Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
10-22-2018, 11:38 AM,
#61
RE: Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
बाली उमर की प्यास पार्ट--46

गतान्क से आगे..................

"दीदी प्लीज़....!" अंधेरा होते ही सीमा के साथ खेल के मैदान की और चल रही अंजलि के कदम रह रह कर ठिठक रहे थे...,"कम से कम मुझे वहाँ अकेला तो मत भेजो!"

"अकेली कहाँ है तू यार.. प्रेम तेरे साथ जा रहा है... डॉन'ट वरी; सुबह तक वो तेरे साथ ही रहेगा.... फिर मेरा नंबर. तो तेरे पास है ना..! कुच्छ दिक्कत हो तो प्रेम के फोन से मुझे फोन कर लेना... चल जल्दी.. 'वो' बाहर वेट कर रहा होगा..." सीमा ने कहकर उसका हाथ पकड़ा और अपने साथ लगभग खींच सा लिया....

"पर दीदी....!" अंजलि साथ साथ चलते हुए अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती हुई बोली..,"कल की तरह अगर वहाँ 3-4 लोग एक साथ मिले तो....?"

"क्यूँ मिलेंगे कयि लोग... एक ही मिलेगा तू चिंता मत कर....! बहुत मज़ा आएगा तुझे... आ.. चलती रह जल्दी जल्दी...!"

"आप भी साथ चलते तो.....!" अंजलि एक बार फिर कसमसाई.....

"मुझे मना ना किया होता तो मैं साथ ही चलती... और फिर मुझे रात को पिंकी को भी तो बाहर निकालना है ना...! उसका भी तो दिल है यार... उसको भी ऐश करने दे...!" सीमा ने चलते चलते तर्क दिया....

"इसके बाद तो आप कभी ज़बरदस्ती नही करोगी ना...? आज के बाद मुझे नही जाना कहीं भी ऐसे!" अंजलि और सीमा दोनो बातें करते करते गेट तक पहुँच चुके थे....

"काफ़ी देर से गाड़ी बाहर खड़ी है मेम'शाब..!" सीमा को गेट की तरफ आती देख गेट्कीपर लगभग भागा हुआ उनके पास आया था....

"चल चल.. जल्दी कर यार... मैं पहले ही बोल रही थी... लेट हो रहे हैं...!" दरवाजा खुलते ही सीमा अंजलि को बाहर गाड़ी के पास ले गयी... प्रेम पिच्छली सीट पर बैठा था...

"आ बैठ जल्दी...!" प्रेम ने तुरंत दरवाजा खोलते हुए अंजलि को इशारा किया.... अंजलि ने मुड़कर दयनीय आँखों से एक बार फिर सीमा की ओर देखा तो सीमा ने उसको अंदर धकेल सा दिया...,"बाइ... कल सुबह दिन निकलने से पहले छ्चोड़ जाना...!"

"चल...!" प्रेम ने इशारा किया और गाड़ी चल पड़ी....

"किधेर चलना है....!" डाराइविंग कर रही मनीषा कि आवाज़ सुनकर अंजलि उच्छल सी पड़ी... अंदर की लाइट बंद होने की वजह से 'वो' उसका चेहरा नही देख पा रही थी....,"दीदी..तुम?"

"सीधी चलती रह... मैं बता दूँगा...! थोड़ा धीरे चलना...." प्रेम ने कहा और अंजलि को अपनी गोद में खींच लिया..... अंजलि में हल्का सा विरोध करने की भी हिम्मत नही थी... उसको याद था कैसे प्रेम ने कल ज़रा सी बात पर रेवोल्वेर निकाल ली थी....

अंजलि के होंटो को चूस्ता हुआ प्रेम उसके उरोजो से खेलने लगा... अंजलि कसमसाई और वासना की एक तीव्र लहर उसके तन बदन में दौड़ गयी.....

"अब सारी उम्र मज़े लेना ऐसे ही....! बहुत मज़ा आ रहा होगा ना तुझे....!" मनीषा ने दाँत से पीसते हुए कहा तो प्रेम उसकी 'टोन' समझ गया...,"आए.. चुपचाप गाड़ी चलाती रह... मैं अकेला भी लेकर जा सकता हूँ इसको....! समझ गयी ना?"

इस बार मनीषा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नही मिली... जी भर कर अपने हाथों से बोझिल सी अंजलि के शरीर से खेलने के बाद प्रेम ने अपनी चैन खोली और उसके हाथ में अपना 'लिंग' थमा दिया...," साली चूस्ति एक नंबर. का है तू.... कल रात से इसकी अकड़न कम नही हुई है....'मुरारी' ना भी कहे तो 'पकड़' के निचोड़ लेना 'उसका' ... पागल हो जाएगा स्साला ठरकी बुड्ढ़ा!"

प्रेम ने अंजलि की गर्दन पकड़ कर उसको अपनी गोद में झुकाया तो कसमसा कर अंजलि ने अपने होन्ट खोल दिए....

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"लौंडिया आ गयी साहब... क्या करूँ...?" रेस्ट हाउस से कुच्छ पहले गाड़ी रोक कर प्रेम ने मुरारी को फोन किया.....

"आ गयी तो अपनी गांद में घुसेड ले इसको... स्साले कब से इंतजार में बैठा हूँ... सीधा लेकर आ जा इसको 102 में.....!" मुरारी की बात सुनकर प्रेम सकपका उठा....

"ला रहा हूँ ना साहब... ववो.. गाड़ी पंक्चर हो गयी थी रास्ते में....!" अब प्रेम उसको 'ये' कैसे बताता कि 'वो' लाख कंट्रोल करने के बावजूद भी बेकाबू होकर रास्ते में अंजलि को ठोकने का लालच छ्चोड़ नही पाया था....

"यहीं लगा दे साइड में....!" प्रेम ने रेस्ट हाउस के सामने जाकर मनीषा को गाड़ी रोकने का इशारा किया और उसके बाद बाहर आकर मनीषा को भी अपने साथ आगे चलने के लिए बोला....

'मुरारी' के निर्देश गेट्कीपर्स को पहले ही मिले हुए थे... बिना कुच्छ पूच्छे ही उन्होने उन तीनो को 102 नंबर. के लिए उपर जाने वाली सीढ़ियाँ दिखा दी....,"उधर से!"

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"हां हां.... आ जाओ अंदर...!" दरवाजे पर नॉक होते ही उनको अंदर से मुरारी की आवाज़ आई और उन्होने दरवाजा अंदर की तरफ धकेल दिया.... पट्टे वाला कच्च्छा और आधी बाजू की बनियान पहने मुरारी दारू में धुत्त होकर सोफे पर पसरा हुआ था... छ्होटे से कद का मोटा सा, थुलथुला मुरारी; (याद होगा ना!)

एक बारगी तो दरवाजे पर खड़ी अंजलि के करारे और बेपनाह खूबसूरती से लबरेज मस्ताये हुए यौवन पर नज़रें डालते ही मुरारी अपनी सूदबुध खोकर उसको देखता ही रह गया... आँखें फ़ाडे घूरते हुए उसने पहले शायद ये तसल्ली की कि ये उसका सपना नही बुल्की हक़ीक़त है... फिर अचानक उसकी नज़र पिछे खड़े प्रेम और मनीषा पर पड़ी...,"चलो तुम अब... क्या काम रह गया यहाँ..?.. दरवाजा बाहर से लॉक करके चाबी गेट्कीपर को दे देना....!"

प्रेम बिना कुच्छ बोले पिछे हटा और मनीषा का हाथ पकड़ कर बाहर लाते हुए उसने दरवाजा लॉक कर दिया....,"हूमें यहीं रुकना है... साइड वाले कमरे में... आओ!"

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*

"क्या मस्त लौंडिया है यार!.... कहाँ से मिली तुमको...?" इन लफ़्ज़ों के ज़रिए मुरारी 'बॉस' को फोन करके उसका धन्यवाद करना ना भूला....,"एक दम रसीली है...! अनचुड़ी तो है ना?"

"हुज़ूर, चख के देखो और खुद ही जान लो.... अब तो आपके पहलू में ही है... हमसे क्या पूच्छ रहे हो...? हा हा हा!" उधर से मुरारी को बॉस का विनम्र स्वर सुनाई दिया..... मुरारी ने सड़ियल सी हँसी हंसते हुए फोन काटा और टेबल पर रख दिया....,"चल एक दम नंगी होज़ा... डॅन्स करना आता है ना?" मुरारी ने उठकर कमरे में चल रहे म्यूज़िक की धुन पर बेढंगे तरीके से मटकना शुरू कर दिया....

जिसके सामने और जिस कारण से अंजलि उस वक़्त 'वहाँ' खड़ी थी; अंजलि को खुद से ही घिन होने लगी.... 50-55 साल का बेहूदा सा आदमी अब उसकी 'अद्वितीया जवानी' को रोंदेगा; इस ख़याल से ही अंजलि को उल्टियाँ सी आने का मंन हुआ... वैसे भी कुच्छ देर पहले ही प्रेम ने गाड़ी में उसका अंग अंग चटका दिया था... उसकी योनि समेत उसका अंग अंग दुख़्ता हुआ स्वयं अंजलि की 'कामवासना' को ही कोस रहा था.... मुरारी के बेहूदा ढंग से खुद को घूरे जाने पर उसकी आँखें शर्मिंदा होकर झुक गयी....

"बहरी है क्या मादर चोद... नाचना नही आता तो नंगी होकर यहाँ आजा..." मुरारी ने अपनी जांघों पर हाथ मारा...," क्या जवानी दी है राम ने तुझे... अब और मत तडपा मुझको.. जल्दी कर...!"

अंजलि की आँखों से आँसू छलक आए... पर वो टस से मस ना हुई... मुरारी की तरफ नज़रें उठाकर देखने का भी मंन नही था उसका....

"अब इस उमर में मुझसे अपने कपड़े फदवाएगी क्या? जल्दी कर वरना....!" मुरारी ने एक बार फिर गुर्रकार कहा.... पर नतीजा वही धाक के तीन पात....

"स्साली कुतिया.... भाव क्यूँ खा रही है... सीधे सीधे प्यार से मान जा.. नही तो..." मुरारी अचानक बोलते बोलते रुक गया... उसने फोन उठाकर 'बॉस' को लगाया," क्या बिगड़ैल लड़की भेजी है यार... मान ही नही रही... अभी तो मैं प्यार से बोल रहा हूँ.. नही मानी तो मैं ससूरी को...... ये मुझे उंगली टेढ़ी करने पर मजबूर कर रही है....."

"पहली बार है ना सरकार! नखरे तो करेगी ही... हे हे.. आप उंगली टेढ़ी कीजिए या लड़की.. मुझे कोई प्राब्लम नही... माल आपका है.. हे हे हे..." उधर से बॉस की आवाज़ आई....

"ठीक है फिर... अभी मा चोद देता हूं मदर चोद की...!" मुरारी बड़बड़ाया और फोन वापस टेबल पर रख कर अंजलि की और बढ़ा...,"तेरी ऐसी गांद मारूँगा ना कि तू..."

जैसे ही मुरारी ने उसको छ्छूने की कोशिश की.. बुरी तरह डरी सहमी खड़ी अंजलि का बदन अचानक हरकत में आया और वो भाग कर कोने के पास लगे बिस्तेर के दूसरी और पहुँच गयी...,"प्लीज़ मुझे जाने दो.. मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ अंकिल...!"

"तेरी मा की चूत स्साली... अंकल किसको बोलती है मदर्चोद..." गुर्रटा हुआ मुरारी पलट कर एक बार फिर उसकी ओर बढ़ा....,"तेरी चूचियाँ मसलूंगा आज... तेरी चूत मारूँगा.. और तू मुझे अंक्ल बोल रही है... मैं तेरा सैयाँ हूँ सैयाँ...." नशे में झूमते हुए मुरारी को जहाँ बिस्तेर के दूसरी और पहुँचने में करीब 10-12 सेकेंड लगे होंगे.. अंजलि को बिस्तेर के उपर से कूद कर दूसरी और आने में पूरा एक सेकेंड भी नही लगा......

मुरारी का चेहरा तमतमा गया...,"तेरी बेहन की... साँस की तकलीफ़ है पहले ही मुझे... चुपचाप मान जा वरना तेरा गॅंगरेप करवा दूँगा स्साली.... रुक... रुक तू एक मिनिट..." जैसे तैसे मुरारी दूसरी और आया तो अंजलि पहले वाली जगह जा चुकी थी... गुस्से से भाननाए हुए मुरारी ने फोन उठाया और अपने तीन राजनैतिक साथियों को रेस्टौउसे में आकर अपने साथ रंगरलियाँ मानने का न्योता दे डाला....

"म्‍म्माइन तैयार हूँ... किसी और को मत बुलाओ... मैं निकालती हूँ कपड़े....." अंजलि अंदर तक सिहर कर बोली....

"अब देखना तू... तेरी मा के यार आकर तेरी गांद और चूत का कैसे बैंड बजाते हैं....!" मुरारी ने गुस्से से तिलमिलते हुए कहा और फोन को वहीं सोफे पर पटकता हुआ सीधा बाथरूम में घुस गया......

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अपनी सूदबुध लगभग खो चुकी अंजलि को आज बचने का कोई और रास्ता दिखाई ना दिया...... उसने भाग कर पहले बाथरूम का दरवाजा बाहर से बंद किया और फिर दरवाजे की चिटकनी भी अंदर से लगा ली.... पर तब तक बाथरूम का दरवाजा अंदर से पीटा जाना शुरू हो गया था...,"साली कुतिया.. मदारचोड़.. दरवाजा खोल वरना....."

अंजलि ने बाथरूम के अंदर कुत्ते की तरह भौंक रहे मुरारी की बातों पर ध्यान ना देते हुए फोन उठाया और मानव का नंबर. डाइयल कर दिया... फोन बिज़ी आ रहा था.. अंजलि के माथे पर पसीने की बूंदे छलक उठी... उसने एक बार मुड़कर बुरी त्राह थपथपाए जा रहे दरवाजे की ओर देखा और फिर से नंबर. ट्राइ करने में जुट गयी....

"हेलो!" फोन पर मानव की चिरपरिचित आवाज़ सुनते ही अंजलि फफक पड़ी..,"म्म..मुझे बचालो सर.. प्लीज़....!"

मानव को फोन पर लड़की की आवाज़ के साथ ही दरवाजा पीटे जाने की आवाज़ भी सुनाई दी..,"हेलो.. कौन है उधर...?" मानव तुरंत ख़तरा भाँप कर बिस्तेर से खड़ा हो चुका था....

"Mमै हूँ सर.. अंजलि.. ंमुझे बचा लो प्लीज़...!" अंजलि अब भी दहाड़ें मारकर रो रही थी....

"अंजलि?... क्या हुआ?" मानव ने सकपका कर पूचछा....

"ययए... ये लोग मुझे.....!"

"ट्तूम तो गुरुकुल में हो ना?" मानव ने अचरज से पूचछा...

"नही सर... म्‍मैइन यहाँ शहर में हूँ.. किसी होटेल में.... प्लीज़ आप जल्दी से आ जाओ यहाँ...!" अंजलि बार बार पिछे मुड़कर बाथरूम के दरवाजे को देख रही थी....

"होटेल में....?" एक बार तो मानव असमन्झस में घिर गया... फिर अचानक ही वो अपने मंन में चल रहे सवालों के भंवर से बाहर आया...,"कौन्से होटेल में.. जल्दी बताओ.. मैं पहुँचता हूँ अभी....!"

"प्प..पता नही...!" अंजलि की साँसे बोलते हुए अटक रही थी.....

"ओह माइ गॉड... पर तुम... टेबल पर देखो... होटेल का मीनू पड़ा होगा कमरे में.. जल्दी बताओ!" मानव तब तक नीचे आकर अपनी जीप में बैठ चुका था....

अंजलि ने हड़बड़ाहट में कमरे में चारों और नज़र डाली.. पर उसको कहीं कोई क्लू नही मिला....,"पपता नही सर.. यहाँ तो... कुच्छ नही....!" अंजलि बोलते बोलते ठिठक कर काँपने लगी...,"अब दरवाजा बाहर से भी पीटा जाने लगा था... ववो लोग शायद मुरारी के बाथरूम का दरवाजा पीटने की आवाज़ें सुनकर वहाँ आ गये थे.....

"कहाँ हो तुम यार... कौन लोग हैं...?" मानव ने हताशा में स्टियरिंग पर घूँसा जमाते हुए पूचछा....

"ंमुझे ये नही पता... सीमा ने मुझे यहाँ...." अचानक दरवाजा भड़क से खुला और अंजलि की आँखें फटी की फटी रह गयी.... तभी गोली चलने की आवाज़ हुई और अंजलि एक दर्दनाक चीख के साथ पिछे सोफे पर आ गिरी..... फोन तभी उसके हाथ से छ्छूट कर गिर गया था....

"हेलो हेलो... अंजलि....!" मानव बोल ही रहा था कि अचानक किसी ने कॉल डिसकनेक्ट कर दी.....

"स्साली... ज़्यादा सयानी बन रही थी...." अंदर फोन हाथ में लिए प्रेम के मुँह से निकला.....

*********

"हेलो मिश्रा... इनस्पेक्टर मानव हियर.... जल्दी से इस नंबर. को ट्रेस करने की कोशिश करो... जितनी जल्दी हो सके उतनी.... हरी उप!" मानव ने हड़बड़ी में ग़लत नंबर. लिखवा दिया.... उसके बाद उसने तुरंत मीनू के मोबाइल पर फोन किया...,"हेलो मीनू! गुरुकुल का कोई नंबर. है क्या?"

"हां.. एक लड़की का है... उनकी रूम-मेट है... क्यूँ?" मीनू ने सहजता से पूचछा....

"बात करने का टाइम नही है...." बोलते बोलते मानव का गला भररा गया...,"पता करो वहाँ अंजलि और पिंकी हैं या नही... अंजलि के बारे में पूच्छ कर जल्दी मुझे बताओ.... बस दो मिनिट में...!"

"ठीक है.. एक मिनिट रूको....!" मीनू ने तुरंत फोन काटा और हड़बड़ी में सीमा का नंबर. मिला दिया.....

"हेलो!" सीमा ने ही फोन उठाया था....

"पिंकी कहाँ है?" मीनू ने सीधे काम की बात की....

"पिंकी पिंकी पिंकी.... सारा दिन इस फोन पर पिंकी के ही फोन आते रहते हैं..." सीमा नींद में बड़बड़ाई...,"आए पिंकी.... तेरा फोन है यार.. ले जा!"

सीमा की बात सुनकर मीनू की जान में जान आई... तभी उसको पिंकी की मचलती हुई आवाज़ सुनाई दी,"बोलो दीदी...!" वह बाहर आ गयी थी.....

"ओह माइ गॉड! मानव ने तो मेरी जान ही निकाल दी थी... ये भी कोई मज़ाक होता है....?" मीनू ने अपनी छाती पर हाथ रखकर कहा....

"क्यूँ? क्या हुआ?" पिंकी चहक कर बोली,"क्या मज़ाक किया जीजू ने?"

"कुच्छ नही छ्चोड़... अंजलि कहाँ है....?"

"ववो..वो.. यहीं है.. सो रही है... क्यूँ?" पिंकी का कलेजा बैठ गया....

"ठीक है.. सो जा... कुच्छ पढ़ाई वधाई भी करती हो या नही तुम दोनो...!" मीनू का लहज़ा अब सहज हो गया था.....

"हां करती हैं ना दीदी....!"

"अच्च्छा रखती हूँ.. मुझे मानव के पास फोन करना है....!" मीनू ने कहकर फोन काट दिया.....

9:30 होने ही वाले थे... अचानक हॅरी को याद करके पिंकी के होंटो पर मुस्कुराहट तेइर गयी..उसने नंबर. मिलाया और हॅरी के फोन उठाते ही पूचछा....,"आए या नही....!"

"बस पहुँच गया 2 मिनिट में.. आता कैसे नही.. तुमने बुलाया था गुलबो!"

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"ये कैसे हो सकता है यार... मैं मज़ाक नही कर रहा.. मैने फोन पर खुद अंजलि की आवाज़ सुनी... तुमने उस'से बात की या नही....!" मानव हैरान रह गया....

"नही.. पर पिंकी से मेरी बात हुई... अंजलि सो रही है....!"

"फिर भी... एक बार कन्फर्म कर लो यार... मुझे कोई धोखा नही हुआ है...!" मानव ने कहा.....

"बार बार फोन करने से वो सीमा मुँह बनाती है... चलो ठीक है.. मैं करती हूँ एक बार और...!"

"क्या? क्या नाम लिया तुमने अभी...?" मानव को याद आया अंजलि ने भी यही नाम लिया था....

"सीमा...! उनकी रूम मेट है.. गुरुकुल में बड़ी चलती है उसकी....! सिर्फ़ उसी के पास फोन है...."मीनू ने कहकर फोन काटा और एक बार फिर सीमा का नंबर. मिलाया.....

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"एक मिनिट... घर से फोन आ रहा है... मैं बात करते ही आती हूँ.. तुम तैयार रहना.....!" पिंकी हॅरी की किसी बात पर मुस्कुराइ और फिर मीनू की कॉल रिसीव कर ली,"हां दीदी....!"

"यार... अंजलि पक्का वहीं है ना...?" मीनू की बात सुनकर पिंकी का दिल धक से कर गया....

"हां... बार बार क्यूँ पूच्छ रही हो तुम....!" पिंकी ने झिझक कर पूचछा.....

"चल एक बार बात करवा दे मेरी....!" मीनू ने सपाट लहजे में बात कही....

"प्पर.. पर वो तो सो रही है ना!" पिंकी बुरी तरह डर गयी....

"सो रही है तो उठ नही सकती क्या...? तू झूठ तो नही बोल रही है... तेरी आवाज़ से लग रहा है ऐसा...." मीनू ने अपने तेवर बदल कर पूचछा...

"नही दीदी... ववो... हाँ... वो.. बाहर गयी है...!" पिंकी ने हथियार डाल दिए....

"क्क्या? बाहर कहाँ...? हॉस्टिल से बाहर...?"

कुच्छ देर पिंकी से कुच्छ ना बोला गया.. फिर धीरे से गले का थूक गटक कर उसने हामी भर दी....,"हां...!"

"हे भगवान... कमिनि... पहले क्यूँ नही बताया... कहाँ गयी है ववो?"

"प्प्पता नही दी...!" पिंकी बुरी तरह घबरा गयी थी... तभी मीनू ने बिना कुच्छ कहे फोन काट दिया.....

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"हेलो... मैं नही आ सकती हॅरी... दीदी को शक हो गया है... मुझसे अंजलि के बारे में पूच्छ रही है बार बार....!"

हॅरी सुनकर चौंक सा गया...," क्यूँ..? उनको कैसे पता लगा... क्या पूच्छ रही हैं...?"

"ऐसे तो कुच्छ नही... पर आज पता नही क्यूँ ज़िद लगाकर बैठ गयी.. बोली अंजलि से बात करा दे... वो तो आज फिर बाहर गयी है ना...? मुझे आख़िर में दीदी को बताना पड़ा.....

"पर वो रोज रोज क्या करने जाती है यार....!? चल छ्चोड़.... मैं तो बड़ी उम्मीद से आया था अपना काम छ्चोड़कर... अब ऐसे ही वापस जाना पड़ेगा क्या? 10-15 मिनिट के लिए ही आ जाओ...!" हॅरी ने मन मसोस कर कहा.....

"ठीक है... मैं 10 मिनिट के लिए आती हून... दीदी को साथ लेकर... फोन भी साथ ही रहेगा फिर....!" पिंकी मायूस होकर बोली....

"दीदी का क्या आचार डालगी यहाँ... पहली मुलाकात है और तुम.... कुच्छ नही होता... अकेली आ जाओ ना एक बार....!"

"अच्च्छा.. आती हूँ... पर हम कहीं जाएँगे नही... ठीक है ना?"

"हूंम्म्म..." हॅरी ने हामी भारी....!"

"दीदी... एक बार चलो ना मेरे साथ... मुझे बस 10-15 मिनिट के लिए जाना है...!" पिंकी अंदर आकर सीमा को उठाते हुए बोली....

"क्यूँ...? 10-15 मिनिट के लिए क्यूँ...? जा रही हो तो पूरी मस्ती करके आओ यार... यहाँ मैं संभाल लूँगी ना....!" सीमा खड़ी होकर बोली....

"नही... ववो.. दीदी को पता लग गया कि अंजलि गुरुकुल से बाहर है... मुझे डर लग रहा है...!"

"उसको कैसे पता लगा यार...?" सीमा चौंक कर बोली....

"ववो.. बार बार अंजलि से बात करने को बोल रही थी... उनको कुच्छ शक हो गया था... मुझे बताना पड़ा.....!" पिंकी सिर झुका कर बोली....

"सत्यानाश हो तेरा... और भी तो तरीके थे.. फोन ऑफ कर देती.... सुबह कह देती कि बॅटरी डाउन हो गयी थी... मुझे मरवाएगी तू....!" सीमा ने गुस्से से कहा...,"सुबह उसके आने के बाद बोल देना कि मैं मज़ाक कर रही थी.. समझ गयी...!" सीमा उसके साथ साथ चलते हुए नीचे आ गयी थी......

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"ओह माइ गॉड.... तो मेरा डर सही निकला... अंजलि ने भी सीमा का नाम लिया था... यहीं कुच्छ गड़बड़ है....!"

"मैं नंबर. दूँ उसका...? तुम बात कर लो जल्दी से....!" मीनू ने हड़बड़ी में कहा....

"ना... अब तो मुझे सीधा गुरुकुल में ही जाना पड़ेगा.... फोन करने से तो वो लोग फिर अलर्ट हो जाएँगे.... तुम भी फोन मत करो अब....!" मानव ने कहते ही फोन काटा और थाने से 2 लेडी पोलिसेकार्मियों को सीधे गुरुकुल भेजने की बात कहकर गाड़ी गुरुकुल की तरफ दौड़ा दी....

चलते चलते ही उसने एस.पी. ऑफीस में फोन किया..,"हां मिश्रा... कुच्छ पता चला नंबर .का..?"

"नही सर.. 'वो' नंबर. तो कयि महीने से सर्विस में नही है... हमने चेक कर लिया...

"वॉट रब्बिश यार... 20 मिनिट पहले ही तो मेरी उस फोन पर बात हुई हैं... एक मिनिट... नंबर. चेक करवाना...!" मानव ने स्क्रीन पर इनकमिंग कॉल डीटेल निकालते हुए कन्फर्म किया....

"ओह शिट यार... दूसरा नंबर. लिखो जल्दी.. मुझे अभी इस नंबर. की डीटेल चाहियें... जल्दी करना यार.. इट'स आन एमर्जेन्सी!"

"ओके सर...!" मिश्रा ने कहकर नंबर. लिखा और फोन काट दिया.....

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"मैं जल्दी ही वापस आ जाउन्गि दीदी... घर से फोन आए तो कह देना बाथरूम में हूँ....!" गेट के बाहर हॅरी की गाड़ी देखकर पिंकी के मॅन में झुरजुरी सी उठ गयी.. पर घरवालों का अंजाना सा डर भी उसको सता रहा था......

"डॉन'ट वरी... मैं फोन ऑफ कर रही हूँ... आराम से आना...!" सीमा ने मुस्कुरकर उसके गालों पर चिकोटी काटी और उसके बाहर निकलते ही वापस पलट गयी....

थोड़ी दूर जाते ही सीमा ने एक फोन लगाया...,"हेलो!"

"हां सीमा....!"

"पिंकी कह रही थी कि वो जल्द ही वापस आएगी.... वो शायद गुरुकुल से दूर नही जाएँगे.... सोचा तुम्हे बता दूँ... तुम गुरुकुल की तरफ ही आ जाओ!"

"ये क्या हो रहा है यार....? वहाँ अंजलि वाला मामला बिगड़ गया.. आज दिन ही उल्टा है... चल ठीक है... हम उधर ही आ जाते हैं....!" सुन'ने वाले ने कहकर फोन काट दिया...

क्रमशः.................................

गतान्क से आगे..................
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10-22-2018, 11:38 AM,
#62
RE: Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
बाली उमर की प्यास पार्ट--47

गतान्क से आगे..................

पिंकी चुपचाप आकर गाड़ी में बैठ गयी.... हॅरी भी कुच्छ पशोपेश में लग रहा था... होता भी क्यूँ नही.. आख़िर पहली बार उसके सपनो की रानी रात के सपने की तरह चाँदनी रात में उसके बराबर वाली सीट पर आकर बैठ जो गयी थी...,"क्या बात है...? तुम इतनी उदास क्यूँ लग रही हो..?" हॅरी ने कहते ही गाड़ी आगे बढ़ा दी....

"नही... कहीं दूर मत चलो प्लीज़... मुझे डर लग रहा है बहुत...?" पिंकी ने चेहरा लटका कर कहा....

"क्यूँ...? मुझसे डर रही हो क्या? तुम नही कहोगी तो मैं तुम्हे हाथ भी नही लगवँगा... इतना तो विस्वाश होगा ना तुम्हे....?"

"ये बात नही है... पहली बार ऐसे बाहर आई हूँ... और फिर पता नही दीदी ने आज शक क्यूँ किया...? यहीं रोक लो ना प्लीज़... ज़्यादा दूर मत चलो...!" सहमी हुई पिंकी ने हॅरी के गियर पर रखे हुए हाथ को थाम लिया....

"ओके ओके... यहीं खड़ी कर देता हूँ, बस! खुश?" हॅरी ने मुस्कुरकर गाड़ी साइड में लगा दी..,"अब बताओ; क्या इरादा है?"

"कुच्छ नही..!" पिंकी हॅरी का आशय समझ कर लजा गयी....

"अपना वादा तो याद होगा ना...?" हॅरी ने अपने होंटो पर जीभ फेरी....

"ंमुझे डर लग रहा है...!" पिंकी ने झुरजुरी सी लेते हुए कहा....

"किस बात का....?" हॅरी ने अपने हाथों में उसका चेहरा थाम लिया...

"पपता नही... पर... सच में मुझे डर लग रहा है...." पिंकी ने अपनी मोटी मोटी आँखों के झरोखे से हॅरी की ओर देखा....

"थोड़ा इधर तो आओ एक बार.. मुझे जी भर कर तुम्हे चूम लेने दो...!" कहकर हॅरी जैसे ही अपनी बाईं ओर झुका पिंकी ने लाज़कर अपनी पलकें बंद की और अपने आपको पिछे खींचने की कोशिश की... पर ये कोशिश सिर्फ़ दिखावटी थी जो लज्जावाश उत्पन्न हुई थी.... हॅरी के होन्ट जैसे ही पिंकी के लरजते सुर्ख गुलाबी अधरों पर टीके... उसने सिसकी लेकर उनके बीच फासला कर लिया... अब दोनो के होन्ट एक दूसरे के होंटो से सिले हुए थे....

पिंकी की साँसें धौकनी की तरह चलने लगी.... मखमली छातियाँ बड़ी तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी.... पिंकी के चेहरे को अपने हाथों में समेटे हॅरी की कोहनियों पर छातियों का दबाव धीरे धीरे बढ़ने लगा था.... हॅरी को समझते देर ना लगी कि ऐसा पिंकी अपनी चूचियाँ में भड़क चुकी आग को दबाने के लिए कर रही है....

हॅरी धीरे से अपना एक हाथ पिंकी के गालों से नीचे सरकता हुआ लाया और उसकी चूची पर रख लिया... पिंकी चिंहूक कर पिछे हट गयी...,"ययए.. ये मत करो प्लीज़...!"

"मैं कुच्छ नही कर रहा जान... सब कुच्छ अपने आप ही हो रहा है... तुम्हारी कसम.... मुझे देखने दो ना छ्छूकर... तुम्हारा बदन....!" हॅरी ने कहा और फिर पिंकी की तरफ से किसी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा किए बगैर ही उसका सिर अपनी गोद में रख लिया...

"आहह..." पिंकी ने मंन में घूमड़ घूमड़ कर उभर रही उत्तेजना पर काबू पाने के लिए अपनी जांघों को कसकर भींच लिया.... अपने घुटने मोदकर वह सीधी हो गयी.. अब उसके नितंब दूसरी सीट पर मचल रहे थे और कमर से उपर वाला हिस्सा हॅरी की गोद में सिमटा हुआ था.....

"आआ...नआईईईईईईई...." जैसे ही हॅरी ने पिंकी के होंतों को चूमते हुए अपना हाथ उसकी कमीज़ के अंदर डाला.. पिंकी उच्छल पड़ी थी....

हॅरी ने अपना हाथ वापस ना खींचते हुए उसके मखमली कमसिन पेट पर नाभि के उपर जमा दिया....,"क्या हुआ?"

"कमीज़ के अंदर नही प्लीज़... गुदगुदी हो रही है बहुत.. हे हे हे..." पिंकी का पेट हॅरी के हाथों का स्पर्श पाकर थिरक उठा था....

"ये गुदगुदी नही है जान... ये तो इशारा है कि तुम्हारा शरीर मेरे हाथ की छुअन अपने रोम रोम पर महसूस करने के लिए तड़प रहा है..." हॅरी कहकर अपने हाथ को और उपर चढ़ने लगा....

"नही... नही.. सच में गुदगुदी हो रही है... अया.. छ्चोड़ो ना.... प्लीज़... मैं फिर कभी तुम्हारे पास नही आउन्गि... छ्चोड़ो मुझे..." बुरी तरह से तड़प उठी पिंकी का विरोध तब तक ही था जब तक उसके एक उरोज पर हॅरी की हथेली ने कब्जा नही जमा लिया था.... जैसे ही ऐसा हुआ.. पिंकी अपनी जिंदगी की पहली मादक अंगड़ाई लेकर सिसकी और उचक कर हॅरी के होंटो पर टूट पड़ी... बावली सी होकर...

बारी बारी से दोनो उरोजो का प्रयप्त मर्दन करने के बाद हॅरी का हाथ वापस नीचे खिसका और अपने आप ही ढीली हो चुकी सलवार में घुसने की कोशिश करने लगा.... पिंकी ने एक बार फिर कसमसकर पल भर के लिए अपनी जांघें कसकर भींची; पर तुरंत ही उसको अपनी कमरस से भीग चुकी योनि पर तरस आ गया और दोनो घुटने उसने विपरीत दिशाओं में फैलाकर अपने नितंब उपर उचका दिए... वह अब भी हॅरी के होंटो से ही लिपटी हुई थी...

हॅरी ने हाथ थोड़ा और अंदर सरकया और जब बाहर निकाला तो उसकी अंगूठे के साथ वाली दोनो उंगलियाँ भीगी हुई थी...,"तुम.. कमाल की हो जान...!" हॅरी पिंकी के होंटो से अलग होता हुआ बोला...

"उन्न्ह... करो ना...!" आँखें बंद किए हुए ही पिंकी मस्ती में बड़बड़ाई और फिर से हॅरी के होंटो पर झपटने के लिए उच्छली....

"क्या करूँ जान...!" हॅरी उसके कान के पास अपने होन्ट लेकर आया और बोलकर उसके कान को हूल्का सा काट खाया....

कामग्नी की लपटें अब अपने प्रचंड रूप में पिंकी के सीने में दहकने लगी थी...,"कुच्छ भी करो... पर करो ना जान.. मैं पागल हो गयी हूँ... पता नही क्या हो.....!"

पिंकी ने अपनी बात पूरी भी नही की थी कि उनके सामने अचानक तीव्र प्रकाश के आ जाने से दोनो की आँखें छूंढिया गयी... पिंकी हड़बड़ाहट में सीधी बैठ कर अपने कपड़े ठीक करने लगी.....

उनके सामने एक गाड़ी आकर रुकी थी... दोनो इस'से पहले कुच्छ समझ पाते.. गाड़ी से उतरे चार लोगों में से एक ने हॅरी की तरफ आकर गाड़ी का शीशा खटखटाया...

"ये कौन हैं हॅरी?" पिंकी बुरी तरह घबरा गयी थी....

"चिंता मत करो... पोलीस वाले होंगे... मैं अभी इनको निपटा देता हूँ...!" हॅरी ने कहा और अपनी गाड़ी का शीशा नीचे किया....,"जी.. भाई साहब... क्या?"

हॅरी की बात पूरी होने से पहले ही उस आदमी ने रेवोल्वेर निकाल कर हॅरी की कनपटी से सटा दी....,"चल बाहर निकल.... गुरुकुल की लड़की के साथ मस्ती करता है सस्सला!"

"प्पर... पर आपको चाहिए क्या?" हॅरी के चेहरे पर तनाव उभर आया था....

"बाहर निकल नही तो भेजे में घुसेड दूँगा... तेरे साथ ये लड़की भी जाएगी फोकट में... चल बाहर आ..." आदमी ने दूसरा हाथ अंदर डालकर खिड़की को खोल दिया था... पिंकी बुरी तरह काँपते हुए अंदर ही अंदर सिसकने लगी थी....

"ओके ओके... आता हूँ यार... पर प्राब्लम क्या है तुम्हारी...." हॅरी जैसे ही गाड़ी से बाहर निकला... दो और रिवॉलवर्स उस पर तन गयी...,"चल.. पिछे बैठ सस्सले!"

सब कुच्छ इतनी जल्दी में हुआ कि इस'से पहले हॅरी कुच्छ और बोलता... बाहर खड़े आदमियों में से 2 हॅरी को लेकर पिछे बैठ चुके थे... और तीसरा आदमी ड्राइविंग सीट पर कब्जा जमा चुका था... उसने बाहर सिर निकाल कर चौथे को हिदायत दी...,"अपनी गाड़ी लेकर पिछे पिछे आ जाओ!"

"ज्जई.. !" चौथे आदमी ने कहा और सामने खड़ी गाड़ी की तरफ चला गया.....

"मुम्मय्ययययययययी........ !" पिंकी ने बुरी तरह रोना शुरू कर दिया था....

"आए... चुप कर चिड़िया.. नही तो तेरे छिड़े को उड़ा देंगे अभी के अभी...!" ड्राइविंग सीट पर बैठे आदमी ने कहा और गाड़ी एक अंजान मंज़िल की तरफ बढ़ा दी.....

"प्पपर.. पर भाई साहब आप लोग चाहते क्या हो..? हमने ऐसा क्या किया है जो....!"

"आए... बोला ना चुप करके बैठा रह.. जिंदगी प्यारी नही है क्या? वैसे भी तू हमारे काम का नही है.. अपनी चिड़िया को वापस लेकर आना चाहता है तो चुपचाप बैठा रह... सब समझ जाएगा... अब की बार बोला तो तेरी...!"

क्रमशः........................

गतान्क से आगे..................
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10-22-2018, 11:38 AM,
#63
RE: Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
बाली उमर की प्यास पार्ट--48

गतान्क से आगे..................

"ज्जई... आपने...बुलाया दीदी जी...!" सहमी हुई सी एक लड़की ने दरवाजे पर आकर हल्का सा अंदर झाँका....

"हां.. आजा....." सीमा को वापस आए मुश्किल से 5 मिनिट ही हुए थे...,"आ बैठ... ज्योति तू बाहर जा... मुझे इस'से कुच्छ पर्सनल बातें करनी हैं...!"

ज्योति ने मुस्कुरकर लड़की की तरफ देखा और उठकर बाहर चली गयी... लड़की सीमा के इशारा करने के बाद चुपचाप आकर बिस्तेर के एक कोने पर बैठ गयी....

"मैं तेरा नाम पूच्छना भूल गयी यार... क्या नाम है तेरा?" सीमा ने इठला कर अपनी ज़ुल्फो को पीछे झटका देते हुए पूचछा....

"ज्जई.. प्रगया!" लड़की ने थोड़ा हिचकिचाते हुए सीमा की आँखों में आँखें डाल कर बताया....

"हूंम्म.. बड़ा प्यारा नाम है... कौनसा रूम है तेरा?"

"ज्जई.. 17!"

"कोई परेशानी तो नही है ना?"

"ज्जई.. नही तो...!" प्रगया ने थोडा ठहर कर बताया....

"कुच्छ हो तो मुझे बता देना...! तू ऐसे डरी हुई क्यूँ है यार.. आराम से उपर पैर करके बैठ ना....!"

"ज्जई.. नही तो दीदी जी... कुच्छ नही..." प्रगया आदेशानुसार पैर उपर करके बैठती हुई बोली....

"बुरा मान गयी क्या? अरे यार.. ऐसे हल्का फूलका मज़ाक तो चलता है शुरू में...!" सीमा ने कहा और खिलखिलाकर हंस पड़ी....

"नही तो दीदी जी.. मैने बुरा नही माना!" प्रगया अब भी थोड़ा सा सहमी हुई थी... उसको लग रहा था कि 'वही' बातें फिर से दोहराई जाएँगी....

"अच्च्छा एक बात बता... तूने 'जब' टाइगर पकड़ा था तो इतना बुरा मुँह क्यूँ बनाया हुआ था... मोमबत्ती ही तो थी यार....!" सीमा माहौल को अपनी बात शुरू करने के लिए सुविधाजनक माहौल तैयार कर रही थी.....

लड़की ने कोई जवाब दिए बिना अपनी नज़रें झुका ली....

"बता ना यार... अब भी क्यूँ शर्मा रही है.. मैं भी तो तेरी तरह एक लड़की ही हूँ....!"

"ज्जई.. बस ऐसे ही....!"

"देख यार... मुझे ये ऐसे शरमाने वाली लड़कियाँ पसंद नही हैं... बात ही तो पूच्छ रही हूँ... क्यूँ घबरा गयी थी तू? वो कोई असली का 'लंड' थोड़े ही था... हे हे हे...!"

सीमा की बातों का रुख़ एक बार फिर से अश्लीलता की हदों को पार करता देख लड़की हड़बड़ा गयी...,"दद्डिडी जी... मैने आज तक इतनी गंदी बातें नही सुनी....!"

"हां.. नही सुनी होंगी... तेरा चेहरा देख कर ही लग रहा है... पर कभी ना कभी तो सुन'नि पड़ेंगी ना... अब तू बड़ी हो गयी है यार... सहेलियों संग ऐसी बातें नही करेगी तो फिर कहाँ करेंगी.... बता?"

"ज्जई.. दीदी जी.." प्रगया के मुँह से कुच्छ और ना निकल सका....

"कभी 'असली' देखा है?" सीमा ने प्यार से उसके कंधे पर हाथ रख कर पूचछा....

"ज्जई.. क्या?"

"वही... जो तूने उस दिन हाथ में पकड़ा था...!"

"उस.. उस दिन से पहले नही दीदी...!" प्रगया बुरी तरह झेंप गयी थी... शायद सलीम के लिंग को याद करके....

"देख मुझे पता है तू झूठ बोल रही है... इसका मतलब तुझे मेरी दोस्ती नामंज़ूर है... तेरी मर्ज़ी है.. पर तू पछ्तयेगि बहुत... तुझे क्या लगता है मैं तेरी बात किसी को बता दूँगी...! ज्योति को मैने तेरे बिना कहे ही बाहर भेज दिया ना?" सीमा ने स्वर में हल्की सी कठोरता लाते हुए कहा....

"ज्जई... जी दीदी जी...!"

"फिर बता क्यूँ नही रही... मुझसे दोस्ती नही करनी ना तुझे?"

"सच कह रही हूं दीदी..." प्रगया ने कहकर अपनी नज़रें झुकाई और बोली...,"सिर्फ़... सिर्फ़ एक बार और देखा था...!"

"शाबाश... ये हुई ना बात... चल हाथ मिला... आज से तू मेरी दोस्त है...!" सीमा उसकी तरफ हाथ बढ़ा कर मुस्कुराइ....,"बनेगी ना...?"

"ज्जई.. दीदी जी...!" प्रगया ने थोड़ा हिचकते हुए सीमा का हाथ थाम लिया...

"अब... पूरी बात बताएगी ना?" सीमा उसका हाथ पकड़े हुए ही बोली....

"क्कौनसी बात दीदी?" प्रगया ने नज़रें उपर की....

"वही यार... पहली बार किसका देखा था.. हे हे....!"

"ववो.. तो दीदी बस ऐसे ही... एक बार ऐसे ही नज़र चली गयी थी..." प्रगया ने फिर नज़रें झुका ली.....

"कैसे यार.. पूरी बात बता ना...! मज़ा आएगा... फिर मैं भी तुझे बताउन्गि...!" सीमा ने उत्सुक होने का अभिनय किया...

"ववो... दीदी एक बार एक लड़का गली में दीवार के साथ खड़ा होकर पेशाब कर रहा था... बस ऐसे ही अपने घर से उसस्पर नज़र चली गयी थी... मुझे पता नही था की....!"

"फिर.. फिर उस लड़के ने क्या किया... और तूने...?" सीमा ने बत्तीसी निकाली....

"क्कुच्छ नही दीदी.. सच्ची....!"

"देख अब मुझसे कुच्छ भी छुपा मत... सच सच बता दे...!"

"मम्मी कसम दीदी... मैं सच बोल रही हूँ.... कुच्छ भी नही हुआ.. मैं वापस चली गयी थी वहाँ से... आपकी कसम....!" प्रगया ने ज़ोर देकर कहा....

"अच्च्छा.. चल छ्चोड़... अच्छे से देखा था ना...?"

"नही... बस 1-2 सेकेंड्स... सच्ची!"

"कैसा था... काला की भूरा.... सच बताना...!"

"ज्जई.. थोड़ा थोड़ा काला सा था....!" प्रगया ने झट से जवाब दिया.....

"फिर तो ज़रूर तूने अच्छि तरह देखा था... है ना... है नाआ!" सीमा ने उसको छेड़ते हुए सा कहा तो प्रगया की नज़रें झुकी और गालों पर लाली सी आ गयी...

"उस वक़्त नही दीदी... फिर मैने खिड़की से देखा था झाँककर....!"

"देखाा.... अब बोली ना असली बात... मज़ा आया था ना देख कर...!" सीमा ने उसको उकसाने की कोशिश की....

"मुझे बहुत शर्म आई थी दीदी... और डर भी बहुत लग रहा था...!" प्रगया अब दिल खोलकर बोलने लगी थी....

"डर्र्र? ... डर क्यूँ यार...?" सीमा ने अचरज व्यक्त किया....

"कि.. कहीं वो मुझे ना देख ले... उसको देखते हुए....!"

"पर मज़ा भी तो आया होगा ना... है ना! .... है नाआ!" सीमा ने उसको उंगली दिखाकर हँसने की कोशिश की तो प्रगया सच में ही हंस पड़ी....," इसमें.. मज़े की क्या बात है दीदी...?" उसने हंसते हुए ही कहा....

"इसमें मज़े की बात नही है तो किस्में है यार... सारा दिन याद रहा होगा ना...?"

प्रगया ने नज़रें झुका ली... कुच्छ बोली नही....

"अच्च्छा एक बात बता... किसी ने तुझे छेड़ा है... कभी....?"

"कैसे दीदी?" अब प्रगया उसकी बातों में पूरी दिलचस्पी ले रही थी....

"कैसे भी... तुझे अकेले में पकड़ लिया हो... तेरे चूतादो को मसला हो.. या......!"

"ऐसे तो नही दीदी.. पर एक बार.... आप किसी को बताओगे तो नही ना दीदी?"

"मैं पागल हूँ क्या यार.. खुलकर बता... अपनी सहेलियों से नही बताएगी तो किसे बताएगी... ऐसे घुट घुट के जीना है क्या....?" सीमा ने उसका हाथ पकड़ कर झटक दिया....

"ववो... एक बार किसी ने मेरी छातियो को मसला था...!" प्रगया ने झिझकते हुए बता ही दिया....

"कैसे? और कुच्छ नही किया क्या?"

"ववो... पिच्छले साल हम ट्रेड फेर में गये थे देल्ही.... वहाँ भीड़ में किसी ने पिछे से बुरी तरह मसल दिया था इनको... मेरी तो चीख निकल गयी होती.... बहुत दर्द हुआ था...!"

"किसने? कोई अंजान था क्या?"

"हां... मैं उसको पहचान नही पाई.... मैने पलट कर देखा तो था....!"

"बहुत मज़ा आया होगा ना?"

"बहुत दर्द हुआ था दीदी... बहुत ज़ोर से पकड़ा था उसने इनको....!"

"पर मज़ा भी तो आया होगा ना... सच बता ना.. शर्मा मत यार.....!"

"हाँ.. थोड़ा सा... पर दर्द ज़्यादा हुआ था दीदी.....!"

"और अगर वो आराम से सहलाता तो मज़ा आता ना बहुत...?" सीमा ने उसकी तरफ आँख मटकाय....

प्रगया शर्मा गयी...,"पता नही दीदी....!"

"पता करना है क्या?" सीमा मतलब की बात पर आ गयी......

"ववो.. तुझे पता आज हॉस्टिल से दो लड़कियाँ बाहर गयी हुई हैं... मज़े लेने के लिए....!" सीमा बत्तीसी निकाल कर बोली...," उन्होने भी पहले कभी मज़े नही लिए...!"

"कैसे दीदी... मैं समझी नही....?" प्रगया अपनी नज़रें सिकोड कर बोली.....

"तुझे मैं...." सीमा कुच्छ बता ही रही थी कि अचानक दरवाजे पर आहट सुनकर रुक गयी....

वह सलीम था...,"मे'मशाब... आपको बड़ी मॅ'म बुला रही हैं....!"

"यार... ये बुद्धी पोपो!... तू यहीं रुकना... मैं बस 2 मिनिट में आई.... ठीक है ना?" सीमा ने खड़ी होकर पूचछा....

"ठीक है दीदी... ववो.. मैं यहीं आकर पढ़ लूँ क्या? अपनी किताबें ले आती हूँ..." प्रगया भी उसके बिच्छाए जाल के आकर्षण में उलझती जा रही थी.....

"हां ले आ... और यहीं सो जाना... आज वैसे भी 2 लड़कियाँ मेरे रूम से नाइट आउट पर हैं...!" सीमा ने हंसकर उसको चौंकाया और बाहर निकल गयी.....

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***********************

"जी मॅ'म... क्यूँ बुलाया है मुझे?" सीमा ने प्रिन्सिपल मेडम के क्वॉर्टर पर जाते ही दरवाजे पर खड़ी होकर इस तरह कहा जैसे 'वो' मेडम से नही किसी पीयान से बात कर रही हो... फिर जैसे ही उसकी नज़र मेडम के सामने बैठे कुच्छ अंजान आगंतुकों पर पड़ी 'वो' संभालती हुई बोली..,"ववो... सॉरी मॅ'म... आपने मुझे याद किया था क्या?"

प्रिन्सिपल मेडम गुस्से में लग रही थी....,"कितनी बार बोला है इस मामले में मुझे मत घसीटा करो.... जब तुम्हारे पास फोन है... जब तुम बाहर जाकर इन्न लोगों से मिल सकती हो तो इनको मेरे पास भेजने की क्या ज़रूरत है...?"

सीमा ने अचंभित होकर सामने बैठे मानव और दो औरतों पर निगाह डाली,"मैने?... मैने किस को भेजा है...?"

"इनको!" मेडम ने मानव की और इशारा करके कहा....,"अब जो भी बात करनी हैं जल्दी करो और निकालों यहाँ से.... आइन्दा कोई ऐसे मेरे पास नही आना चाहिए...!"

"मामला क्या है..? कौन हैं ये?" सीमा अभी तक असमन्झस में थी....

मानव का धैर्य पसीने के रूप में उसके माथे से चू पड़ा था... फिर भी वह अभी तक शांत बैठा उनकी बातों का मतलब समझने की कोशिश कर रहा था... वह उठकर दरवाजे के पास आ गया...,"अंजलि कहाँ है?"

सीमा की आँखें खुली की खुली रह गयी...,"क्क्कऔन अंजलि.... ंमुझे क्या पता?"

"मैं दोबारा नही पूच्हूंगा!" मानव ने जबड़ा भींच कर अपनी मुत्ठियाँ कसते हुए कहा....

"म्मै... अभी आती हूँ... एक मिनिट में...!" सीमा ने कहते हुए बाहर खिसकने की कोशिश की.. पर मानव ने अपना पंजा खोल कर उसको दिखाया,"मेरे पास टाइम नही है... एक थप्पड़ में एनकाउंटर हो जाएगा तेरा... जल्दी बताती है या....!"

"ंमुझे नही पता सच में....सस्सीर...!" मानव के तेवर देखकर सीमा वहीं ठिठक गयी....

"इसका तलाशी लो और मुँह बाँध कर गाड़ी में लेजाकार डाल लो... किसी को पता नही चलना चाहिए यहाँ....!" मानव ने वहाँ सादी वर्दी में बैठी 2 महिला कॉन्स्टेबल्स को इशारा किया...,"ये ऐसे नही बोलेगी....!"

"देखिए श्रीमान... आप ऐसा नही कर सकते... अगर आपने ऐसा किया तो मजबूरन मुझे पोलीस को फोन करना पड़ेगा....!" उलझन में खड़ी हो चुकी मेडम के मुँह से निकला... तब तक महिला पोलिसेकार्मियाँ सीमा को काबू में कर चुकी थी....

"मैं पोलीस ही हूँ... कहिए!" मानव ने आँखें निकाल कर मेडम पर व्यंग्य सा किया तो वो हतप्रभ सी उसको घूरती रह गयी...,"आपको बहुत पहले फोन करना चाहिए था.... चलो मेरे साथ....!"

"ये.. ये मोबाइल मिला है सर...!" लॅडीस में से एक ने मोबाइल निकाल कर मानव को पकड़ा दिया.....

"पर बेटा... म्म्मै तो...." मेडम ने हकलाते हुए कहा तो मानव ने वही रूखा सा जवाब देकर उसको लाजवाब कर दिया...,"मैं दोबारा नही कहूँगा...!"

"च..चलती हूँ बेटा.. पर.. म्मेरा इसमें कोई....!" मेडम खड़ी होकर दरवाजे पर आई और चुपचाप मानव के आगे आगे चलाने लगी.....

क्रमशः........................

गतान्क से आगे..................
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10-22-2018, 11:38 AM,
#64
RE: Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
बाली उमर की प्यास पार्ट--49

गतान्क से आगे..................

अरे... दरवाजा खुला ही पड़ा है...! विष्णु कहाँ गया?" प्रिन्सिपल मेडम के मुँह से गुरुकुल के गेट पर आते ही अनायास ही निकल गया....

"वो गाड़ी में पड़ा है...! चलो... तुम भी जाकर उस गाड़ी में बैठ जाओ..." मानव ने पिछे चलते हुए कहा और बाहर निकलते ही दरवाजे पर ताला लगाकर चाबी जेब में रख ली....!

"कहाँ चलूं, जल्दी बोलो....!" मानव ने गाड़ी में बैठते ही सीमा की तरफ चेहरा घुमा कर पूचछा.... दूसरी गाड़ी गेट्कीपर ओर मेडम को लेकर आगे निकल गयी थी.....

"मंमुझे कुच्छ नही पता सर.. सच में.... आज प्रेम उसको लेकर गया था... मुझे कुच्छ नही बताया उन्होने....!" सीमा ने सहम कर जवाब दिया....

मानव हड़बड़ाहट में ही सीमा की तरफ देखता रहा..,"ये प्रेम कौन है....? फालतू बातें मत करो... मुझे जल्द से जल्द अंजलि के पास पहुँचना है... एक मिनिट...." मानव ने जेब से सीमा का फोन निकाला..,"उस'से बात करो... पूच्छो उस'से जल्दी... अगर उसको ज़रा सा भी शक हुआ तो यहीं गोली मार दूँगा साली कुतिया को....!"

"ज्जई...." सीमा ने कुच्छ पल ठिठकने के बाद अपना हाथ आगे करके फोन पकड़ लिया....,"ज्जई.. क्या पूच्छना है...!" सीमा आज बुरी तरह मिमिया रही थी....

"अंजलि कहाँ है?" मानव ने जवाब दिया....

"ज्जई.. वो ऐसे नही बताएगा.... मुझे पता है!"

"तो तुम सोचो... हमें कैसे भी करके अंजलि के पास पहुँचना है.... ध्यान रखो अगर आज तुमने साथ दिया तो तुम बच सकती हो.....!" मानव उसके अंदर का डर गायब करने में अपनी तरफ से कोई कसर नही छ्चोड़ना चाह रहा था....

"फिर मैं बच जाउन्गि ना सर...?" सीमा के मंन में कुच्छ उम्मीद सी जागी...

"अब और कैसे सम्झाउ तुझे... तुम टाइम खोटा मत करो.. जल्दी कुच्छ सोचो....!"

"ठीक है सर... एक मिनिट..." सीमा ने कुच्छ सोचकर प्रेम का नंबर. मिला दिया... मानव ने तुरंत गाड़ी का एंजिन बंद कर दिया...

"हेलो...!"

"हां सीमा डार्लिंग... सूनाओ!"

"ंमुझे एक लड़की को लेकर आना है... अभी...!" सीमा ने कहा....

"अभी.. इतनी रात को?" प्रेम ने पूचछा....

"हाँ....!" सीमा की साँसें तेज होने लगी थी.....

" आज नही यार... कल ले आओ... आज किसी के पास टाइम नही है....!" प्रेम ने असमर्थता जताई.....

"नही.. अभी आना पड़ेगा... एक नंबर. की..." बोलते हुए सीमा ने झिझक कर मानव की ओर देखा..," बहुत प्यारी लड़की है... आज लेकर नही आई तो फिर हाथ से निकल जाएगी... कल वो हॉस्टिल छ्चोड़कर वापस जाने की बात कह रही है.....!"

"ऐसा क्या खा लिया हॉस्टिल में आज... सभी की चूत आज ही फदक रही है क्या... आज तो कोई वेहिकल भी नही है.... तुम रहने ही दो....!"

"वेहिकल तो है हमारे पास... तुम बस बताओ की आना कहाँ है....?"

"कहाँ से आया वेहिकल.....?"

"ववो... वो दरअसल उसके बाय्फ्रेंड की गाड़ी है.... उनको जगह की तलाश है... मैने बोला है कि मैं ले चालूंगी.....!" सीमा ने जवाब दिया.....

"मतलब एक और रेप... हे हे हे... क्या करूँ यार...? रूको.... सोचने दो...!" प्रेम के माथे पर बल पड़ गये.....

"वैसे तुम कहाँ हो....? अंजलि के साथ ही होगे ना......" सीमा ने बातों ही बातों में पूच्छने की कोशिश की....

प्रेम ने बोलने से पहले एक लंबी साँस ली...," मैं तुम्हे फोन करके बताने ही वाला था.... ववो....." कहकर प्रेम रुक गया....

"क्या? क्या बताने वाले थे...." सीमा के दिल की धड़कने बढ़ गयी....

"छ्चोड़ो.... कल सुबह उसके घर वालों को खबर भिजवा देना कि 'वो' किसी के साथ दीवार कूद कर भाग गयी.... 3-4 हफ्ते बाद उसकी लाश फिकवा देंगे किसी ट्रॅक पर.... किसी को क्या मालूम पड़ेगा...." प्रेम ने कहा....

"क्ककयाआअ...." सीमा आँखें फाडे गुस्से से लाल हो चुके मानव का चेहरा देखती रह गयी.....,"प्पपर... तुम्हे पता है क्या होगा...?"

"मेरा दिमाग़ मत खाओ यार... बॉस ने जैसा बोला मैने बता दिया... उनसे करना जो बात करनी है... मुझे कुच्छ नही पता......!"

"बॉस से बात करा सकते हो क्या?" सीमा ने हड़बड़ी में पूचछा....

"नही... आज 'वो' किसी से बात नही कर सकते... वो आज अपने स्पेशल प्रॉजेक्ट में बिज़ी हैं.... क्या माल पकड़ा है यार... वो तो हाथ लगते ही उच्छल रही है... अजय बता रहा था...!"

"क्कऔन... पिंकी?" सीमा के मुँह से निकल गया... मानव के तुरंत रौन्ग्ते खड़े हो गये.....

"मुझे नही पता, पिंकी है या रोज़ी... वही जो हॉस्टिल से आई थी आज....!"

"प्पर... कहाँ हो तुम अभी....!" हकबकाई हुई सीमा के मुँह से निकला....

"जहन्नुम में.... आज का प्रोग्राम कॅन्सल करो यार... पहले ही दिमाग़ बहुत खराब है.....!"

"प्पर... मेरी बात तो...!" सीमा की बात सुन'ने से पहले ही प्रेम ने फोन काट दिया...

"पिंकी कौन है....?" मानव ने सीमा का गला पकड़ लिया...

"वववो... " सीमा थर थर काँपने लगी..,"ववो.. वो तो अपनी मर्ज़ी से ही गयी थी...!"

"तेरी मा की.... ओह शिट...." मानव पागल सा हो उठा.. उसकी समझ में नही आ रहा था कि क्या करे और क्या नही.... अचानक उसने अपना मोबाइल निकाला और मिश्रा का नंबर. मिला कर सीमा के हाथ से उसका मोबाइल झपट लिया....

"हां मिश्रा.... एक नंबर. लिखो जल्दी....!"

"सर.. बगैर एस.पी. साहब की पर्मिशन के बगैर ट्रेसिंग और सुर्वीलानसिंग अलोड नही है... आपको पता है ना...?" मिश्रा की आवाज़ आई....

"यार समझा कर... ये सारे नंबर. तरुण वाले केस से रिलेटेड हैं... उन्ही मैं आड कर देना... जल्दी कर यार! मेरे पास टाइम नही है... सब कुच्छ ख़तम हो जाएगा....!" मानव की आँखों में आँसू आ गये.....

"तो क्या मंत्री जी का नंबर. भी उसी केस से जुड़ा है....?" मिश्रा ने चौंक कर पूचछा....

"मंत्री... कौन मंत्री...?" अब चौंकने की बारी मानव की थी....

"सॉरी सर.. मैं आपको नाम नही बता सकता... एस.पी. साहब ने मना कर दिया है....!" मिश्रा ने सपस्ट किया....

"... तू जल्दी से इस नंबर. को सरविलेन्स पर लगा कर इसकी लोकेशन बता... मैं देखता हूँ उस मंत्री को....!" मानव ने नंबर. 2 बार रिपीट किया....

"वैसे आपकी मर्ज़ी है सर जी.. पर मधुमक्खी के छते में हाथ ना ही डालो तो बेहतर है....!"

"तू इस नंबर. की लोकेशन कितनी देर में बता रहा है....!" मानव ने उसकी बात अपने सिर के उपर से गुजर जाने दी.....

"पता लगते ही कॉल कर दूँगा सर...!" मिश्रा ने कहकर फोन रख दिया.....

"किसके साथ गयी है पिंकी...?" मानव ने जल्दबाज़ी में पूचछा और गाड़ी स्टार्ट करके शहर की तरफ ही दौड़ा दी....

"ववो.. वो तो पता नही सर.... पर मेरे फोन में नंबर. होगा उसका...!" सीमा ने कहा....

" नंबर. निकाल कर दो मुझे...." मानव ने उसको मोबाइल पकड़ते हुए कहा....," क्या वो भी तुम लोगों में से ही.....!"

"नही सर... वो तो.. पिंकी के गाँव... हां याद आया... हॅरी के साथ गयी थी... पर इन्न लोगों ने उसको रास्ते से उठा लिया....

"तो इन लोगों को कैसे पता चला....?" मानव ने पूचछा और सीमा के हाथ से मोबाइल निकाल कर हॅरी का नंबर. डाइयल किया.... उस वक़्त सीमा की नज़रें एक बार फिर झुक गयी थी... पर मानव का ध्यान उस पर रह नही सका....

"ययए तो ऑफ आ रहा है.... ये बॉस कौन है?" मानव के दिमाग़ में हथोदे से बजने लगे थे....

"पता नही सर... मेरे पास तो उनका नंबर. भी नही है....!" सीमा ने चेहरे पर मासूमियत झलकाते हुए कहा.....

"साली रंडी... तेरी जान ले लूँगा अगर पिंकी को कुच्छ हुआ तो...." मानव का चेहरा पसीने से भीग गया था... उसकी समझ में नही आ रहा था की क्या करे और क्या नही... वक़्त ज़्यादा था नही... आनंफानन में मानव ने खुद ही मंत्री के पास फोन करने की सोची... पर उधर घंटी जाते ही मानव ने फोन काट दिया और पिछे मुड़ा...,"सीमा... अब तक तो शायद मैं तुम्हे छ्चोड़ता नही था... पर अगर तुम इन्न लोगों तक मुझे आज ही पहुँचा सको तो मैं सच में तुम्हे इस केस से बाहर करवा दूँगा.... प्लीज़...!" मानव का लहज़ा आसचर्यजनक ढंग से नरम पड़ गया था....

"पर.. मुझे पता नही है कि आज ये कहाँ होंगे...?" सीमा ने सहमी आवाज़ में जवाब दिया....

"मंत्री का नंबर. मिल रहा है... इस तक पहुँचा सकती हो?"

"कैसे सर?"

"बात करके...अपने मोबाइल से... कैसे भी...!" मानव ने उसको उसका मोबाइल दे दिया....

"ठीक है सर... मैं कोशिश कर दूँगी....!" सीमा ने एक गहरी साँस लेने के बाद कहा और कॉल बटन दबा दिया... उसके पास और कोई चारा था भी नही.....

"हेलो!" सीमा ने यथासंभव मधुर आवाज़ में बोला....

"कौन है...?"

"मैं हूँ...?" सीमा ने अंधेरे में तीर चलाने की सोची...

"मैं कौन साली... भेजा क्यूँ गरम कर रही है मेरा....?" मुरारी नशे में अकेला बिस्तर पर पड़ा था....

"अरे मैं हूँ...मैं घर से भाग कर आ गयी हूँ जान...अब कहाँ आना है बोलो... एक मिनिट... तुम शक्ति ही बोल रहे हो ना?"

"हां हाँ.. एक मिनिट..." सीमा की बात सुनकर मुरारी की अधूरी हसरतें एक बार फिर जवान हो उठी... यकायक उसने अपनी आवाज़ में परिवर्तन करके जवान होने का ढोंग करने की कोशिश शुरू कर दी....," तुम कहाँ हो... म्मै तुम्हे लेने भेजता हूँ....!"

"म्‍मैई..." मानव के इशारे पर सीमा ने अपनी बात बदल दी... तुम बता दो ना... मैं आ जाउन्गि.. मेरे पास गाड़ी है....!"

"तुम रेस्ट हाउस आ जाओ.... कहना मुरारी जी के रूम में जाना है... 102 में...!" नशे में मुरारी भूल ही गया कि वो 'शक्ति' है....,"ववो... वो मैने यहाँ नाम बदला हुआ है ना जान!"

"ठीक है... मैं आ रही हूँ वहीं.....!" सीमा ने कहकर फोन काट दिया.... मानव का चेहरा तमतमा गया और उसका बयाँ पैर आक्सेलाटोर पर दबाता चला गया.....

"तुम्हे क्या सच में नही मालूम की बॉस कौन है...?"

"नही सर..... सर.. मैं आपको अपनी तरफ से पूरा सहयोग करूँगी... सर.. आप चाहे कुच्छ भी.... कर लो... पर प्ल्ज़ मुझे छ्चोड़ देना सर..." सीमा ने गियर पर रखे मानव के हाथ पर अपना हाथ रखने की कोशिश की.. पर जैसे ही मानव ने अपने तमतमाए हुए चेहरे से उसकी और घूरा.. वह कंपकंपा कर पिछे हाथ गयी.....

चलते चलते ही मानव ने अपना फोन निकाला और मीनू का नंबर. मिला दिया... मीनू भी अभी तक जाग ही रही थी... चुपके से चारपाई से उठकर वो बाथरूम में आई और फोन उठाया...,"कुच्छ पता लगा मानव?"

"मीनू.. ववो..." बोलते हुए मानव का गला भारी हो चला था...,"अंजलि अब नही है... ववो.. पिंकी भी....!"

"क्याआआआआ...." बड़ी मुश्किल से मीनू अपनी चीख निकालने से रोक पाई.....

..............................

.........................

"कुच्छ याद आया हरामी स्साली...?"

एक अंजान जगह पर स्थित कोठी के एक कमरे के कोने में अपनी ही बाहों में सिमटी हुई खड़ी बुरी तरह भयभीत पिंकी को घूरते हुए अजय ने पूचछा... उसी कमरे में हॅरी को एक कुर्सी पर बँधकर बिठाया गया था.... सुनील के हाथों में थामे वीडियो कमरा का फोकस हॅरी और पिंकी ही थे.... ऐसा प्रतीत हो रहा था कि 'इस' हादसे ने दोनो को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है.... हॅरी अपनी तरफ से हर तरह से मिन्नतें और गुज़ारिश कर चुका था... पर हैवानो के हुज़ूम पर उसकी बातों का क्या असर होता भला.....!

"म्‍म्माइने क्या किया है? हमें छ्चोड़ दो ना प्लीज़!" थर थर काँप रही पिंकी शुरू से यही रट लगाए हुए थी.....

"अच्च्छा! अब निकल गयी सारी हेकड़ी तेरी... तुझे याद है ना तरुण ने क्या कसम खाई थी... याद आया कुच्छ? अब गिन ले तेरे सामने कितने आदमी हैं... पूरे चार ही हैं ना? हा हा हा! तरुण भाई की आख़िरी इच्च्छा तो हमें पूरी करनी ही पड़ेगी....!" धीरे धीरे सरकता हुआ अजय पिंकी के पास जा पहुँचा.... पिंकी अजय और उसके साथ खड़े होकर दाँत निकाल रहे तीन लोगों के इरादे भाँप कर बुरी तरह रोने लगी थी...

"भाई साहब प्लीज़... इसको छ्चोड़ दो..तुम चाहो तो मुझे गोली मार दो.... ये..ये बहुत मासूम है....इसने तुम्हारा क्या......?" लाख बार चुप रहने की धमकी मिलने के बावजूद हॅरी से पिंकी की ये दशा देख रहा ना गया....

"चुप कर बे... तुझे कितनी बार बोलना पड़ेगा... ये क्या कम है कि अब तक हमने इसके शरीर को नोचना शुरू नही किया है.... 'ये' स्साली मासूम है तभी तो इसको खुद ही कपड़े निकाल देने को बोल रहे हैं... वरना तो अब तक... अब की बार एक शब्द भी बोला ना तो तेरे सामने ही खोल देंगे इसको..." अजय एक बार फिर हॅरी की तरफ देख कर गुर्राया और फिर पिंकी की तरफ मूड गया...,"चल... निकाल दे ना... दिखा ना अपने बदन की गर्मी!"

"नही... प्लीज़.." जैसे ही अजय ने पिंकी के गाल को अपने हाथ से च्छुआ.. पिंकी का पूरा बदन च्छुईमुई की तरह मुरझा सा गया...,"प्लीज़ भैया....!"

"भैया बोलती है साली...!" और उस दरिंदे ने एक ज़ोर का तमाचा पिंकी के गालों पर जड़ दिया...,"ये सब तूने उस वक़्त क्यूँ नही सोचा जब तू तरुण को चप्पल से पीट रही थी बोल....!"

पिंकी इस मार से बुरी तरह बिलख उठी...,"ववो.. वो मुझे छेड़ रहा था... प्लीज़ मुझे छ्चोड़ दो...!" इस बार पिंकी की 'भैया कहने की हिम्मत ना हुई....

"अच्च्छा... छेड़ तो मैं भी रहा हूँ... चल मार मुझे.... आजा...!" अजय उसके सिर पर खड़ा होकर गुर्राया....

"नही... प्ल्ज़...!"

"अच्च्छा चल बता... उस दिन तरुण ने क्या कसम खाई थी... बोल!"

"मंमुझे नही...." और पिंकी के सामने कुच्छ दिन पहले का वो दृशय कौंध गया जब तरुण दरवाजे पर खड़ा होकर कह रहा था कि अगर 4-4 मर्दों से उसको नही रौुन्डवाया तो उसका नाम बदल देना.... पिंकी सिहर उठी... उसको नही मालूम था कि तरुण की कसम 'उसको' इस मुकाम पर लाकर छ्चोड़ देगी.....,"म्‍मैइन.. मैं आपसे दया की भीख माँग रही हूँ... हमें छ्चोड़ दो प्ल्ज़... मुझे माफ़ कर दो... "

"तू अपने आप कपड़े निकालेगी या हमें तेरी चिकनी जवानी को अपने हाथों से ही नंगी करना पड़ेगा... जल्दी कर....!" अजय एक बार फिर गुर्राया.....

"भाई साहब प्ल्ज़...." हॅरी जैसे ही इस बार बोला, अजय ने रेवोल्वेर निकाल कर उस पर तान दी....," कल्लू!... पहले इसको ठोक साले को... ये बीच में ऐसे ही चिक्चिक करता रहेगा नही तो.... स्साला... बाहर लेजाकार इसके भेजे में ठोक दे दो चार गोली....!"

जैसे ही कमरे में खड़े बाकी तीन लोगों में से एक हॅरी की तरफ बढ़ा, पिंकी मिमिया उठी..,"नही प्ल्ज़... म्म्मै... मैं निकाल रही हूँ... इसको कुच्छ मत कहो....!"

"चल शाबाश! रहने दे कल्लू... इस हसीना के कहने से एक बार और माफी सही... चल शाबाश... निकाल दे... एक एक करके सारे निकाल कर नंगी हो जा अपने आप!... प्यार से निकालेगी तो प्यार से मारेंगे तेरी.. मेरा वादा है... हा हा हा...!" अजय ने कल्लू को रोक दिया.....

पिंकी का चेहरा बुरी तरह पीला हो चला था.... जिसको कुच्छ भी करने देने की छ्छूट देकर अपनी आँखों में जाने अपने यौवन को पुलकित करने की कितनी ही सुन्दर कल्पनायें निर्मित कर पिंकी आज बाहर आई थी... उसी के सामने खड़े होकर कुच्छ दरिंदे उसको जॅलील करने की तैयारी कर चुके थे... पिंकी का चेहरा आँसुओं से भीगा हुआ था... हॅरी अवाक सा सब कुच्छ देख रहा था... पर दोनो बेबस थे... एकद्ूम लाचार....

"चल अब निकाल... ऐसे मुँह पिचकाय क्या सोच रही है...!" अजय ने जैसे ही कहा, उसका मोबाइल बज उठा...,"एक मिनिट... चुप रहो सब... हां प्रेम भाई!" अजय ने फोन कान से लगा लिया.....

"क्या चल रहा है उधर...?" प्रेम ने पूचछा.....

"कुच्छ नही... बस वही सब.... साली टाइम बहुत लगा रही है....अभी तक कपड़े भी नही निकाले.... पता नही बॉस चाहते क्या हैं... हे हे हे... हमें मनमानी नही करने दे रहे... हे हे हे...!" अजय ने बोलते हुए पिंकी के कंधे पर हाथ रख लिया.... पिंकी कसमसा उठी.....

"बात करा ना एक बार.... बॉस का फोन ही नही लग रहा....!" प्रेम ने कहा.....

"आज नही लगेगा... बॉस आज बहुत बिज़ी हैं...!" अजय ने जवाब दिया और वापस जाकर हॅरी की कुर्सी पर पैर रख लिया....

"इसीलिए तो कह रहा हूँ यार... तू तेरे फोन से करा दे बात एक बार.... 'वो' मामला तो सेट कर दिया... मंत्री भी निसचिंत होकर सो गया होगा.... मुझे क्या करना है अब....?"

"बताया ना यार बॉस आज फोन नही ले सकते... मामला सेट कर दिया ना! बहुत बढ़िया.......और दूसरी का?"

"मेरे साथ ही है... पिछे पड़ी है डिग्जी में... मामू लोगों की बहुत प्राब्लम होती है यार रात में.... बहुत परेशान कर रही थी....पता नही कब झमेला खड़ा कर दे...!" प्रेम ने बताया....

"घर जाकर सो जा आराम से..... सुबह देखेंगे..." अजय ने कहा और तुरंत अपनी बात से पलट गया..,"नही नही.. एक मिनिट... यहीं आजा... 1012 में.... हम सब यहीं हैं...!"

"आच्छि बात है... मैं वहीं आ जाता हूँ... यहाँ से ज़्यादा दूर भी नही है...!" प्रेम ने कहकर फोन काट दिया......

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"मुझे बहुत डर लग रहा है मानव... अब क्या होगा? पापा शहर पहुँचने वाले हैं... तुम्हारे पास दोबारा फोन करेंगे शहर आते ही.... मैने अभी अंजलि के बारे में नही बताया उनको...! पिंकी... ठीक तो होगी ना"

"हॅरी का भी फोन नही लग रहा... पर तुम फिकर मत करो...सब ठीक हो.... एक मिनिट... फोन रखो...." मानव ने तुरंत कहा और मीनू का फोन होल्ड पर डाल लिया...,"हां मिश्रा...?"

"सर.. 'वो' नंबर. ट्रेस हो गया है... अभी एक दूसरे नंबर. से बात हुई हैं उसकी... कहो तो सुनाउ?" मिश्रा ने उधर से कहा....

"कुच्छ काम की बात है क्या?" मानव ने जल्दी जल्दी में पूचछा... उसने रेस्ट हाउस से कुच्छ पहले ही गाड़ी रोक दी थी....

"कुच्छ खास पता नही चल पाया बातों से... उसको कहीं '1012' में बुलाया है... ये नही पता कहाँ का 1012... बाकी कुच्छ और भी बातें हैं...! मामला सेट करने की...."

"1012....." मानव अपना सिर खुजाते हुए बड़बड़ाया... "एक मिनिट...ये... 1012 क्या है...?" मानव ने सीमा का रुख़ किया.....

"सेक्टर 37 में किराए की कोठी है सर.. हम कभी कभी वहाँ जाते हैं...!" सीमा ने अनमने ढंग से जवाब दिया....

"क्या? मतलब इसी शहर में?" मानव को कुच्छ उम्मीद बँधी....

"हाँ... क्यूँ?" सीमा ने पूचछा.....

"फोन रखो मिश्रा... ज़रूरत पड़ी तो मैं फिर कॉल कर लूँगा... नाइट ड्यूटी है ना?"

"जी सर....!" मिश्रा ने बताया...

मानव ने फोन काटा और तुरंत गाड़ी को यू-टर्न दे दिया...,"प्रेम को पता होगा ना कि पिंकी कहाँ है?"

"पता नही.. शायद पता हो...! अब आप रेस्ट हाउस नही चल रहे क्या?" सीमा ने पूचछा....

" अब तुम चुप रहो... प्रेम 1012 में आ रहा है... मंत्री से ज़्यादा 'वो' काम का है...." मानव ने कहा और फिर एक फोन किया...,"इनस्पेक्टर मानव बोल रहा हूँ...सारे चौराहों से चेक पोस्ट हटा लो... सेक्टर. 37 के अंबेडकर चौंक पर 4 आदमी भेज दो... सादी वर्दी में....! पोलीस की गाड़ी मत लाना साथ...."

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"आज तो कमाल हो गया यार... कहीं भी पोलीस वाले नही...." प्रेम ने अंदर आते ही हॅरी को कुर्सी पर बँधे देखा तो उच्छल पड़ा...,"ययए........" वह कुच्छ बोल ही रहा था कि अजय ने उसको टोक दिया...,"चुप... बॉस का आदेश है.. तुम्हारी जान पहचान का है क्या?"

"आ..न..नही.. कुच्छ नही... तुम लोग 'काम' कब शुरू करोगे....!"

"चल रहा है... चल उतार भी दे कपड़े जाने मॅन... क्यूँ तरसा रही है इतना.. हम तेरे यार को ठोक देंगे तब उतारेगी क्या? इसको भी तो दर्शन करा दे अपनी कमसिन जवानी के...." अजय फिर से पिंकी की तरफ बढ़ गया.....

********************************************

"जैहिन्द जनाब!" अंबेडकर चौंक पर पोलीस वाले मानव से पहले ही पहुँच चुके थे.....

"ये लो..." मानव ने नीचे उतारकर चाबी एक आदमी की तरफ उच्छाल दी....,"अंधेरे में खड़ी कर दो इसको..." मानव ने कहा और सीमा का हाथ पकड़ कर पोलीस वालों द्वारा लाई गाड़ी में बैठ गया....," पहले मैं जाउन्गा अंदर... इस लड़की के साथ..... तुम लोग बाहर रहना.. एकदम चौकस... कोई भागे तो सीधी गोली मार देना सस्सलों को....!" मानव ने कहा और गाड़ी 1012 की तरफ चल पड़ी.....

"तुम समझ रही हो ना... तुम मुझे अंदर लेकर जाओगी...अपना साथी बताकर.... कोई भी लोचा हुआ तो सबसे पहले मैं तेरे सिर में गोली थोकुन्गा...." मानव ने सीमा की तरफ देख कर कहा....

"ठे.. ठीक है सर....!" सीमा सहम कर बोली....

तभी मानव का फोन बाज उठा...,"बेटा.. म्मै पहुँच गया... बस-स्टॅंड के पास खड़ा हूँ बाइक पर.... कुच्छ पता लगा क्या पिंकी का?" पिंकी के पापा की आवाज़ थॅरेयी हुई थी....

"आप फिकर ना करें पिताजी... मैं बहुत जल्द उसको ढूँढ लूँगा....!" मानव ने भी भर्रए गले से उनको शंतवना देने की असफल कोशिश की....

"पर मैं अब क्या करूँ...? यहीं खड़ा रहूं क्या...?" पापा ने पूचछा.....

"नही... मैं भेजता हूँ आपके पास... किसी को....!" मानव ने जवाब दिया.....

गतान्क से आगे..................
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Reply
10-22-2018, 11:39 AM,
#65
RE: Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
बाली उमर की प्यास पार्ट--50



गतान्क से आगे..................

"चल.. आगे चल... बोलना तू मुझे लेकर आई है....!" मानव 1012 से करीब 100 गाज पहले ही सीमा के साथ गाड़ी से उतर गया था.....

"ज्जई... आप चुप ही रहना वहाँ... मुझे प्रेम दिखेगा तो मैं आपको इशारा कर दूँगी... आप.. मुझे छ्चोड़ देंगे ना....!" सीमा ने याचना से मानव की तरफ देख कर कहा...

"पहले काम तो कर....!" मानव ने तेज़ी से चलते हुए अपने रेवोल्वेर में गोलियाँ चेक की... सब 'सेट' था.....

"ज्जई... आइए...!" सीमा दरवाजे पर आकर खड़ी हुई तो मानव ने उसके गले में बाँह डाल ली....

"सीमा तू?" घंटी बजाने पर बाहर आई डॉली सीमा को देख कर थोड़ी अचंभित सी हुई और फिर नज़र उपर करके मानव की और देखा...,"प्रेम तो अभी आकर बता रहा था तू किसी लौंडिया को लाने की बात कह रही थी... ये कौन है?"

मानव ने मुस्कुरकर डॉली की ओर अपनी आँख दबा दी... पर कुच्छ बोला नही....

"आए... अपनी औकात में रह स्साले... तेरे जैसे बहुत देखे हैं... ज़्यादा स्मार्ट बन रहा है क्या?" डॉली मज़ाक में ही, पर थोड़ा बिफर कर बोली....

"डॉली... ये उसका बॉयफ्रेंड है... बाकी कौन है यहाँ....?" सीमा ने बीच बचाव करते हुए कहा....

"सभी हैं... क्यूँ? लड़की कहाँ है?" डॉली ने घूम कर आगे चलते हुए पूचछा....

"मुझे प्रेम से बात करनी है... वो कहाँ है...?" सीमा ने फिर पूचछा....

"बैठो... मैं बात करती हूँ उस'से....!" डॉली ने एक बार फिर इतरा कर मानव की तरफ देखा और मटकती हुई आगे बढ़ गयी....

जहाँ उस वक़्त मानव और सीमा बैठे थे.... वहाँ से ये अंदाज़ा भी लगाना मुश्किल था कि इस मकान में कुच्छ ख़तरनाक भी चल रहा होगा.... वहाँ सुनाई दे रहे तेज़ म्यूज़िक से ज़्यादा से ज़्यादा ये अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि अंदर कोई पार्टी चल रही हो सकती है.... मानव की बेचैनी बहुत बढ़ गयी थी... पर वह जानता था कि जल्दबाज़ी से खेल बिगड़ सकता है.... फिर 'वो' शायद पिंकी तक पहुँच ही ना सके... इसीलिए वह शांत ही बैठा था....

******************************

*

डॉली ने अंदर जाकर बुरी तरह फफक फफक कर उन्न ज़ालिमों के सामने रो रही पिंकी पर एक सरसरी निगाह डाली.... 'हॅरी' को उनके ज़ुल्म से बचाने की कवायद में पिंकी ने अपनी इज़्ज़त को नीलम होने देने का मंन बना लिया था.... कमीज़ निकाल देने के कारण उसके समीज़ से झलक रही जवानी को 'कुच्छ' क्षण तक ही सही, पर च्छुपाने के लिए वह अपने दोनो हाथों में अपनी छातियो को च्छुपाए रखने का जतन कर रही थी...... उसकी आँखों से लगातार बह रहे आँसुओं से उसका समीज़ गीला होता जा रहा था....

"आए... बहुत मज़ाक हो गया अब... रोना छ्चोड़ और बाकी कपड़े उतार डाल... आख़िरी बार कह रहा हूँ वरना अब हम खड़े होकर आ रहे हैं तेरे उपर.... फिर बरी बरी नही.. एक साथ ही करेंगे.... सोच ले... तेरे पास आख़िरी पाँच मिनिट और हैं.....!" अजय ने गुर्रकार कहा और उसके पास जाकर उसके हाथ खींच कर छातियो से दूर हटा दिए...,"साली की चूचियाँ तो देखो... कैसे तनी हुई हैं.. इस हालत में भी....!"

"प्रेम... ववो सीमा आई हुई है नीचे.... उसके साथ एक लड़का भी है....!" डॉली ने अपना ध्यान पिंकी से हटाकर कहा....

"सीमा...? पर ववो यहाँ कैसे आ गयी...? मैने तो उसको बताया भी नही...." प्रेम दुविधा में पड़कर बोला...,"और वो तो कोई लौंडिया लाने की बात कर रही थी... लड़का कौन है?"

"वो कह रही है कि उस लड़की का बाय्फ्रेंड है.....!" डॉली ने बताया.....

"अरे हां याद आया.... पर लड़के को ऐसे यहाँ थोड़े ही लाना चाहिए था.... ईडियट! चल मैं देखता हूँ..." प्रेम ने कहा और उसके साथ बाहर निकल कर आ गया....

*****************

"हेलो बॉस!" प्रेम ने जाते ही मानव की तरफ हाथ बढ़ाया....,"लड़की कहाँ है...?"

"आ जाएगी...!" मानव ने अपने आवेगो को काबू में करके सहज भाव से कहा....

"एक मिनिट... सीमा... तुम मेरे साथ आना...!" प्रेम सीमा का हाथ पकड़ कर बाहर की ओर ले चला.... मानव उनके पिछे पिछे चल पड़ा....

"तुम यहीं रूको बॉस... आराम से बैठो.. मुझे कुच्छ पर्सनल बात करनी है....!" प्रेम ने हाथ बढ़कर इशारा किया....

"ओके...!" खुशकिस्मती से वो लोग बाहर ही जा रहे थे... इसीलिए मानव ने कुच्छ क्षण का वेट करना मुनासिब समझा.... वह उनके दरवाजा खोल कर बाहर जाने का वेट करता रहा.....

"आए... तुम कहाँ चल दिए... यहीं बैठने को बोला है ना?" मानव उठने लगा तो डॉली बिफर कर बोली....

"बस एक मिनिट.... अपनी गर्लफ्रेंड को ले आता हूँ....!" मानव पलटा और मुस्कुरकर बोला.....

"कहा ना चुपचाप बैठ जाओ... उनको अंदर आने दो....!" डॉली तुनक पड़ी....

मानव धीरे से उसके पास आया," वो तो अब गये... वो अब वापस नही आएँगे... तुम्हे भी जाना है क्या?"

"आए.. क्या मत... उम्म्म्म..उम्म्म्म..." और डॉली की बोलती बीच में ही बंद हो गयी.... मानव ने उसका मुँह दबाकर अपने साथ ही घसीट लिया था.... बाहर की ओर...

***********************

"जनाब इधर....!" झाड़ियों में दुबके पोलीस वालों में से एक की आवाज़ आई...," इस लड़की ने इसको बता दिया कि आप पोलीस वाले हो.... ये फोने कर रहा था कहीं... हमने दबोच लिए..... स्साले!"

मानव ने धक्का देकर डॉली को भी उनके साथ ही नीचे डाल दिया और घुटना टेक कर रेवोल्वेर की नोक प्रेम के माथे पर अड़ा दी....,"जल्दी बता पिंकी कहाँ है.. वरना यहीं ठोक दूँगा स्साले को....!"

प्रेम ने घबराकर लेते हुए ही अपने हाथ उठा लिए....,"प्ल्ज़ साहब.. गोली मत चलना.. मुझे नाम नही पता... पर एक लड़की..... अंदर है...!"

"क्या? यहाँ...!" मानव ने चौंक कर कोठी की तरफ देखा....,"यहाँ अंदर?"

"ज्जई साहब...!" प्रेम की आँखें भय के मारे फैल गयी थी....

"कितने लोग हैं अंदर तुम्हारे ....?"

"ज्जई.. पाँच....!"

"बॉस?"

"ज्जई...!"

"सुशील, पूरी...!.. तुम इन्न तीनो को संभलो... कोई बकबक करे तो सीधी ठोक देना अंदर... बाकी जल्दी आओ मेरे साथ.... जल्दी..!" मानव कहते ही सीधा अंदर की और भागा...... बाकी दो पोलीस वाले भी तुरंत उसके पिछे हरकत में आ गये.....

**********************************************

"कहा था ना सिर्फ़ पाँच मिनिट हैं तेरे पास....!" अजय ने कहा और पिंकी के पास जाकर उसके हाथ पिछे मॉड्कर अपने हाथ में पकड़ लिए.... पिंकी बुरी तरह सीसीया उठी.....,"अयाया... प्लीज़.....!"

"साली... बोल... कहा था ना?" अजय ने कहा और पिंकी के समीज़ में हाथ डाल कर उसको खींच लिया.... मानवता नंगी हो कर त्राहि त्राहि कर उठी... पिंकी का करूँ क्रंदान देख कर भी उन्न काफिरों का दिल नही पिघला.....

"आए हाए.... मेरी जान... क्या माल है तू...? बाहर से तो ऐसी नही...." अजय बोल ही रहा था कि अचानक पिछे से आवाज़ आई...,"आएय यू!"

"तुम यहाँ कैसे... आ!" पलट कर अजय मानव को ज़्यादा देर घूर नही सका... गोली सीधी उसके माथे के बीचों बीच घुस गयी थी.... उसके हाथ में थमा पिंकी की इज़्ज़त, उसकी समीज़ का टुकड़ा हवा में लहराया और ज़मीन पर अजय की लाश के साथ ही गिर गया....

तभी कल्लू के हाथ में रेवोल्वेर चमकी और अगले ही पल उसके खून के छ्चींटों से दीवार लाल हो गयी....

बदहवास सी खड़ी पिंकी कुच्छ देर तो जैसे कुच्छ समझ ही नही पाई...... अचानक जैसे ही इस सुखद अन-होनी से उसकी आँखें रूबरू हुई... उसके शरीर में तुरंत प्रतिक्रिया हुई और वह रोटी हुई भाग कर 'ऐसे' ही मानव से लिपट गयी... अब उसका रुदन और भी बढ़ गया था....

बाकी बचे दोनो लोग हाथ उपर करके सहमे हुए खड़े थे.... मानव ने अपने पिछे खड़े पोलीस वालों को कोठी का कोना कोना छान देने का आदेश दिया और फिर कुर्सी पर बँधे बैठे 'हॅरी' पर नज़र डाली...,"तुम तो वही हो ना जो....!"

अब जाकर पिंकी को अपनी हालत का ध्यान आया था... वह तुरंत कसमसा कर मानव की छाती से अलग हुई और भागकर अपना कमीज़ उठा लिया... उसके बाद वह कमरे के कोने में खड़ी होकर फूट फूट कर सुबकने लगी.....

"सब ठीक हो जाएगा पिंकी.... कमीज़ पहन लो जल्दी...!" मानव के कहा और कुर्सी पर बँधे हॅरी को खोलने लगा.....

"सॉरी सर... मेरी वजह से....!" हॅरी के चेहरे पर अप्रध्बोध साफ पढ़ा जा सकता था.....

"बाद में बात करेंगे...." मानव ने कहकर फोन निकाला सबसे पहले मीनू को पिंकी के ठीक होने की सूचना दी....

"पर... पर वो बाहर क्यूँ गयी...?" पिंकी की आँखों में भी खुशी के आँसू छलक उठे थे.....!"

"वही....!" मानव ने गहरी साँस ली..,"इश्क़ विश्क़... प्यार व्यार....!"

"क्या? हॅरी के साथ...?" मीनू चौंक पड़ी.....

"हाआँ... यहीं बैठा है.... बेचारा!" मानव ने हॅरी की तरफ घूर कर देखा....

"और अंजलि...?" बोलते हुए मीनू का गला सा रुंध गया था.....

"मम्मी को बता दो पिंकी ठीक है... मेरे साथ है.... मैं बाद में फोन करता हूँ....!"

"हाँ... मम्मी मेरे साथ ही बैठी है...!"

********************************

"जनाब कुच्छ नही मिला..... हमने पूरा घर छान लिया....!" दोनो पोलीस वाले वापस आ गये थे.....

"कुच्छ नही यार... बॉस को ढूँधो... 'वो' भी यहीं था.....!"

"जनाब.. कोई नही है... पिछे का दरवाजा खुला है.. लगता है भाग गया...!" पोलीस वाले ने अफ़सोस जताया....

"अब कहाँ जाएगा.... इन्न दोनो को साथ ले लो...!" मानव के इशारा करते ही पोलीस वालों ने बाकी जिंदा बचे दोनो लोगों के कॉलर्स पकड़ लिए.....

"तुम क्या सोचकर पिंकी को हॉस्टिल से बाहर लाए थे हॅरी....?" अब कमरे में सिर्फ़ 'वो' तीन ही बचे थे... हॅरी और पिंकी दोनो सिर झुकाए खड़े थे....

"सॉरी सर... ववो.. आक्च्युयली....!" हॅरी ने कुच्छ कहने की कोशिश की थी....

"तुम अब ये कहोगे की तुम इस'से प्यार करते हो.. वग़ैरह वग़ैरह.... पर सोच कर देखो.. क्या ये प्यार है...? क्या ये प्यार की उमर है इसकी....? कम से कम ऐसे हॉस्टिल से निकाल कर तो नही लाना चाहिए था..... तुम समझ रहे होगे मैं क्या कहना चाहता हूँ....!" मानव ने बड़प्पन के नाते कहा....

हॅरी से कुच्छ बोलते नही बन पा रहा था.... अचानक पिंकी ही उसके बचाव में आगे आ गयी,"म्म्मैने ही इसको बोला था... मैं सिर्फ़ दस मिनिट के लिए बाहर आई थी... इस'से बात करने..." हालाँकि नज़रें पिंकी की भी अब शर्म से झुकी हुई थी...

"जनाब.... ववो... इस लड़की के पापा आए हैं...बाहर खड़े हैं... आपने बोला होगा जगदीश को...!" एक पोलीस वाले ने आकर बताया.....

"हां... हां.. चलो...!" मानव ने पिंकी का हाथ पकड़ा और उसको लेकर बाहर निकल गया.....

**************************************

"उस कामीने की हिम्मत कैसे हुई मेरी बेटी को हॉस्टिल से बाहर लाने की.... कहाँ है ववो....!" नीचे पिंकी के पापा ये जान'ने के बाद कि पिंकी ठीक है; हॅरी पर भड़क रहे थे.....

"ताउ आ रहे हैं ना... शुक्र करो.. कम से कम तुम्हारी बेटी बच गयी.. वरना...!"

"लो आ गये.... जनाब.. आप इनसे ही बात कर लो...!" दूसरे पोलीस वाले ने कहा....

पिंकी अपने पापा से नज़रें मिलने का साहस नही कर पा रही थी... आख़िरकार हॉस्टिल से बाहर तो 'वो' अपनी मर्ज़ी से ही आई थी ना.... अपने पापा के तेवर देख पिंकी मानव के पिछे ही च्छुपकर खड़ी रही.....

पापा ने भी शायद उस'से वहाँ बात करना मुनासिब नही समझा... पर पिछे आते हॅरी को देखते ही अचानक वो उसकी ओर लपके...,"साले... कुत्ते... कामीने...!"

अच्च्छा हुआ जो मानव ने बीच बचाव करा दिया..,"आप धैर्य रखिए पिताजी... ये बातें बाद में भी हो सकती हैं.... समझने की कोशिश करें.....!"

"पर इसको छ्चोड़ना नही कमिने को.... मैं इसके खिलाफ एफ.आइ.आर. कारवँगा....!" पापा ने पिछे हट'ते हुए कहा.....

"वो पाँचों कहाँ हैं....?" मानव ने एक पोलीस वाले से पूचछा.....

"गाड़ी में डाल लिया है जनाब...! क्या करना है बताइए.....?"

"इसको भी ले चलो... उनके साथ..." मानव ने मुड़कर हॅरी की तरफ आँख मारी और फिर उसका हाथ पकड़ कर कुच्छ दूर उसके साथ चला गया....,"मैं समझता हूँ यार... हो जाता है... पर 'वो' तो पापा हैं ना! आज मेरे थाने में रहना और सुबह निकल जाना.... मैं बात कर लूँगा... पर अभी पढ़ने दो यार इसको...!"

"जी.. थॅंक योउ सर!" हॅरी ने मानव का हाथ दोनो हाथों में थाम लिया....

"और उनका क्या करना है जनाब....?" साथ साथ चल रहे एक पोलीस वाले ने पूचछा....

"करना क्या है... खाल उतार दो सबकी... सुबह तक मुझे इनकी सारी डीटेल्स चाहियें... और हाँ... 'वो' प्रेम...! उसको अलग डाल लेना.... शायद 'वो' बॉस को जानता होगा... मैं आ रहा हूँ तुम्हारे साथ ही....!" मानव ने कहा और वापस मूड गया....

पोलीस वालों ने तब तक आ चुकी वॅन में सबको बिठा लिया.... सब हताश नज़रों से एक दूसरे को देख रहे थे.... उनका खौफनाक साम्राज्य अब धूल-धूसरित हो चुका था....

"सब ख़तम हो गया! इस साली सीमा ने सब मॅटीया-मेट कर दिया...." प्रेम ने इधर उधर देखा और एक लंबी साँस लेकर धीरे से कहा.....

अचानक पिछे गोली चलने की आवाज़ सुनकर आगे बैठे पोलीस वाले स्तब्ध रह गये... भाग कर पिछे आए तो देखा प्रेम गाड़ी में नीचे पड़ा है और उसके मुँह से खून बह रहा है....

"ययए.. ये क्या किया आपने?... मुझे क्यूँ.. आहह" प्रेम बिलबिलता हुआ हॅरी की ओर आँखें फ़ाडे देखता रहा....

इस'से पहले हॅरी दूसरी गोली चला पाता.. पोलीस वाले उसको काबू में कर चुके थे....

"क्या हुआ? गोली क्यूँ चलाई...." मानव लगभग भागता हुआ गाड़ी में चढ़ा था....

"जनाब... इस'ने... इसने इस पर गोली चला दी....!" पोलीस वाले ने हॅरी की और इशारा किया..... प्रेम बेसूध हो चुका था....

"जल्दी करो.... गाड़ी पहले हॉस्पिटल लेकर जाओ.. ये मारना नही चाहिए...!" मानव ने कहा और हॅरी को वापस नीचे खींच लाया....,"क्यूँ किया तुमने ऐसा...?"

"साले उसी की वजह से ये सब हुआ.... मुझे उसकी जान लेने दो प्लीज़.... मैं आपके हाथ जोड़ता हूँ....!" हॅरी की आँखों से मानो खून टपक रहा हो....

"उसकी वजह से...? पर वो तो बाद में आया था... और... और तुम्हारे पास रेवोल्वेर कहाँ से आई 'वो'?" मानव ठिठक कर अचानक खड़ा हो गया.....

"ववो.. वो मैं अंदर से लाया था... उस आदमी की उठाकर जिसने आप पर गोली चलाने की कोशिश की थी.....!" हॅरी ने जवाब दिया....

"शिट यार... तुम्हे नही पता ववो हमारे कितने काम का आदमी था.... उसको कुच्छ हो गया तो मैं तुम्हे छ्ोड़ूँगा नही, देख लेना..... चल...!" मानव ने गुस्साए लहजे में कहा.....

*********************

"हां मिश्रा... अब सुना 'वो' रेकॉर्डिंग... देखें कुच्छ काम का है कि नही...." मानव ने थाने में आते ही कहा.... पिंकी और उसके पापा को उसने 'अपने' ही घर भेज दिया था शहर में.... हॅरी उसके सामने ही कुर्सी पर बैठा हुआ था....

"2 मिनिट लगेंगे सर...! आप होल्ड करना...!" मिश्रा की आवाज़ आई....

"हां ठीक है..." मानव ने फोन का लाउडस्पिकर 'ऑन' करके टेबल पर रख लिया...,"हॅरी!"

"जी सर...!"

"सॉरी.. तुम्हारे लिए एक काम है...!"

"ववो.. वो मैं कल सुबह बताउन्गा...!" मानव मुस्कुरा दिया... तभी फोन पर मिश्रा की आवाज़ उभरी..,"हेलो सर..?"

"हां मिश्रा!"

"लीजिए सुनिए..." मिश्रा ने कहा और 'टेप' की लाइन फोन के साथ कनेक्ट कर दी...

"क्या चल रहा है उधर...?"

"कुच्छ नही... बस वही सब.... साली टाइम बहुत लगा रही है....अभी तक कपड़े भी नही निकाले.... पता नही बॉस चाहते क्या हैं... हे हे हे... हमें मनमानी नही करने दे रहे... हे हे हे...!"

"बात करा ना एक बार.... बॉस का फोन ही नही लग रहा....!"

"आज नही लगेगा... बॉस आज बहुत बिज़ी हैं...!"

"इसीलिए तो कह रहा हूँ यार... तू तेरे फोन से करा दे बात एक बार.... 'वो' मामला तो सेट कर दिया... मंत्री भी निसचिंत होकर सो गया होगा.... मुझे क्या करना है अब....?"

"बताया ना यार बॉस आज फोन नही ले सकते... मामला सेट कर दिया ना! बहुत बढ़िया.......और दूसरी का?"

"मेरे साथ ही है... पिछे पड़ी है डिग्जी में... मामू लोगों की बहुत प्राब्लम होती है यार रात में.... बहुत परेशान कर रही थी....पता नही कब झमेला खड़ा कर दे...!"

"घर जाकर सो जा आराम से..... सुबह देखेंगे..." ,"नही नही.. एक मिनिट... यहीं आजा... 1012 में.... हम सब यहीं हैं...!"

"अच्च्ची बात है... मैं वहीं आ जाता हूँ... यहाँ से ज़्यादा दूर भी नही है...!"

पूरी बात सुनते ही मानव उच्छल सा पड़ा.... वह झटके के साथ कुर्सी से उठा और लगभग दौड़ते हुए लोक्कूप की तरफ गया...,"प्रेम की गाड़ी कहाँ है...?"

"जी उधर ही खड़ी होगी... सफेद वरना है 8544!" अंदर बैठे दोनो लोगों में से एक ने बताया....

"चाबी?"

"जी उसके पास ही होगी या फिर घर में रखी होगी.....!"

"हूंम्म..." मानव पलटा और तुरंत हॉस्पिटल में प्रेम के साथ रुके पूरी के पास फोन किया... खुसकिस्मती से चाबी उसकी जेब में ही मिल गयी.... पर एक बुरी खबर भी साथ मिली थी... प्रेम मर चुका था...

"श शिट.... मैं सुशील को भेज रहा हूँ.. चाबी उसको दे देना... ओके?" मानव ने हताशा में टेबल पर मुक्का मारा...

"जी जनाब!" उधर से आवाज़ आई....

"तुमने मेरा सारा खेल खराब कर दिया... प्रेम को मार दिया तुमने.... शायद केवल वही 'बॉस' को जानता था..."मानव ने हॅरी की आँखों में झाँक कर कहा....,"तुम्हे आज लोक्कूप में ही रहना पड़ेगा... सुबह देखूँगा क्या करूँ...!"

"ज्जई...!" हॅरी के मुँह से कुच्छ और ना निकला....

**************************

"ये रही शायद... हां यही है.... जल्दी खोलो....!" मानव की साँसें उखड़ी हुई थी... फोन पर हुई बातें सुन'ने के बाद इतना तो तय था कि जो कोई भी है... जिंदा है... पर ये समझ नही आ रहा था कि 'दूसरी' कौन हो सकती है.....

मानव की आँखें पिछे दिग्गी में हाथ, पैर और मुँह बाँध कर डाली गयी लड़की पर पड़ते ही सुखद आस्चर्य से फैल गयी...."आन्जुउउउउउउउउउ.... तुम्म्म!"

गतान्क से आगे..................
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10-22-2018, 11:39 AM,
#66
RE: Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
बाली उमर की प्यास पार्ट--51

गतान्क से आगे................

मानव ने बिना वक़्त गँवाए अंजलि को डिग्जी से बाहर निकल कर उसके हाथ पाँव खोले...,"अंजू.. तुम.. ऐसे... तुम्हे तो....!"

"पिंकी....!" चेहरे पर बँधी पट्टी के हटते ही अंजलि लगभग चिल्ला पड़ी...,"पिंकी को बचाओ जल्दी प्लीज़... वो.. हॅरी उसको....!"

"रिलॅक्स... पिंकी बिल्कुल ठीक है... पर तुम...!" मानव के चेहरे की रौनक उसकी खुशी बयान कर रही थी....

"नही... ववो.. हॉस्टिल में नही है... हॅरी उसको....!" अंजलि ने एक बार फिर कुच्छ बताने की कोशिश की... पर इस बार भी मानव ने उसको टोक दिया..,"हाँ.. हाँ... मुझे पता है... वो हॅरी के साथ बाहर आकर इन्न लोगों के चंगुल में फँस गयी थी... पर अब वो बिल्कुल ठीक है.... तुम फिकर मत करो... तुम तो ठीक हो ना...?"

"अच्च्छा!" अंजू खुश होकर बोली...,"वो सब पकड़े गये क्या....?"

"हाँ... चलो अब... तुम बच कैसे गयी?" मानव ने उसके साथ वापस ज़ीप में बैठते हुए पूचछा तो अंजलि के चेहरे पर टीस उभर आई...,"बेचारी मनीषा को इन्न लोगों ने मार दिया.... उसने मुझे बचाने के लिए अपनी जान गँवा दी....!"

"क्या? कौन मनीषा?... वही तुम्हारे गाँव वाली....?" मानव उच्छल पड़ा....

"हाँ... मैं उस बुड्ढे को बाथरूम में बंद करके आपके पास फोन कर रही थी तो 'वह' प्रेम दरवाजा तोड़कर अंदर आ गया... वा तो मुझे मार ही देता अगर मनीषा उसके साथ छ्चीना झपटी नही करती तो.... गोली 'उस' बेचारी को लग गयी...." अंजलि ने बोलते बोलते बुरा सा मुँह बना लिया....,"वह मुझे भी मारने वाला था... पर हॅरी ने उसको मना कर दिया....?"

"हॅरी ने मना कर दिया? मैं कुच्छ समझा नही....!" मानव ने चौंक कर अंजलि की तरफ देखा.....

"आपने उसको नही पकड़ा क्या?.... हॅरी ही तो इन्न सबका 'बॉस' है....!"

"कियेयीययाया?" ठगे से रह गये मानव के पैर ब्रेक्स पर दाबते चले गये...,"तत्तूम्हे कैसे पता....?" मानव ने फटाफट अपना मोबाइल निकलते हुए कहा और थाने में फोन किया....,"हेलो पूरी?"

"पूरी तो गया जनाब!.. जल्दी बोलो... मेरे पास टाइम नही है...." उधर से आवाज़ आई....

"कहाँ गया....? तुम कौन बोल रहे हो?"

"सब उपर गये... मैं भी चलता हूँ... अलविदा.. हा हा हा हा... बाइ इनस्पेक्टर साहब...!"

"हेलो... हेलो.. कौन? हॅरी.... ओह्ह्ह शिट... मुझसे इतनी बड़ी चूक कैसे हो गयी....!" मानव ने झल्लाते हुए स्टियरिंग पर मुक्का मारा और इसके साथ ही गाड़ी को रफ़्तार देते हुए उसने शहर भर में वी.टी. शुरू कर दी....

******************************

**********

"ओह माइ गोद..." मानव ने थाने में जाते ही अपना माथा पकड़ लिया.... थाने में उस वक़्त मौजूद तीनो पोलीस वालों की लाशे यहाँ वहाँ बिखरी पड़ी थी.... मानव भाग कर लोक्कूप की तरफ गया... अंदर फैला खून बयान कर रहा था कि किस निर्दयता से हॅरी ने उन्न सब को मौत के घाट उतारा होगा.... लोक्कूप रूम में भी 2 लाशे ही बची थी बस...,"सस्सालाअ!"

********************************

थाने में पूरी पोलीस फोर्स के साथ ही आंब्युलेन्स भी आ चुकी थी.... सब के सब अपने अपने कामो में व्यस्त थे.... मानव उनको इन्स्ट्रक्षन देकर वापस ऑफीस में आ गया....

"तुम्हे कैसे पता लगा कि हॅरी बॉस है....?" अपना सिर पकड़े ऑफीस में बैठा मानव अब सिवाय लकीर पीटने के; और कर ही क्या सकता था..... अंजलि भी उसके सामने सिर झुकाए बैठी थी.....

"मनीषा के मरने के बाद उसने खुद मुझे फोन पर बात की थी......वह मुझे वापस भेजने के मूड में नही था.... मैं रोने लगी तो उसने मुझे कहा था कि चिंता मत करो... पिंकी का वेट कर रहा हूँ, गुरुकुल के बाहर... वो भी तुम्हे यहीं मिलेगी....!" अंजलि ने बताया.....

"पर....!" मानव कुच्छ बोलते बोलते रुक गया...,"खैर.. अब तो वैसे भी सॉफ हो चुका है कि हॅरी ही इनका 'बॉस' था.... वैसे मनीषा वहाँ कैसे पहुँची... और उसने तुम्हे बचाने के लिए अपनी जान क्यूँ दी.....?"

"उसी ने हम सब को बचाने के लिए तरुण को मारा था.... तरुण इन्न सब के साथ ही काम करता था.... वह हम तीनो को भी इसी दलदल में घसीटना चाहता था..." यहाँ से शुरू करके अंजलि ने पूरी कहानी मानव को सुना दी....

" ओह्ह्ह.... ये हॅरी तो तुम्हारे गाँव का ही है ना?" मानव ने पूचछा....

"नही... हमारे गाँव का नही है... इसका दवाइयों का कुच्छ बिज़्नेस है... हमारे गाँव में पता नही क्यूँ रहता था.... गाँव वालों को कुच्छ पता होगा.... पर क्या पता उनको भी ना पता हो!"

"एक मिनिट... चलो महिला थाने चलते हैं... शायद सीमा या डॉली से कुच्छ पता चले, उसके बारे में.....!" मानव ने कहा और अंजलि को अपने साथ लेकर निकल पड़ा.......

************

"मुझे उस'से पहली बार अर्चना मेडम ने बात करवाई थी सर.... हमें तो आज तक ये भी नही पता की 'बॉस' कौन है... सिर्फ़ प्रेम और अजय ही उस'से मिलते थे, एक आध बार....." सीमा थाने में बैठी अपनी बर्बाद हो चुकी जिंदगी पर आँसू बहा रही थी.....

"कौन अर्चना मेडम?" मानव ने अपनी थयोरियाँ चढ़ा कर पूचछा.....

"जब में स्कूल में पढ़ती थी तो हमारे स्कूल में टीचर थी... आजकल प्रिन्सिपल हैं.....!"

"ओह्ह्ह... मैं समझ गयी... वही ना जो तुमसे उस दिन गुरुकुल में बात कर रही थी....!" अंजलि ने तुरंत पूचछा.... सीमा ने सहमति में सिर हिला दिया...,"हां!"

"वो तो इसी शहर में रहती हैं.... तुम यहीं आराम करो अंजू...!" मानव तुरंत खड़ा हो गया...," 2 लेडी कॉन्स्टेबल्स को बुलाओ अभी....!"

*************************

"कौन?...." तीन चार बार बेल बजाने पर एक आदमी की आवाज़ आई....

"दरवाजा खोलो...!" मानव ने आवाज़ सुन'ने के बाद कहा....

"पर कौन है भाई... इतनी रात को...?" अंदर से दरवाजा खोले बिना ही एक बार फिर से पूचछा गया....

"पोलीस है... जल्दी खोलो...!" भाननाए हुए मानव ने गुस्से में दरवाजे पर ठोकर मारते हुए कहा.....

"आप... पर यहाँ क्यूँ....?" घबराकर आदमी ने दरवाजा खोल दिया.....

"तेरी बीवी कहाँ है...?" मानव ने पूचछा.....

"ववो.. वो तो बाहर गयी है..... क्यूँ?" आदमी हड़बड़ा गया था.....

"जल्दी बता वरना....!" मानव अब और समझौते के मूड में नही था.. उसने अपनी रेवोल्वेर निकाल ली...,"बहुत हो गया तुम्हारा धंधा.... बता कहाँ है तेरी बीवी....?"

"ववो... उसको किसी ने बुलाया था.... कह रही थी कुच्छ एमर्जेन्सी है..... पर आप क्यूँ...?"

"किसने?... कहाँ बुलाया है?"

"ये तो पता नही सर...!"

"कब?" मानव ने फिर पूचछा.....

"अभी... 20 मिनिट पहले..... पर आप...!"

"तेरी बीवी है वो.. और तुझे ये पता नही की उसको इतनी रात को...." बोलते बोलते मानव रुका और फिर अचानक चिल्लाया..,"फोन लगा.... फोन लगा उसको.. वरना ववो गयी जान से... वो उसको भी मार देगा स्साला....!"

"पर वो उसको क्यूँ मारेगा... बहुत शरीफ लड़का है वो तो...." हड़बड़ाहट में आदमी के मुँह से निकल ही गया...,"एक मिनिट.. मैं फोन करके बताता हूँ उसको....!"

"नही उठा रही... लगता है वाइब्रेशन पर होगा... म्यूज़िक चला रखा होगा ना.....!" आदमी ने फीकी हँसी हंसते हुए जवाब दिया.....

मानव ने उसके हाथ से फोन झपट कर साथ आई महिला पोलिसेकार्मी को दे दिया...,"ट्राइ करते रहो.. उठा ले तो मुझे देना.... मुझे तो लगता है कि वो भी गयी...!"

"हां.. अब तू बोल... कौन है 'वो' शरीफ लड़का....!" मानव ने उस आदमी के कॉलर पकड़ लिए.....

"म्मूंुझे.. मुझे कुच्छ नही मालूम...!" आदमी घिघियाते हुए बोला.....

"अच्च्छा! तुझे ये पता है कि 'वो' शरीफ लड़का है.... तुझे अपनी बीवी के इतनी रात में बाहर जाने पर भी कोई ऐतराज नही है.... जल्दी बता दे.... उस शरीफ लड़के ने पिच्छले तीन घंटे में अपने सब साथियों को मार दिया है.... तीन पोलीस वालों को मार कर थाने से भागा है.... तेरी बीवी भी शायद अब तक मर् चुकी होगी.... समझ गया तू.... अब जल्दी से बता दे वरना तेरा खून भी उसके सिर लग जाएगा...!" मानव ने गुर्रकार कहा....

"बा...बाब...बताता हूँ.. प्लीज़.. गोली मत चलना...!" कनपटी पर रेवोल्वेर तनी देख कर आदमी के रौंगटे खड़े हो गये....,"मुझे ज़्यादा नही पता.. पर.. पर मेरी बीवी ने एक बार बताया है कि वो 'जुलना' का रहने वाला है... हॅरी नाम है... मुझे इस'से ज़्यादा कुच्छ नही पता......!"

"तुम कभी मिले हो उस'से?"

"नही... पर मेरी बीवी की आल्बम में फोटो है उसका.....!" आदमी ने घिघियाते हुए बताया.. रिवॉलव अब तक उसकी कनपटी पर ही थी.....

"उसको पता है कि तुझे उसके बारे में कुच्छ पता है...?" मानव ने पूचछा....

"नही...!" आदमी ने ना में सिर हिला दिया.....

"फोटो लेकर आ उसका....!" मानव ने रेवोल्वेर वापस रखते हुए कहा.....

"ज्जई... लाता हूं... ववो.. फोन मिला की नही....?"

"नही... जल्दी कर.....!"

"ये लीजिए सर...!" आदमी ने फोटो लाकर मानव को दे दिया.....

मानव ने फोटो को गौर से देखा और अपनी जेब में डाल लिया....,"चल.. गाड़ी में बैठ... ताला लगा दे यहाँ....!"

"प्पर... पर मैं क्यूँ सर?"

"जिंदा रहना है कि नही.....?" मानव मुड़कर गुर्राया....

"ज्जई... चलता हूँ......!"

*****************

वो लोग अभी थाने पहुँचे भी नही थे कि मानव के मोबाइल पर एक और खबर आ गयी...,"सर... ववो... पटियाला चौंक के पास अभी एक औरत की लाश मिली है..... लगता है गला घौंत कर मारा गया है उसको....!"

"उफ़फ्फ़... गयी..." मानव के मुँह से निकला...,"गाड़ी में है क्या?"

"नही सर... ऐसे ही फूटपाथ की साइड में पड़ी थी.... कोई सभ्य लेडी मालूम होती हैं....."

"हुंग.... शभ्य साली.....!" मानव बड़बड़ाया.... और पिछे बैठे आदमी को टोका...,"नंबर. क्या है तेरी बीवी की गाड़ी का?"

"ज्जई... डल 9क्प 7457...!"

"कलर...?"

"जी ब्लॅक... होंडा सिटी!"

मानव फोन पर निर्देश देने लगा....," ववो.. ब्लॅक कलर की होंडा सिटी में मिलेगा... 7457.... बचना नही चाहिए वो... किसी भी कीमत पर....!"

"मेडम किधर हैं...!" आनन फानन में एक पोलीस वाला लगभग भागते हुए महिला थाने में घुसा....

"सो रही हैं... क्यूँ?" रात की ड्यूटी पर तैनात एक महिला पोलिसेकार्मी ने पूचछा....

"इनस्पेक्टर साहब ने उन्न लड़कियों को एक लाश की शिनाख्त के लिए थाने बुलाया है... एक लेडी को भी साथ में....!" पोलीस वाले ने कहा.....

"मैं... मैं तो ड्यूटी पर हूँ... एक मिनिट... शिल्पा को जागती हूँ...." पोलीस वाली ने कहा और स्टाफ वॉर्ड में जाकर शिल्पा को जगा दिया...,"उठ.. ड्यूटी पर जाना है तुझे...!" पोलीस वाला उसके साथ साथ ही था.....

"अर्रे हां... उस लड़की को बुलाया होगा... अंजलि को...! उसको यही छ्चोड़ गये थे ना...! उनकी जान पहचान की है..." महिला पोलीस कर्मी ने कहा....,"मैं अभी उठाती हूँ...!"

"अंजलि?.. नही नही... उन्न दोनो को... ववो.. क्या नाम थे यार... डॉली और सीमा... हां....!" पोलीस वाले ने कहा....

"ठीक है... लाओ.. उनका पर्चा दो!" महिला पोलीस कर्मी ने हाथ बढ़ा कर कहा....

"पर्चा सुबह भेज देंगे यार.... तुम्हे नही पता कितनी मारा मारी चल रही है... ववो.. कमीना...!"

"पर कहीं मेडम गुस्सा ना करें सुबह उठकर... ये ऐसी ही है...चिड़चिड़ी सी.... क्या करूँ... अब जगाउन्गि तो गुस्सा करेंगी...!"

"छ्चोड़ ना यार... रोज रोज तो ऐसे होता है... मैं जाते ही जनाब का फोन करवा दूँगा.....!" पोलीस वाला उनके साथ बाहर आ गया....

"दीदी दीदी....!" उनके बाहर निकलते ही भयभीत सी अंजलि ने चदडार से मुँह निकाल कर अपनी साइड में सो रही पोलीस वाली को जगाया.....

"सोने दे ना यार.... अब तो आई हूँ.... सुबह होने वाली है वैसे भी...!" पोलीस वाली ने उसको झिड़कते हुए कहा.....

"दीदी.. ववो... हॅरी...!" अंजलि ने उसको एक बार फिर हिलाया.....

"क्या हॅरी हॅरी यार... तू ज़्यादा जासूस मत बन.... पकड़ा जाएगा अपने आप... पोलीस वालों ने चारों और नाके लगा रखे हैं... सो जा....!"

"वो.. ववो.. यहीं आया हुआ है.. पोलीस की वर्दी में है....!"

"सीसी..क्क्याअ...!" पोलीस वाली की नींद एक दम उड़ गयी... पर उठ कर बैठ जाने के बावजूद उसकी आवाज़ नही निकली....,"कहाँ...?"

"अभी अंदर आया था... मैने थोड़ी सी चदडार उठाकर देखा.....!" अंजलि लेते लेते बोल रही थी... वह बहुत ज़्यादा डर गयी थी.....

"कुच्छ हथियार था क्या उसके पास...?" पोलीस वाली ने सहम कर पूचछा....

"पता नही.. ये तो...!" अंजलि ने जवाब दिया.....

"सो जा... अपने साथ मुझे भी मरवाएगी क्या? 6-7 खून तो पहले ही कर चुका है... उसको क्या फ़र्क़ पड़ेगा....?" पोलीस वाली वापस लेट गयी... और डरी सहमी हुई चदडार की औट में से ही दरवाजे को घूर्ने लगी......

****************************************

"फोन ज़रूर करवा देना मेडम के पास... मेरी ड्यूटी 7 बजे ख़तम होगी.... उस'से पहले पर्चा भिजवा देना या इन्न लड़कियों को...." पोलीस वाली ने शिल्पा को उन्न दोनो लड़कियों के हाथों में लगी हथकड़ियों का दूसरा छ्होर थामकर पोलीस ज़ीप में बैठाते हुए कहा.....

"तुम फिकर मत करो!" ड्राइविंग सीट पर बैठा हॅरी मुस्कुराया और गाड़ी स्टार्ट करके दौड़ा दी.........

"क्या क्या बता दिया इनस्पेक्टर साहब को...?" हॅरी ने गाड़ी चलाते हुए एक पोलीस नाके से पार करके पूचछा..... पोलीस की गाड़ी देख कर नाके पर खड़े पोलीस वालों ने अपने बारर्ओर खींच लिए थे.... सुबह के तीन बजे भारी ट्रक्स और सायरेन बजाती घूम रही गाड़ियों के अलावा कुच्छ दौड़ भी नही रहा था शहर की सड़कों पर......

"हमें कुच्छ पता ही नही है सिर... हमने तो आज तक उसको देखा भी नही है.... हम क्या बतायें?" डॉली ने मुरझाए चेहरे से साथ बैठी शिल्पा को देखते हुए कहा.... साँवली सी शिल्पा शक्ल सूरत की बड़ी प्यारी थी.... नयी नयी पोलीस में भरती हुई थी... जोश अभी कायम था... जवानी भी...!

"पर.. तुम शहर से बाहर कहाँ लेकर जा रहे हो.... इनस्पेक्टर साहब कहाँ हैं....?" शिल्पा उनीनदी सी थी... अचानक उसने बाहर झाँक कर पूचछा.....

"एक डेड बॉडी मिली है.... साहब वहीं पर हैं... इनको शिनाख्त के लिए बुलाया है....!" हॅरी अब निसचिंत हो चुका था......

शिल्पा ने मुँह पिचकाया और वापस सीट से सॅट कर अपनी आँखें बंद कर ली.....

************************************

"आए... गया क्या वो?" बाहर तैनात पोलीस वाली जैसे ही पानी पीने के लिए अंदर आई... अंजलि के साथ लेटी हुई पोलीस वाली ने चदडार से मुँह निकाल कर पूचछा....

"हां... गया...! लड़कियों को लेने आया था...." पानी पीकर वापस मुड़ते हुए पहली ने जवाब दिया.....

"फिर....?" दूसरी उच्छल कर बैठ गयी......

"फिर क्या? भेज दिया.... पर्चा सुबह आएगा....!"

"किययाया? अरी 'ववो' हॅरी था.... उन्न लड़कियों का बॉस?"

ड्यूटी पर तैनात पोलीस वाली की तो जैसे जान ही निकल गयी...,"ययए... ये क्या कह रही है तू...? पहले क्यूँ नही बताया...? गयी मेरी नौकरी तो... हे भगवान.....! ये मुझसे क्या हो गया....."

"मैं कौनसा उसको जानती थी.... इस'ने बताया है अभी... मुझे तो अब पता चला...."

"पर दीदी.. मैने तो...!" अंजलि बोलने लगी तो पोलीस वाली ने उसको झिड़क दिया...,"चुप कर... अभी भी टाइम है... वी.टी. करवा दे.... शकुंतला को बोलकर... वरना तू तो गयी....!"

"पर... पर... कहेंगे क्या? ववो तो ऐसे उल्लू बना गया जैसे....!" पहली ने पूचछा....

"ऐसे मत कहना... बोलना पोलीस की वर्दी में आया था और आते ही कनपटी पर रेवोल्वेर लगाकर छुड़ा ले गया.... फालतू में चूतिया बन'ने की ज़रूरत नही है.. समझी... कर दे फोन.....!"

"पर... पर ववो तो... उसके साथ मैने शिल्पा को भी भेज दिया.... उसको तो सब पता है ना... वो तो सच ही बताएगी बाद में....!" पहले वाली काँपने लगी थी......

"उसका क्या पता अब बचेगी भी या नही... बाद की बाद में सोचेंगे... तू वी.टी. करवा जल्दी.... शहर में होगा तो पकड़ तो लेंगे उसको... कौनसी गाड़ी में आया था.....?"

"पोलीस ज़ीप थी.... चल मेरे साथ आजा यार... तू उसको बता देना देना क्या बोलना है...?"

"क्यूँ घबरा रही है यार..... यहाँ कम से कम मर्डर तो नही किए.... सिटी थाने में देखा क्या हाल करके गया है.... कुच्छ नही बिगड़ेगा तेरा.... चल मैं चलती हूँ तेरे साथ...."

************

"व्हाआत....? ये क्या बक रहे हो...." मानव सुनते ही उच्छल पड़ा....

"जी सर... अभी वी.टी. हुई है...." वाइर्ले ऑपरेटर लगभग भागता हुआ ऑफीस में आया था....,"वह मेरी बेटी शिल्पा को भी ज़बरदस्ती पोलीस ज़ीप में बिठाकर ले गया...... जल्दी कुच्छ कीजिए सर....!" डब्ल्यू.ओ. हाथ जोड़कर गिड़गिदने लगा.....

"इसकी मा की... स्साला.... पोलीस ज़ीप कहाँ से आई उसके पास...?" मानव ने खड़ा होते ही टेबल पर मुक्का मारा.....,"कौनसी ज़ीप थी....?"

"इसके बारे में उनको कुच्छ नही पता सर.... आप कुच्छ कीजिए ना...!"

"घंटा ड्यूटी करती हैं स्साली ववो... कम से कम ज़ीप का नंबर. तो देख लेती.... कितनी देर पहले हुआ है ये सब....?"

"अभी 1 मिनिट पहले ही रिपोर्ट हुई है साहब.... 5 मिनिट पहले वारदात हुई है... मेरी बेटी तो वैसे भी बहुत भोली है जनाब....!" डब्ल्यू.ओ. गिड़गिडया... उसको बस अपनी बेटी की पड़ी थी.....

"भोली है तो इस लाइन में क्या...." मानव गाली बकते बकते रह गया.... पर वो बुरी तरह भनना गया था...," साले तनख़्वाह पाने के लिए भरती हो जाते हैं.... ज़ीप निकलवओ बाहर....!"

गतान्क से आगे................
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10-22-2018, 11:39 AM,
#67
RE: Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
बाली उमर की प्यास पार्ट--52

गतान्क से आगे................

"हां, बाहर आ जाओ!" हॅरी किसी से फोन पर बात कर रहा था....

"अभी और कितनी दूर जाना है...", शिल्पा ने एक बार फिर गर्दन उचका कर गाड़ी चला रहे हॅरी पर निगाह डालने की कोशिश की....

"फिकर मत करो...!" हॅरी ने कहते कहते गाड़ी सड़क के बाईं और करके ब्रेकेस लगा दिए... तभी तकरीबन 25-30 साल का एक युवक ज़ीप की पिच्छली सीट खोलकर उसमें आ चढ़ा...,"हे... चलो नीचे उतर कर उस गाड़ी में बैठो...!" उसका दूसरा साथी बाहर खड़ा अपने दाँतों में से कुच्छ निकालने की कोशिश कर रहा था....

सीमा और डॉली अचंभित सी उन्न दोनो को देखने लगी.... वो दोनो उनको अच्छि तरह जानती थी.... पर साथ बैठी शिल्पा और आगे बैठे 'पोलीस वाले' की वजह से वो एक दूसरी का चेहरा ताक कर ही रह गयी....

"ये सब क्या है... अभी और कितना आगे चलना है... ये दोनो कौन हैं...?" शिल्पा ने हड़बड़ा कर एक बार फिर पूचछा.....

"सब समझ आ जाएगा.. हे हे हे...", इस बार जवाब गाड़ी में चढ़े युवक ने दिया और अपनी हथेली शिल्पा की जाँघ पर रख कर दबा दी.. और फिर गुर्राते हुए रेवोल्वेर निकाल कर कहा,"चलो नीचे...!"

"ययए... ये क्या कर रहे हो..." अपने गालों पर रेवोल्वेर की नोक सटी देख कर शिल्पा अपनी जाँघ पर रखी हथेली का विरोध करना तो जैसे भूल ही गयी.... युवकों की शकल सूरत और तेवरों से उसको वो दोनो पेशेवर मुजरिम लग रहे थे... सूखे पत्ते की तरह कांपना शुरू कर चुकी हाथ में थमी हथकड़ियों को झट से छ्चोड़ते हुए तुरंत नीचे आ गयी....,"क्क्या है ये सब...?"

नीचे खड़े युवक ने शिल्पा के नीचे आते ही उसका हाथ पकड़ लिया,"चलो.. उस गाड़ी में...!"

"ययए... ये तो कमाल हो गया यार.... तुम कैसे...?" डॉली खुशी से उच्छलते हुए सीमा के साथ लगभग भाग कर सड़क से नीचे उतर कर खड़ी की गयी गाड़ी में आकर बैठ गयी...,"आए... चल हमारी बेड़ियाँ खोल... ययएए... ये तो वही लड़का है ना जो....!" डॉली ने हॅरी को पोलीस वाले के भेष में ज़ीप से उतर कर गाड़ी की तरफ आते देखा तो अवाक रह गयी.... सीमा का भी यही हाल था.....

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"डॅमिट यार... अगर वो ज़ीप में था तो गया कहाँ.... हर चौराहे पर पोलीस है... फिर भी...." मानव झुंझला उठा था..... वह अंबेडकर चोवोक पर बॅरियर लगाए खड़े पोलीस वालों से बात कर रहा था.....

"सर आपके वी.टी. करवाने के बाद हमने हर गाड़ी को चेक किया है.... चाहे वो लाल बत्ती वाली गाड़ी ही क्यूँ ना हो....!" पोलीस वाले ने सिर झुका कर अदब से जवाब दिया... हताशा और निराशा सबके चेहरों से साफ झलक रही थी.....

"क्या उस'से पहले कोई पोलीस ज़ीप शहर से बाहर गयी है?" मानव ने पूचछा.....

"आज तो पोलीस की हर गाड़ी रोड पर है सर.... पर फिर भी हमने एहतियात के तौर पर पास वाले थानो में भी एलेर्ट कर दिया था.....

मानव ने जेब से मोबाइल निकाल कर समय देखा.. सुबह के 6:00 बजने वाले थे...,"मैं जुलना जा रहा हूँ..... तुम चौकस रहना... वो दिन निकलने पर किसी दूसरी गाड़ी से शहर के बाहर निकलने की कोशिश कर सकते हैं....." मानव ने कुच्छ और ज़रूरी हिदायतें दी और वापस गाड़ी में बैठ गया.....

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"ययए सब आख़िर चाहते क्या हैं...? तुम भी इन्न लोगों से मिले हुए हो लगता है!" जैसे ही हॅरी अकेला शिल्पा के पास आया, वो बरस पड़ी..... उसको बाहर दोनो लड़कियों के खिलखिलाने की आवाज़ें आ रही थी....

"हा हा हा हा.....बड़ी जल्दी समझ गयी तुम...! वैसे तुम्हे पोलीस में भरती किसने कर लिया....?" हॅरी अट्टहास सा करता हुआ आपाधापी में खड़ी शिल्पा के सामने बिस्तर पर पसर गया,"साले पोलीस वालों ने आज बहुत भगाया.... मुझे इतना काम करने की आदत नही है.....!"

"क्क्या मतलब...?" शिल्पा आस्चर्य से हॅरी का चेहरा घूरते हुए बोली....

"छ्चोड़ो.... आओ... थोड़ी मालिश कर दो.. मेरा बदन दुख रहा है....!" हॅरी बत्तीसी निकाल कर बोला और अपनी कमर में अटकाई हुई सी माउज़र निकाल कर टेबल पर रख दी......

ख़तरा भाँप चुकी शिल्पा भला यह मौका कैसे गँवाती... उसने फुर्ती दिखती हुए माउज़र लपक कर हॅरी की और तान दी...,"तो तुम इन्न लोगों के साथ मिले हुए हो... मैं तुम्हे छ्चोड़ूँगी नही....

"मुझे भी पोलीस वालों जितना चूतिया समझती है क्या सस्साली? इसमें गोली तेरा बाप डालेगा... मैं सब कुच्छ सब्र से करता हूँ... पर उन्न लोगों को सोन्प दिया तो तुझे कच्चा चबा जाएँगे.... समझ गयी....? अब इसको टेबल पर रख कर मेरे पास आ जा... वरना मैं उनको अंदर बुला लूँगा.....!" हॅरी ने लेते हुए ही कहा और फिर अपनी आँखें बंद कर ली.......

"मुंम्म्मय्यययी......." शिल्पा ने चुपचाप माउज़र को टेबल पर वापस रखा और रोने लगी....

"तू तो सच में चूतिया है...." हॅरी ने आँखें खोल कर टेबल से माउज़र उठाई और उसकी मॅग्ज़ाइन निकाल ली...," आज तो मैं गया था काम से.... साला भूल ही गया था कि तू पोलीस वाली है और तुझे गन चलानी आती है.... हा हा हा हा... ये ले... अब खेल ले इसके साथ... मेरा काम तो तू करेगी नही... लगता है मुझे उन्न दोनो को गिफ्ट में देना पड़ेगा तुझे.....!"

"प्ल्ज़... प्ल्ज़... मुझे छ्चोड़ दो... !" शिल्पा तुरंत हॅरी के पैरों में गिरकर गिड़गिदने लगी...,"मुझे जाने दो यहाँ से... मैं किसी को कुच्छ नही बोलूँगी.....!"

हॅरी बिस्तर पर सिरहाने को ऊँचा करके अढ़लेता सा हो गया और उसने कसमसाती हुई शिल्पा को अपनी बाहों में खींच लिया.....,"मैं लड़कियों को नही मारता... 'प्यार' करता हूँ... यही मेरा पेशा है....!"

आतंक के मारे बौखलाई हुई शिल्पा अपने आपको हॅरी के पहलू में सिमट'ते हुए पाकर विरोध तक नही कर सकी.... उसके आँसुओं से नमकीन हुए जा रहे उसके होन्ट जैसे ही हॅरी ने 'अपने' कब्ज़े में लिए; वह सिसक उठी... भय के मारे.....!

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"इसको पहचानते हो क्या? हॅरी को!" मानव जुलना कस्बे में जाकर दुकान दारों को अपने साथ लाई फोटो दिखा दिखा कर थक चुका था... उसकी उम्मीद ढीली पड़ने ही लगी थी कि एक जगह पान की दुकान पर बात बन गयी.....

"हां साहब... पर आप क्यूँ पूच्छ रहे हो?... ये तो निहायत ही शरीफ लड़का था....!"

"शरीफ माइ फुट, सस्सलाअ...!" मानव के मुँह से निकला... फिर अचानक ही उसने थयोरियाँ चढ़ा कर पूचछा..,"था मतलब?"

"मतलब अब वो यहाँ नही रहता साहब.... तीन चार साल हो गये.... घर वालों से अनबन के चलते वो घर छ्चोड़ कर चला गया था.....!"

"हूंम्म..... कौन कौन है इसके घर में... अब?" मानव ने उत्सुक होकर पूचछा...,"वो तो यहीं रहते होंगे ना...?"

"हां.... ये थोडा सा आगे चलकर पहली गली में तीसरा... नही नही... एक मिनिट... चौथा मकान है.... मम्मी पापा और छ्होटा बेटा ही रहते हैं यहाँ बस....!" दुकानदार ने अंदाज़ा लगाकर बताया....

"घरवालों से अनबन की कोई खास वजह....?" मानव ने एक और सवाल किया....

"इतना तो मालूम नही साहब.... पर लड़का बहुत शरीफ था.... राम क़ास्स्साम!"

"हूंम्म... थॅंक्स!" मानव ने कहा और दोनो पोलीस वालों को साथ लेकर आगे बढ़ गया.......

"ये आप क्या कह रहे हैं इनस्पेक्टर साहब... हॅरी तो कभी ऐसा सोच भी नही सकता...!" आलीशान बंगले में पोलीस वालों के सामने बैठे हॅरी के पिता जी मानव की बात सुनते ही उच्छल पड़े......

"देखिए में यहाँ झक मारने नही आया हूँ.... अगर आप मुझे उसके पते ठिकाने नही बताते तो मजबूरन मुझे आपको साथ लेकर जाना पड़ेगा..... फ़ायडा इसी में है कि आप उसके बारे में जितना जानते हैं, यहीं बता दें...." मानव व्याकुल हो उठा था....

"मैं मज़ाक नही कर रहा इनस्पेक्टर साहब... उस जैसा लड़का आपको शायद ही कोई और मिलेगा.... उसने तो आज तक चींटी भी नही मारी... आप खून करने की बात कर रहे हैं.....!" पिता जी ने दोहराया.....

"देखिए मैं उसका रिश्ता लेकर यहाँ नही आया हूँ जो आप उसकी तारीफों के पुल बाँधे जा रहे हैं... उसका ठिकाना बता दीजिए!" मानव ने अपने तेवर बदल कर कहा...

"सॉरी इनस्पेक्टर... मुझे पता होता तो मैं तीन साल से यहाँ बैठा उसकी राह नही देख रहा होता... उसको गले से लगाकर वापस ले आता...!" पिताजी की आँखों में आँसू उमड़ पड़े....

"तो फिर आपको मेरे साथ चलना पड़ेगा...!" मानव की तमाम कोशिशों के बाद भी हॅरी के घर वालों ने जब संतोषजनक जवाब नही दिया तो मानव कुर्सी से खड़ा हो गया....

"मुझे तो हमेशा से पता था वो ऐसा है.... आप ही सिर पे चढ़ा के रखते थे उसको.... देख लिया नतीजा... कटवा ली ना अपनी नाक... घर तक पोलीस आ गयी... अब भुग्तो... लगा लो उसको वापस लाकर कलेजे से.... अरे 'वो' बस दिखने का ही शरीफ था... पर मेरी तो आपने कभी सुनी ही नही.... पहले ही जायदाद से बेदखल कर देते तो आज ये दिन ना देखना पड़ता....." काफ़ी देर से मुँह बनाए उनकी बातें सुन रही औरत से रहा ना गया.... शायद वो हॅरी की माताजी थी.....

मानव ने तिर्छि नज़रों से देखते हुए हॅरी की माताजी की बातों का अर्थ निकालने की कोशिश की.... पर कुच्छ समझ में नही आया... अमूमन ऐसी बातें पिता के मुँह से सुन'ने को मिल जाती हैं.. पर.....

"नमस्ते अंकल!" बाहर से भागते हुए अंदर आए बच्चे पर भी मानव ने पैनी निगाह डाली.... करीब 8-9 साल का वो बच्चा आते ही अपनी मम्मी की गोद में बैठ गया......

"क्या ये आपकी दूसरी शादी है....?" मानव ने तर्कपूर्ण ढंग से सोचने के बाद पिताजी से सवाल किया.....

"चलिए.... मेरे साथ उपर चलिए.... सब बताता हूँ आपको...!" हॅरी के पिताजी ने कहा और खड़े होकर सीढ़ियों की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया......

"हां हां... बता दो सब कुच्छ... सारा दोष मुझ पर ही मढ़ देना... तुम्हारा बड़ा 'नाम' हो जाएगा इस'से... हॅरी तो हीरा है हीरा.... हाथ कंगन को आरसी क्या....! सब कुच्छ तुम्हारे सामने आ गया ना....! भुगतो अब...." माता जी अपने पति का इनस्पेक्टर को अकेले में उपर ले जाना बर्दाश्त ना कर सकी.... और कुच्छ ना कुच्छ बड़बड़ाती ही रही......

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"हॅरी हमारा बेटा नही है इनस्पेक्टर साहब!" उपर जाते ही पिताजी ने बात साफ करके मानव को चौंकने पर मजबूर कर दिया....

"'हमारा बेटा नही है' मतलब?... आपका बेटा नही है या फिर.....?"

"वो हम दोनो का ही बेटा नही है... हमने उसको गोद लिया था....!" पिताजी ने सपस्ट किया.....,"दरअसल शादी के केयी साल तक जब हम दोनो को कोई बच्चा नही हुआ तो हम दोनो ने हताश होकर बच्चा गोद लेने का फ़ैसला किया था.... पर हॅरी के घर में आने के 15 साल बाद भगवान ने मेरी बीवी की सुन ली.... मैं तब बच्चा नही चाहता था... पर.... मुझे पता था उसके बाद यही होगा.... मयूर के पैदा होने के बाद से ही सावित्री को 'हॅरी' खटकने लगा था.... पर मेरा विश्वास कीजिए इनस्पेक्टर साहब... 'वो' तो सच में हीरा था हीरा.....!" पिताजी ने अपनी नाम हो चुकी आँखों को च्छुपाने के लिए अपना मुँह फेर लिया......

"ओह्ह्ह... पर वो घर छ्चोड़ कर क्यूँ गया? क्या आपकी बीवी....?"

"हां..." पिताजी की गर्दन हां में हिली और झुकी हुई ही रह गयी...,"कोई कितना बर्दाश्त करेगा....!"

"उसको इस घर से कोई लगाव था भी या नही...?"

"था इनस्पेक्टर साहब.... वो तो मयूर को भी अपनी जान से ज़्यादा चाहता था... दरअसल नफ़रत का तो उसको पता ही नही था कि क्या होती है.... एक दिन उसकी मम्मी ने उस पर 'गोद लिया हुआ' कहकर ताने मारने शुरू कर दिए और मयूर का हक़ खाने वाला कहने लगी... उसके बाद केवल 2 दिन और ही 'वो' यहाँ रुका था बस... कुच्छ नही पता मुझे... कम से कम मुझे बता कर तो चला जाता.....!" अब तक पिताजी की आँखें बरसने लगी थी....

"ओह्ह.. आइ'म सॉरी... शायद 'इसी' नफ़रत ने उसको 'ऐसा' रास्ता इख्तियार करने पर मजबूर कर दिया..... मैं अपना नंबर. छ्चोड़ कर जा रहा हूँ... अगर आपको...."

"वो ऐसा नही कर सकता इनस्पेक्टर... मैं अब भी दावे के साथ कह सकता हूँ... आपको ज़रूर कोई ग़लतफहमी हुई है... वह मर जाएगा पर ऐसा काम नही करेगा....!"

"देखते हैं.... फिलहाल तो उसको ढूँढना है.....!" मानव ने कहकर उनके कंधे पर हाथ रखा और दोनो नीचे उतरने लगे......

..........................................

"शिवा...!" हॅरी करीब एक घंटे बाद कमरे में शिल्पा को रोती छ्चोड़ कर बाहर आया....

"जी बॉस...!" हॅरी को देखते ही शिवा तुरंत खड़ा हो गया.....

"उन्न दोनो का क्या किया?"

"बाँध के डाल दिया पिछे वाले कमरे में..... रात को ही टपकाना है ना?"

"अंदर जाकर पोलीस वाली की सी.डी. बना लो.... उसके बाद इसको दिखा भी देना...!" हॅरी ने उसको आदेश दिया.....

"पर बॉस..." शिवा पास आकर बोला.....," पोलीस वाली को धंधे में लाना ठीक नही है... लड़कियाँ तो और भी मिल जाएँगी...... ये 'साली' कभी भी फंस्वा सकती है.....!"

"भेजा नही है तो ज़्यादा टेन्षन मत लिया कर..... आज तक तुम लोग इसीलिए प्रेम की जगह नही ले पाए थे..... चल छ्चोड़... अंदर जाकर इसकी सी.डी. बना लो..... नरेश को चढ़ा देना पहले... इस साले को केमरा पकड़ना नही आता.... और हां ज़रा संभाल कर... कुँवारी थी अभी तक...." हॅरी ने मुस्कुरकर कहा तो नरेश की बाँच्चें खिल गयी....,"थॅंक यू बॉस!"

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Reply
10-22-2018, 11:39 AM,
#68
RE: Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
"ये ज़ीप यहीं मिली तुम्हे....?" मानव हाइवे पर ज़ीप बरामद होने की सूचना मिलने के कारण सीधा वहीं पहुँच गया था......

"जी जनाब...! किसी को अभी हमने अंदर भी बैठने नही दिया है.....!" हवलदार ने आकर सल्यूट बजाया....

"हूंम्म.... इसका मतलब वो यहाँ से पैदल....!" मानव टहलता हुआ सड़क किनारे पहुँचा और सड़क से नीचे टाइरन की छाप देख कर अपना सिर खुज़ाया...,"गाड़ी में गया है स्साला... कोई और अब भी उसकी मदद के लिए है....!"

"जी जनाब!" हवलदार ने टाल ठोनकी....

"ज़ीप में चेक करो कुच्छ मिल जाए तो.... एक मिनिट... स्टियरिंग मत छ्छूना.... मुझे कुच्छ और भी मामला लग रहा है...." कहते हुए मानव गाड़ी के टायरों के निशान के पास बैठ गया.... और बारीकी से निरीक्षण करते ही उसकी आँखें चमक उठी....,"तुम शहर जाने वाली गाड़ियों को भी चेक कर रहे थे क्या?"

"जी जनाब... आपका फोन आने के बाद तो हमने 'मुरारी' की गाड़ी को भी नही छ्चोड़ा... आने जाने वाले सारे वेहिकल अच्छि तरह चेक किए थे.....

"गुड.... यहाँ से वो गाड़ी घूमाकर वापस ले गये हैं... अगर वो शहर में नही घुसे तो कहीं आसपास ही हैं.... छ्होटे रास्तों पर तो वैसे भी सबने खास तौर पर चेकिंग की होगी... वो 100 % साथ वाले सेक्टर में ही मिलेंगे....!" मानव उतावला सा होकर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ा और हेडक्वॉर्टर फोन किया....,"सर, मुझे करीब 50 पोलीस वालों की ज़रूरत है....!"

"काम'ऑन मानव... शहर में कोई आतंकवादी नही घुसे हैं... क्या करोगे इतनी फोर्स का.....?" एस.पी. साहब ने बिगड़े हुए लहजे में सवाल किया..... वो भी पोलीस वालों की हत्या और एक महिला पोलीस कर्मी की किडनॅपिंग से सकते में थे.....!

"सर मुझे घर घर की तलाशी लेनी पड़ेगी... वो लोग शर्तियाँ शहर में ही हैं...!" मानव ने ज़ोर देकर कहा....

"पागल हो गये हो क्या? घर घर की तलाशी......!"

"सॉरी सर... ई मीन सेक्टर 37 में घर घर की तलाशी.... ज़्यादा घर नही हैं यहाँ.... कुल मिलकर 4-5 घंटे का ही काम होगा.... मुझे हर व्यक्ति सिविल ड्रेस में चाहिए.....!"

"कितनी किरकिरी कारवाओगे यार... मीडीया हँसेगा हम पर.... नो! आइ वल्न'ट अल्लोव यू" एस.पी. साहब ने तल्खी से कहा.....

"प्लीज़ सर... आइ नीड युवर को-ऑपरेशन.... मैं शाम तक उन्हे गिरफ्तार कर ही लूँगा....!"

"ओ.के... मुझे उपर बात करने दो.... आइ'ल्ल कॉल यू बॅक!" एस.पी. साहब ने कहा और फोन काट दिया.....

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"काम हो गया बॉस!" शिवा अपनी चैन बंद करते हुए बाहर निकला... उस'के हाथों में वीडियो केमरा भी था.... पर बॉस... वो तो स्यूयिसाइड करने की बात कर रही है... हमने बहुत समझाया कि उसको बहुत पैसे मिलेंगे पर.....!"

"तुमसे जितना कहा जाए उतना ही किया करो.... वीडियो दिखाई उसको....?"

"जी बॉस... तभी तो...." शिवा ने सिर झुका लिया.....

"जाओ अब तोड़ा आराम कर लो.... मुझे बात करने दो उस'से.....!" हॅरी मुस्कुराया और कमरे के अंदर चला गया....

"सॉरी जान... पर क्या करता... आख़िर जान का सवाल है....!" हॅरी उसके पास जाकर बैठ गया......

"हाथ मत लगाओ मुझे... वैसे भी मुझे मारना है... तुम अभी क्यूँ नही मार देते.....!" शिल्पा बिलख उठी.....

"मुझे मारने से गुस्सा शांत हो जाएगा क्या?" हॅरी ने बत्तीसी निकाली पर रोती हुई शिल्पा रोती ही रही.....

"क्यूँ मरना चाहती हो...? सेक्स तो हर इंसान की ज़रूरत है... मैने किया था तो तुम थोड़ा थोड़ा एंजाय कर रही थी... मैने महसूस किया.... इन्न लोगों ने भी किया.. इसीलिए नाराज़ हो क्या?" हॅरी ने कहते हुए एक बार फिर शिल्पा को छ्छूने की कोशिश की तो शिल्पा बिफर पड़ी...,"अभी कसर रह गयी है तो और बुला लो... फिर सी.डी. बेचकर मुनाफ़ा कमाना और मुझे ब्लॅकमेल करना....!"

"ओह नो...! ये सब किसने कहा? साले हरामी... मुश्किल में गधे को भी बाप बनाना पड़ता है.......!" हॅरी ने गुस्से में कहा और फिर शांत होकर बोला...,"अगर में कहूँ कि ऐसा नही होगा तो...? उल्टा मैं तुम्हे एक अनोखा तोहफा देने वाला हूँ... हे हे हे...!"

उसके बाद करीब 5 मिनिट तक कमरे में सिर्फ़ शिल्पा के रोने की आवाज़ें आती रही... धीरे धीरे जब वह शांत हुई तो उसी ने चुप्पी तोड़ी..," कम से कम इस घटिया काम की वीडियो तो ना बनाते.... 2 महीने बाद मेरी शादी है... और तुम......!"

"देखो.. तुम जब चुप हो जाओगी तभी मैं कुच्छ बोलूँगा... ठंडे दिमाग़ से फ़ैसला करना.... मैं तुम्हारी प्रमोशन करवाने की सोच रहा हूँ... हे हे हे....!" हॅरी अपना पासा फैंक कर चुप हो गया... उसे शिल्पा से कुच्छ जवाब मिलने की उम्मीद थी... पर उस वक़्त शिल्पा कुच्छ और सोचने की हालत में थी ही नही......

"मुझे मार कर तो तुम्हरा गुस्सा शांत हो जाएगा ना....? प्रमोशन तो मिलेगी ही... शायद वीरता पदक भी मिल जाए... सोच लो....!" हॅरी ने कहा और अपनी माउज़र एक बार फिर उसकी ओर सरका दी....

शिल्पा ने एक बार हॅरी को घूर कर देखा और फिर अपनी नज़रें झुका ली... अरमान तो शायद उसके यही थे... पर उसको यकीन था कि माउज़र में अब की बार तो शर्तिया गोलियाँ नही मिलेंगी.....

"फ़ैसला तुम्हारा है... एक तरफ सी.डी. बन'ने के कारण तुम स्यूयिसाइड करने की बात बोल रही हो... दूसरी तरफ मैं तुम्हे प्रमोशन का चान्स और तुम्हारी सी.डी. वापस लौटने का ऑफर दे रहा हूँ... सोच लो... क्या नुकसान है...?"

"तुम..." शिल्पा की आँखों की पुतलियान आसचर्यजनक ढंग से फैल गयी..,"तुम ऐसा क्यूँ करोगे....?"

"तुम सिर्फ़ आम खाओ....! आज रात यही माउज़र तुम्हारे हाथ में होगी....वो भी फुल्ली लोडेड.... हम पाँचों का एनकाउंटर कर दो... सिर्फ़ शिवा और नरेश को ये नही बोलना है कि तुम बाद में उन्हे भी मार दोगि... मैं उनको विश्वास दिला दूँगा कि तुम उनको नही मारोगी... उसके बाद तुम्हे सिर्फ़ पोलीस के पास फोन करना है कि तुमने बड़ी बहादुरी से हम सबको मार गिराया.... सो सिंपल... मुझे मारने के बाद सी.डी. मेरी जेब से निकाल कर जला देना.....!" हॅरी ने पैतरा फैंका.....

"पर... पर तुम खुद को क्यूँ मरवाओगे....?" शिल्पा अपने साथ हुए हादसे को भूल कर हॅरी की कहानी में खोई हुई थी......

"बस... यही समझ लो कि दुनिया से मन भर गया है.... जैल नही जाना चाहता... आज नही तो कल पकड़ा ही जाउन्गा....!"

"पर तुम खुद भी तो अपने आपको और बाकी लोगों को मार सकते हो... मुझसे क्यूँ बोल रहे हो...?" शिल्पा असमन्झस में थी.....

"तुम्हारे लिए... सिर्फ़ तुम्हारे लिए... कल रात उन्न दोनो को लाने के लिए मुझे तुम्हाए साथ लाना पड़ा... और फिर आज जो कुच्छ हुआ.. उसकी कीमत अदा करके जाना चाहता हूँ.... बोलो!"

"नही... तुम मज़ाक कर रहे हो... है ना?"

"अगर तुम्हे लगता है तो.... कहो तो तुम्हारे सामने बाकी लोगों को मार कर दिखाउ? पर इस'से तुम्हारी बहादुरी कम हो जाएगी... हे हे हे...!" हॅरी हंसता रहा.. उसको समझ आ चुका था कि शिल्पा तैयार हो गयी है.....

"नही... पर तुम पागल हो क्या?" शिल्पा ने आस्चर्य से पूचछा......

"हाआँ....! हा हा हा हा हा..." हॅरी ने ज़ोर का ठहाका लगाया....,"और मेरे पास मेडिकल सर्टिफिकेट भी है... इसका... कहो तो दिखाउ?"

"नही रहने दो..." शिल्पा ने कहा और फिर हिचकिचा कर बोली...,"तो...कब?"

"आज रात को.... मैं और बाकी दोनो लड़कियाँ बँधे हुए होंगे और ये दोनो लड़के तुम्हारी मदद करेंगे.... हमें मारने के बाद जब ये दोनो हम तीनो को खोले तो तुम इनको भी.... समझ गयी ना?"

शिल्पा ने एक गहरी साँस ली.... उसको हॅरी की बातों पर विश्वास नही हो रहा था.. होता भी कैसे...?

"तैयार हो तो बोलो वरना मुझे कुच्छ और....." हॅरी बात कह ही रहा था कि शिवा और नरेश हड़बड़ाहट में भागे हुए सीधे आकर कमरे में घुस गये...,"बॉस.. मारे गये... बाहर 2 आदमी खड़े हैं... कद काठी से पोलीस वाले लग रहे हैं..... लगता है हम फँस गये......!"

"ओह.. शिट... 2 ही हैं या...?" हॅरी ने उत्तेजित होकर पूचछा....

"गेट पर तो 2 ही हैं बॉस... क्या पता बाहर....!"

"सावधानी से उनको अंदर बुला लो... वापस मत...."

"बचाआओ..... बचाअ...." शिल्पा पोलीस आने की बात सुनकर खुद को काबू में नही रख पाई.....

"स्स्साआआअलि.... कुतिया... मैं तुझे प्रमोशन दिलाने जा रहा था और तू...." हॅरी ने अपना जबड़ा भींच कर शिल्पा का मुँह दबाया और गोली सीधी उसके बायें सीने में उतार दी....

"बॉस... गोली की आवाज़ तो... अया..." शिवा को गोली मारने की वजह जब तक नरेश समझ पाता..वह भी एक भयानक चीख के साथ अपना दम तोड़ चुका था.... हॅरी पिछे वाली खिड़की से सीधा नीचे कूदा और अंदर सीमा और डॉली की ओर भागा....

जब तक पोलीस वाले हरकत में आकर दीवार कूदकर अंदर पंहूचते... कोठी में तीन गोलियाँ और चल चुकी थी.....

"हेलो..हेलो.. सर! यहाँ 375 में गोलियाँ चली हैं अंदर.. हमें लगता है वो यहीं छुपे हुए हैं... आप..!" बाहर खड़े पोलीस वाले ने तुरंत एस.आइ. के पास फोन घुमा दिया था...

"तो फोन कहे कर रहे हो यार.. अंदर जाकर पाकड़ो उनको.. हम अभी वहाँ पहुँच रहे हैं...!" उधर से फटी हुई आवाज़ आई...

"पर सर.. डंडे से हम गन का मुकाबला कैसे... कम से कम हथियार देकर तो...!" पोलीस वाला कह ही रहा था जब आख़िरी गोली चली थी...

"ओ.के. ओ.के. होल्ड ऑन दा स्पॉट.. मैं इनस्पेक्टर साहिब को सूचित करके अभी बाकी लोगों को वहीं भेज रहा हूँ... देखना कहीं पिछे से ना भाग जायें...!" एस.आइ. ने कहा..

"नही सर.. भागने का तो....," सिपाही के बोलते बोलते फोन काट गया...," काट दिया साले ने... कह रहा है अंदर जाकर पकड़ लो.. जैसे... इनकी मा की चूत.. साले खुद तो रेवोल्वेर टांगे चालान काट'ते रहते हैं... हम को बोल रहे हैं कि डंडा दिखा कर किल्लर को पकड़ लो.. हिस्स्स...!" सिपाही बड़बड़ाया...

"अब तो कोई आवाज़ नही आ रही यार... लगता है सारी गोलियाँ ख़तम हो गयी इनकी... अंदर चलकर देखें क्या...?" दूसरे सिपाही ने गेट से अंदर झाँकते हुए कहा....

"तू पागल है क्या..? क्या पता हमारे लिए बचा कर रखी हों एक आध... तुझे जाना है तो जा.. मुझे बहादुरी दिखाने का शौक नही है फोकट में... बात करता है..."दूसरा अधेड़ उमर का पोलीस वाला बड़बड़ाया..,"तू यहीं खड़ा रह.. मैं पीछे जाकर देखता हूँ..."

**********************

इनस्पेक्टर मानव करीब 5 मिनिट में ही बताई गयी जगह पर पहुँच गया था... कुच्छ और पोलीस वाले भी तब घर में घुसे ही थे.....

"तुम उपर जाकर देखो...!" मानव ने एक साथी से कहा बंद कमरे के बाहर खड़े होकर ऊँची आवाज़ में कहा..,"तुम आज नही बच सकते! बहुत खून बहा लिया तुमने... चुपचाप बाहर आ जाओ...!"

प्रत्युत्तर में आवाज़ उपर से आई,"सिर्र्ररर... शिल्पा!"

"एक मिनिट यहीं रहना..." मानव ने कहा और उपर की और भगा... उपर कमरे में जाते ही वहाँ पड़ी तीन लाशों को देख मानव का कलेजा छल्नी हो गया,"ओह्ह माइ गॉड! बहुत कमीना है स्साला...!" मानव के मुँह से निकला और उसने हड़बड़ाहट में शिल्पा की नब्ज़ चेक की.. कुच्छ भी नही बचा था....

"ववो नीचे ही है...!" मानव गुस्से में दनदनाता हुआ वापस नीचे उतरा..,"तोड़ दो दरवाजा... इस साले को तो मैं....!"

मानव का आदेश मिलते ही एक हत्ते कत्ते पोलीस वाले ने खींच कर दरवाजे पर लात मारनी शुरू कर दी... तीन चार प्रयासों के बाद उनको दरवाजा तोड़ने में सफलता मिल गयी...,"ध्यान से...!" मानव ने निर्देश देकर अंदर पहला कदम रखते ही उसकी साँसे ठंडी पड़ गयी.. सीमा और डॉली की खून से लथपथ लाशें एक दूसरी से बँधी हुई पड़ी थी....

"अभी भी मौका है... हाथ उठाकर बाहर निकल आओ वरना....!" मानव ने कहा और धीरे धीरे दाईं तरफ वाले दरवाजे को खोला... पर वहाँ भी उसको निराशा ही हाथ लगी....

"सर यहाँ...एक और लाश...!" मानव वापस पलटा ही था कि सामने वाले दूसरे कमरे से आवाज़ आई... मानव फुर्ती दिखाते हुए कमरे तक पहुँचा और अंदर पड़ी लाश देखते ही उसके मुँह से निकला,"हररयययी?"

"साँस चल रही है सर...!सिर्फ़ बेहोश है..." पोलीस वाले ने उसकी नाड़ी छूते ही उच्छल कर कहा..,"इसके पेट में गोली लगी है...!"

"जल्दी इसको हॉस्पिटल पहुँचाओ... चार आदमी जाना साथ और हर पल इस पर नज़र रखना... बहुत शातिर है साला...! बाकी लोगों को भी चेक करो... हरी उप!" मानव उत्तेजित होकर चिल्लाया और कमरे में पिछे की और खुलने वाले दरवाजे से निकल कर सावधानी से बाहर आया.... गीली ज़मीन में पीछे वाली दीवार की तरफ जाते हुए जूतों की छाप और टपका हुआ खून सॉफ दिखाई दे रहा था.... सरसरी नज़र डालने पर ही उसको दीवार के पास एक जोड़ी जूते भी पड़े दिखाई दे गये... फौरी तौर पर ऐसा लग रहा था कि कोई जूते वहाँ निकाल कर दीवार के पार कूदा है...

"इसको किसने गोली मारी...!" मानव उधेड़बुन में वापस अंदर आया और पोलीस वालों से पूछा...,"इश्स मकान की तलाशी लेने कौन आया था...?"

"हम... ववो.. रज़बिर और मैं आए थे जनाब...!" एक पोलीस वाले ने बताया....

"जब तुम्हे शक हुआ तो क्या तुमने ये नही देखा कि घर के पिछे भागने की जगह है...!" मानव ने झल्लते हुए जवाब माँगा....

"पता था जनाब... मैं शक होते ही पिछे जाकर खड़ा हो गया था... वहाँ से कोई नही गया बाहर...!" पोलीस वाले ने झूठ बोलकर अपना बचाव किया.... पर मानव को उसके लहजे पर ही विस्वाश नही हुआ..,"कोई तो ज़रूर भागा है यहाँ से...!" मानव बोलते बोलते पिछे आ गया था..

"नही जनाब... भगा होगा तो पहले ही भागा होगा.... हमारे आने के बाद तो....!"

"बकवास बंद करो... जाकर मकान की तलाशी लो...!" मानव गहरी सोच में डूबा हुआ लग रहा था.....

"साहब.. उन्न लड़कियों की लाश के पास रेवोल्वेर पड़ी है...." एक पोलीस वाला भागते हुए मानव के पास आया....

***************

"बेटा... वो.. अंजलि को भेज देते तो हम घर चले जाते...!" फोन मानव के घर से आया था... आवाज़ मीनू के पापा की थी....

"ओह.. सॉरी पिताजी! मुझे तो ध्यान ही नही रहा था... आप थोड़ी देर और रुक सकते हैं क्या...?" मानव ने नरम लहज़ा करके बात की....

"वो तो ठीक है पर..." मीनू के पापा बोलते बोलते रुक गये..,"कितनी देर और?"

"मैं बस कुच्छ ही देर में फोन करता हूँ आपको...!" मानव ने बात करके फोन काटा और एक पोलीस वाले को अपने पास बुलाया...," तुम जाकर महिला थाने से अंजलि को लेकर हॉस्पिटल में आ जाओ... मैं वहीं पहुँच रहा हूँ...!"

"जी जनाब... मैं जा रहा हूँ...!" पोलीस वाले ने जवाब दिया....

***********************************************

"सर... होश आ गया उसको... डॉक्टर ने कहा है आप बात कर सकते हैं...!" एक पोलीस वाले ने हॉस्पिटल के बाहर अंजलि के पास खड़े मानव को सूचना दी तो मानव के कदम तेज़ी से अंदर की ओर बढ़ चले.....

"जी तो चाहता है तुम्हारा यहीं एनकाउंटर कर दूं सस्सले...!" मानव ने अजीब सी नज़रों से उसको देख रहे हॅरी की ओर घूरकर शब्दों को चबाते हुए कहा...

"प्पर.. पर क्यूँ सर...?" हॅरी ने थोड़ा हिलने की कोशिश की और दर्द के मारे कराह कर अपना पेट पकड़ लिया...," मैने क्या किया है...? मैं तो आपका शुक्रगुज़ार हूँ कि आपने मुझे..... वो.. पिंकी ठीक है क्या?"

"बकवास बंद कर... बहुत हो गया नाटक.. स्साले... मेरी मजबूरी नही होती तो एक गोली वहीं तेरे भेजे के पार कर देता..." मानव ने आँखें निकाल कर सख़्त लहजे में कहा..,"तुझे गोली किसने मारी?"

"मुझे कुच्छ भी नही पता सर... मुझे तो 'वो' लोग एक दिन पहले ही उठाकर यहाँ लाए थे..."

"कहा ना बकवास...!" मानव बोलते बोलते अचानक बाकी बचे शब्दों को खा गया..,"अच्च्छा चल बोल... बता..पहले तू ही बोल ले...!"

"सर मुझे सच में नही पता मुझे गोली किसने मारी... मैं तो उनमें से किसी को जानता भी नही हूँ....!"

"अच्च्छा! बहुत खूब...!" मानव ने अपनी पैनी निगाह से उसके चेहरे पर उभरी शिकन का मतलब समझने की कोशिश की," क्यूँ मारी गोली...?"

"मुझे सच में कुच्छ नही पता सर... मैं...." हॅरी ने सिर झुका लिया..,"मैं और पिंकी.... पिंकी कुच्छ देर के लिए गुरुकुल से बाहर मेरे पास आई थी की उन्होने हमें उठा लिया... उसके बाद वो हमें कहीं ले गये और वहाँ से मुझे यहाँ लाकर क़ैद कर लिया था जहाँ से आप अभी... आपने मुझे बचा लिया वरना...."

"आए.. बोला ना बकवास मत कर.. जनाब तेरा यहीं रेमांड ले लेंगे अभी...... फालतू नाटक्बाज़ी करता है...!" साथ खड़े पोलीस वाले ने पॉइंट बनाने की कोशिश की....

"नही नही.. बोलने दे इसको... जी भर कर बोल ले बेटा.... चल बोलता रह!" मानव ने कहा....

"मुझे और कुच्छ भी नही पता सर... मैं और पिंकी एक दूसरे से... आप उसी से पूच्छ लो....!"

"पिंकी अब इस दुनिया में नही है...!" मानव ने पैतरा फैंका...

"किययाया...?" हॅरी के चेहरे पर अविश्वास के भाव उभर आए... ये कैसे हो सकता है सर... नही... ये नही हो सकता.....!"

"मतलब तू ये कहना चाहता है कि जिसने पिच्छले 24 घंटे में पोलीस की नाक में दम करते हुए दर्ज़न भर लोगों को मौत की नींद सुला दिया 'वो' तेरा कोई हमशकाल था... यही ना?"

"क्या कह रहे हैं आप...? मेरी कुच्छ समझ में नही आ रहा....पर पिंकी... वो कैसे..?" हॅरी ने आस्चर्य और शिकन अपने चेहरे पर लाते हुए पूचछा....

"कोई बात नही बेटा.... ठीक हो ले एक बार... सब समझ जाएगा..." मानव ने कहा और तभी उसको कुच्छ ध्यान आया... वह पोलीस वाले को इशारा करके बाहर निकल गया...

******

"तुम हॅरी को कितना जानती हो अंजू...?" मानव ने अंजलि के पास आकर पूचछा...

"ठीक ठाक जानती हूँ.. क्यूँ?" अंजलि ने पलट कर सवाल किया....

"दरअसल.. मुझे लग रहा है कि कुच्छ गड़बड़..."मानव ने थोड़ा रुक कर कुच्छ सोचा और बोला...,"तुम हॅरी से पहली बार कब मिली थी....?"

***************

"मुरारी जी ने आपके लिए ही मेरी ड्यूटी यहाँ लगवाई है....!" मानव के बाहर जाते ही मौका देख कर पोलीस वाला अपनी औकात पर आ गया...

"क्या कह रहे हो..? मेरी कुच्छ समझ में नही आ रहा.. कौन मुरारी जी?" हॅरी ने अपनी पीड़ा पर काबू पाते हुए अंजान सा चेहरा बनाकर पूचछा...

"आप...? तो क्या तुम सच में बॉस नही हो...?"

"एक मिनिट.. दरवाजा बंद करना ज़रा....!" हॅरी के चेहरे पर अजीब से भाव आ गये....

"नही... ऐसे ही धीरे धीरे बोल दो... ये इनस्पेक्टर बड़ा घटिया है... किसी की भी नही सुनता... मुझ पर भी शक कर लेगा...!" पोलीस वाला उसके पास स्टूल लेकर बैठ गया....

"इस नंबर. पर फोन करना... ये तुम्हे सब समझा देगा..." हॅरी ने जल्दी जल्दी में एक नंबर. लिख कर उसको पकड़ा दिया....," आज रात ही इसका एनकाउंटर करवा दे... नही तो ये साला इनस्पेक्टर राम और श्याम की कहानी पर कभी भरोसा नही करेगा...! बाकी सब मैं संभाल लूँगा....!"

"हो जाएगा... पर 'वो' पैसे कहाँ से मिलेंगे...!" पोलीस वाले ने बत्तीसी निकाल ली....

"काम करने से पहले मिल जाएँगे... तू फोन तो कर एक बार...!" हॅरी अब संतुष्ट नज़र आ रहा था....

"पर ये क्या ? आपने खुद को गोली क्यूँ मारी... आप भाग भी तो सकते थे.... !"

"मेरी मति मारी गयी थी क्या जो मैं खुद को गोली मारूँगा... चूतिया लोग साथ रखेंगे तो और क्या होगा...इसकी मा की.. साली सीमा ने मरते मरते ठोक दी.... बेड के ड्रॉयर में से निकाल ली होगी आकर... दीवार पर चढ़ने की कोशिश की थी.. पर..." मानव को अंदर आते देख हॅरी चल रही बात से एक दम पलट गया," मुझे भी वो आजकल में मार ही देते... मेरी किस्मत ही अच्छि थी जो आप लोग आ गये...

"तू जितना स्याना है जनाब उसके डबल हैं... तेरी कहानी यहाँ नही चलने वाली... समझा..!" पोलीस वाला भी गिरगिट की तरह रंग बदल गया था...," पोलीस वालों को मारा है तूने... तू तो गया....!"

"बस कर..." मानव के आते ही पोलीस वाला खड़ा हो गया था....,"बाहर जा थोड़ी देर!"

"जी जनाब!" पोलीस वाले ने अदब से सिर झुकाया और बाहर निकल गया.....

क्रमशः......................

गतान्क से आगे................
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10-22-2018, 11:40 AM,
#69
RE: Desi Sex Kahani बाली उमर की प्यास
बाली उमर की प्यास पार्ट--53

गतान्क से आगे................

"तो तुम कहना चाहते हो कि तुम बेक़ुसूर हो और तुम्हारी शकल का कोई और बंदा पिच्छले 36 घंटे से हमारी नाक में दम कर रहा है...!" मानव ने हॅरी बने उस युवक के साथ जी भर कर माथा पच्ची करने के बाद कहा....

"ज्जई... अगर आप कह रहे हैं कि आपने खुद उसको देखा है तो हो सकता है... पर मुझे इस बारे में सच में कुच्छ नही पता....!" हॅरी लेते लेते जवाब दे रहा था....

"मैं ये सब नही मान सकता... हूबहू शकल... वही आवाज़... ये सब कहानियों में होता है... मुझे उल्लू बनाने की कोशिश ना करो; यही अब तुम्हारे लिए... वैसे तुम रहने वाले कहाँ के हो?" मानव को अचानक कुच्छ ध्यान आया...

"ज्जई... मैं बता दूँगा... पर आप प्लीज़ मेरे घर पर सूचित ना करें... मैने अपना घर छ्चोड़ दिया है...!"

"पूच्छ सकता हूँ क्यूँ...?" मानव ने तिर्छि नज़रों से उसको घूरते हुए पूचछा....

"जी... वो मैं आपको नही बता सकता... " हॅरी ने एक गहरी साँस छ्चोड़ी...,"मैं जुलना से हूँ...!"

"कौन कौन हैं तुम्हारे घर में...?" मानव ने अगला सवाल किया....

"जी.. मम्मी पापा हैं... और एक छ्होटा भाई... मयूर...!"

"मतलब तुम हॅरी ही हो! पर ववो.. कौन है जो ये सब करवा रहा है...? तुम्हारा कोई जुड़वा भाई है क्या?" मानव ने अगला सवाल किया....

"ज्जई.. नही... पर कुच्छ यकीन से कह भी नही सकता...!" हॅरी ने कहा और नज़रें चुरा ली....

"क्या... क्या मतलब?" मानव उसके मुँह से ही सुन'ना चाहता था.....

"जी.. दरअसल मैं उनका गोद लिया हुआ बेटा हूँ... ववो मुझे अनाथालय से लेकर आए थे.... इसीलिए..."

"साला ये चक्कर क्या है..." मानव झुझलाते हुए स्टूल से उठ कर खड़ा हो गया...," अगर तुम बेक़ुसूर हो और हॅरी ही हो तो वो कौन है जिसको कल अंजलि ने देखा था... जो परसों मेरे साथ था... और वो भी बिल्कुल तुम्हारी तरह... कुच्छ फ़र्क तो जुड़वाँ बच्चों में भी होता है...!"

मानव की जब कुच्छ और समझ में नही आया तो उसने घर फोन करके पिंकी को हॉस्पिटल में बुला लिया... और फिर बाहर निकल कर अंजलि को आवाज़ दी..,"इधर आना अंजू...!"

"ज्जई... सर.." अंजलि सहमी हुई सी कमरे में आकर खड़ी हो गयी... हॅरी की ओर उसने देखा तक नही...

"ध्यान से इसको देखो... क्या ये हॅरी ही है?" मानव ने अंजलि से कहा...

अंजलि ने मानव के कहने पर एक सरसरी नज़र हॅरी पर डाली और फिर मानव की ओर देखते हुए अपनी गर्दन 'हां' में हिलाकर झुका ली....

"ऐसे नही.. एक दम ध्यान से देखो... मुझे लगता है कि एक ही शकल के दो आदमी हैं कहानी में.... तुम गौर करके बताओ कि क्या ये वही लड़का है जिसको तुमने गाँव में देखा है...?"

अंजलि ने इस बार देखते हुए हॅरी से नज़रें चार की तो वह मुस्कुरा दिया....,"हां... यही है... कल भी मैने इसी को देखा था थाने में....!" अंजलि ने कन्फर्म किया.....

"हॅरी... पहली बार तुमने इसको कब देखा था....?" मानव ने हॅरी से सवाल किया....

"ज्जई... ये दोनो मेरे ऑफीस में आई थी... तभी मैने इसको और पिंकी को पहली बार देखा था...!" हॅरी बना युवक यहाँ मात खा गया... अंजलि ने कुच्छ याद किया और हॅरी से सीधा सीधा सवाल किया...,"क्या पिंकी को भी तुमने वहीं देखा था पहली बार....?"

हॅरी अंजलि की बात का मतलब समझ गया..,"नही... ऐसे तो मैने कयि बार तुम्हे भी देखा था आते जाते... पर..."

"नही... मैं ये नही कह रही... पिंकी से पहली बार तुम कब मिले थे और क्या बात हुई थी...!" अंजलि तालाब वाली बात याद करके बोली....

"हां... बात तो शायद पहले भी हुई हैं... पर कुच्छ याद नही आ रहा...!" हॅरी हड़बड़ा गया था....

"झूठ!" अंजलि उच्छलते हुए सी बोली...,"वो बात तो तुम भूल ही नही सकते... ये ज़रूर हॅरी नही है...!" अंजलि मानव की और देख कर बोली.....

"ये तुम क्या कह रही हो... मुझे सब कुच्छ याद है... तुम और पिंकी पहली बार मेरे पास ई-पिल लेने आई थी... पिंकी ने माँगी थी और मैं नाराज़ हुआ था... उसके बाद तुम मुझे शहर में मिली... वो सब भी मुझे याद है... बाद में तुम्हारे साथ ही पिंकी पैसे लौटने आई थी.....!" हॅरी हद से ज़्यादा बोलकर सफाई देने लगा....

"तो फिर इसका मतलब यही हुआ कि दूसरा कोई आदमी है ही नही... तुम ही हॅरी हो और तुम ही बॉस हो!" मानव ने निष्कर्ष निकालने की कोशिश की.....

"नही... पहले इस'से पूच्छो की पहली बार ये पिंकी से कहाँ मिला था.... उस बात को तो कोई भूल ही नही सकता.... ये हॅरी नही है अगर इसको नही पता तो....!"

"ऐसी क्या बात है...?" मानव अंजलि के चेहरे पर गौर करता हुआ बोला और फिर अपने आप ही उसको चुप रहने का इशारा किया....,"रहने दो... यही बताएगा.. या फिर....!"

मानव बोल ही रहा था कि बाहर से एक पोलीस वाला पिंकी को साथ लिए कमरे में दाखिल हो गया... पिंकी सहमी हुई भी थी और शरमाई, सकूचाई हुई भी....

"पिंकी... एक बार इसको ध्यान से देख कर बताओ कि क्या यही लड़का हर बार तुमसे मिला है...?" मानव ने पूचछा....

पिंकी ने बिना देखे ही हामी भर दी... हॅरी को कनखियों से उसने देख तो पहले ही लिया था....

"पिंकी! क्या तुम्हे याद है तुम दोनो पहली बार कब मिले थे...?" अंजलि से बिना पूच्छे रहा ना गया....

"हां!" पिंकी ने कहकर सिर झुका लिया..,"तालाब पर!"

"एक मिनिट... अभी तुम कुच्छ मत बोलो...!" मानव ने निर्देश दिया...,"अब कुच्छ याद आया हॅरी जी!"

"ज्जई.." हॅरी हड़बड़ा गया था..,"पर... पर ढंग से याद नही है....!"

"कोई बात नही.. जितना याद है.. वही बता दो!" मानव को कुच्छ ना कुच्छ निष्कर्ष निकालने की उम्मीद बँधने लगी थी....

"बस.. थोड़ा थोड़ा ही याद है.... शायद... नही... कुच्छ याद सा नही आ रहा...!" हॅरी बोलता भी तो क्या बोलता.....

"हो ही नही सकता 'वो' बात याद ना हो..." अंजलि से रहा नही जा रहा था....,"चलो यही बता दो कि जब तुम इसके पास गये तो पिंकी क्या कर रही थी..."

"कहा ना यार कुच्छ याद नही है...!" हॅरी झल्ला उठा....

"मैं बताती हूँ... पिंकी अपनी भैंसॉं को लेने तलब के उस पार गयी थी....!" अंजलि बोल ही रही थी कि हॅरी ने उसको टोक दिया...,"हां हां.. याद आ गया... मैं उधर नहर की तरफ से घूमफिर कर आ रहा था.... तभी ये मुझे मिली थी....!"

"अच्च्छा... अब तो याद आ गया ना... चलो अब बताओ फिर क्या हुआ था... बाकी बात तो तुम भूल ही नही सकते.....!" मानव चुपचाप अंजलि और हॅरी की बातें सुन रहा था... उसको विश्वास था कि अंजलि ठीक चल रही है... इसलिए उसने उसको रोकने की कोई कोशिश नही की.....

"फिर... बस एक आध बात हुई थी और....!"

"ये... हॅरी नही है सर...!" अंजलि ने अपना फ़ैसला सुना दिया...,"उस बात को ये कैसे भूल सकता है जब पिंकी मुसीबत में थी और हॅरी ने इसको बचाया था... दरअसल...!" बोल रही अंजलि को मानव ने बीच में ही टोक दिया...,"एक मिनिट... ये हुई ना बात! अब कुच्छ याद आया हॅरी जी?"

हॅरी के पास अब भी बोलने को कुच्छ नही था... उसको पता था कि इस सवाल का जवाब उसके पास नही है... निढाल सा होकर लेट'ते हुए उसने अपना जबड़ा कस लिया और आँखें बंद कर ली...,"मेरा नाम प्रशांत है!"

पर... लेकिन ये क्या कह...!" पिंकी आसचर्यचकित होकर कुच्छ बोलने को विवश हो ही गयी थी कि मानव ने अपनी आँखों का इशारा करके उसको चुप कर दिया...,"हां.. क्या बोल रहे थे भाई साहब!"

"मेरा नाम हॅरी नही है... मैं तो...!"

"तो फिर हॅरी कहाँ है...?" अब मानव को हॅरी की तलाश थी....

"शिट!" प्रशांत ने हताशा में अपना माथा पीट लिया... उसको मालूम था कि अब उसको सब सच बोलना ही पड़ेगा...," तरुण मेरा बहुत अच्च्छा दोस्त था... एक तरह से इस धंधे में आप उसको मेरा पार्ट्नर कह सकते हैं...."

"मैने पूचछा हॅरी कहाँ है....?" मानव ने गुस्साए हुए लहजे में फिर पूचछा....

"है... जिंदा है... उसकी शकल मुझसे बहुत मिलती थी... उसकी सारी कहानी जान'ने के बाद मुझे उस'से हमदर्दी सी हो गयी थी.... इसीलिए उसको उस वक़्त जान से नही मार पाया.... 'वो' भी मेरी तरह अनाथालय में ही होता अगर उसको किसी ने गोद ना लिया होता... अपनी अपनी किस्मत है!" प्रशांत ने मुँह पिचकाया....

"तो इसका मतलब तुम दोनो भाई हो?" मानव उसके पास आकर बैठ गया.....

"पता नही... शायद भाई ही होंगे.... तभी तो....!"

"तुम पहले हॅरी बताओ कहाँ है..? बाकी बातें बाद में होती रहेंगी....!" मानव उतावला सा होकर बोला.....

"लाइए मैं फोन कर देता हूँ... वो 'लोग' उसको छ्चोड़ देंगे!"

"नही.. तुम अड्रेस बताओ!"

"अगर पोलीस वाले उसको लेने गये तो उसकी लाश ही मिलेगी... मैने उनको समझा रखा था कि उन्हे क्या करना है... फिर भी अगर आप..." प्रशांत को बोलते बोलते मानव ने बीच में ही टोक दिया,"नही... ये लो... फोन करके कह दो...!"

"थॅंक्स!", कहकर प्रशांत ने फोन मिलाया....

"हेलो!"

"हां... कौन है?"

"मैं बोल रहा हूँ...!" प्रशांत ने इतना ही कहा और उधर वाले बंदे को आवाज़ पहचान में आ गयी....,"जी बॉस... पर बॉस...?"

"हॅरी को छ्चोड़ दो.... रात वाला प्रोग्राम कॅन्सल करवा दो....!"

"पर क्यूँ बॉस? ववो.. पैसे तो हमने भिजवा दिए... आपने ही तो बोला था कि...."

"पैसे को मारो गोली यार... उसको छ्चोड़ दो और तुम सब भाग जाओ... सब ख़तम हो चुका है....!"

"पर बॉस....." सामने वाला अब भी दुविधा में था...,"आप कैसे बचेंगे फिर?"

"मैं अब बचना नही चाहता.... छ्चोड़ दो उसको..!" प्रशांत ने कहकर फोन काट दिया.....

"वेरी इंट्रेस्टिंग!" मानव ने उसके हाथ से फोन ले लिया...,"तो तुम हॅरी को मरवा कर उसको 'बॉस!' साबित करना चाहते थे.... हां... अब बताओ पूरी कहानी....!"

प्रशांत ने तकिये से सिर लगाया और कुच्छ दिन पुरानी यादों में चला गया....

तरुण और मैं एक दूसरे को बहुत दीनो से जानते थे.... मनीषा हमारी पहली शिकार थी और उसको मेरे पास तरुण ही लेकर आया था... सब कुच्छ ठीक चल भी रहा था... एक दिन मुझे तरुण ने बताया कि उसके गाँव में एकदम मेरी ही शकल का लड़का रहने के लिए आया है.... यू.पी. में दो चार केस मुझ पर चल रहे थे... पर मैं कभी पकड़ा नही गया था... उन्न मामलों को ख़तम करने के लिए मैने हॅरी को प्रशांत बनाकर मरा हुआ दिखाने का प्लान बनाया और गाँव में आने के कुच्छ दिन बाद ही उसको उठवा लिया था.... पर उसकी बातें सुनकर जाने क्यूँ उस'से हमदर्दी सी हो गयी थी.... खास तौर पर ये जान'ने के बाद कि 'वो' भी शुरुआत के कुच्छ दिन अनाथालय में ही रहा है...

मुझे भी यही लग रहा था कि वो मेरा भाई हो सकता है... पर मैने उसको छ्चोड़ा नही... ऐसी ही किसी एमर्जेन्सी के लिए जिंदा रख लिया था था.... इसके अलावा मुझे गाँव में एक सुरक्षित जगह भी मिल गयी थी.... मैं गाँव में ही रहने लगा....

"पर मैं तुम्हारा फोन कभी ट्रेस नही कर पाया... तुम गाँव में रहते थे... पर तुम्हारी लोकेशन कभी उसके आसपास भी नही लगी...!" मानव ने उसको टोक कर बीच में सवाल किया....

"हां... एक तो मैं अपने नंबर.स फ्रीक्वेंट्ली बदलता था... दूसरे मैं हमेशा अपने सेल पर फॉर्वर्डेड कॉल्स ही रिसीव करता था... शायद इसीलिए...!"

"आगे बोलो....!"

तरुण मीनू को इस बिज़्नेस में लाने की सोच रहा था... उसी दौरान उसने मुझे बताया कि पिंकी ने उसके साथ क्या किया... वो अपने तरीके से बदला लेना चाहता था पर मैने उसको संयम रखने की सलाह दी..... स्कूल की इनकी मूवी देखने के बाद मुझे भी लगने लगा था कि इनको जिस तरह चाहें हम उस तरीके से नचा सकते हैं... और फिर हमारी लिस्ट में ये दो लड़कियाँ और शामिल हो गयी... पर उसी रात तरुण का खून हो गया.... इसके लिए मैं मीनू को ही ज़िम्मेदार मान रहा था क्यूंकी उसी दिन उसने मुझे बताया था कि 'वो' मीनू' से मिलने जा रहा है....

और जब मनीषा ने मुझे बताया कि उसने सोनू को तरुण पर चाकू से हमला करते देखा है तो मैने गुस्से में उसको अपने पास बुलाकर मार डाला... उसके पास तरुण का फोन देख कर मुझे पूरा विश्वास हो गया था कि उसी ने तरुण को मारा है......

बाद में पिंकी मेरे पास आई और मेरे दिमाग़ में एक दूसरा प्लान कौंध गया.... पिंकी ने मुझसे इस लहजे में बात की जैसे ववो मुझे पहले से पसंद करती है.. मैने हॅरी से इस बाबत जानकारी लेनी चाही पर उसने इस बात से ही नकार कर दिया कि ऐसा कुच्छ है.... हां इतना ज़रूर कहा था कि 'ये' उसको अच्छि लगती है और 'वो' इसको कयि बार गुलबो कहकर चिड़ा भी देता है.... मैने अपने तरीके से तरुण की ली हुई कसम का बदला लेने का फ़ैसला कर लिया...... यही मेरा बिज़्नेस भी था..... मैने पिंकी को प्यार के जाल में फँसाया... बाकी तो आप सब को पता ही है.... " प्रशांत ने बात ख़तम करके नज़रें झुका ली....

"मुझे उम्मीद नही थी तुम इतनी जल्दी हार मान कर टूट जाओगे....!" मानव उसको घूरता हुआ बोला....

"मुझे नही पता कि हार क्या होती है और जीत क्या! मैने जिंदगी को हमेशा शतरंज के खेल की तरह जिया है.... मैं सामने वाले की चाल समझे बगैर वार नही करता... पर मेरे मंन में तब से ही एक उधेड़बुन चल रही थी जब से मैने खुद को बचाने के लिए हॅरी का एनकाउंटर करवाने का प्लान बनाया था.... ये सच है कि मैं खुद को अब भी बचा लेना चाहता था... पर पता नही क्यूँ.. मैं इसकी.." हॅरी ने पिंकी की तरफ एक पल के लिए देखा..," इसकी आँखों का सामना नही कर सका..... पता नही क्यूँ... मैं इसको धोखा दे रहा था पर मुझे ये भी लग रहा था कि मैं खुद को ही छल रहा हूँ... पता नही क्यूँ...."

"फिर ये भी नही चाहता था कि मेरे कर्मों की सज़ा मेरा... वो भाई भुगते... बस पता नही क्यूँ.... खैर...!" प्रशांत ने एक लंबी साँस ली और चुप हो गया....

"तो.. तुम शुरू से ही हॅरी नही थे....!" पिंकी आँखें फाड़ कर बोली....

"तालाब वाली बात का मुझे नही पता.. पर तब से जब तुम मेरे पास 'वो' गोलियाँ माँगने आई थी.... मैं ही था.....!"

"जाओ.. तुम थोड़ी देर बाहर बैठो...!" मानव ने अंजू और पिंकी की ओर इशारा किया....

"चलो...!" पिंकी अंजू का हाथ पकड़ कर बाहर ले आई....

"हॅरी मुझसे प्यार करता होगा क्या?" पिंकी अजीब कसंकस में थी.....

"पता नही... वो आए तो उसका गला पकड़ कर पूच्छ लेना.... पर एक बात तुम बिल्कुल सही कह रही थी....!" अंजलि ने कहा....

"क्या?" पिंकी ने अंजलि की आँखों में झाँकते हुए पूचछा.....

"हॅरी ने सच में किसी को भी तालाब वाली बात नही बताई.... अगर वो इसको बता देता तो आज ये बच जाता...!" अंजलि ने कहा....

"हां.. और वो..." पिंकी बीच में ही रुक गयी..,"बता ना! वो मुझसे प्यार कर लेगा ना?"

"मुझे नही पता... मैं तो बस इतना जानती हूँ कि इस चक्कर में झमेले बहुत हैं... मैने तो आज से तौबा कर ली!" अंजलि ने कहा और अपने कान पकड़ लिए

तो दोस्तो बाली उमर की प्यास अब एक बीती बात बन गई थी इसके बाद अंजलि ने फिर कभी सेक्स की बातो पर ध्यान नही दिया और वह अपनी पढ़ाई सीरियस होकर करने लगी फिर मिलेंगे एक नई कहानी बाबुल प्यारे के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा

दा एंड

गतान्क से आगे................
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