Free Sex Kahani प्यासी आँखों की लोलुपता
09-08-2018, 01:53 PM,
#11
RE: Free Sex Kahani प्यासी आँखों की लोलुपता
मेरे जय के गोद मैं बैठने के परिणाम तो होने ही थे। मैं महसूस कर रही थी की धीरे धीरे जय का लण्ड खड़ा हो रहा था और थोड़ी ही देर में मैंने मेरी गांड पर उसे ठोकर मारते महसूस किया। मैंने एक पतला सा गाउन ही पहना था। उस में से जय का मोटा और कड़ा लण्ड मेरी गांड की दरार में जैसे घुस रहा था। ठीक से कन्धों को दबाने किए लिए मैंने मेरे गाउन के ऊपर के दो बटन खोल दिए थे। अगर ऊपर से झांका जाय तो मेरे दोनों स्तन साफ़ दिख सकते थे। जय चाहता तो अपने हाथ थोड़े और लम्बे करके मेरे बूब्स को छू सकता था और दबा सकता था। मुझे उसका डर था। पर उसने ऐसा कुछ नहीं किया।

सबसे बड़ी समस्या यह थी की मेरे पॉँव के बीच में से रस झरना शुरू हो गया था। अब अगर मैं जय की गॉद मैं बैठी रही तो वह पानी उसके पाजामे को भी गिला कर सकता था। इससे यह जाहिर हो जाता की मैं भी जय के स्पर्श से एकदम गरम हो गयी थी।
जय के आघोश में रहते हुए, मैं भी उत्तेजित हो रही थी। उनके मांसल हाथ मेरे दोनों कन्धों पर मसाज कर रहे थे, उनकी मर्दाना खुशबु मेरे पॉंव के बीच में अजीब सी मीठी टीस पैदा कर रही थी। उन का खड़ा लण्ड पाजामे के अंदरसे मेरे गाउन को दबाते हुए मेरी गांड की दरार में घुसने की कोशिश कर रहा था। पर जय का ध्यान उन की हथेलियां और अंगूठे, जो मेरे कांधोंकी हड्डी के नीचे की मांस पेशियोँ दबाने में लगे थे उस पर था। मेरा मन हुआ की उनके खड़े लण्ड को पकड़कर उसे महसूस करूँ। पर मैंने अपने आप को काबू में रखा और जय की गोद से हटते हुए बोली, “अब बहुत ठीक लग रहा है। शुक्रिया।”
कंधा तो ठीक हुआ पर अभी पॉँव में दर्द काफी था। जय ने मुझे एक पॉँव से दूसरे पॉँव को दबाते हुए देखा तो वह समझ गये की मुझे पाँव में काफी दर्द हो रहा था। जय ने कहा, “तुम्हें पाँव में सख्त दर्द हो रहा है। लाओ मैं तुम्हारे पाँव दबा दूँ।”
जय से मेरे पाँव छुआना मुझे ठीक नहीं लगा। मैंने कहा, “नहीं, कोई बात नहीं। मैं ठीक हूँ।”.
जय ने तब मेरे सिरहाने ठीक किये और मुझे सो जाने के लिए कहा। मैं पलंग पर सिरहाना सर के नीचे दबाकर लम्बी हुई। धीरे धीरे धीरे मेरी आँखें गहराने लगीं। मैंने महसूस किया की जय ने मेरे पाँव से चद्दर उठा कर मुझे ओढ़ाया और खुद मेरे पाँव के पास बैठ गये। मैं थकी हुई थी और गहरी नींद में सो गयी। उस बार न तो मुझे कोई सपना आया न तो मुझे कोई डर लग रहा था। जय के पास में होने से मैं एकदम आश्वस्त थी।
काफी समय गुजर गया होगा। मेरी आँख धीर से खुली। सुबह के चार बजने में कुछ देर थी। मैं गहरी नींद में चार घंटे सो चुकी थी। रात का प्रहर समाप्त हो रहा था। चारों और सन्नाटा था। मुझे काफी आराम महसूस हो रहा था । मुझे मेरे पाँव हलके लग रहे थे। आधी नींद में मैंने महसूस किया की जय मेरे पाँव दबा रहे थे। मैं एकदम हैरान रह गयी, क्यूंकि जय इतने अच्छे तरीके से मेरे पाँव दबा रहे थे की मेरे पाँव का दर्द जैसे गायब ही हो गया था।
उनका मेरे पाँव को छूना मेरे जहन में अजोबो गरीब तूफान पैदा कर रहा था। अब मेरा मन मेरे नियत्रण में रखना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था। वैसे ही मैं जय के एहसानों में दबी हुई थी। उपर से आज उन्होंने मेरी इतनी सेवा की और बदले में मैंने और राज ने उनको कितना डाँटा पर फिर भी उन्होंने पलट कर ऊँचे आवाज से बात नहीं की यह सोच कर मुझे बुरा भी लगा और उन पर प्यार भी आया। पिछले दिन की घटनाओं से मैं ज्यादा उत्तेजित हो रही थी। जय की अपनी आतंरिक उत्तेजना को मैं समझ सकती थी। राज को मेरे बिना कुछ दिन भी अकेले सेक्स किये बिना रहने में बड़ी मुश्किल होती थी। जय तो इतने महीनों से अपनी पत्नी के बगैर कैसे रहते होंगे यह सोचकर मैं परेशान हो रही थी।
मेरे पाँव में जय के स्पर्श से मैं मदहोश हो रही थी। हालांकि जय मेरे घुटनों तक ही पाँव दबा रहे थे और उसके ऊपर हाथ नहीं ले जाते थे। मैं उनके संयम पर आश्चर्य रही थी। ऐसा संयम रखना उनकी लिए कितना कठिन रहा होगा यह मैं समझ सकती थी। मुझे उनपर तरस आया। पहले अगर किसीने मेरे पाँव को छूने की कोशिश भी की होती तो उसकी शामत आ जाती। पर उस रात मैं चाह रही थी की जय अपना हाथ थोड़ा ऊपर खिसकाएं और मेरी गीली चूत पर हाथ रखें। हे भगवान् यह मुझे क्या हो रहा था?
मैंने सोते रहने का ढोंग किया। मैं मन ही मन में उम्मीद कर रही थी की जय अपना हाथ थोड़ा ऊपर की और खिसकाएं और मेरी जांघों को सहलाएं और फिर मेरी चूत के ऊपर के उभार को स्पर्श करें। पर जय बड़े निकम्मे निकले। उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैंने मेरी जांघों के बीच के सारे बालों को साफ़ कर रखा था।
शायद जय को लगा होगा की मेरे पाँव का दर्द ख़तम हो चुका था। क्यूंकि वह मेरे पाँव दबा नहीं रहे थे बल्कि हलके से सेहला रहे थे। वह शायद मेरे पाँव के स्पर्श से आनंद का अनुभव कर रहे थे। उनके स्पर्श के कारण हो रहे उन्माद पर नियंत्रण में रखना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था। न चाहते हुए भी मेरे मुंह से एक हलकी रोमांच भरी आह निकल गयी।

मैंने सोचा बापरे यह क्या हो गया। अनजाने में ही मैंने यह जाहिर कर दिया की मैं जाग गयी थी और जय के पाँव सहलाने से आह्लादित हो रही थी। इस उम्मीद में की शायद जय ने मेरी आह नहीं सुनी होगी; मैं चुपचाप पड़ी रही और जय के मेरे पाँव के स्पर्श का आनंद लेती रही। थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद जब मैंने आँखें खोली तो देखा की जय का एक हाथ उनके पाँव के बीच था और दूसरे हाथ से वह मेरे पाँव को सेहला रहे थे। मुझे यकीन था की उस समय जरूर जय का लण्ड तना हुआ एकदम कड़क होगा क्यूंकि मैंने उनके पाँव के बीच में तम्बू सा उभार देखा। उस समय मेरी मानसिक हालात ऐसी थी की मुझे ऐसा लग रहा था की जिस दिशा में मैं बहती चली जा रही थी वहांसे से वापस आना असंभव था। और मेरी इस बहकावे का कारण जय नहीं था। मैं स्वयं अपने आप को नियत्रण में नहीं रख पा रही थी।
राज मेरी इस हाल के पुरे जिम्मेवार थे। वह जिद करते रहे की मेरे और जय के बीच की दुरी कम हो, जय हमारे यहां शामका खाना खाने के लिए आये, जय हमारे यहाँ रात को रुके इत्यादि इत्यादि। मुझे ऐसा लगने लगा की कहीं न कहीं राज कोई ऐसी चाल तो नहीं चल रहे जिससे की जय और मैं (हम) मिलकर सेक्स करें और मैं जय से चुदवाऊं। मैंने सोचा की अगर ऐसा ही है तो फिर हो जाये। फिर मैं क्यों अपनी मन की बात न मानूं?
मैंने तय किया की जो भी होगा देखा जाएगा। मैं जरूर अपने पति को पूरी सच्चाई बताऊँगी और वह जो सजा देंगे वह मैं कबुल करुँगी। पर उस समय यह सब ज्यादा सोचने की मेरी हालत नहीं थी। मेरी चूत में जो खुजली हो रही थी उसपर नियत्रण करना मेरे लिए नामुमकिन बन रहा था। हकीकत तो यह थी की मैं सीधी सादी औरत से एक स्वछन्द और ढीले चरित्र वाली लम्पट औरत बन रही थी जो राज के अलावा एक और मर्द का लण्ड अपनी चूत में डलवाने की लिए उत्सुक थी।
शायद जय को पता लग गया था की मैं जाग गयी थी। उन्होंने मेरे पाँव से उनका हाथ हटा कर चद्दर से मेरे पाँव ढक दिए और अपना हाथ धीरे से मेरी कमर पर चद्दर पर रख दिया। मुझे लगा की कहीं वह मेरी चूँचियों को सहलाना और मसलना शुरू न कर दे। बल्कि मेरे मन में एक ख्वाहिश थी की अगर वह ऐसा कर ही देते हैं तो अच्छा ही होगा। उस हाल में मुझे कोई शुरुआत नहीं करनी पड़ेगी। हर पल बीतने पर मेरी साँसों की गति तेज हो रही थी। जय ने भी उसे महसूस किया क्यूंकि उसने अपना चेहरा मेरे चेहरे के बिलकुल सामने रखा। और धीरे से मेरे कान में बोलै, “डॉली क्या आप बेहतर महसूस कर रही हो?”
उस हालात में क्या बेवकूफी भरा प्रश्न? मैंने धीरेसे मेरी आँखें खोलीं तो मेरी आँखों के सामने जय को पाया। जय की नाक मेरी नाक को छू रही थी। मुझे जय के सवाल से गुस्सा तो आया पर मैंने उसके जवाब में जय की और मुस्काते हुए कामुक नजर से देखा। मेरी कामुक नजर और मेरी शरारत भरी मुस्कान ने शब्दों से कहीं ज्यादा बयाँ कर दिया। जय ने झिझकते हुए मेरी आँखों में देखा और मेरे भाव समझ ने की कोशिश करने लगे। तब मैंने वह किया जो मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी। मैंने अपने दोनों हाथ जय के सर के इर्दगिर्द लपेट दिए और जोरसे उसके चेहरे को मेरे चेहरे पर इतने जोरों से दबाया की जिससे उसके होँठ मेरे होठों से भींच गए।

जय को तो बस यही चाहिए था। वह झुके और उन्होंने मुझे मेरे होंठों पर इतना गाढ़ चुम्बन किया की कुछ क्षणों के लिए मेरी सांस ही रुक गयी। उनकी हरकत से ऐसा लगता था की वह इस का इंतजार हफ़्तों या महीनों से कर रहे थे। महीनों तक उन्होंने अपनी इस भूख को अपने जहन में दबा के रखा था। पर मेरी इस एक हरकत से जैसे मैंने मधु मक्खी के दस्ते पर पत्थर दे मारा था। जय मेरे होंठों को छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे। हम करीब तीन मिनट से ज्यादा देर तक एक दूसरे के साथ चुम्बन में लिपटे रहे।
अपने होंठों से उन्होंने मेरे होंठ को प्यार से सहलाया, मेरे ऊपर के होंठ को चूमा, दबाया और खूब इत्मीनान से चूसा। फिर उसी तरह मेरे निचले होंठ को भी बड़ी देर तक चूसते रहे। मेरे होठों को अपने होठों से बंद करके उनको बाहर से ही चूसते रहे और अपने मुंह की लार अपनी जीभ से मेरे होठों के बाहरी हिस्से में और मेरे नाक और गालों पर भी लगाई। फिर मेरे होंठों अपने होंठों से खोला और अपनी सारी लार मेरे मुंह में जाने दी। मैं उनकी लार को मेरे मुंह के अंदर निगल गयी। मुझे उनकी लार बहुत अच्छी लगी।
-  - 
Reply
09-08-2018, 01:53 PM,
#12
RE: Free Sex Kahani प्यासी आँखों की लोलुपता
जब हम गाढ़ चुम्बन में लिपटे हुए थे की जय का एक हाथ मेरी पीठ पर ऊपर नीचे घूम रहा था। साथ साथ में मेरा गाउन भी ऊपर नीचे हो रहा था। मेरी जांघों पर जय का खड़ा कडा लण्ड रगड़ रहा था। जय के मुंह से कामुकता भरी हलकी कराहट उनकी उत्तेजना को बयाँ कर रही थी। जय को कल्पना भी नहीं होगी की मैं ऐसे उनकी कामना को पूरा करुँगी। 
जय के कामोत्तेजक तरीके से मेरे बदन पर हाथ फिराना और गाढ़ चुम्बन से मेरे बदन में कामाग्नि फ़ैल रही थी। उनका एक हाथ मेरी पीठ पर मेरी रीढ़ की खाई और गहराइयों को टटोल रहा था जिससे मेरी चूत में अजीब सी रोमांचक सिहरन हो रही थी और मेरी योनि के स्नायु संकुचित हो रहे थे। उस समय मैं कोई भी संयम और शर्म की मर्यादाओं को पार कर चुकी थी।
हमारे चुंबन के दरम्यान मेरा हाथ अनायास ही जय की टांगों के बीच पहुँच गया। जय के पूर्व वीर्य से वहाँ पर चिकनाहट ही चिकनाहट फैली हुई थी। जैसे ही मेरे हाथ ने उनके लण्ड को पाजामे के उपरसे स्पर्श किया तो मैंने अनुभव किया की जय के पुरे बदन में एक कम्पन सी फ़ैल गयी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अपने पाजामे पर ही लण्ड पर दबाये रखा। दूसरे हाथ से उन्होंने अपने पाजामे का नाडा खोल दिया और उनका नंगा लण्ड अब एक अजगर की तरह मेरी हथेली में आगया। मैं जय के लण्ड को ठीक तरह से पकड़ भी न पायी।

मैंने उसकी लम्बाई और मोटाई का अंदाज पाने के लिए उसके चारों और और उसकी पूरी लम्बाई पर हाथ फिराया। हाय दैया! एक आदमी का इतना बड़ा लण्ड! इतनी सारी चिकनाहट से भरा! मुझे ऐसा लगा जैसे कोई घोड़े का लण्ड हो। उस पर हाथ फिराते मैं कांप गयी। शायद मेरे मनमें यह ड़र रहा होगा की इतना बड़ा लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ ने में जरूर मुझे बहुत कष्ट होगा। 
मुझे मेरे मामा के लण्ड की याद आयी। उसके सामने तो राज के लण्ड की कोई औकात ही नहीं थी। जय का लण्ड गरम और लोहे के छड़ के सामान सख्त था। उनके लण्ड के तल में कुछ बाल मेरी उंगलिओं में चिपक गए। उनके लण्ड के बड़े मशरुम की तरह चौड़े सर पर के छिद्र में से चिकना पूर्व रस बूंदों बूंदों में रिस रहा था और पुरे लण्ड की लम्बाई पर फ़ैल रहा था।
मैं जय से चुम्बन में जकड़ी हुई थी और जय के लण्ड को एक हाथ से दुलार रही थी। तब जय ने धीरे से अपना सर उठाया और हिचकिचाते हुए पूछा, “डॉली, मेरा…. आशय…. ऐसा…. करने…. का….. नहीं था…. मतलब…. मैं आपको… मैं…. यह कह…. रहा…. था…. अहम्…. मतलब…. तुम बुरा… तो….. नहीं … मानोगी? क्या मैं…. मतलब…. यह ठीक…. है….? क्या….. तुम…. तैयार…. हो…?” जय की आवाज कुछ डरी हुई थी, की कहीं मैं उसे फिर न झाड़ दूँ।
मैं उस इंसान से तंग आ गयी। मुझसे हंसी भी नहीं रोकी जा रही थी। पर मामला थोड़ा गंभीर तो था ही। मैंने अपनी हंसी को बड़ी मुश्किल से नियत्रण में रखते हुए जय की आँखों में सीधा देखकर कहा, “अरे भाई! अब क्यों पूछ रहे हो? इतना कुछ किया तब तो नहीं पूछा? सब ठीक है, मैं तैयार हूँ, तैयार हूँ, तैयार हूँ। अब सोचो मत, आगे बढ़ो। जो होगा, देखा जाएगा। मैं एकदम गरम हो रही हूँ। याद करो राज क्या कह रहे थे, ‘भूत तो चला गया, भविष्य मात्र आश है, तुम्हारा वर्तमान है मौज से जिया करो’ अब आगे की सोचो मत। अब मुझे जोश से प्रेम करो, मुझसे रहा नहीं जाता। मुझे अंग लगा लो आज की रात मुझे अपनी बना लो।” इतना कह कर मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। मुझे उस रात उस पागल पुरुष से रति क्रीड़ा का पूरा आनंद लेना था।
जय ने धीरेसे हमारे बदन के बीच में हाथ डाल कर एक के बाद एक मेरे गाउन के बटन खोल दिए।। मैं अपनी जगह से थोड़ी खिसकी ताकि जय मेरे गाउन को मेरे बदन से निकाल सके। मैंने गाउन के अंदर कुछ भी नहीं पहना था। मैंने जय के पाजामे का नाडा खोला। जय ने पाजामे को पांव से धक्का मार कर उतार दिया और कुर्ते को भी उतार फेंका। तब हम दो नंगे बदन एक दूसरे के साथ जकड़ कर लिपटे हुए थे। 
जैसे ही हमने अपने कपडे उतार फेंके की जय थम गए। वह मुझसे थोड़े दूर खिसक गए। मैंने सोचा अब क्या हुआ? मैंने अपनी आँखें खोली तो जय को मेरे नंगे बदन को एकटक घूरते हुए पाया। कमरे में काफी प्रकाश था जिससे की वह मेरा नंगा बदन जो उनकी नज़रों के सामने लेटा हुआ पड़ा था उसे, अच्छी तरह निहार सके। मैं अपनी पीठ पर लेटी हुई थी। जय की नजर मेरे पुरे बदन पर; सर से लेकर मेरी टाँगों तक एकदम धीरे धीरे संचारण कर रही थी।
मेरे खुले हुए बाल मेरे सर के नीचे और उसके चारों और फैले हुए थे और मेरे गले के नीचे मेरी चूँचियों को भी थोडासा ढके हुए थे। मेरे सर पर का सुहाग चिन्ह, लाल बिंदी रात के प्रकाश में चमक रही थी और जय के आकर्षण का केंद्र बन रही थी। मेरी गर्दन और उस में सजे मेरे मंगल सूत्र को वह थोड़ी देर ताकते ही रहे। मेरे स्तन अपने ही वजन से थोड़े से फैले हुए थे। फिर भी जैसे वह गुरुत्वाकर्षण का नियम मानने से इंकार कर रहे हों ऐसे उद्दण्ता पूर्वक छत की और अग्रसर थे। मेरी फूली हुई निप्पलेँ मेरे एरोला के गोलाकार घुमाव के बीच जैसे एक पहाड़ी के नोकीले शिखर के सामान दिखाई दे रहीं थीँ।
अनायास ही जय का हाथ मेरे एक स्तन पर जा पहुंचा। उन्होंने मेरे चॉकलेटी एरोला पर मेरी उत्तेजना से फूली हुई निप्पलोँ के चारोँ और अपनी उंगली घुमाई। मेरे एरोला पर रोमांच के मारे छोटी छोटी फुंसियां बन गयी थी जो मेरे कामान्ध हाल को बयाँ कर रही थी। उन्होंने मेर एक निप्पल को चूंटी भरी। शायद यह देखने के लिए की क्या वह सपना तो नहीं देख रहे। मेरे मुंह से आह निकल गयी।
मैंने अपनी आँखें बंद कर ली, जिससे की मैं उनकी हथेली और उंगलियां, जो की अब धीरे धीरे मेरे नंगे बदन को तलाश रहीं थीं उस का और उनका हल्का हूँ… कार जो की उनका आनंद बयान कर रहा था, उस रोमांच का मैं अनुभव कर सकूँ। धीरे धीरे उनकी हथेली और उंगलियां मेरे सपाट पेट पर जा टिकीं। वह मेरे शरीरऔर कमर के घुमाव का और मेरे पेट की नरम त्वचा का अनुभव कर रहे थे। जय ने अपनी एक उंगली मेरी नाभि के छिद्र में डाली। और उसे प्यार से दुलार ने लगे। उन्हें कैसे पता की मैं ऐसा करने से बड़ी ही कामुक उत्तेजना का अनुभव करती थी। कहीं राज ने तो जय को यह सब नहीं बताया?

मेरे नाभि छिद्र में उंगली डालने से मैं कामुक उत्तेजना के मारे पागल हो रही थी मैं मेरी नाभि के छिद्र को दुलार करने से मैं बेबाक सी हो रही थी और जय को रोकने वाली ही थी के उनकी हथेली थोड़ी खिसकी और मेरी नाभि नीचे वाले थोड़े से उभार और उसके बाद के ढलाव के बाद मेरे पाँव के बीच मेरी चूत का छोटा सा टीला जो बिलकुल साफ़, बाल रहित था; वहीँ रुक गयी। मैं अपनी आँखें बंद करके उनके हर एक स्पर्श का अद्भुत आनंद ले रही थी। अब वह मेरी चूत के टीले को बड़े ही प्यार से सेहला रहे थे और उनकी उंगलियां मेरी चूत के होठों से नाम मात्र की दुरी पर थीं। न चाहते हुए भी मेरे होठों से एक कामुकता भरी सिसक… निकल ही गयी।
मैंने मेरी आँखें खोली और उनकी और देखा। जय मेरी नग्नता को बड़े चाव और बड़ी गहराई से देख रहे थे। शायद वह अपने दिमाग के याददास्त के सन्दूक में मेरे नग्न बदन की हर बारीकियों को संजोना चाहते थे। मैं उनकी और देख कर मुस्कुराई और बैठ खड़ी हुई। बिना कुछ बोले, मैं पलंग से नीचे उतरी और जय के सामने खड़ी हो गयी। जय को यह देख बड़ा आश्चर्य हुआ। जय आश्चर्य पूर्ण नज़रों से मेरे नग्न शरीर, मेरी सुडोल आकृति को ललचायी हुई आंखों से देख रहे थे।
-  - 
Reply
09-08-2018, 01:53 PM,
#13
RE: Free Sex Kahani प्यासी आँखों की लोलुपता
मेरे गोलाकार उन्नत उरोज घने गुलाबी चॉकलेटी रंग के एरोला से घिरे हुए दो फूली हुई निप्पलों के नेतृत्व में मेरे खड़े होने के बाद भी गुरुत्वाकर्षण को न मानते हुए उद्दंड रूप से खड़े हुए थे। मैंने मेरे दोनों पाँव एक दूसरे से क्रॉस करते हुए मेरी सुडौल आकृति को ऐसे प्रस्तुत किया जैसे रैंप के ऊपर मॉडल्स अलग अलग कपड़ों को पहन कर अपना अंग प्रदर्शन करते हैं। फिर मैंने जय से पूछा, “जय मैं कैसी लग रही हूँ?”
अपना बड़ा लण्ड और मोटे टट्टे लटकाते हुए जय धीरेसे खड़े हुए। मेरे बाल, कपोल, आँखें, नाक, होंठ, चिबुक, गर्दन, कंधे, स्तन मंडल को देख कर जय के मुंह से ऑफ़.. उन्ह… निकल गया। अपने हाथ ऊपर कर उन्होंने मेरे स्तनों को दोनों में हाथों पकड़ा और अपनी हथेलियों में ऐसे उठाया जैसे वह उसका वजन कर रहें हों।
“तुम्हारे उरोज मेरी अद्भुत कल्पना से भी कहीं अधिक सुन्दर हैं। तुम प्रेम की देवी हो और एकदम सम्भोग योग्य हो।” मुझे ख़ुशी हुई की देरसे ही सही पर जय में अपन मन की बात कहने की हिम्मत हुई। मैं जय की और देख कर मेरी कामुकता भरी मुस्कान से उन्हें आव्हान किया।

मैं जय के मांसल मांशपेशियों युक्त सशक्त, सुडोल और लचीला बदन को देखते ही रह गयी। उनकी छाती पर थोड़े से बाल थे परन्तु राज की तरह बालों का घना जंगल नहीं था। उनकी शारीरक क्षमता उनकी छाती के फुले हुए स्नायुओँ से पता लगती थी। उनका फुर्तीला लम्बा कद कोई भी औरत के मन को आसानी से आकर्षित करने वाला था। उनके पेट में जरा सी भी चर्बी नहीं थी।
ऐसे नग्न खड़े हुए जय कोई कामदेव से कम नहीं लग रहे थे। उनके लण्ड के तल पर बाल थे और वह उनके पूर्व रस से लिप्त उनके लण्ड की चमड़ी पर चिपके हुए थे। उनके लण्ड पर कई रक्त की नसें उभरी हुई दिखाई पड़ रही थीं। उनके बावजूद उनका लण्ड चमकता हुआ उद्दण्ता पूर्वक सख्ती से खड़ा मेरी और इशारा करता हुआ मेरी चूत को जैसे चुनौती दे रहा था।
मेरे स्तनों को हाथ में पकड़ रखने के बाद जय ने मुझे अपने करीब खींचा। उन्होंने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। मुझे अपनी बाहों द्वारा थोड़ा ऊपर उठाते हुए उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों से चिपकाए और इस बार वह मुझे बड़े ही प्यार एवं मृदुता से मेरे होंठों पर अपनी जिह्वा से चूसते हुए चुम्बन करने लगे। अपने हाथ से मेरी पीठ और मेरे चूतड़ के गालों को बड़े प्यार से वह सहलाने और कुरेदने लगे। मैं उनपर ऐसे लिपट गयी जैसे लता एक विशाल पेड़ को लिपट जाती है।


उनकी उँगलियों ने जब मेरी गाड़ की दरार में घुस ने की चेष्टा की तो मेरे मुंह से अनायास ही आह्हः निकल पड़ा। यह मेरी काम वासना की उत्तेजना को दर्शाता था। इंडियन हिन्दी सेक्स स्टोरीस हिंदी चुदाई कहानी
हम इतने करीबी से एक दूसरे के बाहु पाश में जकड़े हुए थे की जब मैंने जय के लम्बे और मोटे लण्ड को अपनी हथली में लेने की कोशिश की तो बड़ी मुश्किल से हमारे दो बदन के बीच में से हाथ डालकर उसे पकड़ पायी। वह मेरी हथेली में कहाँ समाने वाला था? पर फिर भी उसके कुछ हिस्से को मैंने अपनी हथेली में लिया और उसकी पतली चमड़ी को दबाते हुए मैं जय के लण्ड की चमड़ी को बड़े प्यार से धीरे धीरे आगे पीछे करने लगी।
मेरा दूसरा हाथ जय की पिछवाड़े था। जैसे जय मेरी पीठ, कमर और गाड़ को अपने एक हाथ से तलाश रहा था तो मैं भी मेरे एक हाथ से उसकी पीठ, उसकी कमर और उसकी करारी गांड को तलाश रही थी। जैसे वह मेरी गांड के गालों को दबाता था तो मैं भी उसकी गांड के गालों को दबाती थी।

जय ने मेरी और देखा। मैंने शरारत भरी मुस्कान से उनको देखा और उनके लार को मेरे मुंह में चूस लिया। जय ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली और उसे आगे पीछे करने लगे जैसे की वह मेरे मुंह को अपनी जीभ से चोद रहे हों। यह उनकी एक बड़ी रोमांचक शैली थी जिसका अनुभव मैंने पहले नहीं किया था। मुझे जय का मेरे मुंह को जिह्वा से चोदना अच्छा लगा।
जय ने फिर मेरे नंगे बदन को बिना कोई ज्यादा ताकत लगाये और ऊपर उठाया और अपना मुंह मेरी चूँचियों पर रख कर एक के बाद एक वह मेरी चूँचियों को चूसने लगे। हवामें उनकी बाहों में झूलते हुए अपनी चूँचियों को चुसवाना मेरे लिए एक उन्मत्त करने वाला अनुभव था। मैंने अपने हाथ जय के गले के इर्दगिर्द कर फिरसे जय को हल्का चुम्बन देते हुए कहा, “तुम एक नंबर के चोदू साबित हुए हो। लगता है जबसे तुमने मुझे पहली बार देखा था तबसे तुम्हारी नियत मुझे चोदने की ही थी। अपने भलेपन से और भोलेपन से तुमने मुझे फाँसने की कोशिश की ताकि एक न एक दिन मैं तुम्हारी जाल में फंस ही जाऊं। एक भोले भाले पंछी को फांसने की क्या चाल चली है? भाई वाह! मान गयी मैं।”
जय मेरी और देख कर मुस्कुराये। उनके स्मित ने सब कुछ साफ़ कर दिया। उन्होंने आसानी से उठाते हुए मुझे पलंग पर लाकर लिटा दिया। उसके बाद मेरे भरे हुए रसीले स्तनों के पास अपना मुंह लगाया और फिरसे दोनों स्तनों को बारी बारी से चूसने लगे। फिर एक हाथ से उनको दबाने में लग गए। मैंने अपने एक हाथ में उनके बड़े लम्बे लण्ड की परिधि को मेरी दो उँगलियों को गोल चक्कर बनाते हुए उसमें लेनेकी कोशिश की, और उन्हें धीरे धीरे सहलाने लगी। मैंने उनके फुले हुए बड़े टट्टों को सहलाया और बिना जोर दिए उनको प्यार से मसला। राज ने मुझे यह बताया था की मर्दों को अपने अंडकोष स्त्रियों से प्यारसे सेहलवाना उन्हें उत्तेजित कर देता है।
उनके अंडकोष को सहलाने से जय के मुंहसे “आह्हः…” की आवाज निकल पड़ी। मैंने जय की छाती पर उनकी छोटी छोटी निप्पलों को एक के बाद एक चूमा। 
मेरी चूँचियों को अपनी चौड़ी हथेलियों में दबाते हुए जय बोले, “ओह! जब से मैंने तुम्हें पहली बार देखा था तबसे मैं इन्हें इस तरह दबाना और सहलाना चाहता था। सही है की मैं तुम्हें पहले चोद ने की अभिलाषा रखता था। पर ऐसी आशा कौन नहीं रखता था? हमारे ऑफिस में सभी कार्यकर्त्ता अगर मौक़ा मिले तो तुम्हें चोदने की इच्छा अपने जहन में छुपाये होंगे। पर मैं भाग्यशाली रहा की तुम मुझे अपने सहायक के रूप में मिल गयी। मुझे तुम्हारी अकड़ और विरोध ने बहोत आकर्षित किया। उसने मुझे और जोश दिलाया। पर डॉली प्लीज, मेरी बात मानो, मेरा आपको मदद करने के पीछे चोदने की गन्दी मंशा बिलकुल नहीं थी। पर हाँ, तुम्हारे इन रसीले होठों को चूमने की और तुम्हारे रस से भरे इन उरोजों को सहलाने और चूमने की तमन्ना जरूर थी।”
ऐसा कहते हुए जय ने अपने होंठ मेरे होंठ पर रखे और एक बार फिर हम दोनों गाढ़ आलिंगन में लिपटे हुए एक दूसरे को चूमने लगे। मैं जय के होठों के मधुर रस का आस्वादन कर रही थी। मैंने धीरेसे जय के मुंह में अपनी जीभ डाली और उसे अंदर बाहर करने लगी, और जैसे पहले जय मुझे कर रहे थे, मैं उनके मुंह को मेरी जीभ से चोद रही थी। जय के हाथ मेरी चूँचियों को दुलार रहे थे और कभी कभी उन्हें दबाते और मेरी निप्पलों को चूंटी भरते थे।
उनके हाथ मेरी चूँचियों से खिसक कर धीरे धीरे मेरे सपाट पेट की और खिसकने लगे। उनका स्पर्श हल्का और कोमल था। उनका ऐसा प्रेमपूर्ण स्पर्श मुझे उन्मत्त करने के लिए काफी था। उनकी उंगलियां मेरे नाभि पर आकर रुक गयीं। धीरे से उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी नाभि में डाली और उसे प्यार से मेरे नाभि की गेहरायीओंमें घुमाने लगे। उन्हें मेरी इस कमजोरी का पता लग गया था की मैं नाभि में उंगली डालने से कामातुर हो कर पागल हो जाती थी। थोड़ी देर बाद उनके हाथ नाभि से मेरे निचले हिस्से की और खिसक ने लगे और मैं काम वासना के मारे तड़पने लगी और मेरे मुंह से कामुक सिसकियाँ निकल ने लगी।
उनकी उंगलियां अब मेरी जाँघों के बीच में थी। जैसे ही उनकी हथेली मेरी चूत के टीले पर पहुंची तो मैं अपनी चरम पर पहुंचले वाली ही थी। मैं इंतजार कर रही थी की कब उनका हाथ मेरी चूत की पंखुड़ियों पर पहुंचे। मैंने अपनी चूत के टीले पर से एक एक बाल साफ़ किये थे। वैसे भी मैं हमेशा अपनी चूत के बाल साफ़ करती रहती थी। राज को यह बात पसंद थी और शायद जय को भी पसंद होगी। मुझे ज्यादा देर इंतजार करना नहीं पड़ा। जय की उंगलियां मेरी चूत की पंखुड़ियों से खेलने में लग गयीं। मेरी चूत से जैसे मेरी कामुक उत्तेजना एक फव्वारे के रूप में निकलने लगी। जय की उंगलियां एकदम भीग गयीं।
-  - 
Reply
09-08-2018, 01:54 PM,
#14
RE: Free Sex Kahani प्यासी आँखों की लोलुपता
जय की उँगलियों ने जैसे ही मेरी चूत की पंखुड़ियों का स्पर्श किया की मैं उन्माद के मारे एक जबरदस्त सिरहन का अनुभव करने लगी। ओह! वह क्या अनुभव था! मेरे बदन में जैसे एक बिजली सी दौड़ गयी और मेरा पूरा बदन जैसे उत्तेजना से अकड़ गया। मेरा दिमाग एकदम सुन्न हो गया और मैं एक अद्भुत सैलाब में मौजों के शिखर मर पहुँच गयी। मैंने जोर से एक उन्माद भरी आह्हः ली और उस रात एकदम झड़ गयी। मुझे बहुत कम बार ऐसा जबरदस्त ओर्गास्म आया होगा।
जय ने मेरी चूत में से तेजी से बहते हुए मेरे स्त्री रस को अपनी उँगलियों को गीला करते हुए पाया तो उन्होंने मेरे देखते ही वह उंगली अपने मुंह में डाली और मेरा स्त्री रस वह चाट गए। उनकी शक्ल के भाव से ऐसा लगा जैसे उनको मेरा स्त्री रस काफी पसंद आया। मैं धीरे धीरे सम्हली।

जय मेरी चूत की पंखुड़ियों से खेल रहे थे। कभी वह उनको खोल देते तो कभी उनके ऊपर अपनी उँगलियाँ रगड़ते। कभी वह अपनी एक उंगली अंदर डालते तो कभी दो।
अब मैं अपने आप को सम्हाल नहीं पा रही थी। मुझसे अब धीरज नहीं रखा जा रहा था। मैंने जय का सर अपने हाथों के बीच पकड़ा और उनको मैंने मेरी जाँघों के बीच की और अग्रसर किया। जय समझ गए की मैं चाहती हूँ की वह मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटे ।
जय अपना सर मेरे पाँव की और ले गये और मेरे पाँव को चौड़े फैलाये जिससे की वह अपना सर उनके बीच में डालकर मेरी चूत में से रिस रहे मेरे रस का रसास्वादन कर सके।
साथ साथ में वह अपनी जिव्हा को मेरे प्रेमातुर छिद्र में डालकर मेरी उत्तेजना बढ़ाना भी चाहते थे। जब मैंने अपने पाँव फैलाये तो जय मेरे चूत के प्रेम छिद्र को देखते ही रह गए। जय ने पिछले छह महीनों से किसी स्त्री की चूत के दर्शन नहीं किये थे। उन्होंने झुक कर मेरी चूत के होठों को चुम्बन किया। उनकी जीभ का मेरी चूत से स्पर्श होते ही मेरे बदन मैं एक कम्पन फ़ैलगयी। मैं रोमांच से सिहर उठी। जय उनकी जीभ से मेरी चूत की पंखुड़ियों से खेलते रहे और मेरी चूत के होठों को चौड़ा करके अपनी जीभ की नोक को उसकी गहराइयों तक डालते हुए मेरे वजाइना को चाटते रहे और चूमते रहे।
उनकी इस हरकत मुझे मेरी उत्तेजना की ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए पर्याप्त थी। मैं नए उन्मादके सैलाब के शिखर पर पहुँचने की तैयारी में थी। उन्होंने मेरु उत्तेजना को भॉँप लिया और मेरी चूत के अंदरूनी हिस्सों में जोश खरोश से अपनी जीभ घिस ने लगे। मेरे से रहा नहीं गया और मैंने “जय बस करो, मुझे एकदम उछाल महसूस हो रहा है। मैं ऊपर तक पहुँच गयी हूँ, मेरा छूट रहा है।” ऐसा कह कर करीब पंद्रह मिनट में मैं दूसरी बार झड़ गयी। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ की मैं पंद्रह मिनट में दो बार झड़ी, और वह भी बिना चुदाये।
इतने बड़े ऑर्गैज़म के बाद में पलंग पर धड़ाम से गिर पड़ी। परन्तु मेरे अंदर की ऊर्जा थमने का नाम नहीं ले रही थी। कौन कह सकता था की चन्द घंटों पहले मैं बीमार थी या एकदम थक कर निढाल हो चुकी थी। मैं वासना की कामुकता से एकदम गरम हो चुकी थी। मैं अब जय का लण्ड मेरी चूत में लेने के लिए अधीर हो चुकी थी। मैं जय से बेतहाशा चुदवाना चाहती थी। मेरे अंदर की शर्म और स्त्री सुलभ हया ने मेरी जय से चुदवाने की भूख को कहीं कोने में दफ़न कर दिया था। अब वह भूख उजागर हो रही थी। मैंने जय के सर को दोनों हाथों में पकड़ा और उसे मैं बिनती करने लगी, “जय, अब मेरा हाल कामुकता की गर्मी में तिलमिलाती कुतीया की तरह हो रहा है। अब सब कुछ छोड़ कर मुझ पर चढ़ जाओ और मुझे खूब चोदो।”
पर जय कहाँ सुनने वाले थे। उन्होंने अपना मुंह मेरी जाँघों के बीच में से हटाया और अपना हाथ अंदर डाला। फिर उन्होंने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डाली। जब उनकी उंगलियां आसानी से मेरी चूत के छिद्र में घुस न सकी तो वह कहने लगे, “डॉली तुम्हारा प्रेम छेद तो एकदम छोटा है। तुम्हारा पति राज इसमें कैसे रोज अपना लण्ड डाल सकता है?”
मुझे अपना छिद्र छोटे होने का गर्व था। क्यूंकि राज मजाक में कहते थे की, “भोसड़ी (चूत) ऐसी होनी चाहिए जो लण्ड को ऐसे ले जैसे लकड़ी में कील, या फिर पेप्सी के सील्ड टम्बलर में स्ट्रॉ। वरना वह भोसड़ा कहलाता है जिसमें लण्ड अंदर ऐसे समाता है जैसे लोटे में दाँतुन।” पर मैं जय से ऐसा कुछ बोल नहीं पायी। मेरी लण्ड सख्ती से पकड़ ने वाली चूत के कारण राज को मुझे चोदने में अनोखा आनंद आता था। वह अक्सर मुझे कहते थे की उन्हें मुझे चोदने में किसी और औरत को चोदने से कहीं ज्यादा मजा आता था। वह मुझे चोदना शुरू करते ही उत्तेजना के कारण झड़ जाते थे।
जैसे जय मेरी चूत में तेजी से उंगली चोदन करने लगे वैसे ही मेरी उत्तेजना सीमा पार कर रही थी। जय मेरी चूत को उँगलियों से चोद कर मुझे पागल कर रहे थे। मैंने जय से कहा, “अब बस भी करो। उत्तेजना से मुझे मार डालोगे क्या? अपनी उंगलियां निकालो और तुम्हारा यह मोटा लंबा लण्ड मेरी चूत में घुसा दो। मुझे चोदो, प्लीज मुझे चोदो।”
पर जय रुकने को तैयार ही नहीं थे। उसने तो उलटा मुझे उंगली से चोदने की प्रकिया और तेज करदी। मेरा सर चक्कर खा रहा था। मैं अपना आपा खो रही थी। मैं जातीय उन्माद के मौजों पर सवार थी। जय का हाथ और उंगलियां तो जैसे एक तेज चलते पंप की तरह मेरी चूत के अंदर बाहर हो रही थी। मैं जोर से उन्माद से चिल्ला उठी और एक गहरी साँस लेते हुए मैं झड़ गयी। मेरे अंदर से एक फौवारा छूटा। मैं कराह ने लगी, “जय मैं मरी जा रही हूँ। मेरा फिर से छूट गया है। अब बस भी करो। अब मैं इसे झेल नहीं सकती। ”

तब जा कर कहीं जय रुके। मैं तब तक वासना से बाँवरी हो चुकी थी। मैं कभी काम वासना के भंवर में इस तरह नहीं डूबी। जय मेरी और देख कर मुस्कुराये और बोले, “क्या हुआ? तुम्हें अच्छा लगा ना?”

मैंने जय का हाथ पकड़ा और खिंच कर उसे मेरे ऊपर सवार होने के लिए बाध्य किया। जयने अपने दोनों पाँव के बीच मेरी जाँघों को रखा और मेरे ऊपर सवार हो गए। उनका मोटा, कड़क और खड़ा लण्ड तब मेरी चूत के ऊपर के मेरे टीले को टोच रहा था। मैंने जय के होठों से मेर होंठ मिलाये और उनसे कहा , “आज मैं तुम्हारी हूँ। मुझे खूब चूमो, मेरी चूँचियों को जोर से दबाओ और उन्हें चुसो, मेरी निप्पलों को चूंटी भरो और इतना काटो की उनमें से खून बहने लगे। मैं चाहती हूँ की आज तुम मुझे ऐसे चोदो जैसे तुमने कभी किसी को चोदा नहीं हो। मैं तुम्हारा यह मोटा और लंबा लण्ड मेरी चूत में डलवाकर सारी रात चुदवाना चाहती हूँ। तुम आज इस तुम्हारे मोटे लण्ड की प्यासी कुतिया को जी भर के चोदो और उसकी प्यास बुझाओ।
मैं स्वयं अपने इस उच्चारण से आश्चर्य चकित हो रही थी। मैंने इस तरह इतनी गन्दी बातें राज से भी नहीं की थी। और मैं थी की उस वक्त एक गैर मर्द से एक कामुकता की भूखी छिनाल की तरह बरत रही थी। फ्री हिंदी सेक्स स्टोरी हिंदी चुदाई कहानी
जय अपने बदन को संतुलित रखते हुए और मुझ पर थोड़ा सा भी वजन न डालते हुए अपने लण्ड को मेरी चूत की पंखुड़ियों के करीब लाये। मेरी दोनों टाँगें उन्होंने उनके कंधें पर रखी। उनका खड़ा लंबा लण्ड मेंरी चूत के द्वार पर खड़ा इंतजार कर रहा था।
उस रात पहली बार मैं सकपकायी। मेरी साँसें यह सोच कर रुक गयी की अब क्या होगा? मैं एक पगली की तरह चाहती थी की जय मुझे खूब चोदे। पर जब वक्त आया तब मैं डर गयी और मेरे मन में उस समय सैंकड़ो विचार बिजली की चमकार की तरह आये और चले गए।

सबसे बड़ी चिंता तो यह थी की जय का इतना मोटा लण्ड मेरी इतनी छोटी और नाजुक चूत में घुसेगा कैसे? हालाँकि राज का लण्ड जय के लण्ड से काफी छोटा था तब भी मैं राज को उसे धीरे धीरे घुसेड़ने के लिए कहती रहती थी। जय का तो काफी मोटा और लंबा था। वह तो मेरी चूत को फाड् ही देगा।
पर मैं जानती थी की तब यह सब सोचने का वक्त गुजर चुका था। अब ना तो जय मुझे छोड़ेगा और न ही मैं जय से चुदवाये बिना रहूंगी। हाँ, मैंने विज्ञान में पढ़ा था की स्त्री की चूत की नाली एकदम लचीली होती है। वह समय के अनुसार छोटी या चौड़ी हो जाती है। तभी तो वह शिशु को जनम दे पाती है। 
मैं जानती थी की मेरी चूत चौड़ी तो हो जायेगी पर उससे मुझे काफी दर्द भी होगा और मुझे उसके लिए तैयार रहना पडेगा। मैंने जय के लण्ड को मेरी उंगलितों में पकड़ा और हलके से मेरी चूत की पंखुड़ियों पर रगड़ा। मेरी चूत में से तो रस की नदियाँ बह रही थी। जय का लण्ड भी तो चिकनाहट से पूरा सराबोर था। मैंने हलके से जय से कहा, “थोड़ा धीरेसे सम्हलके डालना। मुझे ज्यादा दर्द न हो। ”
.
मैंने एक हाथ से जयके लण्ड को पकड़ा और उसके लण्ड केचौड़े और फुले हुए सिंघोड़ा के फल जैसे ऊपरी हिस्से को मेरी चूत में थोड़ा सा घुसेड़ा और मेरी कमर को थोड़ा सा ऊपर की और धक्का देकर जय को इशारा किया की बाकी का काम वह खुद करे।
जय मेरे इशारे का इंतजार ही कर रहे थे। उन्होंने अपनी कमर को आगे धक्का देकर उनका कडा लण्ड मेरी चूत में थोड़ा सा घुसेड़ा। चिकनाहर की वजह से वह आसानी से थोड़ा अंदर चला गया और मुझे कुछ ज्यादा दर्द महसूस नहीं हुआ। मैंने मेरी आँखों की पलकों से जय को हंस कर इशारा किया की सब ठीक था।
जय का पहला धक्का इतना दर्द दायी नहीं था। बल्कि मुझे अनिल के लण्ड का मेरी चूत में प्रवेश एक अजीबोगरीब रोमांच पैदा कर रहा था। उस वक्त मेरे मनमें कई परस्पर विरोधी भाव आवागमन करने लगे। मैंने महसूस किया की मैं एक पतिव्रता स्त्री धर्म का भंग कर चुकी थी। उस रात से मैं एक स्वछन्द , लम्पट और पर पुरुष संभोगिनी स्त्री बन चुकी थी। पर इसमें एक मात्र मैं ही दोषी नहीं थी।
मुझसे कहीं ज्यादा मेरी पति राज इसके लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने बार बार मुझे जय की और आकर्षित होने के लिए प्रोत्साहित किया था। पर मैं तब यह सब सोचने की स्थिति में नहीं थी। उस समय मेरा एक मात्र ध्येय था की मैं वह चरम आनंद का अनुभव करूँ जो एक लम्बे मोटे लण्ड वाले पर पुरुष के साथ उच्छृंखल सम्भोग करने से एक शादी शुदा पत्नी को प्राप्त होता है।
मैं अब रुकने वाली नहीं थी। मैं ने एक और धक्का दिया। जय ने अपना लण्ड थोड़ा और घुसेड़ा। मुझे मेरी चूत की नाली में असह्य दर्द महसूस हुआ। मैंने अपने होंठ दबाये और आँखें बंद करके उस दर्द को सहने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने लगी। जय ने एक धक्का और दिया और उसका लोहे की छड़ जैसा लण्ड मेरी चूत की आधी गहराई तक घुस गया। मैं दर्द के मारे कराहने लगी। पर उस दर्द में भी एक अजीब सा अपूर्व अत्युत्तम आनंद महसूस हुआ।
जैसे जय ने मेरी कराहटें सुनी तो वह थम गया। उसके थम जाने से मुझे कुछ राहत तो जरूर मिली पर मुझे अब रुकना नहीं था। मेरी चूत की नाली तब पूरी तरह से खींची हुई थी। जय का लण्ड मेरी नाली में काफी वजन दार महसूस हो रहा था।
उसके लण्ड का मेरी वजाइनल दीवार से घिसना मुझे आल्हादित कर रहा था। मैंने जय को इशारा किया की वह रुके नहीं। जैसे जैसे जय का मोटा और लंबा कड़ा लण्ड मेरी चूत की गेहराईंयों में घुसता जारहा था, मेरा दर्द और साथ साथ में मेरी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी।
मैंने जय को रोकना ठीक नहीं समझा। बस मैंने इतना कहा, “जय जरा धीरेसे प्लीज?”
जय चेहरे पर मेरे कराहने के कारण थोड़ी चिंता के भाव दिख रहे थे। मैंने उसे कहा, ‘धीरेसे करो, पर चालु रखो। थोड़ा दर्द तो होगा ही।“
मैं जानती थी की जय मुझे देर तक और पूरी ताकत से चोदना चाहते थे। मैं भी तो जय से चुदवाने के लिए बाँवरी हुई पड़ी थी। मैंने जय का हाथ पकड़ा और उसे चालु रहने के लिए प्रोत्साहित किया। जय ने एक धक्का लगाया और मेरी चूत की नाली में फिरसे उसका आधा लंड घुसेड़ दिया। तब पहले जैसा दर्द महसूस नहीं हुआ। जय रुक गया और मेरी और देखने लगा। मैंने मुस्करा कर आँखसे ही इशारा कर उसे चालु रखने को कहा।
-  - 
Reply
09-08-2018, 01:54 PM,
#15
RE: Free Sex Kahani प्यासी आँखों की लोलुपता
जय ने एक धक्का और दिया। फिर थोड़ा और दर्द पर उतना ज्यादा और असह्य नहीं था। मैं चुप रही। जय ने उनका लण्ड थोड़ा पीछे खींचा और एक धक्के में उसे पूरा अंदर घुसेड़ दिया। चिकनाहट के कारण वह घुस तो गया पर दर्द के मारे बड़ी मुश्किल से मैंने अपने आपको चीखने से रोका। मेरे कपोल से पसीने की बुँदे बहने लगीं। यहां तो एक जय ही थे जो मेरा यह हाल था। एक लड़की पर जब कुछ लोग बलात्कार करते होंगे तो उस बेचारी का क्या हाल होता होगा वह सोच कर ही मैं कापने लगी।
दूर सडकों पर चीखती चिल्लाती गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो गयी थी। हमारी कॉलोनी में ही कोई गाडी के दरवाजे खुलने और बंद होने की आवाज सुनाई दे रही थी। नजदीक में ही कहीं कोई दरवाजे का स्प्रिंग लॉक “क्लिक” की आवाज से खुला और बंद हुआ। पर मुझे यह सब सुनने की फुर्सत कहाँ थी ? मेरा दिमाग तो जय का कडा लंड उस समय मुझ पर जो केहर ढा रहा था उस पर समूर्ण रूप से केंद्रित था।
जय ने एक बार उसका लण्ड अंदर घुसेड़ने के बाद उसे थोड़ी देर अंदर ही रहने दिया। दर्द थोड़ा कम हुआ। उसने फिर उसे धीरे से पीछे खींचा और बाहर निकाला और फिर अंदर घुसेड़ा। मेरी पूरी गर्भ द्वार वाली नाली जय के लम्बे और मोटे लण्ड से पूरी भरी हुई थी।
मेरी पूरी खींची हुई चमड़ी उसके लण्ड को खिंच के पकड़ी हुई थी। हमारी योनियों मेसे झरि हुई चिकनाहट के कारण हमारी चमड़ी एक दूसरे से कर्कश रूप से रगड़ नहीं रही थी। दर्द सिर्फ चमड़ी की खिंचाई के कारण था।
मैंने अपना कुल्हा ऊपर उठा कर जय को मेरी चुदाई चालु रखने का आग्रह किया। जय ने मेरी प्यासी चूत में हलके हलके अपना लंड पेलना शुरू किया और फिर धीरे धीरे उसकी गति बढ़ाने लगा। उसका कडा छड़ जैसा लंड मेरी गरमा गरम गर्भ नाली में पूरा अंदर घुस जाता और फिर बाहर आ जाता, जिससे मेरी गर्भ नाली में और भी आग पैदा कर रहा था।
मैं भी अपने पेडू को ऊपर उठाकर और नीचे गिराकर उसकी सहायता कर रही थी। कुछ ही देर में उसका लंबा लंड, मेरे गर्भ कोष पर भी टक्कर मारने लगा। इसके इस तरह के अविरत प्रहार से मेरी चूत की फड़कन बढ़ रही थी जिससे मेरी चूत की नाली की दीवारें जय के मोटे लंड को कस के दबा रही थी, या यूँ कहिये की जय का लंड मेरी चूत की नाली की दीवारों को ऐसा फैला रहा था की जिससे मेरी चूत की नाली की दीवारें जय के लंड को कस के दबा रही थी।
बहुत सारी चिकनाहट के कारण हमारी चमड़ियाँ एक दूसरे से रगड़ भी रही थी और फिसल भी रही थी। इस अद्भुत अनुभव का वर्णन करना असंभव था। मैं अत्योन्माद में पागल सी उत्तेजना के शिखर पर पहुँच रही थी। 
जय के हरेक धक्के पर मेरे मुंह से कामुक कराहट निकल ही जाती थी। जय अपना लंड मेरी चूत में और फुर्ती से पेलने लगा। मैं भी उसके हरेक प्रहार के ताल का मेरे पेडू उठाकर बराबर प्रतिहार कर रही थी। मैं उसदिन तक उतनी उत्तेजित कभी नहीं हुई थी। शादी के दिन से उस दिन तक राज ने कभी मुझे इतनी तगड़ी तरह चोदा नहीं था। यह सही है की राज ने मुझे एक लड़की से एक स्त्री बनाया। तो जय ने उस रात को मुझे एक स्त्री से एक दुनियादारी औरत बनाया, जो एक मात्र पति के अलावा किसी और मर्द से चुदवाने का परहेज नहीं करती थी।
जय मुझे चोदते हुए बोलते जारहे थे, “डॉली, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। तुम कितनी अच्छी हो। यह मैं तुम्हें सिर्फ सेक्स करने के लिए नहीं कह रहा हूँ। यह सच है।”
जवाब में मैंने भी जय से कहा, “जय, तुम भी बड़े गज़ब के चोदू हो। मैं भी तुम्हे चाहती हूँ और मैं तुमसे चुदवाती ही रहना चाहती हूँ। प्लीज मुझे खूब चोदो। आज अपना पूरा वीर्य मेरी प्यासी चूत में उंडेल दो। मैं तुम्हारा वीर्य मेरे गर्भ कोष में लेना चाहती हूँ।”
जय अपने चरम पर पहुँच ने वाला था। उसका चेहरा वीर्य छोड़ने के पहले अक्सर मर्दों का चेहरा जैसे होता है ऐसा तनाव पूर्ण लग रहा था। जय ने कहा, “डॉली, मैं अपना छोड़ने वाला हूँ।”
मैं समझ गयी की वह शायद यह सोच रहा था की वह मेरे गर्भ में अपना वीर्य डाले या नहीं। मैंने उसे पट से कहा, “तुम निःसंकोच तुम्हारा सारा वीर्य मेरे अंदर उंडेल दो। मैं तो वैसे ही बाँझ हूँ। मैं गर्भवती नहीं होने वाली। मैं चाहती हूँ की तुम्हारा वीर्य मुझमें समाये। काश मैं तुमसे गर्भवती हो सकती। मैं अपने पति के बच्चे की माँ न बन सकी, तो तुम्हारे बच्चे की ही माँ बन जाती। पर मेरी ऐसी किस्मत कहाँ?”
मैं भी तो अपने उन्माद के शिखर पर पहुँचने वाली थी। जय के मेरे गर्भ में वीर्य छोड़ने के विचार मात्र से ही मेरी चूत में सरहराहट होने लगी थी और मैं भी अपना पानी छोड़ने वाली थी। जय के मुंहसे, “आह्ह… निकल पड़ी, और एक ही झटके में मैंने अनुभव किया की मेरे प्यासे गर्भ द्वार में उसने एक अपने गरम वीर्य का फव्वारा छोड़ दिया।

मुझे उसके वीर्य का फव्वारा ऐसा लगा की जैसे वह मेरे स्त्री बीज को फलीभूत कर देगा। मैं उत्तेजना से ऐसी बाँवरी बन गयी और एक धरती हीला देने वाला अत्युन्मादक धमाके दार स्खलन होने के कारण मैं भी हिल उठी। ऐसा अद्भुत झड़ना मैंने पहली बार अनुभव किया।
जय ने धीरेसे अपना लंड मेरी भरी हुई चूत में से निकाला। वह अपने ही वीर्य से लथपथ था। अब वह पहले जितना कड़क तो नहीं था, पर फिर भी काफी तना हुआ और लंबा लग रहा था। पर तब तक मैंने यह पक्का कर लिया की जय के वीर्य की एक एक बून्द वह मेरी चूत में खाली कर चुका था।
मुझे जय का वजन मेरे ऊपर बहुत अच्छा लगा रहा था। अपना सब कुछ निकाल देने के बाद जय धीरे से नीच सरका और जय और में हम दोनों एक दूसरे की बाहों में पलंग पर थक कर लुढ़क गए। मैं अपनी गीली चूत और जय का लथपथ लंड की टिश्यू से सफाई करने में लग गयी। उस रात जय तो बिलकुल नहीं सोये थे। कुछ मिनटों में ही वह गहरी नींद सो गए।
मैं एक बार फिर गरम पानी से नहाना चाहती थी। मैं खड़ी हो कर बैडरूम से बाहर आयी। बैडरूम का दरवाजा पूरा खुला हुआ था। मैं बाथरूम की और जाने लगी। मैंने कपडे पहनना जरुरी नहीं समझा। अचानक मेरी नजर ड्राइंग रूम की तरफ गयी। मेरी जान हथेली में आ गयी जब मैंने राज को ड्राइंग रूम में सोफे पर सामने वाली टेबल पर अपना पाँव लम्बा कर गहरी नींद में सोते हुए देखा।
उन चंद लम्हों में मुझे लगा जैसे मेरी दुनिया गिरकर चकनाचूर हो गयी। पता नहीं कब परे पति राज आये और कब सोफे पर आ कर सो गए। फिर अचानक मुझे दरवाजा खुलने और बंद होने की आवाज की याद आयी। उस समय मुझे अपनों मदहोशी में कोई और चीज का ध्यान ही नहीं था। बाप रे! बैडरूम का दरवाजा खुला हुआ था। मतलब राज ने जय को मुझे चोदते हुए देख लिया था।
मेरे पाँव के नीचे से जैसे जमीन फट गयी। मेरी आँखों के सामने अँधेरा छा गया। मुझे समझ में नहीं आया की मैं क्या करूँ। मैंने हड़बड़ाहट में गाउन पहन लिया और भागती हुयी राज के पास पहुंची। मुझे ऐसा लगा की मैं क्यों नहीं उसी क्षण मर गयी? राज के सर पर मैं झुकी तब मेरी आँखों में आंसू बह रहे थे। मैं फफक फफक कर रोने लगी। आँखों में आंसूं रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। आंसूं की कुछ बूँदें राज के सर पर जा गिरी। राज ने आँखें खोली और मुझे उसके ऊपर झुके हुए देखा। राज थके हुए लग रहे थे। उनकी आँखे धुंधली देख रही होंगी।
उनके जागते ही मैं राज को लिपट गयी और ऊँची आवाज में रो कर कहने लगी, “मुझे माफ़ करो डार्लिंग! मैंने बहुत बड़ा पाप किया है। मैंने आपको धोका दिया है और उसके लिए अगर आप मुझे घर से निकाल भी देंगे तो गलत नहीं होगा। मैं उसी सजा के लायक हूँ।
राज ने मुझे अपनी बाँहों में लिया और बोले, “क्या? तुम पागल तो नहीं होगयी हो? तुम्हें किसने कहा की तुमने मुझे धोका दिया है? तुम्हें माफ़ी मांगने की भी कोई जरुरत नहीं है। अरे पगली, यह तो सब मेरा रचाया हुआ खेल था। प्यारी निश्चिंत रहो। याद है मैंने क्या कहाथा? ‘भूत तो चला गया, भविष्य मात्र आश है, तुम्हारा वर्तमान है मौज से जिया करो’ मैं जब आया तो मैंने जय और तुम को अत्यंत नाजुक स्थिति में देखा। आप दोनों को उस हालत में देख कर मुझे बड़ी उत्तेजना तो हुई और तुम दोनों के साथ जुड़ने की इच्छा भी हुई, पर मैंने आप दोनों के बीच में उस समय बाधा डालना ठीक नहीं समझा। मेरी प्यारी नैना, तुम ज़रा भी दुखी न हो।”
राज ने खड़े हो कर मुझे अपनी बाहों में लिया और उबासियाँ लेते हुए कहा, “अभी उठने का वक्त नहीं हुआ है। पूरी रात मुश्लाधार बारिश में सफर करके मैं परेशान हो गया हूँ। गर तुम्हें एतराज न हो तो मैं तुम्हारे और जय के साथ सोना चाहता हूँ। जानूं, आओ, चलो एक बार फिर साथ ही सो जाएँ हम तीनों। जानूं मैं तुम्हें बहोत बहोत चाहता हूँ।”
राज की बात सुनकर मुझे एक बहुत बड़ा आश्चर्य हुआ। तब मैं थोड़ी रिलैक्स भी हुई। राज ने मुझे उठा कर पलंग पर नंगे गहरी नींद में लेटे हुए जय के साथ में सुलाया। राज ने मुझे जय के बाजू में सुलाया और खुद मेरी दुसरी तरफ बैठ गए। फिर मुझे अपनी बाहों में लिया और एक घनिष्ठता पूर्ण चुम्बन दिया और बोले, “जय बिस्तरे में कैसा था? क्या तुम्हे जय से सेक्स करने में मज़ा आया?”
मैंने राज की आँखों से आँखें मिलाकर बेझिझक कहा, “हाँ, वह अच्छा है। पर तुम और भी अच्छे हो। ”

राज ने मुझे ऐसे घुमाया जिससे मेरी पीठ उनकी तरफ हुयी। वह मुझे पीछेसे चोदना चाहते थे। मैं भी राज की बातें सुनकर उन्हीं की तरह गरम हो गयी थी। मैं समर से चुदने के बाद राज से भी चुदवाना चाहती थी।
मैं एक ही रात में दो लण्डों से चुदना चाहती थी। उस सुबह राज ने मुझे खूब चोदा। वह मुझे करीब १५ मिनट तक चोदते रहे और आखिर में अपना सारा माल मेरी चूत में छोड़ा। हमारी कराहट और पलंग के हिलने से जय थोड़ी देर में जग गए। राज को इतने क़रीबसे मुझे चोदते हुए देखने का सदमा जब धीरे धीरे कम हुआ उसके बाद जो हुआ वह एक लंबा इतिहास हैं।
अंत में मैं इतनाही कहना चाहती हूँ की उस रात के बाद राज राज, जय और मेरे बीच ऐसे कई मजेदार किस्से हुए जिसमें जय और राज दोनों ने साथ में मिलकर और अलग अलग से मुझे चोदा। वह एक साल मेरे लिए एक अविश्वसनीय सपने की तरह था।
खैर, ख़ुशी इस बात की थी की हमारी शादी के इतने सालों के बाद मैं गर्भवती हुई। मेरे सास ससुर, मेरे माता पिता, राज और मैं, हम सब इस नवशिशु के आने के समाचार सुनकर बहुत खुश हुए। जय भी बहुत खुश हुए। वह चचा जो बनने वाले थे।



end
-  - 
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Thumbs Up bahan sex kahani बहना का ख्याल मैं रखूँगा 82 1,555 2 hours ago
Last Post:
  mastram kahani प्यार - ( गम या खुशी ) 60 119,982 3 hours ago
Last Post:
Star Adult kahani पाप पुण्य 220 914,632 02-13-2020, 05:49 PM
Last Post:
Lightbulb Maa Sex Kahani माँ की अधूरी इच्छा 228 706,923 02-09-2020, 11:42 PM
Last Post:
Thumbs Up Bhabhi ki Chudai लाड़ला देवर पार्ट -2 146 68,051 02-06-2020, 12:22 PM
Last Post:
Star Antarvasna kahani अनौखा समागम अनोखा प्यार 101 196,289 02-04-2020, 07:20 PM
Last Post:
Lightbulb kamukta जंगल की देवी या खूबसूरत डकैत 56 21,848 02-04-2020, 12:28 PM
Last Post:
Thumbs Up Hindi Porn Story द मैजिक मिरर 88 94,078 02-03-2020, 12:58 AM
Last Post:
Star Hindi Porn Stories हाय रे ज़ालिम 930 1,089,737 01-31-2020, 11:59 PM
Last Post:
Star Kamvasna मजा पहली होली का, ससुराल में 42 118,571 01-29-2020, 10:17 PM
Last Post:



Users browsing this thread: 1 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


smoial boy garl sexbaba ne ashram me bulaker choda antravasana sex story Hindi meWWW.XXXXXXSPARM.COMचोदते चोदते गंद से आगे निकल जाए ग्वीडोकाँख सुँघा चोदतेबकरी को चोदा एक लङके ने Xxx फोटो 90penish ka viriyo nikal ta he to shidha yonime nikala jaye ushaka vodoyo xxx hdBimar maa ko chuda khniगाँव के लडकी लडके पकडकर sexy vido बनायाXnxx bhagar wala ke pas chudaihdsaxx xxpahadशादीशुदा फुफेरी बहन के बच्चेदानी तक लंड डालकर चुदाई की हिंदी सेक्सी कहानी फोटो सहितबीवी ने चुड़ै करा कर पति का कर्ज उतरा सेक्सी स्टोरी इन हिंदीYumsexstories baji ki shalwaar ek aorat ke dastan sexy Kahani rajsharma.comwww xxx sexbaba.net/artikeaa oratko gode banaka chodnama majaataha?Desi sasur netxxnxAntervsna hindi/मम्मी की चीखें निकलीJaadui Chashma by desi52.com/Forum-bollywood-actress-fakes?page=8मूतने बेठी लंड मुह मे डाल दीया कहानीbhai ne bhan ko choda bibi samjke sex story GujaratiXxxxx rajokri ki new b.f & porn photos desi sexi bhabhi ka मास्तारामdidi ko bra dilwayaसगी चुत एकदम टाईट बडा लंड चुत मे लिया सेकसी कहानियाlikhit me khuofnak kahaniyaKOI DEK RAHA HAI GANDI GALIWALA HINDI NEW KHANI KAMKUTA MASTRAMdifferent type yonichut picturenivetha tomad ki chot chodae ki photomalvikasharmaxxxwww.भाई ने अपनी बहन को बोला की तुम आवाज मत करना मै जब तेरी चुत मे लंड डालू तब सैक्स विडीयों गाँव का सैक्स विडीयों. com Indian masuka Hindi mein aur Jor jor se chodo na janau xxx vidoonidhhi agerwal ki xxxx mp dawnloadmummy ne anjna admi se chuday karwayiकॉलेज वालि साली का सेक्सि क्सनक्स. Comchuchi pelate xxx www xxxxx. viedos bf xxx. www. iniabixxx video bada land wala bahut lssi girane waladehati xxx but mejhattara sutaria sexbabaFkig xxx perubaeपोती की चुत में जबरदस्ती लन्ड घुसाया सील तोड़ी सेक्सी कहानीNude Dipsika nagpal sex baba picsmaa beta rajsharma sexstoriesxx baby mayke sath sexybpvideiGandi galiya sexbababur jhhat miyaine ka pic porn potoschudai ke liye vidhur chacha se ghar basaya-chacha se hamari chudai ki kahaniyaलडकी की बुर मे लड क्यो घुसाया जाता है बताये फोटोdesi52.com/kamakathalu sexगाङ मे घूसने वालि सेकसी बिऐफpayel kapre kholkar boob dikhayaChodana sikhaya khet may majduran ney rat koHindi video Savita Bhabhi Tera lund Chus Le Maza haiwww.jamke.chodna.bhosdike.landme.dam.nahihe.kya.hindi.sex.kahaniमाका का खेत मे लम्बा लैंड सा चुड़ै हिन्दी सेक्स स्टोरीजmuththi ghusa wala chut burxxx hd photo school antarawsnapati se lekar bete tak chudbai bhau bahinichi antarvasnalabki karna bacha xxxhiende ma pyare lereksePORN HINDI LATEST NEW KHANI MASTRAM HOT SEXY NON VEJ KHANI BHABI NA CHODNA SIKHIYASeptikmontag.ru मां बेटा hindi storyपेशाब पिलाने वाली छिनाल सेक्स स्टोरीM Meri family or Mera gaav sex babasahukar ne karj ke badle gand marichudne ke baad chut jhadi xnxxtv.Slwar wale hindu girl and mulvi ki gand xxx kahani handi video desi52sexxx comनेहा का बुर कैसे फाडेchuso ah bur chachivadhu anna vinakunda ammanu sex chesina koduku sex storysSex stories prachi VahiniAni meAthiya Shetty sex baba.comSexbaba.com bahu ki javaniGirlfriend sexy bate jise vo otejit ho jayhalwai anterwasna.comDeepshikha Nagpal Fake Nude photo sex babaxxxsex gusur ke Pani valaRadhika bhabi pucchisexफफफफ xnxmp ईन्दोरी भाभी कि चुदाइsali ke sath room me larka pkra jija phir diya pel read the hindi