Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - Printable Version

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RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

इधर सवी अमर को अपने घर ले आई थी .....उसके पास एक ही बेड रूम था ...तो उसने एक और बेड लगवा लिया था .....दिन भर अमर वहीं रहता अपनी यादों को तलाशने की कोशिश करता और शाम तक थक जाता ....सवी दिन भर काम करती हॉस्पिटल में और शाम को अमर से खूब बातें करती ....सवी बहुत कोशिश कर रही थी कि अमर को कुछ तो याद आए पर उसकी हर कोशिश बेकार हो रही थी ....कई बार उसका दिल किया कि कम से कम सुनील को तो अमर के बारे में बता दे ...पर फिर खुद को रोक लेती ..क्यूंकी वो अच्छी तरहा समझ चुकी थी कि सुनील सुमन और सोनल से कभी कुछ नही छुपाता .....और वो सुमन को कोई सदमा नही देना चाहती थी ...

सुनील पढ़ कर फ्री हुआ .....तो थक चुका था .....रात के 9 बज चुके थे ....उसके पास ही सोनल बैठी पढ़ रही थी ....

सुनील के नज़रें सोनल के खूबसूरत चेहरे पे जम गयी और याद आने लगे वो पल जब इनकी सुहाग रात हुई थी.....

खुशियों से सजी सजी फुलो की वो रात
याद आती है मुझे वो मेरी सुहागरात
मेरा वो उसके रुख़ से घूँघट उठाना
मेरे देखते ही उसका नज़ारे चुराना
चूम कर उसकी आँखो को सीने से लगाना
हुई थी उस दिन हमारी ज़िंदगी की नयी सुरुआत
याद आती है मुझे वो मेरी सुहागरात
उसके सुर्ख होंठो की लाली चुराना
बातो ही बातो में हद से गुज़र जाना
आँचल में उसके सर को छुपाना
उन दो ज़िस्मों का एक हो जाना
मध्यम-2 सी धड़कने वो पिघलते जज़्बात
याद आती है मुझे वो मेरी सुहागरात
कुछ ही पॅलो में सब कुछ बदल जाना
अपनी उंगलियो से उसके सर को सहलाना
बिखरे हुए उन लम्हो को को समेटना
उससे वो प्यारी-2 बातें करना
ये कोई कविता नही बस मेरे थे एहसास
याद आती है मुझे वो मेरी सुहागरात
खुशियो से सजी सेज फुलो की वो रात
याद आती है मुझे वो मेरी सुहागरात

सोनल भी थक चुकी थी पढ़ते पढ़ते ...वो अपनी किताब बंद करती है ...नज़र उठाती है तो सुनील को यूँ मंत्रमुग्ध निहारता हुआ पाती है ...शर्म के मारे उसके गाल लाल पड़ जाते हैं...

उठ के सुनील की आँखों पे हाथ रख देती है ....ऐसे मत देखो .....

सुनील यथार्थ में वापस आता है और सोनल को अपनी बाँहों में समेट लेता है ........सुनील की बाँहों के कसाव से सोनल सिसक पड़ती है और उसके गले में अपनी बाँहें डाल देती है .......

दोनो यूँ ही चिपके रहते हैं....कुछ देर बाद सोनल खुद को छुड़ाने की कोशिश करती है.....

'छोड़ो ना ...अभी भाभी आ जाएगी खाने के लिए कहने ...'

उँ हूँ

सुनील उसके होंठ अपने होंठों के क़ब्ज़े में लेलेता है और शिद्दत से चूसने लगता है .....सोनल उसकी बाँहों में पिघलने लगती है ...आँखों में गुलाबी डोरे तैरने लगते हैं......

तभी दरवाजे पे नॉक होता है .......मिनी बाहर से ही बोलती है ....सोनल खाने के लिए आ जाओ ......वो अंदर नही आती .....जानती थी मिया बीवी किसी भी पोज़िशन में हो सकते हैं..और वो नही चाहती थी कि सुनील उसके बारे में कुछ भी ग़लत सोचे...

सोनल....अपने होंठ सुनील से अलग करती है ......चलो ...रात को कसर पूरी कर लेना ......उसके होंठों पे नशीली मुस्कान थी .....

सुनील फिर उसके सर को अपने हाथों में थाम एक ज़ोर का चूमा लेता है और फिर छोड़ देता है ...

सोनल...उई माँ लगता है आज मेरी खैर नही ..बड़े बेसबरे हो रहे हो ....

सुनील ....तुम हो ही ऐसी दिल करता है बस तुम्हें बाँहों में लिए पड़ा रहूं और जिंदगी यूँ ही गुजरती रहे ......

सोनल......अच्छा जी ....और पहले तो देखते तक नही थे मेरी तरफ ............शायद आज भी वो दिन सोनल को याद थे ...या फिर मिनी उन दिनो की याद को ताज़ा कर रही थी...

सुनील ....का मूड ऑफ हो जाता है....वो खट से सोनल को छोड़ बाहर चला जाता है .....

सोनल को उसी वक़्त अपनी ग़लती का अहसास हो जाता है और भागती है सुनील के पीछे .......और सबके सामने उसे अपनी बाँहों में भींच .......ग़लती हो गयी प्लीज़ नाराज़ मत होना....

रूबी ....भाभी .....उन्ह उन्ह ....ये आपका बेडरूम नही है .....

सोनल फट से अलग होती है .......सुनील के चेहरे पे गुस्सा देख .,...सोनल की आँखों में आँसू आ जाते हैं और वो वापस कमरे में भाग जाती है ....

सुनील उसके पीछे नही जाता ....और टेबल पे बैठ जाता है .....

रूबी उठती है तो सुनील गुस्से से उसे देखता है ...बेचारी सहम के बैठ जाती है .....फिर सुमन खड़ी हो जाती है ....सुनील गुस्से से उसे भी देखता है तो उसकी आँखों में भी गुस्सा आ जाता है और सुनील की परवाह ना करते हुए चली जाती है ......

सुनील उठ जाता है और घर से बाहर ...जाने लगता है ....

मिनी ......सुनील रूको ..क्या करने जा रहे हो .....वो गुस्से से पलट के उसकी तरफ देखता है .....

मिनी ...तुम से ये उम्मीद नही थी ....पति पत्नी में मन मुटाव हो ही जाता है कभी कभी ...इसका मतलब ये नही अपनी ईगो को ले कर बैठ जाओ .....सोनल ने सबके सामने ग़लती मानी ना ...जो भी बात थी ....फिर तुम क्यूँ ऐसा कर रहे हो ....बस इतना ही प्यार ......

ये बात अगर सुमन बोलती तो सुनील शायद कुछ और तरीके से लेता लेकिन मिनी के मुँह से सुन वो तिलमिला गया .....अब उसे क्या बोलता ..क्यूँ उसे गुस्सा चढ़ा .......पैर पटकता हुआ वो हाल में बने एक छोटे बार पे जा के बैठ गया .....और विस्की की बॉटल उठा मुँह से लगा ली ....नीट पीता चला गया .....

मिनी और रूबी दौड़ के उसके करीब पहुँची ......और रूबी ने बॉटल खींच ली उस से .......

रूबी ....शराब किसी दर्द का इलाज़ नही भाई ....और आप तो नीट पीने लग गये ......


सुनील की आँखों में आँसू थे .........

मिनी .....तुम रोते हुए अच्छे नही लगते .....

सोनल की बात ने उन दिनो की याद ताज़ा कर दी थी जब वो अपनी मर्यादा की दीवारों से लड़ता था ......क्या कहता वो इन दोनो से .......बस इतना ही बोल पाया ...ठीक है नीट नही पियुंगा ....प्लीज़ मुझे अकेला छोड़ दो .....

मिनी ......जाओ जाके सोनल को मना के लाओ .......उसकी आवाज़ में गुस्सा सॉफ दिख रहा था ........इस वक़्त उसे माँ भी नही मना पाएगी ....बस यही प्यार है क्या तुम्हारा ....

सुनील ...मिनी को देखता रह गया

मिनी .....जाओ .......भूखा रखोगे क्या उसे

रूबी ...जाओ ना भाई ...भाभी को मना के ले आओ



RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

सुनील कमरे की तरफ बढ़ जाता है .....अंदर घुसता है तो देखता है की सोनल सुमन की गोद में बिलख रही थी माफी माँग रही थी ......सुमन उसे चुप करने की कोशिश कर रही थी पर सोनल पे तो माफी माँगने का दौरा चढ़ चुका था.

सुनील पास जा के बैठ गया .....सुमन की नज़रों में गुस्सा भी था और नमी भी थी ......

सुनील ने सोनल को सुमन की गोद से उठाया .....बस और नही ....

सोनल सुनील से लिपट गयी .....प्लीज़ मुझे ......

सुनील ....कहा ना बस .........और अपने होंठ सोनल के होंठों पे रख दिए ............सुनील के होंठों का अहसास पा सोनल शांत होती चली गयी ...

सुनील.......क्या चल रहा है तुम्हारे दिमाग़ में ......अपने होंठ हटा के उसने सोनल से पूछा .........

सुमन को एक तूफान उठता हुआ नज़र आया क्यूंकी वो भी सोनल को कुछ दिनो से देख रही थी ...मिनी के बदले हुए रवैये का असर पड़ रहा था उसपे ........

सुमन.......मत पूछो उस से कुछ .....सम्भल्ने दो उसे अपने आप .....लड़ने दो ...उन बेतुकी भावनाओं से ....


सुनील.........मतलब.......सुनील का दिमाग़ चकराने लगा .......सर में हथौड़े बजने लगे ....कुछ दिनो से घर में जो हो रहा था ...एक एक पल उसकी नज़रों से गुजरने लगा ......और उसके मुँह से निकल गया मिनी........

सोनल ज़ोर से चिपक गयी सुनील के साथ ...जैसे डर रही हो की कोई उसके सुनील को उस से खींच के ले जा रहा हो ....वो शेरनी आज एक भीगी बिल्ली से भी नाज़ुक बन गयी थी ......


सुनील.......आइ लव यू डॉल .......आइ लव ओन्ली यू टू ........

सोनल को सुनील की बाँहों में जो सुख मिलता था वो सारी दुनिया की नैमतों से भी बहुत ज़्यादा था .....जो प्यार करता है वो डरता भी है ....ये बात आज सोनल को समझ में आई थी .........मिनी की पीड़ा को महसूस कर वो अपने पुराने दिनो में चली गयी थी ....और एक डर उसके दिल-ओ-दिमाग़ को दस्तक देने लग गया था........


सुमन...बस बहुत हुआ...अब चलो खाना खा लें...वो दोनो भी वेट कर रही होंगी....
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कविता ने अपनी आँखें बंद कर ली ......जैसे जैसे राजेश उसके करीब आ रहा था वैसे वैसे ......उसकी दिल की धड़कन और तेज होती जा रही थी .
कमान की तरहा तनी हुई भवें, आँखों में काजल ....माथे पे लाल बिंदिया सोने के टीके से धकि हुई ...माँग में चमकती सिंदूर की लाली ....होंठों पे लाल लिपस्टिक ....हाथों में कंगन और सुहाग चूड़ीयाँ, गले में दमकता हुआ कुंदन का हार......कानों में लटकते झुमके ...हाथों में मेंहदी ...पैरों पे मेंहदी और महावर ...अप्सरा भी देख ले तो शरमा जाए ....तो बेचारे राजेश की क्या हालत होती ....दिल उछलने लगा था....साँसों की रफ़्तार बढ़ने लगी थी .......दोनो ही बेचैन हो रहे .......एक की बेचैनी तो खूबसूरती की मूरत को देख बाद रही थी और दूसरे की बेचैनी में घबराहट मिली हुई थी ...आयेज आनेवाले पलों का सोच कर .....

राजेश थोड़ा और आगे बढ़ा ...बड़ा नही जैसे धीरे धीरे उसे कोई खींच रहा था उसकी नज़रें तो कविता के चेहरे से हट ही नही रही थी .......कविता की पलकें पल भर को खुली ....अपनी तरफ बढ़ते राजेश को देख सिहर गयी और फट से घुँगत कर लिया .......

उफफफ्फ़ क्यामत ही टूट पड़ी राजेश पर .....

अपने रुख़ पे निगाह करने दो,,खूबसूरत गुनाह करने दो....रुख़ से परदा हटाओ जाने हया...आज दिल को तबाह करने दो.......अपने आप ही अल्फ़ाज़ राजेश के होंठों पे आ गये .....घूँघट ओढ़े सुहाग सेज पे बैठी कविता के चेहरे की लालिमा और भी बढ़ गयी ....

राजेश धीरे से उसके पास बैठ गया और कविता मारे लाज के और भी खुद में सिमटती चली गयी ........घबराहट में पैरों के टख़नों से बिस्तर नोचने लगी .....दोनो हाथों की उंगलियाँ एक दूसरे में फस गयी और झुक के अपना सर अपने घुटनो से टिका लिया .......

तभी राजेश को याद आया कि दुल्हन को पहले मुँह दिखाई देनी है जो उसकी माँ ने उसे दी थी .......उसने अपनी जेब में हाथ डाला और एक चमकते हुए हीरों का हार निकाला .......

कविता.......राजेश ने धीरे से पुकारा .....पर कोई जवाब नही .....

कविता मेरी तरफ देखो ना ....देखो बेचारे ये पत्थर भी मेरी तरहा जीने की लिए कितना तड़प रहे........राजेश हार को वहीं उसके पैरों पे रखता है और आगे बढ़ उसे उठाने की कोशिश करता है उसके चेहरे को दोनो हाथों में थाम .......कविता राजेश के हाथों के सहारे अपना सर उठा लेती है और राजेश धीरे से उसकी घूँघट को हटा देता है .........चोंधिया जाती हैं राजेश की आँखें........अगर कोई कविता की खूबसूरती का बखान करने बैठता तो कसिदो पे कसीदे लिखता चला जाता ......

अपनी आँखें खोलो हज़ूर .....

कविता ना में गर्दन को हल्की जुम्बिश देती है

राजेश कविता के हाथ को पकड़ लेता है .....अहह सिसक पड़ी कविता ............जानेमन आँखें नही खॉलॉगी तो अपना तोहफा कैसे देखोगी ............राजेश वो हीरे का हार उठा कविता के हाथ में रख देता है और उसे हाथ को चूम लेता है . म्म्म्मा आहह कविता उसके होंठों को अपने हाथ पे महसूस कर लरज गयी .....

देखो बेचारे ये पत्थर तड़प रहे हैं.....जब ये तुम्हारे गले को छुएँगे तो इनके अंदर जान आजाएगी और तुम्हारी चमक से इनको नयी जिंदगी मिल जाएगी....

कविता धीरे से पलकें खोलती है और अपने हाथ में एक सुदार चमकता हुआ हीरों का हार देखती है ..........होंठ काँपने लगते हैं...दिल में एक मुस्कान की लहर उठ जाती है ..........और इस पल को अपनी यादों के खजाने में महफूस करने के लिए अपनी आँखें फिर बंद कर लेती है ........उसके पति का ये पहला तोहफा उसके लिए जान से भी बढ़ कर था.......

राजेश ....पहन कर दिखाओ ना .....देखो कितना तरस रहे हैं ये पत्थर ........वो बार बार हीरों को पत्थर बोल रहा था ....और कविता उसकी बात पे हैरान थी पर कुछ बोल नही पा रही थी .....जो हीरे हार में जड़े हुए थे उनकी लशक ही बता रही थी कि वो कितने कीमती हैं......

कविता तो आँखें बंद रख छुई मुई की तरहा बैठी रही .....राजेश हार उठा उसके गले में डाल दिया ....उफ़फ्फ़ क्या चमक थी ...यूँ लग रहा था जैसे कविता के बदन को छू कर उन हीरों में जान आ गयी हो ......

जब राजेश के हाथों का अहसास अपनी गर्दन पे हुआ तो कविता के जिस्म में हलचल मच गयी .......पहली बार कोई मर्द उसे छू रहा था .....उसका पति उसे छू रहा था ...ये अहसास एक रोमांच उसके बदन में जागृत कर रहा था .....उसके होंठ कमकपाने लगे थे ......

राजेश ......देखो तुम्हारे पहनने से इनमे कितनी जान आ गयी है वरना ये पत्थर ...पत्थर ही रह जाते ............चलो एक बार शीशे में देखो तो सही .....


कविता फिर अपनी गर्दन को ना में हल्की जुम्बिश देती है .....

कवि.....चलो ना उठो .....राजेश उसे पहली बार कवि कह के बुला रहा था और कविता को ये नाम उसके कानो में रस घोलता हुआ लग रहा था......राजेश उसका हाथ पकड़ खींचता है और वो खिंची चली जाती है .....पर अपनी आँखें बंद ही रखती है .........राजेश के साख हाथों में उसका नाज़ुक हाथ चरमरा रहा था .....जिस्म में अंजनी तरंगों की लहरें उठने लगी थी .........

राजेश उसके कंधे पे अपनी बहन फैला उसे खुद से सटा लेता है और धीरे धीरे उसे कमरे में रखी ड्रेसिंग टेबल के सामने ले जाता है .......

आँखें खोलो ........कविता धीरे से अपनी पलकें उठाती है .....और अपने गले में चमकते हुए हार को देख एक भीनी सी मुक्कान उसके अधरो पे लहर जाती है .....वो अपना सर फिर झुका लेती है और राजेश उसके पीछे हो उसकी बाँहों को सहलाते हुए अपने दोनो बाजू उसके बाजुओं से चिपकते हुए अपनी उंगलियों को उसकी उंगलियों में फसाते हुए उसकी गर्दन पे अपनी नाक रगड़ते हुए पूछता है........पसंद आया मेरी जान को ये मामूली तोहफा .......



RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

राजेश के यूँ इस तरहा चिपकने से कविता की साँसे और भी तेज हो गयी ...........उसका सीना उठने और बैठने लगा .......धमनियों में रक्त प्रवाह बढ़ने लगा ......

राजेश धीरे से कविता को अपनी तरफ घुमाता है ....और उसके चेहरे को अपने हाथों में थाम लेता है .........कवि आँखें खोलो ना ........मुझे शर्म आ रही है ....कविता बहुत धीमी आवाज़ में बोली .....

'मुझ से कैसी शरम जान .....ये तो हमारे मिलन की रात है .....खोलो ना आँखें अपनी .......देख तो लो तुम्हारा मिया तुम्हारे काबिल भी है या नही ....'

कविता धीरे से अपनी आँखें खोलती है और राजेश झील सी गहरी आँखों में खो जाता है .............'शुक्र है उस खुदा का जिसने तुम्हें बनाया ....मेरी जिंदगी में रंगों की बाहर ला दी ...........आइ लव यू जान' राजेश धीरे धीरे अपने चेहरे को उसकी तरफ बढ़ाआता है और कविता तड़प के राजेश से लिपट जाती है ....उसकी साँसों की खुशुबू राजेश को और भी मदहोश करने लगी थी .....

तभी कविता को याद आता है सासू माँ ...केसर वाला दूध रख गयी थी........

कविता राजेश से अलग होती है और बिस्तर के पास रखे चाँदी के ग्लास को उठा राजेश की तरफ करती हुई बोली ......आपके लिए .......और शरमा के गर्दन नीचे झुका लेती है ....

राजेश उसके हाथ से ग्लास थाम लेता है ........'पहले इसे मीठा तो कर दो ....'

कविता .....छी झूठा कारवाओगे ....वो समझ गयी थी राजेश किस तरहा मीठा करने की बात कर रहा है .....

राजेश...मेरी जान जब बीवी अपने होंठों की मिठास किसी चीज में घोलती है तो वो झूठा नही होता .....उस से ज़्यादा पाक और सॉफ और लज़तदार चीज़ दुनिया में हो ही नही सकती .....अब फटाफट इसे मीठा कर दो....

कविता ...नही नही मैं कैसे ...ये आपके लिए है ...पहले आप ही पीजिए ( उफफफ्फ़ ये में क्या बोल गयी ..वो मन ही मन सोचती है ...क्या इनके साथ शेर करूँ....)

राजेश ...पहले मीठा करो वरना मैं नही पियुंगा.....

कविता ...बड़े जिद्दी हो आप तो ...और कविता अपने होंठ ग्लास से लगा एक छोटा सा घूँट ले लेती है .....

राजेश ग्लास को घुमा उसी जगह अपने होंठ रखता है जहाँ कविता की लिपस्टिक के निशान पड़ गये थे और एक घूँट ले कर ग्लास कविता के होंठों से लगा देता है ...इसी तरहा दोनो दूध का ग्लास ख़तम कर देते हैं........

राजेश ग्लास को साइड में रख कविता को अपनी बाँहों में भर लेता है और कविता उसके साथ चिपकती चली जाती है ....

राजेश...कवि ....दो दिन बाद हम हनिमून पे जा रहे हैं .....तुम कहाँ जाना चाहती हो ...

कवि....जहाँ आपका दिल करे ...

राजेश ...हम ताहिती जाएँगे .....पता है दुनिया का एक कोना है वो लेकिन हनिमूनर्स के लिए तो पॅरडाइस है .......वहाँ एक आइलॅंड है ....बोरा बोरा ....वहाँ मैने बुकिंग करवा ली है ....बस दिक्कत ये है कि 48 घंटे तो फ्लाइट में लग जाते हैं...पहले ऑकलॅंड उतरेंगे और फिर वहाँ के लिए फ्लाइट लेंगे ....और एक दिलचस्प बात ये है कि वहाँ हम एक दिन पीछे हो जाते हैं......

कवि......ह्म्म्म. लव्ली .......बहुत खर्चा होगा ना......

राजेश .....यार हनिमून जिंदगी में एक ही बार होता है ...तो क्यूँ ना खुल के जिएं..और पैसा क्या चीज़ है फिर कमा लेंगे ...अब तो मेरे घर की लक्ष्मी भी तो आ गयी है ....

कविता बस यूँ ही राजेश से चिपकी खड़ी थी ...और राजेश ने उसे अपनी बाँहों में समेट रखा था .....कुछ क्षण बाद राजेश अपना चेहरा कविता की गर्दन पे रगड़ने लगा .....

उम्म्म्म कविता सिसक उठी .....

कविता की गर्दन पे अपना चेहरा रगड़ते हुए वो उसके बदन से निकलने वाली खुश्बू में खो गया ….कविता की हालत बुरी होने लगी थी…टाँगों में कंपन बाद गया था…..धीरे धीरे उसके मुँह से सिसकियाँ फुट रही थी …जिस्म में उठते हुए उफ्फान को वो संभाल नही पा रही थी और उत्तेजना के मारे वो राजेश से चिपकती चली जा रही थी……

‘कवि तुम बहुत खूबसूरत हो ……मेरे सारे दोस्त अब जलेंगे ……’

कविता ने कोई जवाब नही दिया बस राजेश की बाँहों में पिघलती जा रही थी …

कविता से जब खड़ा ना हुआ गया तो उसने राजेश के कंधो को पकड़ लिया ….ये इशारा था …प्लीज़ मुझे बिस्तर पे ले चलो ….और राजेश ने भी देर नही लगाई उसे बिस्तर पे लिटा दिया और उसके पास ही बैठ गया…..शर्म के मारे कविता ने अपनी आँखें बंद कर ली राजेश ने झुक के उसके माथे को चूम लिया और कविता सिहर उठी ………

उसे सोनल की बात याद आ रही थी….राजेश जो करे उसे करने देना…….और वो अंदर ही अंदर घबरा रही थी …शरमा रही थी …कि राजेश क्या करेगा उसके साथ …ऐसा नही था कि उसे इस्त्री पुरुष के संबधों के बारे में पता नही था …पर जीवन में पहली बार जब पति अपनी पत्नी के नज़दीक जाता है सुहागरात के स्वर्णिम पलों में तो ये स्वाभाविक है कि लड़की बहुत शरमाती है …खांस कर वो लड़की जिसने कभी कोई बॉय फ्रेंड ना बनाया हो ….क्यूंकी उसके लिए हर अहसास एक नया अहसास होता है..एक नयी अनुभूति होती है …..ऐसी ही दशा थी इस वक़्त कविता की.


राजेश उसके चेहरे पे झुक गया दोनो की गरम साँसे एक दूसरे से टकराने लगी और राजेश अपनी नाक उसकी नाक से रगड़ने लगा …आह बंद आँखों में भी कविता की पुतलियाँ तेज़ी से इधर से उधर हो रही थी ….लाल सुर्ख होंठ काँपने लगे थे …..दोनो हाथों से उसने बिस्तर को जाकड़ लिया था………

राजेश फिर उपर हो गया……और उसके चेहरे को निहारने लगा …….फिर एक एक कर धीरे धीरे उसके जेवर उतारने लगा ……हर छुअन के साथ कविता सिसकती रही …………
जब सब जेवेर उतर गये तो राजेश ने झुक के उसके गालों पे होंठ रख दिए …….उम्म्म्म सिसकी कविता और अपने आप उसकी बाँहें उठी और राजेश को अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया …..

राजेश फिर कविता से अलग हो गया ……जानम इन कपड़ों में तकलीफ़ नही हो रही …कितने भारी भारी हैं ….चेंज कर लो ……और राजेश उठ के कमरे में बने वॉर्डरोब पे गया और एक पॅकेट निकाल लाया ……..

कवि …लो चेंज कर लो …….

वाक़्य में ड्रेस चाहे सिल्क की थी पर इतनी नक्काशी करी गयी थी उसपे की भारी हो गयी थी …और यक़ीनन कविता को उसमे तकलीफ़ हो रही थी ……राजेश के हाथ से पॅकेट ले कविता बाथरूम में घुस्स गयी …शीशे के सामने खुद को देख शरमा गयी और अपने कपड़े उतारने लगी ……कपड़े उतार के जब उसने पॅकेट खोला तो…….हाई राम ….ये कपड़े….कैसे पहनू …मैं उनके सामने कैसे जाउन्गि ये पहन कर…..लाइनाये देख उसकी हालत बिगड़ गयी…..शर्म-ओ-हया की लाली चेहरे पे ही नही पूरे जिस्म पे फैल गयी …….

ये लाइनाये का पूरा सेट था ….लेस वाली ब्रा और पैंटी और उपर से एक गाउन जो सिर्फ़ एक डोरी से ही बांधता था…धड़कते दिल से कविता ने पहन तो लिया पर बाथरूम से बाहर निकलने में उसकी जान आफ़त पे बन गयी …बाथरूम की सीत्कनी तो खोल ली हल्का सा खोल भी लिया दरवाजे को पर शर्म के मारे बाहर ना निकल पाई ….शादी के बाद लड़कियों के कपड़े कितने बदल जाते हैं…इसका अहसास उसे होने लगा था ….लाल रंग की लाइनाये में उसका रूप और भी दमकने लगा था …..

राजेश ने जब देखा की बाथरूम का दरवाजा खुल गया है पर कवि बाहर नही निकल रही …तो समझ गया कि शर्म का डोरा चढ़ गया होगा और उसके कदम बाथरूम की तरफ बढ़ गये …..

धीरे से वो बाथरूम में घुस गया और उसके घुसते ही कविता को झटका लगा और वो पलट गयी …

राजेश उसके करीब जा पीछे से सट गया ….और कविता की सांस उपर नीचे होने लगी …..

उसके बालों में अपने चेहरे रगड़ते हुए …रात बाथरूम में बिताने का इरादा है क्या….

कविता कुछ नही बोलती…..बस अपनी बहकति हुई सांसो पर काबू पाने की कोशिश करती रही जो और भी तेज होती जा रही थी…..

राजेश ने फिर कविता को गोद में उठा लिया और बिस्तर की तरफ बढ़ गया…कविता ने अपना चेहरा उसकी छाती में छुपा लिया …..राजेश भी अपने कपड़े बदल चुका था …इस वक़्त वो सिर्फ़ बनियान और पाजामा में था…….

राजेश ने कविता को बिस्तर पे लिटाया तो शरमा के वो पलट गयी और अपना चेहरा तकिये में छुपा लिया….

‘हाई कॉन ना मर जाए इस अदा पे…कत्ल भी करते हैं और हाथ में तलवार भी नही …’

अपने मुँह छुपाए हुए कविता मुस्कुरा उठी ….शायद जितना वो घबरा रही थी …उतना ही राजेश को तड़पने में एक अजीब सा लुत्फ़ भी आ रहा था……

राजेश उसके कंधों पे झुक उसके कंधों को चूमने लगा ……..और कविता अपना सर हिलाने लगी ..जैसे कह रही हो …मत करो ना ….क्यूँ जिस्म के उन तारों को छेड़ रहे हो जिनसे आज तक मेरा सामना नही हुआ……पर राजेश को तो उसके बदन से निकलती भीनी भीनी सुगंध सम्मोहित करती जा रही थी …..

कवि …इधर देखो ना …….राजेश उसकी गर्देन को चूमते हुए बोला……

कवि ने यूँ ही ना में गर्देन हिला दी….

राजेश… नाराज़ हो मुझ से …….चलो मैं बाहर चला जाता हूँ….

कविता यूँ पलटी जैसे भूकंप आ गया हो…सुहाग रात को अगर लड़का कमरे से बाहर चला जाए तो जाने लोग क्या क्या सोचने लगते हैं लड़की के बारे में…कवि आँखें डबडबाने लगी थी…



RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

‘अरे तूमम्म……पगली मैं तो मज़ाक कर रहा था…मैं कभी तुम से जुदा हो सकता हूँ क्या …कभी यूँ तुम्हें अकेला छोड़ सकता हूँ क्या….’ राजेश ने अपनी ज़ुबान आँखों पे फेरी और उस मदिरा से भी नशीले उसके टपकने वाले आँसुओं को चाट गया …..

दोनो एक दूसरे को देखते रहे ....कविता की झील सी गहरी आँखें बता रही थी कि कितना दर्द हुआ था उसे जब राजेश ने जाने की बात बोली थी.....

'सॉरी यार ...मैं तो बस तुम्हें छेड़ रहा था ताकि तुम अपनी झील सी गहरी आँखों में मुझे डूबने दो....'

कविता के काँपते हुए होंठ बता रहे थे कि मुस्कान की एक झलक आ के चली गयी ....

'क्या इन मदिरा के प्यालों को छू सकता हूँ.....' राजेश झुकते हुए बोला और अपने होंठ कविता के लरजते हुए होंठों के पास ले गया.....कविता की आँखें बंद हो गयी..होंठ खुल गये ..जैसे कह रहे हों...कब्से कर रहे हैं इंतेज़ार ......

और राजेश के होंठ कविता के होंठों से चिपक गये.....

लहरा उठी कविता और अपने आपने उसके हाथ राजेश के सर पे जा उसके बालों को सहलाने लगे ....होंठों का ये मिलन आगाज़ था ...कि ये दोनो अब धीरे धीरे अपनी आत्माओं के मिलन की तरफ बढ़ रहे थे.

राजेश धीरे धीरे उसके होंठों की लाली चुराने लगा बिल्कुल इस तरहा जैसे कविता के होंठों से बूँद बूँद मदिरा टपक रही हो और कविता की साँसे तेज होने लगी ...आँखों में लाल डोरे उत्पन्न होने लगे ...जिस्म में बेचैनी बढ़ती चली गयी ...हाथ राजेश के सर से हट बिस्तर को दबोच बैठे....

जैसे जैसे राजेश उसके होंठों चूस्ता रहा ....कविता का बदन मचलने लगा ...होंठों से लहरें उठ के उसके निपल्स तक जा रही थी जो कड़े होने लगे और कविता तड़प और बेकनी के मारे अपनी एडियाँ रगड़ने लगी.....

राजेश कभी उसके होंठ चूस्ता तो कभी उसके होंठों पे अपनी ज़ुबान फेरता और कविता की सिसकियाँ राजेश के होंठों तक आ दम तोड़ रही थी ........

राजेश के हाथ अब धीरे धीरे कविता के बदन को सहलाने लगे .........

राजेश का हाथ सरकता हुआ कविता के पेट तक पहुँचा और कविता का बदन अकड़ गया......उसने धीरे से कविता के गाउन की डोरी खोल दी और जैसे ही राजेश के तपते हाथों ने कविता के नंगे पेट को छुआ ....कविता ने तड़प के राजेश को अपनी बाहों में बींच लिया ...जैसे कहना चाहती हो ...प्लीज़ रुक जाओ ......या फिर ये इशारा था कि इतनी देर क्यूँ...शायद कविता खुद भी समझ नही पा रही थी ....दिमाग़ में एक डर बसा हुआ था और बदन कुछ ही माँग करने लगा था ...इन्दोनो के बीच फसा बेचारा दिल बस अपने धड़कने की रफ़्तार बढ़ाता जा रहा था..........कविता कुछ कहना चाहती थी ...उसके होंठ खुल गये और राजेश की ज़ुबान अंदर घुसती चली गयी ...जैसे उसे उसका दूसरा घर मिल गया हो........

अपने पेट पे राजेश के हाथों की थिरकन उसे मदहोश करती चली जा रही थी ....

राजेश की ज़ुबान कविता के मुँह के अंदर घूमने लगी और ना चाहते हुए भी कविता की ज़ुबान उससे मेल जोल बढ़ाने लगी .......राजेश अब अपनी ज़ुबान पीछे करता चला गया और कविता की ज़ुबान आगे बढ़ती चली गयी ....इतना कि राजेश के मुँह में घुस गयी और राजेश के होंठों ने उसपे अपना क़ब्ज़ा बना लिया और उसकी ज़ुबान को चूसने लग गया....

अहह ये सिसकी कविता के दिमाग़ में ही दबी रह गयी क्यूंकी ज़ुबान पे तो राजेश ने क़ब्ज़ा कर लिया था और ऐसे चूस रहा था जैसे ज़ुबान शहद टपका रही हो ......

कविता का जिस्म नागिन की तरहा लहराने लगा.....हर बीतते पल के साथ उसका जिस्म कुछ और माँग रहा था जिसे वो समझ नही पा रही थी ....और उसकी बाँहों का कसाव राजेश पे बढ़ता चला गया जैसे उसके जिस्म के अंदर समा जाना चाहती हो....

राजेश बहकता जा रहा था ...जाने क्यूँ उसी वक़्त उसके दिमाग़ में एक बिजली सी कोंधी और उसे अपने डॅड की एक बात याद आ गयी ....सुहागरात का मतलब जिस्मो का मिलन नही होता ...ये रात होती है एक दूसरे के करीब आने की .....लड़की के दिमाग़ में हज़ारों डर होते हैं...उन डर को दूर करने की उसे ये अहसास दिलाने की कि तुम उसे कितना प्यार करते हो ...लड़की को ये कभी नही लगना चाहिए कि तुम सेक्स के भूके हो ...वरना वो इज़्ज़त नही बन पाएगी ...जिसकी तुम सारी जिंदगी उससे अपेक्षा करो ....हां अगर लड़की की हरकतों से इस बात का अहसास हो कि वो भी इस मिलन को चाहती है तभी आगे बढ़ो

राजेश ढीला पढ़ गया ....उसने कविता के होंठों से अपने होंठ अलग कर दिए ......

कविता जो खो चुकी थी एक नशे में उसे एक झटका सा लगा जब राजेश ने उसके होंठों को आज़ाद किया...उसकी बाहों की गिरफ़्त राजेश पे ढीली पड़ गयी ....उसकी आँखें खुल गयी .........और उन आँखों में एक सवाल था ...रुक क्यूँ गये...जिसे राजेश समझ गया फिर भी आगे नही बढ़ा ...और कविता के गाउन की डोरी बाँध दी ...

कविता जो जिस्म में उठते हुए तुफ्फान से घबरा रही थी...आगे आनेवाले पलों का सोच घबरा और डर सा रही थी .....उसे ना जाने क्यूँ एक सकुन सा मिला जब राजेश ने उसके गाउन की डोरी बाँध दी ....फिर एक नया डर उसके अंदर जनम ले बैठा ...क्या मुझ से कोई ग़लती हो गयी ...जो ये मुझ से अलग हो गयी .....दिमाग़ में आँधियाँ उड़ने लगी ....दिल बेचैन होने लगा ....इस वक़्त वो सोनल से बात करना चाहती थी ..पर ये मुमकिन ना था.....

राजेश...क्या सोचने लग गयी ....वो उसे अंदर उमड़ते हुए तुफ्फान को पहचान गया था....और अपने डॅड का मन ही मन शुक्रिया अदा कर रहा था ...जिनकी वजह से आज वो एक ज़्यादती करते करते रुक गया था....

कवि क्या जवाब देती की वो क्या क्या सोच रही है ...बस चुप रही और आँखों में सवाल भरे राजेश को देखती रही ....

राजेश बिस्तर से उतर गया और कविता का डर और भी बढ़ गया......

'इधर आओ ...' उसने कविता का हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ ले खिड़की पे पहुँच गया ...परदा हटाया तो सामने चाँद अपनी किरणें नीचे समुद्र पे फेंक रहा था और समुद्रा की लहरें उछल उछल उन किरणों को लपकने की कोशिश कर रही थी .....कितना सुंदर समा था ....अगर कोई कवि इस वक़्त इस समा को देखा तो खुद ब खुद उसके जेहन में एक कविता जनम लेलेति ...

'वो सामने देखो ......आज वो चाँद कितना जल रहा होगा ........जानती हो क्यूँ.....वो चाँद तो सारी दुनिया के लिए है जो अपने चेहरे पे छाए दाग छुपाने के लिए बादलों की ओट में छुपता फिरता है ....पर उस कायानात को बनानेवाले ने एक चाँद और बनाया है ......जिसकी छटा ने मेरे जीवन में चाँदनी ही चाँदनी भर दी है......और वो चाँद आज मेरे पास है मेरे पहलू मैं है ...मेरी बाँहों में समाया हुआ है ......'

कविता ने नज़रें घुमा के राजेश को देखा ......और शर्मा के फिर सामने लहरों की उछल कूद देखने लगी ....

कवि .......सॉरी ....पर मेरी भी ग़लती नही ...तुम इतनी हँसीन और खूबसूरत हो मैं बहक गया था

कविता एक दम पलटी और राजेश के मुँह पे हाथ रख दिया ....'आप क्यूँ सॉरी बोल रहे हो ...मुझ से ही कोई ग़लती हो गयी होगी .......'

कविता के दिल का दर अब ख़तम हो चुका था ....वो जान गयी थी ....उसे ऐसा जीवन साथी मिला है जो हमेशा उसे प्यार करता रहेगा ...

' तो बंदा क्या एक गुस्ताख़ी कर सकता है ....इन मे के प्यालों में भरी मदिरा का पान कर सकता है....' कविता के होंठों पे पे अपनी उंगले फेरते हुए राजेश बोला और कविता शरमा के उसकी छाती पे अपना मुँह छुपा बैठी....

छाया है हुसनो इश्क़ पे एक रंगे बेखुदी
आते है जिंदगी में यह आलम कभी कभी

कविता ये अल्फ़ाज़ सुन मुस्कुरा उठी और सर उठा राजेश की तरफ देखने लगी जो उसके खूबसूरत चेहरे को निहार रहा था ....चुंबन की इज़ाज़त माँगने के बाद अब उसने कोई जल्दी नही दिखाई थी ...बस कविता को बाँहों में भरे सामने समुद्र पे चंद्रकिरणों के नृत्य को देख रहा था .........

वक़्त गुजर रहा था ...लेकिन दोनो एक दूसरे की बाँहों में खो चुके थे ......एक दूसरे की धड़कन को महसूस कर रहे थे ......एक दूसरे के जिस्म से निकलती खुसबू से खुद को सराबोर कर रहे थे...

जिस्मो के मिलन तो होते रहते हैं...यहाँ रूहों का मिलन हो रहा था ....वाक़ई में ये सुहाग रात एक असली सुहाग रात थी ....जहाँ दो लोग जो कल अंजान थे ......आज एक दूसरे की धड़कन बन चुके थे......दो जिस्म और एक जान बन चुके थे ......

इन दोनो को देख चाँद को रश्क हो रहा था ....उसकी चाँदनी दुनिया के लिए थी उसके लिए नही ......और यहाँ राजेश की बाँहों में उसका चाँद अपनी चाँदनी पूरे कमरे में ही नही बिखेर रहा था ....साथ ही साथ उस घटा में विचरण करते चाँद को कॉंपिटेशन दे रहा था ...क्यूंकी लहरों ने उछलना बंद कर दिया था ....वो तट की तरफ दौड़ रही थी खांस कर उस खिड़की की तरफ ...जहाँ राजेश की बाँहों में समाया हुआ चाँद ....अपनी किरणों से उनको सामोहित कर रहा था.........

राजेश....कवि आज मैं बहुत खुश हूँ ....तुम नही जानती जब तुमने शादी के लिए हां करी थी ...मुझे ऐसा लगा था ....जैसे मुझे एक जीवन मिल गया हो एक मकसद मिल गया हो ....और वो मकसद है सारी जिंदगी तुम्हारी ज़ुल्फो की छाँव में खोए रहना ....मेरी जिंदगी में तुमसे पहले कोई लड़की नही थी ....और अब तुम्हारे आने के बाद ...किसी और के आने का सवाल ही नही उठता ...मैं बस सिर्फ़ तुम्हारा हूँ...सिर्फ़ तुम्हारा ...



RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

राजेश........कविता के लरजते हुए होंठ उसका नाम पुकार उठे और एक शाद घुल गया राजेश के कानो में और उसने कस के कविता को अपनी बाँहों में भींच लिया

अहह हड्डियाँ तक चरमरा गयी थी कविता की ...लेकिन इस जकड़न में एक सकुन था ....अपनेपन का एक अहसास था.......

राजेश ने उसे अपनी बाँहों पे उठाया और बिस्तर की तरफ बढ़ गया.

कविता को बिस्तर पे लिटाने के बाद ........राजेश उसके चेहरे को निहारने लगा.....

कविता को बहुत शर्म आने लगी थी.....ऐसे क्यूँ देख रहे हो ........उसने अपना चेहरा दोनो हाथों से ढांप लिया....

राजेश ने प्यार से उसके दोनो हाथ हटाए.....देख रहा हूँ बनानेवाले ने कितनी फ़ुर्सत से तुम्हें बनाया ......ये झील से गहरी आँखें....ये मदमाते हुए होंठ...ये गुलाबी पन लिए तुम्हारे सुख गाल ......ये लाल बिंदिया जो तुम्हारे माथे पे सजने का गौरव ले रही है ...ये कमान की तरहा तनी हुई भवें जो हर पल मुझे पे तीर पे तीर छोड़ती जा रही हैं.......कुदरत का ये बेमिसाल तोहफा जो मुझे मिला है ....दिल करता है बस देखता ही रहूं...देखता ही रहूं........

कवि...हाई क्या क्या बोल रहे हो...शर्म आ रही है.....

राजेश.....अब कैसी शरम जाने मन अब तो हम एक है .....

राजेश कविता के चेहरे पे झुकने लगा और कविता ने भी अपने होंठ खोल उसका स्वागत किया और दोनो के होंठ एक दूसरे से चिपक गये .......अब कविता राजेश का साथ देने लगी और जब राजेश उसका निचला होंठ चूस्ता वो राजेश का उप्परवाला होंठ चूसने लगती ....दोनो की साँसे एक दूसरे में घुलने लगी.....कविता राजेश के बालों को सहलाने लगी और राजेश के हाथ उसके जिस्म पे फिरने लगे ................

राजेश ने फिर कविता के गाउन की डोरी खोल दी और उसकी नाभि पे हाथ फेरने लगा .........कविता लरज के रह गयी और दोनो के चुंबन में तीव्रता आने लगी.........ज़ुबाने एक दूसरे से मिलने लगी ....कभी एक की ज़ुबान दूसरे के मुँह में घुसती तो कभी दूसरे की ....ज़ुबानो का खेल आपस में काफ़ी देर तक चलता रहा .........और कविता के बदन में उत्तेजना का संचार होने लगा ......वो अपने उप्पर अपना बस खोती चली जा रही थी .......उसके हाथ राजेश के बालों से उतर उसकी पीठ को सहलाने लगे थे.......

काफ़ी देर तक दोनो एक दूसरे के होंठ चूस्ते रहे अरे फिर जैसे ही राजेश ने उसके होंठों को छोड़ उसकी थोड़ी को चूमते हुए अपने होंठ उसकी गर्दन पे रखे ....कविता की दबी हुई सिसकियाँ बाहर निकलने लगी ....अहह उम्म्म्मम उफफफफफफ्फ़

कविता की गर्दन को चाटते हुए राजेश उसके उरोजो की उपरी सतह पे अपनी ज़ुबान फेरने लगा जो अभी तक ब्रा में क़ैद थे ......एक तरफ वो उसकी नाभि पे हाथ फेर रहा था और दूसरी तरफ अपने होंठों की गर्माहट उसके उरोजो पे पहुँचा रहा था ...ये दो तरफ़ा अहसास कविता से सहा नही जा रहा था और उसके मुँह से बदस्तूर उँची उँची आवाज़ में सिसकियाँ निकल ने लगी.....

ओह म्म्म्मँमाआआ हहाइईइ क्या कर रहे हो....अहह मुझे कुछ हो रहा है.......प्लीज़ ....मत करो.....

लेकिन राजेश रुका नही और उसका दूसरा हाथ कविता के उरोज़ पे आ गया........अहह

राजेश का दूसरा हाथ धीरे धीरे उपर सरकने लगा और हर पल के साथ कविता की धड़कन तेज होती चली गयी .....और जैसे ही दूसरा हाथ भी दूसरे उरोज़ को सहलाने लगा ......कविता मचल उठी और अपनी एडियाँ रगड़ते हुए बिस्तर को नोचने लगी अपना सर सिसकते हुए तकिये पे इधर से उधर पटाकने लगी ....

अहह सस्स्स्सिईईईईईईईई उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़

और राजेश के हाथों का दबाव उसके उरोजो पे बढ़ने लगा ...निपल इतने कड़े हो गये कि ब्रा को फाड़ बाहर निकलने की कोशिश करने लगी ............कविता का जिस्म कमान की तरहा उठ गया जब राजेश ने ब्रा समेत ही एक निपल को अपने दाँतों से पकड़ लिया ......

उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ म्म्म्मा आआआअ कविता ने ज़ोर से राजेश के सर को अपने उरोज़ पे दबा डाला और अपने पैर पटाकने लगी........

कविता के गुदाज सख़्त उरोज़ और कड़े निपल को ब्रा समेत ही पा कर राजेश पागल होने लगा और ज़ोर ज़ोर से कविता के निपल को ब्रा समेत ही चूसने लग गया .

अहह ओह कविता के मुँह से लगातार सिसकियाँ निकल रही थी ...उसके बर्दाश्त की सीमा ख़तम होती जा रही थी ...निपल से सीधा तरंगे उसकी अन्छुइ कट पे प्रहार कर रही थी .....वो अपनी जाँघो को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी ............

राजेश ने कविता को थोड़ा उपर उठाया और जब दोनो की आँखें चार हुई तो कविता ने शर्मा के आँखें बंद कर ली...चेहरे पे छाई लाल की लालिमा और काँपते होंठ बहुत कुछ कह रहे थे....

राजेश ने उसकी बाजू को सहलाते हुए उसके गाउन को कंधों से नीचे सरका दिया और अपने हाथ पीछे ले गया और ब्रा के हुक खोल दिए …..जैसे ही ब्रा ढीली पड़ी …..शरम के मारे कविता उठ के राजेश से चिपक गयी और राजेश के हाथ उसकी नंगी पीठ को सहलाने लगे …….और अपने होंठ कविता के कंधे पे रगड़ने लगा …..माआहह उम्म्म्ममम कविता उसकी इस हरकत पे सिसक पड़ी ………



RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

राजेश फिर उस से अलग हुआ ….कविता के गाउन को खींचने लगा तो कविता ने अपनी गान्ड उपर उठा ली उसकी मदद करने के लिए और पल भर में गाउन और ब्रा बिस्तर के कोने में पड़े थे …….कविता शरमा के बिस्तर पे ओंधी गिर पड़ी और राजेश ने अपनी बनियान उतार फेंकी ……..
इस वक़्त कविता के जिस्म पे सिर्फ़ एक पैंटी रह गयी थी ….राजेश बिस्तर से उतरा और अपना पाजामा उतार सिर्फ़ अंडरवेअर में रह गया और बिस्तर पे बेड कविता की पीठ को चूमने लगा …..
झनझणा गयी कविता …..अहह सिसकते हुए अपने चेहरे को तकिये पे दबाने लगी ……
उसकी पीठ को चूमते हुए …..राजेश जब सरकता हुआ उसकी कमर तक पहुँच तो तो कविता ने बिस्तर को मुठियों में जाकड़ लिया.

तभी कमरे के दरवाजे पे ठक ठक होने लगी ………..दोनो फट से अलग हुए ….कविता तो गाउन पहन कर बाथरूम में घुस गयी …..

राजेश ने अपने कपड़े पहने फटाफट और दरवाजा खोला ….सामने आरती खड़ी रो रही थी…….

‘क्या हुआ माँ…….’

‘बेटा तेरे पापा…….को हार्ट अटॅक हुआ है …जल्दी कुछ कर ……..’ घबराहट में आरती ने आंब्युलेन्स के लिए फोन भी नही किया था….राजेश भागता है अपने डॅड के कमरे में जो इस वक़्त अपनी छाती दबाए दर्द से तड़प रहा था ……….उसका पूरा जिस्म पसीने से लथपथ था …..

राजेश विजय को अपनी बाँहों में उठाता है और बाहर अपनी कार में उसे लिटा कर हॉस्पिटल की तरफ तेज़ी से निकल पड़ता है ….आरती साथ नही जा पाती क्यूंकी घर में बहू अकेली रह जाती …….

बाथरूम में खड़ी कविता ने सब सुन लिया था......घबरा गयी वो जाने क्या क्या उसके मन में आने लगा .....आज ही वो इस घर में आई और आज ही उसके ससुर को हार्ट अटॅक हुआ ...कहीं कुछ बुरा ना होज़ाये ...तो क्या इसका इल्ज़ाम उसपे लगेगा .....

बाथरूम से बाहर निकल वो अपना सलवार सूट पहन लेती है और गाड़ी देखती है ....आधी रात हो चुकी थी .....दिल कर रहा था सोनल से बात करे पर इस वक़्त मुनासिब नही था....वो हाल में चली गयी जहाँ आरती बैठी आँसू बहा रही थी....

कवि ...आरती के गले लगते हुए ...कुछ नही होगा पापा को माँ .....कुछ नही होगा ....भगवान इतना निष्ठुर नही है जो मेरे सर से पापा का साया उठा ले ...कुछ नही होगा उन्हें.....

तभी राजेश का फोन आता है ........विजय आइसीयू में अड्मिट हो गया था...इस वक़्त उसकी हालत अटेबल थी ...पर डॉक्टर्स ने 24 घंटे आइसीयू में अब्ज़र्वेशन पर रखा था जो कि ज़रूरी था.......

राजेश से फोन पे बात कर आरती की जान में जान आती है .......और वो सोचने लगती है ...आज शाम को जब विजय की बात सुनील से हुई थी ..तब से वो बहुत परेशान था....ऐसी क्या बात हुई थी दोनो के बीच......वो इस बात का कोई जिक्र कविता से नही करती......


जब से विजय ने सुनील से कविता के पिता का नाम पूछा था ....तब से उसके अंदर एक तुफ्फान उठ गया था....अंजाने में उस से एक गुनाह हो गया था........काश ये बात वो राजेश और कविता की शादी से पहले पूछ लेता ....लेकिन कहते हैं ना होनी हो कर रही है ....आइसीयू में बिस्तर पे लेटे उसके सामने वो पल आ गये जब उसे आरती से शादी करने का फ़ैसला लिया था............आरती बंगलोर में एमबीबीएस कर रही थी ....जब वहाँ के एक डॉक्टर ने नशे की हालत में आरती का रेप कर डाला था और उसी रात वो गायब भी हो गया था.....उस रेप का आरती पे इतना गहरा असर हुआ था कि वो कोमा में चली गयी थी ..........और उसी दौरान उसके पेट में एक बच्चा जनम लेने लगा था......कोमा की हालत में आरती का अबॉर्षन नही किया जा सकता था...बच्चा उसके पेट में पलता रहा और जब आरती कोमा से बाहर आई तो 6 महीने गुजर चुके थे....

होश में आने के बाद जब आरती को पता चला कि वो नाजाएज बच्चे की माँ बनने वाली है तो उसने ख़ुदकुशी करने की कोशिश करी ...पर सही वक़्त पे विजय ने उसे बचा लिया .......बड़ी मुश्किल से उसने आरती को संभाला ....और उसने वो कदम उठाया जो उसके लिए भी आसान नही था...वो आरती से बहुत प्यार करता था........उसके लिए अपनी जान तक दे सकता था.......विजय ने अपनी गर्ल फ्रेंड को छोड़ दिया और आरती से शादी कर ली .....आरती और कोई नही उसकी छोटी बहन थी ....आरती के रेप की खबर और उसके नाजाएज बच्चे के बारे में जान उसके माँ बाप दोनो ही ये गम संभाल ना सके और एक एक कर इस दुनिया से रुखसत हो गये....

विजय आरती को मुंबई ले आया और एक नये सिरे से जिंदगी शुरू की ..........बच्चा होने के बाद आरती ने बच्चे को मारने की कोशिश करी पर विजय ने ऐसा नही होने दिया और उसने आरती के दिल में बच्चे के लिए प्यार पैदा किया क्यूंकी अब वो उस बच्चे का पिता था........डेलिवरी के वक़्त आरती को कॉंप्लिकेशन हो गयी थी जिसकी वजह से वो दुबारा माँ नही बन सकती थी .....

विजय नही जानता था कि वो रेपिस्ट भी मुंबई आ चुका है और एक बहुत बड़ा डॉक्टर बन चुका है .....यूँ कहिए कि उस रेपिस्ट के दिन बचे थे इसलिए कभी भी विजय और आरती का उस रेपिस्ट से सामना नही हुआ .......

वो रेपिस्ट और कोई नही था ........समर था.........

इसलिए जब विजय को इस बात का पता चला कि कविता का बाप समर है ...वो सह नही पाया ....अंजाने में उसने भाई और बहन की शादी करवा दी थी .........



RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

ये अहसास उसे बहुत तडपा रहा था ...उसने सुनील को भी कुछ नही बताया था इस बारे में क्यूंकी जैसे ही उसे सुनील ने कविता के बाप का नाम बताया ........विजय के हाथों से फोन छूट कर गिर गया था...........

आइसीयू के बाहर बैठा राजेश इस वक़्त विमल के साथ था....राजेश ने हॉस्पिटल पहुँचने से पहले ही विमल को बुला लिया था .....विमल राजेश को सांत्वना देता रहा की अंकल को कुछ नही होगा .....पर राजेश इस बात से परेशान था कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो उसके डॅड को हार्ट अटॅक हो गया.........क्यूंकी विजय को सालों से कोई बीमारी नही हुई थी.....


और आइसीयू में लेटा विजय ये सोच रहा था कि ये कड़वा सच वो राजेश को बताए या ना बताए ......वो अच्छी तरहा जानता था कि राजेश की सुहाग रात अधूरी रह गयी थी ...पर कितनी अधूरी ये वो अपने बेटे से नही पूछ सकता था ....जिस तरहा राजेश ....दिल-ओ-जान से कविता से मोहब्बत करता था ...ये खबर सुन कहीं ......वो कुछ कर ना बैठे ........उसे कुछ समझ नही आ रहा था ....वो क्या करे......आरती को भी ये बात नही बता सकता था...दिल की बहुत कमजोर थी ...पहले ही उसे इस बात को हजम करने में साल के साल लग गये थे कि उसकी समाज में इज़्ज़त बचाने के लिए उसके भाई ने उस से शादी की थी .........अब ये खबर तो उसकी जान ले लेगी .......

डॉक्टर ने जब देखा कि विजय सो नही रहा है और सोचों में गुम है .........तो उसने विजय को नींद का इंजेक्षन दे दिया ....ताकि उसका दिमाग़ रेस्ट कर सके वरना हालत बिगड़ भी सकते थे.......इंजेक्षन के असर से विजय सो गया .....

राजेश अपने मोबाइल से ताहिती मेसेज भेज अपना हनिमून कॅन्सल कर देता है और कुछ वक़्त बाद के लिए रखता है पर डेट कन्फर्म नही करता ........

अगले दिन शाम को विजय को डिसचार्ज कर दिया गया था......जब वो घर पहुँचा तो आरती उस से लिपट के बहुत रोई ....किसी तरहा राजेश ने आरती को संभाला कि डॅड को आराम चाहिए .....

वो हंसता खेलता विजय आज एक पत्थर सा बन गया था...उसके चेहरे की मुस्कान गायब हो चुकी थी .... राजेश और कविता की सुहाग रात जो अधूरी थी वो अधूरी ही रह गयी थी क्यूंकी दोनो विजय की तिमारदारी में लगे रहते .........कविता जैसे बहू पा आरती बहुत खुश थी ...नही जानती थी आगे क्या तुफ्फान आने वाला है ......एक हफ़्ता गुजर गया ....विजय खामोश रहा ...जब भी राजेश और कविता दोनो उसके सामने होते उसके दिल में एक टीस उठ जाती ..तड़प के रह जाता वो .......नही रहा गया उस से और उसने सुनील को फोन कर अर्जेंट्ली आने के लिए कह दिया .........सुनील सोच रहा था कि कविता के आने का टाइम हो गया है .....लेकिन विजय की कॉल से वो परेशान हो गया कि कहीं ऐसा तो नही की वो कविता को देल्ही भेजने का इरादा बदल चुके हों.........

सुनील को विजय के हार्ट अटॅक के बारे में नही पता था क्यूंकी विजय ने सख्ती से राजेश और कविता को मना कर दिया था........

चाहे सुनील उस से उम्र में बहुत छोटा था ...पर जो परिपक्वता उसने सुनील में देखी थी ...उतनी अभी राजेश में भी नही थी ....अगर थी भी तो शायद एक बाप बहुत डर रहा था अपने बेटे को सच बताने के लिए..........इस वक़्त विजय को बस सुनील ही नज़र आ रहा था जिस से वो दिल की बात कर सकता था खुल कर .....

सुनील ने अगले दिन का कह दिया और सोनल को साथ ले वो अगले दिन मुंबई की फ्लाइट में बैठ गया.......

सुनील नही जानता था कि एक तुफ्फान उसका इंतेज़ार कर रहा है ...फिर से उसे दर्द की वादियों में ले जाने के लिए.........ये तुफ्फान क्या क्या गुल खिलाएगा ...कोई नही जानता था.......

अगले दिन दोपहर तक सुनील सोनल के साथ विजय के घर पहुँच गया था .....वहाँ पहुँच के उसे पता चला विजय के हार्ट अटॅक के बारे में पता चला तो बहुत नाराज़ हुआ ........राजेश ने उससे माफी माँगी कि डॅड ने माना किया था ....आप लोग परेशान हो जाते ...पर उसे ताज्जुब हुआ कि अचानक सुनील और भाभी कैसे आ गये .....

सुनील और सोनल जब विजय से मिले तो उसने उन्हें पहले आराम करने को कहा कि शाम को बात करेंगे .....

शाम तक कविता सोनल के साथ ही चिपकी रही और पता नही कितने सवाल किए होंगे सुहाग रात के बारे में जो उसकी अधूरी रह गयी थी...

सुनील ने रमण और समर की मौत के बारे में किसी को नही बताया और सोनल को भी सख्ती से मना कर दिया था ...नही चाहता था कि कविता गम के बादलों में घिरे ...खांस कर रमण के लिए क्यूंकी वो भी तो भाई था ...हां समर की मौत का सुन तो शायद वो खुश ही होती .....

सुनील राजेश के साथ अलग कमरे में बैठ गया और विमल के बारे में जितनी जानकारी हो सकती थी लेता रहा .........

शाम को विजय ने सिर्फ़ सुनील को अपने कमरे में बुलाया..........



RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

विजय ......सुनील तुम से कुछ छुपा नही मेरे और आरती के बारे में....तब जो मैने किया था ...वो एक मजबूरी थी जो धीरे धीरे प्यार में बदल गयी ...लेकिन अब जो हुआ है वो एक गुनाह है जो अंजाने में हो गया...काश उस वक़्त मैं तुम्हें रेपिस्ट का नाम बता देता या पहले तुम से कविता के बाप का नाम पूछ लेता तो ये सब नही होता ....

जैसे जैसे विजय बोलता जा रहा था वैसे वैसे सुनील के दिल की धड़कन तेज होती चली गयी और उसके कानो में हथौड़े बजने लगे .....

विजय ने जब पूरी बात ख़तम करी तो सुनील नियती को कोसने लगा ......जिसने अंजाने में दो सौतेले भाई बहनो की शादी कर्वादी .....और राजेश उसका भी सौतेला भाई निकला......यानी आरती उसकी सौतेली माँ है ......समर के ज़रिए ......

अगर सारी बात राजेश और कविता के सामने खोली गयी तो वो जानता था कि क्या हाल होगा दोनो का ...क्यूंकी वो ये सब भुगत चुका था जब उसे अपनी असलियत का पता चला था .......नही ये दर्द वो राजेश और कविता को नही दे सकता था....

सुनील को गहरी सोच में देख ...विजय सवाल कर ही बैठा ....क्या सोचा है तुमने बेटा.....ये कड़वा सच मुझ से सहन नही हो रहा ....अगर कभी बाद में दोनो को इस सच्चाई का पता चला तो .....जाने क्या होगा ....अभी तो कुछ बिगड़ा नही दोनो का तलाक़ हो सकता है ......पर बाद में ...कहर आ जाएगा....दोनो की जिंदगी में.....

सुनील......पापा मुझे कुछ सोचने का वक़्त दो ...मैं कल इस विषय पे आपसे बात करूँगा.....

विजय...पापा......

सुनील....हां ........राजेश मेरा सौतेला भाई है ...इस लिहाज से आंटी मेरी सौतेली माँ और क्यूंकी आप मेरी सौतेली माँ के पति हैं तो मेरे भी पापा हुए ना .........ये बहुत लंबी कहानी है .....बाद में बताउन्गा.....अभी आप थक चुके हो....आराम करो ...सब ठीक हो जाएगा.....

हां आपको कुछ सकुन मिले तो .....ये जान लीजिए कि वो रेपिस्ट ....समर .......मर चुका है ....उपरवाले ने उसे उसके करमो की सज़ा दे दी है.......और उसकी मौत इन दोनो की शादी के अगले दिन ही हुई थी .........बाकी बातें कल करता हूँ.......अच्छा अब इज़ाज़त दीजिए.....


सुनील......विजय के कमरे से निकल.....सोनल के पास चला गया ...........कविता वहीं उसके पास बैठी हुई थी .........

सुनील.....कवि डियर .....मुझे तुम्हारी भाभी से कुछ ज़रूरी बात करनी है ....और फिर तुम से भी .......एक घंटे के लिए हम दोनो को अकेला छोड़ दो...


कविता...जी भैया ......अच्छा आप चाइ लोगे या कॉफी......

सुनील....ब्लॅक कॉफी पिला दे....

ब्लॅक कॉफी सुनते ही सोनल और कविता समझ गयी ....बात गंभीर है और सुनील परेशान भी है...

कविता चली गयी सुनील के लिए कॉफी लाने और सुनील...सोनल से सारी बात करने लग गया ....जैसे जैसे सोनल सुनती जा रही थी ....वैसे वैसे उसका चेहरा गुस्से से लाल पड़ता जा रहा था....

सोनल...कितनी ज़िंदगियों में जहर घोला है उस हरामज़ादे ने......क्या पता कल और कोई भाई बहन निकल आए....

सुनील...अब होनी तो कोई टाल नही सकता ...पर मसला अब ये है कि क्या करें....क्या राजेश और कवि को सब कुछ बता दें........विजय पापा यही पूछ रहे थे इसीलिए उन्होंने मुझे बुलाया...

सोनल....पापा.....

सुनील....खुद ही सोच लो कैसे वो पापा हुए ......अब बताओ क्या करें........

सोनल...मेरा तो दिमाग़ फटने लग गया है...अगर हम राजेश और कवि को सब कुछ बता देंगे तो तुफ्फान आ जाएगा दोनो की जिंदगी में अभी शादी को दिन ही कितने हुए हैं........

सुनील...हां अगर बाद में पता चला तो शायद कहीं और भी बड़ा तुफ्फान ना आ जाए.........ये बातें छुपती नही कहीं ना कहीं से पता चल ही जाती हैं...पता नही वक़्त ने क्या सोच रखा है हम सब के लिए...

सोनल.....दीदी से बात करनी पड़ेगी .....और सोनल सूमी का नंबर मिला लेती है .............फिर दोनो सूमी को सब बतातें है और क्या करना है पूछते हैं....

सूमी भी परेशान हो जाती है ....और सोचने का वक़्त मांगती है .....


ये दोनो अभी फोन बंद ही करते हैं कि कवि सुनील के लिए कॉफी ले आती है और इनके पास बैठ जाती है ....

कविता...भाई ...आपने कुछ बात करनी थी ....

सुनील...कॉफी तो पीने दे यार .....आराम से करूँगा....ये बता राजेश क्या कर रहा है....

कविता...बुलाऊ क्या...ऑफीस का कुछ काम देख रहे थे.......

सुनील....नही रहने दे...जब फ्री हो जाए तब बताना.....

तबी सूमी का फोन आता है ....वो सुबह की फ्लाइट से आ रही थी........

कविता ...भाई कुछ चाहिए हो तो आवाज़ देदेना ...मैं किचन में मम्मी की हेल्प कर रही हूँ डिन्नर बनाने के लिए....

सोनल...मैं भी चलती हूँ....

कविता...ना भाभी आप तो भाई के पास ही बैठो .....बता नही रहे पर मैं जानती हूँ ...परेशान हैं किसी बात को लेकर ....वैसे भी आप पहली बार मेरे घर आई हो.....आपको कैसे काम करने दूं....

सोनल...बहुत बड़ी हो गयी है....हां.....

कविता...अरे नही आप से हमेशा छोटी ही रहूंगी.....अच्छा चलती हूँ.....

कविता के जाने के बाद सुनील कॉफी पीता रहा और दोनो इसी मसले पे वादविवाद करने लगे ...पर कोई हल निकलता नज़र नही आ रहा था....

सुनील और सोनल बातें कर रहे थे की सुनील बोला .....मुझे राजेश से अकेले में कुछ बात करनी है ........

सोनल.....क्या .....बताने जा रहे हो उसे ??

सुनील......नही जनरल बात करूँगा .......जानना चाहता हूँ...वो इन्सेस्ट के बारे में क्या सोचता है ......और घुमाफिरा के तुम कविता से बात करो ....कोई भी एक कहानी सुना देना ....हमारी ही कहानी सुना देना ...कहना तुम्हारी किसी सहेली की है ......और उसका रिक्षन देखना .......वो तुम्हें बहुत मानती है खुल के बात करेगी तुमसे ....दोनो का रिक्षन देखने के बाद डिसाइड करेंगे ....क्या करना है और सुबह तक सूमी भी आ जाएगी ......मैं एक काम करता हूँ राजेश को बाहर ले जाता हूँ ड्रिंक्स के लिए....



RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

राजेश अपने काम से फ्री हो चुका था ........सुनील ने विजय से इज़ाज़त ली अकेले में कि वो राजेश को बाहर ले जा रहा है ......ड्रिंक्स के लिए ....पने को तो दोनो घर में भी पी सकते थे ...पर सुनील को जो महॉल चाहिए था वो नही मिल पता.....विजय समझ गया ...बस इतना ही बोला बड़े हो चुके हो हर बात के लिए माँ की इज़ाज़त ज़रूरी नही होती ....और तुम दोनो तो जीजा साले हो .......पर बाहर ज़्यादा मत पीना........

सुनील....यही तो तय करना है ...कॉन सा रिश्ता रखें....जीजा साले का या भाई भाई का........और लिमिट में ही रहेंगे......


सुनील राजेश को बाहर ले गया......राजेश को भी कोई आपत्ति नही थी ......इस बहनें दोनो और करीब हो जाएँगे ...वो सुनील के साथ चल दिया.......दोनो एक पॉश बार में चले गये ...पहली ड्रिंक तक तो इधर उधर की बातें होती रही ......और फिर सुनील ने जैसा सोचा था वैसा बॉम्ब फोड़ ही दिया....

सुनील.....राजेश कभी इन्सेस्ट के बारे में सुना है ?

राजेश इस सवाल पे कुछ पल सुनील को देखता ही रहा ........कुछ पल सोचता रहा ....ये क्या पूछ रहा है ...सुनील ......एक बेकार वीआर्ड फॅंटेसी है लोगो की ...पता नही लोग क्या क्या सोचते हैं....

सुनील....नही हक़ीक़त में भी ऐसा हो जाता है .....यार वी आर अडल्ट्स कॅन डिसकस ऑन एनी टॉपिक.....खुल के बात कर ......

राजेश कुछ पल सोचता रहा.......पता नही ये सब मुझे बहुत अजीब लगता है ...कैसे होते होंगे वो लोग ...जो इस तरहा के रिश्ते रखते हैं.....माना जब समझ नही था तब कुछ भी होता था ....पर समझ की स्थापना भी इसीलिए हुई ...कि ये रिश्ते ग़लत हैं...तभी तो समझ ने क़ायदे क़ानून बनाए की जिंदगी किस तरहा जिया करें.....

सुनील.....अगर समझ की बात करते हो .....तो कर्नाटका में ......मामा की शादी पहली भांजी से की जाती है .......फिर ये क्या है ...इन्सेस्ट नही है क्या!!!!!!!

राजेश उसकी तरफ देखता रहा पर कुछ ना बोला.......

सुनील.....मैं एक बहुत करीबी को जानता हूँ......जहाँ भाई बहन की शादी हुई ...दोनो बहुत खुश हैं............

राजेश .....शायद करोड़ो में कोई एक आध किस्सा हो ......ये सब समझ के सामने खुल के तो नही आता ...इसलिए पता नही .....

सुनील राजेश को अपनी कहानी पूरी डीटेल में बताता है .......एक दोस्त की कहानी कह कर .....

राजेश सुनता रहता है ...बीच में उसने एक दो पेग फटाफट लगा लिए............जब सुनील ने सारी बात ख़तम करी तो उससे पूछा ..........अब बताओ ...किसकी ग़लती थी...क्यूँ हुआ ऐसा रिश्ता.....


राजेश......शायद अगर दो लोग आपस में प्यार करते हैं और इस तरहा के हालत हो जाएँ तो कोई बुराई नही है ....पर जो रिश्ते वासना पे आधारित होते हैं ..उनसे मुझे सख़्त नफ़रत है ....इसीलिए कभी कोई गर्ल फ्रेंड नही बनाई .....

सुनील ....ह्म्म्मम एक और किस्सा है .......वो इनके दो सौतेले भाई बहन का है ...जिन्हे पता नही था ....ना ही परिवार को भी पता था ...जब तक दोनो की शादी नही हो गयी...और शादी के कुछ दिन बाद पता चलता है ...दोनो परिवार से अंजाने में कितनी बड़ी ग़लती हो गयी ....अब दोनो परिवार इस सोच में पड़े हैं कि उन्हें सच बताएँ या नही .........क्या होना चाहिए .....

राजेश...मेरे ख़याल से दोनो को सच अभी बता देना चाहिए ....और उन्दोनो पे छोड़ देना चाहिए ...कि वो क्या करना चाहते हैं......

सुनील...क्या ये इतना आसान होगा ...उस लड़की के बारे में सोचो ....जो सुहागरात मना चुकी हो ...और बाद में जब उसे और उसके पति को सच्चाई का पता चले....और उसका पति उसे छोड़ने का फ़ैसला ले ले ...क्या होगा उस लड़की का........क्या वो जी पाएगी.....

राजेश....जी तो वो दोनो तब भी नही पाएँगे ...अगर ये बात उन्हें बाद में पता चली .....क्या विश्वास रह जाएगा उन्हें अपने बड़ों पे ...जिन्हे सब पता चल गया फिर भी कुछ नही बताया....तब तो दोनो बिखर जाएँगे ...शायद कभी सम्भल ना पाएँ....

अब सुनील सीरीयस हो गया.......राजेश जो बोल रहा था सही बोल रहा था...बारूद अगर फटना है तो जितना जल्दी फटे उतना नुकसान कम होगा ...बाद में अगर कविता प्रेग्नेंट हो गयी ...और तब कुछ ऐसा हो गया ...तो क्या होगा.....

सुनील फिर बातों का रुख़ कहीं और कर देता है ...और एक दो ड्रिंक के बाद दोनो घर पहुँच जाते हैं जहाँ सभी खाने पे इंतेज़ार कर रहे थे.......खाने के दौरान सुनील सोनल को इशारा कर देता है कि रात को कविता को अपने पास ही रखे और विजय को इशारे में कह देता है की राजेश को बातों में उलझाए रखे जब तक कविता सोनल के साथ सो नही जाती ......

खाने के बाद ......विजय राजेश को अपने कमरे में ले गया ....कविता अपने बेडरूम को ठीक करने जाने लगी तो सोनल ने उसे कुछ देर बाद आने को बोल दिया .....

इस बीच सोनल और सुनील की बात हुई .......तो कविता का नज़रिया सामने आ गया ...वो ऐसे रिश्ते के बिल्कुल खिलाफ थी ...उसके हिसाब से अभी एक दम दोनो को अलग कर देना चाहिए ....अगर वक़्त ...उनके दिल में प्यार के बीज को संजोए रखता है ....तो उसे वक़्त पे छोड़ देना चाहिए ..लेकिन जान भुज कर सच को छुपाना अपराध होगा......

सोनल से कविता का नज़रिया सुन....सुनील मन में फ़ैसला कर लेता है ......अब उसे सूमी का इंतेज़ार था ......कि वो क्या कहती है.....

सुनील ने इस रात को कविता और राजेश को दूर ही रखा था ...क्यूंकी कविता के जो ज़ज्बात सोनल ने बताए थे वो सुन कर सुनील हिल गया था और ...ये ज़रूरी हो गया था कि उनके बीच जिस्मानी रिश्ता अभी कायम ना हो सके ...क्यूंकी अगर ये हो जाता तो आगे जा कर बहुत भयानक नतीजे निकलने की उम्मीद थी ..जिनका सामना करने की सुनील में हिम्मत नही थी........

ये रात सुनील और सोनल ने आँखों में ही काट दी ...क्यूंकी कल ....शायद एक नया तुफ्फान इनकी जिंदगी में आनेवाला था .....इनकी तो इनकी ...खांस कर राजेश और कविता की जिंदगी में ....जो ये टाई करेगा ...आगे जा कर इनकी जिंदगी का रुख़ क्या होगा......

अगले दिन 12 बजे तक सूमी पहुँच गयी ...और उसके आने पे सभी हैरान हुई ......खांस कर राजेश ........आख़िर हो क्या रहा है ......पहले सुनील और सोनल का आना ...फिर सुमन का आना और घर में इनके आने की किसी को खबर ना होना.....दिल में घबराहट फैल गयी ...उसे सुनील की बातें याद आने लगी जो कल बार में हुई थी ...क्या मक़सद था उन बातों का ...कहीं सुनील इनडाइरेक्ट्ली उसे कुछ बता तो नही रहा था......नही नही ऐसा नही हो सकता .....पर कुछ तो बात है.......दिमाग़ फटने लग गया उसका..

सुमन से मिल कविता बहुत खुश हुई और आरती भी

कुछ देर इधर उधर की बातें सब के बीच हुई फिर सुनील सोनल और सुमन को ले कर एक कमरे में बंद हो गया.........और राजेश के दिल की धड़कने बंद हो गयी ......वो कविता से बात करना चाहता था अकेले में पर मौका ही नही मिल रहा था......

दो घंटे तक ये तीनो आपस में वाद विवाद करते रहे ......फिर सुनील बाहर निकल आया और सीधा विजय के पास चला गया ........

सोनल ने कविता को अंदर बुला लिया .............

करीब 2 घंटे तक विजय और सुनील की बात होती रही ....सुनील ने अपना पूरा इतिहास उसे बता दिया ...कैसे वो राजेश का सौतेला भाई हुआ और क्या क्या हुआ ...क्या क्या उसकी भावनाएँ थी सूमी से शादी करने से पहले और किन हालत में उसे सोनल से शादी करनी पड़ी ...जो दुनिया के लिए उसकी सगाई बहन है पर वास्तव में सौतेली है .....और समर के आक्सिडेंट....उसका कोमा में होना ...और कोमा से होश में आने के बाद उसका स्यूयिसाइड करना ....सुनील बोलता जा रहा था और विजय आँखें फाडे और मुँह खोले सब सुनता जा रहा था ...एक इंसान की वजह से क्या क्या हुआ ...ये उसके बर्दाश्त से बाहर हो चुका था और विजय समझ गया कि वक़्त आ चुका है राजेश को सब सच बताने का .....अगर राजेश और कविता के बीच सच्चा प्यार है तो ये सच उन्हें जुदा नही कर पाएगा ...लेकिन अगर .....ये सच उन्हें बाद में पता चला तो कयामत भी आ सकती थी ...विजय ने आरती को बुलवा लिया और अपना फ़ैसला उसे सुना दिया ....आरती बहुत रोई .....पर राजेश और कविता की आगे आनेवाली जिंदगी के बारे में सोच उसने दिल पे पत्थर रख लिया ......



RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी - - 07-20-2019

अब सवाल था राजेश को ये सच कॉन बताएगा ........दो ही लोग हो सकते थे विजय या सुनील.........

सुनील ने ये ज़िम्मेदारी विजय को दी .....और कमरे से बाहर निकल आया ...नीचे हाल में बैठा राजेश परेशान हो रहा था ....कि आख़िर हो क्या रहा है ......सुनील ने राजेश को विजय के पास जाने को कहा और धड़कते दिल से .......आनेवाले समय का इंतेज़ार करने लगा..........

कुछ देर बाद सोनल उसे बुलाने आ गयी .........सोनल का चेहरा बता रहा था कि तूफान आ चुका है ........अपने आप को हिम्मत देते हुए सुनील अंदर चला गया .....

सुनील अंदर पहुँचा तो कविता उस से लिपट ज़ोर ज़ोर से रोने लगी ........

कविता ...भाई मुझे यहाँ से ले चलो ..मैं ये पाप नही कर सकती ....अपने ही भाई के साथ ......ओह नो.........ये सब आपने पहले क्यूँ नही जाँच करी ....( वो बेतहासा सुनील की छाती पे मुक्के बरसाने लगी ...इस बात की परवाह किए बेगैर कि सुनील को कितनी चोट लग रही है ...जिस्म से ज़्यादा उसका दिल घायल था ......उसकी आँखों में बसी नमी सुमन और सोनल दोनो देख रही थी ....दोनो के दिल रो रहे थे क्यूंकी अंदर ही अंदर सुनील रो रहा था.........)

सुनील......होनी को कॉन टाल सकता है गुड़िया....मैने तो तेरा भला ही चाहा था....मुझे क्या खबर थी कि ये पहाड़ तुझ पे भी आ कर गिरेगा .......काश उस वक़्त मैं समर का नाम विजय को बता देता .....तो ये सब नही होता.....मैं तेरा गुनेहगार हूँ...जो सज़ा देना चाहे दे दे ...मैं उफ्फ तक नही करूँगा.........और हो सके तो इस भाई को माफ़ कर देना.....( कहते हुए सुनील भी रो पड़ा ...क्यूंकी वो कविता के दिल की हालत अच्छी तरहा समझ सकता था.......)

कविता...भाई मेरा दम घुट रहा है...मुझे अभी यहाँ से ले कर चलो ...इसी वक़्त मैं एक पल के लिए भी इस छत के नीचे नही रुक सकती...........

सुनील....तू जैसा कहेगी वैसा ही होगा........

सुनील....सूमी ...पॅक अप........और वो किसी होटेल में फोन करने लग गया .....दो कमरे बुक करवा लिए और दस मिनट में एक कार घर के आगे थी ......कविता ने सिर्फ़ वही कपड़े लिए जो सुमन ने उसके लिए खरीदे थे और सिर्फ़ वही जेवर लिए जो उसके थे बाकी सब उसने वहीं छोड़ दिया....गले से जब मन्गल्सुत्र उतारने जा रही थी तो उसके हाथ काँपने लगे .....उसने वो मंगल सट्रा नही उतरा ....सोनल सब देख रही थी ..उसने कुछ ना कहा .....सुनील ने तीनो को होटेल भेज दिया और हाल में बैठ इंतेज़ार करने लगा...जैसे ही ये तीनो कार में बैठ निकल गये.....आरती वहाँ आ गयी और अपनी बहू को इस हालत में जाते हुए देख उसका दिल चीत्कार उठा ......वहीं लहरा के गिर पड़ी.....

सुनील फटा फट भागा और आरती को उठा सोफे पे लिटा दिया और उसके चेहरे पे पानी छिड़कने लगा ........

कुछ पलों बाद आरती होश में आ गयी और रोने लगी ....ये ये क्या हो गया.........

सुनील....वक़्त पे भरोसा रखो मम्मी ......वो सब ठीक कर देगा..........

आरती ....अब कैसी मम्मी मेरी बहू तो चली गयी......

सुनील समझ गया कि विजय ने सिर्फ़ इनके अपने बारे में ही बताया होगा ......सुनील का इतिहास वो छुपा गया होगा..........



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