Sex Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
09-23-2018, 01:37 PM,
RE: Sex Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
दीपा ने शरमाते हुए अपनी सलवार के नाडे को खोलना शुरू कर दिया….और फिर सोनू ने अपने सारे कपड़े उतार कर दीपा की सलवार को पकड़ कर निकाल दिया….अब नीचे दीपा के बदन पर वाइट कलर के कच्छि थी….सोनू ने फिर से चार पाई पर चढ़ते हुए दीपा की टाँगो को घुटनो से पकड़ कर फेला दिया…..”दीपा देखो तुम्हारी कच्छि तो पूरी गीली हो गई है….” सोनू ने दीपा की कच्छि के ऊपेर से दीपा की चूत को दबाते हुए कहा….

दीपा: सीईईईईईईईई सोनू प्लीज़ ऐसे मत कहो ना….?

सोनू: सच ये देखो मेरे उंगली भी कैसे गीली हो गई…..

सोनू ने अपनी उंगली जिस पर दीपा की चूत से निकला हुआ कामरस लगा हुआ था…दीपा को दिखाते हुए कहा….दीपा ने शरम कर दूसरी तरफ अपने फेस को घुमा लिया…सोनू ने दीपा के कच्छि के इलास्टिक में हाथ डालते हुए उसे नीचे की तरफ सरका दिया और फिर उसकी कच्छि को निकाल कर नीचे फेंक दिया….और फिर से दीपा की टाँगो को फेलाते हुए उसकी चूत का गुलाबी लबलबाते हुए छेद को देखने लगा….दीपा ने शरमाते हुए अपने दोनो हाथ अपनी चूत के आगे रख लिए…..

सोनू: ये क्या है….?

दीपा: तुम ऐसे क्यों देख रहे हो मुझे शरम आती है…?

सोनू: अगर देखूँगा नही तो तुम्हारी चूत मैं मेरा लंड कैसे जायगा…

दीपा: धात ऐसी बात क्यों कर रहे हो….

सोनू: (दीपा के हाथो को पकड़ कर हटाते हुए) सही तो कह रहा हूँ….

और अगले ही पल सोनू ने अपने लंड को पकड़ कर लंड के सुपाडे को दीपा के दहकती हुई चूत के छेद पर लगा दिया….सोनू के लंड के गरम सुपाडे को अपनी चूत पर महसूस करते ही दीपा ने सिसकते हुए कांपना शुरू कर दिया…उसकी कमर काँपते हुए ऐसे हिल रही थी…जैसे वो अपनी चूत को खुद ही सोनू के लंड के सुपाडे से रगड़ रही हो….”सीईईईई सोनू उंह डालो ना अंदर…..” दीपा ने सिसकते हुए बुद्बुदाया…..सोनू ने अपने लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर सेट किया और फिर आगे की ओर झुकते हुए धीरे-2 अपने लंड के सुपाडे को चूत के छेद पर दबाने लगा….लंड का सुपाडा दीपा की पनाई हुई चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा…..

जैसे ही सोनू के लंड का मोटा सुपाडा दीपा की चूत के छेद में घुसा तो दीपा का बदन एक दम से अकड़ गया….”आइईए मम्मी दीपा ने सोनू के बालो को कस्के पकड़ते हुए चिल्लाते हुए कहा….”दर्द हो रहा है क्या…..”

दीपा: हां पर थोड़ा सा….

सोनू: अंदर करू….

दीपा: (सिसकते हुए) हाआँ पूरा अंदर कर दो…..

सोनू के लंड का सुपाडा दीपा की चूत के छेद में फँसा हुआ था….सोनू ने दीपा की टाँगो को उठा कर अपने कंधो के ऊपेर रख लिया….और फिर आगे की ओर झुकाते हुए दीपा के कंधो को पकड़ कर एक ज़ोर दार धक्का मारा……सोनू का लंड दीपा की चूत की दीवारो को चीरता हुआ उसकी बच्चेदानी से जा टकराया…..दीपा की तो मानो जैसे साँस ही रुक गई हो….उसकी आँखे ऊपेर को चढ़ गई….दीपा ने अभी चिल्लाने को मूह खोला ही था कि, सोनू ने लपकते हुए दीपा के होंटो को अपने होंटो में भर कर चूसना शुरू कर दिया….और उसके कंधो से हाथ हटा कर उसके दोनो चुचियों को ज़ोर -2 मसलने लगा….
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09-23-2018, 01:37 PM,
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सोनू का लंड दीपा की चूत की गहराइयों में उतर कर फँस सा गया था...सोनू ने अब दीपा के होंटो को छोड़ कर उसकी चुचियों को मसलते हुए चूसना शुरू कर दिया था..2 मिनिट में ही दीपा एक दम गरम हो गई थी….और उसने अपनी गांद को ऊपेर की ओर उठाते हुए सोनू के लंड पर अपनी चूत को दबाना शुरू कर दिया था…

सोनू समझ चुका था कि, दीपा की रस निकालने वाली मशीन अब पूरी तरह गरम हो चुकी है…..उसने दीपा की चुचियों से अपना मूह हटाया और घुटनो के बल बैठते हुए अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….दीपा मस्ती में आकर अपने सर इधर उधर पटकने लगी….जैसे सोनू के लंड का सुपाडा उसकी बच्चे दानी से जाकर टकराया तो दीपा अपनी चूत को ऊपेर की ओर उछाल देती…और उसकी चूत सोनू की जाँघो की जड़ों से टकरा कर ठप-2 के आवाज़ पैदा करती……

सोनू: अहह मेरी रानी बोल कैसा लग रहा है…

दीपा: उंह सीईईईईईई ओह हाइी सोनू बहुत मज़ा आ रहा है….

सोनू: दीपा तुम बिकुल रजनी की तरह मेरा लंड अपनी चूत में ले रही हो….

दीपा: (सोनू की बात सुन कर और गरम होने लगी) सच सोनू मम्मी भी अपनी चूत में ऐसे ही लंड पेलवाती है….

सोनू: हां दीपा ऐसे ही वो भी अपनी गान्ड को ऊपेर उछाल कर अपनी चूत को मेरे लंड पर मारती है….

दीपा: (ये सुन कर एक दम मदहोश हो जाती है…उसके दिमाग़ में एक छवि सी बन जाती है रजनी की वो कैसे अपनी गान्ड को ऊपेर उठा उठा कर सोनू के लंड को अपनी चूत में लेती है…..और यही सब सोचते हुए दीपा और मदहोश होकर अपनी गान्ड को किसी चुदेल रांड़ की तरह सोनू के लंड पर अपनी चूत को पटकने लगती है…..) ऐसे ही लेती है मम्मी तुम्हारा लंड सोनू……

सोनू: हां ऐसे ही….

और फिर तो जैसे सोनू को ऐसे जोश आया कि, जैसे वो पहली बार किसी की चूत मार रहा हो…वो अपना पूरा लंड बाहर निकाल-2 कर दीपा की चूत में ठोकना शुरू कर देता है.. दीपा सोनू के हर धक्के से सिसक उठती है….”बहुत गरमी है ना तेरी चूत में ले साली देख अपने यार के लंड का कमाल….साली अब तो तुझे रोज चोदुन्गा मैं…बोल चुदवायेगि ना मुझसे रोज…..”
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09-23-2018, 01:37 PM,
RE: Sex Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
दीपा: हां रोज मर्वाउन्गि अपनी चूत ओह्ह्ह्ह सोनू मुझी से शादी कर लो…मुझे सदा के लिए अपनी बना लो….रोज तुमसे अपनी चूत मरवाना चाहती हूँ…रोज आ ईज़ी सुनो ना मुझे अपनी लुगाई बनाओगे ना…

सोनू: हां मेरे जान रोज तेरी चूत को ऐसे ही अपने लंड और पानी से भरुन्गा… और तुझसे शादी भी करूँगा…

दीपा: जीए मैं भी अपनी चूत के पानी से आपके लंड को रोज नहलाउन्गि…… ह हाइी ओह माइ गेयैयी मम्मी अह्ह्ह्ह….

दीपा का बदन एक दम से काँपने लगा….सोनू भी पूरे जोश में घस्से मार-2 कर दीपा को नीचे से पानी पानी कर रहा था…और अगले ही पल सोनू के लंड ने अपनी पानी की बरसात दीपा की चूत में कर दी…जैसे ही दीपा को अपनी चूत में सोनू का उबलता हुआ लावा महसूस हुआ दीपा एक दम से तड़प्ते हुए झड़ना शुरू कर दिया. दोनो गहरी साँसे ले रहे थे एक दूसरे से चिपके हुए, अभी उनकी साँसे भी दुरस्त नही हुई थी कि रूम का दूर एक दम धडाम की आवाज़ करता हुआ खुल गया.

दीपा और सोनू एक दम हैरानी से डोर की ओर देखते है तो उनकी साँसे अटक जाती है….

सोनू और दीपा के चेहरे का रंग दरवाजे की दहलीज पर खड़े शख्स को देख कर एक दम से उड़ चुका था....डोर पर चन्डीमल खड़ा था....जो शायद घर पर किसी काम से आया था...एक नौकर को अपनी जान से भी ज़्यादा प्यारी बेटी के साथ इस हालत में देख कर उसका खून खोल उठा....उसने आगे बढ़ कर सोनू को उसकी बनियान से पकड़ कर घसीटते हुए चारपाई से नीचे गिरा दिया...."साले हराम के पिल्ले तेरी ये जुर्रत कि हम जैसे उँचे लोगो की इज़्ज़त पर हाथ डाले.....साले आज नही बचेगा तू मेरे हाथ से....चल साले पहले तो अपने कपड़े पहन..."

उधर दीपा अपने बदन को चादर से ढके हुए सहमी सी चारपाई पर बैठी थी.....चन्डीमल ने एक ज़ोर दार लात सोनू के पैट में दे मारी...."चल साले पहन अपने कपड़े....." सोनू दर्द से एक दम बिलबिला उठा....उसने जल्दी से अपना पजामा पहना....चन्डीमल ने उसे उसके बालो से पकड़ कर बाहर की तरफ घसीटा और फिर उस रूम का डोर बंद करते हुए, सोनू की तरफ मूड कर उस पर थप्पाड़ों के बरसात कर दी....

पर तीन चार थप्पड़ खाने के बाद सोनू का खून भी खोल उठा...और उसने चन्डीमल के चेहरे पर एक ज़ोर दार घूँसा दे मारा....चन्डीमल चकरा कर वही गिर पड़ा....सोनू के घूँसे से वो एक दम बोखला गया था. "ओह्ह भीमे कालू जल्दी अंदर आओ...." चन्डीमल ने अपने आप को संभाल कर खड़े होते हुए कहा....बाहर से दो पहलवान टाइप आदमी दौड़ते हुए अंदर आ गए....." क्या हुआ सेठ जी...." उन दोनो ने चन्डीमल की बिगड़ी हुई दशा देख कर पूछा....

चन्डीमल: इस हराम के जने को बाहर ले जाओ.....साले ने हमारे घर की इज़्ज़त को उछाला है....छोड़ना नही इसे...जाओ साले के हाथ पैर बाँध कर तांगे में डालो मैं अभी आता हूँ.....
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09-23-2018, 01:37 PM,
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उन दोनो पहलवानो के आगे अब भला सोनू की क्या चलती.....उन दोनो ने सोनू को बुरी तरह घसीटते हुए बाहर लेजाना शुरू कर दिया...उनके जाने के बाद चन्डीमल ने रूम का डोर नॉक किया...पर जब डोर ना खुला तो चन्डीमल डोर को धकेल्ता हुआ अंदर जा घुसा...अंदर दीपा अपने कपड़े पहन चुकी थी....और सहमी सी एक कोने में बैठे हुए सूबक रही थी....चन्डीमल ने उसके बालो को पकड़ कर खेंचते हुए खड़ा किया....अपनी जान से भी ज़्यादा प्यारी बेटी को....

जिस पर हाथ उठाना तो दूर चन्डीमल ने गुस्से में आकर चिल्लाया भी नही था....चन्डीमल ने एक ज़ोर दार थप्पड़ दीपा के गाल पर दे मारा... फूलों से नाज़ुक कली थी वो....थप्पड़ से उसका होन्ट कट गया...और पतली सी लकीर उसके होंटो से बहने लगी....

अपनी बेटी के चेहरे पर खून देख कर अगले ही पल चन्डीमल का दिल पसीज उठा...पर उसका गुस्सा शांत नही होने वाला था...."दीपा तुमने अपने बाबा के साथ धोखा किया....क्या कमी रह गई थी हमारी परवरिश में...." चन्डीमल और वहाँ नही रुकना चाहता था...इसलिए वो वहाँ से बाहर आ गया....

जब चन्डीमल बाहर पहुँचा तो उसके आदमियों ने सोनू के हाथ पैर रस्सी से बाँध कर उसे तांगे में नीचे लिटाया हुआ था...." क्या करना है इसका सेठ जी...." चन्डीमल ने एक बार सोनू की तरफ देखा और बोला... "चलो इसका क्या करना है....ये हम कर्नल साहब के सामने इसे लेजा कर सोचेंगे....

फिर चन्डीमल आगे वाले तांगे में बैठ गया....उसके पीछे वाले तांगे में वो दोनो आदमी और सोनू था...कुछ ही देर में वो आर्मी सेंट में पहुँच गए....वहाँ से वो सोनू को लेकर सीधा कर्नल थॉमस के पास पहुँचे....जब चन्डीमल ने ये सारी बात थॉमस को बताई..तो थॉमस ने चन्डीमल को कहा कि, इसको मारा तो नही जा सकता....पर इसे बागी साबित करके मैं काल कोठरी में सड़ने के लिए डाल सकता हूँ.....

चन्डीमल ने थॉमस से रिक्वेस्ट करते हुए कहा कि, ये लड़का फिर कभी सूरज की रोशनी ना देख पाए. तभी जाकर उसके मन को तसल्ली मिल्लेगी.... उधर घर पर जब सीमा और बेला वापिस पहुँची तो उनके पड़ोस में रहने वाली औरत भाग कर उनको घर के मुख्य द्वार पर ही रोक लिया.

औरत: रजनी क्या हुआ है तुम्हारे घर पर....?

रजनी: क्या हुआ...मैं तो अभी कांति ताई से मिल कर आ रही हूँ....

औरत: अभी कुछ देर पहले सेठ जी आए थे....वो सोनू को बाँध कर ले गए हैं....

ये बात सुनते ही दोनो की साँसे एक दम से फूल गई...दोनो दौड़ती हुई अंदर आई और जैसे ही वो दीपा के रूम में पहुची तो दीपा की हालत देखते ही उनके हाथ पैर काँपने शुरू हो गए....

सीमा: (दीपा को अपनी बाहों में भरते हुए) दीपा दीपा क्या हुआ दीपा सोनू को कहाँ लेकर गए है तुम्हारे बाबा....

दीपा: (रोते हुए) पता नही माँ....

सीमा: पर हुआ क्या था.....?

दीपा: वो बाबा ने मुझे और सोनू को....(दीपा ने ज़ोर ज़ोर से रोना शुरू कर दिया.....)

सीमा ये सुन कर और खोफ़ज़दा हो गई कि, चन्डीमल ने ये सब देख लिया है....और वो उसे ज़रूर ये सवाल करेगा कि, वो दीपा को सोनू के साथ घर में अकेला छोड़ कर क्यों गई.....
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09-23-2018, 01:37 PM,
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दूसरी तरफ सोनू को सेंट्रल जैल में बागी करार करते हुए काल कोठारी में डाल दिया था....चन्डीमल के दिल को जैसे सकून मिला था....अब वो जल्द से जल्द घर जाना चाहता था...पता नही अब उसके दिमाग़ में क्या चल रहा था....

चन्डीमल जैसे ही घर पहुँचा तो उसे बेला और रजनी दोनो दीपा के रूम में मिल गई…. चन्डीमल का गुस्सा सातवें आसमान पर था….उसने अंदर आते ही रजनी को पकड़ लिया. और दो तीन तमाचे उसके मूह पर दे मारे…..”साली छीनाल तेरी हिम्मत कैसे हुई दीपा को घर में अकेला छोड़ कर जाने की….बोल अगर दीपा तेरे पेट से पैदा हुई होती तो, इसे घर में उस नौकर के साथ अकेला छोड़ कर जाती……आज जो भी हुआ है सब तेरी वजह से हुआ है……

ये कहते हुए चन्डीमल बेला की तरफ पलटा…”और छिनाल तुम तू भी ध्यान से सुन ले…. अगर ये बात बाहर पहुँची तो मैं तेरे और तेरे सारे खानदान की खाल खिंचवा लूँगा…..” बेला चन्डीमल का ये रूप देख कर एक दम से डर गई….”नही नही सेठ जी….मैं भला ऐसे क्यों करूँगी…मेरे भी तो बेटी है….और बेटी की इज़्ज़त क्या होती है मैं अच्छे से जानती हूँ….”

चन्डीमल ने एक बार फिर से रजनी को घूरा और बाहर चला गया…उस दिन घर में मातम सा महॉल बना रहा….दूसरी तरफ सोनू को सेंट्रेल जैल में भेज दिया गया था…..

दिन पर दिन बीत रहे थे…..पर सोनू का रजनी और बेला को कुछ पता नही लग सका था….उन दोनो ने पता लगाने की बहुत कॉसिश की, पर कही से भी कुछ हाथ नही लग रहा था….सोनू कहाँ है ये सिर्फ़ चन्डीमल और उसके वफ़ादार दो आदमी जानते थे…..दूसरी तरफ जैल में सोनू की मुलाकात एक रवि नाम के शख्स के साथ हुई…..रवि अपने इलाक़े का नामी चोर था…..एक दो कतल के केस भी उसपर हुए थे. पर कतल के जुर्म कभी साबित नही हो पाए थे……

एक दिन सोनू से एक सिपाही ने आकर कहा कि, उससे कोई मिलने आया है…..जैसे ही सोनू ने ये सुना तो उसके दिल में एक आस सी जगी…..और वो उस सिपाही के साथ चल पड़ा…जब वो मीटिंग रूम में पहुँचा तो उसकी दूर की रिस्तेदारी में उसका चाचा वहाँ खड़ा था….उसे देखते ही सोनू के आँखे भर आई. उसके चाचा ने उसे गले से लगा लिया…..”चाचू मुझे यहाँ से बाहर निकालो…..मैं यहा नही रहना चाहता…..” सोनू रोते हुए कहा…..

मुकेश: सोनू पहले तू चुप कर…….

सोनू: माँ और बाबू जी कैसे है….? (सोनू ने सुबक्ते हुए अपने माँ बाप के बारे में पूछा..)

मुकेश: (उदास होते हुए) सोनू तुमने ये सब क्या कर दिया बेटे…..पता है तुम्हारी इस हरक़त की वजह से तुम्हारे उस सेठ ने तुम्हारी माँ बाबू जी को भी जैल में डलवा दिया है……

सोनू: (जैसे ही सोनू ने ये खबर सुनी…सोनू की आँखे गुस्से से लाल हो गई) क्या ये उसने बहुत बुरा किया है….मैं उसे छोड़ूँगा नही……

मुकेश: तुम तो चुप ही रहो सोनू…..ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है……

सोनू: हां जानता हूँ कि ये सब मेरी वजह से हुआ है…..और उसकी सज़ा भी मुझे मिल रही है….पर फिर उसने माँ बाबू जी के साथ ये सब क्यों किया…..

मुकेश: देख बेटा हम भी बहुत मुस्किल से बचे है…..हम ने तो ये सब भी बोल दिया था कि, हम लोगो को तुम्हारे और तुम्हारे माँ बाबू जी कोई लेना देना नही है……तब जाकर हमारी जान छूटी है.. और अगर हम भी जैल में बंद हो जाते….तो पीछे कोई भी कार्यवाही करने वाला नही रहता……

सोनू: तो अब आप क्या कर लोगे…..

मुकेश: देख बेटा मेरी इतनी हैसियत नही है कि, उस सेठ के सामने टिक पाऊ….पर हां मैं तुम्हारे मा बाबू जी के लिए उसे मिन्नत ज़रूर करूँगा…..

सोनू: ठीक है चाचा जी….कम से कम माँ बाबू जी को तो जैल से निकलवाइए….
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09-23-2018, 01:38 PM,
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उसके बाद उसका चाचा उसे झूठा सा दिलासा देकर चला गया…..वो चन्डीमल से उसकी दुकान पर जाकर मिला….बहुत समझाया बहुत मिन्नते की पर चन्डीमल की सेहत पर कोई असर नही पड़ा…उधर जैल में रवि के कारनामो से अंजान सोनू की दोस्ती उससे गहरी होती जा रही थी….रवि हट्टा कट्टा लड़का था… यहाँ तक के जैल का जेलर भी उससे डरता था….उसकी हाइट 6, 4 इंच थी…..चौड़ा सीना…..जब कभी ललकारता तो ऐसे लगता जैसे कोई शेर दहाड़ रहा हो….

रवि की सज़ा ख़तम होने के कगार पर थी……और जब से उसे पता चला था कि, सोनू उस शहर के सबसे अमीर आदमी यानी कि चन्डीमल के घर पर नौकर था….तब से वो बातों बातों में उसे चन्डीमल के बारे में जानने की कॉसिश करता था…..कि चन्डीमल कब घर जाता है….कब दुकान पर आता है….उसके साथ कॉन कोन होता है…घर पर कोन होता है….धीरे-2 ये सारी बातें उसने जैल में बैठे-2 ही सोनू से धोखे से पता कर ली थी…..फिर उसकी रिहाई का दिन भी आ गया….रवि जानता था कि, चन्डीमल अंग्रेज़ो की खुशामद करके इतना अमीर बना है…..भले ही वो बागी नही था….पर अंग्रेज़ो से उसको बहुत नफ़रत थी….

और उन आदमियों से ख़ासतोर पर जो अंग्रेज़ो का साथ देते थे….रवि ये भी जानता था कि, कैसे चन्डीमल ने सोनू को झूठे इल्ज़ाम में फँसाया है……जैसे ही वो जैल से बाहर आया…उसने चन्डीमल के ऊपेर नज़र रखनी शुरू कर दी……दूसरी तरफ चन्डीमल ने इस दौरान अपनी दुकान के पास वाली खाली दुकान को बहुत ही महँगे दामो पर बेचा था….रवि का प्लान सॉफ था….लूट करो और फरार हो जाओ…..क्योंकि इस बार वो बड़ा हाथ मारना चाहता था और इस सहर से बहुत दूर जाकर नई जिंदगी शुरू करना चाहता था. इसलिए उसने सोच रखा था…कि अपने आगे आने वाली हर रुकावट को वो जड से उखाड़ देगा…..

रवि अपना प्लान बना चुका था….उसको ये भी मालूम था कि, चन्डीमल के साथ हमेशा दो पहलवान रात को उसको उसके घर छोड़ने जाते थे….रात को रास्ता बहुत सुनसान हो जाता था….जिस दिन चन्डीमल को बेची हुई दुकान के पैसे मिले उसी दिन चन्डीमल ने दुकान की कमाई में से भी बहुत से पैसे निकाल लिए थे….और वो घर की तरफ चल पढ़ा…..जैसे दोनो तांगे सुनसान रास्ते पर आए…..उन तान्गो में से एक घोड़ा बिदक गया….जिस पर पहलवान बैठे हुए थे….वो रास्ते में ही खड़ा हो गया…..

टाँगे वाले ने उस पर बहुत चाबुक बरसाई पर घोड़ा टस से मस नही हुआ….चन्डीमल का तांगा भी रुक गया था…..चन्डीमल ने तांगे पर बैठे बैठे आवाज़ दी….”अर्रे ओह भीमा क्या हुआ रे….” भीमा तांगे से उतर कर चन्डीमल के पास आया….और बोला…”पता नही सेठ जी घोड़े को क्या हो गया है…चल ही नही रहा…..”

चन्डीमल: जाओ जल्दी देखो उसे क्या हुआ है….ये मुसबीत भी आज ही आनी थी……

भीमा फिर से पीछे वाला तांगा एक तरफ चल पड़ा….दोनो तान्गो में 20-22 फुट का फाँसला था…दूसरा पहलवान कालू भी नीचे उतर आया था..और तांगे वाला भी….अभी भीमा उस तरफ जा ही रहा था कि, उस तांगे के पीछे अंधेरे में घोड़े की टापो की आवाज़ आनी शुरू हो गई….कोई घोड़े पर सवार तेज रफ़्तार से उनकी तरफ बढ़ता चला आ रहा था….अंधेरा बहुत था….इसलिए कुछ भी ठीक से दिखाई नही दे रहा था…..तभी कुछ दूरी पर अंधेरे में से एक साया प्रकट हुआ….कोई घोड़े पर सवार बहुत तेज़ी से उनकी तरफ बढ़ रहा था….

भीमा और कालू दोनो ही उस इलाक़े के नामी पहलवानो में से एक थे…..इसलिए कभी किसी का खोफ़ नही खाते थे…..और इस बात से अंज़ान कि उनकी तरफ उनकी मौत दौड़ती हुई आ रही है,….दोनो बिना हीले वही खड़े उसे देखने लगे….जैसे ही वो घोड़ा उनसे 10 फुट की दूरी पर पहुचा…तो उस घुड़सवार ने अपने पीछे से एक मोटा सा लट्ठ निकाल लिया और लहराते हुए उन दोनो की तरफ बढ़ा. इससे पहले कि दोनो सम्भल पाते, उस घुड़सवार ने अपना मोटा लट्ठ गुजरते हुए भीमा की कॅनपॅटी पर दे मारा…..भीमा उसी पल ढेर हो गया…..वो घुड़सवार फिर आगे से पलटा…और इस बार उसके निशाने पर कालू था….पर तब तक कालू सम्भल चुका था….

उसने तांगे से अपनी लाठी निकाल ली…..अब दो पहलवान आपस मे भिड़ने के लिए तैयार थे….अपनी जान बचाने के लिए…वो घुड़सवार फिर से उसकी तरफ आया….और जैसे ही वो कालू के पास पहुचा उसने चलते हुए घोड़े से कालू के ऊपेर छलाँग लगा दी…..कालू को इस बात का अंदाज़ा नही था कि, वो शख्स घोड़े से उसपर छलाँग लगा देगा…..कालू एक दम से हड़बड़ा गया….और अगले ही पल दोनो नीचे ज़मीन पर घुथम घुथा हो चुके थे….उधर चन्डीमल की गान्ड से ये सब देखते हुए फॅट कर हाथ में आ चुकी थी…..” अर्रे तुम चलो…” उसने तांगे वाले को लात मारते हुए कहा….” तांगे वाले की तो चन्डीमल से ज़्यादा फॅट रही थी……

इसलिए उसने अपने तांगे को पूरी रफ़्तार से दौड़ा दिया…..उधर रवि कालू के ऊपेर सवार उस पर घूँसो और लातों की बरसात कर रहा था….और रवि जैसे ख़ूँख़ार और तगड़ाए इंसान के सामने कालू जैसे पहलवान की भी एक ना चल रही थी……मुक्के बरसाते हुए, रवि के हाथ में तीन चार किलो का एक पत्थर आ गया…और उसने उसकी कॅनपॅटी पर दे मारा….कालू भी वही ढेर हो गया…. कालू और भीमा दोनो बेहोश हुए थी…..मरे नही थे....

रवि अपने घोड़े की तरफ भागा और और घोड़े पर सवार होकर चन्डीमल का पीछे करने लगा…..और एक मील आगे जाते ही उसने चन्डीमल को रास्ते में घेर लिया….और अगले ही पल चन्डीमल उसके घुटने के नीचे था….चन्डीमल ने उससे मुकाबला करने के कॉसिश की….पर रवि के सामने वो कहाँ टिक पाता. रवि ने उसको मार मार कर अध मरा कर दिया….और उसके सारे पैसे लेकर फरार हो गया….

चन्डीमल बेसूध कच्ची सड़क पर पड़ा हुआ था….पर होनी को शायद कुछ और ही मंज़ूर था…. दूसरी तरफ से अंग्रोजो के केंट में रसद देने जा रहे ट्रक आ रहे थे…..रास्ते में उनकी हेड लाइट खराब हो गई थी….और इसलिए अंधेरे में उन्हे कुछ दिखाई नही दे रहा था…वो धीरे-2 ट्रक चलता हुआ हॉर्न बजाते हुए आगे बढ़ रहा था….पर बेहोश हो चुके लोगो को हॉर्न के आवाज़ कहाँ सुनाई देती है….चन्डीमल के दोनो पैरो के ऊपेर से ट्रक गुजर गया…..चन्डीमल बेहोशी की हालत में ही तड़प उठा….उधर आगे कालू और भीमा दोनो उस ट्रक के नीचे आकर शिकार हो गए….ड्राइवर दारू भी पिए हुआ था…

सुबह अपने काम पर जा रहे आदमी ने चन्डीमल को अधमरी हालत में देखा तो उसने शोर मचाया.. सड़क पर आ जाते लोगो को इकट्ठा किया….चन्डीमल को उस एरिया के सभी लोग जानते थे……इसलिए वो उसे जल्द ही केंट के हॉस्पिटल में लाया गया…कालू और भीमा रात को ही दम तोड़ चुके थे…..उधर रजनी दीपा और बेला को भी ये बात पता चल गई तो वो भी हॉस्पिटल में पहुचि….ये खबर जब सीमा को पता चली तो वो भी अपनी ससुराल से अपने माँ बाप के साथ वापिस आ गई…..अगले दो महीने तक चन्डीमल हॉस्पिटल में रहा….चन्डीमल के पैर ट्रक के नीचे आने से बुरी तरह पिस गए थे. इसलिए उन्हे काटना पड़ा…..रवि की मार ने उसके बाजू की हड्डी तोड़ दी थी…..चन्डीमल की अब उमर हो गई थी…इसलिए उस हड्डी के जुड़ने का भी कोई चान्स नही था…

2 महीनो बाद चन्डीमल हॉस्पिटल से डिसचार्ज होकर घर आया….पीछे से उसके कुछ वफ़ादार नौकरो ने दुकान की ज़िम्मेदारी अच्छे से निभाई थी…..सीमा जो अभी एक दम जवान थी…अब उसे चन्डीमल के साथ अपना जीवन बिताना बेमानी लग रहा था….इसलिए उसके भाई ने चन्डीमल से उसके डाइवोर्स की बात कर ली…..चन्डीमल ने मन पर बोझ रख कर सीमा को डाइवोर्स दे दिया…..

अब चन्डीमल की दुनियाँ उसके कमरे तक सिमट कर रह गई थी…..वो ना कही आता और ना कही जाता. बस अपने कमरे में पड़ा रहता…..रजनी शाम तक दुकान पर बैठने लगी थी…..चन्डीमल ने अपनी सारी जायदाद सीमा और दीपा के नाम कर दी थी…..
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09-23-2018, 01:38 PM,
RE: Sex Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
एक दिन रजनी जब दीपा को सुबह उसके रूम में उठाने गई तो उसने देखा दीपा ज़मीन पर बेहोश पड़ी हुई थी….उसके मूह से झाग निकल रहा था….उसका रंग नीला पड़ चुका था….और पास में ही चूहो को मारने वाली दवा पड़ी हुई थी……ये देख रजनी एक दम से घबरा गई….और उसने एक दम से बेला-2 चिल्लाना शुरू कर दिया….बेला जब रूम में आई तो सामने नज़ारा देख उसके भी हाथ पैर सुन्न पड़ गए….रजनी बाहर की तरफ भागी तो शोर सुन कर आस पास के लोग भी भागे चले आए….

तांगे से जल्द ही दीपा को हॉस्पिटल पहुचाया गया….जब चन्डीमल को ये बात पता चला कि, दीपा ने जहर खा लिया है…तो वो एक दम से टूट सा गया…..और बिलख-2 कर रोने लगा…..पड़ोस के कुछ लोग उसे दिलासा देने के लिए उसके पास बैठे थी……चन्डीमल मन ही मन सोच रहा था कि, मैं कैसा बदनसीब बाप हूँ….उधर मेरी बेटी के जान ख़तरे में है और मैं उसको देखने के लिए भी नही जा सकता…रह रह कर उसके दिमाग़ में बुरे-2 ख़याल आ रहे थे…..

शाम ढल चुकी थी….और चन्डीमल की बेबसी उसे अंदर ही अंदर ही खाए जा रही थी….तभी बाहर से दौड़ता हुआ एक आदमी अंदर आया….उसकी साँसे फूली हुई थी…..उसने हान्फते हुए कहा. “सेठ जी मैं अभी हॉस्पिटल से आ रहा हूँ…..सेठानी ने कहलवाया है कि, सेठ को बोलना कि दीपा अब ख़तरे से बाहर है…..फिकर करने की कोई ज़रूरत नही……”

ये खबर सुन कर चन्डीमल को राहत की साँस आई……”माँ माँ मुझे अपनी बेटी के पास जाना है…..भाइयो मुझे अपनी बेटी के पास ले चलो….” चन्डीमल ने सबके सामने हाथ जोड़ते हुए कहा….तो लोगो ने उसे बिस्तर से उठा कर बाहर लेजा कर तांगे पर बैठाया और उसके साथ हॉस्पिटल पहुचे…..रात का वक़्त हो चला था….दीपा को होश आ चुका था….चन्डीमल को दीपा से मिलने के इजाज़त भी मिल गई थी….

दो आदमी उसे उठा कर वॉर्ड में ले गए…..और उसे दीपा के पास एक चेर पर बैठाया….चन्डीमल ने सीमा को छोड़ कर सब को बाहर जाने के लिए कहा……सबके बाहर जाने के बाद, चन्डीमल ने रुन्वासि से आवाज़ में कहा….. “बेटी तुमने ये सब क्यों किया…..तुम्हे नही पता तुम्हारे पापा तुम्हे कितना प्यार करते है….अर्रे पगली मैं तो पहले से ही मरा हुआ हूँ…..और तूने ये काम करके मुझे और मार देना था…..मैं तेरे बिना नही रह सकता….अगर तुझे कुछ हो जाता तो मैं भी इस दुनिया में नही रह पाता…..”

दीपा: (दूसरी तरफ फेस करके….) और मैं उसके बिना नही रह सकती….

जैसे ही उसने ये बात सुनी, चन्डीमल एक दम से ठंडा पड़ गया….वॉर्ड में सन्नाटा सा छा गया…. छन्डीमल नज़रे झुकाए बैठा था….15 मिनिट बाद डॉक्टर अंदर आया और उसने कहा कि, अब दीपा को आराम करने देना चाहिए…..”फिर से लोगो ने चन्डीमल को उठाया और बाहर लाकर एक बेंच पर बैठा दिया….उसकी दुकान पर काम करने वाला एक आदमी भी वहाँ ही खड़ा था…..चन्डीमल ने उसको अपने पास बुलाया और कहा कि थॉमस को बुला लाए……

वो आदमी वहाँ से चला गया और थोड़ी देर बाद कर्नल थॉमस भी वहाँ आ गया…..चन्डीमल ने थॉमस से सोनू और उसके घर वालो को छोड़ने के लिए कहा…..थॉमस ने कहा कि, वो कल सुबह ही उनको रिहाः करवा देगा……थॉमस के जाने के बाद, चन्डीमल ने रजनी से बात की और बताया कि कल सोनू को जैल से रिहाः कर देंगे….तुम उसे कल जाकर जैल से ले आना….रजनी ये बात सुन कर बेहद खुस थी…. अगले दिन सुबह रजनी तांगे पर जैल पहुचि और थोड़ी देर बाद सोनू को रिहाः कर दिया गया….रजनी ने उसे अपने साथ चलने को कहा तो सोनू ने सॉफ मना कर दिया……

रजनी: क्या बात है तुम साथ क्यों नही जाना चाहते…..

सोनू: अब मेरा वहाँ कोई काम नही है….उस इंसान ने मेरे माँ बाबा को बहुत दुख दिया है…. अब मैं वहाँ जाकर उसकी शकल भी नही देखना चाहता…..

रजनी: देखो सोनू मुझे पता है कि, तुम सेठ से बहुत नाराज़ हो…..पर दीपा के बारे में तो सोचो. उसने तुम्हारे लिए जहर खा कर आत्महत्या करने की कॉसिश की है….

सोनू: मैं वो सब नही जानता…..अगर वो मुझसे इतना ही प्यार करती थी…..तो फिर उसने उस समये अपने बाप से क्यों नही कहा जब उसका बाप मुझे जनवरो की तरह पीट रहा था…..अब मैं अपने घर जाकर पहले अपने माँ बाबा से मिलना चाहता हूँ…..

ये कह कर सोनू वहाँ से निकल स्टेशन पर पहुच गया और ट्रेन पकड़ अपने सहर जा पहुँचा वहाँ पर उसके माँ बाप को पहले से जैल से बाहर निकलवा दिया गया था…..जब सोनू अपने घर पहुचा तो उसके पिता ने उसे अपने घर के अंदर नही आने दिया……कहा कि, उसने उनके नाम पर कलंक लगा दिया है. अब उसके घर में उसके लिए कोई जगह नही है….सोनू एक दम हताश हो चुका था….उसे समझ में नही आ रहा था कि, अब वो क्या करे कहाँ जाए….

जब उसे किसी तरफ कोई भी रास्ता ना मिला तो उसे बेला की याद आई……ये सोच कर कि, बेला उसे अपने घर में रहने देगे……वो फिर से ट्रेन पकड़ कर गाओं पहुचा उस समय रात का वक़्त हो चला था…रात के करीब 9 बज रहे थे……बेला सेठ के घर से काम निपटा कर आ चुकी थी….रात के 9 बजे अचानक से दूर पर नॉक हुई तो बेला डोर की तरफ बढ़ी….और बाहर पहुच कर आवाज़ दी “ कॉन है…”

सोनू: मैं हूँ सोनू……(सोनू धीरे से बोला…..)

सोनू की आवाज़ सुनते ही बेला का चेहरा एक दम से खिल उठा…उसने डोर खोला और सोनू को अंदर आने को कहा…..सोनू अंदर आ गया…..बेला ने डोर बंद किया…..और उसे पीछे कमरे में ले आई…..” कहाँ था तू…….इतनी रात को कहाँ से आ रहा है…..” बेला ने उसे चारपाई पर बैठने को कहा….

“घर गया था….”

बेला: फिर

सोनू: कुछ नही उन्होने मुझे अपने घर के अंदर नही जाने दिया…..

ये कहते हुए सोनू की आँखे भर आई…..बेला ने उसके सर को अपनी बाहों के घेरे में लेते हुए उसके सर को अपने सीने में दबा लिया……”कोई बात नही…..अभी तुमसे वो नाराज़ होंगे…..इसलिए शायद उन्होने गुस्से में कह दिया होगा….जैसे जैसे समय गुजरेगा वैसे-2 सब ठीक हो जायगा…..आज सुबह मालकिन ने बताया था कि, तुम उनके घर वापिस नही आना चाहते तो मेने ये उम्मीद ही छोड़ दी थी कि, मैं तुम्हे कभी दोबारा देख भी पाउन्गि……..चल जा हाथ मूह धो ले…..मैं तेरे लिए खाना बना देती हूँ…..” 

सोनू: नही मैने खाना रास्ते में ही खा लिया था…..

बेला: अच्छा तू रुक मैं नीचे बिस्तर लगा लेती हूँ…..फिर नीचे आराम से लेट करके बात करेंगे…..
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09-23-2018, 01:38 PM,
RE: Sex Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
उसके बाद बेला ने नीचे दो बिस्तर बिछाए….और दोनो नीचे लेट गए……”देख सोनू अब तो सेठ भी मान गया है…..और मुझे लगता है कि, वो जल्द ही तेरी शादी दीपा से करवा भी देगा…तू भी अब मान जा….” सोनू ने बेला की तरफ करवट बदली……”नही काकी…..जिस इंसान की वजह से मेरे माँ बापू को इतनी ज़िल्लत उठानी पड़ी…..मैं उस इंसान को कभी माफ़ नही करूँगा….और मैं उस घर में कभी नही जाउन्गा…..”

ऐसे ही बातें करते हुए, दोनो कब सो गए…..पता ही नही चला….अगली सुबह बेला तैयार होकर जब सेठ के घर पहुचि तो उसने रजनी को बताया कि, सोनू रात से उसके घर पर है तो रजनी वहाँ एक पल भी ना ठहरी और बेला के साथ उसके घर आ गई…….सोनू को देखते ही उसने बाहों में भर लिया. और फिर उसके साथ चारपाई पर बैठते हुए बोली…..”देख सोनू अब गुस्सा थूक दे….और घर चल….दीपा भी हॉस्पिटल से घर आ गई है…..पर वो ना कुछ खाती और ना ही कुछ पीती है…. देख तेरे बिना वो कैसे जिंदा लाश बन कर रह गई है…..”

सोनू: नही मैं नही जाउन्गा अब उस घर में….उस इंसान ने मेरे और मेरे घर वालो की बहुत बेज़्जती की है…..

रजनी: हां मैं जानती हूँ सोनू पर उस इंसान को उसके करमो के सज़ा मिल चुकी है…..अब वो अपाहिज होकर चारपाई पर बैठा है…..

सोनू: (एक दम से चोन्कते हुए) क्या…..?

रजनी ने सारी बात सोनू को बताई रजनी और बेला के बहुत समझाने और मनाने पर सोनू मान गया...और बेला और रजनी के साथ चन्डीमल के घर आ गया....जब वो दीपा के रूम में पहुचा तो दीपा सोनू को देख कर एक दम से रोते हुए बेड से उठी और सोनू के गले आ लगी.....कुछ पल वो सोनू की बाहों में रोती रही...सोनू ने उसे दिलासा दिया कि, वो अब कही नही जायगा......पर सोनू अपने मा बाप के साथ हुई बेज़्जती नही भूला था....वो चन्डीमल को ऐसा सबक सीखाना चाहता था कि, उसके दिल का बोझ हल्का हो सके....

दीपा को खाना खिलाने के बाद सोनू बाहर आ गया....और पीछे के रूम की तरफ जाने लगा....."कहाँ जा रहे हो...." रजनी ने उसे पीछे से आवाज़ देकर रोक लिया...."वो पीछे जा रहा हूँ....."

रजनी: आज से तुम वहाँ पीछे नही रहोगे,,,,,आज से वो जगह तुम्हारी नही है....आज से तुम इस घर के अंदर रहोगे....मेरे साथ वाले कमरे में... मेने सारा प्रबंध कर रखा है.....

रजनी ने सोनू की तरफ मुस्कराते हुए देख कर कहा....और उसका हाथ पकड़ कर उसे कमरे में ली गई...."देखो आज से ये तुम्हारा कमरा है...ठीक है ना....किसी और चीज़ की ज़रूरत तो नही...." सोनू ने रूम में चारो तरफ नज़र दौड़ाई......ये कमरा घर में सबसे बड़ा कमरा था....जो पहले सीमा का था....उसमे एक नया बेड और बाकी सारा समान था....

रजनी: सोनू अब तुम खुश हो ना....देखो सेठ ने तुम्हारी और दीपा की शादी के लिए हां भी कह दी है.....शादी के बाद तुम इस घर के नौकर नही दामाद हो जाओगे....ये सारी दौलत और जायदाद तुम्हारे होगी. भूल जाओ जो हुआ.....

सोनू: नही मैं नही भूल सकता....मेरे साथ जो हुआ वो तो चाहे मैं भूल ही जाउ....पर जो ज़िल्लत मेरे माँ बाबा ने उठाई है...वो मैं कभी नही भूल सकता....

रजनी: सोनू कोई तो रास्ता होगा ही ना....तुम मुझे बताओ तुम क्या चाहते हो...किस तरह तुम्हारे दिल को ठंडक पहुचे गी.....

सोनू: उसने मुझे इस लिए पीटा था कि, उसने मुझे दीपा के साथ वो सब करते हुए देख लिया था.....अब मैं उसके सामने ही सब कुछ करना चाहता हूँ.....

रजनी: तुम पागल तो नही हो गए....देख सोनू दीपा सेठ की बेटी है....और दीपा ये सब कभी नही करेगी.....वो तुमसे प्यार करती है...और अगर तुम ही ये हरक़त करोगे तो उसके दिल पर क्या बीतेगी...कोई लड़की अपने बाप के सामने....नही सोनू तुम ठीक नही बोल रहे.....

सोनू: तो ठीक है दीपा नही तो ना सही.....तुम चुदवाओगि उसके सामने.....?

रजनी: सोनू तू तो जानता है कि, मैं पेट से हूँ....पर फिर भी मैं तुम्हारी ये ख्वाहिश पूरी ज़रूर करूँगी....पर उसके लिए मुझे कुछ वक़्त चाहिए.....

सोनू: कितना.....वरना मैं ज़्यादा दिन यहाँ नही रुक पाउन्गा....

रजनी: सिर्फ़ दो दिन दो दिन चाहिए मुझे....पर मुझसे वादा करो कि उसके बाद तुम दीपा से शादी करो गे और हमेशा हमारे पास रहोगे....

सोनू: ठीक है मैं वादा करता हूँ.....

रजनी: ठीक है तुम आराम करो...मैं तुम्हारे लिए नाश्ता भिजवाती हूँ.....
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09-23-2018, 01:38 PM,
RE: Sex Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
ये कह कर रजनी बाहर चली गई....अब उसके सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो चुकी थी....और अंदर ही अंदर कही ना कही...अपने ऊपेर हुई ज़्यादतियो को लेकर उसके दिल मे भी चन्डीमल के लिए नफ़रत भरी हुई थी. वो खुद भी चन्डीमल को नीचा दिखाना चाहती थी.....

घर का काम निपटा कर रजनी दीपा को लेकर सहर चली गई….क्योंकि दीपा का हॉस्पिटल में चेकप होना था….और उसके बाद उसे दुकान पर भी कुछ देर के लिए जाना था…..इधर रजनी के जाने के बाद बेला घर की सफाई के काम में लगी हुई थी. बेला जब झाड़ू लगाने सेठ चन्डीमल के रूम में पहुचि तो, उस समय उसने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी कमर मे फँसा रखा था….जब बेला ने नीचे झुक कर झाड़ू लगाना शुरू किया तो बेला की मोटी गान्ड पीछे बैठे चन्डीमल के आँखो के सामने आ गई…..

चन्डीमल का लंड उसकी धोती मे कुलाँचे भरने लगा….चन्डीमल को अपाहिज होकर इस बिस्तर पर पड़े दो महीने हो चुके थी….और तब से चन्डीमल के जिंदगी मे बस यही सुख रह गया था कि, जब बेला आकर उसके रूम मे झाड़ू पोछा करती है, तब बेला के मोटे-2 चुतड़ों और उसकी गुदाज़ चुचियों के दर्शन चन्डीमल को हो जाते थे…और चन्डीमल अपने ऊपेर ओढी चद्दर के अंदर हाथ डाल कर अपने लंड को सहलाने लगता…..फिर बेला के जाने के बाद वो मूठ मार कर अपने मन की भडास निकाल लेता….

आज जब बेला झाड़ू लगाते हुए, चन्डीमल के बेड के पास पहुचि, तो चन्डीमल अपने आप पर काबू ना रख सका…और हाथ बढ़ा कर बेला की गान्ड को पकड़ कर मसल दिया….”अहह” बेला एक दम से चोन्कते हुए सीधी हो गई….और चन्डीमल की तरफ खा जाने वाली नज़रों से देखते हुए बोली….. “ये क्या कर रहे हो सेठ जी…”

छन्डीमल: वो मैं बेला इधर आ ना….देख ना तू जब भी मेरे कमरे मे आती है….मेरा बुरा हाल हो जाता है…..देख इस ग़रीब पर कुछ तरस खा….

बेला: (गुस्से से) देखो सेठ जी नौकर हूँ आपकी गुलाम नही….आगे से मेरे साथ ऐसी वैसी हरक़त की तो मालकिन को बता दूँगी…..

छन्डीमल: अर्रे मेरी जान नाराज़ क्यों होती है…इधर तो आ…एक बार सिर्फ़ एक बार मुझे अपनी जवानी का रस चखा दे….तो जो बोलगी जितना पैसा माँगेगी वो मैं तुम्हे दूँगा.. सिर्फ़ एक बार…..

बेला: मुझे क्या रंडी समझ रखा है आने दो मालकिन आगे से मैं नही आती तुम्हारे यहाँ काम करने…..

बेला ने वही झाड़ू फेंका और रूम से बाहर आ गई…जैसे ही बेला रूम से बाहर आई तो उसने देखा कि दीवार के साथ सोनू खड़ा हुआ था….जो शायद अंदर जो भी हुआ था….उसने देख लिया था…अभी बेला ने कुछ खोलने के लिए मूह खोला ही था कि, सोनू ने उसके मूह पर हाथ रख कर चुप रहने को कहा….और फिर उसका हाथ पकड़ कर अपने रूम में ले गया…..दोनो रूम में कुछ देर बाते करते रहे…इधर चन्डीमल बेला को गालियाँ दे रहा था….

उधर बेला थोड़ी देर बाद सोनू के रूम से निकल कर चन्डीमल के रूम के तरफ चली जाती है….बेला को अपने रूम मे आता देख चन्डीमल अपना मूह दूसरी तरफ कर लेता है….”सेठ जी मैं ना जाने गुस्से मे क्या बोल गई आपको…मुझे माफ़ कर दीजिए…” बेला ने चन्डीमल की कमर के पास बेड पर बैठते हुए कहा….मैं आपकी हालत समझती हूँ मालिक…..जानती हूँ आप इस कमरे मे पड़े-2 ऊब जाते है…. पर मैं ही पागल थी कि, आपको ग़लत समझ बैठी….”

बेला ने चन्डीमल की जाँघ पर हाथ रखते हुए कहा…..तो चन्डीमल को ऐसा लगा जैसे उसने नंगी तारो को छू लिया हो…उसी पल चन्डीमल के लंड ने ज़ोर का झटका खाया. छन्डीमल की दोनो टांगे घुटनो से नीचे कट गई थी….पर लंड कभी -2 थोड़ी देर के लिए खड़ा हो जाया करता था….”अर्रे पगली तू चिंता मत कर….मुझे तुम्हारी बात का बुरा नही लगा….मैं तो तेरे हुश्न का शुरू से दीवाना हूँ….” ये कहते हुए चन्डीमल ने अपना एक हाथ बेला के ब्लाउस के ऊपेर से उसकी चुचि पर रख दिया और उसे ज़ोर-2 से दबाने लगा….”आहह सेठ जी….क्या कर रहे है….धीरे करिए ना…” बेला ने चन्डीमल के लंड को धोती के ऊपेर से पकड़ते हुए कहा…

जैसे ही बेला ने चन्डीमल के लंड को पकड़ा चन्डीमल एक दम से सिसक उठा…उसने ब्लाउस के ऊपेर से ही बेला की चुचियों को मसलते हुए चूसना शुरू कर दिया…”हाइए सेठ जी और ज़ोर से मीजिए ना मेरी चुचियों को आ आप तो सच मे बहुत अच्छा मसलते है…” बेला ने सिसकते हुए चन्डीमल के लंड को और तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया….चन्डीमल तो जैसे मस्ती के सागर मे गोते खा रहा था. उसने अपने काँपते हुए हाथों से बेला के ब्लाउस के हुक्स खोलने शुरू कर दिए…

पर जल्दबाजी मे उससे एक भी हुक नही खुल पाया था….बेला एक दम से खड़ी हो गई….और खुद ही अपने ब्लाउस के हुक्स खोल कर अपनी 38 साइज़ के चुचियों को बाहर निकाल दिया….बेला के बड़ी-2 गुदाज चुचियाँ देखते ही चन्डीमल का लंड फटने को आ गया….अगले ही पल बेला ने अपनी साड़ी भी अपने बदन से अलग कर दी…अब उसके बदन पर खुला हुआ ब्लाउस और पेटिकॉट ही रह गया था…जिसके नीचे पेंटी तक नही थी…..जैसे ही बेला बेड पर दोबारा बैठी…चन्डीमल ने एक हाथ उसकी चुचि और दूसरा हाथ पेटिकॉट पर रखते हुए उसे ऊपेर उठाते हुए चुचियों को मसलना शुरू कर दिया…..
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09-23-2018, 01:38 PM,
RE: Sex Kahani हलवाई की दो बीवियाँ और नौकर
जैसे ही बेला का पेटिकॉट उसकी कमर तक आया…वैसे ही चन्डीमल का दिल ये देख कर उछल कर बाहर आने को हुआ की, बेला ने नीचे पेंटी नही पहनी हुई है….अगले ही पल चन्डीमल के हाथ मे बेला के मोटी फांको वाली फूली हुई चूत थी…जिसे देख कर वो पागलो की तरह उसकी चूत को मसल रहा था….”बेला तुम्हारी चूत तो देख कैसे पानी छोड़ रही है….मुझे तो पहले से ही पता था…तेरे जैसी गुदाज औरत की चूत इतना पानी छोड़ती ही होगी….पर तू कच्छि नही पहनती क्या….

बेला: (चन्डीमल की धोती को हटा कर उसके लंड को पकड़ते हुए) हम ग़रीब लोग है सेठ जी रोटी मुश्किल से मिलती है तो कच्छि कहाँ से ख़रीदती…

चन्डीमल: (बेला की चूत मे अपनी उंगलयों को डाल कर अंदर बाहर करते हुए) आह तू फिकर ना कर…तुझे सब कुछ मैं लाकर दूँगा….तू बस मेरा ध्यान रखा कर समझी….अपने सेठ को खुश रखेगी तो कभी किसी चीज़ कमी नही आने देगा तुझे तेरा ये सेठ……

बेला: सच कह रहे हो सेठ जी…आप मुझे लाकर दोगे ना कच्छि….?

छन्डीमल: हां मेरी जान…..और तुझे पहनाउन्गा भी मैं अपने हाथों से….चल अब जल्दी कर आज और चखा दे अपनी चूत का रस मेरे लंड को देख कब से तडप रहा है….

बेला बेड पर चढ़ि और चन्डीमल की कमर के दोनो तरफ अपने पाँव रख कर धीरे-2 नीचे की और आते हुए, चन्डीमल के लंड को पकड़ और अपनी चूत की फांको पर रगड़ना शुरू कर दिया…”आह ओह्ह बेला तेरी चूत तो बहुत गरम है….डाल ना जल्दी….” छन्डीमल को जैसे ही अपने लंड के छोटे से सुपाडे पर बेला की चूत की गरमी का अहसास हुआ चन्डीमल ने एक दम सिसकते हुए अपनी आँखे बंद कर ली और बेला की चुचियों को पकड़ कर मसलने लगा….

बेला ने चन्डीमल के लंड को पकड़ कर तेज़ी से अपनी चूत की फांको पर रगड़ना शुरू कर दिया….तभी चन्डीमल का बदन एक दम से अकड़ गया….और चन्डीमल सीसियाते हुए झड़ने लगा….चन्डीमल के लंड ने दो तीन झटके खाए…और कुछ कतरे पतले से पानी के उसके सुपाडे के छेद से बाहर आकर सुपाडे पर ही लग गए…चन्डीमल की साँसे एक दम से उखाड़ चुकी थी….उसने आँखे खोल कर अपने ऊपेर बैठी बेला की तरफ देखा और मुस्कराते हुए बोला….”बेला तेरी चूत सच मे आग का समुंदर है… देख ना मेरा लंड तो अंदर भी जा नही पाया…..”

बेला: (मूह बनाते हुए) हां देख रही हूँ…खुद तो हल्के हो लिए…अब मेरी चूत मे जो आग लगाई है उसका क्या करू….

छन्डीमल: तू घबरा क्यों रही है मेरी जान दो मिनिट रुक तो सही….फिर देखना कैसे तेरी चूत मे लंड डाल कर तेरी चूत की गरमी निकालता हूँ…

बेला: (चन्डीमल के सिकुडे हुए लंड को हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए) पर सेठ जी मुझे तो नही लगता कि ये मेरी चूत की गरमी निकाल सकता है….

छन्डीमल: तू थोड़ी देर इसे हिला कर खड़ा तो कर…फिर देखना इसका कमाल…

बेला बेड से नीचे उतर गई….और बेड के किनारे खड़े होकर झुकते हुए चन्डीमल के लंड को हिलाना शुरू कर दिया…”उफ़फ्फ़ ये नही खड़ा होगा सेठ जी….” बेला ने चन्डीमल की तरफ देखते हुए कहा…”होगा मेरे जान थोड़ा सबर तो कर….” तभी एक दम से रूम का डोर खुला और डोर पर सोनू को खड़े देख कर चन्डीमल की गान्ड तो फटने को आ गई…..”ये क्या हो रहा है….” सोनू ने अंदर आते हुए कहा….”आने दो रजनी मालकिन को…बेला मैं तुम्हारी कर्तूते बताता हूँ उसको….” सोनू ने चन्डीमल की तरफ देखते हुए कहा…..

बेला: (नाटक करते हुए) नही नही सोनू मालकिन को कुछ ना बताना….वरना वो मुझे काम से भी निकाल देंगी….देखो इसमे मेरी कोई ग़लती नही है….ये तो सेठ जी मुझसे करवा रहे थे…मत बताना….सेठ जी कहिए ना सोनू को…..

छन्डीमल: (एक दम से हड़बड़ाते हुए) हां-2 सोनू बेटा रजनी को कुछ मत कहना… देख मैने तेरे और दीपा के रिश्ते के लिए हां भी कर दी है अब तो….देख अब तू पुरानी बातें भूल जा….

सोनू: पुरानी बातें तो मैं भूल ही गया हूँ….पर अब इस नये किस्से का करना है…(सोनू ने चन्डीमल और बेला की तरफ घुरते हुए कहा….)

छन्डीमल: बेटा तू जो कहे वो मैं करने को तैयार हूँ…पर रजनी को कुछ ना कहना…..

सोनू: वो तो मैं तुम्हारी पत्नी को बताउन्गा ही…..साले तूने मुझे जैल भिजवाया तो मैं चुप रहा….पर तूने मेरे माँ बाप को जेल भेज कर बहुत ग़लती कर दी है…..

बेला: देख सोनू बेटा….

सोनू: चुप कर मैं किसी का बेटा वेटा नही हूँ…..
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