Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
01-12-2019, 02:23 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
रात वही ...पर कमरा दूसरा ....जहाँ रूबी और कविता थे.....रूबी ने कविता को छेड़ छेड़ कर उसका बुरा हाल कर दिया था......इतना कि कविता रुआंसी सी हो गयी थी...

रूबी ....अरे मेरी जान सॉरी ...मैं तो मज़ाक कर रही थी...अब तू जल्दी छोड़ के चली जाएगी...कसम से तेरी बहुत याद आएगी....रूबी की आँखें भी छलक पड़ी..

कविता...क्यूँ मैं कहाँ जाउन्गि...अभी तो यहीं रहूंगी ...भाई के और तुम सबके पास....कोर्स पूरा होने से पहले कहीं नही जानेवाली......मैं नही जानेवाली...बोल दूँगी सॉफ सॉफ

रूबी .....अब चल चुकी तेरी ...दीवाना हुआ पड़ा है मेरा जीजा ...सुना नही कैसे गा रहा था.......एक लड़की को देखा तो....

कविता शरमा गई ...धत्त चुप कर...

रूबी ...अब चुप कर....मन में तो लड्डू फुट रहे होंगे...पिया से मिलने की जो घड़ी नज़दीक आने वाली है....

कविता.....बस भी कर ......

रूबी ....आए थे छुट्टी मनाने घूमने फिरने ...और आते ही मेरी बहन कोई ले उड़ा ....मारी गयी मेरी छुट्टियाँ ....लेकिन मुझे बहुत खुशी है...जीजा जी बहुत अच्छे हैं....

कविता ...एक काम कर मेरी जगह तू लेले ....तुझे इतना अच्छे लगते हैं वो तो...

रूबी ...मेरी फूटी किस्मत ...मुझे पसंद ही कहाँ किया....वैसे ये जितने भी जीजा होते हैं ना 1+1 स्कीम ले के चलते हैं...साली को आधी घरवाली ही समझते हैं....

कविता ...बक बक बंद कर ऐसे नही हैं वो...

रूबी....देखते हैं......कैसे निकलते हैं....सच अगर कभी मुझे पकड़ लिया तो......

कविता...ये मौका तो उन्हें कभी नही देनेवाली मैं....

रूबी ....वाह वाह ....अभी से इतना हक़ .....चिंता मत कर मैं ही उन्हें करीब नही आने दूँगी....और खिलखिला के हंस पड़ी....

चुहलबाजी करती हुई दोनो सो गयी.....

रूबी की नींद अचानक टूट गयी ....सोते सोते कविता उसके बहुत करीब आ गयी थी...उसका चेहरा बिल्कुल रूबी के चेहरे के पास था और उसकी गर्म साँसे रूबी के चेहरे को गरम कर रही थी...सोते हुए भी उसके सुंदर संतरे की छोटी फाडियों जैसे होंठ लरज रहे थे...उसका सीना एक भारी पन लिए उपर नीचे हो रहा था...यूँ लग रहा था जैसे वो कोई सपना देख रही हो......रूबी ने कभी लेसबो नही किया था...पर इस वक़्त उसे यूँ लग रहा था जैसे कविता के होंठ उसे पुकार रहे हों......


रूबी अपने चेहरे को उसके और करीब ले गयी और झीजकते हुए अपने होंठ उसके होंठों से मिला दिए....बिजली सी कोंध गयी रूबी के जिस्म में और सोते हुए भी कविता के होंठ उसके होंठों की छुअन से कांप गये.......

रूबी खुद को रोक ना पाई और कविता के होंठ चूसने लग गयी .....कविता नींद में ही तड़पति हुई रूबी से चिपक गयी और जैसे ही दोनो के उरोज़ एक दूसरे से टकराए .....रूबी सिसक पड़ी .....कविता ने कस के रूबी को अपने से भींच लिया.

एक पल के लिए रूबी ने कविता के होंठों को आज़ाद किया तो कविता के मुँह से निकल गया.......राजेश.......अहह और कविता ने अपने होंठ आगे बढ़ा दिए .....रूबी अब डर गयी ....जब नींद खुलेगी और कविता को सच का पता चलेगा ....कि सपना वो राजेश का ले रही थी ....पर असल में रूबी उसके साथ खेल रही थी तब क्या होगा...कहीं कविता नाराज़ हो गयी तो बात सुनील से भी नही छुपेगी ....तब.....तब का सोच रूबी को पसीना आ गया और उसने खुद को कविता से अलग कर लिया........

उसके अलग होते ही कविता बेचैन हो गयी ...और उसकी नींद खुल गयी .....साथ में रूबी को लेटा देख ...वो बूरी तरहा शरमा गयी.......है ये कैसा सपना था.....तकिये को अपनी बाहों में जाकड़ वो सोने की कोशिश करने लगी....

रूबी को तो रात भर नींद नही आई.......


एक और कमरे में......रमण सो चुका था...बहुत खुश था कि कविता को अच्छा लड़का मिल गया..जैसा उसे मिनी ने बताया था....लेकिन मिनी की आँखों से नींद गायब थी.....सबके सामने जब सुनील ने रूबी को भेजा था अपनी भाभी को लाने के लिए तो वो सोनल को लेकर आई थी....बहुत तेज झटका लगा था मिनी को ....इस बात से नही कि वो लड़की सोनल निकली थी ....इस बात से ज़्यादा कि सुनील ने सोनल से शादी की थी और सबके सामने उसे अपनी बीवी की तरहा इंट्रोड्यूस भी किया था.....यानी रूबी को पहले से ही पता था......वो तुलना कर रही थी ...उसके भाई ने उसके साथ क्या किया और यहाँ एक और भाई है ...जो बाक़ायदा शादी करता है और गर्व से .....अपनी बहन को अपनी बीवी बोलने में गुरेज़ नही करता .....काश सुनील ही उसका वो भाई होता.....आँखों से आँसू छलक आए ...अब उसे समझ में आया था....कि उसके हुस्न का जादू क्यूँ नही चल रहा था सुनील पर ...जिसके पास सोनल जैसी बीवी हो...अप्सरा को भी मात देती हुई....वो क्यूँ कहीं और मुँह मारेगा........लेकिन रमण से जो शर्त लगाई थी ....वो अभी तक उस शर्त को नही भूली थी ...उसने आदमी का एक ही रूप देखा था....औरत की चूत के पीछे पागल......वो एक नही कई औरतों की ...जैसा कि उसका अपना भाई था और जैसा की उसका अपना पति था.....आदमी के लिए यही धारणा उसके मन में घर कर चुकी थी ...और उसे यकीन था...कि वो सुनील को फँसा लेगी एक दिन...आख़िर सुंदरता में वो भी कम नही थी.....ये रात उसकी भी आँखों में ही गुजर गयी.....

अगले दिन सुबह सुनील जल्दी उठता है....सोनल और सुमन अभी सो रहे थे....

सुनील बाहर जा कर सीधा मिनी के रूम को नॉक करता है....मिनी क्यूंकी सोई नही थी इसलिए दरवाजा जल्दी खुल जाता है....

सुनील....सिर्फ़ इतना कहने आया था...बहुत से सवाल होंगे तुम्हारे ....सबका जवाब मिल जाएगा ...लेकिन कविता की शादी में कोई गड़बड़ नही होनी चाहिए......

ये बात सुनील ने दरवाजे पे खड़े हुए बहुत ही बर्फ़ीली आवाज़ में कही थी....

मिनी ....इतना गिरा हुआ समझते हो क्या......अंदर तो आओ....

सुनील...नही बाद में तुम दोनो से भी बहुत सी बातें करनी है .....पर अभी वक़्त नही है ...शाम को कविता की एंगेज्मेंट है और बहुत काम है.

मिनी ....मुझे भी तो बताओ क्या काम मैं कर सकती हूँ...आख़िर भाभी हूँ कविता की ....

सुनील....अगर रिश्तों की गहराई और उनकी मर्यादा को मान्यता देती हो....वो भी दिल से ...तो हाल की सजावट को सूपरवाइज़ कर लेना ...वैसे ये काम में सोनल को देने वाला था....

मिनी ...ये काम मुझ पे छोड़ दो...कविता सोनल के बहुत नज़दीक है ...उसे हर समय कविता के साथ ही रखो...

सुनील....भरोसा कर लूँ..कोई गड़बड़ नही होगी ....

मिनी ...कम से कम इतने की तो हक़दार हूँ ही ..चाहे मेरी पिछली जिंदगी कैसे भी गुज़री हो......आँखें छलक आई थी उसकी.

सुनील...ठीक है तो फिर ये काम तुम्हारे ज़िम्मे सगाई ठीक ठाक हो जाए फिर हम बात करेंगे.

सुनील निश्चिंत हो कर वहाँ से अपने कमरे में आया ---3 कप कॉफी के तयार किए और अपनी बीवियों को उठाने चल दिया.....

सुमन ने एक तरफ पलटी मारी हुई थी और सोनल ने दूसरी तरफ .....

सुनील ने कॉफी की ट्रे ...टेबल पे रखी...और पहले सुमन के पास गया ....हल्के से उसे सीधा किया और अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए.....सुमन की बाँहें अपने आप सुनील से लिपट गयी ...कुछ सेकेंड के चुंबन के बाद सुनील ने अपने होंठ अलग किए ...गुड मॉर्निंग जान ...उठ जाओ अब ....बहुत काम करना है आज.......

सुमन....उम्म लव यू डार्लिंग.....गुड मॉर्निंग.....उसकी आँखों से आँसू छलक पड़े थे......

सुनील...क्या हुआ ...ये आँसू क्यूँ....

सुमन...तुम नही समझोगे ....और लिपट गयी सुनील के साथ ....

सुनील...अगर नही समझता होता ...तो शायद आज तुम मेरी जिंदगी में नही होती ...वही दूरियाँ रहती जो एक माँ और बेटे के बीच होती हैं...क्यूँ पुरानी बातें सोचने लगती हो.......

सोनल जाग चुकी थी और आँखें बंद कर अपनी बारी का इंतेज़ार कर रही थी और इनकी बातें सुन...उसकी आँखें भी भीग चुकी थी ...और बंद पलकों की साइड से दो कतरे टपक पड़े थे...

सुमन....ये दर्द तुम नही समझोगे जान ...मुझे सच्चा प्यार मिला ...पर वो भी अपने बेटे से...........अपने बेटे से प्यार करने का गुनाह जो मैने किया है...उसकी सज़ा ...शायद उपर जा के ही मिलेगी.....

सुनील....तुमने कोई गुनाह नही किया....अगर किसी ने किया है तो मैने......अगर तुम्हें कोई गिल्ट है ...तो इसके बारे में हम कविता की शादी के बाद बात करेंगे ...प्लीज़ डॉल....नाउ चियर अप....बहुत काम करना है आज .......आज सारी शॉपिंग करनी है तुमने और सोनल ने ...कविता के लिए ...मेरी छोटी बहन को अप्सरा का रूप देना है ....उसे दुनियादारी सिखानी है ...पति के साथ कैसे रहे...ससुराल वालों के साथ कैसे रहे...बहुत ज़िम्मेदारी है जानूं....

सुमन.....अपने आँसू पोंछते हुए .....सच कहूँ...ये गिल्ट फीलिंग कभी कभी आ जाती है....जब कभी अपने इतिहास के बारे में सोचने लगती हूँ...लेकिन मैं बहुत बहुत खुशनस्सीब हूँ...जो तुम मेरी जिंदगी में आए ....अगर उपरवाला कभी ये पूछे की स्वर्ग चाहिए या सुनील....तो मुझे बस सुनील चाहिए ...मेरा सुनील...और कुछ नही...

सुनील...चलो बहुत हो गयी सेनटी बातें कॉफी ठंडी हो रही है ...सुनील फिर एक छोटा चुंबन लेता है सुमन का ...और उसे कॉफी का कप पकड़ा कर सोनल की तरफ जाता है 

सुनील सोनल के चेहरे पे झुकता है तो उसकी आँखों से टपके आँसू नज़र आ जाते है.......उसके होंठों पे अपनी ज़ुबान फेरते हुए पूछ लेता है ...अब तुझे क्या हुआ मेरी जान ....

सोनल एक दम सुनील से चिपक जाती है........कुछ नही बस दीदी की बातें सुन दिल भारी हो गया......

सुनील उसके होंठ अच्छी तरहा चूस्ता है .....गुड मॉर्निंग लव....फटाफट कॉफी ख़तम करो और रेडी हो जाओ...बहुत काम है आज.....

सुनील ने ब्रेकफास्ट का ऑर्डर रूबी के रूम में ही कर दिया था.

तीनो तय्यार होते हैं कॉफी पीने के बाद ....सुमन जब ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठ तयार हो रही थी ...तो फिर उसकी आँखें भीग गयी ......उसकी नज़र सिंदूर की डिब्बी पे थी ...जिसका वो इस्तेमाल अभी दिन में नही कर सकती थी....

सुनील ने उसे पीछे से जाकड़ लिया .....थोड़े टाइम की बात है जान ......तभी जाने सुमन को क्या सूझता है अपनी साड़ी उठा अपनी पैंटी को नीचे सरकाती है और अपनी कट के उपर सिंदूर का टीका लगा लेती है....अब उसके दिल को थोड़ा सकुन मिला और अधरों पे मुस्कान आ गयी ....लिपस्टिकस दिन में वो स्किन कलर की ही इस्तेमाल करती थी...और उसके गुलाबी होंठ अपनी पूरी छटा के साथ निखर जाते थे.....

तयार होने के बाद तीनो रूबी के कमरे में चले गये.....
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01-12-2019, 02:23 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
दोनो लड़कियाँ तयार हो चुकी थी ....ब्रेकफास्ट करते हुए ....सुनील सुमन को राजेश की उंगली का साइज़ देता है ताकि वो रिंग नाप के हिसाब से ले सकें और ......सोनल की ड्यूटी रात होने तक कविता के साथ ही लगा देता है .....रूबी ने तो साथ रहना ही था .....सुमन को भी शॉपिंग ख़तम करने के बाद वो होटेल में ही रहने के लिए बोलता है ...पता नही कब क्या ज़रूरत पड़ जाए ......

अब उसे इंतेज़ार था अपने दोस्त का जो विजय की फॅमिली का पूरा कच्चा चिट्ठा लाने वाला था......

सब लोग शॉपिंग के लिए चले गये और सुनील अपने कमरे में जा कर बैठ गया.....

थोड़ी देर बाद राजेश आ कर उससे मिलता है ....और शाम को एक सर्प्राइज़ देने की इज़ाज़त माँगता है....वो सर्प्राइज़ था कविता का बर्तडे .....जो आज ही था ...जिसके बारे में सुनील खुद सर्प्राइज़ देना चाहता था पर ...राजेश की बात मान लेता है....

सुनील थोड़ा हैरान भी था कि राजेश को पता कैसे चला कविता के बर्तडे के बारे में...पर कुछ बोलता नही ...चुप ही रहता है.....राजेश चला जाता है .....

राजेश सुनील के कमरे से बाहर निकला ही था कि उसके दोस्त का फोन आता है देल्ही से ...

राजेश ......अबे तू अभी देल्ही में ही है ...फ्लाइट क्यूँ नही ली अभी तक.....

दोस्त.....यार एक भी सीट नही मिल रही...

राजेश .....एक काम कर मुंबई चला जा....पापा ने एक चार्टर्ड फ्लाइट बुक की है 3 बजे की अपने दोस्तों के लिए उसमे आ जाना ...मैं इन्फ़ॉर्मेशन भेज दूँगा एरपोर्ट पे .....और हां अपनी बहन उर्वी को ज़रूर ले के आना ...कविता बहुत खुश होगी उसे देख....

दोस्त ...ठीक चल मैं मुंबई की फ्लाइट लेता हूँ.....तेरा काम हुआ या नही...

राजेश...हो गया यार थॅंक्स....उर्वी कविता की क्लास मेट है और उसकी सहेली भी ...तभी तो इतनी जल्दी उसकी डेट ऑफ बर्त का पता चला....मेरा साला तो खुद भोचक्का रह गया था कि मुझे कैसे मालूम पड़ा ....मज़ा आ गया यार ....और शाम को जब कविता को सर्प्राइज़ दूँगा .....तब देखते हैं ......उसे कैसा लगता है ....चल रखता हूँ...इंतेज़ार करूँगा...

राजेश अपनी माँ आरती के साथ सगाई की शॉपिंग के लिए निकल पड़ता है....

करीब घंटे बाद सुनील का दोस्त पहुँच जाता है और विजय की सारी इन्फर्मेशन उसे देता है....25 साल से ये लोग मुंबई में थे ...अच्छी फॅमिली है...बिज़्नेस भी अच्छा है और मार्केट में साख भी बहुत है ...पर मुंबई आने से पहले ये कहाँ से आए थे इसके बारे में कोई जानकारी नही थी........


सुनील को ये बात बहुत अजीब लगी ...और उसने विजय से बात करने का फ़ैसला कर लिया...

सुनील ने विजय के कमरे में इंटरकम से बात करी और मिलने के लिए कहा तो विजय ने उसे कमरे में ही बुला लिया.......

जब सुनील ने अपना सवाल किया ....तो विजय बहुत सीरीयस हो गया....उसे शायद उम्मीद नही थी कि सुनील इतनी छान बीन करेगा......

विजय.....सुनील बेटा ....अब जो मैं तुम्हें बताने जा रहा हूँ....वो बात सिर्फ़ तुम तक रहनी चाहिए ....किसी भी कीमत पे ये बात राजेश और कविता को नही पता चलनी चाहिए ....

सुनील वादा करता है और उसके बाद विजय बोलना शुरू करता है ....सुनते सुनते सुनील की आँखें भर आती हैं और एक बहुत बड़ा बोझ जो उसके दिल में था ....वो उतर जाता है....

सुनील विजय के पैर छूता है और एक खुश दिल के साथ पूरी तन्मयता के साथ कविता की सगाई की तयारि में जुट जाता है......

मिनी ब्रेकफास्ट करने के बाद होटेल के स्टाफ के पीछे पड़ चुकी थी और एक एक बात को बारीकी से डिसकस कर रही थी और अपने सुझाव भी दे रही थी...

सुमन आदि एक ज्वेल्लेर के यहाँ सगाई की अंगूठी पसंद कर रहे थे और इतेफ़ाक से आरती और राजेश भी वहीं पहुँच गये......क्यूंकी दोनो परिवारों ने गोआ के सबसे बड़े ज्वेल्लेर के पास ही जाना पसंद किया था.....कविता की नज़र जैसे ही राजेश पे पड़ी ...घबरा के सोनल के पीछे छुप गयी ....सोनल उसके इस रविए से हैरान हुई की अच्छा इसको क्या हो गया ....लेकिन जब आरती की आवाज़ सुनी तो समझ गयी और गर्दन मोड़ जब देखा तो आरती और राजेश वहाँ खड़े थे.....सोनल अपनी जगह से उठ गयी और आरती को नमस्ते कर उसे अपनी जगह दे दी ......सोनल के उठते ही कविता सामने पड़ गयी ...और नज़रें खुका ली...उसके दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी ....और राजेश शरत भरी नज़रों से उसे देख रहा था.

आरती ...ये तो बहुत अच्छी बात हो गयी आप लोग यहाँ मिल गये ...अब तो बहू की पसंद की ही अंगूठी लूँगी......इधर आ बेटी मेरे पास बैठ .....

कविता शरमाती हुई आरती के पास बैठ गयी ...फिर आरती ने उसके पसंद की डाइमंड रिंग ली .....

सुमन ने भी राजेश की पसंद की रिंग ले ली....उसके बाद ये लोग अपने रास्ते निकल पड़े ...बीच में में मौका देख राजेश ने कविता के हाथ को अपने हाथों में ले मसल दिया....कविता की तो सांस उपर की उपर नीचे की नीचे रह गयी ....रूबी ये सब हरकत देख रही थी और राजेश के कान में बोली...जीजा जी सब्र रखिए ...सब्र का फल मीठा होता है...

राजेश भी जवाब तो देना चाहता था पर अपनी माँ की वजह से चुप रह गया.

दोपहर तक इनकी शॉपिंग चलती रही ......कविता मन ही मन बहुत खुश थी ....सुमन से उसे वाक़्य में माँ का प्यार मिल रहा था...रूबी से एक दोस्त और बहन का और सोनल बिल्कुल एक भाभी की तरहा उसका ख़याल रख रही थी....कुछ दिनो में ये साथ छूट जाएगा....ये सोच सोच के वो उदास होती रहती ...रूबी जब भी उसे उदास देखती तो कुछ ना उत्पाटांग हरकत कर उसे हंसा देती ...

जब ये लोग होटेल पहुँच गये ....और सुनील के पास कमरे में गये तो वो अपने दोस्त के साथ ही बैठा हुआ ...रात के प्रोग्राम के बारे में बात कर रहा था और उसकी ड्यूटी उसने केटरिंग स्टाफ के उपर लगा दी थी......साथ ही हाल में डिस्को लाइट्स और डॅन्सिंग फ्लोर का बंदोबस्त कर ने को भी कह दिया था....इनलोगो के आते ही उसका दोस्त बाहर चला गया और जो काम सुनील ने उसे दिए थे उनमे लग गया.....

उसके जाते ही कविता सुमन से लिपट गयी और रोने लगी .....

सुमन....अरे क्या हुआ ...रोने क्यूँ लगी...

कविता रोते हुए ....मैं आप सब को छोड़ के नही जाउन्गि ....

सुमन...पगली ...एक दिन तो हर बेटी को जाना होता है ....और जब दिल करे तब मिलने आ जाना ....

कविता ....कैसे आउन्गि .....आप देल्ही में और वो मुझे मुंबई ले जाएँगे....

सुनील....कोई बात नही हम भी मुंबई शिफ्ट हो जाएँगे ...........पर कुछ टाइम बाद .....

सुमन और सोनल...दोनो ही चॉक के सुनील को देखने लगी ....

सुनील....बाद में बात करेंगे ....पहले इस गुड़िया को सजाओ और संवारो ....सबकी नज़रें मेरी बहन पे ही होनी चाहिए .....बिल्कुल सुंदरता की देवी की तरहा ......अच्छा में चलता हूँ ...कुछ काम निपटाने हैं....

सुमन ने ब्यूटीशियन को कमरे में ही बुला लिया .......कम से कम 4 लड़कियाँ आई थी ...जो कविता,सोनल,और रूबी को तयार करने लगी .....

सोनल के ज़ोर देने पे सुमन ने भी बॉडी मसाज करवा लिया और सोनल ने सुमन की चूत के चारों तरफ .....मेंहदी से सुनील का नाम लिखवा लिया .....और अपने भी ....

इन दोनो का मेक अप अलग रूम में हो रहा था और रूबी और कविता का अलग रूम में.

सोनल तो ऐसे तयार हुई थी कि जैसे आज उसकी शादी होनेवाली हो ...बस वो भारी गहनो की कमी थी और वैसे भी गहनो के बिना भी सोनल बहुत सुंदर लगती थी ....आख़िर भाभी जो थी लड़की की और उसे तो पूरा हक़ था सजने सवरने का.....सुमन ने आज सोनल को भी एक डाइमंड का हार ले दिया था और उसे पह्न उसकी सुंदरता और भी बढ़ गयी थी....

सुमन ने हल्का ही मेक अप किया था.

हल्के मेक अप के बावजूद भी सुमन अपनी सुडौलता की वजह से बड़ी कातिल लग रही थी और ब्यूटीशियन ने इतनी मेहनत करी थी सोनल/रूबी और खांस कर कविता को सजाने सवारने की आज महफ़िल का कोई भी आदमी इन तीनो से नज़रें नही हटा पाता और अपने अंदर इनको पाने की ख्वाइश पाल बैठता .......

राजेश के दोस्त तो यक़ीनन जब कविता को देखते तो उसकी किस्मत से जलन करते ........

वक़्त आ गया था कि ये लोग पार्टी हॉल में जाएँ ...पर सुनील और मिनी और सुनील का दोस्त तो बस लास्ट मिनिट तायारी में लगे रहे ....सोनल ने जाने कितनी बार फोन किया सुनील को ......दो घंटे पहले सुनील ने मिनी को भी भेज दिया था कि वो तयार हो जाए .....और मिनी के लिए दो घंटे काफ़ी थे अपने हुस्न को निखार देने के लिए.

आधा घंटा पहले ही सुनील आया ...फटाफट शेव करी नहाया और सुमन से अपने कपड़े माँगे तो सुमन ने उसके लिए एक नया जोड़ा निकाल दिया जो उसने और सोनल ने मिल कर खांस तौर पे आज की शाम के लिए नया खरीदा था.....

वो सूट पहनने के बाद अगर कोई लड़की सुनील को देखती तो बस देखती रह जाती .....

सोनल और सुमन तो बस .....अह्ह्ह्ह कर उठी जब सुनील तयार हो गया ....तयार होने के बाद जब सुनील की नज़र अपनी दोनो बीवियों पे पड़ी तो उसके लंड ने सलामी देनी शुरू कर दी ....सोनल उसकी हालत समझ मुस्कुरा उठी और अपने होंठ नशीले अंदाज़ में कटती हुई बोली .....सब्र करो जान अभी रात होने में काफ़ी वक़्त है ....

सभी हाल में पहुँच जाते हैं और कुछ देर बाद लड़के वाले भी आने शुरू हो जाते हैं .....जिस वक़्त सुनील वगेरह हाल में पहुँचे उसी वक़्त विजय वगेरह भी पहुँच गये ....कविता और राजेश को स्टेज पे रखी दो सजी हुई कुर्सियों पे बिठा दिया गया और विजय और आरती वहीं गेट पे रुक गये और अपने मेहमानों का स्वागत करने लगे ....रूबी कविता के पास ही रही ...सुनील और सोनल भी गेट पे रहे और आने वालों का स्वागत करते रहे विजय के साथ.

आरती ने एक पंडित का भी इंतेज़ाम कर रखा था ....जब सब .....सेट्ल होगया ( इस दोरान वेटर्स कोल्ड ड्रिंक्स और हॉट ड्रिंक्स सर्व कर रहे थे स्नॅक्स के साथ) तो पंडित जी ने पूजा आरंभ की और जो वक़्त उन्होने निकाला था उस के हिसाब से राजेश और कविता ने एक दूसरे को अंगूठी पहनाई .....उसी वक्त उपर से दोनो पे गुलाब के फूलों की पत्तियॉं की बारिश होने लगी ...ये इंतेज़ाम मिनी ने खांस तौर पे करवाया था ........हॉल के सेंटर में कुछ अंधेरा सा था और वेटर्स उस एरिया को घेर के खड़े हुए थे ताकि कोई वहाँ ना जा सके .....

इधर......................................
जिस वक़्त ...जिस लम्हा राजेश ने कविता को अंगूठी पहनाई ...........उसी वक़्त समर की आँख खुल गयी ...जैसे उसकी अंतरात्मा पे पड़ा एक बोझ हट गया हो ....और उसके अवचेतन मश्तिश्क ने उसे आज़ादी दे दी दुबारा जिंदगी जीने की ...........

अंगूठी पहनाने के बाद विजय ने दोनो को नीचे उतार गेस्ट्स से मिलने को कहा ...........

दोनो अपनी सीट से खड़े हो जाते हैं......दोनो के चेहरे पे छाई खुशी बता रही थी ....कि जब जीवन साथी का चुनाव हो जाता है और परिवार की सहमति के साथ होता है ...वो पल एक यादगार बन जाता है ...

दोनो सीडीयों की तरफ बढ़े ......और राजेश रुक गया ........कमर झुका के कविता के सामने झुकते हुए ....

राजेश:- लॅडीस फर्स्ट.
कविता एक स्माइल देती है और उससे पहले ही उतरने लगती है और जैसे ही पहला हदम सीढ़ियो पे रखती है वैसे ही सीढ़ियों की लाइट्स अप हो जाती हैं आंड तभी पीछे से बहुत ज़ोर से आवाज़ आती है

हॅपी बर्तडे कविता!!!!!!!!.

एक पल के लिए तो वो घबरा जाती है बट जब उसे वो शब्द वापस से गूंजते हुए सुनाई देते हैं तो उसकी आँखें नम हो जाती है और बहुत ही हैरत से वो राजेश की तरफ देखती हैं.

तब तक कविता एक कदम नीचे उतर चुकी थी.

राजेश उसके पास आता है और उसका हाथ पकड़ के उसे वापस स्टेज पे लाता है और फिर से सॉफ्ट्ली प्यार से कहता है

हॅपी बर्तडे कविता. हॅपी बर्तडे.......

कविता हैरानी से उसे देखे जा रही थी. राजेश उसके चेहरे से पढ़ लेता है कि उसे बहुत सवाल करने हैं.

कविता कुछ बोलती ....तभी अंधेरा हो जाता है और एक स्पॉट लाइट कविता के उपर पड़ती है और चमकीले सितारों और फूलों की बारिश कविता पे होने लगती है .......कविता वहीं जाम जाती है और तभी एक स्पॉट लाइट बीच सेंटर पे पड़ती है ....अब वहाँ से वेटर्स हट चुके थे और वो स्पॉट लाइट सुनील पे पड़ती है जो अपनी बाँहें फैला अपनी बहन का इंतेज़ार कर रहा होता है .....

खट से सारी लाइट्स ऑन हो जाती हैं और राजेश कविता का हाथ पकड़े उसे सुनील के पास ले जाता है ....कविता सुनील की बाँहों में समा जाती है और रोने लगती है .....

सुनील : क्या हुआ मेरी गुड़िया को ...आज तो खुशी का दिन है ...ऐसे रोते नही ....

कविता ...बस चिपकी हुई सुबक्ती रही ...इतना प्यार सहना उसके बस में नही था ...भाई और होनेवाला शोहेर दोनो ही बेमिसाल थे.

सुनील....चल अब बस कर सब तुझे ही देख रहे हैं.....चल केक काट ....और सुनील उसे बाँहों में लिए पलट जाता है ....पलटते ही सामने एक बहुत बड़ा केक था....

सुमन,सोनल, मिनी,रूबी, विजय और आरती सभी वहीं आ जाते हैं....

कविता जब केक काट रही थी तो विमल भी राजेश के पास आ के खड़ा हो गया ....राजेश ने कनखियों से उसे रूबी की तरफ इशारा किया और इतने में केक कट गया और हॅपी बर्तडे कविता का शोर हॉल में गूँज गया ......विमल की नज़रें जब रूबी पे पड़ी ..वो तो वहीं जम के रह गया.....

राजेश ने उसे कोहनी मारी तो वो सकपका के नज़रें इधर उधर फेरने लगा पर घूम फिर के उसकी नज़रें फिर रूबी पे टिक जाती .... सोनल ने इस बात को ताड़ लिया और सुनील के कान में कुछ कहा .....सुनील ने अपनी नज़रें विमल पे गढ़ा दी तो राजेश भी थोड़ा घबरा गया और विमल को इशारा किया फुट ले अभी....

वेटर्स केक सारे गेस्ट में बाँटने लगे और राजेश कविता से बोला ....चलो तुम्हें अपने ख़ास दोस्त से मिलाता हूँ...कविता ने सोनल की तरफ देखा और उसने आँख से इशारा कर दिया जाने का .....विमल एक कोने में खड़ा बस रूबी को देख रहा था......
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01-12-2019, 02:26 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
राजेश कविता के साथ चलते हुए ...यार हर बात क्या भाभी से पूछ के करोगी ...अब तो हमारी सगाई हो चुकी है ...इतना तो मेरा हक़ बन ही गया है ...

कविता चुप रही बस मुस्कुरा दी ....राजेश उसे ले कर विमल के पास पहुँच गया .......

राजेश ......कविता ये है विमल मेरा जिगरी यार 

विमल...भाभी जी प्रणाम और कविता के चरणो में बैठ गया ...

कविता तो उछल पड़ी ...ये ये क्या कर रहे हो...

विमल....भाभी जी इस ग़रीब का भी उधार करवा दो....आपकी बड़ी कृपा होगी .....

कविता .....अरे उठो तो ...सब देख रहे हैं...ये क्या कर रहे हो.....और कैसा उधार.....

राजेश .......कवि इस बेचारे को मेरी साली साहिबा पसंद आ गयी है ...


कविता...क्या क्या मत लब.......

राजेश ....यार सिंपल सी बात है ...जनाब रूबी से शादी करना चाहते हैं....

कविता अब मुस्कुरा उठी ....ओह तो ये बात है ...

विमल अभी तक उसके कदमो में ही बैठा हुआ था...

कविता ...देवर्जी ...ये अंगूर खट्टे ही नही कड़वे भी हैं .....और मेरे हाथ में कुछ नही....

तभी सोनल भी वहाँ आ गयी ........क्या हो रहा है ......

विमल फट से सोनल के कदमो की तरफ मूड गया .....भाभी की भाभी याने बड़ी भाभी ........प्लीज़ बड़ी भाभी जी ......बचा लो इस ग़रीब को....

राजेश और कविता खिलखिला के हंस पड़े और सोनल हैरानी से विमल को देख रही थी ...वैसे वो समझ तो चुकी थी....

सोनल...अरे उठो और ढंग से बात करो क्या मसला है ......तुम्हारे भैया को बुलाती हूँ....सारी प्राब्लम सॉल्व कर देंगे....

विमल ऐसे उठ के खड़ा हुआ जैसे स्प्रिंग लग गये हों......मार पड़वाओगी क्या भाभी .....

सोनल...क्यूँ ऐसी क्या बात है जो मार पड़ेगी .....और अगर मार पड़ने वाली बात है तो फिर ऐसा काम करते ही क्यूँ हो....

विमल...मैं तो सीधा साधा था ....ये इसने मेरा दिमाग़ खराब कर्वादिया .......वो राजेश की तरफ इशारा करता है....

सोनल के सामने तो राजेश की भी बोलती बंद हो गयी थी .....

राजेश ...म म मा मैने तो कुछ नही किया 

कविता ...क्यूँ अभी तो कह रहे थे......

राजेश ....क क क क्या कह रहा था क क्कुच्छ भी तो नही ...

सोनल ...क्या चक्कर चल रहा है मैं उनको बुलाती हूँ....और सोनल मुड़ने लगी तो....

राजेश ...भाभी प्लीज़ रुक जाओ ...वो बात ये है कि विमल को रूबी पसंद आ गयी है और वो उससे शादी करना चाहता है....

सोनल.....क क.क क्य्ाआआआ

राजेश और विमल दोनो ही सर झुकाए खड़े रहते हैं...

सोनल हँसती हुई ...ये तुम्हारा दोस्त भी तुम्हारे जैसा है क्या ...चट मँगनी पट ब्याह वाला...

राजेश ....भाभी प्लीज़ विमल अच्छा लड़का है मैं इसकी गॅरेंटी लेता हूँ.....

सोनल....ह्म्म्मी ठीक करती हूँ तुम्हारे भैया से बात ....

राजेश...विमल ...दोनो ही ...थॅंकआइयू भाभी ....प्लीज़ हां करवा देना....
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01-12-2019, 02:26 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
सोनल हँसती हुई सुनील की तरफ बढ़ती है और विमल हाथ जोड़े उपरवाले से प्रार्थना करने लगता है......

तभी आरती वहाँ आ जाती है ...

आरती .....क्या हो रहा है ......तुम लोग यहाँ कोने में क्यूँ खड़े हो ....सब लोगो से मिला ना मेरी बहू को...

राजेश ....मोम ...वो ....विमल को रूबी पसंद आ गयी है तो सोनल भाभी से रिक्वेस्ट कर रहे थे कि लगे हाथों इस का भी काम हो जाए ....मतलब इसकी भी सगाई हो जाए ...

आरती...कययय्याआआअ 

विमल......आंटी प्लीज़ ....

आरती...उफ़फ्फ़ आज कल के लड़के ...अरे पहले अपने पापा से तो बात करता ...सीधा उन्हें बोल दिया.....और पैर पटकती हुई विजय की तरफ चल दी....

रूबी सुनील के साथ ही खड़ी थी और सुमन भी वहीं थी ....

सोनल ....तीनो को एक तरफ ले जाती है और विमल की तरफ इशारा करते हुए सारी बात बताती है....

रूबी तो बिदक जाती है.......नही भाभी भूल कर भी कभी मेरी शादी की बात मत करना......मैं इस लायक ही नही रही ......

सुमन....रूबी ऐसे नही सोचते .....और तुझे जिस बात का डर है वो तू मुझ पर छोड़ दे.....

रूबी ...जब तक मेरा कोर्स पूरा नही होता ...तब तक प्लीज़ कोई भी इस बारे में बात नही करेगा.....

सोनल वहीं से राजेश की तरफ ठेंगा दिखा के उसे इशारा कर देती है ...भूल जाओ रूबी को......

विमल को बहुत बड़ा झटका लगता है ....कोई कमी नही थी उसमे ....राजेश की तरहा अच्छी पर्सनॅलिटी थी ....बाप के चलते हुए बिज़्नेस को संभाल रहा था......कोई लड़की उसे ना कर देगी ..ये उसके लिए बहुत बड़ी बात थी....

विमल राजेश और कविता की तरफ एक बार देखता है और फिर हाल से बाहर चला जाता है ....

राजेश......ये पागल साला कहीं कुछ कर ना बैठे.......कविता प्लीज़ तुम अपनी भाभी के पास जाओ ..मैं इस गधे को देख कर अभी आता हूँ....

इस दौरान आरती विजय को सारी बात बता देती है .....विमल के मोम डॅड भी आए हुए थे....विनय उनसे बात करता है ....वो दोनो भी रूबी को गौर से देखते हैं....और जिस खानदान में विजय के बेटे की शादी हो रही हो ..उसी खानदान में अपने बेटे की शादी से उन्हें कोई प्राब्लम नही थी....


विमल बार में घुसने वाला था ...राजेश ने उसे पकड़ लिया ...भागने की वजह से वो हाँफ रहा था.....अबे ओ इक्कीसवीं सदी के मजनू ........चल अंदर और तमाशा मत कर ....
किसने कहा था तुझे कविता से सब बोलने के लिए ....पापा से बात करनी थी ना ....चल माँ को बोल दिया है देखते हैं क्या होता है ...और तुझे जल्दबाज़ी किस लिए हो रही है ...शांत रह ..हर किस्सा मेरी तरहा नही फटाफट हो जाता ...

राजेश जब विमल को अंदर ले जाता है तो देखता है कि उसके मोम डॅड और विमल के मोम डॅड सुनील से बातें कर रहे थे...

सुनील विजय को सॉफ मना कर देता है .....रूबी अभी शादी नही करना चाहती और वो कोई ज़ोर नही डालेगा रूबी पर .......विजय उसकी बात का आदर करता है और बात राजेश और कविता की शादी पे घूम जाती है .......

ये लोग बात कर रहे होते हैं कि राजेश एक घोषणा करता है कि आज के मोके पर उसका दोस्त गाना सुनाएगा.......

हियर कम विमल ....गिव हिम आ बिग हॅंड ......

विमल राजेश को बोलता है अबे ये क्या नौटंकी मचा रहा है ....

राजेश....साले मौका दे रहा हूँ तुझे ......बहुत अच्छा गाता है तू ...शायद कुछ तो इंटेरेस्ट तेरे में जागे उसका ........चल अब शुरू हो जा ......

राजेश विमल को स्टेज की तरफ धकेल देता है और खुद कविता के पास जा के खड़ा हो जाता है ...


विमल गाना शुरू करता है ......


मिले ना फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली
मिले ना फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली
इसी तरह से बसर
इसी तरह से बसर हम ने ज़िंदगी कर ली
मिले ना फूल

अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा
अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा
खुदा तराश लिया
खुदा तराश लिया और बंदगी कर ली
मिले ना फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली

नज़र मिली भी ना थी और उनको देख लिया
नज़र मिली भी ना थी और उनको देख लिया
ज़ुबान खुली भी ना थी
ज़ुबान खुली भी ना थी और बात भी कर ली
मिले ना फूल..

वो जिनको प्यार है चाँदी से, इश्क़ सोने से
वो जिनको प्यार है चाँदी से, इश्क़ सोने से
वोही कहेंगे कभी
वोही कहेंगे कभी हम ने ख़ुदकुशी कर ली

मिले ना फूल तो काँटों से दोस्ती कर ली
इसी तरह से बसर हमने ज़िंदगी कर ली
मिले ना फूल.
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01-12-2019, 02:26 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
विमल जब गा रहा था ...सबकी नज़रें उसपे टिक जाती हैं..खांस कर रूबी की ....जो बड़े गौर से विमल को देखने लगी थी ......इस बात को सोनल भी नोट करती है कि रूबी की आँखें नम पड़ी हुई थी ...

गाने के दौरान विमल एक बार भी अपनी नज़र उपर नही करता और सर झुकाए हुए ही गाता है ....

राजेश को उसपे गुस्सा चढ़ रहा था ...गधा इतना सॅड सॉंग क्यूँ गा रहा है .....

जब उसका गाना ख़तम हुआ तो सर झुकाए हुए ही स्टेज से उतर राजेश के पास चला गया .....हॉल में तालिया बाजी पर महॉल थोड़ा गमगीन सा हो गया था ...

तभी आरती अनाउन्स करती है कि अब राजेश भी एक गाना सुनाएगा .....ज़ोर की तालियाँ बजती है ...कविता हैरानी से राजेश को देखती है .....और वो उसके कान में बोल देता है ....होनेवाले पति की खूबियों का धीरे धीरे ही पता चलता है ....और फट से स्टेज पे चढ़ जाता है ....... 

जो गाना वो गाता है उसे सुन कविता का शर्म के मारे बुरा हाल हो जाता है और वो सोनल के पास जा उसके पीछे छुप जाती है ...


शादी के लिए रज़ामंद कर ली,
रज़ामंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
शादी के लिए रज़ामंद कर ली,
रज़ामंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
हो उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
शादी के लिए रज़ामंद कर ली,
रज़ामंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली

बन के भँवरा अब बाग मे,
बन के भँवरा अब बाग में
कलियों के पिछे नही भगुगा मैं
शाम सवेरे बस आज से,
गलियों मे अब नही झकुँगा मैं
नैनो की खिड़की, नैनो की खिड़की
मैने बंद कर ली, हाँ मैने बंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
हो उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली

मेरी नज़ारो ने हुसन की,
मेरी नज़ारो ने हुसन की,
नाज़ुक बहारो को च्छू लिया
नाज़ है मुझको तक़दीर पर,
मैने सितारो को च्छू लिया
मैने तो क़िस्मत, मैने तो क़िस्मत
बुलंद कर ली, बुलंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
हो उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
उड़ती चिड़िया पिंजरे मे बंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली
आहा, शादी के लिए रज़ामंद कर ली,
रज़ामंद कर ली
मैने इक लड़की पसंद कर ली.



गाना पूरा होने के बाद तालियाँ बाजी ...फिर खाने का काम शुरू हो गया .......राजेश वहीं चला गया था जहाँ कविता खड़ी थी सोनल के पीछे और छुप छुप के राजेश को देख रही थी....
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01-12-2019, 02:26 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
सब लोग खाना खा रहे थे और विजय सुनील को लेकर एक जगह बैठ गया था .......रूबी बार बार विमल की तरफ देखती जो बहुत उदास सा एक कोने में खड़ा ना जाने शुन्य में किसे देख रहा था......

विमल की माँ ने उसे खाने के लिए बुलाया ...पर विमल इनकार करता हुआ हॉल से बाहर निकल गया ...हॉल से ही नही होटेल से बाहर चला गया और बीच पे जा कर दूर तक फैले हुए समुद्र को देखने लगा ......राजेश की तरहा विमल भी बस अपने करियर पे ध्यान लगा रहा था और अपने डॅड के बिज़्नेस के साथ जुड़ने के बाद बस उसे आगे बढ़ाने में लगा रहा ...कभी लड़कियों की तरफ उसने ध्यान ही नही दिया था .....राजेश की वजह से आज पहली बार किसी लड़की को गौर से देखा और दिल ने उन तारों को जगा दिया जो बरसों से सोई पड़ी थी.....पर रूबी की ना ...उसे बहुत चोट दे गयी थी ....अपने अंदर ही कोई कमी ढूँडने लगा था वो.......

ऐसा नही था कि रूबी को विमल पसंद नही आया था ...पर उसका अतीत उसे आगे बढ़ने से रोकता था...बिखर जाती थी वो जब भी उसकी शादी के बारे में बात होती थी....और इन क्षणों में उसकी नफ़रत रमण के लिए और भी बढ़ जाती थी ....

तभी वो एक लड़की वो समुन्द्र में घुसते हुए देखता है ...जो बस आगे बढ़ती जा रही थी ..........वो ज़ोर से चिल्लाता है .....उसे रोकने के लिए .........पर वो लड़की नही रुकती और बस आगे बढ़ती रही यहाँ तक कि उसका सर तक पानी में डूब गया था ........अंधेरा फैल चुका था गनीमत ये थी कि बीच पे इस वक़्त होटेल की लाइट्स जल रही थी .....

विमल उसकी तरफ दौड़ता है और पानी में छलाँग लगा उसे ढूँडने की कोशिश करता है ...

खाने के बाद लगभग सभी गेस्ट चले गये अपने कमरों में ...इनकी वापसी की फ्लाइट विजय ने शादी के बाद ही रखी थी ....और सुनील से सभी बातें करने के बाद ये तय हो गया था कि 4 दिन बाद शादी होगी ......

कुछ जवान जोड़े बचे हुए थे और अब जा के कविता की नज़र उर्वी पे पड़ी .......

कविता ...उर्वी तू यहाँ.......और मिलने क्यूँ नही आई ......स्टेज पे.....

उर्वी ...कविता के गले लग गयी .....यार इतनी जल्दी जल्दी आना हुआ की तेरे लिए कोई गिफ्ट ही नही ला पाई इस लिए खाली हाथ स्टेज पे आना अच्छा नही लगा .....

कविता ...लेकिन तू ....

उर्वी ...मेरे भैया जीजाजी के दोस्त हैं.....

कविता ....ओह ...अब समझी ...तूने ही मेरे बर्थडे के बारे में बताया होगा ....

उर्वी ...अब होनेवाले जीजा के लिए इतना तो करना ही था ना उपर से भैया का भी ज़ोर था....

कविता .....चल तुझे घरवालों से मिलाती हूँ .......और कविता उर्वी को खींच कर सोनल के पास ले गयी ....

कविता ...भाभी ये मेरी सहेली है ...इसके भैया और वो दोस्त हैं .....

सोनल .......उर्वी से गले मिलती है ....

उर्वी ......आप इसकी भाभी हैं तो मेरी भी हुई ......वैसे आप हमारे कॉलेज से ही पासआउट हुई थी ना....

सोनल...हां वहीं से हुई थी......कैसे चल रहा है सब....

उर्वी ...बढ़िया भाभी ....सब ठीक है .....

सोनल ...तुमने कब जाय्न किया .......

उर्वी ...कविता के साथ ही ....हम लोग बॅंगलुर से देल्ही आए थे ...पापा की ट्रान्स्फर देल्ही हो गयी थी ......मेरा माइग्रेशन तो ही नही रहा था ...पर भैया ने किसी तरहा करवा ही लिया.


सोनल....अब तुम दोनो आपस में बातें करो ...मैं अभी आती हूँ..कुछ काम है ....

सोनल दोनो को छोड़ सुनील के पास चली गयी .......क्या बात है इतनी टेन्षन में क्यूँ हो..

सुनील...यार 4 दिन में शादी का सारा इंतेज़ाम....

सोनल ...अरे आपने क्या करना है ...होटेल को इन्स्ट्रक्षन देदो सब हो जाएगा...हमे तो बस शॉपिंग ही करनी है ...गिफ्ट्स वगेरह की ...

कविता तक खबर पहुँचती है कि 4 दिन बाद शादी ....उसके तो हाथ पाँव फूल गये दौड़ के सुनील के पास गयी ...भाई ये क्या 4 दिन में शादी ...कुछ तो वक़्त लेते .....

सुमन........कवि बाद में बात करेंगे यहाँ नही .....

तभी राजेश वहाँ आ जाता है ....एक वेटर को साथ लिए हुए जो सबके लिए कॉफी लाया था......

राजेश ने उड़ती उड़ती बात सुन ली थी कि कविता को इतनी जल्दी शादी से प्राब्लम है .....

राजेश सब को कॉफी के लिए बोलता है और सारे लेलेते हैं...

राजेश ...कुछ प्राब्लम....

सुमन...नही बेटा कुछ नही ....

राजेश .....कुछ तो है ...ये कविता इतनी सीरीयस क्यूँ है ...

सोनल ....कुछ नही है ..लड़कियाँ ऐसी ही हो जाती हैं...जब शादी का सुनती हैं....

सुनील...काफ़ी देर हो चुकी है ......मेरे ख़याल से अब चलना चाहिए ...

राजेश ....सुनील भाई क्या कल कविता को साथ ले जा सकते हैं......असल में जो भी शॉपिंग करनी है वो इसकी पसंद से ही करना चाहते हैं.....मोम साथ में होंगी...

सुमन...कोई बात नही बेटा ..कविता चल देगी साथ पर हां दोपहर तक इसे वापस छोड़ देना.......हमे भी तो शॉपिंग करनी है शादी की.....

राजेश ....जी आंटी बिल्कुल......अच्छा चलता हूँ.....सबको नमस्ते कर वो चला जाता है ...

सुनील भी विजय से इज़ाज़त लेता है और सभी सुनील की हट की तरफ चले जाते हैं....मिनी कुछ देर पहले ही निकल गयी थी....क्यूंकी रमण को इतनी देर व्हील चेर पे बैठने से प्राब्लम हो रही थी...

सब कमरे में पहुँच के बैठ गये जिसका जहाँ दिल किया ....सुनील ने एक नज़र घुमाई .......ये रूबी कहाँ है ????

सोनल फट से कमरे से बाहर निकली और रूबी और कविता के कमरे की तरफ गयी ........कमरा लॉक था.... वो दौड़ती हुई वापस आई ....

सोनल.....रूबी तो कमरे में भी नही है ........कहाँ गयी वो ........

कविता ...मैने तो उसे बस तभी देखा था जब विमल गा रहा था ....उसके बाद तो मुझे नज़र ही नही आई ......

सुनील ....उठ के बाहर भागने ही वाला था रूबी को ढूँडने कि सामने से विमल आता हुआ दिखाई दिया ....उसने एक लड़की को अपनी दोनो बाँहों पे उठा रखा था ........ध्यान से देखा तो वो रूबी थी .... सुनील भाग के उसके पास गया ....रूबी पूरी तरहा भीगी हुई थी ...और बेहोश थी ...विमल भी पूरी तरहा भीगा हुआ था....
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01-12-2019, 02:27 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
विमल...भाई जल्दी डॉक्टर को बुलाओ ...ये आत्महत्या करने जा रही थी ...वो तो मेरी नज़र पड़ गयी .....


सुनील उसे कमरे में ले गया .....सोनल फटाफट इसके कपड़े बदलो .......बेड रूम में ले जाओ ..मैं डॉक्टर को बुलाता हूँ....

सुमन...क्या हो गया है तुम्हें.....मैं हूँ ना ....

सुमन अंदर कमरे में चली गयी ......रूबी को उल्टा किया और उसकी पीठ को प्रेस कर उसके फेफड़ों से पानी निकालने की कोशिश करने लगी .....काफ़ी पानी निकला और रूबी को वॉमिटिंग भी हो गयी ....

सुमन ने सुनील को भेज कुछ दवाइयाँ फटा फट मँगवाई ...विमल वहीं था .....उसने सुनील के हाथ से पर्ची ली और भाग लिया 10 मिनट में विमल दवाइयाँ ले कर पहुँच गया....

सुमन रूबी के इलाज़ में लग गयी ....सुनील ने विमल का शुक्रिया अदा किया ...

विमल...नही भाई शुक्रिया की कोई ज़रूरत नही रूबी की जगह कोई और भी होता तो मैं यही करता ...अच्छा चलता हूँ...कोई ज़रूरत पड़े तो बुला लीजिएगा ....राजेश के साथ वाले कमरे में मैं रुका हुआ हूँ...

विमल चला गया .........अंदर रूबी को भी होश आ गया था....वो कुछ खोई हुई सी लग रही थी....सुमन ने उसका अच्छी तरहा चेकअप कर उसे नींद का इंजेक्षन दे दिया...

सबके चेहरे गमगीन थे...रूबी ने स्यूयिसाइड अटेंप्ट क्यूँ किया .......

सुमन बेडरूम से बाहर आ गयी .......कविता बेटी जाओ बहुत दे हो चुकी है ...जा के सो जाओ .....

कविता को डर लग रहा था ...जिंदगी में पहली बार उसने किसी को शूसाइड करते हुए पाया और वो बहन को तड़प रही थी वो अंदर ही अंदर आख़िर ऐसी क्या बात हुई जो रूबी ने स्यूयिसाइड करने की सोची ....शादी के प्रपोज़ल से तो कोई स्यूयिसाइड नही करता ....क्या बात हुई ..जो रूबी ने इतना बड़ा स्टेप उठा लिया ....

सविता मम्मी कहाँ चली गयी ...क्यूँ गयी ...आज मेरी सगाई हुई और मम्मी यहाँ नही ....हो क्या रहा है ....दिमाग़ फटने लग गया उसका ...हज़ारों सवाल खड़े हो चुके थे उसके दिमाग़ में...

सुमन.......सुनील एक काम करो ....तुम और सोनल ...आज कविता के कमरे में सो जाओ ...इसे यहीं मेरे पास रहने दो .......रूबी सो चुकी है ...अगर रात को उठ गयी तो मैं संभाल लूँगी ....तुम लोग सुबह इधर आ जाना .....

सुनील...लेकिन.....

सुमन ...बस कोई बात नही ....जाओ तुम दोनो कल से बहुत काम भी करने हैं...सोनल...कविता की नाइट ड्रेस इधर दे जाओ.....

सुनील कविता के कमरे में चला गया .....सोनल अपना नाइट गाउन साथ ले गयी और कविता की नाइट ड्रेस ला के दे दी.

नींद तो किसी को नही आनी थी ...रूबी ने स्टेप ही ऐसा उठाया था.....

इधर..................................................................
समर से लाइफ सपोर्ट सिस्टम्स सभी हटाए जा चुके थे ....अब वो खुद सांस ले रहा था ....देख रहा था समझ पा रहा था ....पर ये जिंदगी मोत से बत्तर थी ...वो यही दुआ माँग रहा था कि काश उसे कभी होश ना आता ...

ऐक्सीडेंट की वजह से उसकी एक टाँग जा चुकी थी ...अब सारी जिंदगी उसे बेसाकी के सहारे ही चलना था .....और उपर से उसके गुप्ताँग में ऐसी चोट लगी थी ...कि वो अपनी मर्दानगी खो बैठा था.......

उसकी दाई टाँग घुटने से नीचे काटी जा चुकी थी और डॉक्टर उसे नकली टाँग लगाने की सलाह दे रहे थे ......जो ऑर्डर पे ही बनाई जाती है और काफ़ी लंबा सेशन चलता है फीजियोथेरपि का .....

,,,,,,,,,,,,,,,,,,इधर ,,,,,,
सवी हॉस्पिटल में बैठी सोच रही थी आगे क्या करे ...उसे कोई रास्ता नज़र नही आ रहा था ...बहुत कोशिश करी पर सुनील के जुड़वा को उसका नाम तक याद नही आ रहा था ....सवी ने उसका नाम अमर रख दिया .....अभी कुछ दिन उसे हॉस्पिटल में ही रखना था क्यूंकी अन्द्रूनि चोटें अभी ठीक नही हुई थी ...उसके बाद सवी ने उसे अपने साथ ही रखने का फ़ैसला कर लिया ....शायद यही पश्चाताप था उसका सूमी को उसके बेटे से जुदा रखने का .....अब उसे अमर को एक नयी जिंदगी देनी थी ...एक नयी पहचान देनी थी ...क्या पता कभी उसकी याददाश्त वापस आती है या नही ...
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कविता के कमरे में पहुँच ...सुनील ने सारे कपड़े उतार दिए और सिर्फ़ अंडरवेर में लेट गया .....सोनल बाथरूम में घुसने वाली ही थी कि सुनील को इस हालत में देख फटा फट अपने कमरे में भागी और सुनील का नाइट सूट ले आई .....

सोनल ...लो पहन लो ...भूल ही गयी आपका नाइट सूट लाना...

सुनील पहन लेता है और इंटरकम से सुमन से बात करता है ....सूमी जब रूबी की नींद खुले तो उसे हाइमेनॉप्लॅस्टी के बारे में बताना ....देल्ही पहुँचते ही ऑपरेशन करवा देंगे .....मेरे ख़याल से वो शादी के लिए इसीलिए मना कर रही है ...क्यूंकी वो अपनी वर्जिनिटी खो चुकी है और यही वजह होगी उसकी इस हरकत को करने की ...

सुमन ....उफ़फ्फ़ ये बात पहले क्यूँ दिमाग़ में नही आई ...ठीक कहा तुमने ....एक बार उसकी हाइमेनॉप्लॅस्टी हो गयी उसके दिमाग़ से ये बातें निकल जाएँगी .....

आधी रात को किसी के सुबकने की आवाज़ सुन सुमन की नींद खुल गयी ...देखा तो रूबी उठ के रो रही थी ....साथ में कविता शायद सोच सोच के सो चुकी थी ...

सुमन ने रूबी के सर पे हाथ फेरा और उसे अपने साथ लिविंग रूम में ले गयी और बेडरूम का दरवाजा बंद कर दिया .......

सुमन ...क्यूँ री ...हमे जीते जी मारना चाहती थी क्या ...क्या कमी है हमारे प्यार में जो तूने ऐसा कदम उठाया ....

रूबी ....बड़ी भाभी मेरा अतीत मुझे जीने नही देता ....मैं कभी शादी नही कर पाउन्गि ...सारी जिंदगी बस यूँ नही गुज़ारना चाहती अकेले और तन्हा .....

सुमन....पगली ऐसा नही सोचते ...तेरे लिए तो बहुत अच्छा लड़का ढूंढूँगी .......वैसे विमल में भी कोई खराबी नही ...वही बचा के लाया था तुझे ....तू डॉक्टर बनने जा रही है हाइमेनॉप्लॅस्टी के बारे में तो जानती ही होगी ...फिर क्यूँ चिंता करती है ...भूल जा उस पुराने इतिहंस को और नयी जिंदगी को दिल से जी.

रूबी ....मगर जब लड़के को पता चलेगा ..क्या वो मुझे अपनाएगा ...दूध में मखी की तरहा निकाल फेंकेगा

सुमन...तो उसे बताएगा ही कॉन...हां ......रमण...उसमे इतनी हिम्मत नही .....जान से मार देगा सुनील उसे ...

रूबी ....तो क्या सारी जिंदगी इस बोझ के तले काटु ...कि अपने पति को जो भी मुझ से शादी करेगा उसे धोखा दिया मैने....

सुमन ..,..बच्चे अज्ञानतावश कभी ग़लतियाँ कर जाते हैं ...जैसे तुमने करी ....इसका मतलब ये नही कि जीना छोड़ दो ...रही बात छुपाने की ...तो तुम्हें क्या मालूम उस लड़के का भी कोई इतिहंस हो जिसे वो नही बता रहा ....आजकल तो कपड़ों की तरहा लोग अपनी गर्ल फ्रेंड्स बदल रहे हैं.....एक बार तुम्हारी हाइमेनॉप्लॅस्टी हो गयी ...तो तुम दुनिया के लिए वर्जिन ही होगी ....अब भूल जा सब बेटा ...क्यूँ खुद को और हमे तड़पाने पे तुल गयी है ...तुझे कुछ हो जाता तो हम तो मर ही जाते...क्या हाल होता सुनील का ...कभी सोच भी सकती है...

रूबी ....बड़ी भाभी मेरी शादी की बात कभी मत करना...

सुमन...तू पागल है ...हर लड़की को एक जीवन साथी चाहिए होता है ...उसके बिना ये पहाड़ जैसी जिंदगी नही काट सकती .......तेरे सामने मेरा एग्ज़ॅंपल है ......करी ना मैने फिर शादी तेरे भाई से विधवा होने के बाद ...

रूबी ....वो तो पापा ने भाई को कहा था.......

सुमन...जो भी था ...आख़िर मैं तयार हुई ना .....चाहती तो मना कर देती .....नही कर पाई ...क्यूंकी मुझे एक मर्द के सहारे की ज़रूरत थी ....मेरे दिल को मेरे दिमाग़ को मेरे जिस्म को और तू ये बच्कानी बातें छोड़ अब अतीत के बारे में .....समझी ...देल्ही पहुँचते ही तेरा ऑपरेशन करवा दूँगी .....कविता दस सवाल करेगी ...चुप रहना मैं उसे समझा दूँगी ...

रूबी सुमन से लिपट गयी .......सब ठीक होगा ना 

सुमन ...मैं हूँ ना तेरी सोनल भाभी है ना ...जब भी तू परेशान हो हमसे बात कर लिया कर ......हम सब तेरे साथ ही हैं....तू तो मेरे सागर की निशानी है ...तू इतनी कमजोर कैसे हो सकती है....

रूबी ...ओह भाभी ....

सुमन...एक सच बोल...तुझे विमल पसंद है ना 

रूबी शरमा गयी .....

सुमन...चल सोजा अब ...सब कुछ मेरे और भाई के उपर छोड़ दे ....और सोच तेरे पास तेरी बहन कविता भी होगी ...तुझे कभी अकेला पन नही सताएगा ....और शायद कुछ सालों में हम भी मुंबई ही शिफ्ट हो जाएँ....

दोनो अंदर जा के लेट गयी ....सुमन सोचने लगी रूबी को क्या साईकाइस्ट को दिखाया जाए या नही ...उसे बहुत प्यार की ज़रूरत है ...एक साथी की ज़रूरत है जो उसे समझे और उसके अतीत को उसके दिमाग़ से निकाल फेंके...

रूबी ...लेट गयी और उसकी आँखों के सामने विमल का उदास चेहरा आने लगा ...उसके गाने की आवाज़ ...कानो में गूंजने लगी ....उसने सुमन की तरफ देखा जो आँखें बंद कर लेटी हुई थी ....रूबी सुमन से चिपक गयी और धीरे धीरे उसे नींद आ गयी...

अगले दिन सुबह ....सबसे पहले विजय और आरती ही दरवाजा नॉक करते हैं....रूबी के शूसाइड अटेंप्ट की खबर उन्हें मिल चुकी थी ....राजेश भी साथ में होता है 

तभी दूसरे कमरे से सुनील वहाँ पहुँच जाता है ...सोनल नही आती क्यूंकी नाइट गाउन में बाहर नही आना चाहती थी ......सुनील ने अपने कल के कपड़े पहन लिए थे और वो विजय को वहाँ से ले रेस्टोरेंट में चला जाता है ......

विजय रूबी के बारे में पूछता है ......सुनील इशारों में अलग हो कर बात करने को कहता है ...जिसे विजय समझ जाता है ...सबके सामने सुनील बस डिप्रेशन ही वजह बताता और ये कि उसे शादी से डर लगता है ...

विजय आरती और राजेश को भेज देता है ताकि वो समय पे तयार हो जाएँ.......
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01-12-2019, 02:28 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
फिर सुनील और विजय की बात होती है ...क्यूंकी विजय ने अपना राज़ सुनील को बताया था...सुनील भी रूबी के बारे में सब बता देता है .....

सारी बात सुनने के बाद विजय ...फिर रूबी की शादी के बारे में बात करता है विमल के साथ और ये वचन देता है कि रूबी ता जिंदगी विमल के साथ खुश रहेगी ...लेकिन इनकी शादी में जल्दबाज़ी नही करेंगे ...ताकि विमल को वक़्त मिल जाए रूबी के दिल में एक छाप छोड़ने के लिए और रूबी उसपे भरोसा कर सके....

विजय और विमल के डॅड दोनो का एक ऑफीस देल्ही में भी था और दोनो का ही एक फ्लॅट देल्ही में था....

सुनील ...कविता के मन की हालत बताता है .
विजय उसकी परेशानी समझ ये रास्ता बताता है कि शादी के बाद दो दिन कविता उनके साथ मुंबई रहेगी फिर वो हनिमून पे जाएँगे और वहाँ से सीधा देल्ही अपने फ्लॅट पे जाएँगे ...राजेश देल्ही के ऑफीस को देखेगा ....और कविता अपने परिवार से जब चाहे मिल पाएगी ....

और विमल भी देल्ही आ जाएगा ...ताकि दोनो की मुलाक़ातें अक्सर हों और एक दूसरे को अच्छी तरहा समझ पाएँ ....

सुनील विजय का जाने कितनी बार शुक्रिया करता है और विजय मजाकिया नाराज़गी में उसे डाँट भी देता है ...वो कोई उपकार नही कर रहा था...अपने परिवार की खुशी के लिए कर रहा था क्यूंकी अब सुनील को वो बेटे की तरहा ही समझता था.

दोनो को लगभग दो घंटे लग जाते हैं...फिर सुनील इज़ाज़त ले कर अपने कमरे में चला जाता है......

विजय का नेचर उसके बात करने का तरीका , उसका सबके लिए परवाह करना ....सुनील को विजय के करीब लेता जा रहा था ...एक कमी जो उसे खलती थी ...वो शायद धीरे धीरे पूरी हो रही थी ...

सुनील जब अपने कमरे पे पहुँचा तो उसने विमल को बाहर टहलते हुए पाया ...

सुनील ...अरे विमल बाहर क्यूँ टहल रहे हो ...चलो अंदर चलो...

विमल ...नही भाई ..बस यही पता करने आया था कि रूबी ठीक तो है ना ....

सुनील ...हां ठीक है बस बेवकूफ़ डिप्रेशन में ये कदम उठा बैठी ...

विमल एक चैन की साँस लेता है .....अच्छा भाई चलता हूँ...

सुनील...जिसकी जान बचाई उसे एक बार मिल तो लो....

विमल ...नही भाई ...वो ठीक है बस यही पता करना था ....अच्छा वो राजेश मेरा इंतेज़ार कर रहा होगा ....विमल चला जाता है 

सुनील नॉक कर दरवाजा खुलवता है ...पूरा परिवार वहीं जमा था ...मिनी और रमण भी आ चुके थे ...रूबी बेड रूम में बैठी हुई थी ...वो रमण की शकल नही देखना चाहती थी ...रमण बहुत उदास था ...वो बस इंतेज़ार कर रहा था ...कविता की शादी का ...शायद उसने कुछ सोच लिया था.....क्या ..ये तो वक़्त ही बताएगा.

ब्रेकफास्ट वहीं मँगवाया जाता है .....सुनील को बहुत गुस्सा चढ़ा हुआ था रमण पे ....आख़िर उसी की वजह से आज रूबी की ये हालत थी ... रूबी अंदर ही ब्रेकफास्ट करने को बोलती है तो रमण मिनी को ले कर चला जाता है ....
उसके जाने के बाद ही रूबी कमरे से बाहर निकली और सीधा सुनील के गले लग जाती है ...

सुनील ...बेवकूफ़ लड़की ...अब रो कर भाई को रुलाना मत .....

नाश्ते के बाद ये डिसाइड होता है कि सोनल कविता के साथ जाएगी ...सोनल मना करती है ...वो चाहती थी कि कुछ वक़्त तो राजेश और कविता अकेले में बिताएँ आपस में बात कर सकें .....हर वक़्त आरती साथ तो होगी नही ....

लेकिन कविता तो शरम से मरी जा रही थी ...वो सोनल के हाथ जोड़ती है ...सोनल उसके सर पे प्यारी सी चपत लगाती है .......और इतनी देर में आरती आ ही जाती है कविता को लेने ....उसे बहुत खुशी होती है कि सोनल साथ चल रही है ....उसके लिए सोनल उसकी बहू ही थी ...क्यूंकी ना जाने क्यूँ उसे सुनील में एक और बेटा नज़र आने लगा था....

तीन दिन बस गहमा गहमी रहती है .....और वक़्त आ जाता है कविता की शादी का ...इस बीच सुनील कविता को समझा देता है कि जब तक उसका कोर्स पूरा नही होगा वो शादी के बाद देल्ही में ही रहेगी ...हनिमून के बाद ......

शादी हो जाती है ...और विजय रुखसती किसी दूसरे होटेल में रखता है ....जहाँ से ये लोग मुंबई चले जाते हैं.........सुनील जब कविता को राजेश के साथ दूसरे होटेल छोड़ के आता है ....पूरे होटेल में कोहराम मचा हुआ था......रमण ने अपना गला काट लिया था और मिनी एक पत्थर की तरहा उसकी लाश के पास खड़ी थी .......

मरने से पहले रमण बस दो लाइन लिख गया था ...वो अपने पाप का बोझ अब और नही उठा सकता और रूबी से इल्तीज़ा करी थी कि हो सके तो माफ़ कर देना .........

रूबी खुद पत्थर बन गयी थी ...कोई भी लड़की चाहे बाद में कितनी भी नफ़रत क्यूँ ना करे वो अपना पहला प्यार भुला नही सकती थी ....सुनील को अब सबसे ज़्यादा चिंता रूबी की हो रही थी ...उसने सोनल और सुमन को अब 24 घंटे रूबी के साथ ही रहने का हुकुम दे दिया था........

अभी खुशी के आलम से बाहर नही निकले थे कि ये कांड उनके सामने था.....रिश्तों में छाई कड़वाहट हो ....पर किसी भी रिश्तेदार की मोत सहन नही होती ....कल जहाँ जिसके लिए मन में क्रोध था ....आज एक बवंडर उठ चुका था ....क्या वो नफ़रत जो सबने रमण से करी थी .....क्या वो ठीक थी ...ये हादसा यही बता रहा था कि चाहे कुछ भी हो वो कैसा भी हो .....उसके ख़यालात रूबी के लिए बदल चुके थे और वो रूबी के स्यूयिसाइड अटेंप्ट को बर्दाश्त नही कर पाया था .....तब से ले कर कविता की शादी तक जाने कितनी मोत मरा होगा वो ....कहते हैं सुबह का भूला अगर शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नही कहते ...पर कुछ वक़्यात ऐसे होते हैं जिन्हें...कोई कुछ भी कर ले ....वो ना माफ़ किए जाते हैं ना भुलाए जाते हैं........यही हुआ था रमण के साथ ...पर असल कसूरवार कॉन था .....क्यूँ बना रमण ऐसा ......सुनील को बस एक ही गुनहगार नज़र आ रहा था .....समर .....उसकी परवरिश ही ऐसी थी ....और ग़लत परवरिश के नतीजे बड़े भयानक होते हैं ....आज उसे एक तरफ इस बात की सबसे बड़ी खुशी थी कि उसकी परवरिश सागर ने की थी ...और दूसरी तरफ उसे दुख भी था ...एक भाई उससे जुदा हो गया था ...जिसे वो सुधारना चाहता था ....पर होनी के आगे किसका ज़ोर चल सकता था.

सुनील ने मिनी को कंधों से पकड़ा ....भाभी .....भाभी वो ज़ोर से चिल्लाया .....और मिनी की रुलाई फुट पड़ी वो सुनील से चिपक ज़ोर ज़ोर से रोने लगी ....वो खुद को रमण की मोत का कसूरवार मान रही थी.....

मिनी तो बस रोती जा रही थी बड़बड़ करती जा रही थी ....ना मैं उनसे शर्त लगाती ना ये सब होता 

सुनील...के दिमाग़ में खटका तो बजा पर वो उसे नज़र अंदाज़ कर गया क्यूंकी रमण जो लिख गया था ...वो उसके गहन पश्चाताप की तरफ इशारा कर रहा था.....

मिनी सुनील की छाती पे मुक्के बरसाती रही और फिर बेहोश हो गयी.......

होटेल वालों ने पोलीस बुला ली थी ...जिन्हों ने बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और अपनी तहकीकात शुरू कर दी ....

खैर हुआ कुछ नही किसी के खिलाफ और बॉडी वापस सुपुर्द कर दी गयी सारी फॉरमॅलिटीस के बाद 

रमण की चिता को आग लगाने के बाद जब सुनील वापस पहुँचा ......तो मिनी ने ...उसे रमण का मोबाइल दिया .........

एक और मोत की खबर थी उसमे..........

सुनील ने सारे मेसेज छाने ...एक दिन पहले समर के कोमा से बाहर आने की खबर आई थी और आज उसकी मोत की ....हॉस्पिटल ने बॉडी क्लेम करने का मेसेज भेजा था..........

पहले तो सुनील ने सोचा कि हॉस्पिटल को ही बोल दे डेड बॉडी को डिस्पोस करने के लिए ...पर फिर उसे याद आया कि मुंबई के मकान की ज़रूरत पड़ सकती है सवी को और मिनी को ...इस लिए उसने बाकी सब लोगो को घर भेज दिया और खुद मुंबई जा कर उसने बॉडी क्लेम कर दाह संस्कार करवाया और डेथ सर्टिफिकेट ले लिया.

घर जब पहुँचा तो मातम का ही महॉल था ......
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01-12-2019, 02:28 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
सुनील ने सोनल को रूबी के साथ लगाया ताकि उसका दिल कहीं और मोड और फिर से पढ़ाई की तरफ लगाए ....मिनी तो बुत सी बन गयी थी ....सुमन ने मिनी को बहुत होसला देने की कोशिश करी पर कुछ फ़ायदा नही हुआ.

दो तीन दिन में रूबी सम्भल गयी और उसने अपना ध्यान पढ़ाई में लगा दिया ....सुनील भी पढ़ने में लग गया .....सुमन ने हॉस्पिटल छोड़ दिया था और अब घर पे ही रहती थी...पैसों की कोई कमी नही थी जो उसे नोकरी करनी पड़ती ....मिनी ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था ....सुनील मिनी के नज़दीक नही जाता था ...मिनी का भार उसने सुमन पे ही डाल रखा था ....सुमन ही मुश्किल से मिनी को खाना खिलाया करती थी ......सोनल अपनी एमडी में बिज़ी हो गयी थी ....शाम को ही घर आती थी और रूबी के साथ लग जाती थी ....पढ़ाई का ज़ोर इतना हो गया था कि घर का महॉल ही पढ़ने वालों का लगता था ....हां रात में सुनील कभी सोनल के साथ होता तो कभी सुमन के साथ..

हफ़्ता बीत गया ......और अब कविता के भी देल्ही आने का समय हो गया था .........

आख़िर सुनील को मिनी से बात करनी ही पड़ी क्यूंकी वो नही चाहता था कि कविता को घर में गम का महॉल नज़र आए ........

रात हो चुकी थी ...सब खाना खा चुके थे ...रूबी और सोनल एक ही कमरे में पढ़ रहे थे ...सुमन कोई मेडिकल जर्नल ले के बैठी हुई थी ......सुनील ने मिनी के कमरे को नॉक किया ....कुछ देर बाद मिनी ने दरवाजा खोला ...शायद वो सोने के कपड़े बदल रही थी ...इस वक़्त उसने नाइट गाउन पहना हुआ था .........पर ऐसा नही जो जिस्म को दिखाए ...बल्कि सब कुछ ही ढका हुआ था बस थोड़ा खुला था....

सुनील....मिनी जो होना था हो गया ...अब खुद को सम्भालो ...आगे पहाड़ सी जिंदगी पड़ी है ...क्या करना चाहती हो तुम...क्या अपने गाँव वापस .....

मिनी ये सुन हिल गयी .....और आज कितने दिनो बाद उसके मुँह से कुछ निकला .......क्या तुम मुझे फिर उसी बर्बादी के रास्ते पे डालना चाहते हो ....चाहते हो मेरा भाई जिंदगी भर मुझे नोचता रहे.....

सुनील....कभी नही ...मैं बस ये जानना चाहता हूँ कि तुम क्या करना चाहती हो .......एक दो दिन में कविता आ जाएगी ....उसका लगभग रोज का ही आना जाना होने लगेगा ...मैं नही चाहता वो तुम्हें यूँ घुट घुट के जीता हुआ देखे ...नही चाहता उसकी जिंदगी में अभी से गम की परछाई भी पड़े ...

मिनी ....मैं यहीं रहूंगी तुम्हारे पास कहीं नही जाउन्गि...मुझे कभी खुद से अलग मत करना..तुम जैसे रखोगे वैसे रह लूँगी.........चाहो तो घर की नौकरानी....

सुनील....मार तो नही खानी...इतना गिरा हुआ समझ लिया तुमने हम लोगो को.....जब तक तुम खुद नही बोलोगि...मैं तुम्हें कहीं जाने को नही कहूँगा और ना ही घर का कोई सदस्य कभी ऐसा कहेगा .....तुम इस घर की बहू हो.......लेकिन रमण के जाने के बाद......

मिनी ....सुनील प्लीज़ मुझे उसकी याद मत दिलाओ...भूल जाना चाहती हूँ अपना इतिहास एक नयी जिंदगी शुरू करना चाहती हूँ...तुम्हारे साथ........

सुनील...म म मेरे साथ.....पागल तो नही हो गयी तुम...

सुनील.....मिनी मैं ओरों की तरहा नही कि औरत देखी और चढ़ गये उसके उपर .....मेरे लिए रिश्ते बहुत माइने रखते हैं......मानता हूँ सोनल और मेरी शादी हुई है ....शायद तुम नही जानती पर सुन लो....सुमन भी मेरी बीवी है....पर ये सब कैसे हुआ क्यूँ हुआ ...ये मैं बताना ज़रूरी नही समझता और इन्दोनो के अलावा मेरी जिंदगी में कोई नही आ सकता एक पल के लिए भी .....

मिनी आँखें फाडे मुँह खोले सुनील को देख रही थी .....

सुनील ......इसलिए मेरा ख़याल दिल से निकाल दो ....एक भाभी हो और भाभी की तरहा रहो...हां जिंदगी में तुम्हें कोई पसंद आ जाए तो बता देना ...मुझे बहुत खुशी होगी अगर तुम्हारा घर एक अच्छे इंसान के साथ बस जाए ....और अगर तुम चाहो तो मैं खुद तुम्हारे लिए एक अच्छा साथी ढूंढूंगा ....

मिनी ....देवता अगर भक्त से कहे कि मेरी पूजा करनी छोड़ दो तो क्या भक्त छोड़ देता है....फूल अगर भंवरे से कहे मेरे पास मत आना तो क्या भँवरा अपना रास्ता बदल लेता है...शम्मा अगर परवाने से कहे मत आ मेरे पास जल जाएगा तो क्या वो शम्मा को छोड़ देता है........नही सुनील......ऐसा कभी नही होता है और इसी तरहा एक लड़की के दिल में अगर एक बार कोई उस जगह पे आ कर बैठ जाए जहाँ लोग भगवान को बिठाते हैं...तो वो लड़की मार जाएगी पर कभी किसी दूसरे के बारे में नही सोचेगी......
मैं तुम पे कभी ज़ोर नही डालूंगी ना ही कोई ऐसी हरकत करूँगी .....कि तुम मुझे अपनाओ...पर मैं तुम्हें अपनी रूह तक का मालिक बना बैठी हूँ...और अब इसे मैं बदल नही सकती ...जाओ सुनील......आराम से सो जाओ ....मुझ से तुम्हें कभी कोई शिकायत नही होगी....

सुनील मुँह फाडे उसे देखता रहा ....कुछ समझ ही ना आया कि क्या बोले ....

मिनी ...अब जाओ भी मैं नही चाहती तुम्हारी बीवियाँ मेरे बारे में कुछ ग़लत सोचे ..........वो उठ के खड़ी हो गयी और सुनील का हाथ पकड़ उसे कमरे से बाहर धकेल दिया....दरवाजा बंद कर वहीं सरकते हुए ज़मीन पे बैठ गयी और रोने लगी ...प्यार किया भी तो किस से ...जो उसे कभी नही अपनाएगा ........

दरवाजे के बाहर खड़ा सुनील .....अपनी जिंदगी को कोसने लग गया ...कितने इम्तिहान और देने पड़ेंगे...कितनी बार खुद को मारना पड़ेगा ....डरने लग गया था वो अपने आप से ....घर की हर औरत हर लड़की उसे चाहने लगे ...ये तो उसने कभी सोचा नही था ....ना ही कभी ऐसा चाहा था ...

सोनल और रूबी पढ़ रहे थे ...उसके कदम लड़खड़ाते हुए सुमन की तरफ बढ़ गये ...जो बेडरूम में सुहागन के रूप में अढ़लेटी पढ़ रही थी.....सुनील उसके पास जा कर उसकी गोद में सर रख लेट गया ......

सुमन...क्या हुआ...

सुनील...एक ठंडी साँस लेते हुए.....कुछ नही ..

सुमन....तुम कुछ छुपा रहे हो....

सुनील...कभी आज तक कुछ छुपाया .....

सुमन ....मिनी ने ज़रूर कुछ कहा है ...तुम बहुत परेशान लग रहे हो ...

सुनील...वो बेवकूफ़ है ...छोड़ो...

सुमन...ओह!!!! समझ गयी ....

सुनील...क्यूँ हो रहा है ऐसा मेरे साथ ....

सुमन ...किताब साइड पे रख झुकती है और सुनील के होंठ चूम लेती है ......क्यूंकी तुम बहुत अच्छे हो......

सुनील...बुरा बन जाउ क्या ....

सुमन ...नही बन पाओगे ....क्यूंकी अब तुम अकेले नही हो ...तुम्हारे दिल में दो और रहती हैं...वो तुम्हें कभी बुरा नही बनने देंगी......तुम तो प्यार करने के लिए ही जन्मे हो .....सिर्फ़ प्यार .....सिर्फ़ प्यार और सुमन ने अपने होंठ सुनील के होंठों से चिपका दिए 

सुमन के होंठों की तपिश से सुनील पिघलने लग गया और उसने उठ के सुमन को अपनी बाँहों में भर लिया और दोनो के होंठ आपस में चिपक गये इस तरहा जैसे कभी जुदा नही होंगे........रात भर दोनो में से कोई नही सोया और एक दूसरे में समाते रहे ....

अग ले दिन मिनी ने किचन का सारा भार खुद पे ले लिया और सुमन को बिल्कुल भी काम नही करने दिया .........

राजेश जब कविता को घर ले के घर पहुँचा तो कविता तो बस घर देखती रही ...ये घर सुनील के घर से बहुत बड़ा था..हर काम के लिए नौकर चाकर थे एक अलग से तीन मंज़िला मकान के पीछे मकान बना हुआ था जो नौकरों के रहने के लिए था......

आरती ने कविता के घर घुसने से पहले उसकी आरती उतारी थी और इन्हें आए अभी थोड़ी देर ही हुई थी कि सारी पड़ोसन धमक पड़ीं दुल्हन से मिलने के लिए और सारा दिन लोगों का आना जाना लगा रहा .....मुश्किल से आरती ने कविता को दोपहर तक उसके कमरे में भेज दिया ताकि वो आराम कर सकें और मिलने जुलने वालों को भी मना कर दिया कि बाद में मिल लेना .....
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01-12-2019, 02:28 PM,
RE: Sex Hindi Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
कविता वाक़ई में थक गयी थी और जल्द ही सो गयी ........राजेश जब कमरे में घुसा कुछ आराम करने तो देखा कविता सो रही थी ...वो वहीं बिस्तर के किनारे बैठ गया और उसे निहारने लगा ....जाने कितनी देर वो यूँ ही बैठा रहा कविता के मासूम चेहरे की खूबसूरती में खोया रहा .....

शाम को आरती कमरे में आई कविता को जगाने तो राजेश को वहीं बैठे उसे निहारते हुए पाया ....उसके सर पे हल्की चपत मारी ...बेवकूफ़ .....और राजेश होश में आया और शरमाता हुआ कमरे से बाहर निकल गया ........आज कविता और राजेश की सुहाग रात थी ......आरती ने घर में ही ब्यूटीशियान को बुला लिया था ...कविता को सजाने और सवारने के लिए .....एक और कमरा सजाया जा रहा था ....इनकी सुहाग रात के लिए .....

मिनी ने अपना पहनावा बिल्कुल बदल लिया ....वो तडकते भड़कीले कपड़ों को त्याग दिया और बहुत ही सादे कपड़े पहनने लगी ...लेकिन वो मिनी वाक़ई में मिनी ही थी ...क्यूंकी सादे वस्त्रों में उसकी खूबसूरती और भी निखर रही थी ...पर उसकी आँखों में उदासी थी ...एक आस थी ...एक प्यास थी ...एक कामना थी ...अपने उस प्यार को पाने की जो वो ना चाहते हुए भी कर बैठी थी .....

मिनी का ये बदला हुआ रूप दो लोगों को बहुत अचंभित कर गया था सुमन और सोनल दोनो को ही .....वो लड़की जो कभी वासना का पुतला थी ...आज वो पूरे घर में प्यार बिखेर रही थी ...पर खुद प्यार के लिए तरस रही थी ....

शाम को सोनल जान कॉलेज से घर पहुँची तो 2 मिनट में मिनी उसके लिए कॉफी ले आई ...

सोनल....अरे भाभी आप क्यूँ इतनी तकलीफ़ करती हो ....आज कल सारा दिन किचन में घुसी रहती हो ....

मिनी ....तू बस अपनी पढ़ाई पे ध्यान दे और बाकी सब भूल जा ...टॉप करना है तुझे 

सुमन...ये तो मुझे आज कल किचन में घुसने ही नही देती ...

मिनी ...मेरे होते आप को क्या ज़रूरत है ...बहुत काम कर लिया ...अब आराम करो ....

तभी सुनील और रूबी भी घर पहुँच गये .......सुनील हमेशा सुमन या सोनल के हाथ से बनी कॉफी ही लिया करता था ....एक ये काम था जो मिनी कभी नही कर पाती थी .....तड़प के रह जाती थी वो ....सुनील के आते ही सुमन किचन में चली गयी और सुनील सीधा कमरे में चला गया ...उसने तो मिनी से बात करनी भी छोड़ दी थी उस दिन के बाद ......मिनी का दिल करता था ज़ोर ज़ोर से रोए पर अपनी आँखों में बसे समुंदर को किसी तरहा रोक लेती थी .............

मिनी को देख सोनल को अपने पुराने दिन याद आने लगे थे .......मिनी की वो वही हालत देख रही थी ...जो कभी खुद उसकी हुआ करती थी ........पहले की मिनी और इस मिनी में दिन रात का अंतर आ चुका था .....सोनल चाह के भी उससे नफ़रत नही कर पा रही थी .....शायद वो मिनी की तड़प को महसूस करने लगी थी .....और उसे डर भी लग रहा था .....कहीं वो खुद उस तड़प से घायल ना हो जाए ......आज उसे मिनी के अंदर वो सोनल नज़र आ रही थी ....जो सुनील से बेपनाह मोहब्बत करती थी ...जिसे सुनील कभी अपनाने को तयार नही हुआ था .....अपने सामने अपना ही पुराना रूप देख सोनल के दिल को कुछ होने लगा था .......तभी मिनी उठ के किचन चली गयी और सोनल की तंद्रा टूट गयी ....अपने ख़यालों को झटक वो कॉफी का कप ले अंदर कमरे में चली गयी ....सुनील बाथरूम में घुसा हुआ था .......सोनल वहीं बेड पे बैठ के कॉफी पीने लगी .....मिनी किचन से कॉफी ले कर रूबी के पास चली गयी और उससे सारे दिन की गतिविधि के बारे में पूछने लगी बिल्कुल ऐसे ही जैसे कोई माँ ...बड़ी बहन पूछती है किसी जवान लड़की से ....

रूबी भी मिनी के बदलाव को पसंद करने लगी थी और मिनी के करीब होती चली गयी. रूबी को मिनी के अंदर एक सहेली एक बड़ी बहन नज़र आने लगी थी ....बिल्कुल उसी तरहा जिस तरहा वो सोनल को समझती थी ....कई बार तो अब वो ये सोचने पे भी मजबूर हो जाती दोनो में से कॉन अच्छा ज़्यादा है ..किसके ज़्यादा नज़दीक रहे ...फिर इन बेतुकी बातों को अपने दिमाग़ से निकाल देती ...

सुनील कॉफी पी कर पढ़ने बैठ गया ....सोनल भी कपड़े बदल पढ़ने लगी और मिनी रूबी से बातें कर किचन में चली गयी रात का खाना तयार करने ....
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