Sex Hindi Kahani गहरी चाल
12-31-2018, 04:00 PM,
#41
RE: Sex Hindi Kahani गहरी चाल
शत्रुजीत ने धीरे से पॅंटी को खींच उसे कामिनी के बदन से जुदा किया,"..ओह माइ गॉड..!",उसने कामिनी को लिटा दिया & बिजली सी तेज़ी से घूम कर उसकी टाँगो के बीच झुक उसकी गंद के नीचे अपने बड़े-2 हाथ लगा के उसकी कमर को हवा मे उठा दिया & उसकी गीली,गुलाबी चूत निहारने लगा.वो बस उसकी गंद थामे उसकी चूत देखे जा रहा था,कामिनी ने नज़रे नीची की & बड़े प्यार से उसके सर पे हाथ फिराया,"क्या देख रहे हो जीत?...कुच्छ करो ना..!तब से ये तुम्हारे इंतेज़ार मे ही तो पागल हो रही है.."

शत्रुजीत ने मुस्कुरा के उसकी ओर देखा,फिर 1 तकिया खींच कर उसकी गंद के नीचे लगा दिया.उसने अपनी 1 उंगली उसकी चूत मे डाली तो कामिनी कराह उठी,"..आहह..".इसके बाद तो शत्रुजीत जैसे पागल हो गया.उसने अपना मुँह उसकी चूत से लगा उसे चाटना शुरू किया तो कामिनी आहे भरने लगी & फ़ौरन झाड़ गयी,मगर शत्रुजीत ने अपना मुँह उसपे से नही हटाया.वो उसे बदस्तूर चूमे चाते जा रहा था.कामिनी उसकी इस हरकत से मज़े मे छटपटाने लगी & उसकी आहे इतनी तेज़ हो गयी की वो आहे थी या चीखे,ये बताना मुश्किल हो गया.

पता नही कितनी देर तक शत्रुजीत उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटता रहा.कामिनी बस उसका सर अपनी जाँघो मे भींचे उसके बालो को खींचती झाडे जा रही.तभी शत्रुजीत ने अपना मुँह उठाया & अपनी उंगली उसकी चूत मे घुसा दी.चूत की दीवारो को रगड़ता हुआ जैसे वो उनपे कुच्छ ढूंड रहा था ,"...आआहह...!",कामिनी ने अपनी कमर उच्छलते हुए ज़ोर की आह भरी,शत्रुजीत ने उसका जी-स्पॉट ढूंड कर उसे छेड़ दिया था.कामिनी को आज तक झड़ने के वक़्त ऐसा एहसास नही हुआ था,इतना मज़ा...की बर्दाश्त ही ना हो!उसने शत्रुजीत के हाथ को अलग कर करवट बदल ली & सुबकने लगी.

शत्रुजीत उसके पीछे जा उसके बाल सहलाते हुए उसकी मखमली पीठ चूमने लगा.थोड़ी देर बाद जब उसे लगा की कामिनी संभाल गयी है तो उसने उसकी पीठ चूमते हुए नीचे जाना शुरू किया.उसकी कमर के बाल पे उसने चूमा तो कामिनी फिर से मस्त हो उठी.शत्रुजीत ने उसे उल्टा कर उसकी गंद पे अपने होंठ सटा दिए.कामिनी अब फिर से हवा मे उड़ने लगी.

शत्रुजीत उसकी गंद से नीचे उसकी जाँघो के पिच्छले हिस्से को चूमते उसके नाज़ुक पैरो तक पहुँचा & उन्हे पकड़ कर कामिनी को घुमा कर सीधा कर दिया.फिर उसके पैरो के पास अपने घुटनो पे बैठ उसके पैर हवा मे उठा उन्हे बारी-2 से चूमने लगा.कामिनी ने देखा की उसका लंड उसके सामने खड़ा है,अब वो उसे अपने अंदर लेने के लिए बेचैन हो उठी थी,"..जीत अब डालो ना इसे अंदर..",उसने हाथ बढ़ा के उसे पकड़ने की कोशिश की.

"ह्म्म..",शत्रुजीत ने उसकी बात शायद नही सुनी,"..अपने लंड को अब अंदर डालो ना..",उसने हाथ बढ़ा के लंड को च्छू लिया.शत्रुजीत ने उसकी टाँगे फैलाई & उसकी दोनो टांगो को झुक के अपने कंधो पे रख लिया.ऐसा करने से उसकी गंद बिस्तर से उठ गयी & चूत पूरी उभर कर उसके सामने आ गयी.

उसने आगे झुकते हुए लंड को उसकी चूत पे रखा तो कामिनी उचक कर तकिये से सर उठा नीचे देखने लगी,वो इस पल को देख अपने ज़हन मे क़ैद कर लेना चाहती थी.उसकी गोरी,गुलाबी चूत के गीलेपान के चलते शत्रुजीत का लंबा,मोटा,काला लंड बड़ी आसानी से उसके अंदर जाने लगा,"..आहह....आन्ं..ह..!"

1 बार फिर कमरे मे कामिनी की मस्ती भरी आवाज़े गुउंजने लगी.शत्रुजीत बड़े हौले-2 लंड को अंदर घुसा रहा था.कामिनी ने अब तक जो सबसे बड़ा लंड अपने अंदर लिया था,वो था कारण का-7 1/2 इंच.शत्रुजीत का लंड उस से 1 1/2 इंच बड़ा था.तो जैसे ही आख़िरी 1 1/2 इंच चूत मे घुसने लगा उसे थोड़ा दर्द महसूस हुआ,"..आईइय्य्यीए.."

पूरा लंड अंदर घुसने के बाद शत्रुजीत थोड़ी देर रुका &फिर वैसे ही उसकी टाँगे कंधे पे चढ़ाए बहुत हल्के-धक्के लगाने लगा.थोड़ी देर मे ही कामिनी की तकलीफ़ ख़त्म हो गयी & वो लंड को चूत मे आता-जाता देखते हुए,अपने हाथ बढ़ा शत्रुजीत के बदन को सहलाने लगी.

शत्रुजीत ने अपने कंधो से उसकी टाँगे उतारी & फिर उसके उपर लेट गया & चूमने लगा.कामिनी ने भी फ़ौरन उसे अपनी बाहो मे भर लिया,"..ओह्ह्ह..जीत..."थोड़ी देर चूमने के बाद शत्रुजीत उसके सीने से उठा & अपनी कमर उचका के लंड लगभग पूरा बाहर निकाल लिया.

बस 1/2 इंच लंड कामिनी की चूत के अंदर था & वो अपने हाथो से उसके सीने के बालो से खल्ती हुई उसकी अगली चल का इंतेज़ार कर रही थी.तभी शत्रुजीत ने 1 ज़ोर के धक्के के साथ पूरा लंड वापस उसकी चूत मे धंसा दिया,"..एयीयैआइयैयीईयेयीईयी...

!",कामिनी चिल्लाई पर उसे बहुत मज़ा आया था.उसने अपने नाख़ून शत्रुजीत की पीठ मे गढ़ा दिए तो वो वैसे ही तेज़ी से गहरे धक्के लगाने लगा.

शत्रुजीत अब अपनी कोहनी के बल लेटा उसकी चुचियो & चेहरे को चूमता हुआ तेज़ी से उसे चोद रहा था & कामिनी पागलो की तरह चिल्ला रही थी,"..हां...हा...अन्न..आई..से..शी....चू..दद्दूऊ...मुझ..ईयीई..हाईईईई...रा....अम्म्म्म....जी..ईत्त्त...!"

कामिनी का जोश के मारे बुरा हाल था .उसने शत्रुजीत के कंधे पकड़े & अपनी टाँगे उसकी कमर पे कस दी & 1 झटके मे पलट के उसके उपर हो गयी.फिर उसके सीने पे हाथ रख पागलो की तरह कमर हिला के उसे चोदने लगी.कामिनी ने बेचैनी से अपने दोनो हाथ अपने सर पे रख लिए.उसके दिल मे इस काले लंड को उसकी गुलाबी चूत को चोद्ते हुए देखने की हसरत जागी.

वो पीछे हो झुकी & अपने हाथ उसकी टाँगो पे रख दिए & फिर कमर हिलाके चोद्ते हुए लंड को अपनी चूत मे आते-जाते देखने लगी.जब लंड जड़ तक उसकी चूत मे धंसता तो दोनो के नाज़ुक अंगो के पास की जगह सॅट जाती,दोनो ने वाहा पर के 1-1 बाल सॉफ कर दिए थे & इस सेसतने का एहसास और नशीला हो गया था.कामिनी की चूत अब बस और बर्दाश्त नही कर सकती थी & वो बस झड़ने ही वाली थी.

शत्रुजीत उसकी जंघे थामे उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठा रहा था,उसने भाँप लिया की उसकी प्रेमिका झड़ने वाली है तो उसने अपना दाया हाथ उसकी बाई जाँघ से हटाया & उसकी चूत के दाने पे लगा दिया,".ऊहह...!",कामिनी की चूत मे इतनी देर से बन रहा तनाव जैसे 1 झटके मे ही बाँध तोड़ता हुआ बाहर निकल गया & वो आहे भरते हुए झाड़ गयी.

वो निढाल हो पीछे ही गिरने वाली थी की शत्रुजीत फ़ौरन उठा & उसे अपनी बाहो मे भर लिया.अब कामिनी उसकी गोद मे बैठी उसके गले से लगी लंबी साँसे भर रही थी.शत्रुजीत बड़े प्यार से उसके जिस्म को सहलाते हुए उसके सर को हल्के-2 चूम रहा था.

शत्रुजीत ने कैसे खुद पे काबू रखा था ये वोही जानता था.कामिनी के अंदर उसका लंड बिल्कुल कड़ा बस झड़ने को तैय्यार था मगर उसकी हसरत थी इस हसीन लड़की के साथ-2 झड़ना.उसने हल्के से कमर हिलाई तो लंड चूत के अंदर सुगबुगया.कामिनी के दिल मे भी फिर से मस्ती हिलोरे मारने लगी.उसने शत्रुजीत की गर्दन को बाहो मे कसा & उसके चेहरे को चूमते हुए हल्के-2 कमर हिलाने लगी.

शत्रुजीत समझ गया कि वो फिर से तैय्यार हो चुकी है.उसने फ़ौरन उसे पलट कर अपने नीचे किया & उसके उपर झुक बड़े गहरे धक्के लगाने लगा.कामिनी ने फिर से उसे अपनी बाहो & टाँगो मे कस लिया.उसकी उंगलियो के नाख़ून शत्रुजीत की पीठ पे अपने निशान छ्चोड़ने लगे तो शत्रुजीत के धक्को मे और तेज़ी आ गयी.

"हा..आन..हान्न..अहहनन्न...बस जे..ईत्त..तोड़.ईई..देर..आ..उर...मैं..बस..झा..दने...वा..ली...हू...",उसने अपने हाथ पीठ से हटा उसकी गंद पे लगा दिए & उसमे अपने नाख़ून धंसा दिए.इस हरकत से शत्रुजीत बिल्कुल पागल हो गया,वो झुका & उसकी 1 चुचि अपने मुँह मे भर चूस्ते हुए बहुत ज़्यादा तेज़ धक्के लगाने लगा.

कामिनी की चूत पे इस बार उसके लंड की सीधी मार पड़ रही थी & वो शत्रुजीत के जिस्म से पूरी तरह चिपकी हुई उसकी गंद पे हाथ कसे जोश मे उसका नाम पुकारे जा रही थी.शत्रुजीत ने 1 कुच्छ ज़्यादा ही ज़ोर का धक्का मारा,लंड उसकी कोख से टकराया & वो इसे बर्दाश्त नही कर पाई-वो सुबक्ते हुए झाड़ गयी & उसकी चूत किसी नदी की तरह बहने लगी.ठीक उसी वक़्त शत्रुजीत ने भी अपने उबलते लावा पे से रोक हटा दी & मानो कामिनी की चूत मे बस बाढ़ आ गयी.

क्रमशः....................ड़ा था की उसकी पॅंटी पे 1 बड़ा गोल सा धब्बा पड़ गया था.शत्रुजीत ने जी भर कर उसकी चुचियो से खेला,अब दोनो के दिलो मे भड़क रही आग कुच्छ ज़्यादा ही तेज़ हो गयी थी & दोनो बस इसमे जल जाना चाहते थे.शत्रुजीत ने उसकी कमर की दोनो तरफ बँधी पॅंटी की डोरियो को खींचा तो पॅंटी उसकी कमर से तो ढालाक गयी पर उसके रस से भीगी होने के कारण उसकी चूत से चिपकी रही.
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12-31-2018, 04:00 PM,
#42
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गहरी चाल पार्ट--17

षत्रुजीत उसके सीने पे गिर गया & उसकी नर्म,गद्देदार चूचियो को तकिया बना उनपे सर रख लंबी-2 साँसे भरने लगा.कामिनी भी हाँफ रही थी.उसने शत्रुजीत के सर को अपने हाथो मे ले लिए & उसके सर को चूमने लगी.

"तो जीत बुलाओगी तुम मुझे?",शत्रुजीत ने सर उठा कर उसकी आँखो मे झाँका.

"हां,इतनी प्यारी चीज़ का मलिक मेरा शत्रु तो हो ही नही सकता!",कामिनी का इशारा उसके लंड को ओर था जो सिकुड़ने के बावजूद उसकी चूत के अंदर था.दोनो हंस पड़े.शत्रुजीत ने उसके उपर से हटना चाहा तो कामिनी ने उसे रोक दिया,"थोड़ी देर ऐसे ही रहो ना,अच्छा लगता था."

शत्रुजीत ने झुक कर उसके गाल को चूम लिया.कामिनी उसके सीने के बालो मे हाथ फिरने लगी.माहौल फिर मस्त हो रहा था.थोड़ी ही देर बाद,शत्रुजीत का लंड खड़ा हो चुका था & वो 1 बार फिर कामिनी की चुदाई मे जुट गया.

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जगबीर ठुकराल अपनी ऐषगाह मे अकेला बेचैनी से चहलकदमी कर रहा था,उसने दीवार घड़ी को देखा-11 बज रहे थे,अभी तक माधो ने फोन क्यू नही किया था?!बेचैनी बढ़ी तो वो ऐषगाह से बाहर निकल लड़कियो के रहने के कमरो की ओर बढ़ा & उनमे से 1 मे दाखिल हो गया.

लड़की शायद नहा रही थी,बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी.उसने हाथ मे पकड़ा मोबाइल मेज़ पे रखा & अपना ड्रेसिंग गाउन उतार मुस्कुराता हुआ बाथरूम मे घुस गया.

"हान्न्ह...!",शवर के नीचे खड़ी लड़की चौंक पड़ी क्यूकी ठुकराल ने उसे पीछे से अपनी बाहो मे जाकड़ लिया था,"..ओह्ह..आप हैं...ऊओवव...!",ठुकराल ने उसके कान पे हौले से काट लिया.उसने उसकी च्चाटिया मसली तो लड़की ने हाथ पीच्चे ले जाके उसके सोए लंड को पकड़ लिया.ठुकराल उसकी नाभि कुरेदते हुए,उसकी जीभ से अपनी जीभ लड़ते हुए उसकी चूचिया मसल रहा था की तभी उसके कानो मे उसके मोबाइल बजने की आवाज़ आई.

वो भागता हुआ बाथरूम से निकला,"हेलो.",लड़की आके उसके पीछे से उस से चिपक गयी & अपने हाथो मे उसके लंड को थाम उसकी पीठ चूमने लगी.

"..बहुत अच्छे माधो!",उसने मोबाइल बंद किया & घूम कर लड़की को उठा कर उसके बिस्तर पे लिटा दिया & उसकी टांगे फैला उसकी चूत मे अपना लंड घुसाने लगा.

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कामिनी की नींद खुली तो उसने देखा की दिन बहुत चढ़ आया था.वो उठी तो उसने पाया की शत्रुजीत वाहा नही था.वो बिस्तर से उतर कर बाथरूम मे चली गयी.जब बाहर आई तो देखा की शत्रुजीत 1 कुर्सी पे बैठा अख़बार पढ़ रहा था.उसने 1 बाथिंग गाउन पहना हुआ था,शायद थोड़ी देर पहले ही वो नाहया था.

उसे देख शत्रुजीत ने अख़बार किनारे रखा दिया & उसके नंगे जिस्म को निहारने लगा.कामिनी उसके पास आई & उसके गले मे बाहे डाल उसे चूमने लगी.शत्रुजीत उसकी जंघे & पीठ सहलाते हुए उसकी किस का जवाब देने लगा कि उसका मोबाइल बजा.उसने किस तोड़ मेज़ से फोन उठाया,"हां,बेटा?...क्या?!..मैं अभी ऑफीस आ रहा हू."

"क्या हुआ?"

"तुम्हारी ज़रूरत पड़ी है,कामिनी.चलो,रास्ते मे सब बताता हू."

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"..तो ये है उस नत्थू राम का परिचय जिसके बारे मे उसकी बेटी ने आज पोलीस मे रपट लिखाई है कि वो गायब हो गया है .",दोनो पहले कामिनी के घर गये थे जहा उसने कपड़े बदले & अब शत्रुजीत की कार मे बैठे त्रिवेणी ग्रूप के दफ़्तर को जा रहे थे,"..चूँकि वो मुझे अपना घर बेच नही रहा था तो पोलीस को कुच्छ तो शक़ होगा ही,बस इसी सिलसिले मे वो मुझसे कुच्छ पुछ्ताछ करना चाहती है.जब अब्दुल को पता चला तो उसने उन्हे ऑफीस बुला लिया.",थोड़ी ही देर बाद कार ऑफीस के बाहर खड़ी थी.

"नत्थू राम कल दोपहर को बाज़ार के लिए निकला & फिर उसके बाद घर नही लौटा.उसकी बेटी दूसरे शहर से यहा चुट्टियो मे अपने बच्चो के साथ उसके पास आई थी.उसी ने पोलीस मे रिपोर्ट दर्ज कराई & साथ ही ये भी कहा कि वो आजकल परेशान था क्यूकी..",इनस्पेक्टर 1 पल के लिए रुका,"..क्यूकी आपलोग उसपे घर बेचने के लिए बहुत दबाव डाल रहे थे."

"इनस्पेक्टर,मेरी कंपनी के लोग..ये मेरा भाई अब्दुल & मैं खुद भी उस से मिल चुके थे & हर बार उसने मकान बेचने से इनकार ही किया था.इस से ज़्यादा ना हमने उस से कुच्छ कहा ना उसने हमसे.मेरी समझ मे ये नही आता की आप मुझसे उसके बारे मे क्यू पुच्छ रहे हैं.",षत्रुजीत सिंग ने इनस्पेक्टर की तरफ देख.उसके अलावा कमरे मे अब्दुल पाशा,जयंत पुराणिक & कामिनी मौजूद थे.

"इनस्पेक्टर,मैं कामिनी शरण,मिस्टर.सिंग की वकील हू.आप मेरे क्लाइंट से आगे कुच्छ पुच्छें,उसके पहले मैं आपको 1 बात बता देना चाहती हू.नत्थू राम सुभाष नगर मे अकेला आदमी था जिसे अपना मकान बेचने से ऐतराज़ था.बाकी सभी लोगो ने खुशी-2 अपने मकान बेच दिए सिवाय उसके.हम उसके खिलाफ कोर्ट मे केस करने वाले थे & हमे पूरा यकीन था की फ़ैसला हमारे ही हक़ मे होता.अब ऐसी सूरत मे मेरे क्लाइंट का उसके साथ कुच्छ गैर क़ानूनी करने की वजह मेरी समझ मे तो नही आती."

"देखिए वकील साहिबा,मैं रिपोर्ट दर्ज होते ही सीधे यहा नही आ गया हू.हमने पूरी तहकीकात कर ली है-ना ही उसका आक्सिडेंट हुआ है, और ना किसी हॉस्पिटल मे उसके भरती होने की खबर है.वो शराबी था,मगर आज तक उसने पी कर कोई बखेड़ा नही किया.दुनिया मे बेटी के सिवा उसका कोई रिश्तेदार नही,उस से & उसके ससुराल वालो से भी उसकी अच्छी बनती है.अगर किसी बात का उसे तनाव था तो वो यही मकान वाली बात हो सकती है.अब इस मे तो हमे यहा पुचहताच्छ करने आना ही था ना."

इनस्पेक्टर ने शत्रुजीत & पशा से उनकी नत्थू राम से की गयी मुलाक़ातो के बारे मे कुच्छ और सवाल किए & फिर चला गया.

"शत्रुजीत,मुझे ये मामला कुच्छ ठीक नही लग रहा."

"क्यू,अंकल जे?"

"पता नही.मुझे लगता है कि इसके पीछे किसी दुश्मन का हाथ है?"

"दुश्मन!कौन?!"

जवाब मे पुराणिक खामोश रहे मगर ऐसा लगता था जैसे उन्हे अंदाज़ा था कि वो दुश्मन कौन था.

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कामिनी अपनी सारी उठाए करण के ऑफीस के डेस्क पे झुकी हुई थी & वो नीचे बैठा उसके पीछे से उसकी चूत चाट रहा था,"..ऊवन्न्नह...करण,डर लग रहा है.कही कोई आ ना जाए."

दोनो ने साथ लंच किया था,उसके बाद करण ने उसे कार मे ऐसे गर्मजोशी से चूमा & उसके नाज़ुक अंग दबाए की दोनो बहुत गरम हो गये & उसके ऑफीस चले आए अपनी प्यास बुझाने के लिए,वैसे भी कामिनी आज रात उस से मिल नही सकती थी क्यूकी आज की रात वो 1 बार फिर शत्रुजीत की बाहो मे गुज़रने वाली थी,"घबराव मत,मेरी जान!कोई नही आएगा.",करण खड़ा हुआ & अपनी पॅंट खोल कर पीछे से लंड उसकी गीली चूत मे घुसाने लगा.लंड पूरा अंदर जाते ही वो झुक कर उसकी पीठ से सॅट गया,उसने हाथ आगे ले जाके ब्लाउस के उपर से ही उसकी चूचिया दबानी शुरू कर दी & धक्के लगाने लगा.उसके ऐसा करते ही कामिनी गर्दन घूमकर उसे चूमने लगी & उसकी चुदाई का मज़ा उठाने लगी.

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"माधो,तुम्हे उसे सबकी नज़रो से छुप के वाहा पहुचना है.मैं जानता हू तुम्हारे लिए ये बाए हाथ का खेल है मगर फिर भी सावधान रहना.",जगबीर ठुकराल फूलो से सजे बिस्तर पे अपनी रखैलो से घिरा बैठा था.1 उसके लंड को चूस रही थी & 2 उसके पीछे बैठी उसके सर & बदन को सहला रही थी.ठुकराल उनकी बड़ी,गोरी छातियो से टेक लगाके बैठा था.1 उसके पहलू मे बैठी अपने हाथो से उसे शराब पीला रही थी & 1 वाहा हाथो मे नोटो की गॅडी लिए खड़ी थी.सभी लड़कियो के बदन पे 1 पॅंटी के अलावा कोई कपड़ा नही था.

"आप फ़िक्र मत करे,हुज़ूर.",माधो पे जैसे इस गरम नज़ारे का कोई असर ही नही था.

"ये पैसे रख लो & उन दोनो को आगे का प्लान 1 बार फिर समझा देना.अब जाओ.",माधो ने पैसे लिए & अपने मालिक को हाथ जोड़ कर चला गया.ठुकराल ने उस खड़ी हुई लड़की को इशारा किया तो उस लड़की ने अपनी पॅंटी उतारी & उसके खड़े लंड को अपनी चूत मे घुसाते हुए उसकी गोद मे बैठने लगी.

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12-31-2018, 04:00 PM,
#43
RE: Sex Hindi Kahani गहरी चाल
रात कामिनी फिर शत्रुजीत के साथ उसके बिस्तर मे नंगी पड़ी हुई थी.वो उसकी चूचिया दबा & चूस रहा था & वो अपना हाथ नीचे ले जाके उसके अंडे दबा रही थी,"जीत....उउउम्म्म्मम..!"

"ह्म्‍म्म..बोलो.",शत्रुजीत उसके निपल को अपने अंगूठे & उंगली के बीच पकड़ के मसल रहा था.

"..आननह..तुम्हे क्या लग..ता है..कोई तुम्हे फॅन..सा..ना च..आह रहा... है..?"

"पता नही.अंकल जे ऐसा सोचते हैं.अब्दुल को भी लगता है मगर मुझे अभी तक ऐसा कुच्छ नही लगता.",वो अब उसकी बड़ी-2 आँखो मे झाँकते हुए अपनी उंगली से उसकी चूत मार रहा था.

कामिनी ने उसका हाथ अपनी चूत से अलग किया & उसे पलट के उसपे सवार हो उसके चेहरे को चूमने लगी,शत्रुजीत के हाथ उसकी पीठ से ले उसकी गंद तक फिसलने लगे,"1 बात पुच्छू?",वो उसके सीने पे बेचैनी से हाथ फिराते हुए उसके गाल चूम रही थी,"..पुछो?"

"अब्दुल & तुम्हारा क्या रिश्ता है?",वो नीचे आ उसके सीने को चूम रही थी,"..पता है..",उसने सर उठा कर शत्रुजीत की आँखो मे देखा,"..मुझे उस से बहुत डर लगता है.."

"क्या?!हा..हा..हा..!",शत्रुजीत हंस पड़ा,"..अब्दुल से डर!...",कामिनी और नीचे जा उसके लंड को हाथो मे ले उसके आस-पास शत्रुजीत के पेट को चूम रही थी,"..वैसे मैं समझ सकता हू.केयी लोगो पे अब्दुल का ऐसा असर होता है,मगर वो बहुत अच्छा इंसान है,कामिनी.उस बेचारे की कहानी बहुत दर्द भारी है.",कामिनी उसके लंड को चूसने लगी थी.शत्ृजीत ने हाथ बढ़ा के उसकी बाई जाँघ को पकड़ के अपनी तरफ खींच के उसे अपने उपर 69 पोज़िशन मे ले लिया.अब कामिनी उसके उपर,उसके मुँह पे अपनी चूत दबाए उसके लंड को चूस रही थी.

"अब्दुल अफ़ग़ानिस्तान का रहने वाला है.वाहा हो रहे गृह-युद्ध ने उसके पिता की जान ले ली तो उसके चाचा ने उसे,उसकी बीमार मा & बेहन के साथ देल्ही ले जाने का फ़ैसला किया.उनके जाने से ठीक 1 दिन पहले 1 हवाई हमले मे अब्दुल की आँखो के सामने उसकी बहन की मौत हुई.",कामिनी ने लंड से सर उठा के गर्दन घुमा के शत्रुजीत को देखा,वो उसकी गंद को मसल्ते हुए 1 उंगली उसकी चूत मे अंदर-बाहर कर रहा था.

"..अब्दुल को अपनी बेहन से बहुत प्यार था & इस बात का उसपे गहरा सदमा पहुँचा.उसका चाचा उसे & अपनी भाभी को किसी तरह देल्ही तो ले आया मगर उसे वापस किसी काम से आफ्गानिस्तान लौटना पड़ा.उसके बाद से उसके चाचा की आज तक कोई खबर नही है...",कामिनी ने वापस अपने होंठ उसके लंड पे कस दिए,"..आअहह..",शत्रुजीत ने आह भरी,"..यहा 1 हॉस्पिटल मे इलाज करने पे पता चला की उसकी मा को कॅन्सर है.11 साल के अब्दुल की कुच्छ समझ मे नही आ रहा था की वो इन मुश्किलो का सामना कैसे करे.इसी समय किसी रिपोर्टर को उसके बारे मे पता चला & उसने उसकी कहानी अख़बार मे छाप दी...",शत्रुजीत ने उसकी गंद की फांको को अपने हाथो मे मसल्ते हुए उसकी चूत पे अपनी जीभ चलाना शुरू कर दिया,"..आअनंह..ऊओईय्यीए...",कामिनी उसके लंड को मसल्ते हुए,आहे भरती हुई अपनी कमर बेचैनी से हिलाने लगी.

थोड़ी देर चूत को चाटने के बाद शत्रुजीत ने अपनी ज़ुबान उसकी चूत से अलग की,"..पिताजी उस वक़्त देल्ही मे ही थे.कहानी सुनते ही वो फ़ौरन अब्दुल से मिले & उसकी मा के इलाज का पूरा खर्चा उठाया,मगर वो बच नही सकी.इसके बाद अब्दुल दुनिया मे अकेला रह गया..",शत्रुजीत बोलते हुए उसके चूत के दाने को उंगली से रगड़ रहा था,"..पिताजी ने बहुत कोशिश की मगर उसके चाचा या किसी & रिश्तेदार का कोई पता नही चला.",कामिनी अब पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी.उसने उठाते हुए शत्रुजीत की पकड़ से अपनी कमर को खींचा & आगे सरक के अपने हाथ से पकड़ उसके लंड को अपनी चूत मे ले,उसकी ओर पीठ किए बैठ कर उच्छल-2 कर उसे चोदने लगी.

"..पिताजी को उस से बहुत लगाव हो गया था & फिर वो उसे यहा ले आए.हम सब ने उसे अपने परिवार का हिस्सा बना लिया.मेरी ज़िंदगी मे भी छ्होटे भाई की कमी पूरी हो गयी.वो पिताजी को भी अब्बू बुलाता था & मुझे भी भाई ही कहता है.अगर खुद के बाद मुझे किसी पे भरोसा है कामिनी तो वो अब्दुल ही है.",वो उसकी गंद को सहला रहा था,"..मगर शायद उसने लड़ाई के दौरान इंसान का जो घिनोना रूप देखा है,जो खून-ख़राबा देखा है...उसने उसकी आँखो & उसकी शख्सियत मे 1 ठंडा पन भर दिया है..शायद वही है जो लोगो की घबराहट का सबब बन जाता है.",कामिनी अब बहुत तेज़ी से उच्छल रही थी,शत्रुजीत उठा & पीछे से अपनी प्रेमिका को जाकड़ उसकी बड़ी,मोटी चूचियो को हाथो मे भर उसकी कसी चूत का लुत्फ़ उठाने लगा.

क्रमशः..................
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12-31-2018, 04:00 PM,
#44
RE: Sex Hindi Kahani गहरी चाल
गहरी चाल पार्ट--18

सवेरे कामिनी की नींद खुली तो उसने देखा की षत्रुजीत सिंग अभी तक वही उसके बगल मे सो रहा था.उसने घड़ी देखी,अभी थोड़ा वक़्त था & वो 1 बार और इस तगड़े लंड का लुत्फ़ उठा सकती थी.शत्रुजीत उसकी दाई तरफ लेटा था,कामिनी ने करवट लेकर अपनी बाई टांग उसके उपर चढ़ा दी & बाए हाथ से उसके लंड को हिलाते हुए उसके चेहरे को चूमने लगी.

शत्रुजीत की आँख खुली तो उसने मुस्कुराते हुए करवट ली & कामिनी से लिपट गया.उसका दाया हाथ उसकी बाई जाँघ की लंबाई पे घूम रहा था & उसका मुँह कामिनी की छातियो से चिपका हुआ था.कामिनी करवट ले अपनी पीठ के बल हो गयी तो शत्रुजीत उसका इशारा समझ गया,उसने फ़ौरन उसकी फैली टाँगो के बीच उसकी चूत मे अपना लंड घुसा दिया,"..य्याहह..!"

कामिनी उसे जकड़े हुए आहे भरते हुए चुदने लगी,तभी शत्रुजीत का मोबाइल बजा.उसने वैसे ही उसे चोद्ते हुए फोन उठा के नंबर देखा,"हां,बेटा...क्या?!!..मैं फ़ौरन नीचे आता हू.",उसने फोन किनारे रख कामिनी की चुदाई जारी रखी,"क्या...हू..आ..जे..ईत्त्त.

..आनह...उउउन्न्ह...?"

"कुच्छ नही...अभी तुम बस अपने मज़े पे ध्यान दो..",शत्रुजीत ने धक्के लगते हुए अपने होंठ उसकी चूची पे कस दिए तो कामिनी ने भी आँखे बंद कर ली & नशे के समंदर मे गोते लगाने लगी.

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नत्थू राम मिल गया था.पोलीस ने उसे पंचमहल के बाहर शत्रुजीत के फार्महाउस मे पाया था.जैसे ही अब्दुल पाशा को ये बात पता चली उसने तुरंत शत्रुजीत को फोन कर दिया था.इस वक़्त न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बार वालो की भीड़ त्रिवेणी ग्रूप के दफ़्तर & शत्रुजीत के घर के बाहर खड़ी थी.उन्हे पता नही था की शत्रुजीत कामिनी के साथ होटेल ऑर्किड से निकल कर सीधा उसके कोर्ट के चेंबर मे चला गया था,जयंत पुराणिक & पाशा भी वाहा मौजूद थे.

"समझ मे नही आता,वो फार्महाउस कैसे पहुँच गया!",पाशा कमरे मे चहल कदमी कर रहा था.

"बेटा,केर्टेकर से बात हुई तेरी."

"हां,भाई.उसे कुच्छ नही पता.वो तो अपने परिवार के साथ आउटहाउस मे सो रहा था,जब सुबह कोई 4 बजे पोलीस वाहा पहुँची.उसने उसी वक़्त मुझे फोन किया.तब तक पोलीस अंदर घुस के नत्थू राम को ढूंड चुकी थी."

"केर्टेकर ने देखा था उन्हे नत्थू राम को घर से निकलते?",पुराणिक 1 कुर्सी पे बैठे काफ़ी गहरी सोच मे डूबे थे.

"हां,अंकल.पोलीस ने उसे फार्महाउस की लॉबी का गेट खोलने को कहा,फिर वो उनके साथ अंदर गया तो 1 बंद कमरे को भी उसी ने चाभी से खोला वही नत्थू राम बैठा मिला.उसके बाद से केर्टेकर पोलीस हिरासत मे है."

"नत्थू राम का कहना है कि कुच्छ नकाब पोश गुन्दो ने उसे उसके घर & बाज़ार के बीच पड़ने वाली 1 सुनसान गली से उठाया & फार्महाउस पे ले गये.उसने किसी की शक्ल तो नही देखी पर वो बार-2 शत्रुजीत का नाम ले रहे थे.",सभी मर्द कामिनी की बात सुन रहे थे.

"..ये गुत्थी तो हम बाद मे सुलझायेंगे.फिलहाल मैने आंटिसिपेटरी बैल की अर्ज़ी दाखिल करा दी है,मुझे यकीन है मुकुल थोड़ी देर मे बैल मंज़ूरी के काग़ज़ ले के आता ही होगा."

"कामिनी,वो ग़रीब केर्टेकर बेवजह मुसीबत मे फँसा हुआ है,उसे भी बाहर निकालो प्लीज़."

"देखो,शत्रुजीत.हमे पक्का यकीन नही की वो केर्टेकर बिल्कुल बेगुनाह है & तुम्हे बैल मिल गयी तो फिर पोलीस उसे कभी नही छ्चोड़ेगी.अभी उनका शक़ सबसे ज़्यादा उसी के उपर होगा,क्यूकी वो वाहा मौजूद था जब गुमशुदा बरामद हुआ.आख़िर उन्हे भी तो ये केस सुलझाना है."

"मॅ'म,ज़मानत मंज़ूर हो गयी,लेकिन 12 बजे कोर्ट मे पेशी है.",मुकुल चेंबर मे दाखिल हुआ.

"ओके,मुकुल.पेशी से तो हम निबट लेंगे लेकिन सवाल ये है की आख़िर नत्थू राम वाहा पहुँचा कैसे?"

"उस से भी बड़ा सवाल ये है कामिनी,की उसे वाहा पहुचने वाला कौन है?",पुराणिक अभी भी वैसे ही बैठे थे.

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इस सवाल का जवाब था जगबीर ठुकराल के पास,जोकि इस वक़्त शैतानी मुस्कुराहट लिए अपने बड़े टीवी स्क्रीन पे न्यूज़ देख रहा था.उसका प्लान शुरू हो चुका था,शत्रुजीत अब उसके रास्ते से हटने ही वाला था.उसने 1 लड़की को इशारा किया तो वो फोन लेकर आई & सोफे पे उस से सॅट के बैठ गयी,ठुकराल ने भी अपनी बाई बाँह के घेरे मे उसे ले लिया,"माधो?"

"जी,हुज़ूर."

"बहुत बढ़िया काम किया है तुमने.",लड़की उसके सीने के बालो मे उंगलिया घुमा रही थी.

"शुक्रिया,हुज़ूर."

"अब आज आगे का प्लान भी इसी तरह बढ़ाना है."

"बिल्कुल हुज़ूर.मैं नज़र रखे हुए हू,जैसे ही मौका मिलेगा हम दूसरी सीढ़ी भी पार कर लेंगे.",लड़की का हाथ ठुकराल के पाजामे मे घुस चुका था.

"बहुत अच्छे,माधो.अपना ख़याल रखना."

"आप बेफ़िक्रा रहें हुज़ूर.",ठुकराल ने फोन रख दिया,"अभी नही,डार्लिंग.",उसने लड़की का हाथ अपने अंडरवेर से निकाला,"..आज बहुत काम है.",वो तैय्यार होने चला गया.

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12-31-2018, 04:00 PM,
#45
RE: Sex Hindi Kahani गहरी चाल
"मिलर्ड!गुमशुदा की बरामदगी शत्रुजीत सिंग के फार्महाउस से हुई है,नत्थू राम भी कह रहा है कि उसे अगवा करने वाले इनका नाम ले रहे थे,इस मामले की तह तक जाने के लिए पोलीस को इनसे पुच्छ-ताछ करनी होगी & इसके लिए मैं आपसे दरखास्त करता हू की शत्रुजीत सिंग को पोलीस हिरासत मे लेने की इजाज़त दी जाए.",सरकारी वकील ने अपनी दलील पेश की.

"मिलर्ड!केवल बरामदगी & कुच्छ अंजान लोगो के नाम लेने से ये कहा से साबित हो जाता है की मेरे मुवक्किल ही दोषी हैं.नत्थू राम ने ये तो नही कहा की खुद शत्रुजीत सिंग ने उसे अगवा किया था,उसने अगवा करने वालो के मुँह से उनका नाम सुना था.कोई मेरे क्लाइंट को फँसाने की कोशिश कर रहा है वरना आप ही बताएँ सर,क्या कोई मुजरिम इतनी बड़ी ग़लती कर सकता है की हर जगह अपना नाम का प्रचार करता चले.फिर भी,मैने अपने क्लाइंट की अग्रिम ज़मानत ले ली है,ये हैं उसके काग़ज़ात.थॅंक यू,सर.",उसने काग़ज़ात कोर्ट पीयान को थमा दिए.

"मिलर्ड!मुलज़िम नत्थू राम को धमकाता आ रहा था-.."

"ऑब्जेक्षन!मिलर्ड..",कामिनी बोली,"..वकील साहब मेरे मुवक्किल पे बेबुनियाद इल्ज़ाम लगा रहे हैं.नत्थू राम ने 1 बार भी अपने किसी बयान मे ये नही कहा है की उसे शत्रुजीत सिंग ने धमकाया है."

"ऑब्जेक्षन सस्टेंड."

"मैं माफी चाहता हू,मिलर्ड.मुलज़िम ने नत्थू राम पे घर बेचने के लिए दबाव डाला था.नत्थू राम के इनकार से बौखला कर उसे डरने की गरज से उसने ऐसा किया है."

"मिलर्ड!जब मेरे मुवक्किल ने आज तक उसे कभी भी धमकी तक नही दी फिर वो अचानक उसे अगवा क्यू कराएगा जब की वो बड़ी आसानी से क़ानून के सहारे उसके मकान का क़ब्ज़ा पा सकता था.",अपनी-2 दलीलें पेश करने के बाद दोनो वकील जड्ज के फैल्से का इंतेज़ार करने लगे.

"मुझे शत्रुजीत सिंग की अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी खारिज करने की कोई मज़बूत वजह नज़र नही आती,इस लिए अभी पोलीस उन्हे हिरासत मे नही ले सकती,लेकिन अदालत उन्हे ये हिदायत देती है की वो पोलीस की करवाई मे पूरा सहयोग दे.पोलीस उनसे कभी ही पुच्छ-ताछ कर सकती है,मगर इसके लिए पोलीस को उन्हे कम से कम 2 घंटे पहले इत्तिला देनी होगी.इस केस की अगली सुनवाई तक मिस्टर.सिंग बिना अदालत की इजाज़त के शहर के बाहर नही जाएँगे.केर्टेकर को पोलीस हिरासत मे रख सकती है.",जड्ज के फ़ैसले को सुन सब कोर्ट से बाहर आए जहा रिपोर्टर्स & तमाशबीनो का हुजूम उमड़ा हुआ था.उनके सवालो को नज़रअंदाज़ करते हुए शत्रुजीत & बाकी लोग अपनी गाडियो मे चढ़ कर वाहा से निकल लिए.

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कामिनी & पुराणिक अपने-2 ऑफीस चले गये थे & पाशा & शत्रुजीत 1 कार मे कही जा रहे थे,कार पाशा चला रहा था,"साइट पे ही चलना है ना भाई?"

"हां,बेटा.",दोनो केस के बारे मे बाते करने लगे & शायद इसी वजह से उनका ध्यान उस काली फ़ोर्ड एंडेवर पे नही गया जोकि ट्रॅफिक की भीड़-भाड़ का फ़ायदा उठा के उनके कुच्छ पीछे चल रही थी.

साइट पे बहुत तेज़ी से काम चल रहा था,बड़ी-2 मशीन्स & बहुत सारे मज़दूर इंजिनीयर्स की देख-रेख मे उस इमारत पे काम कर रहे थे.1 बड़ी सी टॉवेर क्रॅन 1 तरफ से सेमेंट की बोरिया उठाती & उसे बन रही इमारत की दसवी मंज़िल पे पहुँचा रही थी.साइट के सुपोवर्विज़र से बात करने के बाद पाशा बाथरूम चला गया & शत्रुजीत अकेला ही घूमने लगा.उसके ज़हन मे नत्थू राम के केस की ही बात घूम रही थी.वो अपने ख़यालो मे खोया हुआ था की तभी उसे पीछे से किसी ने ज़ोर का धक्का दिया & वो रेत के ढेर पे गिर पड़ा,वो धक्का देने वाला शख्स उसके उपर था.शत्रुजीत कुच्छ समझता ठीक उसी वक़्त उसके गिरते ही सेमेंट की 5 बोरिया वही पे गिरी जहा पे वो पहले खड़ा था.

उसकी समझ मे सब आ गया,इस इंसान ने उसकी जान बचाई थी.वो कपड़ो से धूल झाड़ता उठा & हाथ बढ़ा के उस अंजन आदमी को उठाया,तब तक वाहा काम करने वाले & पाशा उसके पास भागते हुए आ चुके थे.शत्रुजीत ने उस आदमी को सहारा दे के खड़ा किया,"शुक्रिया."

वो आदमी बस हांफे जा रहा था,उसके कपड़ो पे गिरने से धूल जम लग गयी थी मगर फिर भी सॉफ ज़ाहिर था की वो पहले से ही बड़े पुराने & मैइले हैं.उसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी & वो काफ़ी कमज़ोर लग रहा था,"तुम यहा काम करते हो?,जवाब मे उसने इनकार मे सर हिलाया.शत्रुजीत अपनी जेब मे हाथ डालता उस से पहले ही पाशा ने अपनी जेब से वॉलेट निकाल के उसके सारे पैसे उस आदमी की ओर बढ़ाए,"ना...मैने जो किया इंसानियत के नाते..मैं ये पैसे नही लूँगा..",वो हांफता हुआ घुमा & 4 कदम चल के चक्कर खा के गिर गया.सभी दौड़ के उसके करीब पहुँचे,शत्रुजीत ने उसे उठाया,"पाशा,ये बीमार लगता है..देखो बेहोश तो नही हुआ पर फिर भी आँखे नही खोल पा रहा है.."

"हां,भाई.इसे हॉस्पिटल ले चलते हैं."

"हां,चल."

क्रमशः......................
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12-31-2018, 04:01 PM,
#46
RE: Sex Hindi Kahani गहरी चाल
गहरी चाल पार्ट--19

उस काली फ़ोर्ड एंडेवर मे बैठे माधो & जगबीर ठुकराल ने ये देखा & वाहा से निकल गये,"सब ठीक जा रहा है,माधो."

"हां,हुज़ूर."

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"मिस्टर.सिंग,इस आदमी ने 2 दीनो से कुच्छ नही खाया है,केवल पानी पिया है.इसकी हालत देखते हुए मुझे लगता है की उसके पहले भी इसने ठीक से खाया-पिया नही है.इसी वजह से ये बहुत कमज़ोर हो गया है & अभी इसे 3-4 दीनो तक तो यहा रहना ही होगा.",डॉक्टर शत्रुजीत सिंग & अब्दुल पाशा को उस अंजान शख्स की हालत से वाकिफ़ करा रहा था.

"आप जो ठीक समझे वो करे,डॉक्टर.इसके इलाज का पूरा खर्च मैं दूँगा.",उसने डॉक्टर से हाथ मिलाया & दोनो वाहा से निकल आए.

दूसरे दिन सुबह दोनो भाई फिर हॉस्पिटल पहुँचे तो देखा कि वो आदमी जगा हुआ था,"अब तबीयत कैसी है तुम्हारी?",शत्रुजीत ने उस से पुचछा.

"जी,अब पहले से बेहतर लग रहा है."

"मेरा नाम शत्रुजीत सिंग है & ये मेरा भाई अब्दुल पाशा.",उसने सर हिला के दोनो का अभिवादन किया.

"मेरा नाम टोनी है."

"टोनी,तुम क्या काम करते हो?"

"कुच्छ नही.",वो खिड़की से बाहर देखने लगा.दोनो भाइयो ने 1 दूसरे की तरफ देखा,शत्रुजीत ने बात आगे बढ़ाई,"तुम यही पंचमहल के हो?",उसने इनकार मे सर हिला दिया.शत्रुजीत & पाशा 1-1 कुर्सी खींच कर बैठ गये.

"टोनी,हम तुम्हारी मदद करना चाहते हैं.तुम्हारी इस हालत की वजह अगर तुम ना बताना चाहो तो भी हुमारे इरादे से हम नही डिगेंगे.फिर भी,अगर तुम अपने बारे मे हमे सब बता दो तो हमे तुम्हारी मदद करने मे शायद आसानी ही होगी."

"या शायद आप भी मुझे नीची नज़र से देखने लगेंगे.",टोनी के होंठो पे फीकी सी मुस्कान थी.

"नही,हम ऐसा नही करेंगे.तुम अपनी कहानी सूनाओ.",टोनी ने 1 लंबी सांस भरी & फिर शत्रुजीत की ओर देखने लगा.

"मेरा पूरा नाम अँतोनी डाइयास है & मैं गोआ का रहने वाला हू.स्कूल के दीनो से ही मुझे आक्टिंग का शौक रहा है & बड़ा होते-2 ये शौक जुनून बन गया.गोआ मे नाटको & 1-2 टीवी प्रोग्रॅम्स मे मेरी आक्टिंग की लोगो ने तारीफ की & मैं अपने बूढ़े मा-बाप को छ्चोड़ किस्मत आज़माने बोम्बे चला गया.वाहा बहुत दीनो तक आएडियाँ घिसने के बावजूद मुझे कोई कामयाबी हासिल नही हुई & मैं मायूस हो गया.मायूसी मुझे कब शराब & ड्रग्स की ओर ले गयी मुझे याद नही."

"..इस दौरान मैं 1 बड़ी प्यारी लड़की से मिला,हम दोनो ने शादी भी कर ली पर वो मेरी बुरी आदते च्छुडा नही पाई.अब ज़िंदगी चलाने के लिए पैसे तो चाहिए थे ना,कभी कही छोटा-मोटा रोल मिल जाता तो कर लेता नही तो विदेशी सैलानियो को चरस,सस्ते होटेल रूम या फिर उनकी हवस मिटाने के लिए लड़के-लड़किया दिलवा देता.इस काम मे मेरी अछी अँग्रेज़ी & 1-2 और विदेशी ज़बानो का काम चलाऊ ज्ञान मेरी बहुत मदद करता.मगर यही काम मुझे क़ानून की नज़र मे मुजरिम बनाता था.",दोनो गौर से उसकी बात सुन रहे थे.

"..पोलीस लॉक-अप आना-जान तो मेरे लिए आम बात हो गयी.इस बीच मेरे मा-बाप भी गुज़र गये & 1 दिन मेरी हर्कतो से परेशान हो मेरी बीवी भी मेरे बेटे के साथ मुझे छ्चोड़ गयी.उस दिन मुझे एहसास हुआ की मैं कितनी ग़लत ज़िंदगी जी रहा था.अगर चाहता तो मैं शराफ़त से भी चार पैसे कमा सकता था,मगर नही मुझे तो नशा भी करना था ना!..& उसके लिए जो पैसे चाहिए थे वो शराफ़त की कमाई से तो नही मिलते.",उसका गला भर आया था & वो 1 बार फिर खिड़की के बाहर देखने लगा.

"..मैने अपने बीवी-बच्चे को बहुत ढूनदा पर वो नही मिले...इधर-उधर भटकता हुआ यहा पहुँचा & फिर आपसे मुलाकात हो गयी.",दोनो खामोशी से उसे देख रहे थे.

"टोनी,अब तुम्हे फ़िक्र करने की कोई ज़रूरत नही.तुमने अपनी मुश्किल दास्तान सुनके मेरी नज़र मे और ऊँचे ही हो गये हो.1 इंसान जो 2 दिन से भूखा हो & फिर भी वो हज़ारो रुपये ठुकरा दे,वो इंसान ग़लत नही हो सकता...हां!तुम भटक गये थे मगर अब सही रास्ते पे हो.तुम्हे मैं कोई ना कोई काम दिलवा दूँगा लेकिन शर्त ये है की तुम नशे से दूर रहोगे."

"मुझे मंज़ूर है,साहब."

"तो ठीक है,अब तुम आराम करो.यहा से छुट्टी मिलते ही तुम हुमारे साथ काम करोगे.",दोनो वाहा से निकल गये.

"अब्दुल..",दोनो कार मे बैठ गये.

"हां,भाई.पता तो लगे ये सच बोल रहा है की नही."

"ठीक है,भाई.",उसने कार गियर मे डाली,"..मगर भाई.."

"हां.."

"काम क्या दोगे उसे?"

"ड्राइवर बना लूँगा."

"हैं?!"

"हां...आबे तू कब तक ड्राइवरी करता रहेगा....& फिर सोच ऐसा ड्राइवर कहा मिलेगा जो 24 घंटे बस हमारी खिदमत मे लगा रहेगा!",दोनो हंस पड़े.ये 1 ऐसा लम्हा था जो कभी-2 ही आता था-पाशा को हंसते शायद कभी ही किसी ने देखा हो.
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12-31-2018, 04:01 PM,
#47
RE: Sex Hindi Kahani गहरी चाल
सुबह चूत मे कुच्छ महसूस होने पे कामिनी की नींद खुली,उसने देखा कारण उसके पेट पे हाथ फेरते हुआ उसकी चूत चाट रहा है.कल रात को वो करण के साथ उसके घर आ गयी थी & उसके बाद दोनो ने पूरी रात जम कर चुदाई की थी.उसने प्यार से उसके सर पे हाथ फेरा तो करण की जीभ उसकी चूत के दाने को छेड़ने लगी,"..उउम्म्म्मम...!"

विवेक उसे कभी भी सुबह को नही चोद्ता था,दोनो को काम पे जाने की इतनी जल्दी होती थी कि वो उठ के बस तैय्यार हो कोर्ट पहुँचने की हड़बड़ाहट मे रहते थे.मगर उसके तीनो आशिक़ तो जैसे उसे बस दिन हो या रात अपने बिस्तर मे अपनी बाहो मे सुलाए रखना चाहते थे!

उसकी चूत गीली हो चुकी थी & उसमे वही मीठा तनाव बन चुका था जोकि उसे झड़ने के पहले महसूस होता था.उसने करण के बाल पकड़ कर हल्के से खींचा,करण उसका इशारा समझ गया.वो उसकी चूत से मुँह हटा उसके पेट को चूमते हुए उपर आने लगा.कामिनी ने टांगे फैलाते हुए उसे बाहो मे भर लिया.

करण उसकी चूचियो के कड़े हो चुके निपल्स को चूसने के बाद उसके चेहरे को हाथो मे ले चूमने लगा.कामिनी भी गर्मजोशी से उसकी किस का जवाब देने लगी.उसकी बेचैनी बहुत बढ़ गयी थी,उसने अपना बाया हाथ करण की पीठ पे ही रखा & दाए को दोनो के जिस्मो के बीच ले जाके उसके लंड को पकड़ अपनी चूत का रास्ता दिखाया.

"..ऊओउउइई...!",करण ने 1 ही झटके मे पूरा का पूरा लंड उसकी गीली चूत मे घुसा दिया.कामिनी के हाथ उसके सर से ले के उसकी गंद तक फिसलने लगे.करण कभी उसके चेहरे को चूमता तो कभी चूचियो को.उसके हाथ तो बदस्तूर उन बड़ी गोलैयो को दबाए जा रहे थे.

दोनो की ही मस्ती अब बहुत बढ़ गयी थी.कामिनी के नाख़ून करण की गंद पे निशान छ्चोड़ रहे थे तो करण के धक्के भी बड़े गहरे हो गये थे.कामिनी ने अपनी टांगे उसकी कमर पे कस दी & उसकी गंद मे नाख़ून धँसते हुए उठाते हुए करण के बाए कान मे पागलो की तरह जीभ फिराने लगी,उसकी चूत करण के लंड पे और कस गयी थी.करण समझ गया की उसकी प्रेमिका अपनी मंज़िल तक पहुँच गयी है,उसने उसी वक़्त अपने गाढ़े पानी को उसकी चूत मे छ्चोड़ दिया & अपना सफ़र भी पूरा कर लिया.

झड़ने के बाद दोनो वैसे ही 1 दूसरे को बाहो मे कसे प्यार से 1 दूसरे के चेहरे को चूम रहे थे की कामिनी का मोबाइल बजा,"हेलो!",दूसरी तरफ षत्रुजीत सिंग था.

"कामिनी,क्या तुम कोर्ट जाने से पहले सिटी हॉस्पिटल आ सकती हो?"

"हॉस्पिटल!सब ठीक है ना?",करण अभी भी उसके उपर चढ़ा उसके बाए निपल पे जीभ फिरा रहा था.

"हां-2,घबराने की कोई बात नही है...शायद हमे अपने केस के लिए 1 बड़ा अहम गवाह मिल गया है."

"ओके.मैं आ जाऊंगी.",कामिनी ने मोबाइल किनारे रखा,"..चलो हटो अब...ऑफीस नही जाना?"

"दिल तो नही कर रहा.",करण ने मुँह हटाया तो हाथ को निपल पे लगा दिया.

"मगर फिर भी जाना तो पड़ेगा!".कामिनी ने मुस्कुरा के उसके हाथ को अपनी छाती से अलग किया & उसे अपने उपर से उतार बाथरूम मे चली गयी.

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"ये आदमी 14 तारीख को बहार गूँज के 1 होटेल मे था,मैने अपनी आँखो से देखा है,सर.",आंतनी डाइयास उर्फ टोनी हॅयास्पिटल बेड पे लेटा शत्रुजीत से मुखातिब था.कामिनी & अब्दुल पाशा गौर से उसकी बात सुन रहे थे.शत्रुजीत पाशा के साथ जब सवेरे उसे देखने आया तो वो टीवी पे न्यूज़ देख रहा था & उसी मे जब नत्थू राम वाली खबर मे नत्थू राम के चेहरा दिखाया गया तो वो चौंक पड़ा.

"..मैं रेलवे स्टेशन से निकल कर इधर-उधर भटक रहा था.अब बहार गूँज कैसा बदनाम इलाक़ा है ये तो आप सब मुझसे बेहतर जानते होंगे-आख़िर आप सब तो यही के हैं.14 तारीख को वही के 1 फूटपाथ के किनारे अख़बार बिच्छा के पड़ा हुआ था.उसी वक़्त ये आदमी सामने के होटेल से निकला & शराब की दुकान पे गया.1 बॉटल खरीद के उसने कुर्ते की जेब मे डाल ली & फिर बगल मे खड़े अंडे के ठेले से उबले अंडे खरीदने लगा.."

"..अंडे वाले को पैसे देने के लिए उसने जेब से पैसे निकाले तो 1 हवा का झोंका आया & नोट उसके हाथो से उड़ गये,1 50 का नोट मेरे पास भी आया.मैने वो उठा के उसे वापस किया तो वो बाकी पैसे भी सड़क से उठा अंडे वाले को उसकी कीमत चुकाने के बाद मुझे शुक्रिया अदा कर चला गया."

क्रमशः.........................
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12-31-2018, 04:01 PM,
#48
RE: Sex Hindi Kahani गहरी चाल
गहरी चाल पार्ट--20

"तुम्हे पूरा यकीन है कि ये वही आदमी है?",कामिनी ने टीवी की ओर इशारा किया.

"अदालत मे ये बात कह सकोगे?"

"क्यू नही,मेडम!"

"देखो,वाहा सरकारी वकील तुम्हे गैर भरोसेमंद बताने के लिए तुम्हारी पिच्छली ज़िंदगी के बारे मे भी पुच्छ सकता है."

"मैं किसी भी सवाल का जवाब दूँगा मेडम,मगर अपना भला चाहनेवाले पे आँच नही आने दूँगा."

"ठीक है,तब तो हमारी मुश्किल आसान हो गयी.",कामिनी ने शत्रुजीत की ओर देखा.

"ह्म्म...लेकिन 1 सवाल अभी भी है?',पाशा की भारी आवाज़ बड़ी संजीदा थी.

"क्या?"

"वो हमारे फार्महाउस के अंदर कैसे पहुँचा."

"ये तो वो खुद अपनी ज़ुबान से बताएगा.",कामिनी ने जवाब दिया.

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"मिलर्ड!अब मैं आपके सामने ऐसा गवाह पेश करना चाहती हू जिसका बयान मेरे मुवक्किल के खिलाफ इस केस को झूठा साबित कर देगा.",जड्ज ने इशारे से उसे गवाह को पेश करने की इजाज़त दी.

"आप का नाम क्या है?",टोनी कटघरे मे खड़ा था.

"आंतनी डाइयास.लोग मुझे टोनी भी बुलाते हैं."

"आप पंचमहल के ही रहने वाले हैं."

"जी नही.मैं गोआ से हू,अभी बॉमबे से इधर आया हू."

"आप क्या काम करते हैं?"

"जी कुच्छ नही.",फिर टोनी ने अपनी ज़िंदगी के बारे मे संक्षेप मे बताया.

"मिलर्ड!हम यहा इनकी दास्तान सुन के वक़्त क्यू ज़ाया कर रहे हैं?आख़िर इनका क्या ताल्लुक है इस केस से?!",सरकारी वकील उठ खड़ा हुआ था.

"कामिनी जी!मुकद्दमे को आगे बढ़ाइए.",जड्ज ने कामिनी से कहा.

"जी!मिलर्ड.मिस्टर.डाइयास 14 तारीख की रात को आपने क्या देखा?

टोनी ने सारी बात बता दी.कोर्ट मे ख़ुसर-पुसर होने लगी,"ऑर्डर!ऑर्डर!"

"मिलर्ड!हम इस इंसान की बातो पे क्यू यकीन करे?!ये इंसान अपने मुँह से खुद के नशेबाज़ & 1 अपराधी होने की बात कह चुका है.क्या ऐसे आदमी की गवाही कोई मायने रखती है?"

"मिलर्ड!मेरे हिसाब से गवाह केवल सच्चे & झूठे होते हैं..& मिस्टर.डाइयास ने वो बुरा रास्ता छ्चोड़ दिया है & अब नेकी से ज़िंदगी जीना चाहते हैं.अगर सरकारी वकील साहब जैसे लोग उन्हे इसी तरह नीची निगाह से देखेंगे तो वो 1 अच्छे इंसान कैसे बनेंगे?"

"फिर भी मिलर्ड,इनकी गवाही को मानने के लिए कोई सबूत भी तो होना चाहिए."

"सबूत है,मिलर्ड!मुझे 1 और गवाह पेश करने की इजाज़त दें."

"इजाज़त है."

1 40-45 साल की उम्र का थोड़ा मोटा सा आदमी,1 फाइल पकड़े कटघरे मे आके खड़ा हो गया.देखने से वो कोई व्यापारी लगता था,"अपना नाम बताइए?"

"अरुण चड्ढा."

"मिस्टर.चड्ढा,आप क्या काम करते हैं."

"मेरा बहार गूँज मे शालीमार डेलक्स नाम का होटेल है."

"ये जो शख्स सामने बैठा है..",उसने नत्थू राम की ओर इशारा किया,"..इसे आपने पहले देखा है?"

"जी हां.14 तारीख को शाम से ये हमारे होटेल मे रुके थे.",कोर्ट मे फिर से ख़ुसर-पुसर शुरू हो गयी.

"युवर विटनेस.",कामिनी ने मुस्कुराते हुए सरकारी वकील को इशारा किया.

"मिस्टर.चड्ढा,आपके पास क्या सबूत है की ये आदमी आपके होटेल मे ठहरा था."

"जी!हम हर गेस्ट से उसका 1 आइड कार्ड माँगते हैं,फिर उसकी फोटो कॉपी उसके नाम & फोन नंबर के साथ अपने रेकॉर्ड मे रखते हैं...ये है इनका रेकॉर्ड.",उसने हाथो मे पकड़ी फाइल आगे कर दी.वकील ने वो फाइल देखने के बाद जड्ज को भिजवा दी,"नो मोर क्वेस्चन्स."

"मिलर्ड!मुझे लगता है मिस्टर.सिंग अपने पैसे & रसुख का इस्तेमाल करके नत्थू राम को झूठा साबित करने के लिए ये चाल चल रहे हैं...नही तो मिलर्ड अगर थोड़ी देर को मान भी ले की नत्थू राम उस रोज़ होटेल मे था तो वो अपना सही आइड कार्ड क्यू इस्तेमाल करेगा?"
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12-31-2018, 04:01 PM,
#49
RE: Sex Hindi Kahani गहरी चाल
"उसी वजह से जिस वजह से आप मेरे क्लाइंट पे नत्थू राम को अपना नाम बता कर अगवा करने का इल्ज़ाम लगा रहे हैं.",कामिनी ने सरकारी वकील की दलील का जवाब दिया & फिर जड्ज से मुखातिब हुई,"..मिलर्ड!सरकारी वकील साहब अगर खुद कोई दलील दे तो वो सच्ची मान ली जाए & अगर वैसी ही दलील मैं दू तो वो झूठ है,चाल है!"

"मिलर्ड!मैं चाहती हू कि नत्थू राम को कटघरे मे बुलाके अब उस से इस बारे मे सवाल किए जाएँ?"

"इजाज़त है."

"नत्थू राम जी,क्या ये सच है की आप शालीमार डेलक्स होटेल मे ठहरे थे."

"जी",सर झुका के धीमी आवाज़ मे उसने जवाब दिया.कोर्ट मे इस बार फिर लोग बाते करने लगे,"ऑर्डर!ऑर्डर!"

"हुज़ूर,मैं..मैं...कुच्छ कहना चाहता हू.",नत्थू राम ने जड्ज की ओर देखा.

"कहो."

"जी..मैने..मैने ये सब ...ये सारा ...कुच्छ नाटक किया था..."

"क्या?"

"जी.मुझे बस सनक सवार हो गयी थी कि मुझे अपना मकान नही बेचना है,ये लोग हर दूसरे दिन आके मुझे ऐसा करने को कहते थे...बस 1 दिन मैने सोचा कि क्यू ना ऐसा करके इन्हे मज़ा चखाऊँ!"

"ज़रा तफ़सील से कहो."

"मैने पहले अपनी बेटी को कुच्छ इस तरह से सारी बात बताई...ये मकान बेचने वाली बात..कि उसे लगे की ये लोग मुझे बहुत परेशान कर रहे हैं..",उसने शत्रुजीत की ओर इशारा किया,"..फिर 14 तारीख को मैं होटेल मे बिना बताए चला गया.उस रात मैं कोई 12 बजे के करीब इनके फार्महाउस पहुँचा.इनके फार्महाउस मे कोई ऐसी कड़ी सेक्यूरिटी है नही बस 1 केर्टेकर रहता है..मैं उसके बारे मे सब पहले पता कर चुका था...उसका आउटहाउस बस 1 कमरे का है & उसके 2 बच्चे हैं...रात को जब बच्चे सो जाते हैं तो दोनो मिया-बीवी उन्हे उस आउटहाउस मे बंद करके खुद फार्महाउस के बेडरूम मे चले जाते हैं...& फिर अपना..अपना काम करने के बाद सवेरा होने से पहले वापस आउटहाउस मे आ जाते हैं..",कोर्ट मे हँसी की 1 लहर दौड़ गयी,केर्टेकर भी वाहा मुजूद था.उसका चेहरा तो शर्म से लाल हो गया था & उसने नज़रे नीची कर ली.कामिनी भी मुस्कुराए बगैर ना रह सकी.

"ऑर्डर!ऑर्डर!",जड्ज ने अपना हथोदा ठोंका,"..मगर तुम्हे ये सब कैसे पता?"

"साहब..कोई 15 दिन पहले मैं फार्महाउस मे पहली बार घुसा था.पीछे की तरफ अगर दीवार के सहारे कुच्छ खड़ा होने को मिल जाए तो अंदर काफ़ी आसानी से घुसा जा सकता है.मैने 1 रेहडी वाले का ठेला लगाकर दीवार फांदी & फिर अंदर जाकर ये सब मालूम कर लिया.14 तारीख को भी केर्टेकर अपनी बीवी के साथ मशगूल था,जब मैं फार्महाउस के अंदर दाखिल हो गया.इसने चाभी वही हॉल के मेज़ पे छ्चोड़ दी थी & खुद बीवी के साथ बेडरूम मे चला गया था..",उसने केर्टेकर की तरफ इशारा किया.

"..मैने चाभी उठा के 1 कमरा खोला & अंदर जाकर उस कमरे की खिड़की खोल ली.फिर मैने रूम को वापस बंद किया & छिप कर केर्टेकर & उसकी बीवी को देखने लगा..",अदालत मे 1 बार फिर लोग दबी आवाज़ मे हंस पड़े,केर्टेकर ने तो उसे ऐसी नज़रो से घूरा जैसे उसे मार ही डालेगा!

"..जब ये बाहर आने लगे तो मैं भी बाहर चला गया & उस खुली खिड़की से वापस अंदर दाखिल हो गया.आने से पहले ही मैने पोलीस को गुमनाम फोन किया था कि मुझे अगवा करके फार्महाउस मे रखा गया है...बस उसके बाद सवेरे पोलीस ने मुझे वाहा से बरामद कर लिया."

"तुम ये बयान किसी दबाव मे तो नही दे रहे?"

"नही,साहब."

"ह्म्म....तुमने बहुत ग़लत काम किया है.1 इज़्ज़तदार शहरी पे झूठा इल्ज़ाम लगाके साज़िश के तहत उसे फँसाने की कोशिश की है.तुम्हारे & बाकी गवाहॉ के बयान & सबूत भी इसी तरफ इशारा करते हैं.अदालत तुम्हे मुजरिम मानती है & केर्टेकर & शत्रुजीत सिंग को बैइज़्ज़त बरी करती है.अदालत लंच ब्रेक के लिए बर्खास्त की जाती है.मुजरिम की सज़ा उसके बाद सुनाई जाएगी."

क्रमशः...................
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12-31-2018, 04:01 PM,
#50
RE: Sex Hindi Kahani गहरी चाल
गहरी चाल पार्ट--21

"बेटा,टोनी के बारे मे पता कर लिया?",षत्रुजीत सिंग अपने ऑफीस मे बैठा अपने कंप्यूटर पे कुच्छ काम कर रहा था,शायद पाशा ने उसकी बात नही सुनी थी.शत्रुजीत ने कंप्यूटर से नज़रे उठा कर अपने मूहबोले भाई की ओर देखा...ना जाने वो किन ख़यालो मे गुम था,"अब्दुल!"

"हुन्न....हाँ.",जैसे वो नींद से जागा.

"क्या सोच रहा है भाई?"

"कुच्छ नही...बस ऐसे ही."

"टोनी के बारे मे पता चल गया?"

"हां,भाई.उसने सारी बातें सच ही कही थी."

"तो उसे रखे रहते हैं ड्राइवर की नौकरी पे,क्यू?",नत्थू राम को सज़ा मिल गयी थी,साथ ही वो मकान बेचने को भी तैय्यार हो गया था.शत्रुजीत ने इसके बाद टोनी को हॉस्पिटल से छुट्टी मिलते ही अपने ड्राइवर की नौकरी पे रख लिया था.

"हां.रखे रहते हैं..",पाशा फिर से अपने ख़यालो मे डूब गया.

-------------------------------------------------------------------------------

नंदिता बिस्तर पे लेटी हुई थी,कमरे मे अंधेरा था.उसके बगल मे उसका पति भी लेटा था,वो जानती थी की वो भी उसी की तरह जगा हुआ था.उसने गर्दन घुमाई,ठीक उसी वक़्त शत्रुजीत भी मुड़ा & दोनो 1 दूसरे की बाहो मे आ गये.थोड़ी ही देर मे दोनो बिल्कुल नंगे हो चुके थे & शत्रुजीत अपनी बीवी के उपर चढ़ उसकी चूचिया चूस रहा था.

मगर आज दोनो की चुदाई मे वो गर्मी नही थी,शत्रुजीत नंदिता के बदन मे कामिनी का अक्स ढूंड रहा था...उसने जैसे ही उसके निपल को जीभ से छेड़ा,उसे अपनी प्रेमिका के गुलाबी रंग के निपल याद आ गये & वो उसे बाहो मे भरने को बेताब हो उठा...कामिनी कैसी मस्त आहे भरते हुए उसका साथ देती थी....नंदिता को भी आज वो मज़ा,वो मस्ती महसूस नही हो रही थी.

उसने शत्रुजीत का सर अपनी छाती से उठाया तो शत्रुजीत उसके उपर से उठ कर बैठ गया.कमरे मे काफ़ी देर तक खामोशी च्छाई रही.फिर शत्रुजीत ने ही चुप्पी तोड़ी,"नंदिता..."

"नंदिता....मुझे लगता है की हमे अब अलग हो जाना चाहिए..."

"नंदिता ने कोई जवाब नही दिया,उसे अपने पति की बात ज़रा भी बुरी नही लगी थी...शायद उसे राहत ही महसूस हुई थी.उनके रिश्ते मे सेक्स को छ्चोड़कर शायद ही कुच्छ अच्छा था & आज तो वो भी ख़त्म ही हो गया था.उसने करवट बदली & चादर से अपने नंगे बदन को ढँका & नींद के आगोश मे चली गयी.शत्रुजीत बैठा अपनी सोती हुई बीवी को देख रहा था.

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"सर."

"हां,टोनी.",टोनी कार चला रहा था & शत्रुजीत उसके साथ वाली सीट पे बैठा अख़बार पलट रहा था.

"सर,प्लीज़ मुझे 1 हफ्ते की छुट्टी दे सकते हैं?",शत्रुजीत ने अख़बार से सर उठाकर उसे सवालीयो नज़रो से देखा,"..सर,मैं 1 बार गोआ जाके अपने मा-बाप की कब्रो पे फूल चढ़ाना चाहता हू &..",टोनी चुप हो कर ड्राइव करने लगा.

"और क्या,टोनी?अपनी बात पूरी करो."

"..और शायद मेरे बीवी-बच्चे का भी कुच्छ पता चल जाए."

"ह्म्म...ठीक है,टोनी.कब जाना चाहते हो?"

"हफ्ते के आख़िर मे,सर."

"ठीक है.चले जाओ."

"थॅंक यू,सर.",शत्ृजीत ने सर हिलाया & वापस अख़बार पलटने लगा.

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"कल रात तुमने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया था,नंदिता.",शत्रुजीत बिस्तर पे अपनी बीवी के बगल मे लेटा हुआ था.

"इतने दीनो से तुम्हे ये बात नही सूझी,फिर अचानक अब क्यू तलाक़ की बात कर रहे हो?"नंदिता छत की तरफ देख रही थी.

"इतने दीनो तक पिताजी का लिहाज करके मैं चुप था...मगर अब मैं ऐसे नही रह सकता."

"तुम कितने मतलबी हो,शत्रु!तुम्हारे पिता अब इस दुनिया मे नही हैं मगर मेरे माता-पिता दोनो अभी हैं & मैं ये रिश्ता तोड़ कर उनका दिल नही दुखाऊँगी."

"नंदिता!तुम क्यू बात को उलझा रही हो?!!...हम दोनो जानते हैं की हुमारे बीच कैसा रिश्ता है...ये दोनो के लिए 1 मौका है अपनी ज़िंदगी को फिर से नये सिरे से शुरू करने का..."

"तुमको क्या फ़र्क पड़ता है की मैं तुम्हारी बीवी रहू या नही!तुम मेरे होते हुए भी तो अययाशिया कर रहे हो...फिर अचानक ये तलाक़ की बात कहा से तुमहरे दिमाग़ मे आ गयी...मैने तुम्हे आज तक किसी बात से रोका या फिर कभी तुम्हारे साथ झागड़ी?नही ना!फिर अलग होने की क्या ज़रूरत है!..."

"यानी तुम तलाक़ नही दोगि."

"नही."

"ठीक है.",शत्रुजीत कमरे से बाहर जाने लगा तो देखा की नंदिता की नौकरानी दरवाज़े पे खड़ी है.उसे आता देख वो 1 किनारे हो गयी & शत्रुजीत कमरे से बाहर चला गया.

आवंतिपुर-पंचमहल से कोई 150-200 किमी की दूरी पर बसा वैसा ही बड़ा शहर मगर यहा का मौसम पंचमहल से ज़्यादा अच्छा था.इसका कारण था वो पहाड़ जिनके कदमो मे आवंतिपुर बसा हुआ था.इन पहाड़ो मे कयि छ्होटे शहर & कस्बे थे जोकि गर्मियो मे सैलानियो से भरे रहते थे.इन्ही मे से 1 छ्होटी सी जगह थी क्लेवर्त.

क्लेवर्त नाम किसी अँग्रेज़ अफ़सर के नाम पे पड़ा था जिसने उस जगह को बसाया था.क्लेवर्त के आस-पास कोई 7-8 बोरडिंग स्कूल थे & इन्ही स्कूल्स की बदौलत वाहा के लोगो की रोज़ी-रोटी चलती थी.इन्ही मे से 1 स्कूल के मेन गेट से 1 काली फ़ोर्ड एंडेवर निकली.

कार माधो चला रहा था & पीछे की सीट पे 3 लोग बैठे थे-1 लगभग 26 बरस की लड़की,जगबीर ठुकराल & आंतनी डाइयास,"आपका कैसे शुक्रिया अदा करू,समझ मे नही आता सर!"

"टोनी,कैसी बाते कर रहे हो!",लड़की बीच मे बैठी थी & दोनो मर्द उसके दोनो तरफ बैठे बाते कर रहे थे,"..तुम भी तो मेरे लिए इतना बड़ा ख़तरा मोल ले रहे हो...वैसे अब बात थोड़ी आसान हो गयी है...क्यू?"

"जी!सर,वो तो है..मगर फिर भी कोई किसी के लिए इतना नही करता जितना आपने किया है!"

"टोनी,तुम मुझे शर्मिंदा कर रहे हो..",उसने खिड़की से बाहर देखा,"..लगता है वो जगह आ गयी,टोनी.",माधो ने कार रोक दी मगर टोनी बैठा ही रहा.ठुकराल ने उसकी तरफ सवालिया नज़रो से देखा,"..सर,वो ज़रा..",टोनी ने कुच्छ झेन्प्ते हुए कहा.

"ओ...हां-2.",ठुकराल दरवाज़ा खोल कर उतरा & माधो को भी बाहर निकलने का इशारा किया.उनके उतरते ही टोनी ने उस लड़की को बाहो मे भर लिया,लड़की भी उस से लिपट गयी & दोनो 1 दूसरे को चूमने लगे.टोनी उसे पागलो की तरह चूम रहा था,"..बस कुच्छ ही दीनो की बात है,शॅरन....फिर हम तीनो साथ रहेंगे-मैं तुम & हमारा बेटा.",वो शॅरन के चेहरे & गले को चूमे जा रहा था.

"..आअहह...बस टोनी,डार्लिंग.अब जाओ...बाहर दोनो खड़े हैं...अच्छा नही लगता."

"ओके,डियर.",टोनी उतरने लगा,"..और हां,शॅरन.हर सनडे को चर्च ज़रूर जाना."

"ओके.बाइ,टोनी.टेक केर.",शॅरन उसकी बात सुनके मुस्कुरा दी.उसके उतरते ही माधो & ठुकराल वापस कार मे बैठ गये.कार थोड़ा आगे बढ़ी तो ठुकराल ने शॅरन की ओर देखा,शॅरन भी उसे देख शरारत से मुस्कुरा रही थी.ठुकराल ने उसे सीट पे गिरा दिया & उसके उपर चढ़ कर उसके गुलाबी गाल चूमने लगा.जवाब मे शॅरन ने उसके बालो को खींच कर उसके होंठो को अपने गुलाबी होंठो से सटा लिया.

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