Rishton May chudai परिवार में चुदाई की गाथा
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परिवार में चुदाई की गाथा

दोस्तो एक कहानी तो स्टार्ट है ही और अब एक छोटी सी कहानी और शुरू कर रहा हूँ जो शायद आपको पसंद आए तो भाइयो शुरू करते है कहानी
मैं पंडित उम्र 28 साल, रंग गोरा, कद 5 फीट 9 इंच, लण्ड का कद 6.5 इंच व मोटाई 4 इंच, बालों से भरी हुई चौड़ी छाती जिसे देखकर मेरे सभी दोस्तों की माँ और सभी भाभियों, आंटियों व तमाम औरतों के मुह में और चूत में पानी आ जाता है।
बात तब की है जब मैं अपने गाँव चांदपुर गया हुआ था। गाँव में हम सभी एक ही घर में रहते थे, घर के सभी आदरणीय सदस्यों का मैं आपको परिचय दे दूँ-
काकी – रत्ना – उम्र 42, रंग- काला, कद- छोटा, मोटी गांड, मोटी कमर, मोटे बोब्बे, भरा हुआ कसा हुआ सुडौल शरीर.
काकी की बेटी – सपना – उम्र 20, रंग- सांवला, अपनी माँ रत्ना की तरह मोटी गांड, पेट, बोब्बे और कमर.
ताई – सुनंदा – उम्र – 55, रंग – सांवला, इस उम्र में भी हट्टी कट्टी गाँव की देहाती सुडौल बूब्स और गांड वाली मर्दाना औरत जिसे देखकर सभी गाँव वालों का लण्ड सलामी देता है.
ताई की बेटी – आनन्दी – उम्र- 26 साल, गोरी चिट्टी कमसीन पतली कमर और छोटे अमिया से स्तन वाली हीरोइन की तरह दिखने वाली लड़की जिसने गाँव में जवान लौंडों से लेकर बुड्ढों का कच्छा गीला किया हुआ है, और भारी बदनामी के चलते आनन्दी से कोई शादी करने को तैयार नहीं है.
मेरे चाचा और ताऊ विदेश गए हुए हैं और 4 साल में एक बार घर पर आते हैं. काकी,ताई व उनकी दो बेटियां एक ही घर में रहते हैं. काकी और ताई में थोड़ा अनबन सी रहती है, कभी कभी लड़ाई भी होती है. लेकिन सपना और आनन्दी के बीच काफी प्यार है.
जब मैं गाँव में छुट्टियां बिताने गया तो सभी मेरी उपस्थिति से काफी खुश हुए. इतने दिनों बाद किसी मर्द ने घर में दस्तक दी. घर का माहौल रंगीन हो गया, मैं भी अपनी बहनों – सपना और आनन्दी के साथ काफी घुल मिल गया, काकी और ताई भी मेरी बहुत सेवा कर रहे हैं.
सपना सकूल गयी हुयी है, ताई कपडे धो रही है, ताई अपनी साड़ी को झांघो तक उठाये हुए जमीन पर बैठकर रगड़ रगड़ के हिल हिल कर कपडे धुल रही है, जिस वजह से ताई के बूब्स भी ब्लाउज में हिल रहेे हैं और बाहर आने को व्याकुल हो रहे हैं, ताई के 70 प्रतिशत बूब्स स्पष्ट दिख रहे हैं,
मैं चारपाई में बैठकर यह विभत्स नजारा देख रहा हूँ और मेरा लण्ड मेरे पैजामे में झटके मारने लगा और तंबू बन गया जिसका उभार पैजामे में स्पष्ट दिख रहा है, ताई अपनी धुन में हिल हिल कर कपड़े धुले जा रही है और मेरी आँखों में अपनी 55 साल की बुढ़िया ताई जो किसी पोर्न स्टार से कम नहीं लग रही है के प्रति हवस बढ़ती जा रही है. हवस से मेरी आँखें लाल हो गयी.
अचानक 42 साल की मोटी,काली काकी रत्ना दरवाजे से बाहर को झाड़ू मारते हुए आती है, काकी ने गहरे गले वाली लाल रंग की नाईटी पहनी है, जिसमे से उसकी चूची के सख्त निप्पल स्पष्ट दिख रहे हैं, मेरी मोटी काली मुसण्ड काकी झुक कर झाड़ू मार रही है,
मुझे काकी किसी रंडी से कम नहीं लग रही है, मेरा लण्ड वैसे ही मिल्फ ताई को देखकर खड़ा था और अब रंडी चची के काले मोटे लटकते हुए तरबुझ को देखकर हतोड़ा बन गया, समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ, कहाँ जाऊं, 4 मोटे दूध से भरे तरबुझ मेरी आँखों के सामने हैं जिन्हें चूसने और मसलने के लिए मैं बेकरार हूँ , लेकिन कैसे? कब? किस तरह? ये सोचकर मेरा दिमाग खराब हो गया.
उसके बाद आनन्दी(ताई की लौंडिया) मेरे पास आयी और मुझ से सट कर बैठ गयी. मैं घबरा गया. शायद आनन्दी ने मेरे पैजामे का उभार देख लिया और लण्ड के झटके भी साफ दिख रहे है, मेरी हालत बिलकुल खराब हो गयी.
मेने जैसे तैसे अपने लण्ड को छुपाने की कोशिश की लेकिन आनन्दी को सब पता चल गया और वो शैतानी से भरी हुई मुस्कान दे कर शरमा कर अंदर कमरे में भाग गयी. मैं भी कमरे में गया.
मैं- क्या हुआ आनन्दी, ऐसे क्यों भाग गयी?
आनन्दी(मेरे लण्ड की ओर देखते हुए)- तुझे नहीं पता भाई ?
मैं(लण्ड को मसलते हुए)- अच्छा, तो ये बात है, बहन शर्मा गयी….
(और मैंने आनन्दी को अपनी बाहों में जकड लिया, वो छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन मेरी ताकतवर भुजाओं के सामने वो हार गयी)
आनन्दी- हाये राम… भाई छोड़, क्या कर रहा है, माँ देख लेगी.
मैं- आनन्दी तू बहुत ख़ूबसूरत है रे.
आनन्दी- हाये दय्या, तेरी बहन हूँ मैं भाई, ऐसे कोई बोलता है अपनी बहन को और ऐसे पकड़ता है कोई, चल छोड़ मुझे अब.
मैं- कौन सा अपनी बहन है तू, ताई की लड़की है, और वैसे भी तेरे बहुत किस्से सुने हैं गाँव में, लोग तरह तरह की बातें करते हैं तेरे बारे में.
आनन्दी- क्या बात करते हैं, ऐसे ही लोग फालतू बकवास करते हैं, भाई तू छोड़ मुझे प्लीज.
(और मैं आनन्दी के होंठ पर अपने होंठ रख देता हूँ और जोर जोर से चूसने लगता हूँ. पतली कमर, पतले बदन वाली, छोटे छोटे बूब्स वाली गोरी 26 साल की मेरी ताई की लड़की आनन्दी मेरी बाँहों में छटपटा रही है, और मैने उसे कस कर पकड़ा हुआ है और उसके होंठ चूसे जा रहा हूँ, ताई की आवाज आने पर 2 मिनट के बाद मेने उसके होंठ छोड़े और हम अलग हुए और ताई कमरे में आयी)

(ताई कपडे धो कर सीधा अंदर आयी, उसके 70 प्रतिशत से ज्यादा दूध दिख रहे हैं, लंबी-चौड़ी सीने वाली देहाती ताई बहुत ही कामुक लग रही है, मन कर रहा है अभी रंडी को नंगी करके गांड में लण्ड पेल दूँ)
ताई- पंडित बेटा चल नाश्ता कर ले, तू भी खा ले रे कुछ आनन्दी.
मैं- जी ताई जी, नाश्ता लगा दो.
(फिर आनन्दी, मैं, ताई और काकी एक साथ डायनिंग टेबल पर नाश्ता करते हैं, नाश्ता करते करते आनन्दी मेरे चेहरे पर गुस्से और आक्रोश से देख रही है मानो अभी मारे मुझे, फिर मुझे कुछ शरारत सूझती है, मेने अपने नंगे पैर के अंगूठे से आनन्दी की चूत में टच किया जिससे आनन्दी सिहर गयी और घबरा भी गयी, मेरी तरफ आँख घूरा कर देखने लगी. फिर मैं अपने पैर के अंगूठे से आनन्दी की चूत की मसाज करने लगा, आनन्दी सिसकारियां भी भरने लगी)
आनन्दी- अह्ह्ह्ह्ह्ह…
ताई- क्या हुआ आनन्दी, ऐसे आह क्यों भर रही है.
आनन्दी- अह्ह्ह्ह कुछ नहीं माँ, ऐसे ही.
(काकी आनन्दी की अश्लील कामुक आवाज़ें सुनकर हंसने लगी, 10 मिनट के बाद आनन्दी की गुलाबी रसभरी जवान लचीली चूत ने पानी छोड़ दिया और आनन्दी निढाल हो गयी, काकी सब कुछ समझ गयी लेकिन काकी ने रंग में भंग डालने का काम नहीं किया.
नाश्ता करने के बाद मैं काकी के साथ गौशाला गया, काकी को काली मोटी भैंस का दूध निकालना है, काकी गौशाला में काम करने लगी, उसके बाद जमीन पर बैठकर दूध निकालने लगी, दूध निकालते हुए काकी के काले विशालकाय दूध भी स्पष्ट दिख रहे हैं.
काकी काली भैंस की छोटी बहन लग रही है, प्रौढ़ अवस्था में मोटी भरे हुए बदन की, सुडौल काले वक्ष वाली, मेरा केला बड़ा करने वाली मेरी 42 वर्षीय रत्ना काकी ने मुझे अपने इस वीभत्स नज़ारे से आगोश में भर लिया है, मेरी आँखें ये सीन देखकर चौंधिया गयी हैं, काकी की काली गांड और काली चूत में लण्ड भिगोकर पेलने की मेरी इच्छा होने लगी है,
मेरा विशालकाय लम्बा लण्ड पैजामे में खड़ा हुआ झटके और हिचकोलेे मारने लगा है जो साफ साफ दिख रहा है और शायद काकी की भी पैनी नजर उसमे पड़ गयी और काकी मेरे पैजामे में उभारों को निहारते हुए हंसने लगी और मुझ से बातें करने लगी)
मैं- हंस क्यों रही है काकी?
काकी- ऐसे ही, अब हंस नही सकती क्या? अच्छा ये बता कि आनन्दी नाश्ता करते वक्त तरह तरह की आवाज़ें क्यों निकाल रही थी?
मैं- उसे पता नहीं क्या हो जाता है कभी कभी, ऐसे ही आवाजें निकलती है, कभी कभी तो मुझ से लिपट जाती है और ऐसे ही आवाज़ निकलती है.
काकी- ओह, तुझ से लिपट कर भी ? कितनी बेशर्म है वो, पुरे गाँव में बदनाम हो रखी है पता है तुझे?
मैं- नहीं काकी, कैसी बदनाम, बताओ मुझे भी?
काकी- चल छोड़, रहने दे, तू बता देगा उसे.
मैं- काकी नहीं बताता तेरी कसम.
काकी- सुन, ताई को भी मत बताना, मुझे मार पिटवायेगा वरना तू.
मैं- अरे ऐसे कोई कैसे मार देगा मेरी प्यारी खूबसूरत काकी को.
काकी- चल हट बदमाश, मैं और खूबसूरत, तेरी आँखें खराब हो गयी बेटा.
मैं- नहीं काकी, मेरे लिए तो तू एक दम मस्त, जवान, खूबसूरत मल्लिका है.
काकी- छी छी छि.. क्या क्या बोलता है अपनी काकी को, शर्म नहीं आती क्या?
मैं- नहीं काकी तू एक दम फिल्म की हिरोइन लगती है.
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(काकी खुश हो जाती है और शर्मा जाती है, मेरी चुतिया मोटी,काली,छोटी काकी को मैं झूट बोलकर बेवकूफ बना रहा हूँ और वो बन भी रही है)
मैं- अच्छा सब कुछ छोड़, तू आनन्दी की बात बता जल्दी.
काकी- अच्छा सुन, वो गंदे गंदे काम करती है पुरे गाँव में हर किसी के साथ, कभी लाला के साथ तो कभी मोची के साथ, एक दिन सब्जी मंडी में 2 आदमियों के साथ गंदा काम कर रही थी, नाक कटवा दी हमारे खानदान की उस हरामण ने, 3 बार तो बच्चा गिरवाया उसका अस्पताल में, वो भी उससे पूछा तो उसे पता नहीं किसका बच्चा था, ऐसे गंदे काम करती है.
मैं- ओह बहनचोद, बहुत ही हरामी लड़की है, शर्म आती है इसे अपनी बहन बोलते हुये.
काकी- क्या बताऊँ बेटा, मैं खुद परेशान हूँ, मेरी भी जवान बेटी है घर में सपना, अब उसकी संगत में रही तो वो भी कहीं उसी की तरह न हो जाये.
मैं- नहीं काकी, मैं समझाऊंगा सपना को, बच्चो को समझाना बहुत जरुरी होता है वरना वो गलत रास्ते में चले जाते हैं, बच्चों से खुलकर बात करनी होती है. चूत, लण्ड, चुद्दम चुदाई, गांड, सब कुछ उन्हें बताना होता है.
काकी- हाय दय्या, छीछी… कितने गंदे गंदे शब्द बोल रहा है तू, ऐसा मत समझाना मेरी बच्ची को, समझाने के चक्कर में कहीं बिगाड़ दिया तूने उसे, वो यही गंदे गंदे शब्द घर में बोलती रहेगी फिर.

मैं- अरे मेरी भोली प्यारी, सेक्सी काकी, आज रात को सपना को साथ में बैठकर समझायेंगे, ठीक है?
काकी- ठीक है मेरे बेटे, अब घर चल, वरना ताई सोचेगी की तबेले में काकी भतीजा पता नहीं क्या कर रहे हैं.
(और हम दोनों हंसने लगे और घर की ओर चल दिए जहाँ ताई आनन्दी को झाड़ू से मारे जा रही है, बाद में मारने का कारण पता चला कि आनन्दी फिर से पेट से है, सही में बहन की लोड़ी ने खानदान की पुरे समाज में नाक कटवा दी)
(दोपहर को सपना सकूल से घर आ गयी, उसने नीली स्कर्ट और शर्ट पहना है, 20 साल की उम्र में सपना का गठीला शरीर व सुडौल वक्ष और गदराया हुआ बदन किसी कामुक औरत के बदन जैसा लग रहा है,
सपना है तो 20 की लेकिन लगती 30 साल की है, हष्ट पुष्ट बदन वाली मेरी काकी की 20 साल की बेटी सपना दिखने में बिलकुल अपनी भैंस जैसी काली मोटी माँ पर गयी है, बिलकुल वैसा ही सांवला रंग, चौड़ी और फूली हुयी छाती, मोटा बदन, मोटी कमर, बड़े बड़े होंठ, आँखों में जवानी का तेज, मानो बदन का एक एक अंग, एक एक रोम कह रहा है कि “आओ दुनिया के मर्दों, आओ मुझे तृप्त करो, मेरी चहकती हुयी, खिलती हुयी, अकेली जवानी के साथ प्यार भरी, वीर्यरस भरी होली खेलो”.
कसम से सपना की स्कर्ट इतनी छोटी है कि उसकी सांवली मांसल जंघाओं के दर्शन मुझे हो रहे हैं और आज सुबह से ही मेरा केला बैठने का नाम नहीं ले रहा, कभी ताई, तो कभी आनन्दी, कभी काकी तो अब सपना ने मेरे लोड़े के कठोरपन को क्रियान्वित किया हुआ है..
अब मेरे लोड़े को चारों की चूत का दीदार होना बाकी है तभी इसे शान्ति मिलेगी, आप सोच सकते हैं सपना 20 साल की शार्ट स्कर्ट पहने हुए, कसी हुयी शर्ट पहने हुए किसी कामसूत्र की अभिनेत्री से कम नहीं लग रही है, मैं तो सपना को एक टक देखता ही रह गया)
सपना- हाय भाई, कैसा है?
मैं- बहुत अच्छा सपना, बड़ी सुन्दर लग रही है तू, जैसे शहर की लड़की.
सपना- थैंक यू भाई, आप भी बड़े हैंडसम लग रहे हो.
(इतना बोलने के बाद सपना कपडे बदलने कमरे में चली गयी, एक तरफ आनन्दी ताई की मार खा कर , कमरे में रो रही है, काकी दिन का खाना बना रही है, सपना कपड़े बदलकर बाहर आती है, उसने एक कसा हुआ टॉप पहना और नीचे जीन्स वाली नेकर पहनी हुई है..
उसके काले मोटे पेट की गहरी नाभि भी दिख रही है, अंदर ब्रा न पहनने के कारण उसके सख्त कठोर निप्पल का भी दीदार हो रहा है, और मोटी मोटी मांसल जांघें और नंगे पैर भी मेरे खड़े लोड़े की सक्रियता में अहम भूमिका निभा रहे हैं, सपना के दोनों पैरों में काले धागे बंधें हैं जो काकी ने उसकी उफनती हुयी जवानी को गंदे लोगो की नजर से बचाने के लिए पहनाएं हैं..
हाथों के नाखूनों में लाल रंग की नेल पॉलिश देखकर ऐसा लग रहा है जैसे अभी नवविवाहित हो, मोटे होंठों में हलकी गुलाबी रंग की लिपस्टिक भी कामुकता को उजागर कर रही है, मेरी नजर में सपना की इस जवानी और मांसल मोटे सुडौल बदन ने घर के बाकि अन्य सदस्यों को मात दे दी है, मेरा सर सपना को देखकर चकरा रहा है..

मन कर रहा है कि सपना को बींच दूँ और चूत, गांड को अपने लण्ड से फाड़ दूँ, और सपना को अपनी पत्नी बना लूँ, मैं सपना के प्यार में डूब गया हूँ, वैसे आनन्दी भी सेक्सी है लेकिन मुझे ज्यादा मांस वाली मोटी लड़कियां और औरतें ही पसंद आती है, आनन्दी हड्डी का ढांचा है और इतने लोगों से चुदने के बाद आनन्दी की चूत भी कई किलोमीटर फैल गयी होगी..
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खैर जब रात हुयी तो मैं काकी के कमरे में गया, काकी ने चिपली गुलाबी रंग की पारदर्शी नाईटी पहनी है जिसमे से उसके काले दूध मे 4 चाँद लगाते हुए काले निप्पल दिख रहे हैं)
काकी- हाँ बेटा बोल, क्या काम है? तू सोया नहीं अभी तक?
मैं- नही काकी, नींद नही आ रही है, अरे
सपना से बात करनी है, दिन में कहा था ना, तू भूल गयी शायद.
काकी- हाय दय्या, मैं तो भूल ही गयी, चल मैं उसे यहीं बुलाती हूँ.
(फिर काकी सपना को ले आयी और कमरे को अंदर से बंद कर दिया ताकि ताई और आनन्दी हमारी बातों में दखल न दे सकें)
सपना- क्या हुआ माँ, भाई दरवाजा क्यों बंद किया?
मैं- धीरे धीरे बोल सपना, ताई और आनन्दी सुन लेंगे.
सपना- लेकिन बात क्या है?
काकी- चुप कर तू लड़की, भाई बतायेगा उसे ध्यान से सुनना, तेरे भले की ही बात है, अब तू जवान हो गयी है, बाहर आनन्दी की तरह कोई गलती न करे इसलिए समझ बात को.
सपना- आनन्दी दीदी ने क्या किया?
मैं- वो बहुत गन्दी है, हमारे परिवार का नाम ख़राब कर दिया उसने, सुन अब जो मैं बता रहा हूँ या कुछ पूछुंगा तो मुझे सच सच बताना, और अगर कुछ समझ न आये तो मुझे पूछना, ठीक है?
सपना- हाँ भाई. बता.
मैं- तेरा कोई दोस्त है सकूल में, कोई लड़का दोस्त,बॉयफ्रेंड?
सपना- ना भाई, कोई नहीं है.
मैं- अब तू बड़ी हो गयी है, सम्भल कर रहना, लोग गलत फायदा उठाते हैं, आनन्दी को देख, उसका बच्चा होने वाला है.
सपना- बच्चा कैसे होता है भाई?
मैं- कितनी भोली है तू बहन, चूत और लण्ड जब आपस में मिलते हैं तो बच्चा होता है भोली.
सपना- चूत लण्ड क्या होता है भाई?
मैं- अरे मेरी जान, मेरी भोली सिस्टर, लण्ड लड़कों का होता है और चूत लड़कियों की, जहाँ से तू पेशाब करती है उसे चूत बोलते हैं और जहाँ से मैं पिशाब करता हूँ इसे लण्ड बोलते हैं, लेकिन इस लण्ड से पिशाब के अलावा सफ़ेद गाढ़ा पानी भी निकलता है, जब वो चूत के अंदर जाता है तो बच्चा होता है.
सपना- तो आपके लण्ड से भी वो सफेद पानी निकलता है?
काकी- बस पंडित बेटा, आज के लिए काफी है इतना ज्ञान, छि…..कितने गंदे शब्द सीखा रहा है तू मेरी बच्ची को.
मैं- तो ना सिखाऊं काकी, फिर आनन्दी की तरह एक दिन पेट लेकर आ जायेगी फिर खुश होना तू.
काकी- हाये दय्या… शुभ शुभ बोल बेटा.
मैं- तो सुन सपना, जैसे तेरे बोब्बे बड़े बड़े हैं काकी के जैसे और तेरी गांड भी बड़ी है तो इसे देखकर बाहर सबके लण्ड खड़े होते होंगे, और तेरी चूत में डालने की सोचते होंगे, तो कभी भी किसी का भी लण्ड अपनी चूत में मत डलवाना वरना बच्चा हो जायेगा, समझी?
सपना- तो जैसे अभी आपका भी लण्ड खड़ा है भाई, तो अगर इसे मेरी चूत में डालेंगे तो बच्चा होगा?
काकी- चुप पगली, वो तेरा भाई है, ऐसे बोलते हैं भाई को?
मैं- मैं तेरी चूत में कभी लण्ड नही डाल सकता पगली, तू मेरी बहन है, भाई बहन ऐसा नहीं करते, केवल पति पत्नी करते हैं, हाँ लेकिन मैं किसी और की चूत में लण्ड डालूंगा तो पक्का बच्चा होगा.
सपना- तो पापा ने माँ की चूत में लण्ड डाला था? तभी मैं हुयी.
मैं- हा हा हा … हाँ पगली??
मैं- जब चूत में लण्ड जाता है तो इस प्रक्रिया को चुदाई, या चुद्दम चुदाई बोलते हैं.
काकी- बस आज के लिए बहुत है.
सपना- 1 मिनट मम्मी, भाई आपका लण्ड क्यों खड़ा है अभी?
काकी- हाय दय्या, पंडित क्या है ये, पैजामे में इतना उभार, किसे देखकर, तू शादी करले बेटा अब.
मैं- हा हा हा…. सपना बहन, जब बड़े बडे दूध सामने होते हैं तो किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाता है यह स्वभाविक है, परंतु हमे मर्यादा में रहकर अपने पवित्र रिश्तों को भूलना नहीं चाहिए.
काकी- बिलकुल सही कहा बेटा, भाई से कुछ सीखो सपना.
सपना- भाई, अपना लण्ड दिखाओ, मेने आजतक लण्ड नही देखा.
काकी- चुप कर पागल लड़की, ऐसे नही देखते.
मैं- देखने में कुछ दिक्कत नहीं है काकी, बस चूत में नही डाल सकते.
काकी- नहीं मत दिखाना पंडित, सपना अब सो जा तू बच्ची.
मैं- अरे काकी, आपने तो चाचा का देख रखा है, अब बच्ची जिद कर रही है तो उसका मन तो रखना पड़ेगा.
(और मैने झट से पैजामा अपने शरीर से अलग कर दिया और मेरा हिचकोले और झटके मारता हुआ लण्ड काकी और सपना की आँखों के सामने आ गया और दोनों माँ बेटी का मुख खुला का खुला रह गया, दोनों मेरे 6.5 इंच के खड़े लण्ड को देखकर आश्चर्यचकित रह गयी)
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काकी- हाय दय्या, पंडित बेटा पैजामा पहन ले बेशर्म, उफ्फ्फ्फ इतना बड़ा है.
सपना- हाये माँ, ये तो डंडा है, ये ऐसा ही बड़ा होता है क्या सबका?
काकी- नही सपना, ये किस्मत वालों को मिलता है, सबका ऐसा नहीं होता.
सपना- भाई, मैं छू कर देख सकती हूँ इसे?
मैं- हाँ हाँ बहन, छूने में कोई परेशानी नहीं है, बस चूत के अंदर इसे नहीं डालना चाहिए वरना बच्चा हो जाता है.

काकी- नहीं सपना छूना मत, गन्दी बात होती है, जब तेरी शादी होगी तब अपने पति का छूना, चूसना, या चूत में डालना जो मर्जी.
मैं- अरे काकी, जब उसकी इच्छा है छूने की तो इसमें दिक्कत क्या है?
सपना- हां माँ, मैं तो छू कर देखूंगी.
(और फिर सपना ने मेरे खड़े लण्ड को अपने हाथ से पकड़ लिया जिसके फलस्वरूप मेने लण्ड ने जोरदार झटका मारा, और सपना हंसने लगी, मेरी तो हालत स्थिर नही थी, मैं दूसरी दुनिया में था, नाईटी पहने हुए काकी, नेकर और टाइट टॉप पहने हुए सपना, दोनों माँ बेटी मेरी आँखों के सामने अर्धनंगन थे)
सपना- भाई इससे सफ़ेद पानी निकाल के दिखा.
काकी- गन्दी बात सपना, ऐसा सिर्फ पंडित अपनी पत्नी के साथ करेगा, उसका पानी केवल उसकी पत्नी देखेगी.
मैं- सपना, मेरी प्यारी बहन, सफ़ेद पानी निकलने में टाइम लगता है, उसके लिए लण्ड को जोर जोर से आगे पीछे करना पड़ता है.
सपना- भाई आपका लण्ड, इतने झटके क्यों मार रहा है?
मैं- बहन तेरे हाथों के स्पर्श से ये झटके मार रहा है, अगर तू कुछ देर ऐसे ही पकड़े रहेगी तो क्या पता इससे सफ़ेद पानी निकल जाये.
काकी- नहीं ऐसा कुछ नहीं होगा, अब सो जा सपना, पंडित तू भी सो जा और अपना पानी निकालना है तो बाथरूम में निकाल दे.
(फिर सपना मेरे खड़े लण्ड को तेज़ तेज़ हिलाने लगी, आगे पीछे करने लगी)
काकी- ये क्या कर रही है, मेने कहा न सोजा तू, समझ नहीं आती बात.
सपना- नहीं सोऊंगी, जब तक भाई का पानी नहीं निकला.
(और सपना जबर्दस्ती मेरे लण्ड का मुठ मारने लगी, काकी उसे जबरन अलग करने लगी लेकिन वो जिद्दी कहाँ मानने वाले थी)
मैं- अह्ह्ह्ह्ह्ह… सपना मेरी बहन अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे ही.. ऐसे ही मेरी प्यारी बहन… काकी करने दे सपना को, अह्ह्हह्ह्ह्ह….
(10 मिनट माँ बेटी की झड़प और सपना द्वारा मेरी मुठक्रिया के चलते मेरा सफ़ेद, हल्का पीला, गाढ़ा वीर्य सपना और काकी के चेहरे पर छूट गया, और दोनों घबरा गयी, मैं आहें भरता रहा)
मैं- अह्ह्ह्ह काकी, सपना, अह्ह्ह्हह्ह.. उफ्फ्फ्फ्फ.. मजा आ गया.. ये होता है बहन सफ़ेद पानी.
सपना- वाह भाई, ये तो गर्म है.
काकी- चल पंडित, अब पूरा गन्दा कर दिया तूने यहाँ, बदबू भी आने लगी, अब सफाई करनी होगी, बहुत बिगड़ा हुआ है तू कसम से.
मैं- काकी, मजा आ गया, अच्छी नींद आएगी अब तो. मैं तेरे साथ ही सो जाऊं आज?

काकी- ठीक है सो जा, लेकिन और कोई शरारत मत करन, सपना जा तू मुह हाथ धुलकर अपने कमरे में सो जा.
(सपना सोने चली जाती है, काकी भी सफाई करके सोने आ जाती है, काकी और मैं एक ही बिस्तर पर लेट जाते हैं)
काकी- ऐसा कोई करता है भला, सपना से मूठ मरवाई तूने अपनी, तेरी बहन है वो, और ऐसे खड़ा होता किसी का अपनी बहन को देखकर.
मैं- काकी एक बात बोलनी है बुरा न मानना, ये लण्ड सपना को देखकर नही तुझे देखकर खड़ा हुआ था और जब से तुझे गौशाला में दूध निकालते हुए देखा तबसे खड़ा है, बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है, क्या करूँ.
काकी- हाय दय्या, ऐसा नहीं सोचते पंडित अपनी काकी के बारे में, ये गन्दी बात है.
मैं- काकी जब सपना मेरा मूठ मर रही थी और जब मेरा माल निकला तो मैं तेरे बारे में ही सोच रहा था.
काकी- क्या हो गया पंडित तुझे, तू होश में तो है?
मैं- नहीं हूँ होश में, तुझे देखकर जोश में होश खो चुका हूँ काकी, तू बहुत ही खूबसूरत है, बिल्कुल नंगी फिल्मो की हिरोइन जैसी.
काकी- तू सच में पागल हो गया, अपने कमरे में जा तू, सोजा, कल बात करेंगे.
मैं- नहीं जाऊंगा, आज यहीं सोऊंगा तेरे साथ.
(मैं अभी भी नंगा ही हूँ, और मेरा लोडा फिर से खड़ा हो गया और झटके मारने लगा, ये देखकर काकी डरने लगी)
काकी- पैजामा तो पहन ले बेशर्म.
मैं- नहीं काकी, ऐसे ही सोऊंगा मैं, देख तुझे देखकर कैसे खड़ा हुआ है ये.
काकी- शरम कर बेशर्म, ऐसे नग्न सोयेगा काकी के साथ, देख तो कैसे खड़ा कर रखा है तूने.
मैं- काकी, तेरी चुच्चिया साफ़ दिख रही हैं इस पारदर्शी नाईटी में, तो ये तो खड़ा होगा ही.
काकी- हाय दय्या, कितनी गन्दी नज़र है तेरी, मेरी चुच्चियों को निहार रहा है.
मैं- तेरी घनी काली झाँटें भी दिख रही है काकी, काटती नहीं है क्या?
काकी- उफ्फ्फ… बेटा सुधर जा, ऐसे नहीं बात करते काकी के साथ.
मैं- तूने मुझे बिगाड़ दिया काकी, तेरे गदराए हुए कामुक बदन और मोटे बूब्स का मैं दीवाना हो गया हूँ, प्लीज काकी एक बार अपने दूध दिखा दे?
काकी- चुप कर, तेरा दिमाग खराब हो गया है, सो जा, बकवास मत कर.
(फिर मेने काकी को कस कर पकड़ लिया और अब काकी मेरी बाहों में है, मेरे लण्ड का स्पर्श काकी के पेट में हो रहा है, काकी की लंबी लंबी साँसे मेरी साँसों से टकरा रही है, काकी घबराई हुई है, करे तो क्या करे बेचारी मोटी काली भैंस)
काकी- पंडित छोड़ बेटा, ऐसा मत कर, मैं तेरी माँ समान हूँ बेटा. आह्ह्ह्ह… ना कर, न कर बेटा.
मैं- अह्ह्ह्ह… काकी, तू परी है, अप्सरा है, मस्त है, कामुक है, मैं कैसे तुझे छोड़ दूँ.
काकी- उईईई… अह्ह्ह्ह…. कुछ चुभ रहा है पेट में बेटा.
मैं- कुछ क्या काकी, लण्ड चुभ रहा है मेरा तेरे पेट में. तेरे होंठ बहुत मोटे हैं काकी.
काकी- तो मैं क्या करूँ मोटे हैं तो?
मैं- करूँगा तो मैं काकी, तू देखते जा.
काकी- पंडित छोड़ मुझे बेटा, ये पाप है.
(काकी के इतना बोलने के बाद मेने अपने होंठ काकी के मोटे रसीले होंठों पर रख दिए और फिर फ्रेंच किस करना शुरू कर दिया, काकी कुछ बड़बड़ाये जा रही थी और छटपटा रही थीं लेकिन मैं कहाँ छोड़ने वाला था, मैं लगातार किस करता रहा और जीभ से जीभ को चूसता रहा.
मेरे द्वारा जबरन करीब 5 मिनट तक किस करने के बाद जब काकी को पता लगा कि भतीजा अब नहीं छोड़ने वाला तो वो भी मेरा साथ देने लगी, हम दोनों काकी-भतीजा एक पति-पत्नी के समान चुम्बन क्रिया किये जा रहे हैं, काकी को भी मस्ती चढ़ गयी और मैने किस के दौरान ही काकी की नाईटी उसके मोटे,गठीले,सुडौल बदन से अलग कर दी और अपनी शर्ट भी उतारकर फैंक दी.
अब काकी और मैं कामवासना में मग्न नग्न एक दूसरे को चुम्बन किये जा रहे हैं और हम दोनों के मुह के थूक और लार का एक दूसरे के मुह में आदान प्रदान किये जा रहे हैं, करीब 30 मिनट बाद एक दूसरे के होंठ, जीभ, थूक, लार चूसने और चाटने के बाद हम दोनों अलग हुए)
काकी- हाय दय्या, पंडित, आह्ह्ह्ह, उईईई…. ये गलत तो नहीं हो रहा कुछ.
मैं- नहीं काकी बिलकुल गलत नहीं है, ये वासना प्राकृतिक होती है, इसमें रिश्ते नहीं देखे जाते, जो करने का मन है वो पूरी जान लगाकर और पूरे जोश से करना चाहिए.
काकी- पंडित अब सहन नहीं होता, जो करना है वो कर ले बेटा, मैं 3 साल से तड़प रही हूँ.
मैं- ये हुयी न बात, अभी फोरप्ले बाकी है मेरी जान, अभी तेरे बूब्स, कमर, पिछवाड़े, पुरे बदन को चाटना है और चूमना है मेरी काकी जान.
काकी- जो करना है कर बेटा, लेकिन तड़पा मत मुझे, असली काम में देरी मत कर.
(फिर मैं काकी के बूब्स को चूसने लगता हूँ, निप्पल को जीभ से रगड़ रगड़ कर, लाल करने की कोशिश करता हूँ, मेरी इस काम क्रीड़ा से काकी सिहर उठती है और मेरे बालों में प्यार से हाथ फेरती है, करीब 15 मिनट दूध चूसने के बाद मैं काकी के पेट को चाटता हूँ और नाभि में अपनी जीभ घुसेड़ता हूँ, मेरी पूरी जीभ काकी की नाभि में चली गयी और काकी की आहें तेज़ हो जाती है)
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#5
RE: Rishton May chudai परिवार में चुदाई की गाथा
काकी- हाये पंडित, अह्ह्ह्हह्ह.. उम्म्ममम्म.. जालिम, अब चोद भी दे मुझे.. अह्ह्हह्ह्ह्ह…
मैं- बहनचोद काकी चुप कर, रंडी ताई आ जायेगी वरना.
(फिर मैं काकी का मुह बंद करने के लिए अपना मुंह काकी के मुँह पर रख देता हूँ, और उसकी जीभ को चूसने लगता हूँ , वो भी मेरी जीभ को चूसने लगती है उसके बाद मैं काकी की बालों से भरी चूत में अपना मुह लगाता हूँ और जीभ से चूत चोदने और चाटने लगता हूँ, जिससे काकी अपना होश खो बैठती है और कामवासना में डूबकर तरह तरह की गालियां देने लगती है और कामुक सिसकारियां भरने लगती है)

काकी- हाये हाये अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… हरामजादे, भेन के लोड़े, ममममम…. चाट मेरी चूत, सारा पानी पी जा भोसदिवाले, अह्ह्ह्हह्.. उम्ममम्ममम्म… उईईईई… मैं गयी पंडित मादरचोद.. ओहूऊऊऊ…..
(जीभ चुदाई के चलते 15 मिनट बाद काकी की काली बड़ी और फैली हुई चूत से 1 गिलास चिपचिपा नमकीन पानी की धार निकलती है जो मैं पी लेता हूँ, काकी झड़ जाती है और कांपने लगती है, काकी 1 बार झाड़ चुकी है लेकिन अभी भी काकी की वासना बाकी है)
काकी- अह्ह्ह्ह्ह्ह…. ओहोहोहोहो… पंडित जल्दी लोडा मेरी चूत में डाल भेन के लोड़े.
मैं- बहुत गाली दे रही है रंडी, तेरी माँ की चूत, अभी डालता हूँ, आज चूत फाड़ डुंग तेरी बहन की लोड़ी.
(फिर मैं अपना लण्ड काकी की चूत में सेट करता हूँ और एक जोरदर धक्का मारता हूँ और 6 इंच लंबा पूरा लण्ड काकी की चूत में चला जाता है जिससे काकी की चीख सपना, ताई और आनन्दी के कमरे में चली जाती है, और फिर हमारी चुदाई आरम्भ हो जाती है,
कमरा पच पच की आवाज़ और काकी-भतीजे की आवाज़ से गूंज उठता है, चुदाई होने के साथ साथ काकी के विशालकाय काले बूब्स भी हिल हिल का चुदाई की शोभा बढ़ा रहे हैं. काकी की दोनों टांगें मेरी पीठ में बंधी हुई हैं, मैं काकी को चोद रहा हूँ, काकी कभी मेरे बाल खींच रही है तो कभी अपने बड़े नाखुनो से मेरी पीठ पर वार कर रही है)
मैं- अह्ह्ह्हह्ह…काकी उम्म्ममम्म.. बहनचोद.. रंडी साली चिनाल अह्ह्ह्ह्ह्ह…
काकी- रंडापे भोसड़ीचोद अह्ह्हह्ह्ह्ह.. चोद अपनी ठरकी चची को हरामी, उम्म्ममम्म.. उईईई..
(काकी-भतीजा चुदाई के चलते काकी की गालियों और पायल व चूड़ियों की खनखनाहट से मेरा जोश और बढ़ जाता है और मैं घपाघप छपाछप काकी की चूत में लण्ड चुदाई करता हूँ.
करीब आधे घंटे घपघप घपघप चुदाई के बाद मैं अपना माल काकी की चूत में ही छोड़ देता हूँ और हम दोनों पति-पत्नी जैसे नंगे दो जिस्म एक जान होकर एक दूसरे के ऊपर ऐसे ही लेटे रहते हैं, और एक दूसरे को किस करते हैं.
तभी अचानक हम दोनों की नजर दरवाजे पर पड़ती है तो वहां ताई सुनंदा खड़ी थी जिसने हम दोनों के अपवित्र कारनामे देख लिए थे, काकी और मैं एक दूसरे से अलग होते हैं और ताई गुस्से से अपने कमरे में जाती है, तभी मैं ताई की ओर लपकता हूँ और ताई को जबरन पकड़कर काकी के कमरे में लाता हूँ, ताई छूटने का प्रयास करती है परंतु असफल होती है)
मैं- ताई, गलती हो गयी, माफ़ कर दो हमे.
ताई- पंडित, मुझे जाने दे वरना मैं चिल्ला के सबको बुला दूंगी, और तुम्हारा चेहरा काला करके गाँव में घुमाएंगे फिर सब लोग.
काकी- करमजली, अपनी लड़की का चेहरा काला करके घुमा पहले गाँव में, उस रंडी ने तो बाहर हमारी इज़्ज़त का फालूदा बना रखा है, और तू हमें बोल रही है, हम कम से कम घर के अंदर तो चुद्दम चुदाई कर रहे हैं, तेरी लड़की तो पूरे गाँव से रंडियों की तरह चुदती है.
ताई- जबान पे लगाम दे रंडी, खबरदार जो मेरी बेटी को कुछ बोला, तेरी बेटी क्या दूध की धुली है, मास्टर से चुदवाती है स्कूल में, बड़ी आयी साली हरामण.
मैं- भैंस की आँख, ताई खबरदार जो काकी या सपना को कुछ कहा, तेरी माँ चोद दूंगा वरना.
ताई- अच्छा जी इस रंडी ने तुझे चूत क्या बेच दी अपनी तू इसी के गुण गाने लगा.
काकी- पंडित, तू इसके लगा 2 गाल पे, ये बुढ़िया तभी चुप होगी.

(तभी मेने गाली देते हुए ताई के गाल पे 2 झापट लगा दिए, ताई रोने लगी और चिल्लाने लगी, इससे पहले की ताई की चीख सारे गाँव वाले सुनते, मैंने ताई के मुह पर काकी का दुपट्टा बाँध दिया और ताई को काकी के बेड से बाँध दिया और ताई के सारे कपडे उतार दिए, अब ताई बिलकुल नंगी थी, बड़े विशालकाय बूब्स, बड़ा प्रौढ़ शरीर, मोटी गांड, देखकर मेरा लण्ड फिर झटके मारने लगा जिसे देखकर ताई के होश उड़ गए, फिर काकी और मैं रणनीति बनाने लगे कि ताई के साथ क्या करना है)
मुह पर दुपट्टा बंधी मेरी बुढ्ढी ताई दबे मुह कुछ बड़बड़ा रही थी, कुछ कहना चाह रही थी लेकिन उसकी आवाज़ उसके मुह में ही दबी रह गयी।
दूसरी तरफ मैं और मेरी मोटी सेक्सी काली काकी रणनीति बनाने लगे।
मैं – काकी, क्या करना है इस भेन की लोड़ी का..?
काकी – अगर इस देहाती को छोड़ दिया तो ये पुरे गाँव में हमारी बात फैला देगी और हमे बदनाम भी कर देगी आज इसकी चूत चुदाई कर दे बेटा पंडित, जब इसकी बूढी पुरानी तड़पती हुयी चूत तेरे लण्ड से बंद हो जायेगी तो इसका मुह भी खुद ब खुद बंद हो जायेगा।
मैं- ठीक है काकी जान, नंगी तो कर ही दिया इसे हमने, अब ऐसा करते हैं तू इसके निप्पल मसल और चुस भी और मैं इसके बाकी बदन का मोर्चा सम्भलता हूँ।
काकी – जो हुकुम मेरे स्वामी।
(और हम दोनों ताई के पास जाते हैं, ताई हमे पास आते देख सहम जाती है, डर के मारे उसकी गांड फट जाती है, उसे डर लगता है कि हमने क्या रणनीति बनाई होगी..
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#6
RE: Rishton May chudai परिवार में चुदाई की गाथा
काकी ताई के बूब्स में झपट जाती है और निप्पल को सहलाती है, बूब्स को मसलती है, ताई दबे मुह सिसकारियां भरती है, दूसरी तरफ मैं ताई के पेट को चूमने लगता हूँ, नाभि में जीभ घुसेड़ कर ताई में कामोत्तेजना पैदा करने का भरपूर प्रयास करता हूँ और इसका प्रभाव भी ताई पर दिखाई दिया..
ताई आहें भरने लगती है, सिहर उठती है, मैं ताई की कमर, पेट, टांगें, जांघें सब कुछ चाटता हूँ और प्रेमपूर्वक सहलाता हूँ, ताई की आँखों में हवस और कामोत्तेजना स्पष्ट पता चल रही थी, ऊपर काकी ताई के निप्पल भी चूसे जा रही है, ताई के काले, बड़े, लंबे, तने हुए, सख्त निप्पल ताई के गदराए हुए मरदाना विशालकाय बदन में चार चाँद लगा रहे थे)
मैं – काकी, इस रंडी के मुह से दुपट्टा हटा दे अब, चिल्लाएगी तो फिर से बाँध देंगे।
काकी – जो हुकुम स्वामी।
(काकी दुपट्टा खोल देती है)
ताई – बहन चोदों, भेन की लोड़ी रत्ना, मादरचोद पंडित, पाप चढ़ेगा तुम्हे भोसडी वालों… अह्ह्ह्ह्ह्ह… मार दिया माँ अह्ह्ह्ह… गयी मैं उईईई…
मैं – ताई, गाली न दे, तेरी माँ चोद दूंगा, मजे लेते रहे बस।
काकी – गाली किसे देती है हरामजादी, माँ की लोड़ी, तेरी बेटी सबसे बड़ी रंडी है गांव की पता है तुझे।
ताई – अह्ह्हह्ह्.. भक्क्क बहनचोद तेरी बेटी भी हरामी है, साली लाला के साथ देखा था मेने उसे, यकीन नहीं आता तो पूछना उसे, खुद की बेटी रंडी है दूसरों को बोलती है चिनल कहीं की.. अह्ह्हह्ह्ह्ह.. मार दिया पंडित बेटा.. अह्ह्ह्ह्ह्ह..
काकी – अगर ये सच हुआ तो मैं तेरी गुलाम बन जाऊंगी, जिंदगी भर तेरा चूत रस पान करूँगी, मुझे अपनी सपना पर पूरा भरोसा है, लेकिन अगर झूट हुआ तो तू और तेरी बेटी रोज मेरी चूत चाटेगी, बोल मंजूर है रांड?
ताई – अह्ह्ह्ह्ह्ह.. हाँ चिनाल मंजूर है तेरी शर्त, अब पहले मेरे बोब्बे चुस जल्दी, अह्ह्हह्ह्ह्ह.. उईईईई.. सहन ना होता अब रत्ना..
(अब ताई भी पुरे जोश में आ चुकी थी और अब ताई के दिमाग और बदन पर पूरा सेक्स का नियंत्रण था, ताई की तरफ से चोदने का निमंत्रण मिल चुका था, काकी गुस्से से रगड़ रगड़ कर ताई के निप्पल चुस रही थी, ताई को पीड़ा भी हो रही थी, ताई करर्ररा रही थी)
ताई – हाये, अह्ह्ह्हह्.. रत्ना.. चुस मेरी देवरानी उटीईई.. उम्ममम्म.. अह्ह्हह्ह्ह.. गयी रे अह्ह्ह्ह्ह.. दीवाना बना दिया तुम दोनों हरामियों ने तो।
मैं – ताई अभी तो देखती जा, ताऊ की याद में जो तू इतने साल से तड़प रही है, आज तेरा भतीजा तेरी सारी हवस मिटा देगा और तेरी कोख से आनन्दी को एक भाई देगा।
ताई – हाये दय्या, दे दे रे मुझे एक लड़का, लड़के के लिए कब से तरस रही हूँ मैं, मेरी कोख में बीज बो दे मेरे भतीजे।
(फिर मैं ताई की चूत का लंबा बाहर की तरफ निकला हुआ चमड़ा अपने हाथों की उँगलियों से चौड़ा करता हूँ, और खोल कर अपनी ताई का चूत दर्शन करता हूँ, सुर्ख लाल मांस से लबा लब भरी हुई ताई की चूत कम भोसडा ज्यादा लग रहा था, जो चूत के पानी से बिलकुल गीला हुआ था..
जब कसाई मुर्गी को काटता है तो जैसे मुर्गी का लाल मांस होता है वैसे ही ताई की चूत के अंदर का वीभत्स नज़ारा था, मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी, अब मेरा प्यार काकी से ताई की तरफ हो गया, ऐसा गर्म मांस से लबालब भरा भोसड़ा देखकर अब मैं ताई से प्यार करने लगा)
मैं – वाह ताई, मैं कितना भाग्यशाली हूँ, मुझे तेरी इस मास से लबालब भरी चूत के दर्शन हुए, तू कितनी सेक्सी है ताई, तेरे लिए जान भी कुर्बान।
काकी – पंडित, जान तो मेरे लिए है ना?
मैं – नहीं काकी, अब ताई के लिए है, अब मैं ताई से प्यार करने लगा हूँ, और अगर तूने ताई को कुछ बोला, तो तेरी बेटी चोद दूंगा, समझी?

(काकी झंड हो जाती है, उसकी ताई के सामने बेइजती हो जाती है, काकी का मुह उतर जाता है और बेइज़्ज़ती से चेहरा लाल हो जाता है, क्योंकि अभी जो थोड़ी देर पहले खुद को रानी समझ रही थी, असल में उसकी औकात रंडी वाली है ये काकी भली भांति समझ गयी थी और गुस्सा हो गयी, वहीँ दूसरी और ताई की हंसी बंद नहीं हो रही थी)
ताई – हा हा हा, साली रंडी कहीं की, औकात पता चल गयी तुझे, माँ की लोड़ी..
काकी – चुप कर चिनल कहीं की।
मैं – काकी, बहन चोद तू चुप हो जा, रंडी, मेरी ताई मेरी रानी है, इस घर की रानी है, तू नौकरानी है समझी रांड?
(और मैंने काकी के गाल पर जोरदार थप्पड़ लगा दिया, और मैं फिर ताई के हाथ खोल देता हूँ, ताई खुलते ही मुझ से पत्नी की तरह लिपट जाती है और मेरे होंठ पर अपने होंठ रख देती है, हम करीब 5 मिनट तक एक दूसरे के होंठ और जीभ चूसते हैं, काकी ये सब नज़ारा देखकर दंग रह जाती है)
ताई – पंडित बेटा, जल्दी डाल दे अपना कोबरा मेरी चूत के अंदर और सारा वीर्य मेरी बच्चादानी में छोड़ दे।
मैं – जो हुकुम मेरी रानी।
(और मैं अपना खड़ा हुआ फंफनता लण्ड सीधा ताई की गर्म हुयी भट्टी जैसी चूत के अंदर डालता हूँ और फिर ताई और मेरी चुदाई प्रक्रिया शुरू हो जाती है, काकी सारा खेल देखे जा रही थी)
ताई – अह्ह्हह्ह्ह.. उम्ममम्मम.. उईईईई.. रेरेरेरेरेरे.. ऐसे ही चोद अपनी ताई को बेटा, अह्ह्ह्हह्ह्.. तेरा सुपाडा तो बहुत ही बड़ा है रे.. ममममम.. उईईईई माँ.. मर गयी..
मैं – ताई, सुनंदा, मेरी जान, आज तेरी कोख में अपना बीजारोपण कर दूंगा मेरी पत्नी.. अह्ह्ह्ह.. कितनी गर्म भट्टी है तेरी भोसड़ी, काकी की तो ठंडी है.. अह्ह्ह्ह..
काकी – पंडित तुम इतने जल्दी क्यों बदल गए बेटा, मुझ में क्या बुरा है, तुमने तो कहा था कि मैं नंगी फिल्मों की हीरोइन लगती हूँ?
मैं – भक्क्क चिनल, शक्ल देखि है आईने में अपनी, वो तो मैं झूट बोल रहा था, तेरा बदन अच्छा है बस चुदाई लायक,आह्ह्ह्ह.. 200 रूपये मिल जायेंगे तेरे बदन के गाँव के बाजार में, आहहहह.. और रहा सवाल मेरे बदलने का, मुझे जहाँ बड़ी चूत मिली, अच्छा स्वाद मिला, ममममम.. अह्ह्ह्हह्.. मैं वहीँ जाऊंगा, आज ताई मुझे पसंद आयी है तो मैं ताई का दीवाना हूँ, कल ताई की जगह तेरी बेटी सपना भी ले सकती है, उईईईई.. अह्ह्ह्हह्.. मैं झड़ने वाला हूँ ताई, अह्ह्ह्ह्ह.. मैं आया आया..
ताई – अंदर ही छोड़ दे बेटा, मुझे बच्चा चाहिए, अह्ह्हह्ह्ह्ह.. मैं भी फारिक होने वाली हूँ मेरे लाल, अह्ह्ह्ह्ह्.. उईईईई.. उम्ममम्मम्म.. आयी मैं भी जान..
(मेरा लण्ड फचापच फचापच ताई की बच्चादानी में गोते खा रहा था, मेरा लण्ड ताई की चूत के पानी से भीग कर और भी लचीला हो गया था, इस चुदाई के अंतिम चरम पर ताई और मैं तेज तेज झटकों के साथ पसीने में लटपट एक साथ झड़ जाते हैं और हमारा नंगन शरीर एक दूसरे से नाग नागिन की तरह लिपटा हुआ था)
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#7
RE: Rishton May chudai परिवार में चुदाई की गाथा

मैं – काकी, देख एक दिन सपना को भी ऐसे ही चोदुंगा।
काकी – बहुत हरामी है रे तू, मेरी बेटी पे रहम कर, वो छोटी है अभी, उसकी तो सील भी नहीं टूटी।
ताई – कितनी भोली है तू रत्ना छिनाल, तेरी बेटी तेरी पीठ के पीछे क्या क्या गुल खिलाती है तुझे पता भी नही, तू उसे शरीफ समझती है, गाँव में पीठ पीछे कितनी बात करते हैं तुझे क्या पता, तेरी बेटी रांड है रत्ना।
काकी – जबान पर लगाम दे सुनंदा, बहुत हो गया, खबरदार जो अब मेरी बेटी के खिलाफ एक भी शब्द कहा।
(मैं काकी का ये विकराल रूप देखकर डर गया और मैंने ऐसे समय में कुछ न कहना ही बेहतर समझा और काकी-ताई को उनके हाल में छोड़ दिया)
ताई – बोलूंगी मैं तो, क्या उखाड़ लेगी मेरा बता?
काकी – भेन की लॉड़ी, थप्पड़ जड़ दूंगी गाल पर, रंडी।
ताई – अपने बाप की बेटी है तो हाथ लगा, तेरा हाथ तोड़ के तेरी गांड में न दे दिया तो मेरा नाम भी सुनंदा नहीं।
(बाप पर बात आते ही काकी ताई पर झपट गई और फिर काकी-ताई की बिल्ली लड़ाई (कैट फाइट) शुरू हो गयी, दोनों नंगी एक दूसरे के बाल खिंचती हुयी लड़ रही थीं, एक दूसरे को चमाट मारते हुए लड़ाई कर रही थी, दोनों हट्टी कट्टी देहाती, मर्दाना औरतें नंगन अवस्था में युद्ध करते हुए बहुत ही आकर्षक लग रही थी..
शोरगुल और हो हल्ले के बीच सपना आ जाती है और अपनी माँ और ताई को इस अवस्था में देखकर भौचक्की रह जाती है, अपनी माँ रत्ना को पिटता देख वो भी ताई पर झपट जाती है और तब ताई की जो पिटाई शुरू होती है वो देखने लायक थी..
पतापत पतापत ताई के गालों पर रत्ना और सपना के बड़े बड़े हाथों द्वारा चमाट की बारिश होती है, नंगी सुनंदा को रत्ना और सपना लेटा लेटा कर लात घुसें मारते हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं किस की तरफ से वार करूँ..
अभी सपना को भी नाराज़ नहीं कर सकता क्योंकि उसकी चुदाई अभी करनी बाकि है, अगर सपना नाराज़ हो जाती तो उसे चुदाई के लिए पटाना कठिन काम था, काकी-ताई का मजा में लगभग ले ही चुका था, तो मैने पीटती हुयी ताई पर ही वार करने की सोची परंतु तभी अचानक आनन्दी का कमरे के आगमन हो जाता है..

माहौल को भांपते हुए वो रत्ना और सपना पर टूट पड़ती है, दरअसल आनन्दी खेलकूद में काफी होशियार थी तो अपनी फुर्ती व चालाकी के दम पर वह, काकी-सपना पर भारी पड़ गयी.और अब दबदबा सुनंदा और आनन्दी का था..
लड़ाई इतनी बढ़ गयी कि आनन्दी और सुनंदा डंडे से लगातार रत्ना और सपना पर वार किए जा रहे थे, और काकी-सपना की हालत बेहोशी वाली हो गयी थी, अब काकी और सपना माफ़ी मांगने पर मजबूर हो गए थे।
काकी (रोते हुए) – माफ़ कर दे दीदी, माफ़ करदे, रहम कर मेरी बच्ची और मुझ पर।
ताई – रंडियों, अब माफ़ी मांगते हो, बोलो करोगे अब बदतमीजी ?
सपना – ना ताई, अब नहीं करेंगे, छोड़ दो हमे।
काकी – भगवान् के लिए छोड़ दो, पंडित बेटा बचा हमे।
मैं – माफ़ी मांग लो, मैं कुछ नहीं कर सकता, काकी आपको ताई का आदर करना चाहिए, वो आपकी माँ की तरह है।
काकी – आज से आदर करूँगी, जो बोलेगी वो करूँगी, गुलाम बन कर रहूंगी।
ताई – अब सजा तो मिलेगी तुम दोनों माँ बेटियों को.. आनन्दी इधर आ, अपना पैजामा खोल और इनके मुह और बदन पर मूत दे, मैं भी मुतती हूँ।
सपना – ऐसा मत करो ताई प्लीज, मत कर आनन्दी दीदी ऐसा।
आनन्दी – चुप कर रंडी साली.. कपड़े खोल अपने जल्दी नंगी हो जा।
सपना – नहीं दीदी नंगी मत कर प्लीज।
(आनन्दी और सुनंदा सपना को जबरन नंगी कर देते है उसके बाद काकी और सपना के ऊपर मूत्र विषर्जन करते हैं, इतना अपवित्र दृश्य देखकर मेरी आँखें भर आयी, काकी-सपना के प्रति मेरा हृदय पिघल गया, मुझे अब ताई और आनन्दी की इस अमानवीय हरकत पर गुस्सा आने लगा, लेकिन मेने अभी कुछ करना ठीक नहीं समझा..
फिर ताई और आनन्दी ने सपना से काकी की चूत चटवायी और काकी से भी सपना की गांड व चूत रस चटवाया.. इतना करने के बाद ताई और आनन्दी अपने कमरे में चले गए और काकी-सपना जमीन में लेटे रो रहे थे)
मैं – चल काकी अब नहा ले और कपड़े पहन ले, सपना बहन तू भी नहा ले।
काकी – तूने मुझे बचाया नहीं पंडित, तू बहुत गंदा है।
सपना – हाँ भाई, हमारा साथ नहीं दिया तूने।

मैं – तो कौन सा मैंने ताई या आनन्दी का साथ दिया, सुन अभी आराम कर, कल कुछ सोचते हैं ताई को सबक सिखाने के बारे मे।
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#8
RE: Rishton May chudai परिवार में चुदाई की गाथा
सपना-कल क्या सोचेंगे भाई अभी सोच ना

मैं-देख सपना मैं तुझे एक कहानी सुनाता हूँ उसे सुनकर ही तू फ़ैसला करना

काकी- अरे पंडित अब इस मामले में ये कहानी कहाँ से आ गई

मैं- पहले तुम दोनों मेरी ये कहानी सुन लो फिर फ़ैसला करना

सपना- किसकी कहानी है और कैसी है चल शुरू कर भाई

काकी- हाँ पर ये तो बता ये कहानी है किसकी

मैं-ये कहानी मेरे दोस्त हापुड़ निवासी रमन, उसकी माँ कामना और छोटी बहन रिंकी की है.
रमन एक 21 वर्षीय लड़का है जिसका अभी हाल ही में दिल्ली के कॉलेज में एडमिशन हुआ है, रमन दिखने में हष्ट पुष्ट लड़का है जिसने अभी अभी कॉलेज की दुनिया में कदम रखा है.

रमन की चौड़ी छाती के घने बाल लड़कियों के लिए आकर्षण का कारण हैं, रमन के घर में उसकी छोटी बहिन रिंकी(उम्र *** वर्ष) और माँ कामना(उम्र 46 वर्ष) रहतीं हैं, रमन का बाप नाम- भास्कर फौजी है जो असम में रहता है.
रिंकी *** वर्षीय 12वीं की गोरी,पतली,सुंदर छात्रा है जिसके जीवन में जवानी का बीच अभी अभी उगा है, रिंकी के उभरते हुए अमिया जैसे कच्चे स्तन काफी टाइट हैं जिसमे उसके टाइट कसे हुए छोटे छोटे निप्पल उसके स्तनों की बनावट में चार चाँद लगाते हैं..
रिंकी की पतली कमर, उभरते हुए कूल्हे, गोरा बदन देखने लायक है, रिंकी ने हाल ही में जवानी में अपना पहला कदम रखा है जिसका प्रभाव उसके चेहरे की तड़प में साफ़ साफ़ नजर आता है..
रिंकी घर में बिना बाँहों वाला छोटा टॉप और निचे नेकर पहने रहती है जिसके कारण उसकी गोरी गोरी मोटी जांघों के दर्शन रमन को होते हैं तो रमन का भी मन डोलने लगता है, गोरी गोरी टांगों में रिंकी ने काले धागे बांधे हुए हैं ताकि उसके हुस्न बदन पर किसी की बुरी नजर न लगे. रमन कई बार अपनी बहन रिंकी से चिपकने का प्रयास करता है और उसके छोटे छोटे कच्चे अमिया जैसे बूब्स की एक झलक पाने के लिए हर समय आतुर रहता है.
वहीं दूसरी और रमन की माँ कामना जिसकी उम्र 45 वर्ष है पति के घर में न होने की वजह से काफी परेशान रहती है, घर में कामना सुबह से श्याम तक नाईटी पहन के रखती है और उसके अंदर कुछ नहीं पहनती..
कामना दिखने में मोटी भैंस जैसी गोरे और सुडौल बदन की मालकिन है जिसके सुडौल मोटे उभरे हुए बूब्स उसकी नाईटी को फाड़ने के लिए उतारू रहते हैं, उसके बड़े बड़े निप्प्ल का आकार उसकी नाईटी के बाहर से साफ साफ दिखता हुआ प्रतीत होता हैं..
लेकिन वो रमन और रिंकी से कभी नहीं शर्माती और घर में सुबह से शाम तक ऐसे ही बेझिझक नाईटी में रहती है, परन्तु रमन की गन्दी नजर अपनी माँ के मोटे गठीले सुडौल बदन पर हमेशा रहती है और अपनी माँ को देखकर उसका लण्ड हर बार खड़ा हो जाता है..
कभी कभी वो बाथरूम में अपने माँ के गोर, मोटे, हाथी जैसे सेक्सी और कामुक बदन के बारे में सोचते हुए अपना गाढ़ा सफेद पानी निकालता है. अपनी माँ के बूब्स की एक झलक पाने के लिए वो हर समय तैयार रहता है, जब कामना झाड़ू लगाती है, पौछा लगाती है या घर का कुछ काम करती है तो रमन अपनी माँ के बूब्स और गांड को चोरी छिपे देखता रहता है, कभी कभी उसकी वीडियो भी बना लेता है.
बात उस समय की है जब रमन और उसकी माँ कामना दिल्ली से ट्रेन में हापुड़ आ रहे थे, जनरल डिब्बे में सीट न होने की वजह से रमन को अपनी माँ की गोद पर बैठना पड़ा, गर्मी का मौसम था, कामना और रमन दोनों पसीने में लतपत थे..
थोड़ा सफर तय करने के बाद रमन कामना को अपनी गोद में बैठने को बोलता है. कामना रमन की गोद में आ जाती है, 110 किलो की रमन की 46 वर्षीय गोरी, मोटे बूब्स वाली माँ अब अपने बेटे की गोद में बैठी थी, ट्रेन स्पीड में थी और झटके मारते हुए चल रही थी और इसी झटके के साथ साथ कामना अपने बेटे की गोद में उछल रही थी जिस वजह से रमन के लण्ड पर दबाव पड़ा और उसका लण्ड खड़ा हो गया और कामना की गांड में चुभ रहा था..
कामना मजबूरी में कुछ कर भी नहीं सकती थी, वह ऐसे ही अपने बेटे की गोद में बैठी रही, वहीँ दूसरी ओर रमन की हालत खराब थी, उसका मन अपनी माँ की गांड में लण्ड डालने का कर रहा था लेकिन वो मजबूर था..
एक आदमी दूसरी सीट में बैठा हुआ ये सब दृश्य देख रहा था, उस आदमी की उम्र लगभग 52 वर्ष होगी, उसकी आँखों में हवस दिख रही थी, अचानक उस आदमी ने कहा –
आदमी- भाभी जी, आपका बेटा थक गया होगा, आप मेरी जगह में बैठ सकते हैं.
कामना- नहीं नहीं भाई साहब, धन्यवाद, अगर मैं आपकी जगह में बैठ गयी तो आप कहाँ बैठोगे फिर?
आदमी- भाभी जी, मैं खड़ा हो जाता हूँ थोड़ी देर तक.
कामना- नहीं भाई साहब, आपका बहुत बहुत शुक्रिया, मेरा बेटा अभी नहीं थका है, जब थक जाए तो मैं बता दूंगी.
आदमी- ठीक है भाभी जी.
(थोड़ा सफर तय करने के बाद झटके मारते हुए रमन के लण्ड ने कच्छे में ही सफेद गाढ़ा माल छोड़ दिया और पुरे डब्बे में रमन के वीर्य की दुर्गन्ध फैल गयी, कामना को ज्यादा बदबू आ रही थी, तो कामना ने उस आदमी को उठने के लिए बोला)
कामना- भाई साहब, अब उठ जाइए आप.
(आदमी ने थोड़ी जगह बनाते हुए कामना को थोड़ी सी सीट दी)
आदमी- उठने की जरुरत नही है भाभी जी, यहीं एडजस्ट कर लेंगे.

कामना- धन्यवाद भाई साहब.
(जगह कम होने की वजह से कामना धीरे धीरे ट्रेन के झटकों के साथ साथ उस आदमी की गोद में आ जाती है, अब कामना उस अनजान आदमी की गोद में बैठी थी, और आदमी से बात कर रही थी)
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#9
RE: Rishton May chudai परिवार में चुदाई की गाथा
आदमी- मैडम, आप कहाँ से हो?
कामना- दिल्ली से भाई साहब और आप?
आदमी- मैं भी दिल्ली से हूँ. आपके हस्बैंड कहाँ काम करते है?
कामना- वो तो आर्मी में हैं, अभी असम में हैं इससे पहले लद्दाख़ में थे.
(ट्रेन के झटकों की वजह से आदमी का लण्ड कामना की गांड में छूने लगा और खड़ा हो गया, इस आदमी का लण्ड रमन के लण्ड से भी ज्यादा बड़ा था और कामना को साफ साफ इसका आभास हो रहा था परन्तु सीट न होने के कारण वो उस आदमी की गोद में बैठने को मजबूर थी, रमन ये सब ड्रामा देखे जा रहा था..
अचानक ट्रेन में जोर का झटका जोरों से लगता है और कामना आदमी की गोद से नीचे गिरने वाली होती है तो वो आदमी कामना को गिरने से बचा लेता है, वो कामना को टाइट पकड़ लेता है, जिस कारण उसके मोटे बूब्स आदमी के हाथों से दब जाते हैं, रमन को ये सब नजारा देखकर बहुत गुस्सा आता है)
कामना(डरते हुए)- हाये दय्या, मैं तो गिर गयी थी अभी, भाई साहब आपका धन्यवाद आपने बचा लिया मुझे.
आदमी- ये तो मेरा फर्ज था भाभी जी. अब मैंने आपको कस कर पकड़ रखा है, अब आप नहीं गिरोगे.
कामना- हाँ भाई साहब ऐसे ही पकडे रहो.
(आदमी ने कामना को टाइट पकड़ रखा था, ट्रेन चल रही थी, झटके लगातार लग रहे थे, आदमी का लण्ड कामना की गांड की दरार को छू रहा था, कामना को भी अहसास हो रहा था और आनंद की अनुभूति भी हो रही थी, कामना ने अपने होंटों को दांतों से दबा लिया और आँखें बंद कर दी..
यह सब देखकर रमन सब कुछ समझ गया और ऐसे ही अपनी माँ को तड़पते हुए देखता रहा, अब आदमी के झटके भी तेज़ होने लगे, कामना ने कोई विरोध नहीं किया.
अचानक आगे गुफा/सुरंग आई तो अन्धेरा हो गया, गुफा ख़त्म होने के बाद रमन ने देखा उसकी माँ का साड़ी का पल्लू नीचे गिरा था और उसमे से लगभग 60 प्रतिशत बूब्स बाहर आने को व्याकुल है, वो सब कुछ समझ गया कि अँधेरे में गुफा में क्या कारनामा हुआ.
दूसरी गुफा आती है तो उसके बाद कामना की साड़ी झांघों तक आ गयी थी, अब रमन की माँ कामना के बिना साड़ी के पल्लू केे बूब्स ट्रेन के डिब्बे में बैठे सभी लोगो के सामने थे और साड़ी झांघ तक थी, झांघ का काला तिल चमक रहा था..
अब तक डिब्बे में मौजूद सभी लोग समझ गए थे की अँधेरी सुरंग में क्या क्या हुआ, और सभी लोग रमन को देखकर हंस रहे थे क्योंकि उसकी माँ उसी के सामने मजे ले रही थी.
तीसरी सुरंग आती है इसके बाद रमन की माँ की काली ब्रा की स्ट्रिप लाल ब्लाउज में से साफ साफ बाहर दिखने लगती है और बूब्स लगभग 70 प्रतिशत बाहर आ गए जिसमे से हलके भूरे रंग के निप्पल का ऊपरी भाग भी नग्न था और सभी को नजर आ रहा था वहीँ दूसरी और उस अनजान आदमी के गालों में और गले में लिपस्टिक के निशान थे, और उसकी शर्ट के 4 बटन खुले हुए थे, ऐसा अश्लील वातावरण देखकर अब सभी को पता चल गया था कि क्या मामला है.
चौथी सुरंग आती है, सुरंग खत्म होने के बाद कामना का साड़ी का पीछे का हिस्सा पूरा खुला था और उसकी गांड में उस आदमी का लण्ड इस प्रकार घुसा हुआ था कि किसी को दिखाई न दे. कामना उस आदमी की गोद में बैठी आगे की और झुकी थी और उसके सर के बाल बिखर गए थे, माथे से पसीने की बूंदें उसके 70 प्रतिशत बाहर दिख रहे बूब्स की काली गहरी घाटी में समा रही थी, रमन को अब यकीन हो गया कि उसकी माँ चुद रही है. रमन कामना की ये हालत देख रहा था और कामना को घूरे जा रहा था.)
कामना(रमन की ओर देखते हुए)- गर्मी बहुत है न बेटा, तुझे नहीं लग रही क्या?
रमन- नहीं माँ, आपको बहुत ज्यादा लग रही है शायद.
कामना- हाँ बेटा, कैसे दूर होगी ये गर्मी.
आदमी- भाभी जी मैं कर देता हूँ दूर, अगली सुरंग आने दो.
(कामना और वो आदमी हंसने लगते हैं और रमन को अपनी माँ की इस करतूत पर बहुत गुस्सा आता है,
पांचवी सुरंग आती है, और ये सुरंग थोड़ा लंबी भी थी, कुछ दिखायी नही दे रहा था, लेकिन कामना और उस आदमी की आवाज सभी को सुनाई दे रही थी, कामना की चूड़ियों की तेज तेज खनखनाहट रेल के डब्बे में गूंज रही थी, कुछ लोग बात भी कर रहे थे कि आज तो रमन की माँ चुद गयी और हंस रहे थे, मजाक बना रहे थे)
कामना- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह भाई साहब तेज… और तेज… जल्दी भाई साहब अह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म…
आदमी- अह्ह्ह्ह्ह भाभी जी अह्ह्ह्ह उईई हो गया बस…. अह्ह्ह्ह…
(कुछ देर बाद आवाजें बंद हो जाती है और सुरंग भी खत्म हो जाती है, आदमी ने लण्ड कामना की गांड से बाहर निकालकर अपने पैजामे में डाल लिया था और कामना ने भी साड़ी निचे कर ली थी और ब्लाउज भी सही कर लिया था और ठीक तरीके से संस्कारी शादीशुदा नारी की भाँती आदमी की गोद में ऐसे बैठी हुयी थी जैसे कुछ हुआ ही न हो..

अब कामना के बूब्स केवल 50 प्रतिशत बहार थे जो हररोज ऐसे ही बाहर लटकते थे, कुछ देर बाद उस आदमी का स्टेशन आ जाता है और वो ट्रेन से उतर जाता है)
कामना- रमन बेटा यहीं बैठे रहना, मैं अभी आई.
रमन- लेकिन माँ आप कहाँ जा रही हो?
कामना- 2 मिनट में आई बेटा, तू यहीं पर रुक कोई सीट न घेर ले.
(उस आदमी को उतरते देख कामना दौड़ी दौड़ी उसके पीछे जाती है और उसे रोकती है)
कामना- भाई साहब, रुकना…
आदमी- क्या हुआ भाभी जी?
(और कामना उस आदमी के होंठों से अपने होंठ मिला लेती है और किस करती है, स्टेशन पर मौजूद सभी लोग उन्हें देखते हैं, रमन के डब्बे के लोग भी उन्हें देखते हैं लेकिन रमन अपनी जगह में रहता है ताकि कोई जगह न घेर ले, इस चुम्बन का मनमोहक दृश्य देखने के लिए भीड़ इकट्ठा हो जाती है, और ट्रेन चलने वाली होती है तो कामना अपने डब्बे में आ जाती है, सभी लोग रमन और उसकी माँ को देखकर हंसते हैं और ट्रेन में मौजूद सभी हरामी किस्म के लौंडे कामना को कुत्तों की तरह ऊपर से निचे तक घूरते हैं)
रमन- कहाँ गयी थी माँ?
कामना- अरे उन भाई साहब का पर्स रह गया था वो देने गयी थी.
रमन- यहाँ अभी पता नहीं क्या हुआ, सभी लोग उस तरफ देखे जा रहे थे जहाँ आप गए, लेकिन मैं अपनी सीट से नहीं उठा ताकि हमारी जगह कोई घेर न ले.
कामना- मेरा राजा बेटा, लेकिन उन अंकल की जगह में तो कोई और बैठ गया, अब मैं तेरी गोद में बैठूंगी.
रमन- हाँ माँ आजाओ, बैठ जाओ.
(कामना फिर अपने बेटे रमन की गोद में बैठ जाती है, रमन का लण्ड एक बार फिर से अपनी माँ की गांड के घर्षण से झटके मारने लगता है और खड़ा हो जाता है, ट्रेन हिल हिल कर चलती है, रमन पहले ही झड़ चुका था और पुरे डब्बे में उसके माल की बदबू फैली हुयी थी वहीँ दूसरी और उस अनजान आदमी ने कामना की साड़ी के पीछे वीर्य गिराया हुआ था, जिसके बारे में कामना को पता नहीं था, उसकी भी बदबू फैल गयी थी, सभी लोगों ने अपने नाक में हाथ रख दिया था, केवल कामना और रमन को छोड़कर, अचानक रमन के हाथ में कामना की साड़ी से उस आदमी का वीर्य लग जाता है और वो अपनी माँ से पूछता है)
रमन- माँ ये चिपचिपा सा क्या लगा है आपकी साड़ी में?
कामना- ओहो, दिखा तो… अरे जब बाहर गयी थी तो तब लग गया होगा, जनरल डिब्बे में यही मुसीबत है, गंदगी ही गन्दगी रहती है.
अगली बार हम ए.सी. डिब्बे में जायेंगे ठीक है?
रमन- ठीक है माँ. माँ मैं आपको वैसे ही पकड़ लेता हूँ जैसे अंकल ने पकड़ा था, कहीं आप गिर न जाओ.
कामना- हाये राम… मेरा बेटा कितनी फिक्र करता है मेरी, पकड़ ले बेटा.
(रमन कामना को वैसे ही कस कर पकड़ लेता है, कामना फिर से उत्तेजित हो जाती है और अपनी जीभ अपने होंठों में फेरने लगती है, ट्रेन के झटकों से उसका पल्लू फिर से नीचे गिर जाता है..
डिब्बे में मौजूद सभी लोग कामना के 70 प्रतिशत बाहर झांकते हुए बूब्स का नज़ारा देख रहे थे और कुछ तो अपने लण्ड में हाथ भी फेर रहे थे. रमन ट्रेन के झटके के साथ साथ खुद भी जोर जोर से कामना की गांड में झटके मार रहा था, और उसका लण्ड कामना को गांड में महसूस हो रहा था..
कामना आगे की तरफ झुकी हुयी थी, उसके बूब्स की काली गहरी घाटी साफ दिख रही थी, गले का मंगलसूत्र लटका हुआ था, माथे पर लाल बिंदी, मांग पर लाल सिंदूर कामना की सुंदरता में चार चाँद लगा रहे थे..
रमन ने अपनी माँ को बूब्स के थोड़ा निचे हाथों से जकड़ा हुआ था और झटके मार रहा था, कामना ने अपने दोनों हाथ अपने घुटनो पर रखे थे, वो अपने बेटे रमन की हालत से वाकिफ थी और उसके मजे में कोई मुसीबत नहीं डालना चाहती थी..
कुछ लोग डिब्बे में कामना और उसके बेटे की करतूत देख कर मुठ मार रहे थे, और कुछ लोग नज़रअंदाज कर रहे थे, कुछ सभ्य परिवार के लोग पहले ही दूसरे डिब्बे में चले गए थे..
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#10
RE: Rishton May chudai परिवार में चुदाई की गाथा
अचानक फिर सुरंग आती है और इस सुरंग के चलते जो 6-7 लोग मुठ मार रहे थे उन्होंने अपना अपना माल कामना के ऊपर डाल दिया और कुछ माल रमन के मुह पर भी पड़ा,कामना का मुह, गला और बूब्स तो माल से भीग गए थे, और रमन का माल भी कच्छे में निकल गया, कामना भी झड़ गयी..
कामना और रमन को पता भी नहीं चला कि ये किसने किया, कैसे हुआ क्योंकि सुरंग खत्म होने पर सभी लोग वैसे ही खड़े हो गए जैसे पहले थे, शक करें तो किस पर, सुरंग खत्म होने पर सबका स्टेशन आया और कामना का मुह 6-7 आदमियों के वीर्य से पूरा सफेद हो गया था..
रमन के भी मुह में माल था, दोनों सभी से नजर छुपाते हुए ट्रेन से जल्दी जल्दी उतरे और घर चले गए, घर पहुँच कर कामना ऐसा बर्ताव कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही न हो, रिंकी कामना और अपने भाई रमन को देखकर बहुत खुश हुयी..
रिंकी ने स्कर्ट और ऊपर एक हलकी सी नेट वाली बनियान पहनी हुयी थी जिसमे उसके कच्ची अमिया जैसे बूब्स हल्के से उभरे हुए लग रहे थे और निप्पल का गोल आकार भी दिख रहा था..
रिंकी अपने भाई के गले लगती है और उससे चिपक जाती है, छोटी होने के कारण रमन रिंकी को गोद में उठा लेता है और उसे उसके कमरे में ले जाता है)
रिंकी- भैया आप मेरे लिए क्या लाये, और आपसे और माँ से इतनी बदबू क्यों आ रही है?
रमन- पगली तेरे लिए तरह तरह के टॉप, जीन्स, शॉर्ट्स लेकर आया हूँ, और बदबू पसीने की है, सफ़र की वजह से आ रही है, अभी नहाऊंगा चली जायेगी.
(रिंकी बहुत खुश हो जाती है, वहीँ दूसरी और कामना नहाने चली जाती है, रिंकी जब अपने भैया रमन द्वारा लाये गए छोटे छोटे साइज के जालीदार ब्रा और पेंटी देखती है तो चौंक जाती है और शरमा भी जाती है)
रिंकी- अरे भैया, ये क्या लाये आप मेरे लिए, मैं नहीं पहनती हूँ ये सब, ये सब तो माँ पहनती है.
रमन- सिस्टर अब तू जवान हो रही है, इन सब चीजों की तुझे जरुरत है, लेकिन माँ को मत बताना कि मैं तेरे लिए ये सब लाया हूँ, वो गुस्सा करेगी.
रिंकी- हाँ लेकिन मैं कैसे पहनू ये सब, माँ को दिख जायेगी तो.
रमन- पगली अगर माँ देख भी ले तो कहना तू अपनी फ्रेंड के साथ मार्किट से ये सब लायी.
रिंकी- ओके भैया, थैंक यू सो मच, आई लव यू भैया.
रमन- आई लव यू टू बेबी.
(और रिंकी बहुत ही खुश होती है और रमन के गले लग जाती है, जिस वजह से उसकी बनियान के अंदर सख्त गुठली से बने कच्चे बूब्स और उनके निप्पल रमन की छाती में टच हो जाते हैं और रमन का पूरा बदन सिहर जाता है, लण्ड खड़ा हो जाता है और जोर जोर से झटके मारने लगता है, उसके बाद रमन और रिंकी अलग होते हैं)
रिंकी- भैया, आज मुझे मैथ्स के कुछ सवाल सिखाना, आपकी मैथ्स काफी अच्छी है.
रमन- ठीक है बहना, मैं सब कुछ सीखा दूंगा तुझे, अभी नहा लेता हूँ, बहुत बदबू आ रही है.
(रमन से भी माल की काफी बदबू आ रही थी, कामना नहा कर अपनी जालीदार नाईटी पहन लेती है, जिसमें से उसके बड़े बड़े तरबूज जैसे स्तन काफी विशाल लग रहे थे..
नाईटी के अंदर ब्रा न पहनने के कारण उसके निप्प्ल्स का उभार स्पष्ट प्रतीत हो रहा था जिसे देखकर रमन का लण्ड अपनी माँ के हुस्न से भरे हुए कामुक सुडौल बदन को सलामी देने लगा, और जब कामना ने रमन की ये हालत देखी तो एक कुटिल कामुक मुस्कान उसके चेहरे पर आई, अब रमन और उसकी माँ कामना के रिश्तों में थोड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा था..
कामना का रमन के प्रति बर्ताव बदल रहा था, और रमन भी अपनी माँ को माँ की नज़र से नहीं बल्कि किसी वैश्या की नज़र से देखने लगा था, ट्रेन की घटना के बाद ज्यादातर टाइम रमन का लण्ड अपनी माँ के ख्यालों में खड़ा रहता था और घर में पैजामे के ऊपर लण्ड का उभार साफ दिखाई देता था, और कामना रमन के लण्ड के उभार को हमेशा घूर घूर के देखा करती थी और मंद मंद कामुक हरामी वाली हंसी देती थी, धीरे धीरे रमन का हौसला भी बुलंद होता चला गया..
कभी कभी रमन अपनी माँ के सामने पैजामे के अंदर अपने लण्ड को इतना खड़ा कर देता था की साफ साफ उभार दिखाई देता था और झटके मारते हुए हिलता भी था, लेकिन कामना का कोई विरोध नहीं था)
(रात का समय था, रिंकी ने रमन को उसे मैथ्स पढ़ाने को कहा)
रिंकी- भैया, प्लीज समझा दो कुछ सवाल. मेरे कमरे में चलो.
रमन- चल बहना.
(रमन और रिंकी कमरे में जाते हैं, रिंकी ने एक टाइट लाल रंग का टॉप पहना हुआ था, जिसके अंदर गुलाबी रंग की उसके भाई रमन द्वारा लायी हुयी जालीदार ब्रा पहनी थी, और उसके बूब्स पहले से थोडा सा बड़े लग रहे थे..
टॉप इतना छोटा था की उसका पेट साफ साफ दिख रहा था, ** साल की उम्र की गोरी लड़की की गहरी नाभि भी दिख रही थी, नीचे उसने एक जीन्स की नेकर पहनी थी और उसके अंदर भी गुलाबी पेंटी पहनी थी जो उसके पिछवाड़े के ऊपर से दिखाई दे रही थी..
उसकी गोरी चिकनी मोटी झांघें बहुत ही सेक्सी लग रही थी जिसमे हलके हलके सुनहरे भूरे रंग के बाल रमन का लण्ड खड़ा कर रहे थे, बुरी नजर से बचने के लिए दोनों पैरों में बंधा हुआ काला धागा उसकी गोरी टांगों के सेक्सिपन की शोभा बढ़ा रहा था..
अपनी बहन को इस वेशभूषा में देखकर उसे उसको पढ़ाने का मन नहीं बल्कि चोदने का मन ज्यादा कर रहा था, रमन की हालत खराब थी, लेकिन उसकी भोली भाली बहन उसके इरादों से वाकिफ नहीं थी, रमन उसे सवाल समझने लगा)
रमन- बहना तूने कपडे पहन लिए जो मैं लाया था, बहुत अच्छी लग रही है तू कसम से.
रिंकी- झूठ बोल रहे हो भैया. सच सच बताओ.
रमन- माँ की कसम, बहुत ज्यादा हॉट और सेक्सी लग रही है.
रिंकी- बहुत गंदे हो आप भैया, कोई अपनी बहन के लिए ऐसे बोलता है.
रमन- इसमें क्या बुरा है, तू सही में गजब लग रही है, मेने तो बस सच बोला बहना.
रिंकी- चलो कोई बात नहीं, थैंक्स.
रमन- अब तू सारे सवाल कर तब तक मैं कंप्यूटर में गेम खेलता हूँ.

रिंकी- ठीक है भैया.
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