Raj sharma stories चूतो का मेला
12-29-2018, 02:43 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
पिस्ता ने जलती निगाहों से मेरी और देखा और बोली- अच्छा लग रहा है न तुझे चल तेरी ख़ुशी इसी में है तो तेरे ताने भी सुन लुंगी मैं 

मैं- रसगुल्ले मस्त है 

पिस्ता- बर्फी भी खा ले मेरी सगाई की है 

सच कहू तो हम दोनों आड़ ले रहे थे शब्दों की अपनी भावनाए छुपाने के लिए कुछ परेशान वो थी कुछ तनहा मैं था, दिलो में बहुत कुछ था कहने को पर होंठो पर जैसे ताला लगा था 

मैं- कुछ सब्जी वब्ज़ी न बची कल की थोडा पनीर ,छोले होते तो मजा आ जाता 

पिस्ता- भोसड़ी के, मैंने होटल खोल रखा है क्या मैं यहाँ तुझे मिलने आई हु तू रो रहा है फ़ालतू में 

मैं- तो क्या करू यार, ऐसा लगता है की तू पल पल मुझसे दूर जा रही है , मुझे तेरे बिना जीने में मुश्किल होगी 

पिस्ता- तुझे कितनी बार समझाया है की तू फालतू के फिल्मी डायलोग मत मारा कर, तू मेरा दोस्त है मरते दम तक मैं तुझसे दोस्ती निभाऊ गी पर तेरी समझ में ही नहीं आ रहा 

मैं- हां, अब तो तू यही कहेगी 

वो- फिर से बोल 

मैं- अब तुझे तेरा मिस्टर मिल गया तो हम जैसो की क्या जरुरत तुझे 

वो- तुझे क्या लगता है की तू बस मेरी जरुरत है 

मैं- मुझे कुछ नहीं पता 

वो- तो फिर क्यों एक्टिंग कर रहा है 

मैं- बस मैं तुझसे दूर नहीं रहना चाहता 

वो- अभी क्या तू चोबीस घंटे मेरे साथ रहता है 

मैं- तू मत कर शादी यार 

पिस्ता- कितने दिन तक रुकुंगी 

हम दोनों के बीच थोड़ी टेंशन सी होने लगी थी 

पिस्ता- तो क्या , मैं कुंवारी ही रहू, जिस से मेरा रिश्ता हुआ है वो मास्टर है , सरकारी और फिर मैं क्यों न करू शादी 

मैं- बस तू मत कर 

वो- ठीक है तू कहता है तो नहीं करती , पर फिर मेरा क्या 

मैं- चुप रहा 

पिस्ता- ठीक है एक काम कर तू कर ले मुझसे ब्याह 

मैं- क्या बोल रही है 

वो- क्यों जब तुझे मेरी इतनी ही पड़ी है तो कर ले ब्याह , मुझे तो किसी न किसी की चूड़ी पहननी है तेरी पहन लेती हु , बोल करेगा मुझसे ब्याह 

मैं कुछ बोलता उस से पहले ही पिस्ता ने पास राखी दरांती से मेरे अंगूठे को चीर दिया दर्द की एक तेज लहर मेरे शरीर में दोड़ गयी खून की धार बह निकली 

पिस्ता- ले आज इसी वक़्त मेरी मांग तेरे खून से भर दे मुझे डर नहीं दुनिया की कसम है तेरी अभी इसी समय तेरी ब्याहता बनकर तेरे घर चलूंगी ले भर ले मेरी मांग 

मैं- यार, ये कुछ ज्यादा ही हो रहा है 

पिस्ता- तो भोसड़ी के इतनी देर से तुझे क्या समझा रही थी मैं पर तू समझता ही नहीं 

मैं- तू नहीं समझ रही है 

पिस्ता- देख मुझे नहीं पता तुझे क्या लगता है तू क्या सोचता है पर तेरे को आप्शन देती हु या तो अभी मेरी मांग भर दे और अपनी बना ले या अगर तूने मुझे कभी अपना माना हो तो मुझे ख़ुशी ख़ुशी विदा कर दे पिस्ता की आँखे भर आई , मैंने उसे सीने से लगा लिया और खुद भी रोने लगा

“तेरे दर्द से दिल आबाद रहा , कुछ भूल गया कुछ याद रहा “

बस जुदाई से ही तो डरता था मैं , खुदा जाने क्या लिख रहा था मेरी तकदीर में एक एक कर सब अपने दूर होते जा रहे थे नीनू डेल्ही चली गयी थी , पिस्ता सगाई कर रही थी बहुत मुश्किल से रोक पा रहा था मैं अपने आप को पर पिस्ता की आँखों में आंसू देख कर मैं खुद की रुलाई पर काबू नहीं कर पाया बहुत देर तक हम दोनों रोते रहे दिलो का दर्द आंसुओ के रस्ते से बहता गया 

पिस्ता- मुझे जाने दे मेरे पांवो में बेडिया मत बाँध , मैं तो बर्बाद हु ही तू अपनी जिंदगी जी 

मैं- तेरे बिना कैसी जिंदगी 

वो- पर मैं तुझसे जुदा कहा 

मैं- साथ भी तो कहा 

वो- जिस तरह राधा श्याम की उसी तरह पिस्ता तेरी , तेरे सर की कसम मेरी हर सांस बस तेरी है और फिर सबको कहा ख़ुशी मिला करती है कुछ लोग बदनसीब भी रहने चाहिए अपनी तरह 

मैं- जिस पल तू जाएगी मेरा मुक्कदर रूठ जायेगा 

वो- जाना पड़ेगा मुझे 

मैं- तो जा किसने रोका है 

वो- ख़ुशी ख़ुशी विदा करदे अपनी दोस्त को अपनी आँखों के पानी को पोंछते हुए मैं बोला- मुझ फ़क़ीर के पास क्या तुझे देने को 

वो- दुआ तो होंगी 

मैं- मैं तो बस ये ही बस यही चाहता हु की तुम खुश रह सदा हर सुख तुम्हारे पाँव चूमे मेरी दुआ तो हर पल तेरे साथ ही रहेंगी 

पिस्ता- तो फिर इस भार से मुक्त कर दे मुझे 


मैं- कौन से से 
वो- की तू अब इस बात से उदास नहीं होगा की मैं जा रही हु, तेरी ये निगाहें मेरा कलेजा चीर जाती है या तो अपना बना ले या फिर हस्ते हुए जाने दे मुझे 

मैंने पिस्ता को गले लगा लिया और बोला- माफ़ कर दे यार, अब कोई गुस्ताखी नहीं होगी तू जैसा चाहेगी वैसा ही होगा 

पिस्ता- तो वादा कर मेरी शादी में आएगा, 

मैं- तेरी कसम यार 

“ये दुआ है मेरी रब से तुझे आशिको में सबसे मेरी आशिकी पसंद आये ”

अब मुसाफिरों की तो यही जिंदगी होती है यारो , धुप छाया का खेल तो सदा चलता रहता है बस कुछ यादे रह जाया करती है जो अक्सर तब आती है जब आदमी दुखी होता है तो चलो अब जो तक़दीर करवाए वो ही सही कुछ देर रुकने के बाद पिस्ता चली गयी इस वादे के साथ की ब्याह से पहले जितना हो सके वो मेरे साथ ही टाइम बिताएगी 
-  - 
Reply

12-29-2018, 02:43 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
मैं भी घर की और चल पड़ा रस्ते में मुझे गीता ताई मिल गयी तो उसने घर आने को कहा मैं ताई के पीछे पीछे घर चला गया तो वो बोली- सुन एक बात बतानी है 

मैं- क्या

वो- वो जो अवंतिका है ना 

मैं- कौन 

वो- परले थोक की , जो बिमला की टक्कर में खड़ी है 

मैं- तो 

वो- उसका संदेसा है तेरे लिए 

मैं- मेरे लिए क्या 

वो- सुन ले पहले मेरी बात 
मैं – हां 
वो- अवंतिका ने कहलवाया है की वो तुझसे मिलना चाहती है एक बार 

मैं- पर मुझसे क्यों 

ताई- वो उसने नहीं बताया पर कुछ बात होगी तभी 

मैं- ठीक है मिल लेता हु पर ताई मामला खीचा पड़ा है कही कोई चाल तो नहीं 

ताई- हो सकता है पर मेरी उस से थोड़ी बोल चाल है तो मैं इतना जरुर कह सकती हु की वो अपने परिवार की तरह घमंडी नहीं है , अच्छे मन की है 

मैं- आप कहती हो तो मीटिंग फिक्स कर लो मिल लेता हु 

ताई- ठीक है मैं बताती हु 

मैं- हां, पर अभी अपनी मीटिंग का क्या 

ताई- थोड़ी फुर्सत आने दे फिर तेरा जुगाड़ भी कर दूंगी 

मैं- ताऊ का क्या हाल 

वो- बेटा, उसको पता नहीं क्या कह दिया उस दिन तूने, ४-५ दिन होने को आये शराब को छुआ भी नहीं है टाइम से काम से आता है मुझसे भी अच्छे से बात करता है 

मैं- चूत मारी के नहीं 

ताई- क्या तू भी 

मैं- ताऊ कस के पेल रहा लगता है तभी मेरे लिए फुर्सत नहीं आपको 

ताई- ऐसा क्यों बोलता है , तेरी वजह से ही तो उसने दारू छोड़ी है , मेरे ऊपर सबसे पहला हक़ तेरा है पर तू भी जानता है की ऐसे चोरी चोरी मिलने में क्या मजा है , तेरे साथ मुझे पूरा टाइम चाहिए ताकि अच्छे से कर पाऊ 


मैं—तो ठीक है पर जल्दी ही मेरा जुगाड़ कर देना 

ताई – कोई कहने की बात है. पर तूने उसको क्या कह दिया जो वो दारू छोड़ दी 

मैं- मैंने कहा की ताऊ अगर तूने दारू न छोड़ी तो ताई किसी और से चुदने लगेगी कब तक सहेगी बस उसको चुभ गयी 

ताई- पक्का कमीना है तू 

मैं- अब तो कमीना ही लगूंगा मैं 

ताई हसने लगी 

मैं- ताई तो वोट किसको देगी 

वो- और किसे दूंगी बिमला को दूंगी 

मैं मुस्कुरा दिया और घर की तरफ चल पड़ा पर ना जाने क्यों मेरे कदम थके थके से लग रहे थे , खैर घर आया तो मुझे याद आया की आज रात हॉस्पिटल में काटनी है क्योंकि मंजू और उसके भाई को मैंने ही मना कर दिया था जाने को , पिस्ता का ख्याल मन से उतर ही नहीं रहा था पर उसकी हर बात सही थी , मेरी मंजिल नहीं थी वो और उसको अपनी मंजिल बना लू उतनी मेरी औकात थी नहीं 


उस से ब्याह करने का मतलब था गाँव में आग लगा देना , गाँव की गाँव में कैसे कुछ हो सकता था और दूसरी तरफ नीनू भी तो थी जो इकरार कर गयी थी इस वादे के साथ की वो ही मेरी हमसफ़र है तो आखिर खूब सोचने के बाद मैंने खुद को तकदीर के हवाले कर दिया हमेशा की तरफ और रिलैक्स होके बैठ गया ,और कर भी तो क्या सकता था मैं दिल में एक विचार और तेजी से आता था की मम्मी को नीनू के बारे में बता दू क्या 

पर विचारो को हकीकत में लाने में बहुत वक़्त लगता है , शाम को हॉस्पिटल जाना था तो गाडी में पेटी लोड की दारु की और चल पड़े गाँव का राउंड लगाने , दारू बाँट कर आया तो बिमला के दर्शन हो गए तो उसे अनदेखा करके मैं घर के अन्दर जाने लगा तो उसने मुझे रोक लिया 


बिमला- बात करनी है 

मैं- चाचा से कर तू मेरी कौन लगे है 

वो- सुन ले ना 

मैं- कहा ना, मैं अजनबी लोगो से बात नहीं करता 

वो- मैं तेरी भाभी हु 

मैं- तो क्या नाचू 

वो- देख, मुझे हर हाल में चुनाव जीतना है 

मैं- तो जीत जा मैं क्या करू 

वो- तू मेरी बात को समझ, देख दादाजी भी सरपंच रहे, फिर मेरे ससुर फिर तुम्हारी मम्मी भी सरपंच बनी 

मैं- तो मैं क्या करू 

वो- मैं भी सरपंच बनना चाहती हु , मैं कुनबे की इस परम्परा को आगे ले जाना चाहती हु 

मैं- किस कुनबे की बात करती हो जिसे तुमने बर्बाद कर दिया 

वो- देखो उस बारे में हम सबको पता है की मुझसे ज्यादा दोषी कौन है 

मैं- हां मेरा दोष है तो फिर क्यों आई हो मेरे पास 

वो- क्योंकि गाँव के 80% यूथ के वोट तुम्हारे कण्ट्रोल में है जो तुम्हारे इशारे पर पड़ेंगे अगर ऐसा हो तो मैं गारंटी से जीत जाउंगी 

मैं- मुझे तुझसे कोई लेना देना नहीं है 

बिमला- पर चाचाजी ने मुझे खड़ा किया है 

मैं- तो उनसे वोट मांग , मैं नहीं चाहता की तू जीते 

बिमला- जीतूंगी तो मैं हर हाल में , अगर मैं हार गयी तो ठीक नहीं रहेगा 

मै- वो भी देख लूँगा तू अपना काम कर 

बिमला को जलती हुई छोड़ कर मैं घर में चला गया
-  - 
Reply
12-29-2018, 02:44 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
पर बिमला ने जिस अंदाज से ये बात कही थी मैं थोडा टेंशन में आ गया था वैसे तो अभी करीब बीस दिन पड़े थे चुनावों के पर कुछ तो खुराफात चल रही थी उस साली के दिमाग में पर अभी अपने को हॉस्पिटल जाना था तो खाना खाया काकी का खाना लिया और बिस्तर गाडी में पटका , और चल पड़ा सहर की और करीब आधे घंटे में मैं वहा पहुच गया काकी मुझे देख कर बोली- राहुल और मंजू नहीं आये 

मैं उनको खाने का डिब्बा देते हुए- वो मम्मी ने कहा की वो लगातार हॉस्पिटल में ही थे तो आज घर रुक जायेंगे नींद भी पूरी हो जाएगी और आराम भी मिलेगा 

काकी को जैसे मेरी बात पर विश्वाश हुआ ही नहीं 

मैं- काका कैसे है 

वो- दवाई दी है तो उसके असर से सोये है , दर्द सहन नहीं होता तो नींद की दवाई देते है अब १०-१२ घंटे आराम रहेगा

मैं- जल्दी ही ठीक हो जायेंगे 

वो- देखो 

फिर काकी ने खाना खाया मैं थोडा घुमने चला गया अब हॉस्पिटल में टाइम पास भी तो नहीं होता है कुछ देर बाद मैं आया तो काकी ने बिस्तर काका वाले कमरे में ही निचे साइड में बिछाया हुआ था 

वो- इधर ही सोते है 

मैं- कोई बात नहीं 

फिर कुछ देर बाद डॉक्टर देख कर गया , उसके जाने के बाद काकी ने दरवाजा बंद कर दिया और नाईट बल्ब जला दिया हम लेट गए काकी गाँव में वोटो की बात पूछने लगी कुछ देर बाद वो बोली सो जाते है , काकी ने करवट ली और सोने की कोशिश करने लगी मैं उनसे चिपक गया और पेट को सहलाने लगा तो वो बोली- क्या कर रहा है मरवाएगा क्या 

मैं- आपसे मिलने को तो मंजू को घर छोडके आया हु 

काकी- मैं तो पहले ही समझ गयी थी की तेरी ही खुराफात होगी 

मैं- तो करे कार्यवाही शुरू 

काकी- पागल है क्या इधर कैसे 

मैं- क्यों नही काका तो सुबह ही उठेंगे पर्दा खीच देता हु और फिर अभी कौन आएगा 

काकी-समझा कर 

मैं- चूत को मसलते हुए , आप समझा करो 

मैंने उठके काका के बेड का पर्दा खीच दिया और फिर काकी को अपनी बाहों में भर लिया काकी बोली- कही कोई आ ना जाये 

मैं- कोई नहीं आयेगा आप कपडे उतारो 

काकी- नहीं नंगी नहीं होउंगी, सलवार उतार ले 

मैं- ठीक है 

काकी ने अपनी सलवार और कच्छी उतार दी , मैंने भी पेंट को निचे खिसका लिया और अपने लंड को काकी के हाथो में दे दिया , 

काकी- बेशर्म कर दिया तूने मुझे 

मैं- तभी तो मजा आएगा 

काकी मेरे लंड को हिलाने लगी मैंने भी एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी हम दोनों एक दुसरे के अंगो से खेलने लगे काकी की चूत जल्दी ही पानी छोड़ने लगी तो मैंने उसकी टांगो को फैलाया और चूत को चखने लगा काकी की तो बोलती बंद हो गयी जब मेरी जीभ उसकी चूत पर चलने लगी , बड़ी मुश्किल से वो अपनी आहो को रोक पा रही थी उसकी चूत से मस्त खुशबू आ रही थी मैं नमकीन पानी को पूरी शिद्दत से चाट रहा था काकी के कुल्हे जल्दी ही ऊपर को हो गए वो मचलने लगी 

कुछ देर चूसने के बाद मैं हट गया और अपने लंड को चूत पर रगड़ने लगा काकी तो फुल गरम हुई पड़ी थी अपने हाथ में मेरे लंड को पकड़ कर वो अन्दर करने लगी तो मैंने पेल मारी और दो तीन धक्को में लंड को अन्दर तक सरका दिया काकी इस बार अपनी आह को नहीं रोक पायी और हमारे जिस्म एक होते चले गए काकी मेरे कान में फुसफुसाते हुए बोली- आराम आराम से करना जल्दबाजी मत दिखाना पूरी रात बस मेरे अन्दर ही रखना अपने हथियार को 

मैं- चिंता मत करो बस मेरे साथ बनी रहना 

काकी ने प्यार से मेरे होंठो पर चुम्बन दिया और मैं चुदाई करने लगा हौले हौले से उसकी काकी ने अपना सब कुछ मेरे लिए खोल दिया हुमच हुमच कर मेरा लंड काकी की चूत में अन्दर बाहर होने लगा चुदास इतनी सर चढ़ रही थी की क्या बताऊ , काकी ने अपनी टांगो को मेरी कमर पर लपेट दिया और मेरे चेहरे को चूमते हुए चुदने लगी मेरा जोश उसकी जवानी की रवानी बस और क्या चाहए था , ना वो कम थी ना मैं चूत की मुलायम पंखुड़िया मेरे लंड को अपने में कसे हुई थी 

मैं अपने मन में तुलना करने लगा की बेटी की चूत ज्यादा मस्त है या माँ की ,काकी के नितम्बो में थिरकन बढती जा रही थी मेरे गले में अपनी बाहों का हार डाले हुए काकी दीन दुनिया से बेखबर सम्भोग के सुख को प्राप्त करने की दिशा में पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध थी मैंने अब उसको पलट दिया और उसको औंधी करके चोदने लगा काकी ने अपने हाथो से चूतडो ओ चौड़ा कर लिया ताकि लंड को कोई रूकावट ना हो , चिकनी चूत में मस्ताना लंड पूरी रफ़्तार से अपना फ़र्ज़ निभा रहा था 

जब जब मेरी गोलिया काकी के नरम चूतडो पर रगड़ खाती तो मस्त अहसास होता काकी ने अब अपनी टांगो को कस लिया जिस से चूत पर रगड़ बड़ी मस्त लग रही थी , चुदाई के खेल में डिप्लोमा धारी काकी को इशारा देने की भी जरुरत नहीं थी , वो खुदबखुद ही समझ जाती थी की क्या करना है क्या नहीं , मैं काकी पर झुके हुए पुरे मजे से चूत मार रहा था काकी ने अपनी उंगलिया मेरी उंगलियों में फंसा ली थी और मेरी उंगलियों को दबाते हुए बता रही थी की मस्ती किस तरह उनके सर चढ़ रही थी 


मैं काकी की गर्दन के निचले हिस्से को चूमने लगा काकी अपनी गांड को उचकाने लगी थी जोर जोर से तो मैं भी तेजी से घर्षण करने लगा , और फिर काकी ने अपनी चूत को भींच लिया और कुछ देर वैसे ही रहने के बाद चूतडो को ढीला छोड़ दिया चूत में एकाएक गर्मी बहुत बढ़ गयी थी तो मेरा लंड भी ज्यादा देर सह नहीं पाया और काकी के झड़ने के कुछ मिनट बाद मेरा काम भी निपट गया , अपनी साँसों को संभालते हुए मैं काकी के साइड में लेट गया कुछ देर हमारे बीच ख़ामोशी छाई रही

अपनी साँसों को संभालते हुए मैं काकी के साइड में लेट गया कुछ देर हमारे बीच ख़ामोशी छाई रही 
काकी ने अपना हाथ मेरे पेट पर रख दिया और सहलाने लगी 

काकी- जान ही निकाल देता है तू तो 

मैं- मजा भी तो आप ही लेती हो 

काकी- हां, पर उम्र का तकाजा भी है अब मुझमे पहले वाली बात कहा रही 

मैं- अब इसमें उम्र कहा से आ गयी , आप तो आज भी नोजवानो का पानी चलते चलते निकाल दो 

काकी- सच में 

मैं उसके बोबो को सहलाते हुए- और नहीं तो क्या देखो, मैं खुद को रोक ही नहीं पाया देखो अभी अभी ली है और मेरा लंड फिर से तैयार है आपकी चूत में घमासान मचाने को 


काकी – ना बाबा ना, अब मुझमे इतनी हिम्मत नहीं है की दुबारा इसको झेल सकू वैसे भी मैं कहा जाने वाली हु जब फिर कभी मौका लगे तो कर लेना अभी तो सो जा 

मैं- काकी एक बार और कितनी देर लगनी है भला 

काकी- तू समझा कर , एक और राउंड होगा तो फिर सुबह मैं उठ नहीं पाऊँगी अब घर होता तो अलग बात थी 
मैं- चलो कोई नहीं 

फिर हम दोनों सो गए, रात को एक दो बार मेरी नींद उचटी पर कुछ ख़ास नहीं था सुबह मंजू और राहुल टाइम से आ गए थे तो मैं वहा से फिर गाँव आ गया , घर जा रहा था तो रस्ते में गीता मिल गयी 

गीता- सुन, अवंतिका ने जवाब भेजा है 

मैं- बताओ 

वो- तू जहा चाहेगा वो वहा मिलने के लिए तैयार है पर तू अकेला मिलेगा क्योंकि वो भी अकेली ही आ रही है और उसने ये जोर देकर कहा है की जो भी बात तुम्हारे बीच होगी वो बस तुम तक ही सीमित रहे 

मैं- पर वो मुझसे क्यों मिलना चाहती है 

ताई- एक बार मिल ले, कोई जाल नहीं है इस बात की मेरी गारंटी है 

मैं- आपने कह ही दिया तो मिल लूँगा 

ताई- बता फिर कब का बोलू 

मैं- एक काम करो कल शाम को सरकारी स्कूल में पर बस वो और मैं ही होने चाहिए 

ताई- उसकी टेंशन ना ले तू 

मैं- तो फिर ठीक है , पर आप कब मिलोगी दिल तडपा जा रहा है आपको नंगा देखने को 

ताई- जल्दी ही कोई मौका निकालती हु 

मैं- ठीक है पर जल्दी ही 

फिर मैं घर के लिए चल पड़ा पर एक सवाल था की अवंतिका क्यों मिलना चाहती है क्या वो मुझ पर फ़िदा हो गयी नहीं यार ऐसा नहीं होगा पर कोई ना जब मुलाकात होगी पता चल ही जाना है , 

घर जाके सबसे पहले तो मैं नहाया कई जोड़ी कपडे मैले पड़े थे तो उनको धोया इसी में काफी वक़्त चला गया कपडे धोके सुखा ही रहा था की मैंने देखा चाचा उसी छप्पर की तरफ जा रहा था जिसमे मैंने मंजू को चोदा था तो मेरे कान खड़े हो गए मैंने कपडे छोड़े और दबे पाँव उधर चल पड़ा , एक मोख्ली सी थी उसमे से मैं चुप के देखने लगा तो मैंने देखा की बिमला और चाचा एक दुसरे को चूम रहे थे 
-  - 
Reply
12-29-2018, 02:44 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
चाचा- ओह मेरी जान कितने दिन हुए तेरे हुस्न का दीदार किये हुए , तेरे बिना मैं कैसे जी रहा हु 

बिमला- मेरा हाल भी आपसे कहा अलग है , सख्ती बहुत है तो मैं क्या करू 

चाचा- अब देर मत कर जल्दी से मेरी प्यास बुझा दे 

उसके बाद दोनो एक दुसरे की बाहों में समाते चले गए तो मैंने सोचा इनको भी क्या देखना ये सुधरने वाले तो है नहीं मैं वापिस आके अपने कपडे सुखाने लगा , तभी मेरे मन में आया की मजे लेने चाहिए तो मैं उधर ही बैठ गया करीब बीस मिनट बाद बिमला पसीना पसीना होते हुए आई, तगड़ा पेला होगा चाचा ने 

मैं- कहा गयी थी 

वो- तुझसे मतलब कही भी जाऊ 

मैं- साली, गंडमरी , करवा आई ऐसी तैसी , तू क्या सोचती है की मुझे पता नहीं कहा मरवा के आई है 

बिमला- मेरी चूत, मेरी मर्ज़ी आएगी उसको दूंगी तेरे को दिक्कत है क्या 

मैं- मुझे क्या दिक्कत हो गी

बिमला- तो अपना मुह बंद रख और रास्ता छोड़ मेरा 

मैं- ले सारे इस रस्ते को गांड में दे ले 

बिमला- तू गांड का जोर लगा ले , मैं तो चाचा की हो चुकी 

मैं- माँ चुदा तू और माँ चुदाये चाचा मेरे लेखे आज मरो सालो तुम 

मैं और बिमला आपस में झीख रहे थे की चाची उस और आ निकली 

वो- क्या हो रहा है 

मैं- कुछ नहीं बस ऐसे ही 

चाची- अन्दर चलो अभी 

बिमला ने चाची से नजरे नहीं मिलायी और अपने घर चली गयी मैं और चाची अन्दर आ गए 

चाची- क्या हो रहा था 

मैं- बोला न कुछ नहीं 

वो- बता ना

मैं- ये गांड मरवा रही थी तुम्हारे आदमी से मैंने देख लिया तो उसके मजे ले रहा था 

चाची- सच में 

मैं- और नहीं तो क्या 

चाची- कहा 

तो मैंने पूरी बात उसको बता दी तो चाची दुखी हो गयी 

मैं- एक आप हो जो आंसू बहा रही हो दूसरी तरफ चाचा है जो फुल मजे ले रहा है 

चाची- तो क्या करू मैं 

मैं- तो कब तक ऐसे घुटती रहोगी, किसी को फरक नहीं पड़ना आप भी अपनी लाइफ को एन्जॉय करो और भी लोग है चाचा के सिवाय जो आपको चाहते है 

चाची- मेरी तरफ देखने लगी 

मैं- चाची, मेरी बात को समझो आप कब तक ऐसे रहोगी , मेरी बात को मान लो, मैं इस लिए नहीं बोल रहा की बस जिस्म का रिश्ता बनाना है आपसे, बल्कि फ़िक्र है आपकी आपको तो पता नहीं कैसा लगता है पर मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता आपको ऐसे पल पल तडपते हुए देख के , मैं बस ज़माने भर की खुशिया आपको देना चाहता हु 

चाची ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और बोली- सही कह रहा है तू आज से तू जैसा कहेगा मैं वैसे ही करुँगी , मैं क्यों अपनी लाइफ उस नीच इंसान के लिए बर्बाद करू 

मैंने चाची के होंठ चूम लिए और बोला- ये हुई ना बात 

चाची- पर मुझे थोडा सा टाइम दे तू 

मैं- कितना टाइम टाइम करती हो आप 

वो- समझा कर तू 

मैं- कोई बात नहीं चलो अभी मूड ख़राब मत करो 

हम बात कर रहे थे की बाहर दरवाजा खड़का तो चाची दरवाजा खोलने चली गयी
चाचा आया था उसने एक नजर हमारे ऊपर डाली और फिर अपने कमरे में चला गया चाची रसोई में चली गयी चाय बनाने के लिए , तभी मम्मी और गीता ताई भी आ गए 

मम्मी ने चाची को आवाज लगायी और कहा की जल्दी से तैयार हो जा , गाँव में चलना है वोट मांगने को तो चाची ने चाय छोडी और उनके साथ चली गयी और हम रह गए अकेले पर दिल को ये अंदेशा होने लगा था की अब चाची श्री जल्दी ही अपने हुस्न का जाम पिलाने वाली है , मैंने सोचा की पिस्ता को फोन करके पूछ लू अगर फ्री होगी तो मिल लूँगा तो मिलाया फ़ोन पर हर बार की तरह उसकी माँ ने ही फ़ोन उठाया साला समझ ही नहीं आता था की फ़ोन लगवा क्यों रखा है पिस्ता ने 

तो मैं अपने कमरे में चला गया नीनू की याद आने लगी बड़ी जोर से कमबख्त ये बोलके गयी थी की जल्दी ही फ़ोन करेगी पर फ़ोन तो क्या उसने लगा है की याद भी नहीं किया , एक हिचकी भी नहीं आई थी मुझे पर मेरा गुस्ताख दिल उसके चेहरे को आँखों के सामने ला रहा था , अब दिल पर किसका जोर चलता है , तो काबू किया खुद पर किसी तरह से अब घर पर भी कोई नहीं था तो मन लग रहा नहीं था तो मैं नहर की तरफ घूमने चला गया नहर के किनारे बैठना बड़ा अच्छा लगता था मुझे 

मैं बैठे बैठे सोचने लगा की घरवालो को मेरे और नीनू के बारे में बता ही देना चाहिए वो क्या है ना की साफ़ साफ़ बात हो तो फिर कोई पंगा नहीं होता , पर किसको बताऊ मम्मी को या फिर पिताजी को अब बाप से ऐसे बात करने की हिम्मत भी नहीं थी पर इस मामले में बात करनी ही थी आज नहीं तो कल अपना भी न थोडा अलग हिसाब था , तो एक बार फिर से सब तक़दीर पर छोड़ दिया और दिमाग इस बात पे लगाया की अवंतिका क्यों मिलना चाहती है क्या चल रहा होगा उसके मन में 

एक मेरी जान और ज़माने भर की परेशानिया कभी कभी तो सोचता था की ऊपर वाले ने लिखा क्या है तकदीर में 

बहुत देर तक मैं उधर ही रहा फिर वहा से मंदिर गया दोस्तों के साथ थोड़ी गप्पे लडाई कुछ प्रोग्राम फिक्स किये और फिर चल पड़ा घर की तरफ , पिताजी कुछ लोगो के साथ बैठक कर रहे थे तो मैंने उधर ध्यान नहीं दिया और कमरे में चला गया , चाची कपड़ो को प्रेस कर रही थी 

चाची- सुनो, कल हम मेरे गाँव चल रहे है 

मैं- क्यों क्या हुआ 

वो- मेरे मम्मी- पापा कुछ दिनों के लिए भाई भाभी के पास जा रहे है तो उनका फ़ोन आया था की मैं कुछ दिनों के लिया घर को संभाल लू 

मैं- पर कल कैसे ......

वो- कोई दिक्कत है क्या 

मैं- चाची, कल नहीं चल सकता परसों सुबह होते ही चलेंगे 

चाची- ठीक है , मैं पापा को परसों का बोल देती हु 

मैं- हां, 

अब कल कैसे जा सकता था कल तो अवंतिका से मिलना था मुझे अब मैं करू भी तो क्या उलझा पड़ा था मैं कदम कदम पर रात बस मैंने सोकर ही गुजारी सुबह होते ही मुझे हॉस्पिटल जाना पड़ा तो वहा से आते आते शाम ही हो गयी थी , मैंने घडी में टाइम देखा पांच से थोडा ऊपर हो गया था तो मैं तुरंत सरकारी स्कूल की तरफ भागा इधर उधुर देख कर मैं अन्दर घुस गया , एक बिल्डिंग , दूसरी फिर एक साइड में जो काफी पेड़ लगे हुए थे उधर मुझे अवंतिका खड़ी दिखी तो मैं दोड़ते हुए उसके पास गया 
-  - 
Reply
12-29-2018, 02:44 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
मैं- नमस्ते, भाभी जी 

वो- जी, नमस्ते 

मैं- वो ताई, बता रही थी आप मिलना चाहती है 

वो- हां, मैंने ही कहा था उस से 

मैं- तो कहिये, कैसे याद किया बंदा हाज़िर है 

वो- कुछ बात करनी थी तुमसे पर इधर नहीं चलो उस तरफ चलते है 

इधर और ज्यादा पेड़ लगे हुए थे तो हम एक पेड़ की साइड में खड़े हो गए 

वो- तुम तो जानते ही हो की तुम्हारी भाभी और मैं आमने सामने है सरपंची में 

मैं- जी 

वो- मैं ये चुनाव हर कीमत पर जीतना चाहती हु 

मैं – तो इसमें मैं क्या कर सकता हु भाभी जी , जीतेगा वो जिसे गाँव चाहेगा 

वो- देखो, हम अब जानते है की तुम्हारे घर में कई बार सरपंच रह चूका है , तो औरो को भी मौका मिलना चाहिए की नहीं 

मैं – बिलकुल मिलना चाहिए

वो- तो मुझे तुम्हारी मदद चाहिए 

मैं- मैं आपकी क्या मदद कर सकता हु 

वो- देखो , शायद तुम्हारे लिए थोडा अजीब लगेगा पर तुम्हारे परिवार का रसूख हमसे ज्यादा है गाँव में और यूथ में तुम्हारा प्रभाव है अगर तुम मेरी मदद करो तो मैं आराम से जीत जाउंगी 

मैं- तो आप कह रही है की मैं अपनी भाभी के वोट आपको डलवा दू , अपने परिवार से धोखा कर दू 

वो- कोई धोखा नहीं है , मैं तुम्हे इसके लिए मुह मांगी रकम दूंगी और फिर कोई चाह कर भी तुमपे शक भी नहीं कर पायेगा 

मैं- भाभी जी रकम का क्या करना अपने को अपन फक्कड़ आदमी , आप अपना नाम वापिस ले लो पैसे मैं आपको देता हु 

वो- देखो तुम समझ नही रहे हो मेरी बात 

मैं- आप समझा नहीं पा रहे है 

वो- देखो बात बस इतनी सी है की मैं सरपंच बनना चाहती हु बस एक बार, अगली बार हमारे सार वोट आपके ओपन में 

मैं- देखो भाभी , अगर बिमला हारेगी तो कुनबे का नाम ख़राब होगा 

वो- मुझे तो बस आपसे आस है वैसे भी उस रात आपने जिस अंदाज से मुझे देखा था मैं समझ गयी थी की आप ही मेरा संकट काटोगे 

मैं- भाभीजी, आप मेरी बात को समझो 

वो- आप मेरी बात समझो, देखो आप मुह मांगे पैसे ले लो पर इलेक्शन मैं जीतनी चाहू 

मैं- बात पैसो की नहीं है , मैंने पहले भी कहा आपको 

वो- तो क्या 

मैं- चलो मान लो बिमला हार जाये तो मुझे आप क्या दे सकते हो 

वो- मैंने कहा न की मुह मांगी रकम, आप चाहो तो आज रात ही रकम जहा आप कहे वही पंहुचा दूंगी 

मैं- आप को ऐसा क्यों लगता है की आप मुझे पैसे से डिगा दोगी 

वो- पैसे की हर किसी को जरुरत होती है 

मैं- पर मुझे नहीं है 

वो- तो क्या कर सकती हु मैं 

मैं- कर तो बहुत कुछ सकती हो पर आपसे होगा नहीं 

वो- क्यों नहीं होगा 

मैं- तो फिर सुनो , मैं आपकी मदद करूँगा जितने वोट मेरे पास है हर एक आपकी पर्ची पर पड़ेगा पर आप सोच लो क्या आप कीमत अदा कर पाएंगी 

वो- मैंने तो पहले ही बोला आप बताओ कितनी रकम 

मैं- मुझे पैसे चाहिए ही नहीं 

वो- तो क्या ख्वाहिश है आपकी 

मैं- अगर आप जीत जाओ तो एक रात आपकी मेरे नाम हो 

वो- होश में हो , जानते हो क्या मांग रहे हो 

मैं- सोचना है आपको 

वो-बहुत बड़ी कीमत मांग रहे हो 

मैं- अब इस गद्दारी की इतनी कीमत तो बनती है , वैसे भी मैं झूठ नहीं कहूँगा दिल आ गया है आप पर बाकि आपकी मर्ज़ी

भाभी- मुझे कुछ सोचने दो 

मैं- सोचना क्या या तो हां या ना 

वो- मुझे आपकी शर्त मंजूर है , आप भी क्या याद करोगे किस से पाला पड़ा था 

मैं- तो मेरा भी वादा है आपसे पर जीतने के बाद जिस दिन मैं कहू वो रात मेरे साथ गुजारनी होगी 

वो- पर मेरी भी एक शर्त है की उस रात की बात बस उस रात ही ख़तम हो जाएगी 

मैं- जैसा आप को ठीक लगे 

मैं- एक बात और भाभी 

वो- क्या 

मैं- जीतने के बाद इस करार से फिर तो नहीं जाओगी 

वो- एक मर्दानी ने करार किया है , पीछे नहीं हटूंगी बस सरपंची दिलवा दो मुझे 

मैंने अवंतिका को अपनी और खीचा और उसकी गांड को अपने हाथो से दबाते हुए बोला – भाभी तैयारिया शुरू कर दो उस रात की , मेरी साँसे उसके चेहरे पर पड़ने लगी थी वो कसमसाने लगी मैंने धीरे से उसके होंठो पर किस किया और बोला – मर्दानी का विश्वाश किया मैंने
-  - 
Reply
12-29-2018, 02:44 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
अवंतिका मुस्कुराते हुए चली गयी मेरी निगाह उसकी मटकती गांड पर रुक गयी थी जिसे वो कुछ ज्यादा ही मटका कर चल रही थी , अब देखने वाली बात ये थी की इस बात का आगे चल कर क्या प्रभाव पड़ना था , मैं दिल से नहीं चाहता था की बिमला चुनाव जीते पर साथ में मेरे इस कदम से कुनबे की प्रतिष्ठा पर भी आंच आनी थी अपने स्वार्थ के लिए मैंने परिवार की इज्जत को दांव पर लगा दिया था , दरअसल ये मैंने एक ऐसी आग को तीली लगा दी थी जिसमे आने वाले समय में सब जल जाना था सब बर्बाद हो जाना था और तड़पना था मुझे बस मुझे 

उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी ऐसा लग रहा था की जैसे कोई चोरी कर ली हो मैंने काम तो कुछ ऐसा ही कर दिया था अपने परिवार को नीचा दिखाने का , पर अब अवंतिका को जबान दे आया था तो सोचा अब जो होगा देखा जाएगा वैसे भी बिमला साली क्या करेगी सरपंच बन कर , पर पंगा इस बात का था की बाप से नजर कैसे मिलाऊंगा , दिमाग ख़राब होने लगा बुरी तरह से , मैं खुद के बारे में सोचने लगा क्या इज्जत थी मेरी एक चूत की प्यास में सब दांव पर लगा दिया था , क्या मेरा और बिमला का जो भी मैटर तथा वो परिवार से बड़ा था, शायद बड़ा था तभी तो मैंने ऐसा कर दिया था पर अब पीछे भी नहीं हट सकता था रात थी जैसे तैसे कट ही गयी सुबह हुई तैयार होकर मैं चाची के साथ उनके गाँव की तरफ चल पड़ा 


लम्बा सफ़र चाची के साथ हस्ते बोलते कैसे कट गया पता नहीं चला सांझ ढले हम उनके गाँव पहुचे आज मोसम भी बरसात का हो रहा था बादलो के कारण अँधेरा सा हो रहा था लग रहा था की तेज बरसात आएगी , नाना-नानी तो कल ही चले गए थे हमने पड़ोसियों से चाबी ली और ताला खोलकर अन्दर आये सामान रखा मैं हाथ मुह धोने चला गया , फिर फ्रेश होकर मैं और चाची बैठे हुए थे , चाची का खिला हुआ ताजा रूप बड़ा सुन्दर लग रहा था 

मैं- चाची कल दोपहर में नदी पर चलेंगे 

वो- तुझे बड़ी पड़ी है नदी की 

मैं- जो काम उस दिन अधुरा रह गया था वो भी तो पूरा करना है ना 

चाची- पगले, तुझे क्या लगता है तुझे यहाँ क्यों लायी हु, 

मैं- क्यों लायी हो 

वो- ताकि जी भर कर तुझसे प्यार कर सकू 

मैं- सची में 

वो- सच , आज से तू ही मेरा एकलोता हकदार होगा 

मैंने चाची को अपनी बाहों में भर लिया और बोला- चाची , आपने तो मेरा दिन बना दिया पर मेरी भी एक गुजारिश है 

वो- क्या 

मैं- की मैं आज आपको दुल्हन की तरह प्यार करना चाहता हु 

वो- मैं कुछ समझी नहीं 

मैं- मैं आपको आज अपनी दुल्हन बनाना चाहता हु 

वो- तो बनालो 

मैं – तो फिर तैयार हो जाओ सुहागरात मनाने के लिए 

चाची शर्मा गयी और बोली- ठीक है तुम इंतज़ार करो मैं दुल्हन की तरह ही श्रृंगार करके, उसी तरह से सजधज से आती हु पर उस से पहले खाना खा लेते है भूख लगी है मुझे 

मैं- ठीक है मेरी जान 

मैं जल्दी जल्दी खाना खाने लगा तो चाची बोली- आराम से खाओ मैं इधर ही हु 

पर आज मुझसे कहा कण्ट्रोल होने वाला था आज की रात को मैं यादगार बनाना चाहता था जब मेरी चाची मेरी दुल्हन बन कर मेरे साथ सुहागरात मनाएगी , खाने के बाद चाची बाथरूम में चली गयी , मैं छत पर चला गया मोसम ने करवट ले ली थी हलकी हलकी बूंदे गिरने लगी थी , मोसम भी आज रोमांटिक होकर हमारे काम में सहयोग कर रहा था करीब एक घंटे तक चाची बाथरूम में ही रही उफ्फ्फ यार आज कितना टाइम लगाएगी तैयार होने में 


तब तक मैंने कमरे में बिस्तर सही कर लिया था मुझसे तो रुका नही जा रहा था बस दिल कर रहा था आज अपना बना लू चाची को , मैं कमरे में बैठे बैठे चाची का इंतज़ार करने लगा पर वो भी देर करके मुझे तडपा रही थी पर जब वो आई तो कसम से दिल की धडकनों की रफ़्तार इतनी बढ़ गयी की कोई मीटर उसकी स्पीड को नाप नहीं पता , 

लाल साड़ी, लाल ब्लाउज में क्या खूब लग रही थी उनकी पर्वतो की तरह उठी हुई छातिया , , बलखाती कमर, गीले बाल जो खुले हुए थे क्या मदहोश करने वाली भीनि भीनी खुशबु आ रही थी उनके तन-बदन से मेरा लंड पेंट में झटके मारने लगा चाची के ऐसे रूप की तो मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी

वो- क्या देख रहे हो ऐसे घूर घूर के 

मैं- अपनी दुल्हन को निहार रहा था 

वो- कैसी लग रही हु 

मैं- एक दम मस्त, मेरा तो हाल बुरा हुआ अब मत तडपाओ मुझे मेरी जान समा जाओ मेरी बाहो में 
चाची ने शर्मा के अपनी नजरे निचे को झुका ली 

मैंने बड़े प्यार से उनके मुखड़े को ऊपर किया और गालो को चूम लिया चाची के बदन में सिरहन दौड़ गयी उनका बदन कांपने लगा 

मैंने चाची को अपनी बाहो में भर लिया और उनके तपते बदन को सहलाने लगा चाची ने अपने आपको मेरे हवाले कर दिया मेरा लंड तो बाहर आने को बुरी तरह से मचल रहा था , आज चाची के बदन में एक अलग सी गर्मी को मैं महसूश कर रहा था मैंने धीरे से उनकी साडी के पल्लू को हटाया तो 37 “ के पुष्ट उभार बिलकुल तने हुए जैसे की अभी ब्लाउज की कैद को तहस नहस कर डालेंगे, मेरी नजरो के सामने थे मुझे निमंत्रण दे रहे थे की आओ खेलो हमसे, मुझे अब रुकना नहीं था 

मैंने धीरे से अपने होंठो को चाची के लाल लिपस्टिक लगे होंठो पर रखा चाची का समूचा बदन सुलग उठा उस चुम्बन से मेरी बाहों में सिमटने लगी वो उनकी गरम साँसों में भाप को मैं अपने मुह में फील कर रहा था मेरे हाथ अपने आप निचे उनकी गांड तक पहुच गए और मैं चूतडो को दबाने लगा चाची ने खुद को एड़ी के बल उठा लिया और और समूच करने लगी बहुत देर तक हम दोनों एक दुसरे के होंठो को ही खाते रहे

मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे ढेर सारी मलाई मेरे मुह में भर गयी हो कितनी चिकने होंठ थे चाची के मैंने उनका हाथ अपने लंड पर रख दिया वो पेंट के ऊपर से ही उसको मसलने लगी मैंने ब्लाउज के बटन खोले और उसको उतार दिया , आज तो क़यामत ही हो जानी थी मुझ पर लाल ब्रा में कैद गोरे गोरे उभार मेरे जी को ललचा रहे थे उफ्फ्फ आज चाची अपने हुस्न के हथियार से मेरा शिकार करने वाली थी मैंने उनके उभारो को अपने हाथो में थामा और ब्रा के ऊपर से ही मसलने लगा 

चाची- सीईईई , ईईई आराम से मेरे राजा आराम से 

मैंने फिर ब्रा भी खोल दी और टूट पड़ा दोनों चूचियो पर बारी बारी से चूसने लगा उनको चाची कामाग्नि से वशीभूत होकर आहे भरने लगी मैंने दोनों उभारो को तब तक चूसा जब तक की वो दोनों बिलकुल लाल नहीं हो गए, कितनी गदर माल थी चाची आज जाना था मैंने , फिर मैंने उनकी साड़ी को उतरना शुरू किया फिर पेटीकोट को अब उनके जिस्म पर बस लाल चड्डी ही थी गोरी गोरी ठोस मांस से भरी हुई जांघे उसकी मैंने फिर जल्दी से अपने कपडे उतारे और नंगा हो गया मेरा लंड हवा में झूलने लगा चाची ने उसे अपनी मुट्ठी में भर लिया एक दो बार उसको हिलाया फिर मेरे पांवो में बैठ कर उसको चूसने लगी

चाची की लिपस्टिक मेरे लंड पर अपना रंग छोड़ने लगी मैं बड़ा ही कामुक हो रहा था चाची का पूरा मुह थूक से भरा हुआ था जिसे वो बड़ी अदा के साथ मेरे लंड पर टपका रही थी , बड़ी तल्लीनता से वो मेरे लंड को चूसे जा रही थी , अब मेरा पूरा लंड उनके मुह में था जैसे की उनके गले में ही उतर गया हो वो घु घु करते हुए बार बार उसको गले तक ले जा रही थी मैं उनके सर को सहलाते हुए बड़े प्यार से अपने लंड को चुसवा रहा था 

काफी देर तक लंड चूसने के बाद वो मुझसे अलग हो गयी उनकी आँखों में एक आग मैंने साफ़ साफ़ देखि 
मैंने चाची की कच्छी को उतार दिया और चाची के चूतडो को दबाने लगा चाची बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी उनकी पूरी योनी काम रस से चिप चिप कर रही थी चाची- ने अपनी टाँगे फैलाई और बोली- अब देर मत कर बहुत दिनों से प्यासी हु, आज मेरी प्यास बुझा दे, अब मुझसे कण्ट्रोल नहीं होता , 
-  - 
Reply
12-29-2018, 02:44 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
मैं तो खुद चाची को भोगने के लिए मरा जा रहा था तो मैंने बिना देर किये लंड को तैनात कर दिया उसकी चूत पर चाची की चूत फुदकने लगी लंड को महसूस करते ही , 

चाची- डाल दे इसको अन्दर , बना ले मुझे अपनी, लगा दे अपनी मोहर मुझ पर 

मैंने लंड को ठीक करते हुए धक्का लगादिया चाची की चूत खुलने लगी चाची ने आह भरी और अपने आप को मेरे हवाले कर दिया जल्दी ही मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चूका था , चाची- गया पूरा 

मैं-हां 

चाची- तो फिर हो जा शुरू , 

मैं- हां मेरी जान 

मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए चाची की गीली चूत में लंड फिसलने लगा , चाची की चूचिया मेरे हर धक्के पर ऊपर को हिल रही थी 

मैं- कैसा लग रहा है 

वो- मेरी छोड़ तू बता तुझे कैसा लग रहा है 

मैं- बहुत ही अच्छा लग रहा है , मेरी मुराद जो पूरी हो गयी है 

चाची- मैंने खुद को तेरे हवाले कर दिया आज से तुझे पति का दर्जा दिया मैंने 

मुझे उनकी बात सुनकर जोश आ गया और मैं अब तेज घस्से मारने लगा चाची का पूरा बदन मेरे धक्को से हिल रहा था चाची की चिकनी चूत में जाकर मेरा लंड आज जैसे स्वर्ग में ही पहुच गया था , मैं अब चाची पर पूरी तरह से छा चूका था मेरा मन मेरा लंड सब चाची का हो चूका था आज उनके गुलाबी होंठो को मैं एक पल के लिए भी नहीं छोड़ने वाला था आज उनका पूरा रस निचोड़ लेना था मुझे , अब चाची भी मस्ती में भरके निचे से धक्के लगा रही थी मैंने अपनी जीभ उनके दांतों पर रगड़ी तो चाची ने अपना मुह खोल दिया और मेरी जीभ उनकी जीभ से खेलने लगी 

चाची की चूत पर अब दे दनादन धक्के बरस रहे थे अरमान पूरी तरह से उफान पर थे , उनकी भारी भरकम छातिया मेरे सीने के निचे दबी हुई थी , चाची के हाथ मेरे चूतडो पर पहुच गए थे और वो उनको दबाते हुए और तेज चोदने का इशारा कर रही थी , चाची पता नहीं कितनी प्यासी थी उनकी चुदास हर पल बढती ही जा रही थी वो इतने जोश में आ चुकी थी की अब वो मेरे निचले होंठ को बुरी तरह से चूस रही थी मैं पसीने से भीगा हुआ चाची की चूत में घमासान मचाये होए थे , कामुकता की आग में धधकती चाची बिस्तर पर किसी जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी इस आस में की बाहर होती बरसात की तरह मेरा लंड रुपी बादल आज जी भर के उनकी चूत पर बरसेगा 

दो जिस्म बिस्तर पर मचल रहे थे , अपने आप को एक दुसरे में इस कदर समा लेना चाहते थे की फिर क़यामत तक अलग ना हो , चाची ने मुझे अब पूरी तरह अपने आगोश में जकड लिया था उनकी टाँगे मेरी टांगो में उलझी पड़ी थी जिस कारण धक्के लगाने में दिक्कत हो रही थी पर वो उत्तेजना की हर हद को आज पर कर रही थी चाची इस अनबुझी प्यास को बुझाने के लिए अपनी तरफ से भी पूरा जोर लगा कर मेरा सहयोग कर रही थी पल पल हम दोनों अब झड़ने के करीब आते जा रहे थे चाची की बेचैनी ये बता रही थी की वो अब पल दो पल की मेहमान है 

धधकती आहे, गरम साँसे सब फिर शिथिल पड़ता गया चाची ने अपने आप को मेरी बाहों में ढीला छोड़ दिया और शांत पड़ गयी जैसे जिस्म से जान छुट गयी हो पर चूत में बुरी तरह से लंड को कस लिया था अपने आप में तो मैं भी कहा कोई प्रतिरोध करता मेरे लंड से वीर्य निकल कर चाची की चूत में गिरने लगा हम दोनों शांत होते चले गए
तूफ़ान बिस्तर पर आकर गुजर गया था टूटे हुए पत्तो की तरह हम दोनों बिस्तर पर बिखरे हुए थे कुछ देर एक दुसरे की बाहों में लेटे रहने के बाद चाची उठी और बाहर जाने लगी तो मैंने उनके बदन पर लिपटी चादर को खींच लिया और वो नंगी हो गयी 

वो- छोड़ ना सुसु जाना है 

मैं- मैं भी चलता हु 

हम दोनों बाहर आ गए बरसात जैसे भी थमी ही थी गीली मिटटी की खुसबू आ रही थी चाची बैठ कर मूतने लगी सुर्र्र की आवाज मेरे कानो को बेधती चली गयी , तो मैं भी वाही खड़े हो के मूतने लगा मैंने देखा की चाची बड़े गौर से मेरे लंड की तरफ देख रही थी 

मैं- ऐसे क्या देख रही हो 

वो- हथियार दमदार है तुम्हारा 

- आप भी कम नहीं हो 

मैंने चाची की कमर में हाथ डाला और अपनी और खीच लिया और चाची की गांड को दबाने लगा ठंडी ठंडी हवा हमारे बदन में सिरहन पैदा कर रही थी मैं धीरे धीरे गांड को सहलाने लगा तो चाची ने भी मेरे लंड को थाम लिया और उसको हिलाने लगी जो आग थोड़ी देर पहले ही बुझी थी उसमे फिर से चिंगारी भड़कने लगी चाची बड़े प्यार से मेरी गोलियों को सहला रही थी जिस वजह से लंड फिर से उत्तेजित होने लगा था मैंने जैसे ही चाची के योनी प्रदेश को टटोला मुझे वहा पर गीलापन महसूस हुआ तो मैंने चाची को अपनी गोद में उठा लिया और पास रखे सोफे पर बिठा दिया 

ने खुदबखुद अपनी ठोस जांघो को फैला दिया जिस से उनकी लपलपाती हुई चूत फिर से मेरी हवस से भरी आँखों के सामने थे चूत को देखते ही मेरा लंड एक दम से खड़ा हो गया खून तेजी से उसकी नसों में दौरा करने लगा , मैं फर्श पर बैठा गया और चाची की चूत को निहारने लगा , चाची ने मेरे सर को अपनी जांघो के बीच झुका दिया चूत की मनमोहक खुशबू मेरी नाक में समाने लगी मैं अपने लंड को मुठियाते हुए चाची की चूत को चूसने लगा पल भर में ही चाची मस्त हो गयी थी उसने अपनी टांगो को अच्छे से फैला लिया था ताकि मेरी जीभ चूत के हर कोने पर पहुच सके 

चूत के अन्दर वाला लाल हिस्सा बुरी तरह से थर्रा रहा था मेरी जीभ की गुस्ताखी से जो नमकीन पानी रिस रहा था योनी से कुछ खट्टा सा कुछ खारा सा मुझे तो अब आदत हो चली थी नयी नयी चूत के पानी को चखने की मेरी जीभ सूपड सूपड करते हुए चाची की चूत की दरार पर रेंग रही थी आहिस्ता से चाची की टाँगे कांपने लगी थी चूत की पंखुड़िया कभी खुलती तो कभी बंद हो जाती चाची की चूत अब इतनी गरम हो गयी थी की मेरी जीभ जलने लगी थी पर मुझे चुसाई करने में मजा बड़ा रहा था 

चूत के छेद पर मैं अब तेजी से अपनी नुकीली जीभ को रगड़ रहा था तो चाची सोफे पर अपनी टांगो को पटकने लगी तभी मुझे ध्यान आया की उस दिन शान्ति मैडम ने शहद से अपनी गांड मरवाई थी तो मैं भी चाची की चूत को शहद से चूसता हु मैं उठ कर रसोई में गया और किस्मत से मुझे एक छोटी शीशी में शहद मिल गया मेरे हाथो में शहद देख कर चाची बुरी तरह से शर्मा गयी उनका पूरा चेहरा गुलाबी हो गया हाय रे अदाए इन औरतो को मर्दों के लंड को तडपना कोई इनसे सीखे चाची ने अपने चूतडो को आगे को सरका लिया 


मैंने शीशी खोलके ढेर सारा शाहद उनकी चूत पर और आस पास की जांघो पर अच्छे से उड़ेल दिया कुछ शहद उनकी चूत में गया कुछ गांड की दरार में , चाची की टांगो को ऊपर करवा के मैं लगा अब उनकी मीठी चूत को चाटने में तो चाची कसम से पागल ही हो उठी उनकी आहे इतनी तेज थी की क्या बताऊ


ओह्ह्ह्हह्ह मेरे याआर यीईईईई ये kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa क्यार डाला रे तूने उफ्फ्फफ्फ्फ़ ओह्ह्ह माआआआआआआआ siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii 

करते हुए वो अपनी चूत को गांड मटकाते हुए चटवाने लगी मेरी जीभ के कारण चूत और गीली होने लगी और मिलजुला स्वाद मुझे मिलने लगा , मैं उनकी जांघो को दांतों से काटने लगा वो और पागल होने लगी , उनका गदराया हुस्न मुझसे पनाह मांगने लगा पर आज बस खता ही होनी थी चूत को खूब चूसने के बाद मेरी जीभ फिसलते हुए चाची की गांड पर पहुच गयी और मैं शहद से सने हुए उसके गांड के गोल छेद पर जीभ रगड़ने लगा तो वो छेद फैलने लगा चाची का बदन अब मस्ती के मारे कांप रहा था 
-  - 
Reply
12-29-2018, 02:44 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
चाची मेरे बालो में अपनी उंगलिया चला रही थी मेरे सर को अपनी टांगो के बीच दबा रही थी एक हाथ से मैं अपने लंड को सहला रहा था जो बस फटने को तैयार खड़ा था चाची की गांड को चाटते चाटते मैं मैं उनकी चूत में ऊँगली करने लगा तो उन्होंने अपने बदन को सिकोड़ना शुरू कर दिया मेरी दो उंगलिया उनकी चूत में तेजी से बाहर हो रही थी और जीभ गांड को चाट रही थी चाची कभी मेरे सर को दबाये कभी अपने बोबो को मसले उतेजना में उल जुलूल हरकते करे चाची की चूत और गांड दोनों में थिरकन हो रही थी 


चाची अब कितनी देर सहती कभी चूत को भींचे कभी गांड को , मुझे उन्हें इस तरह से देखते हुए बड़ा अच्छा लग रहा था और मैं तेजी से अपने हाथ और जीभ चलाने लगा था मेरे इन प्रहारों को वो जायदा देर तक नहीं सह पायी और अजीब सी आवाजे करते हुए झड़ने लगी एक बार से मैं चूत के अमृत को पीने लगा

चाची झड़ कर सोफे पर ही पस्त हो गयी थी जबकि मेरे लंड को चूत की सख्त जरुरत थी तो मैंने चाची को सोफे पर ही घोड़ी बना दिया और लंड को चूत पर लगा दिया 

चाची – ठहर जा थोड़ी देर 

पर अब रुकना नामुमकिन था तो मैंने उनकी कमर को जकड़ा और धक्का लगाते हुए चूत में लंड को ठेल दिया 

चाची- आहह , रुक जा ना बिलकुल भी गीली नहीं है जलन हो रही है 

मैं- समझा करो अब नहीं रुक पाउँगा 

चाची- दर्द हो रहा है 

मैं- दर्द में ही मजा है मेरी जान 

मैं तेजी से लंड को अन्दर बाहर करने लगा , उनके मांसल चुतड हिलने लगे घस्सो की थाप से चाची की चौड़ी गांड देख कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था चाची घोड़ी बनी हुई चुद रही थी , मैं अपना हाथ उनकी टांगो के बीच ले गया और चूत के दाने को ऊँगली से सहलाने लगा तो चाची के बदन में हरकत होने लगी और वो गरम होने लगी उन्होंने अपनी जांघो को आपस में जोड़ लिया था तो चूत मारने में और मजा आने लगा था 


वो दर्द से परेशान हो रही थी पर मुझे इस समय बस खुद की पड़ी थी अपनी प्यास की पड़ी थी मैं तेज तेज धक्के लगा रहा था और दाने को भी सहला रहा था तो करीब तीन चार मिनट बात चाची की चूत का गीलापन बढ़ने लगा और वो चिप्चिपने लगी तो लंड को भी थोड़ी राहत मिली और चाची को भी , मैं उनको ऐसे चोद रहा था की जैसे आज के बाद वो मुझे देंगी ही नहीं , उनकी टाँगे मेरे झटको के कारण बुरी तरह से हिल रही थी पल पल मेरे लंड की ऐंठन और बढ़ रही थी आज चाची की चूत को पूरी तरह अपना बना लेने का इरादा था उसका 

चाची ने अपने सर को को सोफे के कुशन पर टिका लिया जिस से उनके चुतड और ऊपर को हो गए और मुझे बेहद आसानी होने लगी चाची को चोदने में चौड़े चौड़े कुलहो को कभी मैं सहलाता तो कभी उनपर चपत लगाते हुए चाची के यौवन रस को मैं पी रहा था पूरी उन्मुक्ता से , इस रस की बूँद को भी तरसता था मैं और आज तो साक्षात पूरी बोतल ही खुली पड़ी थी मेरे लिए शायद इस लिए ही मेरा लंड आज शांत होने का नाम नहीं ले रहा था चाची का हाल बुरा हुआ पड़ा था बडबडा रही थी वो कुछ कुछ 

पर मैं उनको चोदे जा रहा था , कुछ देर बाद मैं उनके ऊपर से उतरा चाची को पलटा और फिर से धक्कम पेल शुरू कर दी चाची की सिस्कारिया मेरे कानो में घुल रही थी वो तो जैसे आज बावली ही हो गयी थी धक्के पे धक्के , धक्के पे धक्के चूत के होंठ खुलते बंद होते खुलते बंद होते मेरा दिल आज बहुत खुश था , चाची ने अब अपनी आँखों को बंद कर लिया था और चुदाई का आनंद ले रही थी चूत से इतना पानी बह रहा था की मैं कटोरी भर सकता था , वो अपने लम्बे नाखुनो को मेरी पीठ पर रगड़ रही थी जैसे की छील देना चाहती हो मेरी पीठ को 

चाची की टाँगे एक दम सीढ़ी मेरे निचे दबी हुई थी मेरे ताबड़तोड़ धक्को को सहते हुए चाची स्वर्गिक आनंद को प्राप्त कर रही थी इधर मेरे बदन में भी उन्माद बढ़ता जा रहा था झड़ने का मीठा मीठा सा अहसास मुझे होने लगा था तो मैं अपनी पूरी जान लगाते हुए चाची की बजाने लगा चाची गहरी गहरी साँसे लेने लगी थी उन्होंने मुझे अपनी बाहों में बुरी तरह से कस लिया और मेरे होंठो को चूसने लगी 


हम दोनों एक दुसरे में समाये हुए कामसुख की तलाश कर रहे थे मेरे लंड में ऐंठन इतनी ज्यादा थी उस पल की मेरे लंड में दर्द होने लगा था पर जोश भी था तो लास्ट के ४-५ मिनट में तो बिस्तर में आग ही लग गयी थी हम दोनों एक दुसरे के दम को निकालने में जुटे हुए थे और फिर चाची ने मैदान छोड़ दिया , चूत एक दम से ढीली पड़ गयी चाची आहे भरते हुए मुझसे लिपट गयी मैंने दो चार घस्से और मारे और उन पर ही ढह गया मेरा काम भी तमाम हो गया था 

मैं सोफे से निचे गिर पड़ा और फर्श पर ही लेट गया मेरी धड़कन बढ़ गयी थी गला सुख गया था कुछ देर पड़े रहने के बाद मैं उठा और रसोई से पानी की बोतल लाया एक सांस में ही आधी पी गया मैंने चाची की तरफ देखा वो सोफे पर पस्त हुई पड़ी थी थोडा पानी उनको पिलाया और उनके पास ही बैठ गया चाची ने मेरी गोद में सर रखा और लेट गयी मैं उसके स्तनों पर पेट पर हाथ फिराने लगा 

मैं- मजा आया मेरी जान 

चाची- हद से ज्यादा 

मैं-अभी तो रात बाकी है बात बाकी है पूरी 

वो- मैं तो बुरी तरह से थक गयी हु 

मैं- आज तो अपनी सुहागरात है अभी से थक गयी 

चाची बुरी तरह से शर्मा गयी मेरा लंड उनके गाल को छु रहा था तो मैंने कहा चुसो ना इसे आपके मुह में जाने को बेताब हो रहा है 

चाची- क्या हो तुम अभी अभी तो करके हटे हो फिर से मस्ती सूझ रही है 

मैं- अब जब आप यु साथ है तो फिर मस्ती तो होगी ही ना 

चाची मेरी गोद से उठ गयी और बैठ की मेरे लंड से खेलने लगी , चाची के हाथो के कोमल अहसास से वो फिर से रोल में आने लगा , कुछ समय बाद चाची ने अपना मुह खोला और चूत रस से सने हुए लंड को पीने लगी उनके होंठो में सच में जादू ही लंड महाराज फिर से तैयार होने लगे चूत को पीटने के लिए , मैं उनके सर को अपने लंड पर दबाने लगा तो उन्होंने ऐसा करने से मना किया और बोली की मुझे अपनी मर्ज़ी से चूसने दे 

चाची मेरे सुपाडे पर अपनी जीभ को गोल गोल करके घुमाने लगी तो मेरे होश फाख्ता होने लगे उफ्फ्फ क्या बात थी उनके गरम लबो में मेरा लंड आज जल जाने को ही तैयार था कई देर तक उन्होंने अपने होंठो की प्यास बुझाई फिर चाची खड़ी हुई और अपनी चूत पर थूक लगा के मेरे लंड पर बैठ गयी घप्प से पूरा लंड चूत में समा गया और फिर चाची बिना किसी जल्दी के आराम से अपने कुलहो को हिलाने लगी एक बार फिर से हमारी चुदाई शुरू हो गयी थी 

चाची मेरी आँखों में आंखे डाले अपनी कुलहो को मेरे लंड पर उचका रही थी फिर उन्होंने मुझे सोफे पर और पीठ टिकाने को कहा तो मैं वैसे ही हो गया चाची अब मेरे ऊपर झुक गयी और मेरे सीने पर किस करने लगी जीभ फिराने लगी फिर उन्होंने मेरी छाती के निप्पल पर अपने होठ रख दिए एक गरमा गरम अहसास हुआ मुझे अब वो मेरी छाती को पिने लगी मैं तो मस्त गया बुरी तरह से चाची अपने दांतों से वहा पर निशान बनाने लगी तो मैंने भी उनके चूतडो से छेड़खानी करनी शुरू कर दिया और अपनी ऊँगली चाची की गांड में घुसा दी चाची ने अपने चूतडो को टाइट कर लिया और जोश में आ गयी 

इस बार हम बस इस तरह से कर रहे थे की कयामत की हद तक समा जाना चाहते थे एक दुसरे में मैं अपनी ऊँगली को बार बार घुमाता वो अपने चूतडो को भीचती और मेरे लंड पर और जोश में आके घस्से मारती मेरे बदन में जैसे सैकड़ो चींटी रेंगने लगी थी तो मैंने अब चाची को फिर से सोफे पर पटका और उनकी दोनों टांगो को कंधे पर रख कर लगा पेलने उनको चाची की चिकनी चूत में मेरा मस्ताना लंड एक बार फिर से चल पड़ा था अपना परचम लहराने को 

चाची भी मेरा पूरा साथ दे रही थी तो आधे घंटे पर जी भर कर पेला उनको जब मेरा होने वाला था तो वो बोली मुझे तुम्हारा रस पीना है तो मैंने अपने लंड को उनके मुह में दे दिया और चाची बड़े चाव से मेरे सफ़ेद रस को गटकने लगी
उस रात चाची की तीन बार लेने के बाद हम दोनों बुरी तरह से थक गए थे तो थकान के मारे आँख लग गयी जब होश आया तो मैंने खुद को बेड पर नंगा सोते हुए पाया पास में पड़े अपने कचछे को पहना घडी में देखा दोपहर के दो बज रहे थे मतलब खूब सोया था मैं बाहर आया तो देखा की बारिश अभी भी आ रही थी सावन के मोसम का यही तो मजा है कल पूरी रात और अब भी बरसात आ रही थी 

चाची में मुझे देखा और कहा फ्रेश हो जाओ मैं खाना लाती हु तुम्हारे लिए तो करीब आधे घंटे बाद हम दोनों खाना खा रहे थे , कल की चुदाई के बाद अब चाची के चेहरे पर एक शोखियत आ गयी थी चहकने सी लगी थी वो मैं रसोई में बर्तन रखने चला गया फिर पानी वानी पीकर आया तो मैंने देखा की चाची बस ब्रा-पेंटी में ही आँगन में नहा रही है तो मैं पास राखी कुर्सी पे बैठ के उनको देखने लगा 

बरसात में उनके बदन पर गीले अंडरगारमेंट बिलकुल चिपके हुए थे चाची की पेंटी से चूत का फुला हुआ उभार साफ़ दिख रहा था पेट पर पड़ती बारिश की बूंदे क्या गजब ढा रही थी मेरा लन्ड खड़ा हो गया तो मैं उसको सहलाने लगा अब चाची ने मुह दूसरी तरफ फेर लिया उनकी गांड का कटाव देख कर मुझे अब बर्दाश्त नहीं हुआ मैंने अपने कच्चे को उतारा और नंगा हो कर चल दिया उनकी तरफ 

चाची ने मुझे अपनी तरफ आते हुए देखा मुस्कुराने लगी , मैंने जाते ही अपनी दिलरुबा को अपनी बाहो में भर लिया और उनके रसीले होंटो पर गिरी बारिश की बूंदों को चाटने लगा चाची ने खुद में मेरे हवाले कर दिया और मेरे लंड को हाथ में लेते हुए किस करने लगी किस करते करते ही मेरे हाथ पीछे गए और मैंने ब्रा को खोल दिया चाची की मखमली छातिया मेरे सीने से टकरा ने लगे वो मेरे लंड को मुठीयाने लगी 

बरसात में भी जिस्मो की आग फिर से फड़कने लगी थी मैंने बिना कोई देर किये अपनी रानी को वाही पंजो के बल झुका दिया चाची ने अपने घुटनों पर हाथ रख लिए और तैयार हो गयी , मैंने लंड पर थोडा सा थूक लगा कर उसको चिकना किया और चाची की मस्तानी चूत से सटा दिया , गोरी गोरी जांघो में मध्य चाची की काले रंग की चूत क्या गजब लग रही थी मैंने अपना लंड चूत पर सटा या और चाची की बलखाती कमर को पकड़ते हुए लंड को अन्दर सरकाने लगा तो प्राणप्यारी चाची ने भी गांड को पीछे को किया ताकि मैं आराम से चूत में लंड को घुसा सकू 
-  - 
Reply
12-29-2018, 02:44 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
पहले झटके के साथ ही मेरा मोटा सुपाडा चाची की चूत में घुस गया मैंने कमर को पकड़ लिया और बरसते मेह में चुदाई का आनंद लेने को तैयार हो गया , दो तीन धक्को बाद अब मैं चाची को झुकाए हुए चोद रहा था बीच आँगन में आँगन कच्चा था तो हमारे पांवो पर कीचड लग रहा था पर तभी मुझे एक मस्त आईडिया आया आज की दोपहर को एक यादगार दोपहर बनाने को मैं जानता था की जितने भी दिन इधर रहना है तो चाची को हर पल भोगना है 

चाची कितनी गरम थी इस का अहसास इस बात से ही लगाया जा सकता है की ठंडी बरसात में भी उनका जिस्म किसी अंगारे की तरह दहक रहा था मैं चुचाप चाची की ले रहा था वो भी अपनी गांड को उचका उचका कर मेरा पूरा सहयोग कर रही थी उनकी सिस्कारिया मुझे पागल ही कर डालती थी कई देर तक झुकाए रखने के बाद वो उठ गयी और मेरी तरफ देखने लगी मैंने उनकी टांग को अपनी कमर पर रखा और खड़े खड़े ही उनको चोदने लगा चाची के गालो को खाते हुए 

मेरा लंड बार बार चाची की बचेदानी से टकरा रहा था अद्भुत आनंद से सरोबार चाची मेरी बाहों में झूल रही थी आःह्ह उफ्फ्फ्फ़ आआह्ह्ह्ह की आवाज उस बारिश में कही दब सी गयी थी कुछ चूत का रस कुछ बारिश का पानी मेरा लंड तो आज मस्त हो गया था पल पल उत्तेजना हम पर हावी होती जा रही थी चाची अपनी गांड हिलाने लगी थी तो मैं भी समझ रहा था और चाची को चरम की और ले जा रहा था , करीब आधे घंटे तक चोदने के बाद मैं चूत में ही झड गया .


कुछ देर बाद लंड चूत से बाहर आ गया चाची ने अपनी ब्रा और पेंटी उठाई और अन्दर जाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया 

वो- क्या 

मैं- अभी कहा चली अभी तो और नहाना है 

चाची- कही ठण्ड ना लग जाये 

मैं- इतनी गरम हो ठण्ड कैसे लगे गी 

आगन में मिटटी और कीचड सा हो गया था की मेरा पाँव रिपटा और मैं गिर गया सन गया उसमे तो चाची हंसने लगी तो मैंने उनको भी अपने ऊपर खीच लिया वो भी सन गयी असल में अब हम दोनों आँगन की कच्ची जमीं पर लेटे हुए भीग रहे थे मैंने चाची के होंठो पर किस किया और बोला- अब मुझे आपकी पिछली वाली में डालना है 

चाची- नहीं उधर नहीं बहुत तकलीफ होती है उधर 

मैं- क्या अब मुझे इतना हक़ भी नहीं की अपनी पत्नी को अपनी मर्ज़ी इ चोद सकू 

वो- मैं तो तुम्हारी हो हो गयी हु पर फिर कभी कर लेना उधर 

मैं- नहीं अभी , चलो मान भी जाओ जा देखो अपने दीवाने को तडपाना अच्छी बात नहीं 
तो चाची मान गयी पर मैं इस पल का आनन्द खूब उठाना चाहता था तो मैंने वाही चाची को उस बारिश के पानी में रगड़ने लगा हम दोनों कीचड में सने हुए थे ऊपर से घनघोर बरसात एक अलग सा ही मजा आ रहा था मैंने वाही चाची को औंधा किया और अपने लंड को गांड के छेद में सरकने लगा , शरू में चाची को थोडा दर्द हो रहा था पर इतना नहीं क्योंकि पहले भी वो गांड मरवा चुकी थी चाचा से 

तो मुझे और उन्हें दोनों को कुछ खास दिक्कत नहीं हुई थी , जब जब लंड गांड में घिसता तो चाची बार बार अपने चुतड भींच लेती थी तो बहुत मजा आ रहा था चाची की चूचिया मिटटी में सनी हुई थी बाल गीले पर बिखरे हुए, उनके नरम चूतडो से टकराते मेरे अंडकोष दबा दब गांड मारी जा रही थी चाची की मस्ती भरी आहे , दरअसल वो इस कदर मस्ता गयी थी की वो चिल्ला रही थी मस्ती में 

अब चाची मेरे ऊपर आ गयी और मेरी जांघो पर बैठ कर गांड में लंड लेने लगी आह आह करते हुए वो अपनी गांड मरवा रही थी जब जब वो ऊपर निचे होती तो मेरी नजर उनकी चूत पर पड़ती जिसकी पंखुड़िया आपस में कसी हुई थी , चाची की गांड में बहुत गर्मी थी जिसे मेरा लंड ज्यादा देर नहीं सह पाया और मैंने अपना गरम लावा चाची की गांड में ही भर दिया

फिर हम लोग अन्दर बाथरूम में आये और खूब मल मल कर नहाये , शाम हो रही थी बारिश भी ढल गयी थी चाची ने कुछ पकौड़े और चाय बनायीं तो बाते करते हुए हम उनका स्वाद लेते रहे , बारिश के कारण सब गीला गीला हुआ पड़ा था कही घुमने भी नहीं जा सकते थे तो बस घर पर ही रहना था , पर उस रात फिर चाची ने मुझे नहीं दी क्योंकि वो थकी हुई भी थी और चूत पर थोडा सा सुजन भी था अगले दिन मौसम कुछ ठीक था तो हम पास के शहर गए घुमने को

शहर कोई बीस किलोमीटर होगा चाची के गाँव से , चाची ने आज एक गहरे नीले रंग की साडी पहनी हुई थी जिसमे वो फुल पटाखा लग रही थी मेरी निगाह तो उसकी गोल गांड से हट ही नहीं रही थी हम शहर पहुचे कुछ खाया पिया तो चाची बोली- चल फिलम देखते है 

मैं- ठीक है 

हम जिस मौल में खाने गए थे उसी में पिक्चर हाल भी था मैंने दो टिकेट ली और हम अपनी स्क्रीन वाले रस्ते पर आ गए टिकेट चेकर ने बताया की ऊपर लास्ट रो में कार्नर की टिकेट है तो हम लोग उधर ही बैठ गए फिर्ल्म शुरू हो गयी पर हॉल में इतनी भीढ़ नहीं थी जितनी होनी चाहिए हम फिलम का लुत्फ़ उठा रहे थे की तभी मेरी नजर हमसे कुछ सीट निचे पर पड़ी तो मैंने देखा की एक लड़का और लड़की उधर चूमा-चाटी में लगे है फिर वो लड़की उस लड़के की गोद में झुक गयी तो मैं समझ गया की वो उसका लंड चूस रही है 
मैंने चाची को द्रश्य दिखाया तो वो हसने लगी , पर मेरा लंड खड़ा हो गया था मैंने अपनी पेंट की चैन खोली और चाची के हाथ में लंड को दे दिया 

चाची- ये क्या कर रहे हो 

मैं- कुछ नहीं मेरी जान 

वो- रखो इसे वापिस 

मैं- देखो वो भी तो कर रहे है और इधर इतनी पब्लिक भी नहीं है ऊपर वाली सीट्स पर तो बस अपन ही है तो थोड़ी मस्ती हो जाये वैसे भी हम जैसे लोगो को इधर कहा मजा करने का मौका मिलता है 

थोड़ी ना नुकुर करने के बाद चाची मान गयी और उन्होंने खुद को सीट पर झुका लिया और मेरे लंड को आहिस्ता से चूसने लगी मेरी नजरे परख रही थी की किसी का भी ध्यान तो हम पर नहीं है पर ऊपर की लास्ट सीट्स का पूरा फायदा हमे मिल रहा था , जल्दी ही मेरा पूरा लंड चाची के मुह में था जिसे वो जल्दी जल्दी चूस रही थी मुझे झाड़ने के लिए इसी लिए मेरी बेकरारी बढती जा रही थी 

चाची बहुत तेजी से मेरे लंड को चूस रही थी मैं उनके बोबो को ब्लाउज के ऊपर से ही मसल रहा था करीब दस मिनट तक उन्होंने खूब चूसा मेरे लंड को तब जाके मेरा स्खलन हुआ और चाची ने मेरे पुरे रस को पी लिया एक बूँद भी नहीं छोड़ी , फिर उन्होंने अपने चेहरे को सही किया और बैठ गयी मैंने अपना हाथ उनकी जांघ पर रख दिया और सहलाने लगा 

मैं- चाची इधर दोगी 

वो- बावला हुआ है क्या 

मैं- गोद में बैठ के चुद लेना 

वो- नहीं बोला न 

मैं- कभी तो दिल दार बनो मेरी जान 

चाची- तू बहुत बेशरम है , इधर कोई देखेगा तो क्या सोचेगा चूस तो दिया तेरा अभी सब्र कर घर जाते ही जैसे मर्ज़ी ले लेना 

- देखो चाची वो लड़की भी तो उस लड़के की गोद में बैठी है अभी आपने चूसा तो किसी ने देखा आपको बस पेंटी को उतार लो और बैठ जाओ 

चाची- तू नहीं मानेगा 

मैं- नहीं 

चाची- हां पर जल्दी ही कर लेना 

मैं- ठीक है 
-  - 
Reply

12-29-2018, 02:45 PM,
RE: Raj sharma stories चूतो का मेला
चाची ने अपनी कच्छी को उतार कर साइड वाली सीट पर रखा और फिर चुपके से मेरे लंड पर बैठ गयी मेरी गोद में और ऊपर निचे होने लगी अब किसे फिल्म का ध्यान था बस चूत मारनी थी अपनी प्यारी चाची की थोड़ी देर बाद वो भी जोश में आ गयी और तेजी कूदने लगी अब घर तो था नहीं तो बस ऐसे ही चुदाई कर सकते थे हम लोग पर जूनून भी कुछ होता है चाची अब अगली सीट पकड़ कर थोडा सा झुक सी गयी ताकि मैं फुल स्पीड में उनको चोद सकू , चाची अपने होंठो को दांतों में दबाते हुए अपनी आहो को रोकने का प्रयास कर रही थी मैं जानता था की अब इंटरवेल होने वाला है तो मैं तेजी से चोदने लगा और जैसे ही इंटरवेल की लाइट्स जली मैंने अपना पानी चूत में छोड़ दिया , घबरायी चाची जल्दी से अपनी सीट पर बैठ गयी 

मैं बाहर गया कुछ खाने के लिए ले आया फिर उन्होंने मुझे कुछ शरारत नहीं करने दी बस चुपचाप फिल्म ही देखते रहे उसके बाद हमने कुछ घरेलु सामान ख़रीदा चाची ने अपने लिए कुछ कपडे ख़रीदे और कुछ मुझे भी दिलवाए इन सब में शाम हो गयी थी मोसम एक बार फिर से अपना रुख बदलने लगा था तो हम तेजी से उस तरफ चले जहा गाँव की जीप लगती थी 

पर वहा जाकर पता चला की लास्ट जीप जस्ट अभी निकली है कोई दो मिनट पहले ही , अब हम क्या करे कुछ देर इंतज़ार करते रहे तभी किसी ने चाची को आवाज दी तो मैंने देखा एक महिला है स्कूटी पे , तो पता चला की चाची के पड़ोस में ही रहती है और एक अध्यापिका है मैंने नमस्ते वगैरा की कुछ बातो के बाद उसने कहा की मेरी स्कूटी पे चलो अब हमे तो जाना ही था तो चाची ने मुझे मुझे कहा की बेटा तू चला क्योंकि तीन सवारिय जो थी 

मेरे पीछे पड़ोसन बैठी फिर चाची और हम चल पड़े गाँव की और शहर से कुछ बाहर आते ही बरसात शुरू हो गयी हलकी हलकी मैंने रुकने को बोला पर वो आंटी ने कहा की घर तो जाना ही है तेज बारिश आएगी तब देखेंगे तो हम चल पड़े गाँव को बरसात का लुत्फ़ उठाते हुए

पड़ोसन की छातिया मेरी पीठ पर चुभ रही थी ऊपर से जब कभी रास्ता ख़राब होता तो मुझे ब्रेक मारने पड़ते तो तीन सवारी होने के कारण वो मुझ पर अपना पूरा भार डाल रही थी ऊपर से वो बारिश की बूंदे मेरा मन फिर से मचलने लगा था , बरसात के कारण रोड पर कुछ फिसलन सी हो रही थी तो गाँव आने में थोडा समय फ़ालतू लग गया, गाँव में घुसे ही थे की बरसात एकाएक तेज हो गयी अब भीगे हुए तो थे ही और भीग गए घर आये मैं स्कूटी से उतरा मेरे पीछे वो लोग भी उतर गए अब मैंने गौर से मास्टरनी को देखा उसकी कुर्ती गीली होकर उसके बदन से चिपकी पड़ी थी ब्रा में कैद उसकी चूचियो का कटाव बड़ा सेक्सी लग रहा था मेरा तो लंड खड़ा हो गया उधर ही 

फिर चाची ने उसको धन्यावाद कहा , मास्टरनी ने कहा वो बाद में मिलने आएगी फिर वो अपने घर में घुस गयी और हम अपने घर में पर मेरा दिल उस पर अटक गया था उस पर पर कैसे चोदु उसको अब चूत कोई हाथ पर तो रखी नहीं होती , कुछ जुगाड़ करना पड़ेगा घर जाते ही हमने सबसे पहले गीले कपड़ो को चेंज किया फिर चाची चाय बना लायी , चाय पीते पीट हम लोग बाते करने लगे 

मैं- चाची , आज मजा आया 

वो- मजा तो ठीक पर तुझे मेरी इज्जत की बिलकूल परवाह नहीं है 

मैं- चाची ऐसे मौको पर जब भी चांस मिले मजा लेने का तो एन्जॉय कर लेना चाहिए सच बताओ चुदने में मजा आया की नहीं 

वो- चुदने में तो हमेशा ही मजा आता है मेरे प्यारे 

मैं- तो आओ एक राउंड और खेलते है 

वो- नहीं अब तो रात को ही वो भी बस एक बार 

मैं- चाची बुरा ना मानो तो एक बात कहू 

वो- क्या 

मैं- ये जो मास्टरनी हैं ना इसकी चूत मारनी है मुझे 

चाचि- हाय राम , कैसी बाते करता है , क्या मेरे से जी भर गया तेरा 

मैं- अप तो सदाबहार हो , पर मेरे लंड में आग लग गयी है मास्टरनी को देख के आपकी तोदोस्त है जुगाड़ करवा दो 

वो- मैं कैसे करवा सकती हु 

मैं- चाची , एक बार दिलवा को ना उसकी 

चाची- देख मैं पक्का तो नहीं कह सकती पर हां कोशिश कर सकती हु , उसका पति ना फौज में है कई कई दिन में आता है तो अब चूत में तो सबी को खुजली मचती है , क्या पता तैयार हो जाये पर अभी मैं कुछ नहीं कह सकती 

उस रात को मैंने चाची को दो बार चोदा पर मेंरे ख्यालो में वो पड़ोसन ही थी , अब कुछ भी करके मास्टरनी को तो चोदना ही था सुबह नहा धोके मैं तैयार था आज मेरा विचार था की नदी पर जाया जाए कुछ मछलिया पकड़ लू और चाची को जब उधर नहीं चोद पाया था तो अब पानी में ही पेलूँगा , वैसे भी आज मोसम भी चकाचक था एक दम से कम से कम उस टाइम तो ऐसा ही था तो मैंने चाची को अपना प्लान बताया तो वो तैयार हो गए, हम लोग घर से निकल ही रहे थे की पड़ोसन आ गयी 

तो हम लोग वापिस अन्दर आ गए और बात करने लगे 

चाची- और सुमन क्या हाल चाल तेरे 

सुमन- बस कट रही है घर से स्कूल , स्कूल से घर तू बता 

चाची- मेरा तो तुझे पता है ही 


सुमन- मेरा हाल भी तेरे जैसे ही है आजकल 

चाचि- वो कैसे, 

सुमन- अरे क्या बताऊ यार, तुम्हारे भैया का तो पता ही है तुम्हे कई कई दिनों में आना होता है , ऊपर से सास ससुर भी आजकल छोटे वाले के पास है तो बस अकेलापन कुछ ज्यादा हो गया है 

चाची- वो तो है ही , तू फ़ालतू में नोकरी के चक्कर में पड़ी है छोड़ इसको और भैया के साथ रह बाहर 

सुमन-मैं तो कई बार बोल चुकी हु पर वो माने तब न ये लड़का कौन है 

चाची- मेरा भतीजा है , जेठानी का लड़का 

सुमन- काफी बड़ा हो गया है 

चाची- हां 

चाची ने मुझे इशारा किया तो मैं वहा से उठ के चला गया और दरवाजे की साइड से उनकी बाते सुनने लगा 
उनकी बाते सुनके पता चला की वो काफी पक्की सहेलिया है 

चाची कुछ देर ऐसे ही बाते घुमाती रही फिर बोली- तो सुमन, तेरा काम कैसे चलता है 

सुमन- कौन सा काम 

चाची- अरे वो रात वाला 

तो सुमन थोडा सा शरमा गयी और बोली- कैसा चलना है जब ये आते है तब तो मौज रहती है दिन में तीन चार बार पिलाई हो जाती है पर जब नहीं होते तो परेशानी होती है कभी ऊँगली तो कभी मोमबत्ती का ही सहारा लेना पड़ता है

चाची- तू पटाखा औरत है लाइन दे दे किसी को 

सुमन- अरे नहीं यार, इधर का माहौल तो तुझे पता ही हैं , कई बार मन तो करता है की सेटिंग कर लू किसीसे पर रिस्क है यार बदनामी का पंगा तो रहता ही है , चल मेरी छोड़ तू बता तेरा क्या चल रहा है 
चाची- तुझे तो पता ही है की मैं तलाक ले रही हु , तो बस वो ही है 

वो- तो तू भी मेरी तरह आजकल उंगलियों पर ही जी रही है 

चाची- छोड़ ना इन बातो को , अब जो है वो है हम लोग नदी पर जा रहे है तू भी चल मेरा मन भी लगा रहेगा 

तो सुमन भी तैयार हो गयी मैं समझ गया था की चाची जल्दी ही इसको तैयार कर देंगी ऐसा मेरा दिल कह रहा था हमने कुछ सामान लिया और नदी की तरफ चल पड़े , इस बार हम लोग चाची के बाग़ की तरफ से ना होकर एक नए रस्ते से गए थे दरसल ये रास्ता बाग़ के पीछे वाले किनारे पर ना जाकर और दूसरी तरफ जंगल की गहराइयों में जाता था करीब आधे पौने घंटे बाद हम लोग उधर पहुच गए इस तरह जंगल खूब गहरा था दूर दूर तक बस शांति ही पसरी पड़ी थी 

नदी किनारे के पेड़ निचे हमने अपना सामान रखा और बाते करने लगे 

मैं-चाची इस तरफ क्यों आये है 

चाची- अब सुमन की नहीं लेनी क्या तुझे तो इधर मौका बनाते है तू एक काम कर पानी में जाके नहा हम लोग आते है कुछ देर में
-  - 
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Star Incest Kahani उस प्यार की तलाश में 84 163,500 14 minutes ago
Last Post:
  स्कूल में मस्ती-२ सेक्स कहानियाँ 1 8,530 Yesterday, 02:37 PM
Last Post:
Star Rishton May chudai परिवार में चुदाई की गाथा 18 41,118 Yesterday, 02:19 PM
Last Post:
Star Chodan Kahani रिक्शेवाले सब कमीने 15 62,993 Yesterday, 02:16 PM
Last Post:
  पड़ोस वाले अंकल ने मेरे सामने मेरी कुवारी 3 37,070 Yesterday, 02:14 PM
Last Post:
  पारिवारिक चुदाई की कहानी 20 174,571 Yesterday, 02:06 PM
Last Post:
Lightbulb Hindi Chudai Kahani मेरी चालू बीवी 204 15,430 08-08-2020, 02:00 PM
Last Post:
Thumbs Up Hindi Porn Story द मैजिक मिरर 89 163,453 08-08-2020, 07:12 AM
Last Post:
Star Hindi Porn Stories हाय रे ज़ालिम 931 2,468,484 08-07-2020, 12:49 PM
Last Post:
Star Maa Sex Kahani माँ का मायका 33 130,189 08-05-2020, 12:06 AM
Last Post:



Users browsing this thread: 2 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.


ek haseena ki majboori full sex stprydevarji aap idar aao mera dood pilona saxबीबी को चोदा boos me rolaya15sex bacche ko sex hdलङ जोर शे मराया हैwww sexbaba net Thread maa sex kahani E0 A4 AE E0 A4 BE E0 A4 81 E0 A4 AC E0 A5 87 E0 A4 9F E0 A4 BEदेसी पापा कॉम हिंदी मूवी क्सक्सक्स ससीयwww.लडकी ने चोदवाई घोडा से बिता हूवा बात bahean me cuddi sexbaba.netxxx com अँग्रेजी आदमी 2 की गङxxxxxxxxxx.bquobhरिया काXxxRadhika thongi baba sex videoअनजान लडकि ने लँड चुसाhindesexestorenewअपने मामा की लडकी की गांड मारना जबरजशतीबुर मे लँड डाल के गपा गप बुर मे पेला पेली करना हैSlwar Wale muslim techer ki gand xxx पोरगी लावायची Xnxxxx coching me vhudaiचुत मे चुत रगरती Bbw xnxx.com.TanyaSharma nude fakekhani kamukta thakurain ke karnameदेसी सेक्सी लुगाई किस तरह चुदाई के लिए इंतजार करती है अपने पति का और फिर केस चुदवाती हैSexkhanidesibahuchudaibohuकजरी की चुदाई कहानी sexy story Choti.sali.ko.chut.ka.pat.pdaya.ak.khaniSunsan raste me ak ledij Ko choda sexy storiesek ladeke ne ladeki ko bulaker buri tarah se cudayi kiwicklund behan ke sath Ek bhai ne balatkar Hindi sex videoMajboor jnani di fuddi maariJyoti ki chut Mar Mar kar Khoon nikal Diye seal todi sexy video xx comalisha panwar naked nude photos sex Babamadhu aunty chudwati huisex videos/Thread-sex-kahani-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80?pid=51289khet me ammiki cudaiki kahaninude porinita chopra sexbaba.comshriyasaran xxxbaba.co.inMeri pyas kaise jagi.rAjsrmA.COMrukmini actress nude nagi picSexbaba. Net of amisha Patel madmast jawaani storiesgaon me pariwaar ki chudai sexbabaladkiyo ke boobs pichkne ka vidio dikhayenude anushka shetty hd image sexy babawww.maa-muslims-ke-rakhail.comझवून टाक मला फाड बेहनचोदसानिका Xxx कहानीवारिस के चकर में भाई से चुदवाया xxx Indian duwnlodxxxmptiriराज शर्मा चुतो का समंदरkab Jari xxxbp Nagi raand sexysiman rokkar adhik samy srx karnahaiXXX videos andhe bankar Kiya chuddai Hindi meghaghre me guskar khade khade chut chati sex storyknware chacha ne meri chut fadi sex story in hindireal didi ki lambi jhhat vdosgand bhai sex pagehamara choto sa parivar by sex babaIndian chut chatahua videoबलि चुत बलि योनि वालि बडे फुल साईज वालि फुल नगा विडियो फोटु देनाBegamki.hindi.bf.videsnazar serial actress sex baba nangi photosaantra vasana sex baba .comlalchi husband yum sex storytanya ravichandran fuckingimageSexbaba भस्मववव हिंदी सेक्स खनिअ टीवी सीरियल एक्ट्रेसधोबन ओर ऊसका बेटा चावट कथाmaa sexbabadevarji aap idar aao mera dood pilona saxtelugu kotha sexstoresದುಂಡು ಮೊಲೆDoctor bhai bahan ki bekabu bhavnaye hindi sexstoryjaffareddy0863लडकि कि टोलेट वाली जगह पर लडके कैसे चाटते हे बताईएwww.kabadi.vale.ne.meri.cut.ka.bajabajaya.sex.kahaniबुलू नँगी गँदी चटा चुची वाली कुछ नये तरीके की तस्वीरेsex stories mami ne lund ki bhik maginagepehrdekaumadhvi ki nangi nahati sex story tarrakkhet par le jakargand mariJanhvi Kapoor ki sexbabaanjane me boobs dabaye kahanido ourt aksath mote landse gandi sex kthaChuche pilne wali bhabhi xxx videosrecording BF bolo Kamar Mein dhaaga bandhkar chudwati Hai Dehati gaon kabhabhi ko nanga kr uski chut m candle ghusai antervasnayoni finger chut sex vidio aanty saree vidiobolti kahani.comporn hd ma ka lvdaHema Malini and Her Servant Ramusex storypejnut me chhodai xxx video