Porn Sex Kahani पापी परिवार
10-03-2018, 04:17 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
"आह मोम !! आप को मुझे नंगा देखना अच्छा लगता है ना तो अब आप जब चाहो मुझे अपने हाथो से नंगा कर सकती हो. मुझे कभी कोई आपत्ति नही होगी" निकुंज अपने हाथ को अपनी मा के मुलायम गाल पर रख कर उसे थपथपाया और महसूस करता है कि उसकी मा के मूँह को उसके लंड की मोटाई ने पूरा भर दिया है "कहीं मा को तक़लीफ़ तो नही हो रही मेरे लंड से" जाने कैसे उसके मन में यह बात आ जाती और वा फॉरन अपना लंड अपनी मा के मूँह से बाहर खींच लेता है.


निकुंज की इस क्रिया से कम्मो सन्न रह गयी और अपनी आँखों की भावों को ऊपर-नीचे हिला कर उससे इस बात का कारण पूछती है. शायद अपने शब्दो का इस्तेमाल वह अपनी निर्लज्जता छुपाने के लिए नही कर पा रही थी.


"मैं जानता हूँ मोम !! आप को इसे चूसने में दर्द महसूस हो रहा है और मैं आप को इस हालत में नही देख सकता" इतना कह कर निकुंज अपने कदम वॉर्डरोब की तरफ बढ़ने लगता है मगर उसकी मा उसका हाथ पकड़ कर उसे उस ओर जाने से रोक लेती है.


"निकुंज" कम्मो ने अपना थूक निगल कर कहा जिस में उसे स्वयं की लार से कहीं ज़्यादा स्वाद अपने पुत्र के मर्दाने रस का आता है "क्या तू अपनी मा से नाराज़ है ?" वह पूछती है.


"मोम !! आप से नाराज़ तो मैं कभी हो ही नही सकता" निकुंज हौले से फुसफुसाया.


"तो फिर क्या बात है बेटे ?" उसने फिर सवाल किया मगर इस बार भी सॉफ लफ़ज़ो में अपनी बात पुच्छने की हिम्मत नही जुटा पाती.


"मोम !! आप मेरी खातिर इसे चूस तो रही थी मगर आप का दर्द मुझसे सहेन नही होता" निकुंज ने सेम टोन में कहा.


"बेटा !! पहली बात तो यह कि मेरा बेटा अपनी मा को सपने में भी कभी दर्द नही देगा, मैं जानती हूँ और दूसरी बात जिस एहसास को मैं तुझे देने की कोशिश कर रही थी उस में इतना दर्द तो हर स्त्री को होगा" कम्मो मुस्कुराते हुए बोली.


"और सबसे बड़ी बात जब इस दर्द में प्यार शामिल हो तो दर्द देने वाले और दर्द सहने वाले दोनो ही प्राणियों को अधभूत सुख की प्राप्ति होती है" इतना कह कर वह मा अपने अपने पुत्र का लंड अपने हाथ की मुट्ठी में अपनी मर्ज़ी से कस लेती है और तत-पश्चात अपने होंठो को फाड़ कर उसका मोटा सुपाडा वापस अपने मूँह के भीतर ठूँसती हुई बेहद प्रचंडता के साथ उसकी चुसाई करना आरंभ कर देती है.


"ह्म्‍म्म" दो तरफ़ा सहमति प्राप्त करने के उद्देश्य से जान-बूझ कर निकुंज ने वह बाधा उत्पन्न की थी और जब उसकी मा ने बल-पूर्वक अपनी इक्षा-अनुसार उसका लंड पुनः अपने मूँह के भीतर परवेश करवाया तो उसका संपूर्ण जिस्म नयी स्फूर्ति और उल्लास के आनंद से अभिभूत हो कर गन्गना उठता है.
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10-03-2018, 04:18 PM,
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कम्मो के होंठ बड़ी कठोरता से अपने पुत्र के विशालकाय लंड को संतुष्टि-पूर्वक सुड़कते हुए लंड की चिकनी चमडी पर तेज़ी से फिसलने लगते हैं और साथ ही वह अपने हाथ की उंगलियों से उसके पूल टटटे खुजला कर उन में बह रहे वीर्य को जल्द ही पिघला देने की प्रयास-रत हो जाती है.


अपनी खुरदूरी जीभ से वह मा अपने बेटे के सुपाडे की नरम सतह को कुरेदती जा रही थी और अपनी मद-मस्त आँखों के प्रभाव से वह निकुंज को लघु समय में ही से आँहे भरने पर मजबूर कर देती है.


"पीं पीं" अचानक मा-बेटे के कानो में उनके घर के बाहर पार्क होती कार की ध्वनि सुनाई पड़ती है और आशंका-स्वरूप कि उस मा का पति और उस बेटे के पिता का बिना किसी पूर्व सूचना के घर वापस लौट आना उन्हें अपने पापी कार्य को वहीं समाप्त कर देने का संकेत करने लगता है.


"ओह्ह्ह मोम !! डॅड आ गये" कहने के उपरांत ही निकुंज सकते में आ गया जब उसकी मा अपने दोनो हाथो के पंजो से उसकी गान्ड को शक्ति-पूर्वक भींचती है और अपना मूँह आगे-पिछे करती हुई अपने पुत्र का विशाल लंड अपने उसी अत्यंत सुंदर मूँह से अति-तीव्रता से चोदने लगती है.


हलाकी कम्मो की घबराहट निकुंज से कहीं ज़्यादा बढ़ चुकी थी क्यों कि वह उसकी मा थी लेकिन किस्मत उसके और उसके बेटे के मिलन के बीच कोई ना कोई अड़ंगा शुरूवात से ही लगाती आ रही थी और जिससे कम्मो का क्रोध उस वक़्त इस कदर बढ़ जाता है कि वा अपने पति को कोसते हुए अपने बेटे के लंड को उसी तत्परता से चूस्ति रहती है जैसे उसे अपने पति की उपस्थिति से कोई फ़र्क ही ना पड़ा हो.


"कामिनी !! कहाँ हो तुम ?" दीप हॉल में प्रवेश करते ही अपनी पत्नी को पुकारता है और ज्यों ही उसकी आवाज़ कम्मो के कानो से टकराई फॉरन वह मा अत्यधिक रोमांच से भर उठती है. अपने पुत्र का विशाल लंड तेज़ी से अपने मूँह के अंदर-बाहर करते हुए वह उसे लगातार चूस रही है और उसका पति कुच्छ ही दूरी से उसे आवाज़ दे रहा है. कम्मो उसी लम्हे प्रण कर लेती है कि वह किसी भी सूरत में निकुंज का लंड चूसना नही छोड़ेगी फिर चाहे उसका पति उसे ढूँढते हुए उस कमरे में ही क्यों ना आ जाए जहाँ वह प्रत्यक्ष-रूप से देख लेगा कि उसकी मौजूदगी को जानते हुए भी उसकी पत्नी अपने सगे छोटे बेटे का लंड बिना किसी भय के अपने मूँह के भीतर समाय बैठी कितनी निर्लज्जता से उसे चूसने में व्यस्त है.


"उफ़फ्फ़ मोम !! छ्च .. छोड़िए डॅड देख लेंगे" निकुंज अपनी गान्ड अपनी मा के हाथो की मजबूत पकड़ से छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहता है और तभी उसे अपने पिता की आवाज़ उनके स्वयं के कमरे से आने का अनुमान हुआ "कामिनी !! हो कहाँ तुम ?" और फिर निकुंज सीढ़ियों पर होती खटपट की ध्वनि से अंदाज़ा लगाता है कि उसके पिता नीचे उतर कर हॉल में वापस आ रहे हैं.


"मोम" निकुंज रुवान्सा हो कर अपनी मा की आँखों में झाँकता है. वह सोच भी नही सकता था कि उसकी मा उस पर इतनी बुरी तरह से आकर्षित होगी कि जानते हुए भी कि उनके कमरे का दरवाज़ा खुला हुआ है और उनका पति पूरे घर में अपनी पत्नी को तलाश रहा है लेकिन इस के बावजूद उसकी मा अपनी जीभ की मचलाहट निरंतर उसके सुपाडे पर दे रही है और कठोरता से उसका संपूर्ण लंड अपने मूँह से बल-पूर्वक सुड़कते हुए चूस रही है जिससे कमरे में उसकी मा की मादक चुसाई की आवाज़ गूंजने से वह निकुंज की घबराहट को और ज़्यादा बढ़ा देती है.


"मुझे ही कुच्छ करना होगा" निकुंज ने उस मुसीबत का हल ढूँढने हेतु अपने मश्तिश्क पर ज़ोर डाला और बिस्तर की पुष्ट पर रखे अपने सेल को उठाने के लिए अपना दायां हाथ उसकी ओर बढ़ाता है मगर दूरी अधिक होने से उसका सेल उसकी उंगलियों की पकड़ में नही आ पाता और ठीक उसी वक़्त उसे अपने डॅड की एक और आवाज़ सुनाई देती है. निकुंज को बचने का यही एक रास्ता सूझा था और वह किसी भी सूरत में अपने पिता की उपस्थिति अपने कमरे में महसूस नही होने देता चाहता था ताकि खुद के साथ उसकी मा पर भी कोई आँच ना आ सके क्यों कि वे दोनो अब एक-दूसरे से बहुत प्यार करने लगे थे.


"सॉरी मोम !! मगर यह ज़रूरी है" इतना कह कर वह अपने शरीर का सारा भार अपनी मा के जिस्म पर डाल कर उसे बिस्तर के मुलायम गद्दे पर उसकी पीठ के बल गिरा देता है और स्वयं भी उसके ऊपर गिर जाता है. सब इतना अचानक हुआ कि कम्मो को सम्हलने का कोई मौका नही मिल सका और उसके पुत्र का विशाल व मोटे लंड का फूला सुपाडा सीधे उसके गले के अंतिम छोर से तेज़ी के साथ टकरा जाता है. वह कामुक एहसास निकुंज झेल नही पाता और ठीक उसी वक़्त उसके सुपाडे से गाढ़े वीर्य की फुहार छूटने लगती है जो बिना किसी अव्रुध्हि के उसकी मा के गले से नीचे उतरने में कामयाब हो जाती है.


"आह" निकुंज तड़प कर सीत्कार उठा मगर अत्यंत तुरंत खुद पर काबू करता है और फॉरन अपना सेल उठा कर लास्ट रिसीव्ड कॉल पर कॉलिंग कर देता है.


"बेटा निकुंज !! तेरी मा कहाँ है ?" कॉल मिलाते ही निकुंज अपने पिता के सवाल पर अपना चेहरा अपने कमरे के खुले दरवाज़े की तरफ मोड़ने पर मजबूर हो गया क्यों कि उसके पिता की आवाज़ उसे संकेत कर रही थी कि वे उसके कमरे की ओर शीघ्रता से बढ़ते चले आ रहे हैं.
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10-03-2018, 04:18 PM,
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"उफ़फ्फ़" अपने पिता की आकृति की उपस्थिति अपने कमरे के दरवाज़े पर देखते ही निकुंज की आँखें रोमांच व घोर निराशा से फॅट पड़ती हैं. वह नंगा अपनी मा के ऊपर लेटा हुआ था और उसका लंड उसकी मा के छोटे से मूँह के भीतर की गहराई में लगातार झड़ते जाने की वजह से निकुंज की कमर भी खुद ब खुद झटके खाती जा रही थी. जैसे ही उसके पिता के हाथ के ज़ोर से उसके कमरे का अध खुला दरवाज़ा पूरा खुलता है निकुंज की रूह काँप जाती है.


"ओह्ह्ह !! पापा सोचेंगे कि मैं मा का मूँह ज़बरदस्ती अपने लंड से चोद रहा हूँ. हां हां !! पापा यही सोचेंगे और उनके ऐसा सोचने से सारा इल्ज़ाम मेरे सर आ जाएगा. मुझे मा को उनकी नज़रों में गिरने से रोकना होगा" चन्द लम्हो में निकुंज यह सोचता है और फ़ैसला लेने के उपरांत ही ताबड़तोड़ धक्को से अपनी मा का मूँह पुनः चोदने का नाटक शुरू कर देता है. उसके पिता ने अपना पहला कदम कमरे में रखा और डर के मारे निकुंज की पलकें ज़ोर से भिन्च जाती हैं मगर ठीक उसी पल हॉल में स्थापित घर का लॅंडलाइन भी "ट्रिंग-ट्रिंग" की ध्वनि से बजना शुरू हो गया.


"हुह !! ये फोनो का सिलसिला कब मेरा पीछा छोड़ेगा" अपने पिता के ये अल्फ़ाज़ कान में सुनाई पड़ते ही निकुंज ने उनके कदमो की आहट को अपने कमरे की पहुँच से दूर जाता महसूस किया और तत-पश्चात ही वह अत्यंत खुशी से झूम उठता है कि यदि उसकी मा ने उसे सुबह कॉल नही किया होता तो वह अपने सेल की कॉलिंग की को मात्र दो बार दबा कर बेहद कम समय में अपने घर के लॅंडलाइन पर कॉल नही कर पाता और यक़ीनन आज का दिन उनका मरण दिन बन जाता.


इसके बाद निकुंज ने तेज़ी दिखाई और कम्मो के ऊपर से हट-ते हुए अपना सिकुड चुका लंड उसके मूँह से बाहर निकाल लिया "मोम !! हम बच गये" मुस्कुरा कर उसने अपनी बेसूध मा को अपने हाथो की मदद से बिस्तर पर बिठाया और अब आगे उन्हें क्या करना है इस बात पर गंभीरता से विचार करने लगता है क्यों कि ब्लॅंक कॉल से वह अपने पिता को ज़्यादा देर तक बेवकूफ़ नही बना पाता.



"मोम !! डॅड वापस कमरे में आ सकते हैं. आप ठीक तो हो ?" निकुंज ने अपनी मा की बंद पलकें और तेज़ हमपाई के मद्देनज़र उसके गाल पर थपकी दे कर पुछा तो एक पल में ही कम्मो की सारी उत्तेजना काफूर हो गयी.


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"अहम-अहम" अपने कंठ पर अपने पुत्र के फूले सुपाडे की दर्दनाक चोट से बहाल वह मा खुल कर खांस पाती इससे पहले ही निकुंज उसे आवाज़ न करने का इशारा करता है "शुउऊ !! डॅड सुन लेंगे तो ज़रूर यहाँ आ जाएँगे मोम" वह हौले से फुसफुसाया.


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"निकुंज !! बेटे अब क्या होगा ?" जिस रोमांच के वशीभूत कम्मो अपने पति की उपस्थति को नकार कर निरंतर अपने बेटे का लंड चूस्ति रही थी अब वह खुमारी छाँट कर उसकी घबराहट और अंजाने भय में तब्दील हो चली थी.


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"डरो मत मोम !! मैं हूँ ना आप के साथ. अगर कुछ होता है तो सारा इल्ज़ाम मैं अपने सर ले लूँगा लेकिन सब से आप खुद को रिलॅक्स करो और अपने मूँह को सॉफ भी" बेखयालि में कम्मो भूल चुकी थी कि उसके होंठो की कीनोर से छलकने के उपरांत उसके पुत्रा का गाढ़ा वीर्य बह कर उसकी ठोडी तक आ पहुँचा था और जो निकुंज के कथन को सुनते ही उसे फॉरन याद आ जाता है.


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"एम्म्म एम्म्म" कम्मो अत्यंत तुरंत अपनी लंबी जीभ अपने सुंदर मुख से बाहर निकालती है और निकुंज की आँखों में झाँकते हुए अपनी जीभ को अपने होंठो पर फेरने लगती है. उस मा की तीव्रता को देख स्वयं उसका बेटा भी चकित रह जाता है और जब कम्मो को इस बात का एहसास हुआ कि वह कितनी निर्लज्जता से अपने बेटे के मर्दाने रस की मलाई ठीक उसी की नज़रों के सामने चाट रही है तो अति-शीघ्र ही वह मा अपने संवेदनशील गुदा-द्वार में सिहरन की कपकपि ल़हेर दौड़ती महसूस करती है.
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10-03-2018, 04:18 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
मोम डॅड को शक़ हो सकता है !! अभी पूरा सॉफ नही हुआ" कह कर निकुंज अपनी उंगली से कम्मो की ठोडी पर चिपके बाकी बचे वीर्य के कतरे पोंछ कर अपनी वह उंगली अपनी इक्षा-अनुसार अपनी मा के होंठो के भीतर घुसा देता है "ज़रूरी है मोम !! आप समझो" अपनी इस शैतानी हरक़त से वह अपनी मा को विवश करते हुए उसे अपने लंड के उपरांत अपनी वीर्य से लथपथ उंगली भी चुसवाने में कामयाब हो गया.


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"तू .. तू .. तू कुच्छ सोच बेटे" कम्मो की आवाज़ लड़खड़ाने लगी. प्रथम खुद के और बाद में उसके बेटे द्वारा ज़बरदस्ती करवाए गये नीच कार्य के प्रभाव से उस मा के मुलायम गाल अत्यधिक लजा कर लाल हो उठते हैं और खुद ब खुद उसकी पलकें शरम-ओ-हया से बंद होने की कगार पर पहुँचने लगती हैं.


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"आइ लव यू मोम !! पुच" निकुंज को अपनी मा की वर्तमान स्थिति पर बहुत प्यार आया और कम्मो की पलकों के बंद होने से पूर्व अचानक ही वह अपने होंठो को अपनी मा के कोमल होंठो से सटा देता है और फिर उतनी ही तेज़ी से उन्हें वापस पिछे भी खींच लेता है.


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"कामिनी !! भाई आख़िर तुम हो कहाँ ?" मा-बेटे के दरमियाँ दोबारा पनप रहे इस रंगीन माहॉल की धज्जियाँ उड़ाती दीप की गर्जना सुन वे दोनो अपने दिल में उफनते सैलाब को वहीं समाप्त कर देने पर मजबूर हो उठते हैं और तत-पश्चात निकुंज अपनी मा के कान में कुच्छ बोलने के उपरांत लगभग भागते हुए बाथरूम के अंदर प्रवेश कर जाता है.


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"पागल है पूरा" यह पहली बार हुआ जब निकुंज ने अपने होंठो से अपनी मा के होंठो को चूमा. भले ही वह चुंबन मात्र एक हल्की सी छुवन का एहसास देने वाला चुंबन था मगर उस मा के पुत्र ने स्वयं अपनी मर्ज़ी से उसे अंजाम दिया और अंत में जिस अंदाज़ से निकुंज अपनी नंगी अवस्था को छुपाते हुए दौड़ा था वह दृश्य देख कर अपने आप कम्मो के चेहरे पर गहरी मुस्कान छा जाती है.


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"अरे !! आप कब आए ?" निकुंज के कमरे से बाहर निकल कर कम्मो ने अपने पति से पुछा जो हॉल के सोफे पर विश्राम की मुद्रा में बैठा हुआ था.


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"अच्छा !! तो अपने छोटे बेटे की सेवा में इस कदर खो गयी हो कि अपने पति की चीख-पुकार भी तुम्हें सुनाई नही दे पाई" दीप अपनी पत्नी के दोनो कंधे निकुंज के कपड़ो से लदे देख उससे पूछता है मगर ज़रा भी संदेह नही कर पाता कि वे कपड़े हक़ीक़त में गंदे हैं या नही "और यह क्या हालत बना रखी है तुमने अपनी ?" पत्नी के बिखरे बाल, पिंदलियों तक ऊपर उठी उसकी सारी, कमर से लिपटा उसका पल्लू, पसीने से सराबोर उसका भीगा चेहरा, थक़ान की अधिकता से फर्श पर रगड़ते उसके बोझिल कदम इत्यादि सभी साक्ष्य दीप के समक्ष साबित होने को काफ़ी रहे थे कि उसकी पत्नी बड़ी लगन और मेहनत से अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह कर रही है.


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"आप खुद ही नही चाहते कि आप की बीवी को ज़रा सा भी सुख मिल सके" कम्मो शिक़ायती लहजे में जवाब देती है. उसके द्वि-अरथी कथन का मतलब सॉफ था कि उसे दीप द्वारा अपने आगमन की निर्धारित सूचना देने के बावजूद भी बे-वक़्त उसका घर लौट आना बिल्कुल पसंद नही आया. कितने आनंद से वह अपने पुत्र का लंड चूसने में मग्न थी और स्वयं उसका पुत्र भी अपनी मा के मूँह की गर्मी से पिघल कर उत्तेजञात्मक आहें भरने पर मजबूर हो चला था. अगर दीप उनके पापी कार्य के बीच बाधा उत्पन्न ना करता तो कम्मो के अनुमान-अनुसार वे दोनो मा-बेटे अब से कुच्छ समय पश्चात तक अपने प्रथम मधुर मिलन के साक्षी बन चुके होते.
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10-03-2018, 04:18 PM,
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पापी परिवार--64





"अब मैने क्या कर दिया !! हमेशा तो कहा है नौकर-चाकर रख लो मगर तुम सुनती कहाँ हो" दीप कम्मो के शिकवे को बे-फ़िक्री में उड़ाते हुए कहता है मगर सच तो यह था कि वह हमेशा से अपनी पत्नी के लिए बहुत फिकर-मंद रहा था परंतु जिस रात कम्मो ने उसे पहली बार अपनी छूट देने से इनकार किया, दीप के दिल में वह आग तब से ले कर अब तक नही बुझ पाई थी.


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"मैने नौकरो की वजह से ऐसा नही कहा !! मैं तो सास वाले सुख की बात कर रही थी" बोल कर कम्मो चुप हो गयी लेकिन अपनी बात के ज़रिए अपने पति का क्रोध बढ़ा बैठी.


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"ह्म्‍म्म !! ठीक है मैं जीत से बात करता हूँ" अपने गुस्से को पीने की कोशिश करते हुए दीप अपनी पत्नी को आश्वासन देता है "अच्छा !! निकुंज कहाँ है ? उसकी कार तो बाहर खड़ी है" उसका पुछ्ना हुआ और फॉरन कम्मो को वह बात याद आ गयी जो निकुंज बाथरूम जाने से पूर्व उसके कान में कह कर गया.


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"वो पास की दुकान से डिटरजेंट खरीदने गया है. चलिए आप के लिए चाइ बना देती हूँ, जब तक आप कमरे में आराम कीजिए" इतना कह कर कम्मो मंन ही मंन मुस्कुराती हुई सीढ़ियाँ चढ़ने लगती है क्यों कि शुरुआत से ही उनके घर की वॉशिंग मशीन फर्स्ट फ्लोर वाले एक्सट्रा बाथरूम में स्थापित थी.


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कम्मो ने देखा उसके पिछे-पिछे दीप भी फर्स्ट फ्लोर पर आ पहुँचा था और जहाँ वह एक्सट्रा बाथरूम में घुसने लगी वहीं उसका पति अपने बेडरूम के अंदर चला जाता है.


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"उफ़फ्फ़ !! आज तो बाल-बाल बचे. चलो चाइ बनाने के बहाने निकुंज को भी बता देती हूँ" सोच कर कम्मो बाथरूम के दरवाज़े की आड़ से फ्लोर के गलियारे में झाँकति है और रास्ता सॉफ जान पड़ते ही आती-तीव्रता से दोबारा सीढ़ियाँ उतरती हुई वह सीधे निकुंज के कमरे में प्रवेश कर गयी.


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"बेटा बाहर आ जा !! तेरे डॅड अपने कमरे में जा चुके हैं" बोल कर कम्मो ने अपने पुत्र के बाथरूम का दरवाज़ा खटखटाना चाहा लेकिन इसके पूर्व ही निकुंज दरवाज़ा खोल कर अपनी मा के हाथ को बल-पूर्वक थामते हुए उसे भी अपने पास बाथरूम के अंदर खींच लेता है और इसके पश्चात उसने दरवाज़ा वापस बंद कर दिया.


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"ओह्ह्ह मोम" उसने अपनी मा को अपने नंगे बलिष्ठ सीने से चिपका कर संतुष्टि-पूर्वक आह ली "मैं बहुत बेचैन था मोम. मुझे बड़ा डर महसूस हो रहा था कि कहीं हॉल में डॅड आप की घबराहट को पहचान कर कोई उल्टा-सीधा अनुमान ना लगा बैठें" निकुंज अपनी मा के बाएँ कंधे पर अपना सर टिका कर सिसकने लगता है बल्कि सच तो यह था उसने पिच्छले 10 मिनिट से इसी उम्मीद में खुद को रोने से रोक रखा था कि उसकी मा पर कोई आँच नही आएगी.


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"निकुंज !! बेटा जब तेरी मा की खातिर सारा इल्ज़ाम तू अकेले ही अपने ऊपर लेने को राज़ी हो सकता है तो क्या तेरी मा अपने लाल को यूँ ही फस जाने देगी" बोलते वक़्त कम्मो भी रुआंसी हो जाती है. हलाकी जब निकुंज ने अचनाक उसे बाथरूम के भीतर खींचा तब अपने पुत्र की उस जबरदारसती के मद्देनज़र एक पल को वह मा बुरी तरह काँप उठी थी. उसका मंन शंका से भर गया था कि यक़ीनन निकुंज ने उसके प्यार को उसका छिनाल्पन समझ लिया है और अब वह बिना अपनी मा की इजाज़त लिए अपनी मंन-मर्ज़ी से उसके जिस्म को नोच-नोच कर खा जाने का इक्शुक हो चला है मगर ज्यों ही कम्मो ने अपने बेटे को आंतरिक पीड़ा से बिलखते देखा स्वयं उसकी आँखें भी आँसुओ की बूँदें छल्काने से खुद को रोक नही पाई.
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10-03-2018, 04:18 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
"चुप हो जा मेरे बच्चे !! तू फिकर क्यों करता है जब तेरी मा तेरे साथ है" निकुंज के बालो में अपनी उंगलियाँ घुमाते हुए कम्मो उसे सहारा देने का प्रयत्न करती है और जल्द ही वह अपनी पूचकारो के ज़रिए अपने पुत्र के गले से निरंतर बाहर निकलती उसकी विह्वल हिचक़ियों को पूरी तरह समाप्त कर देने में सफल हो जाती है.


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"मोम !! क्या डॅड अपने रूम में रिलॅक्स कर रहे हैं ?" निकुंज ने अपनी मा को अपनी मजबूत बाहों की क़ैद से आज़ाद करते हुए पुछा.


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"क्यों !! ऐसा क्यों पुच्छ रहा है. क्या तुझे अपनी मा के साथ अभी और छेड़खानी करनी है ?" कम्मो बेहद प्यार से निकुंज का कान पकड़ते हुए उल्टे उससे सवाल करती है "वैसे तेरे लंड की हालत देख कर तो नही लगता कि इस वक़्त तू अपनी मा के साथ कोई और शरारत करने के मूड में है" कम्मो ने मुस्कान के साथ अपनी निगाहों को अपने बेटे के सिकुडे लंड से जोड़ कर कहा.


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"क्या मोम आप भी" अपने आप ही निकुंज का मायूस लटका चेहरा अपनी मा की बात को सुन कर खुशनुमे चेहरे में परिवर्तित हो गया.


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"अरे देखो कैसे शर्मा रहा है !! पता है अब तक मेरा गला दर्द से उबर नही पाया. मुझे तो लगा कहीं मैं उस दर्द को सहते-सहते बेहोश ही ना हो जाउ. वा तो भला हो जो ऐन-मौके पर तेरे लंड से वीर्य निकलने लगा और उसके बाद लंड की विशालता भी धीरे-धीरे अपने आप ख़तम होती गयी वरना पता नही आज मेरा क्या होता" कम्मो ने उसे डाँटने का नाटक किया मगर उसके कथन में पूरी सच्चाई थी कि अब तक वह अपने कंठ को दुख़्ता महसूस कर रही थी.



"वो मोम !! अगर मैं आप को ज़बरदस्ती बेड पर नही गिराता तो पक्का आज हम डॅड के हाथो पकड़े जाते" कहने के उपरांत निकुंज ने अपनी मा को उन सभी हलातो से रूबरू करवाया जिन्हें कम्मो अपने पुत्र की टाँगो की जड़ के नीचे दबी होने की वजह से नही जान पाई थी और साथ ही निकुंज ने यह भी स्वीकारा कि उसे अपने पिता के उनके कमरे में आ पहुँचने के पूरे आसार नज़र आ चुके थे और तभी वह अपनी टाँगो के नीचे फसि अपनी मा के मूँह में जान-बूझ कर निर्दयता से धक्के मारने पर मजबूर हो गया था ताकि उसके डॅड की पहली नज़र में ही सब कुच्छ पानी की तरह सॉफ हो जाए कि असली कुसूरवार उनका बेटा निकुंज है ना कि उनकी पत्नी कामिनी.


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"ओह्ह्ह निकुंज !! कितना सोचता है तू अपनी मा के बारे में" कम्मो ने अत्यंत खुशी से झूमते हुए अपने बेटे के चौड़े माथे को चूम कर कहा. उसका हृदय गदगद हो गया था जब उसे निकुंज द्वारा सारी सत्यता मालूम चली क्यों कि संपूर्ण ग़लती स्वयं उस मा की ही रही थी. अगर वह अपने पति की कार की ध्वनि को सुनने के फॉरन बाद ही अपने कामलूलोप मन पर काबू कर लेती तो इतना बड़ा बखेड़ा कभी शुरू ना होता.


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"चल अब तू नहा धो कर तैयार हो जा और मैं तेरे डॅड के लिए चाइ बनाती हूँ" अपनी पुरानी ग़लती याद आने के उपरांत कम्मो अपनी दूसरी पनपती ग़लती को वहीं ख़तम कर तेज़ गति से अपने पुत्र के बाथरूम से बाहर निकल जाती है ताकि उसका पति चाइ के इंतज़ार में दोबारा अपनी पत्नी को आवाज़ ना देने लग जाए.


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कम्मो ने अल्प समय में चाइ तैयार की और दीप को देने अपने बेडरूम में पहुँचती है मगर वहाँ उसका पति पहले ही नींद के आगोश में समा चुका था और उसके ज़ोरदार खर्राटे सुन कम्मो का चंचल मश्तिश्क फिर से बावला हो उठता है.


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"अब तक उसने नहा नही पाया होगा. अच्छा मौका है कम्मो देख तेरा पति तो सो गया फॉरन जा क्यों कि अब तू बड़े आराम से अपने बेटे को अपने हाथो से नहेलवा भी सकती है" कम्मो ने चाइ का कप बिस्तर के पास वाली टेबल पर रख दिया और अपने बेडरूम से बाहर जाने के लिए अपने कदम दरवाज़े की ओर बढ़ाने लगी.


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"पक्की रंडी बन गयी है तू कम्मो, अपने सगे बेटे के जिस्म की प्यासी !! अरे जी भर कर तो उसे नंगा देख लिया, मंन भर कर उसका लंड चूसा, उसके स्वादिष्ट गाढ़े वीर्य का स्वाद चखा, अपने पति द्वारा पकड़े जाने से बची, दोबारा उसी ग़लती की पुनरा-व्रत्ती की. अब क्या तू एक ही दिन में अपनी सारी पापी लालसाओ को पूरा कर लेना चाहती है. क्या सोचेगा वह अपनी मा के बारे में अगर तू वापस उसके पास पहुँच गयी. क्या बोलेगी उसे कि तेरा पति सो गया और तू अपने बेटे को नहलवाने आ गयी. छिनाल समझेगा वह तुझे और यदि ना भी समझे तो क्या तू इन मर्दो की फ़ितरत से अंजान है, उन्हें तो बस औरत की अदाओ का आनंद मिलना चाहिए भले चाहे वह औरत तुझ जैसी कोई व्यभिचारी मा ही क्यों ना हो" स्वयं के अंतर-मंन का दूसरा पहलू कम्मो के निरंतर बढ़ते कदमो को रोक तो नही पाता लेकिन उनका रुख़ ज़रूर बदल देता है जो अब निकुंज के कमरे में उसे नहेलवाने के स्थान पर दोपहर का खाना बनाने के उद्देश्य से किचन के भीतर पहुँच चुके थे.
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10-03-2018, 04:18 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
कलयुगी मनुष्य की इंद्रियाँ यदि हमेशा उसे भटकाव की ओर धकेलने का प्रयत्न करती हैं तो कभी-कभार उन्हें सकारात्मक सोच भी प्रदान करती हैं और कम्मो ने अपनी सोच के दूसरे पहलू को स्वीकार कर मानो स्वयं के ऊपर बहुत बड़ा उपकार किया था वरना बाथरूम के भीतर स्टूल पर बैठे नंगे निकुंज ने तो अब तक अपने बदन पर पानी की एक भी बूँद का छिड़काव नही किया था बल्कि अपनी मा के वापस लौट आने के यकीन में अपना लंड सहलाते हुए वह जवान मर्द सिर्फ़ अपना वक़्त काटे जा रहा था.


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निकुंज के जाने के मात्र 5 मिनिट बाद नीमा के फ्लॅट का मैन गेट दोबारा नॉक हुआ.


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"क्या बात है !! वापस लौट आया क्या ?" घनघोर चुदाई की प्यास बुझने के उपरांत भी नीमा के चेहरे पर मुस्कान च्छा जाती है. अब तक उसने अतिथि-कक्ष को सँवारा नही था और किचन में उबल रही चाइ को धीमी आँच पर पकता छोड़ वह तेज़ कदमो से दरवाज़े की तरफ दौड़ पड़ती है.


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"मोम !! जल्दी खोलो ना. मुझे ज़ोर से पॉटी आ रही है" वह मैन गेट को खोल पाती इससे पहले ही उसके कानो में अपने बेटे विक्की के यह शब्द खलबली मचा देते हैं. उस मा को फॉरन अपने नन्ग्पन्न का ख़याल आ जाता है और वह बिजली की तेज़ी से ग्वेस्टर्म के फर्श पर बिखरे पड़े अपने पुराने कपड़े समेट कर अपने बेडरूम में आ पहुँचती है. उसने अत्यंत-तुरंत ही वॉर्डरोब खोल उस ड्रेस पर झपट्टा मारा जो उसे अपने पहले प्रयास में आसानी से प्राप्त हो गयी और तत-पश्चात ही बिना कोई अंडरगार्मेंट्स पहने छर्हरे बदन की स्वामिनी वह सुंदर नारी उस झीनी ब्लॅक नाइटी से अपना ना छुप सकने वाला जिस्म धाँकने की असफल कोशिश करने लगती है.


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"आ .. आ रही हूँ बेटे" नीमा ने चिल्ला कर कहा मगर अपने बेटे द्वारा लगातार दरवाज़ा पीटने के कार्य में ज़रा भी रुकावट ना डाल पाई "बस आ गयी" एक लम्हा अपने दिल पर हाथ रख उसकी असामान्य धड़कनो को महसूस करने के उपरांत नीमा ने अपने घर का मेन गेट खोल दिया.




"दरवाज़ा खोलने में कितनी देर लगा दी मम्मी" विक्की ज़ोर से चिल्लाया "अब हटो सामने से वरना मेरा पॅंट गंदा हो जाएगा" बोल कर वह अपनी मा को धक्का देते हुए सीधे अपने कमरे की दिशा में दौड़ जाता है.


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विक्की के उपरांत स्नेहा का भी घर के अंदर प्रवेश हुआ और जल्दबाज़ी में जिस बात पर उसके भाई गौर नही कर पाया था वह अपनी मा के गदराए बदन पर उस छोटी सी नाइटी को देख दंग रह जाती है.
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10-03-2018, 04:18 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
"मा !! आप ने नाइटी के नीचे ब्रा नही पहनी ?" दरवाज़ा बंद होने से पूर्व ही स्नेहा ने बिना किसी अतिरिक्त झिझक के स्पष्ट-रूप से अपनी मा से पुछा. नीमा के गोल मटोल मम्मे और उन पर तने उसके लंबे चूचक उस पारदर्शी नाइटी में बिल्कुल सॉफ नज़र आ रहे थे "और पैंटी भी नही" अपनी मा की चूत पर अपनी हैरत भरी निगाहें डालती हुई वह अपने खुले मूँह पर अपना हाथ रख कर बेहद अचंभित स्वर में कह उठती है.


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"वो .. हू स्नेहा मैं" अपनी बेटी के विध्वंशक सवाल को सुन नीमा की सिट्टी-पिटी गुम हो गयी "तू .. तू पहले अंदर आ" नीमा ने फॉरन दरवाज़े से बाहर झाँकते हुए कहा और सब कुच्छ व्यवस्थित देख दरवाज़े को बंद कर देती है जब कि कुच्छ देर पहले उत्तेजना के भंवर में वही रमणीय नारी निकुंज को विदा करने नंगी ही लिफ्ट तक आ पहुँची थी जो उनके फ्लॅट के मैन दरवाज़े के ठीक सामने परंतु उससे 10 गज के फ़ासले पर स्थापित थी और तब यक़ीनन नीमा को ज़रा भी घबराहट महसूस नही हुई थी कि उसके पड़ोस का कोई भी बंदा किसी भी पल अपने फाल्ट से बाहर निकल कर उसे उसकी नग्न अवस्था में देख सकता है मगर अपने खून द्वारा टोके जाने की शरम में वह मा फ्लोर की गॅलरी का मुआइना करने को विवश हो चली थी.


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दरवाज़ा बंद करने के उपरांत नीमा पलटी और जाना स्नेहा अब तक उसके समीप खड़ी थी और अपनी मा के मोटे-मोटे चुतडो के दर्शन करने के पश्चात उसके चेहरे का रंग फीका पड़ चुका था, भय-स्वरूप स्वयं नीमा की चढ़ि साँसों और उसके दिल की अनियंत्रित धड़कनो का कोई परवार नही था और निरंतर वह मा किसी अंजानी शंका के तेहेत बुरी तरह काँपती जा रही थी.


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"तू भी फ्रेश हो जा स्नेहा !! मैं अभी आती हूँ, कहीं किचन में बन रही चाइ उबल कर बाहर ना छलक आई हो" नीमा ने अपनी वर्तमान दयनीय स्थिति पर काबू करने का प्रयत्न करते हुए कहा और शीघ्रता से अपने कदमो को किचन की दिशा की ओर चलायमान कर देती है.


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"मा !! जब आप को पता था कि विक्की दरवाज़ा खटखटा रहा है. क्या तब भी आप को ख़याल नही आया कि दरवाज़ा खोलने से पहले इस ट्रॅन्स्परेंट नाइटी के नीचे आप को अपने अंडरगार्मेंट्स पहेन लेने चाहिए थे ?" नीमा किचन के अंदर पहुँच भी नही पाई थी उससे पूर्व ही स्नेहा ने उसके बढ़ते कदमो को अपने दूसरे विस्फोटक प्रश्न के ज़रिए वहीं रोक दिया "क्या आप को नही लगता कि नाइटी पहनने के बावजूद भी आप नंगी दिख रही हो ?" वह टहलती हुई अपनी मा के समक्ष आ कर खड़ी हो जाती है.


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"उम्म्म !! बेटी मैं घर पर अकेली थी तो सोचा केवल नाइटी मेरा से काम चल जाएगा और जब तेरे भाई ने ज़ोर-ज़ोर से दरवाज़े को पीटा तब वाकाई मुझे इस बात एहसास ना रहा कि मैने क्या पहेन रखा है, क्या नही" अपने मष्टिशक पर दबाव डालने के उपरांत नीमा हौले से फुसफुसाई. सोचते हुए उसका दिल दहेलता जा रहा था कि वह तो नंगी ही दरवाज़ा खोलने वाली थी और यदि विक्की ने उसे आवाज़ दे कर अपनी उपस्थिति से अवगत नही करवाया होता तो निकुंज को वापस लौट आया जान वह बेफिक्री से दरवाज़ा खोल भी देती.


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"चलो कोई ना !! वैसे मेरी मा इस वक़्त कयामत ढा रही है" अचानक मुस्कुराते हुए स्नेहा ने अपना रंग बदला. जितना ख़ौफ्फ वह अपनी मा की आँखों में देखना चाहती थी, तत्काल के लिए उतना उसे पर्याप्त जान पड़ता है और तभी वह अपने क्रोध को अत्यंत तुरंत शांत कर अपना पूर्व प्रेम अपनी मा पर उडेल रही थी.


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"धत्त" जहाँ अपनी बेटी की कटु वाणी में आकस्मात प्रेम-रूपी बदलाव आया महसूस कर नीमा को बहुत सुकून प्राप्त होता है वहीं उसके गाल स्नेहा के शरारती कथन को सुनने के उपरांत शरम से लाल भी हो उठते हैं.


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"चलो मा !! आप इतमीनान से चाइ बना लो, फिर एक-साथ पिएँगे" कह कर स्नेहा हॉल के सोफे की ओर मूड गयी और नीमा अपना पिच्छा छूटते देख अति-तीव्रता से किचन के अंदर प्रवेश कर लेती है.


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"उफ़फ्फ़ ये लड़की और इसके सवाल" नीमा ने गॅस के बरनर को ऑफ किया और अपनी धुकनी-समान अनियंत्रित सांसो की रफ़्तार को सामान्य करने लगी "इससे पहले की विक्की अपने कमरे से बाहर निकले मुझे चेंज कर लेना चाहिए वरना यह इश्यू दोबारा भी क्रियेट हो सकता और क्या पता वह पागल अपनी बहेन के सामने ही मेरे साथ उल्टी-सीधी हरक़त करना शुरू ना कर दे" सोच कर वह हॉल में वापस लौटी मगर वहाँ पनपे मौजूदा दृश्य पर नज़र पड़ते ही उसकी गान्ड फट जाती है. उसकी बेटी स्नेहा उसी सोफे को बड़े गौर से देख रही थी जिस पर कुच्छ वक़्त पूर्व नीमा और निकुंज ने चुदाई का पापी खेल खेला था.





डर से बहाल नीमा ने फॉरन अपने कमरे की ओर प्रस्थान कर जाना उचित समझा लेकिन स्नेहा की अगली हरक़त देख उसकी रूह काँप उठती है. उसकी बेटी सोफे की रेक्सिन सतह पर फैले चुदाई के गाढ़े रस की कुच्छ बूँदें अपने हाथ की उंगली में लपेटने के पश्चात, उस पदार्थ की जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से अपनी वह उंगली अपनी नाक के काफ़ी करीब पहुँचा कर उसकी सुगंध सूंघने वाली रही थी.
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10-03-2018, 04:19 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
"मा !! हमारे घर आने से पहले आप इस सोफे पर बैठ कर फिंगरिंग कर रही थी ना और तभी आप ने नाइटी के नीचे पैंटी नही पहेनी है और दरवाज़ा खोलने में भी आप को काफ़ी देर लगी ?" अपनी मा को हॉल में खड़ा देख स्नेहा ने बेहद सीधे और सरल लफ़ज़ो में सवाल पुछा "मैं आप की पुसी को लीक़ कर चुकी हूँ और मुझे आप के ऑर्गॅज़म की पूरी पहचान है" साथ ही वह खुद ही अपने प्रश्न का उत्तर भी देती है.


क्यों कि सोफे पर फैला रस अब तक गीला था इसलिए स्नेहा यह कयास लगाने पर मजबूर हुई कि उसकी मा ने घर के सूनेपन का फ़ायदा उठा कर पूरी रात अपनी चूत मरवाई है और अंतिम चुदाई सोफे पर करवाने के उपरांत अब से कुच्छ ही समय पूर्व उस बाहरी मर्द को घर से बाहर निकाला होगा. वहीं अपने छोटे भाई विक्की के वीर्य को चख लेने के पश्चात यक़ीनन वह मर्दो के मर्दाने रस के स्वाद से पूरी तारह वाकिफ़ हो चुकी थी.


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"ह .. हां स्नेहा यह सच है मगर बेटी थोड़ा आहिस्ते बोल, कहीं तेरे भाई तक तेरी आवाज़ ना पहुँच जाए" अपनी बेटी की निर्लज्जता पर नीमा को जितना आश्चर्य हुआ उससे कहीं ज़्यादा वह खुश हुई. स्नेहा ने सिर्फ़ उसकी मा के ऑर्गॅज़म का ही अनुमान लगा पाया था जब कि उस रस में सम्मिलित मर्द के वीर्य के अंश की वह कोई जानकारी नही जुटा पाई थी और शायद यही मुख्य वजह बनी जो नीमा ने मास्टरबेट करने वाली झुटि बात को भी फॉरन स्वीकार कर लिया.


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"मा !! मुझे आप के ऑर्गॅज़म का टेस्ट बहुत पसंद है" अपने कथन से उस बेशर्म बेटी ने अपनी मा को चौंका दिया और अपनी उंगली अपने मूँह के अंदर घुसा कर बेहद कामुकता-पूर्वक उसे चूसने लगती है "यूम्मी !! आप फिकर मत करो, भाई के आने से पहले मैं इसे पूरी तरह सॉफ कर दूँगी" स्नेहा ने उंगली अपने मूँह से बहार निकाल कर ज़ोर से चटकारा लिया और तत-पश्चात अपने संपूर्ण हाथ में उस रस को समेटने के उपरांत अपनी मा को दिखा-दिखा कर अपना हाथ अपनी लंबी जीभ द्वारा चाटने लगती है. चक्कर खाती नीमा चाह कर भी अपनी बेटी की यह अश्लील हरक़त रोक नही पाई बस शरम से सराबोर अपना चेहरा झुका कर अपने बोझिल कदमो से अपने बेडरूम की दिशा की ओर आगे बढ़ जाती है.


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बेड-रूम में पहुँच कर नीमा ने दरवाज़े को अंदर से लॉक कर लिया और अपने बिस्तर पर पाँव पसार वह सुबह से ले कर अब तक हुए पूरे घटना-क्रम पर विचार करने लगती है. आज उस कामलूलोप नारी ने अपनी इक्षा-अनुसार अपनी एक और मर्यादा का उलंघन किया था और यक़ीनन अब से कुच्छ वक़्त पूर्व वह नारी पराए पुरुष निकुंज के साथ निश्चिंतता-पूर्वक पापी संसर्ग स्थापित करने में सफल भी हुई थी मगर अपनी सग़ी बेटी स्नेहा की निर्लज्ज क्रियाओ पर गौर फरमाने के उपरांत उस मा की आँखों में अंगार भड़क उठते हैं.


"वाकाई आज उसने बहुत नीच और घिनौनी हरक़तें की हैं" फॉरन नीमा को अपना जिस्म सुलगता महसूस हुआ जो सिवाए उसके स्वयं के क्रोध के कुच्छ और ना था मगर अत्यंत तुरंत वह मा यह भी स्वीकार करती है कि उसके निरंतर बढ़ते जा रहे पापो के फल-स्वरूप ही उसकी बेटी अपनी मा जैसी व्यभिचारी स्त्री बनने पर विवश हो चली है.
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10-03-2018, 04:19 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
"मम्मी !! चाइ ठंडी हो रही है" पुत्र विक्की के लफ्ज़ कानो में सुनाई पढ़ते ही नीमा वर्तमान में वापस लौट आई "हां बस 5 मिनिट में आती हूँ" वैसे तो वह दोबारा हॉल में नही जाना चाहती थी मगर स्नेहा अन्य कोई हड़कंप ना मचा दे, मजबूरी-वश नीमा को व्यवस्थित हो कर हॉल में आना ही पड़ता है.


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"स्नेहा !! आज से तेरी क्लासस री-स्टार्ट हो रही हैं ना, तो जा फटाफट तैयार हो जा. जब तक मैं तेरे लिए नाश्ता बना देती हूँ" नीमा ने चाइ के कप समेट-ते हुए कहा. वह अपनी बेटी की आँखों में झाँकने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी और जल्द ही उसे अपनी नज़रो से दूर कर देने की अभिलाषी थी.


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"मा !! मैं नामिता से पुच्छ कर बताती हूँ क्यों कि मुझे एक पेंडिंग असाइनमेंट को पूरा करने में उसकी मदद चाहिए" नीमा के कथन के जवाब में ऐसा बोल कर स्नेहा अपने कमरे की ओर चली गयी मगर अपनी दोस्त के ज़िक्र से वह दोबारा अपनी मा का ध्यान अपनी उसी दोस्त के भाई निकुंज की तरफ मोड़ देने में कामयाब रही और अंत-तह नाश्ता करने के पश्चात वह अपने इन्स्टिट्यूट जाने के लिए निकल पड़ी.


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निम्मी को इन्स्टिट्यूट की पार्किंग में खड़ा देख स्नेहा भी अपनी अक्तिवा ठीक उसके बलग में पार्क कर देती है.


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"अरे वाह !! तू तो मुझसे पहले यहाँ पहुँच गयी" गले मिलने के उपरांत स्नेहा बोली.


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"कामिनी !! तेरे कॉल ने आज मेरी नींद खराब कर दी" मुस्कुराते हुए निम्मी शिक़ायत करती है.
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