Porn Kahani भोली-भाली शीला
01-07-2018, 01:50 PM,
#11
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--11



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गतांक से आगे ......................

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माधवी ने अपनी आँखे बंद कर रखी थी, ये जैसे उसकी तरफ से एक स्वीकृति थी की आओ पंडित कर लो मेरे साथ जो तुम्हारी इच्छा हो ..भोग लो मेरे जिस्म को ...चोद डालो अपनी इस दासी को ..समा जाओ मुझमे आज बहार बनकर ..


ये सब सोचते -2 उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी .वो तो बस इन्तजार कर रही थी की कब पंडित का लंड उसकी चूत पर दस्तक दे और कब वो उनसे लिपट जाए ..


पर काफी देर तक कोई प्रितिक्रिया न होती देखकर उसने आँखे खोली तो पाया की पंडित तो कमरे में ही नहीं है ..वो हेरान-परेशान होकर इधर -उधर देखने लगी ..वो उठी और खिड़की से बाहर झांका तो पाया की पंडित बाहर खड़ा हुआ किसी से बात कर रहा था ..मंदिर में शायद कोई आया था ..समय भी काफी हो चला था ,वो ज्यादा इन्तजार नहीं कर सकती थी ..थोड़ी ही देर में रितु भी आने वाली थी , उसने जल्दी-2 अपने कपडे पहने और पीछे के दरवाजे से बाहर निकल कर अपने घर चली गयी ..


पंडित जब थोड़ी देर में वापिस आया तो माधवी को वहां ना पाकर वो रहस्यमयी हंसी हंसने लगा ..वो जान बूझकर माधवी को प्यासा छोड़कर बाहर निकला था मंदिर के सामने खड़े हुए अपने एक भक्त को अन्दर उससे बातें करने लगा था ..वो माधवी को थोडा और तडपाना चाहता था ..चोदने के लिए उसके पास शीला तो थी ही ..इसलिए वो अपने सारे प्रयोग माधवी पर करना चाहता था ..


थोड़ी देर में ही शीला भी आ गयी ..वो आज पंडित जी के लिए घर से ख़ास पकवान बनाकर लायी थी ..होली जो आने वाली थी 2 दिनों के बाद, उसने घर पर गुजिया और लड्डू बनाए थे, जो वो पंडित जी के लिए लेकर आई और दोनों मिलकर वहीँ मंदिर में बैठ गए और बातें करने लगे ..आज पंडित जी को शीला से कुछ विशेष बात भी करनी थी और इसके लिए मौका भी अच्छा था.


शीला बार -2 पंडित जी की तरफ लालसा से भरी हुई नजरों से देख रही थी , उसकी चूत में खुजली हो रही थी , वो बस यही सोच रही थी की आज पंडित जी इतना विलम्ब क्यों कर रहे है ...अन्दर जाने में ..और उसे चोदने में ..


पंडित भी शीला की कसमसाहट को देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहा था ..


पंडित : "क्या हुआ शीला ..तुम आज थोडा असहज दिखाई दे रही हो .."


शीला : "जी नहीं ...ऐसा कुछ नहीं ..वो बस मैं ...मैं ...सोच रही थी ..की आज आप अन्दर क्यों नहीं ..चल रहे .."


उसने पंडित के कमरे की तरफ इशारा किया ..


पंडित : "चलते हैं ..इतनी जल्दी क्या है ..लगता है तुम्हे अब रोज चुदने की आदत सी पड़ गयी है ..है ना ..."


शीला ने शरमा कर अपना मुंह नीचे कर लिया ..

पंडित : "अच्छा सुनो, याद है तुमने कहा था की मुझे किसी भी काम के लिए मना नहीं करोगी .."


शीला : "याद है पंडित जी ..आप आज्ञा कीजिये ..क्या करना है मुझे ..मैं आपके लिए कुछ भी करने को तैयार हु .."

शीला ने अपना सीना आगे किया और विशवास के साथ पंडित की आँखों में आँखे डालकर बोली .


पंडित : "तो सुनो ..तुम्हे आज रात 9 बजे मेरे पास आना होगा , और जो काम हम रोज दिन में करते हैं , वो आज रात में करेंगे ..और एक नए तरीके से करेंगे .."


पंडित की बात सुनकर शीला चोंक गयी ..रात में पंडित के पास आना काफी मुश्किल था , घर पर माँ-पिताजी आ चुके होंगे ..वो उन्हें क्या बोलेगी, कैसे निकलेगी ..


पंडित ने उसकी परेशानी भांप ली और बोला : "तुम रात की चिंता मत करो ..तुम घर पर बोल देना की आज पंडित जी ने तुम्हारे पति की आत्मा की शान्ति के लिए एक विशेष पूजा रखी है जो रात को ही हो सकती है और तुम्हारा उपस्थित रहना आवश्यक है, कोई तुमपर किसी भी प्रकार का शक नहीं करेगा .."


पंडित जी की फूल प्रूफ योजना सुनकर शीला भी मुस्कुरा दी ..और बोली : "पर पंडित जी ..इतना जोखिम लेकर रात को ही करने की क्या सूझी आपको ..दिन में भी तो वही मजा लिया जा सकता है .."


पंडित : "शीला ...कुछ चीजों का मजा रात को ही आता है ..और आज जो मजा मैं तुम्हे देने की बात कर रहा हु वो लेकर तो तुम रोज रात को ही मेरे पास आया करोगी .."


पंडित जी की लालच भरी बात सुनकर शीला भी सोचने लगी की ये रात कब होगी ..


और दूसरी तरफ, पंडित जी का लंड अभी थोड़ी देर पहले ही झडा था, इसलिए उन्हें किसी प्रकार की कोई जल्दी नहीं थी ..पर हाँ कुछ ऊपर के मजे जरुर लिए जा सकते थे ..शीला के तने हुए मुम्मे देखकर उनके मन में उन्हें दबाने का विचार हुआ और वो उसे धीरे से बोले : "तुम अन्दर जाओ ..और अपनी साड़ी उतार दो ..और ऊपर से ये ब्लाउस और ब्रा भी ..मैं बस अभी आया .."


पंडित जी की बात सुनकर, मन ही मन 'कुछ तो मिलेगा' ये सोचते हुए वो अन्दर की तरफ चल दी .


पंडित जी ने जल्दी-2 मंदिर के काम निपटाए ..और अन्दर आ गए और आशा के अनुरूप शीला अर्धनग्न अवस्था में किसी आज्ञाकारी यजमान की तरह उनके बिस्तर पर बैठी हुई थी ..उसके कड़े -2 निप्पल देखकर पंडित का लंड भी कडा होने लगा ..पर रात की बात सोचकर उन्होंने किसी तरह अपने आप पर काबू किया ..वो आगे आये और अपनी जीभ से शीला के खड़े हुए निप्पल को छुआ ..


अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह स्स्स्स्स्स ......पंडित जी ...


शीला ने एक ही झटके में पंडित जी का चुटिया वाला सर पकड़ा और अपनी छाती पर जोर से दबा दिया ..


पंडित जा का पूरा मुंह उसके गुदाज मुम्मे के ऊपर धंस सा गया ...जीभ और होंठों की दिवार पार करता हुआ उसका निप्पक बिना किसी अवरोध के पंडित के मुंह में जा घुसा ..आज शीला की उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर थी ..उसके निप्पल के चारों तरफ बने हुए ब्राउन घेरे पर बने हुए छोटे -2 दाने भी आज पंडित को अपनी जीभ और होंठों पर महसुस हो रहे थे ..पंडित के दांत और जीभ उसके मुम्मे की सेवा करने में व्यस्त हो गए ..


पंडित का दूसरा हाथ उसके दुसरे मुम्मे को पीस रहा था ..


पंडित : "ओह्ह्ह ...शीला .....इतने मुलायम और स्वादिष्ट स्तन मैंने आज तक नहीं चखे ...अह्ह्ह्ह ....कितने मस्त है ये ....पुच्च्छ्ह ....."


पंडित में मुंह से अपने शरीर की सुन्दरता सुनने में शीला को बहुत मजा आता था ..वो मंद-2 मुस्कुराती हुई पंडित के सर को अपने स्तनों पर इधर-उधर घुमा रही थी ..और आवेश में आकर वो उसके माथे के ऊपर चुबनों की बारिश करने लगी ...


शीला : "अह्ह्ह पंडित जी ....उम्म्म्म ....चूसिये ...और जोर से चूसिये ...आपके होंठों की कस्मसाहट मुझे अपने स्तनों पर रात भर महसूस होती है ..अह्ह्ह्ह ....चबा जाइये इन्हें ...ये आपके ही है ..."


शीला ने तो जैसे अपने स्तन पंडित जी को दान ही कर दिए, वो उन्हें किसी भी प्रकार से इस्तेमाल करने की पूरी छूट दे रही थी ..और पंडित जी भी इस छूट का पूरा अवसर उठा रहे थे ..और उसके स्तनों को चूसने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे ..


शीला से अब सहा नहीं जा रहा था ..उसने पंडित जी का हाथ पकड़ा और अपनी पेटीकोट के ऊपर से ही अपनी चूत के ऊपर लगा कर जोर से दबा दिया ..

"अह्ह्ह्ह्ह पंडित जी ......क्यों तडपा रहे हो .....देखो ना ...मेरी चूत कितनी गरम हो चुकी है ...अह्ह्ह्ह ...रात को जो करना है वो कर लेना ..पर अभी तो कुछ करो इसका ...नहीं तो मैं मर जाउंगी ...अह्ह्ह्ह ..."


पर पंडित भी काफी समझदार था, वो जानता था की अभी करने से वो रात वाला काम उससे करवा नहीं पायेगा ...


वो उसके स्तनों को ही चूसता रहा ..


शीला कुछ और बोल पाती तभी दरवाजे पर दस्तक हुई ..


शीला एकदम से चोंक कर उठ बैठी ..


तभी बाहर से आवाज आई : "पंडित जी ..मैं रितु ...दरवाजा खोलिए ..."


पंडित ने फुसफुसा कर शीला को बताया के ये वही लड़की है जिसे तुमने आज से टयूशन पढ़ाना है .


शीला के गर्म शरीर पर जैसे ठंडा पानी डल गया, पर वो कर भी क्या सकती थी ..पंडित ने उसके कपडे उसके हाथ में पकडाए और बाथरूम में जाकर पहनने को कहा और ये भी कहा की जब तक वो ना बुलाये , बाहर न निकले ..


पंडित ने अपने खड़े हुए लंड को बैठ जाने की रिक़ुएस्ट की और जाकर दरवाजा खोल दिया ..सामने रितु खड़ी थी, सफ़ेद टी शर्ट और घुटनों तक स्कर्ट पहने ..पर ये क्या, उसकी टी शर्ट का दांया हिस्सा , यानी उसकी दांयी चूची पूरी तरह से भीगी हुई थी ..और अन्दर से उसकी शमीज के नीचे छुपी हुई क्यूट सी ब्रेस्ट साफ़ नजर आ रही थी ..खासकर उसके लाल रंग के निप्पल ..


पंडित : "अरे रितु ..आओ ..ये क्या ..तुम भीगी हुई क्यों हो .."



पंडित ने अपनी लम्बी ऊँगली रितु की छाती की तरफ करके पूछा ..और ऐसा करते-2 वो ऊँगली एक बार तो उसकी छाती से छुआ भी दी ..


वो पहले से ही घबराई हुई थी, पंडित की ऊँगली अपने निप्पल पर लगते ही वो हडबडा भी गयी और पंडित जी के शरीर से रगड़ खाते हुए अन्दर आ गयी ..और रुन्वासी होकर बोलने लगी : "देखिये न पंडित जी ..अभी होली आने में दो दिन है, पर फिर भी ये गली के लड़के अभी से होली खेलने लग गए हैं ..घर से निकलते ही मेरे पीछे 2 लड़के पड़ गए ..बचते हुए आई पर एक गुब्बारा मार ही दिया कमीनो ने ..यहाँ ..."


अपनी ब्रेस्ट के ऊपर इशारा करते हुए वो रोने लगी ..


पंडित जी : "अरे ..अरे ..कोई बात नहीं ..गुब्बारा ही तो मारा है ना ..तुम्हे लगा तो नहीं ज्यादा तेज .. "


पंडित आगे आया और उसके कंधे पर हाथ रखकर सहानुभूति जताने लगा ..और सोचने लगे ..सच में कमीने थे ..कितना सटीक निशाना मारा है ..नजदीक आकर खड़े होने से उसकी नजरे ज्यादा करीब से उसकी निप्पल को देख पा रही थी ..जो शायद रितु को नहीं पता था ..


पंडित ने अपना गमछा उसको दिया और पानी पोंछने के लिए कहा ..


और रितु किसी अबोध लड़की की तरह पंडित के सामने ही अपनी गुदाज छातियों के ऊपर वो गमछा मसल -2 कर पानी को साफ़ करने लगी ..वो जब अपनी छातियों को दबाती तो टी शर्ट के ऊपर की तरफ एक गुब्बारा सा बन जाता जैसे सारा मांस बाहर निकल कर आने को आतुर हो ..


पंडित जी गमछे की किस्मत को सरहा रहे थे ..और सोच रहे थे की काश मैं होता गमछे की जगह ..


रितु : "धन्यवाद पंडित जी ..ये लीजिये अपना गमछा ..और वो आंटी अभी तक नहीं आई ..जिन्होंने टयूशन पढाना था .."


रितु की बात सुनते ही पंडित को बाथरूम में छुपी हुई शीला का ध्यान आया ..वो सोचने लगे की कैसे रितु से छुपाकर वो शीला को बाहर निकाले ..


वो बोले : "वो आती ही होगी ..पर तुम्हारा स्कूल बेग कहाँ है .."


रितु : "ओह ..वो तो बाहर ही रह गया ..मैं भीग गयी थी न , इसलिए मंदिर में ही रख दिया था ..रुकिए ..मैं अभी लेकर आती हु .."


पंडित ने चेन की सांस ली और उसके जाते ही भागकर बाथरूम से शीला को निकाला और उसे पीछे के दरवाजे से बाहर निकाल कर दोबारा अन्दर आने को कहा ..


जैसे ही रितु अपना बेग लेकर वापिस आई, पीछे के दरवाजे पर दस्तक हुई और पंडित ने जाकर खोला ..और शीला को अन्दर ले आये ..

पंडित ने रितु की तरफ देखा और बोले : "यही है वो जो तुम्हे टयूशन पढ़ाएगी ..इनका नाम शीला है .."


ऋतू ने शीला को नमस्ते किया और अपना बेग खोलकर उसमे से बुक्स निकालने लगी .


शीला भी बेमन से उसे पदाने लगी, उसका मन तो अभी तक अपनी अधूरी चुदाई पर अटका हुआ था .


पंडित अपने बेड पर बैठा हुआ था और शीला की पीठ उनकी तरफ थी और वो नीचे बैठ कर रितु को पढ़ा रही थी .


पंडित की नजरों के सामने शीला की नंगी पीठ और रितु का भीगा हुआ स्तन था ..अचानक शीला को अपनी पीठ पर पंडित की उँगलियों का आभास हुआ ..वो कसमसा कर रह गयी ..पंडित अपनी ठंडी-2 उँगलियाँ उसकी गर्दन के नीचे वाले हिस्से पर घुमा रहा था ..शीला के जिस्म के रोंगटे खड़े होने लगे ..


पंडित ने रितु से कहा : "तुम्हारे एग्जाम कब तक हैं .."


रितु : "जी अगले हफ्ते तक ..बस तभी तक की जरुरत है मुझे ..उसके बाद तो अगली क्लास में चली जाउंगी .."


पंडित ने मन ही मन सोचा की उसके पास सिर्फ एक हफ्ते का ही टाईम है रितु की चुदाई करने के लिए ..उसने बैठे हुए मन ही मन तरकीबे बनानी शुरू कर दी .


1 घंटे के बाद पंडित ने शीला से कहा : "आज के लिए इतना बहुत है ..अब इसे कल पढ़ाना ..अब तुम जाओ ..और रात को वो पूजा के समय जरुर आ जाना .."


शीला ने पंडित से कोई सवाल नहीं किया ..और उठकर खड़ी हुई और उन्हें प्रणाम करके अपने घर चली गयी ..


अब उन्होंने अपना पूरा ध्यान रितु के ऊपर लगाया ..जो अपनी बुक्स अपने बेग में डाल रही थी .


पंडित : "रितु ...पढाई के अलावा और क्या रुचियाँ है तुम्हारी .."


रितु : "पंडित जी ..मैं घर पर माँ का हाथ बंटाती हु, सहेलियों के साथ खेलती हु, टीवी देखती हु ..बस .."


पंडित : "तुम्हारी सिर्फ सहेलियां ही हैं ..कोई लड़का दोस्त नहीं है ..?"


पंडित के मुंह से ऐसी बात सुनकर वो उनके मुंह की तरफ आश्चर्य से देखने लगी ..


पंडित : "अरे ..ऐसे क्या देख रही हो ..तुम सुन्दर हो ..जवानी की देहलीज पर खड़ी हो ..ऐसी अवस्था में कोई लड़का दोस्त ना हो , ऐसा तो हो ही नहीं सकता .."


रितु : "जी नहीं पंडित जी ...ऐसा कुछ नहीं है ..मेरा कोई लड़का दोस्त नहीं है ..और ना ही मैं इस बारे में सोचती हु .."


पंडित ने देखा की उसके निप्पल कड़े होने लगे हैं, और बात करते हुए उसके होंठ भी फड़क रहे हैं ..


पंडित : "चलो अच्छी बात है ..कोई नहीं है ..इन चीजों से जितना दूर रहो, उतना ही अच्छा है ..पर कभी तुम्हे किसी ने छुआ भी नहीं ..या फिर कभी किसी ने तुम्हे ..."


पंडित ने बात बीच में ही छोड़ दी ..वो रितु के मुंह से गिरधर वाली बात उगलवाना चाहते थे ..


पंडित की बात सुनते ही रितु कांपने सी लगी ..उसे जैसे वो सब याद आने लगा जब उसके पिताजी ने उसे पकड़कर मसल सा दिया था और उसके नाजुक होंठों को चूस कर उसका सारा रस पी गए थे ..


वो कुछ ना बोली ...बस बैठी रही ..पंडित ऊपर बेड पर बैठा हुआ उसके हाव भाव का जाएजा ले रहा था ..


पंडित : "देखो ..तुम शायद जानती नहीं हो ..मेरे अन्दर अद्भुत शक्ति है ..मैं सामने वाले के मन की बातें जान लेता हु ..तुम जो भी सोच रही हो सब मुझे दिख रहा है .."


रितु का भयभीत चेहरा पंडित को घूरने में लग गया ..पंडित ने वही आईडिया अपनाया था जिसे उसने गिरधर पर आजमा कर उसके मन की बात जान ली थी ..जबकि ये सब कुछ माधवी ने उसे बताया था ..
रितु : "क्या ...क्या दिख रहा है ...आपको ..पंडित जी ..."


वो शायद परखना चाहती थी की पंडित जी सच ही बोल रहे हैं ..


पंडित : "तुम्हे किसी ने अपनि बाहों में दबोचा हुआ है ..और तुम्हे बेतहाशा चूम रहा है .."


पंडित की बात सुनते ही वो उठ खड़ी हुई और पंडित जी के पैरों को पकड़ कर रोने लगी ..: "पंडित जी ..ये बात आप किसी से मत कहना ..प्लीस ...पंडित जी ..मैं बदनाम हो जाउंगी ...अगर किसी को पता चला की मेरे पिताजी ने मेरे साथ ये सब किया ..."


उसने आखिर कबुल कर ही लिया ..पर ये इतना घबरा क्यों रही थी ..पंडित ने उसके मन में विशवास बिठाने के लिए उसके कंधे पर हाथ रखे और उसे अपने पास बिस्तर पर बिठा लिया : "अरे पगली ...मैं भला ऐसा क्यों करूँगा ..मुझे भी तेरी इज्जत की उतनी ही चिंता है ..जितनी तुझे ..चुप हो जा .."


कहते -2 उन्होंने उसे सर को अपने कंधे पर रख लिया और उसकी कमर सहला कर उसे आश्वासन देने लगे ..


उसने ब्रा तो पहनी नहीं हुई थी ..शर्ट के अन्दर सिर्फ शमीज थी ..ऐसा लग रहा था की उसकी मांसल कमर और पंडित के हाथ में बीच कुछ भी नहीं है ..पंडित भी अपनी आँखे बंद करके उसके टच का मजा लेने लगा ..


पंडित : "पर एक बात सच-2 बताना ..तुम्हे कैसा एहसास हुआ था जब गिरधर ने तुम्हे ...चूमा था .."


पंडित के कंधे रितु का सर था, वो तेज साँसे लेने लगी जो पंडित को अपनी गर्दन पर साफ़ महसूस हुई ..


पंडित ने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा : "बोलो ...सच बोलना ..तुम जानती हो न ..मेरी शक्ति के बारे में .."


पंडित ने उसके सामने झूठ बोलने की कोई जगह ही नहीं छोड़ी थी ..पर फिर भी वो सब कुछ बताने में घबरा रही थी ..
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01-07-2018, 01:50 PM,
#12
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--12



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गतांक से आगे ......................

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पंडित : "देखो रितु , तूम मुझे अपना हितेषी समझो ..तुम जवानी की जिस देहलीज पर हो, वहां काफी तरह की उलझने मन में होती है जिनका निवारण होना अनिवार्य है ..वर्ना तुम सभी चीजों को अपने हिसाब से सोचने लगती हो और उनसे डर कर एक विचार बना लेती हो ..जो कई बार सही नहीं होता ..मुझे पता है तुम ये सब बातें अपनी माँ से भी नहीं करती हो ..और ना ही तुम्हारी कोई और सहेली इतनी समझदार है जिसे इन सब बातों के बारे में विसतृत जानकारी हो ..इसलिए बोल रहा हु, तुम्हारे मन में किसी भी प्रकार का कोई भय या प्रश्न है, तुम मुझे बता सकती हो, मैं उसका उचित निवारण करूँगा .."


पंडित की बातें सुनकर रितु ने भी सोचा की उनसे डरने का कोई ओचित्य नहीं है, वो तो उसकी मदद ही करना चाहते हैं, इसके लिए उसे सब तरह की शर्म छोड़कर उन्हें अपने मन की बात बतानी ही होगी ..


रितु ने बोलना शुरू किया : "दरअसल ...पंडित जी ...वो ...मुझे ....बस इतना जानना है की ...की ..जो भी पिताजी ने किया ...उसकी वजह से ...मुझे ..कोई ....मेरा मतलब है ..मुझे बच्चा ....तो नहीं हो जाएगा .."


रितु की बचकाना बात सुनकर पंडित जी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके ..दरअसल गलती उसकी भी नहीं थी ..हमारी शिक्षा प्रणाली में अभी तक सही तरीके से लड़कियों और लडको को ये नहीं बताया जाता की क्या करने से बच्चा होता है और क्या करने से नहीं ..और इसी बात का फायेदा पंडित को उठाना था ..


पंडित : "अरे तुम ये कैसी बाते कर रही हो ..लगता है तुम्हे इन सब बातों का कुछ भी ज्ञान नहीं है .. चलो कोई बात नहीं ..मैं तुम्हे सब बता दूंगा ..पर पहले तुम मुझे उस दिन वाली बात विस्तार में बताओ जब गिरधर ने तुम्हे ...पकड़ा था .."


वो बात सुनते ही रितु का चेहरा फिर से लाल हो उठा ..उसकी नजरें फिर से नीचे हो गयी, पंडित उसे समझाने के लिए कुछ बोलने ही वाला था की रितु ने धीरे से बोलना शरू किया : "उस दिन ..पिताजी हमेशा की तरह अपने कमरे में बैठ कर शराब पी रहे थे ..माँ किचन में थी ..पिताजी ने मुझसे कुछ सामान मंगवाया ..मैं जैसे ही उनके पास लेकर गयी, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया ..ये आम बात थी, पर उस दिन उनकी पकड़ कुछ ज्यादा जोर वाली थी , वो बोले 'तुम ही हो जो मेरा पूरा ध्यान रखती हो ..रितु , आओ , इधर आओ , मेरे पास ..' और पिताजी ने मुझे मेरी कमर से पकड़ कर अपने पास खींच लिया .."


पंडित बीच में ही बोल पड़ा : "तुमने उस दिन पहना क्या हुआ था ..?"


रितु : "जी मैंने एक लम्बी फ्रोक पहनी हुई थी ..जो मैं अक्सर रात को पहन कर सोती हु .."


और वो आगे बोली : "उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरा बेलेंस नहीं बन पाया और मैं उनकी गोद में जा गिरी ..और उनका हाथ सीधा मेरी ...मेरी ब्रेस्ट के ऊपर आ गया ..मुझे लगा की शायद गलती से लग गया होगा, पर फिर उन्होंने मेरी ब्रेस्ट को ..दबाना शुरू किया तो मुझे पता चल गया की वो जान बुझकर कर रहे हैं ..मुझे तो कुछ समझ नहीं आया की वो ऐसा क्यों कर रहे हैं ..मैंने अपनी सहेलियों से सुना था की ऐसा मर्द और औरत करते हैं बच्चा पैदा करने के लिए ..और वो बात याद आते ही मैं बेचैन हो गयी ..की पिताजी मेरे साथ ऐसा क्यों करना चाहते हैं ..मैं उठने लगी और मम्मी को आवाज देनी चाहि तो उन्होंने मेरे चेहरे को पकड़ा और मुझे चूमने लगे ...उनके मुंह से शराब की गन्दी स्मेल आ रही थी ...उनकी मूंछे मुझे चुभ रही थी ..और वो बड़ी ही बेदर्दी से मेरे होंठों को चूस रहे थे ...और ...और ..मेरी ब्रेस्ट को भी दबा रहे थे .....मेरा तो पूरा शरीर कांपने लगा था ..समझ नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है ...मेरी आँखों से आंसू निकलने लगे ..पर उनपर कोई फर्क नहीं पडा ..वो मुझे चूसते रहे ...और मुझे यहाँ - वहां से दबाते रहे ... "


पंडित : "मतलब तुम्हे वो सब अच्छा नहीं लग रहा था .."


रितु थोडा सकुचाई ..और फिर बोली : "तब तक तो अच्छा नहीं लग रहा था पर फिर ...फिर उन्होंने अपना एक हाथ मेरी फ्रोक के नीचे से अन्दर डाल दिया ...और ...और अपने पंजे से मेरी ...वो शू शू करने वाली जगह को पकड़ लिया ..."


उसकी साँसे तेज होने लगी थी ..पंडित ही पलक झपकाना भूल गया ...और रितु के आगे बोलने का वेट करने लगा ...


एक-दो तेज साँसे लेकर वो आगे बोली : "उनकी उँगलियाँ मेरी उस जगह पर घूम रही थी ..उसकी मालिश कर रही थी ..और वो जगह भी पूरी गीली हो चुकी थी ...मुझे तो लगा शायद डर की वजह से मेरा पेशाब निकल गया है ..पर बाहर नहीं निकला ...मुझे बड़ा ही अजीब सा लगा ...मुझे तब पहली बार अच्छा लगने लगा था ...पर तभी मम्मी अन्दर आ गयी और वो जोर से चिल्लाने लगी ...मैं तो भागकर अपने कमरे में चली गयी ..और अपने बिस्तरे में घुस गयी ...बाहर से माँ और पिताजी के लड़ने की आवाजें आती रही ...आर मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था ...मैंने अपने एक हाथ नीचे लेजाकर वहां लगाया तो देखा की काफी चिपचिपा सा कुछ निकल रहा है ...मैंने बाथरूम में जाकर सब साफ़ किया ..पर मुझे डर लगने लगा था की कहीं मुझे बच्चा ना हो जाए ...इसलिए पिताजी के पास जाते हुए मुझे अब डर लगने लगा था ...और माँ ने भी उनके पास जाने को मना कर दिया .."


पंडित ने उसकी पूरी बात सुनकर एक गहरी सांस ली ..वो समझ गए की रितु बेकार में डर रही है ..वो उसे समझाने लगे ..: "देखो रितु , तुम जो भी सोच रही हो, वो सब गलत है, बच्चा ऐसे नहीं होता ..उसके लिए तो कुछ और करना पड़ता है , जिसे सम्भोग कहते हैं ..और जो भी तुम्हारे साथ हुआ, वो सब तो सम्भोग से पहले की क्रिया है ..जिसके कारण कुछ (बच्चा) होना असंभव है .."


रितु मुंह ताके उनकी ज्ञान भरी बातें सुनती रही ..और आखिर में बोली : "ये ...ये सम्भोग क्या होता है ..."


पंडित ने धीरे से कहा : "चुदाई ...चुदाई को ही सम्भोग कहते हैं .."


चुदाई शब्द सुनते ही रितु का चेहरा लाल सुर्ख हो उठा, उसकी आँखों में लालिमा सी उतर आई ...


पंडित : "और पता है ...चुदाई कैसे होती है ..."


ऋतू ने ना में सर हिलाया ...जिसकी पंडित को पूरी उम्मीद थी .


पंडित : "वो जो तुम्हारे नीचे है, शू शू करने वाली जगह ..उसे क्या कहते हैं ...पता है .."


पंडित की ऊँगली रितु की टांगो के बीच की तरफ थी .


रितु शायद जानती थी ...पर शरम के मारे कुछ ना बोली ..

पंडित : "उसे कहते हैं ...चूत और लडको के पास जो होता है ...उसे कहते हैं लंड "


पंडित ने अपने लंड की तरफ इशारा किया ..


पंडित : "और ...जब ये लंड, चूत में घुसता है ..उसे कहते हैं चुदाई ..और फिर अंत में जब लड़की की चूत और लड़के के लंड में से रस निकलता है तो दोनों मिलकर बनाते हैं बच्चा ..समझी ..."


पंडित ने उसे एक मिनट के अन्दर ही सृष्टि जनन का ज्ञान दे डाला ..

और रितु आँखों में आश्चर्य के भाव लिए उनकी सारी बातें सुनती रही ..वैसे उसके मन में काफी प्रश्न उबाल खा रहे हो ..और पंडित को मालुम था की वो अभी और भी बहुत कुछ जानना चाहती है , पर अब वो चुप होकर बैठ गए और उसके पूछने की प्रतिक्षा करने लगे ..


आखिर रितु ने अपना प्रश्न पूछ ही डाला : "पर पंडित जी ..वो सब तो एक लड़का - लड़की के बीच होना चाहिए ..फिर मेरे पिताजी ..मेरे साथ ऐसा ..क्यों कर रहे थे ..ये तो पाप है .."


पंडित : "देखो रितु , तुम्हारा कहना सही है ..पर सेक्स की दुनिया में कोई किसी का रिश्तेदार नहीं होता, उनमे सिर्फ एक ही रिश्ता होता है ..और वो होता है ..जिस्म का ..इसमें उम्र , रिश्ते , सुन्दरता , कुछ भी मायने नहीं रखते ..मायने रखता है तो सिर्फ एक दुसरे के प्रति आकर्षण और अपनी उत्तेजना को शांत करने की चाहत ....इसलिए उस दिन तुम्हारा दिमाग कुछ और सोच रहा था और तुम्हारा जिस्म कुछ और चाह रहा था ..जिसकी वजह से तुम्हारी चूत में से वो रस निकल रहा था .."


पंडित ने उसके रस निकलने वाली बात के रहस्य से पर्दा उठाया ..रितु को जैसे वो बात समझ आ गयी, उसने अपना सर हिलाते हुए पंडित जी की बात में सहमती जताई ..


पंडित : "मुझे पता है, तुम्हे अभी भी काफी बाते समझनी है, पर इसके लिए मुझे विस्तार से तुम्हे वो सब बताना होगा ..जिसके लिए तुम्हे सोच विचार कर आना है, तुम अभी जाओ, और रात भर सोचो, अगर ठीक लगे तो कल तुम्हारी टयूशन के बाद मैं तुम्हे ये सब बातें विस्तार से और व्यावहारिक (प्रेक्टिकल) रूप में समझा दूंगा .."


रितु उनकी बात का मतलब समझ गयी ...और उसने शरमा कर अपना मुंह फिर से नीचे कर लिया ...यानी पंडित जी कह रहे थे की वो उसे चुदाई के बारे में पूरा ज्ञान दे देंगे ..और ना चाहते हुए भी उसकी नजर पंडित जी की धोती के ऊपर चली गयी, जहाँ पर होती हुई हलचल देखकर उसकी चूत में भी सीटियाँ बजने लगी ...वो फिर से तेज साँसे लेने लगी ...और जल्दी-2 अपना बेग समेत कर बाहर की तरफ भागी ...


पंडित ने अपना चारा फेंक दिया था ...और रितु ने उसे चुग भी लिया था ..अब कल देखते हैं, क्या करती है वो आकर ...पर कल से पहले तो आज रात का इन्तजार था पंडित को ...


रात को उन्होंने शीला को जो बुलाया था ..अपने कमरे में ..उसे एक सरप्राईज देने के लिए ..

पंडित ने अपने दुसरे काम समेटे और शाम को थोडा सामान लेने के लिए वो बाजार की तरफ निकल पड़ा ..


वैसे तो मंदिर में आने वाले सामान से ही उसकी दिनचर्या और खाने पीने की चीजें निकल आती थी पर फिर भी कुछ सामान तो लेना ही पड़ता था ..और उसका रुतबा इतना था की वो कहीं से भी सामान ले, कोई उससे पैसे नहीं लेता था ..


पंडित बाहर निकल कर सीधा परचून की दूकान पर पहुंचा और आटा , मसाले और एक दो चीजें दुकानदार से निकालने को कहा ..पर पंडित ने नोट किया की उस दिन वो दुकानदार कुछ ज्यादा ही दुखी दिखाई दे रहा था ..पंडित ने पुछा : "अरे इरफ़ान भाई ..क्या हुआ तुम कुछ परेशान से दिख रहे हो ..सब ठीक तो है ना .."


इरफ़ान : "अब क्या कहे पंडित जी ..मेरी तो किस्मत ही खराब है ..आप तो जानते ही है, मेरी बेटी
नूरी जिसका पिछले साल ही निकाह हुआ था, वो अक्सर अपने पति से लड़कर मेरे घर आ जाती है ..कल रात भी यही हुआ, पिछले एक साल में 6 बार उसको समझा बुझा कर वापिस भेज चूका हु पर कल रात के बाद तो वो अपने शोहर के पास जाने को राजी ही नहीं है ..वो कहती है की वो उसके लायक नहीं है ...अब आप ही बताएं पंडित जी ..मैं क्या करू .."


नूरी की बात सुनते ही पंडित के शेतानी दिमाग ने फिर से अंगडाई लेनी शुरू कर दी ..वो काफी सुंदर थी, जैसे ज्यादातर मुस्लिम लड़कियां होती हैं ..और जब तक वो यहाँ रहती थी, पंडित जी से काफी गप्पे मारती थी, जब भी वो दूकान पर कुछ सामान लेने आते थे ।


वो कुछ देर तक सोचते रहे और फिर बोले : "देखो इरफ़ान भाई, वैसे तो तुम्हारे घर के मामलो में मेरा बोलना मुनासिफ नहीं है, पर अगर हो सके तो उसके दिल की बात जानने की कोशिश करो ..पूछो उससे की क्या परेशानी है ..क्या पता, वो सही हो ..या फिर उसकी बात सुनने के बाद कोई उपाय निकल सके .."


इरफ़ान : "पंडित जी ..वो मुझे तो कुछ बताने से रही ..उसकी अम्मी के इंतकाल के बाद वो मुझसे खुल कर कोई भी बात नहीं करती है .." और कुछ देर सोचने के बाद वो बोले : "अगर आप उससे बात करके देखे तो शायद वो आपसे कुछ बोल पाए ..हाँ ..ये सही रहेगा ..आप उससे बात करो ..और उसके दिल और दिमाग में क्या चल रहा है, उसका पता करो ..."


पंडित उसकी बात सुनकर चुप रहा, वो जानता था की नूरी उनकी बात मानकर अपने दिल की बात जरुर बता देगी, फिर भी ये बात वो इरफ़ान के मुंह से निकलवाना चाहते थे ,


पंडित : "अगर मेरे समझाने से वो समझ जाए तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है ...पर अभी उससे बात करना सही नहीं है, कल ही आई है वो, और मुझे भी आज कुछ काम है , ऐसा करते हैं, मैं कल आऊंगा , इसी समय, और फिर उससे बात करके समझाने की कोशिश करूँगा ..तुम अब उसको ज्यादा परेशान मत करना ..और बोल कर रखना की मैं कल आऊंगा उससे मिलने .."


इरफ़ान ने पंडित जी का धन्यवाद किया, और उनका सामान बाँध कर उन्हें दे दिया और हमेशा की तरह उनसे कोई पैसे भी नहीं लिए ..


पंडित अपने पिंजरे में एक और शिकार फंसता हुआ साफ -2 देख पा रहा था ..वो उसे अपने मंदिर में तो बुला नहीं सकता था, इसलिए उसके घर पर ही जाने की बात कही थी ..


अब उसके मन में नूरी को लेकर अलग - 2 योजनाये बननी शुरू हो गयी थी .


घर आते-2 8 बज गए , शीला को पंडित ने 9 बजे बुलाया था, अभी 1 घंटा था उनके पास, उन्होंने जल्दी-2 खाना बनाया और खा लिया क्योंकि शीला के आने के बाद तो उन्हें खाने का टाइम ही नहीं मिलता .


रात को 9 बजते ही उनके दरवाजे पर धीरे से दस्तक हुई ..और पंडित ने दरवाजा खोलकर शीला को अन्दर ले लिया ..


शीला ने सलवार कमीज पहना हुआ था, अन्दर आते ही पंडित ने उसे अपनी बाहों में भर लिया और शीला भी उनसे बेल की भाँती लिपटती चली गयी ..


शीला : "अह्ह्ह पंडित जी ..क्यों तडपा रहे हो सुभह से ..आज का पूरा दिन बिना कुछ किये ही निकल गया ...देखो न मेरा क्या हाल हो रहा है .."


शीला ने पंडित का हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख दिया, और जोरों से दबा दिया , उसके सख्त मुम्मे पकड़कर पंडित को 440 वाल्ट का करंट लग गया .


पंडित : "अरे इतनि बेसब्री क्यों हो रही है ...तेरी इसी तड़प को देखने के लिए ही तो मैंने आज पूरा दिन कुछ नहीं किया तेरे साथ ..."


शीला ने पंडित के होंठों को चूमना चाह पर पंडित ने बड़ी चालाकी से अपना मुंह नीचे किया और उसके मुम्मो के ऊपर, सूट के ऊपर से ही , रगड़ने लगा .


"अह्ह्ह्ह्ह .....पंडित जी ....खा जाओ .....ये मिठाई आपके लिए ही है ...." शीला ने सिसकारी मारते हुए अपनी दूकान के पकवान चखने का न्योता दिया ..


पर पंडित के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था , वो उसके वीक पॉइंट्स को मसल कर, सहला कर उसे और भी उत्तेजित करने में लगा हुआ था और टाइम पास कर रहा था ..शीला भी ये बात नहीं समझ पा रही थी की पंडित ने उसके कपडे उतारने शुरू क्यों नहीं किये ..वो तो चुदने के लिए इतनी बेताब थी की अपने हाथों से खुद कपडे उतारने लगी पर पंडित ने उसके हाथों को रोक दिया और इधर -उधर मुंह मारकर कुछ और टाइम पास करने लगा ..


तभी पीछे के दरवाजे पर एक और दस्तक हुई ..शीला ने बदहवासी में पंडित को देखा और आँखों ही आँखों में पुछा , कौन हो सकता है बाहर ...पर पंडित को मालुम था की बाहर कौन है ..शीला कुछ समझ पाती इससे पहले ही पंडित ने दरवाजा खोल दिया ..बाहर गिरधर खड़ा था ..रोज की तरह अपने हाथ में अद्धा और खाने का सामान लिए ..

पंडित ने गिरधर को अन्दर बुला लिया, शीला अस्त - व्यस्त हालत में खड़ी थी , उसे उम्मीद नहीं थी की पंडित ऐसे ही किसी को अपने कमरे में लेकर आ जाएगा खासकर जब वो भी अन्दर ही मौजूद थी ..


अन्दर आते ही गिरधर ने जैसे ही शीला को देखा तो उसकी आँखों में अजीब सी चमक आ गयी, उसने मुस्कुराते हुए पंडित की तरफ देखा तो पंडित के चेहरे पर आई अजीब सी मुस्कराहट देखकर वो साफ़ समझ गया की ये पंडित जी का जुगाड़ है, और शायद आज उसकी भी किस्मत खुल जाए और पंडित इस खुबसूरत और भरी हुई औरत को उसके साथ शेयर कर ले ..और शीला इन सब बातों से बेखबर नीचे देखते हुए अपने पैरों के नाखूनों से जमीन कुरेदने में लगी हुई थी ..


पंडित : "आओ गिरधर ...इनसे मिलो ..ये हैं शीला ..यही रहती है, हमारे मोहल्ले में ..ये अक्सर मुझे खाना बनाकर खिलाने के लिए आती है .."


शीला ने अपना सर ऊपर किया और गिरधर को हाथ जोड़कर नमस्ते किया ..


पंडित : "शीला, तुम अन्दर जाओ और हमारे लिए दो गिलास लेकर आओ .."


पंडित ने गिरधर के हाथ से शराब की बोतल ले ली और अपने बेड पर बैठ गए ..


शीला ने आज पहली बार पंडित जी के हाथ में शराब की बोतल देखि थी , उसे तो विशवास ही नहीं हुआ की पंडित जी भी शराब पी सकते हैं ..वैसे पंडित जी उसके साथ चुदाई कर सकते हैं तो कुछ भी कर सकते हैं ...उसने कोई प्रश्न नहीं किया और अन्दर चली गयी ..


उसके जाते ही गिरधर पंडित से बोला : "अरे वह पंडित जी ..आप तो छुपे रुस्तम निकले ..क्या माल है ये औरत तो ..इसके दूध तो देखो जरा ..मन तो कर रहा है की अभी इसके कपडे फाड़ डालू और अपना मुंह लगा कर दूध पी जाऊ कुतिया का .."


लगता है आज गिरधर पहले से ही पीकर आया था, एक तो पिछले 2 महीनो से किसी की नहीं ले पाया था और दूसरा पंडित जी ने उसे माधवी की चूत मारने के लिए भी मना कर रखा था ..और आज शीला को देखते ही उसे ना जाने क्यों ये लगने लगा था की आज उसके लंड को कुछ न कुछ जरुर मिलेगा ..


पंडित : "अरे गिरधर, मैंने तुझे बोला था न की तू फ़िक्र मत कर, मेरे साथ रहेगा तो एश करेगा , तुझे माधवी की भी मिलेगी, इसकी भी दिलवा दूंगा और रितु की भी .."


रितु का नाम सुनते ही गिरधर के लंड ने फिर से एक अंगडाई ली ..और खुली आँखों से सपने देखने लगा ..


तभी शीला वापिस आ गयी और उनके सामने ट्रे में गिलास और खाने का सामान रख दिया ..


पंडित ने उसे वहीँ अपने पास बिठा लिया और गिरधर से पेग बनाने को कहा ..


पेग बनाते हुए गिरधर की नजरें शीला को चोदने में लगी हुई थी ...तभी उसने देखा की पंडित का एक हाथ सरक कर शीला की जांघ के ऊपर आ गया ...और शीला कसमसा कर रह गयी ..


गिरधर ने पेग पंडित को दिया और दोनों पीने लगे ..


पंडित : "शीला, तुम इससे मत शरमाओ ..ये मेरा दोस्त है, और हमारे बीच में कोई भी बात छुपी नहीं रहती .."


पंडित की बात सुनकर शीला ने हेरानी भरी नजरों से उन्हें देखा, मानो पूछ रही हो की क्या हमारी बात भी मालुम है इसे ...


पंडित मुस्कुराते हुए सिप लेते रहे ..


अब पंडित का हाथ उसकी जांघो के बीच जा पहुंचा ..वो तो पहले से ही गर्म हुई पड़ी थी, पंडित के सहलाने से उसकी चूत से ज्वालामुखी जैसी गर्माहट निकलने लगी ..जिसे पंडित साफ़ महसूस कर पा रहा था ..पर गिरधर के सामने बैठे होने की वजह से वो सकुचाये जा रही थी ..
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Reply
01-07-2018, 01:50 PM,
#13
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--13



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गतांक से आगे ......................

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पंडित ने सोच कर रखा हुआ था की आज वो शीला से क्या करवाना चाहता है, उसने शीला को अपना गिलास दिया और बोला : "ये लो ..तुम भी पियो .."


शीला : "नहीं पंडित जी ..मैं नहीं पी सकती ..मैंने आज तक नहीं पी .."


पंडित ने झूठा गुस्सा करते हुए कहा : "नहीं पी तो आज पियो ..तुम मेरी बात को मना कैसे कर सकती हो ...याद नहीं, तुमने क्या कहा था ..पियो इसे .."


पंडित के गुस्से को देखकर वो डर सी गयी और उसने गिलास लेकर एक ही घूँट में पूरी पी डाली ..काफी कडवी थी ..वो खांसी करने लगी ..पंडित ने जल्दी से उसे खाने के लिए नमकीन दी ..और उसी गिलास में थोडा पानी डालकर दिया ..वो कुछ सामान्य हुई ..पर अब उसका सर चकरा रहा था ..आँखे घूम रही थी ..पंडित की हरकत देखकर गिरधर भी अपना मुंह फाड़े उन्हें देखता रहा ..


पंडित ने एक और पेग बनाया और थोड़ी सी पीने के बाद उन्होंने फिर से गिलास शीला को दे दिया, उसने बिना किसी अवरोध के वो भी पी लिया ..अब वो पूरी बहक चुकी थी ..पंडित ने बचा हुआ आखिरी घूँट अपने मुंह में भरा और शीला को अपनी तरफ खींचकर उसके होंठों से होंठ लगा कर वो भी उसके मुंह में डाल दी ..शीला वो भी पी गयी, और पंडित के होंठों को बुरी तरह से चूसने लगी ..अब उसे गिरधर के सामने बैठे होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ..वो गहरी साँसे लेती हुई पंडित के चेहरे को चूमे जा रही थी, एक तो नशे की वजह से और दूसरे सुबह से अपने बदन में छुपाये हुई उत्तेजना की वजह से ..


चूसते -2 शीला पंडित की गोद में ही चढ़ गयी ...और उनके गले में बाहें डालकर , अपनी गांड को उनकी जाँघों पर मसलने लगी ..


"अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .....पंडित जी ....ये क्या पिला दिया आपने ...मुझे ....उम्म्म्म्म ....इसने तो मेरी आग को और भी भड़का दिया है ..."


पंडित ने उसके कुर्ते को पकड़ कर ऊपर खींचा, शीला ने अपनी बाहें ऊपर करके पंडित की मदद की ..और अब वो सिर्फ ब्रा और सलवार में उनकी गोद में बैठी हुई थी ...


पंडित ने शीला को अपने गले से लगा कर उसके मुम्मो को अपनी छाती से पीस सा दिया ...वो भी सिसक कर अपनी छातियों को पंडित के सीने से लगकर मसलने लगी ..


गले मिलते हुए पंडित के सामने गिरधर का चेहरा था, जो पीना भूलकर , मुंह फाड़े, पंडित की रंगरेलियां देख रहा था ..पंडित ने इशारा करके गिरधर को शीला की ब्रा खोलने को कहा ..गिरधर ने कांपते हुए हाथों से शीला की ब्रा के स्ट्रेप पकडे और उन्हें खोल दिया ..


शीला को तो पता ही नहीं चला की उसकी ब्रा पंडित ने नहीं बल्कि गिरधर ने खोली है ..पर गिरधर ने आज पहली बार इतनी भरी हुई और गोरी औरत के शरीर पर हाथ लगाया था, उसे तो विशवास ही नहीं हुआ ...पंडित के इशारा करने पर वो थोडा आगे आया और अपने हाथ आगे करके उसने शीला की ब्रेस्ट को अन्दर से पकड़ लिया और उन्हें बेदर्दी से दबाने लगा ...


अब जाकर शीला को एहसास हुआ की ये हाथ गिरधर के हैं, क्योंकि पंडित के हाथ तो उसकी गांड को मसलने में लगे हुए थे ..ये एक अलग ही एहसास था उसके लिए ..अब उसे भी लगने लगा था की उसकी तो आज डबल बेंड बजेगी ..


और दूसरी तरफ गिरधर का भी यही हाल था, उसने तो सपने में भी नहीं सोचा था की उसे ऐसी औरत की मारने को मिलेगी जो हाथ लगाने से भी मेली हो जाए ..

गिरधर के अपने हाथों की उँगलियों में शीला के निप्पल भर लिए , वो इतने बड़े और मुलायम थे मानो शेह्तूत , उनमे से रस निकल कर जैसे बाहर बह रहा था ..


वो थोडा और आगे खिसक आया और बीच में पड़ी हुई प्लेट्स और गिलास को एक तरफ करके ठीक पंडित के सामने बैठ गया ..शीला अभी भी अपनी मोटी गांड को पंडित की जाँघों के ऊपर मसल-2 कर अन्दर से निकल रही अग्नि को बुझाने की कोशिश कर रही थी ..


पंडित ने बीच में लटक रही ब्रा को निकाल कर साईड में फेंक दिया ..अब शीला की नंगी छातियाँ पंडित के सीने से चटखारे ले लेकर मिल रही थी .


पंडित ने अपनी लम्बी जीभ निकाली और शीला के गले से लेकर ऊपर की तरफ पुताई करनी शुरू कर दी ..उसकी गीली जीभ अपना गीलापन छोडती हुई जा रही थी और पंडित शीला के जिस्म का नमक चखकर मजे से उसका भोग लगा रहा था .


पंडित की देखा देखि गिरधर ने भी अपनी कठोर और पत्थर जैसी जीभ निकाली और शीला की मखमली पीठ के ऊपर रगड़ने लगा .


शीला अपने ऊपर हो रहे गीले हथियारों के हमले से बचने के लिए छटपटाने लगी ..वैसे ही उसकी चूत से मेंगो फ्रूटी निकल कर पंडित की जाँघों को गीला कर रही थी, ऊपर से पंडित और गिरधर की जुगलबंदी जीभों ने उसके शरीर के तानपुरे में ऐसे संगीत बजाने शुरू कर दिए जिसे उसने आज तक नहीं सुना था ..और वो संगीत सिस्कारियों के रूप में उसके मुंह से बाहर निकलने लगा ..


'"अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .....पंडित जी ....उम्म्म्म्म्म .....ये क्या कर दिया आपने ....अह्ह्ह्ह .... "


और उसने अधीरता वश पंडित जी की जीभ जो उस वक़्त उसकी ठोडी को कुत्ते की तरह चाट रही थी , उसे अपने दांतों के बीच लेकर जोर से काट लिया ...


पंडित की सिसकारी निकल गयी ..और उसकी जीभ से खून .


शीला का जंगलीपन देखकर पंडित को भी जोश आ गया ..और वो अपनी पूरी ताकत से उसके योवन को अपने हुनर दिखा दिखाकर चूसने लगा .


पीछे से गिरधर ने अपना कुरता, धोती और चड्डी एक ही झटके में निकाल फेंकी ..उसके लंड का बुरा हाल था ..और वो अपने पुरे 7 इंच के आकार में आकर फुफकार रहा था ..


गिरधर ने पीछे से ही शीला के इर्द गिर्द अपनी बाहें लपेटी और उसके दोनों मुम्मों को बेदर्दी से मसलने लगा .उसने शीला के चेहरे को पकड़कर तिरछा किया और अपनी तरफ घुमाया ...और उसके गालों और कानों को उसी तरीके से चाटने लगा जैसे वो उसकी पीठ को चाट रहा था ..उसकी जीभ का खुरदुरापन शीला की नाजुक त्वचा को चुभ सा रहा था ..पर नशे और उत्तेजना के आवेश में उसे वो सब महसूस ही नहीं हो रहा था ..वो तो जैसे हवा में उढ़ रही थी ..किसी उड़नखटोले (पंडित की जाँघों ) पर बैठी हुई थी और दो सेवक मिलकर उसकी सेवा किसी रानी की तरह से कर रहे थे ..


शीला ने आँखे बंद किये -2 ही अपना मुंह खोल और गिरधर के होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी ..उसके नशीले और शरबती होंठों की मदिरा अब गिरधर खुल कर पी रहा था ..और साथ ही साथ वो अपने हाथों से उसकी छातियों को आटे की तरह से गूंध रहा था ..शीला के मुंह पीछे करने की वजह से उसकी छातियाँ नुकीली सी होकर पंडित के सामने उभर आई और पंडित ने उनकी कठोरता को अपने दांतों से महसूस करना शुरू कर दिया ..


शीला को कुछ भी होश नहीं रह गया था की वो क्या कर रही है और किसके साथ कर रही है ..वो तो बस स्वर्ग का मजा लेने में लगी हुई थी ..


शीला को चूमते-2 गिरधर ने उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपनी गोद में ही लिटा लिया ..शीला की दोनों टाँगे पंडित की कमर से बंधी हुई थी और उसकी गांड पंडित के लंड के ऊपर थी ..और पीछे लेटने की वजह से उसकी पीठ अब बेड को छू रही थी और उसका सर गिरधर की गोद में था ..और वो स्पाईडरमेन स्टाईल में शीला के चेहरे को पकड़ कर उलटी किस्स कर रहा था ..और अपने हाथो को आगे लेजाकर उसके पर्वतों की मालिश भी कर रहा था ..

पंडित ने आगे झुककर अपनी जीभ शीला की नाभि के ऊपर रखी और फिर अन्दर घुसा दी ..


अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ....पंडित ......उम्म्म्म्म्म .......


ये भी उसका वीक पॉइंट था ..जिसे पंडित अपनी जीभ और दांतों से चुभला कर उसे और भी उत्तेजित कर रहा था ..


शीला को सांस लेने की भी फुर्सत नहीं थी ..वो गिरधर के मुंह से निकल रही साँसों से ही काम चला कर जिन्दा रहने का प्रयास कर रही थी .


पंडित ने उसकी नाभि को पूरा छान मारा और उसे चूस चूसकर लाल सुर्ख कर दिया ..अब उसके हाथ शीला की पयजामी पर थे जिसके लास्टिक को पकड़कर उन्होंने उसे नीचे खींच दिया ..कच्छी समेत ..


और सामने से निकलती हुई खुशबु को सूंघकर उन्होंने अपनी आँखे बंद कर ली और एक जोरदार डुबकी मारकर वो उसकी चूत की झील में गुम हो गए ..


शीला ने भी एक जोरदार सीत्कारी मारते हुए पंडित के सर को पीछे से पकड़कर उसे और अन्दर धकेल दिया ..


"अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .....ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ .....पंडित जी ....चुसो ....इसे ....सुबह से कुलबुला रही है ....अह्ह्ह्ह्ह ....खा जाओ ....पी जाओ सब कुछ ...उम्म्म्म्म्म ...उफ्फ्फ ....."


पंडित ने उसके कूल्हों पर हाथ रखकर उसे ऊपर उठा लिया और उसकी चूत का पान करने लगे ..जैसे कोई मिठाई की थाली उठा रखी हो और उसमे सीधा मुंह मारकर सब कुछ चट करने में लगे हों ..


शीला को अपने सर के नीचे गिरधर के लंड का एहसास हुआ और उसने अपनी गर्दन तिरछी की उसके देसी लंड को अपने मुंह में भर लिया ..


गिरधर की तो जैसे लाटरी ही लग गयी ...दो दिन पहले माधवी ने जिन्दगी में पहली बार उसके लंड को चूसा था ..और आज शीला भी वही कर रही थी ..इतनी ख़ुशी तो उसने कभी नहीं देखि थी एक साथ .


वो उसके सर को पकड़ कर अपने लंड के ऊपर जोरों से दबाने लगा ..और उसके मुख को चोदने लगा ..


पंडित ने भी आनन् फानन में अपनी धोती और कच्छा निकाल फेंका और घुटनों के बल बैठ कर शीला की जाँघों को अपने दोनों हाथों से पकड़ा ..और अपने लंड के सुपाडे को उसकी अधीर चूत के ऊपर लगाया ...बाकी का काम शीला ने खुद कर लिया ..अपने शरीर को नीचे की तरफ एक जोरदार झटका दिया ..और पंडित का सुपाड़ा लंड समेत अपने अन्दर घुसेड लिया ...


"अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ......उम्म्म्म्म .....ओघ्ह्ह्ह्ह पंडित जी .....आपके लंड का वेट सुबह से था ...अह्ह्ह ..चोदो मुझे ....अह्ह्ह ....जोर से ....हां ..."


पंडित तो पहले से ही खुन्कार हो चुका था ..शीला की बाते सुनकर वो और भी तेजी से अपने काम में लग गया ..और उसकी चूत के अन्दर अपने लंड के झटके दे देकर उसे बुरी तरह से चोदने लगा ..


"अह्ह्ह अह्ह्ह उफ्फ्फ उफ्फ्फ उम्म्म ....उम्म्म अह्ह्ह्ह्ह ...उफ्फ्फ्फ़ उफ्फ्फ ..... "


उसकी सिस्कारियां पंडित के कमरे में घंटियों की तरह से गूँज रही थी ..


अब गिरधर से भी बर्दाश्त नहीं हुआ, शीला को जो झटके मिल रहे थे और जिस तरह से वो चिल्ला रही थी, उसके लंड को उसने चूसना छोड़ दिया था ..और अब गिरधर अपने हाथों से अपने लंड को मसलते हुए शीला के हिलते मुम्मे और चुदाई देख रहा था ..


पंडित से उसकी हालत देखि नहीं गयी ..उनके मन में एक विचार आया ...उन्होंने अपना लंड शीला की चूत से निकाले बिना ही उसे अपने ऊपर खींच लिया और खुद बेड पर लेट गए ..अब शीला उनके ऊपर थी ..और फिर उन्होंने पीछे से गिरधर को इशारा करके उसकी गांड मारने को कहा ..गिरधर को तो विशवास ही नहीं हुआ की पंडित एक ही बार में उसके दोनों छेदों को फाड़ने की सोच रहे हैं ...वो झट से उठा और अपने लंड को पकड़ कर उनके ऊपर आ गया ...और अपने लंड को उसने शीला की गांड के छेद पर रख दिया ..


अपने पीछे गिरधर के लंड का एहसास पाते ही उसके शरीर के रोंगटे खड़े हो गए ...उसने आज तक ऐसा सोचा तक नहीं था ..पर उत्तेजना के शिखर पर पहुंचकर उसने ये भी कर डालने की सोची और थोडा रूककर उसके लंड को अपनी गांड के छेद में फंसने दिया ..और जैसे ही वो फंसा, गिरधर के जोरदार शॉट मारकर अपने लंड को उसकी गांड की बोड्री लाईन के पार पहुंचा दिया ..


"अह्ह्ह्ह्ह्ह .....धीरे ....अह्ह्ह्ह ..उफ्फ्फ्फ़ ....."


उसकी तो जैसे गांड की नसें ही जाम हो गयी ..उसका सारा नशा रफूचक्कर हो गया ..पंडित और गिरधर का लंड उसकी चूत और गांड के पूरा अन्दर तक समा चुका था ...उसे आज पूर्णता का एहसास हुआ ..और अन्दर से आने वाले सेंसेशन का मजा वो धीरे -2 हिलकर लेने लगी ..

पंडित और गिरधर एक साथ ले मिलाकर उसे चोदने में लग गये ..और अब शीला को भी मजा आने लगा ..


"अह्ह्ह .... उम्म्म्म्म पंडित जी .....सच में .....अह्ह्ह ..मजा आ गया ..ऐसा तो मैं सपने में भी नहीं सोच सकती थी ..आपने इस विधवा को आज दुगना मजा दिया है ...अह्ह्ह्ह्ह ....ये मैं पूरी जिन्दगी नहीं भूल सकती ...उम्म्म अह्ह्ह्ह और तेज ...करो। ....अह्ह्ह्ह ....तुम भी गिरधर ....जोर से डालो ...अपना लंड ... मेरी गांड में ....अह्ह्ह फाड़ डालो ...आज इसे ..अपने मोटे लंड से ....अह्ह्ह्ह्ह्ह ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मर्र्र गयी ....अह्ह्ह्ह .....बहुत मजा आ रहा है ....हाँ ....ऐसे ही ...ओह्ह्ह पंडित जी .....मैं तो गयी ....अह्ह्ह्ह ...."


और वो झड़ने के बाद भरभराकर पंडित के ऊपर गिर गयी ...और बेहोश सी हो गयी .


उसकी चूत से गाड़े पानी की बोछारें निकलकर पंडित के लंड को भिगोने लगी ..


पंडित से भी संभालना मुश्किल हो गया और उसके लंड ने भी अपनी खीर शीला की कटोरी में भर कर उसे तृप्त कर दिया ..


पीछे से गिरधर ने भी अपने पंजे शीला की गद्देदार गांड में फंसाकर अपना पूरा जोर लगाकर एक जोरदार गर्जन के साथ अपना रस उसकी गांड के छेद में निकलने दिया ..


और फिर दोनों गहरी साँसे लेते हुए अपने-2 लंड शीला के अन्दर से निकाल कर वहीँ बेड पर लुडक गए ..


तभी बाहर दरवाजे पर दस्तक हुई ..जिसे सुनकर पंडित और गिरधर एक दम चोकन्ने हो गए ...और एक दुसरे के चेहरे की तरफ देखने लगे ..शीला तो बेहोशी की हालत में पड़ी थी, उसे कोई होश नहीं रह गया था ..


पंडित और गिरधर सोचने लगे की इतनी रात को कौन हो सकता है .


पंडित ने हिम्मत करके पुछा : "कौन है ....?"
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Reply
01-07-2018, 01:56 PM,
#14
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--14



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गतांक से आगे ......................

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बाहर से आवाज आई : "पंडित जी ...मैं ...माधवी .."


माधवी की आवाज सुनते ही गिरधर की सिट्टी पिट्टी ही गुम हो गयी ..वो धीरे से फुसफुसाया : "ये इतनी रात को कैसे आ गयी ...पंडित जी ..अगर इसने मुझे ऐसी हालत में देख तो अनर्थ हो जाएगा .."


गिरधर ने अपने और शीला के नंगे शरीर की तरफ इशारा किया ..


शीला अभी तक बेहोशी की हालत में ही थी ..


पंडित ने उसे शांत रहने का इशारा किया और दरवाजे की तरफ मुंह करके बोला : "जरा रुको माधवी ..अभी आता हु .."


और फिर जल्दी से शीला की टाँगे पकड़ी और गिरधर को उसकी बाजू पकड़ने को कहा और दोनों ने उसके नंगे जिस्म को उठा लिया और उसे बाथरूम की तरफ ले गए ..पंडित ने गिरधर को भी अन्दर रहने को कहा और खुद धोती लपेट कर बाहर आ गए और दरवाजा खोल दिया ..


बाहर माधवी खड़ी थी , अपना गाऊन पहने ...और गले में चुन्नी थी ..


पंडित : "अरे माधवी ...इतनी रात को कैसे आना हुआ ..आओ -२ अन्दर आ जाओ ..?"


माधवी अन्दर आ गयी और पंडित ने दरवाजा बंद कर दिया .


माधवी : "पंडित जी ..वो गिरधर आये हैं क्या यहाँ ..आज तो इतनी रात हो गयी ..इतनी देर तो आज तक नहीं की इन्होने ..."

पंडित ने घडी देखि ...12 बजने वाले थे ..सच में , शीला की चुदाई करते हुए समय का पता ही नहीं चला उन्हें ..


पंडित : "हाँ ....वो आया तो था ..बस आधा घंटा पहले ही गया है ..वो कह रहा था की किसी से पैसे लेने थे, रात के समय ही मिलता है वो ..इसलिए ...आ जाएगा ...तुम चिंता मत करो .."


पंडित की बात सुनकर माधवी को कुछ राहत मिली ...


माधवी ने गाऊन पहना हुआ था और अन्दर आने के बाद पंडित ने गोर से देखा तो उसके निप्पल खड़े हुए साफ़ दिखाई दिए यानी उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी ..


पंडित की धोती में भी हलचल सी होने लगी ..पर उसका पति भी तो अन्दर ही था ..और शायद दरवाजे में बनी हुई झिर्री से सब देख रहा था ..कुछ सोचते हुए पंडित के मन में एक अजीब सा ख़याल आया ..और उसके चतुर दिमाग ने एक जोरदार और रिस्की प्लान बनाया ..


पंडित : "आओ बैठो माधवी ..अभी उसको आधा घंटा लगेगा वापिस आने में .."


माधवी के शरीर में भी झुरझुराहट सी फेल गयी जब पंडित ने हाथ पकड़ कर माधवी को अपनी तरफ खींचा और उसे सुबह का अधुरा छोड़ा गया काम याद आ गया ...


उस बेचारी को क्या पता था की अन्दर बाथरूम में बैठा हुआ उसका पति गिरधर सब कुछ साफ़ -२ देख रहा है ..पर वो भी पंडित के एहसान के तले दबा हुआ (शीला के नंगे जिस्म को अपने हाथो में समेट कर) अन्दर बैठा हुआ था ..उसे तो ये भी नहीं पता था की पंडित और उसकी बीबी के बीच बात कहाँ तक पहुँच चुकी है ..और जो कुछ भी वो देखने वाला था वो उसके लिए शॉक लगने जैसा ही था ..


माधवी : "पंडित जी ...सुबह तो आप बिना कुछ बोले ही बाहर निकल गए थे ..और अब हाथ पकड़ कर बुला रहे हैं .."


पंडित : "सुबह की बात कुछ और थी ..अभी की और है .."


कहते - २ पंडित ने माधवी के खड़े हुए निप्पल को गाऊन के ऊपर से ही मसल दिया ...उसकी सिसकारी निकल गयी ..और उसने अपना चेहरा पंडित के सामने सियार की भाँती ऊपर उठा दिया और अगले ही पल अपने पंजो पर खड़े होकर उसने पंडित के होंठों का शिकार कर लिया ...


पंडित : "उम्म्म्म्म ......ओह्ह्ह्ह ....माधवी ....सच में ....गिरधर की किस्मत कितनी अच्छी है ...जो हर रात तुम्हारे साथ होता है वो ..और जब मन चाहे कुछ भी कर सकता है ... "


माधवी ने पंडित की गर्दन ..छाती और नाभि वाले हिस्से को चुमते हुए नीचे की तरफ जाना शुरू किया ...और बोली : "ओह्ह्ह्ह पंडित जी ...रात भर साथ रहना तभी मजेदार लगता है जब दूसरा इंसान भी मजे देने वाला हो ...आजकल के मर्द या औरत बाहर क्यों मुंह मारते हैं ..पता है .."


पंडित : "नहीं ...तुम बताओ ..."


माधवी : "क्योंकि घर में उन्हें वो सब नहीं मिल पाता जिसकी उन्हें इच्छा होती है ...जैसे मैं ..मैं चाहती हु की रोज रात को मेरा पति मेरी चूत को चाटे ..मुझे प्यार से किसी राजकुमारी की तरह से मुझे एक औरत होने का एहसास दिलाये ...और बस मुझे ही प्यार करे ..."


उसकी बात सुनकर शायद गिरधर को भी अपनी कमजोरी का पता चल गया होगा ...


पंडित की धोती एक ही झटके में नीचे गिर गयी और उसका शीला के कामरस में डूबा लंड माधवी के सामने लहराने लगा ...


माधवी ने भूखी शार्क की तरह से पंडित की टांगो के बीच फंसी हुई मछली को लपका और तिल्ली वाली कुल्फी की तरह से उसे चूसने और चाटने लगी ...पंडित के लंड में से दूध की बूंदे निकल कर उसके चेहरे पर गिरने लगी ...


माधवी : "ह्म्म्म्म ......आपके लंड में से किसी और की चूत की खुशबू आ रही है ...लगता है मेरे आने से पहले किसी और की सेवा कर रहे थे आप ...पंडित जी .."


पंडित कुछ ना बोला ...ऐसी अवस्था में कुछ भी बोलना सही नहीं था ...वो बस मुस्कुराते हुए माधवी के चोदु मुंह को चोदने में लगा रहा ...


पंडित ने अपने हाथों से अपना डंडा पकड़ा और माधवी के चेहरे पर मारने लगा ...


चमड़ी के डंडे की मार अपने चेहरे पर पड़ती देखकर माधवी और भी खुन्कार हो उठी ....उसने आनन् - फानन में अपना गाऊन निकाल फेंका और नंगी होकर पंडित की गर्दन से झूल गयी ...


उसके बड़े -२ तरबूज पंडित की छाती से पीसकर अपना रस निचोड़ रहे थे वहां ...

पंडित ने उसकी चोडी - चिकनी गांड को अपने हाथों में समेटा और उसे ऊपर उचका कर अपनी गोद में ले लिया ...


माधवी ने अपनी मोटी जांघे पंडित की कमर से लपेट कर उसे हेवन के मजे देने शुरू कर दिए ...अपने होंठों से .


उसके गुलाबी होंठ बड़ी बेदर्दी से पंडित को चूसने और खरोचने में लगे हुए थे और उतनी ही बेदर्दी से वो अपनी छातियाँ पंडित के सीने से झटके दे देकर पीस रही थी ..


अचानक पंडित ने अपनी एक ऊँगली माधवी की गांड के छेद में घुसा डाली ..


"अह्ह्ह्ह्ह .....ओफ़्फ़्फ़्फ़ पंडित जी ....उम्म्म्म्म ....यहाँ नहीं ....दर्द होता है ....अह्ह्ह्ह "


पंडित समझ गया की माधवी की गांड अभी तक कुंवारी है ...मजा आयेगा ..

और अन्दर , गिरधर दरवाजे की झिर्री में आँख लगाए हुए पंडित और अपनी पत्नी की रासलीला देख रहा था ..और गुस्सा होने के बजाये अप्रत्याशित रूप से उसके लंड ने भी अंगडाई शुरू कर दी ...वैसे भी वो पंडित जी को पहले ही बोल चूका था की वो अगर उसकी मदद करे तो उसे अपनी पत्नी और बेटी को उनसे शेयर करने में प्रोब्लम नहीं है ..पर कहने और करने में काफी अंतर होता है, उसके कहने का ये मतलब नहीं था की पंडित सच में ही उसकी पत्नी या बेटी की चुदाई कर दे ...पर अब हो भी क्या सकता था ..बाहर जिस तरह से माधवी पंडित के साथ मजे ले रही थी, उससे एक बात तो साबित हो ही चुकी थी की ये इनका पहली बार नहीं था ... और उसके पास
सिर्फ देखने के और कोई चारा नहीं था ...उसके सामने शीला नंगी पड़ी हुई थी ..उसने टटोल कर उसकी चूत पर हाथ लगाया और पंडित के लंड से निकले हुए रस से भीगी उसकी चूत की मालिश करने लगा ...


बाहर आँख लगाकर उसने देखा की पंडित की ऊँगली अभी तक माधवी की गांड के अन्दर ही है और उसकी मसाज कर रही है ..पंडित का लंड माधवी की गद्देदार गांड को सलामी दे रहा था ..और अब पंडित झुककर उसके आमो का रस पी रहा था ...और माधवी पंडित के सर को अपनी ब्रेस्ट पर जोर से दबा कर उसे और जोर से चूसने के लिए कह रही थी ....


"अह्ह्ह्ह्ह पंडित ....उम्म्म्म्म .....क्या चूसते हो आप ....अह्ह्ह्ह ...मेरे निप्पल तो धन्य हो गए आपके मुंह में जाकर .... अह्ह्ह्ह्ह ....मजा आ रहा है ...."


"साली मुझे तो आजतक ऐसा नहीं बोल इसने ...और पंडित को कैसे चने के झाड़ पर चड़ा रही है ...ये ...." गिरधर बुदबुदाया ...


उसने शीला की एक टांग उठा कर अपने कंधे पर रख ली ...और उसकी चूत पर अपने लंड को लेजाकर एक धक्का मारा ...और उसका उदबिलाव सरकता हुआ शीला की चूत में घुस गया ...


बेहोशी की हालत में के बावजूद शीला के मुंह से एक मीठी सी सिसकारी निकल गयी ...


पंडित ने काफी देर से माधवी के भरे हुए जिस्म को उठा रखा था ..और थक गया था ..उसने उसे नीचे उतार दिया ..और वो फिर से पंडित के लंड को अपने मुंह में लेकर उसकी मिठास का आनंद लेने लगी ...


पंडित भी उसके मुंह को चूत की तरह से चोदने लगा ...


अन्दर गिरधर अपनी किस्मत पर फूला नहीं समा रहा था की आज उसे शीला जैसी मस्त माल की गांड और अब चूत भी मारने को मिल गयी है ...और बाहर पंडित ये जानते हुए की माधवी का पति गिरधर अन्दर से सब कुछ देख रहा है , उसकी बीबी का मुख चोदन करने में लगा हुआ था ...


अचानक बिना किसी वार्निंग के पंडित के लंड ने ढेर सारा मीठा नारियल पानी माधवी के मुंह में निकाल दिया ...जिसे वो बिना कोई देरी किये पी गयी ...


अपनी पत्नी की ऐसी करतूत देखकर गिरधर के धक्के और भी तेज हो गए ...शीला की चूत में ..और वो बडबडाने लगा "भेन चोद ....इतने सालों तक मेरा लंड कभी नहीं चूसा ...और अब ऐसे चूस रही है जैसे बरसों से येही पसंद है रांड को ...साली कुतिया ....भेन की लोडी ...."


आवेश में आकर उसके मुंह से गालियाँ निकलती जा रही थी ...वो अपनी पत्नी पर गुस्सा नहीं था ...बस गिला था की उसने ये सब इतना लेट सीखा ...


पंडित ने माधवी को नीचे जमीं पर लिटा दिया और उसकी चूत के अन्दर अपना मुंह लेकर कूद गया ...


"अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ....... .पंडित ....जी ....उम्म्म्म्म ....चुसो इसे ....आपकी जीभ और होंठ इसे बहुत पसंद आ गए हैं ...अह्ह्ह्ह ...." और पहले की तरह ही उसने पंडित की चुटिया को पकड़ कर जोरों से उसके मुंह को अपनी चूत के ऊपर मारना शुरू कर दिया ...और एक मिनट के अन्दर ही उसके अन्दर से निकल रही बारिश से पंडित के मुंह को धोना शुरू कर दिया ...


और दोनों गहरी साँसे लेते हुए एक दुसरे के ऊपर गिर पड़े ...चुदाई अभी भी होनी बाकी थी ....पंडित का लंड फिर से होने में 30 मिनट और लगने थे अभी ...


एकदम घडी की देखकर माधवी हडबड़ा कर उठी और बोली : " अरे आधा घंटा हो गया ...वो आने वाले होंगे ...मैं चलती हु ." और उसने अपने ऊपर गाऊन पहना चुन्नी ली और बाहर निकल गयी ...




पंडित ने भागकर बाथरूम का दरवाजा खोला ...और गिरधर को शीला की चुदाई करते हुए देखा ...शीला भी होश में आ चुकी थी ...और हक्की बक्की होकर ये सोचते हुए की आखिर मैं बाथरूम में कैसे आ गयी और गिरधर का लंड मेरी चूत के अन्दर कब घुसा , धक्के लेने में लगी हुई थी ..


और गिरधर पंडित की तरफ देखते हुए,शीला की टांगो को पकडे हुए,जोर से धक्के मारने में लगा हुआ था ...और आखिरकार उसने भी अपनी पिचकारी शीला की चूत में छोड़ दी ...


"अह्ह्ह्ह्ह्ह .....उम्म्म्म्म्म ......ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ......."


और उसके ऊपर निढाल सा होकर गिर गया ...

गिरधर ने अपने लंड की आखिरी बूँद भी शीला की चूत में निकाल दी थी ..और अब वो पूरी तरह से खाली हो चूका था ..


शीला की तो टाँगे पूरी सुन्न सी हो चुकी थी ..पहले पंडित और गिरधर ने मिलकर उसकी डबल बजायी और अब गिरधर ने दोबारा से सिंगल ...इतना तो वो आजतक नहीं चुदी थी ..पर पंडित के अलावा गिरधर से भी अपना बेंड बजवाने में उसे काफी मजा आया था ...और उसकी मुस्कराहट उसके अन्दर की ख़ुशी साफ़ बयान कर रही थी .


पंडित ने इशारा करके उसे जाने के लिए कहा ..वो उठी और लडखडाती हुई कमरे में आई और अपने कपडे समेट कर पहने और चुपके से पीछे के दरवाजे से बाहर निकल कर अपने घर चली गयी .


उसके जाते ही पंडित ने गिरधर से कहा : "मुझे मालुम है की तुमने अन्दर से सब कुछ देख ही लिया है की तुम्हारी पत्नी मेरे साथ क्या-२ कर रही थी .."


गिरधर कुछ ना बोला .


पंडित : "देखो गिरधर ...मैंने ये सब तुम्हारी मदद करने के उद्देश्य से किया है ..तुम्ही ने कहा था न की माधवी तुम्हारे किसी भी कार्य में साथ नहीं देती ..जैसे लंड चूसना या चूत चुस्वाना ..मैंने उसे अपने पास बुलाया था और सब समझाया भी था ..पर तुम तो जानते ही हो , जब तक प्रेक्टिकल करके ना दिखाया जाए ये पुराने विचारों वाली औरतें कुछ भी नहीं समझती ..और वो मेरे निर्देशों का ही असर था जब उसने तुम्हारे लिंग को पहली बार चूसा था और अपनी चूत भी चुस्वायी थी .."


गिरधर पंडित की बातें बड़े ध्यान से सुन रहा था ..


पंडित : "और मेरे साथ ये सब करने में कोई नुक्सान भी नहीं है उसे ..क्योंकि मैं इस बात की भनक किसी को भी नहीं लगने दूंगा, और ये सब करते -२ मैं जल्दी ही रितु को भी तुम्हारे लिए राजी कर लूँगा ..तब तक तुम भी शीला के साथ जब चाहे मजे ले सकते हो ..और अब तो माधवी भी तुम्हे कुछ भी करने से मना नहीं करेगी ..क्यों .. "


पंडित ने अपनी तरफ से लालच का एक और दाना गिरधर के सामने फेंका ..


गिरधर ने सर झुका कर अपना सर हिलाया ..उसके सामने कोई और चारा भी तो नहीं था ..वो पंडित से लडाई भी नहीं कर सकता था की उसने क्यों उसकी बीबी के साथ ऐसे सम्बन्ध बनाए, जबकि वो भी किसी और के साथ वही सब करने में लगा हुआ था और अब उसकी नजर अपनी ही बेटी पर भी थी, उसे पंडित का साथ ही सही लगा, क्योंकि उसकी वजह से ही वो आज शीला जैसे माल के साथ मजे ले पाया था और आगे भी ले सकता था , और रितु भी तो थी आगे के खेल में ..


ये सब सोचकर और समझकर वो पंडित से बोला : "आप ठीक कहते हैं पंडित जी ..जैसा आप उचित समझे वैसा ही कीजिये .."


पंडित मुस्कुराया , वो समझ गया था की आज के बाद गिरधर की तरफ से उसे कोई रुकावट नहीं होगी ..


पंडित : "चलो अब तुम भी घर जाओ ..माधवी तुम्हारे लिए कितनी चिंतित थी ..जल्दी जाओ अब .."


गिरधर ने भी अपने कपडे पहने और बाहर निकल गया .


पंडित ने उसके जाते ही दरवाजा बंद किया और आराम से लेट गया ..और सोचने लगा की कितनी चतुराई से उसने गिरधर के सामने ही माधवी से मजे ले लिए ..और आगे भी ले सकने के दरवाजे खोल दिए ..पर अपनी पत्नी को मेरा लंड चूसते देखकर उसमे काफी उत्तेजना भी आ गयी थी ..और उसने बेहोश पड़ी हुई शीला की चूत बाथरूम में ही मारनी शुरू कर दी थी ..अब गिरधर जाते ही माधवी का बेंड बजा देगा ..और अपना गुस्सा , इर्ष्या और उत्तेजना उसके ऊपर निकालेगा ..


पंडित ये सब सोचते -२ एकदम से उठकर बैठ गया ..और मन ही मन बोला : "यार ...ये सीन तो देखने वाला होगा .."


और उसने जल्दी से अपना कुरता और चप्पल पहनी और एक शाल लेकर गिरधर के घर की तरफ चल दिया ..अपना चेहरा उसने शाल से ढक लिया ताकि कोई उसे पहचान ना सके ..
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Reply
01-07-2018, 01:57 PM,
#15
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--15



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गतांक से आगे ......................

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उसके घर के पास पहुंचकर पंडित ने इधर उधर देखा और अन्दर कूद गया ..और पीछे की तरफ से घूमकर गिरधर के कमरे की खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया ..जो खुली हुई थी और वहां काफी अँधेरा भी था ..इसलिए उसे कोई देख भी नहीं सकता था ..


गिरधर थोड़ी देर पहले ही आया था इसलिए अपने कपडे बदल रहा था ..


बाहर से माधवी की आवाज आई : "भूख लगी है तो खाना लगाऊ ?..."


गिरधर : "भूख तो लगी है पर खाने की नहीं ...किसी और चीज की ..जल्दी से अन्दर आ जा अब ..."


पंडित समझ गया की शो शुरू होने वाला है ..


माधवी अन्दर आई, उसके चेहरे की लाली बता रही थी की चुदने की इच्छा उसके अन्दर भी कुलबुला रही है ..पंडित ने उसकी चूत को चाटकर उसके अन्दर की वासना को काफी भड़का दिया था, अब उसे किसी भी कीमत पर अपने अन्दर लंड चाहिए था ..


जैसे ही माधवी ने दरवाजे की चिटखनी लगाई, गिरधर ने पीछे से उसके मुम्मे पकड़ कर जोर से दबा दियी ...माधवी की सिसकारी निकल गयी ..


"अह्ह्ह्ह्ह्ह ....धीरे .....रितु साथ वाले कमरे में ही है ....वो ना जाग जाए ..."


रितु का नाम सुनते ही पंडित के साथ -२ गिरधर का हाथ भी अपने लंड के ऊपर चला गया ...और उन दोनों ने लगभग एक ही अंदाज में रितु के नाम से अपने लंड महाराज को मसल दिया ..


गिरधर के सामने तो माधवी की फेली हुई गांड थी सो उसने अपने लंड का भाला उसके गुदाज चूतडों में घोंप दिया ..पर पंडित बेचारा अपने खड़े हुए लंड को अपने ही हाथों से सहलाकर दिल मसोस कर रह गया ...


माधवी ने अपना चेहरा पीछे करके गिरधर के चेहरे को पकड़ा और उसे चूसने लगी ...


उन्हें चूसते हुए देखकर पंडित का मन हुआ की अन्दर चलकर उनके साथ ही खेल में शामिल हो जाए ..क्योंकि दोनों ही उसे नहीं रोकेंगे ...पर ये समय सही नहीं है ..ये सोचकर वो बस उनका खेल देखने में ही लगा रहा ..


गिरधर ने अपने कपडे जल्दी से उतार दिये और माधवी को अपनी तरफ घुमा कर उसके गाऊन को पकड़कर ऊपर से निकाल दिया और उसे नंगी करके अपने सीने से लगा कर चूमने लगा ..


माधवी उसकी में मचल सी गयी : "अह्ह्ह्ह .....धीरे ....आज मैं कुछ भी करने से मना नहीं करुँगी ....जो भी करना है ...जैसे भी करना है ..कर लो ...और मुझसे भी करवा लो .."


उसकी बात सुनकर गिरधर के साथ -२ पंडित भी उत्तेजित हो गया ...काश हमारे देश की हर औरत अपने पति या बॉय फ्रेंड को ऐसे ही बोले तो कोई भी उनके साथ चीटिंग ना करे और बाहर मुंह ना मारे ..


गिरधर ने उसके सर के ऊपर हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ दबा दिया ..और माधवी भी पालतू कुतिया की तरह अपने मालिक की आज्ञा का पालन करती हुई अपने पंजो पर बैठ गयी और गिरधर के लंड को अपने मुंह में लेकर जोरों से चूसने लगी ...


अचानक चूसते - २ उसने लंड बाहर निकाल दिया और गिरधर की तरफ देखकर गुस्से से बोली : " ये किसकी चूत का रस लगा हुआ है तेरे लंड पर ...बोल किसके साथ मजे लेकर आ रहा है .."


पंडित और गिरधर ने अपना -२ सर पीट लिया ..


शीला की चूत मारकर उसने अपना लंड धोया नहीं था ..और जैसे उसने पंडित के लंड को चूसते हुए बोल दिया था वैसे ही उसने अपने पति को भी रंगे हाथों पकड़ लिया ..


गिरधर : "अरे पागल हो गयी है क्या ...मैंने कहाँ जाना है ..."


बेचारा हकलाता हुआ उसे जवाब दे रहा था ..उसकी समझ में नहीं आ रहा था की क्या बोले और क्या नहीं ...


माधवी : "मैं समझ गयी ...तुम जरुर पंडित के घर पर किसी के साथ मजे कर रहे थे ..क्योंकि यही गंध मैंने पंडित के ल ......."


इतना कहते -२ वो रुक गयी ...अपनी गलती पर उसे अब पछतावा हो रहा था ..की आवेश में आकर वो क्या कह गयी ..

तीर कमान से निकल चुका था ..अब कुछ नहीं हो सकता था ..जो माधवी थोड़ी देर पहले गुस्से में पागल होकर गिरधर के ऊपर बरस रही थी अब वो भीगी बिल्ली बनकर उसके पैरों के पास बैठी हुई अपनी नजरें चुरा रही थी ..


गिरधर : "मुझे पता है की तुम पंडित जी के साथ क्या -२ मस्ती लेकर आई हो .."


उसकी बातें सुनते ही उसने चोंक कर अपना सर ऊपर उठाया ..

गिरधर आगे बोल : "पंडित जी को मैंने अपनी समस्या बताई थी और उन्होंने ही मेरे कहने पर तुम्हे वो सब सिखाने के उदेश्ये से किया था ..कल भी और अभी थोड़ी देर पहले भी जो तुमने पंडित जी के साथ किया, मुझे सब पता है उसके बारे में .."


वो चुपचाप बैठी उसकी बातें सुनती रही ..


वो आगे बोला : "और तुम भी सही हो अपनी जगह ..पंडित जी और मैंने मिलकर एक औरत के साथ आज काफी मजे लिए ...उसका नाम शीला है ..तुम शायद जानती हो उसे .."


माधवी को ध्यान आ गया की पंडित जी ने उसी से रितु को पढ़ाने के लिए बोला है ..उसने हाँ में सर हिला दिया ..


गिरधर : "तुमने पिछले २ महीनो से जो व्यवहार मेरे साथ किया है , उसकी वजह से मेरे अन्दर काफी उत्तेजना भर चुकी थी ..जिस्म की प्यास एक ऐसी चीज है जो इंसान से क्या से क्या करवा देती है ..इसलिए जब पंडित जी ने शीला के साथ सेक्स करने का मौका दिया तो मैं मना नहीं कर पाया .. और हमने मिलकर उसके साथ ...चुदाई की ..."


एक साथ २-२ लंडो से शीला की चुदाई की बात सुनकर माधवी के रोंगटे खड़े हो गए ..उसके निप्पल भी अपने 1 इंच के आकार में आकर सामने की तरफ निकल आये ..जिसे पंडित की पेनी नजरों ने दूर से ही देख लिया ..और वो समझ गया की ये बात सुनकर वो उत्तेजित हो रही है ..


गिरधर : "और हम वो सब कर ही रहे थे की तू वहां आ गयी, इसलिए मैं उस शीला के नंगे जिस्म के साथ वहीँ बाथरूम में छुप गया, और मैंने वहां से बैठकर तुझे पंडित के साथ वो सब करते हुए देखा .."


बेचारी ने अपना सर शर्म से फिर से झुका लिया .


गिरधर : "और सच कहु ..तुम्हे पंडित जी का लंड चूसते हुए देखकर मुझे गुस्सा तो बहुत आया था ..पर एक अजीब सा उत्साह और उत्तेजना भी आ गयी थी ..और जिस शीला को थोड़ी देर पहले पंडित जी ने बुरी तरह से चोदा था उसे मैंने वहीँ बाथरूम में फिर से चोदना शरू कर दिया ..इसलिए तुम्हे उस वक़्त पंडित जी के लंड से वही गंध आई जो अब मेरे लंड से आ रही है ..क्योंकि दोनों एक ही जगह से होकर आये हैं .."


गिरधर ने सब सच -२ बोलकर पूरी पिक्चर साफ़ कर दी ..


गिरधर तो आदमी था और आदमी तो ऐसे अवेध संबंधों के बाद नहा धोकर साफ़ हो जाता है पर औरत अगर वही काम करे तो समाज या उसके सगे सम्बन्धी उसे जीने नहीं देते ..ये ना जाने कैसा सामाजिक कानून है हमारे देश का ..


माधवी : "इसका मतलब तुम्हे मेरे और पंडित जी के संबंधों से कोई परेशानी नहीं है ..?"


गिरधर : "नहीं ..अगर तुम इसमें खुश हो और तुम्हे मजा आ रहा है तो इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है .."


पंडित ने मन ही मन सोचा 'हाँ बेटा ..तुझे क्या परेशानी हो सकती है ..एक तो तेरी पोल पट्टी खुलने के बाद भी तू बच गया ..और ये सब अभी भी इसलिए कह रहा है की आगे के लिए भी तेरा रास्ता साफ़ हो जाए और माधवी भी दोबारा कुछ करने से ना टोके ...'


अपने पति की तरफ से से खुली छूट मिलने की ख़ुशी में माधवी ने एक जोरदार झटके से गिरधर के लंड को दोबारा अपने मुंह में दबोचा और उसे सड़प -२ करके चूसना शुरू कर दिया ..

गिरधर के लंड पर शायद उसके दांत लग गए थे ...वो बिलबिला उठा ..


'अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ......साssssssss लीssssssssss कुतिया .......धीरे ......उन्न्न्न्ह्ह्ह '


अचानक पंडित के कानों में साथ वाले कमरे से कुछ आवाज आई ..वो साथ वाली खिड़की से अन्दर झाँकने लगा ..वहां रितु सोयी हुई थी ..और गिरधर के चिल्लाने की वजह से उसकी नींद एकदम से खुल गयी और वो उठ खड़ी हुई ..और हडबडाहट में वो अपने बेड के साथ पड़े टेबल से जा टकराई ..आवाज धीरे थी जो माधवी और गिरधर तक नहीं पहुंची पर पंडित ने सुन ली थी ..


रितु ने हमेशा की तरह वही लम्बी फ्राक पहनी हुई थी ..वो नींद के आलम में खड़ी हुई सोच रही थी की आवाज कहाँ से आई, तभी गिरधर के मुंह से एक और सिसकारी निकल गयी ..


आज माधवी कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी अपने पति पर ..और वो पंडित से सीखी हुई लंड चुसाई की कला का पूरा उपयोग अपने पति के लंड पर कर रही थी ..


गिरधर : "अह्ह्ह .....धीरे ....चूस ......ऐसी खुन्कार तो तू आजतक नहीं दिखी ..."


अब उसे क्या पता था की ये तो माधवी का ख़ुशी जाहिर करने का तरीका था, गिरधर ने उसे पंडित के साथ मजे करने की पूरी छूट जो दे दी थी ..उसके बदले अपने पति को पूरी ख़ुशी देना तो बनता ही था ना ...


गिरधर के कमरे और रितु के कमरे के बीच एक दरवाजा भी था, जो हमेशा बंद ही रहता था ..दोनों कमरों में जाने के लिए बाहर से ही एक - २ दरवाजा था ..और कभी भी बीच का दरवाजा खोलने की जरुरत नहीं पड़ी ..


रितु अब तक समझ चुकी थी की उसकी माँ और पिताजी के बीच चुदाई का महासंग्राम हो रहा है ..और उसे भी अब तक इन सब बातों का ज्ञान होने लग गया था ..पहले तो उसके पिताजी ने ही उसके कुंवारे होंठों को पीकर उसे जीवन में पहली बार स्वर्ग के मजे दिलाये थे और उसके उरोजों को मसलकर उसकी भावनाओं को भी भड़काया था ..और उसके बाद पंडित जी ने भी अपनी ज्ञान भरी बातों से उसके मन से अज्ञानी बादल हटाये थे ..


वो दबे पाँव दरवाजे के पास पहुंची और इधर - उधर देखकर उसने एक छेद ढून्ढ ही लिया और उसमे आँखे लगा कर दुसरे कमरे में अपने माँ बाप के बीच हो रहे प्यार भरे लम्हों को देखने लगी ..


पंडित ने पहले तो शुक्र मनाया की उसकी आँख पहले नहीं खुली और उसने गिरधर और माधवी के बीच होने वाली बातें नहीं सुनी ..वर्ना आगे के लिए उसे पटाने में प्रोब्लम हो सकती थी ..


दुसरे कमरे में देखते ही उसकी सिट्टी पिट्टी गम हो गयी ...उसके पिताजी का लम्बा खूंटा उसकी माँ चूस चूसकर मरी सी जा रही थी ...ऐसा लग रहा था की जिन्दगी की सबसे बड़ी ख़ुशी माधवी को सिर्फ लंड चूसने में ही मिलती है ..उसका उत्साह और उत्तेजना देखते ही बनती थी ..


रितु के नन्हे -२ निप्पल खड़े हो गए और उसका एक हाथ अपने आप उनपर जाकर उनके अकार का जायजा लेने लगा ..


पंडित का लंड भी धोती में तम्बू बना कर खडा था , उसने अपनी धोती खोल कर जमीन पर गिरा दी और अपने लंड को हाथ में लेकर मसलने लगा ..


पंडित ऐसी जगह पर खड़ा था की एक कदम इधर खिसकने से उसे गिरधर और माधवी के कमरे का नंगा नजारा देखने को मिल रहा था और दूसरी तरफ कदम खिसकाने से रितु अपने छोटे-२ अमरुद मसलती हुई, अपने ही माँ बाप को मजे लेते हुए देखकर, दिखाई दे रही थी ..


गिरधर ने माधवी को ऊपर खींचा उसकी एक टांग उठाकर अपने हाथ में रख ली और अपना थूक से भीगा हुआ लंड उसकी चूत में लगाकर नीचे से एक जोरदार शॉट मारकर अपने अपोलो को उसकी गेलेक्सी में धकेल दिया ..


'अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .....उम्म्म्म्म .....ओह्ह्ह ..तरस गयी थी ....मैं ...इसे अन्दर लेने के लिए ...अह्ह्ह्ह .... उम्म्म्म्म ...पुरे दो महीने बाद प्यास बुझी है इसकी ...आज तो इतना चोदो मुझे .....की सारी कसर निकल जाए ...अह्ह्ह्ह ...'

गिरधर को उसकी बातों से ये भी पता चल गया की उसने पंडित के साफ़ सिर्फ चुसम चुसाई ही की है ...चुदाई नहीं . पर पंडित का लंड जब उसकी पत्नी की चूत में जाएगा तो कैसे मचलेगी वो ...ये सोचते हुए उसने अपने धक्कों की स्पीड और तेज कर दी ..


माधवी के मुम्मे गिरधर के लंड के हर झटके से आसमान की तरफ उछल जाते ...और फिर उतनी ही तेजी से दोबारा नीचे आते ..ऐसे झटके जिन्दगी में पहली बार मिल रहे थे माधवी को ...उसने अपनी बातों और हरकतों से गिरधर को इतना उत्तेजित कर दिया था की वो आज उत्तेजना के एक नए आयाम को छुने को आतुर था ..


पंडित ने मन में सोचा 'अगर कुछ गलत काम करने से ऐसे मजे मिले तो वो काम करना गलत नहीं है ..आज उसकी वजह से ही उनके रूखे सूखे दम्पंत्य जीवन में एक नए रक्त का संचार हो पाया है ..'


पंडित मन ही मन अपने किये हुए कार्य पर गर्व महसूस करके मुस्कुराने लगा ..


उसने खिसककर रितु के कमरे में झाँका तो उसकी बांछे खिल उठी ...अपने माँ बाप को बुरी तरह से चुदाई करते हुए देखकर वो भी पूरी तरह से उत्तेजित हो गयी थी ...उसने अपने स्तनों को बुरी तरह से मसलकर अपने अन्दर मचल रही उत्तेजना को शांत करने की कोशिश की और जब वो नाकाम रही तो उसने एक ही झटके में अपनी फ्रोक को अपने सर के ऊपर से उतार कर एक तरफ फेंक दिया ..और अब था पंडित की लार टपकाती हुई आँखों के सामने कमसिन रितु का नंगा जिस्म ..


अह्ह्ह्ह्ह्ह .....रितु .....म्मम्मम .


पंडित ने अपना लंड मसलते हुए एक दबी हुई सी सिसकारी मारकर अपने लंड को तेजी से हिलाना शुरू कर दिया ..
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Reply
01-07-2018, 02:02 PM,
#16
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--16



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गतांक से आगे ......................

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रितु के छोटे-२ स्तन जो करीब छोटे संतरों के अकार के होंगे उसके सामने थे, और नीचे उसकी पतली कमर और पीछे भरवां गांड ..उसने सोचा 'कसम से एक बार ये मेरे नीचे आ जाए इसको तो बिना टिकट के आसमान की सेर करवा दू ..'


पंडित ने अपने लंड को और तेजी से मसलना शुरू कर दिया ..


अचानक गिरधर के कमरे से माधवी की आवाजें और तेजी से आनी शुरू हो गयी ...


"अह्ह्ह्ह्ह्ह ......ऐसे ही .....चोद ....साले ....अह्ह्ह्ह ......भेन चोद .......डाल अपना लंबा लंड .....और अन्दर ....तक ...अह्ह्ह्ह ......अह्ह्ह्ह ...ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ..."


गिरधर ने उसे अपनी गोद में उठाकर अपना लंड उसकी फुद्दी में जोर - २ से पेलना शुरू कर दिया था ...


और लगभग एक साथ ही दोनों का रस माधवी की ओखली में निकला और दोनों वहीँ बेड के ऊपर लेटकर गहरी साँसे लेने लगे ..


और दूसरी तरफ बेचारी रितु सिर्फ अपने संतरों को मसलकर ही रह गयी ...उसे शायद अभी तक मुठ मारना भी नहीं आता था ..वो अपने हाथों को बस अपनी चूत पर रगड़कर ही रह गयी ..वहां और क्या करने से कैसे मजे मिलेंगे, उसे नहीं पता था ..और उसकी नादानी को देखकर पंडित उसकी कुंवारी चूत को देखते हुए जोरों से बडबडाने लगा ..


'अह्ह्ह्ह ...सा ली ...तुझे तो पूरा तराशना पडेगा ....अह्ह्ह्ह तेरी कमसिन जवानी को तो मैं अपने लंड के पानी से नहलाऊगा ...अह्ह्ह्ह्ह्ह ....ये ले ....नहा ले ..'


और ये कहते हुए उसके लंड ने अपने पानी का त्याग कर दिया रितु की खिड़की पर ...और गाड़े और सफ़ेद रस से खिड़की के नीचे की दीवारें रंग गयी ..


पंडित को पता था की अगले दिन रितु को क्या सिखाना है अब ..वो अपने कपडे समेट कर चुपके से जहाँ से आया था वहीँ से वापिस चला गया ..


अब तो उसे अगले दिन का इन्तजार था ...

वो रात बड़ी ही मुश्किल से कटी थी पंडित की ..


सुबह उठकर हमेशा की तरह पंडित ने मंदिर के सारे कार्य निपटाए, भक्तों को प्रसाद दिया, पूजा अर्चना की और वापिस अपने कमरे में आ गया और थकान दूर करने के लिए चाय पीने की सोची पर चाय पत्ती नहीं थी, कल भी जब वो सामान लेने के लिए इरफ़ान की दूकान पर गया था तो उसे याद नहीं रहा था ..वैसे तो इरफ़ान ने उसे शाम को आने के लिए कहा था पर अभी चाय पत्ती लाना भी जरुरी था, इसलिए वो वहां चल दिया ..


दूकान पर पहुंचकर देखा तो पाया की दूकान तो बंद है ..सुबह के 9 बजने वाले थे, इतनी देर तक तो वो दूकान खुल ही जाती है ..वो कुछ देर तक वहां खड़ा हुआ सोचता रहा की ऊपर उसके घर जाए या नहीं ..पर फिर कुछ सोचकर वो ऊपर चल दिया ..


अन्दर जाने का दरवाजा खुला हुआ था, उसने दरवाजा खोल कर आवाज लगायी : "इरफ़ान भाई ...घर पर ही हो ..."


पर कोई आवाज नहीं आई, वो थोडा अन्दर गया तो बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आई, पंडित ने फिर से पुकारा ..


'इरफ़ान भाई ...ओ इरफ़ान भाई ...'


अन्दर से नूरी की नशीली सी आवाज आई 'कोन है ...'


उसकी आवाज सुनते ही पंडित के शरीर में करंट सा दौड़ गया, पंडित ने अपने आप को संभाला और बोला : "मैं हु ..मंदिर वाला पंडित .."


नूरी : " अरे वाह ...पंडित जी ..रुकिए जरा ...मैं अभी आई ..."


पंडित वहीँ सोफे पर बैठ गया ..और फिर से तेज आवाज में बोला : "इरफ़ान भाई कहाँ चले गए ..आज दूकान भी नहीं खुली ..."


अन्दर से नूरी ने जवाब दिया : "वो आज सुबह -२ हिना खाला का फ़ोन आया था, उनका छोटा बेटा हॉस्पिटल में है ..उन्हें कुछ पैसों की जरुरत थी ..वही देने गए हैं ..२ घंटे में आयेंगे वो .."


इतना कहते-२ वो बाहर निकल आई ...पंडित उसे देखते हुए जैसे सपनों की दुनिया में खो सा गया ...

वो बिलकुल बदल गयी थी ...जिस्म पूरा भर सा गया था ..गोरा चिट्टा रंग ..चमकता हुआ चेहरा, गुलाबी आँखें , पतले और लाल सुर्ख होंठ , और नीचे का माल देखकर तो पंडित की जीभ कुत्ते की तरह से बाहर निकल आई,

उसके दोनों मुम्मे जो पहले 34 के साईज के थे, अब 38 के हो चुके थे , कमर का कटाव उसके कसे हुए सूट में से साफ़ नजर आ रहा था , और उसकी मोटी टांगों का गोश्त तंग पायजामी को फाड़कर बाहर आने को अमादा था ..उसके बाल भीगे हुए थे, जिनमे से पानी की बूंदे अभी तक टपक रही थी ..


पंडित : "मैं तो दूकान से कुछ सामान लेने के लिए आया था ..पर दूकान बंद थी, इसलिए मैंने सोचा की ऊपर आकर देखू की सब ठीक तो है न, वरना इरफ़ान भाई की दूकान कभी बंद तो नहीं होती ..ऊपर आकर देखा तो दरवाजा भी खुला हुआ था ..इसलिए सीधा अन्दर आ गया .."


वो नूरी के जिस्म को घूरने में लगा हुआ था और बोलता भी जा रहा था .


नूरी बोली : "वो अब्बा जान जब गए तो बाहर का दरवाजा बंद करना भूल गयी मैं ...वैसे भी कोई आता ही कहाँ है हमारे घर ..कल रात को अब्बा ने बताया था की आप आयेंगे शाम को ..कुछ बात करने के लिए .."


पंडित : "हाँ ...वो ...दरअसल ..." पंडित को सूझ ही नहीं रहा था की क्या बोले और क्या नहीं ..


नूरी : "मुझे पता है की अब्बा ने आपको सब कुछ बता दिया है मेरे बारे में ..और शायद आपसे बोला भी है की मुझे कुछ समझाए ..इसलिए आपने शाम को आने को कहा था न .."


पंडित ने हाँ में सर हिलाया ..और नूरी की तरफ देखता रहा , वो सब बोलते - २ उसकी आँखों से पानी निकलने लगा था ..वो रोने लगी ..पंडित को सूझ ही नहीं रहा था की वो करे तो करे क्या ..


नूरी रोते -२ उनके पास आई और अपने घुटने पंडित के सामने टिका कर उनके पैरों पर अपने हाथ रखकर बैठ गयी ..और बोली : "पंडित जी ...अब्बा तो समझते ही नहीं है ..जिस तकलीफ से मैं गुजर रही हु वो सिर्फ मैं ही जानती हु ..मैं तो अपनी परेशानी उन्हें बता भी नहीं सकती .."


पंडित के सामने बैठने की वजह से नूरी के दोनों उरोज किसी पकवान से सजी प्लेट की तरह पंडित के सामने थे ..उनके बीच की लकीर (क्लीवेज) लगभग २ इंच तक बाहर दिखाई दे रही थी ..और सूट के अन्दर दोनों मुम्मों को जैसे जबरदस्ती ठूंसा गया था ..वहां का गोरापन भी कुछ ज्यादा ही था ..और पानी की बूंदे वहां भी फिसल कर नीचे की घाटी में छलांग लगा रही थी ..उसकी बातों से ज्यादा पंडित का उसके भीगे हुए हुस्न पर ध्यान था ..


पंडित : "तुम ..अगर चाहो तो मुझे अपनी परेशानी बता सकती हो .."

नूरी कुछ देर तक अपनी नजरें झुका कर बैठी रही ..जैसे सोच रही हो की पंडित को बोले या नहीं .. ..फिर धीरे से बोली : "वो दरअसल ...जब से मेरा निकाह हुआ है, मेरा शोहर और घर के दुसरे लोग चाहते हैं की मैं जल्द से जल्द माँ बन जाऊ , और इसके लिए हमने पहले दिन से ही कोशिश करनी भी शुरू कर दी थी .."


पंडित ने सोचा 'साली साफ़ -२ क्यों नहीं बोलती की बिना कंडोम के चुदाई करनी शुरू कर दी थी तेरे शोहर ने पहली रात को ही ..'


वो आगे बोली : "पर २ महीने के बाद भी कोई रिसल्ट नहीं निकला तो घर वालों ने और मेरे शोहर ने भी मुझे भला बुरा कहना शुरू कर दिया ..घर में लडाई झगडे भी होने लगे , और जब ज्यादा हो जाती तो मैं घर भी आ जाती, पर थोड़े समय के बाद सब कुछ भूलकर लौट भी जाती थी ...पर इस बार तो मैंने सोच लिया है ..मैं वापिस जाने वाली नहीं हु .."


पंडित : "क्यों ..ऐसा क्या हुआ है .."


नूरी : "उन्होंने मेरे सारे टेस्ट करवा लिए, मुझमे कोई कमी नहीं है ..और जब मैंने अपने शोहर को टेस्ट करवाने के लिए कहा तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया ..और बोले की उन्हें ये सब करने की कोई जरुरत नहीं है ..कमी मेरे अन्दर ही है ..और वो दूसरी शादी करके दिखा भी देंगे की वो बच्चा पैदा करने की काबलियत रखते हैं ..पर मुझे मालुम है की दूसरी शादी करने के बाद भी कुछ नहीं होने वाला ..कमी उनके अन्दर ही है ..ये बात मानने को वो तैयार ही नहीं है .."


पंडित : "देखो नूरी ..तुम्हारी बात सही है ..पर हमारा समाज मर्द प्रधान है ..और उसे ही प्राथमिकता देता है ..इन सब बातों के लिए हमेशा से ही औरत को दोषी माना जाता है ..तुम अपनी जगह सही हो ..तुमने सही किया, अगर उसे तुम्हारी कदर होगी तो अपने आप ही आएगा तुम्हे लेने .."


नूरी पंडित की बातें सुनकर मुस्कुरा दी ..उसने सोचा , चलो कोई तो है जिसे उसके निर्णय की कदर है ..


पंडित : "पर तुमने अपने अब्बा के बारे में भी सोचा है कभी ...वो कितने चिंतित रहते हैं ..तुम उन्हें ये सब कुछ बता क्यों नहीं देती .."


नूरी : "नहीं ...नहीं ..मैं उनसे ये सब कभी नहीं बोल सकती ..उन्हें काफी तकलीफ होगी ..उन्हें बी पी की प्रॉब्लम है, ये सब सुनकर और अपनी बेटी का घर उजड़ता हुआ देखकर वो और भी टेंशन ले लेंगे ..नहीं ...मैं उन्हें ये सब नहीं बता सकती .."


पंडित : "फिर एक ही उपाय है इसका ...तुम वापिस अपने घर जाओ ..ताकि तुम्हारे अब्बा की परेशानी कम हो जाए .."


नूरी : "पर वहां जाकर मेरी परेशानी शुरू हो जायेगी, उसका क्या ..उन्हें तो बस मेरी कोख में बच्चा चाहिए, ताकि अपने समाज में वो गर्व से कह सके की उनका लड़का नामर्द नहीं है ..."


उसने अपने दांत पीस कर ये बात बोली ..


फिर कुछ सोचकर वो बोली : "पर एक तरीका है ...जिससे मैं वहां वापिस भी जा सकती हु और उन्हें सबक भी सिखा सकती हु .."


पंडित : "क्या ...??"


नूरी : "मैं किसी और के साथ सम्बन्ध बना लू ..और अपनी कोख से उन्हें अलाद नसीब करवाऊ ...और ये सब जानते हुए की मेरी औलाद मेरे नामर्द पति की निशानी नहीं है, मुझे उन्हें सबक सिखाने का मौका भी मिल जाएगा ..."


पंडित उसकी बातें सुनकर भोचक्का रह गया ...वैसे पंडित के मन में सबसे पहले यही बात आई थी की उसे बोले की तू बाहर से चुद ले और उन्हें बच्चा दे दे ..उन्हें क्या पता चलेगा ...पर यही बात नूरी ने इतनी आसानी से कह डाली, इसका उन्हें विशवास ही नहीं हो रहा था ..और अब पंडित को अपना नंबर लगता हुआ दिखाई दे रहा था ..


पंडित : "देखो… जो भी तुमने सोचा है ..वो गलत तो है ..पर तुम अपनी जगह सही हो ..अपनी ग्रहस्त जिन्दगी बचाने के लिए तुम्हारा इस तरह से सोचना बिलकुल सही है ..मुझे तुम्हारा ये सुझाव पसंद है ..पर क्या ...तुमने ...सोचा है की ...किसके साथ ..मेरा मतलब है .."


नूरी की आँखों में भी गुलाबी डोरे तेरने लगे ..वो धीरे से फुसफुसाई : "वो मैं सोच रही थी ...की ..अपने ...अब्बा को ही ...मतलब ..उनके साथ ...ही कर लू ..."

नूरी की बातें सुनते ही पंडित के सपनों का महल एक ही पल में चूर चूर हो गया ...


नूरी : "आप ही बताइए पंडित जी ..उनसे बेहतर और कौन होगा ...इस काम के लिए ..घर की बात घर पर ही रह जायेगी ...और वैसे भी, अम्मी के इंतकाल के बाद अब्बा की हालत देखि है मैंने ...रात -२ भर जागते रहते हैं ..तड़पते रहते हैं अपने बिस्तर पर ...और ...और ...अपने हाथों से ..खुद ही ..वो भी करते हैं ..."


पंडित उसकी बात सुनकर चोंक गया : "क्या ...क्या करते हैं .."


नूरी : "अपने पेनिस को रगड़ते हैं ...मूठ मारते हैं ...मैंने देखा है ..उन्हें .."


पंडित समझ गया की नूरी का मन शुरू से ही अपने अब्बा यानी इरफ़ान के ऊपर आया हुआ है ..इसलिए वो चुप कर उसकी हर बात पर नजर रखती है ..


नूरी : "पंडित जी ..आपको मैंने ये सब इसलिए बताया की आप मेरी मदद करो ..आप को मैं अपना सच्चा हितेषी मानती हु ..और आप अब्बा को भी अच्छी तरह से जानते हैं ..आप ही कोई रास्ता निकाले जिससे मैं वो सब कर सकू जो मैंने सोच रखा है .."


पंडित समझ तो गया था की वो अपनी बात पर अडीग है .अपने बाप से चुदवा कर और प्रेग्नेंट होकर ही मानेगी ..पर पंडित ने भी कच्ची गोलियां नहीं खेली थी ..वो अपने हाथ आये हुए इतने अच्छे अवसर को नहीं जाने दे सकता था ..उसके मन में प्लान बनने शुरू हो गए ...

पंडित को काफी देर तक चुप रहते और कुछ सोचता हुआ देखकर नूरी बोली : "पंडित जी ..क्या सोचने लगे ..बताइए न, कैसे होगा ये सब ..जो मैंने सोचा है .."


पंडित : "देखो नूरी ..तुम मेरी बात का गलत मतलब नहीं निकालना ..पर जो भी तुम सोच रही हो, वो इतना आसान भी नहीं है ..मैं इरफ़ान भाई को अच्छी तरह से जानता हु ..दरअसल ..हमारी दोस्ती है ही इतनी गहरी की वो अपने दिल की हर बात मुझसे शेयर कर लेते है ..और उन्हें जो प्रोब्लम है वो मुझे भी पता है .."


नूरी (आश्चर्य से ..) : "उन्हें ..उन्हें क्या प्रोब्लम है ..."


पंडित : "वो दरअसल ..इरफ़ान भाई के लिंग में कुछ प्रोब्लम है ..बढती उम्र के साथ वो उनका साथ नहीं दे रहा है ..और मैंने उन्हें कुछ ख़ास किस्म की ओषधि लगाकर अपने लिंग की मालिश करने को कहा है ताकि वो पहले जैसा ताकतवर हो जाए ..और जब तक वो नहीं होगा उनके लिंग से निकले वीर्य में भी कोई शुक्राणु अपना कमाल नहीं दिखा पायेंगे ...और तुम्हारीसारी प्लानिंग धरी की धरी रह जायेगी ."


पंडित ने जल्दबाजी में अपने मन की बनायी हुई झूटी कहानी सुना दी नूरी को ..


पंडित की बाते सुनकर नूरी का मुंह खुला का खुला रह गया ...


नूरी : "पर ...पर पंडित जी ...आप ये सब ..कैसे ..क्यों कर रहे है .."


पंडित : "दरअसल मैंने ओषधि विज्ञान को पड़ा हुआ है और इस बात का तुम्हारे अब्बा को भली भाँती पता है ..इसलिए उन्होंने मुझे अपनी व्यथा बताई थी ..और वही ओषधि का लेप वो अपने लिंग पर रोज करते हैं जिसे तुमने समझा की वो अपने अन्दर की उत्तेजना शांत कर रहे है ...उन्हें पहली जैसी अवस्था में आने के लिए कम से कम 6 महीने का समय लगेगा .."


नूरी : "या अल्लाह ...इतने समय में तो क्या से क्या हो जाएगा ...अब मैं क्या करू ..अच्छा हुआ मैंने अपने मन की मानकर अब्बा को अपने बस में करने की पहले नहीं सोची ...वर्ना सब कुछ करने के बाद भी कुछ ना हो पाता तो मैं उनसे पूरी उम्र नजरें न मिला पाती ...अब क्या होगा मेरा ..."


पंडित अपनी कुटलता पर मन ही मन मुस्कुरा रहा था ..


पंडित : "पर तुम परेशान मत हो .कोई न कोई हल निकल ही आएगा ..तुम्हारे अब्बा के अलावा कोई और भी तो होगा तुम्हारे जहन में जो तुम्हारी ऐसी मदद कर पाए .."


नूरी लगभग टूटी हुई सी आवाज में बोली : "नहीं पंडित जी ...और कोई नहीं है ..मैंने ऐसा कभी सोचा नहीं था ..पर मेरे साथ जो खेल जिन्दगी मेरे साथ खेल रही है , उसकी वजह से मैंने ये कदम उठाने की सोची ..और कोन है जो मेरी मदद करे .."


पंडित का मन कह रहा था की चिल्ला कर बोले 'भेन की लोड़ी , तेरे सामने एक जवान और हस्त पुष्ट इंसान खड़ा है ...मुझे बोल न ..'


तभी जैसे पंडित के मन की बात समझकर नूरी कुछ सोचते-२ पंडित को देखकर दबी आवाज में बोली : "पंडित जी ..अब आप ही है जो मेरी मदद कर सकते हैं ..."


पंडित (अनजान बनते हुए ) : "मैं ...कैसे ..."


नूरी (अपनी नजरें नीची करते हुए ) : "आप मुझे गलत मत समझिएगा ..पर मैं किसी और को कहने से अच्छा आपसे अपनी मदद करने की उम्मीद रखती हु ...अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो ...क्या आप… मुझे ...मुझे ..."



वो आगे ना बोल पायी ..


पंडित : "ये क्या कह रही हो तुम नूरी ...मैं कैसे तुम्हारे साथ वो सब ...."


नूरी एकदम से तेष में आते हुए : "क्यों ..क्या कमी है मुझमे ..मैं सुन्दर नहीं हु ..आपको पसंद नहीं हु क्या ..मुझे सब पता है पंडित जी ..आप मुझे किस नजर से देखते हैं ..लड़की को कोनसा इंसान कैसी नजर से देख रहा है और उसके बारे में क्या सोच रहा है उसे सब पता रहता है , फिर चाहे वो लड़की का भाई या बाप हो या फिर रिश्तेदार या कोई और मिलने वाला ..मैंने देखा है आपकी नजरों में भी, वही लालसा , वही प्यास , वही ललक जो मुझे पाना तो चाहती है पर सीधा कहने से डरती है ..है न पंडित जी ..बोलिए ..."


पंडित ने अपना सर झुक लिया, नूरी उनकी समझ से कही ज्यादा चतुर निकली ..


उनका झुक हुआ चेहरा देखकर नूरी बोली : "पंडित जी ..देखिये ..मेरा मकसद आपको ठेस पहुंचाने का नहीं था ...मैं तो सिर्फ .आपसे मदद मांग रही थी ...बोलिए ...आप मेरी मदद करेंगे ना .."


कहते -२ नूरी के हाथ पंडित की जांघो पर चलने लगे ..उसकी साँसे तेज होने लगी ...उसके उभार ऊपर नीचे होने लगे ..और आँखे और भी गुलाबीपन पर उतर आई ..और ये सब पंडित जी से सिर्फ एक फुट की दुरी पर हो रहा था ..
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Reply
01-07-2018, 02:02 PM,
#17
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--17



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गतांक से आगे ......................

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वो पंडित से चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार थी, पंडित के लंड से चुदकर वो प्रेग्नेंट होना चाहती थी ... अब पंडित के लिए भी अपने आप को संभालना मुश्किल हो गया ..उसने नूरी के नूर टपकाते हुए चेहरे को अपने हाथों में पकड़ा और धीरे से बोले : "ठीक है ..जैसा तुम चाहो ..मैं तैयार हु तुम्हारी मदद करने के लिए ..."


पंडित का इतना कहना था की नूरी की आँखों से आंसू निकल गए और उसने आगे बढकर पंडित के गले में अपनी बाहें डाल दी ..उसके दोनों खरबूजे पंडित की छाती से पीसकर अपना गुदा वहां महसूस करवाने लगे ..


पंडित ने भी उसकी पीठ पर अपनी जकड बनाते हुए उसे अपने ऊपर खींच लिया ..और पीछे की तरफ लेट गया ..नूरी का गदराया हुआ जिस्म पंडित के ऊपर पड़ा हुआ था ..उसके रेशमी बालों ने दोनों तरफ से गिरकर उसके और पंडित के चेहरे को किसी जंगले की तरह से ढक लिया ..नूरी ने अपना चेहरा ऊपर उठाया और पंडित की आँखों में बड़े प्यार से देखा ..और फिर अपनी आँखे बंद करते हुए वो नीचे झुकी और पंडित के होंठों को अपने अन्दर समेट कर उसे जोर से चूम लिया ..


अह्ह्ह्ह्ह ...क्या एहसास था ..उसके गुलाब की पंखड़ियों का ..ऐसा लग रहा था की गुलाब की पत्तियां उसके होंठों को चूस रही है ..इतना कोमल एहसास पंडित को आज तक नहीं हुआ था ...


पंडित ने दुगने जोश के साथ अपनी पकड़ बडाई और उसके होंठों को चूसने लगा ...


'उम्म्म्म ....पंडित जी ....धीरे ...अहह ...आप तो काफी जालिम लगते हैं इस मामले में ...'


नूरी की कम्प्लेंन सुनकर पंडित ने अपना उत्तेजना पर लगाम लगायी ..और अपने हाथ नीचे करके हमेशा से आँखों के आकर्षण का केंद्र रहे उसके उरोजों को पकड़ा और उन्हें सहलाने लगा ...मगर प्यार से.


उसकी ब्रेस्ट पर चमक रहे निप्पल पंडित को साफ़ महसूस हो रहे थे ..वो अभी -२ नहा कर आई थी इसलिए उसके शरीर की ठंडक पंडित को काफी सुखद लग रही थी ..


पंडित ने उसके सूट को नीचे से पकड़ा और ऊपर करके निकाल दिया ...उसने नीचे ब्लू कलर की ब्रा पहनी हुई थी ..पंडित ने उसकी ब्रा भी खोल दी ..और जैसे ही वो खुली, उसमे से पके हुए फलों की तरह उसके दोनों आम बाहर निकल कर पंडित के चेहरे पर आ गिरे ..और पंडित के होंठ और जीभ जोर -२ से उनपर चलने लगे ...नूरी ने सोचा भी नहीं था की धार्मिक काम काज करने वाला ये पंडित सेक्स के ऐसे दांव पेंच भी जानता होगा जिसे देखकर लड़की के मुंह से तो क्या चूत से भी चीखे निकल जाए ...


'अह्ह्ह्ह ....पंडित जी .....उम्म्म्म ....क्या करते हो ...अह्ह्ह ...बहुत मजा आ रहा है ...अह्ह्ह ...'


पंडित उसे ये सब मजे देने के लिए ही तो सब कर रहा था ...


पंडित के हाथ उसकी पायजामी की तरफ चले, उसने तो जैसे सोच लिया था की आज ही इसे प्रेग्नेंट करके रहेगा ...


पर तभी बाहर का दरवाजा खडका ..दोनों चोंक गए ..


नूरी ने जोर से पुछा : "कोन है ...बाहर "


"बेटा ...मैं ...हु ..खोलो ..." वो इरफ़ान की आवाज थी , कमीना दो घंटे में आने वाला था , पंडित ने मन ही मन सोचा ...


दोनों घबरा गए, नूरी ने जल्दी से अपने कपडे पहने और पंडित को अपने कमरे में लेजाकर बेड के नीचे छुपा दिया और जाकर दरवाजा खोल दिया ..


दोनों की आवाजें पंडित साफ़ सुन पा रहा था ..


नूरी : "अब्बा जान ...आप काफी जल्दी आ गए ..."


इरफ़ान : "हाँ ..मैंने वो पैसे सीधा उसके खाते में जमा करवा दिए ..वो ए टी एम से निकलवा लेगी ..वहां जाने और आने में काफी समय लगता ..शाम को उसे देखने चला जाऊंगा ..अभी दूकान भी तो खोलनी है ..तू मेरे लिए जल्दी से नाश्ता बना, मैं नहा कर आता हु .."


वो नहाने के लिए जल्दी से गुसलखाने में घुस गए, नूरी ने भागकर पंडित को बाहर निकाल और उसे चुपचाप बाहर निकाल दिया ...पंडित को अपनी हालत आजकल के नोजवान आशिक जैसी लग रही थी जो लड़की के घर से उसके बाप के डर से छुप कर भाग रहा था ..पर जो भी हो, नूरी के जलते हुए बदन के आधे अधूरे एहसास ने पंडित के अन्दर की ज्वाला को और भी ज्यादा जला दिया था ..उसे अब जल्द से जल्द उसके साथ चुदाई करनी थी और उसे बच्चा देना था ...वो शाम को आने का वादा करके जल्दी से नीचे उतर गया ..


और वैसे भी , रितु के आने का टाईम भी होने वाला था ..

पंडित अपने कमरे में भागकर पहुंचा, चलते हुए उसका एक हाथ अपनी धोती के ऊपर था, वैसे धोती का तो एक बहाना ही था, असल में वो अपने खड़े हुए लंड को पकड़ कर चल रहा था, उसे डर था की उसका खड़ा हुआ लंड कोई देखा ना ले ..


दरवाजा बंद करके वो अपनी उखड़ी हुई साँसों पर काबू पाते हुए आँखे बंद करके अपने खड़े हुए लंड को मसलने लगा और नूरी के बेपनाह हुस्न को याद करते हुए उसकी धोती कब नीचे गिर गयी, उसे भी पता नहीं चला ...


उसके लम्बे लंड के ऊपर चमक रहे सुपाडे पर नूरी के नाम का पसीना उभर आया ..उसने वो प्रिकम अपने पुरे लंड पर मलकर एक दबी हुई सी सिसकारी मारी ...नूरी के नाम की .


'अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .....नूरी ......क्या माल है ....उम्म्म्म्म ....क्या मुम्मे थे तेरे .....इतने मीठे ....इतने कड़क निप्पल ....अह्ह्ह्ह्ह्ह .....ओह्ह्ह्ह्ह नूरी ....'


पंडित अपने दरवाजे की ओट लेकर खड़ा हुआ अपना लंड मसल रहा था ...तभी दरवाजे पर धीरे से किसी ने खडकाया ..


पंडित ने आनन् फानन में अपनी धोती ऊपर उठाई और अपने लंड को छुपाने की असफल कोशिश करते हुए जैसे ही पूछना चाहा की कौन है ...बाहर से आवाज माधवी की आवाज आई "पंडित जी ...खोलिए तो जरा ..."


माधवी की रसीली आवाज सुनते ही पंडित के हाथों से धोती छुट गयी और उसने जल्दी से दरवाजा खोलकर माधवी का हाथ पकड़ कर अन्दर खींचा और दरवाजा फिर से बंद कर दिया ..


माधवी को पंडित जी से ऐसे बर्ताव की उम्मीद नहीं थी ..पर अन्दर आकर जैसे ही उसकी नजर पंडित के खुन्कार लंड के ऊपर गयी उसका शरीर कांप सा गया ...उसकी आँखे बोजिल सी हो गयी और वो बेजान सी होकर वहीँ जमीन पर बैठकर पंडित ने नोने से लंड को निहारने लगी ...


पंडित की हालत पहले से ही खराब थी, माधवी की मर्जी जाने बिना ही वो हरकत में आ गया और आगे बढकर अपने श्रीखंड को उसके मुंह में धकेल दिया ...


उम्म्म्म्म .....


पंडित जी का मीठा उपहार पाकर वो गदगद हो उठी ...और उसका मीठा रस पीकर वो अपने मुंह और जीभ को उसपर जोरों से चलाने लगी ...


वैसे भी अपने पति की तरफ से खुल्ली छूट मिल जाने की वजह से वो पंडित से सब कुछ खुलकर करवाने को बेताब थी, और वो ये नहीं जानती थी की पंडित को ये सब पहले से ही पता है ..


पंडित ने अपने फैले हुए हाथों से उसके सर को जोर से पकड़ा हुआ था ...और अपनी हथेलियों से उसके कानों को रगड़ कर उसे और भी गरम कर रहा था ...


आज माधवी ने साडी पहनी हुई थी ..उसका पल्लू कर खिसक कर नीचे ढलक गया, उसे भी पता नहीं चला ..उसके दूध से भरे हुए थन बाहर निकलकर अपना दूध निकलवाने को मचलने लगे ..


पंडित के हाथ खिसकते हुए आगे आये और एक एक करके उसने माधवी के ब्लाऊस के बटन खोलने शुरू कर दिये.


माधवी ने भी पंडित जी की मदद करते हुए अपना ब्लाउस खोल दिया और अपनी ब्रा के कप नीचे खिसका कर अपने उरोज उनके समक्ष उपस्थित कर दिए ..


पंडित ने झुक कर उसके निप्पल अपने दोनों हाथों की उँगलियों में पकडे और उन्हें ऊपर की तरफ खींच दिया ...


माधवी दर्द और आनंद के मिले जुले मिश्रण के साथ सिसक उठी ..


'अह्ह्ह्ह्ह्ह .......ओह्ह्ह्ह्ह ...पंडित जी .....उफ्फ्फ दर्द होता है ...'


पर पंडित को उसपर कोई रहम नहीं आया, वो उसे ऊपर की तरफ खींचता चला गया, माधवी के मुंह से पंडित का डंडा बाहर निकल गया और उसके पुरे शरीर पर रगड़ खाता हुआ ठीक उसकी चूत के ६ इंच ऊपर आकर रुक गया ..

उत्तेजना के मारे माधवी के मुंह से लार निकल कर उसकी ठोडी और गर्दन को गीला कर रही थी ..पंडित ने अपनी लम्बी जीभ निकाली और उसके होंठों से निकल रहे अमृत को चाटना शुरू कर दिया ...


माधवी के होंठों के ऊपर पंडित की जीभ ऐसे चल रही थी मानो वो कोई आइसक्रीम हो ..गर्दन पर पहुंचकर पंडित के हाथों के पंजे उसके मुम्मों को जोरों से मसलने लगे ...अब माधवी ने पंडित के सर को पकड़कर उसे अपने सीने से लगा लिया और आनंद सागर में गोते लगाते हुए पंडित से मुम्मे चुस्वाने का सुख भोगने लगी ..


माधवी ने सिसकारी मारते हुए कहा : "स्स्स्स पंडित जी ...आज मैं कितने सही समय पर आई आपके पास ...अह्ह्ह्ह्ह ...आई तो कुछ और काम से थी ...पर मुझे क्या मालुम था की मेरी किस्मत में आज सुबह -२ आपका प्रसाद लिखा होगा ...आअह्ह्ह्ह्ह "


कहते -२ उसने एक बार जोर से पंडित के लंड को पकड़ कर मसल दिया ...


पंडित का लंड उसकी चूत में अभी तक एक बार भी नहीं गया था ....और आज वो ये काम किसी भी कीमत पर करना ही चाहती थी ..पंडित की भी हालत खराब थी, नूरी की चूत मारने से वो आज वंचित रह गया था जिसकी वजह से उसके अन्दर काफी गुबार भर गया था .उसने घडी की तरफ देखा, रितु और शीला के आने का समय भी होने वाला था ..और उनके आने से पहले जैसी परिस्थिति हो जाती, जिसमे उसे बिना चूत मारे ही रहना पड़ा था, उसने आनन् फानन में माधवी को अपने बेड पर पटका और उसकी साडी और पेटीकोट ऊपर करके उसकी गीली कच्छी को साईड में किया और अपना दनदनाता हुआ लंड एक ही बार में उसकी गर्म और रसीली चूत में पेल दिया ...


"अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .....ओह्ह्ह्ह पंडित जी ......उम्म्म्म्म .....मैं तो धन्य हो गयी ....अह्ह्ह्ह ....आपसे चुदवाकर उम्म्म्म्म ......क्या लंड है आपका .....मोटा ....और लम्बा .....उम्म्म्म ....."


वो पंडित के लंड को गिरधर के लंड से कम्पेयर कर रही थी ...इसलिए उसको आज काफी मजा भी आ रहा था ....उसकी साड़ी मोटी जाँघों के ऊपर सिमटी पड़ी थी ...और धक्के लगने की वजह से बुरी तरह से अस्त व्यस्त हो चुकी थी ...ऊपर के दोनों कबूतर भी हर झटके से ऊपर उड़ जाते पर बंधे होने की वजह से वापिस नीचे आ जाते ..


पंडित खड़े-२ झटके मार रहा था ...उसका पसीने से भीगा हुआ शरीर अपने अन्दर की गर्मी को लंड के जरिये माधवी की चूत में ट्रांसफर करने में लगा हुआ था ...


माधवी के पैर भी नीचे थे और उसने अपने पैरों को दोनों तरफ फ़ेल कर पंडित को बीच में आदर सहित खड़ा किया हुआ था, और उतने ही आदर के साथ उनके खड़े हुए लंड को अपने अन्दर लिया हुआ था ..


अचानक पंडित के झटके तेज होने लगे ...


'अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ माधवी ...उम्म्म ....क्या टाईट चूत है तेरी ...अह्ह्ह ...लगता है गिरधर ने पूरा इस्तेमाल नहीं किया ...अह्ह्ह ...जवान बेटी हो गयी है तेरी ...अह्ह्ह्ह्ह ..फिर भी ....इतनी गरम चूत है तेरी ...'


माधवी के अन्दर की भट्टी भी आग उगलने लगी ..और एक भीषण गर्जन के साथ पंडित के लंड से पानी निकल कर माधवी की भट्टी की आग बुझाने लगा ...माधवी को भी ओर्गास्म के झटके अन्दर से लगने महसूस हुए और उसका पूरा शरीर अकड़ गया ...उसके पैर सामने हवा में सीधे हो गए ...पंडित ने अपने पुरे शरीर को माधवी के ऊपर लिटा दिया ..और बाकी के बचे हुए झटके दोनों ने एक साथ खाए ...एक दुसरे से लिपटे हुए .



'ओह्ह्ह्ह्ह पंडित जी .....आज जैसी चुदाई तो किसी ने नहीं की मेरी ....कितना शक्तिशाली है आपका लंड .....मुझे तो जन्नत की सैर करवा दी आपने आज ...मैं तो आपके लंड की मुरीद हो गयी ...कसम से ..'


पंडित ने उसकी बाते सुनते हुए अपने कपडे पहनने शुरू कर दिए और माधवी को भी सही अवस्था में आने को कहा ..थोड़ी ही देर में दोनों सही तरीके से अपने आपको दरुस्त करके बैठ गए ..


पंडित ने दोनों दरवाजे खोल दिए और एक अगरबत्ती जला दी ताकि कमरे से सेक्स की महक निकल जाए ...


पंडित : "हां ...माधवी ...अब बोलो ...किस काम से आई थी तुम .."


माधवी शर्माते हुए बोली : "वो ..मैं ..आपको धन्यवाद देने आई थी ...की आपकी वजह से मेरे और गिरधर के बीच फिर से पहले जैसा अपनापन आ गया है .. "


पंडित : "मैं जानता हु ..."


माधवी चोंक कर बोली : "कैसे ????"

पंडित : "भूल गयी ...मैं अंतर्यामी हु ...मुझे सब पता चल जाता है ...तुम्हारे चेहरे को देखते ही मैं समझ गया था की तुम यहाँ किसलिए आई हो ..."


माधवी शरमाने लगी ...और धीरे से बोली : "अच्छा ...तभी आपने बिना कुछ पूछे मुझे अन्दर खींच लिया और ये सब कर डाला ...मुझे तो ऐसा लग रहा था की आप जैसे मेरी ही प्रतीक्षा कर रहे थे की कब मैं आऊ और कब आप मुझे चो ...चोद डाले ..."


पंडित मुस्कुराने लगा ...और सोचने लगा 'अब इस अज्ञानी को कैसे समझाऊ '


तभी बाहर से रितु अन्दर आ गयी ...और अपनी माँ को पंडित के साथ बैठ देखकर बोली : "अरे माँ ...तुम यहाँ हो ...मैं तुम्हे घर पर देख रही थी ...वहां कोई नहीं था, मैं स्कूल से आकर कपडे भी बदल आई और खाना भी खा लिया ... "


माधवी : "अरे ...पंडित जी से बातें करते-२ मुझे समय का ध्यान ही नहीं रहा ...अच्छा पंडित जी ..मैं चलती हु ...आप बस मेरी बच्ची की पढाई पर ध्यान दीजिये ...अगर हो सके तो अपनी तरफ से भी कोई शिक्षा इसे दे दिया करिए ..शीला जी तो स्कूल का पाठ्यकर्म पढाती है ...जीवन और ज्ञान से सम्बंधित बातें तो आपही बता सकते हैं न ..."


पंडित : "इसमें कहने वाली क्या बात है माधवी ..तुम चिंता मत करो ..रितु को हर तरह की शिक्षा मिलेगी ...तुम जाओ .."


माधवी पंडित जी को प्रणाम करके वहां से निकल गयी ...पंडित का ध्यान अब रितु के ऊपर गया ...वो आज पिंक कलर की लम्बी सी फ्रोक पहन कर आई थी ...स्लीवलेस थी वो ...और उसके दांये कंधे पर पंडित को उसकी ब्लेक ब्रा का स्ट्रेप भी नजर आ रहा था ...


पंडित बुदबुदाया 'ओह्ह्ह्ह रितु ....क्यों आग लगाती हो ...ऐसे अपने अंगों के दर्शन करवाकर ...'


आज वो रितु को सच में कुछ स्पेशल ज्ञान देने के मूड में था .

रितु के चेहरे पर भी आज एक अलग सी रौनक थी , कुछ नया सीखने की, नया देखने की , जीवन के रहस्यों को समझने की और उन्हें अपनाने की . वो सब कुछ सोचकर मंद -२ मुस्कुरा भी रही थी .


पंडित : " क्या बात है रितु , आज तुम काफी खुश नजर आ रही हो .."


रितु (अल्हड़पन और शोखी भरे स्वर में बोली ) : "आप तो सब चेहरा देखकर ही जान लेते है न ..आप ही बताइए मैं क्या सोच कर खुश हो रही हु .."


पंडित के ज्ञान को उसने सीधे शब्दों में चुनोती दे डाली .


पंडित भी मुस्कुराते हुए उसके पास खिसक आया और धीरे से बोला : "मुझे तो पता है की तुम क्या सोचकर मुस्कुरा रही हो ..पर ऐसा ना हो की मैं तुम्हे बताऊँ और तुम शरमा कर यहाँ से भाग जाओ ..."


रितु (सकुचाते हुए) : "नहीं ...ऐसा नहीं होगा ...आप बताइए तो सही .."


पंडित : "तो सुनो ...तुमने कल रात को अपने माँ पिताजी को वो सब करते हुए देखा जिसके विषय में सोचकर तुम २ दिनों से परेशान हो ..यानी सम्भोग ..है न .."


पंडित की बात सुनकर रितु का मुंह खुला का खुला रह गया ..उसे शायद ये आशा भी नहीं थी की पंडित इतनी आसानी से उसके सामने उसकी पोल पट्टी खोल कर रख देगा ..और शायद ये भी अंदाजा नहीं था की पंडित सच में कल रात वाली बात जानता होगा ..मतलब, उसे ये तो पता था की पंडित मन की बात जान लेता है पर ये बात भी वो जान लेगा उसे उम्मीद नहीं थी ..


अब उस बेचारी को कौन समझाए की पंडित वो सब कैसे जानता है .


पंडित : "और मुझे ये भी पता है की तुम उन्हें देखते -२ क्या कर रही थी ..कैसे तुमने अपनी फ्रोक को उतार फेंका और ..."


"बस पंडित जी ....प्लीस ...और कुछ ना बोलिए ...मुझे शर्म आ रही है ...प्लीस ..." वो गहरी साँसे लेते हुए पंडित जी के पैरों में गिर पड़ी ..जैसे उनके ज्ञान से रूबरू होकर अपनी अज्ञानता की माफ़ी मांग रही हो ..


पंडित ने उसकी गोरी-२ बाजुओं से पकड़ कर उसे ऊपर उठाया और बोले : "इसमें शर्माने वाली कोनसी बात है रितु ...वो सब स्वाभाविक था, तुमने जो देखा उसके परिणामस्वरूप वो सब तो होना ही था ...बस तुम्हे अपनी भावनाओं को व्यक्त करना नहीं आया ....."


पंडित उसकी आधी अधूरी जानकारी के बारे में जानता था ..इसलिए ये सब बोला ..


रितु : "पंडित जी ..मुझे सच में इन सब चीजों के बारे में कुछ नहीं मालुम ..घर पर भी और स्कूल में भी कोई ऐसा नहीं है जो ये सब बताये ..आपने भी कल मुझे जो बात बतायी थी वो मेरे लिए बिलकुल नयी थी ..वरना आज तक तो मैं यही समझती थी की शायद किस्स करने से ...ही बच्चा ...हो जाता है ..."


पंडित : "ह्म्म्म ...पर तुम चिंता ना करो ..अब मेरे पास आकर तुम्हारा अज्ञानता का अँधेरा दूर हो जाएगा ...मैं रोज तुम्हे जीवन के हर पहलु से अवगत करवाऊंगा ..."


रितु ने हाँ में सर हिला दिया ..


वो ये सब बातें कर ही रहे थे की बाहर से शीला अन्दर आ गयी और पंडित जी के पैर छु कर वहीँ उनके पास जमीन पर बैठ गयी ..


पंडित ने शीला से कहा : "शीला ...आज हम दोनों मिलकर रितु के कुछ सवालों का निवारण करेंगी ..जो काम क्रीडा यानी सेक्स के बारे में हैं .."


पंडित की बात सुनकर रितु के साथ-२ शीला भी आश्चर्य से उन्हें देखने लगी ..
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Reply
01-07-2018, 02:02 PM,
#18
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--18

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गतांक से आगे ......................

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रितु इसलिए की वो शायद किसी और के सामने या साथ में अपने सवालों का जवाब नहीं चाहती थी ..और पंडित जी शीला के साथ ये सब बातें कैसे करेंगे उसे ये समझने में काफी परेशानी हो रही थी ..


और दूसरी तरफ शीला को इसलिए की पंडित की प्लानिंग वो भी नहीं जानती थी , पंडित के कहने पर उसने गिरधर के साथ डबल मजा किया था जिसमे उसे बहुत मजा भी आया था और अब पंडित जी शायद उसका इस्तेमाल करके उनकी बेटी के साथ भी वही सब करना चाहते हैं ..

पर पंडित जी की हर बात को आँख मूँद कर मानने कर वचन वो दे चुकी थी इसलिए उसकी हिम्मत नहीं हुई की उनसे कोई सवाल करे ..वैसे भी, वो जानती थी की पंडित जी कुछ भी करें , उसे मजा तो आना ही आना है ..और वैसे भी, रितु को स्कूल की पढाई कराने से ज्यादा उसे सेक्स की पढाई कराने में ज्यादा मजा आएगा ये सोचते हुए वो पंडित जी से बोली : "ठीक है पंडित जी ...आप जैसा कहें .."


पंडित : "शीला ...तुम दोनों दरवाजे बंद कर दो और अपने सारे कपडे उतार दो .."


पंडित की बात सुनकर शीला किसी रोबोट की तरह से उठी और पहले मंदिर की तरफ का और फिर पीछे वाली गली का दरवाजा बंद कर दिया और बीच में खड़ी होकर अपनी साडी खोलने लगी ..


साडी उतारने के बाद ब्लाउस और फिर ब्रा भी ..और नीचे से पेटीकोट उतार कर वो पूर्ण रूप से नग्न अवस्था में आ गयी ..पिछले २-३ दिनों की तरह आज भी उसने पेंटी नहीं पहनी हुई थी ..


पंडित के नाग ने विराट रूप लेना शुरू कर दिया ..


अपने सामने शीला को पूरा नंगा देखकर रितु पलके झपकाना भी भूल गयी ..कल तक एक अध्यापिका बनकर उसे ज्ञान देने वाली शीला आज पूरी नंगी होकर उसके सामने खड़ी थी ..एक अलग तरह का ज्ञान देने के लिये .


पंडित : "देखो रितु , तुम शायद ये सोच रही होगी की मेरे कहने से शीला इस तरह से क्यों तैयार हो गयी ..सुनो, शीला को भी ऐसे कई ज्ञान और खुशियाँ मैंने प्रदान की है जिसकी वजह से इसका जीवन आज पूरी तरह से बदल चूका है ..इसलिए मेरे साथ किसी भी प्रकार की क्रिया करने से इसे कोई आपत्ति नहीं होती बल्कि ख़ुशी ही मिलती है .."


पंडित की बात सुनकर उसे विशवास ही नहीं हो रहा था की पंडित जी का शीला के साथ कोई सम्बन्ध हो सकता है ..


उसकी दुविधा का निवारण करने हेतु पंडित जी उठे और शीला के सामने जाकर उसके चेहरे को पकड़ा और अपने होंठों को उसके अधरों पर रखकर उनका पान करने लगे .


शीला के हाथों का हार अपने आप पंडित जी के गले में आ गया और वो भी उचक उचक कर उनका साथ देने लगी ...


पंडित जी ने शीला के ऊपर वाले होंठ को अपने दांतों में दबाया और ऊपर की तरफ खीचकर चुभलाने लगे ..और अपने हाथों की उँगलियों से उसके निप्पलस को मसल मसलकर लाल करने लगे .


'अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म ......उफ़ पंडित जी .....आपकी उँगलियों में तो जादू है ...अह्ह्ह्ह ...ह्म्म्म्म ऐसे ही ...दबाइए इन्हें ...रात भर दर्द करते रहते हैं ..अह्ह्ह्ह ...'


शीला की करुण पुकार सुनकर पंडित ने और तेजी से उनका मर्दन करना शुरू कर दिया ..


पंडित का ध्यान रितु की तरफ था, वो ये सब करते हुए रितु को एक -एक एक्शन साफ़ दिखाना और समझाना चाहते थे ..


पंडित : "देखो रितु ...एक औरत के जिस्म के सबसे कामुक और उत्तेजना का संचार करने वाले हिस्से होते हैं ये ..उसके होंठ ...उसके उरोज ..और ये ..उसकी चूत ...इनका सेवन और मंथन करना अति आवश्यक होता है ...तभी उसे मजे आते हैं ..ये देखो ..."


इतना कहकर उसने शीला की साफ़ और चिकनी चूत पर अपनी उँगलियाँ फेराई और एक झटके से अपनी एक ऊँगली अन्दर खिसका दी ...


"अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ....ओह्ह्ह्ह पंडित ......जी ....उम्म्म्म्म ....मजा आ गया ..."


पंडित : "देखा ...सिर्फ एक ऊँगली अन्दर डालने से इतना मजा आ गया इसे ...सोचो जब वो अन्दर जाएगा तो क्या होगा ..."


'वो' मतलब लंड ...इतना तो वो अच्छी तरह से जानती थी, रात को अपने माँ बाप की पूरी फिल्म जो देख चुकी थी ...


पंडित : "रितु ...तुम शायद नहीं जानती की आदमी और औरत जब सम्भोग करते हैं तो वो सिर्फ बच्चा पैदा करने का माध्यम नहीं होता, बल्कि एक दुसरे को उत्तेजना का वो एहसास दिलाने का माध्यम भी होता है जिसके लिए स्त्री और पुरुष का मिलन होता है ...और वो आनंद स्त्री को देने के लिए पुरुष कई प्रकार की प्रक्रियाएं करते हैं ..जैसे चूत में ऊँगली डाल देना ...या उसे अपने मुंह से चूसना ..और अंत में अपना लंड अन्दर डाल देना ..जिसके घर्षण से दोनों को काफी मजा आता है ..."

और रितु को प्रेक्टिकल दिखाने के लिए पंडित ने शीला को बिस्तर पर लेटने को कहा ..और खुद उसके सामने आकर बैठ गया ..उसकी टांगो को चोडा करके बीच में जगह बनायी और झुककर अपनी एक ऊँगली फिर से शीला की चूत में डाल दी ...वो चिहुंक उठी ..और फिर दूसरी ऊँगली भी ..और फिर तीसरी ...और उन्हें एक लय में लाकर अन्दर बाहर करने लगे ..


रितु भी आज्ञाकारी स्टूडेंट की तरह उनके पास खड़ी होकर उनका प्रेक्टिकल बड़े ही गौर से देख रही थी ..


पंडित की तीनों उँगलियाँ शीला की चूत में थी , शीला की चूत पंडित की लगातार चुदाई की वजह से खुल गयी थी इसलिए खुली हुई चूत अपने सामने देखकर रितु येही सोचने में लगी हुई थी की कैसे पंडित की तीन -२ उँगलियाँ बड़ी आसानी से अन्दर बाहर हो रही है , पर उसकी चूत तो बड़ी टाईट है, उसमे तो एक ऊँगली डालने से भी इतना दर्द होता है ..कैसे हो पायेगा ये सब उसके साथ ..


पंडित ने उसकी दुविधा पड़ ली और बोले : "चूत की कसावट जल्दी ही चली जाती है ...क्योंकि पुरुष इसके अन्दर अपनी उँगलियाँ और लिंग डालता है ...शुरू में थोडा दर्द या परेशानी भी होती है पर बाद में मजा भी बहुत आता है ...देखो तो जरा इसके चेहरे को ..."


पंडित ने रितु को शीला के चेहरे की तरफ देखने को कहा ...जो अपनी आँखें बंद करके पंडित के बिस्तर पर नंगी पड़ी हुई जल बिन मछली की तरह मचल रही थी ...आनंद सागर में गोते लगाती हुई वो सब कुछ भूलकर अपनी चूत में पंडित की उँगलियों का मजा ले रही थी ..


पंडित ने तीन उँगलियों के साथ-२ अपना अंगूठा भी अन्दर दाल दिया और उसकी क्लिट को उँगलियों और अंगूठे के बीच में दबोच कर उसकी मसाज करने लगे ...


अब तो उसकी कसमसाहट और मजा और भी बड़ गए ...उसने अपनी गांड वाला हिस्सा हवा में उठा लिया ..और पंडित की उँगलियों के बदले अपने शरीर को धक्के देकर उनकी उँगलियों को अन्दर बाहर करने लगी ..


उसकी हालत देखकर रितु को साफ़ पता चल रहा था की शीला को कितने मजे आ रहे हैं ..


पंडित : "ये जो दाना होता है न ..इसका घर्षण करने से या मसलने से ही स्त्री को असली मजे आते हैं और उसके अन्दर का पानी बाहर निकलता है ...और ये घर्षण ऊँगली , मुंह और लंड तीनो से हो सकता है ..."


पंडित की बात सुनकर रितु को अक्ल आई, वो समझ गयी की क्यों कल रात को भी वो सिर्फ सुलग कर रह गयी, काश वो अपनी ऊँगली को अन्दर डालकर मसलती तो उसे तड़पते हुए सोना नहीं पड़ता ..


पंडित : "लिंग से निकले रस और स्त्री के अन्दर से निकले पानी के मिश्रण से ही बच्चा बनता है .."
ये बात तो पंडित जी पहले भी बता चुके थे, पर आज अपने समक्ष प्रेक्टिकल होते देखकर उसे सब आसानी से समझ में आ रहा था ..


पंडित जी की पारखी नजरें रितु के शरीर की हर हरकत पर थी ...उसके छोटे-२ चुचुक खड़े हो चुके थे ..और टाँगे भी कांप रही थी ..उसके हाथ की उँगलियाँ अपनी चूत की तरफ जाने को मचल रही थी पर शरम के मारे वो पंडित के सामने कुछ कर नहीं पा रही थी ...


पंडित भी जानता था की स्त्री के बदन की आग कैसी होती है . और वो हमेशा की तरह अपनी तरफ से कोई भी पहल नहीं करना चाहता था ..वो तो उसे तडपा कर उसे उस हालत में लाना चाहता था जहाँ आकर वो मजबूर हो जाए और पंडित के साथ अपनी मर्जी से सब कुछ करे ..


और इसके लिए अभी पंडित को काफी मेहनत भी करनी थी ... 

पंडित ने देखा की रितु की नजरें बार बार उनके लंड की तरफ जा रही है ..उनका धोती में खड़ा हुआ लंड उसे काफी आकर्षक लग रहा था ..


जवान लड़कियों की सबसे पहली पसंद अपने सामने नंगा लंड देखने की रहती है ..वो अपने जीवन के 16 -18 साल गुजारने के बाद उस चीज को देखने की लालसा रखने लगती है जिसकी वजह से उन्हें सबसे ज्यादा मजा आने वाला होता है, मूवीज में देखकर या अपनी करीबी सहेली से उनकी रूपरेखा सुनकर उसे देखने की इच्छा और भी प्रबल होती चली जाती है ..वैसे तो रितु भी अपने पिता यानी गिरधर का लंड देख ही चुकी थी, पर वो काफी दूर था, अपने समक्ष खड़ा हुआ लंड देखने का लालच रितु के चेहरे पास साफ़ देख पा रहा था पंडित ..


पर वो उसे अभी और भी तडपाना चाहता था ..


और इसके लिए उसने रितु को दुसरे आसन यानी मुख चुदाई के बारे में बताना शुरू किया ..


पंडित : "देखो रितु ...अब मैं तुम्हे वो क्रिया दिखाने जा रहा हु जिसे अपने ऊपर महसूस करके औरत को सबसे ज्यादा मजा आता है .."


इतना कहकर पंडित ने शीला की टांगो को पकड़कर दोनों तरफ फेला दिया और खुद उसकी चूत के ऊपर मुंह रखकर सामने लेट गया ...पंडित ने अपनी उँगलियों से शीला की जाँघों को जोर से पकड़ा हुआ था ..
और पंडित के होंठ बिलकुल शीला की चूत के होंठों के ऊपर थे ..दोनों तरफ से गर्मी निकल कर एक दुसरे के होंठों को झुलसा रही थी ..पंडित ने एक गहरी सांस लेकर अपना मुंह शीला की चूत के ऊपर लगा दिया ..वो आनंद से चीत्कार उठी ...


"अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .....उम्म्म्म्म्म्म ...पंडित ....जी .....अह्ह्ह्ह्ह्ह ..."


शीला में चेहरे पर आ रहे मादक एहसास को देखकर रितु उसके मजे को नाप रही थी ..कितना अलग और मीठा एहसास हो रहा होगा शीला को , अपनी चूत पर पंडित के होंठों को पाकर ..उसने आँखे मूँद कर वो एहसास अपने शरीर पर महसूस करने की सोची पर जो काम असल में हो वही सही में मजा देता है, सिर्फ सोचकर कुछ नहीं मिलता ..रितु का मन भी विचलित होना शुरू हो चूका था, वो भी अपने ऊपर वो सब कुछ करवाना चाहती थी जो शीला करवा रही थी ..पर पंडित के सामने इतनी जल्दी अपने आप को अर्पित करके रितु भी जल्दबाजी नहीं करना चाहती थी, वो ज्यादा से ज्यादा देर तक अपने आप पर संयम रखकर अपने आप को बचाकर रखना चाहती थी और इसी बीच ज्यादा से ज्यादा ज्ञान भी लेना चाहती थी .


पंडित के होंठों ने शीला की चूत की फेली हुई परतों को अपने मुंह में दबा कर उसका रस चूसना शुरू कर दिया ..


शीला के हाथ पंडित के चोटी वाले सर को पकड़ कर उसे और जोर से अपनी चूत पर दबा कर उत्साहित कर रही थी की और जोर से चूस ...इतने से कुछ नहीं होने वाला ..


रितु अपने सामने इतना कामुक कार्य देखकर खुद को ना रोक पायी और घुटनों के बल नीचे जमीन पर बैठकर वो और करीब से पंडित के द्वारा की जा रही मुख चुसाई देखने लगी ..इसका दोहरा फायेदा था, एक तो वो और करीब से उन्हें देख पा रही थी, दूसरा उसकी कमर से नीचे वाला हिस्सा पंडित और शीला की नजरों से दूर होने की वजह से वो अपनी चूत के ऊपर हाथ फेरा कर अपनी कसक को दबा सकती थी ..और उसने किया भी ऐसा ही ..बैठने के साथ ही उसका हाथ सीधा अपनी रसीली और कसी हुई चूत के ऊपर गया और उसने अपनी फ्रोक के ऊपर से ही अपनी चूत को जोर से मसल दिया ...




उम्म्म्म्म्म .....अह्ह्ह ..


एक दबी हुई सी सिसकी उसके मुंह से भी फुट ही गयी, जिसे पंडित के तेज कानो ने सुन लिया ..


और वो मंद ही मंद मुस्कुरा कर शीला के शहद को और तेजी से पीने लगा ..


वो अपनी जीभ से शीला की क्लिट को चुभला भी रहा था ताकि उसे और भी ज्यादा मजे मिल सके ..और उसका मजा देखकर रितु भी और ज्यादा उत्तेजित हो पाए और अपनी शर्म हया छोड़कर पंडित के सामने अपनी इच्छा का इजहार खुल कर कर दे .


अचानक शीला ने अवीश में आकर अपने बांये हाथ से रितु के चेहरे पर अपनी उँगलियाँ फेराई और उन्हें घुमा फिरा कर उसके होंठों पर लेजाकर उसके मुंह में घुसेड दी ..


पहले तो रितु को समझ में नहीं आया की शीला की उगलियों का क्या करे ..पर अन्दर से आ रही आवाज को पहचान कर उसने शीला की उँगलियों को धीरे - २ चूसना शुरू कर दिया ...


अपनी चूत और उँगलियाँ एक साथ चुसवा कर शीला की हालत और भी पतली होने लगी ..और वो और जोर से चिल्ला कर अपनी ख़ुशी का इजहार करने लगी ..


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म्म्म्म घ्ह्ह्ह्ह्ह .....उम्म्म्म .. और तेज .... चॊओस्स ऒऒओ ..... उम्म्म्म्म ...

पंडित और रितु दोनों ने उसकी आज्ञा का पालन करते हुए चूत और ऊँगली और तेजी से चूसनी शुरू कर दी ..रितु की उँगलियाँ और तेजी से अपनी चूत की फांकों पर चलने लगी ..उसके हाथों की थिरकन देखकर पंडित को साफ़ महसूस हो रहा था की वो क्या कर रही है ..


शीला ने अपनी उँगलियों को रितु के दांतों में फंसा कर उसे अपनी तरफ खींचा ..और अपने चेहरे पर लाकर अपना हाथ बाहर खींच लिया ...और उसके कच्चे और कोमल होंठों को अपने मुंह में दबोचकर खुन्कार लोमड़ी की तरह उसे चूसने लगी ..


अपने ऊपर हुए ऐसे हमले की उम्मीद रितु को बिलकुल भी नहीं थी ...वो तो बस शीला की तरफ खींचती चली गयी और उसके परिपक्व होंठों के बीच अपने गुलाबी होंठों की पंखुड़ियों को मसलते पाकर अपनी आँखे बंद कर ली ..


रितु के मुंह से निकली शीला की उँगलियों को पंडित ने अपनी तरफ खींचा और उन्हें चूसने लगा ...


अह्ह्ह्ह ....क्या मीठा एहसास था ...रितु के मुंह से निकली उँगलियों की नमीं का ..कितनी मीठी लग रही थी वो ...अगर उसके होंठों को चूस लिया जाए तो कितनी मिठास निकलेगी उनमे से ...येही सोचकर पंडित काफी उत्तेजित हो गया और उसने एक झटके से अपनी धोती उतार फेंकी और उठकर अपने लंड को शीला की चूत के ऊपर रख दिया ...


अपने चूत द्वार पर लंड महाराज को आया देखकर उसने रितु को समुच करना छोड़ दिया ..और अपना पूरा ध्यान पंडित के लंड के ऊपर लगा दिया ..


रितु तो जैसे किसी सुखद सपने से जागी शीला के कोमल होंठों ने उसे पूरी तरह से चूस डाला था ..और जैसे ही उसने उसे छोड़ा उसने अपनी आँखे खोल दी और शीला की आँखों की तरफ देखा जो पंडित जी के लंड घूर रही थी ...


और जैसे ही शीला की आँखों का पीछा करते हुए रितु की नजरें पंडित के लंड पर गयी उसका मुंह खुला का खुला रह गया ...


''इतना ....बड़ा .......ल .....लंड .......ओह्ह ....माय गॉड .....''


उसने इतनी पास से और इतने बड़े लंड को नहीं देखा था ...गिरधर का ही तो देखा था उसने और वो भी दूर से ...और दूर से देखने पर तो अच्छी खासी चीज भी छोटी ही लगती है ...


पर पंडित के मोटे और लम्बे लंड को देखकर वो पलकें झपकाना भूल गयी और उसे घूर कर देखने लगी ..


पंडित ने बड़े आराम से अपने लंड को मसला और बोले : "रितु ...अब मैं तुम्हे मानव जीवन के सबसे बड़े अध्याय से अवगत करवा रहा हु ...जिसे काम क्रीडा यानी चुदाई कहते हैं ...चुदाई के लिए आदमी अपने लंड को स्त्री की चूत के अन्दर डालता है ....ऐसे ...और अन्दर बाहर धक्के लगता है ..."


और इतना कहकर पंडित ने शीला के अन्दर अपना लंड एक ही झटके में पेलकर जोरों से धक्के मारने शुरू कर दिए ..


शीला की आनंदमयी चीखे उसे मिल रहे मजे को बयान कर रही थी ...


''अह्ह्ह्ह ....उम्म्म्म्म ....पंडित .....जोर से ...चोदो ओ ...अह्ह्ह्ह्ह ...उम्म्म उ ह्ह्ह्ह ,,,,अह्ह्ह ...अह्ह्ह्ह ...ओफ्फ्फ ओम्म्म्म ....... अह्ह्ह्ह ...अग्ग्ग्घ्ह्ह्ह ...मैं तो गयी ......"


और इतना कहकर वो निढाल हो गयी ...

रितु से सहन करना मुश्किल हो गया ...और उसने अपनी फ्रोक को ऊपर उठाया और कच्छी को साईड में करके अपनी एक ऊँगली अपनी चूत में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगी ...जैसा की गुरूजी यानी पंडित ने बताया था ..


पंडित अपने झटके मारता रहा ..और अंत में आकर उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया ...और
रितु के मासूम और कामुक हो चुके चेहरे को देखकर उसने अपने लंड की पिचकारियाँ शीला के पेट पर छोड़नी शुरू कर दी ...


इतना सारा रस निकलता हुआ देखकर रितु ने भी उँगलियों की तेजी बड़ा दी और एक जोरदार विस्फोट के साथ उसकी चूत में से भी ढेर सारा रस पहली बार कोमार्य की कच्ची धानी से निकल कर बाहर आ गया ..


उसकी साँसे फूल गयी ...


उसका सर चकरा गया ...और वो वहीँ शीला की बगल में ढेर हो गयी ...


पंडित ने अपना लंड साफ़ किया ..और समझ गया की अब रितु उसके जाल में पूरी तरह से फंस चुकी है ...


थोड़ी देर तक आराम करने के बाद शीला अपने कपडे पहन कर तैयार हो गयी और जाने लगी ...जाते हुए पंडित ने उसे धीरे से कहा की कल आने की कोई जरुरत नहीं है ...वो समझ गयी की कल पंडित जी रितु का उदघाटन करेंगे ...


थोड़ी देर बाद रितु भी बिना कुछ कहे चली गयी ...
अब पंडित को कल का इन्तजार था ...
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01-07-2018, 02:02 PM,
#19
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--19

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गतांक से आगे ......................

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पंडित ने उनके जाने के बाद नहा धोकर थोडा आराम किया ..वो काफी थक चुका था ..जब उसकी नींद खुली तो शाम के 4 बजने वाले थे ..अभी मंदिर खुलने में टाइम था, उसे नूरी का ध्यान आया, इरफ़ान भाई को उसने शाम को आने के लिए बोला था ..वो जल्दी से तैयार हुआ और बाजार की तरफ चल दिया ..


इरफ़ान भाई ने दूर से ही पंडित जी को आते हुए देख लिया और अपनी दूकान से बाहर निकल आया ..


इरफ़ान : "नमस्ते पंडित जी ...मुझे तो लगा की आप भूल गए हैं की आपने आज आने का वादा किया था .."


पंडित : "अरे नहीं इरफ़ान भाई, ऐसा कैसे हो सकता है ..बल्कि मैं तो आज सुबह भी आया था पर आपकी दूकान बंद थी इसलिए मैं वापिस चला गया .."


इरफ़ान : "ओह्ह ...दरअसल मुझे सुबह अस्पताल जाना था, मेरी बहन का बेटा दाखिल है वहां ..पर पंडित जी ...मैं नहीं था तो आप ऊपर जाकर नूरी से तो मिल ही सकते थे ना ..इसमें तक्कल्लुफ़ कैसा था .."


अब बेचारे इरफ़ान को कौन समझाए की पंडित सुबह आकर क्या नहीं कर गया उसकी बेटी नूरी के साथ ...


पंडित कुछ ना बोला ...इरफ़ान ने पंडित जी से कहा : "पंडित जी ...आप ऊपर जाइए ...नूरी ऊपर ही है ..मैं जरा अपनी दुकानदारी देख लेता हु तब तक ..और अपनी तरफ से पूरी कोशिश कीजियेगा उसे समझाने की ..मेरी तो सुनती ही नहीं है वो .."


पंडित : "आप फिकर मत करो इरफ़ान भाई ..मैं सब संभाल लूंगा ..आप अपनी दूकान संभालिये ..मैं ऊपर देखता हु .."


इतना कहकर पंडित दूकान के साईड से जा रही सीड़ियों पर चड़ता हुआ ऊपर आ गया ..


ऊपर जाते हुए पंडित नूरी के भरे हुए जिस्म के बारे में सोचता जा रहा था ..और जैसे ही वो ऊपर पहुंचा नूरी बिलकुल सामने खड़ी हुई दिखाई दे गयी ..वो तार पर धुले हुए कपडे डाल रही थी ..उसने पीले रंग का सूट पहना हुआ था ..और कपडे धोने की वजह वजह से वो लगभग पूरी गीली थी ..पंडित जी के क़दमों की आहट सुनकर वो पलटी और भागकर उनसे आकर लिपट गयी ..जैसे जन्मो से उनका इन्तजार कर रही हो ..


नूरी : "ओह्ह्ह ...पंडित जी ...आप तो मुझमे आग लगा कर चले गए ..सुबह से आपका इन्तजार कर रही हु ..अब सहन नहीं होता ..."


और इतना कहते हुए उसने उचक कर फ़िल्मी स्टाईल में पंडित जी के होंठों को अपने मुंह में दबोचा और उन्हें चुसना शुरू कर दिया ..


पंडित : "उम्म्म्म ....दरवाजा तो बंद कर लो ..."


नूरी ने दरवाजा बंद किया ..और पंडित को घसीटते हुए अन्दर ले गयी ..उन्हें बिस्तर पर पटका ..और एक झटके से अपना सूट उतार फेंका ..उसकी काली ब्रा में कैद गोरे मुम्मे पंडित जी को ललचा रहे थे ..नूरी ने बिना देरी किये अपनी ब्रा भी खोल डाली और उछल कर बेड पर आई और पंडित के ऊपर अपने फल लटका कर उन्हें तडपाने लगी ..


अपने चेहरे के 2 इंच की दुरी पर गीले और रसीले फल लटकते पाकर पंडित जी की जीभ बाहर निकल आई और उन्होंने ऊपर मुंह करके नूरी के दांये मुम्मे का लाल निप्पल अपने मुंह में दबोच लिया ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .......स्स्स्स्स्स्स्स ....उम्म्म्म्म्म्म ....ओह्ह्ह्ह्ह पंडित ......उम्म्म्म्म ...सुबह से झुलस रही हु मैं ....आग में तेल डालकर चले गए तुम तो ....अह्ह्ह्ह ....अब जल्दी से मेरी आग बुझा डालो ...जल्दीईईईइ इ .......''


पंडित के सर के नीचे हाथ डालकर उसने उनके सर को पकड़कर अपनी छाती से दबा डाला ...पंडित के मुंह पर उसका पूरा मुम्म पिचक गया मुम्मे का मांस पुरे चेहरे को कवर करता हुआ फेल गया ...पंडित की आँखे भी ढक गयी नूरी के मुम्मे से ..उन्होंने अपने दुसरे हाथ से बांये स्तन को पकड़ा और उसे मसलकर उसका रस निकालने लगे ..


नूरी तड़प उठी ..


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्यीई .......उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ पंडित जी .....आपके मुंह के साथ - २ हाथों में भी जादू है ...ऊपर इतना कमाल है तो नीचे क्या धमाल होगा ....हूँ ....''


और इतना कहकर वो नीचे सरक गयी और पंडित के धोती से ढके हुए लंड के ऊपर आकर रुक गयी .


पंडित की धोती के नीचे उनका नाग पूरी तरह से खडा होकर फुंफकार रहा था ..नूरी का चेहरा कामुकता से भरकर बड़ा ही नशीला लग रहा था ...उसके मुंह से गीली जीभ निकल कर बाहर लटक रही थी ..और उसमे से लार निकल कर पंडित जी की धोती पर गिर रही थी .


उसने भूखी कुतिया की तरह अपना मुंह सीधा पंडित के लंड के ऊपर लगा दिया और धोती के कपडे समेत उसे दबोच लिया ...


कपडा होने के बावजूद पंडित को नूरी के दांतों की चुभन अपने हथियार पर महसूस हुई और वो दर्द से बिलबिला उठे ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह ......धीरे नूरी ...धीरे ...ये प्यार से इस्तेमाल करने वाली चीज है ...हिंसक तरीके से करोगी तो तुम्हारा ही घाटा है ..''


वो उनकी बात समझ गयी और फिर बड़े ही प्यार से उसने पंडित जी की धोती में से प्यारे - सलोने लंड को बाहर निकाला और उसे देखकर उसकी आँखों में चमक आ गयी ..


पंडित जी का लम्बा लंड था ही इतना मस्त की हर किसी की आँखे चमक उठती थी ..


उसने धीरे- २ पंडित जी की धोती को फेला डाला और उन्हें पूरा नंगा कर दिया ...


उनका गठीला शरीर और नीचे उतना ही गठीला लंड देखकर वो पंडित जी की कायल हो गयी ..


नूरी ने अपनी पेनी जीभ बाहर निकाली और पंडित जी के लंड के ऊपर फेरानी शुरू की और फिर धीरे-२ वो उसे चूसने लगी ...और फिर तो वो रुकी ही नहीं ..पंडित को ऐसा लग रहा था की उनका लंड किसी सकिंग मशीन के अन्दर फंस गया है ...और उसकी शक्ति सारा रस निकालने की कोशिश कर रही है ...


''अह्ह्ह्ह्ह पंडित जी .....क्या खूबसूरत चीज है आपके पास ....इतना लम्बा तो मैंने आज तक नहीं लिया ...आज तो मजा आ जाएगा ..मुझे ख़ुशी है की आपके जानदार लंड की वजह से मैं प्रेग्नेंट हो सकुंगी ....''


पर प्रेग्नेंट होने के साथ -2 वो पुरे मजे लेने के मूड में भी थी .. उसने अपने मुम्मे पकडे और पंडित जी के लम्बे लंड को उनके बीच में फंसा कर खुद ऊपर नीचे होने लगी ...वो अपने आप टिट फकिंग करवा रही थी ..पंडित के लिए ये नया अनुभव था ...वो अपनी कोहनियों के बल बैठकर उसके हिलते हुए जेली से भरे मुम्मे को अपने लंड के चारों तरफ फिसलता हुआ देखने लगे ..


बीच -२ में वो अपनी जीभ भी उनके सिरे पर टच कर देती जिसकी वजह से उनके मुंह से सिसकारी निकल जाती ..


आज तो पंडित पुरे मूड में था ... नूरी की चूत का तीया पांचा करने के ...

नूरी के चेहरे पर बिखरी जुल्फों की वजह से पंडित जी को कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था ..लंड चूसते हुए लड़की किस अंदाज से उसे देखती है, ये देखना हमेशा से आदमी का सबसे प्रिय दृश्य रहा है ..


पंडित ने हाथ आगे किये और उसकी लटों को साईड में करके उसके चेहरे को देखने लगे ..


पंडित जी ने अपनी लम्बी टांगो का इस्तेमाल किया और नूरी की पायेजामी के ऊपर से ही उसकी चूत को रगड़ने लगे ..अपने पैर के अंगूठे से उसकी चिकनी चूत के ऊपर खुजली करके उसे और मचलने पर मजबूर करने लगे .


और फिर उन्होंने अपनी दोनों टांगो के अंगूठे से उसकी पायेजामी के किनारों को पकड़ा और उसे नीचे खिसका दिया ...साथ में कच्छी भी उतर आई ..और पुरे कमरे में नूरी की चूत से निकल रहे रस की गीली - २ सी खुशबू तैर गयी ...पंडित से भी अब सहन करना मुश्किल होता जा रहा था ..उन्होंने नूरी की फेली हुई चूत के द्वार पर अपने अंगूठे को दोबारा लगाया और एक हलके झटके के साथ उसे चूत के अन्दर उतार दिया ...और अंगूठे के साथ वाली उँगलियों को नीचे की तरफ मोड़ दिया ताकि वो ज्यादा से ज्यादा अन्दर जा सके ..




''अह्ह्ह्ह्ह ........अह्ह्ह्ह ....पंडित जी ....आपका तो अंगूठा भी बहुत बड़ा है ...उम्म्म्म्म ....''


और फिर वो उनके अंगूठे के ऊपर अपनी चूत वाले हिस्से से उछल कूद मचाने लगी ..


पंडित जी उसकी क्लिट को अपने अंगूठे के सिरे पर साफ़ महसूस कर पा रहे थे ..नूरी ने भी पंडित के लंड को और जोरों से चूसना शुरू कर दिया ..


कहते हैं, औरत को जितना मजा बिस्तर पर आदमी देगा, उसके बदले में उसे दुगना मजा वो देगी ..बस देर इस बात की होती है की आदमी कितने उत्तेजित और गंदे तरीके से वो सब मजे औरत को दे जिसके बदले में वो भी बिना सोचे समझे उसे ऊपर से नीचे तक चाट कर रख दे .


और यही हाल आज नूरी का था ..पंडित के अंगूठे ने जो धमाल उसकी चूत के तहखाने में मचा रखा था उसका बदले वो पंडित के लंड को बुरी तरह से चूसकर उनके गोडाउन में हंगामा कर रही थी .


आज जैसा मजा शायद ही नूरी को अपने शोहर से आया होगा ..


पंडित ने उसके कन्धों को पकड़ा और उसे ऊपर की तरफ खींच लिया ..उनका अंगूठा भी बाहर आ गया ..अपने चेहरे के ऊपर लाकर उन्होंने उसके स्ट्रोबेरी जैसे होंठों को अपने मुंह में दबोचा और जोरों से उन्हें पीना शुरू कर दिया ...नूरी की कसमसाहट उनके मुंह में ही दब कर रह गयी ..

उन्होंने उसे और ऊपर खींचा और उसके मुम्मों को अपने होंठों से किस्स करते हुए उसके पेट तक आये और फिर थोडा और ऊपर करके उसकी सुगन्धित चूत को ठीक अपने चेहरे के ऊपर लाकर थोडा रुक गए ...


नूरी भी दम साधे पंडित के द्वारा अपनी चूत के निगले जाने की प्रतीक्षा कर रही थी ...उसकी चूत की परतें पूरी तरह से अपने ही रस में डूब कर गीली हो चुकी थी ..जैसे फूल के ऊपर ओस की बूंदे .


उन्होंने अपनी लम्बी सी जीभ बाहर निकाली और ऊपर से ही एक लम्बी चटाई करके डिस्प्ले में आया हुआ सारा पानी पी गए ..

पंडित की गर्म जीभ अपने सबसे कीमती अंग पर लगता देखकर वो जोर से चीत्कार उठी ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .....उम्म्म्म्म्म ....और करो .....ना ...पंडित जी ....और चाटो ....इसे ...''


पंडित जी को ज्यादा कहने की जरुरत नहीं थी ..वो अपने काम में माहिर थे ..पर अपनी आदत से मजबूर वो लड़की को तदपा कर उसे और ललचाना चाहते थे ..इसलिए उन्होंने उसकी चूत को छोड़कर उसकी अंदरूनी जाँघों के ऊपर अपने दांत गाड़ दिए ...जो औरत के शरीर का सबसे संवेदलशील अंग होता है ..पर चूत से ज्यादा नहीं ...इसलिए नूरी को इसमें उतना मजा नहीं आया जितना पहले आया था ..उसने अपनी चूत वाला हिस्सा उनके मुंह पर रखा और उसे चूसने को कहा ..


''पंडित जी ....यहाँ अपनी कृपा बरसो ...यहाँ ज्यादा जरुरत है ....उम्म्म्म .....''


पर जैसे ही पंडित ने उसकी बात को अनसुना करते हुए वापिस जाँघों को चाटा वो बिदक सी गयी ...और पंडित के सर को अपनी टांगो के बीच दबोच कर सीधा उनके मुंह के ऊपर बैठ गयी ...


''पंडित .....सुनता नहीं ....मैंने कहा ना ..की यहाँ चूस साले ....समझ नहीं आता तुझे भेन चोद ......''


उसका उग्र रूप देखकर पंडित भी सहम गया ...पर वो कुछ ना बोला ..उसकी जरुरत से ज्यादा समझदारी की वजह से ही उसे गालियाँ पड़ रही थी ..पर बिस्तर पर पड़ने वाली गालियों का भी अपना अलग ही मजा है ..उन्होंने भी आखिर उसकी बात मानते हुए अपनी उँगलियों से उसकी चूत की परतों को फेलाया और अपनी लम्बी जीभ रोकेट की तरह उसके अन्दर उतार दी ..


''उम्म्म्म्म्म्म ....अह्ह्ह्ह्ह .....यही ....तो .....अह्ह्ह ...मैं .....उम्म्म ...कह ....रही थी ....उम्म्म्म्म्म ......हानsssssss …. ..ऐसे ही ....ओह्ह्ह पंडित जी ....आप तो कमाल है ....उम्म्म्म्म ....जितना लम्बा आपका पैर का अंगूठा ....उम्म्म्म्म उतनी ही लम्बी जीभ भी ....अह्ह्ह्ह ....आपका लंड जब अन्दर जाएगा तो .....क्या होगा ...अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ....ओह्ह्ह्ह ...माआआआआ .... .''


पंडित ने अपनी जीभ एकदम से बाहर खींच ली ...और बोले : "भेन की लोड़ी .....तेरी चूत की आग है ही इतनी खतरनाक की मुझे अपने सारे सिपाही इसे बुझाने में लगाने पड़ रहे हैं ....अग्ग्ग्घ्ह्ह .....अभी तुझे बताता हु ...की मेरे लंड में कितनी काबिलियत है ...''


और इतना कहकर उन्होंने उसके मखमली जिस्म को वापिस नीचे की तरफ धकेला और तब तक धकेलते रहे जब तक वो अपनी मंजिल यानी पंडित के लंड तक नहीं पहुँच गयी ...और वो कुछ बोल पाती इससे पहले ही उन्होंने उसकी गांड के चारों तरफ अपने पंजे रखे और उसकी चूत की फांकों को फेलाया और एक जोरदार झटका मारकर अपना बम्बू उसकी शहद की पिटारी में उतार दिया ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह .......उम्म्म्म्म्म ......ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ पंडित जी .......उम्म्म्म्म्म ......क्या बात है .....अह्ह्ह्ह्ह .....इतना भरा हुआ तो मैंने आज तक फील नहीं किया अपने आप को ....उम्म्म्म्म ....ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ......''


उसने अपने मुम्मे पंडित की छाती पर फेला दिए सुखाने के लिए जो उनके चूसने से गीले हो गए थे ...और पंडित के झटकों का इन्तजार करने लगी ..


और वो आये भी ...


मगर धीरे धीरे ...


और वो भी पुरे वाले ...यानी पंडित हर बार धीरे से अपना पूरा लंड बाहर खींच लेता ...और फिर वापिस अन्दर डालता ...उनके सुपाड़े को हर बार अन्दर जाते हुए जो जद्दो जहत करनी पड़ती उसकी वजह से वो तड़प कर रह जाती ...


''उम्म्म्म ..पंडित जी ....क्यों तड़पा रहे हैं ....जोर से करो ना ...लगातार ....लम्बे ...शॉट्स मारो ...ना प्लीस ...प्लीस ना ..''


पंडित माँ दिल पसीज गया ...और उन्होंने उसकी बात मानते हुए अपने धक्के तेजी से मारने शुरू कर दिये ..उन्होंने अपने पैरों को बिस्तर पर जमाया और उसकी गांड को पकड़ कर नीचे से इतने धक्के पे धक्के मारे की नूरी के शरीर की सारी नसें खुल गयी ...और वो सिवाए अपनी ब्रेस्ट को उनके सीने से रगड़कर , अपने दांतों से उनके कन्धों पर कट्टी मारने के सिवाए कुछ ना कर पायी ...


और अंत में एक जोरदार घोषणा के साथ पंडित जी ने अपने लंड का रसीला ...नशीला ...खुशबोदार ...मसालेदार ...रस नूरी की चूत के अन्दर निकाल दिया ...

''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ......ओह्ह्ह्ह्ह्ह नूरी .....उम्म्म्म्म ....सच मे. ......तेरी चूत भी बड़ी मजेदार है ....उम्म्म्म ...बड़ी टाईट है ....ओह्ह्ह्ह्ह ....ये ले .....ले मेरा रस ....और हो जा प्रेग्नेंट ....''


पंडित ने जैसे अपना आशीर्वाद दिया उसे ..



वो तो पता नहीं कितनी बार झड चुकी थी ...पंडित के पाईप से निकल रहे जूस की सप्लाई काफी देर तक होती रही ..और वो जरुरी भी थी ...आखिर उसे प्रेग्नेंट भी तो होना ही था ..


पंडित ने उसे नीचे उतार दिया ..और वो काफी देर तक बिस्तर पर ऐसे ही पड़ी रही ...ताकि उनका रस अन्दर तक असर करे .


पंडित ने अपने कपडे पहने और बाहर जाने लगे ..


नूरी ने पुकारा : "पंडित जी ...एक ही बार में प्रेग्नेंट नहीं होते ...कम से कम 8 - 1 0 बार करना पड़ेगा ...''


पंडित जी मुस्कुरा दिए ..वो भी तो दुबारा आना चाहते थे इस गरम चूत को चोदने के लिए ..

शाम को मंदिर के काम निपटा कर पंडित आराम से अपने कमरे में बैठ गया ..और गिरधर का इन्तजार करने लगा ..शराब के साथ उसकी बीबी और बेटी के बारे में बाते करने के लिए पंडित मचला जा रहा था ..पर लगभग 10 बजे तक इन्तजार करने के बाद भी जब गिरधर नहीं आया तो वो समझ गए की आज वो नहीं आएगा, इसलिए वो खाना वगेरह खा कर सो गया .


अगली सुबह पंडित ने सारे काम निपटाए और रितु के आने की प्रतीक्षा करने लगे ..आज तो उन्होंने शीला को भी आने के लिए मना कर दिया था ताकि वो आराम से रितु का भोग लगा सके ..


रितु के बारे में सोचते हुए उनके लंड ने अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी ..वो सोचने लगे की उसकी कुंवारी चूत को मारने में कितना मजा आएगा , वो चिल्लाएगी भी ..उसे थोडा आराम से करना पड़ेगा ..वो झट से उठे और बाथरूम से सरसों के तेल की शीशी उठा कर अपने बेड के पास लाकर रख दी ..ताकि रितु की चूत मारते वक़्त उसका इस्तेमाल कर सके ..


अब तो पंडित का लंड भी तैयार था ..उनका बिस्तर भी और उसके किनारे पड़ा हुआ तेल भी ...बस इन्तजार था तो रितु के आने का ..


और जैसे ही घडी में 2 बजे, पंडित के कान दरवाजे पर आती हुई आहट की तरफ चले गए ...


बाहर से रितु की सुरीली सी और दबी हुई सी आवाज आई : "पंडित जी ..खोलिए ...मैं हु रितु ..''


पंडित तो सुबह से ही उसका इन्तजार कर रहा था ..वो झट से उठा और भागकर दरवाजा खोल दिया ..


सामने रितु हमेशा की तरह लम्बी फ्रोक में खड़ी मुस्कुरा रही थी ..वो कुछ बोल पाते तभी रितु के पीछे से एक लड़की निकल कर सामने आई ..पंडित उसे देखकर चोंक गया ..


रितु : "पंडित जी ..ये ...ये मेरी सहेली है ..संगीता ...और संगीता येही है वो पंडित जी ...जिनके बारे में मैंने तुझे बताया था ..''


पंडित जी हेरानी से कभी रितु और कभी संगीता को देखे जा रहे थे ..और सोच रहे थे की आखिर रितु उसे अपने साथ क्यों लेकर आई है और क्या बताया है उसने उनके बारे में संगीता को .


वैसे संगीता देखने में बुरी नहीं थी ..छोटे कद की ..बाल अजीब ढंग से बंधे हुए थे ..काली आँखे थी, सांवला चेहरा , उसने अभी तक स्कूल की ड्रेस यानी सफ़ेद शर्ट और ग्रे स्कर्ट पहनी हुई थी ....


पर सबसे आकर्षक चीज जो पंडित जी की नजरों में आई वो थे उसके मुम्मे ..जो उसकी उम्र और शरीर के हिसाब से काफी बड़े थे ..


पंडित ने उन दोनों को अन्दर बुलाया और दरवाजा बंद कर दिया ताकि कोई उन दोनों लड़कियों को एक साथ उनसे बातें करते हुए ना देख सके .


अन्दर आते ही संगीता ने बोलना शुरू कर दिया : "ओह्ह्ह वाव ...रितु ...जैसा तूने बताया था ठीक वैसे ही हैं पंडित जी ...ही इज लाईक सलमान खान ...आई लाईक हिम ..''


वो देखने में जितनी भोंदू लग रही थी वैसी थी नहीं …अंग्रेजी में चपर चपर करने में लगी हुई थी ..


पर पंडित यही सोचने में लगा हुआ था की आखिर रितु उसे अपने साथ क्यों लेकर आई है ..


रितु : "मैंने तुझसे पहले ही कहा था की पंडित जी कमाल के है ..तू ही नहीं मान रही थी की मंदिर में पूजा पाठ करने वाले ऐसे नहीं होते ...और तू पूछ रही थी ना की कैसा होता है आदमियों का ..रुक तुझे अभी दिखाती हु ..''


इतना कहकर वो आगे आई और पंडित जी की धोती की तरफ हाथ बढाया ...अब पंडित जी की सहनशीलता की हद पार हो गयी ..


पंडित : "ये क्या है रितु ...कौन है ये ...और किसलिए लायी हो तुम इसे मेरे पास ....क्या देखना चाहती है ये ..''


रितु (सकुचाते हुए ) : "वो ...वो ...पंडित जी ...दरअसल ...ये मेरी बेस्ट फ्रेंड है ... ..मैं इससे कोई भी बात नहीं छुपाती ..और ना ही ये मुझसे ..आज तक जो भी यहाँ हुआ मैंने सब बता रखा है इसे ...पिताजी वाली बात भी बता दी थी मैंने .... और जब कल वाली बात बताई तो ये कहने लगी की वो भी आपको देखना चाहती है ..दरअसल ये भी मेरी तरह ही है ..आज तक इसने कुछ भी नहीं देखा ..और मैंने जो भी पिछले दो दिनों में देखा यानी माँ-पिताजी को करते हुए और फिर कल आपको भी शीला आंटी के साथ सब कुछ करते हुए तो ये जिद्द करने लगी की इसे भी वो सब देखना है ..मेरी जिदगी तो आपने बदल ही डाली है ..आपकी वजह से ही मैं आज स्कूल में रेगुलर जा पा रही हु, सही ढंग से पढाई हो पा रही है ..और सेक्स से रिलेटिड सभी बातों की जानकारी जिस तरह से आप देते हैं वो तो काबिले तारीफ है ..इसलिए ये मेरे साथ ही स्कूल से सीधा मेरे घर आ गयी और वो भी इसलिए की आप इसे भी वो सब समझाए और दिखाए ताकि इसका भी उद्धार हो सके .."


पंडित अपना मुंह फाड़े उसकी बातें सुनता जा रहा था ..उसे तो अपनी किस्मत पर विशवास ही नहीं हो रहा था की उसकी झोली में बिना कुछ मांगे एक और कुंवारी चूत आ गिरेगी ..


उसके मुंह से सिर्फ यही निकला : "क ...क्या ..क्या देखना चाहती है ये .."


रितु ने धीरे से कहा : "जी ..जी ..वो ..वो ..आपका ...ल ...लंड "


पंडित के पुरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी ..जिस अंदाज से रितु ने उनके लंड के बारे में बोला था उसे सुनकर वो सुरसुरा कर रह गए ..
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01-07-2018, 02:02 PM,
#20
RE: Porn Kahani भोली-भाली शीला
पंडित & शीला पार्ट--20

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गतांक से आगे ......................

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वो कुछ बोल पाते इससे पहले ही संगीता बोल पड़ी : "पंडित जी ...प्लीस ...प्लीस प्लीस ...मुझे भी दिखाओ ना ..जब से इस बिच ने मुझे आपके बारे में बताया है मुझसे तो रहा नहीं जा रहा ..आप बुरा मत मानना पर हमारे लिए ये सब देखना और महसूस करना बहुत बड़ी बात है ..इन्फेक्ट हर लड़की यही चाहती है ..पर सड़क पर खड़ी होकर तो ये बोल नहीं सकती न की मेरे बॉय फ्रेंड बन जाओ ..मुझे अपना पेनिस दिखाओ ...आप मानो या ना मानो, लड़कियों में लड़कों से ज्यादा सेक्स के प्रति लगाव होता है ..बस उनका शर्मीला स्वभाव ही उन्हें मार जाता है, पर रितु ने जब से मुझे आपके और शीला आंटी के बारे में बताया है वो सब सोच सोचकर मेरी पेंटी कई बार गीली हो चुकी है ..आपको विशवास नहीं होता तो ये देखो ...''


और उसने एक ही झटके से अपनी स्कर्ट को ऊपर उठा कर अपनी गीली पेंटी पंडित जी की भूखी आँखों के सामने परोस दी ..


ब्लेक कलर की पेंटी पर उसकी चूत से निकले पानी के धब्बे साफ़ चमक रहे थे ..


उसकी कच्छी और मोटी टांगो को देखकर पंडित का घोड़ा अपने अस्तबल से बाहर निकलने को हिनहिनाने लगा ..


और अपनी कच्छी दिखाते हुए कमला के चेहरे पर कोई शिकन या शर्म के भाव भी नहीं थे ..वो बिलकुल नार्मल थी ..पंडित समझ गया की जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी इस कुंवारी चूत का उद्धार भी उपरवाला उसके हाथों से करवाना चाहता है ..


पंडित बस मंत्रमुग्ध सा होकर उसकी कुंवारी चूत को परदे के पीछे से देखता रहा ..इसी बीच रितु आगे आई और पंडित जी की धोती को साईड में करके उनके लंड महाराज को बाहर निकालने की एक और कोशिश की ..इस बार पंडित ने कोई ऐतराज नहीं जताया ..वो भी पहली बार किसी का लंड अपने हाथों में लेने जा रही थी ..इसलिए वो कांप रही थी .पंडित जी की धोती की गाँठ खोलकर उसने उसे नीचे गिरा दिया ..और अब पंडित जी सिर्फ एक धारियों वाले कच्छे में उन दोनों के सामने खड़े हुए थे ..और उनका लंड किसी तोप की तरह सामने की तरफ तना हुआ खड़ा था ..


''ओह्ह्ह्ह्ह वाव .....रितु देखो जरा ...कितना लम्बा दिख रहा है पंडित जी का पेनिस ...उम्म्म उतारो न इसको भी ...मुझे साफ़ -२ देखना है ..''


संगीता तो पंडित जी का नंगा लंड देखने को मचल सी उठी ..


पंडित जी ने भी अपने आप को उन दोनों के प्रयोग में आने वाली चीज की तरह अपने आपको उनके हाथों सपुर्द कर दिया .....और रितु की तरफ देखने लगे ..जिसकी कांपती हुई उँगलियों ने जैसे ही पंडित जी के कच्छे के नाड़े को पकड़कर खींचा, उसके हाथ की ठंडक से पंडित का पूरा शरीर झनझना उठा ..और इसी झनझनाहट में उनका कच्छा उनका साथ छोड़कर नीचे जमीन पर जा गिरा ..


अब वो बिलकुल नंगे खड़े थे ..रितु तो कल भी उनको नंगा देख चुकी थी ..


पर संगीता, जिसे उन्होंने अपनी जिन्दगी में आज पहली बार देखा था ..वो भी उन्हें नंगा देख रही थी ..


पंडित बेचारा तो उनके कोतुहल को शांत करने की वस्तु बनकर रह गया था ..पर ऐसी वस्तु बनना किसे पसन्द नहीं होगा ..


रितु ने अपने हाथ आगे किये और पंडित जी के खड़े हुए घोड़े पर अपनी उँगलियों की नकेल कस दी .


और उसे पकड़ते ही रितु की आँखे मूंदती चली गयी ...उसके होंठ सूख कर सख्त हो गए ...उसकी साँसे तेज चलने लगी ...उसके सीने पर रखे हुए छोटे - २ स्तन ऊपर नीचे होने लगे ..पंडित का मन किया की आगे बढकर उसे अपनी बाहों में दबोच ले और उसे पी जाए ..


पर तभी सामने खड़ी हुई संगीता आगे बड़ी और अपने हाथ आगे करके उसने पंडित के लंड को रितु के हाथों से खींच कर अपने कब्जे में ले लिया ..


''ओह्ह्ह माय गॉड .....मुझे तो विशवास ही नहीं हो रहा है की मैंने अपने हाथ में एक जीता जागता पेनिस पकड़ा हुआ है ...वाव ....आई एम् सो लक्की टुडे ....''


वो तो उनके लंड को अपने हाथो में पकड़ कर ऐसे उलट पलट कर देख रही थी मानो कोई एलियन का बच्चा देख लिया हो उसने ...


और दूसरी तरफ रितु उसको गुस्से से भरी हुई नजरों से देख रही थी ..उसने भी तो अपनी जिन्दगी में पहली बार किसी के लंड को पकड कर देखा था ..पर शायद उसने अपनी सहेली को कुछ ज्यादा ही उत्साहित कर दिया था इसलिए वो अब उसके सामने मजे ले रही थी और वो खुद खड़ी होकर उसे वो सब करते हुए देख रही थी ...आखर लायी भी तो वही थी उसे अपने साथ ..


पंडित ने देखा की रितु ललचाई हुई नजरों से कमला को उनके लंड से खिलवाड़ करते हुए देख रही है ...वो कभी उनके सुपाड़े की स्किन को आगे करती और कभी पीछे ..कभी नीचे लटक रही गोटियों को पकडती और कभी बीच में से उनके लंड को ...


पंडित का मन किया की संगीता को बोले की पहले रितु को उनके लंड को छूने और देखने दे ..पर वो कुछ बोल पाते इससे पहले ही संगीता ने उन्हें और रितु को चोंकाते हुए उनके लंड को अपने मुंह में भर लिया ..


''उम्म्म्म्म .......पुच्च्च्छ्ह्ह ....उम्म्म्माअ ह्ह्ह्ह ....''


वो उनके लंड को अपने मुंह में ठूसकर बस निगले जा रही थी ..उसका करना क्या है उसे पता ही नहीं था ...


पंडित ने ना चाहते हुए भी अपनी आँखे बंद कर ली ..संगीता के सर को उन्होंने दबोचा और उसके शरीर को नीचे धक्का देकर घुटनों के बल बिठा दिया ..और खुद खड़े होकर उसका मुख चोदन करने लगे .


संगीता के मुंह के अन्दर अब पंडित जी का पूरा लंड आ जा रहा था ..और अन्दर जाते हुए उसके रसीले होंठों से रगड़ खाता हुआ जब उनका लंड अन्दर जाता तो अपनी जीभ से निकल रही लार से वो उसे नेहला देती और वापिस जाते हुए उसे सुखा कर बाहर भेजती ..

लंड चूसना कितना आसान है ..संगीता ने मन ही मन सोचा ..और कितना मजेदार भी ..


उसने आज तक इन्टरनेट और मोबाइल पर कई सीन देखे थे जिसमे लड़की लंड चूसते हुए अपनी चूत और मुम्मों को मसलती है ...ये सोचते हुए उसने अपनी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए ...और अन्दर हाथ डाल कर अपना एक मोटा ताजा मुम्मा बाहर निकाल लिया ..और उसे दबाने लगी ..


पंडित अपनी फटी हुई आँखों से अपना चेहरा नीचे किये हुए उसके तरबूज को देखे जा रहा था ..इतना बड़ा ..इतना सख्त और कसावट वाला स्तन तो उसने आज तक नहीं देखा था ..उत्तेजना से मिलने वाली ख़ुशी के मारे उसके लंड से प्रीकम निकल कर संगीता के मुंह में चला गया ..


उसने उम् आअम्म्म ...करते हुए वो प्रीकम पी लिया ..और उनके लंड को बाहर निकाल दिया ...


''वाव ....पंडित जी ...ये क्या था ...इतना मीठा ...इतना टेस्टी ....क्या यही 'कम' होता है ''


वो कुछ बोलते इससे पहले ही किसी मेघावी छात्र की तरह रितु बीच में बोल पड़ी ...''अरे नहीं पगली ...ये तो सिर्फ ट्रेलर है ...पूरी पिक्चर तो लास्ट में दिखाई देगी ...ही ही ...है न पंडित जी ...''


पंडित बेचारा सर हिला कर रह गया ..


रितु : "और वो पिक्चर देखने के लिए तुझे काफी मेहनत करनी पड़ेगी ...ऐसे कपड़ों में बैठे रहने से कुछ नहीं होने वाला .."


संगीता उसकी बात समझ गयी ...कपडे उतारने का समय आ चुका था ..वो बड़े ही मादक तरीके से उठी और पंडित के लंड को अपनी गिरफ्त से निकाल कर उनके सामने खड़ी हो गयी ..


संगीता का भी ये पहला टाइम था किसी के सामने नंगा होने का ..पर फिर भी काफी हिम्मत करते हुए उसने अपनी शर्ट के बचे हुए बटन खोलने शुरू किये और सारे बटन खुलने के बाद उसने अपनी शर्ट को अपने जिस्म से जुदा कर दिया ...उसने मेचिंग ब्लेक ब्रा पहनी हुई थी ..जिसमे से एक मुम्मा पहले से ही बाहर निकल कर पंडित जी को दर्शन दे रहा था ..उसने अपने हाथ पीछे किये और एक ही पल में अपनी ब्रा भी खोल कर नीचे गिरा दी ..


अब संगीता टोपलेस होकर सिर्फ स्कर्ट में पंडित और रितु के सामने खड़ी थी ..उसके दोनों जग्स को देखकर पंडित जी की आँखे उबल कर बाहर आ रही थी ...इतने बड़े ...इतने अल्हड ..इतने सख्त ..इतने मादक स्तन उन्होंने आज तक नहीं देखे थे ...उनके हाथ में खुजली सी होने लगी उन्हें दबोचने के लिए ...


रितु भी संगीता की ब्रेस्ट की बनावट देखकर दंग रह गयी ...


रितु : "पंडित जी ..आपको पता है ..हमारे पुरे स्कूल में संगीता की ब्रेस्ट सबसे बड़ी और परफेक्ट है ...सभी लड़कियां इसकी ब्रेस्ट की तारीफ करती है ..."


"और सारे ठरकी टीचर्स भी ...हा हा हा ..." संगीता ने उसकी बात पूरी की और दोनों जोरदार हंसी के साथ एक दुसरे के हाथ पर हाथ मारकर हंसने लगे ..



इसके जैसी ब्रेस्ट देखकर तो हर किसी को लालच आएगा ही ..


और बातें करते-२ अचानक संगीता ने अपनी स्कर्ट भी खोलकर नीचे गिरा दी ..पंडित के लंड ने उसके बदन की बनावट को देखकर एक जोरदार सलाम ठोंका ..


और फिर मचलते हुए ..धीरे-२ डांस करते हुए ..उसने अपनी कमर से वो पेंटी भी निकाल कर नीचे फेंक दी ..


पंडित तो अपनी आँखे झपकाना भी भूल गया ..

पंडित ने इतनी कमसिन और इतनी मादक जिस्म वाली लड़की आज तक नहीं देखि थी ...उनके लंड ने ना जाने कितनी बार झटके मार मारकर अपने ही पेट पर चोट पहुंचा डाली ..


संगीता धीरे -२ चेलते हुए पंडित के पास आई और अपनी बाहों को उसने पंडित के गले में डाल दिया ..और धीरे से बोली : "अब बोलिए पंडित जी ...मुझे भी वो सब ज्ञान ..वो सब शिक्षा मिलेगी ना जो आपने रितु को दी है ..''


पंडित के मुंह से तो कुछ निकला नहीं ..बस गर्दन हिला कर हाँ बोल दिया ..


उसने ख़ुशी में आकर पंडित जी को चूम लिया ...


दुसरे कोने में खड़ी हुई रितु जल भुन रही थी ..पर पंडित का पूरा ध्यान अब संगीता पर था ..


उन्होंने संगीता को अपने बेड पर लिटा दिया ..वो किसी जलपरी की तरह अपने शरीर को समेट कर पंडित के बेड पर जाकर लेट गयी ...उसकी आँखे बंद सी होने लगी ...ये सोचकर की पंडित अब उसके साथ क्या करेंगे ..

पंडित ने अपने लंड को मसलते हुए उसकी तरफ देखा ...और बेड के किनारे आकर वो नीचे बैठ गए ...उसके पैरों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसके दोनों पैरों को अपने कन्धों पर रखकर उसकी सुगन्धित और अनछुई चूत के ऊपर अपने होंठों को ले आये ...

आगे क्या होने वाला है ये संगीता अच्छी तरह से जानती थी ..पर फिर भी पंडित से उसने धीरे से पुछा : "प ....पंडित ...जी ...ये ...ये क्या करने वाले है ...आप ...''


पंडित (मुस्कुराते हुए ) : "तुम्हारी सेक्स शिक्षा शुरू करने से पहले तुम्हारे शरीर के सबसे गर्म भाग को शांत करना आवश्यक है ..और मुझे पता है ..वो येही है ..है ना ..."


और इतना कहते हुए पंडित ने अपने ठन्डे होंठ उसकी गर्म चूत के ऊपर रख दिए ..


संगीता भनभना उठी ..और उसने आगे बढकर पंडित के सर को पीछे की तरफ धकेलते हुए चीखना शुरू कर दिया ...


''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह पंडित जी ......ये…ये क्या .....अह्ह्ह्ह ....गुदगुदी हो री है .....अह्ह्ह्ह्ह .....नाआअ करो प्लीस .......''


पर पंडित जानता था की वो क्या और क्यों कर रहा है ...


लड़की की चूत चाटने के बाद आदमी उससे कुछ भी करवा सकता है ..अपना लंड चुसवा सकता है, उसकी चूत मार सकता है और उसकी गांड भी ...पहले से ही उसे अपने बोझ के तले दबा दो ताकि वो किसी भी बात के लिए मना ही ना कर पाए ...इसलिए पंडित अपनी लम्बी और तजुर्बेदार जीभ से उसकी कुंवारी चूत को खंगालने में लगा हुआ था ...वो इतनी टाईट थी की पंडित को अपनी उँगलियों से उसकी परतें हटा कर अपनी जीभ अन्दर धकेलनी पड़ रही थी ...


अब संगीता को भी मजा आने लगा था ...उसने अभी तक मूवीज में ही ऐसा होते हुए देखा था ..पर अपने ऊपर करवाने में जो मजा है वो देखने में कहाँ ..


इसलिए संगीता अब बिना चिल्लाये हुए पंडित के होंठों और जीभ का मजा ले रही थी ..फर्क सिर्फ ये था की अब उसकी चीखें सिस्कारियों में बदल चुकी थी ..


पंडित के अचानक उसकी क्लिट को अपने होंठों के बीच फंसा लिया और वो किसी जाल में फंसी चिड़िया की तरह फडफडाते हुए पंडित के मुंह पर झड गयी ...


"अह्ह्ह्ह्ह्ह ......ओह्ह्ह्ह्ह ......पंडित जि ..... अह्ह्ह्ह्ह ...उम्म्म्म ......ये…ये क्या ....अह्ह्ह्ह ....आई थिंक ....आई .....एम् .....कमिंग .....अह्ह्ह्ह्ह्ह ....ओह्ह्ह्ह्ह गोश ......''


उसका पूरा शरीर ऎठ सा गया ...और उसे ऐसा लगा वो अन्तरिक्ष की सेर कर रही है ..


इसी बीच पंडित ने उसकी मिठाई की दूकान में बनी पहली मिठाई यानी रसमलाई पूरी तरह से चट कर डाली ...

और बुरी तरह से हांफती हुई संगीता का बेजान शरीर बिस्तर रूपी धरातल पर आ गिरा ...


''ओह्ह्ह पंडित जी .....ये क्या था ....आई एम् स्पीच्लेस ....तूने देखा ना रितु ...ओह्ह माय गॉड ...इट वास माय फर्स्ट ओर्गास्म ...एंड आई लव्ड इट ...''


वो तो पंडित का बखान करते हुए थक ही नहीं रही थी ..


पंडित उठ खड़ा हुआ और अपना खड़ा हुआ लंड उसके चेहरे के आगे लहरा दिया ...


अब टाईम था पे बेक का ...उसने ख़ुशी -२ उनके लंड को अपने मुंह में भरा और जोरों से चूसने लगी ..इस बार उसकी चूसने की स्पीड काफी तेज थी ..पंडित ने जिस तरह से उसकी चूत को चूसा था उसका बदला वो ऐसे ही उतार सकती थी ..


अचानक पंडित ने अपने लंड को उसके मुंह से वापिस खींच लिया ..क्योंकि वो झड़ने वाले थे ..और अपना रस ऐसे ही व्यर्थ करना तो उन्होंने कभी सीखा ही नहीं था ..


उन्होंने संगीता को वापिस बेड पर लेटने को कहा ..वो समझ गयी की चुदने की वो घडी आ गयी है जिसका हर लड़की इन्तजार करती है ..पर वो इतनी जल्दी ही आ जायेगी उसे ये अंदाजा नहीं था ..


पर वो कुछ ना बोली और पीठ के बल बेड पर लेट गयी ..अपनी टाँगे फेला दी ...और अपनी बाहें भी ..


रितु भी हेरान सी होकर उसे देखी जा रही थी ..की कितनी आसानी से वो पंडित के एक ही इशारे पर चुदवाने को तैयार हो गयी ...उन्होंने कई बार चुदाई के बारे में डिस्कस किया था ..और ये भी सोचा था की अपनी शादी की रात को अपने पति को ही वो अपनी कुंवारी चूत उपहार में देंगी ..पर पंडित के जादू के आगे रितु और संगीता का जैसे ब्रेन वाश हो गया था ..पंडित ने जिस तरह उन्हें मजे दिए थे उसके बदले में अपनी चूत उन्हें भेंट करने के सिवा उन्हें कुछ और सूझ ही नहीं रहा था ..


वैसे वो सब अगर रितु के साथ हुआ होता तो वो भी शायद आज पंडित से चुद रही होती ..पर इस समय संगीता थी पंडित जी के नीचे और रितु को सबसे ज्यादा जलन इसी बात की हो रही थी और अपने आप को कोस भी रही थी की क्यों वो आज संगीता को अपने साथ लेकर आई, उसके हिस्से की चुदाई कितनी आसानी से उसने हड़प ली ..


पर अब कुछ नहीं हो सकता था ..
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