Maa Sex Kahani माँ का मायका
10 hours ago,
#1
Star  Maa Sex Kahani माँ का मायका
◆ माँ का मायका◆
Written by Sexy baby


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Season १

(Episode-1)

मेरी मा पिताजी का लव मैरेज हुआ था।मा बड़े घर की और पिताजी छोटे गरीब घराने से।नतीजन उन्हें भागकर शादी करनी पड़ी थी।अभी मेरी 12 वि की शिक्षा चालू हो गयी थी।बहुत आगे की पढ़ाई करू ये पिताजी की बहुत इच्छा थी।पिताजी दूसरे शहर में ड्राइवर का काम करते थे।जब बारहवीं का नतीजा आया।वो गांव आने के लिए अपनी काम की गाड़ी लेके निकले पर कभी पहुंचे ही नही।अभी मैं अनाथ मा विधवा।पिताजी की क्रियाकर्म विधि पूरी हुई।दूसरे दिन दरवाजे पर दादा(मा के पिताजी)खड़े दिखे।

मा दादा को देख उनसे रोते हुए बिलक गयी।सबसे छोटी लड़की थी तो मा दादा की बहुत लाडली थी।दादा ने मुझे भी वहां बुलाया और गले से लगाया।आखिरकार वही हुआ जो होना था,मेरे पापा के परिवार से सिर्फ एक ही भाई था और उनकी पत्नी.उनको संतान नही थी।चाची मुझे ही अपना बच्चा मानती थी।उम्र 40 पर गयी थी दोनो की तो अभी संतान होने का कोई निशान न था।दादा ने मा को अपने साथ आने का प्रस्ताव रखा।मा ने उसको बहुत ना नकुर किया।पर बाद में चाचा और चाची के कहे अनुसार ओ मान गयी।शादी के बाद चाचा ने मा को बड़े भाई और चाची ने बड़ी बहन की तरह सहारा दिया था तो वो उनको मना नही कर पाई।
पर अभी सवाल मेरा था।मा का मायका शहर में था।हमारे गांव से कोसो दूर।मुझे वहां से कॉलेज आना जाना नही जमने वाला था।
तो चाची बोली "एग्जाम खत्म होने तक विराज यही रुक लेगा।छुटियो में आ जाएगा।वैसे भी आगे की पढ़ाई तो वो वही करने जाने वाला था।"
सबको ये बात सही लगी।दो दिन बाद मा दादा के साथ अपने मायके निकल गयी।मेरा भी ओ आखरी दिन था कॉलेज का,उसके बाद अगले 1 महीने घर से ही पढ़ाई करनी थी।मै हॉल टिकट ले कर घर आया।

मैं घर में जैसे ही घुसा तो सामने का नजारा बडा कामनिय था।चाची v आकर के पेंटी में मेरे तरफ पिछवाड़ा किये खड़ी थी।

लग रहा था की अभी स्नान करके आई है।बहुत सुगंध आ रही थी।उस अवस्था में मेरे हाथ में जो किताबे थी वो फट से गिर गयी।

अभी मेरे सामने 36 साइज के खुले चुचे छुपाते सावले रंग की रेड पेंटी में अधनंगी 43 साल की मजबूत हॉट माल चाची खड़ी थी।कुछ देर जो हुआ उसका हम दोनो को कुछ समझ न आया।हम सिर्फ अपनी कमान (प्रायवेट पार्ट)संभाल रहे थे।तभी चुचो,पेंटी से मेरी नजर घूमते चाची की आँखों में थम सी गयी,क्योकि उनकी नजर एक ही जगह पर रुकी थी और वो जगह मेरी पेंट में बना हुआ टेंट था।क्या कहे उस पल का आनंद नीचेवाले ने झटका देके अपनी खुशी जाहिर की,मन में लड्डू फूटा पर मुझे अजीब फील हुआ और मैं वहां से सीडी चढ़ के ऊपरी मंजिल गया।

(हमारे घर में नीचे हॉल किचन छोटा रूम उसके बाजू में कॉमन बाथरूम और ऊपर एक रूम था जिसमे एक बेड और बाजू में सब समान भरा हुआ(बैडरूम कम स्टोर रूम)था।)

मैं खाना खाने भी नीचे नही आया।पूरा दिन हमने एक दूसरे से आंखे नही मिलाई।आज 18 होने चुका था पर इन अठारह सालो में कभी चाची को देख अइसे विचार नही आये।स्कूल में भी मा के दर से गंदे बच्चो की संगत में नही गया।उसी वजह से मेरे दोस्त भी बहुत कम थे।

रात 9 बजे हम लोगोने खाना खाया।पर खाना खाने पर सिर्फ हम दोनो ही थे,चाचा मुझे दिखाई न दिए।सुबह के हादसे के बाद हम बात नही किये थे,और आगे से बात करू इतनी हिम्मत मुझमे थी नही।मैं खाना खाके उपर जाके सोने गया।करीब 11 बजे चाची ऊपर आके दरवाजा खटखटाने लगी,और पुकार भी रही थी।मैं थोड़ा डर सा गया।मन में बिजली सी चल गयी की "क्या हुआ होगा?"।

मैं दरवाजा खोला चाची नाइटी (मैक्सी जैसा एक लॉन्ग ड्रेस)में मेरे सामने खड़ी थी।मैंने ऊपर से नीचे देखा।सुबह से मेरा नजरिया ही बदल रहा था।पर चाची के चेहरे पर पसीना था।

चाची:वीरू मुझे नीचे अकेले में डर लगता है।तुम आज चलो न मेरे साथ,चाचा भी कल आएंगे,शहर का काम पूरा करके।

मैं थोड़ा सोच के:ठीक है बड़ी मा मैं आता हु आप आगे चलो मैं आता हु।

मैं चाची को बचपन से ही बड़ी मा बुलाता था।पर अभी की हालाते बदलती नजर आ रही रही।उस टाइम मैं अंडरवेअर में था तो उन्होंने इतना नोटिस नही किया अंधेरे में।मैं शॉर्ट ढूंढा।पर मुझे मिल नही रही थी।चाची ने सीढ़ियों के नीचे आके फिरसे पुकारा तो मैं टॉवल लपेट के उनके साथ सो गया उनके रूम में।

मैं गया तबतक चाची पलंग पे सो चुकी थी।मैं पलंग बोल रहा हु पर वैसे कुछ आलीशान नही था।एक खटिया था जिसे उसने ही दहेज में लाया था।पर बहोत छोटा था।दो लोग सोने के बाद खत्म हो जाता है।

मैं उनके बाजू में जाकर सो गया।बचपन में जब भी चाचा और पिताजी बाहर रहते थे तब मैं चाची के पास सो जाता था।आज भी मैं उसी लिहाजे में उनके करीब सो गया।उनकी तरफ पीठ करके सोया तो मैं नींद में नीचे गिरने लगा ।तो मैंने उनकी तरफ मुह करके सोना सही समझा।जैसे ही मैं घुमा चाची की बालो की खुशबू दिलो दिमाग में घुस गयी।मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।

मेरा मन बहोत चंचल था।उसी सुगंध के हवाओ में मुझे सुबह का नजारा याद आने लगा।नींद गहरी नही थी पर सपना तो कैसे भी आ सकता है,चाहे उसमे हकीकत शामिल हो।क्योकि जिंदगी का पहला नजारा था की मैंने किसी औरत को अधनंगा देखा था और मेरे अवजार ने हरकत की थी।

मैं उस हकीकत वाले हसीन कामनिय सपने में इस तरह खो गया उसमे मेरे लन्ड का आकर एकदम से बढ़ गया।टॉवल ढीला था तो आकर बढ़ने के बाद बिखर गया।तो अंडर वेअर के साथ मेरा लन्ड किसी बड़े कोमल से चट्टानों पे घिसने लगा।कुछ देर मैंने मजा लिया।बहुत अच्छा महसूस करने लगा था।अंडरवेअर में मुझे कंफर्टेबल महसूस नही हुआ तो मैंने लन्ड को बाहर निकाल के उस गदरिले चट्टानों पे उसके बीच के दरी में घुमाने,घिसाने लगा।कुछ समय बाद मैं अकड़ सा गया और मेरे लन्डसे पानी निकल गया।पर मैं सपने में था तो मुझे ओ चट्टानों सी बहती नदी की तरह लगा।मैं अभी तक सपने में था।पर जब मुझे गिला महसूस हुआ मैं उठ गया।

मैं बाथरूम जाके फ्रेश होकर आया तो मुझे सामने दिखा की चाची की पिछवाड़े सब गिला था।नाइटी गांड के छेद में घुसी थी।मुझे अब पूरा मामला समझ आया की सपने में मैंने क्या कर दिया है।

चाची सोई थी तो मैं भी चुप चाप जाके सो गया।कुछ पल बाद चाची की नींद खुली।मैं फ्रेश हुआ था तो मुझे नींद नही आयी थी।चाची की गीलेपन की वजह से नींद टूटी थी।वो उठ के बैठी और थोड़ा घूम कर जो गीली जगह थी उसको हाथ में लेके सूंघा।और कुछ पल मेरी तरफ देखा।मैं सोने का नाटक कर रहा था।जब उन्होंने मेरी ओर से नजर हटाई तो मैंने आंखे खोली।ओ मेरे लण्ड के पानी को मसल रही थी उंगलियों में,पर उनके चेहरे पर न गुस्सा था न खुशी।ओ कुछ पल एसेही बैठी सोचती रही कुछ और सो गयी।मैं भी निशचिंत होकर सो गया,की मेरी गलती पकड़ी नही गयी।

सुबह के टाइम नाश्ता करने के बाद मैं पढाई कर रहा था।चाची घर की रोजाना की तरह सफाई कर रहा था।फरवरी था तो ऊपरी कमरे में गर्मी रहती है तो मैं चाचा चाची के रूम में पढ़ाई कर रहा था।चाची हमेशा देर से नहाती थी,क्योकि घर की साफ सफाई करनी रहती थी।बाहर का साफसफाई पूरा होने के बाद मुख्य द्वार बन्द कर के वो कमरे में आ गयी।उनका बदन पसीना पसीना था।अभी सिर्फ उनके कमरे की ही सफाई बाकी थी जहाँपर मैं पढ़ाई कर रहा था।मैं पलंग पे था।चाची रूम के अंदर आते ही।हवाई खाने लगी।उनको बहुत गर्मी सी लग रही थी।उन्होंने साड़ी जो पहनी थी उसको निकाल दिया।
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10 hours ago,
#2
RE: Maa Sex Kahani माँ का मायका
अभी वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी।उन्होंने सारा समान जो रूम में बिखरा पड़ा था वो समेट लिया।और जो अलमारी में रखना था उसे लेकर अलमारी खोलने गयी।पर पेटीकोट की नाड़ी अलमारी के दरवाजे में फसी और पेटीकोट नीचे गिर गया।उनको संभालने का मौका ही नही मिला।उन्होंने झट से पीछे देखा तो मैं उनको नीचे गर्दन झुकाए दिखाई दिया।ओ वैसे ही पेंटी में अपना काम चालू रखी।

झुक कर पढ़ाई करनेसे मेरी कमर दुखने लगी तो मैंने अंगड़ाई ली तभी सामने का नजारा देख कर मैं अइसे ही देखता रह गया।अलमारी का एक दरवाजा जिसपर शीशा होता है ओ बंद था तो मैं चाची को घूर रहा हु ये चाची ने नोटिस किया।पर वो वैसे ही काम में लगी रही।

पर कल जैसे उन्होंने खुदको ढकने की कोशिश नही की।ऊपर से गांड को मजबूर तरीकेसे हिला मचल रही थी।मैं अभी एकदम से ठंडा पड़ गया।

लन्ड उत्तेजना से खड़ा हो गया।मेरी ये हालत देख चाची मुस्करा रही थी।उन्हें इसका मजा आ रहा था।वो वैसे ही कमर को झटके देते हुई गांड मटकाते हुए अलमारी बन्द करके वहां से बाहर निकल गयी।

मैं झट से उठा और बाथरूम चला गया और पेंट अंडरवेअर के साथ निकाल दिया।देखा तो लन्ड लोहा हो गया था।मैंने लण्ड को बहोत दबाया।की ओ जैसे थे हो जाए।मैं इस खेल पे कच्चा खिलाड़ी था।मुझे मालूम नही था की कैसे भड़के हुए लन्ड को शांत किया जाता है।तभी मेरे सामने के शीशे में मुझे चाची दिखाई दी।मुझे तब अहसास हो गया की जल्दबाजी में मैंने दरवाजा बन्द ही नही किया।मैं अचानक से चाची की तरफ घूम गया।

पर चाची का रिएक्शन मेरी हवाइयां उड़ाने वाला था।

चाची:अरे वीरू ये क्या हुआ?तेरे लुल्ली को क्या हुआ?

चाची को इतनी खुल के बाते करके सुन मुझे भी सुकून आ गया।कलसे जो अपराधी से महसूस हो रहा था उससे मैं थोड़ा बाहर आ गया।और जो था सब बकने लगा।

मैं:क्या मालूम चाची जब भी आपके पिछवाड़े को देखता हु मेरी लुल्ली अइसे हो जाती है।

चाची ये सुन के चौक सी गयी और अपनी गांड घूमाते हुई बोली:ये वाला हिस्सा?

जैसे ही वो घूम जाती है वैसे ही मेरा लन्ड भी झटका खाता है।उस झटके को देख चाची आपमे ओंठ दांतो तले चबाती है।

चाची:उसका कुछ कर नही तो तबियत बिगड़ जाएगी तेरी।

बीमारी होने की आशंका से ही मैं कंप सा गया।पर क्या करू मुझे मालूम न था।
मैं:क्या करू पर।कल से ट्राय कर रहा हु।कुछ नही हो रहा।बहुत दर्द भी होता है।इससे तो मेरी पढ़ाई भी नही होगी।

चाची:मैं तेरी हेल्प कर दूंगी पर किसीको बताना नही।नही तो लोगो को मुह दिखाने लायक नही रहेगा तू।

मैं:नही चाची किसीको नही बताऊंगा।

चाची मेरे करीब आ गयी।उसने मेरे लण्ड को छुआ और सुपडे का चमड़ी नीचे कर उंगली घुमाया।और मुह में डाल उसकी टेस्ट ली।मेरे लन्ड के सुपडे से लेके पूरे शरीर में करंट सा फैल गया।उन्होंने मुझे बाहर बैठाया।पूरे घर का खिड़की दरवाजा बंद करके फिरसे मेरे पास आ गयी।मुझे पूरे कपड़े निकलने बोली ।अभी मैं पुरा नंगा पलँग पर पैर फैलाये बैठा था।वो पास आयी।लण्ड को हाथ में लेके चमड़ी को ऊपर नीचे करके हिलाने लगी।मेरी नजर सिर्फ चाची की आंखों में थी।उनके आंखों में भयानक हवस की प्यास थी।

उनके हिलाने की वजह से लण्ड अभी लोहा बन गया था।चाची ने मेरे लण्ड को मुह में लेके चूसने लगी।
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ओ लण्ड के सुपडे से लेके अंडों तक चाट चूस रही थी।मैं उन्हे निहार राहा था।उनका एक हाथ उनके पेंटी में घुसा था।ओ लण्ड को कुल्फी की तरह चूस चाट रही थी।काफी समय वो चूसती रही।उनकी पेंटी भी अभी गीली थी।लगता है वो उस समय झड गयी थी।मेरा भी समय हो गया।मैंने चाची को बोला:चाची मेरे लुल्ली से पानी निकलने वाला है।
चाची सिर्फ मुस्कराई और लन्ड को जोरसे हिलाने लगी।मैं झड़ गया तो अंदर से निकला सफेद पानी भी चाची ने अपने मुह में ले लिया और गटक गयी।मेरा लन्ड पूरा गिला था तो चाची ने उसे चाट के साफ कर दिया।
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चाची:जाओ पानी से साफ कर दो।मैं खाना बना लेती हु।

मैं बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर आया।हम लोगो ने मिलकर खाना खाया।शाम को चाचा आने वाले थे तबतक चाची ने 2 बार मेरा लन्ड चुसाई कर ली थी।चाचा शहर शहर घूम कर कपड़ा बेचते थे तो कईबार बाहर ही रहते थे।अभी जब भी चाचा बाहर रहते चाची घर में ब्रा पेंटी में ही रहती और लण्ड को मजा देती।

बहोत दिनों से हमारा यही कार्यक्रम चलता रहा।एकदिन मैं रात को चाची के साथ ही सोया था।चाची लण्ड चूस के शांत करवा कर सो गयी थी।रात को मेरी नींद खुली।तो सामने चाची के चुचे थे,बहोत बड़े।जैसे ही चाची की सांसे ऊपर नीचे जाती वैसे वो भी नीचे ऊपर हो रहे थे।मेरा लण्ड अभी हरकत में आ गया,पूरा तन के खड़ा था।सेक्सुअल में हम दोनो बहोत घुल मिल गए थे पर उनके बाकी अंगों को हाथ लगाने के लिए अभी भी डर सा लग रहा था।पर यहा लण्ड का तनाव भी सहन नही हो रहा था।मैंने चाची के चुचो को ब्रा के ऊपर से मसलना चालू किया।और उनकी कमर पर लण्ड घिसा रहा था।चुचे मसलने की वजह से चाची की भी नींद खुल गयी थी।उन्होंने ब्रा खोल के चुचे आज़ाद कर दिए।
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मैं चुचे बड़े मजे से मसल रहा था।मुझे उनके ऊपर जो निप्पल्स थे उनको खींचने में मजा आ रहा था।चाची सिसक रही थी।चुचो को देख मेरे में जो बच्चा था ओ जग गया।मुझे चुचे चूसने की बड़ी इच्छा होने लगी।

मैं:चाची मुझे चुचे चूसने की बहुत इच्छा हो रही है।

चाची मुस्कारते बोली:तो चूस ले ना मेरे बेटे तेरे ही तो है ।

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उनकी अनुमति मिली और मैं थोड़ा ऊपर होकर उनके चुचे चूसने लगा।निप्पल को ओंठो से खींचने लगा।वो मेरे सर पर हाथ से सहला रही थी।मेरा पानी अभी छुंटने को था।मैं पलंग से उठा और बाथरूम गया।और सारा माल छोड़ दिया।

दूसरे दिन जब सुबह उठा तो चाची घर में नही थी।लगता है बाजार समान लेने गयी होगी क्योकि रूम में पर्स भी नही था।पर उनकी अलमारी खुली थी।मैं बाथरूम जाने से पहले अलमारी बंद करने गया तो मुझे एक साइड में एक किताब मिली।उसके ऊपर नंगी औरतो की फोटो थी।मैं उसको लिया और बाथरूम में चला गया।पूरी पुस्तक कहानी और फ़ोटो से भरी पड़ी थी।
मैंने पूरी किताब पढ़ ली।बाद में जहा थी वह पर आके रख दी।जब वह पे रख रहा था तो मुझे एक पैकेट मिला,कॉन्डोम का।किताब में मैंने उसके उपयोग और जरूरत के बारे में पढ़ा था।मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया था।मैंने सोचा की मैं भी देख लू की मेरे लन्ड पर ये कैसे आता ह।

मै पूरा नंगा होकर बेड पे लेट गया।मेरा लण्ड आसमान को सलामी दे रहा था।मैंने पैकेट खोला और कॉन्डोम को लंड में घिसड रहा था।मुझसे वो हो नही रहा था।तभी झट से दरवाजा खुला।सामने चाची खड़ी थी।

चाची:अरे वीरू क्या कर रहा है?

मैं:वो चाची ये घुसाने की कोशिश कर रहा था पर जा नही रहा।

चाची ने अलमारी के पास देखा।हैरान सी शक्ल करते हुए मेरे पास आयी।उनको अहसास हो गया की वो जल्दबाजी में अलमारी खुली छोड़ गयी है।

मेरे पास आकर बोली:रुक मैं हेल्प कर देती हु।पर तू लगाके करेगा क्या?

मुझे क्या जवाब दु समझ नही आ रहा था ।मैने हवा में जवाब दे दिया:"मालूम नही?!?!?!?"

चाची हस्ते हुए:पागल है मेरा बच्चा।रुक तुझे मैं इसका पूरा इस्तेमाल बताती हु।

और उन्होंने खुद को नंगा कर दिया।और मेरे सामने खड़ी हो गयी।छोटे छोटे झांट वाली चुत मेरे सामने थी।प्रत्यक्ष में पहली बार मैं चुत देख रहा था।
मैंने उत्साह में आगे हाथ करके चुत को सहलाया।चाची की मुह से आआह निकल गयी।फिर उन्होंने मुझे लिटाया और लन्ड को थोड़ा हिलाकर कॉन्डम चढ़ा दिया।फिर मुह से थोड़ी थूंक मेरे लन्ड पे डाल सहलाया और थोड़ी चुत पे डाल के चुत को भी मसला।फिर धिरे से दोनो पैर मेरे दोनो तरफ फैला कर मेरे लन्ड पर चुत का छेद लगाया और आहिस्ता नीचे बैठ गयी।
दोनो की मुह से प्यारी दर्द भारी आआह निकल गयी।
चाची थोड़ी देर अयसेही बैठी रही फिर आहिस्ते आहिस्ते ऊपर नीचे होने लगी।उनके दाँत ओंठ को चबा रहे थे।उनके मुह से " आआह आआह सीईई आआह आउच्च" जैसी कामनिय आवाजे निकल रही थी।
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कुछ देर धीरे धीरे करने के बाद उन्होंने मेरे हाथ अपने चुचो पे रख दिए और अपने ही हाथो से मेरे हाथो पर दबाव देके चुचे दबाने मसलने लगी।अभी उनके ऊपर नीचे होने की गति और आवाज भी बढ़ गयी थी।हम दोनो एक साथ ही अकड़ के झड़ गए।

दोपहर को चाची किसी सहेली के साथ बाहर चली गयी।मैंने दिनभर पढ़ाई की।रात को खाना खाने के बाद मैं जाकर बेडरूम में सो गया।आज दिनभर चुदाई और पढ़ाई से आज मुझे जल्दी नींद आ गयी।करीब रात 12 बजे मुझे आवाजे सुनाई दी जिससे मेरी नींद खुल गयी।

वो आवाजे चाची की थी वो चुत में उंगली कर रही थी और चुचे मसल रही थी।मैंने उनको पूछा:क्या हुआ?क्यो चिल्ला रहे हो?आपके चुत को क्या हुआ?

चाची:वो जो तुझे होता है हर दिन?

मैं:फिर उसके लिए क्या करना पड़ेगा?

चाची:वही जो मैं करती हु तेरे साथ?

मैं उनके चुत के पास गया और उनके चुत में जीभ लगाया और चाटने लगा।चाची उससे और उत्तेजित हो गयी।ओ मेरा मुह और अंदर डाल के दबाने लगी।करीब आधा घंटे तक उसकी चुत को चूसने के बाद भी उनका चुत रस नही निकल रहा था।तो उन्होंने मुझे उसमे लण्ड घुसाने बोला।

मैं:पर कॉन्डोम नही है अभी!?!?

चाची:अरे भाड़ में जाने दो कॉन्डम को अभी चुत की आग मिटानी जरूरी है।
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इतना बोल के उन्होंने मेरा लण्ड हाथ में लेके हिलाया उसे थूक से नहलाया और चुत पे टिका दिया।और मुझे धक्का देने बोली।मैंने आहिस्ता आगे पीछे होना चालू किया।कुछ देर बात "आआह आआह सीईई"पर टिकी रही बाद में चाची के कहने पर गति को बढ़ा दिया।
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अभी रूम में

"आआह चोद चोद और जोर से चोद भड़वे,पूरी ताकत से चुत मार,बड़ी आग है इस रंडी में,और आआह उहह जोर से"

की आवाज गूंज रही थी।चाची कुछ 15 20 मिनिट में झड़ गयी।और उसके कुछ पल बाद मैं भी झड़ने वाला था।जैसे ही मैं अकड़ गया चाची ने मुझे ऊपर बुलाया और लण्ड को अपने मुह में रख हिलाने लगी।
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मेरा सारा लण्ड का रस उसकी मुह में।उसने शरबत की तरह उसे गटक लिया।फिर जब मैं सोया तब मुझे चिपक कर गले लगा के सो गयी।

दूसरे दिन मैं उठा तो चाची किचन में थी।मैं बाथरूम जाके आया।जैसे ही बाहर आया चाची ने मेरे हाथ पैसे दिए और कहा "बाजू के गांव में चाचा आये है वहां से फिर शहर लौटना है उन्हें।उनको जाके दे आ।"मैं घर से निकला।गांव दूर था तो वापस लौटने तक शाम हो गयी।

रोज मैं चाची के साथ खाना खाता था पर आज ज्यादा थकान थी इसलिए मैं खाना खाके ऊपर चला गया ।पर आज दिन का पढ़ाई का कोटा पूरा भी करना था।तो मैं थोड़ा पढ़ने बैठा।उसमे ही मैं थक के सो गया।रात को मेरे लण्ड ने फिरसे आग झोंकना चालू किया।मेरी नींद टूट गयी थी।मुझे नींद आने के लिए लण्ड शांत होना जरूरी था।

मैं नीचे आया और अंधेरे में पलंग पर चढ़ के चाची के पीछे सो गया।और लन्ड को बाहर निकाल के गांड पे घिसने लगा।गांड का आकर बहोत बड़ा और गोल था।मुझे बहोत मजा आ रहा था।कुछ पल बाद सामने से गांड आगे पिछे करते हुए साथ मिलने लगी।मैंने बगल से हाथ डाल चुचो को दबाना चालू किया।आज चाची साड़ी में थी।और चुचे भी बड़े थे।मुझे आज बहुत मजा आ रहा था।

कुछ पल की बात मेरे लण्ड ने अपना रस छोड़ दिया।मैं दिनभर थका था तो आदत से वही पर सो गया।सुबह उठा तो देखा की जो मेरे साथ सोई है वो चाची जैसी नही थी।कोई और ही था।नीचे देखा तो लण्डरस का दाग वैसे का वैसा था।मैं थोड़ा डर सा गया।मैं झट से उठा और देखा तो चाची उस औरत के उस तरफ सोई थी।मतलब रातभर हम तीनो एक पलँग पे थे और मैं उस अनजान औरत के गांड पे अपना लण्ड रगड़ रहा था और जोश में चुचे भी दबा दिए।चद्दर की वजह से उनका मुह मुझे दिखाई नही दिया।

पर उसके अगले ही पल मुझे ये बात समझ आयी की मैंने इतना सब किया फिर भी ओ औरत चिल्लाई क्यो नही।नींद में होगी इसलिए नही चिल्लाई होगी पर उसने लण्ड घिसते हुए गांड भी हिलाई थी।मेरा सुबह सुबह सिर चकराने लगा।मैं झट से ऊपर की मंजिल पे जाके सो गया क्योकि अभी 6 ही बजे थे।

सुबह 10 बजे मैं नीचे आया और फ्रेश होकर बाथरूम से बाहर आया और चाची से नाश्ता मांगा और ऊपर चला गया।कुछ देर बाद ऊपरी कमरे की टकटक हुई।पर मैं पढ़ने में इतना गढ़ गया था की मैं कुछ जवाब ही नही दिया।

वो अंदर आई,आके सामने नाश्ता रखा,मैंने सर ऊपर उठा कर देखा तो 55 साल पार 36'36'38 का यौवन सावली आधे सफेद आधे बालो वाली एक मदमस्त औरत मुझे देख मुस्कराते हुए खड़ी थी।

मेरे मुह से यकायक निकल गया:अरे अम्मा जी नमस्ते आप कब आई।

जी हा!!चाची की मा थी ओ। 5 साल पहले देखा था उनको।बड़ी खुले विचारों की औरत।थोड़ी अजीब भी थी।चाची के पिताजी के देहांत के वक्त आखरी मुलाकात हुई थी हमारी।पर तब मैं छोटा था।करीब 13 साल का।पति के मरने के बाद 1 हप्ते में ही वो हसने खिलखिलाने लगी थी।उनके गांव के लोग उसे पागल औरत समझते थे।क्योकि हो हद से ज्यादा खुले विचारो की थी।

जब मैं छोटा था तब से जब भी आती थी तो मुझे वही खाना खिलाना नहलाना सब करती थी।क्योकी उनकी बेटी को कोई संतान नही थी इसलिए।

अम्मा:अरे अभी ध्यान गया तेरा तेरी अम्मा पर,कबसे आई हु मैं।

मैं:अरे अम्मा 12 वी का वर्ष है।पढ़ाई कर रहा था।

अम्मा:मालूम है तेरी क्या पढ़ाई चल रही है।

मैं:मतलब?!? आपको क्या मालूम है?मैं कुछ समझा नही।

अम्मा:कल रात को जो टेस्ट दे रहा था एग्जाम की वही तेरे पढ़ाई की प्रोग्रेस पता चल गयी।
और इतना कहके उन्होंने आके मेरे गाल को खींच मेरे हाथ की खाली प्लेट लेके वहा से चली गयी।
मैं थोड़ा सहम से गया।क्योकि चाची के बजाय उनकी मा के साथ मैने हस्थमैथुन किया था।कहि चाची बुरा न मानले।इसलिए डर सा लग रहा था।

दोपहर को खाना खाने के बाद मैं सो गया क्योकि रात को देर से सोया और जल्दी भी नींद खुली थी और पढ़ाई से सबको नींद आती है।शाम को 6 बजे करीब मेरी नींद खुली।सोते वक्त रात का सारा मामला मेरे दिमाग में घूम रहा था।उसकी वजह से लण्ड तन चुका था।टाइट शॉर्ट से बहोत दर्द हो रहा था,इसलिए शॉर्ट उतार कर बनियान अंडरवेयर में नीचे आ गया।अंडरवेयर में खड़े लण्ड का आकर साफ दिखाई दे रहा था।
नीचे आके चाची को पुकारने लगा तो चाची ने किचन से आवाज दी की मैं यहाँ हु।मैं किचन में गया तो।चाची आटा बून्द रही थी और अम्मा बैठ के बाते कर रही थी।
चाची:क्यो बेटा अम्मा से मिला की नही?

अम्मा:हा तेरा लाडला मिला मुझे,बहुत अच्छे से।

मैं:चाची चाची सुनो तो।

चाची:हा हा बोल,क्यो चिल्ला रहा है।

मैं अम्मा के सामने वो बात बोलने से शर्मा कम रहा था डर ज्यादा रहा था।मैंने आंखे नीचे करली।मेरे आंखों को देखते हुए दोनो ने मेरे अंडरवेयर को देखा जो फुली हुई रोटी की तरह बन चुका था।और दोनो खिलखिलाकर हस पड़ी।
मैं दोनो को सिर्फ देखता ही रह गया।

चाची:अच्छा ये बात है,पर अभी मैं काम कर रही हु,मैं कैसे हेल्प करू?

मेरा मुह एकदम से मायूस होकर नीचे हो गया।मैं वह से जाने वाला था तभी अम्मा बोली:

"तू नही तो मैं हु न,मैं मदत कर दूंगी मेरे पोते की।आजा मेरे लल्ला।"
मैं थोड़ा हिचकिचाने लगा।पर लन्ड को शांत भी करना था तो मैं उनके पास गया।अभी मैं दोनो के बीच खड़ा था।चाची मेरे तरफ पीठ करके ओटे वे आटा बून्द रही थी।मैं उनके पीछे था और बाजू डायनिंग पर अम्मा ।मैं पास गया वैसे ही अम्मा ने अंडरवेयर के ऊपर से ही लण्ड को दबाया।मेरे मुह से आआह निकल गयी।मेरे सिसकी से चाची ने मुड़के देखा और हस दी।
अभी अम्मा ने अंडरवेअर नीचे कर लण्ड को बाहर निकाला
अम्मा:हाये दैया बड़ा तगड़ा लण्ड है रे तेरा।
अभी तक लण्ड शब्द मैंने किसी औरत के मुह से नही सुना था।चाची लुल्ला ही बोलती थी।

चाची:फिर क्या अम्मा,बेटा किसका है।

अम्मा लण्ड को सहलाये:हा वो तो है,एकदम दमदार है।तेरे पिताजी से भी तगड़ा।

चाची:मा क्या आप भी,उसके सामने अइसी बाते कर रही हो।

अम्मा:तो,,तो क्या हुआ,जो है वो है।तेरे पति का इतना तगड़ा है क्या?मेरे पति का तो नही है।

चाची का चेहरा लाल था वो अम्मा को चुप रहने का इशारा करती है।पर अम्मा उसे टोकती है:बोल न,जो है वो है।

चाची धीमे से नही बोलती है।अम्मा हस्ते हुए लण्ड को ऊपर से नीचे हिलाना चालू करती है।मुझे मजा बहोत आ रहा था पर दर्द भी उतना ही था।

अम्मा लन्ड को हिलाते हिलाते मेरे शरीर का जायजा लेने लगी।मेरे छाती बाजुओं पे हाथ घूमाने लगी।मैं भी उनके चुचो को घूरने लगा।उनका पल्लू चुचो से हटा हुआ था।उनकी नजर जब मेरे आंखों के दिशा में गयी तो उन्होंने भी मेरी नजर की हवस नोटिस कर ली।मुझे मालूम पड़ा की अम्मा में मेरी नजर ताड ली तो मैने भी नजर हटा दी और इधर उधर देखने लगा।पर मुझे नजर चुराते देख अम्मा ने लण्ड को हल्का सा दबाया।मेरे मुह से सिसकी/चींख निकलने ही वाली थी की अम्मा ने मेरे मुह पे हाथ रखा जिससे मेरी आवाज चाची तक न जाए।

अम्मा ने आंखों से कहा:चुचे चाहिए क्या?"

मैंने भी शैतानी मुस्कराहट में हा बोल दिया।वो भी मादक हस दी।उसने ब्लाउज खोल दिया।ब्रा तो वो पहनती नही ।

अभी गोल मटोल लटके हुए चुचे मेरे सामने थे।मैंने हल्के से हाथ बढ़ाये और उनके चुचे सहलाने लगा।हाथ घुमाते घुमाते उनके निप्पल को मसल दिया तो अम्मा के मुह से सिसकी निकलते निकलते रह गयी।उन्होंने दांत ओंठ दबा चबा के आनंद लूटना चालू रखा।ओ लन्ड को सिर्फ सहला रही थी।अभी लन्ड पूरा तन के आगबबूला हो गया था।अम्मा ने नीचे बैठ के उसको अपने मुह में लेके उसको चूसना चालू कर देती है।

अम्मा अपना पल्लू घुटनो से ऊपर करके चुत को मसलने लगी।मैं खड़ा था तो मुझे चुत नही दिखाई दे रही थी।

मेरा लन्ड अभी झड़ने को था।मैंने चाची को वैसे इशारे से बताया पर वो सिर्फ हसी।मतलब उनको मेरा लण्ड रस पीना था।ओ लण्ड के सुपड़े के ऊपर जीभ फेरने लगी।जिससे मेरे लण्ड का तनाव और बढ़ गया।और फुआरे उड़ाते हुए मेरे वीर्य की धारा अम्मा के मुह पे गिर गई।

संजोग अइसा की उसी वक्त चाची भी पीछे मुड़ी।उनके सामने गिला 5 इंच का लण्ड लटकाए मैं और मुह पे सफेद वीर्य से रंगा मुह लेके घुटनो पे बैठी अम्मा थी।

मुझे उस वक्त लगा की अब मेरी कोई खैर नही।चाची जरूर नाराज होंगी।पर यहाँ तो उल्टा हो रहा था।वीर्य से रंगा मुह लेके अम्मा बाथरूम जाने वाली थी की चाची ने अम्मा का हाथ पकड़ा और उन्हें करीब खींच के मेरा गिराया मुह पर का रस चाटने लगी।उन्होंने पूरा रस साफ कर दिया।उस चाट चटाई करते हुए,दोनो लेस्बियन हो गए।एक दूसरे के होठो को मिलके चूसने लगे।

क्या मादक नजारा था।दोनो उसमे इतना मन्त्र मुग्ध हो गयी की आवेश में पूरे कपड़े निकाल दिए।दोनो अभी बेड रूम में चली गयी।मैं तो सिर्फ खड़े खड़े देखता रहा।जो हो रहा था उसपे मुझे भरोसा नही हो रहा था।मुझे एकपल के लिए वो सपना लगा।

इसी सोच में पड़ा था तभी मुझे कुछ जलने की बदबू आयी।देखा तो रोटी जल रही थी।मैंने गैस बंद किया।किचन ठीक करके बेडरूम में घुस गया।अभी भी दोनो एक दूसरे से लिप्त थी।चाची अम्मा के चुचे चूस रही थी और अम्मा चुत में उँगली डाले चुत सहला रही थी।थोड़ी देर बाद नजारा बदला अभी चाची के चुचे अम्मा के मुह में और चाची अपनी चुत को सहला रही थी।मैं तो समझ गया की बेटी पूरी अम्मा पे गयी है।पूरी नशा है इन दोनो की रगों में।पर अभी मेरा लण्ड भी प्यासा हो रहा था।तो मैं भी पलंग पर चढ़ के अम्मा को जॉइन किया।

मैं और अम्मा एक एक चुचे को चूसने लगे।मैंने चाची का हाथ हटाया और मैं खुद चाची के चुत में उंगली अंदर बाहर करने लगा ।चाची मेरे बाल को खिंच ताने सिसक रही थी।उन्होंने हम दोनो के सिरों को अपने चुचो में दबाके रखा था।

बीच में ही उन्होंने मेरे सर को पकड़ा और अपने मुह के पास लेके अपने ओंठ मेरे ओंठ से मिला लिए।मेरे जिंदगी का पहला कीस(चुम्मा)।वो मेरे ओंठो को चूस रही थी।लाल कोमल पंखुड़िया रसमलाई की जैसा स्वाद था उनमें।

उन दोनो ने मुझे पलँग पर लिटा दिया।अभी अम्मा ने मेरे लण्ड को हिलाया और थोड़ी थूक अपनी झांटो वाली चुत पर डाल के मेरे लण्ड पर चुत लगाके आहिस्ता ऊपर नीचे होने लगी।वो बड़े मजे में अपनी चुत चुदवा रही थी।यह चाची भी गरम थी वो दोनो पैर फैला के मेरे मुह पे बैठ गयी और चुत को मुह में लगा दिया।अभी एक चुत मुह में और एक लण्ड के ऊपर थी।चाची मुह से चुत चोद रही थी और अम्मा लण्ड से।अम्मा उम्र के हिसाब से जल्दी झड़ गयी और।मेरा बाजू में सो गयी।

जैसे ही अम्मा लन्ड के ऊपर से हटी चाची ने वहां कब्जा कर लिया।वो चुत को चुदवाने लगी।मैं और मेरा बेचारा लण्ड सिर्फ चुदाई मशीन बने थे।चाची का भी ज्यादा देर चल न सका कुछ पल में वो भी ढेर हो गयी।1 से 2 घंटा सोने के बाद हम लोगो ने नंगा ही खाना खाया ।

बाद में मुझे मालूम पड़ा की अम्मा अबसे यही रहने वाली थी।जबतक चाचा नही रहते थे तबतक मैं अम्मा चाची तीनो एक साथ चुदाई का आनंद लेते थे।और जब चाचा रहते थे तब अम्मा मुझे मजा देती थी।उसमे मेरी एक गलती भी हुई की चाची पेट से हो गयी।चाचा संतान होने के खुशी में कुछ शक नही किये।उसके बाद मेरे एग्जाम भी स्टार्ट हुए तो मेरी चुदाई तो क्या चुसाई भी नही होती थी।एग्जाम में थकावट न आ जाए इसका डर था चाची को।अम्मा हमेशा तैयार रहती थी पर चाची ने उनको भी बोल दिया की एग्जाम है इससे मुझे दूर रखे।

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10 hours ago,
#3
RE: Maa Sex Kahani माँ का मायका
चाची के प्रेग्नेंसी का पहिला महीना था।जबसे ये खबर चाचा को लगी तबसे चाचा का रोज घर आना जाना चल रहा था।कई बार तो वो घर पे ही रुक जाता एक दो दिन के लिए।चाचा कम पढ़ा लिखा था।तो डॉक्टर वैगरा उसको समझ नही आता था।जब भी डॉक्टर आते मैं ही देखता था।बच्चा होने के खयाल से ही चाचा उछल रहा था।उसकी खुशी देख मैं भी बहोत खुश था।बचपन से जिसने मुझे अपने बेटे जैसा संभाला,जिसने बहुत कुछ किया मेरे लिए उसके लिए कुछ कर सका उसका आनंद था मेरे मन को।

चाची की प्रेग्नेंसी की बात सुन के उनकी सहेलियां घर के पड़ोसी सब अभिनदंन करने लगे।घर में लोगो की चलचलाहट बढ़ रही थी।तो दिन में मैं चाची के पास और अम्मा दोनो से दूर रहता था।क्योकि दिनभर के मेहमानों की बहोत तादात थी।

चाची दाँट से अम्मा भी मुझे कुछ करने नही देती थी। एग्जाम खत्म होने को था 4 दिन बाद आखरी विषय का एग्जाम था।विषय भी बहोत बडा नही था तो पढ़ाई भी ज्यादा नही थी।चाचा भी घर में था आज।पढ़ाई से फुर्सत मिलती तो दिनभर सिर्फ चाचा के साथ ही रहता था।पहिले दो दिन अयसेही निकल गए।

तीसरे दिन दोपहर खाना होने के बाद चाचा ने मुझे उपर से नीचे बुलाया।

चाचा: वीरू मैंने पहाड़ी वाली देवी से मन्नत मांगी थी तो चाची को वहाँ लेके जाना है।शाम तक आ जाएंगे।

मैंने कहा:ठीक है चाचा,आराम से जाना,खयाल रखना।

चाची भी पीछे पीछे निकलते हुए धीमे से बोली
"मैं नही हु इसका मतलब मजे नही करना,पढ़ाई पे ध्यान दो,शर्मिला ने तेरी जिम्मेदारी मुझपर छोड़ी थी,और मैं उसमे असफल नही होना चाहती।अभी चलती हु,पर ध्यान रखना सिर्फ पढ़ाई।एग्जाम होने तक और कुछ नही"

पीछे अम्मा खड़ी थी उनको भी"माँ तुम भी समझ गयी न।दूसरे की अमानत है।कुछ हो गया तो तुम जिम्मेदार।"

चाचा:अरि वो बहोत दूर जाना है,घर की बातें आने के बाद कर लेना ।

चाचा चाची निकल जाते है।उनके जाने तक मैं दरवाजे पर खड़ा था।जब मैं अंदर गया रो अम्मा बर्तन साफ कर रही थी बाथरूम में।मुझे शैतानी सूझी और मैं उनके पास गया।वो नीचे छोटे टेबल पे बैठ कर बर्तन साफ कर रही थी।मैं उनके सामने जाके लण्ड निकाल के सहलाने लगा।पर अम्मा इगनोर कर रही थी।काफी देर सहलाने के बाद लण्ड तन गया।पर अम्मा ने कुछ रिएक्ट नही किया।

मैं लण्ड लेके उनके पीछे गया और थोड़ा घुटना मोड़ के लण्ड को उनके पीठ पर घिसाने की कोशिश की पर वो और नीचे झुकी जिससे मैं घिस न पाउ।

अम्मा:देख लल्ला अगर तुम्हारी चाची को मालूम पड़ गया तो एकबार तुझे छोड़ देगी पर मेरी खैर नही।तू परेशान मत के।जा पढ़ाई कर।

मैं:पर अम्मा?!!!!?

अम्मा:मैंने कहा ना जा पढ़ाई कर।जा..।

मैं मायूस होकर वहां से चला गया।पर लण्ड को शांत करना था।तो चाची के अलमारी से चुदाई कहानिया वाली किताब ली और ऊपर चला गया।कहानी और फ़ोटो को देख मैंने हिलाया और लण्ड को शांत कराया।फिर किताब पलँग के निचे रखके सो गया।

करीब 4 बजे मुझे अम्मा ने जगाया और चाय दिया।मैंने खिसक के चाय का कप लिया।और चाय पीने लगा।उन्होंने सर पे हाथ सहलाना चालू किया प्यार से तो मैं वहां से उठकर खिड़की के पास गया।अम्मा मेरे इग्नोरेंस से चौक सी गयी।वो कुछ बोल पाती उससे पहले मैंने उनके हाथ में कप थमाया।
उनको कहा:जरा बाहर घूम के आता हु बहोत बोअरिंग फील हो रहा है।
अम्मा कुछ बोली नही सिर्फ देखती रही।

शाम को जब घर आया तो चाचा चाची आ गए थे।उन्होंने जो प्रशाद लाया वो हमने खा लिया।हम अभी बातचीत में लगे थे।जब भी अम्मा मुझसे आये मुझसे जुड़े किसी बात को छेड़ती तो मैं या तो टोक देता याफिर वो बात को किस और बात में मोड़ देता।चाची को लगता की मैं अम्मा की खिंचाई कर रहा हु पर अम्मा को उस बात से बहोत परेशानी हो रही थी।वो मायूस चेहरा करके मेरे पास देखती थी।मुझे गुस्सा तो बहुत आया था पर उनकी मायूस चेहरे से पिघल न जाऊ इसलिए उनकी तरफ नजर भी नही की मैंने।

रात को आज जल्दी खाना खा लिया था।क्योकि चाचा चाची दोनो थके थे।अम्मा किचन का काम खत्म कर रही थी।मैं उपर जाके अपनी जगह सो गया।मुझे मालूम था।आज चाचा है तो वो यही आएगी सोने।पर मैं बहोत सख्त होने की कोशिश में था।

करीब एक घंटा गुजरा।तबतक मुझे नींद आ चुकी थी।अम्मा मेरे बाजू में आके सो गयी।ऊपरी पलंग बहोत बड़ा था करीब 3 लोग सो सकते थे।उनके आहट से मैं जग गया।पर उनको लग रहा था की मैं अब भी सोया हु।

कुछ वक्त निकल जाने के बाद मैं उठा और बाथरूम जाकर आया।और सो गया।नींद आने ही वाली थी की तभी पीछे से मेरे लण्ड पे हाथ का स्पर्श हुआ।

मैं:अम्मा सोने दो मुझे,हटो।

अम्मा: अरे मेरा लल्ला अभी भी गुस्सा है अपनी अम्मा से।

मैं:मैं बोला तुम सो जाओ नही तो चाची डाँटेगी,सही बोला न।
अम्मा हस पड़ी:अच्छा मेरी बात मेरे पे पलटी दे रहे हो।

अम्मा ने मेरे ऊपर की चद्दर हटा दी ।और मेरे सामने ही कपड़े उतारने लगी।मुझे उन्हें देखने की बहोत इच्छा हो रही थी पर गुस्से वाला नाटक मुझे रोक रहा था।

अभी अम्मा पूरी नंगी थी।मैं बनियान और अंडरवेयर मे था।
वो मेरे पीछे आके चिपक के सो गयी।उन्होंने मुझे कस के पकड़ लिया।मैने छूटने की नाकाम कोशिश की।पर मेरे अंदर का काम देव उनके स्पर्श से उत्तेजित हो गया था।

उन्होंने मेरी अंडरवेअर खिसका दी और पैरों से भी नीचे खिसका दी।अभी मेरा लण्ड पूरा आझाद था।अम्मा के हाथ के स्पर्श से लण्ड झूम उठा था।

मैं उनकी तरफ घुमा।धीमे रोशनी में आज मुझे अम्मा एक जवान अप्सरा लग रही थी,लगता है कामुकता की नजर से मैं उनको देख रहा था।आगे क्या करू ये सोचने से पहलेही अम्मा ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया।उनके चुचे मेरे छाती पर दब गए थे।मेरा लण्ड उनके झांटेदार नही बिना झांट वाले रासीलि चुत पर घिस रहा था।उनकी कटी हुई झांटे मेरे लण्ड को चुभ रही थी।बड़ा मजा आ रहा था।हमारी गरम सांसे एक दूसरे को और कामुक बना रही थी।

उन्होंने मेरे ओंठो को अपने ओंठो से मिलाया और चूसने लगी। उनके ओंठो में चाची से भी ज्यादा मिठास थी।ओ बीच में मेरे जीभ को भी मुह में लेके चूसती थी।मैंने उनके चुचो को भी अपने पंजो की जखड में ले लिया।उनके निप्पल्स कड़क बन गए थे।

हमारा रसपान खत्म होते ही मैंने चुचो को बारी बारी चूसना चालू किया।उनके निप्पल्स बड़े मादक थे ।उनके निप्पल्स को चूसने में और ही मजा था।थोड़ा नीचे उनकी मुनिया थी जिसकी आज साफ सफाई हुई थी।गीली होने से और ही चमक रही थी।कामोत्तेजना से उनकी चुत की लब्ज थिरक रहे थे ।चूत रस की सुगन्ध बहोत ही अछि थी।मैंने जीभ उनकी गीली चुत में घुसाई वैसे ही उन्होंने मेरा सर अम्मा ने चुत पर दबाया और उनके मुह से सुखद सिसकारी निकल गयी।उनके चुत में जीभ घूम रही थी।उनकी रासीलि चुत का खट्टा मीठा स्वाद बहोत आनंद दे रहा था।

अम्मा:लल्ला चल बहोत हो गया मेरे झड़ने से पहले चुत के होल में तेरा लन्ड घुसा और चोद दे तेरी अम्मा को।जल्दी कर।अभी आग सहन नही होती।

मैंने अपने लण्ड को हिलाया।चुत पे थूक डालके चुत के दाने को सहलाया।और लन्ड छेद पे टीका के अंदर घुसेड़ा और आगे पीछे होने लगा। नीचे झुक कर उनके चुचे चाट रहा था।जब मुझे लगा की लण्ड सही से घुसा और सेट हो गया तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।अम्मा के मुह से सिसकारी निकल रही थी पर उनकी इच्छा चिल्लाने की हो रही थी पर उससे गड़बड़ होगी इसलिए वो खुदको संभाल रही थी।उनकी कशमकश देख मैंने उनके ओंठो को मेरे ओंठो के कब्जे में कर दिया।

चुत के लगने वाले धक्कों से चुत से पच पच की आवाजे आ रही थी मैं बड़े जोर से धक्के लगाए जा रहा था।पक्छ पच्छ की आवाजे भी बढ़ने लगी और अम्मा का शरीर ढीला पड़ गया।

पर मेरा लण्ड अभी भी कामुकता की आग में था।अम्मा ने मेरी परेशानी को समझा और मुझे उपर बुला के लण्ड को मुह में लिया।और मेरी गांड को पकड़ के आगे पीछे करने लगी।इस नए प्रयोग से मैं भी उत्साहित था।मुझे भी मजा आ रहा था।पूरा लण्ड अम्मा के मुह में आगे पीछे हो रहा था।जैसे ही मुझे लगा की मैं झड़ने वाला हु मैन मुह चुदने का स्पीड बढ़ा दिया।मेरा सारा माल मुह में छोड़ दिया।उन्होंने भी उसे मजे से गटका,फिर पूरा लन्ड को चूस चाट के साफ किया ।मैंने अंडरवेअर पहना और सो गया।

दुसरे दिन पुरा पढाई मे निकाल दिया।अगले दिन एग्जाम का आखरी दिन था।पेपर भी अच्छा निकल गया।शाम को घर आया तो चाचा कही बाहर जा रहे थे।मुझे देख उन्होंने मुझे पास बुलाया।

चाचा:अरे वीरू कैसा गया एग्जाम?

मैं: बहोत बढ़िया।

चाचा:फिर कल तो तू जाएगा यहासे,बस चाचा को भूल न जाना।

मैं:नही चाचा अइसे क्यो बोल रहे हो,जिंदगीभर के लिए जा रहा हु,बीच बीच में आता रहूंगा।

चाचा:चलो ठीक है।अभी मेरा कुछ काम है पड़ोस की गांव में।कल सुबह तक तैयार रहना,हम निकल जाएंगे तुम्हारे नाना के यह पे।ठीक है?

मैं:अच्छा ठीक है,जैसा आप कहे।

चाचा निकल जाने के बाद मैं चाची को पुकारने लगा,क्योकि भूख बहुत लगी थी।पर चाची का कुछ आवाज नही आ रहा था।मैंने अम्मा को भी पुकारा,उनका भी कोई ठिकाना नही था।

मैं किचन में घुस गया तो देखा की मा बेटी की जोड़ी किचन में बैठी है।

मैं:क्या चाची आप दोनो यहां हो फिर भी आवाज नही दे रही हो।

तभी दोनो जो मेरे तरफ पीठ करके खड़ी थी।मेरे सामने मूड गयी।दोनो के आंखों से आँसू निकल रहे थे।

मैं:क्या आप दोनो भी गंगा जमुना बहा रहे हो।क्या हुआ?

तो चाची ने मुझे अपने पास बुलाया और अपने बाहों में भर लिया।उनके आंसू और शरीर की गर्मी मुझे बेचैन कर रही थी।

मैं:अच्छा,कल मैं जा रहा हु इसलिए रो रही हो...क्या आप भी हमेशा के लिए थोड़ी जा रहा हु,जो अइसे रो रही हो।

चाची:तुम्हे बोलने में क्या जाता है,तुम्हारी बचपन से आदत हो गयी है।अभी घर सुना सुना रह जाएगा।

मैं:अरे मेरा छोटा भाई उस सुनसुनाहट को भर देगा।तुम रो मत।

मैंने उनकी आंखे पोंछी।अम्मा को भी शांत कराया।

मैं:क्या बनाया खाने में बहोत भूख लगी है।

मैंने घर में मिठाई लायी थी वो खाई और ऊपर जाके अपना सारा समान लगा दिया।शाम को मा का कॉल आया।उनसे ही बात करते करते समय निकल गया।

शाम को खाना खाने जब नीचे आया तो घर के सारे दरवाजे खिड़कियां बंद थी।हॉल में भी धीमी रोशनी वाला दिया चालू था।किचन में भी कोई नही था।और बेडरूम में पूरा अंधेरा।मुझे बहुत अजीब फील हुआ।किचन में तो वो लोग नही थे।मैं सोचने लगा खाने से पहले ये सो गए क्या!!या बाहर गए है!?!

मैं उत्सुकता में बेडरूम की लाइट ऑन कर दी।अंदर देखा तो अम्मा चाची की चुत चाट रही थी।लाइट ऑन होते ही दोनो सोधी हो गयी।उनके हिसाब से उनको लगा की चाचा न आये हो।पर मुझे खड़ा देख उनके जान में जान आ गई।

मैं भी उनके खेल में शामिल हुआ।चाची की चुत अम्मा चाट रही थी और अम्मा की चुत मैं और मेरा लण्ड चाची के मुह में था।बड़ा ही आनंद था उस चुसमचूस में।

आज चाची को चोद तो नही सकता था पर चुत चूसना और लण्ड को चुसवा सकता था।

हम तीनो झड़ गए थे।चाची ने मेरे लटके लण्ड को फिरसे मुह में लिया और चूसने लगी।सासों की गर्माहट मुझे साफ महसूस हो रही थी मेरे लण्ड पे।जैसे ही मेरा लण्ड खड़ा हुआ।अम्मा घोड़ी बन गयी।और चाची ने मेरा लंड उनके चुत पे लगा दिया।मैं पीछे से धक्का देना शुरू किया।चाची ने मेरे ओंठो पे कब्जा कर लिया।मैंने उनके चुचे मसलना चालू किया।अम्मा की उम्र हो गयी थी तो वो ज्यादा देर टिक नही पाती थी तो वो जल्दी ही झड़ गयी।

पर अभी मेरा लन्ड को शांत करना बाकी था तो चाची ने मेरा लण्ड चूसना चालू किया।मैं भी थोड़ी देर में झड़ गया।

हमने खाना खा लिया।अम्मा ने सारा काम निपटा लिया।तबतक मैं और चाची बेडरूम में थे।चाची मेरे बहो में थी।हम दोनो एक दूसरे को लिपटे हुए थे।

चाची:वीरू तू अभी मुझे छोड़ के जाएगा।

मैं:क्या चाची फिरसे चालू हो गयी तुम।तुमने मा को क्यो भेज दिया फिर।नही तो मैं यही रह जाता।

चाची:अरे वो चाचा ने किया ,मेरा मन नही था।

अम्मा भी मेरे पास आके नंगी होकर बैठ जाती है।

अम्मा मेरे लण्ड को सहलाते हुए:मुझे इसकी बहोत याद आएगी।बहोत मजा दिया इसने मुझे कम दिनों में।

मैंने भी उनकी चुत में उंगली घुसा के बोला: इसको भी तो भूल न पाऊंगा

तभी मेरा लन्ड खड़े होने लगता है।

मैं:देख मेरा लण्ड भी उससे सहमत है।

और इस बात पर हम हस दिए।

चाची ने नीचे जाके मेरे लण्ड के टोपे(सुपडे) को जीभ से चाटना चालू किया।मुझे शरीर में सिहरन सी हो रही थी।अम्मा ने झट से मेरे ओंठ चुम लिए।उन्होंने ओंठो को चूसना चालू किया।चाची पूरा लन्ड चूस रही थी।अब लण्ड भी लोहा बन गया था।
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10 hours ago,
#4
RE: Maa Sex Kahani माँ का मायका
चाची को मैं चोद नही सकता था तो अम्मा मेरे लण्ड पर कब्जा कर ली।वो धीमे से जाके उसपर बैठ गयी और चूतड़ उठा उठा के चुदने लगी।चाची भी गर्म हो गयी तो।उसने चुत को मेरे मुह में लगा दिया।उनके चुत से लाव्हा रस बाहर आ रहा था।मैं उनके चुत के लब्जो को चूसने लगा,चाटने लगा।धिमेसे उंगली डाल के जीभ को जितना अंदर जाए उतना घुसेड़ने लगा।चाची भी धीमे से आगे पीछे होते हुए जीभ से चुत चुदवाने लगी।

अम्मा हमेशा की तरह झड़ कर लन्ड पे ही बैठ गयी।उसके कुछ पल बाद मेरे मुह में चुत रस की नदी बह गयी।चाची भी अभी झड़ गयी थी। वो बाजू हो कर सो गयी ।मैने अम्मा को बाजू किया और अपना लन्ड उनके मुह में दाल दिया।और गांड हिला के उनका मुह चोदने लगा।और सारा पानी उनके मुह में छोड़ दिया।पूरी रात मैं उन दो नंगी परियो के साथ रासलीला करता रहा।आखिरी दिन था तो पूरे मजे लूट लिए।

सुबह को जब उठा तो 9 बज गए थे।मैं बाथरूम जेक फ्रेश होकर नहाकर तैयार हुआ औऱ नाश्ता करके चाचा की राह देख रहा था।जैसे ही चाचा आया मैं नाना के घर निकल गया।मेरे जाने से चाची अम्मा बहोत रो रही थी।

Season 1 over.....
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10 hours ago,
#5
RE: Maa Sex Kahani माँ का मायका
Season २
◆ माँ का मायका◆
(incest,group, suspens)
(Episode-1)
चाचा और मैं देर रात नाना के यहाँ पहुंचे।नाना शहरी इलाके में रहते थे ।बड़े लोगो की कॉलोनी।सबके बंगले थे।जन्म के बाद 18 साल बाद पहली बार यहाँ आया था।मा और एक और औरत दरवाजे पे खड़े थे।घर की नौकरानी होगी शायद।हम गरीब घर से आते थे तो चाचा को वह रुकना सही नही लगा।मा ने चाचा को रोकने की बहोत कोशिश की पर चाचा नही रुके।वो अपने कंपनी के दोस्त के पास चले गए।
नौकरानी अम्मा(नौ.अम्मा): दीदी तुम्हारा बेटा तो बडा सुंदर है,पूरा तुम पे गया है।

मा:फिर,है ही मेरा बेटा।

दोनो हँसे और मुझे लेके अंदर चले गए।

बंगला काफी बड़ा था।दो मंजिला रहेगा।घर में घुसते है दाएं हांथ को भगवान का मंदिर उसके बाजू में किचन।बीच में सीढ़िया ऊपर जाने के लिए।दरवाजे से बाए हांथ एक छोटा रूम(स्टोर रूम) फिर नाना जी का कमरा फिर मा का कमरा ।ऊपरी मंजील पर दो मामा थे मेरे।उनका कमरा दाएं ओर बड़े मामा की बेटी का और छोटे मामा के बेटे का कमरा बाए ओर।उसमे और एक कमरा बनाया गया था ,लगता है मेरे लिए था।

काफी देर हो गयी तो मा ने मुझे कमरे तक छोड़ा,और वो अपने कमरे में चली गयी।कमरा अच्छा खासा सजाया हुआ था जैसे फिल्मों में होता है।यहां खुद की अलमारी खुद का बाथरूम और बेड भी।मैंने ज्यादा समान नही लाया था।बैग को अलमारी की बाजू में रखा और बाथरूम चला गया।

बाथरूम से फ्रेश होकर जैसे ही बाहर निकलने वाला था मुझे वो वाली आवाजे सुनाई दी।

"आआह आआह रवि और जोर लगा आआह"

"हा मेरी जान लेले और लेले आआह और चाहिए,आज लुटले कल से मैं टूर पे जाऊंगा तो फिर जलती रहेगी।"

"अरे यार तुम भी अइसा ना करो हर 2 हप्ते में टूर,मेरी हालत बहोत खराब होती है,मत जाओ न।"

अभी मुझे मालूम नही पड़ रहा था की आवाज नीचे की कमरे से है बाजू के ।बाजू के है तो दाएं या बाए।क्योकि मैं मामा और उनके बेटा बेटी के रूम के बीच के कमरे में था।तो वो मामा मामी या भैया और कोई भी हो सकता है।

उनकी आवाज से मेरा लण्ड खड़ा हो गया था।थक गया था तो हिलाने के लिए मन नही किया।और मैं वैसे ही जाके सो गया।

सुबह मेरी नींद खुली।पर मैं नींद खुलने के बाद भी वैसे ही पड़ा रहता था बेड में,बचपन की आदत।तभी कोई मेरे कमरे में आया।पहले क्नॉक किया पर मैंने कोई जवाब नही दिया।

वो अंदर आयी।हा,वो औरत थी।वही जो रात को मा के साथ थी।उसके हाथ में झाडू पोंछा था।वो आयी मेरे तरफ देखती रही फिर अपना काम करने लगी।वो बार बार मेरे तरफ आंखे घुमाके देख रही थी।बीच में अजीब से मुह बनाके हस रही थी।

उसकी उम्र करीब 45 साल शरीर पतला था।पर गांड भरी हुई थी।जैसे रोज किसीसे चुदती हो।चुचे भी काफी हद तक थे,पर इतने बड़े भी नही थे।सावला रंग,बीच बीच में काले बाल।

वो अपना काम खत्म करके चली गयी।वो जाने के बाद मैं उठा तो मुझे थोड़ा अजीब से फील हुआ।शरीर पूरा अकड़ गया अइसे लग रहा था।पर जब ध्यान दिया तो मालूम पड़ा की शॉर्ट में लन्ड ने तंबू बनाया है।अभी मुझे समझ आया की वो क्यों हस रही थी।

मैं बाथरूम गया।फ्रेश होक बाहर आया तो मा खड़ी थी।

मा:आ गया मेरा लाल,कैसा है?एग्जाम सही से गयी न?बड़ी दीदी को तकलीफ तो नही दी?

मैं:मा'' मा ''मा'' रुको,रुको।सांस तो लेने दो।क्या आते ही सवाल पूछने लग गयी।सब ठीक है।एग्जाम भी सही गयी।चाची पेट से है ।पहिला महीना है।और अम्मा भी आयी है ओअभि वही रहेगी।बस की और जानकारी चाहिए।

मा:क्या बड़ी दीदी पेट से!!!ईश्वर की लीला अपरंपार।

मा ने आगे आकर मुझे गले लगा लिया।वैसे हर बार लगाती है।पर इस बार मुझे उनके बारे में मा की गोद वाली फीलिंग नही आयी।उनके स्पर्श में जो गर्माहट थी उससे मेरे तन बदन में आग सी जल गयी।कुछ गलत से लगा इसलिए मैं हट के बाजू हो गया।

मा:चल नाश्ते का समय हो गया।सब आ गए होंगे।तुम भी आओ।

मैं:चलो तुम मैं कपड़े पहनके आता हु।

मा के जाने के बाद मैंने कपड़े बदले।और नीचे आ सीढ़ियों से उतरने लगा।

मुझे सब लोग ताक रहे थे।मुझे Uncomfortable सा फील होने लगा।नाना से पापा के देहांत के वक्त मुलाकात हुई थी।पर बाकी सब नए थे।मैं अंदर ही अंदर डर से गया था।

मैं खाने के मेज तक पहुंचते ही मुझे नाना ने मुझे अपने पास बुलाया:"आओ विराज यहां आ जाओ!!!"

नाना सारे घर वालो से:"ये है विराज अपनी शर्मिला का एकलौता चिराग।अबसे हमारे साथ ही रहेगा।आशा है किसीको एतराज नही है।"

मैंने स्माइल से सब की तरफ देखा उसमे बड़े मामा और छोटी मामी मुझे अलग ही नजरो से देख रहे थे।जैसे उन्हें खुशी नही हुई हो।

नाना (सबका परिचय कराते हुए) :देख बेटा विराज ये तुम्हारे बड़े मामा विजय उनकी पत्नी यानी की तुम्हारी बड़ी मामी सुशीला ओ उनकी बेटी संजना(संजू) उनके साइड में बैठी वो तुम्हारे बड़े भैया की बीवी सिद्धि।ये तुम्हारे छोटे मामा संजय उनकी पत्नी ,तुम्हारी छोटी मामी अवंतिका,उनका बेटा मतलब तुम्हारे बड़े भैया रवि।

वो कांता चाची है यह पर काम करती है।वो बाहर जो गाड़ी के पास खड़े है वो उनके पति और हमारे ड्राइवर शिवकरण।"

सब की जानकारी हो गयी थी।और ये भी की रात की चुदाई का रवि मेरा कौन है,पर औरत भाभी थी इसपे मुझे शक था क्योकि नाश्ते के समय मैंने भाभी की आवाज सुनी वो रात वाली आवाज नही लगी।मैं नाश्ता करके अपने रूम में अपना कमरा अपनी तरह से सेट करने गया।
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10 hours ago,
#6
RE: Maa Sex Kahani माँ का मायका
(Episode 2)

अर्ज किया है

"अब हो गयी थी चोदने की आदत मेरे लण्ड को अइसी
की जनाब आआह सुनते तो भी गर्म होने लगते है"

तो अइसी हालत में मुझे दूसरी चुत का बंदोबस्त करना था।सुबह के नजारे से कांता चाची ठीक थी।पर उसकी हमेशा घरवालों को जरूरत रहेगी।नौकरानी जो ठहरी।रात को वो पति का बिस्तर गर्म करेगी।और बाकी घरवालो में किसी भी औरत के बारे में मैं सोचने से भी डर रहा था।

मेरा अभी कमरा अपनी तरह से सेट हो गया था।मैं रूम में बैठ कर बहोत बोर हो गया।जब मैं बाहर निकला तो छोटी मामी मा और सिद्धि भाभी दरवाजे पे खड़े थे(क्योकि रवि भैया टूर पे जा रहे थे।)

मैं वहां से टेरेस पर आ गया।वहां कसरत(GYM)का समान था।पर जहाँतक मालूम मुझे यहां कोई फिट नही था। मैने मन ही मन सोचा फिट होने के लिए लाये रहेंगे और हंस दिया।पर मुझे फिटनेस का बहोत शौक था।NCC के वक्त से मुझे इसकी बहोत चाहत थी।

मैंने टेबल पर बैठे डंबल्स उठाके कसरत चालू की।मुझे टी शर्ट में Uncomfortable सा लगने लगा। मैने टी शर्ट उतार कर अपना काम चालू रखा।तभी पीछे से कुछ लोग आने की आहट हुए।छोटी मामी,दीदी,और भाभी थी।मुझे तीनो घूर के देखने लगी

दीदी:क्या बात है,बड़ी बॉडी शोड़ी बना रहे हो,पहले से ही फिट हो और कितना करोगे वीरू।

उनकी मुह से वीरू सुनके मुझे थोड़ा अपना पन फील हुआ

.
(संजना दी: 24 साल की एक ग्रेजुएट लड़की।उम्र के हिसाब से मोटी थी।बड़े घर के लोग फिटनेस पे तभी ध्यान देंगे जब जान पे आए।अभी मोटी है तो सब जगह मोटापन होगा।मोटेपन की वजह से गिने चुने फ्रेंड थे वो भी पढ़ाई के बाद जबसे घर पे है तबसे भाभी ही उसकी फ्रेंड)

भाभी:जाने दे संजू।देवर जी का मन होगा,और फिट होने से कुछ नही होता मेंटेन भी रखना पड़ता है तभी तो कमाल का शरीर मिलता है।एकदम मजबूत,दमदार।

.
(सिद्धि भाभी:27 से 28 साल की पतली सी लड़की,बड़े घर की थी।शरीर कसा हुआ नही था पर मुफट थी।चुचो में उभार नही था।ना गांड बड़ी थी।पर बहोत गोरी थी)

भाभी की बात छोटी मामी को चुभी,उसे अच्छा नही लगा की अपनी बहु के पराये मर्द के लिए अइसे विचार है ।उन्होंने सीधे सीधे कहा नही पर फटकारा जरूर मुझे।

छोटी मामी(छो मामी):अरे बेटा कल ही आये हो पहले तौर तरीके सिख लो।अइसे किसी के चीजो को बिना पूछे नही इस्तेमाल करते।समझदार लगते हो।सही कहा न!!?

.
(छो मामी: 35 से 40 साल की कसी औरत।मेरे से हाइट काम थी करीब 4'5 पर ग़ुस्सेवाली थी।चुचे भी भरे थे और गांड भी।थोड़ी सावली थी।पर बहोत नक्शेदार शक्ल।वो भी बड़े घर से अति थी।और खास बात की मा से उसकी बनती नही थी।)

मैंने भी ज्यादा बात न बढ़ाते हुए उनसे माफी मांगली उस बात के लिए।

"माफ करना मामी जी,बस बोर हो गया तो सोचा कसरत कर लू,माफ करना"

मैं वह से अपने कमरे में चला गया।

पीछे:

संजू दीदी: क्या चाची आप भी नया है,ज्यादा नही जानता यह की लोग शहर को,थोड़ी देर बैठ जाता तो क्या हो जाता वैसे भी भैया ने कसरत करना छोड़ दिया अभी सामान अइसे ही पड़ा है।"

छो मामी:ठीक है ठीक है,मुझे लगा मैने बोल दिया अभी तुम मुझे मत सिखाओ मुझे क्या करना है।चलो सिद्धि।

छोटी मामी अपनी बहु सिद्धि भाभी को लेके नीचे आई उनके पीछे दीदी भी आ गयी।

पर संजू दी नीचे आते ही मेरे कमरे में आ गयी।

संजू दी: वीरू तू ज्यादा दिल पे मत ले वो है ही अइसी

मैं:नही दी कोई बात नही उनकी भी बात सही थी

संजू थोड़ी मजाकिया खुले विचारों की थी।मेरे हाथ में मोबाइल था।चाचा ने तोफा दिया था,क्योकि मैं अभी शहर में रहने वाला था,नई जगह थी,उसका उपयोग होगा इसलिए।

संजू:क्या कर रहे हो वैसे।गर्लफ्रेंड से बाते हा!!??!!

मैंने नार्मल में जवाब दिया: नही दी अइसे बातों में मुझे ज्यादा रस नही।और गांव में अइसे बाते नही होती।आपके शहर में होता रहेगा।

संजू:तुम्हारा क्या मतलब है।मेरा बॉयफ्रेंड?!? मुझे देख रहे हो? कोई पसंद करेगा अइसे लगता है तुझे।

मैं पोसिटिव में बोला:क्यो नही मोटा होना इतनी भी बड़ी बात नही।कोई न कोई पसंद कर ही लेगा।

संजू को नीचे से मा बुलाती है।

संजू: चलो बुआ बुला रही है मैं तुम्हे बाद में मिलती हु।

और संजू वहां से चली गयी।

मुझे चाची की बहुत याद आ रही थी।तो मैने उनको कॉल किया।

चाची:हेलो कौन?

(मेरा नम्बर सेव नही था)

मैं:पहचान कौन?

चाची:अरे मेरा लला आ गयी चाची की याद तेरे को।

मैं: नही चाची,मुझे मुनिया की याद आ रही थी।

चाची:अच्छा जी अइसी बात है।पर मेरी मुनिया को लुल्ली की याद नही आ रही(चाची हस दी)

मैं:चाची अभी लुल्ली नही,लण्ड हो गया है।

चाची:अरे दैया तुझे किसने बताया की तेरा लुल्ला लण्ड हो गया है।

मैं:वो तुम्हारी किताब से सब सिख लिया हु।पर अभी क्या फायदा कुछ होने वाला है नही।उसे शांत करने वाला कोई है नहीं।

चाची:हा न मेरे लाल मेरा भी वही हाल है।जल्दी से आ जाना।अम्मा को तेरी याद अति है बहोत।

तभी मुझे मा खाने के लिए बुला लेती है।मैं चाची को वैसे बोल दिया।

चाची:अच्छा ठीक है।खयाल रखना।और अइसे ही कॉल करते रहो।
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9 hours ago,
#7
RE: Maa Sex Kahani माँ का मायका
(Episode 3)

पहली बार मैंने इतने लोगो के बीच आलीशान भोजन किया था।नाना बहोत ही कठोर और पुराने विचारों वाले थे।सब लोग उनसे डर के रहते थे।खाना खाने के बाद सब लोग अपने अपने कमरे में चले गए।

मैं अपने कमरे में आ गया।बहोत दिनों बाद बहुत अच्छा से फील हो रहा था,काश अम्मा चाची चाचा भी यहाँ आ जाते।
मैं गांव में फेसबुक वैगरा कम इस्तेमाल करता था क्योकि न पैसे रहते थे न अच्छा नेटवर्क।यह पर फ्री wifi था ।संजू दी ने मुझे पासवर्ड भी दे रखा था।मैं अपना एकाउंट को इस्तेमाल कर रहा था तभी मुझे वहाँ एक विज्ञापन लिंक मिला।मैने उसको खोला तो एक एप्लिकेशन को डाऊनलोड करने बोला।मैंने वो भी किया।वैसे भी मुझे नींद नही आ रही थी।
वो streanger chat( अजनबीओ से बाते) एप्लिकेशन था।मैंने एप्लिकेशन में अपना असली नाम नही डाला क्योकि पहली बार इस्तेमाल कर रहा था।मैंने जैसे ही अंदर और गया तो मुझे फटाफट फ्रेंड रिक्वेस्ट आने लगी।मैंने देखा संजना दी का भी रिक्वेस्ट था।पहले मैने उसको एक्सेप्ट किया।फिर और लोगो की प्रोफाइल चेक करने लगा।तभी मुझे सामने से मेसेज आया ।

संजना:hii

मैंने भी:hii

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[Image: IMG_20200212_011033.jpg]

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[Image: IMG_20200212_011443.jpg]

मैं उसके लिए अजनबी था पर उसने अपने असली एकाउंट से फ़ोटो शेयर किये वो भी विथ फेस।या तो वो पागल थी या अकेला पन और हवस उसके दिमाग को साथ नही दे रही थी।

पर इस समय सबसे बड़ा प्रॉब्लम था मेरा खड़ा लण्ड।मैंने बाथरूम में जाने का सोचा हिलाने के लिए पर क्या मन हुआ मैं पीछे बाल्कनी में गया।और गमले में लण्ड हिलाने लगा।

मैं आंख बंद करके लण्ड हिला रहा था।तभी नीचे से बर्तन की आवाज आयी।जैसे ही मैं नीचे देखा तो चूडिओ की खनखनाहट हुई और निचे एक छोटा सा घर था उसमे एक औरत भाग के अंदर चलि गयी।उसके अंदर जाते ही घर की बिजली बंद हुई।

आज बहोत कुछ अजीब हो रहा था।काफी रात हो चुकी थी और लण्ड भी सो गया तो मैंने भी लाइट बंद करके सोने का फैसला किया

जो होगा कल का कल देखेंगे।
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9 hours ago,
#8
RE: Maa Sex Kahani माँ का मायका
(Episode 4)

दूसरे सुबह मैं कांता की राह देखने लगा क्योकि मुझे मेरे लण्ड को शांत करने वाली वही एक औरत पूरे घर में दिख रही थी।कल रात जो संजू दीदी के साथ मेरी कहानी घटी वो भी मुझे परेशान कर रही थी।की संजू दीदी अयसेही किसी अजनबी के साथ अपने नंगे फ़ोटो शेयर कर देगी।पढ़ी लिखी समझदार है वो।मैंने तय किया की उसे इस बारे में समझाना पड़ेगा।आखिरकार परिवार के मान सन्मान की बात है।

वही सोच रहा था तभी कांता चाची की आहट सुनाई दी।पर वे भौचक्के में तब पड़ा जब मुझे रात वाली कंगन की आवाज आने लगी।मैं पूरा तैयार था।अपने तने लन्ड को थोड़ा बाहर रख कर सोने का नाटक कर रहा था।आज तो ये चुत की चिड़िया मुझे चाहिए थी।

कांता जैसे ही मेरे पास साफ सफाई करने आई।उसने मेरे लन्ड को देख लिया।मैं मन ही मन में खुश हुआ की योजना काम कर गयी,अभी उसका आगे का रिएक्शन मेरे योजना का अगला पड़ाव तय करने वाला था।और मेरी सोच अनुसार और उसने अपनी आदत से मजबूर मेरे लण्ड को गौर से निहारना चालू किया।

उसके चेहरे के नक्से बदल रहे थे।वो घुटनो पे बैठी थी।उसने अचानक से अपना हाथ साड़ी के ऊपर से ही चुत पर दबाया।उसकी हरकते मुझे और उत्तेजित बना रही थी।मेरा लण्ड भी झटके खा रहा था।उसने नीचे से हाथ डाल चुत मसलना चालू किया।

मैने सोचा की यही सही समय है की उसे रंगे हाथ पकड़ू और अपनी योजना पूरी कर लू।पर नियति को वो मंजूर नही था।किसी की आहट सुनाई दी और कांता सीधी होकर अपने काम में लग गयी।मा मेरे कमरे में आ रही थी।उसने मुझे उठाया।मैं बाथरूम में गया।जबतक मैं बाहर आता कांता वहां से जा चुकी थी।मुझे मा पर बहुत गुस्सा आया।

नाश्ता होने के बाद मैं थोड़ा इधर उधर टहला और कमरे में आ गया। मैं चाची की कहानियों की किताब पढ़ रहा था।
मेरे रूम के दरवाजे पर क्नॉक हुआ।

"मैं आ जाऊ अंदर"

मैं:अरे दीदी आ जाओ।

मैंने बोला सही पर मैंने हड़बड़ाहट में किताब तकिए के नीचे डाल दी।पर उसका आधा पार्ट बाहर था।मेरा लण्ड तन गया था।तो मैं जाके फ्रेश होकर आया।बाहर आया तो संजू दी वही किताब पढ़ रही थी।मेरी तो हवाइयां निकल गयी।अभी तो मेरे लग गये।

मैंने दौड़ते हुए उनके हाथ से किताब खींची।

संजू दी:वीरू ये क्या हरकते कर रहा है तू?!?

मुझे घबराहट में नही पता चल रहा था की क्या बोलू?

संजू दी:घर में मालूम पड़ जाएगा तो पिट जाएगा।अइसी हरकत करते हुए शर्म नही आयी।तुम्हे अच्छा लड़का समझ रही थी।कुछ संस्कार नही किये लगता है।

अभी संजू दी अपनी मर्यादा पार कर रही थी।बड़ी है इसलिए लिहाज रख रहा था।पर अभी बात हद से बढ़ गयी तो मुझे रहा न गया।मैंने झट से मोबाइल निकाला और कल के चैटिंग के स्क्रीनशॉट दिखा दिए।

संजू दी के पैर के नीचे की जमीन खिसक गयी।वो बोलते है हकलाने लगी।AC में उसको पसिना आने लगा।वो उठी और वहां से निकल गई।मैंने भी राहत की सांस ली।फिरसे कोई न देख ले इसलिए किताब अछि जगह छुपा ली।

दोपहर खाना खाने के वक्त मैं ही अकेला मर्द था घर में बाकी कंपनी में रहते थे।घर में अभी बाकी औरते थी।वैसे भी मैं सबसे कम ही घुल मिल के रहता था तो दोपहर के खाने के बाद मैं टेरेस पे गया।वहाँ पर से पीछे के बाजू जो गार्डन में घर था उसको देखने लगा।मुझे वहां कांता का पति दिखाई दिया।जो अभी अभी घर जा रहा था।इसके दो मतलब थे ये कांता का घर है और कल मुझे हिलाते देखने वाली कांता ही थी।दूसरा की नाना मामा घर आ गए है।

आज सारे मर्द समय के पहले घर आ गए थे।मैं भी नीचे गया तो देखा की किसी बात की तैयारी चालू थी।बाद में मालूम पड़ा की नाना और छोटे मामा किसी काम से बाहर जा रहे है।सब लोग उनकी तैयारी में लगे थे।मैं भी ओ जाने तक बाहर ही खड़ा रहा।वो जाने के बाद मैं फिरसे ऊपर गया।और कसरत में मन जुटा लिया।

रात को खाना खाने के बाद सारे लोग अपने अपने रूम में चले गए।मैं भी अपने कमरे में था।दिनभर बैठ बैठ के मुझे बोर लगने लगा था।कुछ काम नही किसीसे बातचीत नही।दिनभर वो किताब पढ़के लण्ड भी बेहाल था।

चाची अम्मा की चुदाई का अयसे चस्का था उसको की हर दिन कोई भी औरत देख ले खड़ा हो जाता।अभी तो हवस मेरे अधीन हो चुकी थी।सुबह कुछ हो जाता तो मा ने टांग अड़ाई।

मैंने कांता के घर पर जाने का सोचा क्योकि आज उसका पति भी नही था।मैं नीचे आया गार्डन में घूमने के बहाने कांता के घर को टटोलने लगा।और जैसा मैंने सोचा था उससे बहोत आगे का देखने को मिला।

मेरी खड़ूस छोटी मामी और कांता दोनो मिलके एक लडके के चुदवा रही थी।

मामी उस लड़के के ऊपर बैठ के गांड हिला हिला के चुद रही थी और कांता अपने चुचे उससे चुसवा रही थी।

कांता के चुचे और उसकी कठोर निप्पल बड़े हॉट लग रहे थे।मामी के भी चुचो का आकर बडा था और गोल भी।उनका चुदाई का खेल देख कर मेरे लण्ड में भी अकड़न आने लगी।पर उस समय लण्ड को खुश करना उतना महत्वपूर्ण नही था।वो समय था एक हथियार जमा करने का जिससे खड़ूस की गांड में उंगली कर सकू।वहां गया था आज के लन्ड के बंदोबस्त के लिए पर यहाँ तो खजाना मिला था।मैंने उनके रासलीला के कुछ तस्वीरे और फ़िल्म बना ली।और रूम में वापस आके गैलरी से उनके खेल खत्म होने की राह देखी।

मैं उनकी राह देख रहा था तभी मेरा दरवाजा खुला।मैने पीछे मुड़ के देखा तो संजू दी थी,वो भी नाइटी में।आज दिनभर मैंने और उन्होंने बात करनी तो दूर की बात है नजर भी नही मिलाई थी।

संजू दी अंदर आयी और बेड पे चुप चाप बैठ गयी।मैं थोड़ा चौक सा गया।मैं उनके सामने आके खड़ा हुआ।

मैं:"क्या हुआ दी?कोई तकलीफ?इतनी रात गए यहाँ?

संजू:वो वीरू वो....

तभी मेरे मोबाइल में मेसेज आया।

मैं:अरे दी मेसेज किया था?माफ करना चार्ज नही था तो इंटरनेट बंद किया था।पर मेसेज क्यो किया।सामने से बोल देती।क्या बात है

संजू:मुझे डर लग रहा था और शर्म भी आ रही थी की कैसे तुमसे कहु।

(मैं अइसे बोल रहा था जैसे मैं सब भूल गया हु।)

मैं:कौनसी बात?यार दी साफ साफ बोलो यार ये सस्पेंस वैगरा नही सहा जाता मुझसे,कमजोर दिल का आदमी हु।

संजू:तुझे सच में नही पता?

मैं:क्या बोलो तो।

संजू:जो कल रात हुआ ,जो सुबह दिखाया।

मैं:अरे वो,उसका क्या?

संजू:तू किसको बताएगा नही न?बता देगा तो मा तो मार ही डालेगी और नाना घर से बेघर कर देंगे।

(मैं थोड़ा कठोर बनके)

मैं:देखो दीदी,इस उम्र में ये बाते होती है पर इसका मतलब ये नही की अपनी प्रायवेट बाते दुनिया में फैला दे।कुछ प्रॉब्लम हो तो घर वालों से भी बातचीत हो सकती है जिससे मामला बढ़ न जाए।

संजू:मुझे इसका कुछ मालूम नही था।मेरी एक दोस्त है वो भी करती थी।तब मैंने देखा था।

मैं:आज तक कितने लोगो से बाते की है?

संजू:एक तुम और एक लड़की थी।

(लड़की का नाम सुनके थोड़ी राहत मिली)

मैं:कुछ नाम जानती हो।

संजू:मैंने पूछा नही पर प्रोफाइल पर "Angel Priya"लिखा था।
(अभी मेरा सिर चकरा गया।मैं गांव से था पर कॉलेज में इन एंजेल प्रिया के चक्कर से वाकिफ था।पर सच्चाई बताकर दीदी को परेशानी में नही डालना चाहता था।)

मैं:आपका मोबाइल दो।

बिना किसी नोकझोक उन्होंने अपना मोबाइल दिया।ओ अभी उस बच्चे के जैसी थी जो फेल होने के बाद या किसी बड़ी शरारत के बाद मा बाप के सामने होता है।

मैंने चेक किया तो सच में उन्होंने सिर्फ हम दोनो से ही बात की थी।चैटिंग में पहले उसने फोटो शेयर किये थे।कल जो बाते ये मुझसे कह रही थी करवा रही थी वो सब इस "Angel priya " की सिखाई थी।

फ़ोटो देख अयसे तो नही लगा की ये लड़का है क्योकि काफी फोटो शेयर हुई थी और सब में कुछ फर्क नही था।मतलब वो लड़की है ये 80% कन्फर्म था।20%इसलिए नही क्योंकि मैंने भी फेक अकाउंट ही इस्तेमाल किया था।

मैंने सारे फ़ोटो बड़े ध्यान से देखा तो मुझे कुछ शक से हुआ की मैने कही तो देखा है इनको।

"कुछ तो गड़बड़ है वीरू"

तो मैने मेरे मोबाइल पर खींची फ़ोटो देखी तो मेरा शक यकीन में बदल गया।वो छोटी मामी ही थी।पर वो अइसा क्यो कर रही थी अगर उसे चुदने मिल रहा था तो।मैंने सोचा उस बंदे के बारे में पता करू ।तो संजू को वो लड़के की फोटो दिखाई जो मामी को चोद रहा था।

संजू ने उसको देखा:"अरे ये तो कांता का भाई है।तुझे कहा मिला इसका फ़ोटो।

मैं:उससे तुम्हे क्या मतलब।बस और क्या मालूम है इसके बारे में।

संजू मेरे आवाज की टोन से सहम गयी:कुछ नही कुछ घरदार नही है।पहले इधर ही काम करता था।पर आलसी था तो नाना ने निकाल दिया।अभी बाहर गांव रहता है।जब भी छुट्टी मिलती है 2,3 दिन अपनी बहन के पास आता है।पर तुम्हे फ़ोटो??

मैं:वो गेट से बाहर जाते हुए देखा शक हुआ तो फ़ोटो लेली।(मैंने झूट बोल दिया)

संजू:अरे नही वो आज वापस जाने वाला था।कांता ने मा से पैसे भी ले लिए थे उसके तनखा के उसको देने के लिए।

मैं मन में(अच्छा तो कलसे उन चुड़ासी रंडिया औरतो को मैं ले सकता हु।पर आज का क्या?तभी मेरा ध्यान दी पर गया।)

मैं:कुछ नही ।सब ठीक है फिलहाल पर आगे से किसीसे बात नही करना अइसे।ठीक है?

संजू:हा ठीक है!!पर तूझसे एक बात करनी थी।

मैं:अब क्या हुआ?

संजू:वो कल......!..

मैं:हा भाई कल की बात किसी को नही बोलूंगा।

संजू:अरे नही सुन तो.कल जो तूने तेरा फ़ोटो भेजा उसको मैं देख सकती हु।

मैं:अरे दीदी ये क्या बात कर रहे हो।किसीने देखा तो मसला बढ़ जाएगा।तुम्हे कुछ देखना है तो पोर्न साइट पे देखो।

संजू:अरे यार अभी तक उसपे ही देखा है।असली में नही देखा। तुम भाई हो और भरोसेमंद हो।प्लीज मेरे लिए एकबार।

(मेरे मन में लड्डू फुट रहे थे।मैं काटा डालने से पहले ही मछली तड़पती हुई मछवारे के जाल में आ गयी।मैंने दरवाजा बंद किया।)

और अंडरविअर सहित शोर्ट निकाल दी।

मेरा लण्ड लटक रहा था।मैं दीदी के पास खड़ा हो गया।दीदी पास से उसको घूरने लगी।उनकी गर्म सासों की वजह से मेरे लण्ड ने हरकते चालू कर दी

संजू:क्या मैं इसको छू सकती हु वीरू?

मैं:हा दी आपकी ही अमानत है।पर सच में कभी आपने लण्ड नही देखा।

संजू:सिर्फ पोर्न में।नाना के डर से बॉयफ्रेंड के चक्कर में फसी ही नही।

मैं:फिर कल जो सब मुझसे करवा रही थी ओ?

संजू:वो तो उस प्रिया ने सिखाया था।मुझे कुछ नही मालूम पोर्न में देखा पर अभी तक रियल में न कुछ देखा न किया।

मैं:तो मैं सब सीखा दूंगा।आपको चलेगा न?

संजू:वीरू तू ही तो है अभी मेरा भरोसेमंद कोई है भी नही।बस किसी को बता न देना।

मैं:तुम चिंता मत करो।
(हम बाटे जरूर कर रहे थे पर लण्ड दीदी के हाथ में था और वो सहला भी रही थी।लन्ड पूरा तन के चौड़ा हो गया था।)

मैं:कल तो सिर्फ चैट में चुसाई की आज रियल में करे।

संजू थोड़ी सोच में पड़ी।वो शर्मा भी रही थी।

मैं:देखो दी अइसे नखरे करने है तो कोई जरूरत नही है।और मैं वहां से हटने लगा।उसने मुझे पकड़ा।

संजू:अच्छा अच्छा ठीक है ठीक है।

उसने आंखे बंद कर ली और लण्ड मुह में ले लिया।"आआह"क्या परमसुख था वो।लेमन की गोली चूसते है वैसे चूसने लगी।तो मैन खुद ही आगे पीछे होना शुरू किया।कुछ देर अइसे ही चलता रहा।मैंने उनकी पूरी नाइटी उतरवा दी।और खुद भी नंगा हो गया।अब वो मेरे बेड पे लेटी थी।मैंने उनके ओंठो के पास ओंठ लेके गया।तो उन्होंने मुह फिर दिया।

संजू:नही वीरू किस नही करना।मुझे अजीब लगता है।

तो मैंने उनके पूरे शरीर पर जीभ घूमना चालू किया।उनके चुचो को चूसने लगा।दबाने लगा।निप्पल्स नोचने लगा।
.
"आआह उहहह आउच्च"उनके मुह से सिसकी निकल गयी।

मैं पूरे शरीर को चूमते हुए नीचे तक आ गया।जैसे ही मैंने चुत पर जीभ लगाई ।उसने मेरा सिर पकड़ लिया।

संजू:रुको वीरू रुक जाओ,मुझे बहुत अजीब से फील हो रहा है।आआह आआह उम्मम।

मैं:दी पहली बार का नशा है कुछ नही होगा।

मैंने उनकी आगे की बात न सुनते हुए।चुत में जीभ दाल दी और घूमने लगा।चुत के लब्ज मुह में खींच के चूसने लगा।वो जोर से सिसकने लगी।पर आवाज इतनी बड़ी भी नही थी।

संजू:वीरू मेरे चुत में जलन सी हो रही है।कुछ करो प्लीज्।आआह आआह सीईई आआह"

संजू दी वरजिन थी।घर में सन्नाटा नही था पर आवाज बाहर जा सकती थी।और जलती चुत वाली लड़की को अगले समय तक रुककर रखना मूर्खता थी।इसलिए जो वैसलीन था मेरे पास वो लाया और उसकी चुत में और मेरे लन्ड में भी रगड़ा।मन में बहोत घबराहट सी थी।आवाज से कोई आया तो कयामत थी।

मैंने अपने लण्ड को जैसे ही टिकाया उसने मुझे रोका।

मैं बहुत गुस्सा हो गया।क्योकि बहोत हिम्मत जुटा कर ये काम कर रहा था इतनी टेंशन में।

संजू:अरे क्या कर रहा है।कॉन्डोम तो लगा।उतना तुझे भी पता है और मुझे भी।

मैं:कहा है?मेरे पास तो नही है?

संजू ने साइड की नाइटी के जेबसे कॉन्डम निकाला।अभी वो कहा से मिला उसमे मुझे कोई इंटरेस्ट नही था।मैंने उसको मेरे लन्ड पे सेट किया।उसपे वैसलीन रगड़ी और चुत पे लगा के धक्का दिया।

वरजिन चुत थी तो फिसल गया।फिरसे ट्राय किया।दो बार वैसे ही हुआ।इसलिए मैने उंगली डाली और आगे पीछे की।उसकी सिसकारी लण्ड को और बेचैन कर रही थी।मैंने उंगलियोंसे थोड़ा फैला के सुपड़े को अंदर घुसाया।भगवान का नाम लिया।और नीचे झुक कर उसको बिना पूंछे ओंठ से ओंठ मिला लिया।उसके हाथ को दबा के एक जोर का झटका मारा।उसकी सिसकी निकली।पर चींख दब गयी।उसने मेरे ओंठ चबा लिए।नीचे का ओंठ फट गया।पर मैंने धीरे धीरे आगे पीछे होना चालू रखा।
.
उसकी आंखों से पानी निकल पड़ा।मैन अपने ओंठ आहिस्ता आहिस्ते निकाला।ओ रो रही थी।मैंने उसके ओंठ चूसना चालू रखा।नीचे से धक्के पे धक्का दे रहा था।नीचे चुचो को कस के मसल रहा था।करीब 20 मिनिट उसके चुत में लण्ड पेल रहा था।अभी ओ भी सेट हो गयी थी।

"आआह वीरू,फक मि,आआह उम्म फक फक फक,आआह उच्च,और जोर से,आआह आआह"
.
मैं भी उत्तजित होकर चोदे जा रहा था।अभी"पकच्छ पच्छ की आवाजे आने लगी।मैं अभी उतना तो अनुभवी हो गया था की ये झड़ने वाली है।और उसी टाइम उसने मुझे कस के जखडा और चुत रस छोड़ दिया।मैंने उसको छोड़ा।बाथरूम में जाके।थोड़ी देर लण्ड हिलाया और खुद भी झड़ गया।उसके मुह में झड़ना पहली दफा थोड़ा सही नही लगा।मछली अभी फाँसी है क्यो गवाए।

कॉन्डोम को बाल्कनी के गमले में घुसाया।बाथरूम में खुदको साफ किया।नीचे किचन में गया।ठंडा पानी लाया।फ्रिज पर रखी बाम की बोतल भी ली।संजू दी को अपने बाथ रूम में लेके गया।चुत को साफ किया।उसके पूरे शरीर को साफ किया और फिरसे बैडरूम में आया।उसके चुत के बाजू में बाम लगाया।दोनो बेड पे पास में बैठे थे।

संजू ने मेरे हाथ में हाथ रखते हुए:थैंक यु वीरू।आज बहोत मजा आया।इतनी खुशी कभी नही मिली।

मैंने उसकी तरफ देखते हुए:कोई नही दी मेरा फर्ज था एक भाई और दोस्त के नाते।

संजू मुस्कराई और अचानक से एक लिप किस देके वहां से अपने कमरे में चली गयी।
.
ओ थोड़ा लंगड़ा रही थी।पर उसका शरीर भी उतना भारी था तो उतना किसी को मालूम नही पड़ेगा अइसे मैंने खुद के ही मन में सोच लिया।अभी मुझे भी नींद आ रही थी।
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9 hours ago,
#9
RE: Maa Sex Kahani माँ का मायका
(Episode 5)

सुबह 7 बजे थे।मेरी नींद आज जल्दी खुल गयी।मुझे प्यास लगी थी।मैंने देखा तो माँ और दोनो मामिया सज धज के कहि बाहर जा रही थी।मैंने कुछ पूछा भी नही,क्योकि नींद बहोत थी।पानी पीकर मैं फिरसे जाकर सो गया।

करीब 10 बजे किसी चीज के गिरने से मेरी नींद खुली।बड़ा भारी आवाज था।देखा तो कमरे में कोई नही था।पर बाथरूम से आवाज आ रही थी।मैं उठा और बाथरूम की तरफ गया।सामने देखा तो शॉवर गिर गया था और गिरने वाले पानी में कांता चाची भीग रही थी।

क्या कयामत थी 45 साल की एक कमसिन औरत ऊपर से नीचे गीली साड़ी में लिपटा यौवन।साडी पुरी चिपक गयी थी।गांड उभार कर दिख रही थी।मैं अंडरविअर में सोता था तो मैं वैसे ही बाथरूम में घुसा था।पानी इतनी जोर से बह रहा था की मैं भी भीग गया।चिपके शरीर से मेरा लण्ड का आकर साफ दिखाई दे रहा था।

वातावरण पूरा रोमांचक हो गया था।मैं उस लम्हे का पूरा फायदा उठाना चाहता था।मैंने उसके पीछे जाकर चिपक गया और अपनी बाहों में जखडा।

कांता:बाबू ये क्या कर रहे हो?!!कोई आ जाएगा तो परेशानी होगी!!छोड़ो

मैं:अरे कुछ नही होता मुझे मालूम है संजू दीदी के सिवा घर में कोई नही है,और वो दोपहर तक आएगी भी नही।

कांता(छूटने की नाकाम कोशिश कहो या नौटंकी करते हुए)
:आपको इतना यकीन कैसे?

मैं:तुझे यकीन चाहिए या मेरा लण्ड

कांता शर्मा गयी।उसने अपना बदन मेरी बाहों में ढीला छोड़ दिया।

मैंने उसके गांड के बीच लण्ड सेट किया और आहिस्ता घिसाने लगा।उसके चुचो को हाथ में लेके मसलने लगा।
कांता"आहुमम्म आआह"करते हुए सिसकारी छोड़ रही थी।
मैंने उसका ब्लाउज और ब्रा दोनो निकाल दिया।क्या भरे चुचे थे।मसलने में बहोत मजा आ रहा था।उसके ब्राउन निप्पल्स बहोत ही मोहक थे।मैंने उसको नोचना चालू किया।तो कांता तिलमिलाने लगी।

मैंने उसको अपनी तरफ घुमाया।पानी के बहाव में लिप्त उसके कांपते हुए होंठो को अपने कब्जे में करते हुए।चूसने लगा।उसने मुझे कस के पकड़ लिया।हम एकदूसरे को लिपटे हुए ओंठोसे रसभरा स्वाद ले रहे थे।

काफी देर होने के बाद उसको मैंने अपने बाहों से रिहा किया।दोनो पूरी तरह से नंगे हो गए थे।उसको मैंने दीवार पर टिका कर नीचे बैठ गया।उसकी चुत ठंडे पानी में भी आग की तरह गर्म थी।मैंने उसके चुत में उंगली डाली और आगे पीछे करने लगा।वो अंगड़ाई ओ में तिलमिला रही थी।
उसकी चुत काफी फैली हुई थी।मैंने जीभ डाल घूमने लगा।उस समय बदन में इतना रोमांच था की उसके चुत रस का खट्टा स्वाद भी मीठा लग रहा था।

मेरा लन्ड भी लोहे की तरह तप कर कठोर बन गया था।मैंने उसके हाथ को पकड़ के अपने लण्ड पे रखा।मेरे गर्म लन्ड के स्पर्श से उसके मुह से सिसकी निकली उसने ओंठ दांतो तले चबा दिया।मैंने फिरसे उसके ओंठो का रसपान चालू किया।ओ मेरा लण्ड अपने हाथो से सहला रही थी।मेरा चमड़ा पूरा पीछे हो गया था और लण्ड का टोपा बाहर चमक रहा था।

ओ नीचे बैठ कर मेरे लण्ड को मुह में ले ली।वो चूस चूस कर लण्ड का स्वाद ले रही थी।टोपे से लेकर नीचे के अंडों तक चाट रही थी।पक्की रंडी थी।अभी मेरा झड़ने का वक्त पास आया था।लण्ड में बेचैनी सी हो रही थी।मैने उसका सर पकड़ा और लण्ड से मुह छोड़ना चालू किया।मुह से "ओओओ गप गप" की आवाजे गूंजने लगी।मैं पूरा का पूरा उसकी मुह में झड़ गया।मैने उसका सर कस के पकड़ा और लण्ड तब तक बाहर नही निकाला जब तक आखरी बून्द उसकी मुह में झड़ नही जाता।ओ भी घुटन से सारा लन्ड रस पी गयी।

सारा रस पीने के बाद भी वो लण्ड को चुस्ती रही।मेरा लण्ड फिरसे तन के खड़ा था।अभी चुदने की बारी उसके चुत की थी।उसको खड़ा किया,वो बेसिन को लग के खड़ी हो गयी।कांता की गांड बहोत बड़ी थी।उसकी कमर को थोड़ा मोड़ा।एक पैर को साइड के बाथटब के ऊपर रखा जिससे चुत का छेद खुला हो जाए।जैसे ही चुत के छेद का दर्शन हुआ।अपना लण्ड छेद पे लगाया और धक्के देना चालू हो गया।
"आआह आआह सीईई उम्मम आआह चोदो आउच्च चो ओओओ दो ओओओ और जोर से आआह हहह आआह

वो भी गांड को आगे पीछे करने लगी।पहले मैं एकदम धीरे से आगे पीछे कर रहा था।15 ,20 मिनट बाद मेरा फिर से झड़ने आया तो मैने स्पीड बढ़ा दी।उनके बाल घोड़े के माफिक खींच जैसे घोड्सवारी ही कर रहा था

"आआह बाबूजी धीरे से आआह मार गई दैया आआह"

जैसे ही मेरा छूटने वाला था।उसको नीचे बैठाया और लण्ड उसके मुह में ठूस दिया।ओ भी बिना बोले भूखी रंडी की तरह चूसने लगी।और लिकलते सारे लंड के पानी को पी गयी।

उसने गीले कपड़े पहने और वहां से जा रही थी।उसको मैंने रोक लिया।

मैं:कांता चाची**

कांता (शर्माते हुए):जी बाबू जी

मैं:फिर कब मिलोगी

कांता:जी पता नही,आप ही देख लो।

मैं:मुझे तो अभी भी मन है।

कांता(शर्माते हस्ते हुए):बाबूजी अभी काम बहोत है,अभी नही।

मैं:सीधा बोलो न लण्ड नही पसंद आया।

मेरे मुह से डायरेक्ट लण्ड शब्द का उच्चरण सुन ओ चौक गयी और शर्माते हुए:नही नही अइसी कोई बात नही,लण्ड तो बहुत दमदार है,इसे कोन ना बोलेगा।

मैं:अच्छा तो तेरी चुत को पसंद नही आया उसका नया शौहर।

(अब हममे खुल के बाते हो रही थी।)

कांता:नही चुत तो दिन रात उसकी सेवा में मेवा खाने को बेताब है(उसने साड़ी के ऊपर से चुत पर हाथ से दबाया)
पर समय ठीक नही।मेवे के लालच में कोई अनहोनी न हो जाए।

मैं आगे गया।उसके चुचे हाथ में पकड़े और निप्पल्स मसलते हुए बोला:ठीक है पर मेरे बुलाने पर आ जाना जरूर।

कांता सिसकार्यो में बोली:आपकीईई ही दासी हुऊऊऊ,जब उचित समय जब भी सेवा करवानी हो हाजिर हो उम्मम जाऊंगी इईस हहहहआआह"

उसको एक ओंठो का चुम्मा दिया और रिहा कर दिया।
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9 hours ago,
#10
RE: Maa Sex Kahani माँ का मायका
( Episode 6 )

भाभी भी सुबह से दिखाई नही दी थी,लगता है वो भी सास के साथ बाहर गयी होंगी।दोपहर को खाना खाने सिर्फ मैं और दीदी ही थी।मैं दीदी के कमरे में गया।तो दीदी लैपटॉप पे कुछ काम कर रही थी।मुझे लगा व्यस्त होगी इसलिए मैं फिरसे अपने कमरे में आया।वह पर कांता चाची किसी आदमी को लेकर आयी थी।वो प्लम्बर था।मैं भी वही खड़ा रहा।आधे घंटे में प्लम्बर का काम खत्म हुआ।उसके जाने के बाद कांता ने सब रूम साफ किया जो प्लम्बर के काम के वक्त खराब हुआ था।

कांता ने जाते वक्त मुझसे खाने के बारे में पूछा।मैं बोला "तुम गरम करके रेडी कर दो और दी के कमरे में लेके आओ हम दोनो है तो वही बैठ कर खा लेंगे।"

कांता वहां से चले जाने के बाद मैं फिरसे दी के कमरे में गया।वो अभी भी लेपटॉप पे ही व्यस्त थी।पर उनके हाथ नही चल रहे थे।उनका बदन कांप रहा था।मुझे परिस्थिति में कुछ अजीब सी से महसूस होने लगा।

मैं उनके पास गया तो देखा की लेपटॉप पे दीदी पोर्न देख रही थी।इतनी गौर से देख रही थी की उनके पास जाके खड़ा रहा तब भी उनको होश नही था।मैंने दो बार "संजू दी संजू दी" करके पुकारा तब भी कोई रेस्पॉन्स नही।फिर मजबूरन उनके कंधों पे हाथ रखा तो ओ चौक गयी।जैसे कोई भूतिया फ़िल्म में जब डरता है वैसे।

मैंने सिर्फ "संजू दी आप" इतना ही बोला था की उन्होंने फटाफट बकना चालू किया।

संजू दी:अरे संजू अच्छा किया तुम आ गए मैं तुम्हे ही बुलाने वाली थी।यहां थोड़े आगे आ जाओ प्लीज।

मैं "क्यो?"बोलता उससे पहले उन्होंने मुझे आगे खींचा।

थोड़ा आगे गया तो मालूम पड़ा की उन्होंने सिर्फ सफेद कुड़ता पहना था।बाकी न ब्रा थी न पेंटी।बेड के किनारे बैठी थी तो चुत साफ साफ दिखाई दे रही थी।उस दिन जो थोड़े झांट के बाल थे ओ भी आज पूरे साफ थे जैसे कभी आये ही नही हो।

उन्होंने मेरी शॉर्ट नीचे करके लण्ड को बाहर निकाला और हिलाना चालू किया।

मैं:अरे दी ये क्या कर रहे हो कोई आ जाएगा तो दिक्कत हो जाएगी।

संजू:अरे कुछ नही होगा कोई नही है घर में।कल सब कुछ तुम ही कर रहे थे।मुझे भी खुदसे कुछ करना था।सुबह से से पोर्न देख देख कर सिख रही हु।सोचा कुछ प्रैक्टिकल भी कर लू जिससे पता चले पढ़ाई कहा तक पहुंची।

मैं:पर दी ओ**

संजू:तुझे कुछ प्रॉब्लम है क्या??

(मैं मन में मुझे कैसी प्रॉब्लम 24×7 तैयार ही रहता हु मैं।बस तेरे चक्कर में पकड़े गए तो अपनी गांड नही मरवानी)

मैं:नही कोई प्रोब्लम नही ,कैसा प्रॉब्लम,तुम जो चाहे कर लो।

संजू ने सामने एक पोर्न लगाया और उसे देख देख कर मेरे साथ वैसे का वैसे चालू हो गयी।

उसने लण्ड को पूरा हिला के तैयार किया,और मुह में लेके चूसना चालू किया।वो पूरी तरह से पोर्नस्टार की तरह चूस रही थी।उसकी वासना और अकेलापन उसे पोर्न की तरफ लेके जा रहा था।

संजू अभी बेड पे घोड़ी बनके लण्ड को चूस रही थी।मैं भी आगे पीछे होकर उसको साथ दे रहा था।थोड़ी देर बाद वो उठी।अपना पूरा कपड़ा उतार के पूरी नंगी हो गयी।

खुद ही अपने चुत में उंगली डाल के मसला और खुद ही अपनी उंगली चूसने लगी और नटखट हस के मुझे आंख मारी।उसने मुझे बेड पे खींचा और पीठ के बल सुला दिया।और खुद मेरे ऊपर आके मेरे पूरे बदन को चूमने लगी।मेरे छाती के निप्पल्स को चूसने लगी।फिर मेरे ओंठो की ओर आई।उसकी गर्म सांसे मेरी वासना को और भड़का रही थी।

उसने अचानक से अपने ओंठ मेरे ओंठो से मिला लिए।ओ चूस रहीथी बारी बारी हर एक लब्ज को।मैंने उसके चुचो को मसलना चालू किया।उसने भी उत्तेजन में अपने चुचे बारी बारी मेरे मुह में ठुसाना चालू किया।

उसकी चूची चूसना तो चालू ही था पर वो ऊपर नीचे होकर अपने चुत को मेरे लण्ड को घिसाने लगी थी।उसने उठ के मेरे लण्ड पे थूक लगाई(अरे यार मुझे चाची की याद आ गयी थी)और चुत पे लगाके आहिस्ते से बैठ गयी।थोड़ा नीचे झुकी मेरे छाती पे हाथ रख कर अपने गांड को ऊपर निचे करने लगी।

"आआह यूअर कॉक सो हार्ड आआह फक मि आआह आआह उम्मम आआह फक मि वीरू आआह आआह"

मैं भी नीचे से गांड ऊपर करके ऊपर नीचे होने लगा।कुछ 6 से 7 मिनिट में वो झड़ के मेरे ऊपर ही सो गयी।मैंने भी 1 मिनिट के लिए दम लिया।

उसी वक्त मुझे किसी चीज की टकराने का आवाज आया।
मैंने देखा तो दरवाजा खुला था।जो मैने ही रखा था।मैं संजू दी को बाजू किया और झट से कपड़े पहन के बाहर गया। मैन देखा तो मेरे पैर के नीचे पानी का ग्लास गिरा था और निकजे कांता जल्दी जल्दी में किचन में घुस रही थी।मैं माजला समझ गया।

मैं नीचे किचन में चला गया।कांता को ठंडी AC में भी पासिना छूट रहा था।

मैं: कांता चाची सब ठीक तो है?कोई परेशानी?

कांता(लड़खड़ाते आवाज में):कुछ नही अइसे ही।

मैं:फिर इतने ठंड में पासिना क्यो आ रहा है।

कांता:वो अयसेही!?!?!?!?!

मैं उनके पास गया।उनकी गांड को पीछे से कस के दबाते हुए बोला:ये जवाब हर किसी को देना।किधर मुह खोला तो चुत में और गांड में डंडा डाल के छिनाल की माफिक चोद डालूंगा।रहम की भिक नही मिलेगी।

मैंने फिरसे उसकी गांड को दबोच के कस के नोचा।

कांता ने सिसकी मार ली"आआह आउच्च आआह"

कांता:पर बाबू ये गलत है,ये सही नही है ।

मैं:तुम जैसी रंडी के मुह से ये बाते अछि नही लगती।

(कांता थोड़ा चौक कर मुझे अइसी देखने लगी की उसे कुछ समझ नही आया हो।मेरा लण्ड तो पहले से ही उत्तेजित था।मैंने शॉर्ट निकाली और उसके पीछे से लण्ड घिसना चालू किया।)

मैं:अरि छिनाल अइसे भोली बन के मत देख।उस दिन जो चुत को चुदवा रही थी अपने भाई से अपनी रंडी मेमसाब के साथ मिलके उसके बारे में बता रहा हु।

(कांता की नजरे एकदम फैल गयी।शरीर में हड़कम्प मच गया।अपने बात को संभालने के लिए वो नाकाम कोशिशें करने लगी ।)

कांता:बाबूजी कुछ भी इल्जाम न लगाओ अपने कहा देखा क्या सबूत है उसका।

मैं:अच्छा जी चोर उल्टा कोतवाल को डांटे।ये देख मैं इन झंडों के फैमिली की पैदाइश नही हु।समझी।(मैने मोबाइल से सब फोटो सामने किये)देख रंडी छिनाल तेरी और तेरे रंडिया मेंम साहब की अय्याशी।अगर ज्यादा चुचा की तो इसका अल्बम नाना और शिवकरण चाचा के पास जाएगा।फिर तुम लोगो की जगह रंडी खाने में।

कांता:नही बाबू जी मैं हाथ जोड़ती हु।जान ले लेंगे ये लोग।

मैं:हाथ जोड़ के क्या करूँगा।सिर्फ चुत खुली रख और मुह बंद।ज्यादा गांड मराई तो भंडा फोड़ दूंगा।फिर न घर की न घाट की।

कांता:जो तुम कहो।बस किसीको बताना नही।जो चाहिए वो कर लो।

मैंने उसकी साड़ी को उपर किया उसको ओटे पे झुकाया।और चुत में लण्ड दाल के आहिस्ता चोदने लगा।

मैं:तेरा भाई आज से मुझे मेरे घरवालों के 100 मीटर के दायरे में नही दिखना चाहिए।

कांता:जी आआह आआह ठीक है आआह।

मैं:हम्म,,वैसे कितनी औरतो ने चुदवा लिया है उससे घर के।

कांता एकदम से चुप हो गयी।

मैन उसके खुली गांड पे छपाक से चमेट मार दी।

कांता:आह्हा बताती हु,सभी ने चुदवा के लिया है।तुम्हारी मा बडी मेमसाब छोटी मेमसाब ।कल छोटी मेमसाब का नंबर था।परसो आपकी मा और उससे पहले बड़ी मेमसाब।

मैं:माँ कैसे?
(मैं चौका भी था और गुस्सा भी आया।)

मैं:मा को आये सिर्फ 1 महीना हुआ है।ओ कैसे इस झमेले में आ गयी।(मैंने और एक फ़टका जड़ दिया गांड पे।)

कांता:आहुच आआह।सच बोलू तो दीदी(मेरी मा)और बड़ी मेमसाब(बडी मामी) को छोटी मामी ने इस झमेले में लाया।
वही उनको समझा के ये सब करवाई।

मैं:मुझे सच सच बता ये छोटी छिनाल का मसला क्या है?इतना घमंड किस बात का?कई अपनी बहु को भी तो नही चुदवाया?

(मैं अभी झड़ने वाला था बातों बातों में मैं अंदर ही झड़ गया। लन्ड को बाहर निकाल कांता के पल्लू से पोंछा और शॉर्ट पहन ली।उसने भी अपने कपड़े सही किये।)

कांता:नही चुदवाया।पर जरूरत पड़ेगी।

मैं:क्यो?भैया गे है क्या?

कांता:अरे नही पर स्पर्म उनका प्रभावी नही है।ये बात सबको नही मालूम।जब मेरे पति उनको लेके डॉक्टर के पास गए थे।तब रास्ते में उनकी बातों से पता चला।

मैं:पर ये छोटी छिनाल को मालूम हो गयी क्या?

कांता:नही अभी तक तो नही।इसलिए तो वो टूर पे रहते है।जिससे मा के सामने ज्यादा देर न रहे।

मैं:पर छोटी मामि चाहती क्या है?उनका बर्ताब बहोत अजीब है।

कांता: संपत्ति!!!! बडी मेमसाब और दीदी जी को इस खेल में फसा कर उनको जाल में फसाना चाहती थी।जिससे सब उसके कंट्रोल में आ जाए।आपके पिताजी का देहांत और बड़े साब(बड़े मामा)का बड़ी मेमसाब से कमजोर रिश्ता उसकी वजह से वो दोनो छोटी मेमसाब की जाल में फसी।अब कुछ दिन पहले तो संजू को भी जाल में ओढ़ रही थी।

(मैं मन में:तभी मैं सोचु संजू दीदी का पोर्न देखना इतना चुदासी होना।संजू दी से फेक अकाउंट से रोमांचक बातें करना फ़ोटो लेना।मतलब संजू दी आधी फस गयी थी।मैं देर से आता तो वो पूरी फस जाती)

मैं:और साली तूने भी उसमे साथ दिया है न?

कांता ने मुह नीचे कर लिया मैं सब समझ गया।

तभी संजू दी आ गयी।उन्हें भूख लगी थी।हम लोगो ने मिलके खाना खाया।शाम तक हमने दो बार अलग अलग तरह से चुदाई की।

रात के खाने के बाद मैं टेरेस पे था।तभी एक गाड़ी निचे आके रुकी।चारो औरते उससे बाहर निकली।छोटी मामी और उसकी बहु लड़खड़ा रहे थे।बड़ी मामी और मा ने उनको संभाला।नशे में धुत थी ओ।

[मैं मन में-बस हो गया रंडिया तेरा खेल आज से तेरा यार तेरे खेल में टांग भी डालेगा और लण्ड भी।अभीतक बहोत घटिया खेल खेली अभी घिनोना खेल देखेगी।तेरे दोनो मोहरे जो तेरे खेल के बहोत फायदे मन्द खिलाड़ी थे अब मेरे कब्जे में है।कांता तो मुह न खोलेगी।और अपना राज छुपाने के लिए भाई का बंदोबस्त खुद ही कर लेगी।एक पत्थर में दो शिकार।अभी तुम लोगो की चुदाई की मशीन मैं और मेरी तुम लोग।माँ यार माफ करना ,तेरे कारनामे सुनके अभी वो बची कूची फिलिंग भी चली गयी।अभी होगा ""वीरू दा शो"")

Season 2 End
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