Kamukta Story बदला
08-16-2018, 01:43 PM,
#41
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...

शिवा अपनी माशूका के ख़यालो से तब बाहर आया जब उसका वाइर्ले अचानक
खड़खड़ाने लगा.एस्टेट की पूरी सेक्यूरिटी टीम & बाकी वर्कर्स वाइर्ले के
ज़रिए ही 1 दूसरे के कॉंटॅक्ट मे रहती थी.वैसे इन वल्क्य-टॉकईस का
इस्तेमाल ज़्यादातर ये बताने के लिए ही होता था कि फलाना गाड़ी खराब हो
गयी है या डेरी वालो ने शाम का दूध दूह लिया है मगर पस्ट्राइसिंग सिस्टम
मे कुच्छ परेशानी है वग़ैरह-2.(दोस्तो ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानिया पर पढ़ रहे है)शिवा ने वाइर्ले उठाया,एस्टेट की 1 जगह की
टूटी बाड़ की मरम्मत हो गयी थी,उसी का जायज़ा लेने के लिए वाहा के
गार्ड्स उसे बुला रहे थे.उसने आह भरी & अपनी जीप की चाभी उठा के अपने
कॅबिन से निकल गया.

देविका के लिए शिवा 1 नौकर से ज़्यादा कुच्छ नही था & उसने उसे थप्पड़ भी
इसीलिए लगाए थे मगर उन चांटो का जवाब जिस अंदाज़ मे शिवा ने इसे दिया था
उसने उसके दिल मे उसके लिए कुच्छ और ही जगह बना दी थी.देविका के दिल मे
भी अब उसके लिए प्यार पैदा हो गया था & उसके जिस्म की बेचैनी उसके दिल की
बेसब्री की परच्छाई ही थी.
अपने पति के लिए अभी भी उसके दिल मे प्यार था & उसकी चिंता भी थी मगर
शिवा वो शख्स था जिसके साथ वो बहुत महफूज़ महसूस करती थी & उसके पास उसे
बहुत सुकून मिलता था.

जीप चलाकर जाते शिवा के दिल मे अभी भी सुरेन सहाय के एस्टेट मे ना होने
का फ़ायदा ना उठाने का मलाल था.उसे अपने बॉस पे & उस वक़्त बाकी लोगो की
मौजूदगी पे बड़ी खिज आई..इन्ही लोगो की वजह से वो अभी अपनी जानेमन के
जिस्म की गोलैईयों मे नही खो पा रहा था.(दोस्तो ये कहानी आप राज शर्मा के
ब्लॉग कामुक-कहानिया पर पढ़ रहे है)उसे अपनी बेबसी पे भी बहुत गुस्सा आ
रहा था & इसी बेबसी & गुस्से ने अचानक 1 ऐसा ख़याल उसके दिमाग़ मे पैदा
किया जिसके आते ही शिवा को खुद से घिन आई & ग्लानि भी महसूस हुई-उसके खिज
भरे दिल से निकली वो बात थी कि सुरेन सहाय मर क्यू नही जाता!शिवा ने 1 पल
को आँखे बंद की & खुद को होश मे लाया.वो 1 ईमानदार & नमकहलाल इंसान था &
ऐसी बातो की उसके दिलोदिमाग मे कोई जगह नही होनी चाहिए थी.उसने
अककलेराटोर पे पाँव दबाया & जीप फ़र्राटे से आगे बढ़ गयी.

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"ये लीजिए मिस्टर.सहाय..",कामिनी ने मुकुल के हाथो से स्टंप पेपर्स लिए &
सुरेन जी को थमाए,"..आप दोनो भाइयो से बात करने के बाद मैने ये काग़ज़ात
तैय्यार किए हैं.",मुकुल ने दूसरी कॉपी वीरेन सहाय को दी.

"..पहले वो करारनामा है जिसमे लिखा है कि वीरेन जी को इस बात से कोई
ऐतराज़ नही की आप एस्टेट & बिज़्नेस के फ़ैसले कैसे & क्या लेते हैं.बाकी
काग़ज़ात मे उन सुरतो के बारे मे लिखा है जब आपकी या आपकी पत्नी की या
फिर दोनो की या फिर वीरेन जी की या सभी की मौत हो जाने की सुरतो मे
प्रसून का क्या होगा.",दोनो भाई गौर से पेपर्स पढ़ रहे थे.

"मिस्टर.सहाय,मैने ट्रस्ट का फॉर्मॅट & उसके काम करने के बारे मे भी सभी
बाते इन काग़ज़ो मे लिख दी हैं.आप दोनो इनको पढ़ के अगर कोई बदलाव चाहते
हैं तो मुझे बता दें.उसके बाद आप इंपे दस्तख़त कर दीजिएगा & आपका काम
ख़त्म."

कोई पौन घंटे तक दोनो भाई सारे पेपर्स पढ़ते रहे & उनमे लिखी बातो पे 1
दूसरे से सलाह-मशविरा करते रहे.उसके बाद दोनो कुच्छ मामूली सी बाते
जोड़ने को कहा & फिर उनपे दस्तख़त कर दिए.कामिनी ने सभी काग़ज़ात मुकुल
को दिए जिसने उसे ऑफीस की तिजोरी मे बंद कर दिया.दोनो भाइयो के पास सारे
काग़ज़ो की 1-1 कॉपी थी.आगे जाके अगर सुरेन जी या फिर वीरेन इनमे कोई
बदलाव चाहते तो तीनो कॉपीस-सुरेन जी की वीरेन की & कामिनी की-को इकट्ठा
करके ही कामिनी के हाथो ही उनमे बदलाव हो सकता था.ऐसा कामिनी ने करारनामे
भी लिख दिया था जिसपे अब दोनो भाइयो के दस्तख़त थे. (दोस्तो ये कहानी आप
राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानिया पर पढ़ रहे है)

"थॅंक यू,कामिनी जी.आपने हमारी बहुत बड़ी मुश्किल आसान की है.",सुरेन जी
जाने के लिए उठ खड़े हुए.

"मिस्टर.सहाय,यही तो मेरा काम है & मेरा काम करने के लिए आपको मुझे
शुक्रिया कहने की ज़रूरत नही.आप अच्छी-ख़ासी फीस दे रहे हैं इस काम के
लिए!",कामिनी की बात पे तीनो हंस पड़े,"..अच्छा,अब इजाज़त चाहूँगा.",हाथ
जोड़ के सुरेन जी उसके कॅबिन से निकालने लगे की कामिनी को कुच्छ याद
आया,"मिस्टर.सहाय,1 मिनिट रुकिये,प्लीज़."

उसके इशारे पे मुकुल कुच्छ और काग़ज़ उनके पास ले आया,"ये प्री-नप्षियल
कांट्रॅक्ट का 1 फॉर्मॅट है.आपने उस दिन प्रसून की शादी के बारे मे बात
की थी ना तो मैने सोचा की आप & मिसेज़.सहाय 1 बार इसे देख लें आपको भी
थोडा अंदाज़ा हो जाएगा."
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08-16-2018, 01:44 PM,
#42
RE: Kamukta Story बदला
"शुक्रिया,कामिनी जी.ये आपने बहुत अच्छा काम किया.",सुरेन जी ने दोबारा
हाथ जोड़े & बाहर चले गये.कामिनी ने आँखो के कोने से देखा की वीरेन को
उसे ये बात कुच्छ अच्छी नही लगी..आख़िर वो प्रसून की बात पे ऐसे संजीदा &
थोड़ा टेन्स सा क्यू हो जाता था?

"अच्छा,मैं भी चलता हू,कामिनी जी.",वीरेन ने अपने चेहरे के भाव बदल लिए
थे & अब वही दिलकश मुस्कान उसके होंठो पे खेल रही थी,"आपने कुच्छ सोचा
मेरी गुज़ारिश के बारे मे?"

"हां वीरेन जी,मैने सोचा.आप कैसे पेंटर हैं अब इसके बारे मे कुच्छ कहना
तो सूरज को दिया दिखाने के बराबर होगा..",तारीफ सुन वीरेन ने हंसते हुए
नज़रे झुका ली,1 बड़े विनम्रा इंसान की तरह.कामिनी बहुत गौर से उसे देख
रही थी,"..लेकिन..",वीरेन के चेहरे से हँसी गायब हो गयी,"..लेकिन मैं
आपकी बात नही मान सकती.प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए."

"नही कामिनी जी,इसमे माफी की क्या बात है?..इतना ज़रूर कहूँगा की आपकी
तस्वीर ना बना पाने का मलाल मुझे उम्र भर रहेगा."

"मैं आपको तकलीफ़ नही पहुचाना चाहती मगर प्लीज़ वीरेन जी मैं ये नही अकर
सकती.",कामिनी को पता था की ये कलाकार लोग बड़े संवेदनशील होते
हैं,दिमाग़ से ज़्यादा दिल का इस्तेमाल करते हैं & वीरेन भी इस इनकार को
ना जाने कैसे ले.

"प्लीज़,कामिनी अब आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं.आपकी बात का ज़रा भी बुरा
नही माना मैने,मेरा यकीन कीजिए & अपने दिल से ऐसी सारी बातें निकाल
दीजिए..ओके!बाइ.",1 बार फिर वही दिलकश मुस्कान बिखेरता वीरेन भी वाहा से
चला गया & कामिनी 1 बार फिर से सोच मे पड़ गयी....ये इंसान नाराज़ नही
हुआ थोड़ा सा निराश ज़रूर हुआ था मगर उसे कोई गुस्सा नही आया था.(ये
कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )...अब तो
उसकी आगे की हर्कतो से ही पता चल सकता था की उसके दिल मे असल मे क्या
था-क्या वो सच मे उसकी खूबसूरती का कायल होके उसकी तस्वीर बनाना चाहता था
या फिर उसका शक़ कि वो अपने भाई की वकील के करीब आना चाहता था सही था.

कामिनी थोड़ी देर खड़ी सोचती रही & फिर अपनी कुर्सी पे बैठ अपना काम करने लगी.

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"नमस्ते!नमस्ते!शाम लाल जी,आइए बैठिए.",सुरेन जी ने बड़ी गर्मजोशी से
अपने पुराने मॅनेजर का इस्तेक़्बल किया. (दोस्तो ये कहानी आप राज शर्मा
के ब्लॉग कामुक-कहानिया पर पढ़ रहे है)

"नमस्ते,सुरेन जी..नमस्ते मॅ'म.कैसे हैं आपलोग & अपना प्रसून कहा है?मैं
उसके लिए ये तोहफा लाया था.",शाम लाल जी की उम्र 60 बरस की थी & उनके सर
के सारे बॉल उड़ चुके थे बस पीछे की ओर थोड़े से बाकी थे.उम्र के साथ
उनका पेट भी कुच्छ निकल आया था.वो उम्र मे सुरेन जी से बड़े थे मगर फिर
भी वो उन्हे हमेशा ऐसे इज़्ज़त देते थे जोकि 1 मालिक को अपने मुलाज़िम से
मिलनी चाहिए थी.

"इसकी क्या ज़रूरत थी,शाम लाल जी!",देविका ने उन्हे 1 शरबत का ग्लास
बढ़ाया.उनके बैठते ही रजनी वाहा शरबत के ग्लास & नाश्ते की तश्तरिया लेके
आ गयी थी.उसने भी शाम लाल जी को नमस्ते किया.

"जीती रहो,रजनी.कैसी हो?",उन्होने 1 घूँट भरा.रजनी ने उनकी बात का जवाब
दिया & उनका & उनके परिवार की खैर पुच्छ वाहा से चली गयी.

"ह्म्म..",थोड़ी देर तक तीनो इधर-उधर की बाते करते रहे उसके बाद सुरेन जी
ने असल मुद्दे की बात छेड़ी जो थी प्रसून की शादी,"..आप दोनो ने वकील से
बात करके क़ानूनी तौर पे तो प्रसून के हितो की हिफ़ाज़त कर ली है मगर फिर
भी..",उन्होने अपनी ठुड्डी खुज़ाई.

"मगर क्या शाम लाल जी?",देविका की आवाज़ मे चिंता सॉफ झलक रही थी.

"देखिए मॅ'म,आप 1 औरत के नाते इस बात को ज़्यादा अच्छी तरह से समझेंगी.1
लड़की अपने पति से केवल ना अपने भविष्या की सुरक्षा,आराम की ज़िंदगी की
उम्मीद रखती है बल्कि उसकी कुच्छ और भी आरज़ुएँ होती हैं..कुच्छ अरमान
होते हैं (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है
)जोकि केवल 1 पति ही पूरा कर सकता है.",पति-पत्नी शाम लाल जी का इशारा
समझ गये थे.यही तो उनकी खूबी थी कोई भी बात बड़ी नफ़ासत के साथ बहुत
सोच-विचार के कहते थे.
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08-16-2018, 01:44 PM,
#43
RE: Kamukta Story बदला
"..& अगर वो आरज़ुए हक़ीक़त मे ना बदले तो औरत बौखला जाती है & 1 बौखलाई
औरत की बौखलाहट का अंजाम कुच्छ भी हो सकता है.ये प्री-नप्षियल अग्रीमेंट
वग़ैरह तो ठीक हैं मगर फ़र्ज़ कीजिए उस औरत को इन काग़ज़ के टुकड़ो की
कोई परवाह ही ना हो तो?..उसे केवल अपनी हसरातो की ही परवाह हो तो?"

"..यही मुश्किल आपको सुलझानी है..",देविका ने बोला,"..1 ऐसी लड़की ढूंढीए
जोकि मेरे बेटे की सच्ची हमसफर बने..",शाम लाल जी कुच्छ बोलने वाले थे
मगर उनके बोलने से पहले ही देविका बोली,"..मैं आपकी बात समझ गयी हू & इस
बारे मे हमे वीरेन ने & आड्वोकेट कामिनी शरण ने भी आगाह किया है.शाम लाल
जी,आप मुझे 1 सुशील & सुलझी हुई बहू ला दीजिए,आपको यकीन दिलाती हू.उसके
अरमान,उसकी हसरत कभी भी अधूरे नही रहेंगे(दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे है)..बस 1 ऐसी लड़की ढूंड दीजिए
मेरे प्रसून के लिए!",


देविका की बात इतने भरोसे के साथ कही गयी थी की शाम लाल जी मना नही कर
सके,"ठीक है,मॅ'म.मैं आज से ही आपके काम पे लग जाता हू.यू समझिए की आपकी
चिंता आज से मेरी हो गयी." (दोस्तो ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानिया पर पढ़ रहे है)

"शुक्रिया,शाम लाल जी! बहुत-2 शुक्रिया.",सुरेन जी जज़्बाती होगये &
उन्होने उनके हाथ पकड़ लिए.देविका को अब थोड़ा चैन था,उसे यकीन था की शाम
लाल जी उसके बेटे के लिए 1 अच्छी लड़की ज़रूर ढूंड लेंगे.

"तो मिस्टर.धमीजा जब आपको हमारी सारी शर्ते मंज़ूर हैं तो बस ये तय करना
बाकी रह जाता है की आप कब से हमे जाय्न करते हैं.",सुरेन सहाय
मुस्कुराए.शिवा भी उनके कहने पे आहा चुपचाप बैठा दोनो की बाते सुन रहा
था.उसने इंदर के बारे मे जो मालूमत हासिल की थी उसके मुताबिक वो बिल्कुल
शरीफ,ईमानदार & मेहनती शख्स था मगर ना जाने क्यू शिवा को कुच्छ खटक रहा
था मगर क्या,ये उसके दिमाग़ मे साफ नही हो पा रहा था.

"आप कहें तो मैं कल से ही आ जाता हू,सर."

"ये तो बड़ी अच्छी बात होगी,मिस्टर.धमीजा.",उन्होने इंटरकम उठा के अपने
सेक्रेटरी को बुलाया.

"सर.",सेक्रेटरी फ़ौरन कॅबिन मे आ गया.(दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे है)

"विमल,ये हैं हमारे नये मॅनेजर,मिस्टर.इंदर धमीजा.ज़रा इन्हे सभी से मिला
देना & इनका कॅबिन भी इन्हे दिखा देना.",फिर वो इंदर से मुखातिब
हुए,"मिस्टर.धमीजा,विमल आपको सारे कामो का भी ब्योरा दे देगा & अगर आप
एस्टेट का जायज़ा लेना चाहें तो हमारे सेक्यूरिटी मॅनेजर मिस्टर.शिवा के
साथ जाएँ.इनसे बेहतर तो मैं भी अपनी एस्टेट को नही जानता!",अपनी ही बात
पे सुरेन जी खुद ही हंस दिए तो शिवा भी मुस्कुरा दिया.

"हुंग..!ये मुझे बताएगा एस्टेट के बारे मे!..इस बेचारे को क्या मालूम की
अंधेरी रातो मे इसकी कमाल की सेक्यूरिटी की आँखो मे धूल झोंक के मैने
पूरी एस्टेट के ज़र्रे-2 को पहचाना है!",इंदर के दिल के ख़याल उसके चेहरे
पे नही आए,"..ज़रूर,सर.वैसे भी इन्हे तो मैं अपना सीनियर ही मानता
हू.जितना तजुर्बा इन्हे इस जगह का है उतना मुझे तो नही है.उम्मीद करता हू
मिस्टर.शिवा की आप हमेशा मेरी मदद करेंगे."

"ज़रूर,मिस्टर.धमीजा.आप बेफ़िक्र रहें.",शिवा खड़ा हो गया,अब उसके भी
जाने का वक़्त हो गया था.

इंदर सबसे इजाज़त लेके विमल के साथ जाने लगा की तभी सुरेन जी ने उन्हे
आवाज़ दी,"अरे विमल,मैं तो भूल ही गया था.भाई ज़रा मॅनेजर साहब के लिए
उनकी कॉटेज सॉफ करवा देना.ये कल से ही हमारे साथ काम शुरू कर रहे हैं."
(दोस्तो ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानिया पर पढ़ रहे है)

"ओके,सर.",विमल ने दरवाज़ा खोला मगर इंदर अभी भी खड़ा था.

"सर."

"यस,मिस्टर.धमीजा."

"सर,प्लीज़.आप मुझे मिस्टर.धमीजा कह के ना बुलाएँ,इंदर बोलिए."

"ओके.",सुरेन जी मुस्कुराए,उन्होने बिल्कुल सही शख्स चुना था.

"..और सर ये कॉटेज,माफ़ कीजिएगा,मगर उसमे कितने कमरे हैं?"

"सर,उसमे 5 कमरे हैं.",सुरेन जी को तो याद भी नही था कि कॉटेज की अंदर की
बनावट कैसी है,ये जबाब इंदर को विमल ने दिया.

"सर,उस से छ्होटा कोई घर नही मिल सकता क्या?"

"छ्होटा!मगर छ्होटा क्यू?",सुरेन जी के माथे पे शिकन थी & होंठो पे इंदर
की बात समझने की कोशिश करती मुस्कान.

"सर,मैं अकेली जान उतने बड़े घर मे क्या करूँगा.प्लीज़ मुझे कोई छोटा घर
दिला दीजिए."

"अरे इंदर ,आप अभी अकेले हैं कल को शादी होगी आपका परिवार होगा या कभी
कोई रिश्तेदार आ गया तो?",ये पहला इंसान था जोकि उतनी बड़ी कॉटेज ठुकरा
के छ्होटा घर माँग रहा था.शिवा भी हैरान था मगर जहा उसके बॉस को इस
हैरानी से खुशी हो रही थी की इंदर लालची नही है वही उसके दिल मे और खटका
होने लगा था..जो भी हो वो इस इंसान पे नज़र रखेगा,उसने तय कर लिया.

"सर,जब परिवार होगा तो मैं आपसे उस कॉटेज को माँग लूँगा लेकिन प्लीज़
सर,अभी मुझे कोई छ्होटा घर दे दीजिए." 

सुरेन जी ने विमल की ओर सवालिया निगाहो से देखा,"सर,है तो मगर वो
क्वॉर्टर है.",उसने थोड़ा सकुचाते हुए कहा & जान के क्वॉर्टर के पहले लगा
सर्वेंट्स लफ्ज़ नही बोला..पता नही कही नये मॅनेजर को बुरा लग गया तो!

"नही!मॅनेजर साहब वाहा नही रहेंगे."

"सर,प्लीज़.उसमे कितने कमरे हैं,विमल जी?"

"जी.बस 2."

"तब तो मेरे लिए बिल्कुल सही है सर."

"मगर आप सर्वेंट क्वॉर्टर्स मे कैसे रह सकते हैं?"

"क्यू नही,सर.आख़िर क्या बुराई है उसमे.प्लीज़ सर,मुझे कोई ऐतराज़ नही है
& आगे अगर ज़रूरत महसूस हुई तो मैं आपसे कॉटेज की चाभी माँग लूँगा."

"ठीक है.जैसी आपकी मर्ज़ी."

"थॅंक्स,सर.",इंदर वाहा से निकल गया,उसका काम हो गया था.उसे पता था की
कौन सा क्वॉर्टर खाली है-ठीक रजनी के क्वॉर्टर के उपर वाला.मॅनेजर'स
कॉटेज सहाय जी के बंगल से दूर था मगर क्वॉर्टर बिल्कुल नज़दीक था & वाहा
से वो आसानी से बंगल पे नज़र रख सकता था. 

क्रमशः.........
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08-16-2018, 01:44 PM,
#44
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...

शिवा भी उसके पीछे-2 बाहर आया & जब कोई 20 मिनिट बाद इंदर दफ़्तर के लोगो
से मिलके बाहर अपनी बाइक के पास आया तो उसने शिवा को वाहा खड़े
मुस्कुराते पाया,"तो अपना समान कब ला रहे हैं आप,इंदर जी?"

"बस शाम को ही आ रहा हू.विमल जी ने क्वॉर्टर की चाभी दे ही दी है.",बाइक
पे बैठ इंदर ने हेल्मेट पहना.

"चाहें तो मेरी जीप ले जाइए.बाइक को यही रहने दीजिए."

"थॅंक्स,शिवा भाई मगर मेरा कोई इतना ज़्यादा समान भी नही है.",उसने बाइक
स्टार्ट की & निकल गया.शिवा उसे जाता देख रहा था....क्या था इंदर मे जो
उसे ठीक नही लग रहा था?..उसने अपने दिमाग़ पे बहुत ज़ोर दिया..उसकी तहे
खंगाली मगर वाहा से कुच्छ भी नही मिला.एस्टेट से बाहर जाते हुए रास्ते पे
इंदर की बाइक अब 1 छ्होटा से बिंदु जितनी दिख रही थी.उसने नज़रे उपर कर
आसमान की ओर देखा,काले बदल घिर रहे थे,लगता था तूफान आने वाला है. 


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"क्या हुआ,ड्राइवर?",कामिनी ने पीछे की सीट पे बैठे शीशा नीचे कर सर को
ज़रा सा बाहर निकाला.ज़ोर की बारिश के बीच उस सुनसान सड़क पे अभी ही उसकी
कार को खराब होना था.आज कोर्ट से वो सीधा किसी काम के सिलसिले मे पंचमहल
के बाहरी इलाक़े मे गयी थी.वहाँ से लौटते हुए शाम हो गयी थी.बारिस तो
दोपहर बाद ही शुरू हुई थी मगर हल्की थी.शाम ढलते-2 उसने बड़ा भयंकर रूप
ले लिया था.

"ड्राइवर ने कार का बॉनेट बंद किया & वापस अंदर आ गया,उसके कपड़े बिल्कुल
भीग चुके थे,"मेडम,कुच्छ समझ नही आ रहा.इतनी तेज़ बारिश है कि ढंग से देख
भी नही पा रहा हू.",उसने अपने रुमाल से अपना चेहरा पोच्छा,ऐसा लग रहा था
मानो नदी मे डुबकिया लगाके वो बाहर आया हो.(ये कहानी आप राज शर्मा के
ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )

बंद कार मे कामिनी को घुटन सी महसूस हुई,उसने शीशा नीचे किया..अच्छा फँसी
आज तो!अब इस मूसलाधार बारिश मे कौन आएगा यहा.तभी पीछे से आती हुई किसी
गाड़ी के हेडलाइट्स की रोशनी उसकी कार के पिच्छले शीशे पे पड़ी.ड्राइवर
फ़ौरन उतरा & अपने भीगने की परवाह किए बिना अपने हाथ हिला के उसे रोकने
का इशारा करने लगा.वो कार पास आई & उसकी कार के आगे जाके रुक गयी.ड्राइवर
उस कार के मालिक की खिड़की के पास जाके उस से बात करने लगा.थोड़ी देर बाद
उस कार का दरवाज़ा खुला & उसमे से उसका मालिक उतरा.कामिनी ने उसे देखने
की कोशिश की मगर विंड्स्क्रीन पे तेज़ी से बहते पानी मे उसे सब धुँधला
नज़र आ रहा था.

जैसे ही वो शख्स पास आया कामिनी चौंक पड़ी,"अरे वीरेन जी,आप?"

"हां,आइए मेरी कार मे चलिए.",कामिनी उतरी & भागती हुई उसकी कार तक
पहुँची.बारिश इतनी तेज़ थी की उतनी सी दूरी मे भी कामिनी बुरी तरह भीग
गयी.

"मेडम,आप इनके साथ जाइए.यहा बगल मे मेरा 1 रिश्तेदार रहता है,मैं उसके
साथ कार किसी तरह उसके घर तक ले जाता हू & बारिश रुकते ही उसे ठीक करवा
के कल घर ले आऊंगा."

"ठीक है,जगन..",कामिनी ने अपना पर्स खोला,"..ये कुच्छ पैसे रख लो.",वीरेन
ने कार आगे बढ़ा दी.

"कहा से आ रही थी आप?",कामिनी ने जवाब देते हुए पाया की उसकी सफेद सारी &
ब्लाउस गीले होके उसके जिस्म से ना केवल पूरी तरह चिपक गये हैं बल्कि और
झीने भी हो गये हैं & वीरेन को उसका ब्रा & नीचे उसका पेट सॉफ नज़र आ रहे
होंगे.उसे अपन हालत पे शर्म आ गयी.उसका दिल कर रहा था की बस जल्दी से वो
अपने घर पहुँच जाए मगर शायद आज उपरवाले ने उसे परेशान करने की ठान रखी
थी.

"ऑफ..ओह!ज़रा देखिए तो!",वीरेन ने सामने की ओर इशारा किया.सड़क पानी से
लबालब भरी थी & आगे कुच्छ गाडिया उनमे फँसी भी हुई थी,"..अब तो आपके घर
जाना आज मुमकिन नही."

"अब क्या करू?",कामिनी के माथे पे परेशान की लकीरें खींच गयी.

"आप बुरा ना माने तो 1 बात कहु.",वीरेन ने उसे देखा तो कामिनी के ब्लाउस
से झँकता उसका सफेद ब्रा & उसका क्लीवेज उसे नज़र आ गया.वीरेन की निगाहे
1 पल को भटकी मगर फ़ौरन वापस कामिनी की निगाहो से मिल गयी. (ये कहानी आप
राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )

"हां,कहिए."

"मेरा घर यही पास मे है.वाहा चलिए.जब मौसम ठीक हो जाएगा तो मैं आपको खुद
आपके घर छ्चोड़ आऊंगा."

"आपको बेकार तकलीफ़ होगी."

"इसमे तकलीफ़ की क्या बात है & इस वक़्त और को भी रास्ता भी तो
नही.",वीरेन ठीक कह रहा था.बारिश थमती दिखाई नही दे रही थी & थम भी गयी
तो जब तक सड़क का पानी नही निकल जाता तब तक वो घर नही जा सकती थी.

"ठीक है,चलिए."
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08-16-2018, 01:44 PM,
#45
RE: Kamukta Story बदला
कामिनी कार से उतर के वीरेन के बंगल मे दाखिल होने लगी तो वीरेन ने पीछे
से उसके गले बदन को देखा.सफेद सारी बदन से ऐसे चिपकी थी मानो वही उसकी
स्किन हो & उसके नशील जिस्म का 1-1 उभार नुमाया हो रहा था.वीरेन की
निगाहे उसकी नंगी कमर से उसकी चौड़ी गंद पे फिसली & उसी वक़्त कामिनी
पलटी & उसकी आँखो के सामने उसके लगभग नुमाया सीने के उभार चमक उठे,"आइए
अंदर चलते हैं."

"आए बैठिए,कामिनी जी..",वीरेन ने अपना 1 बातरोब कामिनी को दिया था.उसके
बाथरूम मे अपने कपड़े गीले उतार अपना बदन सूखा कामिनी ने उसे ही पहन लिया
था,"..ये लीजिए चाइ." (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ
में पढ़ रहे है )

"थॅंक्स.",कामिनी ने कप लिया & सोफे पे बैठ गयी.वीरेन का रोब उसे बहुत
बड़ा हो रहा था & उसकी आएडियो से कुच्छ उपर तक आ रहा था.

"आप यहा अकेले ही रहते है?"

"हां."

"कोई नौकर वग़ैरह भी नही है?"

"हैं,दोनो सवेरे आते हैं & सारा काम करके दोपहर तक चले जाते हैं.",वीरेन
ने भी कपड़े बदल लिए थे & वो भी उसके साथ चाइ की चुस्किया ले रहा था.

"वैसे भी मुझे अकेला रहना ही ठीक लगता है.जैसे मर्ज़ी रहो जो मर्ज़ी
करो.",कामिनी ने उसकी तरफ मुस्कुराते हुए सवालिया नज़रो से देखा.

"आप कुछ ग़लत मत समझिए.अरे मैं ठहरा पेंटर.कभी-2 1-2 दिन तक बस पैंटिंग
ही बनाता रहता हू.कभी कयि दीनो के लिए गायब हो जाता हू.अब ऐसे मे जो साथ
रहेगा उसे परेशानी तो होगी ही & उस से ज़्यादा मुझे.काम करते वक़्त मुझे
पसंद नही की कोई मुझे डिस्टर्ब करे.इस वजह से लोग कभी-2 मुझे बदतमीज़ &
खाड़ुस भी समझ लेते हैं."

"उम्मीद करती हू अभी मेर वजह से आप डिस्टर्ब नही हो रहे हैं?"

"कैसी बात करती हैं कामिनी जी आप!ये तो मेरी ख़ुशनसीबी है की आज आप मेरे
साथ बैठी हैं & मुझ से बाते कर रही है.",कामिनी मुस्कुराइ & अपना खाली कप
मेज़ पे रखा.

"ना.मैने ग़लत कह दिया..अभी मैं खुशनशीब नही हू..खुशनसीब तो तब होता जब
आप मेरी पैंटिंग की सिट्टिंग के लिए तैय्यार हो जाती.",जवाब मे कामिनी ने
कुच्छ ना कहा बस सर झुका लिया.कमरे मे सन्नाटा पसर गया.उस खामोशी से
कामिनी को थोड़ी बेचैनी हुई तो उसने उसे तोड़ने की गरज से वीरेन से सवाल
किया,"वीरेन जी,आप क्यू बनाना चाहते हैं मेरी पैंटिंग?"(ये कहानी आप राज
शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )

वीरेन ने अपनी वही दिलकश मुस्कान फेंकी.कामिनी को उस पल वो बहुत ही हसीन
लगा.वो वही सोफे से टेक लगाके पाँव फेला के बैठ गया.

"कामिनी जी,पता नही कभी आपने सुना है या ना पर हम पेंटर्स फेज़स मे काम
करते हैं.",कामिनी ने अपनी बाई कोहनी अपने घुटनो टीका दी थी & उसी हथेली
पे अपनी ठुड्डी & गौर से उसे सुन रह थी,"..मैं आपको अपनी ही मिसाल देता
हू.जब मे कॉलेज मे था..यही पंचमहल मे..उस वक़्त मुझे इंसानी चेहरे बड़े
दिलचस्प लगते थे & मैं बस पोरट्रेट्स बनाता था.घरवालो के,दोस्तो के..या
फिर राह चलते कभी कोई दिल चस्प इंसान दिख गया उसका भी."

"..फिर मैं पॅरिस चला गया & वाहा मेरा 1 दूसरा फेज़ शुरू हुआ,मुझे शहर &
उनका माहौल,शहर मे बसने वालो की खास आदतो ने बहुत लुभाया & मैं उनकी
पेनट्ग्स बनाने लगा."

"उरबनिया..",कामिनी के मुँह से निकला,यह नाम दिया था उस दौर को किसी आर्ट
क्रिटिक ने.कामिनी ने किसी मॅगज़ीन मे पढ़ा था उस बारे मे & तस्वीरे भी
देखी थी,"..उसमे आपकी 1 बहुत मशहूर तस्वीर थी,मदर & चाइल्ड अट दा आइफल
टवर.",तस्वीर मे 1 बच्चा अपन मा के साथ खड़ा सर उठा के आइफल टवर को देख
रहा है & उन्दोनो के बगल मे टवर की परच्छाई पड़ रही है.बच्चे के चेहरे पे
बिल्कुल निश्च्छाल खुश है-जैसी की केवल बच्चे महसूस करते हैं मगर माँ के
चेहरे के भाव बड़े दिलचस्प थे.वो बच्चे को खुश देख मुस्कुरा रही है मगर
उस खुशी मे कही दर्द भी दिख रहा थ.कैमरे से खींची फोटो मे ये दिखना तो
बड़ा आसान है मगर रंग & कूची के साथ ऐसी कलाकारी,वो तो बस कमाल था!

"तो आप वकालत के साथ-2 आर्ट का भी शौक रखती हैं?"

"जी,लेकिन मेरा ज्ञान बस सतही है."

"वही सबसे अच्छा होता है..हां तो मैने कहा कि ये मेरा दूसरा & सबसे लंबा
फेज़ था,फिर मैं ऊब गया & 1 दिन दिल ने कहा की वापस घर चलो तो यहा चला
आया.कामिनी जी,यहा मैं आया था इस बार केवल हिन्दुस्तानी औरत की तलाश
मे.मैं आज की हिन्दुस्तानी औरत की तस्वीरे बनाना चाहता था,(ये कहानी आप
राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )आज की लड़की जोकि
मर्दो से कंधा मिला के नही बल्कि उनसे आगे चल रही है मगर फिर भी उसके
पहनावे मे,उसके रूप मे उसकी शख्सियत मे अभी भी अपनी मिट्टी की खुश्बू आती
है..",कामिनी बड़े गौर से उसे सुन रही थी,ये पहली बार था जब वो 1 कलाकार
वो भी वीरेन जैसे नामचीन पेंटर की सोच के बारे मे जान रही थी.

"..मगर मैं यहा आया तो मुझे बड़ी निराशा हुई,हमारी औरतो ने तरक्कत तो
बहुत की है मगर जहा तक उनकी शख्सियत का सवाल है वो अपनी विदेशी सथिनो की
ड्यूप्लिकेट होती जा रही हैं.."उसने कामिनी की आँखो मे देखा,"..जब मैने
पहली बार आपको देखा तो मुझे लगा की मेरी तलाश ख़त्म हो गयी.आप ही थी
जिन्हे मैं ढूंड रहा था-हौसले & हिम्मत से भरी,खूबसूरत मगर खस्लिस
हिन्दुस्तानी.",वो उठ खड़ा हुआ & दोनो खाली कप्स मेज़ से उठाए,"..मगर
मेरी किस्मत इतनी अच्छी नही थी & आपने इनकार कर दिया.",वो मुस्कुराया &
कप्स रखने किचन मे चला गया.

कामिनी के दिल मे उठा-पुथल मच गयी....किस शिद्दत के साथ इसने अपनी बात
कही थी & उन बातो मे कही भी कोई झूठ नही था..यानी की वो केवल 1 पॅनिटर की
हैसियत से ही उसके पास आया था..उसका शक़ की वो अपने भाई की वकील के करीब
रह ये जानना चाहता है की कही वो उस से छुपा के तो कुच्छ नही कर
रहा-बिल्कुल बेबुनियाद था.उसने 1 मासूम इंसान के उतने ही मासूम पेशकश को
नाहक ही ठुकरा दिया था.उसे बहुत बुरा लग रहा था.वो उठी & किचन मे चली
गयी,(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है
)वीरेन फ्रिड्ज से खाना निकाल के गरम कर रहा था.आज तक वो उसे 1 बदतमीज़ &
बद्दिमाग शख्स समझती आई थी जोकि अपने मतलब के लिए उसके करीब आना चाहता
था..कितनी ग़लत थी वो.हक़ीक़त ये थी की वीरेन 1 भला & मददगार इंसान था
जिसे सिर्फ़ 1 ही बात मे दिलचस्पी थी-पैंटिंग.

"वीरेन जी..",आवाज़ सुन वीरेन घुमा,"..आप जाइए & ड्रॉयिंग रूम मे
बैठिए.खाना मैं गरम करती हू.",उसने उसके हाथ से बर्तन लिया & माइक्रोवेव
मे रखा.वीरेन जाने लगा,"और हां..",किचन से निकलता वीरेन पलटा,"..मैं आपकी
पैंटिंग के लिए सिटिंग्स करने को तैय्यार हू."

वीरेन का मुँह हैरत से खुल गया & उसके चेहरे पे बेइंतहा खुशी का भाव आ
गया.कामिनी मुस्कुराइ & घूम के खाने का समान बर्तनो मे निकालने लगी.वीरेन
कुच्छ देर खड़ा उसे देखता रहा & फिर खुशी से मुस्कुराता ड्रॉयिंग रूम मे
चला गया.

"ट्ररर्नन्ग्ग....!",मूसलाधार बारिश के शोर के कारण & बाथरूम मे होने की
वजह से रजनी ने अपने क्वॉर्टर की डोरबेल ज़रा देर से सुनी.वो कुच्छ देर
पहले ही बंग्लॉ से लौटी थी & पूरी तरह से भीग गयी थी.अभी उसने अपना गीला
बदन पोंच्छा ही था कि ना जाने कौन आ गया.

"अब इस वक़्त कौन हो सकता है?....ज़रूर पड़ोस की गीता होगी.",बड़बाडदते
हुए रजनी ने सेफ्टी चैन लगाके दरवाज़ा खोला तो उसे इंदर बाहर खड़ा नज़र
आया.

"तुम!!",उसने फ़ौरन सेफ्टी चैन हटा के दरवाज़ा खोल इंदर को अंदर आने
दिया,"इंदर,तुम इस वक़्त यहा कैसे?"

"तुम्हारी याद ने दीवाना कर दिया तो चला आया.",इंदर ने उसे बाहो मे भर लिया.

"ओह्ह..छ्चोड़ो ना!तुम एस्टेट मे घुसे कैसे?कही किसी को पता चल गया तो
आफ़त आ जाएगी.",रजनी ने उसे परे धकेला.

"अच्छा!",इंदर ने बाहे ढीली की & उसकी बाहे पकड़ उसके चेहरे को
देखा,"..किसकी मज़ाल है जो सहाय एस्टेट के मॅनेजर से कोई सवाल करे?"

"मतलब की..",रजनी का मुँह हैरत से खुल गया.

"हां,मेरी जान.तुम्हारे सामने यहा का नया मॅनेजर खड़ा है.",उसने उसे फिर
से अपने सीने से लगा लिया & उसके चेहरे को अपने हाथो मे भर लिया,"ये सब
तुम्हारी वजह से मुमकिन हुआ है.",उसने उसके माथे को चूम लिया.

"ओह्ह..इंदर,मैं तुम्हारे लिए कुच्छ भी कर सकती हू.",रजनी ने उसके सीने
पे सर रख दिया,"..आज मैं बहुत खुश हू.",उसकी बाहे अपने प्रेमी की पीठ पे
कस गयी.

"और मैं भी.",इंदर ने अपने बाए हाथ से उसकी ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर
कर उसके होंठो को तलब किया तो रजनी ने भी बड़ी गर्मजोशी से उन्हे उसकी
खिदमत मे पेश कर दिया.बिल्कुल सच कहा था इंदर ने,इस लड़की की वजह से आज
उसने अपने बदले की ओर 1 पहला मज़बूत कदम रखा था.ये ना होती तो पता नही
उसे क्या-2 मशक्कत करनी पड़ती.

"उउंम्म..मेरा तो ध्यान ही नही गया,तुम तो बिल्कुल भीग गये हो.",रजनी ने
किस तोड़ी,"..चलो,जाओ बदन पोंच्छ लो तब तक मैं खाना निकालती हू."

"बदन तो पोंच्छूंगा मगर तौलिए से नही & मुझे जो खाना है वो डिश तो तुम
हो,जानेमन!",इंदर ने उसके चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.रजनी के दिल मे
सवाल उठे की वो अपनी कॉटेज से यहा तक आया कैसे..कही किसी को पता ना चल
जाए (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है
)..मगर उसका इश्क़ उसके सर पे सवार था & उसका जिस्म इंदर के आगोश मे
टूटने को बेचैन.ऐसे मे वो क्या करती!उसने भी बड़ी गर्मजोशी से उसके अस्र
के बालो मे उंगलिया फिराते हुए उसे खुद से चिप्टा लिया.

रजनी ने जल्दी मे नाइटी के नीचे कुच्छ नही पहना था & इंदर के सख़्त हाथ
उसके नाज़ुक अंगो पे बड़ी बेदर्दी से मचल रहे थे.रजनी के जिस्म की आग भी
धीरे-2 भदक्ति जा रही थी,उसने अपने हाथ इंदर की पीठ पे फिरते हुए उसकी
गीली कमीज़ को उसकी पॅंट से बाहर खींचा & फिर हाथ उसके अंदर घुसा गीली
पीठ सहलाने लगी.इंदर भी उसकी नाइटी उपर उठाते हुए उसके गले & क्लीवेज को
चूम रहा था.
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08-16-2018, 01:45 PM,
#46
RE: Kamukta Story बदला
"ऊव्व....!",इंदर के हाथ जैसे ही उसकी नंगी गंद से टकराए उसने उन्हे ज़ोर
से दबा दिया & अपने नखुनो से उन रसीली फांको को खरोंच भी दिया.जवाब मे
रजनी ने भी उसकी पीठ को हौले से नोच दिया.इंदर के दिल मे अपनी इस कठपुतली
के नंगे जिस्म को देखने की हसरत पैदा हुई & उसने नाइटी को खींच उसके सर
से उपर निकाल दिया.रजनी की साँसे तेज़ चल रही थी & उनकी वजह से किशमिश के
दानो जैसे कड़े निपल्स से सजी उसकी चूचिया उपर-नीचे हो रही थी.इंदर ने
नज़रे नीचे की तो देखा की उसकी झांतो से ढँकी चूत थोड़ी गीली सी लग रही
थी.

इंदर की निगाहे उसके जिस्म मे जैसे आग लगा रही थी.उसे शर्म सी आई & वो
आगे हो उसके सीने से लग गयी,"क्या देख रहे हो?"

"अपनी किस्मत पे यकीन नही आ रहा था.वही देख रहा था की तुम्हारे जैसा हीरा
मुझे कैसे मिल गया."

रजनी के दिल मे इतनी खुशी भर गयी की उसका गला भर आया.उसने सर उपर किया &
इंदर को पगली की तरह चूमने लगी.इंदर की बाजुओ की गिरफ़्त की वजह से दोनो
के जिस्म बिल्कुल चिपके हुए थे & उसका पॅंट मे बंद लंड रजनी की नाभि के
नीचे & उसकी चूत के उपर के पेट के हिस्से मे चुभ रहा था.रजनी का दिल अब
बिल्कुल बेक़ाबू हो गया था & उसमे आज इंदर की प्यार भरी बात ने उसकी सारी
शर्मोहाया मिटा के बस अपने प्रेमी के लिए ढेर सा प्यार & उसके जिस्म की
चाहत छ्चोड़ दी थी.(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में
पढ़ रहे है )

इंदर उसकी गंद मसल रहा था & उसके हाथ भी इंदर की गंद पे जम गये थे.इंदर
झुका & उसने उसका बाया हाथ अपनी गंद से हटा के आगे ला अपने लंड पे रख
दिया.पिच्छली बार की तरह इस बार रजनी ने हाथ पीछे नही खींचा बल्कि उसे
हल्के-2 दबाने लगी.इंदर का जोश अब अपने चरम पे पहुँच गया.वो जल्दी-2 अपनी
पॅंट उतारने लगा तो रजनी ने उसके हाथ हटाए & खुद उसके कपड़े निकालने लगी.

इंदर के नंगे होते ही दोनो फिर से 1 दूसरे की बाहो मे खो गये.थोड़ी देर
चूमने के बाद इंदर उसे उसके कमरे मे ले गया & दोनो बिस्तर पे लेट
गये.इंदर उसकी चूचिया चूस्ते हुए उसकी चूत मे उंगली कर रहा था & रजनी
अपने दाए हाथ मे उसके लंड को मजबूती से पकड़े हिला रही थी.उसने सोचा भी
नही था की वो इस तरह से 1 मर्द के लंड की ऐसी दीवानी हो जाएगी.लंड का 1
साथ मुलायम & सख़्त एहसास उसके दिल मे गुदगुदी पैदा कर रहा था.इंदर की
उंगली ने उसे जन्नत तक पहुँचा दिया था & वो लंड को पकड़े हुए बेचैन हो
कमर & बदन को हिलाते हुए आहे भरती झाड़ गयी. (ये कहानी आप राज शर्मा के
ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )

इंदर काफ़ी देर तक उसकी चूचियो से खेलता रहा.जब वो उठा तो रजनी की चूचिया
उसके होंठो के निशानो से भरी पड़ी थी.इंदर ने धीरे से उसका हाथ अपने लंड
से खींचा & फिर उसे सीधा लिटा दिया.रजनी ने सोचा की अब वो उसे चोद के
शांत करने वाला है मगर उसने ऐसा कुच्छ नही किया बल्कि उसे हैरान करते हुए
इंदर अपने घुटनो पे उसके सीने के बगल मे खड़ा हो गया & अपना लंड अपने बाए
हाथ मे पकड़ उसके होंठो से सटा दिया.

रजनी उसका इशारा समझ गयी & उसने फ़ौरन अपने होंठ खोल दिए & लंड को अपने
मुँह मे भर लिया.इंदर उसकी बाई तरफ था & उसने अपना बाया घुटना रजनी के
सीने पे हल्के से इसतरह जमाया की उसकी मोटी छातिया उसके नीचे दब गयी.फिर
तकियो की वजह से उठे हुए रजनी के सर को पकड़ के वो हौले-2 अपने लंड से
उसके मुँह को चोदने लगा.

रजनी सर बाई तरफ घुमा अपने मुँह मे उसके लंड का स्वाद चख ते हुए अपने
हाथो से इंदर की जंघे & गंद सहला रही थी.उसे बहुत मज़ा आ रहा था & उस से
भी ज़्यादा खुद पे आश्चर्या हो रहा था की वो कैसे झट से लंड को मुँह मे
लेने को राज़ी हो गयी!..और तो और अब वो लंड को तरह-2 से अपनी ज़ुबान &
होंठो से छेड़ अपने प्रेमी को जोश मे पागल कर रही थी.इंदर का सचमुच बुरा
हाल था.उसने अचानक रजनी के सर को ज़ोर से पकड़ लिया & लंड को उसके मुँह
मे ठुसने लगा.8 इंच का लूंबा,मोटा लंड रजनी के हलक मे जाने की कोशिश करने
लगा तो रजनी की सांस अटकने लगी.उसने इंदर के लंड के बगल मे पेट पे हाथ रख
उसे जैसे लंड बाहर खींचने का इशारा किया.

"सॉरी...आहह..!",इंदर ने अपने दिल पे काबू रखा.आमतौर पे वो ऐसा नही करता
था,उसके लिए औरत का जिस्म बस उसकी मर्दानी भूख को शांत करने का ज़रिया था
लेकिन रजनी की बात और थी.उसे नाराज़ कर या उसके दिल मे शक़ पैदा कर वो
अपने इंतकाम को ख़तरे मे नही डाल सकता था.उसने लंड आधा बाहर खींच लिया और
उतने से ही रजनी के मुँह को चोदने लगा.(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है ) रजनी भी उसकी गंद को थामे उसके धक्के
सहती हुई अपनी जीभ से लंड को छेड़ रही थी.

"आहह..आहह..!",इंदर का लंड रजनी की ज़ुबान के आगे घुटने टेक रहा था &
उसमे से उसका विर्य बलबला के निकलता हुआ रजनी के मुँह मे भर रहा था.हैरान
इंदर ने देखा की रजनी उसके लंड को पकड़ हिला के उसका सारा पानी मानो
निचोड़ रही है & उसे चाट-चाट के पी रही है.ये भोली सी लड़की बिस्तर मे
कैसी बिंदास हो गयी थी!मगर उस से भी ज़्यादा हैरत हुई खुद रजनी
को....कितना मज़ा आ रहा था उसे ये सब करने मे.उसने कभी सपने मे भी नही
सोचा था की वो लंड मुँह मे लेगी & इस तरह चांट-पोंच्छ के उस से गिरता रस
पिएगी.....लेकिन कितना मज़ा आ रहा था इस सब मे...कितनी मस्ती!उसकी चूत मे
कसक सी उठने लगी थी.

इंदर ने लंड उसके मुँह से खींचा & उसके बगल मे लेट गया & उसे बाँहो मे भर
लिया. (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )
थोड़ी देर दोनो बस 1 दूसरे से सटे लेटे रहे फिर रजनी ने ही पहल की.इंदर
के सोए लंड को उसने अपने हाथो मे लिया & उसे जगाने लगी.थोड़ी ही देर मे
लंड खड़ा हो गया तो इंदर ने उसे पीठ के बल लिटाया,उसके उपर चढ़ा & उसकी
टाँगे फैला के लंड को उसकी इंतेज़ार करती चूत मे दाखिल करने लग.दोस्तो
बाकी कहानी अगले पार्ट मे
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Reply
08-16-2018, 01:45 PM,
#47
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...
"ये बातरोब नही चलेगा....",अपने स्टूडियो मे खड़ा वीरेन सहाय अपनी
प्रेरणा कामिनी को देख रहा था,"..इसमे तो आपके बदन का आकार ही नही पता
चलता.",इस वक़्त वो 1 पेंटर था & कामिनी उसकी मॉडेल,"..1 मिनिट आप बैठिए
मैं कुच्छ करता हू.",ठुड्डी खुजाता वीरेन स्टूडियो के दूसरे कोने मे चला
गया.

कामिनी ने सर घुमा के स्टूडियो को देखा.बंगले के बड़े से हॉल मे वीरेन ने
अपना स्टूडियो बनाया था.1 कोने मे शेल्व्स & अलमारी मे पे उसके रंग,ब्रश
& बाकी समान था.उसके पास ही उसका ईज़ल पड़ा था.कमरे के दूसरे कोने मे 1
बड़ा सा पलंग था & उसी के बगल मे आयेटॅच्ड बाथरूम का दरवाज़ा.हॉल मे 1
बहुत बड़ी सी खिड़की थी & उसमे शीशे के दरवाज़े लगे हुए थे.इस वक़्त
बारिश की वजह से वो दरवाज़े बंद थे & एसी चालू था.खिड़किया इतनी बड़ी &
चौड़ी थी की उनपे 1 आदमी तो आराम से लेट सकता था,"आप ने इसे अपना बेडरूम
भी बनाया हुआ है क्या?" (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ
में पढ़ रहे है )

"नही..वो तो कभी कभार पैंटिंग करते हुए थक जाता हू तो यही सो जाता
हू.",वीरेन 1 अलमारी से कुच्छ कपड़े निकाल रहा था,"हां,मिल गयी."

"ये लीजिए.",उसने 1 लाल रंग की सारी & ब्लाउस कामिनी को दिया.

"ये औरतो के कपड़े आपके पास कैसे आए?",कामिनी ने मुस्कुराते हुए मज़ाक किया.

"कामिनी जी मैं 1 पेंटर हू..",वीरेन भी हंसा,"..वैसे तो मॉडेल्स को उनके
खुद के कपड़े लाने को कहता हू मगर कभी-कभार ज़रूरत पड़ ही जाती है तो ऐसे
कुच्छ कपड़े अपने पास रखने ही पड़ते हैं."

कामिनी बाथरूम मे जाके सारी पहनने लगी तो उसे कुच्छ भारी सामान फर्श पे
खींचने की आवाज़ आई.जब वो बाहर आई तो उसे उस आवाज़ का कारण पता चला,वीरेन
ड्रॉयिंग रूम से 1 दीवान खींच के वाहा ले आया था.दीवान 1 तरफ से इस तरह
उपर उठा हुआ था कि उसपे अढ़लेटी होके भी बैठा जा सकता था.

कामिनी के आते ही वीरेन ने उसे नज़र भर के सर से पाँव तक देखा,लाल लिबास
मे उसका गोरा रंग मानो भड़कते शोलो का धोखा दे रहा था.वो उसके करीब आया &
उसकी सारी को कमर के पास से पकड़ के थोड़ा ठीक किया.ऐसा करने से उसकी
उंगलिया कामिनी के चिकने पेट को छु गयी.मर्दाने एहसास से कामिनी के बदन
मे झुरजुरी सी हुई मगर वीरेन तो बस 1 पेंटर की हैसियत से उसके कपड़े ठीक
कर रहा था मगर ऐसा भी नही था कि उसे कुच्छ महसूस ना हुआ हो.कामिनी की
खूबसूरत & उसकी करीबी ने उसके दिल मे भी हलचल पैदा की थी मगर इस वक़्त
उसका ध्यान पूरी तरह से अपनी तस्वीर के उपर था.

"कामिनी आप इस्पे इस तरह से बैठिए.",वीरेन के कहे मुताबिक कामिनी अपनी
दाई करवट पे उस दीवान के उठे हिस्से पे अपनी दाई बाँह टीका के अदलेटी सी
लेट गयी,".(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है
).हां,बस ऐसे ही.",वीरेन ने उसके चेहरे को ज़रा सा उपर घुमाया & फिर अपने
ईज़ल के पास जाके उसपे नया काग़ज़ लगाने लगा.

कामिनी अब किसी मूरत की तरह पड़ी हुई थी & वीरेन उसकी तस्वीर बना रहा
था.वो 1 पल को उसकी ओर देखता & फिर अपने हाथ उस काग़ज़ पे चलाने
लगता.स्टूडियो मे बिल्कुल खामोशी च्छाई थी अगर कोई आवाज़ थी तो वो थी
खिड़कियो के शीशो पे पड़ती तेज़ बारिश की.कोई 1 घंटे बाद वीरेन ने वाहा
छाई खामोशी तोड़ी,"कामिनी अब आप चाहे तो अपनी गर्दन हिला सकती हैं मगर
ध्यान रहे बाकी बदन वैसे ही रखिएगा....या फिर आप चाहे तो थोड़ी देर के
लिए ब्रेक ले लें?"

"बस थोड़ा पानी पीला दीजिए.",वीरेन ने उसे पानी पिलाया तो कामिनी फिर से
वैसे ही लेट गयी.उसने अपना सर उठाके छत की ओर कर लिया था & बाकी बदन वैसे
ही दाई बाँह पे टीका वीरेन की ओर घुमा हुआ था.वीरेन तेज़ी से हाथ चला रहा
था मगर उसने गर्दन घुमा के कामिनी की ओर देखा तो उसके हाथ जहा के तहा रुक
गये.कामिनी अपना सर उपर उठाए & आँखे बंद किए हुई थी & उसके लंबे,काले बॉल
पीछे दीवान से नीचे लटक रहे थे.उसकी सारी थोड़ा सरक गयी थी & उसका
चिकना,गोरा पेट & उसके बीच की गोल,गहरी नाभि सॉफ दिख रहे थे.

वीरेन उस हसीना की खूबसुअरती को बस निहारे जा रहा था की तभी कामिनी की
सारी का पल्लू उसके बाए कंधे से थोड़ा और नीचे हुआ & उसकी लाल ब्लाउस मे
कसी बाई छाती नुमाया हो गयी.कामिनी ने ब्रा गीला होने की वजह से तो पहना
नही था सो उसका निपल का उभार ब्लाउस के कपड़े मे से सॉफ-2 दिख रहा
था.वीरेन का गला सुख गया & उसने थूक गटका....ना केवल खूबसूरत मगर उतनी ही
मस्तानी थी ये लड़की!इस वक़्त वो 1 पेंटर की नही 1 मर्द की निगाहो से
कामिनी को देख रहा था.उसकी आँखे उसके चेहरे से फिसलते हुए उसके सीने पे
आती & फिर नीचे उसके पेट तक पहुँच के ये अंदाज़ा लगाने लगती कि इसके नीचे
छुपि हुई उसकी चूत भी क्या बाकी बदन जितनी ही नशीली होगी या फिर उस से भी
ज़्यादा?कामिनी को 1 ही पोज़िशन मे लेटे-2 थकान सी महसूस हुई तो उसने
पैरो के पंजो को नीचे की तरफ तानते हुए उनमे आ गयी अकड़न को भगाने की
कोशिश की.

लाल नैल्पोलिश से सजे उसके नाख़ून वाले गोरे पैरो की ये हरकत देख वीरेन
के दिल मे उस हुस्न परी की शान मे सर झुका उन्हे चूम लेने की हसरत पैदा
हुई.उसे पता भी नही चला था मगर उसका लंड खड़ा हो चुका था.उसने अपनी नज़रो
के सफ़र को वापस पाँव से सर तक शुरू किया & जैसे ही सूकी निगाहे कामिनी
के सीने तक पहुँची कामिनी ने उसकी ओर सर घुमा दिया.(ये कहानी आप राज
शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )दोनो की आँखे चार हुई तो
कामिनी ने उसकी आँखो मे झलक रही उसके जिस्म की तारीफ & चाह-दोनो को पढ़
लिया मगर वीरेन ने भी फ़ौरन अपनी आँखे वापस ईज़ल पे टीका दी & उसके हाथ
फिर से उसपे चलने लगे.

तो जनाब मुझे घूर रहे थे!....कामिनी मन ही मन हँसी & अपना सर घुमा के
नीचे अपने जिस्म को देखा तो उसे उसका कारण भी समझ आ गया मगर उसने अपने
पेट को या फिर चूची को ढँकने की कोई कोशिश नही की.इस खूबसूरत मर्द ने
उसके भी दिल को गुदगूदाया था & उसके साथ थोड़ी बहुत छेड़-छाड करने मे उसे
कोई बुराई नही दिखाई दी.कामिनी ने सर घुमा के वीरेन की ओर देखा तो पाया
की वो पैंटिंग कर रहा है.उसे देखते हुए वो वापस सर घुमा रही थी कि तभी
उसका ध्यान वीरेन के पाजामे पे गया जहा 1 तंबू बना हुआ था.तंबू के आकर ने
उसे भी बेचैन कर दिया & उसकी चूत मे भी कसक उठने लगी.उसने हल्के से अपनी
जाँघो को आपस मे रगड़ा & आँखे बंद कर अपना ध्यान इन गुस्ताख ख़यालो से
हटाने लगी.

दोनो 1 दूसरे से आँखे चुराए अपने-2 कामो मे मगन थे-वीरेन 1 पेंटर के &
कामिनी उसकी मॉडेल के,मगर सच तो ये था की दोनो के दिलो मे बहुत उथल-पुथल
मची हुई थी.दोनो अब सिर्फ़ 1 दूसरे के जिस्मो के बारे मे सोच रहे थे &
दोनो के दिलो मे बस 1 ही सवाल था....क्या ये इंसान मुझे खुद के करीब आने
देगा?

"आअहह...हाआन्न....बस..थोड़ी..दे...र..और......",देविका अपने उपर चढ़े
अपनी चुदाई करते अपने पति सेइल्तिजा कर रही थी.सुरेन सहाय के दिल को आज
उनका जोश संभालने मे काफ़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रह था.बड़ी मुश्किल
से उन्होने अपनी बीवी से ये बात च्छूपा के उसकी चुदाई जारी रखी थी.

"हां..हान्न..हान्न्न्न्न......",देविका तेज़ी से अपनी मंज़िल की ओर बढ़
रही थी....बस थोड़ी देर और वो उसे ऐसे ही चोद्ते रहे की तभी सुरेन जी का
बदन झटके खाने लगा & उसे अपनी चूत मे उनका पानी भरता महसूस हुआ.उसे बड़ी
खिज महसूस हुई..अपनी मंज़िल के कितना करीब थी वो लेकिन उसने अपने जज़्बात
अपने पति से छुपाए & उन्हे ज़ोर से अपने आगोश मे भींच लिया & मस्ती मे
आहे भर झड़ने का नाटक करने लगी.सुरेन जी उसकी छातियो पे सर रखे हाँफ रहे
थे.

उसने महसूस किया की सुरेन जी ने सारा पनी छोड़ दिया है & उनका लंड अब
बिकुल सिकुदा सा उसकी चूत मे पड़ा है.उसे चिंता हुई की कही उनकी तबीयत
नसाज़ तो नही?

"सुनिए..",उसने उनका सर अपने सीने से उठाया,"..आपकी तबीयत ठीक है
ना?",उसने प्यार से उनके बालो मे हाथ फेरा.

"हां..हां..क्यू?",उन्होने झूठ बोला.वो उसे और परेशान नही करना चाहते थे
वैसे ही उनकी बीमारी & प्रसून की वजह से उसे क्या कोई कम तनाव था!

"मुझे आप थोड़ा परेशान लग रहे थे."

"ऐसी तो कोई बात नही.",सुरेन जी उसके उपर से उतरे & उसकी बगल मे लेट गये.

"आप अपनी दवाएँ तो समय से ले रहे हैं ना?",अपनी बाई कोहनी पे उचक उसने
उनके माथे को सहलाया.

"हां."

"बहुत अच्छे,अब सो जाइए.",वो प्यार से उनके बॉल सहलाने लगी.सुरेन जी ने
आँखे बंद कर ली....क्या वो दवा अब असर नही कर रही थी?..उन्हे इतनी घबराहट
क्यू महसूस हो रही थी देविका की चुदाई करते वक़्त?..अब डॉक्टर से मिलना
ही होगा मगर देविका को इस बात का पता नही चलना चाहिए नही तो वो और परेशान
हो जाएगी...इन्ही ख़यालो मे डूबे हुए कब उन्हे नींद ने आ घेरा उन्हे पता
ही ना चला.
-  - 
Reply
08-16-2018, 01:45 PM,
#48
RE: Kamukta Story बदला
कमरे मे उनके खर्राटे गूँज रहे थे मगर देविका अभी भी जागी हुई थी.उसे लगा
की सुरेन जी काम के ज़्यादा बोझ की वजह से थके हुए थे & इसलिए आज उसका
आख़िर तक साथ नही दे पाए.उसने गर्दन घुमा के उन्हे देखा वो गहरी नींद मे
खर्राटे भर रहे थे (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में
पढ़ रहे है )लेकिन वो अभी भी प्यासी थी.उसने करवट बदल सोने की कोशिश की
मगर उसका जिस्म उसे सोने नही दे रहा था.बेताब हो उसने 1 ऐसा कदम उठाने की
सोची जो उसने आज तक नही उठे था.उसने फर्श पे गिरी अपनी नाइटी को हाथो मे
लिया & बिस्तर से उठ गयी.साइड-टेबल की दराज से उसने अपने कमरे की चाभी
उठाई & कमरे से बाहर निकल गयी.

बाहर आ उसने कमरा लॉक किया & बढ़ गयी अपने प्रेमी शिवा के कमरे की
ओर.पूरे घर मे सन्नाटा पसरा था सिर्फ़ बाहर हो रही मूसलाधार बारिश का शोर
था.उसने शिवा के कमरे का दरवाज़ा खोला & अंदर दाखिल हो दरवाज़े की
च्षिटकॅनी लगा दी.शिवा गहरी नींद मे था.देविका ने उसके बदन पे पड़ी चादर
हटाई तो देखा की वो भी उसी की तरह बिल्कुल नंगा था.

उसने अपनी नाइटी & चाभी बिस्तर के पास पड़ी 1 कुर्सी पे रखे & बिस्तर पे
चढ़ घुटनो के बल बैठ अपने प्रेमी के लंड को मुँह मे भर लिया.नींद मे डूबे
शिवा को लगा कि वो सपना देख रहा है की उसकी जानेमन उसके लंड को अपनी
ज़ुबान से चाट रही है मगर जैसे ही नींद टूटी तो उसने पाया की ये सपना नही
हक़ीक़त है.उसका दिल बेइंतहा खुशी से भर गया.उसे जगा देख देविका ने लंड
को मुँह से अलग किया & मुस्कुराते हुए उसके उपर चढ़ गयी.

उसकी चूत मे आग लगी हुई थी & अभी उसे बुझाने के सिवा उसे कुछ नही सूझ रहा
था.अपने घुटने दोनो तरफ जमा कर उसने लंड को चूत का रास्ता दिखाया &
उच्छल-2 कर चुदने लगी.शिवा उठ बैठा & उसे अपनी बाहो मे भर उसके सीने मे
अपना चेहरा दफ़न कर दिया.उसके सर को थामे देविका बड़ी ज़ोर से उछल रही
थी.सुरेन जी ने जो काम शुरू किया था शिवा उसे अंजाम तक पहुँचा रहा
था.उसके बाल खींच उसके सर को उसने अपनी चूचियो मे बिल्कुल भींच दिया.शिवा
की ज़ुबान को वो अपनी गोलाईयो पे महसूस कर रही थी.उसके बड़े-2 हाथ उसके
रेशमी जिस्म को बेचैनी से सहला रहे थे,उसकी चूत मे बन रहा तनाव अब
बिल्कुल चरम पे पहुँचा & उसके बाद जैसे उसके बदन मे बिजलियो की कयि
धाराएँ 1 साथ फूट पड़ी.

तेज़ आहे भरती अपनी जंघे अंदर की ओर भींचती अपने प्रेमी को अपने सीने से
चिप्टा देविका झाड़ रही थी मगर शिवा के लिए तो अभी शुरुआत थी.वो वैसे ही
बैठा उसकी चूचिया चूस रहा था,"शिवा.."

"ह्म्म...",शिवा उसकी बाई चूची को ऐसे चूस रहा था मानो छोड़ेगा तो उसकी
जान चली जाएगी.

"ये नया मॅनेजर कैसा आदमी है?तुम्हारे बॉस तो बड़ी तारीफ कर रहे थे."

"मुझे....पता नही कैसे कहु..",शिवा ने चूची को मुँह से निकाल लिया & उसे
हाथ से दबाने लगा.देविका को उसकी उलझन थोड़ी अजीब लगी.

"क्यू क्या हुआ?",उसने उसके सर को उपर कर उसके होठ चूम लिए.

"देविका,उसके बारे मे सभी कुच्छ ठीक है.ईमानदार है,सच्चा है,लालची नही है
मगर फिर भी मुझे उसके बारे मे कुच्छ खटक रहा है.",अभी तक शिवा टाँगे
फैलाए बैठा था.अब उसने देविका की गंद की मांसल फांको को अपने हाथो मे
थामा & थोड़ा उठ कर अपने घुटने मोड़ के बैठ गया.देविका बे भी अपनी टाँगे
उसकी कमर पे कस दी.

"लेकिन क्या?",देविका ने अपने नाख़ून उसकी पीठ पे हल्के से फिराए तो शिवा
का बदन सिहर उठा & अपनेआप ही उसकी कमर हिलने लगी & 1 बार फिर देविका की
चुदाई शुरू हो गयी.

"यही तो मैं समझ नही पा रहा हू.",देविका को भी अब थोड़ी चिंता होने
लगी.मनेजर एस्टेट का सबसे अहम इंसान था अगर उसी के बारे मे कोई शुबहा तो
फिर एस्टेट का क्या होगा & फिर शिवा जैसा इंसान भी पशोपेश मे दिख रहा हो
तो चिंता तो लाज़मी थी (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ
में पढ़ रहे है )मगर अगले ही पल उसकी चिंता दूर हो गयी,"..मगर तुम परेशान
मत हो,मैं उसपे कड़ी नज़र रखूँगा & जब तक मेरे दिल की ये उलझन सुलझ ना
जाए मैं चैन से नही बैठूँगा.",उसने उसकी गंद की फांको को अपने हाथो तले
मसला & उसके होंठो को चूमते हुए उसे चोदने लगा.

देविका जानती थी की शिवा फालतू बाते नही करता.उसकी बातो से उसे बहुत
सहारा मिला.उसने अपनी बाँहे उसके गले पे कसते हुए अपनी जीभ उसकी जीभ से
लड़ाई & उसकी चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगी.

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
क्रमशः...........
-  - 
Reply
08-16-2018, 01:45 PM,
#49
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...
"उम्म..छ्चोड़ो ना....प्लीज़!!!!...औउ मा...ऊव्व.....!",अंधेरे कमरे मे
रजनी की मस्त आवाज़े गूँज रही थी.वो अपने प्रेमी को बस सतही तौर पे मना
कर रही थी की वो उसके जिस्म से और ना खेले मगर उसका दिल तो चाहता था कि
अब बस पूरी उम्र बस वो ऐसे ही उसके मज़बूत जिस्म की पनाह मे पड़ी
रहे.इंदर & वो बिस्तर पे लेटे थे & इंदर उसकी चूत के दाने को दाए हाथ की
उंगली & अंगूठे से पकड़ के हल्के-2 मसल रहा था & उसकी ये हरकत रजनी को
जोश से पागल कर रही थी.

"तुम तो कहती थी कि तुम्हारे बॉस बीमार हैं मुझे तो बिल्कुल तन्दरुस्त
नज़र आए.",इंदर ने उसके होंठो पे अपनी ज़ुबान फिराई.

"उम्म...",जवाब मे उसने उसकी ज़ुबान को अपने मुँह के अंदर खींच लिया न&
कुछ पल उसे चूमती रही,"..नही इंदर,वो सचमुच बीमार है.यकीन मानो उन्हे दिल
की बीमारी है."

"अच्छा.."..तो फिर मेरी दवा अपना कमाल क्यू नही दिखा रही.कितनी मुश्किल
से उसने उस दवा का नाम & फिर उसकी जगह उस स्लो पॉइजान को ढुंडा था (ये
कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )जो उसने उनकी
दवा की जगह रखा था...कही सहाय ने उसकी रखी डिबिया बदल के नयी डिबिया तो
नही ले ली..अब ये कैसे पता चलेगा?..यानी उसे कुच्छ और तरीका अपनाना
पड़ेगा...,"अहह...ह......ऊहह...ऊहह...!",उसकी उंगलियो की हरकत से झड़ती
रजनी ने उसके ख्यालो को तोड़ा.

वो उसके बाई तरफ लेटी साँसे लेती हुई अपने जिस्म को अभी-2 मिली खुशी का
पूरा लुत्फ़ उठा रही थी.इंदर ने उसे करवट ले अपनी ओर घुमाया फिर उसकी बाई
टाँग हवा मे उठा के खुद भी अपनी बाई करवट पे हुआ & अपना लंड उसकी उसके रस
से भीगी चूत मे पेल दिया,"..ऊव्वववव....!",रजनी अपनी टांग उसकी कमर पे
कसते हुए उसके सीने से लिपट गयी.अपना बाया हाथ इंदर ने रजनी की गर्दन के
नीचे लगाया & दाए से उसकी गंद मसल्ने लगा.

"और तुम्हारे भाईय्या?"

"प्रसून भाय्या...",आज रजनी को इंदर के घर पे बिताई उस दोपहर से भी
ज़्यादा मज़ा आ रहा था,"..उनके बारे मे 1 मज़ेदार बात बताऊं?"

"हूँ.",इंदर के कन खड़े हो गये मगर वो झुक के उसकी ठुड्डी ऐसे चूमने लगा
मानो उसे कोई खास मतलब ना हो इस बात से.

"उम्म्म्म....!",रजनी ने अपना बाया हाथ उसकी पीठ पे फिराते हुए उसकी गंद
को सहलाया,"..मॅ'म उनकी शादी करना चाहती हैं."

"क्या?!",चौंक के इंदर उसकी ठुड्डी छोड़ उसे देखने लगा.

"हां..",& फिर चुद्ते हुए रजनी ने झड़ने तक उसे बताया की कैसे शाम लाल जी
के आने पे उसके कान मे ये बात पड़ी थी & देविका & सुरेन सहाय अपने वकील
से भी इस बारे मे बात कर रहे थे.झड़ने के कुछ देर बाद इंदर ने लंड निकाला
तो रजनी ने थकान से चूर हो आँखे बंद कर ली.उसे सोता देखा इंदर उठा & कमरे
की खिड़की तक चला गया.अभी भी बारिश वैसे ही ताबड़तोड़ हो रही थी....आख़िर
उसे इस बात का पता कैसे नही चला?..ये शादी तो नही हो सकती किसी भी हालत
मे नही!..(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है
)उसका पूरा प्लान चौपट हो जाएगा अगर उस पागल की शादी हो गयी तो.ये शादी
का ख़याल तो पक्का देविका के दिमाग़ की उपज होगा.सुरेन सहाय के बस का नही
था ऐसा सोचन.उसने जितना सोचा था देविका उस से भी कही ज़्यादा चालाक थी.आज
वो बहुत खुश था वो एस्टेट मे घुस जो गया था मगर इस नयी खबर ने उसकी खुशी
काफूर कर दी थी.

उसका दिल बेचैन हो उठा & उसे शराब की तलब लगी मगर यहा शराब थी कहा.वो
मुड़ा & रजनी की ओर देखा.वो बेख़बर सो रही थी.उसने अपने कपड़े पहने & सोई
हुई रजनी के बदन पे चादर डाली & वाहा से निकल उसके क्वॉर्टर के ठीक उपर
अपने क्वॉर्टर मे चला गया.


कामिनी ने आँखे खोल खिड़की के बाहर देखा तो पाया की सुबह हो चुकी थी &
बारिश भी रुक चुकी थी मगर बादल अभी भी छाए थे.रात काफ़ी देर तक वीरेन
सहाय पैंटिंग बनाता रहा था & कोई 1 बजे उसने उसे छ्चोड़ा था.वो उसी के
गेस्ट रूम मे अभी सोकर उठी थी.

बिस्तर से उतरी तो कामिनी ने देखा की उसके कपड़े आइरन करके पास पड़ी
कुर्सी पे रखे थे.घर मे कोई नौकर तो आया नही लगता था फिर इन कपड़ो को
प्रेस किसने किया?कामिनी की ब्रा & पॅंटी भी वाहा रखे थे....यानी की
वीरेन ने ही उसके कपड़े वाहा रखे थे..उसने उसके अंडरगार्मेंट्स भी
छुए..इस ख़याल से कामिनी के गाल शर्म से लाल हो गये.

रात को वो वीरेन की दी सारी पहन के ही सो गयी थी.सारी उतार अपने कपड़े
पहनते हुए उसे रात की बाते याद आ गयी.(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )पैंटिंग बनाते वक़्त दोनो ने 1 दूसरे से
नज़रो का जो खेल खेला था उसने उसके दिल मे अभी फिर से गुदगुदी पैदा कर दी
& उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.

कपड़े पहन वो बाहर आई,"गुड मॉर्निंग,कामिनी जी!"

"गुड मॉर्निंग."

"आइए चाइ पीजिए.",दोनो बैठ के चाइ पीने लगे.चाइ पीते वक़्त भी कामिनी ने
गौर किया की वीरेन बीच-2 मे उसके चेहरे को देख रहा था.चाइ पीते हुए कोई
खास बातचीत नही हुई & उसके ख़त्म होते ही कामिनी ने चलने की बात की.

"चलिए मैं छ्चोड़ देता हू.",वीरेन उठा & थोड़ी ही देर बाद दोनो उसकी कार
मे कामिनी के घर के लिए रवाना हो गये.घर पहुँचते ही कामिनी ने वीरेन को
उसके घर मे आ साथ नाश्ता करने का न्योता दिया मगर वीरेन ने काम का बहाना
कर उसे शालीनता से मना कर दिया.

कार गियर मे डाल उसने कामिनी की ओर देखा,"तो आज शाम आप आ रही हैं ना?"

"हां.आने के पहले मे आपको फोन कर दूँगी."

"ओके.तो शाम को मिलते हैं.",वीरेन की नज़रे उसके चेहरे से फिसल उसके झीनी
सारी मे से झाँकते उसके क्लीवेज पे आई मगर फ़ौरन सँभाल गयी.उसने क्लच
छ्चोड़ा तो कार आगे बढ़ गयी & वाहा से निकल गयी.

वीरेन ने कहा था की पैंटिंग बनाने मे समय लगता है & अभी कामिनी को उसके
पास कुच्छ दीनो तक आना पड़ेगा.कामिनी इसके लिए तैय्यार हो गयी थी,उसने
कहा की शाम को काम के बाद जो 2-3 घंटे उसके पास बचते थे उसी समय मे वो
उसकी पैंटिंग के लिए आ जाया करेगी.

वीरेन की कार नज़रो से ओझल हुई तो कामिनी ने दरवाज़ा खोला & गुनगुनाते
हुए घर मे दाखिल हुई.वीरेन की दिलचस्पी ने उसके दिल मे भी उमंगे पैदा कर
दी थी.वो अपने कमरे मे गयी & काम के लिए तैय्यार होने लगी.अभी तो उसे
कोर्ट जाना था मगर उसका दिल चाह रहा था (ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )क फ़ौरन शाम हो जाए & वो वीरेन के बंगल पे
पहुँच जाए ये देखने के लिए की आज दोनो का नज़रो का खेल कहा तक पहुँचता
है.

-------------------------------------------------------------------------------

"तो इंदर जी,समझ मे आ गया आपको सारा काम?",उसकी लाई फाइल पे सुरेन सहाय
ने दस्तख़त किए.

"यस सर.स्टाफ के लोग काफ़ी मदद कर रहे हैं इसलिए कोई परेशानी नही हो रही है."

"बहुत अच्छे लेकिन अगर कोई भी परेशानी हो तो मुझे ज़रूर बताएँ."

"थॅंक यू,सर.",इंदर फाइल ले वाहा से बाहर निकलने लगा.दरवाज़ा खोलते ही
उसने देखा की शिवा वाहा 1 फाइल लिए चला आ रहा था.दोनो ने मुस्कुरा के 1
दूसरे को ग्रीट किया & फिर शिवा अंदर घुस गया & इंदर बाहर चला गया.

"सर,ये उस सेक्यूरिटी सिस्टम्स वाली कंपनी ने अपना कोटेशन दिया है,1 बार
आप इसे चेक कर लीजिएगा."

"ओके.शिवा.1 बात बताओ भाई?"

"पुच्हिए,सर."

"क्या हमे सच मे इन चीज़ो की ज़रूरत है?"

"बिल्कुल है,सर.",शिवा ने उनपे बहुत ज़ोर डाला था की एस्टेट की हिफ़ाज़त
के लिए अब बाडो & तारो से उपर उठना पड़ेगा,"..सर,बाडेन & तार तो ठीक है
मगर इतने बड़े इलाक़े के चप्पे-2 पे हर वक़्त नज़र रखना तो मुश्किल है
चाहे आप कितने भी आदमी क्यू ना भरती कर ले.ये मशीन्स हमारे काम को आसान
करेंगी & हम अपना सेक्यूरिटी स्टाफ भी कोई 20% तक कम कर सकते हैं.."

"..जो पैसे यहा खर्च हो रहे हैं,आप ये सोचिए की वो पैसे सेकर्टी स्टाफ को
कम कर के बचा लिए जाएँगे."

"हूँ,तुम्हारी बात तो ठीक लगती है,फिर भी मैं 1 बार ये कोटेशन & इस मामले
मे तुमने जो मुझे रिपोर्ट मुझे दी थी उसे फिर से पढ़ लेता हू."

"ओके,सर.",शिवा वाहा से चला गया.

-------------------------------------------------------------------------------

"वाउ!",कामिनी वीरेन के साथ उसके स्टूडियो मे खड़ी उसकी बनाई खुद की
पैंटिंग देख रह थी,"..कितनी सुंदर पैंटीइंग बनाई है वीरेन आपने..मैं ऐसी
दिखती हू क्या?!...यकीन नही होता.ये आपके हाथो का कमाल है!",वीरेन की
पैंटिंग मे कामिनी की शख्सियत पूरी उभर के आई थी.पैंटिग देखने पे ये लगता
था मानो को रानी अपने दीवान पे बैठी हो,उसके चेहरे पे रौब झलक रहा था मगर
वो घमंडी नही लग रही थी बल्कि बड़ी ही अज़ीम लग रही थी.

"जी नही.ये आपकी शख्सियत का कमाल है.आप जैसी हैं वैसे ही मैने उसे इस
काग़ज़ पे उतार दिया है.",वीरेन मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था.उसकी
नज़रो मे अपनी तारीफ देख 1 पल को कामिनी जैसी विश्वास से भरी लड़की की
पॅल्को पे भी हया का बोझ आ पड़ा(ये कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग
कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है ).नज़रे झुका के वो फिर से अपनी तस्वीर
देखने लगी,वो जानती थी की वीरेन अभी भी उसे देखे जा रहा है.

"पैंटिंग तो बन गयी यानी मेरा काम ख़त्म?",उसने बात बदली.

"ख़त्म!अभी तो आपका काम शुरू हुआ है मोहतार्मा!"

"क्या मतलब?"

"मतलब ये की ये तो पहली तस्वीर है.अभी तो मैं तब तक आपकी तस्वीरे
बनाउन्गा जब तक की मुझे ये ना लगे कि अब आपकी शख्सियत का कोई भी पहलू
दिखाने को बाकी नही रहा है."

"आप भी ना!अब ऐसी भी कोई खास बात नही है मुझमे.",कामिनी ने बोल तो दिया
मगर वीरेन की बातो ने उसके दिल मे बहुत खुशी भर दी थी.

"..जिसका मतलब है की मैं आपकी पेंटिंग्स बनाता रहूँगा.",वीरेन ने जैसे
उसकी बात सुनी ही नही थी.

"प्लीज़!अब और तारीफ मत कीजिए वरना मुझमे गुरूर आ जाएगा."

"बिना गुरूर के तो हुस्न फीका ही लगेगा.",इस आख़िरी बात ने तो कामिनी के
गालो को शर्म से और भी सुर्ख कर दिया.

"अच्छा-2.तो आज कौन सी पेनिंट्ग बनाएँगे मेरी?"

"अभी बताता हू.",वीरेन ने पास का कपबोर्ड खोला.बरसो बाद वो किसी लड़की के
लिए अपने दिल मे ऐसे जज़्बात महसूस कर रहा था.ऐसा नही था कामिनी से मिलने
से पहले उसका किसी लड़की से कोई रिश्ता नही था.कयि लड़किया आई & गयी मगर
कोई भी उसके दिल मे ऐसी जगह नही बना पाई की वीरेन को लगे की वो उसके बगैर
जी नही सकता.बस 1 लड़की थी जिसने उसके दिल मे ये एहसास पैदा किया था मगर
वो..

उसने अपने माज़ी के बारे मे सोचना छ्चोड़ा.वो जो भी था,जैसा भी था,बीत
चुका था & ये खूबसूरत लड़की जो उसके स्टूडियो मे खड़ी थी ये हक़ीक़त थी &
उसे अब बस इसी बात से मतलब था.
-  - 
Reply
08-16-2018, 01:46 PM,
#50
RE: Kamukta Story बदला
"आज आप ये लिबास पहेनिए.",उसने उसे काले रंग का 1 लहंगा-चोली थमाया & 1
छ्होटा सा बॉक्स भी.कामिनी ने उसे खोला तो उसमे कुच्छ चाँदी के ज़वरात
थे.उसने सभी चीज़े ले वीरेन की ओर सवालिया नज़रो से देखा.

"कामिनी,मैं आपको हर इंसानी जज़्बात को महसूस करते हुए दिखाना चाहता
हू..इस तस्वीर मे आप 1 बहुत ही विश्वास से भरी औरत नज़र आ रही हैं जोकि
आप हक़ीक़त मे भी हैं.",उसने अपनी बनाई हुई पैंटिंग की ओर इशारा
किया,"..अब अगली पैंटिंग मे मैं आपको गम महसूस करते हुए दिखाना चाहता
हू-इंतेज़ार का गम.ये लिबास हमारे गाओं की लड़किया अभी भी पहनती हैं.(ये
कहानी आप राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ में पढ़ रहे है )ये ज़वरात
आपके जिस्म पे सजे ये दिखाएँगे की आपको धन-दौलत की कमी नही है मगर जो
चीज़ आपके लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है,सबसे खास है आपके लिए वोही आपके
पास मौजूद नही & आप उसी के इंतेज़ार मे हैं."

वीरेन अपनी कला के प्रति पूरी तरह से समर्पित था & इस वक़्त कामिनी 1
कलाकार को ही सुन रही थी.वीरेन की बात पूरी होने पे वो मुस्कुराइ &
बाथरूम की ओर बढ़ गयी.कुच्छ लम्हो बाद जब वो बाहर आई तो उसे देख वीरेन का
मुँह हैरत से खुला रह गया.वो 1 पेंटर था & आम लोगो के मुक़ाबले उसकी
इमॅजिनेशन कुच्छ ज़्यादा सॉफ होती थी.ये लिबास चुनते वक़्त उसके दिमाग़
ने कामिनी की 1 तस्वीर बना ली थी कि वो कैसी दिखेगी मगर इस वक़्त जो
लड़की उसके सामने खड़ी थी वो उस तस्वीर वाली कामिनी से कही ज़्यादा हसीन
& दिलकश लग रही थी.

चोली थोड़ी तंग थी & इस वजह से कामिनी की छातिया आपस मे दब गयी थी & चोली
के गले से उसका क्लीवेज थोड़ा और उभर आया था.हाथो मे चूड़ियाँ खनक रही थी
& चलते हुए पैरो मे पायल.पतली कमर पे वो चाँदी का कमरबन्द झूल रहा था &
उसके उपर उसकी गहरी,गोल नाभि चमक रही थी.वीरेन ने उसके माथे पे चमक रही
बड़ी सी लाल बिंदी को देखा तो उसका दिल किया की इसी वक़्त उसे आगोश मे भर
उसके माथे को चूम ले & अपने जज़्बातो का इज़हार कर दे उस से.

वीरेन की निगाहे लगातार उसे देखे जा रही थी & कामिनी उन नज़रो की तपिश से
शर्मा रही थी & बेचैन भी हो रही थी,"क्या देख रहे हैं?",उसकी खनकती आवाज़
ने वीरेन को जगाया.

"हुन्न...हा-हन...क-कुच्छ नही..आइए यहा खड़े होइए..ऐसे.",वीरेन ने उसे
कमरे की बड़ी खिड़की के पास खड़ा कर के बाहर देखने को कहा.अब कामिनी की
पीठ उसकी तरफ थी.चोली की डोरिया पीठ के आर-पार हो रही थी मगर पीठ कमर तक
लगभग पूरी नुमाया ही थी.वीरेन ने उसकी पीठ से लेके कमर तक निहारा.पतली
कमर के बाहरी कोने फैलते हुए लहँगे मे गायब हो गये
थे....उफफफ्फ़....कितनी चौड़ी गंद थी & कितनी भरी हुई!उसका दिल किया की 1
बार उस दिलकश अंग पे अपने हाथ फिरा ले मगर उसने खुद पे काबू रखा & अपने
ईज़ल के पास खड़ा हो गया.

अब कामिनी अपने हाथ खिड़की के बदन शीशे पे रखे हुए बाहर देख रही थी,उसका
चेहरा थोड़ा सा दाई तरफ घुमा हुआ था & वीरेन भी उसके पीछे उसी तरफ खड़ा
अपनी कूची चला रहा था.कामिनी को ये तो पता चल गया था की उसके रूप ने
वीरेन के दिल को पूरी तरह से घायल कर दिया है & इस वक़्त वो कल की तरह
उसके चेहरे को देख नही पा रही थी इसलिए उसे ऐसा लग रहा था की पैंटिंग
करता वीरेन अपनी आँखो से उसके जवान हुस्न के घूँट पी रहा है.इस ख़याल ने
उसके दिल मे खलबली मचा दी थी.

इन्ही ख़यालो मे गुम वो खिड़की से बाहर बंगल के लॉन को देख रही थी
कि,"हाअ..!",अपनी कमर पे कुच्छ महसूस कर वो चौंक पड़ी.

"मैं हू.आप वैसे ही खड़े रहिए,प्लीज़.बिल्कुल भी मत हीलिएगा.",वीरेन ने
उसकी कमर की बाई ओर बँधी लहँगे की डोरी को ढीला कर दिया.कामिनी को इतनी
हैरानी हुई की पूछो मत..इसका इरादा क्या था?क्या वो उसको.."वीरेन..",उसने
उसे टोका.

"बस 1 मिनिट.",वीरेन के हाथो की लंबी उंगलिया उस डोरी को खोल लहँगे को
थोडा नीचे कर रही थी & फिर कस रही थी.उसके हाथो की कोमल छुअन ने कामिनी
के जिस्म की आग को भड़का दिया.वीरेन ने डोरी कस कर कमर को पकड़ के थोड़ा
सा हिला के सही पोज़िशन मे किया & वापस ईज़ल के पास चला गया.कामिनी की
चूत मे कसक सी उठी & उसका दिल किया की काश वीरेन उसके लहँगे को खोल अपनी
लंबी उंगलिया उसकी चूत मे घुसा देता.(दोस्तो ये कहानी आप राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर पढ़ रहे है)
इस गुस्ताख ख़याल के आते ही उसकी आँखे बंद
हो गयी & गले से बहुत धीमी सी आह निकली.

"क्या हुआ कामिनी?",वीरेन ने चिंतित हो पुचछा.

"क-कुच्छ नही.",कामिनी ने खुद को संभाला & खिड़की से बाहर देख अपने
दिमाग़ से वीरेन का ख़याल हटाने लगी.

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
क्रमशः........
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