Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
08-05-2017, 11:48 AM,
#1
Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
मैं और मेरी बहू 

लेखक --राज अग्रवाल

हिन्दी फ़ॉन्ट बाइ राज शर्मा
ये कहानी 44 साल की तलाक़ शुदा औरत प्रीति सहगल की है उसकी ज़ुबानी:-

मैं मनाली के एक पेंटहाउस में अपनी बहू रश्मि के साथ 69 की पोज़िशन में एक दूसरे की चूत चाट रहे हैं. साथ ही साथ हमारी गांद की चुदाई भी हो रही है. रश्मि की गांद मेरा बेटा राज मार रहा है मेरी गांद मेरे बेटे का खास दोस्त रवि मार रहा है. इसके पहले की में इसके आगे कुछ कहु में आप सब को ये बताना चाहती हूँ कि हम यहाँ तक कैसे पहुँचे.

मैं एक तलाक़ शुदा औरत हूँ जिसने बड़ी मुश्किल से अपने पति से अपने जीने का हक़ छीना है. मुझे तलाक़ के बाद एक चार कमरों का फ्लॅट, एक गाड़ी और अछी ख़ासी नकद रकम मिली जो हमारे गुज़ारे के लिए काफ़ी थी.

मेरा बेटा अपनी ग्रॅजुयेशन कर चुक्का था और अगले महीने शादी करना चाहता था. मेरा बेटा राज 22 साल की उमर और देखने में बहोत ही सुन्दर था, 6" फ्ट की हाइट, भूरी आँखें और उसका बदन देखने काबिल था. उसका सबसे खास और प्यारा दोस्त रवि की 6.01 फिट थी और बहोत ही ताकतवर था. रवि भी 22 साल का था और उसकी आँखों भी भूरी थी मेरे बेटे की तरह.

मेरा बेटा अपनी प्रेमिका रश्मि से शादी करना चाहता था, जो मुझे बिल्कुल भी पसंद नही थी, लेकिन मैने अपने बेटे के आगे मजबूर थी. ना जाने क्यों मुझे हमेशा यही लगता था कि वो मेरे बेटे के पैसों के पीछे है.

वैसे रश्मि देखने मे काफ़ी सुंदर थी, हिएत् 5.07, पतला बदन, पतली कमर उसका फिगर 36-24-36 था. उसे मिनी स्कर्ट्स और इस तरह के कपड़े पहनने का बड़ा शौक था. मेने अक्सर उसकी मिनी स्कर्ट में से उसके चूतर के बाहर झँकते देखे थे.

मेरा भी फिगर कुछ कम नही था, 44 साल की उमर में भी मेने अपने शरीर को संभाल कर रखा था. 35.25.36 मेरा फिगर था. मैं रोज़ दो घंटे स्विम्मिंग करती थी जिससे मेरा शरीर शेप में रह सके.

राज और रश्मि अगले महीने शादी करना चाहते थे इसलिए हमने शॉपिंग भी बहुत की थी. वो अपने हनिमून पर मनाली जाना चाहते थे. एक दिन में शॉपिंग करने के लिए घर से निकली पर मुझे याद आया कि में कुछ समान घर में भूल गयी हूँ.

जैसे ही में घर में दाखिल हुई मुझे राज और रवि की आवाज़े सुनाई दी. मैं एक बेडरूम की ओर बढ़ी और उनकी आवाज़े सुनने की कोशिश करने लगी. इतने में मेने रवि की आवाज़ सुनी,

"हां मेरे लंड को इसी तरह चूसो, बड़ा मज़ा आ रहा है."

मेने कमरे में झाँक कर देखा, रवि बेड के किनारे पर बैठा हुआ था और मेरा बेटा घुटनो के बल बैठ कर रवि के लंड को चूस रहा था. मुझे विश्वास नही हो रहा था कि मेरा बेटा जिसकी शादी एक महीने मे होने वाली थी वो अपने दोस्त का लंड चूस रहा था.

"राज तुम तो यार रश्मि से भी अच्छा लंड चूस्ते हो?" रवि ने कहा.

में जो सुन रही थी उसपर मुझे विश्वास नही हो रहा था क्या रश्मि और राज दोनो रवि के लंड के चूस्ते थे.

"मेरा पानी छूटने वाला है राज!" रवि बोला.

"आज तुम तुम्हारा पानी मेरे मूह पर छोड़ो," कहकर राज ने रवि के लंड को अपने मूह मे से निकाल दिया.

में रवि के लंड को देख कर चौंक गयी, मुझे अंदाज़ा तो था कि उसका लंड मोटा और लंबा है लेकिन आज रूबरू देख कर मैं चौंक गयी. उसका लंड करीब 10" इंच लंबा और 4" इंच मोटा था. राज भी उसके लंड को अपने हाथों में नही ले पा रहा था.

राज उसके लंड को हिला रहा था और साथ ही चूस्ते जा रहा था, अचानक ही रवि के लंड ने अपना पानी छोड़ दिया. मेने आज तक किसी को इस तरह पानी छोड़ते नही देखा था. रवि ने कम से कम 7 बार पिचकारी छोड़ी होगी. राज ने उसके लंड को चूस कर एक दम निढाल कर दिया था.

"आज तक मेने किसी लंड को इतना पानी छोड़ते हुए नही देखा." राज बोला.

"तुम्हे क्या अछा लगता है मेरा पानी छोड़ने का तरीका या तुम्हारे मूह में झड़ना." रवि ने पूछा.

"इस सवाल का जवाब देना बहोत कठिन है, जब तुम्हारा लॉडा हवा में पानी फैंकता है तो भी अच्छा लगता है और जब वो मेरे मूह में पिचकरी छोड़ता है तो ऐसा लगता है कि मेरे गले की सारी प्यास बुझ गयी है." राज ने रवि के लंड को और जोरों से चूस्ते हुए कहा.

"क्या तुम मेरी गांद मारने को तय्यार हो? मुझे सही में तुम्हारा लॉडा अपनी गांद में चाहिए," मेरे बेटे ने रवि से पूछा

मैं यही सोच रही थी कि मेरा बेटा इतना बड़ा लॉडा अपनी गांद में कैसे लगा, वहीं रवि ने क्रीम की शीशी निकाल अपने लौदे पर लगा फिर मेरे बेटे की गांद पर मल दी.

मेरा बेटा दरवाज़े के हॅंडल को पकड़ झुक गया और रवि ने अपना खंबे जैसा लॉडा उसकी गांद में घुसेड दिया.

रवि पहले तो धीरे धीरे गांद मारता रहा फिर जैसे ही उसने रफ़्तार पकड़ी मुझे विश्वास नही हुआ कि मेरा बेटा इतना मोटा और लंबा लंड झेल सकता है.

रवि पहले तो धीरे धीरे राज की गांद मार रहा था फिर उसने रफ़्तार पकड़ ली. मुझे विश्वास नही हो रहा था कि मेरा बेटा इतना मोटा लंड अपनी गांद में झेल लेगा.

"हाआआं ज़ोर सीईई मेरी गाआआंद मरूऊओ, पुर्र्ररा घःऊशाआआआआ दो" राज ज़ोर ज़ोर से रवि से कह रहा था.

"तुम्हारी गांद बहोत अछी है. सही में मुझे उतना ही मज़ा आ रहा जितना मुझे रश्मि की गांद मारने में आता है." रवि ने अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ाते हुए कहा.

"क्या तुम चाहते हो कि आज में तुम्हारी गांद का कचूमर बना दू," रवि ने तेज़ी से अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए कहा.

"हां आज ज़ोर से मेरी गांद मारो चाहे मेरी गांद फॅट ही क्यों ना जाए." मेरा बेटा गिड़गिदते हुए रवि से बोला.

रवि ने अपना लंड थोड़ा सा बाहर खींचा और ज़ोर से राज की गांद में पेल दिया.

"हां फाड़ दो मेरी गांद दो, छोड दो अपना पानी मेरी गांद में." कहकर राज अपने लंड पर मूठ मारने लगा.

"तुम्हारी गांद सही में बड़ी जानदार है, मुझे तुम्हारी गांद मारने में उतना ही मज़ा आ रहा है जितना मुझे रश्मि की गांद मारने में आता है," कहकर और ज़ोर से उसने अपना लंड अंदर पेल दिया.

रवि ने अपनी रफ़्तार तेज कर दी, और वो ज़ोर ज़ोर से अपना लंड राज की गांद के अंदर बाहर कर रहा था, "ले मेरा पूरा लंड ले ले मेरा छूटने वाला है." कहकर रवि ने अपना पानी राज की गांद में छोड़ दिया.

रवि रुकने का नाम नही ले रहा था. उसका लंड अब भी भी राज की गांद के अंदर बाहर हो रहा था, में पहली बार किसी को इतनी ताक़त से और ज़ोर से चोद्ते देख रही थी.
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08-05-2017, 11:48 AM,
#2
RE: Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
"आज में तुम्हारी गांद की धज्जियाँ उड़ा दूँगा," रवि और तेज़ी से गांद मारते हुए बोला.

"हाआआं फ़ाआआद दो मेर्रर्र्ररी घाआआआआआआण्ड को." राज उसका साथ देते हुए बोला.

रवि का लंड तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था. उसके चेहरे के खींचाव को देख कर लग रहा था कि वो दुबारा छूटने वाला है. रवि और ज़ोर ज़ोर से लंड पेल रहा था. दोनो की साँसे फूली हुई थी.

"ये मेराआआ छूटा" कहकर रवि ने वीर्य राज की गांद में उंड़ेल दिया.

"ःआआआआआआआआण मुझे महसूस हो ऱाःआआआआआआआ है, छोद्दद्ड दो सारा पानी मेरी गाआआंद में छोड़ दो." राज हानफते हुए बोल रहा था.

इनकी चुदाई देख में दंग रह गयी थी. मैं सोच रही थी क्या रश्मि को ये सब मालूम है? रश्मि भी तो रवि से चुदवाती है, तो ज़रूर मालूम होगा. में चुपचाप अपने कमरे में आ गयी. मेरी चूत भी इनकी चुदाई देख गीली हो गयी थी. मेरा खुद का मन चुदवाने को कर रहा था.

शाम को में शॉपिंग के लिए घर से निकली, मेरे ख़यालों में अभी भी राज और रवि का नज़ारा घूम रहा था. मेने सोच लिया था कि में उनपर ज़्यादा नज़र रखूँगी, शायद रश्मि की चुदाई देखने का मौका मिल जाए.

दो दिन बाद में काम पर से घर लौटी तो मुझे राज के कमरे से आवाज़ें सुनाई दे रही थी. मेने धीरे से खिड़की से झाँका तो देखा बिस्तर पर रवि, राज और रश्मि के बीच में बैठा हुआ था. तीनो नंगे थे और उनके कपड़े कमरे में चारों तरफ बिखरे पड़े थे. रश्मि घुटनो के बल होकर रवि का लंड चूस रही थी.

"अब मेरी बारी है." कहकर राज ने रश्मि से रवि का लंड लिया और चूसने लगा.

रश्मि बिस्तर के नीचे उतर राज के लंड को अपने मूह में ले चूसने लगी.

में असचर्या चकित थी कि मेरा बेटा और उसकी होने वाली बीवी दोनो ही लॉडा चूस रहे थे.

राज और रश्मि दोनो लंड को तब तक चूस्ते रहे जब तक रवि और राज के लंड ने पानी नही छोड़ दिया. रवि ने अपने वीर्य से राज का मूह भर दिया और राज ने अपने वीर्य की पिचकारी रश्मि के मूह मे छोड़ दी.

रवि ने फिर रश्मि को बिस्तर के किनारे पर बिठा उसकी टाँगे फैला दी. उसने दोनो टाँगे को और फैला अपनी जीव रश्मि की चूत पर रख उसे चाटने लगा. रवि अब ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत को चूस रहा था, वो अपनी जीव उसकी चूत के अंदर डाल चोद रहा था. थोड़ी देर में ही रश्मि के मूह से मादक सिसकारियाँ फुट रही थी.

"हाआआं चााआआतो और्र्र्ररर ज़ोर से चूवसो हाआआऐं यहीयईिन." रश्मि का शरीर अकड़ने लगा, वो अपनी गर्दन उन्माद में इधर उधर कर रही थी.

लगता था कि रवि इस खेल का पुराना खिलाड़ी था उसे अच्छी तरह मालूम था उसे क्या करना है, वो ज़ोर से अपनी जीव रस्मी की चूत में घुसा अपने होठों से पूरी चूत को मूह में ले लेता. वो ज़ोर ज़ोर से तब तक रश्मि की चूत चाट रहा था जब तक रश्मि की चूत ने पानीनही छोड़ दिया और वो थक कर उसे रुकने को कहने लगी,

"प्लीज़ रुक जाओ बसस्स्स्सस्स और नही में और सहन नही कर सकती."

में अगले चार घंटे तक इस चुदाई का नज़ारा देखती रही. चारों आसान बदल बदल कर चुदाई कर रहे थे, जैसे पूरी कामसुत्रा का अनुभव करना चाहते हो. में खुद गिनती भूल गयी कि कौन कितनी बार झाड़ा.

थोड़ी देर सुसताने के बाद रवि का लंड फिर तन कर खड़ा हो गया था, रश्मि भी उसका लंड अपनी चूत में लेना चाहती थी. रवि बिस्तर पर लेट गया और रश्मि उसपर चढ़ उसके लंड को चूत के छेद पर लगा खुद उसके लंड पर बैठ गयी.

रवि का पूरा लंड रश्मि की चूत में घुस चुक्का था. उसने रवि के लंड को खुद की चूत में जगह बनाने का समय दिया और फिर खुद धक्के लगाने लगी. उसके कुल्हों को पकड़ रवि भी नीचे से धक्के लगा रहा था. रश्मि के मूह से सिसकारियाँ फुट रही थी,

"ःआआआआआआआआआआण ओह य्ाआआआआआ आईसस्स्स्स्सीईई ही."

इतने में राज रश्मि के पीछे आ गया और उसे थोड़ा नीचे झुका उसकी गांद को सहलाने लगा. उसने अपनी दो उंगली उसकी गांद में घुसा दी, "ऊऊऊऊऊऊऊऊ माआआआ," रश्मि दर्द से कराही.

राज ने थोड़ी वॅसलीन ले अपने लंड और उसकी गांद पे लगा दिया, और फिर अपना 6' लंड उसकी गांद मे पेल दिया. अब रवि रश्मि को नीचे से चोद रहा था और राज पीछे से. मेने आज तक दो लंड एक साथ नही लिए थे, ये सीन देख के मेरी चूत में पानी आ गया.

टू बी कंटिन्यूड…………
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08-05-2017, 11:49 AM,
#3
RE: Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
गतान्क से आगे......

मेने आने वाले दिनो में कई बार रश्मि, राज और रवि को एक साथ चुदाई करते देखा. मुझे भी किसी से चुदवाये कई साल हो गये थे और मेरा भी शरीर गरमा उठता था.

ऐसा लगता था कि तीनो को सेक्स के अलावा कुछ सुझाई ही नही देता था. मैं नही जानती थी कि ये सब कुछ कितने दिनो तक चलेगा. अगले महीने राज और रश्मि की शादी होने वाली थी.

एक दिन जब वो तीनो चुदाई मे मशगूल थे मैं हर बार की तरह उन्हे छुप कर देख रही थी. मैं अपने ही ख़यालों में खोई हुई थी कि अचानक मेने देखा कि रवि मुझे ही देख रहा था. शायद उसने मुझे छुपकर देखते पकड़ लिया था. क्या वो सब को ये बता देगा ये सोचते हुए में वापस अपने कमरे मे आ गयी.

कुछ दिन गुज़र गये पर रवि ने किसी से कुछ नही कहा. मैं समझी शायद उसने मुझे ना देखा हो पर उस दिन के बाद मेने छुपकर देखना बंद कर दिया.

शनिवार के दिन राज और रश्मि अपने कुछ दोस्तों के साथ पिक्निक मनाने चले गये. मेने सोचा कि चलो आज घर में कोई नही में भी थोड़ा आराम कर लूँगी.

मेने अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगी हो गयी. एक रोमॅंटिक नॉवेल ले मैं सोफे पर लेट पढ़ने लगी. बेखायाली मे मुझे याद नही रहा कि मेने दरवाज़ा कैसे खुला छोड़ दिया. मुझे पता तब चला जब मेने रवि की आवाज़ सुनी, "किताब पढ़ी जा रही है."

मेने तुरंत अपना हाथ अपने नाइट गाउन की तरफ बढ़ाया पर रवि ने मेरे गाउन को मेरी पहुँच से दूर कर दिया था. मेने झट से एक हाथ से अपनी चुचियों को ढका और दूसरे हाथ से अपनी चूत को ढका.

"तुम यहाँ क्या कर रहे हो? तुम तो राज के साथ पिक्निक पर जाने वाले थे?" मेने थोड़ा चिंतित होते हुए पूछा.

"पता नही क्यों मेरा मन नही किया उनके साथ जाने को. उस दिन के बाद मेने सोचा आप अकेली होंगी चल कर आपका साथ दे दूं. आपको ऐतराज़ तो नही?" रवि ने जवाब दिया.

"ज़रूर ऐतराज़ है. आज में अकेले रहना चाहती हूँ. अब तुम यहाँ से चले जाओ." मेने अपनी आवाज़ पर ज़ोर देते हुए कहा.

रवि ज़ोर से हँसने लगा और अपने कपड़े उतार दिए, "मैं थोड़ी देर आपके साथ बिताकर चला जाउन्गा."

मैं उसके व्यवहार को लेकर चिंतित हो उठी. जब उसने कपड़े उतार शुरू किए तो में चौंक पड़ी. मेने गौर से उसके लंड की तरफ देखा, मुरझाए पन की हालत में भी वो कम से कम 6' इंच लंबा दिख रहा था. मेने अपनी नज़रें हटाई और पेट के बल लेट गयी जिससे उसकी नज़रों से अपने नंगे बदन को छुपा सकु.

"इसमे इतनी हैरानी की क्या बात है. तुम मुझे इससे पहले भी नंगा देख चुकी हो." उसने कहा.

उसे पता था कि में उन लोगो को छुप कर देख चुकी हूँ और में इनकार भी नही कर सकती थी. उसने एक बार फिर मुझे चौंका दिया जब वो मेरे नग्न चुत्तदो को सहलाने लगा.

साइड टेबल पर पड़ी तेल की शीशी को देख कर वो बोला, "प्रीति तुम्हारे चूतड़ वाकई बहोत शानदार है और तुम्हारा फिगर. लाओ में थोडा तेल लगा कर तुम्हारी मालिश कर देता हूँ."

मेने महसूस किया तो वो मेरे कंधों पर और पीठ पर तेल डाल रहा है. फिर वो थोड़ा झुकते हुए मेरे बदन पर तेल मलने लगा. उसके हाथों का जादू मेरे शरीर मे आग सी भर रहा था. उसका लंड अब खड़ा होकर मेरे चुतदो की दरार पर रगड़ खा रहा था. मेने अपने आप को छुड़ाना चाहा पर वो मुझे कस कर पकड़े तेल मलने लगा.

मेरे कंधों और पीठ पर से होते हुए उसके हाथ मेरी पतली कमर पर मालिश कर रहे थे. फिर और नीचे होते हुए अब वो मेरी नग्न जांघों को मसल रहे थे. अब वो मेरी गांद पर अपने हाथ से धीरे धीरे तेल लगाने लगा. बीच मे वो उन्हे भींच भी देता था. एक अजीब सी सनसनी मेरे शरीर में दौड़ रही थी.

रवि काफ़ी देर तक यूँही मेरी मालिश करता रहा. गांद की मालिश करते हुए कभी वो मेरी जांघों के बीच मे भी हाथ डाल देता था.

फिर उसने मुझे कंधे से पकड़ा और पीठ के बल लिटा दिया. इससे पहले कि में कोई विरोध करती उसने मेरे होठों को अपने होठों मे ले चूसना शुरू कर दिया. अब मुझसे अपने आपको रोक पाना मुश्किल लग रहा था आख़िर इतने दिनो से में भी तो यही चाहती थी. मेने अपने आपको रवि के हवाले करते हुए अपना मुँह थोड़ा खोला और उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल घूमाने लगा.

रवि मेरे निचले होठों को चूस्ते हुए मेरी थोड़ी फिर मेरी गर्दन को चूम रहा था. जब उसने मेरे कान की लाउ को चूमा तो एक अजीब सा नशा छा गया.

अपनी जीब को होले होले मेरे नंगे बदन पर फिराते हुए नीचे की और खिसकने लगा. जब वो मेरी चुचियों के पास पहुँचा तो वो मेरी चुचियों को हल्के से मसल्ने लगा. मेरे तने हुए निपल पर अपनी जीब फिराने लगा. अजीब सी गुदगुदी मच रही थी मेरे शरीर मे. कितने सालों से में इस तरह के प्यार से वंचित थी.

रवि मेरी आँखों में झँकते हुए कहा, "तुम्हारी चुचियों बड़ी शानदार है."

में उसके छूने मात्र से झड़ने के कगार पर थी. रवि ने मुझे ऐसे हालत पे लाकर खड़ा कर दिया था कि मेरी चूत मात्र छूने से पानी छोड़ देती.

वो मेरी चुचियों को चूसे जा रहा था और दूसरे हाथ से मेरी जांघों को सहला रहा था. झड़ने की इच्छा मेरे में तीव्र होती जा रही थी. मेरी चूत में आग लगी हुई थी और उसका एक स्पर्श उसकी उठती आग को ठंडा कर सकती थी.

मेने उसे अपनी बाहों में जकड़ते हुए कहा, "रवि प्लीज़ प्लीज़….."

"प्लीज़ क्या प्रीति बोलो ना? तुम क्या चाहती हो मुझसे? क्या तुम झड़ना चाहती हो?' जैसे उसने मेरी मन की बात पढ़ ली हो.

"हां रवि मेरा पानी छुड़ा दो, में झड़ना चाहती हूँ." मेने जैसे मिन्नत माँगते हुए कहा.

वह मेरी दोनो चुचियों को साथ साथ पकड़ कर मेरे दोनो निपल को अपने मुँह में लेकर ज़ोर से चूसने लगा. अपना मुँह हटा कर वो फिर से वही हरकत बार बार दोहराने लगा जब तक में अपने कूल्हे ना उचकाने लगी.

जैसे ही उसका हाथ मेरी चूत पर पहुँचा उसने अपनी उंगली मेरी गीली हुई चूत में घुसा दी. फिर वह अपनी दो और उंगली मेरी चूत में घुसा कर अंदर बाहर करने लगा.

रवि फिर मेरी टाँगो के बीच आ गया और मेरी चूत को अपने मुँह मे ले लिया. उत्तेजना के मारे मेरी चूत फूल गयी थी. वो मेरी चूत को चूस और चाट रहा था. रवि अपनी लंबी ज़ुबान से मेरे गंद के छेद से चाटते हुए मेरी चूत तक आता और फिर अपनी ज़ुबान को अंदर घुसा देता.

उसकी इस हरकत ने मेरी टाँगो का तनाव बढ़ा दिया और एक पिचकारी की तरह मेरी चूत ने उसकी मुँह मे पानी छोड़ दिया. मेरा शरीर मारे उत्तेजना के कांप रहा था और मुँह से सिसकारिया निकल रही थी.

रवि ने अच्छी तरह मेरी चूत को चाट कर साफ किया और फिर खड़े होते हुए मेरी ही पानी का स्वाद देते हुए मेरे होठों को चूम लिया.

"देखा तुम्हारी चूत के पानी का स्वाद कितना अच्छा है. और तुम्हारी चूत पानी भी पिचकारी की तरह चोदती है." उसने कहा.

"हां राज मेरी चूत उत्तेजना में फूल जाती है और पानी भी इसी तरह छोड़ती है. मेरे पति का अच्छा नही लगता था इसीलिए वो मेरी चूत को चूसना कम पसंद करता था." मेने कहा.

"में समझ सकता हूँ. अब में तुम्हे आराम से प्यार करना चाहता हूँ और तुम भी मज़े लो." कहकर रवि मेरी चेहरे पर हाथ फिराने लगा.

रवि उठ कर खड़ा हो गया और उसका लंड और तन कर खड़ा हो गया. में अपनी जिंदगी में सबसे लंबे और मोटे लंड को देख रही थी. रवि का लंड मेरे पति के लंड से दुगना था लंबाई मे. वो कमसे कम 9'इंच लंबाई मे और 5' इंच मोटाई मे था. मेरा जी उसके लंड को मुँह मे लेने को मचल रहा था और में डर भी रही थी क्योंकि मेने आज तक इतने लंबे लंड को नही चूसा था.

उसने मुझे धीरे से सोफे पर लिटा दिया. में आराम से लेट गयी और अपनी टाँगे फैला दी. उसने अपने लंड को मेरी चूत के मुँह पर रखा और धीरे से अंदर घुसा दिया.

मेने कस कर रवि को अपनी बाहों में जाकड़ लिया था. उसके लंड की लंबाई से मुझे डर लग रहा था कि कहीं वो मेरी चूत को सही मे फाड़ ना दे.

रवि धीरे से अपने लंड को बाहर खींचता और फिर अंदर घुसा देता. मेने अपनी टाँगे उठा कर अपनी छाती से लगा ली जिससे उसको लंड घुसाने में आसानी हो. जब उसका लंड पूरा मेरी चूत मे घुस गया था तो वो रुक गया जिससे मेरी चूत उसके लंड को अड्जस्ट कर सके. मुझे पहली बार लग रहा था कि मेरी चूत भर सी गयी है.
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08-05-2017, 11:49 AM,
#4
RE: Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
रवि ने मेरी आँखों मे झाँका और पूछा, "प्रीति तुम ठीक तो हो ना?"

मेरे मुँह से आवाज़ नही निकली, मेने सिर्फ़ गर्दन हिला कर उसे हां कहा और अपने बदन को थोड़ा हिला कर अड्जस्ट कर लिया. मुझसे अब रहा नही जा रहा था.

"पल्ल्ल्ल्ल्लेआआअसए अब मुज्ज़ज्ज्ज्ज्झे चूऊओदो." मेने धीरे से उससे कहा.

रवि ने मुस्कुराते हुए अपने कूल्हे हिलाने शुरू कर दिए. पहले तो वो मुझे धीरे धीरे चोद्ता रहा, जब मेरी चूत गीली हो गयी और उसका लंड आसानी से मेरी चूत मे आ जा रहा था अचानक उसने मेरी टाँगे उठा कर अपने कंधों पर रख ली और ज़ोर ज़ोर के धक्के लगाने लगा.

उसका हर धक्का पहले धक्के ज़्यादा ताकतवर था. उसकी साँसे तेज हो गयी थी और वो एक हुंकार के साथ अपना लंड मेरी चूत की जड़ों तक डाल देता. अब में भी अपने कूल्हे उछाल उसका साथ दे रही थी. में भी अपनी मंज़िल के नज़दीक पहुँच रही थी.

"चूऊऊदो राआआआवी आईसस्स्स्स्स्ससे ही हााआअँ ओह मेयरययाया छुउतने वायायेएयेयायायाल हाईईइ." में उखड़ी सांसो के साथ बड़बड़ा रही थी.

"हाआआं प्रीईएटी चूऊऊद डूऊऊ अपनााआ पॅनियीयैयियी मेरे लिईई." कहकर वो ज़ोर ज़ोर से चोदने लग गया.

रवि मुझे जितनी ताक़त से चोद सकता था चोद रहा था और मेरी चूत पानी पर पानी छोड़ रही थी. मेरा शरीर उत्तेजना मे कांप रहा था, मेने अपने नाख़ून उसके कंधों पे गढ़ा दिए. मेरी साँसे संभली भी नही थी की रवि का शरीर अकड़ने लगा.

"ओह प्रीईईटी मेरााआआआ भी चूऊऊथा ओह ये लो." रवि ने एक आखरी धक्का लगाया और अपना वीर्य मेरी चूत मे चोद दिया.

पिचकारी पिचकारी मेरी चूत मे गिर रही थी. जैसे ही हम संभले मेने अपनी टाँगे सीधी कर ली. रवि तक कर मेरे शरीर पर लुढ़क गया, हम दोनो का शरीर पसीने से तर बतर था.

"चलो नहा लेते है." रवि ने मुझे चूमते हुए कहा.

अब मुझे अपने किए हुए पर शरम नही आ रही थी. में नंगी ही उठी और रवि का हाथ पकड़ बाथरूम की ओर बढ़ गयी. हम दोनो गरम पानी के शवर की नीचे खड़े हो अपने बदन को सेकने लगे. हम दोनो एक दूसरे की बदन को सहला रहे थे और एक दूसरे की बदन पर साबुन मल रहे थे. मेने रवि के लंड और उसकी गोलियों पर साबुन लगाना शुरू किया तो उसका लंड एक बार फिर तन कर खड़ा हो गया.

में उसके मस्ताने लंड को हाथों मे पकड़े सहला रही थी. मुझमे भी फिर से चुदवाने की इच्छा जाग उठी. मैं उसके लंड को अपनी चूत पर रख रगड़ने लगी.

रवि भी अपने आपको रोक नही पाया उसने मुझे बाथरूम की दीवार के सहाहे खड़ा किया और मेरे चुतदो को अपनी ओर खींचते हुए अपना लंड मेरी चूत मे घुसा दिया.

उसके हर धक्के के साथ मेरी पीठ दीवार मे धँस जाती. में अपने बदन का बोझ अपनी पीठ पर डाल अपनी चूत को और आगे की ओर कर देती और उसके धक्के का साथ देती. थोड़ी ही देर में हम दोनो का पानी छूट गया.

हम दोनो एक दूसरे को बाहों मे लिए शवर के नीचे थोड़ी देर खड़े रहे. फिर में उसे अलग हुई तो उसका लंड मुरझा कर मेरी चूत से फिसल कर बाहर आ गया. मेरे मन में तो आया कि में उसके मुरझाए लंड को अपने मुँह मे ले दोनो के मिश्रित पानी का स्वाद चखू पर ये मेने भविष्य के लिए छोड़ दिया.

पूरा दिन हम मज़े करते रहे. कभी हम टीवी देखते तो कभी एक दूसरे को छेड़ते. पूरे दिन हम कई बार चुदाई कर चुके थे. मेने रात के लिए भी रवि को रोक लिया. रात को एक बार फिर हमने जमकर चुदाई की और एक दूसरे की बाहों मे सो गये.

दूसरे दिन मे सो कर उठी तो मन में एक अजीब सी खुशी और शरीर मे एक नशा सा भरा था. मेने रवि की तरफ देखा जो गहरी नींद मे सोया हुआ था. उसका लंबा मोटा लंड इस समय मुरझाया सा था. उसके लंड को अपने मुँह मे लेने से मे अपने आपको नही रोक पाई.

में उसके बगल मे नंगी बैठी थी. मेरी चूत और निपल दोनो आग मे जल रहा था. मेने अपना हाथ बढ़ाया और रवि के लंड को पकड़ अपने मुँह मे ले लिया. मैं ज़ोर ज़ोर से लंड चूसने लगी इतने में रवि जाग गया और उसके मुँह से सिसकारी निकल पड़ी, "हााआअँ प्रीईटी चूऊसो ईसीईईई चतत्तटो मेरी लंड को."

उसकी टाँगे अकड़ रही थी और में समझ गयी कि थोड़ी देर की बात है और वो झाड़ जाएगा. कई सालों बाद में किसी मर्द के वीर्य का स्वाद चखने वाली थी. में उसके लंड को चूसने मे इतना मशगूल थी कि कोई कमरे मे दाखिल हुआ है इसका मुझे ध्यान ही नही रहा.

में बिस्तर पर बैठी और झुकी हुई रवि का लंड चूस रही थी कि मेने किसी के हाथों का स्पर्श अपनी जांघों पर महसूस किया. रवि के लंड को बिना मुँह से निकाले मेने अपनी नज़रे उप्पर उठाई तो देखा कि मेरी बहू रश्मि एकदम नंगी मेरी जांघों के बीच झुकी हुई थी.

रश्मि मेरी जाँघो को चूमने लगी और उसके हाथ मेरे कूल्हे और कमर को सहला रहे थे. मैने अपना ध्यान फिर रवि का लंड चूसने मे लगा दिया और इतने में ही रश्मि मेरी चूत को मुँह में भर चूसने लगी.

उसकी जीब ने तो जैसे मेरी चूत की आग को और भड़का दी. में अपने कूल्हे पीछे की ओर कर उसकी जीब का मज़ा लेने लगी. इतने अपनी जीब के साथ रश्मि अपनी दो उंगली मेरी चूत मे डाल अंदर बाहर करने लगी. मेरा शरीर उत्तेजना मे भर गया.

मेने ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को चूस रही और साथ साथ ही रश्मि के मुँह पर अपनी चूत दबा रही थी. थोड़ी ही देर में मेरी चूत ने रश्मि के मुँह पर पानी छोड़ दिया.

अचानक रवि ने मेरे सिर पर हाथ रख उसे अपने लंड पे दबा दिया. उसके लंड को गले तक लेने मे मुझे परेशानी हो रही थी कि उसके लंड ज़ोर की पिचकर छोड़ दी. इतना पानी छूट रहा था की पूरा वीर्य निगलना मेरे बस की बात नही थी. उसका वीर्य मेरे होठों से होता हुआ मेरी चुचियों पर गिर पड़ा.

रश्मि ने आगे बढ़ मेरे चुचियों परे गिरे वीर्य को चाट लिया और मेरी चुचियों को चूसने लगी.

"क्या इनकी चुचियाँ काफ़ी बड़ी नही है?" रश्मि ने मेरे निपल्स को भींचते हुए रवि से पूछा.

रवि के लंड से छूटा वीर्य अभी भी मेरे होठों पे लगा हुआ था. में बिस्तर पर आराम से लेट गयी थी, तभी रवि ने मेरे होठों को चूम कर मुझे चौंका दिया. उसने मेरे होठों को चूस्ते हुए अपनी जीब मेरे मुँह मे डाल दी. मैं इतनी उत्तेजित हो गयी कि मुझे लंड लेने की इच्छा होने लगी.

रवि ने मेरी चूत को अपनी उंगलियों से फैला एक ही ज़ोर के धक्के मे अपना लंड मेरी चूत मे अंदर तक पेल दिया. उसके एक ही धक्के ने मेरी चूत का पानी छुड़ा दिया.

रश्मि मेरे उप्पर आ गयी और मेरे चेहरे के पास बैठ कर अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी, मैं डर गयी, "प्लीज़ रश्मि ऐसा मत करो, मेने आज तक ये सब नही किया है." मेने विरोध करते हुए कहा.

"बेवकूफ़ मत बनो. वक्त आ गया है कि तुम ये सब सीख लो. वैसे ही करते जाओ जैसे मेने तुम्हारी चूत चूस्ते वक़्त किया था." रश्मि ने कहा.

"रश्मि अगर तुमने जिस तरह से मेरे लंड को चूसा था उससे आधे तरीके से भी तुम चूत चतोगी तो रश्मि को मज़ा आ जाएगा." रवि ने मेरी चूत मे धक्के लगाते हुए कहा.

मेने अपना सिर थोडा सा उप्पर उठाया और अपनी जीब बाहर निकाल ली. मुझे पता नही था कि चूत कैसे चाती जाती है इसलिए मैं अपनी जीब रश्मि की चूत के चारों और फिराने लगी.

रश्मि की चूत इतनी मुलायम और नाज़ुक थी की में अपने आप को रोक नही पाई और ज़ोर से अपनी जीब चारों तरफ घूमने लगी, रश्मि के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी. रश्मि को भी मज़ा आ रहा था.

मुझे खुद पर विश्वास नही हो रहा था, मुझे उसकी चूत का स्वाद इतना अच्छा लगा कि मेने अपनी जीब को एक त्रिकोण का आकर देकर उसकी चूत मे घुसा दी. अब मैं उसकी चूत मे अपनी जीब अंदर बाहर कर रही थी.

रश्मि को भी मज़ा आ रहा था. उसने अपनी जंघे और फैला दी जिससे मेरी जीब को और आसानी हो उसकी चूत के अंदर बाहर होने मे.

जैसे जैसे मे रश्मि की चूत को चूस रही थी मेरी खुद की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. रवि एक जानवर की तरह मुझे चोदे जा रहा था. उसका लंड पिस्टन की तरह मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था. उत्तेजना मे मेने अपनी दोनो टाँगे रवि की कमर पे लपेट ली और वो जड़ तक धक्के मारते हुए मुझे चोदने लगा.

रवि ने एक ज़ोर का धक्का लगा अपना वीर्य मेरी चूत मे छोड़ दिया और उसी समय मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया. मेरी चूत हम दोनो के पानी से भर गयी थी. मेने नज़रें उठा अपना ध्यान रश्मि की ओर कर दिया.

अब मे अपनी जीब जोरों से उसकी चूत के अंदर बाहर कर रही थी. मेने उसकी चूत की पंखुड़ियों को अपने दांतो मे ले काट लेती तो वो मारे उत्तेजना के चीख पड़ती, "ओह काआतो मेरिइई चूओत को ओह हाआअँ घुसााआआअ दो आआपनी जीएब मेर्रर्र्ररर चूऊत मे आआआः आचाा लग रहा है."

रश्मि ने उत्तेजना मे अपनी चूत मेरी मुँह पर और दबा दी और अपनी चूत को और मेरे मुँह मे घुसा देती. मैने उसके कुल्हों को पकड़ और ज़ोर से उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया. रश्मि ने अपनी चूत को मेरे मुँह पर दबाते हुए अपना पानी छोड़ दिया. आख़िर वो थक कर मेरे बगल मे लेट गयी.
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08-05-2017, 11:49 AM,
#5
RE: Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
हम तीनो थके निढाल बिस्तर पर लेटे हुए थे कि रश्मि बोल पड़ी, "प्रीति आज तक किसी ने मेरी चूत को इस तरह नही चूसा जैसे तुमने. सबसे बड़ी बात ये है कि चूत चूसने का तुम्हारा पहला अनुभव था."

"और लंड चूसने मे भी, मेरे लंड ने पहली बार इतना जल्दी पानी छोड़ा होगा." रवि ने कहा.

"मुझे खुद समझ मे नही आ रहा है. पिछले दो दीनो मे जितनी चुदाई मेने की है उतनी में पिछले दो सालों मे नही की." मेने कहा.

"अब तुम क्या सोचती हो?" रवि ने पूछा.

"मुझे खुद को अपने आप पर विश्वास नही हो रहा है कि मेने अपनी होने वाली बहू के साथ शारारिक रिश्ता कायम किया है और मेरे बेटे के गहरे दोस्त से चुदवाया है. समझ मे नही आता कि अगर मेरे बेटे राज को पता चला तो उससे क्या उससे क्या कहूँगी." मेने कहा.

"ये सब आप मुझ पर छोड़ दें, राज को में संभाल लूँगी. फिलहाल तो में फिर से गरमा गयी हूँ." रश्मि ने कहा.

रश्मि बिस्तर पर पसर गयी और अपनी टाँगे फैला दी, "प्रीति अपनी जीब काजादू मेरी चूत पर एक बार फिर से चला दो. आओ और मेरी चूत को फिर से चूसो ना."

मेने अपनी होने होली वाली बहू को प्यार भरी नज़रों से देखा और उसकी टाँगो के बीच आते हुए अपनी जीब उसकी चूत मे अंदर तक घुसा दी. रश्मि को अपनी चूत चूसवाना शायद अच्छा लगता था. वो सिसक पड़ी.

"ओह हााआआं चूऊऊऊओसो और ज़ोर से अहह ऐसे ही."

रवि मेरे पीछे आ गया और मेरी कुल्हों को पकड़ पीछे से मेरी चूत मे अपना लंड घुसा दिया. मेरी चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी. रवि ने मेरी चूत का पानी अपनी उंगली मे लगा मेरी गांद के छेद मे डाल उसे गीला करने लगा. पहले तो मुझे अजीब सा लगा पर में वैसे ही पड़ी रही.

"ऐसे ही रहना हिलना मत." कहकर रवि बाथरूम मे चला गया.

जब वो वापस आया तो उसने फिर अपना लंड मेरी चूत मे घुसा दिया और मेरी गांद के छेद पे अपनी उंगलियाँ फिराने लगा. फिर वो कोई क्रीम मेरी गांद पर मलने लगा. उसने थोड़ी सी क्रीम मेरी गांद के अंदर डाल दी और मलने लगा साथ ही अपनी उंगली को मेरी गांद के अंदर बाहर कर रहा था. मेरी गांद पूरी तरह से चिकनी हो गयी थी और उसकी उंगली आसानी से अंदर बाहर हो रही थी.

रश्मि जो अब तक रवि की हारकोतों को देख रही थी अचानक बोल पड़ी. "हाआन्न रवि डाल दो अपना लंड इसकी गांद मे. में देखना चाहती हूँ कि तुम प्रीति की गांद कैसे मारते हो?'

"प्रीति क्या तुम भी अपनी गांद मे मेरा लंड लेना चाहोगी?" रवि ने अपने लंड को मेरी गांद के छेद पर रखते हुए कहा.

"नही रवि ऐसा मत करना. मेने पहले कभी गांद नही मरवाई है." मेने अपना सिर यहाँ वहाँ पटकते हुए कहा, "तुम्हारा लंड काफ़ी मोटा और लंबा और है, ये मेरी गांद को फाड़ डालेगा."

"हिम्मत से काम लो. अगर में इसका लंड अपनी गांद मे ले सकती हूँ तो तुम भी ले सकती हो फरक सिर्फ़ आदत का है." रश्मि मेरे निपल मसल्ते हुए बोली.

रवि ने ढेर सारी क्रीम लगाकर अपने लंड को भी चिकना कर लिया था. फिर उसने थोड़ा सा थूक अपने लंड पर लगा अपना लंड मेरी गांद मे घुसा दिया.

मेरे आँख से आँसू निकल पड़े और में दर्द में चीख पड़ी, "उईईई मररर्र्र्ररर गाइिईईईई निकॉयेयीयायायाल लूऊओ प्ल्ीआस्ीईए दर्द्द्द्द्दद्ड हूऊ रहा."

मेरी चीखों पर ध्यान ना देते हुए रवि ने अपना हाथ आगे कर अपनी दो उंगली मेरी चूत मे डाल दी. उसके इस स्पर्श ने शायद मेरी गांद मे उठते दर्द को कम कर दिया. में अपने कूल्हे पीछे धकेल उसका साथ देने लगी.

रवि अब पूरे जोश से मेरी गांद की धुलाई कर रहा था. उसकी उंगलियाँ मेरी चूत को चोद रही थी और उसका लंड मेरी गांद को.

वही रश्मि ने अपनी चूत मेरे मुँह के आगे एक बार फिर कर दी और में उसकी चूत को चूसे जा रही थी.

रश्मि की निगाहें रवि के लंड पर थी जो मेरी गांद के अंदर बाहर हो रहा था, "राआवी घुस्स्स्स्स्ससा दो अपना लंड फाड़ डूऊऊऊऊ आज इसकी गांद को." रश्मि बड़बड़ा रही थी.

मेरे शरीर मे गर्मी इतनी बढ़ती जा रही थी. मेरी चूत मे उबाल आ रहा था. मैं अपने पूरे जोश से रवि के धक्कों का साथ दे रही थी. मेरी चूत इतनी पहले कभी नही फूली थी जितनी की आज.

"हे भ्ाागवान." मेने अपने आपसे कहा. "मेरा फिर छूटने वाला है," मुझे विश्वास नही हो रहा था.

रवि पूरी ताक़त से अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था. मेने अपनी टाँगे उसकी कमर के चारों और लपेट ली थी और बड़बड़ा रही थी, "ओह राआवी हाआआं और काआआस के चूऊऊदो हूऊऊ आआआआः मेर्रर्र्र्ररर चूऊऊऊथा."

रवि मेरी गांद मे अपने लंड के साथ अपनी उंगली से मेरी चूत को चोद रहा था. मेने अपना मुँह रश्मि की चूत पर रख दिया और एक पागल औरत की तरह उसकी चूत को चूसने लगी.

रवि ने एक ज़ोर का धक्का मारा और अपना वीर्य मेरी गंद मे छोड़ दिया. मेरी गांद ने आज पहली बार वीर्य का स्वाद चखा था. में ज़ोर ज़ोर से रश्मि की चूत चूस रही थी, उसकी चूत पानी छोड़े जा रही थी और में हर बूँद का स्वाद ले उसे पी रही थी.

हम तीनो थके निढाल, पसीने से तर बतर बिस्तर पर पसर गये. इतनी भयंकर सामूहिक चुदाई मेने अपनी जिंदगी मे नही की थी. मुझे शरम भी आ रही थी साथ ही एक अंजनी खुशी भी कि मैं अपने शारारिक सुख का भी अब ख्याल रख सकती थी तभी रश्मि ने कहा,

"प्रीति तुम हमारे साथ हमारे हनिमून पर क्यों नही चलती?"

"रश्मि तुम्हारा दिमाग़ तो खराब नही हो गया है? तुम चाहती हो कि में अपनी हँसी उड़वाउ. लोग क्या कहेंगे कि बेटे के हनिमून पर एक मा उनके साथ क्या कर रही है?" मेने कहा.

मैं मज़ाक नही कर रही. रवि हम लोगो का साथ आ रहा है. हमने चार लोगो के हिसाब से कमरा बुक करवाया है. तुम हमारे साथ एक दम फिट बैठोगी." रश्मि ने कहा.

"रश्मि सही कह रही है प्रीति. हमने चार लोगो की बुकिंग कराई है. मैं वैसे भी किसी को अपने साथ ले जाने वाला था, तो तुम क्यों नही चलती." रवि ने मेरी चुचियों को मसल्ते हुए कहा.

"तुम ये कहना चाहते हो कि राज चाहता है कि रवि और एक दूसरी औरत उसके साथ उसके हनिमून पर चले और साथ साथ एक ही रूम मे रुके." मेने पूछा.
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08-05-2017, 11:49 AM,
#6
RE: Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
"हां ये सही है. तुम जानती हो कि हम तीनो आपस मे चुदाई करते है. और तुम भी हम दोनो का साथ दे चुकी हो तो क्यों ना हम चारों साथ साथ चले." रवि ने कहा और रश्मि ने भी अपनी गर्दन हिला दी.

"अगर में तुम लोगो की बात मान भी लेती हूँ तो राज क्या सोचेगा? मैं कैसे उसके सामने एक ही कमरे में तुम दोनो के साथ चुदाई करूँगी?" मेने पूछा.

"मेने कहा ना कि राज में संभाल लूँगी." रश्मि ने कहा.

"मैं इस तरह फ़ैसला नही कर सकती. मुझे सोचने का वक़्त चाहिए. में सोच कर तुम लोगों को बता दूँगी." मेने जवाब दिया.

मेने देखा कि रवि का लंड एक बार फिर खड़ा हो रहा था. रश्मि ने मेरी निगाहों का पीछा किया और झुक कर रवि के लंड को अपने मुँह मे ले लिया. वो उसके लंड को चूसने लगी और उसका लंड एक बार फिर पूरी तरह से तन कर खड़ा हो गया.

"क्या ये सब कभी रुकेगा कि नही?" मेने अपने आप से पूछा.

"प्रीति में एक बार फिर तुम्हारी गांद मारना चाहता हूँ." रवि ने अपने लंड को सहलाते हुए कहा.

रवि और रश्मि ने मिलकर मुझे घोड़ी बना दिया. "प्रीति में आज तुम्हारी गांद मे अपना लंड डाल अपना वीर्य तुम्हारी गांद मे डाल दूँगा." रवि मेरे कान मे फुसफुसाते हुए मेरे कान की लाउ को चुलबुलाने लगा.

मेरा शरीर कांप गया जब उसने अपने लंड को मेरे गंद के छेद पर रगड़ना शुरू किया. वो एक बार मेरी गंद मे अपना लंड घुसा चुक्का था फिर भी मेरे मुँह से हल्की चीख निकल गयी, "ओह मार गेयीयीयियी."

रवि का लंड मेरी गंद मे जगह बनाता हुआ पूरा अंदर घुस गया. वो मेरे कुल्हों को पकड़ धक्के लगा रहा था. तभी रश्मि मेरी टाँगो के बीच आ गयी और मेरी चूत को चाटने लगी. उसकी तर्जुबेकर जीब मेरी चूत से खेलने लगी.

वो अपने लंड को मेरी गंद के अंदर बाहर करता रहा जब तक कि उसका 9' इंची लंड पूरा नही घुस गया. फिर उसने रफ़्तार पकड़ ली और ज़ोर के धक्के लगाने लगा.

मेने भी ऐसा आनंद अपनी जिंदगी मे नही पाया था. एक तो रश्मि की जीब मेरी चूत मे सनसनी मचाए हुए थी और दूसरी और रवि का लंड मेरी गंद की धज्जियाँ उड़ा रहा था. मैं भी उत्तेजना में अपने मम्मे मसल रही थी और ज़ोर से अपने कुल्हों को पीछे धकेल उसका साथ दे रही थी.

रवि ज़ोर से चोद रहा था और रश्मि पूरी ताक़त से चूस रही थी. जब रश्मि ने मेरी चूत के मुहानो को अपने दांतो से भींचा उसी वक़्त मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. मुझे याद नही कि ये आज मे 6 बार झड़ी थी या 7वी बार.

रवि ने चोदना जारी रखा. मुझे उसका लंड अपनी गंद मे अकड़ता महसूस हुआ मैं समझ गयी कि उसका भी छूटने वाला है.

मुझसे अब सहा नही जा रहा था. में पागलों की तरह अपना सिर बिस्तर पर पटक रही थी, बिस्तर की चादर को नोच रही थी और गिड़गिदा रही थी कि वो दोनो रुक जाए.

रवि ने अपने तगड़े लंड को मेरी गंद से बाहर खींचा और सिर्फ़ अपने सूपदे को अंदर रहने दिया. उसने दोनो हाथों से मेरे मम्मे पकड़े और एक ज़ोर का धक्का लगाया. उसका लंड मेरी गंद की दीवारों को चीरता हुआ जड़ तक घुस गया. उसने ऐसा दो तीन बार किया और अपना वीर्य मेरी गांद मे छोड़ दिया.

मुझे नही पता कि उसके लंड ने कितना पानी छोड़ा पर मेरी चूत पानी से लबाब भर गयी थी. उसका वीर्य मेरी गांद से होते हुए मेरी चूत पर बह रहा था जहाँ रश्मि अपनी जीब से उस वीर्य को चाट रही थी.

रवि और रश्मि उठे नहाए और कपड़े पहन कर चले गये, और छोड़ गये मुझे अकेला अपनी सूजी हुई गंद और चूत के साथ जो रस से भरी हुई थी. उनके साथ हनिमून पर मे जाउ कि नही इसी ख़याल मे कब मुझे नींद आ गयी मुझे पता नही.

टू बी कंटिन्यूड………….
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08-05-2017, 11:50 AM,
#7
RE: Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
गतान्क से आगे......

दूसरे दिन मेरी आँख खुली तो मेरा बदन मेरे दर्द के दुख रहा था. ऐसा लग रहा था कि शरीर मे जान ही नही है. मेने बाथ टब मे हल्का गरम पानी डाला और स्नान किया. आछी तरह अपनी सूजी हुई चूत और गंद की गरम पानी से सिकाई की.

मैं अपनी चूत और गंद पर हाथ फिरा रही थी तो मुझे विश्वास नही हो रहा था कि एक दिन में इतनी बार चुदवा सकती हू. रवि को मोटा मस्ताना लंड मेरी आँखों के आगे आ जाता. रवि वाकई मे एक शानदार मर्द था और उसे औरत को चुदाई का सुख देना आता था.

मेने अपने गीले बदन को अछी तरह टवल से पोंछने के बाद अपने बदन को शीशे मे निहारा. मेरा हर अंग जैसे खिल उठा था. दिल मे एक अलग ही उमंग सी जाग उठी थी.

मैं राज और रश्मि के हनिमून के बारे में सोच रही थी. मुझे विश्वास नही हो रहा था कि वो मुझे साथ चलने के लिए कह सकते थे. मेने फ़ैसला वक़्त पर छोड़ दिया था. अभी शादी को एक महीना पड़ा था.

कुछ दिन इसी तरह बीत गये. एक दिन की बात है मैं रवि और रश्मि के साथ अपने बिस्तर पर थी. राज किसी काम से बाहर गया हुआ था.

रवि अपने खड़े लंड को हाथ मे पकड़े हुए बिस्तर पर लेटा हुआ था. में अपने आपको रोक नही पाई और रवि के उप्पर आ गयी. मेने अपनी दोनो टाँगे रवि की कमर के अगल बगल रखी और अपनी चूत उसके खड़े लंड पर रख दी.

रश्मि ने अपने हाथों से मेरी चूत के मुँह को थोड़ा फैलाया और लंड को ठीक चूत के मुँह पर लगा दिया. मैं नीचे होते हुए रवि के लंड को अपनी चूत मे लेने लगी. मेरे कूल्हे अब रवि के अंडों से टकरा रहे थे.

मेने झुकते हुए अपने होत रवि के होठों पर रखे और उन्हे मुँह मे ले चूसने लगी. रवि ने भी मेरी भरी भरी चुचियों को अपने हाथों मे पकड़ा और अपनी जीब मेरे मुँह मे डाल दी.

उसका लंड मेरी चूत मे हिल्लोरे मार रहा था. मुझसे अब सहन करना मुश्किल होने लगा. मेने अपने आपको सीधा किया और उसके लंड पर उठने बैठने लगी. रवि मेरे कुल्हों को पकड़ नीचे से धक्के लगाने लगा.

रश्मि ने मेरे होठों पर अपने होठ रख कर चूसना शुरू कर दिया साथ ही वो मेरे चुचियों को ज़ोर से मसल रही थी. कभी वो मेरे निपल को भींच देती. रवि अपने लंड को मेरी चूत मे अंदर बाहर किए जा रहा था.

रश्मि ने अपने हाथ मेरी गांद पर रख मेरे गांद के छेद से खेलने लगी. रश्मि अब मेरे गंद के छेद पर अपनी जीभ फिरा रही थी. मुझे ऐसी सनसनी पहले कभी महसूस नही हुई. इससे पहले भी रश्मि मेरी चूत या गांद के छेद को चाट चुकी थी पर ऐसे नही जब एक लंड मेरी चूत मे पहले से ही था.

तभी मेने महसूस किया कि रश्मि ने किसी तरह की क्रीम या तेल मेरी गांद के छेद पर डाल दिया है और उस जगह की मालिश कर रही है. जब मेरी गांद के चारों तरफ का हिस्सा चिकना हो गया तो उनसे अपनी एक उंगली मेरी गांद मे डाल गोल गोल घुमाने लगी. इस दोहरे स्पर्श ने मेरी चूत और गंद मे एक आग सी लगा दी थी. में उत्तेजना मे ज़ोर ज़ोर से अपने आप को रवि के लंड पर दबा देती.

रश्मि ने अपनी उंगली मेरी गांद से निकाल ली और मेरे गंद को और फैलाते हुए अपने जीब से उसे चाटने लगी. तभी मेने महसूस किया कि उसकी मुलायम जीब से ज़्यादा सख़्त चीज़ मेरी गांद से टकरा रही है, मैं डर गयी पता नही क्या चीज़ है.

में विरोध करना चाहती थी कि तभी रश्मि मेरे बगल मे आ गयी और मेरे मम्मो को मसल्ने लगी और फिर उसने मेरा सिर पकड़ अपनी चूत की ओर कर दिया. तभी मेने रवि को कहते सुना,

"प्रीति अब राज तुम्हारी गांद मारेगा. राज तुम्हारा बेटा पहचानती हो ना उसे? और फिर तुम चाहती हो ना कि कोई तुम्हारी गांद मारे? रवि ने कहा.

मेने राज के लंड को अपनी गांद मे घुसता महसूस किया. राज का लंड रवि जितना लंबा और मोटा तो नही था फिर भी उसे अंदर घुसने मे तकलीफ़ हो रही थी.

में इस से बचना चाहती थी पर रश्मि ने अपनी चूत मेरे मुँह पर दबा कर मेरी हर कोशिश को नाकाम कर दिया.

"थोडा सब्र से काम लो प्रीति," रश्मि ने मुझे समझाते हुए कहा, "थोड़ा दर्द होगा शुरू मे फिर ऐसा मज़ा आएगा कि तुम अपने आप को कोसोगी तुमने आज तक एक साथ दो लंड अपनी चूत और गांद मे क्यों नही लिए."

उसकी शब्दों ने मुझे थोड़ी राहत दी. पहले तो मुझे अपनी गांद मे दर्द हो रहा था पर वक़्त के साथ दर्द मज़े मे बदल गया. राज अपना लंड मेरी गांद मे पेले जा रहा था और रवि अपना लंड मेरी चूत मे.

मैं भी दोहरी चुदाई का मज़ा लेने लगी. कभी में अपने आप को रवि के लंड पर दबा देती तो कभी अपने कूल्हे पीछे कर राज के लंड पर.

तीनो मेरे जिस्म से खेल रहे थे. उनके हाथ मेरे बदन पर रैंग रहे थे और मेरी उत्तेजना को एक नई चर्म सीमा पर पहुँचा रहा थे. मेरे लिए चुदाई का या नया अनुभव था. अपने जिस्म मे इतनी उत्तेजना मेने कभी महसूस नही की थी.

"प्रीति मुझे पता है कि दोहरी चुदाई का मज़ा क्या होता है. मेने रात को ही इन दो लंड का मज़ा साथ साथ लिया है." रश्मि बोली.

अचानक मेने महसूस किया कि मेरी गंद मे घुसा लॉडा फूलने लगा है और उसकी चोदने की रफ़्तार तेज हो गयी है. कुछ ही देर मे रवि का लंड मेरी गंद मे अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ रहा था, और साथ ही मेरी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया.

रवि का लंड भी तनने लगा था और वो ज़ोर ज़ोर से अपने कूल्हे उछाल मेरी चूत मे अपना लंड पेल रहा था. मेने रवि के लंड को अपनी चूत मे जकड़ा और ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे बैठने लगी. उसका लंड आकड़ा और उसने भी मेरी चूत मे अपना वीर्य उंड़ेल दिया.

रश्मि भी पीछे नही रही उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया. मैं उसकी चूत चूस्ते हुए अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत मे डाल अंदर बाहर करने लगी. उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया और में उसकी चूत से छूटे पानी को पीने लगी. जब में उसकी चूत से छूटे पानी एक एक बूँद पी गयी तो में निढाल होकर उनके बगल मे बिस्तर पर पसर गयी.
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08-05-2017, 11:50 AM,
#8
RE: Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
रवि और राज मेरे बदन से खेल रहे थे. दोनो मेरे बदन को सहला रहे थे और रश्मि मेरी टाँगो के बीच आ मेरी चूत मे भरे पानी को पी रही थी. थोड़ी ही देर मे मेरे दोनो शेर फिर से तय्यार हो गये थे मुझे चोदने के लिए.

मैने एक बार फिर रवि के उप्पर चढ़ कर उसका लंड अपनी चूत मे ले लिया. फरक सिर्फ़ इतना था कि राज ने अपना लंड मेरे मुँह मे दे दिया था और रश्मि मेरी गंद मे अपनी उंगली डाल अंदर बाहर कर रही थी.

मेरे तीन छेदों को तीन लोग अपनी तरह से चोद रहे थे, "प्रीति देखो दो लंड को कैसे तुम मज़े से ले रही हो. मेने कभी नही सोचा था कि तुम इतनी चुड़दकड़ हो जाओगी." रश्मि मेरी गांद के छेद पर अपनी जीब फिराते हुए बोली.

रवि और राज दोनो ने अपने लंड का पानी अपने अपने छेद मे उंड़ेल दिया था और रश्मि ने एक बार फिर अपनी ज़ुबान से उनके वीर्य को चाट कर सॉफ किया था. एक तरफ तो मेरे मन मे खुशी थी और दूसरी तरफ आत्म गिलानी भी.

"मा तुम्हे सही मे हमारे साथ मेरे हनिमून पर आना चाहिए. मेने प्लेन की भी चार टिकेट करा रखी है और होटेल मे रूम भी चार लोगों के लिए है." राज ने मुझसे कहा.

मेने सोच रही थी कि अभी अभी मेरा बेटा अपना वीर्य मेरी गांद मे झाड़ के हटा है और अब मुझे अपने हनिमून पे साथ मे आने की दावत दे रहा है. में समझ चुकी थी कि हनिमून पर भी सामूहिक चुदाई के अलावा क्या होना था, मेने सोचा. जो पहले ही हो चुका है उसे पीछे क्या हटना. अगर कुछ और होगा तो थोड़े दीनो मे मुझे पता चल जाएगा.

"ठीक है जो हम लोगों के बीच हो चुक्का है उसके बाद में हां बोलती हूँ." मेने कहा.

"वाह मज़ा आ गया तुम्हारी बात सुनकर. फिर तो हमे जश्न मनाना चाहिए." रवि ने उछलते हुए कहा. "प्रीति में एक बार फिर तुम्हारी गांद मारना चाहता हूँ."

हम चारों ने अपने बदन घुमाए, मैं और रश्मि 69 की अवस्था मे थे और एक दूसरे की चूत को चूस रहे थे. रवि अपना लंड मेरी गांद मे डाल चोद रहा था और राज रश्मि की गांद मे लंड डाल पेल रहा था.

दोनो हम दोनो को इसी तरह चोद्ते रहे जब तक कि उनका पानी नही छूट गया.

हम चारों थक गये थे और निढाल पड़े थे. फिर हम सबने साथ साथ स्नान किया और हॉल मे आकर बैठ गये.

बातें करते हुए रवि ने बताया कि मनाली के जिस होटेल मे बुकिंग कराई गयी हो वो चोदु लोगों के लिए मशहूर है. वहाँ हर तारह के जोड़े आते है और चुदाई का मज़ा लेते है.

राज ने बताया कि उस होटेल में जोड़े आते ही इस लिए है कि वहाँ पर अदला बदली आसानी से हो जाती है.

"तब तो मज़ा आ जाएगा." रश्मि अपने होठों पर ज़ुबान फेरते हुए बोली.

में मन ही मन सोच रही थी की, "जो मेने किया वो अच्छा है या बुरा, पता नही कहाँ मेने अपने आपको फँसा लिया था."

अगले कुछ दिन हमारे शादी की तय्यारियाँ करते हुए बीते. लेकिन हम चारों एक दूसरे के इतने करीब आ गये थे कि क्या कहूँ? हम लोग दिन भर शूपिंग करते, फिर रात को किसी आछे होटेल मे खाना खाते और फिर बेडरूम मे चुदाई करते.

आख़िर राज की शादी का दिन आ ही गया. शादी का समारोह काफ़ी सिंपल था, सिर्फ़ कुछ खास दोस्त और रिश्तेदार थे. सब लोगो ने खूब मज़ा लिया और शादी का आनंद उठाया.

फेरो के पहले रवि ने खूब कस कर रश्मि को चोदा और अपना वीर्य उसके मुँह मे छोड़ दिया था. में भी पीछे नहीं थी मेने भी अपनी चूत कस कर उससे चूस्वाई थी. फेरो के वक्त जब रश्मि ने घूँघट निकाल रखा था मेने पूछा, "ये घूँघट क्यों निकाल रखा है?"

"कुछ नही अपने चेहरे और होठों पर रवि के वीर्य के दाग छुपाने की कोशिश कर रही हूँ." उसने शरारती मुस्कान के साथ जवाब दिया.

उसकी बात सुन मैं भी जोरों से हंस दी.

अगले दिन हम एरपोर्ट के लिए रवाना हो गये. जहाँ तक पड़ोसी और रिश्तेदारों का सवाल था वो ये ही जानते थे कि मेने काम से छुट्टी ले ली है और कहीं घूमने जा रही हूँ. किसी को नही पता था कि में और रवि नए ब्याहते जोड़े को उनके हनिमून पर उनके साथ हो जाएँगे.

कहने को तो हम चारों प्लेन के फर्स्ट क्लास मे अलग अलग बैठे थे, पर एर होस्टेस्स समझ गयी कि हम साथ साथ है. वो थोड़ी विचलित थी, उसे पता था कि राज और रश्मि की अभी अभी शादी हुई है, पर हम दोनो उनके साथ क्यों है ये उसके समझ मे नही आया.

ये बात उसकी समझ मे तब आई जब रश्मि ने उसे बताया कि हनिमून पर हम उनके साथ शामिल हो जाएँगे. रश्मि ने उसे हमारे होटेल का नाम भी बता दिया जहाँ हम ठहरनेवाले थे.

एर होस्टेस्स जो को एक 26 साल की कुँवारी और सुंदर लड़की थी अपने आपको रोक नही पाई और राज से पूछ बैठी, "जहाँ तक में समझती हूँ आप दोनो की नई शादी हुई है और आप हनिमून पर जा रहे है. आपका खास दोस्त और आपकी माताजी आप दोनो के हनिमून पर आप के साथ हो जाएँगी. क्या आपको पता है कि जिस होटेल में आप लोग रुक रहे हैं वो सिर्फ़ जोड़ों के लिए है?"

"हां हमे पता है इसी लिए हम चारों एक ही रूम मे रुक रहे है." राज ने जवाब दिया.

राज की बात सुनकर वो चौंक पड़ी, उसका नाम मिली था, "एक ही कमरे में"

"हां एक ही कमरे में, इससे आसानी होगी हम लोग पहले से ही आपास मे चुदाई करते है." रश्मि ने थोड़ा हंसते हुए कहा.

मिली थोड़ा सोचते हुए हमारे पास से हट गयी. उसे विश्वास नही हो रहा था जो रश्मि ने उससे कहा था. थोड़े ही देर मे या बात प्लेन के और कर्मचारियों मे फैल गयी. सब आते जाते हमे घूर रहे थे.

रवि हंस रहा था और रश्मि से कहा, "तुमने तो मिली से ये सब कहकर चौंका दिया."

मिली ने हम सब ड्रिंक्स और खाना सर्व किया. राज और रश्मि बातें करने मे लगे हुए थे तब मेने रवि की और अपना ध्यान कर लिया.
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08-05-2017, 11:50 AM,
#9
RE: Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
"रवि तुमने आज तक कितनी लड़कियों को चोदा है?" मेने रवि की पॅंट के उपर से उसके लंड को सहलाते हुए कहा.

रवि अपनी कॉलेज की दास्तान सुनाने लगा. उसकी चुदाई के क़िस्से सुन्नकर में काफ़ी उत्तेजित हो गयी थी.

"रवि अब बस करो बाकी कि कहानी फिर कभी सुनना." मेने एक कमजोर आवाज़ मे कहा.

"लगता है कि मेरी कहानी सुन कर तुम्हारी चूत गीली हो गयी है." रवि ने पूछा.

"हां" मेने धीरे से कहा.

"लाओ देखता हूँ मे." कहकर उसने अपना हाथ मेरी स्कर्ट मे डाल दिया और गीली हुई पॅंटी के उपर से मेरी चूत पर रख दिया, "उम्म्म्मम काफ़ी गीली हो चुकी हो."

रवि ने अपनी उंगलियाँ मेरी पानी मे डाल दी और मेरी चूत मे उंगली डाल अंदर बाहर करने लगा. मैं इतनी उत्तेजित कि तीन चार बार उंगली करने से ही मेरी चूत ने उसकी हथेली पे पानी छोड़ दिया. उसने मुस्कुराते हुए अपना हाथ अपने मुँह के पास किया और अपनी उंगली चाटने लगा.

कॅबिन मे एक अजीब सी सुगंध फैल गयी. मेने गर्दन घुमा प्लेन के कोने में देखा कि मिली वहाँ रश्मि के पास खड़ी हमे ही देख रही थी. जब उसने रवि को उंगली चाटते देखा तो दंग रह गयी. वो सब समझ चुकी थी. रवि ने मेरी नज़रों का पीछा किया और ज़ोर से अपनी उंगली चाट मिली को चिढ़ाने लगा.

तब मेने देखा कि रश्मि ने अपना हाथ मिली के स्कर्ट मे डाल दिया है और उसकी चूत को सहला रही थी. मिली के चेहरे पर अजीब से भाव आ गये थे. जब मिली ने हम लोगो को उसे देखते देखा तो शर्मा कर दूर चली गयी.

रवि मिली को देख हँसने लगा. वो झुक कर मेरे कान मे बोला, "प्रीति तुम्हारी चूत सही मे प्यारी है और तुम्हारी चूत के पानी का तो जवाब नही मज़ा आ गया."

जब हम प्लेन से उतरे तो मिली ने हम सब अभिवादन किया.

"हमे अफ़सोस है कि तुम हमारे साथ नही चल सकती." रश्मि ने मिली से कहा.

हम लोगो ने अपना अपना समान उठाया और अपनी मंज़िल की ओर चल दिए.

मनाली पहुँच हम हमारे पेंटहाउस मे पहुँचे और अपना समान लगा दिया. हम सब सफ़र से तक गये थे इसलिए थोड़ा आराम करने लगे.

दोस्तों ये थी प्रीति की कहानी. हनिमून पर क्या हुआ ये अगले भाग मे. अपनी राई हर बार की तरह ज़रूर दीजिएगा.

तो बे कंटिन्यूड…………..
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08-05-2017, 11:52 AM,
#10
RE: Kamukta Kahani मैं और मेरी बहू
गतान्क से आगे......

जब हम लोग थोड़ा आराम करने के बाद उठे तो सबने थोड़ा चाइ नाश्ता किया. नाश्ता करने के बाद रवि ने कहा, "चलो थोड़ा घूम आते हैं जिससे हम इस महॉल से वाकिफ़ हो जाएँगे."

जिस होटेल में हम रुके थे वहाँ हर प्रकार सुख सुविधा थी. टेन्निस कोर्ट बना हुआ था, जिम था, सन बाथ, और ढेर सारी दुकाने शॉपिंग के लिए. जो कुछ भी किसी को चाहिए वहाँ उपलब्ध था. एक बार था जो 24 घंटे खुला रहता था.

घूमते घूमते हम होटेल के स्विम्मिंग पूल के पास आ गये. वहाँ काफ़ी भीड़ थी और कई लोग पूल मे तेर रहे थे. राज और रश्मि भी अपने कपड़े उतार पानी मे उत्तर गये. रवि ने मेरी तरफ देखा तो मेने भी अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए. में भी अपनी ब्रा और पॅंटी पहने पानी मे कूद पड़ी.

रवि बार की तरफ चला गया. जब वो हम सभी के लिए ड्रिंक्स लेकर लौटा तो मेने देखा कि औरतों की नज़र उसकी लंड वाले हिस्से पर टिकी हुई थी. उसका लंड खड़ा था और उसकी शॉर्ट्स पर से उसकी मोटाई झलक रही थी.

थोड़ी देर स्नान करने के बाद हम सब अपने पेंटहाउस मे आ गये. कपड़े बदलने के बाद हम सब रात के कहने के लिए तय्यार थे.

होटेल के रेस्टोरेंट मे हम सभी ने खाना खाया. खाना काफ़ी स्वादिष्ट था. खाना खाने के बाद हम लाउंजस मे बैठे कॉफी पी रहे थे. आख़िर हम सब कमरे मे लौट आए और सोने की तय्यारी करने लगे.

मैं और रवि एक बिस्तर पर थे और राज और रश्मि एक बिस्तर पर. उस रात रवि ने मुझे कई बार कस कर चोदा और मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दिया. राज ने भी रश्मि की जम कर चुदाई की. जब वो तक कर सो गया तो रश्मि हमारे साथ हमारे बिस्तर पर आ गयी और मेरे उपर लेट अपनी चूत मेरे मुँह मे दे दी. हम 69 अवस्था मे एक दूसरे की चूत चूस रहे थे. तभी रवि ने अपना लंड मेरी गांद मे डाल कर धक्के लगाने लगा. तभी राज भी उठ गया और उसने अपना लंड रश्मि की गंद मे डाल दिया. आख़िर हम सब तक कर सो गये.

हनिमून का पहला दिन

मुझे पहली बार पता चला कि जब किसी मर्द लंड पेशाब से भरा हो तो वो चुदाई कैसे करता है. रवि का लंड खूटे की तरह तना था और वो मेरी चूत मे घुसकर कस के धक्के मार रहा था. मैं उसके धक्कों को सहन नही कर पा रही थी, मेने उसे रुकने को कहा. रवि ने अपना लंड बाहर निकाला और बाथरूम मे पिशाब करने चला गया.

जब वो बाथरूम से बाहर आया तो उसने अपना लंड मेरे मुँह के सामने कर दिया, "प्रीति इसे चूसो ना देखो कितना भूका है ये."

मेने उसका लंड अपने मुँह मे ले लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी रवि ने अपना हाथ मेरे सिर पर रख दिया और अपने लंड को अंदर तक घुसा दिया. अब वो मेरे मुँह मे धक्के लगा रहा था, "ओह हाआाआअँ चूऊसो ईसीई ओह आआआ ओह प्रीति कितना अच्छा लंड चूसती हो तुम ओह मेरा छूटाआआ." कहकर उसने अपने वीर्य की पिचकारी मेरे मुँह मे छोड़ दी. मैं उसका सारा वीर्य पी गयी.

फिर हम सब स्नान करने के बाद नीचे रेस्टोरेंट मे नाश्ता करने चले गये. नाश्ते के बाद हमने साइटसीयिंग का प्रोग्राम बनाया हुआ था. पूरे दिन मनाली की सैर करने के बाद हम जब शाम को होटेल पहुँचे. घूमते घूमते हमारी दोस्ती कई लोगो से हो गयी थी.

हमारी दोस्ती दो ऐसी लड़कियों से हुई जो घूमने आई हुई थी. उनकी हरकतों को देख कर में समझ गयी वो लेज़्बीयन है. उनका नाम रीता और अनीता था. हमारी जान पहचान एक जोड़े विनोद और शीला से हुई जो हनिमून मनाने आए थे.

जब इन चारों को मालूम हुआ कि हम चारों एक ही कमरे में रहकर साथ साथ चुदाई करते है तो उन्हे विश्वास नही हुआ. हम सब लोगों ने मिलकर रात का खाना साथ साथ खाया. जब रात हुई तो रवि ने पूछा, "रात का क्या प्रोग्राम है."

पता नही मेरी बहू रश्मि के मन में क्या था, "राज आज में और प्रीति रीता और नीता के साथ उनके कमरे में सोएंगे."

राज कोई जवाब देता उससे पहले रवि ने कहा, "हमे कोई आपत्ति नही है, हम भी शायद आज की रात विनोद और शीला के साथ गुजरेंगे."

शायद रवि की विनोद और शीला से कुछ बात हो चुकी थी. उन्होने मेरी और रश्मि की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए अपना हाथ हिला दिया.

जब सब लोग तक गये थे तो एक बार की लिए सब अपने अपने कमरे में चले गये कपड़े बदलने के लिए.

जब में अपने कमरे में रश्मि के साथ पहुँची तो उसने अपने कपड़े उतार दिए. फिर रश्मि ने एक छोटी सी शॉर्ट और टीशर्ट पहन ली बिना ब्रा और अंडरवेर के, "क्या इतना ही पहनोगी रात को उन लड़कियों की पार्टी मे जाने के लिए." मेने हंसते हुए पूछा.

"एक बार उनके कमरे में पहुँचेंगे तो शायद ये भी बदन पर नही रहेंगे, हम वहाँ चुदाई के लिए जा रहे है ना कि रात का खाना खाने के लिए." रश्मि अपनी चुचियों को मसल्ते हुए बोली.

मेने रश्मि की तरह शॉर्ट्स और टीशर्ट पहन ली. मुझे अस्चर्य हो रहा था कि मैं रश्मि के साथ जाने को कैसे तय्यार हो गयी. आज तक मेने रश्मि के सिवा किसी और औरत के साथ सेक्स का मज़ा नही लिया था. पर आने वाली रात के बारे में सोच कर ही मेरे शरीर मे सुरसुरी दौड़ रही थी.

"तुम दोनो ने क्या प्रोग्राम बनाया है." रश्मि ने राज और रवि से पूछा.

"हम दोनो विनोद और शीला के रूम मे जा रहे है. शीला ने कभी तीन मर्दों से एक साथ नही चुडवाया है और वो इसका मज़ा लेना चाहती है." राज ने हंसते हुए कहा.

"म्‍म्म्ममम अछा है मज़े करो." रश्मि ने कहा.

हम चारों अपने रूम से निकले और अपने अपने स्थान की ओर बढ़ गये.
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