kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
03-22-2020, 12:47 PM,
#1
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साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ

प्रिय पाठक गण , अकसर मेरी कहानिया लम्बी होती हैं और शायद कुछ लोगोँ को बोरिंग भी लगे, क्यूंकि मैं कहानियों में पटकथा पर और जो भावावेश और जज्बा होता है उस पर ज्यादा बल देता हूँ। यह कहानी वैसे तो साधारणसी है पर इसमें वही भाव आपको दिखेंगे। अगर आपमें धैर्य एवं भाव को परखने की शूक्ष्मता के लिए जो समय और सोच चाहिए उसका अभाव है तो आपको मेरी कहानी नहीं भाएगी।

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राज और कमल की दोस्ती स्कूल में मशहूर थी। उनके घर नजदीक ही थे और उनके माता पिता एक दूसरे को जानते थे। वह शुरू से सेकंडरी हाई स्कूल तक साथ साथ पढ़े, क्रिकेट खेले और बहोत मस्तियाँ भी की। कमल राज से एक क्लास सीनियर था। उनकी दोस्ती कैसे इतनी गहरी हुयी इसके पीछे एक कहानी थी। कहानी कुछ इस तरह थी की जब राज छठवीं क्लास में था तब उसीकी स्कूल में सीनियर क्लास में एक हट्टाकट्टा लड़का था जो हमेशा राज का मजाक उड़ा कर राज को तंग करता रहता था। एकबार जब राज ने उसका विरोध किया तो उसने राज को एक घूंसा मारा। राज गिर गया और उसके दाँतो से खून बहने लगा। तब कमल ने उस मोटे लड़केकी पिटाई की और राज को बचाया। उस लड़के से लड़ते कमल को भी चोटें आयीं और काफी खून निकला।

पर बात यहां ख़तम नहीं हुई। वही मोटा लड़का शहर के पुलिस अफसर का बेटा था। कमल से पिटाई होने के बाद वह तिलमिला उठा था और एक दिन मौक़ा मिलते ही उसने राज को स्कूल छूटते ही स्कूल के बाहर ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपनी गाडी में उठवा लिया और राज को शहर के बाहर दूर एक नाली के पास पिटाई करके लहू लुहान हालत में फेंक दिया।

कमल जैसे ही स्कूल से बाहर निकला तो बच्चों ने उसे बताया की राज को उस मोटे लड़के ने दोस्तों से मिलकर कैसे अगुवा किया था। कमल आग बबूला हो गया, पर उसे राज की चिंता थी। वह तुरंत अपनी साइकिल पर निकला और उस मोटे लड़के के घर के बाहर कुछ पौधों की आड़ में छुपकर वह मोटे लड़के का इंतजार करने लगा। जब वह लड़का अपने घर पहुंचा की कमल ने लपक कर कार में बैठे हुए मोटे लड़के की गर्दन दबोच ली और जोर से दबायी। वह लड़का छटपटा ने लगा और कमल के हाथों से चार करारे थप्पड़ रसीद होने पर उसने अपना गुन्हा कुबूल किया। कमल के कहने पर उसने राज को जहां पिटाई कर के छोड़ा था वहाँ ले गया।

उसी गाडी में कमल राज को अस्पताल ले गया और उसकी जान बचाई। मोटे लड़के के पिता जो पुलिस में थे वह बड़े सज्जन थे। अपने बेटे की करतूत पर बड़े शर्मिन्दा हुए और बेटे को सबके सामने

दो थप्पड़ लगाए और कमल और राज के माता पिता को बेटे की शिकायत ना करने के लिए प्रार्थना की। राज के माँ बाप तो कमल के पाँव पकड़ कर उसका अहसान मानने लगे। इस वाकये के बाद राज के माता पिता कमल के घर आये और उसकी बड़ी प्रशंसा की। राज और कमल के कुटुंब की दोस्ती और गहरी हो गयी। राज की माँ और कमल की माताजी एक दूसरे की पक्की सहेलियाँ बन गयीं। राज कमल को बड़े भाई की तरह मानने लगा। कमल हमेशा उसे छोटे भाई की तरह प्यार करता था। राज की माँ कमल को इतना प्यार करती थी की वह सबको कहती थी की "अगर मेरी बेटी होती तो मैं कमल के साथ उसकी शादी जरूर करती।"

घरसे राज या कमल कोई भी चीज़ लाते तो वह मिल बाँट कर खाते। उनकी दोस्ती बचपन से ही गाढ़ी हो गयी। राज के लिए भी कमल का वजूद कोई देवी देवता से कम नहीं था। राज को कोई भी छोटा मोटा फैसला करना होता था तो वह कमल से पूछता और वही करता जो कमल उसे कहता। इतना ही नहीं, जब कभी कमल अपने घर में सोया होता था और राज उसे मिलने आता, तो तुरंत कमल के पाँव दबाने लगता था।

कमल स्कूल में एक अच्छा खासा क्रिकेटर माना जाता था। नियमित व्यायाम करने के कारण उसका बदन गठीला और आकर्षक था। अपनी स्कूल की टीम का वह कप्तान था। कमल सुन्दर बदन का, आकर्षित आँखों वाला और मनमौजी था। उसकी एक आदत थी की वह जो दिल में आता था बोल देता था या कर देता था। कमल मजबूत शरीर का था और राज थोड़ा कमजोर, दुबला पतला था। पढ़ाई में राज हमेशा अव्वल आता था। कमल भी पढ़ाई में ठीक ही था।

उनकी दोस्ती बढ़ती गयी और उन दोनों की जोड़ी पुरे स्कूल में मशहूर हो गयी। कमल रंगीन तबियत का था। राज थोड़ा गंभीर किस्म का था। छठी सातवीं कक्षा से ही अक्सर कमल राज से लड़कियों के बारेमें बातें करता। धीरे धीरे राज भी कमल के साथ स्कूल की लड़कियों के बारेमें बातें करने लगा। जब वह दोनों बात करते तो मालूम होता की उन दोनों की नजर अक्सर एक ही लड़की पर टिकती थी। एक बार कमल ने राज से पूछा, "राज यार हम दोनों को एक ही लड़की क्यों पसंद आती है? अगर हमने एक ही लड़की शादी के लिए भी पसंद की तो क्या होगा?"

राज ने फ़ौरन कहा, "तो फिर हम दोनों ही वह लड़की से शादी करेंगे।"

कमल: "पर एक लड़की से दो मर्द शादी नहीं कर सकते।"

राज: "तो फिर हम क्या करेंगे? तो मैं वह लड़की तुम्हारे लिए छोड़ दूंगा। मैं उससे शादी नहीं करूंगा।"

राजकी बात सुन कर कमल राज को गले लगा कर बोला, "नहीं यार, ऐसा नहीं हो सकता। हमारी यारी के बिच में कोई लड़की नहीं आनी चाहिए। अगर ऐसी नौबत आयी तो हम दोनों अलग अलग लड़कियों से शादी तो करेंगे, लेकिन दोनों लडकियां हम दोनों की पसंदगी की ही होंगीं और हमारी बीबियाँ हम दोनों की होंगी ना की किसी एक की। साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ..."

कमल हंस पड़ा, "यह तो बहुत अच्छा होगा। तब तो हम दोनों हमारी दोनों बीबियों के साथ ही रहेंगे और उनके साथ मिलजुलकर एन्जॉय करेंगे। कभी तुम मेरी बीबी के साथ रहना और मैं तुम्हारी बीबी के साथ। कैसी रहेगी? बोलो मंजूर?"

राज ने एक ही पल में कहा, "एकदम मंजूर।"

उस समय इतनी समझ नहीं थी की बीबी कोई बपौती संपत्ति नहीं है की उसे मिलजुल कर बाँटा जाये।
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03-22-2020, 12:48 PM,
#2
RE: kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
हाई स्कूल पास करने के बाद वह दोनों को अलग अलग कॉलेज में दाखिला मिला और वह कुछ सालों के लिए अलग हो गए। पर उनकी बात फ़ोन पर होती ही रहती थी। कमल राज को अपनी हर बात बताता और राज कमल को। फ़ोन पर भी वह एक दुसरेकी टांग खींचते रहते की कोई लड़की फँसी के नहीं।

कमल की शोहरत बढ़ने लगी, क्यूंकि वह क्रिकेट खेलनेमें अव्वल था। उसने अपनी स्कूल को इंटर स्कूल खेलों में चैंपियनशिप दिलाई थी। कॉलेज में वह टीम का कप्तान रहा और वहाँ भी उसने अपने झंडे गाड़ दिए। स्कूल और कॉलेज में लडकियां कमल पर फ़िदा थीं। कॉलेज में खेलते खेलते ही वह रणजी ट्रॉफी में भी खेलने लगा। उसके आकर्षक व्यक्तित्व के कारण वह काफी लोकप्रिय बना। उसके फोटो खेलकूद के और फैशन के मैगज़ीन में अक्सर आते रहते थे। यह कहा जाता था की एक न एक दिन वह भारत के लिए जरूर खेलेगा। .

कॉलेज पास होते ही कमल को उसके क्रिकेट में लोकप्रियता के कारण मुंबई में एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिली। उधर राज ने कॉलेज में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के लिए और पढ़ाई की।

दो तीन सालों के बाद कमल की शादी की बात होने लगी। उस समय कमल ने यह शर्त रखी की जो भी लड़की वह पसंद करेगा उसे राज भी मिलेगा और हाँ कहेगा तभी बात आगे बढ़ेगी। कुमुद नामकी एक लड़की से शादी के बारेमें बात होने लगी तो कमल ने राज को बुलाया। राज को कुमुद से मिलाया। उसी समय कुमुद को पता लगा की कमल के जीवन में राज की कितनी अहमियत थी। राज की रजामंदी से कमल की शादी कुमुद के साथ तय हो गयी। कमल की शादी में राज उसका ख़ास दोस्त बना था।

कुमुद कुछ गंभीर और अपनी उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्व सी लड़की थी। पढ़ाई में वह काफी तेज थी और अपनी कॉलेज में काफी अच्छे नंबर से अव्वल रहती थी। वह देखने में बहुत सुन्दर थी, पर माँ बाप की तालीम के कारण वह धर्म में आस्था रखने वाली, शर्मीली और संकुचित विचारों की थी। कुमुद का नाक नक्श सुकोमल और बदन पतला था पर उसके स्तन उसके बदन के हिसाब से भरे हुए थे। उसकी कमर और नितम्ब उसके ड्रेस में खूब जँचते थे। राज को सबसे अच्छी लगी कुमुद की आँखें जो बिना बताये जैसे बहुत कुछ कह रही थी। कुमुद की आँखों में एक गंभीरता और सौम्यता थी जो कुमुद के व्यक्तित्व को भलीभाँती प्रदर्शित करते थे।

कमल ने देखा की राज को उसकी भाभी पसंद आयी। कमल ने महसूस किया की कुमुद को देखते ही राज का चेहरा खिल उठता था और उस के चेहरे पर अजीब से भाव दिखाई पड़ते थे। शायद राज को कमल की होने वाली पत्नी कुमुद काफी भा गयी थी। कमल को लगा की राज के मन में कुमुद के लिये जरूर नरम भाव था। कमल ने राज से पूछा, "यार मेरी बीबी कुमुद कैसी लगी?"

राज जवाब देनेमें थोड़ा हिचकिचाया; पर जब राजने देखा की कमल जवाब लिये बिना उसे छोड़ेगा नहीं तब वह दबी आवाज में बोला, "भाभी बहुत सुन्दर है यार।"

राज ने कमल की और कुमुद की जोड़ी की खूब तारीफ़ की। खैर, शादी के दरम्यान उनके बिच खूब हंसी मजाक हुआ। कुमुद भी काफी खुशनुमा लड़की थी।

राज कॉलेज में ग्रेजुएशन के आखरी साल में पढ़ रहा था उसी दरम्यान रानी कॉलेज में पहले साल में पढ़ती थी। जब राज अव्वल दर्जे से पास हुआ तो रानी पहली लड़की थी जिसने उसे बधाई दी। रानी को देखते ही पहली मुलाक़ात में ही राज उस पर फ़िदा हो गया पर उसने अपने मन के भाव जाहिर नहीं किये। रानी पढ़ाई में थोड़ी कमजोर थी और उसने राज से पढ़ाई में सहायता मांगी। राज तो रानी से मिलने के मौके ही ढूंढता था। राज ने रानी को शाम को थोड़ी देर कॉलेज में ही बैठ कर पढ़ाना शुरू किया। इस तरह उनकी मुलाकातों का दौर शुरू हुआ।

रानी आधुनिक विचारों वाली लड़की और कॉलेज में खेलकूद में अक्सर अव्वल होती थी। कॉलेज की महिला क्रिकेट टीम की वह कप्तान थी। जब भी महिला टीम का कोई मैच होता था तो पूरा कॉलेज टीम को सपोर्ट करने पहुंचता था। यह बात और है की सारे लड़के महिला टीम को सपोर्ट करने कम और रानी को घूरने ज्यादा आते थे। रानी पुरे कॉलेज की शान थी। रानी के पिता और माँ अपने जमाने में माने हुए खिलाड़ी और एथलिट थे। रानी भी उन्हीं के नक़्शे कदम पर शारीरिक क्षमता पर काफी ध्यान देती थी और खेलकूद के मैदान में और जिम में खासी कसरत एवं परिश्रम कर उसने अपने बदन को फिट रखा था।

लम्बी, सुन्दर और भरे हुए बदन की रानी जब लेग्गीन पहन कर कॉलेज आती तो सारे लड़के उसकी गाँड़ को घूरते ही रहते। रानी की कमर, जांघें और गाँड़ एकदम सुआकार और सुडौल थी। वह अक्सर जीन्स और टॉप पहनकर कॉलेज आती थी। रानी की कमर के निचेसे उसकी जांघों पर से घूमती हुई उसकी गाँड़ का फैलाव और उसके फुले हुए गालों के बिच की दरार की हलकी सी झलक देखकर लड़के आह भरने लगते। कोई कोई बार जब वह स्कर्ट पहनकर कॉलेज में आती तो रानी की कमल की डंडी के सामान जांघें देखकर अच्छे अच्छों की हालत खराब हो जाती थी और ख़ास कर लड़कों में शर्त लगती थी यह जानने के लिए की उस दिन रानी ने कौनसे रंग की पेंटी पहनी होगी।

कॉलेज में रानी को महिला टीम में क्रिकेट खेलते हुए देख कर कई लड़के रानी पर मरते थे और उसके करीब आने की भरपूर कोशिश करते थे। रानी का अच्छा खासा फैन क्लब था, पर रानी को राज ज्यादा अच्छा लगा क्यूंकि वह उसकी हर बात मानता था, रानी के बारेमें हमेशा चिंतित रहता था और उसकी बहुत इज्जत करता था। दोनों में मुलाकातें होती गयीं और देखते ही देखते दोस्ती प्यार में बदल गयी।
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03-22-2020, 12:48 PM,
#3
RE: kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
राज कमल को रानी के साथ प्यार के बारे में बताता था। उसने कमल से कहा की कई बार उसने रानी को किस किया और उसके स्तनों का मजा लिया था। राज रानी के भरे हुए स्तनों के बिच कैसे अपना सर सटा कर कई बार रानी की गोद में लेट जाता था यह बताते राज और कमल दोनों अपने हाथों से हस्तमैथुन कर अपना माल निकालते थे। पर रानी ने राज को उससे आगे बढ़ने की कतई इजाजत नहीं दी। रानी का कहना था की पहले शादी फिर सब कुछ। राज ने कमल से और अपने माता पिता से रानी के बारेमें बात की तो सब बड़े खुश हुए। दोनों की शादी की बात होने लगी।


राज ने ख़ास कमल की पसंद जानने और रानी से मिलाने के लिए कमल को बुलाया। हालांकि रानी कमल से पहले मिली नहीं थी पर कमल की क्रिकेटर के रूप में शोहरत से वह भली भाँती वाकिफ थी। पहली बार रानी को जब पता चला की कमल राज का दोस्त है, तब रानी की ख़ुशी का ठिकाना ना रहा। कमल उसका हीरो था। क्रिकेट खेलनेमें वह कमल को अपना आदर्श मानती थी और उसके बारेमें अखबारों में बड़े चाव से पढ़ती रहती थी। रानी ने तो कमल के कई फोटो अपने रूम में दीवारों पर सजा रखे थे। रानी कमल को मिलते ही उसकी दीवानी हो गयी।

कमल की रानी से जब पहली बार मुलाक़ात हुई तो कमल भी रानी को देखता ही रह गया। रानी की तेज और कटीली आँखों ने कमल के दिल को जैसे अपनी नजर की छुरी से काट सा दिया। रानी के पुरे फुले हुए बड़े स्तनों को वह देखता ही रह गया। रानी के घने लम्बे बाल देखते ही बनते थे। वह उतनी सुन्दर पीछे से थी जितनी आगे से।

जब राज ने कमल से रानी के बारे में पूछा और उस से शादी करने की इजाजत मांगी तब कमल ने उसे फ़ौरन हाँ कह दिया। उन शुरूआती मुलाकातों में ही रानी और कमल की भी अच्छी खासी दोस्ती हो गयी थी।

रानी से मिलने के बाद जब राज ने कमल से पूछा की क्या कमल को रानी पसंद है? तब कमल के मुंह से अनायास ही निकल गया की, "यार तेरी गर्ल फ्रेंड तो बड़ी मस्त है।"

राज ने कमल को झकझोरते हुए कहा, "कमल भैया, मुझे हमारा एक दूसरे से किया वादा याद है। अगर तुम्हें रानी बहुत पसंद है तो तुम जब बोलो तो मैं तुम्हारे लिए रानी को छोड़ सकता हूँ। शायद रानी को भी कोई आपत्ति नहीं होगी क्यूंकि वह तो वैसे ही आपके पीछे पागल है।"

कमल ने राज से कहा, "तू पागल है? मैं शादी शुदा हूँ। मेरा कहने का मतलब था की रानी मस्त है और तू उसके साथ खूब मजे कर।" कमल राज से रानी की ज्यादा तारीफ़ करने से डरता था क्यों की राज कहीं ऐसा ना सोचे की कमल की नजर रानी पर है।

राज ने देखा की कमल भैया मना तो कर रहे थे पर कमल भैया की नजर उस की होने वाली बीबी रानी पर थी इस बात में कोई शक नहीं था। हालांकि कमल भैया ने ना तो ऐसा वैसा कुछ कहा और ना ही कुछ किया, पर राज समझ गया की कमल भैया को रानी भा गयी है। राज जानता था की रानी थी ही इतनी सुन्दर और देखने में सेक्सी की अगर मौक़ा मिले तो कमल भैया तो क्या, कोई भी मर्द रानी को चोदना चाहेगा।

वह जानता था की कमल भैया तो वैसे ही रंगीन मिज़ाज के थे, तो भले ही वह कुछ ना बोलें पर उनके मन की मंशा क्या होगी वह राज जानता था। उसी वक्त राज ने मनमें प्रण लिया की अगर कमल भैया के मनमें की कहीं न कहीं रानी को चोदने की थोड़ी सी भी इच्छा है तो वह कमल भैया के मन की ख्वाहिश जरूर पूरी करने की भरपूर कोशिश करेगा।

राज ने रानी को साफ़ साफ़ बता दिया था की कमल भैया उसकी आत्मा थे और वह कमल भैया के लिए कुछ भी कर सकता है। एक बार जब रानी ने राज से हंसी मजाक में पूछा की क्या वह कमल को रानी से भी ज्यादा प्यार करता है तो राज ने पट से कहा, "तुम मेरी जान हो और कमल भैया मेरी आत्मा है। तुम मेरे जीवन में अब आयी हो। कमल भैया तो मुझसे बचपन से जुड़े हैं। भगवान् करे ऐसी घडी ना आये, पर अगर मुझे तुम दोनों में से कोई एक को चुनना पड़े तो मैं कमल भइया को चुनूंगा।"

यह सुनकर रानी दंग रह गयी। आज तक रानी ने किसी व्यक्ति में भी अपने दोस्त के लिए इतना समपर्ण का भाव कभी नहीं देखा था। पर रानी खुश भी हुई क्यूंकि वह कमल को तो वह वैसे भी अपना हीरो मानती थी और कमल के खेल और उसके व्यक्तित्व की वह दीवानी थी।

राज की शादी में कमल और कुमुद ख़ास मेहमान रहे। राज की शादी के दरम्यान कुमुद की भी रानी से अच्छी खासी दोस्ती हो गयी थी। शादी के बाद अक्सर कमल की पत्नी कुमुद राज की बीबी रानी से फ़ोन पर बात करती रहती थी। फ़ोन पर बात करते करते रानी और कुमुद भी ख़ास दोस्त बन चुके थे। हालांकि उसके बाद ज्यादा मिलना हुआ नहीं।

राज को अहमदाबाद में अच्छे ओहदे वाली सरकारी नौकरी मिली। शादी के पहले एक डेढ़ साल तक तो राज की और उसकी बीबी रानी की रति क्रीड़ा धमाके दार हुआ करती थी। राज की बीबी रानी बिस्तर में आक्रमक थी। पर डेढ़ साल गुजरने के बाद दोनो का सेक्स का जोश धीरे धीरे कम होने लगा। तो कमल का भी तो वही हाल था। राज और कमल फ़ोन पर चर्चा करते यही सोच रहे थे की शादी के पहले उन्होंने सोचा था की शादी के बाद खूब मजे करेंगे पर डेढ़ साल के बाद ही पति पत्नी को एक दूसरे से सेक्स करने में मजा इतनी जल्दी कम कैसे हो जाता है? ख़ास तौर से महिलाओं को तो यह बात सटीक लागू होती है।
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03-22-2020, 12:48 PM,
#4
RE: kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
राज अपनी पत्नी रानी को कमल के बारे में हर रोज कुछ न कुछ बताता ही रहता था। एक रात रानी को उसने बातों बातों में उनके बचपन के बारे में बताया। राज ने बताया की कमल और राज ने एक दूसरे को वचन दिया था की वह एक ही बीबी के साथ शादी करेंगे। और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह दोनों एक दूसरे की बीबी को मिल बाँट कर एन्जॉय करेंगे।

राज की पत्नी रानी हंसने लगी। उसने कहा, "तुम दोनों पागल हो क्या? मिलजुल कर एकदूसरे की बीबी को एन्जॉय करने की बात कहाँ से आयी? ऐसा कभी होता है क्या? अगर मान भी लिया जाए की पति की ऐसी इच्छा हो तो भी बीबियाँ थोड़े ही मानेगीं? ऐसे थोड़े ही होता है? यह सारी बातें बचपन की बातें हैं। अब तुम दोनों बड़े हो गए हो।"

तब राज ने कहा, "ऑफिशियली ना होता हो। पर मैंने सूना है की छुपे छुपे तो सब होता है। कई दोस्त ऐसे भी हैं जो मौक़ा मिलने पर एक दूसरे की बीबी को बदलते हैं और उनके साथ सेक्स का मजा लेते हैं। ऐसे कई क्लब भी हैं।"

रानी ने कहा, " पागल हो गए हो क्या? आपका कहने का मतलब है की दो पति मिलकर दोनों में से किसी एक की बीबी को चोद सकते हैं या फिर दो पति एक दूसरे से मिलकर एक दूसरे की बीबियों को चोद सकते हैं? क्या बात करते हो? अगर ऐसा हो तो फिर शादी का वजूद ही क्या रह जाता है?"

राज ने रानी की बात का कोई जवाब नहीं दिया। रानी ने राज को सीधा सटीक जवाब तो दे दिया पर उसके मन में इस वार्तालाप से जरूर एक आशंका जगी की कहीं उसके पति के मनमें उस को कमल भैया से चुदवाने की इच्छा तो नहीं? यह सोचते ही रानी के मनमें एक अजीब सा तूफ़ान उमड़ने लगा। हालांकि रानी ने उस विचार पर उस समय ज्यादा ध्यान नहीं दिया और फ़ौरन उसे अपने मन से खारिज कर दिया।


लोग अक्सर अपनी शादी शुदा जिंदगी की नाजुक बातें छुपा के रखते हैं। पर राज और कमल फ़ोन पर अपने निजी वैवाहिक जीवन के बारेमें अक्सर बात किया करते थे। खास तौर पर राज कमल को अक्सर फोन किया करता और अगर कोई नयी ताज़ी बात हो तो बताने में संकोच नहीं करता था। उसने बचपन से ही तय किया था की कमल उसका दुसरा रूप है। वह कमल से कुछ भी छिपाना नहीं चाहता था। कमल यह समझ नहीं पाया की क्या राज कमल को सारी बातें बता कर अपना छोटे भाई का फर्ज निभा रहा था या फिर उसकी कुछ और मंसा थी।

कमल राज और रानी की गोपनीय बातें सुनकर बड़ा उत्तेजित हो जाता था। रानी पर कमल वैसे ही फ़िदा था, हालांकि वह अपने आप को बड़ा नियत्रण में रखता था। जब राज कमल को फ़ोन पर उसकी और उसकी बीबी रानी के सेक्स की बातें बताता था तो कमल का लण्ड खड़ा हो जाता था और कमल बगैर रुके अपने हाथों से ही मुठ मारकर अपना माल निकाल लेता था, या फिर अपनी बीबी कुमुद पर उस रात कहर ढा देता था।

हालांकि कमल की बीबी कुमुद, कमल को राज और कमल के बिच फ़ोन पर होती बातों के बारेमें ज्यादा कुछ पूछती नहीं थी, पर जब कमल राज के साथ फ़ोन पर बात करता था और वह पास ही होती थी तो सुनकर थोड़ा बहुत समझ जाती थी की दोनों दोस्तों के बीचमें क्या बातें हो रही थीं। कमल भी कुमुद को बताता था की उनकी क्या बात हो रही थी। कमल की बात सुन कर कुमुद आश्चर्य में पड़ जाती थी की उनकी दोस्ती इतनी गहरी थी की एक दूसरे को इतनी निजी गोपनीय बातें बतानेमें दोनों दोस्तोंको कोई ख़ास झिझक नहीं होती थी। खैर उसे उनकी दोस्ती के बारेमें तो पहले से पता तो था ही।

राज और कमल और कमल की पत्नी कुमुद और राज की पत्नी रानी भी फ़ोन पर एक दूसरे से बात करते रहते थे। कुछ समय बाद कमल के मन में यह स्पष्ट हो गया था की राज की नजर उसकी बीबी कुमुद पर कुछ ज्यादा ही थी। कमल तो खैर राज की पत्नी रानी पर पहले से ही फ़िदा था। कमल जानता ही था की रानी भी उसे पसंद करती थी। फ़ोन में दोनों एक दूसरे की बीबी के साथ हल्का फुल्का मजाक जरूर कर लेते थे बस। पर बात उससे आगे नहीं बढ़ी।

एक बार कमल और कुमुद अपने गाँव जाते हुए राज के यहां एक दिन रुके। तब कमल ने महसूस किया की कुमुद को देखकर राज भी कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो रहा था। कमल को लगा जैसे राज को कुमुद का बदन (वह पतली और सुडौल थी), उसका पहनावा, उसकी चालढाल उसका मुस्काना खूब पसंद आता था। शायद राज सोच रहा होगा की कमल की पत्नी कुमुद राज के ही टाइप की है।

जब कमल ने राज को कुमुद को ताकते हुए पकड़ा तो एक आँख मारकर उसे चिढ़ाया। कमल की आँखों का इशारा देख कर राज सहमा गया और उसने बरबस अपनी निगाहें कुमुद के बदन से हटा ली। ऐसे ही बातों में मुलाकातों में धीरे धीरे दोनों जोड़ी के बिच आपसी सम्बन्ध गहरे होते चले गए।
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03-22-2020, 12:48 PM,
#5
RE: kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
शादी के करीब दो साल बाद राज का मुंबई जाने का प्रोग्राम बना। राज के आने की खबर सुनते ही कमल ने आवभगत की तैयारियां शुरू कर दी। कमल बार बार अपनी बीबी कुमुद से कहने लगा, "डार्लिंग राज मेरी जान है। वह मेरा दोस्त और भाई नहीं वह मेरा सब कुछ है। जितना मैं तुम्हें चाहता हूँ उतना ही या शायद उससे ज्यादा मैं राज को चाहता हूँ। राज की आवभगत मैं कोई कसर नहीं होनी चाहिए।" कुमुद भी जानती थी की राज कमल की जान है। कुमुद को भी तो राज की सभ्यता और शर्मीलापन खूब पसंद था। राज की चोरी छुपी नजरें कुमुद भी भांप गयी थी।


कमल ने मुंबई में एक छोटा सा फ्लैट ख़रीदा था। राज सबेरे ही कमल के घर पहुँच गया और अपनी आवभगत देख कर खुश हुआ। कमल की बीबी कुमुद पहले से ही भजन कीर्तन में कुछ ज्यादा ही विश्वास रखती थी। उन्होंने एक छोटा पर खूबसूरत मन्दिर रसोई घर में ही सजा रखा था।

उस शाम, कमल कुछ सामान खरीदने बाहर निकला था। वापस आते हुए कमरे में दाखिल हो रहा था की कमल ने देखा की राज एक कोने में बैठे हुए कमल की बीबी कुमुद को ताड़ रहा था, जो की उस समय दूसरे कमरे में फर्नीचर की डस्टिंग कर रही थी। कुमुद ने चुन्नी नहीं डाली थी और अपना घाघरा अपनी जाँघों पे चढ़ा कर वह सफाई के काम में तल्लीन थी। वह राज की हाजरी से बेखबर सफाई में लगी हुई थी और कोई गाना हल्के हल्के गुनगुना रही थी। कमल ने तब राज की आँखों में जो भाव देखे तो कमल समझ गया की उसकी बीबी को देख कर राज के मन में कुछ कुछ जरूर हो रहा था।

उस रात कमल ने अपनी बीबी कुमुद को चिढ़ाया और कहा, "मेरा दोस्त राज तुझ पर फ़िदा है, ऐसा लगता है। उसे तेरी पतली कमर, सुआकार गाँड़ और करारी चूँचियाँ बहुत पसंद है। मैंने देखा है की जब तू चलती है तो वह तुझे पीछे से ताकता ही रहता है और तेरी गाँड़ हिलाती हुई चाल पर वह फ़िदा लगता है। बेचारा दूसरे कमरे में सोते हुए भी शायद तुम्हारे ही सपने देख रहा होगा।"

जब कमल की बीबी कुमुद ने यह सूना तो वह कमल पर आग बबूला हो गयी और बोली, "तुम्हें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं यह पता ही नहीं है। वह तुम्हारा गहरा दोस्त है और मैं तुम्हारी बीबी। राज ने कभी भी आज तक गलत अंदाज से मुझे छुआ नहीं है। वह एक आदमी है। आदमी की नजर औरत के शरीर पर स्वाभाविक पड़ ही जाती है। पर इसका मतलब यह नहीं की वह बुरा है। तुम्हारी नजर में ही कुछ गड़बड़ है।" यह कह कर कुमुद रिसिया गयी। कमल ने उसे शांत करने की कोशिश की पर वह न मानी। आखिर में कमल थक हार कर करवट बदल कर बिस्तर में खिसक कर कुमुद से थोड़ी दूर लेट गया।

कमल की बात सुन कर कुमुद को चैन नहीं पड़ रहा था। वह शयन कक्ष से दरवाजा खोल कर बाहर निकली। बाहर के कमरे में लेटा हुआ राज अंदर के कमरे से आ रही आवाजें सुन कर यह समझ गया था की कमल भैया और कुमुद के बिच कुछ कहा सुनी हो रही थी पर कुछ स्पष्ट नहीं सुनाई पड़ रहा था। एकाध बार उसने अपने नाम का जिक्र होते हुए सूना जरूर था।

राज ने जब देखा की कुमुद बाहर आ गयी थी और वह दुखी और नाराज लग रही थी तो वह भाग कर कुमुद के पास गया उसकी आँखें नम हो रही थी। राज ने कुमुद से सम्मान और प्यार से पूछा की क्या बात थी। जैसे ही राज ने कुमुद से थोड़ी सी सहानुभूति जताई की कुमुद की आँखों में से गंगा जमुना बहने लगी। कुमुद राज से लिपट कर और उसके कंधे पर सर रख कर रोने लगी। राज ने अपनी बाहें फैलायीं तो अनायास ही कमल की बीबी कुमुद राज की बाहों में समा गयी। वह बोल नहीं पा रही थी। राज थोड़ी देर उसकी भाभी के सर पर हाथ फिराता रहा। कमल सारा नजारा अंदर से देख रहा था।

अपने भाई समान दोस्त की बीबी को देखते ही राज के दिल में कुछ अजीब सी हलचल होने लगती थी। उसको कुमुद की पतली कमर और उसपर भी तने हुए कर्रारे स्तन मंडल और नोकीली और सुरम्य नाक बड़ी लुभावनी लगती थी। राज का एक हाथ कुमुद के कधों पर था और इधर उधर जाने के लिए बेकरार हो रहा था।

कमल सोने का ढोंग करके बिस्तर पर पड़ा पड़ा सारा नजारा देख रहा था। राज ने कुमुद से पूछा की क्या हुआ था। कुमुद थोड़ी सहमा कर राज से बोली, "आपके दोस्त मुझसे आजकल लड़ते हैं और बड़ी उटपटांग बातें करते हैं। लगता है जैसे वह मुझसे संतुष्ट नहीं है।"

राजने जवाब में कहा, "कमल भैया आपसे संतुष्ट नहीं है? कमाल है! आप के जितनी सुन्दर और सभ्य बीबी पाकर तो कोई भी अपने आप को भाग्यशाली समझेगा। रानी भी सुन्दर है पर आपके मुकाबले नहीं। मैं तो कमल भैया की ईर्ष्या करता हूँ की उसे आपके जितनी सेक्सी पत्नी मिली"

राज के मुंहसे अनायास ही "सेक्सी" शब्द निकल गया। कमल बड़ा हैरान हो गया यह सुन कर की उसका प्यारा दोस्त राज जिसको अबतक वह बच्चा समझता था, वह उसी की बीबी को सेक्सी कह रहा था! कमल सोच रहा था की कहीं उस की बीबी कुमुद राज के मुंह से सेक्सी शब्द सुन कर तिलमिला ना उठे। पर ऐसा कुछ हुआ नहीं।
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03-22-2020, 12:48 PM,
#6
RE: kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
उलटा कुमुद राज की आँखों में आँखें डाल कर पूछने लगी, "मजाक मत करो राज। मैं कोई सुन्दर नहीं हूँ। अगर मैं सुन्दर होती और तुम्हारे भैयाको पसंद होती तो वह मुझसे इस तरह की उटपटांग बाते न करते। "


कुमुद को इतना करीब पाकर राज की हालत खराब हो रही थी। उसके पजामेमें उसका लण्ड फर्राटे मार रहा था। वह अपने आप को बड़ी मुश्किल से रोक पा रहा था। राज के दिमाग में खून का बहाव एकदम तेज हो रहा था। लगता था कहीं उत्तेजना में उसके बदन में खून की धमनियां फट न जाएँ।

बड़ी मुश्किल से अपने आप को सम्हालते हुए राज ने पूछा "कैसी बातें?" तो कुमुद बोली, "वह हर रात तुम्हारे बारे में....." बोल कर वह शर्मा गयी और बोली, "जाने दो मैं क्या कहूं? मुझे शर्म आती है।" और कुमुद थोड़ी देर चुप हो गयी।

कमरे में थोड़ी देर के लिए सन्नाटा छा गया। राज और कुमुद की गहरी साँसों की आवाज कमल को साफ़ सुनाई दे रही थी। राज के पजामेमें उसका लण्ड खड़ा हो गया था। कुमुद जब राज से लिपट कर खड़ी थी तब राज का लण्ड कुमुद के पाँव के बिच ठोकर मार रहा था। कमल की बीबी कुमुद ने राज के लण्ड को अपने पॉंव के बिच ठोकर मारते हुए महसूस किया तो वह बोल पड़ी, "अरे राज भैया, तुमभी.....? यह ... क्या है?" यह कह कर कुमुद राज से थोड़ा हट कर खड़ी हुई।

राज बेचारा क्या बोलता? ना तो उससे रहा जा रहा था ना उससे सहा जा रहा था। वह लज्जा से तार तार हो रहा था। उसका भेद खुल गया था। उसके लिए तो अब एक ही रास्ता था। वह एकदम करुणा भरी आवाज में कुमुद से क्षमा मांगते हुए बोला, "भाभी, मुझे माफ़ कर दीजिये। मैं पहले से ही कुछ नर्वस था। आपको देखकर, आपकी सुंदरता से मैं कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गया। मैंने फिल्मों में तो सुन्दर लडकियां देखि हैं, पर साक्षात् आपके जितनी सुन्दर लड़की आपके अलावा नहीं देखि। प्लीज आप माफ़ कर दीजिये। आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा।"

जब एक औरत अपनी सुंदरता की इतनी भूरी भूरी प्रशंसा सुनती है तो उसे प्रशंसा करने वाले के दोष नहीं दीखते। कमल की बीबी कुमुद अपनी प्रशंसा सुनकर आधा शर्म से और आधा सहानुभूति से राज की और देख कर बोली, "ठीक है बहुत हो गया। मेरी जूठी तारीफ़ करके अब तुम मेरी टांग खींचना बंद करो। मैंने माफ़ किया। बस? "

राज ने कहा, "तो फिर ज़रा हंस भी दो भाभी।"

सुन कर कुमुद हंस पड़ी और राज को कमर में नकली घूँसा मारते हुए बोली, "तुम भी ना, तुम्हारे दोस्त से कम नहीं हो। मुझे लगता है तुम्हारे भाई तुम्हारे बारेमें सच ही कह रहे थे।"

बिस्तर पर लेटा हुआ कमल अपनी बीबी और अपने दोस्त राज के बिच की बातें सुन रहा था।

इस हादसे के बाद राज और कुमुद में थोड़ी और पटने लगी। राज कमल और कुमुद के साथ दो दिन और रुका। जाने से एक दिन पहले शाम को जब सब एक साथ बैठे थे तो कुमुद ने अपने पति कमल से राज के सामने ही बातों बातों में कहा, "कमल, तुम्हारा दोस्त राज, तुमसे कहीं ज्यादा सयाना है।"

कमल जोर से हंसा और बोल पड़ा, "अच्छा? तुझे भी राज पसंद है? मेरा दोस्त है ही ऐसा। अगर वाकई में तुम्हें राज इतना पसंद है तो चल, आज रात राज को हमारे साथ ही सोने के लिए बुला लेते हैं। हम सब मिलकर मौज करेंगे।"

कमल की बात सुन कर राज का मुंह खुला का खुला ही रह गया। कुमुद गुस्से से तिलमिला उठी और कमरे से झाड़ू निकाल कर जोर जोर से चिल्लाकर कमल से कहने लगी, "तुम समझते क्या हो अपने आपको? जो मन में आये सो बोल देते हो?" वह कमल के पीछे झाड़ू ले कर मारने के लिए दौड़ पड़ी। कमल भाग कर घर के बाहर की और दौड़ पड़ा। राज एकदम बिच में आया और कुमुद के हाथ से झाड़ू लेकर कोने में फेंक दिया और कमल के पीछे भागती हुई कुमुद को रोका और अपनी बाहों में खिंच कर दबा कर उसे शांत करने लगा।
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03-22-2020, 12:48 PM,
#7
RE: kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
उस दिन की तरह राज का लण्ड फिर से एकदम खड़ा होकर कमल की बीबी कुमुद के बदन को टॉच रहा था। इस बार तो दोनों के बदन के हिलने से और राज का कुमुद को अपने काफी करीब दबाने से शक की कोई गुंजाइश ही नहीं थी की राज का लण्ड कुमुद ने जरूर अनुभव किया था। पर इस बार कुमुद इस बारेमें कुछ नहीं बोली और राज की बाहों में कमल को कोसती रही।

राज कमल की और मुड़ा और बोला, "हद है भैया। आप जो कुछ मन में आता है वह बोलते जा रहे हो। ज़रा अपने आप पर नियत्रण रखो। ऐसा बोलोगे तो फिर मैं तुम्हारे घर नहीं आऊंगा।"

कमल ने कहा, "भाई मैं तो जो मनमें आता है वह बोल देता हूँ। मुझे माफ़ करदे पर ऐसे कभी मत कहना की तू मुझसे दूर हो जाएगा।"

कमल और राज गले लग गए। दोनों की आँखें आंसुओं से नम हो गयी।

कुमुद भी उनके पास आयी और उन दोनों से लिपट कर बोली, "यह तो इमोशनल अत्याचार हो गया।अब बस भी करो। तुम दोनों सगे भाई ना होते हुए भी एक दूसरे को इतना चाहते हो की एक दूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हो। यह अद्भुत है। भगवान आप दोनों की जोड़ी सलामत रखे।"


अगले दिन राज को वापस जाना था। उस रात राज, कमल और कुमुद तीनों बिस्तर पर लेटे हुए देर रात तक बातें करते रहे। कुमुद राज और कमल के बिच में लेटी हुई थी। उस रात बातें करते हुए पता नहीं कितनी बार राज और कुमुद में शारीरिक स्पर्श हुआ होगा। देर रात तक बातें चलती रहीं। फिर राज अपने कमरे में सोने के लिए चला गया। दूसरे दिन राज वापस अहमदावाद चला गया।

जब भी उनकी फोन पर बातचीत होती तो कमल रानी के बारेमें पूछता और राज कुमुद के बारेमें।

एक दिन राज कुछ ज्यादा ही दुखी था। कमल से फ़ोन पर बात करते करते वह बोल पड़ा, "भैया, अब तो जिंदगी बोझ बन गयी हो ऐसा लगता है। शादी के शुरू में तो मेरी और रानी की खूब जमी। हमने खूब मजे किये। पर अब तो सेक्स का जोश धीरे धीरे कम हो गया है। इस लिए नहीं की हमें सेक्स करना अच्छा नहीं लगता, पर इस लिए की सारी नवीनता ख़त्म हो गयी है। मुझसे ज्यादा रानी पर इस का असर दिखाई देने लगा है। क्या बताऊँ? मेरी सेक्स करने की इच्छा को वह अक्सर "थक गयी हूँ।" कह कर टाल देती है या फिर टाँगे फैला कर कहती "चलो जल्दी निपटाओ, मुझे नींद आ रही है। मुझे बड़ा दुःख होता है पर क्या करूँ? मेरी समझ में नहीं आता की क्या किया जाय।"

तब अचानक कमल को वह लेख याद आया जो उसने कोई ब्लॉग में पढ़ा था। कमल ने कहा, "राज मेरे पास एक फॉर्मूला है। अगर तुझे पसंद आता है तो अमल कर।" कमल ने फिर उसका प्लान जो उस ब्लॉग के लेख पर आधारित था, राज को विस्तार से बताया।

सुनकर राज खिल उठा। राज ने कहा, "भाई, तुम्हारे प्लान में दम है। तुम कहो तो मैं इसे आज से ही अमल करना शुरू कर देता हूँ।"

कमल ने कहा, "राज यह पहला सोपान है। इस प्रोग्राम के तीन सोपान है। दुसरा और तीसरा बाद में बताऊंगा। "

राज ने कमल को विश्वास दिलाया की वह उसे एकदम अमल करना शुरू कर देगा और कमल को बताता रहेगा की असर कैसा रहा।

करीब दो हफ्ते गुजर गए पर कमल को राज का कोई फ़ोन ना आया। कमल बेचैन था, क्यूंकि ऐसा कभी नहीं हुआ की राज दो या तीन दिन में कोई फ़ोन ना करे। कमल ने फ़ोन नहीं किया क्यूंकि उसे पता था की राज रानी के साथ व्यस्त होगा। तब फिर एक दिन अचानक ही राज का फ़ोन आया। राज ने सबसे पहले तो इतने दिन तक फ़ोन न करने के लिए माफ़ी मांगी और फिर तब तक का विस्तार पूर्वक विवरण दिया।

राज ने कमल से कहा, "कमल भैया तुम तो यार कमाल के जादूगर हो। जैसा तूम ने बताया था, मैं रानी को बाहर घुमाने के लिए ले जाने लगा हूँ। पहले मैं खुद तो बाहर घूमता था और नए नए लोगों से मिलता रहता था। शाम को मैं जब घर लौटता तो "थक गया हूँ" कह कर यातो टीवी देखने लगता यातो अखबार पढ़ने। रानी बेचारी रसोई में लगी और घरमें बैठ कर वही पुरानी घिसी पिटी जिंदगी जी रही थी। उसके लिए आज और कल में कोई भी फर्क नहीं था। मैं धीरे धीरे रानी को मेरे साथ शामको बाहर खाने, तो कभी उसकी सहेलियों से मिलने तो कभी क्लब में ले जाने लगा। मेरी बीबी में इस कारण जो परिवर्तन आया वह मुझे हैरान करने वाला था। रानी की मुस्कान लौट आने लगी। भैया वाकई फॉर्मूला जबरदस्त है।"

कमल ने कहा, "मैं जैसा कहता हूँ ऐसा करते जाओ। देखो तुम्हारे जीवन में कैसे बहार लौट आती है। अब दुसरा कदम आगे बढ़ाओ। रानी को थोड़े भड़कीले कपडे पहनने का आग्रह करो। कोई उनको लाइन मारेगा तो वह कभी किसी को थोड़ी छूट भी देगी। चिंता मत करो, तुम्हारी बीबी तुम्हारी ही रहेगी। इस बिच तुम भी कभी कभी किसी की बीबी पर लाइन मारोगे तो रानी भाभी तुम्हें कुछ नहीं कहेगी।"

राज ने कुछ निराशा से कहा, "भैया रानी बाहर जाने के लिए तो तैयार होती है, उसे सजधज ने का भी बड़ा शौक है पर आजकल वह अपने अंग प्रदर्शन करने से डरती है। कहती है, "अब मैं एक माँ बन गयी हूँ। यह सब मुझे शोभा नहीं देता। कॉलेज की बात और थी। ऐसे भड़कीले वेश में मुझे देख कर लोग हँसेंगे। कहेंगे बूढी घोड़ी जवान बनना चाहती है।"

कमल ने हंसकर कहा, "तुम एक काम करो। तुम रानी से कहो की वह शादी के बाद तो और भी सुन्दर और सेक्सी हो गयी है। दूसरे मर्द रानी को देख कर हँसेंगे नहीं, उसे देखकर घूरेंगे और रानी के पति की यानी तेरी इर्षा करेंगे। कहेंगे यह साले बन्दर ने मोरनी को फाँस लिया।
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03-22-2020, 12:49 PM,
#8
RE: kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
देखो राज यह सब कहने की बातें हैं। पर पत्नी को रिझाने के लिए यह बातें हैं बहुत जरुरी। रानी को कहना की तुम्हारे दोस्त तो अभी भी कहते हैं की भाभी शादी के बाद अब तो और भी सुन्दर लग रही है। देखो मेरे शब्दों का बुरा मत मानना, पर तुम रानी भाभी से स्पष्ट शब्दों में कहो की उनके स्तन, उनकी गांड और उनकी कमर, नाभि इत्यादि शादी के बाद तो और आकर्षक रूप से उभरे हैं और बड़े ही सेक्सी लग रहे हैं। उन्हें देखकर अच्छे अच्छों का लण्ड खड़ा हो जाता है। दूसरों को उन्हें देखने दो, जलने दो और तुम उसे एन्जॉय करो। अपनी बीबी से यह कहो की, "मेरी बीबी सब की बीबियों से ज्यादा सुन्दर लगनी चाहिए।"


कमल की बात सुन राज हैरान रह गया की उसकी बीबी के बदन के बारेमें कमल कितनी सटीक जानकारी रखता था।

खैर राज ने माना की पहले जब रानी ब्यूटी पार्लर जाने की बात कहती तो राज उसे कहता था, "बगैर मेकअप के ही तुम तो इतनी सुन्दर लग रही हो। जिसको तुम्हें पटाना था वह तो पट गया। अब ब्यूटी पार्लर जाने से क्या फर्क पडेगा?" और रानी निराश होकर ब्यूटी पार्लर जाने का प्रोग्राम कैंसिल कर देती थी।

पर अब राज ने तय किया की वह रानी को न सिर्फ ब्यूटी पार्लर जाने से नहीं रोकेगा बल्कि उसे प्रोत्साहित करेगा।राज ने कमल के इशारे पर प्लान का अमल करना शुरू कर दिया। एक दिन राज ने अपनी बीबी से पूछा, "डार्लिंग आज कल तुम ब्यूटी पार्लर क्यों नहीं जा रही?" तो रानी कुछ अजीब तरीके से राज की और देखने लगी।

राज ने कहा, "तुम कितनी ज्यादा सुन्दर हो, यह तुम्हें नहीं पता। मैं चाहता हूँ यह सुंदरता मेकअप से और निखरे और मेरी बीबी का बदन पूरी दुनिया को ढंढेरा पिट पिट कर पूछे की "है मुझसे कोई और ज्यादा सुन्दर?"

यह सुनकर रानी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे सज धज ने का शौक तो था ही। ऊपर से उसे पति का प्रोत्साहन मिला, तो वह जब भी कहीं जाने का प्रोग्राम बनता तो बड़ी खुश होकर पार्लर जाने लगी। आकर राज को सेक्सी पोज़ देकर पूछती, "मैं कैसी लग रही हूँ?"

राज उसे बाहों में लेकर कहता, "वाह भाई। आज तुम्हें देखकर मेरे सारे दोस्त इर्षा से मुझसे जलेंगे। आज तो मेरी बीबी एकदम सेक्स की मूर्ति लग रही है। मुझे यही चिंता हो रही है की तुम्हे देखकर मेरे दोस्त मेरी और इशारा कर कहेंगे यार इस बन्दर को ऐसी सुन्दर मोरनी कैसे मिल गयी? इस पोज़ में तुमको देखकर अच्छे अच्छों का लण्ड खड़ा हो जाएगा, और उनका तुम्हें चोदने का मन करेगा। तुम्हंज़ ऐसे देखकर मेरा भी तो मन कर रहा है मैं तुम्हें अभी, यहीं और इसी वक्त चोद डालूं।"

रानी हमेशा उसकी बातें सुनकर खिल जाती और "धत्त, ज्यादा ड्रामा मत करो। ज़रा शर्म करो। धीरज रखो, रातको तुम खूब चोदना।" कह कर हंस पड़ती।

फिर एक दिन राज ने कमल की कही दूसरी बात भी थोड़ी बढ़ाचढ़ा कर अपनी सुन्दर बीबी को कह ही डाली। राज ने रानी को कहा, "रानी डार्लिंग, तुम्हारे स्तन, तुम्हारी गांड और तुम्हारी कमर, नाभि इत्यादि शादी के बाद तो और आकर्षक रूप से उभरे हैं और बड़े ही सेक्सी लग रहे हैं। उन्हें देखकर अच्छे अच्छों का लण्ड खड़ा हो जाता है। मैंने तुम्हारी जितनी सुन्दर बीबी किसी की नहीं देखि। तुम्हें अगर मर्द लोग ताकते हैं तो उसे एन्जॉय करो। मैं तुम्हें सबसे ज्यादा सेक्सी देखना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ की तुम जब भी मौक़ा मिले तो भड़कीले कपडे पहनो। मैं चाहता हूँ की गैर मर्द तुम्हें ताकें और तड़पें। वह लोग तो तुम्हारे बारे में सोच कर मुठ मारें और मैं उनपर तरस खाकर तुम्हें प्यार से चोदूँ।"

धीरे धीरे राज की खूबसूरत बीबी रानी अपना रूप और सुंदरता को ऐसे सजाने लगी की सब देखते ही रह जाएँ। रानी को उसे खूबसूरत दिखाने की राज की चाहत बहुत भायी। वह सेक्सी वेश भी पहनने लगी। बल्कि कई बार वह अपनी नाभि के निचे तक साडी पहनके राज के साथ पार्टी में और मार्किट में भी गयी। जब लोग उसे लालच भरी नज़रों से देखते थे तो वह उसका मजा लेने लगी।

राज जिस क्लब का सदस्य था उस क्लब में रानी को शाम को ले जाने लगा। रानी ने उसी क्लब की युवा महिलाओं से मिलकर एक महिला क्रिकेट टीम बनायी और वहाँ और बाहर की टीम के साथ खेलने लगीं। राज ने कमल से यह बात की कमल बड़ा खुश हुआ और बोला की अगर रानी चाहे तो कमल उसे क्रिकेट के बारे में कुछ टिप्स दे सकता है।

उन्ही दिनों में कमल का तीन दिन के लिए क्रिकेट खेलने के लिए अहमदाबाद आने का प्रोग्राम बना। रानी यह सुनकर ख़ुशी के मारे उछल पड़ी। उसने राज से कहा की राज कमल भैया को कहें की वह दो चार दिन उनके वहाँ आकर रुकें और रानी को क्रिकेट की कोचिंग दें। राज ने जब कमल से यह कहा तो कमल ने राज की बात मान ली और कमल का प्रोग्राम तय हो गया। कमल ने बताया की वह तीन दिन तक तो होटल में टीम के साथ रुकेगा पर चार दिन वह राज के साथ गुजारेगा।
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03-22-2020, 12:49 PM,
#9
RE: kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
राज तो कमल के आने की खबर से मारे ख़ुशी के बाँवरा सा हो गया। उसने कमल भैया की आवभगत के लिए काफी तैयारी की और नया फर्नीचर, परदे, तौलिये और पता नहीं क्या क्या नयी चीज़ें खरीद लाया। राज का उत्साह देखकर उसकी की बीबी रानी हैरान रह गयी। वह जानती तो थी की कमल के लिए राज के मन में खूब प्रेम और सम्मान था, पर इस हद तक का प्रेम और उत्साह तो उसने पहली बार देखा। राज बार बार कहता, "कमल मेरा दोस्त नहीं, भाई भी नहीं, भगवान है। मैं उसके लिए जो भी करूँ कम है। उसने मुझे नयी जिंदगी दी है।"

तीन दिन जब कमल मैच खेल रहा था तो रानी रोज मैच देखने जाती थी। कमल का प्रदर्शन बैटिंग और बोलिंग में सर्वोत्तम रहा। रानी रोज खेल के बाद थोड़ी देर के लिए कमल से जरूर मिलती और मिलकर उसे बधाई देती। मैच खतम होने के दूसरे दिन राज कमल को सुबह ही सुबह घर ले आया।

कमल को जैसे ही घर में प्रवेश कराया की राज ने कमल की आरती उतारी, उसके पाँव खुद छुए और रानी से छूने को कहा। पर कमल ने राज की बीबी रानी को पाँव नहीं छूने दिया, बल्कि प्यार से गले लगाया। फिर राज ने कमल के ललाट पर तिलक लगाया, उसे जलपान कराया और सीधे ही अपने बैडरूम में ले जा कर थोड़ी देर लेट कर आराम करने को बाध्य किया।

कमल के लेटते ही राज पलंग के ऊपर कमल के पाँव के पास बैठकर कमल के पाँव दबाने लगा। एक कोने में खड़ी खड़ी रानी अपने पति का ऐसा मित्र प्रेम देखती रही। राज ने अपनी बीबी रानी को अपने पास बिठाकर उसके कंधे पर एक हाथ रख कर कहा, "रानी डार्लिंग, कमल भैया मेरा सर्वस्व है। जैसा मैं तेरे लिए सबकुछ हूँ वैसे कमल भैया मेरे लिए सब कुछ है। उनकी इच्छा भी मेरे लिए आज्ञा सामान है।"

पति की इतनी गहरी मित्र भक्ति देख कर रानी थोड़ी सी भावुक हो गयी और धीरे से राज के पास पलंग पर बैठ कर कमल का दुसरा पाँव अपनी गोद में लेकर उसे प्यार से दबाने लगी। कमल के मना करने पर भी वह नहीं मानी और जब तक कमल सो नहीं गया तब तक दोनों कमल की पाद सेवा करते रहे।

कमल ने महसूस किया की बरबस ही उसकी नजर न चाहते हुए भी रानी के सुन्दर और कमनीय बदन पर चली जाती थी। कमल को भी ऐसा लगा की रानी भी शर्माते हुए अपनी नजरें निचीं कर हल्का सा मुस्का कर उसे कुछ कुछ प्रतिक्रिया (रिस्पॉन्स) दे रही थी। जब कमल साथ होते तो रानी की बातें ख़तम ही नहीं होती थीं। वह कमल को उसके क्रिकेट के बारे में काफी पूछती रहती थी।

उन चार दिनों में राज तो अपने ऑफिस चला जाता पर रानी रोज कमल को क्लब में ले जाती और कमल और रानी क्लब में क्रिकेट की प्रैक्टिस करते। कई बार जब क्लब में ज्यादा लोग ना होते तो कमल रानी के पीछे सट कर खड़ा रहता और कैसे बैटिंग करना है वह सिखाता। कई बार कमल रानी के पीछे खड़े होकर रानी की बाहें पीछे से पकड़ कर कैसे गेंद फेंकी जाती है वह दिखाता।

उस समय कमल का लण्ड पतलून में खड़ा हो जाता और रानी को अच्छी तरह अपनी जाँघों के बिच में या फिर अपनी गाँड़ की दरार में कई बार कमल का लण्ड महसूस होता था। रानी जान गई थी की कमल बहुत उत्तेजित हो रहा था। बॉलिंग करते समय कैसे शरीर का संतुलन रखना चाहिए यह सिखाने के लिए कई बार कमल रानी के पीछे खड़ा होकर रानी की छाती पर अपने दोनों हाथ रख कर उसे सिखाता। ऐसा करते हुए उसे रानी के स्तनों को दबाने का पूरा मौक़ा मिलता।

रानी शायद समझ गयी थी की कमल भैया सिखाने के साथ साथ उसके बदन का मजा ले रहे थे पर वह कुछ नहीं बोलती। रानी कमल भैया की क्रिकेट खेलने की सूझबूझ और सिखाने की लगन से खुश थी। शायद रानी के मनमें भी तो कुछ कुछ सेक्स की आग लगी हुई थी।

उन चार दिनों में रानी कमल के साथ काफी कुछ घुलमिल गयी थी। अब वह पहले की तरह कमल से ज्यादा अतड़ी अलग सी नहीं रहती थी। रानी ने जाते समय कमल को रात ट्रैन में खाने के लिए खाना पैक कर दिया। जब कमल ने डिब्बा खोला तो उसमें से एक पर्ची निकली जिसमें लिखा था "हमारे घर आने का बहोत बहोत शुक्रिया। हमें भूल मत जाना और आते रहना।" कमल की समझ में नहीं आया की वह कोई ख़ास सन्देश था या फिर एक साधारण धन्यवाद।


राज का अपने प्रति इतना बदलाव और राज का रानी को इतनी छूट देना रानी को बहुत अच्छा तो लगा पर रानी के मनमें उत्सुकता हुई की आखिर कुछ न कुछ बात है जिससे की उसका पति रानी की और इतना ध्यान देने लगा है। आखिर बात क्या है? एकदिन राज से रानी ने वह बात पूछ ही डाली जिसका राज को डर था। उसने राज को बात बात में पूछा की, "राज एक बात बताओ। पहले तो आप अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे की मेरी और ज़रा भी ध्यान नहीं देते थे। पर आजकल आप मेरे बारे में, मेरे शरीर के बारेमें और मुझे सेक्सी दिखाने में आपका इंटरेस्ट इतना क्यों बढ़ गया है? आपमें अचानक इतना जबरदस्त परिवर्तन कैसे आया?"

तब राज ने जवाब दिया की "यह सब कमल का कमाल है।" और फिर राज ने रानी को कमल से हुई बातचीत के बारेमें बताया।

रानी राज की बात सुनकर हैरान रह गयी, फिर धीरे से बोली, "कमाल है। कमल भैया बड़े ही समझदार हैं। पत्नी का कैसे ध्यान रखना चाहिए यह वह बखूबी जानते हैं।" राज समझ गया की सेक्स लाइफ में सुधार होने से रानी भी खुश लग रही थी और दूसरे रानी को यह भी शिकायत नहीं थी की उसका पति राज कमल से रानी के बदन के बारेमें खुल्लम खुल्ला बात कर रहे थे।
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03-22-2020, 12:49 PM,
#10
RE: kaamvasna साँझा बिस्तर साँझा बीबियाँ
जब राज ने कमल से यह सब कहा तो कमल ने राज से पूछा, "एक बात तो हमारे पक्षमें है। रानी थोड़ी ही सही पर तैयार तो हो रही है। मैं तुम्हें तो मार्गदर्शन दे रहा हूँ, पर मेरी बीबी को तैयार करने में नाकाम हूँ। अच्छा एक बात बताओ, रानी को कभी ज्यादा रोमांटिक वाली; अरे साफ़ साफ़ कहूं तो ब्लू फिल्म दिखाते हो क्या?"

जब राज ने कहा, "नहीं। अरे मैंने खुद ही कोई ब्लू फिल्म नहीं देखि तो रानी को कहाँसे दिखाऊंगा?"

कमल ने अपना सर पीटते हुए कहा, "तुम तो बड़े भोंदू निकले यार। आजकल यह सब मिल जाता है। ज़रा कोशिश करो। अपनी बीबी रानी को गरमा गरम हॉट ब्लू फिल्म दिखाओ। मैं एक काम करता हूँ। मैं तुम्हें एक लिंक भेजता हूँ। तुम उस ब्लू फिल्म को देखो और भाभी को भी दिखाओ। फिर देखो, भाभी में और कितना बदलाव आता है!"

तब राज ने पूछा, "भैया तुमने यह सब किया है क्या? जब मैं वहाँ आया था तो मुझे लगा की तुम्हारी अपनी विवाहित जिंदगी भी कुछ ज्यादा बढ़िया नहीं चल रही थी।"

कमल एक लम्बी और बड़ी गहरी साँस लेकर बोला, "अरे भाई, यह सब अपने तजुर्बे से ही तो कह रहा हूँ। हम कोई आसमान से नहीं टपके। मुझे किसीने रास्ता दिखाया। अब मैं तुम्हें राह दिखा रहा हूँ। पर हाँ, मेरी कहानी तुमसे थोड़ी अलग है। कुमुद और रानी में अंतर है। मेरे दबाव के कारण कुमुद थोड़ी बदली तो है, पर उसे तैयार करना मेरे लिए तो भाई पहाड़ पर चढ़ने जैसा है। पर मेरी छोडो, जहां आगे बढ़ सकते हैं वहाँ तो कोशिश करें।"

कमल की बात सुन कर राज मन ही मन में दुखी हुआ की कमल भैया और कुमुद भाभी की जोड़ी अच्छी चल नहीं रही थी। शायद कुमुद भैया को कुमुद भाभी को चोदने में भी मजा नहीं आ रहा था। राज की यह बात समझ में नहीं आयी क्यूंकि राज को तो कुमुद बड़ी सेक्सी लगती थी और राज के मनमें एक ख्वाहिश थी की अगर मौक़ा मिले तो और अगर कमल भैया को कोई आपत्ति ना हो तो राज भी कुमुद भाभी को चोदना चाहता था। राज ने फिर दुबारा दृढ निश्चय किया की एक न एक दिन वह जरूर अपनी बीबी रानी को तो कमल भैया से जरूर चुदवायेगा। शायद कमल भैया भी कुमुद को राज से चुदवाने के लिए राजी हो जाएँ। पर सबसे ज्यादा जरुरी यह था की पहले अपनी बीबी रानी को कमल भैया से चुदवाने के लिए तैयार करना।

राज ने कमल से वह ब्लू फिल्म वाली लिंक भेजने को कहा तो कमल ने राज को एक वेबसाइट की लिंक भेजी और कहा, "इसे एकदम गुप्त रूपसे अपने लैपटॉप पर डाउनलोड कर देखना और फिर रानी भाभी को भी दिखाना। फिर मुझे बताना की क्या हुआ?"

राज ने लिंक खोल कर वीडियो देखा तो उस वीडियो में दो मित्र अपनी पत्नियों के साथ कोई हिल स्टेशन जाते हैं। संयोग वश उन्हें एक ही कमरे में रुकना पड़ता है। वहाँ वह एक दूसरे की बीबियों को कम कपड़ों में देखते हैं।


दो पलंग एकसाथ जुड़े हुए होते हैं और रात को दोनों पति अपनी पत्नियों से लिपट कर सोते हैं तभी रातको अचानक ही एक कपल उत्तेजित हो जाता है और पति पत्नी से चोदने की रट लगाने लगता है। आखिर में पत्नी पति की बात मानकर कपडे पहने हुए ही अपना घाघरा ऊंचा करके उसे चोदने देती है।

जब दूसरा कपल यह देखता है तो पति अपनी पत्नी के विरोध करने पर भी अपने और पत्नी के कपडे निकाल कर पत्नी पर चढ़ कर उसे चोदने लगता है। उसे कोई परवाह नहीं की दुसरा कपल उन दोनों को नंगा चोदते हुए देख रहा था। पत्नी भी अपने आपको रोक नहीं पाती है और पति का पूरा साथ देती है। तब पहला कपल हैरान हो कर उन दोनों को चोदते हुए देखता ही रहता है। तब वह पति दूसरे कपल को देखकर अपने सारे कपडे निकाल देता है और अपनी पत्नी को भी नंगी कर चोदने लगता है। दोनों पति एक दूसरे को उछृंखलता से अपनी अपनी बीबियोंको चोदते हुए देखते हैं।

दोनों पत्नियां अपने पति से चुदवाने में मग्न होती हुई अपनी आँखें बंद करके मजा लेती हैं तब एक पति दूसरे पति को आँख मार कर इशारा करता है और फिर एक पति दूसरे की पत्नी की जाँघों पर हाथ रखता है। उसे देख कर दुसरा पति दूसरे की पत्नी के स्तन दबाने लगता है। दोनों में होड़ लगती है और उससे पहले की दोनों पत्नियां अपने पति के खेल को समझे, दोनों पति फुर्ती से अपनी बीबी के ऊपर से हटकर एक दूसरे की पत्नी पर चढ़कर उन्हें चोदने लगते हैं। पत्नियां समझ जाती हैं; पर जैसे असहाय है ऐसा ढोंग करके अपनी आँखें बंद करके इसका मजा लेती हैं और बादमें बिंदास होकर (अपने पति की इजाजत जो मिल गयी) अलग अलग तरीके से दूसरे के पति को चोदती है और उससे चुदवाती है। ऐसे कई तरह से लण्ड चूसना, चूत चाटना, चूँचियों को चूसना और निप्पलों को काटना इत्यादि होता है और आखिर में दोनों पति दूसरे की पत्नियों की चूत में अपना वीर्य निकालते हैं।
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