Incest Kahani एक अनोखा बंधन
05-07-2020, 02:16 PM,
#1
Thumbs Up  Incest Kahani एक अनोखा बंधन
एक अनोखा बंधन----1


दोस्तो ये कहानी है इंसानी रिश्तो की जो कि आज भी हमे सिखाती है कि हमे रिश्ते कैसे
निभाने चाहिए दोस्तो रिश्तो मे कभी भी बासी पन नही आना चाहिए
“ये मैं कहा हूँ. मैं तो अपने कमरे में नींद की गोली ले कर सोई थी.

मैं यहा कैसे आ गयी ? किसका कमरा है ये ?”

आँखे खुलते ही ज़रीना के मन में हज़ारों सवाल घूमने लगते हैं. एक

अंजाना भय उसके मन को घेर लेता है.

वो कमरे को बड़े गोर से देखती है. "कही मैं सपना तो नही देख रही" ज़रीना सोचती है.

"नही नही ये सपना नही है...पर मैं हूँ कहा?" ज़रीना हैरानी में पड़ जाती है.

वो हिम्मत करके धीरे से बिस्तर से खड़ी हो कर दबे पाँव कमरे से बाहर आती है.

"बिल्कुल शुनशान सा माहॉल है...आख़िर हो क्या रहा है."

ज़रीना को सामने बने किचन में कुछ आहट सुनाई देती है.

"किचन में कोई है...कौन हो सकता है....?"

ज़रीना दबे पाँव किचन के दरवाजे पर आती है. अंदर खड़े लड़के को देख कर उशके होश उड़ जाते हैं.

“अरे ! ये तो अदित्य है… ये यहा क्या कर रहा है...क्या ये मुझे यहा ले कर आया है...ईश्की हिम्मत कैसे हुई” ज़रीना दरवाजे पर खड़े खड़े सोचती है.

आदित्या उसका क्लास मेट भी था और पड़ोसी भी. आदित्य और ज़रीना के परिवारों में बिल्कुल नही बनती थी. अक्सर अदित्य की मम्मी और ज़रीना की अम्मी में किसी ना किसी बात को ले कर कहा सुनी हो जाती थी. इन पड़ोसियों का झगड़ा पूरे मोहल्ले में मशहूर था. अक्सर इनकी भिड़ंत देखने के लिए लोग इक्कठ्ठा हो जाते थे.

ज़रीना और अदित्य भी एक दूसरे को देख कर बिल्कुल खुस नही थे. जब कभी

कॉलेज में वो एक दूसरे के सामने आते थे तो मूह फेर कर निकल जाते थे. हालत कुछ ऐसी थी कि अगर उनमे से एक कॉलेज की कॅंटीन में होता था तो दूसरा कॅंटीन में नही घुसता था. शूकर है कि दोनो अलग अलग सेक्षन में थे. वरना क्लास अटेंड करने में भी प्राब्लम हो सकती थी.

“क्या ये मुझ से कोई बदला ले रहा है ?” ज़रीना सोचती है.

अचानक ज़रीना की नज़र किचन के दरवाजे के पास रखे फ्लवर पोट पर पड़ी. उसने धीरे से फ्लवर पोट उठाया.

आदित्य को अपने पीछे कुछ आहट महसूस हुई तो उसने तुरंत पीछे मूड कर देखा. जब तक वो कुछ समझ पाता... ज़रीना ने उसके सर पर फ्लवर पोट दे मारा.

आदित्य के सर से खून बहने लगा और वो लड़खड़ा कर गिर गया.

"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ ऐसी हरकत करने की." ज़रीना चिल्लाई.

ज़रीना फ़ौरन दरवाजे की तरफ भागी और दरवाजा खोल कर भाग कर अपने घर के बाहर आ गयी.

पर घर के बाहर पहुँचते ही उसके कदम रुक गये. उसकी आँखे जो देख रही थी उसे उस पर विश्वास नही हो रहा था. वो थर-थर काँपने लगी.

उसके अध-जले घर के बाहर उसके अब्बा और अम्मी की लाश थी और घर के

दरवाजे पर उसकी छोटी बहन फ़ातिमा की लाश निर्वस्त्र पड़ी थी. गली मैं

चारो तरफ कुछ ऐसा ही माहॉल था.

ज़रीना को कुछ समझ नही आता. उसकी आँखो के आगे अंधेरा छाने लगता है और वो फूट-फूट कर रोने लगती है.

इतने में अदित्य भी वाहा आ जाता है.

ज़रीना उसे देख कर भागने लगती है….पर अदित्य तेज़ी से आगे बढ़ कर उसका मूह दबोच लेता है और उसे घसीट कर वापिस अपने घर में लाकर दरवाजा बंद करने लगता है.

ज़रीना को सोफे के पास रखी हॉकी नज़र आती है.वो भाग कर उसे उठा कर अदित्य के पेट में मारती है और तेज़ी से दरवाजा खोलने लगती है. पर अदित्य जल्दी से संभाल कर उसे पकड़ लेता है

“पागल हो गयी हो क्या… कहा जा रही हो.. दंगे हो रहे हैं बाहर. इंसान… भेड़िए बन चुके हैं.. तुम्हे देखते ही नोच-नोच कर खा जाएँगे”

ज़रीना ये सुन कर हैरानी से पूछती है, “द.द..दंगे !! कैसे दंगे?”

“एक ग्रूप ने ट्रेन फूँक दी…….. और दूसरे ग्रूप के लोग अब घर-बार फूँक रहे हैं… चारो तरफ…हा-हा-कार मचा है…खून की होली खेली जा रही है”

“मेरे अम्मी,अब्बा और फ़ातिमा ने किसी का क्या बिगाड़ा था” ---ज़रीना कहते हुवे

सूबक पड़ती है
Reply

05-07-2020, 02:16 PM,
#2
RE: Incest Kahani एक अनोखा बंधन
“बिगाड़ा तो उन लोगो ने भी नही था जो ट्रेन में थे…..बस यू समझ लो कि

करता कोई है और भरता कोई… सब राजनीतिक षड्यंत्र है”

“तुम मुझे यहा क्यों लाए, क्या मुझ से बदला ले रहे हो ?”

“जब पता चला कि ट्रेन फूँक दी गयी तो मैं भी अपना आपा खो बैठा था”

“हां-हां माइनोरिटी के खिलाफ आपा खोना बड़ा आसान है”

“मेरे मा-बाप उस ट्रेन की आग में झुलस कर मारे गये, ज़रीना...कोई भी अपना आपा खो देगा.”

“तो मेरी अम्मी और अब्बा कौन सा जिंदा बचे हैं.. और फ़ातिमा का तो रेप हुवा

लगता है. हो गया ना तुम्हारा हिसाब बराबर… अब मुझे जाने दो” ज़रीना रोते हुवे कहती है.

“ये सब मैने नही किया समझी… तुम्हे यहा उठा लाया क्योंकि फ़ातिमा का रेप

देखा नही गया मुझसे….अभी रात के 2 बजे हैं और बाहर करफ्यू लगा है.

माहॉल ठीक होने पर जहाँ चाहे चली जाना”

“मुझे तुम्हारा अहसान मंजूर नही…मैं अपनी जान दे दूँगी”

ज़रीना किचन की तरफ भागती है और एक चाकू उठा कर अपनी कलाई की नस

काटने लगती है

आदित्य भाग कर उसके हाथ से चाकू छीन-ता है और उसके मूह पर ज़ोर से एक थप्पड़ मारता है.

ज़रीना थप्पड़ की चोट से लड़खड़ा कर गिर जाती है और फूट-फूट कर रोने

लगती है.

“चुप हो जाओ.. बाहर हर तरफ वहसी दरिंदे घूम रहे हैं.. किसी को शक हो गया कि तुम यहा हो तो सब गड़बड़ हो जाएगा”

“क्या अब मैं रो भी नही सकती… क्या बचा है मेरे पास अब.. ये आँसू ही हैं.. इन्हे तो बह जाने दो”

आदित्य कुछ नही कहता और बिना कुछ कहे किचन से बाहर आ जाता है.

ज़रीना रोते हुवे वापिस उसी कमरे में घुस जाती है जिसमे उसकी कुछ देर पहले आँख खुली थी.

-----------------------

अगली सुबह ज़रीना उठ कर बाहर आती है तो देखती है कि अदित्य खाना बना

रहा है.

आदित्य ज़रीना को देख कर पूछता है, “क्या खाओगि ?”

“ज़हर हो तो दे दो”

“वो तो नही है.. टूटे-फूटे पराठे बना रहा हूँ….यही खाने

पड़ेंगे..….आऊउच…” आदित्या की उंगली जल गयी.

“क्या हुवा…. ?”

“कुछ नही उंगली ज़ल गयी”

“क्या पहले कभी तुमने खाना बनाया है ?”

“नही, पर आज…बनाना पड़ेगा.. अब वैसे भी मम्मी के बिना मुझे खुद ही बनाना पड़ेगा ”

ज़रीना कुछ सोच कर कहती है, “हटो, मैं बनाती हूँ”

“नही मैं बना लूँगा”

“हट भी जाओ…जब बनाना नही आता तो कैसे बना लोगे”

“एक शर्त पर हटूँगा”

“हां बोलो”

“तुम भी खाओगि ना?”

“मुझे भूक नही है”

“मैं समझ सकता हूँ ज़रीना, तुम्हारी तरह मैने भी अपनो को खोया है. पर ज़ींदा रहने के लिए हमें कुछ तो खाना ही पड़ेगा”

“किसके लिए ज़ींदा रहूं, कौन बचा है मेरा?”

“कल मैं भी यही सोच रहा था. पर जब तुम्हे यहा लाया तो जैसे मुझे जीने

का कोई मकसद मिल गया”

“पर मेरा तो कोई मकसद नही………”

“है क्यों नही? तुम इस दौरान मुझे अछा-अछा खाना खिलाने का मकसद बना लो… वक्त कट जाएगा. करफ्यू खुलते ही मैं तुम्हे सुरक्षित जहा तुम कहो वाहा पहुँचा दूँगा” – अदित्य हल्का सा मुस्कुरा कर बोला

ज़रीना भी उसकी बात पर हल्का सा मुस्कुरा दी और बोली, “चलो हटो अब…. मुझे बनाने दो”

क्रमशः............
Reply
05-07-2020, 02:17 PM,
#3
RE: Incest Kahani एक अनोखा बंधन
एक अनोखा बंधन----2

गतान्क से आगे.............

“क्या मैं किसी तरह देल्ही पहुँच सकती हूँ, मेरी मौसी है वाहा?”

“चिंता मत करो, माहॉल ठीक होते ही सबसे पहला काम यही करूँगा”

ज़रीना अदित्य की ओर देख कर सोचती है, “कभी सोचा भी नही था कि जिस

इंसान से मैं बात भी करना पसंद नही करती, उसके लिए कभी खाना

बनाउन्गि”

आदित्य भी मन में सोचता है, “क्या खेल है किस्मत का? जिस लड़की को देखना

भी पसंद नही करता था, उसके लिए आज कुछ भी करने को तैयार हूँ. शायद

यही इंसानियत है”

धीरे-धीरे वक्त बीत-ता है और दोनो आछे दोस्त बनते जाते हैं. एक दूसरे के प्रति उनके दिल में जो नफ़रत थी वो ना जाने कहा गायब हो जाती है.

वो 24 घंटे घर में रहते हैं. कभी प्यार से बात करते हैं कभी तकरार से. कभी हंसते हैं और कभी रोते हैं. वो दोनो वक्त की कड़वाहट को

भुलाने की पूरी कॉसिश कर रहे हैं.

एक दिन अदित्य ज़रीना से कहता है, “तुम चली जाओगी तो ना जाने कैसे रहूँगा

मैं यहा. तुम्हारे साथ की आदत सी हो गयी है. कौन मेरे लिए

अछा-अछा खाना बनाएगा. समझ नही आता कि मैं तब क्या करूँगा?”

“तुम शादी कर लेना, सब ठीक हो जाएगा”

“और फिर भी तुम्हारी याद आई तो?”

“तो मुझे फोन किया करना”

ज़रीना को भी अदित्य के साथ की आदत हो चुकी है. वो भी वाहा से जाने के

ख्याल से परेशान तो हो जाती है, पर कहती कुछ नही.

आफ्टर वन मंथ: --

“ज़रीना, उठो दिन में भी सोती रहती हो”

“क्या बात है? सोने दो ना”

“करफ्यू खुल गया है. मैं ट्रेन की टिकेट बुक करा कर आता हूँ. तुम किसी

बात की चिंता मत करना, मैं जल्दी ही आ जाउन्गा”

“अपना ख्याल रखना अदित्य”

“ठीक है…सो जाओ तुम कुंभकारण कहीं की…हे..हे..हे….”

“वापिस आओ मैं तुम्हे बताती हूँ” --- ज़रीना अदित्य के उपर तकिया फेंक कर

बोलती है

आदित्य हंसते हुवे वाहा से चला जाता है.

जब वो वापिस आता है तो ज़रीना को किचन में पाता है

“बस 5 दिन और…फिर तुम अपनी मौसी के घर पर होगी”

“5 दिन और का मतलब? ……मुझे क्या यहा कोई तकलीफ़ है?”

“तो रुक जाओ फिर यहीं…अगर कोई तकलीफ़ नही है तो”

ज़रीना अदित्य के चेहरे को बड़े प्यार से देखती है. उसका दिल भावुक हो उठता

है

“क्या तुम चाहते हो कि मैं यहीं रुक जाउ?”

“नही-नही मैं तो मज़ाक कर रहा था बाबा. ऐसा चाहता तो टिकेट क्यों बुक

कराता?” -- ये कह कर अदित्य वाहा से चल देता है. उसे पता भी नही चलता

की उसकी आँखे कब नम हो गयी.

इधर ज़रीना मन ही मन कहती है, “तुम रोक कर तो देखो मैं तुम्हे छ्चोड़ कर कहीं नही जाउन्गि”

वो 5 दिन उन दोनो के बहुत भारी गुज़रते हैं. आदित्य ज़रीना से कुछ कहना चाहता है, पर कुछ कह नही पाता. ज़रीना भी बार-बार अदित्य को कुछ कहने के लिए खुद को तैयार करती है पर अदित्य के सामने आने पर उसके होन्ट सिल जाते हैं.
Reply
05-07-2020, 02:17 PM,
#4
RE: Incest Kahani एक अनोखा बंधन
जिस दिन ज़रीना को जाना होता है, उस से पिछली रात दोनो रात भर बाते

करते रहते हैं. कभी कॉलेज के दिनो की, कभी मूवीस की और कभी क्रिकेट

की. किसी ना किसी बात के बहाने वो एक दूसरे के साथ बैठे रहते हैं. मन ही मन दोनो चाहते हैं कि काश किसी तरह बात प्यार की हो तो अछा हो. पर बिल्ली के गले में घंटी बाँधे कौन ? दोनो प्यार को दिल में दबाए, दुनिया भर की बाते करते रहते हैं.

सुबह 6 बजे की ट्रेन थी. वो दोनो 4 बजे तक बाते करते रहे. बाते करते-करते उनकी आँख लग गयी और दोनो बैठे-बैठे सोफे पर ही सो गये.

कोई 5 बजे आदित्य की आँख खुलती है. उसे अपने पाँव पर कुछ महसूस होता है

वो आँख खोल कर देखता है कि ज़रीना ने उसके पैरो पर माथा टिका रखा है

“अरे!!!!!! ये क्या कर रही हो?”

“अपने खुदा की इबादत कर रही हूँ, तुम ना होते तो मैं आज हरगिज़ जींदा ना होती”

“मैं कौन होता हूँ ज़रीना, सब उस भगवान की कृपा है, चलो जल्दी तैयार हो जाओ, 5 बज गये हैं, हम कहीं लेट ना हो जायें”

ज़रीना वाहा से उठ कर चल देती है और मन ही मन कहती है, “मुझे रोक लो

अदित्य”

“क्या तुम रुक नही सकती ज़रीना...बहुत अछा होता जो हम हमेशा इस घर में एक साथ रहते.” अदित्य भी मन में कहता है.

एक अनोखा बंधन दोनो के बीच जुड़ चुका है.

----------------------

5:30 बजे अदित्य, ज़रीना को अपनी बाइक पर रेलवे स्टेशन ले आता है.

ज़रीना को रेल में बैठा कर अदित्य कहता है, “एक सर्प्राइज़ दूं”

“क्या? ”

“मैं भी तुम्हारे साथ आ रहा हूँ”

“सच!!!!”

“और नही तो क्या… मैं क्या ऐसे माहॉल में तुम्हे अकेले देल्ही भेजूँगा”

“तुम इंसान हो कि खुदा…कुछ समझ नही आता”

“एक मामूली सा इंसान हूँ जो तुम्हे…………”

“तुम्हे… क्या?” ज़रीना ने प्यार से पूछा

“कुछ नही”

आदित्या मन में कहता है, “……….जो तुम्हे बहुत प्यार करता है”

जो बात ज़रीना सुन-ना चाहती है, वो बात आदित्या मान में सोच रहा है, ऐसा अजीब प्यार है उष्का.

ट्रेन चलती है. आदित्य और ज़रीना खूब बाते करते हैं….बातो-बातो में कब वो देल्ही पहुँच जाते हैं….उन्हे पता ही नही चलता

ट्रेन से उतरते वक्त ज़रीना का दिल भारी हो उठता है. वो सोचती है कि पता

नही अब वो अदित्य से कभी मिल भी पाएगी या नही.

“अरे सोच क्या रही हो…उतरो जल्दी” अदित्य ने कहा.

ज़रीना को होश आता है और वो भारी कदमो से ट्रेन से उतारती है.

“चलो अब सिलमपुर के लिए ऑटो करते हैं” आदित्या ने एक ऑटो वाले को इशारा किया.

“क्या तुम मुझे मौसी के घर तक छोड़ कर आओगे?”

“और नही तो क्या… इसी बहाने तुम्हारा साथ थोड़ा और मिल जाएगा”

ज़रीना ये सुन कर मुस्कुरा देती है.

आदित्य के इशारे से एक ऑटो वाला रुक जाता है और दोनो उसमे बैठ कर सिलमपुर की तरफ चल पड़ते हैं.

क्रमशः............
Reply
05-07-2020, 02:17 PM,
#5
RE: Incest Kahani एक अनोखा बंधन
एक अनोखा बंधन----3

गतान्क से आगे.............

ज़रीना रास्ते भर किन्ही गहरे ख़यालो में खोई रहती है. अदित्य भी चुप रहता है.

एक घंटे बाद ऑटो वाला सिलमपुर की मार्केट में ऑटो रोक कर पूछता है, “कहा जाना है… कोई पता-अड्रेस है क्या?”

“ह्म्म…..भैया यही उतार दो. आदित्य, मौसी का घर सामने वाली गली में है” ज़रीना ने कहा.

"शूकर है तुम कुछ तो बोली." अदित्य ने कहा.

"तुम भी तो चुप बैठे थे मोनी बाबा बन कर...क्या तुम कुछ नही बोल सकते थे."

"अछा-अछा अब उतरो भी...ऑटो वाला सुन रहा है." दोनो के बीच तकरार शुरू हो जाती है.

ज़रीना ऑटो से उतरती है. "अदित्य आइ आम सॉरी पर तुम कुछ बोल ही नही रहे थे."

"ठीक है कोई बात नही. शांति से अपने घर जाओ...मुझे भूल मत जानता."

"तुम्हे भूलना भी चाहूं तो भी भुला नही पाउन्गि"

"देखा हो गयी ना अपनी बाते शुरू." अदित्य ने मुस्कुराते हुवे कहा.

ज़रीना ने उस गली की और देखा जिसमे उसकी मौसी का घर था और गहरी साँस ली. "चलु मैं फिर"

थोड़ी देर दोनो में खामोसी बनी रहती है. आदित्य ज़रीना को देखता रहता है. "जाते जाते कुछ कहोगी नही" अदित्य ने कहा.

“आदित्य अब क्या कहूँ…तुम्हारा सुक्रिया करूँ भी तो कैसे, समझ नही आता”

“सुक्रिया उस खुदा का करो जिसने हमे इंसान बनाया है…. मेरा सुक्रिया क्यों करोगी?”

“कभी खाना बुरा बना हो तो माफ़ करना, और जल्दी शादी कर लेना, तुम अकेले नही रह पाओगे”

“ठीक है..ठीक है….अब रुलाओगि क्या.. चलो जाओ अपनी मौसी के घर”

“ठीक है अदित्य अपना ख्याल रखना और हां मैने जो उस दिन तुम्हारे सर पर फ्लवर पोट मारा था उसके लिए मुझे माफ़ कर देना”

“और उस हॉकी का क्या?”

ज़रीना शर्मा कर मुस्कुरा पड़ती है और कहती है, “हां उसके लिए भी”

“ठीक है बाबा जाओ अब…. लोग हमें घूर रहे हैं”

ज़रीना भारी कदमो से मूड कर चल पड़ती है और अदित्य उसे जाते हुवे देखता रहता है.

वो उसे पीछे से आवाज़ देने की कोशिस करता है पर उसके मूह से कुछ भी नही निकल पाता.

ज़रीना गली में घुस कर पीछे मूड कर अदित्य की तरफ देखती है. दोनो एक दूसरे को एक दर्द भरी मुस्कान के साथ बाइ करते हैं. उनकी दर्द भारी मुस्कान में उनका अनौखा प्यार उभर आता है. पर दोनो अभी भी इस बात से अंजान हैं कि वो ना चाहते हुवे भी एक अनोखे बंधन में बँध चुके हैं. प्यार के बंधन में.

जब ज़रीना गली में ओझल हो जाती है तो अदित्य मूड कर भारी मन से चल

पड़ता है.

“पता नही कैसे जी पाउन्गा ज़रीना के बिना मैं? काश! एक बार उसे अपना दिल चीर कर दीखा पाता…क्या वो भी मुझे प्यार करती है? लगता तो है. पर कुछ कह नही सकते”अदित्य चलते-चलते सोच रहा है.

अचानक उसे पीछे से आवाज़ आती है

“आदित्य!!! रूको….”

आदित्य मूड कर देखता है.

उसके पीछे ज़रीना खड़ी थी. उसकी आँखो से आँसू बह रहे थे.

“अरे तुम रो रही हो… तुम्हे तो अपने, अपनो के पास जाते वक्त खुस होना

चाहिए”

“तुम से ज़्यादा मेरा अपना कौन हो सकता है अदित्य… मुझे खुद से दूर मत करो”
Reply
05-07-2020, 02:17 PM,
#6
RE: Incest Kahani एक अनोखा बंधन
आदित्य की भी आँखे छलक उठती हैं और वो दौड़ कर ज़रीना को गले लगा कर

कहता है, “क्यों जा रही थी फिर तुम मुझे छ्चोड़ कर?”

“तुम मुझे रोक नही सकते थे?” ज़रीना ने गुस्से में पूछा.

“रोक तो लेता पर यकीन नही था कि तुम रुक जाओगी”

“तुम कह कर तो देखते” ज़रीना सुबक्ते हुवे बोली.

“ओह्ह…ज़रीना आइ लव यू…”

“पता नही क्यों.... बट आइ लव यू टू अदित्य” ज़रीना ने कहा.

“मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि वापिस कैसे जाउन्गा”

“और मैं सोच रही थी कि तुम्हारे बिना कैसे जी पाउन्गि”

“अछा हुवा तुम वापिस आ गयी वरना देल्ही से मेरी लाश ही जाती”

“ऐसा मत कहो… मैं वापिस क्यों नही आती. अम्मी,अब्बा और फ़ातिमा को तो खो चुकी हूँ, तुम्हे नही खो सकती अदित्य”

उन्हे उस पल किसी बात का होश नही रहता. प्यार और होश शायद मुस्किल से साथ चलते हैं.

“पता है…मैं तुम्हे बिल्कुल लाइक नही करता था”

“मैं भी तुमसे बहुत नफ़रत करती थी”

“ऐसा कैसे हो गया? ये सब सपना सा लगता है” अदित्य ने कहा

“ये तो पता नही…पर मुझे हमेशा अपने पास रखना अदित्य, तुम्हारे बिना मैं नही जी सकती”

“तुम मेरी जींदगी हो ज़रीना, मेरे पास नही तो और कहा रहोगी”

“पर अब हम जाएँगे कहा…. मुझे नही लगता कि हम दोनो उस नफ़रत के माहॉल में रह पाएँगे?”

“चिंता मत करो, प्यार हुवा है तो इस प्यार के लिए कोई ना कोई सुकून भरा

आसियाना भी ज़रूर मिल जाएगा”

दोनो हाथो में हाथ ले कर चल पड़ते हैं किसी अंजानी राह पर जिसकी

मंज़िल का भी उन्हे नही पता. प्यार की राह पर मंज़िल की वैसे परवाह भी कौन करता है.

जिस तरह नदी पहाड़ को चीर कर अपना रास्ता बना लेती है. उसी तरह प्यार

भी इस कठोर दुनिया में अपने लिए रास्ते निकाल ही लेता है. तभी शायद

इतनी नफ़रत के बावजूद भी दुनिया में प्यार… आज भी ज़ींदा है.
Reply
05-07-2020, 02:17 PM,
#7
RE: Incest Kahani एक अनोखा बंधन
एक अनोखा बंधन--4

गतान्क से आगे.....................

आदित्य और ज़रीना एक दूसरे का हाथ थाम कर चल दिए. पर उन्हे जाना कहा था ये वो तैय नही कर पाए थे. नया नया प्यार हुवा था वो दोनो अभी बस उसमें खोए थे. जींदगी की कठोरे सचाईयों का सामना उन्हे अभी करना था.

“वापिस चले क्या ज़रीना?”

“तुम्हे क्या लगता है लोग हमें वाहा जीने देंगे. मैं वाहा नही रह पाउन्गि अब.”

“पर यहा हमारा कुछ नही है. घर बार सब गुजरात में ही है. यहा पैर जमाना मुश्किल होगा.”

“हम कोशिस तो कर ही सकते हैं.”

“ठीक है ऐसा करते हैं फिलहाल किसी होटेल में चलते हैं और ठंडे दिमाग़ से सोचते हैं कि आगे क्या करना है.”

“हां ये ठीक रहेगा. मैं बहुत थक भी गयी हूँ. बहुत जोरो की भूक भी लगी है.”

“चलो पहले खाना ही खाया जाए. फिर होटेल चलेंगे.”

“हां बिल्कुल चलो.”

दोनो एक रेस्टोरेंट में बैठ जाते हैं और शांति से भोजन करते हैं.

“दाल माखनी का कोई जवाब नही. नॉर्थ इंडिया में बहुत पॉपुलर है ये.”

“हां अच्छी बनी है. मैं इस से भी अच्छी बना सकती हूँ.”

“तुमने घर तो कभी बनाई नही.”

“सीखूँगी ना जनाब तभी ना बनाउन्गि. मुझे यकीन है मैं इस से अच्छा बना लूँगी.”

बातो बातो में खाना हो जाता है और दोनो अब एक होटेल की तलास में निकलते हैं.

“यहा शायद ही कोई अच्छा होटेल मिले. कही और चलते हैं.” ज़रीना ने कहा.

“तुम्हे कैसे पता.”

“जनाब मेरी मौसी के यहा आती रहती हूँ मैं, पता कैसे ना होगा.”

“ओह हां बिल्कुल. चलो कही और चलते हैं.” आदित्य ने कहा.

दोनो ऑटो पकड़ कर लक्ष्मीनगर पहुँचते हैं और वाहा एक होटेल में कमरा ले लेते हैं. रात घिर आई है और प्यार के दो पंछी रात में आशियाना पा कर खुस हैं.

जब अदित्य और ज़रीना कमरे की तरफ जा रहे होते हैं तो ज़रीना कहती है, “तुम्हे नही लगता कि हमें दो कमरो की ज़रूरत थी.”

“क्यों अब तुम क्या मुझसे अलग रहोगी. इस प्यार का कोई मतलब नही है क्या तुम्हारे लिए.”

“प्यार हुवा है शादी नही…हे..हे…हे.” ज़रीना ने हंसते हुवे कहा.

“शादी भी जल्द हो जाएगी. तुम कहो तो अभी कर लेते हैं.”

“नही…नही मैं मज़ाक कर रही थी. चलो अंदर.” ज़रीना ने कहा.

रूम में आते ही ज़रीना बिस्तर पर पसर गयी और बोली, “ये बिस्तर मेरा है. तुम अपना इंटेज़ाम देख लो.”

“बहुत खूब …मैं क्या फर्स पर लेटुंगा.” आदित्य भी ज़रीना के बाजू में आ कर लेट गया.

ज़रीना फ़ौरन बिस्तर से उठ गयी.

“प्यार का मतलब ये नही है कि हम एक साथ सोएंगे. मैं सोफे पर जा रही हूँ. तुम चैन से लेटो यहा हा.”

“अरे रूको मैं मज़ाक कर रहा था. तुम लेटो यहा. सोफे पर मैं सो जाउन्गा.” आदित्य बिस्तर से उठ जाता है.

“पक्का…फिर मत कहना कि मैने बिस्तर हथिया लिया.” ज़रीना मुश्कुराइ.

“मेरा दिल हथिया लिया तुमने बिस्तर तो बहुत छोटी चीज़ है. जाओ ऐश करो.” आदित्य भी मुश्कराया.

ऐसा प्यार था उनका. प्यार और तकरार दोनो साथ साथ चल रहे थे. जब प्यार होता है तो प्यार को तरह तरह से आजमाया भी जाता है. ऐसा ही कुछ ज़रीना और अदित्य के प्यार के साथ होने वाला था. वो दोनो तो इस बात से बिल्कुल अंज़ान थे. नया नया प्यार हुवा था. और नया प्यार अक्सर सोचने समझने की शक्ति ख़तम कर देता है. शुरूर ही कुछ ऐसा होता है प्यार का. लेकिन ऐसे नाज़ुक वक्त में थोड़ी सी भी ग़लत फ़हमी या टकराव प्यार को मिंटो में कड़वाहट में बदल सकती है. प्यार इतना गहरा तो होता नही है कि संभाल पाए. इश्लीए नया नया प्यार अक्सर शुरूवात में ही बिखर जाता है. अभी तक तो सब ठीक चल रहा लेकिन अगले दिन अदित्य और ज़रीना के प्यार का इम्तिहान था. जिसमे पास होना बहुत ज़रूरी था.

अगले दिन दोनो बड़े प्यार से उठे. गुड मॉर्निंग विश किया. नहाए धोए. ब्रेकफास्ट किया और फिर आगे का सोचने लगे.

“अदित्य हमारी पढ़ाई का क्या होगा.”

“तभी तो मैं वापिस जाने की सोच रहा था. अब तो शांति है वाहा.”

“लेकिन मैं अगर वाहा तुम्हारे साथ रहूंगी तो लोग तरह तरह की बाते करेंगे.”

“तो क्या हुवा हम शादी करके रहेंगे एक साथ यू ही थोड़ा रहेंगे.”

“लेकिन वाहा अभी भी तनाव बना हुवा है. ऐसे में हमारे रिश्ते को कोई नही समझेगा.”

“फिर ऐसा करते हैं कि पहले पढ़ाई पूरी करते हैं. फिर आगे का सोचते हैं.”

“मैं कहा रहूंगी. मेरा घर तो बुरी तरह जल चुका है. और वाहा कोई और नही है जिसके पास मैं रुक पाउ.”

“हॉस्टिल हैं ना कॉलेज का दिक्कत क्या है.”

“ओह हां ये बात तो मैने सोची ही नही. हां मैं हॉस्टिल में रह सकती हूँ.”

“चलो छोड़ो ये सब. चलो घूम कर आते हैं कही. आते हुवे वापसी की ट्रेन का टिकेट भी बुक करवा लेंगे.”

“कही हम जल्दबाज़ी में तो फ़ैसला नही ले रहे.”

“फ़ैसला तो हमें लेना ही है. मुझे इस से बेहतर रास्ता नही लगता. तुम कुछ सूझा सकती हो तो बोलो.”

“हां वैसे हमारी पढ़ाई के लिहाज़ से ये ठीक है…चलो कहा घूमने चलोगे” ज़रीना ने कहा

“लाल किला नही देखा मैने अब तक चलो वही चलते हैं.” आदित्य ने कहा.

“मैने देखा है एक बार. तुम्हारे साथ देखने में और मज़ा आएगा चलो.”

दोनो लाल किला घूमने निकल पड़े. जब वो लाल किले से बाहर आए तो दोनो को जोरो की भूक लग चुकी थी.
Reply
05-07-2020, 02:18 PM,
#8
RE: Incest Kahani एक अनोखा बंधन
“अदित्य चलो अब खाना खाया जाए. एक रेस्टोरेंट है यही पास में वाहा हर तरह का खाना मिलता है. चलो.”

आदित्य और ज़रीना एक रिक्सा ले कर उस रेस्टोरेंट पर पहुँचते हैं. लेकिन रेस्टौरा को देखते ही अदित्य सोच में पड़ जाता है. रेस्टोरेंट में वेज और नोन-वेज दोनो तरह का खाना था. आदित्या था पंडित इश्लीए वो थोड़ा सोच में पड़ गया. लेकिन ज़रीना की खातिर रेस्टोरेंट में घुस्स गया.

“ज़रीना तुम ऑर्डर दो मैं वॉश रूम हो कर आता हूँ.”

“क्या लोगे तुम ये तो बताते जाओ.”

“मंगा लो कुछ भी.”

ज़रीना ये तो जानती ही थी कि अदित्य वेजाइटरियन है. उसने उसके लिए वेज खाना ऑर्डर कर दिया और अपने लिए चिकन कढ़ाई और तंदूरी नान ऑर्डर कर दिया. यही से सारी मुसीबत शुरू होने वाली थी. आदित्य जब तक वापिस आया तब तक उसका खाना आ चुका था. जैसे ही अदित्य बैठा ज़रीना का ऑर्डर भी आ गया. जब वेटर ने चिकन कढ़ाई टेबल पर रखी तो आदित्या की तो आँखे फटी रह गयी. उसका मन खराब हो गया.

“ये तुमने ऑर्डर किया है.”

“हां…ये मेरी फेवोवरिट डिश है.”

“अफ…मैं यहा एक मिनिट भी नही बैठ सकता.” आदित्य वॉश रूम की तरफ भागता है. उसे उल्टी आ जाती है. पंडित होने के कारण वो हमेसा नोन वेज चीज़ो से दूर ही रहा था. उसके साथ ऐसा होना स्वाभाविक ही था.

आदित्य वापिस आया और बोला, “उठो मैं यहा खाना नही खाउन्गा.”

“क्या हो गया अदित्य कुछ बताओ तो सही. बैठो तो.”

“ये नोन वेज मेरी आँखो के आगे से हटा लो. मुझे ग्लानि होती है. कैसे खा सकती हो तुम एक जीव को. तुम्हे ग्लानि नही होती”

ज़रीना ने चिकन कढ़ाई पर पलेट रख दी और बोली, “कैसी बात कर रहे हो. इसमे ग्लानि की क्या बात है.”

अदित्य बैठ गया और बोला, “मैं ये सब बर्दास्त नही कर सकता. तुम्हे ये सब छोड़ना होगा.”

“क्यों छोड़ना होगा. ये भोजन है और कुछ नही. आइ लाइक इट.”

“पर ये किसी की हत्या करके बनता है. ये पाप है.”

“पता नही कौन सी दुनिया में जी रहे हो तुम. मैने तो बहुत पंडित लोगो को खाते देखा है नोन वेज.”

“खाते होंगे पर मैं बिल्कुल नही खाता.”

“तो मत खाओ तुम मुझे नही रोक सकते.”

“तुम समझती क्यों नही. अपने खाने के लिए क्या किसी जीव की हत्या ठीक है.”

क्रमशः...............................
Reply
05-07-2020, 02:18 PM,
#9
RE: Incest Kahani एक अनोखा बंधन
एक अनोखा बंधन--5

गतान्क से आगे.....................

“मिस्टर अदित्य पांडे एक बात बताओ. क्या आनाज़ में जान नही होती. क्या पॅडी ज़ींदा नही होती. जिस पेड़ से फ्रूट तोड़े जाते हैं क्या वो जींदा नही हैं. मार्स पर घास का एक तिनका भी नही उगता. एक घास का तिनका भी उतना ही जींदा है जितना की चिकन. अब बताओ क्या कुछ ग़लत कहा मैने.”

“मुझे नही पता लेकिन मुझे ये सब बर्दास्त नही है.”

“ये तुम्हारी प्राब्लम है मेरी नही.” ज़रीना ने कहा.

प्यार बड़ी जल्दी अपना हक़ जताने लगता है. यही बात अक्सर टकराव का कारण बन जाती है. आदित्य ज़रीना पर हक़ तो जता रहा था पर उसने ग़लत वक्त चुन लिया था. ज़रीना के लिए अपने भोजन को डिफेंड करना स्वाभाविक था. ये बात अदित्य की समझ में नही आ रही थी.

ज़रीना की भी ग़लती थी. वो ये नही समझ पा रही थी कि अदित्य का रिक्षन नॅचुरल है. उसे बहस में पड़ने की बजाए थोड़ा शांति से काम लेना चाहिए था. लेकिन ये बाते कहनी आसान हैं और करनी मुश्किल.

आदित्य फ़ौरन उठ कर बाहर आ गया. आदित्य को सामने ही हनुमान जी का मंदिर दीखाई दिया और वो मंदिर में घुस्स गया.ज़रीना को इतना बुरा लगा कि वो भी बिना खाना खाए बिल पे करके बाहर आ गयी. बाहर आकर अदित्य को ना पाकर उसकी आँखो में खून उतर आया.

“बस इतना ही प्यार था इसे मुझसे. चला गया छोड़ के मुझे. मैं ऐसे इंसान के साथ जींदगी नही बीता सकती.”

गुस्से में अक्सर हम सही फ़ैसला नही कर पाते और अपनी सोचने समझने की ताक़त खो बैठते हैं. ज़रीना इतने गुस्से में थी कि उसने तुरंत मौसी के घर जाने का फ़ैसला कर लिया. उसने ऑटो पकड़ा और सिलमपुर की तरफ चल पड़ी. हालाँकि ये बात और थी कि रास्ते भर उसकी आँखे टपकती रही.

आदित्य सोच रहा था कि ज़रीना अंदर चैन से बैठ कर खाना खा रही होगी. इश्लीए वो मंदिर से आराम से निकला. उसने रेस्टोरेंट के बाहर से ही झाँक कर देखा. ज़रीना वाहा होती तो दीखती. उसने अंदर आ कर पता किया. उसे बताया गया कि वो तो खाना खा कर चली गयी. अब वेटर बहुत बिज़ी रहते हैं. उन्हे क्या मतलब किसी ने खाना खाया या नही. उसके मूह से निकल गया कि वो खाना खा कर चली गयी. आदित्य के शीने पर तो जैसे साँप लेट गया.

उसने बाहर आ कर देखा लेकिन ज़रीना कही दीखाई नही दी. “ये प्यार इतनी जल्दी भिखर जाएगा मैने सोचा नही था.”

आदित्य ऑटो लेकर होटेल की तरफ चल दिया. उसे उम्मीद थी कि ज़रीना उसे होटेल में ही मिलेगी. लेकिन होटेल पहुँच कर वो दंग रह गया. ज़रीना वाहा होती तो मिलती. वो तो अपनी मौसी के घर पहुँच भी गयी थी और वाहा उसका बड़े जोरो का स्वागत भी हो रहा था.

आदित्य बेचारा अकेला बिस्तर पर लेट गया. “शायद वो चली गयी अपनी मौसी के यहा. अगर यही सब करना था तो कल मेरे साथ आई ही क्यों थी. कल ही चली जाती. चलो अछा ही हुवा. उसके साथ निभाना वैसे भी मुश्किल था.” ये बाते अदित्य सोच तो रहा था लेकिन सोचते सोचते उसकी अंजाने में ही आँखे भर आई थी.

“ज़रीना क्यों किया तुमने मेरे साथ ऐसा. तुम तो ऐसी नही थी. मुझे छोड़ कर चली गयी. क्या यही प्यार था तुम्हारा. मैं तुम्हे कभी माफ़ नही करूँगा.”

ज़रीना और आदित्या दोनो को ही प्यार ने बड़ी गहरी चोट दी थी. इधर अदित्य रो रहा था उधर ज़रीना की भी हालत खराब थी. उसे लोगो ने घेर रखा था. उस से पूछा जा रहा था कि वो दंगो से कैसे बची. ज़रीना ऐसी हालत में नही थी कि कुछ भी कहे. उसका तो दिल बहुत भारी हो रहा था. वो कयि बार वॉश रूम में आकर चुपचाप सूबक सूबक कर रोई.

इस तरह प्यार के इंतेहाँ में अदित्य और ज़रीना का प्यार फैल हो गया था. और इस फेल्यूर के बाद दोनो का ही बहुत बुरा हाल था. दोनो के दिलो में एक दूसरे के लिए नफ़रत उभरने लगी थी लेकिन आँखे थी कि प्यार में आँसू बहा रही थी. प्यार भी अजीब खेल खेलता है.

प्यार को समझना बहुत मुश्किल काम है. ये बात वही समझ सकते हैं जो कभी प्यार के पचदे में पड़े हों. ज़रीना चली तो आई थी गुस्से में अपनी मौसी के घर लेकिन उसके दिल पर अदित्य से दूर हो कर जो बीत रही थी उसे सिर्फ़ वो ही जानती थी. ऐसा नही था कि नाराज़गी दूर हो गयी थी उसकी. वो तो ज्यों की त्यों बरकरार थी. लेकिन फिर भी रह-रह कर वो अदित्य की यादों में खो जाती थी.

मौसी के यहा ज़रीना को गुम्सुम देख कर सभी परेशान थे. उन्हे लग रहा था कि ज़रीना ज़रूर कुछ छुपा रही है. लोग अंदाज़ा लगा रहे थे कि शायद दंगो के दौरान कुछ अनहोनी हो गयी होगी उसके साथ, जिसे वो छुपा रही है. इश्लीए लोगो ने उस से सवाल पूछने बंद कर दिए. उन्हे क्या पता था की ज़रीना की छुपी का कारण अदित्य है.

ज़रीना कोशिस तो खूब कर रही थी हँसने की मुश्कूराने की लेकिन बार बार उसका दिल भारी हो उठता था.

“बेटा तू कुछ बोल क्यों नही रही है. जब से आई है गुमशुम सी है. हमें बता तो सही की क्या बात है.” ज़रीना की मौसी ने पूछा.

“मौसी कुछ नही बस वैसे ही परेशान हूँ.” ज़रीना ने कहा.

“अम्मी और अब्बा की याद आ रही होगी है ना. फ़ातिमा का सुन कर बहुत दुख हुवा मुझे. अल्ला उन्हे माफ़ नही करेंगे जिन्होने फ़ातिमा के साथ ये सब किया.”

“मुझे वो सब याद ना दिलाओ मौसी. बड़ी मुश्किल से भूली हूँ मैं वो सब.” बोलते-बोलते ज़रीना की आँखो में आँसू उतर आए.

मौसी ने ज़रीना को गले से लगा लिया और बोली, “मेरी प्यारी बच्ची…चल छोड़ ये उदासी कुछ खा पी ले.”

“मुझे भूक नही है मौसी अभी.” ज़रीना ने कहा.

“चल ठीक है. जब तेरी इच्छा हो तब खा लेना….ठीक है. थोड़ा आराम कर ले, बहुत थक गयी होगी. तेरे लिए वही कमरा तैयार करवा दिया है जहा तू हर बार आ कर रहती है…ठीक है.”

“शुक्रिया मौसी” ज़रीना मुश्कुरा दी.

ज़रीना कमरे में आ कर बिस्तर पर गिर गयी और फिर आँसुओ का वो तूफान उठा की थामे नही थमा. “क्यों किया अदित्य तुमने ऐसा मेरे साथ. बहुत प्यार करती हूँ तुम्हे में…फिर आख़िर क्यों”

अब ज़रीना के पास अदित्य तो था नही जो कोई जवाब देता. प्यार के गम में डूबी हुई ज़रीना रोते हुवे सवाल पे सवाल किए जा रही थी जिनका उसे कोई जवाब नही मिल रहा था. बहुत रुला रहा था प्यार बेचारी को.
Reply

05-07-2020, 02:18 PM,
#10
RE: Incest Kahani एक अनोखा बंधन
आदित्य की भी हालत कम नाज़ुक नही थी. पेट में चूहे कूद रहे थे लेकिन मज़ाल है कि मूह पे खाने का नाम आए. प्यार भूक प्यास सब भुला देता है. वो भूके पेट होटेल के बिस्तर पर पड़ा हुवा करवट बदल रहा था. पता नही उसे ऐसा क्यों लग रहा था कि अभी दरवाजा खुलेगा और ज़रीना अंदर आएगी. जब भी उसे अपने कमरे के बाहर आहट सुनाई देती तो वो फ़ौरन उठ कर देखता.वो दाए-बाए हर तरफ बड़े गौर से देखता. अब ज़रीना वाहा होती तो दीखती. हर बार निराश और हताश हो कर अदित्य वापिस अपने बिस्तर पर गिर जाता. हालत तो अदित्य की भी बिल्कुल ज़रीना जैसी ही थी बस फ़र्क इतना था कि उसकी आँखे इतनी नही बरस रही थी जीतनी की ज़रीना की. हां ये बात ज़रूर थी कि उसकी आँखो में हर वक्त नमी बनी हुई थी. आँसू भी टपकते थे रह-रह कर जब दिल बहुत भावुक हो उठता था.

“ज़रीना तुम्हे मुझे यू छोड़ कर नही जाना चाहिए था. मेरे बारे में तुमने एक बार भी नही सोचा. कितना प्यार करता हूँ तुम्हे और फिर भी तुमने ऐसा किया. तुम्हे माफ़ नही कर पाउन्गा मैं.” आदित्या ने अपनी आँखो के नीचे से आँसुओ की बूँदो को पोंछते हुवे कहा.

धीरे धीरे कब रात घिर आई पता ही नही चला. पूरी रात ज़रीना को नींद नही आई. आदित्य भी सो नही पाया. हां ऐसा होता है. प्यार कभी-कभी नींद भी छीन लेता है. ऐसी नाज़ुक हालत में सोना वैसे भी नामुमकिन था.

प्यार की एक इंट्रेस्टिंग बात ये भी होती है की सब नाराज़गी और नफ़रत सिर्फ़ उपर का दिखावा होती है. दिल की गहराई में कुछ ऐसी तड़प होती है एक दूसरे के लिए की उसे शब्दो में नही कहा जा सकता. ये बात कोई प्यार करने वाला ही समझ सकता है.

सुबह होते होते अदित्य और ज़रीना दोनो का ही गुस्सा ठंडा पड़ने लगा था. ज़रीना ने फ़ैसला किया कि वो दिन निकलते ही होटेल जाएगी और अदित्य के गले लग जाएगी और उस से खूब लड़ाई करेगी. बस दिक्कत की बात सिर्फ़ ये थी कि वो घर से निकले कैसे. कोई उसे अकेले कही जाने नही देगा और किसी को साथ लेकर वो अदित्य के पास जा नही सकती थी. इश्लीए जैसे ही दिन निकला वो चुपचाप घर से निकल पड़ी. देल्ही में ऑटो तो सारी रात चलते हैं. सुबह सुबह ऑटो मिलने में कोई दिक्कत नही हुई.

पर दिक्कत ये आन पड़ी कि ऑटो वाला ज़रीना को लक्ष्मीनगर की बजाए कही और ही ले आया. दरअसल ऑटो वाला नया था. उसे लक्ष्मीनगर की लोकेशन ठीक से पता नही थी बस यू ही अपने पैसे बनाने के चक्कर में चल पड़ा था अंदाज़े से.

“भैया ये कहा ले आए तुम मुझे ये लक्ष्मीनगर तो नही लग रहा.”

“ओह…ये लक्ष्मीनगर नही है क्या. ग़लती हो गयी मेडम”

ऑटो वाले ने दूसरे ऑटो वाले से लक्ष्मी नगर का रास्ता पूछा और फिर ऑटो को लेकर चल पड़ा.

होटेल पहुँचते पहुँचते सुबह के 9 बज गये. ज़रीना ने तुरंत ऑटो वाले को पैसे पकड़ाए और होटेल में घुस्स कर सीधा अपने उस रूम की तरफ चल पड़ी जिसमे अदित्य और वो एक साथ रुके थे. लेकिन पीछे से रिसेप्षन पर खड़ी एक युवती ने उसे टोक दिया.

“एक्सक्यूस मी मेडम, आप कहा जा रही हैं.”

ज़रीना मूडी और बोली, “रूम नो 114 में ठहरी हूँ मैं.”

“ओह हां मैं भूल गयी सॉरी. पर आपके साथ जो थे वो जा चुके हैं रूम छोड़ कर.”

“क्या?” ज़रीना के तो पैरो के नीचे से जैसे ज़मीन ही निकल गयी.

“कब गये वो?”

“बस अभी अभी निकले हैं”

“कहा गये वो?” ज़रीना का तो दिमाग़ ही घूम गया था.

“मेडम शायद आपने ठीक से सुना नही. वो चेक-आउट करके जा चुके हैं. अब कहा गये हैं हमें नही पता.”

ज़रीना चेहरा लटकाए हुवे होटेल से बाहर आ गयी.

“मेरा ज़रा सा भी वेट नही किया तुमने अदित्य. क्यों प्यार किया मैने तुमसे.” ज़रीना की आँखे फिर से भर आई.

बड़ा ही अजीब सा कुछ हो रहा था अदित्य और ज़रीना के साथ. ज़रीना होटेल पहुँच गयी थी और अदित्य सिलमपुर. बात सिर्फ़ इतनी थी कि दोनो ग़लत समय पर सही जगह पर थे.

आदित्य को ज़रीना की मौसी का घर तो पता था नही. हां बस गली का पता था. अदित्य पीठ पर बेग टांगे गली में चक्कर लगा रहा था. उसने किसी से ज़रीना की मौसी के घर के बारे में पूछने की जहमत नही उठाई. वो बस बार बार गली के चक्कर लगा रहा था.

“क्या वो मुझे भूल गयी इतनी जल्दी. बाहर आकर तो देखना चाहिए उसे मैं कब से घूम रहा हूँ यहा.”

क्रमशः...............................
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Thumbs Up Antarvasna Sex चमत्कारी 153 115,129 05-07-2020, 03:37 PM
Last Post:
Star Desi Porn Kahani काँच की हवेली 73 36,750 05-02-2020, 01:30 PM
Last Post:
Star Incest Porn Kahani चुदाई घर बार की 47 59,486 04-29-2020, 01:24 PM
Last Post:
Tongue Sex kahani किस्मत का फेर 20 33,812 04-26-2020, 02:16 PM
Last Post:
Lightbulb Kamukta kahani प्रेम की परीक्षा 49 51,162 04-24-2020, 12:52 PM
Last Post:
  पारिवारिक चुदाई की कहानी 17 81,150 04-22-2020, 03:40 PM
Last Post:
Thumbs Up xxx indian stories आखिरी शिकार 46 52,853 04-18-2020, 01:41 PM
Last Post:
Lightbulb non veg kahani एक नया संसार 253 540,434 04-16-2020, 03:51 PM
Last Post:
Thumbs Up dizelexpert.ru Hindi Kahani अमरबेल एक प्रेमकहानी 67 46,547 04-14-2020, 12:12 PM
Last Post:
Star Sex kahani अधूरी हसरतें 272 493,587 04-06-2020, 11:46 PM
Last Post:



Users browsing this thread: 21 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.


Pooja ki suhagrat me chudai kahani-threadhindi.chudai.kahani.ghar.me.femilysabi.nagge.rahte.haiseptikmontag.ruनाईटी पहनी लुगाई गी xxxx vदीवानगी राज शरमाचुदाईbhiya ki biwi web sireeg kuku aapगालिया दे दे चुदती hot mom hindi sex storyXxxx www .com ak ladka 2ladke kamraशिकशी का 2फोटोhinthi hot auntyi photos nippalप्राची देसाई की चूत देखनी हैtapsi pnnu nure बकवास का गर्म bobos तस्वीरXnxxn!पल रन्दिsabse Dard Nak Pilani wala video BF sexy hot Indian desi sexy videoxxx.shalem.javied.ke.halvai.ke.do.bibe.ke.chudae.ke.kahane.baba.nat.comदीदीHDXxxअलिशा कि नंगी Xxx फोटुkamarbanad,xxxx,nikidapni niw bibi ki ngan chodkr suhag rat manae hindi hestoriDOWNLOAD THE DRINK MEIN NASHE KI GOLI MILAKE AT HOTEL HINDI SEXY VIDEObhabhi ne mjhse apni panty mangwai bazar seyum sex storiseSex story salwar smellRemote Se Kar Ka Rang chalta hai aur ladki ke kapde Tod Dete Hain Remote Se Vaali video sexy xxxदेसी।साडी।पहेनकर।चोदाई।वाली।बिडियोझवाया शिकनेthakur ki beti mona ki bete par pyar ki bochare sexwww.रेशमा कि चुत कैसि हैँ?Mota.aur.lamba.lanad.se.khede.khade.sex.xxxx.porn.videoअसल चाळे मामी जवलेdesi sex aamne samne chusai videoek sath teennke sath chudai kahaniindean sexmarahti vsexi randi mummy ki bur gand bhosda chhinal rand ghode se chod beta mom ko pel hindi kahaniland ny chot ko fahdya panjabiसुहागरात हदे जबरदसतआईला झवले Stori 2019 Gifफेमेली सेकसी कहानीय़ा मां सगे मूसलीम कहानीय़ाkamukta.maakigandmarikese chudi pati samne sambhu sexy storyanna koncham adi sexxnxxporn movie kaise shout Hoti hainsaumya tandon shubhangi atre lesbian picsमेरी माँ भें की मन चुत गण्ड मरी गन्दी गली डकारइंडियन सेक्सी वीडियो प्लेयर गांड वाली टट्टी निकलेदुहना स्तन लडकी का आदमी चुसते हुए Sexदिपिका कि चोदा चोदि सेकसि विडीयोचुदाई कहानी भाई बहिन की भाई ने पकड के जबरजशती चोदा भोशडी काbhai se condom wali panty mangwayiवालपेपर फोटो देसी sax सासरsex vedeo bhabhi ko nagti jbrdshसीमा ने सहेली को भाई से चुदवाने के बहाने खुद को चुदवा लियाBap ne kacchi beti ko bhga bhga ke sex kiya indian pornबायको पादली झवतानाsasumaake chudai x video hdbabuji ka ghode jesa land sexbaba.comdipika kakar hardcore nude fakesBhabhi ne nanad ko praducer se chudwayaफुल रोमटिक कयु मेराxxxxbfxxnxxindian girels fucking in gungle hd vidpesrajsharma hindi sexy kahani chunchiyon me doodhwww.ind.punjabi.hiroin.pic.xxx.laraj.sizewwwचाची को चोदकर छिनाल बना दिया comKahlidaki ki sexy-kahani hindibari bhabhi sari woli bacha nadan boya seksi videoslwar kholkr chdae bfsexyxxbhabhiChikni bossi xxx danloadइंडियन गरल हाट की चुत के फोटोझांटो सफाईsiekha.armpit.sex.babajiju ne chat pe utari salwar sex storyकौन-कौन सी हीरोइन सेक्स मूवी से हीरोइन में बनीxxxxx desi girls hot & top porn photos b.f gaw Rajokri delhi-38 maa ke bed ke neeche nirodh Girl छोटा पेंट कयोँ पहनती हैनई झांटो सफाईambada vali aunty hard sexHD XXX बजे मूमे फूल सैकसीkamsin jawani nude selfie pic or khaniyaSexyxxnxwww.aadhuri icha beta ne ki pure incest khamiMahdi lagi dulan ki chudaei xnxxXnxx बोबो दबाकेऋतु ने बिना कुछ सोचे उन का रस से भीगा लंडashwarasex auntiyon ne dekhai bra pantyindiyn ketme sexsex vidioGaon ke khet me bahen Ki fati salwar se chut Dekha nonveg vashna kahani