Mastram Kahani बाप के रंग में रंग गई बेटी
10-04-2018, 11:59 AM,
#71
RE: Mastram Kahani बाप के रंग में रंग गई बेटी
मनिका धीरे धीरे अपने कदम बढ़ाये जा रही थी, उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी, उसे कुछ समझ नही आ रहा था, अगर वो सचमुच कनिका हुई तो मैं क्या करूंगी, मनिका को कुछ पता नही चल रहा था वो बस आगे बढ़ी जा रही थी, और जल्द ही वो अपने पापा के रूम के दरवाजे के सामने खड़ी थी

उसने हल्के से दरवाज़े को अंदर की तरफ धकेला, और ये देखकर उसके आश्चर्य का कोई ठिकाना ना रहा कि दरवाज़ा खुला हुआ ही है,

दरअसल ये कनिका के शैतानी दिमाग की खुराफात थी, उसने ये पहले ही प्लान कर रखा था, की अगर मनिका जल्दी घर आती है तो वो किसी तरह उसे अपने और जयसिंह की चुदाई का नज़ारा दिखा देगी, और उसकी ये तरकीब अब काम भी आ रही थी

मनिका ने धीरे से दरवाज़े को थोड़ा सा खोला और फिर तो अंदर का नज़ारा देखकर उसके होश ही उड़ गए,

अंदर जयसिंह कनिका को घोड़ी बनाकर पीछे से अपना लंड अपनी बेटी की चुत में पेल रहा था और कनिका भी किसी रंडी की तरह उछल उछल कर उसका साथ दे रही थी, मनिका को तो ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसकी कोई सौतन उसके पति के साथ चुदाई कर रही है,
एक बार तो उसने वहां से हट जाने का सोचा पर ना जाने क्या सोचकर वो वही डटी रही और ये उसकी बड़ी भूल थी, क्योंकि धीरे धीरे ही सही पर अब उसका बदन भी अंदर की चुदाई देखकर गरम होने लगा था, उसकी चुत में चींटिया से रेंगने लगी थी, उसकी हवस अब बढ़ती ही जा रही थी

अंदर के घमासान को देखकर अब उसके हाथ खुद ब खुद अपनी स्कर्ट के अंदर से होते हुए पेंटी के अंदर छुपी उसकी चुत पर चले गए और वो उसे जोर जोर से मसलने लगी, अंदर जयसिंह कनिका की चुत ठोखने में बिजी था, तो इधर मनिका ये सोचकर अपनी चुत मसले जा रही थी कि काश कनिका की जगह वो होती वहां पर

गज़ब का गरम नज़ारा था वो, एक बेटी अंदर अपनी चुत मरा रही थी तो दूजी बाहर खड़ी अपनी चुत मसल रही थी

करीब 20 मिंट ही हुए थे कि दोनों तरफ तूफान से उमड़ पड़ा, जयसिंह भलभलाता हुआ कनिक के साथ ही उसकी चुत में झाड़ गया और बाहर मनिका भी बुरी तरह से झाड़ गयी

थोड़ी देर बाद जब मनिका को होश आया तो उसने अपने रुमाल से अपनी चुत साफ की और नीचे फर्श पर पड़े अपने पानी को भी साफ किया, और भागकर किचन में गयी, वहां से खाने का पैकेट लिया और घर से बाहर आ गयी, 2 से 3 मिंट बाद उसने बेल बजाई


इधर जयसिंह और कनिका ने जब बेल की आवाज़ सुनी तो वो हड़बड़ा गए, कनिक ने अपने कपड़े उठाये और भागकर अपने रूम में आ गयी, जयसिंह ने भी झटपट कपड़े पहने ओर दरवाज़ा खोलने की लिए चल पड़ा

दरवाज़ा खोलते ही सामने मनिका खड़ी थी

" अरे मनिका, तुम इतनी जल्दी कैसे आ गयी, तुम तो 10 बजे आने वाली थी ना" जयसिंह बोला

"वो पापा मैंने काव्य को बोला कि घर पर मोम नही है सो खाना मैं ही ले जाऊंगी बाहर से, उससे 2 -3 दिन बाद मिल लुंगी" मनिका ने कहा

"कोई नही बेटी, आओ अंदर, चलो खाना तो तुम ले ही आयी, मैं कनिक को बुला लेता हूं, हम सभी खाना खा लेते है, और वैसे भी मुझे कल ऑफीस जाना पड़ेगा तो जल्दी सोना है आज" जयसिंह बोला

"ओके पापा" मनिका बोली

थोड़ी देर बाद ही तीनो लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे कहना खा रहे थे, कोई कुछ भी नही बोल रहा था, मनिका तो थोड़े गुस्से में थी , वो कनिका से थोड़ा जल भी रही थी, पर ये भी नही समझ पा रही थी कि वो उत्तेजित क्यों हुई" 

जल्द ही तीनो ने खाना खत्म किया और अपने अपने रूम में सोने के लिए चले गए, तीनो अलग अलग सपने संजोते हुए गहरी नींद के आगोश में जा चुके थे

सुबह जयसिंह जल्दी उठकर तैयार हुआ और आफिस के लिए निकल गया, दरअसल उसे अगले दिन सिंगापुर जाना था पर उसने ऑर्गनाइजर्स से बात करवाके अपना प्रोग्रम 6 की बजाय 10 को करवा लिया, क्योंकि मधु भी घर पर नही थी

इधर मनिका और कनिका के बीच सुबह से ही अजीब सी खामोशी थी, पर मनिका ने रात में कनिका की छोटी सी गुलाबी चुत भी देखी थी, और वो न चाहते हुए भी उसकी ओर आकर्षित हो रही थी

दोपहर को दोनों बहनें हॉल में बैठी टीवी देख रही थी, टीवी पर टाइटैनिक मूवी आ रही थी, और तभी अचानक मूवी में वो सेक्स सीन आ गया गाड़ी वाला, उस सीन को देखकर मनिका ने चैनल चेंज करने के लिए रिमोट उठाया पर तभी कनिका बोली

"रहने दो ना दीदी, कितना अच्छा सीन है" कनिका बोली

"अच्छा बताऊ तुझे, तू अभी इनके लिए छोटी है" मनिका बोली

"अरे दीदी, आपको क्या पता मैं कितनी बड़ी हो गयी" कनिका मुस्कुरा कर बोली



"हां मुझे सब पता है" मनिका उसकी तरफ देखकर बोली और रिमोट उठाने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि कनिका ने उससे पहले रिमोट उठा लिया और रिमोट लेकर अपने रूम की तरफ भाग गई,मीका भी उसके पीछे दौड़ी, और तभी अचानक कनिका ने आकर उसके उपर छलांग लगा दी..और वो जोरों से डर कर चीख पड़ी..

कनिका उसकी हालत देखकर ज़ोर से हँसने लगी.

और मनिका मुँह बनाती हुई कनिका को मारने दौड़ पड़ी.

और उसे पकड़कर उसने बेड पर पटक दिया..और कनिका के दोनों हाथ सिर से उपर की तरफ रखकर उसे नीचे लिटा कर उसके पेट पर बैठ गयी..

कनिका अभी तक बेतहाशा हँसती जा रही थी...

कनिका को ऐसे हंसते देखकर मनिका भी गुस्सा भूल गयी और वो भी मुस्कुराने लगी..

दोनो बहने मस्ती के मूड में आ चुकी थी,...



मनिका : "अब बोल कनिका की बच्ची ...करेगी मेरे साथ ऐसा मज़ाक....बोल...''

वो झुककर उसके काफ़ी करीब आ चुकी थी...और इसी बीच अपने को छुड़वाने के लिए कनिका ने अपनी गांड वाला हिस्सा हवा में उठा दिया..

मनिका को ऐसा लगा जैसे नीचे से कोई उसकी चूत में लंड डालने की कोशिश कर रहा है...क्योंकि दोनो की चूत इस वक़्त एक दूसरे बिलकुल ऊपर थी .

और अपनी चूत पर वो नमकीन सा दबाव महसूस करते ही उसकी चूत को पसीना आ गया...सेल्फ़ लुब्रीकेशन स्टार्ट हो गया अचानक उसमें से..और उसने भी कनिका की लचीली कमर को पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ा और उसे ऊपर से ऐसे धक्के मारने लगी जैसे वो उसकी चुदाई कर रही हो.



कनिका जो अभी तक हंस रही थी, मनिका के ऐसे झटकों को समझकर वो भी हँसना भूल गयी और सीरियस सी होकर उसने अपनी बहन से पूछा : "दी....दीदी ....ये...ये ...क्या कर रहे हो.....ऐसा तो....ऐसा तो लड़का और लड़की करते है...''

पर मनिका ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया...और अपने हाथ धीरे-2 उसने कनिका की टी शर्ट में डाल दिए और ऊपर की तरफ खिसकाने शुरू कर दिए....

जैसे-2 मनिका की उंगलियाँ सरककर उपर की तरफ आ रही थी...वैसे-2 कनिका के माथे पर पसीना बढ़ने लगा था...वो चाहकर भी उसके हाथों को रोक नहीं रही थी , आज से पहले उसने ऐसा कभी भी महसूस नही किया था...एक अजीब सा सेंसेशन हो रहा था उसे अपनी चूत पर...मनिका की घिसाई से...और अब उसकी उंगलियों की थिरकन से भी उसे गुदगुदी महसूस होने लगी थी..

उसने ब्रा नही पहनी हुई थी...और जल्द ही मनिका की दोनो हथेलियां उसके नन्हे उरोजों से आ टकराई और उसने बड़े ही प्यार से उसके नन्हे चूजों को अपने हाथों में भर लिया..

कनिका की तो आँखे बंद हो गयी उस एहसास से जब मनिका ने होले से अपने हाथ के दबाव से उसकी ब्रेस्ट को दबाया..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....आआआआहह....दीदी......ये क्या कर रहे ........उम्म्म्ममममममममम....''

वो शिकायत थी या प्रश्न ...ये तो नही पता चल सका...पर कनिका के हाथों ने अगले ही पल उपर की तरफ आते हुए टी शर्ट के उपर से ही मनिका के हाथों को पकड़ लिया..मनिका को लगा की वो हटाने के लिए कह रही है...पर वो धीरे से बुदबुदाई..

''दीदी.....प्लीज़ .......ज़ोर से दबाओ ना......ऐसे....''

और उसने अपने हाथों से मनिका के हाथों को जोर से दबा दिया...और मनिका के हाथों के नीचे उसकी नन्ही गोल गोल टमाटर भी उस दबाव में आकर नीचुड़कर रह गयी.

मनिका तो भभक उठी उसके बाद....उसने कनिका की ब्रेस्ट को इतनी बेदर्दी से दबाना शुरू कर दिया की उसपर लाल निशान बनते चले गये...पर वो रुकी नही..

कनिका के नुकीले निप्पल भी मनिका के जालिम हाथों को रोकने में असमर्थ थे..भले ही वो काँटों की तरह उभरकर ब्रेस्ट की रक्षा कर रहे थे पर ऐसे काँटों से शायद इस वक़्त मनिका को कोई असर ही नही पड़ रहा था...वो तो उन काँटों को भी बीच-2 में ऐसे मसल रही थी जैसे उनमे से दूध निकलने वाला हो..

दूध तो नही निकला..पर उसकी हर उमेठन से कनिका की सिसकारियाँ ज़रूर निकल रही थी.



अब तो साफ़ हो चुका था की आज ये दोनो बहने अपनी सारी सीमाएँ लाँघने की तैयारी कर रही है..

मनिका तो अभी तक जैसे किसी नशे मे ये सब कर रही थी...ऐसा नशा जो उसके शरीर को अपने बस में करने में असमर्थ था...वो ये भी भूल चुकी थी की ये उसकी वही छोटी बहन है जिसने उसके प्यार उसके पापा पर डाका डाला ...कनिका तो अपनी जवानी के उस पड़ाव पर थी जहाँ उसे ऐसी बातों में मज़ा मिलता था जो सैक्स से जुड़ी हो...अपने घर से बाहर निकलकर और जवानी की दहलीज पर कदम रखने के बाद कनिका में काफ़ी खुलापन आ चुका था.

कनिका के अंदर एक अजीब सी चाहत ने जन्म ले लिया था...सेक्स के बारे में वो दूसरों से कुछ ज़्यादा ही सोचने लगी थी..पर अपनी बहन के डर के मारे और शर्म की वजह से वो अपनी भावनाओं को उसके सामने बाहर नही आने देती थी..


पर अब उसे रोकने वाला कोई नही था.

जैसे ही मनिका के हाथों ने उसकी नन्ही ब्रेस्ट को छुआ...वो अपने हाथों के दबाव को उनपर डालकर और ज़ोर से दबाने की गुज़ारिश करने लगी मनिका से..

उसकी ब्रेस्ट ही उसके शरीर का सबसे सेंसेटिव हिस्सा थी..

इसलिए उसपर हाथ लगते ही वो भी अपनी सुधबुध खो बैठी और फिर शुरू हुआ उस छोटे से कमरे में दो बहनो के जिस्म के बीच उत्तेजना और सेक्स का वो सिलसिला जो शायद अब थमने वाला नही था.

कनिका ने एक मादक सी अंगड़ाई लेते हुए अपनी टी शर्ट उतार कर दीवार पर दे मारी..

और उसकी साँवली और नन्ही छातियाँ देखकर मनिका के मुँह में पानी भर आया.



उसके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे...और उसके निप्पल के घेरे पर भी महीन से दाने उगे हुए थे..मनिका तो उसके निप्पलों की कारीगरी देखकर अचंभित रह गई...क्योंकि उसके दानों पर भी इतनी महीन कारीगरी नही की थी ऊपर वाले ने...वो बिल्कुल सादे से थे...पर उसकी ब्रेस्ट कनिका के मुक़ाबले काफ़ी बड़ी थी..कनिका की तो अभी -2 आनी शुरू हुई थी..पर एक बार जब ये भर जाएगी तो कयामत ढाएगी ये लड़की..

और ये तभी भरेंगी जब इनके उपर मेहनत की जाएगी...ये सोचते हुए मनिका का सिर उसकी छातियों पर झुकता चला गया..और अपने होंठ,दाँत और जीभ रूपी ओजरों से उसने कनिका के बूब्स पर मेहनत करनी शुरू कर दी..
सबसे पहले अपनी गर्म जीभ से उसने कनिका के निप्पल्स को छुआ....जो कनिका के शरीर पर पहला स्पर्श था किसी लड़की का...ज़्यादातर लड़कियों के शरीर पर पहला स्पर्श किसी लड़के का होता है..पर लड़की के स्पर्श में भी कोई बुराई नही थी इस वक़्त...कनिका ने एक तड़प भरी किलकारी मारते हुए अपनी दीदी के सिर को पकड़कर ज़ोर से दबा लिया अपनी छातियो पर...और चीख पड़ी वो..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.......आआआआआअहह दीदी............. ...उफफफफफफफफफफफफ फफफ्फ़.........क्या फीलिंग है ......माय गॉड ..... आआआआआआआअहह........ज़ोर से सक्क करो ना....दीदी............प्लीईईईईस......काट लो इन्हे......जोरों से...............दांतो से..................आआआआआआहह उूुुुउउफ़फ्फ़ एसस्स ऐसे ही................. उम्म्म्ममममममममममममममममममममम आआआआआआआहह दीदी..........यार .....कहाँ थी आप ......पहले क्यों नही किया ये सब..................उम्म्म्मममममममममममममम.......''

कनिका तो भाव विभोर सी हुई जा रही थी अपने शरीर को मिल रहे इतने उत्तेजक मज़े को महसूस करते हुए...उसे पता तो था की ऐसा ही कुछ होता होगा..पर अभी जो कुछ भी हो रहा था उसके साथ वो उसे शब्दों मे व्यक्त कर ही नही सकती थी...ऐसा मज़ा ...इतना आनद....उत्तेजना का इतना संचार...ऐसी तड़प...उसने आज तक सोचा भी नही था की लड़की के साथ सेक्स के खेल में भी इतना मज़ा आता है.


मनिका के सिर को कभी एक पर तो कभी दूसरी ब्रेस्ट पर वो लट्टू की तरह घुमा रही थी...उसकी लार से उसने अपनी छातियों की पुताई करवा ली...उसके लंबे और नुकीले निप्पल अपने पुर शबाब पर आ चुके थे...

वो बेड पर पड़ी हुई किसी मछली की तरह तड़प रही थी.



उसने अपनी नशीली आँखो से मनिका की तरफ देखा..और फिर अपने हाथ उपर करते हुए उसने मनिका की ब्रैस्ट को पकड़ लिया...

मनिका को तो ऐसा लगा जैसे उसके दिल की धड़कन रुक जाएगी..जब कनिका ने उन्हे टी शर्ट के उपर से ही मसलना शुरू किया..

''उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उऊहह ...............आआआआआआअहह कनिका..................उम्म्म्ममममममममम...... .एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......''

और फिर धीरे-2 कनिका ने उसकी टी शर्ट को उपर खिसकाना शुरू कर दिया...और अंत में आते-2 उसे उतार कर अपनी ही टी शर्ट के उपर फेंक दिया..मनिका ने तो ब्रा पहनी हुई थी...जिसे उसने खुद ही अपने हाथ पीछे करते हुए खोल दिया..



और जैसे ही उसके बूब्स कनिका की नज़रों के सामने आए, अपने आप ही उसका मुँह उनकी तरफ खींचता चला गया..और उसने एक जोरदार झटके के साथ उसकी बड़ी सी ब्रेस्ट को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया..

किसी बच्चे की तरह वो उसके लम्बे निप्पल का दूध पीने लगी..

और अपनी नन्ही बहन को अपनी छाती से चिपका कर मनिका ने एक रस भरी सिसकारी मारकर उसे और अंदर घुसा लिया..

''आआआआआआआआआअहह ओह्ह्ह्ह माय बैबी .................. सकक्क मी......सक्क.....इट ......बैबी.....''



बैबी तो पहले से ही उत्तेजना के शिखर पर थी...अपनी बहन की दर्द भरी पुकार सुनकर वो और ज़ोर से उसके दानों को अपने पैने दांतो से कुतरने लगी...किसी चुहिया की तरह...और हर बार काटने पर मनिका के शरीर से एक अजीब सी तरंग उठ जाती..जिसे कनिका सॉफ महसूस कर पा रही थी..

ये खेल दोनों के लिए नया था...आज से पहले उन्होने किसी लड़की के साथ ऐसा कुछ भी नही किया था...पर सेक्स भी अजीब तरह का खेल है..इसे सीखना नही पड़ता, ये अपने आप आता चला जाता है..

और यही हो रहा था दोनो के साथ...कनिका के साथ तो कुछ ज़्यादा ही...वो छुटकी कुछ ज़्यादा ही उछल रही थी इस खेल में ...

इसलिए जब अच्छी तरह से उसने मनिका की ब्रेस्ट का जूस पी लिया तो वो तुरंत खड़ी हुई और उसने अपनी केप्री भी उतार कर फेंक दी...और अब वो मनिका के सामने बेशर्मों की तरह पूरी तरह से नंगी होकर बैठी थी..



कनिका की देखा देखी मनिका ने भी अपना पायज़ामा उतार दिया...और अब वो दोनो नंगी बैठी थी एक दूसरे के सामने..पर आगे क्या करना है ये किसी को नही मालूम था..क्योंकि किसी लड़की के साथ ये उन दोनों का ही पहला एक्सपीरियंस था


मनिका की नंगी ब्रैस्ट देखने में काफी यम्मी लग रही थी , वो कनिका के मुकाबले काफी बड़ी भी थी,इसलिए मनिका उनको हाथों में लेकर खुद ही दबाने लगी, और अपनी मोटी छातियों में और उभार ले आई 


अपने अंतर्मन की आवाज़ सुनकर दोनो ने एक दूसरे की ब्रेस्ट को अच्छी तरह से चूस डाला था..पर अब क्या करे ,शायद यही सोचे जा रही थी वो दोनो...

उत्तेजना के नशे में कनिका को सिर्फ़ वही याद आ रहा था की कैसे वो खुद,जब पापा उसकी चुत चूस रहे थे तो ज़ोर-2 से आहे भरकर मज़े ले रही थी..

बस,कनिका ने भी वही ठान लिया..

उसने धीरे से धक्का देकर मनिका को बेड पर लिटा दिया..

पहले तो अपनी उँगलियों को मनिका की चूत में डालकर कनिका ने अंदर के टेंप्रेचर और चिकनाई का अंदाजा लिया 



और फिर धीरे -२ नीचे झुककर वो अपना चेहरा चूत के करीब ले गयी 

मनिका का शरीर भी काँप उठा,ये सोचकर की उसके साथ क्या होने वाला है अब...उसके होंठ थरथरा कर रह गये, पर उनमे से ना नही निकल पाया...और उसने अपने आप को अपनी छोटी बहन के सुपुर्द करते हुए अपनी आँखे बंद कर ली.

और फिर कनिका नीचे झुकी और उसने अपने होंठों से उसकी गुलाब जैसी चूत की फेली हुई पंखुड़ियों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
पहला नीवाला मुँह में लेते ही उसका स्वाद पता चल गया कनिका को...जो उसे काफ़ी मजेदार लगा..

और मनिका तो बिफर गयी अपनी चूत की चुसाई से...

''ऊऊऊऊऊऊऊहह कनिका.............मेरी ज़ाआाआन्न................सस्स्स्स्स्स्सस्स..... ये क्या कर दिया............आआआआहह .....बहुत मज़ा आ रहा है ............उम्म्म्ममममममममम..... एसस्स्स्स्सस्स...... अहह.....''

और फिर तो वो बावली कुतिया की तरह उसकी चूत के उपर लगे अखरोट के दाने पर और संतरे की फाँक जैसी चूत को खाने में लग गयी...

अपनी लंबी और गर्म जीभ को उसने अंदर भी धकेला..उसकी मलाई को चाटा ...चूसा...और अंत में पी गयी.



ऐसा स्वाद लगा उसे उसकी चूत का की वो उसे तब तक चूसती रही जब तक मनिका झड़ने के करीब नही पहुँच गयी..

और मनिका को तो अपनी चूत चुस्वाते हुए अपने पापा ही याद आ र्हे थे..और याद आ रहा था उस रात का दृश्य

.और उसी सीन को याद करते हुए मनिका को ऐसा फील हुआ की इस वक़्त कनिका नही बल्कि उसके पापा उसकी चूत को चूस रहे हैं..

और झड़ने के करीब तो वो वैसे ही थी...इसलिए जैसे ही उसकी चूत से ताज़ा नारियल पानी निकल कर कनिका के मुँह में गया...उसने उसके बालों को पकड़ कर अपनी फूली हुई चूत पर घिस डाला और ज़ोर से चिल्लाई....

''आआआआआआअहह.................ओह..... पापा.................... सकककककक मिईीईईईई.......''



भावनाओ में बहकर उसके मुँह से पापा निकल तो गया...पर अगले ही पल वो यथार्थ के धरातल पर आ गयी...और उसने डरते-2 कनिका की तरफ देखा..

पर शायद उसने सुना नही था....क्योंकि वो बड़े ही प्यार से उसकी चूत में से बूँद-2 करके निकल रहा रस अपनी जीभ में समेट कर अंदर लेने में लगी हुई थी..

और जब पूरी तरह से उसकी चूत के रस को उसने पी लिया तो अपना मुँह सॉफ करते हुए वो मुस्कुराती हुई उपर आई...

''अक्चा....तो पापा के उपर नज़र है आपकी....आप तो बड़े चालू निकले दीदी....''

उसकी ये बात सुनकर मनिका का शरीर सुन्न होता चला गया
..



पर कनिका के होंठों पर अलग ही तरह की मुस्कान आ चुकी थी अब.

जिसे देखकर मनिका समझ नही पा रही थी की उसके दिमाग़ में आख़िर चल क्या रहा है..

पर उसके बाद जो हुआ, उसे देखकर तो मनिका के भी होश उड़ गये..उसने तो सोचा भी नही था की इस चुहिया के दिमाग़ में इतना गंद भरा पड़ा है

मनिका से कुछ बोलते नही बन रहा था...रंगे हाथो पकड़ी गयी थी वो .

जिस कनिका को वो अपने प्यारे पापा से दूर करना चाहती थी, उसके सामने ही उसके और पापा के बीच का परदा उठ गया...अब उसे उस हद तक तो नही मालूम था पर जिस अंदाज में वो पकड़ी गयी थी..यानी अपनी चूत को चुसवाते हुए और झड़ते हुए जिस अंदाज में उसने अपने पापा को पुकारा था, उसे देखकर तो कोई बेवकूफ़ भी बता देगा की मनिका के मन में उसके पापा के लिए क्या चल रहा है.

मनिका ने अपना चेहरा नीचे कर लिया.

कनिका : "ओहो दीदी...आप प्लीज़ ऐसे एम्बेरेस मत होवो ...इनफेक्ट मुझे तो इस बात की खुशी है की आप पापा को उस नज़र से देखते हो,जिस नज़र से उन्हे मैं देखकर अपने अरमानो को दबाया करती थी..''

कनिका के मुँह से सीधी बात सुनकर मनिका भी चोंक गयी...पर उसने कुछ ज़्यादा रिएक्ट नही किया..आख़िर कनिका की भी क्या ग़लती है इसमे...एक तो उनके पापा इतने चार्मिंग है,वो खुद उनसे चुदाई करती है , ऐसे में कनिका को किसी भी बात का दोष देना सही नही था.

मनिका ने भी अब कनिका को कल रात के बारे में उसे बता देना उचित समझा, और फिर उसने कहा

मनिका- सुन कनिका, वो मैं तुझे कल रात के बारे में कुछ बताना चाहती हूं

कनिका - यही ना कि कल आपने मुझे और पापा को चुदाई करते देख लिया था

मनिका तो कनिका की बात सुनकर दंग रह गयी, उसे तो अब सूझ ही नही रहा था कि वो क्या बोले
कनिका - दीदी आप शर्माओ मत प्लीज़, दरअसल मैंने और पापा ने तो गांव में उस रात ही पहली चुदाई कर ली थी जब हम साथ सोये थे, और कल रात भी मैने ही जानबूझकर कमरे का दरवाजा खुला रखा था

मनिका के ऊपर तो जैसे एक के बाद एक बम फूट रहे थे, वो पूछना चाहती थी कि ये सब हुआ कैसे पर उसके पूछने से पहले ही कनिका ने उस पर एक और बम फोड़ दिया

कनिका - दीदी वो उस दिन सुबह मैंने आपको भी पापा का लंड चूसते हुए देख लिया था, आपको लग रहा था मैं सो रही थी पर आपकी आवाज सुनकर मैं जग गयी थी और आप दोनों के खेल का आनंद उठा रही थी

मनिका के चेहरे की हवाइयां उड़ चुकी थी, कहाँ तो वो सोच रही थी कि वो ही उन दोनों के बारे में जानती है पर यहां तो ये छुटकी उसकी माँ निकली

कनिका - अच्छा दीदी, प्लीज़ आप मुझसे शर्माओ मत, आपने और मैंने दोनों ने ही पापा के साथ चुदाई कर ली है तो हमे एक दूसरे से कुछ नही छुपाना चाहिए, अच्छा दीदी प्लीज़ बताओ ना आप दोनों के बीच ये सब कैसे शुरू हुआ

मनिका भी अब थोड़ी नार्मल हो चुकी थी, फिर उसने कनिका को अपने और अपने पापा के बीच हुए पूरे वाकये को शुरू से लेकर अंत तक मिर्च मसाला लगाकर सुना दिया, कैसे पहली बार दिल्ली में ये सब शुरू हुआ था, कैसे जयसिंह ने अपनी बेटी को फंसाने के लिए चले चली, कैसे फिर वो उनसे नाराज़ हुई, कैसे धीरे धीरे वो उन्हें चाहने लगी, और कैसे उस बरसात की रात वो सब कुछ हुआ
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10-04-2018, 11:59 AM,
#72
RE: Mastram Kahani बाप के रंग में रंग गई बेटी
कनिका तो बड़ी तल्लीनता से उसकी कहानी सुन रही थी, और फिर उसने भी अपने और अपने पापा की उस सुहागरात की कहानी मनिका को सुना दी

दोनों बहनें एक दूसरे के सीक्रेट शेयर कर बड़ी खुश थी, पर अब दोनों ही बहुत गर्म हो चुकी थी

कनिका : "देखो दीदी...आज जो कुछ भी हमने एक दूसरे के साथ किया है..वो सिर्फ़ एक हद तक ही कर सकते है...असली मज़े के लिए तो हमे किसी मर्द की ज़रूरत पड़ेगी ना..और पापा के होते हुए हम किसी दूसरे मर्द के बारे में क्यो सोचे...ठीक है ना...''

कनिका अपने हिसाब से तर्क दे रही थी...जो अभी के लिए मनिका को भी सही लग रहा था..

कनिका : "ओफफो....अब छोड़ो भी ये सब....इस मूमेंट का मज़ा लो बस...आपने तो मज़ा ले लिया...अब मेरी बारी है...''

इतना कहकर कनिका ने एक झटके से मनिका को अपने उपर खींचा और उसके होंठों पर टूर पड़ी...शायद पापा का ज़िक्र आने के बाद उसमे एक नयी उर्जा का संचार हो चुका था..कुछ नयी पॉसिबिलिटीस दिख रही थी उसे अब इस खेल में .

वो अपनी नन्ही मगर गोल मटोल गांड को अपनी बहन की तरफ करके बोली : "अब आप बनॉगे मेरे लिए....पापा...और वो सब करोगे जो आप मुझे पापा समझकर करवा रहे थे...''

मनिका का तो दिमाग़ ठनक गया ये सुनकर...अब परदा तो उठ ही चुका था उनके बीच से...इसलिए कनिका सारे मज़े खुलकर लेना चाहती थी...जिस तरह मनिका ने अपने पापा को इमेजीन करते हुए कनिका से अपनी चूत चुस्वाई थी और बाकी के सारे काम करवाए थे,वही सब अब वो उससे करवाना चाहती थी..
कनिका काफ़ी उत्तेजना में भर चुकी थी...वो अपने हाथ को पीछे लेजाकर अपनी गांड के नीचे नज़र आ रही संतरों की फांको को ज़ोर से मसलने लगी...और ज़ोर से चिल्लाई : "अब और कितनी बार बोलना पड़ेगा आपको....पापा....आओ ना प्लीईईईईस.....और सक्क करो मुझे....यहाँ से....''

वो अपनी पतली उंगलियों को पाव रोटी जैसी चूत के अंदर घुमाते हुए बुदबुदाई..



मनिका के सामने अब कोई चारा बचा ही नही था...उसने उसकी दोनो टाँगो को फेलाया और अपनी जीभ निकाल कर उसका मक्खन निकालने में लग गयी.

दोनो जांघों को उसने दोनो दिशाओं में फेलाकर अपनी नुकीली जीभ से अंदर का अनारदाना कुरेदना शुरू कर दिया.

कनिका ने अपनी बहन के सिर को अपने हाथों से पकड़कर अपनी चूत पर ज़ोर से दबा लिया..और ज़ोर से चिल्लाई

''ऊऊऊऊऊऊऊहह पापा...............मेरे प्यारे पापा......आआआआआआआहह एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... ऐसे ही चूसो....अपनी बेटी की चूत को................आआआआआआअहह''

मनिका की तो हँसी निकल गयी उसकी बात सुनकर....पर कनिका पर तो कोई फ़र्क ही नही पड़ रहा था...वो तो बस अपनी आँखे बंद किए हुए अपने पापा को इमेजीन कर रही थी..

ठीक वैसे ही जैसे कुछ देर पहले तक मनिका कर रही थी.

मनिका ने भी सोचा की अब इतना कुछ तो हो ही चुका है उनके बीच तो इस बात पर उसे टोकना सही नही है...लेने दो उसे भी मज़े..
और वो भी पूरे ज़ोर शोर के साथ उस खेल में कूद पड़ी..

और उसकी रसीली चूत से निकले गाड़े रस से अपने भीगे चेहरे को निकाल कर वो बुदबुदाई : "हाँ मेरी जान.....आज तुझे ऐसा चुसूंगा की तू भूल ही नही पाएगी....''

कनिका की उत्तेजना तो सांतवे आसमान पर पहुँच गयी ये सुनकर...और उसने अपने प्यारे ''पापा'' के सिर को वापिस काम पर लगाते हुए उसे फिर से अंदर दबा लिया.

और सिर्फ़ एक मिनट के अंदर ही वो भरभराकर झड़ गयी...और ढेर सारा गीलापन उसने अपने बिस्तर पर छोड़ दिया..

ये तो सिर्फ़ पहली बार ही था...अभी तो ना जाने और कितनी बार झड़ना था उसने..

कनिका के शरीर से तरंगे निकल रही थी झड़ने के बाद...मनिका उन तरंगो से ताल मिलाकर उसकी चूत से बची हुई ओस की बूंदे चूस रही थी..



उसकी चूत पर अभी तक हलके रोँये थे...जिन्हे उसने काटा नही था...यानी उसने अभी तक अपनी चूत की सफाई नही की थी...ऐसी खूबसूरत एक बार चुदी चूत को चूस्कर पापा को कितना मज़ा आएगा...यही सोचकर मनिका मुस्कुरा दी.

और उसने अपनी जीभ के नुकीले सिरे को उसके मटर दाने पर रगड़ना शुरू कर दिया.




''आआआआहह दीदी..................धीरे -2 क्यो कर रहे हो....ज़ोर से सक्क करो ना...............पहले की तरह....''

मनिका समझ गयी की वो जंगली तरीके से प्यार करने वालो में से है...और उसने सुना हुआ था की ऐसी ही लड़कियां अक्सर मर्दों को पसंद आती है जो बेड पर उधम मचाते हुए वाइल्ड तरीके से सेक्स करे..

इस खेल में उसे भी बहुत कुछ सीखने को मिल रहा था..जिसका प्रयोग वो बाद में अपनी रियल लाइफ पर करके और भी ज़्यादा मज़े ले सकती थी.

मनिका : "अच्छा ...तो तुझे ज़ोर से करवाने में मज़ा मिलेगा....अब देख तू....मैं कितने ज़ोर से करती हूँ ....''

इतना कहते हुए मनिका ने अपना चेहरा ज़ोर से उसकी चूत पर दे मारा...और सड़प -2 करते हुए उसकी चूत को ऐसे चूसने लगी जैसे बर्फ का मीठा गोला चूसते है ....

कनिका तो छटपटा कर रह गयी ....उसने मनिका के बालों को पकड़कर उसके चेहरे को अपनी टाँगो के बीच ऐसे फिक्स कर लिया जैसे वो उसे अब कभी छोड़ेगी ही नही...

''आआआआआआआआअहह .............ओह येसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स पापा.................मेरे प्यारे पापा.................ऐसे ही सक्क करो................ज़ोर ज़ोर से................... अहह...''



और इस बार मनिका ने उसकी पूरी की पूरी चूत को अपने मुँह में भर लिया...यानी उसकी चूत की दोनो संतरे जैसी फांको को मुँह में लेकर चूस डाला..मनिका के मुँह में एकदम से इतना रस भर गया जैसे उसने कोई स्पंज रसगुल्ला मुँह में लेकर दबा दिया हो...

और ऐसा और ना जाने कितना रस और भर रखा था इस छोटी सी चुहिया ने अपनी चूत के अंदर ..


उसकी चूत को अच्छी तरह से चूसने के बाद मनिका को ऐसा लगा जैसे उसने कोई शक्तिवर्धक टॉनिक पी लिया है...एक नशा सा चड गया था उसे पीकर ...और उसी नशे में डूबकर वो उपर की तरफ चल दी..

और उसके नुकीले निप्पल को अपने मुँह में लेकर उसने ज़ोर से काट लिया..

''आआआआआआआआआआआआआआअहह...........सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....


भले ही कनिका तड़प उठी थी इतने ज़ोर से काटने पर..लेकिन उसने कोई शिकायत नही की

बल्कि मनिका के चेहरे को पकड़कर अपने दूसरे बूबे पर ले आई और आँखो ही आँखो में उसे भी उतनी ही ज़ोर से काटने की गुज़ारिश कर डाली..
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10-04-2018, 11:59 AM,
#73
RE: Mastram Kahani बाप के रंग में रंग गई बेटी
भले ही कनिका तड़प उठी थी इतने ज़ोर से काटने पर..लेकिन उसने कोई शिकायत नही की

बल्कि मनिका के चेहरे को पकड़कर अपने दूसरे बूबे पर ले आई और आँखो ही आँखो में उसे भी उतनी ही ज़ोर से काटने की गुज़ारिश कर डाली..

और उसकी बात को मानते हुए मनिका ने उस निप्पल को भी नही बक्शा और अपने पैने दांतो से उसके कोमल माँस को अंदर दबा कर मसल डाला..

दर्द और मज़े से भरी सिसकारियाँ गूँज उठी पूरे कमरे में ..

और उस चीख को भी मनिका ने अपने मुँह से दबा दिया ....अपने होंठ रख दिए उसके लरज रहे अधरों पर...और पी लिया सारा का सारा मीठा रस.

मनिका की चूत में फिर से खुजली होने लगी थी..

वो धीरे-2 किसी नागिन की तरह चलती हुई कनिका के उपर चड़ती चली गयी..

और अपने ही आनंद में डूबी हुई कनिका को पता भी नही चला की कब मनिका की रस टपकाती हुई चूत उसके मुँह के ठीक उपर आ लगी..

मनिका ने अपनी चूत को नीचे करते हुए उसके होंठों से छुआया ,और जैसे ही कनिका को उसकी चूत का अंदाज़ा हुआ, उसने लपक कर अपनी जीभ बाहर निकाल ली और उसे चाटना शुरू कर दिया.



मनिका बड़े ही मादक अंदाज में अपनी कमर हिला-हिलाकर उस से अपनी आइस्क्रीम चुस्वा रही थी.


एक के बाद दूसरी बार झड़ने के बहुत करीब पहुँच चुकी थी अब वो.

कनिका तो जैसे हर पल के साथ सेक्स में मास्टर होती चली जा रही थी.


उसकी जीभ अब पहले से ज़्यादा अंदर और पहले से ज़्यादा हमला करती हुई उसकी सेवा कर रही थी.

पर अब सिर्फ़ उसकी जीभ के कुरेदने से कुछ होने वाला नही था..

दोनो के सिर पर उत्तेजना का ज्वार पूरी तरह से चढ़ चुका था.

मनिका ने अपनी चूत को नीचे लाते हुए उसकी टाँगो के बीच में से अपनी टांगे क्रॉस करी जिससे दोनो की चूतें आपस में मिल गयी..

और फिर दोनो एक दूसरे की आँखो में देखते हुए धीरे -2 अपने-2 शरीर को हिलाने लगे



और उस थिरकन ने जल्द ही रफ़्तार पकड़ ली

ऐसा लग रहा था जैसे दोनो को एक दूसरे से पहले झड़ने की जल्दी है..

कनिका ने तो उसके चेहरे को अपने करीब लाकर उसे फ्रेंच किस करना शुरू कर दिया..
और साथ ही साथ उसकी गोल मटोल बूब्स बॉल्स को भी अपने हाथों से मसलने लगी

एक साथ अपने सभी सेंसेटिव पायंट्स पर हमला होता देखकर मनिका तो बावली हो गयी.

उसके होंठों को वो किसी वहशी की तरह चूस रही थी...बिल्कुल वैसे ही जैसे उसके पापा ने चूसा था उसे उस दिन बरसात में .

और स्तनों को तो ऐसे मसल रही थी जैसे वो रबड़ के बने हो...पर इस वक़्त दर्द से ज़्यादा मज़ा मिल रहा था.

और अपनी चूत के उपर उसकी चूत की घिसाई महसूस करते हुए तो उसका बुरा हाल था.

घर्षण से इतनी गर्मी निकल रही थी अंदर से की अगर कोई कागज रख दो तो वो भी आग पकड़ ले..

मनिका से वो सब बर्दाश्त नही हुआ और उसने कनिका को नीचे पटक दिया

और खुद उसके उपर चढ़ बैठी.

किसी मर्द की तरह

और अपनी चूत को फिर से उसकी चूत पर लगाकर ऐसे झटके मारने लगी जैसे वो अपने लंड से उसकी चुदाई कर रही हो



कनिका के सेक्सी जिस्म और नशीली आँखो मे देखते हुए उसने अपनी चोदने की स्पीड तेज कर दी.

दोनो की चूतें एक दूसरे से घिसाई करने के बाद चाशनी से तर बतर हो चुकी थी.

चादर तो भीग ही चुकी थी बुरी तरह से

और फिर वो वक़्त आ ही गया,जिसके लिए दोनो इतनी मेहनत कर रही थी..झड़ने का 

और आख़िर मे बुरी तरह से कराहती हुई दोनो झड़ने लगी..ढेर सारा पानी निकला था उन दोनों बहनों की फूल जैसी चुतो से

आखिर कई देर की मशक्कत के बाद मिले इस जन्नत जैसे आनंद की प्राप्ति के बाद वो दोनों बहनें एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर सो गई,

शाम के 5 बजने वाले थे, कनिका की आंखे पहले खुल चुकी थी, उसने अपने साइड में देखा तो मनिका बिल्कुल निश्चिन्त होकर सोई पड़ी थी, अपनी दीदी को इस तरह देखकर कनिका से रह नही गया और उसने आगे बढ़कर अपने होठों को मनिका के होठों से सटा दिया, और उनका जूस चूसने लगी

मनिका भी कनिका की इस हरकत से उठ गई, और कनिका को इस तरह अपने होठ चूसते देख उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, थोड़ी देर के चुम्बन के बाद दोनों बहनें खड़ी हुई और फ्रेश होकर हॉल में आ गई और बाते करने में मशगूल हो गयी

कनिका - दीदी अब तो हम पापा के साथ मिलकर सेक्स कर सकते है ना, कितना मज़ा आएगा, आप मैं और पापा

मनिका - हाँ छुटकी, बहुत मज़ा आएगा, पर पापा को ये बताएंगे कैसे कि अब हम साथ मे सेक्स करने के लिए पूरी तरह से तैयार है

कनिका - उसकी चिंता आप मत करो दीदी, आज हम दोनों उनको वो जलवे दिखएँगे कि वो खुद हमे साथ मे चोद देंगे

मनिका - धत्त तू बहुत शैतान हो गयी है छुटकी, पर मेरी एक शर्त है

कनिका - शर्त कैसी शर्त

मनिका - तुम दोनों ने मुझे बिना बताए सेक्स किया इसलिए उसकी सजा मैं तुम्हे दूंगी

कनिका - सज़ा कैसी सज़ा

मनिका - यही की पापा को ये बताने के बाद कि अब हम दोनों उनसे साथ सेक्स कर सकते है, पर आज की रात पहले सिर्फ मैं ही उनसे चुदाई करवाउंगी, और तुम सिर्फ पास बैठकर देखोगी, ताकि तुम्हे भी पता चले कि कल रात तुम दोनों को चुदाई करते देख मेरी क्या हालत हुई थी, और पापा भी तुन्हें पास में बैठा देखे पर कुछ कर न सके

कनिका - पर दीदी ये तो बहुत बड़ी सज़ा दी रही हो आप, मैं कैसे खुद को कंट्रोल कर पाऊंगी

मनिका - मुझे नही पता, तू मेरी बहन है ना, मेरी इतनी बात नही मान सकती

कनिका - चलो ठीक है दीदी, आपके लिए मैं सब कीच करूंगी ,पर आपके एक बार चुदाई के बाद हम आज ही मिलकर उनसे चुदाई करवाएंगे पक्का

मनिका - हाँ ठीक है


यह कहकर दोनों बहनें एक दूसरे से गले लग गयी, और फिर दोनों मनिका के रूम में आ गयी और बहुत ही सेक्सी तरीके से खुद को सजाने लगी

आज तो दोनों बहनें इस कदर सेक्सी लग रही थी जैसे वो आज जयसिंह पर कहर ही ढाना चाहती थी

शाम को जयसिंह अपने घर पहुंचा, घर की बेल बजाई तो सामने कनिका खड़ी थी, आज तो इतनी सेक्सी लग रही थी कि जयसिंह तो बस उसे देखता ही रह गया

कनिका - क्या हुआ पापाआआआ, ऐसे क्या देख रहे हो मुझे

जयसिंह - बेटी आज तो तुम इतनी सेक्सी लग रही हो कि मन कर रहा है कि यही पटककर छोड़ दूं तुम्हे

कनिका - क्या पापाआआआ, आप भी ना, कल रात ही तो आपने मेरी चुत की जबरदस्त कुटाई की है

जयसिंह - अरे तेरी जैसी चुत को तो जितना चोदा जाए उतनी ही इच्छा और भी बढ़ती जाती है, वैसे मनिका कहाँ है, बाहर गयी है क्या, चलो न अभी एक राउंड कर लेते है

कनिका - अरे अरे रुको पापा, दीदी अंदर ही है, टीवी देख रही है

जयसिंह ये सुनकर थोड़ा सा दुखी हुए और अंदर आ गया, पर उसे क्या पता था कि आज उस पर क्या कहर ढहने वाला है


जयसिंह ने जब हॉल में मनिका को देखा तो उसके हाथ मे जो सूटकेस था वो वही गिर गया, वो एकटक मनिका को निहारने लगा, उसकी प्यारी सी रंडी बेटियां आज उसके लंड पर कहर ढाए जा रही थी, मनिका ने तो इतनी छोटी सी स्कर्ट पहनी थी कि उसमें से उसकी गुलाबी कच्छी की झलक साफ साफ दिखाई दे रही थी

उसकी तन्द्रा तब भंग हुई जब कनिक ने पीछे से उसे आवाज़ दी, क्या हुआ पापाआआआ ,आप रुक क्यों गए

जयसिंह सकपकाया और जल्दी से अपना बैग उठाकर अपने रूम में दौड़ गया, उसको इस तरह हड़बड़ाते देखकर दोनों बहनें हसने लगी, उन्हें अपनी पहली चाल कामयाब होती दिख रही थी

कमरे में आकर जयसिंह को ऐसा लग रहा था जैसे वो 100 मीटर की दौड़ में हिस्सा लेकर आया है, उसका बदन आग की तरह सुलग रहा था, रह रहकर उसकी आँखों के सामने उसकी बेटियों का वो रूप आ रहा था


"आज क्या हो गया इन दोनों को, कोसे छोटे छोटे कपड़े पहन मेरे इस लंड पर कहर ढा रही थी, पूरी रंडी लग रही थी दोनों, मन कर रहा था कि वही पटककर दोनों को छोड़ दूं, हाय्य .....और वो मनिका तो अपनी पूरी कच्छी के दर्शन करवा रही थी मुझे, मन कर रहा था कि उसे वही लिटाकर उसकी गर्म चुत में अपना मोटा लंड घुसेड़ दूँ" जयसिंह इसी तरह की बातों में उलझा था

थोड़ी देर बाद वो फ्रेश होकर अपने पाजामे और टीशर्ट में बाहर आया, अभी भी दोनों बहनें टीवी देखने मे बिजी थी

जयसिंह आकर उनके साथ ही सोफे पर बैठ गया

"और पापा, कैसा रहा दिन ऑफिस में आज" कनिका ने पूछा

"अच्छा रहा बेटी, तुम दोनों बताओ कैसा गुज़रा आज का दिन" जयसिंह बोला

"अरे पापाआआआ आज तो हम दोनों बहनें बेस्ट फ्रंड्स भी बन चुकी है, बहुत अच्छा रहा हमारा दिन" कनिका चहकती हुई बोली

"क्यों इस क्या हो गया आज" जयसिंह ने आश्चर्य से पूछा

पर कनिका तो बस इसी सवाल का इंतेज़ार कर रही थी, उसके शैतानी दिमाग ने इस पल के लिए कुछ सोच रखा था, उसने पहले ही प्लान बना रखा था, और अपने प्लान पर अमल करती हुई वो बेबाकी से बोल पड़ी

"आज हम दोनों बहनों का बदन एक हो गया है पापाआआआ" कनिका बोली

"क्या मतलब........" जयसिंह के गले की सांस उसे रुकती हुई सी महसूस हुई

"मतलब ये मेरे भोले पापा की आज हम दोनों बहनों ने एक दूसरे की चुत से निकली मस्त मलाई चख ली हैं" कनिका बेबाकी से जवाब दिए जा रही थी


"ये ....ये...तुम कैसी गन्दी बाते कर रही हो मेरे सामने" जयसिंह थोड़ा हकलाता हुआ बोला

"अच्छा जी आप गंदे काम कर सकते है और हम बोल बजी नही सकते" इस बार मनिका बीच मे बोल पड़ी

"गंदे काम मैने क्या किया है" जयसिंह सचमुच काफी डर गया था ,उसकी ऐसी हालत देखकर दोनों बहनें हंसी जा रही थी

"गंदे काम, मैं बताती हूं कि आपने क्या किया, आपने मेरे साथ दो बार दमदार चुदाई की और बिना मुझे बताए अपनी छोटी बेटी को भी छोड़ दिया" मनिका झुटमुट के गुस्से में बोली

" क्याआआआआ....." अब तो जयसिंग की सिटी पिट्टी गुम हो चुकी थी, उसका भांडा फुट चुका था, उसे समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे

"क्यों पापाआआआ, अब बोलो क्या हुआ" मनिका बोली

"वो बेटी वो वो म मम्मम...." जयसिंह हकला रहा था

"पापा अब तो आपको सज़ा जरूर मिलेगी" मनिका बोली

"सज़ा कैसी सज़ा" जयसिंह डरता हुआ बोला, उसे तो लग रहा था कि उसके हाथ मे आयी हुई उसकी दोनों बेटिया उसके हाथों से निकलने वाली है, काश वो एक मे ही खुश रहता, वो अपनी किस्मत को दोष दे रहा था, पर उसे क्या पता था कि आज की रात उसकी किस्मत बदलने वाली है

"मैं बताती हूँ कि आपको क्या सज़ा मिलेगी, आपकी सज़ा ये है कि आज हम मैं आपके इस अहंकारी बड़े से लंड को कच्चा कहा जाऊंगी" मनिका हस्ते हुए बोली

दोनों बहनों को हस्ते देख जल्द ही जयसिंह को भी सारा माजरा समझ आ गया, वो भी अब हल्के हल्के मुस्कुराने लगा

"अरे रुको अभी तो पूरी सज़ा सुननी बाकी है" मनिका बोली

"बोलो क्या सजा दोगी मुझे" जयसिंह भी अब इस खेल का मजा ले रहा था

"आपकी सजा ये है कि आज की रात आपके इस लंड को मेरी चुत को 3 बार काम से कम शांत करने होगा, और आप सिर्फ मेरी ही चुदाई करोगे, कनिका पास में खड़ी होकर नंगी हमे देखेगी, पर आप उसे छू नही सकते" मनिका बोली

ये तो सचमुच एक सजा से कम नही थी, कनिका जैसी खूबसूरत रांड बेटी सामने नंगी खड़ी हो तो वो कैसे खुद पर काबू रखता, पर वो मनिका को मना भी नही कर सकता था

उसने भारी मन से हाँ भर दी, उसके हां भरने की देर थी कि मनिका ने तुरंत जयसिंग के होठो पर हमला कर दिया,
मनिका अपने मुँह से अजीब-2 सी आवाज़ें निकाल रही थी...और जयसिंह को अपने होंठों के ज़रिए पिये जा रही थी.
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10-04-2018, 11:59 AM,
#74
RE: Mastram Kahani बाप के रंग में रंग गई बेटी
ये तो सचमुच एक सजा से कम नही थी, कनिका जैसी खूबसूरत रांड बेटी सामने नंगी खड़ी हो तो वो कैसे खुद पर काबू रखता, पर वो मनिका को मना भी नही कर सकता था

उसने भारी मन से हाँ भर दी, उसके हां भरने की देर थी कि मनिका ने तुरंत जयसिंग के होठो पर हमला कर दिया,
मनिका अपने मुँह से अजीब-2 सी आवाज़ें निकाल रही थी...और जयसिंह को अपने होंठों के ज़रिए पिये जा रही थी.

जयसिंह ने मनिका को अपनी गोद मे उठा लिया और कनिका के साथ अपने रुम में आ गया

कनिका ने भी दरवाजा बंद कर दिया.

जयसिंह ने इतनी ज़ोर वाली सकिंग पावर आज तक महसूस नही की थी...उसने भी अपने आप को मनिका के हवाले छोड़ दिया..और आराम से खड़ा होकर उसकी स्मूच का लुत्फ़ उठाने लगा.

उसकी आँखे खुली हुई थी और वो पीछे खड़ी कनिका को बिल्कुल करीब से देख पा रहा था...उसने अपनी बाहें मनिका के चारों तरफ लपेट दी और मनिका को उतनी ही तेज़ी से चूमने लगा जितनी ज़ोर से वो चूम रही थी.



कनिका उन्हे किस्स्स करते हुए देखकर यही सोच रही थी की ना जाने किस जन्म का बदला ले रहे है एक दूसरे से जो इतनी ज़ोर से चूम रहे है...कनिका भी उनके बिल्कुल पास खड़ी थी, मनिका की पीठ उसकी तरफ थी

जयसिंह ने अपना हाथ पीछे की तरफ बढ़ाकर कनिका के बूब्स पर रख दिया...और इस तरह से मनिका के साथ-2 कनिका को भी अपने लपेटे में ले लिया जयसिंह ने...कनिका तो अपने पापा के सख़्त हाथों को अपनी कोमल और नन्ही छाती पर महसूस करते ही भलभला उठी...और अपने होंठों को दांतो तले दबाकर अंदर ही अंदर सिसक पड़ी..


कुछ देर तक चूमने के बाद मनिका को जैसे होश आया...उसने आँखे खोली और जयसिंह को बेड पर बैठने को कहा..

मनिका की आँखे खुलते ही जयसिंह ने तुरंत कनिका के बूब्स छोड़ दिए...कनिका को तो मज़ा आना शुरू ही हुआ था की जयसिंह ने हाथ झटक लिए..उसे बहुत बुरा लगा..पर वो कर भी क्या सकती थी...आज उसका दिन नही था...इसलिए ऐसे में उसे आज जो भी मिल रहा था उसके लिए वही बहुत था..

जयसिंह भी जानता था की मनिका को अच्छा प्यार देने की खातिर आज उसे कनिका से दूर ही रहना होगा..


मनिका को चूमते-2 जयसिंह के हाथ उसके बूब्स पर चले गये...मनिका को हमेशा से ही अपने बूब्स पर हाथ लगने के बाद गुदगुदी सी महसूस होती थी...उसने जयसिंह के हाथ वहां से हटाना चाहा पर वो तो शैतान पापा की तरह अपनी बेटी की कमज़ोरी जानने के बाद उसके पीछे ही पड़ गया...और अपना मुँह नीचे करते हुए उसने टी शर्ट के उपर से ही उसके उभरे हुए निप्पल को अपने दांतो में दबोच लिया और ज़ोर से काट लिया.



''आआआआआआआआआआआहह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....पापाआआआ .....''

एक साथ दो सिसकारियाँ गूँजी थी....मनिका के साथ-2 कनिका भी कसमसा उठी थी.

दोनो ने एकदम से अपनी किस्स तोड़कर कनिका की तरफ देखा तो वो थोड़ा डर सी गयी...कि कहीं उसे कमरे से बाहर जाने के लिए ना बोल दे...वो चुपचाप जाकर कोने में पड़ी चेयर पर जाकर बैठ गयी.
मनिका और जयसिंह मुस्कुरा दिए और एक बार फिर से अपने काम पर लग गये.मनिका उसे चूमने में और जयसिंह उसके बूब्स को दबोचने में ..

अब मनिका अपने जंगली रूप में आने लगी थी...जयसिंह जिस अंदाज से उसके बटन्स को छेड़ रहा था,मनिका अपनी उत्तेजना की सीमा के करीब पहुँचती जा रही थी.

जयसिंह ने अपनी टी शर्ट उतार दी और अपना कसरती बदन मनिका को दिखाया.



जवाब मे मनिका ने भी उतनी ही बेशर्मी से अपनी टी शर्ट को उतार फेंका...जयसिंह ने उसकी टी शर्ट उतारने में मदद की और उतारने के बाद उसे हवा में उछाल दिया .... अब वो सिर्फ़ ब्रा और स्कर्ट में खड़ी थी.



ऐसा लाजवाब हुस्न देखकर जयसिंह का लंड उसके पाजामे में खड़ा हो गया....जिसे आगे बढ़कर मनिका ने अपने हाथो में पकड़ा और ज़ोर से दबा दिया...जयसिंह ने अपना हाथ उसकी कमर पर लेजाकर उसकी ब्रा के हुक्स खोल दिए और अपनी आँखो का इशारा करके उसे नीचे जाने को कहा...

मनिका ने अपने हाथ उसके पाजामे पर रखे और जयसिंह ने उसकी ब्रा पर..और जैसे ही मनिका नीचे बैठी, उसकी ब्रा जयसिंह के हाथ में रह गयी...और नीचे बैठते-2 जयसिंह के पाजामे को मनिका ने नीचे कर दीया..इस तरह से दोनो एक ही साथ नंगे हो गये

जयसिंह का लंड मनिका के चेहरे से किसी डंडे की तरह टकराया..जिसे पकड़कर उसने बड़े प्यार से देखा लेकिन जैसे ही वो उसे चूसने के लिए आगे हुई, जयसिंह ने उसे रोक दिया, बेचारी के मुंह का पानी अंदर ही रह गया..


जयसिंह : "ऐसे नहीं ... पहले रिक्वेस्ट करो, इसे चूसने की परमिशन मांगो ''.

मनिका भी जयसिंह की ये बात सुनकर सोचने लगी की ये क्या हो गया है पापा को, ऐसे मौके पर आकर ये कैसी हरकत कर रहे है, जब वो चूसने के लिए तैयार है ही तो इस तरह की मिन्नतें करवाकर उन्हें क्या मिलेगा.

पर वो बेचारी नहीं जानती थी की आज की रात के लिए जयसिंह ने क्या-२ सोच कर रखा हुआ था, और ये भी उसी सोच का हिस्सा था, जयसिंह जानता था की ये मनिका की तीसरी ही चुदाई है, इसलिए उसकी चुदाई की हर मूमेंट को वो यादगार बना देना चाहता था, ताकि वो उसे उम्र भर याद रखे, इसलिए कदम-२ पर उसने इस तरह के छोटे-२ खेल सोच कर रखे हुए थे.

मनिका ने भी बहस करना सही नहीं समझी , वो उसके मोटे लंड को देखते हुए प्यार भरे स्वर में बोली : "प्लीज , लेट मी सक इट, चूसने दो मुझे ''



जयसिंह (मुस्कुराते हुए) : "यस, सक्क इट , चूसो इसे, मेरे लंड को,मेरी बॉल्स को, चाटो , खा जाओ इन्हे ....."



मनिका ने महसूस किया की ये सब सुनकर उसके शरीर में अजीब-२ सी तरंगे उठने लगी है, वो पहले से ज्यादा उत्तेजित महसूस करने लगी, जयसिंह के लंड को चूसने की अभिलाषा और जोर से उभरने लगी, अब वो समझ गयी थी की पापा ने ये सब किसलिए किया , वो मन ही मन उन्हें थेंक्स बोलते हुए आगे बड़ी और टूट पड़ी जयसिंह की टांगो के बीच ..
.कुछ देर तक उसकी बॉल्स को अच्छी तरह चूसने के बाद एक ही बार में उसके मोटे लंड को अपने मुँह के अंदर निगल गयी.



मनिका ने इस पल का ना जाने कितने पलो से इंतजार किया था...जब से कनिका और मनिका ने सीक्रेट शेयर किये थे तब से ही मनिका के दिमाग़ में बस यही चल रहा था की जब पापा घर पर दोबारा मिलेंगे तो कैसे चुसेगी...कैसे मसलेगी उनके लंड को.

क्योंकि एक बात तो वो समझ ही चुकी थी की उसके पापा को लंड चुसवाना बहुत पसंद है.

अब इस पगली को कौन समझाए की ये काम तो हर मर्द की पहली पसंद है.

मनिका ने पिछले 2 दिनों से इकट्ठी की हुई लार को चाशनी की तरह अपने पापा के लंड पर लपेट कर उसे नहला दिया और ज़ोर -2 से जयसिंह का मीठा लंड चूसने लगी.

ये सब देखकर कनिका का क्या हाल हो रहा था ये बताने की ज़रूरत नही थी.

वो तो अपनी चूत को अपनी जाँघो के बीच दबाकर अपनी संतरे की फांको को आपस में बुरी तरह से मसल रही थी.. और साथ ही साथ अपनी उंगली खुद ही चूस्कर अपने दिल को तसल्ली दे रही थी की वो भी किस्स कर रही है...और दूसरे हाथ से अपनी छातियों को लाल करने में लगी हुई थी.

जयसिंह तो नीचे मुँह करके मनिका की छातियाँ देखकर पागल हुए जा रहा था, उसकी इन्ही तनी हुई कुँवारी छातियो ने ही उसकी तरफ आकर्षित किया था उसे हमेशा से...और अब वही छातियाँ उसके सामने थी...और वो भी पूरी नंगी.

जयसिंह के मुँह मे पानी भर आया...और उसे मालूम था की इस पानी को कहाँ उड़ेलना है...उसने मनिका की बगल में हाथ डालकर उसे किसी बच्चे की तरह उठाकर बेड पर पटक दिया और उसके मुम्मो पर टूट पड़ा...ऐसा लग रहा था जैसे वो दो मीठे स्पॉंज केक खा रहा था जिनपर लगी चेरी को वो मुँह में लेजाकर चुभलाता और अपने दांतो से उसे उखाड़ने की कोशिश भी करता.
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10-04-2018, 12:00 PM,
#75
RE: Mastram Kahani बाप के रंग में रंग गई बेटी
मनिका के दोनो हाथो को उसने बेड पर दबोच रखा था..ताकि वो उसे रोक ना पाए...बेचारी उसके नीचे दबकर सिर्फ़ छटपटाने के अलावा कुछ नही कर पा रही थी.उसके अंदर उठ रही तरंगे उसके जिस्म को उपर की तरफ उचका रही थी..और वो अपने कूल्हे उठाकर अपनी चूत को जयसिंह के खड़े हुए लंड से टच करवाने की नाकाम कोशिश कर रही थी.

लेकिन जयसिंह बड़ी ही चालाकी से अपने लंड को उसकी चूत से दूर रखकर उसकी बेकरारी को बड़ा रहा था.

जयसिंह उसके बूब्स को चूसता - 2 नीचे की तरफ बढ़ने लगा...उसकी नाभि पर पहुँचकर उसने अपनी जीभ उसके अंदर डाल दी...और उसकी नाभि को अपनी जीभ से चोदने लगा..

ये देखकर दूर बैठी कनिका ने भी अपनी टी शर्ट उठाकर अपनी नाभि की गहराई देखी की क्या वो भी जीभ से चोदने लायक है या नही...वो उतनी गहरी नही थी जितनी मनिका की थी...कारण था मनिका का गदराया हुआ जिस्म, जिसकी वजह से उसकी नाभि उसके पेट में थोड़ा अंदर जा धँसी थी...और इस वक़्त जयसिंह उसी नाभि को अच्छी तरह से चाटकर उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर रहा था.

थोड़ी देर बाद उसने फिर से दक्षिण का रुख़ किया और उसकी जीभ की जीप मनिका की चूत के द्वार पर जाकर रुक गयी...


जयसिंह ने उपर मुँह करके उसके चेहरे को देखा...वो साँस रोके उसके अगले कदम की प्रतीक्षा कर रही थी.

जयसिंह ने उसकी स्कर्ट के बटन खोले और उसकी पेंटी समेत उसे नीचे की तरफ खींच दिया..

जैसे-2 उसकी पेंट उतरती गयी,उसकी कमाल की चूत उभरकर जयसिंह के सामने आती चली गयी.

कमाल की इसलिए की एक तो वो बिल्कुल गोरी थी...और उपर से उसकी जिस अंदाज में ट्रिमिंग की गयी थी,उसे देखकर जयसिंह अचंभित रह गया..चूत के चारों तरफ हल्के-2 बाल छोड़कर एक डिज़ाइन सा बना दिया गया था..और बाकी हर जगह से वो एकदम सफाचट थी...और ये सब इतने महीन तरीके से किया गया था की वो खुद तो ये कर ही नही सकती थी..जयसिंह समझ गया की उसकी चूत की कलाकारी में कनिका का हाथ है.

जरासल आज दोपहर ही कनिका और मनिका ने एक दूसरे के चुतो की सफाई की थी 

उसने कनिका की तरफ देखा तो वो अपनी चूत मसलते हुए जयसिंह को देखकर मुस्कुरा उठी...और अपने बूब्स को प्रेस करके एक सिसकारी भी मारी...जयसिंह समझ गया की मनिका की चूत के बाल इसी चुहिया ने कुतरे है..

अब जयसिंह के सामने एकदम रसीली और जूस से भरी हुई चूत पड़ी थी...उसने अपनी जीभ को तैयार किया और टूट पड़ा उसकी चूत की नदी में .



सेलाब तो कब से उमड़ रहा था उसकी चूत में ....अब जयसिंह की जीभ ने चप्पू चलाकर उस नदी में सैलाब लेकर आना था....और वो ये काम करना बख़ुबी जानता था.

जयसिंह मनिका की चुत चूसने लगा था, तभी कनिका बोल पड़ी, पापा दीदी की चुत खट्टी मीठी है ना
मनिका ने बुरा सा मुँह बनाकर कनिका को डांटा : "अब तू ऐसे मौके पर ये सब शिकायते करने यहाँ आई है....''


कनिका : "नही दीदी....मैं तो एक आइडिया लेकर आई हूँ ...जिसमे पापा को इसे सक्क करने में ज़्यादा मज़ा आएगा...''


इतना कहकर वो भागकर किचन में गयी और फ्रिज खोलकर एक छोटी सी शहद की शीशी निकाल लाई...जयसिंह समझ गया की ये क्या करने वाली है...


वो करीब आई और उसने वो ठंडा-2 शहद मनिका की चूत के उपर उडेल दिया....एक गाड़ी सुनहरे रंग की लकीर के रूप में वो शहद धीरे-2 मनिका की गरमा गरम चूत को अपने रंग में रंगने लगा..थोड़ा शहद उसने उसकी गांड की तरफ से भी डाल दिया,जो धीरे-२ बहकर उसकी चुत तक पहुँचने लगा


जयसिंह देख पा रहा था की कनिका वो शहद उड़ेलते हुए अपनी जीभ ऐसे लपलपा रही थी जैसे वो बरसो की प्यासी हो....
शहद की पूरी शीशी उड़ेलने के बाद वो बोली : "लो पापा....अब आपकी ये स्वीट डिश आपके लिए तैयार है...''


और ये कहकर जैसे ही वो उठकर जाने लगी, जयसिंह ने उसकी कलाई पकड़ ली और बोला : "अब इतना काम कर दिया है तो थोड़ा और कर दो मेरे लिए....इसे अपनी दीदी की चुत पर फेला भी दो...अपने अंदाज में ..''


ये बात सुनते ही कनिका के होंठ थरथरा उठे...उसके पूरे शरीर के रोँये खड़े हो गये....



वो सोचने लगी की क्या इसका मतलब ये है की पापा उसे इस सेक्स के खेल में शामिल होने के लिए बोल रहे है...

और दूसरी तरफ मनिका को भी झटका लगा...वो नही चाहती थी की आज के दिन कनिका उनके इस चुदाई वाले खेल में शामिल हो...वो बस यही चाहती थी की वो दूर बैठकर ये खेल सिर्फ़ देखे......जैसा की दोनो के बीच समझोता हुआ था..


लेकिन कनिका के चेहरे और मनिका के दिमाग़ में चल रही बातो को जैसे जयसिंह ने पढ़ लिया था...वो बोला... : "देखो....तुम सिर्फ़ और सिर्फ़ ये एक छोटा सा काम करोगी...और कुछ नही...उसके बाद वापिस अपनी जगह पर जाकर बैठ जाओगी...अच्छे बच्चो की तरह....ओके ..''


कनिका के लिए ये एक सपने जैसा ही था...वो अपनी बहन की शहद से भीगी चूत को चूसने वाली थी...उसी चूत को जिसे उसके पापा सिर्फ़ दस मिनट बाद चोदने वाले थे...यानी उसके पापा चाहते थे की वो अपनी बहन की चूत खुद तैयार करे,ताकि वो बाद में उसकी चुदाई सही से कर सके


मनिका ने भी कुछ नही कहा...वैसे भी उसे एक्साइट करने के लिए सही ढंग से चूत की चुसाई करना बहुत ज़रूरी था ...और ये काम कनिका से अच्छी तरह कोई और कर ही नही सकता था...


जयसिंह मनिका की टाँगो के बीच से उठकर उपर बेड की तरफ चला गया...और कनिका उसकी जगह पर आकर बैठ गयी...उसने मनिका की दोनो टाँगो को दोनो दिशाओं में फेलाया और अपनी जीभ निकाल कर उसकी नोक से ढेर सारा शहद समेटा और दोनो हाथों की उंगलियों से मनिका की चूत की फांके फेला कर नीचे से उपर की तरफ लेजाते हुए उसकी चूत का अभिषेक कर दिया...एक लंबी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह के साथ मनिका ने अपनी बगल में बैठे जयसिंह के लंड को बुरी तरह से पकड़ा और ज़ोर से मसल डाला...


''आआआआआआआआआआआआआआआआआहह ओह...... कनिकाआआआआआअ......''


कनिका की जीभ ने वो ठंडा -2 शहद उसकी खुली हुई चूत के अंदर धकेलना शुरू कर दिया था...

ये शहद वाली ट्रिक उसने कई दीनो से सोच के रखी हुई थी किसी लड़की के लिए...लेकिन उसे करने का मौका ऐसे आएगा ये उसने सपने में भी नही सोचा था...वो भी अपनी सगी बहन के साथ

जयसिंह भी अपने घुटनो के बल बैठकर अपने लंड को उसके मुँह के करीब ले आया...और मनिका उसे किसी गली की कुतिया की तरह चाटने लगी...अपनी जीभ से लपलपा कर उसने जयसिंह के लंड को अपने ही शहद से तर-बतर कर दिया...ठीक उसी तरह जिस तरह से उसकी चूत को कनिका ने कर दिया था इस वक़्त..




कनिका तो बड़े ही चाव से उसकी चूत के हर भाग को शहद में लपेट कर चाट रही थी....चूत से निकलता खट्टापन अब शहद में मिलकर कुछ अलग ही स्वाद दे रहा था...जो कनिका को काफ़ी पसंद आया...और उसे पता था की पापा को भी ये स्वाद पसंद आएगा...


कुछ देर बाद वो अपने रस से भीगे होंठ वहां से उठा कर बोली : "आओ पापा....अब ट्राइ करो...''


जयसिंह ने एक लंबी छलाँग लगाई
और बेड से नीचे उतर आया...कनिका के हटते ही उसने मोर्चा संभाल लिया और जब उसकी जीभ मनिका की चूत से टकराई तो वहां के बदले स्वाद को महसूस करते ही वो पागल सा हो गया...और पहले से कही ज़्यादा तेज़ी से उसकी चूत को अपने मुँह से चोदने लगा...

करीब दस मिनट तक अच्छी तरह से चूसने के बाद उसे एहसास हो गया की चूत की ऐसी चुसाई से बड़ा मजा इस दुनिया में और कोई नहीं है


और उसे ये भी अहसास हो गया की अब मनिका की चूत अंदर और बाहर से पूरी तरह गीली है...यही सही मौका है....उसका किला फतह करने का..


वो उठा और अपने लंड पर थोड़ी सी थूक मलकर उसने मनिका की गर्म चूत पर टीका दिया..

ये वो मौका था जब मनिका और कनिका अपनी साँसे रोके एक साथ उस पॉइंट को देख रही थी...जहाँ पर जयसिंह के लंबे लंड और मनिका की कमसिन चूत का मिलन हो रहा था.

जयसिंह ने धीरे-2 करके अपने लंड को उसके अंदर धकेलना शुरू किया...

मनिका : "उम्म्म्म.....पापा.....दर्द तो नही होगा ना....'' मनिका 2 बार चुद चुकी थी पर आज वो ऐसे रियेक्ट कर रही थी मानो उनकी पहली चुदाई हो

जयसिंह : "नही मेरी जान.....इतनी देर तक जो तेरी चूत को तैयार किया है, वो इसलिए ही ना की ये दर्द ना हो....अब सिर्फ़ मज़ा ही मज़ा मिलेगा...दर्द नही...''

और जैसे-2 उसका लंड मनिका के अंदर जाता जा रहा था, उसके चेहरे के एक्शप्रेशन बदलते जा रहे थे...

और धीरे-2 करते हुए जयसिंह ने अपना आधे से ज़्यादा लंड उसकी चूत में डाल दिया....अब तक मनिका की आँखो से आंसू निकलने लग गये थे....पर वो अपने मुँह पर हाथ रखकर अपनी चीख को बाहर नही निकालने दे रही थी...

जयसिंह ने उसके दोनो हाथो को बेड पर टीकाया और धीरे से उसके उपर झुकते हुए बोला : "बस बैबी.....थोड़ा सा और....'''



वो कुछ बोल पाती, इससे पहले ही जयसिंह ने अपना पूरा का पूरा भार उसके उपर एक झटके मे डाल दिया ....और उसका खंबे जैसा लंड मनिका की चूत को किसी ककड़ी की तरह चीरता हुआ अंदर तक घुसता चला गया....


''आआआआआआआआआआआआहह ऊऊऊऊऊऊओह मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्रर्र्र्ररर गईईईईईईईईईईईईईईsssssssss ..... आआआआआआआआआहहsssssssssss पापाsssssssss..................................''

कनिका भागकर उसके करीब आई और बेड पर चड़कर वो मनिका के चेहरे को चूमने लगी

वो तो ऐसे दिलासा दे रही थी उसे जैसे वो बरसो से चुदती आई है, कनिका अपने होंठ उसके होंठो पर रखकर उसे बुरी तरह से चूसने भी लगी.

कनिका की किस्स्स का जवाब भी देना शुरू कर दिया था मनिका ने....दोनो एक दूसरे के होंठों को किसी भूखी बिल्लियों की तरह से चूस रही थी...और कनिका ने जब देखा की मनिका का दर्द अब गायब हो चुका है तो वो बेमन से वापिस अपनी जगह पर जाकर बैठ गयी..

मनिका ने जाते हुए उसे थेंक्स भी कहा...और फिर अपने पापा के साथ वो एक बार फिर से मस्ती के खेल में शामिल हो गयी.

अब तो वो अपनी टांगे दोनो दिशाओ में फेलाकर पूरे जोश से अपने पाप के लंबे लंड को अंदर तक ले रही थी...और सिसकारियाँ मारकर उसे और ज़ोर से चोदने के लिए उकसा भी रही थी...

''आआआआआआआआहह पापा........ मेरी जानssssssssss ....... और तेज़ी से करो.................. उम्म्म्ममममममममममम...... आहह पापा.............. मजा आ रहा है ....................... उम्म्म्ममममममममम..... इसी मज़े के लिए कब से तरस रही थी..... आआआआआआआआहह ........ ऐसे ही................... हमेशा मेरे अंदर ही रहना ...................... दिन रात...................चोदो मुझे ..................मेरे प्यारे पापा............................ सिर्फ़ मेरे पापा.................''


दूर बैठी छुटकी कनिका बुदबुदा उठी ..'तेरे ही क्यो....मेरे भी तो है...'
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10-04-2018, 12:00 PM,
#76
RE: Mastram Kahani बाप के रंग में रंग गई बेटी
वो अपनी चूत को बेपर्दा करके मसल रही थी ..... और साथ ही साथ बाहर की तरफ निकले हुए क्लिट के दाने को भी रगड़कर अपनी तृष्णा शांत करने की कोशिश कर रही थी




लेकिन जयसिंह और मनिका में से किसी का भी ध्यान उसकी तरफ नहीं था, वो दोनों तो बुरी तरह से एक दूसरे को चोदने में लगे हुए थे

जयसिंह भी अपनी पागल सी हुई जा रही बेटी को इस तरह से चोदकर बावला हुए जा रहा था, और वो इस मौके का भरपूर फायदा उठा रहा था....

आख़िरकार ज़ोर-2 से चिलाते हुए मनिका झड़ गयी ...


''आआआआआआआआहह ओह माय गॉड ................ पापा ..................... आई एम कमिंग ..................''



जयसिंह भी चिल्लाया : "मैं भी आआआआआआय्य्ाआआआआ... मेरी ज़ाआाआआनन्न....''


मनिका : "अंदर ही निकालो .......................... आज मेरे...................... अंदर ही निकााआआाआल्लो.....''


कनिका तो ये सुनते ही चोंक सी गयी....क्योंकि मनिका में आने से पहले उसने या बात उससे डिसकस की थी की कोई प्रोटेक्षन भी लेगी क्या...तो मनिका बोली थी की पापा इतने समझदार तो है ही...वो बाहर ही निकाल देंगे...या शायद वो कंडोम लगाकर करेंगे....

लेकिन यहाँ ना तो कंडोम लगाने का टाइम था और ना ही जयसिंह ने कुछ समझदारी दिखाई....और उपर से मनिका खुद ये बात बोल रही थी की उसके रस को अंदर ही निकाले....क्या वो प्रेगञेन्ट होना चाहती है....ये बात कनिका को परेशान कर रही थी.


मनिका ने भी ऐसा कुछ नही सोचा था....लेकिन इस मौके पर आकर वो एक बार अपने अंदर तक अपने पापा के प्यार को महसूस करना चाहती थी...इसलिए उसने एक सेकेंड में ही ये सोच लिया की आज जो हो रहा है, होने दो...बाद में टेबलेट ले लेगी...


जयसिंह ने भी एक सांड की तरह हुंकारते हुए अपने लंड का सारा पानी उसकी चूत के अंदर निकाल दिया....



''आआआआआआआआआआअहह मेरी ज़ाआाआआआअन्न् ......ये ले......................''

जयसिंह ने अपनी प्यारी बेटी के लिए सहेज के रखा हुआ प्रेम रस पूरी तरह से उसकी प्यासी चूत
मे उडेल दिया , अपनी बाल्स को पूरी तरह से खाली कर दिया उसने..
मनिका की चूत ने भी जयसिंह के लंड को किसी वेक्यूम क्लीनर की तरह चूस डाला और पूरी तरह से तृप्त होकर पस्त हो गयी



और फिर गहरी साँसे लेता हुआ उसके मुम्मों पर सिर रखकर लेट गया...उसका लंड अपने आप फिसलकर बाहर निकल आया...और पीछे से निकला दोनो के प्यार का मिला जुला पानी में लिपटा रंगीन जूस...


कनिका ने जो आज देखा था उसे सोचकर उसका पूरा शरीर काँप सा रहा था....वो भी कुछ देर में इसी तरह से चुदेगी ...और उसका भी ऐसे ही पानी निकलेगा...वो भी मज़े लेगी...वो भी चिल्लाएगी....ये सब सोचते-2 वो मुस्कुरा दी..


जयसिंह और मनिका दोनो ने नोट ही नही किया की उनके पीछे खड़ी कनिका उनके इस मिलन को देखकर कैसे अपने बूब्स और पुस्सी को रगड़ रही है...

उसे पता था की अभी तक उसका नंबर नही आया है,इसलिए वो इस तरह से दूर खड़ी होकर अभी के लिए तो बस यही कर सकती थी...पर वो छुटकी ऐसी थी नही...वो जानती थी की आजकल की दुनिया में ऐसे दूर रहकर कुछ नही मिलने वाला...बड़े लोग हमेशा छोटो को दबाते है..उनके हक को खुद छीनकर ले जाते है...भले ही अभी के लिए इन दोनों बहनों में ऐसी कोई भी भावना नही थी पर इस तरह दूर खड़े होकर वो निश्चिन्त तौर पर कुछ खो ही रही थी...या ये कह लो की उसकी बहन सारे मज़े खुद लेकर उसे ऐसे मज़े से वंचित रख रही थी..

और कुछ पाने के लिए वो उन दोनो के करीब आ गयी...

वो भी तो नंगी ही थी...इसने अपना वो नंगा बदन अपने पापा से लेजाकर चिपका दिया...

क्योंकि वो जानती थी की जो भी उसके साथ होगा वो पापा के चर-कमलों द्वारा ही होगा...

इधर जयसिंह और मनिका अब दूसरे राउंड के लिए पूरी तरह तैयार थे, जयसिंह और मनीज दोबारा एक दूसरे के होठों को चबाने में मशगूल हो गए,पर जयसिंह को जब कनिका के गर्म बदन का एहसास हुआ तो उसने अपनी किस्स तोड़ी और कनिका की तरफ देखा...मनिका भी उसे देखकर समझ चुकी थी की उसकी चूत में भी अब कुलबुलाहट शुरू हो चुकी है....दोनो ने मुस्कुराते हुए कनिका को भी अपनी बाहों मे जगह देकर उसे अंदर घुसा लिया....और फिर एक साथ तीनो ने अपने-2 मुँह आगे कर दिए और तीन तरफ़ा स्मूच शुरू हो गयी....

दोनो बिलियों की तरह जयसिंह के होंठों को ही चूसने का प्रयास कर रही थी...जयसिंह भी कभी एक को तो कभी दूसरी को स्मूच कर रहा था...ऐसे अलग-2 नर्म होंठों को चूसने में उसे बहुत मज़ा आ रहा था...ऐसा ही कुछ वो उनकी चुतों के साथ भी करना चाहता था.

जयसिंह ने तुरंत वो सामूहिक किस्स तोड़ी और अपनी गोद मे बैठी मनिका को नीचे उतार दिया...वो तो उसपर से उतरने को ही राज़ी नही हो रही थी...पर जब जयसिंह ने उसकी गर्म चूत में उंगली डाली तब जाकर वो नीचे उतरी...

उन दोनो को जयसिंह ने धक्का देकर बेड पर लिटा दिया, जयसिंह अपने होठों पर जीभ फिर रहा था, दोनो बहने उसे ऐसा करते हुए देख रही थी और अपनी चूत में उंगली और मुम्मो पर पंजा लाकर उसके आगे बढ़ने का इंतजार कर रही थी...

जयसिंह के लण्ड को देखकर दोनो की चूत में से नींबू पानी निकल रहा था..

जयसिंह ने दोनो की बहती हुई चूत देखी और वो उनके पैरों के पास आकर बैठ गया...अब तक दोनो समझ चुकी थी की उनके साथ क्या होने वाला है...दोनो ने एक दूसरे का हाथ जोरों से पकड़ लिया...

जयसिंह ने दोबारा सबसे पहले मनिका की चूत में अपना मुँह डाला...वहाँ से इतना गीलापन निकल रहा था की उसे एक पल के लिए ऐसा लगा की वो लिम्का पी रहा है...एकदम शहद में लिपटा खट्टा-मीठा सा स्वाद था उसकी चूत के रस का...



कुछ देर तक उसे चूसने के बाद वो कनिका की तरफ पलटा...और अपनी जीभ लगाकर उसका स्वाद चखा...वो थोड़ा मीठा था...उसने अपने होंठों और दाँतों से उसकी चूत पर हमला कर दिया...



वो बिलख उठी...और तड़पकर उसने पास लेटी मनिका को पकड़कर अपने उपर खींच लिया...और उसके मम्मों को जोरों से चूसने लगी...

''आआआआआआआआआहह माय बैबी...''


मनिका को अपनी छोटी बहन अपनी बच्ची जैसी लग रही थी...जो अभी पैदा भी नही हुई थी...वो उसे माँ बनकर अपना दूध पिलाने लगी...नीचे से जयसिंह उसकी चूत चूस रहा था और उपर से वो मनिका के मुम्मे चूसकर अपना सारा मज़ा आगे ट्रान्स्फर कर रही थी...

कुछ देर बाद जयसिंह फिर से मनिका की चूत पर आ लगा...और ऐसा उसने करीब 3-4 बार किया....कभी कनिका तो कभी मनिका...

कनिका के ऊपर मनिका थी, इसलिए दोनों की चूत एक के ऊपर एक लगकर जयसिंह के सामने थी



कनिका काफ़ी देर से बिलख रही थी...और आख़िरकार उसकी चूत ने पानी छोड़ ही दिया...

वो भरभराकर झड़ने लगी....जयसिंह और मनिका ने मिलकर उसकी चूत का पानी पी डाला..

अब जयसिंह की बारी थी...मनिका ने उसे बेड पर लिटा कर पीछे पिल्लो लगा दिया और खुद उसकी टाँगो के बीच पहुँच गयी...दूसरी तरफ से कनिका भी आ गयी...फिर दोनो ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे को देखा और मिलकर जयसिंह के लंड पर टूट पड़ी...
जयसिंह ने तो बेड की चादर को ज़ोर से पकड़ लिया जब उसपर ये हमला हुआ तो...मनिका ने उसके लण्ड को निगल लिया था और कनिका ने उसकी गोटियों को....

ऐसा लग रहा था जैसे भूखे इंसानों को 1 महीने बाद कुछ खाने को मिला है...

जयसिंह के लंड को चबर-2 करके दोनों खाने लगी...उनकी गर्म जीभे , तेज दाँत और नर्म होंठों के मिश्रण से उसे बहुत गुदगुदी भी हो रही थी...पर उससे ज़्यादा मज़ा भी बहुत आ रहा था...



जयसिंह ने हाथ आगे करके दोनों के मुम्मे सहलाने शुरू कर दिए...दोनो के निप्पल एकदम कड़क हो चुके थे...उन्हे मसलने में उसे बहुत मज़ा आ रहा था...

दोनों जयसिंह के लंड को बुरी तरह से चूस रहे थे, एक गोटियां चूस रही थी तो दूसरी लंड.

कनिका टॉपलेस होकर जयसिंह के सामने थी...जयसिंह के मुँह में पानी आ गया उन गोरी-2 छातियों को देखकर 


और उसने मनिका को अपनी तरफ खींचकर अपने होंठ लगा दिए उसके मुम्मों पर और जोरों से चूसने लगा..

कनिका ने जयसिंह के सिर को पकड़कर और ज़ोर से अपनी छाती में घुसा लिया और चिल्लाई : "ओह पापा........ ज़ोर से सुक्क्क करो..... बहुत परेशान करते है ये.... दबाओ इन्हे..... चूसो.... काट लो दांतो से..... अहह ...ओह पापा ...... सस्सस्स ..''

जयसिंह ने उसके बूब्स पर मार्क बनाने शुरू कर दिए...

कुछ देर तक अपनी ब्रेस्ट चुसवाने के बाद वो बड़े ही प्यार से बोली : "पापा..... मुझे भी चूसना है...''

जयसिंह मुस्कुरा दिया उसके भोलेपन को देखकर...

कितनी मासूमियत से वो खुद ही उसके लंड को चूसने के लिए बोल रही थी...

इससे उसके उतावलेपन का सॉफ पता चल रहा था...

जयसिंह जानता था की वो ज़्यादा देर तक तो इस खेल को बड़ा नही पाएगा, पर जितने मज़े वो ले सकता है उतने वो ले लेना चाहता था.

जयसिंह ने हामी भर दी..

दोनों बहनें पूरी रंडी बनकर अपने पापा के लंड को खा जाने में जुटी थी, कुछ ही देर में उनकी मेहनत रंग लाने लगी, जयसिंह के लन्द में दोबारा तनाव आना शुरू हो चुका था और कुछ ही मिनट में अब वो तनकर पूरी तरह खड़ा था,

अब जयसिंह ने कनिका को सीधा लेटाया और एक ही झटके में अपने पूरे लंड को उसकी चुत में उतार दिया, कनिक की चुत लंड के इस घर्सन से उत्तपन्न गर्मी से पिघली जा रही थी, इधर मनिका ने भी कनिका के होठो और मुंम्मो पर लगातार हमला जारी रखा हुआ था


इस दोतरफा हमले को सह पाना कनिक के लिए बड़ा मुश्किल हुआ जा रहा था, जयसिंह पोजीशन बदल बदल कर कनिका की चुत की धज्जियां उड़ाई जा रहा था, बीच बीच मे अब वो अपना लंड निकालकर मनिका की चुत में भी घुसेड़ देता ,

तकरीबन 45 मिनट की घमासान धमाकेदार चुदाई के बाद जयसिंह ने अपना पानी दोनों बहनों के मुंम्मो पर छोड़ दिया जिसे दोनों बहनों ने अमृत समझ चाट लिया, इस बीच वो दोनों भी न जाने कितनी बार अपना पानी छोड़ चुकी थी

पूरी रात उन तीनों ने जबरदस्त चुदाई की, ओर थक हारकर लगभग 4 बजे सोये

अगले 2 दिन जब तक मधु और हितेश नही आये, उन तीनों का चुदाई का सिलसिला यूँ ही जारी रहा

फिर कनिका और हितेश तो अपनी एग्जाम की तैयारियों में मशगूल हो गए और जयसिंह मनिका को लेकर सिंगापुर चला गया, वहां 3 दिनों तक वो हनीमून मनाते रहे, 

एग्जाम पूरी होने के बाद मधु हितेश को लेकर कुछ दिन अपने पिता के यहां चली गयी, मनिका और कनिका ने बहाना बना लिया किसी तरह और फिर 15 दिन तक वो लोग घर में ही हर कोने में रंगरेलियां मनाते रहे
तकरीबन महिने भर बाद मनिका जयसिंह और कनिका के साथ दिल्ली चली गयी, वहां भी 2- 3 दिन उन्होंने घुमाई और चुदाई दोनों की और फिर जयसिंह मनिका को होस्टल में छोड़कर कनिका के साथ वापस आ गया

जयसिंह और कनिका की चुदाई लगातार जारी रही, मनिका भी उनके साथ फ़ोन सेक्स करती, और जब भी मनिका को छुट्टी मिलती वो घर आ जाती, फिर उनका वही प्रोग्राम चलता, कभी कभी जयसिंह भी काम के बहाने से दिल्ली चला जाता, और इस तरह उनकी लाइफ खुशियो से भरपुर होती चली गयी

THE END
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