Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
12-21-2018, 02:35 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
अरे ये क्या रितिका भाभी,,,,अभी आपके हाथों से शगुन की मेहन्दी भी नही उरती और आप किचन का काम करने
लगी,,,,,,,ये ग़लत बात है करण भाई,,,,रितिका भाभी को किचन के काम नही करना चाहिए,,,,

अच्छा सन्नी अगर मैं नही करूँगी तो कॉन करेगा,,,,रितिका भाभी ने हंसते हुए बोला,,,और वैसे भी माँ और
शिखा ही काम करती है अब वो नही है तो मुझे ही करना होगा ना,,,,,,अच्छा एक बात बताओ कि अगर मैं और
कारण अकेले रहते होते तो भी मुझे ही सारा काम करना पड़ता ना,,,,,,तो भी मैं क्या ये मेहन्दी के उतरने
का इंतजार करती रहती,,,,


ऐसी बात नही है भाभी ये तो परंपरा होती है हर घर की ,,नयी बहू से घर का काम नही करवाया जाता


अच्छा अगर मैं काम नही करूँगी तो कॉन करेगा,,,,और वैसे ही मैं इस घर की बहू नही बेटी बनकर आई
हूँ,,,माँ करण से ज़्यादा मुझे प्यार करने लगी है,,,


करण ने उदास होके मेरी तरफ देखा,,,,हां सन्नी भाई ये ठीक बोल रही है,,,तभी तो मेरी पसंद का
खाना न्ही बनाती माँ,,,, जो भी बनाती है रितिका की पस्संद का ही बनाती है,,,,

मैं करण की बात सुनके हँसने लगा और साथ मे रितिका भी,,, अच्छा जी,,इतना प्यार हो गया है सास बहू मे,,ये
तो बहुत अच्छी बात है,,,वैसे अब किसकी पस्संद का खाना बना रही हो आप भाभी,,,

तुम्हारी पसंद का,,,,रितिका ने हंसते हुए जवाब दिया,,,,

मेरी पसंद का,,,,भला आपको कैसे पता मुझे क्या पसंद है,,,,,

मुझे सब पता है सन्नी,,,,कुछ बातें करण से पता चली कुछ बातें माँ और शिखा दीदी से और कुछ बातें
आपकी माँ से पता चली है मुझे कि आपको क्या पसंद है और क्या नही,,,,,जैसे आपको मटर पनीर,,वाइट
चने और साथ मे भिंडी की सब्जी पसंद है और अभी मैं वही बना रही हूँ,,,,

अरे वाह आपको तो सब पता चल गया मेरे बारे मे ,,लेकिन मुझे तो कुछ भी नही पता आपके बारे,


यही तो फ़र्क है सन्नी तुम मे और मेरे मे,,मैं तुम्हारे बारे मे सब जानती हूँ लेकिन तुम सब जान कर
भी अंजान हो,,,,,मैं भाभी की बात नही समझा लेकिन जिस अंदाज़ से रितिका भाभी मुझे देख रही थी उस से
मैं थोड़ा परेशान हो गया,,,,,

तभी मैने बात को पलटने के लिए बोला,,,,,लाओ भाभी मैं भी कुछ हेल्प कर देता हूँ आपकी,,,,,

अच्छा क्या हेल्प करोगे,,भाभी ने फिर अजीब तरीके से बात की,,,

कुछ कह नही भाभी लेकिन सब्जी अच्छी तरह से काट लेता हूँ मैं,,,मैने इतना बोला और एक तरफ पड़ा हुआ
नाइफ उठा लिया और पास मे पड़ी हुई भिंडी भी उठा ली और भिंडी को काटने लगा,,,

तभी करण का फोन बजने लगा और वो फोन के लिए अपने रूम मे चला गया,,,,,

मैं शेल्व पर चॉपिंग बोर्ड रखके उसके उपर भिंडी काटने लगा जबकि रितिका मेरे से दूर खड़ी होके
आटा गूँथ रही थी,,,,मेरी पीठ थी उसकी तरफ और मैं पूरा ध्यान सब्जी काटने पर दे रहा था,,लेकिन मेरे
कानों मे आटा गूँथति हुई रितिका की चूड़ियों की आवाज़ हल्का मीठा शौर मचाने लगी थी जिस से मैं नज़रे
बचा कर रितिका की तरफ देख लेता था,,,एक बार मैं रितिका की तरफ देख रहा था तो उसने अपने हाथों से
अपने बालों की एक लट को जो उसके चेहरे पर आके उसको परेशान कर रही थी उस लट को अपने हाथ से एक साइड
करने की कोशिश की,,,,बालों की लट तो साइड हो गई थी लेकिन उसके हाथ आटे वाले थे जिस से थोड़ा गुन्था हुआ
आटा उसके फोरफेड पर लग गया था,,,,


तभी मैं उसको देखकर हँसने लगा,,,उसने मुझे उसकी तरफ देखकर हंसते हुए पकड़ लिया और इशारे मे
पूछने लगी,,क्या हुआ सन्नी हंस क्यूँ रहे हो,,

तभी मैने उसको इशारा किया कि उसके फोरहेड पर आटा लगा हुआ है,,,,

वो भी हँसने लगी और हंसते हुए मेरे करीब आ गई,,,,,,,,मुझे देख कर तुझे हँसी आती है ना सन्नी और तुझे
हंसते देखकर मुझे खुशी होती है,,वैसे भी तू शुरू से मुझपे हंसता ही आया है,,जाने अंजाने ही सही हर
बार मेरा मज़ाक ही बनाया है तूने और मैं पगली तेरी खुशी को देखकर खुश हो जाती हूँ,,,

भाभी मैं तो वो मैं ,,,,मुझसे कुछ नही बोला जा रहा था,,हिम्मत ही नही हो रही थी,,,,,रितिका भाभी
मैं तो इसलिए हंस रहा था क्यूकी आपके फोरहेड पर आटा लगा हुआ था,,,

जानती हूँ सन्नी और ये मैने जनभूज कर लगाया है ताकि तेरा ध्यान मेरी तरफ आए और तू खुश हो जाए,,,
मैं तो हमेशा तुझे खुश करना चाहती हूँ खुश देखना चाहती हूँ,,और तू है कि मुझे देखकर
ही खुश होता रहता है,,,,मेरा मज़ाक बना कर खुश होता है,,,

तुम क्या बोल रही हो मुझे कुछ समझ नही आ रहा,,,

मुझे और मेरी किसी बात को तूने आज तक कभी समझा भी नही है सन्नी,,,,तू समझ जाता तो ये सब नही होता
ये बात भाभी ने थोड़ी उदास होके बोली थी,,,
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12-21-2018, 02:38 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
क्या नही होता,,,,क्या तुम करण से शादी करके खुश नही हो,,,,क्या ये सब ग़लत हुआ है,,,,

नही सन्नी करण से शादी करवा कर तूने मुझे मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा तोहफा दिया है और तेरी बात मानके
मैने करण से पहला सेक्स करके उसको शादी का सबसे अच्छा तोहफा भी दे दिया है लेकिन जिस चीज़ पर किसी और का हक़ था वो किसी और को मिल गई,,,ये बात खुशी की नही है मेरे लिए,,,,मैने सपना देखा था करण से शादी का जो
तूने पूरा कर दिया हक़ीक़त मे बदल दिया लेकिन साथ ही एक और सपना देखा था मैने जिसको तूने तोड़ दिया

तुम अब ये सब शुरू मत करो प्ल्ज़्ज़ रितिका,,,,,तुम जानती हो जो नही हो सकता कभी नही हो सकता,,,,तुम अब
शादी शुदा हो करण की वाइफ हो,,अब तुमपे करण का हक़ बनता है,,,,,


हक़ तो तुम्हारा भी बनता था ,,और अब भी बनता है,,,,लेकिन तूने मुझे पहले भी ठुकराया और शायद अब भी
ठुकरा रहे हो क्यूकी तुझे शायद मैं खूबसूरत नही लगती ,,अच्छी नही लगती,,,,

ऐसी बात नही है रितिका तुम बहुत खूबसूरत हो लेकिन इस खूबसूरती की वजह से मैं अपने दोस्त को उसकी दोस्ती को
या उसके यकीन को धोखा नही दे सकता,,,

तुम बहुत तेज हो सन्नी,,,,बातें भी खूब बना लेते हो,,,,दोस्ती और यकीन की बात करके तुम मेरे से बचना
चाहते हो,,,,एक औरत की नज़र से तुमको देखु तो तुम पर गुस्सा आता है क्यूकी तुम उसके खूबसूरत जिस्म को
ठुकरा कर बेहूदा दोस्ती की बातें करते हो ,,लेकिन अगर एक दोस्त की नज़र से देखु तो तुम बहुत अच्छा कर रहे
हो जो दोस्ती की वजह से एक कमसिन खूबसूरत और जवान लड़की को ठुकरा रहे हो,,,तुम्हारी यही बात तो अच्छी
लगती है मुझे,,,,,कि तुम यकीन नही तोड़ते किसी का,,,,,यही वजह है कि मैं तुमको लाइक करती हूँ ,इतना
लाइक करती हूँ कि बता नही सकती,,,,

सही कहा ,,मैं करण का यकीन नही तोड़ सकता,,,,वो मेरा दोस्त है,,,,,


जानती हूँ,,लेकिन औरत होने के नाते मुझे तेरे पर गुस्सा आता है,,,,दिल करता है ये नाइफ लेके तेरा खून
कर दूं मैं,,उसने इतना बोला और एक नाइफ उठाकर मेरे गले से लगा दिया,,,बोलो क्या बोलते हो,,क़तल कर दूं
क्या मैं तुम्हारा,,फिर शायद मुझे भी चैन मिले क्यूकी तुमने बार बार मुझे ठुकराया है और हर बार
मेरी बेज़्ज़ती की है,,,,

तुम जो चाहो कर सकती हो रितिका भाभी,,तुम्हारा हक़ बनता है,,,,

उसने नाइफ को मेरे गले पर रखा और खुद आगे की तरफ बढ़ कर मेरे फेस के करीब अपना फेस कर लिया और
अपनी होठों को थोड़ा सा खोलकर मेरे फेस पर हल्की हवा मारने लगी अपने मुँह से ,,उसकी साँसों की गरम
और मदहोश करने वाली खुश्बू से मैं थोड़ा हिल सा गया था,लेकिन फिर भी ना जाने कैसे मैने खुद को
क़ाबू मे किया हुआ था,,और खुद पर क़ाबू करते हुए मैं उस से थोड़ा दूर हट गया,,,

उसने मेरी इस हरकत से मुझे हंस कर बड़े प्यार से देखा,,,,फिर चलके मेरे करीब हो गई,,,मैं अभी उस से
दूर हुआ था कि वो वापिस मेरे पास आ गई थी,,,,,


हक़ तो तुम्हारा भी बनता है सन्नी,,,,मेरी जान लेने का,,,,मैं तो तुम्हारी जान नही ले सकती लेकिन अगर तुम
चाहो तो मेरी जान ले भी सकते हो,,,,उसने मेरा हाथ पकड़ा जिसमे नाइफ पकड़ा हुआ था और उस हाथ को अपने
हाथ मे पकड़ कर अपनी गर्दन पर लगा दिया,,,,बोलो क्या मेरा क़तल कर सकते हो तुम,,तुम्हारे लिए तो ये
आसान काम है,,,,

ये क्या बेहूदा मज़ाक है ,,,,,मैने इतना बोला और अपने हाथ को रितिका के हाथ से छुड़वा लिया और दूर हट गया
तभी करण एक दम से अंदर आ गया,,,,,

ओह्ह माइ गॉड,,,,,सही टाइम पर दूर हो गया रितिका भाभी से वर्ना करण पता नही क्या सोचता,,,मुझे लगा
करण ने कुछ नही देखा लेकिन मैं ग़लत था,,,,,,

उसने किचन मे आते ही बोला,,,,,अरे क्या हो गया भाभी और देवेर मुझे देखकर चुप क्यूँ हो गये,,,

रितिका एक दम से बोल पड़ी,,,,,कुछ नही करण इसको सब्जी काटने मे प्रोबलम हो रही थी मैने बोला मैं सिखा '
देती हूँ तो बोलने लगा रहने दो मैं खुद कर लूँगा,,,,तो मैने भी ज़ोर ज़बरदस्ती नही की,,,,खुद ही काटने
दो पता चल जाएगा,,,,,

तभी करण मेरे पास आ गया और बोला,,,,,अरे तू भी किस काम मे पड़ गया है सन्नी भाई,,रहने दे ये औरत
लोगो का काम है रितिका खुद कर लेगी हम लोग बाहर चलते है,,,,

मुझे भी लगा बाहर जाना ही सही है लेकिन तभी रितिका बोल पड़ी,,,,मैं अकेली कैसे करूँगी इतना काम सन्नी
को रहने दो ना यहाँ,,,मेरी हेल्प के लिए ,,,,तुमको बाहर जाना है तो जाओ करण,,,,

नही करण भाई तुम भी बाहर मत जाओ,,,यही रूको,,,हम लोग यहीं बातें कर लेते है साथ साथ मैं भाभी
की हेल्प भी कर दूँगा,,,,,मैं नही चाहता था कि करण मुझे अकेले को भाभी के साथ छोड़कर बाहर जाए

ठीक है भाई मैं यही रुकता हूँ लेकिन मुझसे कोई काम नही होगा,,मैं बस बातें करके टाइम पास कर
सकता हूँ तुम लोगो का,,

हां हां ठीक है करण भाई ,,,,तू यहीं रह बस ,,कुछ मत कर बातें ही करता रह ,,,बस बाहर नही जाना,

मैने इतना बोला तो रितिका ने मेरी तरफ हंस कर देखा,,,उसको लगा कि मैं उस से डर गया हूँ और शायद मैं
डर भी गया था,,,,बात ये नही कि मैं रितिका से डरता था मैं तो करण के यकीन टूट जाने से डरता था,,
उसके बाद जब तक सब्जी नही कट गई मैं बाहर नही गया और जब हम लोगो का काम ख़तम हो गया तो मैं
करण के साथ बाहर चला गया,,,और फिर हम लोग बाहर बैठकर बातें करने लगे,,,,


मैं और करण बाहर निकलकर सोफे पर बैठने लगे लेकिन तभी करण ने मुझे इशारा किया कि अंदर रूम मे
चलते है,,,मैं उसके साथ उसके रूम मे चला गया,,,

अबे रूम मे क्यूँ लेके आया,,बाहर ही बैठ जाते और बात कर लेते,,बाहर डरता था क्या बात करने से ,,या बोलू
कि रितिका से डरते हो,,मैने हंसते हुए मज़ाक मे ये बात बोली थी

हां भाई रितिका से डरता हूँ ,,तभी तो 2 दिन से ना मोम के पास गया हूँ ना शिखा के पास,,दोनो कुछ
उदास लग रही थी आज भी,,,

अबे तेरे पास इतनी खूबसूरत बीवी आ गई है फिर भी तुझे शिखा और अलका आंटी की पड़ी है,,,अभी तो कुछ दिन
मस्ती कर रितिका के साथ ,,वैसे भी माँ और तेरी बेहन ने कहाँ जाना है,,,अभी नया फूल खिला है बाग मे
पहले उसकी खुश्बू लेले फिर वापिस चला जाना माँ और शिखा के पास,,,


भाई नये फूल की खुुशबू ले चुका हूँ,,बोलू तो सील खोल चुका हूँ रितिका की ,,,2 रातों मे खूब
चुदाई करली है उसकी ,,,,अब उसको भी दर्द होने लगा है आज ही बोल रही थी कुछ दिन दूर रहने को ,,,बोली
पेन हो रहा है 2-3 आराम करने दो,,,और वैसे भी मेरा दिल माँ और शिखा के साथ मस्ती को भी कर रहा है,


अरे वाह क्या बात है,,सील खोल दी तूने भाभी की,,,ये तो अच्छी बात है,,,,जंग जीत गया तू सील खोलकर,,और
दर्द भी दिया ,,,वाह भाई वाह,,,चल कोई ना अब 2 दिन दूर ही रहना ,,सील खुलने के बाद जब नयी नयी चुदाई
होती है तो सूजन आ जाती है इसलिए दर्द होता होगा भाभी को,,,तू कुछ दिन दूर ही रहना उन से और माँ के
साथ मस्ती कर लेना,,और हां शिखा के साथ भी,,

लेकिन कैसे भाई ,,,रितिका घर पे होती है,,दिल तो करता है उसको सब कुछ बता दूं लेकिन डर भी लगता है,,

आबे पागल हो गया है क्या,,,,अभी नयी नयी शादी हुई है अभी से कुछ मत बताना और जब टाइम आएगा तो अपनेआप
पता चल जाएगा उसको,,,वैसे तू कोई जल्दबाज़ी मत करना,,,और रही बात माँ और शिखा के साथ मस्ती करने की
तो वो तू अब भी कर सकता है बुटीक पर जाके,,,

बुटीक पर,,,किसके बुटीक पर भाई,,,,करण हैरान होके बोला,,,

अरे भुआ के बुटीक पर,,,माँ अलका आंटी और शिखा को लेके वहीं गई है मस्ती करने के लिए,,,बोल रही थी
शिखा और अलका आंटी बहुत तरस रही है मस्ती के लिए,,,अब अगर तुझे भी जाना है तो जा उनके पास

करण खुश हो गया,,,,लेकिन भाई रितिका से क्या बोलूँगा,,,,

इसमे क्या प्रोबलम है,,,,उसको बोल देना तू मेरा साथ किसी ज़रूरी काम से जा रहा है ,,,,

ठीक है भाई,,,,चल तू भी साथ चलना मेरे मस्ती करेंगे सब लोग मिलकर वैसे भी काफ़ी दिन हो गये है
साथ मिलकर मस्ती नही की हम लोगो ने ,,


ठीक है,,,लंच करते है फिर चलते है,,,,

फिर हम लोग इधर उधर की बातें करने लगे,,,कुछ देर बाद रितिका भाभी ने आवाज़ लगाई कि लंच तैयार
हो गया है,,,मैं और करण बाहर चले गये उसके रूम से लंच करने के लिए,,,
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12-21-2018, 02:38 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
लंच करते टाइम भी मैं रितिका भाभी की तरफ ज़्यादा ध्यान नही दे रहा था बस खाने पर ध्यान दे रहा
था,,,,लंच करके मैं वहाँ से निकल पड़ा और करण भी मेरे साथ चल पड़ा,,,उसने भाभी को बोला था कि
वो मेरे साथ किसी ज़रूरी काम से जा रहा है,,,फिर मैं और करण पहुँचे बुटीक पर और वहाँ पहुँच
कर हम लोगो ने शिखा ,,अलका आंटी और मेरी माँ के साथ मिलकर खूब मस्ती की,,फिर रात होने से पहले हम
लोग चल पड़े अपने अपने घर की तरफ,,,,,,

बुटीक से मस्ती करके करण गया अपने घर अपनी माँ और बेहन के साथ जबकि मैं माँ को लेके अपने घर
आ गया,,,,

घर पहुँचा तो सीधा उपर अपने रूम मे चला गया,,,डॅड घर आ चुके थे और नीचे बैठकर टीवी देख
रहे थे,,जबकि सोनिया उपर रूम मे ही बैठकर स्टडी कर रही थी,,,जब मैं रूम मे घुसा तो वो बेड
पर बैठी हुई थी,,,,

कहाँ था तू,,,स्टडी नही करनी थी क्या,,तेरे को तो कोई टेन्षन ही नही है सन्नी ,,याद रख अगर तेरी वजह से
मुझे मेरी अक्तिवा नही मिली तो बहुत बुरा होगा तेरे साथ,,,सोनिया हल्के गुस्से और नखरे का साथ बोली,,

सौरी सोनिया,,मुझे थोड़ा काम था करण के साथ इसलिए लेट हो गया ,,,बस नहा धो कर फ्रेश हो जाउ फिर
करता हूँ स्टडी,,,

हां हां करले बहाने जितने करने है,,,,एक तू है बहानेबाज और एक कविता है,,मेडम की तबीयत ठीक नही
है,,,बोलने लगी भाई के साथ घूम कर आई हूँ तबीयत बिगड़ गई है,,,,झूठी बहानेबाज कहीं की,,,

अरे ऐसे क्यूँ बोल रही हो उसको,,,हो सकता है उसकी तबीयत सच मे खराब हो सकती है,,,,,
वैसे मुझे तो पता ही था कि उसकी तबीयत सच मे खराब है,,,क्यूकी उसकी तबीयत मेरी वजह से ही तो खराब
हुई थी,,,


तो क्यूँ गई अपने भाई के साथ घूमने ,,मैने मना भी किया था मत जाओ ,,,एग्ज़ॅम के दिन चल रहे है,सोनिया
हल्के गुस्से से बोली

वो एग्ज़ॅम से बोर हो गई होगी मन बहलाने के लिए चली गई होगी अपने भाई के साथ,,इसमे क्या बड़ी बात है,,
वैसे तुझे शरम आनी चाहिए ,,जब तू बीमार थी तो वो तेरी इतनी केर करती थी और अब वो बीमार हुई है तो
उसकी खबर लेने की जगह तू उसको बहानेबाज बोल रही है,,क्या यही दोस्ती है तेरी,,,

बस बस तू चुप कर,,तुझे मेरे और कविता के बीच मे बोलने की ज़रूरत नही,,,,जाके जल्दी फ्रेश होज़ा और स्टडी
कर चुप-चाप बैठकर,,,,उसने ये बात ऐसे बोली जैसे ओरडर दे रही हो,,,,वैसे भी इसके सामने बोलना मेरे
बस की बात नही इलसीए मैं चुप करके बाथरूम मे घुस गया,,,

साला एक तो बाथरूम की टॅब ठीक से काम नही कर रही थी,,,,ये तो शूकर है मुँह-हाथ धोना था तो थोड़े
पानी से काम चल गया ,,अगर नहाना होता तो मैं शोभा के रूम मे ही जाता ,,,,,खैर मैं मुँह-हाथ धोके
बाहर आ गया और अपने बेड पर बैठकर स्टडी करने लगा,,,


सोनिया ने डिन्नर करने भी नीचे नही जाने दिया ,,,खाना प्लेट मे लेके उपर ही आ गई ,और डिन्नर करके हम
लोग फिर स्टडी करने लगे,,,पहले तो मैं अपने बेड पर बैठा रहा फिर डिन्नर के बाद मैने दरवाजे को
अंदर से बंद किया और मॅट्रेस को नीचे ज़मीन पर लगा कर सोनिया के बेड से दूर बैठ गया,,,सोनिया मेरी
इस हरकत से मुझे खुश होके देखने लगी थी,,,मैने भी हंस कर उसकी तरफ देखा और फिर ध्यान अपनी बुक
की तरफ कर लिया,,,,



सुबह भी सोनिया ने मुझे उठा दिया था क्यूकी मैं मॅट्रेस को दरवाजे के पास लगा कर लेटा हुआ था,उसने
मुझे उठाया तो मैने मॅट्रेस को बेड पर रखा और वो बाहर चली गई,,,,,उसके जाने के बाद मैं भी फ्रेश
होके नीचे चला गया,,,,,,

नीचे जाके देखा तो मोम और डॅड समान पॅक कर रहे थे,,सोनिया भी मोम की हेल्प करने लगी थी,,,,

अरे मोम ये समान क्यू पॅक कर रही हो,,,मैने मोम के रूम मे जाते ही पूछा,,,,

मुझे पता था तू भूल जाएगा सन्नी,,,,,माँ ने हंसते हुए बोला,,,,रेखा की शादी है ना हम लोगो को गाँव
जाना है,,,,

ओह्ह शिट मैं तो सच मे भूल गया था मोम,,,

तभी सोनिया मज़ाक मे बोल पड़ी,,,,,,हां मोम अक्सर इंटेलिजेंट लोग छोटी छोटी बातें भूल ही जाते है,,,

उसने इतना बोला तो मोम और डॅड हँसने लगे,,,,

माँ मेरा भी बहुत दिल करता है शादी मे जाने का,,,गाँव जाके घूमने का,,,मैने मायूस मुँह बनाते हुए
बोला,,,,

चल चुप कर,,,एग्ज़ॅम से डरने वाले नालयक लड़के,,,,,मुझे पता है तू बहाना बना रहा है गाँव जाने का
सोनिया ने इतनी बात बोली तो सब लोग फिर से हँसने लगे,,,


क्यू तेरा दिल नही करता क्या गाँव जाने का,,मैने चिढ़ते हुए सोनिया की बात का जवाब दिया,,

दिल तो करता है मेरा पर मुझे एग्ज़ॅम की ज़्यादा टेन्षन है,,,एग्ज़ॅम नही होते तो मैं चली जाती,,,

एग्ज़ॅम कब ख़तम हो रहे है तुम लोगो के बेटी,,,,ये बात डॅड ने पूछी,,,,

डॅड एक एग्ज़ॅम कल है और एक एग्ज़ॅम उसके 1 दिन बाद,,,,


ओह नो बेटा,,,,, परसो रात को तो रेखा की शादी है ,,मतलब रात को रेखा की शादी है और अगले दिन सुबह
तुम लोगो का एग्ज़ॅम है,,,,,,अगर तुम लोग शादी पर गये तो रात की शादी अटेंड करके सुबह एग्ज़ॅम टाइम तक
वापिस आना मुश्किल होगा,,,

इट्स ओके डॅड ,,हम शादी के बाद मिल लेंगे रेखा को गाँव जाके,,,वैसे भी शादी से ज़्यादा ज़रूरी है मेरे
एग्ज़ॅम ,,,सोनिया ने इतनी बात मेरी तरफ देखते हुए बोली,,,मैं समझ गया वो मुझे चिड़ा रही है,,,

ये हुई ना बात बेटी,,,अच्छा तो अब हम लोग चलते है,,,


डॅड आप वापिस कब तक आओगे,,,,मैने डॅड का बॅग पकड़ा और बाहर जाते हुए ये बात डॅड से पूछी,,,

बेटा हम लोग शादी के 2 दिन बाद ही वापिस आयंगे,,क्यूकी गाँव मे शादी के बाद भी बहुत रस्मे होती है
पूरी करने वाली,,,हम लोगो को कम से कम 6-7 दिन तो लग ही जाने है,,,,तब तक तुम लोग झगड़ा बिल्कुल मत
करना ,,,अच्छे भाई बेहन की तरह मिलकर रहना,,,,

माँ हम लोगो अब कब लड़ते है,,,अब तो हम दोनो की फाइट कबकि ख़तम हो गई है,,,अब आप बेफ़िक्र होके
जाओ,.,,

मैने मन ही मन सोचा कि मोम डॅड तो चले जाएँगे बेफ़िक्र होके लेकिन अब मुझे थोड़ी फ़िक्र होने लगी थी
क्यूकी 7 दिन मुझे और सोनिया को अकेले रहना था ,,,,अगर कुछ ग़लत हो गया तो ,,और अगर कुछ नही हुआ तो,,,

मोम डॅड चले गये ,,,,मैं और सोनिया गेट बंद करके वापिस अंदर आ गये,,,सोनिया ने नाश्ता लगा दिया टेबल पर
जो मोम बना कर गई थी,,,,उसने प्लेट मे नाश्ता रखा और कॉफी कप मे डालके मेरी तरफ कर दी,,,मैने अपनी
प्लेट और कॉफी कप लिया और उपर चला गया और उपर जाके भुआ की किचन के बाहर लगे डाइनिंग टेबल पर बैठ
कर नाश्ता करने लगा,,,,
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12-21-2018, 02:38 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
मैं सोनिया के पास नही रहना चाहता था जितना हो सके उस से दूर रहना चाहता था,,,ये बात नही कि मैं
उसके साथ सेक्स नही करना चाहता था लेकिन मैं डरता था,,बस उसको हर्ट नही करना चाहता था,,,,,अब घर
मे कोई नही था और ऐसे मोके पर सोनिया के पास होने से मेरे अंदर का जानवर कभी भी उसको हर्ट कर सकता
था लेकिन मैं हर्ट करके नही प्यार से सब कुछ करना चाहता था,,,लेकिन वो मान नही रही थी,,,,और अब मैं
शायद उसको मनाना भी नही चाहता था,,,,मैं यही सब सोचता हुआ नाश्ता कर रहा था,,तभी सोनिया उपर
आ गई,,,

तू यहाँ क्यूँ आ गया भाई,,नीचे बैठकर नाश्ता नही कर सकता था क्या,,,

मेरी मर्ज़ी,,मुझे यहाँ बैठना था,,तुझे कोई प्रोबलम है क्या मेरे यहाँ बैठकर नाश्ता करने से,,मैने
थोड़ा गुस्से मे बोला तो सोनिया थोड़ी मायूस हो गई,,,

फिर उसने मायूसी भरे चेहरा पर नकली मुस्कान लिए मेरे से बोला,,,,कोई नही भाई तू जहाँ मर्ज़ी बैठ
मुझे क्या,,,मैं तो ऐसे ही पूछ रही थी,,,,

वो ये सब मुस्कुरा कर बोल रही थी लेकिन मैं जानता था वो मायूस है और ये हँसी नकली है जिस से वो मुझे
पागल बनाने की कोशिश कर रही है ,,,लेकिन मैं पागल बनने वाला नही,,उसको बचपन से जानता हूँ
मैं,,

वो अपने रूम मे चली गई और मैं नाश्ता करने लगा,,,लेकिन मुझे नाश्ता निगलने मे थोड़ी मुश्किल हो रही
थी क्यूकी मैने सोनिया को थोड़ा हर्ट कर दिया था जो मुझे अच्छा नही लग रहा था,,

वो रूम मे गई और अपनी बुक्स लेके बाहर आ गई फिर मेरे पास आके फेस पर वहीं नकली मुस्कान लेके मेरे
से बोली,,,,,,,जब नाश्ता ख़तम हो जाए भाई तो डाइनिंग रूम मे आ जाना मिलकर स्टडी करते है,,,कविता का तो
पता नही आएगी या नही

मुझे थोड़ी टेन्षन थी सोनिया के साथ अकेले घर मे रहने पर,,,इसलिए मैने उसको कविता को फोन करने को
बोला,,,

तू कविता को फोन करके बुला ले ना,,सब मिलकर स्टडी कर लेंगे,,,

भाई मैने फोन किया था लेकिन उसने बोला वो नही आएगी,,,शायद अभी भी तबीयत ठीक नही है उसकी,,

तूने उसकी तबीयत के बारे मे पूछा नही क्या उस से,,,,


पूछा था भाई लेकिन वो बोली कि अब वो ठीक है बस ऐसे ही आराम कर रही है,,,,उसका दिल नही था आने को
इसलिए मैने भी ज़्यादा फोर्स नही किया,,,और वैसे भी उसका भाई कहीं गया हुआ है आउट ऑफ टाउन इसलिए भी वो
नही आ रही,,,

उसकी बात से मैं सोच मे पड़ गया,,क्या मैने इतना ज़्यादा ज़ोर लगा दिया था उसकी चुदाई मे कि उसकी तबीयत
इतनी ज़्यादा बिगड़ गई थी,,


मैं अपनी ही सोच मे बैठा हुआ था तभी सोनिया बोली,,,,अब तूने स्टडी करने आना है मेरे साथ या यहीं
बैठकर कविता का इंतजार करना है,,,,

नही तुम जाओ और स्टडी करो,,,मैं नीचे बैठकर खुद स्टडी कर लूँगा,,,,इतना बोलकर मैं बाकी का बचा हुआ
नाश्ता करने लगा,,

वो मेरी बात से थोड़ी उदास हो गई ,,,,ओके भाई ,,इतना बोलकर वो भुआ के ड्रॉयिंगरूम मे चली गई और उसके
जाने के बाद मैं नाश्ता ख़तम करके नीचे चला गया और सोफे पर बैठकर टीवी देखने लगा,,,


मैं टीवी देखते हुए सोच रहा था कि अब कैसे भी करके मोम डॅड के आने तक सोनिया से दूर रहना होगा,,वैसे
तो मैं ऐसा मोका तलाश कर रहा था ऐसे मोके की वेट मे था कि कब मुझे और सोनिया को अकेले रहने का मोका
मिलेगा लेकिन अब जब मुझे मोका मिला था तो मुझे डर लगने लगा था और मैं उस से दूर भागने लगा था

मुझे अभी टीवी देखते हुए कुछ ही टाइम हुआ था कि सोनिया नीचे आ गई,,,,

आइ न्यू इट सन्नी,,,,उसने थोड़ा तेज आवाज़ मे बोला,,,,,मुझे पता था तू स्टडी नही कर रहा होगा टीवी देख रहा
होगा मज़े से,,,,,

उसकी बात सुनके मैं एक दम से पीछे मुड़ा तो वो सीडियों के पास से सोफे की तरफ आते हुए मुझे गुस्से से
देख रही थी,,,

मैना कहा था मेरे साथ बैठकर स्टडी करले लेकिन नही तुझे तो अकेले बैठकर स्टडी करनी है,,,और यहाँ
स्टडी करने की जगह तू आराम से लेट कर टीवी देख रहा है,,,,,सोच ले सन्नी अगर तेरी वजह से मुझे मेरी
अक्तिवा नही मिली तो मेरे से बुरा कोई नही होगा,,,,


तेरे से बुरा वैसे भी कोई नही है,,,,मैने ये बात धीरे और मज़ाक मे बोली ,,,,,

क्या बोला तू फिर से बोलना ज़रा,,,,उसने मेरे पास आके मेरे हाथ से टीवी का रिमोट छीनते हुए गुस्से से बोला,,
छोड़ ये रिमोट और टीवी बंद करके स्टडी कर मेरे साथ उपर चलके,,,,

मेरे हाथ मे रिमोट था और वो मेरे से रिमोट पकड़ने की कोशिश कर रही थी ,,,उसने अपना पूरा ज़ोर लगा दिया
तो मुझे लगा कि रिमोट मेरे हाथ से निकल जाएगा इसलिए मैने अपने दूसरे हाथ से भी रिमोट पकड़ने की
कोशिश की जिसस वजह से मेरे हाथ उसके हाथ के उपर आ गया और मैने रिमोट पकड़ते हुए उसका हाथ ही पकड़
लिया और ऐसा करते ही मुझे अजीब बेचैनी होने लगी,,,,मेरे अंदर तूफान सा उठने लगा,,लेकिन मैने खुद पर
क़ाबू किया और रिमोट को छोड़ दिया,,,,और उठकर खड़ा हो गया,,,

मुझे नही करनी स्टडी तेरे साथ बैठकर,,,मुझे अकेले रहना है,,,,मैने ये बात गुस्से मे बोली तो शायद वो
समझ गई थी कि मैं उस से दूर रहने की बात क्यूँ कर रहा हूँ,,,

अकेले रहना है तो अकेले रह मुझे क्या,,,,लेकिन मेरे सामने रह तू बस ताकि मुझे पता चलता रहे कि तू
स्टडी कर रहा है,,,,

इतना बोलकर वो उपर चली गई और कुछ देर बाद हाथ मे कुछ बुक्स लेके वापिस नीचे आ गई और आते ही मेरा
हाथ पकड़ कर घर से बाहर सामने वाले गार्डन मे ले गई,,,,

चल बैठ जा यहाँ और स्टडी कर ,,मैं उसकी बात मान कर बैठ गया उसने मुझे बुक दी और अपनी बुक लेके
मेरे से दूर जाके बैठ गई ,,,,


सर्दी की धूप थी इसलिए हम लोग गार्डन मे बैठ गये,,,सोनिया मेरे से करीब 12-15 कदम की दूरी पर जाके
बैठ गई थी,,उसने टाँगों को घास पर फैला दिया और बुक को अपने घुटनो पर रखके स्टडी करने लगी
थी,,,,

उसने अभी ब्लू जीन और साथ मे पिंक टॉप पहना हुआ था,,,उसके हाथ मे एक पेन था जिसको वो बार बार अपने
मुँह से पकड़ रही थी कभी उस पेन से बुक पर कुछ लिखने लगती फिर पेन को वापिस मुँह मे पकड़ लेती ,मैं
अपनी बुक पर ध्यान कम दे रहा था और उसकी तरफ ज़्यादा देख रहा था ,,वैसे मैं उसको इग्नोर करने की
कोशिश तो कर रहा था लेकिन इस टाइम उसका गोरा रंग जो सर्दी की तीखी धूप मे और भी ज्यागा गोरा लगने लगा
था उसका पूरा रूप निखर कर बाहर आने लगा था ,,उसका मासूम चेहरा और चेहरा पर उड़ती झुलफे और मुँह
पे पकड़ा हुआ पेन ,,,मेरी तो हालत खराब होने लगी थी इतनी मासूमियत से मेरे सामने बैठकर पढ़ती सोनिया
को देखकर,,वो भी बीच बीच मे बुक से ध्यान हटा कर मेरी तरफ देख रही थी लेकिन जब भी वो मुझे
देखती मैं नज़रे झुका लेता और ध्यान बुक की तरफ कर लेता,,वो मेरी इस हरकत से हँसने लगती उसको लगता मैं
उस से डर गया हूँ लेकिन उसको क्या पता था कि मैं उस से कम और खुद से ज़्यादा डर रहा हूँ क्यूकी कैसे
इस टाइम मैं खुद पर क़ाबू करके बैठा हुआ था ये बस मैं ही जानता था,,,

कुछ टाइम बाद वो घास पर लेट गई ,,,उसने अपने पेट को नीचे घास की तरफ किया और लेट गई फिर उसने बुक
को अपने सर के सामने रख लिया,,,,उसने अपने एक हाथ को पानी एल्बो से बंद किया और एल्बो को ज़मीन पर
टिका लिया और उसी हाथ की हथेली पर अपनी चिन को रखते हुए अपने सर को हाथ की हथेली पर टिका कर सामने
पड़ी बुक को रीड करने लगी,,,,उसका एक हाथ उसके सर के बोझ को झेल नही पा रहा था इसलिए उसने दूसरे हाथ
को भी एल्बो से बेंड किया और उसको भी ज़मीन पर टिका कर अपने दोनो हाथों पर अपनी चिन को रखा और
बुक रीड करने लगी,,,जब भी उसको पेज टर्न करके नेक्स्ट पेज पर जाना होता वो अपने एक हाथ को ज़मीन से
उठा लेती,,,मैने भी ऐसे ही किया और उसी हालत मे लेट कर बुक रीड करने लगा लेकिन मेरा ध्यान बुक पर
कम और सोनिया की तरफ ज़्यादा था,,,मैं उसके मासूम चेहरा को देख रहा था ,,उसकी पलके झुकी हुई थी और
उसका ध्यान बुक पर था लेकिन जल्दी ही उसका ध्यान मेरी तरफ आ गया और वो जल्दी से उठकर बैठ गई,,,लेकिन
मैं ऐसे ही लेटा रहा और उसकी तरफ देखता रहा,,,,,

तभी उसने अपने सर को हिलाया और एशारे से मेरे से पूछने लगी,,,,,क्या देख रहे हो सन्नी,,,,

मैं भी सर को ना मे हिला दिया और बता दिया कि मैं कुछ नही देख रहा,,,और मैने अपना ध्यान बुक
पर कर लिया,,,,

कुछ देर बाद मेरा ध्यान उसकी तरफ गया तो वो अपने हाथ से अपने चेहरे को हवा दे रही थी शायद उसको
गर्मी लगने लगी थी और लगती भी क्यू नही,,,अभी सर्दी शुरू हुई थी इसलिए ज़्यादा देर तक धूप मे बैठना
बहुत मुश्किल था ,,,मैं जहाँ बैठा हुआ था वहाँ पेड़ की कुछ छाया थी धूप कम थी इसलिए मुझे
कोई दिक्कत नही हो रही थी,,,उसने देखा कि मेरे पास ज़्यादा धूप नही है और वो जल्दी से उठकर मेरे पास
आके बैठ गई,,,,लेकिन ज़्यादा पास नही 5-6 कदम की दूरी पर,,,क्यूकी ज़्यादा पास आने की ग़लती वो नही करने वाली
थी,,,


कुछ देर वो बैठी रही और बाद मे फिर से लेट गई,,,,इस बार उसने पीठ को ज़मीन से लगा लिया था और बुक
को अपने पेट पर रखके स्टडी करने लगी थी,,,मैं भी लेटा हुआ था लेकिन जल्दी ही मैं उठके बैठ गया था,
क्यूकी मेरा धान उसके जिस्म पर चला गया था,,,उसका टॉप जो थोड़ा छोटा था और लेटने की वजह से उसकी कमर
थोड़ी सी नंगी हो गई थी,और मेरी नज़र उसकी नंगी और दूध जैसी गोरी कमर पर अटक गई थी,,मैं पता नही
कितने टाइम से उसकी कमर को देखता रहा तभी मैं एक दम से डर गया,,,


सोनिया गुस्से से बोली,,,,,,,,,,क्या कर रह हो सन्नी,,,,

उसकी बात से डर कर मैने नज़रे उसकी काम्र से हटा ली और उसके फेस की तरफ देखा,,तो उसकी आँखें गुस्से से लाल
हो गई थी,,,,

कुउछ न्ह्ही म्मैईन्न तो स्टडी कर रहा था,,,,मैने डरते हुए बोला था ,,,,

जानती हूँ क्या स्टडी कर रहे हो तुम,,,,इतना बोलकर वो उठी और अपना टॉप ठीक करते हुए वहाँ से अंदर की
तरफ चली गई,,,,,और जाते जाते मुझे गुस्से से बोल गई,,,,
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12-21-2018, 02:39 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
मैं अंदर जा रही हूँ तुम यहीं बैठकर स्टडी करो,,जब तक मैं लंच नही बना लेती तब तक अंदर नही
आना तुम,,,,इतना बोलके वो अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर लिया,,,,,उसके जाते ही मैं सर पकड़ कर घास
पर लेट गया,,,,

साला ये तो पंगा है,,,,दूर रहना मुश्किल है सोनिया से लेकिन पास जाना और भी ज़्यादा मुश्किल है,,,करूँ भी
तो क्या करूँ मैं,,,,कुछ समझ नही आ रहा था,,,लेकिन एक बात अच्छी हो गई थी,,मैं खुद उस से दूर
होने की या उसको दूर करने की कोशिश कर रहा था और अब वो खुद ही मेरे से दूर चली गई थी,,,,अब
लंच टाइम तक कोई टेन्षन नही थी,,,,क्यूकी तब तक मैं भी बाहर ही बैठने वाला था या बोलो तो सोने
वाला था,,,,मौसम बहुत अच्छा था मैने बुक साइड पर रखी और सोनिया के बारे मे सोचता हुआ ,,उसके मासूम
चेहरे के बारे मे सोचता हुआ नींद के आगोश मे चला गया,,,,,

नींद मे भी मैं सोनिया के सपने देख रहा था
लेकिन जल्दी ही मेरे सपने मे वो रात आ गई जब मैं कविता के साथ था नंगे जिस्म एक ही बेड पर ,,,

तभी कुछ देर बाद मुझे सोनिया की आवाज़ सुनाई दी,,,,

बस यही आता है तुम्हें या टीवी देखना या सोना,,,,और कुछ नही कर सकता तू,,,सोनिया घर के दरवाजे से बाहर
आते हुए गुस्से से मुझे बोल रही थी,,,,


मैं आँखें मल्ता हुआ उठा और बोला,,,,मैं सो नही रहा था बस बुक रीड करते करते आँखें दुखने लगी
थी इसलिए आँखों को आराम देने क लिए कुछ देर आँखें बंद करके लेट गया था,,,,,

हां हां बुक रीड करते ही तेरी आँखें थकती है,,,अभी तुझे तेरा लॅपटॉप लाके दे दूँ तो उसमे 24 अवर्स
बिना थके गेम खेलता रहेगा टाइम पास करता रहेगा ,कभी नही थकेगा तू और ना तेरी ये आँखें ,,


मैं उसकी बात का कोई जवाब नही दे पाया बस चुप चाप उठके खड़ा हो गया,,,

अब चुप क्यूँ है ,,,,कुछ बोलता क्यूँ नही,,,,वो गुस्से से फिर से बोली,,,,

बोला ना बाबा मैं सो नही रहा था बस थक गया था इसलिए लेट गया,,,,तू बिना वजह क्यूँ गुस्सा करती रहती है


मैं बिना वजह गुस्सा नही करती ,,,तू ही हर बार मुझे गुस्सा दिलवाता है,,,वो फिर से गुस्से से बोली

अब मैने क्या कर दिया,,,,थक गया था तो लेट गया था इसमे तुझे गुस्सा दिवाले वाली क्या बात थी,,,,

तू तो कुछ करता ही नही सन्नी,,,बस गेम खेलता है,,,सोता रहता है,,,टीवी देखता रहता है या अपनी बेहूदा
और घटिया हरकते करता रहता है,,,

मैं सोनिया की बात समझ गया उसका इशारा उस हरकत की तरफ था जब वो मेरे पास घास पर लेटी हुई थी और
उसका टॉप उसकी कमर से उपर उठा हुआ था और मैं उसकी नंगी कमर को देख रहा था,,,,

मुझे कोई बात नही सूझ रही थी इसलिए मैने उसको लंच के बारे मे पूछ लिया,,,,लंच बन गया क्या,,

हां बन गया तभी तुझे बुलाने आई थी,,,,चल आजा अंदर,,,,

मैने सोचा अच्छा हुआ लंच की बात करदी वर्ना पता नही क्या क्या सुनाती रहती ये हिट्लर मुझको,,,,

मैं जल्दी से उसके पास से गुजर कर घर के अंदर चला गया जबकि वो मुझे घुरती रही,,,,

अंदर जाके मैं सीधा माँ के रूम मे गया और मुँह हाथ धो कर बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया,,,तब
तक सोनिया ने खाना लगा दिया था,,,,मैने चुप चाप बैठकर खाना ख़तम किया ,,,मैने उसकी तरफ ध्यान
भी नही दिया क्यूकी मुझे पता था वो गुस्से मे है,,,अगर उसकी तरफ देख लेता तो खाना चबाना भी मुश्किल
होता और उसको गले से नीचे निगलना भी ,,,

खाना ख़तम करके मैं सोफे पर जाके लेट गया,,,,और टीवी देखने लगा,,,,

तू फिर से लेट गया,,,अभी सोके थका नही क्या तू सन्नी,,,सोनिया बर्तन किचन मे रखके मेरे पास आके बोली,

अरे मेरी माँ अभी तो लंच किया और अभी फिर से स्टडी शुरू कर दूं क्या,,,कुछ देर तो आराम से टीवी देखने
दो,,,मैने इतनी बात हाथ जोड़कर बोली थी सोनिया से,,,


सोनिया मेरी तरफ देखकर हँसने लगी,,,ठीक है ठीक है,,,,,कुछ देर आराम कर्लो और टीवी देख लो,,,बाद मे मैं
स्टडी करवाउंगी तुझे,,,,फिर कोई बहाना नही चलना तेरा,,,,कि मैं थक गया हूँ ,,आँखें दुखने लगी
है ,,,,

ओके अम्मा जी ,,,अब तो टीवी देखने दो बाद मे जितनी स्टडी करवानी होगी करवा लेना,,,बस कुछ देर आराम करने
दो,,,

ठीक है,,,इतना बोलकर हंसते हुए वो दूसरे सोफे पर जाके बैठ गई और जाते जाते मेरे हाथ से रिमोट छीन कर
ले गई,,,,और फिर अपनी पसंद का एक बोरिंग सा प्रोग्राम लगा लिया वही सास बहू वाला,,,,मैने सोचा कोई बात
नही इसको टीवी देखने दो और अपुन आराम करता है और वैसे भी ऐसा प्रोग्राम देखकर अक्सर नींद अच्छी आने लगती
है,,,,,,,,,,,,

वो बड़े ध्यान से टीवी देख रही थी जैसे टीवी मे खो ही गई थी,,,और मैं उसको देखने लगा था, जैसे वो टीवी मे खो गई थी मैं भी उस मे खो सा गया था,,,

तभी उसकी ज़ुल्फो की एक लट जो उसके चेहरे पर आ गई थी उसने अपनी ज़ुल्फो की उस लट को अपनी उंगली से अपने कान के पीछे करते हुए मेरी तरफ देख लिया और तभी मेरा ध्यान उसकी तरफ ही था,,,,

क्या देख रहे हो सन्नी,,,,उसकी आवाज़ से मैं एक दम चौंक गया,,,

कुछ नही,,मैं तो ये वो,,,ये बोरिंग शो देख रहा हूँ,,,मैने टीवी की तरफ इशारा करते हुए बोला

आए ब्लॅकी इसको बौरिंग मत बोल ये मेरा सबसे अच्छा शो है,,मुझे बहुत अच्छा लगता है ये शो

तुझे अच्छा लगता है तो क्या ये अच्छा हो जाएगा,,,मुझे तो बौरिंग लगता है ,,,इतना ज़्यादा बौरिंग कि मुझे तो
नींद भी आने लगी है ये शो देखकर,,,

वो थोड़ा चिडते हुए,,,बोला ना इसको बौरिंग मत बोल,,,ये मेरा सबसे पसंदीदा शो है,,,ये बात वो थोड़ी
इतराते हुए बोली,,,

हां हां जानता हूँ जैसी तू बौरिंग वैसे तेरे पसंदीदा शो भी बौरिंग,,,,और वैसा ही था तेरा खाना ,,,
इतना सड़ा हुआ खाना आज तक नही खाया मैने,,,


वो थोड़ा गुस्से से बोली,,,,चल चल चुप कर,,मैं तो बहुत अच्छा खाना बनाती हूँ,,,और आज भी इतना अच्छा बनाया
था कि पेट भरके खाया मैने,,,

अपने खाने की तारीफ तू खुद ही कर सकती है मैं नही,,,मैने तो इतना सड़ा हुआ,,इतना फीका खाना आज तक
नही खाया,,,ना मिर्च थी उसमे ना न्नमक था और ना ही कोई मसाला,,,,तेरी तरह बोरिंग है तेरे शो और तेरी
तरह फीका और बिना स्वाद का है तेरा खाना,,,,

ओई ब्लॅकी बोला ना मेरे शो को बौरिंग मत बोल और मेरा खाना तो बहुत अच्छा था ,,बिल्कुल मेरे जैसा
तीखा ,,,मैं भी तो तीखी मिर्च हूँ और मेरा खाना भी तीखा था एक दम स्पाइसी,,,

अच्छा तू तीखी मिर्च है क्या,,,सच मे,,,

हां हूँ,,तुझे कोई शक है,,,वो फिर से इतराते हुए बोली,,,

अच्छा अगर तू तीखी मिर्च है तो मुझे तीखा खाना बहुत पस्संद है,,,मैने इतना बोला और हँसने लगा,,,

लेकिन वो मेरी बात से शरमा भी गई,,फिर एक दम से बोली,,,,अपनी बकवास बंद करले वर्ना मारूँगी तुझे,,

तू मारेगी मुझे,,मैने हंसते हुए उसको चिड़ाते हुए बोला,,,,

हां मारूँगी,,,,और वो भी इस रिमोट से,,,,उसने रिमोट को हवा मे उठा लिया और मेरी तरफ करके मुझे
दिखाने लगी,,,,

चल चल साइड हो,,,बड़ी आई रिमोट मारने वाली,,,खाना तो ठीक से बनाया नही जाता और रिमोट से मारने चली
है मुझे,,,,मैं उसको जान बूझ कर तंग कर रहा था ताकि वो हर्ट हो जाए अपने खाने की बेज़्ज़ती सुनकर और
गुस्से मे वहाँ से चली जाए,,,

मैं उसको हर्ट करने की कोशिश मे था लेकिन गुस्से मे उसने कुछ ऐसा किया जिस से मैं हर्ट हो गया,,उसने
मज़ाक मज़ाक मे रिमोट को मेरी तरफ फेंका और रिमोट सीधा आके मेरी लेफ्ट आँख के बिल्कुल पास आके लगा,,,

उसने तो मज़ाक मज़ाक मे धीरे से मारा था लेकिन रिमोट की एक कॉर्नर काफ़ी ज़ोर से मेरी लेफ्ट आँख के पास
लगी और मुझे बहुत हर्ट हुआ,,,मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ और दर्द के मारे मेरे मुँह से अह्ह्ह्ह निकल गई और जल्दी
ही मेरा हाथ मेरी लेफ्ट आँख के उपर चला गया,,मैने हाथ से अपनी आँख को दबा लिया,,,,
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12-21-2018, 02:39 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
सोनिया जल्दी से अपने सोफे से उठकर मेरे पास आ गई,,,,ओह्ह शिट्ट ,एम्म्म सूउररयी सुन्नयी मैने जानभूज
कर नही मारा मैने तो मज़ाक मे हल्के से रिमोट को तेरी तरफ फेंका था,,,,आइ म सूउरयी सन्नी

मेरा एक हाथ मेरी आँख पर था और मेरी आँख बंद थी लेकिन मैं दूसरी आँख से सोनिया की तरफ देख रहा था
वो थोड़ा परेशान हो गई थी और डर भी गई थी मेरी चोट की वजह से,,,,,यही तो प्यार था हम भाई बेहन मे
की किसी का दर्द नही देख सकते थे हम दोनो,,,ना वो मुझे हर्ट करके खुश थी ना मैं उसको,,,लेकिन जाने
अंजाने जैसे मैं उसको हर्ट कर देता था वैसे आज उसने भी मुझे हर्ट कर दिया था,,,,वो बस सौरी सौरी बोलती
जा रही थी,,,,और मेरे पास आके सोफे पर थोड़ी सी जगह मे बैठ गई थी,,,

सन्नी ज़ोर से लगा क्या,,,दिखा ज़रा,,,,इतना बोलके उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरी आँख से मेरा हाथ हटा दिया
हाथ हट-ते ही उसने मेरी आँख को देखा,,,मेरी आँख के बिल्कुल पास आके लगा था रिमोट जिस से आँख पर हल्की
सूजन आ गई थी,,,,,ओह्ह मयी गॉड ये तो सूज गई है सन्नी,,,,उसकी आँखों मे आँसू आ गये मेरा दर्द
देखकर,,,,

आइम सौरी सन्नी मैने जान भूज कर नही मारा तेरी कसम सन्नी,,,,वो फिर से सौरी बोलती जा रही थी

अरे रो क्यूँ रही है पगली,,मैं जानता हूँ तूने जानभूज कर नही मारा क्यूकी मुझे पता है तू मुझे कभी
हर्ट नही कर सकती जैसे मैं नही कर सकता,,,,चल अब रोना बंद कर ,,,कुछ नही हुआ है मुझे,,,ठीक हूँ
मैं,,,इतना बोलकर मैने उसकी आँखों से निकलने वाले आँसू सॉफ किए अपने हाथ से और उसको चुप करवाने लगा

वो रोती जा रही थी और मैं एक हाथ से उसके आँसू पोंछ रहा था तभी उसने मेरा हाथ साइड कर दिया ,,आँख
खोल अपनी सन्नी दिखा ज़रा अंदर तो चोट नही लगी,,,वो रोती हुई बोल रही थी.,,

अरे कुछ नही हुआ बोला ना,,तू बिन-वजह परेशान हो रही है,,,,

फिर वो रोते हुए अपने ही अंदाज़ मे बोली,,,,बोला ना आँख खोल और दिखा मुझे,,,,

वो रोते हुए भी गुस्सा कर सकती थी यही तो खूबी थी उसकी जिस से मेरी फट-ती थी,,,उसके कहने पर मैने
आँख खोली तो वो ज़्यादा परेशान हो गई,,,

क्या हुआ तू इतनी परेशान क्यूँ हो गई,,,,


सन्नी वो तेरी आँख अंदर से लाल हो गई है,,,,लगता है बहुत ज़ोर से लगा तुझे,,,,दर्द हो रहा होगा ना,,,इतना
बोलकर वो फिर से रोने लगी,,,,

नही नही कुछ नही हुआ तू परेशान मत हो ठीक हूँ मैं,,,इतनी चोट तो लगती ही रहती है,,,अब तू रोना
बंद कर ,,,,


सौरी सन्नी ,,,,सब मेरी वजह से हुआ,,बहुत बुरी हूँ मैं,,,हर वक़्त गुस्सा करती रहती हूँ तेरे पर,,हर
बात पर डाँट देती हूँ,,,,आज तो खाना भी अच्छा नही खिला सकी तुझे और अब चोट भी लगा दी तेरे,,,वो
बहुत ज़्यादा रोने लगी,,,,


अरे पगली बोला ना कुछ नही हुआ मुझे,,,,अब तू मेरी छुटकी बेहन है मुझे डाँटने का तो पूरा हक़ बनता
है तुझे,,,,और तुझे किसने बोला कि खाना अच्छा नही था,,,,खाना बहुत अच्छा बना था,,,मैं तो मज़ाक कर रहा
था,,तूने देखा नही मैने आज 2 रोटी भी ज़्यादा खाई थी,,,,सच मे खाना बहुत अच्छा बना था,,इतना बोलते हुए
मैं उसकी आँखों से आँसू पोंछता जा रहा था,,,

खाने की तारीफ सुनके उसका रोना बंद हो गया लेकिन चेहरे पर मायूसी अभी भी थी उसके,,,,खाना अच्छा बना था
तो झूठ क्यू बोला तूने,,,ना तू झूठ बोलता और ना मैं तुझे मारती,,,सब तेरी वजह से हुआ और मैं पगली
समझ रही थी सब मेरी ग़लती है,,,,बिना वजह रो रही हूँ मैं ,,तेरे साथ ऐसा ही होना चाहिए,,,

अच्छा सौरी बाबा सब मेरी ग़लती है,,अब खुश,,,

तभी उसने हल्के से थप्पड़ मारा मेरे गाल पर जिसस से मेरी आँख के पास हल्का दर्द हुआ,,

अहह ,,,,,,,मेरे मुँह से आहह निकल गई,,,

ओह्ह सौररी सन्नी,,,मैने वो जानभूज कर,,,सौरी ,,,,उस से ग़लती हो गई थी इसलिए उसने अपने दोनो हाथों से
अपने कान पकड़ लिए और सौरी बोलने लगी,,,,वो किसी छोटी बच्ची की तरह कान पकड़ कर बैठी हुई थी और मुझे
सौरी बोल रही थी

इस वक़्त वो किसी मासूस बच्ची जैसी लग रही थी उसको देखकर मैं उसके मासूम चेहरे मे खो सा गया,,भूल गया कि मुझे चोट लगी है भूल गया कि मुझे दर्द हो रहा है,,,,जैसे मैं उसके मासूम चेहरे मे खो गया था वो भी एक टक मेरी आँखों मे देख रही थी,,,,

तभी उसने अपनी जीन की पॉकेट से एक रुमाल निकाला और मेरी आँख बंद करके उस रुमाल को मेरी आँख पर
रख दिया,,,,

ये क्या कर रही हो,,,,रुमाल क्यू रखा मेरी आँख पर,,,,

कुछ नही भाई,,,,रुमाल रखकर हल्की गरम हवा दूँगी अपने मुँह से तो तेरी आँख का दर्द थोड़ा कम हो
जाएगा,,,,इस से पहले मैं कुछ बोलता या उसको ऐसा करने से मना करता उसने मेरी आँख बंद करके मेरी
आँख पर रुमाल रखा और खुद नीचे झुककर उस रुमाल पर अपने होंठ रखे और मुँह खोलकर अपने मुँह से
गरम हवा मारने लगी रुमाल पर जिसकी गर्मी मुझे अपनी आँख पर महसूस होने लगी और शायद मुझे कुछ
आराम भी मिलने लगा मुझे कुछ रहट महसूस होने लगी,,,,,


मैं सोफे पर लेटा हुआ था,,,,और वो सोफे पर थोड़ी सी जगह पर बैठी हुई थी,,,,मेरी लेफ्ट आँख पर चोट
लगी थी जिस पर रुमाल रखकर वो गर्म हवा मार रही थी,,,,वो मेरे जिस्म पर झुकी हुई थी जिस वजह से
उसका लेफ्ट हॅंड मेरी चेस्ट पर था और उसका राइट हॅंड उस रुमाल पर था,,उसने रुमाल को अपने हाथ से पकड़ा
हुआ था,,

जबकि मेरा लेफ्ट हॅंड सोफे से नीचे लटक रहा था और राइट हॅंड मेरे और सोफे के बीच मे था,,,मेरा लेफ्ट हॅंड
सोफे से नीचे उसकी टाँगों के पास टच हो रहा था लेकिन किसी ग़लत मकसद से नही,,,,लेकिन मेरा राइट हॅंड
पता नही कब मेरे पेट पर आ गया और वहाँ से सोनिया की कमर को टच करने लगा,,,वो मेरी चेस्ट पर झुकी
हुई थी और मेरी आँख पर हवा मार रही थी ,,,उसके छोटे छोटे बूब्स मेरी चेस्ट पर टच करने लगे थे


जिस से मुझे हल्की मस्ती चढ़ने लगी थी और उसकी गर्म साँसे जो रुमाल से होती हुई मेरी आँख तक गर्मी पहुँचा
रही थी ,,उस गर्मी से मेरा जिस्म भी गर्म होने लगा और पता नही कब मेरा राइट हॅंड उसकी कमर को टच
करता हुआ उसकी पीठ पर चला गया,

वो मेरे उपर झुकी हुई थी जिस वजह से उसका टॉप थोड़ा उपर उठ गया था और मेरा हाथ उसकी जीन और टॉप के
बीच मे नंगी हुई पीठ पर रखा गया था,,,मैने अपने हाथ को हिलाया नही बस ऐसे ही वहाँ पड़ा रहने
दिया मुझे पता था अगर हाथ हिला तो पंगा हो जाना है,,,पंगा तो वैसे भी हो ही रहा था मेरे साथ,,,

किसी ग़लत मकसद से ना सही लेकिन हाथ नंगी पीठ पर टच होते ही मेरी हालत खराब होने लगी और शायद
सोनिया की भी,,,उसकी साँसे पहले से ज़्यादा गर्म हो गई थी और उसकी हार्ट बीट भी तेज हो गई थी,,,तेज तेज धड़कते
दिल के साथ उसकी छाती उपर नीचे होने लगी और उसके छोटे छोटे बूब्स रुक रुक कर मेरी छाती से टच होने
लगे,,,मेरा हाथ जो उसकी नंगी पीठ पर था उसकी उंगलियों ने मस्ती मे अपनी हरकते करना शुरू कर दिया
था,,,सोनिया शायद घबरा गई थी इसलिए मेरे जिस्म से उपर नही उठ रही थी लेकिन जैसे ही मेरे हाथ की हरकते
शुरू हुई वो एक दम से उपर उठ गई,,,उसके उठने की वजह से मेरा हाथ जो उसकी पीठ पर था वो पीठ से गिरता
हुआ मेरे पेट पर उसकी कमर के पास आ गया और अभी भी उसकी कमर को टच कर रहा था
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12-21-2018, 02:39 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
वो उठकर सीधी होके बैठ गई थी,,,उसकी हार्ट बीट तेज थी,,,वो तेज तेज साँसे ले रही थी,,,उसके फेस पर हल्की
मायूसी थी और डर बहुत ज़्यादा था,,,वो बहुत ज़्यादा परेशान भी लग रही थी,,उसकी आँखें जो मदहोश हो चुकी
थी और भारी होती जा रही थी ,,,उसके बदन काँप रहा था ,,,उसका एक हाथ अभी भी मेरी चेस्ट पर रखा हुआ
'था वो भी मेरे दिल के करीब,,,वो इतनी ज़्यादा तेज़ी से साँसे ले रही थी जैसे गर्म होने पर लड़की लेती थी लेकिन
उसकी हालत से पता नही चल रहा था वो मदहोश हो गई थी,,,,या डर रही थी,,,,,लेकिन उसकी आँखों मे एक
अजीब सी उलझन थी जिस से मैं भी उलझ गया था ,,,,मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,,,,


तभी वो धीरे से बोली,,,,,,कुछ आरामम मिला सन्नीई,,,,


मेरी एक आँख पर रुमाल था और मैं एक आँख से उसकी तरफ देख रहा था,,,

उसकी आवाज़ और उसकी ज़ुबान उसका साथ नही दे रही थी ,,,वो बोलते टाइम डरी हुई थी,,,उसकी ज़ुबान लड़खड़ा रही थी
,,,

मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया,,,

उसने फिर से पूछा,,,,कुछ आराम मिला य्या नहीइ सन्नी ग्गर्र्म्म ह्हव्वा से,,,

मैने हां मे सर हिला दिया,,,,हां कुछ आराम तो मिला ,,,,कुछ देर और गर्म हवा डू शायद ज़्यादा आराम
मिले,,,,

उसने हां मे सर हिला दिया और नीचे झुकने लगी,,लेकिन तभी मैने अपने लेफ्ट हॅंड से अपनी आँख पर पड़ा हुआ
रुमाल उठा दिया,,,,

उसने मेरी तरफ सवालिया नज़रो से देखा,,,,,रुमाल क्यूँ उठा दिया सन्नी,,,,

कुछ नही,,,,सोचा रुमाल के बिना हवा ज़्यादा गर्म लगेगी तो शायद ज़्यादा आराम भी मिलेगा,,,,तुम बिना रुमाल
के हवा दो मेरी आँख को,,,

उसने डरते हुए मेरी तरफ देखा फिर नज़रे घुमा कर मेरे उस हाथ की तरफ देखा जो मेरे पेट पर पड़ा
हुआ था लेकिन उसकी कमर को टच कर रहा था,,,,उसने डरते हुए उस हाथ की तरफ देखा और फिर वापिस मेरी
तरफ देखा और धीरे धीरे नीचे की तरफ झुकने लगी,,,उसका एक हाथ मेरी चेस्ट पर था जिस से वो मेरी
टी-शर्ट को कसके पकड़ती जा रही थी,,,सॉफ पता चल रहा था वो घबरा रही थी,,,,उसने मेरे हाथ की तरफ देखा
था जो उसकी कमर को टच कर रहा था उसको पता था अगर वो नीचे झुकेगी तो मेरा हाथ वापिस उसकी पीठ
पर चला जाएगा इसलिए वो डरते हुए मेरे हाथ की तरफ देख रही थी,,


हिम्मत करके बड़ी धीरे धीरे वो नीचे की तरफ बढ़ती आ रही थी और उसकी साँसे गर्म होती जा रही थी जो
करीब 1 फीट से ही मेरे चेहरे पर गर्मी का एहसास देने लगी थी,,,उसके दिल की धड़कन भी मुझे इतनी दूर
से सुनाई दे रही थी,,,उसकी साँसे गर्म भी थी और उखड़ भी रही थी,,,वो बड़ी हिम्मत करके नीचे झुकती आ
रही थी और जैसे जैसे वो नीचे झुक रही थी वैसे वैसे मेरा राइट हॅंड जो मेरे पेट पर था और उसकी कमर
को टच कर रहा था वो हाथ उसकी पीठ पर उसी जगह चला गया था जहाँ पहले था,,नीचे झुकने की वजह
से उसका टॉप फिर से पीठ से उठने लगा था और उसकी पीठ नंगी होने लगी थी,,


मेरा हाथ वापिस जीन और टॉप के बीच हल्की से नंगी हुई पीठ पर चला गया,,,,वो मेरी आँख के उपर अपने
लिप्स करके झुकती चली आ रही थी और उसके करीब आते आते उसकी साँसे और ज़्यादा गर्म होने लगी थी,,जैसे ही वो
मेरी आँख के पास पहुँची और अपने मुँह को खोलकर अपने लिप्स मेरी आँख पर रखने लगी मैने खुद को
थोड़ा हिला दिया और अड्जस्ट करते हुए अपने सर को हिला कर अपनी आँख की जगह अपने लिप्स को कर दिया,,,मैने ये
सब इतनी जल्दी किया कि उसको कुछ समझ नही आया और जैसे ही उसने लिप्स मेरी आँख को टच करने वाले थे वही
लिप्स अब मेरे लिप्स पर टच हो गये थे,,,,ऐसा होते ही मेरे जिस्म मे एक मस्ती की लहर दौड़ गई और शायद
उसके जिस्म मे एक डर की ,,,,,



उसका मुँह खुला हुआ था और जैसे ही उसके लिप्स मेरे लिप्स पर आए मैने अपनी ज़ुबान को उसके मुँह मे घुसा
दिया और उसके लोवर लिप्स को अपने लिप्स मे पकड़ लिया,,,मेरे ऐसा करते ही उसका हाथ जो मेरी चेस्ट पर था उस
हाथ से उसने मेरी टी-शर्ट को कस्के अपनी मुट्ठी मे पकड़ लिया और ऐसा करते हुए उसके नाख़ून मेरी चेस्ट पर
घुस गये थे उसने अपने नाखूनो से मेरी चेस्ट को हल्का सा कुरेद दिया था ,,मुझे हल्का दर्द हुआ लेकिन
मज़ा बहुत आया,,,,मैने उसके लोवर लिप्स को अपने लिप्स मे पकड़ा और अपने मुँह मे भरके चूसने लगा और इसी
टाइम मेरी ज़ुबान उसके मुँह मे थी और मैं अपनी ज़ुबान से उसकी ज़ुबान को टच कर रहा था,,मेरा हाथ जो
उसकी नंगी पीठ पर था वो हाथ उसकी पीठ से उपर उठने लगा वो भी उसके टॉप के अंदर से,,


मेरा हाथ उसकी नंगी पीठ पर टॉप के अंदर से उपर की तरफ बढ़ने लगा,,मेरे लिप्स उसके लिप्स मे जकड़े हुए
थे जिनको मैं बड़े प्यार से चूस रहा था ,,,उसने अपने सर को उपर करने की कोशिश की लेकिन जल्दी से नही
धीरे धीरे और तभी मैने अपने लेफ्ट हाथ को जो सोफे से नीचे लटक कर उसकी टाँगों को टच कर रहा था
उस हाथ को उसके सर पर रखा और उसके सर को वापिस अपने लिप्स पर दबा दिया और उसको ऐसे ही किस करने लगा
उसने भी अपने दूसरे हाथ को मेरे शोल्डर पर रखा और मेरे शोल्डर पर ज़ोर से अपने नाख़ून घुसा दिया
और जल्दी से मेरे से दूर होने लगी,,,,मैने भी ज़्यादा ज़ोर नही लगाया और उसको उपर उठने दिया ,,,वो धीरे से
उपर उठती गई और मेरा लिप्स से दूर होती गई,,,,उसके उपर होते होते मेरा हाथ भी उसकी पीठ से फिसलता हुआ
नीचे की तरफ आने लगा,,,जब तक वो सीधी हुई तब तक मेरा हाथ वापिस मेरे पेट पर आ गया था और उसकी कमर
को टच करने लगा था,,


वो सीधी होके बैठ गई थी,,,मेरा हाथ उसकी पीठ से नीचे आ गया था मेरे पेट पर ,,दूसरा हाथ उसके सर
से नीचे होके वापिस सोफे से नीचे लटक गया था,,,उसका एक हाथ अभी तक मेरी चेस्ट पर था और उसने अपनी मुट्ठी
मे मेरी टी-शर्ट को कसके पकड़ा हुआ था,,वो उपर तो उठ गई थी लेकिन उसकी आँखें बंद थी,,मैं उसकी तरफ
देख रहा था,,वो आँखें बाद किए तेज़ी से साँसे ले रही थी,,,,उसका दिल अभी भी बहुत तेज़ी से धड़क रहा था,
उसने अपने दूसरे हाथ को अपने दिल पर रखा और अपने दिल पर क़ाबू करने लगी,,मैं बस लेटा हुआ उसके लिप्स
के बचे खुचे स्वाद का आनंद ले रहा था और उसके मासूम चेहरे की तरफ देख रहा था,,,,

कुछ देर बाद उसने आँखें खोली और मेरी तरफ देखा.,,वो कुछ नही बोली बस तेज़ी से धड़क रहे दिल को
क़ाबू करने मे लगी हुई थी,,,उसने अपने हाथ को मेरी चेस्ट से उठा लिया और उस हाथ से अपने लिप्स पर लगे
हुए मेरे थूक को सॉफ करने लगी थी,,,और ऐसा करते हुए वो सीधा मेरी आँखों मे देख रही थी,,,मैं भी
एक-टक उसकी आँखों मे देख रहा था,,,



मुझे तो आराम मिला ,,क्या तुझे आराम मिला,,,,,मैने इतना हंसते हुए बोला सोनिया से,,,

वो कुछ नही बोली बस जल्दी से वहाँ से उठी और किचन मे भाग गई,,,,मैं सोफे पर लेटा हुआ उसको देखता
रहा,,,,वो किचन मे जाके फ्रिड्ज के पास खड़ी हो गई और फ्रिड्ज से पानी की बॉटल निकाल कर पानी पीने लगी,,
वो बहुत तेज़ी से पानी पे रही थी उसने पानी की एक बॉटल को मुँह से लगा लिया और तेज़ी से पानी पीते हुए बॉटल को
तब तक मुँह से अलग नही किया जब तक बॉटल खाली नही हो गई,,,,फिर उसने बॉट्टेल को रखा और किचन से बाहर
आ गई,,,,लेकिन वो मेरे पास नही आई वो सीडियों की तरफ जाने लगी थी और जाते हुए मेरे से नज़रे न्ही मिला रही
थी,,लेकिन फिर भी मैने उसकी नज़रो मे देख ही लिया,,,वो रो रही थी ,,,,,

जैसे वो कदम रखने लगी पहली सीढ़ी पर मैंने उसको आवाज़ दी,,,,,सोनिया,,,,,

मेरी आवाज़ सुनके वो वहीं रुक गई लेकिन मेरी तरफ पलटी नही,,,,,

मुझे लगता है तुमको कविता के घर चले जाना चाहिए,,,एक तो उसकी तबैयत का पता कर लेना और उसके साथ
उसके घर मे बैठकर स्टडी भी कर लेना,,,इसी मे सबका फ़ायदा है,,,यहाँ रहने पर किसी का भी नुकसान
हो सकता है,,,

वो वापिस नही पलटी बस ऐसे ही खड़ी रहके बोलने लगी,,,,,,मुझे कहीं नही जाना सन्नी,,,,यहीं रहना है इस
घर मे,,,इतना बोलकर वो उपर जाने लगी

मैने फिर से उसको आवाज़ दी लेकिन वो नही रुकी,,,और अपनी आँखों से आँसू पोन्छते हुए उपर की तरफ चली गई
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12-21-2018, 02:41 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
मैने सोचा कि ये तो पंगा हो गया,,,भले ही उसने मुझा रोका नही लेकिन फिर भी वो रोने तो लगी थी मेरी
इस हरकत से ,,,मैं कुछ नही करना चाहता था लेकिन वो मेरे इतने पास थी कि मेरे से खुद पर क़ाबू नही
हुआ,,और ग़लती उसकी है मेरी नही मैने कितनी बार बोला मेरे पास मत आया करो लेकिन वो है कि सुनती ही नही,,,
पर अब तो वो मेरी आँख की वजह से मेरे पास आई थी ताकि मेरा दर्द ठीक कर सके लेकिन मैं ऐसा कमीना
इंसान जो अपना दर्द कम करने वाली सोनिया को ही हर्ट कर दिया था,,वो रोने लगी थी,,सिर्फ़ मेरी वजह से,,,


मुझे पता था वो यहाँ से नही जाएगी इसलिए मैं कविता को फोन करने को सोची ताकि कविता यहाँ आ
जाएगी और उसके होते हुए मैं सोनिया के पास भी नही जाउन्गा और शायद कविता के आने पर मेरा ज़्यादा ध्यान
कविता पर रहेगा ,,,,,और वैसे भी मेरा बड़ा दिल कर रहा था अब कविता से मिलने को,,,सोनिया ने एक आग जो
लगा दी थी पूरे जिस्म मे जिसको कविता ही भुजा सकती थी,,,,,लेकिन कविता ने तो सॉफ सॉफ मना कर दिया था
आने से,,उसने बोला कि सूरज भाई घर पर नही है वो नही आ सकती ,,,,मैने बोला कि मैं उसके घर आ जाता
हूँ तो उसने इस बात से भी मना कर दिया,,,,,,

क्यूकी उसके घर जाके मैं कामिनी भाभी के साथ तो कुछ नही कर सकता था और कविता ने सीधी तरह से बोल
दिया था कि उसकी तबीयत ठीक नही है,,,तो भला मैं उसके घर जाके क्या करता,,,,


मैं करीब 25-30 मिनट ऐसे ही सोचता रहा ,,कभी सोनिया के बारे मे तो कभी कविता का बारे मे,,

फिर सोचा कि क्यूँ ना करण के घर चला जाए,,,,वहाँ से शिखा को या अलका आंटी को लेके बुटीक पर चला
जाउन्गा मस्ती करने के लिए,,,और अगर ना भी मस्ती कर सका तो कम से कम घर से बाहर तो चला जाउन्गा,,और
रात होने से पहले घर वापिस नही आउन्गा,,,और रात को आके खुद को मोम-डॅड के रूम मे बंद कर लूँगा ताकि
रात को सोनिया के साथ कुछ ग़लत हरकत नही कर सकूँ,,,

अभी 3 बजे थे और रात होने मे कम से कम 4-5 अवर्स थे,,,मुझे 4-5 अवर्स कहीं बाहर टाइम पास करना
ही होगा,,,इसलिए रेडी होने के लिए मैं उपर जाने लगा क्यूकी मेरे कपड़े उपर पड़े हुए थे,,,,सोनिया के रूम
मे,,,,,मुझे वहाँ जाने मे डर तो लग रहा था लेकिन वहाँ जाना भी ज़रूरी था क्यूकी मैं इन कपड़ो मे तो
घर से बाहर नही जा सकता था,,,,खैर ''मैं हिम्मत करके उपर की तरफ चलने लगा,,,,,

25-30 मिनट नीचे बैठा रहा और सोचता रहा कि अब क्या किया जाए,,,,

सोनिया ने मेरी आँख का दर्द कम करने की कोशिश की लेकिन मैने उसका ही दर्द बढ़ा दिया था ,,उसको हर्ट किया
था रुला दिया था,,,अब मुझे कैसे भी करके रात तक उस से दूर रहना था क्यूकी वो कविता के घर जाने को
तैयार नही थी,,,,और ना ही अब कविता यहाँ आने को तैयार थी,,,,सब पंगा हो गया था वो भी मेरी वहज से,,,

सोनिया हर्ट हुई मेरी वजह से,,,,कविता की तबीयत ठीक नही थी वो भी मेरी वजह से,,,,,,

अब मैं किसी को हर्ट नही करना चाहता था,,,इसलिए रात तक कहीं बाहर टाइम पास करना चाहता था,,और वैसे
भी जाने अंजाने ही सही मैने सोनिया को हर्ट किया था और जाने अंजाने ही सही उसके करीब होके मैं कुछ गर्म
हो गया था मुझे ये गर्मी निकालनी थी कहीं ना कहीं,,,,और सबसे अच्छा रास्ता था अलका आंटी और शिखा को अपने
साथ बुटीक पर लेके जाना,,,उन्ही के साथ मस्ती कर सकता था मैं,,और इस तरह मैं कुछ देर घर से बाहर
और सोनिया से दूर रह सकता था,,,,,क्यूकी जितना टाइम मैं घर पर रहूँगा उतना टाइम यही डर रहेगा कि कहीं
मैं सोनिया को हर्ट नही कर दूं,,,

मैं सीढ़ियों से उपर चला गया,,,सोनिया को भी उपर आए 25-30 मिनट हो गये थे,,,मेरे कपड़े उसी रूम मे
थे जहाँ सोनिया थी और मुझे उस रूम मे जाने से बहुत डर लग रहा था लेकिन जाना भी ज़रूरी था,,,मुझे पता
था मैं उसका सामना नही कर सकता ,,फिर भी हिम्मत करके मैं उसके रूम मे चला ही गया,,,मैने हिम्मत
करके बड़ी धीरे से दरवाजा खोला और अंदर देखने लगा,,मैने देखा सोनिया अपने बेड पर नही थी ,,मैने
दरवाजा थोड़ा और खोला और रूम मे देखने लगा मैं इतना डरा हुआ था कि मैं खुद न्ही गया अंदर बस
अपने सर को दरवाजे से अंदर किया था और दरवाजा भी इतना ही खोला था जिस से मेरा सर अंदर चला जाए और मैं
अंदर देख सकूँ,,,,


मैने सर को दरवाजे से अंदर किया और रूम मे हर तरफ देखने लगा,सोनिया कहीं नही थी,,,शायद वो बाथरूम
मे होगी या शायद बुक लेके भुआ वाले ड्रॉयिंग रूम मे स्टडी करने चली गई होगी,,,मैं जल्दी से रूम
मे घुस गया और अपने कपड़े निकालने लगा और कपड़े निकालते हुए मैने देखा कि बाथरूम का दरवाजा खुला
हुआ था इसका मतलब सोनिया बाथरूम मे नही थी,,मैने रूम को अंदर से लॉक किया और जल्दी अपने कपड़े निकाले
और बेड पर रखे फिर अपने कपड़े उतार दिए और बाथरूम मे घुस गया नहाने के लिए लेकिन इस बाथरूम की
तो टॅब खराब थी पानी बहुत कम निकलता था,,,इसलिए मैने कपड़े वहीं रहने दिए और शोभा के रूम मे चला
गया क्यूकी उसके रूम का बाथरूम और तब ठीक से काम करती थी,,,मैं जल्दी से नहा धो कर तैयार हो गया और
घर से निकल गया,,,,जब मेन गेट खोलकर बाइक को बाहर निकाल रहा था तभी मैने देखा कि सोनिया भुआ वाले
ड्रॉयिंग रूम की खिड़की पर बैठी हुई थी जिसकी खिड़की घर के फ्रंट गर्दन की तरफ खुलती थी,,,,मैने एक बार
उसकी तरफ देखा तो वो कुछ उदास लग रही थी,,,मैं भी उसको देखकर उदास हो गया लेकिन मैने ज़्यादा ध्यान
नही दिया उसकी तरफ क्यूकी मैं जितना देखता उतना ही उदास होता और उसको भी उदास कर देता,,,,मैने बाइक निकाली
और वहाँ से चला गया,,,

मेरा दिल किया करण के घर जाने को लेकिन मैं करण के घर नही गया बस शिखा दीदी को फोन कर दिया और
बोल दिया भुआ के बुटीक पर आने को ,,मैं घर से जाते टाइम बुटीक की चाबी साथ लेके गया था,,मैं
खुद उपर जाके बैठ गया और शिखा दीदी और अलका आंटी का वेट करने लगा,,,,वो लोग भी कुछ देर मे वहाँ आ
गई ,,,उन्होने नीचे आके बेल बजाई तो मैं नीचे चला गया गेट खोलने क लिए,,

मैने नीचे जाके गेट खोला तो शिखा दीदी और अलका आंटी को देखकर खुश हो गया,,वो दोनो ने बहुत ही ज़्यादा
सेक्सी ड्रेस पहनी हुई थी,,,,शिखा ने एक स्किन कलर का टाइट फिटिंग सूट पहना हुआ था जो उसके बदन से एक दम
चिपका हुआ था वो सूट इतना ज़्यादा टाइट था कि जो भी देखता शिखा दीदी को उसको दीदी के जिस्म का सही सही नाप
मिल जाता ,,,,उसके बड़े बड़े बूब्स जो सूट के उपर से बाहर निकल रहे थे ,,उनका पेट जो एक दम सपाट था
और वो मोटी नही थी लेकिन हल्के भरे बदन की थी इसलिए उनका हल्का सा पेट बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रहा था उस
टाइट फिटिंग सूट मे,,मैं उसकी तरफ देखता ही रह गया ,,,,
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12-21-2018, 02:41 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
ऐसे क्या देख रहे हो सन्नी इतना बोलकर शिखा दीदी अंदर आ गई और आते ही मेरे से चिपक गई,,वो इतनी ज़ोर से
आके मेरे गले लगी थी कि धक्के से मेन गेट से 2-3 कदम पीछे खिसक गया था,,शिखा दीदी ने गले लगते ही
मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रखे और मुझे किस करना शुरू कर दिया और मैं तो वैसे ही सोनिया की वजह से गर्म होके
आया था घर से और अब शिखा दीदी को इस टाइट फिटिंग सूट मे देखकर मूड और भी खराब हो गया था लेकिन शिखा
दीदी को किस करते हुए मैं पीछे अलका आंटी की तरफ देख रहा था जो गेट से अंदर आके गेट बंद कर चुकी
थी और सामने से चलके मेरे और दीदी की तरफ आ रही थी,,,मैने उसको देखा तो जो गर्मी जो आग सोनिया और शिखा
दीदी ने लगाई थी मेरे जिस्म मे अलका आंटी ने उस आग मे अपने हुस्न का आयिल डालके उस आग को और भी ज़्यादा भड़का दिया था,,,,,


सही कहा है किसी ने,,,,जब औरत की उमर हो 16-17 (सोलह-सत्रा) तो वो बन जाती है जवान लंड के लिए ख़तरा ,,

और जब हो उसकी उमर 29-30 (उनतीस-तीस) तो वो बन जाती है एक दम मस्त चीज़

और जब हो उसकी उमर 45-50 (पेंतालीस-पचास) इतनी चुदक्कड हो जाती है नही बुझती है उसकी प्यास,,,,,फिर वो
प्यास चाहे उस औरत की हो या लंड घुसाने वाले मर्द की,,,,,

अभी अलका आंटी भी मुझे बहुत ज़्यादा चुदक्कड लग रही थी,और वही प्यास मुझे अलका आंटी मे नज़र आ रही थी,,,
वो आज इतनी ज़्यादा चुदासी लग रही थी कि गेट बंद करके जिस अंदाज़ से वो मुझे देख रही थी ऐसे लग रहा था
जैसे किस तो मुझे शिखा दीदी कर रही है लेकिन मेरे होंठों मे स्वाद आ रहा था अलका आंटी के होंठों का ,,,
अलका आंटी हम दोनो से दूर खड़ी होके अपने लोवर लिप्स को वापिस पलट कर अपने मुँह मे भरके दाँतों से
काट रही थी,,,

अभी अलका आंटी ने एक ब्लॅक कलर की साड़ी पहनी हुई थी,,वो गेट के पास खड़ी हुई थी और अपने लिप्स को अपने
मुँह मे भरके दाँतों से हल्के हल्के काट रही थी ,,उनकी आँखों मे एक नशा था एक मस्ती थी और उसी मस्ती
मे वो अपने बूब्स को अपने हाथों मे भरके दबा रही थी ,,उनके बूब्स ब्लाउस से आधे से भी ज़्यादा बाहर
निकले हुए थे लेकिन जब वो अपने बूब्स को अपने ही हाथों मे पकड़ कर दबा रही थी तो उनके बूब्स और भी
ज़्यादा बाहर निकलने को मचल रहे थे,,,,,,वो मस्ती मे मुझे देखती हुई अपने बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा
रही थी तभी उन्होने अपने हाथ को अपने पेट की तरफ किया और पेट के आगे से साड़ी को साइड हटा दिया और मैं
उनका हल्का सा मोटा गौरे रंग का मखमली पेट देखकर मस्ती मे शिखा को जबरदस्त किस करने लगा,,शिखा
भी पहले से मुझे पागलो की तरह किस कर रही थी,,,

फिर अलका आंटी ने आगे बढ़ कर शिखा को पकड़ कर साइड कर दिया,,,,,चल पीछे हट बेटी पहले मुझे ज़रा चख
लेने दे इस सन्नी के होंठों का रस तू बाद मे चख लेना,,,,,आंटी ने शिखा को साइड किया और खुद मेरे से
चिपक गई,,

अरे रूको ना आंटी,,,,यहाँ नही उपर चलते है,,,अगर चुदाई का मज़ा लेना ही है तो अच्छी तरह उपर चलके लेते
है ना,,,,,मैने इतना बोला और शिखा जल्दी से उपर की तरफ चलने लगी जबकि अलका आंटी और मैं हाथों मे हाथ
डालके एक साथ उपर की तरफ जाने लगे,,,,मैं और अलका आंटी अभी पीछे थे कि शिखा एक रूम मे घुस गई और
जब तक मैं और अलका आंटी वहाँ पहुँचे तब तक वो अपनी कमीज़ उतार चुकी थी और सलवार खोलने मे लगी
हुई थी,,,,

उसको देखकर अलका आंटी हँसने लगी,,,लगता है इस लड़की की चूत मे कुछ ज़्यादा ही आग लगी हुई है,,,आंटी की
बात सुनके मैं भी हँसने लगा,,,,,हाँ आंटी जी मुझे भी ऐसा ही लगता है और आग तो मुझे भी लगी हुई है
कहो तो भुजा ले आग से आग को,,

अरे बेटा इसलिए तो यहाँ आई हूँ मैं ताकि आग से आग भुजा सकूँ,,,,,इतने दिन से चुदाई नही की आज तो सारी आग
भुजा लूँगी,,,,


पर आंटी जी अभी कल ही तो हम सबने मिलकर इतना मज़ा किया था ,,,,आप थी मैं था ,,करण शिखा और मेरी माँ
भी तो थी साथ मे,,,कितना मज़ा किया था कल भूल गई,,,

नही बेटा कुछ नही भूली,,,लेकिन करण के पापा को बाहर गये कितने महीने हो गये है जबकि तुम लोगो को चुदाई
करते हुए अभी कुछ ही टाइम हुआ है,,,अब तो जब तक 3-4 महीने दिल भरके चुदाई नही करती तब तक नही आग
भुजने वाली मेरी चूत की,,,

सही बोला आंटी जी,,,वैसे भी आप जैसी खूबसूरत औरत को दिन मे 2-3 बार तो चुदाई करवानी ही चाहिए,,,और
सच बोलू तो अगर मैं आपका पति होता तो रोज आपकी चुदाई करता,,,मुझे तो गुस्सा आता है अंकल पर जो आप जैसी
मस्त औरत को छोड़कर दूर चला गया है,,,मैं तो कभी आपसे दूर नही जाता,,,,

हयी मैं मर जावा सन्नी,,,,काश तू ही मेरा पति होता तो मैं भी तेरे को दूर नही जाने देती,,,इतना चुदवाती
तेरे से कि चूत को फाड़ कर रख देती,,,और गान्ड मे तो इतना लंड घुसाती की गान्ड का भोसड़ा बन जाता,,,अलका
आंटी ऐसे बात कर रही थी इसका मतलब था वो आज फुल मस्ती के मूड मे थी,,शिखा भी अपनी माँ की बातों
से मस्त होके नगी होके बेड पर लेट गई थी और चूत पर उंगली करते हुए एक हाथ से अपने बूब्स को मसल्ने
लगी थी,,,,,

अब जल्दी आ जाओ ना आप लोग भी ,देखो मेरी चूत से अमृत रस भी बहने लगा है,,,,,शिखा ने अपनी चूत मे
उंगली घुसा दी और चूत के पानी से गिल्ली हो चुकी उंगली को मेरी और अलका आंटी की तरफ करके दिखाने लगी थी,,


इतनी भी क्यूँ बैसब्रि हो रही हो बेटी ,,थोड़ा आराम से,,,अगर मज़ा लेना ही है तो जल्दबाज़ी क्या करनी,,,अलका ने
अपने ब्लाउस को खोलते हुए ये बात बोली और फिर ब्लाउस को उतार कर साइड मे रख दिया,,

जल्दबाज़ी है मुझे माँ,,,उधर करण की शादी हो गई है हर रात वो सुहागरात मना रहा है और हम दोनो
नकली लंड से काम चला रही है,,,,शिखा थोड़ी चिड़ते हुए बोली,,,

तभी मैने अलका आंटी को अपनी बाहों मे पकड़ा और उनके बूब्स को मसल्ते हुए बोला,,,चलो आंटी इसकी चूत
की आग भुजा ही देते है कितनी तड़प रही है बेचारी,,,इतना बोलकर मैं आंटी के साथ बेड के पास चला गया,,

बेड के पास जाके आंटी मेरी टी-शर्ट उतारने लगी,,,,हां बेटा आग तो भुजानी ही पड़ेगी और इसकी बात भी सही है
करण तो रोज सुहागरात मना रहा है और हम दोनो को नकली लंड से काम चलाना पड़ता है वो भी छुप-छुप
कर,,या रात को हम दोनो साथ सोती है तब,,,,लेकिन तब भी बहुत ध्यान देना पड़ता है,,,,यहाँ हम डरती
रहती है और वहाँ करण रितिका के साथ सुहागरात मनाता रहता है,,,,

मेरी टी-शर्ट उतर चुकी थी और मैं खुद अपने हाथों से अपनी पॅंट को उतार रहा था,,,,वैसे आंटी आप लोगो ने
उसकी सुहागरात का बेड बहुत अच्छा सजाया था,,,मैं तो तभी मस्त हो गया था दिल किया उस बेड पर जाके मैं भी
थोड़ी मस्ती करलूँ,,

तभी शिखा बोल पड़ी,,,,कोई बात नही सन्नी,,,ऐसा ही बेड हम फिर से सज़ा देंगी तेरे लिए और मैं उसी बेड पर
तेरे साथ सुहागरात भी मनाउन्गी तू फ़िक्र मत कर,,,,बस आज इस चूत की प्यास भुजा दे,,,,

मेरी पॅंट निकल चुकी थी और मैं अपने हाथों से अलका आंटी के बूब्स को मसल रहा था और आंटी खुद अपने
अपनी साड़ी को निकाल कर पेटिकोट को खोल रही थी,,,,और पल भर मे पेटिकोट नीचे गिर गया और हम दोनो नंगे
हो गये,,,,शिखा तो पहले से नंगी थी बेड पर,,,,

हां बेटा सही कहा इसने,,,,एक दिन तेरी भी सुहागरात की बेड सज़ा दूँगी मैं ,,,,,,और तेरी सुहागरात की दुल्हन
होगी ये शिखा,,,,पूरी रात मस्ती करना इसके साथ,,,,

ये अकेली क्यूँ आंटी जी,,,,,,अब भी साथ रहना आंटी जी,,,एक रात मे 2-2 दुल्हन से सुहागरात मनाउन्गा मैं,,,
मैने ये बात आंटी के बूब्स दबाते हुए बोली,,,और फिर हम लोग बेड पर शिखा के पास चले गये,,,और फिर
शुरू हुआ चुदाई का खेल जो रात तक चलता रहा,,,

मैने 3-4 अवर्स मे 2 बार चुदाई की थी और एक बार पानी निकाला था शिखा के मुँह मे और एक बार अलका आंटी
के मुँह मे,,,अलका आंटी और शिखा भी 2 बार झड़ी थी और मैने उनकी छूट का पानी पिया था,,फिर हम लोग
वहाँ से अपने अपने घर की तरफ चल पड़े,,,,
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12-21-2018, 02:41 PM,
RE: Hindi Porn Story कहीं वो सब सपना तो नही
अलका आंटी मुझे रोकना चाहती थी और शिखा भी,,वैसे मैं भी रुकना चाहता था उन लोगो के साथ बुटीक पर
लेकिन सोनिया घर पर अकेली थी और मुझे उसकी टेन्षन थी,,ये बात अलका आंटी और शिखा को भी पता था कि सोनिया
घर पर अकेली है इसलिए उन लोगो ने मुझे नही रोका और अगर रोकती भी तो भी मैं नही रुकता,,,,

बुटीक पर लॉक लगा कर मैं चला अपने घर की तरफ और शिखा अलका आंटी को लेके चल पड़ी अपने घर की
तरफ,,,,

मैं घर पहुँचा तो काफ़ी लेट हो गया था,,,10 बजे से उपर हो गया था टाइम,,,सर्दिया शुरू हो गई थी इसलिए
रात जल्दी हो गई थी और 10 बजे का मतलब था आधी रात ,,,मैने गेट खोला और बाइक अंदर किया फिर मेन डोर
पर जाके बेल बजाई तो पहली बेल पर ही सोनिया ने आके दरवाजा खोल दिया,,

दरवाजा खोलकर सोनिया ने मेरी तरफ देखा ,,और मैने भी उसकी तरफ देखा,,,,कुछ टाइम हम लोगो की नज़रे मिली
और फिर उसने अपनी नज़रे झुका ली और दरवाजे से एक साइड की तरफ हो गई,,,,उसके साइड होते ही मैं घर के अंदर
चला गया,,,,


मैं मोम के रूम मे जाने लगा तभी सोनिया ने दरवाजा बंद करके मुझे आवाज़ लगा दी,,,,इतनी लेट क्यूँ हो
गये भाई,,,मैं कब्से तुम्हारा वेट कर रही थी,,,इतने फोन किए तुमने फोन भी नही उठाया मेरा,,

मैं उसको इग्नौर करना चाहता था लेकिन ये काम मेरे लिए मुश्किल था,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्यूँ वेट कर रही थी
चुप चाप सो नही सकती थी क्या,,,

उसने मायूस होके बोला,,,,,भाई मैं डिन्नर के लिए तेरा वेट कर रही थी,,ताकि तुम आओ और हम भाई बेहन एक
साथ बैठकर डिन्नर करे,,,,मैने तेरी पसंद का सब कुछ बनाया है,,


किसने बोला था मेरी पसंद का बनाने को और किसने कहा था वेट करने को,,,खुद डिन्नर कर लेती,,,मैने थोड़ा
चिड़ते हुए बोला,,,

ऐसे क्यूँ बोल रहा है भाई गुस्से से,,,मैने तो सब कुछ तेरी वजह से किया,,,,इतना बोलकर वो डाइनिंग टेबल के पास
गई और वहाँ से एक कटौरी लेके मेरे पास आ गई,,

देख भाई मैने तेरी पसंद की खीर भी बनाई है,,,,पता है कितना टाइम लगा ये खीर बनाने मे ,,,और तू
है कि गुस्सा कर रहा है,,

मुझे नही खानी कोई खीर-वीर,,,और किसने बोला था ये सब ड्रामा करने को,,,मैने बोला था क्या,,,,,,मुझे
नही खाना कुछ भी ,,मैं बाहर से खाना खाकर आया हूँ और अब मुझे नींद आ रही है,,,,

तभी वो रोने लगी और उसकी आँख से एक आँसू निकला और खीर वाली कटौरी मे गिर गया,,,,उसने खीर वाली कटौरी को
वापिस रखा डाइनिंग टेबल पर और रोते हुए बोनले लगी,,,,

ठीक है मत खाओ सो जाओ जाके,,,,मैं ही पागल हूँ जो इतनी मेहनत से सब कुछ बनाया तेरे लिए और तू है की
गुस्सा कर रहा है,,,खुद ग़लती करता है ,,,खुद बुरे काम करता है और खुद ही गुस्सा भी करता है,,,जाओ सो
जाओ जाके ,,,तुमको नही खाना तो मुझे भी नही खाना,,,,इतना बोलकर वो रोती जा रही थी,,,

मेरा दिल किया उसको चुप करवाने को क्यूकी मुझसे कुछ भी बर्दाश्त होता था लेकिन उसकी आँखों मे आँसू
मेरे से बर्दाश्त नही होते थे,,,लेकिन उसका रोना ज़रूरी था और उसका गुस्से होना भी ज़रूरी था,,क्यूकी वो गुस्सा
रहेगी तभी मेरे से दूर रहेगी,,,,

नही खाना तो मत खा ,,जा दफ़ा हो जा यहाँ से और चली जा उपर अपने कमरे मे,,,,मैने थोड़ा गुस्से से चिड़ते
हुए बोला तो वो फूट-फूट कर रोने लगी और वहाँ से भाग कर उपर चली गई,,,,,


मैं भी आके मोम के रूम मे लेट गया,,,मेरा मूड भी काफ़ी खराब हो गया था मैं बस सो जाना चाहता
था,,इसलिए मैं उठा और डॅड की अलमारी से पयज़ामा निकाल कर पहन लिया और वापिस बेड पर लेट गया,,,लेकिन मुझे
नींद नही आ रही थी,,,,एक तो मैने सोनिया पर गुस्सा करके उसको रुला दिया था इस बात से मुझे खुद पर भी
गुस्सा था पर मेरा ऐसा करना भी ज़रूरी था उस से दूर रहने के लिए,,,और दूसरा मैं भूखा भी था और भूखे
पेट नींद नही आती,,,,इसलिए मैं बाहर डाइनिंग टेबल पर आया जहाँ खाना ऐसे ही पड़ा हुआ था,,और वहीं पड़ी
हुई थी वो खीर वाली कटौरी,,,,

मुझे खीर बहुत अच्छी लगती थी और अब मुझे भूख भी बहुत लगी हुई थी इसलिए मैने खीर वाली कटौरी उठाई
और खीर खाने लगा लेकिन तभी मेरा दिल पसीज गया,,,वो खीर एक दम नमकीन लग रही थी मुझको,,हालाकी
उसमे बहुत मीठा स्वाद होता है लेकिन इस खीर मे एक आँसू गिरा था सोनिया का जिस से खीर नमकीन लगने लगी
थी मुझे,,मुझे खीर ख़ाके खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा था,,मैने उस मासूम को क्यूँ रुला दिया,,उसकी क्या
ग़लती थी, जो ग़लती थी सब मेरी थी,,,मैं हवस मे इतना अँधा हो गया था कि अपनी मासूम बेहन पर गुस्सा करने
लगा था उसको हर्ट करने लगा था ,,,,

अपने ज़ज़्बातों मे मैं इतना पागल हो गया था कि उन्ही ज़ज़्बातों की वजह से मेरी ज़ुबान का टेस्ट भी बदल
गया था,,,,मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा था,,,उस मासूम के एक आँसू मे इतना खारा-पन था कि खीर भी
नमकीन हो गई थी,,,,

फिर मुझे याद आया कि मुझे भूखे पेट नींद नही आ रही थी तो भला सोनिया को कैसे नींद आएगी,,,उसने
भी तो कुछ नही खाया,,,,इसलिए मैं प्लेट मे खाना लगा कर उपर उसके रूम मे चला गया,,मैं रूम
मे गया तो लाइट जल रही थी और वो पिल्लो को हग करके रो रही थी,,,उसकी पीठ थी दरवाजे की तरफ इसलिए उसने
मुझे रूम मे अंदर आते नही देखा,,,,,मैं रूम मे गया और खाने की प्लेट को हाथ मे लेके उसके बेड के
पास चला गया,,फिर एक हाथ से उसको हिलाने लगा लेकिन मैं उसको हाथ नही लगाना चाहता था इसलिए मैं उसके
हाथ मे पकड़े हुआ पिल्लो को पकड़ कर उसको खींचा तो सोनिया का ध्यान मेरी तरफ आया,,,,वो एक दम से
उठकर बैठ गई ,,,,

मैं भी उसके बेड पर बैठ गया और खाने की प्लेट को हम दोनो के बीच मे रख लिया,,फिर हाथ आगे बढ़ाकर
उसके आँसू पोन्छने लगा,,,,,उसने मेरा हाथ झटक दिया और गुस्सा करने लगी,,,,मेरे से रूठने लगी,,,

अब क्यूँ आया है तू यहाँ,,,जा चला जा यहाँ से मुझे बात नही करनी तेरे से,,तू बहुत बुरा है,,,वो रोते हुए
हल्के गुस्से से बोल रही थी,,,

मत बात कर ,,,लेकिन ये खाना तो खा ले,,,

मुझे नही खाना,,,मुझे भूख नही है,,,,

अच्छा बाबा सौरी,,,,ग़लती हो गई,,इतना बोलकर मैने रोटी का एक नीवाला तोड़ा और उसके मुँह की तरफ ले गया,,,,चल
अब माफ़ कर्दे मुझे और खाना खा ले,,,

उसने मेरा हाथ पीछे कर दिया,,,,मुझे नही खाना,,इतना बोलकर उसने अपने फेस को दूसरी तरफ टर्न कर लिया,,

देख तू नही खाएगी तो मैं भी नही खाउन्गा,,,,,मैने थोड़ा उदास होके बोला,,

लेकिन तू तो बोल रहा था तू बाहर से ख़ाके आया है भाई,,,,झूठ बोल रहा था क्या तू भाई,,,,

हां मैं झूठ बोल रहा था और अब सच बोल रहा हूँ ,,मुझे बहुत भूख लगी है गुस्सा थूक दे मेरी
छुटकी बहना और खाना खा ले वर्ना मुझे भी भूखा रहना पड़ेगा,,,,

उसने अपने हाथों से अपने आँसू पोन्छ दिए और तभी मैने अपने हाथ को आगे किया तो उसने मुँह खोलकर मेरे
हाथ से वो नीवाला खा लिया,,,और खाते हुए बोली,,,,,,तू सच मे बहुत बुरा है भाई,,,कभी कभी बहुत गुस्सा
आता है तुझपे,,,,

जानता हूँ,,,मैं बहुत बुरा हूँ,,,,और तुम बहुत अच्छी हो,,,,चलो अब अच्छी बच्ची बनके खाना खा लो और
सो जाओ,,,,मैं भी चलता हूँ नीचे और खाना ख़ाता हूँ,,,,

यहीं बैठ जाओ भाई हम साथ मिलकर खाना खाते है,,,,उसने बड़े प्यार से बोला,,,

नही पगली,,,मैं यहाँ नही बैठ सकता ,,मुझे नीचे जाना होगा,,तू समझ रही है ना मेरी बात,,,,मैं यहाँ
नही रुक सकता ज़्यादा देर,,,,क्यूकी मैं तुझे और ज़्यादा हर्ट नही करना चाहता ,,,मैने उसको इतना बोला और वो
मेरी बात का मतलब समझ गई,,,,

उसने हां मे सर हिला दिया और बता दिया कि वो मेरी बात समझ गई है,,,

फिर वो खाना खाने लगी और मैं वहाँ से बाहर आने लगा और आते हुए मैं उसके दरवाजे के पास खड़ा हो गया
और पीछे मूड के उस से बोला,,,,

खीर बहुत अच्छी बनी है सोनिया,,,तुम भी खा लेना ,,,,मैने ये बात हंस कर बोली तो उसके फेस पर भी हल्की
स्माइल आ गई,,,

फिर मैं नीचे आ गया और प्लेट मे डिन्नर लगाने लगा,,,लेकिन तभी मेरी नज़र पड़ी उस कटौरी पर जिसमे खीर
थी और सोनिया का एक आँसू गिर गया था,,,,,मैने खाना प्लेट मे लगाने से पहले खीर की कटौरी उठा ली और फिर
से एक स्पून खीर लेके मुँह मे डालके खाने लगा ,,,,अब वही खीर जो कुछ टाइम पहले मुझे नमकीन लगने
'लगी थी वो खीर फिर से मीठी हो गई थी इतनी ज़्यादा मीठी की मुझे लगने लगा जैसे मेरे मुँह मे शक्कर घुल
रही हो,,,,मैं समझ गया कि अगर सोनिया उदास हो तो मुझे कुछ भी अच्छा नही लगना और अब मैं सोनिया को खुश
करके आया था इसलिए मुझे खीर का स्वाद मीठा लगने लगा था,,,


सच कहते है लोग,,ज़ज़्बात सिर्फ़ इंसान का मिजाज़ ही नही ज़ुबान का स्वाद भी बदल देते है कभी कभी,,,,


मैने डिन्नर करके खीर की एक कटौरी भरके अपने साथ मोम डॅड के रूम मे ले गया और आराम से लेट कर खीर
का मज़ा लेने लगा,,,,खीर सच मे बहुत ही ज़्यादा स्वाद बनी थी,,,,चावल का एक एक दाना मुँह मे घुलता ही जा रहा
था,,,और ड्राइ फ्रूट्स तो पूछो मत कितने डाले थे सोनिया ने,,,,चावल के दाने कम और बादाम पिस्ता ज़्यादा मिल
रहे थे मुझे खीर मे,,,,

मैं बेड पर लेटा हुआ बड़े स्वाद से खीर का मज़ा ले रहा था और साथ मे अपने मोबाइल पर फेसबुक ऑन कर लिया था और
टाइम पास करने लगा था,,,तभी मुझे किसी के खांसने की आवाज़ आई तो मैने पीछे मूड कर देखा,,,

दरवाजे के पास सोनिया खड़ी हुई थी,,,,

तुम यहाँ क्या कर रही हो,,तुमको बोला था ना उपर रहने को,,,

भाई मैं तो डिन्नर वाले बर्तन रखने आई थी किचन मे,,,,

रख दिए ना,,,,अब जाओ और सो जाओ उपर जाके,,,,,

मैं तो सो जाउन्गा लेकिन तुम अभी तक क्यूँ नही सोए भाई,,,,,उसने मेरे से सवाल किया वो भी थोड़ा डरते हुए,,

मैं तो खीर खा रहा था ,,सच मे बहुत अच्छी बनी है खीर ,,पेट भर गया लेकिन दिल नही भर रहा खाने
से ,,,,दिल करता है बस ख़ाता जाऊ,,,,

तो खा लो ना किसने रोका है भाई,,,,आपके लिए तो बनाई थी मैने,,,

बहुत बहुत शुक्रिया मेरी छुटकी बहना मेरे लिए खीर बनाने का ,,,,अब जाओ उपर जाके सो जाओ टाइम बहुत हो गया
है,,,,

अभी नही सोना मुझे भाई,,,,कल एग्ज़ॅम है ना अभी तो एग्ज़ॅम की तैयारी करनी है,,,,,सोना तो बहुत देर बाद है मुझे
तभी उसने मेरे हाथ मे पकड़ा हुआ मोबाइल देख लिया,,,,,ये मोबाइल पर क्या कर रहे हो भाई,,,

कुछ नही बस खीर खाते हुए टाइम पास कर रहा था,,,,,

टाइम ही पास करना है तो एग्ज़ॅम की तैयारी मे टाइम पास करो ना ,,,मोबाइल मे क्या रखा है,,,वो थोड़े हल्के गुस्से
मे बोली थी,,,,मुझे पता है वो स्टडी के मामले मे कितनी सीरीयस रहती है हर टाइम,,,,

वैसे भाई तेरी तैयारी हो गई क्या एग्ज़ॅम की,,,उसने ये सवाल भी थोड़े गुस्से से किया था

उसने इतना पूछा तो मेरे से कोई लफ्ज़ नही निकला मुँह से मैं बस सर को झुका कर बैठ गया,,,

मैं पहले ही जानती थी भाई,,,तूने तैयारी नही की होगी,,,,सारा दिन पता नही कहाँ घूमता रहा और घर भी लेट
आया तू,,,,अब भी मोबाइल पर लगा हुआ है,,,,कुछ तो ध्यान दो भाई कल एग्ज़ॅम है तुम्हारा,,,

वो मैं वो ,,,,,मैं बस स्टडी करने ही वाला था खीर ख़तम करके,,,,
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