Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
07-20-2019, 09:26 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
रूबी...लीजिए अपनी अमानत संभालिए .......कल पार्टी लूँगी आप से ....और रूबी दोनो के अकेला छोड़ ...वहाँ से चली गयी ......उसकी आँखें छलक पड़ी थी..पर ये खुशी के आँसू थे....कविता को उसका प्यार आज मिल जाएगा...उसका टूटा हुआ घर फिर से जुड़ जाएगा....उसके कदम सुनील के कमरे की तरफ बढ़ गये....

कविता सर झुकाए खड़ी थी.....उसके आँसू टपक रहे थे और हर आँसू राजेश के दिल पे वार कर रहा था......

राजेश.......उसके करीब गया और उसके चेहरे को उसकी ठोडी पे हाथ रख उपर उठाया ......ये तुम्हें रोना किसने अलाउ किया.......

कविता राजेश से लिपट गयी ....और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी ..........राजेश के हाथ में पड़ा जाम नीचे गिर गया और उसने उसे अपने बाँहों में समेट लिया ......

'बस जानम बस .....बिल्कुल नही रोना..........'

लेकिन कविता का रोना बंद ही नही हो रहा था .....वो आँसू जो कब से उसने रोके हुए थे आज बह निकले .....

'बस यार ....'

'मुझे माफ़....'

'ठीक है किया माफ़ ...पर एक अच्छा सा गाना सुनाना पड़ेगा....'

'क्या.....'

'क्यूँ ...पहली बार तुमसे कुछ माँगा है....पूरा एक साल तरसा हूँ...तुम्हारी मीठी आवाज़ सुनने के लिए'....राजेश उसके चेहरे से आँसू चाटते हुए बोला......

हवा भी मंद मंद चलने लगी ....लहरों ने धीमी गति अपना ली ...जैसे किसी सरगम की ताल पे चल रही हों...और कविता को बॅक ग्राउंड म्यूज़िक दे रही हो......

राजेश बस उसके चेहरे को निहार रहा था..........

'गाओ ना....प्लीज़....'

कविता का चेहरा शर्म से लाल पड़ गया...होंठ काँपने लगे .......

'क्या गाउ...'

'कुछ भी जो तुम्हारा दिल करे .....'

कविता ने धीरे से गाना शुरू कर दिया.....और राजेश उसकी मधुर आवाज़ में खोता चला गया.....

आपकी नज़रो ने समझा प्यार के काबिल मुझे
दिल की ऐ धड़कन ठहर जा, मिल गयी मंज़िल मुझे
आपकी नज़रो ने समझा.............

जी हमें मंजूर है आपका यह फ़ैसला
कह रही है हर नज़र बंदा परवर शुक्रिया
दो जहाँ की आज खुशिया हो गयी हाँसिल मुझे
आपकी नज़रो ने समझा.............

आपकी मंज़िल हूँ मैं, मेरी मंज़िल आप हैं
क्यो मैं तूफान से डरूँ मेरे साहिल आप हैं
कोई तूफ़ानो से कह दे, मिल गया साहिल मुझे
आपकी नज़रो ने समझा.............

पॅड गयी दिल पर मेरी आपकी परच्छाइया
हर तरफ बजने लगीं सैकड़ो शहनाईया
हँसके अपनी जिंदगी मे कर लिया शामिल मुझे
आपकी नज़रो ने समझा.............


राजेश.....वाह.....तुम्हारे होंठों पे तो सरस्वती वास करती है.........बहुत खूब.........कोयल से भी मधुर ......

कविता ....चलिए अब मज़ाक मत उड़ाइए मेरा.....

राजेश ने उसे अपनी बाँहों में ले लिया ....और उसके गेसुओ को सूंघने लगा ........वक़्त थम गया था....और दोनो वहीं खड़े एक दूसरे की बाँहों में खो गये थे.........

राजेश......मेरी कभी याद आई.....

कवि...हर पल हर लम्हा.....

राजेश.....फिर इतने दिन क्यूँ लगा दिए........

कवि....डरती थी....कुछ समझ नही आता था......जब भी सुनील भैया और सोनल भाभी को एक दूसरे के करीब देखती ...तुम्हारी बहुत याद आती थी .....लेकिन हिम्मत नही होती थी ....इस रिश्ते को अपनाने की .......लोग क्या कहेंगे.......

राजेश.......चलो छोड़ो पुरानी बातें...चलो मोम के पास बहुत खुश होंगी तुम्हें देख.........

राजेश कविता को ........विजय के रूम में ले गया....


कविता को देख ....आरती फूली नही समाई ......

आरती ...मेरी बहू आ गयी...........सुनो ...यहाँ कोई मंदिर होगा क्या...आज तो प्रसाद बँटवाउन्गी.....आ बेटी आ अपनी माँ के गले लग जा

कविता ....आरती के चरण छूने जा रही थी......पर आरती ने उसे रोक अपने सीने से लगा लिया .........

आरती तो कविता के वापस आने पे बौरा सी गयी थी ...पंख लग गये थे उसे ...और विजय अपने आँसू रोके आरती को खुश होता हुआ देख रहा था......

आरती ...ये तूने अपना गला क्यूँ नंगा रखा हुआ है .....और अपने गले से सोने का हार निकाल कविता को पहना देती है .....

कविता भाव विभोर हो ...मम्मी सब कुछ तो है ...फिर....

आरती ..बस बस चुप कर ....अपशकुन होता है अगर बहू जेवर ना पहने तो.......विजय खिलखिला के हंस पड़ा ....

विजय ...सब कुछ इसी का तो है...जब चाहेगी पहन लेगी ..ये क्या तुम अपने .....

आरती ...आप चुप रहो जी...माँ बेटी के बीच बोलने की ज़रूरत नही.....

विजय ...ठीक है यार नही बोलता...पर इस बाप को भी तो अपनी बेटी से मिलने दो...आवाज़ भर्रा गयी थी .......

कविता दौड़ के विजय के सीने से लग गयी ...

विजय लगभग रोते हुए...अब तो नही जाएगी ना अपने इस बाप को छोड़ कर...

कविता ...पापा...कभी नही कहीं नहीं........दोनो की आँखों से आँसू टपकने लगे ...बाप-बेटी का प्यार होता ही ऐसा है...

वक़्त अगर जख्म देता है तो उन्हें भरता भी है...यही देख रहा था राजेश...आज कितने अरसे बाद उसने अपने माँ बाप के चेहरे पे सच्ची खुशी देखी थी ....कविता की जुदाई ने उन्हें तोड़ दिया था..कहते कुछ नही थे पर उनके दर्द की चीत्कारें राजेश तक पहुँचती रहती थी और वो बेबस सा कुछ नही कर पाता था...

आरती ...सुनो जी ..चलो फटाफट....मार्केट जाना है.......

विजय....अरे सिटी सेंटर बहुत दूर है..कल चल देंगे...

आरती ...नही नही अभी चलो .....मुझे बहुए के लिए कुछ लेना है ....

अब विजय आगे कुछ नही बोल सकता था...चुप चाप फटा फट बाथरूम में जा कर कपड़े बदल के आ गया....

विजय.....राजेश सुनील को इनफॉर्म कर देना ..कविता बेटी हमारे साथ है..ऐसे ही परेशान होगा और इसे ढूंढता फिर रहा होगा....

राजेश ...मैं भी चलूं.....सुनील को तो रूबी ने बता ही दिया होगा...

आरती...नही जी तुम्हारा कोई काम नही है ....वहाँ....पापा ने जो कहा है वो करो और हमारा इंतेज़ार करो....

आरती कविता को ले कर विजय के साथ चली गयी........

और राजेश सोचने लग गया...कल कितनी उदास थी और आज कितना हँसीन है...वाह रे वक़्त तेरे खेल निराले.....

यययययययाआआआआआहूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ

उनके जाते ही राजेश ज़ोर से चिल्लाया ...पूरे होटेल में गूँज गयी होगी उसकी आवाज़.....फट से घुस गया बाथरूम में और शेव करने लगा ....कितने कितने दिन शेव नही करता था.....और एक अच्छी ड्रेस निकाल के पहनी अपने रूम में जा कर ........

फिर वो चल पड़ा रिसेप्षन की तरफ....सुनील के कमरे का पता करने........

रूबी जब सुनील के कमरे के पास पहुँची तो कुछ देर रुकी...अपनी सांसो को संयत किया ...और थोबडे पे 12 बजा लिए और ज़ोर से दरवाजा खटखटाने लगी....

सुनील हाल में ही बैठा था ...उसने दरवाजा खोला तो सामने रूबी को बदहवास हालत में देखा ......

सुनील....क्या रूबी इस तरहा......

रूबी दौड़ के सुनील से चिपक गयी...

'भैया वो कवि....वो.....बीच पे......'

सुनील घबरा गया ........क्क्क क्या हुआ कवि को?

'वो हमे छोड़ के चली गयी........'और उसके मोटे मोटे मगर्मच्छि आँसू टपकने लगे......

'कककककककककक्क्क्यययययययययययययाआआआआआअ सुनील ज़ोर से चीखा इतने में सुमन और सोनल हड़बड़ाती हुई अपने अपने बेड रूम्स से बाहर निकली.....

सुमन...क्या हुआ ....कवि को.....

रूबी ...बड़ी भाई वो.....आन न न......रोते हुए .....वो हमे छोड़ के चली गयी......

सुनील ..तुरंत बाहर भागने को हुआ.....

रूबी ....ने फट से उसे पकड़ लिया....कहाँ चले ....अब नही आएगी वो वापस ...गयी ....

सुनील...रूबी छोड़ मुझे ....कॉन सा बीच कहाँ हुआ हादसा ...ढंग से तो बता....

रूबी ....अब और क्या बताऊ...उसे जिसके साथ जाना था चली गयी....

सोनल....क्या ...नही नही कविता ऐसा नही कर सकती......वो ऐसी लड़की नही है....

रूबी....क्यूँ.....भाई मेरे जीजा जी के साथ गयी है...इसीलिए तो कह रही हूँ...अब वापस नही आएगी........हूऊऊहूऊऊऊओ वववओूऊऊऊव्ववववववववव

रूबी मस्ती में ज़ोर से चीखी...मेरी बहन का घर बस गया......और वो कमरे में डॅन्स करने लगी....

सुनील/सोनल/सुमन...मतलब....राजेश यहाँ है...और वो उसके साथ......

रूबी ..ने सोनल को खींच लिया ...पार्टी टाइम भाभी ....

सुनील....धम से सोफे पे गिर पड़ा .......मेरी तो जान निकाल दी....ऐसा करते हैं क्या.....अब कहाँ हैं दोनो..

रूबी...मैं तो दोनो को बीच पे छोड़ के आई थी...अब कहाँ होंगे ....पता नही ...आँखे नाचते हुए बोली........भाई आज तो पार्टी होनी चाहिए.....

थोड़ी देर सभी राजेश और कविता के बारे में बातें करते हैं........सबके चेहरे पे खुशी छा गयी थी...गम के जिन बादलों को सब छुपाया करते थे ताकि कविता दुखी ना हो...वो छेंट गये थे....

रूबी ने अब इन्हे अकेला छोड़ने का सोचा .......मैं चली मिनी भाभी को ये खुशख़बरी देने ......वो कमरे से चली गयी और उसके जाते ही सुनील ने सोनल को अपनी गोद में खींच लिया ......और अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए.....सोनल ने भी अपनी बाँहें उसके गले में डाल दी......


कुछ देर सोनल के होंठ अच्छी तरहा चूसने के बाद सुनील ने सुमन को अपनी तरफ खींच लिया और सुमन ने अपनी बाँहें उसके गले में डाल दी...दोनो कुछ पल एक दूसरे को देखते रहे और फिर दोनो को पागलपन का जैसे दौरा चढ़ गया ....एक दूसरे के होंठ चूस ही नही रहे थे ..खा भी रहे थे ...दोनो का बस चलता तो उखाड़ ही लेते एक दूसरे के होंठ...इस दर्द में भी एक लज़्ज़त थी जिसका मज़ा दोनो उठा रहे थे.......सुनील उठ खड़ा हुआ सुमन को गोद में उठाए हुए ...और बेडरूम की तरफ बढ़ने ही लगा था ...कि डोर बेल बज उठी......गुस्सा चढ़ गया सुनील को....सुमन उसकी गोद से नीचे उतरी....साड़ी से ही उसके होंठ सॉफ किए और हँसती हुई अंदर भाग गयी ...सोनल भी अपनी लिपस्टिक ठीक करने अंदर भाग ली और सुनील ने कोफ़्त खाते हुए दरवाजा खोला तो सामने राजेश खड़ा था.......

सुनील.....आओ देवदास आओ...मिल गयी पारो

राजेश .....सुनील की बात सुन झेंप गया ....

पीछे से सोनल.........

'आओ जीजा जी अंदर आओ ...ये तो ऐसे ही बोलते रहते हैं...'

राजेश अंदर आ गया .....

सुनील...बैठ ना यार ...क्यूँ शतुरमुर्ग की तरहा खड़ा है ....

राजेश बैठ गया ...तब तक सुमन भी आ गयी ......

राजेश ने सुमन के पैर छुए ....

सुमन ने उसे उठा गले लगा लिया .....'सदा खुश रहो'

सुनील...सोनल यार वाइन निकाल आज तो पार्टी टाइम है

सोनल...अभी लाई और अंदर चली गयी ...

सुनील ...और सुना क्या हाल हैं.....

राजेश ...वो मैं ये बताने आया था कि मम्मी और डॅड कविता को साथ ले कर सिटी गये हैं...आप लोग परेशान ना हो इसलिए....

सुनील....यार अब वो तेरी ज़िम्मेदारी है...मैं भला क्यूँ परेशान होने लगा...

सोनल नयी वाइन की बॉटल और दो ग्लास ले आई ...

सुनील...दो ग्लास ...तुम लोग...नही जाय्न करोगे ....आज तो मौका भी है दस्तूर भी ......

सोनल...नही जी ....आप दोनो ही नोश फरमाइए ...कुछ चाहिए हो तो बता देना .....

सुनील ये नही चलेगा ....आज तो पार्टी टाइम है फटा फट अपना और सूमी का ग्लास ले आओ....

राजेश जानता तो था कि सुनील की सुमन से शादी हो चुकी है ..पर यूँ अपने सामने निक नेम से बुलाना उसे कुछ अजीब लगा .......

सुनील..उसके भाव पढ़ गया .........यार अपनी बीवी को बुला रहा हूँ..किसी और को नही .......चिल कर...

सोनल और सुमन भी पास बैठ गये ...सोनल ने साकी का काम संभाल लिया और ग्लास में वाइन डाल दी....

एक साथ सबने चियर्स किया .....तो हॅपीनेस इन लाइफ ऑफ राजेश आंड कवि ...सुनील बोला ......

फिर सबने एक एक छोटा सीप लिया ....यूँ ही बातें चलती रही कभी राजेश के काम की कभी आरती और विजय की ...कभी सुनील और उसकी मॅरीड लाइफ की और आगे के प्लान की ......

राजेश ने इस मोके का फ़ायदा उठाने की सोची और विमल का ज़िकरा छेड़ बैठा..........

सुनील उसे कुछ जवाब देता कि राजेश का मोबाइल बज उठा ........विजय की कॉल थी ...उसने सब को बुलाया था......

हाथ में पकड़े जाम ख़तम कर सभी चल पड़े .......

विजय के कमरे में जब सब पहुँचे ...तो एक पल तो कविता को पहचान ही नही पाए ...बिल्कुल किसी अप्सरा की तरहा सजी सँवरी दुल्हन को भी मात दे रही थी....

सुमन ने उसकी बलाइयाँ ली और आरती से गले मिली ....सुनील और सोनल दोनो ने विजय और आरती के पैर छू उनका आशीर्वाद लिया...

विजय ...... अब ऐसा है कि राजेश और कविता के लिए मैने दूसरे होटेल में हनिमून सुइट बुक करवा दिया है ......
ये सुन कविता शरमा के सोनल के पीछे हो गयी .....

विजय आगे फिर बोला ....सुनील तुम्हारे लिए एनिवर्सरी सुइट भी एक और होटेल में बुक हो गया है.....

सुनील....जी ......

विजय ...मैं कुछ नही सुनूँगा ...जो कहा है वैसा करो ...रूबी और मिनी हमारे साथ रहेंगी इसी होटेल में..उन्हें घुमाना फिराना मेरी ज़िम्मेदारी है...

सुनील...पर वो दोनो हमारे बेगैर.......

आरती .....बड़े जो कहते हैं मान लेते हैं......

आरती को ना करने की हिम्मत किसी में नही थी ..........

विजय ने राजेश और कविता को रुखसत कर दिया और होटेल की सारी डीटेल्स राजेश को दे दी...आरती ने पूरा एक बॅग भर के शॉपिंग करी थी जिसे राजेश को लादना ही पड़ा ....

इनके जाने के बाद विजय सब को ले रूबी के कमरे में गया.....

विजय ...रूबी से ...बेटी तुम्हारा भाई इतने समय तक ...बस जिंदगी से लड़ता ही आ रहा है ..अब उसे फ्री कर दो ......कुछ तो सॅकन मिले उसे ...मैं हूँ ना तुम लोगो को घुमाने फिराने के लिए .....

रूबी...जी अंकल जैसा आप कहें....

विजय ...सुन लिया ..कितनी समझदार है मेरी बेटी ...अब तू फुट ले यहाँ से ...नज़र मत आना ....एक दिन पहले सब यहाँ इकट्ठे होंगे तब फॅमिली आउटिंग और पार्टी होगी.....

सुनील सर खुजाता निकल पड़ा और पीछे पीछे सुमन और सोनल भी आ गयी और समान पॅक होने लगा.....

राजेश और कविता करीब एक घंटे बाद मोटर बोट से अपने होटेल पहुँच गये ...रिसेप्षन पे राजेश गया रूम की के लिए तो रिसेप्षन क्लर्क ने उनका स्वागत किया और एक पोर्टर उनका सामान ले एक वॉटर बंग्लॉ में ले गया जो ...फूलों से सज़ा हुआ था और बिस्तर भी सुहाग सेज की तरहा सज़ा हुआ था. राजेश कविता को गोद में उठा कर अंदर ले गया
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07-20-2019, 09:26 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी

कविता को धीरे से बिस्तर पे बिठाने के बाद राजेश उसके चेहरे को निहारने लगा ...जैसे बरसों के प्यासे को ओस की चन्द बूँदें दिखाई दे गयी हों....कविता ने शर्म के मारे अपना चेहरा ढांप लिया अपने हाथों से ....राजेश ने धीरे से उसके हाथ हटाए और उसके लब गुनगुनाने लगे....

चौदहवीं का चाँद हो या आफताब हो
जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो

जुल्फे हैं जैसे कंधे पे बादल झुके हुए
आँखे हैं जैसे मय के प्याले भरे हुए
मस्ती है जिसमे प्यार की तुम वो शराब हो
चौदहवीं का चाँद हो.........

चेहरा है जैसे झील मे खिलता हुवा कंवल
या जिंदगी के साझ पे छेड़ी हुई .
जाने बहार तुम किसी शायर का ख्वाब हो
चौदहवीं का चाँद हो.........

होंठो पे खेलती हैं तबस्सुम की बिजलिया
सजदे तुम्हारी राह मे करती हैं कहकशां
दुनिया के हुसनो इश्क का तुम ही शबाब हो
चौदहवीं का चाँद हो.........

गुनगुनाते हुए राजेश धीरे धीरे कविता के सभी जेवेर उतारने लगा ..उनके लिए तो ये सुहाग रात ही थी ....कविता शरमाती सकुचाती रही .....और जब गाना ख़तम हुआ राजेश उसके और भी करीब आ गया ....दोनो की साँसे टकराने लगी....कविता के दिल की धड़कन आनेवाले पलों को सोच बढ़ गयी ...जिस्म के रोंगटे खड़े हो गये......होंठ कपकपाने लगे और राजेश ने धीरे धीरे झुकते हुए उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिए..


राजेश धीरे धीरे कविता के होंठों की लाली चुराने लगा .....और कविता की आँखें खुमारी में बंद होती चली गयी......कल कल करती समुन्द्र की लहरें बार बार बंग्लॉ के पिल्लर्स से टकरा रही थी ....अफ ये बेचैनी का आलम .....चारों तरफ फैलता जा रहा था ....उँची उँची उठती हुई लहरें जैसे चाँद से कह रही थी ...अपनी किर्नो को इस तरहा घूमाओ ...कि उस अप्सरा के बदन को छू कर हम पर गिरे और हमारे अस्तित्व को एक माइना मिल जाए.

दोनो का चुंबन गहरा होता चला गया...यहाँ ताकि की साँस लेना भी भूल गये बस एक दूसरे के होंठों का रस चुराने में लगे रहे......

कविता अपना जिस्म ढीला छोड़ चुकी थी ....वो जानी पहचानी तरंगे जो उसने पहली बार महसूस करी थी राजेश के साथ वो अपना सर उठा चुकी थी और उसके जिस्म में पल पल रोमांच बढ़ता जा रहा था ...दोनो इस कदर एक दूसरे में डूब गये कि सांस उखाड़ने लगी तब जा कर अलग हुए.... कविता हाँफती हुई बिस्तर पे पीछे लूड़क गयी ...........राजेश अपनी साँसे दुरुस्त करते हुए उठा और कविता जो नया सूटकेस लाई थी उसे खोल उसमे से उसके लिए एक अच्छी लाइनाये निकाल ली और उसे पकड़ा दी ताकि वो भारी कपड़ों से आज़ाद हो जाए.....कविता वो लाइनाये ले बाथरूम में घुस गयी और जब पहनी तो खुद को शीशे में देख शरमा गयी.....उफ्फ कैसे कैसे कपड़े पहनते हैं...सब दिख रहा है इसमे.....छि कैसे जाउ उनके सामने ......


जब ज़रूरत से ज़्यादा देर हो गयी तो .......राजेश समझ गया ...उसकी बीवी ....शर्म-ओ-हया की दीवारों में फस गयी है......वो उठ के बाथरूम के बाहर खड़ा हो गया ........बेगम साहिबा नाचीज़ आपके दीदार के लिए तड़प रहा है ......

अंदर कविता ......उईईइ माँ देखो कितने उतावले हो रहे हैं.......और दिल की धड़कनो को संभालते हुए बाहर दरवाजे तक आई ....और राजेश तो बेहोश होते होते बचा ...........उसकी ये हालत देख कविता को खुद पे गुमान हो आया ...कॉन बीवी नही चाहेगी कि उसका शोहार उसकी ताब के आगे जल ना जाए ........

राजेश के मुँह से सीटी निकल गयी और कविता शरमा के पलट गयी .....

'अरे अरे ....रात बाथरूम में गुजारने का इरादा है क्या' .....राजेश ने फट उसे खींच गोद में उठा लिया ....और कविता ने उसके गले में बाँहें डाल दी .......

'आज तो मेरा कतल हो कर ही रहेगा......' राजेश ने उसके माथे को चूमते हुए कहा

'धत्त' और मन में सोच यही रही थी ......कत्ल किसका होगा....ये तो मुझे मालूम है ....हाउ हाई ...मैं भी क्या सोचने लगी ...छि

'कवि तुम नही जानती तुमने मुझे मेरी जिंदगी वापस दे दी ...वरना मैं शायद ज़्यादा दिन .......'

'गंदी बातें मत बोलिए .....आप नही जानते मुझ पे क्या क्या गुज़री है ....' कवि की आँखें नम हो गयी .....

'अरे सॉरी ...मेरी जान की आँखें मेरी वजह से नम हो गयी......'

'मारूँगी...तंग करोगे तो...'

'ओए ओए ....मेरी शेरनी बोलने लगी.....'

कवि ने प्यार से राजेश की बाजू पे दो तीन थप्पड़ लगा दिए ....

'अहह' राजेश ऐसे चिल्लाया जैसे बहुत ज़ोर की लग गयी हो.......

'हाई राम.....आपको कोई चोट लगी है क्या.....'

'हां लगी तो है...पर बाजू पे नही दिल पे '

'उम्म्म' कवि ने राजेश की छाती पे चेहरा छुपा लिया .....और राजेश ने उसे बिस्तर पे बिठा दिया....

चाँद बादलो के पीछे छुपता बाहर निकलता और शरमा के फिर छुप जाता .....और राजेश ...तो बस उस चाँद को निहार रहा था ...जो उसकी नज़रों के सामने था ...उसकी दिलरुबा...उसकी शरीके हयात ...उसकी जान .....उसकी हर धड़कन का वजूद .......

'ऐसे मत देखो ...प्लीज़...'

'क्यूँ हम तो देखेंगे ...'

'लाज आती है ना....'

'ये लाज को आज डिब्बे में बंद कर दो ...और चलो मेरे साथ ...मिलन के उस रास्ते पे...जो हमे कभी जुदा नही होने देगा'

'आप तो पूरे बेशर्म हो....'

'बीवी से प्यार करना कब से बेशर्मी हो गयी....'

'छि मुझे तो शर्म आती है ना ......'

'किस बात से...'

'वो वो जो आप ....हाउ .....गंदे....'

'चलो आज हम पूरे गंदे हो जाते हैं......'

'ओउुउऊचह'

कविता चीख ही पड़ी जब राजेश के हाथों ने उसे मम्मो को छू लिया ........राजेश धीरे धीरे उसकी गर्दन को चूमने लगा और कवि का जिस्म शर्म के मारे अकड़ने लगा ...उसकी आँखें अपने आप ही बंद हो गयी......राजेश के हाथ उसके जिस्म पे घूमने लगे और कवि की सिसकियाँ निकलने लगी.........

गर्दन को चूमते हुए राजेश ने जब अपनी ज़ुबान उसके उरोजो की मध्य घाटी की शुरुआत पे फेरी तो कवि मचल उठी और अपने आप ही उसके हाथ राजेश के बालों से खेलने लगी ...उसकी आँखें कभी खुलती और कभी बंद होती ......

राजेश ने अपने कपड़े उतार लिए सिर्फ़ अंडरवेर में रह गया और झुक के कविता के पेट को चूम लिया....अहह सिसक उठी कविता उसके गर्म होठों का अहसास अपने पेट पर पा कर ......राजेश ने धीरे से उसकी लाइनाये की डोरी खोल दी और कविता के उरोज़ एक दम सामने आ गये .....शरमा कर कविता पलट गयी और राजेश के लिए तो ये अच्छा ही हुआ ....आराम से उसकी लाइनाये उतार डाली ......अब कविता सिर्फ़ पैंटी में थी ..........

शर्म और कामोउत्तेजना का मिला जुला कॉकटेल कविता के जिस्म को कपकपा रहा था......

राजेश धीरे धीरे कवि की पीठ पे चुंबन अंकित करने लगा ......और कवि हर चुंबन के साथ सिसक पड़ती ...............बहुत ही धीरे धीरे वो कवि की पीठ को चूमते हुए नीचे की तरफ बढ़ रहा था ....और कवि उत्तेजना में जलती हुई सिसकियाँ भर रही थी और अपनी एडियों को रगड़ रही थी ...........

राजेश जब सरकता हुआ उसकी कमर तक पहुँचा तो कविता से बर्दाश्त ना हुआ और वो बल खाने लगी ..........

फिर राजेश ने कविता को पलट दिया तो उसने अपनी आँखें बंद करते हुए अपनी जाँघो को कस के आपस में सटा लिया और जैसे ही राजेश के होंठ उसकी नाभि को छुए ...सिसकते हुए वो बिस्तर को मुठियों में भीचने लगी...

धीरे धीरे राजेश उपर बढ़ा और जैसे ही उसने कवि के निपल को अपनी ज़ुबान से छेड़ा .......अहह म्म्म्मा आआअ कविता ज़ोर से सिसकी और और अपने पैर पटाकने लगी .......निपल से उठती तरंगे कविता का हाल बहाल करने लगी ......

राजेश उसने निपल को चूसने लगा .........उूुउउइईईईईई माआआआआअ

कविता के निपल सख़्त और कड़े हो गये ........उसका जिस्म झंझनाने लगा



अहह हााईयईईईई उफफफफफफफफफफ्फ़ कविता की सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगी और खुली खिड़की से आती हुई हवाओं की साइं साइ के साथ मिल कमरे के महॉल को और भी उत्तेजक करने लगी......राजेश कभी एक निपल को चूस्ता तो कभी दूसरे को.....



फिर उसने दोनो उरोजो का मर्दन शुरू कर दिया और ज़ोर ज़ोर से कविता के निपल चूसने लगा...

अहह सीईईईईईई आआअहह सस्स्सिईईईईई उफफफफफ्फ़

कविता ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी .....और तड़प के उसने राजेश के सर को अपने उरोज़ पे दबा डाला ........

राजेश का लंड अंडरवेर फाड़ के बाहर आने को तयार हो चुका था और उसे अंडर वेर में तकलीफ़ हो रही थी....

उसने कविता को छोड़ा और अपना अंडरवेर उतार फेंका ....कविता की नज़र जब उसके लंबे मोटे लंड पे पड़ी तो घबरा के आँखें बंद कर ली.........राजेश ने झुक कर पैंटी के उपर से ही उसकी चूत को छुआ .... अहह
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07-20-2019, 09:26 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
कविता सिसकी और अपनी जांघे एक दूसरे से चिपका ली...पर राजेश उसकी चूत को ऐसे ही चूमता रहा फिर उसने कविता की पैंटी उतार डाली......

शर्म के मारे कविता का बुरा हाल हो गया ......दिल की धड़कने बढ़ गयी..........जिसमे घबराहट के मारे पसीने पसीने हो गया .........

राजेश ने उसकी जाँघो को फैलाया और उसकी चूत पे ज़ुबान फेरने लगा....

अहह उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ कविता मचलते हुए सिसकने लगी और बिस्तर को खींचने लगी.....



जिंदगी में पहली बार ऐसी ऐसी तरंगे उठ रही थी कवि के बदन में ......जिन्हें समेटना उसके बस में ना रहा और ........मचलते हुए वो अपने पहले चरमोत्कर्ष की और तेज़ी से अग्रसर होने लगी.....

अहह मुझे कुछ हो रहा है है....ओह माआआआआआआआ

कमान की तरहा उसका जिस्म उठ गया और वो राजेश के मुँह पे झड़ने लगी............राजेश उसके प्रेम रस को पीने लगा.....

कविता का जिस्म निढाल हो बिस्तर पे गिर पड़ा.......

राजेश उठ के उसके पास लेट गया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया.....

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सुनील का होटेल कुछ ज़्यादा दूर था एक छोटे आइलॅंड पे बना एक बुटीक होटेल जिसके पास एक ही वॉटर बंग्लॉ था जो इनके लिए बुक था और ये बंग्लॉ भी फूलों से सज़ा हुआ था...बस बिस्तर सुहाग सेज की तरहा नही सज़ा था...लेकिन इस बंग्लॉ में एक लिविंग रूम और 2 बेडरूम थे .....विजय कहाँ तक सोचता है ये देख सुनील के चेहरे पे मुस्कान आ गयी .....सुनील के बंग्लॉ में प्राइवेट पूल था जो इस वक़्त लाइट्स से जगमगा रहा था



बंग्लॉ में पहुँचते ही सोनल ने सारी लाइट्स ऑफ कर दी....कुछ बड़ी कॅंडल्स वहाँ कोनो में रखी हुई थी उन्हें जला दिया ...वो पूरी मस्ती में आ चुकी थी.......और थिरकते हुए गाने लगी .....जिसका मज़ा दोनो सुनील और सुमन लेने लगे.....

रात अकेली है, बुझ गए दिए
आके मेरे पास, कानो.न मे.न मेरे
जो भी चाहे कहिए, जो भी चाहे कहिए,
रात अकेली है, बुझ गए दिए
आके मेरे पास, कानो.न मे.न मेरे
जो भी चाहे कहिए, जो भी चाहे कहिए

तुम आज मेरे लिए रुक जाओ, रुत भी है फुरसत भी है
तुम्हें ना हो ना सही, मुझे तुमसे मुहब्बत है
मोहब्बत की इजाज़त है, तो चुप क्यू रहिए
जो भी चाहे कहिए,
रात अकेली है, बुझ गए दिए
आके मेरे पास, कानो.न मे.न मेरे
जो भी चाहे कहिए, जो भी चाहे कहिए

सवाल बनी हुई दबी दबी उलझन सीनों में
जवाब देना था, तो डूबे हो पसीनो. में
ठानी है दो हँसीनों में, तो चुप क्यूँ रहिए
जो भी चाहे कहिए,
रात अकेली है, बुझ गए दिए
आके मेरे पास, कानो.न मे.न मेरे
जो भी चाहे कहिए, जो भी चाहे कहिए...

थिरकते हुए गाते हुए सोनल ने सूमी को भी साथ में खींच लिया और स्ट्रिपटीज़ शुरू कर दी....सूमी ना कर रही थी..पर सोनल मानी नही ...और दोनो थिरकते हुए धीरे धीरे स्ट्रिपटीज़ करती रही जब तक ब्रा और पैंटी में नही रह गयी .......उसके आगे सोनल ने जान भुज के ना अपने इननेर्स उतारे और ना ही सूमी को उतारने दिए ....ये काम उसने सुनील पे छोड़ दिया था.......सुनील ने वहाँ पड़ी शॅंपेन की बॉटल खोली और दोनो पे छिड़कने लगा.

सुनील कभी सोनल के जिस्म से शॅंपेन चाटता तो कभी सूमी के जिस्म से ....सोनल सुनील को धक्का दे बाहर पूल में कूद गयी...सुनील ने फट से अपने कपड़े उतारे और वो भी पानी में कूद गया और इससे पहले सोनल तैर कर आगे भागती ...सुनील ने उसे क़ब्ज़े में ले लिया और दोनो का स्मूच शुरू हो गया...


सुमन भी पीछे से आकर सुनील से चिपक गयी .....सोनल ने सुनील को छोड़ दिया और सुनील ने सूमी को अपने पास खींच लिया ...ये दोनो गहरे चुंबन में डूब गये और सोनल पूल से बाहर निकल गयी ......अपने ब्रा और पैंटी उतार दोनो के उपर फेंक दी और लहराती बल खाती अंदर लिविंग रूम में जा कर शेम्पेन के ग्लास तयार करने लगी..तीन पेग तयार कर वो बाहर आ गयी और दोनो को एक एक पेग पकड़ा खुद वहीं पूल के किनारे अढ़लेटी हल्की हल्की चुस्कियाँ लेने लगी.....

सुनील ने सूमी की ब्रा और पैंटी भी उतार फेंकी ....ये देख सोनल पूल में कूद गयी और सुनील का अंडर वेर खींच उतार डाला......अब तीनो बिना किसी वस्त्र के एक दूसरे से चिपक गये .......कभी सुनील सुमन को चूमता तो कभी सोनल को........पूल के नीचे लगी लाइट्स इनकी मस्ती को और बढ़ा रही थी ........सुनील सोनल को गहरा स्मूच देने लगा तो सूमी पीछे से सोनल के साथ सट गयी और अपनी निपल उसकी पीठ पे रगड़ते हुए उसके उरोज़ मसल्ने लगी ...

कुछ देर यूँ ही पूल में मस्ती करते रहे फिर पूल से बाहर निकल आए क्यूंकी चारों तरफ अंधेरा छा चुका था और ऐसे समय में ज़्यादा देर पूल में रहना भी ठीक नही था....वहीं पास पड़ी लोंग चेर्स पे रखे हुए टवल्ज़ उठाए और तीनो ने खुद को पोन्छा फिर अंदर चले गये....

सोनल ने फिर से पेग बनाए और दोनो को पकड़ा दिए ........

सोनल.....आज कितना खुशी का दिन है.......हर बार पता नही कुछ कुछ हो जाता था...पूरा साल ऐसे ही गुजरा.....चियर्स टू और गुड टाइम्स

सुनील...उसे अपनी गोद में खींचते हुए....वक़्त से डरना चाहिए जानेमन..पता नही कब क्या हो जाए.....

सोनल....देखो ना दीदी कैसी बातें करते हैं...क्या हमे खुश रहने का भी हक़ नही ....

सूमी ...कह तो ये ठीक ही रहा है ना ...जिंदगी दोनो रंग दिखाती है ...कभी खुशी कभी गम

सोनल...मैं आज बहुत खुश हूँ...अब मूड मत ऑफ करना आप दोनो.....कविता सेट्ल हो गयी ...और अंकल ने देखो किस तरहा रूबी और मिनी को घूमने की ज़िम्मेदारी ले कर हमे एक दम अलग कर दिया ताकि हम लोग अपनी एनिवर्सरी अपने ढंग से अकेले मना सके .......

सुनील ...तो इतनी दूर क्यूँ है इधर आ ...........और सोनल को खींच उसके होंठ चूसने लग गया



सूमी...मैं जा रही हूँ सोने.......

सोनल एक दम अलग हुई सुनील से .......आई है ...मैं जा रही हूँ सोने ....कहीं नही जा रही आप....आज हम तीनो की रात है...हमारी एनिवर्सरी की रात है.......

सूमी........मेरी एनिवर्सरी तो निकल चुकी गुड़िया

सुनील..........जान आप ही बताओ ...मैं क्या करता ...जो हालत....

सुमन दौड़ के उसके पास आई और अपनी बाँहों में समेट लिया .....मैं कोई गिला नही कर रही .......बस इतना कह रही हूँ ...ये रात तुम दोनो की है

सोनल.....नही दीदी ...माना देर हो गयी कुछ ...पर ये रात हम तीनो की है .......अब ये भी क्या करते ...एक तरफ कवि.....

सुमन....तू पागल है क्या ....क्या मैं नही जानती ये कितना प्यार करता है मुझ से ....छोड़ो इन बातों को ....चलो बेड रूम में चलते हैं .....यहीं रात गुजारनी है क्या ....

सुनील ....जब रात हमारी है...आस पास कोई भी नही तो फिर खुल के क्यूँ ना इस रात का मज़ा लें ........देखो यहाँ से दूर तक फैला समुद्र और उसपे उछल कूद करती चाँदनी कितना सुहावना मंज़र बना रही हैं

सुनील ने सुमन को भी अपनी गोद में खींच लिया अब उसकी एक जाँघ पे सुमन थी और दूसरी पे सोनल.......

तीनो के होंठ एक साथ एक दूसरे की तरफ बढ़े और और तीनो के होंठों का संगम देखने वाला था...तीनों की ज़ुबाने बाहर निकल एक दूसरे से मिलने लगी और सुनील के हाथ फिसलते हुए दोनो के मम्मो पे चले गये ....एक साथ वो दोनो के मम्मे मसल्ने लगा.

अहह उम्म्म्मम दोनो ही सिसक पड़ी और सुनील के लंड को सहलाने लगी .........काफ़ी देर तक तीनो एक दूसरे को चूमते रहे और दोनो के मम्मे मसलता रहा .......

फिर सोनल और सुमन ने एक साथ सुनील के लंड पे धावा बोल दिया और उसे चाटने और चूसने लगी.....

अब सुनील की बारी थी सिसकने की .....दोनो औरतों के गरम होंठों का अहसास अपने लंड पे पा कर वो मचल उठा ......
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07-20-2019, 09:26 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
दोनो बड़ी शिद्दत से सुनील का लंड चूस रही थी ......और सुनील ...आँखें फाड़ते हुए उसके बालों को सहला रहा था....

दोनो के होंठों की गर्मी को सुनील ज़्यादा देर तक ना सह सका ....उूुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ एक चीख के साथ वो झड़ने लगा और सोनल और सूमी में तो होड़ लग गयी कॉन कितना उसके वीर्य को अपने गले में उतार ता है............कुछ बूंदे सूमी के गालों पे टपक पड़ी और कुछ सोनल के ....दोनो ने एक दूसरे के गाल चाटे ...उसके वीर्य को गटक लिया ..........सुनील काफ़ी दिनो बाद इतने बड़े ऑर्गॅज़म से गुजरा था ...वो सोफे पे निढाल पड़ गया .........

दोनो ने फिर भी उसे नही छोड़ा और दोनो उसके एक एक निपल को चाटने लगी और अपने नर्म हाथों से उसके लंड को सहलाने लगी...जो धीरे धीरे अपने आकार में फिर लोटने लगा

सुनील को फिर मस्ती चढ़ने लगी और वो सोनल पे टूट पड़ा ....उसके एक उरोज़ को मुँह में भर लिया .....दूसरी तरफ से सूमी ने भी सोनल के दूसरे निपल को चूसना शुरू कर दिया ....सोनल के निपल्ल को चूस्ते हुए सुनील सूमी के उरोज़ को मसल्ने लगा .....

अहह उफफफफफफफ्फ़
दोनो के होंठों से मिलता हुआ दोहरा अहसास सोनल को तड़पाने लगा ....और वो ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी.........

सूमी साथ साथ सोनल की चूत भी रगड़ने लगी ...ये तीसरा हमला सोनल सह ना सकी............और उसने सूमी को खींच अपने होंठ उसके होंठों से सटा दिए ....दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने लगी और सुनील उसके निपल को चूस्ते हुए दूसरे उरोज़ को मसालने लगा ......

सूमी ने सोनल की चूत में सीधा दो उंगलियाँ घुसा डाली .........दर्द के मारे सोनल ने सूमी के होंठ काट लिए ...........

सुनील अब सूमी के कड़े निपल को चूसने लगा और सोनल के उरोज़ को मसल्ने लगा .............

सुनील का लंड इतना सख़्त हो चुका था कि उसे दर्द का आभास होने लगा ........अब उसे शिद्दत से चूत की ज़रूरत थी ..पर उसने खुद पे काबू रखा ....काफ़ी देर तक दोनो सोनल के बदन से खेलते रहे जब तक वो चीखते हुए झड ना गयी और निढाल पड़ गयी.........

सुनील फिर सूमी के होंठ चूसने लगा और उसके निपल अपनी उंगलियों में दबा के मसल्ने लगा .....

अहह सूमी की सिसकी सुनील के होंठों में ही दब के रह गयी.....

सूमी इतनी देर में काफ़ी गरम हो चुकी थी ........उसकी चूत रस टपका रही थी और उसका बदन मचलने लगा.........

सुनील ने सूमी को सोफे पे झुकाया और पीछे से उसकी चूत में लंड घुसा डाला.....

ओह म्‍म्म्मममाआआअ सूमी ज़ोर से चीखी .............जिसे सुन सोनल की आँख खुल गयी और वो फट से सूमी के नीचे आ गयी और उसकी चूत को चाटने लगी ......

सूमी भी चुदते हुए उसकी चूत चाटने लगी...



सुनील सतसट सूमी को चोदने लगा ........अहह अहह उम्म्म्ममम सूमी ने सोनल की चूत से अपना मुँह हटा लिया और ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी ....

ओह सुनिल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल फक मी हार्ड......अहह ईईसस्सस्स तेज और तेज........अहह फाड़ दो मेरी चूत.......

सुनील के धक्के इतने तेज हो गये कि सोनल को बीच से हटना ही पड़ा .....और वो अलग हो दोनो की चुदाई देखने लगी........फिर उससे रहा नही गया और वो सूमी के होंठ चूसने लगी .....

अहह म्‍म्म्मममाआआआआआआआआआअ

सूमी की चीख सोनल के मुँह में ही दबी रह गयी........और वो झड़ते हुए सोफे पे गिर सी गयी..........सुनील अभी तक नही झडा था ....वो सोनल को उठा अंदर कमरे में ले गया और ताबड तोड़ उसे चूमते हुए अपना लंड उसकी चूत में घुसा डाला........

झटका इतना तेज था कि सोनल की चीख निकल गयी.....आाआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

लेकिन सुनील नही रुका और तेज़ी से सोनल को चोदने लग गया....पागलपन सा सवार हो गया था सुनील पे



सोनल ने अपनी टाँगें घुटनो से मोड़ ली और सुनील के लंड को अंदर तक लेने लगी........

ओह डार्लिंग ...फक मी.....चोदो और ज़ोर से चोदो....

अहह कमरे में सोनल की सिसकियाँ फैलने लगी............


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राजेश के सीने में सर छुपाए कवि ने अपनी लाज का घुँगट ओढ़ लिया ......राजेश.........उसकी छाती के बालों से खेलते हुए वो पुकार उठी....

'ह्म्म' राजेश उसकी पीठ को सहलाते हुए बोला....

'तुमने पूछा ही नही क्यूँ मैं......'

'जो बातें दर्द से जुड़ी हो उन्हें पीछे छोड़ देना ही अच्छा होता है .....मुझे और क्या चाहिए...तुम वापस आ गयी .....मेरे लिए ये ही बहुत है - चलो तुम्हें कुछ दिखाता हूँ...कविता ने अपनी लाइनाये पहन ली और हैरानी से राजेश को देखने लगी ....वो तो यही सोच रही थी कि राजेश अब आगे बढ़ेगा ....पर उसका सयम देख वो उसकी कायल हो गयी

राजेश ने अपना अंडरवेर पहन लिया और उसे बाहर हट में बने लॉन पे ले आया ............दूर दूर तक फैला समुद्र और उसपे खेलती हुई चाँदनी सॉफ सॉफ नज़र आ रही थी.......राजेश उसके पीछे उसके साथ चिपक गया और समुद्र पे खेल ती चाँदनी की तरफ इशारा करते हुए बोला........

'देखो ....हमे लगता है कि चाँदनी समुद्र के जल पे नृत्य कर रही है ......पर असल में ये दो प्रेमी हैं जो एक दूसरे से जुदा होते हुए भी जुदा नही होते .......तभी तो समुद्र की लहरों में उफ्फान तब आता है जब चाँद नज़र आता है........क्यूंकी समुद्र अपनी लहरें उछल चाँद को छूने की कोशिश करता है......बिल्कुल उसी तरहा जैसे एक साल हम दूर भी थे और करीब भी थे'

कवि...एक बात कहूँ ......

राज......हां बोलो....

कवि ...मैने सुना है ......."दा पर्फेक्ट गाइ ईज़ नोट दा वन हू हॅज़ दा मोस्ट मनी ऑर दा मोस्ट हॅंडसम वन यू’ल्ल मीट. ही ईज़ दा वन हू नोज हाउ टू मेक यू स्माइल आंड विल टेक केर ऑफ यू ईच आंड एवेरिडे अंटिल दा एंड ऑफ टाइम".... और मेरी जिंदगी में आप वही दर्जा रखते हो ......बहुत नाराज़ हूँ आप से .....

राज....अरे.....ऐसा क्या कर दिया मैने .....

कवि .....कुछ किया नही इसीलिए तो नाराज़ हूँ....एक बार भी मुझे रोकने की कोशिश नही करी ...एक बार भी मुझे वापस नही बुलाया...एक बार ये नही पूछा मैं क्यूँ चली आई ....क्या एक पल में सारे हक़ जो आपके मुझ पे थे वो ख़तम हो गये ?

राज....कवि ....अब क्या कहूँ....अब इसमे मेरी ग़लती हो भी सकती है और नही भी ...बस देखने के नज़रिए पे सब लागू होता है......ऐसे तो मैं भी तुम से पूछ लेता ...बिना मुझसे मिले ..बिना कोई बात किए तुम चली क्यूँ गयी थी....उस वक़्त शायद हम दोनो को ही एक दूसरे की बहुत ज़रूरत थी.......पर उस वक़्त ना मैं तुम्हें समझ सका और ना ही तुम मुझे ....देखा जाए तो हम दोनो की असल जिंदगी की शुरुआत तो आज से हुई है .......

कवि......हां पर अगर रूबी आपको देख ना लेती और मुझे खींचते हुए आप तक ना लाती ...तो आप तो नही आनेवाले थे ना मुझे लेने ....कितनी आसानी से कह गये थे ......"मैं अब कभी भी ना तुम्हें किसी तरहा तंग करूँगा और ना ही मिलने की कोशिश करूँगा....पर हां ...मैं इंतेज़ार करूँगा तुम्हारा जिंदगी की आखरी साँस तक"

राज....कवि सच में मेरे पास कोई रास्ता नही था उस वक़्त ...मैं तुम्हारे दिल को किसी तरहा ठेस नही पहुचाना चाहता था......जो उस वक़्त हुआ ...उसका झटका तुम्हें भी लगा था और मुझे भी ......अगर उस रात सुनील ने मुझे रोका नही होता ...तो शायद ....शायद मैं आज इस दुनिया में होता ही नही ......जब एक लड़के को ये पता चले ...कि वो एक नजाएज औलाद है ...और रेप का रिज़ल्ट है ....तो तुम सोच सकती हो क्या गुज़री होगी मुझ पर ...और जिसकी गोद में सर रख मैं उस वक़्त रोना चाहता था...उस से भी नियती ने मेरा रिश्ता बदल डाला.....हम दोनो को एक ही आदमी का खून बना डाला ......शायद उस वक़्त हम दोनो ही कुछ समझने के काबिल ना थे ....हम दोनो को ही वक़्त चाहिए था....इस तुफ्फान से गुजरने के बाद खुद को समझने के लिए .......

कवि....शायद आप ठीक कह रहे हो....जानते हो सारी जिंदगी मैं बाप के प्यार को तरसती रही ....माँ जिंदगी से लड़ते लड़ते थक गयी और एक दिन मुझे छोड़ के चली गयी...उस दिन बहुत रोई थी मैं..कोई अपना नही था मेरे पास ...पर माँ जाने से पहले मेरे बाप को चिट्ठी लिख गयी ....जो सुनील भाई के हाथ लगी और वो मुझे लेने आ गये ....वहाँ मुझे माँ, बहन,भाई और भाभी सबका प्यार मिला पर फिर भी बाप के प्यार को तरसती रही ...फिर आप मेरी जिंदगी में आए और मुझे प्यारे से पापा मिल गये ...और फिर ये तूफान आ गया ..जिसने मुझे तोड़ के रख दिया था....बड़ी भाभी जो मेरी माँ ही हैं वो, सोनल भाभी और सुनील भैया ना होते तो मैं बिखर गयी होती वजूद तक मिट गया होता मेरा......

राज....बस जान ....ये तुफ्फान आना था आ कर चला गया ....अब मैं हूँ और तुम हो ....मेरा वादा है तुमसे...जिंदगी भर पलकों पे बिठा के रखूँगा ......

कवि.....सच मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ जिससे आप मिले ..विजय पापा मिले और ममता की मूर्ति आरती मम्मी मिली .....और मुझे कुछ नही चाहिए जिंदगी में......

राज.....ग़लत बात तुम बड़ी ना-इंसाफी कर रही हो ...सुनील और अपनी भाभियों से ...अगर वो तुम्हारी ज़िम्मेदारी नही उठाते...तो शायद हम कभी मिल ही नही पाते ....हर रिश्ते का अपना एक आधार होता है ..उसका एक वजूद होता है ..उसकी एक मर्यादा होती है ......उसमे एक अलग ही अपना पन होता है .....

कवि....यू नो ..यू आर वेरी स्वीट, दट'स व्हाई आइ लव यू फ्रॉम दा कोर ऑफ माइ हार्ट .....

हल्की हल्की बारिश की बूंदे शुरू हो गयी ....और चाँदी रात में कवि के चेहरे पे गिरती फिसलती बूंदे उसके रूप को और भी निखारने लगी....

बारिश की मचलती बूँदों ने कवि के अरमान जगा दिए और वो बारिश में घूमते हुए थिरकने लगी और राजेश उसकी चोंध में खोते हुए गुनगुनाने लगा

बहोश-ओ-हवास में दीवाना
यह आज वसीयत करता हूँ,
यह दिल यह जान मिले तुमको
में तुमसे मोहब्बत करता हूँ

मेरे जीतेज़ी यार तुम्हे
मेरी सारी जागीर मिले
वो ख्वाब जो मेने देखे हैं
उन ख्वाबों की तबीर मिले,
हर एक तमन्ना के बदले
में आज यह हंसरत करता हूँ
यह दिल यह जान मिले तुमको
में तुमसे मोहब्बत करता हूँ

मेरी आखों में नींद नहीं
मेरे होठों पे प्यास नहीं
हर चीज़ तुम्हारे नाम हुई
अब कुछ भी मेरे पास नहीं
तुमने तो लूट लिया मुझको
में तुमसे शिकायत करता हूँ यह दिल यह जान मिले तुमको
में तुमसे मोहब्बत करता हूँ
बहोश-ओ-हवास में दीवाना...

कवि बारिश में थिरकति रही और राजेश गुनगुनाता रहा .....जब राजेश का गुनगुनाना बंद हुआ तो कवि हाँफती सी उसके साथ लिपट गयी .....कवि का दिल यही कर रहा था कि वक़्त यहीं रुक जाए और वो राजेश की बाँहों में यूँ ही जिंदगी गुज़ार दे.....

कवि की साँस जब संभली तो राजेश ने उसके चेहरे को अपने हाथों में थाम उसकी झील सी गहरी आँखों में झाँकना शुरू कर दिया ...शरमा के कवि ने नज़रें झुका ली और राजेश के होंठ आगे बढ़ते गये जब तक वो कवि के होंठों से मिल नही गये...बिजली कोंध गयी कवि के जिस्म में और उसके कस के खुद को राजेश से चिपका लिया

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सूमी की साँसे जब संभली तो वो भी पीछे पीछे कमरे में आ गयी और दोनो के पास लेट गयी ......दोनो की चुदाई देख सूमी फिर गरम होने लगी......

सुनील जितनी तेज़ी से सोनल को चोद रहा था....वो ज़्यादा देर ना टिक पाई और झड गयी ...फिर सुनील ने अपनी पोज़िशन बदली और लेट के सूमी को अपने उपर ले लिया.....सूमी अपनी टाँगें फैला धीरे धीरे उसके लंड पे बैठने लगी और अपनी चूत में लेने लगी ......सोनल अपने टाँगें फैला सुनील के चेहरे पे बैठ गयी और अपनी चूत चटवाने लगी ........

सोनल और सूमी आमने सामने थी और दोनो के होंठ आपस में जुड़ गये.......



सूमी ...सुनील के लंड पे उछलते हुए सोनल के होंठ चूस रही थी और अपने होंठ चुस्वा रही थी.......दोनो के बीच की शर्म कब की ख़तम हो चुकी थी ....अब उन्हें एक दूसरे के जिस्म से खेलना भी अच्छा लगने लगा था............

सोनल की चूत में सुनील अंदर तक अपनी जीब घुसा रहा था और सोनल भी अपनी चूत उसके मुँह पे दबा और रगड़ रही थी........तभी सूमी ने सोनल के होंठ छोड़े और उसके निपल को चूसने लग गयी ......
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07-20-2019, 09:26 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
सुनील तेज़ी से सोनल की चूत चूस रहा था .......कभी उसकी चूत एक लब को सख्ती से चूस्ता तो कभी दूसरे को और अपनी ज़ुबान से उसे चोदने में लगा हुआ था .....

अहह उफफफफफफफफफ्फ़ उूउउइईईईईईईईई

सोनल ज़ोर ज़ोर से सिसक रही थी.........

सूमी भी अपने चर्म की तरफ तेज़ी से बढ़ रही थी..... उसने सोनल के निपल को छोड़ दिया और तेज तेज सिसकियाँ भरने लगी ....

पूरे कमरे में सूमी और सोनल की सिसकियाँ गूँज रही थी ....सोनल से और ज़्यादा देर तक ...अपनी चूत में उफ्फनती हुई तरंगों को और बर्दाश्त ना कर पाई और अपनी चूत को सुनील के मुँह पे दबा झड़ने लगी............सुनील लपलप उसका रस पी गया और सोनल उसके उपर से हट के बिस्तर पे गिर पड़ी ......

सुनील भी हाँफने लगा उसके हटने के बाद क्यूंकी सोनल ने सख्ती से उसके सर को अपनी चूत पे दबा रखा था.....

सूमी भी ...सुनील के लंड पे उछलती उछलती थक गयी थी और सोनल के हटते ही वो सुनील पे गिर पड़ी........और हाँफने लगी...

कुछ देर बाद सुनील ने पलटी मारी और सूमी को अपने नीचे ले लिया ...उसका लंड अभी भी सूमी की चूत में घुसा हुआ था....

सूमी ने अपनी बाँहों का हार सुनील के गले में डाल दिया और उसके कान में फुसफुसाई.......'अब तो मुझे बेटा दे दो......अब किस बात का डर ...सारी दुनिया में तो एलान कर चुकी हूँ...अपनी शादी का ...'

सुनील....स्वीट हार्ट ...रूबी की शादी हो जाने दो ...फिर हम तीन और हमारे 4 ......

सूमी .....उसका मेरे बेटे से क्या मतलब...होती रहेगी उसकी उसकी शादी ...मुझे अब छोटा सुनील चाहिए जल्दी अपनी गोद में........प्लीज़ मान जाओ ना .....

सोनल जो सब सुन रही थी ......हम तीन और हमारे दो......एक एक ही ढंग से पाल लें तो गनीमत है ....

सुनील...अरे ये सब बाद की बातें हैं....इतनी जल्दी भी क्या है....

सूमी ...मुझे है ना ...समझा करो .....प्लीज़ प्लीज़ ...मेरा सोनू ...मेरी जान ..मान जाओ ना ....

सोनल...मान जाइए ना .....देखो दीदी के पास इतना वक़्त नही है और जब शादी डिक्लेर हो चुकी है तो जाहिर है माँ तो बनेगी ही ना.....फिर देरी कर के कॉंप्लिकेशन्स को मौका क्यूँ देना......

सुनील........इस टॉपिक पे कल बात करें.......

सोनल.....हज़ूर मौका भी है दस्तूर भी और दो दिन में दीदी का फर्टाइल पीरियड भी शुरू हो जाएगा ...........कितना अच्छा लगेगा जब प्यारा सा गोलू सा छोटा सुनील हमारी गोद में खेलेगा ...........प्लीज़ डार्लिंग मान जाओ ना .....जो मुश्किल थी वो सॉल्व हो चुकी है ....अब क्या डरना किसी से ...

सुनील ...गौर से सूमी को देखने लगा .....

सूमी की आँखें नम हो चुकी थी ...वो आस भरी नज़रों से सुनील को देख रही थी........

सुनील ने अपने होंठ सूमी के होंठों से सटा दिए और अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा .....



अहह सस्स्सुउुउउनन्निईल्ल्ल्ल हहाआंणन्न् कककाअरर द्दूव न्न्नाअ

'जैसी तुम्हारी मर्ज़ी ....खुश अब........'

'उम्म्म्मम लव यू...लव यू...लव यू....'

'एक बार सोच ज़रूर लेना अच्छी तरहा....'

'सब सोच लिया ...अब तो यहाँ से प्रेग्नेंट हो कर ही निकलूंगी......लव मी डार्लिंग...जस्ट लव मी...'

और सुनील ने तेज़ी से लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया ....

अहह ज़ोर से ....अपनी गान्ड उसी लय में उछालती हुई सूमी बोली......

सुनील के धक्के भी तेज होते चले गये और जितनी तेज से वो सूमी को चोदता ..उतनी ही तेज़ी से सूमी भी अपनी गान्ड उछाल उसका साथ देती ....

फॅक फॅक फॅक फॅक ...ठप ठप ठप का संगीत कमरे में गूंजने लगा ......


दोनो थक भी चुके थे और जिस्म पसीने से भर चुके थे .......दोनो की भयंकर चुदाई का पागलपन कुछ देर और चला और फिर दोनो एक दूसरे को कसते हुए चिपक गये और एक साथ झड़ने लगे.........

इसके बाद तीनो एक ही कमरे में सो गये ...नयी सुबह के इंतेज़ार में जो इनकी जिंदगी को नया रुख़ देने वाली थी.

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राजेश....कवि अंदर चलो ...बहुत भीग ली हो...बीमार ना पड़ जाओ ....

कवि ....तुम हो ना साथ ...फिर किस बात की चिंता ...आइ लव रेन्स यू नो ...बारिश जब भी आती है दिल करता है मोर की तरहा मेरे पंख निकल जाएँ और मैं थिरकति रहूं....

राजेश कवि को गोद में उठा के अंदर ले गया .....दोनो के कपड़े बुरी तरहा भीग चुके थे ......राजेश तो था ही अंडरवेर में....उसने अपना गीला अंडरवेर उतार फेंका.....कवि ने शर्म के मारे नज़रें फेर ली .......

राजेश यूँ ही बाथरूम में घुस गया और जल्दी शवर ले कर बाथगाउन पहन के बाहर आ गया .....

उसके बाहर आने के बाद कवि बाथरूम में घुस्स गयी ...उसने भी शवर लिया और वो भी बाथगाउन पहन कर ही बाहर आई .......

कवि फिर खिड़की खोल बाहर अपने हाथ घुमाने लगी और बारिश का मज़ा लेने लगी .....राजेश यूँ ही उसे बिस्तर पे बैठे देखता रहा ...कवि के चेहरे पे छाई खुशी ही राजेश के लिए सब कुछ था .......अपने मन में उमड़ती जिस्मो के मिलन की भावना को उसने कुचल डाला क्यूंकी वो जल्दबाज़ी नही करना चाहता था.........

करीब दस मिनट कवि ऐसे ही बारिश से खेलती रही ...यहाँ तक की बाथगाउन जो पहना था वो भी भीग गया .....

राजेश बिस्तर से उठ कमरे में बने बार काउंटर पे गया और अपने लिए वाइन एक ग्लास में डाल कर हल्की हल्की चुस्कियाँ लेने लगा और बारिश की बूँदों को कवि के चेहरे पे नृत्य करते हुए देख उसकी मनमोहकता में खोते हुए धीरे धीरे वाइन पीता रहा.....

रात धीरे धीरे सरक्ति जा रही थी ...चाँद तो कब का घने बादलों की ओट में छुप गया था ...चारों तरफ घना अंधेरा था ...बस इनकी हट की लाइट्स जल रही थी....

कवि ने मचलते हुए कुछ लाइट्स ऑफ कर दी ...जिस से महॉल बहुत ही कामुक हो गया ......

राजेश खुद को और रोक ना सका और कवि के पीछे जा कर उसके साथ चिपक गया .......

राजेश अपनी नाक उसकी गर्दन पे धीरे धीरे रगड़ने लगा और दोनो हाथ आगे ले जा कर उसके गाउन की डोरी को खोल दिया .......

कवि पीछे होती चली गयी और अपना सर राजेश के कंधे पे टिका दिया ......

राजेश का सामीप्य ही उसके बदन में खलबली मचा बैठा ....आँखों में नशीलापन उतरने लगा ....साँसे तेज होने लगी .........

राजेश ने गाउन पे पट अलग किए और अपने हाथों से उसके पेट को सहलाने लगा .....

अहह .........कवि सिसकी और पलट के राजेश से चिपक गयी ......

राजेश ने उसके गाउन को जिस्म से अलग कर दिया और अपना भी उतार डाला .....दोनो के नंगे बदन एक दूसरे के तापमान को बढ़ाने लगे .....साँसों की गर्माहट बढ़ती चली गयी .....और राजेश ने उसके चेहरे को उठा उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया ....कवि भी उसका साथ देने लगी.....



चुंबन तोड़े बिना ....राजेश कवि को उठा के बिस्तर पे ले गया और दोनो का चुंबन ऐसे ही चालू रहा



रात सरक्ति हुई कब अलविदा कर गयी दोनो को पता ही ना चला ......बाहर टपकती हुई बारिश के बावजूद भी पो का उजाला फैल गया और दोनो जब साँस लेने अलग हुए तो करे में दिन का हल्का सा उजाला फैलने लगा ....

'मेम्साब .....रात सटक ली ...दिन हो गया .....थोड़ी देर अब सो ही लेते हैं'

कवि हंस पड़ी और दोनो बिस्तर पे पड़े कंबल में घुस्स गये.


राजेश और कवि नींद की आगोश में चले गये ...एक सकुन था दोनो के चेहरे पे जो बता रहा था ..कि जिंदगी के ये पल जो उन्होंने साथ गुज़ारे थे ...वो ये कभी नही भूलने वाले थे. रात भर के जागे हुए भावनाओं की उथल पुथल से गुज़रे ..नींद तो गहरी आनी ही थी ....करीब 12 बजे ही राजेश की नींद खुली ....साथ में सो रही कवि के चेहरे पे छाए नूर को देखने लगा .....बहुत प्यार आया उसे कवि पे ....दिल करा उसके होंठ चूम ले ...पर खुद को रोक लिया ताकि उसकी नींद में खलल ना हो ...

राजेश फ्रेश हुआ और एक टी-शर्ट और शॉर्ट पहन ली ...फिर उसने कवि का बेड खोल उसके लिए एक ड्रेस निकाल ली और कॉफी बना ने बाद वो कवि के पास आ कर बैठ गया ....उठ जाओ जाने मन ...कवि के होंठों को चूमते हुए उसे उठाया ....कुन्मूनाती हुई कवि उठी और अपनी हालत देख उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया...खुद को चद्दर से ढांप लिया और भाग के बाथरूम में घुस गयी ....राजेश ने बाथरूम का दरवाजा नॉक किया ..और उसे उसकी ड्रेस दी ...शरमाते हुए उसने ड्रेस ले ली .....जब बाहर निकली तो ...


तो उसे देख राजेश सिटी बजाने लग गया .........कविता ने शरमा के अपने चेहरे को ढांप लिया .....

राजेश...यार सुबह सुबह इतना बड़ा ज़ुल्म मत किया करो ......इस दिल की धड़कन ही तुम्हारे चेहरे के नूर की तपिश पा कर ही चलती है ...यूँ चेहरा छुपा लोगि तो हम तो .......

कविता दौड़ के राजेश के पास आई और उसके होंठों पे अपने हाथ रख दिए .......
राजेश ने उसके हाथ को चूम उसे बाँहों में भर लिया ....क्या हुकुम है मेम्साब का ......क्या किया जाए आज....

कवि ...जो आपका दिल करे ...

राजेश ...कम्बख़्त मेरे पास रहा ही कहाँ...उसे तो तुमने कब का अपने क़ब्ज़े में कर लिया है....

कवि ....भूख लगी है ..पहले कुछ खाने को तो मन्ग्वाओ ....

राजेश...ऑप्स ....मैं भी पागल हूँ....अच्छा बोलो क्या खओगि ..यहाँ के प्रॉन्स बहुत ही स्पेशल हैं.....

कवि ...सी फुड में कुछ भी मंगवा लो.....

राजेश .....अदब बजाते हुए ...जो हुकुम मालिका-ए-आलम और सी फुड ब्रेकफास्ट का ऑर्डर कर देता है ...जिसमे एक मिक्स रोस्टेड सिज़्लर भी होता है......

जब तक ब्रेकफास्ट आता दोनो हट के एक दम कोने में बैठ पैर लटका एक दूसरे से चिपक हँसीन फ़िज़ा का लुफ्त उठाने लगे


राजेश ...ब्रेकफास्ट के बाद का प्रोग्राम तो बताओ क्या करना चाहती हो....

कविता ...हम तो आपके हवाले हो चुके हज़ूर ...अब जो आपकी इच्छा

राजेश ....किसी आइलॅंड पे चलें......मोटर बोट की सैर भी हो जाएगी ....और नेचर के साथ मस्ती भी ....

कविता ...वाउ लव्ली .....कोई ऐसा आइलॅंड चुनना छोटा सा ...जहाँ सिर्फ़ हम दो हों और खुल के घूमे फिरे मस्ती करें ......

राजेश ....यार ऐसे आइसलॅंड पास नही होते ...काफ़ी दूर होते हैं और वहाँ पहुँचने में काफ़ी टाइम लगता है .......हमारा हफ़्ता तो फिर इसी में ख़तम हो जाएगा ....लेट'स डू आइलॅंड हॉपिंग टूर ....मालदीव के जो कुछ अच्छे आइलॅंड हैं उन्हें देखते हैं.......और जो तुम कह रही हो वो एक स्पेशल टूर बनाएँगे ...जब तुम डॉक्टर बन जाओगी ...
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07-20-2019, 09:27 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
सुबह सोनल की नींद सबसे पहले खुली ....और उसने जब देखा कि तीनो नग्न एक दूसरे से चिपके पड़े हैं तो बहुत शर्म आई उसे ....आख़िर नारी लज्जा सर उठा ही लेती है....धीरे से उठ के वो बाथरूम में जा कर फ्रेश हुई ...सब के लिए कॉफी बनाई बेड की साइड टेबल पे रख वो सुनील के चेहरे पे झुक गयी ....उसके होंठों पे अपनी ज़ुबान फेर उसे चूमते हुए बोली ...गुड मॉर्निंग डार्लिंग ....उम्म्म सुनील उठा सोनल को अच्छी तरहा किस किया फिर उसने सूमी को चूम कर उठाया और बाथरूम में घुस गया फ्रेश होने.

जब तक सुनील फ्रेश हुआ सुमन भी फ्रेश हो गयी ...फिर तीनो ने एक साथ कॉफी पी ....सुमन तयार होने लगी और सुनील बाहर आ लहरों और एक दम सॉफ समुद्रि पानी को देखने लगा ...दिल मचल गया उसका ...टी-शर्ट उतार फेंकी और शॉर्ट में सीडीयों के पास जा कर खड़ा हो गया....सोनल वहीं बाहर रखी कुर्सी पे बैठ सूमी का इंतेज़ार करने लगी ...



और सुनील पानी में जा कर तैरने लगा सुनील को तैरते देख...सूमी को गुस्सा चढ़ा ...पहले क्यूँ नही बोला ...ऐसे ही तयार हुई ...सोनल को खींच अंदर भागी और बिकिनी पहन बाहर आई ....सोनल कुछ देर वहीं बैठी और उसने सूमी को जाने को कहा ....सूमी भी पानी में उतर गयी ..उसने बंग्लॉ के खंबे के साथ बँधा एक फ्लोटर खोल लिया और उसपे बैठ मस्ती करने लगी ....सुनील तैरता हुआ उसके पास पहुँचा और उसे पानी में खींच लिया ...सूमी उसके चुंगल से निकल फ्लोटर की दूसरी तरफ जा उसे छेड़ने लगी ......पर ज़्यादा देर खुद को अलग ना कर सकी और दोनो का स्मूच शुरू हो गया ....उपर बैठी सोनल दोनो को मस्ती करते देख हंस रही थी ..



सुनील और सुमन समुद्र में मस्ती कर रहे थे ....सोनल अंदर चली गयी और इंटरकम पे ब्रेकफास्ट का ऑर्डर दे कर बाहर आ गयी ...सूमी को आधा घंटा हो गया था ....इतने लंबे स्मूच के बाद उसकी साँस फूलने लगी थी .....वो अलग हो सीडी पे बैठ गयी ...सुनील ने फ्लोटर फिर खंबे से बाँध दिया और सोनल को इशारा किया ...जो इशारा पाते ही पानी में कूद गयी ...और दोनो अपने हनिमून की याद को ताज़ा करने लगे



कुछ देर बाद इनका ब्रेकफास्ट आ गया ...और तीनो मस्ती में उपर बनी बाल्कनी में बैठ गरमागरम ब्रेकफास्ट का मज़ा लेने लगे .....

सुनील.....सोनल यार ...हमारी बड़ी बेगम ने अगले साल के लिए भी मालदीव फिक्स कर रखा है फॉर हॉलिडे.....कॅन'ट गो एनी व्हेयर एल्स ...

सोनल...क्यूँ क्यूँ..

सुनील....यार सबको ढिंढोरा पीट दिया है कि इनका हब्बी इन्हें मालदीव में मिला ...जो उसका फॅवुरेट हॉलिडे डेस्टिनेशन है ....तो फिर कहीं और कैसे जा सकते हैं..

सूमी ...क्यूँ बूरी जगह है क्या ये ....

सुनील...बुरी ...यार ये तो हब है हनिमूनर्स का .........वैसे राजेश के साथ अच्छा नही हुआ ...कहाँ टहीटी और कहाँ मालदीव्स ......

सूमी ......अच्छा नही हुआ ....ये बोलो कि जिंदगी बन गयी .......हमारी गुड़िया कैसे दौड़ के उसके पास चली गयी .......

सुनील....ह्म्म्म बात तो है ...क्या को-इन्सिडेन्स हुआ ना ...हम भी यहाँ...वो भी यहाँ ......और बिछड़े मिल गये....

सोनल...एक बात का दुख है ....वो पहले क्यूँ नही बोली .......इतने दिन दोनो को दूर तो ना रहना पड़ता ....

सूमी .....उसके दिल की हालत सोच, वो हमे अपना समझ के भी अपना नही समझती थी ....वो खुद को एक बोझ समझती थी ....कोई लड़की कभी ये बातें खुल के नही बोलेगी .......क्यूंकी वो डरती थी कि हमे बुरा लगेगा अगर कभी उसने अपने ज़ज्बात सामने रख दिए ....वो एक खुद्दार माँ की बेटी है ...वो संस्कार तो उसमें आएँगे ही.

सुनील की आँखों से आँसू टपक पड़े .....मतलब मेरे प्यार में कुछ कमी रह गयी ..........

सोनल जो एक लड़की होते हुए सूमी की बात अच्छी तरहा समझ गयी थी ...बोली .....एक बात बताओ ....सारी जिंदगी तुम एक बाप के प्यार को तरसते रहे ...और अचानक दुनिया के सब रिश्ते ...भाई-बहन-भाबी-माँ सब एक साथ उठ के सामने आ जाएँ क्यूंकी तुम्हारी माँ तुम्हारे साथ नही रही वो...तुम्हारे बाप को इल्तीज़ा कर गयी अब तो ज़िम्मेदारी संभाल लो .....वो लड़की क्या सोचेगी...मैं खुद को उसकी जगह रख लूँ तो शायद मैं तो जी भी ना पाऊ ....पर जितना प्यार और जितना भरोसा वो आप पे करती है ...वो पूरे परिवार में किसी से नही...

सुनील......खैर ...उस उपरवाले का करम है जो आज राजेश और कविता मिल गये ...मेरे सर से बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी उतर गयी....

सोनल.......हज़ूर कहाँ हैं आप ......बहन की ज़िम्मेदारी तो ता-उम्र रहती है ...जब तक जिस्म में साँस रहती है ...ये ज़िम्मेदारी साथ साथ चलती है ....जब दिल से बहन माना है उसे ....तो दिल से सभी ज़िम्मेदारियों का पालन कीजिए ...........

सूमी......सोनल ठीक कह रही है जान....चाहे कवि की शादी हो जाए ...चाहे रूबी की शादी हो जाए ....दोनो अपने घर में सुखी रहें.....पर हमारी ज़िम्मेदारी हमारी आखरी साँस तक रहती है .......

रूबी की नींद जब खुली ...तो देखा मिनी दूसरे बिस्तर पे आराम से सो रही थी ...आज विजय ने इनका प्रोग्राम बनाया हुआ था आइलॅंड हॉपिंग टूर का मोटर बोट से ...जिसके बारे में रूबी सोच सोच के रोमांचित हो रही थी ...फिर उसके जहाँ में आरती की वो बातें आने लगी जो कल उसने कही थी.....जिंदगी भर कविया का साथ बना रहेगा अगर वो विमल से शादी के लिए मान जाती है क्यूंकी राजेश और विमल बचपन के ऐसे दोस्त हैं जो कभी नही जुदा होनेवाले...और दोनो बहनें हर दम एक दूसरे के पास रहेंगी ...आरती ने विमल और उसके खानदान की तारीफों के पुल बाँध दिए ...और रूबी से कहा कि अच्छी तरहा ठंडे दिमाग़ से सोच ले ...वो हां करेगी तभी आरती सुमन और सुनील से बात करेगी ....

रूबी की आँखों में विमल का चेहरा और उसकी पर्सनॅलिटी घूमने लगी जैसा उसने उसे कविता की शादी में देखा था.......लेकिन मन जो सुनील की छवि बनी हुई थी उसे वो बाहर नही निकल पा रही थी और वो ये भी अच्छी तरहा जानती थी कि ये अंगूर खट्टे हैं...सुनील उसे कभी नही अपनाएगा...वो इंसान ही अलग किसम का है ...रूबी जिंदगी के जिस दौर से गुजर रही थी ....उसने खुद को लड़कों से काट लिया था ....कभी सोचती की बिल्कुल शादी नही करेगी ...कभी सोचती कि एक दिन तो सुनील अपना लेगा ...और कभी जब गहराई से सोचती तो सॉफ सॉफ दिखता कि सुनील का सपना सिर्फ़ एक सपना ही रह जाएगा....

कविता की जब शादी हुई तो दिल में सेकड़ों अरमांन मचल उठे ...लेकिन अपने अतीत उसे चैन नही लेने देता...

मिनी जब उठी तो देखा रूबी बहुत ही गहरी सोच में डूबी हुई है .........

मिनी ....क्या सोच रही है रूबी ....विमल के बारे में.......

रूबी ....हां भाभी ...कुछ समझ नही आ रहा ...

मिनी ....मेरी एक बात मानेगी गुड़िया .......पहले तो मुझे ये भाभी कहना छोड़ दे ...दीदी ही बुलाया कर ...मुझे नही अच्छा लगता कोई मुझे भाभी कह कर बुलाए ....(कहते हुए मिनी की आँखें नम हो चुकी थी...)

रूबी कुछ पल हैरानी से मिनी को देखती रही .......दीदी ..जो मेरे साथ हुआ उसके बाद एक डर सा दिल में बैठ गया है ...मैं किसी और को चाहती हूँ..और ये भी जानती हूँ कि वो मुझे कभी नही मिलेगा ....मेरी कुछ समझ में नही आता कि मैं क्या करूँ.....

मिनी ....वक़्त ले ...जिंदगी के ये फ़ैसले पल में नही किए जाते ...वैसे अगर ध्यान से सोचे तो लड़का अच्छा है ...सबसे बड़ी बात राजेश का दोस्त और कविता का साथ ....कुछ ग़लत होने का तो सवाल ही नही उठता .......बाकी तेरी मर्ज़ी ..कोई ज़बरदस्ती थोड़े ही है ....और दिल करे तो एक बार सोनल या सुनील से बात कर लेना ....लेकिन हम लोगो की बस राय होगी ...असल फ़ैसला तो तूने लेना है ....तू क्या चाहती है ...अगर दिल का कोई तार छिडता हो ..विमल को देखने के बाद तो कोई बुराई नही आगे बढ़ने में ...और ये अरेंज्ड मॅरेज होगी ...तो जब आरती जी ने बात उठाई है तो सोच वो ज़िम्मेदारी भी तो ले रही हैं तेरी खुशी की ...आख़िर तू उनकी बहू की बहन है .....चल ब्रेकफास्ट के लिए चलते हैं ..अंकल तो वहाँ पहुँच ही गये होंगे.

दोनो रेस्टोरेंट की तरफ चली जाती हैं.

ब्रेकफास्ट के बाद विजय और आरती दोनो को आइलॅंड हॉपिंग टूर पे ले गये ....रूबी तो ख़यालों में ही उलझी हुई थी ...वो इस टूर का मज़ा नही ले पा रही थी ......आरती और विजय सब नोट कर रहे थे.........

आरती ....रूबी .....मेरे लिए तुम और कवि पहले हो...राजेश बाद में.....और इतना मत सोचो अभी....ये फ़ैसले एक दिन के नही होते ...तस्सल्ली से आराम से हर पहलू पे गौर किया जाता है ......आज घूमने आए हैं तो बस घूमेंगे बेटी ..यूँ अपने आप को जिंदगी जीने से मत रोको

दूर फैले हुए समुद्र को वो अपने फ्लॅट से देख रही थी ........और जैसे समुद्र की सतह पे घना विशाल वीरानपन होता है ऐसा ही वीरानपन था उसकी जिंदगी में .....

बहारों मेरा जीवन भी सवारों
बहारों मेरा जीवन भी सवारों
कोई आए कही से
कोई आए कही से यू पुकारो
बहारों मेरा जीवन भी सवारों
बहारों..

तुम्ही से दिल ने सीखा है तड़पाना
तुम्ही से दिल ने सीखा है तड़पाना
तुम्ही को दोष दूँगी
तुम्ही को दोष दूँगी
तुम्ही को दोष दूँगी ए नज़ारों
बहारों मेरा जीवन भी सवारों
बहारों..

रचाओ कोई कजरा लाओ गजरा
रचाओ कोई कजरा लाओ गजरा
लचकती डालियो से तुम
लचकती डालियो से तुम, फूल वारों
बहारों मेरा जीवन भी सवारों
बहारों..

लगाओ मेरे इन हाथो में मेहेन्दि
ऱगाओ मेरे इन हाथो में मेहेन्दि
सजाओ माँग मेरी
सजाओ माँग मेरी, याद की धारों
बहारों मेरा जीवन भी सवारों
बहारों..

ये कॉन था ...किस का था इंतेज़ार उसे .....कितने साल बीत गये ....जब से पढ़ाई ख़तम हुई ...वो बस इंतेज़ार ही करती रही ...कि आज उसके मम्मी पापा उसके लिए खुश खबरी लाएँगे ...पर नही ...हर बार उनके लटके चेहरे को देख ....उसका दिल चीत्कार कर उठता ......और अब तो उसका प्यार उसके ही दिल में दफ़न रह गया था....वो अब कभी नही आएगा ....ये बहारें ...ये फिजाये...सब बेमानी हो कर रह गयी थी .......उसने कभी सोचा ही ना था ...कि यूँ उसके प्यार को ठोकर लगा दी जाएगी ...बचपन से दोनो साथ बड़े हुए ..खेले कुदे ...बचपन से ही वो उसके दिल में जगह बना बैठा था ...पर इतनी हिम्मत ना हुई कि उसे अपने दिल की बात कह सके .....रास्ता चुना जो सही भी था ...एक दिन हिम्मत कर माँ को सब बता दिया था ...उसकी चाय्स पे माँ भी बहुत खुश हुई थी और जानने के बाद पापा भी ...लेकिन जब वो उसके रिश्ते की बात ले कर वहाँ गये ...तो खाली हाथ ही लोटे ...उनकी दोस्ती भी कुछ ना कर पाई .......आज वो किसी और का हो चुका है .....क्या प्यार इतना निष्ठुर होता है ...उसकी आँखों से आँसू टपक पड़े .....उसकी नज़रें बेड के किनारे रखे फोटो फ्रेम पर गयी ......क्यूँ चले गये मुझ से इतनी दूर ...वो फोटो से बात करते हुए ज़ोर से रोने लगी ......
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07-20-2019, 09:27 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
क्या इतफ़ाक़ था कि राजेश और कविता एक तरफ से आइलॅंड हॉपिंग टूर पे निकले और दूरी तरफ से विजय वगेरह भी ...पर होनी ने इनका टकराव कभी भी नही होने दिया क्यूँ दोनो का रास्ता बिल्कुल उलट था ....जहाँ राजेश पहली बार पहुँचा वो विजय का आखरी स्टॉप था ....इसलिए सारा दिन घूमते हुए भी ये आपस में नही टकराए ....आइलॅंड हॉपिंग टूर की सबसे खांसियत थी .....मोटर बोट की राइड ...जो राजेश ने अपने अकेले की लिए बुक करी थी ...किसी और पॅसेंजर को उसमे नही आने दिया था ...अपनी मर्ज़ी से बोट जितनी देर चाहे उतनी देर हर आइलॅंड पर रोकी ...और कविता ने बहुत से मोमेंटोस खरीदे ....

शाम तक ये वापस अपने होटेल पहुँच गये .....कविता आज बहुत चाहक रही थी ...सारा दिन राजेश उसे हँसाता रहा ...कभी कोई नोतंकी करता तो कभी कोई .....एक जगह एक आइलॅंड पे जहाँ कुछ वीरना पन था राजेश ने उसे अपनी बाँहों में भर चूमना शुरू कर दिया था ....इस खुले में उसका चूमना ...कवि पहले तो कितनी घबरा गयी थी...पर धीरे धीरे उसे भी मज़ा आने लगा था .......जैसे ही वो अपने रूम में घुसे कविता लहराती हुई बेड पे गिर पड़ी ......

राजेश ...अरे फ्रेश तो हो जाओ

कविता ....आज मैं बहुत खुश हूँ......सच तुम को पा कर जिंदगी का नारिया ही बदल गया .....

राजेश ...हां इसीलिए तो छोड़ गयी थी ....

कविता ....देखो ऐसी बातें करोगे तो नाराज़ हो जाउन्गि ......

राजेश ...तोबा तोबा ...मैं तो मज़ाक कर रहा था ....तुम नही जानती ..तुमने वापस आ कर मेरी जिंदगी में नयी उमंग भर दी है ......

कविता ..उसे जीब से चिढ़ाती हुई बात में घुस्स गयी ....

राजेश मुस्कुराते हुए अपने कपड़े उतारने लगा ...जगह जहाँ रेत लगी हुई थी जो उसे अब चुब रही थी ...और अंडरवेर में ही वहीं सोफे पे बैठ कविता के बाहर आने का इंतेज़ार करने लगा और अपने लिए वाइन एक ग्लास में डाल हल्के हल्के सीप लेटे हुए दूर तक फैले समुद्र में उठती गिरती लहरों को देख मज़े लेने लगा ....

कविता जब बाथरूम से बाहर निकली तो राजेश की तो हालत ही खराब हो गयी उसे देख

अपना सर झटक वो बाथरूम में घुस गया और शवर लेने लगा......

कविता ने सारी लाइट्स ऑफ कर दी .....लिविंग रूम के कोनो में बड़ी बड़ी कॅंडल्स रखी हुई थी ...उसने वो जला दी .......रूम सर्विस को शॅंपेन और नोन वेज स्नॅक्स का ऑर्डर कर दिया ...सभी पर्दे हटा ...एक दम ओपन एर जैसे महॉल बना दिया जहाँ सिर्फ़ चार मोमबत्तियों की रोशनी थी और खिड़कियों से झाँकती चाँद की चाँदनी महॉल को और भी कामुक बना रही थी ......फिर कवि ने म्यूज़िक सिस्टम पे एक बहुत ही भीनी आवज़ में म्यूज़िक लगा दिया जिसपे डॅन्स हो सके ......

राजेश बाथरूम से बाहर निकला बाथरोब में तो ये सारी चेंजस देख वो कविता के टेस्ट का कायल हो गया ......इस से पहले वो कुछ बोलता वेटर ने ऑर्डर डेलिवर कर दिया .........

राजेश ...मन में सोचने लगा ...आज तो मेरे कत्ल का पूरा इरादा है मेम्साब का .........

वेटर समान सेंटर टेबल पे लगा बिल साइन करा के चला गया .........और जाने से पहले डिन्नर का भी ऑर्डर ले गया ......

राजेश वेटर के जाने के बाद सिटी बजाने लगा ....और कविता ने शर्मा के चेहरा झुका लिया .........

राजेश धीरे धीरे चलता हुआ कविता के पास पहुँचा उसकी कमर में हाथ डाल डॅन्स करने लगा .....

राजेश ....वह जान क्या रंगीन समा बाँधा है .....बस ऐसे ही मेरी जिंदगी रंगीन करती रहना .......

कविता ने शर्मा के चेरा उसकी चाहती पे छुपा लिया और डॅन्स में उसके साथ देने लगी .........

राजेश म्यूज़िक के साथ एक गीत भी गाने लगा .........


जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हम नवाज
जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज

ना कोई है ना कोई था ज़िंदगी में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज

हो चाँदनी जब तक रात देता है हर कोई साथ
तुम मगर अंधेरो में ना छोड़ना मेरा हाथ
हो चाँदनी जब तक रात देता है हर कोई साथ
तुम मगर अंधेरो में ना छोड़ना मेरा हाथ

जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज
ना कोई है ना कोई था ज़िंदगी में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज

वफ़ादारी की वो रस्में निभाएँगे हम तुम कस्में
एक भी साँस ज़िंदगी की जब तक हो अपने बस में
वफ़ादारी की वो रस्में निभाएँगे हम तुम कस्में
एक भी साँस ज़िंदगी की जब तक हो अपने बस में

जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हम नवाज
ना कोई है ना कोई था ज़िंदगे में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा ओ हम नवाज

दिल को मेरे हुआ यकीन हम पहले भी मिले कहीं
सिलसिला ये सदियों का कोई आज की बात नहीं
दिल को मेरे हुआ यकीन हम पहले भी मिले कहीं
सिलसिला ये सदियों का कोई आज की बात नहीं

जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज
जब कोई बात बिगड़ जाए जब कोई मुश्किल पड़ जाए
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज
ना कोई है ना कोई था ज़िंदगी में तुम्हारे सिवा
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज
तुम देना साथ मेरा ओ हमनवाज

कविता ने भी गाने में उसका साथ दिया ....दोनो मस्ती में झूमते रहे गाते रहे .....और जब म्यूज़िक बंद हुआ तो इनका गाना भी अंत तक पहुँच गया था....

फिर राजेश ने शॅंपेन खोली और उसकी फुहार कविता पे छिड़क दी ....

कविता .....ऊऊुुऊउककचह च्चिईिइ गंदे .......चिल्लाती हुई रूम से बाहर बने डेक पे चली गयी .....

राजेश दो पेग बना कर बाहर ले गया ....

कविता ......गंदे ऐसा भी कोई करता है मेरे उपर ही डाल दी .....

राजेश ....जानेमन .....यही तो मज़ा होता है शॅंपेन का अब पी कर देखो लुत्फ़ ही लुत्फ़ आएगा ......

कविता ने उसके हाथ से जाम लिया .....दोनो ने चियर्स किया

राजेश ...तो थे एवरलासटिंग ब्यूटी ऑफ माइ वाइफ

कविता .....टू दा साउंड हेल्त ऑफ और लव

दोनो ने जाम ख़तम किया अंदर आए और भूख लग चुकी थी तो स्नॅक्स पे टूट पड़े .....

धीरे धीरे शॅंपेन की बॉटल और स्नॅक ख़तम हो गये और दोनो बाहर टहलने लगे हाथों में हाथ डाल.

कुछ देर बाद इनका डिन्नर भी आ गया ...जिसे दोनो ने बाहर ...चाँदनी रात का लुफ्त लेते हुए खाया .....

डिन्नर ख़तम हुआ .....दोनो ने अपने हाथ मुँह बाथरूम में सॉफ किए .....फिर कविता ने राजेश का नाइट सूट वॉर्डरोब से निकाला और उसे दिया ......पहन लीजिए ....इतना कह वो फिर बाथरूम में घुस गयी ...सारा जिस्म चिपचिपा हो रहा था शॅंपेन की वजह से .....शवर ले कर वो बाथरोब में ही बाहर आ गयी अंदर उसने कुछ नही पहना था क्यूंकी ब्रा और पैंटी तो साथ ले जाना भूल ही गयी थी ....बाथरोब से उसके उरोज़ झाँक रहे थे ....राजेश ने उसकी बात रखते हुए नाइट सूट पहन लिया था....दोनो की नज़र जब एक दूसरे से टकराई तो वहीं जम के रह गयी ...आँखों ने आँखों से बातें शुरू कर दी ...और कविता के चेहरे पे लाज की लाली फैलने लगी ....राजेश के कदम अपने आप उसकी तरफ बढ़ते चले गये और दोनो इतने करीब होगये की सांसो में सांस घुलने लगी .......बहुत इंतेज़ार किया था दोनो ने इस रात का....आज वो रात आ ही गयी थी...जब दो बदन एक दूसरे में समानेवाले थे...दो आत्माओं ने अपना मिलन करना था...दो दिल एक ही सुर गाते हुए धड़कने लगे थे......और दोनो के होंठ करीब आते चले गये.....मिलन की शुरुआत हो गयी.......
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07-20-2019, 09:27 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
राजेश (आगे से राज ) और कविता (आगे से कवि) दोनो एक दूसरे में खो चुके थे…कवि की आँखें बंद हो चुकी थी …उसकी सांसो की रफ़्तार तेज हो चुकी थी…….उसके निपल धीरे धीरे सख़्त होते जा रहे थे और उसके हाथ खुद ब खुद राज की पीठ पे जा उसे सहला रहे थे……दोनो धीरे धीरे सरकते हुए बिस्तर की तरफ बढ़ रहे थे ……..और इस बीच उनका चुंबन बिल्कुल नही टूटा……कवि के जिस्म से निकलती भीनी भीनी खुश्बू राज को मदहोश करती जा रही थी …और चुंबन से जनम लेती भावनात्मक तरंगे कवि को बेचैन करती जा रही थी…….

दोनो बिस्तर पे एक दूसरे को चूमते हुए बैठ भी गये और उन्हें पता भी ना चला………

कवि धीरे धीरे पीछे होने लगी और राज उसे चूमता हुआ उसके साथ ही उसपे झुकता चला गया …..कवि ने राज के बालों को सहलाना शुरू कर दिया ….और उसे अपने होंठों की मदिरा पिलाती चली गयी ….यहाँ तक की दोनो को साँस लेना मुश्किल हो गया था पर फिर भी उनका चुंबन नही टूटा…जब राज के हाथ सरकते हुए बाथरोब में घुस्स कवि के पेट को सहलाने लगे …तो कवि ये झटका सह ना सकी और अपने होंठ अलग कर हाँफती हुई सिसकने लगी…आह…आह…अह्ह्ह्ह….राज…..अहह

राज…..कवि के गले को चूमते हुए बोला……आइ लव यू जान
कवि …ओह राज मी टू डार्लिंग……और सख्ती के साथ राज से चिपक गयी…
कवि की गर्दन को चूमते हुए राज ने उसके कंधों से टवल हटा दिया और अपने होंठ उसके कंधों पे रगड़ने लगा …….माहह आअहह

राज…..उफफफफ्फ़ मुझे कुछ हो रहा है….

राज….होने दो आज जो भी होता है……

कवि…..अहह अहह उम्म्म्मम

राज के चुंबन कवि के जिस्म में थल्थलि मचा रहे थे ….आग और फूस एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे……कामग्नि की जवाला भड़क रही थी …..काम और रति की प्रणय लीला अपना रूप ले रही थी ……

राज ने कवि के बाथरोब की डॉरी खोल दी

कवि ने शर्मा के चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया और राज उसके मदमाते जिस्म को देख और भी नशे में उतारता चला गया......उसने फटाफट अपने कपड़े उतार डाले और सिर्फ़ अंडरवेर में रह गया जिसमे उसका लंड इतना सख़्त हो चुका था कि बस अंडरवेर के क्वालिटी ने उसे बचा रखा था वरना कब का फट गया होता.

दिल थामे अपनी धड़कनो पे काबू रखने की कोशिश करते हुए कवि आने वाले पलों का इंतेज़ार कर रही थी....आज वो मन से चाहती थी कि उसका और राज का मिलन पूरा हो जाए...उसकी रूह राज की रूह से मिलने को बेचैन हो रही थी ...और रूहों का संगम तो जिस्म के संगम से ही बनता है......

कवि तिरछी नज़रों से बार बार राज के अंडरवेर के फूले हुए भाग को देखती और अनुमान लगाती कितना बड़ा और मोटा होगा ...कैसे जाएगा ये उसके अंदर ....फिर अपनी सोच पे शरमा जाती.......

अपने कपड़े उतारने के बाद राज ने उसकी नाभि को चूमना शुरू किया ..कभी ज़ुबान उसकी नाभि में घुसाता तो कवि की सिसकी निकल पड़ती .....जिस्म में गुदगुदी के अहसास के साथ कभी ना महसूस की हुई तरंगों के तालमेल ने उसे बलखाने पे मजबूर कर दिया ....अपने गर्दन तकिये पे इधर से उधर करती और अपने जिस्म को लोच देने लगती ......

राज ने जब उसकी नाभि को मुँह में भर चूसना शुरू किया तो तड़प उठी कवि .....ऊऊऊ उूउउइई म्म्म्मा आ ज़ोर से सिसक पड़ी और जिस्म कमान की तरहा उठता चला गया .....राज ने उसे वापस बिस्तर पे गिरने ना दिया और उसे अपनी बाँहों में थाम लिया .....

ओह राज्ज्जज्ज्ज ओह माआ अहह हहाऐईयईईईईईईईईई

कवि ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी ...उसकी नाभि से उसकी चूत तक एक जवरभाटा फैल गया.......चूत में ऐसी हलचल मची के उस अहसास को महसूस कर वो बोखला गयी.....

उफफफफफफफफफ्फ़ र्र्र्ररराआआजजजज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज अहह अकड़ गया उसका जिस्म और जल बिन मछली की तरहा तड़प्ते हुए झड़ने लगी.......उसके चूत से निकलता सारा रस बेचारा बाथरोब अपने अंदर सोखता रहा और कुछ पलों बाद कवि का जिस्म निढाल हो राज की बाँहों में झूल गया

राज ने कवि को धीरे से बिस्तर पे लिटा दिया ...जो अपनी आँखें बंद रख अपने अदभुत आनंद की दुनिया में खो चुकी थी....राज उसे यूँ ही निहारता रहा ...जब कवि ने आँखें खोली और राज को यूँ निहारते हुए पाया तो शरमा के मुँह दूसरी तरफ कर लिया......

राज....नही जान आज तो मुँह ना फेरो ....और उसके चेहरे को अपनी तरफ कर अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए....धीरे धीरे राज कवि के जिस्म पे छा गया...और दोनो का गहरा चुंबन शुरू हो गया...कवि राज को अपने होंठ पिलाती हुई कभी उसके सर पे हाथ फेरती तो कभी उसके गाल सहलाती.......

दोनो एक दूसरे में खो गये ...राज कभी कवि का निचला होंठ चूस्ता तो कभी उपरवाला...कवि भी उसका पूरा साथ दे रही थी ...वो भी राज के होंठों को चूसने में लग गयी थी...

दोनो की ज़ुबान एक दूसरे से मिल रही थी...जैसे एक दूसरे का हाल पूछ रही हों.....और अपनी प्यास से पहचान करा रही हों.....कभी राज की ज़ुबान कवि के मुँह में घुस जाती और उसका पीछा करते हुए कवि की ज़ुबान राज के मुँह में घुस जाती ....दोनो एक दूसरे के ज़ुबान चूसने लग जाते और अपने अनोखे आनंद की दुनिया में खोए रहते.
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07-20-2019, 09:27 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
कमरे की सभी खिड़कियाँ खुली हुई थी..ठंडी ठंडी हवा अंदर आ कर दोनो के जिस्म को सहला रही थी.....खिड़कियों पे लटकते पर्दे झूलते हुए इनकी तरफ बढ़ते ..जैसे दोनो को दुनिया की नज़रों से छुपाना चाहते हों......

दूर गगन से झाँकता हुआ चाँद लाल सा पड़ जाता जैसे उसे इन पर्दों पे गुस्सा चढ़ रहा हो...जो उसकी नज़र के आगे बार बार आ रहे थे ...और उसकी चाँदनी को इन तक पहुँचने में बाधा दे रहे थे......पर्दों और चाँद की ये आँख मिचोली भी खूब थी ..जिसपे लहराते हुए बादल जान चाँद के आगे आ जाते तो उसका दिल करता अभी रो पड़े......

दिन में सुनील ---सुमन और सोनल को घुमाने ले गया शाम को जब वापस पहुँचे तो सोनल बहुत चहक रही थी ...उसके मन में आनेवाले मेहमान को लेकर बहुत सी अपेक्षाएँ थी ....वो बिल्कुल सुनील जैसा दिखेगा......बिल्कुल उसकी तरहा संस्कारी बनेगा...सबका नाम रोशन करेगा ....बेचैन हो रही थी वो उसे अपनी गोद में लेने के लिए ...माँ का प्यार उसपे लुटाने के लिए..सुमन से ज़्यादा तो सोनल को ही जल्दी सी लग रही थी के सुमन जल्दी से माँ बन जाए ...क्यूंकी उसने सुमन को कयि बार उदास सा देखा था ....वैसे तो सुमन बहुत खुश थी .....उसकी उदासी का कारण सोनल अच्छी तरहा समझती थी ..पहले तो विधवा के रूप में दिन भर रहना सुमन को अंदर ही अंदर खाए जा रहा था ...उसके दिमाग़ में हमेशा एक डर बसा रहता था ...कि कहीं सुनील को कुछ हो ना जाए ...जब से उसने सुमन को सारा दिन सुहागन के रूप में रहते हुए देखा ...कितनी शांति आ गयी थी उसके चेहरे पे ...और सुमन की ज़ुबान और दिल तरसता था कि वो अपनी ममता को जीई भर के लुटाए इसीलिए वो कविता और रूबी का बहुत ख़याल रखती थी ..पर हर औरत की तमन्ना होती है अपनी कोख से जन्मे को अपना दूध पिलाने की ..उसे अपनी गोद में ले कर खेलने की ....जब से सुनील के साथ रिश्ता बदला ....सुनील ने सुमन से उसे बेटा कहने का अधिकार छीन लिया था....क्यूंकी वो नही चाहता था...रिश्तों का झमेला बने और मर्यादा बार बार फिर से अपना सर उठा तकलीफ़ देती रहे .....अब जब सुनील मान गया था कि सुमन माँ बन जाए ....सुमन के चेहरे पे फैली खुशी देखने वाली थी ...और यक़ीनन सबसे ज़्यादा खुश सोनल थी ....क्यूंकी मन ही मन सोनल अपना और सुमन की रिश्ता नही भूली थी ...और एक बेटी अपनी माँ को उदासी के आलम में नही देख सकती थी... सोनल ने कयि बार सुनील को समझाने की कोशिश करी थी पर वो नही मानता था..उसके लिए सुमन की समझ में जो इज़्ज़त थी ..उसपे वो कभी कोई आँच नही आने देना चाहता था....दिल तो उसका भी करता था कि सुमन की इच्छा पूरी हो जाए ...पर हमेशा खुद को मजबूर पता था ...अब ये सारी मजबूरियाँ ख़तम हो चुकी थी ..क्योंकि सुमन ने खुल के अपनी शादी का एलान कर दिया था.....अब अंदर ही अंदर लोग क्या बातें करते थे इस बात का उन्हें कोई फरक नही पड़ता था क्यूंकी जल्दी ही वो देल्ही छोड़ कहीं और बसनेवाले थे....सोनल ने आज की रात को दोनो के लिए एक यादगार रात बनाने का सोच लिया था.....उसने एक ब्यूटीशियन को होटेल से बुलवाया और ज़बरदस्ती सुमन को एक बार फिर से दुल्हन का रूप दिलवाया ....सुमन भी पीछे नही रही और उसने सोनल को नही छोड़ा ...अपनी ही तरहा उसे भी दुल्हन के रूप में सजवाया और एक बेडरूम को बिल्कुल सुहाग सेज की तरहा सज्वा दिया गया.....लिविंग रूम से बाहर वाइन का सीप लेता हुआ सुनील इस बात से अंजान था कि अंदर हो क्या रहा है ...क्यूंकी सोनल ने सख्ती से मना किया था कि वो 3 घंटे तक अंदर नही आएगा....

समुद्र की ठंडी ठंडी हवा सुनील के मन को बहका रही थी .....दूर दूर तक पानी बिल्कुल सॉफ था यहाँ तक की सामुद्री स्तह पे स्थित कॉरल तक नज़र आ रहे थे और कभी कभी रंग बिरंगी मछलियाँ इधर से उधर भागती हुई नज़र आ जाती थी...सुमन ने माँ बनने की जो इच्छा अब सामने रखी थी ...वो सुनील को नये नये खाब दिखा रही थी ....बाप बनने का सफ़र कितना सुहाना होता है ...और सबसे ज़यादा आनंद एक बाप को तब आता है जब उसका नन्हा मुँहा उसकी गोद में किल्कारी भरता है और अपने छोटे छोटे होंठों पे प्यारी सी मुस्कान लिए अपने करीब बुलाता है....और कैसे ज़रा सा नाराज़ होने पे रो रो कर सारे घर को सर पे उठा लेता है...जब टोतली आवाज़ में पहली बार वो सुमन को माँ बोलेगा और फिर उसे पापा ...वो मंज़र कितना सुहाना होगा....वाक़्य में जब बच्चा होता है ...तो माँ बाप को असल में अपना वो बचपन याद आता है ..जिसे वो भूल चुके होते हैं ..जिसकी याद का हल्का सा भी नामो निशान बाकी नही रहता ना चेतन में और ना ही अवचेतन में....

'तुझे सूरज कहूँ या चंदा..तुझे दीप कहूँ या तारा...मेरा नाम करेगा रोशन...जग में मेरा राज दुलारा....' ये ख़याल दिमाग़ में आते ही सुनील मुस्कुरा उठा...वक़्त धीरे धीरे सरक रहा था सुनील वाइन पीता हुआ अपने बेटे के ख़यालों में इस कदर खो गया था कि उसे याद ही ना रहा कि 3 घंटे कब गुज़रे ......होश उसे तब आया जब वेटर ....रात का खाना ले कर आ गया और अंदर लिविंग रूम में पड़ी डाइनिंग टेबल पे सज़ा के चला गया ....यही वो वक़्त था जब ब्यूटीशियन का ग्रूप भी हंसता हुआ वहाँ से विदा ले गया.....सुनील अंदर गया दोनो को बुलाने तो चोंक गया ...उसकी दोनो बीवियाँ दुल्हन के लिबास में किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी......आज तो तू गया रे काम से ...ये दोनो आज निचोड़ के रख देंगी.....जंगली बिल्ली और जंगली शेरनी ...दोनो एक साथ उसका क्या हाल करेंगी ...ये सोच के वो अंदर ही अंदर मुस्कुरा उठा .....यही तो असप प्यार होता है मिया बीवी का.....

.'ये धंसु आइडिया किस का था' पूछ ही बैठा वो....

'क्यूँ अच्छा नही लगा क्या..' सोनल ने उल्टा सवाल कर दिया....

'अच्छा तुमने तो मेरे दिल-ओ-दिमाग़ में ब्लास्ट कर डाले हैं ....तुम्हारा ही काम लगता है...'

सुमन....हां ये इसका ही आइडिया था ...पर बेवकूफ़ सिर्फ़ मुझे ही सज़ा रही थी तुम्हारे लिए ...बड़ी मुश्किल से मानी तब जा के खुद भी सजने को तयार हुई ...'

सुनील...क्यूँ जानेमन ...ये ज़ुल्म क्यूँ करने लगी थी......

सोनल....आज मेरे छोटू की बुनियाद रखी जाएगी ...तो मौका भी था और दस्तूर भी आख़िर पहली अनिवेर्सरि भी तो यादगार होनी चाहिए ....

सुनील...अब दोनो दूर क्यूँ हो ..मेरे करीब आओ........

दोनो शरमाती हुई सुनील से लिपट गयी और सुनील ने दोनो को अपनेई बाँहों में कस लिया.........अहह सिसक पड़ी दोनो ....दोनो के माथे पे चुंबन कर .......सुनील उन्हें डाइनिंग टेबल पे ले गया ....फिर तीनो ने अपने हाथों से एक दूसरे को खाना खिलाया.......

खाने के बाद सोनल ही दोनो को खींच बेड रूम में ले गयी …जो फूलों से सज़ा हुआ था……मज़े की बात ये थी कि आज सुमन और सोनल दोनो ने एक ही रंग के कपड़े पहने थे ….गुलाबी रंग की चोली और लहंगा …उपर से ओडनी डाली हुई थी सर पे….माथे पे चमकती गुलाबी बिंदिया …होंठों पे लाल लिपस्टिक…सजे हुए हाथ मेहन्दी से और पैरों पे भी मेंहदी कमाल दिखा रही थी ….दिल में बिल्कुल पहली रात जैसी हलचल मची हुई थी दोनो के ….सुनील की तो नज़र कहीं रुक ही नही रही थी..कभी वो सुमन को देखता तो कभी सोनल को….

सोनल ने सुमन को बिस्तर पे बिठाया और सुनील को उसकी तरफ धकेल दिया ….और खुद बिस्तर के दूसरी तरफ जा बैठी ….पर सुनील ने उसका हाथ पकड़ पास खींच लिया ……

सोनल…अहह नही ना …पहले दीदी के साथ मैं बाद में…..
सुनील…गुस्से से उसकी तरफ देखा तो फट से सोनल ने कान पकड़ लिए……

सुनील ने एक एक कर दोनो की ओडनी उतार डाली …दिलों की धड़कन बढ़ गयी ….और पहले सुनील ने सूमी को अपनी बाँहों में खींच लिया और अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए ……सूमी पिघलती चली गयी ….सुनील की बाँहों में …..दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने लगे ……ज़ुबान से ज़ुबान टकराने लगी …

सुनील और सूमी अपने चुंबन में इस कदर खोए कि भूल ही गये एके साथ में सोनल भी है ….जो प्यार भरी नज़रों से दोनो को देख रही थी ……वो तो चाहती भी यही थी कि आज की रात सुनील बस सूमी के अंदर खो जाए ….

सूमी की सांस जब रुकने लगी तो उसने मुश्किल से खुद को सुनील से अलग किया ….इस दोरान सुनील उसके होंठों की सारी लाली चुरा चुका था …पर कुदरत ने जो लाली सूमी के होंठों को बक्शी थी वो खुल के निखर गयी थी …

सुनील ने तब सोनल को अपने करीब खींच लिया जो अपनी कजरारी झील से गहरी आँखों में एक अन्भुज सी प्यास लिए सुनील को देख रही थी ….दोनो और भी करीब हुए और सोनल के लरजते होंठों पे जब सुनील के होंठों ने अपना अधिकार जमाया तो सोनल सिसक उठी ……’ओह्ह्ह्ह सुनील ….आइ लव यू…..’

‘ आइ लव यू टू जान’ और सुनील सोनल के निचले होंठ को चूसने लग गया मचल गयी सोनल और उसके हाथ सुनील के जिस्म को सहलाने लगे…

शाम को जब रूबी और मिनी अपने कमरे में पहुँचे थे तो इतना थक चुके थे ...के सीधा बिस्तर पे गिर पड़े और दोनो की आँख लग गयी.....वैसे तो कमरे में दो बिस्तर थे पर दोनो इतना थक चुकी थी कि एक ही बिस्तर पे लूड़क पड़ी ......सोते सोते दोनो के जिस्म ने करवट ली और उसके चेहरे एक दूसरे के बिल्कुल सामने आ गये ....दोनो की बाँह एक दूसरे की कमर पे चली गयी और जिस्म काफ़ी करीब हो गये ..शायद मिनी को सपना देख रही थी ..

उसका हाथ अपने आप रूबी की कमर को सहलाने लगा और नींद में ही रूबी की साँसे तेज होने लगी .....मिनी का हाथ सरकता हुआ रूबी की ढीली टॉप के अंदर घुस्स गया और उसकी पीठ को सहलाने लगा....नीद में ही दोनो के होंठ काफ़ी करीब आ गये और एक दूसरे से चिपक गये.....



मिनी ने नींद में ही रूबी के होंठों को चूमना शुरू कर दिया …..ये चुंबन इतनी धीरे थे कि रूबी को इनका कुछ ज़्यादा पता ही ना चल रहा था…..पर धीरे धीरे मिनी के चुंबनो में तेज़ी आने लगी और उसने थोड़ी ज़ोर से रूबी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया …..
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07-20-2019, 09:27 PM,
RE: Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी
रूबी की आँखें फट से खुल गयी और देखा कि मिनी उसके साथ चिपकी हुई उसके होंठ चूस रही है…..एक हलचल सी मच चुकी थी रूबी के अंदर ….जिन भावनाओं को उसने बहुत मुश्किल से रोक कर सिर्फ़ पढ़ाई पे ध्यान लगाया था …वो अपना सर उठाने लगी थी …….दिल कह रहा था बहक जा पर दिमाग़ ने आगे क्या होगा उसकी चेतावनी दे डाली …और रूबी फट से मिनी से अलग हो गयी …इसका झटका मिनी को भी लगा ……एक पल तो उसे भी कुछ समझ नही आया …पर रूबी के चेहरे पे छाए हुए गुस्से ने सब कुछ बता दिया कि क्या हुआ होगा ….

मिनी ….सच रूबी …जो भी हुआ नींद में हुआ …मैं शायद कोई सपना देख रही थी……

रूबी ……कोई बात नही भाभी …बस अब हम दोनो एक बेड पे कभी नही सोएंगे…..

इतना कह रूबी उठ गयी और वॉर्डरोब से अपने कपड़े निकाल बाथरूम में घुस्स गयी….

रूबी के जाने के बाद मिनी सोच में पड़ गयी …नींद में भी इस तरहा रूबी के साथ उसने क्या कर डाला…क्या सोच रही होगी मेरे बारे में…..आँसू टपकने लगे उसकी आँखों से और उसके जहाँ में सुनील का चेहरा उभरने लगा ……सुनेल ( दोस्तो ये सुनील है ) मारना है तो मार दो…पर इस तरहा की बेरूख़ी मुझ से और बर्दाश्त नही होगी ……तुम नही जानते क्या क्या गुज़री मेरे साथ तुम्हारे जाने के बाद …..आँसू टपकते हुए वो अपने ख़यालों में खो गयी…..

रूबी जब बाथरूम से बाहर निकली तो उसने सलवार सूट पहना हुआ था …….जब उसकी नज़र मिनी पे पड़ी ..जो कहीं खोई हुई रो रही थी …रूबी ये समझी कि वो अपनी हरकत पर रो रही है ..परेशान है ….वो मिनी के करीब गयी …..कोई बात नही भाभी जो हुआ नींद में हुआ …उसमे आपकी कोई ग़लती नही..अब ये रोना बंद कीजिए ….और जा के फ्रेश हो जाइए…अंकल किसी भी टाइम आ जाएँगे रात के डिन्नर के लिए ….

मिनी अपने ख़यालों से वापस आई और रूबी की तरफ देखा …..जिसकी आँखों में इस वक़्त कोई नाराज़गी का भाव नही था ..कुछ तसल्ली मिली मिनी को और वो अपने कपड़े ले भुजे मन से बाथरूम में घुस्स गयी …

रूबी ने मिनी को और कुछ तो नही कहा था …पर इस हादसे ने उसके अंदर दबी उसकी कामइच्छा को भड़का दिया था……जिन भावनाओं को हंसरतों को उसने बड़ी मुश्किल से दबा के रखा हुआ था …उसपे जमी रख की परतें उड़ गयी थी और अंदर छुपा ढकता हुआ अंगारा बाहर आ जवाला बनने की कोशिश करने लगा था…


डर लगने लग गया रूबी को अपने आप से ….उसका जिस्म अब माँग करने लगा था पुरुष के सामीप्य की …उसकी चूत में खलबली सी मच गयी थी …उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी ….वो सुनील के बारे में सोचने लगी ……ये जानते हुए भी कि सुनील उसे किसी भी कीमत पे नही अपनाएगा …वो सुमन और सोनल के साथ बहुत खुश है ..उन्हें कभी धोखा नही देगा ….लेकिन कुछ चाहतें ऐसी होती हैं जो दबाई तो जाती हैं पर भूली कभी नही जाती …एक लड़ाई शुरू हो गयी उसके दिमाग़ में…क्या करे..किस तरहा..सुनील को राज़ी करे कि वो उसे भी अपना ले …..लेकिन ये नामुमकिन था…ये वो अच्छी तरहा जानती थी...एक एक हादसा जो पीछे गुजरा था ....वो उसकी नज़रों के सामने गुजरने लगा और ये बात वो अच्छी तरहा समझ गयी ...हर लड़की के हर ख्वाब कभी पूरे नही होते.....दिल के अरमान ता-उम्र दिल में दबे रह जाते हैं......

जिन ख्वाबों ने रमण के साथ जनम लिया था वो किस तरहा कुचले गये..उन ख्वाबों की ताबीर फिर सुनील बन गया...जिसने सॉफ सॉफ मना कर दिया ....अब सिवाए उन ख्वाबों को अपने सीने में दफ़न रखना ही रूबी की जिंदगी बन गया था......

सोचते सोचते उसे आरती की बातें याद आने लगी ....और मन ही मन उसने एक फ़ैसला ले लिया .....

मिनी जब फ्रेश हो कर बाथरूम से बाहर निकली …तो चुप चाप रूबी के पास सर झुका के बैठ गयी….

रूबी ….भाभी आप आंटी को हां कर दो …कि वो भाई से बात कर लें.

मिनी …क्या……

रूबी …हां भाभी मैने अच्छी तरहा सोच लिया है वो ठीक कह रही हैं….’एक कहावत सुनी होगी…बर्ड्स ऑफ फेदर फ्लॉक टुगेदर’ अब वो राजेश जीजू के दोस्त हैं तो उनकी तरहा अच्छे ही होंगे…..और फिर कवि का साथ..उपर से आंटी और अंकल का हाथ सर पे ….और क्या चाहिए…बाकी तो जो किस्मेत में लिखा होगा वही मिलेगा…

मिनी …..देख ये फ़ैसले भावनाओं में बहक के नही लिए जाते ……एक बार फिर ठंडे दिमाग़ से सोच ले….आज जो हम दोनो के बीच ग़लती से हो गया..उसे इस फ़ैसले का आधार मत बना ….वरना बाद में पछताएगी….

रूबी…ना भाभी बहुत अच्छी तरहा सोच लिया…इस से पहले मेरे झखम नासूर बन जाएँ..मेरे लिए यही रास्ता सही होगा …जब एक दिल से प्यार करनेवाला मिल जाएगा …ये जखम गायब हो जाएँगे ….और मुझे यकीन है विमल ऐसा ही होगा…वरना राजेश जीजू उसकी बात कभी नही छेड़ते

मिनी ….तो मैं पक्का आंटी को हां कर दूं…फिर सोच ले …अब रिश्तेदारी ऐसी है के बाद में मुकुर नही पाएगी….

रूबी …नही भाभी मुकरने के लिए ये फ़ैसला नही लिया …..

अभी ये लोग बातें कर रहे थे कि दरवाजे पे नॉक हुआ …खोला तो देखा के आरती खड़ी थी….

आरती …चलो बच्चों…चलें डिन्नर के लिए…

मिनी …आंटी एक मिनट बैठो …आपसे कुछ बात करनी है…

मिनी ने रूबी की तरफ स्वालिया नज़रों से देखा …कि बोल दे हां या फिर अब भी….

रूबी ने हां में सर हिला दिया…

आरती वहीं उनके पास बैठ गयी ...हां बेटी बोलो क्या बात है...

मिनी...आंटी आप सुनील से बात कर लो...रूबी ने हां कर दी है...

आरती...क्या....सच.....ओह गॉड आइ'म सो हॅपी टू हियर दिस....मुझे एक और बेटी मिल गयी ...और आरती ने अपने गले से हार निकाल रूबी को पहना दिया और उसे अपने गले से लगा लिया....

आरती के सीने से लग रूबी को वही ठंडक मिली जो सवी के सीने से लग के मिलती थी ...उसकी रुलाई फुट पड़ी ...आज उसे सवी की बहुत याद आ गयी थी....
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