Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
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#81
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 54

नेहा दीदी से मिलने पर उन्होंने साफ साफ शब्दो में कहा था की जो बीत गया उन चीजो पर अपना दिमाग मत लगाओ ,बल्कि आने वाले वक्त की सोचो …

मैं भी फिर भी थोड़ा कंफ्यूशन में था ,

“दीदी लेकिन क्या ये सही होगा की मैं उनसे ये सब छिपाऊँ ..”

मेरी बात सुनकर दीदी हँस पड़ी लेकिन जल्द ही संजीदा हो गई ..

“भाई झूल बोलकर रिश्ते की शुरुवात करना गलत है लेकिन तुमने झूठ नही बोला है बस सच को छुपाया है और जिस सच को तुमने छुपाया है वो अभी तुम्हारा सच है ,वो सच बदल सकता है ,तुम चीजो को और कॉम्प्लिकेटेड मत करो ,सच को ही बदल दो ,तुम रश्मि से प्यार करते हो या नही “

“जी दीदी करता हु “

“तो उसे बताओ की तुम उसे कितना प्यार करते हो ,पॉजिटिव तरीके से आगे बढ़ो ,उससे प्यार करो उसे अपने अहसासों का बयान करो ,और हा इन हवस के चक्रव्यूव से निकलो ये तुम्हे बर्बाद कर देगा ..”

उनकी बात सुनकर मैं थोड़ी देर के लिए चुप रहा ..

“दीदी लेकिन निशा और निकिता दीदी को माना करे करू ?“

“आज नही तो कल करना ही होगा भाई ,उन्हें भी अपने लाइफ में एक नई दिशा ढूंढनी होगी ,अभी तो ये सब चल जाएगा लेकिन जब रश्मि घर आएगी तब कैसे करोगे …”

“तो क्या करना चाहिए.??”

“मुझे पता है की निशा और निकिता दीदी दोनो ही तुझसे सच में प्यार करते है और वो बातो को समझेंगे ,तेरे और रश्मि के बीच कभी भी कोई भी दीवार नही बनेंगे ..इसलिए तुम उनकी तरफ से बेफिक्र रहो लेकिन भाई बाहर किसी से ही कोई भी संबंध मत बनाना,ऐसे किसी के भी साथ जो तुम्हे बाद में फंसा दे या फिर जिसका पता रश्मि को किसी भी तरीके से चल जाए ,खैर मैं आशा करती हु की तुम्हे इतनी तो समझ होगी ही “

मेरे मन में सामीरा का नाम कौंधा लेकिन फिर भी मैं चुप ही रहा

“जी दीदी “

“ओके भाई अब अपने काम पर ध्यान दे आखिर तू इतने बड़े साम्राज्य का मालिक बन गया है और अब तेरी शादी भी हो रही है तो तुझपर जिम्मेदारी भी बढ़ाने वाली है …”

उन्होंने मेरे गालो को खींचा ,

**************

घर में फिर से खुसिया जन्म लेने लगी थी ,मेरी और निकिता दीदी की शादी की खबरों से कोई भी अछूता नही रह गया था ,सब कुछ ठीक चल रहा था,मैं अपने नियमित दिनचर्या को अपना रहा था ताकि मैं ज्यादा शांत रह सकू और वासना की लहरे मुझे ना छुए ,तब भी मेरा जिस्मानी संबंध निशा और निकिता दीदी के साथ बना ही हुआ था ,मैं निकिता दीदी से उनकी शादी के बाद ये संबंध खत्म कर देना चाहता था ,लेकिन अभी भी रोहित पूरी तरह से तैयार नही था,उसे मैं पूरी ट्रेनिंग दे रहा था ,कोशिस यही थी की वो दीदी के साथ आगे की जिंदगी अच्छे से बसर कर सके ..

सामीरा मेरी भावनाओ को समझती थी फिर भी कभी कभी हमारे बीच संबंध बन जाया करते थे,मैं इतना सक्षम तो था की एक साथ कई लड़कियों के साथ संभोग कर सकू लेकिन मैं चाहता था की ये जितना कम हो सके उतना ही मेरे और रश्मि के रिश्ते के लिए अच्छा है,मैं ये सच छिपा कर ही रखना चाहता था ..

सामीरा वाली बात ऐसे भी किसी को नही पता था ,वही निशा और निकिता दीदी वाली बात सिर्फ 3नो बहनो को बस पता थी,इन तीनो के अलावा किसी से भी संबंध बनाने से मैंने परहेज कर लिया था ,क्योकि मैं अपने पिता की गलती नही दोहराना चाहता था ..

अब मेरी शादी होने वाली थी और मुझे मेरी जिम्मेदारी का भी अहसास होने लगा था ,तो मैं बीजनेस में ही ज्यादा समय देने लगा था ,मैं सामीरा के साथ बैठे हुए अपने अकाउंट्स देख रहा था तभी एक नाम में आकर मैं अचानक से रुक गया …

“डागा इंटरप्राइजेज..?”

मेरे मुह से निकला

“हा राज ये डागा साहब की कंपनी थी …”

“डागा साहब ???”

“हा डेनिस चरण डागा उर्फ DCD उर्फ डागा साहब ,अलग अलग कामो के लिए अलग अलग नाम “

“मतलब ..” सामीरा की बात सुनकर मेरे कान खड़े हो गए थे

“डेनिस चरण डागा ये नाम था उनके ड्राइविंग लाइसेंस और मतदाता पत्र का नाम ,अंडरवर्ड में वो DCD के नाम से जाने जाते थे और बिजनेस की दुनिया उन्हें डागा साहब बुलाती थी ..”

“ओह...मगर इनका हमारी कंपनी से क्या कनेक्शन था “

“कभी तुम्हारे पिता और भैरव सिंह दोस्त हुआ करते थे,भैरव सिंह को ऊपर उठाना था तो उसने कुछ गलत धंधे भी शुरू कर दिए तब तुम्हारे पिता जी ने भी उनका साथ दिया था,उस समय ऐसे किसी भी काम को करना डागा साहब की परमिशन के बिना अधूरा होता था ,वो उस समय अंडरवर्ड के किंग हुआ करते थे ,अभी से उनका संबंध तुम्हारे पिता से हुआ था ,लेकिन बात में उन्होंने अपने बुरे कामो को बंद करना शुरू किया और सिंपल बिजनेस करने लगे,सुना है वो दिल के बहुत ही बड़े इंसान थे जितना कमाते थे उतना ही गरीबो और जरूरतमंदो में बांट देते थे,पुराने क्रिमनल होने के बावजूद उनका लोगो में बहुत सम्मान था ,तुम्हारे पिता जी की उन्होंने बिजनेस को बढ़ाने में बहुत मदद की थी दोनो में एक खास कनेक्शन भी था ..”

“कैसा कनेक्शन “ मैं हर एक शब्द को ध्यान से सुन रहा था

“कुछ अजीब सा कनेक्शन था ,बाद में मुझे पता चला था की वो दोनो किसी बाबा के सानिध्य में है और वंहा को साधना कर रहे है ,तुम्हारे पिता ने तो ये सब जल्दी ही छोड़ दिया लेकिन डागा साहब ने साधना जारी रखी और इससे उनके बिजनेस में बहुत ही नुकसान भी होने लगा,लेकिन फिर भी जैसे वो इस चीज को ही अपना जीवन बना लिए थे ,सारी संपत्ति बेच कर दान दे दिया और कही गायब हो गए ...तब तक तुम्हारे पिता से उनका और उनकी कंपनी का कनेक्शन खत्म हो चुका था ,सालो पहले की बात है ..फिर भी जिन लोगो को उन्होंने कंपनी बेची थी उनके साथ हमारे व्यपारिक संबंध थे ,ये उन्ही के अकाउंट्स है बाद में उन्हें जब लगा की डागा नाम का असर जब मार्किट में नही रहा तो उन्होंने कंपनी का नाम बदल लिया ..”

“ओह …”

मैं कुछ सोच में पड़ा था ,मुझे जो समझ आया वो ये ही की पिता जी और बाबा दोनो एक साथ साधना करना शुरू किये थे ,लेकिन बाबा जी ने कभी भी मुझे इस बारे में नही बताया ...अजीब बात थी ,शायद वो अपनी पुरानी जिंदगी से बहुत ही आगे निकल चुके थे …

“क्या हुआ राज किस सोच में पड़ गए “

“नही नही कुछ नही बस ..”

“तुम बिजनेस की ज्यादा टेंशन मत लो ,अभी तुम अपनी शादी पर फोकस करो ,तैयारिया भी तो करनी होगी ..”

“हा वो भी है लेकिन अब शादी हो रही है तो जिम्मेदारियां भी तो बढ़ जाएगी “

मेरी बात सुनकर सामीरा हँस पड़ी

“तुम भैरव सिंह के दामाद बन रहे हो ,तुम्हे किस बात की फिक्र है ..”

उसने मुझे ये चिढ़ाते हुए कहा था

“हमारा बिजनेस उनसे ज्यादा है “

“हा तो क्या हुआ,पावरफुल तो वो ज्यादा है ना ..”

मैंने मुस्कुराते हुए सामीरा को देखा ,इसी पावर,पैसे और सेक्स के चक्कर ने मेरे पिता को डुबो दिया था ..मैंने मन ही मन कसम ली की मैं कभी इस गेम में नही फसुंग बल्कि अपनी जिंदगी में सादगी लेकर आऊंगा ,लोगो की मदद करूँगा जैसे बाबा जी किया करते थे,शक्तियां पाकर मेरे पिता ने जन्हा लोगो की जिंदगी बिगड़ दी और अपने परिवार से भी दूर हो गए वही बाबा जी ने उन्ही शक्तियों से बस दुसरो का भला ही किया,मेरे जैसे इंसान को इतना मजबूत और काबिल बना दिया …

और ये सब सोचते हुए मेरे चहरे में एक मुस्कान आ गई थी क्योकि आज मुझे जैसे अपने जीवन का असली मकसद मिल गया था ..
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RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 55

शादी को कुछ ही दिन बचे थे ,मैं निशा के साथ सोया हुआ था ,

“भाई शादी के बाद आप तो मुझे भूल ही जाओगे क्यो ?”

निशा ने मुझे ये पहली बार नही चिढ़ाया था बल्कि वो ऐसा बोलते रहती थी लेकिन आज मैं इस बारे में थोड़ा सीरियस था ..

“तू कहे तो शादी ना करू “

मेरे ऐसे जवाब से वो भी चौक गई ..

“मैंने ऐसा तो नही कहा भाई”

“तुझे दुखी करके मैं खुश कैसे रह सकता हु मेरी जान “

मैंने बड़े ही प्यार से उसके होठो को चूमा ,उसके आंखों में मैंने कुछ बूंदे देखी..

“तू मेरी बहन है जान,हमारे बीच जिस्मानी संबंध जरूर है लेकिन फिर भी मैं तुझे अपने बहन की तरह ही प्यार करता हु ,लेकिन तुझे सोचना होगा की मैं तेरे लिए क्या हु ..और शादी हो ने से कोई बहन को नही भूल जाता,तू मेरी गर्लफ्रैंड नही है जो शादी होने पर मैं तुझे भूल जाऊंगा ..”

वो सिसकते हुए मेरे सीने में आ समाई ..

मेरे छाती में उगे हुए बालो पर वो अपने हाथो को फेर रही थी ..

“भाई मैं भी आपको बहुत बहुत बहुत ज्यादा प्यार करती हु ,हा आप मेरे भाई हो लेकिन भाई से बहुत ज्यादा भी हो ,मैं ये नही कहती की आप शादी मत करो ,मुझे बेहद खुशी है की जिसे आप प्यार करते हो वो आपके जीवन में आ रही है ,रश्मि को मैं बेहद प्यार दूंगी और रही बात जिस्मानी संबंधों की तो …

मैं किसी और के साथ ये नही कर पाऊंगी ,बस मेरे लिए इतना करना होगा की मुझे हमेशा अपने पास रखना होगा,मैं आपसे कुछ भी नही माँगूँगी ,मैं समझती हु अगर आपको सिर्फ ये संबंध रश्मि के साथ रखना हो तो भी मुझे कोई दुख नही होगा लेकिन ...लेकिन मुझे किसी और के साथ जाने को मत कहना “

उसकी इस बात में मुझे इतना प्यार आया की मैंने उसके गालो को अपने हाथो में पकड़ कर उसके होठो में अपने होठो को डाल दिया..

थोड़ी देर तक उसके प्यारे से गालो को चूमता रहा,उसकी आंखों से अपने होठो को लगाया .और हल्के से उसके नाक पर अपने नाक को रगड़ा ,वो भी हल्के से मुस्कुराई ..

“निशा मैं तुझे हमेशा अपने साथ ही रखूंगा ,कोशिस करूँगा की शायद रश्मि हमारे रिश्ते को समझ पाए मुझे नही लगता की वो समझ पाएगी ,इसे लोग नाजायज और पाप ही समझते है और हमेशा ऐसा ही समझेंगे ,इसलिए दुनिया की मुझे कोई फिक्र नही है ,अगर ये नाजायज है और पाप है तो मैं ये पाप जीवन भर करूँगा,चाहे ये सब रश्मि से छिपकर ही क्यो न करना पड़े ..”

मैं उसके होठो में अपने होठो को डाल चुका था,वही मेरे मन में ये बात भी आ रही थी की मैं जो बोल रहा हु उसे करना कितना कठिन होने वाला है ,रश्मि मूर्ख नही थी हमारी शादी होने वाली थी और एक बार जब वो घर आ गई तो निशा के साथ मुझे जिस्मानी रिश्ते तोड़ने पड़ेंगे ,रश्मि इसी शहर में रहती थी मायके जाने वाला कोई सिस्टम ही नही था,पाप करना जितना आसान होता है उसे छिपाना उतना ही कठिन और कोई चीज तब तक पाप होती है जब तक उसे छिपकर किया जाए ….

मुझे रश्मि से बात करनी होगी ,मैं अपनी बहन को ऐसे नही छोड़ सकता ,अगर वो किसी से शादी नही करेगी ,हमेशा मेरे साथ रहेगी तो इसका मतलब साफ था की मुझे उसके जिस्मानी जरूरतों को भी पूरा करना होगा ,और छिपकर मैं कितना ही कर पाऊंगा...मुझे इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नही थी की रश्मि इसे समझ पाएगी लेकिन अगर किसी तरह उसे शादी के बाद ये सब पता चला तो शायद वो खुद को भी मार दे ,शायद वो इसे सहन ही नही कर पाए,वो मुझे छोड़ देती तो कोई बात नही थी लेकिन वो खुद भी इससे टूट जाएगी और ये मेरे लिए सबसे बड़ी बात थी जिसे मैं खुद इतना प्यार करता था मैं उसे टूटने कैसे दे सकता हु …

मैंने मन ही मन ये फैसला कर लिया था की शादी से पहले मैं उसे ये बात दूंगा …

************

शहर से बाहर एक पहाड़ी के ऊपर बैठा हुआ मैं सिगरेट के गहरे कस खीच रहा था ,सामने मेरे नजर में पास गहरी खाई दिख रही थी ,ये एक पर्यटन स्थल था जो की घुमावदार पहाड़ी रास्ते में बनाया गया था जन्हा लोग रुककर फ़ोटो वोट खिंचा करते थे,यंहा से पूरी खाई साफ साफ दिखाई देती थी साथ ही मेरा शहर भी ,और शहर से लगी नदी भी ..

इस मनोरम दृश्य को देखते हुए भी मेरे चहरे पर चिता के भाव गहरा रहे थे सिगरेट के कस इतने गहरे खीच रहा था की कोई भी देखकर कह सकता था की मेरे मन में कोई बहुत ही गहरा द्वंद चल रहा है ,मैं किसी बेहद ही गंभीर चिंता में डूबा हुआ हु ..

पास ही टॉमी भी टहल रहा था ,

जब मैं मुड़ा तो सामने से मेरी दिल की रानी,हुस्न की मलिका रश्मि आती हुई दिखी,आंखों में आंसू लिए और चहरे में ढेर सारा गुस्सा था ,उसके पीछे निशा चल रही थी उसके भी आंखों में आंसू था लेकिन चहरा मायूस था ..रश्मि मेरी ओर तेजी से बढ़ रही थी उसे देखते ही मेरे हाथो में रखी सिगरेट अपने आप ही नीचे गिर गई वो मेरे पास आ चुकी थी …

चटाक …

एक झन्नाटेदार थप्पड़ मेरे गालो में पड़ा,उसके हाथो इतने कोमल थे की मुझे किसी फूलों के टकराने सा आभास हुआ लेकिन वजन उसके हाथो में नही बल्कि उसकी भावनाओ में था..

आंखों से निर्झर आंसू बहने लगे थे,मेरी आंखे भी चंद बूंदों का रिसाव प्रारंभ कर चुकी थी ..

“तुम इतने बड़े कमीने निकलोगे मैंने सोचा भी नही था,जिसे मैंने अपने जान से ज्यादा चाहा वो ऐसा निकलेगा छि ...वो भी अपने ही बहन के साथ “

वो रोते हुए खाई के पास जाकर बैठ गई,एक बार मुझे डर लगा की कहि वो खुद ही ना जाए..

इसलिए मैं तुरंत ही उसके पास पहुचा और उसके पास बैठ गया ..उसकी दूसरी ओर निशा बैठ गई थी ..

रश्मि और निशा दोनो ही रो रहे थे ,मैं बस खाई को निहार रहा था ..

मैंने एक फैसला किया था रश्मि को अपने और निशा के बारे में बताने का फैसला ,मैं कुछ भी बोलने की हालत में नही था इसलिए मैं उसे और निशा को यंहा लेकर आया था ,और निशा ने उसे सब कुछ बता दिया था ,वो मानो किसी और ही दुनिया में खोई हुई बस रोये जा रही थी ..

ना जाने कितना समय ऐसे ही बीत गया था मैं उसे चुप कराने की कोशिस भी नही कर रहा था …..

“मैं ये शादी नही कर सकती “

आखिर उसने बोला ..

“मैं तुम्हारे फैसले का सम्मान करता हु रश्मि अगर तुम नही चाहती तो …”

मैं कुछ भी ना बोल पाया ..

लेकिन उसने अजीब आंखों से मुझे देखा

“मुझे इसकी उम्मीद नही थी राज की तुम ऐसे निकलोगे ..तुमने ये बात मुझसे छिपाई लेकिन ..लेकिन अब तुम मुझे यू ही जाने दे रहे हो ..”

उसकी बात से मैं चौक गया

“तो ..”

मैं हड़बड़ाया

“तो का क्या मतलब है ,जब हमारे परिवारों को ये पता है और उन्होंने रिश्ते के लिए मना नही किया तो हम क्यो पीछे हटे..”

इस बार मेरा सर पूरी तरह से चकराया ..

“वाट ..”

“ऐसे क्या अनजान बन रहे हो सबको पता है की तुम और मैं भाई बहन है ,हम दोनो के पिता एक ही है “

मैंने घूरकर निशा की ओर देखा ..वो सर गड़ाए हुए मुस्कुरा रही थी ,अब इस लड़की का मैं क्या करू,मैंने इसे क्या बोलने के यंहा लाया था और ये क्या बोल गई ..

“रश्मि …”अब मैं क्या बोलता मुझे समझ ही नही आ रहा था असल में रश्मि इसलिए गुस्से में थी की मैंने उसे ये बात नही बताई थी जबकि मुझे पहले से ही पता चल गया था ..

“अब कुछ बोलोगे भी ..”

वो मुझे गुस्से में देख रही थी ,मैंने एक गहरी सांस ली

“रश्मि बात बस इतनी नही है ..”

इस बार निशा ने मुझे सर उठाकर देखा उसने ना में सर हिलाया ..

लेकिन मैंने बोलना जारी रखा

“रश्मि ये बात अपनी जगह है लेकिन मैं तुम्हे यंहा कुछ और बताने के लिए लाया हु .”

“नही भइया “

निशा अनजान डर से कांप गई थी जो बात उसे बतानी चाहिये थी वंहा वो खेल गई थी ,मैं समझता था वो नही चाहती थी की एक सच में मेरे और रश्मि के रिश्ते में कोई दरार आये लेकिन मैं झूठ के सहारे नही जी सकता था …

“क्या हुआ राज कौन सी बात “

रश्मि बुरी तरह से चौक गई थी और हमे संदेह की निगाहों से देख रही थी ..

“रश्मि कैसे कहु ..लेकिन कहना भी तो जरूरी है “

मैं अपना सर पकड़ कर बैठ चुका था ,रश्मि का रोना पूरी तरह से बंद हो गया था ..

“राज तुम मुझे डरा रहे हो क्या बात है ..”

“नही भईया ऐसा मत करो “इस बार निशा फफक कर रो पड़ी थी

मैंने एक गहरी सांस ली ,और रश्मि का हाथ अपने हाथो में ले लिया

“रश्मि एक बात ये जान लो की मैं तुमसे बेहद प्यार करता हु ,तुम्हारे बिना मेरे लिए ऐसा है जैसे सांस लिए बिना जीना ,तू अगर मुझसे दूर हुई तो मैं तड़फ जाऊंगा ,इसलिए मैंने ये बात अभी तक तुमसे छिपा कर रखी है मैं नही चाहता था की मैं तुमसे दूर हो जाऊ लेकिन ...लेकिन मैं अपने रिश्ते की बुनियाद झूठ से नही रखना चाहता ,मुझे बोलना ही होगा ,ये झूठ मैं तुमसे नही बोल सकता ..”

रश्मि ने मेरे आँखों में देखा वो सच में घबराई हुई थी

“क्या राज ..??”

“रश्मि...मेरे और निशा के बीच ..जिस्मानी संबंध है ..”

मैं इतना ही बोलकर चुप हो गया था ,वही रश्मि का हाथ किसी बर्फ की तरह ठंडा हो चुका था,वो बस मुझे देख रही ही उसकी आंखों में एक आंसू भी नही था ,चहरा किसी मुर्दे की तरह पिला पड़ चुका था ,

“रश्मि ..”

मैंने उसे हिलाया ,निशा भी और मैं दोनो ही उसकी इस हरकत से डर गए थे .

“रश्मि उठो ..रश्मि “

वो कुछ भी नही बोली ,उसकी आंखे तो खुली हुई थी लेकिन वो बस चुप थी ..

चटाक ,चटाक चटाक

मैंने पूरी ताकत से उसे तीन झापड़ लगा दिए ,तब जाकर उसकी नजर मुझसे मिली …

बस हमारी नजर मिली थी हम एक दूसरे को देख रहे थे,पता नही वो क्या बोलने वाली थी लेकिन वो चुप थी बिल्कुल ही चुप ,मैं चाहता था की वो मुझे मारे मुझे गालियां दे लेकिन वो चुप थो...और उसकी यही चुप्पी मुझे डरा रही थी ...बेहद ही डरा रही थी ..

“रश्मि कुछ बोलो “

मेरी आवाज भर गई थी

“माफ नही कर सकती तो कम से कम गालियां ही दे दो ,मुझे मारो रश्मि ,लेकिन ऐसे चुप तो ना रहो “

मैंने उसके चहरे को पकड़ कर झिंझोरा ,वो हल्के से हंसी

“बहुत खूब राज पिता जी सही कहते थे तुम रतन चंदानी के खून हो ,और उसपर कोई भी भरोसा नही कर सकते ..तुमने अपनी ही बहन के साथ ..वाह राज वाह..”

तभी निशा ने रश्मि का हाथ पकड़ लिया

“रश्मि ये मेरी गलती थी ,मैं ही भाई को उकसाती रही ,मैंने ही उनसे प्यार कर बैठी थी ,उन्होंने तो बस मुझसे प्यार किया था ,ये कब जिस्मानी हो गया मुझे पता ही नही चला ,प्लीज् रश्मि भाई को मत छोड़ना,मैं तुम्हारे जीवन से बहुत ही दूर चली जाऊंगी ,मेरा साया भी इनके ऊपर नही पड़ेगा ,रश्मि प्लीज ..ये तुम्हे बहुत प्यार करते है तुम्हारे बिना नही जी सकते “

निशा ,उसके पैर को पकड़ कर गिड़गिड़ा रही थी ..

रश्मि ने उसके बालो पर अपने हाथ फेरे ..

“नही निशा तू कहि नही जाएगी ,तूने अपने भाई से प्यार किया है और ये प्यार तुझे मुबारक हो ,जाऊंगी तो मैं तुम्हारे जीवन से “

इससे पहले ही कोई कुछ समझ पाता रश्मि खड़ी हुई और सीधे खाई में खुद गई ..

“रश्मि..” दो आवाजे तेजी से निकली ..और फिर

“भाई ..”निशा चिल्लाई ,क्योकि मैं भी रश्मि के पीछे खुद गया था …

जैसे ही रश्मि खाई की तरफ भागी थी मुझे समझ आ गया था की वो क्या करने वाली है और मैं उसके पीछे दौड़ा वो कूदी और उसके पीछे मैं भी कूद गया ,इतने दिनों के बाद मैंने फिर से अपनी शक्तियों का प्रयोग किया मेरा दिमाग बिल्कुल ही शांत हो चुका था,मेरे हाथो में रश्मि का हाथ आ चुका था,मैंने उसकी कलाई को जकड़ लिया और अपने दूसरे हाथ से पहाड़ में उगे एक पेड़ को पकड़ लिया,नीचे खाई थी और हम अधर में लटके हुए थे …

“छोड़ दो मुझे राज मुझे मर जाने दो मैं ऐसे नही जी सकती “

रश्मि चिल्लाई

“चुप चुप बिल्कुल चुप..”उसकी इस हरकत से मेरा दिमाग गर्म हो चुका था

“क्या सोच कर अपनी जान दे रही है तू ,तेरे जाने के बाद क्या मैं खुश रह पहुँगा ..क्या निशा कभी अपने को माफ कर पाएगी ,अगर हम इसे तुझसे छिपाते तो जिंदगी भर कभी इसकी खबर नही होती और आज सच बोलने की तू मुझे ये सजा दे रही है “

“राज तुम मुझपर गुस्सा हो रहे हो तुम्हे इसका कोई हक नही है ,तुमने गलती की है ..”

वो रोते हुए चिल्लाई

“गलती की है तो क्या खुद की जान ले लेगी,अरे मरना है तो मैं मारूंगा तू क्यो मारने को खुद गई ,और जब हम दोनो ही मारने वाले है तो सुन ..सिर्फ निशा ही नही बाली निकिता दीदी से भी मेरे सबन्ध रहे और हा मैं लड़कियों को सिर्फ देखकर ही उन्हें आकर्षित कर सकता हु लेकिन कभी तुझे किया क्या नही ना,क्योकि मैं तुझसे प्यार करता था ,और निकिता दीदी के साथ साथ सामीरा और सना से भी हो चुका है ,और कान्ता और शबीना से भी ..”

खाई के उपर लटक रही थी ,उसकी कलाई को मैंने पकड़ के रखा था हम दोनो ही मौत में झूल रहे थे ..

वो आश्चर्य से मुझे देख रही थी ..

“क्या ...क्यो मेरे प्यार में ऐसी क्या कमी रह गई थी राज “

वो रोने लगी थी

“क्या कमी ?? तुझे उस लकड़ी के बारे में बताया था न और आठ ही ये भी की उसने मेरे अंदर कितनी ताकत भर दी ,तो वो ताकत मेरे सेक्स में भी बढ़ गई ..मैं पागल रहने लगा था सेक्स के लिए तभी मुझे निशा ने प्रपोज कर दिया ,तू तो शादी से पहले कुछ भी नही करना चाहती थी तो क्या करता तेरे साथ जबरदस्ती करता क्या,जो मिला उससे ही काम चला लिया “

ये सब बोलते ही मुझे थोड़ा भी डर नही लग रहा था मुझे बस ये लग रहा था की मारने से पहले बस उसे सब सच सच बता दु,मुझे अब ऐसा भी नही लग रहा था जैसे मैंने जिस्मानी संबंध बनाकर कोई गलती की हो मुझे सब बिल्कुल भी नार्मल सा लग रहा था और इसलिए मैं ये बोल पा रहा था ..

“तो तुम मुझे बता तो सकते थे ना की तुम्हे क्या परेशानी है ,मैं तुम्हे संतुष्ट करती “

मैं जोरो से हँस पड़ा

“तू..तू तो मुझे अकेले अभी भी सन्तुष्ट नही कर पाएगी ,शायद तुझे पता नही की ये आग क्या है रश्मि,मैं तुझे कभी भी धोखा नही दे सकता इसलिए मैंने शादी से पहले के सभी संबंध खत्म करने के लिए भी सोच लिया लेकिन ...लेकिन जब ये आग भड़कती है तो ..तो तुझे बता नही सकता की क्या हो जाता है मैं जानवर बन जाता हु ,एक लड़की के बस का नही है पगली “

वो मुह फाडे देख रही थी

“अगर सच्चाई बता देते तो मैं कुछ ना कुछ तो कर हि सकती थी “

“ले अब बात दिया ना सच्चाई कर ले क्या कर सकती है “

मैं ये बोलकर हँस पड़ा था वही रश्मि मुझे खा जाने वाली निगगहो से देख रही थी ,मैंने एक गहरी सांस ली और उसे ऊपर उछाल दिया ,वो हवा में उछली और मैंने उसके कमर को पकड़कर अपने से चिपका लिया ..

“देखा तेरे होने वाले पति में इतनी ताकत है की तुझे किसी गुड़िया की तरह उछाल दिया “

मैं जोरो से हंसी ..

“पति हु ..”

भले ही हम जिंदा बचे या ना बचे लेकिन रश्मि की नाराजगी का गायब होना मेरे लिए इतना सुखद था की मैं अब हँसते हँसते ही मर सकता था ..

“ये पगली ,आई लव यू,और शादी के बाद किसी से कोई भी संबंध नही ,मेरा प्रोमिश है “

“और निशा के साथ “

“तेरी इजाजत से ,वो भी तो मुझे बेहद प्यार करती है और मेरे सिवा किसी और की नही होना चाहती “

“वो तुम्हारी बहन है “

“तू भी तो है ..”

मेरी बात सुनकर रश्मि शर्मा गई

“मेरी बात अलग है ..”

मैंने उसके चहरे में एक फूक मारी ,मेरे हाथो में अब दर्द होने लगा था,ये हमारे जीवन का अंतिम समय हो सकता था और मैं इसे और भी हसीन बनाना चाहता था ,

“हम शायद अब मारने वाले है मारने से पहले मुझे माफ कर दे जान ,मैं तेरा हु और सिर्फ तेरा ही रहूंगा,आई लव यू मेरी रानी “

मैंने रश्मि के नाक में अपनी नाक रगड़ी..

उसकी आंखों में पानी था ,उसने अपने हाथ मेरे गले में जकड़ लिए थे,और पैर मेरे कमर में ..

हमारे होठ मील गए ..

जीवन में ऐसा किस मैंने कभी भी नही किया था ,इसमे इतना प्रेम था इतनी गहराई थी …..

मेरा हाथ फिसलने लगा था ,और अब मैं अपनी जान के बांहो में समाए हुए अपने जीवन का अंत करना चाहता था ..

“मैं इसी तरफ से मरना चाहता था जान “

हम दोनो की आंखे मिल गई थी ..

“लेकिन अब मैं मरना नही चाहती ,तुम्हारे साथ जीना चाहती हु “

उसने सुबकते हुए कहा ,

“अरे वो कोई जगह है क्या रोमांस करने की ,रस्सी को पकड़ो “

ऊपर से निशा चिल्लाई ,देखा तो पास में एक रस्सी अभी अभी लटक रही थी शायद निशा ने फेंकी थी ..

“तुम साथ हो तो मैं कैसे मर सकता हु “

मैंने ताकत लगाई और अपनी पकड़ और भी मजबूत कर दी और उसे रस्सी को अपनी ओर खिंचने के लिए कहा,रस्सी से मैंने उसे अपनी और मेरी कमर को जोरो से बंधने के लिए कहा ,जब उसने आश्वस्त किया की हमारी कमर रस्सी से अच्छे से बंध चुकी है तो मैंने रस्सी को दोनो हाथो से पकड़ लिया,रश्मि मुझे जोरो से पकड़े हुए थी ..

ये मेरे ताकत की परीक्षा थी ,मैं पुरी ताकत लगाकर ऊपर चढ़ रहा था ,हाथो में गजब का दर्द था लग रहा था की कहि ये शून्य ना हो जाए लेकिन मैं गहरी सांस लेकर ऊपर चढ़ रहा था ……..

ऊपर आने के बाद जन्हा निशा रोते हुए हमसे लिपट गई वही ,रश्मि ने मुझसे अलग होते ही एक तेज करारा झापड़ मेरे गालो में झड़ दिया …

“अकेले मरने भी नही दे सकते क्या “

वो गुस्से में बोली

मैंने मुस्कुराते हुए हा में सर हिलाया और वो फिर से मुझसे लिपट गई …...
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Yesterday, 12:44 PM,
#83
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 56

आखिरकार वो ही दिन आ गया जब हमारी शादी हुई ,पूरा माहौल खुश था,शहनाइयां बज रही थी ,दिल झूम रहा था ..

पहले मेरी बारात गई और फिर दूसरे दिन निकिता दीदी की शादी होनी थी ,बारात आने ही वाली थी और में दीदी के कमरे में गया …

वो दुल्हन के परिधान में बैठी हुई बहुत ही प्यारी लग रही थी ..

मैंने सबसे उनसे अकेले बात करने के लिए थोड़ा समय मांगा…

“क्या हुआ भाई”

मुझे अपने चहरे को इतना गौर से देखते हुए दीदी ने कहा

“आप बहुत ही सुंदर लग रही हो “

मैंने उनके माथे को चुम लिया..

वो भी मुस्कुरा रही थी

“दीदी ,रोहित जैसा भी है आपसे बहुत ही प्यार करता है “

“जानती हुई इसलिए तो इस शादी के लिए राजी हो गई,और तू तो है ना सब सम्हालने के लिए “

वो मुस्कुराई

“सब का मतलब…”

मैं उन्हें देखकर मुस्कुराया

“सब का मतलब सब ..अगर रोहित मुझे खुश नही कर पाया तो “

मैं हल्के से मुस्कुराने लगा

“वो कर लेगा फिक्र मत कीजिये,हमारे बीच जो भी हुआ है आजतक उसे सब पता है ,लेकिन आज के बाद आप उसकी है,मैंने उसे ट्रेन किया है वो अब मानसिक और शारीरिक रूप से पहले से बहुत ही अच्छा और मजबूत इंसान बन चुका है..”

“जानती हु भाई लेकिन उसकी बस वो देखने वाली बीमारी उसके सर में ना चढ़े वरना करने की जगह बाद देखता रह जाएगा “

हम दोनो ही इस बात पर जोरो से हँस पड़े

“डोंट वरी वो सम्हाल लेगा अब “

“और भाई रश्मि को खुश रखना,ये बड़ी बात है की वो तुमसे इतना प्यार करती है,तू नसीबवाला है की तुझे समझने वाली बीबी तुझे मिल रही है और एक बात और अपने हैवान को अपने काबू में रखना ,बेचारी के लिए सब कुछ नया होगा “

मैंने मुस्कराते हुए हा में सर हिलाया और उनका माथा फिर से चूम लिया …

दीदी की बिदाई हो चुकी थी ,सही शादी के भागदौड़ में थके हुए थे..दूसरे दिन मेरी सुहागरात होनी थी ..


मुझे सुबह से ही अपने कमरे में घुसने नही दिया गया था ,रात में जब मैं वंहा पहुचा तो पूरा कमरा अच्छे से सजाया गया था..

अंदर मेरी दो बहने मेरा इंतजार कर रही थी …

“भाई पहले शगुन दो फिर हम जाएंगे “

निशा ने इठलाते हुए कहा ,मेरी जान रश्मि अभी सिकुड़ी हुई अंदर ही अंदर मुस्कुराते हुए बैठी थी ..

वही निशा और नेहा दीदी मेरे बिस्तर पर आराम से बैठी थी ,टॉमी भी मानो कोई शगुन की आस में उनके साथ ही बैठा हुआ था ..

“क्या शगुन चाहिए “

मेरी बात सुनकर दोनो एक दूसरे को देखने लगी

फिर निशा ने ही आगे की बात की

“भाई पूरा पर्स खाली करेंगे तब ही भाभी के पास आने देंगे वरना हम यही बैठे है “

“अच्छा तो बैठे रहो मेरी जान से प्यार करने में मैं शरमाउंगा क्या ??”

“हा तू तो बेशर्म ही है,चल चुप चाप शगुन निकाल “

इस बार नेहा दीदी ने मुझे झाड़ा “

“अरे तो बताओ तो की कितना ??”

मेरी बात सुनकर फिर से दोनो बहने एक दूसरे को देखने लगे ..

“मुझे एक शगुन चाहिए “निशा बोल उठी

“अरे मेरी जान मेरा जो भी है वो तेरा ही तो है तू बोल ना तुझे क्या चाहिए “

आखिर मैंने भी बोला

“मुझे चाहिये...कि ..आप भाभी से बेहद प्यार करोगे और साथ ही उनका पूरा ख्याल रखोगे “

निशा की मासूम सी आवाज मेरे कानो में पड़ी

मेरे और नेहा दीदी के साथ साथ रश्मि भी मुस्कुराने लगी थी

“अच्छा तुझे क्या लगता है की मैं तेरी भाभी को प्यार नही करूँगा “

मैंने निशा को छेड़ा

“मैं जानती हु की आप भाभी से कितना प्यार करते हो लेकिन फिर भी मुझे कसम दो “

निशा का बालहठ जारी था

“”तू बोले तो जान दे दु तेरी भाभी के लिए .”

मेरी बात सुनकर सब थोड़ी देर के लिए चुप हो गए

“अच्छा खाई में लटक कर भी दिमाग ठिकाने नही आया ना आपका ,चलो सीधे सीधे प्रोमिश करो मुझसे “

निशा की इस बात ने कहि ना कहि मेरा दिल ही जीत लिया था ,मैं उसके हाथ में अपना हाथ रखकर बोल पड़ा..

“”मैं तेरी भाभी से जान से भी ज्यादा प्यार करूँगा ,वो मेरी जान है उसके लिये कुछ भी करूँगा ओके ..”

मेरी बात सुनकर जन्हा निशा के चहरे में नूर आ गया वही रश्मि थोड़ी और सहम सी गई ,ना जाने घूंघट के अंदर का क्या माजरा था ..

“भाई अब शगुन दे और हमे बिदा कर “

नेहा दीदी ने साफ शब्दो में कहा

“अरे तो बोलो ना,अपनी बहनो के लिए तो जान हाजिर है “

“जान नही बस तू पर्स इधर दे “

मैंने मुस्कुराते हुए अपना पर्स उन्हें दे दिया…

“ छि कैसा कंगाल आदमी है ,इतनी बड़ी प्रॉपर्टी का मालिक हो गया है फिर भी जेब में सिर्फ 2 हजार रुपये “

“अरे दीदी क्रेडिट कार्ड रख लो जो लेना हो ले लेना “

“हमे बस नेंग के लिये चाहिए,अभी यंहा से निकलेंगे तो पूरे परिवार वाले पूछेंगे की भाई ने कितना दिया ,ये क्रेडिट नही केस होता है “

“ओह..कैश तो इतना ही है “

“कोई बात नही इतने में काम चला लेंगे “

दीदी ने पैसे अपने पास रख लिए और रश्मि के सर पर एक किस किया साथ ही मेरे माथे को भी चूमा ,वही निशा ने भी किया ..

“बेस्ट ऑफ लक भाई”

दोनो मुस्कुराते हुए वंहा से निकल गई ,साथ ही टॉमी को भी ले गयी ..

“अरे उसे तो छोड़ दो ,उसे कहा ले जा रही हो “

मेरी बात सुनकर दोनो ही हँस पड़ी वही मुझे रश्मि की भी हंसी की आवाज सुनाई दी ..

“आज इसे हम लोगो के पास रखने दे ओके..”

मैंने कोई बहस नही किया ,क्योकि अगर वो ऐसा कर रही थी तो कुछ सोचकर ही कर रही थी ...

ये परम्पराए भी अजीब होती है ,इतनी दौलत होते हुए भी मेरी बहने 2 हजार में खुश हो गई ..

खैर सामने रश्मि शरमाई और सहमी ही बैठी थी ,ऐसे जिनकी लव मैरिज हुई हो उन्हें ऐसे शर्माना तो शोभा नही देता लेकिन सच कहो तो ये शर्म एक औरत को और भी खूबसूरत बना देता है ..

मैंने धीरे से उसका घूंघट उठाया,वो हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी ..

“हाय मेरी जान कितनी खूबसूरत लग रही हो “

सच में वो बेहद ही सूंदर लग रही थी ,सुंदरता सिर्फ जिस्म की नही होती असल में सूंदर होना और सूंदर दिखना दोनो में फर्क है ,कोई दुनिया की नजर में सूंदर हो सकता है लेकिन आप को सूंदर ना लगे वही कोई दुनिया की नजर में सुंदर नही हो वो आपको बेहद ही सूंदर लगे ,जैसे की मा को उसके बच्चे हमेशा से सूंदर लगते है चाहे वो जैसे भी हो ..

प्रेम में होने से सुंदरता और भी बढ़ जाती है ,मैं प्रेम में था एक गहरे प्रेम में था और रश्मि भी शायद मेरे लिए वैसा ही महसूस करती थी..

मुस्कराती हुई रश्मि को देखकर मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं शुरू कहा से करू क्योकि मैं जो भी करता तो हो सकता है उसकी मुस्कराहट चली जाती और मै ये नही होने देना चाहता था ..

“इन लोग टॉमी को भी ले गए “

मैंने बात बढ़ाने के लिए कहा,हमारे रिलेशन को इतना दिन हो गया था फिर भी मुझे यंहा बैठकर नर्वस सी फिलिंग आ रही थी ..

मेरी बात सुनकर वो हंसी

“मैंने ही कहा था “

“वाट ? क्यो??”

“मुझे शर्म आती ना इसलिए “

“अरे तो टॉमी से क्या शर्माना “

वो फिर से हल्के से हंसी “

“नही पता लेकिन उसके सामने “

“उसके सामने क्या ?”

“वो मेरा देवर जो है “

रश्मि की बात सुनकर मुझे बेहद प्यार आया और मैंने उसके गालो को चुम लिया

“अच्छा वो तुम्हारा देवर है “

“अब आप मेरे पति हो “

मुझे अचानक ही ये याद आया की मैं सच में उसका पति हु ,ये हो गया था ..ये फिलिंग भी मेरे दिमाग से निकल गई थी ,पति होने की फिलिंग ..वो मेरी पत्नी थी इसका मतलब बहुत ही बड़ा था.एक जिम्मेदारी साथ थी ,और उसके साथ ही एक अधिकार भी ..

मैंने रश्मि को जोरो से जकड़ लिया था .

“क्या हुआ आपको “

वो मुझे आप कहने लगी थी ,मेरे चहरे में ये सुनकर मुस्कान आ गई

“तुम मेरी हो गई जान “

“मैं तो हमेशा से ही आपकी हु “

“लेकिन आज दुनिया के सामने भी हो गई ,”

“और आप भी अब मेरे हो “

“हा मेरी जान “

मैंने रश्मि के होठो पर अपने होठो को रख दिया ,झलकते हुए पैमानों से होठो का रस मेरे होठो में घुलने लगा था ,उसने भी अपनी बांहे मेरे गले में डालकर मुझे खुद को सौप दिया था..

हम आगे बड़े और तब तक नही रुके जब तक हम एक दूसरे में खो ही नही गए …..


*********
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Yesterday, 12:44 PM,
#84
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
शादी को 10 दिन हो चुके थे ,हम कही घूमने जाने का प्लान भी कर रहे थे ,तभी नेहा दीदी ने मुझे एक गिफ्ट दिया ..

उसमे एक जादू के शो की कुछ टिकटे थी ,कोई बहुत बड़ा जादूगर शहर आया था,देश विदेश में उसका नाम था ,शहर के बड़े बड़े लोग भी वंहा पहुचे थे..

“अरे दी मुझे ये जादू वादु में कोई इंटरेस्ट नही है “

“देख हम सभी तो जा रहे है तू अपना देख ले लेकिन याद रख नही गया तो जीवन भर पछतायेगा “

उनकी बात मुझे थोड़ी अजीब लगी ,मैंने उनके आंखों में देखा कुछ तो अजीब था ...वही रश्मि और निशा बहुत ही एक्साइटेड थे क्योकि उन्होंने उस जादूगर के कुछ खेल यु ट्यूब और टीवी में देखा था,उन्होंने भी मुझे जाने के लिए बहुत फ़ोर्स किया आखिर मैं भी मान ही गया……

शो शानदार था और कुछ ऐसा था जो हजारों सवाल मेरे दिमाग में ला रहा था ,जैसे उस जादूगर ने खुद को ऊपर लटकाया था उसके हाथ पैर बांध दिए गए थे,मजबूत ताले लगा दिए गए थे,वही

नीचे बड़े बड़े मगरमच्छ से भरा हुआ शीशे की बानी टंकी थी ,अगर वो नीचे गिरता तो मगरमच्छ उसे खा जाते ,ऊपर की रस्सी को भी जला दिया गया था जो की एक मिनट बाद ही टूट जाती ,जिससे वो नीचे गिर जाता ..

अब उसे अपने हाथ और पैर के ताले खोलकर टंकी के बाजू में खुद जाना था वो भी सिर्फ 1 मिनट के अंदर वरना वो मारा जाता ,सभी अपनी उंगली दांत से दबा चुके थे ,समय निकल रहा था और वो अपने हाथो को खोलने में कामियाब रहा था लेकिन पैरो को नही खोल पा रहा था .1 मिनट पूरा होगा गया चारो तरफ लाल लाइट जलने लगी और आखिर रस्सी टूट गई ,जादूगर का शरीर सीधे उस टब में गिरा और चारो तरफ से चीखों की आवाज गूंज गई ,मेरा दिल ही जोरो से धड़का ,टब के अंदर के मगरमच्छो ने उसके शरीर के चिथड़े चिथड़े उड़ा दिए …

पूरा हाल शांत हो गया था तभी एक आवाज आय

“क्या आप मुझे यंहा देखना चाहते है”

ये आवाज हाल के पीछे से आई सही का सर उधर घुमा और तालियों की गड़गड़ाहट से फिर से पूरा हाल गूंज गया ..वो जादूगर हाल के एंट्री पॉइंट में खड़ा था .

सभी जैसे पागल हो गए थे और तालिया बजा रहे थे ,और ये तो बस एक ही आइटम था उसने कुछ और भी चीजे दिखाई जिसे देखकर मेरे दिमाग में बस एक ही सवाल गुंजा …

आखिर कैसे ….????
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Yesterday, 12:44 PM,
#85
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 57

जब शो खत्म हो गया सभी लोगो के मुह में बस तारीफ ही तारीफ थी लेकिन मेरी नजर नेहा पर थी ..

नेहा दीदी मुझे देखकर बस एक स्माइल दे गई और सभी के साथ बाहर जाने लगी ,

शो में राज्य के मंत्री जी भी आये थे जो की मुझे उस दिन पार्टी में मिले थे ..

मैं उनकी ओर लपका

“ओह राज तुम भी यंहा आये हो ,कैसे लगा शो..”

“बेहतरीन ,क्या आप उस जादूगर से मुझे मिलवा सकते है “

“बिल्कुल क्यो नही चलो हमारे साथ अभी उससे ही मिलने जा रहा हु “

“अकेले ..”

मेरे मुह से निकला

“वाट ..”

“प्लीज् सर “

“ठीक है लेकिन ऐसी क्या बात हो गई की तुम्हे अकेले में मिलना है ..”

वो भी आश्चर्य में थे

“वो मुझे...मुझे उनसे जादू सीखना है “

“वाट हाहा …”

वो मुझ देखने लगे

“क्या सच में ??”

उन्होंने फिर से कहा

“जी बिल्कुल “

“तुम अजीब आदमी हो यार राज ,इतना बड़ा बिजनेस है और तुम्हे जादू सीखना है ये कोई फालतू काम नही है बचपन से प्रेक्टिस करते है लोग “

“आप एक बार मिलवा तो दीजिये “

“अच्छा अभी तो अपने परिवार के साथ चलो फिर बात करते है “

मैं उनके साथ सभी को लेकर चल दिया ,मेरे घर वाले उस सेलिब्रेटी जादूगर से मिलकर खुश थे असल में बहुत भीड़ थी उनसे मिलने के लिए यंहा तक की VIP लोगो की भी ,मंत्री जी ने मुझे जादूगर के सेकेट्री से मिलवाया

“सर काम क्या है “

“यार काम नही बता सकता बस मीटिंग करवाओ ,अगर पैसे लगेंगे तो मैं देने को तैयार हु “

“सर बात पैसों की नही है असल में सर बहुत बिजी होते है ..”

“आधा घंटा बस ..”

सेकेट्री थोड़े सोच में पड़ गया मुझे तब समझ आया की सेलिब्रेटी होना क्या होता है ,उसके सामने पैसा भी कोई मतलब नही रखता वक्त की ये कीमत होती है ..

“ओके सर ,अब आप मंत्री जी के थ्रू आये है तो मैं कुछ करता हु ,कल सुबह गार्डन में चलेगा ,वो मॉर्निंग वाक में जाते है ..”

“ओके डन ..”


मैं सुबह सुबह वंहा पहुच गया था ..

मैं अपना सामान्य परिचय देने ही वाला था की वो बोल उठे

“मैं जानता हु आपको चंदानी साहब ,कल ही तो हम मिले थे आप अपने परिवार के साथ आये थे,मेरी याददाश्त इतनी भी कमजोर नही है,और ऐसे भी इस उम्र के अरबपति है ही कितने दुनिया में जो पूरा बिजनेस खुद के दम पर चला रहे है …”

मैं उनकी बात सुनकर बस मुस्कुराया ,वो बेहद ही तेज चलते थे,उनके सामने मुझे लगभग दौड़ाना पड़ रहा था

“सर मुझे आपसे के चीज जाननी है “

“बोलिये “

“वो जो आपने टंकी वाला सीन किया था ,गजब का था ऐसा लगा जैसे की आप नीचे गिर गए और मगरमच्छो ने आपको खा ही दिया लेकिन आप पीछे से आ गए ..सर मुझे बस ये जानना है की आपने ऐसा किया कैसे ..”

वो अचानक से रुक गए

“आप ये जानने के लिए मुझसे मिलना चाहते थे ,क्या आपको पता नही की कोई भी जादूगर अपना सीक्रेट किसी को कभी नही बताता ..मुझे तो लगा था की आप बिजनेसमैन है कोई की बात करना चाहते होंगे लेकिन आप तो सच में एक बच्चे ही निकले ..”

वो फिर से चलने लगा

“अरे सर मैं जानता हु की जादूगर अपना सीक्रेट नही बताते,मैं आपसे वो पूछ भी नही रहा हु मुझे डिटेल नही जानना है बस मुझे ये जानना है की ऐसा किस तरीके से किया जा सकता है और कहा कहा किया जा सकता है ,मतलब की क्या इसे कहि भी अंजाम दिया जा सकता है ,क्योकि जब आपने इसे हाल में किया तो आपके पास पहली की तैयारी रही होगी ,आपके सपोर्ट में लोग रहे होंगे ,लेकिन क्या इसे ऐसे भी किया जा सकता है “

वो फिर से रुक गए और मेरे चहरे को ध्यान से देखने लगे

“मैं आजतक बहुत से लोगो से मिला जो की ये जानने को बेताब थे की जादू को कैसे किया गया लेकिन तुम जैसी बेताबी मैंने कभी नही देखी ..मामला सिर्फ जादू का तो नही है “

“सर मामला बेहद ही गंभीर है ,समझ लो की मेरे जीवन से बहुत ही जुड़ा हुआ है ..”

“हम्म असल में हम इसे जिस टेक्निक का यूज़ करते है वो है delusion creat करना ,अब ये कैसे बनाया जाता है वो अलग अलग जगह और काम के हिसाब से अलग अलग हो सकता है ...समझ लो की सामने वाले की आंखों में एक धोखा दिखाया जाता है जिसे लोग सच समझने लगे और वो इसे कोई जादू समझे ..लेकिन इसे स्टेज में करना ही इतना मुश्किल है की बाहर करना तो ...बहुत मुश्किल होगा ,हा छोटे मोटे चीज तो कोई भी जादूगर कर सकता है लेकिन कल जैसा परफॉर्मेंस बाहर करना .. कोई बहुत ही ट्रेंड आदमी ही कर सकता है जो की इस फील्ड का उस्ताद हो ,क्योकि इसमे उस्ताद बनने के लिए बचपन से मेहनत लगती है ..”

“ह्म्म्म सर एक बात और आप के अलावा इसे बाहर और कितने लोग कर सकते है ,मतलब की हमारे देश में कितने लोग होंगे इस काबिलियत के “

वो मुस्कुराये और मेरे कंधे पर अपना हाथ रख दिया

“बेटा तुम क्या करने वाले हो ये तो मुझे नही पता लेकिन ऐसे हजारों लोग है जो ये कर सकते है ,बस उन्हें अच्छा टीम मिलनी चाहिए बिना टीम के कोई भी कुछ भी नही कर सकता “

“थैंक्स सर “

“क्या बस इतना ही “

“जो जानना था वो जान लिया थैंक्स ..”

मैं वंहा से निकल गया था…..


मैं अभी नेहा दीदी के कमरे में था

“अरे भाई इतनी सुबह सुबह ..”

वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी

“दीदी मैं उस जादूगर से बात करके आ रहा हु ,और जो मैं समझ पाया उसके हिसाब से …..”

मैंने उन्हें घूर कर देखा

“क्या??”

“क्या मैं जो सोच रहा हु वो सही है “

“और तुम क्या सोच रहे हो मेरे भाई “

वो मेरे पास आकर बैठ गई ,मैंने उनका हाथ अपने हाथो में रख लिया था

“दीदी प्लीज मैंने ऐसी चीजे ढूंढते हुए इतना समय बिता दिया जिसको ढूंढने की मुझे जरूरत ही नही थी ,मुझे अब फिर से इस जासूसी करने का कोई मूड नही है तो प्लीज बता दो ना ..”

“अरे वही तो पूछ रही हु की क्या बताऊ “

मैंने उन्हें नाराजगी से देखा वो हँस पड़ी

“अच्छा बाबा ठीक है,और जवाब है की हा ..”

मैं अपना सर पकड़ कर बैठ गया

“लेकिन आखिर क्यो ??? यार मेरे घर वालो को हो क्या गया है हर चीज में इतना ड्रामा करने की क्या जरूरत है “

मैं अब भी अपना सर पकड़े हुए बैठा था

“उनसे ही पूछ लेना “

“कहा मिलेंगे ..??”

उन्होंने गहरी सांस छोड़ी

“कल चलते है ,लेकिन बस हम दोनो और किसी को पता नही चलना चाहीये वो सब कुछ छोड़ चुके है “

मैंने हा में अपना सर हिलाया ..

मुझे सच जानने के लिए कल तक रुकना था ,अजीब बात है ना की जिस सच को जानकर कुछ भी नही बदलने वाला उसे भी जानने की इतनी बेताबी होती है ,आज मुझे पता चला की मेरे पिता जिंदा है ,उन्होंने इतना बड़ा ड्रामा रच दिया था ,ये तो समझ आ गया था की कैसे लेकिन बस ये जानना था की क्यो ????
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Yesterday, 12:44 PM,
#86
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 58

मुझे बार बार अपने पिता की वो आंखे नजर आ रही थी जिसे मैंने अंतिम बार देखा था ,

उन आंखों में कुछ था ,कोई तो बात थी जो दिल को छू रही थी ,एक सच्चाई थी उनकी आंखों में ,एक प्रेम था भावनाओ की उथल पुथल से शांत थी वो आंखे ..

ऐसी आंखे किसी की अचानक से नही हो सकती थी ,यही कारण था की शांत होने पर और याद करने पर मुझे ये याद आ जाता था की आखिर वो एक पल में कैसे बदल गए थे ,ये असंभव था ,ये असंभव था की कोई इतनी जल्दी बदल जाए ,बदलाव एक प्रक्रिया होती है जो समय लेती है …

शायद बदलाव की प्रक्रिया पिता जी के अंदर बहुत ही पहले से चल रही थी लेकिन मैं उसे समझ नही पाया,मैं समझ नही पाया क्योकी मैं खुद ही उलझा हुआ था ,अनेको विचारों की भीड़ में अपने खुद के मन के दंगल में फंसा हुआ था ..

सुबह ही में और नेहा दीदी निकल पड़े मेरे लिए किसी अनजान से सफर में ..

घर में बहाना ये था की बिजनेस का कोई काम है और नेहा दीदी बस इंटरेस्ट के लिए जा रही है …

बिजनेस इसलिए क्योकि रश्मि और निशा दोनो को इसमे कोई इंटरेस्ट नही था इसलिए वो साथ नही हुई ..

हमारी गाड़ी जंगल के बीच से गुजर रही थी ,हम दोनो में ही कोई बात भी नही हो रही थी ,दोनो ही अपने अपने विचारों में खोए हुए थे या फिर बस चुप रहना चाहते थे..

थोड़ी देर बाद दीदी ने कार सड़क से उतार कर एक पगडंडी में चला दी ,थोड़ी देर में हम एक आश्रमनुमा जगह पर थे ..

“ये कौन सी जगह है दीदी “

“ये वो जगह है जन्हा से पिता जी ने शुरू किया था “

“मतलब की ये उनके गुरुदेव का आश्रम है “

पिता जी के गुरुदेव ,मतलब बाबा जी के भी गुरु,तो ये जगह थी जहाँ से इन शक्तियों की शुरुवात हुई थी ..

कार से निकल कर हम आश्रम में गए,कुछ बोल वंहा दिखाई दे रहे थे ..लेकिन फिर भी ये बहुत ही सुनसान ही लग रहा था क्योकि मुझे शहरों के आश्रम को देखने की आदत हो गई थी जन्हा पर हजारों या सैकड़ो की संख्या में लोग आते जाते है ..

दीदी मुझे एक कमरे में ले गई ,सभी कमरे घास के बने हुए थे,छोटी छोटी झोपड़ियां बस थी ..

कमरे के अंदर एक व्यक्ति ध्यान लगाए बैठा था ,देखने से वो कोई सिद्ध व्यक्ति लग रहा था ,पतला देह मानो जर्जर हो रहा हो ,उम्र 90 से क्या कम रही होगी ,लेकिन देह की आभा गजब की थी ,एक तेज था ,बाल और दाढ़ी ,घने और सफेद थे ,उनकी बंद आंखे भी ऐसी लग रही थी जैसे वो हमे देख रहे हो ,उस कमरे में कोई भी नही था रोशनी बस उतनी ही थी जितनी की एक छोटी सी खिड़की से आ सकती थी,घास से ही सही लेकिन इस झोपड़ी को बेहद ही सलीके से बनाया गया था,इसलिए अंदर जगह अच्छी थी,वो साधु जमीन से थोड़े ऊंचे बैठे हुए थे आसान कुछ नही बल्कि मिट्टी का था,कोई चटाई नही कोई सुविधा नही ,लेकिन वो मस्त थे,ध्यान की अवस्था में भी मस्त लग रहे थे जैसे साक्षात कोई देव जमीन पर उतर आया हो ..

उन्हें देखते ही अंदर से ना जाने क्या हुआ मैं नतमस्तक हो गया,शरीर से नही बल्कि मन से मैंने समर्पण कर दिया था ..

मैं और दीदी अपने घुटने में आ चुके थे हमारे हाथ जुड़ गए थे..

मेरी आंखों से पानी आने लगा था ,एक प्रेम की अनुभूति मेरे पूरे मनस में फैल रही थी ,वो अद्भुत थी बिल्कुल ही निश्छल सी अनुभूति हो रही थी ..

अद्भुत ये भी था की मेरे जैसा हाल दीदी का भी हो रहा था ..

उन्होंने धीरे से अपनी आंखे खोली ,उनके आंखों में एक चमक थी ..

आ गए तुम दोनो ..

जितना हैरान मैं था उतना ही दीदी भी थी ..

“जी स्वामी जी ,हम पिता जी से मिलने आये थे”

दीदी ने कहा ..

“हा बहाने तो कई हो सकते है आने के ,लेकिन रास्तो से क्या फर्क पड़ता है जब एक ही मंजिल में जाना हो “

उन्होंने मुझे देखा ,उनके नयन ऐसे थे की जैसे कोई मुझे इतनी गहराई से देख रहा हो जितना मैंने खुद को भी नही देखा था ,

“तो तूम हो जिसे डागा ने वो लकड़ी दी थी “

मैं चौक गया और कुछ ना बोल पाया

“डागा समझदार है,हमेशा था और चंदानी बेवकूफ...वो तो तुम्हारे कारण अक्ल आ गई वरना “

वो हल्के से मुस्कुराये ,उनकी नजर दीदी पर थी दीदी भी उनकी बात सुनकर मुस्कुरा उठी ..

“जाओ मिल आओ ,लेकिन जाने से पहले प्रसाद लेकर जाना “

मैं और दीदी वंहा से निकल कर एक दूसरी कुटिया की तरफ बढ़ाने लगे पहले दीदी अंदर गई वंहा कोई भी नही था ,दीदी वापस आयी और फिर हम चलने लगे मैं उनके पीछे पीछे चल रहा था ..

चलते चलते हम एक छोटे से झरने के पास पहुचे और पास ही पत्थर में बैठा हुआ एक सन्यासी मुझे दिखाई दिया ..

मैं उन्हें पहचानता था वो मेरे पता ही थे,मेरे आंखों में आंसू आने लगे थे ...जैसे जैसे मैं उनके पास जा रहा था वैसे वैसे ही मेरी धड़कने बढ़ रही थी ..

वो पलटे और बस मुस्कुराये ,इतना सुकून था इस मुस्कराहट में ,कितनी शांति थी ,कितना प्रेम था ..

उन्होंने उठाकर पहले नेहा दीदी को फिर मुझे गले से लगा लिया ,लेकिन उनकी आंखों में एक भी बून्द आंसू के नही थे ,जैसे उन्हें पता था की ये होने वाला है ,जबकि मेरी आंखे भीगी हुई थी ..

“कैसे हो राज “उनके आवाज में भी एक अजीब सी बात थी ,जैसे ...जैसे कीसी साधक की आवाज हो ..

“आखिर क्यो पापा ..??”

मैं बस इतना ही कह पाया ,उन्होंने एक गहरी सांस ली और पास ही रखे पथ्थर में मुझे बैठने के लिए कहा ..

हम तीनो ही बैठ चुके थे …

मेरा ध्यान उनके गले में गया और जैसे मैं चौक ही गया ,उनके गले में एक ताबीज जैसा कुछ था मैं उसे पहचानता था वो वैसा ही था जैसे मेरी जादुई लकड़ी बंधी हुई ताबीज,और इसमे भी एक लकड़ी ही बंधी हुई थी ..

“ये..”

मेरे मुह से निकला ,वो फिर से मुस्कुराये .

“सब बताता हु थोड़े शांत हो जाओ ..”

मैं शांत हुआ और उन्होंने बोलना शुरू किया ..

“दौलत ,शोहरत,शराब ,शबाब ...सुख सुविधा की कामनाये ये सभी जब आपकी जरूरत बन जाए आप इसके पीछे अपना असली मकसद भूलने लगे,खुद को भूलने लगे तो इसे वासना कहा जाता है ,वासना किसी की भी हो सकती है लेकिन जिसकी भी हो चाहे पैसे की हो या जिस्म की या फिर सत्ता की पावर की कोई भी वासना हो वो हमेशा बर्बाद ही करती है ,सामान्य जीवन में शायद इसका पता ना भी चले लेकिन एक साधक के जीवन में अगर वासना ने प्रवेश किया तो बस तबाही ही तबाही होती है ,और बेटा एक साधक के लिए सबसे बड़ी वासना उसकी सिद्धि ही होती है ,अगर सिद्धि में ही वासना जाग जाए तो साधक तबाह हो जाता है ..

वैसा ही मेरे साथ भी हुआ.मैं इस गुरुकुल में आया तो था अपने पुराने कर्मो के प्रताप में साधक बनने ,लेकिन धीरे धीरे मुझे साधना की जगह सिद्धि भाने लगी ,मैं अपने मार्ग से भटक गया था ,और मेरे गुरु के रोकने पर ही नही रुका ,मुझे तो शुरुवाती सिद्धियां मिली थी मैंने उसका गलत उपयोग किया अपने वासनाओ की पूर्ति के लिए ,मैंने अपने जीवन में क्या क्या गलतियां की ये तो तुम्हे भी पता चल गया होगा ..”

मैंने हा में सर हिलाय और वो फिर से बोलने लगे

“मुझे अपनी गलती का अहसास भी हो पा रहा था लेकिन एक दिन मैंने अपनी वासना की पूर्ति के लिए अपनी ही बेटी का इस्तमाल किया ,वो भी मेरे सम्मोहन में फंसकर उस आंधी में बह गई लेकिन जब उसे होश आया तब उसने मुझे मेरी गलती का अहसास दिलाया ,वासना की तूफान में मैं भी रिस्तो की मर्यादा को भला बैठा था ,मैं इतना बड़ा पाप कर बैठा था की ग्लानि से मेरा सीना ही जल गया,वो समय वही था जब तुम जंगल से वापस आये थे,मैं चन्दू को अपना खून समझता था ,और नेहा चन्दू से प्रेम किया करती थी ,मुझे खुद पर ग्लानि होने लगी थी तब नेहा ने ही मुझे सहारा दिया …

समय बीत रहा था मेरी आंखे खुल चुकी थी ,मैं चीजो को स्पष्ट देख रहा था ,मैं देख रहा था की मेरे द्वारा किये गए पापा का मुझे क्या फल मिल रहा है ,मैंने तुम्हे कान्ता और शबीना के साथ देखा,तुम्हारी ये हालत मुझसे देखी नही गई क्योकि इससे पहले तुम्हारी जगह मैं खड़ा हुआ था वासना से पीड़ित जलता हुआ उस आग में ,कुछ दिन बाद ही मैंने तुम्हारे पास मैंने ये जादुई लकड़ी देखी थी ,मुझे मेरे गुरु की बात याद आ गई,की जब तुम काबिल बन जाओगे तब मैं तुम्हे ये दूंगा ...मुझे समझ आ गया था की तुम जंगल में किसी से मिले जरूर हो ,मैंने पता किया तो मुझे पता चला वो और कोई नही बल्कि मेरा गुरुभाई और पुराना दोस्त डागा था,शायद उसे ये समझ आ गया था की तुम काबिल हो इस लकड़ी के लिए इसलिए उसने तुम्हे ये दिया,और फिर बाद में तुमने इसका गलत उपयोग किया और ये तुमसे छीन लिया गया ये उसके पास चला गया जिसे इसकी जरूरत थी ,लेकिन तुम्हारे पास ये लकड़ी देख कर मुझे और भी ग्लानि हुई ,मैंने और डागा ने एक साथ ही साधना की शुरवात की थी,उसने अपनी वासनाओ को पीछे छोड़ दिया और इतना आगे निकल गया वही मैं सांसारिक भोगों में ही उलझ कर रह गया था ,मैंने इससे अपने को दूर कर विरक्त जीवन जीने का फैसला किया ..

मैं ये कर पाता तभी मुझे ये भी आभास हुआ की हमारे परिवार पर भी कोई संकट मंडरा रहा है,चन्दू गायब हो चुका था,तुम परेशान थे ,तुम्हारी मा मुझे कोई बात बताती नही थी ,और भैरव का हमारे परिवार में दखल बढ़ गया था ,मन के साफ होने से मुझे ये भी समझ आने लगा था की तुम्हारी माँ और भैरव के बारे में जो मैं सोचता था वो महज मेरा शक था,मेरे मन का कीड़ा था ..

मैं बस मूक दर्शक बनकर देखने लगा,नेहा का प्यार उससे दगा कर चुका था और मैंने उसे भी बस देखने की सलाह दी ..

फिर घटनाएं होते गई मैं बस देखता रहा ,आखिर वो समय आ गया जब मुझे मौका मिला अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होने का ,वसीयत को अमल में लाकर अपने बच्चों को पूरी संपत्ति को सौपने का ,तक मेरे सूत्रों से मुझे विवेक के बारे में पता चला था की वो जिंदा है और भैरव और तुम्हारी मा के संपर्क में है .
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Yesterday, 12:44 PM,
#87
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
मैं जिम्मेदारी से मुक्त तो होना ही चाहता था लेकिन साथ ही साथ मैं अपना ये वजूद मिटाकर नई जिंदगी भी जीना चाहता था,मुझे पता था की विवेक हमारे परिवार और खासकर मेरे खून का प्यासा है इसलिए उसे खत्म करने का भी यही सही समय लगा ,अभी तक जो मैं चुपचाप खेल को होता हुआ देख रहा था मैं अब इसमे अंतिम बार कूदने की सोच ली ..

मैंने नेहा के साथ मिलकर एक प्लान बनाया और एक बड़े एलुजानिस्ट से जाकर मिला ,उसे बताया की कैसे मुझे एक एक्सीडेंट का सीन क्रिएट करना है , जिसमे मैं तो मार जाऊ ऐसा लोगो को लगे और फिर पूरे नियम से मेरा अंतिम संस्कार भी किया जाए लेकिन फिर भी मैं बच जाऊ ..

पूरा प्लान उसने डिजाइन किया ,उसने हिदायत भी दी थी की इसमे मुझे बहुत ही खतरा भी हो सकता है क्योकि मेरे जख्म और ब्लास्ट असली होने वाले थे ,छोटी सी गलती और जान जा सकती थी ,लेकिन मुझे तो मरना ही था..

प्रॉपर्टी तुम्हे सौपने के बाद प्लान के हिसाब से नेहा ने अनुराधा ( माँ) को अपने साथ चलने को राजी किया ..

मैं सिर्फ अपने ही कार को उड़ा सकता था लेकिन इसके बाद शक विवेक पर पूरी तरह से नही जाता और तुम भी शक नही करते ,और कभी अपने माँ के त्याग को नही समझ पाते इसलिए हमने ये प्लान किया था...हमारे साथ हमारे टीम के मेंबर भी थे जिनकी संख्या करीब 30 की थी ,वंहा तुम्हारे आस पास जो लोग भी दिख रहे थे उनमे से अधिकतर उस टीम में था ,ब्लास्ट असली था,तुम्हारी माँ को निकनलने में थोड़ी देरी जरूर हो गई और उसके कारण मुझे भी बुरी तरह से चोट आयी थी ,सांसो की मंद करने की प्रेक्टिस मुझे पहले ही करवा दी गई थी ,इसीतरह ब्लास्ट में मेरा चहरा बुरी तरह से जख्मी हुआ था इसलिए उसे बनाना मेकअप वालो के लिए और भी आसान हो गया था,लाश को उस समय बदाल दिया गया था जब उसे मरचुरी में रखा गया था ..और बस काम खत्म “

वो मुझे देखकर मुस्कुरा रहे थे

“लेकिन आपके कारण विवेक का कत्ल हो गया “

वो हल्के से हँसे

“वो इसी के लायक था ,उसे नही मारा जाता तो हमारे पूरे परिवार को मार देता,और सबसे पहले तुम्हारी माँ को क्योकि उसे ये लगने लगा था की तुम्हारी माँ और भैरव ने मिलकर उसे धोखा दिया है ,और ये कुछ हद तक सही भी था ,ऐसे विवेक का पता भैरव के लोगो तक हमने ही पहुचाया था ..”

“ह्म्म्म लेकिन आपने मुझे ये अब क्यो पता लगने दिया,अब मुझे समझ आ रहा है की कैसे नेहा दीदी ने मेरी मदद की थी माँ से सब कुछ उगलवाने में और फिर जादू वाला खेल दिखाकर आप तक पहुचने में “

इस बात को सुनकर दीदी और पापा दोनो ही मुस्कुराये ..

“वो सिर्फ इसलिए क्योकि अगर तुझे नही बताया जाता तो तू बेवजह ही भटकता रहता ,तुझे आज भी यही लगता की कोई तेरे परिवार का दुश्मन है जिससे सबको खतरा है और अगर खोज बिन करके तुझे कुछ पता भी चल जाता तो भी तू बस निराश ही होता क्योकि उसके लिए तुझे बहुत ही मेहनत करनी पड़ती ,हमने तो तुझे बस मेहनत से बचा लिया…”

मैंने एक गहरी सांस छोड़ी ..

“ह्म्म्म तो अब “

“तो अब ये हमारा अंतिम मिलन है ,ये तू रख ये तेरे लिए है तू अब इसके काबिल हो चुका है और हा जो गलती मैंने अपने जीवन में की वो तू मत करना ,किसी भी वासना के पीछे मत भागना,वो सिर्फ तुझे बहकाएंगी और जो हासिल होगा वो है सिर्फ दुख ..”

उन्होंने अपने गले से वो ताबीज निकाल कर मुझे दे दी ..

“लेकिन ये तो आपकी... “मैं कुछ बोल पाता उससे पहले वो बोल उठे

“नही बेटा ये मेरी आखिरी जिम्मेदारी थी ,अब मुझे सन्यास लेना है ,मैं बस इसी दिन के लिए रुका हुआ था ,अब समय आ गया है की मैं पूर्ण सन्यास ले लू और आश्रम छोड़ दु ..जैसे डागा ने छोड़ दिया था ..अब मुझे इसकी कोई जरूरत नही है ,”

बोलते हुए उनका चहरा खिल गया था ,उन्होंने अंतिम बार हमे गले से लगाया और वही से बिना आश्रम गए ही जंगल की ओर निकल गए …….

हम वापस आश्रम में आ चुके थे और गुरु जी की कहे अनुसार प्रसाद लेने पहुच गए ..

हम उनके पास ही बैठे थे...

उन्होंने पास एक मिट्टी के कटोरे में रखी हुई राख उठा ली

दीदी को एक चुटकी राख दी दीदी ने उसे अपने मुह में रख लिया उनकी आंखे बंद हो चुकी थी ,

अब मेरी बारी थी मैंने भी हाथ फैलाये..

“सोच लो इसे खाने से तुम्हारी सारी शक्तियां खत्म हो जाएगी और ये तुम्हारी जादुई लकड़ी भी किसी काम की नही रह जाएगी “

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा

“आप के हाथो से प्रसाद के लिए तो सब मंजूर है “

उन्हें मुझे भी वो प्रसाद दिया और मैंने उसे बड़े ही प्रेम से ग्रहण भी कर लिया ..

प्रसाद मुह में रखते ही मेरी आंखे बंद हो गई ऐसा लगा की मेरे सामने एक फ़िल्म चल गई हो ..

मेरी आंखे अचानक से खुली मेरी आंखों में आंसू थे साथ ही साथ उन साधु की आंखों में भी आंसू थे ,मैं दीदी के पैरो में गिर पड़ा ..मैं खूब रोया खूब रोया ..

वही दीदी ने मेरे कंधे से पकड़कर मुझे उठा लिया और अपने गले से लगा लिया ..

“मुझे माफ कर दो माँ ..”

मैंने रोते हुए कहा

“मुझे भी बेटा ,गलती सिर्फ तेरी नही थी मेरी भी थी ..”

"आप दोनो को आपके गलती की सजा मिल चुकी है "

साधु की आवाज सुनकर मैंने उस साधु को बड़े ही प्रेम से देखा ..

“भाई ,तुम्हारा लाख लाख शुक्रिया “

वो मुस्कराया ..

“वो जन्म अलग था आप दोनो का ये जन्म अलग है अब उसकी यादों से निकल कर बाहर आइये ,इस जन्म में आपको बहुत सारी जिम्मेदारियों का निर्वाहन करना है ,आप दोनो ही साधक रह चुके हो और कर्म के बंधन को समझते हो आपके कर्म ने आपको इतने दिन दुखी किया ,साधक होंने के बावजूद आपने अपनी सिद्धि का गलत उपयोग किया था अपनी माँ के रूपजाल में फंसकर उन्हें सम्मोहित किया उनके साथ संबंध बनाया ,सम्मोहन का असर टूटने के बाद भी हमारी माँ ने आपको रोका नही बल्कि साथ दिया,दोनो ने अपनी साधना को वासना के चपेट में आकर नष्ट किया था,और वासना से मुक्त होने पर अपनी ग्लानि की वजह से आत्महत्या कर लीया और इसकी सजा के रूप में साधक होते हुए भी एक सामान्य मनुष्य और वैसे ही वासनाओ के लगाव के साथ आप लोगो का जन्म हुआ ,उसी तरह एक ही घर में ,लेकिन इस बार माँ-बेटे की जगह भाई बहन बनकर ,बचपन में दुख भोगकर आपने अपने कर्मो की सजा पा ली वही इन्हें भी इनके पिता ने इनकी इक्छा के विरूद्ध संभोग कर मानसिक दुख दिया वही इनके प्रेम ने इन्हें मानसिक प्रताड़ित किया ...हमारा हर दुख और सुख हमारा ही कमाया हुआ होता है ,इस जन्म का हो या फिर दूसरे जन्मों को लेकिन कर्म का फल तो मिलता ही है ,और जन्हा बुरे कार्मो का फल आप भोग रहे थे वही पिछले जन्म की साधना भी आपके पीछे ही रही ,जन्म सम्पन्न घर में हुआ ,और कर्म का बंधन कट जाने पर साधको के संपर्क में भी आये ,साधको-साधुओं का संपर्क भी पिछले जन्म के साधना से ही मिल पाता है वरना लोग तो उनके साथ रहकर भी साधना से अछूते रह जाते है ,आपको मेरे शिष्य (डागा) का संपर्क हासिल हुआ जिसने पुराने कर्मो को थोड़ा सा जग दिया जिससे आपके अंदर मौजूद सारी शक्तियां जो पहले के जन्मों में कमाई थी वो बाहर आने लगी उन्हें आप पहचानने लगे ,वही इन्हें दूसरे शिष्य (चंदानी) का संपर्क प्राप्त हुआ ,इनके कारण ही उसके मन ने वासना के प्रति अपना रवैया बदला और फिर से साधना की ओर अग्रसर हुआ ,वही ये ही आपके वासना से पीड़ित मन को पवित्रता की ओर ले जाने का कारण बनी ..

जिसके कारण पिछले जन्म में साधना से भटके थे वो इस जन्म में साधना के जन्म लेने का कारण बनी …

मैं इसी कुटिया में आप लोगो का इंतजार करता रहा ,आखिर आप मेरे भाई और माँ है ...मुझे रिश्तो से कोई लगाव नही रह गया है लेकिन मैं एक साधक की साधना को सफल होते देखना चाहता था ,आप लोगो को ये याद दिलाने के लिए जिंदा था की आप कोई सामान्य आत्मा नही है बल्कि पुराने साधक है जो मार्ग से भटक गए …”

“तो क्या हरिया भी “

मैंने कापते हुए आवाज में कहा ,मैं अपनी खुसी को सम्हाल नही पा रहा था ,मेरी आवाज कांप रही थी ..

“हा आप लोगो के संभोग को खिड़की से देखते हुए भी नही रोकने वाला हमारा नॉकर हरिया आज भी वही कर रहा है आपके पालतू टॉमी के रूप में ,उसके पास आप जैसे साधना की कमाई भी नही थी जिससे वो मनुष्य योनि पा सकता “

मैं और माँ (नेहा दीदी) दोनो ही गदगद थे

“अब मेरा काम पूरा हुआ मैं ये शरीर छोड़कर जा सकता हु “

वो मुस्कुराये

“नही ,हमे दीक्षा दिए बिना आप नही जा सकते ,हमे फिर से दीक्षित करो ,हमे फिर से साधक बनाओ “

मेरी बात सुनकर वो मुस्कराए

“अभी नही ,अभी आप इस जन्म की जिम्मेदारियों से मुक्त नही हुए है ,मेरा शिष्य डागा अब साधना के उस मुकाम में पहुच चुका है की आपको फिर से दीक्षित कर साधक बना सकता है ,अब मुझे आज्ञा दे ,आने वाले समय में डागा ही आपके इस जन्म का गुरु होगा “

उन्होंने फिर से आंखे बंद कर ली ,हम तीनो के आंखों में ही पानी था ,एक प्रेम था जो इन्हें अभी तक समाधि में जाने से रोके रखा था उनका काम अब खत्म हो चुका था ,वो समाधि में जा चुके थे इस शरीर को छोड़ चुके थे …

मैंने अपने गले से वो ताबीज निकाल कर उनके चरणों में रख दी क्योकि ये जादुई लकड़ी अब मेरे किसी काम की नही रही थी ..


उस कुटिया से निकलने पर मेरा मन इतना प्रफुल्लित था की मुझे मानो दुनिया की सभी खुशियां मिल गई हो ..

दीदी ने शादी ना करने का फैसला किया और वो भी आश्रम में हमेशा के लिए रहने चली आयी ,वही मैं अपने जीवन का सामान्य तरीके से निर्वाहन करने लगा था ..

बाबा जी (डागा) ने मुझे ,रश्मि और निशा को गृहस्थ साधना के लिए पति पत्नी के रूप में दीक्षित किया ,क्योकि निशा की जिम्मेदारी मुझपर ही थी और इस बात को रश्मि ने भी मान लिया था ,मेरे सम्बन्ध दोनों से ही कायम थे ,वही नेहा दीदी को सन्यास के लिए ..

अब वासना नही बल्कि प्रेम ही रह गया था ,अब जिम्मेदारियां तो थी लेकिन उनका बोझ नही रह गया था,

क्योकि मुझे पता था की मेरा असली ठिकाना कहा है …….


************ समाप्त *********
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