Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
2 hours ago,
#1
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जादू की लकड़ी


इंट्रोडक्शन

एक छोटे से लकड़ी का टुकड़ा आपकी जिंदगी सवार देगा ये सोचना थोडा मुश्किल सा काम है लेकिन अगर वो लड़की का टुकड़ा जादुई हो तो ..??
मे बी पॉसिबल राइट …

ये स्टोरी भी ऐसे ही लकड़ी के एक टुकड़े के बारे में जो मुझे किसी इत्तफाक से मिल गया,और मेरी जिंदगी को पूरी तरह से बदल कर रख दिया

मेरा नाम है राज,राज चंदानी ,जितना कमान मेरा नाम है उससे भी कामन मेरी जिंदगी थी ,कामन कहना थोड़ा गलत होगा क्योकि मेरी जिंदगी तो झंड थी …

मेरे पिता रतन चंदानी शहर के सबसे बड़े कपड़ा व्यपारी है ,समझो नाम चलता है,रुपये पैसे की कोई कमी नही थी,वो एक बेहद ही आकर्षक और रौबदार व्यक्तित्व के मालिक थे ,खुद के साड़ी के मिल और कई कपड़ो की दुकाने थी ,तो आप सोचोगे की ऐसे अमीरजादे की जिंदगी झंड कैसे हो गई …….

कारण भी मेरे पिता ही थे ,वो जितने रौबदार ,चार्मिंग,रसूखदार थे उतना ही मैं फट्टू,डरपोक,और मरियल था,इसका कारण भी मेरे पिता ही थे क्योकि उन्होंने बचपन से ही मुझे मर्द बनाने के चक्कर में इतना टार्चर किया की मैं डरपोक हो गया,वो मुझे सबके सामने जलील कर दिया करते थे,मेरी तुलना अपने से करते और फिर मुझे लूजर साबित कर देते,बचपन में ही उन्होंने मुझे इतना डराया धमकाया था की मेरे अंदर वो हीन भावना बहुत गहरे में घर कर गई थी ,मुझे लगता था की मैं कुछ भी नही हु ,

ऐसे ये बात नही थी की वो सबके लिए ऐसे ही थे,मेरी बहनों को वो राजकुमारियों जैसे रखते थे,वो तीनो निकिता,नेहा ,निशा उनकी लाडली थी,हमेशा उन्हें अपने सर में चढ़ाए रखते तो मुझे अपने जूते की धूल भी नही समझते थे,उनका एक ही मानना था की घर में एक ही मर्द है और वो है वो ,जैसे मेरा कोई वजूद ही नही था ….

निकिता और नेहा मुझसे बड़ी थी वही निशा मुझसे 1 साल की छोटी..

वो कितने बड़े चुददक्कड़ थे ये तो इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की 4 बच्चे उन्होंने 4 साल में ही पैदा कर दिए ,बेचारी मेरी माँ ..

मेरी माँ अनुराधा,भोली भाली सी ,वो इस घर में एक मात्रा इंसान थी जिसे मेरी थोड़ी फिक्र थी ,लेकिन वो संस्कारी ,भोली भाली बेचारी ही थी मेरे बाप के सामने बिल्कुल भीगी बिल्ली सी बन जाती,और मेरा बाप फिर मेरे गांड में सरिया घुसा घुसा कर मेरी मारता था……

लुसर...ये मेरे बाप का सबसे प्रिय शब्द था जब बात मुझपर आती ,यंहा तक की हमारे नॉकर के बेटे चंदू को भी मुझसे ज्यादा इज्जत दी जाती थी,क्योकि वो क्रिकेट और फुटबॉल का कैप्टन था,हम हमउम्र ही थे,उसकी बात बाद में करेंगे …
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2 hours ago,
#2
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
तो मेरा बाप जितना आकर्षक और रौबदार था उतना ही ज्यादा औरतो के मामले में कमीना भी था,कहते है की ऐसी कोई लड़की या औरत नही जिसे उन्होंने चाहा हो और ना पटा लिया हो ,वो लड़की पटाने के लिये साम दाम दंड भेद सब कुछ इस्तेमाल कर दिया करते थे,मेरी माँ को पता था की नही मुझे नही पता लेकिन अगर वो इस बारे में जानती तो भी मुझे यकीन था की वो कुछ ना कहती ,वो थी ही इतनी सीधी …

मेरे बाप के कारनामो का पता मुझे हमारे नॉकरो से चलता था ,

कभी कभी देशी चढ़ाने के बाद अकेले में अब्दुल काका जो हमारे पुराने नॉकरो में थे और पापा के उम्र के थे मुझे कहा करते थे

“साहब ने इतनी लडकिया चोदी है की मैं गईं नही सकता,और इस घर में काम करने वाले सभी लोगो की पत्नियों को भी चोद चुके है ,और सभी औरतो को भी ,रामु की बीवी कांता को तो मेरे सामने ही मुझे दिखा दिखा कर चोदा था ...हा हा हा..कभी कभी तो लगता है चंदू उनका ही बेटा है ..हा हा हा …”

वही जब रामु काका मेरे साथ अकेले शराब पी रहे होते तो कहते

“साहब ने इतनी लडकिया चोदी है की मैं गईं नही सकता,और इस घर में काम करने वाले सभी लोगो की पत्नियों को भी चोद चुके है ,और सभी औरतो को भी ,अब्दुल की बीवी शबीना को तो मेरे सामने ही मुझे दिखा दिखा कर चोदा था ...हा हा हा..कभी कभी तो लगता है सना उनकी ही बेटी है ..हा हा हा …”

कैसे गांडू लोग थे ,लेकिन क्या करोगे मेरा बाप था ही इतना खतरनाक ,दुनिया के लिए उसके मुह से शहद ही टपकता था,हर कोई उनका दीवाना था बस जब मेरी बड़ी आती तो उसे क्या हो जाता…


कभी कभी अकेले में जब मैं रोता था तो मेरी माँ मुझसे कहती थी की तेरा बाप तुझसे जलता है,क्योकि जब तेरा जन्म हुआ तो तू तेरी दो बहनों के बाद पहला लड़का था,मैं तुझे बहुत प्यार करती थी,पता नही लेकिन तेरे बाप को लगता था की तू उसकी जगह ना ले ले,वो बहुत ही महत्वाकांक्षी है और अपने चीज पर किसी दूसरे का अधिकार बर्दास्त नही कर सकते ,शायद इसीलिए वो तुम्हे नीचा दिखाने की कोशिस करते है ……

उनकी बात मुझे तब तक समझ नही आई जब तक मैंने फ्रायड की साइकोसेक्सुअल थ्योरी नही पढ़ ली ,लेकिन जो भी हो वो मेरे लिए मेरा सबसे बड़ा दुश्मन था……

उसकी वजह से मेरी बहनों ने कभी मुझे भाई वाला प्यार नही दिया,भाई तो छोड़ो वो तो शायद मुझे इंसान भी नही समझती थी,मेरा मुह देखती तो ऐसा मुह बनाती जैसे किसी मनहूस को देख लिया हो ,मेरी छोटी बहन निशा तो मुझे देखते ही कहती थी

“लुसर साला “

सच बाताऊ की दिल पर क्या बीतती थी लेकिन पता नही क्यो सब कुछ की आदत सी बन गई थी ,मेरा सर मेरे ही घर में झुका होता था,मैं नही चाहता था की मेरे घर में मेरा सामना किसी से हो,मेरा उठाना बैठना इस घर में नॉकरो के साथ ही था ,शायद यही मेरी औकात थी ,वो भी इसलिए मझसे अच्छे से बात कर लेते थे क्योकि मैं उनके मालिक का बेटा था और कभी कभी उन्हें दारू पिला दिया करता था…..

इस घर में मेरे दो ही चाहने वाले थे एक थी मेरी माँ जो पापा और बहनों के सामने शांत हो जाती थी,बस अकेले में थोड़ा दिलासा दिला देती थी,और दूसरा था टॉमी ,वो एक लेब्राडोर कुत्ता था उस बेचारे को इस बात से कोई फर्क नही पड़ता की कोई मुझे क्या कहता है,वही था जिसके साथ मैं समय बिताया करता था,बाते किया करता था और जिसके लिए मैं लुसर नही था..

कभी कभी उसे मेरे साथ देखकर मेरी बहने कह देती

‘पता नही पापा ने दो दो कुत्ते क्यो पाल के रखे है’

दिल में दर्द उठा ना ..???मेरे लिए रोज का था…….

अब जिस आदमी का घर में ये हाल था सोचिए उसका सामाजिक ओहदा क्या रहा होगा,स्कूल में भी मेरा सर नीचे ही रहता था,मैं नही चाहता था की कोई आकर मुझसे बत्तमीजी करे क्योकि ये आम सी बात थी,लड़के चिढ़ाया करते थे कुछ को पता नही क्यो बेवजह सी दुश्मनी थी मुझसे ,ऐसे पता था वो कारण था की एक तो मैं अमीर था और दूसरी थी रश्मि….अब ये रश्मि के बारे में बाद में बताता हु …
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2 hours ago,
#3
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
खैर मेरी हालत ये थी की स्कूल जाना किसी जहन्नुम जाने से कम नही था,लेकिन जाना तो होता था,एक प्रॉब्लम ये भी थी की मेरी छोटी बहन निशा मेरे ही क्लास में थी और वो एक बम्ब थी ,लड़के उसके पीछे लार टपकाते और वो उन्हें अपने इशारों पर चलाती,पूरे पापा पर गई थी ,वही उसका एक ऑब्सेशन था मुझे सबके सामने बेइज्जत करने का ,वो कोई मौका नही छोड़ती थी ..

तो कहने की जरूरत नही की स्कूल में मेरा कोई दोस्त भी नही था,बस दो लोग थे,एक था चंदू,रामु काका का बेटा वो भी मेरे ही क्लास में था और मुझसे इसलिए बात कर लिया करता था क्योकि वो मेरे बाप के पैसे में इस अच्छे स्कूल में पढ़ रहा था और दूसरा उसे जब पैसे की जरूरत होती तो मुझसे ही लिया करता था..

चंदू था तो महा कमीना,उसका काला चहरा और काला बदन ,जो की कसरती था और ऊंचा डीलडौल के कारण वो भयानक सा लगता था,असल में उससे बाकी लड़को की फटती भी थी ,जिसके कारण मुझे चिढ़ाने वाले या सताने वाले थोड़ा डरते थे,यंहा तक की निशा के आशिक जो उसे खुश करने के लिए मेरी मारने पर तुले रहते थे उनसे चंदू ही मुझे बचाता था लेकिन हमेशा नही ,लेकिन फिर भी चंदू मेरा दोस्त कम दुश्मन ही था,क्योकि वो जितना मुझे देता उससे ज्यादा मुझसे लेने की फिराक में रहता था,और सभी से तो मुझे बचा लेता लेकिन उससे मुझे कौन बचाता,मेरे सामने ही वो निशा को खा जाने वाली नजर से देखता था,निशा के सामने हमेशा मेरा मजाक उड़ाता ताकि वो दोनों मुझपर हँस सके ,और निशा कमीनी भी उसके सामने मुझे अक्सर कहती थी..

“मर्द तो तू ही चंदू,वरना यंहा तो चूतिये लूजर को भी भाई बोलना पड़ता है,”

बदले में चंदू हँसते हुए उसके जिस्म को घूरता और निशा उसे भी मुस्कुराकर उसे देखती ,कभी कभी तो लगता था की चंदू निशा की लेता होगा लेकिन अभी तक मुझे कोई प्रूफ नही मिला था …

साला चंदू मेरी भोली भाली मा को देखकर मेरे सामने ही अपना लौड़ा मसल देता था,जबकि मेरी माँ उसे अपने बेटे जैसे प्यार देती थी,ये देखकर मेरा सर बस नीचे हो जाता,क्योकि लड़ना मुझे आता नही था,मैं सीधा नही था चोदू था,डरपोक था ,फट्टू था जो मुझे मेरे बाप ने बनाया था…….

ऐसे स्कूल में एक और थी जिसे मैं सच्चे अर्थों में दोस्त कह सकता था वो थी रश्मि...रश्मि हाय मेरे स्कूल की सबसे फटाका माल कही जाती थी ,सारे स्कूल के लड़के उससे बात करने को तराशते ,यंहा तक की निशा भी उसके सामने कुछ नही थी ,लेकिन वो लड़को में सिर्फ मुझसे ही बात किया करती थी ,वो ही एक थी जो मेरे लिये किसी से भी लड़ जाती भीड़ जाती,यंहा तक की निशा और चंदू से भी ,किसी टीचर से भी ,वो शेरनी थी जो मेरी रक्षा करती थी लेकिन इस बात का मुझे दुख ही था,वो मेरे साथ ही इसलिए रहती थी की लोग मुझे परेशान किया करते थे और कोई मुझसे सीधे मुह बात नही किया करता था,रश्मि बेहद ही संदुर लड़की थी तन से भी और मन से भी ,उसने मुझे बहुत स्नेह दिया था,कहने की जरूरत नही की एक लूजर की तरह मैं उसे प्यार करता था लेकिन वो मुझे प्यार नही करती थी बल्कि मुझपर तरस खाती थी,और ये बात मुझे अच्छे से पता थी ,और उसी तरस वो कारण था जिसके कारण लड़के मेरे जान के दुश्मन बने हुए थे और निशा मुझसे इतना चिढ़ती थी ,रश्मि ही वो लड़की थी जिसके सामने निशा की भी नही चलती थी ,वही चंदू भी सालों से उसे पटाने की कोशिस कर रहा था लेकिन रश्मि अगर किसी से सीधे मुह बात करती थी वो था मैं उसके दया का पात्र...जो भी था मुझे उसका साथ अच्छा लगता था कम से कम वो ही एक कारण थी जिससे मुझे स्कूल जाने की हिम्मत मिल जाती ..

और चंदू मुझसे कहा करता

“इस रंडी को तो मैं एक दिन पटक कर चोदूंगा ,साली बहुत नखरे मरती है “

उसकी बात सुनकर मेरा……...मेरा सर फिर से नीचे हो जाता ….


तो दोस्तो ये थी मेरी झंड जिंदगी ,ये ऐसी ही रहती अगर मेरा बाप पूरे परिवार के साथ केदारनाथ जाने का प्लान नही बनाता,उन्हें एक बिजनेस डील करनी थी और अपनी प्रिंसेस(मेरी बहने) की रिक्वेस्ट पर वो पूरे परिवार को साथ ले जाने के लिए राजी हो गए ,और साथ थे सना (अब्दुल की बेटी), चंदू और टॉमी ……
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2 hours ago,
#4
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 1

केदारनाथ की यात्रा पर ऐसा लग रहा था जैसे पूरा परिवार एक साथ गया हो और मैं और टॉमी उनसे अलग,किसी को हम दोनों में कोई इंटरेस्ट ही नही था,बीच बीच में माँ मुझे खाने के लिए पूछ लिया करती ,तो खान खाना और किसी कोने में पड़े रहना यही हमारी नियति थी,पूरे मजे वो लोग कर रहे थे,सना और चंदू परिवार का हिस्सा ना होते हुए भी साथ थे,लेकिन मैं …..

खैर मैं तो आना भी नही चाहता था लेकिन पापा का ऑर्डर था तो आना पड़ा…

मंदिर के दर्शन के बाद माँ मेरे पास आयी और मेरे हाथो में बड़े प्यार से एक धागा बांध दिया,

“मैंने भगवान से दुवा की है की वो तेरी सारी तकलीफों को दूर करे,मेरा बेटा ,भगवान तेरी सुनेगा बेटा उसके घर देर है अंधेर नही “

उन्होंने बड़े ही प्यार से मेरे माथे को चूम लिया ,उनकी बात सुनकर मेरे आंखों में आंसू आ गए ,काश माँ की बात सच हो भगवान मेरी सुन ले …

लेकिन मुझे लगा की ये धागा किसी काम का नही क्योकि हम वंहा से गंगोत्री के लिए निकलने वाले थे 2 गाड़िया थी,एक गाड़ी जो की SUV थी उसमें 6 लोग और ड्राइवर आ चुके थे,मेरी बहन निशा ने अपना दिमाग लगाया और पापा के पास पहुची..

“पापा मैं चंदू और घर के दोनों कुत्तों के साथ कार में आती हु “

मैं वंहा पास ही खड़ा था और पापा के चहरे में आयी हुई मुस्कान को भी देख सकता था,पापा ने बस हा में सर हिला दिया…

सच में भगवान ने मेरी नही सुनी क्योकि उनके साथ आने का मतलब था की रास्ते भर वो मेरी खिंचाई करेंगे,और एक अजनबी ड्राइवर के सामने भी मुझे जलील करने को कोई कसर नही छोड़ेंगे..

निशा और चंदू पीछे की सीट में बैठ गए वही मैं और टॉमी ड्राइवर के साथ …

शाम का समय था,गाड़ी चल पड़ी SUV तेज चल रही थी और काफी आगे निकल गई थी,हमारी गाड़ी को चंदू ने आराम से ही चलने का आदेश दिया था,

और शुरू हो गया उनका फेवरेट काम ,मुझे जलील करना …

वो कमीना ड्राइवर भी इसके मजे ले रहा था और मुझे देख कर हँस रहा था,सच कहु तो मुझे रोना आने लगा था,मेरा गाला भरने लगा था …

“चंदू अगर कोई किसी की बहन के जिस्म से खेले तो वो भाई क्या करेगा “

जरूर निशा के होठो में कमीनी मुस्कान रही होगी जो मैं देख नही पाया

“क्या करेगा मुह तोड़ देगा ,अगर किसी ने उसके सामने उसकी बहन को कोई गैर मर्द छू भी ले तो “

“हा लेकिन लुजर्स को कोई फर्क नही पड़ता,तो मर्द ही कहा होते है “

दोनों जोरो से हंसे वही ड्राइवर इस बार तिरछी निगाहों से मिरर से पीछे देखने लगा जैसे उसे आभास था की कुछ होने वाला है

“यकीन नही आता तो ट्राय करके देख लो “

निशा की बात से जैसे चंदू को एक सुनहरा अवसर मिल गया हो

“राज सुन तो इधर देख “चंदू ने आवाज दी

मैं नही चाहता था की मैं मुड़कर उन्हें देखु लेकिन मेरे अंदर एक अनजान सा डर दौड़ गया था ..

मैं मुड़ा ,चंदू निशा के स्कर्ट के नीचे से हाथ घुसाकर उसके जांघो को मसल रहा था

“आह चंदू ,क्या करते हो,”

“थोड़ा और अंदर ले जाऊं क्या तेरा भाई कही मार ना दे मुझे “

दोनों जोरो से हंसे ,वही ड्राइवर के होठो में एक कमीनी मुस्कान आ गई क्योकि वो भी बेक मिरर से पीछे की ओर देख रहा था,

इतना जलील होना मुझे गवारा नही था,मेरे सब्र की इंतेहा हो गई थी और मैंने क्या किया,??

मैं सर मोड़कर रोने लगा,मेरी सुबकियां शायद सबको सुनाई दे रही थी

“देखो ऐसे होते है लुजर्स कुछ तो कर नही पाते बस औरतो जैसे रोते है या किसी औरत के पल्लू में जा छीपेंगे,कभी माँ के तो कभी उस बीच रश्मि के ..”

निशा की बातों में जैसे जहर था ,

मैं और नही सह पाया

“गाड़ी रोको …”

मैंने पहली बार कुछ बोला था लेकिन ड्राइवर ने मुझे बस देखा

“मुझे पेशाब जाना है “

मैंने फिर से ड्राइवर को देखा लेकिन वो जैसे किसी और की इजाजत का इंतजार कर रहा था ..

“ओह देखो लूजर को आंसू के साथ अब पेशाब भी निकल गया इसका “

निशा की बात सुनकर चंदू और निशा जोरो से हंसे लेकिन इस बार ड्राइवर नही हंसा शायद उसे मुझपर थोड़ी दया आ गई होगी ,उसने गाड़ी साइड में लगा दी और मैं टॉमी को लेकर वंहा उतर गया…

मैं गाड़ी से थोड़ी दूर जा खड़ा हुआ ,मैं दहाड़ मार कर रोना चाहता था लेकिन मैंने खुद को काबू में किया ..

“ओ लूजर जल्दी आ “

निशा ने आवाज लगाई ,मैं अपने आंसू पोछता हुआ फिर से गाड़ी की ओर चल दिया ,मैंने दरवाजा खोला ही था की ..

भरररर
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2 hours ago,
#5
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
गाड़ी थोड़ी दूर तक चलकर फिर से रुक गई ,इस बार निशा और चंदू के साथ ड्राइवर भी हंसा था ,मैं समझ गया की ये मेरे साथ क्या कर रहे है ..

मैं फिर के गाड़ी के पास पहुचा और फिर के उन्होंने दरवाजा खोलते ही गाड़ी चला दी ,मैं और टॉमी दोनों ही नही बैठ पाए ..

“अरे आओ आओ दोनों कुत्तों को गाड़ी में बैठने से पपरेशानी हो रही है क्या ..”

निशा ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा ,मैं खुद को सम्हालते हुए फिर से गाड़ी के पास पहुचा और फिर से भर्रर्रर गाली आगे चल दी ,रात हो चुकी थी दूर दूर तक कोई भी नही था बस हमारी ही गाड़ी की लाइट दिख रही थी ,हम घने जंगल के बीच में थे,जंगल और पहाड़ और रात का अंधियारा सब मिलाकर बेहद ही डरावने लग रहे थे,मैं फिर से गाड़ी की ओर बढ़ता की जोरदार बिजली चमकी और बदल गरजे,बहुत ही तेज बारिश शुरू हो गई थी ,मैंने टॉमी को उठा लिया तेजी से कर की तरफ बढ़ा,हम दोनों ही भीगने लगे थे कार का दरवाजा फिर से बंद कर दिया गया था,मैने तुरंत ही दरवाजा खोला और जैसे ही टॉमी को सीट में रखने की कोशिस की फिर से भरररर…

मैं बुरी तरह से झल्ला गया था,वो लोग जोरो से हँस रहे थे और कांच से बाहर झांक कर कमेंट दे रहे थे,कार फिर से थोड़ी दूर जाकर खड़ी हो गई थी ,फिर से तेज गर्जना हुई लेकिन इस बार ना जाने टॉमी को क्या हुआ ,वो मेरे गोद से उतर कर सड़क से बाहर की ओर दौड़ाने लगा उस ओर जंहा जंगल था,मैं उसे पकड़ने के लिए दौड़ पड़ा लेकिन वो तेज था,हम सड़क से उतर कर झाड़ियों में जा चुके थे,और जंगल के अंदर की ओर जा रहे थे..

“टॉमी बेटा रुक जा “मैं चिल्ला रहा था,बारिश बहुत ही तेज हो चली थी थोड़ी ही देर में जैसे कोई तूफान सा आ गया हो,मैं इन पहाड़ो की बारिश के बारे में सुन रखा था लेकिन टॉमी को मैं अकेले नही छोड़ सकता था,लेकिन टॉमी अंधेरे में कही खो गया था,इधर बारिश इतनी तेज थी की उसकी आवाज सभी आवाजों पर छा गई थी,मुझे हॉर्न बजने की आवाज सुनाई दी जो की बेहद ही जोरो से बजाई जा रही थी ,मैं उस ओर मुड़ा ..

“ओ लूजर जल्दी से यंहा आ जा वरना सोच ले तेरा क्या होगा “

ये आवाज चंदू की थी,मैं घबराकर उस ओर मुड़ा ही था की मुझे झड़ियो में एक हलचल सी महसूस हुई ,मैंने देखा की टॉमी झड़ियो से निकल कर आगे की ओर भाग रहा है ..

“टॉमी रुक जा यार तू मरवाएगा मुझे “मैं फिर से उसके पीछे भागा..थोड़ी ही देर हुए थे की मुझे लगा की मैं बहुत आगे आ गया हु ,अब पीछे से कोई आवाज नही आ रही थी,ऐसा जरूर लग रहा था जैसे दूर से कोई चिल्ला रहा हो ,शायद चंदू या वो ड्राइवर..

इधर टॉमी रुकने का नाम ही नही ले रहा था ना ही वो पकड़ में आ रहा था ,मैं बारिश में बुरी तरह से भीग चुका था ,ठंड से कांपने भी लगा था ..

मेरा दिमाग अब टॉमी के लिए खराब हो चुका था मैं पूरी ताकत लगा के उसके पीछे भागा,वो एक झड़ियो के झुंड में जा कूदा और मैं भी उसे पकड़ने के लिए छलांग लगा दी लेकिन …..

लेकिन ये क्या झड़ियो के पास चिकना पत्थर था जिसमे मैं और टॉमी दोनों फिसल गए थे,पास ही बहते झरने की आवाज से स्पष्ट था की हम उस झरने की ओर फिसल रहे है,पल भर के लिए ही मानो मेरे दिल की धड़कन ही रुक सी गई,सामने मौत साक्षात तांडव कर रहा था..

टॉमी फिसलता हुआ झरने में गिर गया..

“नही …”

मैं जोरो से चीखा लेकिन सब बेकार था मैंने हाथ पैर मारे लेकिन गीली काई की वजह से मैं रुक ही नही पाया और ..

“नही ….”झरने के गर्त में गिरता चला गया,डर के मारे ना जाने कब मैंने अपने होश खो दिए थे …………..

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2 hours ago,
#6
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 2

ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपने बिस्तर में सोया हुआ हु और टॉमी हमेशा की तरह मेरे गालों को चाट रहा है..

“अरे टॉमी सोने दे ना ‘

मैंने करवट ली लेकिन ..

छपाक

मैं पानी में गिर गया था,मैं अचानक होश में आया मेरे सामने कल के हादसे का पूरा चित्र ही घूम गया ,

“है भगवान हम लोग कहा है “

टॉमी को तो कोई भी फर्क नही पड़ रहा था,और हम नदी में बहते हुए ना जाने कहा आ पहुचे थे,अजीब बात थी की इतने उचाई से गिरने के बाद भी मुझे बस मामूली खरोंचे ही आयी थी वही टॉमी तो बिल्कुल ही स्वस्थ लग रहा था,हम नदी के किनारे में पड़े थे,मैं उठकर इधर उधर देखने लगा..

मेरे जैसा डरपोक इंसान आज एक पालतू कुत्ते के साथ घने जंगल में अकेला था ,दूर दूर तक कोई नही दिख रहा था,आज तक कभी मैं अपने शहर से बाहर अकेले नही गया था,ऐसे मेरी फट के चार हो जानी थी लेकिन पता नही वंहा की हवा में क्या था की मैंने उसे और भी गहरे अपने फेफड़ों में भर लिया ,मुझे बिल्कुल ही ताजा सा अहसास हुआ ..

मैंने अपने हाथो में बंधी मा के द्वारा दिए हुए उस धागे को देखा ,मैंने प्यार से उसे चूम लिया ,मुझे लगा की आज अगर मैं जिंदा बचा हु तो माँ के आशीर्वाद से और भगवान की कृपा से ही बच पाया हु ,वरना इतने उचाई से गिर कर कोई कैसे बच सकता था ..

मुझे आज भगवान और चमत्कार में यकीन हो गया था ..

और साथ ही मुझे एक अजीब से भाव का अहसास हुआ जैसे मैं आजाद हु ,बिल्कुल खुली हवा ,ना बाप का डर न बहनों के ताने सब से मुक्त…….

मैं ऐसे ही खुश ही रहता अगर मुझे भूख नही लगती ,लेकिन जोरो की भूख गई थी,टॉमी तो पता नही क्या सुन्ध रहा था ..

“दोस्त जोरो की भूख लगी आई क्या है आज ब्रेकफास्ट में “

टॉमी मुझे देख कर जैसे मुस्कुराया..

अब ये मुस्कुराए या रोये साला एक ही सा दिखता है ..

टॉमी कुछ सूंघता हुआ एक ओर बढ़ गया था ,मैं भी उसके पीछे पीछे चल दिया थोड़ी दूर जाने पर ही मुझे समझ आ गया की आज तो टॉमी की दावत थी यानी कोई जानवर मर गया था और उसके शरीर के सड़ने की बदबू फैल रही थी ,मै नाक बंद करके टॉमी के पीछे चल दिया ,टॉमी तो जैसे उस पर झपट पड़ा लेकिन जब मैंने उसे देखा तो ..

तो मेरी फट के चार हो गई ,क्योकि वो एक भालू का शरीर था,वो भी जंगली विशालकाय भालू..

अब मुझे फिर से याद आया की मैं कहा हु,मैं यंहा पिकनिक मनाने नही आया हु बल्कि खो गया हु ,मैंने अपने जेब तलाशे

“ओ सीट...साला मोबाइल तो गाड़ी में ही रह गई “

दूसरी जेब में पर्स था जिसमे कुछ पैसे भी थे लेकिन यंहा उन पैसों का मैं क्या करूंगा ..

मैंने मेन वर्सेस वाइल्ड देख रखी थी लेकिन यंहा मुझे कुछ झँटा समझ नही आ रहा था …….

मैं थोड़ी देर इधर उधर घुमता रहा फिर एक लकड़ी को तोड़कर उससे भाला जैसा कुछ बनाने की कोशिस में लग गया,घंटे भर की मेहनत के बाद मेरे पास एक हथियार था जिसकी नोक मैंने भालू के हड्डियों से बनाई थी ,ये शिकार के लिए वक्त पड़े तो बचाव के लिए था……

जब भूख तेज हुई तो मैंने पेड़ो की पत्तियों खाना स्टार्ट किया कुछ ठीक ठाक थी तो कुछ बहुत ही कड़वी ..

क्यो फल मिलने की कोई उम्मीद तो नही दिख रही थी लेकिन फिर भी मैं जंगल के अंदर जाने लगा,जो खाने के लायक दिखता उसे खा खा कर देखता जाता था ,मैंने सुना था की जंगल में भटक जाने पर नदी के सहारे चलते जाना चाहिए तो मैं नदी के किनारे किनारे चल रहा था ..

दिन तो जैसे तैसे कट ही गया लेकिन अब फिर से रात आने वाली थी ,टॉमी तो जैसे यंहा बेहद खुश था लेकिन मेरी तो फटने वाली थी,फिर से बदल गरजने लगे और हर गर्जना ऐसा लगती थी जैसे मेरा काल हो …..

मुझे एक ठिकाना चाहिए था ,ऐसा कुछ जिसमे मैं अपने को बारिश से बचा सकू …

मैंने एक समतल जगह ढूंढ ली और वंहा पेड़ो की टहनियां इकट्ठा करके पेड़ के सहारे एक छत बनाने की कोशिस करता रहा ,मैं इस हालात में था लेकिन फिर भी मेरे दिल में वो डर धीरे धीरे गायब हो रहा था,मैंने जीवन में पहली बार अपनी स्तिथियों को स्वीकार कर उनका सामना करने की ठानी थी और मेरे साथ था मेरे मा का दिया वो धागा जिसमे प्यार था आशीर्वाद था …

शायद मुझे अपने पर और उस धागे पर यकीन हो रहा था की मैं इस मुश्किल से निकल सकता हु ,

और रात भारी बारिश हुई ,टॉमी और मैं एक दूसरे से लिपटे हुए ठिठुरते हुए एक पेड़ के नीचे झड़ियो से बनाये गए आशियाने के नीचे बैठे रहे ,यंहा अंधेरा था घना अंधेरा,ये ऐसी रात थी जिसकी कल्पना भी किसी को डराने को काफी हो ……

ना जाने कौन सा जंगली जानवर कब हमारे ऊपर हमला कर दे,सांप,बिछु,जहरीले कीड़े मकोड़े हम किसी का भी शिकार हो सकते थे,आंखों से नींद तो गायब हो गई थी लेकिन आंखे बंद कर खुद को सम्हालने के अलावा मेरे पास कोई चारा भी तो नही था…

मैं टॉमी को ऐसे सहला रहा था जैसे कह रहा था की सब ठीक हो जाएगा,मैं जीवन में पहली बार किसी को हिम्मत दिला रहा था,सच में मुसीबत और तकलीफें इंसान को और भी मजबूत बना देती है ,मेरी आराम तलबी की जिंदगी और घरवालों के तानों ने मुझे बचपन से जितना कमजोर बनाया था आज इस मुसीबत ने मुझे एक ही दिन में इतना मजबूत बना दिया था,इस समय तक मुझे हार मान जाना था लेकिन मेरे हाथ में बंधा ये धागा ना मुझे हार मानने दे रहा था ना ही उम्मीद छोड़ने …………
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2 hours ago,
#7
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 3

जब नींद आती है तो नरम बिस्तर की परवाह नही रह जाती ,यही मेरे साथ हुआ मुश्किल घड़ी में भी ना जाने कब मैं नींद के आगोश में चला गया था,

मेरी नींद खुली टॉमी की गुर्राने से मैं तुरंत ही सतर्क हो गया ,टॉमी सामने देख कर गुर्रा रहा था,सामने देखा तो मानो मुझे सांप ही सूंघ लिया क्योकि सामने सच में सांप ही था ,फन फैलाये वो भी फुंकार मार रहा था,मैं घर में एक अदन छिपकली को भी देखकर भाग जाता हु और यंहा नागराज स्वयं पधारे थे ..

वही टॉमी लड़ने की पोजिशन ले चुका था वो उसे देख कर गुर्रा रहा था,दोनों की निगाहे एक दूसरे से मिली हुई थी ,मुझे पता नही था की एक पालतू कुत्ता इस तरह शिकारी भी हो सकता है,शायद ये उसके खून में हो ,कुछ चीजे जानवरो को कभी नही सीखनी पड़ी वो उसे जन्म से ही सीखकर पैदा होते है ,जैसे सेक्स करना ..

टॉमी ने अपना एक पंजा सांप की ओर किया और सांप ने उपसर झपट्टा मार दिया ,वही टॉमी ने दूसरे पंजे से सीधे सांप के गले पर वार किया और इससे पहले की सांप कुछ समझ पाए टॉमी ने अपने दांतो से उसके गर्दन को दबोच लिया और रामनाम सत्य….

टॉमी की इस बहादुरी पर मुझे थोड़ा आश्चर्य भी हो रहा था लेकिन आज उसने मेरी जान बचा ली थी …

अभी तो ये शुरुवात थी ना जाने मुझे इस जंगल में और क्या क्या देखना पड़ेगा ……..

रात भारी बारिश हुई थी और पास जिस नदी के साथ मैं चल रहा था उसे देखकर मेरा दिल ही भर आया था,कारण था की उसमें पानी लबालब भरा हुआ था,नदी का वेग तेज हो गया था साथ ही उसका पानी बारिश के कारण गंदा भी हो चुका था,मुझे रोना इसलिए भी आ रहा था क्योकि मैं घर में फिल्टर का पानी पिया करता था ,कल तक नदी का पानी साफ़ था लेकिन आज ,मुझे आग जलानी होगी..

जब पेट में चूहों ने कोहराम मचा दिया तो मेरे दिमाग में एक ही बात आयी की आग जलाओ और कुछ पका कर खाओ लेकिन क्या..??

टॉमी फिर से सूंघता हुआ अपने जुगाड़ में लग गया था मैं उसके पीछे पीछे चलता हुआ ना जाने कहा तक निकल गया बस मैं ध्यान ये रख रहा था की नदी की दिशा में ही चलता जाऊं ,रास्ते में जो खाने के लायक मिल जाता मैं उसे खा लेता था ,दो ही दिन में मैं सिख गया था की कौन सी चीज खाई जा सकती है ,इसे कहते है जीवन का संघर्ष ..

चलते चलते मैं थक कर बैठ चुका था ,कही कोई उम्मीद की किरण नही दिख रही थी लेकिन फिर भी मुझे चलते रहना था,तभी मानो कुछ हुआ मेरे कानो में शंख की गूंज सुनाई पड़ी ,मैं उछाल कर खड़ा हो गया मानो फिर से शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार हो गया हो..

“टॉमी तुमने सुना ,ये तो शंख की गूंज है यानी कोई इंसान आस पास ही होगा “

अब बेचारा टॉमी बोलता भी क्या वो बस मुझे ही देखे जा रहा था ..

मैं उस शंख की ध्वनि के सहारे आगे बड़ा और मैंने जो देखा उसे देखकर मेरा दिल बाग बाग हो गया था ,दूर पहाड़ पे मुझे एक मंदिर दिखाई दिया,मैंने अब देर नही की और उसी ओर बढ़ने लगा,मैं ठीक उस पहाड़ के नीचे था जिसके ऊपर मंदिर था,दोपहर से शाम होने को आई थी और मैं थक कर चूर था लेकिन फिर भी जब बात जीने मारने की हो तो कौन देखता है ,मैंने गहरी सांसे ली ..

“बस वंहा तक पहुच जा कोई ना कोई तो मिल ही जाएगा “

मैंने खुद से कहा और चलने ही वाला था की टॉमी की हरकत से मैं थोड़ा ठिठका …

वो पीछे किसी को देख रहा था ,जब मैं पीछे मुड़ा तो ……

तो लगा जैसे अब हार्ट अटैक आने वाला हो ..

एक बिल्कुल ही शार्प चीता मुझे लालची निगाहों से देख रहा था ,वो हमशे कुछ ही दूरी पर था ,मेरे हाथ पैर मानो शून्य पड़ गए थे,दिल ने धड़कना ही बंद कर दिया था,आज तक लोगो ने मुझे डरपोक कहा था लेकिन डर होता क्या है ये शायद आज मुझे पता चला,वो बड़े ही प्यार से मुझे निहार रहा था जैसे कोई भूखा व्यक्ति अपने खाने को निहारता है ..

कुछ पल के लिए लगा मानो सब कुछ थम सा गया हो ,मरे हाथो में वो भाला था जो मैंने जोड़ तोड़ कर बनाया था लेकिन उसपर भी मेरी पकड़ धीमी पड़ने लगी थी …

वो बहुत ही धीरे धीरे मेरी ओर बढ़ रहा था ,वही टॉमी की भी सिट्टी पिट्टी गुम थी ,वो भी बस उसे ही देख रहा था शायद मेरे जैसी स्तिथि उसकी भी थी ..

“है भगवान बचा ले ...माँ “

मेरे दिल से ये फरियाद निकली ,मानो मेरा पूरा प्राण बस उसे ही पुकार रहा हो ,अचानक मेरे अंदर ये भावना आयी की जब मरना ही है तो लड़ कर मारूंगा ..

मेरे चहरे का भाव बदलने लगा , ना जाने कहा से एक ऊर्जा सी मेरे भीतर उमड़ गई ,डर रोमांच में बदल गया ,हाथो में रखे भाले पर मेरी मुठ्ठी कसने लगी ,मैं पहली बार मेरे पैरों में मुझे जान आने की अनुभूति हुई ,मैं वैसे ही पोजिशन में आ गया जैसे की टॉमी आज सुबह सांप के सामने था ,शिकारी वाली पोजिशन में मैं उसके तरफ थोड़ा सा झुक गया था और भाले को अपने एक हाथ में पकड़ा हुआ अपने से पैरलर रखे हुए था,मुझे याद आया हॉलीवुड मूवी 300 का वो सीन जब स्पार्टा का युवराज लियोनार्डस एक अदमखोर जानवर का शिकार करता है……

मैं खुद को उसके ही जगह में पा रहा था,मेरे हाथो में भी भाला था,मैं भी अकेले था,बस वंहा बर्फ पड़ रही थी और यंहा धूप निकली हुई थी ,मुझे देखकर मानो चीता भी शिकारी मूड में आ गया था वो झपट्टा मारने को पूरी तरह से तैयार था ,और मैं भी उससे भिड़ने को तैयार हो गया था ..

तभी ..

शंख की ध्वनि फिर से पूरे माहौल में गूंज गई ,इस बार वो बहुत पास सी आती हुई प्रतीत हुई ,उसे सुनकर चीते को ना जाने क्या हुआ वो तुरंत ही सामान्य हुआ और वंहा से खिसक लिया ,मैं बड़े ही आश्चर्य से ध्वनि की ओर देखने लगा, सामने कुछ ही दूर पर पहाड़ के एक बड़े पत्थर पर खड़ा हुआ सन्यासी मुझे देख रहा था ,उसके हाथो में शंख था और हाथो में त्रिशूल ,पूर्ण नग्न था लेकिन पूरे शरीर में राख मले हुआ था ,बड़ी बड़ी जटाएं फैली हुई थी ,दुबला पतला ही था लेकिन मानो चहरे और शरीर से एक तेज सा निकल रहा हो,वो बस मुझे देखने लगा ,और मैं …….

मैं वही दंडवत हो गया…

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2 hours ago,
#8
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
हम पहाड़ी के चोटी पर बने उस मंदिर में थे,मंदिर छोटा सा ही था लेकिन पहाड़ की चोटी पर होने के कारण दूर से दिखता था,शिव के उस मंदिर में एक शिव लिंग की स्थापना की गई थी ,वो मंदिर कम और इस बाबा जी का आश्रम ज्यादा थी …

पास की कुटिया में उन्होंने हमे बिठाया जो केवल एक झोपड़ी सा था ,मैं उनके सामने बैठा था मेरे बाजू में टॉमी बैठा हुआ था,

मेरे सामने एक अग्निकुंड था जो की अभी ठंडा था ..

“यंहा क्या कर रहे हो बच्चे ..”

उनकी बात सुनकर पता नही मुझे क्या हुआ मानो इतना सारा दुख जो मैं दो दिनों से अपने अंदर ही दबा कर रखा था वो बाहर फुट पड़ा मैं जोरो से रोया …

रोते रोते मैंने उन्हें पूरी बात बतला दी की कैसे मैं यंहा तक आया ,साथ ही मैंने ये भी बता दिया की कैसे निशा और चंदू ने मिलकर मेरा माजक उड़ाया और वो ऐसा क्यो करते है,सभी चीजे जो मेरे दिल में सालो से था……

वो काफी देर तक मुझे बिना टोके ही मेरी बात को सुनते रहे …..

जब मैं शांत हुआ तो उन्होंने मुझसे बस ये कहा

“भूख लगी है “

मैंने हा में सर हिलाया ,उनके होठो में एक मुस्कान आ गई

वो मेरे साथ झोपड़ी से बाहर आये और पहाड़ी से नीचे की ओर इशारा किया ,

“वंहा तुम्हे कुछ फल और कंदमूल मिल जाएंगे ,अपने लिए और मेरे लिए ले आओ “

मेरा तो चहरा ही उतर गया ,मुझे फिर से नीचे जाना था और इनके लिए भी फल लाने थे …

“लेकिन महाराज अगर कोई जानवर फिर से मुझपर आक्रमण कर दिया तो “

मेरी बात सुनकर वो जोरो से हंसे

“रुको ..”

वो झोपड़ी के अंदर गए और जब वो बाहर आये तो उनके हाथो में एक छोटी सी त्रिशूल थी उसे उन्होंने मुझे थमा दिया,साथ ही दूसरे हाथो में एक छोटा सा लकड़ी का टुकड़ा था कुछ एक उंगल जितना लंबा ,बेलनाकार ...उसे उन्होंने मुझे दिया

“ये कोई आम लड़की का टुकड़ा नही है ये जादुई लकड़ी का टुकड़ा है,अगर कोई मुसीबत आये तो इसे चाट लेना ,तुम्हारे अंदर इतनी ताकत आ जाएगी की तुम चीता ,शेर ,हाथी ,आदमी सभी तरह के जानवरो को पछाड़ दोगे…”

मैंने उन्हें आश्चर्य से देखा लेकिन वो मेरी बात सुनकर बस मुस्कुराए

“ये चंदन का एक छोटा सा टुकड़ा ही है जिसे मैंने अपने मंत्रों से सिद्ध किया है ,अब ये कोई सामान्य चीज नही है,मानो ये कोई मनी है,जिसे मिल जाए उसकी जिंदगी बना दे,वो हर चीज दिला दे जो वो चाहता है ,ताकत,हिम्मत ,हौशला,और जिसकी तुम्हारे अंदर बहुत कमी है आत्मविस्वास और आकर्षण ये जब तुम्हे सब कुछ देगा …….”

उनकी बात सुनकर मुझे माँ की बात याद आ गई मुझे लगा जैसे भगवान ने मेरी सुन ली और ये फरिश्ता मेरे पास भेज दिया ,मैं खुसी खुशी टॉमी को लेकर नीचे चला गया ….

शाम से रात हो गई थी जब मैं वापस आ रहा था ,लेकिन रात के उस अंधियारे में भी डर की कोई छोटी सी लकीर मेरे जेहन में नही थी ,जबकि ये रात का अंधियारा और ये अकेलापन भी मुझे बड़ा ही सुहा रहा था क्योकि मन में कोई डर नही था,मुझे हमेशा लग रहा था की कोई अदम्य शक्ति मेरे साथ है जो की वक्त पड़ने पर मुझे किसी भी मुसीबत से निकाल देगा,मैंने बहुत से फल टोकरी में भर लिए थे ,टॉमी तो अपना जुगाड़ खुद ही कर रहा था ,जीवन में पहली बात मुझे पता चला की बिना डर के जीना क्या होता है,निर्भीकता क्या होती है ,साहस और शांति क्या होती है……

मैं झूमता हुआ गुनगुनाता हुआ मस्ती में टॉमी के साथ बड़े ही मजे से पहाड़ी चढ़ कर फिर से आश्रम तक पहुच गया ,बाबा जी ध्यान में बैठे थे ,तब तक मैं ऊपर रखे एक पत्थर पर बैठा दूर देखने लगा ,दूर दूर तक बस जंगल ही जंगल था ,रात होने के साथ चांद की रोशनी में वो जगह किसी जन्नत से कम ना थी ,इसीलिए साधु सन्यासी जंगलों की ओर चले आते है,हवाओ में थोड़ी सी ठंड होने लगी थी ,कभी कभी थोड़ी कपकपी सी लग जाती ..

थोड़ी देर बाद ही बाबा जी बाहर आये और मुझे देखकर अपने पास बुला लिया,मैंने अपने साथ लाये हुए फल और कुछ कंदमूल उन्हें धो कर दिए ,और पास ही बैठकर मैं भी खाने लगा ….

“तुम मंदिर के अंदर ही सो जाना ,बाहर रात होने के साथ साथ ठंड और भी बढ़ेगी “

मैंने हा में सर हिलाया …….

सुबह होते ही मैं उनके साथ पास की नदी में नहाने और पानी लेने चला गया,आते आते उनके साथ कुछ लकड़ियां भी बीनते हुए ले आये,साथ ही कुछ फल और पत्ते और कंदमूल भी ,उन्होंने मुझे बताया की क्या खाते है क्या नही खाते,किस पेड़ की जड़ को खाया जाता है,और कुछ ऐसे पेड़ और पौधों के बारे में उन्होंने बताया की मैं सुनकर दंग ही रह गया,सच में प्रकृति हमे कितना कुछ देती है ……

ऊपर आते ही उन्होंने कहा की इतना पानी मेरे लिए ही काफी होता है तुम और पानी ले आओ ,नदी कुछ किलोमीटर दूर थी लेकिन मेरे पास समय ही समय था ..मैं खुसी खुसी फिर से नीचे चला गया मैं अपने पर खुद ही हैरान था की मेरे अंदर इतनी ऊर्जा कहा से आ रही है,मैं थक ही नही रहा था,वो लड़की अब भी मेरे पास थी,पानी लाकर मैं फिर से नीचे फल और कंदमूल की तलाश में निकल पड़ा और शाम होने से पहले तक लकड़ियो के साथ वापस भी आ गया …

हम शाम का भोजन कर रहे थे ..

“तो वो लकड़ी तुमने सम्हाल कर तो रखी है ना “

“जी महाराज ,ये तो कमाल है ,मुझे अपने जीवन में कभी इतनी ऊर्जा और शांति का अनुभव नही हुआ था,ना ही इतनी निडरता मेरे अंदर कभी भी थी ..”

वो मुस्कुराए

“अभी तो ये बस शुरवात है तुम सोच भी नही सकते की ये तुम्हारे लिए क्या कुछ नही कर देगी ,तुम जिसे चाहो अपना गुलाम बना लोगे तुम्हारी वाणी में वो तेज आ जाएगा ,जो चाहोगे वो पा लोगे तुम्हारे अंदर उतनी ऊर्जा और ताकत आ जाएगी ,शाररिक क्षमता मानसिक क्षमता जो भी तुम बढ़ाना चाहो सब इसके उपयोग से बढ़ा सकते हो ,बस तुम्हे शुरवात करनी होगी बाकी मदद ये कर देगा ,तुम इसे एक ताबीज की तरह बनाकर रख लो मैं तुम्हे रेशम का एक धागा दे देता हु,मेरी तरफ से ये तुम्हारे लिए उपहार है ...अभी तुम्हे कुछ दिन यही रहना होगा,जब गांव से कोई इधर आएगा या फारेस्ट वाले लोग इधर आएंगे तो तुम उनके साथ चले जाना “

उनकी बात सुनकर मुझे कैसा लगा ये तो मैं बता भी नही सकता,मैं उमंग से भर गया था ,मैं इतना खुश था की मेरे आंखों से कुछ आंसू गिर पड़े…

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2 hours ago,
#9
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
मैं लगभग 10 दिन तक वही रहा,उस पहाड़ी में चढ़ना उतारना मेरे लिए बच्चों का खेल बन गया था,मैं अपने को बहुत ही ताजा और ताकतवर महसूस कर रहा था,मैं हमेशा ही उमंग में रहता था ,मैं टॉमी के साथ खेलता हुआ जंगल में दूर तक निकल जाता ,कई किलोमीटर यू ही दौड़ जाता जाता था मुझे ये जंगल ही अपना घर लग रहा था ,सच कहु तो मुझे यंहा से वापस जाने का भी मन नही कर रहा था लेकिन …

लेकिन वो दिन आ गया जब मुझे जाना था ,फारेस्ट डिपार्टमेंट के कुछ लोग पेट्रोलिंग करते हुए वंहा पहुच गए थे ,बाबा जी ने उन्हें मेरे बारे में बताया ..

“अच्छा तो ये लड़का है ,हमने इसे बहुत ढूंढने की कोशिस की लेकिन ये कही नही मिला,पुलिस वाले अब भी इसकी तलाश कर रहे है,हम इसे पुलिस के पास ले जाएंगे वंहा से इसे इसके घर पहुचा दिया जाएगा “

जाते वक्त बाबा ने मेरे सर पर हाथ फेरा ,उनके स्पर्श में बहुत ही स्नेह था ,मैं तो फफक कर रो ही पड़ा ऐसे लगा जैसे ये ही मेरा घर था और मुझे किसी अनजान जगह जाना पड़ रहा हो …

उन्होंने मुझे प्यार से समझाया

“अपने पर और मेरी विद्या पर भरोसा रखना तुम जितने के लिए ही पैदा हुए हो “

उन्होंने मेरे कानो में कहा और मैं आंसू पोछता हुआ उनके चरणों में गिर गया ..

“मैं यही रहना चाहता हु बाबा ..’

मैं उनके चरणों में पड़े हुए आखिर अपने दिल की बात कह ही दी

“बेटा के जगह तुम्हारे लिए नही है ,पहले जीवन को जी तो लो फिर सन्यास लेना ,मेरे दरवाजे तुम्हारे लिए हमेशा खुले रहेंगे लेकिन अभी समय नही आया है ,अभी तो तुम्हे इस जीवन को जीना है इससे भागना नही है ..”

उन्होंने क्या कहा मुझे उतना तो पल्ले नही पड़ा बस ये समझ आ गया की मुझे वापस जाना होगा …

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फारेस्ट वाले मुझे पुलिस के हवाले कर दिए जिन्होंने मेरे घर में फोन कर उन्हें बता दिया की मैं मिल गया हु और पुलिस के साथ वापस आ रहा हु …

मैं घर जा रहा था कुछ 12-13 दिन बाद ,लेकिन अब मैं वो राज नही था जो गलती से जंगलों में खो गया था ,मैं एक अलग ही इंसान था ,मैं वो था जिसने दो दिन तक अकेले घने जंगल में सरवाइव किया था,मैं वो था जिसने मौत को करीब से देखा था,मैं वो था जो एक ऊंचे झरने से गिरने के बाद भी जिंदा बचा था,मैं वो था जो एक जंगली चीते के सामने उससे लड़ने को तैयार खड़ा था,मैं वो था जो दिन में कई बार ऊंची पहाड़ी पर उतर और चढ़ सकता था वो भी सर में एक पूरी भरी मटकी ले कर ,और मैं वो था जिसके साथ एक तपस्वी ,योगी ,सिद्ध पुरुष का आशीर्वाद था ………

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2 hours ago,
#10
RE: Hindi Kamuk Kahani जादू की लकड़ी
अध्याय 4

सामने मेरा घर था जिसे मैं आज तक अपना घर कहता रहा था,लेकिन यकीन मानिए ये कभी मुझे अपना घर नही लगा,और वो 10 दिन जो मैंने उस पहाड़ी के मंदिर में बिताए थे ,मुझे लगने लगा था की यही मेरा असली घर है,आज मुझे लग रहा था की मैं अपने असली घर को छोड़कर किसी दूसरी जगह आ रहा हु…

सामने गेट था और अब मेरी नई दुनिया में प्रवेश करने का समय आ चुका था…..

पुलिस ने मेरे घर वालो को पहले ही मेरे आने की खबर दे दी थी तो मुझे यकीन था की सभी ,सभी ना सही कम से कम मेरी प्यारी माँ तो मेरे आने का इंतजार कर ही रही होगी ,ऐसे भी इस घर में मैं बस उन्हें ही देखना चाहता था और वो ही तो एक थी जिसे मुझसे प्यार था…….

दरवाजा खुला और मेरी मैं ने दौड़ाते हुए मुझे गले से लगा लिया .

“बेटा तू कहा चला गया था “

वो मेरे गालों को बेतहाशा चूमने लगी थी ,मेरी उम्मीद के विपरीत यंहा घर का हर सदस्य था और सारे नॉकर भी …

“ऐसे क्या लाड़ दिखा रही हो इसे, ये कोई जंग जीतकर नही आया है,अपनी गलती से खो गया था ,कहा भाग गया था तू ..”

मेरा बाप चिल्लाया ,मैंने इस बार नजर नीचे नही की बल्कि उसे एक बार घूर कर देखा और फिर अपनी माँ की तरफ देखने लगा,रो रो कर बेचारी के आंख सूज गए थे,मैं उसके गालों को प्यार से सहलाने लगा..

मेरा बाप फिर से भड़का

“कुछ पूछा जा रहा है तुमसे ,कहा भाग गए थे तुम “

“ये अभी तो आया है और आप ..”

माँ कुछ बोलने वाली थी की पापा ने अपना हाथ दिखा के रोक दिया आखिर मुझे बोलना ही पड़ा..

“मैं कही भागा नही था,आपकी प्यारी बेटी और उसके बॉयफ्रेंड ने मिलकर मुझे जंगल में भरी बारिश में अकेले छोड़ दिया था …”

मैंने घूरकर निशा की ओर देखा मेरी बातों से वो सकपका सीं गई थी ..

“कुछ भी मत बोल लूजर ,.”

वो भड़की लेकिन इस बार मेरा सर झुका नही बल्कि मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई ,मेरे इस एटीट्यूड को देखकर निशा मानो जल सी गई ..

“पापा ये ..”

पापा ने उसे फिर से रोका

“अपनी गलती को अपनी बहन पर मत डालो “

वो कुछ और बोलते की मैं बोल पड़ा

“बहन ….हा हा हा…”मैंने बड़े ही व्यंगात्मक अंदाज से निशा की ओर देखा ,पता नही मेरी आंखों में क्या था की वो घबरा सी गई और सहम गई,मुझे लगा की ये मेरे उस ताबीज वाली लकड़ी का कमाल है जो भी हो अब तो मैं राजा था …..

“पहले इससे तो पूछ लो की इसने कब मुझे अपना भाई माना है ..माँ मुझे बहुत जोरो की भूख लग रही है आपके हाथो का खाना खाये मानो बरसो हो गए ,जल्दी से खाना लगा दो मैं फ्रेश होकर आता हु ..”

मेरी बात और कांफिडेंस से मेरी माँ भी चकित थी ,मैं मुड़ा और पुलिस वालो को खुद ही धन्यवाद कहा और बिना किसी से कुछ कहे टॉमी की साथ अपने कमरे में आ गया …..

कितना सरल था …

जिन चीजों से मैं आज तक डरता रहा था उनका सामना करना इतना सरल होगा ये मैंने सोचा ही नही था …

मैंने अपने ताबीज को चूमा ,टॉमी को नहलाया और खुद भी नहा कर नीचे आ गया ,अब घर में कोई भी नही दिख रहा था ,मैं डायनिंग टेबल पर बैठा था मेरे पास ही माँ भी बैठी थी ..

“हो क्या गया है तुझे ,अपने पापा से ऐसे बात कर रहा था ,तू ठीक तो है ना बेटा ..”

उन्होंने मुझे खाना परोसते हुए कहा

मैं जोरो से हँस पड़ा

“हा माँ अब ही तो ठीक हुआ हु “

मेरे इस बात से माँ के आंखों में आंसू आ गए ,मैं समझ सकता था की क्यो,उन्होंने मुझे जीवन भर घुटते हुए देखा था,हमेशा ही दबकर रहते हुए देखा था ,उनके लिए इससे ज्यादा खुसी की बात और क्या हो सकती थी की उनका बेटा अपनी जिंदगी सर उठा कर जिये …

मैं खाना खाकर स्कूल के लिए निकलने लगा ,माँ ने फिर से मुझे रोक लिया

“बेटा आज भी स्कूल जाएगा,पहले तो स्कूल के नाम से तेरा चहरा उतर जाता था ..”

मैं बस मुस्कुरा कर रह गया ….


स्कूल में जैसे मैं एक खास अट्रेक्सन था ,क्लास में जाते ही चंदू मुझे मिल गया ..

“क्यो बे चुतिये कहा भाग गया था ..”

मैं अपने बेंच में बैठा ही था की वो मेरे सामने आकर खड़ा हो गया था,चंदू की बात का मैंने कोई जवाब नही दिया बल्कि बस उसको देख कर मुस्कुरा दिया,पता नही क्यो लेकिन मुझे लगा जैसे मेरे मुस्कान में वो ताकत है जो मेरी बातों में नही होगी ,सच था क्योकि चंदू थोड़ा झल्ला गया था,मैं उसके आंखों में आंखे मिलाकर उसके प्रश्न का जवाब दिए बिना बस मुस्कुरा रहा था जैसे उसके प्रश्न की मेरे लिए कोई अहमियत ही नही हो ..

निशा दूर खड़ी हम दोनों को देख रही थी वही जैसे ही रश्मि की नजर मुझपर पड़ी वो दौड़ाते हुए मेरे पास आ गई ..

“कहा थे तुम, ना जाने तुम्हारे बारे में कितनी कहानियां ये लोग फैला रहे थे,की तुम घर छोड़ कर भाग गए हो...“

उसने चंदू को घृणा की दृष्टि से देखा

“बस जंगल घूमने का मन किया तो निकल पड़ा ,ऐसे जंगल बेहद ही खूबसूरत था….. तुम्हारी तरह ..”

मैंने ये बात उसकी आंखों में देखकर कही थी ,और इससे उसके साथ साथ चंदू का भी मुह खुला का खुला रह गया था,रश्मि इतने दिनों से मेरी दोस्त थी लेकिन मैंने आजतक कभी उससे दोस्तो की तरह बात नही की थी ,और आज आते ही मैं उससे फ्लर्टिंग करने लगा था,मुझे नही पता था की ये मुझसे कैसे हो रहा है बस मुझे अब डर नही लग रहा था,मेरे साथ बाबा जी का आशीर्वाद जो था,तो मैं जो मुह में आये वो बोल रहा था दिल से बोल रहा था ,अपने दिमाग को मैंने थोड़ा साइड कर दिया था,क्योकि दिमाग सोचता बहुत है ,अच्छा- बुरा,ये- वो, दुनिया- दारी..

इतना सोचता है की हम जी ही नही पाते तो दिमाग को रिलेक्स रखो और अपनी जिंदगी जिओ ,बाबा ने मुझे यही सिखाया था ..

“तुम्हे क्या हो गया आज ,तुमने जिंदगी में पहली बार मेरी खूबसूरती की तारीफ की है ..कुछ बदले बदले लग रहे हो “

रश्मि की बात से मैं खुल कर हँस पड़ा था ,जिसे वो दोनों ऐसे देख रहे थे जैसे कोई भूत देख लिया हो मानो जो देखा उसपर यकीन ही नही आ रहा हो …

“अरे यार मैंने तो बस सच कहा है ,ऐसे तुम बहुत याद आई मुझे ,जंगल में मेरे अकेलेपन में, आखिर तुम ही तो एक दोस्त हो मेरी “

ऐसे ये बात पूरी तरह से गलत थी क्योकि मुझे उसकी बिल्कुल भी याद नही आयी थी लेकिन मेरी बात सुनकर वो मुस्कराई ,

“तुम सच में बहुत बदल गए हो ..”

उसने बस इतना ही कहा और अपने सीट पर चली गई ..

उसके जाते ही चंदू मेरी ओर हुआ

“क्यो बे साले बहुत हीरो बन रहा है तू ,रश्मि से फ्लर्ट करेगा “

उसने मुझे धमकाने वाले अंदाज में कहा ,

“क्यो तेरी बहन है क्या ..”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा ,

“तेरी तो ..”उसने मुक्का ताना लेकिन रुक गया ,मैं अब भी उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था,यकीन मानो मेरे दिमाग में उसके लिए कोई गुस्सा ही नही था वो तो मुझे बच्चे जैसा लग रहा था,

अर्ज किया है

मैं तो चीता से लड़ने वाला इंसान था ,ये तो मेरे लिए झांट समान था ..वाह वाह वाह वाह

जैसे ही मेरे मन में ये बात आयी मेरी मुस्कान और भी गहरा गई ..

“साले बहुत बोल रहा है तू,अपने को बड़ा तीसमार खान समझ रहा है ना,बहन की बात करता है पता है ना तेरी बहन के साथ क्या किया था कार में “

मुझे उसकी बात से गुस्सा या शर्म आना था लेकिन दोनों ही नही आया ,मैंने बस के अंगड़ाई ली ,मैंने देखा की निशा उसी ओर आ रही थी ...

“तुझे निशा को चोदना है ना ,चोद उसे, लेकिन उसे मेरी बहन बोलकर बहन शब्द को गाली मत दे ..”

मेरी बात निशा के भी कानो में गई होगी ,वो सन्न थी जबकि चंदू निरुत्तर, वो खिसियाया हुआ अपने सीट में चला गया ,वही निशा गुस्से से भरी हुई मुझे देख रही थी लेकिन मैंने उसको बिल्कुल ही इग्नोर कर दिया था ….

दो क्लास के बाद ब्रेक हुआ और एक मोटा लड़का मेरे सामने आकर खड़ा हो गया,ये लड़का रश्मि का दीवाना था इसलिए स्वाभाविक रूप से मुझसे जलता था और मुझे परेशान किया करता था ..

“क्यो बे चोदू कहा था इतने दिन “

उसने अपने दांत निकाले ,एक बार उसने रश्मि की ओर देखा की कही वो आ तो नही रही है लेकिन रश्मि अपनी एक सहेली से बातों में बिजी थी ..

“सामने से हट बे गैंडे मुझे मूतने जाना है “

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा चौका क्योकि उसे इस उत्तर की उम्मीद नही थी ,

“मादरचोद तेरी तो “

उसने अपना हाथ मेरे कॉलर को पकड़ने के लिए उठाया ही था की ..

चटाक ..

एक करारा झापड़ मैंने उसके गाल पर झड़ दिया ,

वो इतना जोर का था की उसका एक दांत टूट कर बाहर आ गया ,मुह से खून बह रहा था ,पूरी क्लास हमे ही देख रही थी ,मैंने उसे सामने से हटाया और पूरे एटीट्यूड के साथ क्लास से बाहर निकल गया ,वो अब भी अपना टूटा हुआ जबड़ा पकड़कर मुझे देख रहा था लेकिन वो क्या किसी की इतनी हिम्मत नही हुई की मुझे रोक सके …..

मुझे लगा था की वो प्रिंसपल के पास जाएगा फिर याद आया की ये तो स्कूल के बदमाशो के एक लोकल गैंग का मेम्बर है तो वो मेरी शिकायत नही करेगा बल्कि स्कूल के बाहर ही सबक सिखाने की सोचेगा...खैर मुझे क्या फर्क पड़ता है मेरे पास तो मेरी लकड़ी थी …

क्लास शुरू होने के बाद वो लड़का मुझे नही दिखा,शायद वो अपने गैंग के लोगो को इकठ्ठा कर रहा होगा ,लांग रिसेस के समय रश्मि मेरे साथ हो ली ,वो मेरे बदले हुए रूप को देखकर बहुत खुश हुई लेकिन वो थोड़ी घबराई हुई भी थी ..

“जानते हो ना जिस लड़के को तुमने मारा वो गुंडा टाइप का है उसका गैंग भी है ..”

रश्मि ने डरते हुए कहा

“हा तो क्या हुआ “

“तुम्हे डर नही लगता ,पहले तो सर झुकाए घूमते रहते थे,कोई भी डरा दिया करता था और अब आखिर हुआ क्या है तुम्हारे साथ जंगल में ..”

रश्मि बड़े ही आकर्षक अंदाज में मुझे देख रही थी ,मैं उसके साथ इतने सालो से था लेकिन मैंने कभी उसके चहरे को ध्यान से नही देखा था ,वो सच में बेहद ही सुंदर थी ..

“बस समझ लो मुझे कुछ ऐसा मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी ,मैंने मौत को इतने पास से देखा की मेरा पूरा डर ही जाता रहा,”

मैं कुछ देर के लिए चुप हो गया ,वो हादसे मेरे दिमाग में चल रहे थे..जबकि रश्मि मुझे ही घूर रही थी ..

“ऐसे क्या देख रही हो “

मैंने उसे खुद को देखता पाकर कहा

“ऐसे ही रहना ,हमेशा…”

हमारी आंखे मिली और मानो कुछ स्पार्क सा हुआ और उसने तुरंत ही नजर झुका ली ,मुझे पता था की क्या हुआ था ,बाबा जी ने कहा था की मेरे अंदर आकर्षण आ जाएगा ,शायद यही बजह थी की रश्मि मुझसे आकर्षित हो गई हो ,उसके चहरे में शर्म साफ दिख रही थी ,एक ही दिन में क्या क्या होने वाला था मेरे साथ ,मैंने मन ही मन बाबा जी को धन्यवाद दिया …

क्लास शुरू हुई तो रश्मि अपनी जगह को छोड़कर मेरे बाजू में आकर बैठ गई ,उसकी इस हरकत से सभी की निगाहे फिर से एक बार मुझपर टिक गई थी,निशा और चंदू का चहरा तो छोटा ही पड़ गया था ,शायद उन्हें अभी भी, घटित हो रही बातों पर विस्वास नही हो रहा हो ….

रश्मि ने मुझे बताया की आज एक नई टीचर हिस्ट्री पढ़ने के लिए आने वाली है ,

पहले जो हिस्ट्री के सर थे वो बड़े ही खड़ूस थे तो मुझे लगा की ये अच्छा ही हुआ ..

तभी एक साड़ी में लिपटी हुई औरत कमरे में आई ,उसके आने से पहले उसके पायलों की खन खन की आवाज मेरे कानो तक आ पहुची थी ,घने घुंघराले बाल लहराती हुई ,मेरी नजर पहले उसके पैरों में गई वो साड़ी पहने हुई थी,स्लेटी कलर की रेशमी पतली साड़ी,और मेरी नजर उसके कमर में जाकर रुक ही गई ,जैसे थूक गले में रुक गया हो ,गोरी चिकनी कमर पर एक चांदी का पतला करधन था,कमर पतले होने की वजह से उसके पिछवाड़े उभरे हुए लग रहे थे ,जब नजर थोड़ी ऊपर गई तो वक्षो की चोटिया दिखाई देने लगी ,और सुराहीदार गर्दन के ऊपर उसके होठ जो अभी मुझसे कुछ ही दूरी पर थे ..

वो हिले ..
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