Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
Yesterday, 12:33 PM,
#1
Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?

कई दिनों से एक फ्रेश कहानी के बारे में सोच रहा था, हालाँकि १-२ कहानियाँ और भी चल रही है, पर इस कहानी को भी अभी से थोडा थोडा लिखना शुरू करने की सोच रहा हूँ, आशा है की आपको ये कहानी पसंद आये
Reply

Yesterday, 12:34 PM,
#2
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?

सावधान........... ये कहानी समाज के नियमो के खिलाफ है क्योंकि हमारा समाज मा बेटे और भाई बहन के रिश्ते को सबसे पवित्र रिश्ता मानता है अतः जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने से अरुचि होती हो वह ये कहानी ना पढ़े
Reply
Yesterday, 12:34 PM,
#3
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?


मेरा नाम क्या है ये मैं आपको बाद में बताऊंगा पर पहले थोडा बाकी लोगो के बारे में भी बता देता हूँ

60 का दशक, कहानी शुरू होती है, भारत के बीचो बिच बसे मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव करमपुर से, लगभग एक हज़ार लोगो की आबादी वाला वो छोटा सा गाँव भारत के अन्य गाँवो की तरह ही उस समय जीवन जीने की जरूरी सुविधाओं से महरूम था, पुरे गाँव में कोई स्कूल नही था या ये कहें की आस पास के 4-5 गाँवो में भी कोई स्कूल नही था, और यही वजह थी कि पुरे गाँव में एक भी आदमी पढ़ा लिखा नही था, सिवाय लाला रोशन लाल को छोडकर, गाँव में कोई हॉस्पिटल नही था, सिर्फ एक वेदजी थे जो छोटी मोटी बिमारियों का इलाज अपनी जड़ी बूटियों से कर दिया करते थे, हालंकि पानी की समस्या नही थी क्यूंकि गाँव के बाहर ही एक नदी बहती थी, जहाँ से महिलाएं पानी भर लिया करती थी, बिजली तो उस समय कई शहरो में भी नही पहुंची थी तो गाँवो में तो लोगो को बिजली के बारे में कुछ पता ही नही था, गाँव के ज्यादातर लोगो का जीवन खेती करके ही चलता था, लगभग सभी लोगो के घर कच्चे और टूटे फूटे थे,

पुरे गाँव में सिर्फ और सिर्फ एक घर था जो पक्का था, क्यूंकि वो गाँव के साहूकार का था, उसकी एक पुस्तैनी हवेली थी जो इस पुरे गाँव में पक्के मकान के नाम पर एकमात्र इमारत थी, उसकी एक राशन की दुकान थी, जिस पर पुरे गाँव वालो को राशन का सामन लेने के लिए निर्भर रहना पड़ता था क्यूंकि इसके अलावा पुरे गाँव में कोई दुकान नही थी, वैसे तो उसका नाम रोशन लाल था पर गाँव के लोग उसे लालाजी के नाम से बुलाते थे,

लाला अक्सर गाँव के लोगो को कर्जा भी दिया करता था, पर ब्याज के नाम पर उनसे बड़ी ही मोटी रकम वसूलता था, लाला बड़ा ही हरामी किस्म का इन्सान था, क्यूंकि एक बार जिसने भी लाला से कर्ज लिया, वो जिंदगी भर के लिए उसका कर्जदार बना रहता था, वो गाँव वालो के अनपढ़ होने का फायदा उठाकर उनके कर्ज को कभी उतरने ही नही देता था, और बेचारे भोले भाले गाँव वाले जिन्दगी भर अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उस लाला को ब्याज के रूप में देते थे,


लाला के परिवार के बारे में भी थोडा सा जान लेते है....

लाला रोशन लाल...... उम्र 56 साल..... इसके बारे में तो लगभग उपर बता ही दिया है....

कमला ........लाला की दूसरी बीवी.......उमर 31 साल.... लाला की पहली बीवी से कोई संतान नही हुई थी ... इसलिए लाला ने दूसरी शादी अपने से काफी छोटी लडकी से कर ली थी और अपनी पहली बीवी को अपने घर से निकाल दिया......उसकी दूसरी बीवी कमला को ऐसे शाही हवेली में रहने का बड़ा शौक था... वो अपने नोकरो पर बड़ा हुक्म चलाया करती थी.... खुद को किसी महारानी से कम नही समझती थी....

पूनम ....... कमला की बेटी......उम्र 19 साल........ अपनी माँ की तरह ही काफी नकचढ़ी है..... हमेशा बन संवरकर रहती है.. हुक्म चलाने का इसका भी कम शौक नही है......,.,.,. किसी से सीधे मुंह बात भी नही करती थी... नखरे बड़े ऊँचे थे उसके


सडको के नाम पर सिर्फ कच्चे रस्ते थे, कहीं आने जाने के लिए बैलगाडियों का इस्तेमाल होता था, इस गाँव में एक मात्र गाड़ीवान हरिया था, हरिया 45 साल का गाँव का एक भोला भाला इन्सान था, लाला से कर्ज लेकर उसने अपने लिए दो बैल खरीदे थे, जिनका इस्तेमाल वो अपनी बैलगाड़ी के लिए करता था,


अब थोडा हम हरिया के परिवार के बारे में जान लेते है,

हरिया.........45 साल का एक अधेड़ उम्र का आदमी, चूँकि गाँव का एकमात्र गाड़ीवान है इसलिए अक्सर महीने में 20-25 दिन गाँव से बाहर ही रहना पड़ता था, क्यूंकि उस ज़माने में कोई गाड़ी मोटर तो थी नही इसलिए अगर कहीं दूर की सवारी आ जाये तो मजिल पर पहुंचने में कई कई दिन लग जाते थे, लाला के कर्ज के बोझ तले दबा जरुर था पर फिर भी गुज़ारा ठीक ठाक हो जाता था,

सुधिया ......... हरिया की बीवी.......उमर 32 साल..... अपने परिवार को चलाने के लिए अपने पति का हाथ बताती थी.... हरिया जहाँ एक और बैलगाड़ी चलाकर पैसे कमाता था... वही दूसरी और सुधिया अपनी बेटी के साथ मिलकर खेती बड़ी का काम सम्भालती थी.... हरिया का खेत गाँव के थोडा सा बाहर की तरफ था... सरला अपनी बेटी के साथ मिलकर सुबह सुबह वहाँ जाती और दोपहर का खाना सुबह सुबह ही बनाकर साथ ले जाती.... पुरे दिन भर दोनों माँ बेटी मिलकर काम करते, और शाम को खेत से लोटकर घर आते

नीलू ............. हरिया का बेटी .......उमर 16 साल ......बड़ी ही खुबसूरत लडकी...... पर गरीबी के चलते अपनि इच्छाओ को दबाकर रखती है.......अपनी माँ के साथ खेती बाड़ी का काम सम्भालती है...... जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ेगी... इसके बारे में और जानने को मिलेगा.....


हरिया का एक बड़ा भाई भी है.... रामू ......हरिया और रामू के घर एक दुसरे के ज्यादा दूर नही थे ...... रामू के परिवार की हालत हरिया से थोड़ी सी बेहतर थी..... क्यूंकि रामू लालाजी की दुकान पर नोकर का काम किया करता था..... इसलिए लाला की थोड़ी बहुत कृपा उस पर रहा करती थी..... रामू और हरिया की एक दुसरे से कम ही बना करती थी... एसा क्यूँ था ये तो आगे कहानी में आपको पता चल ही जायेगा......

पर पहले रामू के परिवार के बारे में भी हम अब थोडा सा जान लेते है....

सरला ...... रामू की बीवी..... उम्र 34 साल .... सुधिया की तरह ही ये भी खेती का काम सम्भालती है...... पर ये अपने बेटे के साथ खेती बड़ी का काम करती है... इनका खेत भी हरिया के खेत के पास था... क्यूंकि उसी खेत का बंटवारा करके दोनों भाइयों में बाँट दिया गया था.....

राजेश उर्फ़ राजू ....... रामू का बेटा....... उम्र 17 साल ...... अपनी माँ के साथ खेती का काम सम्भालता है... बाकि इसके बारे में आगे कहानी में पता चलेगा

चंदा ....... रामू की बेटी...... उमर 16 साल ....... कभी कभी अपनी माँ और भाई के साथ खेत में चली जाती है... या फिर कभी कभी अपने पिता के कहने पर लालाजी के घरवालो के कपड़े धोने का काम कर दिया करती थी....


बाकि किरदार जैसे जैसे कहानी आगे आगे बढ़ेगी वैसे आते जायेंगे, अपने बारे में भी मैं आप लोगो को जल्दी ही बताऊंगा

सुनसान सड़क थी, चारो तरफ अँधेरा फैला हुआ था, हरिया अपनी बैलगाड़ी में सवार होकर भोपाल से वापस अपने गाँव की तरफ जा रहा था, दरअसल वो किसी सवारी को भोपाल लेकर आया था और अब उसे वहां छोड़कर वो वापस अपने गाँव की तरफ जा रहा था, 4 दिन का रस्ता था, और वो पिछले 3 दिन से अपनी बैल गाड़ी में बैठकर वापस करमपुर की तरफ आ रहा था,

हरिया अपनी मस्ती में लालटेन की रौशनी में बैठा बैलगाड़ी को हांके जा रहा था, कि तभी अचानक उसे उस कच्ची सी सडक के बाजु में कुछ हलचल सी नजर आई.... पहले तो वो बहुत ही डर गया क्यूंकि उस समय भूतो चुडैलो में लोगो का काफी अन्धविश्वास हुआ करता था.. पर फिर उसने थोड़ी सी हिम्मत की और थोडा सा और पास गया.... जैसे ही वो थोडा करीब पहुंचा उसकी नज़र झाड़ियो के बिच उलटी पड़ी एक टूटी फूटी कार पर जा गिरी.... कार को देख कर लग रहा था कि शायद कोई हादसा हुआ है.... हरिया जल्दी से अपनी बैल गाड़ी से उतरा और कार के पास गया.... उसने कार के अंदर देखा पर उसे कोई भी नज़र नही आया..... हरिया कार के आस पास देखने लगा और तभी अचानक उसे एक आदमी कार से थोड़ी ही दुरी पर बेहोश नज़र आया... हरिया जल्दी से उसके पास गया और उसे पलटा...

“ये तो एक बच्चा है......” हरिया के मुंह से अकस्मात ही निकल पड़ा...

ये मैं था.... मेरी उमर 15 साल है.....

आप लोग सोच रहे होंगे कि मैं यहाँ इस सुनसान जंगल में कैसे पहुंचा.. मेरा एक्सीडेंट कैसे हुआ.... ये सब जानने के लिए आपको अगली अपडेट का इंतज़ार करना होगा

Reply
Yesterday, 12:34 PM,
#4
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?

हरिया ने मुझे तुरंत अपनी गोद में उठाया और अपनी बैलगाड़ी में लेटा दिया.... मैं अभी भी बेहोशी की हालत में पड़ा था... हरिया ने अपनी बैलगाड़ी की रफ्तार जितनी हो सकती थी बढ़ा दी, जल्द ही हम पास के एक गाँव में पहुंच गये, हरिया ने सडक किनारे आग ताप रहे कुछ लोगो से उस गाँव के वेदजी का पता पूछा और फटा फट गाड़ी को उस तरफ मोड़ दिया, जल्दी ही बैलगाड़ी उस गाँव के वेदजी के यहाँ पहुंच चुकी थी....

हरिया अंदर जाकर वेदजी को बाहर बुला लाया, वेदजी ने जब मेरी हालत देखी तो वो भी एक बार को भोच्क्के रह गये, हरिया और वेद्जी मिलकर मुझे उठाते हुए अंदर ले गये, वेदजी और उनकी पत्नी ने जल्द ही मेरा उपचार शुरू कर दिया..... मेरे सर पर गंभीर चोट लगी थी, और जिस्म पर यहाँ वहाँ चोट के निशान थे,

लगभग 2 दिन बाद जाकर मुझे होश आया..... आँखे खोलते ही मेरे जिस्म में दर्द की एक तेज़ लहर दोड गयी... और मुंह से दर्दभरी आह निकल गयी.... मेरी आह इतनी तेज़ थी कि उसे सुनकर बाहर से हरिया और वेदजी भी भागकर अंदर आ गये.... उन्होंने मुझे होश में देखा तो उनके चेहरे पर भी थोड़ी मुस्कान आ गयी.... पर मेरी हालत यहाँ बहुत ख़राब थी... पुरे शरीर में दर्द की लहरे उठ रही थी... मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी आँखे खोली.... तो सामने दो आदमी खड़े दिखाई दिए.... मैं उन्हें नही जानता था..... और जानता भी कैसे मैंने अपनी ज़िन्दगी में पहली बार उन्हें देखा था...........

अब मैंने थोड़ी हिम्मत करके बैठने की कोशिश की पर मेरे शरीर में शायद अभी इतनी ताकत नही थी कि मैं खुद से उठकर बैठ जाऊ.... तभी वेदजी आगे बढकर मुझे सहारा देने लगे....... हरिया ने भी उनकी मदद की... और किसी तरह मैं बैठ गया.... मैं उन दोनों की तरफ हैरानी से देखे जा रहा था....

वेदजी – बेटा, अब कैसी तबियत है तुम्हारी....

मैं – ठीक....है...पर आप लोग कौन है.... मैं यहाँ कैसे आया....ये कोंनसी जगह है.....

हरिया – बेटा, मैं तुम्हे यहाँ लेकर आया हूँ... तुम्हारी गाड़ी का हादसा हो गया था... और तुम मुझे वहां बेहोश मिले... तुम्हे बहुत ज्यादा चोट लगी थी... इसलिए मैं तुम्हे यहाँ उठाकर अपनी बैलगाड़ी में ले आया.... वैसे बेटा तुम्हारा नाम क्या है... तुम कहाँ के रहने वाले हो.. तुम्हारी गाड़ी का हादसा कैसे हुआ......

मैं – जी....जी...मेरा नाम.....?????????? मेरा नाम......मेरा नाम क्या है..... मुझे कुछ याद क्यूँ नही आ रहा..... मेरा नाम ???????????

और अचानक मेरे सर में दर्द की एक तेज़ लहर दौड़ गयी और मैं फिर से बेहोश हो गया.......

हरिया और वेदजी ने मिलकर मुझे दोबारा लेटाया और खुद वहाँ से बाहर आ गये

हरिया – क्या लगता है वेदजी... क्या हुआ है इस बच्चे को.....

वेदजी – देखो हरिया.. मैं पक्के तोर पर तो नही कह सकता पर मुझे लगता है कि शायद सर पर चोट लगने की वजह से इस लडके की यादाश्त चली गयी है.. देखा नही कैसे अपने नाम को याद करने की कोशिश कर रहा था.....वैसे इसके कपड़ो और चेहरे को देखने से लगता है ये किसी रईस खानदान का लड़का है....

हरिया – लग तो मुझे भी यही रहा है वेदजी.. पर अब क्या किया जाये... मुझे लगा था कि जैसे ही इसे होश आएगा.. मैं उससे उसका पता पूछकर घर छोड़ आऊंगा... पर इसे तो अपना नाम तक याद नही है.... क्या आप इसे यहाँ रखकर इसका इलाज कर सकते है... मैं ठीक होते ही इसे यहाँ से ले जाऊंगा...

वेदजी – बात तो तुम्हारी नेक है .... पर मुझे माफ़ करना हरिया... मैं इसे अपने यहाँ नही रख सकता... घर की हालत तो तुम पहले से ही देख रहे हो... बड़ी मुश्किल से मेरा और मेरी पत्नी का गुज़ारा चल पता है... ऐसे में इसे यहाँ रखकर इलाज करना तो नामुमकिन है हमारे लिए

हरिया – ठीक है फिर वेदजी... मैं इसे अपने साथ ही ले जाता हूँ.... पर आप 6 -7 दिन और इसका इलाज कर दीजिये.... ताकि सफ़र के लायक होने पर मैं इसे यहाँ से ले जाऊ....

वेदजी – ठीक है हरिया... अगर बात 6-7 दिनों की है, तो मैं इसे यहाँ रख सकता हूँ...

हरिया – बहुत बहुत शुक्रिया वेदजी

......................................................

2-3 दिनों बाद ही वेदजी की जड़ी बूटियों ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया, लगभग तीसरे दिन मुझे होश आया.... पर इस बार मेरी हालत में थोडा सुधार था.. और दर्द में भी कमी थी... पर अब भी मुझे कुछ याद नही आ रहा था कि मैं कौन हूँ.. कहाँ रहता हूँ.. मेरे माँ बाप कौन है.... मैं यहाँ कैसे पहुंचा....

मेरी हालत हरिया से भी छिपी नही थी... इसलिए हरिया मेरे पास आकर बैठा और बोला

हरिया – देखो बेटा, तुम चिंता मत करो... सब ठीक हो जायेगा.... भगवन ने चाहा तो जल्द ही तुम्हारी यादाश्त वापस आ जाएगी....

मैं – आपने जो मेरे लिया किया उसके लिए मैं आपका एहसान मंद रहूँगा.... पर मुझे बिलकुल भी समझ नही आ रहा कि मैं अब क्या करूं.. कहाँ जाऊ...

हरिया – तुम इस बात की बिलकुल फ़िक्र नही करो.. जब तक तुम्हे तुम्हारी यादाश्त वापस नही आ जाती तब तक तुम मेरे साथ मेरे घर रहोगे.....

मैं – पर मैं कैसे... पहले ही मेरी वजह से आपको इतनी तकलीफ उठानी पडी गयी है.. मैं नही चाहता कि अब आपको और तकलीफ उठानी पड़े.....

हरिया – इसमें तकलीफ कैसे... तुम तो मेरे बेटे जैसे हो.... और वैसे भी एक इन्सान की मदद करना तो दुसरे इन्सान का फ़र्ज़ बनता ही है....

मैंने काफी कोशिश कि मना करने की पर हरिया की जिद के आगे मेरी ना चली.. आखिर में मुझे हारकर उसकी बात माननी ही पड़ी.... मेरी रजामंदी सुनकर हरिया काफी खुश हुआ......

हरिया भी दरअसल मुझमे अपना बेटा ढूंढ रहा था.. क्यूंकि उसके कोई बेटा नही था सिर्फ एक बेटी थी.... पर हरिया के इस मिलनसार व्यव्हार से मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ......

मैं – पर मैं आपको क्या बुलाऊ...... और आपका नाम क्या है...

हरिया – मेरा नाम हरिया है... मैं यहाँ से 1 दिन की दुरी पे बसे हुए छोटे से गाँव करमपुर में रहता हूँ... चूँकि तुम मेरे बेटे की उमर के ही हो इसलिए तुम चाहो तो मुझे चाचाजी बुला सकते हो.......

मैं – ठीक है चाचाजी..... पर आप मुझे क्या बुलायेगे???

हरिया – अगर मेरा कोई बेटा होता तो मैं उसका नाम समीर रखता..... इसलिए मैं आज से तुम्हे समीर ही बुलाऊंगा... क्यूँ ठीक है ना समीर बेटा ...

मैं – जी जैसा आप ठीक समझे......

लगभग 7 दिनों में मेरे शरीर के ज्यादातर घाव भर चुके थे..... और अब मैं हरिया चाचा के साथ उनके घर जाने के लिए बिलकुल तैयार था..... हमने वेदजी को उनकी सहायता के लिए बहुत बहुत धन्यवाद दिया और फिर हरिया चाचा की बैलगाड़ी में बैठकर करमपुर की ओर निकल गये.....

और यहीं से मेरे जीवन की एक नयी शुरुआत हुई.......................
Reply
Yesterday, 12:34 PM,
#5
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?

पुरे रस्ते हरिया चाचा मुझे अपने परिवार के बारे में बताते रहे... मैं उन सबके बारे में सुनकर बड़ा ही नर्वस फील कर रहा था....

“कहीं उन लोगो ने मुझे वहाँ रहने से मना कर दिया तो..कहीं मैं उन्हें पसंद नही आया तो.... मैं ऐसे में कहाँ जाऊंगा...क्या करूँगा” ये सब सोच सोच कर मैं परेशान हुए जा रहा था... शायद हरिया चाचा ने भी मेरी परेशानी महसूस कर ली....

हरिया – चिंता मत करो समीर बेटा .... सुधिया और नीलू को तुम जरुर पसंद आओगे....

हरिया चाचा की बात सुनकर मैं थोडा सा अच्छा महसूस करने लगा....
पुरे रस्ते चाचा ने मुझे अपने परिवार और गाँव के बारे में काफी कुछ बता दिया......

और आखिर कार वो वक्त भी आ गया जब हम करमपुर की सरहद में दाखिल हो चुके थे...शाम का वक्त हो चला था... पल पल मेरे दिलो की धडकन और भी तेज़ होती जा रही थी...... गाँव बहुत ही छोटा सा था...सभी घर टूटे फूटे नज़र आ रहे थे.... मुझे थोडा सा अजीब महसूस हो रहा था... शायद नयी जगह की वजह से

और फिर वो वक्त आया जब हरिया चाचा के मुंह से निकला “समीर बेटा, उतरो.. अपना घर आ गया है”

मैं बैलगाड़ी से निचे उतरा.... सामने एक कच्चे ढांचे का टुटा फूटा सा मकान दिखाई दे रहा था... घर के पास ही एक छोटा सा बाड़ा था.. जिसमे हरिया चाचा अपनी बैल बांध रहे थे... वहा घास फूस और पथरों की मदद से एक छोटा सा कमरा भी बना था... शायद घर का फालतू सामान रखने के लिए...

मैं अभी घर को निहार ही रहा था कि हरिया चाचा बैल को बांधकर मेरे पास आ गये

हरिया – क्या हुआ समीर बेटा, घर पसंद नही आया क्या......

समीर – नही ऐसी कोई बात नही.... वो तो बस नयी जगह है न इसलिए

हरिया – चलो अंदर चलो... तुम्हारी चाची को तुम जरुर पसंद आओगे...

हरिया चाचा मुझे अंदर ले आये.......... जैसे ही हम अंदर पहुंचे मुझे घर के एक कोने में एक कच्चे टूटे फूटे चूल्हे पर रोटी बनाती एक लडकी दिखी, मुझे समझते देर ना लगी कि शायद ये नीलू है.. हरिया चाचा की बेटी...

नीलू ने जैसे ही अपने पिता को देखा.... वो उठकर खड़ी हो गयी.. और भागकर हरिया चाचा के गले लग गयी....

नीलू – इस बार आने में बहुत दिन लगा दिए बापूजी ...... माँ और मैं बहुत परेशान हो गये थे

हरिया – हाँ बेटा , काम ही कुछ ऐसा आ गया था....

मैंने आज पहली बार नीलू को देखा.... उसका बदन बिलकुल गोरा और दुधिया था, और दिखने में वो बहुत ही ज्यादा खूबसूरत थी, तीखे नैन नक्श, दमकता गोरा चिट्टा चेहरा और गुलाबी रसीले होंठ, छोटे छोटे अमरूद जैसी सुंदर सुंदर चुचियाँ, पतली गोरी कमर, उभरी हुई गांड, भरी मांसल जाँघे और उसके कच्चे यौवन की मादक खुशबू जो किसी भी मर्द का मन बहका सके , मैंने जब उसे इतने करीब से देखा तो देखता ही रह गया..... वो दिखने में किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी....

तभी मैंने महसूस किया कि नीलू भी मुझे घूरकर देख रही है........ मैंने तुरंत अपनी नज़रे निचे कर ली और थोडा सकपका गया

नीलू – बापूजी... ये लड़का कौन है.....

हरिया – बेटा.... इसके बारे में मैं तुझे बाद में बताऊंगा पर पहले ये बता कि तेरी माँ कहाँ है... मुझे तुम दोनों से कुछ जरूरी बात करनी है...

नीलू – माँ तो अभी अपनी पड़ोसन है ना रजनी मोसी, उनके पास गयी है... कुछ देर में आती ही होंगी

हरिया – अच्छा तो तू एक काम कर .... हमारे खाने का भी इन्तेजाम कर ...तब तक हम दोनों हाथ मुंह धोकर थोडा आराम करते है..

नीलू – जी ठीक है बापूजी...

ये कहकर नीलू ने दोबारा एक बार भरपूर नज़र से मुझे देखा और जाकर खाने की तैयारियो में लग गयी... हरिया चाचा ने मुझे उनका एक छोटा सा जो टुटा फुटा बाथरूम था, उसका रास्ता दिखा दिया.. मैंने भी जल्दी ही अपने हाथ मुंह धो लिया, हरिया चाचा मुझे एक कमरे में ले आये... कुल मिलाकर दो ही तो कमरे थे.... शायद एक में हरिया चाचा और उनकी बीवी रहती होंगी और दुसरे में उनकी बेटी.... मैं हरिया चाचा के साथ उनके रूम में आ गया... हरिया चाचा ने मुझे कुछ देर आराम करने को कहा ... मैंने भी सफ़र की थकान की वजह से थोडा आराम करना ही बेहतर समझा...

करीब 1 घंटे आराम के बाद अचानक मेरी आँख खुल गयी.... मुझे बाहर कुछ आवाज़े सुनाइ दे रही थी.. शायद हरिया चाचा की बीवी वापस आ चुकी थी.. और चाचा उन्हें मेरे बारे में बता रहे थे.. मुझे जो सुन रहा था मैं आप लोगो को भी बता देता हूँ

हरिया चाचा – देखो सुधिया.... वैसे भी भगवान ने हमें बेटा नही दिया.. कल को जब नीलू शादी करके दूजे घर चली जाएगी तब ये ही हमारे काम आएगा

सुधिया – पर इसका मतलब ये तो नही कि आप किसी भी ऐरे गैरे को यहाँ लाकर रख लेंगे... भले ही ये अपनी यादाश्त खो चूका है पर क्या पता ये पहले क्या था. हो सकता है कि कोई चोर रहा हो...

हरिया – कैसी बाते करती हो ... इसकी गाड़ी का हादसा हुआ था.. जब इसके पास गाड़ी है तो ये चोर कैसे हो सकता है

सुधिया – पर फिर भी ना जाने मेरा मन क्यूँ नही मान रहा...

हरिया – अच्छा एक काम करते है... कुछ दिन इसे यहाँ रहने देते है.. उसके बाद आगे देखा जायेगा.. पर जब तक ये यहाँ है इसके साथ थोडा अच्छे से पेश आना

सुधिय – ठीक है... कुछ दिनों की बात है तो मैं आप जैसा कहेंगे वैसे ही करूंगी... वैसे पहले मैं उसे देख तो लूँ

हरिया – हाँ ठीक है ... वैसे भी अब खाना खाने का वक्त हो गया तो तुम अंदर जाकर उसे खाना दे आओ और मिल भी आओ...

फिर मुझे बर्तनों की थोड़ी आवाज़ सुनाइ दी.. और जल्द ही सुधिया एक थाली में मेरे लिए खाना लेकर आ गयी, लालटेन की रौशनी में मुझे सुधिया साफ साफ दिखाई दे रही थी....

सुधिया - कैसे हो बेटा ……अब दर्द तो नही हो रहा…..

मैं - नही ….अब ठीक हूँ….

मैंने अपने मासूम से चेहरे से सुधिया की ओर देखते हुए कहा….और फिर अपनी नज़रे नीचे कर ली………सुधिया मुझे एक टक देखे जा रही थी…जिसकी वजह से मैं थोड़ा नर्वस फील कर रहा था…और अपनी हाथों की उंगलयों को आपस मे दबा रहा था..

सुधिया – अच्छा ये लो खाना खा लो... वैसे भी सुबह से भूखे होगे तुम

मैंने थाली लेने के लिए जैसे ही हाथ थोडा सा आगे बढाया मेरे हाथ में अचानक तेज़ दर्द हो उठा......... सुधिया ने जल्दी से थाली को साइड में रखा और मेरे पास आकर बैठ गयी.........

सुधिया – क्या हुआ बेटा, अभी भी दर्द हो रहा है क्या.......

मैं – जी थोडा थोडा... मैंने बड़ी ही मासूम सी शक्ल बनाते हुए कहा

सुधिया – लाओ मैं तुम्हे अपने हाथों से खाना खिला दूँ...

फिर सुधिया मुझे अपने हाथों से खाना खिलाने लगी.... इस बिच सुधिया लगातार मुझे ही देखे जा रही थी... शायद मेरे मासूम गोरे और सुंदर चेहरे को देखकर सुधिया के मन में ममता जाग उठी....

इधर हरिया और नीलू भी कमरे में आ गये और सुधिया को मुझे खाना खिलते हुए देखने लगे

सुधिया को इतने प्यार से खाना खिलाते देख मेरी आँखों में आंसू आ गये

सुधिया –क्या हुआ बेटा, तुम्हारी आँखों में आंसू क्यों???

मैं – जी, मुझे अपनी माँ की याद आ गयी... शायद मेरी भी कोई माँ होंगी.. या नही .. मुझे तो ये भी याद नही....
मेरी बात सुनकर सुधिया का दिल पसीज गया.... उसने झट से मुझे अपने गले लगा लिया...... और बोली

सुधिया – तुम चिंता मत करो बेटा, आज से मैं तुम्हारी माँ हूँ, और यही तुम्हारा परिवार है

ये सुनकर मेरे साथ साथ हरिया और नीलू भी बड़े खुश हुए

उस दिन मैं बड़ा खुश था..... मुझे एक नया परिवार मिल गया था.... अगले ही दिन सुधिया ने पुरे गाँव में ये खबर फैला दी कि उन्होंने मुझे गोद ले लिया है....

धीरे धीरे समय गुजरता गया... मेरे जख्म पूरी तरीके से भर चुके थे.... मैं भी अपनी पिछली जिन्दगी को पूरी तरह से भूल चूका था या यूँ कहे कि भूली हुई जिन्दगी के बारे में अब सोचना ही बंद कर दिया था.. धीरे धीरे मैं गाँव के लोगो से भी घुलने मिलने लगा... मेरे कुछ दोस्त भी बन चुके थे... अब मैं सुधिया को माँ और हरिया को बापूजी कहकर बुलाता था.... वो दोनों भी मुझे बहुत प्यार करते थे.......

Reply
Yesterday, 12:34 PM,
#6
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?

मुझे उस गाँव में रहते हुए करीब 1 साल का वक्त बीत चूका था, मैं अपनी पुरानी जिंदगी लगभग भूल ही चूका था, और अपनी इस नयी जिंदगी को ही पूरी तरह अपना चूका था, मैं यहाँ बहुत ही ज्यादा खुश था, बापूजी और माँ मुझे बहुत प्यार करते थे, नीलू दीदी भी मुझे पसंद करती थी, पर कभी कभी मुझे लगता कि शायद वो मुझे थोड़ी अजीब नजरो से देखती है, मैं अपनी इस नई ज़िन्दगी में पूरी तरह रम गया था,

मुझे रामू ताउजी के परिवार के बारे में भी सब पता चल गया था, सरला ताई, राजू भैया और चंदा दीदी भी मुझसे बहुत प्यार से बाते करते थे, पर रामू ताउजी मुझसे थोड़े खफा खफा से रहते थे, मैंने महसूस किया कि वो बापूजी से भी सीधे मुंह बात नही करते, ऐसा क्यूँ था, ये तो मैं नही जानता, पर हाँ ताउजी के अलावा सभी लोग मुझसे प्यार करते थे, और इसीलिए मैं अक्सर उनके घर जाया करता था, राजू भैया से मेरी बहुत जमती थी,

कभी कभी मैं माँ और नीलू दीदी के साथ खेत में भी जाया करता, मुझे खेती बाड़ी के बारे में कुछ भी नही पता था, माँ और दीदी ने मुझे कुछ ही महीने में पूरा किसान बना दिया, मुझे खेती का पूरा ज्ञान हो चूका था, पर फिर भी ना जाने क्यूँ मेरा मन खेती बाड़ी में कम ही लगता था, और ये बात माँ बापूजी भी जानते थे, इसलिए वो मुझे खेत जाने के लिए कभी भी मजबूर नही करते थे, जब मेरी इच्छा होती तभी मैं खेत जाता, वरना अपने दोस्तों के साथ गुली डंडा खेलने निकल जाता,

वैसे तो मेरे 1 साल में काफी दोस्त बन चुके थे, पर उनमे से मेरा सबसे खास दोस्त चमकू था, वैसे तो उसका नाम मोहन था, पर सारे गाँव में वो चमकू के नाम से ही मशहुर था, उमर में मुझे कोई एक आध साल बड़ा होगा, वैसे तो गाँव के बाकि लडको की तरह वो भी गाली गलोच वाली भाषा का ही इस्तेमाल करता था, पर फिर भी दिल का बड़ा अच्छा था, अक्सर हम शाम को गुली डंडा खेलने जाते थे.......

ऐसे ही एक दिन मैं चमकू और बाकि दोस्तों के साथ गुली डंडा खेल रहा था, की तभी गुली उछलकर मेरी तरफ आई, मुझे गुल्ली का कैच पकड़ना था, पर मेरे हाथो से गुल्ली छुट गयी, चमकू जो मेरी टीम में था, उसने जोर से चिल्लाकर मुझे गाली दी

चमकू – ओ तेरी बहन दी साले, गुल्ली नही पकड़ी जाती तो खेलता क्यूँ है, तेरी वजह से मैं दो आने हार गया

मैं - यार क्या करूँ…..छुट गया अपने आप….

चमकू – क्यों साले, गुल्ली पकड़ते टेम हाथ कांप रहे थे क्या, जरुर साला कल मुठ मारा होगा, तभी हाथ कांप रहे है तेरे, या कोई फुद्दी में हाथ घुसा रखा था साले

मैं ये शब्द पहली बार सुन रहा था इसलिए मुझे बड़ा ही अजीब सा लगा, मैंने उस टाइम तो कुछ नही कहा पर जब मैं और चमकू वापस घर की तरफ आ रहे थे तब मैंने उससे पूछा

मैं – चमकू, यार ये फुद्दी और मुठ क्या होता है

चमकू - (हंसते हुए) अरे क्या नवाब साहिब, आप को फुद्दी और मुठ मारने का भी नही पता

मैं – नही यार मुझे सच में नही पता

चमकू – अब फुद्दी तो मैं तुझे नही दिखा सकता, पर हाँ मुठ मारना जरुर सिखा सकता हूँ, बोल सीखेगा

मैं – हाँ क्यों नही सिखा ना

चमकू ने एक बार मेरी तरह मुस्कुरा कर देखा और एक कोने में ले जाकर चारो तरफ देखते हुए अपनी निक्कर की ज़िप खोल दी, और उसमे से अपना 3 इंच का सुस्ताया सा लंड बाहर निकाल लिया,

और अपने हाथ से अपने लंड को पकड़ कर मुझे दिखाते हुए बोला – देख समीर, इसे लंड कहते है,

चमकू – पर ये तो नुन्नी है ना,

चमकू – अरे नुन्नी तो बच्चो की होती है बहनचोद, मर्दों का लंड होता है,

मैं हैरत भरी नजरो से कभी उसे और कभी उसके लंड को देखता

चमकू – अब देख ध्यान से, अब मैं तुझे मुठ मारना सिखाता हूँ

चमकू ने अपने हाथ में थोडा सा थूक लगाया और अपने लंड पर मलने लगा, धीरे धीरे उसका लंड खड़ा होने लगा और देखते ही देखते वो ३ इंच से बढकर 5 इंच के करीब हो गया, चमकू अपने हाथ को अपने लंड पर कसकर लंड की चमड़ी को आगे पीछे कर रहा था, मैं बड़े ही ध्यान से उसे देख रहा था, कुछ ही पल में चमकू के लंड से सफेद से पानी धार निकलने लगी, ये देखकर मुझे बड़ा ही अजीब सा लगा, क्यूंकि मुझे तो लगा था कि नुन्नी से सिर्फ और सिर्फ मूत ही निकलता है, पर आज पहली बार नुन्नी से कुछ सफेद सफेद सा निकलते देखा,

चमकू के चेहरे पर अजीब सी ख़ुशी के भाव छलक रहे थे,

मैं – चमकू, ये तेरी नुन्नी... मेरा मतलब तेरे लंड से अभी अभी क्या निकला, वो सफेद सफेद

चमकू – इसे वीर्य कहते है, और जब ये वीर्य किसी लडकी की फुद्दी में जाता है ना तो उससे बच्चा पैदा होता है, समझा

मैं चमकू की बाते ऐसे सुन रहा था मानो वो कोई अमृत ज्ञान बाँट रहा हो,

उस दिन और कुछ खास नही हुआ और मैं अपने घर आ गया, थोड़ी देर बाद माँ दीदी भी घर आ गये, बापूजी किसी सवारी को लेकर भोपाल गये हुए थे, इसलिए उन्हें आने में कम से कम 4-5 दिन और लगने थे,

सुधिया – आज क्या किया पूरे दिन मेरे लल्ला ने

मैं - कुछ खास नही किया माँ, बस दोस्तों के साथ ही घूम रहा था

सुधिया – आजकल तू अपने दोस्तों के साथ बहुत घुमने लगा है, खेत में आ जाया कर कभी कभी

मैं – ठीक है माँ, मैं कल चलूँगा आप दोनों के साथ

सुधिया – चल ठीक है, अब मैं खाना बना लेती हूँ, फिर आराम से सो जाना, कल खेत में भी चलना है तुझे

मैं – ठीक है माँ

कुछ ही देर में माँ और नीलू दीदी ने मिलकर खाना बना लिया, जल्दी ही हम तीनो ने मिलकर खाना खाया और फिर सोने के लिए चले गये

मैं और नीलू दीदी एक ही कमरे में सोते थे, चूँकि घर में एक ही चारपाई थी जो माँ बापू के कमरे में थी, इसलिए मैं और नीलू दीदी जमीन पर ही गद्दा बिछाकर सोया करते थे,

उस रात भी मैं खाना खाकर कमरे में आ गया और निक्कर बनियान पहनकर सो गया, चूँकि गर्मियों के दिन थे इसलिए अक्सर मैं निक्कर बनियान में ही सो जाया करता था,

कुछ देर बाद नीलू दीदी भी आकर मेरे बाजु में लेट गयी,

रात के तकरीबन 12 बज रहे थे, मेरी आँखों से नींद कोषों दूर थी, क्यूंकि आज दिन में चमकू ने जो कुछ मुझे बताया उसके बाद से वो बाते मेरे दिमाग में ही घूम रही थी,
मैंने साइड में देखा तो नीलू दीदी मेरी तरफ पीठ करके लेटी हुई थी, इधर मुझसे अब बर्दास्त करना मुश्किल हुआ जा रहा था,

मैंने धीरे से उठकर नीलू दीदी की आँखों को देखा, ये निश्चित करने के लिए की वो सो रही है, नीलू दीदी की आँखे बंद दी, मैंने हलके से आवाज़ लगाई, पर नीलू दीदी का कोई जवाब नही आया, अब मैं बिलकुल निश्चित हो चूका था कि नीलू दीदी सो रही है

मैंने धीरे से अपनी निक्कर के बटन खोले और बड़ी ही सावधानी से अपनी निक्कर को निचे करने लगा, जल्द ही मेरी निक्कर मेरे घुटनों तक उतर चुकी थी, गर्मी की वजह से मैं अंदर कच्छा नही पहनता था, इसलिए निक्कर उतरते ही मेरा लंड पूरी तरह से नंगा हो चूका था,

मैंने अपने लंड की तरफ देखा, वो अभी मुरझाया हुआ सा था, या यूँ कहूँ कि इस एक साल में मैंने अपने लंड को हमेशा मुरझाया हुआ ही देखा है, मैंने अपने हाथ की अंगुलियों पर थोडा सा थूक लगाया और फिर कांपते हुए अपने हाथ को अपने लंड पर लगा दिया, थूक को लंड के सुपाडे पर अच्छी तरह मलने के बाद अचानक मुझे मेरे लंड में तनाव सा महसूस होने लगा, मैंने अपने लंड के चारो और मुट्ठी को कस लिया और फिर धीरे धीरे अपने लंड की चमड़ी को उपर निचे करने लगा

मुझे पता नही था पर ना जाने मुझे क्यूँ बहुत अच्छा महसूस हो रहा था, देखते ही देखते मेरे लंड का आकार बढ़ने लगा, और कुछ ही मिनटों में मेरा लंड पूरी तरह तनकर खड़ा था, मुझे ये तो पता नही था कि ये कितने इंच का था, पर देखने में चमकू के लंड से दोगुना लम्बा और लगभग ढाई गुना लग रहा था, एक बार तो मैं भी दर गया कि मेरा लंड इतना बड़ा कैसे है, कहीं मुझे कहीं कोई बीमारी तो नही,

पर फिर मैंने अपना ध्यान उस और से हटाया और दोबारा अपने लंड पर मुठ मारने लगा, मुझे सच में इतना अच्छा फील कभी नही हुआ था, मैं अब तेज़ी से अपने लंड की मुठ मारने लगा, अचानक मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे लंड में से कुछ निकलने वाला है, मेरे हाथ की गति और भी तेज़ हो गयी, और तभी मेरे लंड से वीर्य की मोटी मोटी पिचकारियाँ निकलने लगी, एक आध पिचकारी तो हवा में बहुत दूर तक गयी, बाकि पिचकारियाँ वहीं बिस्तर पर गिरने लगी, मुझे इतना ज्यादा मजा अपनी पूरी जिंदगी में नही आया था, मेरे लंड से करीब आधे मिनट तक वीर्य निकलता रहा, मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था, मैंने अपने जीवन की पहली मुठ मारी थी, मेरी आँखों के सामने थोडा अँधेरा सा छा गया

जब पूरी तरह से मेरा वीर्य निकल चूका था, तो मेरे चेहरे पर पूर्ण संतुष्टि के भाव आ चुके थे, मैंने धीरे से अपने निक्कर को उपर किया, पर अभी काम बाकी था, क्यूंकि मेरे लंड से निकला पानी बिस्तर और जमीन पर गिरा था, मैंने धीरे से उठकर कोई कपडा ढूँढने लगा, तभी मेरे हाथ में कोई छोटा सा पतला लाल कपड़ा आ गया, मैंने वो कपड़ा उठाया और बड़ी ही सावधानी से सारा वीर्य साफ करने लगा,

जब सारा वीर्य साफ हो गया तो मैंने वो कपडा वापस वहीं रख दिया और आराम से सो गया
Reply
Yesterday, 12:35 PM,
#7
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?

अगली सुबह 6 बजे जब मेरी आँख खुली तो देखा...नीलू दीदी मुझे उठा रही थी.....

“उठ जा समीर, देख सुबह हो गयी है, आज तुझे हमारे साथ खेत में भी जाना है”

मैं भी आंख मलता हुआ खड़ा हो गया, रात की खुमारी अब तक शायद उतरी नही थी, इसलिए अभी भी हल्की हल्की नींद आ रही थी मुझे,

“चल जल्दी से जंगल पानी हो आ, और फिर आकर नहा ले” नीलू दीदी बोली

“जी दीदी जा रहा हूँ” ये कहकर मैं भी आखिर कर उठ खड़ा हुआ

थोड़ी देर में ही मैं जंगल पानी करके वापस आ गया, जब मैं वापस आया तो मैंने देखा कि नीलू दीदी बड़ी ही अजीब नजरो से मुझे घुर रही थी जैसे मैंने कोई गलत काम कर दिया हो, पर मैंने इस ओर ज्यादा ध्यान नही दिया और बाथरूम में जाकर नहाने लगा, बाथरूम में जाकर दोबारा मैंने एक बार मुठ मारी और फिर नहाने के बाद मैं दीदी और माँ के साथ खेत में चला गया

जब हम खेत में पहुंचे तो आज वहां बाजु वाले खेत में सिर्फ राजू भैया और चंदा दीदी ही थी, मैं जब भी खेत आता था तो मुझे सरला ताई वहां जरुर नज़र आती थी, पर आज वो वहां नही थी, माँ ने भी ये बात नोट की, इसीलिए हम लोग राजू भैया और चंदा दीदी के पास गये

माँ – अरे राजू बेटा, तुम्हारी माँ कहाँ है आज, खेत में नही आई क्या

राजू – नही चाची, वो आज हमारे मामाजी आये हुए है, इसलिए वो आज घर पर ही है, दोपहर को उनका खाना भी बनाना पड़ेगा ना इसलिए

माँ – अरे, सुमेर आया है, और तेरी माँ ने हमे बताया भी नही

राजू – वो मामाजी आज सुबह ही आये है चाची

माँ – चलो कोई बात नही, आज शाम को जाकर मिल लेंगे उनसे,

राजू – जैसा आप ठीक समझे चाची

फिर हम लोग वापस अपने खेत में आ गये, हमारे खेत में इस बार फसल काफी अच्छी हुई थी, गन्ने का खेत था हमारा, वैसे भी गाँव में ज्यादातर लोग गन्ने की ही खेती करते थे, जब हम लोग वापस आ गये तो माँ अचानक बोली

माँ – हाय राम, मैं तो कुदाली (मिटटी खोदने का ओजार) आज घर पर ही भूल गयी, और आज तो बाड बनाने का काम भी करना है, ऐसे में तो दो कुदाली चाहिए ही चाहिए

नीलू दीदी – राजू से मांग लो ना माँ

माँ – ये तुमने ठीक कहा, समीर बेटा, जा जाकर राजू से दो कुदाली ले आ

मै माँ की बात सुनकर दुबारा राजू भैया के खेत की तरफ चल पड़ा, राजू भैया वहां अपनी कुदाली से कुछ मिटटी खोद रहे थे, मैं उनके पास गया और बोला

मैं – राजू भैया, आपके पास दो कुदाली है क्या, वो आज माँ कुदाली घर ही भूल आई,

राजू – मेरे पास तो एक ही कुदाली है यहाँ, दूसरी तो घर पर पड़ी है, और इस कुदाली से भी मुझे अभी बहुत सा काम करना है......

राजू भैया की बात सुनकर मैं वापस अपने खेत की तरफ मुड गया और जाकर माँ को सारी बात बता दी

माँ – चलो फिर समीर बेटा, एक काम करो, तुम अपने घर से एक कुदाली ले आओ और दूसरी कुदाली अपनी ताई के यहाँ से ले आना, बोल देना मैंने मंगाइ है........

मैं माँ की बात सुनकर वापस घर की ओर चल पड़ा, करीब आधे घंटे पैदल चलने के बाद मैं घर पहुंच गया, मैंने अपनी कुदाली उठाई और दूसरी कुदाली लेने के लिए ताईजी के घर की तरफ चल पड़ा,

ताईजी के घर पहुंचकर जैसे ही मैंने दरवाज़ा खटखटाने के लिए हाथ बढाया तभी मेरे कानो में एक आह की अजीब सी आवाज़ पड़ी, और मेरा हाथ वहीं रुक गया,

“ये कैसी आवाज़ है” मैंने मन ही मन सोचा

मैं अभी सोच ही रहा था कि दोबारा एक और आह की जोरदार आवाज़ मेरे कानो में पड़ी, मुझे बड़ा अजीब लगा, मैंने सोचा कि कही कोई चोर तो नही घुस आया घर में, ये सोचते ही मेरे हाथ पांव काँप गये, मैंने सोचा कि मुझे पहले देखना होगा कि ये कोई चोर ही है या कोई और,

इसलिए मैं छुपकर घर के अंदर जाने की जगह ढूँढने लगा, ताईजी के घर के बिलकुल पास एक बड़ा सा नीम का पेड़ था, मैं तुरंत उस नीम के पेड़ पर चढ़ गया और वहां से ताईजी के घर की छत पर आ गया,

तभी मुझे ख़याल आया कि, सीढ़ियों पर एक रोशनदान है…जो सरला ताई के कमरे का है….मैं बिना कुछ सोचे समझे सीढ़ियों की तरफ गया….और जब दो तीन सीढ़ियों को उतर कर उस घुमाव पर पहुचा…यहाँ से सीढ़ियाँ मुड़ती थी…वहाँ रोशनदान था.. और फिर जैसे ही मैने अंदर झाँका तो, मुझे दुनिया का सबसे अजीब नज़ारा दिखाई दिया….क्योंकि मैं रोशनदान से देख रहा था…इसलिए मुझे नीचे बेड पर किसी आदमी की नंगी पीठ दिखाई दे रही थी…और उस आदमी के कंधे के थोड़ा सा ऊपेर सरला ताई का चेहरा दिखाई दे रहा था….

सरला ताई ने अपनी टाँगो को उठा कर उस सख्स की कमर पर लपेट रखा था…और वो सख्श पूरी रफ़्तार से अपनी कमर को हिलाए जा रहा था… उस समय जो मेरे सामने हो रहा था मैं ये नही जानता था कि, उसे चोदना कहते है..वो सख्स और सरला ताई दोनो पसीने से तरबतर थे….सरला ताई ने अपनी बाजुओं को उस सख्स की पीठ पर कस रखा था…

”ओह्ह्ह्ह सुमेर आज पूरी कसर निकाल दे….बड़े दिनो बाद मौका मिला है…..” सुमेर नाम सुनते ही मुझे जैसे करंट सा लगा,

“ताईजी अपने भाई के साथ ये क्या कर रही है” मेरे दिमाग में विचार कोंधा

“आह बहना ज़ोर तो पूरा लगा रहा हूँ…लेकिन जैसे -2 तेरी उमर बढ़ रही है…साली तेरी फुददी और टाइट और गरम होती जा रही है….जीजा तुझे अच्छे से नही चोदते क्या....ओह्ह देख मेरा लंड कैसे फस- 2 के अंदर जा रहा है….” सुमेर ने और रफतार से झटके लगाने शुरू कर दिए….

मैं उस वक़्त तक एक दम भोला पंछी था….पर ये बात मुझे भी समझ आ चुकी थी कि, वो दोनो जो भी कर रहे है,….दोनो को मज़ा बहुत आ रहा है….

“कहाँ सुमेर, तेरे जीजा तो अब मेरी तरफ देखते भी नही, एक तू ही तो है जो अपनी इस प्यासी बहना की चूत की प्यास बुझा जाता है” ताई ने कहा

इधर सुमेर झटके मारे जा रहा था, चूँकि सुमेर की पीठ मेरी तरह थी और वो खुद ताई के उपर था इसलिए मुझे कुछ भी साफ़ दिखाई नही दे रहा था, पर मेरे लंड में जरुर तनाव आना शुरू हो चूका था,

उधर सुमेर के धक्को की रफ़्तार बढ़ गयी और देखते ही देखते वो ताई पर पूरी तरह से ढह गया, दोनों जने अब लम्बी लम्बी साँसे ले रहे थे, मैं अब बस हटने ही वाला था कि तभी अचानक वो हुआ जिससे मेरे होश फाख्ता हो गये,

सुमेर, ताई के उपर से हट गया और अब ताई मेरी आँखों के सामने पूरी तरह से नंगी होकर लेती थी, मेरे तो दिमाग ने ही काम करना बंद कर दिया था, सरला ताई की चूत से सफेद सफेद कुछ निकल रहा था, मुझे समझते देर ना लगी कि ये जरुर सुमेर के लंड से निकला वीर्य है, तभी सरला ताई थोड़ी पलटी और अपनी चूत को साफ करने लगी

मैंने अपनी जिन्दगी में पहली बार किसी ओरत को नंगा देखा था, और वो भी अपनी सरला ताई को, सरला ताई की रंगत ऐसी थी जैसे किसी ने दूध मे केसर मिला दिया हो…..बिल्कुल गोरा रंग, लाल सुर्ख गाल, मम्मे तो ऐसे कि मानो रब्बर की बॉल्स हो…बिलकुल कसे हुए लग रहे थे….पर सरला ताई की जो चीज़ सबसे ज़्यादा कातिलाना लग रही थी….वो थी उनकी बाहर को निकली हुई गोल मटोल गांड …उनकी गांड और चूत देखकर मेरा लंड तो पेंट फाडकर बाहर आने को तैयार था,

पर ज्यादा देर वहां रहना खतरे से खाली नही था, इसलिए अब मैने वहाँ खड़े रहना मुनासिब नही समझा….और उपर जाने की सोचा, पर जैसे ही मैं उपर जाने को हुआ मुझे ऐसा लगा मानो सुमेर ने मुझे देख लिया हो, मेरी तो गांड फटकर हाथ में आ चुकी थी कसम से, मैं बड़ी तेज़ी से वहाँ से भगा और वापस नीम के सहारे घर से बाहर आ गया .

चाहता तो मैं ये था कि वहां से भाग जाऊ पर बिना कुदाली लिए जाना भी सम्भव नही था, मैं बड़ी ही अजीब उलझन में फँस चूका था..............
Reply
Yesterday, 12:35 PM,
#8
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?


मेरे सामने बड़ी ही मुश्किल समस्या आ गयी थी, मैं अब वहां रुकना नही चाहता था, क्यूंकि मुझे डर था कि कहीं सुमेर ने मुझे देख तो नही लिया, तो दूसरी तरफ माँ का हुक्म था और बिना कुदाली लिए मैं जा भी नही सकता था, हारकर मैंने फैसला लिया कि अब जो भी हो देखा जायेगा, पर कुदाली तो लेनी ही पड़ेगी

यहीं सोचकर मैने बड़ी ही हिम्मत करके दरवाजे को खटखटाया, थोड़ी ही देर में सरला चाची ने आकर दरवाज़ा खोला, उनको देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कहीं मेहनत करके आ रही है, इसलिए पसीने से तरबतर हो रखी थी, बाल भी बिखरे हुए लग रहे थे, और उनके चेहरे की हवाइयां उडी हुई थी, शायद उन्हें डर था कि कहीं ताउजी तो वापस नही आ गये है, पर जब उन्होंने मुझे वहां देखा तो उनकी जान में जान आई

सरला – अरे समीर बेटा, तू यहाँ, मेरा मतलब है बड़े दिनों बाद आया इधर......

मैं – वो माँ ने आपके घर से कुदाली लाने के लिए भेजा है, इसीलिए आया था...

सरला – अच्छा ठीक है... तो रुक मैं अभी तेरे लिए कुदाली लाती हूँ...

ये कहकर सरला ताई अंदर चली गई, पर मैं अंदर नही गया, बस वहीं खड़ा खड़ा इंतज़ार कर रहा था, क्यूंकि जितना डर ताई को था उतना ही मुझे भी लग रहा था... और मैं नही चाहता था कि अंदर जाकर सुमेर से सामना करना पड़े, इसलिए वहीं खड़ा खड़ा इंतज़ार करता रहा

जल्द ही ताईजी अपने हाथो में कुदाली लिए बाहर आ गयी

सरला – ले समीर बेटा, और कुछ भी चाहिए क्या

मैं – जी नही ताईजी, बस कुदाली ही चाहिए थी... अब मैं चलता हूँ.....

सरला – अरे बेटा कम से कम पानी तो पीकर जा, इतने दिनों बाद आया है तू इधर

मैं – नही ताई, फिर कभी आकर पी लूँगा, आज प्यास नही और जल्दी भी जाना है

सच तो ये था कि अंदर का नज़ारा देखकर मेरा गला सुख चूका था, पर अब दोबारा अंदर जाने की हिम्मत नही थी मुझमे, इसलिए मैंने तुरंत कुदाली ली और अपने खेत की तरफ चल पड़ा,

......................................................................

पुरे दिन खेत में काम करने के बाद मैं, माँ और नीलू दीदी के साथ वापस घर आ गया, मेरा मन आज किसी भी काम में नही लग रहा था, मैं जानना चाहता था कि सुमेर और ताईजी आपस में वो क्या कर रहे थे, पर मुझे समझाने वाला कोई नही था, हार मानकर मैंने सोचा कि किसी तरह चमकू से ही पूछ लूँगा, पर उसे इस बात की भनक नही पडनी चाहिए कि मैंने ताईजी और सुमेर को ऐसा करते देखा

इसी उधेड़बुन में लगा मैं खाना खाने लगा, और खाना खाने के बाद आकर कमरे में लेट गया, थोड़ी देर बाद नीलू भी आकर लेट गयी........ कल की तरह आज भी नींद मेरी आँखों से कोषों दूर थी, और आज के वाकये ने मेरे लिए आज में घी का काम कर दिया, मैं किसी तरह नीलू के सोने का इंतज़ार करने लगा,

और तकरीबन 11 बजे के आस पास जब मुझे ये महसूस हुआ कि नीलू दीदी सो गयी है तो मैंने कल की ही तरह मुठ मारने का सोचा, मैंने हलके से अपने निक्कर को अपने घुटनों तक उतार दिया और अपनी हथेली में थूक लगाकर लंड पर मलने लगा

आज तो मेरा लंड और भी ज्यादा विकराल नज़र आ रहा था, क्यूंकि आज मेरे दिमाग में सरला ताई का नंगा बदन घूम रहा था, मैं ताई के नंगे बदन को सोचकर अपने लंड को मसले जा रहा था, और मुझे कल से भी ज्यादा मजा आ रहा था,

तभी अचानक नीलू दीदी ने हल्की सी करवट ली और मेरी तरफ पीठ करके सो गयी.... मुझे थोडा सा डर लगा.... मैंने डरते डरते नीलू दीदी की और देखा पर उनकी आँखे बंद थी... मुझे यकीन हो गया कि ये सो रही है... मैं फिर से अपने काम में लग गया

पर तभी अचानक वो हुआ जो मैंने कभी सपने में भी नही सोचा था.... मेरी नज़र अचानक नीलू दीदी की उठी हुई मांसल गांड पर जा पड़ी, और मेरे लंड ने ये सोचकर ही एक जोरदार ठुमकी ली,

नीलू दीदी मेरी तरफ पीठ किये लेटी थी, उसके बॉडी कर्व को देखकर मैं पागल सा हो गया…उसकी वो पतली कमर ने मुझ पर नज़ाने क्या जादू सा कर दिया था..जो मैं अपने होश को खो बैठा…

पीछे से उसकी गोरी नागिन सी बल खाती हुई कमर को देख मेरा लंड एक दम से तन गया, शायद आज काम करके दीदी बहुत थक गयी थी इसलिए जमकर नींद ले रही थी, मैं ये सोच कर उनके थोडा सा और करीब आ गया, और पीछे से नीलू दीदी के भरे हुए मस्त जिस्म को देखने लगा

क्या मस्त और सेक्सी बदन था नीलू दीदी का… 30 साइज़ के कसे हुई मम्मे…नीचे गठीला और भरा हुआ पेट और नागिन सी बलखाती कमर, उफ़फ्फ़ गांड तो पूछो ही मत, क्या गोल मटोल गांड थी…मैं अपने आपे से बाहर हो गया…नीलू को देख कर मेरा लंड एक दम से सख़्त हो कर, मेरी निक्कर में झटके खाने लगा

अब मेरे दिमाग़ में वासना का तूफान उठ चुका था…मैं नीलू दीदी के थोडा सा और करीब हो गया, मेरे और नीलू दीदी के बीच अब सिर्फ़ 7-8 इंच का फाँसला था…

नीलू दीदी के इतना करीब लेटे होने के कारण…मेरा लंड मेरे निक्कर में हलचल मचाए हुए था…अब मुझसे रहा नही जा रहा था…मैं दीदी के करीब खिसक गया..मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा…मैं डर रहा था..कि कहीं दीदी जाग ना जाए… पर वासना के नशे में आकर मैं आगे खिसक गया…और नीलू दीदी से एक दम चिपक गया…मेरा तना हुआ लंड अब नीलू दीदी की शलवार के ऊपेर से उसकी गांड पर रगड़ खा रहा था…मैं काफ़ी देर ऐसे ही लेटा रहा…जैसे मैं नींद में हूँ….

जब थोड़ी देर तक दीदी नही हिली…तो मैं हिम्मत करके और करीब खिसक गया…और मेरा लंड नीलू दीदी की गांड पर और दब गया…नीलू दीदी ने पतली सी शलवार कमीज़ पहनी हुई थी….और नीचे पैंटी भी पहनी हुई थी…जिसके कारण मेरा लंड उनकी गांड की दर्रार में नही जा पा रहा था..पर वैसे ही लेटा-2 अपने लंड को पकड़ कर नीलू दीदी की गदराई हुए गांड पर सलवार के उपर से ही रगड़ने लगा…

मैं साथ में दीदी के ऊपेर नज़र जमाए हुआ था…पर वो बिल्कुल शांत लेटी हुई थे..अब मेरा लंड बिल्कुल अकड़ चुका था…और मैं फारिग होने के बिकुल करीब था… मैंने अपना एक हाथ नीलू दीदी की चिकनी और मखमल जैसे गोरी कमर पर रख दिया…

इस बार नीलू दीदी थोड़ा सा हिली..और फिर से शांत पड़ गई…पर उसके हिलने से मेरा लंड उसकी शलवार और पैंटी को दबाता हुआ उसकी गांड की दर्रार में थोड़ा सा अंदर के तरफ दब गया था..

मैं अपने होशो हवाश खो चूका था, मैंने वासना में भरकर धीरे से अपने लंड को उसकी गांड की दरार में और अंदर घुसाने की कोशिश की, पर इस बार शायद नीलू दीदी के शरीर में थोड़ी हलचल हुई, मैं बिलकुल डर गया और तुरंत अपना लंड वापस पीछे खिंच लिया,

थोड़ी देर बाद ही दीदी दोबारा आराम से सो गयी, मैंने सोचा कि अब और जयादा आगे बढना खतरे से खाली नही है, इसलिए मैं वापस पीछे खिसक गया, अब कुछ भी करना खतरे से खाली नही था, इसलिए मैंने चुपचाप अपना निक्कर उपर किया और सो गया

Reply
Yesterday, 12:35 PM,
#9
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
[b]
अगली सुबह मेरी नींद जल्दी ही खुल गयी, पर मैंने देखा कि नीलू दीदी पहले से ही उठकर बाहर जा चुकी थी, नीलू दीदी के बारे में सोचते ही मुझे रात की बात याद आ गयी,

“हाय... कितनी सुंदर है ना दीदी” मेरे दिमाग में आवाज़ आई..... मैं मन ही मन मुस्कुराने लगा, थोड़ी देर बाद उठकर मैं जंगल पानी के लिए निकल गया, चूँकि उस जमाने में लेट्रिन वैगरह तो होते नही थे, इसलिए हगने के लिए जंगल में ही जाना पड़ता था, मैं और चमकू अक्सर साथ ही जाया करते थे, उस दिन भी हम लोग साथ साथ ही जा रहे थे, कि चमकू बोला

चमकू – क्यों बे, कल खेलने क्यों नही आया?

मैं – वो यार, माँ ने मुझे उनके साथ खेत में काम करने के लिए ही बोला है, इसलिए अब मैं खेलने नही आ पाउँगा

चमकू – तो तू मना कर देता चूतिये,

मैं – कैसे मना कर देता यार, अम्मा डांटती तो

चमकू – क्या फुद्दू है तू बहनचोद, अपनी अम्मा की डांट से डरता है,

मैं – क्यों, तू नही डरता क्या तेरी अम्मा से,

चमकू – अबे साले, मैं डरने वालो में से नही, और वैसे भी मेरी अम्मा मेरी कोई बात नही टालती?

मैं – ऐसा क्यूँ???

चमकू – ये तो मैं नही बता सकता, पर इतना जान ले कि मेरी अम्मा मेरी हर बात मानती है, जैसे की वो मेरी अम्मा नही मेरी बीवी हो??

मैं – क्यूँ फेंक रहा है साले, तेरी अम्मा, यानि झुमरी काकी, तेरी हर बात मानती है, ये तो हो ही नही सकता, पूरा गाँव जानता है कि झुमरी काकी कितनी सख्त औरत है, और साले कितनी बार ही मेरे सामने तेरी अम्मा ने तुझे जमकर पीटा है, भूल गया उस दिन जब हमे खेलते खेलते अँधेरा हो गया था, और जब मैं तेरे साथ तेरे घर की तरफ गया तो तेरी अम्मा ने कैसे तुझे उल्टा करके पीटा था, चार दिन तक हगने में भी दर्द होता था तुझे, याद है कि भूल गया

चमकू – सब याद है मुझे, पर वो सब पुरानी बाते है, अब तो मेरे लिए मेरी अम्मा एक नौकरानी की तरह है, जो मेरा हर हुक्म मानती है,

मैं – हा हा हा......... बस कर यार, इतनी फेंकेंगा तो हंस हंस कर मेरी निक्कर में ही टट्टी निकल जायेगी

चमकू (गुस्से से) – साले हरामी, मेरा मजाक उडाता है, आज तो मैं तुझे दिखाकर ही रहूँगा कि मेरी अम्मा मेरी गुलाम है,,,, तू देखता जा

मैंने चमकू की बात को ज्यादा तवज्जो नही दी, और बस ऐसे ही हलकी फुलकी बाते करते करते हम सुबह के अँधेरे में जंगल में पहुंच गये, वहां पर भी चमकू अपनी अम्मा के बारे में ही बके जा रहा था, पर मुझे उसकी बातो पर बिल्कुल भी भरोसा नही हो रहा था, क्यूंकि झुमरी काकी का तो पुरे गाँव में खोंफ था,

झुमरी काकी के पति फौज में नोकरी करते थे, गाँव के लोग उन्हें फोजी साहब कहते थे और हम लोग फोजी काका, उस वक्त बॉर्डर पर भारत और चीन के बिच काफी टेंसन का माहौल था, इसलिए फौजी काका पिछले 6 महीने से घर नही आये थे, और शायद एक आध साल और भी घर नही आते, पर एक बात थी जो फौजी काका के बारे में सबको पता थी, वो ये कि पीछले साल बॉर्डर पर उनकी ट्रक की दुर्घटना हो गयी थी, पर कुछ ही दिनों बाद उन्होंने फिर से ड्यूटी जॉइन कर ली थी, पुरे गाँव में उनकी इस बहादुरी के किस्से मशहूर थे, और जब वो वापस गाँव आये थे तब गाँव वालो ने बड़ी ही गरम जोशी से उनका स्वागत किया था, पर जल्द ही बॉर्डर की टेंसन के चलते उन्हें वापस बुला लिया गया था, फौजी काका बड़े ही अच्छे स्वाभाव के इन्सान थे

पर झुमरी काकी बड़ी ही सख्त किस्म की औरत थी, पुरे गाँव में ये बात मशहूर थी, झुमरी काकी अपने पति की फौजदारी का रौब भी अक्सर दुसरो पर झाडती थी, वैसे दिखने में तो वो काफी अच्छी थी, पर स्वाभाव की बहुत ही कठोर थी, और इसी वजह से मैं भी उनसे बाते करने में डरता था, कई बार मेरे सामने ही वो चमकू को पिट दिया करती थी, और मुझे भी डांटती, इसलिए मैं तो कई दिनों से उनके घर की तरफ भी नही गया,

अब ऐसे में चमकू कहे कि उसकी अम्मा उसकी गुलाम है तो मैं तो क्या कोई भी उसकी बात पर हँसता

खैर जंगल पानी करने के बाद हम दोनों वापस अपने घरो की तरफ लौट चले,

चमकू – चल आज तुझे दिखाता हूँ, मैं अपनी अम्मा से डरता हूँ या वो मेरी गुलाम हैं?

मैं – रहने दे यार, अब मजाक बंद कर, वैसे भी मेरे पास वक्त नही इन सब बातो का, मुझे आज भी माँ और दीदी के साथ खेत जाना है, वो मेरी राह तकती होंगी,

चमकू – चल ठीक है, पर आज शाम को तू इधर आ जाना, आज तो मैं तुझे दिखाकर ही रहूँगा कि मैं सच बोल रहा हूँ या झूट...

मैं – चल ठीक है, आ जाऊंगा शाम को, पर अभी जाने दे मुझे......

चमकू – चल ठीक है फिर, मिलते है शाम को

चमकू से अलविदा लेकर मैं अपने घर की तरफ चल पड़ा, अब भी अँधेरा पूरी तरह नही मिटा था, पर गाँव वाले तो अपनी अपनी बैल लेकर खेतो की तरफ चल पड़े थे, मैं अब तेज़ तेज़ कदमो से अपने घर की तरफ बढ़ने लगा,

घर पहुंच कर मैंने जल्दी से नहाना धोना किया, और फिर माँ और दीदी के साथ खेत में चला गया, मैंने कल की तरह आज भी महसूस किया कि नीलू दीदी बिच बिच में मुझे अजीब नजरो से देखती, पर फिर वापस नार्मल हो जाती,

पुरे दिन खेत पर काम करने के बाद हम लोग शाम को वापस अपने घर की तरफ चल पड़े, घर आकर मैंने दोबारा स्नान किया, स्नान करते ही मेरी दिन भर की थकान दूर हो गयी, स्नान करने के बाद मैं अभी थोडा आराम कर ही रहा था कि मुझे चमकू की बात याद आ गयी,

मैं जल्दी से खड़ा हुआ और बाहर की तरफ जाने लगा

बाहर बाड़े में नीलू दीदी कुछ काम कर रही थी, मुझे बाहर जाता देख वो बोली

नीलू दीदी – समीर, इस वक्त कहाँ जा रहा है?

मैं – दीदी, वो मैं चमकू से मिलने जा रहा हूँ, जल्दी वापस आ जाऊंगा

नीलू दीदी – पर माँ ने बोला था ना, कि उस लडके से दूर रहा कर, वो सही लड़का नही है,

मैं – पर दीदी मैं पक्का जल्दी से घर आ जाऊंगा, और वैसे भी माँ तो अभी सरला ताई के घर गई है, और शायद लेट ही आएगी, तब तक तो मैं वापस आ जाऊंगा

नीलू दीदी – चल ठीक है, पर खाने के टेम से पहले घर आ जाना,समझा

मैं – ठीक है दीदी....

नीलू दीदी से इज़ाज़त लेकर मैं चमकू के घर की तरफ बढ़ गया, जल्दी ही मैं चमकू के घर के सामने था, हमारे घर की तरह उनका भी एक छोटा सा कच्चा मकान था, मैंने जाकर दरवाजे पर दस्तक दी, थोड़ी ही देर में चमकू ने आकर दरवाज़ा खोला,

चमकू – ओह, तो तू आ गया, मुझे तो लगा था कि तू आएगा ही नही,

मैं – कैसे नही आता यार, तूने बुलाया और हम चले आये....... हाहाहा....

चमकू – चल अंदर चलकर बाते करते है..

मैं – झुमरी काकी कहाँ गयी, दिखाई नही दे रही...

चमकू – अम्मा तो अभी बाहर अपनी सहेली के घर गयी है, आने में वक्त लगेगा..... तब तक हम बाते करते है आजा

मैं चमकू के साथ आकर खाट पर बैठ गया

मैं – अच्छा तो अब बता चमकू, तू सुबह सुबह आज क्या बरगला रहा था, कहीं कोइ नशा वशा तो नही कर लिया था सुबह सुबह....

चमकू – साले हरामी, तुझे अब भी मेरी बाते मजाक लगती है, मैं कह रहा हूँ ना कि अब मेरी अम्मा मेरी गुलाम है, तू मानता क्यों नही

मैं – कैसे मान लूँ यार, जिस झुमरी काकी से गाँव का बच्चा बच्चा डरता है, जो तुझे उल्टा लटका कर मार मार कर तेरी गांड सुजा दिया करती थी, तू बोलता है कि वो तेरी गुलाम है, भला मैं कैसे भरोषा कर लूँ

चमकू – लगता है तू ऐसे नही मानेगा, तुझे सच्चाई बतानी ही पड़ेगी....

मैं – सच्चाई, कैसी सच्चाई?

चमकू - पता नहीं तेरे को बताना चाहिए कि नहीं? तू अपने पेट में रख पाएगा या नहीं! सबको बोल दिया तो मैं गया काम से ,

मैं - यार वादा करता हूँ, किसि को नहीं बताऊँगा,

चमकू - तो सुन पिछले ६ महीने से मैं अपनी अम्मा को चोद रहा हूँ,

चमकू की बात सुनते ही जैसे मेरी तो आँखे फटी की फटी रह गयी,

मैं बोला- ये क्या बोल रहा है तू, भांग वांग तो नही खा ली, अपनी अम्मा को ही?

चमकू – हाँ अपनी अम्मा को ही, पर इसमें भी एक और खास बात है

मैं – क्या खास बात

चमकू – यही कि ये सब मेरे बापू ने शुरू करवाया था,

मैं हैरान होकर बोला- क्या फौजी काका ने कहा तुझसे कि काकी को चोदो

चमकू – हाँ यार

मैं – पर बता ना ये सब हुआ कैसे

चमकू - ये तो शायद तुझे पता ही होगा कि करीब 6-7 महीने पहले मेरे बापू का एक हादसा हुआ था, याद है ना

मैं – हाँ याद है ना, एक्सीडेंट के बाद भी तेरे बापू ने होंसला नही हारा और कैसे देश के लिए दोबारा हिम्मत से नोकरी शुरू कर दी, कैसे भूल सकता हूँ मैं

चमकू – ये बात सही है कि मेरे बापू ने होसला नही हारा पर और बहुत कुछ हार गये जो सिर्फ हमे पता है

मैं – मतलब ,,,,, मैं कुछ समझा नही...

चमकू – मैं तुझे सब बताता हूँ, पर तू किसी और को ना बताना

मैं – कैसी बात करता है यार , मैं सच में किसी को ये बात नही बताने वाला


[color=#008040]
अब चमकू मुझे अपनी कहानी सुनाने लगा जो मैं उसके शब्दों में ही आपको सुना रहा हूँ

चमकू – तो सुन, क़रीब 7 महीने पहले जब मेरे बापू का एक बड़ा ऐक्सिडेंट हुआ और वो बाल बाल बचे, तो उनको करीब करीब 15 दिन अस्पताल में रहना पड़ा था, कुछ दिन बाद वो यहाँ गाँव आये तो मैंने महसूस किया कि अब मेरे बापू और अम्मा किसी बात को लेकर बहुत ही परेशान रहा करते थे,

मैं उन दोनों को दुखी देखता पर मुझे कारण का पता नही था, ऐसे ही कुछ दिन चलते रहे, फ़ीर एक दिन दोनों में बहुत झगड़ा हुआ और मैं घबरा कर वहाँ पहुँचा तो देखा कि अम्मा बिस्तर पर बैठ कर रो रही थी और बापू अपना सर पकड़कर बैठे थे,

मैंने अम्मा को चुप कराया और अपने बापू से बोला- आप लोग क्यों लड़ रहे हो? आपने अम्मा को क्यों रुलाया?

अम्मा आँसू पोंछतीं हुई बोली- बेटा तू जा यहाँ से, तेरा कोई काम नहीं है यहाँ,

बापू- नहीं तू कहीं नहीं जाएगा , हमारी लड़ाई तुमको लेकर ही है,

अम्मा - आप इसको क्यों इसमें उलझा रहे हो , बच्चा है अभी, बेचारा,

बापू- वह अब बच्चा नहीं रहा पूरा जवान है ,

अम्मा - आपको मेरी क़सम इसे यहाँ से जाने दो,

बापू- नहीं आज बात साफ़ होकर रहेगी,

अम्मा फिर से रोने लगी,

मैं हैरान था कि ये हो क्या रहा है?

बापू- देखो अब तुम बच्चे नहीं रहे, पूरे जवान आदमी हो 16-17 साल के, तुमने पता है ना कि मेरा एक्सीडेंट हुआ था, दरअसल इस ऐक्सिडेंट में मेरी मर्दानगि चली गयी है , अब मैं तुम्हारी अम्मा को शारीरिक संतोष नहीं दे सकता, अब अस्पताल वालों ने भी कह दिया है कि कोई उपाय नहीं है मेरे ठीक होने का,

मैं हैरान होकर बोला- तो ?

बापू- मैंने तुम्हारी अम्मा को कहा कि वो चाहे तो मुझे छोडकर जा सकती है, क्योंकि वो कब तक एक नामर्द के साथ रहेगी, पर वो इसके लिए तय्यार नहीं है,

अम्मा बिच में ही बोल पड़ी - अब इस उम्र में एक जवान लड़के की माँ होकर मैं कहाँ जाउंगी ? आप पागल हो गए हो, मैं ऐसे ही जी लूँगी, बस भगवान आपको सलामत रखे,

बापू- पर मैं नहीं चाहता कि तुम अपना मन मार के जियो, मैं तो चाहता हूँ कि तुम जी भर के अपनी ज़िंदगी जियो,

अम्मा - क्या ज़िन्दगी में शारीरिक सुख ही सब कुछ होता है? प्यार का कोई मतलब नहीं है?

बापू- प्यार तो बहुत ज़रूरी है पर शारीरिक सुख का भी बहुत महत्व है, मैं नहीं चाहता कि तुम बाक़ी ज़िन्दगी इसके बिना जीयो,
अम्मा फिर से रोने लगी,

बापू- मैंने एक दूसरा रास्ता भी तो बताया था तुझे ,

ये सुनके अम्मा रोते हुए वहाँ से बाहर निकल गई,

मैं - बापू दूसरा रास्ता क्या हो सकता है?

बापू- बेटा यहीं तो वो मान नहीं रही,

मैं - बापू आप मुझे बताओ मैं उनको मनाने की कोशिश करूँगा,

बापू- ये तुमसे ही सम्बंधित है,

मैं - मेरे से मतलब?

बापू- देखो बेटा, जब औरत प्यासी होती है ना तो वो किसी से भी चुदवा लेती है,

मैं तो उनके मुँह से ये शब्द सुनके हाक्का बक्का तह गया,

बापू- अब तुम्हारी अम्मा अगर किसी से भी चुदवा ली तो हमारी बदनामी हो जाएगी, बोलो होगी कि नहीं?

मैंने हाँ में सर हिलाया,

बापू- इसलिए मैंने उसको ये बोला है कि अब तुम भी जवान हो गए हो तो वो तुमसे ही चुदवा ले, इस तरह घर की बात घर में ही रहेगी,

मेरा तो मुँह खुला का खुला हो रह गया ,

मैं - ये कैसे हो सकता है बापू? वो मेरी अम्मा हैं,

बापू- वो तेरी अम्मा हैं, पर उससे पहले वो एक औरत है, वो अभी सिर्फ़ 38 साल की है, इस उम्र में तो औरत की चुदाई की चाहत बहुत बढ़ जाती है, और तेरी अम्मा तो वैसे भी शुरू से ही बहुत चुदासी रही है

मैं - पर बापू मुझे सोचकर भी अजीब लग रहा है, अम्मा कभी नहीं मानेगी ,

बापू- तू मान जा तो मैं उसे भी मना लूँगा,

मैं - पर बापू.......

बापू- पर वर कुछ नहीं, ज़रा मर्द की नज़र से देख उसे, क्या मस्त चूचियाँ हैं मस्त गुदाज बदन है, बड़े बड़े चूतर हैं, नाज़ुक सी बुर है उसकी, बहुत मज़े से चुदाती है,

अब मैं भी आखिर इन्सान हूँ, कब तक खुद पर लगाम रखता, और अब मेरा लंड खड़ा होने लगा , मैं वासना से भरने लगा,

बापू- वो लंड भी बहुत अच्छा चूसती है, तूने कभी किसी को चोदा है?

मैंने ना में सर हिलाया,

बापू- ओह तब तो तुझे सिखाना भी पड़ेगा, पहले ये बता कि अम्मा को चोदने को तय्यार है ना,

मेरा लौड़ा पैंट में एक तरफ़ से खड़ा होकर तंबू बन गया था, मुझे शर्म आयी और मैं किसी तरह अपने लंड को अजस्ट करने लगा,

ये बापू ने देख लिया और हँसते हुए बोले- चल तू हाँ बोले या ना बोले , तेरे लौड़े ने तो सर उठा कर हाँ बोल ही दिया है, क्यों...हा हा हा.....

मैंने शर्म से सर झुका लिया,

बापू मेरे पास आकर मेरे लौड़े को पकड़ लिए और उसकी लम्बाई और मोटाई को महसूस करने लगे,

और ख़ुश होकर बोले- वाह तेरा लौड़ा तो मेरे से भी बड़ा है और मोटा है, तू तो मुझसे ज़्यादा ही मज़ा देगा अपनी अम्मा को, अब तो मेरा खड़ा ही नहीं होता, पर जब खड़ा होता था तब भी तेरी अम्मा कभी कभी बोलती थी कि मेरा थोड़ा और मोटा होता तो उसको ज्यादा मज़ा आता, अब उसकी बड़े और मोटे लौड़े से चुदवाने की इच्छा भी पूरी हो जाएगी,

फिर बापू मेरे लौड़े से हाथ हटाकर बोले- बेटा मैं तुम्हें सिखा दूँगा कि अम्मा को कैसे चोदना है, पर पहले चलो अम्मा को मनाते हैं और तुम दोनों की चुदायी कराते हैं, आज वो इसीलिए रो रही थी कि उसे तुमसे नहीं चुदवाना है, कहती है कि अपने बेटे से कैसे चुदवा सकती हूँ,

मेरा लौड़ा अब झटके मार रहा था और मैं बापू के पीछे पीछे अम्मा के कमरे में जाने लगा, कमरे में अम्मा उलटी लेटी हुई थीं और उनका पिछवाड़ा सलवार में बहुत ही उभरा हुआ और मादक दिख रहा था, बापू ने मुझे इशारे से उनके चूतरों को दिखाते हुए फुसफुसाते हुए कहा- देख क्या गाँड़ है साली की, अभी देखना तुझसे कैसे कमर उछाल उछाल कर चुदवायेगी?

मैं अपने बापू के मुँह से गंदी बातें सुनकर हैरान हो गया, आजतक मैंने बापू का ये रूप नहीं देखा था, पर मैं तो अम्मा की मोटी गाँड़ देखकर उत्तेजित तो बहुत था,

तभी अम्मा को लगा कि वह कमरे में अकेली नहीं है, तो उसने मुँह घुमाकर देखा और एकदम से उठकर बैठ गयी,

अब बापू उसको देखकर हँसते हुए बोले- क्या जानु , क्यों सीधी हो गयी, चमकू तो तुम्हारी गाँड़ का उभार देखकर मस्त हो रहा था,

फिर बापू ने वो किया जो मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था, उन्होंने मुझे धक्का देकर अम्मा के सामने खड़ा किया और मेरे लौड़े को पकड़कर अम्मा को दिखाते हुए बोले- देख मैं ना कहता था कि कोई भी मर्द तेरा बदन देखकर पागल हो जाएगा, देख तेरा अपना बेटा ही तेरी मस्त गाँड़ देखकर कैसे लौड़ा खड़ा कर के खड़ा है,

अम्मा की तो आँखें जैसे बाहर को ही आ गयीं, वो हैरानी से बापू के हाथ में मेरा खड़ा लौड़ा देखे जा रही थी,
बापू ने मेरा लौड़ा अब मूठ मारने वाले अंदाज़ा में हिलाना चालू किया, और अम्मा की आँखें जैसे वहाँ से हट ही नहीं पा रही थी,

बापू- देख जानु क्या मोटा और लंबा लौड़ा है इसका, तेरी बड़े लौड़े से चुदवाने की इच्छा भी पूरी हो जाएगी,

अब बापू ने उनकी छातियाँ दबानी शुरू की और अम्मा आह कर उठी और बोली- छी क्या कर रहे हो, बेटे के सामने और ये क्यों पकड़ रखा है आपने?

बापू ने जैसे उनकी बात ही ना सुनी हो, वो मुझे बोले- लो बेटा अपनी अम्मा के दूध का मज़ा लो,

जब मैं हिचकिचाया तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अम्मा की छाती पर रख दिया,

अब मैं भी कहाँ रुकने वाला था, मैंने मज़े से छाती दबायी और अम्मा की चीख़ निकल गयी - आह जानवर है क्या? कोई इतनी ज़ोर से दबाता है क्या?

मैं डर गया और बोला- माफ़ करना अम्मा , पहली बार दबा रहा हूँ ना, मुझे अभी आता नहीं,

बापू हँसते हुए बोले- हाँ जल्द सब सिख जाएगा और अपनी अम्मा को बहुत मज़ा देगा , क्यों जानु है ना?

अम्मा कुछ नहीं बोली पर अब मैं थोड़ा धीरे से एक चुचि दबा रहा था और एक बापू दबा रहे थे, जल्द ही अम्मा की आँखें लाल होने लगी और वो वासना की आँधी में बह गयी,

अब बापू ने मुझे कहा- चलो अब उसके दोनों दूध तुम ही दबाओ, और मैं अब मज़े से उनके दूध दबाने लगा,

Reply

Yesterday, 12:35 PM,
#10
RE: Hindi Antarvasna Kahani - ये क्या हो रहा है?
अब बापू ने मेरी पैंट की ज़िप नीचे की और मेरी पैंट की बेल्ट भी निकाल दी, अम्मा हैरानी से बापू की करतूत देख रही थी, अब बापू ने मेरी पैंट नीचे गिरा दी, और अम्मा ही नहीं बापू की भी आँखें फटीं रह गयीं, क्या ज़बरदस्त उभार था चड्डी में और मेरा लौडा चड्डी से बाहर आकर एक तरफ़ को निकल आया था, वो था ही इतना बड़ा की चड्डी में समा ही नहीं रहा था,

मेरा मोटा सुपाड़ा बाहर देखकर अम्मा की तो आह निकल गई, वो बोली- हे भगवान , कितना बड़ा है और मोटा भी,

बापू- हाँ जानू तुम्हारी बुर तो ये फाड़ ही देगा,

अम्मा - हाँ सच बहुत दर्द होगा लगता है मुझे,
बापू- अरे एक बार ये पहले भी तुम्हारी बुर फाड़ चुका है, जब बुर से बाहर आया था, आज अंदर जाकर फिर फाड़ेगा, और वो हँसने लगे, अब अम्मा भी मुस्करा दी,

फिर बापू ने अम्मा की कुर्ती उतार दी और ब्रा में फंसे हुए गोरे कबूतरों को देखकर मैं मस्ती से उनको दबाकर अम्मा की नरम जवानी का मज़ा लेने लगा,

बापू ने कहा- जानु चड्डी तो उतार दो बेचारा इसका लौड़ा कैसे फ़ंड़ा हुआ है, देखो ना,

अब अम्मा भी मस्ती में आ गयीं थीं , उन्होंने मेरी चड्डी उतार दी और मेरा गोरा मोटा लौड़ा देखकर सिसकी भर उठी,

अब बापू ने मेरा लौडा हाथ में लेकर सहलाया और कहा- देखो जानु कितना गरम है इसका लौड़ा और फिर अम्मा का हाथ पकड़कर उसपर रख दिया,

अम्मा के हाथ में मेरा लौड़ा आते ही अम्मा हाय कर उठी, वो मुझसे आँख नहीं मिला पा रही थी, पर उनका हाथ मेरे लौड़े पर चल रहा था और उनके अंगूठे ने सुपाडे का भी मज़ा ले लिया, मुझे उत्तेजना हो रही थी और मैं झुक कर उनकी ब्रा का हुक खोलना चाहा, पर मैं अनाड़ी खोल ही नहीं पाया,

बापू हँसते हुए मुझे हटा कर हुक खोल दिए और ब्रा को अलग करके अम्मा के बड़े बड़े मम्मे नंगा कर दिए, मैं तो जैसे पागल ही हो गया और मैंने अम्मा के खड़े लम्बे काले निपल्ज़ को मसलना शुरू किया, अब अम्मा की आह्ह्ह्ह्ह्ह निकलने लगी और उनका हाथ लौड़े पर और ज़ोर से चलने लगा,

तभी बापू ने अम्मा को लिटा दिया और मुझे बोले- चल बेटा अब अपनी माँ का दूध पी, जैसे बचपन में पिया था,

मैं झुका और अपना मुँह एक दूध पर रख दिया और उसे चूसने लगा, और दूसरे हाथ से दूसरे दूध को दबाकर मस्ती से भर गया,

अब अम्मा भी मज़े से हाऊय्य्य्य्य मेरा बच्चाआऽऽऽऽऽ हाय्य्य्य्य्य्य कहकर मेरा सर अपनी छाती पर दबाने लगी,

बापू बोले- अरे बस क्या एक ही दूध पिएगा , चल दूसरा भी चूस,

मैंने दूध बदलकर चूसना चालू किया, उधर बापू अम्मा की सलवार उतार दिए, और मुझे पहली बार पता चला की अम्मा पैंटी पहनती ही नहीं, बापू ने बाद में बताया था कि पिछले कुछ सालों से उन्होंने अम्मा को पैंटी पहनने से मना किया था,

अब अम्मा की बिना बालों वाली बुर मेरे आँखों के सामने थी, बापू ने मुझे अम्मा के पैरों के पास आने को कहा और उनकी टांगों को घुटनो से मोड़कर फैला दिया और उनकी जाँघों के बीच इनकी फूली हुई बुर देख कर मुझे लगा कि मैं अभी झड़ जाऊंगा

फिर बापू ने मुझे बुर सहलाने को कहा और वो नरम फूली हुई बुर को दबाकर सहलाकर मैं बहुत गरम हो गया, मेरे लौड़े के मुँह में एक दो बूँद प्रीकम आ गया था,
बापू ने उस प्रीकम को अपनी ऊँगली में लिया और सूंघकर बोले- वाह क्या मस्त गंध है,

फिर अम्मा के नाक के नीचे रखकर उनको सुँघाए और फिर अपनी ऊँगली अम्मा के मुँह में डाल दी, अम्मा बड़े प्यार से उसको चाट ली,

बापू बोले- बेटा, अपनी अम्मा को लंड दो चूसने के लिए , उसको चूसने में बहुत मज़ा आता है, अब अम्मा उठकर मेरा लौडा मुँह में लेकर चूसने लगी, और सुपाडे को जीभ से चाटने लगी,

फिर बापू ने कहा- चलो बाद में चूस लेना, अब चुदवा लो, अम्मा लौडा मुँह से निकाल कर लेट गयी,

अब बापू ने अम्मा की बुर की फाँकों को अलग किया और उनकी गुलाबी छेद को मुझे दिखाया और बोले- बेटा ये तेरा जन्म स्थान है, तू यहाँ से ही पैदा हुआ था, अब चल वापस यहीं अपना लौड़ा डालकर फिर से अंदर जा,

अब मैं अम्मा की जाँघों के बीच आया और बापू ने मेरे लौड़े को पकड़ कर के सुपाडे को गुलाबी छेद पर रखा और कहा- चल बेटा धक्का दो, मैंने धक्का मारा और आधा लौड़ा बुर के अंदर चला गया, अम्मा की चीख़ निकल गयी- हाऽऽऽऽयय्यय मरीइइइइइइइइइइ , धीरे से करोओओओओओओओओ ,

मैंने घबरा के बापू को देखा तो उन्होंने इशारा किया और ज़ोर से मारो, मैंने फिर धक्का मारा और मेरा पूरा लौड़ा अंदर चले गया, मुझे लगा कि जैसे किसी गरम भट्टी में मेरा लौडा फँस गया है, वाह क्या तंग बुर थी अम्मा की, अम्मा को शायद दर्द हो रहा था वो बोली- आह बेटा धीरे करो, तुम्हारा बहुत बड़ा है, थोड़ा समय दो आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,

बापू ने कहा- बेटा अम्मा का दूध चूसो और दबाओ वो मस्त हो कर चुदवायेगी, मैंने वैसे ही किया, अब अम्मा गरम होने लगी और उनका दर्द भी मज़े में बदलने लगा,

फिर मैंने उनके होंठ चूसने शुरू किए, अब अम्मा ने मेरे चूतरों पर अपने हाथ रख दिया और मुझे धक्का मारने में मदद करने लगी,

उधर अम्मा नीचे से अपनी कमर उठाकर मेरा साथ देने लगी, अब ज़ोरों की चुदायी हो रही थी, तभी मैंने देखा कि बापू अपना पैंट उतारकर अपने छोटे से लंड को रगड़ रहे थे पर वो खड़ा नहीं हो रहा था,

उधर अम्मा अब चिल्ला रही थी- हाऊय्य्य्य्य्य बेटाआऽऽऽऽऽऽ चोद मुझे आऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त लौड़ा है तेरा हाय्य्य्य्य मर गईइइइइइइइइ फाड़ दे आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरी फाड़ दे, हाय्य्य्य्य्य्य्य ऐसी ही चुदायी चाहिए थी मुझे बेटाआऽऽऽऽऽऽऽऽ ,

अब कमरा फ़च फ़च की आवाज़ से भर गया था,
बापू अब पास आकर हमारी चुदायी देख रहे थे और अपना लंड हिला रहे थे, तभी अम्मा चिल्ला कर बोली- हाय्य्य्य्य्य्य्य जोओओओओओओओओओर्र्र्र्र से चोदोओओओओओओओओओ , आह्ह्ह्ह्ह मैं झड़ीइइइइइइ ,

अब मैं भी अपनी अम्मा के साथ ही झड़ गया,
बापू अभी भी लंड हिला रहे थे पर वह अभी भी छोटा सा सिकुड़ा हुआ ही था, मुझे बापू के लिए काफ़ी अफ़सोस था पर अपने लिए मैं बहुत ख़ुश था, मुझे चोदने के लिए चूत जो मिल गयी थी,

बस उस दिन के बाद से मैं अम्मा के साथ ही सोता हूँ, और वो रोज़ ही कम से कम दो बार मुझसे अपनी फुद्दी मरवाती है, अब तो मैं अम्मा की गांड भी मारता हूँ....

चमकू की कहानी सुनकर मेरा लोडा तो मेरी पेंट फाडकर बाहर आने को तैयार हो गया, मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजना महसूस कर रहा था, अब मुझे चुदाई के बारे में काफी कुछ पता चल गया था, और ये भी कि कल सरला ताई और सुमेर चुदाई ही कर रहे थे.....

चमकू – क्यों बे, अब तो यकीन हुआ ना कि अम्मा मेरी गुलाम है....

मैं – हाँ यार , सच में, तू बड़ी ही किस्मत वाला है, तेरे पास रोज़ चोदने के लिए चूत जो है...

चमकू – वैसे अगर तू चाहे तो एक काम हो सकता है..

मैं – वो क्या

चमकू – मैं तुझसे अपनी अम्मा को चुदवा सकता हूँ

चमकू की बात सुनकर तो मुझे लगा जैसे अभी मेरा पानी निकल जाएगा

मैं – पर यार ये कैसे सम्भव है, मेरा मतलब है कि तेरी बात अलग है, तू उनका बेटा है, पर वो मुझसे क्यों करवाएगी

चमकू – मेरे कहने से वो कुछ भी कर सकती है...

मैं – सच्ची, तू सच में काकी की दिलवाएगा मुझे....

चमकू – हाँ, पर एक शर्त है....

मैं – वो क्या...

चमकू – तू जब भी कोई चूत मारे तो मुझसे भी उसकी मरवाएगा....

मैं – पर यार मैं तो किसी की चूत नही मारता.,...

चमकू – अबे पता है बेवकूफ, इसलिए तो बोला कि जब भी मारे, आज नही तो कल, पर जब भी मारे

मैं – चल फिर तय रहा... पर तू झुमरी काकी को कैसे राज़ी करेगा....

चमकू – तू उसकी फ़िक्र मत कर, कुछ ही दिनों में वो तेरे लंड के निचे लेटी होंगी, बस तेरा लंड चूत मारने के लायक हो, कहीं ऐसा ना हो कि 2 इंच की लुल्ली लेकर हाज़िर हो जाए, नही तो तेरे साथ मुझे भी हाथ धोना पड जायेगा अपनी अम्मा की फुद्दी से, हा हा हा ..........

चमकू मेरे लंड का मजाक उड़ाकर हंसने लगा पर उसे ये बात कहाँ पता थी कि मेरा लंड उसके लंड से दुगुना लम्बा और ढाई गुना मोटा है.... मैं भी उस वक्त ज्यादा कुछ नही बोला... कुछ देर और हम यहाँ वहां की बाते करते रहे और फिर मैं वापस अपने घर की तरफ चल पड़ा....
[/color][/b]
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Star non veg kahani कभी गुस्सा तो कभी प्यार 116 140,880 42 minutes ago
Last Post:
  Thriller विक्षिप्त हत्यारा 60 2,038 Yesterday, 01:10 PM
Last Post:
Thumbs Up Desi Porn Kahani नाइट क्लब 108 5,436 Yesterday, 01:03 PM
Last Post:
Exclamation Maa Chudai Kahani आखिर मा चुद ही गई 40 351,775 07-31-2020, 03:34 PM
Last Post:
Thumbs Up Romance एक एहसास 37 12,797 07-28-2020, 12:54 PM
Last Post:
Star Rishton May chudai परिवार में चुदाई की गाथा 16 24,617 07-28-2020, 12:44 PM
Last Post:
  Hindi Antarvasna - काला इश्क़ 104 31,744 07-26-2020, 02:05 PM
Last Post:
Heart Desi Sex Kahani वेवफा थी वो 136 37,374 07-25-2020, 02:17 PM
Last Post:
Star Indian Porn Kahani शरीफ़ या कमीना 50 160,734 07-23-2020, 02:12 PM
Last Post:
  पड़ोस वाले अंकल ने मेरे सामने मेरी कुवारी 2 33,889 07-21-2020, 02:15 AM
Last Post:



Users browsing this thread: 14 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.


Budhe baba ki rep rep kahanihd pron xxx momko chodte padosne dekhaसेक्सी फिल्म मानदेव काला घोड़ा काला सेक्स करते हुए लड़कीmiyaa or bivi hindime xxx vdiosघर पर कोई नहीं है आ जाओ एमएमएसपोर्नमैं शर्माने का नाटक करती रही है छुट्टी रही सेक्स XXX kahaniyanew diapky padkar xxx vidiodhano ke kheto ki chudai ki xxx hindi vXxxbf gandi mar paad paadeअन्तर्वासना कहानी गाँव में गरीब भाभी ने आगंन में नंगा करके नहलाया sexy video suhagrat Esha Chori Chupke chudai ka video bhajanदहकती चूत की रगड के चुदाया की कहानीvhstej xxxcomTara,sutaria,sexbabaमंदा काकीला झवली Chavat कथाmomdifudiraj shrma hinde six khanefuckkk chudaiii pronsxe.Baba.NaT.H.K.cayina wwwxxxxBaba nay anty ko choda in nighty videosDesi bhabi gand antarvesna photoVelamma ke chudte hue free chitraपुचित बुला खोसला सेकसि कहानिxxx video chut fardi or chilaikammo aur uska beta hindi sex storyकोठे वाली रंडी चे मनोगत/Thread-raj-sharma-stories-%E0%A4%9A%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE?pid=65630मौसी की पेंटी और ब्रेसियर मे मुठ माराMe poran sexx videos me kam kar sakta hu muje koe ladki mil sakti h jo mere sath vedeos bnaagiMansi Srivastava nangi pic chut and boob vparivar sexbaba kahanimanisha koirala sex baba.net full photoskutiya bnaya aur bezzat kiya aur chudwayaसुहारात किxxxमूठ मारन साडी xxx sex मेरि भबिकी chudaai xnxx.comशविता भाभी कि सेकशि फोटो दीखाईMom को वेटे ने रखेल वन कर ठोक ले Xnxx.betiya BP sex chachi patiyaबाड शिकशी गाड का फोटोbhabhi strip sexbabaपियंका,कि,चुदाई,बडे,जोरो से/Thread-maa-sex-kahani-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A4%9F%E0%A4%A8%E0%A4%BE?pid=91168sex baba bhenGirl ki rsili cut ke xxx potosNAGI HOKA PHOTO BANANE KI STORYशैकश विलू विडियो पानी चुडाना चूतactior mehreen kaur pirzada xnxxसेकसी बियफ बिडियो सेकसी अचछा अचछा बुर और चूत दिखाओगेxxx choda to guh nikal gaya gand seComputer table comfortable BF sexyxxxजेटना xnxxसेक्स बाबा नेट निशा के पापाकमिंग फक मी सेक्स स्टोरीsexbaba.com gifs xxx ass nude actressआह ऊह माआआ मर गयीmushal mano lig pron vidioshemailsexstory in hindixxnxnxx ladki ke Ek Ladka padta hai uskoApni sagi beti ko chodta hai.comxxxcomSxx duniya ka sabsy mutaa laand kamuskan mehni ass sex xxx बेटा माँ के साथ खेत में गया हगने के बहाने माँ को छोड़ा खेत में हिंदी में कहने अंतर वासना परchachi ko patak sex kiya sex storyचूतपर मेहन्दीsari kholkar blouwz aur saya dekhaia bhabiआकेली बेटी घर xxxx com. HD TV वीडियो बीएफ सेक्सी पोर्न सी लड़की के साथ जबरिया चोदा चोदी पड़ेगी भाभी के साथ जबरिया चोदा चोदीइंडियन सेक्सी वीडियो प्लेयर गांड वाली टट्टी निकलेनंगीसीलबंदआहहहह भाई फक मी सेक्स स्टोरीTane daba kar ddud nikarte bataw sekxHindi sexy photo dikhao Sumona Chakravarti ke bilkul sexy nangeShohar ki berukhi sex story Hindi xossipy.comu.p news potho k sath h.d. iemagbahu sote jabrdasti sasur ne god land khada pe betya kahani xxxbfचूत चाटने HD video 2019 मूह पर बेठने बाला sex xxxx HDमेरे दोस्तों ने शर्त लगाकर मेरी बहन को पटाकर रंडी बनाया चुदाई कहानीviriya kaha jata h inside camra xxnxmaa ki adhuri ichcha Puri ki sex storyKamukta ki imtiha full image sahit sexy khanichut me bhoot sex babaबाथरम नागी भाभी फोटोओपन सेक्स तुम्हारी मां के लोड़े की चुदाई दिखाइए वीडियो सॉन्गshow deepika padukone musterbate story at sexbaba.netPriti suhagrat sex stories-threadnanga sadhu pragant kiya sexy Kahani sexbaba netsex babanet bahan bane mayake sasural ke rakhel sex kahaneमुक्या आईला झवले कथाजीजू लण्ड को चूत में पूरी ताकत से तब तक दबाते रहे जब तक पूरा लण्ड मेरे पेट में नहीं समा गया।मेरी चूत का बुरा हाल थाazmkhar xxxtoral rasputra nudeतेलगू बणी गाड वाली आनटी की चुदाईCuat mi barf dalkar jijaji ni cudai ki