Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
09-04-2017, 04:05 PM,
#21
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
डॉली- सर छोड़ो.. मुझे बाथरूम जाना है.. बड़ी ज़ोर से सूसू आ रही है।
चेतन- हा हा हा सूसू.. अरे तू कोई छोटी बच्ची है क्या.. जो सूसू बोल रही है.. पेसाब बोल.. मूत बोल.. सूसू हा हा हा…
डॉली- बड़े गंदे हो आप.. अब जाने भी दो… नहीं तो यहीं निकल जाएगी।
चेतन- चल मैं भी साथ चलता हूँ.. मुझे भी करना है.. दोनों साथ में करेंगे।
दोनों बाथरूम में घुस गए..
चेतन आज फिर वैसे ही करना चाहता था जैसा उसने ललिता की चूत से पेशाब निकलते हुए किया था, मगर वो डॉली को कुछ बोलता उसके पहले वो कमोड पर बैठ गई और मूतना शुरू कर दिया.. शायद उससे कंट्रोल नहीं हुआ.. चेतन बस देखता रह गया।
वो भी क्या करता.. अब बोल कर कोई फायदा भी नहीं था.. उसके पेशाब करने के बाद चुपचाप खुद करने लगा।
डॉली वापस कमरे में आकर शीशे के सामने टेढ़ी खड़ी होकर अपनी गाण्ड देखने की कोशिश करने लगी.. तभी चेतन भी आ गया।
चेतन- डॉली ऐसे क्यों खड़ी हो.. क्या देख रही हो?
डॉली- अपनी गाण्ड देख रही हूँ.. अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे कोई चीज़ अन्दर घुसी हुई हो.. दर्द भी हो रहा है गाण्ड में…
चेतन- अरे कुछ नहीं.. कसी हुई गाण्ड पहली बार चुदी है ना.. तो ऐसा लगता है.. चल आजा बिस्तर पर.. मैं थोड़ा सहला देता हूँ.. आराम मिलेगा…
डॉली- सर.. सिर्फ़ गाण्ड को सहलाओगे.. मेरा पूरा बदन अकड़ गया है आप थोड़ा दबा दो ना प्लीज़…
चेतन- जान तू दो मिनट रुक.. मैं सरसों का तेल थोड़ा गर्म कर के लाता हूँ.. उसकी मालिश से तेरा सारा दर्द निकल जाएगा।
डॉली ने कुछ सोचा उसके बाद बिस्तर पर पेट के बल लेट गई।
चेतन रसोई में चला गया और वहाँ से एक प्याली में तेल को हल्का गर्म करके ले आया।
चेतन- ले.. मैं आ गया.. अब देख थोड़ी ही देर में तुझे आराम मिल जाएगा।
चेतन बिस्तर पर बैठ गया और अपने हाथों पर ढेर सारा तेल लेकर डॉली की गर्दन से मालिश करना शुरू हो गया।
डॉली- आह.. गर्म तेल का अहसास कितना अच्छा है.. उफ सर.. आपके हाथ में तो जादू है.. हाथ लगाते ही बड़ा सुकून मिल रहा है आह्ह.. दबाव उफ्फ हाँ.. ऐसे ही.. मज़ा आ रहा है।
चेतन बड़े प्यार से मालिश करने लगा.. गर्दन से पीठ पर होता हुआ गाण्ड को रगड़ने लगा। करीब आधा घंटा तक वो मसाज करता रहा।
दोस्तों इतनी कमसिन लड़की नंगी पड़ी हो और उसके जिस्म को मालिश हो रही हो तो जाहिर सी बात है.. उसकी उत्तेजना तो बढ़ेगी ही.. क्योंकि चेतन गाण्ड में तेल डाल कर ऊँगली अन्दर तक डाल रहा था, कभी उसकी चूत को दबा रहा था।
डॉली एकदम जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी।
वो एकदम गर्म हो गई थी।
इधर चेतन का भी यही हाल था।
डॉली के यौवन को छूने से उसके लौड़े में तनाव पैदा हो गया था और होगा भी क्यों नहीं..
18 साल की कली को मसाज दे रहा था.. लौड़ा तो फुंफकार मारेगा ही।
डॉली- आह्ह.. आह उफ़फ्फ़… सर आह्ह.. बड़ा मज़ा आ रहा है.. आपने तो आह..
मेरे जिस्म में आग लगा दी.. उफ्फ अब तो आ आपके लौड़े से चूत और गाण्ड के अन्दर तक मालिश कर ही दो आह्ह.. तभी मुझे सुकून मिलेगा…
चेतन- हाँ साली रंडी.. तू है ही इतनी हॉट कि साला कोई भी तुझे देख कर गर्म हो जाए और मैं तो कब से तेरे यौवन को मालिश कर रहा हूँ साला लौड़ा फटने को आ गया.. चल अब बन जा घोड़ी.. पहले तेरी गाण्ड बजाऊँगा.. उसके बाद चूत की आग बुझाऊँगा।
डॉली झट से घोड़ी बन गई और चेतन ने अपना लौड़ा गाण्ड में डाल दिया.. करीब आधा घंटा तक वो गाण्ड मारता रहा.. अबकी बार डॉली को दर्द नहीं बल्कि मज़ा मिल रहा था।
लौड़ा गाण्ड में घुस रहा था और उसकी चूत पानी-पानी हो रही थी।
जब चूत की आग हद से ज़्यादा हो गई तो डॉली ने चेतन को नीचे लिटा दिया और खुद उसके लौड़े पर बैठ गई.. और कूदने लगी..
केवल 5 ही मिनट में वो झड़ गई..
मगर चेतन कहाँ झड़ने वाला था.. वो नीचे से धक्के मारता रहा।
उसके बाद स्थिति बदल कर उसे चोदने लगा।
दोस्तो, 25 मिनट तक चेतन चूत में लौड़ा पेलता रहा.. डॉली दोबारा झड़ने को आ गई.. तब कहीं जाकर चेतन के लौड़े ने लावा उगला..
दोनों एक साथ झड़ गए और एक-दूसरे से लिपटे हुए पड़े रहे।
चुदाई की थकान और रात भी काफ़ी हो गई थी.. दोनों कब सो गए.. पता भी नहीं चला।
सुबह 6 बजे ललिता की आँख खुली वो भी नंगी ही सोई पड़ी थी..
उठ कर वो सीधी बाथरूम में गई.. नहा कर फ्रेश हुई।
आज उसने नीली साड़ी पहनी, उसमें वो बहुत सुन्दर लग रही थी।
उसके बाद वो दूसरे कमरे में गई.. जहाँ चेतन और डॉली एक-दूसरे की बांहों में गहरी नींद में सोए हुए थे।
ललिता- लो इनको देखो.. अभी तक बेशर्मों की तरह सोए पड़े हैं।
ललिता ने उनको उठाने की बजाय कमरे की बत्ती बन्द की और रसोई में चली गई।
लगभग 7 बजे तक ललिता ने आलू के परांठे और चाय तैयार कर ली.. उसके बाद वापस कमरे में गई.. दोनों अभी तक वैसे ही पड़े थे।
ललिता- डॉली.. अरे उठ भी जा.. अब क्या पूरा दिन सोती रहेगी.. स्कूल नहीं जाना क्या?
दोस्तो, मैं आपको बता दूँ.. डॉली का स्कूल 8 से 2 बजे तक का था।
चलिए आगे देखिए।
डॉली अंगड़ाई लेती हुई उठी.. वो पूरी नंगी थी.. उसकी चूत पर वीर्य लगा हुआ था.. जो सूख गया था।
डॉली- उहह.. क्या दीदी.. कितनी अच्छी नींद आ रही थी.. सोने भी नहीं देती आप…
चेतन भी उठ गया था.. उसने दीवार घड़ी की ओर देखा तो चौंक कर बैठ गया।
चेतन- अरे बाप रे… 7 बज गए.. क्या अनु पहले क्यों नहीं उठाया.. डॉली चल उठ जा.. स्कूल जाना बहुत जरूरी है.. आज इम्तिहान के प्रवेश-पत्र मिलेंगे।
ललिता- अच्छा मैंने नहीं उठाया.. आप ही रात भर चोदने का मज़ा लेते रहे थे.. चलो कुछ देर नहीं हुई.. नास्ता रेडी है.. बस तुम दोनों तैयार हो जाओ।
चेतन कुछ नहीं बोला और सीधा बाथरूम में घुस गया।
ललिता ने डॉली का हाथ पकड़ कर उसको खड़ा किया।
ललिता- अरे बहना.. जल्दी कर तेरे घर भी जाना है.. बैग लेने.. और स्कूल ड्रेस भी वहीं है।
डॉली आधी खुली आँखों से बाथरूम की तरफ बढ़ने लगी।
ललिता- यहाँ कहाँ जा रही है.. इसमें चेतन है.. सारी रात चुदवा कर भी तेरा मन नहीं भरा क्या.. जो अभी भी वहीं जा रही है.. दूसरे कमरे में जा और जल्दी तैयार हो जाना.. ओके…!
डॉली कुछ बोली नहीं बस ललिता की तरफ देख कर मुस्कुरा दी और वहाँ से चली गई।
ललिता कमरे का हाल ठीक करने लगी।
करीब 20 मिनट में दोनों नहा कर फ्रेश हो गए।
डॉली ने अपने कपड़े लिए और पहनने लगी। चेतन भी वहीं उसके सामने खड़ा कपड़े पहन रहा था।
ललिता- हद हो गई बेशर्मी की.. कपड़े बाथरूम में ले गई होती.. नहा कर ऐसे ही नंगी बाहर आ गई।
अब कपड़े भी यहीं पहन रही है।
डॉली- दीदी आपने ही मुझे बेशर्म बनाया है और सर से कैसी शर्म रात भर नंगी इनके साथ थी तो अब क्या नया हो गया.. दीदी.. प्लीज़ ये ब्रा का हुक बन्द करो ना.. कब से ट्राइ कर रही हूँ हो नहीं रहा..
ललिता- मेरी जान.. जब सर से कोई शर्म नहीं है तो हुक भी उनसे ही बन्द करवा ले और अब तू बड़ी साइज़ की ब्रा खरीद ले.. चेतन ने तेरे मम्मों को दबा-दबा कर बड़े कर दिए हैं हा हा हा…
डॉली- क्या दीदी.. आप भी ना.. एक ही रात में बड़े हो गए क्या.. अब आप बन्द कर रही हो या सच में सर को बोलूँ।
ललिता- ला इधर आ.. बड़ी बेशर्म हो गई है और रात भर तेरे सर ने दबाए भी तो खूब हैं ना.. फरक तो पड़ेगा ही.. अभी नहीं तो कुछ दिन बाद बड़े हो जाएँगे.. खरीदना तो पड़ेगा ही तुमको..
डॉली- चलो मान लिया मैंने मगर मैं क्यों खरीदूँ.. सर ने बड़े किए है वो ही लाकर दे देंगे हा हा हा हा…
कमरे में हँसी का माहौल बन गया। ललिता भी उसकी बात से हँसने लगी।
ललिता- अच्छा ठीक है.. मंगवा लेना, अभी जल्दी रेडी हो जा मेरी माँ.. बातें शाम को कर लेना।
डॉली- ना ना माँ नहीं सौतन.. हा हा हा हा..
डॉली पर मस्ती करने का भूत सवार हो गया था।
ललिता इसके आगे कुछ ना बोली.. बस उसको गुस्से से आँख दिखाई और कपड़े पहनने को बोल कर नास्ता लाने चली गई।
नाश्ते के दौरान भी हल्की-फुल्की बातें हुईं..
उसके बाद चेतन निकल गया।
ललिता और डॉली भी साथ में निकले।
डॉली के घर के बाहर गमले से चाबी ली.. जल्दी से उसने ड्रेस पहना और स्कूल के लिए निकल गई।
चाबी वापस वहीं रख दी।
इस दौरान ललिता ने घर की तारीफ की और डॉली से कहा- स्कूल से वापस उसके पास आ जाए.. उसके मॉम-डैड तो शाम तक आएँगे।
डॉली ने ललिता को किस किया और बाय बोलकर चली गई
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09-04-2017, 04:05 PM,
#22
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
स्कूल के गेट पर वही तीनों खड़े उसको आते हुए देख रहे थे।
आज डॉली के चेहरे में अजीब सी कशिश थी और वो बड़ी चहकती हुई स्कूल में दाखिल हुई।
रिंकू- उफ्फ साली क्या आईटम है.. यार जब भी सामने से गुजरती है..
साला लौड़ा इसको सलामी दिए बिना रह नहीं पाता है।
खेमराज- यार कब मिलेगी ये साली.. मन तो करता है साली को जबरदस्ती चोद दूँ।
मैडी- अबे साले.. हवसी रेप की सोचिओ भी मत.. साला आजकल सज़ा बहुत खतरनाक है.. बहन के लौड़े सीधे फाँसी की माँग करते हैं।
खेमराज- तो क्या करें यार.. ये साली खुद तो आकर बोलेगी नहीं कि आओ मेरी चूत मार लो।
रिंकू- यार साली के नखरे भी बहुत हैं ठीक से देखती भी नहीं है और ना किसी से बात करती है।
मैडी- अरे नखरे तो होंगे ही.. स्कूल में सब से ज़्यादा खूबसूरत माल है और साली को भगवान ने फिगर भी ऐसा दिया कि देखने वाला ‘आह’ भरे बिना रह नहीं सकता!
रिंकू- यार कुछ दिन बाद इम्तिहान शुरू हो जाएँगे.. उसके बाद स्कूल से छुट्टी.. साली 12वीं में है.. अगर पास हो गई तो सीधे कॉलेज जाएगी.. पता नहीं कौन से कॉलेज में जाए.. इस बार हमारी तो पास होने की उम्मीद भी नहीं है।
खेमराज- हाँ यारों.. किसी भी तरह इम्तिहान के पहले या इम्तिहान के दौरान ही इस साली को पटाओ वरना जिंदगी भर अफ़सोस ही करते रहेंगे।
हाय.. दोस्तो, क्यों मज़ा आ रहा है ना कहानी में.. अरे नहीं मैं आपको बोर करने नहीं आई हूँ.. इन तीनों के बारे में बताने आई हूँ।
क्योंकि अब इनके बारे में बताने का वक़्त आ गया है।
इन तीनों की उम्र लगभग 22 के आस-पास होगी.. कोई एक आध महीने का फ़र्क होगा।
तीनों दिखने में भी बस ठीक-ठाक से ही हैं इसी लिए कोई लड़की इनको भाव नहीं देती और हाँ तीनों पढ़ाई में भी कमजोर हैं..
बस आवरगर्दी करते हैं कई बार फेल होकर अब 12वीं तक आ पाए हैं।
इनका रुझान शुरू से डॉली पर ही रहा है क्योंकि वो एक सीधी-सादी लड़की थी और बला की खूबसूरत भी थी इसलिए लट्टू होकर ये उसके पीछे पड़े हैं।
इनकी बातों से आपको लग रहा होगा कितने बड़े चोदू होंगे मगर ऐसा कुछ नहीं है.. कोई 3 साल पहले इन्होंने अपने से जूनियर एक लड़के बबलू को फंसाया था वो कोई कम उम्र का चिकना सा लौंडा दिखने में गोरा-चिट्टा था.. बस इन तीनों ने उसको बहला-फुसला लिया और उसकी गाण्ड मार ली.. मगर इनको ज़्यादा दिन तक वो गाण्ड भी नहीं मिली।
बबलू के पापा सरकारी नौकरी में थे, यहाँ से तबादला हो गया तो दूसरी जगह चले गए और बबलू भी उनके साथ चला गया।
इन तीनों ने कोई 2 या 3 बार उसकी गाण्ड मारी होगी।
उस दिन से लेकर आज तक चूत तो बहुत दूर की बात है किसी लड़के की गाण्ड भी नसीब नहीं हुई.. बस हाथ से काम चला रहे हैं।
आप लोग सही सोच रहे हैं अब मेरी कहानी में इनका जिक्र हुआ तो इनको भी चूत के दर्शन जरूर होंगे..
मगर कब और कैसे होंगे वो आगे की कहानी में आपको पता चलेगा..
तो बस पढ़ते रहिए और मज़ा लेते रहिए। चलिए बातें बहुत हो गई.. अब वापस कहानी पर आती हूँ।
वो तीनों काफ़ी देर तक डॉली के बारे में बात करते रहे.. क्लास में भी बस उसी को घूरते रहे।
आज प्रिंसिपल सब को इम्तिहान के प्रवेश-पत्र के बारे में बता रही थीं कि जाते समय लेते जाना..
सब कुछ सामान्य चल रहा था, जब चेतन उस क्लास में आया तो डॉली के होंठों पर मुस्कान आ गई।
रात की सारी बातें उसे याद आने लगीं.. उसने झट से नज़रें नीची कर लीं उसको उस वक्त बड़ी शर्म आई।
दोस्तो, दोपहर तक कुछ भी ऐसा नहीं हुआ जो आपको बताने लायक हो।
स्कूल की छुट्टी हुई तो चेतन ने डॉली को बोल दिया- तुम ललिता के पास घर चली जाओ.. मुझे आने में देर होगी.. सबको प्रवेश-पत्र जो देने हैं।
डॉली गेट से जब बाहर निकली तो वो तीनों उसके पीछे हो लिए और बस चुपचाप चलने लगे।
जब एक सुनसान गली आई तब रिंकू ने हिम्मत करके अपने कदम तेज किए और डॉली के बिल्कुल बराबर चलने लगा और उसकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा। 
डॉली कुछ नहीं बोली और बस चलती रही।
रिंकू- डॉली आख़िर बात क्या है.. हम एक क्लास में हैं. तुम मुझसे कभी बात भी नहीं करती हो?
डॉली- क्या बात करूँ.. मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी.. मैं जानती हूँ तुम तीनों पीठ पीछे से किस तरह लड़कियों की बुराई करते हो.. जाओ यहाँ से।
रिंकू- अरे नहीं नहीं.. तुम गलत समझ रही हो.. हम बुराई नहीं तारीफ करते है.. बस।
तभी वो दोनों भी उसके बराबर आ गए और उसकी हाँ में हाँ मिलने लगे। 
खेमराज- हाँ डॉली.. स्कूल की सब लड़कियां एक तरफ और तुम एक तरफ क्योंकि तुम बहुत भोली हो जिसने भी तुम्हें हमारे बारे में बताया है.. तुम खुद जरा सोच कर देखो वो सही लड़की नहीं है.. तुम समझ रही हो ना मेरी बात को…
दरअसल खेमराज ऋतु की बात कर रहा था जो डॉली के करीब थी। उसका ब्वॉय-फ्रेण्ड अजय था.. दोनों काफ़ी मज़ा करते हैं. स्कूल में सब को ये पता है.. बस खेमराज का इशारा उसी तरफ था।
डॉली- देखो कौन कैसा है.. मुझे कोई लेना-देना नहीं.. बस तुम लोग मेरा पीछा करना बन्द करो।
मैडी- अबे सालों क्यों बेचारी को परेशान कर रहे हो.. इसका मन नहीं है बात करने का.. तो ना सही.. चलो इसको जाने दो…
डॉली ने एक नज़र मैडी को देखा जैसे उसका शुक्रिया अदा कर रही हो।
मैडी- डॉली मैं इनको ले जाता हूँ.. बस एक बात सुन लो सोमवार को मेरा जन्मदिन है.. अगर हो सके तो प्लीज़ आ जाना.. ओके बाय.. चलता हूँ।
जाते हुए मैडी बस डॉली की आँखों में ही देख रहा था।
डॉली के होंठों पर बेहद हल्की सी मुस्कान आई थी, जिसे वो मैडी से छुपा ना सकी।
मैडी भी बिना उसका जवाब सुने उन दोनों को लेकर दूसरी गली में मुड़ गया। 
खेमराज- अबे ले क्यों आया.. साली को अभी सीधा कर देता.. बहुत भाव खा रही थी।
मैडी- साले सब्र कर.. हमेशा जल्दी में रहता है।
रिंकू- और यह जन्मदिन का क्या चक्कर है यार…?
मैडी- साले भूल गया क्या सोमवार को है ना..
रिंकू- अरे याद है.. मगर उसको क्यों बोला.. वो कौन सा आ ही जाएगी और मान ले आ भी गई तो क्या होगा?
खेमराज- अरे यार.. कल का बता दिया होता.. साली की चूत किसी सुनसान जगह ले जाकर चोद देते।
मैडी- अबे बहन के लौड़े.. कभी तो दिमाग़ का इस्तेमाल किया कर.. कल का रख लेते और वो सुनसान जगह क्यों आती हमारे साथ? हरामी उसको मेरा घर पता है.. वो अगर आती भी है तो वहीं आती। अब सुन सोमवार को वो पक्का आएगी और उसके साथ कोई बदतमीज़ी मत करना.. मेरे दिमाग़ में एक प्लान है.. बस समझो कम बन जाएगा।
रिंकू- क्या है.. बता ना यार?
मैडी- अभी नहीं.. सोमवार को.. जब वो आएगी.. तब बताऊँगा। अब चलो यहाँ से.. यहाँ झांट भी नहीं उखड़ पाएगी।
डॉली सीधी ललिता के घर चली जाती है।
उसका दरवाजा उस वक्त खुला हुआ था।
ललिता कमरे में बैठी टीवी देख रही थी।
डॉली- हाय दीदी.. क्या कर रही हो?
ललिता- अरे तू आ गई.. चेतन कहाँ है?
डॉली- उनको थोड़ा काम है.. बाद में आएँगे।
ललिता- इधर आ देख.. न्यूज़ में क्या दिखा रहे हैं.. कल 5 लड़कों ने जन्मदिन पार्टी में एक लड़की को नशे की दवा देकर उसका बलात्कार कर दिया.. कुत्तों को पुलिस ने पकड़ लिया है.. बेचारी वो लड़की अब तक सदमे में है।
डॉली- कितने गंदे लड़के होंगे.. जबरदस्ती की क्या जरूरत थी.. प्यार से कर लेते।
ललिता- लड़की कुँवारी थी.. मर्ज़ी से नहीं मानी.. तभी तो ऐसा हुआ उसके साथ.. आजकल किसी का भरोसा नहीं करना चाहिए।
डॉली- दीदी एक साथ 5 चोदेंगे.. तो कितना दर्द हुआ होगा ना बेचारी को?
ललिता- हाँ दर्द तो हुआ ही होगा वैसे एक बात है.. अगर लड़की पहले से चुदी हुई हो और अपनी मर्ज़ी से चुदवाए तब ज़्यादा के साथ चुदने में मज़ा आता है।
डॉली- सच में दीदी… लेकिन 5 कुछ ज़्यादा नहीं हो जाते हैं…
ललिता- हाँ 5 ज़्यादा है.. बेस्ट 3 होने चाहिए.. एक लौड़ा मुँह में.. दूसरा चूत और आखिरी गाण्ड में.. बस.. फिर देखो क्या मज़ा मिलता है।
डॉली- ऊह.. माँ.. अब समझ में आया.. वो तीनों मेरे पीछे क्यों पड़े हैं।
ललिता- कौन तीनों.. बता तो?
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09-04-2017, 04:05 PM,
#23
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
डॉली ने स्कूल से लेकर जन्मदिन तक की बात ललिता को बता दी।
ललिता- हाँ पक्का.. वो तुझे चोदना चाहते हैं मत जाना उनके पास.. अगर तुझे सच में मज़ा लेना है तो उनको ये अहसास मत होने देना कि तू चुदना चाहती है.. तब जाना.. मगर ऐसी-वैसी कोई चीज़ मत खाना.. वरना होश में नहीं रहेगी और वो तेरे मज़े ले लेंगे.. तुझे कुछ मज़ा नहीं आएगा।
डॉली- नहीं दीदी अभी मेरा चुदने का ऐसा कोई इरादा नहीं है.. अगर कभी मन हुआ भी तो उनके पास नहीं जाऊँगी.. किसी तरह उनको मेरे पास बुलाऊँगी।
ललिता- हाँ ये एकदम सही रहेगा.. चल उनकी बात छोड़.. ये बता रात को कितनी बार चुदाई की तुम लोगों ने?
डॉली ने रात की सारी बातें ललिता को बताईं.. सुनते-सुनते ललिता अपनी चूत मसलने लगी।
ललिता- डॉली तू बड़ी कमाल की आइटम है.. एक ही दिन में इतनी बार चुदी.. बड़ी हिम्मत वाली है रे तू.. तेरी बातें सुनकर मेरी चूत गीली हो गई।
डॉली- अच्छा.. दिखाओ तो.. अभी रस चाट कर आपको मज़ा दे देती हूँ।
ललिता- अरे नहीं.. चेतन आता ही होगा.. पहले साथ खाना खाएँगे.. उसके बाद मज़ा करेंगे।
थोड़ी देर में चेतन भी आ गया.. तीनों ने खाना खाया और थोड़ी बातें की, जब ललिता ने चुदाई की बात की तो चेतन ने मना कर दिया।
उसने कहा- डॉली के इम्तिहान करीब हैं इसको पढ़ाई में ध्यान देने की खास जरूरत है।
ललिता- लेकिन चेतन आज ही ये यहाँ है.. कल से तो बस शाम को आएगी।
चेतन- देखो अनु मैं एक आदमी होने के साथ-साथ एक ज़िम्मेदार टीचर भी हूँ और डॉली को पास कराना मेरी ज़िमेदारी है। ये सब कभी भी कर लेंगे.. मगर इम्तिहान में फेल हो गई तो इसका साल बर्बाद हो जाएगा।
चेतन की बात ललिता के साथ डॉली भी अच्छे से समझ गई।
ललिता- ठीक है.. मैं बर्तन साफ कर देती हूँ.. आप इसे पढ़ाओ।
शाम के 5 बजे तक चेतन जी-जान से उसको समझाता रहा.. ललिता भी काम ख़त्म करके उनके साथ बैठ गई।
डॉली- आहह कमर अकड़ गई.. बैठे-बैठे.. अब मुझे जाना चाहिए मॉम-डैड भी आते ही होंगे और सर थैंक्स.. आज अपने मुझे बहुत अच्छे से सब समझाया।
चेतन- हाँ.. अब तुम जाओ.. मन तो बहुत था तेरी चूत मारूँ.. मगर आज नहीं.. कल शाम को आओगी, तब पढ़ाई के साथ चुदाई भी करूँगा.. ओके अब तुम जाओ…
डॉली ने चेतन को एक चुम्बन किया और ललिता के गले लग कर कान में धीरे से बोली।
डॉली- सर का बड़ा मन है चोदने का.. अब आप मेरे जाने के बाद मज़े करना… उनके लौड़े को मेरी तरफ़ से भी थोड़ा चूसना ओके…
ललिता बस मुस्कुरा देती है और डॉली वहाँ से चली जाती है।
चेतन- क्या बोल रही थी कान में.. वो?
ललिता- मेरे राजा.. आपने उसे इतने प्यार से चोदा कि आपके लौड़े की दीवानी हो गई है वो.. जाते-जाते भी आपका लौड़ा चूसना चाहती थी मगर आपके मना करने के कारण मुझे बोल कर गई है कि उसकी तरफ से मैं आपके लौड़े को चुसूँ।
चेतन- अच्छा अगर उसका इतना मन था.. तो एक बार जाते-जाते चुसवा देता.. चल अब गई तो जाने दो.. वैसे भी कल रात को तुम सो गई थीं.. आज पूरी रात तुम्हें चोद कर भरपाई कर दूँगा.. आ जाओ मेरी जान.. कमरे में चलकर थोड़ा आराम कर लें.. पूरी दोपहर बैठ कर थक गए हैं।
दोनों कमरे में जाकर लेट जाते हैं। ललिता चेतन की पैन्ट का हुक खोलने लगती है।
चेतन- क्या बात है.. अभी चुदना है क्या..? मैं समझा रात को आराम से करेंगे।
ललिता- चुदना नहीं है.. बस डॉली की बात याद आ गई.. थोड़ा लंड चूसने दो ना.. उसकी बात टालने का मन नहीं कर रहा।
चेतन ने भी उसकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिलाई और लौड़ा बाहर निकाल लिया। ललिता उसको चूसने लगी।
दोस्तों ललिता को लौड़ा चूसने दो.. चलो हम डॉली के पास चलते हैं वो अब तक घर पहुँची या नहीं..
डॉली चुपचाप जा रही थी इत्तफ़ाक की बात देखिए उसी जगह पर आज भी एक कुत्ता और कुतिया की चुदाई चालू थी।
डॉली उनको देखने लगी मगर आज उसको होश था कि वो रास्ते में है.. इसलिए उसने चारों तरफ देखा कि कोई आ तो नहीं रहा ना…
वो रास्ता अक्सर सुनसान ही रहता था इसलिए वो वहीं खड़ी होकर कुत्ता-कुतिया की चुदाई देखने लगी।
तभी सामने से वो ही बूढ़ा आदमी आता हुआ दिखा.. उसे देखते ही उसके दिमाग़ में चेतन की बातें घूमने लगीं कि बूढ़े लौड़े में कहाँ जान होती है।
सारी बातें उसे याद आ गईं.. तब डॉली को शरारत सूझी.. उसने जानबूझ कर अपनी चूत पर हाथ लगा कर खुजाने लगी..
वो आदमी पास आया।
डॉली ऐसे बर्ताव कर रही थी.. जैसे उसको पता ही ना हो कि कोई उसे देख रहा है। 
बूढ़ा- अरे आज फिर यहाँ खड़ी होकर खुजा रही हो.. मैंने कहा ना मेरी बात मान लो.. मेरे साथ चलो मलहम लगा दूँगा.. ठीक हो जाओगी…
डॉली- अरे आप कब आए और क्या सच में.. आपके पास ऐसी मलहम है?
बूढ़े के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई थी।
बूढ़ा- हाँ बेटी.. मेरी बात का यकीन कर.. मुझसे डर मत.. चल यहीं पास में ही मेरा घर है.. आज तेरी खुजली का पक्का इलाज कर दूँगा।
डॉली ने सोचने का नाटक किया और मन ही मन बोलने लगी।
डॉली- बुड्डे.. तुझसे कौन डर रहा है तू क्या बिगाड़ लेगा मेरा.. मैं तो आज तेरा हाल बिगाड़ दूँगी.. आज के बाद तू किसी को मलहम लगाने का नाम नहीं लेगा।
बूढ़ा- बेटी क्या सोच रही है.. चल ना मेरे साथ…
डॉली ने हल्की मुस्कान दी और बूढ़े के साथ हो गई.. रास्ते में बूढ़े ने सामान्य बातें की।
‘कहाँ रहती हो..? पढ़ाई कैसी है..? इस वक्त कहाँ पढ़ने जाती है..?’
बस इन सब बातों में ही बूढ़े का घर आ गया.. जो एक आलीशान कोठी थी।
डॉली- वाओ अंकल.. आपका घर तो काफ़ी बड़ा है.. कौन-कौन रहता है यहाँ?
बूढ़ा- मेरा नाम सुधीर मोदी है.. चौक पर जो होटल है.. वो मेरा है.. मेरे दो बेटे अमेरिका में हैं उनकी फैमिली भी वहीं रहती है.. यहाँ मैं अकेला हूँ बस…
डॉली- ओह.. आप अकेले बोर नहीं हो जाते.. आप के बेटे आपको अकेला क्यों छोड़ गए.. आप भी चले जाते उनके साथ वहीं…
सुधीर- नहीं.. ऐसी बात नहीं है.. यहाँ मुझे अच्छा लगता है.. मेरी पत्नी के मरने के बाद मेरे बेटे मुझे साथ ले जा रहे थे मगर मैं ही नहीं गया.. बस सुबह से शाम तक होटल में वक्त निकल जाता है.. रात को घर पर आराम करता हूँ.. ऐसे ही जिन्दगी चल रही है।
डॉली- आपके घर का काम कौन करता है.. आप खाना कहाँ खाते हो?
सुधीर- अरे सारी बात यहीं करोगी क्या? चलो अन्दर आ जाओ वहाँ आराम से बात करेंगे।
दोनों अन्दर चले जाते हैं. अन्दर का नजारा देख कर डॉली चौंक जाती है। हॉल में एक तरफ लकड़ी का बड़ा सा काउंटर लगा था.. उस पर बहुत सी शराब की बोतलें रखी हुई थीं और वहाँ काफ़ी आलीशान सोफे वगैरह रखे थे।
सुधीर- यहाँ बैठो.. मैं कुछ खाने को लाता हूँ।
डॉली- नहीं.. उसकी कोई जरूरत नहीं है आप यहाँ बैठो.. मुझे आपसे बातें करना अच्छा लग रहा है और कुछ बताओ ना अपने बारे में…।
सुधीर- सुबह फ्रेश होकर सीधा होटल जाकर ही नाश्ता करता हूँ। फिर एक औरत शांति आ जाती है.. उसके पास घर की दूसरी चाबी है। वो घर की साफ-सफ़ाई, कपड़े धोना ये सब काम निपटा कर चली जाती है। उसके बाद दोपहर का खाना भी वहीं ख़ाता हूँ शाम को हल्का नाश्ता करके घर आ जाता हूँ..। रात को बस कुछ नमकीन के साथ शराब पीता हूँ और सो जाता हूँ.. यही है मेरी जिन्दगी।
डॉली- छी: छी:.. आप शराब पीते हो.. कितनी बुरी बात है।
सुधीर- अरे इसमें क्या बुराई है.. ये तो बहुत लोग पीते हैं.. चल जाने दे इन सब बातों को.. जिस काम के लिए तुझे यहाँ लाया हूँ.. वो कर लेते हैं।
डॉली- क..कौन सा काम.. मुझे जाना होगा.. बहुत देर हो गई है।
दोस्तों उस वक्त तो डॉली ने शरारत के चक्कर में मलहम लगवाने की बात पर ‘हाँ’ कह दी थी और यहाँ आ गई थी।
मगर अब उसको घबराहट होने लगी थी और होनी भी चाहिए उसकी उम्र ही क्या थी अभी…
सुधीर- अरे यहाँ तू मलहम लगवाने आई है ना.. बस लगवा ले और चली जा.. मैं कुछ नहीं करूँगा.. मुझसे ऐसे डर मत..
डॉली को फिर से चेतन की बात याद आ गई कि बूढ़े का लौड़ा खड़ा नहीं होता है और हो भी जाए तो कुछ कर नहीं सकता।
बस डॉली में थोड़ा हौसला आ गया।
डॉली- मैं डर नहीं रही हूँ और आपसे किस बात का डर.. आप कर भी क्या सकते हो?
सुधीर- चल सारी बातें जाने दे.. मैं ट्यूब ले आता हूँ फिर तुझे मलहम लगा दूँगा।
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09-04-2017, 04:05 PM,
#24
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
डॉली- नहीं नहीं.. जाने दो… आपकी ट्यूब में कहा अब पेस्ट होगा.. अब तक तो सूख गया होगा..
सुधीर के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और वो डॉली के एकदम पास आकर खड़ा हो जाता है।
सुधीर- एक बात कहूँ.. अब तक तो मैं असली मलहम की ही बात कर रहा था.. मगर तुम कुछ और ही समझ रही थीं.. और अब तुम्हारी बातों से साफ पता चल गया कि तुम कहना क्या चाहती हो.. लो खुद देख लो कि इस ट्यूब से पेस्ट निकलता है या नहीं हा हा हा हा…
सुधीर ने निगाहें लौड़े पर डाल कर ये बात कही थी.. जिसको डॉली अच्छी तरह समझ गई।
डॉली- ओह.. क्या मतलब है आपका.. मैंने भी असली मलहम की ही बात की है.. कुछ नहीं…
सुधीर- बेटी.. ये बाल मैंने धूप में सफेद नहीं किए.. जवानी में बहुत सी लड़कियों की खुजली मिटाई है और आज भी मेरी ट्यूब में इतना पेस्ट है कि किसी को भी आराम से लगा सकता हूँ और गारन्टी के साथ उसकी खुजली मिटा सकता हूँ।
डॉली भी समझ गई कि अब बात छुपाने से कुछ नहीं होगा.. बूढ़ा बड़ा शातिर है.. सब समझ गया है। अब उसने मन ही मन पक्का निर्णय ले लिया कि अब तो इस बूढ़े को चैक करना ही पड़ेगा.. क्योंकि उसको ये यकीन था कि इस बूढ़े में दम तो नहीं है.. ये उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
डॉली- अच्छा ये बात है.. तब तो जरूर आजमा कर देखूँगी.. दिखाओ तो अपनी ट्यूब…
सुधीर- अब मैं क्या दिखाऊँ.. खुद ही देख लो..
डॉली- नहीं.. मैं नहीं देखूँगी.. अगर दिखानी है तो दिखाओ.. नहीं तो मैं जाती हूँ।
सुधीर समझ गया कि अब क्या करना है.. उसने पैन्ट खोली और नीचे सरका दी। अंडरवियर उसने पहनी नहीं थी तो बस सीधा प्रसारण शुरू हो गया.. उसका लौड़ा सोया हुआ.. कोई 3″ का होगा और मज़े की बात देखो झांटें एकदम साफ थीं.. शायद कल ही सेव की हुई होगीं।
डॉली- हा हा हा ये छोटा सा इसके दम पर खुजली मिटाओगे?
सुधीर- बेटी सोए हुए पर मत जाओ.. जरा इसे जगाओ.. उसके बाद देखो कि इसमें कितना दम है..
डॉली- अच्छा.. ये जागता भी है क्या इस उम्र में…
सुधीर- हाँ खुद देख लो.. अपने मुलायम हाथ तो लगाओ इसे…
डॉली ने लौड़े को सहलाना शुरू कर दिया.. सुधीर ने मज़े में आँखें बन्द कर लीं और बस दूसरी दुनिया में खो गया।
डॉली बड़े प्यार से लौड़े को सहलाने लगी और उसकी उम्मीद से बाहर वो धीरे-धीरे अकड़ना शुरू हो गया।
अभी कोई 5 मिनट ही हुए होंगे कि वो तन कर अपने पूरे शबाब पर आ गया।
डॉली तो बस देखती रह गई, वो करीब 7″ लम्बा होगा और मोटा भी अच्छा ख़ासा था.. लग ही नहीं रहा था कि किसी बूढ़े आदमी का लंड है।
एकदम तना हुआ फुंफकार मारता हुआ जवान लौड़ा लग रहा था और आप तो जानते ही हो तना हुआ लौड़ा डॉली की कमज़ोरी था..
उसको कहाँ बर्दाश्त हुआ.. वो झट से टोपी को मुँह में लेकर चूसने लगी।
अबकी बार चौंकने की बारी सुधीर की थी.. क्योंकि उसने सोचा ही नहीं था कि इतनी जल्दी ये हो जाएगा।
वो बस सोच ही रहा था कि इसको कहूँ एक बार मुँह में लो मज़ा आएगा.. मगर डॉली तो बिना कहे ही लौड़ा चूसने लगी।
अब तो सुधीर के वारे-न्यारे हो गए.. वो बस मज़े की दुनिया में खो गया।
सुधीर- आह्ह.. आह.. मज़ा आ रहा है.. तुम बहुत अच्छे से चूस रही हो.. उफ्फ क्या पतले होंठ हैं तुम्हारे.. आह्ह.. अब बस भी करो.. माल निकाल कर ही दम लोगी क्या.. आह्ह.. चूत की खुजली नहीं मिटवानी क्या उफ़फ्फ़…
डॉली ने लौड़ा मुँह से निकाल दिया और हाथ से सहलाने लगी।
डॉली- बस इतनी ही देर में माल आने वाला है.. मेरी खुजली क्या खाक मिटाओगे?
सुधीर- तू शक बहुत करती है.. एक बार मौका देकर तो देख.. सारी खुजली मिटा दूँगा.. अपने अनार तो दिखा.. उनका थोड़ा रस पी लूँगा तो और जोश आ जाएगा। अपनी चूत के दर्शन भी करा.. ताकि उसका रस चाट कर तुझे गर्म करूँ.. तेरी खुजली और बढ़ाऊँ.. उसके बाद मलहम लगाऊँगा।
डॉली- चलो.. अब यहाँ तक आ गई हूँ तो आपके लौड़े का कमाल देख कर ही जाऊँगी.. लो खुद ही निकाल दो मेरे कपड़े।
डॉली उसके सामने खड़ी हो गई और वो एक-एक करके उसके कपड़े निकालने लगा।
जैसे-जैसे डॉली का गोरा बदन उसकी आँखों के सामने आ रहा था.. वैसे-वैसे उसका लौड़ा झटके खा रहा था।
डॉली के मम्मों और चूत की फाँकें देख कर लौड़े से पानी की बूँदें निकल आई थीं।
सुधीर- उफ़फ्फ़ क्या यौवन है.. कभी सपने में भी मैंने ऐसे जिस्म को नहीं देखा था.. आज आँखों के सामने देख कर अपनी किस्मत पर यकीन ही नहीं हो रहा है।
डॉली- अभी तो देखा है.. बस जल्दी ही भोग भी लोगे.. तब क्या हाल होगा आपका?
सुधीर- बरसों पहले एक कच्ची कली को चोदा था.. उसके बाद कभी मौका नहीं मिला… आज तुम मेरी किस्मत बदलने आ गई हो।
डॉली कुछ नहीं बोली बस मुस्कुरा दी।
डॉली को नंगा करने के बाद सुधीर ने जल्दी से अपने कपड़े निकाल कर फेंक दिए और डॉली के होंठ चूसने लगा।
डॉली भी उसका साथ देने लगी।
होंठों का रस पीते-पीते सुधीर ने उसे बाँहों में उठा लिया और कमरे में ले गया।
वहाँ एक आलीशान बिस्तर था उस पर डॉली को लिटा कर वो भूखे बच्चे की तरह उसके चूचों पर टूट पड़ा और निप्पल चूसने लगा।
डॉली- आह्ह.. उफ़फ्फ़ सस्स.. आराम से आह्ह.. काटो मत.. आह्ह.. निशान पड़ जाएँगे आह्ह..।
सुधीर- अरे क्या करूँ.. उफ़फ्फ़ कंट्रोल करना मुश्किल है.. ऐसे मस्त मम्मे हैं कि बस मुँह हटाने का मन नहीं करता.. कितना रस है तेरे अनारों में..
डॉली- उफ़फ्फ़ सस्स आह्ह.. मेरी चूत में आह्ह.. इससे भी ज़्यादा रस है.. आह्ह.. उसको चूसो ना.. उफ्फ और आह्ह.. मुझे भी उफ्फ सस्स अपना लौड़ा चुसाओ.. बहुत मन हो रहा है।
सुधीर उसकी बात को समझ गया और 69 की स्थिति में आ गया।
अब दोनों बड़े मज़े से रस का मज़ा ले रहे थे। सुधीर जीभ चूत के अन्दर तक घुसा कर चूत को चाट रहा था और डॉली पूरा लौड़ा मुँह में लेकर होंठ भींच कर चूस रही थी।
लगभग दस मिनट तक ये चुसाई चलती रही.. सुधीर ने चूत को इतनी बुरी तरह से चूसना शुरू कर दिया कि डॉली लौड़ा चूसना भूल गई और सिसकने लगी।
डॉली- आआह्ह.. आह आपने ये क्या आह्ह.. कर दिया चूत जलने लगी है.. अब डाल दो.. बस आह्ह.. बर्दास्त नहीं हो रहा मुझसे…. प्लीज़ जल्दी घुसा दो।
सुधीर उसकी हालत को समझ गया और उसे सीधा लेटा कर उसके पैरों को मोड़ दिया.. लौड़े को छूट पर टिका कर हल्के से दबाने लगा.. लौड़ा चूत में घुसना शुरू हो गया।
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09-04-2017, 04:09 PM,
#25
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
डॉली- नहीं नहीं.. जाने दो… आपकी ट्यूब में कहा अब पेस्ट होगा.. अब तक तो सूख गया होगा..
सुधीर के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और वो डॉली के एकदम पास आकर खड़ा हो जाता है।
सुधीर- एक बात कहूँ.. अब तक तो मैं असली मलहम की ही बात कर रहा था.. मगर तुम कुछ और ही समझ रही थीं.. और अब तुम्हारी बातों से साफ पता चल गया कि तुम कहना क्या चाहती हो.. लो खुद देख लो कि इस ट्यूब से पेस्ट निकलता है या नहीं हा हा हा हा…
सुधीर ने निगाहें लौड़े पर डाल कर ये बात कही थी.. जिसको डॉली अच्छी तरह समझ गई।
डॉली- ओह.. क्या मतलब है आपका.. मैंने भी असली मलहम की ही बात की है.. कुछ नहीं…
सुधीर- बेटी.. ये बाल मैंने धूप में सफेद नहीं किए.. जवानी में बहुत सी लड़कियों की खुजली मिटाई है और आज भी मेरी ट्यूब में इतना पेस्ट है कि किसी को भी आराम से लगा सकता हूँ और गारन्टी के साथ उसकी खुजली मिटा सकता हूँ।
डॉली भी समझ गई कि अब बात छुपाने से कुछ नहीं होगा.. बूढ़ा बड़ा शातिर है.. सब समझ गया है। अब उसने मन ही मन पक्का निर्णय ले लिया कि अब तो इस बूढ़े को चैक करना ही पड़ेगा.. क्योंकि उसको ये यकीन था कि इस बूढ़े में दम तो नहीं है.. ये उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
डॉली- अच्छा ये बात है.. तब तो जरूर आजमा कर देखूँगी.. दिखाओ तो अपनी ट्यूब…
सुधीर- अब मैं क्या दिखाऊँ.. खुद ही देख लो..
डॉली- नहीं.. मैं नहीं देखूँगी.. अगर दिखानी है तो दिखाओ.. नहीं तो मैं जाती हूँ।
सुधीर समझ गया कि अब क्या करना है.. उसने पैन्ट खोली और नीचे सरका दी। अंडरवियर उसने पहनी नहीं थी तो बस सीधा प्रसारण शुरू हो गया.. उसका लौड़ा सोया हुआ.. कोई 3″ का होगा और मज़े की बात देखो झांटें एकदम साफ थीं.. शायद कल ही सेव की हुई होगीं।
डॉली- हा हा हा ये छोटा सा इसके दम पर खुजली मिटाओगे?
सुधीर- बेटी सोए हुए पर मत जाओ.. जरा इसे जगाओ.. उसके बाद देखो कि इसमें कितना दम है..
डॉली- अच्छा.. ये जागता भी है क्या इस उम्र में…
सुधीर- हाँ खुद देख लो.. अपने मुलायम हाथ तो लगाओ इसे…
डॉली ने लौड़े को सहलाना शुरू कर दिया.. सुधीर ने मज़े में आँखें बन्द कर लीं और बस दूसरी दुनिया में खो गया।
डॉली बड़े प्यार से लौड़े को सहलाने लगी और उसकी उम्मीद से बाहर वो धीरे-धीरे अकड़ना शुरू हो गया।
अभी कोई 5 मिनट ही हुए होंगे कि वो तन कर अपने पूरे शबाब पर आ गया।
डॉली तो बस देखती रह गई, वो करीब 7″ लम्बा होगा और मोटा भी अच्छा ख़ासा था.. लग ही नहीं रहा था कि किसी बूढ़े आदमी का लंड है।
एकदम तना हुआ फुंफकार मारता हुआ जवान लौड़ा लग रहा था और आप तो जानते ही हो तना हुआ लौड़ा डॉली की कमज़ोरी था..
उसको कहाँ बर्दाश्त हुआ.. वो झट से टोपी को मुँह में लेकर चूसने लगी।
अबकी बार चौंकने की बारी सुधीर की थी.. क्योंकि उसने सोचा ही नहीं था कि इतनी जल्दी ये हो जाएगा।
वो बस सोच ही रहा था कि इसको कहूँ एक बार मुँह में लो मज़ा आएगा.. मगर डॉली तो बिना कहे ही लौड़ा चूसने लगी।
अब तो सुधीर के वारे-न्यारे हो गए.. वो बस मज़े की दुनिया में खो गया।
सुधीर- आह्ह.. आह.. मज़ा आ रहा है.. तुम बहुत अच्छे से चूस रही हो.. उफ्फ क्या पतले होंठ हैं तुम्हारे.. आह्ह.. अब बस भी करो.. माल निकाल कर ही दम लोगी क्या.. आह्ह.. चूत की खुजली नहीं मिटवानी क्या उफ़फ्फ़…
डॉली ने लौड़ा मुँह से निकाल दिया और हाथ से सहलाने लगी।
डॉली- बस इतनी ही देर में माल आने वाला है.. मेरी खुजली क्या खाक मिटाओगे?
सुधीर- तू शक बहुत करती है.. एक बार मौका देकर तो देख.. सारी खुजली मिटा दूँगा.. अपने अनार तो दिखा.. उनका थोड़ा रस पी लूँगा तो और जोश आ जाएगा। अपनी चूत के दर्शन भी करा.. ताकि उसका रस चाट कर तुझे गर्म करूँ.. तेरी खुजली और बढ़ाऊँ.. उसके बाद मलहम लगाऊँगा।
डॉली- चलो.. अब यहाँ तक आ गई हूँ तो आपके लौड़े का कमाल देख कर ही जाऊँगी.. लो खुद ही निकाल दो मेरे कपड़े।
डॉली उसके सामने खड़ी हो गई और वो एक-एक करके उसके कपड़े निकालने लगा।
जैसे-जैसे डॉली का गोरा बदन उसकी आँखों के सामने आ रहा था.. वैसे-वैसे उसका लौड़ा झटके खा रहा था।
डॉली के मम्मों और चूत की फाँकें देख कर लौड़े से पानी की बूँदें निकल आई थीं।
सुधीर- उफ़फ्फ़ क्या यौवन है.. कभी सपने में भी मैंने ऐसे जिस्म को नहीं देखा था.. आज आँखों के सामने देख कर अपनी किस्मत पर यकीन ही नहीं हो रहा है।
डॉली- अभी तो देखा है.. बस जल्दी ही भोग भी लोगे.. तब क्या हाल होगा आपका?
सुधीर- बरसों पहले एक कच्ची कली को चोदा था.. उसके बाद कभी मौका नहीं मिला… आज तुम मेरी किस्मत बदलने आ गई हो।
डॉली कुछ नहीं बोली बस मुस्कुरा दी।
डॉली को नंगा करने के बाद सुधीर ने जल्दी से अपने कपड़े निकाल कर फेंक दिए और डॉली के होंठ चूसने लगा।
डॉली भी उसका साथ देने लगी।
होंठों का रस पीते-पीते सुधीर ने उसे बाँहों में उठा लिया और कमरे में ले गया।
वहाँ एक आलीशान बिस्तर था उस पर डॉली को लिटा कर वो भूखे बच्चे की तरह उसके चूचों पर टूट पड़ा और निप्पल चूसने लगा।
डॉली- आह्ह.. उफ़फ्फ़ सस्स.. आराम से आह्ह.. काटो मत.. आह्ह.. निशान पड़ जाएँगे आह्ह..।
सुधीर- अरे क्या करूँ.. उफ़फ्फ़ कंट्रोल करना मुश्किल है.. ऐसे मस्त मम्मे हैं कि बस मुँह हटाने का मन नहीं करता.. कितना रस है तेरे अनारों में..
डॉली- उफ़फ्फ़ सस्स आह्ह.. मेरी चूत में आह्ह.. इससे भी ज़्यादा रस है.. आह्ह.. उसको चूसो ना.. उफ्फ और आह्ह.. मुझे भी उफ्फ सस्स अपना लौड़ा चुसाओ.. बहुत मन हो रहा है।
सुधीर उसकी बात को समझ गया और 69 की स्थिति में आ गया।
अब दोनों बड़े मज़े से रस का मज़ा ले रहे थे। सुधीर जीभ चूत के अन्दर तक घुसा कर चूत को चाट रहा था और डॉली पूरा लौड़ा मुँह में लेकर होंठ भींच कर चूस रही थी।
लगभग दस मिनट तक ये चुसाई चलती रही.. सुधीर ने चूत को इतनी बुरी तरह से चूसना शुरू कर दिया कि डॉली लौड़ा चूसना भूल गई और सिसकने लगी।
डॉली- आआह्ह.. आह आपने ये क्या आह्ह.. कर दिया चूत जलने लगी है.. अब डाल दो.. बस आह्ह.. बर्दास्त नहीं हो रहा मुझसे…. प्लीज़ जल्दी घुसा दो।
सुधीर उसकी हालत को समझ गया और उसे सीधा लेटा कर उसके पैरों को मोड़ दिया.. लौड़े को छूट पर टिका कर हल्के से दबाने लगा.. लौड़ा चूत में घुसना शुरू हो गया।
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09-04-2017, 04:09 PM,
#26
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
डॉली- आह्ह.. उफ़फ्फ़ आपका लौड़ा मोटा है.. मज़ा आ गया.. ज़ोर से एक साथ पूरा घुसा दो ना आह्ह..

सुधीर ने लौड़ा पीछे किया और ज़ोर से एक झटका मारा.. पूरा लौड़ा जड़ तक चूत में समा गया।
डॉली- ओह्ह.. उफ़फ्फ़ चोदो आह्ह.. अब ज..ज़ोर से चोदो आह्ह.. मज़ा आ रहा है.. मेरी चूत की सारी खुजली मिटा दो.. आह्ह.. अपनी भी ख्वाहिस पूरी कर लो आह्ह.. चोदो..
सुधीर जोश में आ गया और रफ्तार से चोदने लगा.. एक कमसिन कली को चोदने के अहसास से ही उसकी नसों में उफान आ रहा था.. वो उम्र से ज़्यादा जोश दिखा रहा था.. लेकिन डॉली जैसी यौवना के आगे बुढ़ापा कहाँ तक रेस लगाता.. कुछ देर बाद वो थक गया और उसकी रफ्तार टूटने लगी।
डॉली- आह्ह.. आह क्या हुआ.. आह्ह.. रफ्तार से चोदो ना.. आह्ह.. प्लीज़ मज़ा आ रहा था.. आह्ह…
सुधीर चोदने के साथ-साथ उसके मम्मों को भी चूस रहा था। लौड़े की रफ्तार के साथ उसके मुँह की रफ्तार भी कम हो गई।
वो अब बिल्कुल झटके नहीं मार रहा था।
बस लौड़ा जड़ तक घुसा कर डॉली पर लेट गया। 
डॉली- हटो मेरे ऊपर से.. उफ़फ्फ़ सारा मज़ा खराब कर दिया.. छोड़ो ना आ प्लीज़ छोड़ो…
सुधीर ने लौड़ा चूत से निकाल लिया और बिस्तर पर ढेर हो गया।
सुधीर- आह्ह.. मेरी हिम्मत नहीं है अब… आजा तू ऊपर आजा.. कूद मेरे लौड़े पे आ..
डॉली ने बातों में समय खराब नहीं किया और झट से सुधीर के लौड़े पर बैठ गई और रफ्तार से कूदने लगी।
वो बहुत ज़्यादा उतेज़ित हो गई थी।
अब उसके बर्दाश्त के बाहर हो गया था.. और उसने इस अदा के साथ चुदना शुरू किया कि सुधीर ज़्यादा देर टिक ना सका और चरम पर पहुँच गया।
सुधीर- आह उहह.. ज़ोर से कूद आह्ह.. मेरा पानी आने वाला है.. आह…
डॉली- आहइ आहइ उईईइ कककक आह मेरा भी आह.. आने वाला है अयेए ईई…
दो मिनट बाद डॉली की चूत ने पानी का फव्वारा खोल दिया.. उसके साथ ही सुधीर भी आँखें बन्द करके झड़ने लगा.. मगर उसके लौड़े से बहुत कम पानी बाहर निकला और उसमें कोई रफ्तार भी नहीं थी।
डॉली- आ आह्ह.. मेरा हो गया उईइ आह्ह.. तुम भी जल्दी से पानी निकालो आह्ह..
सुधीर- उफ़फ्फ़ आह्ह.. मेरा निकल गया आह्ह.. अब उतर जाओ आह्ह..
डॉली नीचे उतर कर उसके लौड़े को देखने लगी जो बिजली की तेज़ी से छोटा होने लगा था और कुछ ही देर में वो सो गया।
डॉली- आह मज़ा आ गया.. लेकिन आपका पानी बहुत कम निकला.. मुझे पता भी नहीं चला.. कब निकल गया।
सुधीर- अरे तू क्या जाने.. इस उम्र में तेरी जैसी कमसिन कली को चोद लिया.. ये ही बहुत बड़ी बात है.. वरना इस उम्र में तो कोई 40 साल की औरत भी नहीं मिलती.. इतना पानी भी कहाँ से निकल आया.. पता नहीं।
डॉली- हाँ ये बात तो है.. मैंने तो सोचा था आपका खड़ा भी नहीं होगा मगर आपने तो मुझे संतुष्ट कर दिया.. पावर तो है आपके लौड़े में…
सुधीर- मैंने तो सोचा भी नहीं था.. तू ऐसी होगी.. एकदम पक्की रंडी जैसे चुदी है तू.. मगर मैं जानता हूँ.. तू रंडी नहीं है.. ज़्यादा चुदी हुई भी नहीं है मगर वो कौन ख़ुशनसीब है जिसने तेरी सील तोड़ी?
डॉली- है बस कोई भी.. आपको उससे क्या? आपने तो मज़ा ले लिया ना.. अब मुझे जाना होगा वरना मम्मी गुस्सा होगी।
सुधीर- एक बात कहूँ.. कभी भी मेरी किसी भी तरह की हेल्प की जरूरत हो, तो मुझे बोल देना.. मैं हमेशा तैयार रहूँगा और हो सके तो कभी-कभार इस बूढ़े के लौड़े का भी ख्याल रख लेना.. माना कोई तगड़ा लौड़ा तुम्हें मज़े देता होगा.. मगर मेरे लौड़े से भी कभी शिकायत का मौका नहीं दूँगा।
डॉली आगे बढ़ी और सुधीर को एक चुम्बन किया।
डॉली- आप चिंता मत करो.. जल्दी ही आपको दोबारा मज़ा देने आऊँगी और कभी कुछ काम होगा तो बता दूँगी.. ओके बाय.. मॉम गुस्सा करेगी।
सुधीर के चेहरे पर ख़ुशी के भाव आ गए.. वो खड़ा होकर कपड़े पहनने लगा। इधर डॉली ने भी कपड़े पहन लिए थे।
डॉली- अच्छा एक बात बताओ आप मुझे मलहम लगाने लाए थे.. उस समय आपके मन में क्या था? सच बताना।
सुधीर- अरे मैं झूठ क्यों बोलूँगा… सुनो उस वक्त मैंने सोचा कि तुम नादान लड़की हो इसलिए ऐसे बीच रास्ते में चूत खुजा रही हो.. मैंने मलहम की बात इसलिए कही कि अगर तुम मान जाओ तो मलहम लगाने के बहाने कम से कम तुम्हारी चूत को छूने का मौका मिल जाएगा और किसी तरह तुम्हें गर्म करके चोदने का ख्याल भी मन में था.. मगर तुम मेरी उम्मीद से ज़्यादा मस्त निकलीं।
डॉली- ओह्ह इतने गंदे ख्याल थे.. मन में.. चलो कोई बात नहीं.. अबकी बार आऊँगी तब इस बात का जवाब दूँगी.. अब जाती हूँ बाय..
सुधीर- अरे रूको.. मैं तुम्हें घर तक छोड़ आता हूँ।
डॉली- नहीं.. इसकी कोई जरूरत नहीं है.. आप यहीं रहो.. ओके बाय..
डॉली वहाँ से निकल गई और अपने घर की और बढ़ने लगी।
इधर ललिता रोटी बना रही थी और चेतन किसी काम में बिज़ी था.. तभी फ़ोन की घंटी बजी ललिता बाहर आई और फ़ोन उठाया।
सामने से डॉली की माँ थी।
ललिता- नमस्ते आंटी.. कैसी हो आप.. अब आपके भाई की तबियत कैसी है? आपके पास मेरे घर का नम्बर कहाँ से आया?
डॉली की माँ- हाँ अब ठीक है.. नम्बर तो तुमने फ़ोन किया था ना.. मेरे फ़ोन में कॉलर आईडी है.. उस पर नम्बर आ गया था और मैंने लिख लिया था.. तुम कैसी हो?
ललिता- अच्छा ये बात है.. हाँ मैं ठीक हूँ.. कैसे फ़ोन किया आपने?
डॉली की माँ- बेटी वो डॉली को भेज दो.. मैंने सोचा वो आ जाएगी.. मगर अब तक नहीं आई.. मैंने उसे कहा भी था कि हम शाम तक आ जाएँगे।
ललिता के चेहरे का रंग उड़ गया था क्योंकि डॉली को गए एक घंटा होने को आया था जबकि रास्ता इतना लंबा नहीं था.. वो कुछ बोलना चाहती थी मगर उसकी आवाज़ गले में अटक गई।
डॉली की माँ- अरे लो आ गई.. अच्छा बेटी मैंने तुमको ऐसे ही परेशान किया.. अच्छा रखती हूँ।
डॉली भाग कर अपनी माँ से चिपक गई और प्यार करने लगी। उसकी माँ ने भी उसका माथा चूमा और बस इधर-उधर की बातें करने लगी।
इधर ललिता सकते में आ गई कि आख़िर डॉली इतनी देर तक कहाँ थी।
चेतन- अरे जानेमन कहाँ खो गईं जल्दी से रोटी बनाओ, भूख लग रही है.. उसके बाद तुम्हारी ठुकाई भी करनी है।
ललिता- अरे कर लेना मेरे राजा.. मगर ये डॉली इतनी देर कहाँ थी।
चेतन के पूछने पर ललिता ने सारी बात बता दी।
चेतन- अरे कोई फ्रेंड रास्ते में मिल गई होगी.. उसके साथ कहीं चली गई होगी या बाहर खड़े-खड़े वक्त निकल गया होगा.. तू ज़्यादा सोच मत.. कल उससे पूछ लेना.. चल अब खाना बना…
ललिता उसी सोच में रसोई में चली गई। खाना तैयार करके वो कमरे में ले गई और दोनों ने बड़े प्यार से एक-दूसरे को खाना खिलाना शुरू कर दिया।
दोस्तों ये तो पति-पत्नी हैं इनका प्यार तो रोज का है.. चुदाई भी रोज होती है.. चलो आपको आगे ले चलती हूँ।
रात में चेतन ने 3 बार ललिता की चूत और गाण्ड का मज़ा लिया और दोनों नंगे ही सो गए।
सुधीर से चुदवा कर डॉली को रात अच्छी नींद आई सुबह बड़ी मुश्किल से उसकी मॉम ने उसे उठा कर स्कूल भेजा। स्कूल के गेट पर आज सिर्फ़ मैडी ही खड़ा हुआ था जैसे ही डॉली आई.. उसने हल्की मुस्कान दी.. बदले में डॉली भी मुस्कुरा दी।
मैडी- डॉली तुमने कोई जवाब नहीं दिया.. सोमवार को आओगी ना?
डॉली- आ तो जाऊँगी.. मगर तुम्हारे दोस्त मुझसे कोई बदतमीज़ी ना करें इसकी गारन्टी दो पहले…
मैडी- अपनी माँ की कसम ख़ाता हूँ कोई कुछ नहीं कहेगा.. बस तुम आ जाना प्लीज़…
डॉली- ओके पक्का आ जाऊँगी.. आज गुरुवार है ना.. अभी तो बहुत दिन बाकी हैं ओके बाय…
डॉली गाण्ड को मटकाती हुई स्कूल में चली गई मैडी वहीं खड़ा बस उसकी गाण्ड को देखता रहा।
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09-04-2017, 04:10 PM,
#27
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
तभी एक तरफ छुप कर खड़े खेमराज और रिंकू भी उसके पास आ गए।
रिंकू- मान गए यार तूने साली को मना ही लिया.. अब आएगा मज़ा.. वैसे तूने सोचा क्या है.. उसको चुदने के लिए कैसे पटाएगा?
खेमराज- साली कुतिया क्या बोल रही थी कि तुम्हारे दोस्तों को कुछ बदतमीज़ी नहीं करना चाहिए.. एक बार आ तो सही साली.. बड़ी शराफत से तुझे चोदेंगे हा हा हा हा…
मैडी- चुप करो सालों.. कोई सुन लेगा.. अब सोमवार तक उसके आस-पास भी नहीं जाना.. नहीं तो बना बनाया काम बिगड़ जाएगा।
रिंकू- यार कहीं ऐसा ना हो तू अकेला मज़ा लूट ले.. और हम लौड़ा हाथ में लिए हिलाते और खड़े रहें.. देख एक लड़की के लिए दोस्ती मत तोड़ देना..
मैडी- साले इतना ही भरोसा है क्या मुझ पे.. तुम दोनों के बिना मैं कुछ नहीं करूँगा ओके.. अब चलो अन्दर.. वक्त हो गया…
क्लास में सब सामान्य चल रहा था, जब चेतन आया.. तब डॉली ने एक हल्की मुसकान दी, मगर चेतन बस देख कर अनजान बन गया और किताब लेकर पढ़ाने लगा।
चेतन- अच्छा बच्चों इम्तिहान के लिए जरूरी सवालों पर निशान लगा लो.. जो याद करने हैं।
कुछ लड़के और लड़कियां एक-दूसरे से धीरे-धीरे कुछ बोल रहे थे और ध्यान नहीं रहे थे। चेतन का गुस्सा तेज था बच्चे उससे डरते थे.. मगर आज पता नहीं क्यों सब ध्यान नहीं दे रहे थे।
चेतन ने जब ये देखा तो गुस्सा हो गया और ज़ोर से चिल्लाया- क्या बकवास लगा रखी है.. चुपचाप निशान लगाओ..
सब चुप हो गए.. चेतन काफ़ी देर तक सवालों के निशान लगवाता रहा इस दौरान वो बार-बार डॉली को देख रहा था और डॉली भी बहुत कामुक मुस्कान दे रही थी।
चेतन को लगा शायद डॉली कुछ कहना चाहती है क्योंकि वो बार-बार ऊँगली से कुछ इशारा कर रही थी.. मगर वो समझ नहीं पा रहा था।
चेतन- डॉली खड़ी हो जाओ।
डॉली खड़ी हो गई और चेतन को देखने लगी।
चेतन- जाओ स्टाफ-रूम में.. जहाँ एक फाइल रखी है.. उस अलमारी में उसमें एक पेपर रखा है.. वो लेकर आओ।
डॉली ‘ओके सर’ कह कर वहाँ से निकल गई..
उसको गए हुए कोई एक मिनट भी नहीं हुआ था कि चेतन भी निकलने को हो गया।
चेतन- बच्चों शोर मत करना.. मैं अभी आता हूँ और डॉली वो पेपर ले आए तो उससे कहना कि बोर्ड पर उसमें लिखे सवाल लिख दे और सब कॉपी कर लेना.. वो कुछ ऐसे सवाल हैं जो किताब में नहीं हैं मैंने बनाए हैं। अक्सर इम्तिहान में सवालों को घुमा कर देते हैं उत्तर किताब में ही होता है मगर बच्चे समझ नहीं पाते हैं.. तो ध्यान से सब लिख लेना।
चेतन क्लास-रूम से बाहर निकल गया मगर फ़ौरन वापस अन्दर आया शायद उसे कुछ याद आ गया।
चेतन- प्रिया.. तुम क्लास की मॉनीटर हो.. ध्यान रखना पीछे से कोई शोर ना हो ओके…
प्रिया- ओके सर..
इतना बोलकर चेतन फ़ौरन स्टाफ-रूम की तरफ गया।
डॉली वो पेपर लिए वहीं खड़ी उसका इन्तजार कर रही थी।
चेतन- हाँ अब कहो.. क्या इशारा कर रही थीं और सब के सामने ऐसे मुस्कुराया मत करो.. अगर किसी को शक हो गया तो?
डॉली- सर किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.. आप बेफिकर रहो.. आज सुबह आते समय दीदी को चोद कर आए हो क्या…
चेतन- नहीं तो.. रात को मस्त ठुकाई की थी.. सुबह कहाँ वक्त मिलता है.. मगर तुम क्यों पूछ रही हो?
डॉली- आपकी पैन्ट की ज़िप खुली हुई है.. क्लास में सब देख रहे थे ये तो अच्छा है कि अन्दर चड्डी है.. वरना आपका लौड़ा बाहर आ जाता हा हा हा हा…
चेतन- अरे धीरे.. कोई सुन लेगा.. ये कैसे खुली रह गई.. बच्चे क्या सोच रहे होंगे.. अच्छा अब तुम जाओ वरना किसी को शक हो जाएगा।
डॉली- मेरे राजा जी एक बार लण्ड के दर्शन करवाओ ना.. बड़ा मन मचल रहा है।

चेतन- तू पक्का मरवाएगी.. शाम को जितना चाहे देख लेना.. अभी जा यहाँ से…
डॉली जाते-जाते लौड़े को सहला कर चली गई।
चेतन डर सा गया अगर कोई आ जाता तो क्या होता…
डॉली के जाने के बाद चेतन फाइल में कुछ देखने लगा… उधर डॉली क्लास में गई तब प्रिया खड़ी हुई और चेतन की कही बात उसको बताई वो बोर्ड पर सवाल लिखने लगी।
काफ़ी देर तक जब चेतन नहीं आया तो क्लास में शोर होने लगा.. सवाल भी सबने लिख लिए थे।
तभी वहाँ चेतन आ गया सब खामोश हो गए और सब की नज़र उनकी ज़िप पर गई जो अब बन्द थी।
कुछ बच्चों ने मुसकान देकर चेतन को अहसास करा दिया कि वो क्यों हँस रहे थे।
चेतन- प्रिया खड़ी हो जाओ.. कब से देख रहा हू तुम दाँत निकाल रही हो.. क्या हुआ तुम क्लास की मॉनीटर हो… अगर तुम ऐसा विहेव करोगी तो बाकी पर क्या असर पड़ेगा।
प्रिया- सर सॉरी…
चेतन- रिंकू तुम मार खाओगे.. क्या ख़ुसुर-फुसुर कर रहे हो?
रिंकू- कुछ नहीं सर सॉरी…
चेतन- हाँ मैं जानता हूँ तुम सब क्यों हँस रहे थे.. यार मैं भी इंसान हूँजल्दबाज़ी में ग़लती हो गई.. अब इसका ये मतलब थोड़े ही है कि तुम मेरा मजाक उड़ाने लगो।
चेतन की बात सुनकर सब बच्चे समझ गए कि सर क्या कहना चाहते हैं।
सब ने एक साथ ‘सॉरी’ कहा.. तभी दूसरे विषय का घंटा बज गया और चेतन वहाँ से चला गया।
दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि ये मैं क्या खिचड़ी पका रही हूँ मगर माफ़ करना.. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है।
यह जो कुछ मैंने लिखा इसका आगे की कहानी से गहरा सम्बन्ध है.. इसलिए आज का ये वाकया बताना जरूरी था ओके..
अब आगे आनन्द लीजिए।
बाकी का दिन सामान्य ही गुजरा.. छुट्टी के बाद डॉली जाने लगी.. तब प्रिया ने उसको पीछे से आवाज़ दी।
प्रिया- डॉली रूको.. मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।
दोस्तो, यह है प्रिया इसकी उम्र 19 वर्ष की है.. इसका रंग साफ नहीं है.. थोड़ी साँवली है.. फिगर 30-26-30 का है मगर लड़के इसे भाव नहीं देते हैं और ये भी ज़्यादा किसी से बात नहीं करती है… बस अपनी धुन में रहती है।
हाँ एक बात और यह रिंकू के चाचा की लड़की है यानी रिंकू की चचेरी बहन है।
एक वजह यह भी है कि स्कूल में कोई लड़का इसके पास नहीं आता है।
आप तो जानते ही हो.. रिंकू और उसके दोस्त एक नम्बर के आवारा हैं और किसकी मजाल जो उनकी बहन को पटाने की सोचे..
डॉली- क्या हुआ ऐसे भाग कर क्यों आ रही है.. क्या बात करनी है।
प्रिया- यार बहुत ज़रूरी बात है.. इसी लिए भाग कर आई हूँ।
डॉली- अच्छा चल बता.. क्या बात है?
प्रिया ने बात बताना शुरू किया तो डॉली के चेहरे के भाव बदलने लगे चिंता की लकीरें उसके माथे पर साफ दिख रही थीं।
डॉली- ओह माय गॉड.. तुम सच कह रही हो.. थैंक्स यार तुमने ये बात मुझे बता दी.. अच्छा एक बात सुनो किसी को भी ये बात मत बताना ओके.. मैं अपने तरीके से कुछ सोचूँगी।
प्रिया- अरे नहीं यार मैं पागल हूँ क्या…
डॉली- थैंक्स यार…
प्रिया- यार प्लीज़.. मेरा एक काम कर दोगी.. प्लीज़ प्लीज़ ना मत कहना…
डॉली- ओके कहो.. अगर मेरे बस में होगा तो जरूर कर दूँगी…
प्रिया फिर बोलने लगी और डॉली बस आँखें फाड़े उसको देखने लगी।
आप ऐसा समझो कि डॉली को उसकी बात सुन कर बहुत बड़ा झटका सा लगा।
डॉली- तू पागल हो गई है क्या.. ऐसा नहीं हो सकता.. तूने ये सब सोचा भी कैसे.. मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं करूँगी ओके…
प्रिया- देख सोच ले.. तूने पहले हाँ कही है.. अब अगर तू ना करेगी तोमैं कुछ कर बैठूंगी.. बाद में तुमको पछताना पड़ेगा।
डॉली- यह क्या बकवास है मुझे क्यों पछताना पड़ेगा हाँ.. और तूने यह सोच भी कैसे लिया.. मेरी तो समझ के बाहर है।
प्रिया ने फिर एक बात उसको कही और इस बार तो डॉली ने अपने हाथ मुँह पर रख लिए..
आज प्रिया उसको एक के बाद एक झटके दे रही थी।
डॉली का गला सूख गया.. बड़ी मुश्किल से उसने बोला।
डॉली- यार मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा तुझे ये कैसे पता चला…. चल इस बात को गोली मार.. देख प्रिया तू अच्छी तरह सोच समझ कर देख ले उसके बाद भी अगर तुमको लगता है यह सही है तो ओके मैं तुम्हारा ये काम कर दूँगी.. मगर ये बात राज़ ही रखना।
प्रिया- मैंने अच्छी तरह सोच कर ही तुमको कहा है।
डॉली- नहीं तू कल मुझे फाइनल बता देना.. उसके बाद समझूंगी.. ओके..
प्रिया- चल ठीक है.. कल बता दूँगी.. अब तू जा और प्लीज़ तू भी किसी को बताना मत…
डॉली- तू पागल है क्या.. ये बात किसी को बताने की है क्या चल बाय… कल मिलते हैं।
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09-04-2017, 04:10 PM,
#28
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
लो दोस्तो, चक्कर आने लगा ना.. कि यह क्या उलझन हो गई..
आख़िर यह प्रिया कहाँ से आ गई और ऐसी क्या बात की उसने डॉली से..
अब ये सब जानना है तो कहानी को ध्यान से पढ़ते रहना पड़ेगा ना..
क्योंकि आप तो मेरा स्टाइल जानते ही हो तो मजा लीजिए दोस्तो, वादा करती हूँ आपका मज़ा बढ़ता ही रहेगा।
चलो अब कहानी पर वापस आती हूँ।
डॉली वहाँ से सीधी घर चली जाती है और खाने के बाद पढ़ाई में लग जाती है। एक घंटा पढ़ाई करने के बाद उसको नींद आ जाती है और वो गहरी नींद में सो जाती है।
शाम को डॉली की मॉम उसे जगाती है तब उसे ख्याल आता है कि चेतन सर इन्तजार कर रहे होंगे.. वो झट से तैयार होती है और घर से निकल जाती है। रास्ते में उसे सुधीर जाता हुआ दिखाई देता है.. वो पीछे से आवाज़ लगती है।
सुधीर- अरे आओ आओ.. डॉली में कब से यहाँ खड़ा तुम्हारी ही राह देख रहा था.. मगर आज इधर से आने की बजाय दूसरी तरफ से कैसे आ रही हो ये बात समझ नहीं आई।
डॉली- मैं रोज पढ़ने जाती हूँ.. आज लेट हो गई तो घर से आ रही हूँ.. समझे आप..
सुधीर- अच्छा अच्छा.. ये बात है.. चलो आज मलहम नहीं लगवाना क्या?
डॉली- नहीं आज नहीं.. इम्तिहान करीब हैं.. तैयारी करनी है.. फिर कभी लगवाऊँगी.. अच्छा आपसे एक काम था…
सुधीर- हाँ बोलो.. इसमें पूछने की क्या बात है.. तुम तो बस हुकुम करो..
डॉली ने सुधीर को बताया कि उसको क्या काम है.. सुधीर थोड़ा चौंका मगर जब डॉली ने पूरी बात समझाई.. तब सुधीर सामान्य हो गया।
सुधीर- अरे ये तो बहुत छोटा सा काम है.. कल ही कर दूँगा और कुछ सेवा करवानी है तो बताओ… 
डॉली- नहीं अंकल बस ये काम कर दो जल्दी.. फिर आपके पास मलहम लगवाने आऊँगी ओके.. अब मुझे जाने दो.. पहले ही देर हो गई है।
सुधीर- अरे कितनी बार समझाऊँ.. अंकल नहीं.. सुधीर बोलो.. तुम्हारे मुँह से मेरा नाम ज़्यादा अच्छा लगेगा.. ओके.. अब जाओ.. कल इसी वक्त मिलना.. समझो तुम्हारा काम हो गया।
डॉली वहाँ से सीधी ललिता के घर चली जाती है वो अभी गेट पर ही पहुँची कि उसको ललिता की आवाज़ सुनाई दी।
ललिता- चेतन.. आज डॉली नहीं आई क्या बात है?
चेतन- हाँ अब तक आ तो जाना चाहिए था.. पता नहीं क्यों नहीं आई स्कूल में तो बड़ी उतावली हो रही थी लौड़े के लिए.. पर अब तक नहीं आई।
चेतन ने स्कूल से आते ही ललिता को सारी बात बता दी थी।
ललिता- नादान है इसलिए ऐसा किया उसने.. मैं फ़ोन करके पूछती हूँ।
तबियत तो ठीक है ना उसकी..
डॉली- हैलो.. तुमने पुकारा और मैं चली आई.. चूत चिकनी करके आई.. हा हा हा हा…
ललिता- बदमाश चुप कर खड़ी हमारी बातें सुन रही थी और गाने का मतलब बदल दिया तूने हा हा हा…
चेतन- मेरी जान इम्तिहान की जरा भी फिकर नहीं है क्या.. जो इतना देरी से आई.. अब कब पढ़ोगी और कब चुदोगी।
ललिता- आज तो पढ़ाई और चुदाई एक साथ चलने दो।
चेतन- हाँ यह आइडिया अच्छा है.. चल आजा कमरे में… जल्दी से कपड़े निकाल स्कूल में बहुत परेशान किया तूने.. आज ऐसे झटके मारूँगा कि तेरी सारी मस्ती निकल जाएगी।
ललिता- आप दोनों पढ़ाई और चुदाई का मज़ा लो.. मुझे तो खाना बनाना है..
डॉली- अरे ये क्या दीदी आप भी साथ में रहो ना… ज़्यादा मज़ा आएगा।
ललिता- अरे नहीं रात को ही चेतन ने बहुत ठुकाई की है और वैसे भी इतना वक्त कहाँ कि हम तीनों साथ में मस्ती कर सकें.. तुम मज़ा लो रविवार को सुबह जल्दी यहाँ आ जाना तब पूरा दिन खूब मज़ा करेंगे।
डॉली- ओके दीदी यह सही रहेगा.. आप जाओ खाना बनाओ।
ललिता के जाते ही डॉली कपड़े निकालने में लग गई।
चेतन- अरे वाह.. इतनी रफ्तार से.. लगता है आज चूत में बड़ी खुजली हो रही है.. चल निकाल.. मैं भी निकालता हूँ।
डॉली- आपका लौड़ा है ही ऐसा की मन ही नहीं भरता और आज तो आपसे पढ़ते हुए चुदवाऊँगी.. नया फन हो जाएगा। 
दोनों नंगे हो जाते हैं. चेतन डॉली को बिस्तर पर लिटा कर उसके मम्मों को चूसने लगता है और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगता है।
डॉली- आह्ह.. ऑउच.. आज क्या हो गया आपको.. इतनी ज़ोर से क्यों दबा रहे हो आह्ह..
चेतन- मेरी जान तेरे अनारों को दबाऊँगा.. तभी तो ये आम बनेंगे ना.. उफ्फ.. कितनी बार दबा चुका हूँ.. साले अब तक वैसे के वैसे ही कड़क हैं.। 
डॉली- आह.. आह्ह.. सर मुझे भी लौड़ा चूसना है.. आह.. साइड बदलो ना.. आह्ह.. प्लीज़ उईईइ।
चेतन- अभी नहीं.. जब तेरी चूत चाटूँगा.. तब चूस लेना, अभी तो तेरे चूचे दबाने दे.. आज इनको बड़ा करके ही दम लूँगा।
डॉली- आह्ह.. आह.. आप पर ये कैसा भूत सवार हो गया आह.. मेरी चूत को बड़ा करो ना.. आह्ह.. दीदी क्या बोलती हैं उईइ आईईइ भोसड़ी बना दो.. आह मेरी चूत की.. मगर आह मम्मों पर रहम खाओ…

चेतन- साली स्कूल में बड़ा मन मचल रहा था ना तेरा.. पूरी रंडी वाली हरकतें कर रही थी.. आज तेरा सारा रंडीपना उतार दूँगा।
दस मिनट तक चेतन चूचों को मसलता रहा.. उसका लौड़ा तन कर एकदम कड़क हो गया था और डॉली की चूत भी गीली हो गई थी।
डॉली- आह्ह.. अब तो चूसने दो आह्ह.. आपका लौड़ा भी आह्ह.. कैसे मेरी टाँगों में चुभ रहा है।
चेतन- चल साली आजा.. अब मेरी ऊपर आकर अपनी चूत का स्वाद लेने दे.. तू आराम से लौड़ा चूस।
दोनों 69 कि स्थिति में आ गए, डॉली बड़े प्यार से लौड़ा चूसने लगी थोड़ी देर बाद वो दाँतों से लौड़े को दबाने लगी।
चेतन- आआ.. साली.. ये क्या कर रही है.. लौड़ा काटने का विचार है क्या? दर्द होता है।
डॉली- हा हा हा क्यों मेरे मम्मों को दबाया था.. तब नहीं सोचा कि मुझे भी दर्द हो रहा होगा।
चेतन- अच्छा ये बात है.. बदला ले रही है.. चल तू अबकी बार काट.. देख में तेरी चूत को कैसे खा जाता हूँ।
डॉली- नहीं नहीं.. प्लीज़ चूत पर मत काटना.. बहुत दर्द होगा। मैं कुछ नहीं करूँगी।
चेतन- अब आई ना लाइन पे… चल चूस मेरी जान.. मुझे भी चूत रस का मज़ा लेने दे।
काफ़ी देर तक ये चटम-चटाई चलती रही.. उसके बाद चेतन ने डॉली से कहा कि जो सवाल मैंने बताए थे उनमें से जो याद हो.. उसका उत्तर बताओ मैं लौड़ा चूत में डाल कर तुझे चोदता हूँ ओके…
डॉली- हाँ मेरे राजा जी.. ये आइडिया अच्छा है.. आप सुन भी लोगे और चोद भी लोगे.. मज़ा आएगा।
चेतन ने डॉली की टाँगें कंधे पर रखी और ‘घप्प’ से पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया।
डॉली- आईईइ मर गई रे आह… चेतन- आह.. नहीं सवाल का जवाब दो.. उहह उहह उहह.. वो दिल वाला ओके.. पूरी क्रिया बोलो…
डॉली- आह्ह.. ओके आह्ह.. सर इंसान के आह्ह.. जिस्म में.. आह्ह.. चोदो आह्ह.. दिल का आह्ह.. बड़ा महत्वपूर्ण आह्ह.. मज़ा आ गया कार्य होता है.. आह ऐसे ही आह्ह.. रफ्तार से लौड़ा अन्दर-बाहर करो आह्ह..
चेतन- वेरी गुड.. अच्छा बोल रही हो उह्ह ले उहह.. आगे बता।
पंद्रह मिनट तक चेतन लौड़े को अन्दर-बाहर करता रहा.. तब तक डॉली ने चुदाई के साथ-साथ तीन सवालों के जवाब बता दिए थे।
डॉली- आह्ह.. मैं गई.. आह पैर दुखने लगे हैं आह मेरा पानी आ रहा है आह्ह.. फास्ट फास्ट आह…
चेतन ने उसके पैरों को कंधे से उतार कर मोड़ दिया और पूरी ताक़त से चोदने लगा.. वो भी चरम पर आ गया था।
दो मिनट बाद लौड़े से पिचकारी निकली और चूत की दीवार से जा टकराई.. डॉली भी गर्म वीर्य के अहसास से झड़ने लगी।
काफ़ी देर तक चेतन उस पर ऐसे ही पड़ा रहा। उसके बाद उठकर बाथरूम चला गया।
डॉली अब भी वैसे ही पड़ी छत को देख रही थी।
चेतन- अरे उठो.. जाओ बाथरूम में जाकर चूत साफ कर लो और कपड़े पहन लो.. पढ़ाई नहीं करनी क्या.. अब बहुत काम हैं। 
डॉली- हाँ मेरे राजा जी.. पढ़ना भी जरूरी है.. नहीं तो एक बार और चुदवा लेती।
चेतन- तू एकदम पक्की चुदक्कड़ बन गई है.. अब तुझे एक बार से कहाँ सबर आएगा.. रविवार को पूरा दिन चोदूँगा.. अभी पढ़ना जरूरी है।
डॉली उठ कर बाथरूम चली जाती है उसके बाद पढ़ाई चालू।
एक घंटा पढ़ने के बाद डॉली घर चली जाती है।
रात का खाना खाकर वो अपने कमरे में बैठी हुई कुछ सोच रही थी। डॉली को प्रिया की कही बात दिमाग़ में घूमने लगी वो अपने आप से बातें करने लगी।
डॉली- क्या ऐसा हो सकता है प्रिया के मन में ये बात आई कैसे.. छी: मुझे तो सोच कर ही घिन आ रही है।
ओह्ह.. दोस्तो, सॉरी आपका दिमाग़ घुमाने के लिए.. आप सोच रहे होंगे आख़िर ऐसी क्या बात कही प्रिया ने जो डॉली इतना सोच रही है।
चलो आपको ज़्यादा परेशान नहीं करूँगी… सुबह क्या हुआ.. वो बता देती हूँ इसके लिए कहानी को वापस थोड़ा पीछे ले जाना होगा तो चलो मेरे साथ।
डॉली- क्या हुआ ऐसे भाग कर क्यों आ रही है? क्या बात करनी है?
प्रिया- यार बहुत ज़रूरी बात है इसी लिए भाग कर आई हूँ।
डॉली- अच्छा चल बता क्या बात है?
प्रिया- यार जब तू स्कूल आई थी तब मैडी से बात करने के बाद जब अन्दर गई.. तब खेमराज और रिंकू भी वहाँ आ गए।
प्रिया ने उनके बीच हुई बात डॉली को बताई.. डॉली के चेहरे के भाव बदलने लगे चिंता की लकीरें उसके माथे पे साफ दिख रही थीं।
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09-04-2017, 04:10 PM,
#29
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
डॉली- ओह माय गॉड.. तुम सच कह रही हो.. थैंक्स यार तुमने ये बात मुझे बता दी.. अच्छा एक बात सुनो किसी को भी ये बात मत बताना ओके.. मैं अपने तरीके से कुछ सोचूँगी।
प्रिया- अरे नहीं यार मैं पागल हूँ क्या?
डॉली- थैंक्स यार।
प्रिया- यार प्लीज़.. मेरा एक काम कर दोगी.. प्लीज़ प्लीज़ ना मत कहना।
डॉली- ओके कहो.. अगर मेरे बस में होगा तो जरूर कर दूँगी।
प्रिया- देख यार तू तो जानती है ना स्कूल में मुझे कोई भाव नहीं देता और वैसे भी मेरे मन में बस रिंकू बसा हुआ है.. किसी और का ख्याल मेरे दिमाग़ में आता ही नहीं मगर तू जानती है वो मेरा दूर का चचेरा भाई है। अब सुन वो तुम्हें चोदना चाहता है और मैं उससे चुदना चाहती हूँ.. बस तू कुछ भी जुगाड़ करके मुझे रिंकू से चुदवाने में मदद कर दे।
प्रिया बोलती रही और डॉली बस आँखें फाड़े उसको देखने लगी। आप ऐसा समझो कि डॉली को उसकी बात सुन कर बहुत बड़ा झटका सा लगा।
डॉली- तू पागल हो गई है क्या? ऐसा नहीं हो सकता.. तूने ये सब सोचा भी कैसे? मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं करूँगी ओके…
प्रिया- देख सोच ले तूने पहले ‘हाँ’ कही है अब अगर तू ना करेगी तो मैं कुछ कर बैठूँगी.. बाद में तुमको पछताना पड़ेगा…
डॉली- ये क्या बकवास है.. मुझे क्यों पछताना पड़ेगा हाँ.. और तूने ये सोच भी कैसे लिया.. मेरी तो समझ के ही बाहर है।
प्रिया- अच्छा तू चेतन सर से चुदे वो ठीक और मैं गलत.. ना ना ज़्यादा सोच मत.. मैं बताती हूँ.. जब तू पेपर लेने गई और काफ़ी देर तक नहीं आई.. मैं तुमको बुलाने वहाँ आई थी.. मगर सर को देख कर मैं एक तरफ छुप गई थी और तब तुम लोगों की बात मैंने सुनी हैं। अब जाहिर सी बात है इतना तो ज्ञान है मुझे.. कि बिना चुदे तो तू ऐसी बात सर से करेगी नहीं…
डॉली ने अपने हाथ मुँह पर रख लिए.. आज प्रिया उसको एक के बाद एक झटके दे रही थी।
डॉली का गला सूख गया… बड़ी मुश्किल से उसने बोला।
डॉली- यार मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा.. चल इस बात को गोली मार.. देख प्रिया तू अच्छी तरह सोच समझ कर देख ले.. उसके बाद भी अगर तुमको लगता है कि ये सही है तो ओके.. मैं तुम्हारा ये काम कर दूँगी.. मगर ये बात राज़ ही रखना।
प्रिया- मैंने अच्छी तरह सोच कर ही तुमको कहा है।
डॉली- नहीं.. तू कल मुझे फाइनल बता देना.. उसके बाद समझूंगी… ओके..
प्रिया- चल ठीक है.. कल बता दूँगी अब तू जा और प्लीज़ तू भी किसी को बताना मत…
डॉली- तू पागल है क्या.. ये बात किसी को बताने की है क्या.. चल बाय कल मिलते हैं।
तो दोस्तों अब आपको सारी बात समझ में आ गई होगी.. सॉरी मैंने पिछले डायलोग दोबारा यहाँ लिखे मगर ऐसे आपको समझ नहीं आता.. चलो अब आगे की कहानी का मजा लीजिए।
डॉली सोचते-सोचते अचानक से उठी उसे कुछ याद आया और उसने एक छोटी डायरी देखना शुरू की.. थोड़ी देर बाद उसने एक नम्बर को गौर से देखा और उस पर फ़ोन लगाया।
फ़ोन की घन्टी बजने लगी.. थोड़ी देर बाद किसी ने फ़ोन उठाया।
डॉली- हैलो क्या मैं प्रिया से बात कर सकती हूँ?
प्रिया- अरे डॉली तू.. हाँ बोल क्या बात है और मेरा नम्बर तुझे कहाँ से मिला?
डॉली- अरे यार पिछले साल इम्तिहान के वक्त तूने ही तो दिया था.. याद है?
प्रिया- हाँ याद आया.. मगर अभी तुझे क्या जरूरत पड़ गई.. फ़ोन करने की.. वो तो बता?
डॉली- देख ऐसे फ़ोन पर मैं नहीं बता सकती.. तू कल स्कूल के बाद मेरे साथ मेरे घर आ सकती है क्या? बहुत जरूरी बात करनी है।
प्रिया- हाँ पढ़ाई के बहाने से आ तो सकती हूँ मगर ये बात तो तू कल भी बोल सकती थी.. अभी फ़ोन क्यों किया।
डॉली- नहीं कल बोलती तो तू घर में किसी को कैसे बताती अब सुन सुबह स्कूल आने के पहले अपनी मॉम को बता कर आना ताकि किसी को कोई शक ना हो समझी।
प्रिया- हाँ यार ये तो मैंने सोचा ही नहीं चल ओके बाय… कल मिलते हैं।
अगले दिन डॉली स्कूल जा रही थी तब मैडी रास्ते में उसको मिल गया।
मैडी- हाय डॉली गुड मॉर्निंग कैसी हो?
डॉली- गुड मॉर्निंग क्या बात है आज गेट पर नहीं खड़े हुए.. यहाँ क्या कर रहे हो?
मैडी- तुम्हारा इन्तजार कर रहा था.. वहाँ वो मेरे दोस्त होते है ना..
तुमको अच्छा नहीं लगता इसलिए मैंने सोचा यहीं बात कर लूँ।
डॉली- देखो मैडी वैसे तो मुझे तुम भी पसन्द नहीं हो क्योंकि तुम तीनों के ही चर्चे स्कूल में होते रहते हैं मगर तुम्हें मैंने कभी किसी को परेशान करते हुए नहीं देखा इसलिए तुमसे बात की.. अब ऐसे अकेले में यहाँ-वहाँ मुझसे बात मत किया करो।
मैडी- थैंक्स जो तुमने मुझे समझा मगर तुम गलत सोच रही हो मैं यहाँ किसी जरूरी काम से आया हूँ।
डॉली- कैसा काम?
मैडी- प्लीज़ बुरा मत मानना.. तुम सोमवार को आ रही हो ना.. बस ये कनफर्म करना था क्योंकि अगर तुम आओगी तो मैंने सोचा है होटल में पार्टी दूँगा.. और अगर नहीं आओगी तो इतना खर्चा क्यों करूँ.. घर में ही सब को बुला लूँगा।
डॉली- अच्छा इस बात का मैं क्या मतलब निकालूँ.. सिर्फ़ मेरे लिए ही तुम खर्चा करना चाहते हो और किसी की कोई वेल्यू नहीं है क्या?
मैडी- तुम फिर गलत समझ रही हो देखो तुम अच्छी लड़की हो.. अगर तुम आओगी तो कुछ खास लोगों के साथ हम चुपचाप में होटल में पार्टी कर लेंगे उसके बाद में घर आकर दोबारा मेरे फालतू दोस्तों के साथ शामिल हो जाऊँगा.. उनको मैं तुम्हारे सामने नहीं लाना चाहता.. बस यही असली बात है।
मैडी की बातों ने डॉली को काफ़ी प्रभावित किया उसको बड़ी ख़ुशी हुई ये जानकार कि खास उसके लिए मैडी ये सब कर रहा है मगर उसको एक बात और समझ में आ गई कि मैडी उसको दाना डाल रहा है सारा चक्कर चूत चोदने का है बस।
डॉली- मैं 100% आऊँगी जाओ तुमको जो तैयारी करनी है कर लो।
मैडी एकदम खुश हो गया और वहाँ से चला गया। डॉली भी स्कूल की तरफ बढ़ने लगी।
दोस्तो, आज चेतन सर ने डॉली को कई बार देखा मगर आज डॉली ने बस हल्की सी मुस्कान दी उसका ध्यान तो प्रिया पर था.. दिन ऐसे ही बीत गया।
छुट्टी के बाद प्रिया को लेकर वो घर की तरफ जाने लगी।
डॉली- हाँ तो अब बता तूने क्या सोचा?
प्रिया- सोचना क्या था मेरा तो अब भी वही जवाब है कि हाँ.. मुझे रिंकू चाहिए बस।
डॉली- अच्छा एक बात तो बता तेरे दिमाग़ में ये ख्याल आया कैसे और रिंकू ही क्यों और कोई भी तो हो सकता है.. अगर तू कहे तो सर से बात कर लूँ.. इसमें दो फायदे हैं.. एक तो सर मज़ा बहुत देते हैं दूसरा तू भाई के साथ सेक्स के पाप से बच जाएगी।
प्रिया- नहीं नहीं सर को बताना भी मत.. समझी और कैसा पाप.. आजकल तो सगे भाई-बहन मज़ा ले रहे हैं.. फिर ये तो दूर के चाचा का बेटा है.. तू ये ज्ञान देना बन्द कर.. बस ‘हाँ’ कह दे कि मेरी हेल्प करेगी और आइडिया कैसे आया ये लंबी कहानी है.. घर चल कर बताऊँगी।
डॉली- अच्छा हाँ.. बस खुश.. मगर तूने क्या सोच कर मुझे ये बात बताई है.. मैं कैसे तेरी मदद करूँगी?
प्रिया- कल जब उन तीनों की बात मैंने सुनी.. उसी वक्त मुझे एक आइडिया दिमाग़ में आया कि वो तीनों तेरे ऊपर लट्टू हैं.. अगर कुछ ऐसा हो कि तेरी जगह मैं आ जाऊँ और उनसे चुदवा लूँ.. बस यही सोचकर मैंने तेरे को बताई ये बात..
डॉली- मगर कैसे यार?
प्रिया- तू इसकी टेन्शन मत ले.. मैंने बहुत सी चुदाई की कहानी पढ़ी हैं.. एक से एक आइडिया मेरे पास हैं।
डॉली- लो बातों में पता भी नहीं चला.. घर भी आ गया।
दोनों घर में चली जाती है सामान्य सी फॉरमॅलिटी के बाद दोनों साथ खाना खा लेती हैं और डॉली के कमरे में पढ़ाई के बहाने चली जाती हैं।
डॉली- चल आजा अब यहाँ बैठ कर सबसे पहले मुझे ये बता कि रिंकू का ख्याल तुझे कैसे आया और दूसरी बात क्या कभी तूने किसी के साथ कुछ किया है?
प्रिया- नहीं यार मैंने ऊँगली के सिवा कभी कुछ नहीं किया.. हाँ रिंकू के बारे में तुझे शुरू से सब बताती हूँ। तभी तुमको मेरी चाहत समझ में आएगी।
डॉली- चल बता में भी तो सुनू कि आख़िर माजरा क्या है?
प्रिया- अच्छा सुन देख तू तो जानती है रिंकू और उसके दोस्त कितने बिगड़े हुए हैं।
डॉली- हाँ यार पता है तू अपनी बात बता ना…
प्रिया- तू सुन तो.. बीच में मत बोल।
डॉली- सॉरी चल.. अब नहीं बोलूँगी.. आगे की बात बता।
प्रिया- कई बार रिंकू अपने दोस्तों के साथ शराब पीकर घर आ जाता था.. किसी को पता नहीं चलता था।
डॉली एकदम ध्यान से सब सुन रही थी।
प्रिया- अब सुन मेरी बात पिछले एक साल से मैं चुदाई की कहानी पढ़ रही हूँ और हर तरह की कहानी मैंने पढ़ी हुई हैं.. उसमें भाई-बहन की कहानी भी शामिल थीं। मेरे दिमाग़ में चुदाई करने की इच्छा ने जन्म ले लिया।
स्कूल में कोई मुझे देखता भी नहीं था और मेरी चुदने की इच्छा दिन पर दिन बढ़ने लगी।
एक बार चाचा जी को रिंकू के शराब पीने की आदत का पता चल गया और उन्होंने उसे बहुत मारा और घर से निकाल दिया। मेरे पापा का स्वभाव थोड़ा नर्म है और चाचा बहुत तेज गुस्से वाले हैं।
तब मेरे पापा रिंकू को हमारे यहाँ ले आए उसे जरा भी होश ना था.. बड़ी मुश्किल से ऊपर मेरे कमरे के पास वाले कमरे में उसे लिटा कर पापा चले गए।
उनके जाने के बाद माँ ने कहा कि उसके कमरे में पानी रख आओ और कुछ फल वगैरह भी रख दो.. होश आएगा तो खा लेगा।
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09-04-2017, 04:10 PM,
#30
RE: Desi Sex Kahani साइन्स की पढ़ाई या फिर चुदाई
जब मैं कमरे में गई वो बैठा हुआ था जैसे ही मैं उसके पास गई उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगा- स..सुन तो यार म..मेरी बात गौर से सुन.. साला जिन्दगी का कचरा हो गया है खेमराज.. तू मेरा भाई है ना.. तू.. मुझे अरे यार साला बात के बीच में मूत आ गया यार.. मेरा हाथ पकड़ कर बाथरूम तक ले चल ना.. स..साली आज तो ज्ज..ज़्यादा चढ़ गई है।
मुझे कुछ समझ नहीं आया क्या करूँ.. क्योंकि वो मुझे अपना दोस्त समझ रहा था।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और बाथरूम तक ले गई।
डॉली- यार क्या बोल रही है.. किसी ने देखा नहीं..?
प्रिया- अरे कमरे में बाथरूम था यार बाहर नहीं गई.. अब तू सुन…
रिंकू- अरे स..साली ज़िप नहीं खुल रही आह्ह… साला मूत भी अन्दर ही निकल जाएगा।
प्रिया- मुझे लगा ये यहीं सूसू कर देगा.. मैंने नीचे बैठ कर उसकी ज़िप खोली.. उसने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी। सीधे ही उसका लण्ड मेरी आँखों के सामने आ गया.. यार सोया हुआ भी बड़ा मस्त लग रहा था और मज़े की बात एकदम क्लीन था।
मैंने हाथ से पकड़ कर उसे बाहर निकाला।
डॉली- ऊह.. माँ.. तुझे शर्म नहीं आई छी: अपने ही भाई का लण्ड हाथ में ले लिया और तुझे जरा भी डर नहीं लगा कि होश में आने के बाद वो क्या सोचेगा?
प्रिया- अरे नहीं रे.. वो बहुत टल्ली था उसे कहाँ कुछ याद रहता है। चाचा उसको मार रहे थे तब भी पता नहीं किस का नाम ले रहा था कि तुझे देख लूँगा।
डॉली- ओह.. अच्छा आगे बता.. क्या हुआ वो बता…
प्रिया- होना क्या था नीचे से माँ की आवाज़ आ रही थी.. मैं घबरा गई उसने बहुत ज़्यादा सूसू की.. मैंने जल्दी से उसकी ज़िप बन्द की.. उसको बिस्तर पर लिटा कर कमरे से बाहर निकल गई।
डॉली- उसके बाद तेरे मन में रिंकू का ख्याल आया।
प्रिया- नहीं यार उसके बाद मैं अपने कमरे में आ कर सोचने लगी.. बस मेरे दिमाग़ में रिंकू का लण्ड घूमने लगा.. मैंने जल्दी से कहानी की किताब निकाली और भाई-बहन की कहानी पढ़ने लगी.. जब रात ज़्यादा हो गई और मेरे जिस्म की गर्मी बढ़ने लगी.. तो मैं चुपके से नीचे गई।
मॉम-डैड के कमरे से खर्राटों की आवाज़ आ रही थी, वो गहरी नींद में सो रहे थे।
उसके बाद मैं ऊपर रिंकू के पास गई.. वो अब भी बेसुध लेटा हुआ था मैंने हिम्मत करके उसकी पैन्ट का हुक खोला और लौड़ा बाहर निकाला।
अरे यार तुझे क्या बताऊँ.. पहली बार लौड़े को ऐसे देख रही थी और सेक्सी कहानी क कारण मेरी चूत एकदम गीली हो रही थी।
मैंने उसके लौड़े को सहलाना शुरू किया कुछ ही देर में वो अपने असली आकार में आने लगा।
रिंकू तो बेसुध सा पड़ा हुआ.. ना जाने क्या बड़बड़ा रहा था.. मुझे तो बस लौड़े से मतलब था.. तन कर क्या मस्त 7″ से भी ज़्यादा हो गया होगा और मोटा भी खूब था यार.. तुझे क्या बताऊँ लौड़ा देख कर मेरी तो हालत खराब हो गई..
डॉली- अच्छा उसके बाद तूने क्या किया.. यार तेरी कहानी में मज़ा आ रहा है।
प्रिया- यार क्या बताऊँ बस उसको सहलाती रही.. कहानी में लण्ड चूसने के बारे में पढ़ा था कि बड़ा मज़ा आता है लेकिन यह सच होता है, यह नहीं पता था।
डॉली- अरे एकदम सच होता है.. बड़ा मज़ा आता है मैंने भी…
डॉली जोश-जोश में बोल तो गई मगर जल्दी ही उसको ग़लती का अहसास हो गया और वो एकदम चुप हो गई।
प्रिया- अच्छा तो ये बात है… हाँ बड़े मज़े ले चुकी है तू.. तो अब बता भी दे.. कितनी बार चूस चुकी है और कैसा मज़ा आया?
डॉली- अभी नहीं सब बताऊँगी मगर पहले तू बता पूरी कहानी।
डॉली को उसकी बातों में बड़ा रस आ रहा था उसकी चूत भी गीली होने लगी थी।
प्रिया- यार पहली बार मैंने लण्ड को होंठों से छुआ.. उफ्फ कितना गर्म था वो.. डरते डरते मैंने उसकी टोपी को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। सच्ची वो ऐसा अहसास था जिसे मैं शब्दों में ब्यान नहीं कर सकती।
डॉली- चुप क्यों हो गई बोल ना यार प्लीज़..
प्रिया- यार बोल तो रही हूँ.. उस दिन को याद करके मुँह में पानी आ गया।
उसके बाद मैं आराम से लौड़े को चूसने लगी।
अब मैंने जड़ तक उसको चूसना शुरू कर दिया। बड़ा मज़ा आ रहा था जीभ से उसको पूरा चाट रही थी।
मैंने उसकी गोटियाँ भी चूसीं.. कोई 15 मिनट तक मैं चूसती रही उसके लौड़े से कुछ पानी की बूँदें आईं जिसका स्वाद खट्टा सा.. नमकीन सा पता नहीं कैसा था.. मगर मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था।
कसम से मेरी चूत पूरी गीली हो गई थी। जब कोई 25 मिनट हो गए होंगे मुझे चूसते हुए तो मैंने रफ़्तार से मुँह को ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया.. जैसे चुदाई होती है बस फिर क्या था उसका लौड़ा फूलने लगा और मेरे मुँह में ही उसने सारा माल छोड़ दिया।
डॉली- ओह.. तूने क्या किया.. पी गई या थूक दिया बाहर…
प्रिया- अरे नहीं मैं तैयार नहीं थी कि कब पानी आएगा.. अचानक से ये सब हो गया और उसके पानी की धार भी बहुत तेज़ी से आई.. सीधे गले में चली गई.. मजबूरन पीना ही पड़ा। मगर हाँ एक बात है.. शुरू में गंदी फीलिंग आई.. उसके बाद बड़ा अच्छा लगा।
डॉली- यार तूने कितनी हिम्मत का काम किया.. मैं होती तो शायद कभी नहीं करती।
प्रिया- अरे इसमें क्या हिम्मत.. आगे सुन.. उसका तो पानी निकल गया मगर मैं काम-वासना की आग में जलने लगी.. मेरी चूत से लगातार रस टपक रहा था और अब बर्दास्त के बाहर था। मैंने नाईटी निकाली जो में रात को पहनती हूँ.. पैन्टी भी एक तरफ रख दी और अपनी कुँवारी चूत पर उसका लौड़ा रगड़ने लगी.. जो अब धीरे-धीरे बेजान हो रहा था.. तू यकीन नहीं करेगी मुरझाए हुए लौड़े ने भी वो कर दिया जो तू सोच भी नहीं सकती जैसे ही मेरी चूत पर मैंने लौड़ा स्पर्श किया.. झट से मेरी चूत का फुव्वारा फूट गया और इतना पानी निकला कि कभी ऊँगली से इतना नहीं निकला होगा यार…
डॉली- यार तेरी बातों ने तो कमरे का माहौल गर्म कर दिया पूरा जिस्म आग की तरह जल रहा है।
प्रिया- अरे तेरा जिस्म जल रहा है बात करते-करते मुझे बस रिंकू का लौड़ा ही नज़र आ रहा है.. मेरी पूरी पैन्टी गीली हो गई यार..
डॉली थोड़ा सा झिझक कर बोली- यार ऐसा ही हाल मेरा भी है।
प्रिया- हाँ जानती हूँ कब से तू पैरों को इधर-उधर कर रही है।
डॉली- उसके बाद क्या हुआ.. उसका दोबारा कड़क किया तूने?
प्रिया- नहीं यार मॉम शायद उठ गई थीं.. वे पानी पीने आई थीं या पता नहीं.. मगर मैंने नीचे कुछ आवाज़ सुनी तो मैंने जल्दी से उसके लौड़े को पैन्ट में करके अपने कपड़े ठीक किए और वहाँ से भाग गई अब तो तुझे समझ आ गई ना मेरी बात.. बस मैं उसी वक्त ये सोच चुकी थी कि अब किसी भी तरह रिंकू को फंसाऊँगी और अपनी चूत का मुहूर्त उसी से करवाऊँगी।
डॉली- यार सुबह कुछ नहीं कहा उसने.. रात की कोई तो बात उसे याद होगी?
प्रिया- अरे कहाँ यार.. वो तो माँ से ये पूछ रहा था मैं यहा कैसे आया.. उसको तो चाचा की मार भी याद नहीं थी।
डॉली- यार एक बात तो तुझे पता है कि रिंकू एक नम्बर का आवारा है.. तू थोड़ी सी कोशिश करके देख वो खुद तुझे चोदने को राज़ी हो जाएगा।
प्रिया- जानती हूँ.. मगर कैसे करूँ यार.. एक ही घर में होते तो ऐसा न था.. अब रिंकू को बस स्कूल में देखती हूँ.. घर तो समझो वो बस खाना खाने जाता है.. बाकी वक्त अपने दोस्तों के साथ ही रहता है। उसे अपने जिस्म के जलवे दिखाने का मुझे कोई मौका ही नहीं मिलता.. अब रात को तो मैं उसके घर बिना काम के जा नहीं सकती हूँ।
डॉली- हाँ ये बात भी सही है.. यार तूने इतनी हिम्मत कर ली वो ही बहुत बड़ी बात है।
प्रिया- यार क्या करूँ.. उसका लौड़ा था ही ऐसा कि बस मेरी चूत फड़फड़ाने लगी और हिम्मत अपने आप आ गई।
डॉली- यार तेरी बातें सुनकर चूत की हालत पतली हो गई.. तू रूक मैं बाथरूम जाकर आती हूँ।
प्रिया- अरे बाथरूम में जाकर ऊँगली करेगी.. इससे अच्छा तो यहीं कर ले और मैं तो कहती हूँ चल मज़ा करते हैं.. मैंने कहानी में पढ़ा है कि कैसे दो लड़कियाँ आपस में चुदाई का मज़ा लेती हैं।
प्रिया ने डॉली के मन की बात बोल दी थी.. उसे ललिता के साथ का सीन याद आ रहा था.. वो झट से मान गई।
डॉली- चल निकाल कपड़े.. नंगी होकर खूब मज़ा करेंगे यार..
प्रिया- हाँ यार.. नंगी होकर ही ज़्यादा मज़ा आएगा।
दोनों ने कपड़े निकालने शुरू कर दिए।
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