Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
12-07-2018, 01:54 PM,
#11
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
कुणाल अपनी कार से ही घर जाता था हमेशा...करीब 3 घंटे की ड्राइव के बाद वो गाँव पहुँच गये...
रास्ते में कुणाल ने उसे अपनी पिछली लाइफ के बारे में यानी अपनी कामिनी के बारे में सब कुछ सच-2 बता दिया..
वो अपनी नयी जिंदगी शुरू करने से पहले आपस में कोई परदा नही रखना चाहता था..
जल्द ही वो गाँव पहुँच गये..
उसे गाँव कहना तो ग़लत होगा क्योंकि एक छोटा सा शहर बन चुका था वो समय के साथ..

कुणाल की माँ ने अपनी होने वाली बहू को देखते ही गले से लगा लिया और उसकी तारीफों के पुल बाँध दिए..
वो बोली की ऐसी बहू तो वो भी ढूँढती तो ना मिलती..कुणाल के पिता को भी कामिनी काफी पसंद आयी
एक ही दिन में कामिनी अपने सास-ससुर के साथ अच्छे से घुल मिल गयी.

अगले दिन कुणाल के चाचा और ताया भी अपनी फैमिली के साथ घर आए..
त्योहारो के दिन और उपर से कुणाल की होने वाली बीबी को देखने की चाह सबमें थी, इसलिए पूरा घर खचाखच भर गया...
सबने अपनी तरफ से होने वाली बहू को मुँह दिखाई और सगन दिया...
कुणाल की माँ ने भी उसे अपने खानदानी कंगन पहना कर उसे अपना आशीर्वाद दे दिया और इस तरह से उन्होने कामिनी का रोक्का करके उसे कुणाल के लिए स्वीकार कर लिया.

कामिनी ने अपनी माँ से भी सबकी बात करवाई , वो भी काफ़ी खुश हुई..
उन्हे तो बस इसी बात का सकून था की उनकी बेटी एक अच्छे घर में जा रही है.

इस तरह से पूरा दिन बीत गया...
कुणाल और कामिनी के सोने का अलग-2 इंतज़ाम किया हुआ था घर वालो ने..

अगली सुबह कुणाल की सबसे हसीन सुबह थी...
चाय का कप लकर कामिनी ने ही उसे उठाया...
और उठाने के साथ ही उसे एक गरमा गर्म किस्स भी दी...
अपनी आने वाली लाइफ में ऐसी गर्म चाय और किस्सेस की कल्पना मात्र से ही उसका लंड खड़ा हो गया..

उसे चादर के अंदर अपना लंड मसलते हुए देखकर कामिनी बोली : "ओले-२...लगता है तुम्हारा दोस्त सुबह -2 तुम्हे परेशान कर रहा है...''

कुणाल : "ये तो इसका रोज का काम है...पर ये बताओ मुझे की इसमे तुम मेरी क्या हेल्प कर सकती हो...''

कामिनी : "सच कहूं ...अगर माँ पिताजी का डर ना होता या हम दिल्ली में ही होते ना...तो इस वक़्त तक तो मैं चुद रही होती....तुम्हारे उपर बैठकर...तुम्हारे इस मोटे लंड से...''

उसने एक-2 शब्द इतने सैक्सी अंदाज में उसकी आँखो में देखते हुए बोला था की कुणाल ने एक ही झटके में उसे पकड़कर फिर से चूम लिया...



वो तो बाहर से माँ के क़दमों की आहट से दोनो ने किस्स तोड़ी वरना वही चुद जानी थी वो कामिनी..

नाश्ता करके वो कामिनी को अपना छोटा सा शहर दिखाने निकल पड़ा..
और रास्ते में उसे उसकी लाइफ का सबसे बड़ा झटका लगा जब उसे अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड कामिनी के पापा मिल गये...

कुणाल भला उन्हे कैसे भूल सकता था...
अभी तक वो वैसे ही दिख रहे थे..
उन्होने भी कुणाल को एकदम से पहचान लिया..

इधर उधर की बातो के बाद पता चला की पिछले महीने ही उनका ट्रांसफर फिर से उसी जगह पर हो गया है...
कुणाल ने बातों -2 में उनसे कामिनी के बारे में भी पूछ लिया तो उन्होने बताया की वो भी साथ ही आई है , कोलकता में जॉब कर रही थी वो छोड़कर अब यहाँ जॉब ढूँढेगी....
कामिनी की अभी तक शादी नही हुई है ये जानकार उसे अंदर से थोड़ी खुशी भी हुई और गम भी...
खुशी इसलिए की उसकी शादी नही हुई अब तक
और गम इसलिए की वो मिली भी तब जब उसकी होने वाली है...

उन्होने काफी ज़ोर देकर कुणाल को घर आने के लिए भी कहा ताकि वो कामिनी की जॉब सर्च में हेल्प भी कर सके..
कामिनी को तो वो भी देखना चाहता था, इसलिए उसने तुरंत हां कर दी...
और शाम को उनके घर आने का वादा करके वो वापिस निकल पड़ा.

कामिनी को वो अपनी पिछली लाइफ के बारे में वो अब तक सब बता ही चुका था इसलिए उसको समझाने में ज़्यादा दिक्कत नही आई उसे..
पर कुणाल के साथ उसने भी जाने की जिद्द पकड़ ली क्योंकि वो भी देखना चाहती थी की उसके होने वाले पति की पहली गर्लफ्रेंड कैसी है..

शाम को दोनो तैयार होकर उनके घर पहुँच गये...
दरवाजा अंकल जी ने ही खोला..
उनकी पत्नी का देहांत 2 साल पहले हो चुका था इसलिए अब घर में सिर्फ़ कामिनी और वो ही थे.

कुछ ही देर में कामिनी भी आ गयी और उसे देखने मात्र से ही कुणाल के दिल की धड़कने तेज हो उठी...
वो तो उसे एकटक देखता ही रह गया...
क्या गज़ब का रूप निकल आया था उसका...
लंबी ,पतली और भरे हुए स्तन...
गांड भी उतनी ही बाहर थी जीतने उसके मम्मे ...
देखने में एकदम अप्सरा लग रही थी वो...
बिल्कुल फिल्मी हीरोइन करीना कपूर जैसी.



कुणाल तो एकटक उसे देखता ही रह गया...
और कुछ ऐसा ही हाल कामिनी का भी था जो कुणाल को देखकर एक बार फिर से अपने पुराने ख़यालो में खो गयी थी और जब उसने साथ बैठी एक लड़की को भी देखा तो उसके चेहरे पर सवाल उठ खड़े हुए..
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12-07-2018, 01:54 PM,
#12
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
कामिनी के पापा ने ही उसका इंट्रो करवाया : "अरे बेटी, ये कुणाल है, याद है ना बचपन में तुम दोनो एक ही स्कूल में पढ़ा करते थे...अब तो ये दिल्ली में एक आई टी कंपनी में इंजिनियर है..''

वो अंकल जी तो ऐसे इंट्रोड्यूस करवा रहे थे जैसे वो दोनो पहली बार मिल रहें हो.

और फिर कुणाल के साथ आई कामिनी को देखकर बोले : "और ये है इसकी मंगेतर....और इत्तेफ़ाक़ से इसका भी नाम कामिनी है... हे हे...तुम दोनो की बहुत बनेगी....जाओ इनके लिए चाय वगेरह ले आओ...''

कुणाल और कामिनी के बारे में सुनकर उसे बहुत बुरा लगा...
एक ही पल में जो बरसो पुरानी मोहब्बत फिर से जागी थी, उसका सरेआम कत्ल कर दिया गया...
वो बुझे मन से अंदर गयी और चाय बनाने लगी..

ऐसा नही था की कलकत्ता जाने के बाद वो कुणाल को भूल गयी थी...
पर बचपन की वो यादें समय के साथ-2 धुंधली होती चली गयी..
बाद में कॉलेज और फिर जॉब...
पता ही नही चला की बचपन का वो प्यार कहां दब कर रह गया.

और आज वो प्यार उजागर भी हुआ तो इस रूप में...
हालाँकि अपने शहर में वापिस आने के बाद कामिनी को विश्वास था की वो कुणाल से दोबारा मिल पाएगी..
पर उसे ये नही पता था की वो सगाई कर चुका होगा..
धीरे से ही सही पर झटका ज़रूर लगा उसके दिल को.

कुणाल को गुमसुम बैठा देखकर उसकी मंगेतर कामिनी उसके कान में बोली : "अगर वो पसंद आ रही है तो मैं बीच से हट जाती हूँ ...यू आर फ्री टू मैरी हर...मुझे कोई प्राब्लम नही है...''

कुणाल ने एक झटके में उसके चेहरे की तरफ देखा...
वो सच में सीरियस थी...
और वो ये सब शायद इसलिए कह रही थी क्योंकि वो कुणाल को ऐसे उदास नही देखना चाहती थी...
अभी भी नही और शादी के बाद भी नही.

लेकिन कुणाल भी इतना कमीना नही था...
जिस लड़की ने उसे अपना सब कुछ सौंप दिया हो और अब शादी भी पक्की हो चुकी हो उसके साथ.....
ऐसे में वो उसे धोखा नही देना चाहता था...
इसलिए उसने एक हल्का सा इशारा करके मना कर दिया..
कामिनी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

**** दोस्तो, अब से कुणाल की मंगेतर कामिनी को बीच-2 में निशु के नाम से संभोदित करूँगा, वरना एक ही सीन में 2-2 कामिनी में कन्फ्यूसन हो जाएगी...आपको भी और मुझे भी.*****

चाय पीते हुए काफ़ी पुरानी बाते हुई उन सबके बीच...
और सबसे अहम बात जो निशु को भी पसंद आई वो ये थी की अंकल को ताश का खेल बहुत पसंद था..

वो खुद भी तो इस खेल की दीवानी थी...
बस फिर क्या था, आनन फानन में ताश का खेल शुरू हो गया वहां ..
हालाँकि वो जुए के रूप में नही था पर खेलने में काफ़ी एन्जॉय कर रहे थे वो दोनो...



उन दोनो को ताश खेलते देखकर कामिनी और कुणाल आपस में बाते करने लगे...
कुणाल ने अपने दिल की और कामिनी ने अपने दिल की सारी बातें उजागर कर दी...
कुणाल ने तो ये भी कहा की अगर वो उसे एक महीना पहले मिली होती तो वो उसी के साथ शादी करता...
पर अब जो किस्मत में है वो उसी के अनुसार अपनी लाइफ चलाएँगे..

इसी बीच निशु और अंकल के बीच काफ़ी अच्छी दोस्ती हो गयी...
और जुआरियो का दिल आख़िर कब तक बिना पैसे का खेल खेलने के लिए मानता...
उन्होने 50-100 रुपय का खेल खेलना शुरू कर दिया और आधे घंटे बाद निशु करीब 700 रुपय हार चुकी थी..
कुणाल को भी विश्वास नहीं हुआ की उस जैसी मंझी हुई खिलाड़ी अंकल से कैसे हार गयी
अंकल पैसे नहीं ले रहे थे पहले पर खेल तो खेल था इसलिए कामिनी ने उन्हे ज़बरदस्ती पैसे दिए और अंकल के कहने पर दोनो ने अगले दिन भी आने का वादा किया..
आख़िर जुए के शोकीन एक ही दिन में थोड़े ही मानने वाले थे.

और इस वक़्त तो निशु के साथ-2 अंकल जी भी नही जानते थे की वो जुए का खेल उनके घर क्या भूचाल लेकर आने में वाला है.

वापिस आते हुए कुणाल के चेहरे पर काफ़ी खुशी थी...
अपने बचपन के प्यार से मिलकर उसका दिल बहुत ही रोमांटिक हो रहा था...
और उपर से सोने पर सुहागा ये हुआ की बारिश शुरू हो गयी..
और वो इतनी तेज थी की गाड़ी चलाना मुश्किल था इसलिए कुणाल ने गाड़ी रोक ली..
और ऐसे रोमॅंटिक पल को भला निशु कैसे जाने देती..
वो कुणाल की तरफ पलटी और दोनो एक गहरी स्मूच में डूब गये...



भले ही निशु उसे किस्स कर रही थी पर उसके जहन में तो कामिनी और वो पल था जब उसने पहली और आख़िरी बार उसे इसी तरह की बारिश में किस्स किया था.

अपनी आँखे बंद करके कुणाल उन्ही पुराने ख्यालो में डूबता चला गया और निशु को कामिनी समझकर उसे बेतहाशा चूमने लगा...
उसके मम्मों को बुरी तरह से मसलने लगा और जब आग हद से ज़्यादा बढ़ गयी तो उसने उसके टॉप को निकाल कर पिछली सीट पर फेंक दिया, ब्रा उतारने में भी उसने देर नही लगाई और और उसे टॉपलेस कर दिया..

निशु के मोटे-2 मम्मों को चूसते हुए वो उन्हे बुरी तरह से काट भी रहा था और धीरे-2 बुदबुदा भी रहा था...

''ओह...कामिनी.......उम्म्म्ममममम.... आई लव यू कामिनी....आई लव योउ.....''



ये तो भला हो की दोनो का नाम ही कामिनी था वरना अभी के अभी उसकी पोल खुल जानी थी...
क्योंकि इस वक़्त कुणाल अपने बचपन के प्यार को याद करके ये सब बड़बड़ा रहा था..

उनकी गाड़ी एक ऐसी सुनसान सी जगह पर थी जहाँ किसी का आना संभव नही था, इसलिए अंदर का खेल काफ़ी गर्म तरीके से, बिना किसी डर के चल रहा था.
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12-07-2018, 01:54 PM,
#13
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
निशु ने उसे कुछ देर तक चूमा और फिर धीरे-2 वो नीचे आने लगी...
और जल्द ही वो उसके कुतुब मीनार की सबसे उपरी मंज़िल को अपनी जीभ से कुरेद कर उसे सता भी रही थी...
हालाँकि निशु की चूत की सील उसने ही तोड़ी थी पर उसे लंड के साथ इस तरह की अठखेलियां करते देखकर उसे लग रहा था की उसने काफ़ी लंड अपने मुँह में लिए है...
पर इसका तो कोई तरीका नही था ना की ये बात साबित हो सके,
इसलिए वो उसकी लंड चुसाई का मज़ा इन बातो को दिमाग़ से निकाल कर लेने लगा..

बाहर की घनघोर बारिश की बूँदो के बीच इस तरह का खेल खेलने में जो मज़ा आता है ये उसे ही पता होता है जिसने ये मजा लिया हो...
निशु ने उसके लंड को धीरे-2 अपने मुँह में लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया...
आज उसका बदन जितना गर्म था उतना ही उसका मुँह भी था, जिसमे झुलसकर कुणाल का लंड जल सा रहा था..

कामिनी ने उसकी बॉल्स को भी अपने हाथ में लेकर उन्हे अपने मुँह में डालकर चूसा, कुणाल तो बस यही सोचकर खुश हो रहा था की ये स्पेशल सर्विस अब उसे पूरी लाइफ मिलने वाली है..

वो फिर से उपर आई और उसके होंठो को चूसने लगी...



कुणाल ने एक बार फिर से उसके बूब्स को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया..
कुणाल को रह रहकर अपनी कामिनी के मम्मे याद आ रहे थे जो इनसे काफ़ी बड़े थे...
और कुणाल को एक दूसरी ही दुनिया में खोया हुआ देखकर वो ताड़ गयी की उसके दिमाग़ में इस वक़्त क्या चल रहा है..

निशु ने अपना मुम्मा उसके मुँह में घुसाते हुए कहा : "मुझे पता है की इस वक़्त तुम अपनी कामिनी के बारे में सोच रहे हो...मेरे बारे में नही...''

उसके इतना कहने के साथ ही कुणाल जैसे आसमान से नीचे आ गिरा...
उसका कड़क लंड मुरझाए हुए फूल की तरह सिकुड कर बैठ गया..
सारी उत्तेजना एक ही झटके में उड़न छू हो गयी..

निशु ने उसकी आँखो मे देखते हुए कहा : "मैने तो पहले ही कहा था, अगर तुम चाहो तो मैं अभी भी बीच में से हट सकती हूँ ...तुम उसके साथ शादी कर लेना...''

कुणाल का दिमाग़ तो एकदम से चलना बंद हो चुका था..
पर उसका दिल जानता था की वो उसे इतना प्यार करती है इसलिए बार-2 ये बात बोल रही है,
और वो भी वो लड़की जिसने अपना सब कुछ उसे सौंप दिया है, जिसे उसके घर वालो ने भी पसंद कर लिया है...
उसके बावजूद वो उसकी लाइफ से पीछे हटना चाह रही है ताकि कुणाल को उसका पहला प्यार मिल जाए...
पर कुणाल जान चुका था की ऐसा करने से भले ही उसे उसका पहला प्यार मिल जाएगा पर ये सच्चा प्यार हमेशा के लिए वो खो देगा, जो वो अब हरगिज़ नही चाहता था.

इसलिए उसने उसकी आँखो में देखते हुए जवाब दिया : "हाँ ये सच है की मैं उसके बारे में ही सोच रहा था पर शायद मैं थोड़ी देर के लिए बहक गया था...मुझे तुमसे ज़्यादा और तुमसे सच्चा साथी कही और मिल ही नही सकता कामिनी...आई लव यू ...''

और इतना कहते हुए उसने उसके होंठो पर अपने होंठ लगा दिए और उन्हे ज़ोर-2 से चूसने लगा...
और इस वक़्त उसकी बाँहों में भी यही कामिनी थी और जहन में भी..
कुणाल के प्यार की गर्मी को और उसके दिल से निकली आवाज़ को महसूस करके कामिनी भी उससे लिपटती चली गयी...
अपने नंगे बदन को उसने मक्खन की तरह कुणाल के जिस्म पर मलना शुरू कर दिया..
और इस बार जब लंड खड़ा हुआ तो वो पहले से ज़्यादा कड़क और उत्तेजना से भरा हुआ था...
कुणाल उसे पीछे वाली सीट पर ले गया और कामिनी की जीन्स उतारकर उसे वहीं लिटा दिया और अपना लंड उसकी चूत पर टिका कर धीरे से धक्का दे दिया ...एक ही बार में उसकी गीली चूत के छेद में उसका लंड घुसता चला गया...



कुणाल ने उसकी कमर को पकड़ कर जोर-२ से धक्के लगाने शुरू कर दिए
उसकी छातियाँ हर धक्के से ऊपर नीचे हो रही थी, जिन्हे देखकर उसे चोदने का मज़ा दुगना हो रहा था

''आआआआआआआआआआहह कुणाल.........ओह....यससससससस ..................... ये....कहकर तुमने मुझे....पूरी लाइफ के लिए.....अपना गुलाम बना लिया है......अहह......आई लव यू कुणाल ......''

थोड़ी देर बाद कुणाल ने उसे अपने ऊपर बिठा लिया और खड़े लंड पर बैठकर कार की छत्त को पकड़कर कामिनी ने अपने पूरे शरीर को उसके लंड पर दबा सा दिया, आज एक नये आयाम तक जा पहुँचा था कुणाल का लंड उसकी चूत में ...जिसे महसूस करके वो किल्किलाती हुई सी उसके लंड पर उछल कूद मचाने लगी..



और उसके लंड पर उछलते-2 वो कब झड़ गयी ये उसे भी पता नही चला और अपनी गर्म साँसे छोड़ती हुई वो उसके कंधे पर ही लूड़क गयी

पर खेल अभी ख़त्म नही हुआ था, कुणाल ने उसकी गांड के नीचे हाथ रखा और उसके शरीर को उपर नीचे करके उसकी चूत मारने लगा...
नीचे से मिल रहे झटको ने उसे फिर से होश में ला दिया और जब तक कुणाल अपने मुकाम पर पहुँचा, कामिनी भी एक बार फिर से झड़ गयी....
आज की ये बारिश में हुई चुदाई ने कुणाल को वो बचपन वाली किस्स को पीछे पछाड़ कर उसकी लाइफ का एक यादगार लम्हा बना दिया था.
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12-07-2018, 01:54 PM,
#14
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
अपने कपड़े पहन कर और हुलिया ठीक करके वो जब घर पहुँचे तो 9 बजने वाले थे...
बारिश की वजह से वहां की बिजली जा चुकी थी जो शायद सुबह से पहले आने वाली नही थी.

दोनो ने खाना खाया और उपर छत्त पर आकर टहलने लगे...
बारिश के बाद की ठंडी हवा से वहां का वातावरण काफ़ी रोमांटिक सा हो चुका था...
ऐसे में कामिनी उसके करीब आई उसे मीठी सी पप्पी दे डाली.

कामिनी : "मुझे पता है की हमारी शादी के बाद भी तुम उसे भुला नही पाओगे...''

उसके इतना कहने के बाद कुणाल फिर से ठिठका ...
कार में उसे अच्छी तरह से आश्वासन देने के बाद भी वो ये बात क्यों कर रही थी ये उसकी समझ में नही आ रहा था.

कामिनी : "मैं एक लड़की हूँ और एक लड़की के दिल की बातें में अच्छे से समझती हूँ ...और जितना मैं लड़को के बारे में जानती हूँ , उनके दिल और नीयत को भी शायद उतना ही समझती हूँ ..इसलिए मुझे लगता है की तुम दोनो को एक बार आपस में सैक्स कर लेना चाहिए...''

उसकी ये बात सुनकर कुणाल हक्का बक्का सा रह गया....
ऐसी अटपटी बात करने का क्या मतलब था भला.

कामिनी ने उसके चेहरे पर आए प्रश्न शायद पढ़ लिए थे, इसलिए वो बोली : "मुझे पता है की ऐसा करना सही नही होगा और ये तुमसे तुम्हारी होने वाली वाइफ ही बोल रही है इसलिए भी शायद तुम्हे अजीब लग रहा है...पर मेरी बात ध्यान से सुनो, मैं एक मॉडर्न ख्यालात वाली लड़की हूँ और मैं जानती हूँ की प्यार में 50% लगाव जिस्मानी होता है, यानी तुम दोनो अगर सैक्स कर लेते हो तो तुम्हारे बीच का प्यार 50% तक कम हो जाएगा और शादी के बाद तुम उसे उतना मिस नही करोगे जितना करने वाले हो...''

ऐसा बचकाना सा लॉजिक तो कुणाल की समझ से परे था...
पर वो अभी तक कुछ इसलिए नही बोल रहा था क्योंकि बात उसी के भले की हो रही थी...
इसलिए वो कामिनी के सारे तर्क सुन लेना चाहता था...
ऐसे बीच में उसे टोकने का मतलब यानी अपना ही नुकसान कराना था.

कामिनी : "और मेरे हिसाब से अगर तुम दोनो का एक बार सैक्स कर लोगे तो शायद बाकी बची लाइफ में एक दूसरे को उतना मिस नही करोगे जितना की करते आ रहे हो और करने वाले हो और वो इसलिए की अपने प्यार के साथ अपने जिस्म को शेयर करने के बाद तुम्हे इतनी तस्सली तो रहेगी की उसे अपने हिस्से का प्यार दे चुके हो तुम...''

बात तो वो सही कह रही थी...
हालाँकि स्कूल टाइम में जब उसे कामिनी से प्यार हुआ था तो उनकी भावनाए कितनी सच्ची और पवित्र थी..
पर आख़िर में आकर उन्होने किस्स करके ही अपने प्यार का इज़हार किया था और किस्स भी तो सैक्स का ही एक हिस्सा है...
और आज भी जब इतने बरसो बाद कुणाल ने कामिनी को देखा तो उसके जिस्म को देखने के बाद उसके मन में एक ख़याल तो यही आया था की काश इसकी एक बार मिल जाए और शायद यही सोचकर उसे दुख भी हुआ था की ये मिली भी तो तब जब उसकी सगाई हो चुकी है वर्ना इसी से शादी करके इसकी पूरी लाइफ मारता...
यानी कुल मिलाकर उसे अब निशु का तर्क सही लग रहा था.

पर उसके कहने मात्र से ही वो सैक्स करने के लिए थोड़े ही मान जाएगी...

उसने जब कामिनी से पुछा की वो ये सब कैसे करेगी और वो भी उसके पापा के होते हुए तो उसने एक कुटीली हंसी हंसकर धीरे से कहा : "उसके पापा के सामने ही ये सब होगा, तुम देखना तो सही, उस अंकल को मैं इस तीन पट्टी के खेल में कैसे फंसाती हूँ , वो खुद ही उसे तुम्हारे हवाले कर देगा ''

कुणाल अब उसके दिमाग पूरा खेल समझ चूका था, वो उस खेल के माध्यम से कामिनी के पापा को फंसा कर उन्हें एक करवा देना चाहती थी. पर उसके हिसाब से ये सब करना इतना आसान नहीं था जितना निशु को लग रहा था, पर कामिनी के चेहरे पर आए कॉन्फिडेन्स को देखकर वो समझ गया की उसने अगर ये बात की है तो ज़रूर उसके दिमाग़ में कोई जबरदस्त प्लान है...

और जब वो खुद ही उसके लिए इतना आगे तक जाने के लिए तैयार है तो वो कौन होता है भला मना करने वाला..
इसलिए उसने भी हां कर दी,
कामिनी तो उसका जवाब पहले से ही जानती थी, इसलिए कुणाल की हां सुनकर वो भी मुस्कुरा दी.

कुछ ही देर में वो नीचे आ गये और अलग-2 कमरों में जाकर सो गये...

अगला दिन उसकी लाइफ का बहुत बड़ा दिन था,
जो उसके और कामिनी के बीच के रिश्तों की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल देने वाला था.

अगले दिन कुणाल की माँ अपनी होने वाली बहु कामिनी को मार्केट ले गयी, उसकी पसंद के कुछ कपड़े दिलवाने के लिए...

कुणाल के पापा ऑफीस जा चुके थे, इसलिए घर पर कोई भी नही था, अपनी निशु से बात करने के इससे अच्छा समय कोई और नही हो सकता था, इसलिए उसने जल्दी से उसका मोबाइल नंबर मिलाया, जो उसने कल शाम ही लिया था उससे..

वो भी जैसे उसके ही फोन का इंतजार कर रही थी..
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12-07-2018, 01:55 PM,
#15
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
फोन उठाते ही बोली : "हाय ...गुड मॉर्निंग..कैसे हो तुम...''

कुणाल का दिल धड़कने लगा उसकी सैक्सी आवाज़ सुनकर, वो बोला : "गुड मॉर्निंग, मैं ठीक हूँ ...बस तुम्हारी याद आ रही थी...इसलिए सोचा...''

कुछ देर के लिए दोनो तरफ एक सुनसान सी खामोशी फैल गयी...

फिर वो बोली : "याद तो मुझे भी आ रही थी...सोई तो मैं भी नही कल रात से...पर ..अब इन बातो का क्या फायदा ...तुम तो..किसी और के हो चुके हो..''

कुणाल : "मुझे नही पता था की तुम मुझे ऐसे एकदम से मिल जाओगी...वरना...तुम्हारे सिवा आजतक मैने किसी और के बारे में नही सोचा...कल बताया तो था मैने ये सब..और तुम्हे पता है की मैं झूट नही बोलता...''

वो हंस दी और बोली : "मुझे पता है मेरे बुद्धू, मैं तो तुम्हारी टाँग खींच रही थी बस...पर सच कहुँ , मैं तुम्हे कभी भुला नही पाऊँगी ...पता है, कल तुम्हारे जाने के बाद एकदम से बारिश आ गयी थी...और..और मुझे वो हमारी...हमारी फर्स्ट किस्स ....याद आ रही थी..''

उस बेचारी को क्या पता था की कुणाल के पास तो उस बारिश में जुगाड़ भी था जिसका उसने बेख़ुबी फायदा उठाया था..

वो बोला : "हाँ ..याद है....और तुम्हे पता है की कल...कार में ही मैने...अपनी फियान्से के साथ भी किस्स किया....तुम्हारे बारे में सोचकर...''

उसने बात तो सच बताई थी पर आधी ही, उसके बाद जो हुआ वो उसे बताने का मतलब था आगे मिलने वाले मज़े को अभी से लात मारना..

निशु शरमा गयी : "धत्त ..तुम कितने बेशरम हो...अपनी फियान्से को किस्स भी करते हो और मुझे उसके बारे में भी बता रहे हो...ये भी नही सोच रहे की इसका मुझपर क्या असर पड़ेगा...''

कुणाल : "क्या असर पड़ रहा है तुमपर...क्या तुम्हे जलन हो रही है...''

निशु : "ना....नही...जलन तो तब होती जब तुम किस्स करते हुए भी उसके बारे में ही सोचते...तुम्हारे मन में कपट होता तो तुम ये बात मुझे बताते ही नही...मुझे तो खुशी हो रही है की तुम ...तुम मेरे बारे में सोचकर उसे किस्स कर रहे थे...''

कुणाल का अंदाज़ा सही निकला उसके बारे में ...
जितना वो अपनी निशु को जानता था उसके हिसाब से ही वो उसे इस तरह की बातें बता रहा था..
सैक्स या किस्स के बारे में उसके क्या विचार होते है ये तो वो नही जानता था पर जिस अंदाज से वो किश की बात पर शरमा रही थी उससे सॉफ जाहिर था की उसे इस तरह की बातें कितनी पसंद है..

इसलिए कुछ सोचकर वो बोला : "सुनो....मुझे तुम्हे किस्स करना है....''

निशु : "पागल हो गये हो क्या तुम...तुम्हारी मंगेतर क्या सोचेगी....मेरे घर पर मेरे पापा है, वो कैसे इस तरह से तुम्हे मेरे करीब आने देंगे...''

वो दूसरे बहाने गिनवा रही थी, अपनी तरफ से उसने मन नहीं किया, ये कुणाल के लिए बहुत था.

कुणाल : "मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता उनसे...तुम अपने बारे में बताओ...क्या तुम मुझे किस्स करने के लिए तैयार हो..''

वो कुछ ना बोली

कुणाल : "पता है, कल भी जब तुम्हारे बारे में सोचकर मैं किस्स कर रहा था तो मुझे वही बारिश याद आ रही थी, तुम बारिश में भीगी मेरे सामने खड़ी थी, पूरी भीगी हुई सी...तुम्हारे नर्म होंठो का वो पहला टच मुझे आज भी याद है...''

दूसरी तरफ उसकी साँसे भारी सी हो गयी,
वो बोली : "ब..बस करो प्लीज़.....मुझे..मुझे कुछ हो रहा है...''

कुणाल समझ गया की यही मौका है, गर्म लोहे पर हथोड़ा मारने का , इसलिए वो और भी ज़्यादा गर्म आवाज़ में बोला : "मैं नही भूल सकता कामिनी....आई लव यू ...पुचssssssss.....पुचssssssss आई लव योउ सो मच....पुचssssssss पुचssssssss...''

और उसने अपने मोबाइल पर अपने होंठो की थूक लगा-लगाकर उसे पूरा गीला सा कर दिया..

दूसरी तरफ कामिनी भी बिफर सी गयी : "ओह्ह कुणाल....आई ऑल्सो लव यूssssssss ..... लव योउ सो मच कुणाल....पुचssssssss......पूपुचssssssss....आई नीड यूऊऊऊउ....बेड्ली....''

बस...
उसके बाद तो उन दोनो के बीच हर बात पर किस्स होनी शुरू हो गयी...
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12-07-2018, 01:55 PM,
#16
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
कुणाल ने उसे अपनी बातो के जाल में ऐसे उलझाया की उसने उसकी बात मानकर अपनी टी शर्ट और ब्रा भी उतार दी...और फोन पर ही सही, कुणाल ने उसके मोटे मम्मों पर ज़ोर-2 से किस्स करी...और उन सब बातो को सुन सुनकर अपने बेड पर आधी नंगी लेती हुई कामिनी ने अपनी चूत को तब तक मसला, जब तक वो झड़ नही गयी...

कुणाल ने भी अपना लंड बाहर निकाल लिया और अपने लंड को उसके मुँह में डालने की बातें करते हुए और उसकी कल्पना मात्र से ही वो भी झड़ता चला गया...

एक मासूम सी मोहब्बत अब वासना का रूप ले चुकी थी....
दोनो तरफ आग इतनी भड़क चुकी थी की इस वक़्त अगर वो दोनो एक दूसरे के सामने होते तो एक जबरदस्त चुदाई कर बैठते...

पर ऐसा होना अभी के लिए संभव नही था...

खासकर कामिनी के लिए, क्योंकि उसे अपने रीति रिवाजो और अपने पापा की आँखो की शर्म या डर का अच्छे से एहसास था...

पर कुणाल के लिए ऐसा कुछ नही था...
एक तो वो लड़का था उपर से उसे अपनी मंगेतर यानी कामिनी का साथ था, जो उनके मिलन का ज़रिया बनना चाहती थी...
पर अभी ये बात उसने निशु को नही बताई...
क्योंकि जो खेल आगे चलकर खेला जाने वाला था, उसमे मिलने वाला इनाम वो पहले से ही उजागर करके इस खेल का मज़ा नही बिगाड़ना चाहता था..

पर जल्द ही 'कुछ' करने का वादा करके उसने फोन रख दिया...

अपनी हालत देखकर उसे भी हँसी आ गयी,
अपने बिस्तर पर नंगे होकर उसने मूठ मारी थी आज,
जो आज से पहले कभी नही किया था...
ये साली लड़किया क्या-2 करवा देती है हम लड़को से...

नहा धोकर वो बाहर आया और नाश्ता करके कुछ देर टीवी देखा..
तब तक निशु और मोंम मार्केट से आ गये..
कुणाल ने कामिनी के साथ बैठकर शाम का प्रोग्राम बनाया और करीब 7 बजे वो दोनो तैयार होकर निकल गये..

आज निशु के पापा बड़ी बेसब्री से उनके आने का इंतजार कर रहे थे,
बड़े दिनों बाद उन्हे जुआ खेलने में मज़ा आ रहा था ,
आता भी क्यो नही, एक तो खेलने वाली सैक्सी लड़की थी उपर से वो जीत भी रहे थे,
ऐसे में मज़ा भला किसे नही आएगा..

कुणाल ने जब निशु को देखा तो उसकी नज़रों मे उसे एक प्यास नज़र आई, जो उसे ही बुझानी थी..



कामिनी ने आने से पहले ही कुणाल को समझा दिया था की बोर होने का बहाना बनाकर वो टीवी देखने के लिए अंदर वाले रूम मे चला जाए, और वहां जाकर जो कर सकता है वो करले, निशु के पापा को अगर शक हुआ या वो अंदर आने लगे तो वो उन्हे आगाह कर देगी या संभाल लेगी..

और आज तो कामिनी ने ऐसी सैक्सी ड्रेस पहनी जिसकी कुर्ती का गला काफ़ी गहरा था,
अंकल जी की नज़रें उसके मम्मों पर ही टिकी रह गयी जब वो झुक कर उनके सामने बैठी..



वो उनकी नज़रों को देखकर मन ही मन मुस्कुरा उठी..

पत्ते बाँटते हुए जब वो थोड़ी सी और झुकी तो अंकल जी की साँसे उसके कानो तक सुनाई देने लगी...
कामिनी को तो डर ही लगने लगा की कहीं ये बुड्ढा उसके मम्मे देखकर ही लुढ़क गया तो सारा खेल वही बिगड़ जाएगा, इसलिए उसे ये सब आराम-2 से ही करना था.

पहली बाजी जब शुरू हुई तो बूट का अमाउंट 50 रुपय रखा गया...
और कामिनी तो पहले से ही सोचकर आई थी की आज का दिन उसे हारना भी है और अंकल जी को अपने जाल में फँसाना भी है..

इसलिए अच्छे पत्ते आने के बावजूद वो पेक कर देती थी...
हालाँकि बीच-2 में उसने एक दो बाजियाँ दिखाने के लिए जीती भी थी पर ज़्यादातर वो हारी ही...
अगर अपने पास आए पत्तो के हिसाब से खेलती तो आज अंकल जी कंगाल हो जाने थे..

पर उसे तो अंकल को कंगाल नही करना था,
उसका मकसद तो कुछ और ही था..

कुणाल बड़ी बेसब्री से कामिनी के खेल को देख भी रहा था और उसकी अगली चाल का इंतजार भी कर रहा था...
इस बीच निशु ने उनके लिए चाय भी बनाई और कुछ स्नैक्स भी...

निशु के मन में भी आज फोन पर हुई बातों के बाद एक अजीब सी हलचल थी....
वो भी बड़ी आस भरी नज़रों से कुणाल को देख रही थी क्योंकि जब से उसने किस्स लेने की बात कही थी उसके मन में भी कुछ-2 हो रहा था..
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12-07-2018, 01:55 PM,
#17
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
कुणाल अपनी मंगेतर के होते हुए उसे किस्स करना चाहता है इस बात में उसे कुणाल का सच्चा प्यार ही दिखाई दे रहा था..

और वैसे भी, एक बात तो वो जान ही चुकी थी की अब वो कुणाल को अपने पति के रूप में पा नही सकेगी पर उसके साथ ये सब करके वो अपने पहले प्यार का हक ही जता रही थी उसपर
और पहले प्यार की जगह कोई नही ले सकता..

अगली गेम के बाद कामिनी ने अंकल से कहा : "अंकल जी, हम तो यहाँ मज़े से खेल रहे है पर ये दोनो को देखो, कैसे बोर से हो गये है अभी से...''

और फ़ि उसने कुणाल की तरफ देखा और बोली : "अगर आप बोर हो रहे है तो हम चले क्या...''

ये सुनते ही अंकल जी को जैसे जोश सा आ गया...
वो बोले : "अरे , अभी से कैसे चलो, खाना खाकर ही जाओगे आज तुम दोनो...और रही बात कुणाल की तो वो तब तक टीवी देख लेगा...निशु और कुणाल तो बचपन के साथ है, आपस मे टीवी देखते हुए बोर भी नही होंगे दोनो...''

फिर उन्होने खुद ही निशु को कुणाल के साथ अंदर के कमरे में जाने के लिए कहा...
और अपने पापा की बात सुनकर मंद-2 मुस्कुराती हुई निशु ने कुणाल को इशारा करके अंदर चलने का न्योता दिया..

अंदर जाते हुए कुणाल की नज़रें उसके हिलते हुए चूतड़ों पर थी...
उन्हे मसलने में कितना मज़ा आने वाला है ये तो वही जानता था...
और अगर उसे उसकी गांड मारने का मौका मिल गया तो वो अपना जीवन सफल मान लेगा कसम से..

उसकी गांड को देखते हुए वो चलता चला जा रहा था और उसे पता भी नही चला की वो अंदर पहुँच गये है और वो रुककर उसे बैठने को कह रही है..
कुणाल अपनी ही धुन्न में आगे चलता चला गया और सीधा निशु से आ टकराया और उसे लेता हुआ वो पीछे के सोफे पर जा गिरा...

एकदम फिल्मी सीन था वो...
निशु की पतली कमर के नीचे कुणाल का हाथ था और उसके मम्मों पर उसका चेहरा...
और गिरने के बाद दोनो ने कोशिश भी नही की उठने की,
हालाँकि निशु को उठ जाना चाहिए था क्योंकि बाहर उसके पिताजी बैठे थे,
ऐसे आवाज़े सुनकर वो अंदर आ सकते थे,
पर कुणाल का चेहरा इतने करीब देखकर और उसके बदन पर अपना जिस्म रगड़कर उसे कुछ होश ही नही रहा और उसकी आँखो में एक नशा सा उतरता चला गया...
जिसे कुणाल ने सॉफ महसूस किया और उसने पहल करते हुए मौके का फायदा उठाया और अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए...

''उम्म्म्ममममममममममममम....... ओह.... निखी.ल्ल्ल्ल्ल.... आई लव यूँ निखिल्ल....... आई लव योउ.....पुचssssssss''

निशु ने बेतहाशा तरीके से बुदबुदाते हुए उसे अपने उपर बिछा सा लिया और उसे अपने होंठो का मीठा रस पिलाने लगी..



आज करीब 15 साल हो चुके थे उस बात को पर आज भी उसके होंठो की मिठास वैसी ही थी जैसे पहली बार में किस्स करने पर..

कुणाल ने तो उसके होंठो को ऐसे-2 तरीक़ो से चूसा की उसका बुरा हाल हो गया,
इतनी बुरी तरह से भी कोई स्मूच कर सकता है ये निशु ने आज ही जाना..
पर वो भला उसे क्यो रोकती ,
मज़ा तो उसे ही आ रहा था ना ये सब करवाने में ..

करीब 5 मिनट तक एक दूसरे को चूसने के बाद दोनो अलग हुए और निशु ने अपना हुलिया ठीक किया...
वो बाहर की तरफ आई और उसने अपने पिताजी और कामिनी को खेलते हुए देखा तब वो निश्चिंत हुई...
ऐसे छुप कर प्यार का खेल खेलने में उसे सच में काफ़ी मज़ा आ रहा था..

वो वापिस आई और कुणाल की गोद में जाकर बैठ गयी और अपनी बाहें उसके गले में डाल कर उससे लिपट गयी.



इसी बीच बाहर तीन पत्ती का खेल खेलती कामिनी ने अपनी गेम स्टार्ट कर दी...

वो अचानक अपनी पीठ पर खुजली करने लगी और हड़बड़ा कर चिल्लाने भी लगी..

''हहाय ..उफफफ्फ़.....ओह अंकल जी....देखना ज़रा...लगता है कोई कीड़ा घुस गया अंदर....''

इतना कहते हुए वो अंकल के करीब जा बैठी...

कामिनी की कुरती का गला आगे से जितना गहरा था, उससे भी ज़्यादा गहराई उसके पीछे की तरफ थी.

उसकी मखमली और गोरी पीठ को देखकर अंकल जी अपनी ही दुनिया में खो गये..



वो छटपटाने का नाटक करती हुई बोली : "करो ना अंकल ...पीछे देखो , है कोई कीड़ा....''

बेचारे अंकल की हवा टाइट हो गयी...
अपनी बेटी की उम्र की लड़की को इतने पास से देखने के बाद उनके बूढ़े लंड में फिर से जान आ रही थी.

वो बोले : "नही...कुछ दिखाई तो नही दे रहा....''

कामिनी : "अंदर देखो ना....''

अंकल जी की रूह काँप गयी ये सुनते ही पर फिर भी हिम्मत करके उन्होने काँपते हुए हाथ उसकी कुरती में डाल दिए...

कामिनी की मखमली पीठ का स्पर्श पाकर उनका लंड तन कर पूरा खड़ा हो गया..

उनका हाथ अंदर जाता चला गया और उसके ब्रा स्ट्रेप से जा टकराया...

कामिनी : "हाँ हाँ ...यहीं पर है कुछ...प्लीज़ ब्रा को खोल दो...शायद उसी की वजह से हो रही है खुजली...''

कामिनी के मुँह ब्रा शब्द सुनकर अंकल जी की साँसे और तेज हो गयी
और जब उसे खोलने के लिए कहा गया तो उनकी मरने जैसी हालत हो गयी....
वो भी उपर मुँह करके शायद भगवान से यही कह रहे थे की ऐसी उम्र में ये कैसे झटके दे रहो हो भगवन..
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12-07-2018, 01:55 PM,
#18
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
पर कामिनी के शब्दो का नशा ही इतना था की वो बिना कुछ सोचे समझे वो करते चले गये जो वो उनसे कह रही थी...
इतना भी नही सोचा की भला वो उन्हे ऐसा करने के लिए क्यो बोल रही है...
ये काम तो वो अपने मंगेतर से या उनकी बेटी से भी करवा सकती है जो अंदर बैठे है...
पर ठरकी बुड्ढ़ो को ऐसा मौका मिले तो उनका दिमाग़ काम करना बंद कर देता है,
फिर वो अपने लंड की ही सुनते है ना की दिमाग़ की.

उसकी ब्रा खुलते ही उसकी छातिया एक झटके से आगे की तरफ लहराई और थोड़ी और बड़ी हो गयी...
पीछे बैठे अंकल की नज़रें उसकी क्लीवेज पर ही थी जो एकदक से काफ़ी बड़ी दिखाई देने लगी थी अब...
और फिर कामिनी के कहे अनुसार उन्होने उसकी ब्रा स्ट्रेप वाले हिस्से पर अच्छे से रगड़ाई की,
ऐसा करवाते हुए एक पल के लिए तो कामिनी भी बहक सी गयी और सोचने लगी की इस उम्र के आदमी से चुदवाने में कैसा फील होता होगा..

खैर, कुछ देर तक अपनी पीठ की मालिश करवाकर वो वापिस आकर उनके सामने बैठ गयी और खेलने लगी,
जैसे कुछ हुआ ही ना हो...

और इस बार उसके गले में झूल रहे मम्मे थोड़े और बड़े हो चुके थे,
जो अंकल जी को अच्छे से रिझाने का काम कर रहे थे..



कामिनी उन्हे बीजी रखने में सफल हो चुकी थी और अंदर उन दोनो में प्यार की गर्मी थोड़ी और बढ़ चुकी थी...

आज की शाम कुछ होने वाला था उस घर में.

अंदर भी और बाहर भी. 

एक बार फिर से जुए का खेल शुरू हुआ...
अंकल जी जीते हुए थे, इसलिए पत्ते भी वही बाँट रहे थे...
पर उनका सारा ध्यान इस बार कामिनी के मम्मों पर ही था, जो ब्रा की क़ैद से निकलने के बाद उनकी आँखो के सामने ऐसे झूल रहे थे जैसे नन्हे खरबूजे पेड़ो पर टाँग दिए हो...
उन्हे चूसने और दबाने मे कितना मज़ा आने वाला था इसका तो अंदाज़ा ही लगा सकते थे अंकल जी पर उनके मन में ये विचार ज़रूर आया की ऐसा अगर एक बार हो जाए तो इस बुडापे में ही सही पर उनकी लाइफ बन जानी है.


वही दूसरी तरफ अपने पत्तो को बिना देखे कामिनी ने 100 की ब्लाइंड चल दी, बावजूद इसके की अंकल जी का ध्यान गेम पर नही था...
पर तिरछी नज़रो से वो उन्हे देख भी रही थी की कैसे वो अपनी बूढ़ी और चमक रही आँखो से उसके योवन को चूस रहे है...
कामिनी ने उनके मुरझाए हुए होंठो को देखा और सोचने लगी की उनकी पकड़ उसके स्तनों पर कैसी लगेगी...
कैसे वो अपने बूड़े होंठो से उसके निप्पल्स को चुभलाएँगे, उन्हे चूसेंगे...उफफफफफ्फ़ ....
भले ही बूड़े थे अंकल जी पर उनमे जो आकर्षण था वो कामिनी को अब लुभा रहा था...
गेम के बहाने वो अपनी उस फेंटेसी को शायद पूरा कर लेना चाहती थी जिसमे वो अपने बाप की उम्र के आदमी से सैक्स करे...
और ये फॅंटेसी उसे अपने पिता की वजह से मिली थी क्योंकि वो काफ़ी हैंडसम थे, बचपन से ही उन्हे देखते हुए वो अक्सर सोचा करती थी की उन जैसा स्मार्ट आदमी किस अंदाज से प्यार करता होगा...
हालाँकि अपने पापा को उसने इस नज़र से आज तक नही देखा था पर उनके जैसा कोई दूसरा मिल जाए तो शायद उसे बुरा ना लगे...

यही सब सोचते-2 उसके मन में यही ख्याल आया की वो ये काम करके ही रहेगी...
आख़िर अपने होने वाले पति की भी इच्छा वो पूरी कर ही रही है...
पर पता नही कुणाल उसकी इजाज़त देगा या नही...
लेकिन वो बाद की बात थी..
अभी के लिए वो कम से कम उपरी मज़े तो ले ही सकती है ना...
जैसा की शायद वो दोनो अंदर ले रहे होंगे..

और अपनी योजना को रूप देने के मकसद से उसने फिर से अपनी पीठ पर खुजली का वही बहाना किया...

अंकल जी तो पहले से ही तैयार बैठे थे इस बार...
वो खुद ही उठकर उसके करीब आए और उसकी कुरती में हाथ डालकर उसे सहलाने लगे...
अंकल जी का खड़ा हुआ लंड उसके कंधे से टकरा रहा था जिसके एहसास से ही पता चल रहा था की उनमे अभी काफ़ी जान है...
ये एक और कारण बन गया उसकी फेंटेसी को निश्चय में बदलने का...

अंकल जी का हाथ उसकी मखमली पीठ पर उपर से नीचे तक सहला रहा था और उनकी नज़रें उपर से उसके मम्मों को भेद भी रही थी...

कामिनी ने कसमसाते हुए कहा : "लगता है कोई कीड़ा ही है....वरना इतनी परेशानी तो आज तक नही हुई...''

अंकल जी बोले : "जो सकता है तुम्हारी ब्रा का स्ट्रैप चुभ रहा हो...''

वो बड़ी ही भोली आवाज़ मे बोली : "हाँ ...हो भी सकता है....ये ब्रा पहली बार ही पहनी है मैने...शायद छोटी आ गयी है...36 के बदले 34 आ गयी है शायद...''

बातों ही बातों में उसने अंकल जी को अपनी छाती का नाप भी दे डाला..
और उसका असर उनपर ऐसा हुआ की उनके हाथ की पकड़ उसकी मांसल पीठ पर और सख्त हो गयी...
शायद उसकी ब्रा का साइज़ उन्हे अंदर तक उत्तेजित कर गया था.

वो बोले : "अगर ऐसा है तो एक बार बाथरूम में जाकर चेक कर लो...ऐसे बेकार में परेशानी होती रहेगी वरना...''

उन्होने अपने बेडरूम में बने बातरूम की तरफ इशारा किया जो ड्रॉयिंग रूम के सामने ही था...

वो भी बिना झिझक के उठी और बोली : "आप सही कह रहे हो ...मैं अंदर जाकर अपनी ब्रा उतार कर ही देखती हूँ ...ये वाली गेम को ऐसे ही रहने देना अंकल...पत्ते मत देख लेना अपने...ओके ...''

अंकल जी ने हंसते हुए उसे पत्ते ना देखने का आश्वासन दिया और वो अपनी गांड मटकाते हुए उनके बेडरूम की तरफ चल दी.

अंकल ने उसकी गांड की मांसलता देखी और अपने लंड को सहलाते हुए कहा : "हाय ....आजकल की लड़कियों की गांड एकदम दिल के आकार की होती है... कच्छी में ऐसी गांड कितनी सैक्सी दिखेगी,
अपने लंड से ऐसे दिल को भेदने में कितना मज़ा आएगा...उफफफ्फ़...''



भले ही बूढ़े हो चले थे वो..
पर जवानी का नशा उनपर से अभी तक उतरा नही था..

उसके अंदर जाते ही उन्होने सोचा की उसे छुपकर देखा जाए..
पर उससे पहले वो निश्चय कर लेना चाहते थे की उनकी बेटी और कुणाल अंदर क्या कर रहे है,
कही वो एकदम से बाहर आ गये तो वो पकड़े जाएँगे...
और ऐसी उम्र में इस तरह की हरकत करते हुए पकड़े जाना वो हरगिज़ नही चाहते थे...

वो अपनी बेटी के बेडरूम की तरफ चल दिए...
अपने पापा के कदमो की आहत सुनते ही वो उछलकर कुणाल की गोद से उतर गयी और सामने वाले सोफे पर बैठ गयी...

टीवी तो पहले से ही चल रहा था इसलिए वो बड़े ही सिरिअस स्टाइल से टीवी देखने का नाटक करने लगी..



अंकल जी ने जब देखा की वो दोनो तो टीवी देखने में इतना बिज़ी है की उनके आने का भी पता नही चला उन्हे तो वो चुपचाप वापिस आ गये...
अब वो निश्चिंत थे की वो दोनो बाहर नही आने वाले..
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12-07-2018, 01:55 PM,
#19
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
वहां से वो सीधा अपने बेडरूम की तरफ भागते हुए से गये...
और वहां जाते ही जो उन्होने देखा, वो उनके दिल की धड़कने रोकने के लिए काफ़ी था...
कामिनी ने दरवाजा भी पूरा बंद नही किया था, और बाथरूम के मिरर में उसका अक्स सॉफ दिखाई दे रहा था...

अब अंकल जी को ये भला कैसे पता चलता की ये उसने जान बूझकर ही किया था...
उसे तो जैसे पक्का विश्वास था की वो बुड्ढा उसे देखने के लिए अंदर ज़रूर आएगा और उसने जब अंदर के वाश्बेसिन पर लगा बड़ा सा मिरर देखा तो उन्हे कुछ इनाम देने की सोची उसने...

कामिनी ने दरवाजा थोड़ा सा खोल दिया ताकि बाहर से आने पर उस खुले दरवाजे से अंदर के मिरर के सामने खड़ी कामिनी का अक्स उन्हे दिखाई दे जाए...
और जब उसने देखा की अंकल जी बाहर आकर खड़े हो गये है तो उसने बड़ी ही बेबाकी से अपनी कुरती उतार दी...
ब्रा तो पहले से ही खुली हुई थी, इसलिए वो भी कुरती के साथ ही उतर का बाहर आ गयी...
अब वो एक बड़े से शीशे के सामने एकदम टॉपलेस होकर खड़ी थी...

उसके मन में पता नही क्या आया की उसने अपना मोबाइल निकाला और अपनी टॉपलेस पिक खींच ली..
शायद वो बाद मे कुणाल को ये सब दिखाना चाहती थी.



वो तो अपने मज़े ले रही थी पर बाहर खड़े अंकल जी की हालत बुरी हो रही थी वो सब देखकर...
आज तक उन्होने किसी भी जवान लड़की को ऐसी हालत में नही देखा था...
उसके एकदम तने हुए मम्मे देखकर उनके मुँह में पानी आ गया और वो सोचने लगे की काश एक बार ये चूसने को मिल जाए तो मज़ा ही आ जाए...

अंदर खड़ी हुई कामिनी ये सब देखकर हंस भी रही थी...
उसे अंदाज़ा था की उसकी ये हरकत उस बूढ़े इंसान पर क्या सितम ढा रही होगी...

पर उसे तो अपनी इस गेम को थोड़ा और आगे बदाना था...
इसलिए उसने अपनी ब्रा को उठाया और उसे उलट पलटकर देखने लगिकी आख़िर उसमे क्या दिक्कत है...

फिर उसने कुछ सोच समझकर अंकल जी को पुकारा...

''अंकल जी......अंकल जी...कहाँ हो आप....''

उसने आवाज़ इतनी ही ज़ोर से आगाई थी की वो अंकल जी तक ही जा सके...
ना की दूसरे बेडरूम में बैठे कुणाल और निशु तक...

अंकल जी तो उसी कमरे में थे...
इसलिए कुछ देर रुककर वो अंदर आने का नाटक करते हुए बोले : "हाँ कामिनी...बोलो ...क्या बात है...''

कामिनी ने अंदर से ही कहा : "अंकल जी...ये मेरी ब्रा का हुक ही है जो मुझे चुभ रहा था...तोड़ा सा टेडा हो गया है ये, इसलिए पीठ पर चुभ रहा है...आपके पास प्लास है क्या, उससे दबाकर ये ठीक हो जाएगा शायद...''

अंकल जी तो अभी तक कामिनी की बेवकूफी पर हंस रहे थे की उसे इतना भी अंदाज़ा नही है की अंदर आधी नंगी खड़ी होने के बाद उसका अक्स उन्हे बाहर दिख रहा है...
कैसी नासमझ है ये लड़की...
पर अंदर से वो खुश भी थे क्योंकि उसकी इसी नासमझी की वजह से वो उसे उपर से नंगा देख पा रहे थे.

वो भागकर उसके लिए प्लास ले आए और खुले हुए दरवाजे से उसे अंदर की तरफ दे दी...

उसने वो पकड़ी और कुछ देर तक उसे ठीक करने के बहाने से उसे और टेडा कर दिया...
फिर वो बोली : "अंकल जी...मुझसे तो हो नही रही ये...आप देखो, आपसे होगी या नही...''

इतना कहते हुए उसने ब्रा और प्लास बाहर की तरफ पकड़ा दी...

अंकल जी के हाथ में जब उसकी गर्म -2 ब्रा आई तो उनका लंड फटने जैसी हालत में हो गया...
उन्होने तुरंत वो ब्रा अपने चेहरे पर रगडी और कामिनी के गर्म मम्मों का एहसास उन्हे फील हुआ जो कुछ देर पहले तक उसी ब्रा में कसे हुए बैठे थे...

इस व्क़्त वो ये भी भूल चुके थे की जिस तरह बाहर से अंदर का उन्हे मिरर के थ्रू दिख रहा था, उसी तरह उन्हे भी कामिनी मिरर के ज़रिए अंदर से देख पा रही थी...कैसे वो किसी ठरकी की तरह उसकी ब्रा को अपने चेहरे पर रगड़ रहे थे.

और अपनी ब्रा को उन्हे अपने चेहरे पर रगड़ते देखकर वो खुद भी उत्तेजित हो गयी....
और सोचने लगी की काश वो उनके चेहरे पर अपने मम्मे भी रगड़ पाती ताकि वो जान पाती की उनके बूढ़े होंठो में अभी तक कितनी जान है...
पर एकदम से वो ये काम नही करना चाहती थी...
हालाँकि कुणाल की तरफ से उसे आश्वासन था की वो अंदर से ना तो खुद ही बाहर आएगा और ना ही निशु को आने देगा, पर फिर भी कामिनी को ये सब इस तरह से करना था ताकि अंकल जी उसकी प्लानिंग ना समझ सके..
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12-07-2018, 01:55 PM,
#20
RE: Desi Sex Kahani पहली नज़र की प्यास
अंकल ने कुछ देर तक उसकी ब्रा को चूमा चाटा और फिर प्लास से उन्होने टेढ़े हुक्क को सीधा किया और उसे अंदर पकड़ा दिया...

और बोले : "ये लो....कर दिया ठीक....अब नही चुभेगा ये तुम्हारे बदन पर....''

और जब दरवाजे से उन्होने हाथ अंदर किया तो जान बूझकर दरवाजे पर हाथ ज़ोर से लगाया और वो खुलता चला गया...

और अंदर लगभग नग्न अवस्था में अपने योवन को शीशे में निहार रही कामिनी ने एकदम से बोखलाने का नाटक करते हुए अपनी छाती पर हाथ रखकर उन्हे छुपा लिया...
पर तब तक वो अपनी नंगी आँखो से अच्छी तरह से उसके मम्मों को देख चुके थे...
और वो भी इतनी करीब से..



अंकल : "ओह्ह्ह...सॉरी.....वो एक दम से पैर फिसल गया....''

कामिनी एक प्यारी सी मुस्कान अपने चेहरे पर लाई और बोली : "इट्स ओके अंकल जी...बाथरूम है ना...यहाँ चिकनाहट तो होगी ही...शुक्र है आप गिरे नही वरना चोट लग सकती थी...''

इतना कहते हुए उसने फिर से दरवाजा बंद कर दिया और अपने कपड़े पहन कर बाहर आ गयी..

तब तक अंकल जी वापिस जाकर अपनी चेयर पर बैठ चुके थे और उसके नंगे बदन को सोचते हुए अपने खड़े हुए लंड को बिठाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे..

वो मुस्कुराती हुई आई और वापिस अपनी सीट पर बैठ गयी...
और बैठने से पहले उसने बड़े प्यार से उन्हे थॅंक्स भी कहा..
और फिर उन्होने फिर से खेलना शुरू कर दिया.

इसी बीच अंदर वाले कमरे में जो हो रहा था उसका तो उन्हे अंदाज़ा भी नही था...

निशु के पापा ने जब अंदर आकर उन्हे चेक किया तो उन दोनो ने टीवी देखने का बहाना किया, जिसे देखने में वो दोनो डूबे हुए थे...
और उनके जाते ही निशु एकदम से उछल कर खड़ी हुई और वापिस आकर कुणाल से लिपट गयी और उसके होंठो को चूसते हुए बोली : "अब वो अगले 15-20 मिनट तक नही आने वाले...जो करना है कर लो...''



उसका ये ऑफर इतना लुभावना था की कुणाल का लंड उसकी पेंट में चुभने सा लगा..

वो उसकी सैक्सी आँखो में देखता हुआ बोला : "कुछ भी कर लूं ...''

निशु : "हाँ ....कुछ भी....''

उसके लरजते होंठो से जब ये निकला तो कुणाल का अपने आप पर काबू नही रहा और वो उसपर टूट सा पड़ा...

वो भी इस बात से अंजान था की उसके प्रेमिका इस वक़्त बाहर निशु के पापा के साथ क्या कर रही है...
उसे तो बस अपनी निशु से मतलब था इस वक़्त...
जो उसके साथ कुछ भी करने को तैयार थी.

कुणाल ने निशु के होंठो को करीब 1 मिनट तक चूसा तो उसने कसमसाते हुए कहा : "आआआअहह कुणाल.....आई लव यूssssssss ....यू आर रियली गुड किस्सर.....लेट मी सी की नीचे भी तुम ऐसे ही किस्स कर पाओगे या नही....''

उसकी आवाज़ में एक चेलेंज भी था, जिसे पूरा करने में कुणाल को कोई परेशानी नही थी...



वैसे इस तरह की बातें करने वाली लड़कियां बड़ी चालाक होती है,
वो चेलेंज के तौर पर सैक्स के समय ऐसी बातें बोल देती है जिन्हे पूरा करने में उनका पार्ट्नर अपनी जी जान लगा देगा और बदले में मज़ा तो उन्हे ही मिलने वाला होता है..

कुणाल ने उसके होंठो को छोड़ा और उसे चूमता हुआ नीचे आने लगा...
मज़े की बात ये थी की अभी तक दोनो ने अपने कपड़े पहन रखे थे...
जो शायद कुछ ही देर में उतरने भी वाले थे.
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