Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
08-18-2019, 01:58 PM,
#71
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
दोपहर शाम मे ढली और शाम रात मे तब्दील हुई और फिर सवेरा हुआ...सवेरा होते-होते कल के ग्राउंड वाले कांड की खबर लगभग हर एक के कानो तक पहुच चुकी थी...कोई कहता कि फर्स्ट एअर के उन दोनो लड़को को अरमान ने और उसके दोस्तो ने मारा,तो कोई कहता कि सिटी वाले सीनियर के साथ उनका कुच्छ लोचा था , कुच्छ तो ये भी कहने वाले थे कि शायद उन दोनो को दिव्या के बाप ने मारा था.....उन्दोनो की हालत इस वक़्त खराब थी और दोनो सिटी के बेस्ट हॉस्पिटल मे अड्मिट थे...किसी को शक़ ना हो इसलिए मैं दूसरे दिन नॉर्मल सा बिहेव करते हुए नॉर्मल तरीके से कॉलेज गया और साथ मे बीमार होने का धंसु आक्टिंग भी किया... मेरा और मेरे खास दोस्तो का अंदाज़ वही था,जिसके लिए हम जाने जाते थे...और क्लास मे हम आज भी लास्ट बेंच पर लड़कियो के पीछे बैठे...बोले तो हम पहले की तरह आज भी बॅक बेन्चेर्स थे...क्लास के कुच्छ लड़को ने मुझसे पुछा कि क्या मैने फर्स्ट एअर के लड़को को मारा है...ऐसा सवाल करने वालो की लिस्ट मे मेरे क्लास के साथ-साथ मेरा दोस्त नवीन और कयि टीचर्स भी शामिल थे...वो सब जितनी भी बार मुझसे ये सवाल पुछ्ते मेरा जवाब हर बार एक होता और वो जवाब था कि"मैं तो कल लंच के बाद तबीयत खराब होने के कारण हॉस्टिल जाकर सीधे सो गया था....मुझे तो आज कॉलेज आने पर इस झगड़े के बारे मे मालूम चला..."
.
एमओएस की चलती क्लास के बीच मे हमारे होड़ सर क्लास मे घुसे और मुझे प्रिन्सिपल के ऑफीस मे चलने के लिए कहा ,जहाँ प्रिन्सिपल सर और थ्री स्टार की खाकी वर्दी पहने हुए एक पोलीस वाला मेरा इंतज़ार कर रहा था.....

"मे आइ कम इन सर..."रूखे आवाज़ मे मैने प्रिन्सिपल सर से अंदर आने की इजाज़त माँगी....

किसी को मुझपर शक़ ना हो इसलिए मैने आज ना तो सर मे तेल लगाया था और ना ही कंघी किया था...जिससे मेरे सर के बाल बिखरे हुए थे और मेरे बीमार होने की गवाही दे रहे थे...प्रिन्सिपल के ऑफीस मे आते वक़्त मैने अपनी दो उंगलियो को आँखो मे डाल लिया था,जिससे मेरी आँखे इस वक़्त एक दम लाल थी और जलन पैदा कर रही थी....जिससे मैं थ्री स्टार की वर्दी धारण किए पोलिसेवाले को यकीन दिला सकूँ मैं सचमुच मे बीमार हूँ और बड़ा कष्ट झेलकर कॉलेज आया हूँ,फिलहाल खुद को ग़लत होते हुए भी सही साबित करने की धुन मे मैने ब्रश तक नही किया था जिससे इस वक़्त मेरे मुँह से एक शानदार खुश्बू भी निकल रही थी जिसका असर वहाँ पर बैठे प्रिन्सिपल सर और उस पोलीस वाले पर हो रहा था.... मुझे सर्दी बिल्कुल भी नही थी लेकिन मैं वहाँ प्रिन्सिपल के ऑफीस मे खड़ा होकर अपनी नाक को सुड़कता और बीच-बीच मे खाँसता...ऐसी आक्टिंग करते हुए एक समय जब मैने खांसने का झूठा अभिनय किया तो उस वक़्त मुझे सच मे जोरो की खाँसी आ गयी और मेरी आँख लाल हो गयी ,ये खाँसी इतनी जबर्जस्त थी कि मेरे आँखो से आँसू भी निकल आए और मुँह से लार भी टपक गया

"अरे भाई,पानी पिलाओ इसको..."थ्री स्टार की वर्दी पहने हुए उस शक्स ने कहा और मुझे अपने पास,बगल वाली चेयर मे बिठाया...

वैसे मुझे बीमार बनकर प्रिन्सिपल के ऑफीस मे आने की कोई ज़रूरत नही थी ,क्यूंकी हमारा हॉस्टिल वॉर्डन ऑलरेडी हमारे पक्ष मे गवाही देने के लिए तैयार था...जिसके बाद कोई कुच्छ नही कर सकता था, लेकिन मैने सर मे तेल और बालो मे कंघी इसलिए नही किया क्यूंकी मैं देखना चाहता था कि यदि सीडार का हाथ मेरे सर पर नही होता तो क्या मैं तब भी खुद को बचाने मे कामयाब होता, मैं ये एक्सपेरिमेंट करना चाहता था कि यदि सीडार का पॉवर मेरे साथ नही होता तो क्या मैं तब भी खुद को पवरफुल साबित कर पाता या नही, ये एक्सपेरिमेंट थोड़ा हटकर था और साथ मे हमारे कॉलेज की लॅबोरेटरी मे होने वाले बोरिंग एक्सपेरिमेंट से ज़्यादा इंट्रेस्टेड भी था, सो आइ डिड....लेकिन मेरा ये एक्सपेरिमेंट तब फैल हो गया जब मेरे साइड वाली चेयर मे थ्री स्टार की वर्दी पहने हुए उस पोलीसवाले ने मेरी तरफ झुक कर कहा...
"मेरे कंधे पर थ्री स्टार यूँ ही नही लगी है मिसटर....मुझे हक़ीक़त की खाँसी और दिखावे मे फरक करना बहुत अच्छी तरह आता है,तूने क्या मुझे अपने कॉलेज का टीचर समझ रखा है जिसे तू जब चाहे तब बेवकूफ़ बना दे...हुह्म"
.
उस पोलीस वाले के ऐसा कहते ही मेरी साँस मानो एक पल के लिए रुक गयी थी,मैं उसकी तरफ एकटक देखे जा रहा था...
"पसीना सॉफ कर लो..."उस थ्री स्टार वाले ने अब प्रिन्सिपल की तरफ देखते हुए कहा"इस पर उन दोनो लड़को के दोस्तो ने रिपोर्ट की है और रिपोर्ट के मुताबिक इसने फर्स्ट एअर के दोनो लड़को को हॉस्टिल के पास वाले ग्राउंड पर ले जाकर बुरी तरह से मारा,पीटा...जिसकी वजह ये हो सकती है कि उन्होने कुच्छ दिनो पहले ही इसपर एफ.आइ.आर. किया था,जिसका बदला इसने उन्हे बुरी तरह से मारकर लिया...इसे हमारे साथ पोलीस स्टेशन चलना होगा....तू तो गया बेटा लंबे से"

"मैं तो परेशान हो गया हूँ इस लड़के से...मैं एक काम करता हूँ,इसके घरवालो को खबर करके कह देता हूँ कि इसकी टी.सी. कॉलेज से ले जाए और इसे पोलीस स्टेशन से ले जाए..."प्रिन्सिपल सर ने मेरी तरफ देखकर गुस्से से कहा और बाहर खड़े पीयान को अंदर बुलाया

जब पीयान प्रिन्सिपल के कॅबिन मे आया तो प्रिन्सिपल सिर ने उसे मेरे अड्मिशन फॉर्म से मेरे घर का कॉंटॅक्ट नंबर लाने को कहा...

मेरी खाँसी ये सब देखकर एक दूं ठीक हो चुकी थी,अब आँख भी लाल से सफेद हो गयी थी और मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग चुका था और यही वो वक़्त था जब सीडार के पॉवर का उसे करके खुद को बचाया जा सकता था...
.
"प्लान नंबर. 2 आक्टीवेटेड...."मैने खुद से कहा और फिर अपने चेहरे पर आए पसीने को सॉफ करके बोला"सर,आप बेवजह मेरे घरवालो को परेशान कर रहे है...मैने कुच्छ किया ही नही है ,मैं तो कल रिसेस के बाद से ही हॉस्टिल मे कंबल ओढ़ कर सोया हुआ था..."

"सच मे "मुझपर तिरछि नज़र मारते हुए थ्री स्टार वाले ने पुछा....

"यदि आपको यकीन ना हो तो हमारे हॉस्टिल वॉर्डन से पुच्छ लीजिए...उन्ही के रूम से मैं फीवर की टॅबलेट और झांदू बॉम लेकर गया था...जिसके बाद मैं अपने रूम मे जाकर सो गया और रात के 9 बजे मेरी नींद वॉर्डन के उठाने से खुली...जो उस समय हॉस्टिल का राउंड लगा रहे थे..."

ये सुनते ही प्रिन्सिपल सर ने सामने रखे फोन से हॉस्टिल के फोन पर घंटी मारी,जिसके बाद हमारे वॉर्डन ने उन्हे वही सब बताया जो मैने अभी-अभी बताया था....
.
"सॉरी ,पर अरमान सच कह रहा है और मेरी अतॉरिटी मुझे इज़्जजत नही देती कि मैं किसी स्टूडेंट को बेवजह परेशान करूँ...."प्रिन्सिपल सर ने अपना चश्मा टेबल पर रखते हुए पोलीस वाले से कहा और फिर वापस अपने चश्मे को आँखो मे फिट करते हुए एक ए-4 साइज़ के पेपर मे कुच्छ लिख कर,कॉलेज के सील का ठप्पा लगाया और उस कागज को पोलीस वाले के हाथ मे सौंप दिया......

उसके बाद पोलीस वाले ने कुच्छ देर मुझे देखा और वो कागज लेकर वहाँ से चलता बना....
.
प्रिन्सिपल के ऑफीस से बाहर निकल कर मैने एक मस्त लंबी साँस ली और ठंडा पानी पीकर क्लास की तरफ खुशी से कूदते-फान्दते गया...इस समय दंमो रानी की क्लास चल रही थी ,पहले तो उसने मुझे अंदर आने की पर्मिशन नही दी लेकिन जब मैने उसे बताया कि मुझे प्रिन्सिपल सर ने एक अर्जेंट काम से बुलाया था तो वो मान गयी और मुझे अंदर आने के लिए....

"बीसी, मेरी जगह पर इसे क्यूँ बैठाया...अब क्या मैं ज़मीन पर बैठू..."लड़कियो के पीछे वाली बेंच पर 7 लड़को को बैठे देखकर मैं धीरे से चिल्लाया और एक साइड अपना पिछवाड़ा टिका कर बैठ गया.....

"अरमान, आया समझ मे कि आन्सर कैसे आया..."चलती क्लास के बीच मे दमयंती ने मुझे खड़ा करके पुछा....

"सब समझ मे आ गया मॅम..."(लवडा समझ मे आया, मुझे तो ये तक नही मालूम की क्वेस्चन क्या था,साली चुदि चुदाई औरत...)

"तो फिर सामने आकर एक्सप्लेन करो..."

"आज थोड़ा...आननह "ज़ोर से खाँसते हुए मैने कहा और फिर रुमाल निकाल कर नाक सॉफ किया"आज तबीयत खराब है मॅम, कभी और एक्सप्लेन करूँगा..."

"ओके,सिट डाउन..."

"थॅंक्स "
.
दंमो गयी तो दंमो के बाद एमएस का टीचर आ टपका और भका भक लिखवाना शुरू कर दिया, साला एक तो ढंग से बैठा नही था उपर से वो ऐसे स्पीड मे बोले जा रहा था जैसे कि उसके गान्ड मे किसी ने लंड डाल दिया हो, बक्चोद कही का.....
"म्सी, बाद मे कौन आया है...वो उठकर अपनी जगह जाए..."फ्रस्टेशन मे मैं भड़क उठा....

"कोई कहीं नही जाएगा...जिसको प्राब्लम हो वो दूसरे बेंच मे जाकर बैठे..."

"सुन बे ,यदि ऐसा है तो भूल जा फिर कि दिव्या से मैं तेरी सेट्टिंग करवाउन्गा..."

"सॉरी यार,तू तो बुरा मान गया..."

"बुरा वो मानता है जिसके पास बुर होता है और मेरे पास बुर नही लंड है "
-  - 
Reply

08-18-2019, 01:58 PM,
#72
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मेरी ये धमकी असर कर गयी और अरुण ने तुरंत वहाँ से 3 लड़को को आगे भगा दिया ,अब वहाँ सबसे पीछे वाली बेंच पर सिर्फ़ मैं,अरुण,सौरभ और सुलभ बैठे थे...एमएस वाला टीचर अब भी भका भक स्पीड से लिखाए पड़ा था बिना इस बात की परवाह किए की आधे से अधिक लौन्डो-लौन्डियो ने लिखना बंद कर दिया है...लेकिन हम चारो अब भी लिख रहे थे और साथ-साथ मे बक्चोदि भी कर रहे थी....
.
"बेटा मुझे कुच्छ दो,वरना मैं सबको बता दूँगा कि उन दोनो को तुम लोगो ने ही ठोका है..."हमारी भका भक लिखाई के बीच मे सुलभ बोला...

"बोल क्या चाहिए तुझे...कार,बंग्लॉ,दमयंती की चूत...तू बोल क्या चाहिए तुझे...तू कहे तो तेरे लिए चाँद-सितारे तोड़ कर ले आउ "

"रहने दे ,तू बस तीन दिन के कॅंटीन का बिल दे देना अरुण...और तू सौरभ,तू बाकी के तीन दिन का बिल दे देना...."

"हम दोनो अपने लंड पर हाथ रख कर तुझे वचन देते है..."अरुण और सौरभ ने एक साथ कहा और अपना एक-एक हाथ अपने लंड पर रख लिया...

"और तू अरमान..."सुलभ की नज़रें अब मुझपर जम गयी...

"मैं तुझे हमारी अगली फाइट मे शामिल करूँगा...."

"ये हुई बात,तू ही है मेरा सच्चा मित्र...आइ लव यू "

"आइ लव यू टू...चल एक पप्पी दे "मज़ाक करते हुए मैं सुलभ की तरफ बढ़ा ही था कि एम एस वाले सर की नज़र हम पर पड़ गयी और वो ज़ोर से चीखा"क्या यार,ये तुम लोग क्या कर रहे हो...बेशर्मी की भी हद होती है..."

"कुच्छ नही सर,वो सुलभ की आँख मे कुच्छ घुस गया था,बस उसे निकाल रहा था..." बिना देरी किए मैं झटपट बोल उठा...

"मुझे मत सीखा तू...और यदि अगली बार से ऐसी हरकत की तो मार-मार के भरता बना दूँगा...समझा..."

"सब समझ गया सर..."
.
"अबे उसने हम दोनो को गे तो नही समझ लिया..."कुच्छ देर बाद सुलभ ने पुछा...

"यही तो प्यार है पगले और वैसे भी वो हमारा क्या उखाड़ लेगा..."
.
उसके बाद जब तक कॉलेज चला अरुण मेरी जान ख़ाता रहा वो मुझसे कयि बार पुछ चुका था की मैं उसकी,दिव्या से सेट्टिंग कब करवा रहा हूँ...जवाब मे मैने उसे कुच्छ देर रुकने के लिए कहा और जब कॉलेज ऑफ हुआ तो बाहर निकलते वक़्त मैने अरुण का मोबाइल माँगा....

"अब क्या करेगा मेरे मोबाइल का..."

"सीडार का नंबर ऑफ आ रहा है ,एक मेस्सेज कर देता हूँ कि सब कुच्छ कंट्रोल मे है..."

"तो तेरा मोबाइल कहाँ गया..."

"मेस्सेगे पॅक नही है अंकिल..."

अरुण से मैने कुच्छ देर के लिए मोबाइल लिया और फिर उसे वापस कर दिया....जब हम दोनो कॉलेज से हॉस्टिल की तरफ आ रहे थे तभी अरुण अचानक अपने मोबाइल को देखते हुए खुशी से रोड पर ही गिर पड़ा....

"मिर्गी मार गयी क्या बे "

"अबे अरमान...ये देख..."अरुण ने रोड पर लेटे-लेटे अपना मोबाइल मेरी तरफ बढ़ाया ,मैने उसके हाथ से मोबाइल लिया और मोबाइल की स्क्रीन पर नज़र डाली....

"आइ लव यू टू....सेनडर:-दिव्या..."पढ़ते हुए मैने अरुण को हाथ देकर उठाया...

अब अरुण की चाल ही बदल गयी थी...जहाँ हर दिन कॉलेज के बाद हमारी हालत खराब हो जाती थी,वही आज दिव्या के एक मेस्सेज ने अरुण के अंदर एनर्जी ला दी थी...वो इस समय उस छोटे बच्चे की तरह खुश हो रहा था,जिसे उसका मन पसंद खिलौना लाकर दे दिया गया हो....वो बार-बार दिव्या के मेस्सेज को पढ़ता और बीच-बीच मे मोबाइल की स्क्रीन को चूमने लगता...तो कभी अपने मोबाइल को सीने से लगाकर दिव्या का नाम लेने लगता....पूरे रास्ते भर अरुण ने ऐसी हरकते करके मुझे पकाया और जब हम हॉस्टिल के सामने आ गये तो वो रुक गया....

"अब क्या हुआ बे..."

"देखा बे,अपुन की स्मार्टनेस के आगे दिव्या फ्लॅट हो गयी...उसने मुझे खुद प्रपोज़ किया...अब मानता है ना कि मैं तुझसे और सौरभ से ज़्यादा हॅंडसम हूँ...लेकिन मुझे एक बात समझ नही आई कि इसने आइ लव यू टू ,क्यूँ लिखकर भेजा..."

"वो इसलिए मेरे लल्लू दोस्त क्यूंकी तूने उसे आइ लव यू का मेस्सेज लिख कर भेजा था इसलिए उसने आइ लव यू टू ,लिखकर रिप्लाइ किया "

ये सुनकर अरुण फिर से ज़मीन मे गिरने ही वाला था कि मैने उसे पकड़ लिया,

"मैने कब किया बे उसे मेस्सेज..."

"तूने नही,मैने किया था मेस्सेज...तेरे मोबाइल से उसके नंबर पर...कुच्छ याद आया या फ्लॅशबॅक मे ले जाउ..."

"बोसे ड्के ,तूने मुझसे कहा था कि तू सीडार को मेस्सेज करेगा "

"चल बोल पापा


.
मैं आज तक यही सोचता था कि मेरी थियरी हमेशा लड़कियो के मामले मे फैल होती है लेकिन उस दिन मुझे ये भी मालूम चल गया कि अरुण भी उन चन्द ग्रेट हमंस मे शामिल है...जिनपर मेरा सिक्स्त सेन्स कभी-कभी फैल हो सकता है....मुझे ये उम्मीद थी कि जब अरुण को मेरे द्वारा दिव्या के मोबाइल पर आइ लव यू ,वाले मेस्सेज का पता होगा तो वो मुझे गले लगाएगा और बोलेगा कि"अरमान कल तेरे कॅंटीन का बिल मैं भरुन्गा" या फिर आज रात के दारू का पूरा पैसा वो देगा....लेकिन साला यहाँ तो मेरी सारी सोच का ही क्रियाकर्म हो गया....मैं चुप चाप हॉस्टिल के अंदर अपने रूम की तरफ जा रहा था और अरुण मुझे गालियाँ बके जा रहा था...
-  - 
Reply
08-18-2019, 01:58 PM,
#73
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"अबे लवडे,तेरा दिमाग़ घास चरने गया है क्या,..यदि दिव्या आइ लव यू,वाला मेस्सेज अपने भाई या अपने बाप को दिखा देती तो मेरा क्या हाल होता...यदि उसने भूले से भी वो मेस्सेज हमारे प्रिन्सिपल को दिखा देती तो आज ही मैं कॉलेज-निकाला घोसित हो जाता...."

"तू इतना भड़क क्यूँ रहा है,ऐसा कुच्छ भी तो नही हुआ ना..."

इतना अच्छा काम करने के बाद अरुण की गालियाँ सुनने से गुस्सा मुझे भी आ रहा था, अरुण की बॉडी की तरह मेरे भी बॉडी का टेंपरेचर बढ़ रहा था...लेकिन कैसे भी करके मैने अपने बॉडी टेंपरेचर को 25°सी पर मेनटेन करके रखा हुआ था क्यूंकी वो अपुन का सॉलिड दोस्त था....

"ऐसा कुच्छ भी नही हुआ का क्या मतलब बे...तू हमेशा चूतिया रहेगा..बकलंड कही का...उल्लू साले,कुत्ते,कमीने..."मुझे धक्का देते हुए अरुण ने कहा...

अरुण का ये धक्का सीधे मेरे लेफ्ट साइड मे असर किया और मैने अपने बिस्तर के नीचे रखा हुआ हॉकी स्टिक उठाया और बोला...

"सुन बे झन्डू ,यदि आगे एक शब्द भी बोला तो ये डंडा तेरी गान्ड मे घुसाकर मुँह से निकालूँगा...यदि गान्ड मे इतना ही दम था तो फिर मुझे क्यूँ बोला कि मैं तुझे दिव्या की चम्मी दिलाऊ, जा के खुद क्यूँ नही माँग ली...एक तो साला एहसान करो उपर से गाली भी खाऊ...सही है बेटा,बिल्कुल सही है..इसिच को कहते है हवन करते हुए हाथ जलना....चल फुट इधर से अभी और यदि अपने साले गौतम और अपने ससुर का तुझे इतना ही डर था तो फिर दिमाग़ से पैदल उस दिव्या से इश्क़ ही क्यूँ लड़ाया...बेटा ये प्यार-मोहब्बत वो मीठी खीर नही,जिसे घर मे तेरी मम्मी सामने वाली टेबल पर रखकर कहती है कि खा ले बेटा,खीर बहुत मीठी बनी है जिसके बाद तू अपना मुँह फाड़कर सारा का सारा निगल जाता है और डकार भी नही मारता...ये प्यार-मोहब्बत वो मीठी खीर है जिसे खाने के बाद बंदे की जीभ से लेकर कलेजा और आख़िर मे गान्ड तक जल जाती है...इसलिए यदि गट्स है तभी माल के पीछे पडो,वरना उन्हे पीछे छोड़ दो...और तूने क्या बोला मुझे...."

"माफ़ कर दीजिए जहांपनाह और मेरी फाड़ना बंद करिए...आप कहे तो मैं गंगा नदी के बीच मे जाकर दोनो कान पकड़ कर उठक-बैठक लगा लूँगा...."

"अब आया ना लाइन पर..."

"अब आगे क्या करूँ..."

"फ़ेसबुक चला और उसको अपनी आदत डलवा दे...ताकि जब तू उससे एक पल के लिए भी दूर रहे तो वो तड़प जाए,तुझसे बात करने को..वो बेचैन हो उठे तुझ जैसे बदसूरत को देखने के लिए....फिर देखना वो चुम्मी भी देगी और चुसेगी भी..."

"क्या चुसेगी बे.."

"होंठ...होंठ चुसेगी,वैसे तूने क्या सोचा था "

"मैने भी होंठ ही सोचा था "

"बस मेरे बताए रास्ते पर चलते रह...कुच्छ ही दिनो मे वो मज़े से लेगी भी और मज़े से देगी भी..."

"ये क्या बक रहा है बे कुत्ते..."

"मेरा मतलब तो गिफ्ट से था,अब भाई जब तुम दोनो कपल हो ही गये हो तो एक-दूसरे को गिफ्ट तो दोगे ही ना और बेटा ज़रा संभाल कर उसे दारू मत दे देना गिफ्ट मे..."

"ओह! समझ गया..."

"बस तू मेरे नक्शे कदम पर चल,दिव्या अपने आगे से भी लेगी और पीछे से भी लेगी..."

"मुझे मालूम है तेरे कहने का मतलब गिफ्ट है..."

"ग़लत...मेरा कहने का मतलब लंड था,मतलब कि वो आगे भी लंड लेगी और पिछवाड़े मे भी लंड लेगी.."ये बोलते ही मैं तुरंत वहाँ से काल्टी हो गया और अरुण हॉकी स्टिक लेकर मुझे दौड़ाने लगा......
.
.
"अरमान,यही पर रोक दे यार...अबकी बार तीसरा कॉल आया है ऑफीस से,मैं चलता हूँ..."वरुण अपने वाइब्रट होते मोबाइल को हाथ मे पकड़ कर बोला...वरुण तैयार तो पहले से था इसलिए उसने एक मिनिट मे शू पहने और फ्लॅट से निकल गया.....

वरुण के जाने के बाद मेरे होंठो पर एक मुस्कान थी...ये मुस्कान उस वक़्त की थी ,जब अरुण मुझे धमकिया देते हुए पूरे हॉस्टिल मे दौड़ा रहा था...साला वो भी क्या पल थे,..कहने को तो हमारा हॉस्टिल किसी फाइव स्टार होटेल की तरह आलीशान तो नही था...लेकिन हमारे लिए हमारा हॉस्टिल किसी फाइव स्टार होटेल से कम भी नही था...हॉस्टिल की बेजान सी दीवारो,दरवाजो जिन पर हम अक्सर पेन से ड्रॉयिंग और कॉलेज के टीचर्स के कार्टून बनाया करते थे ,उन भद्दी सी दीवारो से हमे एक लगाव सा हो गया था...और आज फिर दिल कर रहा था कि उन बेजान सी भद्दी दीवारो के बीच रहूं, आज फिर दिल कर रहा था की अपने टीचर्स के कार्टून उन बेजान सी दीवारो पर बनाऊ और हॉस्टिल के बाथरूम मे जाकर स्पर्म डोनेट करूँ...पर ये मुमकिन नही था और शायद समय का चक्र ही एक ऐसी घटना थी,जिसके सामने मैने हार मानी थी....
.
"अबे ओये मुँह बंद कर ले..." मुझे ज़ोर से हिलाते हुए अरुण बोला"इसी दुनिया मे है ना या फिर किसी एलीयन के साथ दूसरे प्लॅनेट की सैर कर रहा है..."

"मैं तो अपने स्वर्ग की सैर कर रहा था और तूने मुझे वहाँ से खींच लिया...साले तू हमेशा मेरे खास पल के बीच मे ही क्यूँ आकर टपक पड़ता है..."

"वो इसलिए क्यूंकी मैने तेरी एमाइल आइडी चेक की और निशा के सारे मेस्सेज पढ़ डाले..."

"ये तूने क्या किया..."

"अबे रिक्ट तो ऐसे रहा है,जैसे मैने तेरी गान्ड मार ली हो..."

"लेकिन फिर भी तुझे ऐसा नही करना चाहिए था...ये ग़लत है.."

"कुच्छ ग़लत नही है बीड़ू और जाकर इनबॉक्स चेक कर 40 मिनिट्स पहले निशा डार्लिंग ने मेस्सेज भेजा है..."

"सच...!"वहाँ से तुरंत उठकर मैं कंप्यूटर के पास पहुचा और अपना इनबॉक्स चेक किया...निशा ने आज एक मेस्सेज भेजा था लेकिन वो अनरीड मेस्सेज के ऑप्षन मे नही था जिसका सॉफ-सॉफ शुद्ध मतलब था की मेरे विशुध दोस्त ने निशा का ये मेस्सेज भी पढ़ लिया है....


"दूसरो के मेस्सेज पढ़ने की तेरी आदत अभी तक गयी नही..."बोलते हुए मैने निशा का मेस्सेज ओपन किया...

निशा ने अपने मेस्सेज मे लिखा था कि उसकी कंडीशन अब और भी खराब हो चुकी है...अब यदि उसकी कोई फ्रेंड भी मिलने आती है तो उसे ,निशा से मिलने नही दिया जाता...उसके बाप ने घर के बाहर दो गार्ड्स और लगवा दिए है जिससे उसका निकलना अब तो नामुमकिन ही है...निशा ने अपने मेस्सेज मे लिखा था कि उसे रात को जबर्जस्ति जल्दी सुला दिया जाता है...यदि वो नींद ना आने का बहाना करती है तो उसके माँ-बाप उसे नींद की गोलियाँ खाने की सलाह देते है और उसके बाद सबसे बुरी खबर निशा ने अपने मेस्सेज मे ये दी थी कि उसके घर के बाहर चौकीदारी करने वाले गार्ड ने उसके बाप को बता दिया है कि निशा का एक लड़के के साथ चक्कर है...लेकिन वो गार्ड मेरा नाम नही जानता इसलिए फिलहाल मुझे चिंता करने की कोई ज़रूरत नही है...निशा ने मुझे सलाह भी दी थी कि मैं उके घर के आस-पास भी नज़र ना आउ,वरना वो गार्ड मुझे पहचान लेगा.....अट दा एंड, निशा ने आख़िर इस मेस्सेज के ज़रिए एक खुशख़बरी दे ही दी,वो खुशख़बरी ये थी कि अभी से ठीक एक घंटे बाद निशा ऑनलाइन रहेगी....
.
"अभी तक क्या कम मुसीबत थी ,जो तेरी उस लैला के गार्ड ने बीच मे एंट्री मार दी..."मेरे पीछे से अरुण बोला...
मैं पीछे मुड़ा तो देखा कि अरुण अपने घुटनो मे हाथ रखे झुक कर कंप्यूटर स्क्रीन मे नज़र गढ़ाए हुए था...

"अबे तू मेरा मेस्सेज क्यूँ पढ़ रहा है ...चल भाग यहाँ से..."

"एक शर्त पर..."

"बोल.."

"तू घर वापस चलेगा..."

"रहने दे,कोई ज़रूरत नही...तू मेरा मेस्सेज देख सकता है..."बड़बड़ाते हुए मैने कहा...
.
"हाई...हाउ आर यू"ठीक एक घंटे बाद निशा का मेस्सेज आया...जिसे देखकर मेरा सीना खुशी के मारे 5 इंच ज़्यादा फूल गया...
-  - 
Reply
08-18-2019, 01:59 PM,
#74
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"आक्सिडेंट हो गया है मेरा और मैं जल्द ही एड्स की बीमारी से मरने वाला हूँ...."

"ऐसा क्यूँ बोल रहे हो..."

"मुझे ये ही...बाइ..हाउ आर यू...जैसे सेंटेन्सस से नफ़रत है.."

"क्क्क...मेरा लास्ट मेस्सेज मिला ,जो मैने आज सुबह किया था..."

"हां मिल गया..."
.
"अब कहाँ मर गयी..."जब कुच्छ देर तक निशा का रिप्लाइ नही आया तो मैने मेस्सेज सेंड किया...

"यही हूँ,..."

"तो फिर इतना शांत क्यूँ है..."

"मैने सोचा कि तुम कुच्छ बोलोगे..."

"ज़्यादा मत सोच...और वैसे मुझे सच मे कुच्छ कहना था..."

"क्या..."

"चुम्मि देगी क्या...."

मैने जैसे ही ये लिखकर सेंड बटन को क्लिक किया अरुण "एसस्स" बोलते हुए ज़ोर से हवा मे कुदा...

"तू क्यूँ खुश हो रहा है बे "

"कुच्छ नही यार,भाई है तू मेरा..."

.
"हमारे मिलने का कोई चान्स नही अरमान "

निशा के इस रिप्लाइ पर मैने बिस्तर से वरुण का गॉगल्स उठाया,जो शायद वो अपने साथ ले जाना भूल गया था और उसे पहनकर टाइप किया"वेल,आइ हॅव आ प्लान तेरे घर मे नींद की कयि गोलिया होंगी...राइट"

"रॉंग...कल ही ख़तम हो गयी.."

"डायन कही की...कोई एक्सपाइर्ड मेडिसिन है..."

"हां...लेकिन ये तुम क्यूँ पुच्छ रहे हो.."

"क्यूंकी मैं तुमसे अब नागपुर के बेस्ट हॉस्पिटल मे मिलने वाला हूँ..."

"मैं कोई एक्सपाइरी टॅब्लेट्स या मेडिसिन नही लेने वाली...समझे..दिमाग़ खराब है क्या तुम्हारा"

"तेरे दिमाग़ का फ्यूज़ उड़ गया है क्या...एक्सपाइरी मेडिसिन तुझे नही तेरे बाप को...सॉरी अंकल जी को खिलानी है...ताकि उनकी तबीयत खराब हो और जब वो हॉस्पिटल मे अड्मिट होंगे तब अपुन दोनो का टांका भिड़ेगा...क्या बोलती ,सॉलिड आइडिया है ना..."

"एक दम बकवास आइडिया है...तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो...."

" दिमाग़ से "जमहाई लेते हुए मैने आगे टाइप किया"अरे टेन्षन मत ले..ऐसी गोली,दवाई से कुच्छ नही होता...मैने खुद पर बहुत बार एक्सपेरिमेंट किया है...."

"आआववववव...."

"क्या आआवववव "

"तुमने अभी कहा कि तुमने खुद पर एक्सपेरिमेंट किया है..."

"हां, जब भी एग्ज़ॅम मे मेरे कम मार्क्स आते या फिर मुझसे कोई ग़लती हो जाती तो घरवालो की डाँट से बचने के लिए मैं यही करता था..क्यूंकी मैं तब कुच्छ घंटो के लिए बीमार हो जाता था..जिसके बाद कोई कुच्छ नही बोलता था...यकीन मान अंकल जी का ज़्यादा से ज़्यादा सर दर्द करेगा या फिर बेहोश हो जाएँगे..."

"सच..."

"अब खून से लिख कर दूं क्या.."

"ठीक है...लेकिन मेरे डॅड को मेडिसिन देगा कौन..."

"मैं दूँगा...मैं तेरे घर आउन्गा और तेरे बाप से...सॉरी अंकल जी से कहूँगा कि ससुर जी मैं आपका दामाद हूँ...उसके बाद मैं अपने ससुर जी के साथ खाना खाउन्गा और चुपके से मेडिसिन उनके खाने मे मिला दूँगा...सिंपल.."

"क्या तुम सच मे ऐसा करोगे, मुझे तो ये डेंजरस लग रहा है...लेकिन कोई बात नही ,मैं तुम्हारे आने का इंतेजार करूँगी..."
.
निशा का ये मेस्सेज पढ़ते ही मैने गॉगल्स निकाल कर बिस्तर पर फेका और ज़ोर से चिल्लाया"हे भगवान,तूने लड़कियो को दिमाग़ क्यूँ नही दिया...यदि तूने इनको दिमाग़ दिया होता तो ये हम मासूम लड़को का दिमाग़ नही खाती...."

मैने गुस्से मे अपने सर के बाल भी नोचे और फिर वापस जाकर कंप्यूटर के सामने बैठ गया...

"देख निशा...मैं अब जो बोल रहा हूँ ठीक वैसा ही करना और प्लीज़...प्लीज़...प्लीज़ अपना दिमाग़ मेरे इस प्लान मे मत लगाना सबसे पहले तो कोई एक्सपाइरी मेडिसिन ढूँढ और अपने बाप...सॉरी यार, मतलब अंकल जी के खाने पीने मे दबाई से मिला देना और हां ज़्यादा मत डाल देना..."

निशा के ऑफलाइन होने से पहले मैने उसे अपना नंबर भी दे दिया और कहा कि जब उसके डॅड की तबीयत खराब हो जाए तो वो आंब्युलेन्स वालो को कॉल करे देन मौका मिलते ही मेरे नंबर पर कॉल कर दे और उसी कॉल के दौरान आगे क्या करना है,मैं उसे बताउन्गा....
.
"एक बात बता..."जब मैने कंप्यूटर शट डाउन किया तो अरुण बोला"तूने बीच मे गॉगल्स क्यूँ पहना...वीडियो चॅट तो तुम दोनो कर नही रहे थे फिर बाबा आदम के जमाने की टेक्स्ट चाटिंग मे तूने गॉगल्स क्यूँ पहना..."

"मैं तो तुझे लाइन मार रहा था..वो क्या है कि मैं तुझे पटा कर ठोकना चाहता हूँ ...जो काम मैं चार साल मे नही कर पाया ,वो मैं अब करने वाला हूँ... चल चलती क्या 11 से 12 के शो मे..."घड़ी की तरफ देखते हुए मैं बोला"आक्च्युयली अपुन जब भी गॉगल्स पहनता है तो एक दमदार फीलिंग्स आती है...मुझे ऐसा लगता है जैसे कि मैं कुच्छ भी कर सकता हूँ..."
"अपनी गान्ड भी मार सकता है ,क्यूँ "
.
अरुण ने खाना बनाया और मैने खाना खाया...एक घंटे पहले मैने निशा को जो प्लान बताया था उसमे रिस्क था,क्यूंकी यदि कही मेडिसिन ने निशा के बाप पर रियेक्शन कर दिया तो बहुत बड़ी दिक्कत हो सकती थी और इन सबका दोषी मैं होता...मुझे अब भी यकीन नही हो रहा था कि मैने निशा के बाप की जान सिर्फ़ एक किस के लिए दाँव पर लगा दी थी...खैर ये सच था और ये कारनामा करने का आइडिया मेरा ही था इसलिए मैं इस समय अब अपने प्लान के बॅक अप के बारे मे सोच रहा था....लेकिन दिमाग़ था कि फ्यूचर मे होने वाले हॉस्पिटल के उस सीन की इमॅजिनेशन कर रहा था ,जब मैं और निशा

"साला मेरे को अब भी यकीन नही हो रेला है कि मैने सिर्फ़ एक किस के लिए इतना सब कुच्छ किया..."

"अब क्या कर दिया बे तूने...आजा दारू पिएगा..."

"वैसे तो आइ लव दारू मोर दॅन गर्ल्स...लेकिन इस समय ये फ़ॉर्मूला चेंज करना है..इसलिए नो दारू, दो चखना.."

अरुण को देखकर और निशा के बाप के बारे मे सोचकर मुझे कॉलेज के दिनो का मेरा एक एक्सपेरिमेंट याद आया जब मैने अरुण के नये शर्ट और जीन्स पहनने के लिए उसे एक्सपाइरी टॅब्लेट्स खिला दी थी साला सुबह से शाम तक सर पकड़ कर रोता रहा था....
.
"अरमान मैने डॅड को मेडिसिन दे दी है...वो इस समय बेहोश है और मोम बहुत परेशान है..."

"गुड...रेप्स आडेड "

"मुझे बहुत डर लग रहा है अरमान..मुझे अब ना जाने क्यूँ ऐसा लग रहा है कि हमे ये नही करना चाहिए था..."

"मुझे भी अब यही लग रहा है "

"क्य्ाआ...पर तुमने तो कहा था कि..."

"चल बाइ..ससुर जी को लेकर हॉस्पिटल पहुच ,मैं भी उधरिच मिलता हूँ..."
.
कॉल डिसकनेक्ट करने के बाद मैने वरुण की बाइक उठाई और हॉस्पिटल के लिए निकल पड़ा...वैसे मैने निशा से हॉस्पिटल का नाम नही पुछा था लेकिन मुझे 101 % मालूम था कि निशा का रहीस बाप नागपुर के सबसे बेस्ट हॉस्पिटल मे अड्मिट होगा और मेरी ये सोच एक दम सही निकली...
.
जिस रूम मे निशा के डॅड अड्मिट थे वहाँ का नज़ारा बिल्कुल जाना पहचाना था..जैसा की अक्सर होता है,निशा का बाप बेड पर बेहोश पड़ा था ,उसके हाथ मे ग्लूकोस की एक बोतल सुई छेद्कर चढ़ाई गयी थी...और निशा अपनी माँ के साथ बेड के आस-पास उदास बैठी हुई थी....
.
"क्या हाल है अंकल का..."निशा को कॉल करके मैने कहा...

कॉल रिसीव करने के बाद निशा मुझे बात करने मे थोड़ा हिचकिचा रही थी जिसकी वजह उसके पास बैठी उसकी माँ थी...

"मोम, आपने नीचे जाकर फॉर्म भर दिया क्या..."कॉल होल्ड मे रख कर निशा ने अपनी माँ से पुछा...

"नही..."

"आप जाइए मैं यहाँ बैठी हूँ..."
.
"अरमान तुमने बिल्कुल ग़लत किया...तुम्हे ज़रा सा भी अंदाज़ा है कि डॅड की हालत क्या है..वो पिछले दो घंटे से बेहोश पड़े है..."
"डॉन'ट वरी, मैं भगवान हूँ ,मेरी इज़ाज़त के बिना इस दुनिया का एक पत्ता भी नही हिल सकता..."

"ये मज़ाक का वक़्त नही है...वैसे तुम हो कहा"

"बाहर खड़ा हूँ..."
.
जब निशा की माँ लिफ्ट से नीचे चली गयी तो मैं उस रूम के अंदर आया जहाँ निशा के पप्पा जी बिस्तर पर एक्सपाइर हो चुकी गोली खाकर अपनी नींद पूरी कर रहे थे....अंदर घुसते ही मैने दरवाजा लॉक किया और पर्दे को खिसका दिया ताकि यदि बाहर से कोई टपोरी अंदर नज़र मारे तो उसे कुच्छ ना दिखे....
"डॅड ,जाग जाएँगे तो प्राब्लम हो जाएगी..."जब मैने निशा को कसकर पकड़ा तो वो बोली...

"इसका भी जुगाड़ है..."बोलते हुए मैने निशा का एक हाथ पकड़ा और उसके लंबे-लंबे नाख़ून से उसके डॅड के तलवे पर खरोंच मारी...

"ससुर जी सो रहे है..."निशा के डॅड के शरीर पर कोई हल चल ना देख कर मैने कहा और निशा के होंठो को अपने होंठो से जकड लिया...
-  - 
Reply
08-18-2019, 01:59 PM,
#75
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
निशा को किस करने के बाद मैने फॉरमॅलिटी निभाते हुए उसका हाल चल पुछा और वो भी फॉरमॅलिटी निभाते हुए लड़कियो के घिसे पिटे अंदाज़ मे बोली "आइ आम फाइन..व्हाट अबाउट यू " जबकि मैं जानता था कि वो इन दिनो कुच्छ परेशान सी है...निशा ने ये फॉरमॅलिटी निभाई ये जानते हुए भी कि मैं सब कुच्छ जानता हूँ...उस थोड़े से वक़्त मे जब मैं उसके साथ था वो हर पल मुस्कुराने का झूठा नाटक करती रही...वो मुझे ये शो कर रही थी की वो बहुत खुश है...जबकि मैं उसकी आँखो को देख कर ही समझ गया था कि वो ऐसा बर्ताव सिर्फ़ मेरा दिल रखने के लिए कर रही है....जब मैं वहाँ से जा रहा था तब वो बहुत खुश नज़र आ रही थी, उसने मुझपर"बाइ...टेक केर युवरसेल्फ "जैसा घिसा पिटा डाइलॉग भी फेक के मारा...लेकिन मैं जानता था की उसने ज़ुबान से तो जाने के लिए कह दिया...लेकिन दिल से वो नही चाहती थी की मैं जाउ....वो इस वक़्त अंदर से कुच्छ और...और बाहर से कुच्छ और थी...वो ये सोच रही थी कि मैं उसकी झूठी हँसी और उसकी झूठी मुस्कान पर यकीन करके ये मान जाउन्गा कि वो सच मे बहुत खुश है...जबकि वो खुद मुझे हर दिन मेरी ईमेल आइडी पर अपने परेशानियो को टेक्स्ट फॉर्म मे कॉनवर्ट करके मुझे सेंड करती थी....जब बात एक दम नाज़ुक सिचुयेशन की हो तो घिसा पिटा डाइलॉग हर किसी के मुँह से निकल जाता है...मेरे भी मुँह से निकला...

" ठीक है तो फिर मैं चलता हूँ...अपना ख़याल रखना और अंकल का भी..."निशा को मैने एक मोबाइल देते हुए कहा..."ये मेरा मोबाइल है,इसे संभाल कर रख और ये बता तू मोबाइल रखती कहाँ है जो ससुर जी हर बार पकड़ लेते है...मुझसे सीख हॉस्टिल स्कूल टाइम मे मैं 3 साल हॉस्टिल मे रहा और तीनो साल मोबाइल अपने पास रखा लेकिन मुझे कभी कोई पकड़ नही पाया...मेरे स्कूल के जाने माने काई टीचर्स जो खुद को शरलॉक होम्ज़ की औलाद समझते थे वो कभी मेरे मोबाइल का दीदार नही कर पाए...."

निशा को समझा-बुझा कर जब मैं बाहर आ ही रहा था कि तभी मेरी सासू माँ दरवाजा खोल कर अंदर टपक पड़ी और मुझे देख कर वो निशा की तरफ सवालिया नज़रों से देखने लगी....सासू माँ की हरकतों को देख कर मैं समझ गया कि वो किस उलझन मे है...

"मैं यहाँ झाड़ू मारने आया था, लेकिन रूम पहले से चका चक है..अब मैं चलता हूँ..."ये बोलकर मैने तुरंत वहाँ से काल्टी मारी और वापस अपने फ्लॅट की तरफ जाने लगा....
.
हॉस्पिटल से अपने रूम आते वक़्त मैं हर पल बस निशा के बारे मे सोचता रहा कि कितना नाटक कर रही थी खुश होने का...फिर मेरा ध्यान निशा के बाप पर गया जो बेड पर बेहोश लेटे हुए थे...उनकी हालत देख कर मुझे थोड़ा खराब लगा.
"ये मैने क्या किया...सिर्फ़ एक किस के लिए निशा के बाप की ये हालत कर दी...मुझे ऐसा नही करना चाहिए था...इट'स टू बॅड "

मैने खुद को गाली दी ,बहुत बुरा भला कहा ये सोचकर कि अब ये ख़यालात मेरे दिमाग़ से चले जाएँगे..लेकिन जैसे-जैसे वक़्त बीत रहा था मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ निशा के डॅड के बारे मे ही सोच रहा था और ये होना ही था क्यूंकी मेरे 1400 ग्राम के वजन वाले दिमाग़ का ये एक साइड एफेक्ट था कि मैं हद से ज़्यादा किसी टॉपिक पर सोचता हूँ और हद से ज़्यादा किसी काम को करने के लिए उतावला रहता हूँ...मैं कभी ये सोचता ही नही कि फलाना काम मुझसे नही होगा या फलाना परेशानी मैं दूर नही कर पाउन्गा...इस समय अपने रूम की तरफ जाते हुए भी मैं निशा के बाप के बारे मे हद से ज़्यादा सोच रहा था...मैं सोच रहा था कि यदि निशा का बाप ठीक ना हुआ तो .....? यदि निशा के बाप की हालत और नाज़ुक हो गयी तो ......?यदि निशा का बाप एक्सपाइरी मिडिसिन के रिक्षन के कारण मर गया तो.....?
.
ये मेरे साथ पहली बार नही हो रहा था जब मैं इतना आगे की सोच रहा था, ऐसा कयि बार मेरे साथ पहले भी हो चुका था...मेरे एक दोस्त ने जब स्यूयिसाइड (ए डेड ड्रीम ) किया था तब मैं काई रात तक बस इसीलिए नही सो पाया था क्यूंकी मेरा दिमाग़ हर वक़्त बस उसी इन्सिडेंट की रट लगाए रहता था...मेरे दिमाग़ मे मेरा वो मरा हुआ दोस्त बहुत दिनो तक ज़िंदा रहा और अक्सर रात को वो मुझे मेरे रूम के दरवाजे के पास हाथ मे फरसा लिए खड़ा दिखता था...
.
मेरा ब्रेन भी कितना घन चक्कर था जिसने बात कहाँ से कहाँ पहुचा दी थी...मैं इस टॉपिक पर और भी ज़्यादा खोया रहता यदि सामने से गुज़र रहे एक शक्स ने मुझे देखकर चलने की नसीहत ना दी होती तो..
.
"कहाँ था बे और तेरा मोबाइल कहाँ है...कितनी देर से कॉल कर रहा हूँ लेकिन तू कोई रेस्पोन्स ही नही देता..."रूम के अंदर घुसते ही वरुण ने पुछा...

"निशा को देकर आ रहा हूँ अपना मोबाइल..."बिना उसकी तरफ देखे मैं सामने वाली टेबल के पास गया और ड्रॉ खोलकर सिगरेट की पॅकेट निकाली...

"साला आज बहुत भयंकर आक्सिडेंट हो जाता,.."तीन-चार कश लगातार मार कर मैने कहा और वरुण की तरफ देखा....वरुण की तरफ देखते ही सिगरेट का जो धुआ मेरे सीने मे था वो अंदर ही रह गया और मैं ज़ोर से खांसने लगा....क्यूंकी इस वक़्त वहाँ वरुण के साथ-साथ सोनम भी मौजूद थी...मैने जिस हाथ मे सिगरेट पकड़ रखी थी उसे पीछे करके दीवार से घिसकर बुझा दिया और सिगरेट वही फेक दी...

"अरुण कहाँ है..."वरुण की तरफ देख कर मैने पुछा...

"बाल्कनी की तरफ देखो...तुम्हारा दोस्त पिछले एक घंटे से बाल्कनी मे खड़ा होकर मुझे लाइन दे रहा है..."

"तुम दोनो अपना कार्यक्रम जारी रखो...मैं आता हूँ..."बोलकर मैं बाल्कनी की तरफ बढ़ा ,जहाँ से अरुण टकटकी लगाए सोनम को देख रहा था...

"पलकें भी झपका लो अंकिल...वरना आँख निकल कर बाहर आ जाएँगी.."

"अरे अरमान तू..."

"नही...मैं अरमान नही बल्कि कोई भूत हूँ.."

"कॉमेडी मत मार और वरुण की आइटम को देख...साली क्या लपपप खाना खाए जा रही है"

"तू एक बात बता कि तू खाने के लिए लार टपका रहा है या सोनम के लिए लार टपका रहा है..."

"दोनो के लिए "
.
"निशा के डॅड की हालत कैसी है अब अरमान..."अंदर से सोनम ने आवाज़ लगाई...

"एक दम बढ़िया...कुच्छ ही देर मे पहले की तरह खेलने-कूदने लगेंगे..."

"निशा ने मुझे कॉल करके बताया था कि उसके डॅड की तबीयत खराब हो गयी है..."सोनम एक बार फिर अंदर से चिल्लाई...
"मुझे भी निशा ने ही कॉल करके बताया था..."

"तुम हॉस्पिटल से ही आ रहे हो ना..."सोनम मेरा कान फाड़ते हुए एक बार फिर चीखी...

"हााआआन्न्न्नननननणणन्......"झुंझलाते हुए मैने अपना पूरा दम लगाया और ज़ोर से चीखा...जिसके बाद सोनम ने और कुच्छ नही पुछा
.
सोनम कुच्छ देर तक और वहाँ रही और फिर वहाँ से जाते वक़्त वरुण को बाइ...टेक केर कहा उसके बाद उन दोनो के बीच पप्पी-झप्पी का आदान-प्रदान भी हुआ...
.
सोनम के जाने के बाद हम तीनो फिर बैठे हाथ मे एक-एक ग्लास लिए...वरुण जहाँ 8थ सेमेस्टर की दास्तान सुनने के लिए बैठा था वही मैं 8थ सेमेस्टर की दास्तान सुनाने के लिए बैठा था और अरुण...अरुण हम दोनो का पेग बना रहा था...
"मेरे मे इस बार कम पानी डालना बे ,लोडू...झान्ट टाइप से पेग बनता है ,साला असर ही नही करता..."

"तू आगे बोल...फिर क्या हुआ..."
.
.
फिर....फिर बहुत बड़ा कांड हुआ...एक दिन कॉलेज से आते वक़्त अरुण ने कहा कि उसे होड़ सर के पास कुच्छ काम है ,इसलिए मैं सौरभ के साथ हॉस्टिल चला जाउ,वो कुच्छ देर मे आएगा....मैं और सौरभ हॉस्टिल आ गये...हमारे हॉस्टिल आने के लगभग आधे घंटे बाद ही अरुण हांफता हुआ आया और रूम के अंदर घुसकर दरवाजा अंदर से बंद कर दिया....
"क्या हुआ बे...किसी ने ठोक दिया क्या..."

"बहुत बड़ा लफडा हो गया भाई..."अरुण सीधे आकर मेरे पास बैठा और बोला"दिव्या से किस करते वक़्त गौतम ने देख लिया...गौतम और उसके दोस्त मुझे मारने के लिए दौड़ा रहे थे ,बड़ी मुश्किल से जान बचा कर आया हूँ...मेरा बॅग भी पीछे कही गिर गया है..."

ये सुनकर कुच्छ देर के लिए मैं घबरा उठा क्यूंकी गौतम इसका बदला अरुण से ज़रूर लेगा और यदि उसने इस बात की हल्की सी भी खबर अपने बाप को दी तो फिर एक बहुत पड़ा बखेड़ा खड़ा होने वाला था...जिसमे गौतम और उसकी बहन दिव्या को तो कुच्छ नही होता...लेकिन मेरा खास दोस्त अरुण पिस जाता....

"होड़ के पास जाने का बोलकर तू इश्क़ लड़ाने गया था बक्चोद,झाटु..."

"बाद मे चाहे जितना मार लेना लेकिन अभी कुच्छ कर...क्यूंकी गौतम अपने सभी लौन्डो के साथ हॉस्टिल आ रहा है,मुझे मारने के लिए...."

"अरुण..."ये एक ऐसा शक्स था जो मेरे दिल के बेहद ही करीब था या फिर कहे कि सबसे करीब था...ये एक ऐसा शक्स था जो जानता था कि मैं आक्चुयल मे क्या हूँ, मैं आक्च्युयली क्या पसंद और ना-पसंद करता हूँ...
-  - 
Reply
08-18-2019, 01:59 PM,
#76
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
किसी के बारे मे मेरी सोच क्या हो सकती है...ये पता करने के सिर्फ़ तीन तरीके है, पहला ये कि मैं खुद आपको बताऊ, जो की कभी हो नही सकता दूसरा ये कि आप मेरे 1400 ग्राम के ब्रेन की स्कॅनिंग करके सब मालूम कर ले और ये भी 99.99999999 % इंपॉसिबल ही है लेकिन तीसरा तरीका बहुत आसान है और वो तीसरा तरीका मेरा खास दोस्त अरुण है...
इस समय अरुण मुझे इस उम्मीद मे ताक रहा था कि मैं उसे इस प्राब्लम से निकलने का कोई आइडिया या फिर कोई सुझाव दूँगा...वो जब से रूम के अंदर घुसा था तब से लेकर अब तक हर 10 सेकेंड्स मे मुझसे पुछ्ता कि मुझे कोई आइडिया आया या नही.....और हर बार की तरह इस बार भी जब उसने 10 सेकेंड्स के पहले ही टोक कर मुझसे पुछा तो मैं भड़क उठा....

"अबे ये एल मे भरा जमाल घोटा है क्या,जो कहीं भी ,किसी भी वक़्त लंड निकाल कर माल बाहर कर दिया...बेटा प्लान सोचना पड़ता है और सोचने के लिए थोड़ा टाइम चाहिए होता है..."

"जल्दी सोच...तब तक मैं मूत कर आता हूँ..."

"हां तू जा मूत कर आ...यही सही रहेगा और सुन..."

"बोल.."

"मेरे बदले भी मूत कर आना "
.
अरुण की मदद तो मुझे करनी ही थी चाहे कुच्छ भी हो जाए बिकॉज़ ही ईज़ लाइक माइ चड्डी आंड बनियान ,जिसके बगैर मैं जी तो सकता था लेकिन उसके बिना हर वक़्त एक बेचैनी सी रहती....हे इस लीके राइफल ऑफ मी पेन,जिसके बिना कॉलेज मे मैं एक दिन भी नही गुजर सकता था...हे इस लीके इयरफोन ऑफ मी मोबाइल,जिसके बिना मैं अपने डूस हज़ार के मोबाइल मे गाना तक नही सुन सकता था और सबसे बड़ी बात ये की वो मेरा रूम पार्ट्नर था और उससे बड़ी बात ये कि वो मेरे दिल के बहुत करीब था ,इतना करीब की कभी-कभी मुझे ऐसा लगने लगता जैसे कि हम दोनो एक-दूसरे के गे-पार्ट्नर है....जब कुच्छ टूटा-फोटा सा आइडिया मेरे दिमाग़ मे आया तो मैं खिड़की के पास गया और बाहर देखने लगा कि गौतम और उसके दोस्त हॉस्टिल की तरफ आ रहे है या नही....और जैसा मैने सोचा था वैसा ही हुआ ,गौतम ,बहुत सारे लौन्डो के साथ हॉस्टिल की तरफ आते हुए मुझे दिखाई दिया...
.
"सौरभ तू जाकर हॉस्टिल के सब लौन्डो को जमा कर और मेरे रूम मे आने के लिए बोल..."

सौरभ के जाने के बाद अपने पैंट की चैन बंद करते हुए अरुण रूम मे घुसा...

"कुच्छ सोचा बे लवडे या अभी तक मरवा रहा है..."अंदर घुसते हुए अरुण ने पुछा....

"तू अभिच यहाँ से काल्टी मार, गौतम बहुत सारे लड़को को लेकर हॉस्टिल की तरफ आ रहा है..."

"शेर ,कुत्तो के झुंड से डरकर भागता नही,बल्कि उनका मुक़ाबला करता है ,उनकी माँ चोद देता है और फिर लवडा चुसाता है..."

"पर अभी सच ये है कि तू ना ही कोई शेर है और गौतम के दोस्त ना ही कुत्ते के झुंड...इसलिए जितना बोला उतना कर और बाहर यदि शोर-शराबा हो तो रूम से बाहर मत निकल जाना....समझा.."

"तू बोल रहा है तो छिप जाता हूँ ,वरना आज ही उन सालो को पेलता..."
.
मैने अरुण को किसी दूसरे रूम मे छुपाया, क्यूंकी जैसा मैने सोचा था उसके अनुसार गौतम...सबसे पहले हॉस्टिल के अंदर एंट्री मारेगा और उसके सामने हॉस्टिल का जो भी लौंडा दिखेगा उसे पकड़ कर सीधे अरुण का रूम नंबर पुछेगा....मैं नही चाहता था कि गौतम ,अरुण को देखे इसीलिए मैने अरुण को दूसरे रूम मे छिपने के लिए कहा और एक कॉपी खोलकर पढ़ने का नाटक ऐसे करने लगा...जैसे की मुझे कुच्छ पता ही ना हो....

हॉस्टिल के अंदर घुसकर गौतम ने एक लड़के का कॉलर पकड़ कर उससे अरुण का रूम नंबर पुछा और फिर दरवाजे पर लात मारकर वो रूम के अंदर आया.....
.
"तो तू भी उसी म्सी के साथ रहता है..."अंदर आते ही गौतम ने गालियाँ बाकी"वो म्सी कहाँ छिपा बैठा है,उसे बोल की बाहर आए, अभी साले के अंदर से इश्क़ का जुनून निकालता हूँ...."

"ओ...हेलो...किसकी बात कर रहा है और गालियाँ किसे बक रहा है..ज़रा औकात से बात कर..."किताब बंद करते हुए मैने कहा...

"तू बीसी ,आज शांत रहना...वरना आज तुझे भी तेरे उस दोस्त के साथ मारूँगा...म्सी शांत हूँ इसका मतलब ये नही कि मैं तुम लोगो से डरता हूँ..."

"म्सी होगा तू ,तेरा बाप,तेरा दादा,तेरा परदादा और तेरे परदादा का परदादा.....और ये बता कि यहाँ गान्ड मरवाने क्यूँ आया है..."मैने भी अपने तेवर दिखाते हुए कहा...

"अरुण..कहाँ है वो बीसी....."

"देख ऐसा है बेटा कि तुम लोग अब निकल लो..."

"पहले बता कि वो है कहाँ...वरना आज तुझे भी ठोकेंगे..."गौतम के एक जिगरी दोस्त ने आगे आते हुए कहा...
"अरुण तो एस.पी. अंकल के यहाँ है...अभी कुच्छ देर पहले उसका फोन आया था..."
-  - 
Reply
08-18-2019, 01:59 PM,
#77
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
एस.पी. का नामे सुनते ही उन लोगो के तेवर काफ़ी हद तक कम हो गया...वो सभी,जो गौतम के साथ आए थे,एक -दूसरे का मुँह तकने लगे...और मैं यही तो चाहता था कि एस.पी. का सपोर्ट अरुण पर है,ये सोचकर वो वहाँ से चले जाए और बात को भूल जाए.....
.
"मुझे इस पर यकीन नही,तुम लोग एक-एक रूम चेक करो और जहाँ भी वो लवडा का बाल दिखे...मार दो साले को...बीसी मेरी बहन से इश्क़ लड़ाता है..."

गौतम के ऐसा कहने पर उसके चम्चे हॉस्टिल के हर एक रूम को चेक करने लगे...अरुण को मैने फ्लोर के सबसे लास्ट रूम मे छुपने के लिए कहा था...इसलिए शुरू के कुच्छ कमरो को जब गौतम के चम्चो ने चेक किया तो उन्हे अरुण नही मिला....लेकिन जब वो फ्लोर के आख़िरी छोर की तरफ बढ़े तो मेरी साँसे अटकने लगी...क्यूंकी यदि उन्होने अरुण को हॉस्टिल मे देख लिया तो वो जान जाएँगे कि एस.पी. से ना तो मेरा कोई रीलेशन है और ना ही अरुण का...यदि ऐसा होता तो फिर वो ये भी जान जाते कि एस.पी. का सपोर्ट लेकर मैं उन्हे आज तक सिर्फ़ चूतिया ही बनाते आया हूँ....
.
"ओये, इसे रंडी खाना समझ रखा है क्या, जो हर रूम को खोल कर देख रहे हो...मैने बोला ना कि अरुण यहाँ नही है..."

"तू बीसी चुप रहा..."मेरा कॉलर पकड़ कर गौतम ने मुझे मेरे रूम के अंदर किया और बोला"तू क्या सोचता है कि मुझे मालूम नही तेरे कांड...फर्स्ट एअर के दो लौन्डो को तूने ही मारा था ये मुझे पता है और बहुत जल्द तेरा भी नंबर आने वाला है....बेटा ऐसा मारूँगा तुझे कि तेरी सारी हेकड़ी निकल जाएगा...एक हिजड़े की ज़िंदगी जीने पर मज़बूर कर दूँगा तुझे मैं...तेरा बाप भी तुझे देखकर हिजड़ा कहेगा और तालिया बजाएगा....मादरचोद तेरी मैं वो हालत करने वाला हूँ कि तुझ पर कोई पेशाब भी करने से पहले सौ बार सोचेगा...चल भाग मादरचोद..."मुझे ज़ोर से धक्का देते हुए गौतम ने कहा...जिसके बाद मैं सीधे अपने बेड के पास गिरा और मेरा सर ज़ोर से किसी चीज़ से टकराया...दर्द तो बहुत कर रहा था लेकिन मेरे अंदर उफन रहे ज्वालामुखी ने उस दर्द को लगभग शुन्य कर दिया...मैने बिस्तर के नीचे पड़ा लोहे का रोड निकाला और खड़ा होकर गौतम को आवाज़ दी...

"इधर देख बे रंडी की औलाद...पहले जाकर अपनी माँ से पुछ्ना कि कितनो का लंड लेकर तुझे पैदा किया है,फिर मुझसे बात करना"लोहे की रोड को मज़बूती से पकड़ते हुए मैने कहा और बिना कुच्छ सोचे-समझे अपनी पूरी ताक़त से वो रोड गौतम के सर मे दे मारा....
.
गौतम के सर पर लोहे का रोड मैने इतनी तेज़ी से मारा था कि वो उसी वक़्त अपने होश खो बैठा ,उसके सरसे खून की धारा बहने लगी...मेरा प्रहार इतना तेज था कि गौतम के चेहरे का कोई भी अंग इस वक़्त नही दिख रहा था...दिख रहा था तो सिर्फ़ खून...सिर्फ़ और सिर्फ़ खून...तब तक हॉस्टिल के सारे लड़के भी मेरे रूम के सामने पहुच गये थे और गौतम के चम्चो को पकड़ कर धो रहे थे.... गौतम ज़मीन पर पट बेहोश पड़ा हुआ था,जिसे मैने रोड से ही सीधा किया और अपनी पूरी क्षमता से एक और रोड उसके पेट मे मारा...जिसके बाद खून सीधे उसके मुँह से निकल कर मेरे उपर पड़ा.......
.
उस दिन हॉस्टिल मे बहुत बड़ा लफडा हुआ था...हम हॉस्टिल वालो ने गौतम और उसके सभी दोस्तो को बहुत मारा...उस समय गुस्से मे शायद मैं ये भूल चुका था कि लोहे की रोड से जिसका मैं सर फोड़ रहा हूँ,वो कोई आम लड़का नही है....गौतम के पेट मे रोड मारकर उसके मुँह से खून निकालते वक़्त मैं ये भूल चुका था कि गौतम का बाप एक बहुत बड़ा गुंडा है और वो इसका बदला मुझसे ज़रूर लेगा....

मैने अब तक के अपने ज़िंदगी के 19 साल मे आज सबसे बड़ी ग़लती कर दी है ,इसका अंदाज़ा मुझे तब हुआ , जब गौतम को बेहोशी की हालत मे आंब्युलेन्स के ज़रिए हॉस्पिटल ले जाया जा रहा था...मैं उसी वक़्त समझ गया था कि इस आक्षन का रिक्षन तो होगा और वो भी बहुत बहुत बहुत बुरा...मेरा गुस्सा जब से शांत हुआ था तभी से मेरे अंदर एक डर घर कर चुका था...वो ये था की गौतम का बाप अब मेरा क्या हाल करेगा...यदि ये कॉलेज की छोटी-मोटी लड़ाई होती तो शायद उसका बाप इसे इग्नोर भी कर देता लेकिन यहाँ उसके एकलौते बेटे का मैने सर फोड़ डाला था...मैं ख़ौफ्फ खा रहा था उस पल के लिए,जब गौतम का बाप अपने बेटे का खून से सना शरीर देखेगा...इस समय मेरे दिमाग़ ने भी अपना साइड एफेक्ट दिखाना शुरू कर दिया..इस समय जब मुझे मेरे दिमाग़ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी तो वो मुझे धोका देकर आने वाले समय मे मेरा हाल क्या होने वाला है ,ये बता रहा था...मैने देखा कि गौतम के बाप ने मेरे सर पर ठीक उसी तरह से रोड मारा जैसा कि मैने गौतम के सर पर मारा था...
.
"अरमान..."किसी ने मुझे पुकारा

"अरमान..."

"अबे अरमाआअन्णन्न्...."कोई मेरे कान के पास ज़ोर से चिल्लाया...

"क्या है बे बोसे ड्के "हॉस्टिल मे रहने वाले उस स्टूडेंट को देख कर मैने पुछा

"सीडार सर,तुझे अमर सर के रूम मे बुला रहे है...चल जल्दी.."

"सीडार भाई,इतनी जल्दी हॉस्टिल कैसे पहुचे...उन्हे तो मैने कॉल तक नही किया था..."

"तू खिड़की के पास ही खड़ा है तो क्या तूने सूरज को ढलते हुए नही देखा...बेटा बाहर नज़र मार ,रात हो चुकी है...अब चल जल्दी से,वॉर्डन भी वहाँ अमर सर के रूम मे मौज़ूद है..."

उसके कहने पर मैने बाहर देखा और इस वक़्त सच मे रात थी...मैने बौखलाते हुए अपनी घड़ी मे टाइम भी देखा तो रात के 7 बज रहे थे...यानी कि मैं घंटो से यही खिड़की के पास खड़ा हूँ,लेकिन मुझे ये नही मालूम चला कि रात कब हो गयी....

"चल..चलते है.."उस लड़के के साथ रूम से बाहर निकलते हुए मैने कहा...

रूम से बाहर आते वक़्त मेरी नज़र अपने आप ही वहाँ पड़ गयी,जहाँ कुच्छ घंटे पहले गौतम खून मे सना हुआ लेटा था...वहाँ खून के निशान अब भी थे और मेरे दिमाग़ ने आने वाले पल की भविष्यवाणी करते हुए मुझे वो सीन दिखाया जिसे देख कर मेरी रूह कांप गयी,...मैने देखा कि मैं खून से लथपथ कहीं पड़ा हुआ हूँ और जानवर मेरे शरीर को नोच-नोच कर खा रहे है....

"अरमान..क्या हुआ,.."मुझे होश मे लाते हुए उस लड़के ने हैरानी से मेरी तरफ देखा....

"कुच्छ नही...चल"
.
अमर सर के रूम के अंदर इस वक़्त लगभग सभी सोर्स वाले होस्टेलेर्स बैठे हुए थे...कुच्छ फोन पर किसी से बात कर रहे थे तो कुच्छ आपस मे आज हॉस्टिल मे हुए मार-पीट के बारे मे डिस्कशन कर रहे थे...हमारा हॉस्टिल वॉर्डन सब लड़को के सामने एक चेयर पर अपना सर पकड़ कर बैठा हुआ था....मेरे अंदर आते ही सब शांत हो गये,जो कुच्छ देर पहले किसी को कॉल पे कॉल किए जा रहे थे उन्होने मोबाइल नीचे कर लिया...जो लोग घंटो पहले हुई इस मार-पीट के बारे मे डिस्कशन कर रहे थे वो मुझे देख कर चुप हो गये और हॉस्टिल वॉर्डन ने बिना समय गवाए एक तमाचा मेरे गाल पर जड़ दिया...


"बहुत बड़ा गुंडा है तू...अब पता चलेगा तुझे की असलियत मे गुंडागिरी क्या होती है...तेरी वजह से मेरी नौकरी तो जाएगी ही,साथ मे तेरी जान भी जाएगी..."बोलकर वॉर्डन ने अपनी कुर्सी पकड़ ली और बैठ कर फिर से अपना सर पकड़ लिया....साला फट्टू

वैसे तो मैं वहाँ मौज़ूद सभी सीनियर्स,क्लासमेट और जूनियर्स को जानता था पर इस वक़्त मेरी आँखे सिर्फ़ और सिर्फ़ सीडार पर टिकी हुई थी...

"ये लोग जो कह रहे है क्या वो सच है...क्या तूने ही गौतम को मारा है..."सीडार ने पुछा

"हां..."

"तो अब क्या सोचा है...कैसे बचेगा इन सब से और मेरे ख़याल से तूने प्लान तो बनाया ही होगा कि गौतम को मारने के बाद तू उसके बाप से कैसे बचेगा..."

"मैं गौतम को नही मारना चाहता था,वो तो सडन्ली सब कुच्छ हो गया..."
-  - 
Reply
08-18-2019, 02:00 PM,
#78
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
उस दिन शायद वो पहला मौका था जब मैं कुच्छ सोच नही पा रहा था,मैं जब भी इन सबसे बचने के लिए कुच्छ सोच-विचार करता तो मेरा दिमाग़ अलग ही डाइरेक्षन मे मुझे ले जाता था..जहाँ मैं जाना नही चाहता था...उस दिन हमारी मीटिंग घंटो तक चली और उस मीटिंग से हमारे सामने दो प्राब्लम आए और हॉस्टिल के हर एक लड़के ने सुझाव दिया ,सिर्फ़ मुझे छोड़ कर ,कि अब आगे क्या करना चाहिए....वॉर्डन हमारे साथ था और वॉर्डन ने कॉलेज के प्रिन्सिपल को भी रात मे पट्टी पढ़ा दी थी ,जिसके बाद हमे ये उम्मीद थी कि प्रिन्सिपल पोलीस के सामने हमारा साथ देगा..हमारे सामने इस वक़्त सिर्फ़ दो प्रॉब्लम्स थी और दोनो ही प्रॉब्लम्स कल सुबह की पहली किरण के साथ मेरी ज़िंदगी मे दस्तक देने वाली थी....पहली प्राब्लम ये थी कि मुझपर और मेरे दोस्तो पर हाफ-मर्डर ओर अटेंप्ट टू मर्डर का केस बनेगा...दूसरा ये कि गौतम का बाप हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ जाएगा,जिसके बाद मेरा बचना नामुमकिन ही था..
.
पोलीस केस को सुलझाने मे हमे ज़्यादा दिक्कतो का सामना नही करना पड़ा क्यूंकी गौतम और उसके दोस्त हॉस्टिल के अंदर घुसे थे मतलब लड़ाई करने के इरादे से वो वहाँ आए थे और फिर सब लड़को के बीच मार-पीट मे गौतम का सर किसी चीज़ से टकराया और वो वही बेहोश हो गया...हम मे से कोई एक भी सामने नही आया जिससे पोलीस किसे रिमॅंड पर ले और किसे ना ले ये उनके लिए मुश्किल हो गया.... हमने उस थ्री स्टार की वर्दी पहने हुए पोलीसवाले के सामने ये प्रूव कर दिया कि गौतम हमे मारने आया था और जिन लोगो का नाम एफ.आइ.आर. मे दर्ज हुआ है वो तो कल रिसेस के बाद वॉर्डन से दो दिन की छुट्टी माँग कर घर के लिए निकल चुके थे लेकिन उन्हे आज वापस इसलिए बुलाया गया ताकि पोलीस को शक़ ना हो कि कॉलेज किसी को बचाने की कोशिश कर रहा है...
.
मुझे ,हॉस्टिल मे रहने वाले कुच्छ लड़को के साथ पोलीस स्टेशन भी ले जाया गया...जहाँ मुझे शुरू मे धमकाया गया और फिर कहा गया कि "यदि मैं उन्हे सब सच बता देता हूँ तो वो मुझे कुच्छ नही होने देंगे..."

वो मुझसे वो सब पुच्छ रहे थे जिसे ना बताने की प्रॅक्टीस मैने कल रात भर की थी,..पोलीस वालो ने मुझसे कल की घटना के बारे मे जितनी भी बार पुछा...जिस भी तरीके से पुछा, मैने हर बार अपना सर ना मे हिलाया और ज़ुबान ना मे चलाई...

"हां सर,हम उसे ला रहे है..."उस थ्री स्टार की वर्दी पहने हुए पोलीस वाले ने फोन पर किसी से कहा और मेरी तरफ देख कर बोला"चल ...तेरे प्रिन्सिपल का फोन आया है,.."

"मैने तो पहले ही कहा था कि मुझे कुच्छ नही मालूम...जो लड़के मेरा नाम बता रहे है वो मुझसे खुन्नस खाए हुए है...इसीलिए उन्होने मेरा नाम बताया..."

"मैने तुझसे पहले भी कहा है और अब भी कह रहा हूँ कि मेरे कंधे पर ये तीन स्टार ऐसे ही नही लगे है...चूतिया किसी और को बनाना...अब चल.."

उसके बाद सारे रास्ते भर मैने अपना मुँह नही खोला क्यूंकी धीरे-धीरे मुझे ऐसा लगने लगा था कि मेरे दिमाग़ पर इस समय शनि और मंगल कुंडली मार कर बैठे हुए है...इसीलिए मैं जो कुच्छ भी सोचता हूँ,जो कुच्छ भी करता हूँ...वो सब उल्टा मुझे ही आकर लगता है.....
.
हमारी पहली प्राब्लम तो लगभग सॉल्व हो गयी थी यानी कि पोलीस केस का अब कोई झंझट नही था अब झंझट था तो वो था गौतम का बाप...

"पोलीस अंकिल...मेरा दोस्त गौतम कैसा है..उसे होश आया या अभी तक लेटा हुआ है..."जीप से उतरते हुए मैने पुछा...

"अपने प्रिन्सिपल के अतॉरिटी का यूज़ करके तू पोलिक के झमेले से तो बच जाएगा...लेकिन उस गुंडे से कैसे बचेगा जिसके लिए नियम,क़ानून कोई मायने नही रखता..."मुस्कुराते हुए उसने जवाब दिया "मुझे इस केस मे कोई खास दिलचस्पी नही है लेकिन तुझे आगाह कर देता हूँ कि तेरा बुरा वक़्त अब शुरू होने वाला है..."

मैं उस थ्री स्टार वाले की तरफ देखकर अपने दिमाग़ की डिक्षनरी मे कोई दमदार डाइलॉग ढूंढता रहा लेकिन जब मुझे कुच्छ नही सूझा तो मैने कहा

"वो क्या है कि इस वक़्त मुझे कोई दमदार डाइलॉग याद नही आ रहा है,इसलिए आप फिलहाल जाओ...आपके इस सवाल का जवाब किसी और दिन दूँगा"

कॉलेज के सामने पोलीस जीप से उतर कर मैं क्लास की तरफ बढ़ा...मन तो नही था क्लास जाने का लेकिन हॉस्टिल मे अकेले रहता तो मेरा दिमाग़ मुझे गौतम के बाप से पहले ही मार देता, इसलिए मैने क्लास अटेंड करना ही बेहतर समझा....क्लास की तरफ आते हुए सामने मुझे एश दिखी तो मेरे कदम खुद ब खुद रुक गये ,मैं जानता था कि वो इस समय मुझसे बेहद ही खफा होगी और मुझपर गुस्सा करेगी...लेकिन मैं फिर भी उसकी तरफ बढ़ा और ना चाहते हुए भी मुस्कुराया ताकि उसकी मुस्कान देख सकूँ...अपने सामने अचानक मुझे पाकर एश कुच्छ देर तक मुझे यूँ ही देखती रही और फिर आँखो मे मेरे लिए दुनियाभर की नफ़रत भरे हुए वहाँ से आगे बढ़ गयी...
.
पिछले कुच्छ दिनो मे मुझे देखकर उसके होंठो मे जो एक प्यारी सी मुस्कान छा जाती थी ,उसकी जिस मुस्कान का मैं दीवाना था ,उसकी जिस मुस्कान पर मैं दिल से फिदा था...आज उसके होंठो से वही मुस्कान गायब थी...उसकी जिन भूरी सी आँखो से मुझे प्यार था,..सबसे ज़्यादा लगाव था ,इस वक़्त वो आँखे एक दम लाल थी...उसकी उन्ही आँखो मे मैने अपने लिए दुनियाभर की नफ़रत देखी ,जिनमे मैं हमेशा अपने लिए एक प्यार, एक अहसास देखना चाहता था....
.
"एश...वेट आ मिनिट..." बिना कुच्छ सोचे-समझे,बिना किसी की परवाह किए मैं एश के पीछे भागा...

"अरमान ,रास्ता छोड़ो..."मुझे अपने सामने पाकर उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ फेर लिया...

"गौतम की वजह से हम, अपन दोनो के बीच मे ख़टाश क्यूँ पैदा करे...चल हाथ मिला..."
.
वो फिर चुप रही और अपना चेहरा दूसरी तरफ करके मेरे वहाँ से जाने का इंतज़ार करती रही...उसकी ये खामोशी तीर बनकर मेरे लेफ्ट साइड मे चुभ रही थी...आज अगर एश मुझे सॉरी बोलने के लिए कहती तो मैं एक बार नही हज़ार बार उसे सॉरी बोलता...लेकिन साली परेशानी तो यही थी कि वो आज कुच्छ बोल ही नही रही थी....
.
"एश..."उसकी तरफ अपना एक हाथ बढ़ाते हुए मैने कहा...

"दूर जाओ मुझसे..."चीखते हुए उसने कहा और सबके सामने मुझे धक्का दिया लेकिन मैं फिर भी उसी की तरफ बढ़ा...सबके सामने अपनी बेज़्जती का अंदेशा होने के बावजूद मैं एश की तरफ बढ़ा...
.
मैं ये नही कहता कि मेरे मन मे एश के सिवा किसी और लड़की का ख़याल नही आता ,मैं हर दिन एश के साथ-साथ कयि दूसरी लड़कियो के बारे मे भी सोचता लेकिन एश के लिए मेरे अंदर जो अहसास ,जो लगाव है वो अहसास,वो लगाव किसी दूसरी लड़की के लिए आज तक नही हुआ था...मैं ये बात ढोल-नगाड़े पीट पीट कर इसलिए कह सकता हूँ क्यूंकी...एश मेरे मान मे नही बल्कि मेरे दिल मे बसी थी....


मैं ये नही कह रहा कि मेरा प्यार किसी फिल्मी प्यार की तरह हंड्रेड पर्सेंट है लेकिन ये मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जितना भी पर्सेंट मेरे दिल मे उसके लिए मोहब्बत है ,वो एक दम सच है और पवित्र भी...वरना मैं कॉलेज मे इस वक़्त सिर्फ़ एक लड़की के लिए...सिर्फ़ और सिर्फ़ और सिर्फ़ एक लड़की के लिए सबके सामने अपनी बेज़्जती सहन नही करता....
.
"अरमान,तुम मुझे अपना दोस्त कहते थे,पर अब पता चला कि तुम तो बस आय्याश किस्म के वो इंसान हो,जिसे किसी की कोई परवाह नही है...अब सामने से हट जाओ,वरना कही ऐसा ना हो कि...मैं सबके सामने तुम पर हाथ उठा दूं..."

"मुझे कोई फरक नही पड़ता कि यहाँ कौन-कौन है और ना ही मुझे इसकी परवाह है..."

"लेकिन मुझे परवाह है...खुद की और गौतम की....गौतम सच ही कहता था कि दोस्ती अपने स्टेटस के बराबर वाले लोगो के साथ ही करना चाहिए..."

उसके बाद मैने सिर्फ़ उसे वहाँ से जाते हुए देखा,क्यूंकी मेरे पास अब कोई शब्द नही थे जिसका इस्तेमाल करके मैं उसे एक बार फिर से आवाज़ दूं या रोकने की कोशिश करू...उसने अभी-अभी कहा था कि इस जहांन मे उसे सिर्फ़ दो लोगो की परवाह है..एक खुद की और एक अपने प्यार की लेकिन मुझे तो परवाह सिर्फ़ एक की थी और वो एश थी..जिसने मुझसे अभी-अभी नफ़रत करना शुरू किया था...मैं अब भी उससे बात करना चाहता था ये जानते हुए भी कि वो अब मुझसे बात नही करना चाहती है लेकिन मेरे दिल ने ,उसके लिए मेरे जुनून ने मुझे फिर से उसके पीछे भागने लिए मुझे मज़बूर कर दिया....
.
"एश,यार एक मिनिट सुन तो ले कि मैं क्या कहना चाहता हूँ..."उसकी कार के पास पहूचकर मैने खिड़की से अंदर देखा और एक बार फिर से एश को आवाज़ दी"बस एक मिनिट..."

"दिव्या तू कार आगे बढ़ा..."मुझसे एक बार फिर मुँह फेर कर वो बोली...

माँ कसम खाकर कहता हूँ कि उस वक़्त मुझे ऐसा लगने लगा जैसे कि उस एक पल मे मेरे सारे सपने जो मैने एश को रेफरेन्स मानकर सोचे थे...मेरी सारी ख्वाहिशें ,जो कि एश को लेकर थी...इस दिल के सारे अरमान ,जिसके रग-रग मे वो बसी हुई थी...मेरे उन सारे सपनो ने, मेरे उन सारी ख्वाहिशों ने,मेरे उन सारे अरमानो ने अपना दम तोड़ दिया था...दिल किया कि यही रोना शुरू कर दूनन और तब तक रोता रहूं जब तक एश खुद आकर मुझे चुप ना कराए...दिल किया कि पागलो की तरह अपना सीना तब तक पीटता रहूं ,जब तक कि मेरी रूह मेरे जिस्म से ना निकल जाए...मेरी उस हालत पर जब एश ने मुझे पलट कर भी नही देखा तो मेरे अंदर उस नरम दिल वाले अरमान को मारकर एक खुद्दार, घमंडी शक्सियत रखने वाले अरमान ने अपनी जगह ले ली...


"ये तुम क्या कर रहे हो..."जब मैने एश के हेडफोन को निकाल कर बाहर फेक दिया तो वो मुझपर चिल्लाते हुए तुरंत कार से बाहर निकली और मुझे थप्पड़ मारने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया....

"शूकर मना कि तेरे इस हाथ को मैने रोक लिया...वरना तेरा ये हाथ यदि ग़लती से भी मेरे गाल को छु जाता तो जो हाल तेरे आशिक़ का किया है उससे भी बुरा हाल तेरा करता...तेरा आशिक़ तो हॉस्पिटल मे ज़िंदा पड़ा है लेकिन तुझे तो मैं सीधे उपर भेजता...साली तू खुद को समझ के क्या बैठी है..."मैने कार का गेट खोला और एश को अंदर फेकते हुए कहा"जिसपर तुझे गुस्सा आता है तो तू उससे बात करना बंद कर देती है लेकिन जब मुझे किसी पर गुस्सा आता है तो मैं उसे बात करने के लायक नही छोड़ता...अब चल जल्दी से निकल इस चुहिया के साथ वरना तेरे बाप को तेरे आशिक़ के बगल मे एक और बेड बुक करना पड़ेगा...."
.
पार्किंग मे मैने आज एश से अपने लगभग सारे लगाव को तोड़कर आया था और इस समय मेरा गुस्सा मुझपर पहले से भी ज़्यादा हावी था...हॉस्टिल पहुचने के बाद मुझे वॉर्डन ने कहा कि पोलीस केस को तो वो लोग कैसे भी करके संभाल लेंगे...लेकिन गौतम के बाप को रोकना उनके बस मे नही है,इसलिए बेहतर यही होगा कि मैं कुच्छ हफ़्तो के लिए अपने घर चला जाउ.

हाइवे के किनारे खड़ा मैं इस वक़्त बहुत सारी उलझनों से घिरा हुआ था...मेरे अंदर क्या चल रहा था ये मैं खुद भी ठीक तरीके से नही समझ पा रहा था...कभी मुझे गौतम के पप्पा जी दिखते तो कभी मेरे दोस्त मुझे दिखते..,तो कभी हॉस्टिल मे लड़ाई वाला सीन आँखो के सामने छा जाता तो कभी एश के साथ आज हुई झड़प सीने मे एक टीस पैदा कर रही थी...कभी मैं खुद को गालियाँ देता कि मैने एश के साथ ऐसा बर्ताव क्यूँ किया तो कभी मेरा घमंडी रूप सामने आ जाता और मुझसे कहता कि...मैने जो किया सही किया,भाड़ मे जाए एश और उसका प्यार...सच तो ये था कि इस वक़्त मैं ठीक से किसी भी मॅटर के बारे मे नही सोच पा रहा था और सारी दुनिया से अलग होकर हॉस्टिल से हाइवे को जोड़ने वाली सड़क के सबसे अंतिम छोर पर खोया-खोया सा खड़ा था...मुझे इसका बिल्कुल भी होश नही था कि मेरे सामने से तीन-तीन ऑटो निकल चुके है...मुझे इस बात की बिल्कुल भी परवाह नही हो रही थी कि मेरे इस तरह से यहाँ खड़े रहने पर मेरी ट्रेन छूट सकती है...

"ओये...रुक...अबे रुक मुझे भी जाना है..."सिटी बस जब सामने से गुज़र गयी तो मुझे जैसे एका एक होश आया ,लेकिन सिटी बस तब तक बहुत दूर जा चुकी थी.....

जब सिटी बस निकल गयी तो मैं वापस अपने कंधे मे बॅग टांगे हुए हॉस्टिल से हाइवे को जोड़ने वाली सड़क के अंतिम छोर पर खड़ा हो गया और फिर से सारी दुनिया को भूल कर अपने अंदर चल रहे तूफान मे खो गया....
.
क्या मैने एश के साथ पार्किंग मे जो किया वो सही था...कहीं मैने अपने हाथो ही अपने अरमानो का गला तो नही घोंट डाला...क्यूंकी यदि एश की जगह कोई और भी होता,यहाँ तक मैं भी होता...तो अपने प्यार को चोट पहुचने वाले से नफ़रत करता...और एसा ने भी आज वही किया,...ग़लत तो मैं ही था जो बार-बार उसके सामने खड़ा हो जा रहा था. उससे बात करने की मेरी ज़िद ने शायद उसे,मुझपर और भी ज़्यादा गुस्सा दिला दिया और फिर पार्किंग मे उसे धमकी देकर आना,.तट वाज़ माइ फॉल्ट,मुझे ऐसा नही करना चाहिए था..किसी भी हाल मे नही करना चाहिए था...
.
लेकिन उसी वक़्त मेरे अंदर से एक और आवाज़ आई कि" दट वाज़ नोट माइ फॉल्ट, यदि एश की जगह पर और कोई होता तो वो बेशक वही करता..जो एश ने किया,आइ अग्री....लेकिन यदि मेरी जगह पर भी कोई और होता तो वो भी वही करता जो मैने किया था...अरुण मेरे भाई जैसा है और उसे कोई मारने आए तो क्या मैं छिप कर सिर्फ़ इसलिए बैठा रहूं क्यूंकी मेरे दोस्त को मारने आ रहा वो लड़का मेरे प्यार का प्यार है...बिल्कुल नही, मैने जो किया बिल्कुल सही किया..जिसको जो समझना है समझे,जिसे नफ़रत करनी है वो करे, अपुन को ज़िंदगी गुज़ारने के लिए सिर्फ़ दोस्त और दारू की बोतल ही काफ़ी है...."
-  - 
Reply
08-18-2019, 02:00 PM,
#79
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मेरे अंदर इस समय दो अरमान मौज़ूद थे और दोनो अपने-अपने विचार दे रहे थे...एक सही था और एक ग़लत ,ये तो मैं जानता था लेकिन सही कौन है ? और ग़लत कौन है ? मैं ये डिसाइड नही कर पा रहा था.मेरा मन कर रहा था कि मैं सड़क के किनारे लगे पेड़ो पर अपना सर दे मारू या फिर अपने बाल नोच डालु...क्यूंकी दूसरो से तो बचा जा सकता है लेकिन खुद से बचने की कोई राह नही होती, इस वक़्त मेरे अंदर दो अरमान थे..एक वो अरमान था जो एश से बेहिसाब मोहब्बत करता था तो दूसरा अरमान ,अरुण को अपना ख़सम खास यार मानता था...उन दोनो अरमान की लड़ाई से मेरे अंदर इस समय एक तूफान उठा हुआ था कि एक स्कूटी मेरे सामने से होकर गुज़री और थोड़ी दूर जाकर रुक गयी....

"अब ये कौन है और मैने इसका क्या बिगाड़ा है...जो मुझे घूर रही है..."अपने चेहरे पर स्कार्फ बाँधे उस लड़की को अपनी तरफ देखता हुआ पाकर मैने सोचा....

मैने अपने अगल-बगल ,आगे-पीछे भी चेक किया की वहाँ मेरे सिवा और कोई तो नही,जिसे ये स्कार्फ वाली आइटम देख रही है...लेकिन वहाँ कोई नही था.. हॉस्टिल को हाइवे से जोड़ने वाली सड़क के अंतिम छोर पर मैं सिर्फ़ अकेला खड़ा था जिसका सॉफ मतलब था कि वो स्कूटी वाली लड़की वहाँ खड़ी होकर मुझे ही देख रही है....

"अरमान...तुम यहाँ"अपने चेहरे पर स्कार्फ लपेटे हुए ही उस लड़की ने मुझसे कहा...

स्कार्फ बँधे हुए होने के कारण उसकी आवाज़ सॉफ नही आ रही थी,लेकिन मैं इतना तो समझ गया था कि ये लड़की कौन है...आक्च्युयली मैं आज इतने दिनो बाद उसे देख कर थोड़ा शॉक्ड हो गया था और साथ ही उसे देखकर एक मुस्कान मेरे होंठो पर आ गयी....
.
"दीपिका मॅम, काफ़ी दिनो बाद देखा..."

"वेट..."उसने स्कूटी का डाइरेक्षन चेंज किया और मेरी तरफ आने लगी मेरे सामने स्कूटी रोकने के बाद दीपिका मॅम ने अपना स्कार्फ हटाया और मुझसे पुछि कि मैं कहाँ जा रहा हूँ....

"कुच्छ काम है घर मे,इसलिए घर जा रहा हूँ..."

"गौतम के बारे मे सुना मैने..."स्कूटी साइड करके वो मेरे पास आई

"हां,मैने भी सुना...पता नही उसे किसने मारा,उस वक़्त मैं घर पर था..."

दीपिका मॅम से मैने झूठ बोला ,क्यूंकी मैं नही चाहता था कि उसे ये मालूम हो कि मुझे बचाने के लिए मेरे वॉर्डन और प्रिन्सिपल सर ने पोलीस से झूठ बोला था...सबको यही मालूम था कि जब गौतम की लड़ाई हुई तब मैं हॉस्टिल मे नही बल्कि अपने घर मे था....

"तो,कितने बजे की ट्रेन है..."

"6'ओ क्लॉक.."

"एक काम करो तुम मेरे साथ चलो..मेरा रूम रेलवे स्टेशन के आगे ही है तो तुम्हे वहाँ छोड़ते हुए चलूंगी..."कुच्छ देर सोचने के बाद दीपिका मॅम बोली...

"ये सही रहेगा थॅंक्स...."बोलते हुए मैं दीपिका मॅम के साथ उनकी स्कूटी की तरफ बढ़ा....

.
आज बहुत दिनो के बाद मैं दीपिका मॅम से मिला था इसलिए स्कूटी पर जब मैं उनके पीछे बैठा तो उनके पिछवाड़े के एक टच से ही मेरा अग्वाडा खड़ा हो गया....साला इतनी बुरी कंडीशन मे फँसे होने के बावजूद ठरक पन मेरे अंदर से नही गयी थी

दीपिका मॅम की एक खास आदत जो मुझे हमेशा से उसकी तरफ आकर्षित करती थी और वो थी उनके पर्फ्यूम की महक...जो इस वक़्त सीधे मेरे रोम-रोम मे एक हॉट लड़की के पास होने का अहसास करा रही थी,...मैं थोड़ा और आगे खिसक कर दीपिका मॅम से चिपक गया और अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रख कर दबाने लगा...मेरी इस हरकत पर दीपिका मॅम कुच्छ नही बोली और चुप चॅप स्कूटी चलाती रही,...इस दौरान मैने पूरा मज़ा लिया और कयि बार पीछे से उसके गर्दन को किस भी किया....
.
"सिगरेट पियोगे..."स्कूटी को धीमा करते हुए दीपिका मॅम ने मुझसे पुछा...

"हााइिईन्न्न्न्..."

"मैने पुछा सिगरेट पियोगे या नही..."अबकी बार उसने स्कूटी रोक कर पुछा...

"मैं सिगरेट सिर्फ़ दारू के साथ लेता हूँ..."

"और मैं चाय के साथ.."बोलते हुए वो नीचे उतर गयी और पास ही बने एक चाय वाले के पास जाकर दो चाय का ऑर्डर दिया...
"ये चाय-वाय रहने दो..."

"ओके..."उस चाय वाले की तरफ देखकर वो बोली"भैया एक लाइट देना और एक चाय..."
.
दीपिका मॅम लगभग 5 मिनिट तक सिगरेट की कश मारती रही और मैं सदमे मे था और दीपिका मॅम को अपनी आँखे फाड़-फाड़ कर देख रहा था....थोड़ी देर बाद जब उसकी सिगरेट और चाय ख़तम हो गयी तो उसने एक और चाय वित सिगरेट का ऑर्डर दिया....

"इसकी तो...एक और राउंड मार रही है"

"अरमान...एक काम करना..."सिगरेट के काश मारते हुए उसने मुझे अपने करीब आने के लिए कहा

"बोलो..."

"वो सामने...मेडिकल स्टोर दिख रहा है ना..."उसने सड़क के दूसरी तरफ इशारा करते हुए मुझसे पुछा...

"सब समझ गया...अबॉर्षन की गोलिया लानी होगी,राइट"

"जाके कॉंडम ले आओ ताकि मुझे अबॉर्षन ना करना पड़े "

दीपिका के द्वारा मुझे कॉंडम लाने के लिए कहने से मैं समझ गया कि वो आज रात मेरे साथ कूची-कूची खेलने के मूड मे है लेकिन 6 बजे मेरी ट्रेन थी इसलिए मैं चाहकर भी उसके साथ नही रह सकता था इसलिए मैने थोड़ा शरमाते हुए कहा...
"मॅम, शायद आप भूल रही है मेरी 6 बजे की ट्रेन है "

"ओये..किस भ्रम मे जी रहा है, मैं तेरे साथ नही बल्कि किसी और के साथ पलंग तोड़ने वाली हूँ...जा जाकर कॉंडम लेकर आ और सीधा एक पॅकेट लेकर आना ,बार-बार कॉंडम लेने दुकान जाना मुझे अच्छा नही लगता..."

"साली कुतिया "बड़बड़ाते हुए मैं कॉंडम का एक पूरा पॅकेट लेने मेडिकल स्टोर की तरफ बढ़ गया....

किसी मेडिकल स्टोर मे कॉंडम खरीदने के लिए जाने वाले सभी हमान बीयिंग्स मेरे ख़याल से दो तरह के होते है...एक वो जो एक दम बिंदास बेझिझक होकर कोनों ले आते है और एक वो जो कॉंडम खरीदते वक़्त थोड़ा शरमाते है...

मैं खुद को बिंदास बनाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा था और जो लाइन मुझे मेडिकल स्टोर वाले से कहनी थी उसकी मैने केयी बार प्रॅक्टीस भी कर ली थी...लेकिन ना जाने क्यूँ मेडिकल स्टोर के पास आकर मैं शरमाने लगा, मुझे उस मेडिकल स्टोर वाले से कॉंडम मॅगने मे झिझक महसूस हो रही थी...ऐसी झिझक पहली बार किसी मेडिकल स्टोर से कॉंडम खरीदने वाले लड़के के अंदर आना बड़ी नॉर्मल बात है लेकिन ये झिझक तब और बढ़ जाती है जब आप ,जहाँ पहली बार कॉंडम खरीदने जा रहे हो ,वहाँ अचानक से भीड़ बढ़ जाए....उन लोगो के बीच मुझे कॉंडम माँगने मे शरम आ रही थी लेकिन मैने खुद को मज़बूत किया और अपनी लाइन्स तीन-चार बार रिवाइज़ करके उस मेडिकल वेल की तरफ देख कर बोला...
"भैया कॉंडम देना तो... "

मेरा ऐसा बोलना था कि वहाँ खड़े सभी लोगो ने कुच्छ देर के लिए मुझे देखा और फिर हल्की सी स्माइल उनके होंठो पर आ गयी....

"क्या चाहिए आपको..."मेडिकल वाले ने मुझसे पुछा...

"कॉंडम देना..कॉंडम "

"कितना दूं ,एक ,दो..."

"पूरा एक पॅकेट देना "

ये सुनते ही वहाँ खड़े लोगो के होंठो पर फिर से एक स्माइल छा गयी...वहाँ खड़े लोगो का मुझे देखकर ऐसे मुस्कुराना मुझे पसंद नही आया और मैं चाहता था कि जल्द से जल्द कॉंडम लूँ और यहाँ से चलता बनूँ....
"किस ब्रांड का चाहिए..."मेडिकल वाले ने एक बार फिर मुझसे पुछा...
"जो सबसे अच्छा हो..."
"मानफ़ोर्से दूं, चलेगा..."
"दौड़ेगा...."
"विच फ्लेवर..."
"कोई सा भी दे दे "खिसियाते हुए मैने कहा ,जिसके बाद मेडिकल वाले ने सॅट्ट से कॉंडम का एक पॅकेट निकाला और झट से मुझे दे दिया....
.
"कमाल है ,चोदे कोई और उसकी प्रोटेक्षन के लिए कॉंडम लेने मैं दुकान जाउ... "मेडिकल स्टोर से वापस उस चाय वाले की तरफ आते हुए मैं बोला, जहाँ दीपिका मॅम सिगरेट के छल्ले बनाकर धुआ ,हवा मे उड़ा रही थी....

वापस आते समय मैने दूर से देखा कि दीपिका मॅम किसी से मोबाइल पर बात कर रही थी लेकिन मुझे अपनी तरफ आता देख उसने हड़बड़ाते हुए कॉल तुरंत डिसकनेक्ट कर दी...दीपिका मॅम की इस हरकत से मैं थोड़ा चौका ज़रूर लेकिन फिर बात को हवा मे उड़ाकर उसकी तरफ बढ़ा....
.
"ये लो मॅम, पूरा एक पॅकेट है..."कॉंडम का पॅकेट देते वक़्त मुझे फिर से दीपिका मॅम द्वारा मुझे देखकर कॉल डिसकनेक्ट करना...याद आ गया

"थॅंक्स अरमान डियर..."दीपिका मॅम ने कॉंडम अपने बॅग मे डाला और मेरी तरफ देखकर एका एक मुस्कुराने लगी....

"ये बिन बादल बरसात कैसे हो रही है...बोले तो इस मुस्कान का क्या राज़ है..."

"बस यूँ ही..."बोलते हुए दीपिका मॅम ने छल्ले को एक और सिगरेट वित टी का ऑर्डर दिया...जिसके बाद मैं कभी उस चाय वाले की तरफ देखता तो कभी दीपिका मॅम की तरफ....

"ये तीसरा राउंड है "

"यह ! आइ नो, अभी तो दो राउंड और बाकी है..."

"सच "
-  - 
Reply

08-18-2019, 02:00 PM,
#80
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
दीपिका मॅम के ऑर्डर पर उस चाय वाले ने चाय और सिगरेट लाकर दीपिका मॅम को दिया और सिगरेट जलाकर दीपिका मॅम धुआ मेरे चेहरे पर फेकने लगी....दीपिका मॅम का यूँ बार-बार मेरे फेस पर सिगरेट का धुआ छोड़ने से मेरे अंदर भी सिगरेट पीने की इच्छा जाग गयी और जब मुझसे रहा नही गया तो मैने कहा...

"एक कश इधर भी देना..."अपना हाथ दीपिका मॅम की तरफ बढ़ा कर मैने सिगरेट माँगा...

"सॉरी ,मैं अपनी सिगरेट किसी और के साथ शेयर नही करती..यदि तुम्हे चाहिए तो दूसरी खरीद लो..."

"ये नियम किसी और के लिए बचा कर रखना..."दीपिका मॅम जब मेरे चेहरे पर सिगरेट का धुआ छोड़ रही थी तो मैने उनके हाथ से सिगरेट छीन ली और बोला"एक बात पुच्छू..."

"क्या..."मेरी इस हरकत पर मेरा खून कर देनी वाली नज़र से मुझे देखते हुए वो बोली...

"जब मैं वापस यहाँ आ रहा था तो आपने मुझे देखकर कॉल डिसकनेक्ट क्यूँ कर दिया....मैं आपका हज़्बेंड तो हूँ नही जो मुझसे अपने अफेर छुपाओ..."

"हां...."लंबी-लंबी साँसे भरते हुए दीपिका मॅम बोली"तुमने सच कहा ,तुम मेरे हज़्बेंड तो हो नही ,जो मैं तुमसे अपना अफेर छिपा कर रखूँगी, वो मेरे नये बाय्फ्रेंड का कॉल था और तुम्हे बुरा ना लगे इसलिए मैने तुरंत कॉल डिसकनेक्ट कर दिया...."
.
"साली मुझे चूतिया बनाती है..."उसको देखकर मैने मन मे कहा....

मैने ऐसा जानबूझकर कहा था कि" मैं उसका हज़्बेंड तो हूँ नही ,जो वो मुझसे अपने अफेर्स छिपायेगी..." ताकि मैं उसका दिमाग़ पढ़ सकूँ, जब शुरू-शुरू मे मैने दीपिका मॅम से कॉल डिसकनेक्ट करने के बारे मे पुछा तो वो घबरा गयी थी लेकिन मेरे द्वारा अफेर वाली बात छेड़ने पर उसने एका एक राहत की साँस ली थी और फिर मुझसे बोली कि उसके बाय्फ्रेंड का कॉल था,...ऐसा बोलते वक़्त कोई भी दीपिका मॅम को देखकर ये बता सकता था कि दीपिका मॅम झूठ बोल रही थी,...उसका गोरा चेहरा लाल हो गया था ,जब मैने उससे कॉल डिसकनेक्ट करने का रीज़न पुछा था...अब जब दीपिका मॅम घबरा रही थी तो ज़रूर कोई घबराने वाली बात उसने फोन पर किसी से की होगी,ऐसा मैने अंदाज़ा लगाया और मुझे देखकर उसका कॉल डिसकनेक्ट करना मतलब वो नही चाहती थी कि मैं उसकी बात सुनूँ या फिर ये भी हो सकता था कि वो मुझसे रिलेटेड ही किसी से बात कर रही थी, लेकिन सवाल अब ये था कि किससे ?
.
अभी तक उस चाय वाले के दुकान मे बैठकर मैने ये गौर किया था कि दीपिका मॅम अधिक से अधिक समय तक मुझे यहाँ पर रोकने की कोशिश कर रही थी...मैं जब भी उसे वहाँ से चलने के लिए कहता तो वो चाय वाले को एक और चाय का ऑर्डर देकर मुझसे कहती कि"इतनी जल्दी रेलवे स्टेशन जाकर क्या करोगे,अभी तो सिर्फ़ 5 बजे है और वैसे भी मैं तुम्हे ड्रॉप करने जा ही रही हूँ ना..."

एक बार तो मैं कुच्छ देर के लिए ये मान भी लेता कि दीपिका मैम ऐसे ही कह रही है और मैं बेवजह ही छोटी सी बात को तूल दे रहा हूँ...लेकिन जबसे मैने उसे, मुझे देखकर कॉल डिसकनेक्ट करने के बारे मे पुछा था तब से वो पहले की तरह नॉर्मल बिहेव नही कर रही थी...वो कुच्छ घबराई हुई सी लग रही थी....

"सच सच बताओ मॅम कि उस वक़्त तुम किससे बात कर रही थी..."उसकी तरफ झुक कर मैने गंभीर होते हुए पुछा...
"किसी से तो नही, क्यूँ..."

"अब हमे चलना चाहिए ,5:30 बज चुके है और चाय वाले की चाय भी ख़तम हो चुकी है शायद..."बोलते हुए मैं खड़ा हो गया
"बैठो ना, कुच्छ देर यहाँ रुक कर बात करते है..."मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बैठाते हुए दीपिका मॅम बोली...

"हद हो गयी अब तो "उसका हाथ झटक कर मैं गुस्से से बोला"तुझे नही जाना तो मत जा..लेकिन मेरी 6 बजे की ट्रेन है...मैं निकलता हूँ..."
.
"ओये लड़के सुन..."किसी ने पीछे से मेरा कंधा पकड़ कर कहा..

"कौन..."

"तेरा बाप,पीछे मूड..."

ये सुनते ही मैं गुस्से से उबलने लगा और तुरंत पीछे मुड़ा...पीछे मुड़कर मैं कुच्छ देखता ,कुच्छ समझता या फिर कुच्छ कहता उससे पहले ही मेरे माथे पर सामने से किसी ने जोरदार प्रहार किया और मैं वही अपना सर पकड़ कर बैठ गया, जिसने भी मुझे मारा था उसने पूरी टाइमिंग और पॉवर के साथ मारा था,जिससे कि मेरे कान मे इस वक़्त सीटिया बज रही थी और पूरा सर दर्द के साथ झन्ना रहा था...कुच्छ देर तक तो मैं वही नीचे अपने सर को पकड़ कर बैठा रहा और जब सामने की तरफ नज़र डाली तो कुच्छ दिखा ही नही,अपनी आँखो को रगड़ कर मैने सामने देखने की एक और कोशिश की लेकिन नतीज़ा पहले की तरह था,मुझे अब भी कुच्छ नही दिख रहा था...
.
"कौन..."बड़ी मुश्किल से मैं इतना बोल पाया....

जिसके बाद किसी ने मुझे पकड़ कर उठाया ,मुझे उपर उस एमकेएल दीपिका ने उठाया था, क्यूंकी मैं उसके पर्फ्यूम की खुशबू को महसूस कर सकता था....

"कैसे हो अरमान..."मेरे कंधो को सहलाते हुए दीपिका रंडी ने अपना मुँह खोला"तुम पुच्छ रहे थे ना कि मैने किसको कॉल किया था और तुम्हे आता देख कॉल डिसकनेक्ट क्यूँ की थी...तो सुनो, मैने गौतम के फादर को कॉल करके ये बताया कि उसका शिकार मेरे साथ है...मैने उन्हे इस दुकान का अड्रेस भी बताया और जब तुम्हे आते हुए देखा तो हड़बड़ाहट मे कॉल डिसकनेक्ट कर दी ताकि तुम्हे मालूम ना हो कि मैं किससे बात कर रही...अब तुम ये भी समझ गये होगे कि मैं तुम्हे क्यूँ जबर्जस्ति यहाँ रोक रही थी..."

"50 दे बीसी..."मैने कहा...

"क्या "

"कॉंडम तेरे बाप की दुकान से लाया हूँ क्या,चल निकाल 50 "दीपिका मॅम की तरफ हाथ बढ़ाते हुए मैने कहा, अब मुझे हल्का-हल्का कुच्छ दिखने लगा था...

"इस सिचुयेशन मे तुम 50 माँग रहे हो..."

"हां , तू जल्दी से 50 दे..."

"ये ले भीखारी अपने 50 "अपने पर्स से एक नोट निकाल कर दीपिका मॅम ने मेरे हाथ मे थमा दिया...

"अब एक पप्पी भी दे दे..."

मैं नही जानता कि उस समय मेरी इन हरकतों से दीपिका और मुझे मारने आए गौतम के बाप के आदमी क्या सोच रहे थे,वहाँ आस-पास खड़े लोग क्या सोच रहे थे...उनका रिक्षन क्या था....क्यूंकी मेरी आँखो के सामने इस वक़्त धुँधला-धुँधला नज़ारा था और उस धुंधले-धुंधले नज़ारे मे किसी के फेस के रिक्षन को देख पाना मुमकिन नही था...

"लगता है दिमाग़ पर पड़ने से असर कुच्छ ज़्यादा हो गया है..."

"लवडा चुसेगी तो सही हो जाएगा, ले चूस ना उस दिन की तरह..."

मैं ऐसी हरकत तीन वजह से कर रहा था पहला ये कि दीपिका का सबके सामने मज़ाक बना सकूँ,दूसरा मुझे कुच्छ सोचने के लिए थोड़ा टाइम मिल रहा था,तीसरा मैं इस जुगाड़ मे था कि कब मैं ठीक से देख पाऊ और देखते ही यहाँ से खिसक लूँ...उसके बाद दीपिका की कोई आवाज़ नही आई और जल्द ही मुझे सही से दिखना भी शुरू हो गया था...मैने देखा कि मुझे मारने के लिए एक नही..दो नही बल्कि एक अच्छी-ख़ासी फौज आई थी...साला मैं कोही सूपर हीरो हूँ क्या,जो गौतम के बाप ने इतने आदमियो को भेज दिया

"यदि ज़िंदा बच गया तो तेरा जीना हराम कर दूँगा दीपिका रंडी, अपनी चूत और गान्ड मे मेरी ये वॉर्निंग बच्चेदानी तक ठूंस ले..."स्कूटी के पास दीपिका को खड़ा देख कर मैने कहा...

"पहले ज़िंदा बच तो सही, चूतिए..."

"घर जाकर उपर वाले से यही दुआ करना कि मैं आज ज़िंदा ना बचु..."दीपिका से मैं बोला"क्यूंकी यदि मैं भूले से भी ज़िंदा बच गया,यदि भूले से भी मेरी आँख दोबारा खुल गयी...यदि भूले से भी मैं दोबारा कभी भी कॉलेज आया तो तू किसी को मुँह दिखाने के लायक नही रहेगी और तू ज़िंदगी भर यही सोचेगी कि उस दिन मैं अरमान के खिलाफ क्यूँ गयी..."

"अच्छा, पैर कब्र मे है लेकिन फिर भू दुनिया देखने की बात कर रहा है..."मुस्कुराते हुए दीपिका मॅम ने मुझे देखा और एक फ्लाइयिंग किस देकर वहाँ से चली गयी....

मुझे लाकर यहाँ फसाने वाली तो चली गयी थी ,अब मैं वहाँ अकेला बचा था...मैने आस-पास खड़े लोगो को देखा ,वो सब वहाँ खड़े मुझे देख तो रहे थे,लेकिन मेरी हेल्प करने के लिए उनमे से कोई भी आगे नही आया....खैर ये कोई बुरी बात नही क्यूंकी अगर उनकी जगह मैं होता तो मैं भी वही करता,जो इस वक़्त वहाँ खड़े लोग कर रहे थे....

मैने एक नज़र मुझे मारने आए गुन्डो पर डाली और देखते ही दहशत मे आ गया...मुझे कैसे भी करके वहाँ से भागना था, लेकिन जिसने मेरे सर मे कुच्छ देर पहले कसकर हमला किया था उसे मैं ऐसे ही नही छोड़ने वाला था...तभी मेरे गालो पर कुच्छ महसूस हुआ और मैने अपने हाथ से अपने गाल को सहलाया तो मालूम चला कि मेरे सर पर कुच्छ देर पहले जो रोड पड़ा था उसकी वजह से ब्लीडिंग शुरू हो गया है....मैने अपने दूसरे हाथ से चेहरे और सर को सहलाया और जब मेरे दोनो हाथ मेरी आँखो के सामने आए तो उनपर एक ताज़ा खून की परत जमी हुई थी, सहसा मेरा खून मेरे माथे से होते हुए मेरी आँखो तक पहुचा.....जिसके तुरंत बाद मैने डिसाइड किया कि मुझे अब करना क्या है....गौतम के बाप के गुंडे कोई फिल्मी गुंडे नही थे जो एक-एक करके मुझसे लड़ने आते ,वो सब एक साथ मेरी तरफ बढ़े....कुच्छ देर पहले जिसने मेरे सर पर रोड मारा था उसके हाथ मे वो रोड अब भी मौज़ूद था ,जिसे मज़बूती से पकड़े हुए वो मेरी तरफ बढ़ रहा था....

"तू तो गया आज कोमा मे..."चाय वाले की दुकान से मैने चाय की केटली उठाकर सीधा उसके सर पर ज़ोर से दे मारा जिसके हाथ मे मेरे खून से साना लोहे का रोड था....

"आआययईीी...मरो म्सी को.."कराहते हुए उसने अपने साथियो से कहा....
.
उस हरामखोर के सर को चाय की केटली से फोड़ने के बाद मैं पीछे मुड़ा और अपनी रूह की पूरी ताक़त लगाकर वहाँ से भागने लगा ,भाग तो वो भी मेरे पीछे रहे थे लेकिन मेरी रफ़्तार और उनकी रफ़्तार मे इस समय खरगोश और कछुये के दौड़ के बराबर फासला था...साले मोटे भैंसे

"आ जाओ लेडवो , तुम लोगो को शायद पता नही कि मैने पैदा होने के बाद चलना नही डाइरेक्ट दौड़ना शुरू किया था,इस खेल मे तो तुम्हारा बाप भी मुझे नही हरा सकता..."उनकी तरफ पलटकर मैने उन सबका मज़ाक उड़ाया और फिर से तेज़ रफ़्तार मे दौड़ने लगा.....

गौतम के बाप के गुन्डो की लगभग आधी फौज पीछे रह गयी थी और जो बचे हुए आधी फौज मेरा पीछा कर रही थी ,उनकी हालत भी मरे हुओ की तरह थी....अब मुझे इस भाग-दौड़ मे मज़ा आ रहा था क्यूंकी भागते वक़्त बीच-बीच मे मैं रुक जाता और पीछे मुड़कर उन गुन्डो को माँ-बहन की गालियाँ देता,जिससे वो फिर से मेरे पीछे भागने लगते....इसी भागम-भाग के बीच उन गुन्डो मे से कुच्छ ज़मीन पर धराशायी हो गये तो कुच्छ जहाँ थे वही किसी चीज़ का सहारा लेकर खड़े हो गये...अब मेरे पीछे सिर्फ़ 4-5 गुंडे ही थे....भागते हुए मैं एक पतली गली मे घुसा और बड़े से घर की दीवार पर खुद को टिका कर आराम करने लगा....लेकिन जो 4-5 लोग मेरे पीछे पड़े थे वो भी हान्फते हुए वहाँ पहुच गये जिसके बाद मैने उस घर का गोल-गोल राउंड लगाना शुरू कर दिया और बाकी बचे उन 4-5 लोगो को भी लगभग अधमरा सा कर दिया.....

"उसैन बोल्ट को जानता है..."उनमे से एक के पास जाकर मैने पुछा, क्यूंकी मुझे मालूम था कि वो जब खुद को नही संभाल पा रहे है तो मुझपर क्या खाक हमला करेंगे...

"नही ,कौन उसेन बलत...हह..."एक ने हान्फते हुए कहा

"बीसी, यदि तू हां मे जवाब देता तो सॉलिड डाइलॉग मारता...अनपढ़ साले.."

"ईईए...."वो मरी हुई आवाज़ मे चीखा

"चल बे ,साइड चल..."उसको ज़मीन पर गिराते हुए मैं वहाँ से खिसक लिया.....
.
"ये सही जगह है...यहाँ तोड़ा आराम कर लेता हूँ..."अपने सर पर हाथ फिराते हुए मैने खुद से कहा , ब्लीडिंग रुक चुकी थी और मैं अब तक होश मे था...जिससे मुझे राहत मिली ,लेकिन सर अब भी रोड के जोरदार प्रहार से दुख रहा था....मैं इस वक़्त एक छोटे से ग्राउंड मे था,जहाँ कुच्छ लड़के क्रिकेट खेल रहे थे....

"पानी है क्या...पानी"उनके पास पहुच कर मैने उनसे पानी माँगा...

पहले तो वो लड़के मुझे देखकर घबरा गये और एक दूसरे का मुँह तकने लगे...लेकिन बाद मे उनमे से एक ने थोड़े दूर पर रखा अपना बॅग उठाया और पानी का एक बोतल मुझे थमा दिया...

"थॅंक्स भाई..."लंबी-लंबी साँसे भरते हुए मैने उसके हाथ से बोतल ले ली और बोतल का थक्कन खोल कर शुरू मे पानी के कुच्छ घूट अपने गले से नीचे उतारा और फिर बाद मे बाकी बचे पानी से अपना फेस सॉफ करने लगा....मेरे सर पर कयि जगह खून बालो से चिपक गया था और मैने जब अपने सर पर पानी डाला तो मेरा पूरा चेहरा खून से सन गया...मेरे सर मे जिस जगह रोड पड़ी थी वहाँ जब मेरा हाथ गया तो जोरो का दर्द हुआ ,जिसके बाद मैने तुरंत अपना हाथ वहाँ से हटा लिया और खून से सनी शर्ट उतार कर वही ग्राउंड मे फेक दी....
.
मैने एक बार फिर क्रिकेट खेल रहे उन लड़को का शुक्रिया अदा किया और वहाँ से दूर जहाँ बैठने का इंतज़ाम था उधर चल पड़ा....रोड मुझे लगभग 15-20 मिनिट पहले पड़ा था लेकिन उसका असर अब हो रहा था. ग्राउंड पर चलते समय अचानक ही मेरी आँखो के सामने धूंधलापन छाने लगा और थोड़ी दूर पैदल चलने के बाद मेरे हाथ-पैर भी जवाब देने लगे...मैं लड़खड़ाने लगा था , कयि बार तो ज़मीन पर भी गिरा...लेकिन जैसे-तैसे मैं उस जगह पहुच ही गया जहाँ बैठने का इंतज़ाम किया गया था.....

"हेलो ,अमर भाई...मैं अरमान...अरमान बोल रहा हूँ,बहुत बड़ा पंगा हो गया है मेरे साथ...गौतम के बाप के आदमियो ने रेलवे स्टेशन जाते वक़्त मुझपर अचानक अटॅक किया और मैं बड़ी मुश्किल से उन्हे चकमा देकर इधर एक ग्राउंड पर पहुचा हूँ...आप तुरंत इधर आ जाओ, और हां साथ मे जितने हो सके उतने लड़को को भी ले आना...."ग्राउंड का अड्रेस बताते हुए मैने अमर से फोन पर कहा...

"आज आया है बेटा लाइन पर, अब तो तू गया....मैं अमर नही नौशाद बोल रहा हूँ,वो क्या है ना बेटा कि अमर का मोबाइल इस वक़्त मेरे पास है....तूने सबसे बड़ी ग़लती की अमर को फोन लगा कर और उससे भी बड़ी ग़लती की मुझे उस जगह का अड्रेस बताकर जहाँ तू अभी गीदड़ की तरह छिपा हुआ है...तू तो गया बेटा काम से, तुझे मुझसे पंगा नही लेना चाहिए था..."
"सॉरी फॉर दट डे, आइ नीड हेल्प..."अपनी बची कूची एनर्जी वेस्ट करते हुए मैं बोला...

"*** चुदा बीसी..."

"हेलो....हेलो...हेल...."

मेरा दस हज़ार का मोबाइल मेरे हाथ से छूट कर नीचे गिर गया, अब मेरी ज़ुबान थकने लगी थी,हाथ-पैर ने काम करना बंद कर दिया था...मैं खुद के पैरो पर खड़ा होना तो दूर अपने शरीर के किसी हिस्से को ठीक से हिला तक नही पा रहा था...जैसे-जैसे सूरज ढल रहा था वैसे-वैसे एक घाना अंधेरा मेरी आँखो के सामने फैलता जा रहा था....मैं किसी को आवाज़ देना चाहता था, मैं किसी को मदद के लिए पुकारना चाहता था...लेकिन ना तो वहाँ इस वक़्त कोई था और ना ही मुझमे किसी को आवाज़ देने की ताक़त बची थी...ग्राउंड पर क्रिकेट खेलने वाले लड़के कब के अपने-अपने घर जा चुके थे...साले मादरचोद, क्यूंकी यदि कभी मेरे सामने ऐसे खून से सना कोई व्यक्ति पड़ा होता तो मैं उसकी मदद ज़रूर करता, इतनी इंसानियत तो अब भी बाकी थी मुझमे की मैं उसे हॉस्पिटल तक पहुचा देता या फिर मोबाइल से 108 डायल करके ये खबर तो दे ही देता कि यहाँ एक इंसान मरने की कगार पर है...मैं अरमान ,उम्र 19 साल...मैं भले ही किसी के अरमानो की फिक्र नही करता लेकिन किसी के जान की कद्र करना मुझे आता है नही तो अब तक वरुण ,मुझपर एफआइआर करने वाले फर्स्ट एअर के वो दो लड़के और गौतम ,आज इस दुनिया मे नही होते.........

मुझे उस वक़्त नही पता था कि आज जो मेरी आँखे बंद होंगी तो फिर कब खुलेगी...खुलेंगी भी या नही ,मुझे इसपर भी संदेह था...जैसे-जैसे रात का पहर बढ़ रहा था मुझे ठंड लगनी शुरू हो गयी थी लेकिन ना तो मैं अपनी दोनो हथेलियो को रगड़ कर गर्मी का अहसास कर सकता था और ना ही किसी को मदद के लिए आवाज़ दे सकता था...थक-हार कर जोरदार ठंड से तिठुरते हुए मैने अपनी आँखे मूंद ली ,तब मुझे मेरे अतीत की किताब के कयि पन्ने याद आने लगे...

मुझे अब भी याद है एक बार जब मुझे जोरो का बुखार हुआ था तो कैसे पूरा घर मेरी देख भाल मे भिड़ा हुआ था...तब मुझे जो भी पसंद होता मैं वो माँगता और मेरी फरमाइश पूरी कर दी जाती थी...मैने कयि बार ठीक होते हुए भी ऐसा नाटक किया,जैसे मैं अब बस मरने ही वाला हूँ और घरवालो से ये कहता कि मुझे ये चाहिए .

मुझे अब भी याद है कि जब मेरी तबीयत खराब थी तो मेरा बड़ा भाई घंटो मेरे सामने बैठकर मुझे लेटेस्ट न्यूज़ सुनाता रहता ,जिसमे मुझे रत्ती भर भी इंटेरेस्ट नही था और जब मैं अपने बड़े भाई की न्यूज़ सुनकर जमहाई मारने लगता तो वो गुदगुदा कर मेरी सारी नींद भगा देता था.....
.
"ढुंढ़ो साले को,उसने फोन करके इसी ग्राउंड का अड्रेस दिया था..."

इस आवाज़ ने मुझे मेरे अतीत की किताब से वापस लाकर वर्तमान मे ला पटका,जहाँ मेरा पूरा शरीर लहू-लुहान होकर पड़ा हुआ था...मैने आवाज़ की तरफ नज़र दौड़ाई तो पाया कि कुच्छ लोग हाथो मे टार्च लिए ग्राउंड के अंदर दाखिल हुए है...वैसे तो मेरा सर बहुत जोरो से दर्द कर रहा था ,लेकिन मैने इतना अंदाज़ा तो लगा लिया था कि ये लोग वही गुंडे है और ये यहाँ मुझे तालश रहे है....
.
"नौशाद ने सच मे इन्हे बता दिया, यदि आज ज़िंदा बच गया तो सबसे पहले नौशाद को रगडूंगा बाद मे दीपिका को...."उन्हे अपनी तरफ आता देख मैने सोचा.

जैसे -जैसे वो गुंडे मेरे करीब आ रहे थे मुझमे थोड़ी बहुत ताक़त आने लगी थी..मैने अपनी आँखे इधर उधर हिलाई तो मालूम चला कि मुझसे थोड़ी दूर पर एक बड़ा सा पत्थर रखा हुआ ,जिसके पीछे यदि मैं छिप जाउ तो ज़िंदा बच सकता हूँ....ज़मीन पर घिसट-घिसट कर जब मैं उस पत्थर की तरफ जा रहा था तो मेरे अंदर सिर्फ़ एक ही ख़याल था कि सबसे पहले मैं नौशाद की खटिया खड़ी करूँगा और फिर दीपिका रंडी को कॉलेज से बाहर निकाल फेकुंगा....मुझे इन दोनो पर ही बहुत ज़्यादा गुस्सा आ रहा था क्यूंकी दीपिका मॅम ने मुझे इस लफडे मे फँसाया और जब मैं इससे बच गया तो नौशाद ने आकर मुझे वापस फँसा दिया.....
.
आख़िर कर मैं उस बड़े से पत्थर तक पहुच ही गया ,वो गुंडे टॉर्च लेकर उस पत्थर से थोड़ी दूर तक आए और फिर चले गये, उन्हे वहाँ से जाता देख मैने राहत की साँस ली लेकिन मुझे ये नही पता था कि हालत अभी और बदतर होने वाले है....मैने उन गुन्डो को जाता देख सुकून की साँस तो ली लेकिन मैं उन गुन्डो मे शामिल उस एक को नही देख पाया जो अंधेरे मे अपनी टॉर्च बंद किए ठीक उसी पत्थर के उपर खड़ा था ,जिसकी ऊलत मे मैं लेटा हुआ था....मुझे इसका अहसास तक नही हुआ कि एक शाकस ठीक मेरे उपर है. उसके उपर होने का अहसास मुझे तब हुआ जब वो कूदकर मेरे सामने आया....उसने हाथ मे मुझे मारने के लिए हॉकी स्टिक टाइप का कुच्छ पकड़ रखा था ,जिसे उसने पहले पहल मेरे गाल मे हल्के से टच किया और फिर मेरे सर मे दे मारा.....इस बार भी दिमाग़ पूरी तरह झन्ना गया और एक तेज दर्द मेरे सर मे उठा..उसके बाद वो नही रुका और नोन-स्टॉप मेरे हाथ-पैर...सर, पेट ,सीने मे हमला करता रहा....कुच्छ देर बाद उसके साथी भी वहाँ पहुच गये और वो सब भी मुझ पर एक साथ बरस पड़े....

मुझे बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था, मैं दर्द से चीखना चाहता था...लेकिन आवाज़ थी कि गले से उपर नही आ रही थी...मेरे शरीर के हर एक अंग को बुरी तरह से पीटा जा रहा था बिना इसकी परवाह किए कि मैं मर भी सकता हूँ...वो मुझे तब भी मारते रहे जब मुझे होश था और शायद मुझे उन्होने तब भी बहुत मारा होगा जब मैं बेहोश हो चुका था....
-  - 
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Tongue dizelexpert.ru Kahani लाल हवेली 89 2,369 3 hours ago
Last Post:
Star bahan sex kahani भैया का ख़याल मैं रखूँगी 261 598,923 05-31-2020, 11:51 PM
Last Post:
Star XXX Hindi Kahani घाट का पत्थर 89 24,908 05-30-2020, 02:13 PM
Last Post:
Star XXX Hindi Kahani अलफांसे की शादी 72 27,523 05-22-2020, 03:19 PM
Last Post:
Star Desi Porn Kahani विधवा का पति 75 58,309 05-18-2020, 02:41 PM
Last Post:
  पारिवारिक चुदाई की कहानी 19 132,318 05-16-2020, 09:13 PM
Last Post:
Lightbulb Kamukta kahani मेरे हाथ मेरे हथियार 76 49,790 05-16-2020, 02:34 PM
Last Post:
Thumbs Up bahan sex kahani बहना का ख्याल मैं रखूँगा 86 409,843 05-09-2020, 04:35 PM
Last Post:
Thumbs Up Antarvasna Sex चमत्कारी 153 156,079 05-07-2020, 03:37 PM
Last Post:
Thumbs Up Incest Kahani एक अनोखा बंधन 62 49,768 05-07-2020, 02:46 PM
Last Post:



Users browsing this thread: 1 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


Adwashi chdai land photosSex videos chusthunaa ani babaji xxx locelmallika serawat konsi movei m.naggi dikhiWww.mumypenty.comrapat harmi k bf xxx nagi foki girls pani nikala xxnx Aannya panday porn nude imageनिपलस मे बढिया बुर फुलल बुर नगी सेकसी बिडीवउघड्या मांड्याबड़ी लहसुन वाली बुर चोदाई वीडियो देहातीmanisha ke choda chodi kahaniya/Thread-chudai-kahani-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2?pid=33054desi52xxxx vidioVelma anti hindisexstorysex ko kab or kitnee dyer tak chatna chaey in Hindi with photoxnxx soteli ma bulati thisi bathroom meSheryln video desi52'comgirl mombtti muli sexgar pa xxxkarna videodidi.sexstory.by.rajsharmadesi sxxxxxx pibivarsha routela gif seXbaba fuck Rachna bhabhi chouth varth sexy storiesAmmi ki jhanten saaf kiChachijaan ke burkhe main choocheHindi font story,bahan me Bhai se new bra and panty mangwaiRu girl naked familwo us admi ke niche tadap rahi thi. par us ke shakti ke age vivash thiDewar be bhabhi ko jabari choda sulakekhuleaam ladki kadudh dabananeha boli dheere se dalo bf videosexbaba.com par gaown ki desi chudai kahaniyaMami ke tango ke bich sex videosladki bur kistarh chode video downloadचुत चोद फोटो पियका चोपर हिरोइनsex babanet bahan bane mayake sasural ke rakhel sex kahaneHotfakz actress bengali site:mupsaharovo.ruactress juhi chawla nude photos sex baba net.inXxx sex साडी मूठ मारनमाँ बच चे को दुध पिला रही तभी ससुर ने दुध पीना सुरू करा साकसी कहानीयाsister ki dithani ke sath chudai ki kahaniमराठिसकसagar aurat muhme lund lenese inkar kare to usse muhme lund lene k liye kaise samjaye?घरमे रंडीखाना चुदाई कथा मराठीत क्सक्सक्सविडो दूर पेल्ना मेंma ke sath nanga nahaya tubal ke pani mein hindi sexstory ma bete milkar nahanaHare bhare jhantoi wale aunte ka Chudaye ka must vediolouda bangaya hai करने के लिए बीटा तेरी luliचमेली की घपाघप जवानीBiwe ke facebook kahanyasavita bhabhi my didi of sexbaba.netTv acctr Nehasharma nude xxx photo of sex babaPesa dekar chdai ki jabdastxxx babi samjkar rather ma'a nagi kayak pure rather choda hindi .comमराठि Sex कथामाँ की अधुरी इच्छा मस्तराम नेट चुदाई कि कहानियाँमां जनम दीन चुदया बेटी कोTravels relative antarvasna storywww.ishita ganguly ki chut ki photo.comgana bjakar chut marbaiindian actress female fuck female nude images sexnaba.netemira foods puccyचूतजूहीसेकसि नौरमलXXX VIDOES पाकिसान 2018Nude Digangna sulwnshi sex baba piscಮಗಳ ತುಲ್ಲಿನಲ್ಲಿ Jacqueline ka Tamasha dekhne Ko Dil Laga Hoon ga Pani nikal Jayega sexyपापा ने लोले पर झुलाईhot saree bhaavi ke gaar chuge fukingभाई बहन की चोदई की बतेAnsochi chudai ki kahanitv actress jeniffer nude photo on sex babaDir Ani vahini Diksha xxx Marathi story jabardastiVollage muhchod xxx vidiomcentpronvideoananya pandey sexbaba.comkarina kapoor fucking stori hindhi maindesi kam wali ki cudaibhviak lote bete bani call girl majburi me kahani