Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
08-18-2019, 01:49 PM,
#61
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"तुम दोनो के रहीस बाप 20 भी नही देते क्या,जो तेरी वो चुहिया फ्रेंड 5 के लिए उस कॅंटीन वाले से लड़ रही है...और तू उसे समझाने की जगह बोतल मे स्ट्रॉ डालकर दारू के शॉट मारे जा रही है...इसलिए मैं तुझे बिल्ली बोलता हूँ..."

"आँख फुट गयी है क्या,ये दारू नही पेप्सी है...और तुम्हे क्या मतलब कि हमे घर से कितने मिलते है..."

"कंजूस होंगे तुम दोनो के पप्पा..क्यूँ "उसके शोल्डर पर अपने शोल्डर से हल्का सा धक्का देकर मैने कहा,जिससे वो खांसने लगी और दिल किया कि उसकी पीठ सहला कर मस्त फिल्मी सीन बनाऊ...लेकिन मेरे सिक्स्त सेन्स और वहाँ मौज़ूद बहुत से स्टूडेंट्स के कारण मैने ऐसा बिल्कुल भी नही किया...

"तुमने मुझे धक्का क्यूँ दिया..."वो बोली और फिर खांसने लगी...

"कितनी नज़्जूक़ है तू डर है कि कही कोई तुझे फूल से ना मार दे...

कितनी प्यारी है तेरी आँखे,डर है कि इन्हे कोई प्यार से ना मार दे..."

"मतलब..."

"कुच्छ नही मैं तो बस मॅतमॅटिक्स का फ़ॉर्मूला याद कर रहा था...."बोलते हुए मैने अरुण की तरफ नज़र घुमाई ,

दिव्या अब भी उस कॅंटीन वाले लड़के से भिड़ी हुई थी और अरुण,दिव्या को बार-बार शांत करने का असफल प्रयास कर रहा था....
"तू जा के उस चुहिया को समझाती क्यूँ नही,फालतू मे लोचा कर रेली है..."

"अभी तो ये शुरुआत है,तुम देखना अभी वो इस छोटी सी बात को कन्ज़्यूमर फोरम तक ले जाने की बात करेगी..."एक प्यारी सी मुस्कान के साथ एश बोली...

और हुआ भी वैसा ही...दिव्या ने उस लड़के को धमकी दी"यदि तूने इस चिप्स पॅकेट के 5 अधिक लिए तो मैं कन्ज़्यूमर फोरम मे केस कर दूँगी..."

"ग़ज़ब,मेरी तरह तेरा भी सिक्स्त सेन्स काम करता है..."एक बार फिर से उसके शोल्डर पर धक्का देकर मैने कहा...

"ये तुम मुझे बार-बार धक्का क्यूँ दे रहे हो..."खिसियाते हुए उसने अपनी पूरी ताक़त के साथ मेरे शोल्डर पर प्रहार किया और जवाब मे मैं मुस्कुरा दिया...

"ये कौन सा पोलीस स्टेशन है..."उस लड़के ने दिव्या से पुछा...

"उपभोक्ता मंच..."अरुण ने उस लड़के को कन्ज़्यूमर फोरम का हिन्दी मे मतलब बताया...

"ठीक है ,15 ही दो...तुम भी क्या याद रखोगी.."दिव्या से परेशान होकर वो लड़का बोला....
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दिव्या ने चिप्स का बिल पे किया और फिर आकर एश के सामने वाली टेबल पर बैठ गयी....वो अब भी गुस्से मे थी..
"ब्लडी करप्षन, यू नो एश...ऐसे ही करप्टेड लोगो के कारण हमारा देश बर्बाद है..."

"हंड्रेड पर्सेंट करेक्ट..."मैं बीच मे ही बोल पड़ा...

"ओह ! अरमान...हाई..."मुझे देखकर दिव्या बोली"तुम्हारा वो दोस्त है ना अरुण ,वो भी करप्षन मे इन्वॉल्व है...वो तो मुझे बोल रहा था कि मैं उस कॅंटीन वाले को 20 दे दूं..."

"और उसे ये आइडिया इन महाशय ने ही दिया था..."एश बोली...जिसके बाद दिव्या का चेहरा एक बार फिर से लाल हुआ और मैने वहाँ से चुप-चाप खिसकने मे ही अपनी भलाई समझी....सच मे लड़कियो के पास दिमाग़ नही होता...साली हरदम मस्त तरीके से बोर करती रहती है...

मैं और अरुण कॅंटीन मे मामला सुलझाने गये थे लेकिन दिव्या के सच्चे देशभक्त होने के चलते हम दोनो ही सुलझ गये और खाली हाथ कॅंटीन से वापस आए.....
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"मेरी वाली एक दम सारीफ़ है बे,.."

"और बेवकूफ़ भी अब तू ही देख 5 के चलते उसने कितना बड़ा तमाशा खड़ा कर दिया..."

"बाकलोल है क्या...दिव्या सच तो बोल रही थी कि वो 5 अधिक क्यूँ दे और वो अपने मज़बूत इरादे पर कायम रही,जिसका नतीजा तूने भी देखा."अपना सीना चौड़ा करते हुए अरुण बोला..."इसमे तुझे वो बेवकूफ़ कहाँ से दिख गयी..."

"तूने अभी का नतीजा देखा,लेकिन मैने उसके इस कारनामे से आने वाले कल का नतीजा देखा...अब जानता है जब वो कल कॅंटीन मे अपना पेट भरने जाएगी तो क्या होगा..."

"क्या होगा..."

"होगा ये मेरे लल्लू लाल की कॅंटीन वाला उसे एक ग्लास पानी तक नही देगा और फिर वो यहाँ से कयि किलोमेटेर दूर सिर्फ़ एक कोल्ड ड्रिंक पीने जाएगी..."

"सत्य के रास्ते मे चलने पर ऐसी मुश्किलो का सामना करना पड़ता है बे..इसमे वो तुझे बेवकूफ़ कहाँ से दिख गयी"

"उसे बेवकूफ़ मैने इसलिए कहा क्यूंकी वो उस लड़के से लड़ाई कर रही थी,जिसकी औकात कॅंटीन मे सिर्फ़ टेबल सॉफ करने की है,यदि उसे सच मे करप्षन मिटाना है तो डाइरेक्ट कॅंटीन के मालिक से बात करना था,जो कि उसने नही किया,चल ये सब छोड़ और ये बता की आज लब किस सब्जेक्ट की है..."

"मेरे ख़याल से सी प्रोग्रामिंग की..."

"मुझे भी कुच्छ ऐसा ही लग रहा है..."

वहाँ से थोड़ी दूर आगे जाने के बाद हम दोनो एक दूसरे पर चिल्लाए"लवडे,हमारी क्लास तो पीछे छूट गयी..."

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सी प्रोग्रामिंग की लॅब मे एक 5 फ्ट की पतली-दुबली लेडी टीचर कंप्यूटर को कमॅंड पे कमॅंड दिए जा रही थी और इधर मैं कन्फ्यूज़ पे कन्फ्यूज़ हुए जा रहा था कि ये लोडी कर क्या रही है...क्लास के कुच्छ होशियार स्टूडेंट्स ,जो कि यहाँ के लोकल थे और घर मे दिन भर कंप्यूटर से चिपके रहते थे ,उन्हे ही सब समझ आ रहा था, मैं तो इस सब्जेक्ट मे वर्जिन था इसलिए फिलहाल तो मैं चुप होकर उन सबको देख रहा था.....

"अरमान लंड, तुझे कुच्छ समझ आया क्या.."अरुण बेचैन होते हुए मुझसे पुछा...

"पूरा समझ गया, बता तुझे क्या बताऊ "

"तेरी भी हालत मेरी तरह है..."

अरुण ने इस बार सौरभ को पकड़ा और उससे पुछने लगा कि कंप्यूटर के अंदर ये कैसा जादू चल रहा है....

"मैं वर्जिन हूँ इस मामले मे..."सौरभ बोला..

"और तू सुलभ,क्या तू बता सकता है कि ये जादू जो कंप्यूटर के अंदर चल रहा है ,उसका राज़ क्या है..."

"मी टू वर्जिन इन दिस माइंड फक्किंग ,लवडा टेकिंग आंड गान्ड मे बवासीर होइंग ,सब्जेक्ट..."

"साले सब देहाती हो,किसी को कुच्छ नही आता..."

"टेन्षन कैकु ले रहा है बावा, दूसरे की कॉपी से कॉपी करने का..."सामने कंप्यूटर के अंदर हो रये जादू को देखकर सौरभ ने कहा...

"तब तक क्या लंड हिलाऊ, 2 अवर्स के लॅब मे कुच्छ तो करने माँगता,जिससे अपना टाइम मक्खन के माफिक कट जाए..."

"अब तो साला हमारे साथ जंगल का राजा भू भी नही है,जो लॅब के खाली टाइम मे पूरे कॉलेज की न्यूज़ सुनाए..."मॅम ने जब एक और जादू किया तो उसे देखते हुए मैं खिसिया गया और भू को याद करने लगा...

"एक आइडिया है..."मोबाइल निकाल कर सौरभ बोला"वाईफ़ाई से नेट चलकर कुच्छ डाउनलोड करते है..."

"सॉलिड आइडिया है...2 घंटे मे तो गान्ड फाड़ बीएफ डाउनलोड कर लेंगे..."

"मेरे ख़याल से हमे सी प्रोग्रामिंग का वीडियो डाउनलोड करके ,देखना चाहिए...क्या पता इस जादू की कोई ट्रिक समझ मे आ जाए.."सुलभ ने कहा और हम तीनो शांत होकर उसे देखने लगे...
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08-18-2019, 01:56 PM,
#62
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
सुलभ सच कह रहा था, यदि हम उस वक़्त सी प्रोग्रामिंग का वीडियो डाउनलोड करते तो कुच्छ ना कुच्छ तो भेजे मे घुसता ही...लेकिन हमने ऐसा नही किया,हम चारो ने ऐसा नही किया....
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"अब क्या लवडा दिन भर पढ़ाई ही करेंगे,थोड़ा टाइम तो हमे खुद के लिए निकालना चाहिए..."सुलभ को एक मुक्का जड़कर अरुण बोला..

"बोसे ड्के ,बोल तो ऐसे रहा है...जैसे शाम को 5 बजे हॉस्टिल जाने के बाद से लेकर सुबह के 9 बजे तक बुक खोलकर बैठा रहता है..."सुलभ बोला और अपना हाथ सहलाने लगा...

"जो-जो सी प्रोग्रामिंग का वीडियो डाउनलोड करना चाहता है ,वो अपना लंड खड़ा करे...मतलब कि हाथ"मैने कहा और सुलभ के सिवा किसी और ने अपना हाथ खड़ा नही किया...

"अब वो लोग अपना लंड खड़ा करे जो दूसरी ज्ञान देने वाली चीज़े डाउनलोड करना चाहते है..."

और इस बार हम चारो मे से मैने,सौरभ और अरुण ने अपना-अपना हाथ खड़ा किया और तय ये हुआ कि हम सी प्रोग्रामिंग का ब्वासीर वीडियो डाउनलोड ना करके कुच्छ ज्ञान देने वाली अदर फाइल्स डाउनलोड करेंगे....

"मैं सारी अपकमिंग मूवी के ट्रैलोर डाउनलोड करता हूँ..."सौरभ ने कहा और काम मे लग गया..

"मैं कुच्छ मूवीस डाउनलोड करता हूँ..."किसी हारे हुए शक्स की तरह सुलभ बोला और वो भी काम मे लग गया...

"मैं एचडी मे पॉर्न वीडियो डाउनलोड करता हूँ और फिर बाथरूम को स्पर्म डोनेट करेंगे..."बोलते हुए मैं भी काम मे लग गया...

"मैं क्या करूँ..."

"तू.....ह्म्म्म्..."कुच्छ सोचकर सुलभ बोला"तू सी प्रोग्रामिंग का वीडियो डाउनलोड कर ले..."

सुलभ के मुँह से एक बार और सी प्रोग्रामिंग वर्ड सुनकर हम तीनो ने उसे खा जाने वाली नज़र से देखा और इशारा किया कि यदि उसने एक बार फिर यदि इस जादुई वर्ड का नेम लिया तो उसे बहुत पेलेंगे.....

"अबे मैं क्या करू..."अरुण ने एक बार फिर पुछा...

"तू....फ़ेसबुक से लड़कियो की फोटो डाउनलोड कर..."

"घंटा..."फिर जैसे ही अरुण को कुच्छ याद आया वो बोला"मैं हवेली डाउनलोड करता हूँ..."
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हम लोग इधर दबी मे कॉलेज की वाईफ़ाई का फुल उसे करके अपना काम निकल रहे थे और उधर वो 5 फुट की दुबली-पतली मॅम अब भी कमॅंड पर कमॅंड दिए जा रही थी और लौन्डो के दिमाग़ मे बवासीर फैला रही थी......

जब लॅब ख़त्म हुआ तो हम चारो हॉस्टिल पहुँचे,जहाँ से अपने मोबाइल का सारा मेटीरियल अमर सिर के लॅपटॉप मे डाला और फिर अपने-अपने मोबाइल मे लिया....

"अरमान एक मस्त न्यूज़ है..."अपना बॅग टाँग कर सुलभ बोला

"चल सुना.."

"एक शर्त पर...पहले बोल कि कल कॅंटीन मे मेरा सारा खर्चा कल तू उठाएगा..."

"रहने दे फिर..."

"एश के बारे मे है...सोच ले"

"चल ठीक है...न्यूज़ बता"

"गौतम बॅस्केटबॉल टूर्नमेंट मे जा रहा है,इसलिए 3-4 दिन तक एश तुझे कॉलेज मे दिव्या के साथ ही दिखेगी..."

"परसो मैं तेरे कॅंटीन का बिल दूँगा..."अरुण बोलते हुए बिस्तर से नीचे गिर गया...

"चल पहले मेरे ऑटो का किराया दे,ताकि मैं अपने रूम तक पहुच जाऊ..."
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सुलभ के जाने के बाद सारा दिन कॉलेज के वाईफ़ाई से डाउनलोड किए गये वीडियो को देखने मे बीता और रात के 12 बजे अरुण के दिमाग़ मे ना जाने फर्स्ट एअर के हॉस्टिल जाने का विचार कहाँ से आ गया...हम दोनो फर्स्ट एअर के हॉस्टिल गये और वहाँ अरुण ने अपने दोस्तो को एचडी क्वालिटी मे डाउनलोड की गयी वीडियो दी, वहाँ से हमे एक बहुत ही रोचक इन्फर्मेशन मिली और वो इन्फर्मेशन ये थी कि दीपिका मॅम आज कल फर्स्ट एअर के एक लड़के पर कुच्छ ज़्यादा मेहरबान है...वो अक्सर रिसेस के वक़्त उस लड़के को कंप्यूटर लॅब मे बुलाती है...ये सब जानकार मुझे समझने मे कोई परेशानी नही हुई कि रिसेस मे दीपिका मॅम और उस लड़के के बीच मे क्या होता है....हॉस्टिल के जिस लड़के पर दीपिका मॅम आजकल मेहरबान थी मुझे उससे थोड़ी जलन भी हुई की वो लड़का अब मेरी जगह ले रहा है...खैर कोई बात नही ,क्यूंकी मुझे मालूम था कि दीपिका मॅम मेरे कारनामे को कभी नही भूलेगी और ना ही मुझे...क्यूंकी वो लड़का भले ही मुझसे ज़्यादा हॅंडसम और वेल मेच्यूर हो,वो भले ही सेक्स आर्ट मे मुझसे माहिर हो,लेकिन वो ऐसा लड़का नही था,जैसा कि मैं....मतलब कि वो मुझसे ज़्यादा पॉपुलर नही था और ना ही उसने अपने फर्स्ट एअर के दौरान 7 साल से इंजिनियरिंग कर रहे अपने सूपर सीनियर को मारा था और जहाँ तक मेरा अंदाज़ा है उस लड़के मे इतनी हिम्मत नही थी कि वो एक डॉन के बेटे से बार-बार पंगा ले और उसकी गर्लफ्रेंड को अपने लेफ्ट साइड मे बसा ले..इसलिए मेरी जलन दूसरे पल ही कूलिंग रिक्षन के कारण बुझ गयी...जिसकी(कूलिंग रिक्षन) एक वजह ये भी थी कि मुझे फर्स्ट एअर से ही मालूम था कि दीपिका मॅम और मेरा साथ महज कुच्छ दिनो का है....
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मैं अपने अतीत के पन्ने खोलने मे तुला हुआ था कि हमारे फ्लॅट पर किसी ने दस्तक दी...जिसे देखकर वरुण तुरंत गेट की तरफ भागा....
"अरे सोनम ,तुम यहाँ...ऐसे अचानक..."वरुण हड़बड़ा कर बोला...वरुण की हालत देखकर कोई भी कह सकता है कि जो लड़की इस वक़्त हमारे रूम के दरवाजे पर खड़ी है,उसे यहाँ देखने की कल्पना वरुण ने कभी नही की होगी....

"वरुण, हाउ आर यू..."

"फाइन...लेकिन तुम यहाँ कैसे..."

"पहले दरवाजे से तो डोर हटो..."वरुण को धक्का देकर रेड स्कर्ट और ब्लू जीन्स मे चमचमाती हुई एक लड़की ने अंदर कदम रखा,जिसे देखकर अरुण का मुँह 2 इंच फट गया और मैं रूम मे इधर-उधर पड़ी दारू की बोतल को छिपाने मे लग गया....

"अरे बताओ तो कि तुमने अचानक अपने दर्शन कैसे दे दिए..."

"पहले ये बताओ कि ये दो नमूने कौन है.."और फिर अरुण की तरफ इशारा करते हुए सोनम बोली"इसे बोलो कि मुझे लाइन मारना बंद करे..."

"इसने हम दोनो को नमूना बोला..."गुस्से मे मैने अरुण से कहा...लेकिन मेरी आवाज़ इतनी धीमी थी कि सिर्फ़ अरुण ही सुन पाए...

"रंडी है साली,चुदने आई होगी..."अरुण भी धीरे से चीखा...
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"सोनम,बाल्कनी मे चलते है..."हम दोनो के सामने वरुण ने उस रेड स्कर्ट वाली लड़की का हाथ पकड़ा लेकिन उस रेड स्कर्ट वाली लड़की ने तुरंत वरुण का हाथ झड़कर दूर कर दिया....

"वरुण , तुम नही जानते कि इस कॉलोनी मे मेरी एक फ्रेंड भी रहती है और मेरी उसी फ्रेंड ने मुझे आज सुबह कॉल किया और बोली कि मैं एक लड़के से मिलकर अपनी उस फ्रेंड का मेस्सेज उसके प्रेमी को दे दूं..."

"तो इसमे मैं क्या कर सकता हूँ..."

"असल मे हम दोनो की बात पूरी नही हो पाई और जब मेरी वो दोस्त मुझे उस लड़के का अड्रेस दे रही थी तो कॉल डिसकनेक्ट हो गयी..."

"क्या नेम है उन दोनो प्रेमी जोड़े का..."

"मेरी फ्रेंड का नेम है ,निशा...और उस लड़के का नेम..."

"अरमान..."मैने बीच मे बोला...

"या,राइट...लेकिन तुम्हे कैसे पता, कही तुम कोई तांत्रिक तो नही..."

"वो लड़का मैं ही हूँ...जिसे तुम ढूँढ रही है..."

"ओह ! दट'स ग्रेट,तो तुम ही हो निशा के वो चंपू बाय्फ्रेंड..."

"हां ,मैं ही हूँ निशा का वो चंपू बाय्फ्रेंड..तो चल बता छछुन्दर क़ी निशा ने क्या मेस्सेज दिया है... "

सोनम के द्वारा मुझे चंपू कहने पर मैं भड़क उठा ,जिसका अंदाज़ा सोनम को भी तब हो गया,जब मैने उसे छछुन्दर कहा...साली खुद को बड़ी होशियार समझ रेली थी, लेकिन उसे मालूम नही था कि मैं कौन हूँ....बोले तो उसे इसका ज़रा सा भी अंदाज़ा नही था कि अरमान क्या चीज़ है

"निशा ने फोन पर कहा कि मैं तुम्हे उसकी ईमेल आइडी दे दूं और तुम उससे ईमेल पर बात करो..."मेरे द्वारा छन्छुन्दर बोले जाने पर वो जल-भुन कर बोली...

"ये तुम लड़कियो के पास दिमाग़ नही होता क्या...अब ईमेल-ईमेल खेलने का कौन सा जुनून निशा को सवार हो गया है..."

"लड़कियो के पास तुम लड़को से ज़्यादा दिमाग़ होता है और निशा ने ऐसा इसलिए कहा क्यूंकी उसके डॅड ने उसपर पाबंदी लगा रखी है, वो अब ना तो किसी से बात कर सकती है और ना ही किसी से मिल सकती है...मेरा अंदाज़ा सही था ,यू आर आ चंपू "

"उस डायन की ईमेल आइडी क्या मुझे सपने मे आएगी..."

"आइ हॅव हर ईमेल आइडी..."अपना छाती चौड़ा करते हुए सोनम ऐसे बोली जैसे ओलिंपिक मे गोल्ड मेडल जीत लिया हो और ना चाहते हुए भी मेरी नज़र उसके सीने पर जा पड़ी...

"वरुण,तुम्हारा दूसरा दोस्त भी मुझे लाइन मार रहा है...."

"क्या अरमान,एक तो ये तेरी मदद करने आई है और उसपर तू इसे अनकंफर्टबल कर रहा है..."सोनम और मेरे बीच खड़े होकर वरुण ने मुझे घूरा...

"मैं इसे अनकंफर्टबल कर रहा हूँ या ये मुझे अनकंफर्टबल कर रही है..."

"हे मिस्टर. मैं कोई ऐसी वैसी लड़की नही हूँ ,समझे..."वरुण को सामने से धक्का देकर सोनम ने मेरी आँखो मे आँखे डालते हुए फाइयर किया....

"वैसे मेरा सवाल ये था कि निशा की ईमेल आइडी मैं कहाँ से लाऊ..."मैने तुरंत टॉपिक चेंज किया और मुद्दे पर आया...

"मैने कहा ना कि उसकी ईमेल आइडी मुझे मालूम है..."सोनम भी मुद्दे पर आते हुए बोली"आक्च्युयली...उसकी ईमेल ईद मैने ही बनाई थी..."

निशा की ईमेल आइडी सोनम ने बनाई है ये जानकार मैं थोड़ी देर तक इंतज़ार करता रहा कि अब वो मुझे निशा की ईमेल आइडी देगी...लेकिन वो चुप चाप खड़ी मुझे देखती रही और जब कुच्छ देर तक और वो एक लफ्ज़ तक नही बोली तो मैं खीज उठा...
"निशा की ईमेल आइडी बताने का क्या लोगि"

"ओह , सॉरी..मैं भूल ही गयी थी.."

"अपुन का स्टाइल ही कुच्छ ऐसा है कि लड़किया मुझे देखकर सब कुच्छ भूल जाती है..."

"ऐसा कुच्छ भी नही है..."एक कागज पर निशा की ईमेल आइडी लिखकर सोनम बोली"अब मैं चलती हूँ..."

"सोनम...रूको,कुच्छ बात करनी है तुमसे...अकेले मे"

"कैसी बात करनी है तुझे"वहाँ मौज़ूद टीने हमान ने मुझसे पुछा...सोनम भौचक्की थी,अरुण ,सोनम को देखकर लार टपका रहा था और वरुण आँखो मे अँगारे लिए बस सोनम के जाने का इंतज़ार कर रहा था,ताकि वो मेरी ठुकाई कर सके....

"वरुण,वैसा कुच्छ भी नही है मेरे भाई,जैसा तू सोच रहा है "वरुण को एक कोने मे लेजा कर मैने समझाया कि मैं सोनम से निशा के बारे मे कुच्छ पुछना चाहता हूँ,जिससे जो उलझन इस समय मेरे दिमाग़ मे है ,वो सुलझ जाए....
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"कब से निशा को जानती हो..."बाल्कनी मे आने के बाद मैने सोनम से पहला सवाल किया...

"लगभग तब से जबसे हम दोनो ने स्कूल जाना शुरू किया,वी आर चाइल्डहुड फ्रेंड्स..."

"तब तो ,तुम मुझे निशा के बारे मे बहुत कुच्छ या फिर ये कहे कि सब कुच्छ बता सकती हो..."

"और तुम्हे ऐसा क्यूँ लगता है कि मैं ऐसा करूँगी..."मेरे ठीक बगल मे खड़े होकर वो बोली"मैं निशा के बारे मे सबकुच्छ जानती हूँ,लेकिन इसका मतलब ये नही कि मैं तुम्हे उसके बारे मे कुच्छ बताने वाली हूँ....तुम्हारा ये घटिया प्लान फ्लॉप है..."

"यहाँ बात फ्लॉप ,हिट,सुपेरहित,ब्लॉकबसटर,ऑल टाइम ब्लॉकबसटर की नही है...यहाँ बात निशा की है..तुम्हे अंदाज़ा भी नही है कि इस वक़्त निशा किस हालत मे है,इसलिए मुझे उसके बारे मे सबकुच्छ जानना ज़रूरी है..."
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08-18-2019, 01:56 PM,
#63
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
सोनम कुच्छ देर तक वहाँ चुप चाप खड़ी सोचती रही और फिर दीवार की तरफ जाकर नाख़ून से दीवार को खरोचने लगी....
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"पुछो...क्या पुछना चाहते हो..."मेरी तरफ पलट कर उसने कहा..

"सबसे पहले ये बताओ कि क्या तुम अब भी निशा के घर जाकर उससे मिल सकती हो..."

"नो...यदि मैने ऐसा किया भी तो उसके माँ-बाप मेरी खटिया खड़ी कर देंगे..."

"मैने ठीक ऐसा ही सोचा था,अब ये बताओ कि क्या तुम सोनम के साथ कॉलेज मे पढ़ती थी..."

"हां,हम दोनो एक दूसरे के बेस्ट फ्रेंड थे..."

"तो फिर मुझे ये बताओ कि विश्वकर्मा और निशा का क्या रीलेशन था..."

"तुम विश्वकर्मा को जानते हो..."

"कल ही उसे जाना है..."

"निशा हमेशा से ही अकेली रही थी,उसके माँ-बाप सिर्फ़ नाम के माँ-बाप थे...वो अक्सर मुझसे कहती कि उसे कोई प्यार नही करता...जबकि उसने किसी के साथ कभी ज़रा सा भी ग़लत नही किया और फिर उसकी ज़िंदगी मे विश्वकर्मा नाम का एक तूफान आया ,जिसने पहले शांति से निशा को अपने जाल मे फसाया और फिर निशा को बदनाम करने लगा...उसने पूरे क्लास के सामने निशा को रंडी कहा था, विश्वकर्मा के धोखे से निशा लगभग पूरी तरह मर चुकी थी...लेकिन कॉलेज के आख़िरी दिनो मे कुच्छ चमत्कार सा हुआ, निशा को देखकर ऐसा लगने लगा...जैसे कि उसे जीने की कोई वजह मिल गयी है,जैसे कि उसने अपने लिए एक सहारा ढूँढ लिया हो,वो सहारा तुम थे अरमान...यदि तुम निशा से ना मिले होते तो शायद वो अब तक ज़िंदा नही बचती...यदि तुम उसकी ज़िंदगी मे नही आए होते तो शायद अबतक वो घुट-घुट कर मर गयी होती या फिर स्यूयिसाइड कर लेती..."

"फिर उसने मुझसे झूठ क्यूँ कहा कि उसकी ज़िंदगी मे मैं पहला लड़का हूँ..."निशा के अतीत ने जब मेरे दिल को चीर डाला तब मैने अपना अगला सवाल किया...

"अरमान,कोई शक्स नही चाहेगा कि उसकी एक ग़लती की वजह से उसके आज और आने वाला कल पर बुरा प्रभाव पड़े और शायद इसीलिए निशा ने तुमसे ऐसा कहा...विश्वकर्मा,निशा की ज़िंदगी की सबसे बड़ी ग़लती थी जिसकी सज़ा वो भुगत चुकी है...और अब वो नही चाहेगी कि उसकी ज़िंदगी का सबसे बुरा दौर उसके आज के अच्छे दौर को ख़त्म कर दे..."

"थॅंक्स,अब तुम जा सकती हो..."बाल्कनी के बाहर आसमान की तरफ देखते हुए मैने सोनम को जाने के लिए कहा...

"अरमान..."वहाँ से जाते हुए सोनम बोली"यदि तुमने ज़िंदगी मे कभी कोई ग़लती की होगी तो तुम्हे इसका अहसास ज़रूर होगा...आगे तुम्हारी मर्ज़ी..."
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सोनम के जाने के बाद मैं बहुत देर तक आसमान को निहारता रहा...आज बहुत दिन बाद सूरज ने अपने दर्शन दिए थे,बादलो को भेदती सूरज की किरण मेरे अंदर एक नया जोश ,एक नया उत्साह भर रही थी...मैने टेबल पर रखे उस कागज को उठाया जिसपर निशा का ईमेल अड्रेस था और तुरंत निशा को मैल कर दिया कि, मैं सोनम से मिल चुका हूँ.....

अब मुझे वो सब बीते पल याद आ रहे थे,जब निशा हर वक़्त मेरे पीछे पागलो की तरह पड़ी रहती थी...मैं समझ चुका था कि उसका वो रुबाब सिर्फ़ एक दिखावा,सिर्फ़ एक छलावा था...ताकि मैं ये ना जान पाऊ कि वो मुझे दिल-ओ-जान से प्यार करती है...शायद उसे डर था कि कही मैं उसकी मज़बूरी का विश्वकर्मा की तरह फ़ायदा ना उठाऊ...लेकिन मैं ऐसा नही था..बेशक मुझमे कयि बुराई है लेकिन मैं दूसरो के अरमानो की कद्र करना जानता हूँ..इसीलिए शायद मेरा नाम अरमान पड़ा या फिर यूँ कहे कि मेरा नाम अरमान होने की वजह से मैं इस शब्द की परिभाषा,इस अरमान शब्द का मतलब समझ पाया...और मुझे मालूम ही नही बल्कि इसका अहसास भी है कि अधूरे अरमानो का गम क्या होता है.... पहले जहाँ मैं निशा की कॉल को इग्नोर करता था वही अब मैं चाहता था कि अब वो मुझे एक कॉल करे तो मैं उसकी आवाज़ सुन लूँ...पहले जहाँ मैं किसी ना किसी बहाने निशा के मेस्सेज को टाल देता था अब मैं वही कंप्यूटर स्क्रीन के सामने पिछले एक घंटे से अपनी ईमेल आइडी खोलकर उसके मेस्सेज का इंतज़ार कर रहा था...मैं देखना चाहता था कि वो अपनी खुशी को शब्दो मे कैसे बयान करती है...मेरे लिए अपने लेफ्ट साइड मे धड़क रहे दिल की धड़कनो को वो किस तरह शब्दो मे उतारती है...और यदि इन शॉर्ट कहे तो "नाउ,आइ आम मॅड्ली लव हर "

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निशा के रिप्लाइ के इंतज़ार मे एक और घंटा बीता लेकिन मेरा इनबॉक्स अब तक खाली था, मैने टेबल पर एक साइड रखा हुआ वो कागज का टुकड़ा उठाया ,जिस पर निशा की ईमेल आइडी लिखी हुई थी,और उसे पढ़ने लगा....
"निशा_लव_अरमानलाइव.कॉम" पढ़ते हुए मेरे होंठो पर एक मुस्कान छा गयी और मैने एक और ईमेल निशा को टपका दिया.....
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"अबे ओये,4 घंटे हो गये कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठे हुए...बोल तो तुझे ही मैल कर दूं..."एक चेयर खीचकर वरुण मेरे बगल मे बैठा और खाने की प्लेट मेरे सामने रख दी"ले भर ले.."

"मैं तो खाना खाने के बारे मे भूल ही गया था..."खाने की प्लेट को लपक कर मैने कहा"अरुण कहाँ है..."

"पता नही,वो बोला कि कुच्छ ज़रूरी काम आ गया है..."

"सिगरेट-दारू लेने गया होगा साला..."

"अरुण को गाली बकना बंद कर और सामने देख ,शायद उसने रिप्लाइ कर दिया है..."

मैने तुरंत प्लेट नीचे रख कर कंप्यूटर स्क्रीन पर नज़र गढ़ाई..निशा ने रिप्लाइ कर दिया था....
"जैल मे कैसा लग रहा है,जानेमन..."

"बहुत अच्छा,मैं तो इतनी ज़्यादा खुश हूँ कि बता नही सकती...तुम सूनाओ "

"अपुन तो बस मज़े मे है...वैसे तुम्हारा नाम क्या है..."

"मेरी ईमेल आइडी मे मेरा नाम है..."

"अरे मैं तो ओरिजिनल नाम पुच्छ रहा हूँ...डायन"

"फ़ेसबुक पर आइडी है तुम्हारी..."

"नही..मैं तो अनपढ़ गावर हूँ,मेरी आइडी फ़ेसबुक मे कैसे होगी..."

"लिंक मैल करो..."

"कुच्छ लफडा है,लोग इन करते वक़्त कुच्छ एरर आता है..."

"नो प्राब्लम, अरमान मुझे तुमसे कुच्छ बात करनी है..."

"हां बोलो..."
"मेरा मोबाइल छीन लिया गया है..."

"तो मैल कर दे...लड़कियो का दिमाग़ हमेशा घुटनो मे क्यूँ रहता है "

"नही..मुझे बात करनी है..."

"तेरा वो हिट्लर बाप गला दबा देगा मेरा यदि मैं उसे तेरे आस-पास दिख भी गया तो..."

"कोई नही...रात को 12 बजे जब सब सो जाएँगे तब मैं कॉल करूँगी ,मेरे पास एक एक्सट्रा मोबाइल है अभी के लिए बाइ..."

"डायन रुक जा किधर काट रेली है"मैने जल्दी से उसे मेस्सेज भेजकर उसके रिप्लाइ का इंतज़ार करने लगा...लेकिन उसके बाद निशा का कोई मेस्सेज नही आया...और वो रात को कॉल करेगी इस उम्मीद मे मैने कंप्यूटर शट डाउन किया और बिस्तर पर लेट गया....मैं चाहता था कि जल्द से जल्द रात के 12 बजे और निशा का कॉल आए...अभी रात के 8 ही बजे थे कि मुझसे थोड़ी दूर रखा मेरा मोबाइल बजने लगा और मैं लपक कर मोबाइल के पास जा पहुचा और कॉल रिसीव की...

"हां मुर्गियो के अन्डो का सिर्फ़ एक ट्रक पहुचा है ,दूसरा अभी तक नही आया,भाई देखो माल कहाँ फसा पड़ा है..."

"रॉंग नंबर..."मैने कहा और कॉल डिसकनेक्ट कर दी...लेकिन उसके अगले ही पल एक बार फिर उसी नंबर से कॉल आया....

"अरे यार देखो माल कहाँ फसा है, यदि दोनो ट्रक नही आए तो मैं तेरी बीवी को आकर चोदुन्गा..."

"*** चुदा अपनी तू,बीसी यदि दोबारा कॉल किया तो फोन के अंदर घुसकर गान्ड मारूँगा,साले हरामी ,बक्चोद..."गालियाँ बकते हुए मैने मोबाइल बिस्तर पर पटक दिया...

"बेटा अभी तो चार घंटे बाकी है...मुझे तो डर है कि 12 बजे तक कही तू पागल ना हो जाए..."एक पैर बिस्तर से नीचे हिलाते हुए अरुण बोला

"टाइम पास कैसे करू..."

"अपुन के पास एक सुझाव है..."बीच मे वरुण बोला...

"ना..नही....नेवेर..."वरुण का इशारा समझ कर मैने कहा..

"हां...अभी...इसी वक़्त..."

"अबे हर टाइम तुझे मैं कहानी सुनाते रहूं क्या...साले मैं भी इंसान हूँ...बोलते-बोलते मेरा भी मुँह थक जाता है"

"यही तो प्यार है पगले..."
.
मन थोड़ा भारी था और बेचैन भी...इसलिए एक स्माल पेग मारकर मैं बिस्तर पर बैठा और मेरे अगल-बगल अरुण-वरुण तकिये पर टेक देकर पसर गये...
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08-18-2019, 01:56 PM,
#64
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
गौतम के टूर्नामेंट मे जाने के बाद एक बहुत बड़ा कांड हुआ...ऐसा कांड जिसने मुझे एक पल के लिए दोतरफ़ा बाँट दिया था,मतलब कि मेरे शरीर के दो हिस्से...मैं कुच्छ पॅलो के लिए कन्फ्यूज़ हो गया था कि किसका साथ दूं और किसका साथ छोड़ू......

गौतम अब भी टूर्नमेंट के चलते बाहर था और मैं ,अरुण के साथ कॅंटीन मे बैठा हुआ था....अरुण अपनी वाली को लाइन दे रहा था और मैं अपनी वाली को...फरक सिर्फ़ इतना सा था कि अरुण वाली अरुण को मस्त रेस्पोन्स दे रही थी और मेरी वाली मुझे देख तक नही रही थी.....

"वो देख पास वाली टेबल खाली हो गयी,चल उधर चलते है..."अरुण का हाथ पकड़कर मैने कहा और उसे उठाने लगा...

"अबे मरवाएगा क्या..."अपना छुड़ा कर अरुण बोला...

"डर मत आजा.."

"अबे चल जा..."

"आना ना कुत्ते.."

"नही आउन्गा कमीने.."

"लवडा मुँह मे दे दूँगा,आजा नही तो..."

"मैं गान्ड मार लूँगा तेरी...चुप चाप बैठ जा नही तो..."

"भूल मत कि मैं अरमान हूँ..."

"और तू भी मत भूल की मैं अरुण हूँ"

"तेरी तो....कैकु खा रेला है ,चल ना...तेरा बिल मैं भर दूँगा..."

"क्या सच मे "

"माँ कसम "

"अब रुलाएगा क्या पगले,चल आजा..."

और फिर हम दोनो उठे और कॅंटीन पर इधर-उधर नज़र मारकर एश के पास वाली टेबल पर बैठ गये....

"वेटर दो प्लेट समोसा, दो पेप्सी और दो पानी पाउच लाना जल्दी से..."ताव देकर अरुण चीखा...

अरुण के चीखने के बाद मैं कुच्छ ऐसा सोचने लगा जिससे एश मेरी तरफ देखे और मुझसे लड़ाई करे...

"यार अरुण,तूने मेरी बिल्ली देखी है क्या..."

"अब ये बिल्ली कौन है..."

"अबे वही,जिसका रंग गोरा है...बात-बात पर गुस्सा हो जाती है..."मैने हँसते हुए कहा और आँखे तिरछि करके एश पर नज़र डाली...उसके चेहरे का रंग इस समय गुस्से से लाल हुआ जा रहा था...

"तुमने कहा था कि यदि मैं तुम्हारी फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट आक्सेप्ट कर लूँगी तो तुम मुझे परेशन करना बंद कर दोगे...और मुझे बिल्ली भी नही कहोगे..."

"मैं आजकल ग़ज़नी बन गया हूँ,सब कुच्छ बहुत जल्द भूल जाता हूँ..."उसके सामने बैठते हुए मैने कहा....

"तू एश को बिल्ली बोलता है "ज़ोर ज़ोर से हँसते हुए अरुण भी वहाँ से उठा और जाकर दिव्या के साइड मे बैठ गया....

अरुण को हँसता देख ,दिव्या भी हंस पड़ी और फाइनली एश की हालत देखकर मैं भी मुस्कुरा उठा...जब तक अरुण हंस रहा था,जब तक दिव्या हंस रही थी...तब तक तो एश शांत थी...लेकिन जैसे ही मैं हंसा तो उसके अंदर मानो ज्वालामुखी फूट गया और वो गुस्से मे बोली...

"मैं बिल्ली तो तुम बिल्ला..."

"चल आजा फिर कोंटे मे "

आगे एश कुच्छ कहती या फिर मैं कुच्छ कहता ,उसके पहले ही हॉस्टिल के 3र्ड एअर का एक लड़का अपने कुच्छ दोस्तो के साथ वहाँ आया और एक झटके मे टेबल पर रखे पानी के ग्लास को उठाकर दिव्या के मुँह पर पूरा पानी डाल दिया....एक पल के लिए तो मैं जैसे सकते मे आ गया कि ये क्या हुआ......

"तेरी माँ की....."दिव्या की ये हालत देखकर अरुण उस लड़के की तरफ पलटा,जिसने ये हरकत की थी...."नौशाद सर,आप...."हॉस्टिल मे रहने वाले सीनियर को देखकर अरुण बोला....उसका गुस्सा नौशाद को देखकर एक पल मे ठंडा हो गया था,...

"तू चल अभी जा यहाँ से,मुझे अपना प्राइवेट मॅटर सुलझाना है..."अरुण को खड़ा करके नौशाद उसकी जगह बैठ गया और हॉस्टिल के दूसरे सीनियर्स ने मुझे भी वहाँ से जाने के लिए कहा....

"भीगे होंठ तेरे...प्यासा दिल मेरा..."गुनगुनाते हुए नौशाद ने अपना हाथ दिव्या की तरफ बढ़ाया...

"सर...वो मेरी दोस्त है,.."नौशाद का हाथ पकड़ कर अरुण बोला...

इस वक़्त दिव्या और एश का भी चेहरा फीका पड़ चुका था, दोनो की आँखो मे डर की एक लहर दौड़ रही थी...जिसका अंदाज़ा मैने लगा लिया....

"तेरी दोस्त है तो क्या अपुन को थप्पड़ मारेगी...आज तो मैं इसको नही छोड़ूँगा...साले दोनो भाई-बहन अपने बाप के दम पर बहुत उचकते है..."नौशाद ने अपना हाथ छुड़ाकर अरुण को आँखे दिखाई
.
कॅंटीन मे मामला बिगड़ते देख ,वहाँ काम करने वाले बीच-बचाव के लिए आगे आए,लेकिन उन सबको नौशाद के दोस्तो ने वापस भगा दिया और कॅंटीन मे मौजूद सभी स्टूडेंट्स को वहाँ से जाने के लिए कहा....

"आज तो रेप होकर रहेगा...वो भी एक का नही दो-दो का..."कहते हुए नौशाद ने दिव्या का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खीच लिया.


.
यदि इस वक़्त वहाँ नौशाद की जगह कोई दूसरा लड़का होता तो मैं तुरंत उससे भिड़ जाता,लेकिन यहाँ सिचुयेशन अलग थी...नौशाद हॉस्टिल मे रहता था और साथ मे मेरा सीनियर भी था और बरसो से चले आ रहे रूल के अनुसार मुझे नौशाद का साथ देना चाहिए था...भले ही ग़लती किसकी भी हो....

नौशाद के चंगुल से दिव्या खुद को छुड़ाने की कोशिश करती रही,लेकिन वो कामयाब नही हो पाई...

"इतना फुदक मत,अभी तेरी सारी गर्मी उतारता हूँ..."

"ये ग़लत है..."हिम्मत करके मैने नौशाद को दिव्या से दूर किया...

"तेरी माँ की...तू होता कौन है बे मुझे सही-ग़लत समझाने वाला...शायद तू भूल रहा है कि मैं तेरा सीनियर हूँ...चल जा यहाँ से वरना मैं भूल जाउन्गा कि तू अरमान है और मेरे हॉस्टिल मे रहता है..."कहते हुए नौशाद ने मेरा कॉलर पकड़ लिया...

"नौशाद भाई...आख़िर बात क्या है..."शांत लहजे मे मैने नौशाद से पुछा...

"मैने आज सुबह इसका हाथ क्या पकड़ लिया,साली ने सबके सामने एक जोरदार तमाचा मेरे गाल पर दे मारा...लवडी बहुत उचक रही थी.." धक्का देकर नौशाद ने मुझे वहाँ से जाने के लिए....

"चलो बेटा..अरुण-अरमान ,दोनो बाहर जाओ...ये हमारा मॅटर है..."हॉस्टिल के दूसरे सीनियर्स जो वहाँ नौशाद के साथ आए थे,उन्होने हमे जबर्जस्ति पकड़ कर कॅंटीन से बाहर कर दिया...

जब मुझे और अरुण को हॉस्टिल के सीनियर्स कॅंटीन से धक्का देकर बाहर कर रहे थे,तब एक वक़्त के लिए मेरी नज़रें एश से मिली...वो इस वक़्त अंदर तक डरी हुई थी,लेकिन कुच्छ बोलने,कुच्छ कह पाने की हिम्मत उसमे नही थी...जब मुझे ढककर देकर कॅंटीन से बाहर निकाला जा रहा था तो एश की आँखे मुझसे मदद की गुहार लगा रही थी...उसकी सफेद सूरत लाल रंग की मूरत मे तब्दील होने लगी थी...मैने कभी कल्पना तक नही की थी कि मैं एश को इस हालत मे देखूँगा...और मैने जब कुच्छ नही किया तो उसके आँख से आँसू की कुच्छ बूंदे उसके गाल को भिगोति हुई उसके होंठो से होते हुए ज़मीन पर गिर पड़ी....लेकिन मैं फिर भी कुच्छ नही कर पाया,क्यूंकी इससे हॉस्टिल के लड़के ही मेरे खिलाफ हो जाते और ये नौशाद वही लड़का था जिसने वरुण को मारने मे मेरी मदद की थी...मेरे दिल के इस वक़्त दो टुकड़े हो चुके थे,एक हिस्सा मुझसे कह रहा था कि मैं नौशाद की बात मानकर चुप-चाप यहाँ से चला जाऊ..तो दिल का दूसरा हिस्सा मुझे धिक्कार रहा था,मेरे दिल के दूसरे कोने से आवाज़ आ रही थी कि कॅंटीन मे जो कुच्छ हो रहा है,जो कुच्छ होने वाला है,उससे दो ज़िंदगिया बर्बाद हो जाएगी और उस बर्बादी का ज़िम्मेदार मैं रहूँगा...इसलिए मैं उन दोनो की मदद करू.....
.
मैं एक रूल के लिए ये सब कुच्छ नही होने दे सकता था और ये कंडीशन ऐसी थी कि मेरा 1400 ग्राम का ब्रेन भी ठप्प पड़ा हुआ था...मुझे कोई तरक़ीब सोचने के लिए कुच्छ वक़्त लगता पर कम्बख़्त वक़्त ही तो नही था मेरे पास....उसपर से मेरी कही हुई चन्द लाइन्स जो मैने खुद एश से कही थी वो मुझे याद आ गयी....
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08-18-2019, 01:56 PM,
#65
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"तेरे इश्क़ मे यदि कोई मेरे सीने मे खंजर खोप दे....
या फिर दिल निकाल कर उसे अंगरो के बीच रख दे,
मुझे इसकी परवाह नही,लेकिन यदि तेरी आँखो से...
आँसू का एक बूँद भी निकला तो वो मेरे लिए कयामत है...."
.
"अरमान,कुच्छ कर ना,वरना आज जो होने वाला है उसका अंजाम बहुत बुरा होगा..."

"वेल...पहले एक बात बता, तू मार खाने से डरता तो नही..."

"कोशिश करूँगा..."

"तो चल आजा,एक प्लान है मेरे पास..."

"कैसा प्लान..."

"प्लान ये है कि एश और दिव्या को कैसे भी करके कॅंटीन से निकलना है और सीनियर्स पर हाथ भी नही उठाना है और तो और हमे इसका भी ख़याल रखना है कि उन दोनो आइटम्स मे से कोई भी बाहर जाकर नौशाद और उसके दोस्तो की शिकायत ना करे.."

"क्या ये मुमकिन है..."

"ओफ़कौर्स ,याद है मैने क्या कहा था कि कभी ये मत भूलना की मैं अरमान हूँ"

"भैया जी,अपनी बढ़ाई बाद मे करना,पहले ये बताओ की प्लान क्या है..."

मैने अरुण को पकड़ा और कॅंटीन के गेट पर जो कि आधा खुला हुआ था उसपर पूरी ताक़त से अरुण को धकेल दिया...गेट से टकराने के कारण एक जोरदार आवाज़ हुई...

"बीसी,तुझे यहाँ से जाने के लिए कहा था ना...."अरुण को कॅंटीन के अंदर देख नौशाद ने अपने दोस्तो को गालियाँ भी बाकी की उन्होने कॅंटीन का गेट क्यूँ बंद नही किया...

"मैं भी हूँ इधर..."कॅंटीन के अंदर किसी हीरो की तरह एंट्री मारते हुए मैने कहा..."साला जब भी आक्षन वाला सीन होता है, मेरा गॉगल्स मेरे साथ नही रहता...:आंग्री :"

"वैसे तेरा प्लान क्या है,मुझे अब तक नही पता..."कपड़े झाड़ते हुए अरुण खड़ा हुआ...

"प्लान ये है कि तू जाके नौशाद के उपर कूद पड़,मैं बाकियो को देखता हूँ..."

"साले,मैने कभी सपने मे भी नही सोचा था कि तू इतना घटिया प्लान भी बनाता है...नौशाद तो आज मेरा कचूमर बना देगा..."लंबी साँस भरते हुए अरुण ने कहा और सीधे जाकर नौशाद के उपर कूद पड़ा...

अरुण के द्वारा किए गये अचानक इस हमले से नौशाद ने अपना कंट्रोल खो दिया और एक तरफ गिर पड़ा...नौशाद के गिरने के साथ ही दिव्या भी एक तरफ गिर पड़ी और मैने तुरंत जाकर दिव्या को सहारा देकर उठाया और एश के साथ उसे वहाँ से भाग जाने के लिए कहा.....लेकिन इस वक़्त मेरे सामने हॉस्टिल के तीन सीनियर्स खड़े थे....

"दो को तो मैं रोक लूँगा,एक को तुम दोनो संभाल लेना...."

"लेकिन कैसे..."हान्फते हुए दिव्या बोली...

"तुम दोनो के उपर का माला खाली है क्या, इतने सारे ग्लास ,प्लेट टेबल पर रखे है...सब फोड़ देना उसके उपर..."

"ठीक है..."
और मैने ऐसा ही किया...दो को मैने बड़ी मुश्किल से संभाला और तीसरे के सर पर दिव्या और एश ने काँच की ग्लास फोड़ डाली और वहाँ से भाग गयी....दोनो को भागते देख मैं भी वहाँ से उठा और बाहर जाकर उन दोनो से कहा कि...वो दोनो ये बात किसी को ना बताए और जाकर पार्किंग मे खड़ी अपनी कार पर आराम करे मैं ,थोड़ी देर मे उनसे मिलता हूँ....
.
वैसे उन दोनो पर यकीन करना कि वो दोनो वैसा ही करेंगी जैसा कि मैने उन्हे कहा है...इस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल था...खैर इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी तो नही था...खुद को मजबूत करके मैं वापस कॅंटीन मे घुसा...जहाँ नौशाद और हॉस्टिल के तीनो सीनियर अरुण की ठुकाई करने के लिए तैयार खड़े थे...

"लिसन...जेंटल्मेन आंड जेंटल्मेन..."पहले मैने अपने हाथो की उंगलियों को चटकाया और फिर गर्दन...उसके बाद मैने अपने शर्ट का कॉलर खड़ा किया ,जिससे उन सबको ऐसा लगने लगा कि मैं उनसे भिड़ने के लिए तैयार हूँ...लेकिन मेरा प्लान कुच्छ दूसरा था..मैने एक बार और अपनी उंगलियो को दूसरे आंगल से फोड़ा और फिर कहा"नौशाद भैया,हम दोनो मार खाने के लिए तैयार है "
.
मुझे अंदाज़ा था कि अब नौशाद और उसके दोस्त हम दोनो बहुत जमकर कुटाई करेंगे...उनके गुस्से को देखकर भी यही लग रहा था...लेकिन उन्होने ऐसा नही किया,उन्होने हमे ज़्यादा नही सिर्फ़ दो-तीन थप्पड़ और चार-पाँच घुसे ही मारे और धमकी दी की वो लोग आज रात मे हम दोनो को जान से मार देंगे....

"चल उठ,अभी प्लान का एक और हिस्सा बाकी है..."अरुण को ज़मीन से उठाते हुए मैने कहा...

"गान्ड मराए तू ,और तेरा प्लान...बोसे ड्के,हाथ मत लगा मुझे..."कराहते हुए अरुण उठकर बैठ गया"साले ये कॅंटीन वाले भी महा म्सी है,जो लफडा शुरू होते ही यहाँ से खिसक लिए..."

"लड़की चाहिए तो मार खाना ही पड़ता है..."

"अरे लंड मेरा...साले तुझे कॉलर उपर करते देख मैने सोचा था कि तू अब इन सबको मारेगा लेकिन तू तो एक नंबर का फटू निकला...हाए राम! उस बीसी नौशाद ने सीधे एक लात पेट पर दे मारी है...लगता है मेरे लिवर फॅट चुके है...तू आज के बाद मुझसे बात मत करना..."

"अबे इतना भी नही मारा उन लोगो ने,जो तू ऐसे लौन्डियो की तरह रो रहा है...साले तू देश की सेवा कैसे करेगा फिर,देश के लिए तू जान क्या देगा जो इतनी सी मार ना सह सका..."

"अरे भाड़ मे जाए देश...लवडे जब तू दिव्या और एश को लेकर यहाँ से भागा था,तभी उन चारो ने मिलकर मुझे जमकर ठोका,...."

"ले पानी पी ,शाम को दारू पिलाउन्गा...और तू कहे तो अभी ,इसी वक़्त दिव्या से भी बात करता हूँ..."

"दारू-पानी छोड़,पहले दिव्या से बात करवा...जिसके लिए मैने इतनी मार खाई है..."मेरे कंधे के सहारे खड़ा होते हुए अरुण कराहते हुए बोला"वैसे ये बता कि अब दिव्या मुझसे इंप्रेस तो हो जाएगी ना..."

"बेटा दिव्या इंप्रेस तब हुई होती ,जब तू पिट कर नही पीट कर आया होता...."

"तू साले दोस्त के नेम पर कलंक है..."

"और ये कलंक ज़िंदगी भर नही छूटेगा..."
.
वहाँ से हम दोनो पार्किंग की तरफ बढ़े और मैं रास्ते भर यही दुआ करता रहा कि एश ,दिव्या के साथ वही मौजूद हो...क्यूंकी ये मेरे 1400 ग्राम के दिमाग़ मे उपजे प्लान का हिस्सा था और यदि ऐसा नही हुआ तो फिर एक बहुत भयानक तूफान आने वाला था,जिसे मैं चाहकर भी नही रोक पाता...पर मेरी किस्मत ने यहाँ पर मेरा साथ दिया ,जैसा कि अक्सर देती थी....कभी-कभी तो मुझे शक़ होने लगता कि मैं किस्मत का गुलाम हूँ या किस्मत मेरी गुलाम है....
.
"बिल्ली दरवाजा खोल..."कार के शीशे पर नॉक करते हुए मैने कहा और अरुण को वही खड़ा कर दिया लेकिन उसके अगले पल ही अरुण ज़मीन मे बिखर गया,उससे अपने पैरो पर खड़ा भी नही हुआ जा रहा था....
.
"शरीर का जो एक-दो हिस्सा सही-सलामत है,तू उसका भी भरता बना डाल..."ज़मीन पर पड़े-पड़े वो मुझपर चीखा...

"सॉरी यार,मैने ध्यान नही दिया..."

मैने अरुण को सहारा देकर वापस उठाया और कार के अंदर उसे बैठने के बाद मैं खुद भी कार के पीछे वाली सीट पर बैठ गया...

"चलो..."कार के अंदर बैठकर मैने दिव्या से कार चलाने के लिए कहा...

"कहाँ चलें..."पीछे पलट कर एश बोली...

"अमेरिका चल,जापान चल,चीन चल,पाकिस्तान चल...जहाँ मर्ज़ी हो वहाँ चल...लेकिन इस वक़्त यहाँ से चल...बिल्ली कही की,दिमाग़ तो है ही नही "

दिव्या ने कार स्टार्ट की और कार को कॉलेज के मेन गाते की तरफ तेज़ी से दौड़ाने लगी...

"अबे तूने इन दोनो को तो बचा लिया,लेकिन अब सवाल ये है कि नौशाद और पूरे हॉस्टिल से हमे कौन बचाएगा....अब तो ना घर के रहे ना घाट के...मतलब कि ना सिटी वालो के रहे और ना हॉस्टिल वालो के...जहाँ जाएँगे थूक कर आएँगे...अरमान तूने तो मुझे जीते जी मार दिया.."

"क्या यार तू भी ऐसे तूफ़ानी सिचुयेशन मे ऐसा सड़ा सा डाइलॉग मार रहा है...और हॉस्टिल वालो की फिकर छोड़ दे ,क्यूंकी अभिच मेरे भेजे मे एक न्यू प्लान आएला है...""तेरे इश्क़ मे यदि कोई मेरे सीने मे खंजर खोप दे....
या फिर दिल निकाल कर उसे अंगरो के बीच रख दे,
मुझे इसकी परवाह नही,लेकिन यदि तेरी आँखो से...
आँसू का एक बूँद भी निकला तो वो मेरे लिए कयामत है...."
.
"अरमान,कुच्छ कर ना,वरना आज जो होने वाला है उसका अंजाम बहुत बुरा होगा..."

"वेल...पहले एक बात बता, तू मार खाने से डरता तो नही..."

"कोशिश करूँगा..."

"तो चल आजा,एक प्लान है मेरे पास..."

"कैसा प्लान..."

"प्लान ये है कि एश और दिव्या को कैसे भी करके कॅंटीन से निकलना है और सीनियर्स पर हाथ भी नही उठाना है और तो और हमे इसका भी ख़याल रखना है कि उन दोनो आइटम्स मे से कोई भी बाहर जाकर नौशाद और उसके दोस्तो की शिकायत ना करे.."

"क्या ये मुमकिन है..."

"ओफ़कौर्स ,याद है मैने क्या कहा था कि कभी ये मत भूलना की मैं अरमान हूँ"

"भैया जी,अपनी बढ़ाई बाद मे करना,पहले ये बताओ की प्लान क्या है..."

मैने अरुण को पकड़ा और कॅंटीन के गेट पर जो कि आधा खुला हुआ था उसपर पूरी ताक़त से अरुण को धकेल दिया...गेट से टकराने के कारण एक जोरदार आवाज़ हुई...

"बीसी,तुझे यहाँ से जाने के लिए कहा था ना...."अरुण को कॅंटीन के अंदर देख नौशाद ने अपने दोस्तो को गालियाँ भी बाकी की उन्होने कॅंटीन का गेट क्यूँ बंद नही किया...

"मैं भी हूँ इधर..."कॅंटीन के अंदर किसी हीरो की तरह एंट्री मारते हुए मैने कहा..."साला जब भी आक्षन वाला सीन होता है, मेरा गॉगल्स मेरे साथ नही रहता...:आंग्री :"

"वैसे तेरा प्लान क्या है,मुझे अब तक नही पता..."कपड़े झाड़ते हुए अरुण खड़ा हुआ...

"प्लान ये है कि तू जाके नौशाद के उपर कूद पड़,मैं बाकियो को देखता हूँ..."

"साले,मैने कभी सपने मे भी नही सोचा था कि तू इतना घटिया प्लान भी बनाता है...नौशाद तो आज मेरा कचूमर बना देगा..."लंबी साँस भरते हुए अरुण ने कहा और सीधे जाकर नौशाद के उपर कूद पड़ा...

अरुण के द्वारा किए गये अचानक इस हमले से नौशाद ने अपना कंट्रोल खो दिया और एक तरफ गिर पड़ा...नौशाद के गिरने के साथ ही दिव्या भी एक तरफ गिर पड़ी और मैने तुरंत जाकर दिव्या को सहारा देकर उठाया और एश के साथ उसे वहाँ से भाग जाने के लिए कहा.....लेकिन इस वक़्त मेरे सामने हॉस्टिल के तीन सीनियर्स खड़े थे....

"दो को तो मैं रोक लूँगा,एक को तुम दोनो संभाल लेना...."

"लेकिन कैसे..."हान्फते हुए दिव्या बोली...

"तुम दोनो के उपर का माला खाली है क्या, इतने सारे ग्लास ,प्लेट टेबल पर रखे है...सब फोड़ देना उसके उपर..."

"ठीक है..."
और मैने ऐसा ही किया...दो को मैने बड़ी मुश्किल से संभाला और तीसरे के सर पर दिव्या और एश ने काँच की ग्लास फोड़ डाली और वहाँ से भाग गयी....दोनो को भागते देख मैं भी वहाँ से उठा और बाहर जाकर उन दोनो से कहा कि...वो दोनो ये बात किसी को ना बताए और जाकर पार्किंग मे खड़ी अपनी कार पर आराम करे मैं ,थोड़ी देर मे उनसे मिलता हूँ....
.
वैसे उन दोनो पर यकीन करना कि वो दोनो वैसा ही करेंगी जैसा कि मैने उन्हे कहा है...इस पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल था...खैर इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी तो नही था...खुद को मजबूत करके मैं वापस कॅंटीन मे घुसा...जहाँ नौशाद और हॉस्टिल के तीनो सीनियर अरुण की ठुकाई करने के लिए तैयार खड़े थे...

"लिसन...जेंटल्मेन आंड जेंटल्मेन..."पहले मैने अपने हाथो की उंगलियों को चटकाया और फिर गर्दन...उसके बाद मैने अपने शर्ट का कॉलर खड़ा किया ,जिससे उन सबको ऐसा लगने लगा कि मैं उनसे भिड़ने के लिए तैयार हूँ...लेकिन मेरा प्लान कुच्छ दूसरा था..मैने एक बार और अपनी उंगलियो को दूसरे आंगल से फोड़ा और फिर कहा"नौशाद भैया,हम दोनो मार खाने के लिए तैयार है "
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मुझे अंदाज़ा था कि अब नौशाद और उसके दोस्त हम दोनो बहुत जमकर कुटाई करेंगे...उनके गुस्से को देखकर भी यही लग रहा था...लेकिन उन्होने ऐसा नही किया,उन्होने हमे ज़्यादा नही सिर्फ़ दो-तीन थप्पड़ और चार-पाँच घुसे ही मारे और धमकी दी की वो लोग आज रात मे हम दोनो को जान से मार देंगे....

"चल उठ,अभी प्लान का एक और हिस्सा बाकी है..."अरुण को ज़मीन से उठाते हुए मैने कहा...

"गान्ड मराए तू ,और तेरा प्लान...बोसे ड्के,हाथ मत लगा मुझे..."कराहते हुए अरुण उठकर बैठ गया"साले ये कॅंटीन वाले भी महा म्सी है,जो लफडा शुरू होते ही यहाँ से खिसक लिए..."

"लड़की चाहिए तो मार खाना ही पड़ता है..."

"अरे लंड मेरा...साले तुझे कॉलर उपर करते देख मैने सोचा था कि तू अब इन सबको मारेगा लेकिन तू तो एक नंबर का फटू निकला...हाए राम! उस बीसी नौशाद ने सीधे एक लात पेट पर दे मारी है...लगता है मेरे लिवर फॅट चुके है...तू आज के बाद मुझसे बात मत करना..."

"अबे इतना भी नही मारा उन लोगो ने,जो तू ऐसे लौन्डियो की तरह रो रहा है...साले तू देश की सेवा कैसे करेगा फिर,देश के लिए तू जान क्या देगा जो इतनी सी मार ना सह सका..."

"अरे भाड़ मे जाए देश...लवडे जब तू दिव्या और एश को लेकर यहाँ से भागा था,तभी उन चारो ने मिलकर मुझे जमकर ठोका,...."

"ले पानी पी ,शाम को दारू पिलाउन्गा...और तू कहे तो अभी ,इसी वक़्त दिव्या से भी बात करता हूँ..."

"दारू-पानी छोड़,पहले दिव्या से बात करवा...जिसके लिए मैने इतनी मार खाई है..."मेरे कंधे के सहारे खड़ा होते हुए अरुण कराहते हुए बोला"वैसे ये बता कि अब दिव्या मुझसे इंप्रेस तो हो जाएगी ना..."

"बेटा दिव्या इंप्रेस तब हुई होती ,जब तू पिट कर नही पीट कर आया होता...."

"तू साले दोस्त के नेम पर कलंक है..."

"और ये कलंक ज़िंदगी भर नही छूटेगा..."
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वहाँ से हम दोनो पार्किंग की तरफ बढ़े और मैं रास्ते भर यही दुआ करता रहा कि एश ,दिव्या के साथ वही मौजूद हो...क्यूंकी ये मेरे 1400 ग्राम के दिमाग़ मे उपजे प्लान का हिस्सा था और यदि ऐसा नही हुआ तो फिर एक बहुत भयानक तूफान आने वाला था,जिसे मैं चाहकर भी नही रोक पाता...पर मेरी किस्मत ने यहाँ पर मेरा साथ दिया ,जैसा कि अक्सर देती थी....कभी-कभी तो मुझे शक़ होने लगता कि मैं किस्मत का गुलाम हूँ या किस्मत मेरी गुलाम है....
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"बिल्ली दरवाजा खोल..."कार के शीशे पर नॉक करते हुए मैने कहा और अरुण को वही खड़ा कर दिया लेकिन उसके अगले पल ही अरुण ज़मीन मे बिखर गया,उससे अपने पैरो पर खड़ा भी नही हुआ जा रहा था....
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"शरीर का जो एक-दो हिस्सा सही-सलामत है,तू उसका भी भरता बना डाल..."ज़मीन पर पड़े-पड़े वो मुझपर चीखा...

"सॉरी यार,मैने ध्यान नही दिया..."

मैने अरुण को सहारा देकर वापस उठाया और कार के अंदर उसे बैठने के बाद मैं खुद भी कार के पीछे वाली सीट पर बैठ गया...

"चलो..."कार के अंदर बैठकर मैने दिव्या से कार चलाने के लिए कहा...

"कहाँ चलें..."पीछे पलट कर एश बोली...

"अमेरिका चल,जापान चल,चीन चल,पाकिस्तान चल...जहाँ मर्ज़ी हो वहाँ चल...लेकिन इस वक़्त यहाँ से चल...बिल्ली कही की,दिमाग़ तो है ही नही "

दिव्या ने कार स्टार्ट की और कार को कॉलेज के मेन गाते की तरफ तेज़ी से दौड़ाने लगी...

"अबे तूने इन दोनो को तो बचा लिया,लेकिन अब सवाल ये है कि नौशाद और पूरे हॉस्टिल से हमे कौन बचाएगा....अब तो ना घर के रहे ना घाट के...मतलब कि ना सिटी वालो के रहे और ना हॉस्टिल वालो के...जहाँ जाएँगे थूक कर आएँगे...अरमान तूने तो मुझे जीते जी मार दिया.."

"क्या यार तू भी ऐसे तूफ़ानी सिचुयेशन मे ऐसा सड़ा सा डाइलॉग मार रहा है...और हॉस्टिल वालो की फिकर छोड़ दे ,क्यूंकी अभिच मेरे भेजे मे एक न्यू प्लान आएला है..."
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08-18-2019, 01:56 PM,
#66
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मेरा मोबाइल एक बार फिर बज उठा और मैने घड़ी मे टाइम देखा...घड़ी का सबसे छोटा काँटा अब भी सिर्फ़ 9 पर अटका हुआ था,लेकिन फिर भी मुझे ऐसा लगा कि शायद ये कॉल निशा ने की होगी....मैं तुरंत बिस्तर से उठा और कूदकर टेबल पर से अपना मोबाइल उठाकर स्क्रीन पर नज़र डाली...नंबर अननोन था लेकिन कुच्छ जाना-पहचाना सा लग रहा था....
"हेलो..."

"क्या यार बलराम भाई...माल अभी तक नही पहुचा, भाई मुर्गियो के अन्डो वाला एक ट्रक आख़िर है किधर....कब तक इंतज़ार करूँ..."

ये सुनते ही मैने नंबर पर नज़र डाली और समझ गया कि क्यूँ मुझे ये नंबर जाना-पहचाना सा लग रहा था...

"क्या बोला,माल अभी तक नही पहुचा..."

"अरे नही पहुचा...वरना क्या मैं झूठ बोलता ,तेरे चक्कर मे मैं एक से गाली भी खा चुका हूँ..."

"एक काम करो, अपने दोनो अंडे निकाल कर भिजवा दो..."

"ओये बलराम क्या बक रहा है..."

"बेटा अगर अगली बार से इस नंबर पर कॉल किया तो तेरे अंडे निकालकर तुझे ही खिला दूँगा...बक्चोद साले,अनपढ़...फोन रख लवडे"
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"कौन था..."अरुण ने मेरा लाल होता हुआ चेहरा देखकर पुछा...

"पता नही साला कोई अंडे वाला है...ग़लती से बार-बार मुझे ही कॉल लगा देता है...चोदु साला"

"अरे हटा उस अंडे फंडे वाले को और तू आगे बता ,फिर क्या हुआ..."वरुण ने मुझे पकड़ा और पकड़ कर सीधे बेड पर खीच लिया...

"अरुण की संगत मे तू भी गे टाइप हरकत करने लगा है..."

"कोई बात नही...तू आगे बता.."
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.
"तुम दोनो आज कॅंटीन मे जो हुआ,उसका ज़िकरा किसी से भी मत करना...अपने आप से भी नही..."जब कार कॉलेज के बाहर पहुचि तो मैने एश और दिव्या से कहा...
"ऐसा क्यूँ...हम तो इसकी शिकायत प्रिन्सिपल से करेंगे..."एश से तुरंत पीछे पलट कर जवाब दिया...

"और मैं इसकी शिकायत अपने डॅड से करूँगी..."दिव्या ने भी पीछे पलट कर जवाब दिया...

"पहली बात तो ये कि दिव्या तू आगे देख कर ड्राइव कर और दूसरी बात ये कि "एश की तरफ देखकर मैने कहा"सुन बिल्ली,यदि ऐसा हुआ तो उन दोनो का करियर खराब हो जाएगा लेकिन मुझे उनके करियर की बिल्कुल भी परवाह नही है दरअसल बात ये है कि यदि ये मामला कॉलेज मे उच्छला तो इसका रिज़ल्ट ये होगा कि नौशाद और उसके दोस्त कॉलेज से निकले जाने के साथ-साथ जैल भी जाएँगे..."

"तो इसमे प्राब्लम क्या है..."दिव्या एक बार फिर पीछे मुड़कर बोली...

"तू आगे देख के कार चला ना वरना किसी को ठोक-ठाक दिया तो सत्यानाश हो जाएगा..."

"दिव्या ने सही कहा,इसमे प्राब्लम क्या है...उनके साथ ऐसा ही होना चाहिए..."दिव्या का समर्थन करते हुए एश ने कहा"डॉन'ट वरी ,हम तुम दोनो को इन्वॉल्व नही करेंगे..."

"सुन रे फ़ेलीनो...इस केस मे हम दोनो कब्के इन्वॉल्व हो चुके है...और मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकी कॅंटीन मे हमारी ठुकाई करने के बाद उन्होने हमे जान से मारने की धमकी दी है..."

"आवववव...."मैं अपनी बात कंप्लीट नही कर पाया था उससे पहले ही दोनो ने आववव करके मुझे रोक दिया....
"क्या आववववव , "

"फिर तो तुम्हे भी पोलीस मे कंप्लेन करना चाहिए..."दिव्या तीसरी बार पीछे मुड़कर बोली...

"तू आगे देख के कार चला ना...मैं बहरा नही हूँ, बिना मेरी तरफ देखे तू कुच्छ बोलेगी तब भी मैं सुन लूँगा..."मैं एक बार फिर दिव्या पर चिल्लाया और जब दिव्या आगे मूड गयी तो बोला"देखो तुम दोनो समझ नही रहे हो...यदि उन दोनो पर केस हुआ तो हॉस्टिल वाले हमारे खिलाफ हो जाएँगे और फिर मेरे साथ-साथ अरुण भी शहीद हो जाएगा..."

"तो इससे हमे क्या लेना-देना..."

"वाह ! यदि यही बात हम दोनो ने उस वक़्त सोची होती,जब कॅंटीन मे तू नौशाद के शिकंजे मे थी...तो शायद ये सिचुयेशन आती ही नही...यदि दिमाग़ नही है तो मत चला ,जितना बोल रहा हूँ उतना कर...कम से कम मेरे भाई जैसे मेरे इस दोस्त की हालत पर तो रहम खाओ पापियो...देख नही रही इसकी हालत..."

"हाई दिव्या..."दिव्या ने जब कार के मिरर मे अरुण को देखा तो अरुण चहकता हुआ बोला..

"हाई अरुण..."मिरर मे देखकर दिव्या ने जवाब दिया...

"अबे तुम दोनो अपना ही,बाइ...बंद रखोगे..कुच्छ देर के लिए"

"ओके,हम तुम दोनो की बात मानने को तैयार है..."आगे मुड़ते हुए एश ने कहा...

"थॅंक्स माइ फ़ेलीनो..."

"पहले बिल्ली अब फ़ेलीनो..इसका मतलब क्या हुआ...लेकिन ये नाम अच्छा लगता है,फ़ेलीनो"

"ज़्यादा खुश मत हो बिल्ली,फ़ेलीनो को स्पॅनिश मे बिल्ली ही कहते है..."
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उसके बाद हम दोनो कार से उतर गये और उन दोनो को जाने के लिए कहा....

"अबे तूने कहा था तेरे पास एक आइडिया है ,नौशाद के कहर से बचने का..."

"हां, है ना..."

"मुझे भी बता वो आइडिया क्या है.."

"सीडार..."मैने मुस्कुराते हुए कहा .

उसके बाद मैने सीडार को कॉल किया और उसे सारी घटना बताई...शुरू-शुरू मे एमटीएल भाई मुझ पर भड़क उठे और बोले कि दुनियाभर के सारे लफडे मे मैं ही क्यूँ फँसता हूँ...लेकिन बाद मे मेरी रिक्वेस्ट पर वो हॉस्टिल आने के लिए तैयार हो गये,उन्होने मुझसे ये भी कहा कि जब तक वो मुझे कॉल करके हॉस्टिल आने के लिए ना कहे मैं हॉस्टिल के आस-पास भी ना दिखू....एमटीएल भाई की कॉल के बाद मैं और अरुण लगभग चार घंटे तक बाहर ही रहे और फिर रात के 7 बजे सीडार का कॉल आया....
.
"चल,हॉस्टिल चलते है...सीडार पहुच गया है..."

"मुझे अब ऐसा क्यूँ लग रहा है कि हमने कॅंटीन मे जो किया,वो हमे नही करना चाहिए था..."

"तुझे ऐसा इसलिए लग रहा है,क्यूंकी तेरी पूरी तरह से फॅट चुकी है...अब चुप-चाप हॉस्टिल चल वरना मेरे हाथो शहीद हो जाएगा..."
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जब हम दोनो हॉस्टिल के अंदर दाखिल हुए तो हॉस्टिल मे रहने वाला हर एक लड़का हमे घूर कर देख रहा था,उनके चेहरे से ऐसा लग रहा था कि जैसे वो मुझसे कहना चाहते हो कि उन्हे ,मुझसे ऐसी उम्मीद नही थी...

अरुण के साथ मैं सीधे अमर सर के रूम मे घुसा जहाँ सीडार,अमर ,नौशाद और उसके कॅंटीन वाले दोस्त बैठे हुए थे...

"आ गया साला, बीसी हरामी..."मुझे देखते ही नौशाद ने गालियाँ बाकी...

नौशाद का इस तरह से सबके सामने गाली बकना मुझे पसंद नही आया और मैने भी उस गान्डु को अपने तेवेर दिखाते हुए बोला"म्सी ,चुप रह...तू सीनियर है ,सोचकर मैं कॅंटीन मे मार खा गया...लेकिन यदि एक लफ्ज़ भी और बोला तो यही पटक-पटक कर चोदुन्गा और तू मेरे लंड का एक बाल भी नही उखाड़ पाएगा..."
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08-18-2019, 01:57 PM,
#67
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"मार म्सी को, दाई छोड़ दे साले की.."अरुण भी गुस्से से भड़क उठा...

"बस बहुत हो गया..नौशाद तू चुप रह और तुम दोनो भी अपना मुँह सिल लो...वरना तीनो को मारूँगा..."सीडार ने तेज़ आवाज़ मे कहा,जिसके बाद हम सब शांत हो गये....

"अरमान पहले तू बोल कि,तू हॉस्टिल वालो के खिलाफ क्यूँ गया...ये जानते हुए भी कि नौशाद ने वरुण को मारने मे तेरा साथ दिया था..."

"एक मिनिट एमटीएल भाई...पहले मैं आपको एक एग्ज़ॅंपल देता हूँ..."सीडार के पास जाते हुए मैं बोला"यदि आज कॅंटीन मे उन्दोनो लड़कियो की जगह पर विभा और मेरी जगह पर आप होते....तो क्या आप क्या करते..."

"तू बात को घुमा रहा है अरमान...सच ये है कि ना तो मैं वहाँ था और ना ही विभा..."

"सवाल ये नही है कि मैं क्या कह रहा हूँ,सवाल ये है कि मैं कहना क्या चाहता हूँ...इन्स्ट्रुमेंट वही है,ऑब्स्टकल भी वही है...बस अब्ज़र्वर दूसरा है तो क्या हम उस इन्स्ट्रुमेंट की थियरी बदल देते है, नही ना...बस मैं यही समझाना चाहता हूँ,दट'स ऑल"
.
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"एकतरफ़ा बीड़ू..."वरुण मुझे बीच मे ही रोक कर बोला"आज तूने साबित कर दिया कि तू मेरा दोस्त है..."

"थॅंक्स "बोलते हुए मैने घड़ी मे टाइम देखा...घड़ी का सबसे छोटा काँटा अब 10 मे आने को बेकरार था,..

"एक बात कहूँ ,तूने सीडार की सोर्स का बहुत सॉलिड तरीके से इस्तेमाल किया है..."

"दट'स ट्रू..जब तक वो हमारे साथ रहा , मैने उसका इस्तेमाल बहुत अच्छे से किया था..."बोलते हुए मैं बिस्तर से सिगरेट का पॅकेट लेने के लिए उठ खड़ा हुआ...

"तूने ये क्यूँ कहा कि तूने उसका इस्तेमाल तब तक किया,जब तक वो तेरे साथ रहा..."

वरुण के इस सवाल का जवाब देना मेरे मुश्किल कामो मे से एक था,लेकिन उसे सच तो मालूम ही पड़ता,आज नही तो कल मैं खुद उसे ये सच बताने ही वाला था...मैने एक सिगरेट सुलगाई और लंबा कश लेने के बाद बोला..
"मैने ऐसा इसलिए कहा क्यूंकी सीडार अब ज़िंदा नही है..."


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अरुण ये सच पहले से जानता था लेकिन वरुण को ये सच एक झटके मे मालूम चला था ,इसलिए वरुण इस वक़्त झटका खाकर शांत बैठा था,सीडार अब ज़िंदा नही है...ये सुनकर वरुण की आँखे बड़ी हो गयी,मुँह खुला का खुला रह गया और दिमाग़ शुन्य हो गया था....वो काफ़ी देर तक मुझे सिगरेट के कश लेते हुए चुप-चाप देखता रहा, वो शायद इस वक़्त सोच रहा था कि मैं सीडार के डेत पर इतना नॉर्मल बिहेवियर कैसे कर सकता हूँ....पर सच ये नही था, सच ये था कि मैं खुद भी बहुत बेचैन हुआ था,जब मुझे सीडार की मौत की खबर मिली थी...उस पल,उस समय,उस वक़्त जब मुझे ये बद्जात और मनहूस खबर मिली तो मुझे यकीन ही नही हो रहा था कि सीडार अब नही रहा ,जब तक कि मैने अपनी आँखो से खुद सीडार की बॉडी को नही देखा था....मैं ये सोच कर चल रहा था कि ये सब झूठ है,सीडार ऐसे ,कैसे मर सकता है...लेकिन मेरे यकीन करने या ना करने से सच नही बदल जाता और ना ही मुझमे और किसी और मे इतनी काबिलियत और ताक़त है कि वो सच को बदल कर रख दे.....

वरुण अब भी एक दम खामोश था और मैं सिगरेट के कश पर कश लिए जा रहा था...जब सिगरेट ख़त्म हुई तो मैने सिगरेट को अपनी उंगलियो के नाख़ून मे फसाया और दूर रखे डस्टबिन पर निशाना लगाकर उछाल दिया....
"गोल..."
"यार,मैं कभी सीडार से नही मिला लेकिन फिर भी उसके बारे मे सुनकर सदमा सा लगा है...कुच्छ करने की इच्छा जैसे ख़त्म सी हो गयी है..."बड़ी मुश्किल से वरुण सिर्फ़ इतना ही बोल पाया...

"किसी से जुड़ने के लिए उससे जान-पहचान ज़रूरी नही...जुड़ाव दिल से होता है,सूरत से नही..."

"ये सब एक दम अचानक से कैसे हुआ...सीडार की मौत कैसे हुई ?"

"मेरे ख़याल से मुझे धीरे-धीरे करके सब बताना चाहिए...लेकिन यदि तू चाहता है कि मैं डाइरेक्ट सीडार के डेत पॉइंट पर आउ,तो मुझे कोई प्राब्लम नही..."

"नही...धीरे-धीरे करके बता.."

मैने घड़ी मे टाइम देखा ,इस वक़्त 10:30 बज रहे थे,लेकिन निशा की कॉल का अभी तक कोई अता-पता नही था,इसलिए मैने कहानी आगे बढ़ाई.....
.
"सीडार भाई,ये आपको बातो मे फसा रहा है....यहाँ क्वेस्चन ये है कि अरमान और अरुण हमारे खिलाफ क्यूँ गये...जबकि मैने इन दोनो को प्यार से समझाया भी था कि वहाँ से चले जाए..."नौशाद ने अपना जाल फेका...

अब तक अमर सर के रूम के बाहर हॉस्टिल के लगभग सभी लड़के मौज़ूद हो चुके थे, जो दीवारो,दरवाजो और खिड़कियो पर अपने कान लगाकर बंद दरवाजे के पीछे क्या हो रहा है...ये सुन रहे थे...नौशाद के इस सवाल से मैं एक बार फिर शिकंजे मे फँसने लगा था और मुझे जल्द से जल्द कुच्छ ना कुच्छ करना था...इस वक़्त अमर सर का ये रूम किसी अदालत की तरह था,जहाँ जड्ज के तौर पर एमटीएल भाई थे, नौशाद यहाँ किसी पीड़ित के तौर पर था,जिसने मुझ पर केस ठोका था....यहाँ और असलियत की अदालत मे फरक सिर्फ़ इतना था कि दोनो पार्टी अपनी वकालत खुद कर रही थी...मतलब की नौशाद मुझ पर आरोप पर आरोप देकर मुझे मुजरिम साबित करने पर तुला हुआ था और मैं उन आरोप से बचने की कोशिश मे खुद की पैरवी कर रहा था.....
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नौशाद और उसके दोस्तो का कहना था कि मैने हॉस्टिल की बरसो से चले आ रहे नियम को तोड़ा है,जिसकी सज़ा मुझे मिलनी चाहिए और मेरा कहना था कि मैने नियम इसलिए तोड़ा क्यूंकी ये उस वक़्त ज़रूरी था..क्यूंकी कोई भी नियम ,क़ानून किसी की ज़िंदगी से बड़े नही होते....

"सीडार भाई,मैं तो बोलता हूँ कि ,आप यहाँ से जाओ और इन दोनो को हमारे हवाले कर दो...सालो को सब सिखा देंगे..."नौशाद ने कहा ,जिसके बाद उसके दोस्तो और रूम के बाहर खड़े हॉस्टिल के लड़को ने उसका समर्थन किया....

"एक मिनिट ,एमटीएल भाई...मैने आज कॅंटीन मे जो किया वो सब नौशाद और उसके दोस्तो की भलाई के लिए किया....अब आप सोचो कि ये दोनो जो करने जा रहे थे,उसके बाद इनका क्या हाल होता...."

"क्या होता,कोई कुच्छ नही उखाड़ पाता मेरा "नौशाद बीच मे बोला..

"सुन बे नौशाद...जितनी देर तक इज़्ज़त दे रहा हूँ...ले ले वरना अभी एनएसयूआइ के लौन्डो को बुलवाकर मरवा दूँगा..."उसके बाद मैने सीडार की तरफ देखकर कहा"एमटीएल भाई, यदि आज कॅंटीन मे ये सब अपना काम कर दिए होते तो बहुत लंबा केस बनता, कॉलेज से निकाले जाते...सात साल जैल मे सड़ते और तो और ये भी हो सकता था कि ये चारो कल का सूरज नही देख पाते क्यूंकी एश और दिव्या ,हमारे कॉलेज की कोई मामूली लड़की नही है...जिनके माँ-बाप अपनी दुहाई लेकर पोलीस स्टेशन मे भागते फिरेंगे...एक का बाप इस शहर का बहुत बड़ा बिज़्नेसमॅन है तो दूसरे का बाप इस शहर का डॉन...वो दोनो मिलकर नौशाद और इसके चूतिए दोस्तो को कुत्ते की मौत मारते, इनका लंड काट देते और जब कल सुबह होता तो इनकी लाश किसी अनाथ की तरह सड़को पर पड़ी रहती....और फिर नतीजा ये होता कि इनके घरवालो को पोलीस के चक्कर काटने पड़ते..."मैने अमर सर के रूम का दरवाजा खोला और जो-जो लोग दरवाजे पर कान लगाए हुए थे,मेरी इस हरकत के कारण वही गिर गये और उन सबको देखकर मैने कहा"अब तुम सब ही बताओ कि सही क्या है और ग़लत...और रही हॉस्टिल के सीनियर्स की रेस्पेक्ट की बात तो इन चारो से पुछो की कॅंटीन मे मैने क्या इनपर एक भी बार हाथ उठाया ? ये मुझे और अरुण पर अपनी फ्रस्टेशन निकालते रहे,हमे मारते रहे...लेकिन हमने कुच्छ नही कहा,यहाँ तक कि इनसे मार खाने के बाद मैने और अरुण ने उन दोनो लड़कियो के पैर पकड़ कर इन चारो महापुरषो की हरकत पर माफी भी माँगी और उनसे रिक्वेस्ट भी की..कि वो ये बात किसी को ना बताए और उन्होने हमारी बात मान भी ली है...दट'स ऑल और मेरे ख़याल से अब कहने और सुनने को कुच्छ नही बचा है...आम आइ राइट एमटीएल भाई..."
.
फिर क्या था...जहाँ कुच्छ देर पहले हॉस्टिल के लड़के मुझ पर नाराज़ थे वो अब मुझसे खुश थे,हॉस्टिल के सभी लड़के..इंक्लूडेड माइ कमीने फ्रेंड्स अरुण और सौरभ(जो मेरी तारीफ कभी नही करते ) भी मेरी तारीफ कर रहे थे...हॉस्टिल के सभी लफंगो ने नौशाद और उसके दोस्तो को चोदु,गान्डु कहा...कुच्छ ने उनके पिछवाड़े पर एक दो लात भी मारी....
अदालत का फ़ैसला मेरे पक्ष मे हुआ और जब एमटीएल भाई ,रात को अपने घर जा रहे थे तो उन्होने मुझे बुलाया...
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"काफ़ी अच्छा प्लान बनाया तूने..."

"कोई प्लान नही बनाया सीडार भाई...जो सच था ,वही बोला..."

"अरमान ,अपने शब्दो के जाल मे किसी और को फसाना...मुझे पूरा यकीन है कि तूने ये सारे ईक्वेशन सिर्फ़ इसलिए जोड़े,ताकि तू उन दोनो लड़कियो को बचा सके और फिर बाद मे खुद को...सबसे पहले तू कॅंटीन से बाहर आया और मेरे ख़याल से तू कन्फ्यूषन मे था कि हॉस्टिल वाले का साथ दूं या फिर उन दोनो लड़कियो का,..उसके बाद तूने एश का साथ देने का सोचा और उन्दोनो को कॅंटीन से बाहर भगा दिया...तूने नौशाद और उसके दोस्तो पर हाथ भी नही उठाया ताकि तू मेरे और सारे हॉस्टिल वालो के सामने अपना पक्ष मज़बूत कर सके...तूने मुझे अपने प्लान मे तभी शामिल कर लिया था,जब तू एश और दिव्या को बचाने के लिए कॅंटीन मे घुसा और मेरे ख़याल से तूने उन दोनो को ये भी कहा कि वो दोनो कॅंटीन वाली बात किसी को ना बताए,जिससे ये मामला रफ़ा-दफ़ा हो जाए...और फिर तूने मुझे कॉल किया क्यूंकी तू जानता था कि हॉस्टिल वाले मेरी बात मानेंगे और तू ये भी जानता था कि मैं तेरी ही साइड लूँगा...आम आइ राइट ,अरमान सर"

"सच तो यही है लेकिन मुझे लगा नही था कि आप सच जान जाओगे..."

"एक बात याद रखना अरमान कि इस हॉस्टिल मे तेरे अब चार दुश्मन हो गये है...ये चार ,चालीस मे तब्दील ना हो जाए...इसका ख़याल रखना..गुड नाइट, अब मैं चलता हूँ..."

"मैं कभी ये नही सोचता कि मेरे दुश्मन कितने है...मैं हमेशा ये सोचता हूँ कि मेरे दोस्त कितने है....यदि ये चार,चालीस मे बदल जाए...तो मैं कोशिश करूँगा कि मेरे दो दोस्त, 200 मे बदल जाए...वो क्या है ना एमटीएल भाई की ज़िंदगी मे जब तक मार-धाड जैसा एक्शन,अड्वेंचर ना हो तो ज़िंदगी जीने मे मज़ा नही आता... गुड नाइट आंड टेक केर..."

मेरी नज़र अब भी टिक-टिक करती दीवार पर लगी घड़ी पर अटकी हुई थी...घड़ी का सबसे छोटा काँटा बस 1 पर पहुचने ही वाला था,लेकिन निशा की कॉल का अब तक कोई नाम-ओ-निशान नही था...पहले मुझसे बात करने की बेचैनी निशा को थी लेकिन अब मैं बेचैन हुआ जा रहा था....मैं इस उम्मीद मे अभी तक जाग रहा था कि शायद वो मुझे अब कॉल करे, क्यूंकी हो सकता है कि उसे 12 बजे तक टाइम ना मिला हो...या फिर उसके मोम-डॅड उसके आस-पास हो....जब मेरी ये हालत है तो ना जाने उस दायां का क्या हाल हो रहा होगा...मुझे तो ऐसा लगता है कि यदि इस वक़्त मैं उसके सामने आ जाउ तो खुशी के मारे वो किसी दायां की तरह मुझे नोच डाले....

"अब तो हद हो गयी,2 बजने वाला है और मैं उल्लू की तरह उसके कॉल का इंतज़ार कर रहा हूँ...कुच्छ देर मे तो सुर्य भगवान भी अपने दर्शन दे देंगे...."मैने एक सिगरेट जलाई और बाल्कनी पर आ गया....
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ना जाने मैं किस उम्मीद मे निशा के घर की तरफ देख रहा था,मैं इस वक़्त पागलो की तरह सोचने भी लगा था...मैं इस समय ये सोच रहा था कि शायद निशा रात को मेरे फ्लॅट की तरफ आए....मेरा दिल और दिमाग़ इस वक़्त अपनी जगह से थोड़ा खिसक गया था जो मैं ऐसी बेबुनियाद ख़यालात अपने जहाँ मे ला रहा था...मैने बहुत देर तक निशा के घर की तरफ अपनी नज़ारे गढ़ाए रखी इस सोच के साथ कि वो कही यहाँ आकर लौट ना जाए.....

मेरा दिल अब मेरे दिमाग़ पर हावी होते जा रहा था...निशा के उस एक कॉल की इंतज़ार ने मेरे सारी क्षमताओ पर क्वेस्चन मार्क लगा दिया था...मुझे इस समय ना तो रात के तीसरा पहर दिख रहा था और ना ही उल्लू की तरह जाग रहा मैं...मुझे तो दिख रही थी तो सिर्फ़ निशा...कभी-कभी मुझे निशा के घर की तरफ जाने वाली गली मे कुच्छ आहट सुनाई देती ,मुझे ऐसा लगता जैसे कि निशा अभी चारो तरफ फैले इस अंधेरे से बाहर निकल कर प्रकट हो जाएगी....

मेरे 1400 ग्राम वेट वाले ब्रेन का एक नुकसान यही था कि मेरा दिमाग़ हद से ज़्यादा क्रियेटिव था...वो अक्सर छोटी से छोटी आहट को किसी का आकार देने पर जुट जाता है...हर कहानी की एक दूसरी कहानी ही बनाने लग जाता है....जैसे कि इस वक़्त हो रहा था और यदि शॉर्ट मे कहे तो मेरा दिमाग़ फॉर्वर्ड की जगह बॅक्वर्ड डाइरेक्षन मे काम कर रहा था....
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"एक बार निशा के घर का राउंड मार कर आता हूँ,क्या पता वो अपने घर की छत मे खड़े होकर मेरा इंतज़ार कर रही हो..."इसी के साथ एक और बेवकूफी भरी सोच मेरे अंदर आई...

"अबे पागल है क्या, इतनी रात को निशा अपने घर की छत पर क्या दे & नाइट मॅच खेल रही होगी...तू शांति से सो जा..."मैने खुद का विरोध किया....

"अरमान...एक बार देख कर आने मे क्या जाता है...वैसे भी तो तू बाल्कनी मे खड़ा होकर सिगरेट ही जला रहा है...ज़्यादा सोच मत और चल निशा के घर के पास चलते है..."
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08-18-2019, 01:57 PM,
#68
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मैने पीछे पलट कर रूम के अंदर देखा ,अरुण और वरुण इस समय गहरी नींद मे थे...मैने जल्दी-जल्दी सिगरेट के चार-पाँच कश लिए और बाल्कनी से डाइरेक्ट नीचे कूद गया और अंधेरे मे ही निशा के घर की तरफ चल पड़ा...निशा के घर से कुच्छ दूरी पर आकर मैं रुक गया और निशा के घर पर एक नज़र डाली..वैसे कहने को तो निशा का घर इस कॉलोनी का सबसे बड़ा और आलीशान घर था...लेकिन इस वक़्त रात के अंधेरे मे निशा का घर सबसे भयानक लग रहा था,..पूरे घर की लाइट्स ऑफ थी ,वहाँ रोशनी के नाम पर निशा के घर का चौकीदार जिस रूम मे रहता था,सिर्फ़ उसी रूम की लाइट जली हुई थी....सबसे खूबसूरत चीज़ सबसे बदसूरत भी हो सकती है ,ये मैं अभी देख रहा था इसलिए मैने खुद को यहाँ आने के लिए कोसा और चुप-चाप वहाँ से खिसक लिया...मैं अब अपने फ्लॅट की तरफ आ रहा था ये सोचते हुए कि निशा के दिमाग़ मे इस वक़्त आख़िर चल क्या रहा है और उससे भी ज़्यादा ये कि मेरे दिमाग़ मे इस वक़्त क्या चल रहा है...क्या सोचकर मैं इतनी रात को निशा के घर की तरफ गया कि वो रात के 3 बजे छत पर खड़े होकर पतंग उड़ा रही होगी...उसके बाद मैं ठीक उसी रास्ते से फ्लॅट के अंदर घुसा ,जिस रास्ते से मैं बाहर आया था...अंदर पहुचने मे थोड़ा टाइम लगा, मुश्किले भी आई पर दरवाजे के बाहर खड़े होकर घंटो दरवाजा पीटना और वरुण को आवाज़ देने से ये अच्छा ही था....मैने पीसी ऑन करके अपनी ईमेल भी चेक की ,लेकिन निशा का कोई मैल अभी तक नही आया था....

"कहीं उसके बाप को मालूम तो नही चल गया कि ,निशा और मेरा चक्कर चल रहा है...यदि ऐसा हुआ तो फिर मेरा तो उपरवाला ही मालिक है..."
.
आधे से अधिक रात तो मैने सिगरेट पीने मे बीता दी थी और बचा हुआ समय बिस्तर पर पड़े-पड़े करवटें बदलने मे गुजर गया और सुबह 6 बजे जाकर नींद लगी लेकिन 2 घंटे बाद ही मुझे अरुण ने जगा दिया....
.
"उठ बे, 12 बज गये..."

"क्या ? 12 बज गये...धत्त तेरी की..."मैं एक दम से उठकर बैठते हुए बोला और घड़ी पर नज़र डाली"अभी तो 8 बजे है बे "
"चल आगे बता क्या हुआ..."चाय का एक बड़ा सा कप मेरे सामने रखते हुए वरुण बोला...

"अभी नींद आइंग..."बोलते हुए मैं वापस बिस्तर पर लुढ़क गया...

"अबे 10 बजे मुझे ऑफीस जाना है...इसलिए सोच रहा हूँ कि तेरी बकवास सुनता चालू...ले पी.."

मैने कप उठाया और ज़ुबान से लगाया "अबे ये तो दारू है..."शकल बिगाड़ते हुए मैं बोला

"उससे क्या फरक पड़ता है..वैसे यदि तेरा मन नही तो रहने दे..मैं पी लूँगा..."
"ना मुन्ना ना...यू नो दट आइ लव दारू मोर दॅन टी....."
.
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एश और दिव्या पर मुझे भरोसा नही था कि वो दोनो मेरी बात मानेगी और अपना मुँह बंद करके रखेगी...इसलिए मुझे हर दिन थोड़ा सा डर ज़रूर रहता कि कही वो कॅंटीन वाली बात किसी को बता ना दे...कॅंटीन वाले कांड के बाद कयि दिनो तक दिव्या और एश कॉलेज मे नही दिखी और अपने पास अब इतना टाइम भी नही होता था कि उनके क्लास के बाहर खड़े होकर उनका इंतज़ार करता रहूं....इधर वर्कशॉप वाला फ़ौजी हम पर गोली पे गोली फाइयर किए जा रहा था...उसका कहना था कि हर एक शॉप की एक अलग प्रॅक्टिकल कॉपी बनानी पड़ेगी और 2 फिगर फ्रेम करवाने होंगे...इधर फ़ौजी तो उधर थर्ड सेमेस्टर के एग्ज़ॅम भी कुच्छ हफ्ते बाद दस्तक देने वाले थे....इसलिए समय का मानो अकाल सा पड़ गया था...बड़ी मुश्किल से हम बाथरूम को स्पर्म डोनेट कर पाते...क्यूंकी प्रॅक्टिकल और असाइनमेंट के पन्नो ने हमे सब कुच्छ लगभग भुला सा दिया था...कभी-कभार आते-जाते..एश से मेरी मुलाक़ात हो जाती थी और अब वो मुझे देखकर इग्नोर ना करके एक प्यारी सी स्माइल देती थी ,वो भी गौतम से छिप्कर.......
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जैसा कि मैने पहले बताया कि मेरी याददाश्त बहुत तेज़ है ,मैं चीज़ो को उतनी जल्दी नही भूलता और ना ही उन्हे इग्नोर करता हूँ और पोलीस स्टेशन वाला केस तो जब मेरे क्लास के लौन्डे नही भूले तो भला मैं कैसे भूल सकता हूँ...मैं फर्स्ट एअर के उन दोनो लड़को को दिखाना चाहता था कि मैं क्या हूँ और मेरी स्टेटस क्या है....मेरे ख़याल से ऐसे सिचुयेशन मे दुनिया मे सिर्फ़ दो केटेगरी के लोग होते है....

पहला वो जो बड़ी से बड़ी बात को हंस कर टाल देते है और ऐसे बिहेव करते है..जैसे कि कुच्छ हुआ ही नही...जबकि किसी ने अच्छे से खोलकर उनकी मारी होती है और दूसरे केटेगरी के लोग वो होते है जो एक बूँद जैसी छोटी से छोटी बात को समुंदर बना देते है....

मेरे अंदर ये दोनो ही खूबिया थी,जिन्हे मैं अकॉरडिंग टू सिचुयेशन ,अपने सिक्स्त सेन्स की मदद से अपनी इस खूबी का अच्छे तरीके से इस्तेमाल करता था...मैने उन दोनो को उनकी उस एफ.आइ.आर. वाली करतूत के लिए एक प्लान बनाया था और जैसा कि अक्सर होता है...इस प्लान की खबर सिर्फ़ मुझे और मेरे दिमाग़ को थी...जब मामला लड़ाई-झगड़ा का हो और मेरे प्लान मे सीडार शामिल ना रहे,ये नामुमकिन ही था...इसलिए मैने अपना मोबाइल निकाला और सीडार का नंबर मिलाया....


"गुड आफ्टरनून एमटीएल भाई..."दूसरी तरफ सीडार के द्वारा कॉल रिसीव करते ही मैं बोला...

"मेरे ख़याल से तूने मुझे गुड आफ्टरनून बोलने के लिए तो कॉल नही किया है...चल जल्दी से काम बोल..."

"उन दो लड़को को तो जानते ही होगे,जिन्होने मुझपर और अरुण पर एफ.आइ.आर. किया था..."मैं सीधे पॉइंट पर आ गया,क्यूंकी अब लंच ख़तम ही होने वाला था और मैं नही चाहता था कि वर्कशॉप वाला फ़ौजी मुझपर मिज़ाइल दागे....

"हां नाम से जानता हूँ,..."

"वो दोनो बहुत उड़ रहे है,दोनो को ज़मीन पर लाने का है "

"अभी मुश्किल से तू कॅंटीन वाले केस से बचा है और अब नया लफडा...अबे तू शांति से इंजिनियरिंग क्यूँ नही करता..."

"वो क्या है एमटीएल भाई...कि जब दो अहंकारी लोग टकराते है तो ऐसा धमाका होते ही रहता है...उन्दोनो को थोड़ा सा हम हॉस्टिल वालो की पॉवर दिखानी है..."

"तो इसमे मैं क्या करूँ...लड़के तो तेरी बात मान ही लेंगे, सबको साथ लेजा कर उन दोनो को फोड़ डाल...इसमे प्राब्लम क्या है..."

"प्राब्लम ये है कि मेरी हॉस्टिल वॉर्डन से मेरी जमती नही है और जितना मुझे मालूम है उसके हिसाब से हमारा हॉस्टिल वॉर्डन आपके दोस्त की तरह है..."

"अबे सीधे-सीधे बोल कि करना क्या है....."

मैने एमटीएल भाई को क्या करना है,ये बताया और उसके बाद अपनी प्रॅक्टिकल कॉपी और ड्रॉयिंग शीट लेकर वर्कशॉप की तरफ चल पड़ा....
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"रोल नंबर 11...."

"प्रेज़ेंट सर..."बाहर से मैं चिल्लाया"मे आइ कम इन सर..."

"अंदर आओ और अपने हथियार निकाल कर जंग के लिए तैयार हो जाओ..."

"मैं तैयार हूँ सर..."

"गुड लक...."उसके बाद उस फ़ौजी ने अपने हाथ मे रखी लिस्ट पर नज़र डाली और पूरा दम लगाकर चीखा"रोल नंबर 12...."
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"तेरी हालत ऐसी क्यूँ है बे,तेरा रोल नंबर तो मेरे बाद ही आएगा..."

"उधर देख...साला वो फ़ौजी आज गोली नही मिज़ाइल फाइयर कर रहा है...एक की उसने ड्रॉयिंग रेड पेन से लाल कर दी मतलब 5 नंबर गये,...उस लड़के का ड्रॉयिंग तो मुझसे ठीक-ठाक ही था,जब उसकी ये हालत है तो मेरा क्या होगा...यही सोचकर मैं परेशान हो रहा हूँ...."

"मैं तो बच जाउन्गा "

"कैसे...अपनी ड्रॉयिंग शीट दिखा तो..."

"अबे ,तूने अभी तक एक चीज़ नोटीस की या नही..."जब अरुण ने मेरी ड्रॉयिंग शीट की तरफ अपने हाथ बढ़ाया तो मैने उसके हाथ को रोक उससे पुछा...

"अरे इधर फटी पड़ी है और तू गोल-मोल सवाल कर रहा है..."

"अपना फ़ौजी हर एक बंदे को एग्ज़ॅक्ट 15 मिनिट्स तक रेमंड पर लेता है,ना एक सेकेंड कम और ना ही एक सेकेंड अधिक...."

"तुझे कैसे पता..."

"अबकी बार जब रोल नंबर 10 वाला लड़का जाए तो टाइम देख लेना...उसकी टेबल पर रखी स्टॉप . तब चालू होती है जब कोई स्टूडेंट अपनी फाइल खोलकर रखता है और वो 15 मिनिट्स तक उस स्टूडेंट पर बॉम्ब फोड़ता है और फिर बेज़्जती करके भेज देता है और फिर बाद वाले स्टूडेंट को 10 सेकेंड्स के अंदर ही वहाँ पहुचना है,जिसके बाद उस फ़ौजी की स्टॉप . फिर चालू हो जाती है....."

"ये सब क्या उस छोटे कद वाले फ़ौजी ने तेरे सपने मे आकर कहा "

"रोल नंबर 9 तक तो वो यहीं करता आ रहा है "

"और यदि उसके पास पहुचने मे 10 सेकेंड्स से ज़्यादा वक़्त लग गया तो..."

"तो फिर वो उस लड़के/लड़की की प्रॅक्टिकल कॉपी और ड्रॉयिंग शीट को छोड़ देगा...इसलिए मर्दो की तरह लंबे-लंबे कदम बढ़ाना...वरना वहाँ पहुचने से पहले ही चुड जाएगा...समझा...."
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थोड़ी देर तक अरुण शांत रहा लेकिन फिर मेरे पास आकर बोला"यार अरमान, उसने अभी-अभी एक की राइटिंग खराब होने की वजह से सी+ ग्रेड दिया है....मेरी राइटिंग तो उससे भी खराब है मैं क्या करूँ... ,कुच्छ जुगाड़ जमा ना"

"एक जुगाड़ है..."

"क्या..."

"वो जुगाड़ क्या मैं तुझे चिल्ला-चिल्ला कर बताउन्गा... कान इधर ला..."

अरुण को जुगाड़ बताने के बाद मैं एक दम सीधा खड़ा हो गया ,क्यूंकी अगला रोल नंबर मेरा ही था.....चूतिए थे शुरू के 10 स्टूडेंट्स जो ड्रॉयिंग शीट को उपर रख कर ले जा रहे थे, मैने ड्रॉयिंग शीट को सबसे नीचे रखा और अब मुझे कैसे भी करके 15 मिनिट्स तक बिना ड्रॉयिंग शीट दिखाए उस फ़ौजी के वॉर को सहना था...क्यूंकी मेरी ड्रॉयिंग शीट तो एक दम सफेद थी...मतलब कि उसमे कोई ड्रॉयिंग ही नही थी और यदि वो फ़ौजी भूल से भी मेरा वो कारनामा देख लेता तो मुझ पर अटॉमिक अटॅक कर देता और यही वजह थी कि जब अरुण ने मेरी ड्राइंग शीट देखने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया तो मैने उसका हाथ रोक दिया था,क्यूंकी मैं नही चाहता था कि वो गला फाड़कर मुझपर चिल्लाए कि"अरमान तो एक दम कोरा कागज है..."
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"रोल नंबर. 11...."अपनी घड़ी पर 10 सेकेंड्स का समय देखते हुए उसने मेरा नाम पुकारा...

और मैं 6 सेकेंड मे ही उसके पास पहुच गया....जब फ़ौजी मेरी प्रॅक्टिकल कॉपी देख रहा था तभी मैने आर्मी वाला मॅटर छेड़ दिया...जिसके बाद उसने मेरी प्रॅक्टिकल कॉपी और ड्रॉयिंग शीट एक तरफ रखवा दी और मुझसे उसी मॅटर पर बात करने लगा...वो इस डिस्कशन मे इतना खो गया था कि मुझे ,उसको याद दिलाना पड़ा की "ल्यूटेनेंट सर,15 मिनिट्स हो गये है "
"रोल नंबर. 12...."फ़ौजी ने फिर से अपनी स्टॉप . शुरू कर दी और उसी वक़्त अरुण के पास जाकर मैने धीरे से कहा की ..."नेवी के बारे मे इससे बात कर...लेकिन पहले प्रॅक्टिकल कॉपी दिखा देना,ताकि उसे शक़ ना हो"


अरुण के पास जाकर मैने धीरे से कहा की..."नेवी के बारे मे इससे बात कर...लेकिन पहले प्रॅक्टिकल कॉपी दिखा देना,ताकि उसे शक़ ना हो"
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"अपुन को तो बस थोड़ा हिंट चाहिए था ,बाकी दिमाग़ तो मेरे पास भी है....अब तू देख इस फ़ौजी को कैसे चकमा देता हूँ..."
अरुण ने चलते-चलते अपनी सारी प्रॅक्टिकल कॉपी एक हाथ मे और ड्रॉयिंग शीट को दूसरे हाथ से पकड़ लिया और टेबल पर बैठे उस फ़ौजी के पास जाकर बोला...

"भारत माता की जय..."

"जय हो भारतमाता की..."एका एक फ़ौजी जैसे खुशी से झूम उठा और अरुण की तरफ देखकर बोला"मुझे तुम्हारे जैसे जोशीले लड़को की ज़रूरत है...खैर अपनी प्रॅक्टिकल कॉपी दिखाओ"

अरुण ने अपनी प्रॅक्टिकल कॉपी एक के बाद एक दिखानी शुरू कर दी...शुरू मे जहाँ फ़ौजी अरुण से एक दम खुश हुआ था ,वही अब अरुण की राइटिंग देखकर उसके चेहरे का रंग बदलने लगा था....

"तुम जैसे जोशीले जवान की इतनी खराब पेर्फोमन्स "अफ़सोस जाहिर करते हुए उस फ़ौजी ने अपना चश्मा उतार कर टेबल पर रख दिया....

"हाथ मे गोली लग गयी थी सर,वरना मेरी राइटिंग का पूरे क्लास मे क्या पूरे कॉलेज मे कोई शानी नही है..."

"हाथ मे गोली लग गयी थी,मतलब..."वापस अपना चश्मा लगाते हुए फ़ौजी ने पुछा...

"मतलब की मैं हॉस्टिल मे गिर गया था...और कल रात भर दर्द सहते हुए जैसे-तैसे काम कंप्लीट किया है..."

"एक्सलेंट, माइ बॉय....एक्सलेंट...मुझे तुम्हारे जैसे जोशीले लड़को को देखकर अपने दिन याद आ जाते है...."

"तो अब मैं चलूं..."

"बिल्कुल जाओ और नंबर की परवाह मत करना...."

"थॅंक यू सर..."

अपना कॉलर उपर करते हुए अरुण मेरे पास आया

"बेटा अरमान, शर्त लगा ले...वर्कशॉप मे तो तुझसे ज़्यादा नंबर पाउन्गा...."
"तूने रात भर मेहनत की ,सारा दिन प्रॅक्टिकल कॉपी को नीली स्याही से भरने मे बिताया,...फिर 4 से 5 घंटे मे तूने ड्रॉयिंग बनाया ,इसलिए यदि तू 1-2 नंबर अधिक पा जाता है तो इसमे कौन सी बड़ी बात है..."
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08-18-2019, 01:57 PM,
#69
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"देख अपनी हार मान ले..."

"कभी नही....बिल्कुल भी नही..."

"साले घमंडी..."

"चल...चलकर सौरभ और सुलभ को इस जंग को जीतने का उपाय बता देते है ,वरना वो दोनो खाम खा शहीद हो जाएँगे...."
जब हमारा काम ख़तम हुआ तो हम दोनो सौरभ और सुलभ की तरफ बढ़ गये, दोनो का रोल नंबर लास्ट मे आता था,इसलिए इस वक़्त दोनो आपस मे बात-चीत करने मे मगन थे
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"सुलभ ,मैं तुझे उस फ़ौजी से बचने का ट्रिक बताता हूँ...."सुलभ के सामने जाकर मैने शान से कहा...

"रहने दो अरमान सर, मुझे उस फ़ौजी से बचने के लिए किसी ट्रिक की ज़रूरत नही है..."

"जब वो पकड़ कर चोदेगा तब तुझे समझ मे आएगा,..."

"लंड मेरे पास भी है...मतलब कि ड्रॉयिंग एक दम करेक्ट है,राइटिंग मेरी सॉलिड है, फाइल भी कंप्लीट है और मुझे सब याद है...."

"चल ठीक है,तू निकल...सौरभ अंकल आपको ट्रिक बताऊ या आपकी भी फाइल कंप्लीट है,ड्रॉयिंग सही है,राइटिंग सॉलिड है और सब कुच्छ याद है..."

"पढ़ने ,लिखने से किसका भला हुआ है यार , तू तो मुझे ट्रिक बता...."
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"अरुण तुझे फर्स्ट एअर के वो दो लड़के याद है ,जिन्होने एफ.आइ.आर. किया था..."वर्कशॉप से बाहर आने के बाद मैने अरुण से पुछा...

"*** की चूत उन दोनो की, बड़ी मुश्किल से बचा था लास्ट टाइम...आत्मा शरीर से निकालने ही वाली थी कि सीडार ने आकर सब संभाल लिया...याद मत दिला वो कांड..."

"मैं उन दोनो को ठोकने का सोच रहा हूँ...."

"क्या...."अरुण जहाँ था वही रुक गया और साथ मे सौरभ और सुलभ के भी पैर वही जम गये...वो तीनो मुझे ऐसे देख रहे थे, जैसे की अभी-अभी मैने उन्हे कोई बहुत बुरी खबर सुनाई हो...जिसपर उन्हे यकीन नही हो रहा था....

"क्या कहा तूने..."आगे बढ़ते हुए अरुण ने मुझे घूरा...

"तूने कहा कि तू उन दोनो लड़को को ठोकने वाला है..."अबकी बार सौरभ ने मुझे घूरा और आख़िर मे मेरे आख़िरी दोस्त,सुलभ ने भी मुझे गुस्से से घूरा....
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"हर बार सीडार तुझे बचा नही पाएगा...."सौरभ ने एक मुक्का मारते हुए कहा...

"और मैं तेरे इस कांड मे तेरे साथ नही हूँ..."दूसरा मुक्का जड़ते हुए अरुण बोला और फिर सुलभ से तीसरा मुक्का जड़ते हुए कहा"छोड़ना मत उन दोनो को...."

"अरे ग़ज़ब...जियो मेरे लाल..."दिल किया कि सुलभ को पकड़ कर किस कर लूँ,लेकिन साला वो लड़का था..इसलिए मैं वहिच पर रुक गया
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08-18-2019, 01:57 PM,
#70
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
सौरभ और अरुण को मानने मे बहुत दिमाग़ खफ़ाना पड़ा और ये मैं पहले से जानता था कि वो दोनो मुझे ऐसा हरगिज़ नही करने देंगे और वो दोनो कैसे मानेंगे...ये मुझे अच्छी तरह मालूम था...मैने सौरभ से कहा कि मैं उसे विभा माँ की चूत दिलाउन्गा और अरुण से कहा कि उसे मैं दिव्या की चूत....सॉरी चूत नही चम्मी दिलाउन्गा...और वो दोनो एक सेकेंड मे मान गये....

"तो क्या उन्हे उनके ही क्लास मे घुसकर मारने का प्लान है..."सुलभ अपने शर्ट की बाहे उपर उठाते हुए बोला...

"नो...और तू जा..."सौरभ बोला"मैं नही चाहता कि तेरे जैसा ब्रिलियेंट लौंडा ,हमारी वजह से मुश्किलो मे पड़े..."

"तेरे चाहने और ना चाहने से क्या होता है..."

"मैं भी ऐसा चाहता हूँ..."

"और मैं भी यही चाहता हूँ कि तू यही से वापस लौट जाए..."

अरुण और मेरे द्वारा सौरभ की बात का समर्थन करने पर सुलभ चिढ़ गया और हम तीनो को गाली देते हुए वहाँ से चला गया....

"लगता है साला बुरा मान गया..."सुलभ को जाते देख सौरभ ने मुस्कुराते हुए कहा"लेकिन मुझे मालूम है कि वो आज रात फोन ज़रूर करेगा,ये जानने के लिए कि क्या हुआ..."

"बुरा वो मानता है,जिसका बुर होता है...और हम लड़को के पास बुर नही लंड होता है..."अरुण ने एक दम शांति से ये डाइलॉग मारा...जिसके बाद हम हँसते-हँसते हॉस्टिल की तरफ चले गये....
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अकॉरडिंग टू और प्लान...फर्स्ट एअर के उन दो लड़को को उनके ही क्लास के कुच्छ लड़के...ठीक उसी ग्राउंड पर लाने वाले थे,जहाँ पर वरुण और उसकी दोस्तो को हमने जम कर ठोका था या फिर ये कहे कि जहाँ मेरी रॅगिंग ली गयी थी...और ये वही जगह थी ,जहाँ से इन सबकी शुरुआत हुई थी....जो दो लड़के ,उन दो चूतियो को उस ग्राउंड पर लाते...वो सिटी मे ही किराए के रूम लेकर रहते थे और इस कांड के बाद उन्हे कुच्छ ना हो ,इसलिए हमारा साथ देने वाले सिटी के उन लड़को को हॉस्टिल मे शिफ्ट किया जा रहा था....जहाँ वो सेफ थे....
.
"अरमान सर, वो दोनो ग्राउंड पर पहुच चुके है...."पोलीस स्टेशन मे झूठी गवाही देने वाले राजश्री पांडे ने मेरे रूम मे आकर कहा....जो कि अब अपने दोस्त के साथ सीडार का रूम छोड़ कर ,हॉस्टिल मे शिफ्ट हो गया था....

"तुम दोनो चलो...आइ आम कमिंग..."मैने अरुण और सौरभ से कहा...

"तू कहाँ जा रहा है..."

"गॉगल्स तो ले लूँ...ताकि लड़ाई मे मैं हीरो दिखू,विलेन नही


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हम पर एफ.आइ.आर. करने वाले लड़के जाल मे फँस चुके थे और वो ग्राउंड पर हॉस्टिल के लड़को के बीच घिरे हुए थे...हॉस्टिल से निकलते वक़्त मैने सोचा था कि उन दोनो लड़को की चड्डी इस समय डर के कारण गीली हो रही होगी और वो सबसे हाथ जोड़कर विनती कर रहे होंगे कि उन्हे वहाँ से जाने दिया जाए...लेकिन जब मैं ग्राउंड पर पहुचा तो वहाँ बिल्कुल भी वैसा नही था...जैसा कि मैने सोचा था....फर्स्ट एअर के वो दोनो लड़के इस वक़्त अपने दोस्तो से,जो कि उन्हे झूठ बोलकर यहाँ लाए थे,उनसे बहस कर रहे थे...वो दोनो वहाँ खड़े हॉस्टिल के 20 लड़को को धमकी दे रहे थे और साथ मे अपने दोस्तो को भी...राजश्री पांडे को मैने मामले की जाँच करने के लिए भेजा जिसके बाद राजश्री पांडे,राजश्री चबाते हुए मेरे पास आया और बोला..
"अरे कुच्छ नही,साले अकड़ रहे है बीसी, वो तो हम सब आपके इंतज़ार मे रुके हुए थे...वरना कब का साले को खून से नहला देते...."

"क्या बोल रहे है दोनो..."

"बोल रहे है कि उनपे जिसने भी हाथ उठाया उसे वो चुन-चुन कर मारेंगे..."

"तो तुम लोगो ने क्या सोचा है..."मैने वहाँ खड़े सभी लड़को की तरफ देखकर पुछा...

"कुच्छ भी हो जाए अरमान भैया...हम तो आज पेलेंगे..."

"दट'स दा स्पिरिट,..."गॉगल्स पहने हुए मैं अरुण और सौरभ के साथ उन्दोनो के पास गया और वहाँ खड़े सभी लड़को को दूर हटने का इशारा किया...
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उनके तरफ जाते हुए मैने सोचा कि अब वो दोनो लड़के अट्लिस्ट मुझे देखकर तो डर ही जाएँगे और मुझसे माफी भी माँगेंगे...लेकिन उन सालो ने इस बार भी मेरी सिक्स्त सेन्स के इमॅजिनेशन की हत्या कर दी

"अरमान, हम तुझसे नही डरते...तू ये याद से अपने दिमाग़ मे बिठा ले कि एक दिन तू भी यही अपने इन लल्लुओ के साथ खड़ा होगा और मैं तुझे कुत्ते की तरह मारूँगा...."गुस्से से भरी अपनी लाल आँखे दिखाते हुए उन दोनो मे से एक ने कहा...जिसके बाद हॉस्टिल के सभी लड़के आगे बढ़े लेकिन मैने सबको वापस पीछे हटने के लिए कहा....

"मैं तो तुझसे डर गया...मुझे माफ़ कर दे..."उसकी आँखो मे आँखे डालकर मैं बोला"वैसे तूने कुत्ता मुझे कहा या खुद को..."

"तुझे कुत्ता कहा भडवे साले ,म्सी"

ये सुनकर हॉस्टिल के लड़के और मेरे दोनो दोस्त ,जो उस समय मेरे पास ही थे,वो उसे मारने के लिए आगे बढ़े ही थे कि मैने एक बार फिर से सबको रुकने का इशारा किया...

"चल पुरानी बात छोड़ और ये बता,मेरा गॉगल्स कैसा लग रहा है...एक दम स्मार्ट दिख रहा हूँ ना मैं..."

"तेरे चूतिए गॉगल्स की तरह तू भी चूतिया दिख रहा है.."

ये सुनकर एक बार फिर सब आगे बढ़े ,जिन्हे रोक कर मैने कहा"अबे तुम्ही लोग मार लो,मैं यहाँ क्या लवडा हिलाने आया हूँ...पीछे जाओ सब..."

"अरे अरमान भैया...छोड़ दो साले को..."राजश्री पांडे ने राजश्री का एक और पाउच मुँह मे डालते हुए चिल्लाया...

जिसके बाद मैने उस लड़के के सर के बाल को ज़ोर से पकड़कर खींचा और उसे गोल-गोल घुमाने लगा...

"मेरे गॉगल्स के बारे मे कुच्छ नही बोलने का...साले खुद की शकल तो गधे की गान्ड जैसी है और मुझे बोलता है कि मैं हॅंडसम नही हूँ..."

जब मैं उसके सर के बाल को पकड़ कर गोल-गोल घुमा रहा था तो अरुण ने एक हॉकी स्टिक ली और उसके पीठ पर हॉकी स्टिक से जोरदार प्रहार किया...जिसके बाद वो लड़का चीख उठा...लेकिन अरुण नही माना और हॉकी स्टिक से उसे पेलता रहा.....हम दोनो को आक्षन मे देखकर भला सौरभ कैसे शांत रह सकता है,सौरभ ने दूसरे लड़के के कान पर एक मुक्का जड़ा और ज़मीन पर धक्का देकर उसे लातों से मारने लगा....वो दोनो लड़के इस समय हम तीनो की पिटाई से सिर्फ़ चीख रहे थे ,रो नही रहे थे...जबकि मैं चाहता था कि वो दोनो रोते हुए हमारे पैर पकड़ कर हमसे माफी की गुहार मारे...
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सौरभ दूसरे लड़के के कभी मुँह पर तो कभी पेट पर लात मारता और जब वो लड़का पीछे पलट जाता तो सौरभ उसके पीठ पर धड़ा धड़ लात मरता,...इधर मैने एक का बाल मज़बूती से पकड़ रखा था और अरुण अपने हाथ मे हॉकी स्टिक थामे उसके हाथ-पैर,पीठ-पेट...तोड़े जा रहे था....वो दोनो लड़के अधमरे से हो गये थे,लेकिन उन्दोनो ने सॉरी अभी तक नही बोला था....

"बीसी, तेरी *** का लंड...मेरा गॉगल्स तोड़ दिया तूने..."अभी तक मैने जिसका बाल पकड़ रखा था उसकी नाक मे एक मुक्का जड़ते हुए कहा और उसे ज़मीन पर फेक दिया....

"तू अभी अपने चश्मे को छोड़ और इनकी धुनाई कर..."उस लड़के के पैर पर ज़ोर से हॉकी स्टिक मारते हुए अरुण ने कहा....

"लवडे,घर से दो बुक्स का पैसा मँगाया था, उसके बाद मैने बुक्स ना ख़रीदकर 1351 का ये गॉगल्स खरीदा और तू बोल रहा है कि..... गान्ड तोड़ दे इस म्सी की,ताकि साला जब कभी भी हॅगने बैठे तो इसे अपनी ग़लती का अहसास हो..."

"जो हुकुम मेरे आका..."बोलते हुए अरुण ने उस लड़को को पलटाया और उसके पिछवाड़े पर हॉकी स्टिक से मारने लगा....
मेरे गॉगल्स की मौत ने मेरे अंदर दफ़न गुस्से के ज्वालामुखी को भड़का दिया था,मैने अरुण को रोक कर उस लड़के को वापस सीधा किया और हवा मे हाथ उठाकर कसकर एक तमाचा उसके गाल पर मारा...जिससे मेरी पाँचो उंगलियो का प्रोजेक्षन उसके गाल पर बन गया...उसके बाद मैं दूसरी साइड गया और एक बार फिर से हवा मे हाथ उठाकर उसके दूसरे गाल पर भी पाँचो उंगलियो के निशान छाप दिए...

"हाथ हटा म्सी..."उस लड़के ने जब अपने दोनो गाल पर हाथ रखे तो एक लात मारते हुए मैने कहा और लगातार उसके गाल पर कसकर थप्पड़ मारने लगा.....

"सॉरी बोल,..."उसके मुँह पर एक लात मारते हुए मैने कहा....

"सॉरी..."धूल और खून से सने मुँह को खोलते हुए उस लड़के ने इतना ही कहा.....
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"अरमान,एक ने तो सॉरी बोल दिया...लेकिन ये साला नही मान रहा...पता नही इस बीसी के अंदर अभी कितना दम बाकी है..."दूसरे लड़के पर सौरभ अब भी लात बरसाए पड़ा था....

"तू हट और देख ये एक मिनिट मे सॉरी बोलेगा..."

सौरभ को मैने दूर हटाया और ज़मीन पर लोट रहे उस लड़के के उपर दोनो पैर से एक साथ कुदा..जिसके बाद उसके मुँह से खून और सॉरी शब्द एक साथ निकला....
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उन दोनो को तो मैं ठोक चुका था,लेकिन मुझे अब गम मेरे गॉगल्स के टूटने का था ,क्यूंकी इसके लिए मैने दो बुक्स की कुर्बानी दी थी...उन्दोनो को मारने के बाद मैं वहाँ खड़ा होकर अपने चश्मे की मौत का दुख मना रहा था कि सडन्ली मुझे एक आइडिया आया और मैने तुरंत पीछे मुड़कर उन दोनो लड़को का वॉलेट निकाल लिया...एक के वॉलेट मे 100-100 की 4 पत्तिया थी तो एक की वॉलेट मे 1000 और 500 की पत्तिया थी.. उन दोनो के वॉलेट से कुल मिलाकर लगभग 5000 मिले,जिनमे से मैने हज़ार का एक-एक नोट अपने दोनो खास दोस्तो को दिया और हज़ार का एक नोट वहाँ खड़े हॉस्टिल के लौन्डो की तरफ बढ़ाकर दो हज़ार अपने जेब मे रख लिए.....

"चलो...अब सब खिसक लो...इधर से.."अरुण ने सबको वहाँ से जाने के लिए कहा...

जब हम सब वहाँ से कुच्छ दूरी पर आ गये थे तभी मुझे अचानक ना जाने फिर से गुस्सा आया और मैं ज़मीन पर दर्द से कराह रहे उन दोनो लड़को के पास पहूचकर दोनो के मुँह मे एक-एक लात जदकर बोला"अरमान....ये नाम अपने जेहन मे बिठा ले और एक बात मेरे अंदर दिल और दया नही है...तुम दोनो जब भी ठीक होगे,मैं तुम दोनो को फिर से मारूँगा और इसी हालत मे ला पटकुंगा....याद रखना आज से तुम दोनो के दो बाप है ,एक बाप को तो तुम दोनो जानते हो और दूसरा बाप मैं हूँ"

"और मैं तीसरा बाप..."अरुण दूर से ही चिल्लाया....
.
"तो अब प्लान क्या है..."हॉस्टिल मे पहूचकर अरुण ने मुझसे पुछा...

"मैं सोच रहा हूँ कि 2001 प्राइस वाला गॉगल्स आज ही माल से ले आउ,जो मैने लास्ट वीक माल मे देखा था

"भाड़ मे जाए तेरा वो गॉगल्स और अब ये बता कि करना क्या है...मुझे अब ना जाने क्यूँ ऐसा लग रहा है कि मैने तेरा साथ देकर ग़लत किया,कही हम लंबे लफडे मे ना फँस जाए "अपने चेहरे को टवल से पोछते हुए सौरभ ने मेरे न्यू गॉगल्स लेने के प्लान को बीच मे ही रोक दिया

"अब कैसा लफडा बे, अब तो जो होना था हो चुका है...जिन्हे मारना था उन्होने मार दिया और जिन्हे मार खाना था ,उन्होने भी मार खा लिया...बस टॉपिक एंड "

"बेटा,टॉपिक एंड नही हुआ है..अभी हमने जो एक्शन किया है उसका अकॉरडिंग तो न्यूटन'स थर्ड लॉ हमारे एक्शन के बदले उसके बराबर एक रिएक्शन तो आएगा ही और वो भी ऑपोसिट डाइरेक्षन मे...बोले तो तलवार अब हमारे गर्दन के उपर लटकने वाली है..."जिस टवल से सौरभ अपना चेहरा सॉफ कर रहा था उसे मेरे फेस पर फेक्ते हुए कहा

"मुझे समझ नही आता कि लोग हमेशा न्यूटन के थर्ड लॉ का ही एग्ज़ॅंपल क्यूँ देते है, जबकि थर्ड लॉ से पहले फर्स्ट आंड सेकेंड लॉ आता है...और वैसे भी मैने उनके रिक्षन को शुरू होने से पहले ही ख़तम कर दिया है इसलिए चिंता की कोई बात नही"

"क्या किया तूने और जब से कॅंटीन मे मेरी पेलाइ हुई है तब से मेरा तुझपर से विश्वास उठ सा गया है...साले खुद तो मरता है साथ मे मुझे भी मरवाता है..."अरुण बीच मे ही टपक पड़ा"मुझे भी अब ऐसा लग रहा है कि तेरा साथ देकर मैने बहुत बड़ी ग़लती कर दी,कहीं उन दोनो ने फिर से पोलीस मे रिपोर्ट कर दिया तो "

"वो तो करेंगे ही"अरुण की फाड़ते हुए मैने कहा"और पोलीस कॉलेज मे भी आएगी और हॉस्टिल मे भी आएगी और तो और हमे अपने साथ ले जाने की कोशिश भी करेगी..."

"बोसे ड्के, इस बार तो गये काम से, तू हमारा दोस्त नही है..."अरुण और सौरभ एक साथ मुझपर चिल्लाए...

"अबे गला फाड़ना बंद करो...पहले मुझे बात तो पूरी करने दो..."अपनी टी-शर्ट उतारकर अरुण के फेस पर फेक्ते हुए मैं बोला"अपना कल्लू वॉर्डन किस दिन काम आएगा..."

"क्या घंटा काम आएगा वो कल्लू...बल्कि वो तो उल्टा हमारी और शिकायत कर देगा...एक तो पहले से ही तू उसे पसंद नही है ,उपर से अब ये नया लोचा.."मेरी टी-शर्ट को वापस मेरी तरफ फेक्ते हुए अरुण ने सौरभ से कहा"सौरभ मेरे भाई, मेरा भी सिक्स्त सेन्स कुच्छ-कुच्छ काम करने लगा है...और जैसा कि मैने अंदाज़ा लगाया है उसके हिसाब से हम दोनो के पैर पोलीस वालो ने रस्सी से बाँध दिए है और डंडे से गान्ड फटट ले पेल रहे है.... अबकी बार तो अच्छे से चुद गये..."

"चुप कर बे चोदु ,खुद तो डरा हुआ है उपर से सौरभ के पिछवाड़े मे भी पिन ठोक रहा है...सौरभ तू यकीन मान अपना वॉर्डन अपनी साइड लेगा..."

"सुनकर दिल को सुकून मिला लेकिन मुझे ऐसा लग रहा है कि ऐसा कुच्छ भी नही होने वाला...मतलब की हॉस्टिल वॉर्डन भला हमारा साथ क्यूँ देगा "

"और कल्लू वॉर्डन विल डू दिस फॉर मी ,फॉर यू,फॉर अरुण,फॉर हॉस्टिल,फॉर होस्टेलेर्स आंड फॉर सीडार "

"देख अरमान ,अभी ज़्यादा डाइलॉग बाज़ी मत छोड़...वरना दो को तो पेल के आया ही हूँ,तीसरा नंबर तेरा लगा दूँगा...इसलिए शॉर्ट मे बता लेकिन अच्छे से बता..."

"सीडार ने वॉर्डन को हमारी तरफ से गवाही देने के लिए मना लिया है,दट'स इट...अब तुम दोनो के गोबर भरे दिमाग़ मे कुच्छ घुसा या फिर जर्मन लॅंग्वेज मे समझाऊ या फिर फ्रेंच मे या फिर स्पॅनिश मे..."

"सब समझ गया अपुन" मुझे गले लगाते हुए सौरभ ने थॅंक्स कहा...

"अपुन भी सारा मॅटर समझ गया है , थॅंक्स तो सीडार की वो हर समय हमारी मदद करने के लिए तैयार रहता है...बेटा अरमान ,यदि सीडार ना होता तो तेरी कोई भी दाल नही ग़लती...."

"यॅ...आइ नो "सिगरेट के पॅकेट से एक सिगरेट निकालते हुए मैने कहा और दिल ही दिल मे एमटीएल भाई का हमारा साथ देने के लिए शुक्रिया अदा किया...
.
"वैसे सौरभ,अरमान ने कुच्छ और भी प्रॉमिस किया था...याद है कि भूल गया..."

अरुण के ऐसा बोलते ही मैं समझ गया कि वो मेरे किस प्रॉमिस की बात कर रहा है और मैं उस वक़्त थोड़ा परेशान सा हो गया...क्यूंकी दोनो को लड़ाई मे शामिल करते वक़्त तो मैने बड़ी आसानी से कह दिया था कि मैं उनके लिए दिव्या और विभा का जुगाड़ करूँगा...लेकिन मुझे मालूम था कि ये काम बहुत मुश्किल है . विभा को तो मैं खुद भी अभी तक नही पटा पाया था,इसलिए सौरभ का मामला कैसे जोड़ू और अरुण के मामले मे तो भयंकर ख़तरा था..क्यूंकी यदि दिव्या के बाप को ज़रा सी भी भनक लग गयी की उसकी बेटी को कॉलेज के किसी लड़के ने किस किया है तो फिर वो लड़का तो गया जान से.....

"इधर-उधर क्या देख रहे हो अरमान बाबू...अपना प्रॉमिस याद तो है ना या हम दोनो याद दिलाए..."मेरे गर्दन को पीछे से पकड़ कर सौरभ ने कहा...

"मैं अभी आया..."

उन दोनो से पीछा छुड़ाने के लिए मैं वहाँ से उठा ही था कि अरुण कूद कर दरवाजे के पास पहुचा और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया...वही सौरभ ने मेरे दोनो हाथ को पीछे से पकड़ कर मरोडने लगा....
.
"जल्दी से हम दोनो के अरमान पूरे कर..वरना तेरा खून कर दूँगा..."सौरभ ने धमकी दी

"मैं तो डाइरेक्ट रेप करूँगा..."दरवाजे के पास खड़े होकर अरुण ने भी धमकी दी...

अब मुझे अंदाज़ा हो गया था कि यदि इस वक़्त मैने उन दोनो को ना कहा तो ,वो दोनो मुझे बहुत मारेंगे इसलिए मैने इस समय उन दोनो को हां कहने मे ही अपनी भलाई समझी और बोला...

"अरुण तेरा काम कुच्छ दिनो मे हो जाएगा और सौरभ तुझे कुच्छ दिन के लिए इंतज़ार करना पड़ेगा,...क्यूंकी विभा को ठोकने के लिए मनाना थोड़ा मुश्किल है,लेकिन मैं इसे करूँगा ज़रूर...अब तो मेरा हाथ छोड़...."
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