Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
08-18-2019, 02:04 PM,
#91
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"यो बेबी यो..."

"तो फिर दानवीर जी, आप मुझे अपना लंड काटकर दीजिए..."

"बालक अब तेरी मुराद पूरी नही हो सकती,क्यूंकी मैने सुबह ही किसी को कंघी दान मे दे दी है...तुम कल आना बच्चा.."

"सौरभ...बम्बू देना तो ज़रा... इस दानवीर को प्रणाम करने का मन कर रहा है..."
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अरुण के हाथ मे हॉकी स्टिक आते ही एक हाथ से अपना बॅग उठाकर मैं वहाँ से भागा और मेरे पीछे अरुण भी भागा...पहले मैं सीढ़ियो से नीचे उतरकर खड़ा हो गया और ये सोचा कि शायद अरुण वापस रूम की तरफ चला गया है...लेकिन हाथ मे गदा लिए अरुण सीढ़ियो से नीचे उतरा और यमराज की स्टाइल मे अपने दाँत दिखाते हुए बोला
"हा...हा..हा..अब कहाँ जाएगा दानवीर.."

"दुनिया बहुत बड़ी है बेबी..."बोलते हुए मैं हॉस्टिल के दूसरे छोर की तरफ भागा,जहाँ से उपर जाने के लिए सीढ़िया बनी हुई थी....मैं कयि बार सीढ़ियो से उपर चढ़ा और नीचे उतरा लेकिन मेरी परेशानी ज़रा सी भी कम नही हुई क्यूंकी अरुण अब भी अपने हाथ मे वो बम्बू लिए मुझे दौड़ा रहा...
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"ये साला,एक कंघी के लिए रो रहा है, धत्त तेरी की..."भागते हुए मैं चिल्लाया"अबे कुत्ते, क्यूँ मार रिया है आज शाम को 10 कंघी लाकर तेरे मुँह पर फेकुंगा...और वैसे भी तेरी वो पीली कंघी एक दम बकवास थी."

"तू तो आज बचेगा नही,अरमान...आज या तो तू शहीद होगा या मैं..."

"ये लवडा ऐसे नही मानेगा..इसे इसकी वो पीली कलर वाली कंघी लाकर देनी ही पड़ेगी..."सीढ़ियो से नीचे उतरते हुए मैने सोचना शुरू किया"सबसे पहले जो लौंडा कंघी ले गया था ,वो मेरे रूम से दो रूम छोड़ कर रहता है...लेकिन उसने तो कंघी लाकर वापस कर दी थी...उसके बाद नीचे फ्लोर वाला लौंडा आया और कंघी लेकर गया और...और साले ने अभी तक कंघी वापस नही लौटाया,उसकी माँ की..."

सीढ़ियो से उपर चढ़ते हुए मैं उस लड़के के रूम की तरफ भागा, जिसके रूम मे अरुण की वो पीली कंघी थी..दौड़ते हुए मैं सीधे उस लड़के के रूम मे घुसा और मेरे पीछे अरुण भी रूम के अंदर आया.

"बोसे ड्के..जब समान लाते हो तो वापस भी कर दिया करो..."हान्फते हुए मैने उस लड़के को देखकर कहा,जो मेरे रूम से कंघी लेकर आया था.

मुझे देखकर उस लड़के के चेहरे के रंग अचानक बदल गये और उसने अपनी गीली टवल मुझे देखते हुए बिस्तर पर फेक दी...उसकी इस हरक़त से मैं समझ गया कि साले का कंघी लौटने का कोई विचार नही है और कंघी को छिपाने के लिए उसने अभी-अभी बिस्तर पर अपनी टवल फेकि है.

"साले कंघी चोर..कल्लू, तू साले जितना बाहर से काला कोयला है उतना ही अंदर से भी है...ला कंघी दे."

"मैने तो तेरी कंघी वापस कर दी थी,अरमान...याद कर"वो कल्लू झूठ बोलते हुए उस टवल के उपर बैठ गया ,जिसके नीचे अरुण की कंघी थी.

"अरुण,तेरे जूते का साइज़ क्या है.."मैने पुछा.

"क्यूँ..."

"अबे डाइलॉग मारना है.."

"तू पहले मुझे मेरी कंघी लाकर दे...वरना डाइलॉग तो मैं तुझ पर मारूँगा.."

"भाड़ मे जा..उसने अपने गान्ड के नीचे कंघी छिपा रखी है.तू उस साले कल्लू की गान्ड मारकर अपनी कंघी ले ले...मैं चला कॉलेज."वहाँ से बाहर निकलते हुए मैं बड़बड़ाया"बीसी अब तक तो ये लोग पेन,कॉपी ,तेल और साबुन चुराते थे ,अब सालो ने कंघी चोरी करना भी शुरू कर दिया "
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बाथरूम मे जाकर मैने अपना चेहरा धोया और अरुण को गालियाँ बकते हुए सौरभ के साथ कॉलेज के लिए निकल पड़ा...
दुनिया मे यदि आप बुरे काम करोगे तो उस बुरे काम मे साथ देने के लिए सब तुरंत राज़ी हो जाएँगे लेकिन यदि आप उस बुरे काम की जगह एक अच्छा काम करने निकलोगे तो कोई साथ नही देगा उपर से दस लोग आकर टोकेंगे...ऐसा ही कुच्छ मेरे साथ इन दीनो हो रहा था.दो दिन पहले ही मैं हॉलिडे मनाकर हॉस्टिल आया था और आते ही मैने सौरभ,अरुण से कहा कि इस साल नो मस्ती,नो पंगा ओन्ली पढ़ाई....मैने इतना क्या कहा,वो दोनो साले मुझे ऐसे देखने लगे..जैसे मैने उनका खाना छीन्कर खा लिया हो.उसी दिन से या फिर कहे की उसी पल से वो दोनो मुझे चिढ़ाने लगे और अपनी हरसंभव कोशिश करने मे जुट गये जिससे मेरे सर से पढ़ाई करने का भूत उतर जाए...लेकिन मैने उन दोनो की एक ना सुनी और आज पहली बार हर सब्जेक्ट के लिए एक रफ कॉपी ना लेजा कर हर सब्जेक्ट के लिए अलग-अलग कॉपी ले जा रहा था ,वो भी बाक़ायदा कवर चढ़ा कर.
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इस साल भी कयि टीचर्स ने हमारा साथ छोड़ा,जिसमे दंमो रानी, आप फिज़िक्स के खिलाफ नही जा सकते के जन्मदाता-श्री कुर्रे सर भी शामिल थे और सच बताऊ तो इन दोनो के जाने से मैं बेहद खुश था. लेकिन एक बॉम्ब अब भी मौज़ूद था और वो बॉम्ब थी हमारी सीसी की टीचर विभा...

मैने आज सारी क्लास मे मन लगाकर पढ़ाई की,.जो-जो टीचर्स ने बोर्ड मे लिखाया उसे बाक़ायदा अच्छे तरीके से कॉपी मे उतारा.यहाँ तक की मैने लॅब के लिए भी प्रॅक्टिकल फाइल और पेजस खरीद लिए थे,बोले तो अपुन पढ़ने के फुल मूड मे था.
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"अरमान...रोल नंबर. 11"

"प्रेज़ेंट मॅम..."हाथ खड़ा करके मैने अपनी उपस्तिथि विभा मॅम के खाते मे दर्ज कराई....

जब सबने अपनी उपस्तिति दर्ज करवा दी तो विभा अपनी जगह से उठी और 5-5 का ग्रूप बनाने को बोलकर आगे चली गयी....
"अब एक-एक करके हर ग्रूप आएगा और टर्बाइन्ज़ के मॉडेल देखेगा..."विभा मॅम ने कहा,जिसके बाद एक-एक ग्रूप बारी-बारी से जाता और टर्बाइन्ज़ के मॉडेल देखकर आता.जब सबने टर्बाइन देख लिया तो विभा ने सबको जो भी आज समझा है उसे लिखने के लिए कहा. मैने मन लगाकर समझा था इसलिए भका-भक लिखना शुरू कर दिया और नोन-स्टॉप 5 मिनिट तक लिखता रहा.

"स्टॉप राइटिंग..."बोलते हुए विभा ने सबके पेन को विराम दिया और फिर एक-एक को बुलाकर पर्सनली बत्ती देने लगी...मेरा रोल नंबर. थोड़ा पीछे था इसलिए मैं अरुण के पास गया.

"कुच्छ लिखा बे लवडे या अभी तक हिला रहा है..."

"माँ कसम यार,कुच्छ समझ ही नही आया.साली सॉलिड तरीके से इज़्ज़त को टर्बाइन मे घुमा-घुमा कर चोदेगि..."घबराते हुए अरुण बोला"कुच्छ सोच ना बे "

"एक काम कर, ये ले मेरा कॉपी तू दिखा देना और सामने वाले पेज पर जो मेरा नाम लिखा है,उसे फाड़ देना..."कुच्छ सोचते हुए मैने अपनी कॉपी अरुण के हाथ मे थमा दी.

"और तू..."

"प्यार करती है विभा मॅम मुझसे,मुझे कुच्छ नही कहेगी.तू मेरी चिंता छोड़..."

"थॅंक्स यार, आइ लव यू."

" ऐसा क्या,फिर मुँह मे लेना एक बार"

मैं अपने वॉलेट मे हमेशा एक-दो बॅंड-एड रखता ही था ,क्यूंकी क्या पता कब ज़रूरत पड़ जाए. अभी विभा मॅम रोल नंबर. 8 वाले को बत्ती दे रही थी कि मैने दो बॅंड-एड वॉलेट मे से निकाल कर लेफ्ट हॅंड मे चिपकाया और जब मेरी बारी आई तो मैं खाली हाथ विभा मॅम की तरफ बढ़ा....

"खाली हाथ क्यूँ आए, तुम्हारी कॉपी कहाँ है..."

"मॅम मैं लिख नही सकता,हाथ मे बहुत गहरा ज़ख़्म है..."लेफ्ट हॅंड विभा माँ को दिखाते हुए मैने कहा"यदि ज़रा सी भी हरकत करू तो बहुत दर्द होता है..."

विभा मॅम मेरी इस चालाकी पर पहले मुस्कुराइ और फिर चेयर मे पीछे की तरफ होकर बोली"तुम्हे बहाना बनाना बहुत आता है ,मुझे पक्का मालूम है कि तुम्हारे हाथ मे कुच्छ नही हुआ है...राइट "

"नही..नही, सच मे मेरे लेफ्ट हॅंड मे दर्द हो रहा है और यदि यकीन ना हो तो बॅंड-एड खोलकर दिखाऊ..."

"रहने दो...इसकी कोई ज़रूरत नही."

"तो फिर मैं जाउ..."

"एक शर्त पर..."चेयर पर सीधे होते हुए विभा बोली"तुम्हे दीपिका का वीडियो कहाँ से मिला..."

"दीपिका मॅम के बारे मे सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ, वो मेरे बेहद करीब थी और आप किस वीडियो की बात कर रही है..."

"देखो अरमान...मैं जानती हूँ कि वो वीडियो तुम्ही ने प्रिन्सिपल के हाथो तक पहुँचाया था और मैं क्या,सारा कॉलेज ये जानता है..."
"मुझे नही पता कि ये अफवाह किसने फैलाई है और आप तो मेरा नेचर जानती ही हो कि ना तो मैं कभी झूठ बोलता हूँ और ना ही कोई बात किसी से छुपाता हूँ...आक्च्युयली मैं एक खुली किताब की तरह हूँ जिसे कोई भी पन्ने पलट-पलट कर पढ़ सकता है ."

"ह्म..."

"मैं ये कहना चाहता हूँ कि यदि मैने वैसा कुच्छ किया होता तो मैं सीना ठोक कर बोलता कि मैने किया है...."

"ठीक है तुम जाओ, "मुझे जाने के लिए कहकर विभा ने अगले रोल नंबर वाले को बुलाया,जो कि अरुण ही था..
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"क्या बोली वो आइटम तेरे से..."जब अरुण विभा मॅम के पास से आया तो मैने उसके आते ही पुछा.

"कुच्छ खास नही,बस मेरी बढ़ाई कर रही थी थोड़ा..."

"यानी कि मेरी बढ़ाई...अब बोल कि क्या हुआ उधर"

"अबे कहा ना कुच्छ खास नही,उसने बस इतना कहा कि अरुण, तुम्हारी राइटिंग सुपर्ब है...ध्यान से पढ़ाई करोगे तो अच्छे मार्क्स स्कोर कर सकते हो..."अपना बॅग टाँगकर अरुण बोला"चल ,हॉस्टिल चलते है...विभा से मैने पर्मिशन ले ली है..."
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हॉस्टिल की तरफ जाते वक़्त मुझे विभा के द्वारा कही गयी वो बात याद आ रही थी ,जो उसने अरुण से कहा था और तभी मुझे मेरा प्लान नंबर. #1 याद आया "रेस्पेक्ट युवर टीचर्स."

अब विभा पहले जैसी भी रही हो लेकिन टीचर बनने के बाद वो पूरी तरह से सुधर चुकी थी.मेरी वजह से वरुण के साथ जो उसका ब्रेक अप हुआ, वो तब से आज तक सिंगल ही है...क्यूंकी यदि उसका कोई नया मजनू होता तो कहीं ना कहीं से मुझे खबर मिल ही जाती और वैसे भी मुझे किसी के पर्सनल लाइफ से क्या लेना देना था.विभा चाहे बाहर जिससे भी चुदवाये, चाहे तो वो बिकनी पहनकर घूमे...वो उसकी लाइफ थी.इसलिए फिलहाल तो मैने मन ही मन मे ये तय किया कि मैं अब उसको बे-मतलब की गालियाँ नही बकुँगा.....

ये सोचते हुए मैं अरुण के साथ हॉस्टिल की तरफ बढ़ रहा था.सौरभ दूसरे ग्रूप मे था,इसलिए कॉलेज से एक साथ आना कभी-कभार ही हो पाता था.

"अरमान ,तुझे वरुण के बारे मे मालूम चला या नही..."कॉलेज से बाहर निकलते ही अरुण अचानक रुक गया

"क्यूँ मर गया क्या वो..."मैने पुछा..

"नही बे, वो उसको 7 साल हो गये थे ना तो उसे कॉलेज से निकल दिया गया है...अब वो कॉलेज नही आ सकता और इस साल उसका लास्ट चान्स है यदि वो इस साल भी पेपर क्लियर नही कर पाया तो उसपर एनएफटी लग जाएगा बोले तो नोट फॉर टेक्निकल..."

"ऐसा भी होता है क्या..."

"बिल्कुल होता है, अब कॉलेज वाले ज़िंदगी भर तो उसको यहाँ रखेंगे नही..ज़रा सोच उसकी क्या धाँसू बेज़्जती होने वाली है..."

"होने दे,अपने को क्या..."
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थोड़ी देर बाद हम दोनो हॉस्टिल के बाहर पहुच गये और मैं इस साल के लिए नये-नये प्लॅन्स और स्ट्रॅटजी बनाने मे बिज़ी था कि अरुण की आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी...

"क्यूँ बे साले ,कल्लू...कंघी चोर बोसे ड्के...इधर आ"अरुण ने हॉस्टिल से बाहर निकलते हुए उस कंघी चोर कल्लू को अपने पास आने के लिए कहा और जब वो हमारे पास आ गया तो अरुण फिर से शुरू हो गया"एक तो साले झान्ट के जैसी शकल है तेरी और उसपर तू कंघी चोरी करता है लवडे..वो भी अपने इन मुड़े-मुड़े बालो के लिए,जो मेरे झान्ट से भी ज़्यादा मुड़े हुए है...."

"तेरे से तो हॅंडसम ही दिखता हूँ..."झुझलाते हुए कल्लू ने कहा...

"लवडा दिखता है मेरा तू. बेटा यदि मेरे लंड और तेरी शकल को एक साथ देखा जाए तो मेरा लंड ही खूबसूरत दिखेगा....चल निकल यहाँ से,कंघी चोर..."

उस कल्लू को शायद ये डर था कि कही हम दोनो उसे पेल ना दे क्यूंकी लास्ट एअर हमने जो कारनामा किया...उसे देखते हुए ये तो हमारे बाए हाथ खेल था.इसलिए कल्लू चुप-चाप जिस काम के लिए निकला था उसी काम को करने के लिए वहाँ से आगे बढ़ गया....

"सुन बे..."अबकी बार मैने उसे आवाज़ दी"आते समय सिगरेट का एक डिब्बा लेते आना वरना चोद-चोद कर गोरा कर दूँगा..."
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हम दोनो का रौब देखते हुए कल्लू ने हां मे अपना सर हिलाया और वहाँ से हमारे पास से आगे बढ़ गया...लेकिन तभी मुझे मेरा प्लान नंबर. 2 याद आ गया. मैने कल्लू को वापस बुलाया और उसे सॉरी कहकर सिगरेट लाने के मना कर दिया.मेरी इस हरकत पर जहाँ उस कल्लू की खुशी का ठिकाना नही था वही दूसरी तरफ मेरा खास दोस्त मुझे बेधड़क सुनाए जा रहा था और बार-बार मुझसे यही पुच्छ रहा था कि "जब फ्री मे सिगरेट मिल रही थी तो मैने मना क्यूँ कर दिया...."

"समझा कर,कभी कभार नेक काम भी कर लेना चाहिए...."

"तू बेटा,अब मुझसे तब तक बात मत करना,जब तक तू मेरे लिए सिगरेट का पॅकेट नही ले आता..."अपने पैर पटकते हुए अरुण वहाँ से अकेले हॉस्टिल के अंदर घुस गया....
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मैने कल्लू को सिगरेट लाने के लिए मना इसलिए किया था क्यूंकी मुझे अचानक मेरा प्लान नंबर. #2 याद आ गया था ,जिसके अनुसार"क्विट स्मोकिंग आस अर्ली ऐज पासिबल..."

अब सिगरेट और दारू की लत तो एक दम से तो छूट नही सकती इसलिए मैने डिसाइड किया कि...धीरे-धीरे करके स्मोकिंग भी छोड़ दूँगा और दारू भी....
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वहाँ से मैं बिना हॉस्टिल गये ,दुकान की तरफ बढ़ा और सिगरेट की एक पॅकेट लेकर ही हॉस्टिल मे आया...रूम मे पहुचा तो देखा कि वहाँ तो पूरी मंडली जमा हुई है और सब भाई लोग किसी टॉपिक पे वाद-विवाद कर रहे थे...

"ले बे थाम..."अरुण के मुँह पर सिगरेट का पॅकेट फैंकते हुए मैने पुछा"और ये महाभारत क्यूँ छेड़ रखा है..."

"अरमान भाई ,आप पहले ये बताओ कि विभा आपको कैसी लगती है..."उस मंडली मे अपना राजश्री भी शामिल था और जब उसने मुझसे ये पुछा की विभा मुझे कैसी लगती है तो मैं फ़ौरन समझ गया कि इनके वाद-विवाद का टॉपिक विभा ही है...

"माल लगती है ,क्यूँ "

"अरे माल तो वो सबको लगती है अरमान भाई...मेरे पुछने का मतलब था कि उसका नेचर किस तरह का है..."

"ह्म...ठीक-ठाक तो है,बस स्टूडेंट्स पर वर्क लोड ज़्यादा दे देती है कभी-कभी..."

"अरे अरमान भाई ,आप अभी भी नही समझे..."

"अबे तो तू ही बता दे कि सही आन्सर क्या है और लवडे तुझे कोई काम धाम नही रहता क्या जो जब देखो मेरे ही रूम मे घुसे रहता है..."

"मुझे तो विभा मॅम रंडी लगती है...अरमान भाई..."राजश्री ने अपने दाँत दिखाए ,जो राजश्री खाने के कारण लाल हो गये थे.
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प्लान नंबर #1 -रेस्पेक्ट युवर टीचर्स....

मेरे कान मे जैसे ही ये आवाज़ गूँजी और मैने तुरंत ना मे सर हिलाकर उन सबको फ़ौरन वहाँ से जाने के लिए कहा....

"अपुन अभिच चला जाएगा...लेकिन पहले सौरभ भाई ये बताएँगे कि कौन जीता...."बोलते हुए राजश्री पांडे ने अपना रुख़ सौरभ की तरफ किया....

"तमाम सबूतों और गवाहॉ को मद्देनज़र रखते हुए ये अदालत इस नतीजे पर पहुचि है कि राजश्री के साथ ज़्यादा लड़को का समर्थन होने कारण विभा को रंडी और राजश्री और अरुण को ये अदालत विजेता घोसित करती है...जो लौन्डे इस डिबेट मे हार गये है उन्हे ये अदालत अभी तुरंत यहाँ से खिसकने का हुक़ुम देती है."
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"विभा रंडी नही है बे,तुम लोग ना किसी के बारे मे भी कुच्छ भी बोलते रहते हो..."सबके जाने के बाद मैने अरुण से कहा..

"तू जब से घर होकर आया है,तब से मैं अब्ज़र्व कर रहा हूँ की तेरा रंग बदलता जा रहा है.."

"अबे अरुण ,अब यदि तू अपनी गर्लफ्रेंड को पटा कर ठोकेगा तो क्या तुझे सब रन्डवा कहेंगे...तो फिर तुम लोग विभा को रंडी क्यूँ बोल रहे हो,उसने तो सिर्फ़ वरुण का ही लिया है...इसमे वो रंडी कहाँ से हो गयी..."

मेरे मुँह से ये सब सुनकर सौरभ और अरुण बुरी तरह चौक गये ,उन्हे यकीन ही नही हो रहा था कि मेरे जैसा लौंडा विभा को रेस्पेक्ट दे रहा है....

"वो सब तो ठीक है...लेकिन क्या तू मुझे ये बताएगा कि तू आज उसकी साइड क्यूँ ले रहा है..."

अरुण के इस सवाल ने मुझे सोचने के लिए मज़बूर कर दिया ,मैं विभा की साइड क्यूँ ले रहा हूँ...क्यूंकी मेरे प्लान नंबर. #1 के मुताबिक़ मुझे सिर्फ़ क्लास मे टीचर्स को रेस्पेक्ट देना था...फिर विभा का मामला आते ही मैं इतना उत्तेजित कैसे हो गया ?

"तुम दोनो चुप रहोगे बे, मैं अभी पढ़ाई कर रहा हूँ..."

रात को 7 बजे जब पढ़ने लिखने का मूड हुआ तो मैं बुक खोलकर बैठ गया और अभी 7 से 8 बज चुके थे...लेकिन अभी तक एक घंटे मे मैं सिर्फ़ एक पॅरग्रॅफ पढ़ पाया था,जिसका कारण ये था कि अरुण और सौरभ कॉलेज की अपनी बहूदी बाते कर रहे थे...शुरू मे अरुण उसे बताने लगा कि आज लॅब मे क्या हुआ और जब वो चुप हुआ तो सौरभ शुरू हो गया....उन दोनो की जब लॅब की बाते ख़त्म हुई तो आज खाने मे क्या मिलेगा इसपर दोनो बहस करने लगे.....

"लवडो, भागो यहाँ से.."गुस्से से किताब बंद करते हुए मैं उठ खड़ा हुआ...

"अबे अरमान, तू भी क्या अभी से किताब खोलकर पढ़ने बैठ गया ,असली इंजिनीयर्स तो रात को 12 बजे के बाद पढ़ाई करते है और वैसे भी पढ़ने लिखने से किसका भला हुआ है...." ठंडे लहजे मे सौरभ ने कहा ,जिसका अरुण ने भी समर्थन देते हुए कहा"तू बेटा, किसी तांत्रिक के पास जाकर झाड़-फूक करा...तुझे पक्का किसी किताबी कीड़े की नज़र लग गयी है...इसीलिए तू आजकल सरिफो वाली हरकते करने लगा है..."

"सोच ले अरुण...क्यूंकी यदि आज मैने नही पढ़ा तो कल की लॅब मे तुझे कौन आन्सर बताएगा और कुच्छ लड़के तो ये भी बोल रहे थे कि कल शायद होड़ सर भी मौज़ूद होंगे वहाँ लॅब मे..."

"सच... "

"तुझे तो पता ही है की मैं कभी झूठ नही बोलता "
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Reply
08-18-2019, 02:04 PM,
#92
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
अरुण अपना सर खुजाते हुए कुच्छ देर तक किसी सोच मे डूबा रहा और फिर वो भी फाइल पकड़ कर लिखने बैठ गया बोले तो अब मैं और अरुण एक दम शांत थे.

"मारो सालो...अभी तो मस्ती के दिन है...जब ये दिन निकल जाएँगे तब रोते रहोगे कि काश...काश वो एक दिन फिर से आ जाए,जब दोबारा से वही थर्ड क्लास की लाइफ जीने का मज़ा लिया जा सके..."तेज तर्रार तेवर मे हम दोनो को बोलते हुए सौरभ वहाँ से बाहर निकल गया और मैं और अरुण एक दूसरे का मुँह तकने लगे....

"भाड़ मे जाए..."बोलते हुए मैने वापस से सीसी की बुक खोली और दूसरे पेराग्राफ से रीडिंग शुरू की....

"गान्ड मराए ..."बोलते हुए अरुण भी फाइल कंप्लीट करने मे बिज़ी हो गया....
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मैं जानता था कि यदि सौरभ और अरुण मे से किसी एक को अपनी तरफ करना हो तो सबसे पहले अरुण पर जाल फेकना चाहिए क्यूंकी अरुण थोड़ा भोला किसम का था और यदि उसे किसी चीज़ के लिए डरा दिया जाए तो वो थोड़ा-थोड़ा डरने भी लगता था...जैसा कि मैने अभी कुच्छ देर पहले होड़ का डर उसके दिल मे बिठा दिया,जिसकी वजह से वो इस समय फाइल कंप्लीट कर रहा था. आक्च्युयली मुझे पहले से ही मालूम था कि सौरभ और अरुण ,मेरी स्टडी मे काँटे की तरह चुभेंगे


इसलिए मैने पहले से ही तय कर रखा था कि अरुण को किसी तरह से मनाकर अपने साइड मे करना है और इसीलिए मैने आज सीसी की लॅब मे अरुण को अपनी कॉपी थमा दिया था...जिससे वो बाद मे मेरा साथ दे. सीसी की लॅब के बाद अरुण को थोड़ा-थोड़ा यकीन हो चला था कि क्लास मे या फिर लॅब मे ,उससे जब भी कोई सवाल पुछा जाएगा तो मैं उसे उस सवाल का जवाब देकर उसकी इन्सल्ट होने से बचा लूँगा...लेकिन उन सवालो के जवाब देने के लिए मुझे पेलम-पेल पढ़ाई करनी थी...जो कि मैं इस वक़्त मन लगाकर कर रहा था.....
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"अबे ये लवडी पढ़ा रही है या रेप कर रही है...साला 12 घंटे फुल नींद लेकर आया हूँ,लेकिन इसको देखकर ऐसा फील हो रहा है कि यही पर सो जाउ...फला इतनी नींद तो मुझे तब भी नही आई होगी जब बचपन मे मेरी माँ मुझे लोरिया सुनाकर सुलाती थी...."विभा मॅम की क्लास मे कहर धाते हुए अरुण ने कहा और अपना कहर जारी रखते हुए वो बोला"अरमान ,एक काम करते है...मैं ना इसकी आवाज़ को रेकॉर्ड कर लेता हूँ और रात को जब नींद नही आएगी तो हेडफोन फँसाकर इसका लेक्चर सुनेंगे...मैं गारंटी देता हूँ इसकी आवाज़ सुनने के बाद सॉलिड नींद आएगी..."

"चुप कर गान्डु,वो तुझे ही देख रही है..."

"इसको मेरा लंड चाहिए इसीलिए सारा पीरियड भर मुझे लाइन देती रहती है ,कुतिया,साली..."

"ऐसा मत बोल बे,थोड़ा सा तो रेस्पेक्ट दे...टीचर है वो अपुन की..."

"अरे लंड मेरा...इससे अच्छा तो मैं पढ़ा लूँगा और बीसी ये रिसेस क्यूँ नही हो रहा आज"
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अरुण की खुन्नस देखकर मैं समझ गया कि उसे इस समय समझाना बेकार है इसलिए मैं अरुण से थोड़ा खिसक कर बैठ गया,ताकि विभा मॅम जब हमारी तरफ नज़र मारे तो उसे ये ना लगे कि अरुण के साथ मैं भी बात कर रहा हूँ....

"अरमान तूने वरुण के बारे मे सुना क्या..."जमहाई मारते हुए अरुण मेरी तरफ खिसका"उसपर एनएफटी लग गया है ,एनएफटी बोले तो..."

"नोट फॉर टेक्निकल...आइ नो, तूने ही कल बताया था...अब जहाँ से खिसका है वापस वही पहुच जा..."अरुण से थोड़ी दूरी और बनाते हुए मैने कहा....

क्लास ख़त्म होने मे या फिर कहे कि रिसेस होने मे जब थोड़ा समय बाकी था तो विभा मॅम ने अरुण को खड़ा किया और लास्ट क्वेस्चन का आन्सर पुछा....

"56.68 केएन..."धीरे से मैने कहा और फिर अरुण ने यही आन्सर ज़ोर से कहा....जिसके बाद सारे स्टूडेंट्स का मुँह फटा का फटा रह गया...खुद विभा मॅम कुच्छ देर के लिए शॉक्ड हो गयी थी.....
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आख़िरकार वो वक़्त आ ही गया,जब रिसेस की घंटी बजी और मेरे खास दोस्त अरुण के जान मे जान आई...

"अच्छा हुआ,जो क्लास छूट गयी,मेरी तो भूख के मारे गान्ड ही फट गयी है...चल कुच्छ चरकर आते है हॉस्टिल से."

"भूख तो अपुन को भी लगी है..चल"

अभी हम दोनो हॉस्टिल जाने के लिए क्लास से निकले ही थे कि स्टूडेंट्स की भारी भीड़ देखकर हम दोनो रुक गये...उस भीड़ मे बहुत से स्टूडेंट्स ने किसी को घेर रखा था और अपना नाम, अपनी ब्रांच के साथ चिल्ला-चिल्ला कर बता रहे थे....

"तू रुक,मैं देख कर आता हूँ..."बोलते हुए अरुण कुच्छ देर के लिए उस भीड़ मे शामिल हो गया...

अरुण जब वापस लौटा तो उसका चेहरा एक दम खुशी के मारे ऐसे खिला हुआ था जैसे की कॉलेज की किसी लड़की ने उसे अपनी चुदाई करने का ऑफर दे दिया हो

"क्या हुआ बे,इतना काहे खुश है..."

"लौन्डे लोग पिक्निक प्लान बना रहे है..."

"साले गेज़ कही के..."

"अबे लौंडिया भी जाएँगी उस पिक्निक मे...सोच साला कितना मज़ा आएगा. तू देखना अरमान 10-12 माल तो मैं यूँ चुटकी बजाकर पटा लूँगा...."

"क्या कहा तूने ,लड़किया भी जाएँगी "

"यस तू बोले तो अभिच अपना,तेरा,सौरभ और सुलभ का नाम एंट्री करवा दूं क्या..."

"हां...जा जल्दी जाके एंट्री करवा..."अरुण को धक्का देते हुए मैने कहा...लेकिन फिर अचानक मुझे मेरे थर्ड प्लान की याद आई .

"प्लान नो. #3-स्टे अवे फ्रॉम गर्ल्स...."

जिसका सॉफ मतलब था कि मुझे पिक्निक मे नही जाना चाहिए

जिनके घर तूफान मे तबाह हो जाते है और जब वो दोबारा अपना घर बासाते है तो मेरे ख़याल से उनके दिल और दिमाग़ मे उस तूफान का डर बैठा रहता है कि कही एक बार फिर से कोई तूफान आकर उनके घर को बर्बाद ना कर दे...ये डर उनके जेहन मे ज़िंदगी भर के लिए बैठ जाता है की कही फिर से कोई आँधी और तूफान ना आ जाए...

और ऐसा ही कुच्छ-कुच्छ इस समय मुझे लग रहा था. मैं निशा के साथ एक पार्क मे बैठा हुआ था और यही सोच रहा था कि 8त सेमेस्टर की कहानी किस्मत दोबारा ना दोहरा दे. दोबारा अपना घर बसाने वाले की तरह मेरे दिल मे उस तूफान का डर था,जो 8थ सेमेस्टर मे आया था.
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"अरमान...तुमने अभी तक बताया नही कि मैं कैसी लग रही हूँ..."अपने उंगलियो से मेरे हाथ को सहलाते हुए निशा पुछि

"एक दम धाँसू..."बोलकर मैं चुप हो गया...

मुझे चुप देखकर निशा एक बार फिर मुझे अजीब नज़रों से देखने लगी.

"क्या हुआ ? तुम मुझसे बात क्यूँ नही कर रहे और ये एक-एक लाइन बोलकर खो कहाँ जाते हो..."निशा बोली. वो अब भी मेरे हाथ को सहला रही थी.

"अंकल जी की तबीयत कैसी है अब...."निशा ने जब मेरा हाथ सहलाते हुए अपना नाख़ून गढ़ाया तो मैं अपने ख़यालात से बाहर आया.

"ये तुम लगातार तीसरी बार पुच्छ रहे हो कि ,डॅड की तबीयत कैसी है...सो बोरिंग "

"अच्छा..."निशा की तरफ अपना चेहरा करते हुए मैने कहा"यदि ऐसा है तो फिर कुच्छ इंट्रेस्टिंग करे..."

"नो...नो...नो"

"यस...यस...यस "
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08-18-2019, 02:04 PM,
#93
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"अरे वो सब करने के लिए ये सही जगह नही है..."मुझे दूर धकेलते हुए निशा बोली"एक बात पुच्छू..."

"क्या..."

"पहले प्रॉमिस करो कि बुरा नही मनोगे...."

"ओये...ये पकाऊ लड़कियो वाली हरकत मत कर मतलब कि जो पुच्छना है पुच्छ और वैसे भी बुरा वो मानता है जिसके पास ......."बोलते हुए मैं बीच मे ही रुक गया
.
"वो तुम्हारे मोबाइल मे एक वीडियो है,जिसमे तुम एक लड़की से अजीब सी लॅंग्वेज मे कुच्छ कह रहे हो और फिर वो लड़की ,जो तुमने कहा है,उसे रिपीट करती है लेकिन वो बार-बार ग़लत बोलती है जिसके बाद तुम अपना सर पकड़ लेते हो और फिर एक कागज मे उसे क्या बोलना है ,वो लिखकर देते हो...."

"वो...वो कुच्छ नही है,वो तो बस ऐसे ही कॉलेज की एक फ्रेंड थी...जिसे मैं तीन अलग-अलग लॅंग्वेज मे सॉरी बोल रहा था...."बड़ी आसानी से बिना एक पल हिचकिचाए मैने,निशा से तुरंत झूठ बोल दिया...क्यूंकी सच बताने पर वो और भी बहुत कुच्छ पूछती या फिर कहे कि सब कुच्छ पूछती....

"अरमान...."

"यस..."निशा के कंधे पर अपना हाथ रखकर उसे अपने पास लाते हुए मैने कहा...

"अरमान , मुझे मालूम है कि तुम उस लड़की को सॉरी नही बल्कि आइ लव यू बोल रहे थे...."

इतना बोलकर निशा चुप हो गयी और मेरी तरफ मासूम सी नज़रों से देखने लगी और मैं उसकी मासूम सी आँखो मे देखते हुए एक नया बहाना ढूँढ रहा था और फिर मुस्कुराते हुए मैने कहा....

"ऐसा कुच्छ भी नही है,आक्च्युयली उस दिन मैने अपने एक दोस्त से शर्त लगाई थी कि मुझे उस वीडियो वाली लड़की को आइ लव यू बोलना है और वो लड़की मेरे आइ लव यू बोलने पर बिल्कुल भी नाराज़ ना हो....इसलिए मैने तीन अलग-अलग लॅंग्वेज मे उसे आइ लव यू बोला जिसकी भनक उस लड़की को नही लगी और मैं शर्त जीत गया.."

"ओह ! टू फन्नी...गुड ट्रिक टू से आइ लव यू तो सम्वन...मुझे भी तुम वो तीन लाइन्स बोलो और फिर मैं उन्ही तीन लाइन्स को रिपीट करूँगी..."

"क्या बात है बड़े ही रोमॅंटिक मूड मे लग रही है "

"अरे तुम बोलो ना..."

मैं कुच्छ देर चुप रहकर उन तीन लाइन्स को याद करने लगा और जब मेरे ध्यान मे वो तीनो लाइन्स आ गयी तो मैने कहा जिसके बाद निशा ने उन्ही तीन लाइन्स को रिपीट किया...आख़िरी लाइन बोलते हुए निशा इतनी ज़्यादा खुश हो गयी कि उसने मुझे गले लगा लिया और मैं....मेरा क्या ,मैं तो हमेशा ही इन सब कामो के लिए तैयार रहता हूँ
.
निशा को कसकर पकड़े हुए मेरा दिमाग़ एक बार फिर घुमा और मैं फिर से कुच्छ सोचने लगा बिना इसकी परवाह किए कि निशा मुझसे कुच्छ कह रही है...और पहले कि तरह इस बार भी मैं होश मे तब आया जब निशा ने अपना नाख़ून मेरे पीठ पर गढ़ाया....

"तुम उस वीडियो वाली लड़की से प्यार करते थे ना..."मुझसे दूर होते हुए निशा ने मेरी आँखो मे देखा....

पहले की तरह वो अब भी एक दम मासूम सी लग रही थी और पहले की तरह मैं फिर से उसकी आँखो मे आँखे गढ़ाए कोई बहाना ढूँढ रहा था....

"इट'स ओके, मुझे कोई प्राब्लम नही...वैसे उस लड़की का नाम क्या था..."

"एश..."बिना एक पल गवाए मैने कहा..

"वो तुम्हारे लायक नही लगती ,बिल्कुल भी नही....उसकी शकल देख कर कोई भी बता सकता है कि वो एक जिद्दी और घमंडी लड़की है,अच्छा ही हुआ जो वो अब तुम्हारे साथ नही है..."

निशा का एश के बारे मे ऐसा कहने पर मैं समझ गया कि वो एश से जल रही है और इसीलिए उसने कुच्छ देर पहले तीन अलग-अलग लॅंग्वेज मे मुझसे ठीक उसी तरह 'आइ लव यू' कहलवाया...जैसा कि एक जमाने मे मैने एश से कहा था...निशा की इस जलने वाली हरकत पर मैं दिल ही दिल मे मुस्कुराया और बोला...

"निशा एक बात बता, तुझे मालूम कैसे चला कि मैने एश को सॉरी नही बल्कि 'आइ लव यू' कहा था..."

"गूगल मे सर्च किया और रिज़ल्ट सामने आ गया...बहुत इंटेलिजेंट हूँ ना मैं..."

"ह्म्म..."कहते हुए मैने निशा को पकड़ा और पार्क मे जैसे दूसरे कपल कर रहे थे ,वैसा ही मैने भी किया और निशा के होंठो को अपने होंठो मे ले लिया....
.
कभी-कभी ज़िंदगी मे किसी एक के लिए अहमियत इतनी ज़्यादा हो जाती है कि दुनिया भर के सारे नियम,क़ायदे-क़ानून एक तरफ और वो एक तरफ....वो इंसान वही करता है जो उसका दिल कहता है...इस समय मैं निशा को किस कर रहा था ,लेकिन मेरा दिमाग़ एक बार फिर से अतीत मे जा पहुचा.जहाँ मैने शुरू-शुरू मे अपने प्लान के अकॉरडिंग चलते हुए पिक्निक पर जाने से मना कर दिया था,लेकिन जैसे ही मुझे पता चला कि एश उस पिक्निक मे जा रही है तो मेरे ही द्वारा बनाए गये मेरे ही सारे क़ायदे-क़ानून मुझे ग़लत लगने लगे और मैने पिक्निक मे जाने के लिए हामी भर दी.....

.
पता नही मैं पिक्निक पर जाने के लिए कैसे मान गया,जबकि मुझे मालूम था कि मेरे ऐसा करने पर मेरे तीनो प्लान ,जिनका पालन करना मेरे लिए उस वक़्त बेहद ज़रूरी था,वो बेकार हो जाएँगे...लेकिन फिर भी मैं गया और अपने होंठो मे मुस्कान और दिल मे नये-नये अरमान लेकर गया....
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"आज तुम थोड़ा अजीब बर्ताव कर रहे हो..."मेरे कान के पास निशा ने धीरे से कहा"कोई प्राब्लम है क्या..."
निशा की आवाज़ सुनकर मैं जैसे अपनी बीती दुनिया से वापस आया
"नही...कोई प्राब्लम नही है,एवेरीथिंग ईज़ ओके..."

"तुम्हे देखकर तो ऐसा नही लगता..."

"दिमाग़ का इलाज करवा,आज तू कुच्छ ज़्यादा ही सोच रही है और अब चल रात होने वाली है...कहीं ऐसा ना हो कि अंकल जी हम दोनो को रास लीला करते हुए देख ले और मेरी खटिया खड़ी कर दे..."

"डॅड हमे नही देख पाएँगे..."एक दम से बहुत ज़्यादा खुश होते हुए वो बोली"उनकी तबीयत अब भी थोड़ी डाउन है..."

"कमाल है यार, तू अपने ही डॅड की तबीयत खराब होने पर खुश हो रही है..."

ये बात मैने निशा को कुच्छ ऐसे कहा जैसे कि मैं उसे धिक्कार रहा हूँ, जैसे की उसने बहुत ही बड़ा गुनाह कर दिया हो...और मेरे ऐसे आक्षन पर उसका रिक्षन कुच्छ यूँ था....

सबसे पहले उसकी आँखे टाइट हुई,गाल गुस्से के कारण लाल हो गये और माथे पर सलवटें पड़ गयी...

"मेरे कहने का मतलब वो नही था...जो मतलब तुमने निकाला..तुम ऐसा कैसे कह सकते हो.."

"देख अब जो बोल दिया ,सो बोल दिया...तू आक्सेप्ट कर ले कि तू ससुरजी की तबीयत खराब होने से बहुत ज़्यादा खुश है..."निशा को और जलाने के लिए मैने कहा और खड़ा हुआ...

"अरमान,मैं बोल रही हूँ ना कि मेरा वैसा मतलब नही था...मैं तो सिर्फ़ तुम्हे ये बताना चाह रही थी कि डॅड हम दोनो को नही देख सकते..."बोलते हुए निशा भी ताव मे खड़ी हो गयी

"अरे मान ले ना अपनी ग़लती,मैं थोड़े ही तेरे बाप को बताने जाउन्गा..."

"क्या...तुमने मेरे डॅड को बाप कहा..तुम ऐसा कैसे कह सकते हो, ही ईज़ माइ फादर..."

"मैने ऐसा कब कहा...तेरे कान बज रहे है...डॉक्टर के पास जाकर अपने दिमाग़ के साथ-साथ अपने कान का भी चेक अप करवा लेना...."

"आइ हेट यू..."दूसरी तरफ घूम कर वो बोली...

"खा माँ कसम कि यू हेट मी... "

"मैं आज के बाद तुमसे कभी बात नही करूँगी..."

"ऐसा क्या...फिर ,वापस कर मेरा मोबाइल...ख़ामखा मेरा दस हज़ार के मोबाइल को बोर करेगी..."निशा की तरफ हाथ बढ़ाते हुए मैने कहा...

"लो...आइ हेट यू..."मेरे हाथ मे मेरा मोबाइल देकर निशा वहाँ से जाने लगी....
.
शुरू मे लगा कि अपना मोबाइल सीधे जेब मे डालकर यहाँ से चलता बनू,लेकिन फिर जैसे दिल ही नही माना कि निशा बिना मोबाइल के रहे...

घमंड और अहम तो मुझमे कूट-कूट कर भरा था,लेकिन उस एक पल मे ना जाने मुझे क्या हुआ की मैं पार्क से बाहर जाते हुए निशा की तरफ लपका और उसके ठीक सामने जा खड़ा हुआ...लड़कियो की बात-बात पर रूठ जाने की यही अदा तो साली दिल चीर देती है

"किधर जा रेली है ,आइटम...चलती क्या कोने मे ..."

"हटो मेरे सामने से..."दूसरी तरफ देखते हुए निशा ने कहा...उसका गुस्सा अब भी उसकी नाक पर फुल जोश के साथ सवार था...

"मज़ाक कर रहा था यार,तू भी ना हर छोटी से छोटी बात को दिल पे ले लेती है..."उसकी हाथ मे मोबाइल रखते हुए मैने सॉरी कहा...

"इट'स ओके..."हल्के गुस्से के साथ वो बोली....
.
जिस पार्क मे मैं और निशा कुच्छ देर पहले बैठकर बाते कर रहे थे,वो पार्क हमारी कॉलोनी के अंदर ही बना हुआ था. वरुण के किसी काम पर जाने के बाद मैने निशा को कॉल किया तो पता चला कि वो एक दम फ्री है मतलब कि उसके डॅड की तबीयत खराब होने की वजह से वो बिस्तर पर पड़े है,इसलिए वो अपनी माँ से कोई ना कोई बहाना मारकर मुझसे मिलने आ सकती है...जिसके बाद हम दोनो आधे घंटे के अंदर ही पार्क मे पहुच गये थे.
.
"वरुण अभी तक नही आया..."रूम के अंदर आते ही मैने अरुण से पुछा, जो कि वरुण के लॅपटॉप मे कोई मूवी देख रहा था....
"पता नही..."

"तू जाकर खाना बना..."कहते हुए मैने उसकी आँखो के सामने से लॅपटॉप को हटाया और बोला"साले,कुच्छ काम-धाम नही है क्या...जो इतने दिन बीत जाने के बावजूद यही पड़ा है..."

"दो-तीन दिन और रुक जा लवडे,फिर मैं खुद यहाँ से चला जाउन्गा..."

"जल्दी से जा बे,फालतू मे हमारा खर्चा बढ़ा रहा है.."
.
खर्चा शब्द सुनते ही अरुण एक झटके मे उठा और सीधे मेरे उपर कूद पड़ा,लेकिन तभी हमारे रिपोर्टर साहब ने एंट्री मारी....

"अरमान...एक लड़का तेरा अड्रेस पुच्छ रहा था..."

"मेरा अड्रेस..."अरुण को दूर फैंकते हुए मैने वरुण की तरफ अपना रुख़ किया"कौन था वो ? "

"पता नही...कॉलोनी के बाहर एक ने मेरी कार रुकवाई और पुछा कि अरमान कहाँ रहता है..."

"और फिर..."

"फिर क्या,मैने उसे उल्टा सीधा अड्रेस बता दिया क्यूंकी मुझे लगा कि इससे तेरी प्राइवसी को ख़तरा है..."

"अबे उल्लू...इस पूरी कॉलोनी मे मैं क्या अकेला ही अरमान हूँ...ये भी तो हो सकता है कि वो किसी दूसरे अरमान के बारे मे पुच्छ रहा हो..."

"पता नही...बाकी तू समझ...मुझे जो करना था,वो मैने कर दिया"सोफे पर गिरते हुए वरुण ने मुझसे कहा"अरमान फिर पिक्निक मे क्या हुआ ,मेरा मतलब कि वहाँ कोई धमाल किया या ऐसे ही लंड पकड़ कर वापस आ गये...."

"पिक्निक..."मुस्कुराते हुए मैने कहा"पिक्निक का नाम तो बस कॉलेज स्टाफ के लोगो और स्टूडेंट्स के पेरेंट्स को दिखाने के लिए दिया गया था..असलियत तो कुच्छ और थी"

"क्या कॉलेज के टीचर्स भी साथ थे..."

"अबे स्कूल समझ रखा है क्या,जो टीचर्स साथ रहेंगे..."

जो दिन पिक्निक के लिए तय हुआ था, वो दिन आते-आते तक कॉलेज के लौन्डो का प्लान पिक्निक से बदल कर 2-3 दिन के कॅंप की शकल ले चुका था जिससे बहुत से स्टूडेंट ने अपना नाम वापस ले लिया. क्यूंकी जो स्टूडेंट्स हॉस्टिल मे रहते थे उन्हे तो कोई प्राब्लम नही थी,लेकिन जो स्टूडेंट्स लोकल थे ,उनमे से अधिकतर के माँ-बाप ऑर केर्टेकर ने उन्हे 2-3 दिन घर से बाहर रहने की अनुमति नही दी और इस पर हमारे कॉलेज के प्रिन्सिपल ने फाइनल एअर के स्टूडेंट्स पर बॅन लगाकर चार-चाँद लगा दिए...जिसका नतीजा ये हुआ कि जहाँ पहले 4 बस बुक करने का प्लान था वहाँ कॅंप के लिए रवाना होने वाले दिन तक आते-आते बस की संख्या चार से कम होकर सिर्फ़ दो रह गयी....इतना सब कुच्छ होने के बावजूद मुझे कोई फ़र्क नही पड़ा,क्यूंकी मेरे साथ मेरे सारे दोस्त जा रहे थे. जिस दिन हमे कॅंप के लिए रवाना होना था, उसके एक दिन पहले हमारे प्रिन्सिपल ने एक और धमाका किया,जिसकी खबर मेरे खास दोस्तो मे शुमार सुलभ ने दी....सुलभ पिछले दो दिन से अपने रूम ना जाकर हमारे हॉस्टिल मे ही पड़ा था,जिसकी वजह से कयि बार मेरी और अरुण की वॉर्डन से बहस भी हो चुकी थी.सुलभ ने एक रात पहले बताया कि प्रिन्सिपल ने हमारे साथ गर्ल्स और बाय्स हॉस्टिल के वॉरडन्स को जाने के लिए कहा है....
.
"इस बीसी ,प्रिन्सिपल ने सारे इंटेन्षन पर मूत दिया...अब ये चोदु वॉर्डन हमारे साथ कॅंप पर जाकर क्या करेंगे....."सिगरेट के पॅकेट से आख़िरी सिगरेट निकाल कर अरुण ने पॅकेट ज़ोर से रूम के बाहर फैंकते हुए कहा.

"करेंगे क्या साले....बस दिन भर हमे इन्स्ट्रक्षन देते रहेंगे कि ,ये मत करो,वो मत करो...."अपने बॅग मे अपना समान भरते हुए सौरभ बोला"मेरा वश चले तो सालो का वही मर्डर कर दूं.."

"मुझे तो इसकी फिक्र हो रही है कि ये वॉरडन्स ,हमे दारू नही पीने देंगे "उदास सा चेहरा बनाते हुए मैने भी अपना बॅग आल्मिराह के उपर से निकाला और पॅकिंग करने लगा....
.
"एक और बुरी खबर है या फिर कहे तो सबसे बुरी खबर है..."सुलभ ने फिर कहा,जिसके बाद हम तीनो वो दूसरी बुरी खबर सुनने के लिए उसका मुँह तकने लगे.

"बोसे ड्के,दूसरी बुरी खबर बताएगा या फिर कोर्ट का नोटीस भेजू तब बकेगा..."जब कुच्छ देर तक सुलभ बिना कुच्छ बोले हम तीनो को ही देखते रहा तो मैं चिल्लाया...

"प्रिन्सिपल ने इन्स्ट्रक्षन दिया है कि लड़के और लड़किया अलग-अलग बस मे बैठेंगे...."

"दाई चोद दूँगा उस टकले की...."अरुण गुस्से से तनटनाते हुए भड़क उठा...

दिल तो मेरा भी किया कि अपने कॉलेज के प्रिन्सिपल को दिल खोलकर गालियाँ दूं ,लेकिन जब मैं ये सूभ काम करने के लिए मुँह खोल ही रहा था कि मेरा दिमाग़ मुझपर चिल्लाया"रेस्पेक्ट युवर टीचर्स..."

"अबे नही अरुण ,ऐसा नही बोलते...प्रिन्सिपल है अपना वो टकलू..और भूल मत कि गौतम वाले केस को दबाने मे उसने हम लोगो की कितनी हेल्प की थी....."ना चाहते हुए भी मैने अपने प्रिन्सिपल को इज़्ज़त देते हुए कहा....

मेरी बात मे दम था जिसका अहसास मुझे तब हुआ ,जब मेरे तीनो दोस्त मेरी बात सुनकर चुप हो गये और अपने समान की पॅकिंग करने मे लग गये....
.
"अरमान ,तेरा बॅग खाली है क्या..."

मैं आवाज़ की तरफ पलटा तो देखा कि अरुण अपने हाथ मे एक जीन्स को मोड़ कर खड़ा था.

"क्यूँ क्या हुआ..."

"ले मेरा ये जीन्स अपने बॅग मे डाल ले..."

मुझे अपना जीन्स देने के बाद ,अरुण ,सौरभ के पास गया और उससे भी वही सवाल पुछा,जो कुच्छ देर पहले उसने मुझसे पुछा था....जब सवाल सेम था तो आन्सर भी सेम ही होगा और ऐसा ही हुआ .

"बेटा मेरे बॅग मे जगह तो इतनी खाली है कि ,तुझे भी भर दूँगा...काम बोल"

"ले मेरा एक जीन्स और दो शर्ट रख ले...वो क्या है कि मेरा बॅग थोड़ा सा फटा हुआ है और मैं नही चाहता कि मेरी बेज़्जती हो जाए..."अपनी बकवास जारी रखते हुए अरुण बोला"तू खुद सोच बे, तुझे उस समय अच्छा लगेगा क्या...जब कॉलेज की लड़किया मुझे देख कर ये कहेंगी कि....अवववव, कॉलेज के सबसे डॅशिंग,स्मार्ट लड़के का बॅग फटा हुआ है.अववव...अवववव...."
.
"सब समान भर लिया अब चलो 2-3 वर्ल्डकप लेकर आते है...."पॅकिंग करने के बाद अंगड़ाई लेते हुए मैने एक लंबी जमहाई मारी...

"इतनी जल्दी क्या है बे...आराम से चलेंगे..वर्ल्डकप लेने"

" सब काम भले ही छूट जाए,लेकिन ये काम नही छूटना चाहिए...चल जल्दी "

"वर्ल्डकप "अपना दिमाग़ पर ज़ोर डालते हुए सुलभ ने पहले मेरी तरफ देखा और फिर जब उसे समझ आ गया कि मैं किस वर्ल्ड कप की बात कर रहा हूँ तो वो बोला"अबे ,दारू पियोगे तो पेला जाओगे...प्रिन्सिपल सस्पेंड कर देगा..."

"आइ लव दारू मोर दॅन माइ इंजिनियरिंग अब अपना मुँह बंद कर"
.
दूसरे दिन जब हम लोग हॉस्टिल से अपना-अपना बॅग लटकाए बाहर निकले तो राजश्री पांडे हमे हॉस्टिल के बाहर ही मिल गया...राजश्री को हॉस्टिल के बाहर देखते ही मैं समझ गया कि वो यहाँ इस वक़्त क्यूँ आया है....

"अरमान भाई,सौरभ भाई,अरुण भाई ,सुलभ भाई...अपुन को आप लोगो के साथ रहना है..."उसने कहा और सिगरेट का एक पॅकेट रिश्वत के तौर पर मेरे तरफ बढ़ा दी...

सिगरेट की एक फुल पॅकेट देखते ही मेरा दिल किया कि अभी अपना बॅग नीचे फेकू और सारे के सारे सिगरेट पी लूँ ,क्यूंकी पिछले एक दो दिनो से मैने सिगरेट को छुआ तक नही था...सिगरेट का पॅकेट लेने के लिए मैने अपना हाथ आगे बढ़ाया ही था कि मेरा 1400 ग्राम का ब्रेन मुझपर चिल्लाया"क्विट स्मोकिंग ऐज अर्ली ऐज पासिबल..." और फिर मैने राजश्री पांडे के हाथ से सिगरेट का पॅकेट लेकर अरुण को सौंप दिया.....

"ये क्या अरमान भाई,आप मुझसे नाराज़ हो क्या..."मेरी इस हरकत पर चौुक्ते हुए राजश्री पांडे ने पुछा...

जवाब मे मैं आगे बढ़ा और उसके कंधे पर एक हाथ रखकर अपना बॅग उसे पकड़ाया और बोला"नही रे पगले...तुझसे कैसी नाराज़गी ,तू तो भाई है अपना...वो तो आजकल मेरे ही दिन खराब चल रहे है...."
.
कॉलेज के ठीक सामने दो बस खड़ी थी, उसमे से एक बस के अंदर मैं और मेरी छोटी सी मंडली घुसी...हमने पहले से ही डिसाइड कर रखा था कि हम लोग किस सीट नंबर पर बैठेंगे.लेकिन जब बस के अंदर पहुँचे तो हमारी सीट पर वो कल्लू कंघी चोर एक हाथ मे चना लिए बैठा हुआ था...

"ओये चल सरक इधर से..."उसको देखकर मैने कहा और वो कल्लू अपना मुँह चलाते हुए खिड़की की तरफ खिसक गया...

"साले कंघी चोर, तुझे मैने खिड़की की तरफ सरकने के लिए नही कहा...मैने तुझे कहा कि सीट पूरी खाली कर..."

"तो फिर मैं कहाँ बैठू..."चने के एक और फेंक मुँह मे डालकर चबाते हुए वो बोला...

"साले मुझे देखकर,तुझे डर नही लगता क्या...बोला ना उठ यहाँ से..."

"तू कोई भूत है क्या, जो तुझसे डरूँ..."

"तेरी माँ की..."बोलते हुए मैने कल्लू को पकड़ा और खिचकर सीधे बाहर फेका"कंघी चोर,साला...मुझे ज़ुबान लड़ाता है..."

उस कल्लू कंघी चोर को बाहर फेकने के बाद मैं खिड़की की तरफ बैठा और कान मे हेडफोन फँसा कर अपनी आँखे बंद कर ली...

मैं बहुत कोशिश कर रहा था कि मुझे सिगरेट का ख़याल ना आए ,लेकिन जब से मैने अपनी आँखे बंद की थी...तब से मुझे सिर्फ़ और सिर्फ़ सिगरेट का वो पॅकेट नज़र आता...जो आज मुझे राजश्री पांडे ने दिया था और मैने अरुण को....
.
"अरमान भैया,थोड़ा साइड हटना तो..."मुझे साइड करके राजश्री पांडे ने अपना सर खिड़की से बाहर निकाला और गुटखे की पीक बाहर थूक कर एक दो लौन्डो को गालियाँ बाकी और वापस अपनी जगह पर ढंग से बैठ गया.....

"लवडे यदि एक और बार तूने मुझे साइड होने के लिए कहा तो बहुत पेलुँगा...."

"सॉरी ,अरमान भाई..."बोलते हुए राजश्री पांडे ने अबकी बार राजश्री अंदर ही निगल लिया....

आँखे बंद करके फिर से मैने कोशिश कि...कि सिगरेट का ख़याल मुझे ना आए लेकिन सिगरेट पीने की तलब ब समय के साथ लगातार बढ़ती ही जा रही थी और जब मुझसे कंट्रोल नही हुआ तो मैने बाहर जाकर चुप-चाप सिगरेट पीने की सोची....

"किधर जा रहा है बे..."

अरुण के इस सवाल पर मैने अपनी फिफ्थ फिंगर(पिंकी) उठा दी और बस से बाहर आकर सीधे हॉस्टिल की तरफ भगा....हॉस्टिल मे मैने दो सिगरेट सुलगाई और जब मन को ठंडक पहुचि तो हॉस्टिल से ठंडा पानी पीकर वापस कॉलेज की तरफ बढ़ा लेकिन मैं बस के करीब पहुचता उससे पहले ही मेरे सामने ब्लॅक कलर की एक लॅंड रोवर कार रुकी.

"एक दिन साला मेरे पास भी ऐसिच कार होगी..."उस चमचमाती हुई कार को देखकर मैने मन मे कहा....

उस ब्लॅक कलर की कार को देखकर मुझे ये अंदाज़ा तो हो गया था कि उसके अंदर बैठा हुआ शक्स करोड़पति है...लेकिन मुझे जोरदार झटका तब लगा,जब उस कार के अंदर से एश एक आदमी के साथ निकली....

"ओह तेरी...ससुर जी "

एश के साथ जो आदमी था उसकी उम्र मेरे हिसाब से 45-50 के बीच रही होगी,इसलिए मैने अंदाज़ा लगा मारा कि हो ना हो ये रहीस बंदा एश के पॅपा जी है बोले तो अपुन के ससुर जी
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08-18-2019, 02:04 PM,
#94
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
. एश अपने डॅड के साथ सीधे कॉलेज के अंदर गयी तो मैने भी उनका पीछा किया और उन दोनो को प्रिन्सिपल के ऑफीस मे जाता देख समझ गया कि अंदर क्या बाते हो रही होगी...मेरे ख़याल से एश का बाप अंदर प्रिन्सिपल से एश के बारे मे बात कर रहा होगा कि उसकी नाज़ुक सी लौंडिया...ओह सॉरी मेरा मतलब है कि उसकी नाज़ुक सी बेटी को इस कॅंप मे कुच्छ नही होना चाहिए...वगेरह-वगेरह.
.
एश अपने डॅड के साथ 10-15 मिनिट तक प्रिन्सिपल के ऑफीस मे रही और जब वो दोनो प्रिन्सिपल ऑफीस से निकले तो मैं भी उधर से काट लिया और उनकी कार से थोड़ी दूर जाकर खड़ा हो गया....

"ओके डॅडी, अब आप जाइए.."ससुर जी के गले लगकर एश बोली...

"ठीक है बेटा, अब तुम भी अपने फ्रेंड्स के साथ जाओ और अपना ख़याल रखना..."

दोनो बाप-बेटी का हगिंग-हगिंग का खेल ख़त्म होने के बाद ,एश के पॅपा जी वहाँ से चलते बने...लेकिन मैं अब भी वही खड़ा था...एश के बाप के जाने के बाद एक और महँगी कार सेम तो सेम प्लेस पर आकर रुकी,जिसमे से दिव्या और उसका बाप निकला....एक बार फिर से वही सेम टू सेम ड्रामा हुआ,जो कुच्छ देर पहले हुआ था बोले तो दिव्या अपने बाप के साथ प्रिन्सिपल के पास गयी और फिर सबके सामने उसने और उसके बाप ने एक-दूसरे को हग किया....
"साले कितने बोरिंग लोग है "
.
मैं पता नही वहाँ क्यूँ खड़ा था,जबकि वहाँ तेज धूप थी और पसीने से मेरे कपड़े भीग रहे थे...लेकिन मैं था कि वही खड़ा था,बस खड़ा था....पता नही ये एसा का जादू था या फिर मेरे दिल की बेबसी जो मुझे कुच्छ सूझ ही नही रहा था. और एक पल को मुझे ना जाने कैसे पता चल गया कि एश अब मेरी तरफ पलटी मारेगी लेकिन वो मेरी तरफ मुड़ती उससे पहले ही मैं लेफ्ट साइड मे 90 डिग्री पर घूम गया और अपना मोबाइल निकाल कर किसी से बात करने का झूठा नाटक करने लगा.
गॉगल्स पहनने के कयि फ़ायदे है लेकिन सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि आप गॉगल्स पहनकर किसी भी लड़की की तरफ अपना चेहरा किए बिना तिरछि नज़र से उसे देख सकते है और उस लड़की को पता भी नही चलता. उस वक़्त मेरी आँखो मे एक काला धाँसू चश्मा था और मैं अपनी आँखे तिरछि किए हुए एश को देख रहा था....


एश शांत होकर बहुत देर तक मुझे देखती रही और फिर दिव्या के साथ बस के अंदर चली गयी...एश दूसरी बस मे बैठी थी और उसके वहाँ से जाने के बाद मैं भी अपने बस की तरफ बढ़ा ये सोचते हुए कि"एक समय कैसे मैं उसे बहुत परेशान करता था और हर बार वो पहले गुस्सा होती और फिर एक मस्त स्माइल पास करती थी...लेकिन वो सब कुच्छ जैसे कि मेरा उसको हर दिन परेशान करना...उसका मुझपर गुस्सा होना और फिर मुझे देखकर उसकी प्यारी सी मुस्कान...अब ये सब बीते जमाने की बात हो चुकी थी. हम दोनो अक्सर जब भी एक-दूसरे के आमने-सामने आते तो ऐसे बिहेव करते जैसे हम दोनो एक-दूसरो को जानते तक नही और आज भी ऐसा ही हुआ था.


वो तो मुझसे बात करने से रही और इधर मेरे घमंड ने मुझे कोई पहल करने से रोक रखा था,मैं यही चाहता था कि शुरुआत वो करे...जो मुझे इस जनम मे मुश्किल ही लग रहा था.

यही सब सोचते हुए मैं बस के अंदर गया और अपने दोस्तो को आवाज़ दी...

"सब चलो बे,दूसरी वाली बस मे बैठेंगे..."

"लेकिन वो तो लड़कियो की बस है...प्रिन्सिपल का ऑर्डर भूल गया क्या..."

"उस टकले की माँ की आँख, तुम सब चलो मेरे साथ..."मैने कहा और इसी के साथ मेरा पहला रूल"रेस्पेक्ट युवर टीचर्स(X)" की माँ-बहन हुई

मैने कभी सपने मे भी या फिर कहे कि ग्रूप डिस्कशन की बोरिंग क्लास मे भी नही सोचा था कि जिन प्लॅन्स को बनाने के लिए मैने अपना सर खपाया था ,उन प्लॅन्स को एक दिन मैं ही अर्थी पर लेटा दूँगा...वो भी एक साथ.

मेरे अब तक के तीनो प्लॅन्स ,जो कि मुझे एक अच्छा स्टूडेंट और एग्ज़ॅम मे मेरे अच्छे मार्क्स ला सकते है,उन्हे मैं पिछले आधे घंटे के अंदर तोड़ चुका था.

हॉस्टिल जाकर मैने दो सिगरेट पिए इससे मेरा 'प्लान नो. 2-क्विट स्मोकिंग' तुरंत अर्थि पर लेट गया . कुच्छ देर पहले मैने प्रिन्सिपल को गाली बाकी जिससे मेरे 'प्लान नंबर. 1 -रेस्पेक्ट युवर टीचर्स' की धज्जिया उड़ी और अब लड़कियो वाली बस मे जाकर मैं अपने प्लान नंबर.3'स्टे अवे फ्रॉम गर्ल्स' को तोड़ने जा रहा था. मेरा ऐसा बिहेवियर किसी भी लिहाज से सही नही था सिवाय इसके कि मैं खुद अपने प्लान तोड़ रहा था ना कि कोई दूसरा.....
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"प्रिन्सिपल चोदेगा हम सबको ,यदि उसे पता चल गया कि हम लोग उसके ऑर्डर को फॉलो नही मान रहे है तो..."

"टेन्षन मत ले बेबी.प्रिन्सिपल भी एक जमाने मे जवान लौंडा रहा होगा इसलिए वो हमारी भावनाओ को समझ जाएगा और वैसे भी उसे कौन बताने जा रहा है कि लड़कियो वाली बस मे मुझ जैसा एक हॅंडसम लड़का था...."अरुण की बकवास को बीच मे ही रोक कर मैने कहा"उस बस मे दिव्या भी है ,सोच ले..."

"अरे गान्ड मराए दिव्या,.उस साली के चक्कर मे इतना बड़ा कांड हो गया और तू चाहता है कि मैं उसके बारे मे सोचु...कभी नही,बिल्कुल नही. "

"बात तो तेरी सही है और जब तुझे उससे कोई मोह-माया नही है तो फिर तुझे उस वक़्त बिल्कुल भी बुरा नही लगेगा,जब मैं उसे गाली बकुँगा..."

"बुरा वो मानता है जिसके पास बुर होता है और मेरे पास लंड है..."

"ओके..तो मैं ये कहना चाहता हूँ कि वो साली दिव्या ,एक नंबर. 1 की बक्चोद है...हॉस्पिटल से वापस आने के बाद शुरू-शुरू मे सोचा कि उसे भी दीपिका और नौशाद की तरह लपेटे मे ले लूँ...लेकिन फिर एक लौंडिया है,सोचकर जाने दिया और लौन्डो को देखकर जैसे वो अपना मुँह फाड़ती है ना ,उससे तो मुझे यही लगता है कि पक्का उसने आज तक कम से कम 10 लंड तो ज़रूर लिया होगा,एक तू ही चोदु था जो किस के चक्कर मे पकड़ा गया.जब पकड़ना ही था तो दिव्या को चोदते वक़्त पकड़ता...मुझे तो ये भी लगता है कि वो तेरे ज़रिए मुझपर डोरे डाल रही थी क्यूंकी मैं तुझसे ज़्यादा स्मार्ट और हॅंडसम हूँ..."

"अबे तू दिव्या की बुराई कर रहा है या मेरी..."

"दिव्या की...तू तो भाई है मेरा ,वैसे तो मैं तुझे इनडाइरेक्ट्ली चोदु कहना चाहता था,लेकिन देख मैने कहा क्या...नही कहा ना. वैसे तो मैं इनडाइरेक्ट्ली तुझे बदसूरत भी कहना चाहता था ,लेकिन देख मैने ऐसा कुच्छ भी कहा क्या...नही कहा ना. अरे पगले तू भाई है मेरा "

"ह्म बेटा, इनडाइरेक्ट्ली बोल-बोल कर डाइरेक्ट्ली मुझे चोदु और बदसूरत बोल रहा है...लवडे के बाल... "

"चल आजा ,अब लड़कियो वाले बस मे चलते है..."

बस से अपनी छोटी सी मंडली के साथ उतर कर मैं दूसरे वाली बस की तरफ चल पड़ा.

"अबे, उस बस मे एसा के साथ पक्का गौतम होगा....कही कुच्छ लफडा ना हो जाए..."लड़कियो वाली बस की तरफ मेरे कदम से कदम मिलकर चलते हुए अरुण ने कहा...

"अबे बक्चोद, भूल गया क्या...प्रिन्सिपल ने फाइनल एअर वालो को कॅंप पर जाने के लिए मना कर रखा है..."

"प्रिन्सिपल के कहने से क्या होता है.क्यूंकी यदि गौतम एश के साथ जाना चाहे तो वो अपने बाप की पॉवर का यूज़ करके बड़ी आसानी से जा सकता है और जहाँ तक मेरा मानना है उसके हिसाब से गौतम अपने बाप की पहुच का इस्तेमाल करके ,एश के साथ ज़रूर इस पिक्निक कम कॅंप मे जाएगा..."

"चल इसी बात पर लगाता है क्या हज़ार-हज़ार की शर्त..."मैने कहा...

बेट का अमाउंट मैने हज़ार रुपये इसलिए रखा क्यूंकी मुझे मालूम था कि ये शर्त मैं ही जीतने वाला हूँ क्यूंकी मुझे पहले से ही इस शर्त का नतीजा मालूम था.

"हज़ार रुपये क्या तेरे पॅपा मुझे देंगे...शर्त लगानी है तो 100-100 की लगा,वरना गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन के गान्ड मे जा..."

"चल ठीक है...100 डन."मैने अपना हाथ अरुण की तरफ बढ़ाया

"मेरी तरफ से भी डन..."मेरे हाथ मे अपना हाथ देते हुए अरुण ने कहा...

और जब शर्त को दोनो तरफ से हरी झंडी मिल गयी तो मैने और अरुण ने 100-100 निकाल कर सौरभ के हाथ मे दे दिए क्यूंकी हम दोनो ही जानते थे कि यदि शर्त के पैसे हमारे पास रहे तो जितने वाले को इनाम के तौर पर सिवाय बाबाजी के घंटा के आलवा और कुच्छ नही मिलेगा...
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जिस बस मे हमारे कॉलेज की लड़किया बैठी थी ,उसके अंदर घुसकर मैने अरुण को दिखाया कि एश कैसे दिव्या के साथ बैठी है और इसी के साथ मैं अरुण से 100 जीत गया

हमारी मंडली के उस बस मे आने से सभी लड़कियो का मुँह 3 इंच फट गया.सभी आइटम हैरान थी,परेशान थी कि मैं और मेरे दोस्त कैसे उनके बस मे आ टपके...शुरू की लगभग आधी सीट लड़कियो से भर चुकी थी लेकिन पीछे तरफ की सीट अब भी खाली थी,इसलिए बिना किसी लड़की की तरफ देखे हम लोग सीधे पीछे की तरफ बढ़ गये....

"अरमान भाई, वो आपका वॉर्डन पीछे गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन के साथ बैठा है...मैं क्या बोलता हूँ ,अपन सब अभिच इस बस से खिसक लेते है वरना भारी बेज़्जती करेंगे वो दोनो..."पीछे की तरफ बढ़ते हुए राजश्री पांडे ने मेरे कान मे कानाफुसी की ,जिसके बाद मेरी नज़र पीछे की सीट पर बैठे हमारे वॉरडन्स पर गयी...

"तुम लोग बैठो ,मैं उसे चोदु बनाकर आता हूँ..."धीरे से बोलते हुए मैं उन्दोनो की तरफ गया....

मुझे बस मे देखकर उन्दोनो का भी पहले वही हाल हुआ, जो की कुच्छ देर पहले लड़किया का हुआ था..बोले तो उन दोनो का भी मुँह 3 इंच खुल गया था...मुझे अपने सामने देखते ही जहाँ गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन किसी सोच मे डूब गयी वही हमारे हॉस्टिल के वॉर्डन की आँख मे ज्वालामुखी तैर रहा था,जो कभी भी फट सकता था.....

"सर.."अपने हॉस्टिल के वॉर्डन की तरफ मुखातिब होते हुए मैं बोला"वो हमारे बस की सभी सीट फुल हो गयी है...इसलिए हम लोग इस बस मे आ गये ,लेकिन यदि आप कहे तो हमलोग अभी इस बस से उतर जाएँगे और पहली वाली बस मे खड़े-खड़े ही चले जाएँगे "

"कोई बात नही बेटा, तुम लोग कोई बाहरी आवारा लड़के थोड़े ही हो...तुम लोग आराम से बैठो...बस इसका ख़याल रखना की यहाँ लड़किया भी बैठी हुई है."
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08-18-2019, 02:05 PM,
#95
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन से ये सुनकर मेरा रोम-रोम खुशी से झूम उठा और दिल किया कि अभिच उस वॉर्डन को एक 'वरदान' माँगने के लिए कह दूं लेकिन फिर ख़याल आया कि वो 'वरदान' तो पूरा होगा नही तो ऐसे बोलने का क्या फ़ायदा....
गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन से हमे जैसे ही हरी झंडी मिली,हमारा वॉर्डन कुच्छ कहने के मूड मे था , उसके आँखो की चाल और फेस का रिक्षन देखकर मैं समझ गया कि वो पक्का हमारी बुराई गर्ल्स हॉस्टिल के वॉर्डन से करेगा लेकिन वो कुच्छ बोलता उसके पहले ही मैं बोल उठा...
"थॅंक यू सर, थॅंक यू मॅम..."

"ओके बेटा, अब आप सब बैठ जाओ...ताकि किसी को कोई प्राब्लम ना हो..."

"वन्स अगेन ,थॅंक यू मॅम..."(चूस ले,बन गयी ना चोदु)
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जब हमे उस बस मे बैठने की पर्मिशन मिल गयी तो हम सब ने अपनी पसींदिदा सीट पर अपना डेरा जमा लिया...मैं अपनी पसंद के अनुसार खिड़की की तरफ बैठा था और राजश्री पांडे मेरे बगल मे था...अरुण और सुलभ दूसरी सीट पर बैठे थे लेकिन सौरभ अकेले पीछे वाली रो मे अपनी टांगे पसार कर बैठा था. हमारी सीट थ्री सीटर थी ,जिसके कारण एक सीट अब भी खाली थी....
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"सर,मे आइ कम इन..."

ये आवाज़ जैसे ही मेरे कानो मे पड़ी तो सबसे पहले जो ख़याल मेरे मन मे आया ,वो ये था कि"ये कौन चूतिया है,जो बस के अंदर आने के लिए पर्मिशन माँग रहा है और जब मैने पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि 5-6 लौन्डे बस के पीछे वाले दरवाजे के पास खड़े होकर बस के अंदर आने के लिए हमारे वॉरडन्स से पर्मिशन माँग रहे थे....जिसमे हमारे हॉस्टिल का वो कल्लू,कंघी चोर भी शामिल था....
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"क्या हुआ बेटा, आप लोग यहाँ क्यूँ आए हो..."ममता भरी आवाज़ मे गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन ने उन लड़को से पुछा"कोई प्राब्लम है क्या..."

"मॅम...वो वाली बस पूरी फुल है ,इसलिए हम लोग यहाँ आ गये..."

"कोई बात नही,आप लोग अंदर आकर बैठ जाइए...लेकिन इस बात का ख़याल रखना कि यहाँ लड़किया बैठी हुई है..."

इसके बाद उन सबने बारी-बारी से वॉर्डन को 'थॅंक यू' कहा और अंदर आ गये.इसे मेरा बॅड लक कहे या फिर कुच्छ और...कि कंघी चोर मेरे ही सीट पर आकर बैठ गया मतलब कि राजश्री पांडे की बगल मे....अब वो कंघी चोर ना तो मुझे पसंद था और ना ही राजश्री पांडे को, सो हम दोनो ही उसे वहाँ से हटाने की तरक़ीब ढूँढने लगे.....


"चल बे ,तू खिसक यहाँ से..."राजश्री का एक पाउच मुँह मे डालते हुए पांडे जी ने अजीब सी आवाज़ मे कहा...

"चुप कर,तेरा सीनियर हूँ मैं...ज़्यादा बोलेगा तो हॉस्टिल के लड़को को बोलकर तेरी पिटाई करवा दूँगा..."अपने छोटे से बॅग को अपनी गोदी मे रखकर वो बोला...

"सच "राजश्री पांडे को सीट से सटकर उस कल्लू की तरफ मैने अपना चेहरा किया...

"अरमान तू शायद मेरी पॉवर को नही जानता..."

"तू म्सी भाग यहाँ से,वरना तेरे गान्ड मे डंडा डालकर 1000 आर.पी.एम. की स्पीड से घुमाउन्गा..."

गुस्से से तमतमाते मेरे चेहरे को देखकर वो कल्लू डर गया और तुरंत अपना बॅग उठाकर पीछे की सीट पर जा पहुचा.
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जब दोनो बस के छूटने का टाइम हुआ तो हमारे हॉस्टिल का वॉर्डन ,दूसरे बस मे चला गया और बस चल पड़ी...मैने अपने कानो पर हेडफोन फँसाया और आँखे बंद कर ली. इस बीच बस मे किसके बीच क्या हुआ,मैं नही जानता और जब किसी ने मेरा नाम लिया था तो मैने अपनी आँखे खोली और देखते ही दंग रह गया कि सुलभ लड़कियो के बीच बैठा मुझे आवाज़ दे रहा था.

"इस साले की लौन्डियो से दोस्ती कब हुई और ये मुझे क्यूँ बुला रहा है...पक्का कोई लड़की मुझपर फिदा हो गयी होगी और मुझे प्रपोज़ करने के लिए बुला रही है "अपने बाल को हाथो से ठीक करते हुए मैने सोचा

जब मैं अपनी जगह पर खड़ा हुआ तो आगे की तरफ बैठी हुई लड़कियो ने मेरी तरफ देखा और तभी ना जाने कहा से मेरे अंदर अहंकार की एक लहर दौड़ आई...

"सॉरी, मेरे पास बेकार की बातो के लिए टाइम नही है..."बोलकर मैं तुरंत बैठ गया...

सुलभ मेरा खास दोस्त था और उसे ऐसा जवाब देने के बाद मुझे खुद भी अच्छा नही लग रहा था लेकिन जब इसकी शुरुआत मैने कर ही दी थी तो फिर पीछे हटना मुझे मंज़ूर नही था...इसलिए सुलभ के द्वारा एक-दो बार और मेरे नाम पुकारे जाने पर भी मैं अपनी जगह से एक इंच भी नही हिला....

जिस तरह सुलभ मेरा खास दोस्त था उसी तरह मैं भी उसका खास दोस्त था और मुझे पूरा यकीन था कि मेरा ऐसा बिहेवियर उसे भी पसंद नही आया होगा....मेरे ख़याल से उसने इसकी कभी कल्पना तक नही की होगी कि मैं उसकी बात को ऐसे टालुन्गा क्यूंकी यदि उसे मेरे इस रवैये की ज़रा सी भी भनक होती तो वो मुझे कभी नही बुलाता....मेरा ये रवैया वहाँ बस मे मौजूद जहाँ सभी लड़कियो को पसंद नही आया था वही मेरे बाकी के दोस्तो की शकल भी काफ़ी खफा-खफा सी थी.

"अरमान ,आना यार...एक मिनिट का काम है..."सुलभ ने तीसरी बार मुझे बुलाया ,लेकिन नतीजा पहले के जैसा ही रहा. मैं इस बार भी अपनी जगह से एक इंच भी नही हिला.

"अरमान...आना "

"राजश्री ,तू जा और सुलभ से मालूम करके आ कि क्या मॅटर है..."सुलभ की बुझी हुई शकल को देखकर मैने अपने बगल मे बैठे राजश्री पांडे से कहा.
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हमारे पांडे जी तो जैसे कब से इसी मौके की तालश मे थे की कब उन्हे लड़कियो के बीच मे जाने का मौका मिले और जब ये मौका उसे मेरे ज़रिए मिल रहा था तो भला वो कैसे पीछे हटने वाला था. मेरी तरह उसने भी अपने बालो पर अपनी उंगलिया फिराई और फिर मुझे साइड करके चलती हुई बस की खिड़की के बाहर गर्दन निकालकर अपना राजश्री से भरा मुँह खाली किया...बस स्पीड मे चल रही थी ,इसलिए पांडे जी ढंग से अपना काम नही कर पाए जिसकी वजह से गुटखे का कुच्छ अंश उनके गालो और होंठो पर अपनी छाप छोड़ गये था, जिसे वो अपने हाथ से सॉफ करते हुए बोला...

"थॅंक यू, अरमान भाई...मैं अभी जाकर ,सुलभ भाई से सब कुच्छ मालूम करके आता हूँ..."

"तेरी तो..."बोलते हुए मैने उसका सर पकड़ा और खिड़की पर दे मारा"तुझे पहले ही बोला था ना कि ये गुटखा,खैनि का प्रदर्शन मेरे सामने मत किया कर...अब जा यहाँ से..."

अपना सर सहलाते हुए राजश्री पांडे , सुलभ की तरफ बढ़ा लेकिन उस बेचारे की किस्मत ही झंड थी. एक तो सुलभ मेरे वहाँ ना जाने पर पहले से ही गुस्साया हुआ था ,उपर से जब राजश्री पांडे ने ,उसकी प्राब्लम पुछि तो सुलभ उसपर फॅट पड़ा और अपने दाँत चबाते हुए तेज लॅफ्ज़ो मे पांडे जी को वहाँ से भगा दिया...अब हमारे पांडे जी क्या करते, वो चुप चाप मायूस होकर वापस लौटे और मेरे बगल मे बैठ गये....
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इसके बाद कुच्छ देर तक और कुच्छ नही हुआ लेकिन मेरे अंदर एक उफान था कि आख़िर सुलभ मुझे बुला क्यूँ रहा था,कही एश ने तो उसे ,मुझे बुलाने के लिए नही कहा....

"धत्त तेरी की,मैने कितनी बड़ी ग़लती कर दी , सुलभ यार ! एक और बार मुझे बुला ,अबकी बार मैं उड़ कर आउन्गा..."

"अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत..."पांडे जी की बगल मे जो सीट खाली थी ,उसपर बैठते हुए अरुण बोला.

"तुझे कैसे पता चला बे "अरुण को देखकर मैने आश्चर्या से कहा.

"क्या...कैसे पता चला ? "

"यही कि,सुलभ के बुलाने पर मैं उसके पास उस वक़्त नही गया ,लेकिन मुझे अब उसका अफ़सोस हो रहा है..."

"बेटा सिक्स्त सेन्स मेरा भी कभी-कभी काम कर जाता है...वैसे मैं यहाँ तेरा दुख-दर्द बाटने नही आया हूँ,बल्कि तुझे ये बताने आया हूँ कि मेरे 100 वापस कर दे,वरना वॉर्डन को मैं ये बता दूँगा कि तू उससे झूठ बोलकर इस बस मे बैठा है..."

"चल जा बे और यदि तू उसे ये बताएगा भी तो मेरे साथ-साथ तुझे भी यहाँ से दूसरी बस मे जाना पड़ेगा..."

"मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता ,क्यूंकी दिव्या मेरे लिए कभी कोई खास लड़की नही थी...मैं तो बस उसके बड़े-बड़े दूध दबाना चाहता था,पर लगता है मेरे ये अरमान अब कभी पूरा नही होने वाला..."

"मुझे मालूम है कि तू ऐसा कुच्छ भी नही करेगा,जिससे मेरी बेज़्जती हो..."

"मेरे 100 देगा या नही..."

"नही..."

"ठीक है फिर..."बोलते हुए अरुण खड़ा हुआ और वॉर्डन की तरफ देखकर बोला"मॅम, आपको कुच्छ बताना है..."

"ये ले पकड़ अपने 100 ,लेकिन याद रखना कि ये 100 तो मैं तुझसे लेकर ही रहूँगा..."धीरे से कहते हुए मैने 100 तुरंत अरुण के हाथ मे पकड़ा दिए.....

"हां बेटा बोलो,कोई दिक्कत है क्या..."गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन ने हमेशा की तरह एक मीठी आवाज़ मे कहा...

"कुच्छ नही मॅम, मैं तो बस ये कहना चाहता था कि आप बहुत अच्छी है..."

जवाब मे वॉर्डन मुस्कुरा दी और अरुण ने 100 का नोट अपने जेब मे डाल लिया.
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अरुण को 100 का नोट देने के बाद भी मैं उस 100 के नोट के बारे मे ना सोचकर ,एश के बीच जाने का जो सुनहरा मौका मैने गवाँ दिया था,उसपर दिल ही दिल मे अफ़सोस जाहिर कर रहा था....

"और उड़ हवा मे, बेटा तेरा ये घमंड किसी दिन तुझे चोद कर ही दम लेगा,अब भी वक़्त है सुधर जा...."मैने खुद से कहा"कितना शानदार अवसर मिला था लड़कियों के बीच इंप्रेशन जमाने का ,लेकिन...."

"अरमान...."सुलभ ने एक और बार मेरा नाम पुकारा और खुद को गाली देना बंद करके मैं तुरंत अपनी जगह से खड़ा हो गया...

"एक मिनिट,इधर आना तो..."

"ओके, आइ अम कमिंग..."बोलते हुए मैं राजश्री के उपर से कुदा और लड़कियो की तरफ जाने लगा...

"अरमान भाई,मैं भी चलूं क्या..."पांडे जी ने अपने दिल के अरमानो को ज़ाहिर करते हुए मुझसे पुछा...

"तू क्या करेगा बे वहाँ जाकर,सिर्फ़ मेरी बेज़्जती ही कराएगा...तू एक काम कर, राजश्री का एक पाउच निकाल और खा के मस्त हो जा...मैं अभी आया"
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सुलभ के बुलाने पर मैं गया तो बड़ी खुशी के साथ था, लेकिन मेरे वहाँ पहुचते ही सभी लड़कियो के चेहरे का रंग ऐसे फीका पड़ गया,जैसे मैने उन सबकी सहेलियो को चोदा लेकिन उन्हे छुआ तक नही . और जब मैं सुलभ के पास पहुचा तो जो लड़किया अभी तक सुलभ की तरफ देखकर बड़े ध्यान से उसकी बाते सुन रही थी,वो अब मुझे ,उसके बगल मे खड़ा पाकर...दूसरी तरफ देखने लगी थी जिससे मेरे शरीर का आधा खून जल उठा और मैने तुरंत अपने वॉलेट से हज़ार का नोट निकाल कर सुलभ को थमाते हुए बोला...

"ले बे ,ये हज़ार रुपये रख और जब बस आगे कहीं रुकेगी तो इन सबको खाना खिला देना.."

"मतलब ? मैं कुच्छ समझा नही..."

"इन सबकी शकल देख, ऐसा लग रहा है कि ना जाने कितने जनम से भूखी है..."

मेरा ऐसा कहना था कि सभी लड़किया जहाँ कुच्छ देर पहले अपना मुँह दूसरी तरफ किए हुए बैठी थी ,अब वही लड़किया 440 वॉल्ट के बिजली के झटके खाकर मेरी तरफ गुस्से से देख रही थी...सिर्फ़ देख रही थी,बोल कुच्छ नही रही थी.
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"तूने मुझे यहाँ क्या इसीलिए बुलाया ताकि मैं इन सबके खाने के लिए कुच्छ पैसे डोनेट कर सकूँ या फिर कोई और बात है..."उन लड़कियो को एक और बार 440 वॉल्ट का झटका देते हुए मैने कहा और जवाब मे इस बार भी वो सब आइटम लोग मुझे सिर्फ़ देखती ही रही...

"तू भी ना यार ,हर टाइम मज़ाक करता रहता है..."एक लड़की की तरफ इशारा करते हुए सुलभ ने कहा"इसे तो जानता ही होगा,ये है मेघा...अपनी ही क्लासमेट है..."

"तीन साल ये हमारे साथ ,हमारी ही क्लास मे पढ़ रही है और तू मुझे यहाँ इसका नाम बता रहा है..."

"अबे नही , आक्च्युयली जब मैं इन सबसे बात कर रहा था तो ,ये बात उठी कि इस साल बेस्ट प्लेयर का अवॉर्ड किसे मिलेगा...और उसी वक़्त बॅस्केटबॉल के बारे मे चर्चा होने लगी..."

"तो..."

"तो फिर मेघा ने अचानक ही मुझसे ये पुछा की बॅस्केटबॉल का नंबर.1 प्लेयर कौन है...."

"अब समझा..."मैं बीच मे ही बोल उठा"तो तूने यहाँ मुझे सिर्फ़ ये पुछने के लिए बुलाया है कि ,बॅस्केटबॉल का नंबर.1 प्लेयर कौन है..."

"यस...यस.."अबकी बार मेघा ने कहा..

"डू गूगल, यू विल फाइंड युवर आन्सर..."सुलभ की तरफ देखते हुए मैने कहा"माना कि लड़कियो के पास दिमाग़ नही होता,लेकिन तुझे तो मैं एक होशियार लड़का समझता था..."

"क्य्ाआअ...हमारे पास दिमाग़ नही है..."5-6 लड़किया एक साथ मुझपर झल्लाई और उन सबको इग्नोर मारते हुए मैं अपनी सीट की तरफ बढ़ गया. अभी मैं अपनी सीट की तरफ जा ही रहा था कि दिव्या की आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी...
"माइ ब्रदर, गौतम ईज़ दा नंबर. 1 प्लेयर ऑफ दा बॅस्केटबॉल गेम ! "

ये सुनते ही मेरा बाकी बचा-कूचा खून भी गुस्से से जल उठा और दिल किया कि अभी जाकर दिव्या को एक तमाचा जड़ डू...लेकिन मैने ऐसा नही किया.
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08-18-2019, 02:05 PM,
#96
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
मैं शांति से पीछे पलटा और शांति से सुलभ के पास गया...

"मैने कहा था ना कि,लड़कियो के पास दिमाग़ नही होता..."

"तो फिर तुम ही बता दो कि बॅस्केटबॉल का बेस्ट प्लेयर कौन है..."एक बार फिर मेघा ने अपना सवाल दोहराया...

"पूरे वर्ल्ड मे माइकल जॉर्डन और इस कॉलेज मे मेरे बराबर कोई प्लेयर नही है..."

"ओ..हेलो एक्सक्यूस मी..."तमतमते हुए दिव्या खड़ी हुई"इस कॉलेज का बेस्ट प्लेयर मेरा भाई है ,तुम नही..."

"ये कौन है..."सुलभ की तरफ देखते हुए मैने पुछा...

इस समय दिव्या पर मुझे गुस्सा तो इतना आ रहा था कि बस का दरवाजा खोलकर उसे बाहर फेक दूं...लेकिन मैं फिर भी शांत रहा और सुलभ की हालत इस समय 'काटो तो खून नही' वाली थी...उसकी समझ मे बिल्कुल भी नही आ रहा था कि वो किसे शांत कराए,मुझे या दिव्या को....

"तुम मुझे नही जानते, याद करो लास्ट एअर मे तुमने मुझे फ़ेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा था और मैने तुम्हारी फ्रेंड रिक्वेस्ट दो दिन बाद आक्सेप्ट की थी..."

"सॉरी, रॉंग नंबर...आइ हेवन'ट एनी फ़ेसबुक आइडी...."

मेरे ऐसा कहने पर दिव्या को कुच्छ नही सूझा कि वो मुझे आगे क्या कहे,इसलिए गुस्से से तमतमाते अपने चेहरे को लेकर वो चुप चाप अपनी जगह पर बैठ गयी. दिव्या ,एश के ठीक साइड मे बैठी थी और जब दिव्या अपनी जगह पर बैठ गयी तो एश ने बहुत ही धीमे लफ़ज़ो मे कहा कि मैं झूठ बोल रहा हूँ....एश के ये लफ्ज़ किसी और को तो सुनाई नही दिए ,लेकिन लीप रीडिंग के कारण मैने तुरंत समझ गया कि एश ने दिव्या से अभी-अभी क्या कहा है.....

"ओये सुन ,फ़ेसबुक गर्ल..."दिव्या की तरफ देखकर मैं पूरे शान से बोला"अपने बगल वाली को बोल दे कि ,मेरे बारे मे उसे जो कुच्छ भी कहना है वो ,खुलकर कहे..."

"तुम मानो या ना मानो अरमान, लेकिन मेरा भाई ही इस कॉलेज का बेस्ट प्लेयर है..."

"ख्वाबो की दुनिया से बाहर आओ बेबी और सच को देखो...सब कुच्छ अपने आप समझ आ जाएगा..."मैने कहा...

वहाँ दूसरो के लिए टाइम पास करने का एक अच्छा-ख़ासा महॉल बन रहा था कि तभी वॉर्डन ,जो कि सबसे पीछे अपने कान मे इयरफोन फसाए हुए थी, वो बोली"बाय्स आंड गर्ल्स...हम अब बस पहुचने वाले है..."

वॉर्डन की बात सुनकर सबका ध्यान हमारे इस बेस्ट प्लेयर की लड़ाई से हटा और सब अपने-अपने बॅग्स उतरने मे लग गये कि तभी मुझे वो आवाज़ सुनाई दी,जिसे मैं पिछले काई महीनो से सुनना चाहता था...तभी मुझसे उस लड़की ने बात की,जिससे मैं बात करने के लिए तड़प रहा था. उसकी आवाज़ सुनते ही दिल जैसे खुशी के मारे झूम उठा, बिना इसकी परवाह किए कि वो मुझे बोल क्या रही है....

"यदि ऐसा ही है तो कॅंप ख़त्म होने के बाद गौतम और तुम्हारा एक मॅच हो जाए,जिससे सबको पता चल जाएगा कि बेस्ट कौन है..."

एश ने ये लफ्ज़ कहे ही इस तरह थे कि अब सबकी नज़ारे मुझ पर टिकी थी , वहाँ मौजूद लगभग सभी लोग पहले जल्दी से जल्दी बस से नीचे उतरना चाहते थे लेकिन जब एश ने मेरे सामने ,गौतम के साथ मॅच खेलने का चॅलेंज रखा तो ,जैसे सब के सब वही जाम गये...कोई भी बस से नीचे नही उतर रहा था,जबकि गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन कबकि नीचे उतर चुकी थी....

उस वक़्त सभी मेरे जवाब के लिए हद से ज़्यादा उत्सुक थे ,सभी चाहते थे कि मैं एश का चॅलेंज आक्सेप्ट करूँ और उसे हां बोल दूं...मैने सुलभ की तरफ देखा तो वो भी इशारे से मुझे ,एश का चॅलेंज आक्सेप्ट करने को कह रहा था...लेकिन सवाल यहाँ ये नही था कि दूसरे क्या चाहते है ,बल्कि सवाल यहाँ ये था कि मैं ,क्या चाहता हूँ और मैं इस बकवास से दूर जाना चाहता था.....
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बस से नीचे उतर चुकी वॉर्डन ने सभी को नीचे आने के लिए आवाज़ लगाई तो जैसे सबको होश आया कि बस रुक चुकी है और उन्हे नीचे उतरना है....

"मेरे ख़याल से तुम सबको नीचे जाना चाहिए..."मैने कहा.

मेरे ऐसा कहने से सब समझ गये थे कि मैने गौतम के साथ बॅस्केटबॉल खेलने का चॅलेंज रिजेक्ट कर दिया था और मैने जब आगे कुच्छ नही कहा तो एक तरफ जहाँ दिव्या बहुत खुश हुई वही दूसरी तरफ मेरे दोस्त बहुत उदास हुए, उनके चेहरे का सारा रंग एक पल मे छु-मंतर हो चुका था....
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"क्या हुआ तुमने कुच्छ जवाब नही दिया..."मैं बस से उतर कर आगे बढ़ ही रहा था कि एश की आवाज़ ने मेरे आगे बढ़ते हुए कदमो को रोक लिया . मैं पीछे पलटा तो एश बोली"सब तुम्हारे जवाब का इंतज़ार कर रहे है..."

मैं पहले से ही ये जानता था कि यदि हम दोनो मे फिर कभी बात होगी तो उसकी शुरुआत एश ही करेगी लेकिन मैं ये नही जानता था कि वो शुरुआत ,मुझे नीचा दिखाने के लिए होगी....मेरे दोस्त ,जो इस समय मेरे अगल-बगल,आयेज-पीछे खड़े थे ,वो सब मुझे धीरे-धीरे गालियाँ देकर बोल रहे थे कि मैं गौतम के साथ मॅच खेलने के लिए हां कह दूं..कुच्छ ने तो मेरे पैर पर ज़ोर से लात भी मारी.
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"तेरी आवाज़ मेरे कानो पर नही पड़ रही,जो बोलना है चिल्ला कर बोल..."मैने कहा.

"मैं ये कह रही थी कि तुमने कुच्छ कहा नही "मेरे पास आते हुए एश बोली और मुझसे थोड़ी दूरी बनाकर खड़ी हो गयी...

"किस बारे मे.."मैं भी उसकी तरफ बढ़ते हुए बोला...

"ओह कमोन,इतना बनो भी मत...सीधे-सीधे हां या ना मे जवाब क्यूँ नही देते कि तुम गौतम के साथ बॅस्केटबॉल का मॅच खेलोगे या नही..."

"और यदि मैं तुम्हारे बाय्फ्रेंड के साथ खेलना पसंद ना करूँ तो,दरअसल बात ये है कि मुझे उसकी शकल पसंद नही है..."

"सॉफ-सॉफ बोलो की तुम डर गये मेरे भाई से...हां"दिव्या चीखते-चिल्लाते हुए एश के साइड मे खड़ी हो गयी....

"पहली बात तो ये कि तू चुहिया की तरह चेटर-चेटर करना बंद कर,वरना चूहे मारने वाली दवा खिला कर तेरी जान ले लूँगा"अपना गला फाड़ कर मैं भी चिल्लाया "और दूसरी बात ये कि...डरते तो हम अपने बाप से भी नही ,नाम है शाहेंशाह..."

इसके बाद दिव्या की जो ज़ुबान पर ताला लगा ,वो फिर नही खुला और जब वो चुप हो गयी तो मैं भी अपने दोस्तो के पास जाने लगा.

"तुम शायद डर रहे हो कि कही उस दिन की तरह तुम फिर ना हार जाओ..."एश ने फिर कहा.

माँ कसम खाकर कहता हूँ कि यदि वो लड़की एश के सिवा कोई और होती तो उसे सीधे माँ-बहन की गाली देता, लेकिन वो एश थी इसलिए मैने उसे कुच्छ नही कहा क्यूंकी मेरे अंदर से ,मेरे दिल से मुझे इजाज़त नही मिली कि मैं एश को कुच्छ बुरा-भला कहूँ....मैं एक बार फिर से पीछे मुड़ा और एश की तरफ जाकर बड़े ही शांत भाव से बोला...
"कभी-कभी एक हार बहुत कुच्छ सिखा देती है जो सौ जीत भी नही सिखा पाती और मेरा लेवेल थोड़ा उँचा है इसलिए मैं गली मे चलते हर किसी के साथ मॅच नही खेलता...मैं मॅच उसी के साथ खेलता हूँ,जिससे मुझे कुच्छ सीखने को मिले,चाहे मैं हार ही क्यूँ ना जाउ...और एक बात बताऊ तुम्हारे बाय्फ्रेंड ,गौतम के अंदर एक भी ऐसी काबिलियत मुझे नही दिखती जो मेरे काम आ सके..."अपने शर्ट मे फँसे गॉगल्स को अपनी आँखो मे चढ़ाते हुए मैने कहा"इसलिए भाड़ मे जाओ तुम और तुम्हारा गौतम..."
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08-18-2019, 02:05 PM,
#97
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
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"क्या सॉलिड डाइलॉग मारा है बीड़ू..मूँहाअ..."

"चल साले दूर हट,गे कही का..."अरुण के पेट मे एक पंच मारते हुए मैने कहा"और तू ये बता कि वो लवडा सुलभ किधर है..."

"वो देख आगे..."आगे की तरफ इशारा करते हुए अरुण बोला"अपनी फॅंटेसी के साथ भाई बिज़ी है..."

"कौन मेघा..."

"यस, फर्स्ट एअर का प्यार है उसका बोले तो लेफ्ट साइड वाला..."

"सच"कहते हुए मैं जहाँ था वही रुक गया ,क्यूंकी सुलभ किसी पर दिल से फिदा है ये मुझे आज पता चला रहा था...

"अब क्या खून से लिखकर दूं..."

"फिर मुझे क्यूँ नही पता चला आज तक..."

"बेटा ,कभी दोस्तो के लिए टाइम निकालेगा तब ना कुच्छ पता चलेगा...मुझे तो पिछले साल से ही मालूम था,सौरभ ने बताया था मुझे..."

"तभी मैं सोचु की लौंडा बस मे लड़कियो से इतना घुल-मिल कैसे रहा है...."

"अब चल,वरना यहाँ जंगल मे पीछे छूट जाएँगे..."
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जिस जगह हम कॅंप के लिए आए थे वो एक जंगली एरिया था,साथ मे पहाड़ी भी...हमारे दोनो वॉर्डन के साथ दो लोग और थे जिन्हे मैने पहली बार देखा था...शायद वो इसी इलाक़े के थे,जिन्हे हमारी मदद के लिए हीरे किया गया था. जिस जगह हम लोग घूमने आए थे वहाँ एक नदी भी बहती थी,जिसके पानी को सरकार. ने बाँधा हुआ था ,जिसके ज़रिए उस जंगल से लगे शहर मे वॉटर की सप्लाइ होती थी,दूसरे शब्दो मे कहे तो वो रिवर, वहाँ के आस-पास रहने वाले लोगो को जीवन देने वाली नदी थी.नदी के आस-पास का नज़ारा भी काफ़ी बढ़िया था जिसकी वजह से अक्सर उस जंगल से लगे शहर के लोग वहाँ घूमने आया करते थे, एक तरह से वो कपल्स के लिए लवर पॉइंट भी था. जिसका अंदाज़ा मुझे तब हुआ जब मैने वहाँ कोने-कोने मे काई लड़को को लड़कियो के साथ बैठे हुए देखा.

"बहुत मज़ा आने वाला है यहाँ तो..."मैने दिल ही दिल मे कहा...

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उस नदी के बहाव को रोकने के लिए जो तरीका अपनाया गया था,वो कुच्छ-कुच्छ किसी डॅम से मिलता था,इसलिए उस इलाक़े के लोग उस जगह को डॅम भी कहते थे.डॅम के अंदर जाने के लिए टिकेट लगता था और जब हम लोग डॅम के अंदर घुसे तो मुझे वहाँ कुच्छ कॉफी हाउस भी दिखे, जहाँ भारी मात्रा मे लड़के-लड़कियो का प्रेमी जोड़ा मौज़ूद था....

"इधर तो सच मे बहुत मज़ा आने वाला है..."कॉफी हाउस के अंदर जब मैने प्रेमी जोड़ो को देखा तो मैने एक बार फिर खुद से कहा....
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यूँ तो वहाँ दिन भर मे हज़ार लोग घूमने आते थे जो कुच्छ घंटे बिताने के बाद वहाँ से चले जाते थे, लेकिन हमारे कॉलेज का ग्रूप 3 दिन तक वहाँ रुकने वाला था और ऐसा करने वाले हम लोग अकेले नही थे...वहाँ हमारे कॉलेज के अलावा भी काई दूसरे कॉलेज के स्टूडेंट्स आए थे जिनके कॅंप मुझे दिखाई दिए.

"चल बे ,दूसरे कॉलेज की लड़कियो को ताड़ कर आते है..."अपने कॅंप के अंदर समान रखने के बाद मैने अपने दोस्तो से कहा...

"नही बे, लफडा हो जाएगा..."सुलभ ने कहा.

"तू लवडे चुप रह और जाके अपनी आइटम के साथ रह...मैं तो इन चूतियो से पुच्छ रहा हूँ..."

सुलभ की तरह अरुण,सौरभ ,राजश्री पांडे और मेरे माइनिंग ब्रांच का दोस्त नवीन भी उलझन मे फँसे थे कि उन्हे दूसरे कॉलेज की लड़कियो को छेड़ना चाहिए या नही. शायद उनके अंदर ये डर बैठ चुका था कि कही दूसरे कॉलेज के लड़को से कोई पंगा ना हो जाए. उन सबको गहरी सोच मे डूबा हुआ देख मैं बोला...

"किसी महान व्यक्ति ने कहा है कि...तो थिंक टू लोंग अबाउट डूयिंग आ थिंग ऑफन बिकम्स इट्स अनडूयिंग..."गॉगल अपने आँख मे चढ़ाते हुए मैने कहा"अब चलो,दूसरे कॉलेज की लड़किया मेरा इंतज़ार कर रही होगी "

पता नही क्यूँ पर जब मैने दूसरे कॉलेज की लड़कियो को छेड़ने के लिए कहा तो ,मेरे दोस्तो ने अपने हाथ खड़े कर दिए, वो मेरे साथ आने को तैयार ही नही थे और उनके बिना मैं जाना नही चाहता था...उनके बिना मैं इसलिए नही जाना था कि मुझे उन सबसे बेहद लगाव था बल्कि इसलिए ताकि जब बाइ चान्स यदि दूसरे कॉलेज के लड़को से मेरा लफडा हो तो मैं अकेला होने की वजह से कहीं पिट ना जाउ...इसलिए चाहे मुझे जो भी करना पड़े,उन्हे अपने साथ लेकर तो जाना ही था.

"सब कॅंप से बाहर निकलो ,बाहर वॉर्डन सबको कुछ इन्स्ट्रक्षन देने वाले है..."एक लड़का भागता हुआ हमारे कॅंप के अंदर घुसा और वॉर्डन सबको बाहर बुला रहे है,ये बोलकर वापस भाग गया.....

हम लोग बाहर आए और उस तरफ बढ़ने लगे,जहाँ सब इकट्ठे हो रहे थे.

वहाँ कॅंप लगाने के लिए अलग ही सुविधा थी और जो जगह कॅंप लगाने के दिया जाता था...वो एक उँची जगह पर था,जहाँ से दम और उसके आस-पास का नज़ारा बहुत ही सुंदर दिखता था.हमारे कॉलेज के कॅंप के पास ही दूसरे कॉलेज के कॅंप भी लगे थे.

"सब आ गये या अब भी कोई बचा है..."हमारे वॉर्डन ने ताव देते हुए कहा"आज अब शाम हो चुकी है तो कोई भी नीचे घूमने नही जाएगा."

"बाप का राज है क्या,जो कोई घूमने नही जाएगा..."मैने मन ही मन मे कहा....

"मैं ,हमारे दोनो गाइडेन्स के साथ सबसे आगे वाले कॅंप मे रहूँगा ,जिसके बाद कुच्छ लड़के फिर बीच मे लड़कियो का कॅंप होगा और आख़िरी मे फिर लड़के रहेंगे, ईज़ तट क्लियर..."

"क्लियर सर..."सब एक साथ ज़ोर से चीखे.

"सभी लड़किया अपने कॅंप मे जाएँगी और लड़के मेरे साथ यही रुकेंगे, हमे आज रात के लिए कुच्छ इंतज़ाम वगेरह करने है...."

लड़कियो को उनके कॅंप मे भेज दिया गया, गर्ल्स हॉस्टिल की वॉर्डन लड़कियो के ही किसी कॅंप मे उनके साथ थी. जब सारी लड़किया वहाँ से रफ़ा-दफ़ा हो गयी तो हमारे वॉर्डन ने हम सबको अपने पास बुलाया...
.
"देखो बाय्स, वो सामने जो कॅंप दिख रहे है ना, वो एक बेहद ही बेकार कॉलेज के है ,इसलिए वहाँ के लड़के भी बड़े लोफर और बेकार है...तुम सब बस इस बात का ध्यान रखना कि उनसे किसी तरह का झगड़ा मोल मत लेना....समझे सब."

"यस सर..."

"और सुनो, दूसरे कॉलेज की लड़कियो से कोई बात करने नही जाएगा, ये मेरा ऑर्डर है...क्यूंकी मैं नही चाहता कि कोई झमेला खड़ा हो.हम लोग यहाँ तीन दिन शांति से रहेंगे और फिर चले जाएँगे...ईज़ दट क्लियर..."

"यस सर..."

"क्या पका रहा है यार, "अपने अगल-बगल खड़े लौन्डो से मैने कहा"मेरा दिल कर रहा है कि साले के मुँह पे जूता फेक के मारू...."
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हम सबको दुनिया भर का ज्ञान देने के बाद हमारे वॉर्डन ने उन दो लोगो से सबका परिचय कराया,जो हमे इन तीन दिनो मे यहाँ के वातावरण को समझने मे हमारी मदद करने वाले थे. वॉर्डन ने 10-10 लड़को का ग्रूप बनाने के लिए कहा और बोला कि उन 20 लड़को को गाइडेन्स के साथ बाहर जाकर कुच्छ समान लाना है....

"सर, मैं जाउन्गा..."मैने अपना हाथ सबसे पहले खड़ा करते हुए कहा.

"अरमान...तुम और तुम्हारी मंडली कही नही जाएगी..तुम लोग सीधे अपने कॅंप पर जाओ और यदि मुझे तुम लोग बाहर दिखे तो यही से नीचे फेक दूँगा...."

"तेरी *** की चूत...तेरी *** का भोसड़ा, हाथ लगा के देख तो साले...लंड काटकर मुँह मे दे दूँगा ,म्सी,बीसी."साइलेंट मोड मे मैने ये शुभ वचन अपने वॉर्डन को कहे और अपने कॅंप की तरफ बढ़ गया.
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"वो साला,कल का लौंडा...हमे सिखा रहा है कि हमे क्या करना चाहिए,उसकी तो मैं...."कॅंप के अंदर आने के बाद मैने अपना जीन्स उतारा और बॅग से दूसरा जीन्स निकाल कर पहनते हुए बोला"उसकी *** की चूत, तुम लोग फिक्र मत करो...हम लोग नीचे घूमने ज़रूर जाएँगे..."

"वो सब तो ठीक है ,लेकिन तू ये कपड़े क्यूँ बदल रहा है..."एक तरफ लेटे-लेटे अरुण ने पुछा...

"अबे उल्लू,नीचे इतनी सारी राजकुमारियां है तो अपना भी फ़र्ज़ बनता है ना कि राजकुमार की तरह दिखे...सौरभ,तू वो पर्फ्यूम निकाल अपने बॅग से."

"किधर जा रहा है..."चौुक्ते हुए अरुण तुरंत खड़ा हो गया और अपने दाँत चबाते हुए मुझसे कहा"भूल गया क्या ,वॉर्डन ने क्या वॉर्निंग दी है..."

"अबे डरता तो मैं ओसामा-बिन-लादेन से नही ,तो फिर उस वॉर्डन की क्या औकात...जो मुझे रोक ले...तुम लोग बस जल्दी से तैयार हो जाओ,बाकी मैं संभाल लूँगा"

"क्या संभाल लेगा बे..."मुझे पकड़ कर नीचे धक्का देते हुए सौरभ बोला"कोई कही नही जाने वाला और ना ही तू कहीं जाएगा..."

"अब ये मत बोल देना कि ,यदि तुझे यहाँ से बाहर जाना है तो मेरी लाश पर से जाना होगा "
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मैने सबको बहुत मनाया नीचे जाने के लिए लेकिन सबमे वॉर्डन का दर इस कदर बैठा हुआ था की कोई मेरी बात सुनने तक को तैयार नही था, मैं जिसे भी मेरे साथ चलने को कहता ,वो अपने कान पर अपने दोनो हाथ रखकर कहता कि"मुझे कुच्छ सुनाई नही दे रहा है..."

"अबे कुत्तो,डरो मत...मैं ये सब पहले भी कर चुका हूँ..."

"कब ,कहा...कैसे.."

"स्कूल मे किया था ,वो भी एक बार नही बल्कि...1 ,2,3,4 और राउंड फिगर मे लेकर बोले तो टोटल 5 बार..."

"कोई ,कही नही जाएगा...वरना मैं वॉर्डन को बोल दूँगा "सौरभ ने ब्रह्मस्त्रा चलाते हुए कहा...जिसके बाद मेरे बाकी के दोस्त और भी डर गये.

मैं कुच्छ देर तक वही उल्लू की तरह खड़ा होकर उन सबको देखता रहा ,कुच्छ सोचता रहा और फिर अरुण के पास जाकर बोला...

"सोच अरुण, जब तू अपनी वो ब्लू कलर की शर्ट और ब्लॅक कलर की जीन्स पहनकर बाहर निकलेगा तो सारी लड़किया अपने कपड़े फाड़ लेगी और कहेंगे कि ,वाउ...आज तक उन्होने तुझ जैसा हॉट लौंडा नही देखा, सोच ज़रा कि तुझे उस वक़्त कितना मज़ा आएगा..."

"सच... : "

"और नही तो क्या..."अरुण को चोदु बनाते हुए मैने कहा"इतना ही नही ,वो तेरे पीछे-पीछे दौड़ेंगी और फिर तुझे लेटा-लेटा कर...लेटा-लेटा कर..."

"मैं तैयार हूँ...." ख़याली पुलाव पकाते हुए अरुण ने मेरे साथ जाने के लिए हां कहा तो मैं सौरभ की तरफ बढ़ा....

"सौरभ ,सोच...जब एक दम फ़िल्मो के माफिक हॉट लड़किया...तुझे देखते ही तेरे पास आएगी और सीधे तेरे लंड पर अपना हाथ रखकर ,तेरा सर अपने दोनो दूध के बीच मे घुसा देंगी तो सोच तुझे उस वक़्त कितना मज़ा आएगा..."

"बहुत मज़ा आएगा ,मैं एक मिनट. मे तैयार होता हूँ..."

इसके बाद मैं राजश्री पांडे की तरफ बढ़ा...

"पांडे जी, उस लम्हे के बारे मे सोचो ,जब तुम्हे एक तुम्हारी टाइप की राजश्री खाने वाली लड़की मिलेगी...तू भी राजश्री चबा रहा होगा,वो भी राजश्री चबा रही होगी...तुम दोनो एक दूसरे के करीब आओगे और करीब...और करीब...."

"आआहह...आगे बोलो अरमान भाई"

"फिर तुम दोनो एक दूसरे को राजश्री का एक-एक पाउच देकर अपने प्यार का इज़हार करोगे और फिर वो राजश्री चबाते हुए तेरे पैंट की ज़िप खोलेगी..."

"आआहह...आगे बोलो अरमान भाई."

"और फिर तेरे लंड पर और फेस पर राजश्री थूक कर भाग जाएगी... "

"क्या अरमान भाई ,केएलपीडी कर दिया."
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08-18-2019, 02:07 PM,
#98
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
अरुण,सौरभ,नवीन और राजश्री पांडे तो मेरे साथ आने के लिए तैयार हो गये थे,लेकिन सुलभ अब भी नाटक कर रहा था.

"तू चलेगा हमारे साथ..."

"मैं नही जाउन्गा..."

"तुझसे पुछ थोड़ी ही रहा हूँ ,मैं तो तुझे बता रहा हूँ कि तू चलेगा हमारे साथ "

जैसे-तैसे करके हम सबने सुलभ को भी राज़ी कर लिया और जब सब तैयार हो गये तो मैने उन सबको वहाँ कुच्छ देर रुकने के लिए कहा....

"अब क्या हुआ,जल्दी चल...मुझसे कंट्रोल नही हो रहा..."

"रुक जा, वो वॉर्डन एक बार हमे देखने ज़रूर आएगा कि हम कॅंप पर मौजूद है या नही...एक बार वो हमे यहाँ देख ले फिर कोई बात नही..."

"तब तक तो साली रात हो जाएगी,फिर लड़किया मेरा खूबसूरत चेहरा कैसे देखेगी "मायूस होते हुए अरुण एक तरफ बैठ गया.
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जैसा कि मेरा अनुमान था वॉर्डन हमारे कॅंप मे आया ,लेकिन आधे घंटे बाद और जैसे ही वॉर्डन हमे देख कर वापस अपने कॅंप मे घुसा तो हम 6 लोग ,तुरंत उस पहाड़ी से नीचे उतर कर डॅम के किनारे पर पहुँचे....उस पहाड़ी से नीचे उतरने मे हम सबके पसीने छूट गये थे और हाँफने भी लगे थे.

"गान्ड फॅट गयी बे,नीचे उतरने मे...अब बस कोई लड़की ब्लो जॉब दे दे तो मज़ा आ जाए..."हान्फते हुए सौरभ बोला.

सौरभ के बाद बारी-बारी से सबने अपनी डिज़ाइर जाहिर की, कुच्छ ने कहा कि उसे स्मूच करना है तो किसी ने कहा वो लड़की की छातियों को मसलना चाहता है...किसी ने कहा कि वो लड़की को झाड़ी के पीछे लेटा कर ठोकना चाहता है तो किसी ने कहा कि डॅम मे कूदकर 'अंडर वॉटर रोमॅन्स' करेगा...पर इन गधो को कौन बताए कि ऐसा आज तो क्या,आने वाले तीन दिनो मे भी ये नही कर सकते....

नदी के उपर एक लंबा-चौड़ा पुल बना हुआ था, जिसके दोनो तरफ थोड़ी-थोड़ी दूर पर बैठने के लिए लोहे की चेर्स फिट किए गये थे और इस वक़्त ,शाम के समय पुल पर बैठने की जो जगह थी वो हाउसफूल थी...मतलब की हर एक जगह पर प्रेमी जोड़ो ने कब्जा कर रखा था.

उन सबको बैठने की सभी जगह पर कब्जा करते देख मेरा रोम-रोम गुस्से से भड़क उठा और मेरे दिमाग़ मे एक खुरापाति आइडिया आया....
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वैसे किसी महान पुरुष ने कहा है कि ' दूसरो के साथ कभी भी ऐसा व्यवहार मत करो,जो तुम्हे खुद खुद के साथ पसंद ना हो...' लेकिन ये वक़्त उस महान पुरुष की बोरिंग बातों को मानने का नही था इसलिए मैने सबको अपने करीब बुलाया और बोला
"मेरे प्यारे भाइयो और भाइयो...चलो थोड़ा मौज-मस्ती करते है..."

इसके बाद मैने सबको क्या-क्या करना है ये बताया और जब सबने इसपर अपनी सहमति दे दी तो हम सब एक साथ आगे बढ़े .

"रेडी दोस्तो..."पुल पर आगे बढ़ते-बढ़ते जब हम लोग एक कपल के पास पहुँचे तो मैने अपने दोस्तो से कहा"सुलभ तू आगे जा और सौरभ तू अपना मोबाइल निकाल ले..."

जब हमने सब ताम-झाम कर लिए तो सुलभ एक प्रेमी जोड़े के सामने जाकर खड़ा हो गया, जो आपस मे एक-दूसरे का हाथ थामे हुए शांति से बैठ कर बात कर रहे थे....
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"ये देखो, ये है हमारे महान भारत के युवा..जो यहाँ पब्लिक प्लेस मे अश्लीलता फैला रहे है."एक दम सीरीयस होते हुए सुलभ बोला,

सुलभ के मुँह से ऐसी धार्मिक बाते सुनकर वो प्रेमी जोड़े ऐसे चौके जैसे उनके माँ-बाप ने उन्हे रोमॅन्स करते हुए देख लिया हो...उनकी तो पूरी तरह से बॅंड बज चुकी थी.

"ऐसे लोग...ऐसे ही लोग है ,जो हमारी संस्कृति को धूमिल करते है..."उसके बाद उन दोनो की तरफ देखकर सुलभ बोला"तुम्हे पता है हमे आज़ादी किस तरह मिली,कितनो का खून बहा...हमे आज़ादी मिली इसका मतलब ये नही तुम लोग कही भी बैठकर ,कुच्छ भी करोगे...सालो कुच्छ तो शरम करो..."बोलते हुए सुलभ ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा...जिसके बाद वो लड़का जो अपनी माल के साथ वहाँ बैठा हुआ था,वो ताव मे सुलभ को मारने के लिए खड़ा हो गया...लेकिन जब हम सब सुलभ के पीछे खड़े हो गये तो वो लड़का शांत बैठ गया....
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"सौरभ अब तेरी बारी..."आगे बढ़ते हुए मैने कहा और सौरभ को छोड़ कर हम सब वही रुक गये....आगे जाकर सौरभ ठीक एक कपल के सामने रुक गया और उनमे शामिल लड़के का कंधा थपथपा कर बोला...
"भाई,एक नंबर लिखना तो..."

"चल निकल यहाँ से..."वो लड़का बोला...

"लिख लेना ना यार..."मासूम सी शक्ल बनाते हुए सौरभ ने विनती की तो लड़की का दिल पिघल गया और उसने अपने बाय्फ्रेंड को इशारे से कहा कि वो सौरभ की बात मान ले...

"चल बोल..."उस लड़के ने अपना मोबाइल निकाल कर कहा

"थॅंक्स यार, वो आक्च्युयली मैने मेरे दोस्त हीरालाल से हीरालाल का नंबर माँगा था और इस वक़्त मेरे पास कोई कागज ,पेन नही है तो..."

"अब बकेगा भी."

"हां चल लिख...99"
"99.."
"99..."
"9999..."नंबर लिखने के साथ-साथ ही वो लड़का धीमी आवाज़ मे नंबर रिपीट भी कर रहा था.
"फिर 99..."
"999999"
"चार बार फिर 9"
"चार बार फिर 9,....9999999999"लिखने के बाद जब उस लड़के ने सौरभ के बताए नंबर पर गौर किया तो उसका भेजा ठनका और वो गुस्से से खड़ा हो गया"बीसी, चोदु समझ रखा है "

"नीचे बैठ बोसे ड्के..."एक तमाचा उसके गाल पर जड़ते हुए सौरभ ने कहा और उसी वक़्त हम सबने वहाँ अपनी एंट्री मारी...जिसके बाद वो लड़का पहले वाले लड़के की तरह चुप-चाप बैठ गया और हम लोग आगे बढ़ गये ,अपने नये शिकार की तालश मे....
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"राजश्री अब जा ,तेरी बारी..."

एक बार फिर हम लोग रुक गये और जिसे शिकार करना था,उसे आगे भेज दिया...राजश्री आगे जाकर एक कपल के पास रुक गया...

"कोई दिक्कत है क्या..."जिस कपल के सामने अपने पांडे जी खड़े थे, उसमे से लड़के ने आँखे बड़ी करके भारी आवाज़ मे पुछा...

जिसके जवाब ने अपने पांडे जी ने सबसे पहले राजश्री का पाउच फाडा और मुँह मे डालकर राजश्री के दानो को चबाते हुए बोले"यहाँ राजश्री का रेट क्या चल रहा है..."

"ओये भिखारी जाता है यहाँ से या दूं दो हाथ..."

"सुन बे लोडू, लड़की के साथ है तो ज़्यादा उचक मत,वरना गुटखे की पीक सीधे तेरे मुँह पर मारूँगा...सॉरी बोल"

"तू ऐसे नही मानेगा..."बोलते हुए वो लड़का हुआ ही था कि अरुण दौड़कर वहाँ पहुचा और उस लौन्डे को एक हाथ जमा दिया...

"तेरी माँ की ...."वो लड़का ज़ोर से चिल्लाया

"चुप चाप बैठ म्सी.."एक झापड़ राजश्री ने तन कर उस लड़के से कहा..

वो लड़का थोड़ा फटतू किसम का था,इसलिए जब उसे दो थप्पड़ पड़े तो उसने रोना शुरू कर दिया, जिसके बाद हम सबने उसे सॉरी कहा और आगे बढ़ गये....
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"अब मेरी बारी..."वहाँ से बहुत आगे आकर मैने कहा.

मेरी नज़र एक ऐसे कपल पर पड़ी थी जो कि आपस मे एक दम से घुले-मिले हुए थे..बोले तो दोनो स्मूचिंग कर रहे थे . मैने एक लंबी साँस ली और उनके पास जाकर लड़के के सर के बाल को पकड़ कर उसका सर ज़ोर से कयि राउंड घुमा दिया...

"साले तेरा पता चल ही गया ना, तू ही है वो...जो मेरी बहन के साथ इश्क़ फरमाता है, बकल..."बोलते हुए मैने एक बार फिर उस लड़के के बालो को पकड़ा और खीचते हुए कयि राउंड घुमा दिया....

अब तक हम लोगो ने जितने भी कपल्स को परेशान किया था ,उनमे से सबने ने हमारे साथ बहस की थी...लेकिन ये लड़का कुच्छ नही बोल रहा था उल्टा मुझे सॉरी बोल रहा था.लड़के की ये हालत देख कर मैने उसे एक-दो मुक्का और मारा और लौंडिया की तरफ देखकर कहा"बहना तू आज घर चल...तेरी खबर तो मैं अच्छे से लूँगा..."बोलते हुए मैं वापस पीछे पलटा और अपने दोस्तो की तरफ आने लगा...

हँसी तो मुझे इस वक़्त इतनी आ रही थी कि अपना पेट पकड़ कर हँसने का मन कर रहा था, लेकिन मैने खुद पर कंट्रोल करके रखा हुआ था.

वो लड़का जहाँ डर के मारे शांत बैठा था वही उसकी आइटम इस कन्फ्यूषन मे थी कि "उसका ये भाई कहाँ से पैदा हो गया..."
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"जानू, तुम ठीक तो हो ना..."उस लड़की ने अपने लूटे-पिटे बाय्फ्रेंड से कहा"ये मेरा भाई नही है..."

"क्या..."दुनिया भर की नफ़रत लिए वो लड़का एक दम से खड़ा हुआ,लेकिन हम लोग तो वहाँ से कब के खिसक चुके थे.
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पुल से नीचे उतर कर हम लोग एक जगह खड़े हुए और अपना पेट पकड़ कर हँसने लगे....राजश्री पांडे की हँसी इतनी भयंकर थी कि उससे ज़मीन मे खड़ा नही हुआ जा रहा था, वो बार -बार हँसते हुए गिरने लगता...

"क्या मारा है उन सालो को,साले सात जनम तक याद रखेंगे..."

"अब सब चुप हो जाओ...वो देखो दूसरे कॉलेज की लड़कियो का ग्रूप आ रहा है..."राजश्री के पिछवाड़े मे एक लात मारते हुए मैने कहा....

"पहले मैं इस पर ट्राइ करूँगा..."

"नही पहले मैं..."

"अबे तू तो चोदु दिखता है, पहले मैं..."

"नही पहले मैं..."

उन सबकी भीनभीनाहट से जब मैं तंग आ गया तो मैने ज़ोर से चीखकर उन सबको पहले शांत कराया और फिर बोला"ये मक्खियो की तरह ,क्यूँ भीनभीना रहे हो बे और ये क्या लगा रखा है...पहले मैं ,पहले मैं...ये कोई फिल्म है क्या जो हीरो के दोस्त किसी हॉट लड़की पर शुरू-शुरू मे डोरे डालेंगे और फिर थप्पड़ खाकर वापस आएँगे..."बोलकर मैं थोड़ी देर के लिए रुका और अपने कॉलर ,शर्ट और पैंट को ठीक करने के बाद बोला"ये रियल लाइफ है,इसलिए डाइरेक्ट हीरो ,अपनी हेरोयिन से फ्लर्ट करेगा...सुलभ गॉगल देना तो मेरा."

"गर्ल्स वित ब्यूटी डॉन'ट हॅव दा ब्रेन..."

ऐसा मेरा मानना था ,लेकिन उन कॅंप के तीन दिनो मे मैं एक ऐसी लड़की से मिला जिसने उपर लिखी गयी लिखावट और मुझे एक झटके मे ग़लत साबित कर दिया.

मैं आज तक ये मानते आया था कि इस पूरी दुनिया मे मुझ जैसा मैं अकेला ही हूँ, इसलिए उस समय अट्मॉस्फियर मे रोमांच के पार्टिकल अपने आप घुल मिल गये,जब मैने अपने जैसे ही दूसरे को देखा. ये रोमांच तब और बढ़ गया जब मुझे मालूम चला कि वो दूसरे कॉलेज की है लेकिन ये रोमांच सबसे ज़्यादा उसके एक लड़की होने पर बढ़ा था.उन दिनो मैं एक ऐसी लड़की से मिला जिसने काई बार मुझे पीछे छोड़ दिया और मैं ये सोचने पर मजबूर हो गया कि एक लड़की के पास इतना दिमाग़ कैसे आ गया,जो मेरे 1400 ग्राम के ब्रेन का मुक़ाबला कर सके....
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राजश्री के हाथ से मैने अपना गॉगल लिया और आँखो मे सजाकर उन लड़कियो की तरफ बढ़ा ,जो हमारी तरफ ही आ रही थी. वो तीन थी लेकिन देखने लायक सिर्फ़ एक ही थी,जो कि बाकी दो लड़कियो के बीच मे चल रही थी....उनकी तरफ आगे बढ़ते हुए मैने गौर किया की वो तीनो लड़किया अपने ही आप मे मस्त थी, उन्हे आस-पास की बिल्कुल भी परवाह नही थी कि उनके आस-पास क्या हो रहा है, वो तो हँसते हुए, एक दूसरे का मज़ाक बनाते हुए बस आगे बढ़ रही थी....
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"ये तो दूसरे कॉलेज की लगती है..."अंदाज़ा लगते हुए मैने सोचा"साला एक इनका वॉर्डन है जो इन सबको अभी तक घूमने की पर्मिशन दे रहा है और एक साला अपना वॉर्डन है जो खुद को हिट्लर की औलाद समझता है...."

उन लड़कियो की तरफ आगे बढ़ते हुए मैं सोचने लगा कि उनसे मैं क्या बात करूँगा और तभी मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरे पीछे कोई है...मैने पीछे मुड़कर देखा तो मेरे दोस्त भी धीमी-धीमी चाल मे आगे बढ़ रहे थे.
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08-18-2019, 02:07 PM,
#99
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
"तुम लोग दफ़ा हो जाओ, वरना वॉर्डन से चुदवा दूँगा...."

"तू साले अपना मुँह बंद रख अरमान,नही तो लवडा फेक कर मारूँगा...बोसे ड्के,चोदु समझ रखा है क्या..."अरुण मेरे पास आया और मेरी आँखो मे आँखे डालकर बोला.

"क्या तुझे मुझसे डर नही लगता..."

"नही.."

"फिर ठीक है, तुम सब भी उसपर ट्राइ करना...लेकिन पहले मुझे जाने दो..."

"ह्म..अब आया ना लाइन पर..जा पहले तू ट्राइ मारकर आ ,हम लोग पीछे जाते है..."
.
"अच्छा हुआ गये साले...कुत्ते कही के."उन सबको पीछे जाता हुआ देख मैं बड़बड़ाया और आगे से आ रही तीन लड़कियो के ठीक सामने जागार उनका रास्ता रोक लिया....
.
"एनी प्राब्लम..."बीच वाली ने मुझे देखकर कहा.

" दिस टाइम, देयर आर ओन्ली थ्री प्रॉब्लम्स.."अंग्री यंग मॅन का रूप धारण करते हुए मैं आंजेलीना(बीच वाली) के लेफ्ट साइड मे खड़ी लड़की को देखकर कहा"फर्स्ट प्राब्लम ईज़ यू"फिर आंजेलीना के राइट साइड मे खड़ी लड़की को देखकर कहा"सेकेंड ईज़ यू"और सबसे आख़िरी मे मैने आंजेलीना की तरफ देखा और गॉगल के अंदर से ही उसकी आँखो मे आँखे डालकर बोला"आंड थर्ड ईज़ यू..."

"आंड हू आर यू..."आंजेलीना थोड़ा झल्लाते हुए बोली.

"मैं अरमान और मैं इस जगह का मॅनेजर हूँ,बोले तो इस जगह का अरेंज्मेंट मैं ही देखता हूँ..."

"तो, इसका मतलब ये नही कि..."

"इस समय मतलब ना तो इसका है और ना ही उसका..."आंजेलीना को बात को बीच मे ही काटकर मैने कहा"मतलब इसका है कि अभी मतलब किसका है , आइ होप कि तुम लोगो को सब समझ आ गया होगा "

"तो हम लोग आगे जाए..."मेरे इतने भारी भरकम डाइलॉग को पूरी तरह से इग्नोर करते हुए आंजेलीना बोली.

"तुम लोग आगे नही जा सकते..."

"क्यूँ...आगे कोई धमाका होने वाला है क्या..."

"धमाका तो नही होने वाला,लेकिन यदि तुम आगे जाओगी तो बहुत बड़े-बड़े धमाके होंगे..."थोड़ा सा मुस्कुराते हुए मैने कहा..."आक्च्युयली ,हमारे रूल्स के अनुसार कॅमपिंग के लिए आए कॉलेज के स्टूडेंट्स को शाम के 6 बजे के बाद डॅम के आस-पास भटकने की कोई अनुमति नही है, इसलिए बेहतर यही होगा कि तुम लोग वापस अपने कॅंप मे जाओ..."
.
मेरी धमकी सुनकर आंजेलीना के अगल-बगल खड़ी लड़कियो ने तुरंत अपना सड़ा सा मुँह बना लिया और मुझे समझते देर नही लगी कि वो दोनो अंदर ही अंदर मुझे गालियाँ दे रही थी.आंजेलीना इस वक़्त शांत खड़ी होकर कुच्छ सोच रही थी .
"तुम्हारा नाम क्या है..."उसकी सोच मे रुकावट डालते हुए मैने उससे पुछा...
"आंजेलीना..."
"जौली "उसका आगे का नाम जानकार पीछे का नाम मैने अपने से फिट कर दिया....

"जौली नही सिल्वा...आंजेलीना सिल्वा "इसके बाद उसने अपने कॉलेज का नाम बताया जिसके बाद मुझे मालूम चला कि वो उस समय म्बबस की पढ़ाई कर रही थी...उसकी खूबसूरती का तो मैं उसे देखते ही कायल हो गया था और अब जब मुझे पता चला कि वो म्बबस की स्टूडेंट है तो उसका लेवेल मेरे लिए थोड़ा और बढ़ गया....
.
"तुम्हारा नाम अरमान है क्या...."आंजेलीना ने अपनी फिंगर मुझ पर पॉइंट आउट करते हुए कहा.

"ओह तेरी "उसके मुँह से अपना करेक्ट नाम सुनकर एक पल के लिए मेरे मुँह के साथ-साथ मेरा सब कुच्छ फट गया....

मेरी हालत इस वक़्त ऐसी थी जैसे कि किसी ने मुझे बगल मे बह रही नदी मे डुबो-डुबो कर खूब पिटा हो....मैने अपना गॉगल उतारा ,जो मेरे हाथ से फिसल कर ज़मीन पर गिर गया. मैं आंजेलीना को बहुत देर तक देखता रहा और उसे पहचानने की कोशिश करने लगा..

"नही..इसको तो आज से पहले कही नही देखा...फिर ये अपुन का नाम कैसे जानती है..."

बहुत सोचने के बाद भी जब मुझे कही से आंजेलीना के बारे मे कोई क्लू नही मिला तो मैने आंजेलीना से ही पुछा कि उसे मेरा नाम कैसे मालूम चला....
.
"मेरी बात सुनकर तुम्हे थोड़ा अजीब लगेगा...शायद ये भी हो कि तुम्हे मुझपर यकीन ना आए..."

" ये पज़्ज़ील-पज़्ज़ील का गेम खेलना बंद करो और सब कुच्छ बताओ..."

"सबसे पहले मैं तुम्हे ये बताना चाहूँगी कि तुम मॅनेजर बिल्कुल नही दिखते और ना ही तुम किसी मॅनेजर के उम्र के हो और दूसरी बात ये कि मैं ऑलरेडी उस शक्स को जानती हूँ ,जो यहाँ सभी अरेंज्मेंट की देख रेख करता है "आंजेलीना ने मुझ पर पहला बॉम्ब फोड़ा और फिर आगे बोली"जब हम तीनो अपने कॅंप से आ रहे थे तो सामने दूसरे कॉलेज का ग्रूप,जो कि अभी कुच्छ देर पहले ही यहाँ आया है,उनके कॅंप के बाहर अच्छी ख़ासी भीड़ थी...हम तीनो उस भीड़ से थोड़ी दूर ,कुच्छ देर के लिए खड़े रहे जिससे हमे ये मालूम चला कि कुच्छ लड़के अपने कॅंप से मिस्सिंग है और तभी तुम्हारे केर्टेकर ने एक नाम गुस्से से लिया'अरमान, उसकी तो मैं आज जान ले लूँगा...' "

"थॅंक्स फॉर दा इन्फर्मेशन...लेकिन मैं अभी तक ये नही समझा कि ,मैं ही अरमान हूँ,तुम्हे ये कैसे मालूम हुआ..."

मेरे इस सवाल पर वो थोड़ा मुस्कुराइ और बोली"हम लोग यहाँ दो दिन पहले से है,इसलिए हमे मालूम है कि कौन किस वक़्त कहाँ होता है और जिस जगह तुम खड़े हो या फिर ये कहे कि जिस जगह हम चारो और तुम्हारे पीछे तुम्हारे दोस्त खड़े है, वहाँ दिन के समय भी कोई नही आता सिवाय उन स्टूडेंट्स के जिनके कॅंप उपर लगे हुए है...तो फिर भला रात मे कौन आएगा....मेरे कॉलेज के तो तुम हो नही तो बचा दूसरा कॉलेज और उनके इस वक़्त कॅंप से मिस्सिंग लड़को का ग्रूप...सो अंदाज़ा लगाना मुश्किल नही हुआ ,दूसरे शब्दो मे कहे तो मैने अंधेरे मे दिए की रोशनी मे एक तीर चलाया जो एक दम सही निशाने पर जाकर लगा..."

"क्या कयामत है यार,साली ने तो भेजा घुमा कर रख दिया..."लूटा-पिटा सा मैं आंजेलीना को देखता रहा ,सिर्फ़ देखता रहा क्यूंकी कहने के लिए मेरे पास इस समय कुच्छ नही था.
.
"मैं समझ सकती हूँ तुम्हारी हालत.."अपने होंठो पर हल्की सी स्माइल लाते हुए वो बोली"अक्सर मेरे फॅक्ट्स सुनकर लोगो का सर चकरा जाता है,.."

"मुझे यकीन हो गया,क्यूंकी अक्सर मैं भी ऐसा ही कुच्छ एक्सपेरिमेंट करता रहता हूँ..."

"सर दर्द की दवाई खा लेना,वरना ब्रेन डॅमेज हो सकता है..."मेरा मज़ाक उड़ाते हुए वो वहाँ से आगे जाने लगी और बोली"गुडबाइ मॅनेजर..."

"तू बाद मे मिल मुझे,फिर तुझे मैं अपने 1400 ग्राम के ब्रेन की पॉवर दिखाता हूँ, साली को....."बोलते हुए मैं बीच मे रुक गया...

पता नही क्यूँ पर मेरा दिल नही किया कि मैं उस लड़की को गाली दूं...
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08-18-2019, 02:08 PM,
RE: Desi Sex Kahani दिल दोस्ती और दारू
उन तीनो के वहाँ से आगे बढ़ने के बाद मैने अपने दोस्तो को पुकारा,लेकिन सालो के कान मे तो जैसे किसी ने लंड डाल दिया था,उनमे से किसी ने भी मुझे कोई रेस्पोन्स नही दिया...

"अबे कुत्तो, जल्दी चलो...वरना वॉर्डन हमे ठोक-ठोक कर बहाल कर देगा..."

"क्या..."वो सब एक साथ चीखे और दौड़ते हुए मेरे पास आए....
.
"क्या बात की तूने उस फुलझड़ी से,.."

"कुच्छ नही..."

"अरे कुच्छ तो किया होगा..."उपर पहाड़ी पर चढ़ते हुए सौरभ ने मुझे धक्का देकर पुछा...

"कहा ना कुच्छ नही किया मैने..."

"तो फिर उसने कुच्छ किया होगा, क्यूँ अरमान भाई..."सौरभ की नकल करते हुए राजश्री पांडे ने भी मुझे धक्का दिया, जिससे मैं उपर चढ़ते हुए गिरने से बाल-बाल बचा...

एक तो वैसे भी आंजेलीना ने पूरे दिमाग़ के अंजर-पंजर ढीले कर दिए थे उपर से अब ये...

"वो छोड़ के गयी है मुझको...."बोलते हुए मैने एक जोरदार मुक्का राजश्री पांडे की पीठ मे जड़ दिया

कॅंप के नज़दीक आने तक हम सबकी दिल की धड़कने बढ़ चुकी थी क्यूंकी हम सब जानते थे कि अब हमारा वॉर्डन सबके सामने हमारी इज़्ज़त उतारेगा..लेकिन जब हम लोग अपने कॅंप्स के नज़दीक गये तो वहाँ कोई भीड़-भाड़ नही थी, वहाँ का नज़ारा पहले जैसे ही था...मतलब कि सभी लड़के अपने कॅंप मे और वॉर्डन ,उन दो गाइडेन्स के साथ अपने कॅंप मे.....

"लगता है कि अब सबके सामने हमारी बेज़्जती नही होगी...चियर्स लवडो..."

"तुझे कैसे पता..."

"क्यूंकी अब हम सब चुप चाप वॉर्डन के कॅंप मे जाएँगे और सॉरी बोल देंगे...जिसके बाद वो हमे उन दो गाइडेन्स के सामने गाली बकेगा और फिर वॉर्निंग देकर छोड़ देगा..."

"तुझे कैसे पता कि सब कुच्छ ऐसा ही होगा..."अरुण ने पुछा...

"मुझे ये सब इसलिए पता है,क्यूंकी..."अरुण के कंधे पर हाथ रखकर मैं बोला"क्यूंकी मैं ये सब स्कूल के दिनो मे भी कर चुका हूँ....वो भी एक बार नही कयि बार."

"मेरे पास एक प्लान है..."सौरभ ने मेरा हाथ अरुण के कंधे से हटाया और हम दोनो के बीच मे घुसकर बोला"यदि ऐसा ही है तो फिर सबको वॉर्डन के कॅंप मे सॉरी बोलने के लिए जाने की ज़रूरत नही..."

"आगे बोल..."

"बोले तो ,तू और राजश्री पांडे चले जाओ..."

"एडा समझ रखा है..."सौरभ को पीछे धकेल कर मैने कहा...

"सही तो बोल रहा है ,सौरभ..."अरुण बोला"तुम दोनो जाकर वॉर्डन को सॉरी बोलना और हमारे हिस्से की गाली खाकर आ जाना,फालतू मे सब गाली खाएँगे"

"तो फिर...तू और राजश्री चल दे या सौरभ को भेज दे.. "अरुण को भी पीछे धकेलते हुए मैने कहा....

"अबे तूने ही तो अभी कहा कि तू ये सब पहले भी कर चुका है,वो भी एक बार नही बल्कि बार-बार...इसलिए तुझे भेज रहे है क्यूंकी तू एक्सपीरियेन्स वाला आदमी है..."मेरे करीब आते हुए सुलभ ने कहा ,लेकिन मैं जब उन सबकी बात मानने से मना कर दिया तो अरुण पीछे से मेरे कान मे फुसफुसाया....

"यदि कोई प्राब्लम हो तो राजश्री को फँसा देना...इसीलिए तो उसे तेरे साथ भेज रहे है..."

"बदले मे मुझे क्या मिलेगा..."

"हम सबकी ढेर सारी दुआ और बहुत सारा प्यार..."

"गान्ड मे डाल ले अपना प्यार...मैं ये सब एक ही शर्त पर करूँगा..."चालाकी भरी मुस्कान के साथ मैने कहा"तू मुझे वो 100 वापस कर,जो बस मे तूने मुझसे वापस ले लिए थे...."

"चल बे, तुझे मैं 100 क्या 100 पैसे भी नही दूँगा..."

"फिर मैं भी नही जा रहा वॉर्डन के पास..."अरुण का रुबाब देखकर मैने भी अपने हाथ खड़े कर दिए.
.
मेरे ज़िद ने अरुण,सौरभ और सुलभ को गहरी चिंता मे डाल दिया था....क्यूंकी एक तरफ अरुण 100 देने मे आना-कानी कर रहा था तो वही दूसरी तरफ सब ये चाहते थे कि मैं ही वॉर्डन के पास जाउ...5 मिनिट तक उन तीनो मे कुच्छ डिस्कशन हुआ...जिसके बाद अरुण ने अपने पर्स से सौ की एक हरी पत्ती मुझे थमा दी.

जब ये मसला ठिकाने लगा तो अब राजश्री पांडे ने रोना शुरू कर दिया कि वो मेरे साथ वॉर्डन के पास नही जाएगा लेकिन उसे मनाने मे मुझे बहुत ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ी...मैने उसे ,उसका सीनियर होने के नाते बहुत सारी धमकिया दी...जिसके बाद ना चाहते हुए भी पांडे जी को हमारी बात माननी पड़ी.उसके बाद वहाँ से अरुण, सुलभ,सौरभ अपने कॅंप की तरफ गये और राजश्री पांडे मेरे साथ वॉर्डन के कॅंप की तरफ....
.
"सर ,मे आइ कम इन..."

"आओ अरमान...अभी मैं तुम्हारे ही बारे मे सोच रहा था..."

वॉर्डन की अनुमति मिलने के बाद हम दोनो अंदर घुसे. वॉर्डन के साथ इस वक़्त तीन लोग थे.दो को तो मैं जानता था ,जो हमारे गाइडेन्स थे..लेकिन तीसरे वाले को मैं पहली बार देख रहा था, खैर ये वक़्त इस समय उस तीसरे वाले के बारे मे ना सोचकर अपने बारे मे सोचने का था लेकिन मैं अंदर आकर वॉर्डन को सॉरी बोलता या अपनी फेंक स्टोरी उन्हे सुनाता कि हम लोग बाहर क्यूँ गये थे...इसके पहले ही वॉर्डन बोल पड़ा....

"अरमान,ये है मेरे बचपन का दोस्त बलराम...तुम यकीन नही करोगे कि हम लोग 12थ तक एक साथ ही पढ़ते थे.."चाय का प्याला सामने ज़मीन पर रखने के बाद ,कुच्छ सोचते हुए वॉर्डन ने कहा"18 साल बाद हम दोनो आज फिर मिले वो भी बड़े अजीब तरीके से और आज मैं बहुत खुश हूँ..."

"लवडा बहुत खुश नज़र आ रहा है, यही बढ़िया मौका है कि इसके सामने अपनी ग़लती स्वीकार कर लूँ..."मैने मन मे सोचा...
.
"अरमान ,आज मेरे दोस्त बलराम ने एक बड़ा ही बढ़िया सुझाव दिया है...बलराम जो कि हमारे साइड मे लगे दूसरे कॉलेज के कॅंप का केर्टेकर है...उसने कहा है कि एक रात दोनो कॉलेज मिलकर ग्रूप डिस्कशन का प्रोग्राम रखते है..."

"ग्रूप डिस्कशन नही , डिबेट..."बलराम बीच मे बोला"और टॉपिक रहेगा इंजिनीयर्स वी/एस डॉक्टर्स..."

"बढ़िया आइडिया है..."मुझे उनके उस डिबेट कॉंपिटेशन मे कोई इंटेरेस्ट नही था,लेकिन फिर भी मैने इंटेरेस्ट के साथ कहा.

"तुम यहाँ क्यूँ आए थे, कुच्छ काम था क्या..."वॉर्डन ने मुझसे पुछा..जिसके बाद मैं थोड़ा चौका...

मैं कुच्छ देर और वहाँ रहा और इधर-उधर की बाते करते हुए वॉर्डन से वो सब जानने लगा कि मेरे कॅंप से गायब होने के बाद यहाँ क्या-क्या हुआ था..लेकिन मेरा सर उस वक़्त जोरो से घूमा जब मुझे बातो ही बातो मे ये पता चला कि वॉर्डन पिछले एक घंटे से म्बबस कॉलेज के केर्टेकर के साथ बैठा गप्पे लड़ा रहा था और फिर जब वॉर्डन ने मुझे, मेरी उस करतूत के लिए कुच्छ नही कहा तो कुच्छ-कुच्छ बाते मेरे दिमाग़ मे घुसना शुरू हो गयी...जैसे कि वॉर्डन को ये मालूम तक नही था कि मैं कुच्छ देर पहले अपने दोस्तो के साथ यहाँ से नीचे डॅम की तरफ गया था....
.
मैं ,राजश्री पांडे के साथ तुरंत वहाँ से निकला और कुच्छ लड़को के कॅंप मे जाकर पुछा कि क्या उन सबकी ,वॉर्डन के साथ मीटिंग हुई थी या किसी को भी हमारे कॅंप से गायब होने की खबर थी और जो जवाब उन लड़को ने दिया उसे सुनकर मैं डबल शॉक्ड हुआ...उन लड़को ने मुझसे कहा कि...ना तो कोई मीटिंग हुई थी और ना ही किसी को पता था कि मैं यहाँ से गायब था.....
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"अरमान भाई..क्या हुआ..."

"कुच्छ नही ,एक तो साला पहले से ही सपने मे आकर दिमाग़ को चोदता था और अब ये दूसरी रियल मे दिमाग़ को चोद रही है...साले दोनो के दोनो भूत है,उपर से नेटवर्क प्राब्लम की वजह से गूगल महाराज भी मेरे साथ नही है..."
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वो लड़की ,जो अपने दो दोस्तो के साथ मुझे पहाड़ी के नीचे मिली थी...उसने मुझे कहा था की मेरे कॉलेज वाले मुझे ढूँढ रहे है और वहाँ से गुज़रते वक़्त उसने मेरा नाम,मेरे वॉर्डन के मुँह से सुना और फिर घनघोर अंधेरे मे एक दिए की रोशनी मे उसने अंधेरे मे तीर चलाया था ,जो कि एक दम फिट बैठा....लेकिन यहाँ आकर मुझे मालूम चला कि उसकी कोई भी बात सच नही थी.ना तो किसी को मेरे गायब होने की खबर थी और ना ही उसने मेरा नाम हमारे वॉर्डन के मुँह से सुना था, तो अब मेरे सामने सवाल ये था कि 'फिर उसे मेरा नाम कैसे मालूम चला, साली कोई भूत तो नही थी...'
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यही सब सोचते हुए मैं अपने कॅंप के अंदर घुसा.रास्ते मे मैने राजश्री पांडे को समझा दिया था कि यदि सुलभ,सौरभ और अरुण मे से कोई ये पुच्छे कि 'वॉर्डन ने क्या कहा' तो उसे बोलना है 'वॉर्डन ने बहुत गाली बकी '
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