Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
07-16-2019, 11:56 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
देखो अब शरमाओ मत प्ल्ज़्ज़ अगर तुम शरमाओगी तो मुझे आगे बढ़ने मे दिक्कत होगी,,,मैने
मस्ती मे इतना बोला तो तो कविता ने मेरे हाथों को छोड़ दिया ऑर अपनी रज़ामंदी दे दी,,,

मैने उसकी चूत की तरफ देखा ऑर अपने लंड को पकड़ कर चूत मे घुसाने लगा लेकिन तभी चूत
से निकलने वाला पानी नज़र आया मुझे जिसको देखकर मेरे मूह मे भी पानी आ गया,,,मैने जल्दी
से उसकी टाँगो की उसके सर की तरफ मोड़ दिया ऑर उसके हाथों मे उसकी टाँगों को पकड़ा दिया ऑर
खुद जल्दी से उसकी चूत की तरफ चला गया,,,उसने भी समझ लिया कि अब क्या होने वाला है इसलिए उसने
अपनी टाँगों को थोड़ा ऑर पीछे किया जिस से उसकी चूत उपर की तरफ उठके मेरे सामने आ गयी ऑर
मैने बिना कोई देर किए अपने होंठों को उसकी चूत पर रख दिया,,,जीन्स उसकी चूत से थोड़ी सी ही
नीचे उतरी थी जिस वजह से उसकी टाँगें ज़्यादा खुल नही पा रही थी ऑर उसकी चूत मुझे बहुत ज़्यादा
टाइट लगने लगी थी,,,,चूत एक दम गोरी थी ऑर उसकी चूत के बीच मे एक रेड कलर की लाइन थी जिस
से पता चल रहा था कि उसकी चूत के लिप्स हल्के से दोनो तरफ खुल गये थे ऑर उसकी चूत का अंदर
का हिस्सा मुझे नज़र आने लगा था,,,मैने उसकी चूत पर अपना मूह रखा ऑर उसकी चूत की उसी लाइन
मे अपनी ज़ुबान डालके चाटने लगा,,,,मैने अपने हाथों से उसकी गान्ड को पकड़ा ऑर हल्का उपर
उठा दिया ऑर चूत को पूरा का पूरा मूह मे भर लिया ऑर चूसने लगा,,मेरी ज़ुबान उसकी चूत की
लाइन से उसकी चूत के अंदर घुसने लगी ऑर मैं उसकी चूत को अपनी ज़ुबान से चोदना शुरू कर दिया
ऐसा करते ही मुझे एक खट्टा खट्टा स्वाद आने लगा,,,जो मुझे बहुत मस्त करने लगा ऑर वैसी भी
खट्टी-खट्टी गंध भी आ रही थी उसकी चूत से,,जो मुझे बहुत ज़्यादा अच्छी लग रही थी,,मैं उसकी
चूत को सूँघता हुआ उसकी चूत को चाट-ता हुआ उसकी चूत को अपनी ज़ुबान से चोदने मे लगा हुआ
था,,,,,




तभी मैने अपने सर को उपर किया और कविता के चेहरे की तरफ देखा,,उसने शरमा कर चहरे को
दूसरी तरफ कर लिया लेकिन मस्ती मे हल्की हल्की सिसकियाँ लेती रही,,,,


प्लज़्ज़्ज़ कविता अब शरमाओ नही,,,,,अब हम दोनो मे कुछ नही रह गया जिस से तुमको शरमाना पड़े
मुझसे,,,,,मेरा साथ दो प्लज़्ज़्ज़ मुझे आगे बढ़ने मे हेल्प करो,,,,तभी मुझे मज़ा आएगा,,,,प्लज़्ज़्ज़्ज़
कविता,,,,

मैने इतना बोला और वापिस उसकी चूत को मुँह मे भर लिया,,,मेरे ऐसे करते ही उसकी सिसकियाँ तेज हो
गयी और कुछ पल बाद उसके मुँह से अल्फ़ाज़ निकले,,,,,,अहह सुउउन्न्ञन्नयी ऊउरर्र्ररर जूऊर्र
ससी छ्चातटूऊ ईसस्क्क्कूव आहह ज्जुउुबांन्णणन् उउन्न्ञददीर्ररर टाककक ग्घहूऊसा दूओ आहह
उऊहह हमम्म्ममममममममममममम हहययययईईईई

काहहन्न ग्घूउसा दूऊन्न अपपनन्ी ज्जुउबांन्न क्कूव, बूलूओ क्काव्वीित्ताअ,,ब्बूल्लू
प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़

वो शरमाने लगी,,,,,,नही शरमाओ नही प्लज़्ज़्ज़ बोलो ना,,कहाँ घुसा दूं अपनी ज़ुबान को,,,बोलो
कविता प्लज़्ज़्ज़्ज़ शरमाओ नही,,,,,वरना मैं पीछे हट जाउन्गा,,,,,,,,,,

न्ह्हीइ न्ह्ही सुन्नयी ऐसाआ ज्जुउल्लाम्म मात्त काररन्ना पीcछीए म्मात्त हून्ना म्मैंन्णणन्
मार जौउउन्नगगीइइ,,,,,भूत्त् आच्छा लाग र्रहहा हहाीइ म्मूुझहहीए,,,ईट्त्न्नाअ माज्जाअ द्दईक़्की
अब प्पीcछीए म्मात्ट हहूनना मीर्ररिइ जाअंन्न नीकककाअल्ल जाआयईईगगगीइइइ


तो बोलो ना ,,,मज़ा आ रहा है,,,,बोलो कुछ तो बोलो,,,,

हहानं सयन्नीयी भ्हुत्त म्मज्जा आ र्रहहा हहाइी अब प्पीच्छी मात्त हाट्थन्ना और्र मसत्तिीई
सी च्चातटू मीररीई ,,,,,,,,चूतततटटटटटटटतत्त कककूऊऊओ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्नितन बोलके
'उसने शर्माके चहरे दूसरी तरफ मोड़ लिया,,,,

मैं उसकी इस हरकत से खुश हो गया और फिर से चूत को चाटने लगा,,,,,और तभी कुछ देर बाद
उसकी आवाज़ आई मुझे,,,,,,,,,,,,,,,हहाआंणन्न् सुउन्न्नयी एआईसीए हहीी छ्चातटूऊ ऊउरर उउन्न्ड़दर्र्र
त्टाककक घहूउसाआ द्दूव अपपननीी ज्जुउबांन क्कू मीरीइ छ्छूटतत मईए ,,,,पुउर्रिि उउन्नड़दीर्र
ग्घूउसाआ दूओ सुउन्नयी और्र खा जाऊ मेरिइई इश्स नाम्मकींन चूत कूऊव,,,और्र प्याररर
ससीई च्छुउसूऊ सुउन्नयययययी आहह उउउउउउउउउउउउह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह


वो खुलकर पेश आने लगी और मैं भी खुलकर मस्ती करने लगा और उसकी चूत को चाटने लगा लेकिन
जब भी मैं उसकी तरफ देखता वो शरमा जाती और चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेती लेकिन उसकी सिसकियाँ
बंद नही होती और वो बोलती जाती,,,,,,,,,अहह ऊौरर्र चूसो सुउन्नयी मीरीइ
चहूऊवटतत हहाआन्न सुउउन्न्ञन्नयी आईसीई हहिि पुउर्रीई ज्जुउब्बांन घहूउसाआ द्डूऊ
उउन्न्ञददीर त्ताक्क्क्क आहह


जितनी मस्ती मे वो सिसकियाँ ले रही थी उतनी ही मस्ती मे मैं उसकी चूत को चाट रहा था तभी चोट
से बहता हुआ थूक और उसकी चूत से निकला हुआ पानी उसकी गान्ड की तरफ बहने लगा और मेरा ध्यान
उसी गान्ड के सुराख की तरफ चला गया और मैने जल्दी से अपनी ज़ुबान को उसकी गान्ड के सुराख पर
रखा और गान्ड के सुराख को चाटने लगा,,,मेरे ऐसा करते ही उसकी सिसकियाँ बंद हो गयी वो अपने
सर को उठकर मेरी तरफ देखने लगी,,,तभी मैने उसकी तरफ देखा तो वो कुछ परेशान लग रही थी
उसको समझ नही आया मैं ऐसा क्यूँ कर रहा हूँ इसलिए मैं वापिस उसकी चूत को चाटना शुरू कर
दिया जिस से वो वापिस आराम से सर को घास पर रखकर लेट गयी और फिर से उसकी सिसकियाँ शुरू हो गयी
तभी मैने अपनी एक उंगली को मुँह मे भरके थूक लगा दिया और फिर थोड़ा थूक उसकी गान्ड पर
थूक दिया और उसकी चूत को चाटने लगा और उंगली से उसकी गान्ड के सुराख को सहलाने लगा लेकिन
ज़्यादा देर तक नही ,,,,,कुछ देर बाद मैने अपनी उंगली को उसकी गान्ड मे घुसा दिया लेकिन उसको दर्द
नही हुआ,,,,अब एक उंगली से क्या दर्द होने लगा गान्ड मे,,,,
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07-16-2019, 11:56 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
वो आराम से लेटी हुई सिसकियाँ लेने लगी और मैं चूत को चाट-ता हुआ उसकी गान्ड मे उंगली करने लगा
,,मैने सोचा कि एक उंगली और घुसा देता हूँ गान्ड मे लेकिन मैने सोचा कि इसको अभी इतना मज़ा
नही आ रहा होगा इसलिए अभी गान्ड मे 2 उंगली डालना ठीक नही होगा इसलिए मैं उसकी चूत को
चाटने मे लगा रहा और 1 उंगली से गान्ड को चोदता रहा,,,,


कुछ देर बाद ही उसकी सिसकियाँ तेज होने लगी और उसकी चूत ने पानी बहाना शुरू कर दिया जब तक
उसकी चूत पानी बहाती रही मैने चूत से अपने मुँह को दूर नही किया और उसकी चूत का पानी पीता
गया और जब चूत से पानी बहना बंद हो गया तब भी मैं चूत को चूमता और चाट-ता रहा,,उसकी
सिसकियाँ बंद नही हुई वो भी लगातार सिसकियाँ लेती रही,,,,शायद वो फिर से वापिस मस्ती मे आ गयी
थी और मैं भी यही चाहता था,,,,,मैं उसकी चूत को चाटने मे लगा रहा और 1 उंगली से गान्ड को
चोदता रहा,,,,


कुछ देर बाद मैं अपने लंड को हाथ मे लेके उसके चहरे के पास गया,,,,उसने शरमा कर चेहरा
घुमा लिया लेकिन फिर वापिस मुझे देखने लगी और मेरे लंड को जो मेरे हाथ मे पकड़ा हुआ था,,,
मैने उसको लंड को मुँह मे लेने का इशारा किया लेकिन उसने ना मे सर हिला दिया ,,,मैने फिर लंड
को उसके होंठों के करीब किया तो उसने मुँह खोला और सर हिला कर फिर से मुझे मना कर दिया


मैने फिर से कोशिश की तो वो बोल पड़ी,,,,,,,,,,नही सन्नी ऐसा मत करो प्ल्ज़्ज़ मुझसे नही होगा ये,
उसने ये बात शरमाते हुए बोली तो मैने भी प्यार से बोल दिया,,,,,,,,,,,,इट्स ओके कविता,,,,अगर नही
कर सकती तो कोई बात नही,,,,मैं इतना बोला और उठकर वहाँ से जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पाकर
लिया और शरमाते हुए मेरे लंड को अपने हाथ मे पकड़ा और अपने होठों से उसपे एक किस करदी,फिर
एक के बाद एक उसने 8-10 किस करदी लंड की टोपी पर लेकिन उसने लंड को मुँह मे नही लिया,,,मैने भी
कोई ज़बरदस्ती नही की और उठकर वापिस उसकी चूत के पास चला गया और वहाँ जाके लंड पर थोड़ा
थूक लगा लिया और घुटनो के बल बैठकर लंड को उसकी चूत पर रखा और हल्का सा ज़ोर लगाया तो
लंड पहली बार मे करीब 4 इंच अंदर चला गया और उसके मुँह से अहह निकल गयी ये
अहह दर्द की नही मस्ती की थी एक राहत की थी,,,,,,मैने लंड को वापिस किया और फिर से अंदर
घुसा दिया तो इस बार लंड करीब 6-7 इंच अंदर चला गया और उसकी चूत की दीवार से टकरा गया,,,

मैं समझ गया कि इसकी चूत की गहराई इतनी ही है बस मुझे अपना 7 इंच लंड ही अंदर घुसाना
होगा,,इस से ज़्यादा नही घुसेगा ,,,इसलिए मैं इतने लंड से उसकी चुदाई करने मे लग गया,,एक दम से
मैने स्पीड तेज करदी थी क्यूकी उसकी चूत बहुत टाइट थी और मुझे एक दम से बहुत ज़्यादा मज़ा आया
था,,,,इसलिए एक दम से मेरी स्पीड तेज हो गयी और झटका जोरदार,,,


उसकी भी सिकियाँ निकलनी शुरू हो गयी और काफ़ी ज़ोर से चिल्ला रही थी वो,,,,मैने उसकी तरफ देखा तो
उसने अपनी आँखें बंद करली और मुँह पर हाथ रख लिया,,,क्यूकी हम लोग बाहर गार्डन मे थे,,,
मुँह पर हाथ तो रख लिया तह उसने लेकिन आवाज़ फिर भी काफ़ी तेज थी उसकी,,,जैसे टाइट चूत से मुझे
लंड पर बहुत ज़्यादा मज़ा मिल रहा था वैसे ही मोटे मूसल लंड से उसको भी अपनी चूत पर बहुत
ज़्यादा मज़ा मिल रहा था,,,,,,,,


वो घास पर लेटी हुई थी उसकी दोनो टाँगे उसके हाथ मे थी और मैं उसकी गान्ड के पास घुटनो के
बल घास पर बैठा हुआ उसकी चूत मे लंड घुसा कर उसकी चुदाई कर रहा था,,,मस्ती मे एक
दम से मेरी स्पीड तेज हो गयी थी ,,अभी मैने लंड घुसाया ही था चूत मे ,,,,,स्पीड तेज होते ही
उसकी भी सिसकियाँ बहुत तेज हो गयी थी,,,,,वो अपने सर को घास पर पटक रही थी इधर से उधर और
ज़ोर ज़ोर से सिसकियां ले रही थी,,,,उसने अपने एक हाथ से अपने मुँह को बंद कर लिया था जिस वजह से
उसकी एक टाँग उसके हाथ से निकल गयी थी जिसको मैने अपने हाथ मे पकड़ लिया था,,,मैं काफ़ी देर
तक उसकी चूत मारता रहा और को सिसकियाँ लेती रही,,,कुछ देर बाद मैने अपने खाली हाथ को उसकी
गान्ड पर रखा और फिर से गान्ड मे एक उंगली घुसा दी और उंगली को अंदर बाहर करने लगा,,लेकिन
उसको इस बात से कोई फ़र्क नही पड़ा मैं समझ गया कि अब ये पूरी मस्ती मे है इसलिए मैने दूसरी
उंगली भी घुसा दी उसकी गान्ड मे और मेरे ऐसा करते ही वो एक दम से उछल गयी लेकिन उसने मुझे
रोका नही बस मेरी तरफ हँसके देखा और फिर से आँखें बंद करके सिसकियाँ लेने लगी,,,,मैने भी
उंगलियों को उसकी छूट से निकाला और फिर अपने मुँह से तोड़ा थूक लगा दिया उंगलियों पर और फिर
से उंगलियों को घुसा दिया उसकी गान्ड मे ,,,

उंगलियाँ थूक की वजह से चिकनी हो गयी थी और चूत से निकलने वाला पानी भी गान्ड के होल पर
बहने लगा था जिस से गान्ड का होल भी चिकना हो गया था ,,मेरी दोनो उंगलियाँ एक ही बार मे
पूरी की पूरी उतर गयी थी गान्ड मे ,,,लेकिन मुझे 2 उंगलियों को आगे पीछे करने मे दिक्कत हो
रही थी इसलिए मैं उंगलियों को ज़्यादा नही हिला रहा था बस हल्के हल्के अंदर बाहर करने मे
लगा हुआ था,,,,मुझे उसकी गान्ड इतनी ज़्यादा टाइट लगी कि मुझसे रहा नही गया,,,मैने उसकी चूत से
लंड बाहर निकाला और गान्ड से उंगलियों को बाहर निकाल लिया फिर लंड पर थूक लगा लिया और लंड
को गान्ड के होल पर रखा और तभी एक दम से कविता थोड़ी पीछे खिसक गयी,,,,


नही सन्नी यहाँ पर नही प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़,,,,यहाँ बहुत दर्द होता है,,,,यहाँ नही,,,,,,,,

तुम घबराओ नही कविता दर्द नही होगा,,,,मैं हूँ ना,,,,

नही सन्नी यहाँ नही ,,मुझे पता है तुम मुझे बहलाने के लिए ऐसा बोल रहे हो लेकिन मुझे
पता है यहाँ बहुत दर्द होता है इसलिए यहाँ अभी नही प्लज़्ज़्ज़ कुछ टाइम रुक जाओ,,,

ओके कविता,,,,,जैसा तुम कहो,,,मैने उसकी टाँगों को पकड़ा और उसकी तरफ हँसके देखा और लंड को
वापिस उसकी चूत मे घुसा दिया,,,उसने भी मुझे हँसके देखा और उसके मुँह से फिर से अहह
निकल गयी और वो फिर से आराम से लेट गयी,,,,,,,मेरा दिल तो किया था उसकी गान्ड मारने को लेकिन उसने
मना कर दिया था इसलिए मैं भी रुक गया और वापिस चूत चोदने लगा उसकी,,,उसकी गान्ड काफ़ी टाइट
थी लेकिन उसकी चूत भी कम टाइट नही थी,,मुझे चूत मे भी गान्ड जैसा मज़ा मिल रहा था लेकिन
मैं जानता था कि गान्ड मे इस से भी कहीं ज़्यादा मज़ा मिलेगा मुझे लेकिन फिर भी कविता के रोकने
पर मैं रुक गया था,,,लेकिन मेरे हाथ की 2 उंगलियाँ फिर से घुस गयी थी उसकी गान्ड मे और इस बात
से उसको कोई परेशानी नही थी उसको परेशानी थी तो मेरे मूसल से ,,,क्यूकी उसको पता था कि ये बड़ा
लंड ये मूसल उसकी गान्ड मे नही जाएगा और अगर चला भी गया तो बहुत दर्द करेगा,,,,मैं भी
उसको दर्द नही देना चाहता था इसलिए चूत पर ही लगा रहा,,,,वो भी आराम से लेट कर आँखें
बंद करके मस्ती मे सिसकियाँ लेती रही,,,,


करीब 10-15 मिनिट मैं ऐसे ही एक ही पोज़ मे उसकी चूत की चुदाई करता रहा और वो आराम से लेट
कर सिसकियाँ लेती रही ,,,,अब मेरी भी सिसकियाँ शुरू हो गयी थी,,,,,मेरा पानी निकलने वाला था इसलिए
मेरी स्पीड और भी ज़्यादा तेज हो गयी थी,,,मैं चाहता था कि वो भी मेरे साथ ही झड़े इसलिए मैने
उसकी गान्ड से उंगलियाँ निकाल ली और उन्ही उंगलियों को उसकी चूत पर रखके चूत के उपर के मास
को तेज़ी से रगड़ने लगा जिस से उसकी आँखें खुल गयी और वो मेरी तरफ देखने लगी,,,,शायद वो भी
समझ गयी थी कि मैं झड़ने वाला हूँ इसलिए उसने मेरी तरफ देखते हुए तेज़ी से अपने हाथों से
अपने बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया था और तेज़ी से सिसकियाँ लेने लगी थी,,,,तभी मेरे लंड से
पानी निकल्ने लगा तो मैने जल्दी से अपने लंड को उसकी चूत से निकाल लिया और उठकर उसके पेट की
तरफ चला गया और जल्दी से अपने लंड की मूठ मारते हुए अपने स्पर्म को उसके पेट पर निकाल दिया
जैसे ही पानी निकालने लगा उसने भी अपने हाथों को अपने बूब्स से उठा लिया और मेरे स्पर्म को अपने
पेट और बूब्स पर मलने लगी,,,उसने स्पर्म को अपने पूरे पेट पर और बूब्स पर मलना शुरू कर
दिया,,जब तक लंड से पानी निकलता रहा वो लंड के स्पर्म को अपने पेट पर मल्ति गयी और जब लंड से
आखरी ड्रॉप भी निकल गयी स्पर्म की तो मैं उसके बगल मे घास पर लेट गये,,,लेकिन वो अपने हाथों
से स्पर्म को अपने पेट पर मल्ति गयी और सिसकियाँ लेती गयी,,,,,



हम दोनो कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे फिर वो उठी और अपनी जीन्स को ठीक करके पहना और मुझे हल्की
किस की मेरे लिप्स पर और अपना टॉप उठाकर घर के अंदर चली गयी जबकि मैं नंगा ही घास पर
लेटा रहा,,,,,,,

मैं घास पर नंगा ही लेटा हुआ था ,,करीब 15-20 मिनिट बाद मैं उठा और देखा कि कविता
वहाँ नही थी,,,,,,मुझे याद आया वो तो अंदर चली गयी थी इसलिए मैने भी अपने कपड़े हाथ मे
लिए और नंगा ही घर के अंदर चला गया,,,,


जैसे ही मैं अंदर घुसा मैने देखा कि कविता नाइटी पहन कर मोम के रूम से बाहर निकल
रही थी,,,,,उसने मुझे नंगे को देखा और शर्मा कर हल्के से चिल्ला कर मुँह दूसरी तरफ टर्न करके
खड़ी हो गयी,,,,,

उसने नाइटी पहनी हुई थी और वो शवर लेके आई थी शायद,,,मैं समझ गया कि मैने इसके पेट पर
अपना स्पर्म निकाला था इसलिए शायद ये नहा कर आई है,,,

चहिईीईईईईईईईईईईईई गंदे सन्नी,,,,कपड़े पहन कर अंदर नही आ सकते थे तुम,,,,


अरे इसमे शरमाने वाली क्या बात,,,,मैं सन्नी हूँ तेरा सन्नी ,,कोई और तो नही जिसको देखकर तुम
ऐसे शरमा रही हो,,,,

तभी वो गुस्से से,,,,,,,,सुन्नययययययययी,,,,,,,,

ओके बाबा सौरी,,,,वैसे तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो और मैं तुम्हारा बाय्फ्रेंड ,,,,और इस वक़्त हम दोनो घर मे अकेले
है सो हम दोनो जैसे चाहे वैसे रह सकते है इसमे परेशानी क्या है,,,,,


तुम सच मे बहुत बेशरम हो सन्नी,,,,हम दोनो अकेले है तो इसका मतलब ये नही कि बिना कपड़ो
के घर मे घूमते रहे,,,,


अरे ये तो अच्छा आइडिया दिया तुमने,,,,,इतना बोलकर मैं उसके पास चला गया,,,,अब मैं तो नंगा ही हूँ
तुम भी अब ये नाइटी उतार दो बिना किसी परेशानी के और बिना कपड़ो के घूमो मेरे साथ इस घर मे,,

मैने ये बात हंसते हुए बोली तो वो मुझे गुस्से से देखने लगी,,,,,,बेशर्मी की हद होती है पागल
सन्नी,,,माना कि हम घर मे अकेले है लेकिन इतने भी बेशरम नही होना चाहिए हम दोनो को

अच्छा इतने नही तो और कितने बेशरम होना चाहिए हम दोनो को तुम ही बता दो,,,मैने इतना बोला
तो वो शरमा गयी,,,,

मैने पास जाके फिर से बोला,,,,,बोलो ना कितने बेशरम होना चाहिए हम दोनो को,,,

मेरे इतना बोलते ही उसने मेरे गाल पर हल्की किस करदी,,,,,,,,,,,,,,,,बस इतना ही बेशरम होना चाहिए
,,,,

किस करके वो पीछे हटने लगी तभी मैने उसको बाहों मे भर लिया,,,,छोड़ो मुझे सन्नी,,,क्यूँ
मज़ाक करते रहते हो हर टाइम,,,,


मैं मज़ाक नही कर रहा कविता जी,,,मैं तो प्यार कर रहा हूँ,,,,वैसे भी अपने अपनी बेशर्मी
बता दी अब मेरी बारी है,,,,इतना बोलकर मैने उसके लिप्स को अपने लिप्स मे भर लिया और किस करने
लगा,,,,,उसने भी मुझे किस का रेस्पॉन्स दिया और मेरे से चिपक गयी,,

कुछ देर बाद हम दोनो अलग हुए,,,सिर्फ़ लिप्स ही अलग हुए थे लेकिन अभी तक हम दोनो एक दूसरे की
बाहों मे थे,,,,,,,,,

अच्छा ये बता तूने मुझे पीछे से क्यूँ नही करने दिया,,मेरा मतलब तूने मुझे गान्ड मे मज़ा क्यूँ
नही लेने दिया,,,,

छी गंदे,,कितने डर्टी वर्ड्स यूज़ करते हो तुम पागल सन्नी,,,,,

अरे अब गान्ड को गान्ड नही बोलू तो क्या बोलू,,,,,,,,

सन्नी प्ल्ज़्ज़ ना एसससे मत बोलो ना गंदा लगता है,,,,कुछ भी बोलो बस ये गंदा वर्ड़ मत बोलो,,

अच्छा बाबा लेकिन बता ना तूने मुझे पीछे वाले होल मे मज़ा क्यूँ नही लेने दिया,,,,डरती है क्या

मैं किसी से नही डरती ,,लेकिन पहले तू बता तू पीछे से क्यूँ करना चाहता है,,,,आगे से कर लिया बहुत
है ना तेरे लिए,,,,

आगे से तो कर लिया लेकिन पीछे से ज़्यादा मज़ा आता है,,,,तू भी एक बार पीछे से कर लेगी तो कभी आगे
से करने के दिल नही करेगा तेरा ,,,,,,तू हर बार मुझे पीछे से करने को बोलेगी,,,

हां हां जानती हूँ बहुत मज़ा आता है पीछे से ,,लेकिन दर्द भी बहुत होता है,,,,उसने ये बात थोड़ी
शर्माके बोली थी,,,,


तुझे कैसे पता दर्द होता है,,,मैने मज़ाक मे पूछा तो वो ज़्यादा ही शर्मा गयी,,

कामिनी भाभी ने बताया था मुझे,,,कि तुमको पीछे से बहुत मज़ा आता है,,,और ये भी बताया था कि
पीछे से दर्द भी बहुत होता है इसलिए उन्होने मुझे अपने पीछे वाले होल को तेरे लिए तैयार करने
को बोला था,,,उन्होने कहा था कि मैं पीछे वाले होल को तेरे लिए तैयार करलूँ क्यूकी तू पीछे से
किए बिना मानेगा नही,,,,और अगर मैने पीछे वाले होल को तैयार नही किया तो तू बहुत दर्द देगा
मुझे,,,,,
-  - 
Reply
07-16-2019, 11:57 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
अच्छा तो भाभी ने बताया तुझे,,,,,क्या ऐसी बातें करती है तू भाभी के साथ,,,,

हां ना करती हूँ,,,,कामिनी मेरी भाभी नही बहुत अच्छी दोस्त भी है,,,,,,उन्होने ही मुझे आज
नीचे शेव करने को भी बोला था,,,जब मैने उनको बताया कि मैं तुमसे मिलने जा रही हूँ तो
उन्होने बोला कि नीचे शेव कर्लो और हो सके तो पीछे वाले होल को भी तैयार कर लो,,,क्यूकी तुमको
पीछे से ज़्यादा मज़ा आता है,,,और वैसे मुझे भी मज़ा आएगा लेकिन तुम्हारा वो बहुत बड़ा है ना
मेरी जान निकाल देगा वो,,,,,पीछे आराम से नही घुसेगा,,,,इतना बोलकर वो फिर से शरमा गयी,,,,


अच्छा तो इसको तैयार कैसे करोगी मेरे लिए,,,ये नही बताया क्या भाभी ने,,,,मैने फिर से मज़ाक मे
बोला


बताया था ना ,,,वही नकली वाला छोटा खिलोना है ना उस से,,,,लेकिन मुझे नही लेना उसको अपने पीछे
मुझे सिर्फ़ तुम्हारा खिलोना ही लेना है,,,,सिर्फ़ उसी का हक़ है मुझपे और किसी का नही फिर वो नकली
ही क्यूँ ना हो,,,,

खिलोना नही है वो डिल्डो है ,,,नकली लंड रब्बर वाला,,,,,,और वैसे क्यूँ नही लेना,,,,जानता हूँ
तुमपर और तुम्हारे जिस्म पर मेरा ही हक़ है और किसी का नही लेकिन दर्द से बचने के लिए और होल
को खोलने के लिए ये ज़रूरी है कविता ,,वरना बहुत दर्द होगा तुमको इस असली वाले खिलोने को अपने
पीछे वाले होल मे लेने पर,,,,,

अच्छा बाबा ठीक है,,,,,,,,भाभी ने बोला था उस से दर्द भी नही होगा और होल भी तेरे इस बड़े खिलोने
क लिए तैयार हो जाएगा,,,,

अच्छा तो कब तैयार करना है पीछे वाले होल को बोलो,,,,

जब भी तुम बोलो,,,,उसने इतना बोला और बहुत ज़्यादा शरमा गयी,,,,

मैं तो अभी तैयार हूँ,,,बस तुम पहले सोनिया को फोन करके पूछो कि वो कब आएगी तुमको लेने


उसने भी जल्दी से मेरे से अलग होके अपनी जीन्स की पेंट से अपना फोन निकाला जो पेंट सोफे पर पड़ी हुई
थी और सोनिया को कॉल करदी,,,,

मैं समझ गया कि इसको भी आग तो लगी हुई है गान्ड मरवाने की लेकिन ये डर रही है,,और डरती भी
क्यूँ नही इसकी कुवारि और सील पॅक गान्ड की धज्जियाँ उड़ा देगा मेरा ये मूसल,,


उसने सोनिया से बात की और फोन कट कर दिया,,,


सोनिया 6 बजे आएगी सन्नी,,,,,,,,,,,,,मैने क्लॉक की तरफ देखा तो अभी 1 ही बजा था,,,,

ये तो अच्छी बात है,,फिर तो बहुत टाइम है हम लोगो के पास ,,,,तो क्या बोलती हो चले एक बार फिर से
मस्ती की सैर पर और तुम्हारी गान्ड के होल को भी तैयार कर दूँगा मैं अपने इस बड़े खिलोने के लिए

लेकिन कैसे सन्नी,,,,,वो नकली खिलोना तो कामिनी भाभी के पास है,,,

नही एक मेरे पास भी है,,,,

तुम्हारे पास ,,,,,,,,,,,उसने हैरान होके पूछा,,,,,तुम्हारे पास कैसे आया वो,,,


अरे मैने ही तो भाभी को लाके दिया था वो,,,सूरज भाई के कहने पर ,,एक ग़लती से मेरे पास ही रह
गया मेरे बॅग मे,,,


कहाँ है वो लेके आओ उसको,,,,,उसने थोड़ा शर्माके लेकिन खुश होके बोला,,

ठीक है तुम मोम के रूम मे चलो मैं लेके आता हूँ,,,,,

वो शरमा कर मोम के रूम मे चली गयी और मैं उपर शोभा के रूम मे और नकली लंड लेके वापिस
मोम के रूम मे आ गया,,,,जहाँ कविता नंगी होके लेट चुकी थी,,,,


उसके बाद मैने कविता की 2 बार और चुदाई की और उसकी गान्ड के होल को भी थोड़ा खुला कर दिया
लेकिन अभी लंड नही घुसाया था मैने उसकी गान्ड मे ,,,,क्यूकी मैं चाहता था वो घर जाके भाभी
से वो नकली लंड लेके अच्छी तरह से थोड़ा और खोल ले अपनी गान्ड को,,,,वो भी इस बात के लिए मान गयी
थी,,,,लेकिन उसने भाभी से नकली लंड लेने से मना कर दिया और उसी लंड को अपने बॅग मे डाल लिया जिस
से मैं उसकी गान्ड के होल को खुला कर रहा था,,,

फिर करीब करीब 6 बजे सोनिया आ गयी थी और कविता को ले गयी थी,,,,कविता का दिल नही था घर जाने
को और मेरा भी दिल नही था उसको यहाँ से भेजने को,,लेकिन उसका जाना ज़रूरी था,,,


उसके जाने के बाद रात कब हुई पता ही नही चला ,,,,और रात कैसे कटी ये सिर्फ़ मैं ही जानता हूँ
,,पूरा दिन इतनी मस्ती की थी कविता के साथ की रात को सोना मुश्किल हो गया था मस्ती किए बिना,,इसलिए
पौर्न मूवीस देखकर मूठ मारनी पड़ी मुझे,,,,


नेक्स्ट डे लास्ट एग्ज़ॅम था,,,,एग्ज़ॅम के बाद मैं कॅंटीन की तरफ चलने लगा ,,मैने करण को भी
इशारा किया था कॅंटीन मे मिलने को लेकिन उसने मेरी तरफ देखा ही नही था,,मैं उस से पहले
एग्ज़ॅम देके बाहर आ गया था सोचा कि जब वो बाहर आएगा तो उस से बात करूँगा,,,इसलिए मैं कॅंटीन
मे आ गया,,,,

मैं वहाँ पहुँचा तो देखा कि अमित कॅंटीन मे खड़ा हुआ था और कॅंटीन वाले को किसी बात पर
गालियाँ दे रहा था और कॅंटीन वाला रो रहा था,,,

अमित>>अबे साले दोबारा अगर पैसे माँगे तो जान ले लूँगा तेरी और कॅंटीन को भी आग लगा दूँगा
इतना बोलकर अमित ने 2-3 थप्पड़ लगा दिए कॅंटीन वाले को,,

तभी अमित के पीछे खड़े हुए लड़के का ध्यान आया मेरी तरफ और उसने अमित को बता दिया मेरे आने
के बारे मे,,,,अमित ने पीछे मूड के मुझे देखा और गुस्से से 1 थप्पड़ और मारा कॅंटीन वाले को
और वहाँ से चला गया,,और जाते हुए फिर से अपने अंदाज़ मे बोलता हुआ गया,,,,,,याद रखा ये कॉलेज
भी मेरे बाप का है और ये कॅंटीन भी,,,,दोबारा से अगर कोई ग़लती हुई तो ना तू रहेगा और ना तेरी
ये कॅंटीन ,,,,


अमित अपने चम्चो को लेके वहाँ से चला गया,,,कॅंटीन वाला समझ गया था कि अमित ने उसको इतनी
जल्दी कैसे छोड़ दिया,,,वो तो कब्से उसको मार रहा था लेकिन मुझे देखकर अमित वहाँ से भाग
गया था,,,,इसलिए कॅंटीन वाला मेरे पास आके रोने लगा,,,,,अच्छा हुआ सन्नी भाई आप आ गये वरना वो
और भी मारता मुझे,,,,

पहले तो ये बचो की तरह रोना बंद करो,,,,और क्यूँ मारा अमित ने तुमको ये बताओ,,,

सन्नी भाई उसका कॅंटीन का बिल 30000 हो गया था आज जब मैने पैसे माँगे तो मुझे मारने लगा
वो,,,अपना और अपने बाप का रौब दिखाने लगा,,,साला बड़े बाप का बेटा है फिर भी भीख माँगके
ख़ाता है,,,,


अभी तू उसके जाने के बाद उसको बुरा बोल रहा है लेकिन जब वो तुझे मार रहा था तब तेरी ज़ुबान
क्यूँ नही चल रही थी,,,तब गूंगा क्यूँ बन गया था तू,,,,


सन्नी भाई मैं ग़रीब आदमी हूँ,,लाचार हूँ और वो बड़े बाप का बेटा है,,,अगर मैं उसको
कुछ बुरा बोलता तो वो मेरी जान ले लता और कॅंटीन भी बंद करवा देता,,,यही कॅंटीन मेरी रोज़ी रोटी
चलती है सन्नी भाई,,,,


बस यही तो पंगा है तुम लोगो का,,,,खुद को ग़रीब और लाचार समझ लेते हो,,,लेकिन तुम लोगो को
ये नही पता कि भले ही तुम लोगो के पास पैसा नही है लेकिन फिर भी तुम लोगो के पास एक ताक़त
ऐसी है जो इन अमीर लोगो के पास नही है,,,,,वो है तुम लोगो की एकता,,,,,,तुम लोग सब एक साथ मिल
जाओ तो तुम लोगो से बड़ी ताक़त कोई नही है,,,और फिर अमित और अमित के बाप जैसे चन्द लोग तुम्हारा
कुछ नही कर सकते,,,,अभी भी तुम लोग 5 थे,,,1 तुम और 4 कॅंटीन मे काम करने वाले,,,और
अमित के साथ तो 2 ही लड़के थे,,,,अगर तुम चाहते तो उन लोगो की हालत खराब कर सकते थे,,,वैसे
भी तुम कुछ ग़लत तो नही कर रहे थे ना,,,,अपने हक़ का पैसा ही माँग रहे थे कोई उधार
तो नही माँग रहे थे जो डर कर या सर झुका कर माँगना पड़े,,,

सन्नी भाई मैं आपकी बात समझता हूँ लेकिन मैं क्या कर सकता हूँ,,,,मेरा बाप पहले से बीमार
है,,,हॉस्पिटल मे है वो,,,,,छोटा भाई भी कल ही गया है गाँव,,मैं कहाँ इन लड़ाई झगडो मे पड़
सकता हूँ,,,,सोचा था कल से छुट्टियाँ शुरू है कॉलेज की तो मैं भी कुछ पैसे लेके गाँव चला
जाउन्गा और अपने बाप का इलाज करवा लूँगा ,,,लेकिन अमित ने तो पैसा देने तक से मना कर दिया,,अब
मैं उस से झगड़ा करूँ या अपने बाप और भाई के बारे मे सोचु,,,,,वो फिर से रोने लगा,,,

अच्छा चल अब रो मत,,,,मैं तुझे पैसे देता हूँ,,,मैं कॉलेज से बाहर गया जहाँ एटीएम
लगा हुआ था और पैसे निकलवा कर कॅंटीन वाले को दे दिए,,


ये लो पैसे और गाँव जाके अपने बाप का इलाज कर्वाओ,,,,

भाई मैं ये पैसे कैसे ले सकता हूँ आपसे,,,और आप क्यूँ दोगे मुझे पैसा,,,मुझे तो अमित से पैसा
लेना है ना,,,

अच्छा ठीक है भाई ,,,,जानता हूँ तूने अमित से पैसे लेने है लेकिन उसने मना कर दिया ना,,,अब तुझे
पैसे की ज़रूरत तो है ना इसलिए मेरे से पैसे लेले और जब अमित पैसे दे देगा तो तुम मेरे पैसे लौटा
देना,,,

मैने उसको पैसे दिए तो वो मेरे पैरो मे गिर गया,,,,,,भाई मैं आपका अहसान कैसे चुकाउन्गा और
कैसे वापिस करूँगा ये पैसे,,,,,अगर अमित ने फिर से पैसे देने से मना कर दिया तो,,,,

तू दूर की मत सोच मेरे भाई,,,,पहले गाँव जाके अपने बाप का इलाज करवा ,,बाकी सब बाद मे देख
लेंगे,,,,,

वो मेरे पैरो मे गिरकर रोने लगा,,,,फुट फुट कर रोने लगा,,,,मैने उसको उपर उठाया तो वो
मेरे गले लग गया,,,,मैं सच मे आपका ये अहसान कभी नही भूलूंगा सन्नी भाई,,

चल बड़ा आया अहसान वाला,,वैसे तो मैं कोई अहसान नही कर रहा तेरे पर लेकिन अगर तुझे फिर भी
ये सब अहसान लगता है तो तुझे भी कभी मौका दूँगा ये अहसान चुकाने का,,,,,अब रोना बंद
कर और अच्छी सी कॉफी पिला मुझे,,,

उसने आँखें सॉफ करते हुए ,,,,आज मैं आपको स्पेशल कॉफी पिलाउन्गा सन्नी भाई,,,,अपने हाथ
से बना कर,,वो खुश होता हुआ चला गया,,,,

वाह जी वाह,,,सन्नी थे ग्रेट,,,,दोस्तो का दोस्त और सबका भला करने वाला,,,मैने पीछे मूड के
देखा तो कविता और सोनिया मेरे पीछे खड़ी हुई थी और ये बात बोल रही थी सोनिया,,,

वो दोनो चलके मेरे पास आ गयी और मेरे टेबल पर बैठ गयी,,,,,,सोनिया तो मुस्कुरा रही थी लेकिन
कविता थोड़ा शरमा भी रही थी मेरे से,,,,,,

तुम लोग यहाँ कैसे,,,,,और कब आई,,,,

जब तुम कॅंटीन वाले का भला कर रहे थे तब आई हम दोनो,,,तू सच मे कितना अच्छा है भाई,,
लेकिन दूसरों के साथ,,,,अपनो के साथ तो तू हमेशा लड़ता-झगड़ता ही रहता है,,सोनिया ने ये बात
थोड़ी नखरे से बोली और फिर हँसने लगी,,,साथ मे कविता भी हँसने लगी,,,

मैं समझ गया कि सोनिया क्यूँ ऐसे बोल रही थी इसलिए मैने बात पलट दी,,,,,,,अच्छा तो कविता अब
छुट्टियाँ हो गयी है कुछ दिनो की तो क्या प्लान है छुट्टीओं का,,,,


हम लोगो का प्लान तो बन गया है सन्नी तू अपनी सुना,,,,कविता ने हँसके बोला तो सोनिया भी हँसने
लगी,,,,


तुम लोगो का क्या प्लान बन गया मुझे भी तो पता चले,,,

तभी कॅंटीन वाला कॉफी लेके आ गया ,,,वो भी 3 कप,,,,

तभी सोनिया ने एक कप कॉफी उठा ली,,,,,,,क्यूँ तुमको क्यूँ बताए हम लोग की हमारा प्लान क्या है,,
सोनिया फिर से नखरे से बोली,,,

हम लोगो का कुछ प्लान है सन्नी ,,,तुम टेन्षन मत लो बाद मे बता दूँगी तुमको,.,ये बात बोली
कविता ने

फिर हम लोग कॉफी पीने लगे और बातें करने लगे,,,,लेकिन मैं ये सोच रहा था कि अब इन लोगो
का क्या प्लान बन गया है,,,,जो मुझे नही बता रही ये दोनो,,,,खैर मुझे क्या,,,,कम से कम सोनिया
मेरे से तो दूर ही रहेगी मेरे लिए यही काफ़ी था,,,,


कॉफी पेके मैं चला अपने रास्ते और कविता और सोनिया गयी अपने रास्ते,,,,इन सब के बीच मे करण
को मिलना तो भूल ही गया था,,,लेकिन अब मैं उसके घर भी नही जा सकता था क्यूकी वहाँ रितिका
थी और मैं उसके पास नही जाना चाहता था,,,,मैं कारण से बाहर ही बात करना चाहता था वो भी
अकेले मे,,,,मैने करण को फोन किया लेकिन उसका फोन ऑफ था,,,,

खैर मैं अपने घर की तरफ चल पड़ा,,,,


घर पहुँचा तो कपड़े चेंज करके आराम से लेट गया,,,,क्यूकी कल से कॉलेज की छुट्टियाँ थी कुछ दिन
की इसलिए मैं बहुत खुश था और आराम से लेट कर टीवी देखने लगा था,,,तभी कुछ देर बाद,,,,???
आराम से सोफे पर लेटा हुआ टीवी देख रहा था तभी बाहर बेल बजने की आवाज़ आई,,

साला अब कॉन आ गया आराम हराम करने,,,चैन से बैठकर टीवी भी नही देखने देते लोग,,

उठकर दरवाजे के पास गया और जैसे ही दरवाजा खोला बाहर कविता खड़ी हुई थी,,कविता
ने दरवाजा खुलते ही मुझे हेलो बोला,,,,,

मैने उसको हेलो बोलना था लेकिन तभी मेरी नज़र पड़ी गेट के पास खड़ी हुई कार पर और
कार के बाहर खड़ी हुई थी सोनिया,,,जो कार से पीठ लगा कर हम लोगो की तरफ देख रही
थी,,,


ओये सन्नी कहाँ खो गया हेलो का जवाब तो देदे,,,कविता ने मेरे सर पर हल्का हाथ मारते
हुए बोला,,,,,

मेरा ध्यान सोनिया से पलट कर वापिस कविता की तरफ आया,,,,ओह्ह सौरी कविता हेलो ,,,हाई

तुम दोनो यहाँ क्या कर रही हो,,,,

भूल गया सन्नी मैने कॉलेज मे क्या बोला था,,,,मेरा और सोनिया का प्रोग्राम बन गया है
छुट्टियाँ मनाने का ,,,,मैं सोच रही थी तुम भी हम लोगो के साथ चलो,,,सौरी मैं
नही हम दोनो सोच रही थी,,,इतना बोलके कविता ने सोनिया की तरफ इशारा किया,,


तभी याद आया सोनिया ने बोला था कॉलेज मे कि उन दोनो का प्लान बन गया है,,लेकिन ये
मुझे क्यूँ साथ लेके जाना चाहती है,,और सबसे बड़ी बात सोनिया कैसे तैयार हो गयी मुझे
भी साथ लेके जाने को,,,वो तो कभी ना लेके जाती मुझे अपने साथ,,,और वैसे भी मुझे भी
नही जाना था सोनिया के साथ मैं तो जितना हो सके उस से दूर ही रहना चाहता था क्यूकी
दूर रहके ही हम दोनो की भलाई थी और अब तो मैं उसको प्यार करने लगा था और चाह कर
भी उसको हर्ट नही करना चाहता था,,,
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Reply
07-16-2019, 11:57 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
ओये सन्नी बोला ना चलेगा हम लोगो के साथ,,,कविता ने फिर से बोला और सर पे हाथ मारा


नही मुझे नही जान तुम दोनो के साथ,,,तुम दोनो ही जाओ और एंजाय करो,,,,मैने थोड़ा गुस्से
मे बोला तो कविता थोड़ा उदास हो गयी,,,,

तभी पीछे खड़ी हुई सोनिया बोलने लगी,,,,,,मैने तुझे पहले ही बोला था कविता ये जाने
को तैयार नही होगा,,,,नखरा करेगा,,,,

इस से पहले कि मैं कुछ बोलता कविता बोल पड़ी,,,,,,तू चुप कर ना बाबा मैं बात कर
रही हूँ ना सन्नी से,,,बोल सन्नी चलेगा ना मेरे साथ,,,बोल ना सन्नी,,,,

नही कविता मुझे नही जाना,,,तुम दोनो जाओ और एंजाय करो,,,,मैं भला तुम दोनो के साथ
जाके क्या करूँगा,,,,


सोनिया फिर से बोली,,,,,कोई फ़ायदा नही कविता तुझे बोला था मैने,,,ये नखरा ही करता
रहेगा ,,,इस से बात करके अपना टाइम खराब मत कर वैसे भी बहुत दूर जाना है हम
लोगो ने,,,,इसको नही जाना तो रहने दे हम दोनो ही चलती है,,,


तभी कविता थोड़ा गुस्से से,,,,मैने बोला ना तुझे कि तू चुप कर्ज़ा,,,,चल तू कार मे
बैठ जा मैं सन्नी से बार कर रही हूँ ना,,,,मैं जानती हूँ ये मेरी बात नही टाल
सकता,,,,

ठीक है करो टाइम खराब मुझे क्या,,,इतना बोलके सोनिया कार मे बैठ गयी,,,

मैं तो साला हैरान हो गया,,,,कविता ने सोनिया पर गुस्सा किया ,,,और सोनिया भी चुप-चाप
से कार मे बैठ गयी,,,,आज पहली बार हुआ था कि कविता ने सोनिया पर गुस्सा किया था और
सोनिया ने आगे से कुछ नही बोला था,,,,मुझे तो यकीन ही नही हो रहा था,,,,,

सन्नी बोल चलेगा ना हम लोगो के साथ,,,,प्ल्ज़्ज़ सन्नी,,,,मना मत करना,,,,


लेकिन कविता मैं ,,,,,,,इस से पहले की मैं कुछ बोलता कविता बीच मे बोल पड़ी,,,


कुछ बोलने से पहले मेरी बात सुन ले सन्नी,,,,,हम लोग कहीं और घूमने नही जा रही हम
लोग तो तेरे गाँव (विलेज) जा रही है,,,

मेरे गाँव,,लेकिन क्यूँ,,,

अरे बोला ना मेरी बात सुन ले पहले,,,हम लोगो का प्लान तो कुछ और था लेकिन तभी सोनिया ने
बोला कि रेखा की शादी है तो हम लोगो का प्लान बन गया तेरे गाँव जाने का,,,,


लेकिन रेखा की शादी तो कल हो चुकी है अब क्या फादा जाने का,,,,,,मैं फिर से बीच मे
बोल पड़ा क्यूकी मैं उन लोगो के साथ जाना ही नही चाहता था,,,


अरे बुद्धु पूरी बात सुन ना मेरी,,,,बीच मे क्यूँ बोल रहा है बार-बार,,,,मैं जानती हूँ
रेखा की शादी कल हो चुकी है लेकिन सोनिया ने बोला कि शादी के बाद और भी बहुत सारे
रीति-रिवाज होते है तुम लोगो मे इसलिए तेरे घरवाले 5-6 दिन वही रहने वाले है तो
हम लोगो ने सोचा क्यूँ ना तुम्हारे गाँव चले...सभी लोग वहाँ होंगे और सबसे बड़ी बात
मैने आज तक तुम लोगो का गाँव नही देखा इसलिए हम लोगो का प्लान बन गया गाँव जाने का,
अब बोल चलेगा कि नही मुझे अपना गाँव दिखान के लिए,,,,

लेकिन कविता मैं,वो,,,,मैं अभी बोलने ही लगा कि कविता ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे
घर के अंदर ले गयी और दरवाजा भी बंद कर दिया,,,,,और जैसे ही दरवाजा बंद हुआ वो
मेरे गले लग गयी और मुझे किस करने लगी,,,,,मैने भी उसको किस का रेस्पॉन्स दिया क्यूकी
दरवाजा बंद था ,,सोनिया को क्या पता हम लोग अंदर क्या कर रहे है,,,,

कुछ देर किस करने के बाद कविता फिर से बोली,,,,,बोल सन्नी अब चलेगा ना मेरे साथ
मुझे अपना गाँव दिखाने,,,,वो बड़े प्यार से मुझे देख रही थी,,,,,,,,,,देख मैं सोनिया
से घर पर बात करके ही यहाँ आई थी और सोनिया को बोला था कि मैं तुझे मना लूँगी
अब मुझे मना मत कर प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़ वरना वो मेरा मज़ाक बनाएगी बार-बार,,,,और वैसे भी
मुझे हाइवे पर कार ड्राइव करने से डर लगता है,,,,,,तू चल ना साथ सन्नी,,,,प्लज़्ज़्ज़्ज़
मेरी खातिर,,,,,,,

उसने इतना सब बड़े प्यार से बोला और मैं मना नही कर पाया,,,और वैसे भी मैं गाँव जाने
की बात से बहुत खुश था,,,क्यूकी सब लोग थे वहाँ पर,,,,लेकिन मुझे डर था घर खाली
छोड़कर जाने मे,,,मुझे डर था कहीं अमित के बाप के लोग घर खाली देखकर घर मे
घुसने की कोशिश ना करे,,,,


तभी मैने कविता को बोला,,,,,,ओके बाबा मैं भी चलता हूँ तेरे साथ,,मैने अभी इतना
बोला और कविता जल्दी से मेरे गले लग गयी और किस करने लगी,,,,

थन्क्ष्क्ष सन्नी ,,अब मैं बताती हूँ सोनिया को बाहर जाके,,,,,उसने इतना बोला और घर के बाहर
जाने लगी,,,,,सन्नी जल्दी से अपना बॅग रेडी कर्लो और बाहर आ जाओ,,,,उसने इतना बोला और
घर से बाहर चली गयी,,,,


उसके जाते ही मैने ख़ान भाई को फोन किया और सारी बात बात दी कि मैं गाँव जा रहा हूँ
और घर खाली रहेगा,,,,,ख़ान भाई ने बोल दिया कि वो कुछ लोगो की मेरे घर की निगरानी पर
लगा देंगे,,और मैं बे-फ़िक्र होके जा सकता हूँ,,,लेकिन फ़िक्र तो मुझे थी क्यूकी सोनिया भी
थी साथ मे

मैं खुद रेडी होके और अपना बॅग लेके घर से बाहर निकला और दरवाजे को लॉक लगा कर
कार की तरफ चला गया,,,,सोनिया और कविता दोनो कार मे बैठी थी,,,,लेकिन आज कविता
कार मे आगे बैठी हुई थी जबकि सोनिया पीछे वाली सीट पर,,,,मैने देखा कि पीछे वाली
सीट पर खाने पीने का बहुत समान पड़ा हुआ था,,,,,,


मैने गेट को भी लॉक किया और कार का दरवाजा खोलके ड्राइवर सीट पर बैठ गया क्यूकी
कविता ने बोला था कार मुझे ही ड्राइव करनी है,,,

जैसे ही मैं कार मे बैठा सोनिया बोल पड़ी,,,,,अरे मान गयी कविता तुझे ,,बड़ी जल्दी
मना लिया तूने सन्नी को,,,,मुझे नही लगा था कि ये इतनी जल्दी मान जाएगा हम लोगो के
साथ जाने के लिए,,,,,

मानता क्यूँ नही,,,,मेरा दोस्त है और मुझे पता है दोस्तो को कैसे मनाया जाता है,,कविता
ने हँसके मेरी तरफ देखा और फिर सोनिया की तरफ देखा तो दोनो हँसने लगी,,,,

मैने भी कार चलाना शुरू कर दिया,,,,,,लेकिन तभी मैने कार की सीट पर पड़े हुए
खाने के समान को देखा तो कविता बोल पड़ी,,,,,,,


सन्नी रास्ता भूल लंबा है ना इसलिए हम लोगो ने पहले ही खाने पीने का सामान कार मे रख
लिए अब कहीं रुकने की ज़रूरत नही होगी,,,,,

कविता सही बोल रही थी,,,हम लोगो को काफ़ी टाइम लगने वाला था गाँव जाने मे ,,,और वैसे
भी सर्दियाँ शुरू हो गयी थी अंधेरा जल्दी होने लगा था,,,इसलिए मैने कोई ज़्यादा बात
'नही की और अपनी मस्ती मे कार ड्राइव करने लगा जबकि सोनिया और कविता दोनो बातें करती
रही पूरा रास्ते,,,,

हम लोग बस एक बार रुके थे वो भी हाइवे पर बने हुए एक रिसोर्ट मे क्यूकी कविता और
सोनिया को वॉशरूम जाना था,,,,उसके अलावा हम कहीं नही रुके,,,,रात 11 बजे के करीब मैने
कार को चाचा जी के घर के सामने रोक दिया था,,,हाइवे पर तो ज़्यादा टाइम नही लगा लेकिन
गाँव की कच्ची और टूटी हुई रोड पर हमे बहुत मुश्किल हुई,,,,



गाँव मे लोग अक्सर जल्दी हो सो जाते है और अब तो आधी रात हो चुकी थी,,,मैने जैसे ही
कार को चाचा जी के घर के सामने रोका सोनिया जल्दी से कार से उतर गई और दरवाजे पर
नॉक करने लगी ,,कविता भी कार से उतर गयी थी जबकि मैं कार मे ही बैठा हुआ था
5-7 मिनिट नॉक करने के बाद जब चाचा जी के घर का दरवाजा नही खुला तो मैने कार
का हॉरेन बजा दिया,,,, कार का हॉरेन बजने से भी चाचा जी के घर से कोई रेस्पॉन्स नही
आया लेकिन मैने देखा कि दूर केवल के घर की लाइट्स ऑन हो गयी और तभी केवल अपने घर
से बाहर आ गया था,,,,केवल चाचा जी का बेटा था जो अपने नये घर मे रहता था ,,,


केवल घर से बाहर आया तो मैने देखा कि उसके पीछे कोई औरत भी घर से बाहर आ गयी
थी,,,


सोनिया और कविता चलके केवल के घर की तरफ जाने लगी और मैं भी कार से उतारकर उनके
पीछे चलने लगा,,,,

सोनिया आगे बढ़ के केवल से मिली और फिर जाके केवल के पीछे खड़ी हुई औरत के गले लग
गयी,,,कविता ने भी केवल को हेलो बोला और सोनिया के साथ उस औरत के गले लग्के मिली

तभी वो औरत बोली,,,,,तुम सोनिया हो ना,,,सोनिया ने हां मे सर हिला दिया,,,,और ये तेरी
दोस्त कविता है,,,मैने ठीक पहचाना ना,,,,कविता ने भी सर हिला कर उसको बता दिया
कि उसने उन दोनो को ठीक पहचाना है,,,,

तभी उसने मेरी तरफ इशारा किया,,,,,और ये सन्नी है ना,,,,तुम्हारा भाई,.,,,सोनिया ने
फिर हां मे सर हिला दिया


मैने दूर से ही केवल और उस औरत को हेलो बोल दिया,,,

सोनिया उस औरत के गले लगी और सोनिया की आँखें नम हो गयी और साथ ही उस औरत की भी
,,मैने देखा कि उन दोनो को देख कर कविता की आँखें भी नम हो गयी थी,,

तभी केवल थोड़ा चिढ़के हुए,,,तुम लोगो ने दरवाजे पर खड़े होके रोना क्यूँ शुरू कर
दिया,,,

ये केवल था ही अजीब बंदा ज़्यादा बात ही नही करता था,,इसलिए तो मैं भी दूर-दूर
से ही मिला था इसको,,,

तभी वो औरत बोली,,,,,कुछ नही जी पहली बार मिली हूँ ना इन लोगो को इसलिए आँखें
भर आई मेरी,,,,,

ये औरत शायद केवल की पत्नी थी,,,,और रिश्ते मे मेरी मामी थी ,,,,मैं आज तक इसको
पहले कभी नही मिला था लेकिन फिर भी वो कुछ जानी पहचानी लग रही थी और जिस तरह
से वो सोनिया और कविता के गले लग्के रोई थी वो केवल से तो बहुत ज़्यादा अलग नेचर की
लग रही थी मुझे,,,,

उमर मे करीब 35-38 के करीब थी,,रंग गौरा था,,जिस्म ज़्यादा नज़र नही आ रहा था
क्यूकी सर्दी की वजह से उसने शाल ओढ़ रखी थी जिस्म पर,,,लेकिन उसका फेस बहुत क्यूट
था मेरा ध्यान उसके क्यूट फेस से हट ही नही रहा था,,तभी मेरी नज़र गयी सोनिया की
तरफ जो मुझे बहुत गुस्से से देख रही थी,,,,



केवल फिर से बोला,,,चलो सीमा अंदर चलो रात बहुत हो गयी है,,,,रोना धोना बाद मे
कर लेना,,,,

तभी पता चला उसका नाम सीमा था,,,
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Reply
07-16-2019, 11:58 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
केवल घर के अंदर चला गया,,,,,सोनिया और कविता भी सीमा के साथ अंदर चली गयी मैने
भी कार घर के अंदर करदी और खुद भी एक रूम की तरफ चला गया,,,,

यहाँ 2 ही रूम थे ,,,,एक तो केवल का ही था,,,,दूसरे रूम मे कविता और सोनिया थी मैं
भी उसी रूम मे चला गया,,,,तभी सीमा भी उसी रूम मे आ गयी,,,,

बहुत थक गये होगे तुम लोग,,,मैं अभी चाइ लेके आती हूँ,,,इतना बोलके वो जाने ही लगी तो
सोनिया बोल पड़ी,,,,रहने दीजिए चाइ हम लोग थक गये है और रात भी बहुत हो गयी है,आप
जाके सो जाइए हम लोग भी सो जाते है,,,,

ठीक है बेटा लेकिन तुम लोग एक ही बेड पर कैसे सो सकते हो,,सीमा ने मेरी तरफ देखते
हुए बोला,,,,क्यूकी वो सोच रही थी कि मैं 2 लड़कियों के साथ एक ही बेड पर कैसे सो सकता
हूँ,,,,,

सोनिया और कविता सीमा की बात से शरमा गयी,,,कविता मेरी तरफ ही देख रही थी,,

तभी सोनिया बोल पड़ी,,,,,आप हम लोगो के साथ सो जाइए मामी जी और सन्नी को केवल मामा
के साथ सुला दीजिए,,,,



मेरी तो साली गान्ड ही फट गयी थी केवल का नाम सुनके,,,लेकिन रास्ते भर ड्राइव करके
मैं थक गया था ,,मुझे बस बेड पर लेटना था फिर चाहे किसी के साथ भी क्यूँ ना
लेटना पड़े,,,,


हां ये ठीक है,,,,,सन्नी तुम जाओ केवल मामा के साथ सो जाओ,,,,सीमा मामी हम लोगो के
साथ सो जाएगी,,,,

मैं भी कुछ नही बोला,,,बस कार से बॅग लेके वॉशरूम मे गया और पयज़ामा टी-शर्ट पहन ली
तभी सीमा मुझे केवल के रूम मे ले गयी और केवल अजीब नज़रो से मुझे देखने लगा,,,

मैने ज़्यादा ध्यान नही दिया और चुप करके बेड पर लेट गया,,,,इतना थक गया था कि जल्दी
ही आँख लग गयी थी,,,,

रात बहुत थका हुआ था इसलिए नींद बहुत अच्छी आई,,,,सुबह उठा तो रूम मे अकेला था
मैं ,,केवल नही था वहाँ,,,उठकर बाथरूम गया और फ्रेश होके साथ वाले रूम मे गया तो
देखा वहाँ पर भी कोई नही था,,,,तभी मुझे उपर छत से कोई आवाज़ सुनाई दी,,कोई
बहुत ज़ोर-ज़ोर से हंस रहा था,,,,मैं भी उपर छत की तरफ चला गया,,


मैं उपर गया तो देखा कि उपर चारपाई पर एक जगह माँ और मामा दूसरी तरफ चाचा और
चाची बैठे हुए थे,,,,और उन लोगो से दूर बैठी हुई थी कविता ,,सीमा और सोनिया
जो बहुत हंस हंस कर बातें कर रही थी,,,,लेकिन बातें बहुत आराम से हो रही थी उनकी
फिर भी वो ज़ोर से हंस रही थी,,,

मैं उपर गया तो चाची ने मुझे गले लगा लिया,,,,चाचा भी अपनी जगह से उठा और
मुझे गले लगा कर मिला,,,,,


आ गया मेरा बेटा,,,,अरे बेटा माफ़ कर्दे रात मैं और तेरी चाची उठ नही सके गेट
खोलने के लिए,,,,एक तो बूढ़ा शरीर और उपर से दवाई का असर ,,,पता ही नही चला
तुम इतनी देर गेट पर खड़े रहे,,,,


कोई बात नही चाचा जी इसमे क्या बड़ी बात है,,,,हम लोग कॉन्सा बाहर रहे,,दूसरे घर
मे चले गये थे,,,,,,अच्छा बाकी सब छोड़ो और ये बताओ आपकी तबीयत अब कैसी है चाचा
जी,,,,,,

देख ले तेरे सामने हूँ,,,,वो तुम शहर वाले क्या बोलते हो,, हां याद आया,,फिट,,बिल्कुल
फिट हूँ बेटा मैं,,,

तभी माँ भी उठके मुझे मिली और चाची जी मेरे लिए नाश्ता लेने नीचे किचन मे चली
गयी


मैं माँ और चाचा से बात कर ही रहा था कि चाची ने मेरा नाश्ता लगा दिया और माँ ने
भी मुझे नाश्ता करने को बोला,,,,

मैं नाश्ता करने के लिए चेयर पर जाके बैठ गया और सामने पड़े टेबल पर से नाश्ता करने
लगा,,,,मैं नाश्ता कर रहा था और मेरा ध्यान गया सोनिया ,,कविता और सीमा की तरफ ,,और
ख़ासकर मैं सीमा को ही देख रहा था,,,तभी फिर से मेरा ध्यान गया सोनिया की तरफ तो
वो मुझे गुस्से से देख रही थी,,,मैने अपनी नज़रे घुमा ली माँ और बाकी लोगो की तरफ


तभी चाचा बोला,,,,,,,तुझे क्या ज़रूरत थी अपना घर रेखा के नाम करने की,,,तेरा
दिमाग़ खराब हो गया था क्या,,,ये बात चाचा जी माँ को बोल रहे थे,,,

चाचा जी रेखा की शादी हो गयी इसलिए मैने उसको तोहफे मे वो घर दे दिया तो भला क्या
ग़लती करदी मैने,,,माँ ने बड़े प्यार से जवाब दिया,,,,

तभी चाचा थोड़े गुस्से से,,,,भला इतना बड़ा घर उसको देने की क्या ज़रूरत थी कोई और
तोहफा नही दे सकती थी क्या,,,,,

इतने मे माँ भी थोड़े गुस्से मे बोल पड़ी,,,,,वो घर मेरा है और मैं जिसको चाहूं वो घर
दे सकती हूँ उसके लिए मुझे किसी से पूछने की ज़रूरत नही और ना किसी का डर है
मुझे,,, माँ इतने गुस्से से बोली कि चाचा ने और चाची ने अपनी नज़रे झुका ली और मामा
खुश हो गया,,,,

माँ थोड़ा ज़ोर से बोली थी इसलिए सोनिया ,,कविता और सीमा का ध्यान भी उन लोगो की तरफ
हो गया और सीमा उठी और सोनिया के साथ कविता को भी लेके नीचे की तरफ चली गयी ,,,
जब वो लोग नीचे जा रही थी तो मेरा ध्यान फिर से सीमा की तरफ गया और तभी सोनिया और
कविता भी मेरी तरफ देखने लगी,,,,इस बार सोनिया के साथ-साथ कविता भी मुझे गुस्से से
देख रही थी,,,


सोनिया का तो ठीक लेकिन कविता मुझे गुस्से से क्यूँ देख रही थी,,,,मुझे कुछ समझ नही
आया,,,,,

इधर माँ फिर से गुस्से मे बोली,,,चाचा जी अब आप अपने घर का काम करने के लिए भी
किसी और का इंतेज़ाम कर लेना,,,क्यूकी अब ना तो रेखा ने वापिस आना है और ना ही मनोहर
ने,,,,जैसे मैने उनको अपना घर तोहफे मे दे दिया है वैसे ही अशोक ने उनको कुछ पैसे
दे दिए है जिस से वो लोग अपनी कुछ गाएँ-भेंसे खरीद कर अपना काम शुरू करने वाले
है,,,

माँ ने इतना बोला तो मामा खुश हो गया और साथ मे चाची भी,,,जबकि चाचा गुस्से मे माँ
की तरफ देखने लगा लेकिन बोला कुछ नही,,बस चाची को अपने साथ लेके जल्दी से वहाँ
से चला गया,,,,

उनके जाने के बाद भी मैने देखा कि सुरेंदर मामा के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी
जबकि माँ अभी तक हल्के गुस्से मे थी,,,,,,पता नही माँ को क्या हुआ था मैने आज तक माँ
को इतने गुस्से मे चाचा जी से बात करते नही देखा था,,,,

फिर माँ ने मेरी तरफ देखा और मैं चुप-चाप नाश्ता करने लगा,,,,माँ भी नीचे चली
गयी चाचा और चाची के पीछे,,,,जबकि मामा वहीं बैठा रहा,,,,मैने भी अपना नाश्ता
ख़तम किया जल्दी से और नीचे आ गया,,,,साथ साथ मामा भी नीचे आ गया,,,,


नीचे आके देखा की माँ नही थी,,,,सुरेंदर तो जल्दी से घर से निकल कर चाचा के घर
की तरफ चला गया और मैने भी बर्तन किचन मे रखे और सोनिया से माँ के बारे मे पूछा
तो उसने बताया कि माँ चाचा के घर गयी है,,,,मैं जाने लगा चाचा के घर तो सोनिया बोली
रूको सन्नी मैं भी साथ चलती हूँ,,,,सोनिया ने सीमा को भी बोला साथ चलने को लेकिन
सीमा थोड़ा गुस्से मे बोली,,,,,,,,

नही सोनिया मुझे नही जाना उस घटिया इंसान के घर मे,,,,,तुम भी मत जाओ सोनिया बेटी,

सोनिया वहीं रुकी रही जबकि मैं माँ की वजह से चाचा के घर की तरफ चल पड़ा,,,एक तो
माँ को आज पहली बार चाचा से गुस्से मे बात करते देखा इस बात की टेन्षन और उपर से
सीमा ने चाचा को घटिया इंसान बोला इस बात की टेन्षन होने लगी मुझे,,,,

मैं चाचा के घर मे जाने लगा तभी चाची गेट पर ही खड़ी हुई थी उन्होने मुझे अंदर
जाने से मना कर दिया,,,,,,

रहने दे सन्नी बेटा अंदर मत जा,,,,उन लोगो का आपस का मसला है उन लोगो को हल करने
दे क्यूकी काफ़ी टाइम से ये मसला हल नही हुआ है,,,,आज ना हुआ तो कभी नही होना,,

मैं कुछ समझा नही लेकिन फिर भी चाची के रोकने पर मैं घर के बाहर ही रुका रहा
सुरेंदर भी मेरे साथ ही खड़ा हुआ था गेट पर,,,जबकि अंदर से माँ और चाचा के झगड़े
का शोर बाहर तक आ रहा था लेकिन कुछ समझ नही आ रहा था कि बात क्या हो रही है

तभी मैने देखा कि केवल की कार आके रुकी घर के सामने और केवल कार से उतर कर घर
के अंदर चला गया,,चाची ने उसको अंदर जाने से नही रोका,,,केवल अंदर गया और माँ का
हाथ पकड़ कर उनको बाहर की तरफ लेके आ रहा था,,,,


छोड़ो सरिता दीदी ऐसे आदमी के ज़्यादा मुँह नही लगते,,,अब जो हो गया सो हो गया,,गुस्सा
थूक दो,,,,अब तो बात बहुत पुरानी हो गयी है,,,,भूल जाओ दीदी और हम लोगो को भी
भूल जाने दो,,,,वैसे भी उनको अपनी ग़लती की सज़ा मिल ही रही है,,,,इतनी उमर मे
कोई सेवा करने वाला भी नही है उनके पास,,,और भला क्या सज़ा हो सकती है ऐसे आदमी
के लिए,,,


माँ कुछ बोलने लगी थी लेकिन जैसे ही माँ की नज़र मेरे पर पड़ी माँ चुप ही रही और
केवल के साथ घर से बाहर आ गयी,,,,

अरे तुम यहाँ क्यूँ आ गये सन्नी बेटा,,,,माँ ने बाहर आते हुए पूछा,,,,,नाश्ता कर लिया था
क्या या बीच मे छोड़कर भाग आया ,,,,

नही नही मा नाश्ता कर लिया था मैने,,,,लेकिन माँ आप चाचा से झगड़ा क्यूँ कर रही
हो ,,,मैने आज तक आपको किसी से झगड़ा करते नही देखा तो चाचा से किस बात पर झगड़ा
हो रहा है आपका,,,,,


कुछ नही बेटा तू टेन्षन मत ले ये हम लोगो की आपस की बात है,,,,चल अब चलते है
वैसे भी तेरे पापा का फोन आ गया है हम लोगो को बुला रहे है वो,,,,


कहाँ बुला रहे है माँ,,,पापा कहाँ है,,,,

पापा रेखा के शादी वाले घर पर है बेटा और बाकी सब लोग भी वहीं है,,,मैं तो बस
मामा के साथ तुझे लेने आई थी,,,,


तभी हम लोग वहाँ से चल पड़े,,,,माँ ने चाची को भी साथ चलने को बोला लेकिन चाची
ने मना कर दिया,,,,

चलिए ना चाची जी,,,,आप रेखा की शादी पर भी नही गयी कम से कम अब जाके रेखा को
आशीर्वाद ही दे दीजिए,,,,,,,

चाची ने फिर मना कर दिया,,,,नही बेटी मैं नही जा सकती,,,तुझे तो पता है कि अगर
मैं चली गयी तो तेरे चाचा जी ने गुस्सा हो जाना है,,इतना बोलके चाची घर के अंदर
चली गयी,,,

माँ ने भी ज़्यादा फोर्स नही किया चाची को,,,,,,,फिर हम लोग केवल के घर की तरफ चल
पड़े,,,,

माँ ने अंदर जाके सबको तैयार होने को बोला और मुझे भी,,,,

मैं फ्रेश होके तैयार हो गया और बाकी सब लोग भी तैयार हो गये,,,,

फिर मैं सोनिया और कविता अपनी कार मे,,केवल और सीमा उनकी कार मे और माँ मामा के साथ
डॅड की कार मे वहाँ से चल पड़े,,,,,,

मैं कार ड्राइव करते हुए ये सोच रहा था कि माँ का कॉन्सा घर है यहाँ जो उन्होने रेखा
को गिफ्ट कर दिया है,,,,मैने कभी नही सुना माँ के घर के बारे मे,,और चाचा को क्या
परेशानी अगर माँ ने वो घर रेखा को दे दिया,,,और सबसे बड़ी बात इन लोगो का क्या झगड़ा
है जो काफ़ी टाइम से चल रहा है,,,,,और चाची रेखा की शादी मे क्यूँ नही गयी ,,रेखा
तो उन्ही के घर मे काम करती थी फिर भला चाचा चाची उसी की शादी मे क्यूँ नही
गये,,,,

मैं यही सब सोचता हुआ कार ड्राइव कर रहा था और थोड़ी टेन्षन मे था लेकिन तभी मेरी
टेन्षन ज़्यादा हो गयी,,,क्यूकी हम लोग रेखा के घर के सामने से गुजर रहे थे किसी ने
कार नही रोकी वहाँ पर,,,,रेखा का घर तो यहीं है फिर ये लोग कहाँ जा रहे है,,
कहीं ये लोग उसी घर पर तो नही जा रहे जो घर माँ ने रेखा को गिफ्ट किया है,,मैं
यही सब सोच रहा था कि कविता ने सॉंग प्ले कर दिए,,,मेरा ध्यान म्यूज़िक की तरफ हुआ
तो कुछ पल के लिए टेन्षन से पीछा छूट गया मेरा,,,


म्यूज़िक सुनते हुए और ड्राइव करता हुवे मैने देखा कि हम लोग काफ़ी दूर आ गये थे,,हम
लोगो को चाचा के घर से चले करीब 2 अवर्स हो गये थे,,,तभी मैने देखा कि डॅड
की कार रुक गयी और मामा और माँ कार मे से उतर गये ,,मैने सोचा ये यहाँ क्यूँ रुक गये
इतनी ही देर मे मेरा ध्यान गया एक हवेली की तरफ जो खूब सज्जी-धजी हुई थी,,मैने
भी कार रोक दी और कार से उतर गया,,,माँ मामा केवल और सीमा चलते हुए हवेली के अंदर
चले गये ,,कविता और सोनिया भी कार से उतर कर उनके पीछे चली गयी लेकिन मैं वहीं
कार के पास रुका हुआ था और हवेली को देख कर थोड़ा हैरान था,,,ये हवेली किसकी है
जिसके अंदर सब लोग जा रहे है,,,,तभी माँ की आवाज़ आई,,,,रुक क्यूँ गये बेटा चलो अंदर
चलते है,,,,

मैं फिर भी वहीं रुका रहा,,इतने मे माँ करीब आई और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने
साथ लेके चलने लगी,,,,वहाँ पर कुछ गाँव के लोग थे जो माँ को सर झुका झुका कर
प्रणाम करते हुए मालकिन मालकिन बोल रहे थे,,,मुझे कुछ समझ नही आ रहा था ये
सब क्या हो रहा है,,,,मैं माँ का हाथ पकड़ कर माँ के साथ चल रहा था,,,जैसे ही
हम लोग हवेली के अंदर गये मैं तो देख कर दंग रह गया,,,वो हवेली हम लोगो के घर से
बहुत ज़्यादा बड़ी थी,,और हवेली के बीचो बीच काफ़ी लोग बैठे हुए थे उन लोगो मे
रेखा और मनोहर भी थे,,,रेखा शादी के जोड़े मे थी और साथ ही मनोहर बैठा हुआ था
और उन्ही लोगो के पास मेरे डॅड भुआ विशाल और शोभा भी बैठे हुए थे,,,केवल सीमा
सोनिया और कविता भी उन लोगो के पास चले गये,,,,,,कविता और सोनिया सब लोगो से मिलने लगी
वो दोनो बहुत खुश थी,,,सीमा भी उनके साथ ही थी,,,,जबकि केवल डॅड और विशाल के पास
जाके बैठ गया था,,

मैं अभी भी माँ का हाथ पकड़ कर उनके साथ चल रहा था,,,,और साथ साथ हवेली को
हर तरफ से देख रहा था,,,,तभी मैने माँ से पूछ लिया,,,,

माँ ये हवेली किसकी है,,,,,माँ ने मेरी तरफ देखा तो समझ गयी कि मैं कुछ परेशान
हूँ ,,,,बेटा ये मेरी हवेली है और अब मैने इसको रेखा को शादी मे गिफ्ट कर दिया है,,

आपकी हवेली,,,,लेकिन अपने कभी बताया नही इसके बारे मे,,,,,,

तभी माँ बोली,,बेटा मैं जानती हूँ तू थोड़ा परेशान है लेकिन अभी मुझसे कुछ मत
पूछना ,,,,अभी शादी के घर मे है हम लोग ,,,तुम बस एंजाय करो मैं बाद मे तुझे
सब बता दूँगी,,,,लेकिन प्लज़्ज़्ज़ तू अभी कुछ मत पूछ मेरे से,,,,
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Reply
07-16-2019, 11:58 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
माँ ने इतना बोला और मुझे रेखा और मनोहर के पास ले गयी,,,,,मैं माँ से बहुत सवाल
करना चाहता था लेकिन माँ ने मना कर दिया था,,,और वैसे भी मैं रेखा और मनोहर के
पास पहुँच गया था इसलिए माँ से कुछ नही पूछ सका,,,,,

मैने रेखा और मनोहर को शादी की बधाई दी और जाके एक चेयर पर बैठ गया,,,रेखा
मुझे बड़ी मस्ती से देख रही थी लेकिन मैने उसकी तरफ कोई ध्यान नही दिया,,डॅड और
विशाल भी मुझे मेरे एग्ज़ॅम्स के बारे मे पूछ रहे थे लेकिन मैं किसी टेन्षन मे था
पता नही क्या जवाब देता गया मैने उनको कुछ नही पता मुझे,,,मेरे दिमाग़ मे बहुत सवाल
थे लेकिन किसी का जवाब नही मिला था अभी तक मुझे,,,

मैं वहाँ से उठा और एक तरफ जाके अकेला खड़ा हो गया और हवेली को देखने लगा,,उस हवेली
मे 3 तरफ रूम्स बने हुए थे और एक तरफ था बड़ा सा दरवाजा बीच मे बहुत बड़ा आँगन
था जिसमे सब लोग बैठे हुए थे,,,,,वो सब लोग शादी शुदा जोड़े के पास बैठकर कोई
रीत रिवाज पूरे कर रहे थे,,,,सब लोग एंजाय कर रहे थे,,,,यहाँ तक कि सोनिया
और कविता भी सीमा के साथ बातें करते हुए एंजाय कर रही थी,,,,सोनिया को शायद कुछ
पता नही था इस सब के बारे मे इसलिए वो ज़्यादा टेन्षन नही ले रही थी,,,लेकिन मुझे
बहुत टेन्षन हो रही थी,,,,घुटन सी होने लगी थी,,,,मैं जल्दी से चलता हुवा हवेली
के बाहर आ गया और खुली हवा मे साँस लेने की कोशिश करने लगा,,,मुझे अभी भी थोड़ी
घुटन हो रही थी इसलिए मैं वहाँ से आगे की तरफ चल पड़ा,,,


मैं टेन्षन मे पता नही किस तरफ जा रहा था मुझे कुछ समझ नही आ रहा था,,मैं
जिस रास्ते भी जाता वहाँ पर लोग मिल जाते मुझे,,,और वो लोग मुझे राम-राम छोटे मालिक
,,कोई बोलता प्रणाम छोटे मालिक,,,,,,मैं कुछ समझ नही पा रहा था,,इसलिए जल्दी
से वहाँ से भाग कर खेतो के बीच चला गया,,,,वहाँ पर कोई नही थी,,बहुत शांति
थी वहाँ ,,,मैं टेन्षन मे एक पैड के नीचे बैठ गया और जो सब भी हो रहा था उसके
बारे मे सोचने लगा,,,,,,,

क्या झगड़ा चल रहा था चाचा और माँ के बीच,,,सीमा क्यूँ नही गयी चाचा के घर और
वो चाचा को घटिया इंसान क्यूँ बोल, रही थी,,,ये हवेली माँ की थी तो माँ ने हम लोगो
को कभी बताया क्यूँ नही,,,मेरा दिमाग़ फटा जा रहा था इसलिए दिमाग़ को आराम देने के लिए
मैं पेड़ के नीचे लेट गया और सर भारी हो गया था मेरा इसलिए आँख लग गयी थी,,


जब उठा तो शाम हो गयी थी,,अंधेरा होने लगा था,,ठंड लगने लगी थी शायद इसलिए
मेरी आँख खुल गयी थी,,,मैं वहाँ से उठा और हवेली की तरफ चलने लगा,,,


हवेली पहुँचा तो देखा बाहर आँगन मे कोई नही था,,तभी एक रूम मे मुझे कुछ आवाज़
सुनाई दी,,,मैं उस रूम मे गया तो देखा सभी लोग वहीं बैठे हुवे थे,,,,गाँव का
कोई नही था बस सभी घर वाले ही थे वहाँ पर,,,



तभी डॅड उठे और मेरे पास आ गये,,,,,,,कहाँ चले गये थे तुम सन्नी,,,कितनी टेन्षन
हो गयी थी हम लोगो को,,,,बता कर नही जा सकता था क्या,,,,मुझे कुछ समझ नही आ
रहा था ,,,,रूम मे बैठा हर शक्स मेरी तरफ देख रहा था,,,कविता और सोनिया कुछ
उदास लग रही थी,,,,तभी मेरा ध्यान गया माँ की तरफ जो मेरी हालत समझ गयी थी,,वो
जानती थी मैं टेन्षन मे हूँ ,,बहुत सवाल है मेरे दिल मे,,,,लेकिन माँ ने मना किया था
इसलिए मैं कुछ पूछ भी नही सकता था,,,


तभी डॅड फिर से बोले,,,बोल ना सन्नी कहाँ चला गया था तू,,,कितना डर गये थे हम
लोग,,बता कर नही जा सकता था क्या ,,,,कहाँ चला गया था बोल ना,,चुप क्यूँ है,,,

मैने फिर देखा रूम मे हर किसी का ध्यान मेरी तरफ ही था,,,सब परेशान थे,,,

तभी मैं मज़ाक मे बोल पड़ा,,,,अरे आप सब लोग इतने परेशान क्यूँ हो,,,मैं तो बस बाहर
घूमने गया था,,,पहली बार यहाँ आया तो दिल किया बाहर घूमने को,,,आप सबको तो
पता है जब भी मैं नयी जगह जाता हूँ खांसकार गाँव मे तो घूमने का बहुत दिल करता
है मेरा,,,,और वैसे भी जब मैं आया बहुत लोग थे यहाँ मैं थोड़ा डर गया था इतने
लोगो को देख कर इसलिए ताजी हवा खाने और गाँव मे घूमने के लिए मैं बाहर चला
गया था,,,घूमते हुए कब शाम हो गयी पता ही नही चला,,,


घूमने ही जाना था तो बता कर नही जा सकता था,,,,देख सब कितने परेशान हो गये थे
,,,सोनिया तो रोने लगी थी कि पता नही तू कहाँ चला गया है,,,,कभी तो अकल से काम
लिया कर,,,,

मैने सोनिया की तरफ देखा तो उसकी आँखें नम थी और कविता की भी,,,

सौररी सौरी सौरी गाइस ,,में किसी को तंग नही करना चाहता था इसलिए बिना बोले ही
चला गया था,,,अपनी ग़लती की माफी माँगता हूँ मैं आप लोगो से,,,प्लज़्ज़्ज़ मुझे माफ़ कर
दो आप सब लोग,,,मैने अपने कान पकड़े और ज़मीन पर बैठ गया,,,,ये देखकर सब लोग
हँसने लगे जो अभी कुछ देर पहले काफ़ी परेशान लग रहे थे,,,

सब लोग खुश हो गये थे लेकिन माँ मुझे अजीब नज़रो से देख रही थी,,,वो समझ गयी
थी कि मैं परेशान हूँ,,,,तभी मैने कविता और सोनिया की तरफ देखा तो वो दोनो भी
मुझे अजीब नज़रो से देख रही थी,,,,खांसकार सोनिया,,,,क्यूकी उस से मेरी हालत छुपती
नही थी कभी,,,हो ना हो उसको भी पता चल गया था कि मैं कुछ परेशान हूँ,,,



तभी मेरे पीछे से विशाल और मामा अंदर आ गये,,,आ गये सन्नी तू,,,,पता नही कहाँ
कहाँ तलाश किया तुझे,,,कहाँ चला गया था,,,,मैं तो परेशान हो गया था,,,,


सौरी विशाल भाई,,,मैं ज़रा घूमने गया था बाहर और घूमता हुआ कुछ दूर निकल
गया था,, सौररी भाई,,,,

चल कोई बात नही अब तो आ गया तू,,,,लेकिन दोबारा बिना बोले कहीं मत जाना तू,,,समझ
गया,,,

जी भाई,,समझ गया,,,,

फिर मैं विशाल के साथ जाके एक सोफे पर बैठ गया ,,,सीमा मामी और गीता भुआ हम लोगो
के लिए खाने पीने का समान ले आई और सब लोग भी खाना खाने लगे,,,,खाना खाते हुए
सब लोगो ने हँसी मज़ाक शुरू कर दिया,,,,जो रूम अभी तक चुप-चाप था उसमे फिर से
मस्ती शुरू हो गयी थी,,,,



लेकिन कोई था जो उदास आँखों से मुझे देख रहा था,,,वो थी सोनिया जो खाना खाती हुई
मेरी तरफ ही देख रही थी,,,और उसी के साथ कविता भी नम आँखों से खाना खा रही
थी लेकिन ध्यान मेरी तरफ़ ही था उसका भी ,,,,सॉफ पता चल रहा था वो दोनो रो कर
हटी थी,,

खाना खाने के बाद सब लोगो अपने अपने रूम मे चले गये,,,,रात काफ़ी हो गयी थी,,और वैसे
भी सर्दी का मौसम था,,,रेखा अपने पति मनोहर के साथ चली गयी एक रूम मे,,एक रूम
सीमा और केवल का हो गया,,,,माँ और डॅड भी अपने रूम मे चले गये,,,जबकि विशाल को मामा
'के साथ और शोभा को भुआ के साथ रूम शेयर करना था,,,,कविता और सोनिया एक रूम मे थी

,,,,मैं किसी के साथ नही रहना चाहता था,,,हालाकी भुआ और शोभा ने मुझे बोला भी
था उनके साथ सोने को लेकिन मैं अकेला रहना चाहता था,,


मैं एक रूम मे जाके बिस्तेर पर लेट गया,,,,लेकिन टेन्षन की वजह से मुझे नींद नही आ
रही थी,,,,काफ़ी देर बिस्तेर पर लेटा हुआ करवटें बदलता रहा लेकिन नींद का दूर तक कोई
नाम-ओ-निशान नही था,,,फिर उठा और बाहर आँगन मे आके बैठ गया,,,सर्दी बहुत थी लेकिन
फिर भी मैं बनियान और शौरट्स मे ही बाहर आके बैठ गया,,,अभी कुछ सोच ही रहा था
कि मेरी पीठ पर किसी का हाथ लगा,,,पलट कर देखा तो वो कविता थी,,,,


इतनी रात को बाहर क्या कर रहे हो तुम सन्नी,,,,उसने मेरे पास आके बैठते हुए मेरे से
सवाल किया,,,,,


कुछ नही कविता,,,बस नींद नही आ रही थी इसलिए बाहर आके बैठ गया,,,नयी जगह
है ना ,,,अड्जस्ट करना थोड़ा मुश्किल हो रहा था ,,,,,

हां हां वो तो ठीक है लेकिन कुछ पहन तो लेता,,,,ये बनियान मे ही बाहर क्यूँ आ गया
,,इतना सर्दी है ,,,,,,तुझे सर्दी नही लग रही क्या,,,


इस से पहले मैं कुछ बोलता कविता ने अपने उपर लिया हुआ कंबल मेरी पीठ पर दिया और
मेरे से चिपक कर बैठ गयी,,,,

मैं जानती हूँ सन्नी तुम कुछ परेशान हो,,,तू मेरे से झूठ नही बोल सकता और अगर बोले
भी तो मैं तेरी आँखों मे सब सच जान लेती हूँ,,,,जानती हूँ कोई बात तुझे परेशान
कर रही है,,,


नही नही कविता ऐसी कोई बात नही है,,,,तुम ग़लत समझ रही हो,,,,मैं तो नयी जगह
पर आके थोड़ा परेशान हूँ बस ,,वैसे कोई बात नही है,,,,

तभी कविता ने मेरी तरफ बढ़ते हुए अपना सर मेरे शोल्डर पर रख दिया,,,,मैने बोला
ना सन्नी तू मेरे से झूठ नही बोला सकता,,,,,,,,,तू अगर सच नही बोलना चाहता मेरे से
तो कोई बात नही लेकिन कम से कम झूठ तो मत बोल,,,जबकि तुझे पता है मैं तेरा
झूठ एक पल मे पकड़ लेती हूँ,,,

मैने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया,,,,क्यूकी जैसे सोनिया मुझे बहुत अच्छी तरह जानती
थी वैसे ही कविता भी उतनी ही अच्छी तरह से मुझे जानती थी,,,,मैं इन लोगो से चाह
कर भी झूठ नही बोल सकता था और अगर बोलता तो पल भर मे मेरा झूठ पकड़ा जाता,,



अछा कविता जी झूठ नही बोलता मैं,,,हाँ मैं कुछ परेशान हूँ और तुझे अभी कुछ न्ही
बता सकता,,,,,लेकिन तू पहले मुझे ये बता कि तू इतनी रात यहाँ क्या कर रही है,,,


मैं तो वॉशरूम जाने के लिए रूम से बाहर आई थी तुझे यहाँ देखा तो तेरे पास आ गयी

हवेली मे किसी भी रूम मे बाथरूण अटॅच नही था,,,,,हवेली के पीछे की तरफ बाथरूम
बना हुआ था,,,,,

तभी मैं उठा और कविता भी उठ गयी,,,,हम दोनो हल्की हल्की बात करते हुए गलियारे मे
से गुजर कर बाथरूम की तरफ जाने लगे,,,,,,गलियारे से गुजर कर राइट साइड बाथरूम
था और लेफ्ट साइड सीढ़ियाँ थी छत पर जाने के लिए,,,,बाथरूम के पास लाइट जल रही थी
जिसकी हल्की रोशनी सीढ़ियों पर भी थी,,,हम दोनो एक ही कंबल मे चलते हुए गलियारे से
गुजर रहे थे ,,तभी कविता बाथरूम की तरफ जाने लगी लेकिन मैने उसका हाथ पकड़
लिया और उसको अपने साथ सीढ़ियों की तरफ ले गया,,,,


मैं उसके साथ एक ही कंबल मे था इसलिए थोड़ा गर्म हो गया था.,,,मैने उसका हाथ पकड़ा
और सीढ़ियों की तरफ ले गया,,,क्यूकी बाथरूम की तरफ कोई भी आ सकता था लेकिन सीढ़ियों
पर किसी के आने का डर नही था,,,8-10 सीडिया चढ़ने के बाद एक टर्न था फिर आगे की
तरफ सीढ़ियाँ जाती थी,,,,,जहाँ पर टर्न था वहाँ कुछ जगह थी खड़े होने के लिए

मैं कविता को लेके वहीं खड़ा हो गया,,,,,अभी भी हम दोनो एक ही कंबल मे थे,,,,

सन्नी प्ल्ज़्ज़ जाने दे मुझे बाथरूम जाना है,,,,,


अच्छा अगर बाथरूम ही जाना था तो मेरे पास क्यूँ आई थी तू,,,
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Reply
07-16-2019, 11:58 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
सौरी बाबा ग़लती हो गयी,,,,,मैने तुझे परेशानी मे बैठा देखा और तेरे पास आ गयी,,अब
दोबारा कभी ऐसी ग़लती नही होगी,,,,अब तो मुझे जाने दे ना,,,,उसको पता लग गया था
मेरा इरादा नेक नही है,,,,


अब ग़लती की है तूने तो सज़ा भी मिलेगी तुझे,,,,बिना सज़ा के नही जाने दूँगा मैं,और
अब तो वैसे भी हालत खराब हो गयी है मेरी,,,इतनी देर से तू साथ मे जो चिपकी हुई है


तभी कविता का ध्यान गया कि हम लोग एक ही कंबल मे थे,,पहले मैं परेशान था इसलिए
उसको परवाह नही थी इस बात की लेकिन अब मैं गर्म हो गया था तो उसको टेन्षन होने लगी
थी एक ही कंबल मे मेरे साथ,,,,

देख सन्नी बाद मे सज़ा दे देना अभी मुझे जाने दे,,,,कोई आ जाएगा ,,,प्लज़्ज़्ज़ सन्नी

लेकिन मैं कुछ नही बोला बस उसके लिप्स की तरफ बढ़ने लगा,,अभी मेरे लिप्स उसके लिप्स पर
टच ही हुए थे कि उसने पल भर मे मेरे लिप्स को अपने लिप्स मे जाकड़ लिया और किस करना
शुरू कर दिया,,,,यही बात मुझे अच्छी लगती थी कविता की,,,पहले मना करती रहती है
और फिर जल्दी ही हथियार भी डाल देती है,,,,


हम दोनो के लिप्स एक दूसरे के लिप्स मे जकड़े हुए थे और एक मीठी और लंबी किस होने लगी
थी हम दोनो मे,,,लेकिन मैं किस तक ही रुका नही रह सकता था,,मेरे हाथ उसकी टी-शर्ट
के अंदर चले गये मैने उसके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया,,,हम लोगो के उपर जो
कंबल था वो भी नीचे गिर गया था,,,मेरे हाथ उसके बूब्स पर थे जबकि उसके हाथ भी
मेरी बनियान मे मेरी पीठ पर चले गये थे,,,,हम लोग पूरे मस्त हो चुके थे,,,


तभी हम लोगो को किसी का खांसने की आवाज़ आई,,,,और जैसे ही हम दोनो ने उस तरफ देखा
तो हम दोनो की गान्ड फॅट गयी,,,,

सोनिया हम लोगो के पास खड़ी हुई थी,,,मेरे हाथ अभी भी उसकी टी-शर्ट मे उसके बूब्स पर
थे जबकि उसके हाथ मेरी पीठ पर थे,,,हम दोनो के लिप्स भी एक दूसरे के थूक से
गीले हो चुके थे,,,,,हम दोनो का हाल बहुत बुरा था,,,ऐसा लग रहा था कि पैरो के
नीचे से ज़मीन निकल रही हो जैसे,,,,


तभी सोनिया बोली,,,,,अगर लैला-मजनू का प्यार ख़तम हो गया हो तो क्या आप वापिस रूम मे
चलेगी कविता जी,,,


सोनिया ने इतना बोला तो हम लोग एक दम से एक दूसरे से दूर हट गये,,,

मैं तो वू मैं वऊू मैं,,,,कविता से कोई बात ही नही हो रही थी,,,

क्या मैं वो मैं वो लगा रखा है,,,,सोनिया थोड़ा गुस्से मे,,,सीधी तरह बोल क्या बोलना
है,,,,

वो मैं तो बाथरूम जाने के लिए आई थी सोनिया,,,,इतना बोलकर उसने सर नीचे झुका लिया

बातरूम इस तरफ नही उस तरफ है,,सोनिया ने बाथरूम की तरफ इशारा करते हुए बोला

कविता जल्दी से भाग कर बाथरूम की तरफ चली गयी,,,,,

तभी सोनिया मुझे बोली,,,,,,,अब तू भी ये मत बोलना कि तू भी बाथरूम जाने के लिए आया
था,,,क्यूकी छत पर कोई बाथरूम नही है,,,मैने सुबह ही चेक किया था,,,इतना बोलकर
वो हँसने लगी,,,,

मेरी तो बोलती ही बंद हो गयी थी ,,,मानो जैसे मुझे साँप सूंघ गया हो,,,

तभी वो हँसती हुई मेरे करीब आई और ज़मीन पर गिरा उठा कंबल उठा कर वहाँ से
चली गयी,,,,

वो तो चली गयी लेकिन मैं अभी तक वहीं खड़ा हुआ था,,,मेरे से एक कदम भी आगे नही
बढ़ाया जा रहा था,,,मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे पैर ज़मीन मे धँस रहे हो,,
मुझे समझ नही आ रहा था,,,,,ये सोनिया एक दम यहाँ कैसे आ गयी,,,,और सबसे बड़ी बात
ये मुझे और कविता को देखकर गुस्सा क्यूँ नही हुई,,मुझे टेन्षन होने लगी थी,,,

साला एग्ज़ॅम के बाद छुट्टियाँ मनाने और एंजाय करने के लिए गाँव आया था लेकिन जबसे आया था
एक के बाद एक टेन्षन ही मिल रही थी मुझे,,,,एंजाय का तो कोई अता पता ही नही था,,,और
अब जब थोड़ा एंजाय करने ही लगा था फिर से टेन्षन ने आके पकड़ लिया था और इस बार
टेन्षन सोनिया के रूप मे आई थी,,,,


मैं बड़ी मुश्किल से सीडियाँ उतरता हुआ अपने रूम तक गया और जाके लेट गया,,,टेन्षन के
मारे पूरी रात नींद नही आई,,,इसलिए सुबह जल्दी ही फ्रेश होके तैयार हो गया था,,,लेकिन
तैयार होके रूम से बाहर नही निकला ,,,क्यूकी मैं सोनिया के सामने नही जाना चाहता था,,

फिर भी जब देखा कि बाहर सब लोगो जमा हो गये है और अपने रीति रिवाज करने लगे है
रेखा और मनोहर के लिए तो मुझे बाहर जाना ही पड़ा,,,,लेकिन मैं चोरों की तरह छुपता
हुआ रूम से बाहर निकल रहा था ताकि सोनिया मुझे नही देख ले,,,,मेरा इरादा छुप्ते हुए
आँगन से चलके हवेली के बाहर जाने का था,,,लेकिन इतने लोगो के बीच च्छुपते हुए हवेली
से बाहर जाना आसान नही था,,इसलिए मैं हवेली की दीवारो की तरफ देखता हुआ सबसे
अंजान बनता हुआ बाहर की तरफ जा रहा था,,,

मैं इधर उधर देख रहा था तभी किसी की आवाज़ सुनाई दी,,,,किसको तलाश रहे हो
सन्नी,,,,,,मैने आवाज़ का पीछा किया तो देखा ये तो सीमा थी,,,,,जो मेरे करीब आ रही
थी,,,

इस से पहले सीमा को कोई जवाब देता एक और आवाज़ कानो मे पड़ी,,,,,और किसको तलाश करना
है इसने,,,,अपनी गर्लफ्रेंड को तलाश कर रहा होगा,,,,इतना बोलते हुए सोनिया भी सीमा मामी के
पीछे पीछे आ गयी,,,,

सीमा की टेन्षन नही थी मुझे लेकिन सोनिया को देख कर मेरी सिट्टी-पिटी गुल्ल हो गयी थी

कविता अपने रूम मे है सन्नी,,,सोनिया ने इतना बोला और हँसने लगी साथ मे सीमा मामी भी
सीमा जब हंस रही थी तो बहुत क्यूट लग रही थी मेरा ध्यान उसकी मुस्कान पर टिक गया,,कितनी
क्यूट लग रही थी सीमा मामी हँसती हुई,,,,

मैं सीमा की तरफ देख रहा था तभी सोनिया मुझे गुस्से से घुरने लगी,,,,

नही नही मैं मैं किसी को तलाश नही कर रह था मैं तो हवेली को अच्छी तरह देख
रहा था,,,कितनी खूबसूरत हवेली है,,,,मैने सोनिया से नज़रे घुमा ली और सीमा मामी को
जवाब देने लगा,,,

अच्छा तू हवेली देख रहा था ,,मुझे लगा शायद कविता को तलाश रहा है तू,,,,सीमा ने
इतना बोला और फिर सीमा और सोनिया हँसने लगी,,,,

फिर मैं कुछ बोलता इस से पहले किसी ने पीछे से मेरा हाथ पकड़ लिया,,,,ये माँ थी

अच्छा हुआ तू तैयार हो गया सन्नी,,,चल मेरे साथ मुझे कुछ काम है तेरे से,,,,माँ ने इतना
बोला और मुझे अपने साथ लेके जाने लगी,,,,

मैने शूकर मनाया कि माँ आ गयी और बचा लिया मुझे सोनिया और सीमा मामी से,,

मैं माँ के साथ चलके हवेली से बाहर जाने लगा तभी सोनिया फिर से बोली,,,,ले सन्नी
आ गयी तेरी गर्लफ्रेंड,,,,,,मैने पीछे मूड के देखा तो कविता अपने रूम से बाहर आ रही
थी,,

सोनिया ने ये बात थोड़ी ज़ोर से बोली थी तो आँगन मे बैठे हुए हर एक शक्स का ध्यान
कविता की तरफ चला गया और वो जल्दी से वापिस अपने रूम मे भाग गयी,,


माँ मेरा हाथ पकड़ कर चल रही थी लेकिन सोनिया की बात सुनके और कविता को वापिस उसके
रूम मे भाग कर जाते देख माँ भी हँसने लगी,,,लेकिन माँ रुकी नही और मुझे हवेली के
बाहर ले गयी,,,,,


माँ सोनिया कुछ भी बोलती रहती है,,,पागल है वो तो,,,,आप उसकी बात पे यकीन नही
करना,,,,मैं माँ को यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा था,,,,,

हाँ हाँ मैं जानती हूँ बेटा ,,,तुझे भी और सोनिया को भी,,,,और खांसकार कविता को भी,
मैं तेरी माँ हूँ मुझे सफाई देने की ज़रूरत नही तुझे,,,

माँ मुझे यकीन दिला रही थी कि उनको मेरी बात पर यकीन है लेकिन फिर भी वो हंस
रही थी,,,,


तभी ..............
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07-16-2019, 11:58 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
तभी एक बंदा माँ के पास आया,,,,,राम-राम मालकिन,,,राम-राम छोटे मालिक,,

मालकिन खेतों को पानी लगा दिया है


अच्छा किया,,,,अब कोई है तो नही खेतों मे,,,,,मुझे अपने बेटे को खेत दिखाने जाना है
मैं नही चाहती वहाँ कोई परेशान करे इसको,,,

नही मालकिन अब कोई नही है,,,,सब लोग चले गये है,,,,

ठीक है तुम भी जाओ हवेली और देखो अगर कोई काम है करने वाला,,,

वो बंदा हवेली मे चला गया और मैं माँ के साथ खेतों मे

माँ आप मुझे कहाँ लेके जा रही हो,,,,,मैने माँ के साथ चलते हुए पूछा

तेरे कुछ सवालो के जवाब देने हैं मुझे सन्नी,,,इसलिए कहीं ऐसी जगह जा रहे है
जहाँ कोई ना हो,,,,और वैसे भी मुझे तेरे से अकेले मे मिलना था,,,,इतना बोलकर माँ ने
मुझे आँख मार दी,,,


मैं कुछ बोलने ही लगा कि माँ ने चुप करवा दिया,,,,

यहाँ कुछ मत बोल सन्नी,,,पहले खेतों मे चल,,फिर जो पूछना होगा पूछ लेना,,,

फिर मैं कुछ नही बोला और माँ के साथ चलने लगा,,,,हम लोग खेतों के बीच कच्ची
सड़क पर चल रहे थे ,,,रास्ता बहुत सकरा था,,,,खड़ी फसल मे चलने मे मुश्किल हो
रही थी थोड़ी,,,,,तभी कुछ देर मे हम ऐसी जहग पहुँच गये जहाँ खड़ी फसल काट
कर एक जगह बनाई थी थी,,,वो जगह करीब 10/10 फीट की थी,,,,

वहाँ पहुँच कर माँ जल्दी से ज़मीन पर बैठ गयी और मुझे भी अपने साथ बैठने को बोला

देख रहा है ये जगह,,,, तेरे मामा ने ये फसल काट कर जगह तैयार की थी ताकि हम
मस्ती कर सके,,,,इतना बोलकर माँ ने मेरे लंड पर हाथ रखा और हल्के से दबा दिया,,,


रूको माँ,,,इतनी भी क्या जल्दी है,,,पहले कुछ बातें तो हो जाए,,,,मैने माँ का हाथ
पकड़ते हुए बोला,,,,

हाँ हाँ बातें भी कर लेते है साथ साथ,,,,चल पूछ जो पूछना है,,,,जानती हूँ तू
बड़ा हो गया है अब तेरे को कुछ बातें बतानी ही पड़ेगी,,,,लेकिन याद रखना तू पूछ
तो कुछ भी सकता है लेकिन मैं जवाब उन्ही बातों का दूँगी जो अभी दे सकती हूँ,,क्यूकी
कुछ बातें ऐसी है जिनका जवाब मैं नही दे सकती,,,,

ऐसी कोन्सि बातें है जिनका जवाब आप नही दे सकती माँ,,मैने कुछ शक की नज़र से माँ
को देखा तो माँ हँसने लगी,,,,

कुछ नही बेटा,,,चल पूछ क्या पूछना है,,,,


अपने हवेली के बारे मे मुझे क्यूँ नही बताया कभी,,,,और ये हवेली अपने रेखा को गिफ्ट की
तो चाचा बुरा क्यूँ मान गये,,,,,और चाचा चाची मे से कोई रेखा की शादी मे क्यूँ नही आया
और ऐसी क्या बात है जिस पर अपने झगड़ा किया अपने चाचा से,,,कॉन सा मसला है जो काफ़ी
टाइम से चला आ रहा है,,,,मैने इतने सारे सवाल एक दम से कर दिए तो माँ कुछ परेशान
हो गयी,,,,

रुक रुक रुक थोड़ी साँस लेले,,,,,इतने सवाल एक दम से,,,,,,देख मैने पहले बोला है की
मैं कुछ बातों का जवाब अभी दे सकती हूँ लेकिन कुछ का सही टाइम आने पर,,,अभी के लिए
तुझे बता देती हूँ,,,,,,,,,तभी माँ ने बोलना शुरू किया,,,,


बेटा ये हवेली मेरी है,,,,मेरे बाप-दादा के टाइम की है ये हवेली,,,,मेरा बाप इस गाँव का
बहुत बड़ा आदमी था,,,बहुत रुतबा था उसका यहाँ,,,,बहुत इज़्ज़त थी उसकी इस गाँव मे,,इस
गाँव की ज़्यादा ज़मीन भी मेरे बाप दादा की है,,,ये जो खेत है ये भी मेरे बाप के है,,
लेकिन कहते है ना कि जिसका जितना नाम होता है वो उतना ही बदनाम भी हो जाता है
कभी-कभी
,,,,,

तेरे पापा अशोक मेरे बाप यानी कि अपने ससुर से नफ़रत करते थे तूने तो देखा ही है कि
वो मेरे चाचा से भी नफ़रत करते है,,,,इसलिए तो उन्होने रेखा की शादी मे भी नही आने
दिया चाचा चाची की,,,हालाकी उन्होने चाची को बुलाया था शादी मे पर चाचा को नही
बुलाया,, और चाची चाचा के बिना नही आ सकती थी,,,,

इस हवेली के बारे मे भी इसलिए आप बच्चों को भी कुछ नही बताया कभी,,,,मैं अक्सर
गाँव तो आती थी लेकिन हवेली मे बहुत कम आती थी,,,,तुम लोग भी आए हो हवेली लेकिन तब
बहुत छोटे थे,,,,लेकिन जब तुम कुछ बड़े होने लगे तो अशोक ने मना कर दिया था तुम
लोगो को यहाँ लेके आने के लिए,,,क्यूकी फिर तुम लोगो ने सवाल करने थे और उन सवालो का
मेरे पास कोई जवाब नही होना था,,,जब तक तुम सब इतने बड़े नही हो जाते कि बातों को
समझ सको तब तक तुम लोगो को हवेली से दूर रखा था मैने,,,,,हालाकी विशाल और शोभा
जानते है हवेली के बारे मे लेकिन तुम और सोनिया नही जानते,,,,

तो क्या ये खेत भी आपके है माँ,,,,और क्या आप यहाँ के ठाकुर की बेटी हो,,और अगर विशाल
और शोभा जानते है तू मुझे और सोनिया को क्यूँ अंजान रखा अपने इन सब बातों से,,,


बेटा तुम और सोनिया अभी छोटे हो,,,लेकिन विशाल और शोभा बड़े हो गये है इसलिए उनको सब
बातें बतानी पड़ी हमको,,,विशाल को कुछ बातें तेरे मामा ने बता दी थी जबकि शोभा को
तेरी भुआ ने,,,,तुमको और सोनिया को बताने की टेन्षन मेरी और अशोक की थी ,,लेकिन तुम लोग
अभी इतने बड़े नही हुए इसलिए मैने और अशोक ने तुम लोगो को अभी तक कुछ नही बताया,,
अब तुम कुछ कुछ जान गये हो तो तुमको बता रही हूँ,,,

यहाँ बहुत रुतबा था मेरे परिवार का और अब वही रुतबा मेरा भी है,,,,गाँव मे बहुत
ज़मीन है मेरी,,,जब मेरे बाप के मरने के बाद मेरी शादी तेरे पापा से हुई और मैं उनके
साथ शहर चली गयी तो हम लोग बहुत छोटे घर मे रहते थे,,,मैं चाहती थी कि हम
लोग बड़े घर मे रहे लेकिन तेरे पापा के पास इतना पैसा नही था,,और तेरे पापा मेरे से
पैसा लेने को तैयार नही थे क्यूकी वो पैसा मेरे बाप की ज़मीन की कमाई से जो आना था
,,,लेकिन घर की हालत इतनी ठीक नही थी,,,बॅंक मे तेरे पापा की नयी नयी नोकरी लगी थी
लेकिन तभी पगार इतनी नही थी,,,इसलिए तो तेरी भुआ ने भी बुटीक खोला था ताकि
घर मे कुछ पैसे आ सके,,,वो सब मेहनत करने को तैयार थे लेकिन मेरे से पैसा नही ले
रहे थे,,,इसलिए मैने तुम बच्चों के नाम पर पैसे ज़मा करवाने शुरू कर दिए और कुछ
पैसे यहाँ गाँव वालो को दान देने शुरू कर दिए,,,,



अच्छा माँ कितने पैसे वाली हो तुम ज़रा बताना,,,और कितने पैसे है हम सब भाई बेहन के
अकाउंट्स मे,,,,,

जब माँ ने मुझे पैसे बताए तो मेरा मुँह खुला का खुला रह गया,,,,साला इतने पैसे थे
मेरे घर वालो के पास ,,,मतलब मेरी माँ के पास,,मुझे यकीन नही हो रहा था


हां बेटा बहुत पैसा है हम लोगो के पास,,,,लेकिन तेरे पापा को वो पैसा नही चाहिए इसलिए
तुम बच्चों को दे दिया मैने,,,,और बाकी का गाँव वालो को,,,,इसलिए तो गाँव वाले इतनी इज़्ज़त
करते है मेरी,,,,


लेकिन माँ तुमने बताया नही कि हवेली रेखा को दी तो चाचा गुस्सा क्यूँ हो गये थे,,,,

माँ कुछ देर चुप रही,,,,फिर बोली,,,,,,अरे बेटा रेखा चाचा के घर की काम वाली है
और इतनी बड़ी हवेली किसी काम वाली के नाम करदी मैने तो चाचा गुस्सा हो गये,,,भला
कोई काम वाली को इतनी बड़ी हवेली देता है क्या,,,,

तो आपने क्यूँ दी हवेली रेखा को माँ,,,,मैने फिर पूछा

अरे बेटा वो काम वाली चाचा चाची के लिए थी मेरे लिए तो एक दोस्त जैसी थी,,इसलिए
मैने वो हवेली उसको दे दी,,,,और भला मैने क्या करनी थी हवेली,हम लोगो का घर है
ना शहर मे,,,यहाँ हवेली मे किसको रहना था,,,,पड़ी पड़ी पुरानी और गंदी ही हो रही
थी,,,,



अच्छा माँ तो वो क्या मसला है जो बहुत टाइम से चला आ रहा है तुम्हारा और चाचा का,,


कुछ नही बेटा,,मेरे चाचा को मेरी शादी तेरे पापा से मंजूर नही थी,,,और तेरे पापा भी
मेरे चाचा से बहुत नफ़रत करते थे ,,यही मसला है जो कब्से चला आ रहा है और अभी
तक सॉल्व नही हुआ,,,,,


लेकिन पापा आपकी फॅमिली से इतनी नफ़रत क्यूँ करते है माँ,,,जब देखो चाचा का नाम सुनते
ही पापा गुस्से मे आ जाते है,,यहाँ तक कि बीमारी मे भी चाचा का हाल चाल पूछने नही
आते गाँव मे,,,,

बस बस ,,,अब बहुत हो गये सवाल,,,,हवेली के बारे मे तूने पूछना था तो तूने पूछ लिया
अब कोई सवाल नही,,,और वैसे भी मैं इसका जवाब नही देना चाहती ये बात तेरे पापा ही
बता सकते है तुमको,,,

अब सवाल करने की बारी मेरी है सन्नी,,,,ये तेरे और कविता के बीच मे क्या चल रहा
है जिसके बारे मे सोनिया बोल रही थी अभी,,,,

माँ का सवाल सुनके मैं थोड़ी देर चुप हो गया,,,,कुछ नही माँ आपको तो पता है सोनिया
बस मुझे तंग करती रहती है,,,,मेरे और कविता मे कुछ नही चल रहा ये तो बस सोनिया
का मज़ाक है,,,

अरे बेटा तू डर क्यूँ रहा है,,,,वैसे भी तू बचपन से कविता के साथ रहा है,,बहुत
बनती आई है तुम लोगो मे शुरू से,,,अगर कोई बात है तो मुझे बता दो,,,और वैसे भी
मुझे तो कोई परेशानी नही है तुम लोगो के रिश्ते से अगर तुम कविता से शादी भी करना
चाहते हो तो मुझे अच्छा लगेगा कि कविता मेरे घर की बहू बने,,,

माँ ने इतना बोला और मैं थोड़ा शरमा गया,,,,माँ को यकीन हो गया कि हम दोनो मे कुछ
चल रहा है,,,,,

नही नही माँ ऐसी कोई बात नही है और अगर कोई बात हुई तो मैं आपको ज़रूर बताउन्गा
लेकिन फिलहाल कोई बात नही है मेरे और कविता के बीच मे,,,,,,,
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07-16-2019, 11:58 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
तेरी ज़ुबान कुछ बोल रही है और तेरा चेहरा कुछ और बोल रहा है सन्नी,,,,चल छोड़
नही बताना तो मत बता,,,कोई ज़बरदस्ती नही करूँगी मैं तेरे साथ,,,,और वैसे भी अभी
ज़बरदस्ती करने का टाइम नही है हम लोगो के पास,,,जल्दी ही लोगो ने वापिस आ जाना है
खेतों मे काम करने इसलिए बहुत कम टाइम है हम लोगो के पास,,,इतना बोलकर माँ ने फिर
से मेरे लंड को हाथ मे पकड़ लिया और सहलाना शुरू कर दिया,,,,फिर शुरू हुआ मस्ती का
खेल,,


हालाकी माँ ने बहुत बातें मुझे बता दी थी लेकिन फिर भी कुछ बातों के जवाब नही मिले
थे मुझे,,,,कुछ टेन्षन दूर हो गयी थी लेकिन फिर भी कुछ टेन्षन थी जो दूर नही
हुई थी,,,,,और सबसे बड़ी टेन्षन थी कि सोनिया ने मुझे कविता के साथ ऐसी हालत मे देख
लिया था कि मेरी गान्ड ही फॅट गयी थी,,,बेचारी कविता का पता नही क्या हाल हो रहा होगा
हवेली मे,,वो तो कहीं छुप भी नही सकती सोनिया से,,,,


मेरा मूड नही था मस्ती करने का लेकिन फिर भी मैने 2 बार माँ की चुदाई की खेतों
मे और वापिस हवेली की तरफ चल दिए,,,,

वापिस हवेली पहुँचे तो देखा कि हर कोई खाना खा रहा था,,,मैं भी अपने रूम मे
चला गया और माँ मेरे लिए खाना ले आई,,,,माँ बहुत खुश थी और खाना रखते टाइम बहुत
ज़्यादा झुक गयी थी,,,,झुकने पर माँ के बूब्स बाहर निकल आए और मेरा ध्यान माँ के बूब्स
पर चला गया,,,,,


बस कर बेटा कितना घूरता रहेगा मेरे बूब्स को,,,अभी इतनी ज़ोर ज़ोर से मसल कर आया है
खेतों मे ,,दिल नही भरा क्या तेरा,,,,,,


क्या करू माँ आपके बूब्स है ही इतने मस्त की जब देखता हूँ नज़रे फेरने का दिल ही नही
करता,,,,


चल हट बदमाश कहीं का,,,,अब बूब्स को घूर्ना बंद कर और खाना खा ले आराम से बैठ
कर,,,,

माँ ने खाना रखा और बाहर चली गयी,,,,

खाना ख़तम करके मैं किचन मे बर्तन रखने गया तो देखा वहाँ सीमा मामी बर्तन
धो रही थी ,,मैं बर्तन रखने क लिए सीमा के पास गया तो उसने हँसके मुझे देखा और
मेरा ध्यान फिर से उसकी मीठी मुस्कान पर टिक गया,,,,

तभी पीछे से सोनिया ने आके मेरे शोल्डर पर हाथ रखते हुए बोला,,,,,,तू किचन मे क्या
कर रहा है,,,,तेरी कविता तो अपने रूम मे है,,

सोनिया ने इतना बोला और हँसने लगी साथ मे सीमा भी,,,,मैं चुप करके वहाँ से चला आया
बाहर की तरफ क्यूकी वहाँ रुकना ख़तरे से खाली नही था,,,,


मैं आके बाहर खड़ा हो गया और गाँव की औरतों को शादी के रीति रिवाज करते देखने लगा
तभी मेरा ध्यान गया कविता की तरफ जो अपने रूम के बाहर खड़ी हुई थी,,,सब लोगो से
दूर,,,,शायद वो डरी हुई थी और डरती भी क्यूँ ना ,,,सोनिया ने सब लोगो के सामने उसको मेरी
गर्लफ्रेंड जो बोला था,,,,वो इतना शरमा रही थी कि रूम से दूर नही जा रही थी,,ये तो शूकर
है रूम से बाहर आ गयी थी वो मुझे तो लगा था रूम से बाहर ही नही निकलेगी,,,

उसका ध्यान मेरी तरफ आया तो मैने उसको इशारे इशारे मे पूछ लिया कि सोनिया ने ज़्यादा तंग
तो नही किया,,,उसने भी ना मे सर हिला कर मुझे बता दिया कि नही सोनिया ने उसको ज़्यादा
तंग नही किया,,,लेकिन जल्दी ही शरमा कर वो वापिस अपने रूम मे चली गयी,,इसको क्या हुआ
ये इतनी जल्दी वापिस रूम मे क्यूँ चली गयी,,,,,तभी मेरा ध्यान गया किचन की तरफ जहाँ
खड़ी हुई सोनिया और सीमा हम लोगो की तरफ देख रही थी,,,,ओह इसलिए कविता रूम मे भाग
गयी थी,,,,,

सोनिया और सीमा हँसके मुझे देख रही थी,,,,मैं सोनिया से तो डर रहा था लेकिन मेरा ध्यान
सीमा की मीठी मुस्कान से नही हट रहा था,,,,तभी सोनिया फिर से मुझे गुस्से मे देखने
लगी और मैने अपना ध्यान दूसरी तरफ कर लिया,,,,


फिर कुछ देर मैं ऐसे ही लोगो की तरफ देखता हुआ टाइम पास करता रहा,,


कुछ देर बाद सोनिया और सीमा भी कविता के रूम मे चली गयी और मैं चला गया छत पर
क्यूकी ये रीति रिवाज मेरी समझ से दूर थे,,,च्चत पर खड़ा हुआ खेतों की तरफ देख
रहा था और टाइम पास कर रहा था,,,,हल्की हल्की धूप थी जिसका एक अलग ही मज़ा था
गाँव की सर्दियों मे,,,,मैं खेतों की तरफ देखता हुआ धूप सेक रहा था तभी मुझे
किसी के छत पर होने का एहसास हुआ,,,मैने पीछे मूड के देखा तो वो सोनिया थी,,


मैं उसको देख कर डर गया लेकिन वो हंसते हुए मुझे देखती हुई मेरे पास आके खड़ी हो गयी
( ज़्यादा पास नही ) वो मेरे से करीब 4-5 कदम की दूरी पर खड़ी हुई थी और मेरे साथ
साथ खेतों की तरफ देख रही थी,,,,

कितना अच्छा नजारा है ना सन्नी यहाँ,,,,जहाँ देखो बस खेत ही खेत है,,ना किसी कार
के हॉरेन की आवाज़ ना धुआँ छोड़ती हुई सिटी बस , बस हर तरफ शांति ही शांति है,,,बहुत
मज़ा आ रहा है मुझे यहाँ गाँव आके,,,अच्छा हुआ मैने और कविता ने गाँव आने का प्लान बना
लिया और उस से भी अच्छा हुआ कि तुम भी हम लोगो के साथ यहाँ आ गये,,,,,


मैं कुछ नही बोला बस उसकी बातें सुनता रहा और खेतों की तरफ देखता रहा,,मैं उस
की तरफ देखने से डर रहा था,,,,


वैसे मुझे यकीन नही था सन्नी तुम भी गाँव आने को तैयार हो जाओगे,,,,मैने कविता को
भी बोला था कि तुम नही आओगे लेकिन उसको यकीन था तुम उसकी बात को मना नही करोगे
वो बड़े यकीन से बोल रही थी और अब पता चला कि उसको इतना यकीन क्यूँ था,,,,

सोनिया ने इतनी बात बोली तो मेरा ध्यान उसकी तरफ गया और वो मुझे देखकर हँसने लगी,,मैने
जल्दी से अपना चेहरा घुमा लिया,,,,


इट्स ओके सन्नी,,कविता ने मुझे सब बता दिया है,,,अब तुम इतना शरमाओ नही प्लज़्ज़्ज़

तभी मैने उसकी तरफ देखा वो फिर मुस्कुरा रही थी,,,,


मैं शरमा नही रहा सोनिया और ना मैं इस बात से डर रहा हूँ कि तुमको मेरे और कविता
के बारे मे पता चल गया है ,,,मैं उसको ये जता रहा था की मैं उस से डर नही रहा
लेकिन असल मे मैं बहुत डरा हुआ था,,,,


मैं तो इस बात से परेशान हूँ कि तुम कहीं कविता को ज़्यादा तंग नही करो मेरे बारे मे
बात करके,,,,तुम मुझे तंग करो तो कोई बात नही लेकिन कविता बहुत मासूम है उसको ज़्यादा
तंग नही करना प्लज़्ज़्ज़्ज़


ओई होइई कितना ख्याल है अपनी गर्लफ्रेंड का,,,,,,सोनिया ने इतना बोला और हँसने लगी,,,

हां सोनिया मुझे बहुत ख्याल है उसका,,,इसलिए बोल रहा हूँ उसको ज़्यादा तंग नही करना
प्ल्ज़्ज़ वो बेचारी पहले ही बहुत परेशान होगी जब तुमने हम लोगो को उस हालत मे ,,,,,,,


मैं अभी बोल रहा था कि सोनिया बोल पड़ी,,,,,,,

मैं उसको ज़्यादा तंग नही कर रही सन्नी क्यूकी उस मासूम ने मुझे सब कुछ जल्दी ही बता
दिया और वैसे भी वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है मेरे से कुछ छुपा नही सकती इसलिए उसको
तंग नही कर रही मैं ज़्यादा,,,मैं तो तुझे तंग कर रही थी क्यूकी तू बात छुपा रहा
था,,,,लेकिन अब तू भी मान गया कि तुम दोनो का चक्कर है तो मैं तुझे भी ज़्यादा तंग
नही करूँगी,,,,लेकिन थोड़ा तंग तो कर सकती हूँ ना,,,,उसने इतना बोला और हँसने लगी,,


ठीक है ठीक है कर ले मुझे जितना तंग करना है,,,वैसे और तू कर भी क्या सकती है
जब देखो मुझे तंग ही करती रहती है,,,,,मैं जो बोल रहा था वो समझ गयी और खेतों
की तरफ देखने लगी,,,,

अच्छा एक बात बता सन्नी,,,,,तू कितना प्यार करता है कविता को,,,,


अरे ये भी कोई पूछने वाली बात है क्या,,,,,मैने थोड़ा चिड़ते हुए बोला,,,

अरे बाबा मैं वैसे ही पूछ रही हूँ,,,,देख तू मेरा भाई है और वो मेरी बेस्टफ्रेंड है
मैं जानती हूँ तू उसके साथ टाइम पास नही कर रहा लेकिन फिर भी मुझे पूछने का हक़
तो बनता है ना,,,,,,


मैं समझ रहा हूँ तू क्या बोल रही है,,,,लेकिन तेरी जानकारी के लिए बता देता हूँ कि
मैं उसके साथ टाइम पास नही कर रहा,,,,,मैं बहुत प्यार करता हूँ उसको और सीरीयस भी
हूँ,,,वो ऐसी लड़की भी नही है जिसके साथ टाइम पास किया जाए,,,वो तो ऐसी लड़की है
जिसके साथ पूरी ज़िंदगी बिताने का दिल करता है,,,,

सोनिया मेरी बात सुनके खुश हो गयी,,,,,ये तो बहुत अच्छी बात है सन्नी कि तू उसको इतना
प्यार करता है ,,,,मैं भी यहीं चाहती हूँ कि मेरा भाई और मेरी बेस्टफ्रेंड एक साथ
रहे,,,,और वैसे भी कविता अच्छी लड़की है उसको तेरे जैसा लड़का ही चाहिए था जो उसकी
इतनी क़दर करे,,,,,लेकिन फिर भी एक बात जान ले अच्छी तरह से अगर तूने कभी उसको
हर्ट किया तो मैं तेरा सर फोड़ दूँगी,,,,,,सोनिया ने ये बात थोड़ी गुस्से मे बोली तो मैं
थोड़ा डर गया उसको भी ये पता चल गया था कि मैं डर गया हूँ,,,

नही नही तू डर मत मैं जानती हूँ तू उसको हर्ट नही करेगा लेकिन फिर भी मैं तुझे
सावधान करना चाहती थी,,,,,उसने इतना बोला और फिर हँसने लगी,,,,,

सावधान ,,,,लेकिन क्यूँ,,,,मैने क्या ग़लती करदी अब,,,,प्यार ही किया है कविता से कोई
ज़ुल्म तो नही किया किसी पे,,,,और प्यार करना क्या कोई ग़लती है,,,,


प्यार करना कोई ग़लती नही है लेकिन प्यार किसी से करना और देखना किसी और को वो भी इतनी
गंदी नज़र से ,,,,ये अच्छी बात नही सन्नी,,,,,

मुझे लगा वो अपनी बात कर रही है क्यूकी मैं कयि बार उसके साथ ग़लत हरकत कर चुका
था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अब मैने किसको देख लिया जो तुझे इतना गुस्सा आ रहा है..मैं
जानता था लेकिन फिर भी उसके मुँह से सुन-ना चाहता था,,,,


मैं सीमा की बात कर रही हूँ सन्नी,,,मैने देखा है तुम सीमा मामी को बड़ी अजीब
नज़रो से देखते हो,,,,अगर तुम किसी से प्यार करते हो तो तुमको किसी गैर औरत या लड़की
को ऐसे नही देखना चाहिए,,,,कविता भी तुम्हारे सिवा किसी लड़के की तरफ आँख उठा कर
भी नही देखती तो फिर तुम क्यूँ ऐसी हरकते करते हो,,,,,क्या इतना ही प्यार है तुमको मेरी
दोस्त से ,,,,बोलो,,,,,,,वो फिर से हल्की गुस्से मे थी,,

मैं उसको तंग नही करना चाहता था लेकिन फिर भी ना जाने क्यूँ मेरा दिल किया कुछ पंगा
करने को,,,,,,,,अब क्या करूँ सोनिया सीमा मामी है ही इतनी खूबसूरत कि मेरा ध्यान चला
जाता है उसकी तरफ मैं खुद को रोक नही पाता,,,,,मैं क्या कोई भी लड़का खुद को उनकी
तरफ देखने से रोक नही पाएगा अब वो है ही इतनी मस्त चीज़ की किसी का भी ध्यान उनकी
तरफ चला जाएगा,,,

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Reply
07-16-2019, 11:58 AM,
RE: Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही
मैने ये बात थोड़ी शरारती अंदाज मे बोली ताकि उसको तंग कर सकूँ ,,,,,


लेकिन तभी सोनिया मेरे पास आई और मुझे कस कर थप्पड़ मारा मेरे मुँह पर,,,,मैने इस
बात का अंदाज़ा भी नही लगाया था कि वो ऐसा करेगी मैं तो बस उसको हल्का गुस्सा दिला रहा
था क्यूकी मैं उसकी बेस्ट फ्रेंड को प्यार करने लगा हूँ और साथ मे किसी और औरत की ऐसे
तारीफ कर रहा हूँ तो उसको गुस्सा तो आएगा ही,,,,लेकिन मैने उस से थप्पड़ की उम्मीद नही
की थी,,,,

शरम आनी चाहिए तुझे सन्नी,,सीमा मामी के बारे मे ऐसे बोलते हुए,,,और कविता को प्यार
करते हो तो तुमको ऐसी हरकत ही नही करनी चाहिए किसी को भी ऐसे गंदी नज़र से नही
देखना चाहिए,,,क्या होगा अगर कविता भी किसी को ऐसे देखना शुरू कर्दे,,,क्या तुमको
अच्छा लगेगा,,,,

मुझे समझ नही आई कि उसको सीमा मामी के नाम पर इतना गुस्सा क्यूँ आ गया,,शायद कविता की
वजह से क्यूकी वो इसकी अच्छी दोस्त जो थी,,,लेकिन मैने तो मज़ाक मे बोला था फिर इसने इतनी
ज़ोर से थप्पड़ क्यूँ मारा मुझे,,,,

तभी मैं कुछ बोलने ही लगा कि उसने एक और थप्पड़ मारा मुझे,,,,,तुझे कोई हक़ नही
सन्नी किसी को इतनी गंदी नज़र से देखने का,,,खास कर सीमा मामी को तो बिल्कुल भी नही
वो तुम्हारी मामी है,,,,,,


मैं समझ नही पाया कि ये मामी के नाम पर इतना गुस्सा क्यूँ हो गयी,,,जब भी मैं मामी की
तरफ देखता तो ये गुस्से से मुझे घूर्ने क्यूँ लग जाती थी,,,

सोनिया मैं तो मज़ाक मे बोल रहा था,,,मेरा कोई गंदा इरादा नही मैं बस,,,,,मैं अभी
बोलने ही लगा था कि तभी उसने फिर से हाथ उठाया लेकिन मैने उसके हाथ पकड़ लिया क्यूकी
मुझे हल्का गुस्सा आ गया था उसपे,,,,

मैने उसका हाथ पकड़ा और उसकी कलाई को हल्के से मोड़ दिया जिस से वो घूम गयी और मेरा
हाथ उसकी पीठ पर आ गया,,,उसकी कलाई मूडी हुई थी और उसकी पीठ पर लगी हुई थी उसका
पेट सामने की दीवार पर लग गया था और उसकी पीठ मेरी तरफ हो गयी थी,,,मैं उसके पीछे
खड़ा हो गया और उसकी कलाई को फिर से हल्का सा मोड़ दिया जिस से उसको दर्द हुआ,,,,


अहह सन्नी हाथ छोड़ मेरा मुझे दर्द हो रहा है,,,,,,अह्ह्ह्ह सन्नी छोड़ ना

अच्छा तुझे दर्द हो रहा है ,,अभी जो कस्स कस्स के मुझे थप्पड़ मारे तूने तब दर्द नही
हुआ तेरे हाथों मे,,,

मैने तो इसलिए मारा कि तू प्यार कविता को करता है लेकिन गंदी नज़र रखता है दूसरी
औरतों पर,,तुझे शरम आनी चाहिए,,,,,,


दूसरी औरत कॉन,,वो सीमा,,,,,तुझे इस बात का गुस्सा है कि मैं सीमा मामी की तरफ
देखता हूँ या इस बात का कि मैं तुझे भी उसी नज़र से देखता हूँ,,,

मैने इतना बोला तो वो चुप कर गयी,,,,लेकिन जल्दी ही बोलने लगी,,,,नही सन्नी ऐसी कोई
बात नही है मैं तो बस ,,,,,वो बोलने लगी तो मैने उसकी कलाई को हल्के से मोड़ दिया
और उसको हल्का दर्द हुआ,,,,,,

आहह सन्नी मत कर हर्ट होता है मुझे,,,,,,


तभी मैं अपने फेस को उसके करीब ले गया उसके शोल्डर के पास और उसके कान मे बोलने
लगा,,,,,हर्ट तो मुझे भी होता है जब तू अजीब नज़रो से मुझे देखती है,,,और अब जब
तुझे मेरे और कविता के बारे मे पता चल गया है तो तुझे अच्छा नही लग रहा शायद तू खुश
नही कि मैं कविता से प्यार करने लगा हूँ,,,,

मैं उसके बिल्कुल साथ मे चिपका हुआ था मेरे लंड जो हल्का हार्ड हो गया था उसकी गान्ड पर
लगने लगा था,,,,मेरी साँसे भी उसके शोल्डर और कान के पास गर्दन पर लगने लगी थी
जो साँसे बहुत गर्म हो गयी थी कुछ ही पल मे,,,,इन सब बातों ने उसको भी थोड़ा गर्म कर
दिया,,उसकी हार्टबीट तेज हो गयी,,साँसे उखाड़ने लगी,,,,,,

न्हीई सुन्नयी म्मैईन्न तूओ भ्हुत्त ख़्ुशह हूंन त्तीररी औरर्र क्काव्वीितता की बाररी
मी जान कार,,और्र भाल्ला कय्या ख़्हूषीि किी बात हूज्गी क्कीी मीर्रा भाइी औरर्र
मेररी द्दूससट्त् प्ययार कार्रनी लाग्गी हाइी ईकक द्दूऊसरी सी,,,,,तभी मैने फिर से
उसकी कलाई मोड़ दी,,,,अहह मॅट काररर नाअ हहूउर्रतत्त हहोतटा हाई ससुउन्नयी,,,

तभी मैं फिर से उसके कान मे बोला बड़ी हल्की आवाज़ मे,,,मुझे नही लगता तू खुश है,
कल रात भी मैने तेरी आँखें देखी थी जब तूने मुझे और कविता को देख लिया था
सीडियों पर,,,तेरी आँखों मे गुस्सा तो ज़रूर था लेकिन एक बेचैनी भी थी,,तुझे शायद
अच्छा नही लग रहा था मेरा यूँ कविता के साथ होना ,,और अभ भी तू सीमा मामी का बहाना
करके मुझपे नकली गुस्सा कर रही है ,,गुस्सा तो तुझे इस बात पर है कि मैं कविता के
साथ जुड़ गया हूँ जबकि तेरे साथ जुड़ना चाहता हूँ,,,,

इतना बोलते हुए मेरा हाथ उसकी कलाई को हल्के हल्के मोड़ रहा था जबकि दूसरा हाथ उसकी
कमर से होता हुआ उसके पेट और दीवार के बीच चला गया था और मैने उसके पेट को हल्के
से सहलाना शुरू कर दिया था,,,,,ऐसा करते ही उसने अपने पेट को दीवार से ज़ोर से दबा
दिया ताकि मेरा हाथ उसके पेट पर हिल-जुल ना सके ,,,,उसके ऐसा करते ही मैने उसके
पेट से अपने हाथ को आगे की तरफ खिसकाना शुरू कर दिया और उसके पेट पर हाथ को
फिराते हुए उसकी कमर की दूसरी तरफ ले गया,,,,,


मेरा हाथ उसके पेट और दीवार के बीच मे फँसा हुआ था और जब मैं अपने हाथ को उसके
पेट से दूसरी तरफ लेके जा रहा था तो पेट के साथ साथ मेरा हाथ दीवार पर भी रगड़
ख़ाता हुआ आगे की तरफ जा रहा था,,,दीवार से रगड़ खाने की वजह से मेरे हाथ की स्किन
छिल्ने लगी थी और मुझे दर्द का हल्का एहसास हो रहा था लेकिन उसके पेट पर हाथ
फिराते हुए मुझे जो उसके पेट का मखमली एहसास हो रहा था उसने दीवार से रगड़ खाने
से स्किन छिल्ने के एहसास को पूरी तरह ख़तम कर दिया था,,,


उसके मुँह से हल्की हल्की आह आह की आवाज़ निकल रही थी ,,,,जो हल्की मस्ती भी थी और
हल्का दर्द भी था जो कलाई मुड़ने से उसको हो रहा था,,,,,अहह नही सन्नी ऐसी कूवई
बात नाहि तुऊउ गगाल्लत्त सम्माझ राहहा हाइी,,,


मैं कुछ ग़लत नही समझ रहा,,,तू जानती है मैं तुझे लाइक करता हूँ और तेरे करीब
आना चाहता हूँ लेकिन अब मैं कविता के करीब होने लगा तो तुझे गुस्सा आने लगा,,तू
इस बात को मान क्यूँ नही लेती इतना बोलकर मैने उसकी गर्दन पर हल्की किस करदी

आहह न्ह्ही सुउन्नयी ऐसा मात्त क्कार्र त्तुउ काववीितता ससी प्ययारर कार्रत्ता हहाई और्र
म्मायन्न इश्स ब्बात्त ससी बभ्हुत्त् क्क्ुशह हूओंन्न ,,तूऊ क्क्कययूउ मीररी साटतह एआईसीई
हहार्रकककट्ट क्काररकी क्काव्वीितता क्की प्ययार क्कूव ररुसवव्वा कारर राहहा हाई
वऊू बहीी तुउज़्झहही बभ्हुत्त् प्पययारर क्कर्ततीी हहाइईइ,,,प्लज़्ज़्ज़्ज़ उसक्की पपयारर क्कू
हहूउर्रत्त माट्त्ट कारर मीररी साटतह एआसा क्कार्रक्की,,


मैं उसके प्यार को हर्ट नही कर रहा,,,हर्ट तो तू कर रही है मुझे भी और खुद को भी
मैं कविता को बहुत प्यार करता हूँ इस बात से मुझे कोई इनकार नही लेकिन उसी तरह मैं
तुझे भी बहुत प्यार करता हूँ ,,,और इस बात पर मुझे कोई शिकायत नही खुद से,,


नहिी सुउन्न्णी यईी गाल्लत्त हाइईइ तटूउ म्मूउज़्झहही प्पययारर न्नाहहीी काररताा त्तुउ बास्स
ग्गान्न्द्दि हार्र्क्कात्ती क्काररत्ता हाई मीररी सातह जो तटूउ अब्भीी बहीी क्कार्र र्राहा
हाइी ऊउरर वाईससी बहीी तूऊ मुउज़्झहही प्पाययर्र न्नाहहीी कारर साकत्टा और्र ना हिी कुकच्छ
औरर्र कारर साककत्ता हाइईइ कययुउककीी तूऊ म्मेररा बभ्ाइी हाइी ,,हुउंम दूननू का
रीशहतता हॅम दून्नू क्कूव ये सब्ब क्काररनी क्कीी ईज़्ज़ाज़्ज़ट्ट न्ह्ही द्दीत्ता


तो इसमे मेरी क्या ग़लती जो तू मेरी बेहन है,,मैं बस तुझे बहुत प्यार करता हूँ उतना ही
प्यार जितना मैं कविता से करता हूँ,,लेकिन तुम इस बात से पता नही क्यूँ मुकर रही हो

याद है उस दिन जब मैने तुझे थप्पड़ मारा था और तेरे मुँह से खूंन् निकल आया था, तू
गुस्सा होने की जगह हंस रही थी प्यार से मुझे देख रही थी,,,तो क्या वो सब झूठ था


नही सुउन्न्णी म्मैईन्न तूओ ईईस्सल्लीययए कखुुशह टहीी कययुउककीी तूऊ म्मूुझहही क्कव्वीितता
सीसी ग्घारर बभीज्ज राहहा था तटूुझहे दार्र तहा क्कीी तूऊ अक्कील्लई मी म्मीरीए
ससी क्कू गाल्लत्त हारकाट नाहहीी कर्रे म्मीररी क्कू हहूरत्त ना कररी ,,म्मूउजझी
रुसववा नाहहीी काररीए,,,लीक्किंन म्मैईन जानने सी माना कार रही त्तीी तो टुऊनी
म्मूुझहहे मारा था,,तूऊ तूओ बास्स म्मूउज़्झहही ख्हुउद्द सी डूउरर कारर राहा था वू
बहिि मीररीई भ्हालायी की लीईई,,,,तूऊ मुउजझी हहूरर्ट न्ंही कारता और्र ना कभिइ
हूर्र्ट कर स्साककत्ता हाइी तूऊ बस मीररी कररी कर सककत्ता है,,,तूऊ तू किसी और्र कू
बहीी म्मूुझहही हुउर्र्ट नाहहीी कर्रनी दीतता और्र जो मुउज़्झहही हुउरत्त काररता हाीइ तूऊ
उसकी जान ल्लेन्नई की क़ोस्शिसश करता है,,भूल गया उस डिन जब उन लड़क्कू को तुन्नी
मररा था मीररीई वज्जहह से,,,,उन्नकीी जान बहिि जा सकक्त्ती त्िी थी,,,

हाँ हाँ मुझे सब याद है,,,,अगर पोलीस नही आती तो शायद मैं उनकी जान ले भी लेता
,,मैं उसकी जान ले लूँगा जो तुझे हर्ट करेगा,,,,जानता हूँ मैं तेरी बहुत केर करता
हूँ बहुत ख्याल रखता हूँ तेरा कभी तुझे हर्ट नही कर सकता लेकिन यही तो प्यार है
मेरा,,,,मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ सोनिया,,,तेरा ख्याल रखना,,तुझे हर्ट नही करना
तेरे साथ हँसना खेलना,,,मस्ती करना,,,अगर ये सब प्यार है तो प्यार ही सही,,,हाँ सोनिया
मुझे तेरे से बहुत प्यार है,,,बहुत प्यार है ,,तू मेरी बेहन है तो इसमे मेरी क्या ग़लती
,,,,और मैं जानता हूँ प्यार तू भी मुझे बहुत करती है लेकिन तू डरती है ,,इस भाई
बेहन के रिश्ते से इसी रिश्ते ने तुझे बाँध कर रखा हुआ है वरना कबकि तू मेरी
बाहों मे आ जाती,,,


नही सुउन्नयी ऐसा मात्त बोल प्लज़्ज़्ज़ मायन्न तुउज़्झहही प्पययारर ंहिी कर्र्त्ती त्तुउ बास्स
मीर्रा ब्भ्हाई हाइईइ,,,


अच्छा अगर ऐसी बात है तो मेरी आँखों मे आँखें डालके ये बात बोल तो मैं यकीन कर
लूँगा तेरा,,,,इतना बोलकर मैने उसको पकड़ा और अपनी तरफ घुमा दिया,,,

देख मेरी आँखों मे और बोल तुझे मेरे से प्यार नही,,,,उसने अपने चेहरे को नीचे झुका
लिया और ज़मीन की तरफ देखने लगी,,,
-  - 
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