Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
07-15-2017, 01:04 PM,
#21
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
महक पर तो चुदाई का नशा छाया हुआ था... उसने अपनी चूत को
मुति मे भरा और मसल्ने लगी.. फिर अपनी तीन उंगली अंदर डाल
अपनी चूत को चोदने लगी... चूत की गर्मी के साथ उसके उछालने की
रफ़्तार भी बढ़ रही थी... उसकी साँसे फूल रही थी... लेकिन मज़ाल
की उसकी रफ़्तार धीमी हो जाए... वो ुआर ज़ोर से अपनी उंगली को चूत
के अंदर बाहर करने लगी... की उसकी चूत ने पानी छोड दिया... उसकी
उंगलियाँ पूरी तरह उसके ही रस से भीग गयी...

राज ने अपना लंड उसकी गॅंड से बाहर निकाला और उसे एक बार फिर अपने
सामने बैठने को कहा, "म्र्स सहगल अब हम एक खेल खेलेंगे... तुम
मेरे लंड को अपनी मुति मे जाकड़ मसलॉगी.. और जब में कहूँगा की
मेरा छूटने वाला है तो तुम वीर्या की धार अपने मुँह मे लॉगी..
समझी."

राज को पता था की वो उसका सारा का सारा वीर्या अपनी मुँह मे नही ले
पाएगी.. उसका पूरा चेहरा भीगो देना चाहता था वो.. उसे महक को
जललिल करने मे मज़ा आता था... लेकिन महक थी की उसे कोई बात का
बुरा ही नही लगता था.. बल्कि उसे तो राज की हर हरकत मे मज़ा
आता था... वो बड़े प्यार से सब कुछ करने को और करवाने को तय्यार
रहती थी.. उसने राज के लंड को अपने मुति मे ले मसल्ने लगी और
उससे बोली.

"हां ऱाज़ा हाआं में तुम्हारे पानी को अपने मुँह मे लूँगी... आआज़
नहला दो मुझे अपने इस अमृत से... मुझे वीर्या की छूट्टी धार
बहोट अछी लगती है.. जब सीधी गले मे गरम गरम धार पड़ती है
तो में तृप्त हो जाती हूँ."

राज को विश्वास नही हो रहा था की कोई औरत इतनी बेबाक और बिंदास
हो सकती है..... रंडियन भी महक की हरकत को देख शर्मा
जाएँगी... महक की शब्दों ने उसे और उत्तेजित कर दिया था... लंड
अकड़ रहा था.... अंडकोःस उबलने लगे थे... उसने महक से कहा की
उसका छूटने वाला है.. महक ने अपना मुँह खोल दिया... और उसके
लंड को और ज़ोर से मुठियाने लगी.

पहली धार उसके मुँह के बजाई उसके चेहरे पर गिरी... तो महक ने
लंड को ठीक अपने मुँह की सीध मे क्या.. दूसरी उसके गले तक चली
गयी.... जिसे महक गीतक गयी... फिर राज का लंड अपने अमृत से
उसके चेहरे को गालों को नहलता रहा.

राज का काम ख़तम हुआ और हर बार की तरह फिर मिलेंटगे कह कर वो
चला गया... हॉल मे पहुँच कर उसने अपना सेल फोन देखा... तो
वो मिस कॉल वेल नंबर को वो पहचान नही पाया.... उसने देखा की
एक मेसेज भी आया था... उसने उस मेसेज को सुना.... जब रजनी ने
उसे उसके यहाँ आने के लिए कहा था और उसके घर का पता भी छोड़ा
था... तो जोरों से हँसने लगा.... "क्या रंडियन हाथ लगी है.. एक
छोड़ती है तो डोस्सरी तय्यार है... वा रे उपर वेल तेरा जवाब
नही.... वो रजनी के घर की और चल दिया.

महक ने स्नान किया और कपड़े बदल बिस्तर पर इस तरह लेट गयी और
पढ़ने लगी.. लेकिन जब उसने अपने पति को घर मे दाखिल होते सुना
तो कीताब को रख सोने का बहाना करने लगी.. अजय चुप चाप आया
और कपड़े बदल बाथरूम मे घूस गया जिससे रजनी के साथ बीताए
पलों के निशान मिटा सके.... जब वो पलंग पर आया तो महा जाग
रही थी.. दोनो चुप छाप लेट हुए थे और दोनो के दीमग मे एक
दूसरे से की बेवफ़ाई के वो पल दौड़ रहे थे.. दोनो एक दूसरे से
अपने राज़ को छिपाना चाहते थे.. लेकिन क्या किस्मत को ये मंज़ूर
था.

जब अजय और महक सोने की कोशिश कर रहे थे उस वक्त राज रजनी के
घर के सामने खड़ा दरवाज़े पर घंटी बजा रहा था.... रजनी ने
दरवाज़ा खोला.. उसने अजय के जाने बाद कपड़े बदल लिए थे.. राज
घर के आदर आया और उसे देखने लगा.

"तो तुम मुझसे चुड़वाना चाहती हो.... अपनी चूत की ठीक तरह
ठुकाई करवाना चाहती हो? राज ने पूछा.

रजनी सिर्फ़ मुस्कुरा के रह गयी.

"तुमने जवाब नही दिया?" राज ने फिर कहा.

"हां" उसने एक मादक अंगड़ाई लेट हुए कहा.

"तो तुम्हारी चूत तड़प रही है मेरे लंड के लिए?" राज ने फिर
कहा.

"हां बहोत ज़्यादा... आग ही आग लगी हुई है इसके अंदर." रजनी ने
जवाब दिया.

"ये तो थोडी देर मे पता चल जाएगा." राज ने रजनी से कहा.
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07-15-2017, 01:04 PM,
#22
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
रजनी उसके चिपक कर खड़ी हो गयी और अपना हाहत उसकी पॅंट के उपर
से उसके लंड पर रख दिया... वो उसकी आँखों मे झाँक रही थी....
दोनो हॉल मे आगाय और राज ने उसे सोफे पर बैठने को कहा.. और
खुद उसके सामने खड़ा हो गया.

"लगता है मेरे लंड के लिए कुछ ज़्यादा ही तड़प रही हो?"

"हां बहोत ज़्यादा" रजनी ने जवाब दिया.

राज ने अपनी पॅंट के बटन खोल अपने लंड को बाहर निकाल लिया.. और
बोला, "में अभी अभी अपने इस लंड से म्र्स सहगल की गॅंड मार कर आ
रहा हूँ.... अगर तुम्हे मेरा लंड चाहिए तो इसे चूस कर खुद के
लिए तयार करना होगा.." उसे उमीद थी की रजनी उसकी ये बात नही
मानेगी.... आज की रात दो बार उसके लंड की गर्मी शांत हो चुकी थी
इसलिए उसे रजनी के मानने ना मानने की परवाह भी नही थी.

राज वैसे ही खड़ा अपनी रखैल की सहेली को देखता रहा थ....कि
अचानक रजनी थोड़ा आगे को झुकी और उसके लंड को अपने मुँह मे ले
लिया.

रजनी के मुँह की गर्माहट पा राज के लंड मे जान आने लगी.. वो
फिर से खड़ा होने लग...वो लंड को इतना अछा चूस रही थी की राज
को स्मझ मे नही आया की उसका लंड उत्तेजना मे खड़ा हो रहा है या
फिर उसकी कला की वजह से.... वो उसके लंड को चूस्टे हुए मसल्ने
लगी... राज को मज़ा आने लगा...

रजनी तो इसी बात से खुश थी की राज महक को चोदने के बावजूद उसे
छोड़ने यहाँ उसके पास आया था.. उसका लंड अब खड़ा होने लग रहा
थ...उस्के लंड को ज़ोर ज़ोर से चूस्टे हुए वो अपनी चूत को मसल्ने
लगी...

राज चुपचाप खड़ा रजनी के मुँह का आनंद उठा रहा था... वो ड्कः
रहा था की वो कितनी कुशलता से उसके लंड को चूस रही थी और
साथ ही अपनी चूत को मसल रही थी.

थोड़े देर बाद राज उसकी टांगो के बीच बैठ गया और उसे खींच
कर सोफे के किनारे पर ले आया... फिर अपने खड़े लंड को उसकी चूत
मे घुसा दिया... वो खुशी से चिल्ला उठी..

"हाआं ऐसे ऑश कितना अछा लग रहा है.. हां ऐसे ही और अंदर
तक घुसा दो.."

राज ने उसकी दोनो जांघों को पकडा और ज़ोर ज़ोर से धक्के मरने
लगा... उसके हर धक्के पर वो भी अपनी कमर उठा उसके लंड को और
अंदर तक लेने लगी...

"हां चोडो मुझे और ज़ोर से चोडो ऑश मज़ा आ जाता है तुम्हारे
लंड से चुड़वाने मे."

राज पूरे जोश मे उसे चोद रहा था... उसकी भरी चुचियाँ मचल
मचल कर आगे पीछे हो रही थी... राज उसके जोश के देख खुद
उत्साहित हो रहा था.. वो रजनी को अभी अपने लंड का... अपनी आदायों
का दीवाना बना देना चाहता था...

"तुम भी कम छिनाल नही... बुद्धी हो गयी हूओ लेकिन लंड के लिए
पागल हो... तुम्हे इसकी भी परवाह नही की मेने अभी थोडी देर पहले
तुम्हारी सहेली की गॅंड और चूत मारी है.. और तुम उसी लंड से
चुडा रही हो." राज ज़ोर ज़ोर के धक्के मार उससे बात कर रहा था.
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07-15-2017, 01:04 PM,
#23
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
रजनी को भी राज की ये अदा बहोत आक्ची लगने लगी थी.. वो भी उसके
साथ ऐसी ही गॅंड बातें करना चाहती थी...

"म्र्स शर्मा तुम्हे मेरा ये मोटा लंड बहोत पसंद है ना? तुम्हारी
चूत तो इसकी दीवानी हो गयी है." राज ने फिर कहा.

"तुम ऐसी बातें करते हो ना तो मुझे बहोत मज़ा आता है.. मेरे
साथ भी वैसे ही बोलो जैसे तुम महक के साथ बोलते हो" रजनी अपनी
कमर उठा उसके लंड को अपनी चूत मे और अंदर तक लेट हुए बोली.

"तो तुम्हे बुद्धी रांड़ बुलयुन तो कैसा रहेगा?" राज ने पूछा.

"नही तुम मुझे म्र्स शर्मा कह कर बुलाओ.. में गरमा जाती हूँ ये
सोच कर मुझ जैसी अधेड़ औरत तुम जैसे नौजवान लड़के को भी
गरम कर सकती है..." रजनी ने कहा.

"तुम भी साली छिनालों की छीनाल हो म्र्स शर्मा... " राज ने उसे
चिढ़ाते हुए कहा.

तभी रजनी की चूत ने पानी छोड दिया... उत्तेजना मे उसका समुचा
बदन कांप रहा था और उसकी चूत पानी छोड रही थी.. वो अपनी
कमर उठा उसके लंड को अपनी चूत मे जकड़ने लगी.. और पानी छोड़ती
रही...

जब उसकी चूत थोडी शांत हुई तो वो अपनी चुचियों को भींचते हुए
किसी रंडी की तरह राज से बोली, "अब मुझे ये मोटा लंड अपनी गॅंड मे
चहिये..इस लंबे लंड से महक की तरह भी गॅंड मरो."

राज ने अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया और उसके बगल मे बैठ
गया.. "अगर तुम्हे भी म्र्स सहगल की तरह चाहिए तो तुम्हे भी
मेहनत करनी होगी." राज ने कहा.

रजनी इतनी गर्मी हुई थी की उसे तो किसी बात की परवाह ही नही थी..
वो तो कुछ भी करने के लिए तय्यार थी.. वो राज की गोद मे बैठ
गयी.. और उसके लंड को अपनी गॅंड के छेड़ से लगा उस बार बैठ
गयी.. उसका लंड उसकी गॅंड की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुस
गया... अब वो ज़ोर ज़ोर से उछाल उछाल कर उसके लंड को अपनी गॅंड मे
लेने लगी अपनी दोनो चुचियों को जोरों से मसल्ते हुए वो उछाल रही
थी.

राज बड़े प्यार से उसकी गॅंड को अपने लंड पर उपर नीचे होते देखता
रहा... क्या रात बीती थी उसकी आज.. दो दो छीनाल दिल खोल कर उससे
चुडा रही थी... उसका लंड अकड़ने लगा था... लेकिन इसके पहले की
वो पानी छोड़ता... रजनी फिर जोरों से सिसक पड़ी.. चिल्ला पड़ी.. और
शायद उसकी चूत ने एक बार फिर पानी छोड दिया था...

वो शांत पड़ने लगी तो राज ने उसे उठा कर सोफे के सहारे घोड़ी बना
दिया और उछाल उछाल कर उसकी गॅंड मरने लगा.. तीन चार ज़ोर के
धक्के मार दिए... जब उससे नही रहा गया तो उसने अपना लंड बाहर
निकाल अपना वीर्या उसकी गॅंड पर छोड दिया.

राज भी तक गया था..."अब मेरे इस लंड को किसी सॉफ कपड़े से सॉफ
कर दो..?"

"रजनी एक नॅपकिन ले आई और प्यार से उसके लंड को पौंचने लगी..
अची तरह सॉफ करने के बाद उसे बड़े प्यार से चूम लिया, "सही मे
बहोत प्यारा है ये... में तो पागल और दीवानी हो गयी हूँ इसकी...
जी करता है की हर वक्त इस अपनी गॅंड और चूत मे लिए रहूं."

राज ने अपने कपड़े पहेने और जाने लगा, "फिर जब ज़रूरत पड़े तो
फोन करना बंदा हाज़िर हो जाएगा." कहकर वो चला गया.
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07-15-2017, 01:08 PM,
#24
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
बुझाए ना बुझे ये प्यास--8

महक सहगल के दीमाग मे हज़ार बातें घूम रह थी. वो सोच रही
थी की उसे कल क्या क्या करना है. सुबह किराने वेल की दुकान पर
जाकर किचन के लिए समान लीखाना है, लौडरी से कपड़े लेने
है, कुछ दवाइयाँ ख़रीदनी है और फिर किसी दुकान पर जाकर एक
नॉवेल ख़रीदनी है जिसके बारे मे उसने इतना कुछ पढ़ा है.

कल के लिए काफ़ी काम था उसके पास अचानक ही उसकी सोच टूटी जब
उसके पति अजय सहगल ने एक हुंकार भरते हुए अपना वीर्या उसकी चूत
मे छोड़ दिया.

महक आज फिर प्यासी रह गयी थी, उसका पति एक बार फिर उसे
मझधार मे छोड सो गया था. उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रखा तो
देखा की उसकी चूत उसके पति के वीर्या से भरी हुई थी. वो इस गीली
चूत के साथ सोना नही चाहती थी, वो उठी और बाथरूम मे घुस
गयी. फिर अपनी चूत और हाहत को आक्ची तरह सॉफ करने के बाद वो
कमरे मे वापस आ गयी. उसे अभी नींद नही आ रही थी इसलिए वो
हॉल मे आ गयी और टीवी देखने लगी.

महक अपने पति से बहोत प्यार करती थी लेकिन उसकी चूत का वो क्या
करे जो हमेशा प्यासी रह जाती थी. वो इतनी बेशर्म भी नही थी
की खुद पति के उपर चढ़ उसके लंड को अपनी चूत मे ले धक्के मारे
की उसकी चूत झाड़ जाए. पर उसने अपनी पति से कभी शिकायत नही
की थी और एक आचसी पत्नी की फ़र्ज़ नीभती रही.

वैसे महक बहोत ही सेक्सी थी, उसका दिल करता था की उसका पति उसकी
जाम कर चुदाई करे. आम औरतों की तरह उसके भी कई सपने थे, कई
कल्पना थी कई इच्छाएँ थी. लेकिन वो जानती थी की उसके पति को
वो सब पसंद नही था और शायद उसकी इच्छा, उसकी कल्पना इन जिंदगी
मे पूरी नही हो पाएँगी.

जब भी टीवी पर या फिर कोई मूवी देखते वक़्त किसी सेक्स सीन को
देखती तो उसकी दबी हुई भावनाएँ ज़ोर मारने लगती लेकिन उसने कभी
अपने पति को इस बात की भनक भी लगने नही डी थी.

शादी से पहले उसने सिर्फ़ एक ही मर्द से रिश्ता बनाया था वो भी
कॉलेज के दीनो मे जब उसने यही कोई दो चार बार उसे गाड़ी के पीछले
सीट पर चोदा था. उसे याद नही आता की उसके साथ चुदाई करते वक़्त
भी उसकी चूत ने कभी पानी छोड़ा हो.

कई बार उसने हस्तमैथुन करने की भी सोची लेकिन उसके ख़याल मे
ऐसा कुछ था ही नही जिससे वो उत्तेजित हो अपनी चूत का पानी छुड़ा
सके. उसे कभी कभी लगता था की वो अपनी भवनाई अपनी इक्चा को
दबा कर ग़लती कर रही है, उसे भी और औरतों के तरह देह सुख का
हक़ है लेकिन वो खुद इतनी शर्मीली थी की उसे अपनी किसी सहेली से
बात करते हुए शरम भी आती थी.
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07-15-2017, 01:09 PM,
#25
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
महक इतनी सुंदर तो नही थी लेकिन उसके नाक नक्श काफ़ी तीखे थे.
5" फीट 6 की लंबाई, गोरा बदन. गोल चेहरा, ऊम्र के हिसाब से बड़ी
बड़ी चुचियाँ जो काफ़ी भरी भरी लगती थी. 45 साल की उम्र मे
फिर भी उसका बदन काफ़ी सुडौल था, गोल गोल चूतड़ जो किसी को भी
लुभा सकते थे. घुँगरले भूरे बॉल जो उसके कंधों तक आते थे
और नीली आँखों जो उसके चेहरे पर चमक पैदा कर देती थी.

उसके पति एक कन्ज़्यूमर कंपनी मे सेल्स मॅनेजर थे, और काम के
लिहाज से अक्सर टूर पर रहा करते थे. गर्मियाँ की छुट्टी ख़तम
होने वाली थी और उसका बेटा सोनू वापस अपने हॉस्टिल चले जाने वाला
था, उसके पास समय ही समय था इसीलिए शायद वो सब ख्वाशे एक
बार फिर उसके जहाँ मे उठ रही थी.

थोडी देर चॅनेल बदल बदल कर वो टीवी देखती रही फिर जब नींद
आने लगी तो उसने टीवी बंद किया और अपने कमरे मे जाकर सो गयी.

दूसरे दिन शाम को जब उसका बेटा कॉलेज के कुछ दोस्तों से मिलकर
घर आया तो उसने अपनी मा से कहा की क्या वो शनिवार की शाम को
अपने कुछ दोस्तों को घर पर एक छोटी सी पार्टी के लिए बुला सकता
है. वैसे भी उसके पति दो दिन बाद टूर पर जाने वाले थे इसलिए
उसने सोनू को इजाज़त दे दी. सोनू उसे थॅंक्स कहते हुए अपने कमरे मे
कुछ फोन करने चला गया.

शनिवार आया और घर का आँगन सोनू के दोस्तों से भरने लगा. सोनू
ने करीब 10 दोस्तों को बुलाया था जिनमे से 8 आ चुके थे, इनमे कुछ
लड़कियाँ भी थी. महक ने देखा की सभी हाशी मज़ाक करते हुए
हंस खेल रहे थे.

सब को अपने आप मे मशगूल देख महक एक कोक की बॉटल लेकर
बच्चों को मस्ती करते देखने लगी. जिस तरह लड़कियाँ लड़कों के
साथ हंस खेल रही थी, ये देख कर उसे जलन होने लगी. उसे
जिंदगी मे कभी ये मौका नही मिला था. वो एक साधारण परिवार से
थी जिन्हे लड़को की दोस्ती आक्ची नही लगती थी. फिर उसकी शादी भी
छोटी उमर मे ही हो गयी थी.

लड़कों पर उसने ख़ास नज़र नही डाली थी, लेकिन तभी एक लड़का
घर मे घुसता उसे दीखाई दिया.

"दोस्तों में आ गया हूँ अब आप पार्टी शुरू कर सकते है." उसने ज़ोर
से कहा जिससे सब को सुनाई दे सके.

"ऱाज़" सभी ज़ोर से चिल्ला पड़े और दौड़ कर उसके पास आ गये.
लड़कियाँ तो जैसे उसे देख पागल हो गयी वो सब दौड़ कर उससे
लीपटने लगी जैसे की कोई उनका बीछड़ा हुआ प्रेमी आ गया हो.

"राज?" महक मन ही मन सोचने लगी. सोनू के दोस्तों मे उसके किसी
दोस्त का नाम राज नही था, फिर कौन है ये?

महक भी उस लड़के राज को देखने लगी जो आते ही आकर्षण का केन्द्रा
बन गया था. उसने देखा की राज का बदन काफ़ी कसरती थी, चौड़े
कंधे, चौड़ा सीना और काफ़ी हॅंडसम लग रहा था. महक अपने बेटे
सोनू की और बढ़ी ये जानने के लिए की ये राज कौन है?

"मम्मी वो राज है, राज शर्मा," सोनू ने कहा, "आप भूल गयी मेरे
साथ स्कूल मे पढ़ा करता था."

"हे भगवान ये राज है, कितना बड़ा हो गया है." महक ने कहा.

राज सोनू के साथ 5थ स्ट्ड मे साथ मे पढ़ता था. और एक दो बार ही
महक की उससे मुलाकात हुई ती जब वो छुट्टी के दिन सोनू के साथ
खेलने उनके घर आया था. फिर उसके बाद सोनू ने कभी कभार ही
उसका ज़िकरा किया था. उस समय मुश्किल से उसकी लंबाई 5'फ्ट 3 होगी और
आज ये लंबा चौड़ा करीब 5'फ्ट 11 की हिएगत और काफ़ी सुंदर लगने
लग गया था. वो एक बार फिर उससे परिचय करने के लिए उसकी और
बढ़ गयी.

"हेलो राज, पहचाना मुहे?" महक ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए
कहा.

"ओह्ह हाँ म्र्स सहगल में आपको कैसे भूल सकता हूँ." कहकर राज ने
महक का हाथ अपने हाथ मे ले लिया, "कैसी है आप... सोनू अक्सर आप
के बारे मे बात करता रहता है." राज ने आँख मरते हुए उसके हाथ
को चूम लिया.

राज को सोनू की मम्मी महक हमेशा से ही आक्ची लगती आई थी. जब
भी वो सोनू के घर जाता था वो टीरची निगाहों से महक को ही
घूरा करता था. वो सुंदर है वो ये जानता था और जब लड़कियाँ उसे
प्रभावित होती थी उसे पता चल जाता था. लड़कियों पर उसके
व्यक्तित्वा का असर जल्दी ही चढ़ जाता था और यही आज महक के साथ
हो रहा था.
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07-15-2017, 01:09 PM,
#26
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
राज ने जिस तरह से उसके हाथ को पकड़ थोड़ा दबाते हुए चूमा था
उसे विश्वास नही हो रहा था. उसके अंदाज़ ने एक बार फिर उसकी भावनाओं
को अंदर से झंझोड़ दिया था, और उसके पैर कांप उठे थे. एक
नौजवान लड़के के लिए दिल मे उठी सोच को सोच वो एक जवान लड़की की
तरह शर्मा गयी.

"में ठीक हूँ, तुम कैसे हो?" महक ने जवाब दिया और अपना चेहरा
को हाथों से छिपाते हुए दौड़ कर घर कर अंदर भाग गयी जैसे
की आँख मे कुछ गिर गया हो.

घर मे पहुंकते ही वो अपने आप को संभालने लगी. उसकी समझ मे
नही आ रहा था की जवान लड़का जो उसके बेटे की उम्र का था, उसका
दोस्त था उसपर ऐसा क्या जादू कर सकता है. ऐसा असर तो उसका अपना
पति भी उसपर नही कर पाया था जब वो पहली बार उससे मिली थी और
वो खुद जवान थी.

उसने निश्चय कर लिया की वो घर के अंदर ही रहेगी, जिससे की वो राज
के सामने ना पड़ जाए और उसकी दबी भावनाओ को फिर उभरने का मौका
मिले. अपने जज्बातों को दबाने के लिए वो टीवी देखने लगी.

थोडी देर बाद उसे प्यास लगी और वो किचन मे अपने लिए कोक लेने
गयी. उसने थोड़ा कोक एक ग्लास मे डाला और पीने लगी. कोक ख़तम
कर वो सींक के पास खड़ी हो गयी ग्लास धोने के लिए. वो खिड़की के
बाहर झाँक कर ठंडी हवा का मज़ा ले रही थी की एक अव्वाज़ ने उसे
चौंका दिया.

"जब मेने तुम्हारे हाथ को चूमा था और तुम्हे आँख मारी थी तो
तुम्हारी चूत मे सनसनी मच गयी थी ना? राज अपने बदन को उसके
बदन से चिपका कर उसके कान मे फुसफुसा रहा था.

महक उसकी इस हरकत से उछाल पड़ी और उसे अपने से परे धकेलते हुए
चिल्ला कर बोली, "तुम्हे शरम नही आती ऐसी हरकत करते
हुए,मुझसे इस तरह से बात मत करो, आख़िर तुम मुझे समझते क्या
हो? "

महक उसे बुरा भला कह कर वहाँ से भगा देना चाहती थी लेकिन
उसका दीमाग उसका साथ नही दे रहा था, दिल मे एक अजीब उथल पथल
मची हुई थी. एक बार फिर उसके पावं कमजोर हो काँपने लगे थे.

राज ने ही उसकी बात का बुरा नही माना और ना ही कोई जवाब दिया, वो
अपने आपको को उससे और चिपकते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा और
अपनी गरम साँसे उसके खुले ब्लाउस के बीच उसकी चुचि के दरार मे
छोड़ने लगा.

राज के होठों का स्पर्श और साथ मे उसकी गरम साँसों ने फिर महक
के बदन मे एक सनसनी मच डी. बरसों की दबी भवनाई फिर उमड़
पड़ी. उसे विश्वास नही हो रहा था की उसके निपल ब्रा मे क़ैद
ब्लाउस के अंदर तनने लगे थे.

"मुझे ऐसा लगता है की तुम्हारी चूत बरसों से प्यासी है, और
किसी मोटे लंबे लंड की तलबगार है. राज ने उसकी कमर मे हाथ डाल
उसे अपने से और चिपकते हुए कहा."

महक के समझ मे नही आ रहा था की वो क्या जवाब दे.

"जब मेने तुम्हे पहली बार छुआ था तभी में समझ गया था की
तुम एक गरम औरत हो जो जाम कर किसी से चुड़वाना चाहती हो..." राज
के आत्मविश्वास से कहे शब्दों ने महक को हैरत मे दल दिया था
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07-15-2017, 01:09 PM,
#27
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
बुझाए ना बुझे ये प्यास--9

महक समझ रही थी की राज सही कह रहा है. हां वो उससे चुड़वाना
चाहती थी, उसका दिल तो कर रहा था की राज वहीं किचन मे उसकी
जमकर चुदाई कर उसकी बरसों की प्यास को ठंडा कर दे.

एक तरफ पत्नी धरम समाज का डर उसके दिल मे था जो कह रहा था
की वो राज को सॉफ माना कर दे, "नही ये कभी नही हो सकता तुम
ग़लत हो चलो जाओ यहाँ से..."

पर जिस्म की आग और बदन से उठती कामग्नी वो सिर्फ़ इतना ही कह
पाई..." आज नही... हम यहाँ कुछ नही कर सकते... कोई भी किसी
समय यहाँ आ सकता है....फिर कभी मौका मिला तो देखेंगे."

महक का जवाब सुनकर राज की हिम्मत और खुल गयी. वो समझ गया की
थोडी हिम्मत दीखने की ज़रूरत है और वो उसे चोद सकता है. वो
उसकी और बढ़ा और उसने उसके टॉप के उपर से उसकी कठोर चुचियों को
अपने हाथों मे पकड़ मसल्ते हुए कहा, "सब अपने आपमे मस्त है और
चुदाई कर रहे है... यहाँ अब कोई नही आएगा."

महक ने महसूस किया की राज का लंड उसकी शॉर्ट्स के उपर से उसकी गॅंड
की दरार पर ठोकर मार रहा था. उसके लंड के स्पर्श ने ही उसके
अंदर की कामग्नी को और बढ़का दिया और उसकी चूत और गीली होने
लगी और वो सिसक पड़ी, "ऊईइ मा ओह."

तुम्हे अक्चा लग रहा है ना? इस तरह चुचियों को मसलवाने मे
मज़ा आआटा है ना तुम्हे.." राज ने उसकी चुचियों को और जोरों से
मसल्ते हुए कहा.

"हां भींच दो मेरी चुचियों को ऑश मसल डालो इन्हे." महक
जोरों से सिसक पड़ी.

"तुम्हारे निपल पर कोई चिकोटी काटता है तो तुम्हे और अच्छा लगता
है ना? राज ने उसके टॉप के उपर से उसके एक निपल को अपनी उंगली और
अंगूठे मे ले जोरों से भींच दिया.

महक की समझ मे नही आया की वो क्या जवाब दिया. आज तक उसने ये
सब नही किया या करवाया था..... ना ही उसके पति ने इस तरह की
बातें की थी उसके साथ... एक अजीब सी सनसनी मची थी उसके
शरीर मे.... वो सिसकते हुए सिर्फ़ इतना ही कह पाई.. "श हाआँ
मुझे बहोट आCछा लगता है.. काट दो मेरे निपल भींच दो
इन्हे...."

राज के हाथों का जादू उसकी चुचियों से होते हुए ठीक उसकी चूत
पर असर कर रहा था और वो चाह रही थी की वो रुके नही बस उसकी
चुचियों को इसी तरह मसलता जाए.

राज उसकी चुचियों को भींच रहा था उसके निपल पर चिकोटी काट
रहा था और महक अपने चूतड़ पीछे कर उसके लंड पर रगड़ने
लगी थी.

राज ने उसे कमर से पकड़ अपनी तरफ थोड़ा खींचा और एक हाथ से
उसकी चुचि को मसल्ते हुए अपना दूसरे हाथ सामने से उसकी जांघों के
बीच रख दिया. महक ने अपनी टाँग फैला दी जिससे राज का हाथ
आसानी से उसकी चूत तक पहुँच सके.
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07-15-2017, 01:09 PM,
#28
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
राज ने अपने हाथ को उसकी शॉर्ट्स के अंदर डाला और पेंटी के अंदर
होते हुए उसकी चूत को अपनी मुति मे भर लिया और साथ ही अपने
दूसरे हाथ को टॉप के अंदर डाल उसकी नंगी चुचि को पकड़ लिया. राज
अब एक हाथ से उसकी चुचि मसल रहा था और दूसरे हाथ से उक्की
चूत.

राज ने अपनी एक उंगली उसकी चूत के अंदर डाल अंदर बाहर करने लगा
और महक अपनी गॅंड को आगे पीछे कर उसके लंड को रगड़ने लगी. वो
गरमा चुकी थी और उसे राज का लंड चाहिए था अपनी चूत मे. राज
उसके उत्तावलेपन को समझ रहा था.

राज जानता था की उसे लंड चाहिए और वो देने भी वाला था पर ऐसी
ही नही, वो नही चाहता था की वो कहती फिरे की राज ने उसकी मर्ज़ी के
खिलाफ उसे चोद... वो उसकी मर्ज़ी से उसे चोदना चाहता था... वो
चाहता था की वो लंड के लिए गिड़गिडाए उसकी मिन्नत करे.

महक की चुचि और चूत को मसल्ते हुए राज ने अपनी गर्दन झुकाई
और उसकी कान मे फुसफुसाया, "मेरे लंड को पाकड़ो."

महक ने अपना हाथ पीछे किया और उसकी शॉर्ट्स के उपर से उसके लंड
को पकड़ लिया. वो शॉर्ट्स के उपर से ही लंड को सहला कर उसकी लंबाई
और मोटाई मापने लगी. उसके मोटे और लंबे लंड का एहसास कर उसकी
चूत किसी अधखुली नाल की तरह बूँद डर बूँद छुओआने लगी.

इतने साल हो गये थे उसकी शादी को और इतने साल मे अपने पति से
चुड़वाते वक़्त उसने कभी इस एहसास को महसूस निया किया था जो आज वो
राज के साथ महसूस कर रही थी. पता नही आज उसे क्या हो गया था
शायद बरसों की तम्मानाएँ शरीर की अग्नि उसपर हावी हो गयी थी.
शादी शुदा होते हुए वो आज अपने बेटे के दोस्त के साथ अपने ही
किचन मे उसके लंड को पकड़ खेल रही थी जहाँ उसका बेटा अपने
बाकी के दोस्तों के साथ बाहर ही खेल रहा था.

"मेरी शॉर्ट्स उतार कर मेरे नंगे लंड को पाकड़ो" तभी राज ने महक
से कहा.

महक राज की तरफ घूमी और घोटनो के बाल बैठ कर उसकी शॉर्ट्स को
नीचे खींच दी. राज ने अपने पैरों से शॉर्ट्स निकाल दी. अब उसका
मोटा और लंबा लंड महक के मुँह से कुछ ही इंच की दूरी पर था.
वो उस लंड को अपनी चूत मे लेना चाहती थी पर वो उसे घूरती रही
उसकी समझ मे नही आया की वो क्या करे.

"खड़ी हो जाओ?" राज ने उससे कहा, "अब मेरे लंड को पकड़ कर
मुठियाओ."

वो खड़ी हो गयी और जैसा राज ने कहा करने लगी. उसने उसके लंड को
अपनी मुति मे भर लिया और उसकी चाँदी को उपर नीचे कर उसे
मुठियाने लगी. वो राज की आँखे मे देख कर उसके लंड को मसल रही
थी.

"तुम चाहती हो ना की में तुम्हारी चूत मे अपने लंड को डाळ कर
तुम्हारी जम खाऱ चुदाई करूँ?" राज ने पूछा.

"हाआं हाआं" वो बोली.

"बताओ मुझे तुम्हे क्या चाहिए" उसने उसे हुकुम देते हुए कहा.

"हां चोडो मुझे ऑश चोडो" वो सिसकते हुए बोली.

"ऐसे नही प्लीज़ बोलो गिड़गिडियो मेरे आगे, प्लीज़ तुम्हारे लंड
से मुझे चोडो." उसने महक से कहा.

महक ने इसके पहले कभी किसी से इस तरह से बात नही की थी. उसने
इन शब्दों को पहले या तो किसी क मुँह से सुना था या फिर कीताबों
मे पढ़ा था लेकिन हक़ीकत मे उसने कभी अपनी ज़ुबान से कहा नही
था. लेकिन राज के मुँह से ऐसे सहबों को सुन वो और गरमा गयी और
खुद बा खुद उसके मुँह से निकालने लगा.

"ओह ऱाज़ प्लीज़ अपने इस मोटे और तगड़े लॉड से चोडो मुझे प्लीज़
जल्दी से चोडो और मत तड़पाव ना प्लीज़....."

ये शब्द निकाल तो उसके मुँह से रहे थे लेकिन धुन उसकी चूत बाज़ा
रही थी.

राज ने उसे घूमा दिया और सींक पर हाथ रख झुकने को कहा. फिर
उसकी शॉर्ट्स और पनटी दोनो को साथ पकड़ उसने उन्हे उसके घूटने तक
नीचे खींच दिया. महक ने अपना एक पैर शॉर्ट्स और पनटी मे से
निकाल अपना पैर फैला दिए और राज ने अपने लंड को पकडा और उसकी
चूत पर रखते हुए एक ही धक्के मे पूरा लंड अंदर घुसा दिया.

महक के मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकाल पड़ी, तभी उसे एहसास हुआ
की उसे अपनी आवाज़ को धीमा रखना होगा. रात हो चुकी थी और
किचन मे अगर मे रोशनी थी तो सिर्फ़ बाहर के हाल मे चल रहे टीवी
की. बाकछे सब बाहर खेल रहे थे वो यहाँ आएँगे तो नही पर वो
नही चाहती थी की उसकी कराहें और सिसकियाँ उन्हे सुनाई पड़े.
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07-15-2017, 01:09 PM,
#29
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
राज महक की पीठ पर लेट सा गया और अपने हाथ नीचे कर एक बार
फिर उसकी चुचियों को पकड़ मसल्ने लगा. अब वो उसकी चुचियों को
मसल्ते हुए धक्के मार रहा था.

महक को विश्वास नही हो रहा था की एक जवान लड़का जिसने अभी अपनी
ग्रॅजुयेशन भी पूरी नही की थी इस कदर किसी औरत को खुश कर
सकता था. उसकी चुदाई की हर कला उसके बदन मे ईक नई उत्तेजना
पैदा कर रही थी. आज वो एक नये अनुभव से गुज़र रही थी, उसके
पति ने कभी इस कदर उसे नही चोद था उसकी चूत जहाँ सनसनी
पैदा कर रही थी तो उसकी चुचियाँ एक मीठी लेहायर दौड़ा रही थी
उसके बदन मे.

"तुम्हे तुम्हारी चूत मे मेरा लंड अक्चा लग रहा है ना? उसने
पूछा. "चोदते ःऊए जब में तुम्हारी चुचियों को भींचता हूँ तो
तुम्हे मज़ा आता है ना?"

राज की ये गंदी बातें और उत्तेजञात्मक बातें उसे और उकसा रही
थी, उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर आ चुकी थी.

"हां" वो इतना ही कह पाई.

राज खड़ा हो गया और अपने लंड को करीब करीब उसकी चूत से बाहर
खींच लिया फिर उसके छूतदो को पकड़ एक ज़ोर का धक्का मार फिर
से लंड को उसकी चूत मे घुसा दिया. फिर अपने धक्कों की रफ़्तार
बढ़ाते हुए वो उसे चोदने लगा.

महक बड़ी मुश्किल से अपनी सिसकियों को राक रही थी. उसने अपने होंठ
दाँतों से भींच लिए थे और उसकी सिसकियाँ गले मे ही घूट कर
रह गयी. उसकी चूत पानी छोड़ने वाली थी. वो अब अपने कूल्हे आगे
पीछे कर राज के धक्कों का साथ देने लगी. राज ज़ोर के धक्के मार
कर उसे चोद रहा था और वो हर धक्के मे अपने चूतड़ हिला उसका
साथ दे रही थी.

महक को अचानक लगा की उसके शरीर मे उबाल आ रहा था. जो एहसास
उसने इतने बरसों मे महसूस नही किया था आज वो उसके साथ हो रहा
था. खुशी मे उसकी साँसे तेज हो गयी और वो सिसक पड़ी..'ऑश आआआः
ओह"

अचानक जैसे की कोई बाँध टूट गया हो. उसकी चूत ने पानी छोड
दिया....'श शायद इसी को झड़ना कहते है' वो सोचने लगी... कितना
कुछ खोया है मेने इन सालों मे....' वो सोचने लगी..... राज के
हर धक्के पर उसकी चूत ज़ोर से पानी छोड देति...उस्ने अपनी चूत की
मासणपेशियों को कड़ा कर राज के लंड को जाकड़ लिया. अब राज का लंड
उसकी चूत की दीवारों को भेदते हुए अंदर बाहर हो रहा था.

महक ने जैसे ही उसके लंड को अपनी चूत मे जकड़ा राज समझ गया
की उसकी चूत पानी छोड चुकी है. उसके भी लंड मे उबाल आना शुरू
हो गया. उसने उसके दोनो छूतदों को पकडा और ज़ोर ज़ोर के धक्के
मारने लगा. उसे लगा की उसका लंड पानी छोड़ने वाला है तो उसने अपने
लंड को उसकी चूत के गहराई तक पेलते हुए अपने वीर्या की पिक्खरी
छोड दी.

राज उकी पीठ पर फिर झुक गया और उसके कान मे फुसफुसते हुए
बोला, "कैसा लगा म्र्स सहगल.?"

"बहोट अक्चा." वो बस इतना ही कह पाई.

राज ने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाला और अपनी पॅंट उपर
चढ़ा पहन ली फिर अपने जेब से अपना विज़िटिंग कार्ड, जिसपर उसका
फोन नंबर और पता छापा था निकाल कर महक को पकडा दिया.

"अगर ऐसी चुदाई की फिर इक्चा हो तो मुझे याद कीजिएगा." कहकर
राज चला गया.

महक वहीं किचन मे काउंटर का सहारा लिए खड़ी थी, उसकी टाँगे
अभी फैली हुई थी और चूत से दोनो का मिश्रित पानी तपाक रहा
था. उसे अपने आप पर शरम आ रही थी की उसने ये क्या कर डाला
फिर भी वो खुश थी की आज इतने बरसों बाद उसकी चूत की प्यास
बुझी थी और वो खुल कर झड़ी थी. उसने अपने कपड़े उठाए और
बाथरूम की और चल दी.

महक दूसरे दिन सो कर उठी और पीछले दिन की घटनाओं को याद
करने लगा. उसे आत्मा ग्लिलनी हो रही थी की उसे वो सब नही करना
चाहिए था. वो एक शादी शुदा औरत थी और एक जवान लड़के की मा
भी. वो नही चाहती थी की अपनी इस हरकत की वजह से उसकी शादी
शुदा जिंदगी मे कोई दरार पड़े.

उसे याद आया की राज ने उसे अपना बुसीनीस कार्ड दिया था, उसने देखा
की वो कार्ड उसके बेड की साइड मे टेबल पर रखा था. उसने वो कार्ड
उठाया और अपने हाथों मे ले मसल कर फैंक दिया. वो उसे फोन नही
करेगी ये उसने सोच लिया था. वो वकति तौर पर बहक गयी थी, ये
बार का मज़ा था जो ख़त्म हो चुका था. अब वो पहले की तरह एक
आक्ची बीवी और एक आची मा बनकर रहेगी.

महक ने अपने आपको घर के काम मे जुटा लिया जिससे उसका मन और
ख़याल ना भटके. लेकिन फिर भी राज का खड़ा लंड उसकी हरकतें
उसके ख़याल मे आ ही जाते. कई बार तो ऐसा हुआ ही राज के लंड का
ख़याल आते ही उसकी चूत मे एक सनसनी दौड़ने लगी, उसके हाहत खुद
बा खुद उसकी चुचियों पर चले गये और वो उन्हे मसल्ने लगी.
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07-15-2017, 01:09 PM,
#30
RE: Desi Chudai Kahani बुझाए ना बुझे ये प्यास
आज से फेले उसने कई बार हस्तमैथुन करने की सोची लेकिन उसके
जहाँ मे ऐसा कोई ख़याल या सपना ही अँहि आता था जिससे वो गरमा
सके और आज एक हल्के से ख़याल ने उसे गरमा दिया था. उसे विश्वास
नही हो रहा था की जिस चीज़ के लिए वो बरसों से तड़प रही थी
आज इस कदर उसे हासिल हो जाएगी. वो राज के ख़याल मे दुबई एक हाथ
से अपनी चूत और एक हाथ से अपनी कूची को मसल रही थी. पर थोड़े
ही देर मे वो अपनी ओषच को झटक फिर हक़ीक़त मे आ अपने काम मे लग
जाती.
शाम को सोनू अपने हॉस्टिल चला गया और एक बार फिर वो घर मे
अकेली रह गयी उसके पति टूर पर से अभी दो दिन आने वाले नही
थे. वो बिस्तर पर लेटकर सोने की कोशिश करती रही लेकिन राज और
उसका लंड उसके ख़याल मे आते रहे. चाह कर भी वो उन्हे अपने ख़याल
से ना निकाल पाई.

आख़िर रात के 10.00 बजे वो अपने आप पर काबू नही रख पाई.
बिस्तर से उठी और डस्टबिन से राज का मसाला हुआ बिज़्नेस कार्ड निकाला
और उसका फोन मिलने लगी.

राज का सेल फोन बाज उठा, लेकिन वो नंबर पहचान नही पाया इसलिए
उसने फोन को वाय्स मैल पर दल दिया. महक ने देखा की मेसेज
रेकॉर्ड हो रहा है तो सोचने लगी की क्या उसे मेसेज छोड़ना चाहिए
फिर उसने कहना शुरू किया.... "है में महक हूँ..... मेने तुम्हे
सिर्फ़ शुक्रिया कहने के लिए फोन किया है......कि तुमने... तुम
जानते हो क्यों.... अगर समय मिले तो मिलने आना...."

"मुझे मेसेज नही छोड़ना चाहिए था.... में तो एक रंडी की जैसे
फोन कर उसे बुला रही हूँ जैसे की मेरी चूत उसके लंड की
दीवानी है.... हां दीवानी ही तो है......" उसने अपने आप से कहा.

थोडी देर बाद राज ने मेसेज सुना और मुस्कुरा पड़ा. तकदीर ने उसके
हाथ एक ऐसी मछली पकडा डी थी जो उसकी और उसके लंड की दीवानी
हो चुकी थी.... लेकिन वो इस मछली को पहले खूब तड़पाना चाहता था
फिर ही उसे अपने तालाब मे क़ैद करना चाहता था.

आने वाले तीन चार दीनो मे उसे महक के कई मेसेज मिले पर उसने
उससे फोन पर भी बात नही की. हर बार वो फोन करती और मेसेज
छोड़ती और राज सिर्फ़ सुन भर लेता. उसका हर मेसेज मे फेले से
कहीं ज़्यादा दीवानगी और उतावलापन झलकता था. वो हर बार उसे
याद दिलाती थी की बुधवार को उसके पति टूर पर से लौट आएँगे और
शायद उन्हे मौका ना मिला मिलने का. वो देखना चाहता था की क्या पति
के होते हुए भी वो उससे चुड़वाने के लिए उतनी ही बेचैन है........
आख़िर बुधवार की शाम 4.00 बजे उसने उसे फोन किया.

"हेलो" फोन की दूसरी और से महक ने जवाब दिया.

"है... म्र्स सहगल में राज रहा हूँ... आपने फोन किया था?"
राज ने कहा.

"हां कई बार फोन कर चुकी हूँ तुम्हे.' महक ने थोड़ा झल्लते
हुए कहा.

"हां मुझे तुम्हारे मेसेज मिले थे... लेकिन क्या था में काम मे
ज़रा ज़्यादा ही बिज़ी था..... कहिए क्या काम था मुझसे?" राज ने
पूछा.

"तुम जानते हो मुझे क्या काम था... लगता है की किसी को तड़पाना
तुम्हारी फ़ितरत है..... मेरे पति जल्दी ही घर आने वाले हैं."
महक ने कहा.

"कितने बजे?" उसने पूछा.

"उनका प्लेन शाम को 7.00 बजे लॅंड करेगा, इसका मतलब 8.00 8.30
बजे तक घर पहुँच जाएँगे." महक ने जवाब दिया.

"फिर तो अक्चा है की वो जब दूसरी बार सहर से बाहर जाए तब हम
मिलें." राज ने कहा.

"हां ये ठीक रहेगा, में तुम्हे फोन करूँगी." उसने कहा, "अब
मुझे जाना है में बाद मे फोन करती हूँ."

शाम को 7.30 बजे महक स्नान करके बाथरूम से निकाली तभी दरवाज़े
पर गहनति बाजी. उसने एक गाउन सा अपने शरीर पर लपेटा और दरवाज़ा
खोलने के लिए गयी. उसने के होल से देखा तो पाया की राज दरवाज़े
पर खड़ा था. दर और उत्साह दोनो से उसका बदन कांप उठा. उसने
दरवाज़ा खोला और इधर उधर झाँकने लगी.

"तुम यहाँ क्या कर रहे हो?" उसने घबराई हुए स्वर मे कहा.

"तुमने कहा था की तुम मुझसे मिलना चाहती हो इसलिए में यहाँ हूँ."
राज ने कहा और इसके पहले महक कोई विरोध करती वो दरवाज़े को
धकेल अंदर आ गया.
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