Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
06-01-2019, 01:57 PM,
#21
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
जैसे-2 मूवी में सेक्स बढ़ता जाराहा था, वहाँ पर बैठे सभी लोग एक्शिटेड होते जा रहे थे, और ना चाहते हुए ही एक दूसरे के साथ खेलने लगते हैं..

रामा दीदी को ये ज़्यादा अच्छा नही लगा या वो ये सब नही करना चाहती होगी सबके सामने तो वो उठकर सोने चली गयी…

सोनू आशा दीदी के साथ चिपका हुआ था, और अपने हाथ इधर-उधर डाल देता, जिसे वो कभी-2 रोक देती जिससे वो अपनी सीमा में ही रहे..

इधर रेखा दीदी ने मेरे उपर हल्ला ही बोल दिया था…! वो मेरे उपर एक तरह से पसर ही गयी थी.. उसके बड़े-2 भारी भरकम चुचे मेरे साइड से दबे हुए थे..

उत्तेजना से मेरा लंड अकड़ गया, जिसे उन्होने अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया, और मेरा हाथ पकड़ कर अपने मम्मे पर रख लिया..

मेरी सहन शक्ति जबाब देती जा रही थी, धीरे-2 वो वाइल्ड होती जा रही थी, यहाँ तक की उन्होने मेरा एक हाथ अपनी चूत के उपर रख दिया और उसे दबाने सहलाने लगी.. उनकी पाजामी गीली होती जा रही थी..

जब मुझसे और सहन नही हुआ तो मे ये कहकर कि मुझे तो अब नींद आरहि है मे उठ खड़ा हुआ..

दीदी प्यासी सी मेरी ओर देखने लगी और उन्होने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली – अरे छोटू बैठ ना.. दिन में नींद पूरी कर लेना..

मे – नही दीदी, अब मेरा सर भारी होने लगा है.. अब मेरे से नही बैठा जाएगा..

वो तीनों तो मूवी में ही खोए हुए थे.. इधर जब मेने उनकी बात नही मानी तो उन्होने मुझे ज़ोर का झटका देकर अपने उपर खींच लिया, जिससे मे उनके उपर गिर पड़ा..

झटका अचानक इतना ज़ोर का था कि वो खुद भी गद्दे पर गिर पड़ी और मे उनके उपर..

उन्होने मुझे अपनी बाहों में कस लिया जिसके कारण उनके दोनो गद्दे जैसे चुचे मेरे सीने में दब गये,

मेरा खड़ा लंड उनकी मोटी-मोटी जांघों के बीच फँस गया, जिसे उन्होने अपनी जांघों को और जोरेसे भींच कर दबा दिया.

वो मुझे किस करने ही वाली थी कि मे उनके उपर से उठ खड़ा हुआ, और तेज़ी से वहाँ से निकल गया और सीधा बाथरूम में घुस गया….

मेने बाथरूम में अपनी टंकी रिलीस की और जाकर अपने बिस्तर पर सो गया, जो छत पर पड़ा हुआ था, मेरे बाजू में ही रामा दीदी का बिस्तर था.

रामा दीदी इस समय अपने घुटने मोड़ कर करवट से गहरी नींद में थी, मे भी जाकर उनकी बगल मे लेट गया और जल्दी ही गहरी नींद में चला गया

मे उँचे और घने पेड़ों के बीच स्थित एक साफ पानी से भरे तलब के किनारे खड़ा हुआ था, अचानक मेरी नज़र तालाब में नहाती हुई एक कमसिन लड़की पर पड़ती है..

उसके बदन पर इस समय मात्र एक पतले कड़े की चुनरी जैसी थी, जो वो अपने शरीर पर लपेटे हुए थी, पानी से गीली होने बाद उसके शरीर का वो कपड़ा उसके बदन को ढकने की वजाय और उसके शरीर के उभारों को प्रदर्शित कर रहा था..

अचानक मुझे देख कर वो लड़की पानी में खड़ी हो जाती है, जिससे उसके कमर से उपर का भाग दिखाई पड़ने लगता है…

पतले गीले कपड़े से उसके गोल –गोल ठोस उरोज साफ-साफ दिखाई दे रहे थे, ब्राउन कलर के अंगूर के दाने जैसे उसके निपल पानी के ठंडे पानी से भीगने के बाद एकदम कड़े होकर उस कपड़े से बाहर निकलने के लिए जैसे व्याकुल हो उठे हों..

मे एकटक उसकी सुंदरता में खोगया, गोरी चिट्टी वो लड़की मेरी तरफ देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी..

अचानक धीरे-2 वो पानी से बाहर आने लगी, मे जड़वत किसी पत्थर की मूरत की तरह वहीं खड़ा उसका इंतेज़ार कर रहा था…

वो बाहर निकल कर ठीक मेरे सामने आकर खड़ी होगयि और उसने अपने गीले कड़क उरोज मेरे सीने में गढ़ा दिए.. और फिर अपने शरीर को उपर-नीचे करके अपने निप्प्लो को मेरे सीने से रगड़ने लगी..

मेरी आँखों में झाँकते हुए उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड पर रख दिया और उसे सहलाने लगी…

उत्तेजना मेरे सर चढ़ कर बोलने लगी थी, मेने उसे अपनी बाहों में कस लिया और उसके होठों को चूस्ते हुए उसके उरोजो को मसल्ने लगा…

वो ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को मसले जा रही थी… अब उसने मेरा लिंग अपनी यौनी के उपर रगड़ना शुरू कर दिया…

मात्र एक झीने से कपड़े और वो भी पूरी तरह पानी से गीला होने के कारण मेरा लंड उसकी यौनी को अच्छे से फील कर रहा था…

मेने उसके गोल-मटोल कलश जैसे कुल्हों को अपने हाथों में कस लिया और अपनी कमर को एक झटका दिया…

उस झीने कपड़े समेत मेरा लिंग उसकी यौनी में प्रवेश करने लगा…मे अपनी कमर को और ज़्यादा उसकी तरफ पुश करने लगा… उसके चेहरे पर दर्द के भाव बढ़ते जा रहे थे…

मुझे लगा जैसे मेरा लंड पानी छोड़ देगा, मेने उसकी पीड़ा की परवाह ना करते हुए अपना लिंग और अंदर करना चाहा कि किसी ने मुझे झकझोर दिया…

हड़बड़ा कर मेने अपनी आँखें खोली तो देखा दीदी मेरे उपर झुकी हुई मुझे ज़ोर-ज़ोर से हिला रही थी…

छोटू उठ जा अब देख कितनी धूप तेज हो गयी है, पसीने से तर हो गया है.. फिर भी सो रहा है…

मे उठकर बैठ गया… मुझे अभी भी ऐसा फील होरहा था, जैसे ये सब सपना नही हक़ीकत में मेरे साथ हो रहा था….

मेरा लंड पूरी तरह अकड़ कर शॉर्ट को फाडे दे रहा था, एक सेकेंड और मेरी आँख नही खुली होती तो वो पिचकारी छोड़ चुका होता…

दीदी की नज़र मेरे शॉर्ट पर ही थी, जब मेने उसकी निगाहों का पीछा किया तब मुझे एहसास हुआ, और मेने अपनी जांघे भींच कर उसे छुपाने की कोशिश की..

दीदी झेंप गयी और नज़र नीची करके मुस्कराते हुए वहाँ से भाग गयी.. और सीधी के पास जाकर पलट कर बोली- अब सपने से बाहर आ गया हो तो नीचे आजा.. भाभी बुला रही हैं…!

मुझे बड़ी शर्म सी महसूस हुई, फिर कुच्छ देर बैठ कर अपने मन को इधर-उधर करने की कोशिश की लेकिन कोई फ़ायदा नही हुआ..

फिर उठकर फर्स्ट फ्लोर पर बने बाथरूम में घुस गया और पेसाब की धार मारी तब जाकर कुच्छ शांति मिली……..

चाय नाश्ता करने के बाद मेने अपनी गुड़िया रानी को गोद में लिया और भाभी को बोलकर बड़ी चाची के घर की तरफ निकल गया…

मेने उनके घर के अंदर जैसे ही पैर रखा, सामने ही वरान्डे में रेखा दीदी चारपाई पर बैठी अपने बेटे को दूध पिला रही थी,

उनका पपीते जैसा एक बोबा, कुर्ते के बाहर निकला हुआ था और उसका कागज़ी बादाम जैसा निपल उनके बेटे के मुँह में लगा हुआ था, और वो चुकुर-2 करके उसे चूस रहा था..

मेरे कदमों की आहट सुन कर उन्होने उसे ढकना चाहा, लेकिन जैसे ही उनकी नज़र मेरे उपर पड़ी.. तो उन्होने अपनी कमीज़ और उपर कर ली जिससे उनका पूरा पपीता मेरे सामने आगया….

मे – दीदी क्या हो रहा है…? और उनके पास बैठ कर उनके बेटे के सर पर हाथ फिराया और उनके बेटे से बोला – अले-अले..मम्मा.. का दुद्दु पी रहा है मेरा भांजा…

दीदी ने जलती नज़रों से मुझे देखा लेकिन मेरी बात का कोई जबाब नही दिया..

मेने उनके पास बैठ के रूचि के गाल पर किस किया और उसे खिलाने लगा…वो बार-2 मेरा ध्यान अपनी ओर करने के लिए सस्सिईइ….आअहह…काट मत… जैसी आवाज़ें करने लगी.. लेकिन मे अपनी गुड़िया से ही खेलता रहा…

फिर जब उनकी एक तरफ की टंकी खाली हो गयी, तो उसे पलट कर दूसरे बोबे की तरफ किया और अपनी कमीज़ उठा कर उसको भी नंगा करके निपल उसके मुँह में दे दिया.. लेकिन पहले वाले को ढकने की कोशिश भी नही की..

अब उनकी कमीज़ उनके दोनो चुचियों के उपर टिकी हुई थी…मे कनखियों से उनको देख रहा था, और अपनी भतीजी से खेलता रहा…

वो मन ही मन भुन-भूना रही थी.. फिर मे बिना उनकी तरफ देखे ही बोला – दीदी घर में और कोई नही है…? उन्होने फिर भी सीधे -2 मेरी बात का कोई जबाब नही दिया और मुझे सुनकर अपने बेटे से बातें करने लगी.

ले बेटा ठूंस ले पेट भरके… यहाँ और कोई नही है, जो तेरी भूख शांत करे..

लेकिन बेटा तो दूध पीना बंद करके कब का सो चुका था.. तो उसको उन्होने साइड में सुला दिया और झटके से अपनी कमीज़ नीचे करके अपने पपीतों को ढक लिया.

मे – चल रूचि.. अपना चलते हैं.. यहाँ तो कोई दिख नही रहा.. तो फिर अपन भी यहाँ बैठ के क्या करेंगे…

वो मेरी बात सुनकर और ज़्यादा खीज गयी और पीछे से मेरे गले को अपने एक बाजू से लपेट लिया… और बोली – कमीने तुझे मे इतनी बड़ी यहाँ बैठी दिखाई नही दी.. जो कह रहा है कि यहाँ कोई नही है..
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06-01-2019, 01:58 PM,
#22
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
मे – चल रूचि.. अपना चलते हैं.. यहाँ तो कोई दिख नही रहा.. तो फिर अपन भी यहाँ बैठ के क्या करेंगे…

वो मेरी बात सुनकर और ज़्यादा खीज गयी और पीछे से मेरे गले को अपने एक बाजू से लपेट लिया… और बोली – कमीने तुझे मे इतनी बड़ी यहाँ बैठी दिखाई नही दी.. जो कह रहा है कि यहाँ कोई नही है..

मे – आप तो कोई जबाब ही नही दे रही तीन मेरी बात का.. तो मे और किसके साथ बात करूँ?

वो – तू तो अब बड़ा आदमी हो गया है.. हम जैसे छोटे लोगों के साथ तो बैठना भी अपनी बेइज़्ज़ती समझता है… और ये कह कर उन्होने अपने स्तनों को मेरी पीठ पर रगड़ दिया…

मे – आपको ऐसा क्यों लगा कि मे आपके साथ बैठ कर बात नही करना चाहता..?

वो – तो फिर रात उठकर क्यों चला गया था, मेने तुझे रुकने के लिया कितना बोला.

मे – रात मुझे सच में बहुत नींद आ रही थी…

फिर उन्होने पीछे से ही मेरी गोद में बैठी रूचि को खिलाने लगी जिससे उनकी दोनो चुचियाँ मेरे शरीर में गढ़ रही थी..

रूचि के साथ खेलने के बहाने उनका हाथ मेरे लंड की तरफ बढ़ने लगा…

मेने मन ही मन सोचा… ये साली कितनी गरम है.. अपने छोटे भाई का ही लॉडा लेने के चक्कर में है.. अगर मेने भाभी से प्रॉमिस नही किया होता तो इसे यहीं पटक कर चोद डालता.. लेकिन क्या करूँ..

कुच्छ देर जब मेरी सहन शक्ति जबाब देने लगी तो मेने बहाना बनाया… दीदी अब मे चलता हूँ.. रूचि को भूख लग रही होगी.. और मे चारपाई से खड़ा हो गया..

वो मुँह लटका के बैठी रह गयी, एक बार फिरसे मे उसको केएलपीडी करके वहाँ से चला आया…..
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शाम को मेरा मन किया कि आज खेतों की तरफ चला जाए, वैसे भी गर्मी बहुत थी, तो शायद खेतों में या बगीचे घूम-घूम कर कुच्छ राहत मिले…

शाम के 5 बज चुके थे, लेकिन गर्मी और धूप ऐसी थी मानो अभी भी दोपहर ही हो…

मे थोड़ी देर आम के पेड़ों के नीचे इधर उधर घूमता रहा… कुच्छ पके आम दिखे तो उन्हें तोड़ने की कोशिश की, और उन्हें पत्थर मार कर तोड़ने लगा..

एक-दो आम हाथ भी आए… अभी में और आम तोड़ता कि तभी वहाँ आशा दीदी आगयि… और मुझे देखते ही चहकते हुए बोली – और हीरो… आज इधर कैसे..?

मे – बस ऐसे ही चला आया… आज कुच्छ गर्मी ज़्यादा है ना दीदी…!

वो – हां यार मेरा तो पसीना ही नही सूख रहा आज… मेने उसके उपर नज़र डाली.. वाकाई में उसका कुर्ता पसीने से तर हो रहा था.. और वो उसके बदन से चिपका पड़ा था…

उसकी ब्रा का इंप्रेशन साफ-साफ दिखाई दे रहा था.. हम दोनो एक पेड़ के नीचे बैठ कर तोड़े हुए आम खाने लगे.. फिर कुच्छ देर बैठने के बाद वो बोली..

चल छोटू.. ट्यूबिवेल की तरफ चलते हैं… मेने कहा हां ! चलो चलते हैं..

हम दोनो ट्यूबिवेल पर आगाय… वहाँ कोई नही था.. और ट्यूबिवेल चल रहा था.

मेने कहा – दीदी ! यहाँ तो कोई नही है… और ट्यूबिवेल चल रहा है… पानी कहाँ जा रहा है..?

वो – हमारे खेतों में मूँग लगा रखी है ना उसमें… वही देखने मे आई थी.. फिर वो मुझसे बोली… छोटू चल नहले.. यार बड़ी गर्मी है.. थोड़ा ठंडे-2 पानी में नहा कर राहत मिल जाएगी…

मे – मन तो है, पर दूसरे कपड़े नही लाया..

वो – अरे यार ! कपड़े उतार और कूद जा हौदी में.. अंडरवेर तो पहना होगा ना..

मे – हां वो तो पहना है.. फिर मेने अपने शर्ट और पाजामा को उतार कर पास में पड़ी चारपाई पर रखा और कूद गया पानी में….

ट्यूबिवेल का ताज़ा ठंडा पानी शरीर पर पड़ते ही राहत मिली… खड़े होने पर हौदी का पानी मेरे पेट तक ही आरहा था….

उपर से पीपे की धार.. पड़ रही थी जिसमें मे बीच-2 में उसके नीचे अपना सर लगा देता…तो और ज़्यादा मज़ा आ जाता….

अभी मे धार के नीचे से अपना सर हटा कर सीधा खड़ा ही हुआ था… कि मेरे पीछे छपाक की आवाज़ हुई……!

मेने जैसे ही अपने पीछे मुड़कर देखा… तो आशा दीदी भी हौदी में कूद पड़ी थी…

पानी में कूदते ही उसने अंदर डुबकी लगा दी… जब वो बाहर आई और खड़ी हुई… मेरी आँखें उसके शरीर पर चिपक गयीं…

उसका पतले से कपड़े का कुर्ता उसके बदन से चिपक गया था और उसकी ब्रा साफ-साफ दिखाई दे रही थी… शरीर के सारे कटाव एकदम उजागर हो गये थे…

आज मुझे पता चला कि उसका बदन भी कम मादक नही था, 33-26-34 का एक मस्त कर देने वाला गोरा बदन..

मुझे अपनी ओर देखते पाकर वो हँसने लगी और अपने हाथों में पानी भर भरके मेरे उपर उच्छलने लगी.. जो सीधा मेरी आँखों पर भी पड़ने लगा…

मेने भी उसके उपर पानी उच्छालना शुरू कर दिया….मेरी पानी उच्छालने की गति ज़्यादा तेज थी.. सो वो मेरी ओर देख भी नही पा रही थी…

वो चिल्लाने लगी – मान जा.. छोटू… मेरी आँखों मे पानी जा रहा है…
मे बोला – शुरू तो आपने ही किया था ना… अब भुग्तो…और पानी उच्छालना जारी रखा..

वो – अच्छा तो ऐसे नही मानेगा तू.. ,और इतना कह कर उसने मेरे उपर छलान्ग लगा दी.. छपाक से मे पानी के अंदर डूब गया और वो मेरे उपर आ पड़ी…

उसके अमरूद मेरे सीने से टकराए… पानी के अंदर ही उसने मेरे गले में अपनी एक बाजू लपेट दी…

मेने पलटी लेकर पानी से बाहर अपना सर निकाला, तो वो भी मेरे साथ ही बाहर आगयि…

वो मेरे गले से अपनी बाजू कसते हुए बोली – अब बोल… मानेगा… बोल…! मे हँसते हुए.. उनसे छूटने की कोशिस कर रहा था.. लेकिन वो मेरे से और ज़्यादा चिपकती जा रही थी..

मेरा पप्पू छोटी सी फ्रेंची अंडरवेर को फाडे दे रहा था…

मेने उसकी बगलों में एकदम उसकी चुचियों के साइड में गुदगुदी करने लगा…. वो खिल खिलाकर हँसते हुए मुझसे और ज़ोर्से चिपक गयी…

उसकी चुचियाँ मेरे सीने से दबी हुई थी.. , उसकी मुनिया और मेरे पप्पू में मात्र कुच्छ ही सेंटिमेटेर का फासला था…

अपनी सखी की खुसबु लगते ही पप्पू और फन-फ़ना उठा… मेने उसके कठोर किंतु रूई जैसे गोल – गोल चुतड़ों को अपनी मुत्ठियों में कस कर भींच दिया…तो वो फासला भी ख़तम हो गया और मेरा बबुआ ने…ठीक उसके भग्नासा के उपर अटॅक कर दिया….!

उसने मेरे कंधे में दाँत गढ़ा दिए और ज़ोर्से काट लिया… मेरी चीख निकल पड़ी..

मेने कहा दीदी… छोड़ो ना.. काट क्यों रही हो….

वो बोली – क्यों निकल गयी सारी हेकड़ी… कह कर उसने अपनी एक टाँग मेरी जाँघ पर लपेट दी और पप्पू की सीधी ठोकर उसकी मुनिया के ठीक होठों पर पड़ी….

सीईईईईईईई….अह्ह्ह्ह… छोटू … कह कर उसने मेरे होठों पर किस कर लिया…और अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को ज़ोर्से मसल डाला….

ना चाहते हुए भी मेरे हाथ उसके गोल-मटोल चुतड़ों पर फिरसे चले गये और मेने उन्हें अपनी मुट्ठी में कस कर मसल दिया….

उसने अपनी कमर को ज़ोर का झटका देकर अपनी मुनिया को मेरे पप्पू पर रगड़ दिया.. और मेरे होठ चूसने लगी…!
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06-01-2019, 01:58 PM,
#23
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
ना चाहते हुए भी मेरे हाथ उसके गोल-मटोल चुतड़ों पर फिरसे चले गये और मेने उन्हें अपनी मुट्ठी में कस कर मसल दिया….

उसने अपनी कमर को ज़ोर का झटका देकर अपनी मुनिया को मेरे पप्पू पर रगड़ दिया.. और मेरे होठ चूसने लगी…!

मेरी हालत खराब होने लगी, …मामला कंट्रोल से बाहर होता जा रहा था….

मुझे लगने लगा कि मे कहीं भाभी से किया हुआ वादा ना तोड़ दूं…, तो मेने उसके कंधे पकड़ कर अपने से अलग कर दिया और हौदी से बाहर निकालने लगा…

वो मेरा हाथ पकड़ कर रोकने लगी… अरे भाई रुक… ना… थोड़ी देर और नहाते हैं.. कितना अच्छा लग रहा है…

मे- नही दीदी अब बहुत हो गया… अब और नही… बस इतना ही बहुत है.. इतना कह कर मे बाहर आगया.. ,

वो अपनी लाल-लाल शराबी जैसी आँखों से मुझे देखती रह गयी… ,

मेने मन ही मन कहा - उफ़फ्फ़.. ये दोनो बहने तो भेन्चोद हाथ धोके पीछे ही पड़ गयीं हैं यार…जल्दी निकल लो पतली गली से…कहीं भेन्चोद उल्टा बलात्कार ही ना कर्दे मेरा..…
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आज मेरा रिज़ल्ट निकलने वाला था, वैसे तो हमारे यहाँ रोज़ ही न्यूसपेपर आता था, लेकिन मुझसे इंतेज़ार नही हुआ और में सुबह-2 ही अपनी स्कूटी लेकर टाउन की तरफ दौड़ गया और न्यूसपेपर ले आया.

मेरा रिज़ल्ट जैसा भाभी ने प्रॉमिस लिया था, मेरे 85% मार्क्स आए थे, जो अपने स्कूल में हाइयेस्ट थे…भाभी खुशी से झूम उठी और उन्होने मेरे चेहरे पर चुंम्बानों की बौछार कर दी.

बाबूजी ने मुझे अपने कलेजे से लगा लिया, मेने इसका श्रेय अपनी भाभी को ही दिया, तो बाबूजी ने उन्हें अपनी बेटी की तरह उनका सर अपने सीने से टिका कर आशीर्वाद दिया.

दो सालों की कोशिश के बाद हमारे स्कूल को डिग्री कॉलेज तक की पर्मिशन मिल गयी थी, तो कॉलेज वालों ने उन सभी बच्चों के गार्जियन से कॉंटॅक्ट किया जो स्कूल से पास आउट हुए थे.. ताकि उन्हें अड्मिशन मिल सके नये सेमिस्टर के लिए…

मेरी भी इच्छा थी की मे अपने घर ही रहूं.. सो मेने बाबूजी को इस बात के लिए राज़ी कर लिया, हालाँकि बड़े भैया का विचार था कि मे इंजिनियरिंग करूँ.

मे इस बात से खुश था कि चलो अब मुझे अपना घर छोड़ कर नही जाना पड़ेगा.
लेकिन मेरी खुशी अभी अधूरी थी.. जिसका अभी मुझे और कुच्छ दिन इंतजार करना था…और आख़िरकार वो दिन भी आ ही गया………!!!!

आज मेरा जन्म दिन था, चूँकि ये ईवन डे था, तो मेरे भाई तो नही आ सके लेकिन भाभी चाहती थी, मेरे जन्मदिन की खुशी पूरे परिवार के साथ मनाई जाए.. सो उन्होने एक दिन पहले से ही सबको बोल दिया…

पिताजी ने भी पंडितजी को बुलवाके हवन पूजन कराया, और हम सब लोगों ने मिलकर खाना पीना किया… सारा दिन हसी-खुशी में ही निकल गया…

शाम को एक केक मँगवाकर काटा और सबने मुझे जन्मदिन की बधाई और आशीर्वाद के साथ-2 क्षमता अनुसार तोहफे भी दिए…

रात को जब सब अपने-2 घर चले गये, और सारा काम निपटाकर दीदी और भाभी जिसमें चाचियों ने भी सहयोग दिया फारिग हुई..

दीदी चाची के साथ उनके घर चली गयी.. कुच्छ देर बाद आने का बोल कर तब भाभी ने मुझे अकेले में बधाई दी और बोली – देवर जी ! 11 बजे मेरे कमरे में आ जाना आपको स्पेशल गिफ्ट देना है…!!

उनके शब्दों ने मेरे कानों में जैसे शहद ही घोल दिया हो… मेरा मन मयूर की तरह नाच उठा और मेने आवेश में आकर भाभी को गोद में उठा लिया और सारे आँगन में लेकर नाचने लगा….

भाभी खिल-खिला रही थी और बार-2 मुझे उतारने के लिए बोल रही थी.. फिर मेने उनको एक चारपाई पर बड़े प्यार से बिठा दिया.. और उनके गालों के डिंपल को चूमकर बोला –

थॅंक यू भाभी आपको अपना प्रॉमिस पूरा करने के लिए.. मे बता नही सकता कि आज मे कितना खुश हूँ…?

भाभी – अपनी थोड़ी बहुत खुशी आनेवाले समय के लिए भी बचा कर रखो मेरे प्यारे देवर राजा…

आज बहुत कुच्छ सीखना और करना है तुम्हें… और मुस्करा कर वो अपने कमरे में चली गयी….!

रात 11 बजे मे भाभी के कमरे में पहुँचा… वो एक फ्रंट ओपन वन पीस गाउन में अपनी ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी थी.. मेरी आहट सुन कर वो खड़ी हो गयी और जैसे ही वो मेरी ओर पलटी…..

मे उन्हें देखता ही रह गया… हल्के से मेक-अप से ही उनका चेहरा कुंदन की तरह दमक रहा था.. पतले -2 होठों पर हल्के लाल रंग की लिपीसटिक,

माथे पर छोटी सी बिंदी, आँखों में हल्का- 2 काजल कमर तक के खुले बालों के बीच मानो घने काले बादलों के बीच अचानक चाँद निकल आया हो.

सुराइदार गर्दन में मात्र एक मन्गल्सुत्र जो उनकी घाटी के बीचो-बीच, उसके काले मोतियो के दाने उनके गोरे बदन को और चार चाँद लगा रहे थे.

झीने कपड़े का गाउन जो सामने उनकी नाभि के उपर मात्र एक डोरी से बँधा था.

उभारों की वजह से गाउन के दोनो छोरो के बीच उनकी चोटियों की ढलान कमरे में फैली हल्की दूधिया बल्ब की लाइट से साफ चमक रही थी.

वो इस समय साक्षात रति का स्वरूप लग रही थी जो किसी भी महायोगी के अंदर सोए कामदेव को जगाने में सक्षम थी. मे उनके इस रूप में जैसे खो सा गया…

भाभी ने मेरी नाक पकड़ कर हिलाई.. और बोली – ओ मेरे अनाड़ी आशिक़ ! कहाँ खो गये..?

मे जैसे नींद से जागा… ! और मेरे मुँह से अपने आप निकल गया… ब्यूटिफुल..! मुझे तो पता ही नही था कि मेरी भाभी इतनी सुंदर हैं…

क्यों मस्का लगा रहे हो..! हँसते हुए कहा उन्होने तो उनके गोरे-गोरे गालों के डिंपल इतने मादक लगे कि मुझसे रहा नही गया, और मेने उनके डिम्पलो को चूम लिया…

सॉरी भाभी ! मेने आपकी बिना पर्मिशन लिए आपके डिंपल चूम लिए…लेकिन ये सच है, कि आप बहुत सुंदर लग रही हो…

भाभी – आज तुम्हें खुली छूट है… आज तुम मेरे साथ अबतक तुमने जो भी सोचा हो मेरे लिए वो सब कर सकते हो…

मे – सच भाभी ! कुच्छ भी.. !

वो मुस्कराते हुए बोली – हां कुच्छ भी…. ये सुनते ही मेने उन्हें अपनी बाहों में कस लिया… आइ लव यू भाभी….

जबाब में उन्होने भी मेरी पीठ पर अपने हाथों को कसते हुए कहा – आइ लव यू माइ स्वीट देवर… मेरे सोना… तुम नही जानते, इस पल का में वर्षों से इंतेज़ार कर रही थी…

हम दोनो के बीच की सारी दूरियाँ आज ख़तम होती जा रही थी, दोनो एकदुसरे से इस कदर चिपके हुए थे कि हवा भी पास नही हो सकती थी…

उनके उरोज मेरे चौड़े सीने में धँस रहे थे.. उनका सर मेरे कंधे पर था और वो अपनी आँखें बंद किए मेरे सीने में अपना चेहरा छुपाये इस अद्वितीय मिलन का आनंद ले रही थी.

ना जाने आज मेरी वासना कहीं कोने में पड़ी सिसक रही थी, उनके अर्धनग्न शरीर के आलिंगन के बाद भी मेरा पप्पू आराम से पड़ा सो रहा था.. शायद उसे आज किसी बात की चिंता नही थी..

वो तो आज पूरी तरह अस्वस्त था की उसका नंबर आना ही आना है…और आज उसके और उसकी सखी के बीच कोई दीवार नही आनेवाली…..!

जब बहुत देर तक मे ऐसे ही उनको अपने से चिपकाए खड़ा रहा तो, भाभी को लगा, कि ये तो इस काम में अनाड़ी है, मुझे ही पहल करनी होगी..

सो उन्होने अपना चेहरा मेरे सीने से हटाया और मेरे सर को अपने हाथों के बीच लेकर उन्होने मेरे माथे से चूमना शुरू किया, फिर गाल, चिन, उसके बाद वो अपने गालों को मेरी दाढ़ी जिस पर हल्के-2 रोएँ जैसे आते जा रहे थे सहलाने लगी..

मे बस बुत बना उनकी पीठ पर अपने हाथ रखे खड़ा था, अपने गालों को मेरी शुरू हो रही दाढ़ी के दोनो तरफ से रगड़ने के बाद वो मेरे होठों पर आ गयी और अपने होठों को मेरे होठों से बस दो इंच दूर रखकर मेरी आँखों में झाँकते हुए बोली –

सुनो मेरे अनाड़ी देवर, अब मे जैसे- 2 तुम्हारे साथ करूँ ठीक तुम भी वैसे ही करना.. और ये बोल कर उन्होने मेरे होठों का चुंबन लेकर अपने होठ अलग कर लिए.. और मेरी तरफ देखने लगी…
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06-01-2019, 01:58 PM,
#24
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
मे बस बुत बना उनकी पीठ पर अपने हाथ रखे खड़ा था, अपने गालों को मेरी शुरू हो रही दाढ़ी के दोनो तरफ से रगड़ने के बाद वो मेरे होठों पर आ गयी और अपने होठों को मेरे होठों से बस दो इंच दूर रखकर मेरी आँखों में झाँकते हुए बोली –

सुनो मेरे अनाड़ी देवर, अब मे जैसे- 2 तुम्हारे साथ करूँ ठीक तुम भी वैसे ही करना.. और ये बोल कर उन्होने मेरे होठों का चुंबन लेकर अपने होठ अलग कर लिए.. और मेरी तरफ देखने लगी…

उनकी कही बात याद आते ही, मेने भी उनके होठों का चुंबन कर दिया, फिर तो भाभी मेरे होठों पर टूट पड़ी, और मेरे होठों को चूसने लगी, मे भी उनकी तरह ही कोशिश करने लगा और मेरे हिस्से उनका निचला होठ आया, और मे उसे पूरी लगन के साथ चूसने लगा.

भाभी मेरे उपर के होठ को चूस रही थी.. फिर कुच्छ देर बाद वो अपनी जीभ मेरे मुँह में डालने लगी, तो मेने भी अपना मुँह खोल दिया और हम दोनो की जीभ आपस में टकरा गयी और अब वो दोनो एक-दूसरे के साथ खिलवाड़ करने लगी.

5-6 मिनिट यही चलता रहा, एकदुसरे की जीभ का स्पर्श मुझे अंदर तक गुदगुदा रहा था, और एक स्वीट सी मादकता छाती जा रही थी…

उसके बाद भाभी ने किस तोड़ दिया और मेरी टीशर्ट निकाल दी, और अपने होठों से मेरे गले को चूमती हुई मेरे सीने तक आ गयी…

मेरी छाती पर भी हल्के-2 रोँये आते जा रहे थे, उनकी जीभ जब मेरे नये आरहे बालों पर फिराने लगी तो मेरी आँखें अपने आप बंद होती चली गयी, और मेरी उत्तेजना में इज़ाफा होने लगा, मेरा शरीर एक अजीब सी उत्तेजना से काँपने लगा.

फिर जैसे ही उनकी जीभ ने मेरे मक्खी साइज़ निपल से टच किया.. मेरे मुँह से स्वतः ही एक सिसकी निकल गयी.. जिसे सुनकर भाभी ने मेरे चेहरे की तरफ देखा,

मेरे लाल हो चुके चेहरे और अधखुली आँखों को देखकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी…

इसी तरह उन्होने मेरी दोनो निपल को देर तक चाटा, फिर जब वो कुच्छ बाहर को निकल आए, तो अपने दाँतों से हल्के-2 उनको खरोंछने लगी… मेरा शरीर गुदगुदाहट और रोमांच से भर गया, और मे अपने पंजों पर खड़ा हो गया…

मेरा पप्पू लगाम तोड़ते बैल्ल की तरह खड़ा होकर फूँकारने लगा…

भाभी ने यहीं बस नही की और वो मेरे पेट को चूमती चाटती हुई नीचे की ओर बढ़ गई और मेरी नाभि को जीभ से सहला दिया…

मेरे पास शब्द नही थे कि मे इस आनंद को किस तरह बयान करूँ…अब मेरे सामने अपने पंजों पर बैठ गयी, और मेरा लोवर अंडरवेर के साथ खींच कर पैरों पर कर दिया…

भाभी ने जैसे ही मेरा अंडरवेर नीचे किया, पप्पू ने उच्छल कर उनकी ठोडी पर अटॅक कर दिया,

भाभी ने मुस्करा कर उसको प्यार से एक चपत लगाई और बोली – कमीने, अपनी सहेली की मालकिन पर ही अटॅक करता है… ठहर.. मे बताती हूँ तुझे…

उन्होने उसे अपनी मुट्ठी में क़ैद कर लिया और धीरे से मसल्ने लगी.. फिर हल्का सा उसका टोपा खोलकर बोली – चल तेरी पहली ग़लती माफ़, आ तुझे प्यार दूं.. और उन्होने उसे चूम लिया…

मज़े में मेरी आहह… निकल गयी, दूसरे हाथ से वो मेरे टट्टों को सहला रही थी, फिर उन्होने लंड को उपर करके उन्दोनो को अपने मुँह में भर लिया और पपोर्ने लगी…

कुच्छ देर मेरे आंडों को चूसने के बाद उन्होने मेरे अधखुले सुपाडे को अपने होठों में क़ैद कर लिया और धीरे-2 उसको अंदर और अंदर लेने लगी, लेकिन उस्दिन वाली ग़लती इस बार नही की और एक हाथ से उसकी जड़ में पकड़े रखा..

भाभी अपने मुँह को आगे-पीछे करके उसको चूसने लगी.. मेरा हाल बहाल होने लगा, और अपने-आप मेरी कमर भी आगे पीछे होने लगी, एक तरह से में उनके मुँह को चोद रहा था……



मेरे हाथ उनके सर पर थे, वो मेरी आँखों में देख रही थी और चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी…

मे अपने चरम पर पहुँचने ही वाला था कि उन्होने लंड चूसना बंद कर दिया… मेरे चेहरे पर असीम आश्चर्य के भाव आ गये..

तो मेने पुच्छ ही लिया…

रुक क्यों गयी भाभी… और करो ना… ! मेरा निकलने वाला था…!

वो शरारत के साथ इठलाती हुई बोली – क्यों करूँ ? मे तुम्हारी नौकर हूँ..?

मेरा तो कलपद हो गया था यार !, उनकी बातें सुन कर और झांट सुलग गयी.. लेकिन फिर भी मे उनसे और चूसने के लिए मिन्नतें करने लगा… तो वो बोली…

लल्लाजी ! आज इसकी पहली धार मुझे अपने अंदर लेनी है, ये कह कर वो पलट गयी, और अपनी पीठ और मदमस्त गांद मेरे से सटा दी…

मेने उनके कान के नीचे गले पर चूमकर कहा – आप बहुत शरारती हो भाभी..

वो – यही शरारातें एक-दूसरे को और नज़दीक लाती हैं… मेरे भोले देवर्जी..

मे – तो अब में क्या करूँ…?

मेरी बात सुनकर वो झट से अलग हो गयी और मेरी तरफ मूह करके मेरा हाथ पकड़ लिया और अपने गाउन की डोरी पर रख दिया…

मेने उनके गाउन की डोरी खींच दी, और मेरी आँखों के सामने वो नज़ारा आ गया, जिसकी मेने अभी तक कल्पना भी नही की थी..

सामने से वो बिल्कुल नंगी थी.. मेने झपट कर उनका गाउन निकाल कर दूर फेंक दिया और दो कदम पीछे होकर उनके शरीर की सुंदरता को देखने लगा…

दूधिया बल्ब की रोशनी में नाहया उनका गोरा बदन किसी संगेमरमर की मूरत की तरह मेरे सामने था, मानो अजंता की कोई मूरत सजीव हो उठी हो…

सुराइदार गर्दन के नीचे उनके गोल-सुडौल गोरे-2 स्तन मानो कलई के दो मुरादाबादी लोटे चिपके हों उनकी छाती पर, जिनके सिरे पर दो कागज़ी बादाम लगा दिए हों जैसे… ऐसे दो उठे हुए निपल , हल्के भूरे रंग के..

नीचे एकदम सपाट पेट जिसमें एक गहरी सी नाभि.. हल्का सा उठा हुआ उनका पेडू, जो शायद प्रेग्नेन्सी के बाद हो गया था…

कूर्वी कमर के नीचे दो केले जैसी चिकनी गोल-गोल, मांसल जांघें, जिनके बीच दुनिया की सबसे अनमोल चीज़, परमात्मा की सफल कारीगरी,

जिसपर एक बाल नही, एकदम चिकनी चूत जो कामरस से भीगकार और ज़्यादा चमक रही थी…

जो योनि पहली दफ़ा अपने पति के सामने किसी जंगली झाड़ियों से घिरी हुई थी, वही आज आपने नये, अनाड़ी प्रेमी, उसके देवर के लिए एकदम चम चमा रही थी…जैसे कुच्छ घंटों पहले ही साफ की गयी हो…

भाभी मेरी नज़रों का स्पर्श अपने शरीर पर फील करके उनकी नज़रें शर्म से झुक गयी और वो अपने निचले होठ को दाँतों से काटती हुई फर्श की ओर देखने लगी...
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06-01-2019, 01:58 PM,
#25
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
भाभी मेरी नज़रों का स्पर्श अपने शरीर पर फील करके उनकी नज़रें शर्म से झुक गयी और वो अपने निचले होठ को दाँतों से काटती हुई फर्श की ओर देखने लगी...

मे हौले से उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया, और उनकी कमर में अपने बाहें लपेट कर अपने से सटा लिया, मेरा लंड उनकी कमर पर ठोकर मारने लगा.

उनके कंधे को चूमते हुए माने कहा – मुझे आज अपने बड़े भैया से जलन हो रही है.. मेरी बात सुन उन्होने मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देखा, इससे पहले की वो कुच्छ कहती.. मेने आगे कहा.-. काश आप मेरी होती.. !

वो – तो अभी में किसकी बाहों में हूँ…?

मे – मेरा मतलब था, कि आप हमेशा के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरी होती.. सच कहता हूँ भाभी…
आपके इस रूप लावण्य से मे चाह कर भी नही निकल सकता...मानो कोई अजंता की मूरत सजीव होकर मेरी बाहों में है..

अपनी तारीफ सुनकर भाभी मन ही मन गद-गद हो उठी और मेरे गालों से अपने गालों को सहलाते हुए बोली –
मे हमेशा ही तुम्हारी रहूंगी लल्लाजी… अपनी मर्यादाओं को निभाते हुए भी मेरा प्रेम तुम्हारे लिए हमेशा बना रहेगा…

अब देखना ये होगा कि तुम मुझे कब तक इसी तरह प्रेम करते रहोगो..?

मे झट से बोल पड़ा – मरते दम तक…! मे आपको ता-उम्र यूँही चाहता रहूँगा..

मेरी बात सुन वो पलट गयी, और किसी दीवानी की तरह मेरे पूरे चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी…

मे भी उनका भरपूर साथ देने लगा, उन्होने मेरे हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिए जिन्हें मेने हौले से सहला दिया..
अहह…. देवर्जी….. इन्हें मूह में लेकर चूसो मेरे रजाअजीीीइ…. इनका दूध आज तुम्हारे लिए है…

भाभी की बात सुन मेने अपना मूह उनके एक निपल से अड़ा दिया और चुकुर-2 करके उनका दूध चूसने लगा… बड़ा ही टेस्टी दूध था भाभी का, मीठा… वो मेरे सर को अपने हाथ से सहला रही थी अपनी आँखें बंद किए हुए…

एक हाथ से मे उनके दूसरे स्तन को सहला रहा था, कभी-2 उनके कड़क हो चुके निपल को दबा देता.. जिसके कारण उनके मूह से सिसकी… ईीीइसस्स्स्शह…. निकल जाती..

कुच्छ देर बाद मे दूसरे स्तन को चूसने लगा, और पहले वाले को हाथ से सहलाता रहा.... मेने चूस-चूस कर, मसल-मसल कर उनके दोनो स्तनों को लाल कर दिया..

भाभी के हाथ का दबाब अपने सर पर पाकर मे नीचे की ओर बढ़ा और उनके पेट और नाभि को चाटता हुआ, उनके रस कलश पर पहुँचा…

मे अपने घुटनों पर बैठकर उनके यौनी प्रदेश को निहारने लगा.. और अपने दोनो हाथों से उनकी मोटी-मोटी जांघों को सहलाते हुए अंदर की ओर लाया,

मेरे हाथों का स्पर्श अपनी जांघों के अंदुरूनी भाग पर पाकर उनकी जांघे अपने आप चौड़ी हो गयी..

अब उनका यौनी प्रदेश और अच्छे से दिख रहा था… उनकी मुनिया से बूँद-2 करके रस टपक रहा था, जिसे मेने अपनी उंगली पर रख कर चखा,

एक खट्टा-मीठा सा स्वाद मेरी जीभ को अच्छा लगा, और मेने एक बार अपने हाथ से उसको सहला कर अपने होठ उनकी यौनी पर रख दिए…

मेरे होठों का स्पर्श अपनी यौनी पर पाकर भाभी के मूह से एक मीठी सी सिसकी निकल गयी…..ईीीइसस्स्स्शह……उफफफफफ्फ़………आअहह….. द.द.ए.व.ए.रजीीइईई….चातूओ…ईससीईई…..प्लेआस्ीई….

मेने पहले भी कभी उनकी बात नही टाली थी… तो अब तो रस का खजाना मेरे सामने था… सो मेने उनकी यौनी की दोनो पुट्टियों समेत पूरी यौनी को अपने मूह में भर लिया और चूसने लगा…

भाभी के दोनो हाथ मेरे बालों को सहला रहे थे, उनके मूह से लगातार कुच्छ ना कुच्छ निकल रहा था.. कुच्छ देर पूरी यौनी को चुसवाने के बाद भाभी बोली-

ल्लाल्लाजीीइई…..इसको खोल के देखो… और अपनी जीभ अंदर डालके चाटो…प्लेआस्ीई…
आअहह….हान्न्न…ऐसी..हिी…हइईए…माआ…उफफफ्फ़…. और जोर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर….स.ईईईईई…..हाइईईईईईईईईईईईई…….उसस्सुउुउऊहह….खा जाऊ…हरंजड़ीइइ..कूऊ…

हाए… देखो…उपर एक नाक जैसी उठी हुई होगी उसको चूसूऊ…. हान्न्न.. यहीयिइ….एसस्स….बहुत अच्छे….अब अपनी उंगली डाल दो अंदर… हइईए…पूरी घुसाऊओ….डरो मत….आहह…. डालडो….हाआंन्न…..अब ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करूऊ…..तेज़ी सीई…. हइई…राम्म्म्मम….ऑश….उूउउ….मीई…तूओ…गाइिईई…ल्ल्ल्लाअल्ल्लाअज्जजििइईई……..

भाभी ने पूरी ताक़त से मेरे सर को अपनी चूत पर दबा दिया, और फलफालकर झड़ने लगी… ढेर सारा… गाढ़ा-गाढ़ा.. मट्ठा सा.. उनकी चूत से निकलने लगा…

मेने अपना मूह हटाना चाहा… तो वो बोली… नही पी जाओ इसे… तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा..

मे उनका सारा चूतरस पी गया… भाभी की टाँगें काँप रही थी, अब उनसे खड़े रहना मुश्किल होता जा रहा था…

लल्ला जी मुझे पलंग पर ले चलो…प्लेआसीए…

मेने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया, उन्होने अपनी बाहें मेरे गले में लपेट दी.. और मेरे मूह पर लगे अपने कामरस को चाटते हुए बोली – कैसा था स्वाद मेरे रस का..?

मे – अह्ह्ह्ह… भाभी.. पुछो मत… ऐसा टेस्ट आज तक किसी चीज़ का नही मिला मुझे.. वो मेरे से और चिपक गयी और मेरे गाल पर ज़ोर से काट लिया..

मेरी चीख निकल गयी और उनके दाँतों के निशान मेरे गाल पर छप गये, जिसे वो अपनी जीभ से चाटने लगी…

मेने भाभी को पलग पर लिटा दिया और खुद भी उनकी बगल में लेटकर उनके बदन पर अपना हाथ फिराने लगा.

भाभी – तुम सीधे लेट जाओ लल्ला… अब मेरी बारी है, तुम्हें वो सुख देने की जिसका तुमने इतने दिन इंतजार किया है, जिसे देने का मेने तुमसे वादा किया था… देखना आज तुम्हारी वर्जिनिटी कितने प्यार से लेती हूँ..

जब मे सीधा लेट गया, तो भाभी अपनी गोल-मटोल 36 इंची गांद लेकर, पैरों को मेरे दोनो तरफ करके, मेरे लंड के पास जांघों पर बैठ गयी..

मेरा लंड अपनी सहेली को अपने सामने इतने नज़दीक पाकर खुशी से ठुमके लगाने लगा..

उसके झटके देखकर भाभी को हँसी आ गयी और बोली – देखा देवर जी.. तुम्हारा ये सिपाही अपनी सहेली को देखकर कैसे ठुमके लगा रहा है…

मे – क्यों ना लगाए, बेचारे को अब तक तो वो घूँघट में ही मिली थी, आज पहली बार मुखड़ा देखने को जो मिला है, खुश तो होगा ही.. हहहे… और हम दोनो ही हँसने लगे…!

फिर भाभी ने अपने हाथ मेरी छाती पर टिका दिए, और उसे सहलाते हुए वो मेरे उपर झुकती चली गयी… मेरे होठों को अपने मूह में लेकर चूसने लगी…

उनके निपल मेरे सीने से रब कर रहे थे, जिसके कारण मेरे पूरे शरीर में सुर-सुराहट सी होने लगी…..

भाभी आगे-पीछे होकर अपनी चुचियों को मेरे सीने से घिस रही थी, जिस के कारण उनकी रसभरी भी अपने प्रियतम को गले मिलने लगी,

और अपने गीले होठों की मसाज देते हुए मानो कह रही ही.. आजा मेरे प्यारे समा जा मुझमें…

हम दोनो फिर एक बार भट्टी की तरह तपने लगे.. अब मुझसे रहा नही जा रहा था, सो बोल पड़ा – आहह… भाभी… कुच्छ करो अब… जल्दी से…

उन्होने भी अब देर करना उचित नही समझा, मेरे उपर झुके हुए ही उन्होने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लिया और अपनी रस से भरी गागर के छोटे से मूह पर रख कर अपनी कमर को हल्के से दबा दिया…

गीली चूत में मेरा चौथाई लंड समा गया..

लेकिन चूत की दीवारों की रगड़ से मेरे सुपाडे से चिपकी हुई स्किन टूटने लगी..

जिसकी वजह से मेरे अंदर एक तेज दर्द की लहर दौड़ गयी.. और मेरे मूह से चीख निकल गयी…

आईईईई……माआ….! भाभी…रूको… मेरा लंड फट गया लगता है… उठो ज़रा देखने दो… आहह…

लेकिन भाभी को पता था कि ऐसा कुच्छ देर के लिए होगा.. सो वो अपनी चूत मेरे लंड पर दबाए हुए बैठी रही और अपनी एक चुचि पकड़ कर मेरे मूह में ठुंसदी…
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06-01-2019, 01:59 PM,
#26
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
अरे लल्लाजी.. कुच्छ नही हुआ… लो इसको चूसो.. हान्ं.. शब्बाश… ऐसे ही..

मुझे अपनी चुचि से लगा कर उन्होने अपनी गांद को एक बार और दबा दिया…

अब आधे से ज़्यादा लंड उनकी चूत में सरक चुका था… लेकिन फिर से दर्द हुआ मुझे और उनकी चुचि को मूह से बाहर निकल कर कराहने लगा..

भाभी मुझे दुलारती हुई दूसरी चुचि मूह में देकर चुसवाने लगी..

कुच्छ देर बाद मुझे राहत सी हुई.. तो भाभी पूरी तरह मेरे उपर बैठ गयी और मेरा पूरा साडे सात इंच लंबा और ढाई इंच मोटा लंड अपने अंदर घोंट लिया..

मेरा दर्द अब पहले से कम था, शायद उनकी रामप्यारी ने अंदर ही अंदर अपने रस रूपी क्रीम से उसे चिकना दिया था..

अब भाभी ने मेरी छाती पर अपनी हथेलिया जमाई और अपने घुटने मोड़ कर उन्होने उठना बैठना शुरू कर दिया…

शुरू-2 में वो धीरे-2 आराम से उपर-नीचे होती रही.. फिर अपनी गति को बढ़ा दिया..

मुझे अब दर्द की जगह मज़ा आने लगा था.. और मेने भाभी के दोनो चुचे अपनी मुत्ठियों में कस लिए और ज़ोर-ज़ोर से मीँजने लगा…

भाभी कमर चलते-2 हाँफने लगी थी और उनकी स्पीड कम पड़ने लगी,

लेकिन मेरा मज़े से बुरा हाल हो रहा था, एक पल की भी देरी एक सदी के समान लग रही थी….,

सो उनकी गति कम होते देख, मेरी गांद ऑटोमॅटिकली मूव करने लगी और मे नीचे से अपनी गांद उचका-2 कर धक्के लगाने लगा.

भाभी ने अपने धक्के बंद कर दिए, अब वो अपने घुटनो पर हो गयी,



मेने नीचे से धक्कों की कमान अपने हाथ में ले ली और इतनी तेज़ी से धक्के मारने लगा, कि भाभी के मूह से हइई…..हइई…आआहह…मार्ररिइ…ऊओह…उउफफफ्फ़… जैसी आवाज़ें कमरे में गूंजने लगी….

वो मेरे धक्कों की स्पीड ज़्यादा देर तक नही झेल पाई और झड़ने लगी… पूरी तरह झड़ने के बाद वो मेरे उपर पसर गयी…

लेकिन मेरा अभी होना वाकी था, सो मे अपनी ही धुन में लगा रहा..

भाभी थोड़ी देर में फिरसे गरम हो गयी.. और फिरसे उनके मूह से ऐसे ही मादक किलकरियाँ निकलने लगी…

आखिकार मेने जिंदगी की पहली चुदाई का आनंद पा ही लिया… मेरे अण्डों से बहता हुआ लावा लंड के रास्ते आने लगा…

और मे बुरी तरह हुनकाआररर… भरते हुए भाभी की चूत में झड़ने लगा…

मेरी पिचकारी इतनी तेज़ी से निकली कि उसकी धार की तेज़ी उन्होने अपनी बच्चेदानी के अंदर तक महसूस की और उसके एहसास से वो फिर बुरी तरह से झड गयी…

मेरी कमर हवा में उठ गयी, भाभी के वजन के बावजूद मेने उन्हें दो मिनट तक उठाए रखा….

फिर भाभी और मे, हम दोनो ही एक दूसरे से चिपक गये किसी जोंक की तरह… मानो कोई हमें अलग ना कर्दे..

स्खलन की खुमारी इतनी तगड़ी थी कि आधे-पोने घंटे तक वो मेरे उपर पड़ी रही, और मेने भी उन्हें उठने के लिए नही कहा…

एक तरह से झपकी ही लग गयी थी हम दोनो को…

फिर एक साथ भाभी हड़बड़ा कर उठी,… हाए डाइयाअ.. मेरी तो आँख ही लग गयी थी..तुमने मुझे उठाया क्यों नही…

अभीतक मेरा लंड उनकी चूत में ही था… जो फिरसे गर्मी पाकर अंदर ही अंदर अकड़ने लगा था,

जैसे ही भाभी एक साथ मेरे उपर से उठी, पच की आवाज़ के साथ लंड चूत से बाहर हो गया.

ढेर सारा मसाला जो मेरे लंड और उनकी चूत से दो बार निकला था मेरे उपर गिरा और मेरा सारा पेट, कमर जंघें सब के सब सन गये…

भाभी ने मुझे बाथरूम जाने को कहा – लल्लाजी जाके ये सब साफ कर लो.. देखो तो क्या हॉल हो रहा है..?

मे – आपको अपनी सफाई नही करनी..?

वो – हां ! लेकिन पहले तुम अपना शरीर साफ कर लो फिर में चली जाउन्गी..

मे – फिर साथ में ही चलते हैं ना..! इसमें अब मेरा तेरा क्या है..!

तो वो हंस कर बोली – चलो ठीक है, और उठकर बाथरूम की तरफ चल दी, पीछे -2 मे भी उनकी मटकती गांद को सहलाते हुए चल दिया…

बाथरूम में पहुँचकर भाभी ने पहले मेरा शरीर पानी से धोया, और उसके बाद अपनी यौनी साफ करने लगी…

तौलिए से पोन्छ्ते हुए भाभी बोली – देवेर्जी कैसा लगा मेरे साथ सेक्स करके..

मेने सीधे से कोई जबाब नही दिया, और उन्हें बाहों में भरके उनके होठों पर एक किस करके बोला –

सच कहूँ… तो आपने मुझे बिन-मोल खरीद लिया भाभी.. मरते दम तक आज के दिन को, चाह कर भी भूल नही पाउन्गा…!

वो – बस मेरी साधना सफल हो गयी ये सुनकर… ! मेरा सपना था कि मे तुम्हें तुम्हारे जीवन की हर वो खुशी दे पाऊ जो तुम्हे चाहिए..!

मेने खुशी के मारे भाभी को किसी बच्ची की तरह गोद में उठा लिया… वो भी अपनी दोनो टाँगों को मेरी कमर के इर्द-गिर्द लपेट कर मेरे गले से लिपट गयी…..

मेरा लंड उनकी गांद की खुश्बू लेते ही तन टॅनाने लगा.. और उनके गांद के नीचे ठोकर मारने लगा….

अपने घोड़े को कंट्रोल में करो देवर्जी… बहुत उच्छल-कूद कर रहा है नीचे.. भाभी हँसते हुए बोली..

मे – वो बेचारा भी क्या करे, जब इतना आरामदायक अस्तबल दिख रहा हो तो वो उसमें जाने की ज़िद करेगा ही ना…

ऐसी ही हसी मज़ाक करते हुए.. में उन्हें गोद में उठाए बाथरूम से बाहर लाया और आकर पलग पर बैठ गया, वो अभी भी मेरी गोद में ही थी…..


भाभी – अब उतारो भी मुझे.. या कुच्छ और इरादा है..?

मे – मन ही नही कर रहा है आपको छोड़ने का....

वो – इतना प्यार करते हो अपनी भाभी से…!

मे – जान हाज़िर है.. आपके एक इशारे पर… अब आप सिर्फ़ मेरी भाभी नही रहीं, जान बन गयी हो मेरी, मेने फिरसे उन्हें अपने से चिपका लिया....

भाभी भी मेरे गले में अपनी मांसल गोरी-गोरी बाहों का हार डाले मेरे होठों को चूसने लगी.. .

मेने उन्हें अपने हाथों से उनकी पीठ पर सहारा देकर लिटा लिया और उनका दूध पीने लगा,

भाभी का सर पीछे को लटक गया, और एक बार फिर उनका मांसल गदराया बदन मस्ती से भरने लगा…

उन्होने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर मेरे लंड को उपर की तरफ किया और वो उसके उपर अपनी चूत से मालिश करने लगी….

उनके रस सागर से नमी चख कर वो मस्ती में झूम उठा, और फन-फ़ना कर फिरसे उनकी सुरंग में जाने की ज़िद करने लगा…

हम दोनो फिर एक बार वासना की आग में जलने लगे,

उसे शांत करने के प्रयास में भाभी ने एक कदम बढ़ाते हुए मेरे लंड को पकड़ कर अपनी गुफा के मूह पर सटा लिया… और धीरे से अपनी कमर में एक हल्की सी जुम्बिश दी…

सर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर… से वो रसभरी सुरंग में आधे रास्ते तक पहुँच गया..

एक साथ हम दोनो के मूह से मस्ती भारी आहह…. फुट पड़ी…

उफफफफफफफफफफफ्फ़…. इतना मज़ा…. ! भाभी आधे लंड को लेकर अपनी कमर को गोल-गोल घुमाने लगी मानो वो उसे मथकर उसमें से रस निकालना चाहती हो…..

मेरे सब्र का बाँध टूट गया , और मेने उन्हें पलग पर लिटा दिया, टाँगे हवा में उठाकर एक भरपूर ताक़तवर धक्का जड़ दिया… अरे लल्लाजी.. कुच्छ नही हुआ… लो इसको चूसो.. हान्ं.. शब्बाश… ऐसे ही..

मुझे अपनी चुचि से लगा कर उन्होने अपनी गांद को एक बार और दबा दिया…

अब आधे से ज़्यादा लंड उनकी चूत में सरक चुका था… लेकिन फिर से दर्द हुआ मुझे और उनकी चुचि को मूह से बाहर निकल कर कराहने लगा..

भाभी मुझे दुलारती हुई दूसरी चुचि मूह में देकर चुसवाने लगी..

कुच्छ देर बाद मुझे राहत सी हुई.. तो भाभी पूरी तरह मेरे उपर बैठ गयी और मेरा पूरा साडे सात इंच लंबा और ढाई इंच मोटा लंड अपने अंदर घोंट लिया..

मेरा दर्द अब पहले से कम था, शायद उनकी रामप्यारी ने अंदर ही अंदर अपने रस रूपी क्रीम से उसे चिकना दिया था..

अब भाभी ने मेरी छाती पर अपनी हथेलिया जमाई और अपने घुटने मोड़ कर उन्होने उठना बैठना शुरू कर दिया…

शुरू-2 में वो धीरे-2 आराम से उपर-नीचे होती रही.. फिर अपनी गति को बढ़ा दिया..

मुझे अब दर्द की जगह मज़ा आने लगा था.. और मेने भाभी के दोनो चुचे अपनी मुत्ठियों में कस लिए और ज़ोर-ज़ोर से मीँजने लगा…

भाभी कमर चलते-2 हाँफने लगी थी और उनकी स्पीड कम पड़ने लगी,

लेकिन मेरा मज़े से बुरा हाल हो रहा था, एक पल की भी देरी एक सदी के समान लग रही थी….,

सो उनकी गति कम होते देख, मेरी गांद ऑटोमॅटिकली मूव करने लगी और मे नीचे से अपनी गांद उचका-2 कर धक्के लगाने लगा.

भाभी ने अपने धक्के बंद कर दिए, अब वो अपने घुटनो पर हो गयी,



मेने नीचे से धक्कों की कमान अपने हाथ में ले ली और इतनी तेज़ी से धक्के मारने लगा, कि भाभी के मूह से हइई…..हइई…आआहह…मार्ररिइ…ऊओह…उउफफफ्फ़… जैसी आवाज़ें कमरे में गूंजने लगी….

वो मेरे धक्कों की स्पीड ज़्यादा देर तक नही झेल पाई और झड़ने लगी… पूरी तरह झड़ने के बाद वो मेरे उपर पसर गयी…

लेकिन मेरा अभी होना वाकी था, सो मे अपनी ही धुन में लगा रहा..

भाभी थोड़ी देर में फिरसे गरम हो गयी.. और फिरसे उनके मूह से ऐसे ही मादक किलकरियाँ निकलने लगी…

आखिकार मेने जिंदगी की पहली चुदाई का आनंद पा ही लिया… मेरे अण्डों से बहता हुआ लावा लंड के रास्ते आने लगा…

और मे बुरी तरह हुनकाआररर… भरते हुए भाभी की चूत में झड़ने लगा…

मेरी पिचकारी इतनी तेज़ी से निकली कि उसकी धार की तेज़ी उन्होने अपनी बच्चेदानी के अंदर तक महसूस की और उसके एहसास से वो फिर बुरी तरह से झड गयी…

मेरी कमर हवा में उठ गयी, भाभी के वजन के बावजूद मेने उन्हें दो मिनट तक उठाए रखा….

फिर भाभी और मे, हम दोनो ही एक दूसरे से चिपक गये किसी जोंक की तरह… मानो कोई हमें अलग ना कर्दे..

स्खलन की खुमारी इतनी तगड़ी थी कि आधे-पोने घंटे तक वो मेरे उपर पड़ी रही, और मेने भी उन्हें उठने के लिए नही कहा…

एक तरह से झपकी ही लग गयी थी हम दोनो को…

फिर एक साथ भाभी हड़बड़ा कर उठी,… हाए डाइयाअ.. मेरी तो आँख ही लग गयी थी..तुमने मुझे उठाया क्यों नही…

अभीतक मेरा लंड उनकी चूत में ही था… जो फिरसे गर्मी पाकर अंदर ही अंदर अकड़ने लगा था,

जैसे ही भाभी एक साथ मेरे उपर से उठी, पच की आवाज़ के साथ लंड चूत से बाहर हो गया.

ढेर सारा मसाला जो मेरे लंड और उनकी चूत से दो बार निकला था मेरे उपर गिरा और मेरा सारा पेट, कमर जंघें सब के सब सन गये…

भाभी ने मुझे बाथरूम जाने को कहा – लल्लाजी जाके ये सब साफ कर लो.. देखो तो क्या हॉल हो रहा है..?

मे – आपको अपनी सफाई नही करनी..?

वो – हां ! लेकिन पहले तुम अपना शरीर साफ कर लो फिर में चली जाउन्गी..

मे – फिर साथ में ही चलते हैं ना..! इसमें अब मेरा तेरा क्या है..!

तो वो हंस कर बोली – चलो ठीक है, और उठकर बाथरूम की तरफ चल दी, पीछे -2 मे भी उनकी मटकती गांद को सहलाते हुए चल दिया…

बाथरूम में पहुँचकर भाभी ने पहले मेरा शरीर पानी से धोया, और उसके बाद अपनी यौनी साफ करने लगी…

तौलिए से पोन्छ्ते हुए भाभी बोली – देवेर्जी कैसा लगा मेरे साथ सेक्स करके..

मेने सीधे से कोई जबाब नही दिया, और उन्हें बाहों में भरके उनके होठों पर एक किस करके बोला –

सच कहूँ… तो आपने मुझे बिन-मोल खरीद लिया भाभी.. मरते दम तक आज के दिन को, चाह कर भी भूल नही पाउन्गा…!

वो – बस मेरी साधना सफल हो गयी ये सुनकर… ! मेरा सपना था कि मे तुम्हें तुम्हारे जीवन की हर वो खुशी दे पाऊ जो तुम्हे चाहिए..!

मेने खुशी के मारे भाभी को किसी बच्ची की तरह गोद में उठा लिया… वो भी अपनी दोनो टाँगों को मेरी कमर के इर्द-गिर्द लपेट कर मेरे गले से लिपट गयी…..

मेरा लंड उनकी गांद की खुश्बू लेते ही तन टॅनाने लगा.. और उनके गांद के नीचे ठोकर मारने लगा….

अपने घोड़े को कंट्रोल में करो देवर्जी… बहुत उच्छल-कूद कर रहा है नीचे.. भाभी हँसते हुए बोली..

मे – वो बेचारा भी क्या करे, जब इतना आरामदायक अस्तबल दिख रहा हो तो वो उसमें जाने की ज़िद करेगा ही ना…

ऐसी ही हसी मज़ाक करते हुए.. में उन्हें गोद में उठाए बाथरूम से बाहर लाया और आकर पलग पर बैठ गया, वो अभी भी मेरी गोद में ही थी…..


भाभी – अब उतारो भी मुझे.. या कुच्छ और इरादा है..?

मे – मन ही नही कर रहा है आपको छोड़ने का....

वो – इतना प्यार करते हो अपनी भाभी से…!

मे – जान हाज़िर है.. आपके एक इशारे पर… अब आप सिर्फ़ मेरी भाभी नही रहीं, जान बन गयी हो मेरी, मेने फिरसे उन्हें अपने से चिपका लिया....

भाभी भी मेरे गले में अपनी मांसल गोरी-गोरी बाहों का हार डाले मेरे होठों को चूसने लगी.. .

मेने उन्हें अपने हाथों से उनकी पीठ पर सहारा देकर लिटा लिया और उनका दूध पीने लगा,

भाभी का सर पीछे को लटक गया, और एक बार फिर उनका मांसल गदराया बदन मस्ती से भरने लगा…

उन्होने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर मेरे लंड को उपर की तरफ किया और वो उसके उपर अपनी चूत से मालिश करने लगी….

उनके रस सागर से नमी चख कर वो मस्ती में झूम उठा, और फन-फ़ना कर फिरसे उनकी सुरंग में जाने की ज़िद करने लगा…

हम दोनो फिर एक बार वासना की आग में जलने लगे,

उसे शांत करने के प्रयास में भाभी ने एक कदम बढ़ाते हुए मेरे लंड को पकड़ कर अपनी गुफा के मूह पर सटा लिया… और धीरे से अपनी कमर में एक हल्की सी जुम्बिश दी…

सर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर… से वो रसभरी सुरंग में आधे रास्ते तक पहुँच गया..

एक साथ हम दोनो के मूह से मस्ती भारी आहह…. फुट पड़ी…

उफफफफफफफफफफफ्फ़…. इतना मज़ा…. ! भाभी आधे लंड को लेकर अपनी कमर को गोल-गोल घुमाने लगी मानो वो उसे मथकर उसमें से रस निकालना चाहती हो…..

मेरे सब्र का बाँध टूट गया , और मेने उन्हें पलग पर लिटा दिया, टाँगे हवा में उठाकर एक भरपूर ताक़तवर धक्का जड़ दिया…
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06-01-2019, 01:59 PM,
#27
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
एक साथ हम दोनो के मूह से मस्ती भारी आहह…. फुट पड़ी…

उफफफफफफफफफफफ्फ़…. इतना मज़ा…. ! भाभी आधे लंड को लेकर अपनी कमर को गोल-गोल घुमाने लगी मानो वो उसे मथकर उसमें से रस निकालना चाहती हो…..

मेरे सब्र का बाँध टूट गया , और मेने उन्हें पलग पर लिटा दिया, टाँगे हवा में उठाकर एक भरपूर ताक़तवर धक्का जड़ दिया…

एक बार फिर एक दर्द की लहर सी मेरे लंड से उठी, जो मज़े के आलम में कन्हि खो गयी, उधर भाभी भी अपने होठों को कसकर दवाए अपने दर्द को पी गयी..

हम दोनो ही मस्ती के ऊडन खटोले में बैठ कर दूर आसमानों में उड़ चले…

कमरे में हमारी जांघों की थप सुनाई दे रही थी… मेरे ताक़तवर धक्कों के बावजूद भी भाभी कुच्छ ना कुच्छ बोलकर मुझे और उत्साहित कर रही थी..

जब एक ही मुद्रा में हमें काफ़ी देर हो गयी.. तो भाभी ने हाथ के इशारे से रुकने को कहा…

फिर मुझे अपने उपर से उठा कर वो पलट गयी और अपने घुटने जोड़ कर पलंग पर घोड़ी की तरह निहुर गयी…

अब उनकी मस्त 38” की गद्देदार कसी हुई गांद मेरे सामने थी, जिसे देखकर मे अपना आपा खो बैठा और उनके एक चूतड़ को काट लिया…

आअहह…..काटो मत…जानुउऊ…, वो दर्द से तडपी..तो मेने उस जगह को चूमा और फिर उनके दोनो चुतड़ों को बारी-बारी से चाटने लगा…

अपना मूह उनकी मोटी गांद में डाल दिया और उनकी चूत और गांद के छेद को चाटने लगा…....

आह्ह्ह्ह… अब अपना मूसल डालो मेरे रजाआा… क्यों तड़पाते हूओ…

भाभी की हालत मुझसे देखी नही गयी और मेने पीछे से अपना लंड उनकी चूत में पेल दिया…

ईईीीइसस्स्स्स्शह……हइईईईई….रामम्म्मममम….अब छोड़ूऊ…लल्लाआ….. आराम सीईए….उफफफफफफफफफफफ्फ़….. कितना मज़ाअ देतीई हूऊ…तुम… मुझे अपना गुलामम्म्म.. बनाआ.. लियाअ…

जी करता है, इसे हर समय अपनी मुनिया में ही डाले रहूं….डालोगे नाआ….!

ये अब आपका ही है….भाभिईीईई….जब चाहो…पकड़ के डाल लएनाअ….हुउन्न्ह…

मेरी जांघे तपाक से उनके भारी चुतड़ों पर पड़ने लगी… कभी-2 मे उनकी गांद मसल देता, तो कभी उनके चुतड़ों पर थप्पड़ जड़ देता…

भाभी और ज़ोर्से चोदने को बोलती…मेरे शरीर से पसीना निकलने लगा… लेकिन चुदाई…चरम…पर पहुँचती जा रही थी…

आधे घंटे की धुँआधार चुदाई के बाद हम दोनो एक साथ ही झड़ने लगे…भाभी की यौनी से लगातार कामरस बरस रहा था…

झड़ने के बाद वो पलंग पर औंधी पसर गयी और में उनकी पीठ पर लड़ गया..

10-15 मिनिट हम ऐसे ही बेसूध पड़े रहे और अपनी उखड़ी हुई साँसों को इकट्ठा करते रहे…

हमारा मस्ती भरा ये खेल सुबह के 4 बजे तक यूँही चलता रहा, फिर थक कर चूर हम एक-दूसरे की बाहों में लिपट कर सो गये…

सुबह 7 बजे रामा दीदी ने दवाजा खटखटाया… तब जाकर भाभी की नींद खुली..उन्होने अंदर से ही आवाज़ देकर कहा…

अभी थोड़ी देर में आती हूँ, रूचि को दूध पिलाकर….!

फिर भाभी ने अपने कपड़े पहने, मुझे झकज़ोर कर जगाया.. जब में जाग गया तो वो बोली –

लल्ला.. तुम कपड़े पहनो, में बाहर निकल कर देखती हूँ, रास्ता साफ देख कर बाहर निकल जाना …

रामा पुच्छे तो कह देना कि जल्दी जाग कर वॉक पर गया था.. ओके..

इस तरह से भाभी ने मेरे जन्म दिन का ये अनौखा तोहफा देकर मुझे जिंदगी भर के लिए अपना बना लिया…

वैसे तो वो मेरा हर तरह का ख्याल रखती ही थी, बस यही काम वाकी था, सो वो भी पूरा हो गया था..

अब वो मेरे लिए मेरी मा से भी बढ़कर मेरी ज़रूरत बन चुकी थी..

मेने अपने नये खुले डिग्री कॉलेज में ही अड्मिशन ले लिया था, जिससे अब मे हमेशा भाभी के पास ही रह सकता था…

एक दिन छुट्टी का दिन दोनो भाई आए हुए थे मेने भाभी को अपनी एक डिमॅंड पहले ही बता दी थी…

सो जब रात को सभी एक साथ बैठ कर खाना खा रहे थे कि भाभी ने भूमिका बनाते हुए बात शुरू की..,

भाभी, भैया से बोली - सुनो जी..! मे क्या कह रही थी.. कि यहाँ घर पर एक बाइक और होनी चाहिए…,

स्कूटी तो रामा के लायक ही है.. छोटू लल्ला अब बड़े हो गये है.. कॉलेज भी जाते हैं.. तो मे चाहती हूँ उनके लिए एक मोटर बाइक ले देते तो…

भाभी की बात से सभी खाना रोक कर उनकी ओर देखने लगे…! सबको यूँ अपनी ओर देखते पा, भाभी कुच्छ हड़बड़ा गयी…

फिर कुच्छ संभाल कर बोली – क्या मेने कुच्छ ग़लत कह दिया..?

बड़े भैया – तुम्हें लगता है कि ये बाइक चला लेगा.. स्कूटी तो ढंग से आती नही अभी तक…..

तभी तपाक से रामा दीदी बोल पड़ी – क्या फ़र्राटे से स्कूटी चलाता है छोटू… और आपको पता है भैया, एक दिन तो अपने दोस्त की बुलेट लेके घर आया था..

दोनो भैया जो शायद अभी तक मुझे बच्चा ही समझ रहे थे… चोंक पड़े…और दोनो के मूह से एक साथ निकला… क्या बुलेट..चला लेता है ये..?

मे – हां भैया.. उसमें क्या है.. वो तो और आसान है चलाने में..

बड़े भैया – तो मोहिनी तुमने बाबूजी से पुछ लिया है..?

भाभी – बाबूजी मेरी बात कभी नही टालते.. उनकी गॅरेंटी मे लेती हूँ.. पर देखो ना…,

जिसका एक भाई असिस्टेंट प्रोफेसर, और दूसरा डीएसपी, उनका छोटा भाई लड़कियों वाली स्कूटी से कॉलेज जाए.. अच्छा नही लगता ना…!

छोटे भैया ताव में आकर बोले – तो ठीक है भाभी.. मेरी तरफ से छोटू के लिए बाइक तय… बोल भाई कोन्सि चाहिए…?

भाभी तपाक से बोली – बुलेट… !

बड़े भैया – क्या..? मोहिनी तुम्हारा दिमाग़ खराब हो गया है.. जानती हो बुलेट की कितनी कीमत है..!

भाभी – अब डीएसपी साब दिलवा रहे हैं… तो इससे कम क्या होनी चाहिए.. क्यों बड़े देवर जी… मे सही कह रही हूँ ना..!

छोटे भैया – अब भाभी का हुकुम सर आँखों पर…

ठीक है छोटू, कल मेरे साथ चलना, अपने शहर से तुझे एक नयी बुलेट डेलक्स दिलवा देता हूँ… अब खुश..?

मे भैया के गले लग गया और उन्हें थॅंक्स बोला..

जब मे उनके गले लगा तब उन्हें पता चला कि मे उनसे भी 2” लंबा हो गया हूँ.. तो भैया हँस कर बोले.. सच में तू बुलेट चलाने लायक हो गया है..!

तभी रामा दीदी बोल पड़ी… भैया मे भी चलूं आपके साथ.. ? मुझे भी कुच्छ शॉपिंग करवा दीजिए ना .. प्लीज़..!

भाभी – हां देवेर्जी.. बेचारी का मन भी बहाल जाएगा.. एक-दो दिन दोनो बेहन भाई शहर घूम लेंगे.. और उसे भी कुच्छ दिलवा देना..

भैया ने हामी भर दी.. और भाभी ने शाम को बाबूजी से भी पर्मिशन ले ली.

अकेले में मेने भाभी को गोद में उठाकर पूरे घर का चक्कर लगा डाला…

दूसरे दिन चाय नाश्ता करके हम तीनो बेहन भाई, भैया के ऑफीस की गाड़ी से उनके शहर की तरफ निकल लिए…
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06-01-2019, 01:59 PM,
#28
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
दूसरे दिन चाय नाश्ता करके हम तीनो बेहन भाई, भैया के ऑफीस की गाड़ी से उनके शहर की तरफ निकल लिए…

मे आगे ड्राइवर के बगल में बैठा था और दीदी-भैया पीछे की सीट पर बातें करते हुए अपना समय पास करते जा रहे थे..

वो दोनो भी कुच्छ सालों पहले एक साथ स्कूल जाना, साथ खेलना बैठना काफ़ी सालों तक रहा था, आज वो दोनो अपनी पुरानी बातों, साथ बिताए लम्हों को याद करते जा रहे.

उनकी बातें सुनकर मुझे पता चला कि हम भाइयों और बेहन के बीच कितना प्रेम है एक दूसरे के लिए..

शायद इसकी एक वजह माँ की असमय मृत्यु भी थी, जिसकी वजह से सब जल्दी ही अपनी ज़िम्मेदारियाँ समझने लगे थे.

उनकी पोस्टिंग जिस शहर में थी, वो हमारे गाओं से तकरीबन 100-110 किमी दूर था,

गाओं से कुच्छ दूर मैं हाइवे तक सिंगल और खराब रास्ता ही था, लेकिन उसके बाद हाइवे अच्छा था.

बातों-2 में समय का पता ही नही चला और कोई 3 घंटे बाद हम उनके शहर पहुँच गये..

भैया पहले सीधे अपने ऑफीस गये, वहाँ अपने स्टाफ से हमें मिलवाया फिर अपने ऑफीस के काम का अपडेट लेकर हम तीनों शॉपिंग के लिए निकल गये..

पहले मेरे लिए एक बुलेट बुक कराई, जो कल तक मिलने वाली थी, फिर हम दोनो के लिए कपड़े वैगैरह खरीदे.. इसी में शाम हो गयी..

दूसरे दिन भैया हमें एक सिनिमा हॉल की टिकेट देकर अपने ऑफीस निकल गये..

अपने ऑफीस की ही एक गाड़ी हमारे लिए रख दी जो हमें पूरे दिन घुमाने वाली थी..

3 से 6 वेल शो हम दोनो मूवी देखने हॉल में घुस गये.. अक्षय कुमार की कोई अच्छी मूवी लगी थी..

दीदी ने नये खरीदे कपड़ों में से एक पिंक कलर की टीशर्ट और एक ब्लू लीन्स पहन रखी थी, मे भी एक वाइट टीशर्ट और जीन्स पहने हुए था..

इस ड्रेस में दीदी क्या ग़ज़ब लग रही थी, मे तो उन्हें देखता ही रह गया.. और मेरे मूह से निकल गया.. वाउ ! दीदी क्या लग रही हो …

वो एकदम से शर्मा गयी, और फिर बोली – सच बता भाई.. मे अच्छी लग रही हूँ ना..!

मे – ग़ज़ब दीदी ! आप तो एकदम से बदल गयी हो… कोई कह नही सकता कि ये कोई गाओं की लड़की होगी..

वो – तू भी किसी हीरो से कम नही लग रहा… देखना कहीं कोई लड़की गश ख़ाके ना गिर पड़े…

मे – अब आप मेरी टाँग खींच रही हो..

वो – नही सच में.. और आगे बढ़के मेरे गाल पर किस कर लिया.. मे तो अचानक उनके किस करने से गन-गन गया…!

हॉल में अंधेरा था, कुच्छ वॉल साइड की लाइट्स थी जिससे हल्का-2 उजाला फैला हुआ था. हम अपने नंबर की सीट जो बाल्कनी में सबसे उपर की रो में थी बैठ गये.

अच्छी मूवी होने की वजह से कुछ देर में ही हॉल फुल हो गया.. और कुच्छ ही देर में सभी लाइट्स ऑफ हो गयी.. और एक दो आड के बाद मूवी स्टार्ट हो गयी.

हॉल में अंधेरा इतना था, कि हमें अपने बाजू वाले की भी पहचान नही हो रही थी कि कॉन बैठा है..

मूवी शुरू हुए अभी कुच्छ ही मिनिट हुए थे कि दीदी का हाथ मेरी जाँघ पर महसूस हुआ..

मे चुपचाप बैठा मूवी देखता रहा.. अब धीरे-2 वो मेरी जाँघ को सहलाने लगी.. और उसे उपर जांघों के बीच ले आई…

अब उनकी उंगलिया मेरे लंड से टच हो रही थी… वो टाइट जीन्स में क़ैद बेचारा ज़ोर मारने लगा..

लेकिन जीन्स इतनी टाइट थी कि कुच्छ ज़ोर नही चल रहा था उसका…

दीदी का हाथ और कुच्छ हरकत करता उससे पहले मे थोड़ा सीधा हो गया और अपनी सीट पर आगे को खिसक गया… !

दीदी ने फ़ौरन अपना हाथ खींच लिया और मेरे मूह की तरफ देखने लगी.. लेकिन मे मूवी देखने में ही लगा रहा…

मे थोड़ा आगे होकर दीदी की साइड वाले अपने बाजू को थोड़ा उनकी सीट की तरफ चौड़ा दिया,

अब हॅंडल पर आगे मेरा बाजू टिका हुआ था और मेरे पीछे ही दीदी ने भी अपना बाजू टिका लिया और मेरी सीट की तरफ को होगयि…

पोज़िशन ये होगयि.. कि अगर मे ज़रा भी पीछे को होता तो मेरा बाजू उनके बूब को प्रेस करता…!

हम दोनो कुच्छ देर यूँही बैठे रहे.. उसको ज़्यादा देर चैन कहाँ पड़ने वाला था.. सो अपना हाथ मेरी बॉडी और बाजू के बीच से होकर फिर मेरी जाँघ पर रख दिया, और फिर वही पहले वाली हरकतें…!

मे उन्हें बोलने के लिए पीछे की तरफ होकर उनकी ओर को हुआ… मेरा बाजू एल्बो से उपर का हिस्सा उनके बूब पर रख गया…!

जैसे ही मुझे इस बात का एहसास हुआ, और मे अलग होने ही वाला था कि उसने मेरा बाजू थाम लिया और उसे और ज़ोर्से अपनी चुचि पर दबा दिया…!

आह्ह्ह्ह… क्या नरम एहसास था, रूई जैसी मुलायम उसकी चुचि मेरी बाजू से दबी हुई थी.. मुझे रोमांच भी हो रहा था,

लेकिन मेरे मन में हमेशा ही उनके प्रति एक भाई-बेहन वाली फीलिंग पैदा हो जाती थी और मे आगे बढ़ने से अपने को रोक लेता था…!

दीदी ने अपना गाल भी मेरे बाजू से सटा रखा था…मेने उनके कान के पास मूह लेजा कर कहा – दीदी ये आप क्या कर रही हो..?

वो – मे क्या कर रही हूँ..?

मे – यही ! अभी आप ऐसे चिपकी हो मेरे से, कभी मेरी जाँघ सहलाती हो… ये
सब…. क्या ठीक है..?

वो – क्यों ! तुझे कोई प्राब्लम है इस सबसे..?

मे – हां ! हम बेहन-भाई हैं, और ये सब हमारे रिस्ते में ठीक नही है..

वो – अच्छा ! और भाभी देवर के रिस्ते में ये सब ठीक है..?

मे – क्या..?? आप कहना क्या चाहती हो..? साफ-साफ कहो…!

वो – आजकल तेरे और भाभी के बीच जो भी हो रहा है ना ! वो मुझे सब पता है.. यहाँ तक कि तेरे बर्थ’डे वाली सारी रात उनके कमरे में जो हुआ वो भी..

मे एक दम से सकपका गया.. और हैरत से उनकी तरफ देखने लगा…..

वो - ऐसे क्या देख रहा है…? क्या ये भी बताऊ, कि कब-कब, तुम दोनो ने क्या-क्या किया और कहाँ किया है..?

लेकिन तू फिकर मत कर मे किसी को कुच्छ नही कहूँगी…बस थोड़ा सा मेरे बारे में भी सोच…!

अब मेरे पास बोलने के लिए कुच्छ नही था… सो जैसे गूंगी औरत लंड की तरफ देखती है ऐसे ही बस उसे देखता ही रहा…!

वो – अब चुप क्यों है ! कुच्छ तो बोल… ?

मे – ठीक है दीदी ! आप जैसा चाहती हैं वैसा ही होगा, लेकिन अभी यहाँ कुच्छ मत करो… वरना मुझे कुच्छ -2 होने लगता है…!

वो – तो फिर कहाँ और कैसे होगा.. ? यहाँ भी कुच्छ तो मज़े कर ही सकते हैं ना !

मेने पूरी तरह हथियार डाल दिए और अपने आपको उसके हवाले कर दिया….
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06-01-2019, 02:01 PM,
#29
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
दीदी अपनी चुचि को मेरे बाजू से रगड़ कर कान में फुसफुसाई… अपनी जिप खोल ना भाई..

मे – क्या करोगी…?

वो – मुझे देखना है तेरा वो कैसा है…!

मे – यहाँ अंधेरे में क्या दिखेगा… ?

वो – अरे यार तू भी ना, बहुत पकाता है.. तू खोल तो सही मे अपने हाथ में लेकर देखना चाहती हूँ..! प्लीज़ यार ! खोल दे…

मे – रूको एक मिनिट.. और मेने सीट से पीठ सटकर कमर को उचकाया और अपना बेल्ट और जिप खोल दिया..

उसने तुरंत अपना हाथ जीन्स के अंदर डाल दिया और फ्रेंची के उपर से ही मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में ले लिया…

मे – अह्ह्ह्ह… कैसा है..?

वो – हाईए.. छोटू ! ये तो बड़ा तगड़ा है…यार !

मे – क्यों तुम्हें अच्छा नही लगा…? तो वो झेंप गयी और शर्म से अपना गाल मेरे बाजू पर सटा दिया…

वो उसे हौले-2 सहलाने लगी और उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने बूब पर रख दिया…और बोली – तू भी इसे प्रेस करना !

मेने कहा रूको, और फिर मेने अपना बाजू उसके सर के पीछे से लेजा कर उसके दूसरी साइड वाले बूब के उपर रख दिया और धीरे-2 दबाने लगा…

मेने उसके गाल को चूमते हुए उसके कान में कहा- तुम भी अपनी जिप खोलो ना दीदी !

तो उसने झट से अपनी जीन्स खोल दी और मेने अपना हाथ उसकी पेंटी के उपर रख कर उसकी मुनिया को सहला दिया…

सीईईईईई…. हल्की सी सिसकी उसके मूह से निकल गयी, उसकी पेंटी थोड़ी-2 गीली हो रही थी.. और अब मेरे दो तरफ़ा हमले से उसकी और हालत खराब होने लगी…

हम दोनो मस्ती में एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे, कि तभी इंटेरवाल हो गया, और जल्दी से अपने सीटो पर सही से बैठकर अपने-2 कपड़े दुरुस्त किए और बाहर चल दिए…

इंटेरवाल के बाद भी हम दोनो ऐसे ही मस्ती करते रहे, और इस दौरान वो एक बार झड भी चुकी थी..

मेरा भी लंड फूलकर फटने की स्थिति में पहुँच गया था..

मूवी ख़तम होने के बाद हम घर लौट लिए, रास्ते भर हम दोनो चुप ही रहे, वो मुझसे नज़र चुरा रही थी, और मन ही मन मुस्कुराए जा रही थी.

मेने गाड़ी की पिच्छली सीट पर बैठे ही उससे पुछा – क्या हुआ दीदी, बात क्यों नही कर रही..?

वो – भाई देख यहाँ अब कुच्छ मत करना, वरना ड्राइवर को शक़ हो जाएगा …

मेने कहा – तो बात तो कर ही सकती हो.. फिर वो इधर-उधर की बातें करने लगी..

घर पहुँच कर फ्रेश हुए, थोड़ा टीवी देखा और कुच्छ देर बाद भैया आ गये…

एजेन्सी वाला बुलेट की डेलिवरी घर पर कर गया था, भैया ने सब पेपर चेक कर लिए..

रात देर तक हम तीनो बेहन भाई देर तक बात-चीत करते रहे.. भैया ने हमने दिन में क्या-2 किया वो सब पुछा.. और फिर अपने-2 बिस्तर पर जाकर सो गये..

दूसरे दिन हम निकलने वाले थे, भैया ने सुबह ही पंप पर जाकर बुलेट का टॅंक फुल करा दिया था, निकलने से पहले भैया बोले –

छोटू ! रास्ते में एक बहुत अच्छी जगह है, जंगलों के बीच झरना सा है, झील है.. देखने लायक जगह है..

अगर देखना हो तो किसी से भी पुच्छ कर चले जाना.. बहुत मज़ा आएगा तुम दोनो को..

फिर हम दोनो भैया से गले मिलकर चल दिए अपने घर की तरफ

डग-डग-डग….. बुलेट अपनी मस्त आवाज़ के साथ हाइवे पर दौड़ी चली जा रही थी..

जो मेने कभी सपने में भी नही सोचा था, आज मुझे मिल गया था..… मेरी पसंदीदा बाइक जिसे दूसरों को चलाते देख बस सोचता था, कि काश ये मेरे पास भी होती.

और आज भाभी की वजह से मेरे हाथों में थी, मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था इस वक़्त…

भैया के घर से निकलते वक़्त दीदी एक सलवार सूट में थी… शहर से निकल कर जैसे ही हमारी बुलेट रानी मैं हाइवे पर आई, दीदी ने मुझे गाड़ी एक साइड में खड़ी करने को कहा..

मेने सोचा इसको सू सू आ रही होगी, सो मेने एक पेड़ के नीचे बुलेट रोक दी और पुछा – क्या हुआ दीदी.. गाड़ी क्यों रुकवाई..?

उसने कोई जबाब नही दिया और मुस्कराते हुए अपने कपड़े उतारने लगी…! मेने कहा- अरे दीदी ऐसे सरेआम कपड़े क्यों निकाल रही हो.. पागल हो गयी हो क्या ?

फिर भी उसने कोई जबाब नही दिया और अपनी कमीज़ उतार दी…

मेरी आँखें फटी रह गयी.. वो उसके नीचे एक हल्के रंग की पतली सी टीशर्ट पहने थी..

फिर वो अपनी सलवार का नाडा खोलने लगी.. और उसे जैसे ही नीचे सरकाया, तो उसके नीचे एक स्लेक्स की टाइट फिट घुटने तक की पिंक कलर की लिंगरी पहने थी..

उसके दोनो कपड़े इतने हल्के थे कि उसकी ब्रा और पेंटी उनमें से दिखाई दे रही थी, वो इन कपड़ों में एकदम शहर की पटाखा माल लग रही थी.

ब्रा में कसे उसके 32 साइज़ के गोरे-2 बूब और पेंटी में कसी उसकी 33-34 की गांद देखकर मेरा पापुआ उछल्ने लगा.

मे भी इस समय एक हल्की सी टीशर्ट और एक होजरी का पाजामा ही पहने था, जो कि काफ़ी कंफर्टबल था रास्ते के लिए.

पाजामा में मेरा तंबू सा बनने लगा था.. लेकिन मे अभी भी बुलेट की सीट पर ही बैठा था, इसलिए वो उसको नही दिखा.

मेने मन ही मन कहा.. हे प्रभु आज किसी तरह इससे बचा लेना…!

ऐसा नही था, कि मे दीदी के साथ फ्लर्ट नही करना चाहता था, लेकिन जिस तरह वो दिनो-दिन मेरे साथ खुलती जा रही थी,

इसी से पता चल रहा था कि अब हम ज़्यादा दिन दूर नही रह पाएँगे..

मे जैसे ही आगे बढ़ने की कोशिश करता, मेरे मन में कहीं ना कहीं ये सवाल उठने लगता., कि नही यार ! ये तेरी बेहन है.. और बेहन के साथ……ये ग़लत होगा.

लेकिन उसके कोमल मन को कॉन समझाए…?

और अब तो उसने मेरे हथियार के दर्शन भी कर लिए थे…
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06-01-2019, 02:01 PM,
#30
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
मे यही सब बुलेट के दोनो ओर पैर ज़मीन पर टिकाए सीट पर बैठा सोच ही रहा था कि वो मेरे पीछे दोनो तरफ लड़कों की तरह पैर करके बैठ गयी और बोली--- अब चलो…

मेने किक लगाई और हमारी बुलेट रानी फिर से डग-डग करती हाइवे पर दौड़ने लगी…

उसने अपने बाल भी खोल दिए थे जो अब हवा में लहरा रहे थे.. मस्ती में उसने अपनी दोनो बाजू हवा में लहरा दी और हवा की तेज़ी को अपने पूरे शरीर पर फील करने लगी…

मे – अरे दीदी ! आराम से बैठो ना.. गिर जाओगी…!

वो – क्यों तुझे चलाना नही आता क्या..?

मे – ऐसा नही है.. अगर कहीं कोई गड्ढा आ गया या किसी भी वजह से ब्रेक भी लगाना पड़ सकता है तो तुम डिसबॅलेन्स हो सकती हो..

उसने मुझे घुड़कते हुए कहा – तू बस अपनी ड्राइविंग पर ध्यान दे.. और मुझे मेरा मज़ा लूटने दे…

मे फिर चुप हो गया.. थोड़ी देर बाद वो बाइक पर खड़ी हो गयी और चिल्लाने लगी—

याहूऊओ….याहूऊ… जिससे उसकी आवाज़ हवा में लहराने सी लगी और उसके खुद के कनों को सर सराने लगी……

ऐसी ही मस्ती में वो बाइक के पीछे मज़े लूटती जा रही थी…

फिर रोड पर कुच्छ गड्ढे से आना शुरू हो गये, तो मेने उसे रोक दिया और ठीक से पकड़ कर बैठने के लिए बोला.

तभी एक बड़ा सा गड्ढा आ गया और गाड़ी उछल गयी… वो अच्छा हुआ कि उच्छलने से पहले उसने मुझे पकड़ लिया था……



अब उसे पता चला कि में क्यों पकड़ने के लिए बोल रहा था… मेरी कमर में बाहें लपेट कर दीदी बोली –

देखभाल कर चला ना भाई.. घर पहुँचने देगा या रास्ते में ही निपटाके जाएगा मुझे…

मे – मेने तो पहले ही कहा था कि पकड़ लो कुच्छ..

दीदी मेरी कमर में अपनी बाहें लपेटकर मुझसे चिपक गयी, जिससे उसके कड़क अमरूद जैसी चुचियाँ मेरी पीठ में गढ़ी जा रही थी, अपना गाल मेरे कंधे पर रख कर मेरी गर्दन से सहलाते हुए मज़े लेने लगी…

नॉर्मली बुलेट जमके चलने वाली बाइक है, फिर भी वो उच्छलने के बहाने से अपनी चुचियों को मेरी पीठ से रगड़ रही थी, उसके मूह से हल्की-2 सिसकियाँ भी निकल रही थी…

धीरे-2 सरकते हुए उसके हाथ मेरे लौडे को टच करने लगे, उसका स्पर्श होते ही उसने उसे थाम लिया और धीरे-2 मसल्ने लगी…

मे – दीदी अपना हाथ हटाओ यहाँ से कोई आते-जाते देख लेगा तो क्या सोचेगा..?

वो – तो देखने दे ना..! हमें यहाँ कों जानता है.., तू भी ना बहुत बड़ा फटतू है यार..!

मे – अरे दीदी ! ये हाइवे है… ग़लती से अपना कोई पहचान वाला गुजर रहा हो तो.. और उसने जाके बाबूजी, या और किसी घरवाले को बता दिया… तब किसकी फटेगी…?

वो – चल ठीक है चुपचाप गाड़ी चला तू… कोई निकलता दिखेगा तो मे हाथ हटा लिया करूँगी..

इतना बोलकर उसे और अच्छे से मसल्ने लगी जिससे मेरा लंड और अकड़ गया.. अब वो पाजामा को फाड़ने की कोशिश कर रहा था..

अपने हाथों में उसका आकर फील करके दीदी बोली – वाउ ! छोटू, तेरा ये तो एकदम डंडे जैसा हो गया है यार....

मे – मान जाओ दीदी ! वरना मेरा ध्यान भटक गया ना, और गाड़ी ज़रा भी डिसबॅलेन्स हुई तो दोनो ही गये समझो..

आक्सिडेंट की कल्पना से ही वो कुच्छ डर गयी और उसने मेरे लंड से अपने हाथ हटा लिए..

लेकिन पीठ से अपनी चुचियों को नही हटाया, और तिर्छि बैठ कर अपनी मुनिया को मेरे कूल्हे के उभरे हुए हिस्से से सटा लिया,

धीरे-2 उपर नीचे होकर अपनी चुचि और मुनिया को को मेरे शरीर से रगड़-2 कर मज़े लेने लगी…

हम 60-70 किमी निकल आए थे, भैया ने जो जगह घूमने के लिए बताई थी, वो आने वाली थी…
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