antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
12-05-2018, 02:25 AM,
#71
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
प्रीती अब फ्रेश होने के लिए अपने रूम की तरफ चली गयी, और स्मृति दोबारा किचन में घुस गयी, प्रीती के जाते ही कुशल बड़ी फुर्ती से खड़ा हुआ और सीधा जाकर किचन के अंदर घुस गया, स्मृति को भी इस बात की भनक थी कि जरुर कुशल प्रीती की जाते ही किचन में आ जायेगा और उससे छेड़ छाड़ करेगा, इसलिए उसने भी आज अपनी अदाओ से कुशल और उसके लंड पर कहर ढाने की तैयारी कर रखी थी, जैसे ही कुशल किचन के अंदर दरवाजे तक पहुंचा, स्मृति जानबुझकर अपनी गांड को मटकाते हुए वाश बेसिन में बर्तन धोने लगी 

कुशल ने बड़ी गोर से स्मृति की ओर देखा, स्मृति आज वाकई बहुत ही हसीन और सेक्सी लग रही थी, उसने पिंक कलर की झीनी सी सलवार और कुर्ती पहन रखी थी, जिसमे से उसकी गदराई मोटी गांड साफ नज़र आ रही थी, जो उसकी कमर से कम से कम छह इंच उठी हुई थी, और उसकी तनि हुई चुचियो को देखकर तो ऐसा लग रहा था मानो वो उसे चुदाई का खुला निमंत्रण दे रही हों, 

जब स्मृति बर्तन धोने के बहाने अपनी गांड को मस्ती से इधर उधर मटकाती तो ऐसा जान पड़ता था कि स्मृति की गांड में कोई छोटी सी बेअरिंग फिट है जो उसकी गांड को मस्त गोल गोल घुमाती है, भले ही स्मृति की उमर ज्यादा हो पर आज भी वो अपनी अदा से अच्छे अच्छे लंडो का पानी निकलवाने की काबिलियत रखती थी, और कुशल तो उसका बहुत बड़ा दीवाना था, वो अच्छी तरह जानती थी कि बिना छुए भी कैसे अपने जलवो से कुशल के खड़े लंड का पानी निकाल सके,

कुशल तो उस वक्त खुद को जन्नत की किसी परी के पास बैठे किसी राजा महाराजा की तरह महसूस कर रहा था क्यूंकि इस वक्त उसके सामने जो मस्त ख़ूबसूरती थी, उसका रसपान वो पिछले 24 घंटे में कई मर्तबा कर चूका था, पर अब भी उसकी प्यास बुझी नही थी,

कुशल तो बेचारा किचन के दरवाजे पर खड़ा उस मस्त गदराई जवानी को देखकर अपने लंड को पेंट के उपर से ही सहलाये जा रहा था, उसकी आँखे बर्तन धोते वक्त उपर निचे होती उसकी मोम की भारी भारी चुचियो पर भी गडी हुई थी,

इधर जब स्मृति जोर लगाकर किसी बर्तन को धोने के लिए निचे की ओर झुकती तो उसकी नारंगी जैसे दूधिया मम्मे उसकी कुर्ती के गहरे गले से से आधे से भी ज्यादा नुमाया हो जाते , यहाँ तक कि उसकी ब्लैक ब्रा के कप्स भी कुशल को साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे

इधर स्मृति ने वाशबेसिन में बर्तन धोने से पहले अपनी कुर्ती को चुपके से साइड में कर लिया था, जिससे उसकी सुंदर सी गांड उभरकर और भी ज्यादा सामने आ रही थी, कुशल की धोकेबाज़ नज़रे तुरंत उसकी ठुमकती गांड की तरफ उठ गई, उस पर जैसे बिजली सी गिर पड़ी, स्मृति भी जान बूझकर बर्तन धोते समय अपनी कमर और गांड को होले होले हिला रही थी,

कुशल ने तुरंत अपनी नज़रे दूसरी तरफ फेरकर देखने की कोशिश की कि कहीं प्रीती तो नही आ रही पर जब उसने मैदान साफ पाया तो वापस अपनी नज़रे अंदर की तरफ घुमानी चाही,पर इससे पहले कि वो अपना चेहरा घुमा पाता, उस पर एक और गाज गिर पड़ी, स्मृति ने जानबुझकर एक बर्तन नीचे गिरा दिया था और अब वो उसे हटाने के लिए झुकी हुई थी

उसकी पतली सी सलवार उसकी मांसल जांघो से बिल्कुल चिपक गयी थी, और स्ट्रेच होने की वजह से सलवार हल्की सी पारदर्शी हो गयी थी, जिसमे से उसकी ब्लू कलर की छोटी सी खूबसूरत पैंटी कुशल की आंखों के सामने आ गयी, उसकी मोटी सी मांसल गदरायी गांड पर उस छोटी सी पैंटी को देखकर कुशल की सांसे ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गयी, उसका चेहरा गरम होने लगा, उसे अपने लंड में तनाव महसूस होने लगा,और जल्द ही उसने विकराल रूप ले लिया जिससे उसके पेंट में उभार बन गया था , स्मृति जानबुझकर बर्तन उठाने में ज्यादा वक्त लग रही थी, उसने कनखियों से कुशल की ओर देखा तो पेंट में उसके लन्ड का उभार उसकी आँखों से छुप नहीं पाया, उसके चेहरे पर एक शातिर हंसी आ गयी

इधर अब कुशल से बर्दास्त करना बिलकुल नामुमकिन हो गया था, भले ही उसे प्रीती के आने का डर था, परन्तु स्मृति इस समय जो नज़ारे उसे दिखा रही थी उसे देखकर उसका सारा डर गायब हो गया और अब उसके दिलो दिमाग पर सिर्फ और सिर्फ स्मृति ही छाई हुई थी, 
कुशल अब धीरे धीरे आकर सीधा स्मृति की ठीक पीछे आ गया और फिर उसने बड़े ही प्यार से अपने हाथो को स्मृति के पेट के इर्द गिर्द लपेट दिया,
स्मृति अपने शरीर पर कुशल के हाथ का स्पर्श होते ही सिहर उठी, और हद तो तब हो गई जब कुशल ने अपनी एक उंगली कुर्ती को उठाकर स्मृति की नाभि में ले जाकर उसे गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया, मानो वो नाभि में से कोई बहुमूल्य वस्तु निकलना चाह रहा हो

कुशल की इस हरकत से स्मृति तो मज़े से पागल हो गई, उसकी वासना अब चरमोत्कर्ष पर पहुंचने लगी, जब उससे बर्दास्त करना मुश्किल हो गया तो उसने अपने एक हाथ को पीछे ले जाकर कुशल के बालों में लगा दिया जिससे कुशल का चेहरा स्मृति के सिर से खिसककर उसकी गर्दन पर आ पहुंचा, 

कुशल ने भी मौके का फायदा उठाते हुए तुरन्त अपने लबों को स्मृति की गोरी गर्दन से चिपका दिया, और कहते है कि लड़की की गर्दन पर अगर कोई किस करे तो उसकी उत्तेजना कई गुना बढ़ जाती है, और यही स्मृति के साथ भी हुआ

कुशल के होठों के स्पर्श अपनी गर्दन पर पाते ही स्मृति अपने काबू से बाहर होने लगी और उसके मुंह से हल्की हल्की आहें भरनी शुरू हो गई
"उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस
ओह्हहहहहह आआआ...आआआ...... ओह्ह"
स्मृति की आहों की आवाज़ अब धीरे धीरे बढ़ती ही जा रही थी

इधर कुशल समझ गया था कि अब स्मृति गरम होने लगी है, कुशल ने भी मौके का फायदा उठाते हुए स्मृति की नाभि में फंसी अपनी उंगली निकाली और होले होले नीचे की तरह ले जाने लगा, स्मृति को जैसे कोई होश ही नही था, 

कुशल का हाथ स्मृति के गोरे पेट से होते हुए अब उसके सलवार की पट्टी पर आ पहुंचा था, कुशल अभी भी लगातार स्मृति की गर्दन पर किस किये जा रहा था, अब कुशल ने धीरे से अपने हाथ की उंगलियों के इस्तेमाल कर सलवार के नाड़े को ढीला किया और स्लो मोशन में अपना हाथ स्मृति की सुलगती चुत की ओर बढाने लगा, कुशल के हाथ और स्मृति की चुत में अब बेहद ही महीन सी पेंटी का कपड़ा था, कुशल अब अपनी उंगलियों को स्मृति की चुत पर पैंटी के ऊपर से ही फेरने लगा, 

इधर स्मृति को अब बर्दास्त करना नामुमकिन हुए जा रहा था,उसने कुशल के बालों से अपना हाथ हटाया और धीरे धीरे कुशल की पेंट की ओर बढ़ने लगी, स्मृति ने अब तुरन्त ही कुशल का लंड उसकी पेंट के ऊपर से ही पकड़ लिया, लंड के अहसास से ही स्मृति बुरी तरह गनगना गई, उसकी सांसे भारी होती जा रही थी, अब उसने एक झटके में ही कुशल के पेंट की ज़िप खोली , उसने महसूस किया कि कुशल ने आज चड्डी नही पहनी थी अंदर, ये जानकर स्मृति की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी, उसने तुरंत ज़िप के अंदर हाथ डाल लिया और उसके तने हुए लंड को अपनी मुट्ठी में कैद कर लिया

अपने हाथों मे अपने बेटे के लंड की अकड़न महसूस करते ही स्मृति का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, उसकी चूत की फाँकें बुरी तरह कुलबुलाने लगी, स्मृति ने थोड़ी देर तक कुशल के लंड को अपनी मुट्ठी में भर कर दबाया और फिर अचानक से उसने कुशल के लंड पर मुठ मारनी शुरू कर दी

अपने लंड पर अपनी मोम की गर्म हथेलियों का स्पर्श पाकर कुशल को लगा जैसे उसका लंड इस गर्मी के अहसास से पिघल ही जायेगा, वासना का तूफान दोनों माँ बेटे के दिलो में आ चुका था,

इधर अब कुशल ने भी तुरंत अब स्मृति की पैंटी के इलास्टिक को ऊपर उठाकर अपनी उंगलिया सीधे उसके चुत से सटा दी, और उसकी चुत के दाने को मसलने लगा,


स्मृति तो इस चौतरफा हमले से बुरी तरह आहें भरने लगी
"उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस"
ओह्हहहहहह, उम्ह्ह्ह्ह्ह लायन ऽऽऽऽऽऽऽ…..ऽऽऽऽऽऽऽ…योर बिग डिक माय लायन …स्स्स्स्स्स्साऽऽऽऽ सो बिग…...ओहहहहहह आआआ
मसल डालो मेरी चुत को....ओह यस..."

सससससहहहहहहह...." इतना कहने के साथ ही जल बिन मछली की तरह स्मृति अपनी भरावदार गांड को कुशल की तरफ ऊचकाते हुए तड़प ऊठी, कुशल की सांसे तेज हो चली, उससे अब रुक पाना बड़ा मुशकिल हुए जा रहा था, वो अब तुरंत अपनी मोम की सलवार को पकड़कर निचे की तरफ सरकाने लगा, स्मृति की भी सांसे तीव्र गति से चलने लगी, धीरे धीरे करके कुशल ने अपनी मोम की सलवार को घुटनों तक सरका दिया, कुशल बहुत ही उतावला हुआ जा रहा था, सलवार के घुटनों तक आते ही स्मृति ने खुद अपने दोनों हाथों से अपनी कुर्ती को थाम लिया और कुशल अपनी मोम की पेंटि को दोनों हाथों की उंगलियों में फंसा कर धड़कते दिल से धीरे धीरे नीचे सरकाने लगा,

जैसे-जैसे पेंटी नीचे सरक रही थी, स्मृति की गोरी गोरी भरावदार गांड दिन के उजाले में चमकने लगी , कुशल की तो हालत ही खराब होने लगी थी , अपनी मोम की गोरी गोरी गांड को देखकर उसका गला सूखने लगा था, उसका पूरा बदन उत्तेजना में सराबोर हो चुका था, कुशल ने धीरे धीरे पेंटी को भी घुटनों तक पहुंचा दिया 


ये नजारा देखकर कुशल से रुक पाना नामुमकिन सा हो गया था, और वो तुरन्त अपनी पेंट भी उतारने लगा , कुशल को पेंट उतारता देख स्मृति के बदन में गुदगुदी सी होने लगी और वो कुशल से बोली,

"बेटाआआआ पेंट रहने दे, ज़िप से बाहर निकाल कर ही कर ले, प्रीती कभी भी आ सकती है जल्दी कर”

कुशल तो ये सुनकर आसमान पर ही पहुंच गया कि उसकी मोम खुद उसे चुदवाने के लिए बोल रही है जबकि उसकी बेटी भी अभी घर पर है, कुशल के लिए तो इस बात ने आग में घी का काम किया और उसका लंड और भी विकराल हो गया 

"कोई नही आएगा मोम आह" 

इतना कहने के साथ ही कुशल ने एक हाथ से उसकी टांग को पकड़ कर उठाते हुए थोडा चौड़ा किया और स्मृति की पीठ पर दबाव बनाते हुए उसे आगे की तरफ झुका दिया, स्मृति आश्चर्यचकित होते हुए कुशल के निर्देश का पालन कर रही थी, 

कुशल ने अब बिना वक्त गंवाए अपने लंड के सुपाड़े को उसकी चुत के गुलाबी छेद पर टीकाया और पूरी ताकत से एक करारा धक्का उसकी चुत में लगा दिया, इस धक्के की ताकत इतनी थी कि पूरा का पूरा लंड एक ही बार मे चुत के अंदर समा गया, स्मृति के मुहं से हल्की सी आह निकल गई 

दोनों माँ बेटो के शरीर में आनंद की एक तेज़ लहर दोड गयी, उन्हें इस बात से और भी ज्यादा मजा आ रहा था कि वो लोग छुप छुप कर सेक्स कर रहे है,

कुशल ने अब अपने लंड को थोडा पीछे खीचा और फिर से एक दनदनाता हुआ शॉट सीधा स्मृति की चुत में पेल दिया, स्मृति इस करारे धक्के को सम्भाल नही पाई और गिरना से बचने के लिए उसने अपने दोनों हाथो को किचन की पट्टी पर जोर से पकड लिया

कुशल अभी तीसरा धक्का लगाने ही वाला था कि उन दोनों के कान में एक जोरदार आवाज़ गूंजी

“मोम.........आपने नाश्ता लगा दिया क्या, मैं निचे आ रही हूँ खाने” ये प्रीती की आवाज़ थी जो अभी अपने कमरे से बाहर ही निकली थी और वो जोर जोर से चिल्ला कर नाश्ते के बारे में पूछ रही थी, प्रीती अब सीढियों से निचे आने लगी 

इधर प्रीती की आवाज़ सुनते ही जैसे स्मृति और कुशल सपने से जागे, स्मृति ने बड़ी ही फुर्ती से अपनी पेंटी और सलवार को उपर चढ़ाया और पलक झपकते ही सलवार का नाडा बांध लिया, 

पर यहाँ कुशल को थोड़ी परेशानी हो रही थी,क्यूंकि उसका विकराल रूप लेकर खड़ा हुआ लंड उसकी ज़िप के अंदर जा ही नही रहा था, और वो पेंट खोलकर लंड अंदर करने का रिस्क नही ले सकता था, स्मृति भी उसकी और बड़ी ही डरी हुई नजरो से देख रही थी मानो वो कह रही हो कि जल्दी कर कुशल अपने लंड को अंदर डाल फटाफट 

पर कुशल का लंड था कि आज बगावत पर उतर आया था, कुशल जोर लगाकर अपने लंड को अंदर ठूंसने की कोशिश कर रहा था पर इसका कोई फायदा उसे नही हो पा रहा था, 

इधर प्रीती के कदमो की एक एक आहट किचन में स्मृति और कुशल की धडकनों को बढाये जा रही थी क्यूंकि कुशल का लंड उसकी पेंट के अंदर जा ही नही रहा था, 

और तभी अचानक प्रीती किचन के अंदर आ गयी, 
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12-05-2018, 02:31 AM,
#72
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
[b]कुशल बड़ी ही मेहनत से अपने लंड को अपनी पेंट में ठूंसने की कोशिश कर रहा था पर उसका लंड था कि आज पूरी तरह से बगावत पर उतर आया था, स्मृति भी बड़ी टेंसन में आ चुकी थी कि अगर प्रीती ने कुशल को इस हालत में देख लिया तो ना जाने क्या होगा,

और तभी अचानक प्रीती किचन के अंदर आ गयी

प्रीती के इस तरह अचानक आते ही स्मृति और कुशल बुरी तरह सकपका गये, कुशल ने बड़ी ही फुर्ती से अपने आपको अपनी मम्मी के बदन के पीछे कर लिया और स्मृति अब ठीक उसके आगे थी जिससे प्रीती को कम से कम कुशल का खड़ा हुआ लंड तो नही दिख पा रहा था, 

स्मृति – “अरे प्री......प्रीती... बेटा..... , बड़ी .....जल्दी फ्रेश हो गयी तुम तो....... चलो तुम बाहर बैठो, मैं अभी तुम्हारे लिए नाश्ता लगाती हूँ टेबल पर.....” स्मृति ने घबराते हुए कहा, क्यूंकि कुशल ठीक उसके पीछे खड़ा था और उसका तना हुआ लंड अभी भी स्मृति की गांड को टच किये जा रहा था, 

प्रीती – “क्या हुआ मोम , आप इतनी घबराई हुई क्यूँ हो, और ये कुशल आपके पीछे क्यूँ खड़ा है” प्रीती ने तो ये सवाल पूछ कर उन दोनों पर जैसे कोई बम ही गिरा दिया था”

स्मृति –“नही बेटा, मैं कहाँ घबराई हुई हूँ, वो तो बस गैस के नजदीक होने की वजह से पसीना आ रहा है” स्मृति हकलाते हुए बोली

प्रीती – “वो सब तो ठीक है मोम, पर ये कुशल का बच्चा आपके पीछे छुपकर क्यूँ खड़ा है, और कुछ बोल क्यूँ नही रहा”

कुशल की तो सिट्टी पिट्टी गुम हो चुकी थी, ये तो स्मृति थी जो किसी तरह सिचुएशन को सम्भालने की कोशिश कर रही थी, वरना अभी तक तो आराम से पकडे जाते,

स्मृति –“कुछ नही प्रीती बेटा , वो मुझे कोई डब्बा चाहिए था, पर वो ऊंचाई पर रखा है न इसलिए कुशल को बुलाया था ताकि वो मेरी हेल्प कर दे उसे उतारने में” स्मृति ने बड़ी सी कुशलता से बचाव करने की कोशिश की 

प्रीती –“पर वो आपके पीछे छुपकर क्यूँ खड़ा है, क्यूँ बे कुशल बाहर निकल वहां से, मुझे तुझसे कुछ काम है अपने रूम में”

कुशल –“ तू...तू...तू चल........म.म्मम्म ...मैं अभी 2 मिनट में आता हूँ बस” कुशल घबरा कर बोला 

प्रीती को अब थोडा शक हुआ कि “आखिर मोम और कुशल दोनों ही इतने घबरा कर क्यूँ बाते कर रहे है, कहीं एसा तो नही कि मेरे उपर जाते ही कुशल और मोम......ओह माय गॉड....... ये कुशल तो बड़ा ही कमीना है, एक मिनट का सब्र नही होता इससे, पर मोम को क्या हुआ,, उसने कैसे उसे करने दिया कुछ मेरे होते हुए भी यहाँ.... मोम तो बड़ी ही छिनाल निकली, अपनी बेटी के घर में होते हुए भी देखो कैसे अपने जवान बेटे के साथ रंगरेलिया मना रही है”

स्मृति –“क्या सोचने लगी प्रीती..... तू...तू चल बाहर बैठ मैं अभी कुशल को डब्बा उतरवाने के बाद बाहर भेजती हूँ”
इधर प्रीती को अब अपनी मोम से थोडी जलन होने लगी थी, कि “आखिर मोम में ऐसा क्या है जो कुशल मेरी बजाय मोम के पीछे पागल है, आज तो मोम और कुशल को सबक सिखा ही देती हूँ”

ये सोचकर प्रीती बोली 

प्रीती –“नहीं मोम मुझे अभी कुशल से बात करनी है कुछ इम्पोर्टेन्ट काम है, ये ऐसे बाहर नही आएगा, मैं खुद ही इसे खींचकर बाहर निकालती हूँ” 

ये कहकर प्रीती अब धीरे धीरे स्मृति और कुशल की तरफ बढने लगी

इधर कुशल और स्मृति के दिलो की धडकन लगातार बढ़ते ही जा रही थी, उनका चेहरा अब पीला पड़ने लगा था, कुशल की तो डर के मारे हालत पतली हो गयी थी 

कुशल मन ही मन सोचने लगा “ हे भगवान कहाँ फँस गया, आज तो मैं गया काम से, अगर प्रीती को पता चल गया तो वो पक्का घर में सबको बता देगी और अगर पापा को पता चला तो वो तो मेरी गांड ही तोड़ देंगे और शायद मुझे घर से बाहर भी निकाल दें, हे भगवन आज बचा लो फिर कभी ऐसी गलती नही करूंगा, प्लीज़ ....”\
कुशल और स्मृति अपने अपने मन में भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि किसी तरह आज वो बच जाये, पर प्रीती अब धीरे धीरे उनके करीब आने लगी थी और स्मृति और कुशल के आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा था कि तभी


तभी बाहर गाडी के हॉर्न की आवाज़ आई, प्रीती को एक पल में समझ आ गया कि ये तो पापा की गाडी की आवाज़ है, इसका मतलब पापा आ गये, 

स्मृति –“ अरे.....अरे...प्प्प्पप....प्रीती....लगता है तेरे पापा....आ गये है.....जा...जा गेट खोल दे जल्दी से.......” स्मृति ने कांपते होठों से कहा 

प्रीती –“जी मोम......” ये कहकर प्रीती किचन से सीधा स्पीड में बाहर निकल गयी और गेट की तरफ बढ़ने लगी
इधर पीछे से कुशल ने फटाफट अपने लंड को पेंट के अंदर फिट करने की कोशीश की, स्मृति ने पलट कर देखा तो पाया की अभी भी कुशल का लंड पूरी तरह नही बैठा था, क्यूंकि स्मृति के पीछे खड़े होने की वजह से कुशल का लंड अपनी मोम की गांड से छु रहा था

स्मृति को कुशल के लंड पर बड़ा गर्व सा हुआ और प्यार भी आ गया, पर वो जानती थी कि ये वक्त सही नही प्यार जताने का, इसलिए स्मृति ने कुशल के लंड को पकड़ा और उसे फटाक से जोर लगाकर ज़िप के अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगी

पर ये क्या, स्मृति के स्पर्श से तो लंड फिर से ओकात में आने लगा, ये देखकर स्मृति के होठो पर एक मुस्कान सी आ गयी, और उसने तुरंत लंड को छोड़ दिया

स्मृति –“ ते तेरा लंड तो बैठने का नाम ही नही ले रहा”

कुशल –“क्या करूं मोम, आपके हाथो के स्पर्श से अपने आप बड़ा हो रहा है”

स्मृति –“पर अभी सही टाइम नही इसे बड़ा करने का, चल जल्दी से अपनी पेंट खोल कर फिर इसे अंदर डाल ले, 
तेरे पापा किसी भी वक्त आ सकते है”

कुशल –“हाँ ये सही रहेगा”

ये कहकर कुशल ने फटाक से अपनी पेंट के बटन खोले और फिर अपनी पेंट निचे करके अपने लंड को पेंट में किसी तरह एडजस्ट करके फिर से पेंट पहन ली,

अब जाकर दोनों के साँस में साँस आया,

स्मृति –“आज तो बाल बाल ही बच गये, वरना शामत आ जाती” स्मृति ने अपने माथे का पसीना पोंछते हुए कहा 

कुशल –“हम्म्म्म सही कहा मोम आपने”


स्मृति –“अच्छा अब चल लगता है तेरे पापा आये है देल्ही से”

कुशल –“चलो मोम”

ये कहकर दोनों माँ बेटे किचन से बाहर आ गये और गेट की तरफ बढ़ चले

प्रीती ने अब तक गेट खोल दिया था, पीछे से अब कुशल और स्मृति भी आ गये, 

जैसे ही प्रीती ने गेट खोला तो सामने पंकज और आराधना दोनों खड़े थे, उन्हें वहाँ देखकर प्रीती के साथ साथ कुशल और स्मृति भी चोंक गये,

प्रीती –“अरे आरू दीदी , आप पापा के साथ कैसे??? आप तो कोई फैशन डिजाइनिंग का कम्पटीशन था ना”

इससे पहले कि आराधना कुछ जवाब देती पंकज बिच में ही बोल पड़ा 

पंकज –“अरे प्रीती पहले हमे अंदर तो आने दे, देखती नही बाहर अभी भी हल्की हल्की बारिश हो रही है, पूरा भिगाएगी क्या हमें”

प्रीती –“ओह सोरी डैड, आइये”

ये कहकर प्रीती ने गेट पूरा ओपन कर दिया ताकि पंकज और आराधना अंदर आ सके, प्रीती ने गौर किया कि आराधना दीदी थोड़ी बदली या कहे कि गदराई सी नजर आ रही थी, और पहले से भी ज्यादा खूबसूरत दिख रही थी, पर प्रीती ने इस ओर ज्यादा ध्यान नही दिया, 

अंदर स्मृति और कुशल भी बस अभी अभी किचन से बाहर निकले थे, और उन्होंने देखा कि पंकज और आराधना अपने गिले बालो को झड़काते हुए अंदर आ गये है, आराधना को पंकज के साथ देखकर उन्हें भी सरप्राइज हो रहा था, पंकज और आरू सोफे पर आकर बैठ गये,


स्मृति – “अरे आप बिना बताये, मेरा मतलब है कि एक कॉल तो कर देते कि आप आ रहे हो, और ये आरू आपके साथ क्या कर रही है, इसका तो कम्पटीशन था ना दिल्ली में????”

पंकज –“अरे इसका कम्पटीशन अचानक कैंसिल हो गया, उधर मेरा जो काम था वो भी पूरा हो गया तो सोचा कि आरू को भी साथ ही ले चलू घर पर”

स्मृति –“चलो ये तो आपने अच्छा किया, वरना ट्रेन में तो परेशान हो जाती बेचारी, पर आपको कम से कम एक कॉल तो कर देना चाहिए था ना”

आराधना ने मन में सोचा –“ ये मोम बार बार कॉल के पीछे क्यूँ पड़ी है, जरुर अपने उस आशिक के साथ गुलछर्रे उडाये होंगे मोम ने, जो उस दिन कैसे बुरी तरह इनकी चुद....कर रहा था”

(रीडर्स को शायद याद होगा कि दिल्ली जाने से पहले आराधना ने कुशल को स्मृति की चुदाई करते हुए देख लिया था, बस उसने कुशल का चेहरा नही देखा था इसलिए उसे पता नही था कि स्मृति किसके साथ सेक्स कर थी, उसे तो यही लग रहा था कि जरुर कोई बाहर का आशिक होगा मोम का )

आराधना –“अरे मोम, वो मैंने ही पापा को मना किया था कॉल करने को क्यूंकि हम लोग आपको सरप्राइज देना चाहते थे” आराधना ने बड़ी सफाई से झूठ बोल दिया 

स्मृति –“चलो कोई बात नही, अब आप दोनों अपने अपने कमरों में जाके फ्रेश हो जाइये, और अपने सर भी पोंछ लेना वरना जुकाम हो जाएगी”

फिर पंकज अपने रूम में चला गया और आराधना अपने रूम में उपर चली गयी, प्रीती भी आराधना के पीछे पीछे उसके साथ ही चली गयी 

इधर निचे कुशल और स्मृति ही बचे थे बस,

कुशल –“मोम, अब हम कैसे कर पाएंगे”

स्मृति –“तू चिंता क्यूँ करता है, निकालेंगे कोई न कोई रास्ता, अब तो मैं भी लायन के बिना नही रह सकती, पर अब हमे घर में थोडा सम्भल के रहना होगा, आज भी बड़ी मुसीबत में फँस सकते थे, अगर प्रीती देख लेती तो”

कुशल –“मोम, शायद उपर वाला भी यही चाहता है कि हमारा रिश्ता ऐसे ही बना रहे तभी तो देखो एन वक्त पर हमे बचा लिया और पापा और आराधना दीदी को भेज दिया”

स्मृति उसकी बात पर बस मुस्कुरा दी 

कुशल –“अच्छा मोम, मैं अभी बाहर जा रहा हूँ अपने एक फ्रेंड के पास, दोपहर तक आ जाऊंगा”

स्मृति –“अरे पर बाहर तो बारिश हो रही है, और तूने तो नाश्ता भी नही किया अभी तक”

कुशल –“अरे मोम, बारिश तो लगभग खत्म हो चुकी है, और नाश्ता मैं अपने फ्रेंड करण के घर पर कर लूँगा”

स्मृति –“अरे बेटा, ये करण वही है ना जिसकी मोम तेरी क्लास टीचर है, क्या नाम है उनका”

कुशल –“ प्रिया मेम”

स्मृति –“हाँ हाँ प्रिया मेम, चल ठीक है तू जा, पर जल्दी आ जाना घर, मैं लायन का वेट करूंगी, शाम को हमे 
स्विमिंग क्लास भी तो जाना है, याद है या भूल गया”

कुशल –“ऑफ़ कोर्स याद है मोम, और आज आप लायन के साथ ही जाओगी स्विमिंग” ये कहकर कुशल ने स्मृति की तरफ एक आँख मार दी, स्मृति भी उसकी और देखकर मुस्कुरा दी 
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12-05-2018, 02:32 AM,
#73
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
[b][b]अपनी मम्मी को स्विमिंग क्लास ले जाने का वादा करके कुशल अपने दोस्त करण से मिलने के लिए निकल पड़ा, करण उसका बचपन का दोस्त था, या कहें कि लंगोटिया यार था उसका, करण ने ही कुशल के दिल में सेक्स के प्रति इच्छा जगाई थी, दोनों दोस्त मिलकर अक्सर नंगी तस्वीरे और ब्लू फिल्मे देखा करते थे, करण के पापा तो जब वो 10 साल का था तभी चल बसे थे, अब उसकी मम्मी प्रिया ही उसकी देखभाल की जिम्मेदारी सम्भालती थी, दो माँ बेटे में बड़ा ही प्यार था, 
करण अक्सर स्कूल में नंगी तस्वीरे लाया करता था जिसे कुशल और वो मिलकर छुप छुप कर देखते थे, दोनों में बड़ा ही याराना था, मुठ मारना भी दोनों ने साथ ही सिखा था, और कई बार तो साथ में मुठ भी मारी थी, 
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कुशल अब करण से मिलने के लिए बाइक से उसके घर की तरफ रवाना हो गया, थोड़ी ही देर बाद कुशल करण के घर पहुंच गया, उसने डोर बेल बजाई तो दरवाज़ा प्रिया मेम ने खोला 

प्रिया मेम ने एक बहुत ही सुंदर और झीनी सी स्टाइलिश मैक्सी पहनी हुई थी, प्रिया मेम सच में बहुत ही मस्त बदन की गदराई सी ओरत थी, बड़े बड़े मम्मे एकदम गोल गोल और पूरी तरह से टाइट थे, नीचे उसका सपाट पेट और गहरी नाभि और पतली कमर बहुत ही ग़ज़ब ढा रही थी, उसके नीचे मस्त भरी हुई जाँघें और उसके बीच में फूली हुई बुर का अहसास कुशल को मस्त किये जा रहा था, दरअसल कुशल तो पिछले कई सालो से प्रिया मेम को चोदने वाली नजरो से देख रहा था, पर चूँकि वो उसके बेस्ट फ्रेंड की मोम थी इसलिए वो कभी हिम्मत ही नही कर पाया, कुशल खासकर प्रिया मेम के चुतडो पर फ़िदा था, हाय कितना गज़ब का और उठा हुआ पिछवाडा था प्रिया मेम का, उसकी सेक्सी गांड के तो टीचर्स के साथ साथ स्टूडेंट्स भी दीवाने थे, पर उसके स्ट्रिक्ट नेचर की वजह से उसके पास फटकने की कोई हिम्मत भी नही करता था,

कुशल अपने ख्यालो में खोया हुआ था तभी प्रिया मेम ने उसे उसके ख्यालो से बाहर खीचा और बोली 

प्रिया मेम – “ अरे कुशल बेटा, कहाँ खोये हुए हो इतनी देर से, अंदर आ जाओ, बाहर अभी भी हल्की हल्की बारिश हो रही है”

कुशल – “ओह सॉरी मेम, वो मैं कुछ सोचने लग गया था मेम”

प्रिया मेम – “सोचना बाद में, पहले अंदर आ जाओ, चलो” ये कहकर प्रिया मेम ने कुशल को अंदर आने के लिए कहा, कुशल भी फटाफट अंदर आ गया 

प्रिया मेम – “अच्छा कुशल बेटा, आज इतने सुबह सुबह कैसे आना हुआ यहाँ”

कुशल –“मेम वो मैं करण से मिलने आया था, कई दिन हो गये न मिले हुए, तो सोचा कि मिल आऊ”

प्रिया मेम –“अरे पर कुशल तो अभी घर पर है ही नही वो तो कल रात अपने किसी फ्रेंड के यहाँ गया था, तो कल से वहीं है, उसे आने में तो अभी 2 घंटे और लगेगे बेटा”

कुशल –“तो फिर मैं चलता हूँ आंटी, फिर कभी आ जाऊंगा”

प्रिया मेम –“अरे ऐसे कैसे चले जाओगे, इतनी दूर से आये हो, कम से कम नाश्ता तो करके जाओ”
कुशल –“नही मेम कोई बात नही मैं करके आया हूँ नाश्ता घर से”

प्रिया मेम –“देखो कुशल मैं कुछ नही सुनने वाली, नाश्ता तो तुम्हे करना ही पड़ेगा, और इसी बहाने मुझे भी थोड़ी कंपनी मिल जाएगी”

कुशल –“चलो ठीक है मेम, आप कहती हो तो रुक जाता हूँ”

प्रिया मेम –“तुम यहीं बैठो, मैं अभी तुम्हारे खाने के लिए कुछ बनाकर लाती हूँ”

ये कहकर प्रिया मुड़कर किचन की तरफ चली गयी, उसके मुड़ते ही कुशल को प्रिया की बड़ी सी गदराई गांड नजर आ गयी, और सुबह से उसका लोडा जो बगावत पर उतर आया था, वो अब दोबारा इस कातिल नज़ारे को देखकर होश में आने लगा, कुशल टकटकी लगाये प्रिया मेम की मोटी गांड को निहारने लगा,

पर तभी अचानक प्रिया मुड़ी और उसने तुरंत कुशल की नजरो को भांप लिया, कुशल तो बिलकुल सकपका गया, पर प्रिया बिलकुल शांत खड़ी रही और बोली

प्रिया मेम –“सैंडविच चलेगी ना कुशल बेटा”

कुशल –“जी...जी....मेम...चलेगी....” कुशल हकलाता हुआ बोला

कुशल को इस तरह हकलाता हुआ देख कर ना जाने क्यूँ प्रिया के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान सी आ गयी, पर उसने इसे ज़ाहिर नही होने दिया 

इधर कुशल मन ही मन सोचने लगा “अबे चूतिये, कहीं तो लंड की बजाय दिमाग से काम लिया कर, साले वो तेरी टीचर होने के साथ साथ तेरे बेस्ट फ्रेंड के माँ भी है, और तेरी भी माँ जैसी ही है,,,,,,,,, पर मैं तो खुद अपनी मोम की ले चूका तो इसकी लेने में क्या हर्ज़ है......अरे नही नही बहनचोद ...अगर उसको थोड़ी सी भनक लग गयी तो यही बुरी तरह गांड कुटाई हो जाएगी........और दोस्ती टूटेगी सो अलग......पर मेरे इस लंड को कैसे समझाऊ, ये तो जब देखो मुंह उठाये खड़ा हो जाता है साला....”

कुशल अपनी दुविधा में फंसा था कि तभी प्रिया मेम हाथो में दो प्लेट्स लिए बाहर आ गयी,

प्रिया मेम –“चलो आओ कुशल बेटा, टेबल पर बैठ जाओ, नाश्ता बिलकुल तैयार है”


अब दोनों लोग आकर टेबल पर अगल बगल बैठ गये और प्रिया कुशल और खुद के लिए नाश्ता सर्व करने लगी, जब वो कुशल को खाना दे रही थी तब वो उसके बिलकुल पास थी और कुशल को उसकी मांसल कलाइयाँ और उसकी बग़लें दिखायी दे रही थी जहाँ से पसीने की मस्त तेज़ गंध आ रही थी, अब वो उत्तेजित होने लगा, तभी वो उसके सामने बैठ गयी और बातें करते हुए खाना खाने लगी, कुशल ने देखा कि उसने बड़े गले की मैक्सी पहनी थी और उसकी बड़ी बड़ी पुष्ट गोलाईयां झाँक रही थीं, उफ़ कितने सुडौल दिख रहे थे उनके गोरे दूध,
प्रिया मेम –“ अरे मैं पानी लाना तो भूल ही गयी” 

और ये कहकर वो उठ कर फ्रिज के सामने झुक कर पानी की बोतल निकालने लगी, झुकने की वजह से उसकी झीनी सी मैक्सी उसकी गांड की गहरी दरार में फंस गयी, अब तो प्रिया मेम की गांड की मस्त छटा देखते ही बन रही थी, कुशल तो एक टक प्रिया मेम की मस्त गांड को घूरे जा रहा था, 

प्रिया मेम को भी अपनी मैक्सी अपनी गांड की खाई में धंसी हुई महसूस हुई तो उसने बड़े ही प्यार से अपने एक हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर धीरे धीरे अपनी फंसी हुई मैक्सी को दरार से निकालना शुरू कर दिया
कुशल तो ये नज़रा देखकर बहुत ही ज्यादा गरम हो गया, उसका लंड अब पुरे उफान पर आ चूका था, और उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसका लंड जल्द ही उसकी पेंट को फाडकर बाहर निकल आयेगा,
तभी वो हुआ जिसकी उम्मीद कुशल ने सपने में भी नही की थी,
प्रिया मेम ने बड़े ही प्यार से कुशल की ओर देखा और फिर धीरे धीरे अपने रसीले होठो पर अपनी जीभ को फिराने लगी, और साथ साथ अपनी गांड में से अपनी मैक्सी को जान बुझकर और भी धीरे धीरे निकालने लगी 

अब कुशल कोई इतना भी बेवकूफ नही था कि इतना भी ना समझे, अब तो कुशल ने सोच लिया कि आज तो माल पूरा गरम है, आज उसे अपनी बचपन की इच्छा जरुर पूरी करनी चाहिए, 

ये सोचकर कुशल ने भी धीरे से अपने लंड पर पेंट के उपर से ही हाथ इस तरह से फिराया कि प्रिया मेम को सारा नजारा आसानी से दिख जाये, वो समझ गया था कि चिड़िया प्यासी है, जल्दी ही जाल में फँस जाएगी,

अब प्रिया मेम पानी की बोतल लाकर उसके साथ दोबारा टेबल पर बैठ गयी, इधर कुशल ने अब प्रिया मेम की फ़िट्नेस की तारीफ़ करनी शुरू की, 

वो बोला: आंटी आप तो लगता है कि फ़िट्नेस पर बहुत ध्यान देती हैं, आप तो एकदम फ़िट हैं,

प्रिया मेम अपनी तारीफ़ से ख़ुश होकर बोली: हाँ मैं रोज़ सुबह योगा करती हूँ और व्यायाम भी करती हूँ,

कुशल : तभी तो आप करण की मम्मी नहीं उसकी दीदी लगती हैं, ऐसा बोलते हुए वो उसकी छातियाँ देखते हुए जीभ होंठ पर फेरा और बोला: आप इतनी सुंदर भी तो हैं, कि आप को देखकर कोई भी दीवाना हो जाये, 

प्रिया मेम –“अच्छा तुझे मैं इतनी सुंदर लगती हूँ क्या?”

कुशल मन ही मन ख़ुश होकर बोला: आंटी, आप इतनी सुंदर हो आपको तो स्कूल के सब बच्चे भी पसंद करते है, और आपको मा- मतलब पसंद मतलब लाइक करते हैं,


प्रिया मेम : तू अभी मा- क्या कह रहा था?

कुशल : कुछ नहीं आंटी, वो बस ऐसे ही मुँह से निकल गया था,

प्रिया मेम : तू माल बोलना चाहता था क्या?

कुशल : आंटी, सॉरी , वो मेरा मतलब है कि बस ऐसे ही कुछ लड़के बोलते हैं,

प्रिया मेम उसकी आँखों मेंदेखते हुए बोली: तू क्या बोलता है? मैं माल हूँ?

कुशल : नहीं आंटी मैं ऐसे कैसे बोल सकता हूँ, आपको,

अब प्रिया मेम को भी इन बातों में मज़ा आ रहा था और वो गरम हो रही थी, उसने अपनी छातियों को खुजाते हुए कहा: तो क्या मैं बेकार दिखती हूँ? माल नहीं लगती तेरे को?

कुशल का लंड झटके मारने लगा,उसका लंड पूरा खड़ा होकर एक तरफ़ से पैंट में तंबू सा बना लिया था, वो चाहता था कि आंटी उस तंबू को देख ले , वो खड़ा हुआ और बोला: आंटी आप सच में बहुत मस्त माल हो, और वो उसकी आँखो में झाँक कर बोला: अगर मैं अंकल होता तो आपको कभी अकेला नहीं छोड़ता,

प्रिया मेम का ध्यान अपने लंड पर ले जाने के लिए उसने अपने तंबू को दबाया और प्रिया मेम की आँखें उसके तंबू को देखकर हैरानी से फटी की फटी रह गयीं, इस छोटे से लड़के का इतना बड़ा हथियार ? अब उसके निपल्ज़ कड़े हो गए और उसकी बुर में जैसे चिटियाँ चलने लगी , वह कई सालो से चुदीं नहीं थी और उसने बुर में ऊँगली भी काफ़ी दिनों से नहीं की थी, इस लिए उसकी बुर गीली होने लगी, उसका हाथ अपने आप ही बुर के पास चला गया और वो उसे दबाने लगी,

प्रिया मेम को अच्छी तरह से अपने तंबू का दर्शन कराकर कुशल हाथ धोकर आया और आकर प्रिया मेम के पीछे खड़ा हो गया, अब उसने प्रिया मेम के कंधे सहलाना शुरू किया और बोला: आंटी आपके गर्दन की मालिश कर दूँ? मम्मी कहती हैं कि मैं बहुत अच्छी मालिश करता हूँ,

उसका स्पर्श पाकर प्रिया मेम सिहर उठी और बोली: मुझे भी हाथ धोने दे ना, बाद में मालिश कर लेना, अब कुशल उसके कंधों के ऊपर से झुक कर ऊपर से उसकी छातियों के बीच में देख रहा था, और बेशर्मी से मुस्करा रहा था और बोला: आंटी आपके ये तो बहुत मस्त हैं, मुझे लगता है कि मैं इनको छूकर देखूँ कि ये असली हैं या नक़ली?

प्रिया मेम हँसते हुए बोली: चल हट बदमाश कहीं का, कुछ भी बोल रहा है?

जब कुशल ने देखा कि वो ग़ुस्सा नहीं हुई है तो उसने रिस्क लेकर उसके साइड में आकर अपने तंबू को छूकर कहा: आंटी, आप भी इसको ग़ौर से देख रही थी, बताइए ना ये कैसा लगा आपको?

प्रिया मेम हड़बड़ा गई और बोली: चलो हटो मुझे हाथ धोने दो,

कुशल इस अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था, उसने और बड़ा रिस्क लिया और प्रिया मेम का उलटा हाथ पकड़कर अपने पैंट के तंबू पर रख दिया और उसके पंजे को अपने पंजे से पकड़कर अपने लंड को दबाने लगा, 

प्रिया मेम की सिसकारि निकल गई, वो बोली: आह ये क्या कर रहे हो, करण आ जाएगा ? छोड़ो मेरा हाथ,

कुशल समझ गया कि वो गरम हो चुकी है वो बोला: आंटी, वो तो 2 घंटे बाद आएगा ना , आप इसको सहलाओ ना प्लीज़,

अब उसने अपना हाथ प्रिया मेम की मैक्सी के ऊपर से उसके चुचि पर रखा और हल्के से दबा दिया, प्रिया मेम की बुर तो जैसे मस्ती से पानी ही छोड़ने लगी, अब वो भी थोड़ा बेशर्मी से उसके लंड को ऊपर से नीचे तक महसूस करने लगी, अब वो समझ गयी कि ये लंड बहुत लंबा और मोटा है, और उसे बहुत मज़ा देगा, उधर अब कुशल ने भी अपना दोनों हाथ उसकी छातियों पर रखा और उनको दबाने लगा और ऊपर से ही निपल्ज़ को मसल कर उसने प्रिया मेम के अंदर के औरत को जगा दिया और उसे चुदायी के लिए तय्यार करने लगा,

तभी प्रिया मेम बोली: कुशल हटो एक मिनट ,

कुशल एक अच्छे बच्चे की तरह हट गया और प्रिया मेम उठकर हाथ धोकर आइ और खाना सम्भालने लगी, 

कुशल ने झूठे बर्तन हटाने में उसकी मदद की और किचन में अचानक उसको बाहों में लेकर उसके होंठों को चूमने लगा, प्रिया मेम ने थोड़े से विरोध के बाद जैसे सम्पर्पण कर दिया, अब कुशल के हाथ उसकी छातियों से होता हुआ उसके चूतरों तक पहुँचा जिनको वो ज़ोर से दबाने लगा,

प्रिया मेम का हाथ उसके लंड पर पहुँच गया और वह भी उसे मसलने लगी, अचानक प्रिया मेम को होश आया और वह बोली: चलो छोड़ो तुम मेरे कमरे में चलो मैं अभी आती हूँ ,

कुशल अच्छे बच्चे की तरह चुप चाप चला गया, इधर प्रिया भी थोड़ी देर बाद अपने कमरे की तरफ चल पड़ी 

प्रिया जैसे ही अपने रूम में आई तो देखा कि कुशल बड़े प्यार से बेड पर बैठा उसका इंतज़ार कर रहा था, प्रिया को एक पल के लिए लगा कि उसके पति भी उसका ऐसा ही इंतज़ार करते थे अक्सर, अपने पति की याद आते ही प्रिया मेम की आँखों में हल्का सा पानी आ गया 

मेम को इस तरह से देख कुशल बोला –“ क्या हुआ मेम, आप रो क्यूँ रही है, क्या आप ये सब नही करना चाहती, अगर नही चाहती तो मुझे बता दीजिये मैं चला जाऊंगा यहाँ से” यह कहकर कुशल बेड से खड़ा हुआ और बाहर जाने के लिए बढने लगा,

पर तभी प्रिया मेम ने उसे पकड़ा और तुरंत बेड पर साथ लेकर बैठ गयी और खुद अपने मुंह को कुशल की बाँहों में देकर सुबकने लगी 

कुशल –“क्या हुआ मेम बताइए ना”

प्रिया मेम –“कुछ नही कुशल, बस तेरे अंकल की याद आ गयी वो भी ऐसे ही अक्सर बेड पर बैठकर मेरा इंतज़ार करते थे, उनके जाने के बाद जो जिन्दगी में जैसे चुदाई वीरान ही हो गयी, पर आज तूने मेरी सोयी हुई वासना को दोबारा जगा दिया, मुझे छोड़ कर मत चले जाना तू भी”

कुशल अब प्रिया मेम को अपनी ओर खींचकर बोला: आंटी प्लीज़ चुप हो जाओ, मैं हूँ ना, अब वो अपने हाथ से उसके गाल को सहला कर उसके आँसू पोंछने लगा, कुशल की नाक में उसके सेंट और उसके बदन की मादक गंध भी समा रही थी, ,वो उसको चुप कराते हुए उसके पेट पर से ले जाकर उसकी चिकनी कमर पर एक हाथ रखा और प्रिया मेम को अपनी ओर खिंचा और गाल सहलाकर बोला: आंटी पहले आप चुप हो जाओ, अब प्रिया मेम की एक चूची उसकी बाँह से पूरी सट गयी थी, उसका सिर कुशल के कंधे पर था, प्रिया मेम की आँखें बंद थीं, उसके होंठ खुले थे मानो कह रहे हों मुझे चूस लो, 

कुशल का लौड़ा अब पूरी तरह से सख़्त हो चुका था, वो अब उसके ऊपर झुका और उसकी आँख को चूमा और बोला: आंटी प्लीज़ रोना बंद करो, मैं कुछ ना कुछ करूँगा, फिर वो उसकी दूसरी आँख को भी चूमा , अब वो नीचे आकर उसके गाल चूमा और बोला: मेरे रहते आपको कभी आँसू नहीं बहाना पड़ेगा, फिर वो कसकर प्रिया मेम को अपनी बाँह में भींच लिया और प्रिया मेम भी उसकी छाती में अपना मुँह घुसा दी, अब कुशल उसकी नंगी पीठ को सहला रहा था जहाँ ब्लाउस के नाम पर एक छोटा सा पट्टा भर था, अब वो उसके कंधे को चूमने लगा, प्रिया मेम भी मस्ती में आ गयी थी और उसने कुशल के पैंट में तने हुए तंबू को साफ़ साफ़ देख लिया था और अंदाज़ा कर लिया था कि इसका तगड़ा हथियार है, अपना हाथ प्रिया मेम ने उसकी जाँघ पर रखा जो कि तंबू के काफ़ी पास ही था, 
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Reply
12-05-2018, 02:32 AM,
#74
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
[b][b][b]कुशल का अब अपने आप पर क़ाबू नहीं रहा और वो प्रिया मेम के सिर पर हाथ रखकर उसके मुँह को ऊपर किया और अपने होंठ उसके होंठ से चिपका दिया, प्रिया मेम आऽऽऽऽह कर उठी, 
कुशल उसे और ज़ोर से जकड़ के उसके होंठ और गाल चूमने लगा, प्रिया मेम अब भी विरोध कर रही थी, तभी कुशल ने उसकी छातियों पर अपना मुँह घुसेडा और उनको मैक्सी के ऊपर से ही चूमने लगा, 
प्रिया मेम: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ धीरे दबाओ ना दुखता है, 
अब कुशल जोश में आकर उसकी एक चूचि को ब्लाउस के अंदर हाथ डालकर निकाल लिया और उसे दोनों हाथों से दबाने लगा, वो बोला: आऽऽऽऽऽह क्या मस्त चूची है आंटी आपकी, , मैं हमेशा चाहता था कि ऐसी बड़ी बड़ी चूची दबाऊँ और चूसूँ, अब वो उसकी चूची चूसने लगा, निपल में जीभ भी रगड़ने लगा, 
अब प्रिया मेम चिल्लाई: आऽऽऽऽऽऽह मरीइइइइइइइ , उइइइइइइ , 
कुशल अब दूसरी चूची भी ब्लाउस से बाहर निकाला और उसे भी दबाया और चूसा, प्रिया मेम उसकी जाँघ दबाए जा रही थी, कुशल ने मस्ती में आकर उसका हाथ अपने तंबू पर रख दिया, प्रिया मेम ने भी बिना देर किए उसे मूठ्ठी में भर लिया और उसको दबाने लगी, अब कुछ बचा नहीं था छिपाने को,
प्रिया मेम: आऽऽऽऽऽह मजा आ रहा है मेरी जान 

प्रिया मेम बिस्तर पर पीठ के बल लेटीं थी और उसकी चूचियाँ अब मैक्सी के बाहर थी और उनपर कुशल का गीला थूक लगा हुआ था ,
जिसे कुशल चूसने लगा, कुशल के हाथ अब उसकी चूचियों पर आ गए थे , वो बोला: आऽऽऽऽऽह आंटी कितने सॉफ़्ट और वो अब अपनी क़मीज़ उतारा और फिर बेल्ट खोला और पैंट भी उतार दिया , चड्डी में से उसके लौड़े का उभार देख कर प्रिया मेम की बुर गीली होने लगी, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त हथियार है - वो सोची, चड्डी में सामने का हिस्सा थोड़ा सा गीला हुए जा रहा था उसके प्रीकम से, 

अब वो उसके ऊपर आया और उसके होंठ चूसने लगा, प्रिया मेम भी अब उसका साथ देने लगी, कुशल ने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली और प्रिया मेम उसको चूसने लगी, फिर कुशल ने अपना मुँह हटाया और खोल दिया अनुभवी प्रिया मेम ने अपनी जीभ उसके मुँफ़र्म है आपके दूध, म्म्म्म्म्म चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है, फिर वो उसकी चूचि चूसते हुए उनको दबाने लगा, 

प्रिया मेम: आऽऽऽऽऽह बेएएएएएएटा क्या माआऽर ही डालेगाआऽऽ, बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ , 

कुशल अब नीचे आया और उसके चिकने पेट को चूमा और नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा, 

प्रिया मेम: उइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽ कर रहे हो, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ , 

अब कुशल और नीचे खिसका और उसने पूरी मैक्सी को खोल दिया, अब सिर्फ एक पेटीकोट ही बचा था उसके शरीर पर, प्रिया मेम ने अपनी क़मर उठाकर उसको मैक्सी निकालने में उसकी मदद की, पेटिकोट में वो बहुत मस्त दिख रही थी, अब उसने उसकी नाभि को जीभ से चाटा और पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसको नीचे करने लगा, प्रिया मेम ने भी पूरी बेशर्मी से अपनी क़मर उठाकर उसे निकालने में पूरी मदद की, वो आज पैंटी नहीं पहनी थी, उसकी जाँघें चिपकी हुईं थीं ,उसकी बुर का थोड़ा सा ऊपरी हिस्सा ही दिखाई दे रहा था, वो उसकी जाँघों को सहलाने लगा और फिर उसकी पेड़ू को सहलाया, प्रिया मेम हम्म कर उठी, अब उसने जाँघों को फैलाया और प्रिया मेम ने इसमे भी सहयोग किया,अब मदमस्त जाँघों के बीच कचौरी की तरह फूली हुई बुर और उसकी फाँक की ग़हरी लकीर साफ़ दिखाई पड़ रही थी और उसके लौड़े ने और प्रीकम छोड़ दिया ,

कुशल अब उसकी जाँघों को चूमने लगा और फिर उसकी बुर को भी नाक डालकर सूँघा वो बोला: आंटी आऽऽऽह क्या मस्त गंध है आपकी बुर की, वो उसे सहलाता रहा,फिर वो उसकी फाँकों को फैलाया और वहाँ के गुलाबी हिस्से को देखा और उसमें जीभ डाला और उसे जीभ से मानो चोदने लगा, प्रिया मेम: आऽऽऽऽऽऽऽह कर उठी, 
अब वो उसे चाटने लगा, प्रिया मेम की सिसकियाँ निकलने लगी, अब उसने उसकी जाँघों को और ऊपर उठाया और उसकी गाँड़ के छेद को देखकर मस्ती से ऊँगली से सहलाया और एक ऊँगली अंदर किया , उसने देखा कि ऊँगली आसानी से अंदर चली गयी, वो अब दो ऊँगली डाला और वो भी आराम से चली गयीं, वो बोला: आंटी जी आपकी गाँड़ बहुत मस्त है और खुली हुई है, क्या अंकल गाँड़ भी मारते थे ? 

प्रिया मेम: आऽऽऽंह अच्छा लग रहा है बेटा, हाँ मारते थे,

कुशल : आंटी आपके चूतर तो मुझे भी बहुत पसंद हैं , वो उनको चूमकर बोला और फिर जीभ से गाँड़ भी कुरेदने लगा, प्रिया मेम: आऽऽऽऽऽहाह , 

कुशल मुँह उठाकर बोला: आंटी आज आपकी मारूँगा दूसरे राउंड में ठीक है ना? 

प्रिया मेम: आऽऽऽह मार लेना बेटा आऽऽऽऽह अब बुर तो मार पहले हाय्य्य्य्य्य्य्य, बहुत खुजा रही है,

कुशल अब उसने उसकी क्लिट को जीभ से छेड़ा तो वो उछल पड़ी और उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करके उसके मुँह को हटाई और बोली: वहाँ हमला किया तो एक मिनट में ठंडी पड़ जाऊँगी झड़कर, 

कुशल मुस्कुराते हुए उठा और आकर उसके बग़ल में लेटा और उसकी चूचियाँ दबाकर चूसने लगा, अब प्रिया मेम भी उठी और उसके ऊपर आ कर उसके निपल्ज़ को दाँत और जीभ से छेड़कर उसे मस्त कर दी फिर नीचे जाकर उसके पेट और नाभि को चूमते हुए उसकी चड्डी तक पहुँची, उसने वहाँ नाक रखी और प्रीकम को सूँघा और फिर उसकी जीभ से चाटकर मस्ती में आकर बोली: आऽऽऽंब तुम्हारी गंध भी बहुत मस्ती ले आने वाली है बेटा, अब वो उसकी चड्डी निकाली और उसका लौड़ा देखकर बोली: आऽऽऽऽहहहह क्या मस्त हथियार है उगफफ कौन ना पागल हो जाए इसको देखकर, म्म्म्म्म्म्म, कहकर वो उसको पूरी लम्बाई में चुमी और चाटी, फिर उसके एक एक बॉल को भी चूम और चाट कर मस्ती से बोली: उम्म्म्म्म्म्म बहुत मस्त है ये , पुच पुच करके उसको चुमी, अब वो अपनी जीभ लेज़ाकर उसके लौड़े के सुराख़ को चाटी और प्रीकम को खा गयी और फिर अब वो उसके सुपाडे को मुँह में लेकर चूसने लगी, 

कुशल अब मस्ती में आकर बड़बड़ाया: आऽऽऽऽऽऽह आंटी आऽऽऽऽऽहहह क्या चूसती हो आऽऽऽऽऽप, वाआऽऽऽऽऽऽऽहहह,
प्रिया मेम अब उसको डीप थ्रोट दे रही थी, कुशल अब कमर उछालकर अपना लौड़ा उसके मुँह को नीचे से चोदने लगा, प्रिया मेम अब मज़े से उसको चूसे जा रही थी,
अब प्रिया मेम उठी और आकर उसके ऊपर बैठी और उसके होंठ चूसने लगी, वो भी उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ दबाने लगा, अब वो अपनी कमर उठाई और उसके लौड़े को पकड़कर अपनी बुर के मुँह पर रखी और नीचे दबाकर अपनी बुर में उसको अंदर करते हुए उइइइइइइइ कहकर अपनी कमर को पूरा दबा दी और लौड़े को जड़ तक अपने अंदर कर लिया, अब वो अपनी कमर उछालकर उसे चोदने लगी, कुशल भी नीचे से धक्के मारकर ह्म्म्म्म्म्म कहते हुए मस्तीसे उसका साथ देने लगा, 

प्रिया मेम : आऽऽऽऽऽहहह बेएएएएएटा आऽऽऽऽऽऽऽह फाऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओ मेरीइइइइइइइइ बुर, 

कुशल : ह्म्म्म्म्म्म आंटी क्या मज़ा आ रहा है, प्रिया मेम की कमर हिले जा रही थी, फिर वो बोली: बेटा अब मैं थक गयी हूँ, तुम ऊपर आ जाओ, 

कुशल उसको अपनी बाहों में भरकर उसे लिए हुए ही पलट गया और ख़ुद ऊपर आ गया, अब वो उसकी टाँगों को अपने कंधे पर रखकर बुरी तरह से चोदने लगा , अब तो कमरा प्रिया मेम की आऽऽऽऽऽह उइइइइइइइ ऊम ऊम ऊम की आवाज़ों से भर गया, पलंग की चरमराहट अब अपनी चरम सीमा पर था जो बुरी तरह से हिल रहा था, 

प्रिया मेम सोची कि जवान लड़के की चुदाई अलग ही होती है, उफफफफ क्या ताक़त है इस लड़के में, फिर वो चिल्ला कर उइइइइइइइइइ मॉआऽऽऽऽ कहकर झड़ने लगी, कुशल भी ह्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा, अब वो आकर उसकी बग़ल में लेट गया, अब वो प्रिया मेम के गाल चूमकर बोला: आंटी आपको पता नहीं है कि आपने आज मुझे कितना मजा दिया है 

कुशल ने प्रिया मेम को लुढ़का कर पेट के बल लिटाया और वो उसके मस्त चूतरों को सहलाया और दबाया , फिर वो उनको चूमने लगा, अब प्रिया मेम ख़ुद ही चौपाया बन गयी और अपनी गाँड़ बाहर कर उसे चोदने का मानो आमंत्रण दी, प्रिया मेम बोली: बेटा थोड़ा सा क्रीम लगा ले, और डाल दे, सच बहुत खुजा रही है, 

कुशल मस्त होकर क्रीम लेकर उसकी गाँड़ में और अपने लौड़े पर लगाया और उसके चूतरों को फैलाया और अपने लौड़े को उसके छेद में लगाकर धक्का दिया, अब लौड़ा उसकी गाँड़ में धँसता चला गया, प्रिया मेम आऽऽऽहहह मरीइइइइइइइ चिल्लाई, 

कुशल अब मस्ती में आकर उसकी गाँड़ मारने लगा, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मज़ाआऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ है, वो अब पिस्टन की तरह आगे पीछे होकर उसकी गाँड़ मार रहा था प्रिया मेम की चीख़ें निकल रही थी, कुशल हाथ नीचे कर के उसकी चूचियाँ दबाए जा रहा था , जल्दी ही प्रिया मेम भी आऽऽऽंहहह करके अपनी बुर की क्लिट मसलने लगी, फिर उसने कुशल का हाथ पकड़ा और उसे अपनी क्लिट में रगड़ने लगी, कुशल अब ख़ुद उसकी क्लिट रगड़ने लगा और गाँड़ में धक्के भी मारता रहा, जल्दी ही दोनों चिल्ला कर झड़ने लगे, 

वो हँसती हुई अपनी मैक्सी उतार दी और उसका भरा हुआ जिस्म ब्रा और पैंटी में देखकर वो मस्त हो गया, अब प्रिया मेम भी उसकी छाती को चूमकर उसके निपल्ज़ को जीभ से चाटी और नीचे उसके पेट और नाभि को चाटते हुए उसकी चड्डी को सूँघने लगी, 

उसकी चड्डी में लगे प्रीकम को उसने जीभ से चाटा और फिर उसकी चड्डी निकाल कर उसके बड़े लंड को प्यार से सहलाकर चूमने लगी, उसने चमड़ी पीछे करके उसका सुपाड़ा बाहर निकाला और उसको चाटते लगी 

कुशल को लगा कि वो अभी ही झड़ जाएगा , सो उसने उसे अपने ऊपर खींचकर उसके होंठ चूसे और ब्रा का हुक खोलकर उसकी ब्रा निकाल दिया, अब उसके नंगे मोटे दूध को वो पागलों की तरह दबाने और चूसने लगा,

फिर उसका हाथ उसकी पैंटी के अंदर गया और उसके चूतरों को वह मसलने लगा, कितने गोल बड़े नरम चूतर थे , उसकी आह निकल गई,के पेशाब के छेद को चाटने लगी, फिर उसने पूरा सुपाड़ा ही मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी,

अब उसने प्रिया मेम को बोल: आंटी मेरी सवारी कीजिए ना,

प्रिया मेम हँसते हुए उसके ऊपर आ गई और अपनी पैंटी उतारकर उसके ऊपर बैठकर उसका लंड पकड़कर अपनी बुर के छेद में लगाकर अंदर कर लिया और फिर एक ही धक्के में वो पूरा लंड निगल गई, उसके मुँह से हाय्य्य्य्य निकली और बोली: हाऊयय्यय क्या मस्त मोटा लंड है तेरा,

कुशल : हय्य आंटी आपकी फुद्दी तो बड़ी ही टाइट है कसम से,

प्रिया मेम : आह आह ह्म्म्मम्म इतने सालो से चूदी नही हूँ ना इसिलए, पर अब तो मैं रोज़ चुदुंगी इस लंड से, बोल चोदेगा न मुझे,

कुशल – “हय्य मेम मैं तो बचपन से आपको चोदने के सपने देख रहा रहा हूँ, अब तो मैं रोज़ आपकी बुर की चुदाई करूँगा पक्का”

प्रिया मेम भी मस्ती से उसके लंड पर उछलकर चुदायी करते हुए बोली: आह बेटा क्या चोद रहा है, तू तो पक्का चुदक्कड है रे हरामी आह हाय्य्य्य्य्य , और वो ज़ोर से चोदते हुए बोली: फाड़ दे अपनी आंटी की बुर आऽऽझहह क्या लंड है रे तेरा हाय्य्य्य्य्य्य मैं गईंइइइइइइइइ, और वो झड़ने लगी, कुशल भी नीचे से धक्का मारतेहुए बोला: आंटी आह तेरीइइइइइइइइइइइ बुर बड़ी गरम है , ले मेरा माऽऽऽऽऽऽऽल्ल्ल्ल्ल लेएएएएएएएएए , और वो भी झड़ गया,


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12-05-2018, 02:33 AM,
#75
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
[b][b][b][b]कुशल और प्रिया मेम बेड पर लेट कर मस्ती से नंगे सोये पड़े थे, कुशल का वीर्य प्रिया मेम की चुत की गहराइयों से निकल कर अब उसकी जांघों से होता हुआ बेडशीट पर गिरने लगा था, प्रिया मेम तो मस्ती में आकर खुद ही अपने सन्तरो को दबाये जा रही थी

प्रिया मेम –“वाह मेरे राजा, तूने तो आज सच में बरसो की प्यास बुझा दी मेरी, तेरा एहसान मैं कैसे चुकाउंगी”

कुशल –“बस आप इसी तरह हमेशा अपनी ये प्यारी सी चुत और गांड मुझे देते रहना, मुझे तो और कुछ नही चाहिए” कुशल अपने मुरझाये से लंड पर हाथ फिराते हुए बोला

प्रिया मेम –“अरे ये भी कहने की बात है क्या भला, अब तो मेरे जिस्म पर तेरा और तेरे इस लंड का पूरा पूरा हक़ है, तू जब चाहे इसका मजा ले सकता है, वैसे एक बात पुछु”

कुशल –“हाँ, बोलिए ना आंटी”

प्रिया मेम –“तेरे चोदने के जबरदस्त तरीके से लगता है तूने पहले भी किसी की मारी है”

कुशल –“आप तो अन्तर्यामी हो मैडम, हाँ मैंने पहले भी चुत मारी हुई है, और गांड भी मार चूका हूँ”

प्रिया मेम –“कौन है वो खुशनसीब, बताना जरा”

कुशल –“सॉरी मेम, मैं आपको बताना तो चाहता हूँ, पर शायद अभी सही वक्त नही है, पर आप चिंता मत कीजिये, वक्त आने पर मैं सबसे पहले आपको ही बताऊंगा, ये प्रॉमिस है मेरा”

प्रिया मेम –“चलो ठीक है, पर अपना प्रॉमिस याद रखना, भूल ना जाना”

कुशल –“जरुर मेम”

प्रिया मेम –“मेरा अच्छा बच्चा”

कुशल –“वैसे मेम, क्या मैं आपसे कुछ पुछ सकता हूँ, आप बुरा तो नही मानेगी”

प्रिया मेम –“हाँ हाँ पूछो ना, अब भला तुमसे क्या छुपाना, तूने तो सब कुछ देख लिया है मेरा”

कुशल –“मेम, आपने अपने पति के अलावा और किस किस का लंड लिया है”

प्रिया मेम –“सच कहूँ, तो मेरे पति के अलावा ये पहला लंड है जो मेरी चुत में गया है”

कुशल –“वाह, मेम मैं तो सच में धन्य हो गया ये सुनकर, ये देखिये मेरा लंड आपकी बात सुनकर दोबारा खड़ा हो गया है”

प्रिया मेम –“हट बदमाश, ये तो हमेशा खड़ा रहता है, पर अभी नही, अब करण के आने का वक्त हो चला है”

कुशल –“क्या मेम, आपने तो पूरा मजा ही खराब कर दिया, अच्छा मेम आपने अंकल के अलावा किस किस का लंड देखा है बिलकुल करीब से”

प्रिया मेम –“तेरा.....और....और......”

कुशल –“और किसका मेम”

प्रिया मेम –“और क....क्र...करण का.....”

कुशल –“क्या....कब...कैसे........”

प्रिया मेम –“अरे कैसे क्या, वो एक दिन मैं गलती से बाथरूम में सीधा घुस गयी, तो अंदर करण अपने लंड पर हाथ कसके जोर जोर से मुठ मारे जा रहा था, तभी अचानक मैंने देख लिया, बस और किसी का नही देखा तुम दोनों के अलावा”

कुशल –“वैसे मेम, करण का लंड कैसा लगा आपको, मतलब कितना बड़ा है”

प्रिया मेम –“ये कैसी बाते करवा रहा है तू मुझसे, भला कोई माँ अपने बेटे के लंड के बारे में बात करती है क्या” प्रिया बोल तो रही थी पर उसे इन बातो से अजीब सी उत्तेज़ना महसूस हो रही थी, और ये चीज़ कुशल भी जानता था क्यूंकि वो तो खुद कई बार अपनी मोम को चोद चूका था 

कुशल –“मेम, प्लीज़ बताइए ना, कैसा लगा आपको करण का लंड, कितना बड़ा था?”

प्रिया मेम –“हय्य.....तू...भी ना......सच में बहुत ही प्यारा लंड था रे उसका.....हा लम्बाई में तुझसे छोटा था पर अपने बाप से तो बड़ा ही था.....हाँ और मोटा तो तेरे ही बराबर का था रे........”

कुशल –“आपको पसंद आया ना मेम अपने बेटे का लंड” कुशल प्रिया मेम को गरम किये जा रहा था

प्रिया मेम –“हय्य...बहुत पसंद है रे...पर क्या करूं ...वो तो मेरा बेटा है......”

कुशल –“तो मैं भी तो आपके बेटे जैसा ही हूँ, अगर मैं आपको चोद सकता हूँ तो वो क्यूँ नही...वैसे भी मेम आपको पता है क्या कि करण को भी मेरी तरह बड़ी उम्र की ओरते ही अच्छी लगती है”

प्रिया मेम –“सच्ची......” प्रिया की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी थी

कुशल –“और नही तो क्या मेम, उसे तो आप मतलब आपकी उमर की औरतें ही पसंद आती है ज्यादा”

प्रिया मेम –“हय्य.....पर मैं तो उसकी माँ हूँ ना, क्या वो मेरे बारे में भी ऐसा ही सोचता है” प्रिया की उत्तेजना अब पल प्रतिपल बढती ही जा रही थी 

कुशल –“हो सकता है मेम, क्या आपने कभी उसे आपको घूरते हुए या, आपकी गांड या बूब्स की तरफ देखते हुए पकड़ा है”

प्रिया मेम –“अरे हाँ, ये तो मैंने कई बार नोटिस किया है कि जब भी मैं झुकती हूँ, झाड़ू वैगरह लगाने के लिए तो मुझे ऐसा लगता है मानो करण मेरे ब्लाउज के अंदर झाँकने की कोशिश करता है, और मेरे पीछे मुड़ते ही शायद मेरी गांड भी ताड़ता है”

कुशल –“इसका मतलब साफ है मेम, कि करण आपकी चुदाई करना चाहता है”

ये सुनकर तो प्रिया की उत्तेजना आसमान तक चढ़ गयी, उसने तुरंत कुशल के लंड को अपने हाथो से पकड़ा और पलक झपकते ही उसे अपने मुंह में ले लिया 

कुशल के लंड को ऐसी गर्माहट मिलने की ही देर थी कि वो फिर से अपनी ओकात में आने लगा, कुशल अब जोर लगाकर प्रिया मेम के सर को पकड़ा और अपने लंड को उसके मुंह में जोरदार तरीके से अंदर बाहर करने लगा

थोड़ी देर तक ऐसे ही प्रिया मेम के मुंह को चोदने के बाद कुशल ने प्रिया मेम को पकड़ा और उसे सीधा लेटा दिया और खुद उसके दोनों टांगो के बिच आ गया 

फिर एक सेकंड में उसने अपने तने हुए लंड को पकड़ा और सीधा निशाना लगाकर प्रिया मेम की चुत में पेल दिया , और फिर बस ताबड़तोड़ धक्के पेलने शुरू कर दिए 

कुशल (धक्के लगाते हुए ) –“प्रिया मेम.... हय्य्य्य.......ये सोचो कि आपकी फुद्दी मैं नही बल्कि आपका बेटा करण मार रहा है”

प्रिया मेम –“ उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह श्ह्ह्ह्ह्ह
गलपप्प्प्प्प्प गलपप्प्प्प्प्प गलपप्प्प्प्प्प्प
आराम्म्म्ममममम सीईई अहह
उःन्ह्ंहंहंहंह्न
बेटेयाआया नहियीईईईई अन्न्‍णणन् उःन्णणणन् मुझे छोड़ दीईईई
श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
उफफफफफफफ्फ़
आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह खा जाओ मेरी चूत पूरी पी जाओ ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह करण मेरे राजा बेटा और जोर से चोदो आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अपनी मोम की चुत आह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,
हाऽऽऽऽऽऽऽयय्यय मजाऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ रहाऽऽऽऽऽ है”

फिर कुशल ने प्रिया मेम को अपनी गोद में खींच कर उसकी टांगों को अपनी गोद के दोनों ओर किया और प्रिया मेम ने भी अपनी गाँड़ उठाकर अपनी बुर के मुँह में कुशल के टनटनाते लौड़े को रखा और धीरे से उस पर बैठने लगी, अब प्रिया मेम ने पूरा नीचे होकर कुशल का का मोटा लौड़ा अपनी बुर में निगल लिया 

कुशल ने उसके दोनों चूतरों को पकड़ा और उसकी कमर को उछालकर अपने लौड़े पर दबाकर चुदाई करने लगा, प्रिया मेम भी हाऽऽऽऽय करके अपनी गाँड़ उछालकर उसके लौड़े पर ऊपर नीचे हो रही थी, कुशल ने अपनी एक ऊँगली में थूक लगाया और उसकी गाँड़ में डाल दिया, वो आऽऽऽऽऽऽह कर उठी और भी ज़ोर ज़ोर से चुदाई करने लगी, उसकी टाइट बुर में उसका मोटा लौड़ा जैसे फँस सा रहा था, कुशल ने महसूस किया कि बेटे के नाम से ही प्रिया मेम और भी ज्यादा मस्ती में आकर चुदाई करने लगी है,

कुशल सोच रहा था कि सच में प्रिया मेम की फुद्दी बहुत टाइट थी, कुशल भी अब मस्ती से नीचे से धक्के मारने लगा और इधर प्रिया मेम की सिसकारियाँ निकलने लगीं, 

कुशल –“मम्मी कैसा लग रहा है अपने बेटे के लंड से चुद कर”

प्रिया मेम –“हय्य्यय्य....मजा आ रहा है करण बेटा, बस ऐसे ही चोद अपनी मम्मी को, कब से प्यासी है तेरी मम्मी पर तू तो देखता ही नही, हय्य्य .....आज तेरे लंड से चुदकर मैं तो निहाल ही हो गयी हूँ रे....हाययय...आह्ह्ह्ह....और जोर से...........चोद दे मुझे करण बेटा.......चोद अपनी चुद्दक्क्ड मम्मी को...”

कुशल –“हाँ....मम्मी......अब तो मैं तुझे रोज़ ऐसे ही चोदुंगा...बोल चुदेगी अपने बेटे से.....रोज़”

प्रिया मेम –“हाँ चुदुंगी.......रोज़ चुदुंगी....सुबह शाम रात....जब तू चाहेगा तेरी मम्मी चूत लेकर हाज़िर हो जाएगी......बस तू ऐसे ही चोदना मुझे.....मेरे बेटे...”

कुशल को ये देखकर मजा आ रहा था कि आखिर प्रिया मेम अपने बेटे से चुदने के लिए राज़ी तो हुई, अब बस करण के मन की परख करनी थी उसे कि करण क्या अपनी मम्मी को चोदने के लिए तैयार है, अगर ऐसा हुआ तो वो दोनों मिलकर प्रिया मेम की चुत और गांड साथ मारेंगे 
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12-05-2018, 02:33 AM,
#76
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
[b][b][b][b][b]ये सोचते ही कुशल के लंड ने प्रिया मेम की चुत के अंदर ही एक और ठुमकी ली, और अब कुशल के धक्को की रफ्तार और ताकत और भी ज्यादा तेज़ हो गये 

प्रिया मेम से ये धक्के बर्दास्त ना हुए और कुछ ही मिनटों में वो आह्ह्ह्हह्ह्म मेरे बेटे चोद दे मुझे .......इइइइइइइइइइइइ आऽऽऽऽऽऽऽऽऽ करके जोरदार तरीके से झड़ने लगी 

कुशल भी अपना लौड़ा उछालकर उसकी बुर में झड़ गया, अब प्रिया मेम जब उसके लौड़े के ऊपर से उठी तो उसकी जाँघों से उसका और कुशल का काम रस बह रहा था,

अब कुशल और प्रिया मेम बेड पर लेट कर सुस्ताने लगे

कुशल –“तो मेम, आखिर कार आपने मान ही लिया कि आप अपने बेटे से चुदना चाहती है,क्यों?”

प्रिया मेम –“ह्म्म्म.....तू बड़ा ही शैतान है रे....आखिर कार मेरे मुंह से निकलवा ही लिया सब कुछ.....मुझे तो लगता है कि तूने अपनी मोम को भी नही छोड़ा होगा, देखा नही कैसे मुझे मम्मी मम्मी बोल कर मस्ती से चोद दिया”

कुशल –“सच कहूँ तो मेम, मुझे तो अपनी मोम भी बड़ी पसंद है, अगर मोका मिला तो मैं तो उन्हें भी चोद दूंगा” कुशल ने आधा ही सच प्रिया मेम को बताया, वो सोच रहा था कि एक बार करण प्रिया मेम को चोद ले उसके बाद ही बताना सही रहेगा 

प्रिया मेम –“सच में तू बड़ा ही हरामी है रे, पर तेरा लंड सच में बड़ा मस्त है, एक बार अपनी मोम को दिखा दे, फिर देखना वो भी सारा दिन इसे अपनी चुत में लेने के लिए तडपेगी”

कुशल –“कोशिश जारी है मेम”

प्रिया मेम-“सही है बेटा लगा रह, पर एक बार अपनी मोम की चुत मिलने के बाद मुझे मत भूल जाना”

कुशल –“अरे मेम भूल तो आप जाओगी एक बार करण का लंड अपनी चूत में लेने के बाद, फिर तो बस वो और आप दिन रात दंगल करोगे बेड पर...हा हा हा...”

प्रिया मेम –“काश तेरा कहना सच हो जाये पर मुझे तो ये नामुमकिन लगता है”

कुशल –“अरे मेम, आप चिंता क्यूँ करती है, मैं करण को अपने आप सम्भाल लूँगा, देखना कुछ ही दिनों में उसका लंड आपकी फुद्दी की गहराइयों में जा चूका होगा, पर मुझे उसका क्या इनाम मिलेगा”

प्रिया मेम –“अरे मैं तुझे और क्या दूँ, मैंने तो अपना पूरा जिस्म ही तुझे सोंप दिया पगले, चल तू ही बता क्या चाहता है, मैं प्रॉमिस करती हूँ कि तू जो मांगेगा मैं पूरा करूंगी चाहे तू कभी भी अपना इनाम मांग लेना, पर ...”

कुशल –“पर क्या....”

प्रिया मेम –“पर तुझे भी अपना वादा पूरा करना होगा”

कुशल –“कोनसा वादा” कुशल मजाक करते हुए बोला

प्रिया मेम –“अरे करण और मेरा....”

कुशल –“क्या करण और आपका क्या.....” कुशल मुस्कुराते हुआ बोला 

प्रिया मेम –“तू मेरे साथ मजाक मत कर, तू सब जानता है ....” प्रिया शर्माती हुई बोली 
कुशल –“अरे मेम आप बताओ ना प्लीज़, मुझे आपके मुंह से सुनना है”

प्रिया मेम –“क्या कुशल, प्लीज़.....मुझे शर्म आती है.....तू सब जानता है” ये कहकर प्रिया मेम ने अपने सर को कुशल की बाँहों में डाल लिया 

कुशल –“प्लीज़ मेम बता दो न एक बार” 

प्रिया मेम –“लगता है तू मुझे आज पूरा बेशर्म बना कर ही छोड़ेगा, तो सुन, प्लीज़ मेरा और मेरे बेटे का टांका भिड़ा दे, कुछ ऐसा चक्कर चला कि उसका लंड मेरी चुत को नसीब हो जाये.....अब खुश...अब तो करेगा न पूरी मेरी शर्त”

कुशल –“हम्म्म्म...आप चिंता मत करो आंटी...अब तो मैं कुछ भी करके आपकी इस प्यारी सी चुत का मिलन आपके बेटे के लंड से करवा कर ही दम लूँगा” ये कहकर कुशल ने अपनी एक ऊँगली प्रिया मेम की चुत में डाल दी 

कुशल की इस हरकत से प्रिया मेम चिहुंक उठी, पर बोली

प्रिया मेम –“अब नही कुशल, करण आने वाला ही होगा...”

कुशल को भी प्रिया मेम की बात सही लगी, 


थोड़ी देर बाद उन दोनों ने अपने कपड़े पहने और बाहर आकर नार्मल तरीके से बैठ गये क्यूंकि उन्हें पता था कि अब करण के आने का समय हो चूका है और तभी कुछ देर में डोर बेल बजी 
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12-05-2018, 02:34 AM,
#77
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
[b][b][b][b][b][b]प्रिया मेम ने जाकर दरवाज़ा खोला तो गेट पर करण खड़ा था

प्रिया मेम –“अरे करण बेटा, आओ, बड़ी देर लगा दी आने में तुमने”

करण –“वो मोम, रस्ते में ट्रैफिक में फंस गया था, इसलिए आने में थोड़ी देर हो गयी”

प्रिया मेम –“चल अब अंदर आ, देखता नही बारिश में कितना भीग गया है, अंदर चलकर कपड़े चेंज कर ले, तेरा फ्रेंड कुशल भी आया है तुझसे मिलने”

करण फटाफट घर के अंदर आ गया, वहां हॉल में कुशल सोफे पर बैठा हुआ था, उसे देखते ही करण बड़ा खुश हुआ

करण –“अरे कुशल, यार बड़े दिनों बाद याद आई मेरी, वरना तू तो छुट्टियों में मुझे भूल ही गया था बिलकुल”

कुशल –“भाई, याद तो तूने भी नही किया, न कोई फ़ोन ना कोई कोई मेसेज, मैं कम से कम मिलने तो आ गया तुझसे”

करण –“अच्छा, चल मेरे कमरे में चलते है, वहां बहुत सी बाते करनी है तेरे साथ”

ये कहकर करण कुशल को अपने कमरे की तरफ लेकर चल पड़ा, आगे करण और पीछे कुशल

कुशल ने पीछे मुडकर देखा तो प्रिया मेम उसकी तरफ बड़ी ही नशीली आँखों से देख रही थी, और उन्होंने आँखे मटका कर कुशल को इशारा किया, कुशल ने भी अपनी जीभ होटों पर फिरा दी,

फिर प्रिया मेम किचन में चली गयी, और कुशल करण कमरे में आ गये और अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया

करण –“साले कमीने, इतने दिन बाद याद आई है तुझे मेरी, कहाँ रंडी चोदने में बिजी था साले”

कुशल –“अबे चूतिये, मैं तो तुझसे मिलने आ तो गया, तू बता तू किधर मुंह मारने में व्यस्त था जो मेरी याद ही नही आई”

करण –“अरे भाई, ऐसी कोई बात नही, मैं तो बस यूँ ही टाइम पास कर रहा हूँ, जब से स्कूल की छुट्टियाँ पड़ी है, बहनचोद टाइम ही नही कटता मेरा तो, तू बता साले, कोई लोंडिया मिल गयी या अभी भी अपना हाथ जगन्नाथ, हा हा हा......”

कुशल –“भाई, अभी भी अपना आसरा तो हाथो का ही है, पर सपने में लोंडिया जरुर चोद लेता हूँ...हा हा हा....”

करण- अबे किसे चोद दिया सपने में, कही अपनी माँ को तो ही नही चोद दिया हा हा......” करण ठहाके लगाते हुए बोला, उन दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि वो किसी भी प्रकार की बात एक दुसरे को बोल देते थे 

कुशल- साले मेरी माँ का तो पता नही पर एक बार तो मैंने सपने मे तेरे घर में आकर अपना लंड खूब तबीयत से हिलाया था

करण- “किसको सोच कर?”

कुशल- तेरी मोम को सोच कर और किसको

करण- लगता है आज तू सुबह से ही किसी की चूत के दर्शन करके आया है जो सुबह से ही तुझे चूत दिखाई दे रही है

कुशल- सॉरी यार बुरा मत मानना मै तो मज़ाक कर रहा था

करण- अबे तेरी बात का बुरा मान कर मैं कर भी क्या लूँगा, तेरा कोई भरोसा नही है, तू मेरी मोम को ढंग से देख लेगा ना तो उसे भी चोदने के बारे मे सोचने लग जाएगा, आख़िर हरामी जो ठहरा 

कुशल- “नही यार, तेरी मोम तो बूढ़ी हो गई होगी, उसकी चूत मार कर क्या मजा आएगा” कुशल करण के मन की बात जानना चाहता था, इसलिए जानबुझकर ऐसी बाते कर रहा था,

करण- “अबे साले, तूने अगर मेरी मोम को देखा होता तो ऐसी बात नही करता”

कुशल- “अच्छा तो क्या तेरी मोम अभी तक जवान है”

करण- “तू बैठ मैं पहले अपनी सिगरेट लेकर आता हूँ, फिर आराम से बैठ कर बाते करेगे, आज मेरा लंड भी सुबह से परेशान कर रहा है”

कुशल- “क्यो तुझे तेरी मोम की गदराई फूली हुई चूत याद आ गई क्या...हा हा हा” कुशल हँसते हुए बोला 

करण- “अबे तू एक बार अगर मेरी मोम की मस्त चूत और मोटी गान्ड देख लेगा ना तो पागल हो जाएगा कसम से”

कुशल- “अबे दिखा चाहे ना दिखा, तू अपने मुँह से ही बता दे, मुझे तो उसमे ही मज़ा आ जाएगा, और साले तेरा लंड तो पेंट के अंदर ही खड़ा हो रहा है साले”

करण- “अरे यार क्या बताऊ, तूने आते ही मेरी मोम की फूली हुई चूत की बात करके मेरा लंड खड़ा कर दिया है”

कुशल- “क्या तेरी मोम की चूत इतनी ज़्यादा मस्त और फूली हुई है, तूने देखी है क्या कभी”

करण- “ हाँ यार अब तुझसे क्या छुपाऊ, दरअसल मैंने हमारे बाथरूम के दरवाजे में छोटा सा छेद कर रखा है, इसलिए कई बार उन्हें नहाते हुए देखता हूँ छुप छुप कर, हाय...मेरी मोम की चूत देख कर तो बुड्ढे का लंड भी झटके मारने लगे, क्या गदराई चूत है उनकी और उनकी मोटी गान्ड देख कर तो तू खड़े-खड़े ही उनकी गान्ड मे अपना लंड फांसने को तैयार हो जाए” करण ने अपने लंड पर हाथ मसलते हुए कहा 

कुशल- “क्या सच में में तेरी मोम की गांड मोटी और गदरायी है” कुशल को समझ आ गया था कि जल्द ही वो अब करण का लंड प्रिया मेम की चुत में डालने में सफल हो जाएगा क्यूंकि आग तो दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी 

करण- “अरे अगर तू मेरी मोम को पूरी नंगी देख लेगा ना तो तेरे लंड से खड़े-खड़े ही पानी निकल जाएगा, मेरी मोम की गदराई जवानी उसकी मोटी गान्ड और उसकी मोटी-मोटी चिकनी जांघे, हाय मैं तो अपने लंड को अपनी मोम को पूरी नंगी सोच कर ही हिलाता हूँ, ऐसी जबरदस्त गान्ड और ऐसी फूली हुई चूत मैंने आज तक नही देखी”

अब कुशल उसको क्या बोलता, वो तो अभी कुछ देर पहले ही उस मस्त चूत और गांड की सवारी करके आया है

कुशल- “अच्छा ये बता तेरी मोम की उमर कितनी है”

करण- “अरे यार कम से कम 45 की होगी, पर उसकी गदराई जवानी आज भी इतनी कसी हुई है, उसके भारी-भारी चुतड तो तेरे दोनो हाथो मे भी नही समा सकते और एक दम गोरी गान्ड है उसकी और उसकी चुत उफ्फ्फ्फ़ क्या बताऊ, आज भी वो अपनी चुत के बाल जब साफ कर लेती है तो उसकी चुत इतनी गोरी और इतनी फूली हुई नज़र आती है कि दिल करता है की अपनी मोम की चूत मे अपना मुँह रख कर अपने मुँह से उसकी फूली हुई चूत को दबाता ही रहू, उसकी गदराई जंघे देख कर तो मैं पागल हो जाता हूँ, इतनी चिकनी और इतनी मोटी-मोटी गदराई जंघे है कि अपने दोनो हाथो मे भर-भर कर दबोचने मे मज़ा आ जाए, उसके दूध इतने मोटे-मोटे और कसे हुए है कि क्या बताऊ यार”

कुशल -अच्छा करण प्रिया मेम कोनसी पेंटी पहनती है, बता न यार”

करण- “अरे वो तो अपनी भारी गान्ड के उपर इतनी छोटी सी पेंटी पहनती है कि उसकी पेंटी तो उसकी मोटी गदराई गान्ड की दरार मे ही फस जाती है और उसके भारी-भारी चुतडो के पाट पूरे नंगे ही नज़र आते है, और तो और जब मेरी मोम की चूत उसकी गुलाबी पेंटी मे कस जाती है तब भी मेरी मोम की चूत पेंटी के उपर से भी इतनी फूली हुई नज़र आती है कि अपने हाथो के पूरे पंजो से पकड़ कर दबोचने पर भी मेरी मोम की फूली हुई चूत पकड़ मे ना आए”

कुशल- अच्छा करण जब तेरी मोम अपनी मोटी गदराई जाँघो को फैला लेती है, तब उसकी चूत कैसी नज़र आती है”

करण- “सबसे बड़ी बात तो यह है कि मेरी मोम हमेशा अपनी चूत के बाल साफ करके उसे एक दम चिकना रखती है और जब वह अपनी मोटी-मोटी गदराई जाँघो को फैला लेती है तो उसका चूत पूरा भोसड़ा नज़र आने लगती है, उसकी चूत की फूली हुई मोटी-मोटी फांके बहुत ही गदराई हुई लगती है और जब वह घोड़ी बन कर खड़ी होती है तो उसकी फूली हुई गदराई फांके बहुत ही खूबसूरत लगती है, 

ऐसा लगता है जैसे पीछे से उसकी मस्तानी फूली हुई चूत की मोटी-मोटी फांको को फैलाकर अपनी मोम की चूत को खूब कस-कस कर चाट लू, मेरी मोम की चूत और मोटी गान्ड को जब से देखा है मैं तो पागल हो गया हूँ यार, मेरा लंड दिन रात अपनी मोम की चूत और गान्ड चोदने के लिए तड़पता रहता है, मैं तो दिन रात अपनी मोम को अपनी कल्पना मे नंगी करके खूब कस-कस कर चोदता हू और यह फील करता हूँ कि कैसे मेरी मोम अपने नंगे बदन को मुझसे चिपका-चिपका कर मुझसे अपनी चूत और गान्ड मराएगी, जब मैं अपनी मोम को अपने सपनो मे पूरी नंगी करके खूब कस-कस कर चोदता हूँ ना तो मुझे बहुत मज़ा आता है और मैं तबीयत से
झड़ता हूँ”

कुशल- “करण पर यार प्रिया मेम थोड़ी सी मोटी नही है क्या” कुशल करण के दिल और लंड को आग को और भी ज्यादा भड़का रहा था 

करण- “अबे साले ,तू उसे मोटी नही गदराई गांड बोल, उनका गुदाज उभरा हुआ पेट उसकी गहरी नाभि, उसके भारी-भारी मोटे-मोटे चुतड, उसकी गदराई चिकनी और खूब मोटी जंघे और सबसे खूबसूरत चिकनी फूली हुई चूत, उफ्फ कुशल मेरे भाई मैं तो अभी ही झड़ जाऊंगा...हय्य्य....भले ही मेरी मोम थोड़ी भारी बदन की है लेकिन उसे चोदने मे मज़ा आ जाए, उसे जब पूरी नंगी करके उसके नंगे गदराए बदन पर चढ़ कर उसे चोदो तो मज़ा आ जाए, तू पिछली बार कह रहा था ना कि करण तेरी फॅंटेसी क्या है तू किसको नंगी सोच कर अपने लंड को सहलाता है, तू किसकी चूत को अपनी कल्पना मे चोद-चोद कर झाड़ता है, तो दोस्त वह मेरी मोम है जिसको अपने कल्पना मे मे कई बार चोद चुका हू”
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12-05-2018, 02:34 AM,
#78
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
[b][b][b][b][b][b][b]कुशल- “यार करण जब तू अपनी मोम की मोटी-मोटी गदराई गान्ड देखता है तो तुझे कैसा फील होता है”

करण- “मुझे लगता है की पीछे से जाकर उसकी मोटी गान्ड मे अपना लंड फसा कर इस कदर अपनी मोम की मोटी और गदराई गान्ड मारू की वह मस्त हो जाए, मेरी मोम की गान्ड है भी इतनी मोटी और गदराई हुई की उसे खूब कस-कस कर अपने मोटे लंड से चोदना पड़े तब जाकर उसे कुछ मज़ा आएगा, तू सोच कुशल मेरी उस समय क्या हालत होती होगी जब मे अपने घर जाता हू और मेरी मोम दिन भर के स्कूल के बाद मेरे सामने अपनी मोटी-मोटी गान्ड मटकाती हुई घूमती है, तब तो दोस्त ऐसा लगता है कि अभी अपनी मोम की साडी उठा कर उसकी मोटी गान्ड मे अपना लंड फसा कर खूब कस-कस कर अपनी मोम की मोटे-मोटे चुतडो को चोद दू, मेरा तो लंड दिन भर उसकी गदराई जवानी, मोटे-मोटे फैले हुए चुतड और फूली हुई चूत को देख-देख कर खड़ा रहता है, उपर से अपनी छोटी सी पेंटी भी मेरे सामने ही बाथरूम मे टांग देती है तब बस यही कल्पना करता हू कि यह छोटी सी पेंटी मेरी मोम की मोटी गान्ड और फूली हुई चूत से कैसे कसी रहती होगी”

कुशल- “फिर तो करण तेरा मन अपनी मोम को पूरी नंगी करके खूब कस-कस कर चोदने का करता होगा?”

करण- “हा यार ऐसा लगता है कि दिन रात अपनी मोम को नंगी करके चोदता ही रहू”

कुशल- “पर तूने अपनी मोम को पहली बार पूरी नंगी कब देखा था?”

करण- “अरे एक दिन मैं अपने रूम मे लेटा हुआ था तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन की ओर पानी लेने गया तो देखा की मोम का रूम अंदर से बंद था, मैं सोचने लगा कि मोम दिन मे ही रूम लॉक करके क्या कर रही तब मैंने दरवाजे के के की होल से अंदर देखा ,जैसे ही अंदर झाँक कर देखा मेरे तो होश उड गये,

कुशल- क्यो ऐसा क्या देख लिया तूने

करण- अरे मेने देखा मेरी मोम पूरी नंगी खड़ी होकर अपनी चूत के बाल साफ कर रही थी, उसकी मोटी और गदराई जवान फूली हुई चूत और मोटी-मोटी गान्ड देख कर मे तो पागल हो गया और मेरा लंड अपनी मोम की नंगी मदमस्त जवानी को देख कर खड़ा हो गया, वह अपनी चूत के एक-एक बाल को बड़े प्यार से साफ कर रही थी और उसकी चूत से जैसे-जैसे बाल साफ हो रहे थे उसकी गोरी चूत और ज़्यादा फूली हुई नज़र आने लगी, उसकी फूली हुई चूत के मोटी-मोटी फूली हुई फांके और उसकी चूत का कटाव साफ नज़र आ रहा था और उसके पेडू और गदराए पेट के उठाव ने मुझे पागल कर दिया था, जब वह थोड़ा घूम गई तो उसकी गदराई मोटी गान्ड देख कर तो मेरा दिल करने लगा कि अभी जाकर अपनी मोम की गदराई उठी हुई मोटी गान्ड मे अपने लंड को कस कर पेल दू, जब मेरी मोम के चूत के बाल पूरे साफ हो गये तो वह अपनी फूली हुई गदराई चूत को अपने हाथ से सहलाते हुए बचे हुए बालो को ढूँढने लगी, उसकी चूत के फूले हुए हिस्से को देख कर मेरे मुँह मे पानी आ गया और मुझे ऐसा लगने लगा कि काश ऐसी फूली हुई चूत को चूमने का मोका मिल जाए तो ऐसी रसीली चूत को रात भर नंगी करके चाटूं

कुशल- “आगे बता फिर क्या हुआ” कुशल गर्म होते हुए बोला

करण- “फिर उस दिन मेने अपनी मोम की नंगी गदराई जवानी को ध्यान करते हुए, उसकी फूली हुई चूत और मोटी गान्ड को कस-कस कर चोदने की कल्पना करते हुए तबीयत से मूठ मारी और तू यकीन नही करेगा अपनी मोम को पूरी नंगी करके चोदने की कल्पना करके जब मेने अपना लंड हिलाया तो मुझे उस दिन सबसे ज़्यादा मज़ा आया, उस दिन के बाद मे अपनी मोम को पूरी नंगी देखने के मोके ढूढ़ने लगा और मेने फिर उसे कभी बाथरूम मे कभी उसके रूम मे कई बार नंगी देखा और अपनी मोम को पूरी नंगी करके चोदने का सोच-सोच के खूब लंड हिलाया,

कुशल- “कभी तूने अपनी मोम को चोदने की कोशिश नही की”

करण- “नही यार मेरी मोम बहुत सख़्त है, इसलिए मेरी कभी हिम्मत ही नही पड़ी, हाँ किसी ना किसी बहाने से कभी अपनी मोम की मोटी गान्ड कभी उसके मोटे-मोटे दूध, और कभी उसकी गदराई जाँघो को ज़रूर छू कर मज़ा लिया है पर चोदने का कभी मोका नही मिला और ना ही मेरी कभी हिम्मत ही पड़ी,

कुशल- “अबे यह बात तू मुझे पहले बता देता तो मैं कुछ ना कुछ आइडिया तो तुझे ज़रूर दे देता कि कैसे बात आगे बढे”

करण- “रहने दे यार, तेरे आइडिया मुझे किसी भी दिन मरवा देंगे, मैं तो अपनी मोम को चोदने की कल्पना करके लंड हिलाकर ही खुस हो लेता हू, मुझे कोई रिस्क नही लेना है”

कुशल- “खैर जैसी तेरी मर्ज़ी पर तूने अपनी मोम की चूत और गान्ड को जब से देखा होगा तब से तुझे भारी बदन वाली औरतो को ही चोदने का मन करता होगा”

करण- “अरे मुझे तो अपनी मोम को ही चोदने का मन करता है लेकिन क्या करू, अपनी मोम की चूत मारने के लिए गान्ड मे दम भी तो होना चाहिए, अपनी मोम को फसा कर चोदना कोई मज़ाक तो नही है”

कुशल- “तू ठीक कहता है, लेकिन अगर तू कोशिश करता तो शायद सफल भी हो जाता, क्योकी औरतो को भी मोटे-मोटे लंड की बहुत चाह होती है, तूने अपना मोटा लोडा अपनी मोम को दिखा दिया होता तो शायद वह भी तेरी और ध्यान देने लगती”

करण- “तू कहता तो ठीक है पर ऐसी स्थिति भी तो बनना चाहिए कि मैं यह सब कर सकता”

कुशल- “अरे यार ज़यादा कुछ नही तो अपनी मोम की फूली हुई चूत को एक बार सोते हुए ही अपनी मुट्ठी मे भर के तो देखता तुझे नही मालूम ऐसी गदराई औरतो की चूत को अपनी मुट्ठी मे भर कर मसल्ने मे कितना मज़ा आता है”

करण- “अरे डियर अपनी मोम की चूत को तो मैं कई बार जब वह गहरी नींद मे होती थी तब अपनी मुट्ठी मे भर कर दबोचने क्या, एक बार तो उसकी साडी सोते हुए पूरी उपर हो गई थी और उसने पेंटी भी नही पहनी हुई थी और शायद झाँट के बाल भी उसने एक दिन पहले ही बनाए थे, तब तू बात नही मानेगा मेने अपनी मोम की फूली हुई चूत पर अपने मुँह को रख कर जब उसकी गदराई मुलायम चूत को चूमा तो मेरा लंड अपना पेंट फाड़ कर बाहर आने को तड़प उठा, अपनी मोम की फूली हुई चूत की मादक गान्ड ने मुझको पागल कर दिया था, मुझसे रहा नही गया और जब मेने हिम्मत करके अपनी मोम की फूली हुई चूत की मोटी-मोटी गदराई फांको को अलग करने की कोशिश की वह एक दम से करवट ले कर लेट गई और मेरी तो गान्ड ही फॅट गई लेकिन किस्मत से मे बच गया तब से ज़्यादा कुछ नही करता हू, जब भी देखता हू कि वह गहरी नींद मे है तब कभी उसकी मोटी गान्ड को सहला लेता हू या फिर उसकी गदराई फूली हुई चूत पर अपना हाथ फेर लेता हू और फिर जाकर मूठ मार लेता हू”

कुशल- “हाय तुझे तो बड़ा मज़ा आया होगा प्रिया मेम की फूली हुई चुत को अपने हाथो मे भर कर दबोचने मे”

करण- “हा यार ऐसा मज़ा तो आदमी को पागल कर देता है”

कुशल –“चिंता मत कर मेरे भाई, हर कुत्ते का दिन आता है, तेरा भी आएगा, जरुर कभी ना कभी तू प्रिया मेम की फूली हुई चुत में अपना लंड डाल पायेगा”

करण –“तेरे मुंह में घी शक्कर मेरे भाई”

कुशल –“अच्छा, यार अब मैं चलता हूँ, घर पर कुछ काम भी है, बाय”

करण –“ओके, बाय, जल्दी वापस आना”

करण फिर अपने कमरे के बाथरूम में घुस गया और कुशल उसके कमरे से बाहर आ गया, बाहर प्रिया मेम सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी, कुशल उसके पास गया और उनको अपनी बाँहों में लेते हुए मस्त किस करने लगा,

प्रिया मेम –“क्या कर रहे हो मेरे राजा, अभी करण घर पर है”

कुशल –“आपको एक खुसखबरी देनी है”

प्रिया मेम –“क्या”

कुशल –“अगर मेरा प्लान कामयाब हुआ तो जल्द से जल्द आपके बेटे का लंड आपकी मस्त चुत में फिट होगा”

प्रिया मेम –“सच्ची....काश ऐसा ही हो”

कुशल –“चलो ठीक है मेम अब मैं घर जाता हूँ, घर वाले वेट कर रहे होंगे, बाय मेम”

प्रिया मेम –“बाय मेरे राजा, जल्दी आना वापस, मैं और मेरी निगोड़ी चुत तुम्हारा इंतज़ार करेगी”

फिर कुशल वापस अपने घर के लिए निकल गया 
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12-05-2018, 02:37 AM,
#79
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
[b][b][b][b][b][b][b][b]अब हम कहानी को वापस कुशल के घर की तरफ मोड़ते है, सिचुएशन काफी बदल चुकी है पर हम वहीं से स्टार्ट करते है जहाँ छोड़ा था, यानि कि जब कुशल अपनी मोम से विदा लेके करण के घर की तरफ निकल चूका था,
स्मृति किचन के कामों में लग चुकी थी, इधर पंकज भी थोडा फ्रेश होने के बाद रेस्ट कर रहा था

आराधना अपने कमरे में कपड़े बदलकर बेड पर जाकर लेटी हुई थी, उसके दिलो दिमाग में सिर्फ और सिर्फ पंकज का चेहरा और लंड घूम रहा था, वो बार बार उन लम्हों को याद कर रही थी जब वो और उसके पापा दो दिल एक जान हो गये थे, और उसके पापा का प्यारा सा लंड उसकी चुत में जाकर बड़ी ही तबियत से उसकी चुदाई कर रहा था, आराधना तो ये सोचकर बड़ी ही चुदासी होने लगी, उसके रोम रोम में चिंगारी सी फूटने लगी, बदन में अंगड़ाईयां आने लगी और वो बेड पर करवटें लेने लगी, उसका मन तो कर रहा था कि वो बस अभी जाकर अपने पापा के लंड को अपनी चुत में घुसा ले और फिर जमकर चुदाई का दौर चले पर वो भी जानती थी कि ये सम्भव नही है 

काफी देर ऐसे ही सोचने के बाद उसने सोचा क्यूँ ना थोड़ी देर नहा लिया जाये, ताकि थोडा अच्छा फील हो 

वो टॉवल लेकर बाथरूम की तरफ बढ़ने लगी कि तभी उसे याद आया कि उसके चुत और टांगो पर अब हल्के हल्के बाल उग आये है, और आराधन अपनी चुत का अब बहुत ज्यादा ख्याल रखती थी, और उसे बिलकुल चिकनी रखना चाहती थी,

उसने अपने बैग से वीट की क्रीम निकाली और बाथरूम में आ गई, उसने अपनी नाइटी को घुटनों तक उठाया और धीरे धीरे अपनी टांगों पर वीट क्रीम लगाने लगी, उसकी गोरी चिकनी टांगो पर हल्के रेशम जैसे छोटे छोटे बाल उग आए थे, 

थोड़ी देर वीट लगाए रखने के बाद उसने धीरे धीरे सारे बाल हटा दिए, ट्यूबलाइट की दुधिया रोशनी में उसकी गोरी सूंदर टांगे और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी, 

टांगो की सफाई के बाद अब बारी थी उसकी अनछुई गुलाबी चुत की, आराधना ने धीरे धीरे अपनी नाइटी को अपने पैरों की गिरफ्त से आज़ाद कर दिया, अब वो सिर्फ अपनी खूबसूरत छोटी सी गुलाबी पैंटी में थी, उसके सुडौल नितम्ब उस छोटी सी पैंटी में उभरकर सामने आ रहे थे, जिन्हें देखकर आराधना ने शर्म के मारे अपनी आंखें ही बन्द कर ली, 

धीरे धीरे उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी, उसका शरीर गर्म होने लगा और उसकी अंगुलिया उसकी पैंटी में से रास्ता बनाते हुए उसकी चुत के दाने को मसलने लगी, 

" उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस"
ओह्हहहहहह पा्ह्ह्ह्हपा फ़क मी पापाआआआ,, अब आप मेरी इस प्यारी सी चुत को मत रुलाओ पापाआआआ,
उन्ह्ह्ह्ह देखिए कैसे मेरी ये गुलाबी चुत आपके उस लम्बे लन्ड को याद करके टेसुए बहा रही है,ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़ इसे और मत तड़पाओ ........ इस निगोड़ी चुत को अपने लंड से भर दीजिये पापाआआआ.......बुझा दीजिये इसकी प्यास, उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस , मैं आपके उस काले लम्बे लंड को अपनी चुत में लेकर रहूंगी.....ओह्हहहहह ....पापाआआआ आपके लिए मैं कुछ भी करूंगी पापाआआआ.....आइए अपनी आराधना के पास, बुझा दीजिये मेरी चुत की आग को पापाआआआ" 

आराधना के हाथ अब तेज़ी से अपनी चुत के दाने को मसल रहे थे, वो पहली बार खुल कर चुत और लंड जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही थी, अब उसकी उत्तेजना चरम पर पहुंचने वाली थी, उसकी अंगुलिया सरपट उसकी चुत की सड़क पर दौड़ी जा रही थी

"उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस"
ओह्हहहहहह पा्ह्ह्ह्हपा मैं गईईईई आहहहहहहहह पापाआआआ"
कहते हुए आराधना के बदन ने एक जोर की अँगड़ाई ली और उसकी चुत से फवारा फुट पड़ा, उसका पानी उसकी चुत से निकलकर उसकी सुडौल जांघो को गीला कर रहा था, उसकी अंगुलिया अभी भी उसकी चुत में फंसी थी, उसने धीरे से अपनी चुत के पानी को अपनी अंगुलियो पर लपेटा और फिर स्लो मोशन में अपने मुंह के अंदर लेकर जीभ से चाटने लगी, 

"उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह पापाआआआ कब दोबारा इन अंगुलियो की जगह आपका वो प्यार लंड होगा, मैं आपके प्यारे लन्ड को अपने मुंह मे लेकर दोबारा खूब चुसुंगी, उसे खूब प्यार करूंगी, उसे जन्नत के दर्शन करवाउंगी, आ जाइए न पापाआआआ"

झड़ने के बाद आराधना की उत्तेजना थोड़ी शांत हुई, पर अपने पापा को पाने की हवस अब और भी ज्यादा उग्र हो चुकी थी, 

अब उसे याद आया कि उसे तो अपनी प्यारी सी मुनिया को सजाना भी है, अपनी फुलकुंवारी के बालों की सफाई कर उसे बिल्कुल चिकनी चमेली बनाना है, उसने वीट क्रीम उठाई और अपनी मुनिया के बालों की सफाई करने में मशगूल हो गई,

सफाई करने के बाद उसने बाथ लिया,

कुछ देर बाद जब आराधना नहा चुकी थी, तो उसने पास रखे तौलिए की तरफ हाथ बढाया और अपना तरोताजा हुआ जिस्म पोंछने लगी. तौलिया बेहद नरम था और आराधना का बदन वैसे ही नहाने के बाद थोड़ा सेंसिटिव हो गया था, सो तौलिये के नर्म रोंओं के स्पर्श से उसके बदन के रोंगटे खड़े हो गए व उसकी जवान छाती के गुलाबी निप्पल तन कर खड़े हो गए. आराधना को वो एहसास बहुत भा रहा था और वह कुछ देर तक वैसे ही उस नर्म तौलिए से अपने बदन को सहलाती खड़ी रही. 

फिर उसने तौलिया एक ओर रखा और अपने अन्तवस्त्रों की तरफ हाथ बढ़ाया, आज उसने एक बिल्कुल महीन पारदर्शी कपड़े की ब्लू पैंटी पहनी और हल्के आसमानी कलर की सी ब्रा...

उसने आज नाइटी की बजाय ब्लैक लिंगरी पहन ली, उसकी लिंगरी उसकी सुडौल झांगो से ऐसे कसकर चिपकी हुई थी, कि मानो उसके झुकते ही लिंगरी का कपड़ा तार तार हो जाएगा, ध्यान से देखने पर उसकी लिंगरी के अंदर से उसकी ब्लू पेंटी की लाइन साफ देखी जा सकती थी,

वो अभी बस तैयार ही हुई थी कि तभी उसके कमरे के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी, आराधना ने कमरा खोला तो सामने प्रीती अपनी चिर परिचित मुस्कान के साथ खड़ी थी,

आराधना –“अरे प्रीती, ऐसे खड़ी खड़ी मुस्कुरा क्यूँ रही है, चल अंदर आजा, बहुत सी बाते करनी है तेरे साथ”

प्रीती और आराधना कमरे में आ गयी, और आकर बेड पर बैठ गयी, इससे पहले कि आराधना कुछ कहती,प्रीती बिच में ही बोल पड़ी 

प्रीती –“दीदी, आप दिल्ली क्या गई आपके तो तेवर ही बदल गये है” प्रीती तीखी मुस्कान के साथ बोली

आराधना –“तेवर...कैसे तेवर?” आराधना थोड़ी सी घबरा गयी थी, उसे लगा कि कहीं इसे शक तो नही हो गया

प्रीती –“और नही तो क्या दीदी, जब गयी थी तब कैसी पुराने जमाने की मधु बाला की तरह गयी थी, बिलकुल ढके और पुराने फैशन के कपड़ो में, और अब जब आई हो तो मल्लिका शेरावत बनकर आई हो...हा हा हा” प्रीती हँसते हुए बोली 

आराधना –“हट पागल, मैं कहाँ चेंज हुई हूँ, वैसी ही तो हूँ जैसे गयी थी”

प्रीती –“कहाँ दीदी, झूट क्यूँ बोलती हो, अब तो आप पूरी माल लग रही हो कसम से, मन करता है कि...”

आराधना –“छुटकी तू बड़ी बदमाश हो गयी है आजकल, बहुत बड़ी बड़ी बातें करने लगी है.........वैसे..अम्मम्म....क्या....क्या मन करता है तेरा”

प्रीती –“रहने दो दीदी, अगर मैंने कुछ बोल दिया तो आप तो नाराज़ हो जाओगी मुझसे....”

आराधना –“अरे बोल ना, मैं नही होउंगी नाराज़”

प्रीती –“दीदी...आपको अभी देखकर मेरा मन कर रहा है कि अभी आपको बेड पर पटक कर जोरदार किस कर दूँ....और फिर....”

आराधना –“फिर....फिर,,,क्या” आराधना भी सुबह से ही काफी गरम थी, उसे प्रीती की ये बाते बहुत ही ज्यादा गरम किये जा रही थी, इसलिए उसे भी इन सब बातो में बड़ा मजा आ रहा था

प्रीती –“फिर ....दीदी...फिर्र्र्र....वो.......” प्रीती हकलाते हुए बोली

आराधना –“अरे बोल ना फिर क्या.....” आराधना उतावली होते हुए बोली 

प्रीती –“फिर बस मुझें नही पता .....आप नाराज़ हो जाओगी ” प्रीती मुंह फेरते हुए बोली हुए बोली

आराधना –“अरे बोल ना मैं पक्का तुझसे नाराज़ नही होउंगी”

प्रीती –“ठीक है, अगर आप नाराज़ नही होने का वादा करती हो तो मैं बोलती हूँ, सबसे पहले मैं आपको जमके किस करूंगी और फिर....फिर.....आपके वहां पर भी किस करूंगी” 
आराधना –“वहाँ ....कहाँ...साफ साफ बोल ना...क्या पहेलियाँ बुझा रही है....”

प्रीती –“आपकी चु....मतलब...पुसी पर...” प्रीती ने आखिर हिम्मत करके बोल ही दिया था, दरअसल जब से सिमरन के साथ उसने लेस्बियन सेक्स का मजा चखा था, उसका दिमाग उसे आराधना के साथ भी ऐसा ही करने के लिए उकसा रहा था, 

आराधना –“हय्य...रामम.......तुझे शर्म नही आती ...कुछ भी बोलती है.....लगता है बहुत बड़ी हो गयी है तू...अभी तुझे बताती हूँ....” ये कहकर आराधना खड़ी हुई

आराधना को इस तरह कहते देख प्रीती भी खड़ी होकर खिलखिलाते हुए बेड के चारो और भागने लगी, आराधना उसके पीछे पीछे उसे पकड़ने के लिए भागने लगी, 

और तभी आराधना ने अचानक प्रीती को पकड़ लिया और झट से बेड पर गिरा कर खुद उसके उपर आ गयी 


आराधना –"अब बोल प्रीती की बच्ची ...करेगी मेरे साथ ऐसा मज़ाक....बोल...''
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12-05-2018, 02:37 AM,
#80
RE: antervasna फैमिली में मोहब्बत और सेक्स
[b][b][b][b][b][b][b][b][b]वो झुककर उसके काफ़ी करीब आ चुकी थी...और इसी बीच अपने को छुड़वाने के लिए प्रीती ने अपनी गांड वाला हिस्सा हवा में उठा दिया..

आराधना को ऐसा लगा जैसे नीचे से कोई उसकी चूत में लंड डालने की कोशिश कर रहा है...क्योंकि दोनो की चूत इस वक़्त एक दूसरे बिलकुल ऊपर थी .

और अपनी चूत पर वो नमकीन सा दबाव महसूस करते ही उसकी चूत को पसीना आ गया...सेल्फ़ लुब्रीकेशन स्टार्ट हो गया अचानक उसमें से..और उसने भी प्रीती की लचीली कमर को पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ा और उसे ऊपर से ऐसे धक्के मारने लगी जैसे वो उसकी चुदाई कर रही हो.



प्रीती जो अभी तक हंस रही थी, आराधना के ऐसे झटकों को समझकर वो भी हँसना भूल गयी और सीरियस सी होकर उसने अपनी बहन से पूछा : "दी....दीदी ....ये...ये ...क्या कर रहे हो.....ऐसा तो....ऐसा तो लड़का और लड़की करते है...''

पर आराधना ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया...और अपने हाथ धीरे-2 उसने प्रीती की टी शर्ट में डाल दिए और ऊपर की तरफ खिसकाने शुरू कर दिए....

जैसे-2 आराधना की उंगलियाँ सरककर उपर की तरफ आ रही थी...वैसे-2 प्रीती के माथे पर पसीना बढ़ने लगा था...वो चाहकर भी उसके हाथों को रोक नहीं रही थी , आज से पहले उसने ऐसा कभी भी महसूस नही किया था...एक अजीब सा सेंसेशन हो रहा था उसे अपनी चूत पर...आराधना की घिसाई से...और अब उसकी उंगलियों की थिरकन से भी उसे गुदगुदी महसूस होने लगी थी..

उसने ब्रा नही पहनी हुई थी...और जल्द ही आराधना की दोनो हथेलियां उसके नन्हे उरोजों से आ टकराई और उसने बड़े ही प्यार से उसके नन्हे चूजों को अपने हाथों में भर लिया..

प्रीती की तो आँखे बंद हो गयी उस एहसास से जब आराधना ने होले से अपने हाथ के दबाव से उसकी ब्रेस्ट को दबाया..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....आआआआहह....दीदी......ये क्या कर रहे ........उम्म्म्ममममममममम....''

वो शिकायत थी या प्रश्न ...ये तो नही पता चल सका...पर प्रीती के हाथों ने अगले ही पल उपर की तरफ आते हुए टी शर्ट के उपर से ही आराधना के हाथों को पकड़ लिया..आराधना को लगा की वो हटाने के लिए कह रही है...पर वो धीरे से बुदबुदाई..

''दीदी.....प्लीज़ .......ज़ोर से दबाओ ना......ऐसे....''
और उसने अपने हाथों से आराधना के हाथों को जोर से दबा दिया...और आराधना के हाथों के नीचे उसकी नन्ही गोल गोल टमाटर भी उस दबाव में आकर नीचुड़कर रह गयी.

आराधना तो भभक उठी उसके बाद....उसने प्रीती की ब्रेस्ट को इतनी बेदर्दी से दबाना शुरू कर दिया की उसपर लाल निशान बनते चले गये...पर वो रुकी नही..

प्रीती के नुकीले निप्पल भी आराधना के जालिम हाथों को रोकने में असमर्थ थे..भले ही वो काँटों की तरह उभरकर ब्रेस्ट की रक्षा कर रहे थे पर ऐसे काँटों से शायद इस वक़्त आराधना को कोई असर ही नही पड़ रहा था...वो तो उन काँटों को भी बीच-2 में ऐसे मसल रही थी जैसे उनमे से दूध निकलने वाला हो..

दूध तो नही निकला..पर उसकी हर उमेठन से प्रीती की सिसकारियाँ ज़रूर निकल रही थी.



अब तो साफ़ हो चुका था की आज ये दोनो बहने अपनी सारी सीमाएँ लाँघने की तैयारी कर रही है..

आराधना तो अभी तक जैसे किसी नशे मे ये सब कर रही थी...ऐसा नशा जो उसके शरीर को अपने बस में करने में असमर्थ था...वो ये भी भूल चुकी थी की ये उसकी छोटी बहन है ...प्रीती तो अपनी जवानी के उस पड़ाव पर थी जहाँ उसे ऐसी बातों में मज़ा मिलता था जो सैक्स से जुड़ी हो...जवानी की दहलीज पर कदम रखने के बाद प्रीती में काफ़ी खुलापन आ चुका था. और अब उसे रोकने वाला कोई नही था.

जैसे ही आराधना के हाथों ने उसकी नन्ही ब्रेस्ट को छुआ...वो अपने हाथों के दबाव को उनपर डालकर और ज़ोर से दबाने की गुज़ारिश करने लगी आराधना से..

उसकी ब्रेस्ट ही उसके शरीर का सबसे सेंसेटिव हिस्सा थी..

इसलिए उसपर हाथ लगते ही वो भी अपनी सुधबुध खो बैठी और फिर शुरू हुआ उस छोटे से कमरे में दो बहनो के जिस्म के बीच उत्तेजना और सेक्स का वो सिलसिला जो शायद अब थमने वाला नही था.

प्रीती ने एक मादक सी अंगड़ाई लेते हुए अपनी टी शर्ट उतार कर दीवार पर दे मारी..

और उसकी साँवली और नन्ही छातियाँ देखकर आराधना के मुँह में पानी भर आया.



उसके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे...और उसके निप्पल के घेरे पर भी महीन से दाने उगे हुए थे..आराधना तो उसके निप्पलों की कारीगरी देखकर अचंभित रह गई...क्योंकि उसके दानों पर भी इतनी महीन कारीगरी नही की थी ऊपर वाले ने...वो बिल्कुल सादे से थे...पर उसकी ब्रेस्ट प्रीती के मुक़ाबले काफ़ी बड़ी थी..प्रीती की तो अभी -2 आनी शुरू हुई थी..पर एक बार जब ये भर जाएगी तो कयामत ढाएगी ये लड़की..

और ये तभी भरेंगी जब इनके उपर मेहनत की जाएगी...ये सोचते हुए आराधना का सिर उसकी छातियों पर झुकता चला गया..और अपने होंठ,दाँत और जीभ रूपी ओजरों से उसने प्रीती के बूब्स पर मेहनत करनी शुरू कर दी..
सबसे पहले अपनी गर्म जीभ से उसने प्रीती के निप्पल्स को छुआ....जो प्रीती के शरीर पर पहला स्पर्श था किसी लड़की का...ज़्यादातर लड़कियों के शरीर पर पहला स्पर्श किसी लड़के का होता है..पर लड़की के स्पर्श में भी कोई बुराई नही थी इस वक़्त...प्रीती ने एक तड़प भरी किलकारी मारते हुए अपनी दीदी के सिर को पकड़कर ज़ोर से दबा लिया अपनी छातियो पर...और चीख पड़ी वो..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.......आआआआआअहह दीदी............. ...उफफफफफफफफफफफफ फफफ्फ़.........क्या फीलिंग है ......माय गॉड ..... आआआआआआआअहह........ज़ोर से सक्क करो ना....दीदी............प्लीईईईईस......काट लो इन्हे......जोरों से...............दांतो से..................आआआआआआहह उूुुुउउफ़फ्फ़ एसस्स ऐसे ही................. उम्म्म्ममममममममममममममममममममम आआआआआआआहह दीदी..........यार .....कहाँ थी आप ......पहले क्यों नही किया ये सब..................उम्म्म्मममममममममममममम.......''

प्रीती तो भाव विभोर सी हुई जा रही थी अपने शरीर को मिल रहे इतने उत्तेजक मज़े को महसूस करते हुए...उसे पता था कि ऐसा ही कुछ होगा क्यूंकि वो तो पहले भी सिमरन के साथ ये मजा ले चुकी थी ..पर अभी जो कुछ भी हो रहा था उसके साथ वो उसे शब्दों मे व्यक्त कर ही नही सकती थी...ऐसा मज़ा ...इतना आनद....उत्तेजना का इतना संचार...ऐसी तड़प...उसने आज तक सोचा भी नही था कि अपनी ही दीदी के साथ सेक्स के खेल में इतना ज्यादा मज़ा आता है.

आराधना के सिर को कभी एक पर तो कभी दूसरी ब्रेस्ट पर वो लट्टू की तरह घुमा रही थी...उसकी लार से उसने अपनी छातियों की पुताई करवा ली...उसके लंबे और नुकीले निप्पल अपने पुर शबाब पर आ चुके थे...
वो बेड पर पड़ी हुई किसी मछली की तरह तड़प रही थी.
उसने अपनी नशीली आँखो से आराधना की तरफ देखा..और फिर अपने हाथ उपर करते हुए उसने आराधना की ब्रैस्ट को पकड़ लिया...

आराधना को तो ऐसा लगा जैसे उसके दिल की धड़कन रुक जाएगी..जब प्रीती ने उन्हे टी शर्ट के उपर से ही मसलना शुरू किया..

''उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उऊहह ...............आआआआआआअहह प्रीती ..................उम्म्म्ममममममममम...... .एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......''

और फिर धीरे-2 प्रीती ने उसकी टी शर्ट को उपर खिसकाना शुरू कर दिया...और अंत में आते-2 उसे उतार कर अपनी ही टी शर्ट के उपर फेंक दिया..आराधना ने तो ब्रा पहनी हुई थी...जिसे उसने खुद ही अपने हाथ पीछे करते हुए खोल दिया..



और जैसे ही उसके बूब्स प्रीती की नज़रों के सामने आए, अपने आप ही उसका मुँह उनकी तरफ खींचता चला गया..और उसने एक जोरदार झटके के साथ उसकी बड़ी सी ब्रेस्ट को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया..

किसी बच्चे की तरह वो उसके लम्बे निप्पल का दूध पीने लगी..
और अपनी नन्ही बहन को अपनी छाती से चिपका कर आराधना ने एक रस भरी सिसकारी मारकर उसे और अंदर घुसा लिया..

''आआआआआआआआआअहह ओह्ह्ह्ह माय बैबी .................. सकक्क मी......सक्क.....इट ......बैबी.....''

बैबी तो पहले से ही उत्तेजना के शिखर पर थी...अपनी बहन की दर्द भरी पुकार सुनकर वो और ज़ोर से उसके दानों को अपने पैने दांतो से कुतरने लगी...किसी चुहिया की तरह...और हर बार काटने पर आराधना के शरीर से एक अजीब सी तरंग उठ जाती..जिसे प्रीती सॉफ महसूस कर पा रही थी..
जब अच्छी तरह से उसने आराधना की ब्रेस्ट का जूस पी लिया तो वो तुरंत खड़ी हुई और उसने अपनी केप्री भी उतार कर फेंक दी...और अब वो आराधना के सामने बेशर्मों की तरह पूरी तरह से नंगी होकर बैठी थी..

प्रीती की देखा देखी आराधना ने भी अपना पायज़ामा उतार दिया...और अब वो दोनो नंगी बैठी थी एक दूसरे के सामने..
आराधना की नंगी ब्रैस्ट देखने में काफी यम्मी लग रही थी , वो प्रीती के मुकाबले काफी बड़ी भी थी,इसलिए आराधना उनको हाथों में लेकर खुद ही दबाने लगी, और अपनी मोटी छातियों में और उभार ले आई 

अपने अंतर्मन की आवाज़ सुनकर दोनो ने एक दूसरे की ब्रेस्ट को अच्छी तरह से चूस डाला था..पर अब क्या करे ,शायद यही सोचे जा रही थी वो दोनो...

उत्तेजना के नशे में प्रीती को सिर्फ़ वही याद आ रहा था की कैसे वो खुद,जब सिमरन दीदी उसकी चुत चूस रही थी तो ज़ोर-2 से आहे भरकर मज़े ले रही थी..

बस,प्रीती ने भी वही ठान लिया..

उसने धीरे से धक्का देकर आराधना को बेड पर लिटा दिया..

पहले तो अपनी उँगलियों को आराधना की चूत में डालकर प्रीती ने अंदर के टेंप्रेचर और चिकनाई का अंदाजा लिया 


और फिर धीरे -२ नीचे झुककर वो अपना चेहरा चूत के करीब ले गयी 

आराधना का शरीर भी काँप उठा,ये सोचकर की उसके साथ क्या होने वाला है अब...उसके होंठ थरथरा कर रह गये, पर उनमे से ना नही निकल पाया...और उसने अपने आप को अपनी छोटी बहन के सुपुर्द करते हुए अपनी आँखे बंद कर ली.

और फिर प्रीती नीचे झुकी और उसने अपने होंठों से उसकी गुलाब जैसी चूत की फेली हुई पंखुड़ियों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

पहला नीवाला मुँह में लेते ही उसका स्वाद पता चल गया प्रीती को...जो उसे काफ़ी मजेदार लगा..

और आराधना तो बिफर गयी अपनी चूत की चुसाई से...

''ऊऊऊऊऊऊऊहह प्रीती .............मेरी ज़ाआाआन्न................सस्स्स्स्स्स्सस्स..... ये क्या कर दिया............आआआआहह .....बहुत मज़ा आ रहा है ............उम्म्म्ममममममममम..... एसस्स्स्स्सस्स...... अहह.....''

और फिर तो वो बावली कुतिया की तरह उसकी चूत के उपर लगे अखरोट के दाने पर और संतरे की फाँक जैसी चूत को खाने में लग गयी...

अपनी लंबी और गर्म जीभ को उसने अंदर भी धकेला..उसकी मलाई को चाटा ...चूसा...और अंत में पी गयी.


आधे घंटे तक दोनों बहनों ने एक दुसरे एक हर एक अंग को जी भर के चूमा चूसा और आखिर में थक कर बेड पर लेट गयी 
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