antervasna चीख उठा हिमालय
10 hours ago,
#61
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
तबजबकि वे टीवी हाँल में पहुंचे !

कई अधिकारियों के कण्ठों से तो चीखें निकल गई । सांगपोक और सिंगसी के माथे ठनक गये !

आंखों में खून उतर आया ।



दृश्य देखने वाले चीनी अधिकारियो के शरीर-कांप रहै थे !!

एक डरावनी सिहरन उनकी आखों में आबैठी थी ।।

दृश्य ही ऐसा था कि बडे-से-बडे दिलके इन्सान भी कांप उठे ।


सारे हॉल में अनेक चीनी सैनिकों के "जिस्म उल्टे लटके हुये थे । रेशम की डोरियों के सिरे हाँल की छत पेर वंदे थे ! उन्हीं डीरियों में बंधे उल्टे लटक रहे थे चीनी सैनिक !


उनके सिर हॉलके फर्श से ठीक सात फीट की ऊंचाई पर पे । सभी बेहोश सभी के माथों पर से खून की बूंदें फर्श पर टप-टप करके गिर रही थीं ब्लेड द्वारा सभी के माथों से गोश्त
नोचकर लिखा गया था --- विकास--

विकास--विकास--विकास--विकास--


सांगपोक के दिमाग में हथोड़े की भाति यह नाम बजने लंगा ।



हॉल का सारा फर्श खुन की बूदों से अंटा पडा था ! एक -दृष्टि में वे सब लटके हुए शरीर लाश-से ही प्रतीत हो रहे थे ! सर्वाधिक्क गम्भीर हालात हबानची की थी !



उसके मस्तष्क पर भी विकास लिखा था ।


आभास होता था कि कोई रहस्य उसके मुँह से उगलबाने के लिये उसे भयानक रूप से यातनाएँ दी गई है ।

विकास--विकास--विकास--
सागपोक के आदेश पर हबानची और सभी सैनिकों को उतारा जाने लगा ।।


किन्तु लाशों के उतरने से पहले ही कई पत्रकारों ने वहां पहुंचकर वह भयानक दृश्य अपने कैमरे के अंदर, कैद कर लिया ।।


सांगपोक गम्बीर था बेहद गम्भीर ।

उसकी नसों में दौड़ता खून उबल रहा था !!


सिंगसी को वंही छोडा उसने, दो अधिकारियों कों अपने साथ लिया ।


जलपोत की सबसे निचली मंजिल के कमरा नंम्बर दस तक पहुंच गया वह । कमरे के बन्द दरबाजे पर उसे एक कागज चिपका नजर आया ! उस कागज को पड़ा उसने।।

उसमें लिखा था---



बेटे सागंपोक !


इस कमरे के अंदर तुम्हारे पिट्ठु मौजूद है ! तुम्हारी सहायता के लिये छोड़े जा रहा हूं !!! यह बात जानकर कर बेहद खुशी हुई कि तुम फिल्में ले गये हो !

फिल्में हमें इसी जलपोत पर मिल जाती तो बेहद दुख होता ।। जानता हूँ कि यह जलपोत चीन पहुचेगा और मेरे इन शब्दों को तुम पडोगे भी अवश्य । अच्छी तरह समझ लो कि जिस समय तुम ये शब्द पढ़ रहे होंगे उस समय मैं तुम्हारे ही देश में कहीं हूं । सम्हलकर रहना !! रोक सको तो रोक लेना !! तुम्हारे देश में तुफान मचाने आया हूं । तुम्हें चैलेंज देता हूं---------चीन से अपनी फिल्में निकालकर ले जाऊगाँ !! तुम तो क्या पूरी चीन सरकार मुझे नहीं रोक सकेगी !!

तुम जैसे दरिन्दे,, अहिंसा के उपासक को हिंसा अपनाने पर विवश करते है !
uttarakhandi
07-10-2016, 10:33 PM
हे भगवान ,


इतनी ऊर्जा लाती कहाँ से हैं आप , आज ३१ पेज पढ़ डाले । मैं तो पढ़ कर ही थक गया और आप पोस्ट करते नहीं थकीं ।

हे भगवान ,


इतनी ऊर्जा लाती कहाँ से हैं आप , आज ३१ पेज पढ़ डाले । मैं तो पढ़ कर ही थक गया और आप पोस्ट करते नहीं थकीं ।


हा हा हा

पता नहीं जी
बस अभी ये उपन्यास पूरा हो जायेगा
३७ पन्ने ही बचे बस

वतन !

----- वतन ----- -----वतन ----- वतन
----- -----वतन ----- -----वतन
----- वतन----- -----वतन ----- वतन


सांपपोक ने उस कागज को पढा ! पढ़ कर रोंगटे खड़े हो उसके ।


उसके आदेश परे दरवाजा खोला गया ।
सांगपोक ने उस कागज को पढ़ा ।


पढ़कर रोगंटे खड़े हो गये उसके ।



उसके आदेश पर दरबाजा खोला गया ।


" नुसरत !" उसे देखते ही तुगलक बोला उठा था --" हमारे आका आगये !"



" आका !" कहता हुआ आगे बढ़ा नुसरत ! वह अभी----अभी सांगपोक के पैरों में झुकने हो बाला था कि साँगपोक ने कठोर स्वर में चेतावनी देकर उन्हें रोक दिया ।


जेम्स बाण्ड चुपचाप सांगपोक की तरफ देख रहा था !


पोक ने कहा-“आश्चर्य की बात है कि बाण्ड जैसा महान जासूस इस चूहेदानी में कैद है !"


जल उठा जैम्म-बाण्ड, बोला…"जिन्होंने हमें यहाँ कैद किया है जब तुम उनके चंगुल में र्फसोंगे तो पता लगेगा ।"

हल्की सी मुस्कान दौड गई गांगपोक के होंठों पर, बोला----"खैर जो हो गया ठीक है, ।किन्तु फिलहाल मैं तुम्हारी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाता हूं !"




"जब तक फार्मूले की फिल्में हमारे बीच है तब तक शायद हमारे नीच दोस्ती नहीं हो सकेगी !"




"फिल्में हमारे पास सुरक्षित है मिस्टर बाण्ड !" पोक के दिमाग में एक योजना आ गई थी और वह उस योजना के आधार पर बातें कर रहा था-----"विजय और वतन यहां से विकास और बागारोफ को निकालकर ले गये और तुम्हें यहीं छोड़ दिया । इसका सीधासा तात्पर्य है कि बे बागारोफ को अपना दोस्त समझते हैं और तुम्हें दुश्मन शायद अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के हिसाब से उन्होंने यह निर्णय लिया है !"



"क्या कहना चाहते हो ?"



"अगर उनकी दृष्टि. से सौचें तो हम दोस्त है ।"' सांगपोक ने कहा …"अगर वे सब हमारे विरुध्द एक हो सकते हैं तो हमें चाृहिये कि एक जुट होकर हम भी उनके खिलाफ खड़े हो जायें । दोस्त बनकर दुश्मनों का मुकाबला करें ।"



एक पल वाण्ड ने कुछ सोचा है शायद यह कि इस समय पोक अपनी दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है । उसे स्वीकार कर लेना ही हितकर है । सम्भव है कि पोक के साथ चीन में रहकर वह फिल्मों का पता निकाल सके !



एक ही पल में इन सच बातों पर विचार कर गया वह, बोला----मुझे आशा नहीं थी कि तुम इतनी समझदारी की बात करोगे !”

पोक की आंखें' चमक उठी ।
सांगपोक मुस्कराया, बोला---" इसका मतलब दोस्ती मन्जूर है तुम्हें ?"



" अगर यह सच्चे दिल से की जा रही है !" बाण्ड मुस्कराया !



फिर --दोस्त बन गये वे । नुसरत और तुगलक भी उनके साथ थे ! "



उसी शाम सांगपोक चीनी सीक्रेट सर्विस के साऊण्ड प्रूफ कमरे में अपने चीफ के सामने बैठा था । चीफ़ उससे कह रहा था ----" सुना है जेम्स बाण्ड, नुसरत और तुगलक को तुमने 'हाऊस' में ठहरा दिया है ?"




--""जी हां ।"



"ऐसा क्यों किया तुमने ?" चीफ ने पूछा----" वहाँ तों अतिथियों को ठहराया जाता है । वहां से तो कोई भी आसानी के साथ निकलकर भाग सकता हैं । इन्हें तो किसी सुरक्षित और गोपनीय स्थान पर कैद करके रखना चाहिये था ।"




"इस समय बे हमारे अर्तिथि हैं चीफ ! वे कहीं नहीं भागेॉगें !"




" क्या मतलब ?"

" मतलब ये चीफ कि विजय, वतन और विकास चीन में आ चुके हैं । रूसी बागरोफ को भी अपनी सहायता के लिए उन्होंने साथ ले लिया है । यूं तो विजय और विकास से ही हमारा देश परेशान है !---अब इनमें एक शैतान और बढ गया हैं--------वतन । उसका कहना है कि चीन में तबाही मचाने आया है वह ! इन सबका मुकाबला करने के लिए बाण्ड, नुसरत तौर तुगलक की सहायता लेने में क्या बुराई है ?"





" मगर वे तुम्हारी मदद करेंगे क्यों ?"




" कियुकि उन्हें उन फिल्मों की अावश्यकता है !" -सांगपोक ने कहा-" ऐसी बात नहीं है चीफ कि मैं कुछ समझता नहीं हूं । मुझे सब पता है कि जेम्स बाण्ड ने मेरी दोस्ती क्यों क्यों स्वीकार कर ली है ।"



-"'क्यों ?"
" अगर वह हमारी दोस्ती स्वीकार न करता तो क्या होता ? यही न कि हम उसे कैद कर लेते ? मैं जानता हूं कि इस हकीकत को बाण्ड अच्छी तरह समझता है । उसने सोचा कि कैद में पड़कर क्या होगा ? दोस्ती स्वीकार करके यह मेरे साथ रहेगा तो शायद किसी तिकड़म से उन फिल्मों का पता क्या सके ।"




" निश्चित रुप से बाण्ड जैसे व्यक्ति कें दिमाग में यह विचार आना -------स्वाभाविक सी बात है।"



-"और यही लालच उसे यहां से फरार नहीं होने मैं देगा !"

"क्रिन्तु अगर वह किसी दिन वास्तव में फिल्मों तक पहुंच गया तो ?" चीफ ने संभावना व्यक्त की ।




"जब स्वयं मैं ही नहीं जानता कि फिल्में कहाँ हैं तो उनके पहुंचने का प्रश्न ही कहां उठता है ?" कुटिलता के साथ मुस्कराते हुए पोक ने कहा----"फिल्में सुरक्षित लाकर मैंने
आपको दे दी । यह मैं स्वयं नहीं जानता कि आपने ये कहाँ पहुंचाई हैं ?"



" अब तुम्हारी योजना क्या है?"



" मैं उनसे कह आया हूँ कि सात बजे उनसे मिलने आऊंगा,, साढे छ: वजाती हुई रिस्टवाच को देखता हुआ सांगपोक बोला- मै उनसे कहूगा कि वे हमारे मित्र राष्ट्र के जासूस हैं : अगर वे विजय इत्यादि के खिलाफ हमारी सहायता करेंगे तो हम उनके राष्ट्र को वेवज एम और अणुनाशक किरणों का फार्मूला अवश्य देंगे ।। इस झांसे में फसाकर मैं उन्हें अपनी मदद के लिए तैयार कर लूंगा । अन्त में उन्हें किस तरह का फार्मूला मिलेगा आप समझ सकते हैं !"


''हमें तुम पर पूरा भरोसा है ।" चीफ ने कहा ।।



"न जाने हैरी कहा गायब हो गया ?" पोक ने कहा---" वह होता तो उसे भी इसी झांसेमें लेकर अपना दोस्त वनाया जा सकता था । वह वतन और विकास की टक्कर का लडका है ।"


" खैर--हां, हवानची का क्या हाल है ?"



" अब तो ठीक है वह है सात वजे वह और सिंगसी भी बाण्ड के पास हाउस में पहुंच रहे है ।"

इस प्रकांर कुछ देर और आवश्यक बातें करने के बाद सांगपोफ खड़ा होगया।
चीफ ने उसे जाने की इजाजत दे दी !


वहाँ से निकलकर वह ठीक सात बजे हाउस पहुँचा !


कमरे में बाण्ड, नुसरत और तुगलक के साथ उसने हबानची और सिंगसी कौ भी अपनी प्रतीक्षा में पाया !


हबानची के सिर पर एक हैट था । काफी हद तक उसने हैट का अग्रिम भाग अपने मस्तिष्क पर झुका रखा था । सम्भवत: इसलिए कि उसके माथे पर लिखा 'विकास' नजर न आए ।



उनके सामने मेज पर शाम को पीकिंग से निकलने वाले करीब करीब सारे अखबार पड़े थे !


सभी में जलपोत के टी वी हाँलं का दृश्य छपा था । चीन में विकास के आगमन की खबर को प्रत्येक अखबार ने अपने ढंग से नमक -मिर्च लगाकर छापा था !


एक अखवार में' तो विशेष रूप से हवानची का फोटों छपा था । उसके माथे पर लिखा था 'विकास' !



"चीन के अन्दर विकास का आधा आतंक तो तुम्हारे देश के ये अखबार फैला देते है ।" जेम्स वाण्ड ने कहा…......."विकास का सिद्धांत है कि वह जहाँ जाता है, पहले वह अपने’ नाम का टेरर फैला देता है ! उसी उदेश्य से उसने टी बी हाँल में सैनिकों को उल्टा लटकाया था उनके माथे पर अपना नाम लिखा था । इन अखबोरों में तो वतन का वह पत्र भी छपा है जो उसने तुम्हारे नाम लिखकर क्रमरे के दरवाजे पर चिपका दिया था !"


"तुम ठीक कहते हों । विकास उतना है नहीं जितना ये अखबार चीनी जनता के सामने उसका हब्बा बना देते है !"

"तुम्हारी सरकार को अखबारों पर सैसर लगाना चाहिए है" बाण्ड ने राय दी…"आदेश हो कि विकास से सम्बन्धित कोई भी अखबार किसी तरह का समाचार न छापे इन समाचारों से होता ये है कि चीनी जनता विकास के आगहन को ही अपने दश के विनाश का द्योतक समझ लेती ।"
" अखबारों पर सैसंर लगाना हमारा काम तो नहीं !" सांगपोक ने कहा--"सरकार का काम है। विषय मे जब वह ही कुछ नहीं सोचती तो हम क्या करें ?"
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10 hours ago,
#62
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
"सीकेंट सर्विस के माध्यम से तुम्हें अपनी सरकार से मांग करनी चाहिए !" बाण्ड ने कहा… "तुम्हें दलील देनी चाहिए कि अखबार कुछ इस तंरह विकास का टैरर जनता में फैलाते हैं कि साधारण जनता विकास के विषय में कुछ बताते हुए डरती है और तुम्हें परेशानी होती है, इत्यादि ।"


"इस विषय पर मैं स्वयं सोच रहा था !" पोक ने कहा…"लेकिंन यहां हमारी बातों का विषय है कि हम सव को मिलकर बिकास, वतन और विजय का मुकाबंना करना है । आज दिन में मैंने अपने चीफ से बातें कर ली हैऔर उन्होंने एक ऐसा आश्वासन दिया है जिससे हमारी दोस्ती और मजबूत होगी !"



" कैसा आश्वासन ?"



" "यह कि अगर आप उनके खिलाफ हमारी मदद करें तो हमारा देश आपके देश को वतन के दोनों फार्मूलों की नकल दे देगा ।"



एक क्षण ध्यान से सांगपोक के चेहरे को देखने के बाद बाण्ड ने 'कहा-१…"अगर ये सच है तो हम तुम्हारी मदद के लिए तयार हैं ।"



" गुड !" पोक ने कहा ----"अब, एक बार… सिर्फ यह पता लग जाये कि चीन में वे लौग हैं कहां ?" इस बार हमारा प्रयास ये होगा कि उनमें से किसी की लाश भी चीन से बाहर न जा सके । हम दुनिया से उनका ड़र हमेशा के लिए समाप्त कर देना चाहते हैं !"

"क्या मैं भी आप लोगों का दोस्त बन सकता हूँ ?"



एक नई आवाज ने सबको चौका दिया ।


पलटकर सभी ने दरबाजे की तरफ देखा । दरबाजे पर हैरी मुस्करा रहा था !



" हैरी !" पोक एकंदम खड़ा हो गया----"तुम यहां कैसे पहुंच गए?"
" किसी भी जासूस के लिए कही भी पहुंच जाना शायद बहुत आश्चर्य की बात नही है !" कमरे में प्रविष्टि होता हुआ हैरी बाला--"संर्वप्रपम वतन की प्रयोगशाला में प्रविषट होने वाला मैं ही था , किन्तु विकास ने चमन में ही मुझे कैद कर लिया ! मेरे मेकअप में उसने स्वयं फिल्में गायब की । मुझे अलफांसे की सुरक्षा में कैद कर लिया गया ! किसी प्रकार मैं उसकी कैद से भांग निकला ! सबकुछ पता लगाया। यह भी पता लगाया कि डैडी के मेकअप मे मुझे लेने बाण्ड अकंल अकेले चमन आए थे , फिल्मों के चीन तक पहुचने की सारी कहानी पता लगी । लिहाजा मैं यहां अागया । फिल्मों का पता के चक्कंर में ही तुम्हारा पीछा कर रहा था कि तुम्हारी बातें सुनी । सोचा कि मैं भी दोस्त बनकर उस फार्मुले की नकल अपने देश तक पहुचा दू तो उचित रहेगा । यही सोच- मैं सामने आगया । "





--"तुमने बहुत अच्छा किया है हमारे बीच तुम्हारी ही कमी थी ।" पोक ने कहा…" भारत और रूस, चीन और अमेरिका के हमेशा ही खिलाफ रहे है है । इस अभियान में भी , उन दोनों देशों के जासूस मिलकर काम कर रहे हैं । हमें भी एकजुट होकर उनका मुकाबला करना चाहिए ।"




-"तुम्हारा यह प्रस्ताब पसन्दआया तभी तो मैं सामने आया ।" हैरी ने कहा…वर्ना एक दुश्मन जैसे ढंग से फिल्में प्राप्त करने के लिए मैं तुम्हारा पीछा कर रहा था । अगर तुम, अमेरिका को भी उस फार्मू्ले की नकल देने, के लिए तैयार हो तो मैं तुम्हारे साथ आ सकता हूं !"

जेम्स बाण्ड, जो हैरी के आगमन पर अभी तक कुछ नहीं बोला था । वह चुपचाप बहुत ध्यान से हैरी का चेहरा देखे जा रहा था ।। इधर सांगपोक हैरी से कह रहा था----हमारी सरकार ने अपने. मित्र राष्ट्रों को नकल देने का निश्चय कर लिया है ।"



इससे पूर्व कि हैरी कुछ बोले, जेम्स बाण्ड ने कहा-----" तुमसे कोई भी समझौता करने से पूर्व मैं कुछ बातें करना चाहता हूं हैरी?"


" जरूर कीजिए अंकल !"



"ये तो तुम्हें मालूम है ही कि चीन में इसं समय, विजय, विकास, वतन इत्यादि मौजूद है और वे......."



" कोई भी मेकअप कर लेने के मामले में उस्ताद है ।"
मुस्करते हुए हैरी ने बात पुरी की ---" सही भी है । आपको इस तरह अचानक मुझ पर विश्वास भी नहीं करना चहिए ।। जिस तरह भी अाप चाहे अपनी तसल्ली कर सकते हैं ।"



" इस प्रकार बाण्ड ने हर प्रकार से जांच की और पाया कि हैरी ही है तो बोला--"बैठ जाओ ।"



फिर उनके बीच इस विषय को लेकर बार्तालाप होने लगाकि विजय, विकास, वतन और बागारोफ से किस प्रकार निपटा जाये ।। पहले तो यंही प्रश्न उठा कि यह कैसे पता लगे कि इतने वडे़ चीन में वे हैं कहां ?

किन्तु पता लगाने का कोई उचित तरीका उनके दिमाग में नहीं आया । तब हैरी ने कहा----" वे लोग चीन में हैं और जब तक चुपचाप बैठे हैं, तब तक तो किसी भी प्रकार उनके ठिकाने का पता लग ही नहीं सकता। किंतु हां यह एक स्वाभाविक-सी बात है कि वे यहाँ चूप नहीं बैठेगे ।। बात अगर सिर्फ विजय अंकल की होती तो यह सोचा जा सकता था कि वे दिमाग से काम लेंगे और उसी समय कोई हरकत करेंगे' जब उन्हें पता सग जायेगा कि फिल्में कहां है ,, किंतु न विकास शांति से बैठने वाला है, न वतन । वे अवश्य ही कोई हंगामा करेंगे । बस, उनके मैदान में अाते ही हमारा काम आसान हो जायेगा ।'"




’इस प्रकार की बातों के पशचात् बारह बजे यह मीटिंग समाप्त हुई ।


सांगपोक ने हैरी के रहने का प्रबंध भी हाउस में कर दिया ।।


रात के करीब दो बजे के करीब सांगपोक अपने बिस्तर पर लेटा । लेटते ही अपने जिस्म में उसे कुछ खुजली सी महसूस हुई । फिर वह अपने जिस्म की बुरी तरह खुजलाने लगा ।




" हम खुजलां दें पोक बेटे !"' इस एक आबाज ने उसके सारे शरीर को जडवत् सा कर दिया ।



उसने देखा-दखते ही रोंगटे खड़े हो गए उसके । पर्दे के पीछे से विकास प्रकट हुआ था !




बेड पर से उछलकृर वह फर्श पर खड़ा हुअा तो बेड के नीचे छूपे किसी व्यक्ति, ने उसकी दोंनों टागें पकड़कर खींच दी । धड़ाम से मुंह के बल बह फर्श पर गिरा ।
अगले ही पल बेड के समीप वतन खडा हुया था-सफैद कपडे, आखों पर काला चश्मा, हाथ में छड़ी ।

जबरदस्त फुर्ती के साथ पुन: उठकर खड़ा हो क्या था सांगपोक ।


उसने देखा…दो तरफ से घिरा हुआ था वह ।


** दोनों तरफ बराबर की लम्बाइयों वाले लड़के । मानो कामदेवों ने एकाएक यमराज का रूप धारण कर लिया हो । सांगपोक उनके बीच स्वयं को नर्वस सा महसूस कर रहा था ।



उसके जिस्म में खुजली उठी और पागलों की तरह खुजाने लगा ।


वतन और विकास ठहाके लगाकर हंसने लगे ।



सांगपोक के मुंह से खून बहने लगा था । अपने जिस्म को पागलों की तरह वह नोचे चला जा रहा था ।


फिर वतन ने छड़ी में से मुगदर निकाला । झन्नाता हुआ एक बार उसने सागपोक की छाती पर किया, मुंह के बल गिरा तो विकास की ठोकर सहनी पडी़ ।



इस प्रकार-सागपोक पर दोनों ही पिल पड़े । उनमें है किसी ने भी सांगपोक को सम्हालने का मौका नहीं दिया । एक तो वह स्वयं ही खुजली से परेशान था ,ऊपर में उन्होंने उसे दबोच लिया । पोक कुछ भी न कर सका । मारते-मारते विकास ओर बतन ने उसे अधमरा कर दिया ।



अन्त में रोते-गिडगिडाते पोक को वतन ने पंखे पर उल्टा लटकाया और पूछा कि फिल्मे कहां है ? पोक ने जवाय नहीं दिया तो राक्षस बन गया विकास है ब्लेड निकाल कर उसने
पोक की सारी खाल नोंच डाली । नाखूनों की जडें काट दीं । कान काट लिए । माथे पर अपना नाम लिख दिया ।।

बेहोश होने से पूर्व पोक ने उन्हें बताया कि फिल्में उसने अपने चीफ को दे दी हैं । बस, इससे आगे फिल्मों के विषय में उसे कुछ पता नहीं है । विकास को क्या पता था कि वह बेचारा सच बोल रहा है ? वह तो यही समझा कि पोक असलियत छुपा रहा है अत: उसकी और अधिक खातिरदारी करने लगा ।


उस समय विकास को यकीन हो गया कि पोक ने वह बता दिया है, जव पिटता पिटता पोक मृत्यु से कुछ ही दूर रह गया !



फिर उसकी कोठी के मुख्यद्वार के बीच पोक के बेहोश शरीर को वे उलटा लटकाकर चले गये ।

अगली सुबह पूर्ण चीन में आतंक छाया हुआ था ।


अखबारों के कॉलम विकास और वतन के नामों से रंगे पडे़ थे !



अपनी कोठी के मुख्यद्वार पर न सिर्फ पोक का जिस्म उल्टा लटका पाया था, बल्कि करीब-करीब उसी स्थिति में सिंगसी और पचास सैनिक अधिकारियों के जिस्म पाये गये थे ।



चीन में इस प्रकार का आतंक जैसा किसी छोटे-से गांव में शेर के प्रविष्ट हो जाने पर फैल गया हो !!



उसी सुबह क्रिस्टीना के ड्राइंगरूम में बैठा विजय कह रहा था… तुम साले मानोगे नहीं, भला रात यह सब करने से फायदा क्या हुया ?"



"अबे चुप रह चटनी के, बच्चों को करने दे जो कर रहे हैं !"

"चचा, तुम भी इन्हें समझाने से तो गए, शै देते हो है" विजय ने कहा !


इससे पूर्व किह बागरोफ कुछ बोले, गम्भीर स्वर में वतन ने कहा-"क्रिस्टीना ने मुझे सब कुछ बता दिया है चचा ! मैं और विकास -यह समझते रहे कि हम दोनों रात को तुम्हें धोखा देकर यहां से निकल गए थे, मगर वास्तविकता ये थी की अाप न सिर्फ जाग रहे थे, वल्कि जहां-जहा हम गए वहां आप भी हमारे पीछे गये थे और हमसे पहले यहां आकर पुन: सौने का नाटक किया ।"




--'"अबे तो और क्या करता ?" विजय भडंक उठा -----"हमने तो सालो तुम्हारी सुरक्षा का ही ठेका ले लिया है !"



इससे पूर्व कि विजय की इस बात का कोई जवाब दे पाता, दरवाजे पर दस्तक हुई । 'सव एकदम चुप हो गए ।



क्रिस्टीना ने पूछा…"कोन है ?"
"लैला का मजनू ।" बाहर से आवाज आई ।


'"लूमड़ !" कहकर विजय अपने स्थान से उठा और झपटकर दरवाजा खोल दिया । सामने देखा, तो हैरी खड़ा था । जहां हैरी को देखकर विजय भौचका रह गया, वहाँ क्रिस्टीना, बागारोफ और विकास के रिर्वाल्बर बाहर आ गये ।



इससे पूर्व कि कोई कुछ हरकत कर पाता, दरवाजे पर खडे हैरी के मुंह से अलकांसे का स्वर निकला---- " चेहरा हैरी का जरूर है, लेकिन हूँ मैं अलफांसे । इस रूप में मैंने अलकांसे की कैद से फरार होने का नाटक रचा है और दुश्मनों का दोस्त बन बैठा हूं ।"

उसे कमरे के अन्दर लेकर दरवाजा पुन: बन्द कर लिया गया ।
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10 hours ago,
#63
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
विजय के पूछने पर सोफ पर बैठकर अलफांसे ने संक्षेप में जो कुछ बताया, वह इस प्रकार था, "जब मुझे पता लगा कि फिल्में चीन पहुंच गई हैं तो मैंने भी यहां आने का निश्चय किया । अपनी असली सूरत में आने के स्थान पर मैंने यहां हैरी की सूरत में आना अधिक उचित समझा । सोचा कि इस अभियान के शुरू में हैरी ने मेरा मेकअप करके काम किया था, सो वह कर्ज उतार दूं । मैं पिशाच से मिला । हैरी को उसके हबाले कर दिया । चमन के राष्ट्रपति भवन के एक तहखाने में इस समय हैरी कैद है । पिशाच को मैं सब कुछ समझा, आया हूँ । उसी ने तिलस्मी चीजों का प्रयोग करके मेरे चेहरे पर यह मेकअप किया है । मैं कल यहां पहुच गया था । मैंने सोचा कि मुझे अपने ढंग से यह पता लगाना चाहिए कि फिल्में कहां हैं ? इसी मकसद से मैं पोक के पीछे लग गया ।, सात बजे पोक हाउस में ठहरे बाण्ड,-नुसरत और तुगलक से मिला है उस समय सिंगसी और हूानची वहीं थे । वहाँ मैंने उनकी बातें सुनीं। उनकी बातें सुनकर मेरे दिमाग में एक योजना पनपी । सोचा कि तुम लोग तो अपने ढंग से फिल्मों का पता लगाने के चक्कर में लगे हो ही, क्यों न मैं उनका साथी बनकर यह प्रयासं करूं?"
"'स्कीम तो तुम्हारी निस्सन्देह तारीफ के काबिल है लूमड़ भाई ! " विजय ने कहा----"लेकिन मेरे ख्याल से बाण्ड इतना बेवकूफ तो नहीं होना चाहिए कि वह तुम पर एकदम यकीन कर ले है क्या उन्होंने तुम्हारी जांच नहीं की ?"



" पिशाचनाथ द्वारा किया गया मेकअप क्या आज तक कीसी की जांच में आया है ?" अलफासे ने मुस्कराते हुए जवाब दिया !



" हूं----साला पिशाचनाथ अपनी तिलिस्म-दवाओं को ही लिए फिरता है ।"


इस प्रकार उनके बीच बातें होने लगी ।


एक घंटे बाद अलकांसे वहाँ से चला गया । वे पुन: बातों में लग गए । कोई ऐसी तरकीब सुझाई नहीं दे रही थी जिससे यह पता लग सके, कि फिल्में कहाँ हैं ?


और पुरे तीन महीने गुजर गए है ।-इन तीन महीनों में चीन के अन्दर क्या कुछ नहीं हुअा, परन्तु फिल्मों का फिर भी पता न लग सका ।

ये तीन महीने चीन के लिएं कहर के महीने थे ।।


हर रोज सुबह को अनगिनत ऐसी लाशें मिलतीं जिन पर विकास लिखा होता था । चीन की जनता और सरकार त्राहि-त्राहि कर उठी ।


चीन में होती इस तबाही की गूंज सिर्फ चीन में ही कैद होकर न रह गई थी वल्कि सारे विश्व में गूँज उठी थी ।


विकांस और वतन की एक ही माँग थी----' चीन चमन के चुराये हुए फार्मूले लौटाये !'



चीन सारे विश्व में प्रचार कर रहा था,, वतन और विकास उसके साथ क्या कर रहे हें किन्तु बीच-बीच में विश्व की टी.वीं स्क्रीनों पर जला हुआ वतन उभरता और चीन द्वारा किए गए प्रचार का खण्डन करता,कहता कि वह चीन से बदला अवश्य लेगा, किंतु अभी तक वह ठीक भी नहीं होपाया। चमन से बाहर भी नहीं निकला है ।


इधर चीन में ये दोनों शैतान इस कदर तबाही मचाये हुए थे कि सारा देश आतंकित पुतला बनकर रह गया था ।
हर सुबह चीन की सडकें लाशों से भरी पाई जाती । कभी एयरपोर्ट पर खडे विमान धु-धु, करके जलने लगते तो कभी अच्छी खासी जाती रेलगाडी एक धमाके के साथ उड़ जाती । हर दुर्घटना के पीछे किसी न किसी रुप में वतन और बिकास की माँग गूंज उठती ।




विनाश-बिनाश और विनाश…चारों तरफ विनाश फैला दिया उन लड़कों ने ।।




और इस समय वे क्रिस्टीना के ड्राईरूम में बैठे खिल खिलाकर हंस रहे थे ।

उनके चेहरों की मासूमियत को देखकर कोई कह नहीं सकता था कि उनसे आज पूरा चीन कांप रहा है । उनके अतिरिक्त ड्राइंगरूम मैं इस समय बागारोफ, विजय, हैरी के रूप में अलफांसे और क्रिस्टोना भी मौजूद थे । विजय कह रहा था… "मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि दोनों को इस विनाशलीला से क्या लाभ होगा ?"



''हमारे पास ऐसा कोई तरीका नहीं है गुरु, जिससे हम यह पता लगा सकें कि वे फिल्में कहां हैं ?" बिकास ने कहा--- "आज तीन महीने गुजरने के बाद भी हम पता नहीं लगा सके हैं । कम-से-कम यह तरीका हमारे पास है जिससे , हम चीन सरकार को फिल्में वापस करने पर विवश कर सकते है !"



"इस तरह भला वे फिल्में कैसे दे देंगे !"




…""उन्हें देनी पडेगी ।" विकास ने कहा----"हम इस देश की जनता को इतना आतंकित कर देंगे कि चीनी जनता स्वयं सरकार से यह मांग करेगी कि वह फिल्में हमें दे दे । जनता की मांग सरकार को माननी ही होगी । नहीं मानेगी तौ चीन में गृह-युद्ध होगा ।"




''तुम हमेशा विनाशकारी बात सोचा करते हो प्यारे दिलजले ।" विजय ने कहा-"अगर इस तरह फिल्में मिलती होतीं तो न जाने कब की मिल गई होती ? मेरा विचार तो ये है कि इस तरीके को छोड़कर फिल्मो का पता लगाने की कोई और तरकीब सोची जाये ।"



विसास ने जिद्द नहीं, की !


पुन: तरकीब सोची जाने लगी ।
जब इसी विषय पर बहस होते काफी देर हो गई तो हल्ले से मुस्कराता वतन बोला----"फिल्मों का पता लगाने की हमें कोई आवश्यकता नहीं है ।"

बुरी तरह चौक पड़े सब, विजय के मुंह से निकला---"क्या मतलब ?"




" समय आने पर 'वेवज एम' की फिल्म खुद ही बता देगी कि वह कहां है ?"



"क्या कहना चाहते हो ?"अलफासे ने प्रश्न किया।



" आज मैं तुम्हे एक रहस्य की बात बताता हूँ ।" मुस्कराते हुए वतन ने कहा ।। 'वेवज एम' के फार्मूले को उस फिल्म पर मैंने स्वयं उतारा है ! मुझे मालूम था कि यह उलझनें हमारे सामने आ सकती हैं । उन फिल्मों पर अंकित फार्मूला बिल्कुल सही है ,, जानबूझकर उसमें एक हल्की सी कमी छोड़ दी है । वह कमी यह है कि उसमें ब्रह्यंड की आवाजो को कंट्रोल करने वाले बटन का हवाला फिल्मों में कहीं नहीं है ।''



" इससे क्या होगा ?"




"निश्चित रूप से चीन के वैज्ञानिक किसा गुप्त प्रयोगशाला में उन फार्मूले के आधार पर 'वेवज एम' बना रहे होंगे"वतन ने कहा----- जैसे ही वेवज एम तैयार होगा और वे उसे अॉन करेंगे तो उसमें से इतनी जोर की व्रह्यंड की आवाजें निकलेगी कि सम्पूर्ण चीन गूंज उठेगा । व्रह्माड का सारा शोर चीख पुकार और आवाज़ गूंज उठेगी और मुझे पता लग जायेगा कि वेवज एम कहां तैयार किया जा रहा है !"



"इतनी महत्त्वपूर्ण बात तुमने पहले क्यों नहीं बताई बटन प्यारे ?"

"उस आवाज को कंट्रोल करने के लिए वेवज एम में बटन नहीं होगा !" विजय की बात पर कोई ध्यान न देते हुए वतन ने बताया----"वेवज एम के आँन होते ही बह्याड की सारी चीखो-पुकार चीन से उतर आयेगी और मेरा आविष्कार मुझे स्वयं बता देगा कि वह कहां है !"
हिमालय के गर्भ में…चीनियों की एक गुप्त प्रयोगशाला । एक कमरे में करीब बीस चीनी वैज्ञानिक । एक लम्बीसी मेज के चारों तरफ वे बीसों बैठे है । अचानक उनमें से एक वैज्ञानिक अपने स्थान से खड़ा होकर कहता है कि---" हमने प्राप्त फिल्म के आधार पर "वेवज एम" तैयार कर लिया है और आज हम उससे बह्मांड की आवाज सुनेंगे" ।



" मेंरे विचार से एक वार और फिल्म में अंकित फार्मूले से वेवज ऐम को मिला लें ।"


"वह तो हम करेगे ही ।" उस वैज्ञानिक ने कहा, किंतु खुशी की बात ये है कि हमने वेवज एम तैयार कर लिया है । हमारे देश को इस आविष्कार की कीमत बहुत महंगी चुकानी पड़ रही है । सारे देश में विकास और वतन ने हंगामा खड़ा कर रखा है, परन्तु हमारी सरकार ने इतनी सावधानी बरती कि इतना सबकुछ करने के बावजूद भी वे कुत्ते यहाँ तक नहीं पहुंच सके । यहाँ जहां वतन के फार्मूले पर हमने रात-दिन तीन महीने मेहनत करके वेवजएम तैयार कर लिया है ।" इस प्रकार एक लम्बाचौडा भाषण दिया उस वैज्ञानिक ने ।



फिर वे सब यह निश्चय करके उठे कि वेवज एम पर बाह्मांड की आवाजें सुनी जायें ।



यह प्रयोगशाला हिमालय के गर्भ में सख्त सैनिक पहरे के बीच थी।


वे बीसों वैज्ञानिक एकं अन्य कमरे में पहुंचे । एक मेज है पेर 'वेवज एम' रखा था । उस 'वेवज एम' की बॉडी वैसी बहीं थी, जैसे वतन के वेवज एम की थी । उसी मशीन कों उन्होंने एक भिन्न बाँडी में कैद किया था ।



मशीनरी को उन्होंने पुन: फिल्म से मिलाया ।

फिर धड़कते दिल से 'वेवज एम' आँन कर दिया गया ।


और तुफान उठ खडा हुआ हो जैसे । इतना शोर कि -------


हिंमालय कांप उठा ।




भयभीत होकर वैज्ञानिक एक-दूसरे पर गिर पड़े । चीख--पुकार और भयानक शोर ने इन सभी वैज्ञानिकों के कानों के पर्दे फाड़ डाले ।


कई अणु बम भी मिलकर इतना तेज धमाका न करते, जितना 'वेवज एम' से निकली आवाजों ने किया ।


पूरा हिमालय इस तरह चीख रहा था मानो किसी ने उसके शरीर में आग लगा दी हो ।।
न सिर्फ चीन बल्कि सारी दुनिया एकदम बुरी तरह चौंक उठी ।


हिमालय के गर्भ से निकली वह दहाड़ से सम्पूर्ण धरती गूँज उठी ।

धरती बुरी तरह कांप उठी ।



सारी दुनिया के ज्बालामुखी भी अगर एक साथ फट पड़ते तव भी शायद उतनी भयानक आवाज न होती !


सदियों से शांत खड़ा हिमालंय चीख उठा था । ऐसी आवाज हुई थी जैसै सारी दुनिया के प्राणी एक साथ अपनी पूरी शक्ति से चीख पड़े हों ।। विश्व में आतंक छा गया-------
-------------हिमालय चीख उठा था ।।

चीखकर उसने सारी दुनिया कों भयक्रांत कर दिया था ।


कुछ देर तक चीखकर हिमालय शांत हो गया ।।।।


किन्तु----हिमालय की उस चीख ने सम्पूर्ण विश्व को बुरी तरह आतंकित कर दिया था ।।



वतन की मंडली के अतिरिक्त शायद किसी को भी समझ में नहीं आया कि हिमालय इतनी जोर से आखिर चीख क्यों पंड़ा ?


संसार के प्रत्येक देश का प्रत्येक व्यक्ति भयंभीत हो उठा ।।



पूरी दुनियां मे र्तिकड़मे लडाई जानें लगों ।। कुछ लोग यह समझे बेठे कि प्रलयं आने वाली है । हिमालय ने चीखकर प्रलय के आगमन की सूचना दे दी है।।


तव जबकि विश्व में हिमालय की इस चीख पर अनेक अटकले चल रही थी ।


विजय इत्यादि के सामने बैठा वतन कह रहा था--" लो चचा, मेरे आविष्कार ने मुझ आवाज दी है !'"





"आबाज बडी भयानक रही बटन प्यारे । सारी दुनिया कांप उठी !"



"मेरा अनुमान है कि इसे आवाज कों सारे विश्व ने सुना होगा !" बिकास ने कहा ।

"लेकिन बटन प्यारे, हिमालय तो बहुत बड़ा है ।" विजय ने कहा--" यह कैसे पता लगे कि हिमालय के कौन से भाग में वह प्रयोगशाला है जहाँसे तुम्हारा 'वेवज-एम' चीखा है?"



वतन ने जेब में हाथ डाला और दिशा--दूरी बताने वाली, एक छोटी-सी विरामघड़ी दिखाता हुआ बोला--"इस घड़ी ने उस केन्द्र को पकड लिया है, जहाँ से इस आवाजकी उत्पत्ति हुई है ! इस समय यह घडी हमें 'वेवज एम' की स्थिति ठीक बता रहा है !"



" तो फिर क्यों न आज ही अपना अभियान समाप्त कर लिया जाये !"
जिस दिन हिमालय चीखा था, उस दिन ने अपने गर्भ में एक बहुत ही अन्धकारमय रात छुपा रखी थी ।



एयरपोर्ट की इमारंत पर यहां-वहां रोशन लाइटें उस अन्धकार से लड़
रही थीं । इमारत में सन्नाटा था । इस समय रात के ग्यारह बज रहे थे और चार बजे से पहले न तो यहाँ कोई फ्लाइट ही होने थी आर न ही कोई विमान यहाँ पहुंचने बाला था, इसलिए रात की डयूटी के कर्मयारी लापरवाही से अपनी-अपनी डयूटियों पर ऊंघ रहे थे ।


हवाई-पट्टी बिरुकुत शांत पड़ी थी, ऐसे समय में दो व्यक्तियों ने एयरपोर्ट की इमामृत में प्रवेश किया । उन दोनों के हाथों' में एक एक सूटकेस था ।

जिस्म पर पतलून के उपर ओवरकोट अौर सिर पर एक गोल हैट । ओवरकोट के कालर खडे़ थे अौर हैट के कोने लगभग झुके हुए थे ।। यह 'कारण था कि उनमे से किसी का चेहरा नहीं चमक रहा था ।।



"चचा ।" उनमें से एक के मुंह से विजय की आवाज निकली----"काम जरा संभलकर करना । कहीं सारा गुड़़ गोवर न हो जाये ।'"

" तू हमें पैतरे बता रहा है चटनी के !" बागारोफ ने कहा'--" बेटा, जासूसी के पैतरे इस्तेमाल करते-करते ही तो ये सिर के बाल उड़ गए हैं ! तू संभलकर रहना । ऐसा न हो जाये कि मैं निकल जाऊं और ये चीनी तुम्हारा तबला बजा दें" ।


''तवला तो इनका विकास और वतन ने बजा रखा है !"








" अच्छा, अब बोलती पर ढक्कन लगा, सामने आँफिस आ रहा है ।" वागांरोफ ने कहा तो सचमुच विजय चुपं हो गया ।

बिना किसी प्रकार की दस्तक दिए वे धड़धड़ाते हुए आँफिस में प्रविष्ट हो गए ! मेज के पीछे एक अफ़सर बैठा ऊंघ रहा था ।



उनकी आहट पाते ही कुत्ते की तरह जागकर उसने कान खडे़ कर लिए !


जब तक वह कूछ समझता, तव तक पलटकर विजय ने दरवाजा अंन्दर से बन्द कर दिया था और उस अधिकारी के सामने खडा ? बागरोफ कह रहा------"हम तुम्हारे मुंह से गुटरगूं की आवाज सुनना चाहते हैं !"
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10 hours ago,
#64
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
चौककर वह अपनी सीट से खड़ा होता हुआ बोला-----"'कौन हैं आप लोग !"


"मेरा नाम विकास है ।" बागारोफ ने कहा है !


" वि ...का.... स !" टूटकर एक-एक शब्द निकला उसके मुंह से । चेहरा पीला पड़ गया । आंखों में मौत नाचने लगी ।


शरीर इस तरह कांपने-लगा, जैसे अचानक वह जाड़ो के बूखार का मरीज-बन गया हो, बोला…म.....मैंने आपका क्या विगाड़ा है ? अ…आप तो बाप हैं मेरे.....स…साली ये हमारी सरकार उल्लू की पट्ठी है, जो आपकी मांग नहीं मांगती ....."

" इसे ही तो कहते हैं गुटरगूं की आवाज ।" कहता हुआ बागरोंफ उस पर झपट पडा़ !


उस बेचारे के तो विकास का नाम सुनते ही हाथ-पांव ढीले पड़ गए थे ! विजय को कुछ करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ी और बागरोफ ने उसे बेहोश कर दिया ।
" मैं किसी और को देखता हूं चचा !" कहकर विजय ने दरवाजा खोता और कमरे से बाहर निकल गया ।


आगे बढकर बागारोफ ने चटकनी पुन: अन्दर से चढ़ा ली वापस आया और उस अधिकारी के जिस्म पर से कपडे़ उतारने लगा ।


दस मिनट बाद उसके जिस्म पर अधिकारी के कपड़े । दरबाजा खोलकर वह गैलरी में आया, दरबाजा बाहर से भिड़ा दिया , तभी गैलरी के एक अन्य आफिस का दरबाजा खुला एक अफसर की वर्दी में विजय बाहर निकला ।


बागरोफ को देखते ही विजय ने आँख दबा दी ! भुनभुनाता हुआ-बागरोफ उसके साथ अागे बढ़ गया ।




"'उस कबूतर मार्का की सूरत ही ऐसी थी कि हमने अनुमान लगा लिया कि अंब वह अपने मुंह से गुटरगूं की आवाज निकाले तो बहुत अच्छी लगेगी ।। यह तो हम जानते' ही थे कि गुटरगूं की वह आबाज न तो तुम्हारा ही नाम लेकर निकलेगी अोर न ही मेरा। अत: विकास का नाम ले दिया देखा नहीं------नाम सुनते ही किस तरह कत्थक डांस करने लगा था।"'



बातें करते हुए वे एयरपोर्ट की बालकनी तक पहुंच गए ।



वहाँ से हवाई पदृटी स्पष्ट चमक रही थी ।

बड़े बडे़ हैंगरों में कई विमान खडे थे ।



उन्हें देखता हुआ विजय वोला--", जो इधर से पहले दो विमान खड़े हैं, वे हमारे बाप के । पहला वाला तुम्हारे बाप ने बनवाया है, दूसरा मेरे बाप ने । वाकी सब बेकार हैं ।"



--"ठीक है ।" बागारोफ ने कहा----"आओ । बालकनी से उतरने के कुछ ही समय बाद वे विमान की तरफ बड़ रहे थे । दोनों का एक-एक हाथ रिवॉ्ल्वर पर था ।।
अभी है हैगरों से काफी दूर ही थे कि अंधेरे में से एक सैनिक निकलकर सामने आया !



" आप ?"



अभी बह कूछ कहना ही चाहता था कि धांय'. ......



विजय के रिबॉल्वर से निकली गाली ने उसके माथे में लहू निकलने के लिए सुराख बना दिया । एयरपोर्ट की इमारत अौर उसके आस-पास छाये सन्नाटे ने एक फायर और चीख की आवाज पर दम तोड़ दिया ।



" आओ चचा । " नारा-सा लगाता हुआ विजय स्वयं बहुत तेजी क साथ विमान की तरहा भागा ।



फायर की आबाज ने एयरपोर्ट की इमारत में हंगामा-सा खडा़ कर दिया था । अभी वे अधिक दूर नहीं दौड़ पाये थे कि उन के पीछे दो-तीन फायर हुए और सांय-सांय आवाज करती हुई गोलियां बराबर से निकल गई ।

भागते हुए' बागारोफ का रिवॉल्वर दो बार गर्जा और वे दोनों बल्व शहीद हो गए जिनके प्रकाश के दायरे में वे थै । अब उनके इर्द-गिर्द अंधेरा छा गया और इस अंधेरे मे वे भाग रहे थे ।।




पीछे से उन पर अब अनगिनत तेज फॉयर हो रहे थे किन्तु क्योंकि वे अंधेरे में थे इतलिए पीछे से उन्हें सही निशाने पर कोई नही ले पाया था ।




भागते हुए विजय ने जेब से हैडग्रेनेड निकाला, मुंह से पिन निकाली और अचानक पीछे पलट गया ।


अपनी गनों से फायऱ करते हुए करीब पांच सैनिक उन की तरफ दौड़ रहे थे !


उन्हीं का निशाना बनाकर विजय ने
बाउंड्री पर ख़ड़े क्रिकेट खिलाडी की भांति बम फेका ।

जिस तरह एक अच्छे खिलाड़ी की थ्रो पर खड़े विकेटकीपर हाथ में जाती है उसी तरह हवा में लहराता हुआ बम सीधा उन पांच सैनिकों के वीच गिरा । एक कर्गभेदी धमाके के साथ उनकी लाशों के चिथड़े हवा मैं लहरा उठे ।




फिर बागारोफ के पीछे भाग लिया बिजय । अब भी चारों तरफ से सैनिकों के भागकर आने की आवाजें आं रही थीं । वे भागते हुए विमानों पर पहुच गए तो विजय ने कहा----"'तुम विमानों को निबटाओ चचा---मैं इन्हें देखता हूं !"


ऐमा ही हुअा भी !


बिजय जैसे पहले, ही यह अन्दाजा कर लिया था कि किसी भी तरफ से सैनिक यहां तक ही पहुंच सकेगा और वह उन्हें चटनी बना देगा !

उधर अपनी जेब से हेंडग्रनेड निकालकर वागारोफ ने मुंह से पिन खींची और शेड के नीचेे खडे़ एक विमान पर उछाल दिया ।



एक कर्ण भेंदी धमाका । आग में झुलता हुआ पेट्रोल उछला है विमान की बाडी खील-खील होकर बिखर गई ।


फिर मानो साक्षात प्रलय का दृश्य एयरपोर्ट पर उपस्थित हो गया ! दस्तीबमों के धमाके और फायरों की आवाज ने सारे वातावरण की मथकर रख दिया !! चीनी सैनिक कुछ भी न कर सके ।।


अन्त में उन्होंने पहले दो विमान को हवाई पदृटी पर दौड़तें और फिर जमीन छोड़कर आकाश की अोर उठते देखा । अपने दो विमानों के अतिरिक्त वे एयरपोर्ट पर मौजूद सभी विमान नष्ट कर गये थे ।।

भारी बूटों की आवाज करता हुआ सैनिक कंटीले तारों की दीवारों के समीप से गुजरा तो विकास और वतन ने अपनी सांसे रोक ली । सैनिक उनके समीप आया तो किसी गोरिल्ले की भांति झपटकर विकास ने सैनिक को दबोच लिया । विकास ने एक हाथ से उसकी गन वाली कलाई को पकडा और दूसरा उसके मुंह पर ढ़क्कन बनकर चिपक गया।

लाचार सैनिक चीख भी नहीं सका और विकास ने उसे झाडीयों में खींच लिया ।


विकास ने क्योंकि उसकी नाक और मुंह बंद कर रखे थे अत: सांस न लेने के कारण वह दो मिनट में ही बैहोश हो गया ।

" ज़ल्दी करो दोस्त विकास ने वतन से कहा…

ठीक दो बजे गुरु और चचा का हमला होगा !


झाडि़यों में से होकर वतन ने आगे रेंगते हुए कहा…"मुझे क्रिस्टी का बहुत दुख है विकास वह बेचारी हमारे साथ आने के लिए रोती रह गई । उसे ले ही आते तो अच्छा रहता । वह बहादुर है और बहादुरी दिखाने के इस मौके पर उसने अपनी इच्छाओं को किस तरह दबाया होगा ।"

'’मैंनें तो कहा भी था तुमसे कि उसे अाने दो ।" रेंगत हुए विकास ने कहा ।


"मैं नहीं चाहता था विकास कि क्रिस्टी मेरे लिए अपनी जान पर खेले वतन ने कहा ।
"आपके चाहने से क्या होता है?" एका एक वे दोनो…अपने समीप से ही क्रिस्टी की आवाज सुनकर चौक पड़े।



वतन तो एकदम बुरी तरह से बौखला गया । मुंह से एक ही शब्द निकला-"क्रिस्टी !"




--"हां ।". अंधेरे में से आवाज उभरी---" मैं साथ हूँ आपके ।"



आवाज की दिशो में अंधेरा था और उस अंधेरे को वतन ने घूरा क्रिस्टी उसे नजर न आई तो बोला----" कहाँ हो क्रिस्टी ?"



'"यहां हूं मैं-आपके बहुत करीब ।" इस आवाज के साथ वतन के जिस्म में बिजला-सी दौड़ गई । अंधेरे में उसके हाथ को एक कोमल हाथ ने भींच दिया था । अनजाने मैं ही वतन ने उस कोमल हाथ को जोर से भींच दिया लिया ! बोला----" त-तुम लौट जाओ क्रिस्टी !"



-"हदय पर वज्रपात न करो !" दर्द में डूबी क्रिस्टी की आवाज ।



" लेकिन मै......!"

"विकास भैया समझाओ न इन्हें ।" क्रिस्टी ने कहा…"'मुझसे बात करके क्या इस महत्त्वपूर्ण समय को खो रहे हैं ।। वो देखो , सामने प्रयोगशाला का मुहाना---रूपी दरवाजा है----सुरंग से किसी वल्ब की रोशनी झांक रही है । दो सैनिक हाथ में गन लिए मुहाने पर खड़े है ! इनसे निपटकर अन्दर जाना है । अन्दर न जाने कितने सैनिकों से निपटना पडे । बहुत काम है…समम बहुत कम । दो बजे हवाई हमला हो जायेगा । उस समय तक हम प्रयोगशाला से बाहर न निकले तो इन सबके साथ ही प्रयोगशाला हमारी भी कब्र बन जाएगी ।"
इससे पूर्व कि वतन कुछ बोले, विकास ने कहा---"वतन, अब आ ही गई है तो आने दो क्रिस्टी को । देखा जायेगा है तुम ध्यान को चारों तरफ से हटाकर सिर्फ लक्ष्य पर केन्दित करो । वह देखो…सुरंग के अन्दर से कोई बाहर आ रहा है ।"
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10 hours ago,
#65
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
सचमुच एक सैनिक अधिकारी बाहर आया ! दरवाजे पर खड़े दोनों सैनिकों से कुछ बातें करने लगा ।


उसी पल क्रिस्टी ने वतन का हाथ छोड़ दिया । वतन को एेसा लगने लगा, जैसे उनका ह्रदय खाली होता जा रहा है ।



न जाने क्यों उसे क्रिस्टी का इस तरह हाथ छूड़ाना अच्छा न लगा ।


वे प्रयोगशाला के मुहाने के काफी करीब थे । इतने करीब अगर वे अपने स्थान से एक जम्प लगा देते तो मुहाने पर ही होते ।



वतन और विकास अभी कुछ सोच ही रहे थे कि अंधेरे में क्रिस्टी की आवाज गूंजी…"वे तीन हैं, हम भी तीन ! दायां मेरा, बायां बिकास भैया का और अफ़सर को ये संभालेंगे !"



वतन अभी कुछ समझ भी नहीं पाया था कि क्रिस्टी ने कहा --"'वनं टू थ्री !"



और थ्री के साथ ही विकास और क्रिस्टी ने अपने-अपने शिकार पर जम्प लगा दी । वतन क्योंकि तैयार नहीं था, इसलिए थोडा चूक गया ।

इन दोनों ने अपने अपने शिकारों कों दबोचा, अधिकारी ने चौककर रिर्वाल्वर निकाला और क्रिस्टी पर फायर कर दिया ।


यह वहीं वक्त था, जब वतन अधिकारी के ऊपर अाकर गिरा ।



गोली क्रिस्टी के पेट में लगी थी किन्तु अपने शिकार को उसने छोड़ा नहीं ।


वतन तो जैसे पागल हो गया था ।



उसका मुगदर संन्नाकर अधिकारी की कनपटी पर पडा़ तो वह चीख के साथ हमेशा के लिए सोगया ।
फॉयर की आवाज ने प्रयोगशाला के अन्दर-बाहर के सभी सैनिकों को सचेत कर दिया था ! विकास ने सोचा कि अब जबकि सन्नाटा भंग हो ही गया' है तो कोई भी काम चुपचाप करने से क्या लाभ है उसने रिबाँल्बर निकालकर दोनों सैनिकों को मार डाला । वतन ने झपटकर क्रिस्टी को पकडा, बोला-----" तुम ठीक हो क्रिस्टी !"



" हां, मेरे देवता-----ठीक हूं मैं ।" अपने दर्द को पीकर क्रिस्टी ने कहा------"मेरी चिंता मत करो । अन्दर जाओ, मैं यहीं पडी़ हूँ । तुम्हारी कसम, बाहर बाले सैनिकों को भी अन्दर नहीं जाने दूंगी ।"




" क्रिस्टी ........" उसने कुछ कहना चाहा ।



"आंओं वतन !" उसका हाथ पकड़कर के अंदर प्रविष्ट हो गया विकास । चारों तरफ़ से सैनिकों के भागते कदमों की आवाजें आ रही थीं । अभी वतन उससे कुछ कहना ही चाहता था कि विकास ने अन्दर का वह एक बल्ब फोड़ दिया । जिसका प्रकाश सुरंग के मुहाने के रास्ते से बाहर झांका करता था ।

सुरंग में गहरा अंधेरा छा गया । वतन का हाथ पकड़े विकास अंधेरी सुरंग से भागा चला जा रहा था । सुरंग,
के बाहर से फायरों की आवाज आ रही थी !




वे आवाजें वतन के सीने को छलनी किये दे रही थीं ।



"विकास,क्रिस्टी ।'" दौड़ता हुआ वतन कुछ कहना ही चाहता था कि विकास ने कहा --"वह सब सम्हाल लेगी , वतन ! तुम सामने नजर रखो !"



विकास और वतन भले ही सुरंग के अंधेरे भाग में भाग रहे थे, किन्तु आगे प्रकाश था !



उस प्रकाशं में तीन सैनिक भागकर उन्हीं की अोर आते दिखाई दिये ।


वतन ने हैंडग्रनेड की पिन खींची और उनकी तरफ उछाल दिया !



फिर---फायर, धमाकों, चीखों, भागते हुए कदमों की आवाजों का बाजार गर्म हो गया । तबाही मचाते हुए ये 'दोनों' अन्दर की तरफ भागे चले जा रहे थे । तुरंग समाप्त हुई तो स्वयं को उन्होंने एक हाँल में पाया !
उस हाल में उनके और चीनी सैनिकों के बीच एक जबरदस्त मोर्चा लगा ।



गोलियां चलती रहीं ! बीच-बीच में दस्ती बमों के धमाके ।

हाँल को लाशों से पाटकर वे एक गैलरी में बढ़ गये ! उन्हें जहां से भी गुजरना होता था, वहां का बल्ब फौड़कड़ पहले अंधेरा कर देते थे । उनकी यह तरकीब काफी काम आ रही थी । प्रत्येक बार वे अंधेरे में होते थे और दुश्मन प्रकाश में ।



हिमालय के गर्भ में छुपे उस सारे अड्डे में धूम गये वे ! उनके सामने किसी भी सैनिक के आने का मतलब था…. उसकी मृत्यु ! अन्त में----- ऐसे बन्द दरवाजे के सामने ठिठक गये वे,
जिसके बाहर लिखा था "प्रयोग-कक्ष"



उसे देखते ही विकास ने सर्वप्रथम उस बल्ब को फोड़ा जिसके प्रकाश में उन्होंने उपर्युक्त शब्द पढ़ा था । इधर वतन ने एक हैंडग्रेनेड प्रयोग-कक्ष के दरवाजे पर दे मारा । एक भंयकर विस्फोट के साथ दरबाजा खील-खील हो कर बिखर गया । बुरी तरह से लगी हुई आग के ऊपर से कूदकर वे दोनों प्रयोग-कक्ष के अंदर चले गये ।



अन्दर रोशनी थी ओर बीस वैज्ञानिक नजर आने वाले व्यक्ति भयभीत से खड़े थे ! पलक झपकते ही विकास की गन ने गर्जना शुरू किया और उनमें से पन्द्रह वैज्ञानिक चीख -चीखकर शहीद हो गये !



शेष पांच ठग सेे खडे़ थे ।



"'तुम इनसे फिल्म और 'वेवज एम' लो वतन मैं बाहर से संभालता हूँ ।" कहने के साथ ही विकास ने गजब-नाक फुर्ती के साथ वापस बाहर की तरफ जम्प लगा दी । पांचों जीवित वैज्ञानिकों की तरफ वतन की गन तनी थी । उसने गुर्राकर पूछा-"फिल्में कहां है ?"



उनमें से किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया तो वतन की गन ने दो बार खांसा ।

दो वैज्ञानिकों के चीखकर गिरते ही शेष तीन चीख पड़े, "बताते हैं ।"



" जल्दी बोलो ।" वतन गुर्रोंया !



उनमें से एक शीघ्रता के साथ एक प्रयोग सीट के नीचे की अलमारी खोली ! उसमें से एक डिब्बा निकाला । शीघ्रता के शाथ कांपते हाथों से डिब्बे में से फिल्में निकाली और वतन की और बढा दी ।



. वतन पुन: गुर्राया----"इन्हें खोलकर दिखाओ ।"


डिब्बा प्रयोग सीट पर रखकर सामने फिल्म खोल खोल- कर दिखाई !



अपनी फिल्मो को पहचानने के बाद वनन ने कहा----" इनको डिब्बे में रखकर डिब्बा मेरी तरफ उछाल दो !"



उसके आदेश का पालन हुअा । …


"वेवज एम कहा है ?" डिब्बा जेब में रखते हुए वतन ने पूछा ।


एक वैज्ञानिक ने डिब्बा अलमारी से निकालकर सीट के ऊपर रख दिया । वतन की गन से बीसों गोलियाँ ने निकाल-कर वेवज एम का अस्तित्व समाप्त करा दिया है फिर उन… तीनो वैज्ञानिकों की तरफ देखकर वह गुर्राया---तुम तींनों भी यह वेवज एम बनाने वाले वज्ञानिकों में से हो । बनाते वक्त इसकी कुछन कुछ कार्यविधि तो तुम्हें याद हो ही गई होगी। अतः जीवित रहने का अधिकार खो चुके हो तुम ।"


अपने शंब्दों की समाप्ति के साथ ही वतन ने उन् तीनों को भी मार डाला !

फिर प्रयोग कक्ष में अंधेरा किया । झपट कर वह कक्ष से बाहर निकला !


" काम हो गया ? अंधेरे में छुपे बिकास ने पूछा !



" हां ....!" वतन ने कहा…"वेवज एम को नष्ट कर आया हुं-वे फिल्में मेरे पास है।"


"आअो----"अँधेरे में से आकर, बिकास ने वतन का हाथ पकड़ लिया, फिर उसी अंधेरे में से होते हुए, जिसे वे स्वयं बनाते चले आये ये बाहर की तरफ भागे ।
बाहर निकले तो बाहर छुटपुट फायरों की आबाज हो रही थीं !


वे दोनों सुरंग के मुहाने के पास जमीन पर लेट गये थे , वतन फुसफुसाया- "क्रिस्टी !"


" 'मैं’ ठीक हूँ । उसके समीप ही अँधेरे में पड़ी क्रिस्टी ने उसका हाथ पकड़ लिया--" तुम्हारी कसम वतन, एक भी कुत्ते को अन्दर न जाने दिया मैंने । सबको मार डाला । सामने की झाडियों में सिर्फ एक सैनिक बचा है!"



"उसे मैं देखता हूँ । कहने के बाद विकास अंधेरे में आगे रेंग गया !
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10 hours ago,
#66
RE: antervasna चीख उठा हिमालय
वतन ने भावावेश में क्रिस्टीना के शरीर को टटोंला तो खून से रंग गये उसके हाथ । चीख सा पडा वतन-----" क्रिस्टी !"



"हां मेरे देवता !"

" तुम घायल हो !"



"ज्यादा नहीं तीन गोलियाँ लगी हैं सिर्फ ,, एक तुम्हारे सामने, दो बाद में वदले में मैंने उन सबको मार डाला ! "

"क्रिस्टी !" पागल-सा होकर वतन उससे लिपटता हुआ बोला---" तुम कैसी पागल हो क्रिस्टी ?"



"वो.......वो देखो....... विमानों की, आवाज आ रहीं है.... क्रिस़्टी ने कहा-------" इम प्रयोगशाला पर हमला होने वाला हैं जल्दी चलो यहां से अभी तो इस नर्क समान मुल्क से बाहऱ निकलना है, तुम्हें !"



" आओ वतन । चचा पहुंच चुके है !" विकास की आवाज ! फिर वे तीनों एक-दूसरे का हाथ पकडे़ उस स्थान से दूर' के भागने लगे !!!


ऊपर प्रयोगशाला के ठीक ऊपर दो विमान चकरा रहे थे । ठीक दो बजे उनमें से एक विमान ने पहला बम प्रयोगशाला के ऊपर फेंका ।



एक भयंकर विस्फोट के साथ हिमालय का वह भाग उड़ गया।।


वहा से दूर वे तीनों भागते हुए एक छोटी -सी पहाडी पर चढ़ रहे थे ,उधर-वे दोनों विमान भयानक रुप से प्रयोशाला के ऊपर बम बर्षा कर रहे थे !!
'"बिनाश विनाश-बिनाश "!


विस्फोट पर विस्फोट आग-ही-अाग आग की लपटों में गर्त हो गयी चीनियों-की वह प्रयोगशाला !


एेक घण्टे की निरन्तर कोशिश के बाद वे-तीनों उस पहाडी की चोटी पर पहुंच गये । वहां पहुंचकर वतन ने जेब से एक बिचित्र-सा रिवॉल्वर निकाला और आकाश की ओर
उठाकर ट्रैगर दबा दिया । रिबाँल्बर की नाल से एक हरे रंग की चमचमाती हुई माला आकाश की तरफ लपकी ।।

आधे घण्टे बाद ही वे दोनों विमान उस पहाडी के ऊपर चकरा रहे थे । उन दोनों से नीचे पहाडी तक दो रस्सियां लटक रहीं थीं !! वतन ने क्रिस्टी से कहा अाओ क्रिस्टी...!"



" 'कहां…?” क्रिस्टी का दर्द-युक्त स्वर---"कहाँ आऊं?"



"'क्या मतलब ?" चौक पड़ा वतन-" तुम नहीं आओगी क्या ?"




"आपका काम खत्म हो गया मेरे देवता !" क्रिस्टी ने कराहकर कहा----"" जाओ इस नर्क से बाहर…मुझे तो यहाँ रहना है !"



-"नहीं ।"' पूरी शक्ति से चीख पड़ा वतन ।



"हां मेरे देवता" 'इसी नर्क समान मुल्क में रहना है मुझे !" क्रिस्टीना ने क्रहा----"'इसलिये कि मेरी सरकार ने मुझे यहाँ जासूसी करने भेजा है ! अपने प्यारे भारत केलिये इसनर्क में ही रहुंगी मैं....."




" नहीं क्रिस्टी तुम भी चलो ।" विकास बोल उठा !

" तुम भी मेरे देवता की तरह पाग़लों जैसी बातें करने लगे विकास भैया !" क्रिस्टी ने मुस्कराकर कहा…क्या तुम नहीं जानते कि मुझे अपने देश की तरफ से क्या हुक्म है ?"
" लेकिन तुम घायल तो क्रिस्टी !" वतन चीखा । "



" इतनी घायल तो इस नर्क में न जाने कितनी बार हुई हूं !" क्रिस्टी ने कहा-----" चित्ता न करो है इतनी ताकत तो क्रिस्टी में अभी है कि वह यहाँ से सुरक्षित अपने फ्लैट पर पहुंच सकती है !"


" नहीं क्रिस्टी नहीं !" पागलों की तरह चीख पडा वतन---"मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊंगा ।"



किन्तु अपनी कसम दे दी क्रिस्टी ने । कह दिया कि अगर उसने साथ ले जाने की जिद की तो उसकी लाश देखेगा । क्रोध में झुलसता वतन एक विमान से लटकी रस्सी पर लटक गया । विकास दूसरे विमान की रस्सी पर ।


विमान ऊचे उठती चले गये ! रस्सी पर लटके वतन और विकास नीचे अंधेरे में डूबी उस पहाडी को देखने की कोशिश कर रहे थे । उन्हें मालूम था कि उस पर खडी क्रिस्टीना तडप-तड़प रो रही होगी !
एक हफ्ते के अन्दर विजय ने विभिन्न देशों में गये भारतीय सीक्रट सर्बिस के सदस्यों को भारत बूला लिया !


अमेरिका से हैरी के बदले अशरफ को ले लिया । भारत में विजय को अलफांसे का पत्र मिला, जिसमें उसने लिखा था…



इतनी आसनी से तुम्हारा काम इसलिये होंगया क्योंकि हिमालय के चीखने का मतलब पोक, हवानची
सिंगसी नुसरत, तुगलक और बाण्ड भी समझ नहीं सके थे ! इन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि हिमालय ने चीखकर तुम्हें बुलाया है । वे तुम्हें पूरे चीन में तलाश करते रहे अौर तुम अपना काम करके निकल गये । सच पूछो इस बार मुझे भी धोखा दे गये ! मेरा ध्यान फिल्मों को प्राप्त करके कुछ कमाने का था, लेकिन मैं चूक गया ।

यह कल्पना मैंने भी नहीं की कि हिमालय के चीखने का मतलब था कि फिल्में वहां है !!!



-------
तुम्हारा अलफांसे
उपन्यास समाप्त होता है
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