Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
06-09-2018, 02:17 PM,
#41
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--41
गतांक से आगे ...........
मैंने रूपाली की तरफ देखा, वो हमें ही देख रही थी, परन्तु जैसे ही मैंने उसकी तरफ देखा उसने अपनी नजरें नीची कर ली।
मैं धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। उसने नजर उठाकर मेरी तरफ देखा और फिर से अपनी नजरें झुका ली। जैसे जैसे मैं उसकी तरफ बढ़ रहा था उसकी धड़कनें तेज होती जा रही थी और उसके हाथ दरवाजे की कुंडी पर कसते जा रहे थे।
बीच बीच में वो मेरे झुलते हुए लिंग पर चोरी चोरी नजरें फिरा रही थी। जैसे ही मैं उसके नजदीक आया उसने अपना मुंह फेरकर दरवाजे की तरफ कर लिया और दरवाजे से सटकर खडी हो गई। पिछे से उसके छोटे छोटे गोल कुल्हों जिन पर कुर्ती कसी हुई थी ने तो कहर ही ढा दिया।
आगे होकर मैंने उसके कंधों पर अपने हाथ रख दिये और मेरा लिंग सीधा उसके कुल्हों के बीच की गहराई में कपड़ों के उपर से ही जा चिपका।

मेरा स्पर्श पाते ही वो सिहर उठी और उसके मुंह से एक आहहह निकली। वो और भी ज्यादा दरवाजे से चिपक गई और अपने कुल्हों को आगे करने की कोशिश करने लगी। पर आगे तो दरवाजा था। मैं और आगे सरक गया और मेरा लिंग उसके कुल्हों पर सेट हो गया। मैंने उसकी कमर के साइड से अपने हाथ आगे किये और उसके उभारों पर रख दिये। छोटे छोटे उभार पूरे के पूरे मेरे हाथों में समा गये। मेरे लिंग का दबाव उसके कुल्हों पर बढ गया था। मैं अपने कुल्हों को हिला हिलाकर उसके कुल्हों पर अपने लिंग को मसल रहा था।
मैंने एक हाथ नीचे किया और उसकी कुर्ती को उपर सरका दिया। मेरा लिंग उसकी मखमली सलवार के उपर से उसके कुल्हों पर दब गया। सलवार इतनी कोमल थी कि लग ही नहीं रहा था कि मेरे लिंग और उसके कुल्हों के बीच सलवार भी है। मैंने अपने लिंग को उसके कुल्हों के बीच में सैट किया और हल्के हल्के धक्के लगाने लगा।
उसके दिल की धडकन इतनी बढ गई थी मैं मेरे हाथ भी उसके उभार के साथ में उछल रहे थे। मैंने अपने दूसरे हाथ को नीचे ले जाकर उसकी कुर्ती के अंदर डाल दिया और कुर्ती को उपर उठाते हुए उसके पेट को सहलाने लगा। उसका पेट रह रहकर उछल रहा था। उसके पेट को सहलाते हुए मैंने अपना हाथ धीरे से उसकी सलवार के अंदर डाल दिया और उसकी पेंटी के उपर से उसकी योनि को सहलाने लगा। जैसे ही मेरा हाथ उसकी योनि पर लगा उसके शरीर ने एक झटका खाया और उसके कुल्हें पीछे को निकल आये जिससे मेरा लिंग उसकी सलवार के साथ उसकी गहराई में समा गया। मैं लिंग को जोर जोर से उसकी गहराई में मसलने लगा।
रूपाली की सिसकियों की आवाज तेज होने लगी। उसकी पेंटी पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपना हाथ बाहर निकालते हुए उसकी सलवार के नाड़े को पकड़ लिया और बाहर निकलते ही खींचकर खोल दिया और कमर को हलका सा पिछे कर लिया। उसकी सलवार सीधी उसके घुटनों पर जाकर अटक गई जो कि दरवाजे के साथ चिपके हुए थे।
सलवार निकलते ही मैंने वापिस अपना लिंग उसकी कुल्हों के बीच सैट कर दिया। पेंटी उसके नितम्बों के बीच की गहराई में फंसी हुई थी। मैंने फिर से अपने हाथों को हरकत दी और उसकी पैंटी को भी नीचे सरका दिया और घुटनों तक करके अपना लिंग उसके नंगे नितम्बों के बीच सैट करके हल्के हल्के धक्के लगाने लगा।
रूपाली का शरीर कांप रहा था और उसके मुंह से दबी हुई सिसकारियां निकल रही थी। मैंने अपना एक हाथ उसकी योनि पर रखा और अपनी उंगली से उसकी फांको को अलग करके उसके स्वर्ग द्वार को कुरेदने लगा।
रूपाली पागल हो उठी और घुमकर अपने हाथ मेरी कमर में डाल दिये और मुझे कसकर जकड़कर मेरे सीने में चिपक गई। उसके घुमने से मेरा लिंग सीधा उसकी योनि पर टकर मारने लगा। मैंने अपने हाथ उसके कुल्हों पर रखे और उसे उपर उठा लिया। घूमते समय पहले ही सलवार उसके पैरों में नीचे जा चुकी थी, जैसे ही मैंने उसे उठाया सलवार उसके पैरों से निकलकर फर्श पर जा गिरी।
मैंने उसे उठाकर पास में रखी टेबल पर बैठा दिया। वो मुझसे जोक की तरह चिपक गई थी, दूर होने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैंने उसके हाथों को अपनी कमर में से हटाया और उसको खुद से दूर करते हुए उसकी कुर्ती को पकड़कर उसके शरीर से अलग कर दिया।
व्हाईट कलर की ब्रा में कैद उसके छोटे छोटे उभार देखकर मैं पागल हो गया और पिछे हाथ लेजाकर उसकी ब्रा के हुक खोलते हुए ब्रा को निकालकर एक तरफ उछाल दिया।
रूपाली ने अपने चेहरे को अपने हाथों में छिपा लिया। उसके नंगे बदन को देखकर मैं पागल हुआ जा रहा था। मैंने अपने हाथ उसके उभारों पर कस दिये और जोर जोर से उन्हें मसलने लगा।
रूपाली ने अपने हाथ मेरे हाथों पर रख दिये। मैंने अपने होंठ आगे बढ़ाये और उसने तुरंत ही मेरे होंठों को कैद कर लिया।
एकदम नरम गुलाब की पंखुड़ियों जैसे, अनछुए लबों पर जब मेरे होंठ पड़े तो मैं उनमें ही गुम हो गया। मैं बहुत ही जोर जोर से उसके होंठों को चूसने लगा। कभी उपर वाले होंठ को कभी नीचे वाले होंठ को चूस रहा था। उसके हाथ मेरे सिर पर थे। उनमें अपनी जांघों को मेरे कुल्हों पर लपेट दिया जिससे मेरा लिंग उसकी योनि पर टक्कर मारने लगा। मुझे किस करते हुए वो अपनी कमर को आगे पिछे कर रही थी। मेरा लिंग उसकी योनि से निकलते अमृत से भिगता जा रहा था और चिकना होकर उसकी योनि पर जोरदार टक्कर मार रहा था, चिकना होने के वजह से बार बार फिसल कर उसके अकड़े हुए दाने को कुचलता हुआ पेट पर चुम्बन ले रहा था।
अचानक मुझे अपने कुल्हों पर ठंडे ठंडे हाथ महसूस हुये। रूपाली के होंठ चूसने में मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं उनसे किसी भी हालत में दूर नहीं होना चाहता था। रूपाली के हाथ मेरे सिर पर थे, ओह तो ये तान्या के हाथ हैं, मैंने मन ही मन सोचा और निश्चिंत होकर रूपाली के होंठों का रस पान करने में लगा रहा। तान्या ने अपने हाथ मेरी पीठ पर फिराने शुरू कर दिये थे। मेरे शरीर में आनंद की लहरें दौड़ रही थी

रूपाली भी मेरे होंठों को चूसने में बराबर साथ दे रही थी। जब काफी देर तक चूसने के कारण मेरे होंठ दर्द करने लगे तो मैंने उसके लबों को उसके लबों से अलग किया। हमारे सांसे उखड चुकी थी। मैंने रूपाली को अपनी बांहों में भरकर उठाया और बेड पर लाकर लेटा दिया और खुद उसके साथ लेट गया। मैं अपनी सांसे दुरूस्त करने की कोशिश कर रहा था।
तान्या मुंह लटका कर वहीं टेबल पर अपने पैर लटका कर बैठ गई। जब मेरी सांसे कुछ नोर्मल हुई तो मैं रूपाली के उपर आ गया और उसके योनि के लबों को अपने हाथों से अलग किया। उसकी योनि पर एक भी बाल नहीं था, देखने से ऐसा लग रहा था कि अभी आये ही नहीं है। गोरी चिटी योनि की मोटी मोटी फांके देखते ही मेरा लिंग पागल हो उठा और जोर जोर से झटके मारने लगा। मैंने अपनी उंगलियों से उसकी योनि के लबों को एक दूसरे से अलग किया। अंदर पूरी तरह से गीली गुलाबी योनि को देखते ही मेरी लार टपक गई और मेरे होंठ सीधे उसकी योनि से जाकर चिपक गये। मेरी जीभ उसकी योनि की फांकों के बीच अपना पहुंच गई।
जैसे ही मेरे होंठ उसकी योनि पर टच हुए रूपाली की कमर हवा में उठ गई और उसके मुंह से जोर की आहहह निकली और उसके हाथ सीधे मेरे सिर पर पहुंच कर मेरे सिर को अपनी योनि पर दबाने लगे। मैंने अपनी जीभ से उसका अम्त चाटना शुरू कर दिया। हल्का हल्का बकबका सा रस, पर शायद आज पहली बार बह रहा था। मैंने अपने होंठों को उसके स्वर्ग द्वार पर सैट किया और जोर से अपनी अंदर की तरफ खींचने लगा। उसकी योनि अमृत रस खिंचता चला आया और मेरे मुंह को भर दिया।
रूपाली का शरीर अकड़ कर हवा में उठ गया। सिर्फ उसका सिर और पैरों के पंजे ही बेड पर टिके थे।
मैंने अपनी जीभ को बाहर निकाला और उसके योनि द्वार पर लगाकर अंदर की तरफ धकेलने लगा। परन्तु उसकी योनि बहुत ही टाइट थी, जीभ अंदर जा ही नहीं रही थी।
एक बार झडने के बाद उसका शरीर वापिस धड़ाम से बेड पर गिरा और वो जोर जोर से सांसे लेने लगी।
मैं उपर की तरफ होता हुआ उसकी नाभि तक आया और अपनी जीभ उसकी नाभि में डाल दी। धीरे धीरे मैं उपर की तरफ आता गया और उसके उभारों के पास आकर मैंने अपनी जीभ उसके एक निप्पल पर टच की और फिर उसके ऐरोला पर फिराने लगा। रूपाली के पैरों में फिर से हरकत होनी शुरू हो गई। वो अपनी जांघों को भिंचने लगी।
मैं उसके उपर लेट गया और लिंग को उसकी योनि पर सैट करके हल्का सा धक्का लगाया। पर लिंग साइड में फिसल गया। मैंने दोबारा ट्राई किया पर फिर लिंग साइड में फिसल गया। मैंने लिंग को हाथ में पकड़कर उसकी योनि के द्वार पर सैट किया और एक हल्का सा धक्का लगाया। मेरा लिंग हल्का सा अंदर हो गया, केवल सुपाड़े के आगे का भाग।
रूपाली का शरीर एक बार कांपा और फिर ढीला पड़ गया। उसने मुझे कसके अपनी बाहों में भींच लिया। मैंने लिंग को वैसे ही पकउ़े पकउ़े थोड़ा सा दबाव डाला तो रूपाली की कमर बेड से उपर उठ गई और उसके मुंह से हल्की सी दर्द भरी आह निकली।
उसके हिलने से मेरा लिंग साइड में फिसल गया। मैंने फिर से लिंग को उसकी योनि पर सैट किया और हल्का सा दबाव डाला, पर जैसे ही मैं दबाव डालता वो हिलती और लिंग साइड में फिसल जाता। परेशान होकर मैं बैठ गया और एक तकिया उठाकर उसके कुल्हों के नीचे सैट किया और फिर बैठे बैठे ही अपना लिंग उसकी योनि द्वार पर सैट किया और उसके उपर लैट गया। तकिया लगाने से मेरा लिंग उसकी योनि पर सही तरह से सैट हो गया था। मैंने अपने लिंग को थोड़ा सा पिछे किया, मेरा हाथ अभी भी लिंग को उसकी योनि द्वार के अलाइन में बनाये हुये था और फिर एक धक्का मारा। मेरा लिंग थोड़ा सा अंदर होकर वापिस बाहर की तरफ फिसल गया। पर उस थोउ़े से अंदर होने से ही रूपाली के शरीर में एक दर्द की लहर दौड़ गई।
उसने अपने पैर मेरे कुल्हों पर लपेट दिये और जोर से भींच लिये। उसके ऐसा करने से मैं हिल नहीं पा रहा था, जिससे धक्का नहीं लगा सकता था। मैंने वैसे ही लेटे हुए उसके होंठों को अपने होंठों से पकड़ा और चूसने लगा।
मस्ती में आकर उसके पैरों की पकड़ कुछ ढीली हो गई और मौके का फायदा उठाते हुए मैंने लिंग को उसकी योनि द्वार पर सैट किया और एक जोर का धक्का मार दिया। मेरा सुपाड़ा उसकी योनि की दीवारों को चीरता हुआ आधा अंदर समा गया।
रूपाली का शरीर अकड़ गया और उसकी आंखों से अश्रु धारा बह निकली। उसके पैरों की पकड़ एकदम कस गई और उसके हाथ सीधे मेरी पीठ पर पर्हुच गये और उसके नाखून मेरी पीठ में उतर गये, उसके नाखून चुभने से मुझे भी काफी दर्द हुआ।
उसके मुंह से निकली चीख मेरे लबों में दब कर रह गई। मैंने ऐसे ही रहते हुए लिंग को थोड़ा थोड़ा दबाव डालने लगा। लिंग योनि की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुसने लगा। रूपाली के नाखून मेरी कमर में गडने लगे और मेरे होंठों में उसका दांत। दर्द तो बहुत हो रहा था पर जो आनंद उसकी कसी हुई कच्ची टाइट योनि में आ रहा था, उसके सामने दर्द कम ही था। दबाव डालते डालते लिंग लगभग 2 इंच अंदर पहुुंच चुका था। आगे कुछ अड़चन महसूस हो रही थी शायद उसकी झिल्ली थी। मैं कुछ देर वहीं पर रूक गया। जब रूपाली कुछ नोर्मल हुई और उसके नाखून का दबाव मेरी कमर में कम हो गया और होंठों पे दांतों का तो मैंने अपनी कमर को उठाते हुए लिंग को बाहर खींचा और फिर एक जोरदार धक्का मार दिया। लिंग उसकी झिल्ली को फाडता हुआ सीधा उसके गर्भाश्य से जा टकराया।
उसने भी बदला लेते हुए मेरे होंठों को बुरी तरह से काट लिया और नाखून कमर में गाड़ कर खरोंच दिये। दर्द के मारे मेरी आह निकली गई।

उसकी योनि ने मेरे लिंग को इस तरह जकड़ लिया था कि अभी के अभी उसकी जान निकाल लेगी। झिल्ली फटने से बहता गर्म खून आग में घी का काम कर रहा था। इतना दर्द हो रहा था मुझे कि मन कर रहा था उसको कच्च चबा जाउं। मैं ऐसे कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा, कुछ मेरे दर्द के कारण कुछ उसके दर्द के कारण। जब कुछ समय बाद उसके नाखूनों और दांतों की पकउ़ ढीली हुई तो मैंने राहत की सांस ली। उसकी योनि ने अभी भी मेरे लिंग को उसी तरह जकड़ रखा था। जब वो नोर्मल हो गई तो मैंनें उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। मजे में दर्द को तो मैं भूल ही चुका था। थोउ़ी ही देर में वो अपने कुल्हे हिलाने लगी। मैंने अपने लिंग को बाहर खींचा और फिर से एक जोर का धक्का मारा। उसके मुंह से आह निकल कर मेरे मुंह में गुम हो गई और उसकी हाथ मेरी कमर पर कस गये और पैर कुल्हों पर। गनीमत थी की अबकी बार नाखून और दांत नहीं कसे थे।
फिर तो धक्कों ने जो रफतार पकड़ी तो उसकी कुल्हें भी ताल से ताल मिलाकर साथ देने लगे।
उसकी योनि के अंदर की गर्मी और इतना ज्यादा कसाव मेरा लिंग सहन नहीं कर पाया और उसके अंदर की आग को शांत करने के लिए अपना रस उगलना शुरू कर दिया। जैसे ही उसने मेरे रस को महसूस किया उसका शरीर अकड़ा और उसने मुझे इस तरह से अपनी बाहों में भींच लिया कि मानो दो टुकउ़े कर देगी। उसकी योनि ने भी अपना रस बहाना शुरू कर दिया।
मेरा लिंग जड़ तक उसकी योनि में घुसा हुआ था। कुछ देर बाद हम स्वर्ग से वापिस लौटे तो हमारी सांसे उखडी हुई थी और शरीर में दर्द का अहसास तडपा रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरे होंठ को काट कर मुझसे अलग कर दिया है। दर्द के अहसास के कारण मेरा लिंग सिकुड कर छोटा सा हो गया और उसकी योनि से बाहर निकल गया।
वो बुरी तरह से मेरे मुंह को चाटने और चूमने लगी।
मेरे होंठ में दर्द हो रहा था इसलिए मैंने खुद को उससे अलग किया और उठ कर बेड पर बैठ गया। मेरा धयान उसकी योनि की तरफ गया तो वो बुरी तरफ से फट चुकी थी और उसका मुंह खुला हुआ था। उसकी योनि से मेरा और उसका रस बह रहा था, जो हलका हलका लाल लाल सा था।
रूपाली बेड पर लेटी हुई अपनी आंखें बंद करके मुस्करा रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और बाथरूम में लाकर शॉवर चलाकर उसके नीचे खड़ी कर दिया। परन्तु खड़े होते ही उसे योनि में असीम दर्द का अहसास हुआ जिस कारण से वो मेरे गले में बाहें डालकर झूल गई।
मैंने उसे सहारा देकर कमोड़ पर बैठा दिया और फिर गीजर चालू कर दिया। गर्म गर्म पानी से उसकी योनि को साफ किया और फिर नहाने के लिए शॉवर के नीचे आ गया।
सॉरी----- आई एम सो सॉरी,,, अचानक उसकी आवाज आई।
क्या हुआ,,,, सॉरी क्यों बोल रही हो, मैंने कहा।
उसने अपनी उंगली मेरी कमर की तरफ कर दी। मैंने पिछे मुंह करके सीसे में अपनी कमर देखी तो कमर पर खून जमा हुआ था और जगह जगह घाव हो रहे थे। मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कराया।
इट्स ओके---- टैंशन मत लो, मैंने कहा।
मेरी बात सुनते ही वो उठने लगी पर जैसे ही उसने उठकर एक कदम आगे बढ़ाया उसके शरीर में दर्द की लहर दौड़ गई और वो वापिस कमोड़ पर बैठ गई।
मैंने उसे सहारा देकर उठाया और शॉवर के नीचे लाकर खडी कर दिया। उसने मेरे कंधे को पकड़ लिया और धीरे धीरे नीचे बैठ गई। शॉवर से निकलता हलका गर्म पानी बहुत ही राहत दे रहा था।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:17 PM,
#42
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--42
गतांक से आगे ...........
शॉवर के बाद हम वापिस बाहर आ गये और मैंने उसके शरीर को पौंछा और उसको बेड पर बैठाकर उसे एक दर्द की गोली दी और खुद भी ली।
मेरी नजर पर गई तो वो ऐसे ही नंगी चेयर पर बैठी हमें घूर रही थी। मेरी कमर को देखकर शायद वो सकुचा रही थी। मैंने उसके पास गया और उसकी तरफ कमर करके फर्श पर बैठ गया और उसे लगाने के लिए मलहम दी। उसने अच्छी तरह से कमर में मलहम लगा दी। मलहम लगवाने के बाद मैं वहीं पर उसके जांघों पर सिर रखकर बैठ गया। वो मेरे बालों को सहलाने लगी। मेरे हाथ साइड से उसकी जांघों को सहला रहे थे।

मेरी नजर पर गई तो वो ऐसे ही नंगी चेयर पर बैठी हमें घूर रही थी। मेरी कमर को देखकर शायद वो सकुचा रही थी। मैंने उसके पास गया और उसकी तरफ कमर करके फर्श पर बैठ गया और उसे लगाने के लिए मलहम दी। उसने अच्छी तरह से कमर में मलहम लगा दी। मलहम लगवाने के बाद मैं वहीं पर उसके जांघों पर सिर रखकर बैठ गया। वो मेरे बालों को सहलाने लगी। मेरे हाथ साइड से उसकी जांघों को सहला रहे थे।
पेन किलर ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था और अब दर्द का अहसास लगभग खत्म सा हो गया था। मैंने सिर उठाकर बेड की तरफ देखा, लग रहा था कि रूपाली सो चुकी है।
उंहहहहह नींद आ रही है, चलो सो जाते हैं, मैंने उंघते हुए तान्या से कहा।
क्या, और मैं, मेरा क्या होगा, तान्या ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा।
अच्छा चलो, आप कुछ मत करना, मैं खुद ही कर लूंगी, तान्या ने फिर कहा।
ठीक है, मैंने थोउ़ा सोचते हुए कहा।
हम उठकर बेड पर आकर बैठ गये।
मैं लेटूंगा कैसे, कमर में दर्द होगा, कमर के घाव याद आते ही मैंने कहा।
तान्या ने पिछे तकिये रखकर इस तरह बना दिया कि कंधों तक तो मैं तकियों पर और कमर उनसे नीचे। फिर उसने मुझे पकड़कर तकियों पर लेटा दिया और दो तकिये मेरे कुल्हों के नीचे लगा दिये। इस तरह से मेरी कमर हवा में थी।
मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कराया। तान्या ने आगे बढ़कर मेरा मुरझाया हुआ लिंग अपने मुंह में भर लिया और जोर जोर से सुक करने लगी। मेरा लिंग झटका खाकर एकदम से खड़ा हुआ और इधर उधर देखने लगा कि किसने मेरी नींद खराब की, परन्तु जब तान्या की गर्म और खुरदरी जीभ की लपेटे में आया तो अपने होशो हवास भूल बैठा और जोर जोर से फुंफकारे मारने लगा।
तान्या ने कुछ देर और लिंग को सुक किया और फिर मेरे दोनों तरफ पैर करके नीचे बैठने लगी। लिंग के पास आकर उसने लिंग को योनि पर सैट किया और आराम से नीचे होती गई। कुछ ही पल में उसकी योनि ने पूरे लिंग को निगल लिया और जकड़ लिया।
उसकी योनि की गर्मी पाकर लिंग पूरी तरह अकड़ गया और तान्या धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी। बहुत देर से मेरी और रूपाली की कामक्रीड़ा देखकर वो ज्यादा ही उतेजित थी, इसलिए जल्दी ही जोरों से मेरे लिंग के उपर कूदने लगी।
उसके इस तरह कूदने से तकिये इधर उधर हो गये और मेरी कमर बेड से टच होने लगी। दर्द तो हो रहा था पर कुछ सोचकर मैंने धयान नहीं दिया।
पांच मिनट में ही तान्या का शरीर अकड़ कर पिछे की तरफ झुक गया और वो मेरे पैरों पर अपने हाथ रखकर वैसे ही बैठी रही। उसकी योनि से पानी निकलकर मेरे पेट पर बहने लगा।
थोड़ी देर बाद वो वैसे ही बैठे रहने के बाद वो अपनी योनि को मेरे लिंग पर आगे पिछे करने लगी। और दो मिनट में ही फिर से गरम हो गई और उसी तरह बैठे हुए जोर जोर से उछलने लगी। अबकी बार उसकी योनि का कसाव कुछ ज्यादा ही हो गया था। अचानक उसने अपने हाथ उठाये और आगे की तरफ झुककर मेरी छाती में रख दिये और जोर जोर से कूदने लगी।
उसकी गर्मी के कारण मैं अब किसी भी समय निकलने वाला था। और वही हुआ। लिंग ने अपने रस से उसकी योनि को भरना शुरू कर दिया और मेरे रस को महसूस करते ही वो दूसरी बार फिर से खाली होने लगी।
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद वो मेरे उपर लेट गई। उसके लेटने से मेरी कमर बेड पर जाकर टिक गई और दर्द के मारे मेरे मुंह से आहहहहह निकली।
तान्या तुरंत उठकर साइड में बैठ गई। मैं उठा और बाथरूम में जाकर खुद को साफ किया और आकर लेट गया। तान्या ने तकियों को सिरहाने रख दिया था और लेटी हुई थी।
मैं आकर औंधा लेट गया और अपना एक हाथ और एक पैर रूपाली के उपर रख दिया और जल्दी ही नींद के आगोश में समा गया।
सुबह जब मेरी आंख खुली तो मेरी कमर पर हलके हलके हाथ महसूस हुआ। मैंने आंख खोलकर सिर उठाकर देखा तो सोनल बैठी हुई थी।
गुड मॉर्निंग,,,,, मुझे उठा हुआ देखकर सोनल ने कहा।
गुड मॉर्निग------- मैंने बैठते हुए कहा।
मैंने बेड पर देखा तो तान्या और रूपाली वहां पर नहीं थी।
वो दोनों कहां गई---- मैंने सोनल से पूछा।
घर----- सोनल ने कहा।
मैंने टाइम देखा----- साढ़े आठ बजने वाले थे।
मैं जल्दी से उठा, पर जैसे ही उठने लगा तो कमर में खिंचाव महसूस हुआ। मैं वापिस बैठ गया और फिर धीरे धीरे उठ कर बाथरूम में गया। फ्रेश होकर नहाया और तैयार हुआ। सोनल नीचे चली गई थी। तैयार होकर ऑफिस के लिये निकल पड़ा।

ऑफिस जाकर बाइक खडी की और सीधा ऑफिस में आ गया। ऑफिस में कोई नहीं था।
आज अपूर्वा नहीं आई क्या, मैंने मन ही मन सोचा। तभी धयान आया कि अपूर्वा की स्कूटी भी नहीं खड़ी थी।
मैंने सिस्टम ऑन किया और चेयर पर बैठकर अपूर्वा का नम्बर मिलाया।
हैल्लो----- फोन आंटी ने उठाया था।
हैल्लो आंटी, मैं समीर बोल रहा हूं अपूर्वा के ऑफिस से, आज वो आई नहीं, मैंने कहा।
समीर बेटा----- उसकी आज तबीयत खराब है, तो इसलिए मैंने नहीं आने दिया, आंटी ने कहा।
क्या हुआ, डॉक्टर को दिखाया, क्या कहा डॉक्टर ने---- मैंने एक के बाद एक सवाल पूछने शुरू कर दिए।
कुछ नहीं हुआ, बस हल्का सा बुखार है, डॉक्टर को दिखा दिया, आंटी ने कहा।
बड़ी फिकर हो रही है, आंटी ने फिर से कहा।
बात करनी है---- लो बात करो---- मेरा उतर जाने बगैर ही आंटी ने अपूर्वा को फोन दे दिया।
हैल्लो--- अपूर्वा की धीमी सी आवाज आई।
हैल्ललााो--- मैंने भी उसकी नकल उतारते हुए कहा।
क्या हो गया तुम्हें------- मैंने कहा।
हल्का सा बुखार है------ अपूर्वा ने कहा।
तभी मुझे बाहर से बॉस की आवाज आई।
ओके, जल्दी से ठीक हो जाओ, बॉस आ रहे हैं,, मैं बाद में बात करता हूं,,,, मैंने कहा।
ओके बाय------ अपूर्वा कहा और फोन रख दिया।
आज अपूर्वा नहीं आई, बॉस ने अंदर आते हुए कहा।
वो उसको बुखार है, अभी फोन किया था मैंने, मैंन कहा।
चलो कोई नहीं, मुझे अभी मीटिंग में जाना है, मैडम की तबीयत भी कुछ खराब है, कोमल यहीं पर है, थोड़ा धयान रखना, बॉस ने कहा।
ओके बॉस, मैंने कहा और काम करने लगा।
बॉस चले गये। मैं अपने काम में बिजी हो गया। कुछ देर बाद कोमल चाय लेकर आई। मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कराया।
गुड मॉर्निंग, उसके अंदर आते ही मैंने कहा।
कोमल ने एक फीकी सी मुस्कान दी और चाय रखकर वापिस चली गई।
बड़ी नखरैल है, मैंने मन ही मन सोचा और चाय पीने लगा।
अभी चाय पी ही रहा था कि कोमल फिर से आई और आकर मेरे साइड में खड़ी हो गई।
मैंने सिर उठाकर उसकी तरफ प्रश्नवाचक निगाह से देखा।
दीदी बुला रही है, चाय पीकर चलो, कोमल ने कहा।
उसकी छोटी सी टी-शर्ट में से झांकता उसका सपाट मुलायम मखमली पेट देखकर मन तो कर रहा था कि छू लूं, पर फिर खुद को रोक ही लिया।
मैंने चाय खत्म की और कोमल के कंधे पर हाथ रखकर खड़ा होने लगा। खड़े होते हुए जानबूझ कर अपना सिर उसके उन्नत उरोजों पर टकरा दिया। एक बार तो उसके मुंह से हल्की सी आह निकली पर फिर वह संभली और तुरंत पिछे हो गई और बाहर निकल गई।
मैं उसके पिछे पिछे चल दिया। उसने एकबार पिछे मुडकर देखा और जब पाया कि मैं पिछे ही आ रहा हूं तो जल्दी जल्दी कुल्हे मटकाते हुए अंदर आ गई।
वो सीधे मैम के बेडरूम में गई। मैं भी उसके पिछे पिछे अंदर आ गया। मैम बेड पर चद्दर ओढकर लेटी हुई थी।
कोमल मैम जाकर बेड पर बैठ गई। वो बेड के साथ कमर लगाकर पैरों को आधे मोडकर बैठी थी। पैरों को थोड़ा सा खोला हुआ था। मैं बेड के सामने आकर खडा हो गया और जैसे ही मेरी नजरें कोमल की तरफ गई तो मेरी आंखें वहीं पर जम गई। उसकी पजामी योनि वाली जगह से गीली थी और उसकी योनि की शेप एकदम से उजागर हो रही थी। गोरी गोरी फांके भीगी हुई पजामी को अपने से चिपकाये हुई थी और ऐसा लग रहा था जैसे आमंत्रण दे रही हों। लग रहा था कि उसने पेंटी नहीं पहनी है। मैं तो बस देखता ही रह गया।
कोमल मैम की तरफ मुंह करके उनसे कुछ कह रही थी। जब उसकी मेरी मुझ पर पड़ी और मेरी आंखों का पीछा करते हुए जब उसे एहसास हुआ कि मेरी नजरें कहां पर हैं, तो उसने एकदम से अपने पैरों को बेड पर सीधा करके एक दूसरे से चिपका लिया और तकिया उठाकर अपनी जांघों पर रख लिया। शायद मैम ने मुझे उसे यों घूरते देख लिया था, वो मंद मंद मुस्करा रही थी।
तभी मुझे ऐसा लगा कि मैम ने अपनी पजामी का उतारा है चद्दर के अंदर ही, या फिर पहना है। मैं आंखें फाड़कर मैम की तरफ देख रहा था। मैम ने मुझे आंख मारी।
वो तुम्हारे सर को तो आज अचानक मीटिंग में जाना पड़ गया तो तुम कोमल के साथ चले जाओ। जगतपुरा में इसकी कोई दोस्त रहती है, दोनों साथ में कॉलेज में पढ़ती थी।
ठीक है, पर फिर यहां आपका धयान कौन रखेगा, वैसे ही आपकी तबीयत ठीक नहीं है, मैंने मैम से कहा।
मेरी चिंता मत करो, शुकन्तला है, तुम जाओ, मैम ने कहा।
और धयान से जाना, मैम ने फिर कहा।
ओके मैम, मैंने कहा।
कब चलना है कोमल जी, मैंने कोमल की तरफ देखकर कहा।
उसने अपनी आंखें झुका रखी थी और मेरे पूछने पर बस इतना ही बोली, 10 मिनट में चलते हैं।
मैंने ऑफिस में आकर सिस्टम शटडाउन किया और आकर मैम के पास बैठ गया। कोमल वहां पर नहीं थी, शायद तैयार होने गई थी। मैम ने चदद्र को थोडा सा साइड में किया और मेरा हाथ पकड़ कर सीधा अपनी योनि पर रख दिया। मेरा हाथ सीधा उनकी नंगी योनि पर जाकर टकराया। मैंने एकदम से उनकी तरफ देखा। उन्होंने कुछ भी नहीं पहना हुआ था। बिल्कुल नंगी लेटी थी। मैम की योनि एकदम गीली थी।
तब मेरी समझ में आया कि कोमल की योनि क्यों गीली थी, शायद मैम के साथ मस्ती चल रही थी। मेरा धयान दरवाजे की तरफ ही था और हाथ मैम की योनि को सहला रहा था।
तभी बाहर से आवाज आई और मैंने अपना हाथ हटा लिया, मैम ने चद्दर ओढ ली। कोमल ही थी।
जैसे ही वो कमरे में एंटर हुई मैं तो आंखें फाडे उसे ही देखता रह गया। आसमानी चमकदार कुर्ती जिसका गला बहुत ही डिप था, और बटन सभी बटन खुले हुये थे। उसके आधे से ज्यादा उरोज बीच में से नंगे दिख रहे थे। मैंने थोड़ा धयान से देखा तो उसने ब्रा भी नहीं पहनी हुई थी। मेरी सांसे तो उपर नीचे होनी शुरू हो गई। स्कीन टाइट जींस में उसकी मादक जांघें उभर कर आ रही थी।
चले---- उसने मुझे खुदको यूं घूरते हुए देखकर कहा।
ओ-के- चलो, कहकर मैं बाहर आ गया।
मैंने बाइक स्टार्ट की और कोमल ने जाकर गेट खोल दिया।
कोमल आकर बाइक पर बैठ गई। उसने टोपी वाला हेलमेट पहना था। वो थोड़ा पिछे हटकर बैठी थी, उसका मेरे कंधे को पकड़ा हुआ था। वो इतना पिछे बैठी थी कि मेरे थोडा पिछे होने पर भी वो टच नहीं हुई। मैंने बाइक में एकदम से रेस दी और एकदम से ब्रेक लगा दिये। कोमल सीधा मेरी छाती से आकर टकराई और उसके उन्नत उरोज मेरी कमर में गड़ गये। क्या फिलिंग थी, बता नहीं सकता। कोमल के मुंह से एक आह निकल गई।
क्या है, आराम से नहीं चला सकते, मैं नहीं जा रही तुम्हारे साथ,,, कोमल ने कहा।
ठीक से चलानी है तो चलाओ, नहीं तो रहने दो, मैं ऑटो में चली जाउंगी, उसने फिर से कहा।
सॉरी, आराम से चलाउंगा, आप नाराज न हो,,, मैंने कहा और बाइक को आगे बढ़ा दिया।
मैं धीरे धीरे 50 की स्पीड पर बाइक चला रहा था। कोमल अभी भी मुझसे चिपक के ही बैठी हुई थी और उसके उरोज मेरी कमर में दबे हुए थे।
थोडी दूर चलने पर उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर से हटाकर अपनी जांघों पर रख लिया, जो मेरी जांघों को साइड में से छूने लगा। तभी एक बाइक वाले ने तेजी से हमारी साइड से बाइक निकाल कर हमारे आगे कर दी, जिससे मुझे ब्रेक लगाने पड़े। अचानक ब्रेक लगाने से थोड़ा सा बैलेंस बिगड़ा, पर स्पीड कंट्रोल में थी तो संभल में आ गई, पर इससे एक फायदा ये हुआ कि गिरने से बचने के लिए कोमल का हाथ मेरे पेट पर पहुंच गया और उसने दोनों हाथों से मेरे पेट को पकड़ लिया।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:17 PM,
#43
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--43
गतांक से आगे ...........
लगता है लाइन पर आ गई है, मैंने मन ही मन सोचा और थोड़ा सा कमर को पिछे की तरफ कर दिया। मुझे मेरी गर्दन पर कोमल की गर्म गर्म सांसे महसूस हो रही थी। पूरे रस्ते वो वैसे ही बैठी रही, धीरे धीरे बाइक चलाते हुए लगभग आधे घंटे में जगतपुरा पहुंच गये।
कोमल ने उतरकर बैल बजाई और मैं बाइक को खड़ी करके उसके पास आकर खड़ा हो गया। दरवाजा कामवाली बाई ने खोला।
जी बोलिये, क्या काम है, बाई ने पूछा।
मैं रूपाली की दोस्त हूं, मिलने के लिए आई हूं, कोमल ने कहा।
रूपाली का नाम सुनते ही मुझे रात वाली रूपाली याद गई और लिंग ने एक अंगड़ाई ली और फिर वापिस सो गया।
जी कौन रूपाली, यहां तो कोई रूपाली नहीं रहती, बाई ने कहा।
बाई की बात सुनकर मेरी हंसी छूट गई। कोमल ने मेरी तरफ घूर कर देखा तो मैं शांत हो गया, पर हंसी रूकने का नाम ही नहीं ले रही थी।
आप एकबार अंदर पूछकर आईये, मैं पहले आ चुकी हूं, यहां पर, कोमल ने बाई से कहा।
आप यहीं पर रूकिये, मैं अभी पूछकर आती हूं, कहते हुए बाई अंदर चली गई।
बड़ी हंसी आ रही है, दो मिनट चुपचाप नहीं खड़े रह सकते, कोमल ने मुझे झिडकते हुए कहा।
थोड़ी देर में अंदर से एक बहुत ही सैक्सी लड़की निकल कर आई, मैंने एक बार उस लड़की की तरफ देखा, फिर कोमल की तरफ देखा। कोमल के चेहरे से लग रहा था कि ये रूपाली नहीं है।
जी कहिये, उस लड़की ने गेट पर आकर मेरी तरफ देखते हुए कहा।
जी मैं रूपाली की दोस्त हूं, उनसे मिलने आई हूं, कोमल ने जवाब दिया।
जी आपको कुछ गलतफहमी हुई है, यहां पर कोई रूपाली नहीं रहती, उस लड़की ने कहा।
उसकी बात सुनकर तो मेरी जोर से हंसी छूट गई और मैं थोड़ा साइड में होकर अपनी हंसी को कंट्रोल करने की कोशिश करने लगा।
मैं पहले भी यहां पर आ चुकी हूं, और मुझे अच्छी तरह याद है कि यही घर था, और आप कह रही हैं कि यहां पर कोई रूपाली नहीं रहती, कोमल ने थोड़ा उलझन में कहा।
जी अभी 6 महीने पहले ही हमने ये घर खरीदा है, उस लड़की ने कहा।
शिटटट्--- क्या आपको पता है कि जो पहले यहां पर रहते थे, वो अब कहां रहते हैं, कोमल ने निराश होते हुए पूछा।
उस लड़की की बात सुनकर मैं वापिस बाइक पर आकर बैठ गया था और बाइक स्टार्ट कर ली थी।
जी जब हम यहां पर आये तो ये घर खाली ही थी, जो पहले रहते थे वो हमारे आने से काफी पहले ही खाली कर चुके थे, इसलिए हमें उनके बारे में कुछ भी नहीं पता है, उस लड़की ने थोड़ा सा सांत्वना वाला चेहरा बनाते हुए कहा।
जी, धन्यवाद, कहकर कोमल मेरे पास आकर बाइक के सहारे लगकर खड़ी हो गई।
जी अगर आपकी आज्ञा हो तो चलें, मैंने मुस्कराते हुए कोमल से कहा।
वो लड़की अभी भी गेट पर ही खड़ी थी, इसलिए मैं अपनी हंसी को थोड़ा कंट्रोल कर रहा था।
तुम्हें बड़ी हंसी आ रही है, अब वो यहां से घर बेच कर चले गये तो इसमें मेरी गलती है, कोमल ने गुस्सा होते हुए कहा।
जी बिल्कुल नहीं, उनको आपको सूचित करना चाहिए था घर बेचने से पहले, और अपना नया एड्रेस भी देना चाहिए था, मैंने सीरियस चेहरा बनाते हुए कहा।
कोमल ने एक जोर का मुक्का मेरी कमर में जमा दिया, और मुंह फुला कर बाइक पर बैठ गई। वो मुझसे काफी पिछे हटकर बैठी थी। मैंने बाइक को वापिस घर की तरफ दौड़ा दिया।
वैसे आपकी वो रूपाली जी दिखती कैसी थी, मैंने कोमल से पूछा।
पर कोमल ने कोई जवाब नहीं दिया।
मुझे भूख लगी है, कहीं रूककर कुछ खाते हैं ना, थोड़ी दूर आने पर कोमल ने कहा।
मैंने बाइक गौरव टावर की तरफ मोड दी और कुछ ही देर में हम गौरव टॉवर में डॉमिनोज में टेबल पर बैठे अपने पिज्जा का इंतजार कर रहे थे।
अभी आप क्या कर रही हैं, कोई और बात न सूझने पर मैंने बातचीत शुरू करने के लिए यही सवाल पूछना सही समझा।
कोमल ने मेरी तरफ देखा और फिर कुछ सोचने लगी।
एमबीए कर रही हूं, कोमल ने जवाब दिया।
अब एमबीए के बारे में मुझे ज्यादा कुछ तो पता नहीं था, इसलिए अपनी पोल खुलने से बचने के लिए मैंने आगे इस बारे में कुछ न पूछना ही सही समझा।
अच्छा आपके पिताजी क्या करते हैं, मैंने उसको फिर से चुपचाप बैठते देखकर पूछा।
क्यों फैमिली पर लिटरेचर लिखना है क्या, सब कुछ पूछ कर, कोमल ने कहा।

अब इस जवाब के बाद तो मेरी हिम्मत ही नहीं हुई कुछ पूछने की, इसलिए चुपचाप पिज्जा का इंतजार करने लगा।
उसका साथ तो बहुत अच्छा लग रहा था, पर जिस तरह से वो बात कर रही थी, गुस्सा भी बहुत आ रहा था उस पर।
थोड़ी देर में वेटर दो पिज्जा ले आया। पिज्जा को देखकर मेरी समझ में नहीं आया कि इसको कैसे खाउं, इसलिए कोमल की शुरूआत करने का इंतजार करने लगा।
कोमल ने पिज्जा खाना शुरू किया और उसकी देखा देखी मैं भी उसी तरह पिज्जा खाने लगा। पिज्जा खाते ही मेरे मुंह में आग सी लग गई, बहुत ही ज्यादा मिर्ची थी, मैंने सॉफ्रट ड्रिक का गिलास एक ही बार में खाली कर दिया।
मैं सी-सी कर रहा था। कोमल मुझे देखकर हंसने लगीं
क्या बच्चों की तरह सी-सी कर रहे हो, थोड़ी सा भी तीखा नहीं खा सकते, कोमल ने हंसते हुए कहा।
इतनी मिर्ची तो हैं इसमें, मैंने इधर उधर वेटर को ढूंढते हुए कहा।
दो ड्रिंक और लेकर आओ, मुझे इधर उधर देखता हुआ पाकर वेटर हमारे पास आया तो मैंने उससे कहा।
और कुछ सर, वेटर पूछने लगा।
नहीं और कुछ नहीं, बस जल्दी से ड्रिंक लेकर आओ, मैंने कहा।
वेटर चला गया।
कोमल ने मेरे पिज्जा में से एक टुकड़ा लिया और खाते हुए कहा, कहां है मिर्ची, बिल्कुल भी नहीं है इसमें, तुमने चिल्ली सॉस ज्यादा लगा लिया होगा, कोमल ने कहा।
उसने मेरे सॉस की तरफ देखा तो आधे से ज्यादा खत्म था।
अब इतनी चिल्ली लगाओगे तो सी-सी तो करोगे ही, कोमल ने कहा और अपना ड्रिंक मेरे सामने कर दिया।
मेरे तो मुंह में आग लगी हुई थी, मैंने जल्दी से उससे ड्रिंक लिया और पी गया। इतने में वेटर दो ड्रिंक और ले आया।
मैंने जल्दी से उनमें से एक और खत्म किया तब जाकर मुंह में कुछ शांति हुई। थोडी देर रूककर मैंने थोड़ा सा टुकडा खा कर देखा, पिज्जा तीखा नहीं था। फिर तो मैंने सारा पिज्जा ही बगैर सॉस के खाया।
पिज्जा खाकर हम उठने ही वाले थे कि तभी मेरी नजर गेट से अंदर आती हुई रूपाली पर पड़ी, उसके पीछे पीछे नवरीत, सोनल और तान्या भी अंदर आ गई।
एक मिनट मैं अभी आया, कहकर मैं उठ खड़ा हुआ।
क्या हुआ, कहां जा रहे हो, कोमल ने पूछा।
अभी आ रहा हूं, मैंने कहा और गेट की तरफ चल पड़ा।
ओए, आप यहां पर क्या कर रहे हो, मुझे देखते ही नवरीत ने पूछा और उसके साथ साथ सोनल ने भी यही सवाल दाग दिया।
वो बॉस की साली को घुमाने लाया हूं, मैंने हंसते हुए कहा।
कहां है, सोनल ने इधर उधर नजर दौड़ाते हुए कहा।
मैं उनको लेकर कोमल के पास आ गया।
ओए, तू यहां क्या कर रही है, रूपाली ने कोमल की तरफ आश्चर्य से देखते हुए कहा।
पहले तू ये बता कि तू कहां मर गई थी, अभी तेरे घर से ही आ रही हूं, कोमल कहते हुए उठी और रूपाली और कोमल के बेमिसाल उरोज एक दूसरे के गले लग गए।
मेरे घर, तुझे मेरा एड्रेस कहां से मिला, रूपाली ने गले मिलकर हटते हुए कहा।
घर कहां मिला, वहां तो कोई और ही था, कह रहे थे कि तुम वहां से बेच कर चले गये हो, कोमल ने कहा।
यार, तू पहले वाले घर पहुंच गई, वो तो किराये का था, अब मालवीय नगर में ले लिया है हमने मकान, रूपाली ने कहा।
कोमल की आंखें कुछ नम सी हो गई थी।
वॉव यार, चलो ये अच्छा हुआ कि हम यहां पिज्जा खाने के लिए रूक गये, नहीं तो तुम्हें तुम्हारी रूपाली शायद कभी नहीं मिलती, मैंने कहा।
तुम तो कह रहे थे कि बॉस की साली को घुमाने लाया हूं, नवरीत ने कहा।
लाया तो हूं, अब तुम्हारी दोस्त मेरे बॉस की साली है तो मेरा कसूर थोड़े ही है, मैंने कहा।
मेरी बात सुनकर सभी हंसने लगे।
हाय मैं, नवरीत, रूपाली की दोस्त, और अब तुम्हारी भी दोस्त, नवरीत ने आगे बढ़ते हुए कोमल से हाथ मिलाते हुए कहा।
स्योर, रूपाली के दोस्त मेरे दोस्त, कोमल ने कहा और उसके गले लग गई।
फिर सभी ने अपना अपना परिचय दिया और दूसरी टेबल से चेयर सरका कर सभी बैठ गये। टेबल के चारों तरफ जगह फुल हो गई, मेरे बैठने के लिए जगह ही नहीं बची, तो मैं पास वाली टेबल पर जाकर बैठ गया।
हे, वहां क्यों बैठ गये, यहां आओ, नवरीत ने अपनी चेयर को एडजेस्ट करते हुए एक चेयर की जगह बनाते हुए कहा।
मैं चेयर उठाकर वहां पर आकर बैठ गया।
फिर उन्होंने 6 पिज्जा और ऑर्डर किये। एक और पिज्जा खाकर मेरा पेट तो फुल भर गया।
रूपाली और कोमल खूब बातें करती रही।
खाना-पीना होने के बाद मैंने बिल पे किया और हम डोमिनोज से बाहर आ गये।
अभी तो मैं घर थोड़ा लेट जाउंगी, शाम को जरूर आना, रूपाली ने कहा।
एड्रेस तो बता दे, आना की बच्ची, कोमल ने कहा।
अरे एड्रेस, ये हैं ना इनके साथ आ जाना, मैं इनके घर पर ही मिलूंगी, रूपाली ने कहा।
कोमल ने मेरी तरफ शंकित नजरों से देखा और फिर रूपाली की तरफ देखकर मुस्करा दी।
ओके ठीक है, इनके साथ ही आ जाउंगी, कोमल ने कहा।
कोमल सभी के गले लगी, मुझको छोड़कर। पर उसकी कसर रूपाली, नवरीत, तान्या और सोनल ने पूरी कर दी।
सबको बायें बोलकर मैं और कोमल ऑफिस के लिए चल दिये और बाकी सभी घर की तरफ।
ऑफिस पहुंचकर कोमल अंदर चली गई और मैं सीधा ऑफिस में आ गया।

थोड़ी देर में कोमल ऑफिस में आ गई और अपूर्वा की चेयर को मेरे पास सरका कर बैठ गई।
ये लो-----आपके पैसे, नहीं तो मन ही मन बुरा-भला कहोगेे,,,,,, कोमल ने मेरी तरफ पैसे बढ़ाते हुए कहा।
किस चीज के पैसे----- मेरी समझ में नहीं आया कि कैसे पैसे दे रही है तो मैंने कन्फयूज होते हुए पूछा।
पिज्जा के,,, और किसके------ कोमल ने कहा और पैसे मेरी गोद में रख दिये।
देवा रे देवा,,,,,,, क्या करूं इन लड़कियों का,,, मैं अपना माथा पिटते हुए बड़बड़ाया।
मैंने कोमल का हाथ पकड़ा और पैसे उसके हाथ में रखने लगा तो उसने अपना हाथ एक तरफ कर लिया।
मेरी तो सटक गई थी, मैंने उसकी गोद में जोर से हाथ मारते हुए पैसे रख दिए। मेरा हाथ उसकी पजामी में से उभर रही योनि पर टच हो गया। मुझे एकदम से करंट सा लगा। मैंने अपना हाथ वैसे ही रख दिया और अब पकड़ लो इन्हें, कहते हुए और ज्यादा अपने हाथ का दबाव कोमल की योनि पर बना दिया। कोमल की सांसे तेज हो गई थी और उसका शरीर बार बार झुरझुरी सी ले रहा था। पर न तो उसने पैसे पकड़े और न ही मेरा हाथ हटाया। मैं वैसे ही अपना हाथ वहां पर दबाकर रखे रहा।
जब कोमल ने मेरा हाथ नहीं हटाया तो मैंने अपने हाथ को थोड़ी सी हरकत दी और अपनी उंगली सीधी करके उसकी योनि के उपर रख दी।
कोमल के शरीर ने एकदम से झुरझुरी ली और मुझे अपनी उंगली पर कुछ गीलापन महसूस हुआ। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, उसकी आंखें आधी बंद थी और चेहरा एकदम लाल हो गया था। उसके उन्नत उरोज तो सांसों के साथ तेजी से उपर नीचे हो रहे थे। मेरा मन तो कर रहा था कि बस मुंह में भरकर चूस लूं।
उसकी हालत देखकर मैं समझ गया कि अब ये इस दुनिया में नहीं है। मैंने अपनी उंगली का हलका हलका दबाव उसकी योनि पर बढ़ाया और रगड़ने लगा।
मैंने उसकी कुर्ती को उपर किया और पजामी की डोर पकड़कर खींच दी। जैसे ही उसकी पजामी की डोर खुली, कोमल ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर जाने से रोक लिया और वापिस अपनी योनि पर पजामी के उपर से ही दबा दिया। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, उसका उसकी आंखें बंद थी।
वो मेरे हाथ को अपनी योनि पर दबाने लगी। मैंने भी हाथ को सही तरह से सैट करके उसकी योनि को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और एक उंगली, पजामी समेत उसकी फांकों में सैट कर दी।
मेरे ऐसा करते ही कोमल का शरीर अकड़ गया और मेरा हाथ पूरा भीग गया। उसने मेरे हाथ को जोर से अपनी योनि पर दबा लिया था, जिससे मेरी उंगली हलकी सी उसकी योनि में चली गई थी।
कुछ देर तक उसका शरीर ऐसे ही अकड़ा रहा। मुझे अपनी उंगली पर उसकी योनि का संकुचन महसूस हो रहा था। उसकी आंखें जोर से बंद थी।
जब वो कुछ नोर्मल हुई तो मेरे हाथ से उसने अपना हाथ हटा लिया, उसने धीरे से थोड़ी सी आंखें खोली, मुझे अपनी तरफ ही देखता पाकर उसने वापिस अपनी आंखें बंद कर ली।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:18 PM,
#44
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--44
गतांक से आगे ...........
मैंने अपना हाथ उसके सिर के पिछे रखा और उसके चेहरे को अपनी तरफ खींचकर उसके तपते लबों पर अपने लब रख दिये।
कोमल जैसे नींद से जागी हो, उसने मुझे पीछे धक्का दिया और तेजी से उठकर बाहर भाग गई। उसके इस बिहेवियर से मैं हैरान रह गया। दो मिनट बाद मैं उठकर दरवाजे पर आया तो देखा कि वो बाहर दीवार के सहारे खड़ी है और जोर जोर से हांफ रही है, उसकी आंखों से आंसू बह रहे हैं।
मैं बहुत परेशान हो गया और जैसे ही मैंने आगे बढ़ने के लिए पैर उठाया मेरा पैर वहां पर गिरे पेड के पते पर पड़ा तो हलकी सी आवाज हुई। कोमल ने आंखें खोलकर जब मुझे देखा तो जल्दी से अंदर चली गई।
मुझे खुदपर बहुत गुस्सा आ रहा था कि क्यों मैंने ये हरकत की। मैं आकर अपनी चेयर पर बैठ गया और सिर को पिछे की तरफ टिका कर सोचने लगा।
उठिये, चाय पी लीजिए, आवाज सुनकर मेरी आंख खुली। कब मुझे नींद आ गई थी पता ही नहीं चला। कोई मुझे झकझोर कर उठा रहा था। मैंने आंखें खोल कर देखा, तो सामने कोमल थी। उसके हाथ में चाय की ट्रे थी।
जब उसने देखा कि मैं उठ गया हूं तो चाय का कप टेबल पर रख दिया।
सॉरी,,, मैंने उससे कहा।
वो जल्दी से चाय रखकर बिना कोई जवाब दिये, और बिना मेरी तरफ देखे वापिस चली गई। मैंने कप उठाने के हाथ आगे बढ़ाया तो हाथ में कुछ खिंचाव सा महसूस हुआ। मैंने देखा तो हथेली और उंगलियों पर पपड़ी सी थी। तब मुझे याद आया कि मैंने हाथ तो धोया ही नहीं कोमल के रस का।
मैं उठकर वासबेसिन पर हाथ-मुंह धोकर आया और बैठकर चाय पीने लगा। मैंने टाइम देखा तो साढ़े चार बज गये थे।
दस-पंद्रह मिनट मैं ऐसे ही चेयर पर बैठा रहा। फिर सभी चीजें ऑफ की और ऑफिस का दरवाजा लगाकर बाहर आ गया। तभी मुझे धयान आया कि मैम की तबीयत खराब थी तो मैंने बैल बजाई।
शकुंतला ने दरवाजा खोला, और मैं अंदर आ गया। मैम हॉल में बैठी टीवी देख रही थी।
अब आपकी तबीयत कैसी है मैम, मैंने अंदर आकर पूछा।
ठीक है, गोली ले ली थी तो अब आराम है, मैम ने कहा।
ठीक है मैम, मैं चलता हूं, टाइम हो गया, मैंने कहा।
वो कोमल भी जा रही थी ना साथ, दोपहर को कह रही थी कि शाम को तुम्हारे साथ ही जायेगी, उसकी सहेली का घर उधर ही है, मैम ने कहा।
जी मैम, मैंने कहा।

मैम ने कोमल को आवाज लगाई। कोमल मैम के रूम में थी। वो बाहर आई और सामने मुझे खड़े देखकर नजरें नीचे कर ली।
जी दीदी, उसने वहीं पर खड़े खड़े ही कहा।
‘जी दीदी’,,,,, ये ‘जी’ कब से लगाने लग गई, मैम ने कहा और हंसने लग गई।
वो समीर जा रहा है, तुझे जाना था ना अपनी सहेली के घर, मैम ने कहा।
हां, कोमल ने कहा।
हां की बच्ची, फिर कब जायेगी, ये जा रहा है, मैम ने कहा।
अभी आ रही हूं, कपड़े चेंज कर लेती हूं, कोमल ने कहा और अंदर चली गई।
मैं वहीं सोफे पर बैठकर इंतजार करने लगा। मैंने मैम की तरफ देखा, तो मैम मुझे ही घूर रही थी।
जैसे ही हमारी नजरें मिली, मैम ने एक कातिल मुस्कान पेश कर दी।
तभी कोमल कपड़े चेंज करके आ गई। उसने हरे कलर की कुर्ती और जींस पहनी हुई थी।
मैं मैम को गुड इवनिंग बोलकर बाहर आ गया। मैंने बाइक को स्टार्ट किया और कोमल का इंतजार करने लगा। तभी शुकंतला किसी काम से बाहर आई, तो मैंने उसे गेट खोलने के लिए कहा।
वो मेरी तरफ देखकर मुस्कराई और जाकर गेट खोल दिया। मैं बाइक लेकर बाहर आ गया और कोमल का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद कोमल आई। उसने गले में चुन्नी भी डाल ली थी। चुन्नी डालने के बाद तो वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। उसने एकबार मेरी तरफ देखा और फिर नजरें नीची कर ली।
आकर वो बाइक पर बैठ गई। वो थोड़ा पिछे होकर बैठी थी। वैसे मैं भी थोड़ा आगे सरक गया था। उसके बैठते ही मैंने बाइक को धीरे से सड़क पर बढ़ा दिया। उसने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख लिया।
सॉरी,,, मैंने उससे कहा।
जी,,,, कोमल ने कहा, शायद उसे ठीक से सुना नहीं होगा।
जी---- वो दोपहर के लिए सॉरी, मैंने कहा।
कोमल चुप रही, कोई जवाब नहीं दिया।
मैंने भी ज्यादा कुछ कहना ठीक नहीं समझा, इसलिए चुपचाप बाइक चलाता रहा। पंद्रह मिनट में हम घर पहुंच गये।
घर के सामने आकर मैंने बाइक रोक दी।
क्या हुआ, कोमल ने पूछा।
कुछ नहीं, घर आ गया, मैंने कहा।
मेरी बात सुनते ही कोमल बाइक से उतर गई। मैंने बाइक को बाहर ही खड़ी कर दिया और हम उपर आ गये।
मैंने बैल बजाइ तो सोनल ने दरवाजा खोला।
आइये, आइये,,, आपका ही इंतजार हो रहा था, सोनल ने कहा।
क्यों, ऐसा क्या प्रोग्राम बना रखा है जो मेरा इंतजार हो रहा था।
अंदर आओ अभी बताती हूं, कहकर वो साइड में हो गई।
मैं अंदर आ गया। उसने कोमल को गले लगाया और उसका हाथ पकड़े पकड़े अंदर ले आई। रूपाली और नवरीत वहीं पर थी।
आज कुछ स्पेशल है क्या, जो नवरीत भी यहीं पर है, रूपाली भी यहीं पर है, मैंने उनको देखकर पूछा।
हां, बहुत स्पेशल है, मेरी दोस्त आई है, तो स्पेशल तो होगा ही, रूपाली ने कहा।
मैं कपड़े चेंज करने के लिए वापिस जाने लगा।
हे, कहां जा रहे हो, नवरीत की आवाज आई।
बस अभी आया, एक बार उपर तक जा रहा हूं, मैंने कहा और बाहर निकल आया।
मैंने उपर आकर लॉक खोला, अभी मैं दरवाजा खोल ही रहा था कि नवरीत भी उपर आ गई।
हाय,,,, मैंने उसे देखकर कहा।
हाय,,,, पोर्शन तो काफी अच्छा है, इतनी बड़ी खुली छत है सामने, ऐसी जगह मुश्किल से ही मिलती है, नवरीत ने कहा।
हां, ये तो है, और पौर्शन ही नहीं, पोर्शन देने वाले भी अच्छे हैं, मैंने कहा।
मेरी बात सुनकर नवरीत हंसने लगी।
ऐसे मकान मालिक पूरे जयपुर में नहीं मिलेंगे, ढूंढने से, नवरीत ने कहा।
बिल्कुल, मैं कौनसा कह रहा हूं कि मिल जायेंगे,,, मैंने हंसते हुए कहा।
दरवाजा खोलकर हम अंदर आ गये।
वॉव, एक लड़के के हिसाब से रूम बहुत ही शानदार सजा रखा है, नवरीत ने कहा और बेड पर आकर बैठ गई।
जी कुछ लेंगी आप, कोल्ड ड्रिंक, हॉट ड्रिंक, मैंने नवरीत की तरफ मुस्कराते हुए कहा।
हूंहहहह,,, कुछ नहीं, नवरीत ने कहा।
आपने अभी तक बताया नहीं कि अपूर्वा के साथ आपका चक्कर चल रहा है या नहीं, नवरीत ने आंखें नचाते हुए कहा।
हम बहुत अच्छे दोस्त हैं, एक-दूसरे के काफी करीब भी हैं, बस इतना ही, मैंने शर्ट निकालते हुए कहा।
नवरीत की आंखें मुझ पर ही जम गई।
कितने करीब,,, नवरीत ने फिर चंचलता से कहा।
उसकी आंखों और चेहरे से चंचलता साफ झलक रही थी।
कितना तो अब कैसे बताउं, पर काफी करीब हैं, एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं, साथ घूमने भी जाते हैं, एक दूसरे को झप्पी भी पाते हैं, मैंने टी-शर्ट पहनते हुए कहा।
कभी एक-दूसरे को किश किया है, नवरीत ने चहकते हुए कहा।
क्या, तुम्हें क्यों इतना इंट्रेस आ रहा है, अपूर्वा में, मैंने कहा।
बताओ ना, नवरीत ने थोड़ा सा नाराज होते हुए कहा।

नहीं, मैंने बेल्ट खोलते हुए कहा।
कहकर मैं कैपरी उठाकर बाथरूम में आ गया और जींस निकालकर कैपरी पहनकर वापिस आया।
नवरीत बैड पर ही बैठी बैठी पैर हिला रही थी। उसकी एक उंगली उसके गाल पर थी, लग रहा था कि कुछ गहरी सोच में है।
क्या सोच रही हो, मैंने उसे इस तरह सोचते देखकर कहा।
सोच रही हूं कि----- कहकर वो रूक गई।
मैं आगे की बात सुनने के लिए चुपचाप खड़ा रहा।
क्या सोच रही हो----- जब कुछ देर तक उसने कुछ नहीं बोला तो मैंने फिर से पूछा।
कुछ नहीं---- टाइम आने पर पता चल जायेगा, नवरीत ने कहा।
तभी कोमल, रूपाली और सोनल भी उपर आ गई।
क्या चल रहा है, अकेले अकेले में, सोनल ने अंदर आते हुए कहा।
कुछ नहीं, मैंने कहा और रसोई की तरफ चल दिया। सभी आकर बेड पर बैठ गई। बस कोमल खड़ी थी। मैंने फ्रीज से पानी निकाल कर पिया।
मुझे भी देना, सोनल की आवाज आई।
मैं एक गिलास और बोतल लेकर आ गया। गिलास में पानी डालकर सोनल को दिया। फिर कोमल से पानी के लिए पूछा तो उसने मना कर दिया।
आप खड़ी क्यों है, बैठिये ना, कोमल को खड़े देखकर मैंने कहा।
वो कुछ करती या कहती उससे पहले ही नवरीत ने उसका हाथ पकड़कर बेड पर खींच लिया। कोमल लगभग गिरते हुए बेड पर बैठ गई।
मैं अपना मोब उठाकर बाहर आ गया। काफी कोशिश की पर फोन मिल ही नहीं रहा था, बस कवरेज से बाहर ही आ रहा था।
मैं परेशान होकर वापिस अंदर आ गया।
क्या हुआ, कुछ परेशान लग रहे हो, सोनल ने कहा।
अपूर्वा की तबीयत खराब थी, पूछने के लिए फोन कर रहा था कि अब कैसी है, पर फोन ही नहीं मिल रहा, मैंने मायूसी से कहा।
क्या, अपूर्वा की तबीयत खराब है, क्या हुआ उसे, नवरीत ने चौंकते हुए कहा और अपना सैल निकालकर फोन मिलाने लगी।
सुबह फोन किया था मैंने, बुखार था, अभी मिल ही नहीं रहा, कवरेज से बाहर आ रहा है।
मिल ही नहीं रहा, नवरीत ने फोन मिलाने की कोशिश करने के बाद कहा।
तुम्हें तो उसका घर पता है ना, मैंने नवरीत से कहा।
हां, मालूम है, पर क्यों, नवरीत ने कहा।
उसके घर चलते हैं, मैं कहकर सबसे चेहरे के एक्सप्रेशन देखने की कोशिश करने लगा।
चलो, नवरीत ने बिना किसी की राय जाने ही अपना फैसला सुना दिया और बेड से उतर कर खड़ी हो गई।
मैंने उसकी तरफ देखा और फिर सभी की तरफ देखा।
क्या हुआ, अब चलो, नवरीत ने मचलते हुए कहा।
यार हम तो उसे जानते भी नहीं हैं, हम क्या करेंगे, रूपाली ने कहा।
तो अब जान जाओगी, चलो उठो, नवरीत ने कहा।
और नहीं जाना तो ठीक है तुम इधर ही रूको, हम जा रहे हैं, नवरीत ने फिर कहा।
मैं भी चल रही हूं, सोनल ने बेड से उतरते हुए कहा।
आप यहीं पर रूकेंगी या फिर आप भी चलेंगी मैम,,,, मैंने कोमल की तरफ देखते हुए कहा।
मुझे लगा कि जैसे कोमल एकदम से हड़बड़ा सी गई है।
हां---- हां--- मैं---- मैं---- चल रही हूं, कोमल ने हड़बड़ाते हुए कहा।
फिर मैं अकेली यहां पर क्या करूंगी, चलो मैं भी चल रही हूं, रूपाली ने भी कहा।
हम सभी नीचे आ गये। सोनल ने आंटी को बोल दिया कि हम बाहर जा रहे हैं।
सोनल की स्कूटी पर नवरीत और रूपाली की स्कूटी पर कोमल बैठ गई। मैं अपनी बाईक पर।
दस मिनट में हम राजापार्क में थे। सोनल आगे नवरीत से रास्ता पूछकर चल रही थी।
एक कोठी के सामने जाकर सोनल की ने स्कूटी साइड में खड़ी कर दी। हमने भी अपनी बाइक और स्कूटी साइड में लगा दी और नवरीत बिना बैल बजाये सीधे गेट खोलकर अंदर, उसके पिछे पिछे हम।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:18 PM,
#45
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--45
गतांक से आगे ...........
रीत,,,,, आज कैसे याद आ गई हमारी, नवरीत को देखते ही लॉन में बैठी आंटी ने कहा।
अपूर्वा कहां है, नवरीत ने बिना कोई जवाब दिये सीधे ही सवाल किया।
वो अपने रूम में आराम कर रही है, और ये सब कौन हैं, आंटी ने बताया और फिर पूछा।
बाद में बताती हूं, कहते हुए नवरीत सीधी अंदर चली गई।
उसके साथ सोनल, रूपाली और कोमल भी अंदर चली गई। मैं बाहर ही खड़ा रहा।
मैं लॉन में आया और आंटी के पैर छूकर नमस्ते किए।
जीते रहो बेटा, आंटी ने आशीर्वाद देते हुए कहा।
मेरा नाम समीर है आंटी, अपूर्वा के ऑफिस में काम करता हूं, मैंने कहा।
ओहहह----- समीर बेटा,,, अरे आओ,,, कहते हुए आंटी ने उठकर मुझे गले लगा लिया।
मैं थोड़ा सा हैरान हुआ, पर ज्यादा नहीं सोचा इस बारे में।
अपूर्वा हमेशा तुम्हारी ही बातें करती रहती है, आंटी ने कहा।
आंटी की बात सुनकर मैं थोड़ा शरमा गया।
मेरा मन तो हो रहा था कि जाकर अपूर्वा को देखूं, कैसी है, पर हिम्मत नहीं कर पा रहा था, कि आंटी क्या सोचेगी।
वो अपूर्वा कैसी है अब, मैंने आंटी से पूछा।
अब ठीक है, बस आराम कर रही है, जाओ मिल लो, आंटी ने कहा और अंदर चल पड़ी।
मैं आंटी के पिछे पिछे अंदर आ गया।
वो उपर सामने वाला कमरा है, मैं तो उपर कम ही जाती हूं, घुटनों में दर्द हो जाता है, आंटी ने उपर इशारा करते हुए कहा।
आंटी शरीर से इतनी बूढी नहीं लग रही थी, और न ही ज्यादा मोटी थी, पर घुटनों का दर्द शरीर देखकर थोड़े ही आता है, कभी भी लग जाता है।
ओके--- कहता हुआ मैं उपर चल दिया।
रूम में आकर देखा तो सभी लड़कियां बेड पर बैठी हुई थी और अपूर्वा उनके बीच में बैठी थी, जैसे सभी को कोई कहानी सुना रही हो। सभी लड़कियां बहुत गौर से उसकी बातें सुन रही थी।
मेरे अंदर आते ही सबने मेरी तरफ देखा। मुझे देखते ही अपूर्वा बेड से उठी और आकर मेरे गले लग गई।
थैंक्स, अपूर्वा ने मेरे गले लगे हुए ही कहा।
थैंक्स, पर किस लिए,, मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा।
मेरा हाल-चाल पूछने के लिए घर आने के लिए, अपूर्वा ने कहा।
वो मुझे कस कर अपनी बाहों में भींचे हुए थी। मैं उसके बालों को सहला रहा था और मेरा एक हाथ उसकी कमर में था।
तुम्हारा फोन क्यों नहीं मिल रहा, मैंने कहा।
वो पता नहीं क्यों उसमें नेटवर्क ही नहीं आ रहा, अपूर्वा ने कहा।
ओ मैडम, अब ऐसे ही चिपकी रहोगी क्या, नवरीत की आवाज आई।
हमारे गले तो नहीं मिली तुम, नवरीत ने फिर कहा।
नवरीत की बात सुनकर अपूर्वा मुझसे अलग हुई, उसके मुंह पर कुछ पीलापन सा था, पर नवरीत की बात सुनकर गाल फिर भी शरम से लाल हो गये थे।
एकदम पीला निकल आया है चेहरा, मैंने उसके गालों को हथेलियों में भरते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर अपूर्वा फिर से मेरे गले लग गई। मेरी नजर पिछे बैठी लड़कियों पर पड़ी, सभी हमें ही देख रही थी।
नवरीत ने मेरी तरफ उंगली हिलाते हुए आंखों से इशारा किया जैसे कह रही हो, ‘तो ये माजरा है’।
मैं अपूर्वा को बांहों में बांधे हुए बेड तक लाया और उसको बेड पर बैठा दिया।
आराम से बैठो, अभी तुम्हें आराम की जरूरत है, मैंने कहा और रूम में नजरें घुमाने लगा।
अपूर्वा शर्म से लाल चेहरा लिए नजरें झुकाकर बैठी थी।
तू इधर आ, तेरी तो मैं अभी क्लास लेती हूं, नवरीत ने उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए कहा।
अपूर्वा लुढकते हुए बेड पर गिर गई। नवरीत ने उसका सिर अपनी गोद में रख लिया।
ओए होए----- कैसे सेब जैसे लाल हो गये हैं गाल, नवरीत ने उसके गालों को मसलते हुए कहा।
मैं रूम में रखी चेयर बेड के पास करके बैठ गया।
अपूर्वा के पैर बेड से नीचे लटक रहे थे। मैंने उठाकर अपनी गोद में रख लिए। अपूर्वा ने सिर उठाकर मेरी तरफ देखा और मुस्करा कर वापिस नवरीत की गोद में सिर रख दिया।
बड़ा प्यार आ रहा है, सोनल ने मेरे गालों को खींचते हुए कहा।
हां हां----- आयेगा क्यों नहीं, आते ही गले जो मिली है, रूपाली ने भी उसका साथ देते हुए कहा।
मैंने कोमल की तरफ देखा, वो थोड़ा शरमा रही थी।
मैं अपूर्वा के पैरों की उंगलियों को मसाज देने लगा।
तभी आंटी अंदर आई और उनके पिछे पिछे कामवाली बाई चाय की ट्रे लेकर आई।
आंटी के आते ही मैंने उठ कर कुर्सी आंटी को ऑफर की।
अरे बेटा बैठो, मैं और ले लेती हूं, कहते हुए आंटी ने एक और चेयर बेड के पास सरका ली और उस पर बैठ गई।

मैं चेयर पर बैठ गया। मेरे बैठते ही अपूर्वा ने अपने पैर फिर से मेरी गोद में रख दिये। मैंने आंटी की तरफ देखा, आंटी हमारी तरफ ही देख रही थी। मेरे देखने पर आंटी मुस्करा दी।
चाय लो बेटा, आंटी ने ट्रे की तरफ इशारा करते हुए कहा।
बाई ट्रे लेकर मेरे साइड में खड़ी थी। बाकी सभी ने चाय ले ली थी। मैंने एक कप चाय का उठाकर आंटी को दिया और दूसरा खुद ले लिया। उसने नमकीन की प्लेट बेड पर सबके बीच में रख दी।
नवरीत अपूर्वा के सिर को गोद में रखे अपूर्वा के बालों और माथे को सहला रही थीं। अपूर्वा आंखें बंद करके मजे से लेटी थी।
अब मुझे भी तो सभी के बारे में बताओ, कौन किसकी फ्रेंड है, आंटी ने नवरीत की तरफ देखते हुए कहा।
ओह, मैं तो भूल ही गई, अपने माथे पर हाथ मारते हुए नवरीत ने कहा और फिर सभी का इंट्रो कराया।
ये सोनल, मेरी फ्रेंड है, मालवीय नगर में ही रहती है, ये रूपाली सोनल की फ्रेंड है, अब मेरी भी है, और ये हैं कोमल, ये रूपाली की फ्रेंड है, कहकर नवरीत चुप हो गई।
और कोमल हमारे बॉस की साली है, अपूर्वा ने कहा।
अच्छा तो ये है वो कोमल, जिसके बारे में तुम बता रही थी, आंटी ने कहा।
बहुत प्यारी हो बेटी, क्या करती हो, आंटी ने कोमल के गालों को सहलाते हुए कहा।
जी अभी पढ़ाई पूरी की है, कोमल ने कहा।
इस अपूर्वा की बच्ची के पेट में कुछ रूकता भी है या नहीं, मैंने मन ही मन सोचा।
चाय पीकर कप वापिस ट्रे में रख दिये, नमकीन तो मुझे पता ही नहीं चला कब खत्म हो गई। बातों बातों में नवरीत और सोनल ने सारी खत्म कर दी। बाकियों ने तो थोड़ी सी ली होगी।
बेटा घर पर कौन कौन हैं, आंटी ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा।
जी आंटी, मम्मी-पापा और हम दो भाई हैं, एक बहन है, मैंने कहा।
भाई छोटा है या बड़ा, आंटी ने फिर पूछा।
जी दोनों छोटे हैं, बहन की शादी हो चुकी है, मैंने कहा।
हम भी सोच रहे हैं अब अपूर्वा की शादी के बारे में, आंटी ने कहा।
जी आंटी, मैंने कहते हुए अपूर्वा की तरफ देखा।
वो मुझे ही देखे जा रही थी। नवरीत की नजरें भी मुझ पर ही थी।
तभी कोमल का फोन बजने लगा। वो उठकर बाहर चली गई।
आंटी मुझसे मेरे घर-परिवार के बारे में पूछती रही और मैं बताता रहा।
कुछ देर बाद कोमल वापिस आई और मेरे पास आकर खड़ी हो गई।
दीदी का फोन था, आने के बारे में पूछ रही थी, कोमल ने कहा।
आज इधर ही रूकना है, कल मेरे साथ ही चलना, अपूर्वा ने कहा।
नहीं, नहीं, जाना तो पड़ेगा ही, कोमल ने कहा।
नहीं, आज तुम यहीं पर रूकोगी, आपने प्रोमिस किया था, और आज आई हुई भी हो, तो आज ही रूकना है, अपूर्वा ने कहा।
ओके---- मैं दीदी से बात कर लेती हूं, कहते हुए कोमल उठकर बाहर चली गई।
अपूर्वा अब आंटी की चेयर पे हाथ रखकर खड़ी थी। उसने अपनी बाहें आंटी के गले में डाल दी और अपना चेहरा आंटी के कानों के पास करके कुछ फुसफुसाई।
आंटी ने मुस्कराते हुए उसके गालों पर एक थपकी दी।
प्लीज, मॉम,,, अपूर्वा ने कहा।
ओके बेटा, मैं देखती हूं, कहते हुए आंटी उठ गई।
मैं नीचे चलती हूं, आप लोग बातें करो, कहकर आंटी बाहर चली गई।
आंटी के जाते ही अपूर्वा मेरी चेयर के पास आई और पिछे से मेरे गले में बाहें डालकर खड़ी हो गई। वो अपने चेहरे को मेरे कान के पास लेकर आई और फिर धीरे से मेरे कान में फुसफुसाई।
आज यही पर रूकना है आपको भी, मैंने मम्मी को कह दिया है, उसने फुसफुसा कर कहा।
क्या, तुम पागल तो नहीं हो, मैंने आश्चर्य से उसकी तरफ अपना चेहरा करते हुए कहा।
चेहरा घुमाने से मेरे होंठ सीधे उसके होंठों से टकरा गये। मैंने तुरंत अपना चेहरा पिछे किया।
हमें देखकर सभी हंसने लगे, अपूर्वा का चेहरा फिर से शरम से लाल हो गया।
प्लीज रूक जाओ ना, वो फिर से मेरे कान में फुसफुसाई।
नहीं यार, जाना तो पड़ेगा ही, मैंने धीरे से कहा।
तभी नीचे से आंटी की आवाज आई।
आई मम्मी, कहते हुए अपूर्वा बाहर चली गई।
उसके बाहर जाते ही कोमल अंदर आई।
तो जी क्या डिसाइड हुआ, नवरीत ने कहा।
दीदी मना कर रही है, कोमल ने कहा।
अरे मेरे से बात करवाओ, ऐसे कैसे मना कर रही है, नवरीत ने कहा।
ओके, ठीक है, रूक रही हूं, कोमल ने मुस्कराते हुए कहा।
ये हुए ना बात, कहते हुए नवरीत ने कोमल का हाथ पकड़कर बेड पर खींच लिया।
कोमल सीधा उसकी उपर जाकर गिरी।
तुम्हारी ये बात बड़ी बेकार है, लेती हो और ऐसे खींचते हो जैसे कोई खिलोना हो, अगर चोट लग जाये तो, मैंने कहा।

दिखाना कहां चोट लग गई, नवरीत ने कोमल के शरीर को टटोलते हुए कहा।
मेरा मतलब लग सकती है, मैंने कहा।
नवरीत ने मेरी तरफ घूर कर देखा, और फिर मुस्करा दी। मेरी भी हंसी छूट गई।
कैसा है मेरा बेटा, नीचे से किसी आदमी की आवाज आई।
अंकल आ गये, नवरीत ने कहा और उठकर बाहर चल दी।
दीदी नाराज हो रही थी, कह रही थी ऐसे कैसे किसी के भी घर रूक जाओगी, कोमल ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
अब ये तुम जानो, मेरी मैम हैं, मैं क्या कह सकता हूं, मैंने कहा।
आपसे बात करवाने के लिए कह रही थी, कोमल ने कहा।
मुझसे, मर गया,,,,, मैंने कहा।
मैंने अपना सैल निकाला और मैम का नम्बर मिलाया।
हैल्लो, फोन उठाते ही मैम ने कहा।
हैल्लो मैम, मैंने कहा।
कहां पर हो, मैम ने पूछा।
अपूर्वा के घर हैं मैम, मैंने कहा।
गये तो कोमल की दोस्त के घर थे, वहां कैसे पहुंच गये, मैम ने पूछा।
वो कोमल की दोस्त मेरे घर पर थी, और फिर वहां से सभी अपूर्वा के घर पर आ गये, मैंने कहा।
तो ये आज रूकने का क्या चक्कर है, मैम ने कहा।
मुझे नहीं पता, वो अपूर्वा कह रही थी इनको रूकने के लिए, मैंने कहा।
क्या करेगी रूककर, मिल ली है, अब रात भर रूकने का क्या मतलब है, मैम ने कहा।
तुम भी उधर ही रूक रहे हो क्या, मैम ने कुछ रूककर फिर पूछा।
मैं यहां कैसे रूक सकता हूं मैम, इनके घर वाले क्या सोचेंगे, मैंने कहा।
ठीक है, अगर तुम वही पर रूक रहे हो, तो कोमल भी रूक जायेगी नहीं तो, उसको रूकने की कोई जरूरत नहीं है, मैम ने कहा।
ठीक है मैम, मैंने कहा और बाये करके फोन काट दिया।
कोमल मेरी तरफ ही देखे जा रही थी, मेरे उतर के इंतजार में। मैंने एक बार उसकी तरफ देखा और बेड पर बैठ गया।
क्या कहा दीदी ने, कोमल ने पास आते हुए कहा।
मैंने बेकार सा मुंह बना दिया, जैसे कहना चाह रहा हों कि मना कर दिया। मैं देखना चाहता था कि ये क्या चाहती है।
मेरे मुंह बनाने से कोमल समझ गई कि मैम ने मना कर दिया है, और उदास सा चेहरा बनाकर बैठ गई।
उदास होने का साफ मतलब था कि वो यहां पर रूकना चाहती है। अब मुझे सोचना था कि ऐसा क्या करूं जिससे मुझे भी ना रूकना पड़े और ये भी यहां पर रूक सके।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:18 PM,
#46
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--46
गतांक से आगे ...........
तभी नवरीत और रूपाली अंदर आई। उनके पिछे ही अंकल भी अंदर आये। अंकल को देखते ही हम सभी खड़े हो गये।
अरे बैठो बैठो, अंकल ने हंसते हुए कहा।
मैं अपूर्वा का पापा हूं, अंकल ने खुद ही अपना इंट्रो देते हुए कहा।
नमस्ते अंकल, मैं समीर, अपूर्वा के ऑफिस में काम करता हूं, मैंने अंकल के पैर छूते हुए कहा।
वाह बेटा, बड़े अच्छे संस्कार है तुम्ळारे, अंकल ने सिर पर हाथ रखते हुए कहा।
अंकल की बात सुनकर मैं मन ही मन बहुत खुश हो गया।
फिर कोमल, रूपाली और सोनल ने भी अंकल को गुड इवनिंग की। कोमल ने अंकल के पैर छूए।
ये मेरे बॉस की साली हैं, अपूर्वा ने अंकल को बताया।
ओह------- तब तो हमारी स्पेशल मेहमान हैं, अंकल ने कोमल के सिर पर हाथ रखते हुए कहा।
जी--- पापा--- और इसीलिए आज ये यहीं पर रूकेंगी, अपूर्वा ने कहा।
कोमल ने मेरी तरफ देखा और फिर अपूर्वा की तरफ देखकर कुछ इशारा करने लगी।
अपूर्वा ने उसकी तरफ आंख मार दी।
ये मेरी फ्रेंड सोनल है, नवरीत ने सोनल की तरफ इशारा करते हुए कहा, और ये सोनल और मेरी दोनों की फ्रेंड रूपाली, नवरीत ने रूपाली पर हाथ रखते हुए कहा।
बहुत अच्छे, सभी अच्छे अच्छे दोस्त हैं तुम्हारे, अंकल ने कहा।
आज एकसाथ कैसे आना हो गया, सभी का, अंकल ने थोड़ा असमंझज में होते हुए कहा।
हम सभी सोनल के घर पर थे, तभी समीर ने बताया कि अपूर्वा की तबीयत खराब थी आज, तो हम सभी मिलने के आ गये, नवरीत ने अंकल को समझाया।
हां--- वो सुबह बुखार था हल्का-सा, अंकल ने कहा।
ठीक है बच्चों, एंजॉय करो, कहते हुए अंकल बाहर निकल गये।

अंकल के जाते ही सभी की सभी बेड पर धडामममम धडाममममम धडाममममम,,,, जैसे जान ही ना बची हो किसी में।
मैं खड़ा खड़ा उन्हें गिरते हुए देखता रहा। कोमल शायद ऐसे ना बेड पर धडाम करती पर नवरीत ने उसका हाथ पकड़ा हुआ था, इसलिए वो भी उसके साथ ही साथ बेड पर धडामममम हो गई।
थोड़ी देर तक सभी ऐसे ही पड़ी पड़ी हंसती रही और फिर एक दूसरे के उपर सिर-पैर डालकर आराम से लेट गई।
ओ-के- अब मैं चलती हूं, फिर ज्यादा अंधेरा हो जायेगा, कोमल ने उठते हुए कहा।
कहां जा रही हो, बैठो इधर,, अपूर्वा ने उसका हाथ पकड़कर खींचते हुए कहा।
कोमल अभी आधी ही उठ पाई थी कि अपूर्वा के वापिस खींचने से फिर से धडामममममम------
देखो बात ऐसी है कि मैं तो जा रहा हूं, और आप इधर ही रूक जाओ,,, मैंने कोमल की तरफ देखते हुए कहा।
मेरी बात सुनते ही अपूर्वा एकदम से उठी और मेरी तरफ उंगली दिखाने लगी।
इधर ही रूकना है आज, मम्मी-पापा से भी मैंने पूछ लिया है, अगर नहीं रूके तो फिर देख लियो------ अपूर्वा ने तमतमाये हुए चेहरे से कहा।
मैं चुप हो गया। अपूर्वा मुझे घूर कर देखती रही। कोमल भी उठ कर बैठ चुकी थी।
मैम ने कह दिया है, तुम रूक सकती हो यहां पर, मैंने कोमल से कहा।
पहले मेरी बात का जवाब दो, अपूर्वा ने फिर पूछा।
जी बिल्कुल,,,,, मेरा अभी कोई इरादा नहीं है नरकवासी होने का,,,,,, मैंने थोड़ा गंभीर चेहरा बनाकर कहा,,,, पर मन ही मन हंसी आ रही थी अपूर्वा का एकदम टमाटर जैसा लाल चेहरा देखकर।
हां,, कहे देती हूं,,,,, नहीं रूके तो फिर ,,,,,, कहकर अपूर्वा ने अपनी उंगली नीचे कर ली जो अभी तक दुनाली की तरह मुझ पर तनी हुई थी।
मैंने अपने सीने पर हाथ रखकर एक ठण्डी सांस ली।
यार कुछ करते हैं तूफानी, ऐसे तो बोर होते रहेंगे यहां पर, फिर रूकने का क्या फायदा होगा, सोनल ने उठकर बैठते हुए कहा।
तभी रूपाली का मोबाइल बजने लगा।
मम्मी का है, एक मिनट चुप रहो, कहते हुए रूपाली ने कॉल पिक की।
हैल्लो मम्मा, रूपाली ने स्पीकर ऑन करते हुए कहा।
मम्मा की बच्ची कहां है तू अभी तक, उधर से आंटी की आवाज आई।
सोनल के पास हूं मम्मा, बस अभी दस मिनट में आ रही हूं, रूपाली ने कहा।
नवरीत ने उसे घूर कर देखते हुए ना के इशारे में अपनी उंगली हिलाई।
ठीक है, जल्दी आ जा, देख अंधेरा भी हो गया है, आंटी की आवाज आई।
ओ-के- मम्मा, बाये,, कहकर रूपाली ने फोन काट दिया।
मम्मा की बच्ची, तुझे मैं बताती हूं, कहते हुए नवरीत ने रूपाली को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया जिससे वो लेट सी गई और फिर उसके पेट पर गुदगुदी करने लगी।
रूपाली हंसने लगी और अपने पैरों को मोड़कर गुदगुदी से बचने की कोशिश करने लगी।
उसके पैर कोमल को लगे तो कोमल ने उसके पैरों को पकड़कर सीधे कर दिया और पकड़े रखे। अब बेचारी रूपाली पैरों को मोड़ भी नहीं सकती थी। नवरीत उसे गुदगुदी किये ही जा रही थी। रूपाली की आंखों में हंसते हंसते पानी आने लगा था।
गुदगुदी करने की वजह से रूपाली की कुर्ती उपर को सरक गई थी जिससे उसका मखमली सपाट पेट नंगा दिखने लगा था। ट्यूबलाइट की रोशनी में तो उसका पेट और भी ज्यादा दूधिया दिख रहा था।
जब नवरीत ने गुदगुदी करनी बंद नहीं की तो रूपाली ने रोना शुरू कर दिया।
आंहनननंहहहननननन प्लीज,, बस ,,,,, प्लीज,,,,,,, और नहीं,,,, प्लीज,,,,, आंनननननननंननहनहहहहहह
जब फिर भी नवरीत ने गुदगुदी करनी बंद नहीं की तो रूपाली ने उसको हाथों को पकड़ने की कोशिश की पर सोनल ने उसके हाथ पकड़ लिये। अब तो नवरीत बिना किसी बाधा के उसे गुदगुदी कर सकती थी। नवरीत ने उसके बगल (काख, आर्मपिट) में गुदगुदी करनी शुरू कर दी।
रूपाली ने एकदम से अपने पैरों को पटका, कोमल की पकड़ शायद ढीली हो गई थी, इस वजह से उसके पैर आजाद हो गये और वो अपने पैरों को बेड पर रखते हुए सिर और पैरों के बल उपर उठ गई।
इस तरह उठने से उसकी कुर्ती जो पहले ही उसकी नाभि से उपर जा चुकी थी, अब उसके उभारों के सहारे जाकर अटक गई।
मेरे लिंग ने अंगडाई लेनी शुरू कर दी।
ठीक है, नहीं जाउंगी, अब तो छोड़ दो,,,,, हार मानते हुए रूपाली ने कहा।
क्या कहा दीदी ने आप बताइये ना, कोमल ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
मैम ने कहा है कि तुम रूक सकती हो, अगर मैं भी यहां पर रूक रहा हूं तो, मैंने उसे बताया।
येय,,,,,, अपूर्वा खुश होते हुए चिल्लाई।
पर मैं नहीं रूक रहा तो आप नहीं रूक सकती, मैंने गंभीर चेहरा बनाते हुए कहा।
अब तो मैं बस,,,,,, कहते हुए अपूर्वा घुटनों के बल चलते हुए मेरे पास आई और मेरे गालों को पकड़कर खींच लिया।
आइइइइइइइइ,,,,, मैं तो मजाक कर रिया था,,,,,,,, मैंने दर्द भरी आह के साथ कहा।
हाहाहाहाहा,,,,,हेहेहेहेहे,,,,, ये ‘रिया’ क्या होता है------- नवरीत ने हंसते हुए पूछा।
मतलब ‘रहा’ वो थोड़ी जीभ लडखड़ा जाती है तो ‘रिया’ निकल जाता है, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
हम्मममम,,,,, आपकी भी जबान लडखड़ाती है, सोनल ने गंभीर चेहरा बनाते हुए कहा और कहकर हंसने लगी।
मैं अभी आई, रूपाली ने उठते हुए कहा और बाहर की तरफ जाने लगी।
कहां---- कहीं भागने का प्लान तो नहीं है, अपूर्वा ने पूछा।
हेहेेहेहे, बस अभी आ रही हूं,,,,,,, रूपाली ने कहा और बाहर निकल गई।
बेटा, खाना तैयार हो गया है, सभी खाना खा लो गर्म गर्म, नीचे से आंटी की आवाज आई।
ओ-के- मॉम, अभी आते हैं, अपूर्वा ने वहीं से मरी-सी आवाज में जवाब दिया।
अपूर्वा, बेटा, आ जाओ खाना खा लो, नीचे से अबकी बार अंकल की आवाज आई।
शायद अपूर्वा की आवाज नीचे तक नहीं पहुंची थी।
मैं उठकर रूम से बाहर आया।
जी अंकल अभी आ रहे हैं, मैंने बाहर आकर कहा।
अंकल नीचे सामने सोफे पर बैठकर कोई बुक पढ़ रहे थे।
अंकल ने मेरी तरफ देखा और फिर हाथ से नीचे आने का इशारा किया।
मैं नीचे जा रहा हूं, अंकल बुला रहे हैं, मैंने कमरे में झांकते हुए कहा और नीचे चल दिया।
आओ बेटा बैठो, अंकल ने अपने बगल में इशारे करते हुए कहा।
मैं साइड वाले सोफे पर बैठ गया।
कैसे हो बेटा, अंकल ने बुक टेबल पर रखते हुए कहा।
ठीक हूं अंकल, मैंने कहा।
काफी टेंलेटेड हो, अंकल ने मेरी तरफ मुस्कराते हुए कहा।
जी, मैं समझा नहीं, मैंने थोड़ा टेंशन में होते हुए कहा।
मुझे लगा कि पता नहीं किस टेलेंट की बात कर रहे हैं,,,, ।
आठवीं तक पढ़े हो, फिर भी आई-टी- प्रोफेशनल हो, अच्छी कम्पनी में नौकरी है, अच्छी पोजीशन पर हो, तो टेलेंटेड ही तो हुए, अंकल ने समझाते हुए कहा।
अंकल की बात सुनकर मेरी जान में जान आई।
ओहह---- हां, वो तो बस ऐसे ही, ज्यादा कुछ नहीं, मैंने चैन की ठण्डी सांस लेते हुए कहा।
अपूर्वा बहुत बातें करती रहती है तुम्हारे बारे में, सब उसी से पता चला, अंकल ने उपर की तरफ इशारा करते हुए कहा।
मैंने अंकल के इशारे की तरफ देखा, सभी लड़कियां बाहर ही खड़ी थी और हमारी तरफ ही देख रही थी। अपूर्वा ने मेरी तरफ थम्स-अप करके बेस्ट ऑफ लक कहा। मैं थोड़ा कन्फयूज हो गया।

इसके बाद अंकल मुझसे मेरे आगे की लाइफ के बारे में क्या सोचा है, मेरे घर-परिवार के बारे में , आदि आदि पूछते रहे। (दोस्तों मैंने ये पूरी कनवर्जेशन लिखी तो है, पर मुझे लगा कि आप सब बोर हो जायेंगे पढ़कर इसलिए पोस्ट नहीं की)।
चलो अब खाना खा लो, खाना लग गया है, आंटी ने कहा।
मैंने आवाज की तरफ देखा, सभी लड़किया डायनिंग टेबल पर बैठी थी और बाई और आंटी खाना लगा रही थी।
मैंने इधर उधर देखा, एक कोने में वाश-बेसिन था। मैंने जाकर हाथ-मुंह धोये और आकर चेयर पर बैठ गया। कुछ देर बाद अंकल भी आकर बैठ गये।
सभी ने खाना आरंभ किया। सभी चुपचाप खाना खा रहे थे। कोई कुछ नहीं बोल रहा था।
सभी खाना खा ही रहे थे कि मेरे पैर पर मुझे कुछ महसूस हुआ। और तुरंत ही मुझे पता चल गया कि ये किसी का पैर है। मेरे सामने नवरीत बैठी थी। मैंने उसकी तरफ देखा तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगा कि उसका पैर हो सकता है। उसका पूरा धयान खाना खाने में था।
मैंने उसके पास में बैठी कोमल की तरफ देखा तो वो भी खाने में मग्न लग रही थी। उसके बाद बैठी अपूर्वा खाना खा रही थी और मेरी तरफ टुकूर टुकूर देख रही थी।
मैंने एकबार कन्फर्म करने के लिए सोनल की तरफ भी देखा पर वो भी खाना खाने में मग्न थी।
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि ये अपूर्वा का पैर हो सकता है। पर सिचुएशन देखकर यही लग रहा था कि पैर अपूर्वा का ही है।
मैंने अपने पैर को थोड़ा सा पिछे कर लिया। पर उसका पैर फिर से मेरे पैर तक पहुंच गया और मेरी पेंट को उपर उठाकर अंदर घुसने की कोशिश करने लगा।
अचानक उसने अपने पैर के अंगूठे और उंगली के बीच में मेरे पैर की चमड़ी को भींच दिया। मैंने रोटी का कौर मुंह में लिया ही था, उसकी इस हरकत से एकदम से कौर स्वांस नली में चला गया और मुझे जोर की खांसी आ गई। वो तो गनीमत है कि मैंने मुंह पर हाथ रख लिया था, नहीं तो गड़बड़ हो जाती।
अपूर्वा एकदम उठी और पानी का गिलास मेरी तरफ बढ़ाया। मैंने उसकी तरफ देखा, उसके चेहरे पर परेशानी झलक रही थी।
मेरी आंखों में पानी आ गया था। मैंने पानी पीया और उठकर वाश-बेसिन पर जाकर मुंह धोया और रूमाल से पौंछकर फिर से आकर खाना खाने लगा। अबकी बार मैंने अपने पैरों को चेयर की तरफ पिछे कर लिया था।
मैंने सबकी तरफ एक नजर घुमाई, नवरीत मुस्करा रही थी, अपूर्वा के चेहरे पर कुछ पेरशानी की रेखाएं थी, कोमल और सोनल भी हल्के हल्के मुस्करा कर मेरी तरफ ही देख रही थीं।

क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:18 PM,
#47
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--47
गतांक से आगे ...........
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि ये किसकी हरकत थी। अपूर्वा जिस तरह से परेशान दिख रही थी, हो सकता है उसकी हरकत हो, परन्तु फिर नवरीत पर नजर जाती तो उसकी वो कातिल मुस्कान देखकर लगता कि हो न हो इसकी ही हरकत है। परन्तु फिर कोमल व सोनल का मुस्कराता चेहरा दिखता तो उन पर भी शक होता। वैसे कोमल पर ज्यादा शक नहीं हो रहा था। परन्तु सोनल और नवरीत पर सबसे ज्यादा शक हो रहा था।
माना कि खाना हमारी तरफ से है और स्वादिष्ट भी है, पर कहीं भागा तो नहीं जा रहा था ना, और हम सब तो थोड़ा थोड़ा ही खाते हैं, तो सारा आपके लिए ही था, फिर भी पता नहीं किस बात का डर था कि इतनी जल्दी थी खाने की,,,,, नवरीत ने अपनी आंखें नचाते हुए कहा और चेयर पर पिछे की तरफ पीठ टिका कर बैठ गई।
सभी हंसने लगे। उसकी ये बात सुनकर तो मुझे पक्का यकीन हो गया कि हो न हो इसी की हरकत है। मैंने फिर से खाना शुरू कर दिया।
लो भई, मेरा पेट तो भर गया, अब तुम लोग खाओ आराम से, कहते हुए अंकल उठ गये और बाई(कामवाली) आकर उनके बर्तन उठा ले गई।
अंकल के जाते ही मुझे फिर से मेरे पैर पर किसी का पैर महसूस हुआ। मैंने सभी की तरफ गौर से देखा पर सभी ऐसे रिएक्ट कर रही थी जैसे वो कुछ कर ही नहीं रही।
मैंने अपना दूसरा पैर उठाया और जोर से उसके पैर पर मारने ही वाला था कि तभी मन में विचार आया कि यार जिसका भी है, है तो लड़की का ही, और यह विचार आते ही मैंने उसके पैर पर मारने का इरादा त्याग दिया।
अब उस पैर की हरकत कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी। अब वो पैर मेरे घुटनों तक आ गया था। नवरीत अपने चेयर पर कुछ नीचे को खिसक गई थी। मतलब वो ही ये हरकत कर रही है।
अगर बैठा नहीं जा रहा तो आराम से सोफे पे जाकर पसर जा, यहां क्या टेबल को गिराने का इरादा है, मैंने नवरीत की तरफ घूरते हुए कहा।
मेरी मर्जी मैं कहीं भी पसरूं, आपको मतलब, उसने मेरी तरफ जीभ निकालते हुए कहा।
रोटियां और चाहिए बेटा, आंटी की आवाज आई।
मैंने गर्दन घुमा कर देखा, आंटी रोटियां लिए आ रही थी। नवरीत सीधी होकर बैठ गई। पर वो पैर अभी भी मेरे पैर से छेड़छाड़ कर रहा था।
अब तो मैं टैंशन में आ गया था, पैर नवरीत का नहीं है तो किसका है। अब मैंने अपना निश्चय पक्का किया और हल्के से उस पर पैर दूसरे पैर से मार दिया।
आइइइइई-------- तुरंत ही रिएक्शन मिला, और कोमल के मुंह से दर्द भरी आह निकली।
क्या हुआ, किसी ने मारा, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
कोमल ने मेरी तरफ घूर कर देखा और फिर खाना खाने लगी।
क्या हुआ दीदी, आइइइई क्यों की थी आपने अभी, नवरीत ने थोड़ा आगे झुककर उसे देखते हुए कहा।
कुछ नहीं, वो,,, वो,,,,, वो,,,, थोड़ा,,, सा ,,,,, बस,,,,,, वो,,,,, उंगली दांतों के नीचे आ गई थी, कोमल ने नवरीत को अपनी उंगली दिखाते हुए कहा।
हेहेहेहेहेहेहेहे,,,,,,, नवरीत खिलखिलाकर हंस पड़ी।

हंसते हुए वो बहुत ही प्यारी लग रही थी। मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। उसके गाल पर पड़े वो डिम्पल मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे।
नहीं,,, नहीं,,, आंटी ओर नहीं,,, बस पेट भर गया, मैंने आंटी को और रोटियां रखने से मना करते हुए कहा, पर आंटी ने जबरदस्ती दो रोटियां और रख दी।
आज तो दो इंच पेट बढ़ ही जायेगा, एक तो इतना ज्यादा मक्खन और उपर से दो रोटियां एक्स्ट्रा,,,, मैंने आंटी की तरफ देखते हुए कहा।
पतली पतली तो रोटियां बनाती हूं मैं, अभी दो रोटी ही तो खाई हैं तुमने, लो ये एक और लो,,,,,,, आंटी ने एक रोटी और रखते हुए कहा।
अरे आंटी, चार रोटियां खा चुका हूं,,,, मैंने आंटी को रोटी रखने से रोकते हुए कहा।
ले लो, बार बार नहीं मिलेंगी आंटी के हाथ की रोटियां, वैसे भी तुम आधे टाइम तो भूखे ही रहते होंगे, नवरीत ने मेरा हाथ एकतरफ हटाते हुए कहा और आंटी ने वो रोटी भी थाली में रख दी।
मैंने नवरीत को घूर कर देखा, और फिर खाना खाने लगा।
हे,,,,, ऐसे क्या देख रहे हो, एक तो एक रोटी एक्सट्रा दिला दी, उपर से गुस्सा हो रहे हो, नवरीत ने हंसते हुए कहा।
मैंने दो रोटियां उठाई और सीधे नवरीत की थाली में पहुंचा दी।
हे, हे, ये चीटिंग है, अपनी रोटियां मेरी थाली में क्यों रखी, इती मुश्किल से तो तुम्हें दिलाई है,,,, नवरीत ने रोटियां उठाकर वापिस मेरी थाली की तरफ बढ़ाते हुए कहा।
अरे,,,,, तुम भी ना रीत,,,,,, ये कहना चाहते हैं कि इनके हाथ दुखने लगे हैं रोटियां तोड़ते तोड़ते, इसलिए अब तुम अपने हाथों से खिला दो, कोमल ने मुस्कराते हुए कहा।
अच्छा तो ये बात है, चलो तुम भी क्या याद रखोगे, कहते हुए नवरीत ने आधी रोटी का एक कौर बनाया और सब्जी लगाकर मेरी तरफ बढ़ा दिया।
मैं उसकी तरफ टुकुर टुकूर देखने लगा।
ऐसे क्या टूकुर टुकूर देख रहे हो, अब खाओ, मेरे हाथ से खाना किसी किसी को नसीब होता है, और वो भी कभी कभी,,,,,,, अब जल्दी से खा लो नहीं तो हो सकता है मेरा मूड बदल जाये, फिर हाथ मलते रह जाओगे,,,,,,,, नवरीत ने अपनी मोटी मोटी आंखें नचाते हुए कहा।
खा लो, खा लो, सालियां खिला रही हों तो, ज्यादा नखरे नहीं करने चाहिए,,,, आंटी ने पास से गुजरते हुए कहा।
सालियााााााााां,,,,, मैंने आश्चर्य से आंटी की तरफ देखा, पर तब तक आंटी रसोई में जा चुकी थी।
चलो अब जल्दी से मुंह खोलो, नवरीत ने कहा।
मैंने अपूर्वा की तरफ देखा, वो मेरी तरफ ही देख रही थी और मुस्करा रही थी। जैसे ही मैंने उसकी तरफ देखा, उसने शरमा कर अपनी नजरें झुका ली और फिर अदा से एक बार वापिस उपर को उठाकर मेरी तरफ देखा और फिर तुरंत ही वापिस नीचे झुका ली।
उसकी इस अदा ने तो मुझे मार ही डाला, और मेरा मुंह खुल गया। मौके का फायदा उठाकर नवरीत ने रोटी सीधा मेरे मुंह में ठूंस दी।
उंहहननननननननन,,,,, मेरे मुंह से बस इतना ही निकल पाया। नवरीत ने अपना हाथ हटा लिया, नीचे ना गिरे इसलिए मैंने अपनी हथेली होठों के पास कर ली।
देखो, देखो, भूखे को,,,,, कैसे बेनिता होकर खा रहा है, खाना कहीं नहीं भागा जा रहा, आराम से भी खा सकते हो, थोउ़ा थोउ़ा करके, नवरीत ने हंसते हुए कहा। उसका एक हाथ मेरी तरफ उठा हुआ था।
तुम भी ना रीत,,,,, ये भी कोई तरीका है,,,,, अपूर्वा ने कहा और उठकर अपनी चुन्नी से मेरे मुंह पर लगी सब्जी को साफ कर दिया।
ओए होए,,,,,,, बहुत दया आ रही है, नवरीम ने अपूर्वा के गालों को खिंचते हुए कहा।
एक साथ इतना ज्यादा खाने के कारण सब्जी की चरचराहट गले में चली गई थी, जिस कारण खांसी तो नहीं हुई, पर आंखों से पानी बहने लगा था।
अपूर्वा उठी और मेरे पास आकर बैठ गई और नवरीत की थाली से रोटियां उठाकर मेरी थाली में रख ली।
देखो, देखो, कैसे मेरी थाली से रोटियां उठा ली भूखों ने, कितने बेनिते हो तुम लोग, नवरीत ने थोड़ा सा सीरियस चेहरा बना कर कहा और कहकर फिर से हंसने लगी।
अपूर्वा ने उसको घूर कर देखा, और फिर अपनी चुन्नी से मेरे आंखों से बहता पानी साफ किया और पीने के लिए पानी दिया।
मैंने पानी पिया। अपूर्वा ने रोटी में से छोटा सा कौर तोउ़ा और सब्जी लगाकर मेरे मुंह के सामने कर दिया। मैंने उसकी तरफ देखा और फिर अपना मुंह खोल दिया। उसने बहुत ही प्यार से मुझे खिलाया। फिर एक कौर खुद खाया और फिर मुझे खिलाया।
मेरा पेट भरा हुआ था, पर कोई इतने प्यार से खिलाए तो कैसे मना किया जाए। वो मुझे खिलाती गई और मैं खाता गया। आधी रोटियां उसने खुद खाई और आधी मुझे खिलाई।
नवरीत हमें देखकर हंसे जा रही थी। कोमल भी हंसने में उसका साथ दे रही थी। सोनल बस हमें घूर घूर कर देख रही थी।
खाना खाने के बाद सभी उठे और वाश बेसिन पर पहुंच गये।

हे पहले मेरा नम्बर है, बाकी सभी लाइन लगा कर खड़े हो जाओ, नवरीत ने सबसे आगे निकलते हुए कहा और वाश बेसिन पर अपने हाथ धोने लगी।
वो कुछ ज्यादा ही टाइम लगा रही थी। मैं एक साइड खड़ा हुआ इंतजार कर रहा था कि कब ये सब जगह दें और मेरा नम्बर आये।
आखिर काफी देर बाद नवरीत ने जगह दी।
हे,,,, ज्यादा टाइम तो नहीं लगाया ना मैंने, इता टाइम तो लगता ही है ना अच्छी तरह से कुल्ला करने में, नहीं तो दांतों में सड़ने हो जायेगी, नवरीत ने मेरे पास आकर खड़े होते हुए कहा।
और हां, आप भी अच्छे से करना, कहीं खाने की तरह जल्दी जल्दी में,,,,,, नहीं तो दांत सड़ जायेंगे, नवरीत ने मेरे गाल का सहलाते हुए कहा।
सभी ने हाथ धोये और आकर सोफे पर बैठ गये। नवरीत और अपूर्वा रसोई में चली गई।
नवरीत व अपूर्वा के रसाई में चले जाने पर मुझे लड़कियां कुछ कम लगी। तभी मुझे धयान आया कि रूपाली तो है ही नहीं।
मैं किसी से कुछ पूछता, उससे पहले ही मेरे कानों में और दूसरी आवाज पड़ी।
हे,,, चलो चलो, उपर, यहां क्या बैठे हो, नवरीत ने रसोई से निकलते हुए कहा। उसके हाथों में दो प्लेटे थीं, प्लेटों में क्या था ये तो दिखाई नहीं दिया। पर ये कहते हुए उपर की तरफ चल दी।
उसके पिछे पिछे अपूर्वा रसोई से निकली, उसके हाथों में भी एक प्लेट थी। वो भी उपर आने का इशारा करते हुए नवरीत के पिछे पिछे चल दी।
हम तीनों खड़े हुए और उपर की तरफ चल पड़े।
समीर बेटा, एक मिनट आप इधर आओ, आपसे कुछ बात करनी है, सामने से आते हुए अंकल ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
मैं कुछ शंकित सा हो गया, कि पता नहीं क्या बात हो गई, जो मुझे अकेले को बुला रहे हैं, पर उनके चेहरे की मुस्कराहट देखकर कुछ शांति मिली।
मैं उनके साथ वापिस सोफे की तरफ मुड गया।
पापा,,,,,,, अभी नहीं, अपूर्वा की आवाज आई।
पर बेटा,,,,,,,, अंकल ने इतना ही कहा।
उउंउंहहहहहह,,,,,, अभी नहीं ना पापा,,,,, फिर से अपूर्वा की आवाज आई।
वो सीढ़ीयों में खड़ी थी, नवरीत उपर पहुंच चुकी थी, बाकी की दोनों लडकिया अपूर्वा के पिछे ही खडी थी।
चलो, जैसी तुम्हारी मर्जी, कहते हुए अंकल सोफे पर बैठ गये।
क्या बात है, अंकल,,,,, मैंने थोड़ा शंकित होते हुए अंकल से पूछा।
वो बेटा, बात ऐसी है कि,,,,,, अंकल ने इतना ही कहा था कि तभी फिर से अपूर्वा की आवाज आई।
नहीं ना पापा,,,,,,, अभी नहीं,,,,, उसने कहा।
ओ-के- बेटा,,,,, अंकल ने कहा।
और आप उपर आओ,,,,,,, अपूर्वा ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
मैं असमंझस में सिर खुजलाते हुए उपर की तरफ चल दिया। समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी क्या बात है, और जब अंकल बता रहे थे तो अपूर्वा ने मना क्यों किया। इसी असमंझस में मैं उपर पहुंच गया।
मेरे उपर आते ही अपूर्वा मेरा हाथ पकड़कर खिंचते हुए अंदर ले गई और अंदर आकर बेड पर बैठा दिया। और फिर प्लेट को टेबल पर रखते हुए टेबल को बेड के पास सरका लिया। नवरीत ने भी अपनी प्लेटे उस टेबल पर रख दी।
प्लेट में रखी मिठाईयां देखते ही मेरे मुंह में पानी आ गया। बंगालियां मिठाईयां और बर्फी, जो कि मेरी बहुत ही मनपसंद मिठाईया हैं।
आराम से बैठो ना उपर पैर करके,,, अपूर्वा ने कहा।
मैंने अपने जूतों की तरफ देखा और फिर जैसे ही जूते उतारने के लिए झुकने लगा, मुझसे पहले ही अपूर्वा नीचे बैठ गई। बैठते हुए उसके उरोज मेरे घुटनों से टकरा गये, पर उसने कोई धयान नहीं दिया और नीचे बैठकर मेरे जूते उतारने लगी।
हे,,, ये क्या कर रही हो, मैं खुद उतार लूंगा, मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।
अब तो आदत डाल लो जीजू,,,,, नवरीत ने चहकते हुए कहा।
जीजू,,,,,, मेरे मुंह से आश्चर्य से निकला।
ये क्या चक्कर है, नीचे आंटी सालियां कह रही थी और यहां पर तुम ये जीजू,,,,,,, ये क्या है,,, मैंने कन्फयूज होते हुए सीरियस चेहरा बनाते हुए कहा।
अपूर्वा ने नवरीत की तरफ घूर कर देखा। नवरीत ने अपने होंठों पर उंगली रख ली और ‘सॉरी’ कहा।
अपूर्वा फिर मेरे जूते उतारने लगी।
हे,,, बताओ ना, मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,, मैंने कहा।
सब समझ में आ जायेगा टाइम आने पर,,,,, कोमल ने कहा।
मैंने उसकी तरफ देखा। वो आराम से बेड पर बैठी थी और उसके हाथ में एक बर्फी थी।

मैंने बुरा सा मुंह बना दिया।
चलो,,, अब आराम से उपर पैर करके बैठ जाओ,,,,, अपूर्वा ने मेरे जूते उतारकर साइड में रखते हुए कहा।
मैं आराम से उपर पैर करके बेड के सहारे कमर लगाकर बैठ गया और पैरों को सीधे करके उनपर कम्बल डाल लिया।
सोनल, जो कि दीवार के सहारे कमर लगाकर अपने पैरों को सिकोड़ कर बैठी थी उसने भी पैरों को सीधा करके मेरे पैरों के उपर रख लिये। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने एक आंख दबा दी।
कोमल सोनल के पास ही दीवार से कमर लगाकर बैठी थी, वो मेरे साइड में ही बैठी थी और अपने पैरों को सिकोड़े हुए थी। उसने अपने पैरों को थोड़ा सा आगे की तरफ सरका दिया जिससे उसके पैरों की उंगलियां मेरी जांघों की साइड में आकर जम गई। मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्करा दी।
नवरीत बेड पर चढी और अपनी कमर पर हाथ रखकर इधर उधर देखने लगी और फिर मेरे और कोमल के बीच में आकर बेड से कमर लगा कर मुझसे सटकर बैठ गई। पर उसे पैर फैलाने के लिए जगह नहीं मिली।
उसने एक पैर मेरी जांघों के उपर से फैला कर रख लिया और दूसरा शायद कोमल के पैरों के बीच से उसके नितम्बों और पैरों के बीच रख लिया।
अभी तक नवरीत के बारे में बारे में कभी भी उलटा नहीं सोचा था, पर आज जब उसने इस तरह से मेरी जांघों पर पैर रखा तो,,,,, न चाहते हुए भी मेरा लिंग अपना सिर उठाने लगा।
क्रमशः.....................
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Reply
06-09-2018, 02:18 PM,
#48
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--48
गतांक से आगे ...........
अपूर्वा ने एक प्लेट उठाई और मेरे साइड में कम्बल में घुसकर बैठ गई और प्लेट मेरी जांघों पर रख दी। मैंने एक बर्फी उठाई और खाने लगा।
अपूर्वा भी मेरे पास ही बेड से कमर लगाकर कम्बल में घुस गई। और अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने उसकी तरफ देखा तो वो अपनी आंखें बंद किए हुए थी और होंठों पर हल्की मुस्कान थी। मैंने उसके गालों को सहलाया और एक और बर्फी उठाकर खाने लगा।
रूपाली कहां गई, मैंने पूछा।
भाग गई वो गोली देकर,,,,, उसे तो मैं अच्छी तरह बताउंगी,,,,, सोनल ने कहा।
तभी कोमल का मोबाइल बजने लगा।
दीदी का है, कोमल ने कॉल उठाते हुए कहा।
हैल्लो, हां दीदी,------------------------- नहीं, इधर ही रूक रही हूं,,,,,,, नहीं वो इधर ही हैं,,,,,,,,,, बस बैठे हैं,----------- हां,, खा लिया,,,,,,,,,,-------------------------------------- ठीक है, ----------- ओके बाये------------- बातें करके कोमल ने फोन काट दिया और मेरी तरफ देखकर मुस्कराने लगी।
क्या----- मैंने उसे मुस्कराते हुए देखकर कहा।
कुछ नहीं------- कहकर वो और भी ज्यादा मुस्कराने लगी।
आपके घर पर कौन कौन है,,,,,, नवरीत ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखते हुए पूछा।
उसका हाथ मेरी गर्दन के पिछे से होता हुआ अपूर्वा के बालों पर पहुंच गया और उसके बालों को सहलाने लगी। नवरीत का एक उभार मेरे हाथ पर हल्का सा टच होने लगा।
मम्मी,,, पापा,,,, भाई और सिस्टर की शादी हो चुकी है, मैंने कहा।
भाई आपसे बड़ा है या छोटा,,,,, अपूर्वा ने पूछा।
छोटा,,,,,, मैंने कहा।
आप बीच के हो-------- कोमल ने कहा।
नहीं, मैं सबसे बड़ा हूं,,,,, मैंने कहा।
ऐसे ही काफी देर बातें चलती रहीं। अपूर्वा मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठी थी और उसका हाथ मेरी गोद में था। सारी मिठाईयां खत्म हो चुकी थी। ज्यादा मैंने ही खाई थी। अपूर्वा ने प्लेट उठाकर टेबल पर रख दी और वापिस मेरे कंधे पर सर रखकर बैठ गई।
उउउउउउउउंहहहह,,, मुझे तो नींद आ रही है, नवरीत ने उंघते हुए कहा और अपना एक पैर मोडते हुए मेरी जांघों पर आगे करके मेरे पेट से सटा दिया। उसकी एक जांघ पूरी तरह मेरे उपर थी और उसकी योनि वाला भाग मेरे जांघों पर टच हो रहा था। उसका हाथ पहले से ही मेरी गर्दन के पिछे से अपूर्वा के बालों में था। उसके इस तरह मेरे से सट कर बैठने से उसके उभार मेरे हाथ पर दब गये। बहुत ही नरम और मुलायम अहसास था।
सोनल पर मेरी नजर पड़ी तो वो तो वैसे ही बैठे बैठे सपनों की दुनिया में पहुंच चुकी थी। उकडू बैठे बैठे (पैरों को मोड कर बैठे हुए) कोमल के घुटनें भी शायद दुखने लगे थे, वो थोडा सा एडजस्ट हुई और अपने पैर मेरे और नवरीत के पैरों के उपर से सीधे कर दिय। उसकी जांघों का नीचे वाला हिस्सा मेरे और नवरीत के पैरों पर आ गया। उसने भी एक जम्हाई ली और अपनी आंखें बंद करके दीवार से सर लगा लिया।
नवरीत के इस तरह होने से अपूर्वा का जो कम्बल के उपर से मेरी गोद में रखा था वो हट गया तो अपूर्वा ने अपना हाथ कम्बल के अंदर कर लिया और मेरी जांघों और पेट पर रख दिया। मैंने अपूर्वा की तरफ देखा, उसकी आंखें बंद थी और उसके चेहरे पर बहुत ही खुशी झलक रही थी।
सो गई क्या,,, मैंने धीरे से अपूर्वा के कान में कहा।
हूंहहहूं,,,, उसने धीमा सा जवाब दिया।

मैंने अपना हाथ उसके बालों में रख दिया और सहलाने लगा। वो थोड़ा सा एडजस्ट हुई और नीचे को सरक कर अपने गाल मेरी जांघों पर रख दिये और सो गई। उसका एक हाथ नवरीत के नितम्बों पर था।
सभी तरफ से लड़कियाें से घिरा हुआ मैं, बहुत ही असहज फील कर रहा था, क्योंकि उनके अंग मुझसे सटे हुए थे जिस कारण मेरा लिंग बार बार झटके ले रहा था।
नवरीत के पैर और अपूर्वा के सिर के कारण मैं उसे एडजस्ट भी नहीं कर सकता था।
सभी लगभग नींद में पहुंच चुके थे। मैंने भी अपना सिर पिछे बेड पर टिका दिया और आंखें करके अपूर्वा के बालों को सहलाने लगा।
तभी आंटी हाथ में ट्रे लेकर रूम में आई।
ये लो,,,,, मैं तो दूध लेकर आई हूं,, और ये सब लम्बी तान गये,,, आंटी ने कहा।
आंटी की आवाज सुनकर मैंने आंखें खोली और आंटी की तरफ देखा।
लो बेटा दूध पी लो,,,, और अपूर्वा और नवरीत तो अब उठेंगी नहीं, कोमल और सोनल को उठा दो,, वो भी पी लेंगी, कहते हुए आंटी ने ट्रे को टेबल पर रख दिया और अपूर्वा के सिर को सहलाते हुए उसके बालों में एक चुम्मी दी और उसको बेड पर सही तरह से लेटा दिया।
मैंने नवरीत को थोड़ा सा अपने से अलग किया और बेड से उठते हुए उसको सीधा करके सही तरह से लेटा दिया।
हलचल होने से कोमल का आंख खुल गई,,,, उसने आंखें मलते हुए चारों तरफ देखा और फिर नवरीत को साइड में लुढक गई।
कोमल,,,,, उठो,,, दूध पी लो,,, फिर सो जाना,,, मैंने उसे हिलाते हुए कहा।
नहीं,,, मुझे सोने दो,,,, कोमल ने नींद में कहा और कम्बल को अपने उपर खींच लिया।
मैंने बेड पर चढकर उसके गालों पर हल्के हल्के चप्पल लगाई,,,, उठो,,,, खामखां में खराब होगा,,, अब आंटी ले आई है,,,, चलो एक बार उठकर पी लो,,, ,फिर आराम से सो जाना।
उउउंहहहहंउउउहहह करते हुए कोमल उठ कर बैठ गई। मैंने एक गिलास उठाकर उसके हाथ के पास कर दिया।
कोमल ने आंखें खोले बगैर ही गिलास पकड़ लिया।
धयान से कहीं इनके उपर गिरा दो,,,,, उसको ऐसे उंघते हुए देखकर मैंने कहा।
उसने गिलास मुंह से लगाया और एक ही घूंट में सारा दूध पी गई और गिलास आगे की तरफ बढा दिया।
उसे देखकर मुझे हंसी आ गई, उसने एक बार भी अपनी आंखें नहीं खोली थी और खाली गिलास सोनल की तरफ कर रखा था।
मैंने उसके हाथ से गिलास लिया और टेबल पर रख दिया।
वो वापिस लेट गई और करवट लेकर नवरीत से चिपक गई। उसका एक हाथ नवरीत की छाती पर पहुंच गया।
मैंने सोनल की तरफ देखा तो आंटी उसके पास खडी थी और चददर को सही कर रही थी।
मैंने सोनल को उठाकर उसको भी दूध पिलाया। उसने भी नींद में ही दूध पिया,,, बस गनीमत इतनी थी कि उसकी आंखें आधी खुली हुई थी। दूध पीकर वो वैसे ही दीवार से सिर लगाकर फिर से सो गई।
मैंने उसे गोद में उठाया और अपूर्वा के साइड में लेटाकर कम्बल ओढा दिया।
लो बेटा, तुम भी पी लो,,, आंटी ने गिलास मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा।
मैंने गिलास लिया और चेयर पर बैठकर दूध पीने लगा।
यहां सोना चाहो तो यहां सो जाना,,,, बेटा,,,,, और नहीं तो साथ वाला रूम भी खाली है,,, चाहों तो उसमें सो जाना,,, मैं कम्बल रख देती हूं उसमें,,,, जहां चाहों वहां सो जाना,,, कहते हुए आंटी गिलास और ट्रे लेकर चली गई।
मैंने दूध पिया और उठकर बाथरूम करने चला गया। वापिस आकर मैं दूसरे रूम को देखने के लिए बाहर आया। दूसरे रूम में जाकर देखा, काफी शानदार रूम था,,, सलीके से सजा हुआ था। इसमें भी डबल बेड था।
तभी आंटी कम्बल लेकर अंदर आई।
ये लो बेटा,,,,, यहां पर आराम से सोना,,,,,,, कहते हुए आंटी ने कम्बल बेड पर रख दिया।
गुड नाइट बेटा,,, अपना ही घर समझना,, और आराम से सोना,,, कहते हुए आंटी वापिस चली गई।
मैं जाकर बेड पर बैठ गया। पता नहीं आज नींद आंखों से काफी दूर थी। फिर भी मैंने लेट कर कम्बल ओढ लिया। पर नींद आने का नाम ही नहीं ले रही थी।
थोड़ी देर मैं ऐसे ही करवटें बदलता रहा, पर नींद नहीं आई तो मैं उठकर बाहर आ गया। सामने मुझे उपर जाने के लिए सीढ़ियां दिखाई दी तो मैं उपर की तरफ चल दिया।
छत पर आकर मैं मुंडेर के सहारे आकर खड़ा हो गया। बहुत ही शांति छाई हुई थी। ठंड का मौसम होने से कुत्ते भी कहीं दुबक कर सो रहे थे शायद।
मैंने चारों तरफ नजर घुमाई,,,,, पूरा शहर रोशनी से जगमगा रहा था। पहाड़ों पर लाल लाइट जल-बुझ रही थी। मैंने आसमान की तरफ देखा तो पूरा आसमान तारों से भरा हुआ था। एकदम साफ आकाश,,,,, छोटा सा चांद दिखाई दे रहा था।
मैं मुंडेर पर चढकर दूसरी साइड पैर लटका कर बैठ गया। दूसरी साइड भी छत थी, इसलिए गिरने की टैंशन नहीं थी। मैं ऐसे ही बैठे हुए आसमान में देखने लगा। शायद तारें गिनने की कोशिश कर रहा हों।

आज काफी समय बाद इस तरह से आसमान में देख रहा था,,, शायद गांव से शहर में आने के बाद पहली बार। मन को बहुत ही शांति सी मिल रही थी। मैं काफी देर तक ऐसे ही आसमान में देखता रहा। तभी मुझे मेरे कंधे पर किसी का हाथ महसूस हुआ।
मैंने गर्दन घुमा कर देखा, पिछे अपूर्वा खड़ी थी।
हाए,,,,,, नींद कैसे खुल गई,,,, मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए कहा।
बाथरूम जाने के लिए उठी थी, देखा तो आप वहां पर नहीं थे,,,, फिर दूसरे कमरे में भी देखा,, पर वहां भी नहीं थे,,, अपूर्वा ने कहा।
मैं एकबार तो काफी परेशान हो गई,,, पर फिर ये उपर का दरवाजा खुला हुआ दिखाई दिया तो मैं उपर देखने आ गई,,, अपूर्वा ने थोड़ा रूककर फिर कहा।
नींद नहीं आर ही थी, तो उपर आ गया,,, मैंने कहा।
अपूर्वा भी मुंडेर पर मेरे साइड में बैठ गई।
कितना ब्यूटीफुल नजारा है,,,, अपूर्वा ने कहा।
हम्ममम,,,,, बहुत दिनों बाद आज रात में आसमान को देख रहा हूं,, बहुत ही अच्छा लग रहा है,,,, मैंने उसके हाथ को अपने हाथों में लेकर सहलाते हुए कहा।
मैं तो पता नहीं आज कितने महीनों बाद उपर आई हूं,,,, अपूर्वा ने कहा और अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया।
बहुत ही अच्छा लग रहा है, इस तरह खुले आसमान के नीचे बैठकर,,,, अपूर्वा ने फिर से कहा।
हम्ममममम,,,,, मैंने बस इतना ही कहा और अपना एक हाथ अपूर्वा के सिर में लेजाकर उसके बालों को सहलाने लगा।
अपूर्वा के साथ इस तरह बैठने से मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और मन हो रहा था कि बस ऐसे ही बैठा रहूं। पता नहीं पर किसी कोने में बहुत ही मीठा सा आनंद महसूस हो रहा था।
आखिरकार मेरी सबसे अच्छी दोस्त जो थी वो,,, और इस तरह खुले आसमान में रात को हल्की हल्की ठण्ड में बैठना,,,, बहुत ही आनंददायक था।
अपूर्वा ने अपना हाथ मेरी कमर में रख दिया और सरककर पूरी तरह से मुझसे सट गई और दूसरा हाथ मेरी गोद में रख दिया। उसके इस तरह बैठने से उसके उरोज मेरे साइड और छाती पर दब गये थे। बहुत ही कोमल एहसास था। हम कितनी ही बार एक साथ रहे हैं, कितनी बार अपूर्वा मेरे से सटकर बैठी है, परन्तु आज तक कभी भी मेरे मन में उसके लिए कोई गलत विचार नहीं आया था। और आज भी वैसा ही था।
वो बहुत ही प्यारी लग रही थी। उसके चेहरे की मासूमियत कोई भी गलत विचार आने ही नहीं दे सकती थी।
आप घर कब जा रहे हो,,,, अपूर्वा ने ऐसे ही बैठे हुए पूछा।
क्यों,,,,, कोई स्पेशल बात है क्या,,,, मैंने पूछा।
नहीं,,,, वो आंटी का फोन आया था ना आपके रिश्ते की बात के लिए,,,, और आपको संडे को बुलाया था,,,,,,, अपूर्वा ने कहा।
ओ तेरे की,,,,,, मैं तो भूल ही गया था,,,, मैंने हैरान होते हुए कहा।
थैंक्स यार याद दिलाने के लिए,,,,, नहीं तो मम्मी तो यहीं पर पहुंच जाती बेलन लेकर,,,,,,, मैंने हंसते हुए कहा।
अपूर्वा भी हंसने लगी।
कल शनिवार है,,,, कल ही जाउंगा शाम को,,,,, मैंने कहा।
तो अगर आपको लड़की पसंद आ गई तो,,,,, हां कर दोगे,,,,, अपूर्वा ने मेरे चेहरे की तरफ देखते हुए पूछा।
अरे अभी तो बस रिश्ते वाले आयेंगे,,, लड़की से मिलना तो बाद की बातें हैं,,,,, मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा।
पर हो सकता है,,, साथ ही आज जाये लड़की भी,,,, अपूर्वा ने कहा।
आपकी फोटो तो उन्होंने देख ही रखी होगी,,,,, अगर वो रिश्ता पक्का करने आये तो,,, लड़की भी साथ ही आ सकती है,,,,, अपूर्वा ने मेरे आंखों को टटोलते हुए कहा।
फिर भी,,,,, ऐसे किसी को एकबार देखकर थोड़े ही हां कर दूंगा,,,,,,, वैसे भी मैं अभी एक-दो साल तक तो शादी करने वाला हूं,,,,, मैंने कहा।
क्यों,,,,,, अपूर्वा ने पूछा।
अरे यार,,, मुझे परेशान होना पसंद नहीं है, खुद भी परेशान रहो,,,,, उसको भी परेशान रखो,,,, इसलिए मैं तभी शादी करूंगा तब अच्छा-खासा पैसा हो जायेगा,,,, ताकि फिर कोई टैंशन ना रहे,,,,,, मैंने कहा।
अब ऐसे में शादी कर लूंगा तो मैं तो पैसे कमाने के चक्कर में परेशान रहूंगा,,,, और पैसे की कमी में उसकी जरूरते भी पूरी नहीं होगी तो वो भी परेशान रहेगी,,, मैंने फिर कहा।
मैंने देखा है, खुद महसूस किया है,,,, जो जिंदगी मैंने गरीबी में काटी है,,, मैं नहीं चाहता कि मेरे बीवी-बच्चे भी उसी तरह की जिंदगी जिये,,,,,, मैंने कहा।
अपूर्वा अभी भी मेरी चेहरे पर ही देखे जा रही थी। उसके चेहरे पर खुशी झलक रही थी।
और अगर वो अमीर बाप की इकलौती बेटी हुई तो,,,, तब भी नहीं करोगे,,,,,, अपूर्वा ने मुस्कराते हुए कहा।
हम्ममम,,,, डिपेंड करता है,,,, अगर वो अपनी अमीरी दिखायेंगे तो फिर मेरी ना ही होगी,,,, क्योंकि मैं किसी का गुलाम बनकर जिंदगी नहीं जी सकता।

हां अगर वो अच्छे इंसान हुए,,,,, और अपने पैसों का रूतबा नहीं दिखाते तो फिर उस बारे में सोचा जा सकता है, मैंने बात पूरी करते हुए कहा।
अचानक अपूर्वा ने मेरे गाल पर एक प्यारी सी किस की और अपना चेहरा मेरे छाती में छुपा लिया।
क्रमशः.....................
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Reply
06-09-2018, 02:18 PM,
#49
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--49
गतांक से आगे ...........
मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी, इसलिए मैं थोड़ा हैरान था और चेहरे पर मुस्कराहट भी थी।
मैंने उसके चेहरे केा पकड़कर उपर उठाया और उसकी आंखों में देखने लगा। उसकी पलकें झुकी हुई थी और गाल एकदम गुलाबी हो चुके थे।
अपूर्वा,,, ये क्या था,,,,,, मैंने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा।
उसने एक बार अपनी पलकें उपर उठाकर मेरी आंखों में देखा और तुरंत ही शरम से वापिस झुका ली और फिर से अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया।
अपूर्वा,,,, मैंने उसके बालों में हाल फिराते हुए कहा।
हूं,,,, उसने इतना ही कहा।
तुम बहुत नॉटी हो गई हो,,,, मैंने उसके सिर को वापिस उपर उठाने की कोशिश करते हुए कहा।
मुझे लज्जा आ रही है, प्लीज,,,,, उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे रोकते हुए कहा।
कुछ देर हम इसी तरह से बैठे रहे,,,, मन तो नहीं कर रहा था, पर रात काफी हो गई थी,,, इसलिए सोना भी जरूरी था।
मैंने अपूर्वा को खुद से अलग किया और उसके चेहरे की तरफ देखा।
उसके उस मासूम से चेहरे पर संतुष्टि,,,,, चंचलता एक साथ झलक रही थी।
चलें,,,, सुबह ऑफिस भी जाना है, मैंने कहा।
हूं,,, कहकर अपूर्वा मुंडेर से नीचे उतर गई।
नीचे आकर हमने रूम में देखा तो तीनों की तीनों पूरे बेड पर फैल चुकी थी एकदूसरे के उपर हाथ-पैर डाले सो रही थी।
उन्हें देखकर मैं दूसरे रूम की तरफ बढ़ गया। अपूर्वा भी मेरे साथ ही उसी रूम में आ गई।

मैं तो सोच रहा था कि बढ़िया तरह से कपड़े वगैरह निकाल के सोउंगा,,, पर अपूर्वा के आने से अब ऐसे ही सोना पडेगा। मैं जाकर बेड पर लेट गया और कम्बल ओढ लिया। अपूर्वा ने लाईट बंद करके नाइट लैंप जला दिया और दरवाजे को हल्का सा खुला रखते हुए बंद करके बाहर चली गई।
अब मैं कपड़े निकालकर सो सकता हूं, मैंने मन ही मन सोचा और कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद कपड़े निकाल कर साइड में रख दिये और आराम से आंखें बंद करके बेड पर फैल कर लेट गया।
तभी दरवाजा खुला और मैं तो बस अंदर तक हिल गया। सामने अपूर्वा थी, उसने झिन्नी सी नाइटी पहनी हुई थी जिसमें से उसकी ब्रा और पेंटी हल्की हल्की नजर आ रही थी। ये तो शुक्र था कि नाइट लैंप जल रहा था, नहीं तो शायद उसका पूरा बदन ही उजागर हो जाता।
वो मुस्कुराते हुए बेड के पास आई और कम्बल को उठाकर उसमें घुस गई।
मेरी तो बुरी हालत हो गई थी। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था कि मैंने कपड़े क्यों निकाले। मैं थोड़ा सा साइड में सरक गया, जिससे उससे टच न हो पाउं, ताकि उसे पता न चले कि मैंने कपड़े उतार रखे हैं। मेरे शरीर पर बस अंडरवियर और सैंडो ही थी। मुझे बहुत ही शरम आ रही थी। मैं अपूर्वा की तरफ करवट लेकर लेट गया ताकि खुद को उससे टच होने से बचा सकूं।
अपूर्वा मेरी तरफ करवट लेकर लेट गई और मेरी आंखों में देखने लगी। शरम के मारे मैंने अपनी आंखें बंद कर ली। उसने मेरे गालों पर हाथ रखा और सहलाते हुए बोली, ‘गुड नाइट’।
मैंने भी उसे गुड नाइट कहा और दोनों के बीच में कम्बल की थोड़ी सी दीवार बना दी। अपूर्वा हंसने लगी।
ये क्या कर रहे हो,,, अपूर्वा ने हंसते हुए कहा।
लक्ष्मण रेखा खींच रहा हूं,, मैंने भी हंसते हुए कहा।
इसकी कोई जरूरत नहीं है, कहते हुए अपूर्वा ने कम्बल को थोड़ा सा अपनी तरफ खींचा और मेरी तरफ सरक कर सीधी होकर लेट गई।
जब तक मुझे पूरी तरह विश्वास नहीं हो गया कि वो सो गई है तब तक मैं जागता ही रहा और जब मुझे लगा कि अब तो ये सो ही गई है, तो मैंने भी अपनी आंखें बंद कर ली और धीरे धीरे नींद के आगोश में समा गया।
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ट्रननननननननननननननननननननननननननन--------------------------------------------
कानों में ये कर्कश आवाज पड़ने से मेरी नींद खुली, मैंने हाथ उठाकर अलार्म बंद करना चाहा पर मेरा हाथ नहीं उठ पाया।
सोनम मुझसे चिपक कर सो रही थी, उसका हाथ मेरे हाथ पर रखा हुआ था, जिससे मैं हाथ नहीं उठा पा रहा था। मैंने उसके हाथ के नीचे से अपना हाथ निकाला और अलार्म की तरफ बढ़ाया,,, पर वहां तो कोई अलार्म नहीं था। मैंने थोड़ा सा और हाथ को इधर उधर मारा, पर अलार्म हाथ नहीं लगा। मुझे बेड का स्ट्रक्टचर भी कुछ बदला बदला सा लग रहा था।
तभी मुझे धयान आया कि ये अलार्म की टॉन तो मेरे मोबाइल में की है। मैंने मोबाइल उठाने के लिए सिरहाने पर टटोला तो मेरे हाथ में मेरी जींस आ गई।
हूं,,, कल कपड़े भी सिरहाने ही रख दिये,,, मैंने मन ही मन सोचा और जींस को एकतरफ करके मोबाइल ढूंढने लगा, पर मोबाइल हाथ नहीं आया।
तभी सोनल ने थोड़ी सी हलचल की और,,, और भी ज्यादा मुझसे चिपक गई। उसका एक पैर मेरी जांघों पर था और मेरा लिंग पूरी तरह तना हुआ था। उसका सिर मेरे कंधे पर रखा हुआ था और उसका एक हाथ मेरी छाती पर था। उसके उभार पूरी तरह से मेरे शरीर से दबे हुए थे।
मैंने थोड़ी सी आंखें खोली और गर्दन घुमा कर मोबाइल देखने लगा, पर कहीं मिल नहीं रहा था।
गर्दन घुमाने पर मेरी नजर बेड के साइड में रखे पोट पर पड़ी जिसमें मछलियां तैर रही थी, मैं हैरान हो गया, मेरे रूम में ये मछलियां कहां से आ गई।
मैंने आंखों को मसलते हुए इधर उधर देखा तो ये तो मेरा रूम ही नहीं है, मैंने थोड़ा सा दिमाग पर जोर डाला।
ओ तेरे की,,, मैं तो अपूर्वा के घर पर सोया था,,, मतलब मैं अपूर्वा के घर पर हूं,,, और ये,, ये,,, ओह माई गोड,,, ये अपूर्वा मुझसे इस तरह से चिपक कर सो रही है।
मेरी तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। इतना धयान आते ही मैंने जल्दी से जींस को उठाया और उसमें से मोबाइल निकालकर अलार्म बंद किया।
शुक्र था कि अपूर्वा की आंख नहीं खुली, नहीं तो मैं कहीं का नहीं रहता।
कुछ देर तक मैं ऐसे ही लेटा रहा और सोचता रहा कि अब क्या करूं। फिर काफी देर सोचने के बाद निर्णय लिया कि धीरे से इसको अपने से अलग करता हूं।
मैंने कम्बल को उतार कर साइड में कर लिया। पर जैसे ही मेरी नजर अपूर्वा पर पड़ी मैंने वापिस कम्बल को ओढ़ा दिया। उसकी नाइटी उसकी कमर तक आ चुकी थी और उसका नाभि से नीचे का पूरा शरीर नंगा था, बस एक छोटी सी पेंटी थी।
कम्बल ओढ़ा कर मैं अपना हाथ उसके पैर तक ले गया और उसे साइड में करने लगा। पर पैर तो साइड में होना दूर, उसका हाथ फिर से मेरे उपर आ गया।
आज तो तू गया बच्चू,,,,, तुने कपड़े निकालकर बहुत बड़ी गलती कर दी,,,, मैंने मन ही मन सोचा।
तभी मुझे बाहर से पानी की आवाज आई। शायद आंटी उठ गई होगी। ये विचार दिमाग में आते ही तो मैं बस परेशान हो उठा।
अगर आंटी ने हमें ऐसे सोते हुए देख लिया तो,,, बस सब कुछ खत्म हो जायेगा, मुझे यहां से धक्के मारकर निकाल देंगे,,, मैंने मन ही मन सोचा और अपूर्वा को ही उठाने का निर्णय किया।
इससे कम से कम आंटी और बाकी को तो पता नहीं चलेगा, अपूर्वा को तो बाद में समझा दूंगा,,, सोचकर मैंने अपूर्वा को उठाने का निर्णय पक्का किया।

मैंने उसको कमर पर से पकड़कर हिलाते हुए धीरे से कहा - अपूर्वा,,,।
हूं,,, उसने इतना ही कहा और,, और भी ज्यादा जोर से मुझसे चिपक गई।
मैंने फिर से उसकी कमर को जोर से हिलाया और कहा - अपूर्वा, उठो,,, सुबह हो गई।
उउंहहहह,,, सोने दो,,, मुझे नींद आ रही है,, अपूर्वा ने नींद में ही कहा और मेरा हाथ पकड़कर अपने उपर रख लिया।
अब क्या करूं, ये तो उठ ही नहीं रही है, आंटी उपर आ गई तो,,, मेरे तो लग जायेंगे। ये विचार आते ही मैं बैचने हो उठा।
फिर मैं खुद ही साइड में होकर उठने का फैसला किया और उससे अपना हाथ छुड़ाकर उसके शरीर को पकड़कर खुद साइड में निकलने लगा, और एक दम से धडाम,,, मैं पहले से ही बेड के बिल्कुल कोने पर पहुंच चुका था, और जैसे ही मैं साइड में होने के लिए एकदम से सरका, सीधा बेड से नीचे।
आआओहहाहहह,,, मेरे मुंह दर्द भरी कराह निकली।
मेरे गिरने की आवाज सुनकर अपूर्वा की भी नींद खुल गई और वो आंख मसलती हुई उठी। उसने इधर उधर देखा तो मैं नीचे पड़ा हुआ कराह रहा था।
वो एकदम से उठकर मेरे तरफ बढ़ी पर उसका बैलेंस बिगड गया और वो भी सीधी मेरे आ गिरी। उसका तो कुछ नहीं बिगड़ा पर मेरे एक तो पहले से ही नीचे गिरने से दर्द था और उपर से वो गिरी तो दर्द दुगुना बढ़ गया।
वो एकदम से उठी और मेरे सिर के नीचे हाथ लेजाकर मुझे बैठाने लगी। मैं धीरे धीरे बैठ गया। मेरे गिरने से पहले मेरे कपडे नीचे गिर गये थे, और जींस का हुक मेरी कमर में चुभ गया था। जिस कारण कमर में ज्यादा दर्द हो रहा था इसलिए ज्यादा देर बैठा नहीं गया।
मैं अपूर्वा और बेड का सहारा लेते हुए उठा और बेड पर लेट गया।
अपूर्वा का चेहरा बहुत ही संकुचित हो गया था। वो एकदम से परेशान हो उठी थी। मेरी आंखों में दर्द के मारे हल्के से आंसू भी आ गये थे।
ज्यादा लग गई क्या,,, अपूर्वा ने परेशान होते हुए पूछा।
कमर में कुछ चुभ गया है, मैंने दर्द भरी आवाज में कहा।
अपूर्वा ने मुझे पकड़कर धीरे धीरे करके पेट के बल लिटाया और मेरी कमर में सहला कर देखने लगी। वो बहुत ही धीरे धीरे से सहला रही थी, जिससे कुछ आराम महसूस हो रहा था।
मेरी कमर को देखने के बाद वो नीचे देखने लगी।
शायद जींस में से कुछ चुभ गया है, हल्की सी खाल भी छिल गई है, उसने नीचे से मेरे कपड़े उठाकर बेड पर रखते हुए कहा।
मैं अभी मम्मी को बुलाती हूं, वो कुछ करेंगी, उसने परेशान होते हुए कहा और बेड से उठ गई।
नहीं, आंटी को मत बुलाना, मैंने उसे रोकते हुए कहा।
क्यों,,, मम्मी कुछ दवाई लगा देंगी,,, अपूर्वा ने कहा।
ठीक है, पर पहले मुझे कपड़े पहनाओ,,, बाद में बुलाना आंटी को,,, मैंने कहा।
अपूर्वा हल्के से मुस्कराई और मेरी जींस मुझे सीधा लेटा कर मेरी जींस पहना दी। फिर गले में से शर्ट पहना कर मुझे हल्का सा उठाया और शर्ट को ठीक तरह से पहना कर मेरे माथे पर एक किस करके बाहर चली गई।
कुछ देर में आंटी और अपूर्वा दोनों कमरे में आई।
क्या हुआ बेटा,,, कैसे लग गई, आंटी ने अंदर आते ही परेशानी वाले स्वर में पूछा।
वो सोते सोते नीचे गिर गया था,,,, मैंने आंटी से कहा।
छोटे बच्चे हो क्या, जो सोते सोते नीचे गिर गये, आंटी ने मुस्कराते हुए कहा।
कहां लगी है, आंटी ने पूछा।
वो कमर में दर्द हो रहा है, मैंने कहा।
आंटी इतना सुनकर वापिस चली गई और कुछ देर बाद एक कटोरी में तेल लेकर आई। आंटी ने मुझे उल्टा करके लेटा दिया और मेरी शर्ट कंधो तक उपर उठा दी।
आहहहह,,,, जैसे ही आंटी ने थोड़ा सा तेल मेरी कमर पर गिराया,, मेरे मुंह से हल्की सी दर्द और सुकून भरी आह निकल गई।
हल्का हल्का गर्म तेल जैसे ही मेरी कमर पर गिरा, एक सुकून सा महसूस हुआ। आंटी ने हल्के हल्के मालिश करनी शुरू कर दी। जैसे जैसे आंटी मालिश करती गई, दर्द छूमंतर होता गया। दर्द एकदम गायब सा हो गया।
अब कुछ देर ऐसे ही लेटे रहना, आंटी ने मालिश खत्म करके कहा और चली गई।
आंटी के जाते ही अपूर्वा बेड पर मेरे पास आकर बैठ गई और मेरी कमर पर हलके हलके सहलाने लगी।
अब दर्द कैसा है, अपूर्वा ने पूछा।
बिल्कुल खत्म हो गया, आंटी के हाथों में तो जादू है, मैंने कहा।
मैंने पहले ना कहा था कि मम्मी दवाई लगा देगी, छोटी मोटी चोट को तो मम्मी तुरंत ठीक कर देती है,, अपूर्वा ने कहा।
हममम,,,, मैंने कहा।
कुछ देर तक मैं वैसे ही लेटा रहा और अपूर्वा मेरी कमर को सहलाती रही।
पर तुम नीचे गिरे कैसे,,,,, अपूर्वा ने पूछा।
पता नहीं, जब नीचे गिर गया तब पता चला कि मैं नीचे गिर गया,,, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
हेहेहेहेहे,,, बिल्कुल छोटे बच्चे की तरह हो,,, सोते हुए गिर गये,,, अपूर्वा ने हंसते हुए कहा।
हे तुम्हें तो नहीं लगी ना,,, मैंने गंभीर होते हुए उससे पूछा।
हम्मम हल्का हल्का दर्द हो रहा है, अपूर्वा ने कहा।
कहां,,, मैंने पूछा।
अपूर्वा ने नजरें नीचे झुका ली,,, फिर कुछ देर बाद अपने उरोजों की तरफ इशारा किया।
मुझे धयान आया की वो मेरे उपर पेट के बल गिरी थी और उसके उरोज मेरी छाती में बुरी तरह दब गये थे।
तो तुम आंटी को बताओ ना,,, वो कुछ इलाज बतायेंगी, मैंने कहा।
मुझे शर्म आती है, अपूर्वा ने शरमाते हुए कहा।
अब बताना तो पड़ेगा ना, और तुम्हारी मम्मी ही तो है, उनसे क्या शरमाना,,, मैंने कहा।
कौन किससे शरमा रहा है, आंटी ने अंदर आते हुए कहा।
कुछ नहीं मम्मी,,, वो बस ऐसे ही,,, अपूर्वा ने कहा।
वो आंटी दरअसल अपूर्वा भी गिर गई थी तो इसे भी थोड़ी चोट लग गई है,,, मैंने कहां
ये भी गिर गई थी, क्या कर रहे थे तुम दोनों,, झगड़ तो नहीं रहे थे,,, आंटी ने कहा।
नहीं आंटी, वो मैं गिरा तो आवाज सुनकर इसकी आंख खुल गई और मुझे उठाने के लिए जैसे ही ये हड़बड़ाहट में बेड से उतरने लगी तो ये भी गिर गई,,, मैंने सफाई पेश करते हुए कहा।
क्रमशः.....................
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06-09-2018, 02:18 PM,
#50
RE: Antarvasnasex बैंक की कार्यवाही
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--50
गतांक से आगे ...........
कहा पर लगी है,,, आंटी ने अपूर्वा तरफ देखते हुए पूछा।
अपूर्वा ने अपनी छाती की तरफ इशारा कर दिया।
यहां कैसे लगी,,, आंटी ने पूछा।
वो इनके उपर गिरी थी, पेट के बल तो,,,,, अपूर्वा ने कहा।
बेटा अब तुम सीधी लेट सकते हो,,,, दर्द कैसा है अब, आंटी ने पूछा।
जी आंटी बिल्कुल ठीक हो गया हे, आपके हाथों में तो जैसे जादू है,, मैंने सीधा होते हुए कहा।
तभी मेरा मोबाइल बजने लगा। मैंने उठाकर देखा, मैम का फोन था।
मैम ने हमारे आने के बारे में पूछा तो मैंने कह दिया कि 9 बजे तक आ जायेंगे, सभी साथ ही आयेंगे।
मैंने टाइम देखा, 7 बजने वाले थे।
कोमल उठ गई क्या आंटी, मैंने पूछा।
कहां, अभी तो तीनों घोड़े बेच कर सो रही हैं, आंटी ने कहा।
मैं उठकर दूसरे कमरे में गया। देखा तो जैसे रात को सोते छोड़कर गया था तीनों वैसे ही सो रही थी।
रात को कोई भी हिली भी नहीं। कैसी नींद है इनकी।, मैंने मन ही मन सोचा और जाकर कोमल को उठाया।
मेरी आवाज सुनकर नवरीत भी और सोनल भी उठ गई।
गुड मॉर्निंग, नवरीत ने अंगडाई लेते हुए कहा।
गुड मॉर्निंग, कैसी नींद आई रात को, मैंने कहा।
हममम, ये सुबह इतनी जल्दी क्यों हो जाती है, कोमल ने आंखें मसलते हुए कहा।
तभी आंटी चाय लेकर आ गई।
आंटी के आते ही सोनल और कोमल जल्दी से उठकर बैठ गई।
गुड मॉर्निंग बच्चो,,, कैसे नींद आई,,, आंटी ने चाय टेबल पर रखते हुए कहा।
गुड मॉर्निंग आंटी, बढ़िया नींद आई, सभी ने एक साथ कहा।
ठीक है, अब चलो जल्दी से उठो और तैयार हो जाओ, चलना भी है, मैंने कोमल की तरफ देखते हुए कहा।
तभी अपूर्वा कमरे में आई, सभी ने उसे गुड मॉर्निंग कहा।
मैं दूसरे कमरे में जाकर बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होकर व नहाकर पहले वाले कमरे में आया।
दरवाजा हलका सा खुला था, जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, तुरंत ही बंद करना पड़ा, कोमल नहाने के बाद कपड़े पहन रही थी।
मैं नीचे आकर अंकल के पास बैठ गया।
उठ गये बेटा, कैसी नींद आई,, अंकल ने एकबार मेरी तरफ देखा और फिर अखबार पढ़ते हुए ही पूछा।
अच्छी नींद आई अंकल,, मैंने कहा।
इतने में बाकी सभी भी नीचे आ गई और सोफो पर बैठ गई।
सुना, सोते हुए गिर गये थे, अंकल ने अखबार साइड में करके हंसते हुए कहा।
मुझे बहुत शर्म आई, और मैंने सिर्फ ‘हां’ में जवाब दिया।
बस फिर क्या था, सभी लड़कियां हंसने लगी। अपूर्वा शायद किचन में थी। सोनल, नवरीत और कोमल यहीं पर बैठी थी।
बच्चे हो क्या, जो सोते हुए गिर गये थे, नवरीत ने चहकते हुए पूछा।
मैंने एक बार उसकी तरफ देखा और फिर नीचे देखने लगा।
कुछ देर बाद आंटी ने खाना लगा दिया। अंकल, अपूर्वा, कोमल और मैंने खाना खाया। नवरीत और सोनल बस खाली-पीली चेयर घेरकर बैठ गई, खाना तो खाया नहीं।
साढ़े आठ बजे हम ऑफिस में लिए निकल पडे।
कोमल अपूर्वा की स्कूटी पर थी और मैं अपनी बाइक पर।
ऑफिस पहुंचकर हमने व्हीकल पार्क किये और कोमल अंदर चली गई, मैं और अपूर्वा ऑफिस में आ गये।
शकुन्तला अभी सफाई कर रही थी तो हम बाहर ही खड़े हो गये।
कैसा लगा मेरा घर, और मम्मी-पापा, अपूर्वा ने पूछा।
हम्मम,, घर भी अच्छा है और घरवाले तो और भी अच्छे हैं, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
तभी शकुन्तला सफाई खत्म करके बाहर आ गई।
कैसी हो शकुन्तला, मैंने उससे पूछा।
बढ़िया हूं साहब, शकुन्तला ने मुस्कराते हुए जवाब दिया।
अपूर्वा ने मेरी तरफ थोड़ी अजीब सी नजरों से देखा और फिर हम अंदर आ गये।

क्या हुआ, ऐसे घूरकर क्यों देख रही हो, मैंने अपूर्वा से कहा।
कुछ नहीं, वो आपने उसका नाम लेकर पूछा ना इसलिए,,, बस,,, अपूर्वा ने कहा।
तभी अपूर्वा एकदम से चेयर पर बैठ गई। उसका हाथ उसके माथे पर पहुंच गया और माथे को दबाने लगा। उसकी आंखें बंद हो गई।
क्या हुआ,,,, मैंने उसे संभालते हुए कहा।
मैंने जैसे ही उसको पकड़ा मुझे हैरानी हुई, उसका शरीर तप रहा था।
चक्कर आ रहे हैं, अपूर्वा ने कहा।
तुम आराम से बैठो, तुम्हें फिर से बुखार हो गया है, मैंने कहा और उसको आराम से चेयर पर कमर टिका कर बैठा दिया।
बाहर आकर मैंने घर की बैल बजाई, कोमल ने दरवाजा खोला।
अपूर्वा की तबीयत ठीक नहीं है, मैम से गाड़ी की चाबी लाना, उसे डॉक्टर के पास ले जा रहा हूं, मैंने कहा।
क्या हुआ, अभी तो ठीक ठाक थी, कोमल ने कहा और फिर बिना मेरे जवाब का इंतजार किये अंदर चली गई।
चलो मैं भी चलती हूं, कहते हुए कोमल ने गाड़ी की चाबी मुझे दे दी और ऑफिस की तरफ चली गई।
मैंने गैरेज में से गाड़ी निकाली और आंगन में लाकर खड़ी कर दी। फिर मैं ऑफिस में जाकर अपूर्वा को सहारा देकर लाया और गाड़ी की पिछली सीट पर लेटा दिया। कोमल ने बैठकर उसका सिर अपनी गोद में रख लिया और उसका सिर दबाने लगी।
जल्दी ही हम डॉक्टर के क्लीनिक पर थे। वहां डॉक्टर ने अपूर्वा को एक इंजेक्शन लगाया और कुछ टेबलेट खाने के लिए दी।
नोर्मल फीवर है, मौसम चेंज हो जाने के कारण हो जाता है, डॉक्टर ने कहा।
थैंक्यू डॉक्टर,,, मैंने कहा और डॉक्टर की फीस देकर अपूर्वा को लेकर गाड़ी में लाकर लेटा दिया।
मैंने गाड़ी अपूर्वा के घर की तरफ दौड़ा दी।
पंद्रह मिनट में हम अपूर्वा के घर के सामने थे। मैंने गाड़ी को साइड में खड़ा किया। मैंने अपूर्वा को गोद में उठा लिया, जैसे छोटे बच्चे को उठाते हैं।
अपूर्वा को कुछ होश नहीं था, उसका शरीर बहुत ज्यादा तप रहा था।
क्या हुआ, अंदर पहुंचते ही सामने से आती आंटी ने पूछा।
बुखार हो गया है आंटी, मैंने कहा।
ओहहह,,, ये तो रोज ही होने लगा,,, ठीक है,, उपर इसके रूम में लेटा दो, मैं डॉक्टर को फोन बुलाती हूं, आंटी ने कहा।
नहीं, उसकी कोई जरूरत नहीं है, अभी डॉक्टर के पास से आ रहे हैं, मैंने कहा और उपर की तरफ चल दिया।
उपर आकर मैंने अपूर्वा को बेड पर लेटा दिया, कोमल ने उसे कम्बल ओढ़ा दिया।
मैं बेड पर बैठ गया और अपूर्वा के सिर को सहलाने लगा। उसने मेरा हाथ पकड़कर अपने गाल पर रखकर गर्दन को टेढी करके अपने गर्दन और गाल के बीच में दबा लिया।
तभी आंटी भी उपर आ गई। मैंने अपना हाथ हटाना चाहा पर अपूर्वा ने नहीं हटाने दिया।
आंटी ने आकर उसके माथे पर हाथ रखकर देखा।
मेरी बच्ची, कितना तेज बुखार है, कहते हुए आंटी बेड पर बैठ गई और कम्बल को सही तरह से औढाने लगी (वैसे पहले ही सही तरह से औढ़ाया हुआ था)।
मैंने फिर से अपना हाथ हटाना चाहा पर अपूर्वा ने नहीं हटाने दिया।
कुछ देर तक हम वहीं पर बैठे रहे। आंटी बार बार अपूर्वा के माथे सहलाती रही और बालों को संवारती रही।
ओके आंटी, अब हम चलते हैं, शाम को फिर आउंगा, हाल-चाल पूछने के लिए,, कहते हुए मैंने अपना हाथ हटाना चाहा।
अपूर्वा ने मेरी तरफ देखा, और फिर अपने गाल से रगड़ते हुए मेरा हाथ छोड़ दिया।
अरे बेटा, बैठो, अभी चाय आ रही है, पीकर जाना, आंटी ने खड़े होते हुए कहा और फिर काम वाली को आवाज लगाई।
कुछ देर में कामवाली चाय लेकर आ गई। चाय लेकर कोमल भी बेड पर बैठ गई। हमने चाय पी और फिर एक बार फिर अपूर्वा के बालों को संवारते हुए उसके गालों को सहलाया बाहर की ओर चल दिये।
शाम को आओगे ना, पिछे से अपूर्वा की आवाज आई।
हां, ऑफिस से सीधा इधर ही आ जाउंगा, मैंने कहा और फिर नीचे आ गये।
आंटी को बाये करके हम बाहर आ गये। कोमल आगे ही बैठ गई। मैंने गाड़ी स्टार्ट की और ऑफिस की तरफ चल पडे।
कोमल मेरी तरफ होकर बैठी थी जिससे गियर चेंज करते हुए मेरा हाथ बार-बार उसके घुटनों से टच हो रहा था।
मैंने उसकी तरफ देखा तो मुस्करा दी और फिर सामने देखने लगी।
मुझे लगता है कि अपूर्वा आपसे प्यार करती है, कोमल ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।
ऐसा कुछ नहीं, हम बस बहुत अच्छे दोस्त हैं, मैंने कहा और मुस्करा दिया।
तुम्हें पता नहीं चला है, पर ये गहरी दोस्ती प्यार में बदल चुकी है, कोमल ने कहा।
तुम चाहे बेशक अभी भी इसको दोस्ती ही समझ रहे हो, पर अपूर्वा तुमसे प्यार करने लगी है, कोमल ने थोड़ा रूककर कहा।
तुम्हें कैसे पता, मैंने सामने देखते हुए ही कहा।
बस मुझे पता है, मैं लडकी हूं, और मुझे पता है कि प्यार में लड़की कैसे बिहेव करती है, आप जब सामने होते हैं तो जो उसके चेहरे पर चमक देखती हूं, जिस तरह से वो आपके साथ घुलती मिलती है, कोमल ने कहा।
अभी कैसे आपका हाथ अपने गालों पर से हटाने नहीं दे रही थी, कोमल ने फिर कहा।
ऐसा नहीं है, हम एक दूसरे से बहुत ज्यादा अटैच हैं, इसलिए हमारे बीच में कोई फॉर्मलटिज नहीं है, और इसीलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है, पर हम बस बहुत ही अच्छे, गहरे दोस्त हैं, और एक दूसरे से भावनात्मक रूप से अटैच हैं, मैंने उसे समझाते हुए कहा।
आप कुछ भी कहो, पर मुझे पता है कि वो आपसे प्यार करती है, कोमल ने अपना डिसीजन सुना दिया।
और आप भी करते हो, कोमल ने थोड़ा रूककर मेरी तरफ देखकर मुस्कराते हुए कहा।
मैं भी उसकी तरफ देखकर बस मुस्करा दिया।
करते हो के नहीं, बताओ,,, कोमल ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
नहीं, ऐसा कुछ नहीं है, तुम्हें वैसे ही लग रहा है, मैंने अपनी गर्दन को मोड कर उसके हाथ से अपने गाल टच करते हुए कहा।
नहीं, तुम करते हो, बस तुम्हें अभी तक इसका एहसास नहीं हुआ है, कोमल ने कहा और मेरे गालों को पकड़कर खिंच लिया।
आई------ क्या कर रही हो, दर्द हो रहा है,,, मैंने उसका हाथ हटाते हुए कहा।
बातों ही बातों में ऑफिस पहुंच गये।
कोमल उतरकर अंदर चली गई और मैंने गाड़ी को गैरेज में पार्क कर दिया।
बॉस यहीं पर है क्या, मैं गाड़ी को खड़ी करके आया तो कोमल दरवाजे पर ही खड़ी थी।
आज कोई भी नहीं है, दीदी की सहेली के यहां गये हुए हैं, कोई फंक्शन वगैरह है, कोमल ने कहा।
मैं ऑफिस की तरफ चल दिया। मैं अभी ऑफिस में आकर चेयर पर बैठा ही था कि कोमल भी पिछे पिछे आ पहुंची। वो अपूर्वा को चेयर को खींचकर मेरे पास लाई और मेरी चेयर पर अपनी कोहनी टेककर बैठ गई।
मैंने उसकी तरफ देखा और मुस्करा दिया। कोमल भी मुस्करा दी।
तुम पक्का हो ना कि तुम अपूर्वा से प्यार नहीं करते,,, कोमल ने पूछा।
मैंने उसकी तरफ देखा, तो वो मेरी ही तरफ देख रही थी।
तुम क्यों इतनी इंक्वायरी कर रही हो, मैंने उसकी तरफ देखकर मुस्कराते हुए कहा।
उसने मेरी आंखों में देखते हुए कुछ ढूंढने की कोशिश की और अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया।
क्रमशः.....................
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