Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
05-19-2019, 01:53 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
जीशान अनुम को अपने ऊपर ले लेता है। अनुम के ऊपर आ जाने से उसकी चूत के नीचे ठीक दोनों गुलाबी पंखुड़ियों के बीच में जीशान का लण्ड अटक जाता है। 

अनुम-क्या कर रहे हैं जी? बस भी कीजिए। 

जीशान-क्या? अभी से बस? अभी तो सारी रात और आज क्या हर रात जागना है तुम्हें। जान मेरी बहुत सो चुकी तुम अकेले-अकेले, अब नहीं 

अनुम हँसती हुई जीशान के निपल्स को जोर से काट लेती है। जीशान दोनों हाथों में अनुम की कमर को दबोच लेता है।

अनुम-“आह्ह… ओह्ह… आप ना बड़े वो है जीशान … पता है बचपन में भी आप ऐसे ही ज़िद करके दूध पिया किया करते थे मेरी । 3 साल तक फीडींग करवाई हूँ मैं आपको…” 

जीशान-मुझे दूध पीना है। 

अनुम क्या? अब कहाँ रहा इनमें दूध? 

जीशान-“मुझे पीना है अभी…” 

अनुम की आँखों में खुमारी सी छा जाती है। वो जीशान की आँखों पर हाथ रख कर उसकी पलकें बंद कर देती है, और धीरे से उसके कान में कहती है-“मुँह खोलिए” 

जीशान-“ऊव् अवववववववूऊ ओ…” मुँह खोल देता है और अनुम अपने एक निप्पल को जीशान के मुँह में डाल देती है। 


अनुम की यादे ताजा होने लगती हैं। वो अपनी दूसरे चुची को मसलती हुई निपल्स को और जीशान के मुँह के अंदर डालने लगती है। जीशान दोनों हाथों से अनुम की कमर को दबाता हुआ चुची को चूसने लगता है-गलपप्प-गलपप्प। 

अनुम-“मुझे बेबी चाहिए जी आह्ह…” 

जीशान-सच अनुम। 

अनुम-हाँ सच उहुउउ आराम से। मुझे आपसे बेबी चाहिए ख़ान साहब्ब। 

जीशान-उसके लिए हमें रोज करना होगा। 

अनुम-“करिये ना… मैं कब रोकी हूँ आपको उम्म…” जीशान के चुची में दाँत गढ़ाने से अनुम को मीठा-मीठा दर्द सा होने लगता है। उसके दिल में बच्चे की ख्वाहिश बहुत पहले से थी, वो अमन को कई बार कहती थी कि उसे दो नहीं बल्की 4 से 5 बच्चे चाहिए, मगर अमन हमेशा उसे नहीं कहता था। उसकी वजह अनुम कभी समझ नहीं पाई। मगर अब अनुम की हर ख्वाहिश जीशान पूरी करने वाला था। 

जीशान-“जब मैं कहूँ , जहाँ मैं कहूँ , वहाँ करूँगा मैं अनुम तुम्हें…” 

अनुम-“शौहर है आप मेरे बिना झिझक करिये। मगर मुझे जल्दी से जल्दी अपनी कोख में आपकी निशानी चाहिए जी…” 

अनुम की बातें सुनकर जीशान का तन बदन आग में जलने लगती है। उसके जिस्म का सारा खून जैसे उसके लण्ड में आ चुका था, जिसकी वजह से वो फौलाद की तरह कड़क हो जाता है। 

अनुम-“अया सुनिए मुझे चुभ रहा है ना ईई…” 

जीशान-कमर ऊपर उठा। 

अनुम अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठाती है। 

जीशान-धीरे-धीरे उसपर बैठ जा अनुम। 

अनुम-“आह्ह… अम्मी आह्ह… अम्मीई जी…” अपने जीशान के, अपने मर्द के, अपने बेटे के लण्ड पर बैठती चली जाती है 
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05-19-2019, 01:53 PM,
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जीशान जैसे ही एक लम्बी साँस लेकर अपनी कमर को ऊपर उठाने लगता है, अनुम उसे अपने कमर से वापस नीचे दबा देती है और सटासटा अपनी कमर को जीशान के लण्ड पर पटकने लगती है। जीशान का गीला लण्ड गपा-गप्प अनुम की चिकनी चूत में अंदर-बाहर होने लगता है। 


अनुम का ये जोश जीशान पहली बार देख रहा था, और दिल से वो बेहद खुश था कि उसके अम्मी, उसकी बीवी अनुम इतनी ज्यादा सेक्सी और डोमिनेंट है। 

जीशान-“अनुमएम्म आह्ह… मुझे पता नहीं था तुम ऐसी निकलोगी?” 

अनुम-मुझमें कई राज हैं, बतलाऊूँ क्या? मुद्दतो से बंद हूँ , खुल जाऊ क्या? 

जीशान अनुम की दोनों चुचियों को मरोड़ता हुआ अपने लण्ड को अनुम की चूत की गहराईयों में समाता चला जाता है।

उधर बाहर खड़ी रज़िया के लबों पर मुस्कान फैल जाती है ये सुनकर कि आज उसकी बेटी अनुम अपनी जिंदगी को खुलकर जी रही है। 

जीशान अनुम को रात भर सोने नहीं देता। सुबह की पहली किरण जब दोनों के जिस्मों पर पड़ती है, तब दोनों को इस बात का पता चलता है कि सुबह के 5:00 बज रहे हैं 

जीशान-जिंदगी की पहली सुबह मुबारक हो अनुम। 

अनुम मुश्कुराती हुई-आपको भी। 

जीशान-बहुत थका चुकी हो तुम मुझे रात भर, अब एक हफ्ते तक छुट्टी । 

अनुम-“ऐसे कैसे छुट्टी ? कोई छुट्टी उट्टी नहीं । दिन में काम और रात में अपने बीवी की बाहों में आराम समझे?” 

जीशान अनुम को दबोचने की नीयत से उसे अपनी तरफ खींचता है, मगर उससे पहले अनुम उसके पास से खिसक के खड़ी हो जाती है-“बस बस मेरे शेर, अभी नहीं । मुझे घर के काम भी कर लेने दो…” 

जीशान-बस एक किस… फिर जाने दूँगा। 

अनुम-“जी नहीं सारी …” और वो चहकते हुई जीशान के रूम से अपने रूम में चली जाती है। 

और जीशान थोड़ी देर अपने बदन को आराम देने के लिए सो जाता है। 3 घंटे बाद जब जीशान की आँख खुलती हैं तो वो खुद को काफी फ्रेश महसूस करता है। उसके लण्ड में फिर से तनाव था। वो अपने लण्ड को हाथ में लेकर देखता है तो उसपर अनुम की चूत का रस अभी भी चढ़ा हुआ था। जीशान बाथरूम में फ्रेश होने चला जाता है और जब फ्रेश होकर नाश्ता करने किचेन में आता है, तो उसे अनुम वॉशबेसिन के पास काम करती हुई और रज़िया नाश्ता करती हुई दिखाई देती है। 

जीशान-लुब कहाँ है? 

रज़िया-वो अपनी सहेली के साथ कालेज अपने कुछ सर्टिफिकेट लाने गई है। 

जीशान अनुम की तरफ देखता है। अनुम अपनी नाइटी में थी और धीमी आवाज़ में कुछ गुनगुना रही थी। जीशान पीछे से जाकर अनुम को अपने बाहों में भर लेता है। 

अनुम-जीशान क्या कर रहे हैं आप? छोड़िए ना… अम्मी देख रही हैं। 

जीशान-तो क्या हुआ? तुम भी जानती हो अनुम कि मेरी दादी कैसे अपनी कमर उठा-उठाकर चुदवाती आई हैं मुझसे, और वैसे भी उनकी एक ख्वाहिश है कि वो तुम्हें अपने ऊपर नंगी लेटाकर अपनी चूत मरवाना चाहती हैं। 

अनुम-मगर मुझे शर्म आती है। 

जीशान-“मैं बड़ा बेशरम हूँ मगर…” कहकर जीशान धीरे-धीरे अनुम की नाइटी कमर के ऊपर तक उठा लेता है। 

रज़िया बैठे बैठे ये सब देख रही थी और सुन भी रही थी। 

अनुम-छोड़िए ना प्लीज़्ज़… जीशान बाद में कर लीजिएगा । 

मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी, जीशान के दोनों उंगलियाँ अनुम की पैंटी को सरकाकर उसकी चूत में जा चुकी थीं। गीली चूत साफ इशारा कर रही थी कि अनुम क्या चाहती है? 

जीशान-“ साली झूठ बोलती है, तेरी चूत इतनी गीली क्यों है, अगर नहीं अभी लेना था तो तुझे?” 

अनुम-अम्मी। 

रज़िया-ये सब क्या हो रहा है अनुम? 

जीशान मुड़कर रज़िया की तरफ देखता है-“कुछ नहीं रज़िया, एक शौहर अपनी बीवी को चोदने वाला है उसकी सास माँ के सामने। चलो इधर आओ…” वो रुआब में बोला था। 

रज़िया जीशान की हिम्मत देखती रह जाती है-क्या? 

जीशान-सुनाई दिया इधर आओ मेरे पास। 

रज़िया उठकर जीशान के करीब आ जाती है 
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05-19-2019, 01:53 PM,
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जीशान एक तरफ अनुम की चूत में उंगली करने लगता है और दूसरी तरफ रज़िया की चुची को सहलाते हुये उसके होंठों को चूमने लगता है। 

अनुम-आह्ह… बस बस ख़ान जी। 

जीशान-“अभी तो शुरुआत है जान मेरी …” जीशान की उंगलियाँ एक तरफ अनुम के चूत में अंदर-बाहर हो रही थीं, और सामने खड़ी रज़िया अपने होंठों पर गरम जीशान के होंठों की ताव नहीं सह पा रही थी। 

अनुम की आँखें बंद हो जाती हैं। जीशान की उंगलियाँ शायद काफी अंदर तक पहुँच चुकी थीं। जीशान रज़िया की गर्दन पकड़कर उसे अनुम के होंठों के करीब ले आता है। 

रज़िया ना में गर्दन हिलाती है, जैसे कह रही हो-नहीं जीशान ऐसा जुल्म ना करो।

मगर जीशान की बड़ी - बड़ी आँखें देखकर रज़िया अपने सारे हथियार डाल देती है। 

उधर अनुम को उस वक्त दूसरा झटका लगता है, जब उसे अपने नाजुक होंठों पर एक औरत के होंठ महसूस होते हैं। जैसे ही वो अपने आँखें खोलती है, अपने एकदम करीब रज़िया को पाकर पागल सी हो जाती है। वो वहाँ से भाग जाना चाहती थी, मगर जिस्म से मजबूर थी। ना जाने क्या तपिश थी उस जालिम की उंगलियों में कि बदन टूट सा जाता था। उसकी उलफत में बेशर्मी की इंतिहा पार कर जाने को दिल चाहता था। उसकी मोहब्बत में पागल हो चुकी अनुम भी अपने होंठों को थोड़ा सा खोल देती है, और पहली बार जीशान के सामने रज़िया और अनुम एक दूसरे को डीप-किसिंग करने लगते हैं। 

जीशान अपनी उंगलियाँ अनुम की चूत से निकालकर नीचे बैठ जाता है, और अनुम की नाइटी में हाथ डालकर उसकी पैंटी को नीचे करके कमर से उतार देता है। 

अनुम बस एक पल के लिए रुकती है, मगर बेचैन रूह अब किसी के रोके से नहीं रुकने वाली थी। जो शब्द जीशान ने कुछ देर पहले उसके कानों में कहे थे कि रज़िया की ये ख्वाहिश है कि वो अपने ऊपर उसे नंगी लेकर जीशान से चुदवाना चाहती है। यही एक बात बेटी को अपनी अम्मी के जिस्म से अलग नहीं होने दे रही थी। 

जीशान अनुम की नाइटी को कमर के ऊपर चढ़ा देता है, और अपने होंठ अनुम की, अपनी अम्मी की, अपनी जान की चमकती हुई चिकनी चूत के ऊपर रख देता है-गलपप्प। 

अनुम-आह्ह… उहुउउ… उउउन्ह… अम्मी रात भर इन्होंने ने मुझे सोने नहीं दिया आह्ह… और अब सुबह से ह … रुकिये ना जी आह्ह…” 

जीशान की जीभ अनुम की चूत को चीरती हुई अंदर चली जाती है। अपनी क्लोटॉरिस पर बढ़ते प्रेशर से अनुम की कमर आगे-पीछे होने लगती है। 

रज़िया-“हमेशा से मैं यही चाहती थी बेटी कि मेरा शहजादा हम सब पर राज करे। रोक मत उसे, करने दे उसे मनमानी आज। अमन विला का शहजादा अपनी रानियों को हर तरह से इश्तेमाल कर सकता है…” कहकर रज़िया अपनी नाइटी को पल भर में निकालकर जिस्म से अलग कर देती है। उसकी ब्रा और पैंटी उसे जिस्म पर बोझ सी लग रही थी, रात भर जीशान और अनुम की चुदाई के आवाज़ें सुनकर उसकी चूत से कतरा-कतरा रिसता पानी अब एक बाढ़ का रूप ले चुका था, और किसी भी वक्त ये सैलाब अपने किनारे तोड़ कर बहने के लिए तैयार था। 


जीशान अनुम की चूत चाटते हुये रज़िया की चूत पर गिरफ़्त बना लेता है। नीचे बैठा जीशान रज़िया की चूत को सहला रहा था और अपनी अम्मी की चूत के ठंडे रसीले पानी को पी रहा था, और एक बेटी अपनी अम्मी की बाहों में सिमटी अपने अरमानों को पूरा होता हुआ देख रही थी। 

जीशान खड़ा हो जाता है और अपनी पैंट की जिप खोलकर दोनों को नीचे बैठा देता है। 

जीशान-“रज़िया मेरी जान, अनुम मेरी रानी, अपने शौहर की खिदमत करना तुम्हारा फर्ज़ है, और उसके साथ उसकी हर खुशी में शरीक होना भी। इसे अपने लबों से साफ करो, ताकी मैं तुम दोनों की ख्वाहिशों को पूरा कर सकूँ …” 

रज़िया अनुम की तरफ देखती है, और दोनों माँ-बेटी मुश्कुराती हुई जीशान के लण्ड को एक साथ चूम लेती हैं जीशान अपनी आँखें बंद कर लेता है और अगले ही पल जीशान का खूबसूरत लण्ड अनुम के मुँह में, तो कभी रज़िया की जीभ पर दौड़ने लगता है। 

जीशान दोनों को अपने रूम में ले जाता है और उन्हें बेड पर लेटाकर दोनों की आँखों में देखते हुये अपने सारे कपड़े निकालकर फेंक देता है। 

अनुम रज़िया के होंठों को चूमते हुए उसके ऊपर लेट जाती है-“अम्मी, आप सच में मुझे अपने ऊपर लेटाकर?” 

रज़िया-“हाँ मेरी बच्ची, मेरी दिल से यही तमन्ना है कि… …” 

अनुम-“आह्ह… मर गई जी…” 
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05-19-2019, 01:54 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
जीशान पीछे से अनुम की चूत में अपना लण्ड ठोंक देता है, उसके धक्के जानलेवा थे। अनुम की रूह तक काँप जाती है। जीशान दोनों हाथों में अनुम की कमर को पकड़कर सटासट अपने लण्ड को अनुम की चूत के अंदर पहुँचाने लगता है। 

अनुम-“आह्ह… धीरे-धीरे जी आह्ह… सूज गई है ना वो…” 

जीशान-“ सूज ने दे, मुझे नहीं मालूम । और अगर दुख रही है तो हट जा यहाँ से। मेरी रज़िया कभी नहीं रोकेगी मुझे…” 

अनुम-“आह्ह… रोक कौन रहा है? आह्ह… चोदिये नाअ… मेरी अम्मी के ऊपर लेटाकर मुझे चोदते हुये आपको शर्म नहीं आती? आह्ह…” 

रज़िया अपने हाथों से अनुम की क्लोटॉरिस को सहलाने लगती है उसके सहलाने का ही असर था जो अनुम के मुँह से ऐसे शब्द निकल रहे थे। 

जीशान-कैसा लग रहा है दादी , अपनी बेटी को उसी के बेटे से चुदती हुई देखकर? 


रज़िया-“मेरे सरताज, मैं बहुत खुश हूँ । आज तुमने वो काम किया है जीशान कि अगर अब जान भी निकल जाए तो गम नहीं मेरी बच्चे। बहुत खुश है आज। है ना अनुम?” 

अनुम-“हाँ अम्मी आह्ह… ये दर्द भी बहुत मीठा है… जीशान का आह्ह… जान भी निकाल देता है और सकून भी पहुँचाता है स्शी अम्मी जी…” 

अनुम की चूत से पानी बहने लगता है और वो थक के चूर हो जाती है। रात भर की थकी हुई अनुम से लण्ड की मार सही नहीं जा रही थी। बहुत दिन के बाद मर्द से सामना हुआ था अनुम का। 

मगर रज़िया की चूत और गाण्ड हर झटका खुशी-खुशी सहने को बेकरार थी। 
रज़िया दोनों पैर खोल देती है और जीशान का हाथ पकड़कर उसे अपने ऊपर खींच लेती है-“इस जमीन पर भी बारिश की बूँदें गिरा दो जी…” 

जीशान अपने लण्ड पर थूक लगाकर रज़िया कि चूत पर घिसता है। 

रज़िया-“तुम्हारी यही अदा मार देती है जीशान बेटा। लड़ने से पहले तुम तलवार की धार तेज करना नहीं भूल ते। आह्ह…” 

जीशान-“अब क्या कहती हो रज्जो?” 

रज़िया-“और जोर से जीशान शन्न्न… फाड़ दे मेरी चूत … जो काम तेरे बाप दादा नहीं कर सके, वो तू करके देखा दे। आह्ह… शुक्रगुजार रहेगी मेरी चूत , अगर तूने इसे फाड़ दिया तो आह्ह…” वो बेखयाली में क्या कह रही थी उसे भी नहीं पता था। 

अनुम अपनी चूत रज़िया के सिर के पास ले आती है, और रज़िया जान जाती है कि क्या करना है? वो जीभ बाहर निकालकर अनुम की चूत पर लगा देती है-“गलपप्प-गलपप्प आह्ह…” 

अनुम-“आह्ह… हाँ अम्मी ऐसे ही आह्ह… आपकी जीभ मेरी जिस्म में आग पैदा कर देती है। ये आपकी जीभ ही है जो मैं सुलगती र ही हूँ अमन के जाने के बाद…” 

रज़िया-“गलपप्प मेरे नीचे आ जा अनुम, ये जालिम मुझे चैन नहीं लेने दे रहा…” 

अनुम रज़िया की चूत की तरफ अपना सिर करके रज़िया की चूत को चाटने लगती है और रज़िया अनुम की चूत को। 

जीशान अपना लण्ड अनुम के मुँह में डालकर गीला करता है और उसे वापस रज़िया की चूत में ठोंक देता है। 

रज़िया-“आह्ह… मेरी यादें ताजा कर दिया जीशान बेटा तूने । शाबाश मेरे शेर… मुझे आज बहुत खुशी हुई अनुम कि तूने एक मर्द को पैदा करके हम सब पर बहुत बड़ा एहसान किया है। मर गई मैं तो…” 

तभी लुबना की आवाज़-“अम्मी… द दी ई…” 

लुबना की आवाज़ सभी को चौंका देती है। 

जीशान दरवाजे में खड़ी लुबना की तरफ देखता है और उसकी कमर रुक जाती है। 
अनुम झट से बेडशीट अपने जिस्म पर लपेट लेती है। 

लुबना-“छीः…” ये कहती हुई अपने रूम में भाग जाती है और थोड़ी देर बाद जोर से उसके रूम का दरवाजा बंद होने की आवाज़ आती है। 

जीशान अनुम और रज़िया की तरफ देखता है। 

रज़िया-“चूत में डालने के बाद रुका नहीं करते मालिक… वो भी तुम्हारी एक खादिम है, रोने दो थोड़ी देर उसे। कुछ नहीं करेगी वो, जानती हूँ मैं। जब मेरी बेटी राजी हो गई तो वो क्या है? बस रुकना मत। एक किला फतह करना है तुम्हें, ये बात याद रखो… आह्ह… हाँ ऐसे ही …” 

रज़िया की बेबाक राय जीशान के मुरझाते लण्ड में दुबारा जान फूँक देती है, और उसका सबूत देते हुये जीशान दुबारा से अपना लण्ड रज़िया की चूत में ठूँस देता है। जीशान लगातार दनादन रज़िया को चोदने लगता है, और ठीक पानी निकलने के पहले अपना लण्ड बाहर निकालकर सारा पानी अनुम और रज़िया की चुचियों पर गिरा देता है। 

अनुम रज़िया की चुची पर गिरा पानी चाटने लगती है और रज़िया अनुम की चुची पर गिरा। 

जीशान फ्रेश होने बाथरूम में घुस जाता है। उसे नहाते हुये बस एक बात सता रही थी कि कहीं लुबना उससे नाराज ना हो जाए। 

लुबना दोपहर का खाना खाने भी बाहर नहीं आती। 
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05-19-2019, 01:54 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
अनुम और रज़िया की हिम्मत नहीं थी कि वो लुबना का सामना कर सकें। अनुम एक प्लेट में खाना डालकर जीशान के हाथ में देती है-“वो सिर्फ़ तुम्हारे हाथों से खायेगी, जाओ खिला आओ उसे…” 

जीशान-तुम भी साथ चलो। 

अनुम-नहीं , उसे इस वक्त सिर्फ़ तुम्हारी ज़रूरत है। 

जीशान अनुम की बात मानते हुये लुबना के रूम के दरवाजा को नाक करता है। 
थोड़ी देर बाद दरवाजा थोड़ा सा खुल जाता है, और जीशान अंदर दाखिल होकर उसे दुबारा बंद कर देता है। लुबना बेड पर पेट के बल लेटी सिसक रही थी। 

जीशान-लुबना खाना खा ले। 

लुबना-नहीं खाना मुझे। 

जीशान-देख ज़िद मत कर खाना खा ले। क्या हुआ क्यों नाराज है? 

लुबना उठकर बैठ जाती है-ये आप पूछ रहे हैं मुझसे? 

जीशान लुबना के पास बैठकर उसका हाथ अपने हाथ में लेने लगता है। मगर लुबना गुस्से में हाथ झटक देती है। 

जीशान-“बस कर…” वो जबरदस्ती उसका हाथ कसकर पकड़ लेता है-“क्या हुआ तू इस बात से नाराज है ना कि मैं, अम्मी और दादी को चोद रहा था? हाँ तो क्या हुआ? शौहर मानती हैं वो मुझे, और तू भी मानती है। एक दिन तुझे भी ऐसे ही रगड़ के चोदुन्गा मैं। याद रख, और हाँ ये रोना धोना अगर मेरे सामने करेगी ना तो शादी करवा दूँगा किसी और के साथ। चुपचाप खाना खा और बाहर आ जा…” 

लुबना-मुझे नहीं खाना खाना वाना । 

जीशान उसे बेड पर पटक देता है और उसके ऊपर चढ़ जाता है-“क्या खायेगी फिर, मेरी लुबु?” 

लुबना आँखें बंद करके जीशान की तरफ से रुख़ मोड़ लेती है। 

जीशान-“मेरे जिस्म में तुझे अम्मी और दादी के जिस्म की खुश्बू आ रही होगी ना? 
उन्होंने इसे मुँह में भी लिया था” वो लुबना का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख देता है। 

लुबना सिहर उठती है। 

जीशान-तुझे चखना है अपने शौहर का? 

लुबना-कुछ नहीं कहती। 

जीशान खड़ा हो जाता है और अपनी पैंट की जिप खोलकर लण्ड हाथ में पकड़कर लुबना के होंठों पर घिसने लगता है कि अचानक जीशान की उम्मीद के खिलाफ लुबना अपना मुँह खोलकर जीभ बाहर निकाल लेती है और पहली बार अपने भाईजान के लण्ड पर अपनी अम्मी और दादी की चूत का पानी चखने लगती है। 


मगर जीशान उसे और तड़पाना चाहता था। वो उसके रूम से बाहर चला जाता है ये कहते हुये कि सब शादी के बाद। 

लुबना खुद की बात को जीशान के मुँह से सुनकर मुश्कुरा देती है। 

अनुम जीशान को मुश्कुराते हुये आता देखकर समझ जाती है कि लुबना अब ठीक है। 

तभी जीशान का सेल फोन बजता है। काल सोफिया का था। 

जीशान-कैसे हो सोफी? 

उधर से रोने की आवाज़ सुनकर जीशान के चेहरे की हँसी गायब हो जाती है-“अरे रो मत, बात क्या है पहले बताओ तो? 

सोफिया दूसरी तरफ से रोती हुई-“मुझे यहाँ से ले जाओ जीशान , वरना मैं अपनी जान दे दूँगी प्लीज़्ज़… मैं इस जहन्नुम में नहीं रह सकती। तुम्हें मेरी कसम मुझे ले जाओ वरना… …” वो काल कट कर देती है। 

इधर सामने खड़ी रज़िया और अनुम के होंठों पर बस एक सवाल होता है-आखिरकार, हुआ क्या? 

जीशान-सोफिया आपी का काल था, रो रही थी। 

रज़िया-हाय हाय क्या हुआ मेरी बच्ची को? मेरा तो दिल बैठा जा रहा है। 

अनुम भी परेशान सी हो गई थी। 

जीशान-आप फिकर ना करें, मैं जाकर देखता हूँ कि आखिरकार, बात क्या है? 

अनुम-हम भी साथ चलते हैं। 

रज़िया-हाँ हाँ पता नहीं मेरी बच्ची ऐसे क्यों रो रही थी? सब ठीक नहीं लगता मुझे अनुम? 

अनुम-अम्मी आप भी ना… पहले चलकर देखते तो हैं। 

जीशान कार में रज़िया और अनुम को लेकर सोफिया के फ्लेट की तरफ चल देता है। सारे रास्ते रज़िया का रोते-रोते बुरा हाल था। जब वो तीनों फ्लेट पर पहुँचते हैं, तो वहाँ पहले से सोफिया के शौहर और उनके अम्मी अब्बू मौजूद थे। खालिद के अम्मी और अब्बू सोफिया को समझा रहे थे, मगर सोफिया थी की रोए जा रही थी। वो उनकी बात सुनने को तैयार ही नहीं थी। 

जीशान, रज़िया और अनुम को देखकर सोफिया का सबर का प्याला छलक पड़ता है, और वो दौड़ती हुई रज़िया से लिपट कर फूट -फूट कर रोने लगती है। 

रज़िया-“चुप हो जा मेरी बच्ची। मैं आ गई हूँ ना… बस बस कुछ नहीं । 

अनुम-क्या बात है, बच्ची इतनी परेशान क्यों है? 

ना खालिद कुछ बोल रहा था और ना उसके वालीलदान 


जीशान-“खालिद भाई बात क्या है? आखिरकार कोई कुछ बोलेगा भी की नहीं ?” वो थोड़ा गरजकर बोला था। 

सामने बैठा खालिद अपना सिर उठाकर जीशान की तरफ देखने लगता है। उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसके मुँह में जीभ ही नहीं है। 

सोफिया चीखती हुई कहती है-“इस कम्बख़्त इंसान से क्या पूछ रहे हैं आप जीशान? ये आपको कुछ नहीं बताने वाले, मैं आपको बताती हूँ । ये ना मर्द हैं। मैं जिस दिन से मैं यहाँ आई हूँ , उस दिन से इन्होंने मुझे हाथ तक नहीं लगाया। पहले-पहले मुझे लगा शायद इन्हें लाइफ सेटल करने में थोड़ा टाइम चाहिए, मगर नहीं कल रात जब मैं इनके करीब आने लगी तो इन्होने मुझसे कहा कि इन्हें मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं है, इन्हें औरतों में दिलचस्पी नहीं है। ‘गे’ है ये ‘गे’…” 
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05-19-2019, 01:54 PM,
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सोफिया चीखती हुई कहती है-“इस कम्बख़्त इंसान से क्या पूछ रहे हैं आप जीशान? ये आपको कुछ नहीं बताने वाले, मैं आपको बताती हूँ । ये ना मर्द हैं। मैं जिस दिन से मैं यहाँ आई हूँ , उस दिन से इन्होंने मुझे हाथ तक नहीं लगाया। पहले-पहले मुझे लगा शायद इन्हें लाइफ सेटल करने में थोड़ा टाइम चाहिए, मगर नहीं कल रात जब मैं इनके करीब आने लगी तो इन्होने मुझसे कहा कि इन्हें मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं है, इन्हें औरतों में दिलचस्पी नहीं है। ‘गे’ है ये ‘गे’…” 

सोफिया के मुँह से निकले ये शब्द सभी को छेद के रख देते है, और सबसे ज्यादा खालिद को। वो सोफिया को मारने की नीयत से सोफे से खड़ा होता है और जैसे ही सोफिया के मुँह पर तमाचा मारना चाहता है, जीशान उसका हाथ पकड़कर उसे अपने सामने खींच लाता है, और आधे हाथ का पठानी थप्पड़ खालिद के मुँह पर जड़ देता है। खालिद 5 फिट दूर जाकर गिर पड़ता है। 

जीशान-“बस… अगर दुबारा ऐसा करने का सोचा भी ना तो फाड़ के रख दूँगा खालिद मैं तुझे। हमने तुझे हमारे घर की इज़्ज़त सौंपी थी और तो लानत है तुझ पर और आप दोनों? आपको तो पता होगा ना इस नामुराद की हरकतें? 

खालिद के अम्मी अब्बू बेचारे इस बात से वाकिफ़ नहीं थे। खालिद के अम्मी अब्बू जीशान और उनके परिवार को समझाने की कोशिश करने लगते हैं। 


मगर शायद जीशान को ये बात नागवार गुज़री थी कि उसकी सोफिया यहाँ इस हाल में रह रही थी। जीशान कहता है-“अम्मी, दादी , आप सोफिया का सामान पैक कीजिए। सोफी अब हमारे साथ रहेगी। और हाँ खालिद मुझे कल ही तलाकनामा चाहिए तुम्हारी तरफ से, और फॅक्टरी से तुम आज अभी इसी वक्त निकाले जाते हो। ये फ्लेट भी कल सुबह तक वाली कर दो, और अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं पुलिस में नहीं जाउन्गा, सीधा सिर में गोली मारूँगा…” 

सामने खड़े सभी जीशान के उस रवैये से सकते में थे, और सोफिया को अपने भाई में वो मर्द नजर आया था, जो हर औरत अपने शौहर में देखना चाहती है, रुआबदार जान बस शेर दिल और अपनी औरत की हिफ़ाजत करने वाला। 

रज़िया और अनुम जीशान को कुछ नहीं कहती। वो जानती थीं कि जीशान जो भी फैसला लेगा, वो सभी की भलाई में होगा। 

रोती हुई सोफिया को अनुम और रज़िया अपने सीने से चिपकाए अमन विला में ले आते हैं। सोफिया रोए जा रही थी और रज़िया अनुम उसके पास बैठी उसे समझाने में लगी हुई थीं 

लुबना को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार, हुआ क्या है? 

जैसे तैसे जीशान सभी को डाँट डपट के रात का खाना खाने के लिए कहता है। 

सोफिया के गले से तो निवाला भी नहीं उतर रहा था, और वही हाल रज़िया का भी था, अपने बेटी की किस्मत पर रज़िया के आँसू भी नहीं रुक रहे थे। सभी रज़िया के रूम में बैठे एक दूसरे को दिलासा दे रहे थे। 

जीशान-अब बस भी कर सोफिया चुप हो जा। जो हुआ वो एक खराब ख्वाब था। भूल जा, आने वाली जिंदगी पड़ी है हमारे सामने, और उसे हम सभी हँसी खुशी गुजारेंगे। मैं सारी तैयारियाँ कर लिया हूँ । हम यू ॰के॰ सेटेल हो जाएँगे। वहाँ हमारे गारमेंट्स का बिजनेस शुरू करेंगे। तुम सब बिल्कुल फिकर मत करो। मैं हूँ ना सबको संभाल लूँगा। 

उसके मुँह से ये बात सुनकर लुबना और अनुम के मुँह से दबी-दबी से हँसी निकल आती है। 

सोफिया को जीशान और अनुम के रिश्ते के बारे में पता नहीं था। 

जीशान-“तुम तीनों यहाँ सो जाओ और हाँ ज्यादा देर तक जागने की ज़रूरत नहीं 
…” वो अनुम को इशारे से बाहर आने के लिए कहता है, और खुद अपने रूम में चला जाता है। 

थोड़े देर बाद अनुम भी जीशान के पास चली आती है। अनुम चुपचाप बेड पर बैठ जाती है-“मैं सोच रही थी कि सोफिया के पास सो जाऊूँ तो उसे भी अच्छा लगेगा…” वो धीमी आवाज़ में जीशान से कहती है। 

जीशान अनुम का हाथ पकड़कर अपने ऊपर खींच लेता है। 

अनुम अपनी नाइटी में थी। रेशमी नाइटी के अंदर शायद कुछ भी पहना हुआ नहीं थी अनुम ने। अनुम कहती है-“आह्ह… कुछ तो शर्म करो जीशान … तुम्हें कोई फिकर नहीं अपनी बहन की। मैं जा रही हूँ …” 

जीशान-ऐसे कैसे जा रही हो? मुझे नींद नहीं आती, पता है ना तुम्हें अब…” 

अनुम-“क्यों नींद नहीं आती? हुम्म…” 

जीशान-“जब तक अपनी अम्मी की चूत चाटकर अपना लौड़ा उनकी चूत में नहीं डालता, मुझे नींद नहीं आते अनुम…”

अनुम के तन बदन में आग लगाने के लिए ये चिंगारी ही काफी थी। वो अपनी जीभ निकालकर जीशान की गर्दन पर घुमाने लगती है, और जीशान अपने दोनों हाथों में अनुम की कमर पकड़कर उसे धीरे-धीरे दबाने लगता है। 

अनुम-“उन्ह… ओह्ह… इतनी मोहब्बत क्यों है तुम्हें जीशान ?” 

जीशान-“पता नहीं ? बस ये पता है कि अब रह नहीं सकता मैं अपनी अम्मी के बिना। एक बात कहूँ अम्मी?” 

अनुम-“हुम्म…” 
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05-19-2019, 01:54 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
जीशान-“ये दिन-ब-दिन बड़े होते जा रहे हैं ना?” वो चूत ड़ों को दबाते हुई कहता है। 

अनुम-“सब मेरे जीशान बेटे की वजह से आह्ह…” 

जीशान-वो कैसे? 

अनुम-“आपको सब पता है जीशान उन्ह…” 

जीशान-मुँह से बोल कैसे? 

अनुम-“मुझे चोदने से आह्ह… उन्हींहींहींहींहीं…” 

जीशान-“इन्हें और बाहर निकालना है मुझे अम्मी…” 

अनुम-कैसे जी? 

जीशान-गाण्ड मारनी पड़ेगी रोज तुम्हारी अम्मी। 

अनुम-“आह्ह… मर ई… सब कुछ सौंप चुकी हूँ आपको जीशान आह्ह…” 

जीशान अपनी दो उंगलियाँ अनुम की गाण्ड में घुसा देता है और अनुम तड़प सी जाती है। ये मोहब्बत की शिद्दत का नतीजा था, जो अनुम इतना बड़ा हादसा घर में होने के बावजूद भी जीशान की बाहों में नंगी पड़ी थी। 

जीशान गले के पास से अनुम की नाइटी निकाल देता है और अपनी पैंट की जिप खोलकर लण्ड बाहर निकाल देता है। अनुम को अपने पेट पर गरम लोहे की तरह सलाख महसूस होने लगती है। वो अपना हाथ नीचे लेजाकर उसे थाम लेती है। 

अनुम-“ये भी दिन-ब-दिन और ताकतवर होता जा रहा है ना? आह्ह…” 

जीशान-“मेरी जान, मेरी बीवी, मेरी अम्मी, मेरी शरीक -ए-हयात अनुम की चूत का पानी पी पीकर इसे ताकत मिल रही है। अनुम मुँह में ले इसे अब अपने…” 

अनुम-“हाँ…” कहकर वो नीचे सरकती जाती है और जीशान के लण्ड को अपने मुँह की गर्मी में लेकर उसे गीला करने लगती है-“गलपप्प-गलपप्प… मैं पागल तो नहीं हो जाउन्गी ना जीशान ? गलपप्प…” 


जीशान-“नहीं अनुम, तू अपने बेटे की मोहब्बत में दिवानी हो जाएगी… आह्ह… आराम से अम्मी जान्न…” 

अनुम के लिए जीशान का हर लफ़्ज बहुत कीमती था। जीशान का उसे अम्मी कहना, उसे अपनी बीवी कहना, उसे अपनी दिवानी कहना, और उसे पागलों की तरह चोदना, ये सारी बातें अनुम को दिन-ब-दिन और ज्यादा तवाना और ज्यादा हसीन बना रही थी। 

जीशान अनुम की कमर अपनी तरफ घुमा देता है और अपनी जीभ से अनुम की चूत को कुरेदने लगता है। दोनों माँ बेटे एक दूसरे को चाटने में लग जाते हैं… गलपप्प-गलपप्प। 

अनुम-अंदर आ जाए ना जी? 

जीशान-कहाँ जानेमन? 

अनुम-“अपनी अनुम की चूत में आ जाइए ना जी… बर्दाश्त नहीं हो रहा आह्ह…” 

जीशान अनुम को अपने नीचे लेकर उसके ऊपर लेट जाता है। दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमते हुये चूत और लण्ड का पानी एक दूसरे के मुँह में डालने लगते हैं। जीशान इतने जोर से अनुम को किस करता था कि अनुम का मुँह खुला का खुला ही रह जाता था। वो अनुम की जीभ को अपने मुँह में लेकर उसे चाटने लगता है, और अनुम जीशान के लण्ड को पकड़कर अपनी चूत पर लगा देती है। 

जीशान हल्का सा धक्का देता है और लण्ड अनुम की चिकने चूत में सरकता हुआ अंदर तक चला जाता है। 

अनुम-“उन्ह आराम से जान … मैं यहीं हूँ ना आपके नीचे आह्ह…” 

जीशान-“क्या करूँ अनुम? जब भी ये अंदर जाता है और जोर से अंदर जाने लगता है, तेरी चूत है ऐसी ही है अनुम आह्ह…” 

अनुम-“मेरी चूत नहीं आपकी है ये आह्ह… मेरी रह तक आपकी है आह्ह… अम्मी जी…” 

जीशान लगातार अपने ताकतवर धक्कों से अनुम की चूत को चोदने लगता है, और अनुम अपने दोनों पैर हवा में उठाकर जीशान के लण्ड को और अंदर तक लेती चली जाती है। 

अनुम-“आह्ह… मेरी जान अपनी जान को अपनी निशानी दे दो… भर दो मेरी कोख अपने बीज से, मैं जनुन्गी आपका बच्चा आह्ह… मुझे प्रेगनेंट होना है आपसे आह्ह… अपनी अम्मी को अपने बच्चे के अम्मी बना दो जीशान आह्ह…” 

जीशान-“हाँ रानी, मेरे अनुम, मेरी जान, मैं तुझे प्रेगनेंट करूँगा। तेरी चूत से अपनी औलाद पैदा करेगा जीशान… बस तुझे रात दिन ऐसे ही चोदता रहूँ आह्ह… मेरी अनुम्म, मेरी जान्न…” 
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05-19-2019, 01:54 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
वो दोनों एक दूसरे में समाते चले जाते हैं, और अनुम चीखती हुई अपनी मोहब्बत के पहले पानी से जीशान के लण्ड को नहलाने लगती है। उसकी चूत से इतना ज्यादा पानी बहने लगता है कि जीशान का लण्ड तरबतर हो जाता है। 

मगर जीशान के धक्के कम नहीं होते वो इसे धुन में लण्ड को जरा सा बाहर निकालकर अनुम की गाण्ड के सुराख पर टिका के सटतत्त करके लण्ड गाण्ड में पेल देता है। लण्ड गीला होने से उसे ज्यादा दर्द नहीं होता, मगर अनुम की चीख निकल जाती है। 

जो दूसरे रूम में मौजूद रज़िया और सोफिया के कानों तक पहुँच जाती है। लुबना उस वक्त तक गहरी नींद में सो चुकी थी। 

सोफिया-अम्मी ये आवाज़ कैसी? 

रज़िया धीरे से सोफिया के कानों में कहती है-“जीशान अपनी अम्मी के साथ हैं…” 

सोफिया का मुँह खुला का खुला रह जाता है-“सच? अम्मी और जीशान ?” 

रज़िया-“नजर मत लगा। मेरी अनुम अपनी असल जिंदगी जी रही है सोफी…”

अनुम-“आजी अज़ज्जई आराम से ना उन्ह… बहुत दिन से नहीं आह्ह…” 

जीशान-“चुप कर साली , कितनी बार बोला है रोका मत कर मुझे आह्ह…” कहकर वो अपने लण्ड को अनुम की गाण्ड में घुसा…ता चल… जाता है। 

और अनुम अपने शौहर के दर्द को भी होंठों में दबाती हर दर्द सहती चली जाती है। उस रात भी जीशान अनुम को एक पल के लिए सोने नहीं देता। 

रात भर रज़िया भी सोफिया को समझती रहती है और अमन विला में गुज़री हर छोटी बड़ी बात सुनाती रहती है। 

कहते हैं वक्त दुनियाँ का सबसे बड़ा मरहम होता है। सेकेंड मिनट में बदले, और मिनट घन्टों में, देखते ही देखते दिन कैसे पूरे एक महीने में गुजर गया, पता ही नहीं चला। सोफिया को अमन विला में आए पूरा एक महिना हो चुका था। खालिद उसे तलाक दे चुका था, और हमेशा-हमेशा के लिए वो शहर छोड़कर भी जा चुका था। 

सोफिया बहुत खुश थी अपनी आज़ादी को लेकर, मगर कहीं ना कहीं उसके दिल में अपने भविष्य को लेकर अब भी उथल पुथल ज़रूर थी। 

जीशान की हर रात अपनी महबूबा अनुम की बाहों में गुजर रही थी। वो इस पूरे महीने बहुत बिजी रहा। अपनी फॅक्टरी को यू ॰के॰ में सेटल करने की जोड़तोड़ में वो घर पर बहुत कम वक्त दे पा रहा था। 


और जितना भी वक्त वो घर में रहता अनुम उसे अपनी बाहों में जकड़े रखती। वो पूरी तरह जीशान के रंग में रंग चुकी थी अब वो जीशान को नाम लेकर भी नहीं बुला रही थी, और ये बात घर के हर सदस्य ने नोटिस भी की थी। रज़िया बहुत खुश थी कि उसकी बेटी अपने जिंदगी जी रही है। दोनों की मोहब्बत जहाँ एक तरफ परखान चढ़ रही थी वहीं लुबना बेहद से भी ज्यादा बेहद परेशान थी 

जीशान रात भर घर से बाहर फॅक्टरी में गुजार कर सुबह-सुबह घर लौटा था। 

अनुम-“क्या जी दिन में तो काम होता ही है। अब रातें भी हमारी सौतन फॅक्टरी के साथ गुजारने लग गये आप?” 

जीशान अनुम को किचेन में अपने बाहों में जकड़ लेता है। अपने होंठों से अनुम के गाल को चूमते हुये वो बहुत खुश लग रहा था-“जानेमन, बहुत जल्दी मेरा ख्वाब पूरा होने वाला है…” 

अनुम-कैसा ख्वाब? 

जीशान-अभी उसे पूरा तो होने दो। 

अनुम-एक बात है? 

जीशान-बोलो ना जान? 

अनुम-नहीं , मुझे शर्म आती है। 

जीशान उसे अपनी तरफ घुमा लेता है और उसकी आँखों में देखते हुये कहता है-बोल भी क्या बात है सोनी? 

अनुम धीरे से जीशान के कान में कहती है-“आप पापा बनने वाले हो…” 

जीशान की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं। वो पिछले डेढ़ महीने से जिस खेत में हल चलाकर मेहनत कर रहा था, उस खेत में आज पहली कोंपल ने सिर उठाया था। 

अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत तोहफा अनुम ने उसे दिया था। वो मारे खुशी के अनुम को अपनी बाहों में उठा लेता है, और उससे चूमता चला जाता है। 

जीशान-“अनुम, अनुम मेरी जान… मेरी अनुम तुम सच कह रही हो ना? सच बताओ तुम्हें कैसे पता चला?” 

अनुम-“मेरे पीरियड्स की डेट पिछले हफ्ते थी…” 

जीशान-“मेरी जानेमन, चलो ना ये खबर सबको सुनाते हैं…” 

अनुम-“नहीं नहीं … पागल हो गये हैं क्या आप? घर में जवान बेटी है। सोफिया भी किस दौर से गुजर रही है? नहीं , मैं वक्त आने पर सबको बता दूँगी …” 

जीशान-इस खुशी के मौके पर कुछ करना चाहिए? 

अनुम-क्या? 

जीशान-अपनी जानेमन को कस के चोदना चाहिए। 

अनुम-“धते्ऽत्त… बेशर्म होते जा रहे हैं आप भी ना अब… पापा बनने वाले हो तो कुछ तो संभाल के बात करें आप…” 
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05-19-2019, 01:54 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
जीशान इससे पहले कुछ बोलता सोफिया की आवाज़ से दोनों चौंक जाते हैं। 

सोफिया-“जीशान , अम्मी मुझे फ्लेट पर जाना है कुछ सामान वहाँ है, वो लेकर आना है। आप दोनों प्लीज़… मेरे साथ चलिये ना…” 

जीशान-बाद में ले आएगे सोफी। 
सोफिया-“नहीं प्लीज़्ज़… अभी चलिये…” उसकी आवाज़ में अजीजी भी थी और खौफ भी। 

अनुम और जीशान एक दूसरे को देखने लगते हैं, और अनुम हाँ में सिर हिला देती है। रज़िया और लुबना को बताकर तीनों उस फ्लेट में चले जाते हैं, जो फ्लेट जीशान ने सोफिया को गिफ्ट किया था शादी के वक्त। खालिद और उसका परिवार जा चुके थे। सारा सामान जैसा का तैसा था। उन लोगों ने एक भी जीशान की दी हुई चीज को हाथ नहीं लगाया था। सारा फर्नीचर बेड सब कुछ जैसा का तैसा था। 


जीशान-“सोफिया जल्दी से सामान ले ले, जो भी लेना है। मुझे फॅक्टरी भी जाना है…” 

सोफिया अपने बेडरूम में जाकर बेड पर बैठ जाती है और फूट -फूट कर रोने लगती है। उसकी आवाज़ सुनकर हाल में बैठे अनुम और जीशान बेडरूम की तरफ भागते है। 

अनुम-“क्या बात है सोफिया बेटा, क्यों रो रही हो? चुप हो जाओ…” 

जीशान-ऐसे नहीं रोते सोफिया, क्या हुआ? 

सोफिया-मुझे समझ में नहीं आ रहा, मैं कैसे कहूँ ? 

अनुम-आखिर बात क्या है सोफिया बता तो? 

सोफिया सिसकती हुई जीशान की आँखों में देखती हुई कहती है-“मैं प्रेगनेंट हूँ …” 

अनुम और जीशान दोनों के मुँह से एक साथ बस यही निकलता है-क्या? 


अनुम-“ तू क्या कह रही है सोफिया? जानती भी है तूने तो कही थी कि खालिद ने तुझे छुआ तक नहीं फिर?” 

सोफिया कुछ नहीं कहती, बस एकटक जीशान को देखती रहती है। 

जीशान आगे बढ़कर सोफिया को बेड से उठाकर खड़ा कर देता है-“ तू सच में प्रेगनेंट है सोफी?” 

सोफिया-हाँ। मैं कई दिन से बताना चाहती थी, दो महीने हो गये हैं। 

जीशान- तू सच कह रही है सोफी? 

सोफिया-हाँ जीशान आपकी कसम। 

जीशान सोफिया को अपनी छाती से लगाकर कस के बाहों में भर लेता है-“मेरी जान, आज मुझे तुम दोनों ने वो खुशी दी कि मैं मर ही ना जाऊूँ… आज तुम दोनों मेरे बच्चे की माँ बनने वाली हो…” 

अनुम समझ जाती है कि सोफिया जीशान के बच्चे की माँ बनने वाली है। 

जीशान-पागल , तूने मुझे बताया क्यों नहीं ? 

सोफिया जीशान की बाहों में सिमट गई थी। वो यही चाहती थी की जीशान अपनी औलाद को अपना नाम दे। कहा-“मैं बताना चाहती थी, मगर हिम्मत नहीं जुटा पाई। आज सुबह जब अम्मी के मुँह से ये बात सुनी की वो भी आपके बच्चे की माँ बनने वाली हैं तो मुझसे रहा नहीं गया जीशान । हाँ हाँ मैं आपके बच्चे की माँ बनने वाली हूँ , आपकी मोहब्बत को जनम देने वाली हूँ जीशान …” 

जीशान अनुम को भी अपनी बाहों में बुलाकर उसे भी अपनी छाती से लगा लेता है। 

अनुम-“सुनिए, ये बात बाहर वालों तक जाएगी तो बहुत बदनामी हो जाएगी…” 

जीशान-“अब किसी को भी कुछ नहीं पता चलेगा। मैं तुझसे कह रहा था ना मेरे ख्वाब के बारे में। हम अगले हफ्ते यू ॰के॰ जाने वाले हैं, हमेशा-हमेशा के लिए। यहाँ की फॅक्टरी मैंने नग़मा के नाम कर दिया है और वहाँ सारे इतेजामात कर दिए हैं। 
हम वहाँ अपना नया बिजनेस शुरू करेंगे। नग़मा से मैंने सारी बात कर लिया है। वो बहुत खुश है। वो हमारी ख़ानदानी बातें उसके ससुराल वालों तक भी नहीं जाने देगी। बस अनुम तू अब कोई फिकर ना कर। मैं तुम सबको एक बेहतर नई जिंदगी दूँगा वहाँ। तुम मेरी इज़्ज़त हो, तुम्हें जीशान ख़ान अपनी सारी मोहब्बतें देगा, वादा है मेरा तुमसे…” 

अनुम-“जान …” और वो जीशान की बातें सुनकर उसके होंठों को चूम लेती है 

जीशान भी अनुम की कमर को सहलाते हुये पहली बार सोफिया के सामने अनुम के मुँह में जीभ डालकर उसके होंठों से रस पीने लगता है। 
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05-19-2019, 01:55 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
ये देख सोफिया की चूत भी सुरसुराने करने लगती है। 

जीशान-“ये बेड सुहागरात के लिए तड़प रहा है। है ना सोफी?” 

सोफिया-हाँ। 

जीशान-“आज तुम दोनों ने मुझे इतनी बड़ी खुशी दी है कि मैं तुम दोनों का मुँह ऐसे मीठा करूँगा की तुम भी याद रखोगी…” कहकर जीशान अपनी शर्ट-पैंट उतारकर अंडरवेअर फेंक कर नंगा बेड पर लेट जाता है-तुम दोनों में से जो सबसे पहले नंगी होकर मेरे पास आएगी, मैं समझूंगा वो मुझसे सबसे ज्यादा प्यार करती है…” 


अनुम सोफिया की तरफ देखती है और फिर जीशान के खड़े लण्ड को। उसकी शर्म तो जीशान कई दिन पहले ही मिटा चुका था। अब उसे किसी के सामने अपने शौहर से चुदने में कोई परेशानी नहीं महसूस होती थी। 

अनुम और सोफिया, दोनों बिजली की तेजी से अपने कपड़े निकालकर जीशान के पास एक साथ आ जाते हैं। जीशान अनुम को अपने ऊपर खींच लेता है-“अनुम, मुझे तेरी चूत बता, जहाँ से मेरा बच्चा निकलेगा?” 

अनुम अपनी कमर जीशान के मुँह की तरफ घुमा देती है और अपना मुँह जीशान के लण्ड की तरफ-“ये देखिये…” 

जीशान अपने होंठ अनुम की चूत पर रख कर उसे चाटने लगता है गलपप्प। 

अनुम-“आह्ह… सुनिये तो… अज़ज्जई अजी सुनिए नाअ आअह्ह…” 

जीशान-“तू क्या देख रही है? मुँह में ले…” वो सोफिया को देखते हुये कहता है, जो सामने बैठी सब देखकर मुश्कुरा रही थी। 

सोफिया और अनुम दोनों जीशान के लण्ड पर झुक जाते हैं, और दोनों माँ-बेटी शरमाती हुई जीशान के लण्ड को बार -बार चाटने और चूमने लगती हैं। इस तरह चूमने से दोनों के होंठ एक दूसरे से टकराने लगते हैं, और उसकी वजह से दोनों की चूत से चिंगारियाँ फूट ने लगती हैं। 

कुछ ही पलों में वो शर्म-ओ-हया का पतला सा पर्दा भी फट जाता है, और दोनों अपनी जीभ बाहर निकालकर जीशान के लण्ड को, तो कभी एक दूसरे के होंठों को चूमने लग जाती हैं गलपप्प। 

इधर जीशान भी अनुम की चूत के दाने को चाट-चाटकर सुजाने लग जाता है गलपप्प। 

अनुम अपनी चूत जीशान के मुँह से हटाकर उसके ऊपर सवार हो जाती है और अपने हाथ से लण्ड पकड़कर उसे अपने चूत पर लगा देती है-“बहुत दिल कर रहा है जी अपनी बेटी के सामने चुदने के लिए… आह्ह… अब चोदिए भी जान …” 


अपनी अनुम के बड़े-बड़े चूत ड़ों को दोनों हाथों में थामे जीशान भी लण्ड को अनुम की चूत में डाल देता है और सोफिया को अपने होंठों पर झुकाकर सटासट अनुम को चोदने लगता है। 

अनुम-“आह्ह… जान …” अनुम भी सोफिया के साथ जीशान के होंठों को, तो कभी सोफिया के होंठों को चूमती हुई अपनी कमर आगे पीछे हिलाने लगती है। 

एक तरफ माँ, तो दूसरी तरफ बेटी , दोनों के पेट में जीशान का बच्चा। बस यही एक बात जीशान के खून में ऐसी तपिश पैदा कर देती है कि वो जानवरों के तरह सटासट झपा-झप अनुम की चूत में पिस्टन की तरह अपने लण्ड को आगे पीछे करते हुये उसे चोदता चला जाता है। 

और अनुम गधी की तरह अपना मुँह खोलकर चीखती चली जाती है-“आजज्ज्ज्ज्जई मार डालोगे क्या? अम्म्मी जी मैं गई…” वो धक्के इतने जानलेवा थे कि 10 मिनट में ही अनुम फारिघ् हो जाती है। 

मगर जीशान का जोश अभी थमा नहीं था। वो सोफिया को अपने नीचे लेटा देता है और उसकी सोई हुई चूत पर थूक कर उस पर हथेली से रगड़ देता है। 

सोफिया तड़प जाती है। पिछले कई दिन से चुदी नहीं थी सोफिया। 

जीशान उसे और तड़पाने के लिए उसकी क्लोटॉरिस पर अपना लण्ड रगड़ने लगता है। उसकी चूत से लेकर गाण्ड के सुराख तक जीशान अपना लण्ड आगे पीछे करने लगता है। 

सोफिया-“अम्मी इनसे बोलिये ना ऐसा ना करें… आह्ह…” 

जीशान-तो क्या करूँ जान मेरी हाँ बोल? 

सोफिया-“चोदिये ना आह्ह…” 

उसका बोलना था कि जीशान अपने लण्ड को सोफिया की चूत में दो महीने बाद फिर से घुसा देता है। 

सोफिया का जिस्म अकड़ सा जाता है। एक जोरदार चीख उसके मुँह से निकल जाती है। वो और चीखना चाहती है, मगर अनुम अपने चूत को उसके मुँह पर रख देती है और सोफिया को अपनी जीभ अनुम की चूत में डालनी पड़ती है। एक तरफ से जीशान के लण्ड का वार तो दूसरी तरफ से अनुम की चूत से बहते पानी की धार, सोफिया दोनों तरफ से पानी में सरबोर होने लगती है। 

दोनों माँ-बेटी सबसे ज्यादा खुश थीं कि उनका शौहर उन दोनों को इतनी मोहब्बत और इतनी शिद्दत से प्यार भी करता है। 

जीशान, अनुम और सोफिया के साथ अमन विला लौट आता है। 

लुबना हाल में ही बैठी थी। उसके चेहरे से लगा रहा था कि वो थोड़ी अपसेट सी है। 


अनुम और सोफिया चुदाई से थक से गई थीं, वो दोनों अपने-अपने रूम में थोड़ी देर आराम करने चली जाती हैं और जीशान आकर लुबना के बगल में बैठ जाता है। 

जीशान-“की हाल है सोणियो?” 

लुबना-बड़ी जल्दी आ गये? बड़े थके-थके से लग रहे हैं? 

जीशान-नहीं तो। मैं बिल्कुल ठीक हूँ , तुम मुझे परेशान लग रही हो। 

लुबना कुछ नहीं कहती। मगर उसकी खामोशी में छुपी हुई बातें जीशान को परेशान करने लगती है। वो लुबना से बात करना चाहता था, मगर उससे पहले उसका सेल फोन बजता है। 

काल जीशान के यू ॰के॰ वाले दोस्त का था। जीशान थोड़ी देर उससे बात करता है और फिर से लुबना के पास आकर बैठ जाता है। जीशान सेल पर बात करने के बाद खुश नजर आ रहा था। 

लुबना-क्या बात है, बहुत खुश लग रहे हैं? किसका काल था? 

जीशान-दोस्त का। तुम क्यों मुँह उतारकर बैठी हो? किसी ने कुछ कहा क्या तुमसे? 

लुबना-“कोई मुझसे बात करना पसंद नहीं करता, और जिसे मैं चाहती हूँ कि बात करूँ, वो मेरी तरफ देखता भी नहीं …” वो वहाँ से ये कहकर अपने रूम में चली जाती है। 

जीशान भी उसके पीछे-पीछे रूम में चला जाता है, और रूम बंद करके उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ घुमा लेता है-“बात क्या है लुब ? तू मुझसे नाराज है?” 

लुबना-“हाँ हूँ मैं आपसे नाराज, और क्यों ना हूँ ? जब देखो आप अम्मी के साथ बिजी रहते हैं। मेरे लिए तो आपके पास वक्त ह नहीं । कभी-कभी तो लगता है आप मुझसे झूठ कहते हैं कि आप भी मुझसे मोहब्बत करते हैं। देखिये जीशान , मुझसे नहीं देखा जाता कि आप मुझे अनदेखा करें। मैं ये नहीं चाहती कि आप अम्मी, और दादी का ख्याल ना रखें । मगर क्या मेरे लिए आपके पास वक्त नहीं ?” 

जीशान एक हाथ लुबना की कमर में डालकर उसे अपने से चिपका लेता है-“हुम्म… नाराज है मेरी जान मुझसे तो कैसे मनाया जाए? हुम्म… एक काम करते हैं कि अपनी लुब की किस्सी ले लेते हैं…” और ये कहते हुये जीशान अपने होंठ लुबना के होंठों पर रख देता है। 

यही वो तपिश थी जिसके लिए लुबना बेकरार थी, यही वो चाह थी जो लुबना जीशान से चाहती थी। अपने होंठों पर अपने महबूब के होंठों के लगते ही लुबना का सारा गुस्सा हवा हो जाता है, और वो भी जीशान के गले में बाहें डाल देती है। 

जीशान-“आइ लव यू मेरा बच्चा…” 

लुबना-“ लव यू टू जान …” 

जीशान-मेरे साथ चलेगी घूमने? 

लुबना-कहाँ? 

जीशान-इग्लेंड। 

लुबना-क्या? सच्ची जीशान ? 

जीशान-“हाँ मुझे यू ॰के॰ जाना पड़ेगा, वहाँ एक गारमेंट्स की फॅक्टरी मैंने खरीद ली है और हमारा नया घर खरीद ने की भी कुछ कार्यवाही की है…” 


लुबना खुशी से झूम उठती है-“मैं ज़रूर चलूंगी , और कौन साथ चलेगा?” 

जीशान-“अम्मी, तू और मैं…”

लुबना-कब जाना है? 

जीशान-“कल सुबह 11:00 बजे की फ्लाइट है। तू पेकिंग कर ले, मैं अम्मी को भी बता दूँगा। और एक बात?” 

लुबना-क्या? 

जीशान लुबना को अपनी गोद में उठ लेता है और खुद बेड पर बैठ जाता है। लुबना दोनों टाँगे जीशान के इर्द-गिर्द लपेटकर उसके लण्ड पर बैठ जाती है। 

जीशान-“वहाँ मैं तुझसे निकाह करने वाला हूँ , अम्मी की मौजूदगी में…” 

ये सुनते ही लुबना की पलकें शर्म से झुकती चली जाती हैं। जीशान दोनों हाथों में लुबना के चूत ड़ों को हल्के से दबाता है। 

लुबना-“इशह… क्या कर रहे हैं?” 

जीशान-“करेगी ना मुझसे शादी लुबु?” 

लुबना अपने मुँह में जीशान का कान लेकर चूमती हुई धीरे से कहती है-“हाँ…” 

जीशान-“मुझे तुझसे कितनी मोहब्बत है लुब , ये मैं तुझसे उस दिन के बाद बताऊँगा?” 
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