Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
05-19-2019, 01:52 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
जीशान उसे समझाने के लिए उसके पास आकर बैठ जाता है। मगर लुबना उसे खुद को छूने भी नहीं देती। लुबना कहती है-“आज आपने मुझे मार दिया जीशान , मेरी मोहब्बत की तौहीन की है आपने। मैं आपको कभी माफ नहीं करूँगी, कभी नहीं ऽऽ… कितना नाज था मुझे अपनी मोहब्बत पर, आप पर। मगर आज आपने ये साबित कर दिया कि मैं कितनी गलत थी। आपको पता है ना मैं कितना प्यार करती हूँ आपसे। नहीं देख सकते मैं किसी को भी आपके साथ, कभी नहीं । आज जो आप अम्मी के साथ कर रहे थे, वो मैं सोच भी नहीं सकती थी। अम्मी भी ऐसी निकलेंगी, मैंने कभी सोचा भी नहीं था। नफरत है मुझे आपसे और अम्मी से भी। चले जाओ मेरे रूम से…? 

जीशान-“लुब मेरी बात तो सुन एक मिनट…” 

लुबना-“चले जाओ, वरना मैं खुद को कुछ कर बैठूँगी। चले जाओ…” 

जीशान एक समझदार लड़का था। वो जानता था इस वक्त लुबना किस दौर से गुजर रह है। वो उसे रो लेने देना चाहता था। वो जानता था कि रो लेने से दिल का बोझ भी हल्का होता है। बारिश हो जाये तो मौसम अच्छा हो जाता है। 

जीशान जब बाहर आता है तो उसे दरवाजे के बाहर अनुम खड़ी मिलती है। इससे पहले की जीशान कुछ बोल पाता, अनुम अपने उंगली की रिंग उतारकर जीशान के हाथ में दे देती है-“मुझे माफ कर दो, मैं अपनी बेटी की खुशियों के बीच कभी नहीं आना चाहती…” 

जीशान-“अम्मी मेरी बात तो सुन लो…” 

अनुम-“मैंने सब सुन लिया जीशान । बस जज़्बात में आकर अच्छा हुआ हमने कोई गलत कदम नहीं उठाया। आइन्दा मेरे करीब भी मत आना…” ये कहकर अनुम वहाँ से भागकर अपने रूम में चली जाती है और दरवाजा बंद कर लेती है। 

एक तरफ लुबना रो रही थी और दूसरी तरफ अनुम, और इन सबके बीच जीशान परेशान खड़ा था। 

अचानक आई इस आँधी ने जीशान को हिलाकर रख दिया था। कुछ वक्त पहले तक वो खुद को दुनियाँ का सबसे खुशनशीब शख्स समझ रहा था। अनुम उसकी मोहब्बत, उसकी ख्वाहिश, उसकी तमन्ना, जिसे पाने की खातिर वो दर-बदर के ठोकरे खाने को तैयार था। जब वो अपनी मोहब्बत का इजहार जीशान से करने के बाद उसकी दी हुई रिंग पहनने के बाद अचानक से ऐसे रुख़ मोड़कर जीशान का दिल तोड़कर चली गई। ये जीशान के लिए काबिल-ए-नागवार बात थी। 

किसी ने ये जानने की कोशिश नहीं की कि जीशान के दिल का क्या होगा? अचानक से जब खुशी मिल जाए तो इंसान वो भी बर्दाश्त नहीं कर पाता। जीशान को एक ही दिन में खुशी और गम दोनों का सामना करना पड़ा। वो अंदर ही अंदर टूट चुका था। वो चीख-चीख के रोना चाहता था, अपना गम किसी के साथ बाँटना चाहता था। मगर उस वक्त वो खुद को तन्हा महसूस कर रहा था। 

उस वक्त जीशान को बस एक तिनके की ज़रूरत थी, जो उसे उस नाजुक वक्त में सहारा दे सके। जीशान घर से बाहर अपने दोस्तों से मिलने निकल जाता है। 
इधर अनुम अपने रूम में बैठकर आँसू बहा रही थी। 

रज़िया अनुम के रूम में दस्तक करके उसके पास आ जाती है। अनुम झट से अपने आँसू पोंछने लगती है। मगर रज़िया अनुम के आँसू अनुम की आँखों से निकलने से पहले देख चुकी थी। वो अनुम को बिना कुछ कहे अपनी बाहों में समेट लेती है, और अनुम एक छोटे से बच्चे की तरह अपनी अम्मी से लिपट कर सिसक-सिसक के रोने लगती है। 

रज़िया-“चुप हो जा मेरे बच्चे, बस इतना नहीं रोते। चुप हो जा। देख तू ऐसे रोएगी तो मैं भी रो दूँगी …” 

अनुम-“अम्मी ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है? अमन से मोहब्बत दिल की गहराईयों से की, मगर उन्हें हमेशा आपके करीब पाया, और अब जब जीशान दिल के रग-रग में बस गया है, वहाँ तक जहाँ से उन्हें निकालना मेरे इख्तियार में नहीं है, तो ऐसा क्यों हो रहा है कि मेरी अपनी बेटी मेरे और उनके बीच में खड़ी है? मैं क्या करूँ? अम्मी मैं क्या करूँ?”

रज़िया सकून की साँस लेती है ये जानकर की अनुम के दिल में भी जीशान ने अपनी मोहब्बत की रोशनी कर दिया है। मगर जैसे ही अनुम से लुबना का नाम सुना, उसे यकीन हो गया कि किस्मत का पहिया एक बार फिर से उसी मुकाम पर आ गया है, जहाँ 20 साल पहले रज़िया, अमन और अनुम खड़े थे। उस वक्त अमन ने रज़िया का हाथ मजबूती से थामा था। 


मगर अब रज़िया जानती थी उससे क्या करना है? वो अपनी बेटी को ऐसे तिल-तिल मरते नहीं देखना चाहती थी। रज़िया ने अनुम से कहा-“इधर देख मेरी तरफ…” 

अनुम रज़िया की आँखों में देखने लगती है। 

रज़िया-“मुझे ये जानकर बहुत खुशी हुई की तुमने सही फैसला किया है, अपने हाथ जीशान के हाथों में देकर। देखो अनुम जिंदगी हमें बार-बार ऐसे मौके नहीं देती। जब तुम जीशान से इतनी मोहब्बत करती हो तो चाहे कुछ भी हो जाये, उसका हाथ मत छोड़ना। कितनी बार मैंने जीशान के मुँह से तुम्हारे बारे में कहते सुनी हूँ कि वो तुमसे घर में सबसे ज्यादा प्यार करता है…” 

रज़िया-अब तुम्हारे बारे में अनुम, उसकी मोहब्बत का जवाब मोहब्बत से दो। लुबना की फिकर मत करो। जीशान जैसा पठान का बच्चा दो क्या पूरे मुहल्ले को संभाल सकता है। अनुम खबरदार जो हमारे सिवा किसी और के बारे में सोचे भी तो उन्हें जान से मार दूँगी …” वो बोलते-बोलते हँस पड़ी। 

अनुम रज़िया के सीने से चिमटी जाती है। 
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05-19-2019, 01:52 PM,
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जीशान का इंतजार घर में हो रहा था। मगर जीशान का कोई अता-पता नहीं था, उसका सेल भी आफ आ रहा था। एक तरफ जहाँ अनुम और रज़िया परेशान थे, वहीं लुबना का दिल भी जोर-जोर से धड़क रहा था। वो जीशान से सख़्त नाराज थी, मगर उसकी गैर मौजूदगी उसे भी अंदर ही अंदर खाये जा रही थी। 

रात के 12:00 बजे 

डोरबेल बजते ही अनुम लपक के दरवाजा खोलती है, सामने जीशान खड़ा था। 
उसके चेहरे से साफ दिखाई दे रहा था कि उसका मूड सख़्त आफ है। जीशान अंदर आता है और बिना कुछ बोले, बिना किसी से मिले , सीधा अपने रूम में चला जाता है। 

रज़िया उसके पीछे जाती है। मगर जीशान दरवाजा जोर से बंद कर लेता है। 

अनुम और रज़िया एक दूसरे को देखते रह जाते हैं। रज़िया इशारे से अनुम को कहती है-“सबर कर अभी वो गुस्से में है, सुबह बात करेंगे…” 

रज़िया किसी तरह समझा बुझा के लुबना को खाना खिलाने में कामयाब तो हो जाती है, मगर हर निवाले के साथ लुबना के आँसू भी आँखों से बह रहे थे। रज़िया उसे जी भरकर रो लेने देना चाहती थी। किसी तरह वो मनहूस रात तो गुजर जाती है। 

जब सुबह अनुम जीशान के रूम का दरवाजा धकेलती है तो उसे दरवाजा खुला मिलता है। अनुम अंदर जाकर देखती है, तो जीशान गहरी नींद में सोया हुआ था। अनुम उसके पास आकर बैठ जाती है। बड़े ही गौर से वो जीशान का चेहरा देखने लगती है। आज उसे जीशान के चेहरे में अमन ख़ान नहीं बल्की अपना हमसफर नजर आ रहा था। आज जीशान का चेहरा उसके दिल की गहराईयों में समाता चला जा रहा था। वो जीशान के माथे को जैसे ही चूमती है, उसके होंठ जैसे जल जाते हैं। 


अनुम रज़िया के पास भागती हुई किचेन में आती है। वहीं लुबना भी थी और रज़िया के साथ काम में हाथ बटा रही थी। 

रज़िया-क्या हुआ अनुम? 

अनुम-अम्मी अम्मी वो? 

रज़िया-अरे बता भी क्या हुआ? 

अनुम-अम्मी आप मेरे साथ चलिए। 

रज़िया अनुम के साथ जीशान के रूम में चली जाती है। पीछे-पीछे लुबना भी चली आती है। रज़िया जैसे ही जीशान के माथे पर हाथ रखती है, उसका दिल जोर से धड़कता है। जीशान का माथा आग के गोले की तरह जल रहा था, उससे तेज बुखार था। 

अनुम जल्दी से डाक्टर को काल करती है। 

डाक्टर जब बुखार देखते हैं, तो पता चलता है कि जीशान को 105° बुखार है। डाक्टर कुछ इजेक्सन जीशान को लगाते हैं, और अनुम से उसके माथे पर गीली पट्टियाँ रखने के लिए कहते हैं। 

एक तरफ से अनुम, दूसरी तरफ से रज़िया और पाँव की तरफ से लुबना बैठकर जीशान के जिस्म को ठंडा करने के कोशिश करने बैठ जाते हैं। तीनों औरतें लगातार जीशान के माथे और पैर के तलवो को ठंडे पानी से गीले कपड़े से ठंडा करती रहती हैं। आखिर एक घंटे बाद जीशान का बुखार कुछ कम हो जाता है। 

जब जीशान आँखें खोलता है तो अपने आस-पास सभी को देखकर हैरान हो जाता है। 

अनुम-अब कैसा लग रहा है जीशान ? 

जीशान-चले जाइए आप दोनों मेरे रूम से। 

रज़िया-“जीशान , क्या हुआ बेटा? तुम्हें तेज बुखार आ गया था, सभी कब से तुम्हारे सिर पर ठंडा कपड़ा रख कर बुखार कम कर रहे हैं…” 

जीशान चिल्लाते हुये-“मैं कहता हूँ चले जाइए आप दोनों यहाँ से अभी के अभी, वरना मैं खुद बाहर चला जाउन्गा घर के…” 

अनुम और लुबना बेड से उठ जाती हैं, और बड़ी उम्मीद भरी नजरों से जीशान की तरफ देखने लगती हैं। 

रज़िया-ऐसा क्या हो गया जीशान ? क्यों ऐसा कह रहे हो? 

जीशान-“बे-मुरव्वत बे-हिस लोगों को मैं देखना भी नहीं चाहता। और तुम लुबना, तुम्हें तो मुझ पर बहुत गुस्सा था ना, चली जाओ और आइन्दा मेरे सामने भी मत आना। आप भी जाइए यहाँ से, कोई नहीं चाहिए मुझे। जिंदा हूँ , मैं मर जाउन्गा तो पता चल जाएगा आप दोनों को…” 

अनुम मुँह पर दुपट्टा रख कर रोती हुई वहाँ से चली जाती है। लुबना भी आँखों में आँसू लिए अपने रूम में जाकर सिसक के रोने लगती है। 

रज़िया-मैं भी जाऊूँ? 

जीशान-नहीं , आप मत जाओ। 

रज़िया गीला कपड़ा जीशान के माथे पर रखती हुई-“क्या गलती हो गई मेरी बच्चियों से, जो तुम उन्हें इतना डाँट रहे हो?” 

जीशान-“आपकी बेचारी बच्ची को मैंने रिंग पहनाया था, मगर उन्हें अपनी बेटी की मोहब्बत याद आ गई, और मेरी रिंग निकालकर मेरे मुँह पर दे मारी आपके बेटी ने, और आप उनकी हिमायत कर रही हैं…” 

अनुम दरवाजे के पास से-“मैंने रिंग नहीं फेंकी थी आपके मुँह पर…” उसकी आवाज़ भरी थी, जैसे बहुत जब्त करके कह रही हो। 

रज़िया उठकर अनुम के पास चली जाती है, और धीरे से अनुम को कहती है-“अनुम, तुम अभी अपने रूम में जाओ, मैं जीशान से बात करती हूँ …” 

अनुम अपने रूम में चली जाती है, और रज़िया बेड पर आकर बैठ जाती है। वो जीशान की टाँगों के पास बैठी हुई थी। 

रज़िया-“मेरी जान को बुखार चढ़ गया है, अभी सारी गर्मी खींच लेती हूँ मेरी जान की…” कहकर रज़िया जीशान की पैंट शर्ट निकालकर फेंक देती है, और अपने ऊपर के कमीज भी उतार देती है। 

जीशान रज़िया को ही देख रहा था-बुखार है मुझे? 

रज़िया जीशान का लण्ड पकड़ती हुई-“बुखार में तो मर्द ख़ूँख़ार हो जाते हैं। मेरी जान के होंठ बुखार से सूख गये हैं…” 

जीशान रज़िया को अपने ऊपर खींच लेता है-“तो अब गीले कर इसे रज्जो…” 

रज़िया-“वही तो करने आई हूँ जी…” और रज़िया अपनी शलवार का नाड़ा खोलकर नीचे गिरा देती है। फिर पैर घुमाकर अपनी चूत को जीशान के होंठों की तरफ कर देती है। जीशान का लण्ड रज़िया के मुँह की तरफ और रज़िया के गीली चमकती हुई चूत जीशान के होंठों के तरफ आ जाती है। 
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05-19-2019, 01:52 PM,
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जीशान पहले रज़िया की चूत को चूमता है, और फिर अपने जीभ बाहर निकालकर उसे रज़िया की चूत में घुसा देता है-गलपप्प-गलपप्प। 

रज़िया-“हाय रे ईई जालिम… गलपप्प-गलपप्प…” वो भी जीशान के लौड़े को मुँह में लेती चली जाती है-“बुखार से लौड़ा गरम हो गया है आपका गलपप्प-गलपप्प…” 

जीशान-“तेरी चूत की ठंडक देने पड़ेगी इसे अब…” 

रज़िया-“दीजिए ना… गलपप्प रोका किसने है गलपप्प…” 

जीशान का लण्ड पूरी तरह तन चुका था, उसके सामने रज़िया की ठंडी चूत से आती सर्द हवाएँ लग रह थीं। जीशान रज़िया को नीचे ले लेता है और पीछे से दोनों चुचियों को पकड़कर लण्ड रज़िया की चूत पर घिसने लगता है। 

रज़िया-“आह्ह… डाल दो जी अंदर… मुझे भी गरम होना है अंदर से उन्ह…” 

जीशान रज़िया के चेहरे को पकड़कर होंठों को मुँह में लेकर लण्ड चूत में घुसा देता है। रज़िया कमर को पीछे की तरफ करती है और जीशान अपने लण्ड को रज़िया की चूत के अंदर तक घुसाता चला जाता है। 

रज़िया-“आह्ह… जान , मेरी बेटी को मत तड़पाओ… आह्ह… उसे भी ये खुशी दे दो…” 

जीशान-“नहीं … उसने मुझे तड़पाया है, मैं उसे हाथ भी नहीं लगाउन्गा आह्ह…” 

रज़िया-“आह्ह… नहीं ना उन्ह… आह्ह… इतने जोर सीईई…” 

जीशान सटासट रज़िया की चूत पेलने लगता है। रज़िया जानती थी ये जोश दुगुना क्यों हो गया है। अनुम का नाम सुनते ही जीशान का लण्ड फौलाद की तरह सख़्त हो जाता था, और पिस्टन की तरह चूत को उधेड़ के रख देता था। 

रज़िया-“आह्ह… अनुम की चूत में भी डाल दो ना… मेरी बच्ची को कब तक तड़पाओगे आप्प?” 

जीशान बिना कुछ बोले सटासट रज़िया को चोदता रहता है और रज़िया कमर आगे पीछे करती हुई अपने पोते और होने वाले जमाई के लण्ड से चुदवाती जाती है। दो घंटे बाद थकी हारी रज़िया खुले बालों का जूडा बाँधती हुई जीशान के रूम से बाहर निकलती है, और सीधा अपने रूम के बाथरूम में घुस जाती है। 

जीशान रात का हल्का फुल्का खाना खाकर सो जाता है। 

रात के करीब 2:00 बजे-

जीशान का दरवाजा खुलता है और अनुम ब्लैक नाइटी में उसके रूम में दाखिल होती है। जीशान को बुखार की वजह से नींद नहीं लग रही थी, वो अनुम को अंदर आता देखता है, मगर खुद को सोता हुआ जाहिर करता है। 


अनुम जीशान के पास आकर बैठ जाती है। वो गौर से जीशान के चेहरे को देखने लगती है, और फिर झुक के जीशान के माथे को चूम लेती है। उसकी आँखों से एक आँसू निकलकर जीशान के गाल पर गिर जाता है। अनुम उस आँसू को अपने होंठों में जज़्ब कर लेती है। 

उस वक्त जीशान के लिए खुद को कंट्रोल कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा था। 

अनुम-“आइ लव यू । मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ । मगर आपकी नाराजगी मुझसे बर्दाश्त नहीं होती। देखो मैंने आपकी दी हुई रिंग भी पहन ली है, अब इसे मुझसे कोई अलग नहीं कर सकता। आप मुझसे नाराज मत रहा करो, चाहे तो मुझे दो थप्पड़ मार दो, मगर ऐसी नाराजगी मुझसे नहीं सही जाएगी जान्न…” वो जीशान को गहरी नींद में सोता देखकर खुद से बातें कर रही थी। 

एक पल के लिए जीशान का दिल किया कि अनुम को अपनी बाहों में समेट ले। मगर वो ऐसा नहीं करता। 
और अनुम उसके माथे को एक बार और चूमकर अपने रूम में चली जाती हैं। 

सुबह 7:00 बजे-

जीशान अपने रोजाना की एक्सरसाइज ख़तम करके नाश्ता करने के लिए डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ जाता है। रोज की तरह लुबना भी वहीं मौजूद थी। जीशान एक नजर लुबना पर डालकर कुस़ी खींचकर बैठ जाता है। अनुम भी अपनी प्लेट लेकर वहीं रज़िया के पास आकर बैठ जाती है। 

रज़िया-जीशान कैसा चल रहा है फॅक्टरी का काम? 

जीशान-ठीक चल रहा है। बस कुछ दिन और जाना पड़ेगा, उसके बाद तो बेफिकर ही बेफिकर है। 

रज़िया के साथ-साथ अनुम और लुबना भी जीशान की तरफ देखने लगती हैं-क्या मतलब? 

जीशान-मैंने फॅक्टरी बेचने का फैसला किया है। 

अनुम और रज़िया के मुँह से बेसाख्ता एक साथ निकलता है-क्या? 

जीशान-“जी हाँ… और मैं इंडिया छोड़कर भी हमेशा-हमेशा के लिए जा रहा हूँ । 

अनुम-“ये क्या कह रहे हो तुम जीशान ? ऐसे कैसे तुम इतना बड़ा डिसीजन ले सकते हो? हमें इस बारे में पूछना भी गँवारा नहीं समझा तुमने?” 

जीशान कोई जवाब नहीं देता और अपना नाश्ता ख़तम करके अपने रूम में चला जाता है। उसके पीछे-पीछे रज़िया, अनुम और लुबना भी चले आते हैं। तीनों जीशान के बेड पर बैठकर उससे सवाल करने लगते हैं 

जीशान-“बस मैं डिसीजन ले चुका हूँ , अब मैं यहाँ नहीं रह सकता। और मैं यहाँ रहूँ भी तो किसके लिए? 

आपके लिए लुबना जो मुझसे नफरत करती है। 

आपके लिए अनुम की तरफ इशारा करते हुये-“जिसने कभी अपनी मोहब्बत की दरिया में से मुझे कभी एक कतरा भी पीने नहीं दिया। अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता…” 

अनुम की आँखों में आँसू आ जाते हैं, और रज़िया उठकर अपने रूम में चली जाती है। 

जीशान-“तुम भी जा सकती हो लुबना…” 

लुबना-“कितनी आसानी से अपने कह दिया जीशान कि आप हमेशा के लिए हमें छोड़कर जाना चाहते हैं। मगर एक बार भी आपने ये नहीं सोचा कि इस फैसले से हम पर क्या गुजरेगी? और मोहब्बत की बात आप ना करें तो बेहतर होगा। मोहब्बत जैसे पाकीजा जज़्बात को आप समझ ही नहीं सकते…”
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05-19-2019, 01:52 PM,
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जीशान अनुम की तरफ देखने लगता है। 

अनुम का दिल भी खौफजदा सा था। वो कल रात तक खुले आसमानों में उड़ रही थी, और आज सुबह ही जीशान ने उसे आसमान से फर्श पर फेंक दिया था। 

जीशान-“आप दोनों मुझसे प्यार नहीं करते तो मैं क्यों रहूँ यहाँ? मुझे बताइए। 

अनुम और लुबना-किसने कहा आपसे? 

लुबना अनुम की तरफ देखती हुई-“मैं आपसे प्यार नहीं करती जीशान ? मैं? आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हो? अ आप ने कभी मुझे मोहब्बत भरी निगाह से नहीं देखा, कभी भी नहीं । आप मुझे एक रिंग भी नहीं पहना सकते? और आप मुझे कह रहे हैं कि मैं आपसे प्यार नहीं करती…” लुबना के सारे जज़्बात सारे एहसासात जो कुछ दिन से अंदर ही अंदर जमा हो रहे थे, जीशान के कुछ लफ़्ज़ों ने उन सब एहसासात को एक लम्हें में दिल से बाहर निकाल दिया था। 

जीशान मुश्कुरा देता है, और लुबना का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचता है। 
लुबना सिसकती हुई-“हाथ छोड़िए मेरा, और चले जाइए आपको जहाँ जाना है…” 

जीशान ख़ान लुबना और अनुम दोनों का हाथ अपने हाथों में पकड़ लेता है-“जो मैं कई सालों से नहीं कर पाया, वो मेरी बेरखी ने कर दिया लुबु। मैं जानता हूँ आप दोनों मुझसे बेपनाह मोहब्बत करते हो, और इस बात का सबूत मुझे रात में मिल चुका है…” वो अनुम का हाथ थोड़ा दबाता है, जिसकी वजह से अनुम के होंठों पर लाल फैल जाती है। 

जीशान-“मैं जानता हूँ लुब तुम मुझसे रिंग को लेकर थोड़े बदजबान हो गई हो। मगर तुम ये नहीं जानती कि मैं एक रिंग नहीं , बल्की दो रिंग लाया था। एक इनके लिए और एक तुम्हारे लिए। ये देखो? 

जीशान अपने पाकेट की जेब से एक और रिंग सेम टु सेम जैसे अनुम की उंगली में उस वक्त मौजूद थी, उसे दिखाता है-“ रही बात यहाँ से जाने की तो मैं कई महीनों से सोच चुका हूँ । अरे भाई जब हम तीनों एक साथ रहने वाले हैं और मुझे तुम दोनों प्यारे-प्यारे बेबी देने वाले हो, तो क्या वो यहाँ पॉसीबल है? मैंने सब कुछ प्लान कर लिया है। यहाँ का बिजनेस बंद करके हम चारों यू ॰के॰ सेटल हो जाएँगे और वहाँ अपनी नई दुनियाँ बसाएँगे…” 

जीशान ये कहते हुये अपने हाथ से रिंग लुबना की उंगली में डाल देता है और बिना देर किए उसे अपने ऊपर खींच लेता है। ये सब इतनी जल्दी में होता है कि ना अनुम कुछ बोल पाती है और ना लुबना कुछ कर पाती है। 

लुबना-“आह्ह… बेशर्म इंसान छोड़ो मुझे…” 

जीशान-“पहले कुछ मीठा हो जाए…” कहकर अपनी अम्मी के सामने अपनी बहन के गीले गुलाबी रसीले होंठों को चूम लेता है। 

और लुबना अपनी आँखें बंद कर लेती है। मगर अगले ही पल उसे अनुम की मौजूदगी का एहसास होता है और वो जीशान को धकेलती हुई वहाँ से अपने रूम में भाग जाती है। 

जीशान अनुम की तरफ घूमता है। अनुम की नजरें झुकी हुई थी, मगर दिल की धड़कनें बहुत तेज चल रह थीं। अनुम बेड से खड़ी हो जाती है। 

हजारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पर दम निकले, 
बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले। 

जीशान शेर गुन गुनाता हुआ अनुम के पास आकर खड़ा हो जाता है-“क्या आप मुँह मीठा नहीं करवाएँगी?” 

अनुम-“बिल्कुल नहीं … और हाँ किसने कहा तुमसे ऐसी वाहियात बात कि मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ ? वो तो लुब बेवकूफ़ है जो तुम्हारी बातों में आ गई, जाओ यहाँ से…” 

जीशान अनुम को अपनी छाती से झटके से लगा लेता है-“बस अनुम बस… बहुत सह चुका हूँ मैं। मैं जानता हूँ तुम मुझसे पागलों की तरह मोहब्बत करती हो। कसम है मुझे तुम्हारी , मैं तुम्हें इतना प्यार दूँगा की तुम सिर्फ़ एक नाम याद रखोगी, और वो होगा मेरा, तुम्हारे शौहर जीशान ख़ान का…” 

अनुम की आँखें बंद हो जाती हैं और वो जीशान से लिपट जाती है। 

जीशान-“मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ …” 

अनुम धीमी आवाज़ में-क्या? 

जीशान अपने पैंट के जेब से एक गोल्डेन पेंडेंट निकालकर अनुम के हाथ में रख देता है-कैसा है? 

अनुम-बहुत खूबसूरत ।

जीशान-मैं चाहता हूँ कि तुम आज रात इसे पहनो। 

अनुम-अभी पहन लूँ? 

जीशान-अभी नहीं । रात में ये पहनकर मेरे रूम में देखना चाहता हूँ मैं तुम्हें। 

अनुम-ठीक है। पहन लूँगी। 

जीशान-सिर्फ़ ये पहनकर आना। 

अनुम गौर से जीशान को देखने लगती है-मैं समझी नहीं ? 

जीशान अनुम के होंठों के करीब आकर-“सिर्फ़ ये पहनकर, और इस जिस्म पर कुछ भी नहीं होना चाहिए…” 

अनुम की टाँगे काँपने लगती हैं-“नहीं नहीं , मैं नहीं ऐसे आ सकती…” 

जीशान-“अगर मेरी मोहब्बत सच्ची है, और तुम मुझे अपना सब कुछ मान चुकी हो तो तुम ज़रूर आओगी। ये मैं यहीं रख रहा हूँ , इस उम्मीद के साथ कि जब मैं फॅक्टरी से वापस आऊूँ, तो ये मुझे यहाँ नहीं , इस गर्दन में दिखाई दे। और इस दुनियाँ की सबसे खूबसूरत औरत मेरा इंतजार करती हुई मुझे दिखाई दे…” 

अनुम लरजती हुई आवाज़ में-तुम ऐसा क्यों करना चाहते हो? 

जीशान-“क्योंकी मैं तुम्हें आज ही प्रेगनेंट कर देना चाहता हूँ अनुम…” 

अनुम जीशान की बात सुनकर खामोश हो जाती है-“मैं नहीं आउन्गि…” 

जीशान अनुम की आँखों में देखते हुये रूम से बाहर चला जाता है और अनुम धड़कते दिल के साथ जीशान को देखती रह जाती है 

अनुम दिल में सोच लेती है कि आखिर कुछ भी हो जाये, मैं ऐसे नहीं जाउन्गी, बिल्कुल नहीं । मगर बार-बार जीशान के वो कुछ शब्द उसके कानों में गूँजने लगते हैं कि मैं तुम्हें आज ही प्रेगनेंट कर देना चाहता हूँ । ऐसी मोहब्बत ऐसे जज़्बात तो अनुम की जिंदगी में उस वक्त भी नहीं आए थे, जब अमन उसके साथ था। इतनी शिद्दत से उससे किसी ने भी मोहब्बत नहीं की थी, जितनी शिद्दत से जीशान करने का दावा करता था। अनुम एक बार उस गोल्डेन पेंडेंट को छू कर देखती है और उसे बिना उठाए जीशान के रूम से बाहर चली जाती है। 

जीशान फॅक्टरी के लिए रवाना हो जाता है, इस उम्मीद के साथ कि शायद अनुम वो पेंडेंट पहन ले और उसे वो सब मिल जाए, जो वो हमेशा से चाहता था।
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05-19-2019, 01:52 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
अमन विला के शहजादे को ये नहीं पता था कि अनुम के दिल में उस वक्त क्या हलचल हो रही है? बिना अनुम की सहमति के जीशान के ख्वाब सिर्फ़ ख्वाब रहने वाले थे, उन्हें अमल जामा पहनाना सिर्फ़ अनुम के हाथों में था। 

जीशान का दिल फॅक्टरी में नहीं लगता वो जल्दी -जल्दी अपनी मीटिंग्स निपटाकर घर चला आता है। जहाँ रज़िया उसे वक्त से पहले घर में देखकर बहुत खुश होती है। 
वही अनुम का दिल जोरों से धड़कने लगता है। 

रज़िया-बहुत जल्दी आ गये? 

जीशान-हाँ काम कुछ ख़ास नहीं था तो सोचा क्यों ना आराम किया जाए? 

रज़िया-ये तो बहुत अच्छा किया तुमने। फ्रेश हो जाओ मैं अनुम से कहकर चाय रूम में भिजवाती हूँ । 

जीशान अपने रूम में फ्रेश होने चला जाता है, और रज़िया अनुम के पास आ जाती है। वो किचेन में रात का खाना बना रही थी। 

रज़िया-अनुम बेटी सुनो वो? 

अनुम-“मुझे पता है अम्मी, मैं चाय ही बना रही हूँ …” 

रज़िया मुश्कुराती हुई अपने रूम में चली जाती है। 

जीशान नहाकर जब अपने रूम में सिर्फ़ तौलिया पहनकर आता है, तो उसे अनुम बेड पर अपनी सोचों में खोई हुई दिखाई देती है। जीशान खंकारता है और अनुम चौंक के उसकी तरफ देखती है। वो ऊपर से नंगा था और एक तौलिया नीचे लपेटे हुये था। 

जीशान-क्या हुआ थोड़ी परेशान दिखाई दे रही हैं आप? 

अनुम-हाँ… वो मैं… नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं । चाय पी लो, ठंडी हो जाएगी। 

जीशान रूम का दरवाजा धकेल देता है और आईने के सामने जाकर खड़ा हो जाता है। उसकी पीठ अनुम की तरफ थी और अनुम उसे ही देख रही थी कि अचानक जीशान के कमर से लिपटी हुई तौलिया नीचे गिर जाती है, और जीशान पूरा नंगा हो जाता है। 

अनुम के आँखें फटी की फटी रह जाती हैं। मगर जीशान अपना तौलिया उठाने के बजाए अनुम की तरफ रुख़ मोड़ देता है। 


अनुम की आँखों के सामने 7” इंच लंबा 3” इंच मोटा वो खूबसूरत लाल सुपाड़े वाला सफेद कलर का लौड़ा आ जाता है। जिसे देखने के बाद अनुम अपनी आँखें उससे हटा नहीं पाती और एकटक जीशान के लण्ड को देखती रह जाती है। उसे तब होश आता है जब जीशान अनुम के एकदम करीब आकर खड़ा हो जाता है। 

अनुम अपनी नजरें उठाकर जीशान की आँखों में देखती है। अनुम का जिस्म बरफ की तरह ठंडा पड़ चुका था, साँसें थमने का नाम नहीं ले रही थीं कि तभी जीशान अपने लण्ड को हाथ में पकड़ता है, और उससे अनुम के, अपनी अम्मी के गुलाबी होंठों के पास लाकर उसके होंठों पर घिसने लगता है। 

अनुम का मुँह बंद था, लण्ड का सुपाड़ा अनुम के होंठों पर घूमने लगता है। ताज्जुब की बात जीशान के लिए थी कि ना तो अनुम मुँह खोल रही थी, और ना जीशान को ऐसा करने से मना कर रही थी। 

जीशान-रात में मैं इंतजार करूँगा और ये भी? 

अनुम बिना कुछ बोले वहाँ से जाने लगती है। 

जीशान पीछे से आवाज़ देता है-सिर्फ़ पेंडेंट पहनकर आना है आपको। 

अनुम-“मैं नहीं आउन्गि…” वो धीमी आवाज़ में बोलती है। 

जीशान-“मुझे पता है आप आओगी, मेरा दिल कहता है…” 

अनुम इस बार जीशान से कुछ नहीं कहती और सीधा अपने रूम में चली जाती है। उसे कुछ देर पहले हुये वाकिये पर यकीन नहीं हो रहा था। वो चाहकर भी अपने जिस्म को काबू नहीं कर पा रही थी। ये जोश-ए-जुनून था या मोहब्बत? ये तो अनुम खुद भी नहीं जानती थी। हाँ मगर एक बात ज़रूर थी कि वो अपनी बात पर कायम रहने का सोच रही थी कि चाहे कुछ भी हो जाए वो रात जीशान के रूम में नहीं जाएगी। 

रात खाना खाने के बाद सभी अपने-अपने रूम में सोने चले जाते हैं, और जीशान लुबना से बात करने उसके रूम में चला जाता है। लुबना उस वक्त बेड पर बैठी अपनी उंगली में पहनी हुई रिंग को ही घुमा रही थी, और अपनी आने वाली जिंदगी के हसीन सपने बुन रही थी। 

जीशान-क्या सोच रही हो लुबु? 

लुबना चौंकती हुई-“नहीं , कुछ भी नहीं । आइए ना बैठिए…” 

जीशान लुबना के करीब बैठ जाता है। 

लुबना-क्या बात है कुछ कहना था आपको? 

जीशान-“नहीं । बस सोने जा रहा था तो मैंने सोचा आज से एक नया रूल फालो किया जाय…” 

लुबना-कैसा रूल? 

जीशान-“यही की सोने से पहले मेरी जान, मेरी होने वाली शरीक-ए-हयात, मेरी लुबना अपने खूबसूरत होंठों से मुझे गुड नाइट वाली किस्सी दे, और जब सुबह मुझे उठाने के लिए आए तब भी मुझे किस करके उठाए…” 

जीशान की बात सुनकर लुबना बुरी तरह शरमा जाती है और अपना रुख़ जीशान की तरफ से दूसरी तरफ फेर लेती है। 

जीशान-इधर देख मेरी तरफ। 

लुबना-मैंने नहीं देखना। 

जीशान-क्यूँ ? 

लुबना-आप दिन-ब-दिन बहुत गंदे और बेशर्म होते जा रहे हो। 

जीशान-इसका मतलब तू मुझे प्यार नहीं करती? 

लुबना जीशान की तरफ देखकर तड़प जाती है-“नहीं नहीं मैं आपसे खुद से भी ज्यादा मोहब्बत करती हूँ । आप ऐसा ना सोचें…” 

जीशान-अगर मोहब्बत करती तो अपने शौहर की बात को हुक्म मानकर पूरा करती, यूँ मुँह ना फेर लेती। 

लुबना मुश्कुरा देती है और बिना जीशान से कुछ कहे उसके सिर को अपने दोनों हाथों में थामकर अपने होंठ जीशान के होंठों से चिपका देती है। 

जीशान इस मौके को इतने आसानी से खोना नहीं चाहता था। वो लुबना को अपनी बाहों में कस लेता है और अपनी जीभ को लुबना के मुँह में डाल देता है। लुबना भी अपनी जीभ को जीशान के मुँह में पहुँचा देती है और दोनों भाई-बहन एक दूसरे में खो जाते हैं। जीशान अपना एक हाथ लुबना की चुची पर रख कर हल्के से उसे मसल देता है। 
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05-19-2019, 01:52 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
लुबना-“आह्ह… क्या कर रहे हैं आप? उन्ह… नहीं ऐसे नहीं , ठीक नहीं आह्ह…” 

इससे पहले कि लुबना और ऐतराज दिखाती जीशान उसे बेड पर गिराकर अपने नीचे लेटा देता है-“मुझे भूक लगी है, दूध पीना है…” 

लुबना-क्या? दूध इस वक्त कहाँ से लाऊूँ मैं? 

जीशान-“यहाँ से…” वो दोनों हाथों में लुबना की चुचियों को लेकर मसलते हुये कहता है। 

लुबना-“बेशर्म कहीं के… मैं क्या कोई गाय भैंस हूँ जो दूध दूँगी ?” 

जीशान-“मुझे पीना है, मतलब पीना है वो भी यहाँ से अभी…” 

लुबना-पागल हो गये हैं आप? 

जीशान-“अच्छा मैं पागल हो गया हूँ ना? और अगर मैंने दूध निकालकर दिखा दिया तो?” 

लुबना-असंभव? 

जीशान लुबना की नाइटी को ऊपर चढ़ाकर गले से बाहर निकालकर फेंक देता है, और एक झटके में ब्रा भी खोल देता है। 

लुबना मना करती रह जाती है। वो जीशान को अपने रूम में से भगाना चाहती थी। मगर आज जीशान कुछ फैसला करके आया था। वो पहली बार अपनी बहन की नंगी चुचियाँ देख रहा था। निपल्स गुलाब की पंखुड़ियों की तरह चमक रही थी। सफेद रंग की लुबना की चुचियाँ इतनी कसी हुई थीं। अब तक किसी भी मर्द ने इन्हें छुआ तक नहीं था, मसलने की बात तो दूर थी। 

लुबना-“आप यहाँ से जाते हैं कि अम्मी आह्ह…” 

लुबना की आँखें बंद हो जाती हैं, क्योंकी जीशान अपने मुँह में लुबना की एक निप्पल को लेकर चूसने लगता है, और दूसरे हाथ से दूसरे निपल्स को मरोड़ते हुये चुची को दबाने लगता है। 

लुबना-“आह्ह… ऐसा मत करिये जीशान उन्ह…” वो पहली बार खुद को हल्का महसूस कर रही थी। ये अनुभव लुबना के लिए बिल्कुल नया और खुशगवार था। वो बहकती जा रही थी। 

जीशान उसे अपने साथ आसमान की उँचाइयों पर लेता चला जा रहा था। जीशान अपने दाँतों से लुबना के निपल्स को काटने लगता है, और एक घुटि -घुटि सी मगर मस्ती भर सिसकी लुबना के मुँह से निकलने लगती है। लुबना जो सोच भी नहीं सकती थी, जीशान वो कर रहा था और उसकी हर हरकत लुबना को उसके और करीब ला रही थी। 

जीशान-“मुझे मेरी लुबना नंगी चाहिए…” 

लुबना-“नहीं आह्ह… अभी नहीं … जीशान शादी की बाद लुबना पूरी की पूरी आपकी है…” 

जीशान एक आख़िरी कोशिश लुबना के जिस्म पर करता है। वो अपने हाथ लुबना की जाँघ पर रख कर उसकी चूत को शलवार और पैंटी के ऊपर से दबा देता है। 
अपने चूत पर मर्द का हाथ पड़ते ही लुबना की कमर ऊपर की तरफ उठ जाती है और वो चीख पड़ती है-“आह्ह… जीशान अभी वो वक्त नहीं आया उन्ह…” 



जीशान उसी वक्त उसके ऊपर से उठ जाता है और लुबना के लाल तपती हुई आँखों और गरम जिस्म को अधूरा छोड़कर वहाँ से अपने रूम में सोने चला जाता है। 

लुबना-“सुनिये तो जी…” 

मगर तब तक जीशान अपने रूम में पहुँच चुका था। वो बहुत खुश था। वो जानता था कि लुबना एक पक्के इरादे वाली लड़की है। वो जीशान से मोहब्बत करती है। मगर उसे अपना सब कुछ तभी देगी, जब जीशान अपने दिल की गहराईयों से लुबना को अपनाएगा। वो तो बस लुबना के ठंडे पढ़ चुके जिस्म में एक चिंगारी डालना चाहता था। 

उसका पूरा ध्यान अनुम की तरफ था। घड़ी रात के 12:00 बजा रही थी। मगर अनुम के कोई हलचल नहीं थी। वो अपने दिल को समझाता हुआ बेड पर बैठ जाता है, एक-एक सेकेंड जानलेवा था जीशान के लिए। बस वो एक ही दुआ कर सकता था कि बस एक बार अनुम यहाँ उसके रूम में आ जाए। 

वक्त अपनी रफ़्तार से गुजर रहा था, मगर जीशान के दिल की धड़कनें धीमी होती जा रही थीं। जीशान की नजरें दरवाजे की तरफ टिकी हुई थी कि ना जाने किस पल किस घड़ी अनुम अंदर दाखिल हो जाए। 

मगर अनुम अपने रूम के बाथरूम से बाहर निकलती है, अपने चमकते हुये मखमली जिस्म पर सिर्फ़ तौलिया लपेटेते हुये। वो बाहर आते ही आईने के सामने खड़े होकर अपने आपको नीचे से ऊपर तक देखती है। 

जो हाल जीशान का था कि दिल की धड़कनें थमती जा रही थीं, उसके बर्खिलाफ अनुम का दिल बेहद जोरों से धड़क रहा था। सामने पड़ी मेज पर अनुम की निगाह जाती है। मेज पर जीशान का दिया हुआ पेंडेंट रखा था। अनुम उसे बस अपनी उंगलियों से छूती है। एक बिजली की लहर उसके दिल-ओ-दिमाग़ को छुती हुई गुजर जाती है। आँखों में उतरते हुये नशे को वो महसूस करती है। 

ये वो नशा था जो अनुम के सिर चढ़कर बोल रहा था। सुबह से खुद को संभालती आइ अनुम अब इस पल बेचैन सी हो गई थी। वो आईने में खुद को देखती हुई अपने जिस्म पर लिपट हुई तौलिया नीचे जमीन पर गिरा देती है। 

जीशान बेड पर टेक लगाकर लेट जाता है। वो सोचने लगता है कि कहीं उसने जल्दीबाजी तो नहीं कर दिया? कह अनुम उससे नाराज ना हो जाये? वो उठकर अनुम के रूम में जाने का सोचता ही है कि नाइटी गाउन में अनुम जीशान के रूम के दरवाजे पर आ जाती है। 

जीशान का दिल बस उससे यही कहता है कि आज क़ुबूलियत का दिन है। अनुम रूम के अंदर आती है और पीछे दरवाजा लाक कर देती है। उसकी आँखों की चमक आज का सामना आज जीशान को अकेले करना था। जीशान को लगने लगता है कि जैसे हर चीज थम सी गई है, बस वो है और उसकी महबूबा अनुम वहाँ मौजूद है। 
अनुम जीशान की आँखों में देखती हुई, अपना नाइटी गाउन नीचे गिरा देती है। 
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05-19-2019, 01:52 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
जीशान का दिल बस उससे यही कहता है कि आज क़ुबूलियत का दिन है। अनुम रूम के अंदर आती है और पीछे दरवाजा लाक कर देती है। उसकी आँखों की चमक आज का सामना आज जीशान को अकेले करना था। जीशान को लगने लगता है कि जैसे हर चीज थम सी गई है, बस वो है और उसकी महबूबा अनुम वहाँ मौजूद है। 
अनुम जीशान की आँखों में देखती हुई, अपना नाइटी गाउन नीचे गिरा देती है। 


जीशान-उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ये मैं क्या देख रहा हूँ ? अगर वो अपनी मोहब्बत का, अपनी अनुम का इतना आशिक ना होता तो शायद दिल के बंद हो जाने से आज इस दुनियाँ से कूच कर जाता। 


अनुम सिर्फ़ जीशान के दिए हुई पेंडेंट में उसके सामने खड़ी थी, अपनी पलकों में हजारों ख्वाब समेटे हुये 

जीशान आगे बढ़ता है। दोनों बिल्कुल खामोश थे। जीशान अपनी पैंट की पाकेट से एक कागज निकालकर टेबल पर रख देता है, और पेन अनुम की तरफ बढ़ाता है-“इस कागजात पर साइन करिए अनुम…” 

अनुम काँपते लबों से-क्या है ईई? 

जीशान-“निकाहनामा…” 

अनुम हैरतजदा सी जीशान को एकटक देखने लगती है। 

जीशान-“हाँ अनुम, इस पर दो गवाहों के और एक वकील के दस्तख़त हैं। इस पर लिखा है कि अनुम ख़ान आपको जीशान ख़ान के निकाह में वाइवज महज 100000 (एक लाख) रूपए मेहर सिक्काए राजुल वक्त दिया जाता है। क्या आप जीशान ख़ान से अपना निकाह क़ुबूल करती हैं?” 

अनुम के हाथ काँपने लगते हैं। वो क्या समझकर आई थी, और एक ही पल में जीशान ने उसे क्या बना दिया? उसकी आँखों में उतरते आँसू जीशान को साफ बता रहे थे कि अनुम किस कदर खुश है जीशान के इस पुख़्ता कदम से। 

जीशान अनुम का हाथ पकड़कर उसे पेन थमा देता है-“साइन कीजिए और हमारी मोहब्बत को तकमील दीजिए अनुम…” 

अनुम एक नजर जीशान के मर्दाना वजूद को देखती है और फिर दिल की गहराईयों से उस कागज पर साइन करती हुई कहती है-“हाँ। मैं अनुम ख़ान आपको अपने निकाह में क़ुबूल करती हूँ …”

उसके बाद जीशान भी उस कागज पर साइन कर देता है। जीशान अनुम के नंगे जिस्म को अपनी बाहों में भर लेता है। वो अपने होंठों से अनुम के होंठों को चूमते हुये बड़े प्यार से कहता है-“आइ लव यू मेरी जान… आज मैं बहुत खुश हूँ …” 

अनुम-“मेरे सरताज, मैं भी आपसे बेपनाह मोहब्बत करती हूँ । मुझे वो सारी खुशियाँ दे दो, जिनके लिए मैं तरसी हूँ । मुझे फिर से प्रेगनेंट कर दीजिए जीशान। आपकी अनुम आपके बच्चे के माँ बनना चाहती है…” 

जीशान-“अनुम्म…” वो अनुम को बेड पर अपने नीचे गिरा देता है और अपने मर्दाना जिस्म को अनुम के नाजुक से बदन पर टिकाकर उसके होंठों को इस कदर चूमने लगता है कि अनुम लरज जाती है। 

जीशान-“आज से तुम्हारा शौहर तुम्हें दुनियाँ के हर गम से निजात दिला देगा…” 


अनुम को जीशान की इस बात पर सौ फीसद यकीन था। दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमते हुये एक दूसरे से अपने जिस्म रगड़ने लगते हैं। 

जीशान को कोई जल्दी नहीं थी, वो अनुम के होंठों को चूमते हुये माथे से लेकर गर्दन के पास आ जाता है। अपनी जीभ से अनुम की गर्दन का बोसा लेने के बाद जीशान नीचे की तरफ उतरने लगता है। खुशी और जोश में अनुम का जिस्म जल बिन मछली की तरह तड़प रहा था, उसका खूबसूरत पेट नीचे ऊपर होने लगता है। जैसे ही जीशान अपनी जीभ अनुम की नाभी के अंदर डालकर चूमता है। 

अनुम-“आह्ह… जान्न निकाल लोगे आज आप अपनी बीवी की उन्ह…” 


जीशान-“नहीं , आज मेरी जान में जान डालूँगा मैं अनुम…” वो अनुम की जाघों को चूमता हुआ उस जगह पहुँच जाता है, जहाँ वो हमेशा से पहुँचने के ख्वाब देखा करता था। 

अनुम अपने दोनों पैर जीशान के लिए, अपने शौहर के लिए, खोल देती है, और जीशान अपनी गुलाबी जीभ से अनुम की बिना बाल वाली चमकती हुई चूत को चूमने चाटने कुरेदने लगता है-गलपप्प-गलपप्प। 

अनुम-“उन्ह आराम से ना जी… आह्ह… ऊहुउउउ… ओह्ह…” वो अपनी आँखें बंद कर लेती है। 

जीशान की जीभ अनुम की चूत के इतना अंदर तक जा रही थी कि अनुम को ऐसे महसूस होने लगता है, जैसे जीशान उसे अपने जीभ से चोद रहा हो। 

जीशान-“आज नहीं जानेमन… आज से कभी नहीं रोकोगी तुम मुझे। ये मेरी है और मैं इसका मालिक हूँ । गलपप्प-गलपप्प…” 

अनुम-“हाँ… मेरी रूह के मालिक, मेरे जिस्म के मालिक, मेरे सरताज, अनुम को आप जहाँ चाहिए वहाँ कर सकते हैं आह्ह…” 

जीशान-क्या कर सकते है अनुम? 

अनुम-“उन्ह आह्ह…” 

जीशान-बोल क्या कर सकते हैं? 

अनुम-“चोद सकते है आप मुझे, आपका दिल जहाँ कहे। मैं आपको आज के बाद कभी नहीं रोकूंगी , वादा करती हूँ आह्ह…” 

जीशान-सोच लो जानेबहार? 

अनुम-सोचना कैसा? शौहर को कभी नहीं मना करती अच्छी बीवी आह्ह…” 
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05-19-2019, 01:53 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
जीशान खड़ा हो जाता है। अनुम उसे अचानक खड़ा होते देखकर हैरत में पड़ जाती है। जीशान अनुम का हाथ पकड़कर बेड पर बैठा देता है और उसके चेहरे के सामने अपना मोटा खूबसूरत लटकता हुआ लण्ड ले आता है-“इसे अपने मुँह में लो…” 

अनुम बड़ी मोहब्बत भरी निगाहों से जीशान के लण्ड को देखने लगती है-“बहुत खूबसूरत है ये…” वो अपने नाजुक हाथों में जीशान के लण्ड को पकड़कर पहले उसे चूमती है, और फिर अगले ही पल उसे अपने मुँह में लेकर अंदर-बाहर चाटने लगती है गलपप्प-गलपप्प… उन्ह… बहुत तड़पी हूँ मैं गलपप्प…” 

जीशान-“अम्मी आह्ह… अम्मी आराम से आह्ह…” 

अनुम जीशान के मुँह से अपना नाम ना सुनकर बल्की अम्मी सुनकर और ज्यादा जोश में आ जाती है। एक माँ अपने बेटे का लण्ड चूस रही है, यही बात उसे अंदर तक जोश में ले आती है। वो जीशान के लण्ड को पागलों की तरह चाटने लगती है गलपप्प-गलपप्प। 

जीशान-“आह्ह… अनुम बस करो आह्ह…” 

अनुम रुकने का नाम नहीं ले रही थी। उसे तो जैसे कोई खोया हुआ खजाना मिल गया था। 

जीशान से और बर्दाश्त नहीं होता। वो अनुम को अपनी गोद में उठाकर अपने बेड पर लेटा देता है-“बस अब और नहीं … अब ये सिर्फ़ एक जगह जाएगा, तुम्हारी चूत में…” 

अनुम-“हाँ… मैं भी यही चाहती हूँ , मुझे ये यहाँ चाहिए…” 

जीशान अपनी दो उंगलियों से अनुम की चूत को सहलाता है। 

अनुम-“उसे और मत तड़पाओ, आप बस डाल दो…” 

जीशान-डाल दूं? 

अनुम जीशान को अपने दोनों पैरों में कस लेती है और अपने हाथ में जीशान का लण्ड पकड़कर चूत पर लगा देती है-“आपको अपनी अनुम की कसम मत सताओ मुझे…” 

जीशान अनुम के होंठों को चूमता हुआ एक हाथ से उसकी चुची को मसलता हुआ पहली बार अपनी अम्मी, अपनी अनुम की चूत में अपना मोटा लण्ड घुसा देता है। 

अनुम-“मर गई जी मैं तो आह्ह… हिलना मत्त्तत्त उन्ह…” 

मगर जीशान अब कहाँ रुकने वालों में से था। अनुम के लाख मना करने के बाद भी वो सटासट अपने लण्ड को अनुम की चूत की गहराईयों में उतारता चला जाता है। 


अनुम-“आह्ह… आप मेरी बच्चेदानी पर ठोकर मार रहे हैं उन्ह्न… प्लीज़्ज़… आराम से करिये ना…” 

जीशान-“मैं हर रात हर दिन तुझे ऐसे ही चोदुन्गा अनुम, और त मुझे नहीं रोकेगी समझी आह्ह…” 

अनुम अपनी आँखें बंद करके धीरे-धीरे दर्द सहती हुई अपनी कमर को ऊपर उठाने लगती है। उसे दर्द भी हो रहा था। कई सालों के बाद एक लण्ड उसकी चूत की गहराईयों में जा रहा था। जीशान अपने बाप का भी बाप था हर लिहाज से, और ये बात अनुम भी बखूबी समझ गई थी कि जीशान उसे कितनी जल्दी प्रेगनेंट कर देगा। 

अनुम का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है, और दोनों माँ बेटे एक दूसरे को रगड़ते हुये, मसलते हुये, चूमते हुये अपनी-अपनी कमर ऊपर और नीचे की तरफ पटकने लगते हैं। मोहब्बत की इस लड़ाई में जीत किसी की भी हो? हाँ मगर आज एक बात तो साबित हो गई थी कि अगर किसी को दिल से चाहा जाए तो कोई ताकत उन दोनों को एक होने से रोक नहीं सकती। 

अनुम-“आह्ह…” जीशान के झटके अनुम को कहने पर मजबूर कर देते हैं-“उन्ह… इतनी मोहब्बत करते हैं आप जीशान मुझसे?” 

जीशान-“ये तो तुम्हें पता चल ही गया होगा। हाँ तुम्हें कल से एक और बात पता चलेगी कि मैं कितना बेशर्म भी हूँ ?” 

अनुम-मतलब? 

जीशान-“वो तुम्हें कल पता चलेगा…” 

अनुम-“आह्ह… अम्मी जी…” वो मुश्कुरा देती है। आज अनुम को वो खुशी मिल रही थी जिसकी वो हकदार थी। मोहब्बत और जज़्बातों की रात तो अभी शुरू हुई थी।

जीशान जितनी ताकत से अपने लण्ड को अनुम की चूत में डालता, उतनी शिद्दत से अनुम उसका जवाब देती, अपनी कमर को ऊपर उठाकर। दोनों हाँफने लगते हैं, जिस्म का खून हर एक नस-नस में इतनी तेजी से कभी नहीं बहा था, जितना आज अनुम और जीशान के जिस्म में बह रहा था, और शायद यही वजह थी कि जहाँ चिकनाहट ज्यादा होती है, वहाँ इंसान का टिकना मुश्किल हो जाता है। 

अनुम की चूत से रिसते हुई पानी के ताव जीशान का लण्ड नहीं सह पाता और वो सटासट अपने लण्ड को अनुम की चूत के अंदर उतारकर रुक जाता है। 

अनुम समझ जाती है कि जीशान किस जगह खड़ा है-“जान रोको मत इस सैलाब को, अपनी जान के अंदर बहने दो आह्ह…” 

जीशान अनुम के होंठों को चूमते हुये अपनी अम्मी की चूत में अपनी मोहब्बत का पहला मीठा-मीठा गाढ़ा-गाढ़ा पानी उतारने लगता है-“अम्मी जान्न गलपप्प-गलपप्प…” 


अनुम-“ख़ान साहब्ब उन्ह… इस बारिश ने आज आपकी बीवी को भी भिगो दिया…” और वो भी जीशान के लण्ड पर पानी छोड़ने लगती है। 

बेडशीट पर इतना सारा पानी गिर चुका था, जैसे यहाँ कोई सैलाब आया हो। 
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05-19-2019, 01:53 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
जीशान का दिल बस उससे यही कहता है कि आज क़ुबूलियत का दिन है। अनुम रूम के अंदर आती है और पीछे दरवाजा लाक कर देती है। उसकी आँखों की चमक आज का सामना आज जीशान को अकेले करना था। जीशान को लगने लगता है कि जैसे हर चीज थम सी गई है, बस वो है और उसकी महबूबा अनुम वहाँ मौजूद है। 
अनुम जीशान की आँखों में देखती हुई, अपना नाइटी गाउन नीचे गिरा देती है। 


जीशान-उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ये मैं क्या देख रहा हूँ ? अगर वो अपनी मोहब्बत का, अपनी अनुम का इतना आशिक ना होता तो शायद दिल के बंद हो जाने से आज इस दुनियाँ से कूच कर जाता। 


अनुम सिर्फ़ जीशान के दिए हुई पेंडेंट में उसके सामने खड़ी थी, अपनी पलकों में हजारों ख्वाब समेटे हुये 

जीशान आगे बढ़ता है। दोनों बिल्कुल खामोश थे। जीशान अपनी पैंट की पाकेट से एक कागज निकालकर टेबल पर रख देता है, और पेन अनुम की तरफ बढ़ाता है-“इस कागजात पर साइन करिए अनुम…” 

अनुम काँपते लबों से-क्या है ईई? 

जीशान-“निकाहनामा…” 

अनुम हैरतजदा सी जीशान को एकटक देखने लगती है। 

जीशान-“हाँ अनुम, इस पर दो गवाहों के और एक वकील के दस्तख़त हैं। इस पर लिखा है कि अनुम ख़ान आपको जीशान ख़ान के निकाह में वाइवज महज 100000 (एक लाख) रूपए मेहर सिक्काए राजुल वक्त दिया जाता है। क्या आप जीशान ख़ान से अपना निकाह क़ुबूल करती हैं?” 

अनुम के हाथ काँपने लगते हैं। वो क्या समझकर आई थी, और एक ही पल में जीशान ने उसे क्या बना दिया? उसकी आँखों में उतरते आँसू जीशान को साफ बता रहे थे कि अनुम किस कदर खुश है जीशान के इस पुख़्ता कदम से। 

जीशान अनुम का हाथ पकड़कर उसे पेन थमा देता है-“साइन कीजिए और हमारी मोहब्बत को तकमील दीजिए अनुम…” 

अनुम एक नजर जीशान के मर्दाना वजूद को देखती है और फिर दिल की गहराईयों से उस कागज पर साइन करती हुई कहती है-“हाँ। मैं अनुम ख़ान आपको अपने निकाह में क़ुबूल करती हूँ …”

उसके बाद जीशान भी उस कागज पर साइन कर देता है। जीशान अनुम के नंगे जिस्म को अपनी बाहों में भर लेता है। वो अपने होंठों से अनुम के होंठों को चूमते हुये बड़े प्यार से कहता है-“आइ लव यू मेरी जान… आज मैं बहुत खुश हूँ …” 

अनुम-“मेरे सरताज, मैं भी आपसे बेपनाह मोहब्बत करती हूँ । मुझे वो सारी खुशियाँ दे दो, जिनके लिए मैं तरसी हूँ । मुझे फिर से प्रेगनेंट कर दीजिए जीशान। आपकी अनुम आपके बच्चे के माँ बनना चाहती है…” 

जीशान-“अनुम्म…” वो अनुम को बेड पर अपने नीचे गिरा देता है और अपने मर्दाना जिस्म को अनुम के नाजुक से बदन पर टिकाकर उसके होंठों को इस कदर चूमने लगता है कि अनुम लरज जाती है। 

जीशान-“आज से तुम्हारा शौहर तुम्हें दुनियाँ के हर गम से निजात दिला देगा…” 


अनुम को जीशान की इस बात पर सौ फीसद यकीन था। दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमते हुये एक दूसरे से अपने जिस्म रगड़ने लगते हैं। 

जीशान को कोई जल्दी नहीं थी, वो अनुम के होंठों को चूमते हुये माथे से लेकर गर्दन के पास आ जाता है। अपनी जीभ से अनुम की गर्दन का बोसा लेने के बाद जीशान नीचे की तरफ उतरने लगता है। खुशी और जोश में अनुम का जिस्म जल बिन मछली की तरह तड़प रहा था, उसका खूबसूरत पेट नीचे ऊपर होने लगता है। जैसे ही जीशान अपनी जीभ अनुम की नाभी के अंदर डालकर चूमता है। 

अनुम-“आह्ह… जान्न निकाल लोगे आज आप अपनी बीवी की उन्ह…” 


जीशान-“नहीं , आज मेरी जान में जान डालूँगा मैं अनुम…” वो अनुम की जाघों को चूमता हुआ उस जगह पहुँच जाता है, जहाँ वो हमेशा से पहुँचने के ख्वाब देखा करता था। 

अनुम अपने दोनों पैर जीशान के लिए, अपने शौहर के लिए, खोल देती है, और जीशान अपनी गुलाबी जीभ से अनुम की बिना बाल वाली चमकती हुई चूत को चूमने चाटने कुरेदने लगता है-गलपप्प-गलपप्प। 

अनुम-“उन्ह आराम से ना जी… आह्ह… ऊहुउउउ… ओह्ह…” वो अपनी आँखें बंद कर लेती है। 

जीशान की जीभ अनुम की चूत के इतना अंदर तक जा रही थी कि अनुम को ऐसे महसूस होने लगता है, जैसे जीशान उसे अपने जीभ से चोद रहा हो। 

जीशान-“आज नहीं जानेमन… आज से कभी नहीं रोकोगी तुम मुझे। ये मेरी है और मैं इसका मालिक हूँ । गलपप्प-गलपप्प…” 

अनुम-“हाँ… मेरी रूह के मालिक, मेरे जिस्म के मालिक, मेरे सरताज, अनुम को आप जहाँ चाहिए वहाँ कर सकते हैं आह्ह…” 

जीशान-क्या कर सकते है अनुम? 

अनुम-“उन्ह आह्ह…” 

जीशान-बोल क्या कर सकते हैं? 

अनुम-“चोद सकते है आप मुझे, आपका दिल जहाँ कहे। मैं आपको आज के बाद कभी नहीं रोकूंगी , वादा करती हूँ आह्ह…” 

जीशान-सोच लो जानेबहार? 

अनुम-सोचना कैसा? शौहर को कभी नहीं मना करती अच्छी बीवी आह्ह…” 
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05-19-2019, 01:53 PM,
RE: Antarvasna अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ
जीशान खड़ा हो जाता है। अनुम उसे अचानक खड़ा होते देखकर हैरत में पड़ जाती है। जीशान अनुम का हाथ पकड़कर बेड पर बैठा देता है और उसके चेहरे के सामने अपना मोटा खूबसूरत लटकता हुआ लण्ड ले आता है-“इसे अपने मुँह में लो…” 

अनुम बड़ी मोहब्बत भरी निगाहों से जीशान के लण्ड को देखने लगती है-“बहुत खूबसूरत है ये…” वो अपने नाजुक हाथों में जीशान के लण्ड को पकड़कर पहले उसे चूमती है, और फिर अगले ही पल उसे अपने मुँह में लेकर अंदर-बाहर चाटने लगती है गलपप्प-गलपप्प… उन्ह… बहुत तड़पी हूँ मैं गलपप्प…” 

जीशान-“अम्मी आह्ह… अम्मी आराम से आह्ह…” 

अनुम जीशान के मुँह से अपना नाम ना सुनकर बल्की अम्मी सुनकर और ज्यादा जोश में आ जाती है। एक माँ अपने बेटे का लण्ड चूस रही है, यही बात उसे अंदर तक जोश में ले आती है। वो जीशान के लण्ड को पागलों की तरह चाटने लगती है गलपप्प-गलपप्प। 

जीशान-“आह्ह… अनुम बस करो आह्ह…” 

अनुम रुकने का नाम नहीं ले रही थी। उसे तो जैसे कोई खोया हुआ खजाना मिल गया था। 

जीशान से और बर्दाश्त नहीं होता। वो अनुम को अपनी गोद में उठाकर अपने बेड पर लेटा देता है-“बस अब और नहीं … अब ये सिर्फ़ एक जगह जाएगा, तुम्हारी चूत में…” 

अनुम-“हाँ… मैं भी यही चाहती हूँ , मुझे ये यहाँ चाहिए…” 

जीशान अपनी दो उंगलियों से अनुम की चूत को सहलाता है। 

अनुम-“उसे और मत तड़पाओ, आप बस डाल दो…” 

जीशान-डाल दूं? 

अनुम जीशान को अपने दोनों पैरों में कस लेती है और अपने हाथ में जीशान का लण्ड पकड़कर चूत पर लगा देती है-“आपको अपनी अनुम की कसम मत सताओ मुझे…” 

जीशान अनुम के होंठों को चूमता हुआ एक हाथ से उसकी चुची को मसलता हुआ पहली बार अपनी अम्मी, अपनी अनुम की चूत में अपना मोटा लण्ड घुसा देता है। 

अनुम-“मर गई जी मैं तो आह्ह… हिलना मत्त्तत्त उन्ह…” 

मगर जीशान अब कहाँ रुकने वालों में से था। अनुम के लाख मना करने के बाद भी वो सटासट अपने लण्ड को अनुम की चूत की गहराईयों में उतारता चला जाता है। 


अनुम-“आह्ह… आप मेरी बच्चेदानी पर ठोकर मार रहे हैं उन्ह्न… प्लीज़्ज़… आराम से करिये ना…” 

जीशान-“मैं हर रात हर दिन तुझे ऐसे ही चोदुन्गा अनुम, और त मुझे नहीं रोकेगी समझी आह्ह…” 

अनुम अपनी आँखें बंद करके धीरे-धीरे दर्द सहती हुई अपनी कमर को ऊपर उठाने लगती है। उसे दर्द भी हो रहा था। कई सालों के बाद एक लण्ड उसकी चूत की गहराईयों में जा रहा था। जीशान अपने बाप का भी बाप था हर लिहाज से, और ये बात अनुम भी बखूबी समझ गई थी कि जीशान उसे कितनी जल्दी प्रेगनेंट कर देगा। 

अनुम का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है, और दोनों माँ बेटे एक दूसरे को रगड़ते हुये, मसलते हुये, चूमते हुये अपनी-अपनी कमर ऊपर और नीचे की तरफ पटकने लगते हैं। मोहब्बत की इस लड़ाई में जीत किसी की भी हो? हाँ मगर आज एक बात तो साबित हो गई थी कि अगर किसी को दिल से चाहा जाए तो कोई ताकत उन दोनों को एक होने से रोक नहीं सकती। 

अनुम-“आह्ह…” जीशान के झटके अनुम को कहने पर मजबूर कर देते हैं-“उन्ह… इतनी मोहब्बत करते हैं आप जीशान मुझसे?” 

जीशान-“ये तो तुम्हें पता चल ही गया होगा। हाँ तुम्हें कल से एक और बात पता चलेगी कि मैं कितना बेशर्म भी हूँ ?” 

अनुम-मतलब? 

जीशान-“वो तुम्हें कल पता चलेगा…” 

अनुम-“आह्ह… अम्मी जी…” वो मुश्कुरा देती है। आज अनुम को वो खुशी मिल रही थी जिसकी वो हकदार थी। मोहब्बत और जज़्बातों की रात तो अभी शुरू हुई थी।

जीशान जितनी ताकत से अपने लण्ड को अनुम की चूत में डालता, उतनी शिद्दत से अनुम उसका जवाब देती, अपनी कमर को ऊपर उठाकर। दोनों हाँफने लगते हैं, जिस्म का खून हर एक नस-नस में इतनी तेजी से कभी नहीं बहा था, जितना आज अनुम और जीशान के जिस्म में बह रहा था, और शायद यही वजह थी कि जहाँ चिकनाहट ज्यादा होती है, वहाँ इंसान का टिकना मुश्किल हो जाता है। 

अनुम की चूत से रिसते हुई पानी के ताव जीशान का लण्ड नहीं सह पाता और वो सटासट अपने लण्ड को अनुम की चूत के अंदर उतारकर रुक जाता है। 

अनुम समझ जाती है कि जीशान किस जगह खड़ा है-“जान रोको मत इस सैलाब को, अपनी जान के अंदर बहने दो आह्ह…” 

जीशान अनुम के होंठों को चूमते हुये अपनी अम्मी की चूत में अपनी मोहब्बत का पहला मीठा-मीठा गाढ़ा-गाढ़ा पानी उतारने लगता है-“अम्मी जान्न गलपप्प-गलपप्प…” 


अनुम-“ख़ान साहब्ब उन्ह… इस बारिश ने आज आपकी बीवी को भी भिगो दिया…” और वो भी जीशान के लण्ड पर पानी छोड़ने लगती है। 

बेडशीट पर इतना सारा पानी गिर चुका था, जैसे यहाँ कोई सैलाब आया हो। 
जीशान अपने अनुम के ऊपर से उतरकर उसके साइड में लेट जाता है। उसकी छाती ऊपर-नीचे होने लगती है। जिस पर अनुम अपना सिर रख देती है, और जीशान के छोटे-छोटे निप्पल से खेलने लगती है। 

जीशान-आप खुश तो हो ना? 

अनुम-“बेहद। एक तब इतनी खुश हुई थी मैं, जब आप यहाँ से बाहर आए थे। और आज तब जब आप वापस इस रास्ते के ज़रिए दुबारा अंदर गये हैं। सच कहूँ तो ये एहसास किस्मत वालों को ही नशीब होता है। मुझे यकीन तो नहीं था, हाँ मगर सोचती थी ज़रूर कि खून अपना असर एक दिन ज़रूर दिखाएगा। और आज वो बात भी हकीकत का रूप ले चुकी है…” 
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